UP Board Class 12 History Model Papers Paper 2

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject History
Model Paper Paper 2
Category UP Board Model Papers

UP Board Class 12 History Model Papers Paper 2

समय: 3 घण्टे 15 मिनट
पूणक: 100
निर्देश
प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
नोट

  • सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  • इस प्रश्न-पत्र में पाँच खण्ड हैं।
  • खण्ड ‘क’ में 10 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, खण्ड ‘ख’ में 05 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 50 शब्द) हैं।
  • खण्ड ‘ग’ में 06 लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 100 शब्द) हैं।
  • खण्ड ‘घ’ में 03 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (लगभग 500 शब्द) हैं।
  • खण्ड ‘ङ’ में ऐतिहासिक तिथियों व मानचित्र से सम्बन्धित 05 प्रश्न हैं। शब्द सीमा में (कम या ज्यादा) 10% की छूट अनुमन्य है।
  • सभी प्रश्नों के निर्धारित अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।

खण्ड-‘क’

बहुविकल्पीय प्रश्न |
प्रश्न 1.
बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी किस भाषा में लिखी?   [1]
(a) फारसी
(b) अरबी
(c) तुर्की
(d) उर्दू

प्रश्न 2.
शेरशाह सूरी का मूल नाम क्या था?   [1]
(a) जमाल खों
(b) हसन खाँ
(c) फरीद
(d) शेर खान

प्रश्न 3.
अकबर ने जजिया कर को कब समाप्त किया?   [1]
(a) 1564 ई. में
(b) 1562 ई. में
(c) 1563 ई. में
(d) 1560 ई. में

प्रश्न 4.
अकबर ने दास प्रथा को कब समाप्त किया था?   [1]
(a) 1560 ई. में
(b) 1561 ई. में
(c) 1562 ई. में ।
(d) 1563 ई. में

प्रश्न 5.
जहाँगीर के बचपन का नाम क्या था?   [1]
(a) सलीम
(b) खुसरों
(c) कुतुब
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 6.
ताजमहल का निर्माण किस शासक ने करवाया था?   [1]
(a) अकबर
(b) शाहजहाँ
(c) जहाँगीर
(d) औरंगजेब

प्रश्न 7.
निम्न में से किसने “पावर्टी एण्ड अन ब्रिटिश रूल इन इण्डिया’ नामक पुस्तक लिखी थी?   [1]
(a) रमेशचन्द दत्त
(b) महादेव गोविन्द रानाडे
(c) दादाभाई नौरोजी
(d) गोपाल कृष्ण गोखले

प्रश्न 8.
शिक्षा से सम्बन्धित चार्ल्स वुड डिस्पैच भारत में कब लाया गयाथा?   [1]
(a) 1852 ई.
(b) 1853 ई.
(c) 1854 ई.
(d) 1856 ई.

प्रश्न 9.
1928 ई. में नेहरू रिपोर्ट को निम्न में से किसने प्रस्तुत किया था? [1]
(a) जवाहर लाल नेहरू
(b) मोतीलाल नेहरू
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 10.
पहली पंचवर्षीय योजना कब लागू की गई थी? [1]
(a) 1949 ई.
(b) 1950 ई.
(c) 1951 ई.
(d) 1952 ई.

खण्ड -‘ख’

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 11.
सहायक सन्धि का सम्बन्ध किसके साथ है? [2]

प्रश्न 12.
राजा राममोहन राय के योगदानों का उल्लेख कीजिए। [2]

प्रश्न 13.
भारतीय राष्ट्रवाद के उदय के दो कारणों की विवेचना कीजिए [2]

प्रश्न 14.
क्रान्तिकारी आन्दोलन के उदय के प्रमुख कारण क्या थे? [2]

प्रश्न 15.
भारत छोड़ो आन्दोलन के असफलता के कारणों का उल्लेख कीजिए। [2]

खण्ड-‘ग’

लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16.
पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर की सफलता के दो कारण बताइए [5]

प्रश्न 17.
शेरशाह के चरित्र एवं उपलब्ध्यिों का मूल्यांकन कीजिए। [5]

प्रश्न 18.
अकबर की राजपूत नीति की दो विशेषताएँ लिखिए। [5]

प्रश्न 19.
शाहजहाँ के समय के उत्तराधिकार युद्ध के कारणों को इंगित कीजिए। [5]

प्रश्न 20.
भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों के आगमन के दो कारण बताइए। [5]

प्रश्न 21.
1857 ई. क़ी क्रान्ति की असफलता के क्या कारण थे? [5]।

खण्ड-‘घ’

दीर्घ उत्तरीय (विस्तृत उत्तरीय) प्रश्न
प्रश्न 22.
बाबर के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक दशा का वर्णन कीजिए। [10]
अथवा
“शेरशाह, अकबर का पूर्वगामी था।” कारण देते हुए इस वक्तव्य की विवेचना कीजिए। [10]

प्रश्न 23.
“शाहजहाँ का शासन काल मुगल काल का स्वर्ण काल था।” इस कथन की आलोचनात्मक विवरण कीजिए। [10]
अथवा
अकबर की मनसबदारी व्यवस्था से आप क्या समझते हैं? क्या यह व्यवस्था उसकी सैनिक शक्ति का आधार थी? [10]

प्रश्न 24.
मराठा राज्य की स्थापना में शिवाजी के योगदान का मूल्यांकन कीजिए। [10]
अथवा
भारत में ब्रिटिश शासन के आर्थिक प्रभाव की विवेचना कीजिए। [10].

खण्ड-‘ङ’

प्रश्न 25.
निम्नलिखित तिथियों के ऐतिहासिक महत्त्व का उल्लेख कीजिए [10]
1. 1448 ई.
2. 1540 ई.
3. 1582 ई.
4. 1675 ई.
5. 1761 ई.
6. 1854 ई.
7, 1875 ई.
8. 1825 ई.
9. 1901 ई.
10. 1665 ई.

मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न
प्रश्न 26.
दिए गए भारत के मानचित्र में चार स्थान (1+1) दर्शाए गए है, इनकी पहचान कर इनके नाम लिखिए। सही नाम तथा सही स्थान दर्शाने के लिए अंक निर्धारित है।
(i) मराठा परिसंघ को वह राज्य जिसकी राजधानी ग्वालियर थी।  [2]
(ii) यह वह स्थान है जहाँ अकबर ने इबादतखाना की स्थापना की थी। [2]
(iii) यह वह स्थान है जहाँ आनन्द भवन स्थित हैं। [2]
(iv) यह वह नगर है जहाँ महात्मा गाँधी ने साबरमती आश्रम की स्थापना की थी। [2]
(v) वह नगर जहाँ संविधान की सभी बैठकें हुआ करती थीं। [2]

Answers

उत्तर 1.
(c) तुर्की

उत्तर 2.
(c) फरीद

उत्तर 3.
(a) 1564 ई. में

उत्तर 4.
(c) 1562 ई. में ।

उत्तर 5.
(a) सलीम

उत्तर 6.
(b) शाहजहाँ

उत्तर 7.
(c) दादाभाई नौरोजी

उत्तर 8.
(c) 1854 ई.

उत्तर 9.
(b) मोतीलाल नेहरू

उत्तर 10.
(c) 1951 ई.

उत्तर 11.
सहायक सन्धि का सम्बन्ध गवर्नर-जनरल वेलेजली से है।

उत्तर 12.
राजा राममोहन राय ने अनेक सामाजिक सुधार के कार्य किए। इन्होंने सती प्रथा, बहुपत्नी प्रथा, जातिवाद आदि का विरोध किया तथा भारतीयों को आधुनिक शिक्षा की ओर अग्रसर किया।

उत्तर 13.
भारतीय राष्ट्रवाद के उदय के दो कारण निम्न हैं।

(i) पाश्चात्य चिन्तन तथा आधुनिक शिक्षा को प्रभाव।।
(ii) सामाजिक-धार्मिक सुधार आन्दोलन।।

उत्तर 14.
क्रान्तिकारी आन्दोलने के उदय के प्रमुख कारण निम्न हैं ।

(i) तत्कालीन राजनीतिक परिदृश्य से मोह भंग।
(ii) सरकार का दमन चक्र।।
(ii) शीघ्र परिणाम की अकांक्षा।
(iv) समकालीन साहित्य द्वारा देश भक्ति का प्रसार करना।

उत्तर 15.
आन्दोलन की असफलता के मुख्य कारण निम्नलिखित थे ।

  •  सरकार ने आन्दोलन का दमन अत्यन्त कठोरतापूर्वक किया| आन्दोलनकारियों के साथ अधिक-से-अधिक क्रूर और पाश्विक व्यवहार किया गया। इसके फलस्वरूप सारे देश में आतंक का राज्य छा गया।
  •  उचित नेतृत्व के अभाव में आन्दोलन ने हिंसात्मक रूप धार कर लिया, जिसके लिए देश तैयार नहीं था। उसके पास अस्त्र-शस्त्रों का नितान्त अभाव था।

उत्तर 25.
महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक तिथियाँ एवं उनका घटनाक्रम

1. 1448 ई. राणा कुम्भा द्वारा चित्तौड़ में विजय स्तभ की स्थापना|
2. 1540 ई. बिलग्राम या कन्नौज को युद्ध ।
3. 1582 ई. दीन-ए-इलाही की स्थापना
4. 1675 ई. गुरु तेग बहादुर की हत्या (औरंगजेब)|
5. 1761 ई. पानीपत का वृत्तीय युद्ध|
6. 1854 ई. पहली बार डाक टिकट का प्रचलन|
7. 1875 ई. सर सैय्यद अहमद खाँ द्वारा अलीगढ़ मोहम्मदन एंग्लो ओरियण्टल कॉलेज की स्थापना|
8. 1825 ई. राजा राममोहन राय द्वारा वेदान्त कॉलेज की स्थापना
9. 1901 ई. पुलिस आयोग व विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना|
10. 1665 ई. पूरूदर की सन्धि जयसिंह (औरंगजेब) एवं शिवाजी के मध्य|

उत्तर 26.
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UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency: Mode

UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency: Mode (केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप : बहुलक) are part of UP Board Solutions for Class 12 Economics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency: Mode (केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप : बहुलक).

