UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities

UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities (रैखिक असमिकाएँ)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities (रैखिक असमिकाएँ).

The inequality solver will then show you the steps to help you learn how to solve it on your own.

प्रश्नावली 6.1

प्रश्न 1.
हल कीजिए : 24x < 100, जब
(i) x एक प्राकृत संख्या है।
(ii) x एक पूर्णांक है। 24x < 100
हल:
24x < 100
24 से दोनों पक्षों में भाग करने पर
x < [latex]\frac { 100 }{ 24 }[/latex] अर्थात (UPBoardSolutions.com) x < [latex]\frac { 25 }{ 6 }[/latex]
(i) यदि x एक प्राकृत संख्या है तो हल {1, 2, 3, 4} है।
(ii) यदि x एक पूर्णांक संख्या है तो हल {…. -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, 4}.

प्रश्न 2.
हल कीजिए: 12x > 30, जब
(i) x एक प्राकृत संख्या है।
(ii) x एक पूर्णाक है।
हल:
– 12x > 30
-12 से दोनों पक्षों में भाग करने पर,
x < [latex]\frac { 30 }{ -12 }[/latex] अर्थात x < [latex]\frac { -5 }{ 2 }[/latex]
(i) यदि x प्राकृत संख्या है तो कोई हल नहीं है।
(ii) यदि x पूर्णाक संख्या है तो हल {….. -5, -4, -3} है।

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प्रश्न 3.
हल कीजिए : 5x – 3 < 7, जब
(i) x एक पूर्णाक है।
(ii) x एक वास्तविक संख्या है।
हल:
5x – 3 < 7
दोनों पक्षों में 3 जोड़ने पर,
5x < 10
5 से भाग देने पर
x < [latex]\frac { 10 }{ 5 }[/latex]
अर्थात x < 2
(i) यदि x एक पूर्णांक संख्या है तो हल {…. -2, -1, 0, 1}.
(ii) यदि x एक वास्तविक संख्या है तो हल x ∈ (-∞, 2).

प्रश्न 4.
हल कीजिए : 3x + 8 > 2, जब
(i) x एक पूर्णाक है।
(ii) एक वास्तविक संख्या है।
हल:
3x + 8 > 2
3x > 2 – 8 या 3x > -6 .
3 से भाग करने पर
x > [latex]\frac { -6 }{ 3 }[/latex] या x > -2
(i) यदि x एक पूर्णांक संख्या है तो हल {-1, 0, 1, 2,….}.
(ii) यदि x एक वास्तविक संख्या है (UPBoardSolutions.com) तो हल x ∈ (-2, ∞).

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प्रश्न 5.
हल कीजिए : 4x + 3 < 6x + 7.
हल:
4x + 3 < 6x + 7
6x को बाएँ पक्ष में तथा 3 को दाएँ पक्ष में रखने पर,
4x – 6x < 7 – 3,
-2x < 4 -2 से भाग देने पर, x > [latex]\frac { 4 }{ -2 }[/latex] या x > -2
दी हुई असमिका का हल है: x = (-2, ∞).

प्रश्न 6.
हल कीजिए : 3x – 7 > 5x – 1
हल:
3x -7 > 5x – 1
5x को बाएँ पक्ष में और 7 को दाएँ पक्ष में रखने पर,
3x – 5x > -1 + 7
या
-2x > 6
-2x से भाग देने पर।
x < -3
दी हुई असमिका का हल है x ∈ (-∞, – 3).

प्रश्न 7.
हल कीजिए : 3(x – 1) ≤ 2 (x – 3).
हल:
असमिका
3(x – 1) ≤ 2 (x – 3)
3x – 3 ≤ 2x – 6
2x को बाएँ पक्ष में और 3 को दाएँ पक्ष में रखने पर,
3x – 2 ≤ 3 – 6
x < – 3
हल है : x ∈ (-∞, – 3].

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प्रश्न 8.
हल कीजिए : 3 (2 – x) ≥ 2 (1 – x).
हल:
दी हुई असमिका 3(2 – x) ≥ 2 (1 – x)
6 – 3x ≥ 2 – 2x
2x को बायीं ओर तथा 6 को (UPBoardSolutions.com) दायीं ओर रखने पर,
2x – 3x ≥ 2 – 6
या
-x ≥ -4 या x ≤ 4
हल है : x ∈ (-∞, 4]

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प्रश्न 13.
हल कीजिए : 2 (2x + 3) – 10 < 6 (x – 2)
हल:
दी हुई असमिका 2 (2x + 3) – 10 < 6 (x – 2)
4x + 6 – 10 < 6x – 12
6x को बायीं ओर तथा -4 को दार्थी ओर रखने पर,
4 – 6x < -12 + 4
-2x < -8 (-1) से गुणा करने पर, x > 4
हल है :
x ∈ (4, ∞)

प्रश्न 14.
हल कीजिए : 37 – (3x + 5) ≥ 9x – 8(x – 3).
हल:
दी हुई असमिका 37 – (3x + 5) ≥ 9x – 8(x – 3)
37 – 3x – 5 ≥ 9x – 8x + 24
– 3x + 32 ≥ x + 24
x को बायीं ओर तथा 32 को दायीं ओर रखने पर
-3x – x ≥ 24 – 32
– 4x ≥ – 8
(-1) से गुणा करने पर तथा 4 से भाग देने पर।
x ≤ [latex]\frac { 8 }{ 4 }[/latex] या x ≤ 2
हल है: x ∈ (-∞, 2].

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प्रश्न 17 से 20 तक की असमिकाओं को हल ज्ञात कीजिए तथा उन्हें संख्या रेखा पर आलेञ्चित कीजिए।

प्रश्न 17.
3x – 2 < 2x + 1
हल:
दी हुई असमिका . 3x – 2 < 2x + 1
2x को बायीं ओर तथा 2 को दायीं ओर रखने पर,
3x – 2x < 1 + 2
x < 3
हल है : x ∈ (-∞, 3).
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प्रश्न 18.
5x – 3 ≥ 3x – 5.
हल:
दी हुई असमिका
5x -3 ≥ 3x – 5
3x को बायीं ओर तथा 3 को दायीं ओर रखने पर,
5x – 3x ≥ -5 + 3
2x ≥ -2
2 से भाग देने पर
x ≥ -1
हल है x ∈ [-1, ∞).
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प्रश्न 19.
3 (1 – x) < 2 (x + 4).
हल:
दी हुई असमिका
3(1 – x) < 2(x + 4)
3 – 3x < 2x + 8
2x को बायीं ओर तथा 3 को दार्थी ओर रखने पर,
-3x – 2x < 8 – 3
– 5x < 5 -5 से भाग देने (UPBoardSolutions.com) पर x > -1
हल है: x ∈ (-1, ∞)
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.1 20.1

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प्रश्न 21.
रवि ने पहली दो एकक परीक्षा में 70 और 75 अंक प्राप्त किए हैं। वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए, जिसे वह तीसरी एकक परीक्षा में पाकर 60 अंक का न्यूनतम औसत प्राप्त कर सके।
हल:
मान लीजिए तीसरे एकक परीक्षा में x अंक प्राप्त किए।
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प्रश्न 22.
किसी पाठ्यक्रम में ग्रेड A पाने के लिए एक व्यक्ति को सभी पाँच परीक्षाओं (प्रत्येक 100 अंकों में से) में 90 अंक या अधिक अंक का औसत प्राप्त करना चाहिए यदि सुनीता के प्रथम चार परीक्षाओं के प्राप्तांक 87, 92, 94 और 95 हों तो वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए जिसे पांचवीं परीक्षा में प्राप्त करके सुनीता उस पाठ्यक्रम में ग्रेड A पाएगी।
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.1 22.1

प्रश्न 23.
10 से कम क्रमागत विषम संख्याओं के ऐसे युग्म ज्ञात कीजिए जिनके योगफल 11 से अधिक हों।
हल:
मान लीजिए x और x + 2 दो विषम परिमेय संख्याएँ हैं।
x तथा x + 2 दोनों ही 10 से कम हैं।
⇒ x < 10 और x + 2 < 10 या x < 8 दोनों का योगं 11 से अधिक है। x + (x + 2) > 11
2x + 2 > 11 या 2x > 11 – 2
2x > 9 या x > [latex]\frac { 9 }{ 2 }[/latex] या (UPBoardSolutions.com) x > 4[latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
अर्थात् यदि x = 5 हो, तब दूसरी संख्या = x + 2 = 7
इसी प्रकार यदि x = 7, तो x + 2 = 9
दूसरा युग्म (7, 9)
x = 9 नहीं हो सकता क्योंकि x + 2 = 11 > 10
अत: वांछित युग्म है (5, 7), 7, 9).

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प्रश्न 24.
क्रमागत सर्म संख्याओं के ऐसे युग्म ज्ञात कीजिए जिनमें से प्रत्येक 5 से बड़े हों, तथा उनका योगफल 23 से कम हो।
हल:
मान लीजिए x और x + 2 दो सम संख्याएँ हैं।
x और x + 2 दोनों ही 5 से बड़ी है।
⇒ x > 5
x + (x + 2) < 23
2x + 2 < 23
2x < 23 – 2 = 21
2x < 21 या x < [latex]\frac { 21 }{ 2 }[/latex]
यदि x = 10, x + 2 = 12 ⇒ x + (x + 2) < 23
इसी प्रकार (6, 8), (8, 10) युग्म भी दी हुई शर्त पूरी (UPBoardSolutions.com) करते हैं। वांछित युग्म (6, 8), (8, 10), (10, 12).

प्रश्न 25.
एक त्रिभुज की सबसे बड़ी भुजा सबसे छोटी भुजा की तीन गुनी है तथा त्रिभुज की तीसरी भुजा सबसे बड़ी भुजा से 2 सेमी कम है। तीसरी भुजा की न्यूनतम लंबाई ज्ञात कीजिए जबकि त्रिभुज का परिमाप न्यूनतम 61 सेमी है।
हल:
मान लीजिए त्रिभुज की सबसे छोटी भुजा = x सेमी
सबसे बड़ी भुजा = 3x सेमी
तीसरी भुजा = 3x – 2 सेमी
प्रश्नानुसार
x + 3x + (3x – 2) ≥ 61
7x – 2 ≥ 61
7x ≥ 61 + 2 = 63
x ≥ 9
सबसे छोटी भुजा 9 सेमी है।

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प्रश्न 26.
एक व्यक्ति 91 सेमी लंबे बोर्ड में से तीन लंबाईयाँ काटना चाहता है। दूसरी लंबाई सबसे छोटी लंबाई से 3 सेमी अधिक और तीसरी लंबाई सबसे छोटी लंबाई की दूनी है। सबसे छोटे बोर्ड की संभावित लंबाई क्या है, यदि तीसरा टुकड़ा दूसरे टुकड़े से कम से कम 5 सेमी अधिक लंबा हो ?
हल:
मान लीजिए कटे हुए सबसे छोटे बोर्ड की लंबाई = x सेमी
दूसरे कटे हुए बोर्ड की लम्बाई = x + 3
तीसरे कटे हुए बोर्ड की लम्बाई = 2x सेमी
दिया है कि
x + (x + 3) + 2x ≤ 91
4x + 3 ≤ 91
4x ≤ 91 – 3 = 88
4x ≤ 88
x ≤ 22 ……(1)
यह भी दिया गया है कि 2x ≥ (x + 3) + 5
2x ≥ x + 8
x ≥ 8 ……(2)
सबसे छोटे बोर्ड की लम्बाई कम से कम 8 सेमी हो और अधिक से अधिक 22 सेमी हो।

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प्रश्नावली 6.2

निम्नलिखित असमिकाओं को आलेखन विधि से द्विविमीय तल में निरूपित कीजिए। (प्रश्न 1 से 10 तक)

प्रश्न 1.
x + y < 5.
हल:
समीकरण x + y = 5 को लीजिए। यह एक सरल रेखा है जो बिन्दु (5, 0), (0, 5) से होकर गुजरती है।
x = 0, y = 0 असमिका x + y < 5 में रखने पर,
अर्थात
0 + 0 < 5 या 0 < 5
⇒ मूल बिन्दु x + y < 5 के क्षेत्र में है।
छायाकिंत क्षेत्र x + y < 5 को निरूपित करता है (UPBoardSolutions.com) जो इसका हल है।
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प्रश्न 2.
2x + y ≥ 6
हल:
2x + y ≥ 6
समीकरण 2x + y = 6 को लीजिए, यह रेखा (3, 0) और (0, 6) से गुजरती है।
x = 0, y = 0 को 2x + y ≥ 6 में रखें तो 0 ≥ 6, जो सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु 2x + y ≥ 6 के क्षेत्र में नहीं हैं।
2x + y ≥ 6 का क्षेत्र छायांकित किया गया है।
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प्रश्न 3.
3x + 4y ≤ 12.
हल:
दी गई असमिका 3x + 4y ≤ 12 सरल रेखा 3x + 4y = 12 बिन्दु (4, 0), (0, 3) से होकर जाती है।
असमिका 3x + 4y ≤ 12 में (0, 0) रखने पर,
0 + 0 ≤ 12 अर्थात 0 ≤ 12 जो सत्य है।
मूल बिन्दु 3x + 4y ≤ 12 के क्षेत्र में (UPBoardSolutions.com) आता है।
इसका आलेख साथ वाली आकृति में दिखा गया है।
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प्रश्न 4.
y + 8 ≥ 2x
हल:
दी हुई रैखिक असमिका y + 8 ≥ 2x सरल रेखा 2x – y = 8 बिन्दु (4, 0) और (0, -8) से होकर जाती है।
असमिका y + 8 ≥ 2x,
x = 0, y = 0 रखने पर
0 + 8 ≥ 0 अर्थात 8 ≥ 0 जो सत्य है।
मूल बिन्दु y + 8 ≥ 2x के क्षेत्र में आता है।
इसका आलेख साथ दी हुई आकृति में बनाया गया है।
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प्रश्न 5.
x – y ≤ 2.
हल:
दी हुई असमिका x – y ≤ 2.
सरल रेखा x – y = 2 बिन्दु (2, 0), (0, -2) से होकर जाती है।
x = 0, y = 0 असमिका x – y ≤ 2 में रखने पर 0 ≤ 2 जो सत्य है।
मूल बिन्दु x – y ≤ 2 के क्षेत्र में है।
असमिका x – y ≤ 2 का आलेख साथ वाली (UPBoardSolutions.com) आकृति में बनाया गया है।
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प्रश्न 6.
2x – 3y > 6.
हल:
दी हुई रैखिक असमिका 2x – 3y > 6
सरल रेखा 2x – 3y = 6, (3, 0) और (0, -2) से होकर जाती है।
असमिका 2x – 3y > 6 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 > 6 जो सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) दी हुई असमिका में नहीं आता है।
इसका आलेख दी हुई आकृति में दर्शाया गया है।
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प्रश्न 7.
-3x + 2y ≥ -6.
हल:
दी हुई रैखिक असमिका -3x + 2y ≥ -6 या 3x – 2y ≤ 6
सरल रेखा -3x + 2y = – 6 बिन्दु (2, 0) और (0, -3) से होकर जाती है।
-3x + 2y ≥ -6 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≥ -6, जो सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0), 3x + 2y ≥ -6 असमिका (UPBoardSolutions.com) के क्षेत्र में है।
इसका आलेख दी हुई आकृति में दर्शाया गया है।
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प्रश्न 8.
3y – 5x < 30.
हुल:
दी हुई असमिका 3y – 5x < 30
सरल रेखा 3y – 5x = 30, बिन्दु (-6, 0) और (0, 10) से होकर जाती है।
असमिका 3y – 5x < 30 में x = 0, y = 0 रखने पर
0 < 30 सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0), 3y – 5x < 30 के क्षेत्र में है। इसका (UPBoardSolutions.com) आलेख दी गई आकृति में दर्शाया गया है।
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प्रश्न 9.
y < -2
हल:
दी हुई रैखिक असमिका y < -2 सरल रेखा y = -2 बिन्दु (2, -2) और (-2, -2) से होकर जाती है।
y < -2 में y = 0 रखने पर 0 < -2, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0), < -2 में नहीं।
दी हुई आकृति में छायांकित क्षेत्र से दर्शाया गया है।
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प्रश्न 10.
x > -3
हल:
दी हुई रैखिक असमिका x > -3
सरल रेखा x = -3 बिन्दु (-3, 2), (-3, -2) से होकर जाती है।
x > -3 में x = 0 रखने पर,
0 > -3, यह सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0), x > 3 में है। दी हुई आकृति में x > -3 छायांकित क्षेत्र से दर्शाया गया है।
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प्रश्नावली 6.3

प्रश्न 1 से 15 तक निम्नलिखित असमिकाओं को आलेखीय विधि से हल कीजिए:

प्रश्न 1.
x ≥ 3, y ≥ 2
हल:
x ≥ 3, y ≥ 2
(i) सरल रेखा x = 3 बिन्दु (3, 0) और (3, 2) से होकर जाती है।
x ≥ 3 में x = 0 रखने पर 0 ≥ 3, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) x ≥ 3 के क्षेत्र में नहीं है।

(ii) सरल रेखा y = 2 बिन्दु (0, 2) और (3, 2) से होकर जाती है।
y ≥ 2 में y = 0 रखने पर
0 ≥ 2, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में (UPBoardSolutions.com) नहीं है।
x ≥ 3 और y ≥ 2 का हल उभयनिष्ठ छायांकित क्षेत्र से दर्शाया गया है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 1

प्रश्न 2.
3x + 2y ≤ 12, x ≥ 1, y ≥ 2.
हल:
दी हुई रैखिक असमिकाएँ 3x + 2y ≤ 12, x ≥ 1, y ≥ 2.
(i) रेखा 3x + 2y = 12 बिन्दु (2, 0) और (0, 6) से होकर जाती है।
3x + 2y ≤ 12 में x = 0, y = 0 रखने पर।
0 + 0 ≤ 12, अर्थात् 0 ≤ 12 जो सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में है।
3x + 2y ≤ 12 के हल में वे सभी बिन्दु हैं जो AB के नीचे है।
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(ii) रेखा x = 1 बिन्दु B(1, 0), Q(1, 2) से होकर जाती है।
x ≥ 1 में x = 0 रखने पर
0 ≥ 1, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में नहीं है।
x ≥ 1 को हल के सभी बिन्दु है जो है जो x = 1 के दाईं ओर है।

(iii) रेखा y = 2, बिन्दु C(0, 2) और D(3, 2) से होकर जाती है।
y ≥ 2 में y = 0 रखने पर 0 ≥ 2, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में नहीं है।
y ≥ 2 का हल वे सब बिन्दु हैं जो y = 2 के ऊपर हैं।
तीनों असमिकाओं का हल इसके उभयनिष्ठ क्षेत्र ΔPOR के सभी बिन्दु हैं।

प्रश्न 3.
2x + y ≥ 6, 3x + 4y ≤ 12.
हल:
दी हुई असमिकाएँ 2x + y ≥ 6, 3x + 4y ≤ 12
(i) सरल रेखा 2x + y = 6 बिन्दु (3, 0) तथा (UPBoardSolutions.com) (0, 6) से होकर जाती है।
2x + y ≥ 6 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 6 जो सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में नहीं है।
2x + y ≥ 6 का हुल वे सभी बिन्दु हैं जो 2x + y = 6 के ऊपर हैं।
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(ii) सरल रेखा 3x + 4y = 12 बिन्दु D(4, 0) और C(0, 3) से होकर जाती है।
3x + 4y ≤ 12 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 + 0 ≤ 12, जो सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में है।
अत: 3x +4y ≤ 12 का हल वे सब बिन्दु हैं जो रेखा CD के नीचे हैं।
इस प्रकार 2x + y ≥ 6, 3x + 4y ≤ 12 का हल वह उभयनिष्ठ क्षेत्र है जो 2x + y = 6 के ऊपर और 3x + 49 = 12 के नीचे है। यह चित्र में उभयनिष्ठ क्षेत्र द्वारा दर्शाया गया है।

प्रश्न 4.
x + y > 4, 2x – y > 0.
हल:
दी हुई रैखिक असमिकाएँ x + y > 4, 2x – y > 0,
(i) रेखा x + y = 4, बिन्दु (4, 0) और (0, 4) से होकर जाती है।
अब x + y > 4 में x = 0, y = 0 रखने पर, हमें प्राप्त हुआ 0 > 4 जो सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में नहीं है।
x + y > 4 का हल वे सब बिन्दु हैं जो रेखा AB के ऊपर है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 4
(ii) रेखा 2x – y = 0, बिन्दु O (0, 0) और D (1, 2) से होकर जाती है।
2x – y > 0 में x = 1, y = 0 रखते हुए 2 > 0, जो सत्य है।
बिन्दु P(1, 0), 2x – y > 0 के क्षेत्र में है।
2x – y > 0 का हल वे सब बिन्दु हैं जो OD के नीचे हैं।

प्रश्न 5.
2x – y > 1, x – 2y < -1.
हल:
दी हुई रैखिक असमिकाएँ 2x – y > 1 और x – 2y < -1
(i) सरल रेखा 2x – y = 1 बिन्दु ([latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] , 0) और (0, -1) से होकर जाती है। 2x – y > 1 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 > 1, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0), 2x – y >1 के क्षेत्र में नहीं है।
2x – y > 1 का हल वे सब बिन्दु हैं जो रेखा AB के नीचे है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 5

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(ii) रेखा x – 2y = -1 बिन्दु C(-1, 0) और D(0, [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] ) से होकर जाती है।
x – 2y < -1 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 < -1, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में नहीं है।
2x – y > 1 और x – 2y < -1 का हल वह उभयनिष्ठ भाग QPR है जो AB के नीचे और CD के ऊपर है।

प्रश्न 6.
x + y ≤ 6, x + y ≥ 4.
हल:
दी हुई रैखिक असमिकाएँ x + y ≤ 6 और x + y ≥ 4 है।
(i) रेखा x + y = 6, बिन्दु A(6, 0), B(0, 6) से होकर जाती है।
x + y ≤ 6 में x = 0, y= 0 रखने पर 0 + 0 ≤ 6 अर्थात् 0 ≤ 6 जो सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0), x + y ≤ 6 के क्षेत्र में है।

(ii) रेखा x + y = 4, बिन्दु C(4, 0) और D(0, 4) से होकर जाती है।
x + y ≥ 4 में x = 0, y = 0 रखने पर, 0 ≥ 4, यह (UPBoardSolutions.com) सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) x + y ≥ 4 में नहीं है। इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो CD के ऊपर है।
दी हुई आकृति में छायांकित क्षेत्र x + y ≤ 6 और x + y ≥ 4 कै हल को दर्शाता है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 6

प्रश्न 7.
2x + y ≥ 8, x + 2y ≥ 10.
हल:
दी हुई रैखिक असमिकाएँ 2x + y ≥ 8, x + 2y ≥ 10.
(i) रेखा 2x + y = 8 बिन्दु A(4, 0), B(0, 8) से होकर जाती है।
2x + y ≥ 8 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 > 8 जो असत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में नहीं है।
2x + y ≥ 8 को हल वे सब बिन्दु हैं जो रेखा AB के ऊपर है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 7
(ii) रेखा x + 2y = 10, बिन्दु C(10, 0) और D(0, 5) से होकर जाती है।
x + 2y ≥ 10 में x = 0, y = 0 रखने पर,
0 ≥ 10, यह सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु (0, 0) x + 2y ≥ 10 में नहीं है।
x + 2y ≥ 2 के सभी बिन्दु CD के ऊपर हैं।
अर्थात् 2x + y ≥ 8, x + 2y ≥ 10 का हल छायांकित उभयनिष्ठ भाग BPC है।

प्रश्न 8.
x + y ≤ 9, y > x, x ≥ 0.
हल:
दी हुई रैखिक असमिकाएँ x + y ≤ 9, y > x, x ≥ 0
(i) सरल रेखा x + y = 9 बिन्दु A(9, 0) और B(0, 9) से होकर जाती है।
x + y ≤ 9 में x = 0, y = 0 रखते हुए 0 + 0 ≤ 9 अर्थात् 0 ≤ 9 जो सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में है।
x +y ≤ 9 के बिन्दु AB रेखा के नीचे हैं।

(ii) सरल रेखा y = x बिन्दु O(0, 0) और C(3, 3) से होकर जाती है।
y > x में x = 0, y = 3 रखने पर, 3 > 0 जो सत्य है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 8

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बिन्दु (3, 0) इसके क्षेत्र में है।
y > x के सभी बिन्दु y = x के ऊपर हैं।

(iii) सरल रेखा x = 0, y-अक्ष को निरूपित करती है।
x ≥ 0 में x = 0, y = 0 रखने पर 3 ≥ 0 जो सत्य है।
x ≥ 0 के सभी बिन्दु x = 0 के दाईं ओर है।
आकृति में उभयनिष्ठ छायांकित क्षेत्र असमिकाओं x + y ≤ 9, y > x, x ≥ 0 का हल है।

प्रश्न 9.
5x + 4y ≤ 20, x ≥ 1, y ≥ 2.
हल:
दी हुई रैखिक असमिकाएँ 5x + 4y ≤ 20, x ≥ 1, y ≥ 2
सरल रेखा 5x + 4y = 20 बिन्दु A (4, 0) और B (0, 5) से होकर जाती हैं।
5x + 4y ≤ 20 में x = 0, y = 0 रखने पर, 0 + 0 ≤ 20 अर्थात् 0 ≤ 20 जो सत्य है।
मूल बिन्दु (0, 0) इसके क्षेत्र में है।
5x + 4y ≤ 20 के सभी बिन्दु रेखा AB के नीचे है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 9
(i) x = 1 बिन्दु C(1, 0), D(1, 2) से होकर जाती है।
x ≥ 1 में x = 0 रखने पर 0 ≥ 1 जो सत्य नहीं है।
x ≥ 1 के सभी बिन्दु x = 1 के दायीं ओर होते हैं।
(ii) y = 2, बिन्दु E(0, 2) और F(4, 2) से होकर (UPBoardSolutions.com) जाती है।
y ≥ 2 में y = 0 रखने पर 0 ≥ 2 सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में नहीं है।
y ≥ 2 का हल वे सब बिन्दु हैं जो EF के ऊपर हैं।
दी हुई असमिकाओं का हल आकृति में उभयनिष्ठ PDR छायांकित क्षेत्र द्वारा दर्शाया गया है।

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प्रश्न 10.
3x + 4y ≤ 60, x + 3y ≤ 30, x ≥ 0, y ≥ 0.
हल:
दी हुई असमिकाएँ : 3x + 4y ≤ 60, x + 3y ≤ 30, x ≥ 0, y ≥ 0.
(i) रेखा 3x + 4y = 60 बिन्दु A(20, 0) तथा B(0, 15) से होकर जाती है।
असमिका 3x + 4y ≤ 60 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 60 जो सत्य है।
मूल बिन्दु इस क्षेत्र में पड़ता है।
इस असंमिका का हल वे सब बिन्दु हैं जो AB के नीचे हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 10
(ii) रेखा x + 3y = 30 बिन्दु C(30, 0) और D(0, 10) से होकर जाती है।
असमिका x + 3y ≤ 30 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 30 जो सत्य है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में है।
इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो CD के नीचे हैं।

(iii) x = 0, y-अक्ष को निरुपित करती है।
x ≥ 0 में वे सब बिन्दु हैं जो y-अक्ष की दाईं ओर हैं।

(iv) y = 0, x-अक्ष को निरुपित करती है। और y ≥ 0 में वे सब बिन्दु हैं जो x-अक्ष के ऊपर हैं।
दी हुई असमिका का हल वे सब बिन्दु हैं जो उभयनिष्ठ क्षेत्र PDOA में आते हैं।

प्रश्न 11.
2x + y ≥ 4, x + y ≤ 3, 2x – 3y ≤ 6.
हल:
दी हुई असमिकाएँ 2x + y ≥ 4, x + y ≤ 3, 2x – 3y ≤ 6.
(i) रेखा 2x + y = 4, बिन्दु A (2, 0) और B(0, 4) से होकर जाती है।
असमिका 2x + y ≥ 4 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 + 0 ≥ 4 अर्थात् 0 ≥ 4जो सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु इस क्षेत्र में नहीं है।
इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो AB के ऊपर हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 11

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(ii) रेखा x + y = 3 बिन्दु C(3, 0), D(0, 3) से होकर जाती है।
असमिका x + y ≤ 3 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 3 जो (UPBoardSolutions.com) सत्य है। मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में है।
इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो CD के नीचे हैं।

(iii) रेखा 2x – 3y = 6, बिन्दु C(3, 0) और E(0, -2) से होकर जाती है।
असमिका 2x – 3y ≤ 6 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 6, जो सत्य है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में है। इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो CE के ऊपर हैं।
दी हुई असमिकाओं का हल छायांकित उभयनिष्ठ क्षेत्र AQC के सब बिन्दु हैं।

प्रश्न 12.
x – 3y ≤ 3, 3x + 4y ≥ 12, x ≥ 0, y ≥ 1.
हल:
दी हुई असमिकाएँ x – 3y ≤ 3, 3x + 4y ≥ 12, x ≥ 0, y ≥ 1.
(i) रेखा x – 3y = 3 बिन्दु A(3, 0), B(0, -1) से होकर जाती है।
असमिका x – 3y ≤ 3 में x = 0, y = 0 रखने पर, 0 ≤ 3 जो सत्य है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 12
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में है। इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो AB के ऊपर है।

(ii) रेखा 3x + 4y = 12 बिन्दु C(4, 0) और D(0, 3) से होकर जाती है।
असमिको 3x +4y ≥ 12 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≥ 12, जी सत्य (UPBoardSolutions.com) नहीं है। मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में नहीं है।
इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो CD के ऊपर है।

(iii) x = 0, y-अक्ष को दर्शाती है।
x ≥ 0 का हल वे सब बिन्दु हैं जो y-अक्ष के दाईं ओर है।

(iv) रेखा y = 1 बिन्दु E(0, 1), Q(3, 1) से होकर जाती है।
असमिका y ≥ 1 का हल वे सब बिन्दु है जो संख्या y = 1 पर पड़ते हैं या इसके ऊपर हैं।
दी हुई असमिकाओं का हल वे सब बिन्दु हैं जो उभयनिष्ठ क्षेत्र PDQRS से निरूपित किया गया है।

प्रश्न 13.
4x + 3y ≤ 60, y ≥ 2x, x ≥ 3, x, y ≥ 0.
हल:
दी हुई असमिकाएँ 4x + 3y ≤ 60, y ≥ 2x, x ≥ 3, x, y ≥ 0.
(i) सरल रेखा 4x + 3y = 60 बिन्दु A(15, 0), B(0, 20) से होकर जाती है।
4x + 3y ≤ 60 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 60 जो सत्य है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में है।
इस असमिका का हल वे बिन्दु हैं जो रेखा AB या AB के नीचे होते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 13

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(ii) y – 2x = 0, बिन्दु O(0, 0) और C(5, 10) से होकर जाती है।
y – 2x ≥ 0 में x = 5, y = 0 रखने पर, 0 – 10 ≥ 0 अर्थात् -10 ≥ 0 जो सत्य नहीं है।
बिन्दु (5, 0) इसके क्षेत्र में नहीं है।
y – 2x ≥ 0 को हल वे सब बिन्दु हैं जो OC पर और OC के ऊपर हैं।

(iii) रेखा x ≥ 3 बिन्दु D(3, 0), E(3, 10) से होकर जाती है।
असमिका x ≥ 3 के हल वे बिन्दु हैं जो DE या DE के दाईं ओर हैं।

(iv) x ≥ 0,y ≥ 0 पहले चतुर्थांश के बिन्दु हैं।
दी हुई असमिकाओं का हल उभयनिष्ठ क्षेत्र POR पर और उसके अन्दर के बिन्दु हैं।

प्रश्न 14.
3x + 2y ≤ 150, x + 4y ≤ 80, x ≤ 15, y ≥ 0.
हल:
दी हुई असमिकाएँ 3x + 2y ≤ 150, x + 4y ≤ 80, x ≤ 15, y ≥ 0.
(i) सरल रेखां 3x + 2y = 150, बिन्दु A(50, 0), B(0, 75) से होकर जाती है।
असमिका 3x + 2y ≤ 150 में x = 0, y = 0 रखने (UPBoardSolutions.com) पर 0 ≤ 150 जो सत्य है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में है।
इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो AB पर या AB से नीचे हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 14
(ii) रेखा x + 4y = 80 बिन्दु C(80, 0), D(0, 20) से होकर जाती है।
असमिका x + 4y ≤ 80 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 80 जो सत्य है।
मूल बिन्दु इस क्षेत्र में है। इसका हल वे सब बिन्दु हैं जो CD पर यी CD के नीचे स्थित है।

(iii) x = 15 रेखा -अक्ष के समान्तर है और x ≤ 15 का (UPBoardSolutions.com) हल वे बिन्दु हैं जो x = 15 पर या इसके बाईं ओर स्थित है।

(iv) y ≥ 0 में y-अक्ष पर और उसके ऊपर के सब बिन्दु हैं।
दी हुई असमिकाओं का हल उभयनिष्ठ क्षेत्र PORS हैं।

प्रश्न 15.
x + 2y ≤ 10, x + y ≥ 1, x – y ≤ 0, x ≥ 0, y ≥ 0.
हल:
दी हुई सममिकाएँ x + 2y ≤ 10, x + y ≥ 1, x – y ≤ 0, x ≥ 0, y ≥ 0.
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 6.3 15

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(i) सरल रेखा x + 2y = 10 बिन्दु A(10, 0) और B(0, 5) से होकर जाती है।
असमिका x + 2y ≤ 10 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 10 जो सत्य है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में है।
इस असमिका का हल वे सब बिन्दु हैं जो AB पर हैं तथा AB के नीचे हैं।

(ii) रेखा x + y = 1 बिन्दु C(1,0), D(0, 1) से होकर जाती है।
असमिका x + y ≥ 1 में x = 0, y = 0 रखने (UPBoardSolutions.com) पर, 0 ≥ 1 जो सत्य नहीं है।
मूल बिन्दु इसके क्षेत्र में नहीं है।
इस असमिका का हल वे सब बिन्दु हैं जो CD पर हैं या इसके ऊपर हैं।

(iii) रेखा x – y = 0 बिन्दु (0, 0) और (1, 1) से होकर जाती है।
असमिका x – y ≤ 0 में x = 0, y = 0 रखने पर 0 ≤ 0 जो सत्य है।
(0, 0) इसके क्षेत्र में है।
इस असमिका का हल वे बिन्दु जो x – y = 0 पर हैं या इसके ऊपर हैं।

(iv) x ≥ 0 वह क्षेत्र है जो y-अक्ष के दाईं ओर है।

(v) y ≥ 0 वह क्षेत्र है जो x-अक्ष के ऊपर है।
दी हुई असमिकाओं का हल वे सब बिन्दु हैं जो उभयनिष्ठ क्षेत्र PQDB में है।

अध्याय 6 पर विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1 से 6 तक की असमिकाओं को हल कीजिए:

प्रश्न 1.
2 ≤ 3x – 4 ≤ 5.
हल:
2 ≤ 3x – 4 ≤ 5
2 + 4 ≤ 3x ≤ 5 + 4
6 ≤ 3x ≤ 9
3 से दोनों पक्षों में भाग देने पर
2 ≤ x ≤ 3
दी हुई असमिका का हल = [2, 3].

