UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 14 क्लासेज एवं ऑब्जेक्ट्स

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 14
Chapter Name क्लासेज एवं ऑब्जेक्ट्
Number of Questions 16
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 14 क्लासेज एवं ऑब्जेक्ट्स

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
क्लास किंस प्रोग्रामिंग सिद्धान्त का केन्द्र बिन्दु होता है?
(a) ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड
(b) क्लास ओरिएण्टेड
(c) ऑब्जेक्ट
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(a) ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) C++ क्लास में डाटा आइटम तथा फंक्शन होते हैं।
(b) C++ क्लास में मात्र फंक्शन होते हैं।
(c) एक क्लास में अनेक ऑब्जेक्ट डिक्लेयर किए जाते हैं।
(d) ऑब्जेक्ट का प्रारूप क्लास की भाँति होता है।
उत्तर
(b) दिए गए विकल्पों में (b) असत्य है, क्योंकि C++ क्लास फंक्शन के साथ-साथ डाटा आइटम भी रखता है।

प्रश्न 3.
सदस्य फंक्शन को कितने प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है?
(a) तीन
(b) चार
(c) दो
(d) एक
उत्तर
(c) सदस्य फंक्शन को दो प्रकार से परिभाषित किया जा सकता हैक्लास बॉडी के अन्दर तथा क्लास बॉडी के बाहर।

प्रश्न 4.
फंक्शन को क्लास के बाहर परिभाषित करने के लिए किस चिह्न का प्रयोग किया जाता है?
(a) :
(b) :
(c) : ?
(d) ::
उत्तर
(d) ::

प्रश्न 5.
क्लास में प्रयुक्त एक्सेस स्पेसीफायर कितने प्रकार के होते हैं?
(a) तीन
(b) दो
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर
(a) एक्सेस स्पेसीफायर तीन प्रकार के होते हैं –
private, protected 24 public

प्रश्न 6.
किस क्लास के डाटा आइटम व फंक्शन को अन्य क्लास द्वारा एक्सेस किया जा सकता है?
(a) public
(b) private
(c) protected
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(a) public क्लास में परिभाषित डाटा आइटम व फंक्शन को किसी भी अन्य क्लास द्वारा एक्सेस किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
निम्न में से ऑब्जेक्ट को परिभाषित करने का प्रारूप कौन-सा है?
(a) class_name object_name
(b) class_name object_name;
(c) object_name class_name;
(d) object_name;
उत्तर
(b) class_name object_name;

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
क्लास का अर्थ समझाइट। (2011, 06)
उत्तर
क्लास एक ऐसा डाटा तत्त्व है, जिसमें प्रोग्राम के सभी डाटा सदस्यों व फंक्शनों को एक संरचना में व्यवस्थित किया जाता है।

प्रश्न 2.
क्लास के सदस्य कौन होते हैं?
उत्तर
क्लास में प्रयुक्त डाटा आइटम तथा फंक्शन क्लास के सदस्य होते हैं।

प्रश्न 3.
स्कोप रिजोल्यूशन ऑपरेटर की व्याख्या केवल एक वाक्य में कीजिए। (2018)
उत्तर
फंक्शन को क्लास के बाहर परिभाषित करने के लिए :: चिह्न का प्रयोग किया जाता है, जिसे स्कोप रिजोल्यूशन ऑपरेटर कहते हैं।

प्रश्न 4.
क्लास में प्रयुक्त protected वई क्या है?
उत्तर
protected एक एक्सेस स्पेसीफायर है, जो प्रोग्राम में किसी क्लास के अन्दर प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 5.
ऑब्जेक्ट क्या होते हैं? (2016, 13)
उत्तर
किसी वस्तु, स्थान, व्यक्ति अथवा अन्य इकाई या कार्य को ऑब्जेक्ट कहा जाता है।

प्रश्न 6.
ऑब्जेक्ट को कैसे पहचाना जाता है?
उत्तर
ऑब्जेक्ट को ऑब्जेक्ट के नाम से पहचाना जाता है।

प्रश्न 7.
फ्रेण्ड फंक्शन की व्याख्या केवल एक वाक्य में कीजिए। (2018)
उत्तर
फ्रेण्ड फंक्शन का प्रयोग friend की-वर्ड के साथ किया जाता है। ये क्लास के मेम्बर फंक्शन नहीं होते, परन्तु उस क्लास के private और protected मेम्बर को एक्सेस कर सकता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न। (2 अंक)

प्रश्न 1.
क्लास से क्या तात्पर्य है? किसी क्लास को किस प्रकार से डिक्लेयर किया जा सकता है? समझाइए। (2008)
उत्तर
क्लास एक ऐसा डाटा तत्त्व है, जिसमें प्रोग्राम के सभी डाटा सदस्यों व फंक्शनों को एक संरचना में व्यवस्थित किया जाता है। C++ भाषा में, क्लास को class की-वर्ड द्वारा परिभाषित किया जाता है।
क्लास को डिक्लेयर करना क्लास को डिक्लेयर करते समय, क्लास के सभी डाटा सदस्य व फंक्शन को क्लास के अन्दर ही व्यवस्थित किया जाता है।
प्रारूप

class class_name
{
private:
Variable declarations;
Function declarations;
public:
Variable declarations;
Function declarations;
};

प्रश्न 2.
क्लासेज तथा ऑब्जेक्ट के सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए। (2006)
अथवा
क्लासेज तथा ऑब्जेक्ट का वर्णन कीजिए। (2018, 09)
उत्तर
क्लास क्लास एक ऐसा तत्त्व है, जिसमें प्रोग्राम के सभी डाटा सदस्यों व फंक्शनों को एक संरचना में व्यवस्थित किया जाता है। वस्तुओं को उनके समान व्यवहार और सम्भव स्थितियों के अनुसार समूहों में बाँटा जाता है, ऐसे प्रत्येक समूह को क्लास कहा जाता है।
ऑब्जेक्ट किसी वस्तु, स्थान, व्यक्ति अथवा अन्य इकाई या कार्य को ऑब्जेक्ट कहा जाता है। कोई ऑब्जेक्ट किसी क्लास का एक बिन्दु या तत्त्व होता है, जो उस क्लास के नाम से बनाया जा सकता है।

प्रश्न 3.
किसी ऑब्जेक्ट को कैसे बनाया जाता है? समझाइए।
उत्तर
कोई ऑब्जेक्ट किसी क्लास का एक बिन्दु या तत्त्व होता है, जो उस क्लास के नाम से बनाया जा सकता है। ऑब्जेक्ट बनाने का प्रारूप इस प्रकार है –
class_name object_name;
यहाँ, class_name उस क्लासे का नाम है, जिसका ऑब्जेक्ट बनाना है। और object_name उस ऑब्जेक्ट का नाम है, जिसे परिभाषित करना है।
उदाहरण
student S;
यहाँ, क्लास Student का एक ऑब्जेक्ट S है।

लघु उत्तरीय प्रश्न।। (3 अंक)

प्रश्न 1.
सदस्य या मेम्बर फंक्शन को कितने प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है? उदाहरण सहित समझाइए। (2008)
उत्तर
सदस्य या मेम्बर फंक्शन को दो प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है, जो निम्न प्रकार हैं
(i) क्लास की बॉडी के अन्दर यदि कोई सदस्य फंक्शन बहुत छोटा होता है, तो उसे क्लास की बॉडी में ही परिभाषित कर दिया जाता है ऐसे सदस्यों को इनलाइन माना जाता है।
उदाहरण

class student
{
private:
char name [20];
public:
void enter ()
{
gets (name);
}
void show ()
{
puts (name);
}
};

(ii) क्लास की बॉडी के बाहर यदि फंक्शन बड़े होते हैं, तो क्लास के बाहर ही परिभाषित किए जाने चाहिए, जिसे :: चिह्न का प्रयोग करके परिभाषित किया जाता है। इस चिह्न को स्कोप रिजोल्यूशन ऑपरेटर (Scope resolution operator) कहा जाता हैं।
उदाहरण

class student
{
private:
chiar name [20];
public:
void enter ();
void show ();
};
void Student :: enter ()
{
gets (name);
}
void Student :: show ()
{
puts (name);
}

प्रश्न 2,
पब्लिक सदस्य, प्राइवेट सदस्य व प्रोटेक्टेड सदस्य में भेद कीजिए। (2008)
अथवा
डाटा हाइडिंग क्या है? क्लास के माध्यम से इसे कैसे प्राप्त किया जाता है? उदाहरण सहित समझाइए। (2006)
उत्तर
वैरिएबल और फंक्शन की घोषणा private की-वर्ड के द्वारा करने पर इसकी उपलब्धता फंक्शन के बाहर नहीं रहती है अर्थात् इनका प्रयोग उसी फंक्शन में किया जा सकता है, जिस फंक्शन में इन्हें घोषित किया गया है। क्लास की घोषणा का यह गुण डाटा हाइडिंग कहलाता है।
C++ में प्रयुक्त private, public तथा protected सदस्यों को एक्सेस स्पेसीफायर कहा जाता है, जो डाटा हाइडिंग में भी प्रयुक्त होते हैं।
इनका विवरण निम्न है –

  1. private किसी भी क्लास के private भाग में परिभाषित डाटा आइटम व फंक्शन केवल उसी क्लास के सदस्य फंक्शन द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।
  2. protected किसी भी क्लास के protected भाग में परिभाषित डाटा आइटम व फंक्शन उस क्लास के सदस्य फंक्शन तथा डिराइब्ड क्लास के सदस्य फंक्शन द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।
  3. public किसी क्लास के public भाग में परिभाषित डाटा आइटम व फंक्शन प्रोग्राम में किसी के भी द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।

उदाहरण

class Employee
{
private:
char name;
public:
int emp-id;
void input ();
protected:
float salary;
void output ();
};

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1.
क्लास की परिभाषा का प्रारूप लिखिए और उसके प्रत्येक भाग का अर्थ समझाइए। (2014)
उत्तर
क्लास एक ऐसा डाटा तत्त्व है, जिसमें प्रोग्राम के सभी डाटा सदस्यों व फंक्शनों को एक संरचना में व्यवस्थित किया जाता है। C++ भाषा में, क्लास को class कीवर्ड द्वारा परिभाषित किया जाता है।
क्लास को घोषित करने का प्रारूप

class class_name
{
private:
Variable declaration 1;
Function declaration 1;
public:
Variable declaration 2;
Function declaration 2;
};

उपरोक्त प्रारूप में, class एक की-वर्ड है, जो किसी क्लास की शुरुआत करता है। class_name उस क्लास का नाम है, जो यूजर द्वारा रखा जाता है।

