UP Board Solutions for Class 10 Hindi पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि और उनकी रचनाएँ

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पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि और उनकी रचनाएँ

रचना           –         रचयिता

सूरसागर – सूरदास
सूर-सारावली – सूरदास
साहित्य-लहरी – सूरदास
श्रीरामचरितमानस – गोस्वामी तुलसीदास
विनयपत्रिका – गोस्वामी तुलसीदास
कवितावली – गोस्वामी तुलसीदास
गीतावली – गोस्वामी तुलसीदास (UPBoardSolutions.com)
दोहावली – गोस्वामी तुलसीदास
रामाज्ञा प्रश्न – गोस्वामी तुलसीदास
रामलला नहछु – गोस्वामी तुलसीदास
बरवै रामायण – गोस्वामी तुलसीदास
जानकी मंगल – गोस्वामी तुलसीदास
वैराग्य-संदीपनी – गोस्वामी तुलसीदास
पार्वती मंगल – गोस्वामी तुलसीदास
श्रीकृष्ण गीतावली – गोस्वामी तुलसीदास
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सुजान रसखान – रसखान
प्रेमवाटिका [2009, 12] – रसखान
बिहारी सतसई – बिहारी
वीणा – सुमित्रानन्दन पन्त
पल्लव – सुमित्रानन्दन पन्त
रश्मिबन्ध – सुमित्रानन्दन पन्त
गुंजन – सुमित्रानन्दन पन्त
युगान्त [2011, 14] – सुमित्रानन्दन पन्त
युगवाणी – सुमित्रानन्दन पन्त
ग्राम्या – सुमित्रानन्दन पन्त
उत्तरा – सुमित्रानन्दन पन्त
लोकायतन [2012, 14] – सुमित्रानन्दन पन्त
कला और बूढ़ा चाँद – सुमित्रानन्दन पन्त
स्वर्णधूलि ग्रन्थि (2009, 11] – सुमित्रानन्दन पन्त
चिदम्बरा [2012, 13, 17] – सुमित्रानन्दन पन्त
स्वर्ण-किरण – सुमित्रानन्दन पन्त
युगान्तर – सुमित्रानन्दन पन्त
शिल्पी – सुमित्रानन्दन पन्त
सौवर्ण – सुमित्रानन्दन पन्त
वाणी – सुमित्रानन्दन पन्त
किरण-वीणा – सुमित्रानन्दन पन्त
पल्लविनी – सुमित्रानन्दन पन्त
युगपथ [2018] – सुमित्रानन्दन पन्त
आधुनिक कवि – सुमित्रानन्दन पन्त
समाधिता – सुमित्रानन्दन पन्त
गीत-हंस – सुमित्रानन्दन पन्त
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पतझर : एक भावक्रान्ति – सुमित्रानन्दन पन्त
गन्धवीथी – सुमित्रानन्दन पन्त
सत्यकाम – सुमित्रानन्दन पन्त
नीहार – महादेवी वर्मा
नीरजा (2016) –  (UPBoardSolutions.com) महादेवी वर्मा
अग्निरेखा (2018) – महादेवी वर्मा
सान्ध्य-गीत [2013] – महादेवी वर्मा
दीपशिखा [2012, 16] – महादेवी वर्मा
यामा – महादेवी वर्मा
रश्मि – महादेवी वर्मा
सप्तपर्णा – महादेवी वर्मा
पथिक[2015] – रामनरेश त्रिपाठी
मिलन [2018] – रामनरेश त्रिपाठी
स्वप्न – रामनरेश त्रिपाठी
मानसी – रामनरेश त्रिपाठी
ग्राम्य गीत – रामनरेश त्रिपाठी
कविता-कौमुदी (2012) – रामनरेश त्रिपाठी
हिमकिरीटिनी [2018] – माखनलाल चतुर्वेदी
हिमतरंगिणी [2017, 18] – माखनलाल चतुर्वेदी
माता – माखनलाल चतुर्वेदी
युगचरण [2012] – माखनलाल चतुर्वेदी
समर्पण – माखनलाल चतुर्वेदी
वेणु लो पूँजे धरा – माखनलाल चतुर्वेदी
मुकुल [2014, 15] – सुभद्राकुमारी चौहान
त्रिधारा [2015] – सुभद्राकुमारी चौहान
साकेत [2014] – मैथिलीशरण गुप्त
नहुष – मैथिलीशरण गुप्त
विष्णुप्रिया – मैथिलीशरण गुप्त
भारत भारती (2013, 14, 15) – मैथिलीशरण गुप्त
यशोधरा – मैथिलीशरण गुप्त
द्वापर – मैथिलीशरण गुप्त
रंग में भंग – मैथिलीशरण गुप्त
जयद्रथ-वध [2012] – मैथिलीशरण गुप्त
किसान – मैथिलीशरण गुप्त
शकुन्तला – मैथिलीशरण गुप्त
त्रिपथगा – मैथिलीशरण गुप्त
शक्ति – मैथिलीशरण गुप्त
अंजलि और अर्थ्य – मैथिलीशरण गुप्त
जय भारत – मैथिलीशरण गुप्त
पंचवटी – मैथिलीशरण गुप्त
सिद्धराज – मैथिलीशरण गुप्त
अनघ – मैथिलीशरण गुप्त
चन्द्रहास – मैथिलीशरण गुप्त
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तिलोत्तमा – मैथिलीशरण गुप्त
अकाल में सारस – केदारनाथ सिंह
अभी बिलकुल अभी – केदारनाथ सिंह
जमीन पक रही है – केदारनाथ सिंह
यहाँ से देखो – केदारनाथ सिंह
बाघ – केदारनाथ सिंह
टाल्स्टॉय और साइकिल – केदारनाथ सिंह
जीने के लिए कुछ शर्ते – केदारनाथ सिंह
प्रक्रिया – केदारनाथ सिंह
विष्णुप्रिया  –  मैथिलीशरण गुप्त
भारत भारती (2013, 14, 15)  –  मैथिलीशरण गुप्त
यशोधरा  –  मैथिलीशरण गुप्त
द्वापर  –  मैथिलीशरण गुप्त
रंग में भंग  –  मैथिलीशरण गुप्त
जयद्रथ-वध [2012]  –  (UPBoardSolutions.com) मैथिलीशरण गुप्त
किसान  –  मैथिलीशरण गुप्त
शकुन्तला  –  मैथिलीशरण गुप्त
त्रिपथगा  –  मैथिलीशरण गुप्त
शक्ति  –  मैथिलीशरण गुप्त
अंजलि और अर्थ्य  –  मैथिलीशरण गुप्त
जय भारत  –  मैथिलीशरण गुप्त
पंचवटी  –  मैथिलीशरण गुप्त
सिद्धराज  –  मैथिलीशरण गुप्त
अनघ  –  मैथिलीशरण गुप्त
चन्द्रहास  –  मैथिलीशरण गुप्त
तिलोत्तमा  –  मैथिलीशरण गुप्त
अकाल में सारस  –  केदारनाथ सिंह
अभी बिलकुल अभी  –  केदारनाथ सिंह
जमीन पक रही है।   –  केदारनाथ सिंह
यहाँ से देखो  –  केदारनाथ सिंह
बाघ  –  केदारनाथ सिंह
टाल्स्टॉय और साइकिल –   केदारनाथ सिंह
जीने के लिए कुछ शर्ते  –  केदारनाथ सिंह
प्रक्रिया   –  केदारनाथ सिंह
सूर्य – केदारनाथ सिंह
एक प्रेम-कविता को पढ़कर – केदारनाथ सिंह
आधी रात – केदारनाथ सिंह
शहर अब भी सम्भावना है। – अशोक वाजपेयी
तत्पुरुष – अशोक वाजपेयी
बाहरी अकेला – अशोक वाजपेयी
इबारत से गिरी मात्राएँ – अशोक वाजपेयी
उम्मीद का दूसरा नाम – (UPBoardSolutions.com) अशोक वाजपेयी
विवक्षा – अशोक वाजपेयी
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एक पतंग अनन्त से 2012] – अशोक वाजपेयी
रिमझिम – श्री श्यामनारायण पाण्डेय
माधव – श्री श्यामनारायण पाण्डेय
हल्दीघाटी – श्री श्यामनारायण पाण्डेय
जौहर – श्री श्यामनारायण पाण्डेय
जय हनुमान – श्री श्यामनारायण पाण्डेय
तुमुलं – श्री श्यामनारायण पाण्डेय
रूपांतर – श्री श्यामनारायण पाण्डेय
आरती – श्री श्यामनारायण पाण्डेय

