UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 3 An Empire Across Three Continents

UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 3 An Empire Across Three Continents (तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य)

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
संक्षेप में उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
यदि आप रोम साम्राज्य में रहे होते तो कहाँ रहना पसन्द करते-नगरों में या ग्रामीण क्षेत्रों में? कारण बताइए।
उत्तर :
यदि मैं रोम साम्राज्य में निवास कर रहा होता तो नगरीय क्षेत्र में ही रहना पसन्द करता, क्योंकि
(i) राम साम्राज्य नगरों का साम्राज्य था। ऐसे में वहाँ गाँवों का बहुत कम महत्त्व था।
(ii) रोम साम्राज्य में नगरों का शासन स्वतन्त्र होता था। इससे व्यक्तित्व के विकास में सहायता मिलती।
(iii) सबसे बड़ा लाभ यह होता कि वहाँ खाद्य पदार्थों की कमी नहीं होती और अकाल के दिनों में भी भोजन प्राप्त हो सकता था।
(iv) नगरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अन्य सुविधाएँ अधिक और अच्छी थीं।

प्रश्न 2.
इस अध्याय में उल्लिखित कुछ छोटे शहरों, बड़े नगरों, समुद्रों और प्रान्तों की सूची बनाइए और उन्हें नक्शों पर खोजने की कोशिश कीजिए। क्या आप अपने द्वारा बनाई गईसूची में संकलित किन्हीं  3  विषयों के बारे में कुछ कह सकते हैं?
उत्तर :
शहरों की सूची :
गॉल, मकदूनिया, रोम, इफेसस, हिसपेनिया, बेटिका, तांजियर मोरक्को, दमस्कस, अलेक्जेण्ड्रिया, कार्थेज, कुस्तुनतुनिया, फिलिस्तीन, मदीना, मक्का, बगदाद, समरकन्द, बुखारा, अफगानिस्तान, सीरिया।
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इस प्रकार छात्र अध्यापक की सहायता से समुद्रों, पत्तनों, प्रांतों की और सूची बना सकते हैं। आपकी सहायता के लिए उपयुक्त नक्शे प्रस्तुत किए गए हैं।

प्रश्न 3.
कल्पना कीजिए कि आप रोम की एक गृहिणी हैं जो घर की जरूरत की वस्तुओं की खरीदारी की सूची बना रही हैं? अपनी सूची में आप कौन-सी वस्तुएँ शामिल करेंगी?
उत्तर :
यदि मैं रोम की गृहिणी होती तो अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निम्नलिखित वस्तुएँ मॅगाती

  1.  रोटी और मक्खन
  2.  सब्जियाँ
  3.  दूध
  4. अण्डे तथा मांस
  5. चीनी
  6.  तेल
  7. बच्चों के लिए आवश्यक वस्तुएँ
  8. सौन्दर्य प्रसाधन
  9. कपड़े धोने तथा नहाने का साबुन
  10. कपड़े, दवाइयाँ आदि

प्रश्न 4.
आपको क्या लगता है कि रोमन सरकार ने चाँदी में मुद्रा को ढालना क्यों बन्द किया होगा और वह सिक्कों के उत्पादन के लिए कौन-सी धातु का उपयोग करने लगे?
उत्तर :
रोमन सरकार द्वारा चाँदी में मुद्रा ढालना इस धातु की कमी तथा मूल्यवान होने के कारण बन्द किया होगा। तत्कालीन शासन में स्पेन में चाँदी की खाने समाप्त हो गई थीं तथा सरकार के पास.चाँदी के भण्डार रिक्त हो गए थे। कॉन्स्टेनटाइन ने सोने पर आधारित नई मौद्रिक प्रणाली स्थापित की और परवर्ती सम्पूर्ण पुराकाल में सोने की मुद्राओं का भारी मात्रा में प्रचलन रहा। वस्तुत: रोम में सोने के कई भण्डार थे। ।

संक्षेप में निबन्ध लिखिए

प्रश्न 5.
अगर सम्राट त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने में वास्तव में सफल रहे होते और रोमवासियों का इस देश पर अनेक सदियों तक कब्जा रहा होता तो क्या आप सोचते हैं कि भारत वर्तमान समय के देश से किस प्रकार भिन्न होता?
उत्तर :
त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने के लिए निकला था किन्तु सफल नहीं हो सका। यदि वह सफल हो जाता और रोमवासियों का अनेक सदियों तक कब्जा होता तो ऐसा भारत वर्तमान भारत से बिल्कुल अलग होता। वह भारत वैसा होता जैसा ब्रिटिश शासनकाल में था। रोम के निवासी एक गुलाम देश के समान व्यवहार करते और भारत के संसाधनों का दोहन करते। भारतीयों को किसी प्रकार का अधिकार प्रदान नहीं किया जाता उन्हें अपमानजनक दशाओं में जीवन व्यतीत करना पड़ता। उल्लेखनीय है कि उस काल में सोना रोम से भारत आता था और भारत सम्पन्न देश था। रोमवासियों की अधीनता स्वीकार हो जाने पर यह सम्भव नहीं होता। भारत के सभी क्षेत्रों में विकास रुक जाता।

प्रश्न 6.
अध्याय को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसमें से रोमन समाज और अर्थव्यवस्था को आपकी दृष्टि में आधुनिक दर्शाने वाले आधारभूत अभिलक्षण चुनिए।
उत्तर :
रोमन समाज और अर्थव्यवस्था में दिखने वाले आधारभूत अभिलक्षण निम्नलिखित हैं

  1. रोमन समाज में नाभिकीय परिवारों (Nuclear Family) का चलन था। वयस्क पुत्र परिवारों के साथ नहीं रहते थे।
  2. पत्नी अपनी सम्पत्ति को अपने पति को हस्तांतरित नहीं करती थी, वह अपने पैतृक परिवार की सम्पत्ति में अपने पूरे अधिकार बनाए रखती थी। अपने पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती थी और पिता की मृत्यु होने पर उस सम्पत्ति की स्वतंत्र मालिक बन जाती थी।
  3. रोम में साक्षरता थी। सभी नगरों में साक्षरता की दर भिन्न-भिन्न थी।
  4.  जैतून के तेल का निर्यात किया जाता था।
  5. रोम में व्यापार एवं वाणिज्य उन्नति पर था। बैंकिंग व्यवस्था भी प्रचलित थी।
  6. रोम के विविध प्रांतों में जलशक्ति से कारखाने चलाए जाते थे।
  7.  सोने-चाँदी की खदानों में भी जलशक्ति का उपयोग किया जाता था।

परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य कौन-सा था?
(क) रोम साम्राज्य
(ख) ब्रिटिश साम्राज्य
(ग) भारतीय साम्राज्य
(घ) रूसी साम्राज्य
उत्तर :
(क) रोम साम्राज्य

प्रश्न 2.
रोम साम्राज्य की प्रमुख भाषा थी
(क) लैटिन
(ख) अंग्रेजी
(ग) स्पेनिश
(घ) रूसी
उत्तर-
(क) लैटिन

प्रश्न 3.
ऑगस्टस का एक अन्य नाम क्या था?
(क) जूलियस सीजर
(ख) ब्रूटस
(ग) ऑक्टेवियन
(घ) एलन
उत्तर :
(ग) ऑक्टेवियन

प्रश्न 4.
कॉन्स्टेनटाइन ने अपनी दूसरी राजधानी कहाँ बनाई?
(क) कुस्तुनतुनिया में
(ख) वेनिस में
(ग) इटली में
(घ) गैलीनस में
उत्तर :
(क) कुस्तुनतुनिया में

प्रश्न 5.
हिप्पो शहर के प्रमुख बिशप कौन थे?
(क) मार्टिन लूथर
(ख) सेंट ऑगस्टाइन
(ग) कोलूमेल्ला
(घ) कॉन्स्टेनटाइन
उत्तर :
(ख) सेंट ऑगस्टाइन

प्रश्न 6.
ऑगस्टस कब शासक बना था?
(क) 27 ई० पू० में
(ख) 26 ई० पू० में
(ग) 507 ई० पू० में
(घ) 230 ई० पू० में
उत्तर :
(क) 27 ई० पू० में

प्रश्न 7.
पैपाइरस पत्र को प्रयोग किस रूप में किया जाता था?
(क) ईंधन के रूप में
(ख) कागज के रूप में
(ग) औषधि के रूप में
(घ) कलम के रूप में
उत्तर :
(ख) कागज के रूप में

प्रश्न 8.
टॉलमी किस विषय का ज्ञाता था?
(क) खगोल व भूगोल
(ख) गणित
(ग) भाषा
(घ) आयुर्वेद
उत्तर :
(क) खगोल व भूगोल

प्रश्न 9.
सॉलिड्स सिक्का किसने चलाया था?
(क) कॉन्स्टेनटाइन
(ख) प्लिनी
(ग) कोलुमेल्ला
(घ) बिलकिस
उत्तर :
(क)कॉन्स्टेनटाइन्

प्रश्न 10.
ऑगस्टस के साम्राज्य को कहते थे
(क) प्रिन्सिपेट
(ख) गणतन्त्र
(ग) यूनियन
(घ) संघ
उत्तर :
(क) प्रिन्सिपेट

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रोमन साम्राज्य को कब और क्यों दो भागों में बाँटा गया ?
उत्तर :
350-400 ई० पू० में शासन को बेहतर ढंग से चलाने के लिए रोमन साम्राज्य को पूर्वी तथा , पश्चिमी दो भागों में बाँट दिया गया।

प्रश्न 2.
वर्ष वृत्तान्त से क्या आशय है?
उत्तर :
समकालीन इतिहासकारों द्वारा लिखा गया इतिहास वर्ष वृत्तान्त कहलाता है। ये वृत्तान्त वार्षिक आधार पर प्रतिवर्ष लिखे जाते थे।