  • private इसे एक्सेस स्पेसीफायर कहा जाता है, जिसमें परिभाषित डाटा आइटम व फंक्शन केवल उसी क्लास के सदस्य फंक्शन द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।
  • Variable declaration 1 यह क्लास में परिभाषित डाटा आइटम है, जो private भाग में परिभाषित हैं। यह केवल इसी क्लास के अन्दर इसके सदस्य फंक्शन द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।
  • Function declaration 1 यह क्लास में परिभाषित फंक्शन है, जो private भाग के अन्दर परिभाषित है। यह केवल इसी क्लास के अन्दर इसके सदस्य फंक्शन द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।
    public यह एक एक्सेस स्पेसीफायर है, जिसमें परिभाषित डाटा आइटम व फंक्शन किसी के भी द्वारा एक्सेस हो सकते हैं।
  • Variable declaration 2 यह क्लास में परिभाषित पब्लिक डाटा आइटम है, जो प्रोग्राम में किसी के भी द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।
  • Function declaration 2 यह क्लास में परिभाषित पब्लिक फक्शन है, जो प्रोग्राम में किसी के भी द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं।

}; यह क्लास के अन्त को प्रदर्शित करता है।
उदाहरण

class Teacher
{
public:
int Id;
void Subject ();
private:
int no_of_lecture;
void Department ();
};

प्रश्न 2.
किसी विद्यार्थी की सूचना प्रदर्शित करने वाले एक ऐसे क्लास की संरचना करें, जिसमें निम्न सदस्य हों (2006)
डाटा सदस्य

  • विद्यार्थी का रोल न.                  विद्यार्थी का नाम
  • विद्यार्थी का विषय                     विद्यार्थी का एड्रेस

सदस्य फंक्शन

  • डाटा सदस्यों को वैल्यू देना
  • विद्यार्थी का रोल न., नाम, विषय व एड्रेस प्रदर्शित करना। सदस्य फंक्शनों का कोड भी लिखिए।

उत्तर

class student
{
private:
int roll;
char name [30], subject [20];
char address [50];
public:
void Input ();
void Show ();
};
void Student :: Input ()
{
cout<<"Enter Roll No."<>roll;
cout<<"Enter Name"< gets (name);
cout<<"Enter Subject"< gets (subject);
cout<<"Enter Address" gets (address);
}
void Student :: Show ()
{
cout<<"Student DetailsK"< cout<<"Roll No. : "<<roll< cout<<"Name: ";
puts (name);
cout<<"Subject: ";
puts (subject);
cout<<"Address: ";
puts (address);
}

प्रश्न 3.
क्लास व ऑब्जेक्ट का प्रयोग करके किसी कर्मचारी (Employee) का ब्योरा (Detail) इनपुट कराके उसे प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर

#include<iostrean.h>
#include<conio.h>
#include<stdio.h>
class Employee
{
int code;
char name [20], dept [20];
float salary;
public:
void Enter();
void Display();
};
void Employee: : Enter()
{
cout<<"Enter Employee Code:"<<end1; cin>>code;
cout<<"Enter Employee Name:"<<end1;
gets (name);
cout<<"Enter Employee Department:
"<<end1;
gets (dept);
cout<<"Enter Employee Salary:"
<<end1; cin>>salary;
}
void Employee :: Display ( )
{
cout<<"Employee Code:"<<code<<end1;
cout<<"Employee Name:";
puts (name);
cout<<"Employee Department:";
puts (dept);
cout<<"Employee Salary:"<<salary;
}
void main()
{
clrscr();
Employee E;
E.Enter();
E.Display();
getch();
}

आउटपुट
Enter Employee Code:
2550
Enter Employee Name:
Sonam Sharma
Enter Employee Department:
Coordinator
Enter Employee Salary:
35000
Employee Code:2550
Employee Name:Sonam Sharma
Employee Department:Coordinator
Employee Salary:35000

प्रश्न 4.
C++ में प्रोटेक्टेड मेम्बर फंक्शन द्वारा m की घात n के मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर

#include<iostream.h>
#inclde<conio.h>
class Pow
{
int P, r;
public:
Pow()
{
p=1;
}
protected:
int comp_pow (int a, int b)
{
int i;
for (i=1; i<=b; i++)
p=p*a;
return p;
}
public:
void Result (int m, int n)
{
r=comp_pow (m, n) ;
cout<<"m to the power of n = "<<r;
}
};
void main()
{
clrscr();
Pow obj:
int m, n;
cout<<"Enter the values of m and n:"; cin>>m>>n;
obj. Result (m, n) ;
getch();
}

आउटपुट
Enter the values of m and n: 5
3
m to the power of n = 125

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 18 शिशु की देखभाल

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 18 शिशु की देखभाल are part of UP Board Solutions for Class 12 Home Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 18 शिशु की देखभाल.

Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 18
Chapter Name शिशु की देखभाल
Number of Questions Solved 21
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 18 शिशु की देखभाल

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
शिशु के शारीरिक क्रिया का प्रथम परीक्षण है।
(a) वमन
(b) दस्त
(c) रुदन
(d) हँसना
उत्तर:
(c) रुदन

प्रश्न 2.
शिशु के जन्म के समय भार होता है।
(a) लगभग 5-7 पौण्ड
(b) लगभग 7-8 पौण्ड
(c) लगभग 2-3 पौण्ड
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) लगभग 5-7 पौण्ड

प्रश्न 3.
माँ का दूध शिशु के लिए उपयोगी है, क्योंकि (2018)
(a) इसमें रोग से लड़ने की क्षमता होती है
(b) इसमें सभी पोषक तत्त्व पाए जाते हैं
(c) यह शीघ्र पचता है
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 4.
शिशु की किस अवस्था में स्तन त्याग करना चाहिए?
(a) 5 से 7 माह
(b) 6 से 9 माह
(c) 8 से 9 माह
(d) 4 से 5 माह
उत्तर:
(b) 6 से 9 माह

प्रश्न 5.
दूध के अतिरिक्त अन्य सम्पूरक आहार शिशु की किस आयु से शुरू होता है?
(a) 2 माह
(b) 6 माह
(c) 1 वर्ष
(d) 2 वर्ष
उत्तर:
(b) 6 माह

प्रश्न 6.
शिशु में अस्थायी दाँत (दूध के दाँत) की संख्या है।
(a) 20
(b) 22
(c) 24
(d) 30
उत्तर:
(a) 20

प्रश्न 7.
शिशु में लघु पाचक व्याधि है।
(a) अतिसार
(b) घेघा
(c) खसरा
(d) ज्वर
उत्तर:
(d) अतिसार

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

प्रश्न 1.
शिशु का भार क्यों ज्ञात करते रहना चाहिए?
उत्तर:
जन्म के तुरन्त बाद शिशु का भार लगभग 5-7 पौण्ड तक होता है, जो धीरे-धीरे कम होकर कुछ औंस में बदलता है। अत: एक महीने तक हर हफ्ते तथा 6 माह तक हर 15 दिन के पश्चात् भार ज्ञात करते रहने चाहिए, जिससे बच्चे की प्रगति ज्ञात होती रहती है।

प्रश्न 2.
स्तन त्याग से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
शिशु की आयु बढ़ने के साथ-साथ उसकी शारीरिक वृद्धि भी तीव्र गति से बढ़ती है। इस वृद्धि के कारण उसकी भूख भी बढ़ती है, जिससे उसे अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। अतः अब उसे माँ के दूध के अतिरिक्त भी भोजन की आवश्यकता होगी। इस स्थिति में माँ को शिशु के लिए अतिरिक्त भोजन तथा ऊपरी दूध पिलाने की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उसे बच्चे को स्वयं का स्तनपान छुड़ाना होता है, इसे ही स्तन त्याग कहते हैं।

प्रश्न 3.
दूध के दाँत से आप क्या समझती हैं? |
उत्तर:
शिशुओं में दाँत निकलने का समय 6-7 माह के बाद का होता है। दाँत निकलने की यह प्रक्रिया 2 से [latex]2 \frac { 1 } { 2 }[/latex] वर्ष तक होती है, जिसमें 20 दाँत निकलते हैं।इन्हें दूध के दाँत कहते हैं।

प्रश्न 4.
दाँत आसानी से निकल आए इसके लिए क्या उपाय करना चाहिए?
उत्तर:
सुहागा को तवे पर भूनकर शहद मिलाकर मसूड़ों पर लगाने से दाँत जल्दी व आसानी से निकलते हैं।

प्रश्न 5.
शिशुओं में लघु पाचक व्याधियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
कब्ज, पेट फूलना, दस्त आना, अतिसार, वमन (उल्टियाँ), पेट दर्द होना, चुनचुने लगना आदि।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

प्रश्न 1.
स्तनपान छुड़ाने की विधि लिखिए। (2018)
उत्तर:
शिशु जैसे-जैसे बड़ा होता है उसका स्तनपान बन्द करके उसे पूरी तरह ठोस आहार पर निर्भर बनाना होता है, क्योंकि एक समय बाद शारीरिक और मानसिक विकास की जरूरत केवल स्तनपान से पूरी नहीं हो सकती है। अत: स्तनपान छोडना शिश के लिए जरूरी होता है। माँ शिशु को 6 महीने बाद स्तनपान कराना बन्द कर सकती है, क्योंकि इस उम्र के बाद बच्चे कुछ ठोस आहार लेना शुरू कर देते हैं। ऐसे में, आप धीरे-धीरे करके उसे अपना दूध पिलाना बन्द करें। हालाँकि जब आपका शिश ठोस आहार लेना शुरू कर देता है। तब वह आपकों ज्यादा दूध पीने की माँग नहीं करता है, क्योंकि इससे शिशु का पेट भरा रहता है, लेकिन बाहरी आहार देने के बाद इस बात की जाँच कर लें कि आपके बच्चे का पेट भर रहा है या नहीं।

धीरे-धीरे स्तनपान छुड़ाने का प्रयास करें, न की एक बार में अचानक से बच्चे को दूध पिलाना छोड़ दें। यदि आप अचानक से बच्चे को स्तनपान छुड़ाने की कोशिश करेंगी तो हो सकता है कि आपका बच्चा बीमार हो जाए। एक बार में स्तनपान छुड़ाना माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

यदि आप शिशु को पहले पूरे दिन में 6 बार स्तनपान कराती थीं, तो अब उसे आप 2 से 3 बार दूध पिलाएँ, क्योंकि दिन के समय आप अपने बच्चे का दिमाग किसी और चीज़ों में लगा सकती हैं और ऐसे में शिशु धीरे-धीरे दूध स्तनपान करना बन्द कर देता है।