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Class Class 12
Subject Economics
Chapter Chapter 29
Chapter Name Measure of Central Tendency: Mode (केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप : बहुलक)
Number of Questions Solved 22
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UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency: Mode (केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप : बहुलक)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

प्रश्न 1
बहुलक या भूयिष्ठक किसे कहते हैं? इसको परिभाषित करते हुए इसके गुण व दोषों पर प्रकाश डालिए। बहुलक की विशेषताओं और उपयोग को भी संक्षेप में लिखिए। [2010]
या
बहुलक का अर्थ स्पष्ट कीजिए। बहुलक के गुणों और दोषों को समझाइए। [2013, 16]
उत्तर:
बहुलक या भूयिष्ठक को अंग्रेजी में ‘Mode’ कहते हैं। इसकी उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के शब्द, ‘La Mode’ से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ रिवाज या फैशन या प्रचलन है।
सांख्यिकी में बहुलक या भूयिष्ठक से तात्पर्य किसी समंकमाला की सर्वाधिक आवृत्ति वाली माप से होता है। बहुलक एक स्थिति सम्बन्धी प्रमुख माध्य है।
कुछ प्रमुख विद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं

क्रॉक्सटन एवं क्राउडेन के शब्दों में, “बहुलक किसी समंक श्रेणी का वह मूल्य है जिसके चारों ओर श्रेणी की इकाइयों के केन्द्रित होने की प्रवृत्ति पायी जाती है और यह मूल्य श्रेणी के मूल्यों का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि होता है।”
केनी के अनुसार, “सांख्यिकी में बहुलक उस मान को कहते हैं, जो समंकमाला में सबसे अधिक बार आता है।”
बॉडिंगटन के अनुसार, “बहुलक को महत्त्वपूर्ण प्रकार, रूप या पद के आकार या सर्वाधिक घनत्व की स्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।”

बहुलक के गुण – बहुलक के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं

  1. थोड़े मदों की जानकारी से भी भूयिष्ठक की गणना सम्भव है। बहुलक की गणना के लिए सभी मदों की आवृत्तियाँ जानना भी आवश्यक नहीं है। केवल बहुलक वर्ग के पहले व बाद वाले वर्ग की आवृत्तियाँ ही पर्याप्त हैं।
  2. इसके मूल्य पर चरम मदों का प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि यह सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होता।
  3. भूयिष्ठक मूल्य के चारों ओर समंक श्रेणी के अधिकतम मूल्य केन्द्रित होते हैं; अत: इससे समूह के लक्षणों तथा रचना पर भी प्रकाश पड़ता है।
  4. बहुलक एक व्यावहारिक माध्य है, जिसका सार्वभौमिक उपयोग है। दैनिक उपयोग की वस्तुएँ; जैसे बनियान, कॉलर या जूते का निर्माता सभी नम्बर के बनियान, कॉलर या जूते नहीं बनाता, वरन् जो नम्बर अधिक माँगे जाते हैं उन्हीं को अधिक बनाता है। यह बहुलक द्वारा ही ज्ञात किया जा सकता है कि किस प्रकार की वस्तु का अधिक निर्माण किया जाए।
  5. बहुलक का निर्धारण बिन्दुरेखीय रीति से भी सम्भव है।
  6. बहुलक को समझना व प्रयोग करना दोनों सरल हैं।
  7. समूह में से चाहे जितने नमूने लिये जाएँ उनसे प्राप्त भूयिष्ठक या बहुलक समान ही रहता है।

बहुलक के दोष – बहुलक के दोष निम्नलिखित हैं

  1. बहुलक को यदि पदों की संख्या से गुणा किया जाए तो पदों के कुल मूल्यों का योग प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  2. इसमें पदों को क्रमानुसार रखना आवश्यक है। इसके बिना बहुलक ज्ञात करना सम्भव नहीं होता।
  3. जब श्रेणी के सभी मूल्यों की आवृत्तियाँ समान हों तो बहुलक ज्ञात नहीं किया जा सकता।
  4. अनेक बार असमान आवृत्ति वितरण में बहुलक सुनिश्चित रूप से निर्धारित नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसी श्रेणियों में कभी-कभी दो या अधिक बहुलक होते हैं।
  5. बहुलक का निर्धारण पूर्णतः पदों की आवृत्तियों पर ही आश्रित होने के कारण इससे कभी-कभी बड़े अशुद्ध तथा भ्रमात्मक निष्कर्ष प्राप्त हो जाते हैं। उदाहरणार्थ, किसी टीम द्वारा खेले गये 12 मैचों में 5 में गोल संख्या शून्य रही तथा अन्य मैचों में एक से अधिक गोल किये गये। किन्तु उनमें से किसी भी मैच की गोल संख्या समान नहीं थी। ऐसी दशा में शून्य पद की सबसे अधिक आवृत्ति होने के कारण बहुलक को मूल्य शून्य हो जाएगा।
  6. भूयिष्ठक के निर्धारण में सीमान्त पदों पर विचार नहीं किया जाता। अतएव जहाँ माध्य निर्धारण में सभी पदों को महत्त्व दिया जाना हो वहाँ बहुलक उपयुक्त माध्य नहीं है।
  7. बहुलक को बीजगणितीय विवेचन नहीं किया जा सकता; अत: यह अपूर्ण है।

बहुलक की विशेषताएँ – बहुलक की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. बहुलक के लिए बीजगणितीय विवेचन करना आवश्यक नहीं होता।
  2. बहुलक आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।
  3. सर्वाधिक घनत्व वाला बिन्दु होने के कारण भूयिष्ठक सम्बद्ध समंकों का यथार्थ प्रतिनिधित्व करता है।
  4. वास्तविक बहुलक के निर्धारण के लिए पर्याप्त गणना की आवश्यकता होती है। यदि आवृत्ति-वितरण अनियमित हो तो बहुलक का निर्धारण करना भी कठिन हो जाता है।
  5. भूयिष्ठक पर श्रेणी के असाधारण सीमान्त पदों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

बहुलक का उपयोग – बहुलक के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं

  1. बहुलक समझने में सरल होता है इसलिए व्यापारिक क्षेत्र में और दैनिक जीवन में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है।
  2. व्यापार एवं उद्योगों के लिए पूर्वानुमान लगाने में बहुलक से अत्यधिक सहायता मिलती है।
  3. किसी भी वस्तु का औसत आकार ज्ञात करने हेतु बहुलक का प्रयोग किया जाता है।
  4. बहुत-से व्यवसायी बहुलक के आधार पर ही माल का निर्माण करते हैं; जैसे-टोपी, जूता, हैट, कॉलर आदि।
  5. उद्योग के क्षेत्रों में माँग को ध्यान में रखकर इसके आधार पर उत्पादन किया जाता है।
  6. मशीनों द्वारा आजकल बहुलक द्वारा निर्देशित उत्पादन पर जोर दिया जाने लगा है।
  7. इसी प्रकार मौसमी अध्ययनों में तापमान, वर्षा, वायुगति की औसत मात्रा का निर्धारण बहुलक द्वारा ही किया जाता है।

बहलक की गणना
बहुलक की गणना निम्नलिखित रीतियों से की जाती है

(क) व्यक्तिगत श्रेणी में बहुलक की गणना – व्यक्तिगत श्रेणी में बहुलक की गणना करते समय बहुलक का निरीक्षण द्वारा ही पता लगा लिया जाता है। श्रेणी का जो पद-मूल्य सबसे अधिक बार श्रेणी में आता है, वही पद-मूल्य बहुलक होता है।
व्यक्तिगत श्रेणी में बहुलक ज्ञात करने के लिए सर्वप्रथम पदों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित कर लेते हैं। पदों के व्यवस्थित होने पर सरलता से पता लग जाता है कि श्रेणी में किस पद-मान की आवृत्ति सबसे अधिक है। श्रेणी में सर्वाधिक पद-मान वाला ही भूयिष्ठक होगा।

उदाहरण 1
माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की कक्षा 12 की परीक्षा में अर्थशास्त्र विषय में 10 परीक्षार्थियों के प्राप्तांक निम्नलिखित हैं
60,   38,   45,   60,   33,   40,   60,   25,   33,  75.
इन समंकों से बहुलक की गणना कीजिए।
हल:
पदों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर श्रेणी निम्नवत् प्राप्त होती है
25,   33,   33,   38,   40,   45,   60,   60,   60,   75
उपर्युक्त श्रेणी को देखने से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि इस श्रेणी में पद-मान 60 की आवृत्ति सर्वाधिक हैं; अत: बहुलक 60 अंक है।

विशेष –
जब किसी व्यक्तिगत श्रेणी में पद-मूल्यों की संख्या बहुत अधिक होती है तो निरीक्षण द्वारा बहुलक ज्ञात करना कठिन होता है। इस प्रकार की स्थिति में बहुलक ज्ञात करने के लिए

उदाहरण 2
में बतायी गयी पद्धति का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण 2 निम्नांकित प्राप्तांकों से बहुलक ज्ञात कीजिए
17, 25, 28, 30, 20, 22, 30, 24, 27, 30, 21, 22, 26, 25, 21, 30, 22, 17, 18, 30, 18.
हल:
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उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि 30 अंकों की आवृत्ति सर्वाधिक 5 बार हुई है; अत: बहुलक 30 अंक है।

(ख) खण्डित श्रेणी में बहुलक ज्ञात करना – 
खण्डित श्रेणी में भी बहुलक ज्ञात करना बहुत सरल है। श्रेणी में जिस पद की बारम्बारता सर्वाधिक होती है, वही पद बहुलक होता है।

उदाहरण 3
माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश कक्षा 12; अर्थशास्त्र की परीक्षा में परीक्षार्थियों ने निम्नलिखित अंक प्राप्त किये, इस श्रेणी का बहुलक ज्ञात कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency Mode 2
हल:
उपर्युक्त श्रेणी में प्राप्तांक 60 की बारम्बारता सबसे अधिक 15 है, अर्थात् 15 परीक्षार्थियों ने 60 अंक प्राप्त किये हैं; अतः स्पष्ट है कि इस श्रेणी का बहुलक 60 अंक है।

उदाहरण 4
बी० एम० एम० इण्टर कॉलेज के विद्यार्थियों की संख्या उनकी आयु के साथ निम्नलिखित सारणी में दी गयी है। इस श्रेणी का बहुलक ज्ञात कीजिए
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हल:
उपर्युक्त श्रेणी में सबसे अधिक बारम्बारता 40 है, जो 2 बार आयी है; अतः इस प्रकार की स्थिति में यह निश्चित करना कठिन हो जाता है कि इस श्रेणी का बहुलक 13 है अथवा 15 । इसे ज्ञात करने के लिए समूहन विधि को उपयोग में लाते हैं।

समूहन विधि – समूहन विधि में हमें स्तम्भ बनाने होते हैं। पहला स्तम्भ दी हुई बारम्बारता का होता है। दूसरा स्तम्भ दो-दो आवृत्तियों को जोड़कर बनाया जाता है। तीसरे स्तम्भ को बनाते समय पहली आवृत्ति को छोड़कर शेष दो-दो आवृत्तियों को जोड़कर समूह बनाये जाते हैं। अन्त में दो से कम आवृत्ति बचने पर उसे छोड़ दिया जाता है। चौथे स्तम्भ में पहली आवृत्ति से आरम्भ करके तीन-तीन

आवृत्तियों को जोड़कर समूह बनाये जाते हैं। इसी प्रकार पाँचवे स्तम्भ में पहली आवृत्ति को छोड़कर तीन-तीन आवृत्तियों को जोड़कर समूह बनाये जाते हैं तथा छठे स्तम्भ को बनाते समय प्रथम दो आवृत्तियों को छोड़कर तीन-तीन आवृत्तियों को जोड़कर समूह बनाये जाते हैं। अन्त में यदि तीन से कम आवृत्तियाँ बचे तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। यह सारणी अग्रलिखित रूप में बनायी जाती है

समूहन सारणी
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उपर्युक्त समूह में यह देखना है कि प्रत्येक स्तम्भ में कौन-सी बारम्बारता सर्वाधिक है। सबसे अधिक बारम्बारता को निम्नलिखित सारणी में अंकित किया गया है

