UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry (वैद्युत रसायन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry (वैद्युत रसायन).

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 3
Chapter Name Electro Chemistry
Number of Questions Solved 82
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry (वैद्युत रसायन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निकाय Mg2+ | Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव आप किस प्रकार ज्ञात करेंगे?
उत्तर
निकाय Mg2+ | Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव ज्ञात करने के लिए एक सेल स्थापित करते हैं। जिसमें एक इलेक्ट्रोड Mg | MgSO4 (1M), एक मैग्नीशियम के तार को 1M MgSO4 विलयन में डुबोकर (UPBoardSolutions.com) व्यवस्थित करते हैं तथा मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड Pt, H2 (1 atm) | H+ (1M) को दूसरे इलेक्ट्रोड की भाँति व्यवस्थित करते हैं (चित्र-1)।
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सेल का विद्युत वाहक बल मापते हैं तथा वोल्टमीटर में विक्षेप की दिशा को भी नोट करते हैं। विक्षेप की दिशा प्रदर्शित करती है कि इलेक्ट्रॉनों को प्रवाह मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड से (UPBoardSolutions.com) हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड की ओर है। अर्थात् मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण तथा हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड पर अपचयन होता है। अत: सेल को निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है –
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प्रश्न 2.
क्या आप एक जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रख सकते हैं?
उत्तर
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अब हम यह जाँच करेंगे कि निम्नलिखित अभिक्रिया होगी अथवा नहीं।
Zn(s)+ CuSO4(aq) → ZnSO4(aq) + Cu(s)
सेल को इस प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है –
Zn | Zn2+ || Cu2+ | Cu
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= 0.34 V – (- 0.76V) = 1.1 V
चूंकि Ecell धनात्मक है, अत: अभिक्रिया होगी तथा इस कारण हम जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट नहीं रख सकते हैं।

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प्रश्न 3.
मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिका का निरीक्षण कर तीन ऐसे पदार्थ बताइए जो अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों को ऑक्सीकृत कर सकते हैं।
उत्तर
फेरस आयनों के ऑक्सीकरण का अर्थ है –
Fe2+ → Fe3+ + e ; E =- 0.77 V
केवल वे पदार्थ Fe2+ को Fe3+ में ऑक्सीकृत कर सकते हैं जो प्रबल ऑक्सीकारक हों तथा जिनका धनात्मक अपचायक विभव 0.77 V से अधिक हो जिससे सेल (UPBoardSolutions.com) अभिक्रिया का विद्युत वाहक बल धनात्मक प्राप्त हो सके। यह स्थिति उन तत्वों पर लागू हो सकती है जो विद्युत-रासायनिक श्रेणी में Fe3+ | Fe2+ से नीचे स्थित हैं; उदाहरणार्थ- Br, Cl तथा I.

प्रश्न 4.
pH = 10 के विलयन के सम्पर्क वाले हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के विभव का परिकलन कीजिए।
हल
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए,
H+ + e → 1/2 H2
नेर्नुस्ट समीकरण से,
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प्रश्न 5.
एक सेल के emf का परिकलन कीजिए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है। दिया गया है: Ecell = 1.05 V
Ni(s) + 2Ag+ (0.002M) → Ni2+ (0.160M) + 2Ag(s)
हल
दी गई सेल अभिक्रिया के लिए नेस्ट समीकरण से,
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प्रश्न 6.
एक सेल जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
2Fe3+ (aq) + 2I (aq) → 2Fe2+ (aq) + I(s)
का 298K ताप पर Ecell = 0.236 V है। सेल अभिक्रिया की मानक गिब्ज ऊर्जा एवं साम्य स्थिरांक का परिकलन कीजिए।
हल
2Fe3+ + 2e → 2Fe2+
2I → I2 + 2e
अतः दी गई सेल अभिक्रिया के लिए, n = 2
ΔrG = – nFEcell
= – 2 x 96500 x 0.236 J
= -45.55 kJ mol-1
ΔrG = -2.303 RT log KC
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= 7.983
KC = Antilog (7.983) = 9.616 x 107

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प्रश्न 7.
किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है?
उत्तर
विलयन की चालकता, विलयन के एकांक आयतन में उपस्थित आयनों की चालकता होती है। तनुकरण पर प्रति एकांक आयतन आयनों की संख्या घटती है, अत: चालकता भी घट जाती है।

प्रश्न 8.
जल की Δºm ज्ञात करने का एक तरीका बताइए।
उत्तर
अनन्त तनुता पर जल की सीमान्त मोलर चालकता (Δºm), अनन्त तनुता पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा सोडियम क्लोराइड (जिसमें सभी प्रबल विद्युत-अपघट्य हैं) की मोलर चालकताएँ ज्ञात होने पर निम्न प्रकार प्राप्त की जा सकती है –
Δºm (H2O ) = Δºm (NaOH)  + Δºm HCl  – Δºm (NaCl)

प्रश्न 9.
0.025 mol L-1 मेथेनोइक अम्ल की चालकता 46.1 S cm2 mol-1 है। इसकी वियोजन की मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक का परिकलन कीजिए। दिया गया है कि
λ°(H+) = 349.6S cm mol-1 एवं
λ°(HCOO-) = 54.6 S cm mol-1.
हल
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प्रश्न 10.
यदि एक धात्विक तार में 0.5 ऐम्पियर की धारा 2 घंटों के लिए प्रवाहित होती है तो तार में से कितने इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होंगे?
हल
Q (कूलॉम) = i (ऐम्पियर) × t (सेकण्ड)
= (0.5 ऐम्पियर) × (2 × 60 x 60 s) = 3600 C
96500 C का प्रवाह 1 मोल इलेक्ट्रॉन अर्थात् 6.02 x 1023 इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के तुल्य होता है।
3600 C के तुल्य इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह = [latex s=2]\frac { { 6.02\times 10 }^{ 23 } }{ 96500 } \times 3600[/latex]
= 2246 x 1022 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 11.
उन धातुओं की एक सूची बनाइए जिनका विद्युत-अपघटनी निष्कर्षण होता है।
उत्तर
Na, Ca, Mg तथा Al.

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प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रिया में Cr2O72- आयनों के एक मोल के अपचयन के लिए कूलॉम में विद्युत की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी ?
Cr2O72- + 14H+ + 6e → 2Cr3++ + 7H2O
हल
दी गई अभिक्रिया के अनुसार,
Cr2O72- – आयनों के एक मोल को 6 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
अतः F = 6 x 96500 C = 579000 C
अत: Cr3+ में अपचयन के लिए 579000 C विद्युत की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 13.
चार्जिंग के दौरान प्रयुक्त पदार्थों का विशेष उल्लेख करते हुए लेड संचायक सेल की चार्जिंग क्रियाविधि का वर्णन रासायनिक अभिक्रियाओं की सहायता से कीजिए।
उत्तर
चार्जिग (आवेशन) के दौरान एक बाह्य स्रोत से (UPBoardSolutions.com) सेल को विद्युत ऊर्जा दी जाती है अर्थात् सेल एक विद्युतअपघटनी सेल की भाँति कार्य करता है। अभिक्रियाएँ डिस्चार्ज (निरावेशन) के दौरान होने वाली अभिक्रियाओं से विपरीत प्रकार होती हैं।
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प्रश्न 14.
हाइड्रोजन को छोड़कर ईंधन सेलों में प्रयुक्त किए जा सकने वाले दो अन्य पदार्थ सुझाइए।
उत्तर
मेथेन (CH4), मेथेनॉल (CH3OH)।

प्रश्न 15.
समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक विद्युत-रासायनिक सेल बनना माना जाता है?
उत्तर
लोहे की सतह पर उपस्थित जल की परत वायु के अम्लीय ऑक्साइडों; जैसे- CO2, SO2 आदि को घोलकर अम्ल बना लेती है जो वियोजित होकर H+ आयन देते हैं
H2O+ CO2 → H2CO3 [latex s=2]\rightleftharpoons [/latex] 2H+ +CO32-
H+ आयनों की उपस्थिति में, लोहा कुछ स्थलों पर से इलेक्ट्रॉन खोना प्रारम्भ कर देता है तथा फेरस आयन बना लेता है। अतः ये स्थल ऐनोड का कार्य करते हैं –
Fe(s) → Fe2+ (aq) + 2e
इस प्रकार धातु से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन अन्य स्थलों पर पहुँच जाते हैं जहाँ H+ आयन तथा घुली हुई ऑक्सीजन इन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर लेती है तथा अपचयन अभिक्रिया हो जाती है। अतः ये स्थल कैथोड की भाँति कार्य करते हैं –
O2(g) +4H+ (aq) +4e → 2H2O(l)
सम्पूर्ण अभिक्रिया इस प्रकारे दी जाती है
2Fe(s)+O2(g) + 4H+ (aq) → 2Fe2+ (aq) + 2H2O(l)

इस प्रकार लोहे की सतह पर विद्युत-रासायनिक सेल बन जाता है।
फेरस आयन पुनः वायुमण्डलीय ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होकर फेरिक आयनों में परिवर्तित हो जाते हैं। जो जल अणुओं से संयुक्त होकर जलीय फेरिक ऑक्साइड Fe2O3. xH2O बनाते हैं। यह जंग कहलाता है।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक-दूसरे को उनके | लवणों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं।
Al, Cu, Fe, Mg एवं Zn.
उत्तर
Mg, Al, Zn, Fe तथा Cu

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प्रश्न 2.
नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
K+ । K = -2.93 V, Ag+ | Ag= 0.80V,
Hg2+ | Hg= 0.79 V
Mg2+ | Mg = -2.37 V, Cr3+ | Cr = -0.74 V
उत्तर
किसी धातु की अपचायक शक्ति उसके ऑक्सीकरण विभव पर निर्भर करती है। ऑक्सीकरण विभव जितना अधिक होगा, ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति (UPBoardSolutions.com) उतनी अधिक होगी तथा इसलिए उसकी अपचायक शक्ति भी उतनी ही अधिक होगी। अत: दिये गये धातुओं की बढ़ती अपचायक शक्ति का क्रम निम्न होगा –
Ag < Hg < Cr < Mg < K

प्रश्न 3.
उस गैल्वेनी सेल को दर्शाइए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
Zn(s) + 2Ag+ (aq) → Zn2+ (aq) + 2Ag(s)
अब बताइए –

  1. कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है?
  2. सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन-से हैं?
  3. प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या है?

उत्तर
जिंक इलेक्ट्रोड ऐनोड का कार्य करता है, जबकि सिल्वर इलेक्ट्रोड कैथोड का कार्य करता है। सेल को निम्न प्रकार प्रदर्शित कर सकते हैं –
Zn (S)| Zn2+ (aq)|| Ag+ (aq)| Ag (s)
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  1. Zn / Zn2+ इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित होता है तथा ऐनोड की तरह कार्य करता है।
  2. बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉन तथा आंतरिक परिपथ में आयन।
  3. ऐनोड पर : Zn (s) → Zn2+ (aq) + 2e
    कैथोड पर : Ag+ (aq) + e → Ag(s)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनी सेल का मानक सेल-विभव परिकलित कीजिए।
(i) 2Cr(s) + 3Cd2+ (aq) → 2Cr3+ (aq) + 3Cd
(ii) Fe2+ (aq) + Ag+ (aq) → Fe3+ (aq) + Ag(s)
उपर्युक्त अभिक्रियाओं के लिए ΔrG एवं साम्य स्थिरांकों की भी गणना कीजिए।
हल
(i) सेले को निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है –
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित सेलों की 298K पर नेर्नुस्ट समीकरण एवं emf लिखिए।

  1. Mg(s) | Mg2+ (0001 M) || Cu2+ (0.0001 M) | Cu(s)
  2. Fe(s) | Fe2+ (0.001 M) || H+ (1 M) | H2(g) (1 bar) | Pt(s)
  3. Sn(8) | Sn2+ (0.050 M) | H+ (0.020 M) | H2(g) (1 bar) | Pt(s)
  4. Pt(s) | Br (0.010 M)|Br2 (l) || H+ (0.030 M) | H2(g) (1 bar) | Pt (s).

हल
1. सेल अभिक्रिया निम्न प्रकार है –
Mg(s) + Cu2+ (0.0001 M) → Mg2+ (0.001 M) + Cu (s)
इसलिए n = 2,
इसके अनुसार नेर्नस्ट समीकरण निम्नवत् होगी –
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2. सेल अभिक्रिया निम्न है –
Fe(s) + 2H+ (1M)→ Fe2+ (0.001M)+ H2 (1bar)
इसलिए n = 2,
इस सेल के epf के लिए नेर्नस्ट समीकरण निम्न होगी –
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3. सेल अभिक्रिया निम्न है –
Sn(s) + 2H+ (0.020M) → Sn2+ (0.050M)+ H2 (1 bar)
इसलिए n = 2,
इसके अनुसार, नेर्नस्ट समीकरण निम्न होगी –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 14a

4. सेल अभिक्रिया निम्न है –
2Br (0.010 M) + 2H+ (0.030 M) → Br2(l) + H2 (1 bar)
इसलिए n = 2,
सेल के लिए नेर्नस्ट समीकरण के अनुसार emf निम्न है –
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प्रश्न 6.
घड़ियों एवं अन्य युक्तियों में अत्यधिक उपयोग में आने वाली बटन सेलों में निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
Zn(s) + Ag2O(s) + H2O(l) → Zn2+ (aq) + 2Ag(s) + 2OH (aq)
अभिक्रिया के लिए ΔrG एवं E ज्ञात कीजिए।
हल
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सेल अभिक्रिया के लिए, n = 2
∴ ΔrG = – nFEcell
∴ ΔrG = – 2 x 96500 x 1.104 = -2.13 x 105 CV mol-1
= – 2.13 x 10 J mol-1

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प्रश्न 7.
किसी विद्युत-अपघट्य के विलयन की चालकता एवं मोलर चालकता की परिभाषा दीजिए। सान्द्रता के साथ इनके परिवर्तन की विवेचना कीजिए।
उत्तर
विद्युत-अपघट्य के विलयन की चालकता (Conductivity of the solution of an electrolyte) – यह प्रतिरोध R का व्युत्क्रम होती है तथा इसे उस सरल रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिससे धारा किसी चालक में प्रवाहित होती है।
c = [latex s=2]\frac { 1 }{ R } =\frac { A }{ pl } [/latex]
k = [latex s=2]\frac { A }{ l }[/latex]
यहाँ k विशिष्ट चालकता है। चालकता का SI मात्रक सीमेन्ज (Siemens) है जिसे प्रतीक ‘S’ से निरूपित किया जाता है तथा यह ohm-1 या Ω-1 के तुल्य होता है।
मोलर चालकता (Molar conductivity) – वह चालकता जो 1 मोल विद्युत-अपघट्य को विलयन में घोलने पर समस्त आयनों द्वारा दर्शायी जाती है, मोलर चालकता कहलाती है, इसे Δm (लैम्ब्डा) से व्यक्त किया जाता है। यदि विद्युत-अपघट्य विलयन के V cm3 में विद्युत-अपघट्य के 1 mol उपस्थित हों, तब
Δm = K x V
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इसकी इकाई ohm-1 cm2 mol-1 या S cm2 mol-1 है।

सान्द्रता के साथ चालकता तथा मोलर चालकता में परिवर्तन
(Variation of Conductivity and Molar Conductivity with Concentration)
विद्युत-अपघट्य की सान्द्रता में परिवर्तन के साथ-साथ चालकता एवं मोलर चालकता दोनों में परिवर्तन होता है। दुर्बल एवं प्रबल दोनों प्रकार के विद्युत-अपघट्यों की सान्द्रता (UPBoardSolutions.com) घटाने पर चालकता सदैव घटती है। इसकी इस तथ्य से व्याख्या की जा सकती है कि तनुकरण (dilution) करने पर प्रति इकाई आयतन में विद्युत धारा ले जाने वाले आयनों की संख्या घट जाती है। किसी भी सान्द्रता पर विलयन की चालकता उस विलयन के इकाई आयतन का चालकत्व होता है जिसे परस्पर इकाई दूरी पर स्थित एवं इकाई अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले दो प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के मध्य रखा गया हो।

यह निम्नलिखित समीकरण से स्पष्ट है –
C = [latex s=2]\frac { kA }{ l } [/latex] =k
(A एवं । दोनों ही उपयुक्त इकाइयों m या cm में हैं)
किसी दी गई सान्द्रता पर एक विलयन की मोलर चालकता उस विलयन के V आयतन का चालकत्व है जिसमें विद्युत-अपघट्य का एक मोल घुला हो तथा जो एक-दूसरे से इकाई दूरी पर स्थित, A अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले दो इलेक्ट्रोडों के मध्य रखा गया हो। अतः
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Δm = [latex s=2]\frac { kA }{ l } [/latex] = k
चूंकि l = 1 एवं A = V (आयतन, जिसमें विद्युत अपघट्य का एक मोल घुला है।)
Δm = k V
सान्द्रता घटने के साथ मीलर चालकता बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह कुल आयतन (V) भी बढ़ जाता है जिसमें एक मोल विद्युत अपघट्य उपस्थित होता है। यह पाया गया है कि विलयन के तनुकरण पर आयतन में वृद्धि K में होने वाली कमी की तुलना में कहीं अधिक होती है।

प्रबल विद्युत-अपघट्य (Strong Electrolytes)
प्रबल विद्युत अपघट्यों के लिए Δm का मान तनुता के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है एवं इसे निम्नलिखित समीकरण द्वारा निरूपित किया जा सकता है –
Δm  = Δºm – Ac1/2
यह देखा जा सकता है कि यदि Δm को c1/2 के विपरीत आरेखित किया जाए (चित्र-3) तो हमें एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जिसका अन्त:खण्ड A एवं ढाल ‘A’ के बराबर है। दिए गए विलायक एवं ताप पर स्थिरांक ‘A का मान विद्युत-अपघट्य के प्रकार अर्थात् विलयन में विद्युत-अपघट्य के (UPBoardSolutions.com) वियोजन से उत्पन्न धनायन एवं ऋणायन के आवेशों पर निर्भर करता है। अत: NaCl, CaCl2, MgSO4 क्रमशः 1-1, 2-1 एवं 2-2 विद्युत-अपघट्य के रूप में जाने जाते हैं। एक प्रकार के सभी विद्युत-अपघट्यों के लिए ‘A’ का मान समान होता है।

प्रश्न 8.
298 K पर 0.20 M KCl विलयन की चालकता 0.0248 S cm-1 है। इसकी मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
हल
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प्रश्न 9.
298 K पर एक चालकता सेल जिसमें 0.001 M KCl विलयन है, का प्रतिरोध 1500 Ω है। यदि 0.001 M KCl विलयन की चालकता 298K पर 0.146 x 10-3 S cm-1 हो तो सेल स्थिरांक क्या है?
हल
k = [latex s=2]\frac { 1 }{ R } [/latex] x सेल नियतांक
∴ सेल नियतांक = K R= 0.146 x 10-3 x 1500 = 0.219 cm-1

प्रश्न 10.
298 K पर सोडियम क्लोराइड की विभिन्न सान्द्रताओं पर चालकता का मापन किया गया जिसके आँकड़े अग्रलिखित हैं –
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हल
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सीधी रेखा को पीछे तक खींचने पर यह Δm अक्ष पर 124.0 S cm2 mol-1 पर मिलती है। यह Δºm का मान है।

प्रश्न 11.
0.00241 M ऐसीटिक अम्ल की चालकता 7.896 x 10-5 S cm-1 है। इसकी मोलर चालकता को परिकलित कीजिए। यदि ऐसीटिक अम्ल के लिए  Δºm का मान 390.5 S cm2 mol-1 हो तो इसका वियोजन स्थिरांक क्या है?
हल
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प्रश्न 12.
निम्नलिखित के अपचयन के लिए कितने आवेश की आवश्यकता होगी?
(i) 1 मोल Al3+ को Al में
(ii) 1 मोल Cu2+ को Cu में।
(iii) 1 मोल MnO4 को Mn2+ में
हल
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित को प्राप्त करने में कितने फैराडे विद्युत की आवश्यकता होगी?
(i) गलित CaCl2 से 20.0 g Ca
(ii) गलित Al2O3 से 40.0 g Al
हल
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित को ऑक्सीकृत करने के लिए कितने कूलॉम विद्युत आवश्यक है?

  1. 1 मोल H2O को O2 में।
  2. 1 मोल FeO को Fe2O3 में।

हल
1. 1 mol H2O के लिए इलेक्ट्रोड अभिक्रिया इस प्रकार दी जाती है –
H2O → H2 + 1/2 O2
अर्थात् O2- → 1/2 O2 + 2e
∴ आवश्यक विद्युत की मात्रा = 2F = 2 x 96500 C = 193000 C

2. 1 mol FeO के लिए इलेक्ट्रोड अभिक्रिया इस प्रकार दी जाती है –
FeO → 1/2 Fe2O3
अर्थात् Fe2+ → Fe3+ + e
∴ आवश्यक विद्युत की मात्रा = 1F = 96500 C

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प्रश्न 15.
Ni(NO3)2 के एक विलयन का प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करते हुए 20 मिनट तक विद्युत-अपघटन किया गया। Ni की कितनी मात्रा कैथोड पर निक्षेपित होगी?
हल
अभिक्रिया निम्न प्रकार सम्पन्न होती है –
Ni2+ + 2e  → Ni
Ni का परमाणु भार = 58.70
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प्रश्न 16.
ZnSO4, AgNO3 एवं CuSO4 विलयन वाले तीन विद्युत-अपघटनी सेलों A, B, C को श्रेणीबद्ध किया गया एवं 1.5 ऐम्पियर की विद्युत धारा, सेल B के कैथोड पर 145 सिल्वर निक्षेपित होने तक लगातार प्रवाहित की गई। विद्युत धारो कितने समय तक प्रवाहित हुई? निक्षेपित कॉपर एवं जिंक को द्रव्यमान क्या होगा ?
हल
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प्रश्न 17.
तालिका 3.1 (पाठ्यपुस्तक) में दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या निम्नलिखित अभिकर्मकों के बीच अभिक्रिया सम्भव है?
(i) Fe3+ (aq) और I (aq)
(ii) Ag+ (aq) और Cu (s)
(iii) Fe3+ (aq) और Br (aq)
(iv) Ag (s) और Fe3+ (aq)
(v) Br2(aq) और Fe2+ (aq).
उत्तर
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए विद्युत-अपघटन से प्राप्त उत्पाद बताइए –

  1. सिल्वर इलेक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
  2. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
  3. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ H2SO4 का तनु विलयन
  4. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ CuCl2 का जलीय विलयन।

उत्तर
1. AgNO3 (aq) → Ag+ (aq) + NO3 (aq)
H2O [latex s=2]\leftrightarrows [/latex] H+ + OH
कैथोड पर : चूंकि सिल्वर का अपचयन विभव (+0.80 V) जल (-0.830 V) से अधिक है, इसलिए Ag+ वरीयता के आधार पर अपचयित होगा तथा सिल्वर धातु कैथोड पर जमा होगी।
Ag+ (aq) + e → Ag (s)
ऐनोड पर : निम्न अभिक्रिया होगी –
H2O (l) → 1/2 O2(g) + 2H+ (aq)
NO3 (aq) → NO3 + e
Ag(s) → Ag+ (aq) + e

इन अभिक्रियाओं में कॉपर का अपचयन विभव न्यूनतम है। इसलिए सिल्वर स्वयं ऐनोड पर ऑक्सीकरण के फलस्वरूप Ag’ में परिवर्तित हो जायेगी और Ag’ आयन विलयन में चले जायेंगे।
Ag(s) → Ag(aq) + e

2. कैथोड पर : सिल्वर आयने अपचयित होंगे तथा सिल्वर धातु जमा होगी।
ऐनोड पर : चूँकि जल का अपचयन विभव NO3 आयनों से कम होता है, इसलिए जल वरीयता के आधार पर ऑक्सीकृत होगा तथा ऑक्सीजन मुक्त होगी।
H2O (l) → 1/2 O(g) + 2H+ (aq) + 2e

3. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ H2SO4 के तनु विलयन का विद्युत-अपघटन
H2SO4(aq) → 2H+ (aq) + SO2-4 (aq)
H2O [latex s=2]\leftrightarrows [/latex] H+ + OH
कैथोड पर : H+ +e → H
H → H(g)
ऐनोड पर : OH → OH + e
4OH → 2H2O (l) + O(g)
अत: कैथोड पर H, तथा ऐनोड पर 0 मुक्त होगी।

4. CuCl2 (aq) → Cu2+ (aq) + 2Cl (aq)
H2O [latex s=2]\leftrightarrows [/latex] H+ + OH
कैथोड पर : चूंकि Cu2+ (+0.341 V) का अपचयन विभव जल (-0.83 V) से अधिक होता है, इसलिए Cu2+ वरीयता के आधार पर अपचयित होंगे तथा कैथोड पर कॉपर धातु जमा होगी।
Cu2+ (aq) + 2e → Cu (s)

ऐनोड पर : निम्न अभिक्रियाओं के होने की सम्भावना है –
H2O (l) → 1/2 O(g) + 2H+ (aq) + 2e– ;
E° = +1.23 V
2Cl–  (aq) → Cl2 (g) + 2e–  ; E° = + 1.36V
चूँकि जल का अपचयन विभव Cl (जलीय) आयनों से कम होता है, इसलिए जल वरीयता के आधार पर ऐनोड पर ऑक्सीकृत होगा तथा O2, गैस मुक्त होगी।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
चार क्षार धातुओं A, B, C व D के मानक अपचयन विभव क्रमशः-3.05 -1.66,- 0.40 तथा 0.80 वोल्ट हैं। इनमें से प्रबलतम अपचायक है – (2011)
(i) A
(ii) B
(iii) C
(iv) D
उत्तर
(i) A

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प्रश्न 2.
प्रबलतम अपचायक है – (2016)
(i) Li
(ii) Na
(iii) K
(iv) Cs
उत्तर
(i) Li

प्रश्न 3.
25°C पर Li+ /Li, Ba2+ / Ba, Na+ / Na तथा Mg2+/Mg के मानक अपचयन इलेक्ट्रोड विभव क्रमशः -305,- 273 – 271 तथा -237 वोल्ट हैं। सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है – (2009, 13, 18)
(i) Ba2+
(ii) Mg2+
(iii) Na+
(iv) Li+
उत्तर
(ii) Mg2+

प्रश्न 4.
किसी भी इलेक्ट्रोड का इलेक्ट्रोड विभव निर्भर करता है – (2012)
(i) धातु की प्रकृति पर
(ii) विलयन के ताप पर
(iii) विलयन की मोलरता पर
(iv) इनमें से सभी पर
उत्तर
(iv) इनमें से सभी पर

प्रश्न 5.
तत्त्वों A, B,C तथा D के मानक अपचयन विभव क्रमशः -2.90, +1.50, -0.74 तथा +0.34 वोल्ट हैं। इनमें सर्वाधिक विभव ऑक्सीकारक है – (2016)
(i) A
(ii) B
(iii) C
(iv) D
उत्तर
(ii) B

प्रश्न 6.
धातु जो सरलता से ऑक्सीकृत हो जाती है – (2017)
(i) Cu
(ii) Ag
(iii) Al
(iv) At
उत्तर
(iii) Al

प्रश्न 7.
चार धातुओं A, B, C तथा D के मानक ऑक्सीकरण इलेक्ट्रोड विभव क्रमशः + 1.5 वोल्ट,- 20 वोल्ट, + 0.84 वोल्ट तथा- 0.36 वोल्ट हैं। इन धातुओं की बढ़ती सक्रियता का क्रम है – (2017)
(i) A < B < C < D
(ii) D < C < B < A
(iii) A < C < D < B
(iv) B < C < D < A
उत्तर
(iii) A < C < D < B

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प्रश्न 8.
निम्न में कौन-सा ऑक्साइड हाइड्रोजन द्वारा अपचयित होगा? (2017)
(i) Na2O
(ii) MgO
(iii) Al2O3
(iv) Ag2O
उत्तर
(iv) Ag2O

प्रश्न 9.
Mg, Cu, Na तथा Au की सक्रियता का सही क्रम है – (2016)
(i) Au > Cu > Mg > Na
(ii) Mg > Cu > Au > Na
(iii) Na > Mg > Cu> Au
(iv) Cu > Mg > Na > Au
उत्तर
(iii) Na > Mg > Cu> Au

प्रश्न 10.
चार धातुओं A, B, C, D के मानक इलेक्ट्रोड विभव (E0) क्रमशः + 1.5 V, -20 V, + 0.34 V तथा – 0.76 v हैं। इन धातुओं की घटती हुई सक्रियता का क्रम है –(2014)
(i) A> C> D> B
(ii) A> B> D> C
(iii) B> D> C> A
(iv) D> A> B> C
उत्तर
(iii) B> D> C> A

प्रश्न 11.
A, B और C तत्त्वों का मानक अपचयन विभव क्रमशः +0.68 V,-0.50 V और-2.5 V है। उनकी अपचयन शक्ति का क्रम है – (2017)
(i) A > B > C
(ii) A > C > B
(iii) C > B > A
(iv) B > C > A
उत्तर
(ii) A > C > B

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प्रश्न 12.
धातु जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से H, विस्थापित नहीं कर सकती है, वह है – (2017)
(i) Zn
(ii) Cu
(iii) Mg
(iv) Al
उत्तर
(ii) Cu

प्रश्न 13.
निम्न में से कौन-सी अभिक्रिया सम्भव नहीं है? (2017)
(i) Cu + 2AgNO3 → Cu (NO3)2 + 2Ag
(ii) CaO + H2 → Ca + H2O
(iii) CuO+ H2 → Cu + H2O
(iv) Fe + H2SO4 → FeSO4 + H2 ↑
उत्तर
(i) Cu + 2AgNO3 → Cu (NO3)2 + 2Ag

प्रश्न 14.
आर्यन जिसकी विद्युत चालकता जलीय विलयन में सबसे अधिक है, है – (2014)
(i) Li+
(ii) Na+
(iii) K+
(iv) Cs+
उत्तर
(iv) Cs+

प्रश्न 15.
अच्छे चालकत्व विलयन वाले पदार्थ हैं – (2017)
(i) दुर्बल वैद्युत अपघट्य
(ii) प्रबल वैद्युत अपघट्य
(iii) विद्युत अपघट्य
(iv) उत्प्रेरक
उत्तर
(ii) प्रबल वैद्युत अपघट्य

प्रश्न 16.
[latex s=2]\frac { N }{ 50 } [/latex] KCl विलयन की 25°C पर विशिष्ट चालकता 0.002765 म्हो सेमी-1  है। यदि विलयन सहित सेल का प्रतिरोध 400 ओम हो तो सेल स्थिरांक होगा – (2017)
(i) 0.553 सेमी-1
(ii) 1.106 सेमी-1
(iii) 2.212 सेमी-1
(iv) इनमें से कोई नही
उत्तर
(ii) 1.106 सेमी-1

