UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 13 Magnetic Effects of Electric Current

UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 13 Magnetic Effects of Electric Current (विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव)

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पाठगत हल प्रश्न

[NCERT IN-TEXT QUESTIONS SOLVED]

खंड 13.1 ( पृष्ठ संख्या 250)

प्रश्न 1.
चुंबक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित क्यों हो जाती है?
उत्तर
हम जानते हैं कि दिक्सूचक की सूई एक छोटे छड़ चुंबक की तरह है, जिसमें उत्तर तथा दक्षिण ध्रुव होते हैं। इसलिए दिक्सूचक की सूई चुंबक के निकट लाने पर आकर्षण या प्रतिकर्षण के कारण विक्षेपित हो जाती है, क्योंकि समान ध्रुवों के बीच (UPBoardSolutions.com) प्रतिकर्षण और विपरीत ध्रुवों के बीच आकर्षण बल लगता है।

खंड 13.2 ( पृष्ठ संख्या 255 )।

प्रश्न 1.
किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ खींचिए।
उत्तर
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प्रश्न 2.
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए।
उत्तर
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के निम्नलिखित गुण हैं

  1. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के उत्तरी (N) ध्रुव से प्रारंभ होकर दक्षिणी (S) ध्रुव पर समाप्त होती है तथा एक बंद वक्र का निर्माण करती हैं। परंतु चुंबक के अंदर क्षेत्र रेखाओं की दिशा दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती है।
  2. किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र रेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती है।
  3. जहाँ पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ अधिक निकट होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होते हैं। इसलिए ध्रुवों पर क्षेत्र रेखाएँ निकट होती हैं।
  4. कोई दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसी भी बिंदु (UPBoardSolutions.com) पर एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।

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प्रश्न 3.
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं?
उत्तर
यदि दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करेंगी तब उस बिंदु पर दिक्सूची को रखने पर उसकी सूई दो दिशाओं की ओर संकेत करेगी। चूंकि किसी एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ असंभव होती हैं। अत: क्षेत्र रेखाएँ प्रतिच्छेद नहीं कर सकतीं।

खंड 13.3 ( पृष्ठ संख्या 256-257)

प्रश्न 1.
मेज़ के तल में पड़े तार के वृत्ताकार पाश पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाश में दक्षिणावर्त विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाश के भीतर तथा बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात कीजिए।
उत्तर
दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम के अनुसार यदि आप चालक तार को पकड़े हुए हैं तब अँगूठा विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करता है, जबकि अँगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशी को निरूपित करता है।
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स्पष्टत: वृत्ताकार पाश (लूप) के अंदर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा कागज़ के तल (मेज़ के तल) के लंबवत् अंदर की ओर होगी तथा पाश के बाहर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा पाश (मेज़) के तल के लबंवत् ऊपर की ओर होगी।

प्रश्न 2.
किसी दिए गए क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र एक समान हैं। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए।
उत्तर
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एक समान चुंबकीय क्षेत्र परस्पर समान्त और बराबर दूरी वाले चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किए जाते हैं जैसा कि निम्न चित्र में दर्शाया गया है।

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प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनिए
किसी विद्युत धारावाही सीधी लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र-
(a) शून्य होता है।
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।
(c) इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है।
(d) सभी बिंदुओं पर समान होता है।
उत्तर
(d) सभी बिंदुओं पर समान होता है।

खंड 13.4 (पृष्ठ संख्या 259)

प्रश्न 1.
किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण किसी चुंबकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है? (यहाँ एक से अधिक सही उत्तर हो सकते हैं।)
(a) द्रव्यमान
(b) चाल
(c) वेग
(d) संवेग
उत्तर
(c) वेग तथा (d) संवेग में परिवर्तन होगा क्योंकि प्रोटॉन धनावेशित होते हैं, जिन पर चुंबकीय क्षेत्र के कारण बल लगेगा और इसकी दिशा बदल जाएगी। चूँकि गति की दिशा परिवर्तित होने पर वेग बदलता है तथा वेग बदलने पर संवेग, (UPBoardSolutions.com) परंतु इसके द्रव्यमान और चाल अपरिवर्तित रहेंगे।

प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 13.7 में हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा यदि
(i) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए।
(ii) अधिक प्रबल नाल चुंबक प्रयोग किया जाए और
(iii) छड़ AB की लंबाई में वृद्धि कर दी जाए?
उत्तर
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हम जानते हैं कि
अतः प्रत्येक स्थिति में छड़ AB का विस्थापन बढ़ेगा।

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प्रश्न 3.
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेशित कण (अल्फा-कण) किसी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
(a) दक्षिण की ओर
(b) पूर्व की ओर
(c) अधोमुखी
(d) उपरिमुखी
उत्तर
(d) उपरिमुखी।

खंड 13.5 ( पृष्ठ संख्या 261)

प्रश्न 1.
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम लिखिए।
उत्तर
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम-इस नियम के अनुसार अपने बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अँगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत् हों। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा प्रदर्शित करें तो अँगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर आरोपित बल की दिशा की ओर संकेत करेगा।
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प्रश्न 2.
विद्युत मोटर का क्या सिद्धांत है?
उत्तर
एक विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि जब एक धारावाही चालक को किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस चालक पर एक यांत्रिक बल लगता है। चालक पर आरोपित बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम द्वारा प्राप्त किया जाता है।

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प्रश्न 3.
विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है?
उत्तर
विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक्परिवर्तक का कार्य करता है। यह एक ऐसी युक्ति है जो धारा के प्रवाह की दिशा उत्क्रमित कर देती है। यद्यपि बैट्री से आने वाली विद्युत धारा की दिशा अपरिवर्तित रहती है लेकिन विभक्त वलय के कारण प्रत्येक आधे घूर्णन (UPBoardSolutions.com) के बाद विद्युत धारा के उत्क्रमित होने का क्रम दोहराता रहता है, जिसके कारण कुंडली तथा धुरी का निरंतर घूर्णन होता रहता है। परंतु यदि विद्युत मोटर में विभक्त वलय न लगे हों तो मोटर आधा चक्कर घूमकर रुक जाएगी।

खंड 13.6 (पृष्ठ संख्या 264)

प्रश्न 1.
किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग निम्नलिखित हैं-

  1. किसी स्थिर कुंडली के पास या उससे दूर चुंबक ले जाकर।
  2. किसी स्थिर चुंबक के पास कुंडली लाकर या उससे दूर ले जाकर।
  3. एक कुंडली के समीप रखी किसी दूसरी कुंडली में विद्युत धारा में परिवर्तन करके पहली कुंडली में धारा प्रेरित की जा सकती है।
  4. कुंडली के फेरों की संख्या में वृद्धि करके।

खंड 13.7 ( पृष्ठ संख्या 265-266 )

प्रश्न 1.
विद्युत जनित्र का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर
विद्युत जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में रखे किसी चालक को घूर्णी गति प्रदान करने में किया जाता है, जिसके फलस्वरूप विद्युत धारा उत्पन्न होती है। यह मूलत: विद्युत चुंबकीय प्रेरणा के सिद्धांत पर कार्य करता है। प्रेरित (UPBoardSolutions.com) धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ-हाथ नियम द्वारा ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 2.
दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर
दिष्ट धारा के कुछ स्रोत निम्नलिखित हैं-शुष्क सेल, सेलों की बैट्री तथा दिष्ट धारा जनित्र (De generator or DC dynamo)।

प्रश्न 3.
प्रत्यावर्ती विद्युत धारा उत्पन्न करने वाले स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर
प्रत्यावर्ती विद्युत धारा उत्पन्न करने वाले स्रोत हैं-प्रत्यावर्ती विद्युत धारा जनित्र (ac जनित्र) तथा बैट्री आधारित उत्क्रमक (इनवर्टर)।

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प्रश्न 4.
सही विकल्प का चयन कीजिए-
ताँबे के तार की एक आयताकार कुंडली किसी चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात् परिवर्तन होता है?
(a) दो।
(b) एक
(c) आधे
(d) चौथाई
उत्तर
(c) आधे

खंड 13.8 ( पृष्ठ संख्या 267)

प्रश्न 1.
विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतः उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
उत्तर
विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यत: उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपाय हैं-

  1. विद्युत फ्यूज़
  2. भू-सम्पर्क तार (earthing wire) का उपयोग

प्रश्न 2.
2kW शक्ति अनुमतांक की विद्युत तंदूर किसी घरेलू विद्युत परिपथ (220V) में प्रचालित किया जाता है, जिसका विद्युत अनुमतांक 5A है। इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
दिया है-
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परिपथ का अनुमतांक 5A है, परंतु विद्युत तंदूर द्वारा 9.09A की धारा ली जा रही है। अतः अनुमतांक से बहुत ज्यादा विद्युत धारा लिए जाने के कारण तार गर्म हो जाएगा तथा अतिभारण (overloading) के कारण फ्यूज का तार पिघल जाएगा, (UPBoardSolutions.com) जिससे परिपथ टूट जाएगा और आग भी लग सकती है।

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प्रश्न 3.
घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर
घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए हमें निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए-

  1. एक ही सॉकेट से बहुत से विद्युत साधित्रों को नहीं जोड़ना चाहिए।
  2. घरो में दो पृथक-पृथक परिपथों में विद्युत आपूर्ति की जानी चाहिए। इसके लिए 15A विद्युत धारा अनुमतांक वाले तथा 5A विद्युत धारा अनुमतांक वाले दो पृथक-पृथक परिपथों में क्रमशः उच्च शक्ति वाले साधित्रों जैसे गीजर, कूलर आदि तथा (UPBoardSolutions.com) निम्न शक्ति वाले साधित्रों; जैसे-पंखे, बल्ब आदि चलाने चाहिए।
  3. उचित धारा अनुमतांक वाले पृथक-पृथक फ्यूज़ लगवाने चाहिए।
  4. उत्तम गुणवत्ता वाले तार, विद्युतरोधी टेप का उपयोग करना चाहिए।

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन किसी लंबे विद्युत धारावाही तार के निकट चुंबकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है?
(a) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लंबवत होती हैं।
(b) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समांतर होती हैं।
(c) चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है।
(d) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तारे होता है।
उत्तर
(a) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है।

प्रश्न 2.
वैद्युत चुंबकीय प्रेरणा की परिघटना
(a) किसी वस्तु को आवेशित करने की प्रक्रिया है।
(b) किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की प्रक्रिया है।
(c) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है।
(d) किसी विद्युत मोटर की कुंडली को घूर्णन कराने की प्रक्रिया है।।
उत्तर
(a) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक (UPBoardSolutions.com) गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है।

प्रश्न 3.
विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं-
(a) जनित्र
(b) गैल्वनोमीटर
(c) ऐमीटर
(d) मोटर
उत्तर
(d) जनित्र

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प्रश्न 4.
किसी ac जनित्र तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अंतर यह है कि
(a) ac जनित्र में विद्युत चुंबक होता है जबकि dc मोटर में स्थायी चुंबक होता है।
(b) dc जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(c) ac जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(d) ac जनित्र में सर्दी वलय होते हैं जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।
उत्तर
(d) ac जनित्र में सर्दी वलय होते हैं जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।

प्रश्न 5.
लघुपथन के समय परिपथ में विद्युत धारा का मान-
(a) बहुत कम हो जाता है।
(b) परिवर्तित नहीं होता।
(c) बहुत अधिक बढ़ जाती है।
(d) निरंतर परिवर्तित होता है।
उत्तर
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रकथनों में कौन सत्य है तथा कौन असत्य? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए
(a) विद्युत मोटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करता है।
(b) विद्युत जनित्र वैद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
(c) किसी लंबी वृत्ताकर विद्युत धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र समांतर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होती हैं।
(d) हरे विद्युतरोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है।
उत्तर
(a) असत्य
(b) सत्य
(c) सत्य
(d) असत्य

प्रश्न 7.
चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के दो तरीकों की सूची बनाइए।
उत्तर
चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के दो तरीके निम्न हैं

  1. किसी चुंबक द्वारा; जैसे-छड़ चुंबक, नाल चुंबक आदि।
  2. किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक तार द्वारा; (UPBoardSolutions.com) विद्युत धारावाही पाश (लूप) द्वारा इत्यादि।

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प्रश्न 8.
परिनालिका चुंबक की भाँति कैसे व्यवहार करती है? क्या आप किसी छड़ चुंबक की सहायता से किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं?
उत्तर
पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार की बेलन की आकृति की अनेक फेरों वाली कुंडली को परिनालिका कहते हैं। जब इस परिनालिका से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसमें छड़ चुंबक की तरह ही चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न बनता है, जिसका एक सिरा N ध्रुव तथा दूसरा सिरा S ध्रुव की भाँति व्यवहार करता है। परिनालिका के अंदर क्षेत्र रेखाएँ समांतर सरल रेखाओं की भाँति होती हैं, जो यह दर्शाता है कि (UPBoardSolutions.com) परिनालिका के भीतर एक समान चुंबकीय क्षेत्र है। हाँ, हम किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण छड़ चुंबक की सहायता से कर सकते हैं। इसके लिए किसी ज्ञात N ध्रुव वाले छड़ चुंबक को परिनालिका के एक सिरे के समीप लाते हैं। यदि प्रतिकर्षण हुआ तो सिरा N-ध्रुव तथा आकर्षण होने पर S-ध्रुव होगा। इसी प्रकार, परिनालिका के दूसरे सिरे के ध्रुव भी ज्ञात किए जा सकते हैं, क्योंकि समान ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण तथा असमान ध्रुवों के बीच आकर्षण होता है।

प्रश्न 9.
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?
उत्तर
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम द्वारा किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल अधिकतम होता है, जब चालक को चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत् रखा जाए। अर्थात् विद्युत धारा की दिशा तथा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा परस्पर लंबवत् हो।

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प्रश्न 10.
मान लीजिए आप किसी चैम्बर में अपनी पीठ को किसी एक दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार से सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आपके दाई ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर
स्पष्टत: फ्लेमिंग के वामहस्त नियम द्वारा, चुंबकीय क्षेत्र की दिशा उर्ध्वाधरत: नीचे (Vertically downward) होगी।
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प्रश्न 11.
विद्युत मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्व है?
उत्तर
विद्युत मोटर का आरेख आकृति में दर्शाया गया है:
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सिद्धांत-किसी धारावाही चालक को किसी चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत् दिशा में रखने पर वह चालक यांत्रिक बल का अनुभव करता है। इस बल के कारण चालक बल की दिशा में घूर्णन करता है। विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से ज्ञात करते हैं।
कार्य विधि-चित्र में दर्शाए अनुसार विद्युत धारा चालक ब्रुश X से होते हुए कुंडली ABCD में प्रवेश करती है तथा चालक ब्रुश Y से होते हुए बैट्री के दूसरे टर्मिनल पर वापस आ जाती है।
स्पष्टतः भुजा AB में विद्युत धारा A से B की ओर तथा भुजा CD में C से D की ओर प्रवाहित होती है। अतः धारा की दिशाएँ इन भुजाओं में परस्पर विपरीत होती हैं, इसलिए फ्लेमिंग के वामहस्त नियम द्वारा AB आरोपित बल उसे अधोमुखी धकेलता है जबकि भुजा CD पर आरोपित बल उपरिमुखी धकेलता है। अतः इस बल युग्म के कारण कुंडली तथा धुरी अक्ष पर वामावर्त घूर्णन करते हैं।
विभक्त वलय का कार्य-विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक्परिवर्तक का कार्य करता है। चित्रानुसार विभक्त वलय P तथा Q का संपर्क क्रमशः ब्रुश X तथा Y से है, परंतु आधे घूर्णन के बाद Q का संपर्क ब्रुश X से होता है तथा P का संपर्क Y से होता है, (UPBoardSolutions.com) जिसके फलस्वरूप कुंडली में धारा उत्क्रमित होकर पथ DCBA के अनुदिश प्रवाहित होती है। फ्लेमिंग के नियम से अब भुजा AB पर उपरिमुखी तथा भुजा CD पर अधोमुखी बल लगता है, जिसके कारण कुंडली तथा धुरी उसी दिशा में अब आधा घूर्णन और पूरा कर लेती हैं। अतः प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद धारा के उत्क्रमित होने का क्रम दोहराता रहता है, जिसके कारण कुंडली तथा धुरी निरंतर घूर्णन करते रहते हैं।

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प्रश्न 12.
ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत मोटर उपयोग किए जाते हैं।
उत्तर
विद्युत मोटर एक ऐसी युक्ति है, जिसमें विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है। इसके कुछ उदाहरण निम्न हैं-विद्युत पंखे, ए०सी०, वाशिंग मशीन, मिक्सर ग्राईन्डर, कूलर, कंप्यूटर, जल पंप, गेहूँ पीसने वाली चक्की इत्यादि।

प्रश्न 13.
कोई विद्युत रोधी ताँबे के तार की कुंडली किसी गैल्वनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबकः
(i) कुंडली में धकेला जाता है।
(ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है।
(iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है।
उत्तर

  1. कुंडली में एक प्रेरित धारा उत्पन्न होता है, जिसके कारण गैल्वनोमीटर में विक्षेप होता है।
  2. प्रेरित धारा उत्पन्न होगी और गैल्वनोमीटर में विक्षेप प्रदर्शित होगा, परंतु विक्षेप की दिशा पहले के विपरीत होगी।
  3. चूंकि चुंबक स्थिर है इसलिए कोई प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी। अतः गैल्वनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होती है।