प्रश्न 2.
स्तन त्याग के पश्चात् शिशु को किस प्रकार का आहार देना चाहिए?
उत्तर:
स्तन त्याग के बाद शिशु का सर्वांगीण विकास हो सके, अत: उसके लिए भोजन में शरीर निर्माणक व रक्षक दोनों प्रकार के तत्त्व उचित मात्रा में मिले होने चाहिए। शिशु के भोजन में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, आलू, गेहूँ, दालें सम्मिलित होनी चाहिए। इससे शिशु को शारीरिक व मानसिक विकास उचित रूप से होगा। अतः शिशु के आहार में निम्नलिखित तत्त्व होने चाहिए

1. प्रोटीन यह शरीर निर्माणक तत्त्व है। यह कोशिका निर्माण का प्रमुख पदार्थ है। प्रोटीन की कमी के लिए बच्चे के आहार में दूध, गोभी, गाजर, पनीर, मटर, शलजम और हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दालें, बादाम, लेकिन मांसाहारी हैं तो गोश्त, अण्डे इत्यादि भी दिए जा सकते हैं।

2. वसा शिशु को वसा की प्राप्ति के लिए मक्खन, कॉड लीवर ऑयल देना चाहिए। वैसे तो शिशु को वसा अपनी आवश्यकतानुसार दूध से ही प्राप्त हो जाती है।

3. कार्बोहाइड्रेट 6 महीने में शिशु काफी क्रियाशील हो जाती है। उसे ऊर्जा की प्राप्ति की भी आवश्यकता होती है। अतः उसके आहार में दलिया, चावल, डबलरोटी, साबुदाना, शकरकन्दी इत्यादि देनी चाहिए।

4. विटामिन दूध, दही, मछली, टमाटर, पनीर, गाजर, अण्डे, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ इत्यादि शिशु के आहार में होनी चाहिए।

5. खनिज लवण शिशु को कैल्शियम, फास्फोरस, खनिज लवण की अधिक आवश्यकता होती है। खनिज लवण की प्राप्ति के लिए शिशु के आहार में अण्डा, पनीर, दही, फलों का रस, हरी सब्जियों का सूप, केला, सेब इत्यादि देने चाहिए।

प्रश्न 3.
शिशु के दाँत निकलते समय कौन-कौन सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तर:
शिशु के दाँत निकलते समय माता को निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए

  1. दाँत निकलते समय बच्चे के मसूड़े फूले हुए होते हैं, अतः मसूड़ों में मिस-मिसी-सी आती है तथा बच्चा कठोर वस्तु चबाने का प्रयत्न करता है। ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा किसी अस्वच्छ कठोर वस्तु को न चबाए, अन्यथा कीटाणु शिशु के शरीर में प्रविष्ट होकर उसे रोगी बना देंगे। इस समय डबलरोटी सेंककर, गाजर, खीरा इत्यादि बच्चे को देना चाहिए।
  2. सुहागा तवे पर भूनकर पीसकर उसे शहद में मिलाकर मसूड़ों पर लगाना | चाहिए। यह दाँत निकलने में सहायता करता है।
  3. बच्चा 6-7 माह के पश्चात् अन्न खाने लगता है। अत: बच्चे के दाँत साफ करने चाहिए। टूथ-ब्रुश से बच्चे के दाँत नहीं साफ करने चाहिए, इससे बच्चे के मसूड़े छिलने का भय रहता है, इसलिए हाथ की अँगुली में मंजन लगाकर धीरे-धीरे दाँत साफ करने चाहिए।
  4. बच्चों को विटामिन डी, कैल्शियम, फास्फोरस दवा या टॉनिक के रूप में दे देने चाहिए। होम्योपैथिक की 20 नं. या B21 नं, दवाई की गोलियाँ भी दाँतों के लिए अच्छी रहती हैं, बच्चों को दे देनी चाहिए।
  5. चूने का पानी पिलाना चाहिए, इससे कैल्शियम मिलता है।

प्रश्न 4.
शिशुओं के वस्त्र तैयार करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अथवा
टिप्पणी कीजिए- शिशु के वस्त्र का चुनाव (2018)
उत्तर:
छोटे शिशुओं के वस्त्रों का चुनाव करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. सर्वप्रथम कपड़ा बच्चे के अनुकूल लेना चाहिए।
  2. ऐसे वस्त्र बनाए जाने या खरीदने चाहिए, जो आसानी से पहनाए जा सकें।
  3. शिशु के वस्त्र सामने या पीछे से खुले होने चाहिए।
  4. शिशु के वस्त्रों में अन्दर दबाव काफी रखना चाहिए। शिशु की लम्बाई तीव्र गति से बढ़ती है, इसलिए जरूरत पड़ने पर वस्त्र खोलकर बड़ा किया जा सकता है।
  5. घुटने चलने वाले बच्चों के वस्त्र ऐसे होने चाहिए, ताकि घुटने में न अटके।
  6. शिशु के वस्त्रों में बटन, डोरी कम होनी चाहिए।
  7. बच्चों के ऊनी वस्त्र बारीक व मुलायम ऊन के होने चाहिए, मोटी ऊन के वस्त्र बच्चों को चुभते हैं। वस्त्र रोएँदार भी नहीं होने चाहिए, अन्यथा रोया बच्चे के मुँह में चला जाता है।
  8. शीतऋतु में बच्चे को स्वेटर प पजामी के साथ टोपी-मौजे पहनाने चाहिए, किन्तु टोपी-मौजे रात को पहनाकर कदापि नहीं सुलाना चाहिए।
  9. शिशु की बिब अवश्य बनानी चाहिए, ताकि खाना खाते समय कपड़े गन्दे न करें।
  10. शिशु के वस्त्र में कभी बटन टूट जाए, तो पिन लगाकर नहीं पहनाने चाहिए

प्रश्न 5.
शिशुओं में नियमित उत्सर्जन की आदत का निर्माण किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर:
शिशु में नियमित उत्सर्जन की आदत का निर्माण इस प्रकार किया जाता है

  1. शिशु में मल-मूत्र त्यागने की आदत का निर्माण शुरू से ही डालनी चाहिए। शिशु के जन्म से 6 माह तक मल त्याग का समय निश्चित नहीं होता। कुछ शिशु दिन में 5-6 बार तथा कुछ 2-3 बार मल त्याग करते हैं।
  2. जब शिशु भोजन ग्रहण करने लगता है, तो उसके मल त्याग का समय भी निश्चित हो जाता है। यह आदत भी शिशुओं में डाली जाती है, अन्यथा उनके पेट में कब्ज सहित अनेक बीमारियाँ होने लगती हैं।
  3. मल-मूत्र त्यागने के पश्चात् शिशु स्वयं तो सफाई नहीं कर सर्कता। अतः माता को चाहिए कि उसके अंगों को भली-भाँति साफ करें और पुनः सूखे पोतड़े या नए डायपर पहनाएँ।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक, 100 शब्द)

प्रश्न 1.
दाँत निकलते समय शिशु को कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है? दाँत निकलने के सन्दर्भ में संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:

दाँत निकलना
जन्म के समय शिशु के दाँत नहीं होते। दाँत निकलने का सही समय 6-7 महीने के बाद का होता है। कुछ शिशुओं को आठवें माह में दाँत निकलते हैं। दाँत निकलने की यह प्रक्रिया 2 से [latex]2 \frac { 1 } { 2 }[/latex] वर्ष तक चलती है, जिसमें लगभग शिशु को 20 दाँत निकलते हैं। इस अवस्था तक प्राय: प्रत्येक शिशु का आहार दूध ही होता है, अतः इन्हें दूध के दाँत कहते हैं।

दाँत निकलने के लक्षण
दाँत निकलते समय शिशु को कई परेशानियाँ होती हैं, जो निम्नलिखित हैं।

  1. मसूड़े सूजने लगते हैं तथा शिशु प्रत्येक वस्तु को अपने मसूड़ों से बल लगाकर दबाने की कोशिश करता है।
  2. दस्त आना, ज्वर आना, मुँह से लार बहना तथा सिर हमेशा गर्म रहता है।
  3. दाँत निकलते समय शिशुओं में चिड़चिड़ापन आता है तथा बार-बार दस्त आने की वजह से वह काफी कमजोर हो जाता है।

दाँत निकलते समय सावधानियाँ इसके लिए लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 देखें।

दाँत निकलने का क्रम व स्वच्छता
सबसे पहले शिशु के नीचले दो दाँत निकलते हैं। किसी-किसी शिशु के कुछ ऊपरी दाँत पहले निकलते हैं। दाँतों के निकलने का क्रम इस प्रकार है।

  • कुतरने वाले दाँत (कृन्तक) 6 से 8 माह के अन्दर निकलते हैं, जिनकी संख्या 2 होती है।
  • पार्श्व कृन्तक 8 से 10 माह के अन्दर निकलते हैं, जिनकी संख्या 4 होती है।
  • पीसने वाले दाँत 12 से 16 माह के अन्दर निकलते हैं, जिनकी संख्या 6 होती है।
  • कीले 18-22 माह के अन्दर निकलते हैं, जिनकी संख्या 4 होती है।
  • दाढ़ 22-24 माह के अन्दर निकलती हैं, जिनकी संख्या 4 होती है।

दाँत निकलने के पश्चात् इनकी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। सुबह-शाम पेस्ट कराएँ। मीठी वस्तु कम खिलाएँ। समय-समय पर चिकित्सक से परामर्श लेते रहें।

प्रश्न 2.
शिशुओं में होने वाली तीन लघु पाचक बीमारियों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
शिशुओं में होने वाली तीन लघु पाचक बीमारियाँ निम्नलिखित हैं।

कब्ज
लक्षण

  1. शिशु शौच नियमित समय पर नहीं करता है।
  2. मेल बहुत कड़ा होता है व कठिनाई से होता है।
  3. मल 2-3 दिन में एक बार होता है।

कारण

  1. शिशु को दूध की सही मात्रा न मिलने पर (दूध की मात्रा अधिक हो या कम)
  2. भोजन सही न हो या पेट में कोई खराबी हो।
  3. माँ के भोजन में कुछ कमी होने पर।

उपचार

  1. शिशु को उबला हुआ पानी पिलाना चाहिए।
  2. शिशु के दूध में देशी लाल रंग की चीनी ज्यादा डालनी चाहिए।
  3. मुनक्का या अंजीर दूध में पकाकर देना चाहिए।
  4. एक-दो बूंद जैतून का तेल देने से भी कब्ज दूर होता है।
  5. शिशु को हरी साग-सब्जी का सूप पिलाना चाहिए।

दस्त
शिशु को जहाँ कब्ज होता है, वहीं दस्त भी जल्दी हो जाते हैं। दस्त के लक्षण निम्नलिखित हैं।

लक्षण

  1. शिशु को शौच कई बार आती है।
  2. शौच झागदार, पतले होते हैं।
  3. इनका रंग अलग-अलग हो सकता है।