प्रश्न 17.
जल के विद्युत अपघटन में बनी ऑक्सीजन और हाइड्रोजन का भारात्मक अनुपात है – (2016)
(i) 2 : 1
(ii) 8 : 1
(iii) 16 : 1
(iv) 1 : 4
उत्तर
(i) 2 : 1

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प्रश्न 18.
हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधने सेल में नेट अभिक्रिया संपन्न होती है – (2016)
(i) 2H(g) +4 OH (aq) → 4H2O (l) +4e
(ii) O2(g) + 2H2O (l) → 2e + 4OH (aq)
(iii) 2H2(g) + O(g) → 2H2O (l)
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(iii) 2H2(g) + O(g) → 2H2O (l)

प्रश्न19.
सीसा संचायक सेल को आवेशित करने पर – (2017)
(i) PbO2 घुलता है।
(ii) लेड इलेक्ट्रोड पर PbSO4 जमता है।
(iii) H2SO4 पुन: बनता है।
(iv) अम्ल की मात्रा घटती है।
उत्तर
(ii) लेड इलेक्ट्रोड पर PbSO4 जमता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेडॉक्स विभव किसे कहते हैं? (2014)
उत्तर
जब सेल में ऑक्सीकरण तथा अपचयन अभिक्रिया होती है तो धातु और विलयन के मध्य स्थापित विभवान्तर को रेडॉक्स विभव कहते हैं; जैसे
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 32
यदि इस प्रकार के सेल का विभव E हो तो ऑक्सीकारक की सान्द्रता [Ox] तथा अपचायक की सान्द्रता [Red] में 25°C पर निम्नलिखित सम्बन्ध होता है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 33
जहाँ, E° रेडॉक्स विभव है और n ऑक्सीकारक (Ox) द्वारा ग्रहण किये गये इलेक्ट्रॉनों की संख्या है। जिन्हें ऑक्सीकारक ग्रहण करके अपने संगत अपचायक में बदल देता है।

प्रश्न 2.
किसी सेल के विद्युत वाहक बल से क्या तात्पर्य है? (2017)
उत्तर
किसी सेल के इलेक्ट्रोडों के इलेक्ट्रोड विभवों में वह अन्तर, जब सेल से परिपथ में कोई विद्युत धारा नहीं बहती है, सेल को विद्युत वाहक बल कहलाता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित सम्भव अभिक्रियाओं की सहायता से Mg, Zn, Cu और Ag को उनके घटते हुए इलेक्ट्रोड विभव के क्रम में लिखिए – (2014)

  1. Cu + 2Ag+ → Cu2+ + 2Ag
  2. Mg + Zn2+ → Mg2+ + Zn
  3. Zn + Cu2+ → Zn2+ + Cu

उत्तर

  1. Cu + 2Ag+ → Cu2+ + 2Ag
    Cu > E°Ag
  2.  Mg + Zn2+ → Mg2+ + Zn
    Mg  > E°Zn
  3. Zn + Cu2+ → Zn2+ + Cu
    Zn > E°Cu

अतः E° का घटता हुआ क्रम इस प्रकार होगा –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 34

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प्रश्न 4.
Mg, Zn, Cu, Ag में से किस तत्त्व की अम्ल से अभिक्रिया होने पर हाइड्रोजन गैस विमुक्त होती है? (2015)
उत्तर
Mg तथा Zn अम्ल से अभिक्रिया करके H, गैस विमुक्त करते हैं क्योंकि विद्युत रासायनिक श्रेणी में Mg तथा Zn का स्थान हाइड्रोजन से ऊपर है अर्थात् Mg तथा Zn की अपचायक क्षमता हाइड्रोजन से अधिक है।

प्रश्न 5.
कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की कील डालने पर क्या होगा? (2016)
उत्तर
कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की कील डालने पर लोहे की कील के ऊपर कॉपर की परत चढ़ जायेगी, क्योंकि कॉपर की सक्रियता लोहे से कम होती है।

प्रश्न 6.
जिंक तथा ताँबे में से एक अम्लों से हाइड्रोजन गैस विस्थापित नहीं करता है। क्यों? (2016)
उत्तर
वैद्युत रासायनिक श्रेणी में जिंक हाइड्रोजन से ऊपर तथा ताँबा हाइड्रोजन से नीचे स्थित है जिसके कारण जिंक हाइड्रोजन से अधिक अपचायक है और ताँबा कम अपचायक है। इसीलिए जिंक अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थाप्रित करता है परन्तु, ताँबा नहीं करता है।

प्रश्न 7.
यद्यपि विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऐलुमिनियम हाइड्रोजन से ऊपर है किन्तु यह वायु और जल में स्थायी है। क्यों? (2016, 18)
उत्तर
यद्यपि विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऐलुमिनियम हाइड्रोजन से ऊपर है किन्तु यह वायु और जल में स्थायी है क्योंकि यह गर्म जल या जलवायु के साथ उच्च ताप पर क्रिया करता है और साधारण ताप पर जल के साथ इसकी क्रिया मन्द होती है।

प्रश्न 8.
Zn तथा Fe, कॉपर सल्फेट (CuSO4) में Cu को विस्थापित कर सकते हैं, परन्तु Pt और Ag नहीं करते। कारण स्पष्ट कीजिए। (2009, 12, 13)
या
Zn, CuSO4 विलयन से कॉपर को विस्थापित कर सकता है जबकि सोना (Ag) ऐसा नहीं कर सकता है। क्यों? (2017)
उत्तर
कम इलेक्ट्रोड विभव वाली धातु अधिक इलेक्ट्रोड विभव वाली धातु को उसके लवण के विलयन में से प्रतिस्थापित कर देती है। विद्युत रासायनिक श्रेणी में नीचे की ओर चलने पर इलेक्ट्रोड विभव कम होता जाता है। चूंकि विद्युत रासायनिक श्रेणी में Zn तथा Fe धातुएँ Cu से नीचे स्थित हैं अत: (UPBoardSolutions.com) इनका इलेक्ट्रोड विभव Cu से कम होता है और ये Cu को उसके लवण विलयन CuSO4 में से विस्थापित कर देती हैं, जबकि Pt और Ag का स्थान विद्युत रासायनिक श्रेणी में Cu से ऊपर होता है जिसके कारण इनका इलेक्ट्रोड विभव Cu से अधिक होता है। इसी कारण से ये Cu को इसके लवण विलयन में से विस्थापित नहीं कर पाती हैं।

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प्रश्न 9.
सिल्वर नाइट्रेट के घोल में कॉपर की छड़ डालने पर घोल नीला क्यों हो जाता है? (2010, 16)
उत्तर
वैद्युत रासायनिक श्रेणी का प्रत्येक तत्त्व अपने से नीचे स्थित तत्त्वों को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है। श्रेणी में Cu का स्थान Ag से ऊपर है. अत: यह AgNO3 से निम्नलिखित क्रिया देगा –
Cu + 2AgNO3 → Cu2+ + 2NO3 + 2Ag
इस प्रकार विलयन में क्यूप्रिंक आयन (Cu2+) विद्यमान होने से विलयन का रंग नीला हो जायेगा।

प्रश्न 10.
विशिष्ट चालकता से क्या तात्पर्य है? इसका मात्रक क्या है? (2014, 17)
उत्तर
किसी चालक के विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उस चालक की विशिष्ट चालकता (या केवल चालकता) कहते हैं। इसे ग्रीक अक्षर K (कप्पा, kappa) से निरूपित किया जाता है।
k = [latex s=2]\frac { 1 }{ p } [/latex]
विशिष्ट चालकता के मात्रक ओम-1 सेमी-1 या Ω-1 सेमी-1 या S सेमी-1 हैं।

प्रश्न11.
एक विद्युत अपघट्य विलयन की मोलर चालकता को परिभाषित कीजिए तथा उसके मात्रक लिखिए। (2014, 18)
उत्तर
किसी विलयन के एक निश्चित आयतन में उपस्थित एक विद्युत अपघट्य पदार्थ के एक मोल द्वारा उपलब्ध कराये गये आयनों की चालकता को मोलर चालकता कहते हैं। इसे A से प्रदर्शित करते हैं। मोलर चालकता के मात्रक ओम-1 सेमी2 मोल-1 या S सेमी2 मोल-1 हैं।

प्रश्न 12.
कोलराउश का नियम क्या है? (2014, 15, 16, 17)
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “किसी विद्युत अपघट्य की अनन्त तनुता पर चालकता इसके धनायनों तथा ऋणायनों की मोलर चालकताओं के योग के बराबर होती है, यदि प्रत्येक चालकता पद को विद्युत अपघट्य सूत्र में उपस्थित संगत आयनों की संख्या से गुणा किया जाये।”
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 35

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प्रश्न13.
मोलर चालकता तथा तुल्यांक चालकता में क्या सम्बन्ध है? (2017)
उत्तर
मोलर चालकता तथा तुल्यांक चालकता में निम्नलिखित सम्बन्ध है – UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 36

प्रश्न14.
विद्युत अपघटन की क्रियाविधि उपयुक्त उदाहरण सहित समझाइए। (2016)
उत्तर
किसी विद्युत अपघट्य का विद्युत धारा द्वारा अपघटन विद्युत अपघटन कहलाता है। उदाहरणार्थ- गलित सोडियम क्लोराइड में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह सोडियम और क्लोरीन में अपघटित हो जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 37

प्रश्न15.
फैराडे का विद्युत अपघटन का प्रथम नियम लिखिए। (2017)
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “विद्युत अपघटन की प्रक्रिया में किसी इलेक्ट्रोड विशेष पर मुक्त (अथवा एकत्रित) पदार्थ का द्रव्यमान विलयन में प्रवाहित की गई विद्युत की मात्रा (कुल आवेश) के समानुपाती होता है।”

प्रश्न16.
फैराडे का विद्युत अपघटन का द्वितीय नियम लिखिए। (2016, 17)
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “जब श्रेणीक्रम में जुड़े विभिन्न विद्युत अपघट्यों के विलयनों में समान मात्रा में विद्युत प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोडों पर मुक्त (या एकत्रित) पदार्थों के द्रव्यमान उनके तुल्यांक भारों के समानुपाती होते हैं।’
अर्थात्  W1 ∝ E1 W2 ∝ E2, [latex s=2]\frac { { W }_{ 1 } }{ { E }_{ 1 } } [/latex] = [latex s=2]\frac { { W }_{ 2 } }{ { E }_{ 1=2 } } [/latex] = [latex s=2]\frac { { W }_{ 3 } }{ { E }_{ 3 } } [/latex]

प्रश्न17.
विद्युत लेपन को उदाहरण द्वारा संक्षेप में समझाइए। (2014)
उत्तर
विद्युत अपघटन द्वारा कम सक्रिय धातु की कलई अधिक सक्रिय धातु पर चढ़ाई जाती है। इस प्रक्रिया को विद्युत लेपन कहते हैं। धातुओं की होने वाली अवांछनीय संक्षारण क्रिया को विद्युत लेपन द्वारा रोका जाता है।
उदाहरणार्थ– लोहे की चादर पर जिंक या टिन का लेप किया जाता है। क्योंकि जिंक या टिन की सक्रियता लोहे से कम है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विद्युत अपघटनी सेल तथा गैल्वेनी सेल में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2014, 15, 17)
उत्तर
विद्युत अपघटनी सेल तथा गैल्वेनी सेल में निम्न अन्तर हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 38

प्रश्न 2.
इलेक्ट्रोड विभव किसे कहते हैं? इसका मान किन-किन कारकों पर निर्भर करता है? (2012, 15)
उत्तर
जब किसी धातु (इलेक्ट्रोड) को उसी धातु के किसी लवण विलयन में रखा जाता है तो धातु तथा विलयन के सम्पर्क स्थल पर वैद्युत द्विक-स्तर (electrical double layer) उत्पन्न हो जाता है जिसके फलस्वरूप धातु तथा विलयन के मध्य विभवान्तर उत्पन्न हो जाता है जिसे (UPBoardSolutions.com) इलेक्ट्रोड विभव (electrode potential) कहते हैं। इसे E° से प्रकट करते हैं और इसे वोल्ट में मापा जाता है। उदाहरणार्थ-जब कॉपर की छड़, कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोई जाती है तो कॉपर की छड़, विलयन के सापेक्ष ऋणावेशित हो जाती है जिससे कॉपर धातु और कॉपर आयनों के मध्य विभवान्तर उत्पन्न हो जाता है।
Cu (s) [latex s=2]\rightleftharpoons [/latex] Cu2+ + 2e
इस विभवान्तर को कॉपर इलेक्ट्रोड का विभव कहते हैं।
इलेक्ट्रोड विभव निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है –

  1. चालक की प्रकृति – जिस इलेक्ट्रोड की चालकता अधिक होगी वह उतना ही अधिक इलेक्ट्रोड विभवे उत्पन्न करता है।
  2. धात्विक आयन की विलयन में सान्द्रता – सान्द्रता बढ़ाने पर इलेक्ट्रोड विभव को मान घटता है, क्योंकि सान्द्रता बढ़ाने पर आयनन घट जाता है, फलस्वरूप चालकता कम हो जाती है।
  3. तापक्रम – इलेक्ट्रोड विभव का मान ताप पर भी निर्भर करता है जो ताप बढ़ाने पर आयनन बढ़ जाने के कारण बढ़ता है।

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प्रश्न 3.
मानक इलेक्ट्रोड विभव क्या है? इलेक्ट्रोड विभव (E) और मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) में सम्बन्ध लिखिए। (2016)
या
टिप्पणी लिखिए-नेर्नस्ट समीकरण। (2015, 16, 17)
उत्तर
मानकं इलेक्ट्रोड विभव – किसी धातु की छड़ को 25°C पर एक मोलर धातु आयन सान्द्रता के विलयन में डुबोने पर धातु और विलयन के मध्य जो विभवान्तर उत्पन्न होता है उसे धातु का मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) कहते हैं।
इलेक्ट्रोड विभव (E) और मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) में सम्बन्ध
माना एक इलेक्ट्रोड अभिक्रिया इस प्रकार है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 39
नेर्नस्ट के अनुसार, किसी ताप T पर धातु इलेक्ट्रोड M| Mn+ के विभव E और विलयन में धातु आयनों की सान्द्रता [Mn+] में निम्नलिखित सम्बन्ध होता है,
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 40

इसे नेर्नस्ट समीकरण भी कहते हैं।
जहाँ E° धातु का मानक इलेक्ट्रोड विभव (वोल्ट में), R गैस नियतांक (R= 8.312 JK-1 mol-1), T परम ताप (केल्विन में), F फैराडे नियतांक (F = 96,485 C mol-1), n इलेक्ट्रोड अभिक्रिया में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉनों के मोलों की संख्या तथा [Mn+] विलयन में धातु आयनों की सक्रियता (activity) अथवा मोल प्रति लीटर में व्यक्त सान्द्रता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित सेल के विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए – (2017)
Cu | Cu++ (1M) | Ag+ (1M) | Ag
दिया है : E° Cu2+ | Cu= + 0.34 volt
E° Ag+ | Ag = + 0.80 volt
हल
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 41

प्रश्न 5.
निम्नलिखित सेल का e.m.f. निकालिए। यह भी बताइए कि कौन-सा इलेक्ट्रोड धन ध्रुव और कौन-सा ऋण ध्रुव है? सेल में होने वाली अर्द्ध अभिक्रियाएँ और पूर्ण अभिक्रियाएँ लिखिए – (2015)
Ni | Ni++ (0.1M) || Ag+ (0.1M) | Ag
E° Ni++ | Ni=- 0.25 v और E° Ag+ | Ag= + 0.80 V
हल
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 42
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 43

प्रश्न 6.
वैद्युत रासायनिक श्रेणी किसे कहते हैं? इसके प्रमुख लक्षण तथा दो प्रमुख उपयोग लिखिए। (2009, 10, 12, 14, 16, 17)
उत्तर
वैद्युत रासायनिक श्रेणी–विभिन्न धातुओं तथा अधातुओं के मानक इलेक्ट्रोड विभवों (अपचयन विभव) को बढ़ते हुए क्रम में रखने पर जो श्रेणी प्राप्त होती है, उसे वैद्युत रासायनिक श्रेणी कहते हैं।
वैद्युत रासायनिक श्रेणी के लक्षण

  1. श्रेणी में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर तत्त्वों की अपचयन क्षमता घटती है, जबकि नीचे से ऊपर जाने पर अपचयन क्षमता बढ़ती है।
  2. हाइड्रोजन से ऊपर के सभी तत्त्व अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं, जबकि नीचे वाले तत्त्व अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करते।
  3. हाइड्रोजन से ऊपर के सभी तत्त्व जल या भाप के साथ क्रिया करके H, गैस देते हैं।
  4. जिस तत्त्व का अपचयन विभव जितना अधिक होता है, वह उतना ही प्रबल ऑक्सीकारक होता है।
  5. जिस तत्त्व का अपचयन विभव जितना कम होता है, वह उतना ही प्रबल अपचायक होता है।
  6. श्रेणी का ऊपर वाला तत्त्व नीचे वाले तत्त्व को उसके विलयन से विस्थापित कर देता है।

उपयोग – वैद्युत रासायनिक श्रेणी के दो उपयोग निम्नवत् हैं –

  1. किसी सेल के मानक वैद्युत वाहक बल का निर्धारण करने में,
  2. धातुओं की क्रियाशीलता की तुलना करने में।

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प्रश्न 7.
गरम करने पर HgO अपघटित हो जाता है परन्तु MgO नहीं। क्यों? (2017)
उत्तर
जो धातु विद्युत रासायनिक श्रेणी में Cu से नीचे हैं उनके ऑक्साइड कम स्थायी होते हैं और वे गर्म करने पर आसानी से अपघटित हो जाते हैं।
2HgO [latex s=2]\underrightarrow { \triangle } [/latex] 2Hg + O2
MgO [latex s=2]\underrightarrow { \triangle } [/latex] कोई विघटन नहीं

प्रश्न 8.
निम्नलिखित को कारण सहित समझाइए –

  1. क्लोरीन KI विलयन से I2 को विस्थापित कर देती है परन्तु I2, KBr विलयन से ब्रोमीन को विस्थापित नहीं करती है। क्यों ? (2017)
  2. Hg+ H2SO4 → HgSO4 + H2

उपर्युक्त अभिक्रिया सम्भव नहीं है। (2017)
उत्तर
1. Cl2 की ऑक्सीकारक क्षमता आयोडीन से अधिक है इसलिए Cl2 KI विलयन से आयोडीन को विस्थापित कर देती है।
2KI + Cl2 → 2KCl + I2
I2 की ऑक्सीकारक क्षमता ब्रोमीन से कम है इसलिए I2, KBr विलयन से ब्रोमीन को विस्थापित नहीं कर पाती है।
2KBr + I2 → कोई अभिक्रिया नहीं

2. Hg विद्युत रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे है इसलिए Hg, H2SO4 से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर पाती है।
Hg+ H2SO4 → कोई अभिक्रिया नहीं

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प्रश्न 9.
कोलराउश के नियम की सहायता से आप ऐसीटिक अम्ल की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता किस प्रकार ज्ञात करेंगे? (2014, 15)
उत्तर
कोलराउश के नियम की सहायता से किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता का निर्धारण आसानी से किया जा सकता है। जैसे- CH3COOH के लिए Δm का मान निम्न प्रकार से प्राप्त किया जा सकता है –
कोलराउश के नियम के अनुसार,
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 44
यदि H+ आयन तथा CH3COO आयन के लिए अनन्त तनुता पर मोलर चालकताओं के मान ज्ञात हैं। तो उपर्युक्त समीकरण की सहायता से CH3COOH के लिए Δm का मान आसानी से ज्ञात किया जा सकता है। यदि आयनिक चालकताएँ ज्ञात नहीं हैं तो निम्न परोक्ष विधि का प्रयोग किया जाता हैपरोक्ष विधि में तीन (या अधिक) ऐसे प्रबल विद्युत अपघट्यों का चुनाव किया जाता है जिनके Δm के मानों (UPBoardSolutions.com) के योग/अन्तर से विचाराधीन दुर्बल विद्युत अपघट्य के Δm का मान प्राप्त किया जा सके जैसे- CH3COOH के Δm के मान को निर्धारित करने के लिए HCl, CH3COONa तथा NaCl का चुनाव किया जाता है और इनके Δm के मानों को बहिर्वेशन विधि द्वारा ज्ञात कर लिया जाता है। कोलराउश के नियम के अनुसार,
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 3 Electro Chemistry image 45

प्रश्न 10.
क्या कारण है कि गलित कैल्शियम हाइड्राइड का विद्युत अपघटन करने पर हाइड्रोजन ऐनोड पर मुक्त होती है? समझाइए। (2017)
उत्तर
गलित CaH2 में हाइड्रोजन हाइड्राइड आयन H के रूप में रहता है और विद्युत अपघटन करने पर H को ऑक्सीकरण होता है।
CaH2 → Ca2+ + 2H
2H → H2 +2e (ऐनोड)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न सेलों की संरचना तथा कार्य प्रणाली का वर्णन कीजिए

  1. शुष्क सेल तथा
  2. मर्करी सेल। (2014)

उत्तर
1. शुष्क सेल – यह सबसे अधिक प्रयोग किए जाने वाला प्राथमिक व्यापारिक सेल है। एक सामान्य शुष्क सेल को संलग्न चित्र में दर्शाया गया है। इसमें जिंक धातु से बना एक पात्र होता है जो ऐनोड का कार्य करता है। MnO2 + C चूर्ण से घिरी एक ग्रेफाइट छड़ कैथोड का कार्य करती है। जिंक पात्र (UPBoardSolutions.com) तथा ग्रेफाइट छड़ के मध्य के रिक्त स्थान में NH4Cl तथा ZnCl2 का एक नम पेस्ट भरा रहता है। जिंक पात्र के चारों ओर गत्ते का आवरण चढ़ा रहता है। सेल के ऊपरी सिरे को मोम अथवा पिच (pitch) से सील कर दिया जाता है।
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इस सेल में जटिल रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं।
इन अभिक्रियाओं को सरल रूप में निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है-
ऐनोड पर–  Zn(s) → Zn2+ + 2e
कैथोड पर– MnO2 + NH+4 +e → MnO(OH) + NH3

ऐनोड पर जिंक ऑक्सीकृत होकर Zn2+ आयनों में परिवर्तित होता है। कैथोड पर मैंगनीज +4 अवस्था से +3 ऑक्सीकरण अवस्था में अपचयित होता है। कैथोड अभिक्रिया में उत्पन्न अमोनिया ऐनोडिक अभिक्रिया में उत्पन्न Zn2+ आयनों से संयोग कर Zn(NH3)+4 आयनों का निर्माण करती है। Zn2+ आयनों के NH3 अणुओं द्वारा जटिलीकरण के कारण मुक्त Zn2+ आयनों की सान्द्रता घट जाती है। जिससे सेल की वोल्टता (voltage) में वृद्धि होती है।

शुष्क सेल का विभव लगभग 1.25 – 1.5 V होता है। इन सेलों की आयु अधिक नहीं होती है क्योंकि सेल में प्रयुक्त NH4Cl अम्लीय प्रकृति का होता है और प्रयोग में न लेने की अवस्था में भी जिंक पात्र का संक्षारण (corrosion) करता रहता है। यह एक प्राथमिक सेल है तथा इसे पुनः आवेशित करना सम्भव नहीं है।

(ii) मर्करी सेल – मर्करी सेल एक विशेष प्रकार का शुष्क सेल है जिसका उपयोग प्राय: घड़ी, कैमरा आदि छोटे यन्त्रों में ऊर्जा स्रोत के रूप में किया जाता है।
मर्करी सेल में जिंक-मर्करी अमलगम ऐनोड के रूप में कार्य करता है। मरक्यूरिक ऑक्साइड (HgO) तथा कार्बन का एक पेस्ट कैथोड का कार्य करता है। पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO) के एक पेस्ट को विद्युत अपघट्य के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। सेल में निम्न अभिक्रियाएँ होती हैं –
ऐनोड पर – Zn (amalgam) + 2OH → ZnO(s) + H20+ 2e
कैथोड पर – HgO(s) + H2O+ 2e → Hg(l) + 2OH
नेट सेल अभिक्रिया –
Zn(amalgam) + HgO(s) → ZnO(s) + Hg(l)

इस सेल की सेल अभिक्रिया में विलयन में उपस्थित कोई ऐसा आयन निहित नहीं है जिसकी सान्द्रता में परिवर्तन हो सकता हो। इस कारण इस सेल का सेल विभव केवल प्रयोग की अवधि में ही नहीं अपितु इसके सम्पूर्ण कार्यकाल में स्थिर रहता है। इसका सेल विभव लगभग 1.35 V है।

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प्रश्न 2.
एक लेड संचायक बैटरी की संरचना तथा कार्य प्रणाली का वर्णन कीजिए। इस बैटरी के पुनः आवेशन में निहित अभिक्रियाओं को लिखिए।
या
किसी व्यापारिक सेल का वर्णन कीजिए। (2015)
या
सीसा संचायक सेल का संक्षिप्त वर्णन करते हुए इसके ऐनोड और कैथोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ लिखिए। (2018)
उत्तर
लेड संचायक बैटरी – यह सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली संचायक बैटरी है। इसका उपयोग सभी स्वचालित वाहनों, जैसे-कार, बस आदि में तथा घरेलू ऊर्जा स्रोतों (power inverters) में किया जाता है। इसमें अनेक लेड संचायक सेल (lead storage cells) श्रेणीक्रम में व्यवस्थित होते हैं।
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एक लेड संचायक सेल वास्तव में एक गैल्वेनिक सेल है जिसमें ऐनोड सूक्ष्म वितरित स्पंजी लेड (finely divided spongy lead) से पैक की गई लेड (या लेड-ऐन्टीमनी मिश्र धातु) की एक जाली का बना होता है, जबकि कैथोड लेड डाइऑक्साइड (PbO2) की एक परत युक्त (UPBoardSolutions.com) एक लेड की जाली का बना होता है। विद्युत अपघट्य के रूप में सल्फ्यूरिक अम्ल के एक तनु विलयन (लगभग 38% द्रव्यमानानुसार) का प्रयोग किया जाता है जिसका विशिष्ट घनत्व (specific gravity) 1.3 g cm होता है। एक संचायक सेल का सेल विभव 2 वोल्ट होता है।

लेड संचायक बैटरी बनाने के लिए अनेक लेड संचायक सेलों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। सेल विभव (emf) 12 V प्राप्त करने के लिए 6 सेलों को तथा सेल विभव 24 V प्राप्त करने के लिए 12 सेलों को श्रेणीक्रम में जोड़ने की आवश्यकता होती है। एक लेड संचायक बैटरी में ऐनोड तथा कैथोड़ प्लेटें (जिन्हें ग्रिड (grids) कहा जाता है। एकान्तर रूप में व्यवस्थित होती हैं तथा सल्फ्यूरिक अम्ल के 38% विलयन में डूबी रहती हैं। ऐनोडों तथा कैथोडों को एक-दूसरे से पृथक् करने के लिए कुचालक पदार्थ से बने पृथक्कारकों (separators) को प्रयोग किया जाता है। ऐलोड तथा कैथोड प्लेटें पृथक् रूप से एक-दूसरे से जोड़ दी जाती हैं। इससे इलेक्ट्रोडों के पृष्ठ क्षेत्रफल में वृद्धि होती है तथा बैटरी की विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो जाती है।

बैटरी में स्थित प्रत्येक सेल में निम्न इलेक्ट्रोड अभिक्रियाएँ होती हैं –
ऐनोड पर : Pb(s) + SO2-4(aq) → PbSO4 (5) + 2e
कैथोड पर : PbO2 (s) + SO2-4 (aq) + 4H+ (aq) + 2e → PbSO4 (s) + 2H2O
शुद्ध सेल अभिक्रिया :
Pb (s) + PbO2 (s) + 4H+ (aq) + 2SO2-4 (aq) → 2PbSO4 (s) + 2H2O
उपर्युक्त अभिक्रियाओं से स्पष्ट है कि सेल (बैटरी) से विद्युत-धारा ग्रहण करने की प्रक्रिया (discharging of the cell) में सल्फ्यूरिक अम्ल का उपभोग होता है और इस कारण सेल में उपस्थित सल्फ्यूरिक अम्ल तनु हो जाता है एवं इसका विशिष्ट घनत्व कम हो जाता है। (UPBoardSolutions.com) दोनों प्रकार के इलेक्ट्रोडों पर PbSO4 का सफेद अवक्षेप जमा हो जाता है। जब सल्फ्यूरिक अम्ल का विशिष्ट घनत्व
1.2 g cm-3 से कम हो जाता है तथा दोनों प्रकार के इलेक्ट्रोड PbSO4 से आच्छादित हो जाते हैं तो सेल अभिक्रिया रुक जाती है। ऐसे सेल (बैटरी) को निरावेशित (discharged) कहा जाता है। इस स्थिति में सेल (बैटरी) को पुनः आवेशित करने की आवश्यकता होती है।

पुनः आवेशन—निरावेशित लेड संचायक सेल (बैटरी) को विपरीत दिशा में किसी बाह्य स्रोत से दिष्ट धारा (D.C.) प्रवाहित कर पुनः आवेशित किया जा सकता है। इसके लिए संचायक सेल (बैटरी) के ऋणात्मक इलेक्ट्रोड टर्मिनल को एक दिष्ट धारा स्रोत के ऋणात्मक से तथा सेल (बैटरी) के धनात्मक इलेक्ट्रोड को स्रोत के धनात्मक टर्मिनल से जोड़ा जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड
अभिक्रियाएँ उत्क्रमित हो जाती हैं जिससे PbSO4 ऋणात्मक इलेक्ट्रोड पर Pb में तथा धनात्मक इलेक्ट्रोड पर PbO2 में परिवर्तित हो जाता है। पुनः आवेशन के समय निम्न अभिक्रियाएँ होती हैं –

ऐनोड पर – PbSO4 (5) + 2e → Pb(s) + SO2-4 (aq)
कैथोड पर – PbSO4 (s) + 2H2O → PbO2(s) + 4H+ (aq) + SO4 (aq) + 2e
शुद्ध आवेशन अभिक्रिया
2PbSO4 (s) + 2H2O [latex s=2]\underrightarrow { Charging } [/latex] Pb(s) + PbO2(s) + 4H+ (aq) + 2SO2-4 (aq)
उपर्युक्त अभिक्रियाओं से स्पष्ट है कि सेल (बैटरी) की पुन: आवेशन प्रक्रिया में इलेक्ट्रोड पदार्थ अपने मूल रूप में पुनः प्राप्त हो जाते हैं तथा H+ एवं SO2-4 आयनों के निर्माण (UPBoardSolutions.com) के कारण H2SO4 के विशिष्ट घनत्व में वृद्धि होती है और यह बढ़कर पुनः 1.3 g cm-3 हो जाता है। इस प्रकार सेल (बैटरी) पुनः विद्युत धारा को उत्पन्न करने में सक्षम हो जाती है और इसे पुन: उपयोग में लाया जा सकता है।