प्रश्न 14.
दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत धारा में कोई परिवर्तन करें तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत धारा प्रेरित होगा? कारण लिखिए।
उत्तर
हाँ, कुंडली B में विद्युत धारी प्रेरित होगी।
जब कुंडली A में प्रवाहित विद्युत धारा में परिवर्तन होता है, तो इसके चुंबकीय क्षेत्र में भी परिवर्तन होता है। चूंकि कुंडली B कुंडली A के निकट है इसलिए कुंडली B के चारों ओर भी. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं में परिवर्तन होता है, जिसके कारण कुंडली B में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।

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प्रश्न 15.
निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाली नियम लिखिए-
(i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र।
(ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत् स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल।
(iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा।
उत्तर

  1. किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निर्धारित करने के लिए दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम” का प्रयोग किया जाता है, जो इस प्रकार है किसी विद्युत धारावाही चालक को अपने दाहिने हाथ (UPBoardSolutions.com) से पकड़ने पर अँगूठा विद्युत धारा की दिशा को संकेत करता है तथा अँगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाओं की दिशा में लिपटी होंगी। इसे मैक्सवेल का कार्कस्कू नियम भी कहते हैं।
  2. किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत् स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल की दिशा ‘‘फ्लेमिंग
    के वामहस्त नियम” द्वारा ज्ञात करते हैं, जो इस प्रकार है
    संकेत-‘महत्त्वपूर्ण तथ्य’ के अंतर्गत पृष्ठ संख्या-208 देखें।
  3. चुंबकीय क्षेत्र में गतिशील चालक में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त के नियम का प्रयोग किया जाता है।
    संकेत-‘महत्त्वपूर्ण तथ्य’ (Point 14) देखें।’

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प्रश्न 16.
नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत जनित्र का मूल सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इनमें ब्रुश का क्या कार्य है?
उत्तर
विद्युत जनित्र का नामांकित आरेख-
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मूल सिद्धांत-विद्युत जनित्र मूलत: विद्युत-चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करती है। विद्युत जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में रखे किसी चालक को घूर्णी गति प्रदान करने में किया। जाता है जिसके कारण प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है, जिसकी दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त वलय नियम द्वारा ज्ञात की जाती है।

कार्य विधि-मान लीजिए कि प्रारंभिक अवस्था में एक कुंडली ABCD चुंबक के ध्रुवों के बीच उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र में दक्षिणावर्त घुमाया जाता है। भुजा AB ऊपर की ओर तथा भुजा CD नीचे। की ओर गति करती है। फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम लागू (UPBoardSolutions.com) करने पर कुंडली में AB तथा CD दिशाओं के अनुदिश प्रेरित विद्युत धाराएँ प्रवाहित होने लगती हैं। बाह्य परिपथ में B2 से B1 की दिशा में विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
अब आधे घूर्णन के बाद CD ऊपर की ओर तथा AB नीचे की ओर जाने लगती है। स्पष्टतः कुंडली के अंदर प्रेरित विद्युत धारा की दिशा बदलकर DCBA के अनुदिश हो जाती है और बाह्य परिपथ में B, से B, की दिशा में प्रवाहित होती है। इस तरह हम देखते हैं कि प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद विद्युत धारा की दिशा बदल जाती है।

ब्रुश के कार्य-ब्रुश B1 और B2 वलयों R1 तथा R2 पर दबाकर रखा जाता है, जो कुंडली में प्रेरित धारा को बाह्य परिपथ में पहुँचाने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 17.
किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता है?
उत्तर
जब विद्युन्मय तार (धनात्मक तार) तथा उदासीन तार (ऋणात्मक तार) सीधे संपर्क में आ जाते हैं, तब विद्युत परिपथ | में अकस्मात् बहुत अधिक विद्युत धारा हो जाती है और लघुपथन हो जाता है। ऐसा तब होता है जब तारों के विद्युतरोधी आवरण क्षतिग्रस्त हो जाए या साधित्र में कोई दोष हो।

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प्रश्न 18.
भूसंपर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कत करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर
भूसंपर्क तार किसी विद्युत परिपथ में सुरक्षा उपाय के रूप में प्रयुक्त होते हैं। खासकर उन साधित्रों में जिनका आवरण धात्विक होता है; जैसे-विद्युत इस्तरी, टोस्टर, मेज़ का पंखा, रेफ्रिजरेटर, कूलर, गीजर आदि। धातु के आवरणों से संयोजित भूसंपर्क तार विद्युत धारा के लिए अल्प प्रतिरोध का चालन पथ प्रस्तुत करता है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि साधित्र के धात्विक आवरण में विद्युत धारा का कोई क्षरण होने पर (UPBoardSolutions.com) उस साधित्र का विभेव भूमि के विभव के बराबर हो जाएगा। फलस्वरूप इस साधित्र को उपयोग करने वाला व्यक्ति तीव्र विद्युत आघात से सुरक्षित बचा रहता है।

Hope given UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 13 are helpful to complete your homework.

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पाठगत हल प्रश्न

[NCERT IN-TEXT QUESTIONS SOLVED]

खंड 5.1 ( पृष्ठ संख्या 91)

प्रश्न 1.
क्या डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ में भी पाए जाते हैं? तुलना करके पता कीजिए।
उत्तर
हाँ, डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ (UPBoardSolutions.com) में भी पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए-Li, Na, K डॉबेराइनर के त्रिक हैं। परंतु ये न्यूलैंड्स के अष्टक के दूसरे स्तंभ में भी मौजूद हैं।

प्रश्न 2.
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की सीमाएँ निम्नलिखित हैं

  1. उस समय ज्ञात सभी तत्वों का वर्गीकरण  डॉबेराइनर के त्रिक के द्वारा नहीं हो पाया।
  2. वे उस समय ज्ञात 64 तत्वों (UPBoardSolutions.com) में से केवल तीन त्रिक ही बना पाए। अतः उनका वर्गीकरण ज्यादा सफल नहीं रहा।

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प्रश्न 3.
न्यूलैंड्स के अष्टक नियम की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर
संकेत-महत्वपूर्ण तथ्य एवं परिभाषाएँ” देखिए।

खंड 5.2 ( पृष्ठ संख्या 94 )

प्रश्न 1.
मेंडेलीफ की आवर्त सारणी का उपयोग कर निम्नलिखित तत्वों के ऑक्साइड के सूत्र का अनुमान कीजिए: K, C, Al, Si, Ba
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements img-1

प्रश्न 2.
गैलियम के अतिरिक्त, अब तक कौन-कौन से तत्वों का पता चला है, जिसके लिए मेन्डलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
गैलियम के अतिरिक्त स्कैंडियम तथा (UPBoardSolutions.com) जर्मेनियम (UPBoardSolutions.com) तत्वों का पता बाद में चला जिसके लिए खाली स्थान छोड़ा गया था।

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प्रश्न 3.
मेंडेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी तैयार करने के लिए कौन सा मापदंड अपनाया?
उत्तर
मेंडेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी तैयार करने के लिए निम्नलिखित मापदंडों को अपनाया था-

  1. तत्वों को परमाणु द्रव्यमानों के आरोही क्रम (बढ़ता क्रम) में व्यवस्थित किया।
  2. रासायनिक गुणधर्मों की समानता के आधार पर व्यवस्थित किया।
  3. तत्व से बनने वाले हाईड्राइड एवं ऑक्साइड के सूत्र को तत्वों के वर्गीकरण के लिए मूलभूत गुणधर्म माना गया।

प्रश्न 4.
आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया?
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में रखा गया, क्योंकि (UPBoardSolutions.com) ये रासायनिक रूप से अक्रिय होती हैं। सभी उत्कृष्ट गैसों के बाह्यतम कोश पूर्णतः भरे होते हैं तथा इनके गुणों में समानताएँ पाई जाती हैं।

खंड 5.3 ( पृष्ठ संख्या 100)

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा किस प्रकार से मेंडेलीफ की आवर्त सारणी की विविध विसंगतियों को दूर किया गया?
उत्तर
आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा मेंडेलीफ की आवर्त सारणी की तीनों विसंगतियाँ निम्नलिखित तरीकों से दूर की गईं।

(i) हाइड्रोजन का स्थान-हाइड्रोजन को क्षारीय धातुओं से गुणों में समानता के आधार पर ग्रुप 1 में सबसे ऊपर रखा गया था, परंतु यह उचित स्थान नहीं था। यह मेंडेलीफ के आवर्त सारणी की एक कमी थी। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्षार धातु (UPBoardSolutions.com) के समान होने के कारण तथा संयोजकता इलेक्ट्रॉन 1 होने के कारण आधुनिक आवर्त सारणी
में इसे समूह (ग्रुप) 1 में रखा गया। जिससे मेंडेलीफ के आवर्त सारणी की पहली कमी दूर हो गई।

(ii) कोबाल्ट (Co) तथा निकैल (Ni) का स्थान-Co का परमाणु द्रव्यमान 58.9 तथा Ni का परमाणु द्रव्यमान 58.7 है; लेकिन Co को Ni के पहले रखा गया था। परंतु Co की परमाणु संख्या 27 तथा Ni की परमाणु संख्या 28 है। आधुनिक (UPBoardSolutions.com) आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ाते हुए परमाणु संख्या के आधार पर व्यवस्थित किया गया जिससे यह कमी भी दूर हो गई। Co समूह-9 तथा Ni समूह-10 में आ गए। इसी प्रकार Ar (परमाणु संख्या 18) तथा K (परमाणु संख्या 19) के गलत क्रम का भी समाधान हो गया।

(iii) समस्थानिकों का स्थान-मेंडेलीफ के आवर्त सारणी में समस्थानिकों का कोई स्थान नहीं था। चूँकि समस्थानिकों के परमाणु संख्या समान होते हैं। अतः इन्हें आधुनिक आवर्त सारणी में एक ही स्थान पर रखा गया। उदाहरण के लिए Cl-35 और Cl-37 के परमाणु संख्या 17 हैं।

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प्रश्न 2.
मैग्नीशियम की तरह रासायनिक अभिक्रियाशीलता दिखाने वाले दो तत्वों के नाम लिखिए। आपके चयन का क्या आधार है?
उत्तर
बेरिलियम (Be) तथा कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम के समाने रासायनिक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करेंगे। हमारे चयन का आधार निम्न है-

  1. 4Be- 2, 2 तथा 20Ca : 2, 8, 8, 2
  2. इनकी संयोजकता इलेक्ट्रॉन समान हैं। इसलिए ये एक ही वर्ग-2 के तत्व हैं, जिसमें Mg है। तथा एक समान गुणधर्म प्रदर्शित करेंगे।

प्रश्न 3.
नाम बताइए|
(a) तीन तत्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो।
(b) दो तत्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों। |
(c) तीन तत्वों जिनका बाहरी कोश पूर्ण हो।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements img-2

प्रश्न 4.
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम, ये सभी धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्वों के परमाणुओं में कोई समानता है?
(b) हीलियम एक अक्रियाशील गैस है, जबकि निऑन की अभिक्रियाशीलता अत्यंत कम है। क्या इनके परमाणुओं में कोई समानता है?
उत्तर
(a) हाँ, इन तत्वों के परमाणुओं में समानता है। Li, Na, तथा K के बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन हैं तथा इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एक जैसे हैं। Li : 2, 1, ; Na : 2, 8, 1 तथा K: 2, 8, 8, 1। अतः ये सभी तत्व आसानी से 1 इलेक्ट्रॉन का परित्याग (UPBoardSolutions.com) कर धनायने बना सकते हैं।

(b) हाँ, दोनों के बाहरी कोश पूर्णतः भरे हैं। He : 2, Ne : 2,8 हीलियम में केवल K सेल है, जिसमें अधिक से अधिक 2 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं, जबकि नियॉन के बाहरी कोश (L-कोश) में अधिक से अधिक 8 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं। अत: ये अक्रिय गैसें हैं।

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प्रश्न 5.
आधुनिक आवर्त सारणी में पहले दस तत्वों में कौन-सी धातुएँ हैं?
उत्तर
लीथियम Li, बेरिलियम (Be)।

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में इनके स्थान के आधार पर इनमें से किस तत्व में सबसे अधिक धात्विक अभिलक्षण की विशेषता है? Ga, Ge, As, Se, Be।
उत्तर
हम जानते हैं कि धात्विक अभिलक्षण आवर्त में बाईं ओर से दाईं ओर बढ़ने पर घटता है। अर्थात् अधिकतम धात्विक गुण वाले तत्व सबसे बाईं ओर होंगे। चूँकि Be आवर्त सारणी में सबसे बाईं ओर समूह-2 में रखे गए हैं इसलिए बेरिलियम (Be) (UPBoardSolutions.com) की धात्विक अभिलक्षण दिए गए तत्वों में सबसे अधिक होगी।

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में बाईं से दाईं ओर जाने पर, प्रवृत्तियों के बारे में कौन सा कथन असत्य है?
(a) तत्वों की धात्विक प्रकृति घटती है।
(b) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
(C) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।
(d) इनके ऑक्साइड अधिक अम्लीय हो जाते हैं।
उत्तर
(C) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।

प्रश्न 2.
तत्व X, XCl, सूत्र वाला एक क्लोराइड बनाता है, जो एक ठोस है तथा जिसका गलनांक अधिक है। आवर्त सारणी में यह तत्व संभवतः किस समूह के अंतर्गत होगा?
(a) Na
(b) Mg
(C) Al
(d) Si
उत्तर
(b) Mg

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प्रश्न 3.
किस तत्व में
(a) दो कोश हैं तथा दोनों इलेक्ट्रॉनों से पूरित हैं?
(b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 हैं?
(c) कुल तीन कोश हैं तथा संयोजकता कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं?
(d) कुल दो कोश हैं तथा संयोजकता कोश में तीन इलेक्ट्रॉन हैं?
(e) दूसरे कोश में पहले कोश से दोगुने इलेक्ट्रॉन हैं?
उत्तर
(a) निऑन- Ne (2, 8)
(b) मैग्नीशियम-Mg (2, 8, 2)
(c) सिलिकॉप Si (2, 8, 4)
(d) बोरॉन-B (UPBoardSolutions.com) (2, 3)
(e) कार्बनः C (2, 4)

प्रश्न 4.
(a) आवर्त सारणी में बोरान के स्तंभ के सभी तत्वों के कौन-से गुणधर्म समान हैं?
(b) आवर्त सारणी में फ्लुओरीन के स्तंभ के सभी तत्वों के कौन-से गुणधर्म समान है?
उत्तर

  1. बोरान की तरह स्तंभ 13 के सभी तत्वों में संयोजकता इलेक्ट्रॉन की संख्या 3 है तथा संयोजकता भी 3 है।
  2. F (2,7) ∴ स्तंभ संख्या = 7 + 10 = 17
    फ्लोरीन (F) की तरह इस ग्रुप (स्तंभ) (UPBoardSolutions.com) के सभी तत्वों की संयोजकता इलेक्ट्रॉन क़ी संख्या 7 है तथा संयोजकता 1 है।

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प्रश्न 5.
एक परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है।
(a) इस तत्व की परमाणु-संख्या क्या है?
(b) निम्न में किस तत्व के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी? (परमाणु-संख्या कोष्ठक में दी गई है)
N(7) F(9) P(15) Ar(18)
उत्तर
(a) इस तत्व की परमाणु संख्या 17 है।
(b) N(7) = 2, 5, F (9) = 2, 7
P(15) = 2, 8, 5 Ar(18) = 2, 8, 8
F(9) में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या 7 (UPBoardSolutions.com) है जो दिए गए तत्व के समान है। अतः इस तत्व के रासायनिक गुण F के समान होंगे।

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प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में तीन तत्व A, B तथा C की स्थिति निम्न प्रकार है-
UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements img-3
अब बताइए कि
(a) A धातु है या अधातु।
(b) A की अपेक्षा C अधिक अभिक्रियाशील है या कम?
(c) C का साइज़ B से बड़ा होगा या छोटा? ।
(d) तत्व A किस प्रकार के आयन, धनायन या ऋणायन बनाएगा?
उत्तर
(a) A अधातु है [क्योंकि समूह 17 आवर्त सारणी के दाईं ओर है]
(b) C, A से कम अभिक्रियाशील होगी, क्योंकि समूह में ऊपर से नीचे बढ़ने पर हैलोजन की अभिक्रियाशीलता घटती है।
(C) ‘C’ का साइज़ B से छोटा होगा, क्योंकि आवर्त में बाईं ओर से दाईं ओर बढ़ने पर परमाणु का साइज़ घटता है।
(d) A ऋणायन बनाएगा क्योंकि इसके बाहरी कोश (UPBoardSolutions.com) में 7 इलेक्ट्रॉन है। अतः 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋण आवेश (आयन) (A) बनाएगा।

प्रश्न 7.
नाइट्रोजन (परमाणु-संख्या 7) तथा फॉस्फोरस (परमाणु-संख्या 15) आवर्त सारणी के समूह 15. तत्व हैं। इन दोनों | तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें से कौन-सा तत्व अधिक ऋण विद्युत होगा और क्यों?
उत्तर
नाइट्रोजन (7) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-2, 5 फॉस्फोरस (15) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-2, 8, 5 चूँकि नाइट्रोजन में दो कोश तथा फॉस्फोरस में 3 कोश हैं इसलिए नाइट्रोजन का परमाणे साइज कम होने के कारण नाभिक को आवेश (UPBoardSolutions.com) इलेक्ट्रॉन को आसानी से ग्रहण कर ऋणायन बना लेता है। अतः नाइट्रोजन अधिक विद्युत ऋणात्मक होगा, क्योंकि किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मक घटती है।

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प्रश्न 8.
तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति से क्या संबंध है?
उत्तर
आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।
कोशों की संख्या = आवर्त संख्या

बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या (संयोजकता इलेक्ट्रॉन) से समूह (ग्रुप) संख्या निर्धारित होती है।
संयोजकता इलेक्ट्रॉन 1 वाले तत्वों को ग्रुप 1 में, संयोजकता इलेक्ट्रॉन 2 वाले तत्वों को ग्रुप 2 में तथा संयोजकता इलेक्ट्रॉन 3 वाले तत्वों को ग्रुप 13 में (3 या 3 से ज्यादा संयोजकता इलेक्ट्रॉन के लिए ग्रुप संख्या = संयोजकता इलेक्ट्रॉन + 10 = 3 + 10 =13)
UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements img-4

प्रश्न 9.
आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्शियम (परमाणु-संख्या 20) के चारों ओर 12, 19, 21 तथा 38 परमाणु-संख्या वाले तत्व स्थित हैं। इनमें से किन तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म कैल्शियम के समान हैं।
उत्तर
कैल्शियम (Ca) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 8, 2
दिए गए तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-
UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements img-5
चूँकि दिए गए तत्वों में से परमाणु संख्या 12 और 38 वाले तत्वों के बाहरी कोश में विद्यमान इलेक्ट्रॉनों की संख्या कैल्शियम के बाहरी कोश में स्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के समान हैं अर्थात् इन दोनों तत्वों की संयोजकता इलेक्ट्रॉन Ca के समान हैं। इसलिए ये दोनों तत्व Ca की तरह भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म प्रदर्शित करेंगे।

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प्रश्न 10.
आधुनिक आवर्त सारणी एवं मेंडेलीफ की आवर्त  सारणी में तत्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements img-6

Hope given UP Board Solutions for Class 10 Science Chapter 5 are helpful to complete your homework.