प्रश्न 3.
रोम में गणतंत्र दिवस कब तक चला?
उत्तर :
रोम में गणतंत्र दिवस 509 ई० पू० से 27 ई० पू० तक चला।

प्रश्न 4.
ऑगस्टस का शासनकाल क्यों याद किया जाता है?
उत्तर :
ऑगस्टस का शासनकाल शान्ति के लिए याद किया जाता है।

प्रश्न 5.
एम्फोरा क्या थे?
उत्तर :
एम्फोरा ढुलाई के ऐसे मटके अथवा कन्टेनर्स थे जिनमें शराब, जैतून का तेल और दूसरे तरल पदार्थ लाए व ले जाए जाते थे।

प्रश्न 6.
बहुदेववाद का क्या अर्थ है?
उत्तर :
बहुदेववाद का अर्थ है अनेक देवी-देवताओं की पूजा-उपासना करना

प्रश्न 7.
सीनेट क्या है?
उत्तर :
सीनेट धनी कुलीन वर्ग का समूह था जो शासन चलाता था।

प्रश्न 8.
रोम के तीन बड़े शहरी केंद्रों के नाम बताइए।
उत्तर :
(i) कॉर्थेज
(ii) सिकंदरिया
(iii) एंटिऑक

प्रश्न 9.
रोम के शहरी जीवन की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :

  1.  प्रत्येक शहर में सार्वजनिक स्नानगृह होता था।
  2.  लोगों को उच्च स्तर के मनोरंजन उपलब्ध थे।

प्रश्न 10.
सेंट ऑगस्टाइन कौन था?
उत्तर :
सेंट ऑगस्टाइन उत्तरी अफ्रीका के हिप्पो नामक नगर का बिशप था और चर्च के बौद्धिक इतिहास में उसका उच्चतम स्थान था।

प्रश्न 11.
रोमवासी किन-किनं देवताओं की पूजा करते थे?
उत्तर :
(i) जुपीटर
(ii) जूना
(iii) मिनर्वा
(iv) मार्स

प्रश्न 12.
पैपाइरस पत्र का प्रयोग किस कार्य में होता था?
उत्तर :
पैपाइरस पत्र का प्रयोग लेखन कार्य के लिए होता था।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चौथी सदी ईसवी के उत्तरार्द्ध में सिकंदर के सैन्य अभियानों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर :
चौथी सदी ईसवी के उत्तरार्द्ध में मेसीडोन राज्य के शासक सिकंदर ने कई सैन्य अभियान किए। सिकंदर के नियंत्रण में सभी क्षेत्रों में यूनानी संस्कृति, विचार तथा आदर्शों को सम्मिश्रण हो गया। पूरे क्षेत्र का यूनानीकरण हो गया। सिकंदर ने उत्तर अफ्रीका, पश्चिम एशिया तथा ईरान के अनेक भागों को जीत लिया। उसके इन अभियानों के फलस्वरूप ईरानी तथा मिस्त्री क्षेत्रों के साथ सिन्धु घाटी तक विस्तृत प्रांत एक हो गए।

प्रश्न 2.
पैपाइरस के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
पैपाइरस एक सरकण्डे जैसा पौधा था। यह पौधा मिस्र में नील नदी के किनारे उगता था। इस । पौधे से लेखन सामग्री तैयार की जाती थी। इसका उपयोग व्यापक रूप में किया जाता था। पैपाइरस पत्रों पर हजारों संविदाएँ, लेख, पत्र तथा सरकारी दस्तावेज लिखे हुए पाए गए हैं। इन्हें पैपाइरस विज्ञानियों द्वारा प्रकाशित किया गया है।

प्रश्न 3.
सीनेट नामक संस्था के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
रोम में सीनेट कुलीन वर्ग के लोगों का एक समूह था जिसमें धनी परिवारों के लोग शामिल थे। गणतंत्र की वास्तविक सत्ता सीनेट नामक निकाय में ही निहित थी। कुलीन वर्ग के लोग सीनेट के माध्यम से ही सरकार चलाते थे। सीनेट की सदस्यता जीवन भर चलती थी। इसके लिए जन्म के स्थान पर धन और पद प्रतिष्ठा को अधिक महत्त्व दिया जाता था। जूलियस सीजर के दत्तक पुत्र तथा उत्तराधिकारी ऑक्टेवियन ने गणतंत्र को समाप्त कर दिया।

प्रश्न 4.
रोम समाज में महिलाओं की दशा कैसी थी?
उत्तर :
रोम के समाज में महिलाओं की दशा :

  1.  रोम के समाज में महिलाओं की स्थिति सुदृढ़ थी। पत्नी अपनी सम्पत्ति अपने पति को हस्तान्तरित नहीं करती थी और पैतृक सम्पत्ति पर उसका अधिकार बना रहता था।
  2.  महिलाएँ अपने पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती थीं और अपने पिता की मृत्यु होने पर उसकी सम्पत्ति की स्वतंत्र मालिक बन जाती थीं। इस प्रकार महिलाओं को पर्याप्त अधिकार प्राप्त थे।
  3. विवाह-अनुच्छेद आसान था। पति अथवा पत्नी द्वारा विवाह भंग करने के उद्देश्य से सूचना देना पर्याप्त था।
  4. लड़के-लड़कियों के विवाह की आयु में पर्याप्त अन्तर था फिर भी महिलाएँ पुरुषों पर अधिकार रखती थीं।

प्रश्न 5.
कॉन्स्टेनटाइन के प्रमुख सुधार लिखिए।
उत्तर :
कॉन्स्टेनटाइन के प्रमुख सुधार निम्नखित थे :

  1. इसका प्रमुख सुधार मौद्रिक क्षेत्र में है। उसने ‘सॉलिड्स’ नामक एक नया सिक्का चलाया जो 4.5 ग्राम शुद्ध सोने का बना था। यह सिक्का रोम साम्राज्य के पतन के बाद भी चलता रहा।
  2. ये सॉलिड्स सिक्के बड़े पैमाने पर ढाले जाते थे और करोड़ों की संख्या में चलन में थे।
  3. कॉन्स्टेनटाइन की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि कुस्तुनतुनिया नगर का निर्माण है। यह नवीन राजधानी तीन ओर से समुद्र से घिरी हुई और सुरक्षित थी।
  4. उसके काल में तेल मिलों और शीशे के कारखानों सहित ग्रामीण उद्योग-धंधों स्क्रूप्रेसों आदि का विकास हुआ।
  5. इन सबसे उसके साम्राज्य में व्यापार की खूब उन्नति हुई।

प्रश्न 6.
“रोमवासी बहुदेववादी थे।” इस कथन को समझाइए।
उत्तर :
यूनान और रोमवासियों की पारम्परिक धार्मिक संस्कृति बहुदेववादी थी। ये लोग अनेक पन्थों एवं उपासना पद्धतियों में विश्वास रखते थे और जुपीटर, जूनो, मिनर्वा और मॉर्स जैसे अनेक रोमन इतालवी देवों और यूनानी तथा पूर्वी देवी-देवताओं की पूजा किया करते थे जिसके लिए उन्होंने साम्राज्य भर में हजारों मंदिर-मठ और देवालय बना रखे थे। ये बहुदेववादी स्वयं को किसी एक नाम से नहीं पुकारते थे।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित के विषय में आप क्या जानते हैं?

  1. जूलिसय सीजर
  2.  ऑगस्टस
  3.  मार्कस ओरिलियस

उत्तर :

  1. जूलियस सीजर (46 ई० पू० से 44 ई० पू०) : जूलियस सीजर मौलिक रूप से रोम का एक महान् सेनापति था जिसने अनेक युद्धों तथा रोमन दासों के विद्रोह को कुचलने के पश्चात् अपने प्रतिद्वंद्वी पाम्पी की मिस्र में हत्या करा दी। उसने 46 ई० पू० में एक तानाशाह के रूप में रोम की गद्दी को प्राप्त किया था।
  2. ऑगस्टस : ऑगस्टस या ऑक्टेवियन जूलियस सीजर का ही वंशज था। वह 37 ई० पू० में | रोम साम्राज्य का सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति हो गया। उसने ऑगस्टस (पवित्र) और इम्पेरेटर  (राज्य का प्रथम नागरिक) नामक पदवियाँ ग्रहण कीं और 24 वर्ष तक रोम पर शासन-किया।
  3. मार्कस ओरिलियस : ऑगस्टस के पश्चात् के शासकों में सबसे योग्य शासक मार्कस | ओरिलियस थी। उसने लगभग 20 वर्षों तक राज्य किया। वह योग्य सेनापति, कुशल प्रशासक व महान् दार्शनिक था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रोम साम्राज्य की सामाजिक संरचना के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
इतिहासकार टैसिटस ने जिन प्रारम्भिक साम्राज्य के प्रमुख सामाजिक समूहों का उल्लेख किया है; वे हैं—सीनेटर, अश्वारोही वर्ग, जनता का सम्माननीय वर्ग, निम्नतम वर्ग। तीसरी सदी के प्रारम्भिक वर्षों में सीनेटर की सदस्य संख्या लगभग 1000 थी तथा कुल सीनेटरों में लगभग आधे सीनेटर इतालवी परिवारों के थे। साम्राज्य के परवर्तीकाल में, जो चौथी सदी के प्रारम्भिक भाग में कॉन्स्टेनटाइन प्रथम के शासनकाल में आरम्भ हुआ, टैसिटस द्वारा बताए गए प्रथम दो समूह (सीनेटर और अश्वारोही) एकीकृत होकर विस्तृत कुलीन वर्ग बन गए थे। इनके कुल परिवारों में से कम-से-कम आधे परिवार अफ्रीकी अथवा पूर्वी मूल के थे। यह ‘परवर्ती रोम’ कुलीन वर्ग अत्यधिक धनी थी। मध्यम वर्गों में नौकरशाही और सेना की सेवा से जुड़े लोग थे किन्तु इनमें अपेक्षाकृत अधिक समृद्ध सौदागर और किसान भी शामिल थे जिनमें बहुत-से लोग पूर्वी प्रान्तों के निवासी थे। टैसिटस ने इस सम्माननीय मध्यम वर्ग को सीनेट गृहों के आश्रितों के रूप में उल्लेख किया है। बड़ी संख्या में निम्न वर्गों के समूह थे जिन्हें ह्युमिलिओरिस अर्थात् ‘निम्नतर वर्ग’ कहा जाता था। इनमें ग्रामीण श्रमिक बल शामिल था जिनमें बहुत से लोग स्थायी रूप से मिलों में काम करते थे।