कारण

  1. दूध में चिकनाई ज्यादा होने पर।
  2. दूध के हजम न होने पर।
  3. निपिल व बोतल की स्वच्छता न होने पर।
  4. माता के दूध में कुछ कमी होने पर।
  5. दूध के बदल जाने पर अर्थात् माँ का दूध छुड़ाकर डिब्बे का दूध देते हैं।

उपचार

  1. यदि दस्त के समय गाय या भैंस का या डिब्बे का दूध दिया जा रहा है, तो उसे बन्द करके माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। फिर धीरे-धीरे दूसरा दूध देना आरम्भ करना चाहिए।
  2. बाल जीवन घुट्टी ठण्डे पानी में घोलकर बच्चे को पिलानी चाहिए।
  3. पान व बादाम भी घिसकर देना चाहिए।
  4. अनार का छिलको घिसकर देने से भी दस्तों में आराम मिलता है।
  5. यदि कोई भी दूध हजम नहीं हो रहा हो तो दूध फाड़कर फटे दूध का पानी | पिलाना चाहिए।

पेट में दर्द होना
लक्षण

  1. पेट कड़ा होने लगता है।
  2. पेट फूल जाता है।.
  3. दर्द होने के कारण बच्चा बहुत रोता है।
  4. बच्चा दध नहीं पीता है।
  5. अपनी टाँगें पेट की ओर सिकोड़ने लगता है।

कारण

  1. दूध में प्रोटीन व शक्कर की मात्रा ज्यादा होने पर।
  2. पेट में वायु इकट्ठी होने पर।
  3. गाढ़ा दूध पिलाने पर।
  4. दस्त ज्यादा होने पर
  5. माता का ठण्डी वस्तुएँ खाने पर।

उपचार

  1. शिशु का पोतड़ा लेकर उसे प्रेस से गर्म करके सिकाई करनी चाहिए।
  2. नाभि के चारों ओर हींग-नमक को पानी में घोलकर रुई से लगा देनी चाहिए।
  3. हींग व काला नमक का घोल बनाकर एक-दो चम्मच पिला देना चाहिए।
  4. सरसों के तेल में लहसुन व अजवाइन पकाकर पेट, पर मल देना चाहिए।
  5. शिशु के दूध में चूने का पानी मिलाकर देना चाहिए।

प्रश्न 3.
टिप्पणी लिखिए-
(i) दूध हजम न होना
(ii) चुनचुने होना
(iii) अतिसार
(iv) वमन
उत्तर:

दूध हजम न होना
लक्षण

  1. दूध पीने के तुरन्त बाद बच्चा दूध निकालने लगता है।
  2. दूध फटा-फटा-सा होता है।

कारण

  1. कुछ बच्चों को ऊपर का दूध हजम नहीं होता है।
  2. दूध ज्यादा पीने पर भी हजम नहीं होता है।
  3. दूध में कुछ कमी हो जाने पर भी ऐसा होता है।
  4. बच्चे की तबीयत सही न होने पर।

उपचार

  1. ऊपर का दूध हजम नहीं हो रहा हो तो माँ का दूध पिलाना चाहिए। यदि | माँ का दूध नहीं मिल पा रहा है तो फटे दूध का पानी देना चाहिए।
  2. दूध पिलाने के बाद डकार दिलानी चाहिए।
  3. सुहागा दूध में मिलाकर देना चाहिए।
  4. बाल जीवन घुट्टी देनी चाहिए।
  5. बच्चे को बिस्तर पर खुला छोड़ दीजिए, जिससे वह हाथ-पैर चला | सके, इससे उसका व्यायाम होता है।

चुनचुने होनी
लक्षण

  1. बच्चा रात में रोता है।
  2. मलद्वार लाल हो जाता है।
  3. सोते समय दाँत किट-किटाते हैं।
  4. बच्चे का रंग पीला पड़ने लगता है व कमजोर हो जाता है।
  5.  शिशु बार-बार मलद्वार को खुजाता है।

कारण

  1. पेट में बारीक-बारीक कीड़े हो जाते हैं।
  2. ये कीड़े मलद्वार में भी हो जाते हैं।
  3. दूध की अस्वच्छता के कारण।
  4. दूध में अधिक शक्करे होने पर।
  5. मलद्वार की सफाई ठीक से न होने पर।

उपचार

  1. मलद्वार की सफाई ढंग से करनी चाहिए।
  2. रात्रि के समय मलद्वार में सरसों का तेल लगा देना चाहिए।
  3. पोतड़े साफ पहनाने चाहिए।
  4. स्वच्छ बोतल में स्वच्छ दूध देना चाहिए।

अतिसार
लक्षण

  1. दस्तों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है।
  2. मल पतला, पीला या राख के रंग का फेनदार होता है।
  3. मल दुर्गन्धयुक्त होता है।
  4. बच्चे को ज्वर हो जाता है।

कारण

  1. दाँत निकलने के समय भी यह रोग हो जाता है।
  2. जीवाणुओं के संक्रमण के कारण।
  3. यकृत की खराबी के कारण।
  4. शक्कर की मात्रा अधिक हो जाने पर।
  5. सब्जी की ज्यादा मात्रा देने पर।

उपचार

  1. शिशु को दूध कम देना चाहिए।
  2. पानी उबालकर पिलाना चाहिए।
  3. दूध पिलाने वाली माँ को भी पानी अधिक पीना चाहिए।
  4. अंगूर का रस, सन्तरे का रस देना चाहिए।
  5. बच्चे के आहार में पूर्णरूपेण सफाई रखनी चाहिए।

वमन
लक्षण

  1. कई बार बच्चा उल्टी करता है।
  2. बच्चे को कब्ज, तेज बुखार हो जाता है।
  3. बच्चा जो कुछ खाता है, तुरन्त उल्टी कर देता है।

कारण

  1. जब बच्चा अधिक दूध पी लेता है।
  2. बीमार होने पर।
  3. बच्चे को दूध पिलाने के बाद उछाला जाए या डकार न दिलाई जाए।

उपचार

  1. दूध पिलाने के बाद डकार दिलानी चाहिए।
  2. सुपाच्य वस्तु खाने को देनी चाहिए।
  3. सुहागा शहद में मिलाकर चटाना चाहिए।
  4. दूध कुछ समय तक नहीं पिलाना चाहिए।

प्रश्न 4.
एक नवजात शिशु की देखभाल करते समय किन-किन बातों पर बल दिया जाना चाहिए? (2018)
उत्तर:
नवजात शिशु की देखभाल Care of New Born शिशु के जन्म के साथ ही शुरू हो जाती है। बच्चे के जन्म के बाद बच्चे को माँ का दूध सही तरीके से और पर्याप्त मात्रा में कैसे मिले, उसके पहनने के कपड़े कैसे हों, उसका बार-बार रोना, बार-बार नेपी गन्दा करना आदि बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। नवजात शिशु की देखभाल का सबसे पहला और जरूरी हिस्सा है कि उसे जन्म के तुरन्त बाद बच्चों के डॉक्टर (Pediatrician) को दिखाकर निश्चित कर लेना चाहिए कि बच्चा बिल्ल ठीक है।

नवजात शिशु अपना अधिकतर समय सोने में व्यतीत करते हैं, परन्तु बच्चे को प्रत्येक कुछ घण्टों के बाद जगा देना चाहिए। और जागने पर उसे अच्छी तरह से आहार देना, चाहिए। आपको उसकी नियमित दिनचर्या में आने वाले परिवर्तन के बारे में विशेष रूप से सजग रहना चाहिए, क्योंकि यह किसी गम्भीर बिमारी के लक्षण हो सकते हैं। यदि वह बहुत अधिक थका हुआ अथवा उनींदा नज़र आए, बहुत कम सजग दिखाई दे और आहार लेने के लिए न जागे, तो आपको अपने बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

नवजात शिशु को साँस लेने के सामान्य तरीके पर स्थिर होने के लिए अर्थात् प्रति मिनट 20-40 साँस लेना शुरू करने के लिए सामान्य रूप से कुछ घण्टे का समय लगता है। अक्सर जब वह सो रहा होता है, तो वह सबसे अधिक नियमित रूप से साँस लेता है। कभी-कभी जब वह जागता है, तो बहुत थोड़ी देर के लिए तेजी से साँस ले सकता है और उसके बाद सामान्य तरीके पर लौट सकता है।

यदि आपको निम्नलिखित में से कुछ नजर आए, तो आपको अपने बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए

  1. लगातार तेज साँस लेना अर्थात् यदि उसकी आयु दो माह से कम है, तो प्रति मिनट साठ से अधिक साँस लेना अथवा यदि उसकी आयु 2-3 माह है, तो प्रति मिनट पचास से अधिक साँस लेना।
  2. साँस लेने के लिए प्रयास करना पड़ रहा हो और निगलने में कठिनाई हो रही हो।.
  3. साँस लेते समय नथुने चौड़े दिखाई देते हों।
  4. त्वचा और होंठों का रंग साँवला अथवा नीला दिखाई देता हो।

कई बार बच्चे को पेट निरन्तर फूला हुआ और कठोर महसूस हो रहा है और साथ ही उसने एक दिन अथवा अधिक समय से मल त्याग नहीं किया हो या पेट की गैस नहीं निकली है अथवा वह बार-बार उल्टी कर रहा हो, तो आपको उसे तत्काल डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए, क्योंकि यह आँतों से सम्बन्धित गम्भीर समस्या हो सकती है। जब कभी भी आपको बच्चा असामान्य तौर पर चिड़चिड़ा अथवा गर्म महसूस हो, तो उसका तापमान मापें। कान का तापमान मापना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है और 3 माह से कम आयु के बच्चों के लिए ऐसा करने की विशेष सलाह दी जाती हैं।

यदि कान का तापमान 37.3°C/99.1°F से अधिक है अथवा कान का तापमान 100.4°F से अधिक है, तो आपको उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए, क्योंकि यह संक्रमण का लक्षण हो सकता है। जल्दी चिकित्सीय सहायता मुहैया करना आवश्यक है, क्योंकि छोटे बच्चों की स्थिति बहुत जल्दी खराब हो सकती है।

शिशुओं में आसानी से और जल्दी ही पानी की कमी हो जाती है। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन कर रहा है, विशेषकर जब वह उल्टी कर रहा हो अथवा उसे दस्त लग गए हों। पिछले 24 घण्टों में उसके द्वारा पीए गए दूध की मात्रा की गणना करें और इसकी उसके सामान्य आहार से तुलना करें, जोकि पहले महीने के दौरान प्रतिदिन 10-20 आउंस (300-600 मिली) होती है।

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UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 13 एक्सेप्शन हैण्डलिंग, स्ट्रक्चर एवं पॉइण्टर