If you have any doubts, please comment below. UP Board Solutions try to provide online tutoring for you.

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 15 (Section 1)

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 15 क्रान्तिकारियों का योगदान (अनुभाग – एक)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Social Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 15 क्रान्तिकारियों का योगदान (अनुभाग – एक)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष में क्रान्तिकारियों की भूमिका की विवेचना कीजिए। [2013]
उत्तर :
स्पष्ट राजनीतिक आन्दोलन के अतिरिक्त बीसवीं शताब्दी के पहले दशक में देश के विभिन्न भागों में अनेक क्रान्तिकारी संगठन भी बने। इन संगठनों का संघर्ष सशस्त्र था। इनकी संवैधानिक आन्दोलन में कोई आस्था नहीं थी। इनका मुख्य उद्देश्य था—ब्रिटिश अधिकारियों को आतंकित करके पूरे सरकारी तन्त्र का मनोबल तोड़ना तथा स्वतन्त्रता प्राप्त करना। इन क्रान्तिकारियों की वीरता और आत्म-बलिदान ने। जनता को प्रेरणा दी और इस तरह जनता में राष्ट्रवादी भावनाओं का विकास किया। स्वतन्त्रता आन्दोलन के तीन प्रमुख क्रान्तिकारियों का संक्षिप्त जीवन परिचय नीचे दिया जा रहा है –

1. चन्द्रशेखर आजाद – देश की स्वतन्त्रता के मार्ग पर हँसते-हँसते शहीद हो जाने वाले क्रान्तिकारियों की प्रथम श्रेणी में चन्द्रशेखर आजाद का नाम आता है। इनका जन्म 23 जुलाई, 1906 ई० में मध्य प्रदेश के भाँवरा नामक ग्राम में हुआ था। चन्द्रशेखर आजाद ने काकोरी काण्ड व साण्डर्स की हत्या में भाग लेकर अपनी प्रतिभा की धाक जमा दी थी। उन्होंने क्रान्तिकारी दल का नेतृत्व बड़ी सफलता से किया। (UPBoardSolutions.com) ब्रिटिश सरकार उनसे परेशान हो गयी थी और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सक्रिय हो गयी थी। सन् 1931 ई० को वे इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपने साथियों के साथ बैठक कर रहे थे। वहाँ पर पुलिस से इनकी मुठभेड़ हुई। इन्होंने पुलिस के हाथों में आने से पहले ही स्वयं को गोली मारकर वीरगति प्राप्त की।

2. भगतसिंह – शहीद भगतसिंह भारत के सच्चे देशभक्त और महान क्रान्तिकारी थे। इनका जन्म 27 दिसम्बर, 1907 ई० को पंजाब के लायलपुर जिले में हुआ था। ब्रिटिश सरकार इनके क्रान्तिकारी कार्यों से बुरी तरह घबरा गयी थी। इन्होंने सबसे पहले चन्द्रशेखर आजाद के साथ मिलकर लाला लाजपत राय पर लाठी बरसाने वाले अंग्रेज अधिकारी साण्डर्स की हत्या की। इसके उपरान्त सुखदेव व राजगुरु के साथ मिलकर 8 अप्रैल, 1929 ई० को केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंककर सनसनी फैला दी। देश की जनता को स्वतन्त्रता के प्रति जागरूक करने के लिए इन्होंने स्वयं को गिरफ्तार करवा दिया। 23 मार्च, 1931 ई० को लाहौर जेल में इन्हें और इनके साथियों को फाँसी दे दी गयी, किन्तु अपने बलिदान से ये भारतीय इतिहास में अमर हो गये।

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3. खुदीराम बोस – खुदीराम बोस भारत के परम देशभक्त और महान क्रान्तिकारी थे। इनका जन्म 3 दिसम्बर, 1889 ई० को बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करके ये बंगाल के क्रान्तिकारी दल में सम्मिलित हो गये। इन्होंने मुजफ्फरपुर में जस्टिस किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेंका। वे उस गाड़ी में मौजूद न होने के कारण बच गये, किन्तु दो निर्दोष स्त्रियाँ मारी गयीं। ये बाद में कैद कर लिये गये तथा सन् 1908 ई० में उन्हें फाँसी दे दी गयी। खुदीराम बोस ने देश की स्वाधीनता और सम्मान के लिए अपने प्राणों की बलि दे दी।

महत्त्व – इन क्रान्तिकारियों की गतिविधियाँ समय-समय पर अंग्रेजी सरकार को हिलाती रहती थीं। जिसके परिणामस्वरूप सरकार किसी भी कार्य का उचित फैसला नहीं ले पाती थी। अगर क्रान्तिकारी आन्दोलन भारत में न हुए होते तो भारत को 15 अगस्त, 1947 ई० को (UPBoardSolutions.com) स्वतन्त्रता प्राप्त करना मुश्किल ही नहीं असम्भव भी था। इसलिए क्रान्तिकारी आन्दोलनों ने स्वतन्त्रता-प्राप्ति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी।

प्रश्न 2.
पंजाब तथा बंगाल की प्रमुख क्रान्तिकारी गतिविधियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
क्रान्तिकारी आन्दोलन उन्नीसवीं सदी के अन्त तथा बीसवीं सदी के शुरू में भारत में चला। यह आन्दोलन तिलक-पक्षीय राजनीतिक उग्रवाद से बिल्कुल भिन्न था। क्रान्तिकारी लोग अपीलों, प्रेरणाओं और शान्तिपूर्ण संघर्षों में विश्वास नहीं रखते थे। उनका यह निश्चित मत था कि पशु बल से स्थापित किये गये साम्राज्यवाद को हिंसा के बिना उखाड़ फेंकना सम्भव नहीं। ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रियावादी और दमन नीति ने उन्हें निराश कर दिया थी। वे प्रशासन और उसके हिन्दुस्तानी सहायकों की हिम्मत पस्त करने के लिए हिंसात्मक कार्य में विश्वास रखते थे। वे अपने आन्दोलन को चलाने के लिए सशस्त्र आक्रमण करना तथा राजकोषों पर डकैती डालने के कार्य को बुरा नहीं समझते थे। इस आन्दोलन में विदेशों में स्थित राष्ट्रवादी भारतीयों ने भी खुलकर भाग लिया।

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क्रान्तिकारी आन्दोलन के केन्द्र एवं गतिविधियाँ

क्रान्तिकारी राष्ट्रवादियों का सर्वप्रथम केन्द्र महाराष्ट्र था। सन् 1899 ई० में जनता की घृणा के पात्र रैण्ड और रिहर्स्ट की हत्या कर दी गयी जिसमें श्यामजी कृष्ण वर्मा का हाथ था। वह भागकर लन्दन पहुँच गये। जहाँ उन्होंने सन् 1905 ई० में इण्डियन होमरूल सोसायटी की स्थापना की। उनकी सहायता से विनायक दामोदर सावरकर भी लन्दन पहुँचकर ‘इण्डिया हाउस’ में क्रान्तिकारी दल के नेता हो गये। वी० डी० सावरकर ने ‘अभिनव भारत’ सोसायटी के सदस्यों के लिए पिस्तौलें भेजने की व्यवस्था की। विनायक सावरकर के भाई गणेश सावरकर पर अभियोग चलाया गया तथा सन् 1909 ई० में उन्हें गोली से उड़ा दिया गया।

बंगाल में क्रान्तिकारियों का नेतृत्व अरविन्द घोष के भाई वी०के० घोष ने किया। उन्होंने ‘युगान्तर’ अखबार के माध्यम से जनता को राजनीतिक और धार्मिक शिक्षा देना आरम्भ किया। वी०एन० दत्त और वी०के० घोष के नेतृत्व में अनेक क्रान्तिकारी समितियाँ बनायी गयीं जिनमें ‘अनुशीलन समिति’ प्रमुख थी। इस समिति की शाखाएँ कलकत्ता (कोलकाता) तथा ढाका में थीं। इस समिति ने आतंकवादी कार्यक्रम शुरू किया। सन् 1907 ई० में लेफ्टिनेण्ट गवर्नर की गाड़ी को बम से उड़ाने का विफल प्रयास किया गया। प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस इस समिति के महत्त्वपूर्ण सदस्य थे। चाकी ने स्वयं को गोली से उड़ा लिया, खुदीराम बोस को फाँसी दे दी गयी।

कलकत्ता (कोलकाता) षड्यन्त्र में अरविन्द घोष, वी०के० घोष, हेमचन्द्र दास, नरेन्द्र गोसाईं, के०एल० दत्त, एस०एन० बोस आदि को गिरफ्तार करके मुकदमे चलाये गये। के०एल० दत्त तथा एस०एन० बोस को फाँसी पर लटका दिया गया। क्रान्तिकारियों ने चुन-चुनकर पुलिस अफसरों, मजिस्ट्रेटों, सरकारी वकीलों, विरोधी गवाहों, गद्दारों, देशद्रोहियों आदि को गोली से उड़ा दिया।

मदनलाल ढींगरा ने इंग्लैण्ड में, भारत में आक्रमणकारियों को दी गयी अमानुषिक (UPBoardSolutions.com) सजाओं के विरोध में सरं विलियम कर्जन वायली को गोली से उड़ा दिया। इस कारण उन्हें फाँसी दे दी गयी।

पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी) भी क्रान्तिकारी गतिविधियों का केन्द्र था। एम०पी० तिरुमल आचार्य और वी०वी०एस० अय्यर यहाँ के मुख्य कार्यकर्ता थे। उनके एक शिष्य वाँची अय्यर को जिला मजिस्ट्रेट को गोली से उड़ाने के अपराध में फाँसी पर चढ़ा दिया गया।

क्रान्तिकारी गतिविधियों का एक केन्द्र अमेरिका के पैसिफिक तट पर था।’इण्डो-अमेरिकन एसोसिएशन तथा ‘यंग इण्डिया एसोसिएशन के मुख्य कार्यालय कैलिफोर्निया में थे तथा अन्य स्थानों पर इनकी शाखाएँ थीं। इनके कार्यकर्ता मुख्यत: बंगाली छात्र थे जिन्हें आयरिश-अमेरिकन छात्रों का सहयोग प्राप्त था। बंगाल और पंजाब में सन् 1913-16 ई० के दौरान क्रान्तिकारी आन्दोलन उग्र रूप में था। पंजाब के कुछ क्रान्तिकारियों ने भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग की जान लेने की कोशिश की। दिल्ली षड्यन्त्र केस में अमीरचन्द, अवध बिहारी, बालमुकुन्द, बसन्त कुमार और विश्वास को मौत की सजा हुई। कनाडा के सिक्ख लोगों के लौटने से पंजाब में क्रान्तिकारी आन्दोलन को बल मिला।

हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक पार्टी ने सरकार के दमन और आतंक का मुकाबला करते हुए क्रान्तिकारी आन्दोलन को बल दिया। सरदार भगतसिंह, यतीन्द्रनाथ दास और चन्द्रशेखर आजाद जैसे क्रान्तिकारियों ने देश के लिए अपना जीवन दे दिया।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित घटनाओं के कारण तथा परिणामों का संक्षेप में वर्णन कीजिए – [2016]
(क) काकोरी काण्ड, (ख) सेन्ट्रल असेम्बली (केन्द्रीय विधानसभा बम प्रहार), (ग) लाहौर काण्ड।
या
काकोरी हत्याकाण्ड कब और कहाँ घटित हुआ था? [2018]
उत्तर :

(क) काकोरी काण्ड

अगस्त, 1925 ई० में हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों ने (UPBoardSolutions.com) लखनऊ के निकट काकोरी नामक स्थान लखनऊ जाने वाली गाड़ी के एक डिब्बे में रखे सरकारी खजाने को लूट लिया। इस घटना में 29
क्रान्तिकारियों को गिरफ्तार कर उन पर काकोरी षड्यन्त्र काण्ड में दो वर्ष तक मुकदमा चलाया गया।

क्रान्तिकारियों में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, रोशन लाल तथा राजेन्द्र लाहिडी को फाँसी दे दी गयी।

काकोरी काण्ड में “हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के अधिकांश नेता गिरफ्तार कर लिए गए। जिसके परिणामस्वरूप इस संगठन का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया। कुछ समय पश्चात् इस काण्ड के एकमात्र बचे क्रान्तिकारी सदस्य चन्द्रशेखर आजाद ने सन् 1928 में दिल्ली के ‘फीरोजशाह कोटला मैदान में एक बैठक आयोजित की और उन्होंने यहीं पर ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की। ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ का पहला क्रान्तिकारी कार्य लाहौर के सहायक पुलिस अधीक्षक ‘साण्डर्स’ की हत्या थी। यह हत्या 30 अक्टूबर, 1928 को साइमन कमीशन के विरोध के कारण एवं लाला लाजपत राय की पुलिस द्वारा की गयी पिटाई का प्रतिशोध थी। साण्डर्स की हत्या में भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद और राजगुरु शामिल थे।

साण्डर्स की हत्या के बाद क्रान्तिकारी तो भूमिगत हो गए परन्तु ब्रिटिश पुलिस निर्दोष अथवा सामान्य जनता को परेशान करने लगी। पुलिस का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए भगतसिंह एवं बटुकेश्वर दत्त ने (1929 ई० में) विधानसभा (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंका, जिसमें इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया तथा मुकदमा चलाया गया।

भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त की गिरफ्तारी के साथ ही अन्य अनेक क्रान्तिकारी गिरफ्तार किये गये और उन पर लाहौर षड्यन्त्र काण्ड में संयुक्त रूप से मुकदमा चला गया। जेल में बन्द इन कैदियों ने राजनीतिक बन्दियों का दर्जा प्राप्त करने के लिए भूख हड़ताल (UPBoardSolutions.com) प्रारम्भ कर दी। इनमें ‘जतिन दास’ भी शामिल थे। हड़ताल के 64वें दिन जतिन दास का देहान्त हो गया। लाहौर काण्ड में अधिकांश क्रान्तिकारियों को दोषी पाया गया और उनमें से तीन भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को 23 मार्च, 1931 को लाहौर में फॉसी दे दी गयी।

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(ख) असेम्बली में बम विस्फोट

ब्रिटिश सरकार द्वारा सेण्ट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम’ (पब्लिक सेफ्टी बिल) तथा व्यापार विवाद अधिनियम’ (ट्रेड डिस्प्यूट बिल) पेश किये गये थे। इन अधिनियमों के तहत अंग्रेज सरकार तथा पुलिस को भारतीय क्रान्तिकारियों तथा स्वतन्त्रता सेनानियों के विरुद्ध अधिक अधिकार दिये गये थे। असेम्बली में इन अधिनियमों को मात्र एक वोट से हरा दिया गया। इन अधिनियमों की स्वीकृति हेतु चर्चा के दौरान हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के कार्यकर्ताओं ने सेण्ट्रल (UPBoardSolutions.com) लेजिस्लेटिव असेम्बली में बम विस्फोट करने की योजना बनायी। क्रान्तिकारी आन्दोलन के नेता चन्द्रशेखर आजाद, बम-विस्फोट के पक्ष में नहीं थे। किसी प्रकार से एसोसिएशन के अन्य नेताओं ने भगतसिंह की इस योजना में सम्मिलित होने के लिए चन्द्रशेखर आजाद को सहमत कर लिया। आजाद ने बम विस्फोट का कार्य बटुकेश्वर दत्त तथा भगतसिंह के सुपुर्द कर दिया।