प्रश्न 2.
विजेण्टाइन साम्राज्य के नारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
मध्य युग में रोमन सम्राट कॉन्स्टेनटाइन ने रोमन साम्राज्य के पूर्वी प्रदेशों को संगठित करके 330 ई० में पश्चिमी विजेण्टाइन साम्राज्य की स्थापना की। इस साम्राज्य की राजधानी यूनानी नगर ‘विजेण्टाइन’ थी। 476 ई० में जब रोमन साम्राज्य का पतन हो गया, तब विजेण्टाइन साम्राज्य ने पर्याप्त प्रसिद्धि प्राप्त की। अब उसकी राजधानी कॉन्स्टेनटिनोपल (कुस्तुनतुनिया) थी। इस साम्राज्य पर अनेक राजाओं ने शासन किया। फलस्वरूप कुस्तुनतुनिया संसार का सबसे अधिक वैभवशाली नगर बन गया। इस साम्राज्य के अंतर्गत व्यापार, वाणिज्य, शासन-प्रणाली, कानून आदि के क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति हुई।
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इस साम्राज्य में सामन्तवाद का विकास हुआ और समाज में ‘सर्फ प्रथा’ (Serf System) प्रर्चा हुई। इस साम्राज्य में ग्रीक ऑथ्रोडॉक्स (नास्तिक) चर्च का बहुत विकास हुआ और राजा ही धर्म अध्यक्ष बने। इस काल में अनेक भवनों, नाटकघरों, गिरजाघरों आदि का निर्माण हुआ, जिन कुस्तुनतुनिया में बना ‘सेण्ट सोफिया का गिरजाघर’ बहुत प्रसिद्ध है। सन् 1453 ई० में तुर्को : कुस्तुनतुनिया पर आक्रमण करके विजेण्टाइन साम्राज्य को नष्ट कर दिया।

प्रश्न 3.
कला, भाषा, दर्शन साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में रोम की क्या देन है?
उत्तर :
कला के क्षेत्र में देन :

  1.  रोम ने कंकरीट को प्रयोग सर्वप्रथम किया।
  2.  वे ईंट-पत्थरों को बड़ी मजबूती से जोड़ सकते थे, इस शिल्पकला को रोम ने ही विश्व को सिखाया।
  3.  डाट का प्रयोग रोम ने सम्भवतः सर्वप्रथम किया। वे मजबूत डाटों के सहारे कई मंजिले मकान बना सकते थे।
  4.  वे मजबूत व सुंदर नहरें बनाना जानते थे।
  5. उन्होंने अपने सम्राटों की मूर्तियाँ बनाकर महत्त्वपूर्ण स्थानों पर लगाई।

भाषा, दर्शन, साहित्य तथा विज्ञान के क्षेत्र में देन

भाषा : रोम के लोगों ने यूनानियों से वर्णमाला सीखकर अपनी वर्णमाला और भाषा का विकास किया। उनकी लैटिन भाषा सारे पश्चिमी यूरोप के पढ़े-लिखे लोगों की भाषा बन गई। कई आधुनिक यूरोपीय भाषाएँ; जैसे–फ्रांसीसी, स्पेनिश, इतालवी उनकी लैटिन भाषा पर आधारित हैं।

दर्शन : एषीक्यूरिन तथा स्टोक दर्शन रोम में बहुत प्रसिद्ध थे। रोम में ल्यूकीट्स, सिसरो, मार्कस, ओरीलियस आदि प्रसिद्ध दार्शनिक हुए।

साहित्य : रोम ने साहित्य के क्षेत्र में कुछ प्रसिद्ध कवि दिए। होरेश और वर्जिल उनके महानतम कवि थे।

विज्ञान : रोम के प्रसिद्ध वैज्ञानिक सेल्सस ने चिकित्साशास्त्र के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी जिसमें शल्य चिकित्सा का विस्तृत वर्णन किया गया। गैलेन नामक वैज्ञानिक ने चिकित्साशास्त्र को विशेष कोष तैयार किया। उसने रक्त संचालन का पता लगाया। खगोल तथा भूगोल के क्षेत्र में टॉलमी नामक विद्वान् नेविशेष कार्य किया। उसने तारों व ग्रहों की स्थिति का अध्ययन किया।

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्यांजलि Chapter 7 महाकवि भूषण

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Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 7
Chapter Name महाकवि भूषण
Number of Questions 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्यांजलि Chapter 7 महाकवि भूषण

कवि-परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ

प्रश्न:
कवि भूषण का जीवन-परिचय लिखिए।
या
कवि भूषण की काव्यगत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
कवि भूषण का जीवन-परिचय लिखते हुए उनकी कृतियों का नामोल्लेख कीजिए तथा साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय: कविवर भूषण का जन्म संवत् 1670 वि० (सन् 1813 ई०) में कानपुर जिले के तिकवाँपुर (त्रिविक्रमपुर) ग्राम में हुआ था। इनके पिता पं० रत्नाकर त्रिपाठी संस्कृत के महान् विद्वान् एवं ब्रजभाषा के अच्छे कवि थे। ये कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। भूषण का वास्तविक नाम क्या था? इसकी कोई जानकारी नहीं मिलती। एक दोहे से विदित होता है कि चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्रदेव ने इन्हें ‘भूषण’ की उपाधि दी थी। कदाचित् कालान्तर में ये ‘भूषण’ नाम से इतने विख्यात हुए कि इनका वास्तविक नाम ही विलुप्त हो गया। इनके जीवन का प्रारम्भिक चरण अकर्मण्यता से ग्रसित था, परन्तु भाभी के एक कटु व्यंग्य ने इनका जीवन बदल डाला। ये मर्माहत हो घर से निकल गये। कहाँ गये, कैसे रहे, इसका कुछ पता नहीं चलता, पर जब ये दस वर्षों के बाद घर लौटे तो इनमें पाण्डित्य एवं कवित्व-शक्ति का पर्याप्त विकास हो चुका था, जिसका राज्याश्रयों में उत्तरोत्तर विकास होता रहा। ये कई राजदरबारों में रहे, परन्तु इन्हें सन्तुष्टि न मिली। अन्त में मनोवांछित आश्रयदाताओं के रूप में इन्हें वीर शिवाजी व छत्रसाल मिले। इन दोनों ने भूषण को पर्याप्त सम्मान दिया। संवत् 1772 वि० (सन् 1715 ई०) के लगभग इनकी मृत्यु हो गयी।

रचनाएँ – भूषण की कीर्ति के आधारस्तम्भ इनके तीन काव्य-ग्रन्थ हैं – (1) शिवराज भूषण, (2) शिवा बावनी और (3) छत्रसाल दशक। शिवसिंह सरोज ने ‘भूषण-हजारा’ व ‘भूषण-उल्लास’ नामक दो अन्य रचनाओं को भी भूषणकृत माना है, परन्तु उनका यह मत प्रमाणपुष्ट नहीं है।

काव्यगत विशेषताएँ

भावपक्ष की विशेषताएँ

राष्ट्रीयता की भावना – भूषण के काव्य की सबसे बड़ी विशेषता उनकी राष्ट्रीयता है। यद्यपि रीतिकाल के अन्य कवियों की भाँति ये भी राज्याश्रित कवि थे और इन्होंने भी अपने आश्रयदाताओं की यशोगान किया है, तथापि इनकी मनोवृत्ति उनसे भिन्न रही है। इन्होंने वीर शिवाजी तथा छत्रसाल को हिन्दू संस्कृति के रक्षक के रूप में देखा, इसीलिए उन्हें अपने काव्य का नायक बनाकर उनकी प्रशस्ति की। भूषण की कविताओं ने उस समय सम्पूर्ण राष्ट्र को चेतना प्रदान की। इनकी रचनाओं की यही विशेषता इनको ‘राष्ट्रीय कवि’ कहने के लिए बाध्य करती है।

वीर रस की मार्मिक व्यंजना – भूषण के काव्य की दूसरी विशेषता वीर रस की अभूतपूर्व व्यंजना है। वीर रस को उद्दीप्त करने वाले सम्पूर्ण तत्त्व इनकी रचनाओं में विद्यमान हैं। अनेक पद्यों में शिवाजी की वीरता एवं उनका मुगलों पर आतंक बहुत प्रभावशाली रूप में चित्रित हुआ है; जैसे