प्रश्न 3.
संक्षारण क्या है और यह किन कारकों पर निर्भर करता है? इसे एक विद्युत रासायनिक घटना क्यों माना जाता है? (2015)
या
लोहे पर जंग लगने से क्या तात्पर्य है? किन परिस्थितियों में लोहे पर जंग लगती है? जंग लगने की क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
या
लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए प्रयुक्त कुछ प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।
या
संक्षारण से आप क्या समझते हैं? इसे प्रेरित करने वाले मुख्य कारकों का वर्णन कीजिए।
या
धातुओं के बलिदानी रक्षण का क्या अभिप्राय है और इसे कैसे सम्पन्न किया जाता है?
या
कैथोडिक रक्षण से आप क्या समझते हैं? यह किस प्रकार लोहे को जंग लगने से बचाता है?
उत्तर
संक्षारण – जब एक धातु को किसी विशिष्ट वातावरण में रखा जाता है तो वह वातावरण से क्रिया कर सकती है जिसके फलस्वरूप उसकी सतह कलुषित (deteriorate) हो सकती है। इस घटना को संक्षारण (corrosion) कहते हैं।

अधिकांश धातुएँ वायुमण्डल में रखे जाने पर किसी न किसी रूप में प्रभावित होती हैं। वायुमण्डल में उपस्थित गैसें धातु से मन्द गति से क्रिया कर उसकी सतह को कलुषित कर देती हैं। इससे धातुएँ अपनी विशिष्ट चमक खो देती हैं। कुछ धातुओं की शक्ति कम हो जाती है और वे दुर्बल तथा भंगुर (UPBoardSolutions.com) (brittle) । हो जाती हैं। चाँदी की चमक का कम होना (tarnishing of silver), लोहे पर जंग लगना (rusting on iron), ताँबे या कॉसे पर हरी परत का जमा होना आदि संक्षारण के कुछ सामान्य उदाहरण हैं। संक्षारण को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है –
किसी निश्चित वातावरण की मन्द किन्तु स्वतः प्रवर्तित क्रिया द्वारा धातुओं की सतह के कलुषित (deteriorate) होने की प्रक्रिया को संक्षारण कहा जाता है।

संक्षारण को प्रभावित करने वाले कारक
धातुओं का संक्षारण अनेक कारकों पर निर्भर करता है। इनमें से कुछ प्रमुख कारक निम्न हैं –
1. धातु की क्रियाशीलता – अधिक क्रियाशील धातु के संक्षारण की सम्भावना किसी अन्य कम क्रियाशील धातु की तुलना में अधिक होती है। उदाहरणार्थ- लोहा अपने से कम क्रियाशील धातु चाँदी की तुलना में अधिक तेजी से संक्षारित होता है। किसी धातु की क्रियाशीलता उसकी विद्युत धनात्मक प्रकृति पर निर्भर करती है। धातु की विद्युत धनात्मक प्रकृति जितनी अधिक होगी, वह उतनी ही अधिक क्रियाशील होगी। इस प्रकार धातुएँ जैसे-Na, Ca, Mg, Al, Zn आदि शीघ्रता से संक्षारित होती हैं।

2. धातु में अशुद्धियों की उपस्थिति – शुद्ध धातुएँ प्राय: अधिक संक्षारित नहीं होती हैं। एक धातु में अन्य अशुद्ध धातुओं की उपस्थिति उस धातु में संक्षारण को प्रेरित करती है। इसका कारण यह है कि कम विद्युत धनात्मक अशुद्ध धातुएँ ग्राही धातु के साथ गैल्वेनिक सेलों का निर्माण करती हैं जिससे ग्राही धातु संक्षारित हो जाती है।

3. जल में विद्युत अपघट्यों की उपस्थिति – जल में विद्युत अपघट्य पदार्थों की उपस्थिति संक्षारण की दर में वृद्धि करती है। उदाहरणार्थ-लोहे का संक्षारण आसुत जल की (UPBoardSolutions.com) तुलना में समुद्री जल में अधिक सीमा तक होता है, क्योंकि समुद्री जल में अनेक विद्युत अपघट्य जैसे NaCl, KCl आदि घुले रहते हैं।

4. वायु में क्रियाशील गैसों की उपस्थिति – वायु में उपस्थित क्रियाशील गैसें; जैसे- CO2 , SO2, NO2 आदि जल में घुलकर अम्लों का निर्माण करती हैं, जो विद्युत-अपघट्यों का कार्य करते हैं एवं संक्षारण प्रक्रिया को त्वरित करते हैं।

लोहे पर जंग लगना – जब लोहे के एक टुकड़े को नम वायु में खुला रखा जाता है, तो उसकी सतह पर एक लाल-भूरी (reddish brown) परत बन जाती है। इस परत को आसानी से खुरचा जा सकता है। नम वायु की क्रिया द्वारा लोहे की सतह पर एक लाल-भूरी परत के जमा होने की प्रक्रिया को जंग लगना कहते हैं तथा लाल-भूरी परत को जंग कहा जाता है।

लोहे पर जंग लगना वास्तव में वायु, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड की लोहे से संयुक्त अभिक्रिया के कारण होता है। पूर्णरूप से शुष्क वायु या वायु मुक्त शुद्ध जल में (UPBoardSolutions.com) लोहे पर जंग नहीं लगती है। जंग की सही संरचना वायुमण्डलीय परिस्थितियों तथा जंग को प्रेरित करने वाले कारकों के सापेक्ष योगदान पर निर्भर करती है। यह मुख्य रूप से जलयोजित फैरिक ऑक्साइड Fe2O3.xH2O है। इसके निर्माण को सरल रूप में निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है –
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जंग लगने की प्रक्रिया में नम वायु की उपस्थिति में सर्वप्रथम लोहे की बाहरी सतह जंग ग्रस्त होती है। और सतह पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (जंग) की एक परत जमा हो जाती है। यह परत मुलायम तथा सरन्ध्र होती है और मोटाई बढ़ने पर स्वयं नीचे गिर सकती है। परत के नीचे गिरने से लोहे की आन्तरिक परत वायुमण्डल के सम्पर्क में आ जाती है और उस पर भी जंग लग जाती है। इस प्रकार यह प्रक्रम चलता रहता है और धीरे-धीरे लोहा अपनी शक्ति खोता रहता है।
लोहे पर जंग लगने की प्रक्रिया निम्नलिखित कारकों से प्रेरित तथा अधिशासित होती है –

  1. वायु की उपस्थिति
  2. नमी की उपस्थिति
  3. कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति
  4. जल में विद्युत अपघट्यों की उपस्थिति
  5. लोहे में कम विद्युत धनात्मक धातुओं की अशुद्धि के रूप में उपस्थिति

संक्षारण की क्रियाविधि – संक्षारण की क्रियाविधि की व्याख्या करने के लिए समय-समय पर अनेक सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया है। इन सिद्धान्तों में विद्युत रासायनिक सिद्धान्त (electrochemical theory) सर्वाधिक मान्य है।

विद्युत रासायनिक सिद्धान्त के अनुसार, संक्षारण मूल रूप से एक विद्युत रासायनिक घटना है। यह मुख्य रूप से धातु सतह के विभिन्न भागों के विद्युत रासायनिक व्यवहारों में भिन्नता के कारण सम्पन्न होती है। लोहे पर जंग लगना संक्षारण का एक विशिष्ट रूप है। विद्युत रासायनिक सिद्धान्त के आधार पर संक्षारण की क्रियाविधि को लोहे पर जंग लगने के उदाहरण से निम्न प्रकार से आसानी से समझा जा (UPBoardSolutions.com) सकता है। लोहे पर जंग लगने की क्रियाविधि-लोहे का संक्षारण उस समय होता है जब इसे जल, घुलित ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वातावरण में रखा जाता है। विद्युत रासायनिक सिद्धान्त के अनुसार, लोहे की सतह के रासायनिक रूप से भिन्न भाग घुलित ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड युक्त जल की उपस्थिति में लघु गैल्वेनिक सेलों (miniature galvanic cells) की भाँति व्यवहार करते हैं। सतह का एक भाग ऐनोड की भाँति तथा कोई अन्य भाग कैथोड की भाँति कार्य करता है। इसके फलस्वरूप ऐनोडिक क्षेत्र (anodic area) में ऑक्सीकरण की क्रिया सम्पन्न होती है और आयरन परमाणु Fe2+ आयनों में ऑक्सीकृत हो जाते हैं।
ऐनोडिक क्षेत्र में
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इस प्रकार मुक्त इलेक्ट्रॉन धातु माध्यम में गति कर कैथोडिक क्षेत्र में पहुँच जाते हैं। कैथोडिक क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन H+ आयनों की उपस्थिति में ऑक्सीजन को अपचयित करते हैं। H’ आयनों का निर्माण जल परत में H2CO3 के वियोजन के कारण होता है जो CO2 के जल में घुलने से प्राप्त होता है।
जल परत में– H2O(l) + CO2 (g) → H2CO3 (aq)
H2CO3 (aq) [latex s=2]\rightleftharpoons [/latex] H+ (aq) + HCO3 (aq)

कैथोडिक क्षेत्र में – O2 (g) + 4H+ (aq) + 4e → 2H2O (l); E° = 1.23 V
इस प्रकार लोहे की सतह पर स्थित एक लघु गैल्वेनिक सेल में सम्पन्न होने वाली नेट अभिक्रिया को निम्न प्रकार से प्राप्त किया जा सकता है –

ऐनोड पर – [Fe(s) → Fe2+ (aq) + 2e ] x 2
कैथोड पर – O2 (g) + 4H+ (aq) +4e → 2H2O(l)
नेट अभिक्रिया
2Fe(s) + O2(g) + 4H+ (aq) → 2Fe2+ (aq) + 2H2O(l); E° cell = 1.67 V

उपर्युक्त अभिक्रिया में निर्मित Fe2+ आयन लोहे की सतह पर स्थित जल परत में गति करने लगते हैं। यदि जल परत में NaCl, MgCl2 आदि विद्युत अपघट्य उपस्थित हैं तो लघु सेल में अधिक विद्युत धारा का संचालन होता है तथा जंग लगने की प्रक्रिया तीव्र हो जाती है।
एक लघु गैल्वेनिक सेल में निर्मित Fe2+ आयन वायुमण्डलीय ऑक्सीजन द्वारा Fe3+ आयनों में ऑक्सीकृत हो जाते हैं तथा वायुमण्डलीय ऑक्सीजन एवं नमी से संयोग कर जलयोजित आयरन (III) ऑक्साइड (Fe2O3 . xH2O) का निर्माण करते हैं जो लोहे की सतह पर जंग के रूप में जमा हो जाता है।
4Fe2+ (aq) + O2 (g) + 4H2O(l)-→ 2Fe2O3 (s) + 8H+
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उपर्युक्त अभिक्रिया में उत्पन्न हुए H+ ओयन जंग लगने की प्रक्रिया में पुन: उपभोगित हो जाते हैं। यदि लोहे में कम विद्युत धनात्मक धातुएँ अशुद्धि के रूप में उपस्थित हैं तो जंग लगने की प्रक्रिया त्वरित हो जाती है क्योकि अशुद्धियाँ लोहे की सतह पर अनेक लघु गैल्वेनिक सेलों का निर्माण (UPBoardSolutions.com) करती हैं। अत्यन्त शुद्ध लोहे पर शीघ्रता से जंग नहीं लगती है। जल में विद्युत अपघट्यों की उपस्थिति जंग प्रक्रिया को त्वरित करती है क्योंकि अपघट्य लोहे की सतह पर उपस्थित जल परत की विद्युत चालकता में वृद्धि करते हैं। यही कारण है कि आसुत जल की तुलना में समुद्री जल में लोहे पर अधिक तेजी से जंग लगती है।

संक्षारण से बचाव – संक्षारण से बचाव की कुछ प्रमुख विधियाँ निम्न हैं –
1. अवरोध रक्षण – लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए इस विधि का काफी उपयोग किया जाता है। इस विधि में धातु सतह तथा वायुमण्डलीय वायु के मध्य एक उपयुक्त अवरोध का निर्माण किया जाता है! इससे धातु सतह वायु, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड की क्रिया से बची रहती है और संक्षारित नहीं होती है। अवरोध रक्षण निम्न में से किसी भी विधि द्वारा किया जा सकता है –

  1. धातु की सतह पर तेल या ग्रीस के लेपन द्वारा – लोहे की सतह पर तेल या ग्रीस (grease) की एक पतली फिल्म बनाकर उसे जंग लगने से बचाया जा सकता है। लोहे के औजारों तथा मशीनी भागों (machinery parts) को इसी प्रकार जंग लगने से बचाया जाता है।
  2. धातु सतह पर पेंट के लेपन द्वारा – धातु सतह पर किसी पेंट (paint), एनामिल (enamel) आदि का एक पतली परत के रूप में लेपन करने से धातु संक्षारित होने से बच जाती है।
  3. धातु पर कुछ विशिष्ट रसायनों के लेपन द्वारा – लोहे की सतह पर FePO4 या अन्य किसी उपयुक्त रसायन का लेप कर उसे जंग लगने से बचाया जा सकता है। रसायन की पतली अविलेय परत लोहे को वायु तथा नमी के सम्पर्क से बचाकर इस पर जंग नहीं लगने देती है।
  4. धातु पर असंक्षारणीय धातुओं की परत द्वारा – किसी असंक्षारणीय धातु; जैसे- निकिल, क्रोमियम आदि की एक पतली परत को किसी धातु पर चढ़ाकर भी उसकी संक्षारण से रक्षा की जा सकती है। जैसे, लोहे पर निकिल या क्रोमियम की एक पतली परत द्वारा लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है।

2. बलिदानी रक्षण – इस विधि में धातु का रक्षण उसकी सतह पर लेपित एक अन्य अधिक सक्रिय धातु के बलिदान द्वारा किया जाता है। जब एक धातु की सतह को एक अधिक सक्रिय धातु से आवृत कर दिया जाता है, तो अधिक सक्रिय धातु प्रथम धातु की तुलना में वरीयता से इलेक्ट्रॉन त्याग (UPBoardSolutions.com) कर आयनिक अवस्था में परिवर्तित होती रहती है। इससे अधिक सक्रिय धातु धीरे-धीरे उपभोगित होती रहती है और प्रथम धातु की संक्षारण से रक्षा करती है। जब तक अधिक सक्रिय धातु संक्षारणीय धातु की सतह पर स्थित होती है तब तक प्रथम धातु-संक्षारण से बची रहती है।

लोहे का गैल्वेनीकरण – जिंक लोहे से अधिक क्रियाशील (अधिक विद्युत धनात्मक) है, अत: जिंक का उपयोग प्राय: लोहे की सतह को आवृत करने के लिए किया जाता है। लोहे की सतह पर जिंक की एक पतली परत को जमा करने की प्रक्रिया को गैल्वेनीकरण कहा जाता है। गैल्वेनीकरण को निम्न दो प्रकार से सम्पन्न किया जा सकता है –

  1. लोहे को पिघले जिंक में डुबोकर – इस विधि में लोहे की चादरों को पिघले जिंक में डुबोया जाता है और इसके पश्चात् उन्हें गर्म रॉलरों (rollers) के मध्य से गुजारा जाता है, जिससे लोहे की चादर से चिपका अतिरिक्त जिंक हट जाता है और उस पर जिंक की एक समान पतली परत शेष रह जाती है।
  2. शेरार्डीकरण द्वारा – इस विधि में जिंक चूर्ण को उच्च ताप पर गर्म किया जाता है और प्राप्त जिंक वाष्प को लोहे की चादरों की सतह पर संघनित होने दिया जाता है, जिससे उन पर जिंक की एक
    पतली तथा एक समान परत जमा हो जाती है।

लोहे की सतह पर स्थित जिंक की परत के कारण लोहे की सतह वायु तथा नमी के सम्पर्क में नहीं आने पाती है। जिंक की परत में खरोंच अथवा दरारें उत्पन्न होने पर भी लोहे पर जंग नहीं लगती है। इसका कारण यह है कि जिंक का मानक अपचयन विभव लोहे के मानक अपचयन विभव से कम है। स्पष्ट है कि लोहे की तुलना में जिंक में ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति अधिक होती है। जिंक परत में दरार पड़ने (UPBoardSolutions.com) पर जिंक परत ऐनोड की भाँति तथा लोहे की खुली सतह कैथोड की भाँति कार्य करने लगती है। ऐनोड पर जिंक के ऑक्सीकरण में उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन आयरन कैथोड पर जाकर वायुमण्डलीय ऑक्सीजन को जल में अपचयित कर देते हैं। ऑक्सीकरण के कारण जिंक परत वायुमण्डलीय O2, CO2 तथा नमी की उपस्थिति में भास्मिक जिंक कार्बोनेट, ZnCO3, Zn(OH)2 में परिवर्तित हो जाती है। यह परत लोहे की खुली सतह को जंग लगने से बचाती है।

टिन द्वारा लोहे की रक्षण – लोहे की सतह पर टिन की एक पतली परत जमाकर भी उसकी जंग लगने से रक्षा की जा सकती है। लोहे की सतह को टिन की एक पतली परत से आवृत करने की प्रक्रिया को टिनिंग (tinning) कहा जाता है। टिनिंग द्वारा लोहा (आयरन) उस समय तक रक्षित रहता है जब तक कि टिन परत अक्षुण (intact) रहती है। यदि टिन परत में खरोंच या दरारें उत्पन्न हो जाती हैं तो लोहा आरक्षित हो जाता है और उस पर जंग लगना प्रारम्भ हो जाता है। इसका कारण यह है कि आयरन का मानक अपचयन विभव टिन से कम है।

इससे स्पष्ट है कि टिन की तुलना में आयरन में ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति अधिक होती है। अत: यदि टिन परत में दरार उत्पन्न हो जाती है तो सतह के खुले भाग में उपस्थित आयरन एक ऐनोड का तथा टिन परत एक कैथोड का कार्य करने लगती है। इसके फलस्वरूप आयरन वरीयता से ऑक्सीकृत होकर जंग ग्रस्त हो जाता है।

3. जंग-रोधी विलयनों द्वारा रक्षण – लोहे के संक्षारण को जंग-रोधी विलयनों द्वारा भी रोका जा सकता है। इस प्रकार के विलयन प्रायः क्षारीय फॉस्फेट या क्रोमेट विलयन होते हैं। विलयन का क्षारीय माध्यम H+ आयनों की उपलब्धता को कम करता है। चूंकि H+ आयन जंग लगने के लिए (UPBoardSolutions.com) अपरिहार्य हैं, अतः उनके कम होने से जंग लगने की प्रक्रिया मन्द हो जाती है। इसके अतिरिक्त फॉस्फेटों में धातु पर आयरन फॉस्फेट की एक परत का आवरण चढ़ाने की प्रवृत्ति होती है। यह परत धातु की जंग लगने से रक्षा करती है। इस प्रकार के विलयनों का प्रयोग स्वचालित वाहनों के इंजनों के भागों को तथा कार रेडियेटरों की जंग लगने से रक्षा करने के लिए किया जाता है।

4. कैथोडिक रक्षण या विद्युत रक्षण – इस विधि का उपयोग धरातल के नीचे दबे पाइपों तथा टैंकों के रक्षण के लिए किया जाता है। इस विधि में रक्षित की जाने वाली धातु को एक अधिक सक्रिय (अधिक विद्युत धनात्मक) धातु से जोड़ा जाता है।

धरातल के नीचे स्थित जिस लोहे के पाइप या टैंक की जंग लगने से रक्षा करनी होती है उसके निकट एक सक्रिय धातु जैसे Zn या Mg की एक प्लेट या ब्लॉक को रखा जाता है और दोनों को एक तार से जोड़ दिया जाता है। चूंकि अधिक सक्रिय धातु में ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति अधिक होती है। (UPBoardSolutions.com) अत: यह लोहे की तुलना में वरीयती से ऑक्सीकृत होती रहती है। इस प्रकार अधिक सक्रिय धातु एक ऐनोड का कार्य करती है। उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन कैथोड की भाँति कार्य कर रहे लोहे के पाइप पर जाकर O, को OH आयनों में अपचयित कर देते हैं।
O2 + 2H2O + 4e → 4OH
सक्रिय धातु के ऑक्सीकरण के कारण ऐनोड धीरे-धीरे लुप्त होता रहता है। इस प्रकार लोहे का पाइप या अन्य वस्तु जंग लगने से रक्षित रहती है और सक्रिय धातु ऐनोड व्यतित होता रहता है। जब तक सक्रिय धातु उपस्थित होती है, लोहे के पाइप पर जंग नहीं लगती है। इस विधि में समय-समय पर सक्रिय धातु के पुराने ऐनोड के स्थान पर नया ऐनोड स्थापित करना आवश्यक होता है।

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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming (रैखिक प्रोग्रामन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming (रैखिक प्रोग्रामन)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 12
Chapter Name Linear Programming
Exercise Ex 12.1, Ex 12.2
Number of Questions Solved 21
Category UP Board Solutions

Learn the procedure to solve the linear programming of the given constraints. Our free handy linear programming calculator tool is designed to help people who want to escape from mathematical calculations.

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming

प्रश्नावली 12.1

ग्राफीय विधि से निम्न रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं को हल कीजिए

प्रश्न 1.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = 3x + 4y का अधिकतमीकरण कीजिए।
x + y ≤ 4, x≥0, y≥0
हल-
दिये हुए असमीक़रणों को समीकरणों में बदलने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 1
x + y = 4
x = 0, y = 0
अब हम उपरोक्त रेखाओं के आलेख खींचते हैं। संलग्न चित्र में सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) OAB परिबद्ध है। सुसंगत क्षेत्र के कोनीय बिन्दु O(0,0), A(4,0), B(0, 4) हैं।
अब हम कोनीय बिन्दुओं पर उद्देशीय फलन Z का मान ज्ञात करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 2
अत: B(0, 4) पर Z अधिकतम है और अधिकतम मान 16 है।

प्रश्न 2.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = -3x + 4y का न्यूनतमीकरण कीजिए
x + 2y≤8
3x + 2y≤12
x≥0, y≥0
हल-
सर्वप्रथम हम रेखाओं x + 2y = 8 …(i)
3x + 2y = 12 …(ii)
x = 0 …(iii)
y = 0 …(iv)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 3
का आलेख खींचते हैं।
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) OABC परिबद्ध है। सुसंगत क्षेत्र के कोनीय बिन्दु O(0, 0), A (4, 0), B(2,3) और C(0, 4) हैं।
अब हम कोनीय बिन्दुओं पर उद्देशीय फलन Z का मान ज्ञात करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 4
अतः कोनीय बिन्दु A(4, 0) पर z का न्यूनतम मान = -12

प्रश्न 3.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = 5x + 3y का अधिकतमीकरण कीजिए।
3x + 5y≤15;
5x + 2y≤10; x≥0, y≥0
हल-
सर्वप्रथम हम रेखओं
3x + 5y = 15 …(i)
5x + 2y = 10 …(ii)
x = 0, …(iii)
y = 0 …(iv)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 5
का आलेख खींचते हैं।
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) OABC परिबद्ध है।
सुसंगत क्षेत्र के कोनीय बिन्दु
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प्रश्न 4.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = 3x + 5y का न्यूनतमीकरण कीजिए
x + 3y≥3; x + y≥2 x, y≥0
हल-
सर्वप्रथम हम रेखाओं
x + 3y = 3 …(i)
x + y = 2 …(ii)
x = 0 …(iii),
y = 0 ..(iv)
का आलेख खींचते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 7
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 8
प्रश्न 5.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = 3x + 2y का अधिकतमीकरण कीजिए
x + 2y≤10; 3x + y≤15; x, y≥0;
हल-
सर्वप्रथम निम्नलिखित रेखाओं
x + 2y = 10 …(i)
3x + y = 15 …(ii)
x = 0 …(iii)
y = 0 …(iv)
के आलेख खींचते हैं।
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र OABC (छायांकित) परिबद्ध है।
जिसके कोनीय बिन्दु O(0, 0), A(5,0), B(4, 3), C(0, 5) हैं।
अब हम कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 9
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 10
Z का अधिकतम मान कोनीय बिन्दु B (4, 3) पर है जोकि 18 है।

प्रश्न 6.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = x + 2y का न्यूनतमीकरण कीजिए
2x + y≥3; x + 2y≥6; x, y≥0
दिखाइए कि z का न्यूनतम मान दो बिन्दुओं से अधिक बिन्दुओं पर घटित होता है।
हल-
सर्वप्रथम निम्नलिखित रेखाओं
2x + y = 3 …(i)
x + 2y = 6 …(ii)
x = 0, …(iii)
y = 0 …(iv)
के आलेख खींचते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 11
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) अपरिबद्ध है।
जिसके कोनीय बिन्दु A(6, 0), B(0, 3) हैं।
अब हम कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 12
∴ बिन्दु A व B दोनों पर Z का न्यूनतम मान 6 है। अतः A व B को मिलाने वाली रेखा के प्रत्येक बिन्दु पर Z का मान न्यूनतम होगा।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित अवरोधों के अन्तर्गत Z = 5x + 10y का न्यूनतमीकरण तथा अधिकतमीकरण कीजिए
x + 2x≤120; x + y≥60; x – 2y≥0, x, y≥0
हल-
सर्वप्रथम हम निम्नलिखित रेखाओं
x + 2y = 120 …(i)
x + y = 60 …(ii)
x – 2y = 0 …(iii)
x = 0 …(iv)
y = 0 …(v)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 13
के आलेख खींचते हैं। स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) ADEC परिबद्ध है।
जिसके कोनीय बिन्दु हैं A (120, 0), D(60, 30), E(20, 40), C (60, 0)
कोनीय बिन्दुओं पर उद्देशीय फलन Z का मान ज्ञात करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 14
अत: C (60, 0) पर Z का न्यूनतम मान 300 है और A(120, 0) और D(60, 30) पर Z का अधिकतम मान 600 है अर्थात् AD के प्रत्येक बिन्दु पर Z का अधिकतम मान 600 है।

प्रश्न 8.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = x + 2y का न्यूनतमीकरण तथा अधिकतमीकरण कीजिए
x + 2y≥100; 2x – y≤0; 2x + y≤200; x, y≥0
हल-
सर्वप्रथम हम रेखाओं
x + 2y = 100 …(i)
2x – y = 0 …(ii)
2x + y = 200 …(iii)
x = 0, …(iv)
y = 0 …(v)
के आलेख खींचते हैं।
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) BCDE है जोकि परिबद्ध है।
जिसके कोनीय बिन्दु B(0, 50), C(0, 200), D(50, 100) और E(20, 40) हैं।
अब हम कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 15
अतः बिन्दु (0, 200) पर अधिकतम मान 400 है।
तथा बिन्दु B 0, 50) व E (20,40) पर Z का न्यूनतम मान 100 है।
अर्थात् (0, 50) और (20,40) को मिलाने वाले रेखाखण्ड के प्रत्येक बिन्दु पर Z का न्यूनतम मान 100 है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 16

प्रश्न 9.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = -x + 2y का अधिकतमीकरण कीजिए
x≥3; x + y≥5;
x + 2y≥6; y≥0
हल-
सर्वप्रथम हम रेखाओं
x = 3 …(i)
x + y = 5 …(ii)
x + 2y = 6 …(iii)
y = 0 …(iv)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 17
के आलेख खींचते हैं।
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) अपरिबद्ध है। जिसके कोनीय बिन्दु A (6,0), B (4, 1) और C(3, 2) हैं।
अब हम कोनीय बिन्दु पर Z का मान ज्ञात करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 18
सारणी से स्पष्ट है कि Z का अधिकतम मान बिन्दु (3, 2) पर है। परन्तु चूंकि क्षेत्र अपरिबद्ध है अतः z का यह मान अधिकतम हो सकता हैं और नहीं भी।
यह ज्ञात करने के लिए असमिका -x + 2y >1…(v) का आलेख खींचते हैं। आलेख द्वारा प्राप्त खुले अर्द्धतल व सुसंगत क्षेत्र में उभयनिष्ठ बिन्दु हैं। अतः Z का कोई अधिकतम मान सम्भव नहीं है।

प्रश्न 10.
निम्न अवरोधों के अन्तर्गत Z = x + y का अधिकतमीकरण कीजिए।
x – y≤ -1; – x + y≤0; x, y≥0
हल-
सर्वप्रथम हम निम्नलिखित रेखाओं
x – y = 1 …(i)
-x + y = 0 …(ii)
x = 0…(iii),
y = 0 …(iv)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 19
के आलेख खींचते हैं।
संलग्न चित्र से हम देखते हैं कि ऐसा कोई बिन्दु नहीं है जो । सभी अवरोधों को एक साथ सन्तुष्ट करे। अत: इस समस्या का कोई सुसंगत हल नहीं है।

प्रश्नावली 12.2

प्रश्न 1.
रश्मि दो प्रकार के भोज्य P और Q को इस प्रकार मिलाना चाहती है कि मिश्रण में विटामिन अवयवों में 8 मात्रक विटामिन A तथा 11 मात्रक विटामिन B हों। भोज्य P की लागत Rs 60/किग्रा और भोज्य Q की लागत Rs 80 किग्रा है। भोज्य P में 3 मात्रक/किग्रा विटामिन A और 5 मात्रक/kg विटामिन B है जबकि भोज्य Q में 4 मात्रक/किग्रा विटामिन A और 2 मात्रक/किग्रा विटामिन B है। मिश्रण की न्यूनतम लागत ज्ञात कीजिए।
हल-
माना मिश्रण में x किग्रा भोज्य P का और y किग्रा भोज्य B का है।
हम प्रदत्त आँकड़ों से निम्न सारणी बनाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 20
क्योंकि विटामिन A की न्यूनतम आवश्यकता 8 मात्रक है।
3x + 4y≥8
इसी प्रकार, विटामिन B की आवश्यकता 11 मात्रक है।
5x + 2y≥11
जबकि
x≥20, y≥0
1 किग्रा भोज्य P का क्रय मूल्य = Rs 60
1 किग्रा भोज्य Q का क्रय मूल्य = Rs 80
x किग्रा भोज्य P और y किग्रा भोज्य Q की कुल लागत Z = 60x + 80y
अतः समस्या को गणितीय रूप में निम्नलिखित रूप से व्यक्त किया सकता हैनिम्न व्यवरोधों के अन्तर्गत 3x + 42≥8 …..(i)
5x + 2y≥11 …..(ii)
x ≥ 0, y ≥ 0 …..(iii)
Z = 60x + 80y का न्यूनतमीकरण कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 21UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 22