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi प्रमुख काव्य-ग्रन्थ और उनके रचयिता

UP Board Solutions for Class 10 Hindi प्रमुख काव्य-ग्रन्थ और उनके रचयिता

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प्रमुख काव्य-ग्रन्थ और उनके रचयिता

रचना            –        रचयिता
खुमान रासो – दलपति विजय
बीसलदेव रासो – नरपति नाल्ह
हम्मीर रासो – शारंगधर
रमाल रासो (आल्हा खण्ड) – पजगनिक
पृथ्वीराज रासो [2009] – चन्दबरदाई
विजयपाल रासो – नल्लसिंह
कीर्तिलता – विद्यापति
सन्देशरासक – अब्दुल रहमान
भरतेश्वर बाहुबली रास – शालिभद्र सूरि
पउमचरिङ – स्वयम्भू
रचना – रचयिता
जयचन्द प्रकाश – केदार भट्ट
जयमयंक जस-चन्द्रिका – मधुकर भट्ट
मृगावती – कुतुबन
मधुमालती – मंझन
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माधवानल कामकंदला – गणपति
रूपमंजरी – नन्ददास (अष्टछाप)
रसरतन – (UPBoardSolutions.com) पुहकर
नलदमन – सूरदास लखनवी
अनुराग बाँसुरी – नूर मुहम्मद
इन्द्रावती – नूर मुहम्मद
यूसुफ जुलेखा – शेख निसार
चित्रावली – उस्मान
ज्ञानदीप – शेख नबी
हंसजवाहिर – कासिमशाह
बीजक – कबीरदास
पद्मावत [2009] – मलिक मुहम्मद जायसी
अखरावट – मलिक मुहम्मद जायसी
आखिरी कलाम – मलिक मुहम्मद जायसी
नरसीजी का मायरा – मीराबाई
रागगोविन्द – मीराबाई
गीतगोविन्द की टीका – मीराबाई
राग सोरठ के पद – मीराबाई
सुदामाचरित – नरोत्तमदास
ध्रुवचरित – नरोत्तमदास
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विचारमाला – नरोत्तमदास
रहीम सतसई – रहीम
श्रृंगार सतसई – रहीम
रहीम रत्नावली – रहीम
बरवै नायिका भेद – रहीम
मदनाष्टक – रहीम
रास पंचाध्यायी – रहीम
रामचन्द्रिका [2012] – केशवदास
रसिकप्रिया [2015, 16] – केशवदास
कविप्रिया – केशवदास
नखशिख – केशवदास
रतनबावनी – केशवदास
वीरसिंह देव चरित – केशवदास
जहाँगीर जस-चन्द्रिका – केशवदास
विज्ञान गीता – केशवदास
शिवराजभूषण – भूषण
शिवाबावनी (2015) – भूषण
छत्रसाल दशक – भूषण
कवित्त रत्नाकर – चिन्तामणि
कवि कल्पतरु – चिन्तामणि
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श्रृंगार मंजरी [2014] – चिन्तामणि
पिंगल – चिन्तामणि
मतिराम सतसई – मतिराम
अलंकार पंचाशिका – मतिराम
रसराज – मतिराम
ललित ललाम [2012, 15] – मतिराम
भाव-विलास – देव
रस विलास – देव
देव-चरित्र – देव
अंगदर्पण – सैयद गुलाम नबी
रस प्रबोध – सैयद गुलाम नबी
श्रृंगार बतीसी – मानसिंह ‘द्विजदेव’
श्रृंगार लतिका – मानसिंह ‘द्विजदेव’
हिम्मतबहादुर बिरुदावली – पद्माकर
जयसिंह बिरुदावली – पद्माकर
गंगालहरी – पद्माकर
जगद्विनोद (2015) – पद्माकर
प्रबोधिनी – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
प्रेम फुलवारी – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
सतसई श्रृंगार –  (UPBoardSolutions.com) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
प्रेम-प्रलाप – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
प्रेम-माधुरी – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
प्रेममालिका – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
प्रेमाश्रुवर्णन – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
प्रेमतरंग – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
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प्रेमघनसर्वस्व – बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
काव्य-मंजूषा – महावीरप्रसाद द्विवेदी
सुमन – महावीरप्रसाद
द्विवेदी कश्मीर सुषमा (2013) – श्रीधर पाठक
स्वर्गीय-वीणा – श्रीधर पाठक
वनाष्टक – श्रीधर पाठक
जगत् सच्चाई सार – श्रीधर पाठक
भारतगीत – श्रीधर पाठक
हेमन्त – श्रीधर पाठक
मनोविनोद – श्रीधर पाठक
शृंगारलहरी – जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’
गंगालहरी – ‘रत्नाकर
विष्णुलहरी – ‘रत्नाकर
गंगावतरण – रत्नाकर
उद्धव-शतक – ‘रत्नाकर
पारिजात – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
वैदेही वनवास – ‘हरिऔध’
प्रियप्रवास [2011, 14, 15] – ‘हरिऔध’
प्रेमाम्बु वारिधि – ‘हरिऔध’
प्रेमप्रपंच – ‘हरिऔध’
प्रेम-प्रश्रवण – ‘हरिऔध’
प्रेमाम्बु प्रवाह – ‘हरिऔध’
रस कलश – ‘हरिऔध’
चोखे चौपदे – ‘हरिऔध’
चुभते चौपदे – ‘हरिऔध’
रुक्मिणी-परिणय – ‘हरिऔध’
प्रद्युम्न-विजय – ‘हरिऔध’
धरती – त्रिलोचन
गुलाब और बुलबुल – त्रिलोचन
दिगन्त – त्रिलोचन
ताप के ताए हुए दिन – त्रिलोचन
शब्द – त्रिलोचन
उस जनपद का कवि हूँ – त्रिलोचन
अरधान – त्रिलोचन
तुम्हें सौंपता हूँ। – त्रिलोचन
जीने की कला – त्रिलोचन
कामायनी – जयशंकर
प्रसाद आँसू [2018] – जयशंकर
प्रसाद लहर – जयशंकर
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प्रसाद झरना 2017 – जयशंकर
प्रसाद प्रेम-पथिक – जयशंकर
प्रसाद चित्राधार [2009] – जयशंकर
प्रसाद कानन कुसुम – जयशंकर
प्रसाद करुणालय [2012, 13] – जयशंकर
