UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 ज्योति-जवाहर (खण्डकाव्य)

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प्रश्न 1
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य की कथावस्तु (कथानक, कथासार) संक्षेप में लिखिए। [2010, 11, 12, 13, 14, 15, 17, 18]
था
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य का कथानक राष्ट्रीय एकता के परिवेश में देश की विभिन्नताओं के बीच अभिन्नता की एक शाश्वत कड़ी के रूप में उभरकर सामने आता है।” इस कथन के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त कीजिए। [2009]
था
‘ज्योति-जवाहर’ के नायक के व्यक्तित्व के निर्माण में पूरे भारत का योगदान रहा। कथानक के आधार पर इस तथ्य को स्पष्ट कीजिए।
था
‘ज्योति-जवाहर’ की कथावस्तु (कथासार) अपने शब्दों में लिखिए। [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 16]
उत्तर
श्री देवीप्रसाद शुक्ल ‘राही’ द्वारा रचित ‘ज्योति-जवाहर’ नामक खण्डकाव्य की कथावस्तु घटनाप्रधान न होकर भावप्रधान है। इस खण्डकाव्य में भारत के निर्माता युगावतार पं० जवाहरलाल नेहरू का विराट लोकनायक का रूप चित्रित हुआ है। कवि ने सम्पूर्ण कथानक को एक ही सर्ग ‘प्रवेश’ में रचा है। कथावस्तु का सारांश निम्नवत् है–

कथानक का प्रारम्भ नायक में देवत्व और मनुजत्व के सम्मिश्रण से हुआ है। विधाता ने जवाहरलाल नेहरू के अलौकिक व्यक्तित्व का निर्माण अपनी रचना का समस्त कौशल लगाकर किया है। कवि की भव्य कल्पना है कि विधाता ने इन्हें सूर्य से ज्योति, (UPBoardSolutions.com) चन्द्रमा से सुघड़ता, हिमालय से स्वाभिमान, सागर से मन की गहराई, वायु से गति और धरती से धैर्य लेकर दिव्य पुरुष के रूप में रचा है। कवि के अनुसार नेहरू जी के व्यक्तित्व में अनेक राज्यों के महान् पुरुषों के गुणों के साथ-साथ राज्यों के सामाजिक-सांस्कृतिक गुणों का भी समावेश निम्नलिखित रूप में हुआ है

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गुजरात प्रान्त में जन्मे महात्मा गाँधी से ये कर्मयोग के सिद्धान्त की प्रेरणा पाकर जीवन के संघर्ष की प्रेरणा लेते हैं। इन्हें गाँधीजी का शुभाशीष, सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, समानता, ममता आदि के रूप में उसी प्रकार प्राप्त हुआ है, जैसे राम को वशिष्ठ का शुभाशीष प्राप्त हुआ था।
महाराष्ट्र ने उन्हें वीर शिवाजी की तलवार के रूप में शक्ति प्रदान की, जिससे वे विदेशी शक्तियों से उसी प्रकार लोहा लेते रहे; जिस प्रकार वीर शिवाजी ने औरंगजेब से लोहा लिया था।

नेहरू जी ने राजस्थान से संघर्षों में जीना सीखा तथा यहाँ के महापुरुषों से संकटों में अपने पथ से किसी भी प्रकार से विचलित न होने की शिक्षा ली। हल्दीघाटी की माटी वीर जवाहर को स्वतन्त्रता पर मिटने की भावनी देती है।

राजस्थान उन्हें भारत की सम्पूर्ण सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर (UPBoardSolutions.com) के रूप में पवित्र कला, जौहर-व्रत, स्वामिभक्ति और त्याग सौंपता है। वह राणा साँगा, कुम्भा, जयमल और महाराणा प्रताप का शौर्य तथा त्याग उनको प्रदान करता है।

सतपुड़ा राज्य भारत की अखण्डता की घोषणा करता है।

कालिदास की भावुकता, कुमारिल की विलक्षण प्रतिभा, अंगारों की भाषा वाला फकीर मोहन तथा अकबर से लड़ने वाली चाँदबीबी’ जैसी महान् विभूतियों को सतपुड़ा अपने हृदय में धारण किये हुए है। इन विभूतियों की समस्त विशेषताओं को वह नेहरू जी को समर्पित कर देता है।

बंगाल भी जवाहर पर अपना वैभवे न्योछावर करने में पीछे नहीं है। विवेकानन्द तथा दीनबन्धु ऐण्डूज की कर्मठता ने नेहरू जी को बहुत अधिक प्रभावित किया है। बंगाल प्रदेश तो नेहरू जी को बंकिम चन्द्र का राष्ट्र-प्रेम, टैगोर तथा शरत् की अमर कला, सुभाषचन्द्र बोस की देशभक्ति आदि सभी कुछ समर्पित कर गौरव का अनुभव कर रहा है।

असम अपने जंगलों, पर्वतों और नदियों की प्राकृतिक सुषमा को नेहरू जी पर वारता हुआ धन्य हो रहा है। रामायण के अनुवादक माधव कन्दली तथा मनसा नामक भक्त-कवि के गीतों ने नेहरू जी के मन को शुद्धता प्रदान की है।

बिहार गौतम बुद्ध की तपोभूमि है। यह सत्य, दया, अहिंसा, क्षमा, त्याग आदि का नन्दन वन है। महावीर स्वामी की विभूति वैशाली नेहरू जी को मानवीय गुणों के मोती अर्पित करती है।

समुद्रगुप्त की यशोगाथा आज भी विद्यमान है। समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त ने भी अपनी वीरता से भारत का मस्तक कभी झुकने नहीं दिया। कलिंग को जीतने के बाद अशोक वैराग्य-भावना से ओत-प्रोत हो गये। इस प्रदेश की ये सभी घटनाएँ नेहरू जी के व्यक्तित्व पर विशेष प्रभाव डालती हैं।

उत्तर प्रदेश अपनी कोख में वीर जवाहर को जन्म देकर धन्य है। मथुरा, वृन्दावन और अयोध्या की गली-गली में चर्चा है कि आज राम और कृष्ण ने प्रयाग में जन्म लिया है। उत्तर प्रदेश तुलसी की राममयी वाणी, सारनाथ में बुद्ध के उपदेश, कबीर की आडम्बरहीनता एवं साम्प्रदायिक सौहार्द, सूर के गीतों का उपहार लिये इस महामानव का अभिनन्दन करता है।

पंजाब भी अपनी गौरवमयी परम्परा को सौंपते हुए जननायक जवाहर के व्यक्तित्व (UPBoardSolutions.com) की अभिवृद्धि में योग दे रहा है। सिकन्दर को स्वाभिमान का पाठ पढ़ाने वाले राजा पोरस का पौरुष, गुरु नानक की वाणी आदि सब कुछ पंजाब वीर जवाहर को सौंप देता है।

कश्मीर का सौन्दर्य नेहरू जी को आकर्षित करता है तथा उन पर फूलों की वर्षा करता है।

कुरुक्षेत्र नेहरू जी को अर्जुन की संज्ञा से विभूषित करता है तथा अर्जुन से गाण्डीव उठवाकर दुर्योधन जैसे अत्याचारी व्यक्तियों को समाप्त करने का आदेश देता है।

पराधीनता के पाश में जकड़ी दिल्ली अकबर की हिन्दू-मुस्लिम एकता की ज्योति को सौंपते हुए गौरवान्वित है। वह उन्हें जहाँगीर का न्याय तथा शाहजहाँ की कलात्मक सौगात को अर्पित करती है।

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वास्तव में सम्पूर्ण भारत ने नेहरू जी को अपनी सभी निधियाँ अर्पित की हैं। यमुना अपने संगम के राजा के अभिनन्दन के लिए अपनी निधियों को न्यौछावर करने संगम तक गयी है। अत: यह कथन भी पूर्ण रूप से उपयुक्त ही है कि ज्योति-जवाहर’ के (UPBoardSolutions.com) नायक के व्यक्तित्व के निर्माण में सम्पूर्ण भारतवर्ष का योगदान रहा है। कवि नायक के व्यक्तित्व में सम्पूर्ण राष्ट्र की चेतना की झलक देखते हुए कहता है

जब लगा देखने मानचित्र, भारत न मिला तुमको पाया।
जब तुझको देखा नयनों में, भारत का चित्र उभर आया ।

प्रश्न 2
‘ज्योति-जवाहर’ का कथानक घटनाप्रधान न होकर भावप्रधान है।” इस कथन का क्या अभिप्राय है ? [2009]
था
नेहरू के व्यक्तित्व के निर्माण में किन शक्तियों का योगदान ‘ज्योति-जवाहर खण्डकाव्य के आधार पर संक्षेप में वर्णन कीजिए।
था
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य में कवि ने पंजाब के व्यक्तित्व का चित्रण किस प्रकार किया है? विस्तार से लिखिए। ‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य के आधार पर मेवाड़ के गौरव का वर्णन कीजिए।
था
‘ज्योति-जवाहर’ के आधार पर बताइए कि नेहरू के व्यक्तित्व को किन-किन व्यक्तियों ने किस रूप में प्रभावित किया? [2009, 10]
उत्तर
नेहरू जी के महान् व्यक्तित्व में भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं। (UPBoardSolutions.com) कवि के अनुसार नेहरू जी के व्यक्तित्व में अनेक राज्यों के महान् पुरुषों के गुणों के साथ-साथ राज्यों के सामाजिक-सांस्कृतिक गुणों का भी समावेश निम्नलिखित रूप में हुआ है–

गुजरात प्रान्त में जन्मे महात्मा गाँधी से ये कर्मयोग के सिद्धान्त की प्रेरणा पाकर जीवन के संघर्ष की प्रेरणा लेते हैं। इन्हें गाँधीजी का शुभाशीष, सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, समानती, ममता आदि के रूप में उसी प्रकार प्राप्त हुआ है, जैसे राम को वशिष्ठ का शुभाशीष प्राप्त हुआ था। नरसी मेहता की भक्तिमयी वाणी से इन्होंने हृदय की पवित्रता को समझा। गुजरात के ही वीर रस के कवि पद्मनाभ तथा महर्षि दयानन्द की चारित्रिक विशेषताओं का भी नेहरू जी पर विशेष प्रभाव पड़ा।

महाराष्ट्र ने उन्हें वीर शिवाजी की तलवार के रूप में शक्ति प्रदान की, जिससे वे विदेशी शक्तियों से उसी प्रकार लोहा लेते रहे; जिस प्रकार वीर शिवाजी ने औरंगजेब से लोहा लिया था। कवि रामदास की राष्ट्रीय भावना, सन्त ज्ञानेश्वर का कर्मयोग, तुकाराम और लोकनाथ के गीत तथा तिलक के ‘करो या मरो’ का उपदेश जवाहरलाल के जीवन में मूर्तिमान हो उठता है। केशवगुप्त के ओजस्वी गीत उनके हृदय में नव-चेतना को जाग्रत करते हैं।

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नेहरू जी ने राजस्थान से संघर्षों में जीना सीखा तथा यहाँ के महापुरुषों से संकटों में अपने पथ से किसी भी प्रकार से विचलित न होने की शिक्षा ली। हल्दीघाटी की माटी वीर जवाहर को स्वतन्त्रता पर मिटने की भावना दे रही है

माथे पर टीका लगा दिया, हल्दीघाटी की माटी ने।
यों मन्त्र दिया मर मिटने का, आजादी की परिपाटी ने ॥

राजस्थान उन्हें भारत की सम्पूर्ण सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर के रूप में आबू की पवित्र कला, वीर क्षत्राणियों का जौहर-व्रत, पन्ना धाय की स्वामिभक्ति और त्याग तथा मीरा का प्रेम में दीवानापन सौंपता है। वह राणा साँगा, कुम्भा, जयमल और महाराणा प्रताप (UPBoardSolutions.com) का शौर्य तथा त्याग उनको प्रदान करता है।

राजस्थान की इस वीर भावना को देखकर सतपुड़ा राज्य भारत की अखण्डता की घोषणा करता हुआ कहता है

बूढ़ा सतपुड़ा लगा कहने, हूँ दूर मगर अलगाव नहीं।
कम हुआ आज तक उत्तर से, दक्षिण का कभी लगाव नहीं ॥

नेहरू जी के दर्शन के लिए नर्मदा, ताप्ती, महानदी, कृष्णा, कावेरी आदि नदियाँ भी पूरब से पश्चिम की ओर फैली हुई थीं। महावीर और गौतम के उपदेशों से ही इन्होंने महान्-धर्म को सीखा। कम्बन की ‘रामायण’ से इन्होंने ‘हिन्दू धर्म का ज्ञान प्राप्त किया तथा रामानुजाचार्य और शंकराचार्य के दार्शनिक तत्त्वों से आत्म-ज्ञान प्राप्त किया। सतपुड़ा के सन्त अय्यर से इन्होंने सत्याग्रह का महामन्त्र प्राप्त किया है। कालिदास की भावुकता, कुमारिल की विलक्षण प्रतिभा, अंगारों की भाषा वाला फकीर मोहन तथा अकबर से लड़ने वाली चाँदबीबी’ जैसी महान् विभूतियों को सतपुड़ा अपने हृदय में धारण किये हुए है। इन विभूतियों की समस्त विशेषताओं को वह नेहरू जी को समर्पित कर देता है। यहाँ की प्रतिमाओं में भारतीय संस्कृति अपने जीवन्त रूप में विद्यमान है। भुवनेश्वर और तंजौर की प्रतिमाएँ नेहरू जी को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं।

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बंगाल भी जवाहर पर अपना वैभव न्योछावर करने में पीछे नहीं है। जहाँ बंगाल का वैभवशाली अतीत चण्डीदास तथा गोविन्ददास के मधुर गीतों को सँजोये है वहीं दूसरी ओर राधा की ममता जयदेव के गीतों में झलकती है। इनके छन्दों में गोपियों की व्याकुलता के भी दर्शन होते हैं। कृतिवास के द्वारा अनूदित रामायण व महाभारत तथा महाप्रभु चैतन्य की भक्तिपूर्ण वाणी नेहरू जी के चारित्रिक विकास में सहायक बने हैं। दौलत काजी तथा शाह जफर की गजलें नेहरू जी की वाणी में गुंजित हो रही हैं। विवेकानन्द तथा दीनबन्धु ऐण्डूज की कर्मठता ने नेहरू जी को बहुत अधिक प्रभावित किया है। बंगाल प्रदेश तो नेहरू (UPBoardSolutions.com) जी को बंकिम चन्द्र का राष्ट्र-प्रेम, टैगोर तथा शरत् की अमर कला, सुभाषचन्द्र बोस की देशभक्ति आदि सभी कुछ समर्पित कर गौरव का अनुभव कर रही है। वह कहता है

अब जो कुछ है सब अर्पित है; आँसू अंगारे औ फनी।
जीवन की लाज बचा लेना, गंगा यमुना के वरदानी।

असम अपने जंगलों, पर्वतों और नदियों की प्राकृतिक सुषमा को नेहरू जी पर वारता हुआ धन्य हो रहा है। रामायण के अनुवादक माधव कन्दली तथा मनसा नामक भक्त-कवि के गीतों ने नेहरू जी के मन को शुद्धता प्रदान की है। वैष्णव मठ की दीवारों पर निर्मित चरित-पुथी ने जन-जन को मानवता के मन्त्र का पाठ पढ़ाया है। असम की घाटियों में संगीत गूंज रहा है तथा वहाँ की हरियाली नेहरू जी का स्वागत करने के लिए मानो छलकी पड़ रही है। असम नेहरू जी का स्वागत करना चाहता है; वह कहता है

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मेरी हर धड़कन प्यासी है, तेरे चरणों के चुम्बन को ।
होती तैयार खड़ी है रे, जन-मन के स्नेह समर्पण को ।

बिहार गौतम बुद्ध की तपोभूमि है। यह सत्य, दया, अहिंसा, क्षमा, त्याग (UPBoardSolutions.com) आदि का नन्दन वन है। महावीर स्वामी की विभूति वैशाली नेहरू जी को मानवीय गुणों के मोती अर्पित करती हुई कहती है–

फिर भी दर्शन के कुछ मोती, इस आशा से ले आयी हूँ।
मोती की लाज न जाएगी, मोती के द्वारे आयी हूँ।

समुद्रगुप्त की यशोगाथा आज भी विद्यमान है। समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त ने भी अपनी वीरता से भारत का मस्तक कभी झुकने नहीं दिया। कलिंग को जीतने के बाद अशोक वैराग्य-भावना से ओत-प्रोत हो गये। इस प्रदेश की ये सभी घटनाएँ नेहरू जी के व्यक्तित्व पर विशेष प्रभाव डालती हैं। वैदिक संस्कृति के विकास में यहाँ के पुष्यमित्र शुंग का विशेष योगदान रहा है। पतंजलि के चिन्तन, बौद्धिक संस्कृति, साहित्य आदि को बिहार नेहरू जी के अभिनन्दन में अर्पित करना चाहता है।

उत्तर प्रदेश अपनी कोख में वीर जवाहर को जन्म देकर धन्य है। मथुरा, वृन्दावन और अयोध्या की गली-गली में चर्चा है कि आज राम और कृष्ण ने प्रयाग में जन्म लिया है। उत्तर प्रदेश तुलसी की राममयी वाणी, सारनाथ में बुद्ध के उपदेश, कबीर की आडम्बरहीनता एवं साम्प्रदायिक सौहार्द, सूर के गीतों का उपहार लिये इस महामानव का अभिनन्दन करता है। स्वतन्त्रता-प्राप्त करने का नाना साहब का स्वप्न वीर जवाहर को पाकर साकार (UPBoardSolutions.com) हो गया। झाँसी और बिठूर को जननायक की कार्यक्षमता पर अटल विश्वास है, मानो तात्या टोपे, जीनत महल, मोहम्मद शाह आदि के बलिदान से वीर जवाहर का आविर्भाव हुआ हो।