8 अप्रैल, 1929 को बटुकेश्वर दत्त और भगतसिंह असेम्बली की दर्शक-दीर्घा में पहुँच गए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने ‘इंकलाब जिन्दाबाद’ का नारा लगाया और बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली के रिक्त स्थान (जहाँ पर कोई व्यक्ति उपस्थित नहीं था) पर कुछ बम फेंके। भगतसिंह ने कुछ छपे हुए पर्चे (पैम्फ्लेट्स) असेम्बली में उपस्थित सदस्यों के ऊपर फेंके जिन पर लिखा था “बहरों को कोई बात सुनाने के लिए अधिक कोलाहल की आवश्यकता पड़ती है।” बम फेंकने का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था। तत्पश्चात् बटुकेश्वर दत्त तथा भगतसिंह को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया गया, जहाँ दोनों ने अपने किये गये (UPBoardSolutions.com) जुर्म को स्वीकार कर लिया। ब्रिटिश फोरेंसिक विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की कि बम इतने शक्तिशाली नहीं थे, जिनसे किसी को घायल भी किया जा सकता हो। यह घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जिसके लिए उन्हें फाँसी दी जा सके। इसलिए 12 जून, 1929 ई० को दिल्ली के सेशन जजों ने विस्फोटकजन्य पदार्थ ऐक्ट की धारा चार तथा इण्डियन पीनल कोड की धारा 307 के तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी।

बटुकेश्वर दत्त को अण्डमान में स्थित सेल्युलर जेल, जो कि काला पानी’ नाम से कुख्यांत थी, भेज दिया गया। उन्हें लाहौर षड्यन्त्र केस में भी अदालत में पेश किया गया जिसमें उनको निर्दोष सिद्ध कर दिया गया। उन्होंने मई, 1933 तथा जुलाई, 1937 में सेल्युलर जेल में दो बार ऐतिहासिक भूख हड़ताल की। सन् 1937 में ही बटुकेश्वर दत्त को हिन्दुस्तान भेज दिया गया, जहाँ पर पटना की बाँकीपुर जेल से उन्हें सन् 1938 ई० में रिहा कर दिया गया।

(ग) लाहौर काण्ड

भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त की गिरफ्तारी के कारण अनेक एच० एस० आर० ए० क्रान्तिकारी भी गिरफ्तार किये गये और उन पर लाहौर षड्यन्त्र काण्ड में संयुक्त रूप से मुकदमा चलाया गया। जेल में रहते हुए जिन कैदियों पर मुकदमा चलाया जा रहा था, उन्होंने साधारण अपराधियों के बजाय राजनीतिक बन्दियों का दर्जा प्राप्त करने के लिए भूख हड़ताल की थी। इन भूख-हड़तालियों में जतिन दास भी थे, जिनका 13 सितम्बर, 1929 ई० को अनशन के 64वें दिन देहान्त हो गया। लाहौर षड्यन्त्र काण्ड में अधिकांश क्रान्तिकारियों को दोषी पाया गया और उनमें से तीन भगतसिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को 23 मार्च, 1931 ई० क फाँसी दे दी गई।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की शाखाएँ किन-किन जगहों पर स्थापित की गयी ?
उत्तर :
अक्टूबर, 1924 ई० में सभी क्रान्तिकारी दलों ने लखनऊ में एक सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में शचीन्द्रनाथ सान्याल, जगदीशचन्द्र चटर्जी, रामप्रसाद बिस्मिल, योगेश चटर्जी आदि सम्मिलित हुए। नये नेताओं में भगतसिंह, शिव वर्मा, सुखदेव, भगवतीचरण बोहरा, चन्द्रशेखर आजाद आदि शामिल थे। नये क्रान्तिकारी राष्ट्रभक्तों ने कुछ नवीन संगठनों की स्थापना की। ये संगठन संयुक्त प्रान्त (उत्तर प्रदेश), दिल्ली, पंजाब तथा बंगाल आदि केन्द्रों में बनाये गये।

हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना सन् 1924 ई० में कानपुर में की गयी। इसके मुख्य कार्यकर्ता शचीन्द्रनाथ सान्याल, रामप्रसाद बिस्मिल, योगेश चटर्जी, अशफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह आदि थे। बंगाल, बिहार, उ०प्र०, दिल्ली, पंजाब, मद्रास (चेन्नई) आदि (UPBoardSolutions.com) प्रान्तों में इसकी शाखाएँ स्थापित की गयीं। इस संगठन के प्रमुख विचार निम्नलिखित थे –

  1. भारतीय जनता में गांधी जी की अहिंसावाद की नीतियों की निरर्थकता के प्रति जागृति उत्पन्न करना।
  2. पूर्ण स्वतन्त्रता-प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष कार्यवाही तथा क्रान्ति की आवश्यकता का प्रदर्शन करना।
  3. अंग्रेजी साम्राज्यवाद के स्थान पर समाजवादी विचारधारा से प्रेरित भारत में संघीय गणतन्त्र की स्थापना करना।
  4. इन्होंने अपने कार्यों के लिए धन एकत्रित करने हेतु सरकारी कोषों को अपना निशाना बनाने का निश्चय किया।

प्रश्न 2.
देश को स्वतन्त्रता दिलाने में मौलाना आजाद का क्या योगदान रहा ? [2011, 16]
उतर :
मौलाना अबुल कलाम आजाद का देश को स्वतन्त्रता दिलाने में महत्त्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने ‘मुस्लिम लीग’ की नीतियों का विरोध करते हुए भारतीय मुसलमानों को राष्ट्रीय धारा में जोड़ने का अथक् प्रयास किया। उन्होंने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति का प्रबल विरोध किया। भारतीय मुसलमानों को जागृत करने के लिए आजाद ने ‘अल हिलाल’ नामक पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ किया। यह पत्र मुसलमानों में अत्यधिक लोकप्रिय था। 1916 ई० में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के आपसी समझौते में उनका सराहनीय सहयोग था। उन्होंने असहयोग आन्दोलन में भाग लिया, जिसके फलस्वरूप उन्हें 1 वर्ष की सजा हुई। 1923 ई० के कांग्रेस अधिवेशन में उन्हें अध्यक्ष चुन लिया गया। 1930 ई० में जब गांधी जी ने ‘सविनय अवज्ञा-आन्दोलन’ चलाया तो आजाद ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। 1940 (UPBoardSolutions.com) ई० से 1946 ई० तक वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभापति रहे। 1947 ई० की अन्तरिम सरकार में वे शिक्षामंत्री रहे। स्वतंत्र भारत में 1958 ई० तक वे लगातार शिक्षामंत्री के पद पर बने रहे। उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तक ‘इण्डिया विन्स. फ्रीडम’ थी।

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प्रश्न 3.
भारत के स्वाधीनता आन्दोलन में सुभाषचन्द्र बोस के योगदान की विवेचना कीजिए। [2015, 18]
उतर :

सुभाषचन्द्र बोस

सुभाषचन्द्र बोस ने राष्ट्रीय आन्दोलन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आर०सी० मजूमदार के शब्दों में–“गाँधी जी के बाद भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष में सबसे प्रमुख व्यक्ति नि:सन्देह सुभाषचन्द्र बोस ही थे।” सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 ई० को उड़ीसा के कटक नगर में हुआ था। सुभाषचन्द्र बोस एक महान् देशभक्त थे। वे राजनीतिक यथार्थवाद से अनुप्राणित थे। उन्होंने लाहौर अधिवेशन में 1929 ई० मे पं० जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत ‘पूर्ण स्वराज्य’ के प्रस्ताव का समर्थन किया। यहीं पर इनके विचारों में अचानक क्रान्तिकारी विचारधारा उत्पन्न हुई। वे 1929 ई० के लाहौर कांग्रेस के अधिवेशन से जब बाहर निकले तो उन्होंने कांग्रेस प्रजातन्त्र पार्टी का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने फारवर्ड ब्लॉक नामक एक अन्य दल की स्थापना की। इन्होंने गाँधी जी के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया, किन्तु सुभाष और गांधी दोनों के विचार एक-दूसरे से सर्वथा विपरीत थे। गांधी जी शान्तिपूर्ण तरीकों से स्वराज्य-प्राप्ति में विश्वास करते थे, जबकि बोस क्रान्तिकारी नीतियों में विश्वास करते थे, किन्तु साध्य दोनों का स्वराज्य-प्राप्ति ही था। सुभाषचन्द्र बोस का विचार था कि गांधी जी की नीति से स्वराज्य कभी नहीं पाएगी, क्योंकि अंग्रेज इतने सीधे व सरल नहीं थे कि वे भारत को सहज ही स्वतन्त्रता प्रदान कर देते। अत: वे क्रान्तिकारी साधनों में विश्वास करते थे। जब द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था तो उन्होंने कहा था, “यह स्वतन्त्रता-प्राप्ति (UPBoardSolutions.com) का अच्छा अवसर है। हमको संगठित होकर ब्रिटिश सरकार से सत्ता छीनने का प्रयत्न करना चाहिए। किन्तु इस समय कांग्रेस ने उनका साथ नहीं दिया। वे 1941 ई० में वेश बदलकर भारत से बाहर चले गए और गुप्त रहकर भारत को स्वतन्त्र कराने का प्रयत्न करते रहे। इन्होंने एक सेना संगठित कर उसका नाम ‘आजाद हिन्द फौज’ रखा। इनका उद्देश्य भारत को परतन्त्रता की बेड़ियों से मुक्त कराना था। बोस इस सेना के प्रधान सेनापति थे। उनका उद्घोष था-‘दिल्ली चलो।’ सुभाष बाबू ने सैनिकों को सम्बोधित करते हुए कथा था-“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।” इस सेना ने अंग्रेजों की सेना में अनेक बार सफल मोर्चा लिया। उन्होंने एक अस्थायी सरकार का गठन भी किया। सुभाष का व्यक्तित्व इतना विशाल था कि उस काल की विश्व-शक्तियों ने उन्हें भारत की अस्थायी सरकार का प्रथम राष्ट्रपति घोषित किया था। जिसे जापान एवं जर्मनी ने भी मान्यता दे दी थी, किन्तु 1945 ई० में एक वायुयान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ की स्थापना कब की गयी थी ?
उत्तर :
‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना सन् 1924 ई० में कानपुर में की गयी थी ?

प्रश्न 2.
काकोरी काण्ड के अन्तर्गत कितने क्रान्तिकारियों को फाँसी की सजा दी गयी ?
उत्तर :
काकोरी काण्ड में रामप्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्र लाहिडी, अशफाक (UPBoardSolutions.com) उल्ला खाँ तथा रोशन लाल को फाँसी की सजा दी गयी।

प्रश्न 3.
लाला लाजपत राय के ऊपर लाठी चार्ज किस प्रदर्शन के दौरान किया गया ?
उत्तर :
लाहौर में साइमन कमीशन का विरोध-प्रदर्शन करते समय लाला लाजपत राय के ऊपर लाठी चार्ज किया गया।

प्रश्न 4.
सी०आर० दास की मृत्यु के बाद बंगाल में कांग्रेसी नेतृत्व कितने गुटों में विभक्त हो गया था ?
उत्तर :
सी०आर० दास की मृत्यु के बाद बंगाल में कांग्रेसी नेतृत्व दो गुटों में विभक्त हो गया था।

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प्रश्न 5.
साण्डर्स की हत्या में कौन-कौन से क्रान्तिकारी शामिल थे?
उत्तर :
साण्डर्स की हत्या में भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद और राजगुरु शामिल थे।

प्रश्न 6.
बंगाल में क्रान्तिकारी गतिविधियों का नेतृत्व किस-किसने किया?
उत्तर :
बंगाल में क्रान्तिकारी गतिविधियों का नेतृत्व सुभाषचन्द्र बोस (UPBoardSolutions.com) और जे०एम० सेन गुप्त ने किया।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. काकोरी काण्ड किस जगह घटित हुआ ?

(क) वाराणसी में
(ख) गोरखपुर में
(ग) लखनऊ में
(घ) पंजाब में

2. चन्द्रशेखर आजाद ने ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन” की स्थापना कहाँ पर की थी ?

(क) पंजाब में
(ख) इलाहाबाद में
(ग) दिल्ली में
(घ) लखनऊ में

3. भगतसिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को फाँसी कहाँ दी गयी ?

(क) पेशावर में
(ख) लाहौर में
(ग) दिल्ली में
(घ) मुम्बई में

4. भगतसिंह को फाँसी दी गयी [2011]

(क) 23 मार्च, 1925 ई० को
(ख) 23 मार्च, 1927 ई० को
(ग) 23 मार्च, 1931 ई० को
(घ) 23 मार्च, 1935 ई० को

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5. वह स्थान जहाँ चन्द्रशेखर आजाद शहीद हुए [2012]

(क) कानपुर
(ख) इलाहाबाद
(ग) लखनऊ
(घ) झाँसी

6. ‘इण्डिया विन्स फ्रीडम’ पुस्तक का लेखक कौन है?

(क) महात्मा गांधी
(ख) सुभाषचन्द्र बोस
(ग) मौलाना अबुल कलाम आजाद
(घ) जवाहरलाल नेहरू

7. लाला हरदयाल थे एक [2015, 16]

(क) वैज्ञानिक
(ख) समाज सुधारक
(ग) शिक्षाविद्
(घ) क्रान्तिकारी

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8. हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का संस्थापक निम्नलिखित में से कौन था? (2017)

(क) अशफाक उल्ला खाँ
(ख) शचीन्द्रनाथ सान्याल
(ग) चन्द्रशेखर आजाद
(घ) योगेश चटर्जी।

9. भगत सिंह को कब फाँसी दी गयी? (2018)

(क) 23 मार्च, 1927
(ख) 23 मार्च, 1931
(ग) 23 मार्च, 1935
(घ) 23 मार्च, 1937

उत्तरमाला

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 15 क्रान्तिकारियों का योगदान 1

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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 1 (Section 1)

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 1 पुनर्जागरण (अनुभाग – एक)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Social Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 1 पुनर्जागरण (अनुभाग – एक).

विरतृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पुनर्जागरण से आप क्या समझते हैं ? यूरोप में पुनर्जागरण के क्या कारण थे ? [2012, 16]
       या
पुनर्जागरण का क्या अर्थ है ? पुनर्जागरण के कारण बताइट।
उत्तर :
पुनर्जागरण – यूरोप के निवासियों ने मध्यकाल की निर्जीव और मृतप्राय रोमन एवं यूनानी सभ्यता को पुनर्जीवित करने के जो प्रयास किये, उन्हें पुनर्जागरण (Renaissance) कहते हैं। ‘पुनर्जागरण’ शब्द का प्रयोग उन सभी बौद्धिक परिवर्तनों के लिए किया जाता है जो मध्य युग के अन्त में तथा आधुनिक युग के प्रारम्भ में हुए। इससे अज्ञानता और अन्धविश्वास की जंजीरों में जकड़े हुए मनुष्य को छुटकारा मिला और उसके जीवन (UPBoardSolutions.com) में नये ज्ञान एवं नयी चेतना का उदय हुआ। इसीलिए ‘पुनर्जागरण’ को मध्यकालीन पुराने विचारों के विरुद्ध एक सांस्कृतिक एवं अहिंसक क्रान्ति की संज्ञा दी गयी। पुनर्जागरण के फलस्वरूप यूरोप में राज्य, राजनीति, धर्म, न्याय, साहित्य, दर्शन आदि के क्षेत्र में बहुत अधिक परिवर्तन तथा सुधार हुए।

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यूरोप में पुनर्जागरण के कारण

यूरोप में पुनर्जागरण के लिए मुख्यतया निम्नलिखित कारण उत्तरदायी थे –

1. धर्म-युद्ध – नवीन ज्ञान का मार्ग दिखाने में मध्यकाल में लड़े गये धर्म-युद्धों ने विशेष भूमिका निभायी। ये धर्म-युद्ध तुर्को से येरुसलम को स्वतन्त्र कराने के लिए ईसाइयों ने लड़े। इन धर्म-युद्धों के कारण यूरोपवासी अन्य देशों की सभ्यता एवं संस्कृति के सम्पर्क में आये और उनमें नवीन विचारों का उदय हुआ।

2. इस्लाम धर्म का प्रचार – धर्म-युद्धों के कारण यूरोप के लोग मध्य-पूर्व की इस्लाम सभ्यता के सम्पर्क में आये। इससे यूरोपवासियों को अपने राजनीतिक एवं धार्मिक ढाँचे की कमियों की जानकारी हुई। उन्होंने अपने जर्जर धार्मिक, राजनीतिक तथा सामाजिक जीवन में समयानुकूल परिवर्तन करने आवश्यक समझे तथा अपनी प्राचीन सभ्यता-संस्कृति को पुनः स्थापित करने के लिए नये सिरे से प्रयास करने प्रारम्भ कर दिये।

3. कुस्तुनतुनिया पर तुर्को का अधिकार – सन् 1453 ई० में तुर्को ने कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लिया। इससे यूरोप में पुनर्जागरण को बड़ा बल मिला। तुर्को के अत्याचार से डरकर बहुत सारे यूनानी- ईसाइयों ने यूरोप के भिन्न-भिन्न भागों (UPBoardSolutions.com) में शरण ली। इन लोगों ने यूरोप में जगह-जगह यूनानी सभ्यता का प्रचार किया, जिसका लोगों पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। इस प्रभाव ने यूरोप में जागृति की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी।