विश्लेषण सारणी
स्तम्भ संख्या प्रत्येक स्तम्भ के अधिकतम बारम्बारता वाले पदचिह्न लगाये गये हैं।
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उपर्युक्त सारणी को देखने से यह स्पष्ट होता है कि 13 वह संख्या है जिसकी आवृत्ति सबसे अधिक है; अतः दी हुई श्रेणी की बहुलक 13 है।

(ग) सतत श्रेणी में बहलक ज्ञात करना – सतत् श्रेणी में बहुलक ज्ञात करने के लिए सर्वप्रथम सर्वाधिक आवृत्ति वाला वर्ग ज्ञात किया जाता है। इसे ही बहुलक वर्ग कहते हैं। यदि सारणी में सर्वाधिक बारम्बारता वाला एक ही वर्ग होता है, तब उसमें निम्नलिखित सूत्र के द्वारा बहुलक ज्ञात किया जाता है
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यहाँ पर, z = बहुलक (Mode),
L1 = बहुलक वर्ग की निम्न सीमा,   L2 = बहुलक वर्ग की उच्च सीमा,
f1 = बहुलक वर्ग की आवृत्ति,         f0 = बहुलक वर्ग के पूर्व वर्ग की आवृत्ति,
f2 = बहुलक वर्ग के बाद वाले वर्ग की आवृत्ति।

उदाहरण 5
निम्नलिखित सारणी के आँकड़ों से बहुलक ज्ञात कीजिए
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हल:
उपर्युक्त सारणी को देखने से ही पता लग जाता है कि 30-40 वर्गान्तर की आवृत्ति सबसे अधिक है, अत: बहुलक इसी वर्गान्तर में स्थित होगा।
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विशेष – सतत् श्रेणी में यदि सबसे अधिक आवृत्ति वाले एक से अधिक वर्ग हों तब सर्वप्रथम समूहन विधि की सहायता से सबसे अधिक आवृत्ति वाला वर्ग ज्ञात करते हैं और उसके बाद निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है
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उदाहरण 6
निम्नलिखित सारणी से बहुलक की गणना कीजिए
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हल:
इस श्रेणी में 9 आवृत्ति वाले दो वर्ग हैं; अत: सबसे पहले समूहन विधि द्वारा सही बहुलक वर्ग ज्ञात किया जाएगा।
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विश्लेषण सारणी
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विश्लेषण तालिका से स्पष्ट है कि बहुलक (Mode) 40-50 वर्ग में स्थित है।
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विशेष – प्रायः बहुलक की गणना करने के लिए इसी सूत्र का प्रयोग किया जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि विश्लेषण सारणी से जो बहुलक वर्ग निकलता है, बहुलक मूल्य का परिकलन इस सूत्र के द्वारा करने पर बहुलक मूल्य, बहुलक वर्ग के बाहर आने लगता है। ऐसी स्थिति में बहुलक मूल्य की गणना करने के लिए 2= L1 + [latex]\frac { { f }_{ 2 } }{ { f }_{ 0 }-{ f }_{ 2 } }[/latex] (L2 – L1) का प्रयोग करते हैं। संकेतों के चिह्न पूर्व सूत्र के अनुसार ही प्रयुक्त होते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1
निम्नलिखित सारणी से बहुलक ज्ञात कीजिएप्राप्तांक
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हल:
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विश्लेषण सारणी
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अतः, बहुलक = 28 अंक

प्रश्न 2
निम्नलिखित आँकड़ों से बहुलक ज्ञात कीजिए
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हल:
निरीक्षण से स्पष्ट है कि 30-35 वर्गान्तर की आवृत्ति सबसे अधिक है; अत: बहुलक इस वर्गान्तर में ही स्थित होगा।
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प्रश्न 3
निम्नलिखित आँकड़ों से बहुलक ज्ञात कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency Mode 19
हल:
निरीक्षण द्वारा स्पष्ट है कि 30-40 वर्गान्तर की आवृत्ति सबसे अधिक है; अत: बहुलक इसी वर्गान्तर में स्थित होगा।
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अतिलघु उत्तरीय प्रश्ता (2 अंक)

प्रश्न 1
निम्नलिखित बंटन का बहुलक ज्ञात कीजिए
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हल:
यहाँ अधिकतम बारम्बारता 23 है; अत: बहुलक वर्ग 12-15 हुआ।
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प्रश्न 2
निम्नलिखित बारम्बारता बंटन का बहुलक ज्ञात कीजिए
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हल:
स्पष्ट है कि 45 की बारम्बारता 15 है तथा किसी भी दूसरे पद की बारम्बारता 15 तथा 15 से अधिक नहीं है।
अतः अभीष्ट बहुलक = 45

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
2, 2, 3, 2, 1 का बहुलक बताइए।
उत्तर:
बहुलक = 2.

प्रश्न 2
आँकड़ों 2, 1, 1, 3, 4, 2, 1, 1, 4, 4, 1, 1 का बहुलक बताइए।
उत्तर:
बहुलक = 1

प्रश्न 3
45 शिक्षार्थियों वाली कक्षा में 5 शिक्षार्थियों की ऊँचाई 142 सेमी, 10 शिक्षार्थियों की ऊँचाई 144 सेमी, 10 शिक्षार्थियों की ऊँचाई 146 सेमी, 15 शिक्षार्थियों की ऊँचाई 150 सेमी है तो 5 शिक्षार्थियों की ऊँचाई का बहुलक बताइए।
उत्तर:
बहुलक = 15.

प्रश्न 4
निम्नलिखित आँकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए
(i) 13, 14, 10, 12, 11, 12, 13, 20, 18, 12, 10, 12.
उत्तर:
बहुलक = 12

(ii) 19, 25, 36, 28, 20, 18, 38, 3, 38, 22, 38, 38.
उत्तर:
बहुलक = 38.

प्रश्न 5
बहुलक का क्या व्यावहारिक प्रयोग है?
उत्तर:
उत्पादन व्यापार एवं उद्योगों में बहुलक का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 6
एक अखण्डित (सतत्) श्रेणी के लिए बहुलक ज्ञात करने का सूत्र लिखिए। [2008]
उत्तर:
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency Mode 25

प्रश्न 7
बहुलक का क्या तात्पर्य है? [2007]
या
बहुलक क्या है? [2012]
उत्तर:
सांख्यिकी आँकड़ों में जिस पद की बारम्बारता अधिकतम हो वह पद बहुलक कहलाता है।

प्रश्न 8
माध्य, माध्यिका और बहुलक में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
बहुलक = 3 x माध्यिका – 2 x समान्तर माध्य
अर्थात् Z = 3M – 2[latex]\overline { X }[/latex]

प्रश्न 9
बहुलक के दो गुण बताइए।
उत्तर:
बहुलक के दो गुण निम्नलिखित हैं

  1. बहुलक सबसे सरल माध्य है जो आसानी से समझ में आ जाता है,
  2. लेखा चित्र द्वारा भी इसे ज्ञात कर लिया जाता है।

प्रश्न 10
बारम्बारता वक्र पर बहुलक कैसे ज्ञात किया जाता है?
उत्तर:
बारम्बारता वक्र का बहुलक क्षैतिज पैमाने पर वह मान होता है जिस पर वक्र की ऊँचाई अधिकतम होती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
2, 2, 2, 3, 5, 5, 5, 6, 6, 6, 8, 8, 8, तथा 5 का बहुलक होगा
(क) 2
(ख) 6
(ग) 8
(घ) 5
उत्तर:
(घ) 5.

प्रश्न 2
दिये गये आँकड़ों में सबसे अधिक बार आने वाले पद को कहते हैं
(क) समान्तर माध्य
(ख) बहुलक
(ग) माध्यिको
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) बहुलक।

प्रश्न 3
वर्गान्तर श्रेणी में बहुलक का सूत्र है
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency Mode 26
उत्तर:
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency Mode 27

प्रश्न 4
माध्य, माध्यिका और बहुलक के सम्बन्ध का सूत्र है
UP Board Solutions for Class 12 Economics Chapter 29 Measure of Central Tendency Mode 28
उत्तर:
(ख) Z = 3M – 2[latex]\overline { X }[/latex].

प्रश्न 5
सभी चर मानों पर आधारित केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप कौन-सी है? [2007]
(क) बहुलक
(ख) माध्यिका
(ग) समान्तर माध्यिका
(घ) मानक विचलन
उत्तर:
(क) बहुलक।

प्रश्न 6
केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप है [2014]
(क) समान्तर माध्य
(ख) माध्यिका
(ग) बहुलक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(घ) इनमें से कोई नहीं।

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UP Board Class 12 Civics Model Papers Paper 1

UP Board Class 12 Civics Model Papers Paper 1 are part of UP Board Class 12 Civics Model Papers. Here we have given UP Board Class 10 Civics Model Papers Paper 1.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Civics
Model Paper Paper 1
Category UP Board Model Papers

UP Board Class 12 Civics Model Papers Paper 1

समय : 3 घण्टे 15 मिनट
पूर्णांक : 100

नोट प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

निर्देश

  • सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  • प्रश्न संख्या-1 से 10 तक बहुविकल्पीय हैं।
  • प्रश्न संख्या-11 से 20 तक अतिलघु उत्तरीय हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 10 शब्दों (एक वाक्य) में देना है।
  • प्रश्न संख्या-21 से 26 तक लघु उत्तरीय-1 हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 50 शब्दों में देना है।
  • प्रश्न संख्या-27 से 30 तक लघु उत्तरीय-2 हैं, जिनका उत्तर लगभग 100-125 शब्दों में देना है।
  • प्रश्न संख्या-31 एवं 32, तक के प्रश्न दीर्घ उत्तरीय हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 250 शब्दों में देना है।
  • सभी प्रश्नों के निर्धारित अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न

नोट निम्नलिखित 10 प्रश्नों में प्रत्येक के चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें पनों में प्रत्येक के चार तिकत्र्य दिए गए हैं। इनमें से सही विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए

प्रश्न 1.
‘लेवियाथन’ पुस्तक का लेखक कौन है? [1]
(a) होब्स
(b) लॉक
(c) रूसो
(d) ग्रीन

प्रश्न 2.
“मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है।’ यह किसने कहा है? [1]
(a) अरस्तू
(b) प्लेटो
(c) सुकरात
(d) हाब्स

प्रश्न 3.
स्वतन्त्रता तथा समानता एक-दूसरे के [1]
(a) पूरक हैं
(b) विरोधी हैं।
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों हैं
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 4.
विश्व पर्यावरण दिवस’ प्रतिवर्ष किस तिथि को मनाया जाता है? [1]
(a) 15 अगस्त
(b) 2 अक्टूबर
(c) 5 जून
(d) 5 मई

प्रश्न 5.
“राज्य एक आवश्यक बुराई है।” यह कथन किसका है। [1]
(a) व्यक्तिवादियों का
(b) समाजवादियों का
(c) आदर्शवादियों का
(d) इनमें में से कोई नहीं