पंजाब भी अपनी गौरवमयी परम्परा को सौंपते हुए जननायक जवाहर के व्यक्तित्व की अभिवृद्धि में योग दे रहा है। सिकन्दर को स्वाभिमान का पाठ पढ़ाने वाले राजा पोरस का पौरुष, गुरु नानक की वाणी आदि सब कुछ पंजाब वीर जवाहर को सौंप देता है। जलियाँवाला बाग अपनी करुणा-कथा कहता हुआ नेहरू जी के हृदय में नव-चेतना का संचार करता है। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की सभ्यता का इतिहास लिये हुए पंजाब नेहरू जी के सामने श्रद्धा के सुमन अर्पित करता है।

कश्मीर का सौन्दर्य नेहरू जी को आकर्षित करता है तथा उन पर फूलों की वर्षा करता है।

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कुरुक्षेत्र नेहरू जी को अर्जुन की संज्ञा से विभूषित करता है तथा अर्जुन से गाण्डीव उठवाकर दुर्योधन जैसे अत्याचारी व्यक्तियों को समाप्त करने का आदेश देता है।

पराधीनता के पाश में जकड़ी दिल्ली मुहम्मद गोरी, चंगेज खाँ, तैमूरलंग की खूनी बरबादी की स्मृतियों को नायक को सौंपने की कल्पना में ही कम्पित हो जाती है, किन्तु अकबर की हिन्दू-मुस्लिम एकता की ज्योति को सौंपते हुए वह गौरवान्वित है। दिल्ली उन्हें जहाँगीर का न्याय तथा शाहजहाँ की कलात्मक सौगात को अर्पित करती है।

वास्तव में सम्पूर्ण भारत ने नेहरू जी को अपनी सभी निधियाँ अर्पित की हैं। यमुंना अपने संगम के राजा के अभिनन्दन के लिए अपनी निधियों को न्योछावर करने संगम तक गयी है। अतः यह कथन भी पूर्ण रूप से उपयुक्त ही है कि ‘ज्योति-जवाहर’ के नायक के व्यक्तित्व के निर्माण में सम्पूर्ण भारतवर्ष का योगदान रहा है। कवि नायक के व्यक्तित्व में सम्पूर्ण राष्ट्र की चेतना की झलक देखते हुए कहता है

जब लगा देखने मानचित्र, भारत न मिला तुमको पाया।
जब तुझको देखा नयनों में, भारत का चित्र उभर आया।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कवि श्री देवीप्रसाद राही जी (UPBoardSolutions.com) ने ‘ज्योति-जवाहर’ के कथानक के प्रतीकों के माध्यम से लाक्षणिक परिवेश में चित्रित करके, कथानक के आदि; मध्य और अन्त को एकात्मकता के सूत्र में पिरोकर, घटनाप्रधान कथानकों की घिसी-पिटी परिपाटी से हटकर, मनोवैज्ञानिक एवं भावात्मक पृष्ठभूमि के आधार पर, संवेदनशील अनुभूतियों के ताने-बाने से प्रस्तुत खण्डकाव्य के कलेवर को मौलिक स्वरूप प्रदान किया है। इसके विवेचन से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रनायक पं० नेहरू का उद्भव ही एक महान घटना है, जिससे प्रेरित होकर इस कृति का सृजन हुआ है।

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प्रश्न 3
‘ज्योति-जवाहर’ के आधार पर खण्डकाव्य के नायक पं० जवाहरलाल नेहरू का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2010, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]
था
“‘ज्योति-जवाहर’ में नेहरू का विराट् व्यक्तित्व ही भारतीय राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।” उक्त कथन की पुष्टि कीजिए। [2009, 10]
था
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य में व्यक्त राष्ट्रीय भावना पर प्रकाश डालिए। [2018]
था
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य के आधार पर पं० जवाहरलाल नेहरू का चरित्र-चित्रण आधुनिक भारत के निर्माता एवं देशप्रेमी के रूप में कीजिए।
था
‘ज्योति-जवाहर’ के नायक के विविध गुणों और उसकी प्रधान चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [2009, 10, 11, 13,14, 16]
था
‘ज्योति-जवाहर’ के नायक की किन्हीं तीन/चार व्यक्तिगत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2014]
था
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य के नायक (प्रमुख पात्र) का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2016, 18]
था
‘ज्योति-जवाहर’ के नायक के प्रेरक चरित्र का वर्णन कीजिए। [2011]
था
“ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य के नायक में देश-प्रेम, विश्व-बन्धुत्व, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तथा राष्ट्रीय भावनात्मक एकता के समन्वित दर्शन होते हैं।” इस कथन की पुष्टि संक्षेप में कीजिए।
था
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य कें जिस पात्र ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया हो, उसका चरित्र-चित्रण कीजिए। [2013, 14, 15]
उत्तर
श्री देवीप्रसाद शुक्ल ‘राही’ द्वारा रचित ‘ज्योति-जवाहर’ नामक खण्डकाव्य के नायक पंडित जवाहरलाल नेहरू हैं। प्रस्तुत खण्डकाव्य में कवि ने नायक के व्यक्तित्व को भारत की सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक, साहित्यिक, धार्मिक और ऐतिहासिक (UPBoardSolutions.com) विशिष्टताओं से समाहित करके नायक जवाहर के व्यक्तित्व में निम्नलिखित विशिष्टताओं को देखा है

(1) अलौकिक पुरुष–कवि ने जवाहरलाल नेहरू के व्यक्तित्व में अलौकिकता का समावेश किया है तथा कहा है कि वे दिव्य तत्त्वों से निर्मित अलौकिक पुरुष हैं। विधाता ने अपने रचना-कौशल से सूर्य से तेज, चन्द्रमा से सुघड़ता, हिमालय से स्वाभिमान, सागर से गम्भीरता, वायु से गति और धरती से धैर्य लेकर उनके व्यक्तित्व का निर्माण किया है–

सूरज से लेकर ज्योति, चाँद से लेकर सुघराई तन की ।
हिमगिरि से लेकर स्वाभिमान, सागर से गहराई मन की॥
लेकर मारुत से गति अबाध, धरती से ले धीरज सम्बले।।
विधि ने तुझको ही सौंप दिया, अपनी रचना का पुण्य सकल ॥

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कवि ने उनके व्यक्तित्व को राम-कृष्ण के गुणों से सम्पन्न मानकर युगावतार का स्वरूप प्रदान । किया है।

(2) गाँधीजी से प्रभावित–जवाहरलाल नेहरू महात्मा गाँधी के सच्चे अनुयायी एवं शिष्य थे। उन्हें गाँधी से सत्य, अहिंसा, उदारता, मानव-प्रेम, करुणा का आशीर्वाद उसी प्रकार प्राप्त हुआ था, जैसे राम को वशिष्ठ का शुभाशीष प्राप्त हुआ था। उन्होंने गाँधीजी के कर्म-सिद्धान्त से प्रेरणा पाकर अपने जीवन को कर्ममय बनाया है।

(3) समन्वयकारी लोकनायक-ज्योति-जवाहर’ काव्य में कवि ने उन्हें ‘संगम का राजा’ कहकर सम्बोधित किया है। उनके विराट् व्यक्तित्व में भारत के सम्पूर्ण धर्मों, संस्कृति, दर्शन, कला, साहित्य, राजनीति आदि के सभी रूपों का अपूर्व संगम मिलता है। वे (UPBoardSolutions.com) जननायक, लोकनायक एवं युगपुरुष के रूप में चित्रित किये गये हैं। भारतवर्ष के प्रत्येक प्रान्त ने अपना कुछ-न-कुछ उन पर न्योछावर किया है। नेहरू जी को युगावतार मानते हुए कवि ने इस प्रकार कहा है

मथुरा वृन्दावन अवधपुरी की, गली-गली में बात चली।
फिर नया रूप धरकर उतरा, द्वापर त्रेता का महाबली ॥

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(4) राष्ट्रीय भावों के प्रेरक–जवाहरलाल नेहरू का व्यक्तित्व भारतीयों को राष्ट्रीय भावनाओं की प्रेरणा देने वाला है। उनके व्यक्तित्व में अशोक की युद्ध–विरक्ति, बुद्ध की करुणा, महावीर की अहिंसा, प्रताप का स्वाभिमान, शिवाजीं की देशभक्ति और विवेकानन्द के आत्मदर्शन की झलक दिखाई पड़ती है। भारत का कण-कण उन्हें त्याग और बलिदान से अभिमण्डित कर रहा है। इसी भाव को व्यक्त करते हुए राही जी कहते हैं

आजादी की मुमताज जिसे, अपने प्राणों से प्यारी है।
उस पर अपनी मुमताजसहित, यह शाहजहाँ बलिहारी है ॥
उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रीय चेतना और भावात्मक एकता के दर्शन होते हैं।

(5) स्वाधीनता-सेनानी–प्रस्तुत खण्डकाव्य में कवि ने वीर जवाहर को एक उत्कृष्ट देशभक्त और अजेय स्वाधीनता-सेनानी के रूप में चित्रित किया है। महाराष्ट्र इस युगपुरुष को शिवाजी की तलवार के रूप में शक्ति सौंपता है, जिससे वे विदेशी शक्तियों से लोहा ले सकें। झाँसी और बिठूर को नेहरू की कार्यक्षमता पर अटल विश्वास है; क्योंकि उनका आविर्भाव तात्या टोपे और मुहम्मद शाह के बलिदान से हुआ है। राजस्थान इस वीर सेनानी को आन पर मिटने की अदा और संघर्षों से जूझने की मस्ती प्रदान करता है।

(6) दृढ़ पुरुष—नायक जवाहरलाल में कठिनाइयों में धैर्य धारण करने की अद्भुत क्षमता है। (UPBoardSolutions.com) उन्हें यह गुण असम की मिट्टी से प्राप्त हुआ है

काँटों की नोकों पर खिलना, मेरे जीवन की शैली है।
मेरी दिनचर्या पर्वत से, लेकर जंगल तक फैली है ॥

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जिस प्रकार नारियल का फल ऊपर से कठोर और अन्दर से कोमल होता है उसी प्रकार श्री नेहरू ऊपर से सैनिक के शरीर के समाने कठोर और अन्दर से सन्त के मन के समान कोमल हैं। इसीलिए खण्डकाव्य में राही जी ने स्वयं उनके मुख से कहलवाया है-

मुझमें कोमलता है लेकिन, कायरता मेरा मर्म नहीं ।
बैरी के सम्मुख झुक जाना, मेरे जीवन का धर्म नहीं ॥

(7) नीतिज्ञ एवं स्वाभिमानी-नेहरू जी महान् राजनीतिज्ञ हैं। यह गुण उन्हें चाणक्य से प्राप्त हुआ था, जिसके सम्मुख सिकन्दर जैसा विश्व-विजेता भी मात खा गया था। उन्होंने राजा पोरस से स्वाभिमान का पाठ पढ़ा, जिसने सिकन्दर को स्वाभिमान का पाठ सिखाया था।

(8) नवराष्ट्र के निर्माता–भारत को स्वतन्त्र कराने के पश्चात् नये राष्ट्र का निर्माण करने वालों में जवाहरलाल नेहरू का नाम अग्रगण्य है। देश का सर्वाधिक उत्थान और विकास करने के लिए उन्होंने पंचवर्षीय योजनाओं का आरम्भ किया। गुट-निरपेक्षता, निरस्त्रीकरण, विश्व शान्ति की स्थापना आदि कार्यों के परिणामस्वरूप भारत विश्व के समक्ष प्रतिष्ठित हुआ। वे भारत को जाति-पॉति के बन्धनों से मुक्त देखना चाहते थे तथा सभी धर्मों की एकता में विश्वास रखकर देश को निरन्तर प्रगति-पथ पर अग्रसर रखना चाहते

(9) विश्व-शान्ति के अग्रदूत-नेहरू जी का व्यक्तित्व महान् था। भारत के राष्ट्र-भक्तों की श्रृंखला में उनका नाम अग्रगण्य है। भारत के भाग्य-विधाता के रूप में वे भारत की धरती पर अवतरित हुए। विश्वविख्यात धीरोदात्त नायक हैं, जिन्हें देश के प्रत्येक अंचल से स्नेहाशीष प्राप्त होता है।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि जवाहरलाल लोकनायक एवं युगावतार हैं, जिनमें अहिंसा, सत्य, मानव-प्रेम, करुणा, विश्व-बन्धुत्व, शौर्य, स्वाभिमान, क्षमा आदि सभी गुण विद्यमान हैं। राष्ट्रीय भावात्मक एकता के प्रतीक के रूप में इनका व्यक्तित्व स्फटिक जैसी स्वच्छता, स्वदेशाभिमान, देश-प्रेम, विश्वबन्धुत्व एवं महान् मानवीय चेतना से ओत-प्रोत है। वस्तुतः वे भारत की आत्मा ही हैं।

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प्रश्न 4
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य के आधार पर कलिंग युद्ध (मर्मस्पर्शी प्रसंग) का वर्णन कीजिए तथा उसके परिणाम का उल्लेख कीजिए।
था
‘ज्योति-जवाहर’ में वर्णित कलिंग युद्ध की घटना और सम्राट् अशोक पर उसके प्रभाव का वर्णन कीजिए। यह भी बताइए कि इस खण्डकाव्य की कथा में इसका क्या महत्त्व है ?
या
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य की ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जिसने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया हो और क्यों ? (2015)
था
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य के आधार पर कलिंग युद्ध का वर्णन कीजिए।[2016, 17]
उत्तर
‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य में कवि श्री देवीप्रसाद शुक्ल ‘राही’ ने आधुनिक भारत के निर्माता जवाहरलाल नेहरू को भारतीय संस्कृति और इतिहास के प्रतीक रूप में चित्रित किया है। इसके लिए कवि ने भारतीय इतिहास की अनेक घटनाओं का वर्णन किया है। इस काव्य में वर्णित (UPBoardSolutions.com) घटनाओं में कलिंग युद्ध और उसके परिणाम का मेरे हृदय पर विशेष प्रभाव पड़ा है; क्योंकि इसका अति मार्मिक वर्णन किया गया है। संक्षेप में इसका प्रसंग निम्नवत् है|

कलिंग युद्ध की घटना सम्राट अशोक के शासनकाल में हुई। यह घटना हृदय को कँपा देने वाली है। इस विध्वंसकारी युद्ध में रक्त की नदियाँ बह गयी थीं, जिसमें आदमी मछलियों जैसे तैरते दिखाई दे रहे थे। इस युद्ध में अस्त्र-शस्त्रों की भयंकर ध्वनि सुनाई पड़ती थी। हर ओर त्राहि-त्राहि मची हुई थी। नरमुण्ड कटकट कर धरती पर गिर रहे थे। न जाने कितनी माताओं की गोद सूनी हो गयी थी, अगणित नारियों की माँग का सिन्दूर पुछ गया था और अनेक बहनें अपने भाइयों की मृत्यु पर बिलख रही थीं। इस प्रकार के भयानक दृश्य को देखकर सभी का हृदय करुण क्रन्दन करने लगा था।

सम्राट अशोक ने जब इतना भयंकर नरसंहार देखा तो उसका हृदय करुणा से द्रवीभूत होने लगा। उसके अन्तस्तल में दया का समुद्र हिलोरें मारने लगा। उसने यह प्रण किया कि वह अब कभी भी हिंसा न करेगा और न ही कोई युद्ध लड़ेगा। वह अपने मन में विचार करने लगा कि मेरे संकेत मात्र से न जाने कितने व्यक्ति काल के मुँह में समा गये हैं। उसका मन विचलित होने लगा। उसके हृदय में वैराग्य भाव जाग्रत हो गया। साम्राज्य (UPBoardSolutions.com) विशाल होते हुए भी वह उसे छोटा और सारहीन प्रतीत होने लगा। कवि ने अशोक की मनोदशा का वर्णन करते हुए कहा है

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सोने चाँदी का आकर्षण अब उसे घिनौना लगता था।
साम्राज्यवाद का शीशमहल कुटिया से बौना लगता था।

कलिंग युद्ध के बाद अशोक पूर्णतया अहिंसक और वैरागी बन गया था। इस युद्ध ने उसके हृदय पर गहरा आघात किया था-

जाने कैसी थी कचोट, छिन पहले जिसने जगा दिया।
हिंसा की जगह अहिंसा का, अंकुर अन्तर में जमा दिया।

कलिंग युद्ध से अशोक का हृदय इतना दु:खी हुआ कि उसने सदैव के लिए तलवार फेंक दी तथा महात्मा गौतम बुद्ध का अनुयायी हो बौद्ध भिक्षु बन गया। कवि ने अशोक की इस स्थिति का चित्रण इस प्रकार किया है-

जो कभी न हारा औरों से, वह आज स्वयं से हार गया।
भिक्षुक अशोक, राजा अशोक से, पहले बाजी मार गया ।।।

‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य में अशोक के द्वारा कलिंग युद्ध करना फिर वैराग्य पैदा हो जाना, इस सबका वर्णन खण्डकाव्य के नायक जवाहरलाल नेहरू के विचारों पर वैराग्य के प्रभाव को चित्रित करने के लिए किया गया है।

सचमुच कलिंग युद्ध और उससे प्रभावित अशोक का यह प्रसंग बड़ा ही रोमांचकारी, भावपूर्ण तथा भारतीय इतिहास की अन्यान्य घटनाओं में प्रभावकारी, प्रमुख तथा महत्त्वपूर्ण है।

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प्रस्तुत खण्डकाव्य की कथा में कलिंग युद्ध के प्रसंग का बड़ा ही महत्त्व है। इसमें एक ओर तो अशोक को युद्ध में रत दिखाया है और दूसरी ओर युद्ध की अतिशयता तथा भीषण नरसंहार से उसके हृदय को बदलते और हिंसा को छोड़कर अहिंसक बनते (UPBoardSolutions.com) दिखाया गया है। अशोक के द्वारा शान्ति और अहिंसा का सन्देश दूर-दूर तक फैलाने का वर्णन किया गया है। जवाहरलाल नेहरू भी शान्ति के अग्रदूत तथा हिंसा के विरोधी थे। अशोक से सम्बन्धित इस प्रसंग का वर्णन करके जवाहरलाल नेहरू के विचारों को अहिंसक बनाने का प्रयास कवि द्वारा किया गया है। प्रस्तुत काव्य का प्रमुख उद्देश्य जवाहरलाल नेहरू के व्यक्तित्व को उजागर करना है और इसी के लिए इस प्रसंग का वर्णन किया गया है। अत: यह प्रसंग मेरी दृष्टि में अति महत्त्वपूर्ण है।

सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली तथा प्रायोगिक एवं आन्तरिक मूल्यांकन

प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र (हल सहित)

प्रथम मासिक परीक्षा

हिन्दी-x

निर्देश—सभी प्रश्नों के उत्तर लिखने हैं। प्रश्नों के अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।

प्रश्न 1.
वाचन के अन्तर्गत कौन-कौन से विषय सम्मिलित किये जाते हैं ?
उत्तर
वाचन के अन्तर्गत निम्नलिखित नौ विषय मुख्य रूप से सम्मिलित किये जाते हैं-

  1. भाषण,
  2. वाद-विवाद,
  3. सस्वर कविता-वाचन,
  4. वार्तालाप,
  5. कार्यक्रम-प्रस्तुति,
  6. अन्त्याक्षरी,
  7. कथाकहानी या कोई घटना सुनाना,
  8. परिचय देना और परिचय प्राप्त करना तथा
  9. भावानुकूल संवाद वाचन।

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प्रश्न 2
अच्छे भाषण की चार प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर
अच्छे भाषण की चार प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं–

  1. भाषण रोचके होना चाहिए। उसमें जोश, उमंग और उत्साह भरा होना चाहिए।
  2. भाषण की भाषा प्रभावशाली व लोगों की समझ में आने वाली होनी चाहिए।
  3. भाषण के विषय को आज के जीवन से जोड़ते हुए वर्तमान उदाहरणों से पुष्ट करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे उसमें सजीवता आ जाए।
  4. भाषण देते समय कविता की पंक्तियाँ या शेर या सूक्तियाँ आदि का जरूरत के मुताबिक प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 3
आपके विद्यालय के वार्षिकोत्सव में आपके विद्यालय की एक छात्रा सुनिधि कत्थक नृत्य प्रस्तुत करेगी। आप उसका परिचय देकर मंच पर बुलाइए तथा प्रस्तुति पश्चात् टिप्पणी भी कीजिए।
उत्तर
नृत्य का नाम सुनते ही हमारा मन झूम उठता है। अंग थिरकने लगते हैं और फिर सामने शास्त्रीय नृत्य हो तो बात ही कुछ और हो जाती है। आज आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है–कत्थक नृत्य। इस नृत्य को हमारे ही विद्यालय की नवीं कक्षा की छात्रा सुनिधि प्रस्तुत करेंगी। जैसा सुन्दर नाम, वैसा ही सुन्दर काम! तो देखिए कत्थक नृत्य।।

कार्यक्रम पश्चात् टिप्पणी–मैंने कहा था—जैसा सुन्दर नाम, वैसा ही सुन्दर (UPBoardSolutions.com) काम! बहुत ही सुन्दर नृत्य था यह-मनोरम, आकर्षक और अपने-आप में सम्पूर्ण।

प्रश्न 4
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द का स्वनिर्मित वाक्य में प्रयोग कीजिए विश्वकोश और दूरस्थ
उत्तर
वाक्य-प्रयोग–विश्वकोश को सर्वाधिक प्रामाणिक सन्दर्भ-ग्रन्थ माना जाता है।
या मैं अपने दूरस्थ मित्रों से चलित दूरभाष यन्त्र द्वारा सम्पर्क रखता हूँ।

प्रश्न 5
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द से उपसर्ग व प्रत्यय अलग करके लिखिए प्रोत्साहित या प्रतिनिधित्व
उत्तर
प्रोत्साहित = प्र (उपसर्ग) + उत्साह (मूल शब्द) + इत (प्रत्यय)
या प्रतिनिधित्व = प्रति (उपसर्ग + निधि (मूल शब्द) + त्व (प्रत्यय)

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प्रश्न 6
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द का सनाम समास-विग्रह दीजिए पदकमल या सुलोचनि
उत्तर
समास-विच्छेदपद-
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 ज्योति-जवाहर (खण्डकाव्य) img-1
प्रश्न 7
निम्नलिखित पदों में से किसी एक का नियम-निर्देशपूर्वक सन्धि-विच्छेद कीजिएनिराश्रय और पतनोन्मुख
उत्तर
सन्धि-विच्छेद-
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 ज्योति-जवाहर (खण्डकाव्य) img-2

द्वितीय मासिक परीक्षा

हिन्दी-X

निर्देश सभी प्रश्नों के उत्तर लिखने हैं। सभी प्रश्नों के लिए अंक निर्धारित है।

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प्रश्न 1
उचित विकल्प का चयन करके अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए
(i) संज्ञा किसे कहते हैं?
(क) व्यक्तियों, वस्तुओं और स्थानों के गुण, संख्या और परिमाण का बोध कराने वाले शब्दों को
(ख) किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, स्थिति, गुण अथवा भाव का बोध कराने वाले शब्दों को
(ग) किसी व्यक्ति की स्थिति व गुणों को बोध कराने (UPBoardSolutions.com) वाले शब्दों को
(घ) किसी वस्तु व स्थान की स्थिति व उसके गुण-दोषों व भाव की स्थिति का बोध कराने वाले शब्दों को
उत्तर
(ख) किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, स्थिति, गुण अथवा भाव का बोध कराने वाले शब्दों को

(ii) विशेषण को उन शब्दों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है-
(क) जो शब्द पुल्लिग की विशेषता बताते हैं।
(ख) जो शब्द स्त्रीलिंग की विशेषता बताते हैं।
(ग) जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं।
(घ) जो शब्द बहुवचन की विशेषता बताते हैं।
उत्तर
(ग) जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं।

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(iii) वाच्य को परिभाषित किया जा सकता है-
(क) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कर्ता स्वयं कार्य न करके दूसरे से काम करवाता है, उसे वाच्य कहते हैं।
(ख) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कर्ता दूसरे से कार्य न करवाकर स्वयं कार्य करता है, उसे वाच्य कहते हैं।
(ग) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव, उसे वाच्य कहते हैं।
(घ) दो या दो से अधिक धातुओं के योग से बनी क्रियाओं को वाच्य कहते हैं।
उत्तर
(ग) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव, उसे वाच्य कहते हैं।

(iv) क्रिया-विशेषण की उचित परिभाषा है-
(क) वे संज्ञा शब्द जो विशेषण प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
(ख) वे सर्वनाम शब्द जो विशेषण की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
(ग) वे अविकारी शब्द जो क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
(घ) वे सम्बन्ध बोधक शब्द जो विशेषण की  विशेषता प्रकट करते हैं क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
उत्तर
(ग) वे अविकारी शब्द जो क्रिया की विशेषता (UPBoardSolutions.com) प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।

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(v) जो अव्यय शब्द वाक्य में किसी शब्द के बाद लगकर उसके अर्थ पर विशेष प्रकार का बल देते हैं, उन्हें कहते हैं-
(क)निपात
(ख)
क्रिया-विशेषण
(ग) संबंधबोधक
(घ) समुच्चयबोधक
उत्तर
(क) निपात।

प्रश्न 2
उचित विकल्प का चयन करके अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए –
1. कौन-से विकल्प में सभी शब्द भाववाचक संज्ञाएँ हैं?
(क) अमीरी, दोस्ती, संस्कार, इंसानियत
(ख) नारीत्व, दोस्त, बूढ़ा, यौवन
(ग) युवक, गुरु, शठ, नेतृत्व
(घ) वक्ता, स्वत्व, प्रयोग, सर्दी
उत्तर
(क) अमीरी, दोस्ती, संस्कार, इंसानियत।

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2. कौन-से विकल्प में सभी सर्वनाम अनिश्चयवाचक हैं?
(क) कुछ, किसी का, किन का, मैं
(ख) किसी ने, किसे, क्या, हम ।
(ग) किन्हीं ने, कोई, कुछ, जो
(घ) कोई, कुछ, किसी की, किन्हीं की
उत्तर
(घ) कोई, कुछ, किसी की, किन्हीं की।

3. कौन-से वाक्य में गुणवाचक विशेषण का प्रयोग किया गया है?
(क) मेरे पास एक काला कुत्ता है
(ख) बाज़ार से तीन किलो घी ले आओ |
(ग) उसने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया
(घ) वह लड़का कहाँ चला गया
उत्तर
(क) मेरे पास एक काला कुत्ता है।

4. अब से ऐसी बात नहीं होगी’ में क्रिया-विशेषण है
(क) ऐसी
(ख) अब से
(ग) नहीं
(घ) ऐसी बात
उत्तर
(घ) ऐसी बात।।

5. निम्नलिखित वाक्यों में सरल वाक्य है
(क) सत्य बोलो और प्रगति प्राप्त करो
(ख) सत्य बोलने वाले की सदा विजय होती है।
(ग) जो सत्य बोलते हैं उनकी सदा जय होती है।
(घ) कभी असत्य मत बोलो क्योंकि सत्य बोलना श्रेष्ठ है।
उत्तर
(ख) सत्य बोलने वाले की सदा विजय होती है।

तृतीय मासिक परीक्षा

हिन्दी-x

निर्देश-सभी प्रश्नों के उत्तर लिखने हैं। प्रश्नों के अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।

प्रश्न 1
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अति संक्षिप्त (100-150 शब्दों का) निबन्ध लिखिए—
(क) स्वदेश-प्रेम,
(ख) प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ।
उत्तर
स्वदेश-प्रेम
रूपरेखा–
(1) प्रस्तावना,
(2) देश-प्रेम की स्वाभाविकता,
(3) देश-प्रेम का अर्थ,
(4) देश-प्रेम का क्षेत्र,
(5) भारतीयों का देश-प्रेम,
(6) उपसंहार।

प्रस्तावना—ईश्वर द्वारा बनायी गयी सर्वाधिक अद्भुत रचना है ‘जननी’, जो नि:स्वार्थ प्रेम की प्रतीक है, प्रेम का ही पर्याय है, स्नेह की मधुर बयार है, सुरक्षा का अटूट कवच है, संस्कारों के पौधों को ममता के जल से सींचने वाली चतुर उद्यान रक्षिका है, जिसका नाम प्रत्येक शीश को नमन के लिए झुक जाने को प्रेरित कर देता है। यही बात जन्मभूमि के विषय में भी सत्य है। इन दोनों का दुलार जिसने पा लिया, उसे स्वर्ग का पूरा-पूरा अनुभव (UPBoardSolutions.com) धरा पर ही हो गया। इसीलिए जननी और जन्मभूमि की महिमा को स्वर्ग से भी बढ़कर बताया गया है।

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देश-प्रेम की स्वाभाविकता–प्रत्येक देशवासी को अपने देश से अनुपम प्रेम होता है। अपना देश चाहे बर्फ से ढका हुआ हो, चाहे गर्म रेत से भरा हुआ हो, चाहे ऊँची-ऊँची पहाड़ियों से घिरा हुआ हो, वह सबके लिए प्रिय होता है।

प्रात:काल के समय पक्षी भोजन-पानी के लिए कलरव करते हुए दूर स्थानों पर चले तो जाते हैं, परन्तु सायंकाल होते ही एक विशेष उमंग और उत्साह के साथ अपने-अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं। जब पशु-पक्षियों को अपने घर से, अपनी मातृभूमि से इतना प्यार हो सकता है तो भला मानव को अपनी जन्मभूमि से, अपने देश से क्यों प्यार नहीं होगा? कहा भी गया है कि माता और जन्मभूमि की तुलना में स्वर्ग का सुख भी तुच्छ है-जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।

देश-प्रेम का अर्थ-देश-प्रेम का तात्पर्य है–देश में रहने वाले जड़-चेतन सभी से प्रेम, देश की सभी झोपड़ियों, महलों तथा संस्थाओं से प्रेम, देश के रहन-सहन, रीति-रिवाज, वेशभूषा से प्रेम, देश के सभी धर्मों, मतों, भूमि, पर्वत, नदी, वन, तृण, लता सभी से प्रेम और अपनत्व रखना, उन सबके प्रति गर्व की अनुभूति करना। सच्चे देश-प्रेमी के लिए देश का कण-कण पावन और पूज्य होता है-सच्चा देश-प्रेमी वही होता है, जो देश के लिए नि:स्वार्थ भावना से बड़े-से-बड़ा त्याग कर सकता है। स्वदेशी वस्तुओं का स्वयं उपयोग करता है और दूसरों को उनके उपयोग के लिए प्रेरित करता है। सच्चा देशभक्त उत्साही, सत्यवादी, महत्त्वाकांक्षी और कर्तव्य की भावना से प्रेरित होता है।

देश-प्रेम का क्षेत्र-देश-प्रेम का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति देशभक्ति की भावना प्रदर्शित कर सकता है। सैनिक युद्ध-भूमि में प्राणों की बाजी लगाकर, राज-नेता राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त कर, समाज-सुधारक समाज का नवनिर्माण करके, धार्मिक नेता मानव-धर्म का उच्च आदर्श प्रस्तुत करके, साहित्यकार राष्ट्रीय चेतना और जन-जागरण का स्वर फेंककर, कर्मचारी, श्रमिक एवं किसान निष्ठापूर्वक अपने दायित्व का निर्वाह करके, व्यापारी मुनाफाखोरी व तस्करी का त्याग कर अपनी देशभक्ति की भावना को प्रदर्शित कर सकता है। संक्षेप में, सभी को अपना कार्य करते हुए देशहित को सर्वोपरि समझना चाहिए।

भारतीयों को देश-प्रेम–भारत माँ ने ऐसे असंख्य नर-रत्नों को जन्म दिया है, जिन्होंने असीम त्याग- भावना से प्रेरित होकर हँसते-हँसते मातृभूमि पर अपने प्राण अर्पित कर दिये। कितने ही ऋषि-मुनियों ने अपने तप और त्याग से देश की महिमा को मण्डित किया है तथा अनेकानेक वीरों ने अपने अद्भुत शौर्य से शत्रुओं के दाँत खट्टे किये हैं। वन-वन भटकने वाले महाराणा प्रताप ने घास की रोटियाँ खाना स्वीकार किया, परन्तु मातृभूमि के (UPBoardSolutions.com) शत्रुओं के सामने कभी मस्तक नहीं झुकाया। शिवाजी ने देश और मातृभूमि की सुरक्षा के लिए गुफाओं में छिपकर शत्रु से टक्कर ली और रानी लक्ष्मीबाई ने महलों के सुखों को त्यागकर शत्रुओं से लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की। भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, अशफाक उल्ला खाँ आदि न । जाने कितने देशभक्तों ने विदेशियों की अनेक यातनाएँ सहते हुए, मुख से ‘वन्देमातरम्’ कहते हुए हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे को चूम लिया।

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उपसंहार-खेद का विषय है कि आज हमारे नागरिकों में देश-प्रेम की भावना अत्यन्त दुर्लभ होती जा रही है। नयी पीढ़ी का विदेशों से आयातित वस्तुओं और संस्कृतियों के प्रति अन्धाधुन्ध मोह, स्वदेश के बजाय विदेश में जाकर सेवाएँ अर्पित करने के सजीले सपने वास्तव में चिन्ताजनक हैं। हमारी पुस्तकें भले ही राष्ट्र-प्रेम की गाथाएँ पाठ्य-सामग्री में सँजोये रहें, परन्तु वास्तव में नागरिकों के हृदय में गहरा व सच्चा राष्ट्र-प्रेम ढूंढ़ने पर भी उपलब्ध नहीं होता। हमारे शिक्षाविदों व बुद्धिजीवियों को इस प्रश्न का समाधान ढूंढ़ना ही होगा। अब मात्र उपदेश या अतीत के गुणगान से वह प्रेम उत्पन्न नहीं हो सकता। हमें अपने राष्ट्र की दशा व छवि अनिवार्य रूप से सुधारनी होगी।