4. नवीन धार्मिक मान्यताओं का विकास – यूरोप के लोगों में यह विश्वास उत्पन्न होने लगा कि स्वर्ग तथा नरक केवल रूढ़िवादी धर्म की कल्पनाएँ हैं। जीवन का सच्चा सुख तो केवल परिश्रम तथा । स्वावलम्बन से प्राप्त होता है। स्वर्ग कहीं नहीं, इसी धरती पर विद्यमान है। इन मानवतावादी विचारों के प्रादुर्भाव से यूरोप के निवासियों को अन्धविश्वासों से मुक्ति मिली और वे नये तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने लगे।

5. भौगोलिक खोजें – पुर्तगाल, स्पेन, फ्रांस, इटली, इंग्लैण्ड, हॉलैण्ड आदि देशों के नाविकों ने नये-नये सामुद्रिक मार्गों तथा नये-नये देशों की खोज की। यूरोप के लोगों ने इन देशों में अपने उपनिवेश स्थापित किये, जिससे यूरोप में साम्राज्यवाद के युग का आरम्भ हुआ। इन भौगोलिक खोजों से यूरोपवासी अनेक उन्नत व प्राचीन सभ्यताओं के सम्पर्क में आये, जिससे यूरोप में नवीन विचारों का उदय हुआ।

6. छापेखाने का आविष्कार – छापेखाने के आविष्कार से पुस्तकों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई, जिससे सामान्य जनता के लिए शिक्षा के द्वार खुल गये। शिक्षा के प्रसार से लोगों का ज्ञान बढ़ा तथा उनकी तर्क-शक्ति का विकास हुआ। फलस्वरूप यूरोप में नवीन विचारों का उदय हुआ।

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7. आविष्कारों का प्रभाव – यूरोप में विभिन्न वैज्ञानिकों ने नये-नये आविष्कार किये। न्यूटन तथा गैलीलियो जैसे वैज्ञानिकों के आविष्कारों के फलस्वरूप विज्ञान के क्षेत्र में क्रान्ति आ गयी। विभिन्न आविष्कारों के कारण प्राचीन-निरर्थक मान्यताओं का लोप होने लगा और लोगों में नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण जाग्रत हो गया।

8. भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में परिवर्तन – उन दिनों लैटिन सारे यूरोप की भाषा बनी हुई थी। इंग्लैण्ड के प्रसिद्ध साहित्यकार चासर ने ‘द कैण्टरबरी टेल्स’ पुस्तक की रचना करके आधुनिक अंग्रेजी साहित्य का मार्ग प्रशस्त किया। इटली के महान् कवि दान्ते ने इटली की भाषा में प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘डिवाइन कॉमेडी’ की रचना की। इटली निवासी मैकियावली ने राज्य की नयी कल्पना प्रस्तुत की तथा जर्मन निवासी मार्टिन लूथर ने चर्च (UPBoardSolutions.com) के विरुद्ध ग्रन्थ लिखे। इन विभिन्न कवियों तथा लेखकों की कृतियों ने यूरोप में पुनर्जागरण को अत्यधिक प्रोत्साहित किया।

9. नये नगरों की स्थापना – यूरोप के विभिन्न देशों में नये नगरों की स्थापना की गयी। आर्थिक और व्यापारिक दृष्टि से ये नगर सम्पन्न थे, जिस कारण इनमें विज्ञान, शिक्षा तथा कला का विकास हुआ। फलस्वरूप इन नगरों के निवासियों में नये ज्ञान तथा नवीन चेतना का उदय हुआ।

10. कलाओं का प्रभाव – चित्रकला, मूर्तिकला, संगीतकला तथा भवन निर्माण में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए। इस युग के प्रमुख कलाकारों में राफेल, माइकल एंजेलो तथा लियोनार्दो-दा-विन्ची के नाम उल्लेखनीय हैं। इन कलाकारों ने अपनी कृतियों द्वारा यूरोप के लोगों को अत्यधिक प्रभावित किया।

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प्रश्न 2.
पुनर्जागरण के क्या परिणाम हुए ? विस्तारपूर्वक लिखिए।
       या
पुनर्जागरण से प्राचीन प्रेरणाओं पर आधारित एक नया प्रयोग शुरू हुआ।” इस कथन की स्पष्ट व्याख्या कीजिए।
       या
पुनर्जागरण काल में आर्थिक दशा और व्यापार में क्या प्रगति हुई ?
       या
यूरोप में पुनर्जागरण के फलस्वरूप समाज, धर्म और राजनीति के क्षेत्र में क्या परिवर्तन हुए
       या
पुनर्जागरण के फलस्वरूप मानव-जीवन अथवा उसके क्रियाकलापों में क्या परिवर्तन आए ?
उत्तर :
पुनर्जागरण काल का एक प्रमुख परिणाम मध्यम वर्ग का उदय और उसकी शक्ति में हुई वृद्धि थी। पुनर्जागरण के फलस्वरूप तत्कालीन यूरोप की आर्थिक दशा, व्यापार, सामाजिक जीवन, धर्म, राजनीति आदि में निम्नलिखित परिवर्तन हुए –
1. आर्थिक दशा तथा विदेशी व्यापार में परिवर्तन – पुनर्जागरण के कारण यूरोपीय नाविकों ने
नये-नये देशों तथा समुद्री मार्गों की खोज की। समुद्री मार्गों का प्रयोग करने से विदेशी व्यापार में असाधारण वृद्धि हुई। यूरोप के राष्ट्रों ने खोजे गये नये-नये देशों में अपने उपनिवेश बसाये और उन्हें अपना व्यापारिक केन्द्र बनाया।उपनिवेशवाद के (UPBoardSolutions.com) कारण साम्राज्यवाद और पूँजीवाद का जन्म हुआ तथा पूँजीवाद के कारण शोषण तथा वर्ग-संघर्ष का उदय हुआ।

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2. सामाजिक जीवन में परिवर्तन – पुनर्जागरण के कारण यूरोप के लोगों के जीवन में व्यापक स्तर पर दूरगामी परिवर्तन हुए। पुनर्जागरण ने अन्धविश्वासों का अन्त करके यूरोपवासियों को व्यावहारिक तथा उपयोगी जीवन प्रदान किया। सामन्तवादी पद्धति का अन्त हो गया। यूरोपीय समाज ने मध्यकालीन युग से निकलकर आधुनिक युग में प्रवेश किया। मानवतावाद के जन्म के कारण समाज में नये मध्यम वर्ग का उदय हुआ। शिक्षा के प्रसार से समाज में नयी चेतना और जागृति आयी और लोग रूढ़िवाद को छोड़कर यथार्थवाद तथा भौतिकवाद की ओर झुकने लगे।

3. राजनीतिक परिवर्तन – धर्म-युद्धों में हार के कारण यूरोप के निरंकुश शासकों को अपनी परम्परागत युद्ध शैली बदलनी पड़ी। इसके फलस्वरूप यूरोप में मध्यकालीन सामन्तवाद धीरे-धीरे समाप्त होने लगा और राज्यों में राष्ट्रीय भावनाएँ पनपने लगीं। राज्य केन्द्रीय शक्ति के रूप में उभरने लगे। कालान्तर में प्रजातान्त्रिक शासन-प्रणाली का जन्म हुआ।

4. धार्मिक परिवर्तन – पुनर्जागरण के कारण यूरोप के धार्मिक जीवन में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए। इस्लाम धर्म के बढ़ते प्रभाव से अपने धर्म तथा समाज की रक्षा के लिए यूरोप का सारा समाज एकजुट हो गया। यूरोप ने अपने सांस्कृतिक पुनरुत्थान के द्वारा अपने धर्म और समाज की रक्षा की। कैथोलिक धर्म की बुराइयों के विरोध में प्रोटेस्टेण्ट धर्म का अभ्युदय हुआ। यूरोप के अधिकांश देशों ने प्रोटेस्टेण्ट धर्म को अपनाना प्रारम्भ कर (UPBoardSolutions.com) दिया। इरैस्मस, ज्विग्ली, मार्टिन लूथर, जॉन काल्विन जैसे समाज- सुधारकों ने धर्म को परिष्कृत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी।

5. भाषा और साहित्य में परिवर्तन – सन् 1465 ई० में जर्मनी में छापेखाने का आविष्कार हुआ। उसके बाद सन् 1476 में इंग्लैण्ड में छापाखाना खोला गया। इसके बाद छापेखानों में वृद्धि होती गयी, जिससे पुस्तकों की छपाई तेजी से होने लगी। इससे सामान्य जनता के लिए शिक्षा के द्वार खुल गये। पुनर्जागरण काल में लैटिन, फ्रेंच, अंग्रेजी आदि भाषाओं का पर्याप्त विकास हुआ। इटली, जर्मनी, इंग्लैण्ड, फ्रांस, हॉलैण्ड आदि देशों के कवियों तथा लेखकों ने अनेक प्रसिद्ध कृतियों की रचना की। विलियम शेक्सपियर ने मैकबेथ, हेमलेट, मर्चेण्ट ऑफ वेनिस, रोमियो-जूलियट तथा इरैस्मस ने इन द प्रेज़ ऑफ फॉली’ की रचना की।

6. राष्ट्रीयता का विकास – पुनर्जागरण के फलस्वरूप यूरोप में नये राज्यों के उत्कर्ष के साथ-साथ राष्ट्रीयता की भावना भी जाग्रत हुई। सामन्तवाद का अन्त हो जाने से जहाँ एक ओर शक्तिशाली राजसत्ता का उदय हुआ, वहीं दूसरी ओर जनता का महत्त्व भी बढ़ा।

7. कला का विकास – इटली का पुनर्जागरण प्रधानत: कला के क्षेत्र में हुआ। वहाँ चित्रकारी, शिल्प एवं स्थापत्य की बड़ी उन्नति हुई। पुनर्जागरण काल के चित्रकारों ने विषयों का चुनाव सीधे जीवन से किया। प्लास्टर और लकड़ी के पैनल के स्थान पर कैनवस का उपयोग शुरू हुआ। लियोनार्दो-दा-विन्ची, माइकल ऐन्जेलो, राफेल और टिशियान के चित्र आज तक अद्वितीय माने जाते हैं।

निष्कर्ष – स्पष्ट है कि पुनर्जागरण से प्राचीन प्रेरणाओं पर आधारित एक नया प्रयोग शुरू हुआ, जिसमें सामंजस्य एवं मौलिकता थी। मनुष्य के सामाजिक मूल्य की पुनर्प्रतिष्ठा शुरू हुई। वास्तव में पुनर्जागरण एक सन्धिकाल था जिसमें प्राचीन एवं आधुनिक काल दोनों की विशेषताएँ मौजूद थीं। भौगोलिक खोजों ने अमेरिका के रूप में नयी दुनिया का पता दिया। कैथोलिक चर्च का एकाधिकार टूटा। धार्मिक संकीर्णता की पकड़ से मानव मुक्त होने लगा। वैज्ञानिक जीवन दर्शन ने मनुष्य को निरन्तर प्रगति के पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार मनुष्य के दृष्टिकोण में जो बदलाव आया वह राजनीति से बाजार, (UPBoardSolutions.com) बाजार से व्यक्ति के जीवन में हर जगह दिखाई पड़ने लगा।

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प्रश्न 3.
पुनर्जागरण के महत्त्व को बताइट।
उत्तर :
यूरोप के इतिहास में पुनर्जागरण के महत्त्व को निम्नवत् स्पष्ट किया जा सकता है

1. प्राचीन साहित्य का अध्ययन – पुनर्जागरण काल की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना बौद्धिक क्रान्ति थी। जिसका मुख्य कारण प्राचीन साहित्य का अध्ययन था। यूरोपवासी 13वीं शताब्दी से ही रोम और यूनान की पुरानी संस्कृति को सम्मान की दृष्टि से देखने लगे थे। इन लोगों ने यूनानी भाषा का अध्ययन किया जिसके फलस्वरूप उन्हें एक नयी संस्कृति, नये विचार और जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण मिला। प्राचीन यूनानी दर्शन और साहित्य (UPBoardSolutions.com) के फलस्वरूप प्लेटो तथा अरस्तू जैसे महान् दार्शनिकों के साहित्य का अध्ययन किया जाने लगा।

2. आलोचनात्मक प्रवृत्तिका उदय – प्राचीन साहित्य के अध्ययन से यूरोपवासियों में आलोचनात्मक और अन्वेषणात्मक प्रवृत्ति उत्पन्न हुई। अब तक तो वे सत्ता की आज्ञा (राजाओं के आदेश) का पालन चुपचाप करते थे और उनके अत्याचारों को सहन करते थे लेकिन अब वह सत्ता की आज्ञाओं को तर्क की कसौटी पर परखने लगे थे। यूरोप की जनता ने आत्म-दमन के स्थान पर आत्म-गौरव और व्यक्तित्व की महत्ता को स्वीकार करना प्रारम्भ कर दिया।

3. बाइबिल का अन्य भाषाओं में अनुवाद – ईसा मसीह के विचारों को अच्छी तरह समझने के लिए बाइबिल का अन्य देशी भाषाओं में अनुवाद किया गया, जिससे बाइबिल की पहुँच आम जनता के दिलों तक पहुँच गयी। लोगों के हृदय में अपने-अपने राष्ट्र के प्रति अद्भुत प्रेम उत्पन्न होने लगा। परिणामस्वरूप अंग्रेज इंग्लैण्ड के विकास के लिए तथा फ्रांसीसी फ्रांस के विकास के लिए प्रयत्नशील होने लगे।

4. मानववाद का उदय – पुनर्जागरण काल में लोग प्राचीन साहित्य की ओर आकर्षित हुए तथा उसके आगे मध्यकालीन आत्मनिग्रह एवं वैराग्य के आदर्श फीके पड़ गये और मानववाद को प्रधानता दी जाने लगी। यूरोप के लोगों ने आत्मनिग्रह के स्थान पर (UPBoardSolutions.com) आत्म-विकास, आत्म-विश्वास, आत्म-गौरव तथा मानव-जीवन के सुखों पर जोर देना प्रारम्भ कर दिया।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि यूरोप में पुनर्जागरण काल एक नये युग की शुरुआत थी। जिसने समाज में व्याप्त समस्त बुराइयों तथा रूढ़ियों के विरुद्ध लोगों में आत्म-चेतना जाग्रत की और लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन की एक नयी दिशा प्रप्त हुई।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यूरोप में पुनर्जागरण सर्वप्रथम कहाँ, कब और क्यों आरम्भ हुआ? [2017]
       या
पुनर्जागरण सर्वप्रथम इटली में ही क्यों प्रारम्भ हुआ? (2016)
       या
यूरोप में पुनर्जागण सर्वप्रथम किस देश में हुआ? इसकी प्रगति के लिए उत्तरदायी कारणों में से किन्हीं दो का उल्लेख कीजिए। (2011, 16)
उत्तर :
यूरोप में पुनर्जागरण सर्वप्रथम इटली में आरम्भ हुआ। कुस्तुनतुनिया नगर पर तुर्को द्वारा अधिकार कर लिये जाने पर यूनान के विद्वान् धर्म तथा दर्शन की पुस्तकें लेकर इटली पहुँच गये। इटलीवासियों ने उनका हृदय से स्वागत किया। फलस्वरूप इटली में नवीन (UPBoardSolutions.com) विचारों, भावनाओं तथा मान्यताओं का उदय होने से वहाँ पुनर्जागरण प्रारम्भ हुआ। पुनर्जागरण के सर्वप्रथम इटली में ही प्रारम्भ होने के उपर्युक्त कारण के अतिरिक्त और भी कई कारण थे; जैसे –

  1. इटली के अनेक नगर वाणिज्य तथा व्यापार के केन्द्र होने के कारण समृद्ध थे।
  2. इटली के नगर सामन्ती नियन्त्रण से मुक्त थे। इन नगरों के स्वतन्त्र व्यापार से पुनर्जागरण को प्रोत्साहन मिला।
  3. इन नगरों के शासक कला-प्रेमी थे। उन्होंने कुस्तुनतुनिया से आने वाले यूनानी विद्वानों का स्वागत किया।

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प्रश्न 2.
पुनर्जागरण की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
पुनर्जागरण की विशेषताएँ – पुनर्जागरण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नानुसार थीं –

  1. पुनर्जागरण ने धार्मिक विश्वास के स्थान पर स्वतन्त्र चिन्तन को महत्त्व देकर तर्क-शक्ति का विकास किया।
  2. पुनर्जागरण ने मनुष्य को अन्धविश्वासों, रूढ़ियों तथा चर्च के बन्धनों से छुटकारा दिलाया और उसके व्यक्तित्व का स्वतन्त्र रूप से विकास किया।
  3. पुनर्जागरण ने केवल मानववादी विचारधारा का विकास किया व मानव-जीवन को सार्थक बनाने की शिक्षा दी।
  4. पुनर्जागरण ने केवल यूनानी और लैटिन भाषाओं के ग्रन्थों को (UPBoardSolutions.com) ही नहीं वरन् देशज भाषाओं के साहित्य के विकास को भी प्रोत्साहन दिया।
  5. चित्रकला के क्षेत्र में पुनर्जागरण ने यथार्थ चित्रण को प्रोत्साहन दिया।
  6. विज्ञान के क्षेत्र में पुनर्जागरण ने निरीक्षण, अन्वेषण, जाँच तथा परीक्षण को महत्त्व दिया।

प्रश्न 3.
पुनर्जागरण के प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
पुनर्जागरण एक ऐसा आन्दोलन था जिसने एक नये युग का सूत्रपात किया। इससे लोगों के दृष्टिकोण में निम्नलिखित परिवर्तन आये –