प्रसाद महाराणा का महत्त्व – जयशंकर
प्रसाद शोकोच्छ्वास – जयशंकर
प्रसाद अनामिका (2012) – सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
आराधना – ‘निराला’
परिमल – ‘निराला’
गीतिका – ‘निराला’
कुकुरमुत्ता – ‘निराला’
अणिमा – ‘निराला’
अर्चना – ‘निराला’
अपरा तुलसीदास [2012] – ‘निराला’
नये पत्ते – ‘निराला’
गीत-गूंज – ‘निराला’
सरोज-स्मृति – “निराला’
राम की शक्ति-पूजा – ‘निराला’
अंजलि – रामकुमार वर्मा
अभिशाप – रामकुमार वर्मा
रूपराशि – रामकुमार वर्मा
जौहर – रामकुमार वर्मा
एकलव्य – रामकुमार वर्मा
उत्तरायण (2016) – (UPBoardSolutions.com) रामकुमार वर्मा
तुलसीदास [2012] – रामकुमार वर्मा
चित्ररेखा – रामकुमार वर्मा
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चन्द्रकिरण – रामकुमार वर्मा
रत्नराशि – रामकुमार वर्मा
संकेत – रामकुमार वर्मा
आकाशगंगा (2016) – रामकुमार वर्मा
उर्मिला – बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’
प्राणार्पण – ‘नवीन’
कुंकुम – ‘नवीन’
रश्मिरेख – ‘नवीन’
अपलक – ‘नवीन’
देश-प्रेम – ‘नवीन’
क्वासि – ‘नवीन’
विनोबा-स्तवन – ‘नवीन’
हम विषपायी जनम के – ‘नवीन’
रेणुका – रामधारी सिंह ‘दिनकर’
हुंकार [2015] – ‘दिनकर’
कुरुक्षेत्र – ‘दिनकर
उर्वशी (2014) – ‘दिनकर’
रश्मिरथी – ‘दिनकर’
रसवन्ती [2014, 18] – ‘दिनकर’
सामधेनी – ‘दिनकर’
हारे को हरिनाम [2014] – ‘दिनकर
द्वन्द्वगीत – ‘दिनकर’
परशुराम की प्रतीक्षा (2011, 15) – ‘दिनकर’
धूप और धुवाँ – ‘दिनकर’
इतिहास के आँसू – ‘दिनकर’
नील कुसुम – ‘दिनकर’
भैरवी – सोहनलाल द्विवेदी
पूजागीत – सोहनलाल द्विवेदी
प्रभाती – सोहनलाल द्विवेदी
चेतना – सोहनलाल द्विवेदी
युगाधार – सोहनलाल द्विवेदी
वासन्ती – सोहनलाल द्विवेदी
दूध बताशा – सोहनलाल द्विवेदी
बच्चों के बापू – सोहनलाल द्विवेदी
झरना – सोहनलाल द्विवेदी
कुणाल – सोहनलाल द्विवेदी
वासवदत्ता – सोहनलाल द्विवेदी
विषपान – सोहनलाल द्विवेदी
चित्रा – सोहनलाल द्विवेदी
बाँसुरी – सोहनलाल द्विवेदी
बिगुल – सोहनलाल द्विवेदी
आँगन के पार द्वार [2013] – सही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
तार सप्तक – ‘अज्ञेय
सुनहरे शैवाल – ‘अज्ञेय
हरी घास पर क्षण भर – ‘अज्ञेय
इन्द्रधनु रौंदे हुए ये । – “अज्ञेय
भग्नदूत – ‘अज्ञेय
चिंता  –  ‘अज्ञेय’
इत्यलम् – ‘अज्ञेय’
बावरा अहेरी – ‘अज्ञेय’
अरी ओ करुणा प्रभामय – ‘अज्ञेय’
कितनी नावों में कितनी बार – ‘अज्ञेय
सागर मुद्रा – ‘अज्ञेय
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महावृक्ष के नीचे – ‘अज्ञेय
नदी के बाँक पर छाया – ‘अज्ञेय
पूर्वा – ‘अज्ञेय’
मधुकलश – हरिवंशराय बच्चन
सतरंगिणी – बच्चन
मधुबाला – बच्चन
मधुशाला [2013, 15] – बच्चन
निशा-निमन्त्रण – बच्चन
मिलन-यामिनी – बच्चन
एकान्त-संगीत – बच्चन
बंगाल का अकाल – बच्चन
प्रणय पत्रिका – बच्चन
आकुल अन्तर – बच्चन
हलाहल – बच्चन
त्रिभंगिमा – बच्चन
चार खेमे चौंसठ बँटे – बच्चन
सूत की माला युगधारा – नागार्जुन
भस्मांकुर – नागार्जुन
सतरंगे पंखों वाली – नागार्जुन
तालाब की मछलियाँ – नागार्जुन
तुमने कहा था – नागार्जुन
खिचड़ी विप्लव देखा हमने – नागार्जुन
हजार-हजार बाहों वाली – नागार्जुन
प्यासी पथरायी आँखें – नागार्जुन
खून और शोले – नागार्जुन
जीवन के गान। – शिवमंगल सिंह ‘सुमन
प्रलय सृजन – ‘सुमन’
विश्वास बढ़ता ही गया – ‘सुमन’
हिल्लोल – ‘सुमन’
पर आँखें भरी नहीं – ‘सुमन’
विन्ध्य हिमालय – ‘सुमन’
मिट्टी की बलात् – ‘सुमन
युग की गंगा – केदारनाथ अग्रवाल
नींद के बादल – केदारनाथ अग्रवाल
लोक और आलोक – केदारनाथ अग्रवाल
आग का आइना – केदारनाथ अग्रवाल
पंख और पतवार – केदारनाथ अग्रवाल
हे मेरी तुम – केदारनाथ अग्रवाल
कनुप्रिया [2013] – धर्मवीर भारती
सात गीत वर्ष – धर्मवीर भारती
अन्धी युग (2009) – धर्मवीर भारती
ठण्डा लोहा (2015) – धर्मवीर भारती
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भूरी भूरी खाक धूल – गजानन माधव मुक्तिबोध’
चाँद का मुँह टेढ़ा – ‘मक्तिबोध’
प्रेम-पथिक – वियोगी हरि
प्रेमशतक – वियोगी हरि
प्रेमांजलि – वियोगी हरि
वीर सतसई – वियोगी हरि
धूप के धान (2012) – गिरिजाकुमार माथुर
मंजीर – गिरिजाकुमार माथुर
नाश और निर्माण – गिरिजाकुमार माथुर
छाया मत छूना – (UPBoardSolutions.com) गिरिजाकुमार माथुर
भीतरी नदी की यात्रा – गिरिजाकुमार माथुर
साक्षी रहे वर्तमान – गिरिजाकुमार माथुर
पृथ्वीकल्प – गिरिजाकुमार माथुर
शिलाखण्ड चमकीले – गिरिजाकुमार माथुर
गीत फरोश [2015, 18] – भवानीप्रसाद मिश्र
खुशबू के शिलालेख – भवानीप्रसाद मिश्र
चकित है दुःख – भवानीप्रसाद मिश्र
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अँधेरी कविताएँ – भवानीप्रसाद मिश्र
बुनी हुई रस्सी – भवानीप्रसाद मिश्र
फसलें और फूल – भवानीप्रसाद मिश्र
सम्प्रति – भवानीप्रसाद मिश्र
कर्णफूल [2014] – नरेन्द्र शर्मा