प्रश्न 6.
अधिकारों के कानूनी सिद्धान्त का प्रतिपादक कौन था? [1]
(a) हाब्स
(b) लॉक
(c) रूसो
(d) बेन्थम

प्रश्न 7.
उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला राज्यपाल कौन थी? [1]
(a) श्रीमती सुवेता कृपलानी
(b) सुश्री मायावती
(c) श्रीमती विजय लक्ष्मी
(d) श्रीमती सरोजनी नायडू

प्रश्न 8.
लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ है। [1]
(a) शिक्षित नागरिक
(b) समाचार-पत्र
(c) निष्पक्ष मतदान
(d) राजनीतिक दल

प्रश्न 9.
न्यायपालिका का कार्य है। [1]
(a) कानून बनाना
(b) राष्ट्रपति का चुनाव करना।
(c) संविधान की रक्षा करना
(d) अध्यादेश निर्गत करना।

प्रश्न 10.
सरकार के अंगों की संख्या कितनी है? [1]
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 11.
लोक-कल्याणकारी राज्य की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2]

प्रश्न 12.
नागरिकों के दो राजनीतिक अधिकारों का उल्लेख कीजिए। [2]

प्रश्न 13.
उन दो राज्यों के नाम लिखिए, जहाँ द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका है। [2]

प्रश्न 14.
भारत के दो राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के नाम लिखिए। [2]

प्रश्न 15.
कार्यपालिका के दो प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए। [2]

प्रश्न 16.
केन्द्रशासित प्रदेशों की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2]

प्रश्न 17.
शीतयुद्ध का क्या अर्थ है? [2]

प्रश्न 18.
न्यायपालिका के दो कार्यों का उल्लेख कीजिए। उत्तर-इस प्रश्न के [2]

प्रश्न 19.
दो वैश्विक संगठनों के नाम लिखिए। [2]

प्रश्न 20.
संघ लोक सेवा आयोग के दो कार्यों का उल्लेख कीजिए। [2]

लघु उत्तरीय प्रश्न 1

प्रश्न 21.
समाजवाद के प्रमुख सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 22.
पर्यावरण प्रदूषण के प्रति नागरिकों के प्रमुख दायित्वों का उल्लेख कीजिए।

प्रश्न 23.
राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है? राज्यपाल की चार कार्यपालिका शक्तियों का उल्लेख कीजिए। [1+ 4]

प्रश्न 24.
भारतीय जनजातियों की आर्थिक समस्याओं का उल्लेख कीजिए। [5]

प्रश्न 25.
राष्ट्रमण्डल के प्रमुख उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। [5]

प्रश्न 26.
पंचायती राजव्यवस्था में कितने स्तर हैं? जिला पंचायत के प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए। [5]

लघु उत्तरीय प्रश्न 2

नोट प्रश्न संख्या 27 से 30 तक के प्रश्नों का उत्तर प्रत्येक लगभग 100-125 शब्दों में देना है।

प्रश्न 27.
आधुनिक राज्यों में कार्यपालिका के किन्हीं चार कार्यों का उल्लेख कीजिए। कार्यपालिका को स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष बनाए रखने के प्रमुख उपायों की विवेचना कीजिए। [1/2 + 1/2 + 1/2 + 1/2 + 4]

प्रश्न 28.
चार ऐसे राज्यों का नाम बताइए, जहाँ विधानपरिषदें हैं? विधान सभा और विधान परिषद् की तुलनात्मक विवेचना कीजिए। [2 + 4]

प्रश्न 29.
भारत में न्यायपालिका की स्वतन्त्रता के किन्हीं दो निर्णायक कारकों का उल्लेख कीजिए। संघात्मक सरकार के लिए स्वतन्त्र न्यायपालिका की अनिवार्यता के पक्ष में अपने तर्क दीजिए [2 + 4]

प्रश्न 30.
शीतयुद्ध के दो कारणों का उल्लेख कीजिए। शीतयुद्ध के कारणों एवं प्रभावों की विवेचना कीजिए। [2 + 4]

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31.
भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना कब हुई? राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष कौन होता है? इसके कार्यों का उल्लेख कीजिए। [2 + 2 + 4]

प्रश्न 32.
संयुक्त राष्ट्र संघ की सफलता तथा असफलता के कारणों का उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए। विश्व शान्ति की स्थापना में यह कार्य कहाँ तक सफल हुआ है? [4 + 4]

उत्तरमाला

उत्तर 1. (a)

उत्तर 2. (c)

उत्तर 3. (a)

उत्तर 4. (c)

उत्तर 5. (a)

उत्तर 6. (c)

उत्तर 7. (d)

उत्तर 8. (b)

उत्तर 9. (c)

उत्तर 10. (c)

उत्तर 13.

  1. उत्तर प्रदेश
  2. बिहार

उत्तर 14.

  1. कांग्रेस
  2. भारतीय जनता पार्टी

उत्तर 16.
केन्द्रशासित प्रदेश की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

  1. प्रत्येक संघ राज्य क्षेत्र को प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, जिसे वह स्वयं के द्वारा नियुक्त तथा प्रशासक के माध्यम से संचालित कराता
  2. विधायिका की अनुपस्थिति में प्रशासक की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद-239 (ख) में है।

उत्तर 17.
शीतयुद्ध से तात्पर्य, एक ऐसी स्थिति से है, जिसमें युद्ध तो किसी भी क्षेत्र में नहीं होता था, किन्तु हर समय युद्ध जैसी स्थिति बनी रहती है।

उत्तर 19.
दो वैश्विक संगठन निम्न हैं।

  1. संयुक्त राष्ट्र संघ
  2. राष्ट्रमण्डल

उत्तर 22.
पर्यावरण प्रदूषण के सन्दर्भ में नागरिकों के दायित्वों का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 21A के अन्तर्गत किया गया है, जिसके अन्तर्गत-वन, झील, नदी और वन्यजीव शामिल हैं, के प्रति नागरिकों का निम्नलिखित प्रमुख दायित्व होना चाहिए

  • पर्यावरण की रक्षा करना।
  • पर्यावरण की संवर्द्धन करना।
  • प्राणि मात्र के प्रति दया भाव रखना।
  • विकास की स्वच्छ वे उन्नत तकनीकों का प्रयोग करना।
  • जनसामान्य में प्रदूषण के कारणों, समस्याओं व निराकरण के कदमों का बेहतर प्रसार करना चाहिए।

उत्तर 27.
कार्यपालिका को स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष बनाए रखने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं।

  1. निष्पक्ष चुनाव प्रणाली
  2. वंशवाद तथा परिवारवाद का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
  3. किसी विचारधारा या मत के प्रति ग्रस्त नहीं होना चाहिए।
  4. कार्यकाल की निश्चितता होनी चाहिए।
  5. सरकार के अंगों में शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त का पालन होना चाहिए।
  6. भ्रष्टाचार-विरोधी संस्थाओं जैसे लोकपाल और लोकायुक्तों की नियुक्ति होनी चाहिए तथा उनके अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने चाहिए।

उत्तर 31.
राष्ट्रीय मावाधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों का संरक्षण के लिए विभिन्न नियमों तथा उपनियमों को लागू करने के लिए सितम्बर, 1993 को राष्ट्रपति के अध्यादेश (Ordinance) द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission, NHRC) CAT TO किया गया। इस अध्यादेश के बाद मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 अस्तित्व में आया। मानवाधिकार आयोग में 9 सदस्य होते हैं। इसमें एक अध्यक्ष होता है, जोकि सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रह चुका हो। आयोग का एक सदस्य ऐसा व्यक्ति होती है, जो उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रह चुका हो।

कार्य एवं शक्तियाँ

इस आयोग के प्रमुख कार्य एवं शक्तियाँ निम्नलिखित हैं। –

  • मानवीय अधिकारों के उल्लंघन से सम्बन्धित कोई मामला न्यायालय में लम्बित हो, तो न्यायालय की अनुमति से मानवाधिकार आयोग उस मामले में हस्तक्षेप कर सकता है।
  • किसी पीड़ित व्यक्ति द्वारा या पीड़ित की ओर से अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा दायर याचिका जिसमें मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात की गई हो, की सुनवाई करता है।
  • राज्य सरकार को सूचना देकर मानवाधिकार आयोग, जेलों में कैदियों की दशा का निरीक्षण कर सकता है।
  • मानवाधिकारों के प्रभावी संरक्षण के लिए सरकार को सिफारिशें करना।
  • मानवीय अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार को परामर्श देना।
  • मानवाधिकारों के उपयोग में बाधक तत्त्वों का पता लगाकर सरकार को उपयुक्त सुझाव देना।
  • मानवीय अधिकार के क्षेत्र में अनुसन्धान तथा विश्लेषण करना।
  • जनसंचार उपकरणों, संगोष्ठी (Meetings) आदि के माध्यम से मानवीय अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना।
  • मानवाधिकार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तथा बाल अधिकार प्रशिक्षण का संचालन करना।
  • मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) तथा अन्य संस्थानों को प्रोत्साहित करना।
  • आयोग अपने कार्यो सम्बन्धी वार्षिक रिपोर्ट केन्द्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करता है।

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UP Board Solutions for Class 12 Civics Chapter 22 India and the World

UP Board Solutions for Class 12 Civics Chapter 22 India and the World (भारत और विश्व) are part of UP Board Solutions for Class 12 Civics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Civics Chapter 22 India and the World (भारत और विश्व).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Civics
Chapter Chapter 22
Chapter Name India and the World
(भारत और विश्व)
Number of Questions Solved 14
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Civics Chapter 22 India and the World (भारत और विश्व)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

प्रश्न 1.
1971 ई० के उपरान्त भारत-पाक सम्बन्धों का विवेचन कीजिए। या भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों का वर्तमान सन्दर्भ में परीक्षण कीजिए। [2016]
उत्तर :
15 अगस्त, 1947 को भारत को अंग्रेजी दासता से मुक्ति प्राप्त हुई तथा दो स्वतन्त्र राष्ट्र ‘भारत व पाकिस्तान’ अस्तित्व में आये। पाकिस्तान का निर्माण साम्प्रदायिकता की पृष्ठभूमि पर आधारित था तथा अपने शैशवकाल से ही यह भारत व भारतीयों के प्रति घृणा व द्वेष की भावना रखने लगा। इस अमित्रतापूर्ण वातावरण के कारण भारत-पाक सम्बन्ध मधुर न रहे।

पाकिस्तान द्वारा 1947 ई० में कश्मीर पर आक्रमण के बाद कश्मीर को भारत में विलय हो गया, परन्तु पाकिस्तान ने इस विलय को पूर्ण अवैधानिक बताते हुए अपना वैमनस्य सन् 1965 व सन् 1971 में भारत पर आक्रमण करके प्रदर्शित किया। 1971 ई० के युद्ध के बाद दोनों देशों ने सम्बन्ध सुधारने पर बल दिया तथा इसी कड़ी में 1972 ई० का शिमला समझौता और 1973 ई० का दिल्ली समझौता सम्पन्न हुआ। सन् 1974 ई० में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को मान्यता प्रदान की। सन् 1974 व 1976 में भारत-पाक सम्बन्ध मधुर न रह सके। 1976 ई० में टूटे सम्बन्धों को फिर से जोड़ने का प्रयास किया गया। 1978 ई० में भारतीय विदेश मन्त्री की पाकिस्तान यात्रा तथा इसी कड़ी में पाकिस्तानी विदेश सलाहकार श्री आगाशाही को भारत-यात्रा ने सम्बन्धों को मधुर बनाने की दिशा में योगदान दिया। अप्रैल, 1978 में भारत-पाक सलाह जल सन्धि सम्पन्न हुई। यह एक प्रगतिशील व सराहनीय कदम बताया गया।