  1. तार्किकता – यूनानी तथा रोमन संस्कृति के प्रभाव से ईसाई जगत् में भी वैज्ञानिक व तार्किक दृष्टिकोण तथा वैज्ञानिक खोज की चेतना का प्रादुर्भाव हुआ। लोग अन्धविश्वासों से मुक्त होने लगे।
  2. मानवतावाद – विद्वान्, दार्शनिक, कलाकार आदि सभी मानवतावाद में रुचि लेने लगे। दिव्यता की अपेक्षा मानव के सम्मान के प्रति सभी की रुचि जाग्रत हुई।
  3. शिक्षा का प्रसार – कला, विज्ञान, साहित्य सभी का एक ही लक्ष्य था—जीवन की सत्यता का ज्ञान।
  4. खोज तथा आविष्कार – महान् नाविकों की समुद्री यात्राओं तथा खोज-यात्राओं ने नये तथा अज्ञात देशों की जानकारी दी।
  5. ईसाई धर्म का विभाजन – सुधार आन्दोलनों ने ईसाई धर्म को (UPBoardSolutions.com) दो सम्प्रदायों-रोमन कैथोलिक तथा प्रोटेस्टेण्ट में बाँट दिया।
  6. राष्ट्र-राज्यों का उदय – राष्ट्र-राज्यों के उदय से सामन्ती लॉड तथा पोप का राजनीति में हस्तक्षेप बन्द हो गया।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित का संक्षिप्त परिचय दीजिए (क) गैलीलियो, (ख) टॉमस मूर, (ग) रोज़र बेकन, (घ) लियोनार्दो-दा-विन्ची।
उत्तर :

(क) गैलीलियो – गैलीलियो इटली का वैज्ञानिक था। इसने दूरबीन अथवा दूरदर्शक यन्त्र बनाकर खगोलशास्त्र के अनेक तथ्यों के बारे में पता लगाया तथा डायनेमिक्स (गति विज्ञान) के अध्ययन की नींव भी डाली। गैलीलियो एक ज्योतिषी ही नहीं, वरन् एक महान् वैज्ञानिक भी था। इसने थर्मामीटर का भी आविष्कार किया।

(ख) टॉमस मूर – टॉमस मूर पुनर्जागरण काल का इंग्लैण्ड का एक प्रसिद्ध साहित्यकार था। उसने अपनी साहित्यिक रचना ‘यूटोपिया’ में समकालीन समाज का व्यंग्यात्मक चित्रण किया है।

(ग) रोजर बेकन – रोज़र बेकन (सन् 1214-95 ई०) इंग्लैण्ड के महान् वैज्ञानिक थे। इन्होंने तर्कवाद के आधार पर सत्य और धर्म की विवेचना करने पर जोर दिया। रोज़र बेकन ने भूगोल, खगोल, गणित, विज्ञान आदि के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किये। इस (UPBoardSolutions.com) महान् साहित्यकार ने अनेक विषयों पर विद्वत्तापूर्ण निबन्ध लिखे। बेकन ने यूरोपवासियों में शिक्षा एवं अध्ययन के प्रति रुचि जाग्रत की।

(घ) लियोनार्दो-दा-विन्ची – यह पुनर्जागरण काल को इटली का एक महान् चित्रकार था। इसके चित्र ‘द लास्ट सपर’ तथा ‘मोनालिसा’ लोगों को आज भी आश्चर्यचकित कर देते हैं। वास्तव में लियोनादों सर्वतोमुखी प्रतिभा का स्वामी था। वह कवि, गायक, चित्रकार, मूर्तिकार, दार्शनिक, वैज्ञानिक और इन्जीनियर सभी कुछ था।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पुनर्जागरण का क्या अभिप्राय है ? [2016]
उत्तर :
पुनर्जागरण का अभिप्राय है-पुनर्जन्म या अन्धकार से निकलकर ज्ञान का पुन: प्रसार।.

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प्रश्न 2.
पुनर्जागरण काल कब आरम्भ हुआ था ?
उत्तर :
पुनर्जागरण काल लगभग 1300 ई० में आरम्भ हुआ था।

प्रश्न 3.
यूरोप में पुनर्जागरण के कोई दो प्रमुख कारण लिखिए। [2012]
उत्तर :
यूरोप में पुनर्जागरण के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित थे

  • भौगोलिक खोजें तथा
  • वैज्ञानिक आविष्कार।

प्रश्न 4.
पुनर्जागरण के दो परिणाम लिखिए।
उत्तर :
पुनर्जागरण काल के दो परिणाम निम्नलिखित हैं

  • राजनीतिक परिवर्तन तथा
  • भाषा और साहित्य में परिवर्तन।

प्रश्न 5.
यूनानी विद्वान् इटली क्यों गये ?
उत्तर :
तुर्को द्वारा कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लेने के बाद यूनानी विद्वानों ने इटली में जाकर शरण ली। इटली के शासकों ने यूनानी विद्वानों, कलाकारों तथा साहित्यकारों का हृदय से स्वागत किया और उन्हें शरण तथा संरक्षण प्रदान किया। (UPBoardSolutions.com)

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प्रश्न 6.
छापाखाने (प्रिण्टिग प्रेस) का आविष्कार किसने किया ?
उत्तर :
छापाखाने (प्रिण्टिग प्रेस) का आविष्कार जर्मनी के एक प्रसिद्ध आविष्कारक गुटेनबर्ग ने सन् 1465 ई० में किया।

प्रश्न 7.
छापाखाने के आविष्कार से पड़ने वाले दो प्रभावों को लिखिए।
उत्तर :
छापाखाने के आविष्कार से निम्नलिखित दो प्रभाव पड़े

  • छापाखाने के आविष्कार से पुस्तकों की संख्या में वृद्धि हुई।
  • कम कीमत में आसानी से पुस्तकें उपलब्ध होने लगीं।

प्रश्न 8.
गैलीलियो और न्यूटन किस देश के निवासी थे? विज्ञान के क्षेत्र में उनका क्या योगदान था? (2012)
उत्तर :
गैलीलियो इटली का निवासी था और उसने दूरबीन का (UPBoardSolutions.com) आविष्कार किया था। न्यूटन जर्मनी का निवासी था और उसने ‘गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त’ की खोज की थी।

प्रश्न 9.
माइकल एंजेलो कौन था? उसकी एक कृति का नाम लिखिए। [2011]
उत्तर :
माइकल एंजेलो एक चित्रकार था। उसकी प्रसिद्ध कृति ‘द फाल ऑफ मैन’ है।

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प्रश्न 10.
दान्ते कौन था ? [2011,14]
उत्तर :
दान्ते इटली के एक महान् कवि थे। इन्होंने इटली की भाषा में प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘डिवाइन कॉमेडी की रचना की।

प्रश्न 11.
‘द प्रिन्स’ किसकी कृति है ? [2012]
उत्तर :
‘द प्रिन्स’ फ्लोरेन्स के एक प्रसिद्ध इतिहासकार और महान् दार्शनिक ‘मैकियावली’ की कृति

प्रश्न 12.
पुनर्जागरण काल के पश्चिमी यूरोप के दो वैज्ञानिकों के नाम लिखिए। [2014]
उत्तर :

  • गैलीलियो – इटली
  • न्यूटन – जर्मनी

प्रश्न 13.
‘कुस्तुनतुनिया पर तुर्की का अधिकार हो जाने से यूरोपीय देशों को किस प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ा? भारत में यूरोपीय राष्ट्रों ने किस मार्ग से प्रवेश किया? [2015]
उत्तर :
कुस्तुनतुनिया पर तुर्को का अधिकार हो जाने से (UPBoardSolutions.com) इन्होंने ईसाइयों पर अत्याचार करना प्रारम्भ कर दिया। भारत में यूरोपीय राष्ट्रों ने समुद्री मार्ग से प्रवेश किया।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. तुर्को ने कुस्तुनतुनिया पर कब आक्रमण किया?

(क) 1453 ई० में
(ख) 1435 ई० में
(ग) 1485 ई० में
(घ) 1688 ई० में

2. यूरोप में पुनर्जागरण सर्वप्रथम किस देश में हुआ?

(क) इटली में
(ख) फ्रांस में
(ग) ब्रिटेन में
(घ) स्पेन में

3. पुनर्जागरण का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा

(क) स्थापत्य कला पर
(ख) नृत्य कला पर
(ग) चित्रकला पर
(घ) संगीत कला पर

4. राफेल कौन था? (2011, 13, 18)

(क) चित्रकार
(ख) वैज्ञानिक
(ग) लेखक
(घ) कवि

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5. मोनालिसा का चित्रकार था (2018)

(क) माइकल एंजेलो
(ख) राफेल
(ग) जाफरे चासर
(घ) लियोनार्दो-दा-विन्ची

6. गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त की व्याख्या की
या
‘गुरुत्वाकर्षण’ के सिद्धान्त का प्रतिपादक कौन था ? (2013)

(क) गैलीलियो ने
(ख) कॉपरनिकस ने
(ग) न्यूटन ने
(घ) रॉबर्ट बॉयल ने

7. पुनर्जागरण के प्रवर्तक के रूप में कौन जाने जाते हैं? (2012)

(क) पेट्रार्क
(ख) दान्ते
(ग) इरास्मस
(घ) टॉमस मूर

8. शेक्सपियर किस देश का नागरिक था ? (2012)

(क) इंग्लैण्ड
(ख) अमेरिका
(ग) फ्रांस
(घ) आयरलैण्ड

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9. टॉमस मूर ने कौन-सी पुस्तक लिखी ? (2011, 12, 13)
या
टॉमस मूर रचयिता था (2015)

(क) यूटोपिया
(ख) मोनालिसा
(ग) हेमलेट
(घ) द प्रिन्स

10. जूलियस सीजर के रचनाकार थे (2012)

(क) दान्ते
(ख) शेक्सपियर
(ग) टॉमस मूर
(घ) मैकियावेली

11. “पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।” यह कथन था (2011)

(क) पेट्रार्क का
(ख) न्यूटन की
(ग) गैलीलियो का
(घ) कॉपरनिकस का

12. दूरबीन ( टेलीस्कोप) को आविष्कार किसने किया? (2011, 12, 14, 16, 18)

(क) गैलीलियो ने
(ख) आर्किमिडीज ने।
(ग) न्यूटन ने
(घ) विलियम हार्वे ने

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13. मैकियावेली द्वारा लिखित पुस्तक का नाम क्या था ?(2012, 13, 14, 16)

(क) डिवाइन कॉमेडी
(ख) यूटोपिया
(ग) द प्रिन्स
(घ) डेकामेरॉन

14. माइकल एंजेलो था एक – (2014)

(क) चित्रकार
(ख) मूर्तिकार
(ग) दार्शनिक
(घ) कवि

15. यूटोपिया के रचनाकार थे (2014)

(क) कार्ल मार्क्स
(ख) मैकियावेली
(ग) टॉमस मूर शेक्सपियर

16. लियोनार्दो-दा-विन्ची था एक (2014)

(क) चित्रकार
(ख) मूर्तिकार
(ग) लेखक
(घ) दार्शनिक

17. किस देश में पुनर्जागरण सर्वप्रथम प्रारम्भ हुआ? (2015)

(क) जर्मनी
(ख) इंग्लैण्ड
(घ) फ्रांस

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18. लेवियाथन’ के लेखक का नाम है (2017)

(क) प्लेटो
(ख) हॉब्स
(ग) लॉक
(घ) मॉण्टेस्क्यू

19. टॉमस मूर था एक महान (2017)

(क) वैज्ञानिक
(ख) मूर्तिकार
(ग) चित्रकार
(घ) लेखक

उत्तरमाला

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 1 (Section 1) 1a

Hope given UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 1 are helpful to complete your homework.

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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 8 (Section 3)

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 8 खनिज संसाधन (अनुभाग – तीन)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Social Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 8 खनिज संसाधन (अनुभाग – तीन).

विरतृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में लौह-अयस्क के वितरण का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
या
भारत में लौह-अयस्क के खनन क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
या
भारत में लौह-अयस्क का वितरण निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत दीजिए
(1) भण्डार,
(2) उत्पादक-क्षेत्र,
(3) उत्पादन तथा
(4) व्यापार
या
धात्विक खनिज से आप क्या समझते हैं ? किसी एक की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
या
लौह-अयस्क के उत्पादन के किन्हीं दो क्षेत्रों की विवेचना कीजिए।
उत्तर :
धात्विक खनिज जिन खनिजों से धातु (Metal) (UPBoardSolutions.com) की प्राप्ति होती है, उन्हें धात्विक खनिज कहा जाता है। लोहा, ताँबा, सोना, चाँदी, बॉक्साइट, सीसा, टिन, मैंगनीज, क्रोमियम, प्लैटिनम, बेरिलियम, जिरकॉन, एण्टिमनी, पारा, रेडियम आदि धात्विक खनिज हैं।

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लौह-अयस्क के भण्डार

भारत में लौह-अयस्क के बहुत बड़े भण्डार (विश्व का 16.5%) विद्यमान हैं। यहाँ हैमेटाइट और मैग्नेटाइट किस्म का लौह-अयस्क अधिक मात्रा में पाया जाता है, जिसमें लोहांश 60 से 70% तक होता है। इसी कारण अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में हमारे लौह-अयस्क की अत्यधिक माँग रहती है। एक अनुमान के अनुसार देश में 17.57 अरब टन लौह-अयस्क के सुरक्षित भण्डार विद्यमान हैं; परन्तु भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने 23 अरब टन लौह-अयस्क के सुरक्षित भण्डारों का अनुमान लगाया है, जिसमें 85% लौह-अयस्क हैमेटाइट किस्म का है।

भारत में लौह-अयस्क के 50% भण्डार झारखण्ड राज्य के सिंहभूम जिले (UPBoardSolutions.com) तथा ओडिशा राज्य के क्योंझर, बोनाई, सुन्दरगढ़ और मयूरभंज जिलों में पाये जाते हैं। लौह-अयस्क का यह क्षेत्र विश्व का सबसे बड़ा तथा सम्पन्न क्षेत्र है। झारखण्ड के हजारीबाग और शाहाबाद जिलों में भी लौह-अयस्क निकाला जाता है।

उत्पादक-क्षेत्र

भारत में राज्यानुसार लौह-अयस्क का उत्पादन निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाता है
1. गोआ- वर्तमान समय में गोआ राज्य भारत का 32% लौह-अयस्क उत्पन्न क़र प्रथम स्थान बनाये, हुए है। यहाँ लोहे की खुली खाने हैं। पिरना-अदोल, पाले-ओनेडा तथा कुडनेम-सुरला लौह-अयस्क की प्रमुख खाने हैं। यहाँ की धातु उत्तम किस्म की नहीं है। यहाँ से लोहा जापान, कोरिया, ताईवान तथा पश्चिमी यूरोप को निर्यात कर दिया जाता है।

2. छत्तीसगढ़- 
छत्तीसगढ़ 25% लौह-अयस्क का उत्पादन कर देश में दूसरा स्थान बनाये हुए है। यहाँ | धल्ली-राजहरा (दुर्ग) तथा बैलाडिला (बस्तर) की खाने प्रसिद्ध हैं। रायगढ़, बिलासपुर, माण्डला, बालाघाट, जबलपुर एवं सरगुजा जिलों में भी लौह-अयस्क के भण्डार पाये जाते हैं। बेलाडिला की लौह खदानों का विकास जापान सरकार के सहयोग से किया गया है।

3. मध्य प्रदेश- 
मध्य प्रदेश का लौह-अयस्क क्षेत्र छत्तीसगढ़ (नव-निर्मित राज्य) में चले जाने के बाद अब यहाँ लोहे के सीमित भण्डार ही रह गये हैं, जो कि माण्डला, बालाघाट एवं जबलपुर के आस-पास हैं।।

4. ओडिशा- 
भारत के लौह-अयस्क उत्पादन में इस राज्य का तीसरा स्थान है, यहाँ देश के लगभग 30% लोहे के भण्डार सुरक्षित हैं। क्योंझर, बोनाई, सुन्दरगढ़, गुरुमहिसानी, सुलेपात तथा बादाम पहाड़ लौह-अयस्क की प्रमुख खाने हैं। मयूरभंज में (UPBoardSolutions.com) भारत की सबसे बड़ी लोहे की खान है। क्योंझर में नोआमुण्डी से भी लोहा निकाला जाता है। यह एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी लोहे की खान मानी जाती है।

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5. झारखण्ड- 
झारखण्ड 16% लौह-अयस्क का उत्पादन कर देश में चौथा स्थान बनाये हुए है। झारखण्ड के लौह-अयस्क की खानें ओडिशा की लौह पेटी से जुड़ी हुई हैं। यहाँ लोहे की प्रमुख खाने गुआ, बड़ाबुरू, पंसीराबुरू, मनोहरपुर आदि में हैं। सिंहभूम की लौह पेटी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहाँ से झारखण्ड राज्य का 72% लोहा निकाला जाता है।

6. कर्नाटक- 
यहाँ भारत का 9% लौह-अयस्क निकाला जाता है, जो मैग्नेटाइट किस्म का है। हॉस्पेट, | बाबाबूदन की पहाड़ियाँ, केमनगुण्डी, शिमोगा, तुमकुर, धारवाड़, चिकमगलूर आदि स्थानों में लोहे की प्रमुख खाने हैं।