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi प्रत्यय

UP Board Solutions for Class 10 Hindi प्रत्यय

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प्रत्यय

पाठ्यक्रम में निर्धारित प्रत्यय (प्रत्ययों के प्रयोग एवं उनसे निर्मित शब्द) : आई, त्व, ता, पन, वा, हट, वट।
नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 2 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।

ध्यातव्य-पाठ्यक्रम में निर्धारित प्रत्ययों के अर्थ के साथ-साथ उनसे निर्मित शब्द भी दिये जा रहे | हैं। यह विद्यार्थियों के ज्ञान-बोध में सहायक होगे।

परिभाषा–जो शब्दांश या वर्ण किसी शब्द के अन्त में (UPBoardSolutions.com) जोड़े जाते हैं और जिनके जुड़ने से शब्द का अर्थ बदल जाता है या उनमें कुछ नवीन विशेषता आ जाता है, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। इन शब्दांशों का स्वतन्त्र रूप से प्रयोग नहीं होता।

प्रत्यय के प्रकार-प्रत्यय के दो भेद हैं—

  1. कृत् प्रत्यय तथा
  2. तद्धित प्रत्यय।।

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(1) कृत् प्रत्यय-जो शब्दांश, धातु के बाद लगाये जाने पर संज्ञा, विशेषण तथा अव्यय शब्द बनाते हैं, वे कृत् प्रत्यय कहलाते हैं। क्रियाओं के सामान्य रूप-उठना, पढ़ना आदि में से ‘ना’ को निकाल देने पर बचा हुआ रूप ‘धातु’ कहलाता है। कृत् प्रत्यय से बने शब्दों को कृदन्त कहते हैं; जैसे-‘पढ़’ धातु में ‘आई’ प्रत्यय जुड़कर ‘पढ़ाई’ शब्द बनता है।

(2) तद्धित प्रत्यय-जो शब्दांश, धातु के अतिरिक्त अन्य शब्दों (संज्ञा, विशेषण, सर्वनाम आदि) (UPBoardSolutions.com) के बाद जुड़कर नये शब्द बनाते हैं, वे तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं; जैसे–‘सुन्दर’ शब्द में ‘ता’ प्रत्यय जोड़कर ‘सुन्दरता’ शब्द बनता है।

प्रत्यय और उपसर्ग में अन्तर–‘प्रत्यय’ शब्द के अन्त में जोड़ा जाता है और ‘उपसर्ग’ शब्द से पहले; जैसे-