गरुड़ को दावा जैसे नाग के समूह पर,
दावा नाग जूह पर सिंह सरताज को।

युद्ध में छत्रसाल की बरछी के कमाल द्रष्टव्य हैं

भुज भुजगेस की वै संगिनी भुजंगिनी-सी,
खेदि-खेदि खाती दीह दारुन दलन के।

भूषण ने शिवाजी एवं छत्रसाल की वीरता का वर्णन युद्ध-क्षेत्र में ही नहीं, अपितु दया, दान, धर्म आदि क्षेत्रों में भी किया है।
वीर रस के साथ रौद्र एवं भयानक रसों का वर्णन भी स्वाभाविक रूप में हुआ है। वीभत्स रस युद्ध-स्थलों पर स्वत: आ जाता है। इनकी रचनाओं में श्रृंगार रस के भी कई छन्द मिलते हैं, पर उनमें वह सौन्दर्य नहीं, जो वीर रस के पदों में है। भूषण की कविता ओज गुण की साक्षात् मूर्ति है।

कलापक्ष की विशेषताएँ

भूषण का कलापक्ष भी इतना उच्चकोटि का है कि उनके भावपक्ष और कलापक्ष में से कौन बढ़कर है, यह कह सकना कठिन है।।
भाषा – भूषण की भाषा में इतनी व्यंजकता एवं ओजस्विता है कि उसमें वीर रस को गर्जन सुनाई पड़ता है

इन्द्र जिमि जंभ पर, बाड़व सुअंभ पर,
रावण सदंभ पर रघुकुल राज है।।

भूषण के काव्य में प्रयुक्त ब्रजभाषा पूर्णतः शुद्ध ब्रजभाषा नहीं है, अपितु उसमें बुन्देलखण्डी, अवधी, अपभ्रंश, तत्कालीन अरबी और फारसी के शब्दों का भी योग है। ब्रजभाषा के अन्य कवियों की भाँति इच्छानुसार तोड़-मरोड़ एवं शब्दं गढ़ने की प्रवृत्ति भी इनमें दिखाई पड़ती है। भूषण ने लोकोक्तियों व मुहावरों के प्रयोग द्वारा भाषा एवं भाव में चमत्कार उत्पन्न किया है। , अलंकार-भूषण के काव्य में उत्प्रेक्षा, रूपक, उपमा, यमक, व्यतिरेक, व्याजस्तुति, अनुप्रास आदि अलंकारों का प्रयोग स्वाभाविक रूप में हुआ है। यमक का एक उदाहरण द्रष्टव्य है

ऊँचे घोर मंदर के अन्दर रहनवारी,
ऊँचे घोर मंदर के अन्दर रहाती हैं।

शब्दालंकारों के समावेश के चक्कर में इन्होंने शब्दों की तोड़-मरोड़ अवश्य की है, जिससे भाषा क्लिष्ट हो गयी है, परन्तु इनकी भाषा में ओज एवं प्रवाह निरन्तर बने रहे हैं; जैसे

पच्छी पर छीने ऐसे परे पर छीने वीर,
तेरी बरछी ने बर छीने हैं, खलन के।

शैली – भूषण की शैली अति प्रभावोत्पादक, चित्रमय, ओजपूर्ण, ध्वन्यात्मक एवं बहुत सशक्त है। इनकी शैली : युद्ध-वर्णन में प्रभावपूर्ण, ओजस्विनी तथा दानवीरता और धार्मिकता के चित्रण में प्रसादयुक्त है।

साहित्य में स्थान – भूषण की कविता भावपक्ष एवं कलापक्ष दोनों ही दृष्टियों से श्रेष्ठ है तथा हिन्दी के वीर रसात्मक काव्य में अद्वितीय स्थान की अधिकारिणी है।

पद्यांशों पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-दिए गए पद्यांशों को पढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

शिवा-शौर्य

प्रश्न 1:
साजि चतुरंग सैन अंग मैं उमंग धारि,
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं ।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के,
नदी नद मद गैबरन के रलते हैं ।।
ऐलफैल खेलभैल खलक में गैलगैल,
गजन की वैल पैल सैल उसलत हैं ।।
तारा सो तरनि धूरि धारा में लगत जिमि,
थारा पर पारा पारावार यों हलत हैं ।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) “सरजा’ की उपाधि से कौन सुशोभित थे?
(iv) शिवाजी की सेना कहाँ के लिए प्रयाण करती है?
(v) सूर्य तारे के समान क्यों दिखायी देने लगता है?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद महाकवि भूषण द्वारा रचित ‘भूषण ग्रन्थावली’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘शिवा-शौर्य’ शीर्षक काव्यांश से उदधृत है।
अथवा निम्नवत् लिखिए-
शीर्षक का नाम – शिवा-शौर्य।
कवि का नाम – महाकवि भूषण।
[संकेत-इस शीर्षक के शेष सभी पद्यांशों के लिए प्रश्न (i) का यही उत्तर लिखना है।]

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – भूषण कवि कहते हैं कि शिवाजी की सेना के युद्ध के लिए प्रस्थान करते समय बहुत अधिक धूल उड़ रही थी। उड़ती हुई धूल इतनी अधिक थी कि इस धूल में सूर्य एक तारे के समान प्रतीत हो रहा था। शिवाजी की विशाल सेना के भार से पृथ्वी भी काँप उठी थी। पृथ्वी के कम्पायमान हो जाने से समुद्र आदि भी हिलने लगे थे। समुद्र के हिलने से ऐसा प्रतीत होता था मानो किसी थाली में रखा हुआ पारा हिल रहा हो। तात्पर्य यह है कि शिवाजी की सेना इतनी अधिक विशाल थी कि उसके युद्ध के लिए प्रयाण करते समय उस स्थान पर ही नहीं, वरन् सम्पूर्ण पृथ्वी पर ही खलबली मच गयी थी और समस्त चराचर जगत् में अव्यवस्था का बोलबाला हो उठा था।
(iii) ‘सरजा’ की उपाधि से शिवाजी सुशोभित थे।
(iv) शिवाजी की सेना युद्ध के लिए प्रयाण करती है।
(v) शिवाजी की सेना के चलने से उड़ी धूल की विपुल राशि से सूर्य तारे के समान दिखायी देने लगता है।

प्रश्न 2:
बाने फहराने घहराने घंटा’गजन के,
नाहीं ठहराने राव राने देस देस के ।।
नग भहराने ग्राम नगर पराने सुनि, ।
बाजत निसाने सिवराजजू नरेस के ।।
हाथिन के हौदा उकसाने कुंभ कुंजर के,
भौन को भजाने अलि छूटे लट केस के ।
दल के दरारन ते कमठ करारे फूटे,
केरा के से पात बिहराने फन सेस के ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइट।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) शिवाजी की सेना के नगाड़ों को क्या प्रभाव दिखाई पड़ता है?
(iv) बालों की लटों के समान क्या प्रतीत होते हैं?
(v) किस कारण शेषनाग के फल केले के पत्तों जैसे चिर गए हैं?

उत्तर:
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – पौराणिक मान्यता के अनुसार विष्णु के 24 अवतारों में से एक अवतार कछुए को हुआ था, जिसने समुद्र मन्थन के समय मन्दराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया था। अन्य मान्यता के अनुसार पृथ्वी को शेषनाग (सहस्र फन वाले सर्प) ने अपने फनों पर धारण कर रखा है। इसी कछुए की कठोर पीठ शिवाजी की सेना के चलने की धमक से विदीर्ण हो गयी है और शेषनाग के फन केले के पत्तों के समान चिरकर अलग-अलग हो गये।
(iii) शिवाजी के प्रचण्ड नगाड़ों की ध्वनि से पहाड़ ढह गए और सेना के नमन-मार्ग में पड़ने वाले गाँवों के लोग भाग खड़े हुए।
(iv) हाथियों के गण्डस्थल पर मदपान के लिए एकत्रित भौंरे बालों की लटों के समान प्रतीत हो रहे हैं।
(v) शिवाजी की सेना के चलने की धमक से शेषनाग के फन केले के पत्तों के समान चिर गए हैं।

छत्रसाल-प्रशस्ति

प्रश्न 1:
भुज भुजगेस की वै संगिनी भुजंगिनी-सी,
खेदि खेदि खाती दीह दारुन दलन के ।
बखतर पाखरन बीच धेसि जाति मीन,
पैरि पार जात परवाह ज्यों जलन के ।।
रैयाराव चंपति, के छन्नसाले महाराज,
भूषन सकै करि बखान को बलन के ।
पच्छी पर छीने ऐसे परे पर छीने वीर,
तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) छत्रसाल की भुजा और बरछी को किसके समान बताया गया है?
(iv) छत्रसाल की बरछी ने किनको बलहीन कर दिया है?
(v) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस रस का अनुपम उदाहरण हैं?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद महाकवि भूषण की ‘भूषण-ग्रन्थावली’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘छत्रसाल-प्रशस्ति’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।
अथवा निम्नवत् लिखिए
शीर्षक का नाम – छत्रसाल-प्रशस्ति ।
कवि का नाम – महाकवि भूषण।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – युद्धभूमि में महाराज छत्रसाल की बरछी गजब का कौशल दिखा रही थी। जिस प्रकार पंख कट जाने पर पक्षी भूमि पर गिर पड़ते हैं, उसी प्रकार छत्रसाल की बरछी शत्रु पक्ष के बड़े-बड़े वीरों के हाथ-पैर काटकर उन्हें असहाय पक्षियों की भाँति भूमि पर गिरा रही थी।
(iii) छत्रसाल की भुजा को शेषनाग के समान और उनकी बरछी को शेषनाग की जीवन-संगिनी नागिन के समान भयंकर बताया गया है।
(iv) छत्रसाल की बरछी ने शत्रुओं के बल-पौरुष छीनकर उन्हें सर्वथा बलहीन कर दिया है।
(v) उपर्युक्त पंक्तियाँ वीर रस का अनुपम उदाहरण हैं।

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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines

UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines (सरल रेखाएँ)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines (सरल रेखाएँ).