7. महाराष्ट्र-
 महाराष्ट्र के चन्द्रपुर जिले में उत्तम श्रेणी के लोहे के पर्याप्त भण्डार हैं, जिसमें धातु का अंश 61 से 67% तक है। इस क्षेत्र में लोहे के प्रमुख उत्पादन लोहारा, रत्नागिरी और पीपल गाँव हैं। यहाँ 30 | करोड़ टन के संचित भण्डार होने का अनुमान है।

8. आन्ध्र प्रदेश– 
यहाँ लोहे का उत्पादन कृष्णा, कर्नूल, कुडप्पा, चित्तूर, गुण्टूर तथा वारंगल जिलों में किया जाता है। ये खदानें गुण्टूर जिले में ओलोर ग्रुप और नेलोर जिले में कईंकर तालुका में स्थित हैं। अनुमान है कि यहाँ 15 करोड़ टन के लौह-भण्डार संचित हैं।

9. तमिलनाडु– 
इस राज्य में मैग्नेटाइट किस्म की लौह-अयस्क पायी जाती है। गोलामलाई, थालमलाई, सिंगापट्टी, थिरथामलाई, पंचमलाई, कोलेमलाई एवं कंजमलाई में लोहे के जमाव पाये जाते हैं।

10. अन्य राज्य– 
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में दामूदा एवं महादेव श्रेणियों की बालुका- पत्थर शैलों से हैमेटाइट किस्म का लोहा निकाला जाता है। जम्मू-कश्मीर राज्य में जम्मू एवं ऊधमपुर जिलों में लोहे के भण्डार हैं। उत्तराखण्ड में गढ़वाल, अल्मोड़ा तथा नैनीताल में, हिमाचल प्रदेश में काँगड़ा एवं मण्डी जिलों में, गुजरात में नवानगर, पोरबन्दर, जूनागढ़, भावनगर, बड़ोदरा एवं खाण्डेश्वर तथा हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जिले में भण्डार अनुमानित किये (UPBoardSolutions.com) गये हैं।

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उत्पादन एवं उपयोग

भारत में लौह-अयस्क का उपयोग एवं लोहे का उत्पादन इस्पात मिलों में किया जाता है। मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्यों को लौह-अयस्क भिलाई व विशाखापत्तनम् संयन्त्रों, ओडिशा के क्योंझर व बोनाई क्षेत्रों तथा झारखण्ड के सिंहभूम जिले का लौह-अयस्क टाटा आयरन ऐण्ड स्टील कम्पनी; जमशेदपुर; बोकारो; कुल्टी; हीरापुर-बर्नपुर; आसनसोल; दुर्गापुर तथा राउरकेला इस्पात संयन्त्रों, कर्नाटक राज्य के लौहअयस्क का भद्रावती व सेलम कारखानों में उपयोग कर उत्पादन किया जाता है।

व्यापार

लोहे के विश्व-व्यापार में भारत का भाग लगभग 5% है। कुल निर्यात होने वाले खनिज में 60% भाग लोहे से। ही प्राप्त होता है। जापान भारतीय लोहे का सबसे बड़ा ग्राहक है, जो लोहे के निर्यात का 70% से भी अधिक भाग आयात करता है। रूमानिया, चेकोस्लोवाकिया, पोलैण्ड, इटली, यूगोस्लाविया, जर्मनी, चीन, पाकिस्तान, कोरिया, ईरान एवं इराक आदि देश भारतीय लोहे के अन्य प्रमुख ग्राहक हैं।

प्रश्न 2.
भारत में मैंगनीज की उपयोगिता और वितरण की विवेचना कीजिए।
या
भारत में मैंगनीज के तीन प्रमुख उत्पादक राज्यों का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :

उपयोग/उपयोगिता

मैंगनीज धातु काले रंग की प्राकृतिक भस्मों के रूप में धारवाड़ युग की शैलों में मिलती है। इन शैलों में देश का 90% मैंगनीज पाया जाता है। यह खनिज ठोस, कोमल एवं रवेहीन और बहुत ही उपयोगी होता है। इसके 95% भाग का उपयोग धातुओं में मिलाकर उन्हें कठोर एवं टिकाऊ बनाने में किया जाता है, जिसका सबसे अधिक उपयोग इस्पात बनाने में किया जाता है। मैंगनीज तथा ताँबे के मिश्रण से टरबाइन–ब्लेड्स; मैंगनीज एवं काँसे के मिश्रण से जलयानों के प्रोपेलर; मैंगनीज एवं ऐलुमिनियम के मिश्रण से विद्युत-तारों को

प्रतिरोधक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इस मिश्र धातु का उपयोग काँच का रंग उड़ाने, रोगन एवं वार्निश को सुखाने, बिजली की बैटरियों, ऑक्सीजन, क्लोरीन आदि गैसों, ब्लीचिंग पाउडर बनाने, मोटरगाड़ियों, टैंक, वायुयान, रेल के डिब्बे, प्लास्टिक बनाने एवं रासायनिक उद्योगों में प्रमुख रूप से किया जाता है। उत्पादन एवं वितरण भारत में मैंगनीज का वितरण अथवा मैंगनीज के प्रमुख उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं

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1. ओडिशा- 
मैंगनीज के उत्पादन में ओडिशा राज्य का भारत में प्रथम स्थान है। यहाँ से देश का 30% मैंगनीज निकाला जाता है। यहाँ पर मैंगनीज के 40% सुरक्षित भण्डार हैं। यहाँ गंगपुर, बोनाय, क्योंझर, कोरापुट, कालाहाण्डी, बोलनगिरि, सुन्दरगढ़ एवं तालचिर की खाने प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

2. मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़-
मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्यों का भण्डारों की दृष्टि से प्रथम, परन्तु उत्पादन की दृष्टि से दूसरा स्थान है। मध्य प्रदेश के बालाघाट, सिवनी, छिन्दवाड़ा, माण्डला, जबलपुर, धार, झाबुआ एवं इन्दौर प्रमुख उत्पादक जिले हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर व बिलासपुर जिलों से भी मैंगनीज निकाला जाता है। इन दोनों राज्यों से देश के लगभग 40% मैंगनीज का उत्पादन किया जाता है।

3. महाराष्ट्र- 
इस राज्य का देश के मैंगनीज उत्पादन में तीसरा स्थान है। यह देश का 18% मैंगनीज उत्पन्न करता है। मैंगनीज नागपुर, भण्डारा एवं रत्नागिरि जिलों में मिलता है।

4. कर्नाटक- 
इस राज्य का देश के मैंगनीज उत्पादन में चौथा स्थान है, जहाँ देश का लगभग 17% मैंगनीज निकाला जाता है। चित्रदुर्ग, कादूर, चिकमंगलूर, शिमोगा, तुमकुर, बेल्लारी एवं बेलगाम जिले प्रमुख मैंगनीज उत्पादक क्षेत्र हैं।

5. राजस्थान- 
इस राज्य में मध्यम श्रेणी का मैंगनीज उदयपुर, बाँसवाड़ा, सिरोही एवं डूंगरपुर जिलों से निकाला जाता है।

6. गुजरात- 
इस राज्य में मैंगनीज की संचित राशि का अनुमान 25 लाख टन लगाया गया है। इसके बड़ोदरा एवं पंचमहल जिले प्रमुख मैंगनीज उत्पादक क्षेत्र हैं।

7. आन्ध्र प्रदेश- 
यहाँ से देश के मैंगनीज उत्पादन का लगभग 8% भाग प्राप्त किया जाता है। विशाखापत्तनम, कुडप्पा, श्रीकाकुलम, गुण्टूर, विजयनगर मैंगनीज के प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

8. अन्य राज्य- 
मैंगनीज के अन्य उत्पादक राज्यों में गोआ, बिहार और (UPBoardSolutions.com) झारखण्ड प्रमुख हैं। गोआ से 5% उत्पादन परनेग तथा बारदेर क्षेत्रों से प्राप्त होता है। झारखण्ड राज्य में सिंहभूम जिला मैंगनीज का प्रमुख उत्पादक है।

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प्रश्न 3.
भारत में बॉक्साइट के उपयोग, भण्डार, उत्पादन एवं वितरण पर प्रकाश डालिए।
या
बॉक्साइट से कौन-सी धातु प्राप्त होती है ? इसके औद्योगिक महत्त्व को बताते हुए इसके भारत में वितरण पर प्रकाश डालिए।
या
भारत में बॉक्साइट उत्पादन का वर्णन कीजिए। इसकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डालिए। [2017]
उत्तर :

उपयोग/महत्त्व

बॉक्साइट एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक एवं उपयोगी धातु है, जिससे ऐलुमिनियम बनाया जाता है। यह एक हल्की व लचीली धातु है जिसे किसी भी रूप में ढाला जा सकता है। इसका रंग मिट्टी के समान लाल या पीला होता है। उत्तम किस्म की बॉक्साइट में 50 से 60% तक ऐलुमिनियम ऑक्साइड होती है। ऐलुमिनियम से अनेक प्रकार के विद्युत उपकरण, बर्तन, चादरें आदि बनायी जाती हैं। यहाँ तक कि इससे बारीक तार भी बनाये जा सकते हैं। (UPBoardSolutions.com) ऐलुमिनियम की 60% खपत बिजली उद्योग में की जाती है। इससे बिजली के केबिल, तार, वायुयान के इंजन और रेलवे कोचों की बॉडी बनायी जाती है। इसकी विशिष्ट मिश्रधातु से बर्तन बनाये जाते हैं। इस धातु से सस्ते बर्तन तथा हलके डिब्बे भी बनाये जाते हैं। बॉक्साइट के मैल से सीमेण्ट बनाया जाता है। इसका औद्योगिक महत्त्व होने के कारण भारत में इसके उत्पादन में तीव्र गति से वृद्धि हुई है।

भण्डार

बॉक्साइट के भण्डारों के दृष्टिकोण से भारत विश्व में दसवाँ स्थान रखता है। देश में बॉक्साइट के भण्डार 303.70 करोड़ टन अनुमानित किये गये हैं। इसमें 7 करोड़ टन के भण्डार उत्तम प्रकार के हैं। संचित राशि का एक-तिहाई भाग केवल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में सुरक्षित है।

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उत्पादन एवं वितरण

बॉक्साइट के उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में दसवाँ है। इसके प्रमुख उत्पादक राज्य बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोआ, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर हैं।

1. बिहार और झारखण्ड- 
इन राज्यों का बॉक्साइट उत्पादन में प्रथम स्थान है, यहाँ से देश का 36% उत्पादन प्राप्त होता है तथा यहाँ 15% संचित राशि विद्यमान है। यहाँ ग्रेनाइट एवं नीस चट्टानों के रूपान्तरण से बॉक्साइट की प्राप्ति होती है। राँची, पलामू, मुंगेर एवं शाहाबाद जिले प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। यहाँ 4.5 करोड़ टन उत्तम धातु के भण्डार अनुमानित किये गये हैं। राँची जिले में लोहरडगा के समीप बॉक्साइट की 80 खाने हैं।

2. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़- 
ये राज्य बॉक्साइट के भण्डारों की दृष्टि से प्रथम स्थान रखते हैं। यहाँ देश के 20 से 30 करोड़ टन भण्डार अनुमानित किये गये हैं, जब कि उत्पादन में इनका दूसरा स्थान है। यहाँ से 26% उत्पादन प्राप्त होता है। यहाँ बॉक्साइट उत्पादन के तीन क्षेत्र प्रमुख हैं

  • कटनी-निमाड़-जबलपुर क्षेत्र,
  • अमरकण्टक-बालाघाट क्षेत्र एवं
  • रायगढ़-बस्तर-दुर्ग क्षेत्र।

3. महाराष्ट्र– बॉक्साइट उत्पादन की दृष्टि से महाराष्ट्र राज्य का तीसरा स्थान है। कोल्हापुर, थाना, कोलाबा, रत्नागिरि, पुणे, सतारा जिले मुख्य उत्पादक हैं। यहाँ बॉक्साइट के एक करोड़ टन के भण्डार अनुमानित किये गये हैं। भारत का 20% बॉक्साइट (UPBoardSolutions.com) महाराष्ट्र राज्य के द्वारा उत्पन्न किया जाता है।

4. गुजरात- 
इस राज्य में बॉक्साइट की खाने सौराष्ट्र क्षेत्र के हाल्हार एवं धाँगरवाड़ी तालुका में स्थित हैं। यहाँ पर इसके 80 लाख टन से 1 करोड़ टन के भण्डार अनुमानित किये गये हैं। भावनगर, नवानगर, पोरबन्दर, जाफराबाद, बेतवा, महुआ एवं भाटिया के समीप उत्तम किस्म की बॉक्साइट धातु मिलती है। खेड़ा जिले में कपाडवंज तथा कच्छ जिले में मांडवी, लाखपत, भुज, अंजर व नखतराना तालुके से भी बॉक्साइट प्राप्त होता है।

5. तमिलनाडु- 
यहाँ सलेम जिले की शिवराय पहाड़ियों में बॉक्साइट की खानें पायी जाती हैं। यहाँ पर 60 से 70 लाख टन बॉक्साइट के भण्डार अनुमानित किये गये हैं। मैटूर में स्थित चेन्नई कम्पनी बॉक्साइट को परिष्कृत करने का कार्य करती है।

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6. कर्नाटक- 
कर्नाटक राज्य में बाबाबूदन की पहाड़ियों में बॉक्साइट की छोटी-छोटी खानें स्थित हैं। बेलगाम क्षेत्र से भी बॉक्साइट प्राप्त होता है। यहाँ 7 लाख टन बॉक्साइट के भण्डार सुरक्षित हैं।

7. अन्य राज्य- 
गोआ राज्य में क्वेपेम एवं कानकोआ तालुके से बॉक्साइट प्राप्त होता है। उत्तर प्रदेश राज्य के बाँदा जिले में 40 से 60% तक की शुद्धता वाला बॉक्साइट मिलता है। इलाहाबाद जिले में भी कुछ भण्डारों का पता चला है। जम्मू-कश्मीर राज्य में पूँछ एवं रियासी क्षेत्रों की खानों में लगभग 22 लाख टन बॉक्साइट के अनुमानित भण्डार प्राप्त किये गये हैं। ओडिशा राज्य के कालाहाण्डी, बोलनगिरि एवं सम्बलपुर जिलों से भी बॉक्साइट प्राप्त होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अभ्रक का क्या महत्त्व है ? भारत में इसके क्षेत्र लिखिए। [2017]
या
भारत में अभ्रक के उत्पादन-क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
या
अभ्रक की उपयोगिता बताइट।
उत्तर :
उपयोग/महत्त्व- 
अभ्रक एक महत्त्वपूर्ण बहु-उपयोगी खनिज है। यह ताप एवं विद्युत का कुचालक होता है; अत: इसका उपयोग विद्युत उपकरण, रेडियो, वायुयान, औषधि निर्माण, अग्निरोधक कपड़ों, पंखों, टेलीफोन, खिलौनों, शीशे की चिमनियों, नेत्ररक्षक चश्मे आदि बनाने में किया जाता है। यह पारदर्शक एवं चमकीला होता है। अतः इससे वार्निश एवं पेण्ट भी बनाये जाते हैं। अभ्रक का उपयोग बेतार का तार तथा सैन्य उपकरण बनाने में भी किया जाता है। अभ्रक औद्योगिक एवं विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से एक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण खनिज है।

अभ्रक उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। यहाँ विश्व का 90% अभ्रक उत्पन्न किया जाता है। यह अभ्रक उत्तम श्रेणी का होता है। इसके निर्यात से भारत करोड़ों रुपयों की विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।

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उत्पादक-क्षेत्र- अभ्रक उत्पादन में बिहार तथा झारखण्ड राज्य अग्रणी हैं। यहाँ देश का 60% अभ्रक निकाला जाता है। यहाँ अभ्रक उत्पादक पेटी 95 से 160 किमी लम्बी तथा 19 से 26 किमी चौड़ी है। इस पेटी का थि:तार चम्पारन से उत्तर-पूर्व की ओर गया तथा हजारीबाग जिलों तक 3,880 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर है। अभ्रक का 30% उत्पादन कर आन्ध्र प्रदेश राज्य दूसरे स्थान पर है। यहाँ अभ्रक उत्पादन क्षेत्र अर्द्ध-चन्द्राकार पेटी में नेल्लोर जिले से गुण्टूर जिले तक 1,550 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं। राजस्थान (जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, अलवर एवं डूंगरपुर जिले) अभ्रक के प्रमुख उत्पादक जिले हैं। (UPBoardSolutions.com) यह राज्य अभ्रक के उत्पादन का केवल 10% भाग ही पूरा करता है। तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, ओडिशा, केरल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल अभ्रक के अन्य उत्पादक राज्य हैं। इन राज्यों से बहुत थोड़ा अभ्रक, जिसकी किस्म भी अच्छी नहीं होती, निकाला जाता है।

प्रश्न 2.
भारत में सोने के उपयोग, उत्पादन एवं वितरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
उपयोग– 
सोना एक बहुमूल्य खनिज है, जिसका भारत में भण्डार बहुत कम है। भारत विश्व में सोने की सर्वाधिक खपत वाला देश है। इसका प्रयोग आभूषण, मूर्तियाँ आदि बनाने में होता है। प्राचीन काल में इसके सिक्के भी बनाये जाते थे। वर्तमान समय में संसार की विभिन्न देशों की मुद्राओं का पारस्परिक विनिमय मूल्य सोने की मात्रा के स्टॉक के द्वारा ही निर्धारित किया जाता है।