कुशल में ‘अ’ उपसर्ग जोड़ने पर-अकुशल।
कुशल में ‘ता’ प्रत्यय जोड़ने पर-कुशलता

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कृत् प्रत्यय के उदाहरण

1. अन-गमन, पठन, दर्शन, पूजन, नमन, मनन, चिन्तन, मिलन।
2. अ-खेल (खेल् + अ), चर, चल, जय, तप, फल, बन्ध, मन्त्र।
3. अनीय-पूजनीय, दर्शनीय, नमनीय, सहनीय, वन्दनीय, पठनीय।
4. अक/क--मोहक, दर्शक, लेखक, पाठक, बोधक, बैठक।
5. आऊ—जड़ाऊ, उठाऊ, चलाऊ, जमाऊ, उड़ाऊ, टिकाऊ, बिकाऊ।
6. आका-धमाका, लड़ाका, उड़ाका।
7. आन-उठान, ढलान, उफान, थकान, उड़ान, मिलान।
8. आवा/वा [2011, 12, 13, 14, 15, 16, 17]-पहनावा, ओढ़ावा, दिखावा, चढ़ावा।
9. आव-बचाव, दुराव, छिपाव।।
10. आहट/हट [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]-घबराहट, जगमगाहट, आहट, सरसराहट, गड़गड़ाहट, चिल्लाहट।
11. आई [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]-लिखाई, (UPBoardSolutions.com) पढ़ाई, हँसाई, चढ़ाई, जुताई, कमाई, निराई, सिलाई।
12. आ–घेरा, झगड़ा, झूला, ठेला।
13. ई-हँसी, माफी, द्वेषी, द्रोही, धमकी।
14. ऊ–खाऊ, कमाऊ, रट्ट, झाडू।
15. औता, ओता-समझौता, न्योता।
16. त, इत–कृत, मृत, पठित, लिखित, रचित, चलित, फलित।
17. नी–कहानी, कथनी, करनी, ओढ़नी।
18. आवट/वट [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]-सजावट, लिखावट, गिरावट, थकावट, बनावट।
19. तव्य—कर्त्तव्य, गन्तव्य, मन्तव्य, ध्यातव्य।
20. औती-फिरौती, मनौती।
21. आप-मिलाप।
22. इयल–मरियल, सड़ियल, (UPBoardSolutions.com) अड़ियल, दढ़ियल।
23. अक्कड़-घुमक्कड़, पियक्कड़।

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तद्धित प्रत्यय के उदाहरण

1. अयन-रसायन, रामायण, नारायण।।
2. आलु, आलू-दयालु, कृपालु, शंकालु, झगड़ालू।
3. आनी, आइन [2009, 18]-सेठानी या सेठाइन, नौकरानी, देवरानी, जेठानी, पण्डितानी या पण्डिताइन, ललाइन।
4. इन-सुनारिन, कलारिन, चमारिन।।
5. इक–श्रमिक, कर्णिक, पारिवारिक, आर्थिक, व्यावसायिक, सामाजिक, नागरिक, राजनीतिक, वैज्ञानिक, सैनिक।।
6. इम–पश्चिम, अन्तिम, अग्रिम, अरुणिम, स्वर्णिम।
7. इमा–लालिमा, लघिमा, गरिमा, महिमा, नीलिमा, हरीतिमा।
8. ईला-चमकीला, भड़कीला, रसीला, जहरीला, गर्वीला।
9. ईन-नवीन, प्राचीन, कुलीन, ग्रामीण।
10. ईय [2015, 17]-नगरीय, जातीय, मानवीय, भवदीय, भारतीय, नारकीय, स्वजातीय।
11. ई–देशी, विदेशी, परदेशी, फली, नगरी।
12. ऊ-बाजारू, गॅवारू।
13. कार-कलाकार, स्वर्णकार, चर्मकार, रचनाकार, निबन्धकार।
14. वार- उम्मीदवार, कसूरवार।।
15. ता [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]—सुन्दरता, (UPBoardSolutions.com) सज्जनता, दुर्जनता, मधुरता, महानता, लघुता।
16. त्र-यत्र, तत्र, सर्वत्र, एकत्र, अन्यत्र।
17. त्व[2009, 11, 12, 13, 14, 15, 15, 17, 18]-बन्धुत्व, मृदुत्व, लघुत्व, कवित्व, प्रभुत्व, महत्त्व, ममत्व, मनुष्यत्व।
18. था-सर्वथा, व्यथा, यथा, अन्यथा
19. पा–बुढ़ापा, रंड़पा।।
20. पन [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]-बचपन, लड़कपन, भोलापन, बड़प्पन, पागलपन।
21. मती–श्रीमती, स्वस्तिमती, बुद्धिमती।
22. मान्-बुद्धिमान्, श्रीमान्, शक्तिमान्।
23. वती–गुणवती, रूपवती, सौभाग्यवती।
24. वान् [2018] विद्वान्, धनवान्, ज्ञानवान्, दयावान्, रूपवान्।
25. आर—लुहार, कुम्हार, सुनारे।।
26. वना–भयावना, सुहावना, डरावना।
27. वन्त, मन्त–श्रीमन्त, गुणवन्त, दयावन्त, भगवन्त।
28. ला–अगला, पिछला, पतला, मॅझला, दुबला।
29. स्थ-निकटस्थ, दूरस्थ, गृहस्थ, स्वस्थ, समीपस्थ।
30. आस-मिठास, उजास, निकास।
31. हारा–लकड़हारा, रोवनहारा, चुड़िहारा।
32. हार-सृजनहार, खेवनहार, राखनहार।।
33. आई [2009, 10, 12, 14, 18]–चतुराई, चौड़ाई, लम्बाई, ऊँचाई, मोटाई, पिसाई।।
34. मय–राममय, धर्ममय, कर्ममय, स्नेहमय, संगीतमय।
35. पूर्वक—प्रेमपूर्वक, विचारपूर्वक, शान्तिपूर्वक, विनयपूर्वक, नियमपूर्वक, दयापूर्वक।
36. प्रद–लाभप्रद, हानिप्रद, भयप्रद, लोभप्रद, (UPBoardSolutions.com) कल्याणप्रद।
37. आत्मक – विचारात्मकं, प्रश्नात्मक, वर्णनात्मक, विवेचनात्मक, व्यंग्यात्मक, बोधात्मक, आलोचनात्मक।
38. जन्य-रागजन्य, प्रेमजन्य, द्वेषजन्य, भावजन्य, क्रोधजन्य।
39. हरा-सुनहरा, खरहरा, पपीहरा, चौहरा।।
40. आकू [2018]–लड़ाकू, पढ़ाकू।

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प्रत्यय से सम्बन्धित अतिरिक्त सामग्री

प्रश्न 1
निम्नलिखित शब्दों से प्रकृति (मूल-शब्द) तथा प्रत्यय को पृथक् करके लिखिए-
उत्तर
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प्रश्न 2
निम्नलिखित प्रत्ययों से युक्त तीन शब्द लिखिए-
उत्तर
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UP Board Solutions for Class 10 Hindi उपसर्ग