प्रश्नावली 10.1

प्रश्न 1.
कार्तीय तल में एक चतुर्भुज खींचिए जिसके शीर्ष (-4, 5), (0, 7), (5, -5) और (-4, -2) हैं। इसका क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दिए गए बिन्दुओं (-4, 5), (0, 7), (5, -5) और (-4, -2) क्रमशः A, B, C, D द्वारा दर्शाया गया है। चतुर्भुज ABCD को दो भागों में बाँटा गया है।
जो ΔABD तथा ΔBDC के रूप में हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 1.1

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प्रश्न 2.
2 भुजा के समबाहु त्रिभुज का आधार y-अक्ष के अनुदिश इस प्रकार है कि आधार का मध्य बिन्दु मूल बिन्दु पर है। त्रिभुज के शीर्ष ज्ञात कीजिए।
हल:
माना ΔABC की भुजा BC, y-अक्ष के अनुदिश है जिसका मध्य बिन्दु मूल बिन्दु O है।
⇒ B और C के शीर्ष बिन्दु (0, a) और (0, -a) हैं।
बिन्दु A, x-अक्ष पर है, AB = 2a, OB = a
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 2

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प्रश्न 3.
P(x1, y1) और Q(x2, y2) के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए जब :
(i) PQ, y-अक्ष के समांतर है,
(ii) PQ, x-अक्ष के समांतर है।
हल:
(i) जब कोई रेखा y-अक्ष के समांतर होती है तो उसे पर जितने भी बिन्दु होंगे उनके x-निर्देशांक बराबर होते हैं अर्थात् x1 = x2.
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 3
(ii) जब कोई रेखा x-अक्ष के समांतर लेती है तो उसके प्रत्येक बिन्दु का y-निर्देशांक बराबर होता है।
अर्थात्
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 3.1

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प्रश्न 4.
x-अक्ष पर एक बिन्दु ज्ञात कीजिए जो (7, 6) और (3, 4) बिन्दुओं से समान दूरी पर है।
हल:
मान लीजिए x-अक्ष पर बिन्दु A(a, 0), बिन्दु B(7, 6) और C(3, 4) से समान दूरी पर है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 4
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 4.1

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प्रश्न 5.
रेखा की ढाल ज्ञात कीजिए जो मूल बिन्दु और P(0, -4) तथा B(8, 0) बिन्दुओं को मिलाने वाले रेखाखंड के मध्य बिन्दु से जाती है।
हल:
बिन्दु P(0, -4) और B(8, 0) को मिलाने वाले रेखाखंड का मध्य बिन्दु
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प्रश्न 6.
पाइथागोरस प्रमेय के प्रयोग बिना दिखलाइए कि बिन्दु (4, 4), (3, 5) और (-1, -1) एक समकोण त्रिभुज के शीर्ष हैं।
हल:
माना दिए गए बिन्दु A(4, 4), B(3, 5) और C(-1, -1) हैं, तब
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 6
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 6.1

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प्रश्न 7.
उस रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो y-अक्ष की धन दिशा से वामावर्त मापा गया 30° का कोण बनाती है।
हल:
माना रेखों OP, y-अक्ष से वामावर्त 30° का कोण बनाती है।
x- अक्षे, की धन दिशा से 90° + 30° = 120° को कोण बनाती है।
रेखा OP की ढाल = tan 120 = -√3
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यह रेखा मूलबिन्दु (0, 0) से होकर जाती है। रेखा का बिन्दु ढाल रूप है।
y – y1 = m(x – x1)
OP का समीकरण y – 0 = -√3 (x – 0)
y = -√3 x.

प्रश्न 8.
x का वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए बिन्दु (x, -1), (2, 1) और (4, 5) संरेख हैं।
हल:
मान लीजिए बिन्दु A (x, -1), B (2, 1), C (4, 5) सरेख हैं यदि,
AB की ढाल = BC की ढाल
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प्रश्न 9.
दूरी सूत्र का प्रयोग किए बिना दिखलाइए कि बिन्दु (-2, -1), (4, 0), (3, 3) और (-3, 2) एक समांतर चतुर्भुज के शीर्ष हैं।
हल:
मान लीजिए एक चतुर्भुज के शीर्ष A(-2, -1), B(4, 0), C(3, 3), तथा D(-3, 2) हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 9
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 9.1

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प्रश्न 10.
x-अक्ष और (3, -1) और (4, -2) बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा के बीच का कोण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना A(3, -1), B(4, -2) को मिलाने वाली रेखा AB की ढाल = [latex]\frac { -2+1 }{ 4-3 }[/latex] = [latex]\frac { -1 }{ 1 }[/latex] = -1
यदि x-अक्ष और AB के बीच से कोण हो, तो
tan θ = -1 = tan 135°
θ = 135°.

प्रश्न 11.
एक रेखा की ढाल दूसरी रेखा की ढाल का दुगुना है। यदि दोनों के बीच के कोण की स्पर्शज्या (tangent) [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex] है तो रेखाओं की ढाल ज्ञात कीजिए।
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 11.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 11.2

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प्रश्न 12.
एक रेखा (x1, y1) और (h, k) से जाती है। यदि रेखा की ढाल m है तो दिखाइए k – y1 = m (h – x1).
हल:
माना रेखा AB बिन्दु A(x1, y1) और B(h, k) से गुजरती हो, तब
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 12

प्रश्न 13.
यदि तीन बिन्दु (h, 0), (a, b) और (0, k) एक रेखा पर हैं तो दिखाइए कि [latex]\frac { a }{ h } +\frac { b }{ k } = 1[/latex]
हल:
मान लीजिए बिन्दु A (h, 0), B(a, b), तथा C(0, k) एक रेखा पर हों, तब
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 13

प्रश्न 14.
जनसंख्या और वर्ष के निम्नलिखित लेखाचित्र पर विचार कीजिए। (देखिए आकृति में) रेखा AB की ढाल ज्ञात कीजिए और इसके प्रयोग से बताइए कि वर्ष 2010 में जनसंख्या कितनी होगी ?
हल:
दी गयी आकृति में रेखा AB बिन्दु A(1985, 92) और B(1995, 97) से होकर जाती है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 14
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 14.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1 14.2

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प्रश्नावली 10.2

प्रश्न 1 से 8 तक रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो दिए गए प्रतिबंधों को संतुष्ट करता है।

प्रश्न 1.
x-अक्ष और y-अक्ष के समीकरण लिखिए।
हल:
x-अक्ष का समीकरण y = 0.
तथा y-अक्ष का समीकरण x = 0.

प्रश्न 2.
ढाल [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] और बिन्दु (-4, 3) से जाने वाली।
हल:
ढाल m = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex], बिन्दु (-4, 3)
अभीष्ट रेखा का समीकरण
y – y1 = m(x – x1)
y – 3 = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] (x + 4)
2y – 6 = x + 4
x – 2y + 10 = 0.

प्रश्न 3.
बिन्दु (0, 0) से जाने वाली और ढाल m वाली।
हल:
दिया है : बिन्दु (0, 0), ढाल = m
ढाल m, तथा (x1, y1) से जाने वाली रेखा का समीकरण
y – y1 = m(x – x1)
y – 0 = m(x – 0)
अतः अभीष्ट समीकरण y = mx.

प्रश्न 4.
बिन्दुः(2, 2√3) से जाने वाली और x-अक्ष से 75° के कोण पर झुकी हुई।
हल:
चूँकि रेखा x-अक्ष के साथ 75° पर झुकी हुई है, तब रेखा की ढाल
m = tan 75° = tan (45° + 30°)
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 4
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 4.1

प्रश्न 5.
मूल बिन्दु के बाईं ओर ४-अक्ष को 3 इकाई की दूरी पर प्रतिच्छेद करने तथा ढाल -2 वाली।
हल:
मूल बिन्दु से बाईं ओर 3 इकाई की दूरी पर स्थित बिन्दु (-3, 0) होगा तथा ढाल m = – 2 m तथा (x1, y1) के द्वारा, रेखा का समीकरण,
y – y1 = (x – x1)
यहाँ x1 = -3 तथा y1 = 0 रखने पर,
y – 0 = -2 (x + 3) यो
y = -2x – 6
2x + y + 6 = 0.

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प्रश्न 6.
मूल बिन्दु से ऊपर y-अक्ष को 2 इकाई की दूरी पर प्रतिच्छेद करने वाली और x-अक्ष की धन दिशा के साथ 30° का कोण बनाने वाली।
हल:
मूल बिन्दु से y-अक्ष पर 2 इकाई की दूरी पर स्थित बिन्दु (0, 2) होगा। x-अक्ष की धन दिशा के साथ रेखा 30° का कोण बनाती है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 6

प्रश्न 7.
बिन्दुओं (-1, 1) और (2, -4) से जाते हुए।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 7
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 7.1

प्रश्न 8.
उस रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जिसकी मूल बिन्दु से लांबिक दूरी 5 इकाई और लंब धन x-अक्ष से 30° को कोण बनाती है।
हल:
हम जानते हैं कि लंबे रूप में रेखा AB का समीकरण,
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 8

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प्रश्न 9.
ΔPQR के शीर्ष P(2, 1), Q(-2, 3) और R(4, 5) हैं। शीर्ष R से जाने वाली माध्यिका का समीकरण ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 9
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 9.1

प्रश्न 10.
(-3, 5) से होकर जाने वाली और बिन्दु (2, 5) और (-3, 6) से जाने वाली रेखा पर लंब रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
बिन्दु A(2, 5) और B(-3, 6) से होकर जाने वाली रेखा का ढाल
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 10
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 10.1

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प्रश्न 11.
एक रेखा (1, 0) तथा (2, 3) बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखाखंड पर लम्ब है तथा उसको 1 : n के अनुपात में विभाजित करती है। रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
रेखा AB बिन्दु A(1, 0) तथा B(2, 3) से होकर जाती है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 11
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 11.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 11.2

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प्रश्न 12.
एक रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो निर्देशांक अक्षों से समान अंत:खण्ड काटती है और बिन्दु (2, 3) से जाती है।
हल:
(i) रेखा AB बिन्दु P(2, 3) से होकर जाती है और निर्देशांक अक्षों पर समान अंत:खंड बनाती है।
OA = OB
∠BAO = 45°
∠BAX = 135°
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 12
AB की ढाल, m = tan 135° = -1
रेखा का समीकरण, y – y1 = m(x – x1)
जहाँ x1 = 2, y1 = 3 तथा m = -1
y – 3 = -1 (x – 2)
x + y – 5 = 0
x + y = 5.