प्रश्न 2.
6 ≤ -3 (2x – 4) < 12.
हल:
6 < -3(2x – 4) < 12 6 ≥ -6(x – 2) > 12
-6 से भाग करने पर
-1 ≥ x – 2 > -2;
-1 + 2 ≥ x > -2 + 2
1 ≥ x > 0 या 0 < x ≤ 1
दी हुई असमिका (UPBoardSolutions.com) का हल (0, 1].

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प्रश्न 7 से 12 तक की असमिकाओं को हल कीजिए और उनके हल को संख्या-रेखा पर निरूपित कीजिए:

प्रश्न 7.
5x + 1 > -24, 5x – 1 < 24.
हल:
(i) 5x + 1 > -24 या 5x > -25 या x > -5
(ii) 5x – 1 < 24 या 5x < 25
x < 5
असमिकाओं का हल (-5, 5).
इसका संख्या रेखा द्वारा निरूपण इस प्रकार है:
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प्रश्न 8.
2(x – 1) < x + 5, 3(x + 2) > 2 – x
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प्रश्न 9.
3x – 7 > 2(x – 6), 6 – x > 11 – 2x
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प्रश्न 10.
5(2x – 7) – 3(2x + 3) ≤ 0, 2x + 19 ≤ 6x + 47.
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प्रश्न 11.
एक विलयन को 68°F और 77°F के मध्य रखना है। सेल्सियस पैमाने पर विलयन के तापमान को परिसर ज्ञात कीजिए, जहाँ सेल्सियस फारेनहाइट परिवर्तन सूत्र परिसर ज्ञात कीजिए , जहाँ सेल्सियस फॉरेन्हाइत परिवर्तन सूत्र F = [latex]\frac { 9 }{ 5 }[/latex] C + 32 है।
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 11.1

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प्रश्न 12.
8% बोरिक एसिड के विलयन में 2% बोरिक एसिड का विलयन मिलाकर तनु (dilute) किया जाता है। परिणामी मिश्रण में बोरिक एसिड 4% से अधिक तथा 6% से कम होना चाहिए। यदि हमारे पास 8% विलयन की मात्रा 640 लीटर हो तो ज्ञात कीजिए कि 2% विलयन के कितने लीटर इसमें मिलाने होंगे?
हल:
माना 2% बोरिक एसिड का x लीटर विलयन मिलाया जाता है।
कुल मिश्रण की संख्या = 640 + x
(i) यदि मिश्रण में 4% से अधिक का विलयन है तो
x का 2% + 640 का 8% > (640 + x) को 4%
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 12
इस प्रकार 2% एसिड विलयन की मात्रा 320 लीटर से अधिक और 1280 लीटर से कम होनी चाहिए।

प्रश्न 13.
45% अम्ल के 1125 लीटर विलयन में कितना पानी मिलाया लाए कि परिणामी मिश्रण में अम्ल 25% से अधिक परन्तु 30% से कम हो जाए?
हल:
मान लीजिए 45% एसिड विलयन में x लीटर पानी मिलाया जाए, (UPBoardSolutions.com) तो मिश्रण की कुल मात्रा = (1125 + x) लीटर
(i) (1125 + x) का 25% < 1125 का 45%
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प्रश्न 14.
एक व्यक्ति के बोद्धिक-लब्धि (I.Q.) मापन का सूत्र निम्नलिखित है:
IQ = [latex]\frac { MA }{ CA }[/latex] x 100
जहाँ MA मानसिक आयु और CA कालानुक्रमी आयु है। यदि 12 वर्ष की आयु के बच्चों के एक समूह की IQ, असमिका 80 ≤ IQ ≤ 140 द्वारा व्यक्त हो, तो उस समूह के बच्चों की मानसिक आयु का परिसर ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Linear Inequalities 14

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UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry (रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry (रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ).

पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए-
(i) H20
(ii) CO2
(iii) CH4
उत्तर
(i) H20 का मोलर द्रव्यमान = (2×1.008) + (1600) = 18.016 amu
(ii) CO2 का मोलर द्रव्यमान = 12.01+ (2×1600)= 44.01 amu
(iii) CH4, का मोलर द्रव्यमाने = 12.01+ (4×1.008)= 16.042 amu

प्रश्न 2.
सोडियम सल्फेट (Na2SO4) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-1

प्रश्न 3.
आयरन के उस ऑक्साइड का मूलनुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए जिसमें द्रव्यमान द्वारा 69.9% आयरन और 30.1% ऑक्सीजन है।
उत्तर
>UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-2

∴ मूलानुपाती सूत्रे =Fe203

प्रश्न 4.
प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए। जब-
(i) 1 मोल कार्बन को हवा में जलाया जाता है और
(ii) 1 मोल कार्बन को 16 g ऑक्सीजन में जलाया जाता है।
उत्तर
ऑक्सीजन/वायु में कार्बन निम्न प्रकार से जलता ह-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-3

(i) हवा में ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा है। इस कारण से ज्वलन पूर्ण होता है। अतः 1 मोल कार्बन | के दहन से उत्पन्न CO2 = 44 g
(ii) इस स्थिति में ऑक्सीजन एक सीमांत अभिकर्मक है। केवल 0.5 मोल कार्बन के जलेंगे।
∴ 32 g ऑक्सीजन से उत्पन्न CO2 = 44g
∴ 16 g ऑक्सीजन से उत्पन्न CO2= [latex]\frac { 44 }{ 32 } \times 16[/latex]= 22 g

प्रश्न 5.
सोडियम ऐसीटेट (CH3COONa) का 500 mL, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82.0245 g mol-1 है।
उत्तर
जलीय विलयन की मोलरता निम्न समीकरण से व्यक्त की जा सकती है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-4
अत: सोडियम ऐसीटेट के द्रव्यमान की आवश्यक मात्रा = 15.38 g

प्रश्न 6.
सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के उस प्रतिदर्श का मोल प्रति लीटर में सान्द्रता का परिकलन कीजिए जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69% हो और जिसका घनत्व 1.41 g mL-1 हो।।
उत्तर
दिया गया प्रतिदर्श 69% है अर्थात् 100 g विलयन में केवल 69 g नाइट्रिक अम्ल है। नाइट्रिक अम्ल का मोलर द्रव्यमान =1+14+ (3×16) = 63g mol-1
∴ 69 g शुद्ध नाइट्रिक अम्ल (जो विलयन के 100 g में उपस्थित है) में उपस्थित मोलों की संख्या = [latex]\frac { 69 }{ 63 } =1.095[/latex]
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-5

प्रश्न 7.
100 g कॉपर सल्फेट (CuSO4) से कितना कॉपर प्राप्त किया जा सकता है?
उत्तर
CuSO4 का मोलर द्रव्यमान = 63.5 + 32+ (4×16)= 1595 g mol-1
1 मोल (159.5 g) CuSO4 में Cu का 1 ग्राम परमाणु (63.5 g) उपस्थित रहता है
∴ 100 g कॉपर सल्फेट से प्राप्त कॉपर की मात्रा = [latex]\frac { 63.5 }{ 159.5 } \times 100[/latex]= 39.81 g .

प्रश्न 8.
आयरन के ऑक्साइड का आण्विक सूत्र ज्ञात कीजिए जिसमें आयरन तथा ऑक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत क्रमशः 69.9 g तथा 30.1 g है।
हल
मूलानुपाती सूत्र की गणना के लिए प्रश्न 3 का हल देखिये।।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-6

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर क्लोरीन के औसत परमाणु द्रव्यमान का परिकलन कीजिए-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-7
उत्तर
क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-8

प्रश्न 10.
एथेन (C2H6) के तीन मोलों में निम्नलिखित का परिकलन कीजिए-
(i) कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(iii) एथेन के अणुओं की संख्या।
उत्तर

  1. 1 मोल एथेन में कार्बन परमाणुओं के 2 मोल हैं।
    ∴ 3 मोल एथेन में उपस्थित कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या = 3×2=6
  2.  1 मोल एथेन में हाइड्रोजन परमाणुओं के 6 मोल हैं।
    ∴ 3 मोल एथेन में उपस्थित हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या =3×6=18
  3. 1 मोल एथेन में उपस्थित अणु = 6.022×1023 (आवोगाद्रो संख्या)
    ∴ 3 मोल एथेन में उपस्थित अणुओं की संख्या = 3x 6.022x 1023 = 18.066×1023

प्रश्न 11.
यदि 20 g चीनी (C2H22O11) को जल की पर्याप्त मात्रा में घोलने पर उसका आयतन 2L हो जाए तो चीनी के इस विलयन की सान्द्रता क्या होगी?
उत्तर
चीनी का मोलर द्रव्यमान = (12×12)+ (1×22) + (11×16) = 342 g mol-1
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-9

प्रश्न 12.
यदि मेथेनॉल का घनत्व 0.793 kgL-1हो तो इसके 0.25 M के 2.5L विलयन को बनाने के लिए कितने आयतन की आवश्यकता होगी?
उत्तर
मेथेनॉल का मोलर द्रव्यमान (CH3OH)= 32 g mol-1
दिये गये विलयन को तैयार करने के लिए आवश्यक मेथेनॉल का भार, जो निम्नवत् है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-10
अतः आवश्यक मेथेनॉल प्रतिदर्श का आयतन = 25.22 mL

प्रश्न 13.
दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। दाब का S.I. मात्रक पास्कल नीचे दिया गया है-
1 Pa=1Nm-2
यदि समुद्रतल पर हवा का द्रव्यमान 1034 g cm-2हो तो पास्कल में दाब का परिकलन कीजिए।
उत्तर
दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया गया है।
समुद्रतल पर हवा का भार = mXg = 1034×98 = 10.1332 kg ms-2
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-11

प्रश्न 14.
द्रव्यमान का S.I. मात्रक क्या है? इसे किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
उत्तर
द्रव्यमान का S.I. मात्रक किलोग्राम (kg) है। पेरिस के निकट सैवरेस में 0°C पर रखी प्लैटिनम-इरीडियम मिश्र-धातु की एक विशेष छड़ अथवा टुकड़े का द्रव्यमान 1 मानक किलोग्राम माना गया है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित पूर्व-लग्नों को उनके गुणांकों के साथ मिलाइए-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-12
उत्तर

  1. माइक्रो-10-6,
  2. डेका-10,
  3. मेगा–10°,
  4.  गीगा–10,
  5. फेम्टो-10-15

प्रश्न 16.
सार्थक अंकों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
उन अंकों की संख्या को, जिनके द्वारा किसी राशि को निश्चित रूप से व्यक्त किया जाता है. सार्थक अंक कहते हैं।

प्रश्न 17.
पेय जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म, जो कैन्सरजन्य है, से अत्यधिक संदूषित पाया गया। संदूषण का स्तर 15 Ppm (द्रव्यमान के रूप में था।
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दर्शाइए।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए।
उत्तर
(i) 15 ppm (द्रव्यमान द्वारा) का अर्थ है कि क्लोरोफॉर्म के 15 भाग (द्रव्यमान से) पानी के 106 भाग (द्रव्यमान से) में उपस्थित हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-13

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को वैज्ञानिक संकेतन में लिखिए-
(i) 0.0048
(ii) 234.000
(iii) 8008
(iv) 500.0
(v) 6.0012
उत्तर
(i) 4.8×10-3,
(ii) 234×105,
(iii) 8.008×103,
(iv) 5.000×102,
(v) 60012×100

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में सार्थक अंकों की संख्या बताइए-
(i) 0.0025
(ii) 208
(iii) 5005
(iv) 126,000
(v) 500.00
(vi) 2.0034
उत्तर
(i) 2,
(ii) 3,
(iii) 4,
(iv) 6,
(v) 3,
(vi) 5

प्रश्न 20.
निम्नलिखित को तीन सार्थक अंकों तक निकटित कीजिए-
(i) 34.216
(ii) 10.4107
(iii) 0.04597
(iv) 2808
उत्तर
(i) 34.2,
(ii) 10.4,
(iii) 0.0460,
(iv) 2810

प्रश्न 21.
(क) जब डाइनाइट्रोजन और डाइऑक्सीजन अभिक्रिया द्वारा भिन्न यौगिक बनाती हैं। तो निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त होते हैं-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-14
ये प्रायोगिक आँकड़े रासायनिक संयोजन के किस नियम के अनुरूप हैं? बताइए।
(ख) निम्नलिखित में रिक्त स्थान को भरिए-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-15
उत्तर
(क) यदि नाइट्रोजन का द्रव्यमान 28 g स्थिर माना जाये तो इन चारों स्थितियों में ऑक्सीजन का द्रव्यमान क्रमशः 32 g, 64 g, 32 g और 80 g प्राप्त होता है, जो सरल पूर्ण संख्या अनुपात । 2 : 4 : 2 : 5 में हैं। अतः दिये गये आँकड़े गुणित अनुपात के नियम का पालन करते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-16

प्रश्न 22.
यदि प्रकाश का वेग 3.00 x 108 ms-1 हो तो 2.00 ns में प्रकाश कितनी दूरी तय करेगा?
उत्तर
तय दूरी = वेग x समय = 30×108 ms-1x200 ns
= 3.0×108 ms-1x200nsx[latex]\frac { { 10 }^{ -9 }s }{ 1ns } [/latex]= 6.00×10-1m=0.600 m

प्रश्न 23.
किसी अभिक्रिया A+B2→AB, में निम्नलिखित अभिक्रिया मिश्रणों में सीमान्त अभिकर्मक, (यदि कोई हो तो) ज्ञात कीजिए-
(i) A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
(ii) 2 मोल A+3 मोल B
(iii) A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
(iv) A के 5 मोल + B के 2-5 मोल
(v) A के 25 मोल+ B के 5 मोल
उत्तर

  1. दी गई अभिक्रिया के अनुसार, A + B2 → AB2 A का एक परमाणु AB के एक अणु से अभिक्रिया करता है।
    ∴ पूर्ण अभिक्रिया में A के 300 परमाणुओं के लिए, B के 300 अणुओं की आवश्यकता होगी। क्योंकि B के केवल 200 अणु उपस्थित हैं, अतः 100 अणुओं की कमी है। इस प्रकार A अधिकता में है। इसलिए B एक सीमान्त अभिकर्मक है।
  2. A के 1 मोल, B के 1 मोल से अभिक्रिया करते हैं।
    ∴ A के 2 मोल, B के 2 मोल से अभिक्रिया करेंगे B के 3 मोल उपस्थित हैं जो अधिकता में हैं। इस प्रकार A एक सीमान्त अभिकर्मक है।
  3. A के 100 परमाणु B के 100 अणुओं से पूरी तरह अभिक्रिया करेंगे। इस प्रकार दोनों प्रयुक्त हो जायेंगे। अत: इस स्थिति में कोई सीमान्त अभिकर्मक नहीं होगा।
  4. B के 2.5 मोल, A के 2.5 मोल के साथ अभिक्रिया करेंगे। इस प्रकार A अधिकता में बचा रहेगा। अतः, B एक सीमान्त अभिकर्मक है।
  5. A के 2.5 मोल B के 2.5 मोल के साथ अभिक्रिया करेंगे। इस प्रकारे B अधिकता में बचा रहेगा। अतः A एक सीमान्त अभिकर्मक है।

प्रश्न 24.
डाइनाइट्रोजन और डाइहाइड्रोजन निम्नलिखित रासायनिक समीकरण के अनुसार अमोनिया बनाती हैं-
N2(g) + 3H2(g) → 2NH3(g)
(i) यदि 2-00×103g डाइनाइट्रोजन 1-00×103 g डाइहाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती है तो प्राप्त अमोनिया के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
(ii) क्या दोनों में से कोई अभिकर्मक शेष बचेगा?
(iii) यदि हाँ, तो कौन-सा उसका द्रव्यमान क्या होगा?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-17

स्पष्ट है, डाइहाइड्रोजन अधिकता में है तथा डाइनाइट्रोजन एक सीमान्त अभिकर्मक है।
∵ 28 g डाइनाइट्रोजन से उत्पन्न अमोनिया = 34g
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-18

(ii) डाइहाइड्रोजन शेष बचेगा।
(iii) शेष H, का द्रव्यमान = 1.00×10-3 – 428.57=571.43 g

प्रश्न 25.
0.5 मोल Na2CO3और 0.50 M Na2CO3 में क्या अन्तर है?
उत्तर
Na2CO3 का मोलर द्रव्यमान = (2×23) +12+ (3×16)= 106
0.5 मोल Na2CO3 से तात्पर्य है-
05×106= 53g Na2CO3
यह केवल द्रव्यमान को सन्दर्भित करता है।
0.50 M Na2CO3 से तात्पर्य है 0.50 मोलर, अर्थात् Na2CO3 के 53 gm 1 लीटर विलयन में उपस्थित हैं। इस प्रकार यह विलयन के सान्द्रण को बताता है।

प्रश्न 26.
यदि डाइहाइड्रोजन गैस के 10 आयतन डाइऑक्सीजन गैस के 5 आयतनों के साथ अभिक्रिया करें तो जलवाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-19
हाइड्रोजन (H2) के दो आयतन ऑक्सीजन (O2) के एक आयतन के साथ अभिक्रिया करके जल वाष्प (H20) के दो आयतन उत्पन्न करते हैं।

इस प्रकार H2 के 10 आयतन पूर्णत: O2, के 5 आयतन के साथ अभिक्रिया करके जलवाष्प के 10 आयतन उत्पन्न करेंगे।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को मूल मात्रकों में परिवर्तित कीजिए-
(i) 28.7 pm
(ii) 15.15 us
(iii) 25365 mg
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-20

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से किसमें परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी?
(i) 1g Au(s)
(ii) 1 g Na(s)
(iii) 1g Li(s)
(iv) 1 g Cl2(g)
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-21
इस प्रकार एक ग्राम लीथियम में परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक है।

प्रश्न 29.
एथेनॉल के ऐसे जलीय विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए जिसमें एथेनॉल का मोल-अंश 0.040 है।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-22

इस प्रकार एक लीटर विलयन में एथेनॉल के 2.314 मोल उपस्थित हैं। अत: दिये गये विलयन की मोलरता = 2.314 M

प्रश्न 30.
एक 12c कार्बन परमाणु का ग्राम (g) में द्रव्यमान क्या होगा?
उत्तर
12c के एक मोल अर्थात् 6.022×1023 परमाणुओं का द्रव्यमान 12g होता है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-23

प्रश्न 31.
निम्नलिखित परिकलनों के उत्तर में कितने सार्थक अंक होने चाहिए?
(i) [latex]\frac { 0.02856\times 298.15\times 0.112 }{ 0.5785 } [/latex]
(ii) 5×5.364
(iii) 0.0125 + 0.7864 + 0.0215
उत्तर
(i) न्यूनतम यथार्थ परक संख्या (0.112) में तीन सार्थक अंक हैं। अत: उत्तर में तीन सार्थक अंक होने चाहिए।
(ii) पाँच पूर्ण संख्या हैं। दूसरी संख्या अर्थात् 5.364 में 4 सार्थक अंक है। अत: उत्तर में चार सार्थक अंक होने चाहिए।
(iii) उत्तर में चार सार्थक अंक होने चाहिए क्योंकि दशमलव स्थानों की न्यूनतम संख्या 4 है।

प्रश्न 32.
प्रकृति में उपलब्ध ऑर्गन के मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए निम्नलिखित तालिका में-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-24
उत्तर
ऑर्गन का औसत मोलर द्रव्यमान
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-25

प्रश्न 33.
निम्नलिखित में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए-
(i) 52 मोल Ar
(ii) 52u He
(iii) 52 g He
उत्तर
(i) ऑर्गन का 1 मोल = 6.022×1023परमाणु
∴ ऑर्गन के 52 मोल = 52x 6.022×1023 परमाणु = 3.131×1025 परमाणु
(ii) He के 4u = He का एक परमाणु
∴ He के 52u = [latex]\frac { 52 }{ 4 } [/latex] = 13 परमाणु
(iii) He के एक मोल अर्थात् इसके 4 g में 6.022×103 परमाणु उपस्थित होते हैं।
अतः 52 g He में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = [latex]\frac { 6.022\times { 10 }^{ 23 } }{ 4 } \times 52[/latex]
= 3.131×1025 परमाणु

प्रश्न 34.
एक वेल्डिंग ईंधन गैस में केवल कार्बन और हाइड्रोजन उपस्थित हैं। इसके नमूने की कुछ मात्रा ऑक्सीजन से जलाने पर 3.38 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.690 g जल के अतिरिक्त और कोई उत्पाद नहीं बनाती। इस गैस के 10.0L (STP पर मापित) आयतन का द्रव्यमान 11.69 g पाया गया। इसके-
(i) मूलानुपाती सूत्र
(ii) अणु द्रव्यमान और
(iii) अणुसूत्र की गणना कीजिए।
उत्तर
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UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-27

प्रश्न 35.
CaCO3 जलीय HCI के साथ निम्नलिखित अभिक्रिया कर CaCI2 और C02 बनाता है।
CaC03(s) + 2HCI(g) → CaCl2(aq) + C02(g) + H2O(l) 0.75 M-HCI के 25 mL के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए CaCO3 की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
उत्तर
विलयन की मोलरता (M) निम्न सम्बन्ध से प्राप्त की जा सकती है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-28

प्रश्न 36.
प्रयोगशाला में क्लोरीन का विरचन मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO2) की जलीय HCI विलयन के साथ अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित समीकरण के अनुसार किया जाता है| 4HCI(aq) + MnO2(s) → 2H20(l) + MnCl2(aq) + Cl2(g)
5.0 g मैंगनीज डाइऑक्साइड के साथ HCI के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे?
उत्तर
दी गई समीकरण निम्नवत् है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-29

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जल तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड निम्नलिखित में कौन-सा नियम दर्शाते हैं?
(i) स्थिर अनुपात का नियम
(ii) व्युत्क्रमानुपाती नियम ।
(iii) रासायनिक तुल्यता का नियम
(iv) गुणित अनुपात का नियम
उत्तर
(iv) गुणित अनुपात का नियम

प्रश्न 2.
आवोगाद्रो संख्या अणुओं की वह संख्या है जो उपस्थित रहती है।
(i) NTP पर 22.4 ली गैस में
(ii) किसी पदार्थ के 1 मोल में
(iii) पदार्थ के 1 ग्राम अणुभार
(iv) ये सभी
उत्तर
(iv) ये सभी

प्रश्न 3.
1 परमाण्विक द्रव्यमान इकाई (amu) का मान होता है।
(i)127 MeV
(ii) 9310 MeV
(iii) 931 MeV
(iv) 937 MeV
उत्तर
(iii) 931 Mev

प्रश्न 4.
1.12 लीटर नाइट्रोजन का STP पर लगभग द्रव्यमान है।
(i) 0.7 ग्राम
(ii) 2.8 ग्राम
(iii) 1.4 ग्राम
(iv) 3.0 ग्राम
उत्तर
(iii) 1.4 ग्राम

प्रश्न 5.
ऑक्सीजन के एक परमाणु का भार होगा
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-30
उत्तर
(ii) [latex]\frac { 16 }{ 6.023\times { 10 }^{ 23 } } [/latex] ग्राम

प्रश्न 6.
किसी गैस के 0.1 ग्राम का NTP पर आयतन 28 मिली है। इस गैस का अणुभार है
(i) 56
(ii) 40
(iii) 80
(iv) 60
उत्तर
(iii) 80

प्रश्न 7.
7.1 ग्राम क्लोरीन गैस में क्लोरीन के मोलों की संख्या है।
(i) 0.01
(ii) 0.1
(iii) 0.05
(iv) 0.5
उत्तर
(ii) 0.1

प्रश्न 8.
निम्न में से सबसे अधिक नाइंट्रोजन परमाणुओं की संख्या किसमें है?
(i) NH4CI का 1 मोल,
(ii) 2M NH3 का 500 मिली।
(iii) NO2 के 6023 X 1023 अणु
(iv) NTP पर 22.4 लीटर N2 गैस
उत्तर
(iv) NTP पर 22.4 लीटर N2 गैस

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में अधिकतम अणुओं की संख्या किसमें है?
(i) 44 ग्राम CO2 में
(ii) 48 ग्राम O3 में
(iii) 8 ग्राम H2 में
(iv) 64 ग्राम SO2 में
उत्तर
(iii) 8 ग्राम H2 में

प्रश्न 10.
अणुओं की संख्या सर्वाधिक है।
(i) STP पर 15 लीटर H2 गैस में
(ii) STP पर 5 लीटर N2 गैस में
(iii) 0.5 ग्राम H2 गैस में,
(iv) 10 ग्राम O2 गैस में
उत्तर
(i) STP पर 15 लीटर H2 गैस में

प्रश्न 11.
10 M-HCI के 100 मिली को 10 M- Na2CO3 के 75 मिली के साथ मिलाया गया।
परिणामी विलयन होगा
(i) अम्लीय
(ii) क्षारीय
(iii) उभयधर्मी
(iv) उदासीन
उत्तर
(ii) क्षारीय

प्रश्न 12.
पानी में H :0 को भारात्मक अनुपात है।
(i) 1:1
(ii) 1:2
(iii) 1 : 8
(iv) 1: 16
उत्तर
(iii) 1 : 18

प्रश्न 13.
आसुत (distilled) जल की मोलरता है
(i) 55.56
(ii) 18.00
(iii) 49.87
(iv) 81.00
उत्तर
(i) 55.56

प्रश्न 14.
यूरिया के जलीय विलयन की मोललता 4.44 मोल/किग्रा है। विलयन में यूरिया का मोल प्रभाज है।
(i) 0.074
(ii) 0.00133
(iii) 0.008
(iv) 0.0044
उत्तर
(i) 0.074

प्रश्न 15.
H3PO4 के 1 M विलयन की नॉर्मलता है।
(i) 0.5 N
(ii) 1N
(iii) 2 N
(iv) 3 N
उत्तर
(iv) 3 N

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दो तत्वों के नाम लिखिए जो उपधातुओं के रूप में कार्य करते हैं।
उत्तर
आर्सेनिक व ऐण्टीमनी।

प्रश्न 2.
सेल्सियस तथा फारेनहाइट में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर
सेल्सियस तथा फारेनहाइट में सम्बन्ध इस प्रकार है : °F = [latex]\frac { 9 }{ 5 } [/latex](°C)+32

प्रश्न 3.
स्थिर अनुपात का नियम किस वैज्ञानिक ने दिया था?
उत्तर
स्थिर अनुपात का नियम फ्रांसीसी रसायनज्ञ जोसफ प्राउस्ट ने सन् 1779 में दिया था।

प्रश्न 4.
कौन-सा नियम गैसीय अभिकारकों तथा गैसीय उत्पादों के अनुपात से सम्बन्धित है?
उत्तर
गै-लुसैक का नियम गैसीय अभिकारकों तथा गैसीय उत्पादों के अनुपात से सम्बन्धित है।

प्रश्न 5.
1 मोल पदार्थ को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
मोल पदार्थ की मात्रा का मात्रक है। 1 मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने ही मूल कण होते हैं जितने की 0.012 किग्रा कार्बन-12 में परमाणु होते हैं।

प्रश्न 6.
CaCO3 के 20 ग्राम में मोलों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-31

प्रश्न 7.
4.4 ग्राम CO2 में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या क्या होगी?
उत्तर
4.4 ग्राम CO2 में मोलों की संख्या = [latex]\frac { 4.4 }{ 44 } [/latex] = 0.1 मोल
0.1 मोल CO2 में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या
= 01x2xN = 01x2x 6023×1023
=1.2046×1023

प्रश्न 8.
C12 के 12 ग्राम में परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर
C12 के मोलों की संख्या =[latex]\frac { 12 }{ 12 } [/latex]=1 मोल
अतः 1 मोल C12 में परमाणुओं की संख्या = 6.023×1023 C12 परमाणु

प्रश्न 9.
CaCl2.2H2O का प्रतिशत संघटन निकालिए।
[Ca = 40, CI= 35.5, H = 1, 0 = 16]
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-32

प्रश्न 10.
मूलानुपाती सूत्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
वह सूत्र जो किसी यौगिक के अणु में उपस्थित विभिन्न परमाणुओं के सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात को दर्शाता है, यौगिक का मूलानुपाती सूत्र कहलाता है।

प्रश्न 11.
मूलानुपाती सूत्र तथा आणविक सूत्र में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर
आणविक सूत्र = nx मूलानुपाती सूत्र (जहाँ ॥ = 1, 2, 3, 4, 5,……..)

प्रश्न 12.
स्टॉइकियोमीट्रिक (रससमीकरणमिती) गुणांक क्या है?
2KCIO3 → 2KCl+3O2
अभिक्रिया के लिए स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक लिखिए।
उत्तर
स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक सन्तुलित रासायनिक समीकरण में अभिकारकों तथा उत्पादों के मोलों की संख्या को स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक कहते हैं।

2KCIO3 → 2KCl+3O2

उपर्युक्त अभिक्रिया में KCIO3 के 2 मोल गर्म करने पर 2 मोल KCI तथा 3 मोल 0, उत्पन्न हो रहा है। अतः उपर्युक्त अभिक्रिया का स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक 2, 2 व 3 है।

प्रश्न 13.
स्टॉइकियोमीट्रिक तथा अन-स्टॉइकियोमीट्रिक यौगिकों में अन्तर बताइए।
उत्तर
वे यौगिक जिनमें विद्यमान तत्वों का संघटन निश्चित होता है, स्टॉइकियोमीट्रिक कहलाते हैं; जैसे-H20, NH3 CH4, CO2 आदि। जबकि वे यौगिक जिनमें विद्यमान तत्वों का संघटन संयोग करने वाले अवयवों की संयोजकताओं के अनुरूप नहीं होता है तथा परिवर्तनीय होता है, जैसे-अन-स्टॉइकियोमीट्रिक कहलाते हैं; Fe0.98O, Cu1.7S आदि।

प्रश्न 14.
रासायनिक अभिक्रिया की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए।
उत्तर
रासायनिक अभिक्रिया रसायन विज्ञान में विभिन्न रसायनों की एक-दूसरे से होने वाली अभिक्रिया रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है। किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को अभिकारक तथा उस अभिक्रिया में बनने वाले पदार्थों को उत्पाद कहते हैं। रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्यतः निम्न प्रकार की होती हैं।

  1. अम्ल-क्षार अभिक्रियाएँ
  2. ऑक्सीकारक-अपचयन अभिक्रियाएँ
  3. अवक्षेपण अभिक्रियाएँ

प्रश्न 15.
मोल प्रभाज को संक्षेप में परिभाषित कीजिए।
उत्तर
मोल प्रभाज “विलयन में उपस्थित किसी एक अवयव का मोल प्रभाज उस विलयन में उपस्थित उस अवंयव के मोलों (ग्राम-अणुओं) की संख्या तथा विलयन में उपस्थित इन सभी अवयवों के मोलों की कुल संख्या का अनुपात होता है।”
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-33

[नोट : विलयन में उपस्थित सभी अवयवों के मोल प्रभाज का योग सदैव एक होता है तथा अवयवों के मोल प्रभाज ताप परिवर्तन पर अपरिवर्तित रहते हैं।

प्रश्न 16.
विलयन की मोलरता क्या व्यक्त करती है?
उत्तर
किसी विलयन के एक लीटर आयतन में उपस्थित विलेय पदार्थ के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता कहते हैं। इस प्रकार यह विलयन के प्रति लीटर में विलेय की सान्द्रता व्यक्त करती है।

प्रश्न 17.
मोललता की परिभाषा लिखिए तथा इसकी इकाई भी बताइए।
उत्तर
किसी विलायक के 1 किग्रा में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या मोललता कहलाती है। इसे m से निरूपित करते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-34
इसकी इकाई (मात्रक) मोल/किग्रा है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए
(i) द्रव्य,
(ii) तत्त्व,
(iii) यौगिक,
(iv) मिश्रण,
(v) परमाणु तथा
(vi) अणु
उत्तर

  1. द्रव्य-वह पदार्थ जो स्थान घेरता है, जिसमें भार होता है तथा जिसका ज्ञान हम अपनी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा कर सकते हैं, द्रव्य कहलाता है।
  2. तत्त्व-ऐसे द्रव्य जिनको किसी भी विधि द्वारा दो या दो से अधिक विभिन्न द्रव्यों में अपघटित न किया जा सके, तत्त्व कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-लोहा, ताँबा, चाँदी आदि।
  3. यौगिक–शुद्ध समांगी द्रव्य (पदार्थ) जो दो या दो से अधिक तत्त्वों के निश्चित अनुपात में पारस्परिक रासायनिक संयोग से बनता है, यौगिक कहलाता है। उदाहरणार्थ-सोडियम क्लोराइड, चीनी, जल आदि।
  4.  मिश्रण–वे द्रव्य जो दो या दो से अधिक पदार्थों (तत्त्वों अथवा यौगिकों) को किसी भी अनुपात में मिला देने पर बनते हैं, मिश्रण कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-चीनी और रेत का मिश्रण, चीनी का जल में मिश्रण आदि।
  5. परमाणु-तत्त्व का वह सूक्ष्मतम कण जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है, परमाणु कहलाता है।
  6. अणु-किसी पदार्थ (तत्त्व अथवा यौगिक) का वह सूक्ष्मतम कण जो स्वतन्त्र रूप में रह सकता है, अणु कहलाता है।

प्रश्न 2.
मिश्रण और यौगिक में अन्तर बताइए।
उत्तर
मिश्रण और यौगिक में अन्तर निम्नलिखित हैं-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-35
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-36

प्रश्न 3.
द्रव्य की कणिक प्रकृति पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
हम जानते हैं कि सभी भौतिक वस्तुएँ द्रव्य से बनी हुई हैं परन्तु द्रव्य किससे बना हुआ है? इस प्रश्न का उत्तर मानव प्राचीनकाल से ही खोजता आया है। ईसा से 500 वर्ष पूर्व भारतीय महर्षि कणाद ने यह विचार व्यक्त किया था कि द्रव्य असतत हैं अर्थात् द्रव्य अतिसूक्ष्म अभिकारक कणों से बना हुआ है। ईसा से पूर्व पाँचवीं शताब्दी में यूनानी दार्शनिक डेमोक्रेटस ने तथा ईसा से पूर्व प्रथम शताब्दी में रोम के दार्शनिक ल्यूक्रिटस ने भी यही विचार व्यक्त किये थे कि द्रव्य अतिसूक्ष्म अविभाज्य कणों से बना हुआ है। इस प्रकार यह सिद्ध हुआ कि द्रव्य की प्रकृति कणिक होती है। 17 वीं और 18 वीं शताब्दी में भी कुछ रसायनशास्त्रियों ने द्रव्य की कणिक प्रकृति सम्बन्धी परिकल्पनाएँ दी। परन्तु 19 वीं शताब्दी से पूर्व तक द्रव्य की रचना के सम्बन्ध में व्यक्त किये गये विचार केवल सपना मात्र थे। सन् 1803 में जॉन डॉल्टन ने सर्वप्रथम परमाणु परिकल्पना के आधार पर द्रव्य की कणिक प्रकृति को सिद्ध किया। अभी यह परमाणु परिकल्पना प्रयोगों और प्रेक्षणों के परिणामों पर आधारित थी। इस प्रकार सिद्ध हुआ कि द्रव्य की प्रकृति कृणिक होती है अर्थात् यह अविन्यास कणों (परमाणुओं) से निर्मित होता है।

प्रश्न 4.
S.I. पद्धति के मूल मात्रक कौन-कौन से हैं? ये किन भौतिक राशियों से सम्बन्धित हैं?
उत्तर
S.I. पद्धति के मूल मात्रक, उनसे संम्बन्धित भौतिक राशियों तथा उनके प्रतीकों को निम्नांकित सारणी में दर्शाया गया है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-37

प्रश्न 5.
द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या है? एक प्रयोग द्वारा दर्शाइए कि रासायनिक परिवर्तन के लिए भी यह नियम सत्य है।
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “किसी रासायनिक अथवा भौतिक परिवर्तन में, उत्पादों का कुल द्रव्यमान अभिकारकों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है। प्रयोग जब 100 ग्राम मरक्यूरिक ऑक्साइड को एक बन्द नली में लेकर गर्म किया जाता है तो 92.6 ग्राम मरक्यूरी और 7.4 ग्राम ऑक्सीजन प्राप्त होती है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-38

यहाँ उत्पादों का कुल द्रव्यमान (92.6 ग्राम + 7.4 ग्राम = 100 ग्राम) अभिकारक के द्रव्यमान (100 ग्राम) के बराबर है।।

प्रश्न 6.
स्थिर अनुपात के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “एक रासायनिक यौगिक में एक ही प्रकार के तत्त्व भारानुसार एक निश्चित अनुपात में जुड़े रहते हैं।’ उदाहरणार्थ— कार्बन डाइऑक्साइड किसी भी विधि से बनाई जाए (वायु में कोयले को गर्म करके, सोडियम बाइकार्बोनेट को गर्म करके अथवा कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करके) उसमें सदैव 1 कार्बन परमाणु और 2 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं तथा ये दोनों सदैव भारानुसार 12 : 32 अथवा 3: 8 के अनुपात में जुड़े रहते हैं।

प्रश्न 7.
गुणित अनुपात के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “जब दो तत्त्वे परस्पर संयोग करके एक से अधिक यौगिक बनाते हैं, तब उनमें एक तत्त्व के विभिन्न भार जो दूसरे तत्त्व के एक निश्चित भार से संयोग करते हैं परस्पर सरल अनुपात में होते हैं। उदाहरणार्थ-सल्फर, ऑक्सीजन के साथ संयोग करके दो यौगिक सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड बनाता है। सल्फर डाइऑक्साइड में सल्फर के 32 भाग, ऑक्सीजन के 32 भागों (भारानुसार) से संयोग करते हैं जबकि सल्फर ट्राइऑक्साइड में सल्फर के 32 भाग ऑक्सीजन के 48 भागों (भारानुसार) से संयोग करते हैं। ऑक्सीजन के विभिन्न भारों, जो सल्फर के निश्चित भार (32 भाग) से संयोग करते हैं, का अनुपात 32:48 अथवा 2:3 हैं जो कि एक सरल अनुपात हैं।

प्रश्न 8.
व्युत्क्रम अनुपात के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “जब दो तत्त्व किसी तीसरे तत्त्व के निश्चित भार से संयोग करते हैं, तो उनके भारों का अनुपात या तो वही रहता है या उन भारों के अनुपात का अपवर्त्य होता है जिसमें वे आपस में संयोग करते हैं। उदाहरणार्थ-कार्बन, सल्फर और ऑक्सीजन तीन तत्त्व हैं। कार्बन और सल्फर ऑक्सीजन से अलग-अलग संयोग करके क्रमशः कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड बनाते हैं। सल्फर और कार्बन आपस में संयोग करके कार्बन डाइसल्फाइड बनाते हैं। कांर्बन डाइऑक्साइड (CO, ) में कार्बन के 12 भाग ऑक्सीजन के 32 भागों से संयोग (भारानुसार) करते हैं जबकि सल्फर डाइऑक्साइड (SO,) में सल्फर के 32 भाग ऑक्सीजन के 32 भागों से संयोग (भारानुसार) करते हैं। अब ऑक्सीजन के निश्चित भार (32 भाग) से संयोग करने वाले कार्बन और सल्फर के भारों में अनुपात 12 : 32 अथवा 3 : 8 कार्बन डाइसल्फाइड (Cs,) में कार्बन के 12 भाग सल्फर के 64 भागों से संयोग (भारानुसार) करते हैं। CS, में कार्बन और सल्फर के भारों में अनुपात 12:64 अथवा 3 : 16

ऊपर दिए गए अनुपातों में अनुपात [latex]\frac { 3 }{ 8 } :\frac { 3 }{ 16 } [/latex] अथवा 2 : 1.