भण्डार, उत्पादन एवं वितरण- भारत में सोने के भण्डार बहुत ही कम मात्रा में पाये जाते हैं। संसार के कुल सोना उत्पादन का मात्र 1.5% ही भारत में निकाला जाता है। कर्नाटक राज्य में कोलार सोने की खान प्रमुख स्थान बनाये हुए है जो कि विश्व की सबसे गहरी स्वर्ण खान है। कोलार तथा हट्टी की खानों से भारत के कुल स्वर्ण उत्पादन का लगभग 98% भाग निकाला जाता है। कर्नाटक में चैम्पियन तथा नन्दी दुर्ग में नयी खानों का भी पता लगा है। 1956 ई० में भारत सरकार ने इन खानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। भारत के राज्य सिक्किम में भी सोने की खानों का पता चला है। अनुमान है कि गंगटोक से 20 किमी दूर डिक्बू स्थान में लगभग 20 लाख टन सोने-चॉदी के भण्डार हैं। इसके अतिरिक्त आन्ध्र प्रदेश में रामगिरि, अनन्तपुर तथा तमिलनाडु में सलेम जिलों की खानों से भी कुछ सोना निकाला जाता है। भारत में बिहार की गंडक, झारखण्ड की स्वर्ण रेखा तथा उत्तर प्रदेश की रामगंगा नदी के रेत से भी सोना निकाला जाता है। भारत में अनुमानतः 103.17 टन शुद्ध सोने के भण्डार हैं। देश में सोने का उत्पादन लगातार घटता ही जा रहा है। सन् 1951 ई० में कुल 7,000 किग्रा सोने का उत्पादन किया गया था, जो वर्ष 1998-99 ई० में 2,463 किलोग्राम और वर्ष 2009-10 ई० में 269.19 किग्रा रह गया।

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प्रश्न 3.
खनिज की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
जो पदार्थ पृथ्वी के धरातल से खोदकर निकाले जाते हैं उन्हें ‘खनिज’ कहते हैं। प्राकृतिक संसाधनों में खनिज पदार्थों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। खनिज की अपनी विशेष रचना व भौतिक गुण होते हैं। देश के आर्थिक विकास और औद्योगिक विकास में खनिज की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। कुछ खनिज संसाधन पृथ्वी के ऊपरी भाग व कुछ सागर की तली से निकाले जाते हैं। सभ्यता की शुरुआत से ही मानव विभिन्न खनिजों का इस्तेमाल करता करता चला आ रहा है। पहले मनुष्य ने ताँबे और काँसे का प्रयोग करना सीखा जिसे कांस्य युग या ताम्र युग के नाम से जाना जाता है। बाद में लौह-अयस्क की खोज की गयी जिससे मजबूत और टिकाऊ सामान बनने लगे। वर्तमान समय में लोहे का सबसे अधिक प्रयोग होता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसका प्रयोग होता है इसलिए वर्तमान युग को लौहयुग की संज्ञा दी गयी है।

प्रश्न 4.
खनिजों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर :
लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, टिन आदि पदार्थ आर्थिक उपयोग की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण धातुएँ हैं। लोहा तो आधुनिक युग में सोने से भी अधिक उपयोगी है। यह आधुनिक सभ्यता का आधार है। इन | खनिज संसाधनों की बढ़ती मॉग एवं अनियन्त्रित खनन के कारण निकट भविष्य में इनके भण्डार समाप्त हो सकते हैं। अत: इनके संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाये जाने चाहिए–

  • लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम आदि चक्रीय संसाधन हैं, अर्थात् इन्हें एक बार प्रयोग करने के बाद गलाकर पुन: प्रयोग किया जा सकता है। अतः धातु से बनी पुरानी मशीनों के टुकड़ों को फिर से प्रयोग में लाया जाना आवश्यक है। रद्दी लोहे को सस्ता या बेकार (UPBoardSolutions.com) समझकर कम कीमत पर विदेशों को निर्यात किया जाना उचित नहीं है। इस्पात-निर्माण की तकनीक में विकास करके इससे पुन: धातु प्राप्त की जानी चाहिए। उच्च तकनीक के कारण ही जापान भारत से रद्दी (Scrap) लोहा खरीदकर उससे अच्छी किस्म का इस्पात बनाता है।
  • खनिजों की खनन तकनीकों में भी पर्याप्त सुधार की आवश्यकता है, जिससे धातुओं की बर्बादी कम हो।
  • जो धातुएँ भारत में कम उपलब्ध हैं उनके स्थान पर उन धातुओं का प्रयोग बढ़ाया जाना चाहिए जो अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए–बिजली में ताँबे के तारों के स्थान पर ऐलुमिनियम के तारों का प्रयोग किया जा सकता है।
  • लोहे का सबसे बड़ा शत्रु जंग है। पेण्ट, ग्रीस, तेल लगाकर या अन्य किसी वैज्ञानिक विधि से यदि लोहे | की रक्षा कर ली जाए तो लौह-भण्डारों का अधिक समय तक संरक्षण हो सकता है।
  • अपनी घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी भारत को खनिजों को विनाश से बचाना होगा तथा इनका निर्यात खनिज रूप में न करके संशोधित रूप में किया जाना उचित होगा।

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प्रश्न 5.
खनिज संसाधनों की दृष्टि से भारत की विश्व में क्या स्थिति है?
उत्तर :
भारत कुछ खनिज संसाधनों में बहुत सम्पन्न है। खनिज पदार्थ ऐसे संसाधन होते हैं जो भूमि के । गर्भ से गहराई से प्राप्त किए जाते हैं। इनमें से कुछ खनिज संसाधन सागरों के अध:तले में भी दबे पड़े हैं। आधुनिक वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी युग में इन खनिज संसाधनों का महत्त्वपूर्ण स्थान है तथा औद्योगिक विकास की धुरी (Pivot) कहलाते हैं। देश में अपने ही बल पर एक बड़ी शक्ति बनने की अपार क्षमताएँ विद्यमान हैं। यहाँ कुछ खनिज देश की आवश्यकता से अधिक पाए जाते हैं, जिनका विदेशों को निर्यात भी किया जाता है। दूसरी ओर कुछ खनिज ऐसे भी हैं जिनका आयात करना पड़ता है। खनिज सम्पदी तथा उनके वितरण की विशेषताओं को निम्नलिखित रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है

  • भारत आधारभूत खनिज सम्पदा अर्थात् लौह-अयस्क की पर्याप्त मात्रा सँजोए हुए है। एक अनुमान के अनुसार देश में विश्व के लौह-अयस्क के एक-चौथाई भण्डार विद्यमान हैं जो उत्तम श्रेणी के हैं। अर्थात् उनमें लोहांश की मात्रा 60% से 75% तक पाई जाती है।
  • देश में पर्याप्त मात्रा में मैंगनीज, अभ्रक (विश्व का 90%), ताँबा, बॉक्साइट आदि खनिज उपलब्ध हैं। जो देश को सुदृढ़ औद्योगिक आधार प्रदान करने में सक्षम हैं।

प्रश्न 6.
ताँबे का क्या उपयोग है ? यह भारत में कहाँ-कहाँ पाया जाता है ?
या
भारत में ताँबे के उत्पादन-क्षेत्रों का वर्णन कीजिए। [2009]
उत्तर:
उपयोग- 
ताँबा एक उपयोगी धातु है। प्राचीन काल से ही भारत में ताँबे की मूर्तियाँ, सिक्के तथा बर्तन आदि बनाये जाते रहे हैं। यह विद्युत और ताप का सुचालक होता है, इसी कारण इसका प्रयोग विद्युत तारों, रेडियो, बिजली की मोटरों, इंजनों में तथा अन्य उपकरणों के बनाने में किया जाता है। लोहे की खोज होने से पूर्व ताँबा ही सभ्यता के विकास का आधार था। भूगर्भ में यह आग्नेय तथा कायान्तरित शैलों की परतों से प्राप्त होता है। अयस्क (UPBoardSolutions.com) रूप में प्राप्त होने के कारण इसका उपयोग करने से पूर्व शोधन किया जाना
आवश्यक होता है।

भण्डार– भारत में लगभग 70 करोड़ टन ताँबे के सुरक्षित भण्डार होने का अनुमान लगाया गया है। राजस्थान (अलवर व झुंझनू), झारखण्ड (सिंहभूम), बालाघाट (मध्य प्रदेश), चित्रदुर्ग (कर्नाटक) में ताँबे की खाने हैं।

उत्पादन एवं वितरण– ताँबे के उत्पादन में भारत का स्थान बहुत पीछे है। ताँबा उत्पादक स्थान निम्नवत् हैं

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1. झारखण्ड- 
इस राज्य का ताँबा उत्पादन में प्रथम स्थान है। यहाँ ताँबा उत्पादक क्षेत्र 130 किमी की लम्बाई में ओडिशा राज्य की सीमा तक फैले हुए हैं। इस राज्य के सिंहभूम, हजारीबाग एवं संथाल परगना प्रमुख ताँबा उत्पादक जिले हैं।
2. मध्य प्रदेश- यह राज्य देश का 20% ताँबा उत्पन्न करता है। जबलपुर, बालाघाट, होशंगाबाद, सागर प्रमुख ताँबा उत्पादक जिले हैं।
3. छत्तीसगढ़- इस राज्य के बस्तर जिले से भी ताँबा निकाला जाता है।
4. आन्ध्र प्रदेश- इस राज्य में नेल्लोर, खम्माम, अनन्तपुर और गुण्टूर जिलों से ताँबा प्राप्त किया जाता है।
5. राजस्थान- इस राज्य में खेतड़ी, झुंझनू, अलवर, सिरोही, उदयपुर आदि स्थानों से ताँबा निकाला जाता है। यहाँ हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड ने खेतड़ी कॉपर प्रोजेक्ट द्वारा ताँबा उत्खनन का कार्य आरम्भ किया है।
6. कर्नाटक- इस राज्य के हासन व चित्रदुर्ग जिलों में भी ताँबा मिलता है।
7. सिक्किम, जम्मू- कश्मीर, पंजाब, पश्चिम बंगाल, मणिपुर आदि राज्य अन्य प्रमुख ताँबा उत्पादक राज्य हैं।

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प्रश्न 7.
भारत में लौह-अयस्क के भण्डारों की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
भारत में लौह-अयस्क के भण्डारों की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • लौह-अयस्क भण्डार की दृष्टि से भारत पर्याप्त धनी है। भारत में उत्तम किस्म की लौह-अयस्क धातु के पर्याप्त भण्डार हैं, जिनमें धातु का अंश 67% तक होता है।
  • भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने यहाँ पर लौह-अयस्क के भण्डार (UPBoardSolutions.com) 23 अरब टन आँके हैं। लौह-अयस्क के 50% भण्डार झारखण्ड राज्य के सिंहभूम जिले तथा ओडिशा राज्य के क्योंझर, बोनाई, सुन्दरगढ़ और मयूरगंज क्षेत्रों में पाये जाते हैं। लौह-अयस्क का यह क्षेत्र विश्व का सबसे बड़ा तथा सम्पन्न क्षेत्र है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उन दो खनिजों के नाम बताइए, जिनमें भारत धनी है और उन दो खनिजों के नाम भी बताइए जिनका भारत में अभाव है।
उत्तर :
भारत लौह-अयस्क, मैंगनीज और अभ्रक में धनी है और ताँबा, सोना और जस्ता खनिजों का भारत में अभाव है।

प्रश्न 2.
कोलार की खानें किसलिए प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
कर्नाटक राज्य में स्थित कोलार की खाने स्वर्ण-उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 3.
किस खनिज के उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है ?
उत्तर :
अधात्विक खनिज अभ्रक के उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है।

प्रश्न 4.
भारत के किन्हीं दो लौह उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत के दो लौह-उत्पादक क्षेत्रों के (UPBoardSolutions.com) नाम हैं–(1) क्योंझर (ओडिशा) तथा (2) बेलाडिला (छत्तीसगढ़)।

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प्रश्न 5.
मैंगनीज को किस प्रकार का खनिज कहते हैं?
उत्तर :
मैंगनीज को धात्विक खनिज कहते हैं।

प्रश्न 6.
अभ्रक का उपयोग किस वस्तु में होता है ?
उत्तर :
अभ्रक का उपयोग डायनमो, बिजली की मोटरों, तार एवं टेलीफोन, रेडियो, स्टोव आदि की सामग्री, कपड़ों, पंखों, खिलौनों आदि में चमक देने के कार्यों में किया जाता है।

प्रश्न 7.
लौह-अयस्क के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर :
इस अयस्क से शुद्ध लोहा बनाकर मशीनों, जलयान, वायुयान, कल-पुर्जी आदि में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 8.
बॉक्साइट का रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
बॉक्साइट का रंग मिट्टी के समान लाल या पीला होता है।

प्रश्न 9.
खनिज संरक्षण के दो उपाय लिखिए। [2014]
उत्तर :

  • खनिजों को प्रयोग करने के बाद लोहा, ताँबा आदि को गलाकर पुन: प्रयोग करना चाहिए।
  • खनिजों की खनन तकनीकों में पर्याप्त सुधार की आवश्यकता है, जिससे धातुओं की बर्बादी न हो।

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प्रश्न 10.
मैंगनीज के दो उपयोग लिखिए। [2010, 11]
उत्तर :

  • मैंगनीज तथा ताँबे के मिश्रण से टरबाइन–ब्लेड्स बनाये जाते हैं।
  • मैंगनीज तथा काँसे के मिश्रण से जलयानों के प्रोपेलर बनाये जाते हैं।

प्रश्न 11.
धात्विक खनिजों के चार नाम लिखिए। [2015]
उत्तर :
लौह-अयस्क, मैंगनीज, निकल तथा कोबाल्ट धात्विक खनिज हैं।

प्रश्न 12.
अधात्विक खनिजों के चार नाम लिखिए।
उत्तर :
अधात्विक खनिजों के चार नाम इस प्रकार (UPBoardSolutions.com) हैं-अभ्रक, हीरा, जिप्सम और संगमरमर।

प्रश्न 13.
भारत के किन्हीं दो लौह-अयस्क उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए। [2017]
उत्तर :
गोवा व छत्तीसगढ़।

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प्रश्न 14.
भारत के किन्हीं दो ताँबा उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए। [2018]
उत्तर :

  • झारखण्ड तथा
  • मध्य प्रदेश।

बहुविकल्पीय

प्रश्न 1. लौह खनिज का एक उदाहरण है

(क) मैंगनीज
(ख) सीसा
(ग) जस्ता
(घ) ताँबा

2. हैमेटाइट का सम्बन्ध किस खनिज पदार्थ से है? [2012]

(क) ताँबा
(ख) सोना
(ग) बॉक्साइट
(घ) लौह-अयस्क

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3. बॉक्साइट किस धातु का अयस्क है? [2011]
या
बॉक्साइट सम्बन्धित है [2013]

(क) सीसा
(ख) ताँबा
(ग) जस्ता
(घ) ऐलुमिनियम

4. रानीगंज प्रसिद्ध है [2012]

(क) कोयले के लिए।
(ख) ताँबा के लिए
(ग) बॉक्साइट के लिए।
(घ) चूना-पत्थर के लिए

5. कोलार का सम्बन्ध किस खनिज से है? [2012]
या
निम्नलिखित में से कोलार किससे सम्बन्धित है? [2013, 15]

(क) ताँबा से
(ख) बॉक्साइट से
(ग) सोना से
(घ) लौह-अयस्क से

6. विश्व में सबसे अधिक अभ्रक उत्पादक देश है [2015]

(क) चीन
(ख) जापान
(ग) अमेरिका
(घ) भारत

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7. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य सर्वाधिक अभ्रक का उत्पादक है?
या
भारत में अभ्रक उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है? [2016]

(क) झारखण्ड
(ख) चेन्नई
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) छत्तीसगढ़

8. मैंगनीज के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

(क) पहला
(ख) दूसरा
(ग) तीसरा
(घ) चौथा

9. निम्नलिखित में से कौन-सी धात्विक खनिज है? [2017]

(क) अभ्रक
(ख) जिप्सम
(ग) ताँबा
(घ) हीरा

10. किस खनिज के उत्पादन में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है?

(क) मैंगनीज
(ख) लोहा
(ग) ताँबा
(घ) अभ्रक

11. बेलाडिला खदान किस खनिज के लिए महत्त्वपूर्ण है?

(क) मैंगनीज
(ख) लौह-अयस्क
(ग) अभ्रक
(घ) बॉक्साइट

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12. ‘कोलार’ सोने की खान स्थित है

(क) आन्ध्र प्रदेश में
(ख) तमिलनाडु में
(ग) कर्नाटक में
(घ) महाराष्ट्र में

13. भारत का कौन-सा शहर ‘स्टील सिटी’ कहा जाता है [2016]

(क) भिलाई
(ख) दुर्गापुर
(ग) जमशेदपुर
(घ) बोकारो

14. मैंगनीज आवश्यक है [2018]

(क) ताँबा उद्योग के लिए
(ख) लौह-इस्पात उद्योग के लिए
(ग) एल्युमिनियम उद्योग के लिए।
(घ) इनमें से किसी के लिए नहीं

उत्तरमाला

1. (क), 2. (घ), 3. (घ), 4. (क), 5. (ग), 6. (घ), 7. (क), 8. (घ), 9. (ग), 10. (घ), 11. (ख), 12. (ग), 13. (ग), 14. (ख)।

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