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 13
Chapter Name एक्सेप्शन हैण्डलिंग, स्ट्रक्चर एवं पॉइण्टर
Number of Questions Solved 18
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 13 एक्सेप्शन हैण्डलिंग, स्ट्रक्चर एवं पॉइण्टर

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
किसी प्रोग्राम से गलतियों को दूर करने के लिए किस तकनीक का प्रयोग किया जाता है?
(a) डाटा हैण्डलिंग
(b) वैल्यू हैण्डलिंग
(C) एरर हैण्डलिंग
(d) एक्सेप्शन हैण्डलिंग
उत्तर:
(d) एक्सेप्शन हैण्डलिंग का प्रयोग प्रोग्राम की गलतियों को ठीक करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 2
एक्सेप्शन कितने प्रकार के होते हैं?
(a) तीन
(b) चार
(C) दो
(d) पाँच
उत्तर:
(c) एक्सेप्शन दो प्रकार के होते हैं–सिन्क्रोनस तथा असिन्क्रोनस।

प्रश्न 3
एक्सेप्शन हैण्डलिंग क्रियाविधि के किस ब्लॉक में एक्सेप्शन होती
(a) try
(b) catch
(c) throw
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) try

प्रश्न 4
विभिन्न प्रकार के परस्पर सम्बन्धित डाटा आइटमों का समूह क्या कहलाता है?
(a) पॉइण्टर
(b) एक्सेप्शन
(c) फंक्शन
(d) स्ट्रक्चर
उत्तर:
(d) स्ट्रक्चर

प्रश्न 5
स्ट्रक्चर से डाटा लेने के लिए कौन-सा उदाहरण सही है?
(a) stu.name
(b) a = stu.name
(c) a = name;
(d) a= stu.name;
उत्तर:
(d) a = stu.name;

प्रश्न 6
निम्न पॉइण्टर पर दिए गए कमेण्ट में से कौन-सा सही है?
int *ptr, p;
(a) ptr एक इण्टीजर टाइप का पॉइण्टर है, जबकि 2 नहीं
(b) ptr तथा p दोनों इण्टीजर टाइप के पॉइण्टर हैं।
(c) ptr एक इण्टीजर वैल्यू है तथा p पॉइण्टर है।
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ptr एक इण्टीजर टाइप के पॉइण्टर को प्रदर्शित कर रहा है, जबकि p एक वैरिएबल को प्रदर्शित कर रहा है।

अतिलघु उत्तरी प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
सिन्क्रोनस एक्सेप्शन के अन्तर्गत किस प्रकार की एरर आती है?
उत्तर:
सिन्क्रोनस एक्सेप्शन के अन्तर्गत ओवरफ्लो व आउट ऑफ रेंज प्रकार की एरर आती हैं।

प्रश्न 2
एक्सेप्शन हैण्डलिंग में catch ब्लॉक का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
catch ब्लॉक का प्रयोग try ब्लॉक में उपस्थित एक्सेप्शन को कैच करने के लिए किया जाती है।

प्रश्न 3
स्ट्रक्चर क्या होता है?
उत्तर:
विभिन्न प्रकार के परस्पर सम्बन्धित डाटा आइटमों का समूह स्ट्रक्चर कहलाता है।

प्रश्न 4
पॉइण्टर पर संक्षेप में व्याख्या कीजिए। [2016]
अथवा
पॉइण्टर की व्याख्या केवल एक वाक्य में कीजिए। [2018, 17]
उत्तर:
पॉइण्टर C++ प्रोग्रामिंग की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता है। पॉइण्टर टाइप के वैरिएबल में किसी वैल्यू का मैमोरी एड्रेस रखा जाता है।

प्रश्न 5
पॉइण्टर द्वारा अर्थमैटिक कार्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
पॉइण्टर द्वारा अर्थमैटिक कार्य निम्न हैं।

  • पॉइण्टर वैरिएबल में जोड़ करना
  • पॉइण्टर वैरिएबल में घटाना

लघु उत्तर प्रश्न I (2 अंक)

प्रश्न 1
निम्न पर टिप्पणी लिखिए।
(i) try
(ii) catch
उत्तर:
(i) try इस की-वर्ड का प्रयोग try ब्लॉक में किया जाता है, जो स्टेटमेण्ट्स का समूह होता है, जिसमें एक्सेप्शन हो सकते हैं।
(ii) catch इस की-वर्ड का प्रयोग catch ब्लॉक में किया जाता है, जो try ब्लॉक में उपस्थित एक्सेप्शन को कैच करता है।

प्रश्न 2
स्ट्रक्चर को घोषित करने का प्रारूप लिखिए।
उत्तर:
स्ट्रक्चर को घोषित करने का प्रारूप निम्न हैं।
struct structure_name
{
Data_type Variable1;
Data_type Variable2;
:
Data_type VariableN;
};

प्रश्न 3
एड्स ऑपरेटर व पॉइण्टर ऑपरेटर से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एड्रेस ऑपरेटर को & चिह्न से प्रदर्शित करते हैं, जिसका प्रयोग वैरिएबल के एड्रेस को ज्ञात करने के लिए किया जाता है। पॉइण्टर ऑपरेटर को चिह्न से प्रदर्शित करते हैं, जिसका प्रयोग वैरिएबल के एड्रेस में स्टोर वैल्यू को ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न II (3 अंक)

प्रश्न 1
एक्सेप्शन हैण्डलिंग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। [2012, 11]
उत्तर:
किसी भी प्रोग्रामिंग भाषा में एक्सेप्शन हैण्डलिंग एक महत्त्वपूर्ण भाग होता है। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसके द्वारा एक्सेप्शन नियन्त्रित की जाती है। इस तकनीक के द्वारा हम अवांछित घटनाओं या एरर्स को भी दूर कर सकते हैं। एक्सेप्शन हैण्डलिंग में निम्न कार्य होते हैं।

  1. एक्सेप्शन को हैण्डल करना या उस एरर का हल निकालना।
  2. एक्सेप्शन को थ्रो करना या बताना की प्रोग्राम में त्रुटि है।
  3. एक्सेप्शन को कैच करना या एरर सूचना को एकत्र करना।
  4. एक्सेप्शन को हिट करना या आकस्मिक (Undesirable) अवस्था को पहचानना।

प्रश्न 2
स्ट्रक्चर क्या होता है? स्ट्रक्चर में वैरिएबल को कैसे घोषित किया जाता है?
उत्तर
स्ट्रक्चर डाटा टाइप भिन्न-भिन्न प्रकार के वैरिएबलों के समूह को एक ही नाम से व्यक्त और उपयोग करने की सरल सुविधा है। विभिन्न प्रकार के परस्पर सम्बन्धित डाटा आइटमों का समूह स्ट्रक्चर कहलाता है।

स्ट्रक्चर में वैरिएबल को घोषित करना
प्रारूप struct structure_narte variable_name;

स्ट्रक्चर के वैरिएबल को स्ट्रक्चर के साथ भी घोषित किया जा सकता है।
प्रारूप
struct structure_name
{
Data_type variable1;
Date_type variable2;
……
……
Date_type variableN;
}
variable_name;

प्रश्न 3
पॉइण्टर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। [2013, 08, 07, 06]
अथवा
एक पॉइण्टर से आप क्या समझते हैं? इसके लाभ बताइए। [2009]
उत्तर:
पॉइण्टर C++ प्रोग्रामिंग भाषा की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। पॉइण्टर टाइप के वैरिएबल में किसी वैल्यू का मैमोरी एड्स रखा जाता है। यह मैमोरी एड्स कम्प्यूटर की मैमोरी में किसी डाटा या निर्देश को रखने वाली लोकेशन होती है। अतः हम पॉइण्टरों के द्वारा मैमोरी में स्टोर किए गए डाटा का उपयोग कर सकते हैं।

पॉइण्टर के लाभ निम्नलिखित हैं

  1. विभिन्न फंक्शन्स के मध्य पॉइण्टर का आदान-प्रदान करना।
  2. पॉइण्टर की सहायता से ऐरे को फंक्शन में पास करना।
  3. पॉइण्टर की सहायता से स्ट्रिग को फंक्शन में पास करना।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1
एक्सेप्शन क्या होती है? यह कितने प्रकार की होती है? उदाहरण सहित समझाइए।
अथवा
उदाहरण देकर C++ में Exception Handling को समझाइए। [2018]
उत्तर:
लॉजिकल अथवा सिण्टैक्स एरर के अतिरिक्त प्रोग्राम में जो एरर आती है, उसे एक्सेप्शन कहते हैं; जैसे-array को सीमा (Scope) से बाहर एक्सेस करना आदि। वह तकनीक जिसके द्वारा ये एक्सेप्शन नियन्त्रित की जाती है, एक्सेप्शन हैण्डुलिंग कहलाती है। इस तकनीक के द्वारा हम अवांछित घटनाओं या एरर्स को दूर भी कर सकते हैं। एक्सेप्शन दो प्रकार की होती है, जो निम्न हैं।

  • सिन्क्रोनस एक्सेप्शन इसके अन्तर्गत ओवरफ्लो व आउट ऑफ रेज प्रकार की एरर आती हैं।
  • असिन्क्रोनस एक्सेप्शन इसके अन्तर्गत प्रोग्राम के नियन्त्रण से बाहर की घटनाओं के प्रकार की एरर आती हैं।

उदाहरण
#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void main( )
clrscr( );
int num1, num2;
float d;
cout<<“Enter first number:”;
cin>>num1;
cout<<“Enter second number:”;
cin>>num2;
try
{
if (num2!=0)
{
d=numi/num2;
cout<<“Divison=”<<d<<end1;
}
else
{
throw (num2);
}
catch(int x)
{
cout<<“There is an exception divide by zero. “<<end1;
}
getch( );
}

आउटपुट
Enter first number: 25
Enter second number: 0
There is an exception divide by zero.

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UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 12 फंक्शन्स एण्ड फंक्शन्स ओवरलोडिंग

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 12 फंक्शन्स एण्ड फंक्शन्स ओवरलोडिंग are part of UP Board Solutions for Class 12 Computer. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 12 फंक्शन्स एण्ड फंक्शन्स ओवरलोडिंग.