प्रत्येक देशवासी को यह ध्यान रखना चाहिए कि उसके देश भारत की देशरूपी बगिया में राज्यरूपी अनेक क्यारियाँ हैं। किसी एक क्यारी की उन्नति एकांगी उन्नति है और सभी क्यारियों की उन्नति देशरूपी उपवन की सर्वांगीण उन्नति है। जिस प्रकार एक माली अपने उपवन की सभी क्यारियों की देखभाल समाने भाव से करता है उसी प्रकार हमें भी देश का सर्वांगीण विकास करना चाहिए। देश-प्रेम मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। इसे संकुचित रूप में ग्रहण न कर व्यापक रूप में ग्रहण करना चाहिए। संकुचित रूप में ग्रहण करने से विश्व-शान्ति को खतरा हो सकता है। हमें स्वदेश-प्रेम की भावना के साथ-साथ समग्र मानवता के कल्याण को भी ध्यान में रखना चाहिए।

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प्रश्न 2
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए-
महात्मा गाँधी अपना काम अपने हाथ से करने पर बल देते थे। वह प्रत्येक आश्रमवासी से आशा करते थे कि वह अपने शरीर से सम्बन्धित प्रत्येक कार्य, सफाई तक स्वयं करेगा। उनका कहना था कि जो श्रम नहीं करता है, वह पाप करता है और पाप का अन्न खाता है। ऋषि-मुनियों ने कहा है बिना श्रम किये जो भोजन करता है, वह वस्तुतः चोर है। महात्मा गाँधी का समस्त जीवन-दर्शन श्रमसापेक्ष था। उनका समस्त अर्थशास्त्र यही बताता था कि प्रत्येक उपभोक्ता को उत्पादनकर्ता होना चाहिए। उनकी नीतियों की उपेक्षा करने के परिणाम हम आज भी भोग रहे हैं। न गरीबी कम होने में आती है, न बेरोजगारी पर नियंत्रण हो पा रहा है और न अपराधों की वृद्धि हमारे वश की बात रही है। दक्षिण कोरियावासियों ने श्रमदान करके ऐसे श्रेष्ठ भवनों का निर्माण किया है, जिनसे किसी को भी ईष्र्या हो सकती है।
(क) महात्मा गाँधी प्रत्येक आश्रमवासी से क्या आशा करते थे?
(i) वह आश्रम के सभी काम स्वयं करें
(ii) वह परिश्रमशील बने ।
(iii) वह अपने शरीर से सम्बन्धित प्रत्येक कार्य स्वयं करें
(iv) वह आश्रम के कार्यों में सहयोग करें।
उत्तर
(iii) वह अपने शरीर से सम्बन्धित प्रत्येक कार्य स्वयं करें।

(ख) ऋषि-मुनियों ने किस प्रकार के व्यक्ति को चोर कहा है?
(i) जो किसी को हानि पहुँचाता है।
(ii) जो चोरी करता है।
(iii) जो बिना श्रम किये भोजन करता है।
(iv) जो असत्य भाषण करता है।
उत्तर
(iii) जो बिना श्रम किये भोजन करता है।

(ग) दक्षिण कोरियावासियों ने श्रमदान करके किस प्रकार की चीजों का निर्माण किया है?
(i) श्रेष्ठ मन्दिरों का
(ii) श्रेष्ठ भवनों का
(iii) श्रेष्ठ पुलों का ।
(iv) श्रेष्ठ बाँधों का
उत्तर
(ii) श्रेष्ठ भवनों का।

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प्रश्न 3
नीचे दिये गये चित्रों के आधार पर एक अति संक्षिप्त कहानी लिखिए-
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 ज्योति-जवाहर (खण्डकाव्य) img-3
उत्तर

तीन मित्र

एक जंगल में एक हिरन, कौआ और चूहा रहते थे। तीनों आपस में गहरे मित्र थे। तीनों साथ-साथ रहते और खाते-पीते थे। एक दिन जंगल में एक शिकारी आया। उसने अपना जाल फैला दिया। बेचारा हिरन शिकारी के फैलाये उस जाल में फँस गया। (UPBoardSolutions.com) उस समय कौआ और चूहा वहाँ नहीं थे। कौआ आया। उसने हिरन को जाल में फंसा हुआ देखा। यह देखकर वह पेड़ पर बैठकर काँव-काँव करने लगा। कौए की आवाज सुनकर चूहा भागा चला आया और उसने अपने तेज दाँतों से जाल काट दिया। इस प्रकार हिरन की जान बच गयो।।

मॉडल पेपर

केवल प्रश्न-पत्र

हिन्दी

कक्षा 10

[ निर्देश-प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।]

1.
(क) निम्नलिखित कथनों में से कोई एक कथन सत्य है, उसे पहचानकर लिखिए-
(i) ‘झूठा सच’ यशपाल का प्रसिद्ध काव्य है।
(ii) डॉ० नगेन्द्र ख्यातिप्राप्त उपन्यासकार हैं।
(iii) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद निबन्धकार थे।
(iv) ‘गबन’ बालकृष्ण भट्ट की प्रसिद्ध कृति है।
(ख) निम्नलिखित कृतियों में से किसी एक कृति के लेखक का नाम लिखिए-
(i) साहित्यालोचन
(ii) सेवासदन
(iii) कलम का सिपाही
(iv) अशोक के फूल
(ग) किसी एक रिपोर्ताज-लेखक का नाम लिखिए।
(घ) किसी एक नाटककार का नाम लिखिए।
(ङ) शुक्लोत्तर युग के किसी एक साहित्यकार का नाम लिखिए।

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2.
(क) छायावाद की किन्हीं दो रचनाओं का उल्लेख करते हुए उनके रचनाकारों के नाम लिखिए।
(ख) रामचन्द्रिका’ तथा ‘ललितललाम’ के रचयिताओं के नाम लिखिए।
(ग) भक्तिकाल के किसी एक कवि का नाम लिखिए।

3.
निम्नांकित गद्यांशों में से किसी एक के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) जब एक बार मनुष्य अपना पैर कीचड़ में डाल देता है तब फिर यह नहीं देखता कि वह
कहाँ और कैसी जगह पैर रखता है। धीरे-धीरे उन बुरी बातों में अभ्यस्त होते-होते तुम्हारी घृणा कम हो जाएगी। पीछे तुम्हें उनसे चिढ़ न मालूम होगी क्योंकि तुम यह सोचने लगोगे कि चिढ़ने की बात ही क्या है? तुम्हारा विवेक कुंठित हो जाएगा और तुम्हें भले-बुरे की पहचान न रह जाएगी। अंत में होते-होते तुम भी बुराई के भक्त बन जाओगे। अत: हृदय को उज्ज्वल और निष्कलंक रखने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि बुरी संगत की छूत । से बचो।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) लेखक ने हृदय को उज्ज्वल और निष्कलंक रखने का क्या उपाय सुझाया है ?
(ख) एक उपवन को पाकर भगवान् को धन्यवाद देते हुए उसका आनन्द नहीं लेना और बराबर इस चिन्ता में निमग्न रहना किं इससे भी बड़ा उपवन क्यों नहीं मिला, एक ऐसा दोष है, जिससे ईष्र्यालु व्यक्ति को चरित्र भी भयंकर हो उठता है। (UPBoardSolutions.com) अपने अभाव परे दिन-रात सोचते-सोचते वह सृष्टि की प्रक्रिया को भूलकर विनाश में लग जाता है और अपनी उन्नति के लिए उद्यम करना छोड़कर वह दूसरों को हानि पहुँचाने को ही अपना श्रेष्ठ कर्तव्ये समझने लगता है।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) लेखक ने ईर्ष्यालु व्यक्ति के चरित्र के भयंकर होने का क्या कारण बताया है ?

4.
निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए और काव्यसौन्दर्य भी लिखिए
(क)
निरगुन कौन देस कौ बासी ?
मधुकर कहि समुझाइ सौंह है,
बुझतिं साँच न हाँसी।।
को है जनक, कौन है जननी,
कौन नारि, को दासी ?
कैसे बरन, भेष है कैसो,
किहिं रस को अभिलाषी ?
पावैगो पुनि कियौ आपनौ,
जो रे करैगो गाँसी ?
सुनत मौन है रह्यौ बावरी,
सूर सबै मति नासी।।
(ख)
मेवाड़-केसरी देख रहा,
केवल रण का न तमाशा था।
वह दौड़-दौड़ करता था रण,
वह मान-रक्त का प्यासा था।।
चढ़कर चेतक पर घूम-घूम,
करता सेना रखवाली था।
ले महामृत्यु को साथ-साथ ।
मानो प्रत्यक्ष कपाली था।।

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5.
(क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक का जीवन-परिचय दीजिए एवं लेखक की एक रचना का नाम लिखिए
(i) रामधारी सिंह दिनकर
(ii) जयप्रकाश भारती
(iii) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक का जीवन-परिचय एवं उनकी एक रचना लिखिए–
(i) मैथिलीशरण गुप्त
(ii) रामनरेश त्रिपाठी
(iii) सूरदास

6.
निम्नलिखित का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए-
अधुनाऽपि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानं च वर्द्धयति। अत्र अनेके आचार्याः मूर्धन्याः विद्वांसः वैदिकवाङ्मयस्य अध्ययने अध्यापने च इदानीं निरताः। न केवलं भारतीयाः अपितु वैदेशिका: गीर्वाणवाण्याः अध्ययनाय अत्र आगच्छन्ति, नि:शुल्कं (UPBoardSolutions.com) च विद्यां गृहणन्ति। अत्र हिन्दू विश्वविद्यालयः, संस्कृत विश्वविद्यालय: काशी विद्यापीठम् इत्येते त्रयः विश्वविद्यालयाः सन्ति, येषु नवीनां प्राचीनानाम् च ज्ञानविज्ञान विषयाणाम् अध्ययनं प्रचलति।
अथवा
स ह द्वादशवर्ष उपेत्य चतुर्विंशतिवर्षः सर्वान्वेदानधीत्य महामना अनूचानमानी स्तब्ध एयाय तं ह पितोवाच

7.
(क) अपनी पाठ्य-पुस्तक से कंठस्थ किया गया कोई एक श्लोक लिखिए जो प्रश्न-पत्र में न आया हो।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए
(i) दाराशिकोहः कस्यां भाषायां उपनिषदाम् अनुवादम् अकारयत् ?
(ii) वातात् शीघ्रतरं किम अस्ति ?
(iii) भारतीय संस्कृतेः मूलं किम् अस्ति ?
(iv) इन्दुदर्शनेन कः वर्धते ?

8.
(क) हास्य रस की परिभाषा लिखकर उसका एक उदाहरण दीजिए।
अथवा
राम-राम कहि राम कहि, राम-राम कहि राम
तन परिहरि रघुपति विरहं राउ गयउ सुरछाम् ।।
उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त रस का नाम तथा स्थायी भाव लिखिए।
(ख) “रूपक’ अथवा ‘उपमा अलंकार की परिभाषा उदाहरण-सहित लिखिए।
(ग) रोला’ अथवा ‘सोरठा’ छन्द की परिभाषा उदाहरण-सहित लिखिए।

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9.
(क) निम्नलिखित उपसर्गों में से किन्हीं तीन के मेल से एक-एक शब्द बनाइए-
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 ज्योति-जवाहर (खण्डकाव्य) img-4
(ख) निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रत्ययों का प्रयोग करके एक-एक शब्द बनाइए-
(i) हट
(ii) पन
(iii) ता
(iv) त्व
(ग) निम्नलिखित में से किन्हीं दो में समास-विग्रह कीजिए तथा समास का नाम लिखिए
(i) स्वर्णकलश
(ii) चौमासा
(iii) जल-थल
(iv) विषधर
(घ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो के तत्सम रूप लिखिए–
(i) आँख
(ii) हाथ ,
(iii) कपूर
(iv) कान
(ङ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-
(i) चाँद
(ii) भ्रमर
(iii) समुद्र
(iv) पर्वत

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10.
(क) निम्नलिखित में से किन्हीं दो में सन्धि कीजिए और सन्धि का नाम लिखिए-
(i) प्रति + उत्तरम्
(ii) पितृ + आदेशः
(iii) तथा + एवं
(iv) महा + ओजः
(ख) निम्नलिखित शब्दों के रूप षष्ठी विभक्ति, द्विवचन में लिखिए-
(i) नदी अथवा मधु
(ii) फल अथवा मति
(ग) निम्नलिखित में से किसी एक की धातु, लकार, पुरुष तथा वचन का उल्लेख कीजिए
(i) पचेव
(ii) पश्याम
(iii) अहसाम्
(iv) पठामः
(घ) निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं दो का संस्कृत में अनुवाद कीजिए
(i) मैं प्रतिदिन स्नान करता हूँ।
(ii) तुम वीर हो।
(iii) वे लड़के दिन में कहाँ पढ़ेंगे ?
(iv) हमें देशभक्त होना चाहिए।

11.
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए
(i) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ii) भ्रष्टाचार : कारण और निवारण
(iii) पर्यावरण-प्रदूषण
(iv) विज्ञान के बढ़ते कदम
(v) स्वास्थ्य शिक्षा का महत्त्व

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12.
अपने पठित खण्डकाव्य के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक को उत्तर लिखिए
(क)
(i) “तुमुल’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) ‘तुमुल’ खण्डकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
(ख)
(i) कर्मवीर भरत’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) कर्मवीर भरत’ खण्डकाव्य के आधार पर भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ग)
(i) ‘कर्ण’ खण्डकाव्य के नायक के चरित्र का चित्रण कीजिए।
(ii) ‘कर्ण’ खण्डकाव्य की कथा संक्षेप (UPBoardSolutions.com) में लिखिए।
(घ)
(i) ‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य की कथावस्तु पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
(ii) ‘अग्रपूजा’ के प्रधान पात्र की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
(ङ)
(i) ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
(ii) ‘ज्योति-जवाहर’ खण्डकाव्य के प्रधान पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(च)
(i) मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के प्रथम सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(छ)
(i) मेवाड़-मुकुट’ के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) ‘मेवाड़-मुकुट’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ज)
(i) ‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) ‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(झ)
(i) ‘मुक्ति-दूत’ खण्डकाव्य के प्रमुख पात्र की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(ii) मुक्ति-दूत’ खण्डकाव्य का कथासार प्रस्तुत (UPBoardSolutions.com) कीजिए।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi पाठ्य-पुस्तक में संकलित लेखक और उनकी रचनाएँ

UP Board Solutions for Class 10 Hindi पाठ्य-पुस्तक में संकलित लेखक और उनकी रचनाएँ

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पाठ्य-पुस्तक में संकलित लेखक और उनकी रचनाएँ

S.No.    लेखक     –     रचना    –    विधा

1. रामचन्द्र शुक्ल – चिन्तामणि [2010, 12, 14;16] – निबन्ध

2.रामचन्द्र शुक्ल – रस-मीमांसा [2011, 13, 14, 16, 17] – आलोचना

3. रामचन्द्र शुक्ल – हिन्दी-साहित्य (UPBoardSolutions.com) को इतिहास [2010, 12] – आलोचना

4. रामचन्द्र शुक्ल – विचार-वीथी [2018] – निबन्ध-संग्रह

5. रामचन्द्र शुक्ल – त्रिवेणी [2010, 15, 17] – आलोचना

6. रामचन्द्र शुक्ल – भ्रमरगीत सार (2009) – आलोचना

7. रामचन्द्र शुक्ल – ग्यारह वर्ष का समय [2015] – कहानी

8. जयशंकर प्रसाद – भआँधी – कहानी

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9. जयशंकर प्रसाद – भआकाशदीप [2009, 11, 14] .- कहानी

10. जयशंकर प्रसाद – भुरस्कार 2015 – कहानी

11. जयशंकर प्रसाद – भइन्द्रजाल [2012, 13, 16] – कहानी

12. जयशंकर प्रसाद – भकंकाल [2013, 18] – उपन्यास

13. जयशंकर प्रसाद – भतितली [2012, 16, 17] – उपन्यास

14. जयशंकर प्रसाद – भइरावती (अपूर्ण) – उपन्यास

15. जयशंकर प्रसाद – भकामायनी – महाकाव्य ”

16. जयशंकर प्रसाद – भस्कन्दगुप्त [2011, 12] – नाटक

17. जयशंकर प्रसाद – भअजातशत्रु [2012, 15, 16] – नाटक

18. जयशंकर प्रसाद – भचन्द्रगुप्त [2009, 10, 11, 17] – नाटक

19. जयशंकर प्रसाद – भ्रुवस्वामिनी [2010, 11, 15] – नाटक

20. जयशंकर प्रसाद – भएक घूट [2015, 16, 17, 18] – नाटक

21. जयशंकर प्रसाद – भजनमेजय का नागयज्ञ [2013, 15, 17, 18] – नाटक

22. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (UPBoardSolutions.com) – भहिन्दी साहित्य विमर्श [2012, 13, 14] – आलोचना

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23. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – भविश्व-साहित्य – लोचना

24. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – भपंचपात्र [2011, 14, 16, 17] – निबन्ध

25. पदुमलाले पुन्नालाल बख्शी – भपद्मवन [2012, 15] – निबन्ध

26. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – भप्रबन्ध पारिजात [2011, 13, 14] – निबन्ध

27. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – भकुछ बिखरे पन्ने [2010, 11, 13, 17] – निबन्ध

28. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – भक्या लिखें – निबन्ध

29. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – भमकरन्द बिन्दु [2011, 16, 18] – निबन्ध

30. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – भझलमला [2011] – कहानी

31. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – साद साहित्य [2011, 14] – निबन्ध

32. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भबापूजी के कदमों में – निबन्ध

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33. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भसंस्कृति का अध्ययन – निबन्ध

34. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भचम्पारन के महात्मा गाँधी, – संस्मरण

35. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – खादी का अर्थशास्त्र

36. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भमेरी यूरोप यात्रा [2012, 15] – यात्रावृत्त

37. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भमेरी आत्मकथा – आत्मकथा

38. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भशिक्षा और संस्कृति [2010, 11, 14, 16] निबन्ध

39. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भभारतीय शिक्षा [2011, 14] – निबन्ध

40. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद – भाँधीजी (UPBoardSolutions.com) की देन [2016] – निबन्ध

41. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भसंस्कृति के चार अध्याय [2010, 11, 12] दर्शन

42. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भअर्द्धनारीश्वर [2009, 12, 13, 14, 16, 18] निबन्ध

43. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भबट-पीपल [2018] – निबन्ध

44. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भउजली आग [2009, 13, 15, 17, 18] – निबन्ध

45. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भदेश-विदेश – यात्रा-वृत्त

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46. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भमिट्टी की ओर – निबन्ध

47. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भरेती के फूल [2009, 12, 15, 17] – निबन्ध

48. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भभारतीय संस्कृति की एकता – संस्कृति ग्रन्थ

49. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – भुद्ध कविता की ओर – आलोचना

50. रामधारी सिंह दिनकर – भपरशुराम की प्रतीक्षा [2013] – खण्डकाव्य

51. रामधारी सिंह दिनकर – भराष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय एकता [2014] – आलोचना

52. भगवतशरण उपाध्याय – भखून के छींटे [2011, 13, 14, 16, 17] – निबन्ध

53. भगवतशरण उपाध्याय – भइतिहास साक्षी है। – निबन्ध

54. भगवतशरण उपाध्याय – भकुछ फीचर कुछ – एकांकी

55. भगवतशरण उपाध्याय – भइण्डिया (UPBoardSolutions.com) इन कालिदास (2017) – समालोचना

56. भगवतशरण उपाध्याय – भविश्व-साहित्य की रूपरेखा (2013) – आलोचना

57. भगवतशरण उपाध्याय – भसाहित्य और कला [2012, 15] – आलोचना

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58. भगवतशरण उपाध्याय – भकलकत्ता से पीकिंग – यात्रा-वृत्तान्त

59. भगवतशरण उपाध्याय – भसागर की लहरों पर [2011, 14] – यात्रा-वृत्तान्त

60. भगवतशरण उपाध्याय – भइँठा आम् [2011, 14, 17, 18] – | संस्मरण

61. भगवतशरण उपाध्याय – भमन्दिर और भवन [2014] – | संस्मरण

62. भगवतशरण उपाध्याय – भइतिहास के पन्नों पर [2009] ऐतिहासिक – निबन्ध

63. भगवतशरण उपाध्याय – भविश्व को एशिया की देन [2013] – निबन्ध

64. जयप्रकाश भारती – भअनन्त आकाश [2011, 16].- निबन्ध

65. जयप्रकाश भारती – भअथाह सागर [2011, 13, 14, 17] – निबन्ध

66. जयप्रकाश भारती – हिमालय की पुकार [2010, 11, 12, 14, 16, 18] – बाल-साहित्य

67. जयप्रकाश भारती – भविज्ञान की विभूतियाँ – जीवनी

68. जयप्रकाश भारती – भचलो चाँद पर चलें [2010, 13, 15, 18] – विज्ञान

69. जयप्रकाश भारती – भदुनिया रंग-बिरंगी [2016, 17] – बाल-साहित्य

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70. जयप्रकाश भारती – भबर्फ की गुड़िया [2013, 14, 17] – बाल-साहित्य

71. जयप्रकाश भारती – भभारत का संविधान – बाल-साहित्य

72. जयप्रकाश भारती – भलोकमान्य तिलक – जीवनी

73. जयप्रकाश भारती – भसरदार भगत सिंह – जीवनी

74. जयप्रकाश भारती – भहमारे गौरव के प्रतीक – जीवनी

75. जयप्रकाश भारती – भदेश हमारा देश हमारा – बाल-साहित्य

76. जयप्रकाश भारती – भउनका (UPBoardSolutions.com) बचपन यूं बीता [2018] – संस्मरण

77. जयप्रकाश भारती – भऐसे थे हमारे बापू – संस्मरण

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78. जयप्रकाश भारती – अस्त्र-शस्त्र : आदिम युग से अणु युग तक बाल-साहित्य

79. जयप्रकाश भारती – भसंयुक्त राष्ट्र संघ – बाल-साहित्य

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 जीवन-सूत्राणि (संस्कृत-खण्ड)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 जीवन-सूत्राणि (संस्कृत-खण्ड)

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अवतरणों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद

प्रश्न (1-2)
किंस्विद् गुरुतरं भूमेः किंस्विदुच्चतरं च खात् ?
किंस्विद् शीघ्रतरं वातात् किंस्विद् बहुतरं तृणात् ? ॥1॥
माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा ।।
मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात् ॥2॥ [2009, 13, 15]
उत्तर
[ किंस्विद् = क्या। गुरुतरं = अधिक भारी। उच्चतरं = ऊँचा है। खात् = आकाश से। वातात् = वायु . से। तृणात् = तिनके से।।

सन्दर्भ–प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी के संस्कृत-खण्ड के जीवन-सूत्राणि पाठ से उद्धृत है।

[विशेष—इस पाठ के समस्त श्लोकों के लिए भी यही सन्दर्भ प्रयुक्त होगा।] | प्रसंग-इन श्लोकों में यक्ष के प्रश्नों और युधिष्ठिर के उत्तरों के माध्यम से माता-पिता इत्यादि के महत्त्व को दर्शाया गया है।

अनुवाद-(यक्ष युधिष्ठिर से पूछता है) भूमि से महान् क्या है ? (UPBoardSolutions.com) आकाश से ऊँचा कौन है ? वायु से अधिक शीघ्रगामी क्या है ? तिनके से अधिक दुर्बल (क्षीण) बनाने वाली क्या है ?

(युधिष्ठिरं उत्तर देता है) पृथ्वी से अधिक भारी माता है। आकाश से अधिक ऊँचा पिता है। वायु से अधिक शीघ्रगामी मन है। तृण से अधिक दुर्बल बनाने वाली चिन्ता है।

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प्रश्न (3-4)
किंस्वित् प्रवसतो मित्रं किंस्विन् मित्रं गृहे सतः? ।
आतुरस्य च किं मित्रं किंस्विन् मित्रं मरिष्यतः ?॥3॥
सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः ।
आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ॥4॥ [2012, 17]
उत्तर
[ प्रवसतः = विदेश में रहने वाले का। सतः = होना। आतुरस्य = रोगी का। मरिष्यतः = मरते हुए का। अर्थः = धन। भिषक् = वैद्य।।

प्रसंग-इन श्लोकों में विभिन्न व्यक्तियों के मित्रों के विषय में बताया गया है।

अनुवाद (यक्ष)-प्रवास में रहने वाले का मित्र कौन है ? (UPBoardSolutions.com) घर में रहने वाले का मित्र कौन है ? ” रोगी का मित्र कौन है ? मरने वाले का मित्र कौन है ?

(युधिष्ठिर)-प्रवास में रहने वाले का मित्र या साथी धन होता है। घर में रहने वाले का मित्र पत्नी होती है। रोगी का मित्र वैद्य होता है। मरने वाले का मित्र दान होता है।

प्रश्न (5-6)
किंस्विदेकपदं धर्म्य किंस्विदेकपदं यशः?
किंस्विदेकपदं स्वर्यं किंस्विदेकपदं सुखम् ? ॥ 5 ॥
दाक्ष्यमेकपदं धर्मं दानमेकपदं यशः।
सत्यमेकपदं स्वर्यं शीलमेकपदं सुखम् ॥ 6 ॥ [2012]
उत्तर
[एकपदं = एकमात्र। दाक्ष्यम् = योग्यता, चतुरता।].

प्रसंग-इन श्लोकों में धर्म और सुखादि को परिभाषित किया गया है।

अनुवाद—( यक्ष)-एकमात्र धर्म क्या है ? एकमात्र यश क्या है ? एकमात्र स्वर्ग दिलाने वाला क्या है ? एकमात्र सुख क्या है ?

( युधिष्ठिर) –दक्षता (योग्यता) एकमात्र धर्म है। दान एकमात्र यश है। सत्य एकमात्र स्वर्ग दिलाने वाला है। सदाचार एकमात्र सुख है।

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प्रश्न (7-8)
धान्यानामुत्तमं किंस्विद् धनानां स्यात् किमुत्तमम् ?
लाभानामुत्तमं किं स्यात् सुखानां स्यात् किमुत्तमम् ? ॥7॥
धान्यानामुत्तमं दाक्ष्यं धनानामुत्तमं श्रुतम् ।
लाभानां श्रेयमारोग्यं सुखानां तुष्टिरुत्तमा ॥8॥ [2010, 11, 18]
उत्तर
[ धान्यानाम् = अन्नों में। दाक्ष्यं = चतुरता, निपुणता। (UPBoardSolutions.com) श्रुतम् = शास्त्र-ज्ञान। श्रेय = श्रेष्ठ। तुष्टिः = सन्तोष।]

प्रसंग-इन श्लोकों में अन्न, धन और सुखादि की उत्तमता पर प्रकाश डाला गया है।

अनुवाद–( यक्ष)–अन्नों में उत्तम क्या है ? धनों में उत्तम क्या है ? लाभों में उत्तम क्या है ? सुखों में उत्तम क्या है ?

( युधिष्ठिर)–अन्नों में उत्तम निपुणता है। धनों में श्रेष्ठ शास्त्र-ज्ञान है। लाभों में श्रेष्ठ नीरोगिता है। सुखों में श्रेष्ठ सन्तोष है।

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प्रश्न (9-10)
किं नु हित्वा प्रियो भवति किन्नु हित्वा न शोचति ?
किं नु हित्वार्थवान् भवति किन्नु हित्वा सुखी भवेत्? ॥9॥
मानं हित्वा प्रियो भवति क्रोधं हित्वा ने शोचति।
कामं हित्वार्थवान् भवति लोभं हित्वा सुखी भवेत् ॥10॥ [2009, 12, 16, 17, 18]
उत्तर
[ मानं = अहंकार। हित्वा = त्यागकर। शोचति = शोक करता है। कामं = इच्छा को।]

प्रसंग-इन श्लोकों में विभिन्न त्यागों के महत्त्व को दर्शाया गया है।

अनुवाद-( यक्ष )-मनुष्य क्या छोड़कर प्रिय हो जाता है ? (UPBoardSolutions.com) मनुष्य क्या छोड़कर शोक नहीं करता है ? मनुष्य क्या छोड़कर धनवान् हो जाता है ? मनुष्य क्या छोड़कर सुखी होता है ?

( युधिष्ठिर)–मनुष्य अहंकार को छोड़कर प्रिय हो जाता है। मनुष्य क्रोध को छोड़कर शोक नहीं करता है। मनुष्य इच्छा (कामना) को छोड़कर धनवान् हो जाता है। मनुष्य लोभ को छोड़कर सुखी हो जाता है।

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अतिलघु-उतरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1
भूमेः गुरुतरं किम् अस्ति ? [2011, 12, 15]
उत्तर
माता गुरुतरा भूमेः।

प्रश्न 2
खात् (आकाशात्) उच्चतरं किम् अस्ति ? [2014, 17]
या
पिता कस्मात् उच्चतरः भवति ? [2010]
उत्तर
खात् (आकाशात्) उच्चतरः पिता अस्ति।

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प्रश्न 3
वातात् शीघ्रतरं किम् अस्ति ? [2009, 10, 12, 14, 15, 16]
उत्तर
वातात् शीघ्रतरं मनः (UPBoardSolutions.com) अस्ति।।

प्रश्न 4
तृणात् बहुतरं किम् अस्ति ?
या
तृणात् का बहुतरी अस्ति ?
उत्तर
तृणात् चिन्ता बहुतरी अस्ति।

प्रश्न 5
प्रवसतो (विदेशे) मित्रं किम् अस्ति ?
उत्तर
प्रवसतो (विदेशे) मित्रम् धनम् अस्ति।

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प्रश्न 6
गृहे सतः मित्रम् किं अस्ति ? [2012, 14]
उत्तर
भार्या गृहे सर्त: मित्रम् अस्ति।

प्रश्न 7
मरिष्यतः मित्रं किम् अस्ति ?
उतर
मरिष्यत: मित्रं दानम् अस्ति।

प्रश्न 8
धनानाम् उत्तमं धनं किम् अस्ति ? [2011, 12]
उत्तर
धनानाम् उत्तमं श्रुतम् (विद्या) अस्ति।

प्रश्न 9
लाभानाम् उत्तमं किम् अस्ति ?
उत्तर
लाभानाम् उत्तमम् आरोग्यम् (UPBoardSolutions.com) अस्ति।

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प्रश्न 10
सुखानाम् उत्तमं किं स्यात् ?
उत्तर
तुष्टि; सुखानाम् उत्तमा स्यात्।।

प्रश्न 11
किं हित्वा नरः प्रियो भवति ?
उत्तर
मानं हित्वा नरः प्रियो भवति।

प्रश्न 12
नरः किं हित्वा न शोचति ?
उत्तर
नरः क्रोधं हित्वा न शोचति।

प्रश्न 13
मनुष्यः किं हित्वा सुखी भवति ?
उत्तर
मनुष्यः लोभं हित्वा सुखी भवति।

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प्रश्न 14
सर्वेषु उत्तमं धनं किम् अस्ति ?
या
धनानां उत्तमं धनं किम् अस्ति ?
उतर
श्रुतं सर्वेषु उत्तमं धनम् (UPBoardSolutions.com) अस्ति।

प्रश्न 15
आतुरस्य मित्रं किं अस्ति ? [2011, 12, 13, 14, 16]
उत्तर

आतुरस्य मित्रं वैद्यः अस्ति।

प्रश्न 16
किं त्यक्त्वा न शोचति ?
या
किं हित्वा (त्यक्त्वा) नरः न शोचति ?
उत्तर
क्रोधं त्यक्त्वा न शोचति।।

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प्रश्न 17
आतुरस्य मित्रं कः भवति ? [2015]
या
भिषक् कस्य मित्रं भवति ? [2009]
उत्तर
आतुरस्य मित्रं भिषक् भवति।

प्रश्न 18
किं नु हित्वा सुखी भवेत् ?
उत्तर
लोभं हित्वा सुखी भवेत्।।

प्रश्न 19
किंस्वित् शीघ्रतरं वातात किं स्विद बहुतरं तृणात ?
उत्तर
मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता (UPBoardSolutions.com) बहुतरी तृणात्।।

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अनुवादात्मक

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 जीवन-सूत्राणि (संस्कृत-खण्ड) img-1
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 जीवन-सूत्राणि (संस्कृत-खण्ड) img-2

व्याकरणत्मक

प्रश्न 1
निम्नलिखित शब्दों के विभक्ति और वचन बताइए-
तृणात्, मित्रम्, धनानाम्, प्रियः, कामम्, वातात्, भूमेः, गृहे, आतुरस्य।
उत्तर
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प्रश्न 2
‘मृ’ धातु के लृट् लकार तथा ‘भू धातु के विधिलिङ् लकार के तीनों पुरुषों और वचनों के रूप लिखिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 9 जीवन-सूत्राणि (संस्कृत-खण्ड) img-4

प्रश्न 3
निम्नलिखित शब्दों के धातु, लकार, पुरुष एवं वचन बताइए-
भवेत्, मरिष्यतः, स्यात्, शोचति।।
उत्तर
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श्लोक-लेवन

ध्यातव्य–यहाँ पाठ्य-पुस्तक से चुनकर कुछ श्लोक दिये जा रहे हैं। छात्रों को इन्हें कण्ठस्थ कर इनके शुद्ध लेखन का अभ्यास करना चाहिए।

  1.  रे रे चातक! सावधानमनसा मित्र! क्षणं श्रूयताम् ।
    अम्भोदा बहवो वसन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः ॥
  2. केचिद वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसथां गर्जन्ति केचिद वृथा।
    यं यं पश्यसि तस्य तस्य (UPBoardSolutions.com) पुरतो मा ब्रूहि दीनं वचः ॥
  3. त्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं,
    भास्वानुदेष्यति हसिष्यति पङ्कजालिः।
    इत्थं विचिन्तयति कोशगते द्विरेफे,
    हा हन्त! हन्त! नलिनीं गज उज्जहार ॥
  4. उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् ।
    वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥
  5. अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः ।
    अमुखः स्फुटवक्ता च यो जानाति स पण्डितः ॥
  6. सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
    सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत् ॥
  7. माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा ।
    मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात् ॥
  8. सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः ।
    आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ॥
  9. मानं हित्वा प्रियो भवति क्रोधं हित्वा न शोचति ।।
    कामं हित्वार्थवान् भवति लोभं  हित्वा सुखी भवेत् ॥

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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 (Section 3)

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 जल संसाधन (अनुभाग – तीन)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Social Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 जल संसाधन (अनुभाग – तीन).