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प्रश्न 2.
एक प्रकार के केक को 200 ग्राम आटा तथा 25 ग्राम वसा (Fat) की आवश्यकता होती है। तथा दूसरी प्रकार के केक के लिए 100 ग्राम आटा तथा 50 ग्राम वसा की आवश्यकता होती है। केकों की अधिकतम संख्या बताओं जो 5 किलो आटे तथा 1 किलो वसा से बना सकते हैं, यह मान लिया गया है कि केकों को बनाने के लिए अन्य पदार्थों की कमी नहीं रहेगी।
हल-
माना पहली प्रकार के केक x हैं और दूसरी प्रकार के केक y हैं।
दिये गये आँकड़ों से निम्न सारणी बनाते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 23
दी गई शर्तों के अनुसार, समस्या को इस प्रकार लिख सकते हैं
व्यवरोधों 200x + 100y ≤ 5000
अर्थात् 2x + y ≤ 50 …(i)
और 25x + 50y ≤ 1000
अर्थात् x + 2y ≤ 40 …(ii)
तथा x ≥ 0 …(iii) y ≥ 0 …(iv)
के अन्तर्गत Z = x + y का अधिकतम मान ज्ञात कीजिए।
उपरोक्त असमिकाओं की संगत समीकरणों की रेखाओं के आलेख खींचते हैं। चित्र से स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र OABC (परिबद्ध) है। जिसके कोनीय बिन्दु O(0, 0), A(25,0), B(20, 10) और C(0, 20) हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 24
अब हम कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 25
चूंकि B(20, 10) पर Z अधिकतम है अर्थात् 20 केक एक प्रकार के और 10 केक दूसरी प्रकार के बनाने होंगे, केकों की अधिकतम संख्या = 30 है।

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प्रश्न 3.
एक कारखाने में टेनिस के रैकेट तथा क्रिकेट के बल्ले बनते हैं। एक टेनिस रैकेट बनाने के लिए 1.5 घण्टा यांत्रिक समय तथा 3 घण्टे शिल्पकार का समय लगता है। एक किक्रेट बल्ले को तैयार करने में 3 घण्टे यांत्रिक समय तथा 1 घण्टा शिल्पकार का समय लगता है। एक दिन में कारखाने में विभिन्न यंत्रों पर उपलब्ध यांत्रिक समय के 42 घण्टे और शिल्पकार समय के 24 घण्टे से अधिक नहीं हैं।
(i) रैकेटों और बल्लों को कितनी संख्या में बनाया जाए ताकि कारखाना पूरी क्षमता से कार्य करें?
(ii) यदि रैकेट और बल्ले पर लाभ क्रमशः ३ 20 तथा १ 10 हों, तो कारखाने का अधिकतम लाभ ज्ञात कीजिए यदि कारखाना पूरी क्षमता से कार्य करे।
हल-
(i) माना रैकेट बनाने की संख्या = x और बल्ले बनाने की संख्या = y
दिये गये आँकड़ों से निम्न सारणी बनाते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 26
इसलिए हम इस रैखिक प्रोग्रामन समस्या को इस प्रकार लिख सकते हैं
Z = x + y का अधिकतम मान निकालें।
जबकि 1.5x + 3y ≤ 42
अर्थात् x + 2y ≤ 28 …(i)
3x + y ≤ 24 …(ii)
x ≥ 0 …(iii)
y ≥ 0 …(iv)
उपरोक्त असमिकाओं के संगत समीकरणों में बदलकर आलेख खींचते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 27
चित्र से स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र OABC (छायांकित) परिबद्ध है। जिसके कोनीय बिन्दु O(0, 0), A(8, 0), B(4, 12), C(0, 14) हैं।
अब हम कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 28
चूंकि B(4, 12) पर Z अधिकतम है।
इसलिए रैकेट की संख्या = 4; बल्लों की संख्या = 12

(ii) लाभ फलन P = 20x + 10y; लाभ अधिकतम है जब x = 4, y = 12
अधिकतम लाभ = 20 x 4 + 10 x 12 = 80 + 120 = Rs 200

प्रश्न 4.
एक निर्माणकर्ता नट और बोल्ट का निर्माण करता है। एक पैकेट नटों में निर्माण में मशीन A पर एक घण्टा और मशीन B पर 3 घण्टे काम करना पड़ता है, जबकि एक पैकेट बोल्ट के निर्माण में 3 घण्टे मशीन A पर और 1 घण्टा मशीन B पर काम करना पड़ता है। वह नटों से Rs 17.50 प्रति पैकेट और बोल्टों पर Rs 7.00 प्रति पैकेट लाभ कमाता है। यदि प्रतिदिन मशीनों का अधिकतम उपयोग 12 घण्टे किया जाए तो प्रत्येक (नट और बोल्ट) के कितने पैकेट उत्पादित किए जाएँ ताकि अधिकतम लाभ कमाया जा सके।
हल-
माना निर्माणकर्ता नट के x पैकेट तथा बोल्ट के y पैकेटों का निर्माण करता है।
तो निर्माणकर्ता को लाभ Z = Rs (17.5x + 7y)
अतः स्पष्ट है कि x≥0, y≥0
अब दिये गये आँकड़ों से निम्न सारणी बनाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 29
अत: निम्न व्यवरोध प्राप्त होते हैं।
x + 3y ≤ 12 मशीन A के लिए
3x + y ≤ 12 मशीन B के लिए
अत: गणितीय समस्या का सूत्रीकरण निम्नलिखित है
Z = Rs (17.5x + 7y) का अधिकतमीकरण कीजिए जबकि निम्नलिखित व्यवरोध हैं।
x + 3y ≤ 12 …(i)
3x + y ≤ 12 …(ii)
x ≥ 0,y ≥ 0 …(iii)
असमिकाओं (i) से (iii) तक के आलेखों द्वारा निर्धारित सुसंगत क्षेत्र चित्र में दर्शाया गया है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 30
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र परिबद्ध है।
अब हम कोनीय बिन्दुओं (0, 0), (4,0), (3, 3) और (0, 4) पर Z का मान ज्ञात करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 31
उपर्युक्त सारणी से स्पष्ट है कि बिन्दु (3, 3) पर Z का मान अधिकतम Rs 73.5 है।
अतः निर्माणकर्ता को 3 बोल्ट के पैकेट व 3 नटों के पैकेटों का निर्माण करना चाहिए ताकि अधिकतम लाभ Rs 73.5 हो।

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प्रश्न 5.
एक कारखाने में दो प्रकार के पेंच A और B बनते हैं। प्रत्येक के निर्माण में दो मशीनों के प्रयोग की आवश्यकता होती है, जिसमें एक स्वचालित और दूसरी हस्तचालित है। एक पैकेट पेंच के निर्माण में 4 मिनट स्वचालित और 6 मिनट हस्तचालित मशीन, तथा एक पैकेट पेंच B के निर्माण में 6 मिनट स्वचालित और 3 मिनट हस्तचालित मशीन का कार्य होता है। प्रत्येक मशीन किसी भी दिन के लिए अधिकतम 4 घण्टे काम के लिए उपलब्ध है। निर्माता पेंच A के प्रत्येक पैकेट पर 37 और पेंच B के प्रत्येक पैकेट पर Rs 10 का लाभ कमाता है। यह मानते हुए कि कारखाने में निर्मित सभी पेंचों के पैकेट बिक जाते हैं, ज्ञात कीजिए कि प्रतिदिन कितने पैकेट विभिन्न पेंचों के बनाए जाएँ जिससे लाभ अधिकतम हो तथा अधिकतम लाभ ज्ञात कीजिए।
हल-
माना पेंच A की संख्या = x और पेंच B की संख्या = y
तब प्रदत्त आँकड़ों से निम्नलिखित सारणी बनाते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 32
अतः दी गई समस्या का गणितीय निरूपण इस प्रकार है
Z = 7x+10y का अधिकतम मान ज्ञात कीजिए। जबकि
4x + 6y ≤ 240 ⇒ 2x + 3y ≤ 120 …(i)
6x +3y ≤ 240 ⇒ 2x + y ≤ 80 …(ii)
x ≥ 0 …(iii), y ≥ 0 …(iv)
उपरोक्त असमिकाओं के संगत समिकाओं के आलेख खींचते हैं।
चित्र से स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र OABCD (छायाँकित) परिबद्ध है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 33
कोनीय बिन्दु हैं o(0, 0), A(40, 0), B (30, 20), C(0, 40)
अब कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 34
अत: B(30, 20) पर लाभ अधिकतम है।
∴ पेंच A की संख्या = 30 और पेंच B की संख्या = 20
और अधिकतम लाभ = Rs 410

प्रश्न 6.
एक निर्माता कम्पनी पैडेस्टल लैंप और लकड़ी के शेड बनाती है। प्रत्येक के निर्माण में एक रगड़ने/काटने और एक स्प्रेयर की आवश्यकता पड़ती है। एक लैंप के निर्माण में 2 घण्टे रगड़ने/काटने और 3 घण्टे स्प्रेयर की आवश्यकता होती है, जबकि एक शेड के निर्माण में 1 घण्टा रगड़ने/काटने और 2 घण्टे स्प्रेयर की आवश्यकता होती है। स्प्रेयर की मशीन प्रतिदिन अधिकतम 20 घण्टे और रगड़ने/काटने की मशीन प्रतिदिन अधिकतम 12 घण्टे के लिए उपलब्ध है। एक लैंप की बिक्री पर Rs 5 और एक शेड की बिक्री पर Rs 3 का लाभ होता है। यह मानते हुए कि सभी निर्मित लैंप और शेड बिक जाते हैं, तो बताइए वह निर्माण की प्रतिदिन कैसी योजना बनाए कि लाभ अधिकतम हो?
हल-
माना पैडेस्टेल लैंप की संख्या = x और लकड़ी के शेड की संख्या = y
दिये गये आँकड़ों से निम्न सारणी बनाते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 35
दी गई रैखिक प्रोग्रामन समस्या का गणितीय निरूपण इस प्रकार है–
Z = 5 + 3y का अधिकतम मान निकालिए—
जबकि 2x + y ≤ 12 …(i)
3x + 2y ≤ 20 …(ii)
x ≥ 0 …(iii)
y ≥ 0 …(iv)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 36
उपरोक्त असमिकाओं के संगत समिकाओं का आलेख खींचते हैं। चित्र से स्पष्ट है कि संगत क्षेत्र OABC , (छायांकित)परिबद्ध है जिसके कोनीय बिन्दु O(0, 0), A(6, 0),B(4, 4), C(10, 10) हैं।
अब हम इन कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 37
अत: B(4, 4) पर Z = 32 अधिकतम है।
इसलिए पैडेस्टेल लैंप की संख्या = 4, लकड़ी के शेड की संख्या = 4

प्रश्न 7.
एक कम्पनी प्लाईवुड के अनूठे स्मृति चिह्न का निर्माण करती है। A प्रकार के प्रति स्मृति चिह्न के निर्माण में 5 मिनट काटने और 10 मिनट जोड़ने में लगते हैं। B प्रकार के प्रति स्मृति चिह्न के लिए 8 मिनट काटने और 8 मिनट जोड़ने में लगते हैं। दिया गया है कि काटने के कुल समय 3 घण्टे 20 मिनट तथा जोड़ने के लिए 4 घण्टे उपलब्ध हैं। प्रत्येक A प्रकार के स्मृति चिह्न पर Rs 5 और प्रत्येक B प्रकार के स्मृति चिह्न पर Rs 6 का लाभ होना है। ज्ञात कीजिए कि लाभ के अधिकतमीकरण के लिए प्रत्येक प्रकार के कितने-कितने स्मृति चिह्नों का कम्पनी द्वारा निर्माण होना चाहिए?
हल-
माना A प्रकार के स्मृति चिह्न = x और B प्रकार के स्मृति चिह्न = y
दिये गये आँकड़ों से निम्नलिखित सारणी बनाते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 38
अतः उपरोक्त रैखिक प्रोग्रामन समस्या का गणितीय निरूपण इस प्रकार होगा–
Z = 5x + 6y का अधिकतम मान निकालिए।
जबकि 5x + 8y ≤ 200 …(i)
10x + 8y ≤ 240
5x + 43 ≤ 120 …(ii)
x ≥ 0 …(iii), y ≥ 0 …(iv)
उपरोक्त असमिकाओं के संगत समिकाओं के आलेख खींचते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 39
चित्र से स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) OABC परिबद्ध है।
कोनीय बिन्दु O(0, 0), A(24, 0), B(8, 20), C(0, 25) हैं।
इन कोनीय बिन्दुओं पर Z का मान ज्ञात करते हैं—
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 40
अत: Z का अधिकतम मान 160 बिन्दु B(8, 20) पर है।
∴अधिकतम लाभ के लिए टाइप 3 के स्मृति चिह्न = 8 और B टाइप के = 20

प्रश्न 8.
एक सौदागर दो प्रकार के निजी कम्प्यूटर एक डेस्कटॉप नमूना और दूसरा पोर्टेबल नमूना, जिनकी कीमतें क्रमशः Rs 25000 और Rs 40000 होगी, बेचने की योजना बनाता है। वह अनुमान लगाता है कि कम्प्यूटरों की कुल मासिक माँग 250 नगों से अधिक नहीं होगी। प्रत्येक प्रकार के कम्प्यूटरों के नगों की संख्या ज्ञात कीजिए जिसे सौदागर अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए संग्रह करें यदि उसके पास निवेश के लिए 70 लाख से अधिक नहीं है और डेस्कटॉप नमूने पर उसका लाभ Rs 4500 और पोर्टेबल नमूने पर Rs 5000 लाभ हो।
हल-
माना डेस्कटॉप नमूना कम्प्यूटर की संख्या = x
और पोर्टेबल नमूना कम्प्यूटर की संख्या = y
एक कम्प्यूटर पर लागत और लाभ निम्नलिखित है
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 42
अतः उपरोक्त रैखिक प्रोग्रामन समस्या का गणितीय निरूपण इस प्रकार होगा—
Z = 4500x + 5000y का अधिकतम मान निकालिए।
जबकि x + y ≤250 …(i)
25000x + 40000y ≤7000000
5x + 8y ≤ 1400 …(ii)
x > 0 …(iii)
y > 0 …(iv)
उपरोक्त असमिकाओं के संगत समिकाओं के आलेख खींचते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 43
स्पष्ट है कि सुसंगत क्षेत्र (छायांकित) OABC परिबद्ध है।
जिसके कोनीय बिन्दु O(0, 0), A(250, 0), B(200, 50), C(0, 175) हैं।
अब हम Z का इन कोनीय बिन्दुओं पर मान ज्ञात करते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 44
अत: B(200, 50) पर Z अधिकतम है, इसलिए अधिकतम लाभ के लिए डेस्कटॉप कम्प्यूटर 200 और पोर्टेबल कम्प्यूटर 50 होंगे।

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प्रश्न 9.
एक भोज्य पदार्थ में कम से कम 80 मात्रक विटामिन A और 100 मात्रक खनिज होना चाहिए। दो प्रकार के भोज्य F1 और F2 उपलब्ध हैं। भोज्य F1 की लागत Rs 4 प्रति मात्रक और F2 की लागत Rs 6 प्रति मात्रक है। भोज्य F1 की एक इकाई में कम-से-कम 3 मात्रक विटामिन A और 4 मात्रक खनिज हैं। F2 की प्रति इकाई में कम-से-कम 6 मात्रक विटामिन A और 3 मात्रक खनिज हैं। इसको एक रैखिक प्रोग्रामन समस्या के रूप में सूत्रबद्ध कीजिए। उस आहार का न्यूनतम मूल्य ज्ञात कीजिए जिसमें इन दो भोज्यों का मिश्रण है और उसमें न्यूनतम पोषक तत्त्व है।
हल-
माना भोज्य पदार्थ में भोज्य F1 की x इकाई तथा भोज्य F2 की y इकाई का मिश्रण होता है।
तब रैखिक प्रोग्रामन समस्या का गणितीय रूप होगा
Z = 4x + 6y (लागत फलन)
जबकि 3x +6y ≥ 80 (विटामिन A व्यवरोध)
4x + 3y ≥ 100 (विटामिन B व्यवरोध)
x, y ≥ 0 (ऋणेत्तर व्यवरोध)
उपरोक्त असमिकाओं के संगत समिकाओं के आलेख खींचते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 45
हम 4x + 6y < 104 अर्थात् 2x + 3y < 52 का आलेख खींचते हैं।
हम देखते हैं कि 2x + 3y < 52 द्वारा निरूपित खुले अर्द्धतल और सुसंगत क्षेत्र का कोई उभयनिष्ठ हल नहीं है।
अतः Z का न्यूनतम मान 104 है।

प्रश्न 10.
दो प्रकार के उर्वरक F1 अं F2 हैं। F1 में 10% नाइट्रोजन तथा 6% फॉस्फोरिक अम्ल है तथा F2में 5% नाइट्रोजन तथा 10% फॉस्फोरिक अम्ल है। मिट्टी की स्थितियों का परीक्षण करने के पश्चात् एक किसान पाता है कि उसे अपनी फसल के लिए 14 किग्रा नाइट्रोजन और 14 किग्रा फॉस्फोरिक अम्ल की आवश्यकता है। यदि F1 की कीमत Rs 6 /किग्रा और F2 की कीमत Rs 5/किग्रा है, प्रत्येक प्रकार का कितना उर्वरक उपयोग के लिए चाहिए ताकि न्यूनतम मूल्य पर वाँछित पोषक तत्त्व मिल सके। न्यूनतम लागत क्या है?
हल-
माना उर्वरक F1 = x किग्रा और उर्वरक F2 = y किग्रा
दिये गये आँकड़ों से निम्नलिखित सारणी बनाते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 46
इस रैखिक प्रोग्रामन समस्या का गणितीय रूप इस प्रकार होगा ।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 47
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 12 Linear Programming image 48
B(100, 80) पर न्यूनतम लागत Rs 1000 हे।
क्योकि सुसंगत क्षेत्र अपरिबद्ध है इसीलिए Z का न्यूनतम मान 1000 हो सकता है या नहीं भी हो सकता।
इसलिए हम असमिका 6x + 5y < 1000 का आलेख खींचते हैं।
क्योंकि इस असमिका द्वारा निरूपित खुले अर्द्धतल और सुसंगत क्षेत्र में कोई भी बिन्दु उभयनिष्ठ नहीं है।
इसलिए Z का न्यूनतम मान = Rs 1000
जबकि उर्वरक F1 , 100 किग्रा तथा उर्वरक F2 , 80 किग्रा मिलाया जाता है।

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UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 4 Cost of Production

UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 4 Cost of Production (उत्पादन लागत) are part of UP Board Solutions for Class 12 Economics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 4 Cost of Production (उत्पादन लागत).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Economics
Chapter Chapter 4
Chapter Name Cost of Production (उत्पादन लागत)
Number of Questions Solved 40
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 4 Cost of Production (उत्पादन लागत)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

प्रश्न 1
उत्पादन लागत से आप क्या समझते हैं ? उत्पादन लागत के प्रकार बताइए।
या
मौद्रिक लागत, वास्तविक लागत एवं अवसर लागत को संक्षेप में समझाइए।
या
लागत से आप क्या समझते हैं? स्थिर लागत तथा परिवर्तनशील लागत में अन्तर स्पष्ट कीजिए। [2014]
उत्तर:
उत्पादन लागत का अर्थ
प्राय: बोलचाल की भाषा में उत्पादन लागत से तात्पर्य उन समस्त भुगतानों से होता है, जिनको एक उत्पादक किसी वस्तु के उत्पादन में प्रयोग आने वाले विभिन्न साधनों को उसके उत्पादन में सहयोग देने के बदले में पुरस्कार के रूप में देता है। इस प्रकार सामान्य बोलचाल की भाषा में वस्तु की लागत में उत्पादक द्वारा अन्य व्यक्तियों को किये गये भुगतानों को ही सम्मिलित किया जाता है तथा उन साधनों या वस्तुओं को जिनको वह अपने पास से दे देता है, उनका पुरस्कार या पारिश्रमिक उस वस्तु की उत्पादन लागत में सम्मिलित नहीं किया जाता है। परन्तु अर्थशास्त्र में वस्तु की उत्पादन-लागत के अन्तर्गत केवल अन्य व्यक्तियों को किये गये भुगतान नहीं रहते हैं, बल्कि उत्पादक द्वारा स्वयं दिये गये उपादानों का पुरस्कार और वस्तुओं का मूल्य तथा उसका स्वयं अपना लाभ भी सम्मिलित रहता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि उत्पादन लागत = भूमि का लगान + कच्चे माल की कीमत + मजदूरों की पूँजी पर ब्याज + संगठनों का वेतन + उद्यमी का सामान्य लाभ।

उत्पादन लागत की परिभाषाएँ
प्रो० मार्शल के शब्दों में, “उत्पादन लागते वह समस्त मौद्रिक (द्राव्यिक) लागत है जो उद्यमी को अपने व्यवसाय में उत्पादकों को विभिन्न उपादानों को आकर्षित करने के लिए लगानी पड़ती है। इसमें कच्चे माल की कीमत, मजदूरी और वेतन, पूँजी पर ब्याज, लगान, प्रबन्धक सम्बन्धी सामान्य आयकरों का भुगतान तथा अन्य व्यापारिक काम आदि सम्मिलित होते हैं।”

उम्ब्रेट, हण्ट तथा किण्टर के अनुसार, “उत्पादन लागत में वे समस्त भुगतान सम्मिलित होते हैं। जो कि अन्य व्यक्तियों को उनकी वस्तुओं एवं सेवाओं के उपयोग के बदले में किये जाते हैं। इसमें मूल्य ह्रास तथा प्रचलन जैसे भेद भी सम्मिलित रहते हैं। इसमें उत्पादक द्वारा प्रदत्त सेवाओं के लिए अनुमानित मजदूरी तथा उसके द्वारा प्रदत्त पूँजी व भूमि का पुरस्कार भी सम्मिलित रहता है।”

उत्पादन लागत के प्रकार
उत्पादन लागत के प्रकार निम्नलिखित हैं

  1. मौद्रिक लागत
  2.  वास्तविक लागत
  3. अवसर लागत

1. मौद्रिक लागत – उत्पत्ति के साधनों के प्रयोग के लिए जो धन व्यय किया जाता है, वह उसकी मौद्रिक लागत होती है या किसी वस्तु के उत्पादन पर द्रव्य के रूप में उत्पादन के उपादानों पर जो व्यय किया जाता है उसे मौद्रिक या द्राव्यिक लागत कहा जाता है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार उत्पादक की मौद्रिक लागत में निम्नलिखित तत्त्व सम्मिलित होते हैं

(क) स्पष्ट लागते (Explicit Costs) – इनके अन्तर्गत वे सब लागतें सम्मिलित की जाती हैं, जो उत्पादक के द्वारा स्पष्ट रूप से विभिन्न उपादानों को खरीदने (क्रय करने) के लिए व्यय की जाती हैं।

(ख) अस्पष्ट लागते (Implicit Costs) –
इनके अन्तर्गत उन साधनों एवं सेवाओं का मूल्य सम्मिलित होता है, जो उत्पादक के द्वारा प्रयोग की जाती हैं, किन्तु जिनके लिए वह प्रत्यक्ष रूप से भुगतान नहीं करता। उत्पादन में प्रयोग किये जाने वाले कुछ साधनों का स्वामी व्यवसायी स्वयं हो सकता है। इसलिए वह उनके लिए प्रत्यक्ष रूप से भुगतान नहीं करता। उद्यमी के स्वयं के साधनों के बाजार दर पर पुरस्कारों को अस्पष्ट लागतें कहा जाता है।
उपर्युक्त स्पष्ट लागतें एवं अस्पष्ट लागतों से स्पष्ट होता है कि मौद्रिक लागत के अन्तर्गत निम्नलिखित दो बातें सम्मिलित होती हैं

  1. वस्तु के उत्पादन हेतु आवश्यक उपादानों की क्रय-कीमत या उन्हें किया गया भुगतान।
  2. फर्म के मालिक द्वारा लगाये जाने वाले उपादानों की अनुमानित कीमत एवं सामान्य लाभ सम्मिलित रहते हैं।

2. वास्तविक लागत – वास्तविक लागत का विचार तो परम्परावादी अर्थशास्त्रियों द्वारा ही प्रस्तुत कर दिया गया था, परन्तु इसकी विस्तृत एवं स्पष्ट व्याख्या प्रो० मार्शल द्वारा की गयी। उन्होंने कहा कि  – “वस्तु के निर्माण में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से लगाये गये विभिन्न प्रकार के श्रमिकों का श्रम इसके साथ वस्तुओं को उत्पन्न करने में प्रयोग आने वाली उस पूँजी को बचाने में जो संयम अथवा प्रतीक्षा आवश्यक होती है, वे समस्त प्रयत्न और त्याग मिलकर वस्तु की वास्तविक लागत कहलाते हैं।”
कहने का आशय यह है कि वास्तविक लागत उन प्रयत्नों तथा त्यागों की माप होती है जो समाज को उसे उत्पन्न करने हेतु सहन करने पड़ते हैं। इसी कारण इसको ‘सामाजिक लागत’ के नाम से भी पुकारते हैं। वास्तविक लागत में निम्नांकित दो बातें सम्मिलित रहती हैं

  1. विभिन्न प्रकार के श्रमिकों के शारीरिक एवं मानसिक प्रयत्न जो उत्पादन क्रिया में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से भाग लेते हैं।
  2. पूँजी को संचय करने के कारण उत्पन्न होने वाले कष्ट एवं त्याग।

ये समस्त प्रयत्न एवं त्याग मिलकर वस्तु की वास्तविक लागत’ कहलाते हैं। जिस कार्य को करने में श्रमिकों को अधिक कष्ट होता है, उसकी वास्तविक लागत अधिक होती है। इसके विपरीत, जिस कार्य को करने में श्रमिकों को कम कष्ट होता है, उसकी वास्तविक लागत कम होती है।

3. अवसर लागत – आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने वास्तविक लागत के विचार के स्थान पर अवसर लागत का विचार दिया है। अवसर लागत को हस्तान्तरण आय’ या ‘विकल्प लागत’ भी कहते हैं।

अवसर लागत से अभिप्राय है कि किसी एक वस्तु के उत्पादन में किसी साधन के प्रयोग किये जाने का अभिप्राय यह है कि उस साधन को अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रयोग नहीं किया जा रहा है। अतः किसी वस्तु को उत्पन्न करने की सामाजिक लागत उन विकल्पों के रूप में व्यक्त की जा सकती है जो उस वस्तु को उत्पादित करने के लिए हमें त्यागने होते हैं।

प्रो० मार्शल ने उद्यमकर्ता के दृष्टिकोण से उत्पादन लागत का विभाजन निम्न प्रकार से किया है

  1. प्रधान लागत अथवा परिवर्तनशील लागत।
  2.  पूरक लागत या स्थिर लागत।

(i) प्रधान लागत अथवा परिवर्तनशील लागत – प्रधान लागत वह लागत है जो उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ बढ़ती रहती है। इस कथन को और अधिक अच्छी तरह इस प्रकार स्पष्ट कर सकते हैं कि “यदि उत्पादन की मात्रा में कमी हो जाती है तो प्रधान लागत में भी वृद्धि हो जाती है। इसके विपरीत, यदि उत्पादन की मात्रा में कमी हो जाती है तो प्रधान लागत में भी कमी हो जाती है। इस प्रकार से उत्पादन की मात्रा और प्रधान लागत में प्रत्यक्ष तथा लगभग आनुपातिक सम्बन्ध होता है। उदाहरणार्थ-एक चीनी मिल को लीजिए। चीनी बनाने के लिए गन्ने के साथ-ही-साथ बिजली व श्रम-शक्ति की भी आवश्यकता पड़ती है। गन्ना-मजदूरी और बिजली पर होने वाला व्यय चीनी के उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ घटता-बढ़ता रहता है। यदि मिल का मालिक चीनी का उत्पादन कम कर देता है तो उपर्युक्त तीनों मदों पर व्यय स्वत: ही कम हो जाता है। इसके विपरीत, यदि वह चीनी के उत्पादन की मात्रा में वृद्धि कर देता है तो उपर्युक्त तीनों मदों पर होने वाले व्यय में वृद्धि हो जाती है। इस प्रकार व्यय का उत्पादन की मात्रा के साथ प्रत्यक्ष सम्बन्ध होने के कारण ही इसे ‘प्रधान लागत अथवा ‘अस्थिर उत्पादन लागत’ भी कहते हैं। मिल के बन्द हो जाने पर अथवा उत्पादन शून्य हो जाने पर प्रधान लागत भी शून्य हो जाती है।

(ii) पूरक लागत या स्थिर लागत – पूरक लागत वह लागत होती है जो उत्पादन की मात्रा के साथ घटती-बढ़ती नहीं है। पूरक लागत को स्थिर लागत’ भी कहते हैं। अन्य शब्दों में इसको इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है कि यदि मिल में उत्पादन की मात्रा को पहले से दुगुना अथवा आधा कर दिया जाए तो पूरक लागत पूर्ववत् ही रहेगी। सरल शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं कि प्रत्येक उत्पादक को कुछ व्यय अनिवार्य रूप से ऐसे करने होते हैं जो उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर भी पूर्ववत् ही रहते हैं; जैसे – भवन व जमीन का किराया, पूँजी पर दिया जाने वाला ब्याज, बीमा शुल्क, मशीनों व यन्त्रों का मूल्य ह्रास, व्यवस्थापकों को वेतन आदि। यदि कारखाने में उत्पादन की मात्रा में एक सीमा तक वृद्धि की जाती है तो पूरक लागत में वृद्धि नहीं होती है, परन्तु जब उत्पत्ति उस सीमा को पार कर जाती है तो पूरक लागत में भी वृद्धि होने लगती है।

प्रश्न 2
सीमान्त उत्पादन लागत (सीमान्त लागत) और औसत उत्पादन लागत (औसत लागत) का अर्थ समझाइए तथा इनका सम्बन्ध रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए। इनके वक्र U-आकार के क्यों होते हैं ? [2006, 08, 10, 11]
या
कुल लागत, औसत लागत तथा सीमान्त लागत की अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए। [2007, 08, 10]
या
औसत लागत एवं सीमान्त लागत से आप क्या समझते हैं? एक सारणी की सहायता से इनके बीच के सम्बन्धों को दर्शाइए। [2007, 08, 10, 15]
उत्तर:
सीमान्त उत्पादन लागत का अर्थ
सीमान्त लागत से अभिप्राय किसी वस्तु की उत्पन्न की गयी अन्तिम इकाई की मौद्रिक लागत से होता है। अन्य शब्दों में, सीमान्त लागत से आशय एक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन करने पर कुल लागत में हुई वृद्धि अथवा वस्तु की एक इकाई को कम उत्पन्न करने पर कुल लागत में हुई कमी से है। अर्थात् एक अधिक अथवा एक कम इकाई के उत्पादन करने पर कुल उत्पादन लागत में वृद्धि या कमी को सीमान्त उत्पादन लागत कहते हैं।

मान लीजिए वस्तु की केवल पाँच इकाइयों का उत्पादन किया गया और उन सबकी कुल लागत ₹ 30 है। अब यदि उत्पादन 5 इकाइयों से बढ़ाकर 6 इकाइयाँ कर दिया जाए अर्थात् एक अधिक इकाई का उत्पादन किया जाए और कुल लागत ₹ 39 आये, तब कुल लागत में ₹ 9 की वृद्धि हुई अर्थात् सीमान्त इकाई की लागत ₹ 9 हुई। इसी प्रकार यदि एक इकाई कम अर्थात् प्रथम चार इकाइयों की कुल लागत ₹ 22 हो तब एक इकाई कम उत्पादन करने पर कुल लागत में हैं 8 की कमी पड़ती है अर्थात् सीमान्त इकाई की लागत ₹ 8 होगी।
सीमान्त उत्पादन लागत कोई निश्चित लागत नहीं होती। वह उत्पादन की मात्रा पर निर्भर करती है।