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हिन्दी व्याकरण शब्द-रचना के तत्त्व

नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार “हिन्दी व्याकरण : शब्द-रचना के तत्त्व खण्ड के अन्तर्गत पाँच प्रकरण-उपसर्ग, प्रत्यय, समास, तत्सम शब्द तथा पर्यायवाची–निर्धारित हैं। इस खण्ड से कुल 11 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे।

ध्यातव्य-इस खण्ड के अन्तर्गत दी गयी सामग्री को विद्यार्थी ध्यानपूर्वक (UPBoardSolutions.com) पढ़े। सम्बद्ध सामग्री पर्याप्त विस्तार से दी गयी है। हिन्दी के भाषिक स्वरूप को समझने की दृष्टि से यह अत्यधिक | महत्त्वपूर्ण है।

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उपसर्ग

पाठ्यक्रम में निर्धारित उपसर्ग (उपसर्गों के प्रयोग एवं उनसे निर्मित शब्द): अ, अन्, अधि, अप, अनु, आ, उप, सह, निर्, अभि, परि, सु।
नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 3 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।

ध्यातव्य प्रस्तुत प्रकरण से सम्बन्धित पर्याप्त सामग्री दी गयी है। कुछ उपसर्ग पाठ्यक्रम से (अतिरिक्त भी दिये गये हैं, जो विद्यार्थियों के ज्ञान-बोध में सहायक होंगे।

वे वर्ण या वर्ण-समूह जो किसी शब्द के पहले जुड़कर उस शब्द के अर्थ में विशेषता उत्पन्न कर देते हैं या उसके अर्थ को बदल देते हैं उपसर्ग’ कहलाते हैं। उपसर्गों का प्रयोग स्वतन्त्र रूप से नहीं होता, वे किसी शब्द के पूर्व ही प्रयोग किये जाते हैं; जैसे-सम्भव, (UPBoardSolutions.com) संहार, संचय। इनमें ‘सम्’ उपसर्ग है; यह भव, हार, चय शब्दों से पहले जुड़ा हुआ है।

हिन्दी.में तीन प्रकार के उपसर्ग प्रयुक्त होते हैं—

  1. संस्कृत के,
  2. हिन्दी के,
  3. उर्दू-फारसी के।

संस्कृत के उपसर्ग

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हिन्दी के उपसर्ग

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उर्दू के उपसर्ग

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उपसर्ग से सम्बन्धित अतिरिक्त सामग्री

प्रश्न 1
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग और मूल शब्दों को अलग करके लिखिए-
उत्तर
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प्रश्न 2
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग पृथक् कीजिए तथा उस उपसर्ग से बनने वाले दो अन्य शब्द भी
लिखिए–
उत्तर
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प्रश्न 3
निम्नलिखित उपसर्गों से एक-एक शब्द बनाइए-
अप, अनु, निर्, वि, अधि, अभि, उप, परि, सह।
उत्तर

  1. अप से अपमानित,
  2. अनु से अनुवादक,
  3. निर् से निर्विशेष,
  4. वि से विशेषाधिकार,
  5. अधि से अधिनायक,
  6. अभि से अभियुक्त,
  7. उप से उपस्थिति,
  8. परि से परिकल्पना,
  9. मुह से (UPBoardSolutions.com) सहधर्मिणी।।

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प्रश्न 4
निम्नलिखित उपसर्गों से एक-एक शब्द बनाइए-
अप, परि, सु, ला, अन्, अनु, उप, अभि, दुर्, प्र, निर्, वि, अति।
उत्तर

  1. अप से अपव्यय,
  2. परि से परिवेष्ठित,
  3. सु से सुमित्र,
  4. ला से लापरवाही,
  5. अन् । से अनुत्तरित,
  6. अनु से अनुमोदन,
  7. उप से उपाधीक्षक,
  8. अभि से अभिव्यक्ति,
  9. दुर् से दुर्निवार,
  10. प्र से प्रस्फुटित,
  11. निर् से (UPBoardSolutions.com) निर्विकल्प,
  12. वि से विशिष्ट,
  13. अति से अतिचार।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi अलंकार

UP Board Solutions for Class 10 Hindi अलंकार

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अलंकार

परिभाषा–अलंकार का अर्थ है-‘आभूषण’; जैसे आभूषण सौन्दर्य को बढ़ाने में सहायक होते हैं, उसी प्रकार काव्य में अलंकारों का प्रयोग करने से काव्य की शोभा बढ़ जाती है; अत: काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्त्वों को अलंकार कहते हैं। अलंकारों (UPBoardSolutions.com) के प्रयोग से शब्द और अर्थ में चमत्कार उत्पन्न होता है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार, “भावों का उत्कर्ष दिखाने और वस्तुओं के रूप, गुण, क्रिया का अधिक तीव्रता से अनुभव कराने में सहायक होने वाली उक्ति अलंकार है।

वर्गीकरण–अलंकारों के मुख्य दो वर्ग हैं–

(अ) शब्दालंकार तथा
(ब) अर्थालंकार।

(अ) शब्दालंकार–जहाँ केवल शब्दों के प्रयोग के कारण काव्य में चमत्कार पाया जाता है, उसे शब्दालंकार कहते हैं। यदि उन शब्दों के स्थान पर उनके पर्यायवाची शब्द रख दिये जाएँ तो वह चमत्कार समाप्त हो जाएगा और वहाँ अलंकार नहीं रह जाएगा।

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(ब) अर्थालंकार-जहाँ अर्थ के कारण काव्य में चमत्कार पाया जाता है, वहाँ अर्थालंकार होता है। इसमें शब्दों के पर्यायवाची रखने पर भी अलंकार बना रहता है।

शब्दालंकार में अनुप्रास, यमक और श्लेष मुख्य हैं, जबकि अर्थालंकारों में उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा मुख्य हैं।

[विशेष-पाठ्यक्रम में केवल उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा अर्थालंकार ही सम्मिलित हैं। पद्यांशों का काव्य-सौन्दर्य लिखने में अनुप्रास, यमक, श्लेष शब्दालंकारों का ज्ञान भी आवश्यक होता है; अत: यहाँ संक्षेप में उनका परिचय भी दिया जा रहा है।