अत: ऑक्सीजन के निश्चित भार के साथ संयोग करने वाले कार्बन और सल्फर के भारों में अनुपात, भारों के उस अनुपात का सरल अपवर्त्य होता है जिसमें कार्बन और सल्फर आपस में संयोग करते हैं। इस प्रकार यह उदाहरण व्युत्क्रम अनुपात के नियम की पुष्टि करता है।

प्रश्न 9.
गै-लुसैक के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
इस नियम के अनुसार, “जब दो गैसें परस्पर संयोग या रासायनिक अभिक्रिया करती हैं, तो समान ताप व दाब पर अभिकारक तथा उत्पाद गैसों के आयतन सरल अनुपात में होते हैं।’
उदाहरणार्थ -एक आयतन हाइड्रोजन (H2), एक आयतन क्लोरीन (Cl2) के साथ संयोग करके 2 आयतन हाइड्रोजन क्लोराइड गैस (HCI) देती है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 Some Basic Concepts of Chemistry img-39
अत: अभिकारक तथा उत्पाद गैसों का अनुपात 1: 1 : 2 है।

प्रश्न 10.
42.47 ग्राम सिल्वर नाइट्रेट प्रति लीटर वाले विलयन के 10 मिली से कितने ग्राम सिल्वर क्लोराइड प्राप्त होगी? (Ag = 108, N=14, 0 = 16, Cl= 35.5, H = 1)
उत्तर
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प्रश्न 11.
सामान्य ताप एवं दाब पर 2.4 लीटर ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए कितना KCIO3 आवश्यक है? (K= 39, Cl= 35.5)
उत्तर
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प्रश्न 12.
1.7 ग्राम अमोनिया (अणुभार = 17) में मोलों और अणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर
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प्रश्न 13.
1 ग्राम हीलियम (He) में परमाणुओं की संख्या और NTP पर आयतन की गणना कीजिए।
उत्तर
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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव जीवन में रसायन विज्ञान के महत्व एवं विस्तार का वर्णन कीजिए।
उत्तर
आधुनिक जीवन में रसायन विज्ञान का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह लगभग सभी क्षेत्रों में मानव-समाज की सेवा कर रहा है और मानव जीवन को सुखी, स्वस्थ, सुरक्षित एवं समृद्ध बना रहा है। राष्ट्रीय अर्थ-व्यवस्था में भी रसायन विज्ञान का महत्त्वपूर्ण योगदान है। देश की विकास योजनाओं की सफलत बहुत कुछ रसायन-विज्ञान के अनुप्रयोग पर निर्भर करती है। सभी लघु और बड़े उद्योगों में रासायनिक पदार्थों की आवश्यकता पड़ती है। अम्ल, क्षार और लवणों का उपयोग धातु-निष्कर्षण, धातु-शोधन, पेट्रोलियम शोधन तथा काँच, साबुन, कागज, कपड़ा, उर्वरक, विस्फोटक, रंजक, औषधियों आदि के उत्पादन में होता है। सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, अमोनिया, कॉस्टिक सोडा और क्लोरीन उद्योगों के स्तम्भ हैं। लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, जिंक, निकिल आदि धातुओं, पीतल तथा स्टील अनेक प्रकार की मिश्र-धातुओं का उपयोग उद्योग-धन्धों और दैनिक जीवन की अनेकों वस्तुएँ बनाने में होता है। प्लास्टिक, टेफ्लॉन, पॉलिथीन, कृत्रिम रबर व अन्य बउत्तरकों से अनेक प्रकार की उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। कृत्रिम रेशम, ऊन तथा धागों से वस्त्र बनाए जाते हैं। कीटनाशी, पीड़कनाशी आदि रसायन फसल की रक्षा करते हैं। औषधियाँ स्वास्थ्य तथा जीवन की रक्षा करती हैं। तेल, वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लवण और विटामिन हमारे भोजन के आवश्यक अंग हैं। संक्षेप में रसायन विज्ञान के महत्त्व को निम्नवत् स्पष्ट किया जा सकता है-
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प्रश्न 2.
डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त क्या है? इसके प्रमुख बिन्दु लिखिए। इसके दोषों का भी वर्णन कीजिए।
उत्तर
डोल्टन का परमाणु सिद्धान्त-एक अंग्रेज अध्यापक जॉन डाल्टन ने सन् 1808 में द्रव्य की रचना के सम्बन्ध में एक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जिसे डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त कहते हैं। इस परमाणु सिद्धान्त के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् हैं-

  1. द्रव्य अत्यन्त सूक्ष्म अविभाज्य कणों का बना होता है जिन्हें परमाणु (atoms) कहते हैं।
  2. एक ही तत्त्व के परमाणु सभी प्रकार से समान होते हैं अर्थात् उनका भार, आकृति आदि समान होते हैं।
  3. विभिन्न तत्त्वों के परमाणुओं के आकार, भार, रासायनिक गुण आदि भिन्न-भिन्न होते हैं।
  4. परमाणु न तो नष्ट किए जा सकते हैं और न ही उत्पन्न अर्थात् ये अविनाशी होते हैं।
  5. एक परमाणु वह सूक्ष्मतम कण है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है अर्थात् पूर्ण परमाणु न कि उनके भिन्न (fractions) रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं।
  6. एक ही अथवा विभिन्न तत्त्वों के परमाणु संयुक्त होकर यौगिक परमाणु (compound atoms) बनाते हैं जिन्हें अब अणु (molecules) कहा जाता है।
  7. जब परमाणु संयुक्त होकर यौगिक परमाणु बनाते हैं तो उनकी संख्याओं में सरल पूर्ण संख्या अनुपात (1 : 1, 1 : 2, 2 : 1, 2: 3) होता है।
  8. दो तत्त्वों के परमाणु विभिन्न अनुपातों में संयोग करके एक से अधिक यौगिक बना सकते हैं।
    उदाहरणार्थ-सल्फर ऑक्सीजन से संयोग करके सल्फर डाइऑक्साइड (SO,) और सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO) बनाता है जिनमें सल्फर और ऑक्सीजन का अनुपात क्रमशः 1:2 और 1: 3 होता है।
  9. परमाणु रासायनिक परिवर्तन में अपनी निजी सत्ता (individuality) बनाए रखते हैं।

डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त के दोष
डाल्टन के परमाणु सिद्धान्तं ने द्रव्य की आंतरिक रचना के बारे में काफी सटीक और सही जानकारी दी। साथ ही उससे रासायनिक संयोजन के नियमों की भी सही व्याख्या हुई परन्तु इस सिद्धान्त के कुछ दोष भी पाए गए जो निम्नवत् हैं-

  1. यह बता नहीं सका कि विभिन्न तत्त्वों के परमाणु किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न होते हैं अर्थात् उसने परमाणु की आंतरिक संरचना के बारे में कुछ नहीं बताया।
  2. यह गे-लुसैक के गैसीय आयतन के नियम की व्याख्या करने में असफल रहा।
  3. यह स्पष्ट नहीं कर सका कि परमाणु क्यों और कैसे जुड़कर यौगिक परमाणु बनाते हैं।
  4. यह अणु में परमाणुओं को बाँधे रखने वाले बल की प्रकृति के विषय में कुछ नहीं बता सका।
  5. यह अभिक्रिया में भाग लेने वाले तत्त्व के मूल कण (परमाणु) और स्वतन्त्र अवस्था में पाए जा सकने वाले मूल कण (अणु) में विभेद नहीं कर सका।

Grams to moles calculator is the best mole weight calculator.

प्रश्न 3.
मोल संकल्पना का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर
परमाणुओं के निरपेक्ष द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए यह अनिवार्य है कि हमें पदार्थ की निश्चित मात्रा में उपस्थित परमाणुओं अथवा अणुओं की संख्या ज्ञात हो। अध्ययन से यह पता चला है कि किसी भी तत्त्व के एक ग्राम परमाणु में समान संख्या में परमाणु होते हैं। इसी प्रकार किसी भी पदार्थ के एक ग्राम अणु में समान संख्या में अणु होते हैं। प्रयोगों द्वारा यह संख्या 6023×1023 ज्ञात हुई है। इस संख्या को ‘आवोगाद्रो संख्या’ या ‘आवोगाद्रो स्थिरांक’ कहते हैं तथा इसे NA द्वारा प्रदर्शित करते। हैं। किसी पदार्थ की वह मात्रा जिसमें 6023×1023 तात्विक कण पाये जाते हैं, एक मोल (mole) कहलाती है। दूसरे शब्दों में, एक मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने ही तात्विक कण पाये जाते हैं जितने कि कार्बन-12 के 12 g(0.012 kg) में होते हैं। ‘मोल’ पद का प्रयोग परमाणु, अणु, आयन, इलेक्ट्रॉन आदि किसी के लिए भी किया जा सकता है। मोल परमाणुओं, अणुओं, आयनों आदि को गिनने का एक मात्रक है। जिस प्रकार एक दर्जन का तात्पर्य 12 वस्तुओं और एक स्कोर का तात्पर्य 20 वस्तुओं से है, ठीक उसी प्रकार मोल का तात्पर्य 6023×1023 कणों से है। इसका कणों की प्रकृति से कोई सम्बन्ध नहीं है।
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किसी पदार्थ के एक मोल के ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान को उसका मोलर द्रव्यमान (molar mass) कहते हैं। परमाणुओं की स्थिति में यह ग्राम परमाणु द्रव्यमान (gram atomic mass) और अणुओं की स्थिति में यह ग्राम आणविक द्रव्यमान (gram molecular mass) के समान होता है। इसे हम इस प्रकार भी कह सकते हैं कि किसी तत्त्व के 6023×1023 परमाणुओं का ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान उसके ग्राम परमाणु द्रव्यमान अथवा एक ग्राम परमाणु के समान होता है। इसी प्रकार किसी तत्त्व अथवा यौगिक के 6023×1023 अणुओं का ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान उसके ग्राम आणविक द्रव्यमान अथवा एक ग्राम अणु के समान होता है।

उदाहरणार्थ-6023×1023 ऑक्सीजन परमाणुओं का द्रव्यमान = 16 g
6023×1023 ऑक्सीजन अणुओं का द्रव्यमान = 32 g
6023×1023 जल अणुओं का द्रव्यमान = 18 g

यदि पदार्थ परमाणवीय (atomic) है तो मोलर द्रव्यमान 6023×1023 (आवोगाद्रो संख्या) परमाणुओं को द्रव्यमान होता है। ऐसे में हम मोलर द्रव्यमान को आवोगाद्रो संख्या से भाग देकर एक परमाणु का निरपेक्ष द्रव्यमान (absolute mass) ज्ञात कर सकते हैं। इसी प्रकार हम आणविक पदार्थों के एक अणु का निरपेक्ष द्रव्यमान भी ज्ञात कर सकते हैं।

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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 17 Breathing and Exchange of Gases

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 17 Breathing and Exchange of Gases (श्वसन और गैसों का विनिमय)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 17 Breathing and Exchange of Gases (श्वसन और गैसों का विनिमय)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जैव क्षमता की परिभाषा दीजिए और इसका महत्त्व बताइए।
उत्तर :
जैव क्षमता। अन्त:श्वास आरक्षित वायु (Inspiratory Reserve Air Volume, IRV), प्रवाही वायु (Tidal Air Volume, TV) तथा उच्छ्वास आरक्षित वायु (Expiratory Reserve Air Volume, ERV) का योग (IRV + TV + ERV- 3000 + 500 + 1100 = 4600 मिली) फेफड़ों की जैव क्षमता होती है। यह वायु की वह कुल मात्रा होती है जिसे हम पहले पूरी चेष्टा द्वारा फेफड़ों में भरकर पूरी चेष्टा द्वारा शरीर से बाहर निकाल सकते हैं। जिस व्यक्ति की जैव क्षमता जितनी अधिक होती है, (UPBoardSolutions.com) उसे शरीर की जैविक क्रियाओं के लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। खिलाड़ियों, पर्वतारोही, तैराक आदि की जैव क्षमता अधिक होती है। युवक की जैव क्षमता प्रौढ़ की अपेक्षा अधिक होती है। पुरुषों की जैव क्षमता स्त्रियों की अपेक्षा अधिक होती है। यह उनकी कार्य क्षमता को प्रभावित करती है।

प्रश्न 2.
सामान्य निःश्वसन के उपरान्त फेफड़ों में शेष वायु के आयतन को बताएँ।
उत्तर :
वायु की वह मात्रा जो सामान्य नि:श्वसन (उच्छ्वास) के उपरान्त फेफड़ों में शेष रहती है, कार्यात्मक अवशेष सामर्थ्य (Functional Residual Capacity, FRC) कहलाती है। यह उच्छ्वास आरक्षित वायु (Expiratory Reserve Air Volume, ERV) तथा अवशेष वायु (Residual Air Volume, RV) के योग के बराबर होती है। इसकी सामान्यतया मात्रा 2300 मिली होती है।

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FRC = ERV + RV
= 1100 + 1200 मिली
= 2300 मिली।

प्रश्न 3
गैसों का विसरण केवल कूपकीय क्षेत्र में होता है, श्वसन तन्त्र के किसी अन्य भाग में नहीं, क्यों?
उत्तर :
गैसीय विनिमय मनुष्य के फेफड़ों में लगभग 30 करोड़ वायु कोष्ठक या कूपिकाएँ (alveoli) होते हैं। इनकी पतली भित्ति में रक्त केशिकाओं को घना जाल फैला होता है। श्वासनाल (trachea), श्वसनी (bronchus), श्वसनिका (bronchiole), कूपिका नलिकाओं (alveolar duct) आदि में रक्त केशिकाओं का जाल फैला हुआ नहीं होता। इनकी भित्ति मोटी होती है। अत: कूपिकाओं (alveoli) को छोड़कर अन्य श्वसन भागों में गैसीय विनिमय नहीं होता। सामान्यतया ग्रहण की गई 500 मिली प्रवाही वायु में से लगभग 350 मिली कूपिकाओं में पहुँचती है, शेष श्वास मार्ग में ही रह जाती है। वायु कोष्ठकों की भित्ति तथा रक्त केशिकाओं की भित्ति (UPBoardSolutions.com) मिलकर श्वसन कला (respiratory membrane) बनाती हैं। इससे O2 तथा C का विनिमय सुगमता से हो जाता है। गैसीय विनिमय सामान्य विसरण द्वारा होता है। इसमें गैसें उच्च आंशिक दबाव से कम आंशिक दबाव की ओर विसरित होती हैं। वायुकोष्ठकों में O2 का आंशिक दबाव 100 -104 mm Hg और CO2) को आंशिक दबाव 40 mm Hg होता है। फेफड़ों में रक्त केशिकाओं में आए अशुद्ध रुधिर में 0 का आंशिक दबाव 40 mm Hg और CO2) का आंशिक दबाव 45-46 mm Hg होता है।
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ऑक्सीजन वायुकोष्ठकों की वायु से विसरित होकर रक्त में जाती है और रक्त से CO2 विसरित होकर वायुकोष्ठकों की वायु में जाती है। इस प्रकार वायुकोष्ठकों से रक्त ले जाने वाली रक्त केशिकाओं में रक्त ऑक्सीजनयुक्त (Oxygenated) होता है। फेफड़ों से निष्कासित वायु में O2 लगभग 15.7% और CO2 लगभग 3.6% होती है।

प्रश्न 4.
CO2 के परिवहन (ट्रांसपोर्ट) की मुख्य क्रियाविधि क्या है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
कार्बन डाइऑक्साइड का रुधिर द्वारा परिवहन ऊतकों में संचित खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड विसरण द्वारा रुधिर केशिकाओं में चली जाती है। रुधिर केशिकाओं द्वारा इसकापरिवहन श्वसनांगों तक निम्नलिखित तीन प्रकार से होता है
(1) प्लाज्मा में घुलकर (Dissolved in Plasma) :
लगभग 7% कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन प्लाज्मा में घुलकर कार्बोनिक अम्ल के रूप में होता है।

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(2) बाइकार्बोनेट्स के रूप में (In the form of Bicarbonates) :
लगभग 70% कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन बाइकार्बोनेट्स के रूप में होता है। प्लाज्मा के अन्दर कार्बोनिक अम्ल का निर्माण धीमी गति से होता है। अत: कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश भाग (93%) लाल रुधिराणुओं में विसरित हो जाता है। इसमें से 70% कार्बन डाइऑक्साइड से (UPBoardSolutions.com) कार्बोनिक अम्ल व अन्त में बाइकार्बोनेट्स का निर्माण हो जाता है। लाल रुधिराणुओं में कार्बोनिक एनहाइड्रेज एन्जाइम की उपस्थिति में कार्बोनिक अम्ल का निर्माण होता है।
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प्लाज्मा में, कार्बोनिक एनहाइड्रेज एन्जाइम अनुपस्थित होता है; अत: प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट कम मात्रा में बनता है। बाइकार्बोनेट आयन UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 17 Breathing and Exchange of Gases image 3 लाल रुधिराणुओं के पोटैशियम आयन (K+) तथा प्लाज्मा के सोडियम आयन (Na+) से क्रिया करके क्रमशः पोटैशियम तथा सोडियम बाइकार्बोनेट बनाता है।
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क्लोराइड शिफ्ट या हैम्बर्गर परिघटना (Chloride Shift or Hambergur Phenomenon) सामान्य pH तथा विद्युत तटस्थता (electric neutrality) बनाए रखने के लिए जितने बाइकार्बोनेट आयन रुधिर कणिकाओं से प्लाज्मा में आते हैं, उतने ही क्लोराइड आयन (Cl) रुधिर कणिकाओं में जाकर उसकी पूर्ति करते हैं। इस क्रिया के फलस्वरूप प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट तथा लाल रुधिरे कणिकाओं में क्लोराइड आयनों का जमाव हो जाता है। इस क्रिया को क्लोराइड शिफ्ट (chloride shift) कहते हैं। श्वसन तल पर प्रक्रियाएँ विपरीत दिशा में होती हैं जिससे CO2 मुक्त होकर वायुमण्डल में चली जाती है।

(3) कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में (In the form of Carboxyhaemoglobin) :
कार्बन डाइऑक्साइड का लगभग 23% भाग लाल रुधिर कणिकाओं के हीमोग्लोबिन से मिलकर अस्थायी यौगिक बनाता है
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सोडियम तथा पोटैशियम के बाइकार्बोनेट्स तथा कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन आदि पदार्थों से युक्त रुधिर अशुद्ध होता है। यह रुधिर ऊतकों और अंगों से शिराओं द्वारा हृदय में पहुँचता है। हृदय से यह रुधिर फुफ्फुस धमनियों द्वारा फेफड़ों में शुद्ध होने के लिए जाता है। फेफड़ों में ऑक्सीजन की अधिक मात्रा होने के कारण रुधिर की हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से मिलकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है। ऑक्सीहीमोग्लोबिन, हीमोग्लोबिन की अपेक्षा अधिक अम्लीय होता है। (UPBoardSolutions.com) ऑक्सीहीमोग्लोबिन के अम्लीय होने के कारण श्वसन सतह पर कार्बोनेट्स तथा कार्बोनिक अम्ल का विखण्डन (decomposition) होता है
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कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन तथा प्लाज्मा प्रोटीन के रूप में बने अस्थायी यौगिक भी ऑक्सीजन से संयोजित होकर कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त कर देते है
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उपर्युक्त प्रकार से मुक्त हुई कार्बन डाइऑक्साइड रुधिर केशिकाओं तथा फेफड़ों की पतली दीवारों से विसरित होकर फेफड़ों में पहुँचती है जहाँ से यह उच्छ्वास द्वारा बाहर निकाल दी जाती है।

प्रश्न 5.
कूपिका वायु की तुलना में वायुमण्डलीय वायु में pO2 तथा pCO2 कितनी होगी? मिलान कीजिए।
(i) pO2 न्यून, pCO2 उच्च
(ii) pO2 उच्च, pCO2 न्यून
(iii) pO2 उच्च, pCO2 उच्च
(iv) pO2 न्यून, pCO2 न्यून
उत्तर :
(ii) pO2 उच्च, pCO2 न्यून। (वायुमण्डलीय वायु में O2 का आंशिक दाब 159 तथा CO2 का आंशिक दाब 0.3 होता है, जबकि कूपिका वायु में O2 का आंशिक दाब 104 तथा CO2 का आंशिक दाब 40 होता है।)

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प्रश्न 6.
सामान्य स्थिति में अन्तःश्वसन प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
सामान्य श्वासोच्छ्वास (breathing) या श्वासन अनैच्छिक होता है। इसमें पसलियों की गति की भूमिका 25% और डायफ्राम की भूमिका 75% होती है।

अन्तःश्वास या प्रश्वसन (Inspiration) :
सामान्य स्थिति में अन्त:श्वास में गुम्बदनुमा डायफ्राम पेशियों में संकुचन के कारण चपटा सा हो जाता है। डायफ्राम की गति के साथ बाह्य अन्तरापर्शक पेशियों (external intercostal muscles) में संकुचने से पसलियाँ सीधी होकर ग्रीवा की तथा बाहर की तरफ खिंचती है। इससे उरोस्थि (sternum) ऊपर और आगे की ओर उठ जाती है। इन गतियों के कारण वक्षगुहा का आयतन बढ़ जाता है और फेफड़े फूल जाते हैं। वक्ष गुहा और फेफड़ों में वृद्धि के कारण वायुकोष्ठकों या कूपिकाओं (alveoli) में वायुदाब लगभग 1 से 3mm Hg कम हो जाता है। इसकी पूर्ति के लिए वायुमण्डलीय वायु श्वास मार्ग से कूपिकाओं में पहुँच जाती है। इस क्रिया को (UPBoardSolutions.com) अन्तःश्वास कहते हैं। इसके द्वारा मनुष्य (अन्य स्तनी) वायु ग्रहण करते हैं।

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प्रश्न 7.
श्वसन का नियमन कैसे होता है?
उत्तर :
श्वसन का नियमन मस्तिष्क के मेड्यूला (medulla) एवं पोन्स वैरोलाइ (Pons varolii) में स्थित श्वास केन्द्र (respiratory centre) पसलियों तथा डायफ्राम से सम्बन्धित पेशियों की क्रिया का नियमन करके श्वासोच्छ्वास (breathing) या श्वसन (respiration) का नियमन करता है। श्वास क्रिया तन्त्रिकीय नियन्त्रण में होती है। यही कारण है कि हम अधिक देर तक श्वास नहीं रोक पाते हैं। फेफड़ों की भित्ति में ‘स्ट्रेच संवेदांग’ (stretch receptors) होते हैं। फेफड़ों के आवश्यकता से अधिक फूल जाने पर ये संवेदांग पुनर्निवेशन नियन्त्रण (feedback control) के अन्तर्गत नि:श्वसन को तुरन्त रोकने के लिए हेरिंग बुएर रिफ्लेक्स चाप (Hering-Bruer Reflex Arch) की स्थापना करके श्वास केन्द्र को उद्दीपित करते हैं, जिससे श्वास दर बढ़ जाती है। यह नियन्त्रण प्रतिवर्ती क्रिया के अन्तर्गत होता है।

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शरीर के अन्त:वातावरण में CO2 की सान्द्रता के कम या अधिक हो जाने से श्वास केन्द्र स्वतः उद्दीपित होकर श्वास दर को बढ़ाता या घटाता है। O2 की अधिकता कैरोटिको सिस्टैमिक चाप (Carotico systemic arch) में उपस्थित सूक्ष्म रासायनिक संवेदांगों को प्रभावित करती है। ये संवेदांग श्वास केन्द्र को प्रेरित करके श्वास दर को घटा या बढ़ा देते हैं।

प्रश्न 8.
pCO2 का ऑक्सीजन के परिवहन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
कूपिकाओं में जहाँ pO2 उच्च तथा pCO2 न्यून होता है H+ सांद्रता कम तथा ताप कम होने पर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनता है। ऊतकों में जहाँ pO2 न्यून तथा pCO2 उच्च होता है H+ सांद्रता अधिक तथा ताप अधिक होता है। ऑक्सीहीमोग्लोबिन का विघटन होता है तथा 0, मुक्त हो जाती है। (UPBoardSolutions.com) इसका अर्थ है O2 फेफड़े की सतह पर हीमोग्लोबिन के साथ मिलती है तथा ऊतकों में अलग हो जाती है। सामान्य परिस्थिति में 5 मिली O2 ऊतकों को प्रति 100 मिली ऑक्सीजनित रक्त से मिलता है।

प्रश्न 9.
पहाड़ पर चढ़ने वाले व्यक्ति की श्वसन प्रक्रिया में क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
पहाड़ पर ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ वायु में O2 का आंशिक दाब कम हो जाता है; अत: मैदान की अपेक्षा ऊँचाई पर श्वासोच्छ्वास क्रिया अधिक तीव्र गति से होगी। इसके निम्नलिखित कारण होते हैं

  1.  रुधिर में घुली हुई ऑक्सीजन का आंशिक दाब कम हो जाता है। O2 रक्त में सुगमता से विसरित होती है। अतः शरीर में ऑक्सीजन परिसंचरण कम हो जाता है। इसके फलस्वरूप सिरदर्द तथा उल्टी (वमन) का आभास होता है।
  2. अधिक ऊँचाई पर वायु में ऑक्सीजन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है; अत: वायु से अधिक O2 प्राप्त करने के लिए श्वासोच्छ्वास क्रिया तीव्र हो जाती है।
  3. कुछ दिनों तक ऊँचाई पर रहने से रुधिर में लाल रुधिराणुओं की संख्या बढ़ जाती है और श्वास क्रिया सामान्य हो जाती है।

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प्रश्न 10.
कीटों में श्वास क्रियाविधि कैसे होती है?
उत्तर :

कीटों में श्वास क्रियाविधि

कीटों में श्वसन हेतु ट्रैकिंया (trachea) पाए जाते हैं। कीटों के शरीर में ट्रैकिया का जाल फैला होता है। ट्रैकियो पारदर्शी, शाखामय, चमकीली नलिकाएँ होती हैं। ये श्वास रन्ध्रों (spiracles) द्वारा वायुमण्डल से सम्बन्धित रहती हैं। श्वास रन्ध्र छोटे वेश्म (atrium) में खुलते हैं। (UPBoardSolutions.com) श्वास रन्ध्रों पर रोमाभ सदृश शूक तथा कपाट पाए जाते हैं। कुछ श्वास रन्ध्र सदैव खुले रहते हैं। शेष अन्तःश्वसन (inspiration) के समय खुलते हैं और उच्छ्व सन (expiration) के समय बन्द रहते हैं।
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ट्रैकियल वेश्म (atrium) से शाखाएँ निकलकर एक पृष्ठ तथा अधर तल पर ‘ट्रैकिया का जाल बना लेती हैं। ट्रैकिया से निकलने वाली ट्रैकिओल्स (tracheoles) ऊतक या कोशिकाओं तक पहुँचती हैं। कीटों में गैसों का विनिमय बहुत ही प्रभावशाली होता है और O2 सीधे कोशिकाओं तक पहुँचती है। इसी कारण कीट सर्वाधिक क्रियाशील होते हैं।

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The partial pressure formula of one gas in a mixture of gases is equal to the amount of pressure that would of the other gases were removed.