प्रश्न 13.
बिन्दु (2, 2) से जाने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जिसके द्वारा अक्षों से कटे अंत:खंडों का योम 9 है।
हल:
मान लीजिए P(2, 2) से होकर जाने वाली रेखा से अक्षों पर बने अंतः खंड a तथा b हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 13
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 13.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 13.2

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प्रश्न 14.
बिन्दु (0, 2) से जाने वाली और धन x-अक्ष से [latex]\frac { 2\pi }{ 3 }[/latex] के कोण बनाने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए। इसके समांतर और y-अक्ष को मूल बिन्दु से 2 इकाई नीचे की दूरी पर प्रतिच्छेद करती हुई रेखा का समीकरण भी ज्ञात करो।
हल:
माना एक रेखा PQ बिन्दु P(0, 2) से होकर जाती है और धन x-अक्ष के साथ [latex]\frac { 2\pi }{ 3 }[/latex] का कोण बनाती है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 14

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प्रश्न 15.
मूल बिन्दु से किसी रेखा पर डाला गया लम्ब रेखा से बिन्दु (-2, 9) पर मिलता है। रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए रेखा AB पर मूल बिन्दु से डाला गया लम्ब AB पर मिलता है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 15
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 15.1

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प्रश्न 16.
तांबे की छड़ की लम्बाई L (सेमी में) सेल्सियस ताप C का रैखिक फलन है। एक प्रयोग में यदि L = 124.942, जब C = 20 और L = 125.134 जब C = 110 हो, तो L को C के पदों में व्यक्त कीजिए।
हल:
L ताप C का रैखिक फलन है।
(20, 124.942), (110, 125.134) इसका रैखिक फलन है। इन दो बिन्दुओं से संतुष्ट फलन
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 16

प्रश्न 17.
किसी दूध भण्डार का स्वामी प्रति सप्ताह 980 लीटर दूध, 14 रू प्रति लीटर के भव से और 1220 लीटर दूध 16 रू प्रति लीटर के भाव से बेच सकता है। विक्रय मूल्य तथा मांग के मध्य के संबंध को रैखिक मानते हुए ज्ञात कीजिए कि प्रति सप्ताह वह कितना दूध 17 रू प्रति लीटर के भाव से बेच सकता है?
हल:
दूध के भाव और मात्रा में रैखिक सम्बन्ध है। यह रेखा दो बिन्दुओं (14, 980), (16, 1220) से होकर जाती है।
इससे प्राप्त रेखा का समीकरण,
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 17

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प्रश्न 18.
अक्षों के बीच रेखाखंड का मध्य बिंदु P(a, b) है। दिखाइए कि रेखा का समीकरण [latex]\frac { x }{ a } +\frac { y }{ b } =\quad 2[/latex]
हल:
माना रेखा AB अक्षों पर p और q अंत:खंड बनते हैं।
बिन्दु A और B के क्रमशः निर्देशांक (p, 0) और (0, q) हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 18
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 18.1

प्रश्न 19.
अक्षों के बीच रेखाखण्ड को बिन्दु R(h, k), 1 : 2 के अनुपात में विभक्त करता है। रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
अक्षों के बीच रेखाखंड AB को R(h, k) AR : RB = 1 : 2 के अनुपात में विभक्त करता है।
मान लीजिए अक्षों पर अंत:खण्ड OA = a और OB = b है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 19
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 19.1

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प्रश्न 20.
रेखा के समीकरण की संकल्पना का प्रयोग करते हुए सिद्ध कीजिए कि तीन बिन्दु (3, 0), (-2, -2) और (8, 2) संरेख हैं।
हल:
बिन्दु A(3, 0), B(2, -2) से होकर जाने वाली रेखा का समीकरण
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.2 20

प्रश्नावली 10.3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित समीकरणों को ढाल अंत:खण्ड रूप में रूपान्तरित कीजिए और उनके ढाल तथा y-अंत:खण्ड ज्ञात कीजिए:
(i) x + 7y = 0
(ii) 6x + 3y – 5 = 0
(iii) y = 0.
हल:
(i) x + 7y = 0
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 1.1

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित समीकरणों को अंतःखण्ड रूप में रूपान्तरित कीजिए और अक्षों पर इनके द्वारा काटे गए अंत:खण्ड ज्ञात कीजिए:
(i) 3x + 2y – 12 = 0
(ii) 4x – 3y = 6
(iii) 3y + 2 = 0.
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 2
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 2.1

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित समीकरणों को लम्ब रूप में रूपान्तरित कीजिए। उनकी मूल बिन्दु से लॉबिक दूरियाँ और लम्ब तथा धन-अक्ष के बीच का कोण ज्ञात कीजिए
(i) x – √3 y + 8 = 0
(ii) y – 2 = 0
(iii) x – y = 4.
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 3
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 3.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 3.2

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प्रश्न 4.
बिन्दु (-1, 1) की रेखा 12(x + 6) = 5(y – 2) से दूरी ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 4

प्रश्न 5.
x-अक्ष पर बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिनकी रेखा [latex]\frac { x }{ 3 } +\frac { y }{ 4 } =\quad 1[/latex] से दूरियाँ 4 इकाई हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 5
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 5.1

प्रश्न 6.
समान्तर रेखाओं के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए-
(i) 15x + 8y – 34 = 0 और 15x + 8y + 31 = 0
(ii) l(x + y) + p = 0 और l(x + y) – r = 0
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प्रश्न 7.
रेखा 3x – 4y + 2 = 0 के समान्तर और बिन्दु (-2, 3) से जाने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 7
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 7.1

प्रश्न 8.
रेखा 4x – 7y + 5 = 0 पर लम्ब और x-अन्त:खण्ड 3 वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 8.1

प्रश्न 9.
रेखाओं √3 x + y = 1 और x + √3 y = 1 के बीच का कोण ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 10.
बिन्दुओं (h, 3) और (4, f) से जाने वाली रेखा, रेखा 7x – 9y – 19 = 0 को समकोण पर प्रतिच्छेद करती है। h का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
माना रेखा AB बिन्दु A(h, 3), B(4, 1) से जाने वाली रेखा की ढाल,
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प्रश्न 11.
सिद्ध कीजिए कि बिन्दु (x1, y1) से जाने वाली और रेखा Ax + By + C = 0 के समान्तर रेखा को समीकरण A(x – x1) + B(y – y1) = 0 है।
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 11.1

प्रश्न 12.
बिन्दु (2, 3) से जाने वाली दो रेखाएँ परस्पर 60° के कोण पर प्रतिच्छेद करती हैं। यदि एक रेखा की ढाल 2 है तो दूसरी रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना दूसरी रेखा की ढाल m है।
दोनों रेखाओं के बीच कोण
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 12.1

UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 12.2

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प्रश्न 13.
बिन्दुओं (3, 4) और (-1, 2) को मिलाने वाली रेखाखण्ड के लम्बे समद्विभाजक रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना बिन्दुओं A(3, 4) और B(-1, 2) को मिलाने वाले रेखाखण्ड का मध्य बिन्दु
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 13

प्रश्न 14.
बिन्दु (-1, 3) से रेखा 3x – 4y – 16 = 0 पर डाले गए लम्बपाद के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए रेखा AB को समीकरप, 3x – 4y – 16 = 0 …… (i)
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 14.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 14.2

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प्रश्न 15.
मूल बिन्दु से रेखा y = mx + c पर डाला गया लम्ब रेखा से बिन्दु (-1, 2) पर मिलता है। m और c के मान ज्ञात कीजिए।
हल:
माना रेखा AB का समीकरण, y = mx + c
रेखा AB की ढाल = m
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 15.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 15.2

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प्रश्न 16.
यदि p और q क्रमशः मूल बिन्दु से रेखाओं x cosθ – y sinθ = k cos 2θ और x secθ + y cosecθ = k पर लम्ब की लंबाइयाँ हैं तो सिद्ध कीजिए कि p² + 4q² = k².
हल:
मूल बिन्दु (0, 0) से x cosθ – y sinθ = k cos 2θ की दूरी,
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 16.1

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प्रश्न 17.
शीर्षों A (2, 3), B (4, -1) और C (1, 2) वाले त्रिभुज ABC के शीर्ष A से उसकी सम्मुख भुजा पर लम्बे डाला गया है। लम्बे की लम्बाई तथा समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए AM रेखा BC पर लंब डाला गया है।
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.3 17.1

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अध्याय 10 पर विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1.
k के मान ज्ञात कीजिए जब कि रेखा (k – 3) x – (4 – k²) y + k² – 7k + 6 = 0
(a) x-अक्ष के समान्तर है।
(b) y-अक्ष के समान्तर है।
(c) मूल बिन्दु से जाती है।
हल:
(i) x-अक्ष के समान्तर y = a
प्रश्न में दिए गए समीकरण में x का गुणांक = 0 या k – 3 = 0 अर्थात् k = 3.
(ii) y-अक्ष के समान्तर रेखा x = q
दिए गए समीकरण में y का गुणांक = 0 या 4 – k² = 0 अर्थात् k = ± 2.
(iii) यदि रेखा मूल बिन्दु से जाती है तो (0, 0) इसके समीकरण को संतुष्ट करेगा।
0 – 0 + k² – 7k + 6 = 0 या (k – 6) (k- 1) = 0 या k = 1, 6.