भारत ने पाकिस्तान के प्रति सदैव सहयोगपूर्ण रवैया अपनाया, परन्तु पाकिस्तान की नीति अनुकूल नहीं रही। पाकिस्तान अपनी सैन्य-शक्ति मात्र भारत के विरुद्ध प्रयोग करने का प्रयास करता रहा है। चीन व अमेरिका इस कार्य में पाकिस्तान की खुले हृदय से सहायता करते रहे। यद्यपि भारत व पाकिस्तान के मध्य वार्ताओं व यात्राओं को क्रम चला आ रहा है, परन्तु मतभेद पूर्णतया दूर नहीं हो सके हैं। सियाचीन विवाद अभी तक समाप्त नहीं हो पाया है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक के समय तक भारत-पाक सम्बन्ध तनावपूर्ण ही रहे। बार-बार कश्मीर विषय को उठाया जाता रहा। साथ ही पाकिस्तान ने प्रत्येक सम्भव तरीके से पंजाब में आतंकवाद को प्रोत्साहित किया। यद्यपि कई स्तरों पर राजनीतिक सम्बन्धों में सुधार हुआ। जिया उल हक कई बार भारत यात्रा पर आये। राजीव गाँधी ने भी उनसे कई बार भेंट की तथा सम्बन्ध सुधारे जाने पर बल दिया।

जिया उल हक की मृत्यु के बाद नवम्बर, 1988 में श्रीमती बेनजीर भुट्टो के नेतृत्व में पाकिस्तान में लोकतन्त्रीय शासन-प्रणाली स्थापित हुई। परिवर्तित राजनीतिक परिस्थितियों में आशी बनी कि भारत-पाक सम्बन्ध सुधरेंगे और आपसी द्वेषभाव व वैमनस्य का वातावरण दूर होगा। दिसम्बर, 1988 के अन्तिम सप्ताह में इस्लामाबाद में हुए ‘दक्षेस (सार्क) सम्मेलन के समय दोनों देशों के प्रधानमन्त्रियों के बीच वार्ता हुई और 1 जनवरी, 1989 को दोनों देशों में तीन समझौते हुए पहले समझौते के अनुसार, भारत-पाक एक-दूसरे के परमाणु संयन्त्रों पर हमला नहीं करेंगे; दूसरा समझौता सांस्कृतिक आदान-प्रदान से सम्बन्धित है तथा तीसरे समझौते के द्वारा दोहरी कर-नीति को समाप्त करने की बात कही गयी। भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी की पाकिस्तानयात्रा इस दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी, ऐसी आशा थी; किन्तु यह आशा निराधार सिद्ध हुई। पाकिस्तान भारत में उग्रवादी गतिविधियों को प्रोत्साहन देता रहा है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को भारी मात्रा में अस्त्र-शस्त्र दिये गये, उन्हें प्रशिक्षित किया गया तथा शरण भी दी गयी। इन सबसे भारत-पाक सम्बन्ध प्रभावित हुए।

भारत में सत्ता परिवर्तन हुआ। प्रधानमन्त्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने दोनों देशों के सम्बन्ध मधुर बनाये रखने की इच्छा व्यक्त की, किन्तु पाकिस्तान द्वारा भारत की एकता व अखण्डता को आघात पहुंचाने के प्रयत्नों ने भारत-पाक सम्बन्धों में कटुता पैदा कर दी। पंजाब और कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को पाकिस्तान खुलेआम बढ़ावा दे रहा है। सन् 1990 के मध्य मार्च तक पंजाब से लगी सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात थे, जिन्हें धीरे-धीरे जम्मू-कश्मीर मोर्चे पर फैला दिया गया। (उल्लेखनीय है कि 1971 ई० में इसी क्षेत्र में भयंकर टैंक युद्ध हुआ था।) पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो की सरकार परास्त हुई और नवाज शरीफ पाकिस्तान के नये प्रधानमन्त्री बने। उन्होंने भी वही पुरानी नीति अपनायी। 1990 ई० में गठित चन्द्रशेखर सरकार के काल में भी दोनों देशों के सम्बन्धों में कोई परिवर्तन नहीं आया। जून, 1991 में सत्ता में आयी श्री नरसिम्हाराव सरकार के काल में पाकिस्तान के साथ भारत के सम्बन्ध बद से बदतर हो गये। पाकिस्तान द्वारा कश्मीर समस्या का अन्तर्राष्ट्रीयकरण करना, कश्मीर के आतंकवादियों को सशस्त्र समर्थन देना तो जारी था ही, किन्तु जब 1993 ई० में हुए मुम्बई बम-काण्ड में उसका हाथ होने का पता चला तब पूरे विश्व के आगे उसका असली चेहरा सामने आ गया, यहाँ तक कि पाकिस्तान को आतंकवादी राज्य घोषित करने की माँग भी उठने लगी।

1999 ई० का वर्ष भारत-पाक सम्बन्धों की दृष्टि से बड़ा घटनापूर्ण रहा। प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 20-21 फरवरी को बस द्वारा दिल्ली से लाहौर तक शान्ति-यात्रा कर इस बसमार्ग का शुभारम्भ किया, किन्तु मई में कारगिल क्षेत्र में घुसपैठियों की आड़ में पाकिस्तानी फौज ने भारतीय क्षेत्र में कुछ जगह अनाधिकृत कब्जा कर लिया। भारतीय फौज ने अप्रतिम धैर्य, शौर्य और बलिदान द्वारा युद्ध कर कारगिल क्षेत्र मुक्त करा लिया। यह भारत की विजय और पाक की पराजय थी। पाकिस्तान में घटना-चक्र तेजी से बदल गया, वहाँ निर्वाचित सरकार का तख्ता पलटकर तथा प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ को गिरफ्तार कर जनरल परवेज मुशर्रफ ने सैनिक तानाशाह के रूप में सत्ता सँभाल ली। उनके भारत विरोधी विचार सर्वविदित हैं।

भारत चाहता था तथा अमेरिका सहित अनेक देश प्रयत्नशील थे कि भारत और पाकिस्तान के बीच शिखर वार्ता हो। अतः जुलाई, 2001 में आगरा में ‘वाजपेयी-मुशर्रफ शिखर सम्मेलन’ आयोजित हुआ। सम्मेलन में भारतीय प्रधानमन्त्री ने भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेद के सभी विषयों पर समग्र बातचीत के प्रयत्न किये, लेकिन मुशर्रफ कश्मीर को केन्द्रीय मुद्दा बतलाते हुए कश्मीर का ही राग अलापते रहे। भारत ने इस बात पर बल दिया कि ‘सीमा पार का आतंकवाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की जड़ है, लेकिन मुशर्रफ ने कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंकवाद को स्वतन्त्रता संग्राम की संज्ञा दी। ऐसी स्थिति में 36 घण्टे की ‘कूटनीतिक बाजीगरी’ को असफल होना ही था। अन्त में मुशर्रफ को बिना किसी औपचारिक विदाई के भारत से लौटना पड़ा।

इस असफल शिखर वार्ता के बाद पाक-प्रायोजित आतंकवाद ने उग्र रूप ग्रहण कर लिया। पहले तो श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला हुआ तथा इसके बाद 13 दिसम्बर, 2001 को लोकतन्त्र का हृदयस्थल संसद आतंकवादियों के हमले का निशाना बनी। इस हमले में संलग्न पाँचों आतंकवादी मारे गये। अब यह बात पूर्णतया स्पष्ट और प्रमाणित हो चुकी है कि ये पाँचों व्यक्ति पाकिस्तान के नागरिक और पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के निवासी थे। इस प्रकार हमले का पूरा दायित्व पाकिस्तान पर आता है। यह दुस्साहस की पराकाष्ठा थी। ऐसी स्थिति में भारत ने पाकिस्तान के विरुद्ध कूटनीतिक कार्यवाही करते हुए पाकिस्तान स्थित अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाने का फैसला कर लिया। 1 जनवरी, 2002 से समझौता एक्सप्रेस ट्रेन व दिल्ली-लाहौर बस सेवा रद्द कर दी गयी तथा भारतीय वायुमण्डल पर पाक विमानों की आवाजाही पर रोक लगा दी गयी। इसके साथ ही भारत ने 20 आतंकवादियों की सूची पाकिस्तान को देते हुए माँग की कि पाकिस्तान द्वारा इन्हें भारत को सौंप दिया जाना चाहिए। ये ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी भारत में आतंकवादी कार्यवाही में प्रमुख भूमिका रही और अभी पाकिस्तान में रह रहे हैं। पाकिस्तान ने अमेरिकी दबाव के कारण आतंकवाद का मौखिक विरोध और कुछ आतंकवादी संगठनों को अवैध घोषित करने जैसी कुछ सतही कार्यवाहियाँ तो कीं, लेकिन वह इन आतंकवादियों को भारत को सौंपने के लिए तैयार नहीं है।

जनवरी, 2002 से मार्च, 2003 तक का 15 महीने का समय भारत और पाक के बीच अत्यधिक तनावपूर्ण सम्बन्धों का रहा, दोनों देश युद्ध के कगार तक पहुँच गये। सितम्बर-अक्टूबर, 2003 में जम्मू-कश्मीर राज्य की विधानसभा के स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न हुए और अन्ततोगत्वा अप्रैल, 2003 में भारतीय नेतृत्व ने दोनों देशों के आपसी सम्बन्धों में गतिरोध को तोड़ने की पहल की। परन्तु इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। 18 फरवरी, 2007 को आतंकवादियों ने समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी में बम विस्फोट किया जिसमें लगभग 68 लोग मारे गए। इस कारण इस रेलगाड़ी का संचालन कुछ समय तक के लिए बन्द कर दिया गया। पुनः सन् 2008 में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुम्बई पर हमला किया जिसमें लगभग 173 लोग मारे गए तथा लगभग 308 लोग घायल हुए। अनेक इमारतें तहस-नहस हो गयीं। विश्वप्रसिद्ध ताज होटल भी उनमें से एक है। इसी प्रकार की घटनाएँ समय-समय पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी करते रहते हैं जिस कारण से दोनों देशों के सम्बन्ध मधुर नहीं बन पाते हैं।