औसत उत्पादन लागत का अर्थ

कुल मौद्रिक लागत में उत्पन्न की गयी समस्त इकाइयों की संख्या का भाग देने से जो राशि आये, वह औसत लागत कहलाती है। कुल उत्पादन लागत में उत्पादित इकाइयों की संख्या का भाग देने से औसत लागत ज्ञात की जा सकती है। उदाहरण के लिए-माना 5 इकाइयों की कुल उत्पादन लागत ₹ 30 है। अत: औसत लागत = 30 ÷ 5 = ₹6 हुई।
कुल उत्पादन लागत औसत लागत = –
उत्पन्न की गयी समस्त इकाइयों की संख्या
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सीमान्त तथा औसत उत्पादन लागत में सम्बन्ध
सीमान्त उत्पादन लागत तथा औसत उत्पादन लागत में घनिष्ठ सम्बन्ध है। इसकी व्याख्या उत्पत्ति के नियमों के अन्तर्गत की जा सकती है। व्यवहार में, उत्पादन में पहले वृद्धिमान प्रतिफल नियम लागू होता है, फिर कुछ समय के लिए आनुपातिक प्रतिफल का नियम तथा फिर ह्रासमान प्रतिफल का नियम लागू होता है।

  1. जब उत्पादन में वृद्धिमान प्रतिफल नियम लागू होता है तब सीमान्त लागत तथा औसत लागत दोनों ही घटती जाती हैं अर्थात् प्रत्येक अगली इकाई की उत्पादन लागत क्रमश: घटती जाती है। इस स्थिति में सीमान्त लागत औसत लागत की अपेक्षा अधिक तेजी से घटती है, परिणामस्वरूप औसत लागत सीमान्त लागत से अधिक रहती है।
  2.  जब उत्पादन में आनुपातिक प्रतिफल नियम लागू होता है तब सीमान्त उत्पादन लागत व औसत उत्पादन लागत दोनों बराबर हो जाती हैं।
  3. हासमान प्रतिफल नियम के अन्तर्गत जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ता जाता है वैसे-वैसे हर इकाई की उत्पादन लागत बढ़ती जाती है। ऐसी दशा में सीमान्त लागत और औसत लागत दोनों ही बढ़ती हैं; किन्तु सीमान्त लागत औसत लागत की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़ती है, परिणामस्वरूप सीमान्त लागत औसत लागत से अधिक हो जाती है तथा सीमान्त लागत की आकृति अंग्रेजी के U-आकार की होती है। सीमान्त उत्पादन लागत तथा औसत उत्पादन लागत के सम्बन्ध को निम्नांकित तालिका व रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

माना कोई फर्म खिलौनों का उत्पादन करती है। खिलौनों की इकाइयों की सीमान्त उत्पादन लागत व औसत उत्पादन लागत निम्नांकित तालिका के अनुसार है

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रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण
संलग्न चित्र में अ ब रेखा पर खिलौनों (उत्पादन) की इकाइयाँ तथा अ स रेखा पर प्रति इकाई उत्पादन लागत दर्शायी गयी है। रेखाचित्र में MC रेखा सीमान्त उत्पादन लागत की रेखा है तथा AC औसत उत्पादन लागत की रेखा है।
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जैसे-जैसे अतिरिक्त इकाइयों का उत्पादन किया जाता है तब औसत लागत व सीमान्त लागत ‘प्रारम्भ में दोनों घटती हैं, लेकिन सीमान्त लागत, औसत लागत की अपेक्षा अधिक तेजी से गिरती है। धीरे-धीरे औसत व सीमान्त लागतें बढ़ने लगती हैं तब वे दोनों बराबर हो जाती हैं। इसके पश्चात् ह्रासमान प्रतिफल नियम लागू होने पर सीमान्त लागत औसत लागत से अधिक हो जाती है।।

औसत लागत और सीमान्त लागत वक्र U-आकार के क्यों होते हैं ?
औसत लागत वे सीमान्त लागत वक्रों के U-आकार के होने का प्रमुख कारण फर्म को प्राप्त होने वाली आन्तरिक बचते हैं। इन बचतों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में बाँटा जा सकता है

1. श्रम-सम्बन्धी बचते – श्रम-सम्बन्धी बचते श्रम-विभाजन का परिणाम होती हैं। कोई फर्म उत्पादन का स्तर जैसे-जैसे बढ़ाती जाती है, श्रम-विभाजन उतनी ही अधिक मात्रा में किया जा सकता है। श्रम-विभाजन के कारण लागत गिरती जाती है।

2. तकनीकी बचते – उत्पादन स्तर जितना अधिक होगा उतनी ही उत्पादन लागत प्रति इकाई कम होगी। इस प्रकार तकनीकी बचतें प्राप्त होती हैं।

3. विपणन की बचते – जैसे-जैसे उत्पादन की मात्रा में वृद्धि होती जाती है वैसे-वैसे विपणन की प्रति इकाई लागत गिरती जाती है।

4. प्रबन्धकीय बचते – उत्पादन में वृद्धि होने पर प्रबन्ध की प्रति व्यक्ति इकाई लागत भी निश्चित रूप से गिरती है।

उपर्युक्त कारणों से उत्पादन के बढ़ने पर औसत लागत के गिरने की आशा की जा सकती है। लागत इस कारण गिरती है, क्योंकि अधिकांश साधन ऐसे होते हैं जिन्हें बड़े पैमाने के उत्पादन पर ही अधिक कुशलता के साथ उपयोग में लाया जा सकता है, यद्यपि उत्पादन बढ़ने पर फर्म की औसत लागत गिरती है, किन्तु ऐसा केवल एक सीमा तक ही होता है। अनुकूलतम उत्पादन इस सीमा को निर्धारित करता है। जब फर्म का उत्पादन अनुकूलतम होता है तो उसकी औसत लागत न्यूनतम होती है। अनुकूलतम उत्पादन तक पहुँचने के पश्चात् औसत लागत बढ़ने लगती है। जब उत्पादन अनुकूलतम से अधिक किया जाएगा तो प्रबन्धकीय समस्याएँ बढ़ जाएँगी। इन सब बातों के आधार पर यह कह सकते हैं कि फर्म का अल्पकालीन औसत वक्र U-आकार का होता है।

प्रश्न 3
कुल लागत, सीमान्त लागत और औसत लागत में अन्तर स्पष्ट कीजिए। किन परिस्थितियों में औसत लागत व सीमान्त लागत में परिवर्तन होते हैं ? सचित्र दर्शाइए।
या
तालिका एवं रेखाचित्र की सहायता से कुल लागत, सीमान्त लागत और औसत लागत के सम्बन्ध को दर्शाइए।
या
कुल लागत, औसत लागत तथा सीमान्त लागत की सचित्र व्याख्या कीजिए। [2007]
उत्तर:
कुल लागत (Total Cost) – किसी वस्तु के कुल उत्पादन में जो धन व्यय होता है, उसे कुल लागत कहते हैं। अन्य शब्दों में, किसी वस्तु की निश्चित मात्रा को उत्पन्न करने में जो कुल मौद्रिक लागत आती है, उसे कुल लागत कहते हैं। कुल लागत में सामान्यत: दो प्रकार की लागते सम्मिलित होती हैं – निश्चित लागतें (Fixed Costs) परिवर्तनशील लागते (Variable Costs)।
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सीमान्त लागत (Marginal Cost) – किसी वस्तु की अन्तिम इकाई पर आने वाली लागत को ‘सीमान्त लागत’ कहते हैं अर्थात् सीमान्त लागत से आशय एक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन से कुल लागत में हुई वृद्धि से होता है या वस्तु की एक इकाई को कम उत्पन्न करने पर कुल लागत में जो कमी होती है, उसको सीमान्त लागत कहते हैं। दूसरे शब्दों में, सीमान्त उत्पादन लागत एक अधिक अथवा एक कम इकाई के उत्पादन करने पर कुल उत्पादन लागत में हुई वृद्धि या कमी है।

औसत लागत (Average Cost) – कुल लागत में उत्पादन की गयी समस्त इकाइयों की संख्या को भाग देने से औसत लागत ज्ञात हो जाती है।
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कुल लागत, सीमान्त लागत और औसत लागत में अन्तर एवं सम्बन्ध
कुल लागत, सीमान्त लागत और औसत लागत में सम्बन्ध एवं अन्तर निम्नवत् है
ज्यों-ज्यों अतिरिक्त इकाइयों का उत्पादन किया जाता है तो कुल लागत में उत्तरोत्तर वृद्धि होती जाती है, लेकिन प्रारम्भ में यह वृद्धि कम गति से और बाद में तीव्र गति से होती है। औसत लागत व सीमान्त लागत प्रारम्भ में दोनों घटती हैं, लेकिन सीमान्त लागत औसत लागत की तुलना में अधिक तेजी से गिरती है और धीरे-धीरे औसत व सीमान्त लागतें बढ़ने लगती हैं, लेकिन सीमान्त लागत के बढ़ने की गति औसत लागत की तुलना में अधिक तीव्र होती है। औसत और सीमान्त लागतों में कमी या वृद्धि उत्पत्ति के नियमों की क्रियाशीलता के कारण होती है।

उत्पादन लागतों को उत्पत्ति के नियमों के सन्दर्भ में निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है

  1.  जब कुल उत्पादन में वृद्धिमान प्रतिफल नियम लागू होता है, तो कुल लागत तो बढ़ती जाती है, किन्तु सीमान्त लागत तथा औसत लागत दोनों ही घटती जाती हैं। सीमान्त लागत औसत लागत की अपेक्षा । अधिक तेजी से घटती है, परिणामस्वरूप औसत लागत, सीमान्त लागत से अधिक रहती है।
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  2. जब उत्पादन में आनुपातिक प्रतिफल नियम लागू होता है तब कुल लागत में वृद्धि होती है, परन्तु औसत लागत वक्र सीमान्त लागत व औसत लागत समान रहती हैं।
  3. जब उत्पादन में ह्रासमान प्रतिफल नियम लागू उत्पादन की इकाइयाँ होता है तब कुल लागत, सीमान्त लागत और औसत लागत तीनों बढ़ती जाती हैं, किन्तु सीमान्त लागत के बढ़ने की गति औसत लागत से अधिक तीव्र होती है।

कुल लागत, सीमान्त लागत और औसत लागत के अन्तर एवं सम्बन्ध को निम्नांकित तालिका व रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है
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रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण
संलग्न रेखाचित्र में अ ब रेखा पर उत्पादन की इकाइयाँ तथा अ स रेखा पर उत्पादन लागत (₹ में) दर्शायी गयी है। ज्यों-ज्यों अतिरिक्त इकाइयों का उत्पादन किया जाता है, कुल लागत में उत्तरोत्तर वृद्धि होती जाती है, लेकिन प्रारम्भ में वृद्धि कम गति से तथा बाद में तीव्र गति से होती है। औसत लागत व सीमान्त लागत प्रारम्भ में दोनों घटती हैं, परन्तु सीमान्त लागत औसत लागत की अपेक्षा तेजी से गिरती है और धीरे-धीरे सीमान्त व औसत लागतें बढ़ने लगती हैं। सीमान्त लागत, औसत लागत की अपेक्षा अधिक तीव्र गति से बढ़ती है।
चित्र में TC वक्र कुल लागत, MC वक्र सीमान्त लागत तथा AC वक्र औसत लागत को प्रदर्शित करती है।

किन परिस्थितियों में औसत लागत व सीमान्त लागत में परिवर्तन होते हैं ?
सीमान्त लागत व औसत लागत में परिवर्तन उत्पत्ति के नियमों के अन्तर्गत होते हैं अर्थात् जब उत्पादन में उत्पादन के नियम क्रियाशील रहते हैं तब औसत लागत व सीमान्त लागत में परिवर्तन होने लगते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1
सीमान्त लागत और औसत लागत के सम्बन्धों को चित्र की सहायता से समझाइए। [2014, 16]
उत्तर:
औसत लागत और सीमान्त लागत का सम्बन्ध
सीमान्त लागत और औसत लागत दोनों में घनिष्ठ सम्बन्ध है। इन दोनों के आपसी सम्बन्ध को हम इस प्रकार से भी स्पष्ट कर सकते हैं
(i) जब किसी वस्तु की औसत लागत में कमी होती है तो उसकी सीमान्त लागत भी वस्तु की औसत लागत से कम होती है।
(ii) जब किसी वस्तु की औसत लागत में वृद्धि होती है तो उसकी सीमान्त लागत भी वस्तु की औसत लागत से अधिक ही होती है। संक्षेप में, औसत लागत और सीमान्त लागत के आपसी सम्बन्ध को संलग्न चित्र द्वारा स्पष्ट कर सकते है
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  1. जब तक किसी वस्तु के उत्पादन में वृद्धिमान प्रतिफल नियम लागू रहता है, तब तक औसत लागत कम होती जाती है तथा इसके साथ-ही-साथ वस्तु की सीमान्त लागत भी कम होती जाती है।
  2. जब तक औसत लागत कम होती जाती है, तब तक उसकी सीमान्त लागत उससे अधिक तीव्रता से कम होती जाती है।
  3. जब वस्तु की औसत लागत में वृद्धि होती जाती है तो उसकी सीमान्त लागत में वृद्धि हो जाती है।
  4.  जब वस्तु की औसत लागत में वृद्धि होती जाती है तो सीमान्त लागत में वृद्धि उससे अधिक तीव्रता से होती रहती है।।
  5. जिस बिन्दु पर वस्तु की औसत लागत न्यूनतम होती है, उस पर वस्तु की सीमान्त लागत और औसत लागत आपस में दोनों बराबर होती हैं।

प्रश्न 2
उत्पादन (उत्पत्ति) ह्रास नियम को उत्पादन लागतों के सम्बन्ध में रेखाचित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
उत्पादन (उत्पत्ति) ह्रास नियम
उत्पत्ति ह्रास नियम एक तकनीकी नियम है जो स उत्पत्ति के साधनों के बदलते हुए अनुपातों के कुल 100उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करता 80
AC औसत उत्पादन वक्र है। उत्पादन ह्रास नियम की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है“यदि हम उत्पत्ति के एक या अधिक साधनों की मात्रा को निश्चित रखते हैं और
V सीमान्त उत्पादन वक्र अन्य साधनों की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं तो एक बिन्दु के पश्चात् .परिवर्तनीय तत्त्वों की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से प्राप्त होने वाली उत्पादन घटने
श्रम वे पूँजी की इकाइयाँ लगता है।”
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उत्पादन हास नियम को लागत वृद्धि नियम भी कहा जा सकता है अर्थात् जब उत्पादन के क्षेत्र में सीमान्त और औसत उत्पादन की मात्रा में एक सीमा के पश्चात् कमी होनी प्रारम्भ हो जाती है तब : सीमान्त और औसत लागतें बढ़नी प्रारम्भ हो जाती हैं। इसीलिए इस नियम को लागत वृद्धि नियम (Law of Increasing Cost) भी कहते हैं।

रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण
उत्पादन ह्रास नियम की क्रियाशीलता के कारण उत्पादन – संलग्न चित्र में उत्पत्ति ह्रास नियम की क्रियाशीलता की दशा में सीमान्त उत्पादन तथा औसत उत्पादन दर्शाया गया है। चित्र में अब रेखा पर श्रम व पूँजी की इकाइयाँ तथा अ स रेखा पर उत्पादन दिखाया गया है। क ख औसत उत्पादन वक्र तथा क ग सीमान्त उत्पादन वक्र है। उत्पत्ति ह्रास नियम की क्रियाशीलता के कारण औसत उत्पादन और सीमान्त उत्पादने दोनों ही गिरते हैं, लेकिन सीमान्त उत्पादन औसत उत्पादन की अपेक्षा अधिक तेजी से गिरता है।

प्रश्न 3
उत्पत्ति ह्रास नियम के अन्तर्गत औसत लागत एवं सीमान्त लागत का चित्र द्वारा प्रदर्शन कीजिए।
उत्तर:
उत्पत्ति ह्रास नियम की क्रियाशीलता के कारण लागत – संलग्न चित्र में अ ब रेखा पर उत्पादन की इकाइयाँ तथा अ स रेखा पर उत्पादन लागत को दर्शाया गया है।
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MC सीमान्त लागत वक्र तथा AC औसत लागत वक्र है। रेखाचित्र से स्पष्ट है कि औसत लागत और सीमान्त लागत दोनों ही बढ़ रहे हैं, इसलिए इसे लागत वृद्धि नियम भी कहा जाता है। इस स्थिति में, सीमान्त लागत के बढ़ने की गति औसत लागत से अधिक तीव्र रहती है। उत्पादन की इकाइयाँ

प्रश्न 4
उत्पत्ति वृद्धि नियम को उत्पादन लागतों के सम्बन्ध में रेखाचित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
उत्पत्ति वृद्धि नियम
उत्पादन की मात्रा में वृद्धि करने के लिए जब उत्पत्ति के साधनों (श्रम व पूँजी) की अधिक इकाइयाँ प्रयोग की जाती हैं तो उसके परिणामस्वरूप संगठन में सुधार होता है। साधनों के अनुकूलतम संयोग से उत्पादन अनुपात से अधिक मात्रा में बढ़ता है। यह कहा जा सकता है कि यदि उत्पत्ति के साधनों की पूर्ति लोचदार हो तो एक बिन्दु तक उत्पादन के पैमाने का विस्तार करने से अनुपात से अधिक उत्पादन होता है। इसे उत्पत्ति वृद्धि नियम कहते हैं। उत्पत्ति वृद्धि नियम को घटती हुई लागत का नियम भी कहा जा सकता है, क्योंकि उत्पादन में वृद्धि साधन की मात्रा में वृद्धि की अपेक्षा तेजी के साथ होती है, इसलिए प्रति इकाई उत्पादन लागत गिरती जाती है। उत्पत्ति वृद्धि नियम के लागू होने के परिणामस्वरूप औसत लागत (Average Cost) तथा सीमान्त लागत (Marginal Cost) दोनों ही गिरती हैं।

रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण

1. उत्पत्ति वृद्धि नियम की क्रियाशीलता के कारण उत्पादन – चित्र (अ) में Ox-अक्ष पर श्रम व पूँजी की इकाइयाँ तथा OY-अक्ष पर उत्पादन की मात्रा को दर्शाया गया है। चित्र में MP 25सीमान्त उत्पादन की वक्र रेखा तथा AP औसत उत्पादन की वक्र रेखाg 20है। चित्र से स्पष्ट है कि जैसे-जैसे उत्पत्ति के साधन की मात्रा को बढ़ाया जाता है, संगठन में सुधार होने के कारण सीमान्त उत्पादन और औसत उत्पादन दोनों ही बढ़ते जाते हैं। परन्तु सीमान्त उत्पादन के बढ़ने की गति औसत उत्पादन के बढ़ने की गति से अधिक तीव्र
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2. उत्पत्ति वृद्धि नियम की क्रियाशीलता के कारण लागत – चित्र (ब) में OX-अक्ष पर उत्पादन की इकाइयाँ तथा OY-अक्ष पर लागत (₹ में) दिखायी गयी है। चित्र में AC औसत लागत तथा MC सीमान्त लागत वक्र है। उत्पादन में वृद्धिमान प्रतिफल नियम लागू होने के कारण म सीमान्त लागत और औसत लागत दोनों ही घटती जाती हैं; परन्तु सीमान्त लागत औसत लागत की अपेक्षा अधिक तेजी E से घटती है।
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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1
मौद्रिक लागत व वास्तविक लागत के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मौद्रिक लागत व वास्तविक लागत में अन्तर
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प्रश्न 2
स्थिर लागत किसे कहते हैं ? इसके अन्तर्गत कौन-कौन से व्यय सम्मिलित किये जाते हैं?
उत्तर:
उत्पादन की स्थिर लागत के अन्तर्गत वे सब उत्पादन व्यय सम्मिलित किये जाते हैं, जिन्हें सभी परिस्थितियों में करना आवश्यक होता है और जो उत्पादन की मात्रा के साथ नहीं बदलते। प्रत्येक उत्पादक को कुछ लागत स्थिर साधनों के प्रयोग करने के लिए लगानी होती है। इस प्रकार की लागत को स्थिर लागत कहते हैं। स्थिर साधन वे साधन होते हैं, जिनकी मात्रा में शीघ्रता से परिवर्तन नहीं किया जा सकता; जैसे – मशीनें, औजार, भूमि, बिल्डिग का किराया, स्थायी कर्मचारियों का वेतन, बीमे की किश्तें आदि। ये सब उत्पादन की स्थिर लागतें होती हैं।

प्रश्न 3
परिवर्तनशील लागत किसे कहते हैं ? इसके अन्तर्गत कौन-कौन से व्यय सम्मिलित किये जाते हैं ?
उत्तर:
परिवर्तनशील लागत वह लागत होती है जो उत्पादन की मात्रा के साथ बदलती है। किसी व्यवसाय में परिवर्तनशील साधनों को प्रयोग में लाने के लिए जो लागत लगाई जाती है, उसे परिवर्तनशील लागत कहते हैं। परिवर्तनशील वे ‘साधने होते हैं, जिनकी मात्रा में सरलता से परिवर्तन किया जा सकता है। परिवर्तनशील लागते उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर बदलती हैं। परिवर्तनशील लागतों के अन्तर्गत, कच्चे माल और ईंधन की लागत, अस्थायी श्रमिकों की मजदूरी इत्यादि को सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 4
सीमान्त उत्पादन लागत से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
सीमान्त उत्पादन लागत, उत्पादन की सीमान्त इकाई को उत्पन्न करने की लागत होती है। दूसरे शब्दों में, उत्पादित वस्तुओं की एक और ईकाई को उत्पन्न करने में जो लागत आती है उसे सीमान्त लागत कहा जाता है। सीमान्त लागत कुल लागत में एक और इकाई उत्पन्न करने के कारण होने वाली वृद्धि को बताती है। श्रीमती जॉन रॉबिन्सन के अनुसार, “सीमान्त लागत का तात्पर्य उत्पादित वस्तु की एक अतिरिक्त लागत से होती है।”

उदाहरण के लिए – 5 इकाई उत्पन्न करने की कुल लागत ₹500 है और 6 इकाइयों को उत्पन्न करने की लागत ₹720 है, तो सीमान्त लागत ₹220 होगी। प्रश्न 5 औसत लागत वक्र व सीमान्त लागत वक्र में अन्तर बताइए। उत्तर औसत लागत वक्र और सीमान्त लागत वक्र में एक निश्चित सम्बन्ध पाया जाता है। जब तक औसत लागत (AC) वक्र गिर रहा होता है तब तक सीमान्त लागत (MC) औसत लागत से कम होती है। किन्तु जब औसत लागत बढ़ने लगती है, तो सीमान्त लागत औसत लागत से अधिक हो जाती है।

यदि औसत लागत वक्र ‘यू’ आकार का खींचा जाता है तो उसके साथ का सीमान्त लागत वक्र सदैव औसत लागत वक्र को उसके न्यूनतम बिन्दु पर काटेगा।

प्रश्न 6
वास्तविक लागत से आप क्या समझते हैं? [2008]
उत्तर:
किसी वस्तु के उत्पादन में जो कष्ट (abstinence), त्याग (sacrifice) तथा कठिनाइयाँ (exertions) उठानी पड़ती हैं, उन सभी के योग को उत्पादन की वास्तविक लागत’ कहते हैं। कुछ अर्थशास्त्री वास्तविक लागत को ‘सामाजिक लागत’ (Social Cost) भी कहते हैं। प्रो० मार्शल ने वास्तविक लागत की अवधारणा को इस प्रकार समझाया है-“किसी वस्तु के उत्पादन में विभिन्न प्रकार के श्रमिकों को जो प्रत्यक्ष या परोक्ष प्रयत्न करने पड़ते हैं तथा साथ ही वस्तु के उत्पादन में प्रयोग की जाने वाली पूँजी को प्राप्त करने में जिस संयम या प्रतीक्षा की आवश्यकता होती है, वे समस्त प्रयास तथा त्याग मिलकर वस्तु की वास्तविक लागत कहलाती है।”

प्रश्न 7
सीमान्त लागत व औसत लागत में अन्तर कीजिए। [2009, 10, 11]
उत्त:
सीमान्त लागत – किसी वस्तु की अन्तिम इकाई पर आने वाली लागत को सीमान्त लागत कहते हैं।
औसत लागत – कुल लागत में उत्पादन की गई समस्त इकाइयों की संख्या को भाग देने पर औसत लागत ज्ञात हो जाती है। औसत लागत और सीमान्त लागत में अन्तर निम्नलिखित हैं

  1. जब किसी वस्तु की औसत लागत में कमी होती है तो उसकी सीमान्त लागत भी वस्तु की औसत लागत से कम होती है।
  2. जब किसी वस्तु की औसत लागत में वृद्धि होती है तो उसकी सीमान्त लागत भी वस्तु की औसत लागत से अधिक ही होती है।

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
कुल लागत से क्या अभिप्राय है ? [2012]
उत्तर:
उत्पादक द्वारा उत्पादन की किसी निश्चित मात्रा को उत्पन्न करने पर जो कुल व्यय आता है, उसे कुल लागत कहा जाता है। इसमें सामान्यतया दो प्रकार की लागत सम्मिलित होती हैं

  1.  निश्चित लागते (Fixed Costs) तथा
  2. परिवर्तनशील लागते (Variable Costs)।

प्रश्न 2
औसत उत्पादन लागत से क्या अभिप्राय है ?
या
औसत लागत का सूत्र लिखिए। [2011, 12, 15, 16]
उत्तर:
औसत उत्पादन लागत, उत्पादन की प्रति इकाई लागत होती है। इसे ज्ञात करने के लिए कुल लागत को उत्पन्न की गयी इकाइयों की मात्रा से भाग दिया जाता है। औसत लागत ज्ञात करने के लिए दिये गये सूत्र का प्रयोग करते हैं
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प्रश्न 3
औसत तथा सीमान्त लागत वक्रों की स्थिति किस प्रकार की होती है ?
उत्तर:
औसत लागत और सीमान्त लागत वक्र सर्वदा U-आकार के होते हैं, जो इस बात की ओर संकेत करते हैं कि आरम्भ में इन लागतों की प्रवृत्ति गिरने की होती है, किन्तु एक न्यूनतम सीमा पर पहुँचने के पश्चात् यह बढ़ने लगती है।

प्रश्न 4
अवसर लागत को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
अवसर लागत को ‘हस्तान्तरण आय’ या विकल्प लागत भी कहा जाता है।

प्रश्न 5
अवसर लागत के दो महत्त्व बताइए।
उत्तर:
(1) लगान के निर्धारण में अवसर लागत का विचार महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। आधुनिक सिद्धान्त के अनुसार लगान अवसर लागत के ऊपर अतिरेक होता है।
(2) अवसर लागत के द्वारा उत्पादन लागत में होने वाले परिवर्तन को समझा जा सकता है।

प्रश्न 6
वास्तविक लागत में किन तत्त्वों को सम्मिलित किया जाता है ?
उत्तर:
वास्तविक लागत = श्रम के प्रयास और कठिनाइयाँ + पूँजीपति की प्रतीक्षा और त्याग।

प्रश्न 7
वास्तविक लागत को ज्ञात करना कठिन है, क्यों? समझाइए।
उत्तर:
वास्तविक लागत को ज्ञात करना एक कठिन कार्य है क्योकि वास्तविक लागत प्रयासों और त्यागों पर आधारित होती है। प्रयास, त्याग और प्रतीक्षा मनोवैज्ञानिक तथा आत्मनिष्ठ होते हैं, इसलिए उन्हें सही-सही मापा नहीं जा सकता है।

प्रश्न 8
उत्पादन लागत वक्र U-आकार के क्यों होते हैं ? [2016]
उत्तर:
लागत वक्रों के U-आकार का होने का सबसे बड़ा कारण उत्पादन को प्राप्त होने वाली आन्तरिक बचते (Internal Economics) हैं।

प्रश्न 9
कुल उत्पादन लागत की संरचना लिखिए। उत्तर कुल लागत निम्नलिखित दो प्रकार की लागतों से मिलकर बनती है
(1) स्थिर अथवा पूरक लागत (Fixed Costs),
(2) परिवर्तनशील लागत (Variable Costs)
या कुल लागत = स्थिर लागत + परिवर्तनशील लागत।

प्रश्न 10
परिवर्तनशील लागत को परिभाषित कीजिए। [2015, 16]
उत्तर:
परिवर्तनशील लागत वह लागत होती है जो उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ बढ़ती रहती है। तथा उत्पादन की मात्रा में कमी होने पर घटती रहती है।

प्रश्न 11
स्थिर लागत किसे कहते हैं? [2010, 12]
या
स्थिर लागत को परिभाषित कीजिए। [2015]
उत्तर:
स्थिर लागत वह लागत होती है जो उत्पादन की मात्रा के साथ घटती-बढ़ती नहीं है। इसे पूरक लागत भी कहते हैं।

प्रश्न 12
अवसर लागत को हस्तान्तरण आय भी कहते हैं। हाँ या नहीं। [2014]
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 13
स्थिर लागत अल्पकाल में उत्पादन में परिवर्तन होने पर परिवर्तित होती है। सही अथवा गलत।
उत्तर:
गलत।।

प्रश्न 14
स्थिर लागत एवं परिवर्तनशील लागत में भेद कीजिए। [2012, 14]
उत्तर:
स्थिर लागत वह लागत होती है जो उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ बढ़ती नहीं है, जबकि परिवतर्नशील लागत वह लागत होती है जो उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ बढ़ती रहती है तथा उत्पादन की मात्रा में कमी होने पर घटती रहती है।

प्रश्न 15
अवसर लागत क्या है? [2006, 08, 10, 14]
उत्तर:
किसी वस्तु के उत्पादन की अवसर लागत वस्तु की वह मात्रा है जिसका त्याग किया जाता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
उत्पत्ति वृद्धि नियम (वृद्धिमान प्रतिफल नियम) की क्रियाशीलता की दशा में औसत लागत की प्रवृत्ति होती है
(क) घटने की
(ख) बढ़ने की
(ग) स्थिर रहने की
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) घटने की।

प्रश्न 2
जब उत्पादन ‘ह्रास नियम’ के अन्तर्गत होता है, तब सीमान्त एवं औसत लागते
(क) घटने लगती हैं।
(ख) बढ़ने लगती हैं।
(ग) स्थिर रहती हैं।
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) बढ़ने लगती हैं।

प्रश्न 3
अवसर लागत को कहते हैं
(क) व्यक्तिगत आय
(ख) हस्तान्तरण आय
(ग) सामाजिक आय
(घ) राष्ट्रीय आय
उत्तर:
(ख) हस्तान्तरण आय।