प्रश्न 11.
ऑक्सीजन वियोजन वक्र की परिभाषा दीजिए। क्या आप इसकी सिग्माभ आकृति का कोई कारण बता सकते हैं?
उत्तर :

ऑक्सीजन वियोजन वक्र

हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमला ऑक्सीजन के आंशिक दबाव (partial pressure) अर्थात् pO2 पर निर्भर करती है। हीमोग्लोबिन-क़ी वह प्रतिशत मात्रा जो ऑक्सीजन ग्रहण करती है, इसकी प्रतिशत संतृप्ति (percentage saturation of haemoglobin) कहलाती है; जैसेफेफड़ों में रक्त के ऑक्सीजनीकृत होने पर O2 का आंशिक दबाव pO2) लगभग 97 mm Hg होता है। इस pO2 पर हीमोग्लोबिन की प्रतिशत संतृप्ति लगभग 98% होती है।

ऊतकों से वापस आने वाले रक्त में O2 का आंशिक दबाव pO2 लगभग 40 mm Hg होता है, इस pOपर हीमोग्लोबिन की प्रतिशत संतृप्ति लगभग 75% होती है। pO2 तथा हीमोग्लोबिन की प्रतिशत संतृप्ति के सम्बन्ध को ग्राफ पर अंकित करने पर एक सिग्माभ वक्र (sigmoid curve) प्राप्त होता है।  इसे ऑक्सीजन वियोजन वक्र कहते हैं। ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन वियोजन वक्र पर शरीर ताप एवं रक्त के pH का प्रभाव पड़ता है। ताप के बढ़ने या pH के कम होने (UPBoardSolutions.com) पर यह वक्र दाहिनी ओर खिसकता है। इसके विपरीत ताप के कम होने या pH के अधिक होने से ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन वक्र बाईं ओर खिसकता है। रक्त में CO2 की मात्रा बढ़ने या इसका pH घटने (H’ आयन की संख्या बढ़ने से) पर O2 के प्रति हीमोग्लोबिन की आकर्षण शक्ति कम हो जाती है। इसी को बोहर प्रभाव (Bohr effect) कहते हैं। यह क्रिया ऊतकों में होती है। इस प्रकार बोहर प्रभाव का योगदान हीमोग्लोबिन को फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन के परिवहन को प्रोत्साहित करता है।
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फेफड़ों में हीमोग्लोबिन को O2 मिलते ही CO2 के प्रति इसका आकर्षण कम हो जाता है और कार्बोमिनोहीमोग्लोबिन COत्यागकर सामान्य हीमोग्लोबिन बन जाता है। अम्लीय हीमोग्लोबिन H+ आयन मुक्त करता है जो बाइकार्बोनेट (HCO3) से मिलकर कार्बोनिक अम्ल बनाते हैं। यह शीघ्र ही CO2) तथा H2Oमें टूटकर CO2 को मुक्त कर देता है। इसे हैल्डेन प्रभाव (Haldane effect) कहते हैं। हैल्डेन प्रभाव फेफड़ों में CO2 के बहिष्कार को और ऊतकों में O2 के बहिष्कार को प्रेरित करता है।

प्रश्न 12.
क्या आपने अव-ऑक्सीयता (हाइपोक्सिया) (न्यून ऑक्सीजन) के बारे में सुना है। इस सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कीजिए व साथियों के बीच चर्चा कीजिए।
उत्तर :
अव-ऑक्सीयता (Hypoxia) :
इस स्थिति का सम्बन्ध शरीर की कोशिकाओं/ऊतकों में ऑक्सीजन के आंशिक दबाव में कमी से होता है। यह ऑक्सीजन की कम आपूर्ति के कारण होता है। वायुमण्डल में पहाड़ों पर 8000 फुट से अधिक ऊँचाई पर वायु में O2 का दबाव कम हो जाता है। इससे सिरदर्द, वमन, चक्कर आना, मानसिक थकान, श्वास लेने में कठिनाई आदि लक्षण प्रदर्शित होते हैं। इसे कृत्रिम हाइपोक्सिया (artificial hypoxia) कहते हैं। यह रोग प्रायः पर्वतारोहियों को हो। जाता है। शरीर में (UPBoardSolutions.com) हीमोग्लोबिन की कमी के कारण रक्त की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसे एनीमिया हाइपोक्सिया (anaemia hypoxia) कहते हैं।

प्रश्न 13.
निम्न के बीच अन्तर करें
(क) IRV, ERV
(ख) अन्तः श्वसन क्षमता और निःश्वसन क्षमता
(ग) जैव क्षमता तथा फेफड़ों की कुल धारिता
उत्तर :

(क)
IRV व ERV में अन्तर

1. IRV :
अन्त:श्वसन सुरक्षित आयतन (inspiratory reserve volume) वायु आयतन की वह अतिरिक्त मात्रा है जो एक व्यक्ति बलपूर्वक अन्त:श्वासित कर सकता है। यह औसतन 2500 मिली से 3000 मिली होती है।

2. ERV :
नि:श्वसन सुरक्षित आयतन (expiratory reserve volume) वायु आयतन की वह अतिरिक्त मात्रा है जो एक व्यक्ति बलपूर्वक नि:श्वासित कर सकता है। यह औसतन 1000 मिली से 1100 मिली होता है।

(ख)
अन्तःश्वसन क्षमता व निःश्वसन क्षमता में अन्तर

1. अन्तःश्वसन क्षमता (Inspiratory Capacity, IC) :
सामान्यतः नि:श्वसन उपरान्त वायु की कुल मात्रा (आयतन) जिसे एक व्यक्ति अन्त:श्वासित कर सकता है। इसमें ज्वारीय आयतन तथा अन्तः श्वसन सुरक्षित आयतन सम्मिलत होते हैं (TV + IRV)।

2. निःश्वसन क्षमता (Expiratory Capacity, EC) :
सामान्यतः अन्तः श्वसन उपरान्त वायु की कुल मात्रा (आयतन) जिसे एक व्यक्ति नि:श्वासित कर सकता है। इसमें ज्वारीय आयतन और नि:श्वसन सुरक्षित आयतन सम्मिलित होते हैं (TV + ERV)।

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(ग)
जैव क्षमता तथा फेफड़ों की कुल धारिता में अन्तर

1. जैव क्षमता (Vital Capacity) :
बलपूर्वक नि:श्वसन के बाद वायु की वह अधिकतम मात्रा जो एक व्यक्ति अन्त:श्वासित कर सकता है अथवा वायु की वह अधिकतम मात्रा जो एक व्यक्ति बलपूर्वक अन्त:श्वसन के पश्चात् नि:श्वासित कर सकता है।

2. फेफड़ों की कुल धारिता (Total Lung Capacity) :
बलपूर्वक नि:श्वसन के पश्चात् । फेफड़ों में समायोजित (उपस्थित) वायु की कुल मात्रा। इसमें RV, ERV, TV  तथा IRV सम्मिलित हैं। यानि जैव क्षमता + अवशिष्ट आयतन (VC + RV)।

प्रश्न 14.
ज्वारीय आयतन क्या है? एक स्वस्थ मनुष्य के लिए एक घण्टे के ज्वारीय आयतन (लगभग मात्रा) को आकलित करें।
उत्तर :

1. ज्वारीय आयतन (Tidal Volume, TV) :
सामान्य श्वसन क्रिया के समय प्रति अन्त:श्वासित या नि:श्वासित वायु का आयतन ज्वारीय आयतन कहलाता है। (UPBoardSolutions.com) यह लगभग 500 मिली होता है अर्थात् स्वस्थ मनुष्य लगभग 6000 से 8000 मिली वायु प्रति मिनट की दर से अन्त:श्वासित/ नि:श्वासित कर सकता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
श्वसन भागफल का अर्थ है।
(क) ऑक्सीजन की प्रति मिनट ग्रहण (व्यय) मात्रा
(ख) कार्बन डाइऑक्साइड के उत्पादन एवं ऑक्सीजन के ग्रहण का अनुपात
(ग) प्रति मिनट कार्बन डाइऑक्साइड का ग्रहणे
(घ) ताप एवं ऑक्सीजन ग्रहण का अनुपात
उत्तर :
(ख) कार्बन डाइऑक्साइड के उत्पादन एवं ऑक्सीजन के ग्रहण का अनुपात

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ब्रोंकाई को एक वाक्य में परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
ब्रोंकाई (bronchi) श्वसन नली (trachea) की वक्ष गुहा में पाई जाने वाली दो शाखाएँ हैं।

प्रश्न 2.
एपिग्लॉटिस का क्या कार्य है?
उत्तर :
एपिग्लॉटिस कण्ठद्वार को ढक्कन की भाँति बन्द करने का कार्य करता है।

प्रश्न 3.
“आणविक ऑक्सीजन जीवन हेतु नितान्त आवश्यक है।” कैसे? अति संक्षेप में समझाइए।
उत्तर :
आणविक ऑक्सीजन के द्वारा ही कोशिकाओं में आवश्यक ऊर्जा उत्पादन के लिए (UPBoardSolutions.com) ऑक्सी श्वसन होता है जो बिना ऑक्सीजन के नहीं हो सकता। अतः जीवन को चलाये रखने के लिए आणविक ऑक्सीजन अत्यन्त आवश्यक है।

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प्रश्न 4.
ग्लाइकोलाइसिस क्रिया के अन्त में ग्लूकोज के प्रत्येक अणु से पाइरुविक अम्ल के कितने अणु बनते हैं? इस क्रिया में O2 की क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
ग्लाइकोलाइसिस क्रिया के अन्त में ग्लूकोज के प्रत्येक अणु से दो पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) अणु बनते हैं। इस क्रिया में O2 की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 5.
ATP तथा NADP का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. ATP–एडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट।
  2. NADP-निकोटिनामाइड ऐडीनीन डाइन्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट।

प्रश्न 6.
श्वसन क्रिया में हीमोग्लोबिन के महत्त्व पर प्रकाश डालिए। या मानव रुधिर में पाये जाने वाले श्वसन रंजक (वर्णक) का नाम तथा रासायनिक संघटन बताइए। या हीमोग्लोबिन के महत्त्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
मनुष्य सहित सभी कशेरुकियों (vertebrates) के तरल संयोजी ऊतक रुधिर (blood) की विशेष कोशिकाओं, जिन्हें लाल रुधिर कणिकाएँ (red blood corpuscles = RBCs) कहते हैं, में एक लोहयुक्त रंगा पदार्थ (pigment) पाया जाता है। यह हीमोग्लोबिन (haemoglobin) कहलाता है। हीमोग्लोबिन में लगभग 5% लोहा (Fe++) तथा शेष ग्लोबिन नामक प्रोटीन (protein) होती है।

हीमोग्लोबिन नामक इस पदार्थ में ऑक्सीजन (O2) तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के संयोजन की अत्यधिक क्षमता होती है। इसीलिए श्वसन की क्रिया में यह इन गैसों के परिवहन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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प्रश्न 7.
प्राणियों में पाये जाने वाले दो श्वसनी वर्णकों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. हीमोग्लोबिन
  2. हीमोसायनिन

प्रश्न 8.
वयस्क मनुष्य सामान्यतः एक मिनट में कितनी बार श्वसन करता है? वायु संचालन कौन-सी क्रिया है?
उत्तर :
सामान्य वयस्क मनुष्य एक मिनट में लगभग 12-20 बार श्वसन करता है। श्वसन एक भौतिक क्रिया है।

प्रश्न 9.
श्वास रोध और श्वास क्षिप्रता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(i) श्वास रोध :
इस रोग के अन्तर्गत श्वसन क्रिया में मांसपेशियाँ सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाती हैं तथा फेफड़ों का आयतन भी लगभग अपरिवर्तित रहता है।

(ii) श्वास क्षिप्रता :
इस रोग में श्वास दर तीव्र हो जाती है। एक सामान्य वयस्क मनुष्य की आराम की अवस्था में श्वास दर लगभग 12-20 है, परन्तु श्वास क्षिप्रता से ग्रस्त व्यक्ति की श्वास दर 20 से ऊपर होती है।

प्रश्न 10.
श्वसन तन्त्र के निम्नलिखित विकारों के कारण लिखिए
(i) एम्फिसीमा
(ii) अस्थमा
उत्तर :

(i) एम्फिसीमा :
इस रोग में कूपिका भित्ति क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे गैस विनिमय की सतह घट जाती है। वायु प्रदूषण, धूम्रपान आदि इसके प्रमुख कारण हैं।

(ii) अस्थमा :
इस रोग में श्वसनी और श्वसनिकाओं की शोथ के कारण श्वसन के समय घरघराहट होती (UPBoardSolutions.com) है तथा श्वास लेने में कठिनाई होती है। वायु प्रदूषण, धूलयुक्त वायु, धूम्रपान आदि इसके प्रमुख कारण हैं।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ATP का पूरा नाम लिखिए तथा इसके कार्य बताइए। या कोशिकीय श्वसन में माइटोकॉण्डूिया की क्या भूमिका है?
उत्तर :
कोशिकीय श्वसन के अन्तर्गत क्रेब्स चक्र माइटोकॉण्ड्रिया में सम्पन्न होता है। इसके फलस्वरूप हाइड्रोजन परमाणु (2H) मुक्त होते हैं। इन्हें हाइड्रोजनग्राही NAD, NADP या FAD ग्रहण करके अपचयित हो जाते हैं। इन्हें पुनः ऑक्सीकृत स्थिति में लाने का कार्य इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र करता है। (UPBoardSolutions.com) इसमें उच्च ऊर्जा इलेक्ट्रॉन मुक्त होता है। मुक्त इलेक्ट्रॉन जब एक इलेक्ट्रॉनग्राही से दूसरे इलेक्ट्रॉनग्राही पर ट्रान्सफर होता है तो ऊर्जा मुक्त होती है। मुक्त ऊर्जा की कुछ मात्रा ATP के रुप में संचित हो जाती है। यह क्रिया माइटोकॉण्ड्रिया के क्रिस्टी पर स्थित ऑक्सीसोम्स या F, कण पर होती है।

ATP (एडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट) में संचित ऊर्जा पेशीय गति, अपेशीय क्रियाओं, सक्रिय गमन, ऊष्मा। उत्पादन, जैव-संश्लेषण, जैव-विद्युत, जैव-प्रकाश उत्पादन आदि क्रियाओं में प्रयुक्त होती है। माइटोकॉण्ड्रिया को कोशिका का विद्युत गृह तथा ATP को उपापचय जगत का सिक्का कहते हैं।

प्रश्न 2.
ए०टी०पी० क्या है? यह ए०डी०पी० से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर :
ए०टी०पी० (ATP) :
कोशिकीय श्वसन के फलस्वरूप मुक्त गतिज ऊर्जा ATP में संचित हो जाती है। यह ट्राइफॉस्फेट न्यूक्लिओटाइड (एडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट) है।
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प्रश्न 3.
निःश्वसन तथा उच्छ्वसन में अन्तर लिखिए।
उत्तर :
निःश्वसन तथा उच्छ्वसन में अन्तर
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प्रश्न 4.
रुधिर में ऑक्सीजन गैस के संवहन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

ऑक्सीजन का परिवहन

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कणिकाओं में स्थित एक लाल रंग को लौहयुक्त वर्णक है। हीमोग्लोबिन के साथ उत्क्रमणीय (reversible) ढंग से बँधकर ऑक्सीजन ऑक्सीहीमोग्लोबिन (oxyhaemoglobin) का गठन कर सकता है। प्रत्येक हीमोग्लोबिन अणु अधिकतम चार O2 अणुओं को वहन कर सकते हैं। हीमोग्लोबिन के साथ ऑक्सीजन का बँधना प्राथमिक तौर पर O2 के आंशिक दाब से सम्बन्धित है। CO2 का आंशिक दाब, हाइड्रोजन आयन सांद्रता और तापक्रम कुछ अन्य कारक हैं जो इस बन्धन को बाधित कर सकते हैं। हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से प्रतिशत संतृप्ति को pO2 के सापेक्ष आलेखित ।

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करने पर सिग्माभ वक्र (sigmoid curve) प्राप्त होता है। इस वक्र को वियोजन वक्र (dissociation curve) कहते हैं जो हीमोग्लोबिन से 0, बंधन को प्रभावित करने वाले pCO2; H+ आयन सांद्रता आदि घटकों के अध्ययन में अत्यधिक सहायक होता है। कूपिकाओं में जहाँ उच्च pO2, निम्न pCO2; कम H+सांद्रता और निम्न तापक्रम होता है, वहाँ ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाने के लिए ये सभी घटक अनुकूल साबित होते हैं जबकि ऊतकों में निम्न pO2 उच्च pCO2 उच्च H+ सांद्रता और उच्च तापक्रम की स्थितियाँ ऑक्सीहीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन के वियोजन के लिए अनुकूल होती हैं। इससे स्पष्ट है कि O2 हीमोग्लोबिन से फेफड़ों की सतह पर बँधती है और ऊतकों में वियोजित हो जाती है। प्रत्येक 100 मिली ऑक्सीजनित रक्त सामान्य शरीर की क्रियात्मक स्थितियों में ऊतकों को लगभग 5 मिली O2 प्रदान करता है।

प्रश्न 5.
ऑर्निथीन चक्र को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए। या ऑर्निथीन-आर्जिनीन चक्र को रेखीय चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर :

यूरिया का निर्माण या ऑर्निथीन चक्र

विभिन्न जैव-रासायनिक (bio-chemical) क्रियाओं के अन्तर्गत यकृत कोशिकाओं में अमोनिया को कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलाकर यूरिया (urea) का निर्माण किया जाता है। ये क्रियाएँ एक चक्र के रूप में होती हैं जिसे ऑर्निथीन चक्र (ormithine cycle) अथवा क्रेब-हेन्सलीट चक्र (Kreb-Henseleit cycle) कहते हैं। इस चक्र में डीएमीनेशन से प्राप्त अमोनिया का एक अणु कार्बन डाइऑक्साइड के एक अणु से मिलकर कार्बमोइल फॉस्फेट (UPBoardSolutions.com) (carbamoyl phosphate) बनाता है। इसमें दो ATP अणुओं का भी उपयोग होता है। काबेंमोइल फॉस्फेट उपलब्ध ऑर्निथीन के साथ ट्रान्सकाबेंमिलेज एन्जाइम की उपस्थिति में संयोग कर लेता है, इससे साइट्रलिन (citrulline) बनता है। साइट्रलिन ए०टी०पी० (ATP) की उपस्थिति में एस्पार्टिक अम्ल (aspartic acid) के साथ संयोग कर आर्जिनोसक्सीनिक अम्ल (arginosuccinic acid) बनाता है। आर्जिनोसक्सीनिक अम्ल का एन्जाइम की उपस्थिति में आर्जिनीन (arginine) तथा फ्यूमैरिक अम्ल (fumaric acid) में विघटन हो जाता है। अब एन्जाइम आर्जिनेज (arginase) की उपस्थिति में आर्जिनीन का विघटन होता है और यूरिया (urea) तथा ऑर्निथीन (ornithine) का निर्माण होता है। इस प्रकार ऑर्निथीन अगले चक्र के लिए वापस मिल जाती है। ऑर्निथीन की इस प्रकार की उपस्थिति के कारण ही इसको ऑर्निथीन चक्र (ornithine cycle) कहते हैं।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोशिकीय श्वसन से आप क्या समझते हैं? इससे सम्बन्धित विभिन्न पदों (steps) का उल्लेख कीजिए। या निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए
(क) ग्लाइकोलिसिस (glycolysis)
(ख) कोशिकीय श्वसन (cellular respiration) या कोशिकीय श्वसन क्या है? ग्लाइकोलिसिस को अनॉक्सी श्वसन क्यों कहा जाता है? ग्लाइकोलिसिस प्रक्रम का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

कोशिकीय श्वसन

भोज्य पदार्थों को विखण्डित कर उनसे रासायनिक ऊर्जा को, उपयोग के लिए, विमुक्त करने वाली अपंचयिक (catabolic) व पूर्णतः नियन्त्रित (controlled) क्रिया श्वसन (respiration) कहलाती है।”

सामान्यत: सभी जन्तुओं में भोज्य पदार्थों में उपस्थित, रासायनिक ऊर्जा धीरे-धीरे एक श्रृंखला में होने वाली अभिक्रियाओं (reactions) के द्वारा स्वतन्त्र की जाती है। अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पदार्थ, ऐडीनोसीन डाइफॉस्फेट या ए०डी०पी० (adenosine diphosphate or ADP) स्वतन्त्र की गयी इस ऊर्जा को अपने साथ जोड़कर एक अस्थायी यौगिक ऐडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट या ए०टी०पी० (adenosine triphosphate or ATP) का निर्माण कर लेता है। ए०टी०पी० (UPBoardSolutions.com) को किसी भी स्थान या उसी या अन्य किसी कोशिका में ऊर्जा के लिए उपयोग में लाया जा सकता है और फिर से ए०डी०पी० प्राप्त हो जाता है। जीवित कोशिका (living cell) में इस प्रकार की क्रिया अत्यन्त नियन्त्रित विधियों से विशेष व्यवस्था के अन्तर्गत, अनेक एन्जाइम, सहएन्जाइम एवं अन्य पदार्थों एवं तन्त्रों (systems) के अन्तर्गत की जाती है। यही नहीं, क्रियाओं के फलस्वरूप जो गतिज ऊर्जा (kinetic energy) निष्कासित होती है उसके अधिकांश भाग को विशेष पदार्थ ए०टी०पी० (ATP) में इस प्रकार संचित किया जाता है

कि उपयोग की आवश्यकता के समय यह तुरन्त अपघटित होकर ऊर्जा को उपलब्ध करा देता है और स्वयं ऊर्जा उत्पादन के स्थान पर ए०डी०पी० (ADP) के रूप में पहुँचकर नयी ऊर्जा ग्रहण करता है अर्थात् उसका कुछ बिगड़ता भी नहीं। बस, यही समस्त क्रियाएँ अर्थात् खाद्य पदार्थ के ऑक्सीकरण से लेकर उपभोग के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराने की नियन्त्रित क्रियाओं को हम श्वसन (respiration) कहते हैं।

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कोशिकीय श्वसन से सम्बन्धित दो प्रमुख पद

(i) ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis) :
श्वसन की यह सामान्य क्रिया प्रारम्भ में कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में होती है और इसमें ऑक्सीजन के बिना ही, केवल आन्तरिक परिवर्तनों के द्वारा, कार्बोहाइड्रेट को अपूर्ण रूप से ऑक्सीकृत करके थोड़ी-सी ऊर्जा निकाल ली जाती है। इस प्रकार के श्वसन को
जिसमें ऑक्सीजन अनुपस्थित होती है, अनॉक्सी या अवायवीय (anaerobic) श्वसन कहते हैं।

(ii) क्रेब्स चक्र (Kreb’s Cycle) :
अधिक दक्षश्वसन की यह क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में सामान्य कोशिका में माइटोकॉण्ड्रिया (mitochondria) पर होती है और ऑक्सीश्वसन या वायवीय श्वसन (aerobic respiration) कहलाती है।

ग्लाइकोलिसिस या ई०एम०पी० पथ

ग्लाइकोलिसिस की अभिक्रियाएँ कोशिका के कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में होती हैं जिसमें 6 C वाला ग्लूकोज का एक अणु विघटित होकर 3 C वाले दो पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) अणु बनाता है। क्रम से एन्जाइम (enzymes) तथा सह-एन्जाइम्स (co-enzymes) की सहायता से शृंखलाबद्ध रूप में, ये क्रियाएँ इस प्रकार घटित होती हैं

पद I :
ग्लूकोज के अणु का फॉस्फोराइलेशन
इस क्रिया के अन्त में फ्रक्टोज 1, 6-डाइफॉस्फेट (fructose 1, 6-diphosphate) का निर्माण होता है। इस क्रिया में पहले ग्लूकोज अणु एक ATP अणु से ऊर्जा तथा एक फॉस्फेट गुट्ट (PO4 ) प्राप्त करता है तथा ग्लूकोज 6-फॉस्फेट (glucose 6-phosphate) बनाता है। ग्लूकोज 6-फॉस्फेट समावयवीकरण (isomerization) के द्वारा फ्रक्टोज 6-फॉस्फेट (fructose 6-phosphate) में बदल जाता है। फ्रक्टोज 6-फॉस्फेट का अणु अब एक ATP अणु से एक फॉस्फेट गुट्ट ऊर्जा की उपस्थिति में प्राप्त करता है और इससे फ्रक्टोज 1, 6-डाइफॉस्फेट बनता है।

पद II :
फॉस्फोराइलेटेड शर्करा का विदलन
इस पद में फ्रक्टोज 1, 6-डाइफॉस्फेट का विदलन (splitting) होता है जिससे दो ट्रायोज (trioses) बनते हैं-एक, 3-फॉस्फोग्लिसरैल्डिहाइड (3-phosphoglyceraldehyde) तथा दूसरा डाइहाइड्रॉक्सी-एसीटोन फॉस्फेट (dihydroxyacetone phosphate)। बाद में, दूसरा ट्रायोज भी एक आइसोमेरेज (isomerase) एन्जाइम की उपस्थिति में 3-फॉस्फोग्लिसरैल्डिहाइड में ही बदल जाता है। इस प्रकार, इस परिवर्तन के बाद, दो अणु (UPBoardSolutions.com) 3-फॉस्फोग्लिसरैल्डिहाइड के उपलब्ध होते हैं। 3- फॉस्फोग्लिसरैल्डिहाइड, अकार्बनिक फॉस्फेट (H3PO4 से) प्राप्त करके 1, 3-डाइफॉस्फोग्लिसरैल्डिहाइड का निर्माण करता है जो दो H+ आयन तथा इलेक्ट्रॉन देकर ऑक्सीकृत हो जाता है। यह क्रिया डिहाइड्रोजिनेज (dehydrogenase) एन्जाइम तथा NAD सह-एन्जाइम की उपस्थिति में होती है तथा 1, 3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (1, 3-diphosphoglyceric acid) का निर्माण होता है।

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1, 3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (1, 3-diphosphoglyceric acid) का डीफॉस्फोराइलेशन (dephosphorylation) होता है तथा एक फॉस्फेट गुंट्ट अलग होकर उपस्थित ADP के साथ संयुक्त होकर ATP का निर्माण करता है। इस प्रकार दो अणुओं से दो ATP अणु और दो अणु 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-phosphoglyceric acid) बनते हैं। जिसमें एन्जाइम, फॉस्फोग्लिसरोम्यूटेज की सहायता से फॉस्फेट गुट्ट का फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल में स्थान परिवर्तन हो जाने से फॉस्फेट अब 2 स्थिति में आ जाता है। अब,प्रत्येक अणु से एक अणु जल निकल जाने से 2-फॉस्फोइनॉल पाइरुविक अम्ल (2-phosphoenol pyruvic acid) का निर्माण होता है। 2-फॉस्फोइनॉल पाइरुविक अम्ल के डीफॉस्फोराइलेशन (dephosphorylation) के द्वारा पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) को निर्माण होता है। इस प्रकार प्राप्त फॉस्फेट गुट्ट 2ADP अणुओं के साथ मिलकर 2ATP अणुओं का निर्माण करते हैं।
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ग्लाइकोलिसिस की सम्पूर्ण क्रियाओं में जहाँ अम्ल बनते हैं; जैसे- फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल, पाइरुविक अम्ल इत्यादि, ये सब लवणों के रूप में हो सकते हैं। अतः इन्हें फॉस्फोग्लिसरेट, पाइरुवेट (phosphoglycerate, pyruvate) इत्यादि भी लिखा जाता है। ग्लाइकोलिसिस (glycolysis) में ATP के कुल चार अणुओं का निर्माण होता है, किन्तु प्रारम्भिक अभिक्रियाओं में दो ATP अणु काम में आ जाते हैं। अतः शुद्ध लाभ केवल दो अणुओं का ही होता है

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(net gain) = 4 ATP – 2 ATP = 2 ATP
दो स्वतन्त्र H+ आयन (ions) भी प्राप्त होते हैं जो प्राय: NAD या NADP पर चले जाते हैं।

क्रेब्स चक्र या ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र

पाइरुविक अम्ल का ऑक्सीकरण ऑक्सीजन की उपस्थिति में क्रमबद्ध तथा चक्र में होने वाली अभिक्रियाओं द्वारा होता है। यह चक्र ही क्रेब्स चक्र (Krebs cycle) कहलाता है। इसकी सम्पूर्ण अभिक्रियाएँ माइटोकॉण्ड्रिया (mitochondria) में होती हैं जहाँ सभी प्रकार के आवश्यक एन्जाइम्स (enzymes) व सह-एन्जाइम्स (co-enzymes) मिलते हैं। पाइरुविक अम्ल, एसीटिल को एन्जाइम-‘ए’ (acetyl co-enzyme-A) बनाने के बाद क्रेब्स चक्र में साइट्रिक अम्ल (UPBoardSolutions.com) (citric acid) के रूप में दिखायी पड़ता है; अत: इस चक्र को ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र या साइट्रिक अम्ल चक्र (tricarboxylic acid cycle or citric acid cycle) कहते हैं। क्रेब्स चक्र में प्रवेश से पूर्व पाइरुविक अम्ल एक जटिल प्रक्रिया से निकलता है। इस क्रिया में कम-से-कम पाँच को-फैक्टर (co-factor) तथा एक एन्जाइम-समूह (enzyme-complex) की आवश्यकता होती है। क्रेब्स चक्र में तो एसीटिल को-एन्जाइम-‘ए’ (acetyl co-enzyme-A) ही प्रवेश करता है। ये क्रियाएँ निम्नलिखित पदों में सम्पन्न होती हैं

      1. ऑक्सीजन के सन्तोषप्रद मात्रा में उपलब्ध होने पर ही उपर्युक्त प्रक्रिया होती है और एसीटिल को-एन्जाइम-‘ए’ (acetyl co-enzyme-A) को निर्माण होता है। इस जटिल प्रक्रिया में पाइरुविक अम्ल के तीन कार्बन में से दो कार्बन परमाणु रह जाते हैं जो एसीटिल (acetyl) समूह के रूप में co-A (co-enzyme-A) के साथ जुड़े हुए हैं।
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        pyruvic acid + co – A + NAD → CH3CO.co – A + CO2) + NAD. H2

        उपर्युक्त प्रक्रिया में H+ आयन प्राप्त होते हैं (NAD.H2 के रूप में)। NAD.H2 इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण तन्त्र (electron transport system = ETS) में पहुंचकर मुक्त ऊर्जा से तीन ATP अणुओं का निर्माण करते हैं। इस प्रकार, दो अणु पाइरुविक अम्ल से 6ATP अणु प्राप्त होते हैं।
      2. एसीटिल को-एन्जाइम-‘ए’ (acetyl co-A) क्रेब्स चक्र के अन्तिम उत्पाद, चार कार्बन यौगिक (C4), ऑक्सैलोएसीटिक अम्ल (oxaloacetic acid) के साथ मिलकर (condensation) साइट्रिक अम्ल (citric acid) बनाता है। साथ ही को-एन्जाइम-‘ए’ (co-A) स्वतन्त्र हो जाता है। यह क्रिया जल तथा एक कण्डेन्सिंग ऐन्जाइम की उपस्थिति में होती है
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  1. इसके बाद की क्रियाएँ चार ऑक्सीकरण (Oxidation) पदों (steps) में सम्पन्न होती हैं जिनमें होकर साइट्रिक अम्ल (citric acid) से ऑक्सैलोएसीटिक अम्ल (Oxaloacetic acid) फिर से प्राप्त किया जाता है। इन क्रियाओं में चार जोड़ा H-आयन और चार जोड़ा इलेक्ट्रॉन्स (electrons) निकाले जाते हैं। इन पदों की अभिक्रियाएँ जटिल, श्रृंखलाबद्ध व चक्रिक (cyclic) होती हैं तथा विभिन्न एन्जाइम्स, सहएन्जाइम्स, को-फैक्टर्स (co-factors) के (UPBoardSolutions.com) सहयोग से सम्पन्न होती हैं इस प्रकार पाइरुविक अम्ल के दो अणुओं (ग्लूकोज के एक अणु से प्राप्त) से कार्बन डाइऑक्साइड के छह अणु (तीन + तीन) निकलते हैं। इस क्रिया में कुल 30 (तीस) ATP अणु भी बनते हैं। 6 (छह) ATP अणु ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र के मध्य बनते हैं। इस प्रकार सम्पूर्ण अणु से सम्पूर्ण वायवीय श्वसन के बाद एक ग्लूकोज अणु से 38 ATP अणु प्राप्त होते हैं।

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UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 4 The Central Islamic Lands

UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 4  The Central Islamic Lands (इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570 – 1200 ई०)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 History . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 History  Chapter 4 The Central Islamic Lands

पाठ्य – पुस्तक के प्रश्नोत्तर
संक्षेप में उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
सातवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों में बेदुइओं के जीवन की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर :
बेदुइओं के जीवन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं

(i) अनेक अरब कबीले बेदूइन या बद्दू या खानाबदोश होते थे।
(ii) ये अपने खाद्य (खजूर) और अपने ऊँटों के लिए चारे की तलाश में रेगिस्तान के सूखे क्षेत्रों से हरे-भरे क्षेत्रों (नखलिस्तान) की ओर जाते रहते थे।
(iii) इनमें से कुछ नगरों में बस गए और व्यापार करने लगे।
(iv) खलीफा के सैनिकों में ज्यादा बदू ही थे। ये रेगिस्तान के किनारे बसे शिविर शहरों; जैसे कुफा तथा बसरा में रहते थे।

प्रश्न 2.
अब्बासी क्रान्ति’ से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
उमय्यदों के विरुद्ध ‘दावा’ नामक एक सुसंगठित आंदोलन हुआ, फलस्वरूप उनका पतन हो गया। सन् 1750 में उनके स्थान पर मक्काई मूल के अन्य परिवार (अब्बासिदों) को स्थापित कर दिया गया। वास्तव में अब्बासिदों ने उमय्यद शासन की जमकर आलोचना की और पैगम्बर द्वारा स्थापित मूल इस्लाम को पुनः बहाल कराने का वादा किया। वे उसमें सफल भी रहे। इसे ही अब्बासी । क्रान्तिं की संज्ञा दी गई है। इस क्रान्ति से राजवंश में परिवर्तन के साथ राजनीतिक संरचना में बहुत परिवर्तन हुआ।

प्रश्न 3.
अरबों, ईरानियों व तुर्को द्वारा स्थापित राज्यों की बहुसंस्कृतियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
अरबों, ईरानियों और तुर्को द्वारा स्थापित राज्य जातीय पक्षपातरहित थे। ये राज्य किसी एकल राजनीतिक व्यवस्था या किसी संस्कृति की एकल भाषा (अरबी) के बजाय सामान्य अर्थव्यवस्था व संस्कृति के कारण सम्बद्ध रहे। मध्यवर्ती इस्लामी देशों में व्यापारी, विद्वान् तथा कलाकार स्वतन्त्र रूप से आते जाते थे। इस प्रकार विचारों तथा तौर-तरीकों का प्रसार हुआ।

प्रश्न 4.
यूरोप व एशिया पर धर्मयुद्धों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर :
यूरोप व एशिया पर धर्मयुद्ध का निम्नलिखित प्रभाव पड़ा
(i) मुस्लिम राज्यों ने अपने ईसाई प्रजाननों के प्रति कठोर रवैया अपनाया। विशेष रूप से यह स्थिति युद्धों में देखी गई।
(ii) मुस्लिम सत्ता की बहाली के पश्चात् भी पूर्व तथा पश्चिम के मध्य इटली के व्यापारिक समुदायों का अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव था।

संक्षेप में निबन्ध लिखिए।

प्रश्न 5.
रोमन साम्राज्य के वास्तुकलात्मक रूपों से इस्लामी वास्तुकलात्मक रूप किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर :
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रोमन साम्राज्य के महामंदिरों के अनुरूप ही इस्लामी दुनिया में भी धार्मिक इमारतें इस्लामी दुनिया की सबसे बड़ी बहारी प्रतीक थीं। स्पेन से मध्य एशिया तक फैली हुई मस्जिदें, इबादतगाह और मकबरों का मूल्लू डिजाइन समान था। मेहराबें, गुम्बद, मीनार और खुले सहन आदि इमारतें मुसलमानों की आध्यात्मिकता और व्यावहारिक आवश्यकताओं को अभिव्यक्त करती हैं। इस्लाम की प्रथम सदी में, मस्जिद ने एक विशिष्ट वास्तुशिल्पीय रूप (खम्भों के सहारे वाली छत) प्राप्त कर लिया था जो प्रादेशिक विभिन्नताओं से परे था। मस्जिद में एक खुला प्रांगण या सहन होता जहाँ एक फव्वारा या जलाशय बनाया जाता था। यह प्रांगण एक बड़े कमरे की ओर खुलता, जिसमें नमाज पढ़ने वाले लोगों की लम्बी पंक्तियों और नमाज का नेतृत्व करने वाले इमाम के लिए काफी स्थान होता उमय्यदों ने नखलिस्तानों में ‘मरुस्थली महल’ कल्पना कीजिए कि इस पेड़ पर खलीफा विराजमान है। दिए गए चित्र में शान्ति व युद्ध का चित्रण किया गया है। बनाए। उदाहरण के लिए-फिलिस्तीन ने खिरबत-अल-मफजर और जोर्डन में कैसर अमरा जो विलासपूर्ण निवास स्थानों, शिकार और मनोरंजन के लिए विश्रामस्थलों के रूप में प्रयोग किए गए थे। महल रोमन और सासायनियन वास्तुशिल्प के तरीके से बनाए। गए थे। उन्हें चित्रों, प्रतिमाओं और पच्चीकारी से सजाया जाता था। रोम की वास्तुकला अत्यधिक दक्षपूर्ण थी। उनके द्वारा सर्वप्रथम कंकरीट का प्रयोग प्रारम्भ किया गया था। वे पत्थरों व ईंटों को मजबूती से जोड़ सकते थे। रोम के वास्तुकारों ने दो वास्तुशिल्पीय सुधार किए– (i) डाट, (ii) गुम्बद। रोम में इमारतें दो या तीन मंजिलों वाली होती थीं। इनमें डालें (Arches) ठीक एक के ऊपर । मेसोपोटामिया की का प्रयोग कोलोजियम बनाने में किया था। वास्तुकला की परम्पराओं से प्रेरित यह कई शताब्दियों तक दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद थी। डाटों का प्रयोग नहर बनाने के लिए भी किया जाता था। रोम के प्रसिद्ध मंदिर पैन्थियन में । औंधे कटोरे की तरह गुम्बद छत थी। यहाँ रोम वास्तुकला के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं
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प्रश्न 6.
रास्ते पर पड़ने वाले नगरों का उल्लेख करते हुए समरकन्द से दमिश्क तक की यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
समरकन्द से दमस्कस के मार्ग पर मर्व खुरसाम, निशापुर दायलाम, इसफाइन, समारा, बगदाद, कुफा, कुसायुर, अमरा, जेरूसलम आदि शहर स्थित हैं। व्यापारी या यात्री दो रास्तों लाल सागर और फारस की खाड़ी से होकर जाते थे। लम्बी दूरी के व्यापार के लिए उपयुक्त और उच्च मूल्य वाली वस्तुओं; यथा-मसालों, कपड़ों, चीनी मिट्टी की वस्तुओं और बारूद को भारत और चीन से लाल सागर के अदन और ऐधाव तक और फारस की खाड़ी के पत्तन सिराफ और बसरा तक जहाज पर लाया जाता था। वहाँ से माल को जमीन पर ऊँटों के काफिलों द्वारा बगदाद, दमिश्क और समरकन्द तक भेजा जाता था।
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परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
इस्लाम धर्म निम्नलिखित में से किसने चलाया था?
(क) मुहम्मद साहब ने
(ख) अब्राहम ने (ग) इस्माइल ने
(घ) खलीफा उमर ने
उत्तर :
(क) मुहम्मद साहब ने

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रन्थ है?
(क) कुरान शरीफ
(ख) हदीस
(ग) एन्जील
(घ) ओल्ड टेस्टामेण्ट
उत्तर :
(क) कुरान शरीफ

प्रश्न 3.
अरब में मुस्लिम साम्राज्य के संस्थापक कौन थे?
(क) खलीफा अबू बकर
(ख) खलीफा उमर
(ग) पैगम्बर मुहम्मद
(घ) खलीफा अली
उत्तर :
(ख) खलीफा उमर

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-सा नगर धर्मनिष्ठ खलीफाओं की राजधानी था?
(क) मक्का
(ख) मदीना
(ग) बगदाद
(घ) कुफा
उत्तर :
(ख) मदीना

प्रश्न 5.
अब्बासी खलीफाओं की राजधानी कौन-सा नगर था? 
(क) जेरूसलम
(ख) बगदाद
(ग) मक्का
(घ) बसरा
उत्तर :
(ख) बगदाद

प्रश्न 6.
मुहम्मद साहब का जन्म कब हुआ था?
(क) 540 ई० में
(ख) 560 ई० में
(ग) 570 ई० में
(घ) 575 ई० में
उत्तर :
(ग) 570 ई० में

प्रश्न 7.
अब्बासी खलीफाओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध है
(क) अल मंसूर
(ख) हारून-अल-रशीद
(ग) अल बाथिक
(घ) अल मामून
उत्तर :
(ख) हारून-अल-रशीद

प्रश्न 8.
‘शाहनामा’ का लेखक कौन था?
(क) शेख सादी
(ख) अल राजी
(ग) उमर खय्याम
(घ) फिरदौसी
उत्तर :
(घ) फिरदौसी।

प्रश्न 9.
‘चट्टान को गुम्बद कहाँ पर स्थित है?