अमेरिका और अन्य कुछ देश भी इस बात के लिए निरन्तर चेष्टा करते रहे हैं कि भारत और पाक के बीच वार्ता प्रारम्भ हो। पाकिस्तान सरकार ने अगस्त, 2011 में भारत को व्यापार में सबसे पसंदीदा देश (एम०एफ०एन०) का दर्जा देने पर सहमति जताकर कुछ सकारात्मक रुख दिखाया था। वर्तमान में नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं। भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 27 मई, 2014 को उनसे मुलाकात करके पाकिस्तान के साथ शान्तिपूर्ण, मित्रवत् एवं सहयोगपूर्ण द्विपक्षीय सम्बन्ध बनाने की नीति के रूख को दोहराते हुए कहा कि भारतवर्ष पाकिस्तान के सभी लम्बित मुद्दों को सन् 1972 के शिमला समझौते के दायरे में सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस सन्दर्भ में श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर शान्ति एवं सौहार्द तथा नियन्त्रण रेखा को सुनिश्चित करने के लिए आतंकवाद एवं हिंसा से मुक्त माहौल बनाने पर जोर दिया। हालाँकि पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने हुर्रियत के नेताओं को बुलाकर भारत के समस्त कूटनीतिक प्रयासों पर पानी फेर दिया और 25 अगस्त, 2014 को इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत के लिए भारत को विदेश सचिव की यात्रा रद्द करने के लिए मजबूर कर दिया।

आज भी भारत अपनी शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व की घोषित नीति के कारण पाकिस्तान के साथ सम्बन्ध सुधारने को तैयार है, लेकिन यह सम्बन्ध कश्मीर तथा देश की एकता व अखण्डता की कीमत पर सुधारने के लिए भारत का कोई विचार नहीं है। दोनों देशों के बीच सम्बन्ध सामान्य रखने के लिए पहले पाकिस्तान को भारत के अन्दरूनी मामलों में दखल देना बन्द करना होगा तथा भारत की एकता व अखण्डता के विरुद्ध साजिशें रचना बन्द करना होगा तब ही जाकर भारत के पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध सामान्य हो सकते हैं।

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प्रश्न 2.
भारत के श्रीलंका के साथ सम्बन्धों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
भारत और श्रीलंका परम्परागत रूप से मित्र रहे हैं। समस्त मित्रता के बावजूद इन दोनों देशों के बीच 1963-72 के वर्षों में कच्चा तीवू विवाद’ था। भारत इस विवाद को शान्तिपूर्ण तरीके से हल करना चाहता था। अत: अप्रैल, 1973 ई० में तत्कालीन भारतीय प्रधानमन्त्री ने श्रीलंका की यात्रा की और सद्भावना का परिचय देते हुए ‘कच्चा तीवू समझौता किया।

श्रीलंका में जातीय तनाव और भारत तथा लंका के बीच विवाद वर्ष 1982 के प्रारम्भ से श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंहली जाति और अल्प-संख्यक तमिल जाति के बीच विवाद और कटुता ने उग्र रूप ले लिया। भारत पर इस विवाद के प्रभाव और कुछ परिस्थितियों में भारी प्रभाव होते हैं, ऐसी स्थिति में दोनों देशों के बीच तीव्र और चिन्ताजनक विवाद ने जन्म ले लिया। श्रीलंका सरकार द्वारा बातचीत के आधार पर इस विवाद को हल करने के बजाय, पूरी शक्ति के साथ तमिल उग्रवादियों को कुचलने के प्रयत्न किए गए, जिसमें वह अब तक भी सफल नहीं हो पाई है। भारत ने इस बात से कभी भी इंकार नहीं किया कि तमिल समस्या श्रीलंका का घरेलू मामला है, लेकिन यह श्रीलंका का ऐसा घरेलू मामला है जिसका असर भारत की आन्तरिक स्थिति पर भी पड़ता है।

भारत श्रीलंका को इस समस्या के हल हेतु सहयोग देने की इच्छा रखता है। इसी भावना से 29 जुलाई, 1987 को ‘राजीव जयवर्द्धन समझौता सम्पन्न हुआ तथा श्रीलंका सरकार के आग्रह पर भारत ने श्रीलंका में 1987 में भारतीय शान्ति रक्षक दल’ भेजा। इस दल ने जन और धन की हानि उठाते हुए साहस के साथ शान्ति स्थापना के प्रयास किए। 1988 में नव निर्वाचित राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा ने जब ‘भारतीय शान्ति रक्षक दल’ की भारत-वापसी की माँग की, तब इसे भारत वापस बुला लिया गया।

दोनों पक्षों के बीच ‘स्वतन्त्र व्यापार समझौता’ और तदुपरान्त 27 दिसम्बर, 1988 को श्रीलंका की प्रधानमन्त्री भारत यात्रा पर आईं और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दोनों देशों के बीच ‘स्वतन्त्र व्यापार समझौता सम्पन्न हुआ। कुछ बाधाओं को पार करने के बाद यह समझौता मार्च 2000 ई० से लागू हो गया तथा इस समझौते से दोनों देशों के विदेश व्यापार में स्फूर्ति आई। इस प्रकार दोनों देशों के सम्बन्ध मित्रता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

श्रीलंकी सरकार वर्ष 2000 से ही तमिल समस्या के समाधान हेतु पूरी गम्भीरता के साथ प्रयत्नशील है तथा मई, 2009 में श्रीलंका सरकार और सेना ने तमिले उग्रवादियों का सफाया कर दिया है; लेकिन स्थिति का दूसरा पक्ष यह है कि सारे क्रम में श्रीलंका के तमिल शान्तिप्रिय नागरिकों को भी भारी तबाही का सामना करना पड़ा है। ऐसी स्थिति में तमिल समस्या का समाधाने अभी दूर है। भारतीय हितों की दृष्टि से इस समस्या को संतोषजनक हल आवश्यक है। भारत चाहता है। कि श्रीलंका की एकता और अखण्द्वता बनी रहे, लेकिन साथ ही तमिलों की सुरक्षा के लिए भी कोई भरोसेमन्द व्यवस्था हो जाए। आवश्यकता इस बात की है कि श्रीलंका इस सम्बन्ध में भारतीय दृष्टिकोण को समझे और उसे उचित महत्त्व दे।

मई, 2009 में लिट्टे की समाप्ति के बाद भी श्रीलंका की तमिल समस्या का स्थायी समाधान दूर है। इस समय भारत व श्रीलंका के मध्य दो प्रमुख मुद्दे हैं। प्रथम, श्रीलंका में आन्तरिक रूप से विस्थापित तमिलों का पुनस्र्थापन, जिसके बारे में भारत समय-समय पर मानवीय सहायता के राहत सामग्री उपलब्ध कराता रहा है। जनवरी, 2009 में भारत के विदेश मन्त्री ने श्रीलंका की यात्रा की जिसका प्रमुख उद्देश्य श्रीलंका के तमिलों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराना था। दूसरा मुद्दा तमिल समस्या के समाधान का है। भारतीय प्रधानमन्त्री राजीव गांधी की 1991 में तमिल आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या के बाद भारत ने तमिल आतंकवादी संगठन का विरोध करना आरम्भ कर दिया था। यद्यपि इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार को भारत के तमिल समूहों का विरोध भी सहना पड़ता है। भारत, श्रीलंका के संविधान व राष्ट्रीय एकता के अन्तर्गत तमिल समस्या का राजनीतिक समाधान चाहता है जिसमें तमिलों को स्वायत्तता दिए जाने का मुद्दा भी शामिल है। अगस्त, 2008 में कोलम्बो में सम्पन्न सार्क सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमन्त्री ने श्रीलंका की यात्रा की।

वर्ष 2009 में दोनों देशों के मध्य 3.27 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार सम्पन्न हुआ। वर्तमान में भारत श्रीलंका का सबसे बड़ा विदेशी निवेशक देश है। सम्बन्धों को प्रगाढ़ बनाने की दृष्टि से 8-11 जून, 2010 में की गई श्रीलंका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इस यात्रा के दौरान भारत द्वारा जहाँ तमिल विस्थापितों के लिए 50,000 मकान बनाने का वचन दिया गया वहीं दोनों देशों में सांस्कृतिक क्षेत्र में व्यापक सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया। भारत इस समय श्रीलंका के कनकनसेनथुराई बन्दरगाह पर पुनर्निर्माण का कार्य कर रहा है। इस सम्बन्ध में वर्ष 2010 में भारत के नौसेना प्रमुख ने श्रीलंका की यात्रा की। इसके बाद दोनों देशों के प्रमुख नेता और उच्च अधिकारीगण एक-दूसरे देशों की निरन्तर यात्रा कर रहे हैं तथा आपसी बातचीत के जरिए अपनी समस्याओं का हल खोजने व आपसी सहयोग को प्रयासरत हैं। कुल मिलाकर लिट्टे की समाप्ति के बाद दोनों देशों में नए सिरे से सम्बन्धों का आरम्भ हो रहा है। भारत, तमिलों के लिए श्रीलंका में अधिक राजनीतिक स्वायत्तता देने का पक्षधर है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (शब्द सीमा : 50 शब्द) (2 अंक)

प्रश्न 1.
भारत-पाक सम्बन्धों को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख मुद्दों को स्पष्ट कीजिए। [2015, 16]
या
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए। [2014]
उत्तर :
भारत-पाक सम्बन्ध सामान्य नहीं हैं, बल्कि वे चिरकाल से तनावपूर्ण चले आ रहे हैं। भारत- पाक सम्बन्धों को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख मुद्दे निम्नवत् हैं –

1. जम्मू-कश्मीर समस्या – पाकिस्तान के द्वारा अक्टूबर, 1947 ई० में कश्मीर पर असफल आक्रमण किया गया। इसके बाद कश्मीर का भारत में विलय हो गया, लेकिन पाकिस्तान के द्वारा इस पूर्णतया वैधानिक और राजनीतिक तथ्य को कभी स्वीकार नहीं किया गया। पाकिस्तान के इसी रवैये के कारण 1965 और 1971 ई० में भारत-पाक युद्ध हुए। कश्मीर का मुद्दा आज भी भारत-पाक सम्बन्धों को प्रभावित कर रहा है।

2. पाकिस्तान का आतंकवाद के रूप में अघोषित युद्ध – पाकिस्तान समर्थक उग्रवादी दस्ते भारत में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं। आये दिन आगजनी, विस्फोट तथा हत्याएँ की जा रही हैं। सामूहिक हत्याकाण्ड, सैनिक बलों पर लुक-छिप आक्रमण तथा तोड़-फोड़, साधारण घटनाएँ हो गई हैं। ये आतंकवादी गतिविधियाँ भी दोनों देशों के सम्बन्धों को प्रभावित कर रही हैं।

प्रश्न 2.
शिमला समझौते के चार उपबन्ध बताइए।
उत्तर :
जुलाई, 1972 ई० को सम्पन्न हुए शिमला समझौते के निम्नलिखित चार मुख्य उपबन्ध थे –