प्रश्न 4
जब सीमान्त लागत घटती है, तो औसत लागत
(क) स्थिर रहती है।
(ख) तेजी से गिरती है।
(ग) तेजी से बढ़ती है।
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(घ) इनमें से कोई नहीं।।

प्रश्न 5
“किसी निश्चित वस्तु की अवसर लागत वह उत्तम विकल्प है जिसका परित्याग कर दिया जाता है।” यह कथन है
(क) डॉ० एल० ग्रीन का।
(ख) डेवनपोर्ट का ।
(ग) प्रो० कोल का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) प्रो० कोल का।

प्रश्न 6
वास्तविक उत्पादन लागत में सम्मिलित होता है
(क) श्रम के प्रयास और कठिनाइयाँ + पूँजीपति की प्रतीक्षा और त्याग
(ख) भूमि का लगान
(ग) प्रबन्धक का वेतन
(घ) उद्यमी का लाभ
उत्तर:
(क) श्रम के प्रयास और कठिनाइयाँ + पूँजीपति की प्रतीक्षा और त्याग।

प्रश्न 7
‘वास्तविक उत्पादन लागत का सिद्धान्त हमें सन्देहात्मक विचार तथा अवास्तविकता की दलदल में डाल देता है।” यह कथन है
(क) प्रो० मार्शल का
(ख) प्रो० हेन्डरसन का
(ग) रिकार्डों का।
(घ) प्रो० जे० के० मेहता का
उत्तर:
(ख) प्रो० हेन्डरसन का।

प्रश्न 8
वास्तविक लागत का सिद्धान्त है
(क) वास्तविक
(ख) अवास्तविक
(ग) वास्तविक और अवास्तविक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) अवास्तविक।

9. निम्नलिखित में से किसे उत्पादन की स्थिर लागत में सम्मिलित किया जाता है?
(क) कच्चे माल की कीमत
(ख) अस्थायी श्रमिकों की मजदूरी
(ग) फैक्ट्री-भवन का किराया
(घ) इन सभी को
उत्तर:
(ग) फैक्ट्री-भवन का किराया।

प्रश्न 10
निम्नलिखित में से स्थिर लागत कौन-सी? [2012]
(क) कच्चे माल पर व्यय
(ख) यातायात व्यय
(ग) मशीनों पर व्यय
(घ) श्रमिकों की मजदूरी
उत्तर:
(घ) श्रमिकों की मजदूरी।

प्रश्न 11
जब औसत लागत न्यूनतम होती है, तब [2014]
(क) औसत लागत < सीमान्त लागत
(ख) औसत लागत = सीमान्त लागत
(ग) औसत लागत > सीमान्त लागत
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) औसत लागत = सीमान्त लागत।

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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives (अवकलज के अनुप्रयोग) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives (अवकलज के अनुप्रयोग)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 6
Chapter Name Application of Derivatives
Exercise Ex 6.1, Ex 6.2, Ex 6.3, Ex 6.4, Ex 6.5
Number of Questions Solved 109
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives

प्रश्नावली 6.1

प्रश्न 1.
वृत्त के क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर इसकी त्रिज्या r के सापेक्ष ज्ञात कीजिए, जबकि
(a) r = 3 सेमी है
(b) r = 4 सेमी है।
हल-
(a) माना वृत्त का क्षेत्रफल A है, तब
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अत: क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर 6π सेमी²/सेकण्ड है।
(b) उपरोक्त की भाँति स्वयं हल कीजिए।[उत्तर : 8π सेमी²/से]

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प्रश्न 2.
एक घन का आयतन 9 सेमी3/से की दर से बढ़ रहा है। यदि इसकी कोर की लम्बाई 10 सेमी है तो इसके पृष्ठ का क्षेत्रफल किस दर से बढ़ रहा है?
हल-
माना घन की कोर = x सेमी, घन का आयतन = V तथा पृष्ठ क्षेत्रफल = S
तब V = x3 तथा S = 6x2. जहाँ x समय t को फलन है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 2
अतः पृष्ठ क्षेत्रफल 3.6 सेमी²/से की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 3.
एक वृत्त की त्रिज्या समान रूप से 3 सेमी/से की दर से बढ़ रही है। ज्ञात कीजिए की वृत्त का क्षेत्रफल किस दर से बढ़ रहा है जब त्रिज्या 10 सेमी है?
हल-
मानी वृत्त की त्रिज्या r सेमी है, तब वृत्त का क्षेत्रफल A = πr² सेमी²
प्रश्नानुसार, [latex ]\frac { dr }{ dt }=3[/latex] सेमी/से …(i)
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अत: क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर 60π सेमी²/सेकण्ड है।

प्रश्न 4.
एक परिवर्तनशील घन का किनारा 3 cm/s की दर से बढ़ रहा है घन का आयतन किस दर से बढ़ रहा है जबकि किनारा 10 cm लम्बा है?
हल-
माना घन का आयतन = V तथा भुजा = a है, तब V = a3
ज्ञात है
[latex ]\frac { da }{ dt }=3[/latex] सेमी/से, a = 10 सेमी
∴ समय के सापेक्ष आयतन के परिवर्तन की दर
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अतः जब घन का किनारा 10 cm लम्बा हो तब घन का आयतन 900 cm2/s की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 5.
एक स्थिर झील में एक पत्थर डाला जाता है और तरंगें वृत्तों में 5 सेमी/से की गति से चलती है। जब वृत्ताकार तरंग की त्रिज्या 8 सेमी है तो उस क्षण घिरा हुआ क्षेत्रफल किस दर से बढ़
हल-
दिया है- [latex ]\frac { dr }{ dt }=5[/latex] सेमी/से, r = 8 सेमी
माना तरंगों से बने वृत्त का क्षेत्रफल A सेमी² है।
तब A = πr²
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 5
अतः जब तरंग की त्रिज्या 8 सेमी हो तब तरंगों द्वारा घिरा हुआ क्षेत्रफल 80 π सेमी²/से की दर से बढ़ रहा है।

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प्रश्न 6.
एक वृत्त की त्रिज्या 0.7 सेमी/से की दर से बढ़ रही है। इसकी परिधि की वृद्धि की दर क्या है। जब r = 4.9 सेमी है?
हल-
माना वृत्त की त्रिज्या r सेमी है, तब परिधि C = 2πr
प्रश्नानुसार,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 6
अत: वृत्त की परिधि 1.4π सेमी/से की दर से बढ़ रही है।

प्रश्न 7.
एक आयत की लम्बाई x, 5 सेमी/मिनट की दर से घट रही है और चौड़ाई y, 4 सेमी/मिनट की दर से बढ़ रही है। जब x = 8 सेमी और y = 6 सेमी है। तब आयत के
(a) परिमाप
(b) क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए।
हल-
ज्ञात है- [latex ]\frac { dx }{ dt }=5[/latex] सेमी/मिनट
तथा [latex ]\frac { dy }{ dt }=4[/latex] सेमी/मिनट
माना आयत का क्षेत्रफल = A सेमी², परिमाप = p सेमी
लम्बाई = x सेमी, चौड़ाई = y सेमी
(a) परिमाप p = 2(x + y)
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अत: आयत का क्षेत्रफल 2 सेमी2/सेमी की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 8.
एक गुब्बारा जो सदैव गोलाकर रहता है, एक पम्प द्वारा 900 सेमी3/सेकण्ड की दर से फुलाया जाता है। गुब्बारे की त्रिज्या के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए जब त्रिज्या 15 सेमी है।
हल-
माना गुब्बारे की त्रिज्या = r तथा आयतन = V
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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 9

प्रश्न 9.
एक गुब्बारा जो सदैव गोलाकार रहता है कि त्रिज्या परिवर्तनशील है। त्रिज्या के सापेक्ष आयतन के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए जब त्रिज्या 10 सेमी है।
हल-
माना गुब्बारे का आयतन = V तथा त्रिज्या = r
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अतः जब त्रिज्या 10 सेमी हो तब गुब्बारे का आयतन 400 π सेमी3/सेमी की दर से बढ़ता है।

प्रश्न 10.
एक 5 मी लम्बी सीढी दीवार के सहारे झुकी है। सीढ़ी का नीचे का सिरा जमीन के अनुदिश दीवार से दूर 2.0 मी/से की दर से खींचा जाता है। दीवार पर इसकी ऊँचाई किस दर से घट रही है जबकि सीढ़ी को नीचे का सिरा दीवार से 4 मी दूर है?
हल-
माना दीवार OC है तथा किसी क्षण सीढ़ी AB की स्थिति इस प्रकार है कि OA = x और OB = y
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अत: दीवार पर सीढ़ी की ऊँचाई 8/3 मी/से की दर से घट रही है।

प्रश्न 11.
एक कण वक्र 6y = x3 + 2 के अनुगत गति कर रहा है। वक्र पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जबकि x निर्देशांक की तुलना में y निर्देशांक 8 गुना तीव्रता से बदल रहा है।
हल-
दिया है-
6y = x3 + 2 और [latex ]\frac { dy }{ dt } =8\frac { dx }{ dt } [/latex]
t के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 13

प्रश्न 12.
हवा के बुलबुले की त्रिज्या, [latex ]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] सेमी/सेकण्ड की दर से बढ़ रही है। बुलबुले का आयतन किस दर से बढ़ रहा है जबकि त्रिज्या 1 सेमी है?
हल-
माना बुलबुले की त्रिज्या = r तथा बुलबुले का आयत
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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 15
अत: बुलबुले का आयतन 2π सेमी3/से की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 13.
एक गुब्बारा जो सदैव गोलाकार रहता है, का परिवर्तनशील व्यास [latex ]\frac { 3 }{ 2 }(2x+1)[/latex] है। x के सापेक्ष आयतन के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए।
हल-
प्रश्नानुसार गोलाकार गुब्बारे का व्यास = [latex ]\frac { 3 }{ 2 }(2x+1)[/latex]
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प्रश्न 14.
एक पाइप से रेत 12 सेमी3/से की दर से गिर रही है। गिरती रेत जमीन पर एक ऐसा शंकु बनाती है जिसकी ऊँचाई सदैव आधार की त्रिज्या का छठा भाग है।रेत से बने शंकु की ऊँचाई किस दर से बढ़ रही है जबकि ऊँचाई 4 सेमी है?
हल-
माना किसी क्षण t है पर शंकु की त्रिज्या r, ऊँचाई h तथा आयतन V है।
[latex ]h=\frac { r }{ 6 }(2x+1)[/latex]
⇒ r = 6h
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प्रश्न 15.
एक वस्तु की x इकाइयों के उत्पादन की कुल लागत C (x) Rs में
C(x) = 0.007x3 – 0.003x2 + 15x + 4000
से प्राप्त होती है। सीमान्त लागत ज्ञात कीजिए जबकि 17 इकाइयों का उत्पादन किया जाता है।
हल-
प्रश्नानुसार, C(x) = 0.007x3 – 0.003x2 + 15x + 4000
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 19
= 6.069 – 0.102 + 15
= 20.967
अतः 17 इकाइयों के उत्पादन की सीमान्त लागत Rs 20.967 है।

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प्रश्न 16.
किसी उत्पाद की x इकाइयों के विक्रय से प्राप्त कुल आय R(x) Rs में R(x) = 13x2 + 26x + 15 से प्राप्त होती है। सीमान्त आय ज्ञात कीजिए जब x = 7 है।
हल-
प्रश्नानुसार, R(x) = 13x2 + 26x + 15
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 20
(MR)x=7 = 26 x 7 + 26
= 182 + 26
= 208
अत: अभीष्ट सीमान्त आय Rs 208 है।

प्रश्न 17.
एक वृत्त की त्रिज्या r = 6 सेमी पर r के सापेक्ष क्षेत्रफल में परिवर्तन की दर है :
(a) 10 π
(b) 12 π
(c) 8 π
(d) 11 π
हल-
मानी वृत्त का क्षेत्रफल = A तथा त्रिज्या = r
क्षेत्रफल A = πr²
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 21
अत: विकल्प (b) सही है।

प्रश्न 18.
एक उत्पाद की x इकाइयों के विक्रय से प्राप्त कुल आय रुपयों में R(x) = 3x² + 36x + 5 से प्रदत्त है। जब x = 15 है तो सीमान्ते आये है :
(a) 116
(b) 96
(c) 90
(d) 126
हल-
दिया है- R(x) = 3x² + 36x +5
सीमान्त ।
सीमान्त आय =
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अब, x = 15, सीमान्त आय = 6 × 21 = Rs 126
अत: विकल्प (d) सत्य है।

प्रश्नावली 6.2

प्रश्न 1.
दिखाइए कि दिया गया फलन f, f(x) = x3 – 3x² + 4x, x ∈ R, R पर निरन्तर वृद्धिमान फलन है।
हल-
दिया गया फलन
f(x) = x3 – 3x² + 4x
f ‘(x) = 3x² – 6x +4
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 23
= 3(x – 1)² + 1 > 0, ∀ x∈R
∵ f ‘(x) > 0, ∀ x∈R
∴ f(x), R पर निरन्तर वृद्धिमान फलन है।

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प्रश्न 2.
सिद्ध कीजिए कि R पर f(x) = 3x + 17 निरन्तर वृद्धिमान फलन है।
हल-
दिया गया फलन f(x) = 3x + 17
f ‘(x) = 3 > 0, ∀ x∈R
f ‘(x) > 0, ∀ x∈R
∴ f(x), R पर निरन्तर वृद्धिमान फलन है।

प्रश्न 3.
सिद्ध कीजिए कि f(x) = sin x द्वारा दिया गया फलन
(a) (0, π/2) में निरन्तर वृद्धिमान है।
(b) (π/2, π) में निरन्तर ह्रासमान है।
(c) (0, π) में न तो वृद्धिमान है और न ह्रासमान।
हल-
(a) f(x) = sin x
⇒ f ‘(x) = cos x
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 24
अन्तराल (0, π/2) में निरन्तर वृद्धिमान तथा अन्तराल (π/2, π) में निरन्तर ह्रासमान है।
∴ फलन अन्तराल (0, π) में न तो वृद्धिमान है और न ह्रासमान,

प्रश्न 4.
अन्तराल ज्ञात कीजिए जिनमें f(x) = 2x² – 3x द्वारा दिया गया फलन
(a) निरन्तर वृद्धिमान है,
(b) निरन्तर ह्रासमान है।
हल-
(a) दिया गया फलन f(x) = 2x² – 3x
f ‘(x) = 4x – 3 > 0, ∀ x > [latex ]\frac { 3 }{ 4 }[/latex]
∴ f(x), अन्तराल (3/4, ∞) पर निरन्तर वृद्धिमान है।

(b) पुनः f ‘(3) = 4x – 3< 0, ∀ x < [latex ]\frac { 3 }{ 4 }[/latex]
∴ f(x), अन्तराल (-∞,3/4) पर निरन्तर ह्रासमान है।

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प्रश्न 5.
अन्तराल ज्ञात कीजिए जिनमें f(x) = 2x3 – 3x2 – 36x + 7 से दिया फलन f (a) निरन्तर वृद्धिमान है, (b) निरन्तर ह्रासमान है।
हल-
(a) दिया गया फलन f(x) = 2x3 – 3x2 – 36x +7
f ‘(x) = 6x2 – 6x – 36 = 6(x2 – x – 6).
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प्रश्न 6.
अन्तराल ज्ञात कीजिए जिनमें निम्नलिखित फलन निरन्तर वर्धमान अथवा हासमान है
(a) f(x) = x² + 2x + 5
(b) f (x) = 10 – 6x – 2x²
(c) f (x) = – 2x3 – 9x2 – 12x + 1
(d) f(x) = 6 – 9x – x²
(e) f(x) = (x + 1)3 (x – 3)3
हल-
(a) ज्ञात है- f (x) = x2 + 2x + 5
f ‘ (x) = 2x + 2 = 2 (x + 1)
f ‘ (x) = 0 ⇒ 2 (x + 1) ⇒ x = – 1
x = – 1 संख्या रेखा को दो भागों में बांटता है। यह भाग अन्तराल (-∞ , -1) तथा (-1, ∞ ) है।
(- ∞ , – 1) में f ‘ (x) = – ऋणात्मक
अत: अन्तराल (-∞ , -1) में फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
(-1, ∞ ) में f ‘ (x) = + धनात्मक
अतः अन्तराल (-1, ∞ ) फलन f निरन्तर वर्धमान है।
(b) ज्ञात है. f (x) = 10 – 6x – 2x²
f ‘ (x) = – 6 – 4x = – 2 (3 + 2x)
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प्रश्न 7.
सिद्ध कीजिए कि
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अपने सम्पूर्ण प्रान्त में एक वृद्धिमान फलन है।
हल-
दिया गया फलन
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प्रश्न 8.
x के उन मानों को ज्ञात कीजिए जिनके लिए y = [x(x – 2)]² एक वर्धमान फलन है।
हल-
ज्ञात है- y = [x (x – 2)]² = x² (x + 4 – 4x)
= x4 – 4x3 + 4x2
x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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∴ x = 0, x = 1, x = 2 से वास्तविक संख्या रेखा के चार भाग अन्तराल (-∞, 0), (0, 1), (1, 2), (2, 2) बनते हैं।
अन्तराल (- ∞, 0) में f ‘ (x) = (-) (-) (-) = – ve (ऋणात्मक)
अतः फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
अन्तराल (0, 1) में f ‘ (x) = (+) (-) (-) = + ve (धनात्मक)
अतः फलन f निरन्तर वर्धमान है।
अन्तराल (1, 2) में f ‘ (x) = (+) (+) (-) = – ve (ऋणात्मक)
अतः फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
अन्तराल (2, ∞) में f ‘ (x) = (+) (+) (+) = +ve (धनात्मक)
अतः फलन f निरन्तर वर्धमान है।
इस प्रकार (0, 1) ∪ (2, ∞) में फलन f वर्धमान है तथा (-∞, 0) ∪ (1, 2) में फलन ह्रासमान है।

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प्रश्न 9.
सिद्ध कीजिए कि [0, π/2] में
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θ का एक वृद्धिमान फलन है।
हल-
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प्रश्न 10.
सिद्ध कीजिए कि लघुगणकीय फलन (0,∞) में निरन्तर वर्धमान फलन है।
हल-
ज्ञात है– f (x) = log x, x > 0
f ‘(x) = [latex ]\frac { 1 }{ x }[/latex] = धनात्मक, x > 0 के लिए
अतः लघुगणकीय फलन अन्तराल (0, ∞) के लिए निरन्तर वर्धमान है। इति सिद्धम्

प्रश्न 11.
सिद्ध कीजिए कि (-1,1) में f (x) = x² – x + 1 से प्रदत्त फलन न तो वर्धमान है। और न ही ह्रासमान है।
हल-
दिया है | f (x) = x² – x + 1
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इस प्रकार (-1, 1) में f ‘(x) का चिह्न एक नहीं है।
अतः इस अन्तराल में यह फलन न तो वर्धमान है और न ही ह्रासमान है। इति सिद्धम्

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में कौन से फलन (0,[latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex]) में निरन्तर ह्रासमान है?
(A) cos x
(B) cos 2x
(C) cos 3x
(D) tan x
हल-
(A) माना f (x) = cos x, ∴ f ‘ (x) = – sin x
अन्तराल (0, π/ 2) में, sin x = + धनात्मक ⇒f ‘ (x) = – ऋणात्मक
अतः फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
(B) माना f (x) = cos 2x
∴ f ‘(x) = – 2 sin 2x
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित अन्तरालों में से किस अन्तराल में f (x) = x100 + sin x – 1 द्वारा प्रदत्त फलन f निरन्तर ह्रासमान है ?
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हल-
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प्रश्न 14.
a का वह न्यूनतम मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए अन्तराल [1, 2] में f(x) = x² + ax + 1 से दिया गया फलन निरन्तर वृद्धिमान है।
हल-
दिया गया फलन
f(x) = x² + ax + 1
f ‘(x) = 2x + a
अन्तराल [1, 2] में f ‘(x) का न्यूनतम मान f ‘(1) = 2 + a होगा
∵ f(x) अन्तराल [1, 2] में निरन्तर वृद्धिमान है ∴ f ‘(x) ≥ 0
∴ 2 + a ≥ 0
⇒ a≥ -2
अत: a का न्यूनतम मान -2 है।

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प्रश्न 15
माना[-1, 1] से असंयुक्त एक अन्तराल I हो तो सिद्ध कीजिए कि I में f(x) = [latex]x+\frac { 1 }{ x }[/latex] से दिया गया फलन f निरन्तर वृद्धिमान है।
हल-
दिया गया फलन f(x) = [latex]x+\frac { 1 }{ x }[/latex]
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∴ (x – 1)(x + 1) > 0
∴ f ‘(x) > 0
⇒ f(x) निरन्तर वृद्धिमान है जब x∈ (1, ∞)
अतः f(x), I पर निरन्तर वृद्धिमान है।

प्रश्न 16.
सिद्ध कीजिए कि फलन f(x) = log sin x,(0,[latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex]) में निरन्तर वर्धमान और ([latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex],π) में निरन्तर ह्रासमान है।
हल-
दिया है- f(x) = log sin x
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प्रश्न 17.
सिद्ध कीजिए कि फलन f(x) = log | cos x|; (0, π/2) निरन्तर ह्रासमान और (π/2, π) में निरन्तर वृद्धिमान है।
हल-
दिया गया फलन f(x) = log cos x
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प्रश्न 18.
सिद्ध कीजिए कि R में दिया गया फलन f(x) = x3 – 3x2 + 3x – 100 वर्धमान है।
हल-
ज्ञात है- f (x) = x3 – 3x2 + 3x – 100
∴f ‘(x) = 3x2 – 6x + 3 = 3 (x2 – 2x + 1) = 3(x – 1)2
∀x∈ R, f ’(x) = धनात्मक
अतः फलन f वर्धमान है। इति सिद्धम्

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प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से किस अन्तराल में y = x2e-x वर्धमान है?
(a) (-∞, ∞)
(b) (-2, 0)
(c) (2, ∞)
(d) (0, 2)
हल-
दिया है- f (x) = x2e-x
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प्रश्नावली 6.3

प्रश्न 1.
वक्र y = 3x4 – 4x के x = 4पर स्पर्श रेखा की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 3x4 -4x
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= 4[3 x 64 – 1]
= 4[192 – 1]
= 4 x 191
= 764
∴स्पर्श रेखा की प्रवणता = 764

प्रश्न 2.
वक्र [latex ]y=\frac { x-1 }{ x-2 }[/latex],x ≠ 2 के x = 10 पर स्पर्श रेखा की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\frac { x-1 }{ x-2 }[/latex],x ≠ 2
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर
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प्रश्न 3.
वक्र y = x3 – x + 1 की स्पर्श रेखा की प्रवणता उस बिन्दु पर ज्ञात कीजिए जिसका x-निर्देशांक 2 है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = x3 – x + 1
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प्रश्न 4.
वक्र y = x3 – 3x + 2 की स्पर्श रेखा की प्रवणता उस बिन्दु पर ज्ञात कीजिए जिसका x – निर्देशांक 3 है।
हल-
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प्रश्न 5.
वक्र x = a cos3θ, y= a sin3θ के θ = [latex]\frac { \pi }{ 4 } [/latex] पर अभिलम्ब की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र को समीकरण x = a cos3θ तथा y = a sin3θ
दोनों पक्षों का θ के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 6.
वक्र x = 1 – a sin θ, y = b cos² θ के θ = [latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex] पर अभिलम्ब की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण x = 1 – a sin θ तथा y = b cos² θ
दोनों पक्षों का θ के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 7.
वक्र y = x3 – 3x– 9x + 7 पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखायें x-अक्ष के समान्तर हैं।
हल-
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प्रश्न 8.
वक्र y = (x – 2)² पर एक बिन्दु ज्ञात कीजिए जिस पर स्पर्श रेखा बिन्दुओं (2,0) और (4,4) को मिलाने वाली रेखा के समान्तर है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = (x – 2)²
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 9.
वक्र y = x3 – 11x + 5 पर उस बिन्दु को ज्ञात कीजिए जिस पर स्पर्श रेखा y = x – 11 है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = x3 – 11x + 5
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प्रश्न 10.
प्रवणता -1 वाली सभी रेखाओं का समीकरण ज्ञात कीजिए जो वक़ [latex ]y=\frac { 1 }{ x-1 }[/latex],x ≠ -1 को स्पर्श करती है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\frac { 1 }{ x-1 }[/latex]
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प्रश्न 11.
प्रवणता 2 वाली सभी रेखाओं का समीकरण ज्ञात कीजिए जो वक्र [latex ]y=\frac { 1 }{ x-3 }[/latex],x ≠ 3 को स्पर्श करती है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\frac { 1 }{ x-3 }[/latex]
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 12.
प्रवणता 0 वाली सभी रेखाओं का समीकरण ज्ञात कीजिए जो वक्र
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को स्पर्श करती है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण
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दोनों पक्षों को x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 13.
वक्र
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पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखाएँ
(i) x-अक्ष के समान्तर हैं,
(ii) y-अक्ष के समान्तर हैं।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण
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दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 14.
दिए वक्रों पर निर्दिष्ट बिन्दुओं पर स्पर्श रेखा और अभिलम्ब के समीकरण ज्ञात कीजिए
(i) y = x4 – 6x3 + 13x2 – 10x + 5 के (0, 5) पर
(ii) y = x4 – 6x3 + 13x2 – 10x + 5 के (1, 3) पर
(iii) y = x3 के (1, 1) पर .
(iv) y = x² के (0, 0) पर
(v) x = cost, y = sin t के [latex]t=\frac { \pi }{ 4 } [/latex] पर
हल-
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प्रश्न 15.
वक्र y = x² – 2x + 7 की स्पर्श रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए, जो
(a) रेखा 2x – y + 9 = 0 के समान्तर है।
(b) रेखा 5y – 15x = 13 पर लम्ब है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = x² – 2x + 7
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 16.
सिद्ध कीजिए कि वक्र y = 7x3 + 11 के उन बिन्दुओं पर स्पर्श रेखाएँ समान्तर हैं जहाँ x = 2 तथा x = – 2 है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 7x3 + 11
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dy }{ dx }[/latex] = 21 x²
जब x = 2, तब स्पर्श रेखा की प्रवणता = 21 x 2² = 21 x 4 = 84
जब x = -2, तब स्पर्श रेखा की प्रवणता = 21 x (-2)² = 84
x = 2 तथा x = -2 पर स्पर्श रेखा की प्रवणता समान हैं।
अतः इन बिन्दुओं पर स्पर्श रेखाएँ समान्तर हैं। इति सिद्धम्

प्रश्न 17.
वक्र y = x3 पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखा की प्रवणता बिन्दु के y-निर्देशांक के बराबर है।
हल-
दिया है, वक्र की समीकरण y = x3
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dy }{ dx }[/latex] = 3x²
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प्रश्न 18.
वक्र y = 4x3 – 2x5, पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखाएँ मूलबिन्दु से होकर जाती हैं।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 4x3 – 2x5
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प्रश्न 19.
वक्र x² + y2 – 2x – 3 = 0 के उन बिन्दुओं पर स्पर्श रेखाओं के समीकरण ज्ञात कीजिए जहाँ पर वे x-अक्ष के समान्तर हैं।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण x² + y² – 2x – 3 = 0
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 20
वक्र ay2 = x3 के बिन्दु (am2, um3)पर अभिलम्ब का समीकरण ज्ञात कीजिए और m का मान बताइए जिसके लिए अभिलम्ब बिन्दु (a, 0) से होकर जाता है।
हल-
वक्र ay2 = x3 ….(1)
समीकरण (1) का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 21
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हल-
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प्रश्न 22.
परवलय y² = 4ax के बिन्दु (at², 2at) पर स्पर्श रेखा और अभिलम्ब के समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y² = 4ax
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 23
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हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 76

प्रश्न 24.
अतिपरवलय [latex ]\frac { { x }^{ 2 } }{ { a }^{ 2 } } -\frac { { y }^{ 2 } }{ { b }^{ 2 } } =1[/latex] के बिन्दु (x0, y0) पर स्पर्श रेखा तथा अभिलम्ब के समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]\frac { { x }^{ 2 } }{ { a }^{ 2 } } -\frac { { y }^{ 2 } }{ { b }^{ 2 } } =1[/latex]
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 25.
वक्र [latex ]y=\sqrt { 3x-2 } [/latex] की उन स्पर्श रेखाओं के समीकरण ज्ञात कीजिए जो रेखा 4x – 2y + 5 = 0 के समान्तर है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\sqrt { 3x-2 } [/latex] …(1)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 26.
वक्र y = 2x2 + 3sin x के x = 0 पर अभिलम्ब की प्रवणता है
(A) 3
(B) [latex ]\frac { 1 }{ 3 }[/latex]
(C) 3
(D) [latex ]-\frac { 1 }{ 3 }[/latex]
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 2x² + 3 sin x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dy }{ dx }=4x+3cosx[/latex]
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अतः विकल्प (D) सही है।

प्रश्न 27.
किस बिन्दु पर y = x + 1, वक्र y² = 4x की स्पर्श रेखा है?
(A) (1,2)
(B) (2,1)
(C) (1,- 2)
(D) (-1, 2)
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y² = 4x …(1)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्नावली 6.4

प्रश्न 1.
अवकल का प्रयोग करके निम्नलिखित में से प्रत्येक का सन्निकट मान दशमलव के तीन स्थानों तक ज्ञात कीजिए
(i) [latex ]\sqrt { 25.3 } [/latex]
(ii) [latex ]\sqrt { 49.5 } [/latex]
(iii) [latex ]\sqrt { 0.6 } [/latex]
(iv) (0.009)1/3
(v) (0.999)1/10
(vi) (15)1/4
(vii) (26)1/3
(viii) (255)1/4
(ix) (82)1/4
(x) (401)1/2
(xi) (0.0037)1/2
(xii) (26.57)1/3
(xiii) (81.5)1/4
(xiv) (3,968)3/2
(xv) (32.15)1/5
हल-
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प्रश्न 2.
f(2.01) का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए जबकि f(x) = 4x² + 5x + 2
हल-
माना x = 2 और x + ∆x = 2.01 तब ∆x = 0.01 = dx (∵∆Y = dx)
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प्रश्न 3.
f(5.001) का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए जहाँ f(x) = x3 – 7 x² + 15
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 98

प्रश्न 4.
x मी भुजा वाले घन की भुजा में 1% की वृद्धि होने के कारण घन के आयतन में होने वाला सन्निकट परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल-
माना घन का आयतन V = x3
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घन के आयतन में सन्निकट परिवर्तन 0.03 x3 मी है।

प्रश्न 5.
x मी भुजा वाले घन की भुजा में 1% ह्रास होने के कारण घन के पृष्ठ क्षेत्रफल में होने वाला सन्निकट परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल-
घन का पृष्ठ क्षेत्रफल S = 6x2
[latex ]\frac { dS }{ dx }=12x[/latex]
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घन के आयतन में सन्निकट परिवर्तन -0.12 x2 मी2 है।