(1) अनुप्रास अलंकार

परिभाषा–जहाँ किसी व्यंजन वर्ण की बार-बार आवृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण-‘चारु चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल थल में।”
स्पष्टीकरण–यहाँ ‘च’ वर्ण और ‘ल’ वर्ण की आवृत्ति अनेक बार हुई (UPBoardSolutions.com) है; अत: यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

(2) यमक अलंकार

परिभाषा–जहाँ एक ही शब्द बार-बार आता है, किन्तु उसका अर्थ भिन्न-भिन्न होता है; वहाँ यमक अलंकार होता है।
उदाहरण—

कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय ।
या खाये बौराय जग, वा पाये बौराय ।।

स्पष्टीकरण-यहाँ ‘कनक’ शब्द दो बार आया है, किन्तु उसके भिन्न-भिन्न अर्थ हैं। प्रथम ‘कनक’ का अर्थ ‘धतूरा’ तथा दूसरे ‘कनक’ का अर्थ ‘सोना’ है; अतः यहाँ यमक अलंकार है।

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(3) श्लेष अलंकार,

परिभाषा–जहाँ कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त होकर अनेक अर्थ प्रकट करे, वहाँ श्लेष अलंकार होता है। उदाहरण-

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून ।
पानी गये न ऊबरे, मोती मानुष चुन ।।

स्पष्टीकरण–यहाँ ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं—

  1. मोती के सम्बन्ध में चमक,
  2. मनुष्य के सम्बन्ध में सम्मान,
  3. जून के सम्बन्ध में जल; अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

(4) उपमा अलंकार- [2009, 10, 11, 12, 14, 15, 16, 17, 18]

परिभाषा–जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति से समान गुण-धर्म के आधार पर तुलना की जाए या समानता बतायी जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है; जैसे–‘राधा के चरण गुलाब के समान कोमल हैं।’ यहाँ राधा के चरण की (UPBoardSolutions.com) तुलना या समानता गुलाब से दिखाई गयी है। इसलिए यहाँ उपमा अलंकार है।
उपमा अलंकार के निम्नलिखित चार अंग होते हैं|

(1) उपमेय-जिस वस्तु की समानता बतायी जाती है; वह उपमेय (प्रस्तुत) होता है। ऊपर दिये गये उदाहरण में ‘राधा के चरण’ उपमेय हैं।
(2) उपमान-जिस वस्तु से समानता की जाती है; वह वस्तु उपमान (अप्रस्तुत) कहलाती है। ऊपर दिये गये उदाहरण में ‘गुलाब’ उपमान है।
(3) वाचक-समानता अथवा पहचान को व्यक्त करने वाला शब्द वाचक’ कहलाता है। ऊपर दिये गये उदाहरण में समान’ शब्द वाचक है।
(4) साधारण धर्म-जो गुण उपमान और उपमेय में समान रूप से रहता है; वह साधारण धर्म कहलाता है। ऊपर दिये गये उदाहरण में कोमल’ शब्द साधारण धर्म है; क्योंकि यह राधा के चरण और गुलाब दोनों में है।
उदाहरण—

  1. ‘हरिपद कोमल कमल-से।’ स्पष्टीकरण-उपमेय-हरिपद। उपमान–कमल। वाचक शब्द-। साधारण धर्म-कोमल।
  2. ‘पीपर पात सरिस मन डोला।’ [2009]

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स्पष्टीकरण-उपमेय-मन। उपमान–पीपर पात। वाचक शब्द-सरिस। साधारण धर्म-डोला।
अन्य उदाहरण-

  1. यहीं कहीं पर बिखर गयी वह, भग्न विजयमाला-सी।
  2. आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी।
  3. तम के तागे-सी जो हिल-डुल, (UPBoardSolutions.com) चलती लघु पद पल-पल मिल-जुल।
  4. करि कर सरिस सुभग भुजदण्डा।
  5. अनुलेपन-सा मधुर स्पर्श था।
  6. सजल नीरद-सी कल कान्ति थी।
  7. छिन्न पुत्र मकरन्द लुटी-सी ज्यों मुझई हुई कली।
  8. अराति सैन्य सिन्धु में सुबाडवाग्नि-से जलो।

(5) रूपक अलंकार [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]

परिभाषा-जहाँ उपमेय में उपमान का भेदरहित आरोप किया (UPBoardSolutions.com) जाता है अर्थात् उपमेय (प्रस्तुत) और उपमान (अप्रस्तुत) में अभिन्नता प्रकट की जाये, वहाँ रूपक अलंकार होता है; उदाहरण—

(1) मुख-चन्द्र तुम्हारा देख सखे ! मन-सागर मेरा लहराता। | स्पष्टीकरण–यहाँ मुख (उपमेय) में चन्द्र (उपमान) का तथा मन (उपमेय) में सागर (उपमान) का भेद न करके एकरूपता बतायी गयी है; अत: यहाँ रूपक अलंकार है।
(2) ‘चरण-कमल बन्द हरि राई।। [2010, 11]
स्पष्टीकरण–यहाँ चरण में कमल का भेद न रखकर एकरूपता बतायी गयी है।
अन्य उदाहरण

  • हरि-जननी, मैं बालक तेरा।
  • मुनि पद-कमल बंदि दोउ भ्राता।
  • अँसुवन जल सीचि-सीचि प्रेम बेलि बोई।
  • माया-दीपक नर-पतंग भ्रमि भ्रमि इवें पड़ेत। [2009, 10]
  • बढ़त-बढ़त सम्पति-सलिलु, मन-सरोज बढ़ि जाय।
  • रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरेउ चटकाय।
  • उदित उदयगिरि-मंचे पर, रघुबर-बाल पतंग।
  • बिकसे संत-सरोज सब, हरषे लोचन शृंग।।
  • अपने अनल-विशिख से आकाश जगमगा दे।

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(6) उत्प्रेक्षा अलंकार [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]

परिभाषा—जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाये, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। मनु-मानो, जनु-जानो, मनहुँ-जनहुँ आदि उत्प्रेक्षा के वाचक शब्द हैं; उदाहरण,

(1) सोहत ओढ़ पीतु पटु, स्याम सलोने गात ।।
मनौ नीलमनि-सैल पर, आतपु पर्यो प्रभात ॥ [2010, 11, 15, 18]

स्पष्टीकरण–यहाँ पीला वस्त्र धारण किये हुए कृष्ण के श्याम शरीर (उपमेय, प्रस्तुत) में प्रात:कालीन धूप से शोभित नीलमणि शैल (उपमान, अप्रस्तुत) की सम्भावना की गयी है; अतः उत्प्रेक्षा अलंकार है।