(क) बसरा
(ख) दमिश्क
(ग) जेरूसलम
(घ) बगदाद
उत्तर :
(ग) जेरूसलेम

प्रश्न 10.
अरब का प्रसिद्ध संगीतकार कौन था?
(क) अल रेहान
(ख) फिरदौसी
(ग) गजाली
(घ) अल अगानी
उत्तर :
(ग) गजाली

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अरब प्रायद्वीप में कौन-कौन से देश सम्मिलित हैं?
उत्तर :
अरब प्रायद्वीप में टर्की, मिस्र, सीरिया, इराक, ओमान, बहरीन, ईरान आदि देश सम्मिलित हैं।

प्रश्न 2.
अरब के मुस्लिम पंचांग का निर्माण किसने किया था?
उत्तर :
अरब के मुस्लिम पंचांग का निर्माण उमर खैयाम ने किया था।

प्रश्न 3.
रसायनशास्त्र में अरब निवासी क्या-क्या बनाना जानते थे?
उत्तर :
अरब निवासी रसायनशास्त्र में चॉदी का घोल, पोटाश, शोरे एवं गन्धक का तेजाब तथा इत्र आदि बनाना जानते थे।

प्रश्न 4.
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक कौन थे?
उत्तर :
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद साहब थे।

प्रश्न 5.
इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक का नाम लिखिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक ‘कुरान शरीफ’ है।

प्रश्न 6.
मुहम्मद साहब का जन्म कब तथा किस नगर में हुआ था?
उत्तर :
मुहम्मद साहब का जन्म 570 ई० में अरब देश के मक्का नगर में हुआ था?

प्रश्न 7.
अब्बासी खलीफाओं की राजनधानी कहाँ स्थित थी?
उत्तर :
मध्यकाल में अब्बासी ख़लीफाओं की राजधानी बगदाद में स्थित थी। यह स्थान वर्तमान इराक की राजधानी है।

प्रश्न 8.
मध्यकाल में बगदाद क्यों प्रसिद्ध था?
उत्तर :
मध्यकाल में बगदाद अब्बासी खलीफाओं के वैभव और अरब सभ्यता व संस्कृति तथा व्यापार का प्रमुख केन्द्र होने के कारण प्रसिद्ध था।

प्रश्न 9.
फिरदौसी ने कौन-सी पुस्तक लिखी?
उत्तर :
फिरदौसी ने ‘शाहनामा’ नामक पुस्तक लिखी थी।

प्रश्न 10.
उमर खय्याम क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
उमर खय्याम अपनी रूबाइयों के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 11.
जेरूसलम कहाँ पर स्थित है और क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
जेरूसलम पश्चिमी एशिया (इजराइल राष्ट्र) में स्थित एक धार्मिक नगर है। यह इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्मों का संगम-स्थल व पवित्र तीर्थस्थान तथा ओमर मस्जिद के लिए विश्वप्रसिद्ध है।

प्रश्न 12.
अरबों ने लेखन-कला की किस शैली का आविष्कार किया?
उत्तर :
अरबों ने लेखन-कला की ‘खुशवती’ शैली का आविष्कार किया।

प्रश्न 13.
अलबरूनी ने कौन-सी पुस्तक लिखी थी?
उत्तर :
अलबरूनी ने तहकीके हिन्द’ नामक पुस्तक लिखी थी।

प्रश्न 14.
खिलाफत का क्या अर्थ है?
उत्तर :
मुहम्मद साहब के निधन के बाद इस्लाम के प्रचार व प्रसार का कार्यभार (पद) “खिलाफत कहलाया, जिसका तेतृत्व अबू बकर, उमर, उस्मान तथा अली नामक खलीफाओं ने किया।

प्रश्न 15.
अब्बासी खलीफाओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध खलीफा का नाम लिखिए।
उत्तर :
अब्बासी खलीफाओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध खलीफा हारून-अल-रशीद था।

प्रश्न 16.
हिजरी सम्वत् कब प्रारम्भ हुआ?
उत्तर :
हिजरी सम्वत् 622 ई० से प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 17.
इस्लाम धर्म ने विश्व की सभ्यता पर क्या प्रभाव डाला?
उत्तर :
इस्लाम धर्म ने विश्व की सभ्यता को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया। कला और धर्म के क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 18.
‘कीमियागिरी क्या थी? यह कला विलुप्त क्यों हो गई?
उत्तर :
रासायनिक प्रक्रिया द्वारा लोहे या किसी अन्य धातु से स्वर्ण (सोना) बनाने की कला को ‘कीमियागिरी’ कहते थे। वंशानुगत होने के कारण यह कला शीघ्र ही विलुप्त हो गई।

प्रश्न 19.
काबा का क्या महत्त्व था?
उत्तर :
मुहम्मद के कबीले कुरैश का जिस मस्जिद पर नियन्त्रण था, उसे काबा कहा जाता था। यह मस्जिद मक्का में थी। सभी लोग इस जगह को पवित्र मानते थे।

प्रश्न 20.
हिजरी वर्ष की क्या विशेषता है?
उत्तर :
हिजरी वर्ष चन्द्रवर्ष होता है जिसमें 354 दिन अर्थात् 29 या 30 दिनों के 12 महीने होते हैं। प्रत्येक दिन सूर्यास्त के समय शुरू होता है।

प्रश्न 21.
प्रथम चार खलीफाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. अबू बकर,
  2.  उमर,
  3.  उस्मान तथा
  4. अली

प्रश्न 22.
अली के काल में इस्लाम जगत में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर :
इस्लाम के चौथे खलीफा अली के शासनकाल में मुसलमान दो सम्प्रदायों-शिक्षा और सुन्नी में विभाजित हो गया।

प्रश्न 23.
अरब में राजतन्त्र की स्थापना किसने और कब की?
उत्तर :
मुआविया ने स्वयं को पाँचवाँ खलीफा घोषित कर उमय्यद वंश की स्थापना की। वह राजतन्त्र का समर्थक था। राजतन्त्र की स्थापना 661 ई० में हुई।

प्रश्न 24.
फातिमिद कौन था?
उत्तर :
फातिमिद शिया सम्प्रदाय से सम्बद्ध था और स्वयं को मुहम्मद की पुत्री फातिमा का वंशज मानता था। 969 ई० में उसने मिस्र को जीतकर फातिमिद खिलाफत की स्थापना की और काहिरा को अपनी राजधानी बनाया।

प्रश्न 25.
धर्मयुद्ध से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर :
जेरूसलम और फिलिस्तीन के अधिकार के प्रश्न पर मुसलमानों और ईसाइयों में दो शताब्दियों (1096-1291) तक युद्ध हुए थे, उन्हें धर्मयुद्ध कहा जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बगदाद कहाँ है और क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
बगदाद, अरब प्रायद्वीप के देश इराक की राजधानी है। मध्यकाल में यह नगर अब्बासी खलीफाओं की राजधानी था। बगदाद; अरब सभ्यता एवं संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र तथा व्यापार का भी प्रमुख केन्द्र होने के कारण प्रसिद्ध है।

प्रश्न 2.
अरब निवासियों के प्रमुख उद्योग कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
अरब निवासी कृषि योग्य भूमि से वंचित थे; अतः उन्होंने अनेक उद्योग-धन्धे अपना रखे थे। वे कपास से सुन्दर वस्त्र, कालीन, गलीचे आदि बनाते थे। इत्र, अर्क और शर्बत बनाने में वे विशेषकुशल थे। दमिश्क की मलमल, तलवारें एवं युद्ध का सामान, मिट्टी के बर्तन तथा खिलौने, काँच का सामान आदि उस समय सारे संसार में प्रसिद्ध थे। अरब निवासी इनका बड़ी मात्रा में व्यापार किया करते थे।

प्रश्न 3.
मक्का और मदीना क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर :
मक्का और मदीना सऊदी अरब के प्रमुख नगर हैं। मक्का में इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था। हजरत मुहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म चलाया था। मदीना में मुहम्मद साहब ने हिजरत की थी। मक्का मुसलमानों का प्रमुख तीर्थस्थल है। प्रतिवर्ष लाखों मुसलमान यहाँ हज करने के लिए आते हैं। ये दोनों नगर इस्लाम धर्म के पवित्र स्थल होने के कारण प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 4.
विज्ञान के क्षेत्र में अरब निवासियों ने भारत एवं यूनान से क्या-क्या सीखा?
उत्तर :
अरब निवासियों ने विज्ञान के क्षेत्र में भारत और यूनान से बहुत-कुछ सीखा। यूनान से गणित और ज्यामिति का ज्ञान लेकर अरबों ने गोलाकार त्रिकोणमिति की खोज की। भौतिक विज्ञान में उन्होंने पेण्डुलम की खोज की और प्रकाश के सम्बन्ध में अनेक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले। अरबों ने भारतीयों से आयुर्वेद का ज्ञान भी प्राप्त किया और यूनानी पद्धति अपनाकर यूनानी चिकित्सा की परम्परा प्रारम्भ की।

प्रश्न 5.
विज्ञान के क्षेत्र में अरबों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
विज्ञान के क्षेत्र में अरबों की उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं

  1.  अरबों के द्वारा गोलाकार त्रिकोणमिति और अंक प्रणाली की खोज की गई थी। यूरोपवासियों ने अरबों से ही अंक प्रणाली को सीखा था।
  2.  अरब वैज्ञानिकों ने ही सर्वप्रथम यह खोज की थी कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती हुई स्वयं की परिक्रमा करती है।
  3.  अरबों द्वारा अनुसन्धान हेतु अनेक प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई थी।
  4.  खगोलशास्त्र के क्षेत्र में उन्होंने अनेक वेधशालाओं का निर्माण किया और नए नक्षत्रों का पता लगाया।
  5. भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में पेण्डुलम की खोज उनके द्वारा ही की गई थी। उन्होंने प्रकाश विज्ञान पर अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की थी।
  6.  वे चिकित्सा के क्षेत्र में भी बहुत पारंगत थे और शिल्प-क्रिया से भली-भाँति परिचित थे।

प्रश्न 6.
कबीले की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
कबीले की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं

  1. कबीले रक्त सम्बन्धों पर संगठित समाज होते थे।
  2.  अरब कबीले वंशों से बने हुए होते थे अथवा बड़े परिवारों के समूह होते थे, परन्तु बन्द समाज नहीं थे।
  3. गैर-अरब व्यक्ति कबीलों के प्रमुखों के संरक्षण में सदस्य बन जाते थे।
  4.  गैर-रिश्तेदार वंशों को तैयार किए गए वंशक्रम के आधार पर विलय किया जाता था।

प्रश्न 7.
इस्लाम धर्म के उदय होने से पूर्व अरब लोगों के जीवन की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब लोगों के जीवन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. इस्लाम से पूर्व अरब लोग अनेक छोटे-छोटे कबीलों में बँटे हुए थे।
  2. कबीले परस्पर छोटी-छोटी बातों पर लड़ते रहते थे।
  3. अरब समाज के लोग अनेक अन्धविश्वासों के शिकार थे।
  4. इस समय अरब के लोग अनेक देवी-देवताओं में विश्वास करते थे और मूर्तिपूजा किया करते
  5.  इस समय अरब के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन था। कालान्तर में व्यापार भी इनकी जीविका का मुख्य साधन बन गया।

प्रश्न 8.
अब्द-थल-मलिक के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर :
अब्द-थल-मलिक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित थे

  1. उमय्यदवंशीय अब्द-थल-मलिक ने अरबी को प्रशासन की भाषा के रूप में अपनाया और सिक्के जारी किए।
  2.  सिक्कों पर रोमन और ईरानी की नकल समाप्त करके अरबी भाषा में लेख अंकित कराए।
  3.  उसने जेरूसलम में चट्टान के गुम्बद का निर्माण करवाया और अरब-इस्लामी पहचान में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 9.
इस्लाम धर्म के प्रमुख सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म के प्रमुख सिद्धान्त

  1. अल्लाह एक और निराकार-इस्लाम धर्म एक अल्लाह और उसके निराकार स्वरूप के सिद्धान्त को मानता है। उसके अनुसार अल्लाह सर्वज्ञ, सर्वोच्च और निराकार है।
  2. कर्मवाद में विश्वास-इस्लाम धर्म, कर्म के सिद्धान्त का पोषक है। उसके अनुसार कर्मों से ही मनुष्य को जन्नत (स्वर्ग) या नरक (दोजख) प्राप्त होता है। न्याय-दिवस (कयामत) पर जीवों के कर्मों के लेखे-जोखे के आधार पर ही प्रत्येक जीव को उसके कर्मों का फल मिलता है।
  3.  पाँच कर्म सिद्धान्त-इस्लाम धर्म के पाँच कर्म-सिद्धान्त अग्र प्रकार हैं

(क) कलमा : ह इस्लाम धर्म का मूल मन्त्र है, जिसके अनुसार अल्लाह एक है, उसके अतिरिक्त कोई नहीं है और मुहम्मद साहब उसके पैगम्बर हैं।
(ख) रोजा-ईस्लाम धर्म मानता है कि रमजान के पवित्र महीनों में प्रत्येक मुसलमान को प्रातः से सूर्यास्त तक रोजा (व्रत) रखना चाहिए।
(ग) नमाज-प्रत्येक सच्चे मुसलमान को प्रतिदिन पाँच बार नमाज पढ़नी चाहिए।
(घ) जकात–प्रत्येक इस्लाम के अनुयायी को अपनी आय में से एक निश्चित राशि स्वेच्छा से गरीबों में दान देनी चाहिए। दान देना पुण्य का काम है।
(ङ) हज–प्रत्येक मुसलमान को अपने जीवनकाल में एक बार मक्का की तीर्थयात्रा (हज) पर अवश्य जाना चाहिए।

प्रश्न 10.
सामाजिक एकता स्थापित करने के लिए मुहम्मद साहब ने कौन-से नियम बनाए थे?
उत्तर :
मुसलमानों में एकता की भावना का विकास करने के उद्देश्य से मुहम्मद साहब द्वारा निम्नलिखित नियम बनाए गए थे1. इज्मा-सभी मुसलमानों को प्रत्येक क्षण, प्रत्येक स्थान पर, प्रत्येक परिस्थिति में इस्लाम के | सिद्धान्तों पर एकमत रहना चाहिए। 2. सुन्ना-इस्लाम धर्म में निर्धारित कार्यों को आदर्श मानकर उनका पालन करना चाहिए। 3. कयास-इस्लाम धर्म पर आधारित मुहम्मद साहब के उपदेशो के अर्थ एवं भाव को समझकर उन उपदेशों का यथावते पालन करना चाहिए।

प्रश्न 11.
इस्लामी राज्यों में कृषि की उन्नति हेतु क्या प्रसास किए गए?
उत्तर :
इस्लामी राज्यों में कृषि की उन्नति हेतु निम्नलिखित उपाय किए गए

  1.  अनेक क्षेत्रों में विशेषकर नील घाटी, में राज्य ने सिंचाई प्रणालियों, बाँधों और नहरों के निर्माण, कुओं की खुदाई की व्यवस्था कराई।
  2. पानी उठाने के लिए पनचक्कियों की व्यवस्था की गई।
  3. इस्लामी कानून के अन्तर्गत उन लोगों को कर में छूट दी गई जो जमीन को पहली बार खेती के काम में लाते थे।
  4.  अनेक नई फसलों; यथा-कपास, सन्तरा, केला, तरबूज, पालक और बैंगन की खेती की गई और यूरोप को उनका निर्यात किया गया।

प्रश्न 12.
उलेमा कौन थे और उनका क्या कार्य था?
उत्तर :
उमेला धार्मिक विद्वान थे। ये कुरान से प्राप्त ज्ञान (इल्म) पैगम्बर को आदर्श व्यवहार (सुन्ना) का मार्गदर्शन करते थे। मध्यकाल में उलेमा अपना समय कुरान पर टीका (तफसीर) लिखने और मुहम्मद की प्रामाणिक उक्तियों और कार्यों को लेखबद्ध करने में लगाते थे। कुछ उलेमाओं ने कर्मकाण्डों (इबादत) के माध्यम से ईश्वर के साथ मुसलमानों के सम्बन्ध को नियन्त्रित करने और सामाजिक कार्यों (मुआमलात) के लिए शेष इनसानों के साथ मुसलमानों के सम्बन्धों को नियन्त्रित करने के लिए कानून तैयार करने का कार्य किया।

प्रश्न 13.
भारत में इस्लाम का प्रसार किस प्रकार हुआ?
उत्तर :
इस्लाम के इतिहास में वालिद प्रथम का शासनकाल खिलाफत के विस्तार के लिए विख्यात है। इसी के शासनकाल में 711 ई० में बसरा के गवर्नर हेज्जाज और उसके दामाद मुहम्मद इब्न-उल कासिम ने दक्षिणी भारत और बलूचिस्तान से सिन्ध पर आक्रमण किया। इसके पूर्व मुहम्मद बिन कासिम ने 710 ई० में 6000 सीरियाई सैनिकों की सेना लेकर मकराने पर कब्जा जमा लिया। यहीं से इसने बलूचिस्तान होते हुए 711-712 ई० में सिन्धु की निचली घाटी और सिन्धु नदी के मुहाने की भूमि पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। वहाँ जिन नगरों को जीता गया, उनमें समुद्री बन्दरगाह अल-देबुल और अल-नीरून थे। अल-देबुल में चालीस घन फुट वाली एक बुद्ध की प्रतिमा स्थापित थी। मुहम्मद बिन कासिम की यह विजय उत्तर में दक्षिणी पंजाब स्थित मुल्तान तक की गई, जहाँ गौतम बुद्ध का पवित्र तीर्थस्थल है। इस विजय से दक्षिणी पाकिस्तान के सिन्ध पर इस्लाम का स्थायी प्रभुत्व स्थापित हो गया तथा शेष भारत दसवीं शताब्दी के अन्त तक, जबकि महमूद गजनवी ने आक्रमण किया, अप्रभावित रहा। इस तरह सेमेटिक इस्लाम और भारतीय बौद्ध धर्म के बीच उसी प्रकार स्थायी रूप से सम्पर्क स्थापित हो गया, जिस प्रकार उत्तर में इस्लाम का तुर्की संस्कृति के साथ सम्पर्क स्थापित हुआ था। इस प्रकार दक्षिण में सिन्ध और उत्तर में काशगर और ताशकन्द खिलाफत की सुदूरपूर्वी सीमा बन गई और आगे भी बनी रही।

प्रश्न 14.
धर्मयुद्ध का क्या अर्थ है? इसके क्या कारण थे?
उत्तर :
पवित्र युद्ध या जिहाद उन युद्धों को कहते हैं जो मध्यकाल में फिलिस्तीन को प्राप्त करने के लिए यूरोपीय ईसाइयों ने अरबी मुसलमानों से लड़े। इन युद्धों को धर्मयुद्ध इसलिए कहा जाता है कि यह युद्ध धार्मिक स्थानों को प्राप्त करने के लिए ईसाइयों ने अरबों के विरुद्ध लड़े थे। धर्मयुद्ध के तीन प्रमुख कारण थे

  1. पवित्र प्रदेशों को पुनः प्राप्त करना।
  2. सामन्तों का वीरता प्रदर्शन का शौक।
  3.  लाडौँ तथा चर्च के नेताओं का स्वार्थ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब सभ्यता एवं संस्कृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब सभ्यता एवं संस्कृति :
इस्लाम धर्म से पूर्व अरब सभ्यता एवं संस्कृति का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के आधार पर किया जा सकता है

प्राचीन अरब के निवासी :
सर्वप्रथम, अरब में बसने वाले कैल्डियन जाति के लोग थे। उनकी सभ्यता उच्चकोटि की थी। बाद में सेमेटिक जनजातियों ने इनकी सभ्यता के अवशेषों को नष्ट कर दिया। सेमेटिक जाति के लोग स्वयं को कहतान (जोकतन) का वंश मानते थे। उन्हीं का आदिपुरुष यारब था, जिसके नाम पर इस देश का नाम ‘अरब’ पड़ा। यारब कहतानी शासक; महान् विजेता और नगरों के निर्माता थे। उन्होंने यमन व अरब के अन्य क्षेत्रों पर सातवीं शताब्दी तक अपनी प्रभुत्व जमाए रखा। अरब के अन्तिम निवासी ‘इस्माइली’ थे।  इस्माइल महान् यहूदी ‘अब्राहम के अनुयायी थे। इन्हें अरब की महानता का संस्थापक और काबा का निर्माता माना जाता है। इस्लामी युग से पूर्व अरब मेंबसने वाले यही लोग थे।

प्राचीन अरबों का राजनीतिक जीवन  :
प्राचीन अरब के निवासी बद्दू कहलाते थे। उनका प्रत्येक तम्बू ‘एक परिवार’ माना जाता था। अनेक तम्बू एक वंश या ‘कौम’ का प्रतिनिधित्व करते थे। एक सौ । वंश मिलकर एक जनजाति’ या ‘कबीले’ का निर्माण करते थे। अरब का यह युग जाहिलिया युग (अज्ञानता और बर्बरता का काल) कहलाता है।

प्राचीन अरबों का सामाजिक एवं आर्थिक जीवन :
प्राचीन अरबवासी खानाबदोश थे। वे तम्बुओं में रहते थे और भेड़, बकरी तथा ऊँट आदि पशुओं को पालते थे। उनका जीवन संघर्षपूर्ण था। प्रत्येक कबीले का एक सरदार होता था, जिसकी आज्ञा कबीले के सभी लोगों को माननी पड़ती थी। अरबवासियों को आर्थिक जीवन व्यापार और लूटमार पर निर्भर था। दक्षिण अरब के लोग विदेशों से व्यापार करते थे।

प्राचीन अरबों का सांस्कृतिक जीवन :
प्राचीन अरब में शिक्षा की कमी थी, लेकिन अरबवासी अपनी भाषा और कविता के लिए विख्यात थे। इस्लाम-पूर्व अरब के साहित्य का पर्याप्त विकास हो चुका था।  इस्लाम-पूर्व अरब के प्रसिद्ध लेखकों में हकीम लुकमान, अख्तम-इब्न-सैफी, हाजी-इब्न-जर्राह, हिद (अलखस की पुत्री, विदुषी), अल मयदानी (‘मजमा-अल-अमथल का लेखक), अल-मुफद्दाल-अल-दब्बी ( ‘अमथल-अल-अरब’ का लेखक) आदि के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इस युग के प्रमुख कवियों में इमारुल केज, तराफा, हरिथ तथा अन्तारा आदि के नाम प्रसिद्ध हैं।

धार्मिक जीवन : इस्लाम पूर्व अरब और जाहिलिया युग  : मुसलमान-विरोधी बद्दुओं की किसी भी धर्म में आस्था नहीं थी। यहूदियों और ईसाइयों को छोड़कर शेष अरब मूर्तिपूजक थे। अरबवासी अनेक देवी-देवताओं की पूजा किया करते थे। अकेले मक्का में ही 360 मूर्तियाँ थीं। बद्द् अधिकतर मूर्तियों और नक्षत्रों की पूजा करते थे। मक्का में ऊँटों और भेड़ों की बलि दी जाती थी। अरबवासी वृक्षों, कुओं, गुफाओं, पत्थर और वायु आदि प्राकृतिक वस्तुओं को पवित्र मानते और उनकी पूजा भी करते थे। प्राचीन अरबों के प्रमुख देवता अल मानहु (सर्वशक्तिमाने शुक्र), देवी अल-लात, अर-राबा और अल-मानह
(भाग्य की देवी), यागुस (गिद्ध), ओफ (एक बड़ी चिड़िया) आदि थे। मक्का के कुरैशियों (प्राचीन अरब का प्रसिद्ध वंश) का देवता ‘अल-हुनल’ था।

प्रश्न 2.
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक कौन थे? इस्लाम धर्म की प्रमुख शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक इस्लाम धर्म के प्रवर्तक मुहम्मद साहब थे। संसार उन्हें पैगम्बर मुहम्मद के नाम से पुकारता है। उनका जन्म 570 ई० में मक्का में हुआ था। उनके पिता का नाम अब्दुल्ला और माता का नाम अमीना था। 25 वर्ष की आयु में उन्होंने खदीजी नामक एक विधवा से विवाह किया। 619 ई० में जब खदीजा की मृत्यु हो गई तब उन्होंने आयशा नामक स्त्री से विवाह किया। उनकी छोटी पुत्री फातिमा ( अज-जोहरा या खूबसूरत), इस्लाम के चौथे खलीफा हजरत अली की पत्नी थी। मुहम्मद साहब प्रारम्भ से ही चिन्तनशील थे। 610 ई० में उन्हें दिव्य सन्देश की प्राप्ति हुई। 40 की आयु में मुहम्मद साहब ने अपने धर्म का प्रचार करना आरम्भ कर दिया। अपने विरोधियों से बचने के लिए। मुहम्मद साहब ने ‘मक्का’ छोड़कर ‘मदीना’ की ओर प्रस्थान किया। इस्लाम के इतिहास में इस घटना का बहुत महत्त्व है और इसे “हिजरत’ कहा जाता है। इसी समय (622 ई०) से मुस्लिम पंचांग का पहला वर्ष अर्थात् हिजरी संवत् शुरू होता है। मुहम्मद साहब मदीना के सर्वोच्च शासक बन गए। उन्होंने अपने विरोधियों को परास्त किया और अपने धर्म का सम्पूर्ण अरब में प्रसार किया। 62 वर्ष की आयु में 632 ई० में उनकी मृत्यु हो गई। बाद में उनके अनुयायियों ने सारे संसार में इस्लाम धर्म का प्रचार किया।

इस्लाम धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ।

इस्लाम धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ निम्नलिखित हैं

  1.  ईश्वर एक है तथा मुहम्मद साहब उसके पैगम्बर हैं।
  2.  सभी मनुष्य एक ही ईश्वर (अल्लाह) की सन्तानें हैं; उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  3.  ईश्वर निराकार है और मूर्तिपूजा एक आडम्बर है।
  4. आत्मा अजर और अमर है।
  5. प्रत्येक मुसलमान को अपने धर्म की रक्षा करनी चाहिए।
  6. मादक वस्तुओं, नृत्य, संगीत तथा चित्र-दर्शन आदि से दूर रहना चाहिए।
  7.  इस्लाम धर्म के अनुसार कयामत के दिन अच्छे काम करने वाले को जन्नत (स्वर्ग) तथा बुरे काम करने वाले को दोजख (नरक) में भेज दिया जाएगा।
  8.  इस धर्म के अनुसार ब्याज लेना, जुआ खेलना, सुअर का मांस खाना पाप है।
  9.  अल्लाह अपने पैगम्बरों को सच्चा ज्ञान (इल्हाम) स्वयं देता है।
  10.  प्रत्येक मुसलमान के पाँच अनिवार्य कर्तव्य हैं

 

  1.  कलमा पढ़ना
  2.  प्रतिदिन पाँचों समय नमाज अता करना (पढ़ना)
  3.  रमजान के महीने में रोजे रखना
  4. अपनी आय का चौथा भाग खैरात (दान) में देना तथा
  5.  जीवन में एक बार हज (मक्का-मदीना की तीर्थयात्रा) रना।

प्रश्न 3.
अरब सभ्यता और संस्कृति का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अरब सभ्यता एवं संस्कृति मध्य युग में अरब सभ्यता का विकास पश्चिमी एशिया में अधिक हुआ, जिसका संक्षिप्त विवेचन निम्नवत् है
1. शासन व्यवस्था :
इस्लाम के प्रमुख नेता को ‘खलीफा’ कहा जाता था। पहले तीन खलीफाओं की राजधानी मदीना नगर था। उसके बाद यह कूफा नगर ले जाई गई, जो आधुनिक दमिश्क में स्थित था। अब्बासी खलीफाओं ने बगदाद को अपनी राजधानी बनाया। तुर्की ने 1453 ई० में पूर्वी रोमन साम्राज्य का अन्त करके कुस्तुनतुनिया को अपनी राजधानी बनाया। आटोमान तुर्को के समय में खलीफा की शक्ति बहुत कम हो गई थी। खलीफाओं ने निरंकुश तथा स्वेच्छाचारी शासक के रूप में अरब पर शासन किया। अब्बासी  खलीफाओं ने जनहित के बहुत-से कार्य किए।

2. सामाजिक जीवन :
अरब साम्राज्य में चार प्रमुख वर्ग थे। प्रथम वर्ग में खलीफा, द्वितीय वर्ग में कुलीन, तृतीय वर्ग में विद्वान, लेखक, व्यापारी आदि सम्मिलित थे तथा चौथे निम्न वर्ग में किसान, दस्तकार तथा दास आते थे। इस समय दास-दासियों की संख्या बहुत अधिक थी। वे खुले बाजार में बेचे और खरीदे जाते थे। अरब समाज में स्त्रियों की दशा शोचनीय थी और उन्हें पर्दे में रहना पड़ता था। इस समय बहुविवाह, तलाक प्रथा और उपपत्नी प्रथा का प्रचलन था। अरब में पुरुष चौड़े पायजामें, कमीज, बड़ी जाकेट, काली पगड़ी, अंगरखा आदि वस्त्र पहनते थे। स्त्रियाँ रंग-बिरंगे सुन्दर वस्त्र धारण करती थीं। निम्न वर्ग में बुर्का (पूरे शरीर को ढकने वाला चोगा) पहनने की प्रथा थी। अरब लोग विभिन्न प्रकार के भोजन तथा पेयोंः जैसे—बनफशा, फालूदा, अंगूर की बेटी अर्थात् शराब आदि का उपयोग करते थे। शतरंज, चौपड़, पासे, चौगाने, पत्तेबाजी, घुड़दौड़, शिकार आदि उनके मनोरंजन के प्रमुख साधन थे।

3. आर्थिक जीवन :
अरबों का प्रमुख व्यवसाय कृषि और युद्ध करना था। अरब के लोग गेहूँ, चावल, खजूर, कपास, पटुआ, मूंगफली, नारंगी, ईख, गुलाब, तरबूज आदि की खेती करते थे। अरब में कम्बल, कढ़े वस्त्र, सिल्क, सूती व ऊनी वस्त्र, किमखाब, फर्नीचर, काँच के बर्तन, कागज आदि निर्माण के उद्योग-धन्धे प्रचलित थे। अरब कारीगर सोने-चाँदी व कीमती पत्थरों, जवाहरातों से जड़े सुन्दर व कलात्मक आभूषण बनाने में दक्ष थे। इस काल में अरब के भारत, चीन तथा अफ्रीका के देशों से व्यापारिक सम्बन्ध थे। बगदाद, बसरा, काहिरा,  सिकन्दरिया मध्य युग के प्रमुख बन्दरगाह और व्यापारिक केन्द्र थे। मध्य युग में अरब के गलीचे, चमड़े की वस्तुएँ, सुन्दर तलवारें, धातु व काँच के बर्तन सारे संसार में विख्यात थे।

4. सांस्कृतिक जीवन :
इस्लामी अरब में शिक्षा का भी पर्याप्त विकास हुआ। अरब में पहला विद्यालय अबू हातिम ने 860 ई० में स्थापित किया। उस समय शिक्षा मस्जिदों और मदरसों में दी जाती थी। अद्द-अल-दौला ने शिराजी नगर में पहला पुस्तकालय बनवाया। उस समय बगदाद शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। वहाँ एक सौ से अधिक पुस्तक-विक्रेता थे। खलीफा मामून | ने बगदाद में एक उच्च शिक्षा का केन्द्र ‘बैत-अल-हिकमत’ स्थापित करवाया था। 1065-1067 ई० की अवधि में निजाम-उल-मुल्क ने अरब में ‘निजामिया मदरसे’ की स्थापना की थी। इससमय कुरान, हदीस, कानून, धर्मतन्त्र (कलाम), अरबी भाषा और साहित्य, ललित, साहित्य (अदब), गणित आदि की शिक्षा दी जाती थी। अरबों ने लिखने की एक अलंकृत शैली ‘खुशवती’ का आविष्कार किया था।

5. साहित्य :
उस समय के अरब साहित्यकारों में हमदानी (976-1008 ई०, ‘मकाना’ नाटक का लेखक), थालिवी (961-967 ई०), अगानी (गीतिकार), जहशियारी (‘आलिफ-लैला’ का पहला लेखक, 942 ई०), नवास (व्यंग्यकार, गजलों का लेखक), अबू हम्माम, अल बहुतरी (820-897 ई०), उमर खय्याम (रूबाइयों का रचयिता) जैसे महान् कवि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। मध्यकालीन अरब साहित्य में ‘खलीफा हारून-अल-रशीद की कहानियाँ’, ‘उमर खय्याम की रूबाइयाँ’, ‘आलिफ-लैला’ की कहानी और ‘फिरादौसी का शाहनामा’ आज भी सारे संसार में प्रसिद्ध हैं।