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बहु-उद्देशीय परियोजना का अर्थ एवं उद्देश्य लिखिए। भारत के आर्थिक विकास में बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के योगदान को लिखिए। [2013]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना से आप क्या समझते हैं? उसके चार उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए। [2014, 17]
या

बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के छः उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। [2018]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना के उद्देश्य एवं महत्त्व का वर्णन कीजिए। [2014]
या

बहुउद्देशीय योजनाओं से आप क्या समझते हैं ? [2010]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना के चार कार्यों का वर्णन कीजिए। [2011]
या

भारत के किन्हीं तीन बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाओं के महत्त्वों का उल्लेख कीजिए। [2013]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना क्या है? इसके किन्हीं पाँच लाभों की विवेचना कीजिए। [2013, 17]
या

बहु-उद्देशीय परियोजना के लाभों पर प्रकाश डालिए। [2011, 13]
या

बहु-उद्देशीय घाटी परियोजना के तीन महत्त्व बताइट। [2015]
उत्तर :
बहु-उद्देशीय परियोजनाएँ वे नदी-घाटी परियोजनाएँ हैं, जिनसे एक ही समय में अनेक उद्देश्यों की पूर्ति होती है। इन योजनाओं को बहुमुखी योजनाएँ भी कहा जाता है। इनसे होने वाले विविध लाभों और देश के आधुनिक विकास में योगदान के कारण इन्हें ‘आधुनिक भारत के मन्दिर’ कहा जाता है। देश के सर्वांगीण आर्थिक विकास एवं क्षेत्रीय नियोजन के लिए बहु-उद्देशीय या बहुध्येयी योजनाओं को क्रियान्वित किया गया है। (UPBoardSolutions.com) इन योजनाओं का तात्पर्य ऐसी योजनाओं से है जिनका उद्देश्य एक-से-अधिक समस्याओं का समाधान करना होता है। इसीलिए इन्हें बहुध्येयी योजनाएँ कहा जाता है। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् देश में खाद्यान्न एवं औद्योगिक उत्पादन में क्रान्तिकारी परिवर्तन के लिए इन योजनाओं को आरम्भ किया गया था। इन योजनाओं का प्रारूप संयुक्त राज्य अमेरिका की ‘टेनेसी नदी-घाटी योजना के आधार पर तैयार किया गया है। भारत में बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाएँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं—(क) सिंचाई परियोजनाएँ तथा (ख) जल-विद्युत परियोजनाएँ।

उद्देश्य (कार्य)-बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाओं के प्रमुख उद्देश्य (कार्य) निम्नलिखित हैं

  • जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन करना।
  • बाढ़ों पर नियन्त्रण करना।
  • सिंचाई हेतु नहरों का निर्माण एवं विकास करना।
  • मत्स्य-पालन करना।
  • भू-क्षरण पर प्रभावी नियन्त्रण करना।
  • उद्योग- धन्धों का विकास करना।
  • आन्तरिक जल-परिवहन का विकास करना।
  • दलदली भूमियों को सुखाना।
  • शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करना।
  • प्राकृतिक सौन्दर्य तथा मनोरंजन व पर्यटन स्थलों का विकास करना।
  • क्षेत्रीय नियोजन तथा उपलब्ध संसाधनों का पूर्ण और समुचित उपयोग करना।
  • पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था करना।

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देश के आर्थिक विकास में योगदान (महत्त्व)/लाभ

बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के अन्तर्गत देश की सर्वांगीण उन्नति एवं विकास में उपयोगी होने के कारण सभी प्रमुख तथा महत्त्वपूर्ण नदियों पर बाँध बनाये गये हैं तथा जल का उपयोग एक साथ कई उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाने लगा है। इन परियोजनाओं से जो लाभ उठाये जा रहे हैं, उनका विवरण अग्रलिखित है–

1. सिंचाई- नदियों पर बाँध बनाकर उसके पीछे जलाशय में जल (UPBoardSolutions.com) संचित कर लिया जाता है। इससे शुष्क ऋतु में सिंचाई के लिए जल प्राप्त होता है। राजस्थान में सतलुज नदी के जल का प्रयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। सिंचाई सुविधाओं के विकास एवं विस्तार से कृषि-योग्य क्षेत्रफल तथा भूमि की उत्पादकता में वृद्धि हुई है तथा एक-फसली क्षेत्र बहु-फसली क्षेत्र में परिणत हो गये हैं।

2. बाढ़-नियन्त्रण- 
विनाशकारी बाढ़ों के लिए कुख्यात नदियों पर बाँध बनाकर इन परियोजनाओं से बाढ़-नियन्त्रण सम्भव हुआ है। अब दामोदर तथा कोसी नदियाँ ‘शोक की नदियाँ नहीं रहीं। अब वे आर्थिक विकास के लिए वरदान बन गयी हैं।

3. जल-विद्युत उत्पादन- 
नदियों पर बाँध बनाकर उनके जल को ऊँचाई से गिराकर बड़ी-बड़ी टर्बाइनों की सहायता से जल-विद्युत का उत्पादन किया जाता है। जलविद्युत जीवाश्म ईंधनों से उत्पन्न तापीय ऊर्जा की अपेक्षा प्रदूषणरहित, स्वच्छ और सतत शक्ति का साधन होती है।

4. वन-रोपण- 
नदी-घाटी में वन-रोपण किया जाता है। इससे पारिस्थितिकी का सन्तुलन कायम होता है। वन-भूमि में वन्य-जीवों को निरापद आश्रय-स्थल प्राप्त होता है। वन क्षेत्रों में उगी हरी-भरी घासे पशुपालन को प्रोत्साहित करती हैं।

5. नौकारोहण- 
बाँध से निकाली गयी नहरों में नौ-परिवहन की सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, जो यातायात का सबसे सस्ता साधन हैं।

6. मत्स्यपालन- 
जलाशयों तथा नहरों में मछलियाँ पाली जाती हैं, उनके बीज तैयार (UPBoardSolutions.com) किये जाते हैं और उनकी बिक्री से आर्थिक लाभ कमाया जाता है।

7. मृदा-संरक्षण- 
मिट्टी का अपरदन नियन्त्रित होता है तथा उसका संरक्षण सम्भव होता है।

8. पर्यटन और मनोरंजन- 
ये परियोजनाएँ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र होती हैं; क्योंकि खाली ‘ पड़ी भूमि पर सुन्दर पार्क, उद्यान आदि का विकास किया जाता है, जो इसके प्राकृतिक सौन्दर्य में वृद्धि कर देते हैं।

9. उद्योग-धन्धों का विकास- 
उद्योग-धन्धों का विकास सस्ती ऊर्जा-शक्ति की उपलब्धता पर निर्भर करता है। बहुध्येयी परियोजनाओं के विकास से उद्योगों को सस्ती जलविद्युत शक्ति के साथ-साथ स्वच्छ जल भी उपलब्ध हो जाता है।

यद्यपि बहु-उद्देशीय परियोजना के प्रमुख उद्देश्य सिंचाई, जल-विद्युत उत्पादन तथा बाढ़-नियन्त्रण हैं, तथापि इनसे अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। जब एक बहु-उद्देशीय परियोजना स्थापित की जाती है तो उसके द्वारा सेवित सम्पूर्ण क्षेत्र का समग्र विकास होता है। उदाहरण के लिए-दामोदर घाटी परियोजना से झारखण्ड तथा प० बंगाल राज्यों को सिंचाई, जलविद्युत, बाढ़-नियन्त्रण, मत्स्य-पालन, मृदा-संरक्षण, वन-रोपण, नौका-रोहण आदि के लाभ प्राप्त होते हैं। जल विद्युत के उत्पादन से उद्योगों को भी लाभ पहुँचता है। औद्योगिक विकास से नगरीकरण में वृद्धि होती है तथा सम्पूर्ण क्षेत्र (UPBoardSolutions.com) का आर्थिक विकास होता है। दामोदर घाटी परियोजना के कारण सम्पूर्ण दामोदर घाटी क्षेत्र देश का महत्त्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र बन सका है। देश में स्थापित अन्य परियोजनाओं से भी देश के विभिन्न क्षेत्रों का आर्थिक विकास सम्भव हुआ है।

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प्रश्न 2.
भाखड़ा-नांगल बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना का विवरण दीजिए तथा उससे होने वाले लाभ भी लिखिए।
या
भारत की किसी एक बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए [2010]
(क) स्थिति, (ख) महत्त्व।
उत्तर :

भाखड़ा-नांगल बहुउद्देशीय नदी-घाटी परियोजना

स्थिति- यह भारत की सबसे बड़ी बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत सन् 1963 में पंजाब के रोपड़ नामक स्थान से 80 किमी ऊपर उत्तर की ओर, जहाँ सतलुज नदी शिवालिक श्रेणियों को काटकर सँकरी घाटी में प्रवाहित होती है, ‘भाखड़ा’ नामक गाँव के निकट एक विशाल बाँध बनाया गया है। इस बाँध के कारण नदी का जल एक विशाल जलाशय के रूप में परिवर्तित हो गया है। इस परियोजना में है 235 करोड़ का व्यय हुआ था। भाखड़ा बाँध सतलुज नदी के आर-पार 518 मीटर लम्बा तथा 226 मीटर ऊँचा है। ऊँचाई की दृष्टि से इस बाँध का विश्व में दूसरा स्थान है। जल संसाधन 305 इस बाँध में सतलुज नदी का जल एक कृत्रिम जलाशय के रूप में एकत्र किया गया है। यह कृत्रिम जलाशय ‘गोविन्द सागर’ कहलाता है, जो 80 किमी लम्बा तथा 3-4 किमी चौड़ा है। इसमें (UPBoardSolutions.com) 114 करोड़ घन मीटर जल संगृहीत किया जा सकता है। भाखड़ा से 13 किमी नीचे ‘नांगल’ नामक स्थान पर दूसरा बाँध बनाया गया है, जो 29मीटर ऊँचा, 315 मीटर लम्बा तथा 121 मीटर चौड़ा है। इस बाँध से नहरें भी निकाली गयी हैं।
UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 जल संसाधन 1
उपयोगिता/प्रमुख लाभ/उपलब्धियाँ/महत्त्व- इस परियोजना के अन्तर्गत तीन शक्तिगृह बनाये गये हैं, जिनसे 1,204 मेगावाट जलविद्युत शक्ति उत्पन्न की जाती है। भाखड़ा बाँध से 1,100 किमी लम्बी मुख्य नहरें निकाली गयी हैं। इसकी उपशाखाओं सहित कुल लम्बाई 4,370 किमी है। इन नहरों से 27 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। इस परियोजना से निकाली गयी नहरों द्वारा की गयी सिंचाई ने उत्तर-पश्चिमी भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में उत्तरोत्तर लाभ एवं वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है तथा यह एक समृद्धिशाली कृषि क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ है। पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान राज्यों की कृषि भूमि को सिंचाई का पूरा-पूरा लाभ इस परियोजना ने पहुंचाया है। इन नहरों से ही राजस्थान की सूखी तथा प्यासी धरती में हरियाली की लहर आ गयी है और खाद्यान्नों को पर्याप्त उत्पादन होने लगा है। इस परियोजना से उत्पन्न जलविद्युत ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान में उद्योग-धन्धों की स्थापना और कृषि के विकास में बहुत सहयोग दिया है। भाखड़ा-नांगल (UPBoardSolutions.com) परियोजना ने इन राज्यों में आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति के द्वार खोल दिये हैं। इस प्रकार यह परियोजना भारत की बहुमुखी प्रगति की द्योतक है।

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प्रश्न 3.
बहु-उद्देशीय नदी-घाटी योजना सिंचाई के पारम्परिक साधनों से किस प्रकार अच्छी है ? भारत के विभिन्न क्षेत्रों से उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
सिंचाई के पारम्परिक साधन नहरें, कुएँ, नलकूप और तालाब हैं। देश में सिंचाई के विकास के लिए अनेक सिंचाई परियोजनाएँ विकसित की गयी हैं, जिनसे बड़ी, मध्यम तथा लघु योजनाएँ मुख्य हैं। सिंचाई की बड़ी तथा मध्यम परियोजनाओं के अन्तर्गत देश की अनेक नदियों से नहरें निकाली गयी हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि उत्तरी राज्यों को इनसे सिंचाई की सुविधा सुलभ हुई है। दक्षिणी भारत में भी महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों से डेल्टाई क्षेत्रों में नहरें निकालकर
ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु राज्यों में सिंचाई की व्यवस्था की गयी है, किन्तु सिंचाई के लिए पारम्परिक नहरी सिंचाई परियोजनाओं की अपेक्षा बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाएँ अधिक श्रेष्ठ हैं, क्योंकि इनसे नहरी सिंचाई के अतिरिक्त निम्नलिखित अनेक लाभ प्राप्त होते हैं

1. बाढ़-नियन्त्रण एवं मृदा-संरक्षण- 
नदियों पर बाँध बनाकर जल-प्रवाह की तीव्रता को नियन्त्रित कर लिया जाता है, जिससे मृदा का संरक्षण होने के साथ-साथ बाढ़-नियन्त्रण भी सम्भव होता है।

2. सिंचाई सुविधाओं का विस्तार- 
नदियों पर बाँधों के पीछे बड़ी-बड़ी झीलें बनायी जाती हैं, जिनमें वर्षा का जल एकत्र हो जाता है। इस जल का प्रयोग शुष्क ऋतु में नहरों द्वारा सिंचाई के लिए किया जाता है।

3. जल-विद्युत का उत्पादन- 
बाँधों द्वारा संचित किये (UPBoardSolutions.com) गये जल को ऊँचाई से गिराया जाता है, जिससे जल-विद्युत का उत्पादन होता है। जल-विद्युत ऊर्जा प्राप्ति का स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त साधन है।

4. औद्योगिक विकास- 
इन परियोजनाओं से उद्योगों को सस्ती जल-विद्युत प्राप्त हो जाती है, साथ ही आवश्यक जल की आपूर्ति भी बनी रहती है।

5. जल-परिवहन सुविधा- 
इन परियोजनाओं के अन्तर्गत नदियों तथा नहरों में अन्त:स्थलीय जल-परिवहन की सुविधा भी सुलभ हो जाती है। भारी वस्तुओं के परिवहन के लिए यह सबसे सस्ता साधन है।

6. मत्स्य उद्योग का विकास- 
बाँधों के पीछे बने जलाशयों में मछलियों के बीज तैयार किये जाते हैं। तथा कुछ विशेष किस्म की मछलियों को भी पाला जाता है।

7. वन्य भूमि का विस्तार- 
बाँधों के जलग्रहण क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण किया जाता है, जिससे न केवल वन्य क्षेत्र का विस्तार होता है, वरन् मृदा अपरदन पर भी रोक लगती है।

8. सूखा-अकाल से मुक्ति- 
भारतीय जलवायु की मानसूनी प्रवृत्ति के कारण अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि होने से अकाल पड़ना सामान्य बात है। बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के अन्तर्गत जलमग्न क्षेत्रों के अतिरिक्त जल को सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भेजकर अकाल की स्थिति से बचने का प्रयास किया जा सकता है।

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प्रश्न 4.
बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजना से क्या तात्पर्य है ? रिहन्द बाँध परियोजना का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
या
रिहन्द बाँध परियोजना का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए [2014]
(a) स्थिति, (ii) प्रभावित क्षेत्र, (iii) महत्त्व।
या
रिहन्द बाँध परियोजना का निर्माण किस नदी पर हुआ है ? इससे किन राज्यों को लाभ पहुँचा है ?
उत्तर :
[संकेत-बहु-उद्देशीय परियोजना से तात्पर्य के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 का आरम्भिक भाग देखें।

रिहन्द बाँध योजना

उत्तर प्रदेश राज्य का गौरव कही जाने वाली इस बहु-उद्देशीय परियोजना को ‘गोविन्द वल्लभ सागर परियोजना’ के नाम से भी जाना जाता है। यह इस राज्य की एकमात्र सबसे बड़ी तथा महत्त्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना का निर्माण सोन नदी की सहायक रिहन्द नदी पर (UPBoardSolutions.com) मिर्जापुर जिले से 161 किमी दक्षिण में मिर्जापुर जनपद के पिपरी नामक स्थान पर किया गया है। यह बाँध 930 मीटर लम्बा, 70 मीटर चौड़ा तथा 92 मीटर ऊँचा है। इस बाँध के पीछे की ओर गोविन्द वल्लभ सागर नामक विशाल जलाशय का निर्माण किया गया है। इसका क्षेत्रफल 300 वर्ग किमी है। यह मानव द्वारा निर्मित सबसे बड़ी झील है, जिसका प्रमुख उद्देश्य रिहन्द नदी की बाढ़ों पर नियन्त्रण करना है। इसे ‘रेणुका बहु-उद्देशीय परियोजना’ के नाम से भी जाना जाता है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रिहन्द नदी की भयंकर बाढ़ों पर नियन्त्रण पाना है। बाँध के नीचे की ओर ओबरा नामक स्थान पर छ: टरबाइन युक्त एक विशाल शक्ति-गृह बनाया गया है, जिससे 300 मेगावाट शक्ति तैयार की जा रही है। इससे 600 किमी लम्बी नहरें निकाली गयी हैं, जिनसे पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी बिहार में सिंचाई की सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। गोविन्द वल्लभ पन्त सागर के जल को सोन नदी में डालकर सोन नहर-प्रणाली के माध्यम से बिहार के चम्पारन, दरभंगा, मुजफ्फरपुर
आदि जिलों में भी 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधाएँ प्रदान की गयी हैं।