(2) मोर-मुकुट की चन्द्रिकनु, यौं राजत नंद-नन्द।
मनु ससि सेखर की अकस, किये सेखर सत-चन्द ॥ [2009, 11, 14]

स्पष्टीकरण-यहाँ मोर पंख से बने मुकुट की चन्द्रिकाओं (उपमेय) में शत-चन्द्र (उपमान) की सम्भावना व्यक्त की गयी है।
अन्य उदाहरण—
(1) लोल-कपोल झलक कुण्डल की, यह उपमा कछु लागत ।
मानहुँ मकर सुधारस क्रीड़त, आपु-आपु अनुरागत ।।
(2) पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से ।।
मानो झूम रहे हों तरु भी, मन्द पवन के (UPBoardSolutions.com) झोंको से ।।
(3) धाये धाम काम सब त्यागी। मनहुँ रंक निधि लूटन लागी । (2013)
(4) उभय बीच सिय सोहति कैसी। ब्रह्म-जीव बिच माया जैसी ।।
बहुरि कहउँ छबि जस मन बसई। जनु मधु मदन मध्य रति लसई ।।
(5) लता भवन ते प्रकट भए, तेहि अवसर दोउ भाई ।। [2009]
निकसे जनु जुग विमल विधु, जलज पटल बिलगाइ ।।
(6) चमचमात चंचल नयन, बिच घूघट पट झीन ।।
मानहुँ सुरसरिता बिमल, जग उछरत जुग मीन ।।। [2012]
(7) चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी। तिलक रेख सोभा जनु चाँकी।
(8) अर्ध चन्द्र सम सिखर-सैनि कहुँ यों छबि छाई ।।
मानहुँ चन्दन-घौरि धौरि-गृह खौरि लगाई ।।

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अभ्यास

प्रश्न 1
निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार का नाम लिखिए तथा उसका लक्षण (परिभाषा) बताइए
(1) हँसत दसने इक सोभा उपजति उपमा जदपि लजाइ ।
मनो नीलमनि-पुट मुकता-गन, बंदन भरि बगराइ ।।
उत्तर
उत्प्रेक्षा तथा अनुप्रास

(2) अरुन सरोरुह-कर-चरन, दृग-खंजन, मुख-चन्द ।
उत्तर
रूपक तथा अनुप्रास

(3) मुख मयंक सम मंजु मनोहर । ।
उत्तर
उपमा, रूपक तथा अनुप्रास

(4) अनुराग तड़ाग में भानु उदै। बिगसी मनो मंजुल कंज कली ।।
उत्तर
रूपक

(5) बिपति कसौटी जे कसे, तेही साँचे मीत ।।
उत्तर
रूपक

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(6) भज मन चरण-कॅवल अबिनासी ।।
उत्तर
रूपक

(7) जौ चाहते चटक न घटे, मैलौ होई न मित्त ।।
उत्तर
रूपक

(8) मनो रासि महातम तारक मैं ।
उत्तर
उत्प्रेक्षा

(9) बन्द नहीं अब भी चलते हैं, नियति-नटी के कार्य-कलाप ।
उत्तर
रूपक

(10) बीती विभावरी जाग री ।।
अम्बर पनघट में डुबो रही तारा घट ऊषा नागरी ।
उत्तर 
रूपक (UPBoardSolutions.com)

(11) अति कटु बचन कहत कैकेयी। मानहुँ लोन जरे पर देई ।।
उत्तर
उत्प्रेक्षा तथा अनुप्रास

(12) दादुर धुनि चहुँ दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई ।।
उत्तर
उत्प्रेक्षा तथा अनुप्रास

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(13) बन्दउँ कोमल कमल से, जगजननी के पाँव ।।
उत्तर
उत्प्रेक्षा तथा अनुप्रास

(14) कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सन राम हृदय गुनि ।।
मानहुँ मदन दुन्दुभी दीन्हीं। मनसा विश्वविजय कहुँ कीन्हीं ।।
उत्तर
उत्प्रेक्षा तथा अनुप्रास।
[ संकेत–अलंकारों के लक्षण  (परिभाषा) के लिए पहले दिये गये विवरण को पढ़िए।]

प्रश्न 2
उपमा अथवा रूपक अलंकार की परिभाषा लिखिए और उसका उदाहरण दीजिए। [2011, 12, 14, 15]
या
उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा लिखिए तथा एक उदाहरण दीजिए। [2011, 12, 13, 14, 15, 16]
या
उत्प्रेक्षा अलंकार का लक्षण और उदाहरण लिखिए। उपमा अलंकार की परिभाषा तथा उदाहरण लिखिए। [2011, 12, 14]
या
उपमा अलंकार के लक्षण और उदाहरण लिखिए। उपमा के चारों अंगों का उल्लेख कीजिए। [2010]
या
उपमा अलंकार के अंगों का उल्लेख करते हुए उसकी परिभाषा लिखिए। एक उदाहरण भी दीजिए|
उत्तर
[ संकेत–उपमा, रूपक तथा (UPBoardSolutions.com) उत्प्रेक्षा अलंकार के विवरण में देखिए।]

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प्रश्न 3
रूपक अलंकार को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
या
रूपक अलंकार की परिभाषा सोदाहरण लिखिए। [2011, 12, 13, 14, 15, 16]
उत्तर
[ संकेत–रूपक अलंकार के विवरण में देखिए।]

प्रश्न 4
पठित अलंकारों में से किसी एक अलंकार की उदाहरण सहित परिभाषा लिखिए।
उत्तर
[ संकेत–अलंकारों के विवरण से अध्ययन करें।]

प्रश्न 5
उपमा और उत्प्रेक्षा अलंकार में अन्तर बताइए। [2012]
उत्तर
उपमा अलंकार में उपमेय और उपमान में समानता निश्चयपूर्वक प्रकट की जाती है; जैसे-मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर है। यहाँ मुख (उपमेय) और चन्द्रमा (उपमान) में सुन्दरता (समान धर्म) के आधार पर समानता स्थापित की गयी (UPBoardSolutions.com) है परन्तु उत्प्रेक्षा अलंकार में उपमेय और उपमान में मात्र सम्भावना प्रकट की जाती है, वह निश्चित रूप से स्थापित नहीं की जाती; जैसे-मुख मानो चन्द्रमा है।

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