6. चिकित्सा :
अरबों ने कई महान् चिकित्सक उत्पन्न किए, जिनमें जिबरील (नेत्र विज्ञान की पुस्तक ‘अल-लाइन’ का लेखक), अलराजी (865-925 ई०, तेहरान निवासी, ‘किताब-उल- असरार’ का लेखक), यूरोप में रहैजेस नाम से विख्यात, चेचक के इलाज का आविष्कारक), अली-अब्बास (‘अल-किताब अल मालिकी’ का लेखक, रोगियों के आहार व मलेरिया की चिकित्सा का अन्वेषक), इब्नसिना (950-1037 ई०, यूरोप में एविसेन्ना नाम से प्रसिद्ध, ‘अलशेख अल-रईस’ की उपाधि, 33 गंन्थों का रचयिता, महान चिकित्सक, क्षय रोग का अन्वेषक, दार्शनिक, भाषाशास्त्री, कवि, प्रमुख पुस्तक ‘किताब-उल-शिफा’) तथा याकूब (पशु चिकित्सक) आज भी सम्पूर्ण-जगत में विख्यात

7. खगोल विद्या और गणित :
अरब ने खगोल विद्या और गणित के क्षेत्र में भी विशेष उन्नति की। अरब खगोलशास्त्रियों ने अबू अहमद, अलबरूनी (973-1048 ई०, ‘हयाहब-अल-न जूम’ का लेखक) तथा उमर खय्याम (1048-1124 ई०, पंचांग का निर्माता) विशेष प्रसिद्ध हैं। मध्यकालीन अरब का विख्यात ज्योतिषी बल्ख का मूल निवासी अबू माशार था, जिसने ज्योतिष सम्बन्धी अनेक पुस्तकें लिखी थीं।

8. कलाओं में प्रगति :
अरब लोगों ने अनेक मस्जिदों व मदरसों का निर्माण करवाया। गजबान ने 838 ई० में बसरा में पहली बार मस्जिद बनवाई। जेरूसलम ने चट्टान का गुम्बद, अक्सा मस्जिद (निर्माता अल-मलिक), दमिश्क में उमय्यद मीनार मस्जिद (705 ई० निर्माता अल वालिद), हरा गुम्बद (निर्माता खलीफा मंसूर) आदि अरब स्थापत्य कला के सुन्दर नमूने हैं। अब्बासी खलीफाओं ने अनेक राजमहलों और भवनों का निर्माण करवाया। बगदाद में बने शाही महल उस समय के अरब वैभव की जानकारी देते हैं। अरब में चित्रकला का भी विकास हुआ। उम्मैद तथा अब्बासी खलीफाओं द्वारा शहरी महलों की दीवारों पर कराई गई चित्रकारी दर्शनीय है। शाही गुम्बद पर घुड़सवार की आकृति (खलीफा मंसूर), शेरों, गरुड़ पक्षियों और समुद्री मछलियों के चित्र (खलीफा अमीन), कैसर आमरा के महल की दीवारों पर महिलाओं तथा शिकार के दृश्यों के चित्र आदि अरब चित्रकला के उत्कृष्ट नमूने हैं। इस युग में प्रमुख चित्रकार अल हरीरी और अल-अल-अगानी थे। अल रेहानी इस समय का विख्यात सुलेखनकार था, जिसने ‘मुकलाह’ की रचना की थी। अरब संगीतकारों में इब्राहीम (खलीफा हारून-अल-रशीद का भाई), गजाली (‘अहिया-अल-उलम’ गजलों का संग्रह), खलीफा अल महदी (सियास या संगीत की पुस्तक), खलीफा अल बाथिक (वीणावादक) के नाम प्रमुख हैं। इस काल में सितार या गिटार तथा उरुयान (आर्गन) प्रमुख वाद्य यन्त्र थे। अल फराबी ने किताब उल मुसीफी अल कबीर’ तथा अल गजाली ने ‘अल समां’ नामक संगीत की पुस्तकें लिखी थीं।।

प्रश्न 4.
कागज की उपलब्धता ने इस्लामिक इतिहास को किस प्रकार संजोया? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
कागज के आविष्कार के पश्चात् मध्य इस्लामिक भूमि में लिखित रचनाओं को बड़े पैमाने पर प्रसार होने लगा। कागज जो लिनन से बनता था, चीन में कागज बनाने की प्रक्रिया को अत्यन्त गुप्त रखा गया था। समरकन्द के मुस्लिम शासकों ने सन् 750 में 20,000 चीनी हमलावरों को बन्दी बना लिया। इनमें से कुछ कागज बनाने में बहुत कुशल थे। अगली एक सदी के लिए, समरकन्द का कागज निर्यात की एक महत्त्वपूर्ण वस्तु बन गया। इस्लाम एकाधिकार का निषेध करता है; अतः कागज इस्लामी दुनिया के शेष भागों में बनाया जाने लगा। दसवीं सदी के मध्य तक इसने पैपाइरस का स्थान ले लिया। कागज की माँग बढ़ गई। बगदाद का एक डॉक्टर अब्द-अल-लतीफ जो 1193 से 1207 तक मिस्र का निवासी था, लिखता है कि मिस्र के किसानों ने ममियों के ऊपर लपेटे गए लिनन से बने हुए आवरण प्राप्त करने के लिए किस तरह कब्रों को लूटा था जिससे वे यह लिनन कागज के कारखानों को बेच सकें। कागज की उपलब्धता के कारण सभी प्रकार के वाणिज्यिक एवं वैयक्तिक दस्तावेजों को लिखना भी सरल हो गया। सन् 1896 में फुस्ताल में बेन एजरा के यहुदी प्रार्थना भवन के एक सीलबन्द कमरे गेनिजा में मध्यकाल के यहूदी दस्तावेजों का एक विशाल भण्डार प्राप्त हुआ। ये सभी दस्तावेज इस यहूदी प्रथा के कारण सुरक्षित रख गए थे कि ऐसी किसी भी लिखित रचना को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए जिसमें ईश्वर का नाम लिखा हुआ हो। गेनिजा में लगभग ढाई लाख पांडुलिपियाँ और उनके टुकड़े थे जिसमें कई आठवीं शताब्दी के मध्यकाल के भी थे। अधिकांश सामग्री दसवीं से तेरहवीं सदी तक की थी अर्थात् फातिमी, अयूबी और प्रारम्भिक मामलुक काल की थी। इनमें व्यापारियों, परिवार के सदस्यों और दोस्तों के बीच लिखे गए पत्र, संविदा, दहेज से जुड़े वादे, बिक्री दस्तावेज, धुलाई के कपड़ों की सूचियाँ और अन्य साधारण वस्तुएँ शामिल थीं।। अधिकांश दस्तावेज यहूदी-अरबी भाषा में लिखे गए थे, जो हिब्रू अक्षरों में लिखी जाने वाली अरबी भाषा का ही रूप था, जिसका उपयोग समूचे मध्यकालीन भूमध्य सागरीय क्षेत्र में यहूदी समुदायों द्वारा साधारण रूप से किया जाता था। गेनिजा दस्तावेज निजी और आर्थिक अनुभवों से भरे हुए हैं और वे भूमध्य सागरीय और इस्लामी संस्कृति की अन्दरूनी जानकारी प्रस्तुत करते हैं। इन दस्तावेजों से यह भी ज्ञात होता है कि मध्यकालीन इस्लामी जगत के व्यापारियों के व्यापारिक कौशल और वाणिज्यिक तकनीक उनके यूरोपीय प्रतिपक्षियों की तुलना में बहुत अधिक उन्नत थीं।

प्रश्न 5.
अरब में दर्शन और इतिहास विषय पर कौन-सी रचनाएँ की गईं? अरबों की विश्व सभ्यता को क्या देन है? 
उत्तर :
अरब दार्शनिकों में अल किन्दी, अल फराबी, इब्नसिना, गजाली, अल-मारी, अलतौहिन्दी के नाम प्रमुख हैं। अरब दर्शन यूनानी दर्शन से प्रभावित था। अरब व यूनान की फिलॉसफी को ‘फलसफा’ कहते थे। अरब में इतिहास-लेखन का भी पर्याप्त विकास हुआ। इस युग के अरब इतिहासकारों में इब्न इशाक (मदीना निवासी, पैगम्बर की जीवनी का पहला लेखक), कृति ‘सिरात रसूल अल्लाह’, अल मुकफा (‘खुदायनामा’ का लेखक), कुतवाह (पहला अरब इतिहासकार, बगदाद निवासी, मृत्यु 889 ई०) कृति ‘किताब उल मारिफ’, अल याकूबी (भूगोलवेत्ता इतिहासकार), अल बालादुरी (‘अल बुल्दान’ तथा ‘अनसाब अल अशरफ’ पुस्तकों का लेखक), अल हकाम (‘फुतुह मित्र’ का लेखक), अल तबरी (838-923 ई०, ‘तारीख अल रसूल’ व अल मुलुक’ का लेखक), अल मसूदी (अरबों का हेरोडोट्स, कृति ‘अल तनवीह’ व ‘अल इशरफ’), अलबरूनी (‘किताब उल हिन्द’ या ‘तहकीके हिन्द’ का लेखक) के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अरब के भूगोलवेत्ताओं में फाह्यान(‘मजम अल बुल्दान’ या ‘भौगोलिक कोष’ का रचयिता), ख्वारिज्मी (‘सूरत अल गर्द’ या ‘पृथ्वी की शक्ल’ का लेखक), अल हमदानी (‘जजीरात अल अरब’ का लेखक) आदि के नाम सारे संसार में प्रसिद्ध हैं। अरबों की देन-अरबों की विश्व सभ्यता को अनेक महत्त्वपूर्ण देन हैं। अरबों ने सर्वप्रथम प्रबुद्ध राजतन्त्र और राष्ट्रीयता की भावना का विकास किया। इस्लाम धर्म का प्रचार तथा प्रसार किया, सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन करने की प्रेरणा दी। संगठित सामाजिक जीवन की नींव डाली। भारत, चीन और अफ्रीका से व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित किए। चीनी, इत्र टिन्चर, कागज, काँच के बर्तन, गलीचे, चमड़े की कलात्मक वस्तुएँ, सुन्दर तलवारें व अन्य हथियार आदि संसार को प्रदान किए। इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरान शरीफ’ की रचना की। उन्होंने संसार को अरेबियन नाइट्स (आलिफ लैला की कहानियाँ), गुलिस्तां व बोस्तां (शेख सादी), शाहनामा (फिरदौसी) जैसे ग्रन्थ उपलब्ध कराए और चिकित्सा, दर्शन, खगोलविद्या, ज्योतिष, गणित, बीजगणित, गोलाकार ज्यामिति तथा कीमियागिरी में अनेक उपलब्धियाँ प्राप्त की और उनका ज्ञान संसार को दिया। अरबों ने बगदाद, दमिश्क, काहिरा, जेरूसलम, मक्का व मदीना में अनेक मस्जिदों का निर्माण कराया और चित्रकला तथा संगीत कला का भी पर्याप्त विकास किया।

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UP Board Solutions for Class 11 Political Science Political theory Chapter 6 Citizenship

UP Board Solutions for Class 11 Political Science Political theory Chapter 6 Citizenship (नागरिकता)

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में नागरिकता में अधिकार और दायित्व दोनों शामिल हैं। समकालीन लोकतान्त्रिक राज्यों में नागरिक किन अधिकारों के उपभोग की अपेक्षा कर सकते हैं? नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति क्या
दायित्व हैं?
उत्तर-
समकालीन विश्व में राष्ट्रों ने अपने सदस्यों को एक सामूहिक राजनीतिक पहचान के साथ-साथ कुछ अधिकार भी प्रदान किए हैं। नागरिकों को प्रदत्त अधिकारों की सुस्पष्ट प्रकृति विभिन्न राष्ट्रों में भिन्न-भिन्न हो सकती है, लेकिन अधिकतर लोकतान्त्रिक देशों ने आज उनमें कुछ राजनीतिक अधिकार शामिल किए हैं। उदाहरणस्वरूप, मतदान अभिव्यक्ति या आस्था की आजादी जैसे नागरिक अधिकार और न्यूनतम मजदूरी या शिक्षा पाने से जुड़े कुछ सामाजिक-आर्थिक अधिकार अधिकारों और प्रतिष्ठा की समानता नागरिकता के बुनियादी अधिकारों में से एक है।

प्रश्न 2.
सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए तो जा सकते हैं लेकिन हो सकता है कि वे इन अधिकारों का प्रयोग समानता से न कर सकें। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देने पर विचार करना और सुनिश्चित करना किसी सरकार के लिए सरल नहीं होता। विभिन्न समूह के लोगों की आवश्यकताएँ और समस्याएँ अलग-अलग हो सकती हैं और एक समूह के अधिकार दूसरे समूह के अधिकारों के प्रतिकूल हो सकते हैं। नागरिकों के लिए समान अधिकार का आशय यह नहीं होता कि सभी लोगों पर समान नीतियाँ लागू की दी जाएँ, क्योंकि विभिन्न समूह के लोगों की आवश्यकताएँ भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। अगर उद्देश्य केवल ऐसी नीति बनाना नहीं है जो सभी लोगों पर एक तरह से लागू हों बल्कि लोगों को अधिक बराबरी पर लाना है तो नीतियों का निर्माण करते समय विभिन्न आवश्यकताओं और दावों का ध्यान रखना होगा।

प्रश्न 3.
भारत में नागरिक अधिकारों के लिए हाल के वर्षों में किए गए किन्हीं दो संघर्षों पर टिप्पणी लिखिए। इन संघर्षों में किन अधिकारों की मॉग की गई थी?
उत्तर-
झोपड़पट्टी वाली का आन्दोलन – भारत के प्रत्येक शहर में एक बड़ी जनसंख्या झोपड़पट्टियों और अवैध कब्जे की जमीन पर बसे लोगों की हैं। यद्यपि ये लोग अपरिहार्य और उपयोगी काम अक्सर कम मजदूरी पर करते हैं फिर भी शहर की शेष जनसंख्या उन्हें अवांछनीय अतिथि के रूप में देखती है। उन पर शहर के संसाधनों पर बोझ बनने या अपराध करने का आरोप लगाया जाता हैं।

गन्दी बस्तियों की दशा अत्यन्त दयनीय होती है। छोटे-छोटे कमरों में बहुत-से लोग हुँसे रहते हैं। यहाँ न निजी शौचालय होता है, न जलापूर्ति और न सफाई व्यवस्था। गन्दी बस्तियों में जीवन और सम्पत्ति असुरक्षित होते हैं। झोपड़ी-पट्टियों के निवासी अपने श्रम से अर्थव्यव्सथा में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं। अन्य व्यवसायों के बीच ये फेरीवाले, छोटे व्यापारी, सफाई कर्मी या घरेलू नौकर, नल ठीक करने वाले या मिस्त्री होते हैं। झोपड़-पट्टियों में बेत-बुनाई या कपड़ा-हँगाई-छपाई या सिलाई जैसे छोटे व्यवसाय भी चलते हैं।

झोपड़-पटिटय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित हो रही हैं। उन्होंने इसके लिए आन्दोलन भी चलाए और अदालतों में दस्तक भी दी है। उनके लिए वोट देने जैसे बुनियादी राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करना भी कठिन हो जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने मुम्बई की झोपड़-पट्टियों में रहने वालों के अधिकारों के बारे में समाजकर्मी ओल्गा टेलिस की जनहित याचिका (ओल्गा टेलिस बनाम बम्बई नगर निगम) पर 1985 में एक महत्त्वपूर्ण निर्णय दिया। याचिका में कार्यस्थल के निकट रहने की वैकल्पिक जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण फुटपाथ या झोपड़-पट्टियों में रहने के अधिकार का दावा किया गया था। अगर यहाँ रहने वालों को हटने के लिए मजबूर किया गया तो उन्हें आजीविका भी गॅवानी पड़ेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान की धारा 21 में जीने के अधिकार की गारण्टी दी गई है, जिसमें आजीविका का अधिकार शामिल है। इसलिए अगर फुटपाथवासियों को बेदखल करना हो तो उन्हें आश्रय के अधिकार के अन्तर्गत पहले वैकल्पिक जगह उपलब्ध करानी होगी।

टिहरी विस्थापितों का आन्दोलन – टिहरी गढ़वाल में टिहरी बाँध के बनने से टिहरी शहर डूब गया। इसके विस्थापितों के लिए सरकार ने जो व्यवस्थाएँ की थीं वे अपर्याप्त थीं। उचित मुआवजे की माँग और उचित आवास की माँग ने जीने के अधिकार का रूप धारण कर लिया। एक बड़ा आन्दोलन चला। अन्तत: सरकार ने सभी को उनके अधिकारों के अन्तर्गत राहत प्रदान की।

प्रश्न 4.
शरणार्थियों की समस्याएँ क्या हैं? वैश्विक नागरिकता की अवधारणा किस प्रकार उनकी सहायता कर सकती है?
उत्तर-
जब हम शरणार्थियों या अवैध अप्रवासियों के विषय में सोचते हैं तो मन में अनेक छवियाँ उभरती हैं। उसमें एशिया या अफ्रीका के ऐसे लोगों की छवि हो सकती है जिन्होंने यूरोप या अमेरिका में चोरी-छिपे घुसने के लिए दलाल को पैसे का भुगतान किया हो। इसमें जोखिम बहुत है लेकिन वे प्रयास में तत्पर दिखते हैं। एक अन्य छवि युद्ध या अकाल से विस्थापित लोगों की हो सकती है। इस प्रकार के बहुत से दृश्य हमें दूरदर्शन पर दिखाई दे जाते हैं। सूडान डरफर क्षेत्र के शरणार्थी, फिलीस्तीनी, बर्मी या बंगलादेशी शरणार्थी जैसे कई उदाहरण हैं। ये सभी ऐसे लोग हैं जो अपने ही देश या पड़ोसी देश में शरणार्थी बनने के लिए मजबूर किए गए हैं।

हम यह मान लेते हैं कि किसी देश की पूर्ण सदस्यता उन सबको उपलब्ध होनी चाहिए, जो सामान्यतया उस देश में रहते और काम करते हैं या जो नागरिकता के लिए आवेदन करते हैं। वैसे अनेक देश वैश्विक और समावेशी नागरिकता को समर्थन करते हैं लेकिन नागरिकता देने की शर्ते भी निर्धारित करते हैं। ये शर्ते साधारणतया देश के संविधान और कानूनों में लिखी होती हैं। अवांछित आगंतुकों को नागरिकता से बाहर रखने के लिए राज्य सत्ताएँ शक्ति का प्रयोग करती हैं।

अनेक प्रतिबन्ध, दीवार और बाड़ लगाने के बाद आज भी दुनिया में बड़े पैमाने पर लोगों का देशान्तरण होता है। अगर कोई देश स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होता और वे घर नहीं लौट सकते तो वे राज्यविहीन और शरणार्थी हो जाते हैं। वे शिविरों में या अवैध प्रवासी के रूप में रहने के लिए विवश किए जाते हैं। अक्सर वे कानूनी रूप से काम नहीं कर सकते या अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं सकते या सम्पत्ति अर्जित नहीं कर सकते। शरणार्थियों की समस्या इतनी गम्भीर है कि संयुक्त राष्ट्र ने शरणार्थियों की जाँच करने और सहायता करने के लिए उच्चायुक्त नियुक्त किया हुआ है।

विश्व नागरिकता की अवधारणा अभी साकार नहीं हुई है। फिर भी इसके आकर्षणों में से एक यह है कि इससे राष्ट्रीय सीमाओं के दोनों ओर की उन समस्याओं का मुकाबला करना सरल हो सकता है। जिसमें कई देशों की सरकारों और लोगों की संयुक्त कार्यवाही आवश्यक होती है। इससे शरणार्थियों की समस्या का सर्वमान्य समाधान पाना सरल हो सकता है या कम-से-कम उनके बुनियादी अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है चाहे वे किसी भी देश में रहते हों।

प्रश्न 5.
देश के अन्दर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में लोगों के आप्रवासन का आमतौर पर स्थानीय लोग विरोध करते हैं। प्रवासी लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकते हैं?
उत्तर-
प्रवासी लोग अपने श्रम से अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं। अन्य व्यवसायों के बीच ये प्रवासी फेरीवाले, छोटे व्यापारी, सफाईकर्मी या घरेलू नौकर, नल ठीक करने वाले या मिस्त्री होते हैं। प्रवासी लोग अपने रहने के स्थान पर बेत-बुनाई या कपड़ा-हँगाई-छपाई, कपड़ों की सिलाई जैसे छोटे कारोबार भी चलाते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Political Science Political theory Chapter 6 Citizenship 1
यदि ये प्रवासी लोग किसी नगर के जीवन से चले जाएँ या अपनी सभी आर्थिक गतिविधियाँ बन्द कर दें तो लोगों की क्या दशा होगी उसे उपर्युक्त चित्र के माध्यम से भली-भाँति समझा जा सकता है।

प्रश्न 6.
भारत जैसे समान नागरिकता देने वाले देशों में भी लोकतान्त्रिक नागरिकता एक पूर्ण स्थापित तथ्य नहीं वरन एक परियोजना है। नागरिकता से जुड़े उन मुद्दों की चर्चा कीजिए जो आजकल भारत में उठाये जा रहे हैं?
उत्तर-
भारत स्वयं को धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक राष्ट्र राज्य कहता है। स्वतन्त्रता आन्दोलन का आधार व्यापक था और विभिन्न धर्म, क्षेत्र और संस्कृति के लोगों को आपस में जोड़ने के कृत संकल्प प्रयास किए गए। यह सही है कि जब मुस्लिम लीग से विवाद नहीं सुलझाया जा सका, तब 1947 ई० में देश का विभाजन हुआ। लेकिन इसने उस राष्ट्र राज्य के धर्मनिरपेक्ष ओर समावेशी चरित्र को बनाए रखने के भारतीय राष्ट्रीय नेताओं के निश्चय को और सुदृढ़ ही किया जिसके निर्माण के लिए वे प्रतिबद्ध थे। यह निश्चय संविधान में सम्मिलित किया गया।

भारतीय संविधान ने बहुत ही विविधतापूर्ण समाज को समायोजित करने का प्रयास किया है। इन विविधताओं में से कुछ उल्लेखनीय हैं-
इसने अनुसूचित्र जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे भिन्न-भिन्न समुदायों, पूर्व में समान अधिकार से वंचित रही महिलाएँ, आधुनिक सभ्यता के साथ मामूली सम्पर्क रखने वाले अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के कुछ सुदूरवर्ती समुदायों और कई अन्य समुदायों को पूर्ण और समान नागरिकता देने का प्रयास किया।
इसने देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित विभिन्न भाषाओं, धर्म और रिवाजों की पहचान बनाए रखने का प्रयास किया। इसे लागों को उनकी निजी आस्था, भाषा या सांस्कृतिक रिवाजों को छोड़ने के लिए बाध्य किए बिना सभी को समान अधिकार उपलब्ध कराना था। संविधान के जरिए आरम्भ किया गया यह अद्वितीय प्रयोग था दिल्ली में गणतन्त्र दिवस परेड में विभिन्न क्षेत्र, संस्कृति और धर्म के लोगों को सम्मिलित करने के राजसत्ता के प्रयास को प्रतिबिम्बित करता है।

नागरिकता से सम्बन्धित प्रावधानों का उल्लेख संविधान के तीसरे भाग और संसद द्वारा बाद में पारित कानूनों में हुआ है। संविधान ने नागरिकता की लोकतान्त्रिक और समावेशी धारणा को अपनाया है। भारत में जन्म, वंश परम्परा, पंजीकरण, देशीकरण या किसी भू-क्षेत्र के राज क्षेत्र शामिल होने से नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। संविधान में नागरिकों के अधिकार और दायित्वों का उल्लेख है। यह प्रावधान भी है कि राज्य को नस्ल/जाति/लिंग/जन्मस्थल में से किसी भी आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों को भी संरक्षित किया गया है। इस प्रकार के समावेशी प्रवाधानों ने संघर्ष और विवादों को जन्म दिया है। महिला आन्दोलन, दलित आन्दोलन या विकास योजनाओं से विस्थापित लोगों का संघर्ष ऐसे लोगों द्वारा चलाए जा रहे संघर्षों के कुछ उदाहरण हैं, जो मानते हैं कि उनकी नागरिकता को पूर्ण अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। भारत के अनुभवों से संकेत प्राप्त होते हैं कि किसी देश में लोकतान्त्रिक नागरिकता एक परियोजना या लक्ष्यसिद्धि का एक आदर्श है। जैसे-जैसे समाज बदल रहे हैं, वैसे-वैसे नित-नए मुद्दे भी समाने आ रहे हैं।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘कर्तव्य के उचित क्रम-निर्धारण का नाम ही नागरिकता है।’ यह कथन किसका है।
(क) ए० के० सीयू को
(ख) सुकरात का
(ग) प्लेटो का
(घ) डॉ० विलियम बॉयड का
उत्तर-
(घ) डॉ० विलियम बॉयड का।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से नागरिक का सामाजिक अधिकार चुनिए
(क) मताधिकार
(ख) शिक्षा का अधिकार
(ग) चुनाव लड़ने का अधिकार
(घ) न्याय प्राप्त करने का अधिकार
उत्तर-
(ख) शिक्षा का अधिकार।

प्रश्न 3.
निम्नांकित में कौन विदेशी है?
(क) राजनीतिक अधिकार प्राप्त
(ख) सैनिक
(ग) राजदूत
(घ) राज्य का सदस्य
उत्तर-
(ग) राजदूत।

प्रश्न 4.
किन देशों में सम्पत्ति खरीदने पर वहाँ की नागरिकता प्राप्त हो जाती है?
(क) भारत
(ख) बांग्लादेश
(ग) दक्षिणी अमेरिका के कुछ देश
(घ) पाकिस्तान
उत्तर-
(ग) दक्षिणी अमेरिका के कुछ देश।

प्रश्न 5.
आदर्श नागरिकता का तत्त्व नहीं है
(क) कर्तव्यपरायणता
(ख) जागरूकता
(ग) शिक्षा
(घ) साम्प्रदायिकता
उत्तर-
(घ) साम्प्रदायिकता।

प्रश्न 6.
“शिक्षा, जो आत्मा का भोजन है, स्वस्थ नागरिकता की प्रथम शर्त है।” यह कथन किसका है?
(क) अब्राहम लिंकन का
(ख) सुकरात का
(ग) बाल गंगाधर तिलक को
(घ) महात्मा गांधी का
उत्तर-
(घ) महात्मा गांधी का।

प्रश्न 7.
आदर्श नागरिक के मार्ग में बाधा है
(क) अशिक्षा व अज्ञानता
(ख) अच्छा स्वास्थ्य
(ग) संयुक्त परिवार
(घ) निर्धन मित्र
उत्तर-
(क) अशिक्षा व अज्ञानता।

प्रश्न 8.
आदर्श नागरिक का गुण नहीं है
(क) सच्चरित्रता
(ख) आत्म-संयम
(ग) उग्र-राष्ट्रीयता
(घ) अधिकार-कर्तव्य का ज्ञान
उत्तर-
(ग) उग्र-राष्ट्रीयता।

प्रश्न 9.
आदर्श नागरिकता के मार्ग में बाधा नहीं है
(क) साम्प्रदायिकता
(ख) अशिक्षा
(ग) निर्धनता
(घ) राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना
उत्तर-
(घ) राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में से कौन-सा तत्त्व आदर्श नागरिकता के मार्ग में बाधक नहीं है।
(क) निर्धनता
(ख) अनुशासन
(ग) अशिक्षा
(घ) स्वार्थपरता
उत्तर-
(ख) अनुशासन।

प्रश्न 11.
किसी राज्य में निवास करने वाले विदेशी के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) वह राज्य में भूमि का क्रय नहीं कर सकता
(ख) उसकी जान-माल की सुरक्षा के लिए राज्य उत्तरदायी नहीं है।
(ग) राज्य उसे अल्पकाल के लिए निवास करने की अनुमति दे सकता है।
(घ) वह अपने राज्य के प्रति निष्ठा रखता है।
उत्तर-
(ख) उसकी जान-माल की सुरक्षा के लिए राज्य उत्तरदायी नहीं है।

प्रश्न 12.
किसी देश में विदेशी को निम्नलिखित में से कौन-से अधिकार प्राप्त नहीं हैं ?
(क) राजनीतिक अधिकार
(ख) सामाजिक अधिकार
(ग) धार्मिक अधिकार
(घ) व्यापारिक अधिकार
उत्तर-
(क) राजनीतिक अधिकार।

प्रश्न 13.
आदर्श नागरिकता के मार्ग में प्रमुख बाधा क्या है ?
(क) औद्योगीकरण
(ख) शहरीकरण
(ग) साक्षरता
(घ) निर्धनता
उत्तर-
(घ) निर्धनता।

प्रश्न 14.
संसद में भारतीय नागरिकता अधिनियम कब पारित हुआ ?
(क) 1950 ई० में
(ख) 1952 ई० में
(ग) 1955 ई० में
(घ) 1960 ई० में
उत्तर-
(ग) 1955 ई० में।

प्रश्न 15.
“दि फिलॉस्फी ऑफ सिटिजनशिप” नामक पुस्तक के लेखक हैं
(क) एफ० जी० गोल्ड
(ख) अल्फ्रेड जे० शॉ
(ग) डॉ० ई० एम० ह्वाइट
(घ) वार्ड
उत्तर-
(ग) डॉ० ई० एम० ह्वाइट।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नागरिकता प्राप्त करने के दो तरीके बताइए।
या नागरिकता प्राप्त होने की कोई दो स्थितियाँ बताइए।
उत्तर-
1. जन्म द्वारा तथा
2. देशीयकरण द्वारा।

प्रश्न 2.
भारत में नागरिकता के लोप होने के कोई दो कारण लिखिए।
या नागरिकता खोने के दो आधार बताइए।
उत्तर-

  1.  विदेश में सरकारी नौकरी करने पर तथा
  2.  सेना से भागने पर।

प्रश्न 3.
आदर्श नागरिक के विषय में लॉर्ड ब्राइस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर–
“एक लोकतन्त्रीय (आदर्श) नागरिक में बुद्धि, आत्म-संयम तथा उत्तरदायित्व होना चाहिए।’

प्रश्न 4.
कोई दो स्थितियाँ बताइए जिनमें केन्द्रीय सरकार नागरिक की नागरिकता समाप्त कर | सकती है।
या एक भारतीय स्त्री की नागरिकता का लोप हो गया है। इसके दो सम्भावित कारणों का |’ उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  1.  देशद्रोह करने पर तथा
  2.  लम्बे समय तक देश से अनुपस्थित रहने पर।

प्रश्न 5.
आदर्श नागरिकता के चार तत्त्व बताइए।
उत्तर–
आदर्श नागरिकता के चार तत्त्व हैं—

  1.  कर्तव्यपरायणता,
  2.  प्रगतिशीलता,
  3.  व्यापक दृष्टिकोण तथा
  4.  जागरूकता।

प्रश्न 6.
भारतीय संविधान में समस्त नागरिकों के लिए कैसी नागरिकता की व्यवस्था की गयी है?
उत्तर-
भारतीय संविधान में समस्त नागरिकों के लिए इकहरी नागरिकता की व्यवस्था की गयी है।

प्रश्न 7.
नागरिक के दो प्रमुख कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर–
नागरिक के दो प्रमुख कर्तव्य हैं—

  1.  राज्य के प्रति भक्ति एवं
  2.  राज्य के कानूनों का पालन करना।

प्रश्न 8.
विदेशी किसे कहते हैं ?
उत्तर–
विदेशी वह व्यक्ति है जो अपना देश छोड़कर किसी कारणवश अन्य देश में रहने लगा हो। उसे उस देश के सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं, राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते।

प्रश्न 9.
विदेशियों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर–
विदेशियों को तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

  1.  स्थायी विदेशी,
  2.  अस्थायी विदेशी तथा
  3.  राजदूत।

प्रश्न 10.
आदर्श नागरिकता के मार्ग में सहायक दो प्रमुख तत्त्व बताइए।
उत्तर-
आदर्श नागरिकता के मार्ग में सहायक दो प्रमुख तत्त्व हैं-

  1.  स्वतन्त्र प्रेस तथा
  2.  स्वस्थ राजनीतिक दल।

प्रश्न 11.
“शिक्षा श्रेष्ठ नागरिक जीवन के वृत्त-खण्ड की आधारशिला है।” यह कथन किस विद्वान् का है ?
उत्तर-
यह कथन डॉ० बेनी प्रसाद नामक विद्वान् का है।

प्रश्न 12.
नागरिकों के कौन-से दो मुख्य प्रकार होते हैं ?
उत्तर-
नागरिकों के दो मुख्य प्रकार हैं-

  1.  जन्मजात नागरिक तथा
  2.  देशीयकरण से नागरिकता प्राप्त नागरिक।

प्रश्न 13.
भारत में नागरिकता अधिनियम कब बनाया गया?
उत्तर-
भारत में नागरिकता अधिनियम 1955 ई० में बनाया गया।

प्रश्न 14.
भारत का प्रथम नागरिक कौन है?
उत्तर-
भारत का राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक माना जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नागरिक की विभिन्न परिभाषाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
‘नागरिक’ की परिभाषाएँ
प्राचीन यूनानी विचारक अरस्तु ने नागरिक की परिभाषा इन शब्दों में की थी, “एक नागरिक वह है, जिसने राज्य के शासन में कुछ भाग लिया हो और जो राज्य द्वारा प्रदान किए गए सम्मान का उपभोग कर सके।”
भले ही तत्कालीन परिस्थितियों में अरस्तु की उपर्युक्त परिभाषा सटीक रही हो, लेकिन अरस्तू की यह परिभाषा आधुनिक काल में अपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि आज नगर-राज्यों का स्थान विशाल राज्यों ने ले लिया है। फलतः ‘नागरिक’ शब्द का अर्थ भी बहुत अधिक व्यापक हो गया है। आधुनिक विद्वानों ने ‘नागरिक’ शब्द की परिभाषा निम्नलिखित प्रकार से दी है ।
लॉस्की के अनुसार, “नागरिक केवल समाज का एक सदस्य ही नहीं है, वरन् वह कुछ कर्तव्यों का यान्त्रिक रूप से पालनकर्ता तथा आदेशों का बौद्धिक रूप से ग्रहणकर्ता भी है।”
गैटिल के अनुसार, “नागरिक समाज के वे सदस्य हैं, जो कुछ कर्तव्यों द्वारा समाज से बँधे रहते हैं, जो उसके प्रभुत्व को मानते हैं और उससे समान रूप से लाभ उठाते हैं।”
सीले के अनुसार, “नागरिक उस व्यक्ति को कहते हैं, जो राज्य के प्रति भक्ति रखता हो, उसे सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त हों और जन-सेवा की भावना से प्रेरित हो।”