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प्रश्न 2.
θ और p के मान ज्ञात कीजिए यदि समीकरण x cosθ + y sinθ = p रेखा √3 x + y + 2 = 0 को लम्ब रूप है।
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प्रश्न 3.
उन रेखाओं के समीकरण ज्ञात कीजिए जिनके अक्षों से कटे अंत:खण्डों का योग और गुणनफल क्रमशः 1 और -6 हैं।
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प्रश्न 4.
y-अक्ष पर कौन से बिन्दु ऐसे हैं, जिनकी [latex]\frac { x }{ 3 } +\frac { y }{ 4 } =\quad 1[/latex] से, दूरी 4 इकाई है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 4

प्रश्न 5.
मूल बिन्दु से बिन्दुओं (cosθ, sinθ) और (cosφ , sinφ) को मिलाने वाली रेखा की लांबिक दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
(cosθ, sinθ) और (cosφ , sinφ) को मिलाने वाली रेखा का समीकरण,
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 5.1

प्रश्न 6.
रेखाओं x – 7y + 5 = 0 और 3x + y = 0 के प्रतिच्छेद बिन्दु से खीचीं गई और y-अक्ष के समान्तर रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 7.
रेखा [latex]\frac { x }{ 4 } +\frac { y }{ 6 } =\quad 1[/latex] पर लंब उस बिन्दु से खींची गई रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जहाँ यह रेखा y-अक्ष से मिलती है।
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 7.1

प्रश्न 8.
रेखाओं y – x = 0, x + y = 0, और x – k = 0 से बने त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 8
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 8.1

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प्रश्न 9.
p का मान ज्ञात कीजिए जिससे तीन रेखाएँ 3x + y – 2 = 0, px + 2y – 3 = 0 और 2x – y – 3 = 0 एक बिन्दु पर प्रतिच्छेद करें।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 9

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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 10.1

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प्रश्न 11.
बिन्दु (3, 2) से जाने वाली उस रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो रेखा x – 2y = 3 से 45° का कोण बनाती है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 11
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 11.1

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प्रश्न 12.
रेखाओं 4x + 7y – 3 = 0 और 2x – 3y + 1 = 0 के प्रतिच्छेद बिन्दु से जाने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो अक्षों से समान अंतः खण्ड बनाती हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 12
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 12.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 12.2

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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 13.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 13.2
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 13.3

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प्रश्न 14.
(-1, 1) और (5, 7) को मिलाने वाली रेखाखण्ड को रेखा x + y = 4 किस अनुपात में विभाजित करती है ?
हल:
मान लीजिए बिन्दु P रेखाखण्ड AB को k : 1 के अनुपात में विभाजित करता है। जबकि A और B के क्रमशः (-1, 1) और (5, 7) निर्देशांक हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 14

प्रश्न 15.
बिन्दु (1, 2) से रेखा 4x + 7y + 5 = 0 की 2x – y = 0 के अनुदिश दूरी ज्ञात करो।
हल:
माना रेखा PC का समीकरण, 2x – y = 0 जिस पर बिन्दु P(1, 2) स्थित है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 15
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 15.1

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प्रश्न 16.
बिन्दु (-1, 2) से खींची जा सकने वाली उस रेखा की दिशा ज्ञात कीजिए जिसका रेखा x + y = 4 से प्रतिच्छेदन बिन्दु दिए बिन्दु से 3 इकाई की दूरी पर है।
हल:
मान लीजिए अभीष्ट रेखा PQ की ढाल m है। रेखा PQ जो बिन्दु P(-1, 2) से होकर जाती है और ढाल m है, का समीकरण
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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 16.1

प्रश्न 17.
समकोण त्रिभुज के कर्ण के अंत्य बिन्दु (1, 3) और (-4, 1) हैं। त्रिभुज के पाद (leg) (समकोणीय नाओं) का एक समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना त्रिभुज ABC एक समकोणीय त्रिभुज है जिसका कर्ण AB है। A और B के निर्देशांक क्रमशः (1, 3) और (-4, 1) हैं।
मान लीजिए BC की ढाल m है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 17
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 17.1

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प्रश्न 18.
किसी बिन्दु के लिए रेखा को दर्पण मानते हुए बिन्दु (3, 8) का रेखा x + 3y = 7 में प्रतिबिंब ज्ञात कीजिए।
हल:
माना देखा AB का समीकरण x + 3y = 7 है और बिन्दु P के निर्देशांक (3, 8) हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 18
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 18.1

प्रश्न 19.
यदि रेखाएँ y = 3x +1 और 2y = x + 3, रेखा y = mx + 4 पर समान रूप से आनत हो तो m का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
रेखा AB का समीकरण, y = 3x + 1 की ढाल = 3
रेखा BC का समीकरण, y = mx + 4 की ढाल = m
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 19
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 19.1

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प्रश्न 20.
यदि एक चर बिन्दु P(x, y) की रेखाओं x + y – 5 = 0 और 3x – 2y + 7 = 0 से लांबिक दूरियों का योग सदैव 10 रहे तो दर्शाइए कि P अनिवार्य रूप से एक रेखा पर गमन करता है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 20
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 20.1

प्रश्न 21.
समांतर रखाओं 9x + 6y – 7 = 0 और 3x + 2y + 6 = 0 से समदूरस्थ रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 21
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 21.1

प्रश्न 22.
बिन्दु (1, 2) से होकर जाने वाली एक प्रकाश किरण x-अक्ष के बिन्दु A से परावर्तित होती है और परावर्तित किरण बिन्दु (5, 3) से होकर जाती है। A के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए BC, x-अक्ष के अनुदिश उस बिन्दु के निर्देशांक A (a, 0) है। AN इस पर लंब है। PA एक आपतित किरण है और AQ परावर्तित किरण है।
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 22
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 22.1

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UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 23
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 23.1

प्रश्न 24.
एक व्यक्ति समीकरणों 2x – 3y + 4 = 0 और 3x + 4y – 5 = 0 से निरूपित सरल रेखीय पथों के संधि बिन्दुओं (junction/crossing) पर खड़ा है और समीकरण 6x – 7y + 8 = 0 से निरूपित पथ पर न्यूनतम समय में पहुँचना चाहता है। उसके द्वारा अनुसरित पथ का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
AB और BC दो रेखीय पथ हैं। AB वे BC रेखाओं के समीकरण
2x – 3y + 4 = 0 ………(1)
और 3x +4y – 5 = 0 ……..(2)
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 24
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 24.1
UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines 24.2

We hope the UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines (सरल रेखाएँ) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 11 Maths Chapter 10 Straight Lines (सरल रेखाएँ), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties (तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties (तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता).

पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?
उत्तर
आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार समान गुणधर्म (भौतिक तथा रासायनिक गुण) वाले तत्वों को एकसाथ एक ही वर्ग में रखना है। चूंकि तत्वों के ये गुणधर्म मुख्यत: उनके संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं। अत: किसी समूह के तत्वों के परमाणुओं के संयोजी कोश विन्यास समान होते हैं।

प्रश्न 2.
मेंडलीव ने किस महत्त्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उस पर दृढ़ रह पाए?
उत्तर
मेंडलीव ने परमाणु भार को, तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार माना तथा तत्त्वों को बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया। वह अपने आधार पर निष्ठापूर्वक दृढ़ रहे तथा उन्होंने उन तत्त्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़ा जो उस समय ज्ञात नहीं थे तथा उनके परमाणु भारों के आधार पर, उनके लक्षणों या गुणों की भविष्यवाणी की। उनकी भविष्यवाणियाँ उन तत्त्वों की खोज होने पर सत्य पायी गयीं।

प्रश्न 3.
मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अन्तर क्या है?
उत्तर
मेंडलीव का आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु भारों पर आधारित है, जबकि आधुनिक आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु क्रमांकों पर आधारित है। इस प्रकार मौलिक अन्तर वर्गीकरण का आधार है।

प्रश्न 4.
क्वाण्टम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।
उत्तर
आवर्त सारणी के दीर्घ रूप में प्रत्येक आवर्त एक नई कक्षा के भरने से प्रारम्भ होता है। छठवाँ आवर्त (मुख्य क्वाण्टम संख्या = 6)n = 6 से प्रारम्भ होता है। इस कक्ष के लिए, n= 6 तथा != 0,1, 2 तथा 3 होगा (उच्च मान आदेशित नहीं है)।

इस प्रकार, उपकक्षाएँ 6s, 6p, 6d तथा 6 इलेक्ट्रॉनों के समावेशन के लिए उपलब्ध हैं। किन्तु आँफबाऊ के नियमानुसार 6d तथा 6/-उपकक्षाओं की ऊर्जा 7s-उपकक्षाओं की तुलना में अधिक होती है। इसलिए यह कक्षाएँ 7s उपकक्षाओं के भरने तक नहीं भरती हैं। इसके अतिरिक्त 5d- तथा 4- उपकक्षाओं की ऊर्जाएँ 6p- उपकक्षाओं से कम होती हैं। इसलिए, छठवें आवर्त में, इलेक्ट्रॉन्स केवल 6s, 4,5d तथा 6p- उपकक्षाओं में भरते हैं। इन उपकक्षाओं में इलेक्ट्रॉन्स की संख्याएँ क्रमशः 2, 14, 10 तथा 6 होती हैं अर्थात् कुल 32 इलेक्ट्रॉन्स होते हैं। इसी कारण छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होते।