प्रश्न 6.
एक गोले की त्रिज्या 7 मी मापी जाती है जिसमें 0.02 मी की त्रुटि है। इसके आयतन के परिकलन में सन्निकट त्रुटि ज्ञात कीजिए।
हल-
ज्ञात है- गोले की त्रिज्या = 7 मी ।
∆r = त्रिज्या में अशुद्धि = 0.02 मी
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प्रश्न 7.
एक गोले की त्रिज्या 9 मी मापी जाती है जिसमें 0.03 मी की त्रुटि है। इसके पृष्ठ क्षेत्रफल के परिकलन में सन्निकट त्रुटि ज्ञात कीजिए।
हल-
ज्ञात है- r = गोले की त्रिज्या = 9 मी
∆r = त्रिज्या में अशुद्धि = 0.03
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प्रश्न 8.
यदि f (x) = 3x² + 15x + 5 हो तो f (3.02) का सन्निकट मान है–
(A) 47.66
(B) 57.66
(C) 67.66
(D) 77.66
हल-
f (3.02) = f (3) + df (3) [3.02 = 3 + 0.02]
यदि f (x) = 3x² + 15x + 5 …(1)
f ‘(x) = 6x + 15
समी० (1) में x = 3 रखने पर,
f (3) = 3 x 9 + 15 x 3 + 5 = 27 + 45 + 5 = 77
df (x) = f ‘(x) x ∆x = (6x + 15) x ∆x
= (6 x 3 + 15) x 0.02 [∴ x = 3, ∆ x = 0.02]
= (18 + 15) x 0.02
= 33 x 0.02 = 0.66
∴ f (3.02) = f (3) + df (3) = 77 + 0.66 = 77.66
अत: विकल्प (D) सही है।

प्रश्न 9.
भुजा में 3% वृद्धि के कारण भुजा x के घन के आयतन में सन्निकट परिवर्तन है
(A) 0.06 x3 मी3
(B) 0.6 x3 मी3
(C) 0.09 xमी3
(D) 0.9 xमी3
हल-
चूँकि घन का आयतन V = x3 (∵ भुजा = x मी)
भुजा में वृद्धि, ∆x = 3% = x का
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अत: विकल्प (C) सही है।

प्रश्नावली 6.5

प्रश्न 1.
निम्नलिखित दिए गए फलनों के उच्चतम या निम्नतम मान, यदि कोई हो तो ज्ञात कीजिए
(i) f (x) = (2x – 1)² + 3
(ii) f (x) = 9x² + 12x + 2
(iii) f (x) = -(x – 1)² + 10
(iv) g(x) = x3 + 1
हल-
(i) दिया गया फलन f(x) = (2x – 1)² + 3
(2x – 1)² का कम-से-कम मान = 0,
⇒ f(x) ≥ 3; ∀ x∈R
∴ f (x) का निम्नतम मान = 3
(ii) दिया गया फलन f (x) = 9x² + 12x + 2 = 9x² + 12x + 4 – 2
= (3x + 2)² – 2
(3x + 2)² का निम्नतम मान = 0,
⇒ f (x) ≥ -2; ∀ x∈R
∴ f (x) का निम्नतम मान = -2
(iii) दिया गया फलन f (x) = – (x – 1)² + 10
– (x – 1)² का उच्चतम मान = 0
⇒f (x) ≤ 10; ∀ x∈R
∴f का उच्चतम मान = 10
(iv) यहाँ g(x) = x3 + 1.
g ‘(x) = 3x² जो x ∈ R के लिए धनात्मक है।
g ‘(x) = 3x² ≥ 0; ∀ x∈R
अत: g एक वर्धमान फलन है।
∴ इसका कोई न्यूनतम तथा अधिकतम मान नहीं है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित दिए गए फलनों के उच्चतम मान या निम्नतम मान, यदि कोई हो तो ज्ञात कीजिए
(i) f(x) = |x + 2| – 1
(ii) g(x) = -|x + 1| + 3
(iii) h(x) = sin (2x) + 5
(iv) f(x) =|sin 4x + 3|
(v) h(x) = x + 1, x∈(-1,1)
हल-
(i) दिया गया फलन f(x) =|x + 2| – 1, f (x)≥ -1; ∀ x∈R
|x + 2| को निम्नतम मान 0 है।
∴ f का निम्नतम मान = -1
|x + 2| कर उच्चतम मान अनन्त हो सकता है।
अत: उच्चतम मान का अस्तित्व नहीं है।
(ii) दिया गया फलन g(x) = -|x + 1| + 3; g (3) ≤ 3∀ x∈R
-|x +1| का उच्चतम मान = 0
g(x) = -|x + 1| + 3 का उच्चतम मान = 0 + 3 = 3
तथा निम्नतम मान का अस्तित्व नहीं है।
(iii) दिया गया फलन h(x) = sin (2x) + 5
हम जानते हैं कि -1 ≤ sin 2x ≤ 1
⇒ 4 ≤ 5 + sin 2x ≤ 6
sin 2x का उच्चतम मान = 1
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प्रश्न 3
निम्नलिखित फलनों के स्थानीय उच्चतम या निम्नतम, यदि कोई हो तो ज्ञात कीजिए तथा स्थानीय उच्चतम या स्थानीय निम्नतम माने, जैसी स्थिति हो, भी ज्ञात कीजिए।
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हल-
(i) दिया गया फलन f(x) = x²
⇒ f ‘(x) = 2x
यदि f ‘(x) = 0 तब 2x = 0 या x = 0
f ‘(x) जैसे ही x = 0 से होकर आगे बढ़ता है तब इसका चिह्न ऋणात्मक से धनात्मक में बदल जाता है।
∴x = 0 पर f स्थानीय मान निम्नतम है।
स्थानीय निम्नतम मान = f (0) = 0
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प्रश्न 4
सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित फलनों को उच्चतम या निम्नतम मान नहीं है–
(i) f (x) = ex
(ii) g(x) = log x
(iii) h(x) = x3 + x2 + x + 1
हल-
(i) दिया गया फलन f ‘(x) = ex
∴f ‘(x) = ex
f ‘(x), x∈R कभी भी शून्य के समान नहीं है।
अत: f का कोई उच्चतम या निम्नतम मान नहीं है। इति सिद्धम्
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प्रश्न 5
प्रदत्त अन्तरालों में निम्नलिखित फलनों के निरपेक्ष उच्चतम मान और निरपेक्ष निम्नतम मान ज्ञात कीजिए
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हल-
(i) दिया गया फलन f(x) = x3, अन्तराल [-2, 2]
f ‘(x) = 3x2
यदि f ‘(x) = 0, तब 3x² = 0
⇒ x = 0
x = -2 पर, f(-2) = (-2)3 = – 8
x = 0 पर, f(0) = (0)3 = 0
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प्रश्न 6
यदि लाभ फलन p(x) = 41 – 72x – 18x² से प्रदत्त है तो किसी कम्पनी द्वारा अर्जित उच्चतम लाभ ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया गया फलन लाभ p(x) = 41 -72x – 18x² …(1)
p’ (x) = – 72 – 36x = – 36 (2 + x)
p ” (x) = – 36
यदि p ‘(x) = 0, तब – 36 (2 + x) = 0 ⇒ 2 + x = 0 ∴ x = -2
p ‘(x) = – ve
अतः x = -2 पर p(x) उच्चतम है।
∴उच्चतम लाभ = p(-2)
[समी० (1) में x  = -2 रखने पर]
= 41 – 72 (-2)2 – 18 (-2)²
= 41 + 144 – 72
= 43 इकाई

प्रश्न 7
अन्तराल [0, 3] पर 3x4 – 8x3 + 12x2 – 48x + 25 के उच्चतम मान और निम्नतम मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना f (x) = 3x4 – 8x3 + 12x2 – 48x + 25
f ‘(x) = 12x3 – 24x2 + 24x – 48
= 12 [x3 – 2x2 + 2x – 4] = 12 [x² (x – 2) + 2 (x – 2)]
= 12 (x – 2) (x2 + 2)
यदि f ‘(x) = 0, तब x – 2 = 0 ⇒ x = 2
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प्रश्न 8
अन्तराल [0, 2π] के किन बिन्दुओं पर फलन sin 2 x अपना उच्चतम मान प्राप्त करता है।
हल-
माना f (x) = sin 2x, अन्तराल [0, 2π]
f ‘(x) = 2 cos 2x
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प्रश्न 9.
फलन sin x + cos x का उच्चतम मान क्या है?
हल-
माना f (x) = sin x + cos x, अन्तराल [0, 2π]
f ‘(x) = cos x – sin x
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए,
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प्रश्न 10.
अन्तराल [1,3] में 2x3 – 24x + 107 का महत्तम मान ज्ञात कीजिए। इसी फलन का अन्तराला [-3,-1] में भी महत्तम मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना
f (x) = 2x3 – 24x + 107, अन्तराल [1, 3]
f ‘(x) = 6x² – 24
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, f ‘(x) = 0
⇒ 6x2 – 24 = 0 ⇒ 6x2 = 24 ⇒ x2 = 4 ⇒ x = ±2
अन्तराल [1, 3] के लिए f(x) = 2x3 – 24x + 107 में x के मान रखने पर,
x = 1 पर, f(1) = 2(1)3 – 24 (1) + 107 = 2 – 24 + 107 = 85
x = 3 पर, f (3) = 2(3)3 – 24 (3) + 107 = 54 – 72 + 107 = 89
x = 2 परे, f(2) = 2(2)3 – 24(2) + 107 = 16 – 48 + 107 = 75
इस प्रकार अधिकतम मान f (x) = 89,
x = 3 पर, अन्तराल [-3,-1] के लिए हम x = – 3, – 2, – 1 पर f(x) का मान ज्ञात करते हैं।
x = – 3 पर, f(-3) = 2(-3)3 – 24 (-3) + 107
= – 54 + 72 + 107 = – 54 + 179 = 125
x = – 1 पर f(-1) = 2 (-1)3 – 24 (-1) + 107 = -2 +24 + 107 = 129
x = – 2 पर f(-2) = 2(-2)3 – 24 (-2) + 107 = -16 + 48 +107 = 139
इस प्रकार अधिकतम मान f (x) = 139, x = -2 पर।

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प्रश्न 11.
यदि दिया है कि अन्तराल [0,2] में x = 1 पर फलन x4 – 62x2 + ax + 9 उच्चतम मान प्राप्त करता है तो a का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना f(x) = x4 – 62x2 + ax + 9
f ‘(x) = 4x3 – 124x + a
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, f ‘(x) = 0
⇒ 4x3 – 124x + a = 0
दिया है, x = 1 पर, f उच्चतम है ⇒ f (1) = 0
4x3 – 124x + a = 0 में x = 1 रखने पर
4 x 1 – 124 x 1 + a = 0 ⇒ 4 – 124 + a = 0 ⇒ – 120 + a = 0
a = 120
इसलिए a का मान 120 है।

प्रश्न 12.
[0,2π] पर x + sin 2x का उच्चतम और निम्नतम मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना f(x) = x + sin 2x
f ‘(x) = 1 + 2 cos 2x
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, f ‘(x) = 0
⇒ 1 + 2 cos 2x = 0 ⇒ cos2x = [latex]-\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
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प्रश्न 13.
ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनका योग 24 है और जिनका गुणनफल उच्चतम हो।
हल-
माना पहली संख्या = x तब दूसरी संख्या = 24 – x है।
प्रश्नानुसार, उनका गुणनफल p = x(24 – x) = 24x – x² …(1)
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, [latex]\frac { dp }{ dx }=0[/latex]
समी० (1) का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 14.
ऐसी दो धन संख्याएँ x और y ज्ञात कीजिए ताकि x + y = 60 और xy3 उच्चतम हो।
हल-
दिया है,
x + y = 60
x = 60 – y …(1)
माना xy3 = P …(2)
समीकरण (1) से x का मान समीकरण (2) में रखने पर,
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प्रश्न 15.
ऐसी दो धन संख्याएँ x और y ज्ञात कीजिए जिनका योग 35 हो और गुणनफल x2y5 उच्चतम हो।
हल-
दो धन संख्याएँ x, y हैं।
दिया है, x + y = 35
⇒ y = 35 – x …(1)
प्रश्नानुसार, माना गुणनफल p = x2y5 …(2)
समीकरण (1) से y का मान समीकरण (2) में रखने पर,
p = x2 (35 – x)5
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 16.
ऐसी दो धन संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनका योग 16 हो और जिनके घनों का योग निम्नतम हो।
हल-
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प्रश्न 17.
18 सेमी भुजा के टिन के किसी वर्गाकार टुकड़े से प्रत्येक कोने पर एक वर्ग काटकर तथा इस प्रकार बने टिन के फलकों को मोड़कर ढक्कन रहित एक सन्दूक बनाना है। काटे जाने वाले वर्ग की भुजा कितनी होगी जिससे सन्दूक का आयतन उच्चतम होगा?
हल-
माना वर्ग की प्रत्येक भुजा x सेमी काटी गई है।
∴ सन्दूक के लिए,
लम्बाई = 18 – 2x
चौड़ाई = 18 – 2x
ऊँचाई = x
आयतन V = ल० × चौ० × ऊँ०
= x(18 – 2x) (18 – 2x)
= x(18 – 2x)x² …(1)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 18
45 सेमी लम्बी और 24 सेमी चौड़ी आयताकार लोहे की एक चादर के चारों कोनों से समान भुजा का एक वर्गाकार निकालने के पश्चात् खुला हुआ एक सन्दुक बनाया जाता है। वर्गों की भुजा की माप ज्ञात कीजिये जिसके काटने पर बने सन्दूक का आयतन महत्तम होगा।
हल-
माना अभीष्ट वर्ग की भुजा x है तब ।।
सन्दूक की लम्बाई = (45-2x)
तथा सन्दूक की चौड़ाई = (24-2x)
सन्दूक की ऊँचाई = x
∴ सन्दूक का आयतन
V = (45 – 2x) (24 – 2x) x
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∴x = 5 पर V का मान महत्तम होगा।
∴ वर्ग की भुजा 5 सेमी होगी।

प्रश्न 19.
सिद्ध कीजिए कि एक दिए वृत्त के अन्तर्गत सभी आयतों में वर्ग का क्षेत्रफल उच्चतम होता है।
हल-
माना a त्रिज्या के वृत्त के अन्तर्गत आयत की लम्बाई x तथा चौड़ाई y है।
चित्र ABC में,
AC = व्यास = 2a
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प्रश्न 20.
सिद्ध कीजिए कि दिए हुए सम्पूर्ण पृष्ठ और महत्तम आयतन के लम्बवृत्तीय बेलन की ऊँचाई , उसके आधार के व्यास के बराबर है।
हल-
माना बेलन की ऊँचाई h तथा आधार की त्रिज्या r है।
पुनः माना बेलन का सम्पूर्ण पृष्ठ S और आयतन V है, तब
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प्रश्न 21.
100 सेमी3 आयतन वाले डिब्बे सभी बेलनाकार (लम्ब वृत्तीय) डिब्बों में से न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल वाले डिब्बे की विमाएँ ज्ञात कीजिए।
हल-
माना बेलनाकार डिब्बों की त्रिज्या r और ऊँचाई h है।
आयतन = πr²h = 100 सेमी3
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प्रश्न 22.
28 मीटर लम्बे तार के दो टुकड़े करके एक को वर्ग तथा दूसरे को वृत्त के रूप में मोड़ा जाता है। दोनों टुकड़ों की लम्बाई ज्ञात कीजिए यदि उनसे बनी आकृतियों को संयुक्त क्षेत्रफल न्यूनतम है।
हल-
तार की लम्बाई l = 28 मी
माना वर्ग की भुजा x तथा वृत्त की त्रिज्या r है, तब
l = वर्ग का परिमाप + वृत्त की परिधि = 4x + 2πr = 28 …(1)
माना संयुक्त क्षेत्रफल A है।
A = वर्ग की क्षेत्रफल + वृत्त का क्षेत्रफल = x² + πr²
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प्रश्न 23.
सिद्ध कीजिए कि R त्रिज्या के गोले के अन्तर्गत विशालतम शंकु का आयतन गोले के आयतन का [latex ]\frac { 8 }{ 27 }[/latex] होता है।
हल-
माना V, AB गोले के अन्तर्गत विशालतम शंकु का आयतन है। स्पष्टतया अधिकतम आयतन के लिए शंकु का अक्ष गोले की ऊँचाई के साथ होना चाहिए।
माना ∠AOC = θ,
∴ AC, शंकु के आधार की त्रिज्या = R sin θ, जहाँ R गोले की त्रिज्या है।
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प्रश्न 24.
दर्शाइये कि एक निश्चित आयतन के शंक्वाकार डेरे के बनाने में कम-से-कम कपड़ा लगेगा जब उसकी ऊँचाई आधार की त्रिज्या के √2 गुना होगी।
हल-
माना शंकु की ऊँचाई h, त्रिज्या r तथा तिरछी ऊँचाई l है।
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प्रश्न 25.
सिद्ध कीजिए कि दी हुई तिर्यक ऊँचाई और महत्तम आयतन वाले शंकु का अर्द्ध शीर्ष कोण tan-1√2 होता है।
हल-
माना शंकु की त्रिज्या = r, अर्द्धशीर्ष ∠BAM = θ
ऊँचाई = h; तिर्यक ऊँचाई = l
ऊर्ध्वाधर ऊँचाई, h = AM = l cos θ
शंकु की त्रिज्या, r = MC = l sin θ
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प्रश्न 26.
सिद्ध कीजिए कि दिए हुए पृष्ठ और महत्त्म आयतन वाले लम्बवृत्तीय शंकु का अर्द्धशीर्ष कोण [latex ]{ sin }^{ -1 }\left( \frac { 1 }{ 3 } \right) [/latex] होता है।
हल-
माना शंकु की त्रिज्या r, तिरछी ऊँचाई l सम्पूर्ण पृष्ठ S तथा आयतन V है।
सम्पूर्ण पृष्ठ S = πr (r + l) या πrl = S – πr²
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प्रश्न 27.
वक्र x² = 2y पर (0, 5) से न्यूनतम दूरी पर स्थित बिन्दु है
(A) (2√2, 4)
(B) ( 2√2 , 0)
(C) (0, 0)
(D) (2, 2)
हल-
माना वक्र x² = 2y पर कोई बिन्दु P(x, y) है।
दिया हुआ बिन्दु A (0, 5) है।
PA² = (x – 0)² + (y – 5)² = z (माना)
Z = x² + (y – 5)² …(1)
तथा वक्र x² = 2y …(2)
x² का मान समी० (1) में रखने पर,
Z = 2y + (y – 5)² =2y + y² + 25 – 10y = y² + 25 – 8y
दोनों पक्षों का y के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dZ }{ dy }=2y-8[/latex]
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, [latex ]\frac { dZ }{ dy }=0[/latex]
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प्रश्न 28.
x के सभी वास्तविक मानों के लिए!
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का न्यूनतम मान है–
(A) 0
(B) 1
(C) 3
(D) [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex]
हल-
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प्रश्न 29.
[x (x – 1) + 1]1/3,0≤x≤1 का उच्चतम मान है
(A) [latex]{ \left( \frac { 1 }{ 3 } \right) }^{ \frac { 1 }{ 3 } }[/latex]
(B) [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
(C) 1
(D) 0
हल-
माना y = [x (x – 1) + 1]1/3
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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उच्चतम मान = 1
अत: विकल्प (C) सही है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives (अवकलज के अनुप्रयोग) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives (अवकलज के अनुप्रयोग), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 2 Market

UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 2 Market (बाजार) are part of UP Board Solutions for Class 12 Economics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 2 Market (बाजार).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Economics
Chapter Chapter 2
Chapter Name Market (बाजार)
Number of Questions Solved 50
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 2 Market (बाजार)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

प्रश्न 1
बाजार की परिभाषा दीजिए। विभिन्न प्रकार के बाजारों के लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
या
बाजार को परिभाषित कीजिए। बाजार के मुख्य तत्त्व अथवा विशेषताएँ क्या हैं? बाजार में एक ही वस्तु की कीमत कैसे निर्धारित होती है?
उत्तर:
बाजार का अर्थ तथा परिभाषाएँ
साधारण बोलचाल की भाषा में बाजार शब्द से अभिप्राय किसी ऐसे स्थान विशेष से है जहाँ किसी वस्तु या वस्तुओं के क्रेता व विक्रेता एकत्र होते हैं तथा वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते हैं, परन्तु अर्थशास्त्र में बाजार शब्द का अर्थ इससे भिन्न है। अर्थशास्त्र के अन्तर्गत बाजार शब्द से अभिप्राय उस समस्त क्षेत्र से है जहाँ तक किसी वस्तु के क्रेता व विक्रेता फैले होते हैं तथा उनमें स्वतन्त्र प्रतियोगिता होती है, जिसके कारण वस्तु के मूल्यों में एकरूपता की प्रवृत्ति पायी जाती है।

विभिन्न अर्थशास्त्रियों के द्वारा बाजार की परिभाषाएँ निम्नवत् दी गयी हैं
एली के अनुसार, “हम बाजार को अर्थ साधारण क्षेत्र से लगाते हैं जिसके अन्तर्गत किसी वस्तु-विशेष पर मूल्य निर्धारित करने वाली शक्तियाँ सक्रिय होती हैं।”
कूर्गों के शब्दों में, “अर्थशास्त्री ‘बाजार’ शब्द का अर्थ किसी ऐसे विशिष्ट स्थान से नहीं लगाते हैं जहाँ पर वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है, बल्कि उस समस्त क्षेत्र से लगाते हैं जिसमें क्रेताओं और विक्रेताओं के मध्य आपस में इस प्रकार का सम्पर्क हो कि किसी वस्तु का मूल्य सरलता एवं शीघ्रता से समान हो जाये।”
प्रो० जेवेन्स के अनुसार, “बाजार शब्द का अर्थ व्यक्तियों के किसी भी ऐसे समूह के लिए होता है जिसमें आपस में व्यापारिक सम्बन्ध हों तथा जो किसी वस्तु का विस्तृत सौदा करते हों।”
प्रो० चैपमैन – “बाजार शब्द आवश्यक रूप से स्थान का बोध नहीं करता, बल्कि वस्तु अथवा वस्तुओं तथा क्रेताओं एवं विक्रेताओं का ज्ञान कराता है, जिसमें पारस्परिक प्रतिस्पर्धा होती है।”
प्रो० बेन्हम – “बाजार वह क्षेत्र होता है, जिमसें क्रेता और विक्रेता एक-दूसरे के इतने निकट सम्पर्क में होते हैं कि एक भाग में प्रचलित कीमतों का प्रभाव दूसरे भाग में प्रचलित कीमतों पर पड़ता रहता है।’
स्टोनियर एवं हेग – “अर्थशास्त्री बाजार का अर्थ एक ऐसे संगठन से लेते हैं, जिसमें किसी वस्तु के क्रेता तथा विक्रेता एक-दूसरे के निकट सम्पर्क में रहते हैं।”
प्रो० जे० के० मेहता – “बाजार एक स्थिति को बताता है, जिसमें एक ऐसी वस्तु की माँग एक ऐसे स्थान पर का जाती है, जहाँ उसे विक्रय के लिए प्रस्तुत किया जाता है।”

बाजार के मुख्य तत्व (लक्षण/विशेषताएँ)
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर बाजार में पाँच तत्त्वों का समावेश किया जाता है

1. एक क्षेत्र – बाजार से अर्थ उसे समस्त क्षेत्र से होता है जिसमें क्रेता व विक्रेता फैले रहते हैं तथा क्रय-विक्रय करते हैं।

2. एक वस्तु का होना – बाजार के लिए एक वस्तु का होना भी आवश्यक है। अर्थशास्त्र में प्रत्येक वस्तु का बाजार अलग-अलग माना जाता है; जैसे–कपड़ा बाजार, नमक बाजार, सर्राफा बाजार, किराना बाजार, घी बाजार। अर्थशास्त्र में बाजार की संख्या वस्तुओं के प्रकार तथा किस्मों पर निर्भर करती है।

3. क्रेताओं व विक्रेताओं का होना – विनिमय के कारण बाजार की आवश्यकता होती है। अतः बाजार में विनिमय के दोनों पक्षों (क्रेता व विक्रेता) का होना आवश्यक है। किसी एक भी पक्ष के न होने पर बाजार नहीं होगा।

4. स्वतन्त्र व पूर्ण प्रतियोगिता – बाजार में क्रेता और विक्रेताओं में स्वतन्त्र व पूर्ण प्रतियोगिता होनी चाहिए जिससे कि वस्तु की कीमत सम्पूर्ण बाजार में एकसमान बनी रह सके।

5. एक कीमत – बाजार की एक आवश्यक विशेषता यह भी है कि बाजार में किसी वस्तु की एक समय में एक ही कीमत हो। यदि कोई व्यापारी किसी वस्तु की एक ही समय में भिन्न-भिन्न कीमतें माँगता है तो क्रेता उससे माल नहीं खरीदेंगे। अत: बाजार में वस्तु की कीमत की प्रवृत्ति समान होने की होती है।

6. बाजार को पूर्ण ज्ञान – वस्तु का एक ही मूल्य हो, इसके लिए क्रेता-विक्रेता दोनों को ही बाजार का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। बाजार का अपूर्ण ज्ञान होने के कारण उनको वस्तुएँ उचित मूल्य पर प्राप्त होने में कठिनाई होती है।
उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर बाजार को इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है-“अर्थशास्त्र में बाजार का आशय किसी वस्तु के क्रेताओं एवं विक्रेताओं के ऐसे समूह से होता है, जिनमें स्वतन्त्र पूर्ण प्रतियोगिता हो तथा जिसके फलस्वरूप उस वस्तु की बाजार में एक ही कीमत हो।”

प्रश्न 2
बाजार की परिभाषा दीजिए। बाजार के वर्गीकरण की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
या
बाजार को परिभाषित कीजिए। समय के आधार पर बाजार के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख कीजिए। [2006, 08, 10, 11, 12]
उत्तर:
[ संकेत बाजार की परिभाषा के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 1 के उत्तर को देखिए।]
बाजार का वर्गीकरण
अर्थशास्त्र में बाजार का वर्गीकरण निम्नलिखित दृष्टिकोणों से किया जाता है
(क) क्षेत्र की दृष्टि से,
(ख) समय की दृष्टि से,
(ग) बिक्री की दृष्टि से,
(घ) प्रतियोगिता की दृष्टि से,
(ङ) वैधानिकता की दृष्टि से।

(क) क्षेत्र की दृष्टि से
क्षेत्र की दृष्टि से बाजार के वर्गीकरण का आधार यह होता है कि वस्तु-विशेष के क्रेता व विक्रेता । कितने क्षेत्र में फैले हुए हैं। इस दृष्टिकोण से बाजार चार प्रकार का होता है

1. स्थानीय बाजार – जब किसी वस्तु की माँग स्थानीय होती है अथवा उसके क्रेता और विक्रेता किसी स्थान-विशेष तक ही सीमित होते हैं, तब उस वस्तु का बाजार स्थानीय होता है। प्रायः भारी एवं कम मूल्य वाली वस्तुओं तथा शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं का बाजार स्थानीय होता है; जैसे-ईंट, दूध, गोश्त, सब्जी आदि का बाजार स्थानीय होता है। परिवहन के विकास एवं वस्तुओं को सुरक्षित रखने के साधनों के विकास के कारण अब स्थानीय बाजार वाली वस्तुओं का बाजार धीरे-धीरे विकसित होकर प्रादेशिक बाजार का स्थान लेता जा रहा है।

2. प्रादेशिक बाजार – जब वस्तु के क्रेता और विक्रेता केवल एक ही प्रदेश तक सीमित हों तब ऐसा बाजार प्रादेशिक होता है। उदाहरण के लिए हमारे देश में राजस्थानी पगड़ी तथा लाख की चूड़ियाँ केवल राजस्थान में ही प्रयोग में लायी जाती हैं, अन्य राज्यों में नहीं। अत: इन वस्तुओं का बाजार प्रादेशिक कहा जाएगा।

3. राष्ट्रीय बाजार – जब किसी वस्तु का क्रय-विक्रय केवल उस राष्ट्र तक ही सीमित हो, जिस राष्ट्र में वह वस्तु उत्पन्न की जाती है तब वस्तु का बाजार राष्ट्रीय होगा। गांधी टोपी, जवाहरकट धोतियाँ आदि कुछ ऐसी वस्तुएँ हैं जिनका क्रय-विक्रय केवल भारत तक ही सीमित है; अत: इन वस्तुओं का बाजार राष्ट्रीय बाजार कहा जाता है।

4. अन्तर्राष्ट्रीय बाजार – जब किसी वस्तु के क्रेता-विक्रेता विश्व के विभिन्न राष्टों से वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते हैं या जब किसी वस्तु की माँग देश व विदेश में हो तो उस वस्तु का बाजार अन्तर्राष्ट्रीय होता है; जैसे – सोना, चाँदी, चाय, गेहूं आदि वस्तुओं के बाजार अन्तर्राष्ट्रीय हैं।

(ख) समय की दृष्टि से
प्रो० मार्शल ने समय के अनुसार बाजार को चार वर्गों में विभाजित किया है

1. अति-अल्पकालीन बाजार या दैनिक बाजार – जब किसी वस्तु की माँग बढ़ने से उसका लेशमात्र भी सम्भरण (पूर्ति) बढ़ाने का समय नहीं मिलता, तब ऐसे बाजार को अति-अल्पकालीन बाजार कहते हैं अर्थात् पूर्ति की मात्रा केवल भण्डार तक ही सीमित होती है। इसे दैनिक बाजार भी कहते हैं। शीघ्र नष्ट हो जाने वाली वस्तुओं – दूध, सब्जी, मछली, बर्फ आदिका बाजार अति-अल्पकालीन होता है।

2. अल्पकालीन बाजार – अल्पकालीन बाजार में माँग और पूर्ति के सन्तुलन के लिए कुछ समय मिलता है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होता। पूर्ति में माँग के अनुसार कुछ सीमा तक घट-बढ़ की जा सकती है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होती। यद्यपि पूर्ति का मूल्य-निर्धारण में प्रभाव अति अल्पकालीन बाजार की अपेक्षा अधिक होता है, किन्तु फिर भी माँग की अपेक्षा कम ही रहता है।

3. दीर्घकालीन बाजार – जब किसी वस्तु का बाजार कई वर्षों के लम्बे समय के लिए होता है, तो उसे दीर्घकालीन बाजार कहते हैं। दीर्घकालीन बाजार में वस्तु की माँग में होने वाली वृद्धि इतने समय तक रहती है कि पूर्ति को बढ़ाकर माँग के बराबर करना सम्भव होता है। इस प्रकार के बाजार में माँग और पूर्ति का पूर्ण साम्य स्थापित किया जा सकता है। दीर्घकालीन बाजार में मूल्य-निर्धारण पर माँग की अपेक्षा पूर्ति का अधिक प्रभाव पड़ता है और वस्तु का मूल्य उसके उत्पादन व्यय के बराबर होता है।