प्रश्न 2.
किसी देश के नागरिक को कितनी श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर-
किसी देश के नागरिक को निम्नलिखित चार श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं

1. अल्प-वयस्क नागरिक- ये एक निश्चित आयु से कम आयु के व्यक्ति होते हैं। ऐसे नागरिकों को समस्त प्रकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन निर्धारित आयु के पूर्व वे अपने राजनीतिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते। भारत में 18 वर्ष की आयु से कम के व्यक्ति इस श्रेणी
में आते हैं।

2. मताधिकार रहित वयस्क नागरिक- ये वे नागरिक होते हैं जो निर्धारित आयु पूर्ण करने के बाद | भी शारीरिक एवं मानसिक अयोग्यताओं के कारण मत देने के अधिकार से वंचित कर दिये जाते हैं। उदाहरणार्थ-कोढ़ी, पागल, दिवालिया व देशद्रोही इत्यादि। इन्हें सिर्फ सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं।

3. मताधिकार प्राप्त वयस्क नागरिक- इस श्रेणी में वे नागरिक आते हैं जो चारों शर्तों को पूरा करते हों, अर्थात् वे राज्य के सदस्य हों, उन्हें सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त हों, उन्हें मताधिकार प्राप्त हो तथा उनमें राज्य के प्रति भक्ति-प्रदर्शन की भावना हो।

4.  देशीयकृत नागरिक- इस श्रेणी में वे नागरिक आते हैं जो पूर्व में किसी अन्य देश अथवा राज्य के नागरिक थे, लेकिन किसी देश में बहुत दिनों तक रहने एवं कुछ शर्तों को पूरा करने पर राज्य की ओर से उन्हें राजनीतिक एवं सामाजिक अधिकार दे दिये गये हों।

प्रश्न 3.
‘विदेशी पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
विदेशी वह व्यक्ति है जो अस्थायी रूप से उस राज्य में निवास करता है जिसका वह सदस्य नहीं है। कोई भी व्यक्ति किसी देश में विदेशी उस समय कहा जा सकता है जब वह अल्पावधि हेतु किसी कार्यवश अपना देश छोड़कर दूसरे देश में रहने के लिए आया हो। कोई व्यक्ति व्यापार करने, शिक्षा प्राप्त करने अथवा घूमने के लिए दूसरे देश में आता है और जितने समय तक अपना देश छोड़कर बाहर रहता है, उतने समय तक उस राज्य में विदेशी कहा जाता है। उसे उस देश के राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते तथा न ही वह उस राज्य के प्रति भक्तिभाव रखता है। वह उस राज्य के प्रति भक्तिभाव रखता है जिसका वह सदस्य है। इस प्रकार विदेशी वह व्यक्ति है जो सिर्फ सामाजिक अधिकारों का उपयोग करता है। एक विदेशी को जीवन एवं सम्पत्ति की रक्षा एवं कुछ सामान्य सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं, लेकिन अन्य सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते। इन अधिकारों की प्राप्ति के बदले विदेशियों को सम्बन्धित देश के कानून का पूर्णतया पालन करना होता है।

प्रश्न 4.
नागरिकता प्राप्त करने के सन्दर्भ में जन्म-स्थान के सिद्धान्त का विवरण दीजिए।
उत्तर-
इस सिद्धान्त के अनुसार बालक की नागरिकता उसके जन्मस्थान के आधार पर निश्चित की जाती है। उदाहरणार्थ, यदि भारत के किसी नागरिक का बच्चा अर्जेण्टाइना की भूमि पर जन्म लेता है। तो वह बच्चा वहाँ का नागरिक माना जाएगा। लेकिन इसके विपरीत, यदि अर्जेण्टाइन के नागरिक का बच्चा भारत- भूमि पर अथवा अन्य किसी राज्य में जन्म लेता है तो वह स्वदेश की नागरिकता से वंचित रह जाएगा। यद्यपि यह सिद्धान्त अर्जेण्टाइना में प्रचलित है, लेकिन वहाँ की अपेक्षा यह इंग्लैण्ड में अधिक व्यापक है। वहाँ तो कोई बच्चा यदि इंग्लैण्ड के जहाज में भी पैदा होता है तो वह इंग्लैण्ड का नागरिक माना जाता है।
इस सिद्धान्त का सबसे बड़ा दोष यह है कि कोई दम्पति विश्व-भ्रमण के लिए निकले तो हो सकता है। कि उसकी एक सन्तान जापान में हो, दूसरी भारत में तथा तीसरी संयुक्त राज्य अमेरिका में। ऐसी दशा में जन्म-स्थान नियम के अनुसार तीनों बच्चे अलग-अलग देशों के नागरिक होंगे तथा उन्हें अपने माता-पिता के देश की नागरिकता प्राप्त नहीं होगी।

प्रश्न 5.
नागरिकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
नागरिकता वह भावना है जो नागरिक में निवास करती है। यह भावना नागरिक में देशभक्ति को जाग्रत करती है और नागरिक को उसके कर्तव्य-पालन तथा उत्तरदायित्व निभाने के लिए सजग करती है। लॉस्की के कथनानुसार, “अपनी प्रशिक्षित वृद्धि को लोकहित के लिए प्रयोग करना ही नागरिकता , है।’ गैटिल के विचारानुसार, “नागरिकता किसी व्यक्ति की उस स्थिति को कहते हैं, जिसके अनुसार वह अपने राज्य में सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकारों का उपभोग कर सकता है तथा कर्तव्यों का पालन करने के लिए तत्पर रहता है।”

विलियम बॉयड के अनुसार, “भक्ति भावना का उचित क्रम-निर्धारण ही नागरिकता है।” डॉ० आशीर्वादी लाल के अनुसार, नागरिकता केवल राजनीतिक कार्य ही नहीं, वरन् एक सामाजिक एवं नैतिक कर्तव्य भी है।”
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि नागरिक होने की दशा का नाम ही नागरिकता है। दूसरे शब्दों में, “जीवन की वह स्थिति, जिसमें व्यक्ति किसी राज्य का सदस्य होने के नाते समस्त प्रकार के सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकारों का उपभोग करता है, ‘नागरिकता (Citizenship) कहलाती है।”

प्रश्न 6.
स्थायी विदेशी तथा अस्थायी विदेशी में अन्तर बताइए।
उत्तर-
स्थायी विदेशी-ऐसे विदेशी जो अपना पूर्व देश छोड़कर किसी ऐसे देश में आ गये हों जहाँ वे स्थायी रूप से रहना चाहते हों तथा नागरिकता-प्राप्ति की शर्तों को पूरा कर रहे हों, स्थायी विदेशी कहलाते हैं। नागरिकता-प्राप्ति की प्रक्रिया द्वारा ये विदेशी उस देश के नागरिक बन जाते हैं। अस्थायी विदेशी–अस्थायी विदेशी विशेष कारण से अपना देश छोड़कर अल्पावधि हेतु दूसरे देश में आकर रहते हैं तथा अपना कार्य पूर्ण करके स्वदेश लौट जाते हैं। सामान्यतया इनका उद्देश्य शिक्षा, भ्रमण अथवा व्यापार होता है।

प्रश्न 7.
नागरिक तथा मतदाता में भेद बताइए।
उत्तर-
एक राज्य के अन्तर्गत नागरिक तथा मतदाता में भेद (अन्तर) होता है। एक राज्य के समस्त नागरिक मतदाता नहीं होते हैं। मतदाता कौन हो सकता है; यह राज्य के कानूनों द्वारा स्पष्ट किया जाता है। किसी भी देश के अन्तर्गत अवयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं होता है। इसके अलावा, कतिपय राज्यों में धर्म, सम्पत्ति, लिंग एवं शिक्षा के आधार पर भी कुछ नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है। किन्तु आधुनिक समय की प्रवृत्ति इस प्रकार के प्रतिबन्धों के प्रतिकूल है। संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, इंग्लैण्ड, पाकिस्तान, फ्रांस इत्यादि संसार के अधिकांश राज्यों में समस्त वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है।

प्रश्न 8.
नागरिकता की चार विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
नागरिकता की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. राज्य की सदस्यता- नागरिकता की सर्वप्रथम विशेषता राज्य की सदस्यता है।
  2. सर्वव्यापकता- नागरिकता प्रत्येक उस व्यक्ति को प्राप्त होती है जो कि राज्य का निवासी हो, भले ही वह शहर में निवास करता हो अथवा किसी ग्राम में।
  3. राज्य के प्रति निष्ठा- नागरिकता में देशभक्ति का गुण होना परम आवश्यक है।
  4. अधिकारों का प्रयोग- नागरिकता व्यक्ति को राज्य की तरफ से अधिकार प्रदान करती है।

प्रश्न 9.
देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की चार शर्ते बताइए।
या भारतीय नागरिकता को प्राप्त करने की दो शर्ते बताइए।
उत्तर-
देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की चार शर्ते निम्नलिखित हैं

  1.  विदेशी ऐसे राज्य का नागरिक न हो जहाँ भारतीयों पर वहाँ की नागरिकता ग्रहण करने पर प्रतिबन्ध लगाया गया हो।
  2.  वह प्रार्थना-पत्र देने की तिथि से पूर्व न्यूनतम एक वर्ष से लगातार भारत में निवास कर रहा हो।
  3.  वह एक वर्ष से पूर्व, न्यूनतम 5 वर्षों तक भारत में रह चुका हो अथवा भारत सरकार की नौकरी में । रह चुका हो अथवा दोनों मिलाकर 7 वर्ष का समय हो, लेकिन किसी भी परिस्थिति में 4 वर्ष से कम समय न हो।
  4.  उसका आचरण अच्छा हो।

प्रश्न 10.
आदर्श नागरिकता के मार्ग में अशिक्षा कैसे बाधक है?
उत्तर-
शिक्षा तथा ज्ञान के अभाव में आदर्श नागरिकता की कल्पना करना व्यर्थ है। अशिक्षित एवं अज्ञानी व्यक्ति उचित व अनुचित में अन्तर नहीं कर पाते। वे अपने उत्तरदायित्व के बोध से अपरिचित रहते हैं। ऐसे व्यक्ति राजनीतिक तथा सार्वजनिक कर्तव्यों का निष्पादन अपनी समझ-बूझ के आधार पर न करके अन्य व्यक्तियों के बहकावे में आकर करते हैं। शिक्षा तथा ज्ञान के बिना व्यक्ति न तो अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और न ही राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकता है। मैकम ने तो यहाँ तक कहा है कि शिक्षा के बिना नागरिक अपूर्ण है।”

प्रश्न 11.
आदर्श नागरिकता के मार्ग में साम्प्रदायिकता कैसे बाधक है?
उत्तर-
साम्प्रदायिकता को आदर्श नागरिक की प्रबलतम शत्रु माना गया है। साम्प्रदायिकता की भावना से ही सामाजिक जीवन में कटुता पैदा हो जाती है तथा शान्ति नष्ट हो जाती है। कभी-कभी इसके वशीभूत होकर व्यक्ति अपने धार्मिक एवं राजनीतिक समुदायों को इतना अधिक महत्त्व देते हैं कि वे समाज एवं राज्य के हितों की अपेक्षा हेतु तत्पर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में आदर्श नागरिकता की प्राप्ति असम्भव हो जाती है।

प्रश्न 12.
नागरिकता का लोप होने की किन्हीं पाँच स्थितियों का विवेचन कीजिए।
उत्तर-
नागरिकता का लोप
सामान्यतया निम्नलिखित स्थितियों में नागरिकता का लोप हो जाता है अथवा किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त हो जाती है-

  1. विदेशी नागरिकता ग्रहण करने पर- यदि कोई व्यक्ति विदेश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी अपने देश की नागरिकता स्वत: ही समाप्त हो जाती है।
  2. विवाह द्वारा- यदि कोई महिला विदेशी पुरुष से विवाह कर लेती है, तो वह अपने देश की नागरिकता खो देती है।
  3. अनुपस्थिति के कारण- यदि कोई व्यक्ति अपने देश से लम्बी अवधि तक अनुपस्थित रहता | है, तो उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है।
  4. सेना से भागने पर- सेना से भागे सैनिक, देशद्रोही तथा घोर अपराधी भी नागरिकता से वंचित कर दिए जाते हैं।
  5. विदेशों में नौकरी करने से- यदि कोई व्यक्ति विदेश में नौकरी कर लेता है अथवा विदेशी नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो वह अपने देश की नागरिकता खो देता है।

प्रश्न 13.
सत्रहवीं से बीसवीं सदी के बीच यूरोप के गोरे लोगों ने दक्षिण अफ्रीका के लोगों पर अपना शासन कायम रखा। 1994 तक दक्षिण अफ्रीका में अपनाई गई नीतियों के बारे में नीचे दिए गए ब्योरे को पढिए।
श्वेत लोगों को मत देने, चुनाव लड़ने और सरकार को चुनने का अधिकार था। वे सम्पत्ति खरीदने और देश में कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतन्त्र थे। काले लोगों को ऐसे अधिकार नहीं थे। काले और गोरे लोगों के लिए पृथक मोहल्ले और कालोनियाँ बसाई गई थीं। काले लोगों को अपने पड़ोस की गोरे लोगों की बस्ती में काम करने के लिए ‘पास लेने पड़ते थे। उन्हें गोरों के इलाके में अपने परिवार रखने की अनुमति नहीं थी। अलग-अलग रंग के लोगों के लिए विद्यालय भी अलग-अलग थे।
(i) क्या अश्वेत लोगों की दक्षिण अफ्रीका में पूर्ण और समान सदस्यता मिली हुई थी? कारण सहित बताइए।
(ii) ऊपर दिया गया ब्योरा हमें दक्षिण अफ्रीका में भिन्न समूहों के अन्तर्सम्बन्धों के बारे में क्या बताता है?
उत्तर-
(i) नहीं, अश्वेत लोगों को दक्षिण अफ्रीका में पूर्ण समान सदस्यता प्राप्त नहीं थी। वहाँ रंगभेद नीति इसका प्रमुख कारण था।
(ii) दक्षिण अफ्रीका में भिन्न समूह (गोर-काले) के अन्तर्सम्बन्ध ठीक नहीं थे। दोनों में आपस में गहरे मतभेद थे।

प्रश्न 14.
नागरिक के लक्षणों की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
उत्तर-
नागरिक के निम्नलिखित लक्षण या विशेषताएँ होती हैं

  1.  वह राज्य का सदस्य हो।
  2.  वह राज्य की सीमा के अन्दर रहता हो, चाहे वह नगर-निवासी हो अथवा ग्रामवासी।
  3.  उसे सभी सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त हों।
  4.  वह राज्य की सम्प्रभुता को स्वीकार करता हो और राज्य में पूर्ण निष्ठा एवं भक्ति रखता हो।
  5.  उसे मताधिकार प्राप्त हो।
  6.  उसमें कर्तव्यपरायणता की भावना निहित हो।
  7.  वह राष्ट्र तथा समाज के प्रति पूर्ण निष्ठा तथा भक्ति की भावना से ओतप्रोत हो।

प्रश्न 15.
विश्व नागरिकता की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
उत्तर-
विश्व नागरिकता की अवधारणा आधुनिक विचारकों की देन है। जिस प्रकार विश्व-राज्य व विश्व-बन्धुत्व की कल्पना की गई है, उसी प्रकार विश्व-नागरिकता का विचार भी विकसित हुआ है। विश्व-बन्धुत्व की कल्पना को साकार बनाकर विश्व नागरिकता के विचार को व्यावहारिक रूप प्रदान किया जा सकता है, परन्तु यह काल्पनिक अवधारणा यथार्थ के धरातल पर असम्भव ही प्रतीत होती है। विश्व नागरिकता का आशय ऐसी नागरिकता से है, जो सभी राष्ट्रों द्वारा मान्य हो। संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएँ विश्व नागरिकता की अवधारणा को व्यावहारिक रूप दे सकती हैं। राजनीतिक सम्बन्ध, शान्ति की इच्छा, आवागमन के साधनों का विकास, सांस्कृतिक एकता, विश्व-बन्धुत्व की भावना व मानवाधिकार, अन्तर्राष्ट्रीय कानून और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से विश्व नागरिकता के आदर्श को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। नेहरू जी विश्व नागरिकता के प्रबल समर्थक थे।

प्रश्न 16.
आदर्श नागरिकता के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
किसी भी देश की प्रगति का आधार वहाँ के नागरिक होते हैं। जिस देश के नागरिक आदर्श नागरिकता के गुणों से परिपूर्ण होते हैं, वह देश शीघ्र ही उन्नति के शिखर पर पहुँच जाता है। अरस्तू का कथन है, “श्रेष्ठ नागरिक ही श्रेष्ठ राज्य का निर्माण कर सकते हैं; अतः राज्य के नागरिक आदर्श होने चाहिए।” वास्तव में आदर्श नागरिकता ही राज्य के विकास का आधार बन सकती है। डॉ० आशीर्वादी के अनुसार, “नागरिकता का सम्बन्ध केवल राजनीतिक जीवन से ही नहीं है, वरन् । सामाजिक और नैतिक जीवन से भी है।”
एक आदर्श नागरिक के गुणों को व्यक्त करते हुए लॉर्ड ब्राइस ने लिखा है, “एक लोकतन्त्रीय नागरिक में बुद्धि, आत्म-संयम तथा उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए।
इसी प्रकार डॉ० ह्वाइट ने लिखा है, “आदर्श नागरिक में तीन गुण; व्यावहारिक बुद्धि, ज्ञान और भक्ति; आवश्यक हैं।”

प्रश्न 17.
आदर्श नागरिकता की किन्हीं चार बाधाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
आदर्श नागरिकता के मार्ग की चार मुख्य बाधाएँ निम्नलिखित हैं

  1.  आदर्श नागरिकता के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा अशिक्षा तथा निरक्षरता है।
  2.  संकीर्ण धार्मिक भावनाएँ तथा साम्प्रदायिकता की मनोदशा आदर्श नागरिकता के मार्ग को अवरुद्ध कर देती हैं।
  3.  संकीर्ण मनोवृत्तियों पर आधारित दलीय राजनीति भी आदर्श नागरिकता को कुंठित कर देती है।
  4.  पूँजीवाद के अनियन्त्रित विकास ने भी समाज को निर्धन तथा अमीर दो वर्गों में विभाजित कर दिया है। अतः निर्धनता भी आदर्श नागरिकता के लिए अभिशाप है।

दीर्घ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नागरिकता का समानता और अधिकार से क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
नागरिकता केवल एक कानूनी अवधारणा नहीं है। इसका समानता और अधिकारों के व्यापक उद्देश्यों से भी घनिष्ठ सम्बन्ध है। इस सम्बन्ध का सर्वसम्मत सूत्रीकरण अंग्रेज समाजशास्त्री टी० एच० मार्शल (1893-1981) ने किया है। अपनी पुस्तक ‘नागरिकता और सामाजिक वर्ग में मार्शल ने नागरिकता को किसी समुदाय के पूर्ण सदस्यों को प्रदत्त प्रतिष्ठा के रूप में परिभाषित किया है। इस प्रतिष्ठा को ग्रहण करने वाले सभी लोग प्रतिष्ठा में अन्तर्भूत अधिकारों और कर्तव्यों के मामले में समान होते हैं।

नागरिकता की मार्शल द्वारा प्रदत्त कुँजी धारणा में मूल संकल्पना ‘समानता’ की है। इसमें दो बातें अन्तर्निहित हैं। पहली यह कि प्रदत्त अधिकार और कर्तव्यों की गुणवत्ता बढ़े। दूसरी यह कि उन लोगों की संख्या बढ़े जिन्हें वे दिए गए हैं।
मार्शल नागरिकता में तीन प्रकार के अधिकारों को शामिल मानते हैं–नागरिक, राजनीतिक और सामाजिक अधिकार।
नागरिक अधिकार व्यक्ति के जीवन, स्वतन्त्रता और सम्पत्ति की रक्षा करते हैं। राजनीतिक अधिकार व्यक्ति को शासन प्रक्रिया में सहभागी बनने की शक्ति प्रदान करते हैं। सामाजिक अधिकार व्यक्ति के लिए शिक्षा और रोजगार को सुलभ बनाते हैं। कुल मिलाकर ये अधिकार नागरिक के लिए सम्मान के साथ जीवन-बसर करना सम्भव बनाते हैं।

मार्शल ने सामाजिक वर्ग को ‘असमानता की व्यवस्था के रूप में चिह्नित किया। नागरिकता वर्ग पदानुक्रम के विभाजक परिणामों का प्रतिकार कर समानता सुनिश्चित करती है। इस प्रकार यह बेहतर सुबद्ध और समरस समाज रचना को सुसाध्य बनाता है।

प्रश्न 2.
भारतीय नागरिकता किन आधारों पर लुप्त हो सकती है? कोई दो प्रकार बताइए।
उत्तर-
भारतीय नागरिक अधिनियम, 1955 नागरिकता के लोप के विषय में भी व्यवस्था करता है, चाहे वह भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अन्तर्गत प्राप्त की गई हो या संविधान के उपबन्धों के अनुसार प्राप्त की गई हो। इस अधिनियम के अनुसार नागरिकता का लोप निम्न प्रकार से हो सकता है

1. नागरिकता का परित्याग- कोई भी वयस्क भारतीय नागरिक जो किसी दूसरे देश का भी ‘ नागरिक है, भारतीय नागरिकता को त्याग सकता है। इसके लिए उसे एक घोषणा करनी होगी और उस घोषणा का पंजीकरण हो जाने पर उसकी भारतीय नागरिकता लुप्त हो जाएगी, किन्तु यदि ऐसी घोषणा किसी ऐसे युद्धकाल में की जाती है, जिसमें भारत एक पक्षकार हो, तो पंजीकरण को तब तक रोका जा सकता है, जब तक भारत सरकार उचित समझे। यह उल्लेखनीय है कि जब कोई पुरुष भारतीय नागरिकता का त्याग करता है, तो उसके साथ-साथ उसके अवयस्क बच्चे भी भारतीय नागरिकता खो देते हैं।

2. अन्य देशों की नागरिकता स्वीकार करने पर- यदि कोई भारतीय नागरिक अपनी इच्छा से  किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता लुप्त हो जाती है। यह नियम उन नागरिकों के सम्बन्ध में लागू नहीं होता है, जो किसी ऐसे युद्धकाल में,
जिसमें भारत एक पक्षकार हो, स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार कर लेते हैं।

प्रश्न 3.
नागरिक और विदेशी में अन्तर लिखिए।
उत्तर-
नागरिक और विदेशी में अन्तर
UP Board Solutions for Class 11 Political Science Political theory Chapter 6 Citizenship 2
UP Board Solutions for Class 11 Political Science Political theory Chapter 6 Citizenship 3

प्रश्न 4.
नागरिक और राष्ट्र के सम्बन्ध की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
राष्ट्र राज्य की अवधारणा आधुनिक काल में विकसित हुई। राष्ट्र राज्य की सम्प्रभुता और नागरिकों के लोकतान्त्रिक अधिकारों का दावा सर्वप्रथम 1789 में फ्रांस के क्रान्तिकारियों ने किया था। राष्ट्र राज्यों का दावा है कि उनकी सीमाएँ केवल राज्यक्षेत्र को नहीं बल्कि एक अनोखी संस्कृति और साझा इतिहास को भी परिभाषित करती हैं। राष्ट्रीय पहचान को एक झण्डा, राष्ट्रगान, राष्ट्रभाषा या कुछ विशिष्ट उत्सवों के आयोजन जैसे प्रतीकों से व्यक्त किया जा सकता है।
अधिकतर आधुनिक राज्य स्वयं विभिन्न धर्मों, भाषा और सांस्कृतिक परम्पराओं के लोगों को सम्मिलित करते हैं।

लेकिन एक लोकतान्त्रिक राज्य की राष्ट्रीय पहचान में नागरिकों को ऐसी राजनीतिक पहचान देने की कल्पना होती है, जिसमें राज्य के सभी सदस्य भागीदार हो सकें। लोकतान्त्रिक देश साधारणतया अपनी पहचान इस प्रकार परिभाषित करने प्रयास करते हैं कि वह यथासम्भव समावेशी हो अर्थात् जो सभी नागरिकों को राष्ट्र के अंग के रूप में स्वयं को पहचानने की अनुमति देता हो। लेकिन व्यवहार में अधिकतर देश अपनी पहचान को इस प्रकार परिभाषित करने की ओर अग्रसर हैं, जो कुछ नागरिकों के लिए राष्ट्र के साथ अपनी पहचान व सम्बन्ध बनाए रखना अन्यों की तुलना में आसान बनाता है। यह राजसत्ता के लिए भी अन्यों की तुलना में कुछ लोगों को नागरिकता देना सरल कर देता है। यह अप्रवासियों का देश होने पर गौरवान्वित होने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में भी वैसे ही सच है जैसे कि किसी अन्य देश के बारे में।

प्रश्न 5.
नागरिक अधिकार आन्दोलन के लिए मार्टिन लूथर किंग जूनियर की भूमिका की विवेचना कीजिए।
उत्तर-
1950 का दशक संयुक्त राज्य अमेरिका के अनेक दक्षिणी राज्यों में काली और गोरी जनसंख्या के बीच व्याप्त विषमताओं के विरुद्ध नागरिक अधिकार आन्दोलन के उत्थान का साक्षी रहा है। इस प्रकार की विषमताएँ इन राज्यों द्वारा पृथक्करण कानून के नाम से विख्यात ऐसे कानूनों द्वारा पोषित होती थीं, जिनसे काले लोगों को अनेक नागरिक और राजनीतिक अधिकारों से वंचित किया जाता था। उन कानूनों ने विभिन्न नागरिक सुविधाओं; जैसे-रेल, बस, रंगशाला, आवास, होटल, रेस्टोरेण्ट आदि में गोरे और काले लोगों के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित कर रखे थे। इन कानूनों के कारण काले और गोरे बच्चों के स्कूल भी अलग-अलग थे।

इन कानूनों के विरुद्ध हुए आन्दोलन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर अग्रणी काले नेता थे। उन्होंने इनके विरुद्ध अनेक अकाट्य तर्क प्रस्तुत किए। पहला, आत्म गौरव व आत्म-सम्मान के मामले में विश्व की प्रत्येक जाति या वर्ण का मनुष्य बराबर है। दूसरा, किंग ने कहा कि पृथक्करण राजनीति के चेहरे पर ‘सामाजिक कोढ़’ की तरह है क्योंकि यह उन लोगों को गहरे मनोवैज्ञानिक घाव देता है, जो ऐसे काननों के शिकार हैं।

किंग के तर्क दिया कि पृथक्करण की प्रथा गोरे समुदाय के जीवन की गुणवत्ता भी कम करती है। किंग इसे उदाहरणों द्वारा स्पष्ट करते हैं। गोरे समुदाय ने अदालत के निर्देशानुसार कुछ सामुदायिक उद्यानों में काले लोगों को प्रवेश की आज्ञा देने के बजाय उन्हें बन्द करने का फैसला किया। इसी प्रकार कुछ बेसबॉल टीमें टूट गईं क्योंकि अधिकारी काले खिलाड़ियों को स्वीकार नहीं करना चाहते थे। तीसरे, पृथक्करण कानून लोगों के बीच कृत्रिम सीमाएँ खींचते हैं और उन्हें देश के व्यापक हित के लिए एक-दूसरे का सहयोग करने से रोकते हैं। इन कारणों से किंग ने बहस छेड़ी कि उन कानूनों को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने पृथक्करण कानूनों के विरुद्ध शान्तिपूर्ण और अहिंसक प्रतिरोध का आह्वान किया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नागरिकता की परिभाषा देते हुए, नागरिक के प्रकार लिखिए।
या नागरिकता से आप क्या समझते हैं? नागरिक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर-
नागरिकता की परिभाषा
नागरिकता उस स्थिति का नाम है, जिसके अन्तर्गत राज्य द्वारा व्यक्ति को नागरिक और राजनीतिक अधिकार प्रदान किए जाते हैं और व्यक्ति राज्य के प्रति विशेष निष्ठा रखता है। नागरिकता को निम्नलिखित शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है
लॉस्की के अनुसार, “अपनी प्रशिक्षित बुद्धि को लोकहित के लिए प्रयोग करना ही नागरिकता है।”
गैटिल के अनुसार, “नागरिकता व्यक्ति की वह स्थिति है, जिसके कारण वह कुछ सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों का उपभोग करता है।
विलियम बॉयड के अनुसार, “भक्ति-भावना का उचित क्रम-निर्धारण ही नागरिकता है।’ नागरिकता की उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर स्पष्ट होता है कि नागरिकता जीवन की वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति किसी राज्य का सदस्य होने के नाते सभी प्रकार के सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों का उपभोग करता है तथा राज्य के प्रति उसके अपने कुछ कर्तव्य भी सुनिश्चित होते हैं। इस प्रकार नागरिक होने की दशा का नाम ही नागरिकता है।

नागरिक के प्रकार
प्रत्येक राज्य में दो प्रकार के व्यक्ति निवास करते हैं
1. नागरिक (Citizen) और
2. विदेशी (Alien)

1. नागरिक
किसी राज्य में चार प्रकार के नागरिक होते हैं-

  • अल्पवयस्क नागरिक- ये एक निश्चित आयु से कम के व्यक्ति होते हैं और इन्हें मताधिकार प्राप्त नहीं होता है। भारत में 18 वर्ष की आयु से कम के व्यक्ति इस श्रेणी में आते हैं।
  • वयस्क नागरिक- ये एक निश्चित आयु प्राप्त व्यक्ति होते हैं। भारत में यह आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है तथा इन्हें मताधिकार प्राप्त होता है।
  • नागरिकता-प्राप्त विदेशी- ये विदेशी होते हैं, परन्तु उन्हें कुछ शर्ते पूरी करने के पश्चात् नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  • मताधिकार-रहित वयस्क नागरिक- इस वर्ग के अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति सम्मिलित किए जाते हैं, जिनकी आयु नागरिकता प्राप्त करने की निश्चित आयु अधिक होती है, परन्तु किन्हीं विशेष कारणों से इन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।

2. विदेशी
विदेशी वे होते हैं, जो किसी अन्य देश के मूल निवासी होते हैं और कुछ विशेष कारणों से कुछ समय के लिए दूसरे राज्य में निवास करते हैं। विदेशी निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं

  • स्थायी विदेशी- ऐसे विदेशी, जो अपना देश छोड़कर अन्य देशों में जाकर बस जाते हैं और उसी देश की नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं, ‘स्थायी विदेशी’ कहलाते हैं।
  • अस्थायी विदेशी अथवा विदेशी पर्यटक- ऐसे विदेशी, जो किसी विशेष कार्य के लिए कुछ समय के लिए दूसरे देश में जाते हैं और अपना कार्य पूरा करके स्वदेश लौट आते हैं, ‘अस्थायी विदेशी’ अथवा ‘विदेशी पर्यटक’ कहलाते हैं।
  • राजदूत एवं राजनयिक- ये विदेशी होते हैं, तथापि इन्हें अन्य विदेशियों की अपेक्षा अधिक | सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। किसी अन्य देश में ये अपने देश का कूटनीतिक एवं राजनयिक प्रतिनिधित्व करते हैं।
    सम्बन्धों के आधार पर विदेशी निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-
  • विदेशी शत्रु- शत्रु देशों में चोरी-छिपे घुसपैठ करने वाले विदेशी, विदेशी शत्रु’ कहलाते हैं। प्रायः शत्रु देशों से आने वाले विदेशियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाती है और उन पर अनेक प्रतिबन्ध भी लगा दिए जाते हैं।
  • विदेशी मित्र- मित्र राष्ट्रों से आने वाले विदेशी, विदेशी मित्र’ कहलाते हैं। ये विदेशी अतिथि के रूप में आते हैं।

प्रश्न 2.
नागरिकता को परिभाषित कीजिए। नागरिकता कैसे प्राप्त होती है तथा इसका किस प्रकार विलोपन होता है?
या नागरिकता की परिभाषा दीजिए और भारत में नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ बताइए।
या नागरिकता समाप्त होने की किन्हीं चार परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
नागरिकता का तात्पर्य किसी राज्य में व्यक्ति का नागरिक होने की स्थिति से है। यह उस वैधानिक या कानूनी सम्बन्ध का नाम है जो व्यक्ति को उस राज्य के साथ, जिसका वह सदस्य है, सम्बद्ध करता है।
1. लॉस्की के शब्दों में, “अपनी प्रशिक्षित बुद्धि का लोकहित में प्रयोग ही नागरिकता है।”
2. गैटिल के अनुसार, “नागरिकता व्यक्ति की उस अवस्था को कहते हैं जिसके कारण वह अपने राज्य में राष्ट्रीय और राजनीतिक अधिकारों का उपयोग कर सकता है और अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए तैयार रहता है।
इस प्रकार किसी राज्य और उसके नागरिकों के उन आपसी सम्बन्धों को ही ‘नागरिकता’ कहा जाता है जिससे नागरिकों को राज्य की ओर से सामाजिक और राजनीतिक अधिकार मिलते हैं। तथा वे राज्य के प्रति कुछ कर्तव्यों का पालन करते हैं।

नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ
नागरिकता प्राप्त करने की विधियों को निम्नलिखित दो भागों में विभक्त किया जा सकता है
1. जन्मजात नागरिकता की प्राप्ति तथा
2. राज्यकृत नागरिकता की प्राप्ति।

1. जन्मजात नागरिकता की प्राप्ति
जन्मजात नागरिकता निम्नलिखित तरीकों से प्राप्त होती है-

  • रक्त अथवा वंश सम्बन्धी सिद्धान्त- जन्मजात नागरिकता प्राप्त करने की प्रथम विधि रक्त सम्बन्ध है। इस सिद्धान्त के अनुसार बच्चे को जन्म किसी भी स्थान पर क्यों न हो, उसे अपने पिता की नागरिकता प्राप्त होती है। फ्रांस, इटली एवं स्विट्जरलैण्ड में इस सिद्धान्त को अपनाया गया है। यह सिद्धान्त न्यायसंगत और विवेकयुक्त है।
  • जन्म-स्थान सिद्धान्त- इस सिद्धान्त के अनुसार बच्चे की नागरिकता का निर्णय उसके जन्म-स्थान के आधार पर किया जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार बच्चे को उसी देश की नागरिकता प्राप्त होती है, जिस देश की भूमि पर उसका जन्म होता है। अर्जेण्टाइना, इंग्लैण्ड तथा अमेरिका में नागरिकता का यह सिद्धान्त लागू है। यह सिद्धान्त नागरिकता का निर्णय करने में तो बहुत सरल है, किन्तु तर्कसंगत नहीं है।
  • दोहरा नियम- कई देशों में दोनों सिद्धान्तों को अपनाया गया है। इंग्लैण्ड, फ्रांस एवं अमेरिका में रक्त-सम्बन्धी सिद्धान्त तथा जन्म-स्थान सिद्धान्त दोनों प्रचलित हैं। दोहरे नियम के सिद्धान्त के अनुसार जो बच्चा अंग्रेज दम्पती से उत्पन्न हुआ हो, चाहे बच्चे का जन्म भारत में हो, अंग्रेज कहलाता है। उसे अपने पिता की नागरिकता प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त यदि किसी विदेशी की इंग्लैण्ड में सन्तान पैदा होती है, तो उसे इंग्लैण्ड की भी नागरिकता प्राप्त होगी।
    इस सिद्धान्त में यह दोष है कि एक बच्चा एक समय में दो देशों का नागरिक बन सकता है, किन्तु वयस्क होने पर वह यह निर्णय कर सकता है कि वह किस देश की नागरिकता को अपनाये और किसका परित्याग करे।