  1. दोनों देशों की सरकारों ने यह निश्चय किया कि दोनों देश परस्पर उन संघर्षों को समाप्त करते हैं, जिससे दोनों देशों के सम्बन्धों में बिगाड़ उत्पन्न हुआ था।
  2. दोनों ही सरकारें अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक-दूसरे के प्रति घृणित प्रचार नहीं करेंगी।
  3. दोनों देशों के आपसी सम्बन्धों में समानता लाने के लिए दोनों देशों के मध्य डाक, तार सेवा, जल, थल, वायुमार्गों द्वारा पुनः संचार व्यवस्था स्थापित की जाएगी। दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के और निकट आयें, इसलिए नागरिकों को आने-जाने की सुविधाएँ दी जाएँगी।
  4. जहाँ तक सम्भव हो सके, व्यापारिक तथा आर्थिक मामलों में सहयोग का सिलसिला शीघ्र| से-शीघ्र प्रारम्भ हो।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
भारत और श्रीलंका में तनाव का मुख्य कारण क्या रहा?
उत्तर :
तमिल समस्या भारत और श्रीलंका के बीच तनाव का मुख्य कारण रहा है।

प्रश्न 2.
भारत और पाकिस्तान में तनावपूर्ण सम्बन्धों के दो कारण बताइए।
उत्तर :

  1. कश्मीर की समस्या तथा
  2. सिक्ख उग्रवादियों को पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षण और सहायता देना।

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प्रश्न 3.
1987 ई० तक भारत और चीन में सीमा विवाद हल करने के लिए कई बार बातचीत हुई। क्या बातचीत की कोई ठोस परिणाम निकला?
उत्तर :
सात बार बातचीत हुई, किन्तु कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

प्रश्न 4.
बाँग्लादेश का निर्माण कब हुआ?
उत्तर :
1971 ई० में बाँग्लादेश का निर्माण हुआ।

प्रश्न 5.
ताशकन्द समझौता कब हुआ था?
उत्तर :
ताशकन्द समझौता 1966 ई० में हुआ था।

प्रश्न 6.
भारत के चार पड़ोसी देशों के नाम लिखिए। [2013, 15]
उत्तर :
भारत के चार पड़ोसी देशों के नाम निम्नवत् हैं –

  1. नेपाल
  2. भूटान
  3. पाकिस्तान
  4. चीन।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत-चीन युद्ध कब हुआ था?
(क) 1956 ई० में
(ख) 1962 ई० में
(ग) 1965 ई० में
(घ) 1971 ई० में

प्रश्न 2.
प्रथम भारत-पाकिस्तान युद्ध कब हुआ था?
(क) 1962 ई० में
(ख) 1965 ई० में
(ग) 1971 ई० में
(घ) 1948-49 ई० में

प्रश्न 3.
ताशकन्द समझौता कब हुआ था ?
(क) 1950 ई० में
(ख) 1962 ई० में
(ग) 1966 ई० में
(घ) 1972 ई० में

प्रश्न 4.
शिमला समझौता कब सम्पन्न हुआ था?
(क) 1962 ई० में
(ख) 1965 ई० में
(ग) 1971 ई० में
(घ) 1972 ई० में

उत्तर :

  1. (ख) 1962 ई० में
  2. (घ) 1948-49 ई० में
  3. (ग) 1966 ई० में
  4. (घ) 1972 ई० में।

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UP Board Class 12 History Model Papers Paper 1

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject History
Model Paper Paper 1
Category UP Board Model Papers

UP Board Class 12 History Model Papers Paper 1

समय: 3 घण्टे 15 मिनट
पूणक: 100
निर्देश
प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
नोट

  • सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  • इस प्रश्न-पत्र में पाँच खण्ड हैं।
  • खण्ड ‘क’ में 10 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, खण्ड ‘ख’ में 05 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 50 शब्द) हैं।
  • खण्ड ‘ग’ में 06 लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 100 शब्द) हैं।
  • खण्ड ‘घ’ में 03 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (लगभग 500 शब्द) हैं।
  • खण्ड ‘ङ’ में ऐतिहासिक तिथियों व मानचित्र से सम्बन्धित 05 प्रश्न हैं। शब्द सीमा में (कम या ज्यादा) 10% की छूट अनुमन्य है।
  • सभी प्रश्नों के निर्धारित अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।

खण्ड-‘क’

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
तुजुक-ए-बाबरी’ को रचयिता था? [1]
(a) बाबर
(b) फैजी
(c) हुमायूँ
(d) फरिश्ता

प्रश्न 2.
औरंगजेब ने शाहजहाँ को कहाँ कैद कर रखा था?  [1]
(a) आगरा में
(b) दिल्ली में
(c) शाहजहानाबाद में
(d) फिरोजाबाद

प्रश्न 3.
मुगल साम्राज्य का अन्तिम सम्राट कौन था?  [1]
(a) बहादुरशाह प्रथम
(b) बहादुरशाह द्वितीय
(c) शाहआलम
(d) मुहम्मदशाह

प्रश्न 4.
शिवाजी की राजधानी थी?  [1]
(a) पुरन्दर
(b) रायगढ़
(c) सिंहगढ़
(d) पुणे

प्रश्न 5.
1833 ई. का चार्टर किस गर्वनर जनरल के समय पास हुआ? [1]
(a) लॉर्ड क्लाइव
(b) लॉर्ड वेलेजली
(c) लॉर्ड-कॉर्नवालिस
(d) लॉर्ड विलियम बैंण्टिक

प्रश्न 6.
ब्रह्म समाज के संस्थापक कौन थे  [1]
(a) राजाराम मोहन राय
(b) स्वामी विवेकानन्द
(c) स्वामी दयानन्द सरस्वती
(d) रामकृष्ण परमहंस

प्रश्न 7.
बंगाल विभाजन के समय भारत का वायसराय था   [1]
(a) लॉर्ड कर्जन
(b) लॉर्ड मिन्टो
(c) लॉर्ड रिपन,
(d) लॉर्ड डफरिन

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से गरम दल के नेता थे  [1]
(a) दादा भाई नौरोजी
(b) फिरोज शाह मेहता।
(c) बाल गंगाधर तिलक
(d) ए.ओ. ह्युम

प्रश्न 9.
निम्न में से कौन-सा आन्दोलन गाँधी जी से सम्बन्धित नहीं था? [1]
(a) असहयोग आन्दोलन
(b) होमरूल आन्दोलन
(c) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
(d) भारत छोड़ो आन्दोलन

प्रश्न 10.
गाँधी जी ने डाण्डी मार्च प्रारम्भ किया था   [1]
(a) अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए कहने हेतु
(b) नमक कानून तोड़ने हेतु
(c) विदेशी सामानों के बहिष्कार हेतु
(d) हिन्दू मुस्लिम एकता हेतु

खण्ड-‘ख’

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 
प्रश्न 11.
राणा सांगा की पराजय के क्या परिणाम हुए? [2]

प्रश्न 12.
शेरशाह को ‘शेर खाँ’ की उपाधि क्यों दी गई?  [2]

प्रश्न 13.
पुरन्दर की सन्धि किस-किस के मध्य हुई? [2]

प्रश्न 14.
फ्रांसीसियों के विरुद्ध अंग्रेजों की सफलता के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए? [2]

प्रश्न 15.
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट क्या था? [2]

खण्ड-‘ग’

लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16.
“हुमायूँ स्वयं अपना शत्रु था” स्पष्ट कीजिए?   [5]

प्रश्न 17.
‘अष्ट्र प्रधान के विषय में आप क्या जानते हैं?  [5]

प्रश्न 18.
1857 ई. की क्रान्ति का तात्कालिक कारण क्या था? [5]

प्रश्न 19.
खिलाफत आन्दोलन के उद्देश्यों की विवेचना कीजिए? [5]

प्रश्न 20.
1947 के अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए? [5]

प्रश्न 21.
गुटनिरपेक्षता का क्या महत्त्व है? [5]

खण्ड-‘घ’

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 22.
“अकबर मुगल साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक था, इस कथन की विवेचना कीजिए। [10]
अथवा
“शाहजहाँ का काल मुगल साम्राज्य का स्वर्ण युग था’ क्या आप सहमत हैं? विवेचना कीजिए। [10]

प्रश्न 23.
(i) बक्सर के युद्ध के कारण तथा परिणामों पर प्रकाश डालिए [10]
अथवा
(ii) बंगाल के द्वैध-शासन के पक्ष-विपक्ष पर प्रकाश डालिए? [10]

प्रश्न 24.
‘भारत सरकार अधिनियम 1935’ की प्रमुख धाराओं का वर्णन कीजिए?  [10]
अथवा
1919′ के अधिनियम की प्रमुख धाराओं का उल्लेख कीजिए। [10]

खण्ड-‘ङ’

प्रश्न 25.
निम्नलिखित ऐतिहासिक तिथियों से सम्बन्धित घटनाओं का उल्लेख कीजिए। [10]
1. 1658 ई.
2. 1659 ई.
3. 1742 ई.
4. 1798 ई.
5. 1856 ई.
6. 1875 ई.
7. 1885 ई.
8. 1798 ई.
9. 1932 ई.
10. 1956 ई.

प्रश्न 26.
मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न
दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र में निम्नलिखित स्थानों का अंकन
(अ) चिह्न द्वारा दर्शाइए तथा उनके नाम भी लिखिए। सही नाम तथा सही स्थान दर्शाने के लिए 1+ 1 अंक निर्धारित है। |
(i) वह स्थान जहाँ से 1857 ई. की क्रान्ति की शुरुआत हुई। । [2]
(ii) वह स्थान जहाँ कांग्रेस का पहला अधिवेशन हुआ। । [2]
(iii) वह स्थान जहाँ जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड हुआ। । [2]
(iv) ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956′ द्वारा 1 मई 1960 में किए गए परिवर्तन द्वारा गठित नया राज्य। [2]
(v) ‘2000 ई. में संसद द्वारा पारित विधेयक द्वारा गठित कोई एक राज्य। [2]

Answers

उत्तर 1.
(a) बाबर

उत्तर 2.
(b) दिल्ली में

उत्तर 3.
(c) शाहआलम

उत्तर 4.
(b) रायगढ़

उत्तर 5.
(d) लॉर्ड विलियम बैंण्टिक

उत्तर 6.
(a) राजाराम मोहन राय

उत्तर 7.
(a) लॉर्ड कर्जन

उत्तर 8.
(c) बाल गंगाधर तिलक

उत्तर 9.
(b) होमरूल आन्दोलन

उत्तर 10.
(b) नमक कानून तोड़ने हेतु

उत्तर 11.
राणा सांगा मेवाड़ के राजपूत शासक थे। 17 मार्च 1527 ई. को हुए खानवा के युद्ध में वे मुगल शासक बाबर से पराजित हो गए। इस | पराजय के निम्नलिखित परिणाम हुए।

  •  भारत पर मुगल साम्राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  •  राजपूत सत्ता की पकड़ कमजोर हुई।

उत्तर 12.
शेरशाह को ‘शेर खाँ’ की उपाधि दक्षिण बिहार के सूबेदार बहार खाँ लोहानी के द्वारा एक शेर को मारने के उपलक्ष्य में प्रदान की गई थी। शेरशाह की बहादुरी से प्रभावित होकर लोहानी ने शेरशाह को अपने पुत्र जलाल खाँ का संरक्षक भी नियुक्त किया था।