4. अति-दीर्घकालीन बाजार – अति-दीर्घकालीन बाजार में उत्पादकों को पूर्ति बढ़ाने के लिए इतना लम्बा समय मिल जाता है कि उत्पादन विधि तथा व्यवसांय की आन्तरिक व्यवस्था में क्रान्तिकारी परिवर्तन किये जा सकते हैं। ऐसे बाजार में पूर्ति को स्थायी रूप से माँग के बराबर किया जा सकता है। इस बाजार में समय की अवधि इतनी अधिक होती है कि उत्पादक उपभोक्ता के स्वभाव, रुचि, फैशन आदि के अनुरूप उत्पादन कर सकता है। इसके लिए नये-नये उद्योग स्थापित किये जा सकते हैं तथा उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।

(ग) बिक्री अथवा कार्यों की दृष्टि से
बिक्री की दृष्टि से या कार्यों के आधार पर बाजार का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार किया गया है।

1. सामान्य अथवा मिश्रित बाजा र- मिश्रित बाजार उस बाजार को कहते हैं जिसमें अनेक एवं विविध प्रकार की वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है। यहाँ क्रेताओं को प्रायः आवश्यकता की सभी वस्तुएँ उपलब्ध हो जाती हैं।

2. विशिष्ट बाजार –
विशिष्ट बाजार वे बाजार होते हैं जहाँ किसी वस्तु-विशेष का क्रय-विक्रय होता है; जैसे–सर्राफा बाजार, बाजार बजाजा, दालमण्डी, गुड़मण्डी आदि। इस प्रकार के बाजार प्रायः बड़े-बड़े नगरों में पाये जाते हैं।

3. नमूने द्वारा बिक्री का बाजार –
ऐसे बाजार में विक्रेता को अपना सम्पूर्ण माल नहीं ले जाना पड़ता है, वह माल को देखकर सौदा तय करते हैं तथा सौदा तय होने पर माल गोदामों से भिजवा देते हैं। इससे बाजारों का विस्तार होता है। क्रेता अपने घर बैठे ही नमूना देखकर तथा उसमें चुनाव करके, बहुत-सा सामान मँगा लेता है।

4. ग्रेड द्वारा बिक्री का बाजार – इस प्रकार के बाजार में वस्तुओं की बिक्री उनके विशेष नाम अथवा ग्रेड द्वारा होती है। विक्रेता को न तो वस्तुओं के नमूने दिखाने पड़ते हैं और न ही क्रेता को कुछ बताना पड़ता है। उदाहरण के लिए-गेहूँ R. R. 21, K-68, फिलिप्स रेडियो, हमाम साबुन आदि।

5. निरीक्षण बाजार- जहाँ वस्तुओं का निरीक्षण करके क्रय किया जाता है उसे निरीक्षण द्वारा बिक्री का बाजार कहते हैं; जैसे-गाय, बैल, भेड़, बकरी, घोड़े आदि का बाजार।

6. ट्रेडमार्का बिक्री बाजार – बिक्री की सुविधा के लिए बहुत-से व्यापारियों के माल व्यापार-चिह्न के आधार पर बिक्री होते हैं; जैसे-बिरला सीमेण्ट, उषा मशीन, लिरिल साबुन, मदन कैंची आदि। जब ट्रेडमार्क द्वारा वस्तु की बिक्री की जाती है तो इसे ट्रेडमार्का बाजार कहते हैं।

(घ) प्रतियोगिता की दृष्टि से
प्रतियोगिता के आधार पर बाजार निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

1. पूर्ण बाजार – पूर्ण बाजार उस बाजार को कहते हैं जिसमें पूर्ण प्रतियोगिता पायी जाती है। इस स्थिति में क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है, कोई भी व्यक्तिगत रूप से वस्तु की कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता। क्रेता और विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है, जिसके कारण वस्तु की बाजार में एक ही कीमत होने की प्रवृत्ति पायी जाती है। यदि किसी स्थान पर मूल्य में भिन्नता होती है तो दूसरे स्थान से वहाँ तुरन्त माल आ जाता है और सबै स्थानों पर मूल्य समान हो जाता है।

2. अपूर्ण बाजार – जब किसी बाजार में प्रतियोगिता सीमित मात्रा में पायी जाती है, क्रेताओं और विक्रेताओं को बाजार को पूर्ण ज्ञान नहीं होता है, तब उसे अपूर्ण बाजार कहते हैं। इस बाजार में अपूर्ण प्रतियोगिता पायी जाती है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार-कीमत में भिन्नता होती है।

3. एकाधिकार – एकाधिकार बाजार में प्रतियोगिता का अभाव होता है। बाजार में वस्तु का क्रेता या विक्रेता केवल एक ही होता है। एकाधिकारी का वस्तु की कीमत तथा पूर्ति पर पूर्ण नियन्त्रण होता है। एकाधिकारी बाजार में वस्तु की भिन्न-भिन्न कीमतें निश्चित कर सकता है।

(ङ) वैधानिकता की दृष्टि से
वैधानिक दृष्टि से बाजार निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

1. अधिकृत या उचित बाजार – अधिकृत बाजार में सरकार द्वारा अधिकृत दुकानें होती हैं तथा वस्तुओं का क्रय-विक्रय नियन्त्रित मूल्यों पर होता है। युद्धकाल अथवा महँगाई के समय में वस्तुओं की कीमतें अधिक हो जाती हैं। ऐसी दशा में सरकार आवश्यक वस्तुओं का मूल्य नियन्त्रित कर देती है। और उनके उचित वितरण की व्यवस्था करती है।

2. चोर बाजार – युद्धकाल अथवा महँगाई के समय में, वस्तुओं की कमी एवं अन्य कारणों से वस्तुओं के मूल्य बढ़ जाते हैं। तब सरकार वस्तुओं के मूल्य नियन्त्रित कर उनके वितरण की व्यवस्था करती है। कुछ दुकानदार चोरी से सरकार द्वारा निश्चित मूल्य से अधिक मूल्य पर वस्तुएँ बेचते रहते हैं। अधिकांशतः ऐसा कार्य अनधिकृत दुकानदार ही करते हैं। ये बाजार अवैध होते हैं।

3. खुला बाजार – जब बाजार में वस्तुओं के मूल्य पर सरकार द्वारा कोई नियन्त्रण नहीं होता है। तथा क्रेताओं और विक्रेताओं की परस्पर प्रतियोगिता के आधार पर वस्तुओं का मूल्य-निर्धारण होता है, तब इस प्रकार के बाजार को खुला या स्वतन्त्र बाजार कहते हैं।

प्रश्न 3
वस्तु बाजार को विस्तृत करने वाले तत्त्वों (कारकों) का वर्णन कीजिए। [2016]
या
बाजार के विस्तार को प्रभावित करने वाले तत्त्वों (कारकों) का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बाजार के विस्तार को प्रभावित करने वाले तत्त्व (कारक)
वस्तु के बाजार का विस्तार निम्नलिखित दो बातों पर निर्भर करता है
(अ) वस्तु के गुण तथा
(ब) देश की आन्तरिक दशाएँ।

(अ) वस्तु के गुण
किसी वस्तु के गुण उस वस्तु के बाजार-विस्तार को निम्नवत् प्रभावित करते हैं

1. वस्तु की विस्तृत माँग – किसी वस्तु के बाजार का विस्तृत अथवा संकुचित होना उस वस्तु की माँग पर निर्भर करता है। जिस वस्तु की माँग जितनी अधिक विस्तृत होती है उस वस्तु का बाजार उतना ही विस्तृत होता है। उदाहरण के लिए-गेहूँ, सोना, चाँदी आदि वस्तुओं की माँग विश्वव्यापी होने से इनका बाजार अन्तर्राष्ट्रीय है।

2. वस्तु की पर्याप्त पूर्ति – वस्तु के बाजार-विस्तार के लिए वस्तु की पूर्ति माँग के अनुरूप होनी आवश्यक है। यदि किसी वस्तु की माँग अधिक है और पूर्ति कम है तब वस्तु का बाजार विस्तृत नहीं हो सकेगा। इसलिए वस्तु की पर्याप्त पूर्ति बाजार के विस्तार को प्रभावित करती है।

3. वस्तु का टिकाऊपन – टिकाऊ वस्तुओं का बाजार क्षेत्र विस्तृत होता है। इसके विपरीत शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं का बाजार संकुचित होता है। उदाहरणार्थ-सोना वे चॉदी का बाजार दूध व सब्जी के बाजार से अधिक विस्तृत होती है।

4. वहनीयता – जिन वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सरलतापूर्वक ले जाया जा सकता है, उनका बाजार विस्तृत होता है। जिन वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है परन्तु भार एवं तौल में बहुत कम होती हैं, उनका बाजार विस्तृत होता है। ऐसी वस्तुओं को लाने में ले जाने का यातायात व्यय कम होता है।

5. वस्तु को ग्रेड या नमूनों में बाँटने की सुविधा – जिन वस्तुओं का उनके गुणों के आधार पर विभिन्न प्रकारों व ग्रेडों में वर्गीकरण किया जा सकता है, उन वस्तुओं का बाजार विस्तृत हो जाता है। इस प्रकार की वस्तुओं के ट्रेडमार्क निश्चित करके उनका विज्ञापन कर, उस वस्तु की मॉग देश-विदेश में उत्पन्न की जा सकती है।

6. वस्तु का स्थानापन्न न होना – बाजार में यदि किसी वस्तु के अधिक स्थानापन्न विद्यमान हैं। तब उस वस्तु का बाजार संकीर्ण होगा। इसके विपरीत यदि वस्तु को स्थानापन्न विद्यमान नहीं है तब उस वस्तु का बाजार विस्तृत होगा।

7. वस्तु का विशेष उपयोग एवं फैशन – किसी वस्तु का उपयोग किसी कार्य-विशेष के लिए होने लगने पर वस्तु को बाजार विस्तृत हो जाता है; जैसे-टेलीफोन आदि। इसके अतिरिक्त यदि कोई वस्तु फैशन में आ जाती है तो उस वस्तु का बाजार भी विस्तृत हो जाता है; जैसे-आज फैशन के युग में क्रीम, पाउडर व चाय आदि का उपयोग निरन्तर बढ़ता जा रहा है। इसके विपरीत, उन वस्तुओं का बाजार स्वतः सीमित हो जाता है, जो वस्तुएँ प्रचलन में नहीं रहती।।

(ब) देश की आन्तरिक दशाएँ
वस्तु के बाजार के विस्तार को देश की आन्तरिक दशाएँ निम्नवत् प्रभावित करती हैं

1. अन्तर्राष्ट्रीय मैत्री एवं सहयोग – किसी वस्तु का बाजार विस्तृत होने के लिए आवश्यक है। कि विभिन्न राष्ट्रों में परस्पर सहयोग एवं मित्रता की भावना हो। यदि एक देश दूसरे देश के आयात एवं निर्यात को प्रोत्साहित करता है तब वस्तु का बाजार विस्तृत होगा। आज अन्तर्राष्ट्रीय बाजार का विस्तार तथा विकास होता जा रहा है।

2. यातायात के साधन व उत्तम संचार-व्यवस्था – यदि देश में यातायात व संचार के अच्छे, सस्ते व विकसित साधन उपलब्ध हैं तो बाजार का विस्तार होता है, क्योंकि इन साधनों के द्वारा किसी एक स्थान-विशेष पर उत्पन्न वस्तु को न केवल स्थानीय बाजारों में, वरन् देश-विदेश में भेजा जा सकता है।

3. देश में शान्ति, सुरक्षा तथा सुव्यवस्थित शासन-व्यवस्था – जब देश में सर्वत्र शान्ति एवं सुरक्षा होती है तथा शासन-व्यवस्था उत्तम होती है तब व्यापारियों में व्यापार के प्रति विश्वास व उत्साह बना रहता है, जिसके परिणामस्वरूप वस्तुओं का बाजार विस्तृत हो जाता है।

4. उत्पादकों व व्यापारियों में विश्वास व नैतिकता – आज के युग में अधिकांश व्यापारिक कार्य विश्वास पर आधारित होते हैं। व्यापारिक भुगतान नकद न होकर चेक या बिल ऑफ एक्सचेंज के द्वारा होते हैं। ऐसी स्थिति में देश के उत्पादक व व्यापारी एक-दूसरे की साख पर विश्वास करके ही लेन-देन करते हैं। यदि वह विश्वास समाप्त हो जाए तो व्यापार का क्षेत्र संकुचित हो जाएगा। अतः विस्तृत बाजार के लिए उत्पादकों व व्यापारियों का चरित्रवान् व ईमानदार होना आवश्यक है।

5. कुशल मुद्रा व बैकिंग प्रणाली – किसी वस्तु के बाजार का विस्तार अच्छी बैंकिंग प्रणाली तथा मुद्रा प्रणाली पर निर्भर करता है। मुद्रा मूल्य में स्थिरता होनी चाहिए तथा बीमा-व्यवस्था का भी प्रबन्ध होना चाहिए, जिससे कि जो माल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाए, उसका बीमा करायो जा सके। जिस देश में बैंकिंग, मुद्रा तथा बीमा की व्यवस्था उत्तम है, उस देश में वस्तुओं के बाजार विस्तृत होते हैं।

6. व्यापार के आधुनिक एवं वैज्ञानिक ढंग – आधुनिक युग में व्यापार वैज्ञानिक ढंग से किया जाता है, अतः जिस देश में वस्तुओं का विज्ञापन, प्रचार व प्रसार नई व आधुनिक प्रणाली से समाचार-पत्रों, रेडियो, टेलीविजन आदि के द्वारा किया जाता है, उस देश में वस्तुओं का बाजार विस्तृत हो जाता है।

7. सरकार की व्यापारिक नीति – वस्तु के बाजार-विस्तार पर सरकार की व्यापारिक नीति का पर्याप्त प्रभाव पड़ता है। स्वतन्त्र व्यापार नीति के परिणामस्वरूप अनेक वस्तुओं के बाजार विस्तृत हो जाएँगे। इसके विपरीत संरक्षण की नीति में वस्तुओं का बाजार संकुचित रहेगा। अतः यदि सरकार की व्यापार नीति अनुकूल है और कर अधिक नहीं हैं तो बाजार विस्तृत किया जा सकता है।

8. पैकिंग का ढंग व शीत भण्डार की व्यवस्था – शीत भण्डार-गृहों की उचित व्यवस्था होने पर क्षयशील वस्तुओं को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। वस्तुओं को उत्तम पैकिंग-व्यवस्था के द्वारा दूर-दूर स्थानों तक भेजा जा सकता है। ऐसी स्थिति में वस्तुओं का बाजार विस्तृत होगा।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1
क्षेत्र के आधार पर बाजार का वर्गीकरण कीजिए। [2012, 13, 14]
उत्तर:
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में देखें।

प्रश्न 2
समय की दृष्टि से बाजार का वर्गीकरण कीजिए। [2008, 14, 15]
उत्तर:
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में देखें।।

प्रश्न 3 प्रतियोगिता के आधार पर बाजारों का वर्गीकरण कीजिए। [2013, 14]
उत्तर:
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में देखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1
पूर्ण प्रतियोगी बाजार की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। [2008]
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगी बाजार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1.  क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है।
  2. व्यक्तिगत रूप से कोई भी वस्तु की कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता।
  3.  क्रेता और विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।
  4.  पूर्ण प्रतियोगी बाजार में वस्तु की एक ही कीमत होने की प्रवृत्ति पायी जाती है।

प्रश्न 2
किसी वस्तु के बाजार को प्रभावित करने वाले तत्वों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वस्तु के बाजार का विस्तार निम्नलिखित दो बातों पर निर्भर करता है
(क) वस्तु के गुण – किसी वस्तु के गुणों का प्रभाव बाजार पर पड़ता है जो अग्रवत् है

  1.  वस्तु की विस्तृत माँग।
  2.  वस्तु की पर्याप्त पूर्ति।
  3. वस्तु का टिकाऊपन।
  4. वहनीयता।
  5. वस्तुओं को ग्रेड या नमूनों में बाँटने की सुविधा
  6. वस्तु का स्थानापन्न न होना।
  7. वस्तु का विशेष उपयोग एवं फैशन।

(ख) देश की आन्तरिक दशाएँ

  1. अन्तर्राष्ट्रीय मैत्री एवं सहयोग।
  2. यातायात के साधन व उत्तम संचार-व्यवस्था।
  3. देश में शान्ति, सुरक्षा तथा सुव्यवस्थित शासन-व्यवस्था।
  4. उत्पादकों एवं व्यापारियों में विश्वास व नैतिकता।
  5. कुशल मुद्रा व बैंकिंग प्रणाली
  6.  सरकार की व्यापारिक नीति।
  7.  पैकिंग का ढंग व शीत भण्डार की व्यवस्था।

प्रश्न 3
बाजार के आवश्यक तत्त्व बताइए।
या
बाजार की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। [2010, 11]
उत्तर:
बाजार के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं।

  1.  एक क्षेत्र – वह समस्त क्षेत्र जिसमें किसी वस्तु के क्रेता व विक्रेता क्रय-विक्रय करते हैं।
  2. एक वस्तु – अर्थशास्त्र में प्रत्येक वस्तु का बाजार अलग-अलग माना जाता है। बाजार के लिए एक वस्तु का होना आवश्यक है।
  3.  क्रेता व विक्रेताओं का होना – बाजार में क्रेता व विक्रेताओं का होना आवश्यक है। इसके अभाव में बाजार नहीं हो सकता है।
  4. स्वतन्त्र प्रतियोगिता – बाजार में क्रेताओं और विक्रेताओं में स्वतन्त्र प्रतियोगिता होनी चाहिए।
  5. एक कीमत – बाजार में वस्तु की कीमत की प्रवृत्ति समान होनी चाहिए।

प्रश्न 4
किसी वस्तु के बाजार को विस्तृत बनाने वाले किन्हीं दो प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए।
या
बाजार के विस्तार को प्रभावित करने वाले दो तत्त्व बताइए।
उत्तर:
वस्तु के बाजार को विस्तृत करने वाले तत्त्व निम्नलिखित हैं।

  1. यातायात व सन्देशवाहन के साधन – किसी वस्तु के बाजार के विस्तार के लिए देश में यातायात व सन्देशवाहन के अच्छे, सस्ते व विकसित साधनों का उपलब्ध होना आवश्यक है।
  2.  वस्तु की विस्तृत मॉग – किसी वस्तु के बाजार के विस्तार के लिए वस्तु की मॉग विस्तृत होनी चाहिए।
  3. टिकाऊपन – बाजार के विस्तार के लिए वस्तु को टिकाऊ होना चाहिए।

प्रश्न 5
क्षेत्र के आधार पर बाजार का विभाजन कीजिए। [2010]
उत्तर:
क्षेत्र के आधार पर बाजार को निम्नलिखित बाजारों में विभाजित किया जा सकता है

  1.  स्थानीय बाजार,
  2. प्रादेशिक बाजार,
  3. राष्ट्रीय बाजार,
  4. अन्तर्राष्ट्रीय बाजार।

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
बाजार की परिभाषा दीजिए। [2015]
या
अर्थशास्त्र में बाजार से क्या तात्पर्य होता है?
उत्तर:
कून के शब्दों में, “अर्थशास्त्र में ‘बाजार’ शब्द का अर्थ किसी ऐसे विशिष्ट स्थान से नहीं लगाते हैं जहाँ पर वस्तुओं का क्रय-विक्रय होती है, बल्कि उस समस्त क्षेत्र से लगाते हैं जिसमें क्रेताओं और विक्रेताओं के मध्य आपस में इस प्रकार का सम्पर्क हो कि किसी वस्तु का मूल्य सरलता एवं शीघ्रता से समान हो जाए।”

प्रश्न 2
अति-अल्पकालीन बाजार क्या है ? [2010]
उत्तर:
जब किसी वस्तु की माँग बढ़ने से उसका लेशमात्र भी सम्भरण (पूर्ति) बढ़ाने का समय नहीं मिलता तब ऐसे ब्राजार को अति-अल्पकालीन बाजार कहते हैं अर्थात् पूर्ति की मात्रा केवल भण्डार तक ही सीमित होती है। इसे दैनिक बाजार भी कहते हैं। शीघ्र नष्ट हो जाने वाली वस्तुओं – दूध, सब्जी, मछली, बर्फ आदि – का बाजार अति-अल्पकालीन बाजार होता है।

प्रश्न 3
एकाधिकार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
जिस बाजार में वस्तु का केवल एक उत्पादक या विक्रेता होता है, उसे एकाधिकार बाजार कहते हैं। एकाधिकार बाजार प्रतियोगितारहित बाजार होता है। इसमें एकाधिकारी (Monopolist) अपनी वस्तु की कीमत अपनी इच्छानुसार निर्धारित करता है।

प्रश्न 4
पूर्ण बाजार की तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  1.  पूर्ण बाजार में क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है।
  2. क्रेताओं और विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।
  3. पूर्ण बाजार में वस्तु की कीमत की प्रवृत्ति एकसमान होती है।

प्रश्न 5
अल्पकालीन बाजार से क्या आशय है? [2006]
उत्तर:
अल्पकालीन बाजार में माँग और पूर्ति में सन्तुलन के लिए कुछ समय मिलता है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होता। पूर्ति में माँग के अनुसार कुछ सीमा तक घट-बढ़ की जा सकती है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होती।

प्रश्न 6
पूर्ण प्रतियोगी बाजार से आप क्या समझते हैं? [2006]
उत्तर:
ऐसा बाजार जिसमें क्रेताओं व विक्रताओं की संख्या अधिक होती है तथा व्यक्तिगत रूप से कोई भी वस्तु की कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता।

प्रश्न 7
दीर्घकालीन बाजार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब किसी वस्तु का बाजार कई वर्षों के लम्बे समय के लिए होता है, तो उसे दीर्घकालीन बाजार कहते हैं। ऐसे बाजार में माँग की अपेक्षा पूर्ति का अधिक प्रभाव पड़ता है तथा वस्तु का मूल्य उसके उत्पादन व्यय के बराबर होता है।

प्रश्न 8
अपूर्ण प्रतियोगी बाजार की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2008]
उत्तर:

  1.  सीमित मात्रा में प्रतियोगिता।
  2. बाजार कीमत में भिन्नता।
  3. क्रेताओं व विक्रताओं को भिन्नता बाजार का अपूर्ण ज्ञान।

प्रश्न 9
बाजार की किस दशा में वस्तु की कीमत उत्पादन लागत के बराबर होती है ?
उत्तर:
पूर्ण बाजार में।

प्रश्न 10
भौगोलिक दृष्टि से सोने-चाँदी का बाजार कैसा होता है ?
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय बाजार।

प्रश्न 11
बाजार में किस प्रकार के बाजार के अन्तर्गत कीमत-स्तर स्थिर होता है ?
उत्तर:
पूर्ण बाजार के अन्तर्गत।

प्रश्न 12
जब बाजार में प्रतियोगिता सीमित मात्रा में हो, वह कैसा बाजार कहलाएगा ?
उत्तर:
अपूर्ण बाजार।।

प्रश्न 13
जब बाजार में प्रतियोगिता का अभाव हो तो उस बाजार को किस प्रकार का बाजार कहते हैं?
उत्तर:
एकाधिकार बाजार।

प्रश्न 14
किस प्रकार के बाजार में वस्तुओं का क्रय-विक्रय नियन्त्रित मूल्यों पर होता है ?
उत्तर:
अधिकृत या वैधानिक बाजार में।

प्रश्न 15
पूर्ण बाजार की दो आवश्यक दशाएँ लिखिए।
उत्तर:
(1) क्रेता-विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।
(2) पूर्ण प्रतियोगिता पायी जाती है।

प्रश्न 16
आर्थिक बाजार के दो आवश्यक गुण बताइए।
उत्तर:
(1) क्रेता तथा विक्रेताओं का होना।
(2) परस्पर प्रतियोगिता का पाया जाना।

प्रश्न 17
“बाजार किसी स्थान को नहीं बताता, वरन वह किसी वस्तु अथवा वस्तुओं तथा उनके ग्राहकों और विक्रेताओं की ओर संकेत करता है, जो एक-दूसरे के साथ सीधी प्रतियोगिता करते हों।” यह परिभाषा किस अर्थशास्त्री की है ?
उत्तर:
चैपमैन की।

प्रश्न 18
वस्तु-विभेद किस बाजार का प्रमुख लक्षण होता है? [2011, 13]
उत्तर:
वस्तु-विभेद अपूर्ण प्रतियोगिता वाले बाजार का प्रमुख लक्षण है।

प्रश्न 19
अण्डे के बाजार को किस वर्गीकरण में रखा जाएगा?
उत्तर:
स्थानीय बाजार।

प्रश्न 20
गेहूँ व सब्जियों के बाजार को क्षेत्र के आधार पर कौन-से बाजार की संज्ञा दी जाती है?
उत्तर:
स्थानीय बाजार।

प्रश्न 21
एकाधिकारी बाजार का अर्थ लिखिए। [2016]
उत्तर:
जिस बाजार में वस्तु का केवल एक उत्पादक या विक्रेता होता है, उसे एकाधिकारी बाजार कहते हैं।

प्रश्न 22
किस बाजार में एक फर्म की औसत आगम उसकी सीमान्त आगम के बराबर होती है ? [2010]
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता के बाजार में।

प्रश्न 23
एकाधिकारी के अन्तर्गत कितने उत्पादक होते हैं? [2016]
उत्तर:
केवल एक।

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
सोने एवं चाँदी का बाजार होता है
(क) दैनिक
(ख) अल्पकालीन
(ग) दीर्घकालीन
(घ) अति-दीर्घकालीन
उत्तर:
(घ) अति-दीर्घकालीन।

प्रश्न 2
सोने-चाँदी का बाजार है
(क) स्थानीय बाजार
(ख) प्रादेशिक बाजार
(ग) राष्ट्रीय बाजार
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
उत्तर:
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार।

प्रश्न 3
सामान्यतः ईंट का बाजार होता है [2012]
(क) स्थानीय बाजार
(ख) प्रादेशिक बाजार
(ग) राष्ट्रीय बाजार
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
उत्तर:
(क) स्थानीय बाजार।

प्रश्न 4
नेहरू जी की आत्मकथा’ पुस्तक का बाजार है
(क) स्थानीय बाजार
(ख) प्रादेशिक बाजार
(ग) राष्ट्रीय बाजार
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
उत्तर:
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार।

प्रश्न 5
निम्नलिखित में से किस बाजार में औसत आगम एवं सीमान्त आगम सदैव बराबर होता है? [2015]
या
AR = MR निम्नलिखित में से किस व्यापार की एक आवश्यक दशा है? [2012]
(क) एकाधिकार बाजार
(ख) पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार
(ग) अपूर्ण प्रतियोगिता का बाजार
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार।

प्रश्न 6
‘जब वस्तुओं की माँग बढ़ने पर इतना समय मिल जाए कि उत्पादकों द्वारा उत्पादन में वृद्धि करके पूर्ति को माँग के अनुसार बढ़ाया जा सके ऐसे बाजार को कहते हैं
(क) अति-अल्पकालीन बाजार
(ख) अति-दीर्घकालीन बाजार
(ग) दीर्घकालीन बाजार
(घ) अल्पकालीन बाजार
उत्तर:
(ख) अति-दीर्घकालीन बाजार।

प्रश्न 7
पूर्ण बाजार की विशेषताएँ हैं।
(क) क्रेताओं और विक्रेताओं की अधिक संख्या
(ख) गलाकाट प्रतियोगिता
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) (क) और (ख) दोनों।

प्रश्न 8
बाजार का विस्तार होता है
(क) आतंकवाद से
(ख) असुरक्षा से
(ग) अशान्ति से
(घ) देश में शान्ति एवं सुरक्षा से
उत्तर:
(घ) देश में शान्ति एवं सुरक्षा से।

प्रश्न 9
अति-दीर्घकालीन बाजार में पूर्ति का स्वरूप हो सकता है
(क) पूर्ति को स्थायी रूप से माँग के बराबर किया जा सकता है।
(ख) पूर्ति को माँग के बराबर नहीं बढ़ाया जा सकता है।
(ग) पूर्ति को माँग के अनुसार बढ़ाने के लिए समय नहीं मिल पाता है।
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(क) पूर्ति को स्थायी रूप से माँग के बराबर किया जा सकता है।

प्रश्न 10
पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति है
(क) वास्तविक
(ख) काल्पनिक
(ग) वास्तविक और काल्पनिक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) काल्पनिक।

प्रश्न 11
अपूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति उत्पन्न होने का कारण है
(क) क्रेता और विक्रेताओं की संख्या का अधिक होना
(ख) क्रेता तथा विक्रेताओं की कम संख्या होना।
(ग) क्रेता तथा विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होना
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) क्रेता तथा विक्रेताओं की कम संख्या होना।

प्रश्न 12
निम्नलिखित में से कौन-सी पूर्ण प्रतियोगिता बाजार की विशेषता नहीं है?
(क) क्रेताओं-विक्रेताओं की संख्या अत्यधिक होना
(ख) वस्तु का समरूप होना
(ग) फर्मों के प्रवेश एवं बहिर्गमन की स्वतन्त्रता
(घ) विज्ञापन एवं गैर-कीमत प्रतियोगिता का होना
उत्तर:
(घ) विज्ञापन एवं गैर-कीमत प्रतियोगिता का होना।

प्रश्न 13
समान कीमत किस बाजार की विशेषता है? [2007]
(क) एकाधिकार
(ख) पूर्ण प्रतियोगिता
(ग) एकाधिकारिक प्रतियोगिता
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) पूर्ण प्रतियोगिता।

प्रश्न 14
वस्तु-विभेद किस बाजार में पाया जाता है? [2007, 13]
(क) पूर्ण प्रतियोगिता
(ख) एकाधिकार
(ग) अपूर्ण प्रतियोगिता
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) एकाधिकार।

प्रश्न 15
पूर्ण प्रतियोगी बाजार में [2006]
(क) सीमान्त आगम से औसत आगम अधिक होती है।
(ख) सीमान्त आगम से औसत आगम कम होती है।
(ग) सीमान्त आगम औसत आगम के समान होती है।
(घ) औसत आगम और सीमान्त आगम में कोई सम्बन्ध नहीं होता है।
उत्तर:
(ग) सीमान्त आगम औसत आगम के समान होती है।

प्रश्न 16
किसी शहर की दूध-मण्डी, उदाहरण है [2007]
(क) स्थानीय बाजार का
(ख) स्थानीय प्रतियोगी बाजार का
(ग) स्थानीय प्रतियोगी अल्पकालीन बाजार का
(घ) स्थानीय प्रतियोगी अल्पकालीन विशिष्ट बाजार का
उत्तर:
(घ) स्थानीय प्रतियोगी अल्पकालीन विशिष्ट बाजार का।

प्रश्न 17
बाजार की शक्तियों से क्या अभिप्राय है? [2014]
(क) माँग और पूर्ति
(ख) माँग और कीमत
(ग) पूर्ति और कीमत
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) माँग और पूर्ति।

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