2. राज्यकृत नागरिकता की प्राप्ति
राज्यकृत नागरिकता नियमानुसार विदेशियों को प्रदान की जाती है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें नागरिकता जन्मजात सिद्धान्त से प्राप्त नहीं होती, वरन् उस राज्य की ओर से प्राप्त होती है, जिसके कि वे मूल नागरिक नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने देश को छोड़कर किसी दूसरे देश में बस जाती है और कुछ समय पश्चात् उस देश की नागरिकताको प्राप्त कर लेता है तो उस व्यक्ति को राज्यकृत नागरिकं कहीं जाता है। नागरिकता देना अथवा न देना राज्य पर निर्भर करती है।
इस सिद्धान्त के अनुसार नागरिकता की प्राप्ति निम्नलिखित रूपों में की जाती है

  • निश्चित समय के लिए- यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश में जाकर एक निश्चित अवधि तक निवास करे तो वह प्रार्थना-पत्र देकर वहाँ की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। इंग्लैण्डे और अमेरिका में निवास की अवधि 5 वर्ष है, जब कि फ्रांस में 10 वर्ष। भारत में निवास की अवधि 4 वर्ष है।
  • विवाह- यदि कोई स्त्री किसी दूसरे देश के नागरिक से विवाह कर लेती है तो उसे अपने पति के देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। भारत का नागरिक पुरुष यदि इंग्लैण्ड की नागरिक महिला के साथ विवाह कर लेता है तो उस महिला को भारत की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। जापान में इसके विपरीत नियम है। यदि कोई विदेशी व्यक्ति जापान की नागरिक महिला से विवाह कर लेता है तो उस व्यक्ति को जापान की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  • सम्पत्ति खरीदना- सम्पत्ति खरीदने से भी नागरिकता प्राप्त हो जाती है। ब्राजील, पीरू और
    मैक्सिको में यह नियम प्रचलित है। यदि कोई विदेशी पीरू में सम्पत्ति खरीद लेता है तो उसे वहाँ की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  • गोद लेना- जब एक देश का नागरिक व्यक्ति किसी दूसरे देश के नागरिक बच्चे को गोद ले | लेता है तो गोद लिये जाने वाले बच्चे को अपने पिता के देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  • सरकारी नौकरी- कई देशों में यह नियम है कि यदि कोई विदेशी वहाँ सरकारी नौकरी कर ले तो उसे वहाँ की नागरिकता मिल जाती है। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई भारतीय इंग्लैण्ड में सरकारी नौकरी कर लेता है तो उसे इंग्लैण्ड की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  • विद्वत्ता द्वारा- कई देशों में विदेशी विद्वानों को नागरिक बनने के लिए विशेष सुविधाएँ दी | जाती हैं। विदेशी विद्वानों के निवास की अवधि दूसरे विदेशियों के निवास की अवधि से कम | होती है। फ्रांस में वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के लिए वहाँ की नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक वर्ष का निवास हीं पर्याप्त है।
  • दोबारा नागरिकता की प्राप्ति- यदि कोई नागरिक अपने देश की नागरिकता छोड़कर दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है तो उसे दूसरे देश का नागरिक माना जाता है, परन्तु यदि वह चाहे तो कुछ शर्ते पूरी करके पुन: अपने देश की नागरिकता भी प्राप्त कर सकता है।

भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ
निम्नलिखित विधियों में से किसी एक आधार पर भारतीय नागरिकता प्राप्त की जा सकती है

1. जन्म या वंश के आधार पर- 1992 ई० में संसद ने सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित कर ‘भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955′ को संशोधित किया है। 1992 ई० के पूर्व भारत के बाहर जन्मे किसी व्यक्ति को रक्त-सम्बन्ध या वंश के आधार पर भारत की नागरिकता तभी प्राप्त होती थी, जब कि उसका पिता भारत का नागरिक हो। अब व्यवस्था यह की गयी है कि भारत से बाहर जन्मे ऐसे किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता प्राप्त होगी; जिसका पिता या माता, उसके जन्म के समय भारत के नागरिक हों। इस प्रकार अब नागरिकता के प्रसंग में बच्चे की माता को पिता के ‘समकक्ष स्थिति प्रदान कर दी गयी है।
2. पंजीकरण द्वारा- निम्नलिखित श्रेणी के व्यक्ति पंजीकरण के आधार पर नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं-

  •  जो व्यक्ति पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें अब भारत में कम-से-कम 5 वर्ष निवास करना होगा। पहले यह अवधि 6 माह थी।
  •  ऐसे भारतीय जो विदेशों में जाकर बस गये हैं, भारतीय दूतावासों में आवेदन-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकेंगे।
  •  विदेशी स्त्रियाँ, जिन्होंने भारतीय नागरिक से विवाह कर लिया हो, आवेदन-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकेंगी।
  •  राष्ट्रमण्डलीय देशों के नागरिक, यदि वे भारत में ही रहते हों या भारत सरकार की नौकरी , कर रहे हों, आवेदन-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।

3. देशीयकरण द्वारा- देशीयकरण द्वारा नागरिकता तभी प्रदान की जाती है, जब कि सम्बन्धित व्यक्ति कम-से-कम 10 वर्ष तक भारत में रह चुका हो। पहले यह अवधि 5 वर्ष थी। ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1986′ जम्मू-कश्मीर तथा असम सहित भारत के सभी राज्यों पर लागू होता है।

4. भूमि विस्तार द्वारा- यदि किसी नवीन क्षेत्र को भारत में शामिल किया जाए तो वहाँ की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो जाएगी। जैसे 1961 ई० में गोआ तथा 1975 ई० में सिक्किम को भारत में सम्मिलित किये जाने पर वहाँ की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो गयी।

नागरिकता का लोप
जिस तरह नागरिकता को प्राप्त किया जा सकता है, उसी तरह कुछ स्थितियों में नागरिकता को खोया भी जा सकता है। निम्नलिखित स्थितियों में प्रायः नागरिकता का लोप हो जाता है

  1. लम्बे समय तक अनुपस्थिति- कई देशों में यह नियम है कि यदि वहाँ का नागरिक लम्बे समय तक देश से बाहर रहे तो उसकी नागरिकता समाप्त कर दी जाती है। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई फ्रांसीसी नागरिक लगातार 10 वर्ष की अवधि से अधिक फ्रांस से बाहर रहे तो उसकी नागरिकता समाप्त कर दी जाती है।
  2. विवाह- महिलाएँ विदेशी नागरिकों से विवाह करके अपने देश की नागरिकता खो देती हैं।
  3. विदेश में सरकारी नौकरी- यदि एक देश का नागरिक अपने देश की सरकार की आज्ञा प्राप्त | किये बिना किसी दूसरे देश में सरकारी नौकरी कर लेता है तो उसे अपने देश की नागरिकता छोड़नी पड़ती है।
  4. स्वेच्छा से नागरिकता का त्याग- कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को उनकी इच्छा के अनुसार किसी देश का नागरिक बनने की आज्ञा प्रदान कर देती हैं। इस प्रकार के व्यक्ति अपनी जन्मजात नागरिकता त्यागकर अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं।
  5. सेना से भाग जाने पर- यदि कोई नागरिक सेना से भागकर दूसरे देश में चला जाता है तो | उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है।
  6. दोहरी नागरिकता प्राप्त हो जाने पर- जब किसी व्यक्ति को दो राज्यों की नागरिकता प्राप्त हो जाती है तब उसे एक राज्य की नागरिकता छोड़नी पड़ती है।
  7. देश-द्रोह- जब कोई व्यक्ति राज्य के विरुद्ध विद्रोह अथवा क्रान्ति करता है तो उसकी नागरिकता छीन ली जाती है, परन्तु देश-द्रोह के आधार पर उन्हीं नागरिकों की नागरिकता को छीना जा सकता है जो राज्यकृत नागरिक हों।
  8. गोद लेना- यदि कोई बच्चा किसी विदेशी द्वारा गोद ले लिया जाए तो बच्चे की अपने देश की नागरिकता समाप्त हो जाती है और वह अपने नये माता-पिता के देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है।
  9. विदेशी सरकार से सम्मान प्राप्त करना- यदि कोई नागरिक अपने देश की आज्ञा के बिना किसी विदेशी सरकार द्वारा दिये गये सम्मान को स्वीकार कर लेता है तो उसे उसकी मूल नागरिकता से वंचित कर दिया जाता है।
  10. पागल, दिवालिया अथवा साधु- संन्यासी होने पर- यदि कोई व्यक्ति पागल, दिवालिया अथवा साधु-संन्यासी हो जाता है तो उसका नागरिकता का अधिकार समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 3.
‘विश्व नागरिकता की अवधारणा क्या है? इसके समर्थन में क्या तर्क प्रस्तुत किए जाते है?
उत्तर-
हम आज एक ऐसे विश्व में रहते हैं जो आपस में जुड़ा हुआ है। संचार के इण्टरनेट, टेलीविजन, सेलफोन और सैटेलाइट फोन जैसे नए साधनों ने उन तरीकों में भारी बदलाव कर दिया है, . जिनसे हम अपने विश्व को समझते हैं। पहले विश्व के एक हिस्से की गतिविधियों की खबर अन्य हिस्सों तक पहुँचने में महीनों लग जाते थे। लेकिन संचार के नये तरीकों ने विश्व के विभिन्न भागों में घट रही घटनाओं को हमारे तत्काल सम्पर्क की सीमाओं में ला दिया है। हम अपने टेलीविजन के पर्दे पर विनाश और युद्धों को होते देख सकते हैं, इससे विश्व के विभिन्न देशों के लोगों में साझे सरोकार और सहानुभूति विकसित होने में सहायता मिली है।

विश्व नागरिकता के समर्थक तर्क प्रस्तुत करते हैं कि चाहे विश्व-कुटुम्ब और वैश्विक समाज अभी विद्यमान नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार लोग आज एक-दूसरे से जुड़ाव अनुभव करते हैं। उदाहरणार्थ-एशिया की सुनामी या अन्य बड़ी दैवी आपदाओं के पीड़ितों की सहायता के लिए विश्व के सभी हिस्सों से उमड़ा भावोद्गार विश्व-समाज की ओर उभार का संकेत है। हमें इस भावना को मजबूत करना चाहिए और एक विश्व नागरिकता की अवधारणा की दिशा में सक्रिय होना चाहिए। राष्ट्रीय नागरिकता की अवधारणा यह मानती है कि हमारी राज्यसत्ता हमें वह सुरक्षा और अधिकार दे सकती है जिनकी हमें आज विश्व में गरिमा के साथ जीने के लिए आवश्यकता है। लेकिन राजसत्ताओं के समक्ष आज अनेक ऐसी समस्याएँ हैं, जिनका मुकाबला वे अपने बल पर नहीं कर सकतीं।

विश्व नागरिकता की अवधारणा के आकर्षणों में से एक यह है कि इससे राष्ट्रीय सीमाओं के दोनों ओर की उन समस्याओं का समाधान करना आसान हो सकता है जिसमें कई देशों की सरकारों और लोगों की संयुक्त कार्यवाही आवश्यक होती है। उदाहरण के लिए, इससे प्रवासी और राज्यहीन लोगों की समस्या का सर्वमान्य समाधान पाना आसान हो सकता है या कम-से-कम उनके बुनियादी अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है चाहे वे जिस किसी देश में रहते हों।

हम अध्ययन कर चुके हैं कि एक देश के भीतर की समान नागरिकता को सामाजिक-आर्थिक असमानता या अन्य समस्याओं से खतरा हो सकता है। इन समस्याओं का समाधान अन्ततः सम्बन्धित समाज की सरकार और जनता ही कर सकती है। इसलिए लोगों के लिए आज एक राज्य की पूर्ण और समान सदस्यता महत्त्वपूर्ण है। लेकिन विश्व नागरिकता की अवधारणा हमें याद दिलाती है कि राष्ट्रीय नागरिकता को समझदारी से जोड़ने की आवश्यकता है कि हम आज अन्तर्समबद्ध विश्व में रहते हैं। और हमारे लिए यह भी आवश्यक है कि हम विश्व के विभिन्न हिस्सों के लोगों के साथ अपने सम्बन्ध सुदृढ़ करें और राष्ट्रीय सीमाओं के पार के लोगों और सरकारों के साथ काम करने के लिए तैयार हों।

प्रश्न 4.
आदर्श नागरिक के गुणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर-
आदर्श नागरिक के गुण
महान् दार्शनिक अरस्तू का मत है कि “श्रेष्ठ नागरिक ही श्रेष्ठ राज्य का निर्माण कर सकते हैं, इसलिए राज्य के नागरिक आदर्श होने चाहिए।” आज का युग प्रजातन्त्र का युग है, जिसमें शासन का दायित्व वहाँ के नागरिकों पर होता है। अत: आदर्श नागरिकता ही राज्य के विकास का आधार है। एक आदर्श नागरिक में अग्रलिखित गुणों का होना आवश्यक है-

  1. उत्तम स्वास्थ्य- आदर्श नागरिक में उत्तम स्वास्थ्य का होना अनिवार्य है। अस्वस्थ व्यक्ति समाज पर भार स्वरूप होता है। वह न तो अपने व्यक्तिगत कर्तव्यों और न ही समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन कर सकता है।
  2. सच्चरित्रता- मनुष्य के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सच्चरित्रता का बहुत अधिक महत्त्व है। चरित्रवान् व्यक्ति ही आदर्श नागरिक बन सकता है, क्योंकि चरित्र द्वारा ही व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का सर्वोत्तम विकास कर सकता है।
  3. शिक्षा- शिक्षा आदर्श नागरिक जीवन की नींव है। गांधी जी ने कहा था कि “शिक्षा, जो आत्मा का भोजन है, स्वस्थ नागरिकता की प्रथम शर्त है। शिक्षा ही अज्ञान के अन्धकार का विनाश कर ज्ञान का प्रकाश करती है। अशिक्षित नागरिक कभी भी आदर्श नागरिक नहीं बन सकता।
  4. विवेक और आत्म-संयम- लॉर्ड ब्राइस के अनुसार, “विवेक आदर्श नागरिक का पहला गुण है।’ विवेक के आधार पर नागरिक अच्छे-बुरे का ज्ञान प्राप्त करता है तथा अपने कर्तव्यों और अधिकारों को भली प्रकारे समझ सकता है। आदर्श नागरिक का दूसरा गुण आत्म-संयम है, अर्थात् नागरिक में अपने हितों का परित्याग कर देने की स्थिति में आत्म-संयम की भावना होनी चाहिए।
  5. परिश्रमशीलता- परिश्रमशीलता वैयक्तिक विकास और सामाजिक प्रगति की आधारशिला है। इससे व्यक्ति में स्वावलम्बन की भावना उत्पन्न होती है। परिश्रमी व्यक्ति ही आदर्श नागरिक बनकर अपना, समाज का और देश का कल्याण कर सकता है।
  6. कर्तव्यपरायणता- श्रेष्ठ सामाजिक जीवन के लिए कर्तव्यपरायणता की भावना बहुत महत्त्वपूर्ण है। कर्तव्यपरायणता आदर्श नागरिक जीवन की कुंजी है।
  7. परोपकारिता- आदर्श नागरिक में परोपकार की भावना होनी आवश्यक है। समाज के असहाय, दीन-दुःखियों तथा अपाहिजों पर उपकार करना प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है।
  8. सहानुभूति और दया- सहानुभूति और दया की भावना भी आदर्श नागरिक के अनिवार्य गुण | हैं। ये ही व्यक्ति को दूसरों की सहायता करने के लिए प्रेरित करते हैं।
  9. मितव्ययिता- आवश्यक व्यय करना आदर्श नागरिक का एक महान् गुण होता है। जो व्यक्ति फिजूलखर्जी करता है, उसे अपने जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अनावश्यक खर्च करने वाला व्यक्ति स्वयं तो कष्ट उठाता ही है, साथ ही परिवार, समाज व राष्ट्र को भी हानि पहुँचाता है; अतः आदर्श नागरिक में मितव्ययिता का गुण होना आवश्यक है।
  10. आज्ञापालन तथा अनुशासन- एक आदर्श नागरिक में आज्ञापालन और अनुशासन की भावना | होनी अनिवार्य है, तभी वह राज्य द्वारा बनाये गये कानूनों का निष्ठापूर्वक पालन कर सकेगा। और दूसरों को भी ऐसा करने की प्रेरणा दे सकेगा।
  11. जागरूकता- आदर्श नागरिक के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने अधिकारों के कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहे। आदर्श नागरिक को अपने परिवार, ग्राम, प्रान्त तथा राष्ट्र के हितों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और उनके प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
  12. प्रगतिशीलता- आधुनिक युग लोकतन्त्र का युग है; अत: यह आवश्यक है कि आदर्श नागरिक रूढ़ियों एवं कुरीतियों की उपेक्षा कर प्रगतिशील विचारों के अनुकूल आचरण करे।
  13. नि:स्वार्थता- आदर्श नागरिक को स्वार्थपरता से दूर रहना चाहिए तथा उसका अन्त:करण जन-कल्याण के उच्च आदर्शों से प्रेरित होना चाहिए।
  14. मताधिकार का उचित प्रयोग- आधुनिक प्रजातान्त्रिक युग में सभी वयस्क स्त्री-पुरुषों को मताधिकार प्राप्त है। इस अधिकार का उचित प्रयोग निष्पक्षता के साथ करना प्रत्येक आदर्श नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। इस अधिकार के अनुचित प्रयोग से शासन में भ्रष्टाचार फैल सकता है और शासन-सत्ता अयोग्य व्यक्तियों के हाथ में पहुँच सकती है।
  15. देशभक्ति- आदर्श नागरिक का सर्वोच्च गुण देशभक्ति है। प्रत्येक आदर्श नागरिक में देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी होनी चाहिए। संकट के समय देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर नागरिक अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए तत्पर हो जाता है।

निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि आदर्श नागरिक में उपर्युक्त गुणों का होना आवश्यक है, क्योंकि आदर्श नागरिक ही समाज और देश को उन्नति के चरम शिखर पर पहुंचा सकते हैं।

प्रश्न 5.
भारतीय नागरिकता पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।
या भारतीय नागरिकता अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारतीय नागरिकता
स्वाधीनता प्राप्ति से पूर्व भारत के नागरिक ब्रिटिश साम्राज्य के नागरिक कहलाते थे। लेकिन उन्हें वे सब अधिकार प्राप्त नहीं थे, जो उस समय एक अंग्रेज को प्राप्त थे। ब्रिटिश सरकार की अधीनता में भारतीयों को अनेक कठिनाइयों तथा असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। अंग्रेज अधिकारी भारतीयों के साथ बड़ा अमानुषिक व्यवहार करते थे। भारतीयों की भाषण एवं प्रेस की स्वतन्त्रता पर भी अनेक प्रतिबन्ध लगे हुए थे। लेकिन 15 अगस्त, 1947 ई० के बाद भारतीयों को नागरिकता सम्बन्धी वे सभी अधिकार मिल गए जिनके माध्यम से वे देश के शासन प्रबन्ध में निर्णायक भूमिका निभाने लगे।

इकहरी नागरिकता
विश्व के सभी संघीय संविधानों में नागरिकों को दोहरी नागरिकता प्राप्त होती है-एक संघ सरकार की नागरिकता और दूसरी उस इकाई या राज्य (प्रान्त) की नागरिकता, जिसमें वह निवास करता है। लेकिन स्वतन्त्र भारत का संविधान संघात्मक होते हुए भी भारतीयों को इकहरी नागरिकता प्रदान करता है। इसका आशय यह है कि प्रत्येक भारतीय केवल भारत संघ का नागरिक, उस राज्य का नहीं जिसमें वह निवास करता है। भारतीय संविधान ने देश की अखण्डता को कायम रखने के लिए इकहरी नागरिकता की व्यवस्था को अपनाया है।

भारत का नागरिक होने का हकदार
भारतीय संविधान-निर्माताओं ने यह निश्चित नहीं किया था कि भविष्य में भारतीय नागरिकता किस प्रकार प्राप्त की जा सकती है तथा उसका लोप किस प्रकार सम्भव है। भारतीय संविधान में केवल यह वर्णित है कि 27 जनवरी, 1950 ई० को भारत के नागरिक कौन हैं। नागरिकता की प्राप्ति तथा उसके निर्णय और लुप्त होने के सम्बन्ध में संविधान ने भारतीय संसद को पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिए हैं। इस प्रकार संविधान ने नागरिकता सम्बन्धी नियमों के निर्माण का एकाधिकार भारतीय संसद को सौंप दिया है।
भारतीय संविधान के लागू होने के समय नागरिकता सम्बन्धी सिद्धान्त निम्नवत् निर्धारित किए गए थे

  1. जन्म- भारत राज्य क्षेत्र में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भारत संघ की नागरिकता प्राप्त होगी।
  2. वंश- वे सभी व्यक्ति भारत संघ के नागरिक माने जाएँगे, जिनके माता-पिता में से किसी एक ने भारत राज्य क्षेत्र में जन्म लिया है।
  3. निवास- वे सभी व्यक्ति भारत संघ के नागरिक होंगे, जो संविधान लागू होने के पाँच वर्ष पूर्व से भारत राज्य क्षेत्र के सामान्य निवासी थे।
  4. शरणार्थी- पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्तियों में से वे व्यक्ति भारत संघ के नागरिक माने जाएँगे-(अ) जो 19 जुलाई, 1948 ई० से पूर्व भारत चले आए थे और जिनके माता या पिता का जन्म अविभाजित भारत में हुआ था। (ब) जो 19 जुलाई, 1948 ई० के बाद भारत
    आए हों और तत्कालीन भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कर लिए गए हों।
  5. भारतीय विदेशी- भारत के संविधान में ऐसे भारतीयों को भी नागरिकों की श्रेणी में पंजीकृत करने का उल्लेख है जो भारत राज्य क्षेत्र के बाहर किसी अन्य देश में निवास करते हों। उनके लिए निम्नलिखित दो शर्ते हैं-(अ) वे या उनके माता-पिता अथवा पितामह-पितामही में से कोई एक अविभाजित भारत में जन्में हों। (ब) उन्होंने अमुक देश में रहने वाले भारतीय राजदूत के पास भारत संघ का नागरिक बनने के लिए आवेदन-पत्र दे दिया हो और उन्हें भारतीय नागरिक पंजीकृत कर दिया गया हो।

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955
भारतीय संसद ने सन् 1955 में भारतीय नागरिकता अधिनियम पारित किया। इस अधिनियम में भारतीय नागरिकता की प्राप्ति और उसके विलोपन के प्रकार को बताया गया है। इस अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित हैं–

भारतीय नागरिकता की प्राप्ति

  1. जन्म- उने सभी व्यक्तियों को भारत संघ की नागरिकता प्राप्त होगी, जिनका जन्म 26 जनवरी, 1950 ई० के बाद भारत राज्य क्षेत्र के किसी भी भाग में हुआ हो।
  2. पाकिस्तान से आगमन या प्रव्रजन- उन सभी व्यक्तियों को, जो 26 जुलाई, 1949 ई० के बाद भारते आए हों, भारत संघ की नागरिकता प्राप्त हो जाएगी, बशर्ते वे भारतीय नागरिकों के रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करा लें और कम-से-कम एक वर्ष से भारत में अवश्य निवास | करते हों।
  3. पंजीकरण- विदेशों में निवास करने वाले भारतीय भारत सरकार के दूतावास में अपना नाम |पंजीकृत कराकर भारतीय संघ की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
  4. विवाह- उन सभी विदेशी स्त्रियों को, जिन्होंने भारतीयों से विवाह किया है, भारत संघ की नागरिकता प्राप्त हो जाएगी।
  5. आवेदन-पत्र- कोई भी विदेशी व्यक्ति आवेदन-पत्र देकर भारत संघ का नागरिक बन सकता है, लेकिन शर्त यह है कि वह अच्छे आचरण का हो, संविधान में वर्णित किसी एक भाषा का ज्ञाता हो, भारत में स्थायी रूप से निवास करने की इच्छा रखता हो और कम-से-कम एक वर्ष | से भारत में लगातार रह रहा हो।
  6. निवास अथवा नौकरी- राष्ट्रमण्डल के सदस्य देशों के वे नागरिक जो भारत में रहते हों या भारत में नौकरी करते हों, तो वे प्रार्थना-पत्र देकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकेंगे।
  7. भूमि विस्तार- यदि किसी नए प्रदेश को भारत में मिला लिया जाता है, तो वहाँ के निवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो जाएगी।

भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1986 तथा 1992
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों की सरलता का लाभ उठाकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब और असम जैसे राज्यों में लाखों विदेशियों ने अनधिकृत रूप से भारत में प्रवेश कर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर ली। अतः केन्द्र सरकार ने भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1986 पारित करके नागरिकता सम्बन्धी प्रावधानों को कठोर बना दिया।

सन 1986 के संशोधन अधिनियम के अनुसार कोई भी विदेशी जब तक कम-से-कम 10 वर्ष तक भारत ‘राज्य-क्षेत्र का निवासी नहीं रहा होगा, भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं कर सकेगा। भारतीय नागरिकता सम्बन्धी प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर तथा असम राज्यों पर भी लागू किया गया। इस संशोधन अधिनियम में यह शर्त भी जोड़ दी गई है कि भारत में जन्म लेने वाले व्यक्ति को भारतीय नागरिकता तभी प्राप्त होगी, जबकि उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक होगा।

सन् 1992 में भारतीय संसद ने नागरिकता से सम्बन्धित दूसरा संशोधन अधिनियम पारित होगा। इस संशोधन अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि विदेश में निवास कर रहे किसी भारतीय दम्पती के यदि कोई सन्तान उत्पन्न होती है, तो वह भारतीय नागरिक मानी जाएगी, बशर्ते कि दम्पती में से किस एक (पति या पत्नी) ने पहले से ही भारतीय नागरिकता प्राप्त कर रखी हो। इससे पूर्व केवल पति का ही भारतीय नागरिक होना अनिवार्य था।

प्रश्न 6.
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं का वर्णन कीजिए तथा उन्हें दूर करने के सुझाव दीजिए।
या
आदर्श नागरिकता प्राप्त करने के मार्ग में कौन-कौन-सी बाधाएँ हैं? विवेचना कीजिए।
या
आदर्श नागरिकता के मार्ग की बाधाओं के निवारण के उपायों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाएँ 
कोई भी नागरिक जन्म से ही एक आदर्श नागरिक के गुणों को लेकर पैदा नहीं होता, अपितु वह बड़ा होकर अपने जीवन में इन गुणों को विकसित करता है। परिवार, समुदाय, समाज और राज्य उसके लिए उन सुविधाओं को जुटाते हैं जिनसे वह एक आदर्श नागरिक बन सकता है। किन्तु कभी-कभी आदर्श नागरिक बनने के मार्ग में अनेक बाधाएँ उपस्थित हो जाती हैं, जिसके फलस्वरूप वह आदर्श नागरिक के गुणों से वंचित रह जाता है। ये बाधाएँ अग्रलिखित हैं

1. अशिक्षा और अज्ञानता- अशिक्षा ही अज्ञानता की जड़ है। अज्ञानी व्यक्ति में उचित और अनुचित का अन्तर कर पाने का विवेक नहीं होता। अशिक्षित व्यक्ति न तो अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और न ही राष्ट्र की सेवा। अतः अशिक्षा व अज्ञानता व्यक्ति के आदर्श
नागरिक बनने के मार्ग में बाधा उत्पन्न करते हैं।

2. व्यक्तिगत स्वार्थ- यह आदर्श नागरिक के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। स्वार्थी व्यक्ति अपने | स्वार्थ को सर्वोपरि मानता है और अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए समाज तथा राष्ट्र के हितों का भी बलिदान कर देता है। वह केवल अपने विषय में सोचता, कार्य करता और जीवित रहता है तथा किसी भी तरह अपने स्वार्थों की पूर्ति कर लेना ही सब कुछ मान लेता है; उदाहरणार्थ-व्यापारी के रूप में कालाबाजारी, सरकारी अधिकारी के रूप में रिश्वतखोरी
आदि। निजी स्वार्थों की प्रबलता ही कुछ मुद्राओं के लिए राष्ट्रीय हितों का सौदा कर लेती है।

3. निर्धनता अथवा आर्थिक विषमता- आदर्श नागरिकता के मार्ग में आर्थिक बाधाएँ प्रबल होती हैं। आर्थिक बाधाओं में दरिद्रता, बेरोजगारी तथा आर्थिक विषमता मुख्य हैं। भूखे व्यक्ति की नैतिकता और ईमान केवल रोटी बन जाती है। गम्भीर आर्थिक विषमताएँ उनमें वर्ग-संघर्ष की भावना उत्पन्न करती हैं, जिससे व्यक्ति अपने वर्ग के हित के लिए समाज के हित को अनदेखा कर देता है।

4. अकर्मण्यता- अकर्मण्यता अथवा आलस्य व्यक्ति को कार्य करने के प्रति उदासीन बना देता है। ऐसा व्यक्ति किसी प्रकार के कार्य करने में रुचि नहीं लेता और अपने कर्तव्य-पालन से दूर रहना चाहता है। इस प्रकारे अकर्मण्यता आदर्श नागरिकता की उपलब्धि में महान् दुर्गुण है।

5. साम्प्रदायिकता एवं जातीयता- अनेक बार व्यक्ति अपने सम्प्रदाय अथवा जातिगत स्वार्थों के वशीभूत होकर समाज और राज्य के हितों की भी अवहेलना करने लगता है। इसी भावना के कारण देश के अनेक भागों में भीषण रक्तपात तथा आत्मदाह जैसी घटनाएँ घटित हुई हैं। इस प्रकार की संकुचित भावनाएँ मनुष्य को आदर्श नागरिक नहीं बनने देतीं।

6. अनुचित दलबन्दी- आधुनिक प्रजातन्त्र का आधार दलीय व्यवस्था है। स्वस्थ दलीय परम्परा प्रजातन्त्रीय शासन की सफलता में सहायक होती है तथा जनसाधारण में राजनीतिक चेतना उत्पन्न करती है; किन्तु अनुचित दलबन्दी सारे वातावरण को विषाक्त कर देती है। यहाँ तक कि विभिन्न राजनीतिक दल अपने लाभ के लिए जातीय और साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काकर दंगे भी कराते हैं। ऐसे दूषित वातावरण में आदर्श नागरिकता की कल्पना भी असम्भव है।

7. सामाजिक कुप्रथाएँ और रूढ़िवादिता- कुछ सामाजिक कुप्रथाएँ भी आदर्श नागरिकता के मार्ग | में बाधा बन जाती हैं। भारतीय समाज में छुआछूत, जाति-पाँति का भेद, बाल-विवाह, दहेज-प्रथा, सती- प्रथा, विधवा-विवाह आदि ऐसी ही सामाजिक कुप्रथाएँ हैं।

8. उग्र-राष्ट्रीयता और साम्राज्यवाद- उग्र-राष्ट्रीयता के कारण नागरिक अपने राष्ट्र को ऊँचा समझते हैं तथा दूसरे राष्ट्रों से घृणा करते हैं। वे अपने राष्ट्र के क्षुद्र स्वार्थ के लिए पड़ोसी राष्ट्रों में साम्प्रदायिक वैमनस्य और आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। इसके अतिरिक्त साम्राज्यवादी प्रवृत्ति भी आदर्श नागरिक जीवन की प्रबल शत्रु है। साम्राज्यवादी देश छोटे राज्यों को पराधीन कर लेते । हैं, जिसके कारण युद्ध होते हैं; उदाहरणार्थ-इराक की साम्राज्यवादी कार्यवाही के कारण इराक व बहुराष्ट्रीय सेनाओं में हुआ भीषण युद्ध।

आदर्श नागरिकता की बाधाओं को दूर करने के उपाय

आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाओं को निम्नलिखित उपायों द्वारा समाप्त किया जा सकता है

1. उचित शिक्षा को प्रसार- शिक्षा के प्रसार से व्यक्ति की बौद्धिक और सांस्कृतिक उन्नति होती है, अज्ञानता समाप्त होती है और उसमें विवेक जाग्रत होता है। शिक्षित व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहता है। इसलिए शिक्षा के अधिकाधिक विकास से अज्ञानता को ।
दूर करके व्यक्ति को आदर्श नागरिक बनने में सहायता की जा सकती है।

2. निर्धनता का विनाश- ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे सभी व्यक्ति अपने भोजन, वस्त्र, निवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें। ऐसा होने पर ही | वे अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का सम्पादन कर सकते हैं। अतः आर्थिक विषमताओं का अन्त । | करके अधिकाधिके रूप में आर्थिक समानता स्थापित की जानी चाहिए।

3. नैतिकता का उत्थान- नागरिकों को उत्तम चरित्र ही राष्ट्र की अमूल्य निधि है। जिस देश के नागरिकों में नैतिक मूल्यों का समावेश होगा, उस देश का सर्वांगीण विकास होगा। व्यक्ति को निजी स्वार्थों का त्याग करके जनहित को सर्वोपरि मानना चाहिए।

4. समाज- सुधार और रूढ़िवादिता का अन्त-समाज में प्रचलित कुप्रथाओं को सरकार द्वारा . समाज-सुधारकों की सहायता से समाप्त किया जाना चाहिए। ऐसा करने पर ही आदर्श नागरिकता का विकास सम्भव है।

5. स्वतन्त्र और शक्तिशाली प्रेस- आदर्श नागरिकता के विकास के लिए स्वतन्त्र और शक्तिशाली प्रेस का होना बहुत आवश्यक है। विभिन्न घटनाओं और गतिविधियों की सही जानकारी नागरिकों को स्वतन्त्र रूप से विचार करने के लिए प्रेरित करती है, किन्तु ऐसा तभी सम्भव है जब प्रेस सरकारी नियन्त्रण से मुक्त हो।

6. स्वस्थ राजनीतिक दलों की स्थापना- देश में राजनीतिक दलों को संगठन विशुद्ध राजनीतिक व आर्थिक आधार पर किया जाना चाहिए। ऐसा होने पर राजनीतिक दल समाज व राष्ट्र के हितों को दृष्टि में रखकर काम करेंगे। ऐसे राजनीतिक दल ही नागरिकों को प्रत्येक विषय पर सार्वजनिक हित की दृष्टि से सोचने की दिशा में अग्रसर करेंगे।

7. विश्व-बन्धुत्व की भावना उग्र- राष्ट्रीयता तथा साम्राज्यवाद के दोषों से बचने के लिए विश्व बन्धुत्व की भावना को अपनाना अत्यन्त आवश्यक है। ‘जीओ और जीने दो’ तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ आदर्श नागरिकता के महान् सन्देश हैं, जो परस्पर सहयोग और सह-अस्तित्व की धारणा पर अवलम्बित हैं। इस भावना को अपनाकर एक आदर्श नागरिक अपने देश के विकास के लिए इस प्रकार कार्य करता है कि वह अन्य देशों की प्रगति में बाधक न हो।

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