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Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 12
Chapter Name फंक्शन्स एण्ड फंक्शन्स ओवरलोडिंग
Number of Questions Solved 24
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 12 फंक्शन्स एण्ड फंक्शन्स ओवरलोडिंग

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
C++ भाषा में कितने प्रकार के फंक्शन्स होते हैं?
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) असंख्य
उत्तर:
(b) C++ भाषा में दो प्रकार के फंक्शन्स होते हैं-लाइब्रेरी फंक्शन व यूजर डिफाइण्ड फंक्शन

प्रश्न 2
ऐसे फंक्शन जो C++ भाषा में पहले से ही सम्मिलित हैं, क्या कहलाते हैं?
(a) बिल्ट-इन फंक्शन
(b) लाइब्रेरी फंक्शन।
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) बिल्ट-इन या लाइब्रेरी फंक्शन C++ भाषा में पहले से ही सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 3
log( ) फंक्शन किस हैडर फाइल में उपस्थित होता है?
(a) math.h
(b) ctype.h
(c) iostream.h
(d) string.h
उत्तर:
(d) math,h

प्रश्न 4
islower( ) फंक्शन किस हैडर फाइल में होता है?
(a) string.h
(b) ctype.h
(c) math.h
(d) conio.h
उत्तर:
(b) ctype.h

प्रश्न 5
वह कौन-सा फंक्शन है, जो स्वयं को ही बार-बार कॉल करता है?
(a) रिकर्सिव फंक्शन
(b) strlen( )
(c) main( )
(d) clrscr( )
उत्तर:
(a) रिकर्सिव फंक्शन

प्रश्न 6
हैडर फाइल के विस्तारक का क्या नाम है?
(a).e
(b) .f
(c) .h
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) .h

प्रश्न 7
हैडर फाइल ‘Conio.h’ निम्न किस फंक्शन को declare करता है, जो DOs कन्सोल I/O routines को Call करने में प्रयुक्त होता है? [2017]
(a) fwrite
(b) delline
(C) abs
(d) Ifind
उत्तर:
(d) fwrite

प्रश्न 8
निम्न में से कौन-सा फंक्शन हैडर फाइल stdlib.h में पाया जाता है? [2018]
(a) feof
(b) abs
(c) strch
(d) cgets
उत्तर:
(d) cgets

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
फंक्शन शब्द को समझाइए। [2012]
उत्तर:
प्रोग्राम को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करना, जो किसी विशेष ऑपरेशन या कार्य उद्देश्य को पूरा कर सके, फंक्शन कहलाता है।

प्रश्न 2
फंक्शन के क्या उपयोग है? [2012]
उत्तर:
फंक्शन का उपयोग गणितीय गणनाएँ करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 3
tan(x) फंक्शन का प्रयोग लिखिए।
उत्तर:
tan(x) फंक्शन किसी कोण x की टेण्जेण्ट ज्ञात करने के लिए प्रयोग होता है।

प्रश्न 4
फंक्शन को डिक्लेयर करने का प्रारूप लिखिए।
उत्तर:
return_type function_name(parameter_list);

प्रश्न 5
किसी फंक्शन को कॉल कैसे किया जाता है?
उत्तर:
किसी फंक्शन को किसी प्रोग्राम में उसका नाम देकर, उसके साथ वास्तविक पैरामीटर को लगाकर एक कोष्ठक के अन्दर रखकर तथा सेमीकॉलन लगाकर कॉल किया जाता है।

प्रश्न 6
लोकल वैरिएबल किसे कहते हैं?
उत्तर:
जहाँ वैरिएबल एक फंक्शन या ब्लॉक में प्रयोग किए जाते हैं, लोकल वैरिएबल कहलाते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न I (2 अंक)

प्रश्न 1
फंक्शन के लाभ लिखिए।
उत्तर:
फंक्शन के निम्नलिखित लाभ हैं।

  • फंक्शन किसी भी प्रोग्राम को छोटा बना देता है, जिससे प्रोग्राम समझने में आसानी होती है।
  • फंक्शन की सहायता से एक कोड को पुनः नहीं लिखना पड़ता है, यूजर अपनी आवश्यकतानुसार फंक्शन प्रोग्राम में कहीं भी प्रयोग कर सकता है।
  • फंक्शन के प्रयोग से प्रोग्राम में त्रुटि खोजना बहुत आसान हो जाता है।

प्रश्न 2
उदाहरण देकर फॉर्मल (Formal) व एक्चुअल (Actual) पैरामीटर्स को समझाइए। [2012]
उत्तर:
फॉर्मल पैरामीटर जो पैरामीटर फंक्शन को परिभाषित करने में प्रयोग होते हैं, फॉर्मल पैरामीटर कहलाते हैं।
एक्चुअल पैरामीटर जो पैरामीटर फंक्शन कॉल करने में प्रयोग किए जाते हैं, एक्चुअल पैरामीटर कहलाते हैं।

उदाहरण
int square (int);
int main( )
{
int v, s = 5;
:
square (S);
:
int square (int a)
{
return a*a;
}

(S); एक्चुअल पैरामीटर
(int a)फॉर्मल पैरामीटर

प्रश्न 3
C++ फंक्शन के केवल उस प्रोग्राम खण्ड को लिखें, जो 100 से 1 तक की गिनती ‘for’ लूप का प्रयोग करके प्रिण्ट करें। [2012]
उत्तर:
Reverse ( )
{
cout<<“The Reverse number”<<end1;
for (int i = 100; i> = 1; i–)
{
cout<<i;
}
}

प्रश्न 4
C++ फंक्शन के केवल उस प्रोग्राम खण्ड को लिखें, जिसका नाम औसत है और जो प्रथम 20 अंकों का योग व औसत ‘do-while’ लूप का प्रयोग करके निकालिए। [2012]
उत्तर:
Average ( )
int sum=0, i=1, avg;
do
{
sum=sum+i;
i++;
}
while (i<=20) ;
cout<<“The sum is”<<sum<<end1;
avg = sum/20;
cout<<“The average is” <<avg;
}

लघु उत्तरीय प्रश्न II (3 अंक)

प्रश्न 1
streat ( ) व strepy ( ) फंक्शनों को उदाहरण सहित समझाइए। [2004]
उत्तर:
strcat ( ) यह फंक्शन दो स्ट्रिगों को जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है। strcpy ( ) इस फंक्शन का प्रयोग एक स्ट्रिग को दूसरी स्ट्रिग में कॉपी करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण
#include<iostream.h>
#include<string.h>
#include<conio.h>
void main( )
{
char str1 [10] = “Hello”;
char str2[10]= “World”;
char str3[10];
strcpy (str3, str1); //copies strl into str3
cout<<“strcpy(str3, str1):”<<str3< <end1;
strcat (str1, str2);
//concatenation str1 and str2 into str1
cout<<“strcat(stri, str2):”
<<str1<<end1;
getch ( );
}

आउटपुट
strepy(str3, str1): Hello
streat(str1, str2): HelloWorld

प्रश्न 2
रिकर्सिव फंक्शन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब कोई फंक्शन अपनी परिभाषा में स्वयं को ही कॉल करता है, तो ऐसी स्थिति को रिकर्सन कहा जाता है और ऐसे फंक्शन को रिकर्सिव फंक्शन कहा जाता है।

उदाहरण
#include<iostream.h>
int fibonacci(int i)
{
if (i = 0)
{
return 0;
}
if(i=1)
{
return 1;
}
return fibonacci (i-1) + fibonacci (i-2);
}
void main( )
int i; for ( i = 0; i < 10; i++)
{
cout<<“\n”<<fibonacci(i);
}
}

आउटपुट

o
1
1
2
3
5
8
13
21
34

प्रश्न 3
हैडर फाइल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। [2012]
उत्तर:
C++ में, फाइल स्टैण्डर्ड फंक्शन्स को संग्रहीत करती है, जिसे यूजर अपने प्रोग्राम में प्रयोग कर सकता है, हैडर फाइल कहलाती है। प्रत्येक हैडर फाइल के पास एक्सटेन्शन (Extension) नाम’.h होता है। कुछ प्रमुख हैडर फाइलें इस प्रकार हैं।

(i) studio.h यह हैडर फाइल इनपुट/आउटपुट फंक्शन्स का समूह होती है;
जैसे gets( ), puts( ) आदि।

(ii) ctype.h यह हैडर फाइल उन फंक्शन्स को संग्रहीत करती है, जो कैरेक्टर को बदलने और जाँचने के लिए प्रयोग किए जाते हैं;
जैसे isalnum( ), tolower( ) आदि।

(iii) string.h यह हैडर फाइले एक से अधिक स्ट्रिग मैनिपुलेशन फंक्शन्स को संग्रहीत करती है;
जैसे stremp( ), strlen( ) आदि।

(iv) math.h इस हैडर फाइल के पास एक से अधिक फंक्शन्स का समूह होता है, जो अर्थमैटिक गणनाएँ करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं;
जैसे sin( ), fabs( ) आदि।

(v) stdlib.h यह हैडर फाइल सामान्यतः प्रयोग होने वाले फंक्शन्स को डिक्लेयर करती है;
जैसे कन्वर्सन, सर्च/सॉर्ट आदि।

प्रश्न 4
फंक्शन ओवरलोडिंग क्या है? उदाहरण सहित समझाइए। [2016, 15, 10, 08]
उत्तर:
फंक्शन ओवरलोडिंग का अर्थ है कि किसी एक फंक्शन नाम से विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न कार्य कराना, जिससे एक फंक्शन के कोड को पुनः नहीं लिखना पड़ता और समय की बचत होती है। इसका प्रयोग करके हम फंक्शन को समान नाम से किन्तु अलग-अलग argument list से डिक्लेयर तथा परिभाषित कर सकते हैं।

उदाहरण
#include<iostream.h>
#include<conio.h>
sum (int, int);
sum (float, float);
void main( )
{
int a, b;
float c, d;
sum (8, 6) ;
sum (2.2f, 3.5f);
getch( );
}
sum(int a, int b)
{
int s;
s = a+b;
cout<<“sum is “<<s<<end1;
}
sum (float c, float d)
{
float s1;
s1 = c + d;
cout<<“sum is “<<s1;
}

आउटपुट
sum is 14
sum is 5.7

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1
स्टैटिक वैरिएबल किस प्रकार अन्य वैरिएबल से भिन्न है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
किसी वैरिएबल के प्रारम्भ में यदि static की-वर्ड लगा होता है, तो उसे स्टैटिक वैरिएबल कहते हैं। स्टैटिक वैरिएबल केवल एक बार डिक्लेयर किए जाते हैं तथा उनकी वैल्यू स्थिर रहती है।

उदाहरण:
स्टैटिक वैरिएबल द्वारा वैल्यू प्रिण्ट करना।

#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void counter( )
{
static int count=0;
cout<<count++;
}
int main()
{
clrscr( );
for (int i=0; i<5;i++)
{
counter ( );
}
getch( );
}

आउटपुट

0  1  2  3  4

उदाहरण
बिना स्टैटिक वैरिएबल द्वारा वैल्यू प्रिण्ट करना।
#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void counter( )
{
int count = 0;
cout<<count++;
}
int main( )
{
clrscr( ); for (int i=0; i<5; i++)
{
counter( );
}
getch( );
}

आउटपुट
0 0 0 0 0

प्रश्न 2
फंक्शन का प्रयोग करते हुए C++ में एक प्रोग्राम लिखिए, जो दिए गए अंकों में से सबसे बड़ा व सबसे छोटा अंक प्राप्त करें। [2016]
उत्तर:
#include<iostream.h>
#include<conio.n>
int largest (int x, int y);
void main( )
{
int a, b;
cout<<“Enter the first number: “;
cin>>a;
cout<<“Enter the second number: “;
cin>>b;
largest (a, b);
getch( );
}
largest (int a, int b)
{
if(a > b)
cout<<“The first number is greater and second is smaller”;
else
cout<<“The second number is greater and first is smaller”,
}

आउटपुट
Enter the first number: 8
Enter the second number: 5
The first number is greater and second is smaller

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 13 बाल-विवाह: गुण व दोष

UP Board Solutions for Class 12  Home Science Chapter 13 बाल-विवाह: गुण व दोष are part of UP Board Solutions for Class 12  Home Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 12  Home Science Chapter 13 बाल-विवाह: गुण व दोष.

Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 13
Chapter Name बाल-विवाह: गुण व दोष
Number of Questions Solved 14
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 13 बाल-विवाह: गुण व दोष

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अक)

प्रश्न 1.
बाल विवाह वर्जित है, क्योंकि 
(2005, 10)
(a) बालिका शारीरिक रूप से परिपक्व नहीं होती।
(b) ऐसी सरकारी नियम है।
(c) लड़का कोई रोजगार नहीं करता
(d) उपरोक्त सभी ।
उत्तर:
(b) पैसा सरकारी नियम है

प्रश्न 2.
बाल-विवाह का दोष नहीं है 
(2018)
(a) जनसङ्ख्या वृद्धि
(b) निर्वहन सन्तान
(c) व्यक्तित्व विकास में बाधक
(d) वैवाहिक समायोजन में सहायक
उत्तर:
(d) वैवाहिक समायोजन में सहायक।

प्रश्न 3.
कम आयु में बालिका का विवाह कर देने पर 
(2018)
(a) बालिका के स्वास्थ्य को खादा रहा है।
(b) माता-पिता का कम हो जाता है।
(c) कम दहेज देना पड़ता है।
(d) उसकी पढ़ाई पर खर्च नहीं करना पड़ता है।
उत्तर:
(a) बालिका के स्वास्थ्य को खतरा रहता है

प्रश्न 4.
दाल-विवाह को समाप्त करने के क्या उपाय हैं। 
(2014)
(a) अधिक-से-अधिक शिक्षा का प्रसार
(b) छोर कानून व्यवस्था।
(e) बाल-विवाह विरोधी व्यापक प्रबार
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5.
बाल-विवाह के उनातन हेतु आवश्यक है। 
(2015)
(a) दहेज प्रथा का विरोध
(b) जन-जागरूकता
(c) शिक्षा का प्रसार
(d) ये भी
उत्तर:
(d) ये सभी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
बालिका का विवाह कम-से-कम कितनी आयु में होना चाहिए? (2005)
उत्तर:
बालिका का विवाह कम-से-कम 18 वर्ष की आयु में होना चाहिए।

प्रश्न 2.
पुरुष को विवाह कब करना चाहिए? (2006)
उत्तर:
पुरुष को उचित जविकोपार्जन की योग्यता अर्जित करने पर 21 वर्ष की आयु 
के बाद बिगाह करना चाहिए।

प्रश्न 3.
लड़कियाँ सरकार से अपनी सुरक्षा हेतु क्या अपेक्षा करती हैं? 
(2018)
उत्तर:
लड़कियाँ सरकार से अपनी सुरक्षा हेतु लैंगिक भेदभाव, यौन शोषण, हिंसक घटनाओं आदि से सुरक्षा की अपेक्षा करती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
बाल-विवाह के तथाकथित लाभों का उल्लेख कीजिए। (2010, 12)
उत्तर:
वर्तमान समय में आता विवाह को मान्यता प्राप्त नहीं है, किन्तु जब यह प्रथा प्रचलित हुई थी, तब इसके तथाकथित स्वीकृत गुण या लाभ निम्नलिखित थे ।

  1. वैवाहिक सामंजस्य बाल- जिह से पति-पत्नी के स्वभाव में अच्छा वैवाहिक सामंजस्य हो जाता है, जिससे संघर्ष होने की सम्भावना अत्यन्त कम रहती हैं।
  2. अनैतिकता तथा व्यभिचार से बचाव बालक-बालिकाओं में | किशोरावस्था में तीब्र कामवासना जाग्रत होती हैं। इस वासना की तृप्ति न होने के कारण समाज में व्यभिचार तथा अनैतिकता फैलती है। अतः इसे रोकने के लिए एकमात्र उपाय बाल गिय मना जाता था।
  3. उत्तरदायित्व समझना लड़के-लड़कियों को उत्तरदायित्व समझाने एवं उन्हें बिगड़ने से बचाने के लिए उनका विवाह अल्पायु में ही कर दिया शाया।
  4. अनेक रोगों का निराकरण आत विवाह से अनेक व्याधियों के होने की आशंका कम रहती है। हैवलिक एलिस के अनुसार, विलम्ब से निबाह होने पर कन्याओं को हिस्टीरिया, रज सम्बन्धी बहुत-सी ध्याधियां, अजीर्ण, सिसई, सिर घूमना, भाँति-भाँति के रोग, अत्यन्त दूषित रक्तहीनता तथा मृत पिण्ड की बीमारी हो जाती हैं। लड़कों में भी शारीरिक व मानसिक दोष उत्पन्न हो जाते हैं।”
  5. प्राकृतिक नियमों के अनुकूल जिस प्रकार अन्य सभी प्राणियों में यौन इच्छा के जाग्रत होते हो यौन सम्बन्ध स्थापित किए जाते हैं, उसी प्रकार मनुष्यों में भी यौन शक्ति के प्रबल होते ही, मौन तृप्ति का असर दिया जाना चाहिए, इस दृष्टिकोण से बाल-विवाह को उचित ठहराने का प्रयास किया जाता है।

प्रश्न 2.
बाल-विवाह से होने वाली हानियों का उल्लेख कीजिए। (2012)
या
बाल-विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला
 हैं ! (2006, 07)
या
कम आयु में विवाह का बालिका पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है?
(2009, 17)
उत्तर:
बाल-विवाह या अल्पायु में होने वाले विवाह से निम्नलिखित हानियाँ या दुष्परिणाम/कुपरिणाम होते हैं।

  1. व्यक्तित्व विकास में बाधा कम आयु में विवाह के कारण बालक-बालिकाओं पर दायित्व का बोझ आ जाता है। इस कारण उनको अपने व्यझिाव का विकास करने का अवसर नहीं मिल पाता है।
  2. स्वास्थ्य पर अरितकर प्रभाव अपरिपक्व अवस्था में बालक बालिका में यौन सम्बन्ध स्थापित होने से जल्द ही बालिका र सन्तान के शन-पोषण का भार आ जाता है। बहुत-सी स्त्रियों प्रस्वकालीन पीड़ा सहन नहीं कर पाती है, उन्हें अनेक रोग हो जाते हैं, कभी-कभी तो मृत्यु तक भी हो जाती है तथा सन्तान भी अस्वस्थ होती हैं।
  3. जनसंख्या में वृद्धि बाल-विवाह के फलस्वरुप जनसंख्या वृद्धि दर तेज हो जाती है। बाल विवाह हो जाने से माता-पिता जल्दी जल्दी सन्तान उत्पन्न करने लगते या तव व सन्तान से जाती है।
  4. बेरोजगारी भारत में बेरोजगारी की समस्या अधिक हैं। बेरोजगारी को गह समस्या जनसंख्या वृद्धि के कारण होती है। अतः अप्रत्यक्ष रूप में बाल-विवाह से बेरोजगारी को प्रोत्साहन मिलता है।
  5. बाल-विधवाओं की समस्या बालविङ्ग, बाल-विधवा की समस्या को भो जन्म देता है। अनेक बीमारियों या फिर किसी घटना के द्वारा बालकों की मृत्यु हो आती है। भारतीय समाज में विधवा विवाह को मान्यता नहीं थी। कम उम्र में विवाह होने के कारण बालिकाएँ पढ़ी-लिखी भी नहीं होती हैं।
  6. अस्वस्थ सन्तानें बाल विवाह के कारण सन्तान शीघ्र उत्पन्न होने में अपरिपक्व माता द्वारा रानान को जन्म दिया जाता है, जिससे बच्चों का स्वास्थ्य सही नहीं रहता है, इससे बाल-मृत्यु को भी बढ़ावा मिलता है।
  7. अकाल मृत्यु वय वालिकाएँ अल्पायु में हो गर्भमती हो जाती है, तो प्रसव के समय कोश की अकाल मृत्यु हो जाती है। 8. शिक्षा में वाधक अल्पायु में विवाह होने में प्रायः लड़की को शिक्षा प्राप्त की सम्भावना समाप्त हो जाती हैं, साथ ही सड़कों की शिक्षा प्रक्रिया भी बाधित होती है, क्योंकि उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर जीविकोपार्जन के लिए प्रयास करने पड़ते हैं।

प्रश्न 3.
बाल विवाह रोकने के क्या उपाय हैं? 
(2018)
या
बाल-विवाह को रोकने के वैधानिक उपाय लिखिए। (2013)
उत्तर:
बाल-विवाह को रोकने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित अधिनियम पारित किए गए हैं।
1. बाल-विवाह परिसीमन कानून या शारदा एक्ट, 1999 इस अधिनियम के 
प्रमुख अनुबन्ध निम्नलिखित हैं।

  • विवाह के समय लड़के को आयु 18 वर्ष तथा लड़की की आयु 14 वर्ष होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की आयु 18 वर्ष से अधिक है और वह 14 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ विवाह करता है, तो ऐसे व्यक्ति को 15 दिन का कारावास या ₹ 100 जुर्माना या दोनों हो सकते है।
  • निर्धारित आयु से कम आयु में विवाह करने पर माता-पिता या साक्षक को 3 माह का कारावास तथा 300 का जुर्माना भुगतना पड़ेगा।

2. हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 ई. में पारित किया गया, जिसके अनुसार विवाह के समय सड़कों की आयु 18 वर्ष तथा लड़कियों की आयु 16 वर्ष निर्धारित की गई। 1976 में एक संशोधन अधिनियम के द्वारा लड़कियो की आयु 18 वर्ष तथा लड़कों की 21 वर्ष निश्चित की गई। वर्तमान में यही नियम लागू है।

3. बाल-विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 यह अधिनियम 1 नवम्बर, 2007 से प्रभाव में आया, इसने शारदा अधिनियम को प्रतिस्थापित किया है। इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं।