यह एक जल-विद्युत शक्ति उत्पादन परियोजना है, जिसके विद्युत शक्ति-गृहों से 3 लाख किलोवाट विद्युत शक्ति उत्पादित की जा रही है। इस शक्ति का उपयोग नलकूप चलाने में किया जाता है तथा मुगलसराय एवं गया के बीच रेलगाड़ियों का संचालन किया जाता है। इस परियोजना से निकाली गयी नहरों से 22 लाख हेक्टेयर तथा नलकूपों द्वारा 34 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा रही है। फलस्वरूप सम्बन्धित क्षेत्रों में खाद्यान्नों एवं अन्य कृषि उत्पादों में पर्याप्त वृद्धि हुई है। इस परियोजना द्वारा अनेक नवीन उद्योगों की स्थापना

करने में सहायता मिली है। मिर्जापुर-सोनभद्र में ऐलुमिनियम, रसायन एवं सीमेण्ट उद्योग तथा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सीमेण्ट, सूती वस्त्र, ऐलुमिनियम, काँच, रासायनिक उर्वरक तथा चीनी बनाने के कारखाने स्थापित किये गये हैं। सोन नदी-घाटी को नहरों द्वारा गंगा नदी से जोड़कर जल-यातायात की सुविधाएँ भी विकसित की जा रही हैं। इस परियोजना की अन्य उपलब्धियों में बाढ़-नियन्त्रण, वृक्षारोपण, मत्स्यपालन, भू-संरक्षण, खनिजों का अधिकाधिक उपयोग तथा मनोरंजन एवं भ्रमण-केन्द्रों का विकास करना है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार (UPBoardSolutions.com) तथा पूर्वी मध्य प्रदेश के समग्र विकास में रिहन्द परियोजना मील का पत्थर सिद्ध हुई है।

प्रश्न 5.
बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजना से आप क्या समझते हैं ? दामोदर घाटी परियोजना का
वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत दीजिए—(क) स्थिति, (ख) उपलब्धियाँ। [2013]
या
दामोदर नदी-घाटी परियोजना की स्थिति पर प्रकाश डालिए। इससे होने वाले किन्हीं चार लाभों की विवेचना कीजिए। [2013]
या

दामोदर घाटी परियोजना की स्थिति एवं महत्त्वों का वर्णन कीजिए। [2013]
या

दामोदर घाटी परियोजना के तीन महत्त्वों पर प्रकाश डालिए। [2015, 16]
उत्तर :
(संकेत-बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजना से तात्पर्य’ के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 का आरम्भिक भाग देखिए।

दामोदर घाटी परियोजना

स्थिति- दामोदर (हुगली की सहायक नदी) नदी का उद्गम स्रोत छोटा नागपुर की पहाड़ियाँ हैं, जो 610 मीटर ऊँची हैं। इस नदी की लम्बाई 530 किमी है, जो झारखण्ड में 290 किमी बहने के उपरान्त पश्चिम बंगाल राज्य में 240 किमी बहकर हुगली नदी से मिल जाती है। इसकी ऊपरी घाटी में वर्षा ऋतु में अत्यधिक वर्षा होने से भयंकर बाढ़े आती हैं, जो नदी के किनारों की मिट्टी काटकर बहा ले जाती हैं। इससे करोड़ों रुपये की हानि (UPBoardSolutions.com) उठानी पड़ती है। दामोदर नदी अपनी भयंकर बाढ़ों के लिए कुख्यात थी। इसकी बाढ़ से लगभग 18,000 वर्ग किमी भूमि प्रभावित होती थी। इसी कारण इस नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था।

सन् 1948 ई० में भारत सरकार ने दामोदर घाटी के सर्वांगीण विकास हेतु दामोदर घाटी निगम (Damodar Valley Corporation) की स्थापना की। इस निगम का मुख्य उद्देश्य दामोदर घाटी का आर्थिक विकास करना तथा सिंचाई, जल-विद्युत की सुविधाओं में वृद्धि कर बाढ़ों पर नियन्त्रण पानी एवं अन्य उद्देश्यों को पूर्ण करना है, जिससे इस प्रदेश का बहुमुखी आर्थिक विकास हो सके।

दामोदर घाटी परियोजना के अन्तर्गत आठ बाँध एवं एक बड़े अवरोधक को बनाया गया है। दामोदर नदी पर पंचेत पहाड़ी, अय्यर एवं बम बाँध; बाराकर नदी पर मैथान, बाल पहाड़ी एवं तिलैया बाँध; बोकारो नदी पर बोकारो बाँध तथा कोनार नदी पर कोनार बाँध बनाये जाने प्रस्तावित हैं, जिनमें चार बाँध–तिलैया, कोनार, पंचेत पहाड़ी तथा मैथान बन चुके हैं। एक बड़ा अवरोधक दुर्गापुर के समीप निर्मित किया गया है, जिसमें लगभग 2,500 किमी लम्बी नहरें एवं उनकी शाखाएँ निकाली गयी हैं। इन बाँधों से बाढ़ का जल रोका गया है तथा सभी बाँधों से जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है। यह योजना केन्द्रीय सरकार, बिहार एवं पश्चिम बंगाल राज्य सरकारों के सहयोग से क्रियान्वित की गयी है। यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी परियोजना है।

उपयोगिता/प्रमुख लाभ/उपलब्धियाँ/महत्त्व- इस परियोजना से दामोदर एवं उसकी सहायक नदियों में आने वाली बाढ़ों पर नियन्त्रण हुआ है। लगभग 74 लाख हेक्टेयर भूमि पर नित्यवाही सिंचाई की जा रही है, जिससे अतिरिक्त जूट एवं खाद्यान्नों का उत्पादन हो रहा है। कोलकाता एवं पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों के बीच 145 किमी लम्बा एक नाव्य जलमार्ग का निर्माण हुआ है। बाँधों में नावें चलाने, तैरने एवं मत्स्य की सुविधाएँ हैं। घरेलू कार्यों के लिए शुद्ध जल की प्राप्ति के साथ-साथ लगभग 1,120 वर्ग किमी क्षेत्र में पेयजल की समस्या का निराकरण हुआ है। छोटा नागपुर के उजाड़ पठारी क्षेत्रों में भू-अपरदन को रोकने के लिए वृक्षारोपण, पशुओं के लिए चारा, रेशम के कीड़ों के लिए शहतूत के वृक्ष तथा उद्योगों के लिए लाख एवं बाँस की उपलब्धि हुई है। लगभग 3 लाख किलोवाट जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे झारखण्ड, कोलकाता, पटना, जमशेदपुर, डालमिया नगर आदि शहरों के औद्योगीकरण में तीव्रता आयी है।

दामोदर पाटी निगम से पश्चिम बंगाल में बर्दवान, हावड़ा, हुगली एवं बांकुड़ा जिलों में 4.40 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा रही है। इस परियोजना के द्वितीय चरण में बम, अय्यर, बोकारो एवं बाल पहाड़ी स्थानों पर जलविद्युत शक्ति के लिए बाँध बनाये जाने की योजना है।

इस प्रकार दामोदर घाटी परियोजना पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड राज्यों के विशाल क्षेत्र में आर्थिक तथा औद्योगिक विकास में सहायक सिद्ध हुई है। यहाँ कृषि, उद्योग, वाणिज्य, व्यापार तथा परिवहन के साधनों में क्रान्तिकारी परिवर्तन होने से आर्थिक परिवेश बदल गया है (UPBoardSolutions.com) तथा इस क्षेत्र की खनिज सम्पदा का भरपूर दोहन सम्भव हुआ है। इससे इस प्रदेश में प्रगति और विकास की लहर दौड़ गयी है। इस प्रकार यह परियोजना झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल राज्यों के सर्वांगीण विकास हेतु वरदान सिद्ध हुई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
देश के विकास में तुंगभद्रा परियोजना का महत्त्व लिखिए।
उत्तर :
तुंगभद्रा परियोजना आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों की संयुक्त परियोजना है। कृष्णा की सहायक तुंगभद्रा नदी पर 50 मीटर ऊँचा तथा 2.5 किलोमीटर लम्बा बाँध कर्नाटक के बेल्लारी जनपद के मल्लापुरम् नामक स्थान पर बनाया गया है। इससे आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों की लगभग चार लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधाएँ प्राप्त हैं। इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 126 मेगावाट है, जिससे दोनों राज्यों के उद्योगों को विद्युत प्राप्त होती है। इस योजना से मत्स्यपालन का भी विकास हुआ है।

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प्रश्न 2.
इन्दिरा गांधी नहर परियोजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
‘इन्दिरा गांधी नहर परियोजना’ पहले राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जानी जाती थी। यह विश्व की विशालतम नहर परियोजना है। यह नहर पंजाब में सतलुज एवं व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बॉध से निकाली गयी है। हरिके बाँध से रामगढ़ तक इस नहर की कुल लम्बाई 649 किमी है। बाँध के पीछे निर्मित जलाशय में 6,90,000 हेक्टेयर मीटर जल एकत्र हो सकती है। इससे व्यास नदी के जल को सतलुज नदी में लाने में सहायता प्राप्त हुई है। (UPBoardSolutions.com) इसी जल को पश्चिमी राजस्थान नहर में ले जाया जाता है। इसके द्वारा उत्तर-पश्चिमी राजस्थान, गंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर तथा जैसलमेर जिलों में सिंचाई की जाती है। यह नहर पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के 14.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है। इन सुविधाओं के कारण राजस्थान का शुष्क मरुस्थलीय भाग पंजाब और हरियाणा की भाँति ‘अन्न का भण्डार’ बन सकेगा। अनेक कृषि तथा पशु-आधारित उद्योगों की भी स्थापना होगी।

प्रश्न 3.
जल एवं भूमि संसाधन के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जल संसाधन- 
स्वच्छ जल मनुष्य की दैनिक आधारभूत आवश्यकताओं में से एक है। घरेलू कार्यों में पानी की आवश्यकता केवल पीने के लिए ही नहीं, अपितु खाना बनाने, कपड़े धोने, स्नान करने
आदि कार्यों के लिए भी पड़ती है। देश की कृषि का विकास भी जलं की सुलभता पर ही निर्भर करता है। जल द्वारा विद्युत का उत्पादन किया जाता है। नहरों व नदियों में नाव, स्टीमर आदि चलाना जल परिवहन का भी साधन है। समुद्रों में जहाजों द्वारा लम्बी-लम्बी यात्राएँ की जाती हैं तथा इनके द्वारा वस्तुओं का आयात-निर्यात किया जाता है। उद्योगों में भी जल की उत्पादन कार्य में सहायता लेनी पड़ती है।

भूमि संसाधन- किसी देश या प्रदेश के अन्तर्गत सम्मिलित भूमि को भूमि संसाधन कहते हैं। इसके अन्तर्गत कृषि भूमि, चरागाह भूमि, पोकर भूमि, वन भूमि, बंजर भूमि, परती भूमि आदि सम्मिलित की जाती हैं। मनुष्य इस उपलब्ध भूमि पर विविध प्रकार से क्रिया-कलाप करता है। (UPBoardSolutions.com) कृषि, पशुपालन, वनोद्योग, खनन-निर्माण उद्योग, परिवहन व्यापार, संचार आदि सभी का सम्बन्ध भूमि संसाधन से होता है। इस प्रकार भूमि संसाधन जल संसाधनों को आधार प्रदान करते हैं, जिनका उपयोग मनुष्य अपने क्रियाकलापों की आपूर्ति में करता है।

प्रश्न 4.
उत्तरी भारत की दो नदियों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर :
उत्तरी भारत की दो प्रमुख नदियों के नाम गंगा और यमुना हैं। उत्तरी भारत की नदियाँ हिमालय पर्वत के हिमाच्छादित शिखरों से निकलती हैं, जिनमें वर्षभर पर्याप्त जल बहता रहता है, ये नदियाँ लम्बी हैं। तथा उनके प्रवाह क्षेत्र अधिक बड़े हैं। उत्तर भारत की नदियाँ समतल व उर्वर भागों से होकर बहती हैं, इसलिए उनका जल नहरों द्वारा सिंचाई कार्य में प्रयुक्त किया जाता है। उत्तरी भारत की प्रमुख नहरें ऊपरी गंगा नहर, पूर्वी यमुना नहर तथा शारदा नहर हैं।

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प्रश्न 5.
जल की माँग किन-किन कार्यों में की जाती है ? [2009]
या
जल संसाधनों से क्या अभिप्राय है ? भारत के लिए इनका क्या महत्त्व है ?
उत्तर :
वर्षा के जल का कुछ भाग भाप बनकर वायुमण्डल में मिल जाता है, कुछ जल भूमि सोख लेती है; जिसे भूमिगत जल कहते हैं। शेष जल ढालू सतह से बहकर आगे बढ़ता रहता है, जिसे बहता हुआ जल (नदी या सरिता) कहते हैं। इस प्रकार भू-पृष्ठ के ऊपर तथा भू-गर्भ में मिलने वाले समस्त जल को जल संसाधन कहा जाता है।

भारत एक कृषिप्रधान देश है जिसकी वर्तमान आबादी 121 करोड़ है। यहाँ जल का प्रमुख उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। सिंचाई के द्वारा देश के कृषि-क्षेत्र में न केवल वृद्धि हुई है, वरन् भूमि की उत्पादकता में भी सुधार हुआ है। इससे खाद्यान्नों के उत्पादन हेतु अत्यधिक मात्रा में जल की पूर्ति होती है। जल का दूसरा उपयोग पेयजल के रूप में किया जाता है। जल परिवहन का भी एक साधन है। उद्योगों में भी जल की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार मानवीय जीवन में जल की महिमा अपरम्पार है। इसीलिए कहा जाता है कि जहाँ जल है वहीं जीवन है।

प्रश्न 6.
भारत में जलसंकट के समाधान हेतु दो सुझाव दीजिए।
उत्तर :
फसलों में सिंचाई, नगरीय एवं औद्योगिक कार्यों में बढ़ते उपयोग के कारण देश में ताजे जल की कमी बढ़ती जा रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो भविष्य में यह संकट घातक रूप ग्रहण कर सकता है। इसके लिए उपलब्ध जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग के साथ-साथ उनके संरक्षण की आवश्यकता है। इसमें जहाँ एक तरफ वर्षा के जल को संग्रहीत करने पर जोर दिया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ जल की बरबादी को रोकने, उसके अन्धाधुन्ध (UPBoardSolutions.com) उपयोग पर अंकुश लगाने तथा उसे प्रदूषण मुक्त रखने के प्रयास किये जा रहे हैं। राजस्थान के जलाभाव वाले क्षेत्रों में तो प्राचीन काल से ही वर्षा के जल को भूमिगत टैंकों में संग्रह करने की परम्परा थी। तमिलनाडु में हाल ही में इसे अनिवार्य कर दिया गया है। नरेगी के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार और नए तालाब का निर्माण, वर्षा जल संग्रह का एक प्रयास है। सिंचाई में जल के उपयोग को कम करने के लिए ‘ड्रिप सिंचाई’, ‘शुष्क कृषि’ आदि को लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल में, सरकार देश की सभी बड़ी नदियों को जोड़ने की एक महत्त्वपूर्ण परियोजना पर भी विचार कर रही है।

प्रश्न 7.
प्रदूषित जल से हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
जल-प्रदूषण का मानव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रदूषित जल से मानव में हैजा, टाइफॉइड, पेचिस व पोलियो जैसे घातक रोग होते हैं, जो बाद में महामारी का रूप धारण कर लेते हैं। इससे मानव का स्वास्थ्य तो खराब होता ही है, अनेक लोगों की मृत्यु भी हो जाती है।

प्रश्न 8.
जल प्रबंधन से क्या आशय है? इसके दो महत्त्व लिखिए। [2014]
उत्तर :
जल-प्रबंधन- 
पृथ्वी पर उपलब्ध जल-संसाधन का समझदारी एवं विवेकपूर्वक व्यय करना तथा उसका संरक्षण करना जल-प्रबंधन कहलाता है। महत्त्व-जल-प्रबंधन के दो महत्त्व निम्नवत् हैं

  • जल प्रबंधन के द्वारा उन क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराया जा सकता है जहाँ पेयजल की कमी हो।
  • उचित जल-प्रबंधन द्वारा अर्थात् जल का विवेकपूर्ण व्यय करके उसे (UPBoardSolutions.com) भविष्य के लिए संचित किया जा सकता है।

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प्रश्न 9.
नागार्जुन सागर परियोजना की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :

नागार्जुन सागर परियोजना

नागार्जुन सागर परियोजना के अन्तर्गत आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर नन्दीकोण्डा गाँव के निकट 88 मीटर ऊँचा तथा 1,450 मीटर लम्बा बाँध बनाया गया है। इससे आन्ध्र प्रदेश की 8.67 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधाएँ मिली हैं। जल-विद्युत द्वारा अनेक उद्योगों का विकास हुआ है तथा मत्स्यपालन में वृद्धि हुई है। इस परियोजना का नामकरण बौद्ध विद्वान नागार्जुन के नाम पर किया गया है। इस परियोजना में बनाये गये बाँध के पीछे, (UPBoardSolutions.com) जहाँ आज एक कृत्रिम जलाशय है, पहले अत्यन्त सुन्दर वास्तुकला के प्राचीन मन्दिर थे। यदि इन मन्दिरों को वहाँ से न हटाया गया होता तो वे जल में डूब गये होते। इसलिए इन मन्दिरों के प्रत्येक पत्थर को हटाकर नये स्थानों पर ले जाया गया, फिर उन्हीं पत्थरों से बिल्कुल पहले जैसे ही मन्दिरों का निर्माण कर दिया गया। यह परियोजना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हम आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाकर ही अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रख सकते हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक संसाधन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
जो पदार्थ मनुष्य को प्रकृति द्वारा निःशुल्क प्राप्त होते हैं, उन्हें प्राकृतिक संसाधन कहा जाता है; जैसे-मिट्टी, वायु, जल, वनस्पति आदि।