उत्तर 13.
पुरन्दर की सन्धि शिवाजी और मुगल शासक औरंगजेब के मध्य 24 जून, 1665 को हुई। इस सन्धि के अनुसार, शिवाजी को अपने 33 में से 23 किले मुगलों को देने पड़े। उनके पुत्र शम्भाजी को मुगल दरबार में 5000 का मनसब दिया गया तथा शिवाजी ने मुगलों की तरफ से बीजापुर के विरुद्ध युद्ध एवं सेवा करने का वचन दिया। इस सन्धि के समय मनूची भी उपस्थित था।

उत्तर 14.
फ्रांसीसियों एवं अग्रेजों के मध्य तीन कर्नाटक युद्ध हुए। जिनमें फ्रांसीसियों की पराजय हुई। इन युद्धों में अंग्रेजों की सफलता के दो कारण निम्नलिखित थे।

(i) फ्रांसीसी सेनापति डुप्ले, बुसी, लाली की तुलना में अंग्रेज सेनापति क्लाइव, लॉरेन्स तथा आयरकूट की कुशलता।
(ii) इंग्लैण्ड की नौ-सेना की सर्वोच्चता।

उत्तर 15.
लॉर्ड लिटन के समय वर्ष 1878 में लागू वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट भारतीय भाषाओं में छपने वाले समाचार-पत्रों की स्वतन्त्रता को प्रतिबन्धित करने वाला एक कानून था। यह राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार को रोकने के लिए लाया गया था। लॉर्ड रिपन ने 1882 ई. में इस एक्ट को रद्द कर दिया।

उत्तर 20.
1947 को अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियम है, जिसके आधार पर भारत एवं पाकिस्तान में विभाजन किया गया। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउण्ट बेटन की योजना पर आधारित यह विधेयक 4 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में पेश किया गया और 18 जुलाई 1947 को शाही संस्तुति मिलने के बाद अधिनियम बना। इस अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं।

(i) भारतीय रियासतों को यह अधिकार दिया गया की वे अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में रह सकती हैं।
(ii) जब तक नया संविधान नहीं बन जाता, तब तक दोनों राज्यों का शासन भारत सरकार अधिनियम 1935 के द्वारा ही चलाया जाएगा।
(iii) भारत का विभाजन उसके स्थान पर भारत तथा पाकिस्तान नामक दो अधिराज्यों में होगा।
(iv) दोनों अधिराज्यों के पास अधिकार सुरक्षित होगा की वे इच्छानुसार राष्ट्रमण्डल में बने रहें या अलग हो जाएँ।
(v) ब्रिटेन में भारत ने मन्त्री के पद को समाप्त कर दिया गया।
(vi) 15 अगस्त, 1947 से भारत और पाकिस्तान में अलग-अलग गवर्नर जनरल कार्य करेंगे।
(vii) जब तक नए प्रान्तों में चुनाव नहीं हो जाते, उस समय तक प्रान्तों में पुराने विधानमण्डल कार्य कर सकेंगे।

उत्तर 23.
(ii) भारत में 17वीं शताब्दी तक ईस्ट-इण्डिया कम्पनी अपनी व्यापारिक स्थिति मजबूत कर चुकी थी। इसके बाद कम्पनी ने भारत के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करना प्रारम्भ कर दिया। कम्पनी के राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण ही बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला तथा कम्पनी के मध्य सम्बन्ध कटु हो गए। जिसके कारण 1757 ई. में इनके मध्य प्लासी का युद्ध हुआ और सिराजुद्दौला की हार हुई। इस जीत के बाद कम्पनी ने अपनी इच्छानुसार बंगाल में नवाब बदलने प्रारम्भ कर दिए।

सिराजुद्दौला के पश्चात् मीर जाफर बंगाल का शासक बना था, जो अंग्रेजों और इस कम्पनी के फायदे के लिए कार्य करता रहता था। तीन वर्ष पश्चात् कम्पनी ने मीर जाफर को पदच्युत करके मीर कासिम को नवाब बनाया जो मीर जाफर का दामाद था।

मीर कासिम एक योग्य व्यक्ति था, इसने बंगाल का नवाब बनते ही अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रशासनिक कदम उठाए। जिसके कारण मीर कासिम और कम्पनी के सम्बन्ध बिगड़ गए, जिसके कारण 1764 ई. में बक्सर का युद्ध हुआ, जिसमें ब्रिटिशों ने मुगल सम्राट शाह आलम बंगाल के नवाब मीर कासिम एवं अवध के नवाब सिजाउद्दौला को पराजित किया। इसके बाद भारत में ब्रिटेन की ताकत और बढ़ गई एवं इस जानकारी के बाद ब्रिटेन ने दुबारा लार्ड क्लाइव को बंगाल का गवर्नर बनाकर भारत भेजा।

लॉर्ड क्लाइव ने यहाँ प्रशासनिक सुधारों के अतिरिक्त 12 अगस्त 1765 ई. में मुगल सम्राटशाह आलम ने इलाहाबाद की सन्धि की इस सन्धि के द्वारा बंगाल में दोहरी सरकार अथवा द्वैध-शासन की स्थापना हुई। इससे कम्पनी को दीवानी और निजामत के अधिकार मिल गए थे, परन्तु कर्मचारी को मालगुजारी वसूल करने तथा | शासन चलाने का अनुभव नहीं था, इसलिए उन्होंने अधिकारों का विभाजन कर दिया। क्लाइव द्वारा स्थापित दोहरी शासन प्रणाली जटिल थी इस व्यवस्था में बंगाल का समस्त कार्य नवाब के नाम से चलता था, परन्तु उसके पास शक्ति नाममात्र की थी। नवाब कम्पनी के पेंशनर थे, परन्तु कम्पनी उन्हें खर्च के लिए निश्चित राशि देती थी। कम्पनी शासन कार्य में नवाब का निर्देशन करती थी, परन्तु रक्षा के लिए जिम्मेदार नहीं थी। कम्पनी एक तरफ बंगाल के नवाब के अधीन होने का दिखावा करती थी तो दूसरी तरफ वास्तविक शक्ति ही कम्पनी के हाथों में थी।

क्लाइव की इस प्रणाली को द्वैध-शासन प्रणाली कहा जाता है। इसके पक्ष एवं विपक्ष में प्रमुख बातें निम्न प्रकार हैं।

पक्ष

(i) कम्पनी के कार्यों के लिए ऐसे कर्मचारियों की कमी थी, जो भारतीय भाषाओं तथा रीति-रिवाजों से परिचित हो, ऐसी स्थिति में कम्पनी ने शासन का उत्तरदायित्व भारतीयों पर डाल दिया, जिससे कम्पनी का शासन सुव्यवस्थित ढंग से चलने लगा एवं भारतीय खुश हो गए।
(ii) उस समय भारत के साथ युरोपीय, पुर्तगाली एवं फ्रांसीसी भी व्यापार करते थे, जो ईस्ट-इण्डिया कम्पनी के विरोधी थे, परन्तु क्लाइव ने द्वैध-शासन की सहायता से बंगाल के नवाब को समक्ष रखकर इन सभी से व्यापार किया और अपनी स्थिति भी मजबूत
की जिसके कारण संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो सकी। |
(iii) द्घ-शासन के कारण ही कम्पनी मराठों की शक्ति से बच गई एवं इसे मराठों का सामना नहीं करना पड़ा। |
(iv) द्वैध-शासन के पूर्व कम्पनी तथा बंगाल नवाब के बीच परस्पर झगड़े होते रहते थे। जिससे जनता भी नाराज थी इस शासन व्यवस्था के बाद यह राजनीतिक संघर्ष बन्द हो गए। इसके बदले बंगाल नवाब को 53 लाख रुपए पेन्श्न के रूप में नवाब को दिए जाते थे, जो शासन चलाने के लिए काफी न थे।
(v) द्वैध-शासन के कारण भारतीय देशी राजाओं में किसी सन्देह की स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकी जिससे कम्पनी एवं जनता को संघर्ष की अग्नि में नहीं जलना पड़ा।

विपक्ष

(i) कम्पनी के पास वास्तविक शक्ति एवं नवाब के पास नाममात्र की शक्ति के कारण कम्पनी नवाबों को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करती थी, जिससे बंगाल की जनता के कल्याण सम्बन्धी कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई।
(ii) द्वैध-शासन के कारण कम्पनी शासन प्रबन्ध की जिम्मेदार नहीं थी।
(iii) कम्पनी ने अपनी आय में वृद्धि के लिए करों की मात्रा में वृद्धि की जिससे कम्पनी के प्रति अराजकता एवं बंगाल में अव्यवस्था एवं अष्टाचार में वृद्धि हुई।
(iv) द्वैध-शासन के कारण कम्पनी ने सैन्य प्रशासन अपने हाथों में ले । लिया जिससे ब्राह्य युद्ध और शान्ति के लिए नवाब कम्पनी की प्रतिक्षा करता था।
(v) बंगाल में वैष-शासन के कारण न्याय व्यवस्था भंग हो गई, क्योंकि कम्पनी न्याय व्यवस्था में भी हस्तक्षेप करने लगी।
(vi) द्वेष-शासन के उद्योग एवं व्यापार को बहुत हानि हुई तथा बंगाल का सूती-वस्त्र उद्योग बर्बाद हो गया।
(vii) भूमि कर वसूली का कार्य ठेकेदार को सौंप दिया गया, जिससे बचत करने के लिए ठेकेदार कार्य करते थे, इसके कारण ही कृषि व्यवस्था भी बन्द हो गई।

उत्तर 25.
महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक तिथियाँ एवं उनका घटनाक्रम

1. 1658  ई. औरंगजेब एवं मुराद द्वारा सामूगद के युद्ध में दारा की सेना पर निर्णायक विजया औरंगजेब को सिंहासनारोहण/शाहजहाँ का बन्दी बनाया जाना।
2. 1659  ई. शिवाजी द्वारा अफजल खाँ का बधा। औरंगजेब का द्वितीय (औपचारिक) राज्याभिषेक|
3. 1742  ई. व्यापारिक हित हेतु फ्रांसीसियों का भारत के | राजनीतिक क्षेत्र में हस्तक्षेप|
4. 1798  ई. हैदराबाद के निजाम द्वारा सहायक सन्धि को स्वीकार करना।
5. 1856  ई. विधवा पुनर्निवाह अधिनियम पारित किया गया।
6. 1875  ई. बम्बई में स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना, अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो ऑरिएण्टल कॉलेज की सर सैयद अहमद खाँ द्वारा स्थापना, न्यूयॉर्क में थियोसॉफिकल सोसायटी की स्थापना।
7. 1885  ई. अवकाश प्राप्त अंग्रेज अधिकारी एलन अक्टोवियन ह्यूम (ए. ओ. ह्यूम) द्वारा मुम्बई (बम्बई) में कांग्रेस की स्थापना
8. 1929  ई. दिसम्बर 1929 में कांग्रेस के लाहौर | अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की माँग की गई।
9. 1932  ई. साम्प्रदायिक निर्णय के विरुद्ध गाँधीजी का | अनशन। गाँधीजी तथा बी. आर. अम्बेडकर के बीच पूना समझौता
10. 1956  ई. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 पारित किया गया।

उत्तर 26.
(i) मेरठ
(ii) बम्बई (मुम्बई)
(iii) अमृतसर
(iv) गुजरात
(v) झारखण्ड
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