  • विवाह के समय लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष एवं सह की 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • इस अधिनियम के अनुसार, बाल-विवाह के लिए बाध्य किए गए अवयस्क बालक, पूर्ण अयस्कता प्राप्त करने के न्यूनतम वर्ष पश्चात् विवाह-विच्छेद कर सकते हैं।
  • यदि 18 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति बाल विवाह करता है, तो ऐसे व्यक्ति को  वर्ष का कठोर कारावास या ₹ 100000 तक का जुर्माना | या दोनों हो सकते हैं।
  • इस अधिनियम में बाल-विवाह को सम्पन्न कराने वाले, संचालित करने वाले या निर्दिष्ट करने बाले के लिए भी दण्ड का प्रावधान है।

प्रश्न 4.
बाल-विवाह को रोकने के क्या उपाय हैं? 
(2005, 06)
उत्तर:
बाल विवाह को रोकने के लिए निम्नलिखित सुझाव सहायक हो सकती हैं।

  1. शिक्षा का प्रसार अल-विवाह जैसी कुप्रथाओं के उम्तन हेतु शिक्षा का अधिक-से-अधिक प्रसार किया जाना आवश्यक है, इससे लोगों में बाल-विमाह के दोष के प्रति अधिकाधिक जागरूकता उत्पन होगी तवा वे इस कुप्रथा का डटकर विरोध करने में समर्ष होगे। इसके अतिरिक्त बालिकाओं में शिक्षा के प्रसार से आत्मनिर्भरता उत्पन्न होगी तथा वे भी बाल-विवाह के विरुद्ध। उता सकेगी।
  2. बाल-विवाह के विरुद्ध जनमत का निर्माण जनमत निर्माण के क्रम में पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, दूरदर्शन, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से बाल-विवाह के दोषों का व्यापक प्रचा किया जाना चाहिए। प्रामीण क्षेत्रों में नाटकों, नौटंकी तथा कवपुतली आदि के माध्यम से जन जागरूकता का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
  3. दहेज प्रथा का विरोध दहेज प्रथा तथा वर-मूल्य जैसी कुप्रथाएं भो बाल-विवाह को पर्याप्त सीमा तक प्रोत्साहन देती रही हैं। अतः इन कुप्रथाओं को समाप्त किया जाना अत्यन्त आवश्यक है।
  4. अन्तर्जातीय विवाहों का प्रचलन अन्तर्जातीय विवाहों के प्रचलन से सम्भवतः समज में दहेज-प्रथा, कुलीन विवाह तथा वर-मूल्य प्रथा भी घट जाए, इस स्थिति में बात विवाह के उन्मूलन में भी योगदान मिल सकता है।
  5. कानूनों को कठोरता से लागू करना बाल-विवाह को रोकने के लिए सम्बद्ध कानूनों को अधिक कठोरता से लागू किया जाना चाहिए।

प्रश्न 5.
आधुनिक समाज में बालिकाएँ सुरक्षित नहीं है क्यों? (2018)
उत्तर:
समाज में प्राचीनकाल से ही बालिकाएँ सुरक्षित नहीं रहीं हैं, इसके निम्न कारण हैं।

  • समाज में लड़के एवं लड़कियों में भेदभाव
  • आपराधिक मानसिकता
  • मनोवैज्ञानिक दत्रय
  • अशिक्षा

समाज में व्याप्त है। भेदभाव बालिकाओं की सुरक्षा में सबसे बड़ा बाधक है। आज भी छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक में यह विभेद चला आ रहा है। यह असुरक्षा उन्हें अपने ही थर से मिलती है। आज भी प्रों में बालिकाओं को शिक्षा देने एवं उन्हें स्वावलम्बी बनाने के लिए तत्पर नहीं है। बढ़ते अपराधों में सबसे अकि बालिकाओं को ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बलात्कार की घटनाएँ प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। यही नहीं यौन शोषण, घरेलु हिंसा, अपहरण एवं वेश्यावृति की घटनाओं ने भी इन्हें समाज के प्रति इरा रखा। है। आंकड़ों पर नजर डाले तो प्रति 5 में से 3 बालिकाएं किसी न किसी प्रकार के यौन उत्पीड़न का शिकार हैं। सड़को, बसो या स्कूलों में भी आए दिन ऐसी घटनाएँ सुनाई पड़ती है। इन बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियों के कारण ही आज कोई भी का स्वयं को सुरक्षित नहीं समझ सकती।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1.
बाल-विवाह से क्या तात्पर्य है? बाल-विवाह के प्रचलन के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए। 
(2012)
उत्तर:
बाल-विवाह बाल-विवाह का तात्पर्य कम आयु में होने वाले विवाह से है अर्थात् ऐसा विवाह, जिसमें वर एवं कन्या में से कोई एक या दोनों ही बाल्यावस्था में होते हैं। बाल्यावस्था, किशोरावस्था में पूर्व की अवस्था होती है, जिसमें बालक-बालिकाएँ पूर्णतः अबोध होते हैं। इस उम्र में न तो वे विवाह का अर्थ समझते हैं और न ही उनमें विवाहू के उत्तरदायित्व निभाने को शारीरिक एवं मानसिक क्षमता होती हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि पूर्ण यौवनावस्था प्राप्त करने से पूर्ण किया गया विवाह बाल-विवाह’ कहलाता है। वर्तमान भारतीय कानून में लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा सड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इस पारित आयु से कम आयु में विवाह करना अवैधानिक एवं हना अपराध माना ।

बाल-विवाह के प्रचलन के मुख्य कारण

समाज में प्राप्त विवाह के प्रचलन के मुख्य कारण निम्नलिखित है।
1. धार्मिक विश्वास हमारे पर्म में कहा गया है कि कन्यादान का पुण्य सौ 
अश्वमेध यज्ञ कराने के बराबर है। माता-पिता दिनभर व्रत रखका कन्यादान देते है एवं यह पुण्य लेते हैं, भारतीय धर्म में पत्नी को पतिव्रता बताया गया है। अतः कन्या की शादी जितनी जल्दी कर दी जाएगी, पतिव्रत करने का उसे उतना ही अवसर प्राप्त होगा। स्मृतियों में बताया गया है कि कन्या को रजस्वला होने के बाद पिता यदि कन्या को प्रम में रखता है या विवाह नहीं करता, तो यह प्रतीमा उसका रुधिर पोता है। इन सब कारणों से बाल-विवाह को प्रोत्साहन मिला।

2. कृषि व्यवसाय भारत की लगभग। 65-70% जनसंख्या ग्रामीण हैं, जिनका शल के प्रचलन के मुग्य व्यवसाय कृषि है। कृषि के लिए मुख्य कारण वा परिवार होना आवश्यक है कि पार्मिक विषम मार्ग पा में जितने ज्यादा मद के पि माप इश उतना ही ज्यादा होगा, इसलिए परिवार। में सदस्यों की संध्या बढ़ाने की दृष्टि से शिक्षा का अभाव भी बाल विवाह को प्रोत्साहन मिला।

3. स्त्रियों की निम्न दशा स्मृतिहास के संयुक्त परिवार समय से ही स्त्रियों की इशा चिन्तनीय हो गई उन्हें भी आ यो से वंचित राति नियम का पालन कर दिया गया। माता-पिता के घर में दहेज प्रथा वह माता-पिता पर पति के घर में पति । पर, वृद्धावस्था में पुत्र पर बोझ समझी जाने लगी। कन्या को जल्दी-से-जल्दी ससुराल भेजकर माता-पिता अपना बोझ हल्का करना चाहते थे, इस कारण भी बाल-विवाह को प्रोत्साहन मिला है।

4. कौमार्य भंग का भय पारम्परिक रूप से भारत में विवाह पूर्व यौन सम्बन्धो को अत्यधिक बुरा माना जाता है। यदि कोई लड़को ऐसा करती है, तो उसका कौमार्य भंग माना जाता है और उससे कोई विवाह नहीं करता। कौमार्य भंग होने के भय से भपतीय माता-पिता लड़की का विवाह अल्पायु में ही कर देते हैं। एक मतानुसार, भारतीय समाज में विदेशी आक्रमणों के कारण बाल विवाङ को प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। इस मत के समर्थन में प्रायः इसी तर्क को प्रस्तुत किया जाता है।

5. शिक्षा का अभाव भारत की अधिकांश जनसंख्या स्तरीय शिक्षा से वंचित हैं। शिक्षा का प्रसार गाँव-गाँव एवं सुदुर क्षेत्रों तक सही तरीके से नहीं होने के कारण यहाँ अज्ञानता पाई जाती है। अज्ञानता के अन्धकार में लोग एक दूसरे के पीछे चलते रहते हैं। इस प्रकार अशिक्षित लोगों में बाल-विवाह का प्रचलन अधिक है।

6. विवादिता भनिता एवं रूढ़िवादिता एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। ऋदिवादी लोग जो उनके पूर्वज करते हैं अर्थात् जो उनके परिवार में होता आया है वे उसी का अनुसरण करते हैं। बच्चों के मन भविष्य को अनदेखा का अप। परम्पराओं एवं रीति-रिवाज को देखते हैं।

7. संयुक्त परिवार संयुक्त परिवार में एक मुखिया होता है, वही अपने पूरे परिवार का भार संभालता है। संयुक्त परिवार में बालकों का आत्मनिर्भर होना जरूरी नहीं हैं। माँ-बाप अपनी इच्छानुसार विवाह कर देते हैं और उनका भार भी संभालते हैं। न्या को पराया धन व योन सममकर उडी ही विवाह कर दिया जाता है।

8. अनुलोम विवाह का प्रभाव अनुलोम मिाह में प्रायेक माता-पिता चाहते है, कि उनको कन्या उचल में आए। अतः जैसे ही पर मिलता है, कन्या का विवाह कर देते हैं। कई बार 4-5 वर्ष की कन्याओं का विवाह भी कर दिया जाता था। इस प्रकार अनुलोम विवाह या फुलौन जिमाह के कारण भी बाल-विवाह का प्रचलन हुआ।

9. जाति नियम का पालन सामान्यतः परम्परागत समाज में अन्तर्जातीय विवाह पर रोक लगाई जाती थी तभी अपनी जाति को मिाह की अनुमति प्रदान की। जाती दी। इस स्थिति में कन्या के माता-पिता को जैसे ही अपनी जाति में उपयुक्त वा मिलता था, चाहे वह अल्पायु ही क्यों न हो, उसका विवाह कर इस जाना

10. दहेज प्रथा दहेज प्रथा भी बाल-विवाह का एक प्रमुख कारण हैं। सड़की की आयु अधिक होने पर उसके विवाह के लिए अधिक दहेज का प्रबन्ध करना पड़ता है। अत: अधिक दहेज देने से बचने के लिए भी बाल-विवाह कर दिए जाते है।

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