प्रश्न 2.
भाखड़ा-नांगल परियोजना किन राज्यों का संयुक्त प्रयास है ?
उत्तर :
भाखड़ा-नांगल परियोजना पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा तथा राजस्थान राज्यों का संयुक्त प्रयास है।

प्रश्न 3.
भाखड़ा बाँध के पीछे मानव-निर्मित झील का नाम लिखिए। इसमें कितना जल एकत्रित होता है?
उत्तर :
भाखड़ा बाँध के पीछे मानव-निर्मित झील का नाम ‘गोविन्द सागर जलाशय’ है। इसमें 7.8 लाख हेक्टेयर मीटर जल संचित होता है।

प्रश्न 4.
भाखड़ा बाँध किस नदी पर बनाया गया है ?
उत्तर :
भाखड़ा बाँध सतलुज नदी पर बनाया गया है।

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प्रश्न 5.
बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के तीन प्रमुख उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर :
बहुउद्देशीय परियोजनाओं के तीन प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  • जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन करना।
  • बाढ़ों पर नियन्त्रण करना।
  • सिंचाई हेतु नहरों का निर्माण एवं विकास करना।

प्रश्न 6.
इन्दिरा गांधी नहर द्वारा किन क्षेत्रों को सिंचित किया जाता है ?
उत्तर :
इन्दिरा गांधी नहर द्वारा उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के गंगानगर, (UPBoardSolutions.com) बीकानेर, चुरु, बाड़मेर तथा जैसलमेर जिलों को सिंचित किया जाता है।

प्रश्न 7.
संसार का सबसे लम्बा बाँध कौन-सा है ? यह किस नदी पर बनाया गया है ?
उत्तर :
संसार का सबसे लम्बा बाँध हीराकुड बाँध है। यह ओडिशा राज्य की महानदी पर बनाया गया है।

प्रश्न 8.
भारत की दो नदियों के नाम बताइए जिन्हें शोक सरिता’ कहा जाता था।
उत्तर :
बंगाल की दामोदर नदी तथा बिहार की कोसी नदी ‘शोक सरिता’ कहलाती थीं।

प्रश्न 9.
नेपाल के सहयोग से भारत में कौन-सी परियोजना पूरी की गयी है ?
उत्तर :
बिहार की कोसी परियोजना’ नेपाल के सहयोग से पूरी की गयी है।

प्रश्न 10.
भारत का प्रथम जल-विद्युत केन्द्र कहाँ और कब स्थापित किया गया ?
उत्तर :
सन् 1902 ई० में कर्नाटक राज्य में कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम् नामक (UPBoardSolutions.com) स्थान पर भारत का प्रथम जल-विद्युत केन्द्र स्थापित किया गया।

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प्रश्न 11.
हीराकुड परियोजना के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :

  • महानदी के जल को नियन्त्रित कर बहु-उपयोगी बनाने के उद्देश्य से इस परियोजना को क्रियान्वित किया गया।
  • इस परियोजना के अन्तर्गत चार विद्युत शक्ति-गृहों का निर्माण किया गया है, जिनसे 2.70 लाख किलोवाट जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे उद्योग-धन्धों की स्थापना में सहायता मिली है।

प्रश्न 12.
महानदी को ‘उड़ीसा का शोक’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
महानदी अपनी भयंकर बाढ़ों के लिए विख्यात रही है। यह नदी अपने (UPBoardSolutions.com) हरे-भरे डेल्टा को प्रतिवर्ष अपनी उफनती हुई जलधाराओं से रौंद डालती थी। इसीलिए इसे ‘उड़ीसा का शोक’ कहा जाता है।

प्रश्न 13.
विश्व की सबसे लम्बी कृत्रिम नहर का नाम लिखिए।
उत्तर :
ग्राण्ड कैनल (चीन)।

प्रश्न 14.
भारत की किन्हीं दो नदी घाटी परियोजनाओं के नाम लिखिए। [2016]
उत्तर :

  • टिहरी बाँध परियोजना तथा
  • भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना।

प्रश्न 15.
दक्षिण भारत में तालाबों द्वारा सिंचाई के महत्त्वपूर्ण होने के दो कारणों का उल्लेख कीजिए। [2011]
उत्तर :

  • दक्षिण भारत में अधिकांश तालाब पक्के हैं। ये उन्नत अवस्था में हैं।
  • इन तालाबों में वर्ष भर जल आपूरित रहता है।

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प्रश्न 16.
दो जल संसाधनों का उल्लेख कीजिए। [2014]
उत्तर :
दो जल संसाधन निम्नवत् हैं- 1. नदियाँ, तालाब एवं झरने। 2. भूमिगत जल।

प्रश्न 17.
भारत की दो प्रमुख बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के नाम लिखिए। [2014]
उत्तर :

  • भाखड़ा-नांगल बाँध परियोजना।
  • रिहन्द बाँध परियोजना।

प्रश्न 18.
वर्षा जल संचयन से क्या तात्पर्य है? [2015]
उत्तर :
वर्षा जल संचयन विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षा जल को रोकने और एकत्र करने की विधि है।

प्रश्न 19.
भारत के दो राज्यों के नाम बताइए जिनसे होकर दामोदर नदी बहती है। [2017]
उत्तर :
झारखण्ड और पश्चिम बंगाल।

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बहुविकल्पीय प्रश्न

1. नागार्जुन परियोजना किस नदी से सम्बन्धित है? [2009, 10, 12]
या
नागार्जुन सागर परियोजना किस नदी पर स्थित है? [2015]
(क) कृष्णा
(ख) कावेरी
(ग) महानदी
(घ) गंगा

2. नागार्जुन परियोजना किस राज्य में स्थापित है?
(क) आन्ध्र प्रदेश
(ख) कर्नाटक
(ग) केरल
(घ) तमिलनाडु

3. मध्य प्रदेश राज्य की प्रमुख परियोजना कौन-सी है?
(क) रिहन्द
(ख) चम्बल
(ग) हीराकुड
(घ) दामोदर

4. निम्नलिखित में से उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना कौन-सी है? [2013]
(क) माताटीला
(ख) रामगंगा
(ग) रिहन्द
(घ) गंडक

5. हीराकुड बहु-उद्देशीय परियोजना किस राज्य में स्थित है?
(क) मध्य प्रदेश
(ख) बिहार
(ग) ओडिशा
(घ) पश्चिम बंगाल

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6. भाखड़ा-नांगल बाँध किस नदी पर स्थित है? [2017]
(क) व्यास
(ख) महानदी
(ग) कोसी
(घ) सतलुज

7. हीराकुड बाँध किस नदी पर बनाया गया है? [2012, 18]
(क) रिहन्द
(ख) दामोदर
(ग) महानदी
(घ) कृष्णा

8. भारत की सबसे बड़ी बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना कौन-सी है?
(क) रिहन्द
(ख) दामोदर
(ग) भाखड़ा-नांगल
(घ) तुंगभद्रा

9. निम्नलिखित में से कौन-सी परियोजना प० बंगाल और झारखण्ड को संयुक्त रूप से लाभान्वित करती है?
(क) तुंगभद्रा
(ख) टिहरी बाँध
(ग) दामोदर घाटी
(घ) नागार्जुन सागर

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10. माताटीला बाँध किस जनपद में बनाया गया है? (2012]
(क) आगरा में
(ख) ललितपुर में
(ग) कानपुर में
(घ) मथुरा में

11. मध्य प्रदेश की सबसे लम्बी नदी है [2009]
(क) नर्मदा
(ख) ताप्ती
(ग) सोन
(घ) केन

12. रिहन्द बाँध परियोजना किस राज्य में स्थित है? [2015]
या
रिहन्द बाँध किस राज्य में बनाया गया है? [2016]
(क) आन्ध्र प्रदेश
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) पश्चिम बंगाल

13. निम्नलिखित में से सबसे लम्बी नदी कौन-सी है? [2013]
(क) यमुना
(ख) गोदावरी
(ग) कावेरी
(घ) ताप्ती

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14. टिहरी बाँध किस नदी पर बनाया गया है? [2016]
(क) रामगंगा पर
(ख) भागीरथी पर
(ग) अलकनन्दा पर
(घ) मन्दाकिनी पर

15. हीराकुड बाँध किस राज्य में स्थित है? [2018]
(क) गुजरात
(ख) आन्ध्र प्रदेश
(ग) ओडिशा
(घ) महाराष्ट्र

उत्तरमाला

1. (क), 2. (क), 3. (ख), 4. (ग), 5. (ग), 6. (घ), 7. (ग), 8. (ग), 9. (ग), 10. (ख), 11. (क), 12. (ग), 13. (ख), 14. (ख), 15. (ग)।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi आदिकाल (वीरगाथाकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi आदिकाल (वीरगाथाकाल)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Hindi आदिकाल (वीरगाथाकाल).

हिन्दी पद्य-साहित्य का संक्षिप्त इतिहास

विशेष—पाठ्यक्रम के नवीनतम प्रारूप के अनुसार हिन्दी पद्य-साहित्य के संक्षिप्त इतिहास के अन्तर्गत रीतिकाल से आधुनिककाल तक का इतिहास सम्मिलित है, किन्तु अध्ययन की दृष्टि से यहाँ सभी कालों के विकास से सम्बन्धित प्रश्न दिये जा रहे हैं; क्योंकि एक-दूसरे से घनिष्ठता के कारण कभी-कभी निर्धारित काल से अलग काल के प्रश्न भी पूछ लिये जाते हैं। इसके अन्तर्गत कवियों और उनकी रचनाओं से सम्बन्धित प्रश्न भी पूछे जाते हैं। इसके लिए कुल 5 अंक निर्धारित हैं।

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प्रश्न 1
हिन्दी पद्य-साहित्य के इतिहास को किन-किन कालों में बाँटा गया है ? प्रत्येक काल की अवधि एवं विभाजन के आधार का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
हिन्दी-साहित्य का आविर्भाव सर्वप्रथम पद्य से हुआ था। विद्वानों ने हिन्दी पद्य-साहित्य के इतिहास को प्रत्येक युग की विशेष प्रवृत्तियों के आधार पर निम्नलिखित चार कालों में विभाजित किया है–

  1. आदिकाल (वीरगाथाकाल) – । सन् 743 से 1343 ई० तक।
  2. पूर्व मध्यकाल ( भक्तिकाल) – सन् 1343 से 1643 ई० तक।
  3. उत्तर मध्यकाल (रीतिकाल) (UPBoardSolutions.com) – सन् 1643 से 1843 ई० तक।
  4.  आधुनिककाल सन् 1843 ई० से आज तक।

प्रश्न 2
काव्य के दो भेद कौन-कौन से हैं ? इनके अन्तर को भी स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
ऐसी पद्य रचना जिसमें छन्दों का विधान होता है, उसे काव्य कहते हैं। काव्य के दो भेद होते हैं—

  1. प्रबन्ध काव्य और
  2. मुक्तक काव्य। जिस काव्य में किसी कथा का आश्रय लेकर कविता रची जाती है, वह प्रबन्ध काव्य कहलाता है। लेकिन मुक्तक काव्यों में किसी कथा का आश्रय न लेकर स्वतन्त्र पदों में अपनी भावाभिव्यक्ति की जाती है।

प्रश्न 3
प्रबन्ध काव्य के प्रमुख भेद कौन-कौन से हैं ? इनका अन्तर स्पष्ट करते हुए एक-एक उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर
प्रबन्ध काव्य के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं–

  1. महाकाव्य और
  2. खण्डकाव्य। जिस काव्य में किसी विशिष्ट व्यक्ति के जीवन का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जाता है, उसे महाकाव्य कहते हैं; जैसे-गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस’। इसके विपरीत जिस काव्य में सम्पूर्ण जीवन का वर्णन (UPBoardSolutions.com) ने होकर उसके किसी अंश या खण्ड का वर्णन हो, उसे खण्डकाव्य कहते हैं; जैसे-रामधारी सिंह ‘दिनकर’ कृत ‘रश्मिरथी’

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आदिकाल (वीरगाथाकाल)

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
आदिकाल का समय कब-से-कब तक माना जाता है ? इस काल के अन्य और कौन-से नाम दिये गये हैं ?
उत्तर
आदिकाल का समय सन् 743 से 1343 ई० तक माना जाता है। इस काल के उत्थानकाल, वीरगाथाकाल तथा चारणकाल अन्य नाम हैं।

प्रश्न 2
वीरगाथाकाल के नामकरण की सार्थकता बताइट। या हिन्दी-साहित्य के आदिकाल को वीरगाथाकाल क्यों कहते हैं ? इस काल की किसी एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए।
उत्तर
वीर रस से परिपूर्ण रचनाओं की अधिकता के कारण हिन्दी-साहित्य के आदिकाल को ‘वीरगाथाकाल’ नाम दिया गया है, जो सर्वथा उपयुक्त है। इस काल की प्रमुख रचना है—पृथ्वीराज रासो, जिसके रचयिता (UPBoardSolutions.com) चन्दबरदाई हैं।

प्रश्न 3
आदिकाल की भाषा का क्या नाम है ?
या
रासो ग्रन्थों में किस भाषा का प्रयोग किया गया है ?
उत्तर
आदिकाल की भाषा का नाम डिंगल है। रासो ग्रन्थ इसी भाषा में लिखे गये हैं।

प्रश्न 4
आदिकाल की रचनाएँ किन-किन रूपों में मिलती हैं ?
उतर
आदिकाल की रचनाएँ दो रूपों में मिलती हैं-

  1. प्रबन्धकाव्यों के रूप में तथा
  2. वीर गीतों के रूप में। चन्दबरदाई का ‘पृथ्वीराज रासो’ प्रबन्धकाव्य है और जगनिक का ‘परमाल रासो’ वीर गीत काव्य है।।

प्रश्न 5
वीरगाथाकाल के प्रमुख कवियों तथा उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर
वीरगाथाकाल के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ हैं-

  1.  दलपति विजय-खुमान रासो,
  2. चन्दबरदाई-पृथ्वीराज रासो,
  3. शारंगधर-हमीर रासो,
  4. नल्ल सिंह-विजयपाल रासो,
  5. जगनिक–परमाल रासो या आल्हा खण्ड,
  6.  नरपति नाल्ह-बीसलदेव रासो,
  7. केदार भट्टजयचन्द्र (UPBoardSolutions.com) प्रकाश,
  8. मधुकर-जयमयंक जसचन्द्रिका।।

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प्रश्न 6
वीरगाथाकाल की रचनाओं में प्रयुक्त छन्दों के नाम बताइए।
उत्तर
वीरगाथाकाल में

  1. छप्पय,
  2. दूहा (दोहा),
  3. सोरठा,
  4. त्रोटक,
  5. तोमर,
  6. चौपाई,
  7. गाथा,
  8. आर्या,
  9. सट्टक,
  10.  रोला,
  11.  कुण्डलिया आदि छन्दों का प्रयोग किया गया।

प्रश्न 7
वीरगाथाकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
वीरगाथाकोल के चार प्रमुख कवि हैं—

  1. दलपति विजय,
  2. चन्दबरदाई,
  3. जगनिक तथा
  4. नरपति नाल्ह।

प्रश्न 8
वीरगाथाकाल की चार प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर
वीरगाथाकाल की चार प्रमुख रचनाएँ हैं—

  1. पृथ्वीराज रासो,
  2. खुमान रासो,
  3. बीसलदेव रासो तथा
  4. परमाल रासो या (UPBoardSolutions.com) आल्हा खण्ड।

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प्रश्न 9
वीर गीत काव्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रन्थ कौन-सा है ? संक्षेप में उसका परिचय दीजिए।
उत्तर
वीर गीत काव्य-ग्रन्थों में सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रन्थ कवि जगनिक का ‘परमाल रासो’ या ‘आल्हा खण्ड’ है। इसमें महोबे के दो प्रसिद्ध वीरों आल्हा तथा ऊदल (उदयसिंह) के वीरोचित चरित्र का सुन्दर वर्णन हुआ है।

प्रश्न 10
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
या
आदिकाल की किन्हीं दो प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
आदिकाल में प्रमुख रूप से चारण या भाट कवियों द्वारा काव्य-रचनाएँ की गयीं। प्राय: सभी कवि राजाओं के दरबार में रहकर काव्य-रचना करते थे। आदिकाल या वीरगाथाकाल की कविता की सामान्य विशेषताएँ या प्रमुख (UPBoardSolutions.com) प्रवृत्तियाँ इस प्रकार हैं—

  1. आश्रयदाताओं की प्रशंसा,
  2. युद्धों का सुन्दर और सजीव वर्णन,
  3. सामूहिक राष्ट्रीयता की भावना का अभाव,
  4. वीर रस के साथ-साथ श्रृंगार का पुट,
  5. ऐतिहासिक तथ्यों के प्रस्तुतीकरण में कल्पना की अधिकता तथा
  6. जनसम्पर्क का अभाव।

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