प्रश्न 5.
आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि z = 14 कहाँ स्थित होगा?
उत्तर
z=114 तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है-
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UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-2

यह स्पष्ट है कि दिया तत्त्व एक सामान्य तत्त्व है तथा आवर्त सारणी के p-ब्लॉक से सम्बन्धित है।’ चूँकि इस तत्त्व में n = 7 कक्ष में इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं, अत: यह आवर्त सारणी के सातवें आवर्त में स्थित होगा। इसके अतिरिक्त समूह की संख्या = 10+ संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
= 10 +4 = 14
अतः दिया गया तत्त्व सातवें आवर्त में तथा समूह 14 में स्थित है।

प्रश्न 6.
उस तत्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग में स्थित होता है।
उत्तर
तीसरे आवर्त में केवल 3- तथा 3p-कक्षाएँ भरती हैं। अत: आवर्त में केवल दो – तथा छः p-ब्लॉक के तत्त्व होते हैं। तीसरा आवर्त Z=11 से प्रारम्भ होकर Z= 18 पर समाप्त होता है। अतः Z=11 तथा Z= 12 के तत्त्व -ब्लॉक में स्थित होंगे। अगले छः तत्त्व Z = 13 (समूह 13) से Z= 18 (समूह 18)p-ब्लॉक के तत्त्व हैं। इसलिए वह तत्त्व जो 17वें समूह में स्थित है उसका परमाणु क्रमांक Z = 17 होगा।

प्रश्न 7.
कौन-से तत्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है?
(i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
(ii) सी बोर्ग समूह द्वारा।
उत्तर

  1. लॉरेन्सियम (Lawrencium) (Z=103) तथा बर्केलियम (Berkelium) (Z=97)
  2. सीबोर्गीयम (Seaborgium) (Z = 106)

प्रश्न 8.
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
उत्तर
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होते हैं अर्थात् उनकी संयोजी कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। इसी कारण से एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं।

प्रश्न 9.
परमाणु त्रिज्या’ और ‘आयनिक त्रिज्या से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
परमाणु त्रिज्या से तात्पर्य परमाणु का आकार है, जो परमाणु के नाभिक के केन्द्र से बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉन की दूरी के बराबर मानी जाती है। किसी आयन की ‘आयनिक त्रिज्या’ उसके नाभिक तथा उस बिन्दु के मध्य की दूरी को माना जाता है जिस पर नाभिक का प्रभाव आयन के इलेक्ट्रॉन मेघ पर प्रभावी होता है।

प्रश्न 10.
किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर
आवर्त में परमाणु त्रिज्याएँ (Atomic Radii in Periods) किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर परमाणु त्रिज्याएँ नियमित क्रम में क्षार धातु से हैलोजेन तक घटती हैं; क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ने के साथ-साथ बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी बढ़ती है, फलस्वरूप बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता भी बढ़ती है। इस कारण इनकी नाभिक व बाह्यतमं कोशों के बीच की दूरी क्रमशः घटती है; अत: परमाणु त्रिज्या घटती है। (यह ध्यान देने योग्य है कि यहाँ उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्या पर विचार नहीं किया जा रहा है। एकल परमाणु होने के कारण उनकी आबन्धित त्रिज्या बहुत अधिक है। इसलिए उत्कृष्ट गैसों की तुलना दूसरे तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या से न करके वाण्डरवाल्स त्रिज्या से करते हैं।)

कुछ तत्वों के लिए परमाणु त्रिज्या का मान निम्नांकित सारणी-1 में दिया गया है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-3
द्वितीय आवर्त में परमाणु त्रिज्या में परमाणु क्रमांक के साथ परिवर्तन चित्र-1 में प्रदर्शित वक्र द्वारा और अधिक स्पष्ट होता है। वक्र में स्पष्ट प्रदर्शित है कि नितान्त बाईं ओर स्थित क्षार धातु (Li) की परमाणु त्रिज्या अधिकतम तथा नितान्त दाईं ओर स्थित हैलोजेन (F) की परमाणु त्रिज्या का मान न्यूनतम है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-4
वर्ग में परमाणु त्रिज्याएँ (Atomic radii in Groups)
किसी वर्ग में ऊपर से नीचे चलने पर परमाणु त्रिज्याएँ बढ़ती हैं; क्योंकि जैसे-जैसे नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इलेक्ट्रॉनिक कोशों की संख्या बढ़ती जाती है, फलस्वरूप बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता घटती है; अत: परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।
निम्नांकित सारणी-2 में धातुओं तथा हैलोजेन तत्वों के लिए परमाणु त्रिज्याएँ दी गई हैं
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UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-6
वर्ग में परमाणु क्रमांकों के साथ क्षार धातुओं तथा हैलोजेनों की परमाणु त्रिज्याओं में परिवर्तन चित्र-2 में प्रदर्शित वक्र द्वारा और अधिक स्पष्ट होता है। मानों से यह स्पष्ट है कि लीथियम (Li) की परमाणु त्रिज्या न्यूनतम तथा सीजियम (Cs) की अधिकतम है। इसी प्रकार हैलोजेनों में फ्लुओरीन (F) की परमाणु त्रिज्या न्यूनतम तथा आयोडीन (I) की अधिकतम है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-7

प्रश्न 11.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज का नाम लिखिए, जो निम्नलिखित परमाणुओं या आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनिक होगी-
(i) F
(ii) Ar
(iii) Mg2+
(iv) Rb+
उत्तर
वे स्पीशीज (विभिन्न तत्त्वों के आयन या परमाणु) जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समने होती है। लेकिन नाभिकीय आवेश भिन्न होता है, समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज कहलाती हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-8

प्रश्न 12.
निम्नलिखित स्पीशीज पर विचार कीजिए- –
N3-,O2-, F, Na+, Mg2+ तथा Al3+
(क) इनमें क्या समानता है? |
(ख) इन्हें आयनिक त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर
(क) दी गई प्रत्येक स्पीशीज में 10 इलेक्ट्रॉन हैं। अत: ये सब समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज हैं।
(ख) समइलेक्ट्रॉनिक आयनों की आयनिक त्रिज्या, परमाणु आवेश के बढ़ने के साथ घटती है। दी।
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प्रश्न 13.
धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर
जनक परमाणुओं से एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों के निकलने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है। इस प्रकार बचे हुए इलेक्ट्रॉन अधिक नाभिकीय आकर्षण का अनुभव करते हैं। परिणामस्वरूप त्रिज्या घटती है। इसी कारण धनायन की त्रिज्या उनके जनक परमाणु से छोटी होती है। दूसरी ओर, जनके परमाणुओं में एक या अधिक इलेक्ट्रॉन बढ़ने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉन कम नाभिकीय आकर्षण या खिंचाव अनुभव करते हैं। परिणामस्वरूप त्रिज्या बढ़ती है। इसी कारण से ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक होती है।

प्रश्न 14.
आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करने में विलगित गैसीय परमाणु तथा ‘आद्य अवस्था पदों की सार्थकता क्या है?
उत्तर
किसी परमाणु के नाभिक द्वारा उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों पर आरोपित बल काफी मात्रा में अणु में उपस्थित अन्य परमाणुओं तथा पड़ौसी परमाणुओं की उपस्थिति पर निर्भर करता है। चूंकि इस बल का परिमाण आयनन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मानों को निर्धारित करता है, अतः इन्हें विलगित परमाणुओं के लिए परिभाषित करना आवश्यक है। एक अकेले परमाणु को विलगित करना सम्भव नहीं है। चूंकि गैसीय अवस्था में परमाणु (या अणु) काफी अलग होते हैं, आयनन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी गैसीय परमाणुओं के लिए परिभाषित की जाती है तथा यह माना जाता है कि वे विलगित हैं। इसके अतिरिक्त आद्य अवस्था (ground state) निम्नतम ऊर्जा की अवस्था अर्थात् सबसे अधिक स्थाई अवस्था को निर्देशित करती है। यदि परमाणु उत्तेजित अवस्था में है, तो इसकी ऊर्जा का एक निश्चित मान होगा और इस अवस्था में आयनन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान भिन्न होंगे। अतः आयनन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करते समय एक गैसीय परमाणु को आद्य अवस्था में स्थित होना आवश्यक है।

प्रश्न 15.
हाइड्रोजन परमाणु में आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा -2.18 x 10-18 J है। परमाणविक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी Jmol-1 के पदों में परिकलित कीजिए।
उत्तर
हाइड्रोजन परमाणु की आद्य अवस्था से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-10

प्रश्न 16.
द्वितीय आवर्त के तत्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है
Li< B < Be<C< O< N < F < Ne व्याख्या कीजिए कि
(i) Be की ∆i,H, B से अधिक क्यों है?
(ii) O की ∆iH, N और F से कम क्यों है?
उत्तर
(i) Be तथा B के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नांकित प्रकार हैं
4Be= 2,2 या 1s2 ,2s2
5B= 2, 3 या 1s2 ,2s2 2p1
बोरॉन (B) में, इसके एक 2p कक्षक में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है। बेरिलियम (Be) में युग्मित : इलेक्ट्रॉनों वाले पूर्ण-पूरित ls तथा 25 कक्षक हैं।

जब हम एक ही मुख्य क्वाण्टम ऊर्जा स्तर पर विचार करते हैं तो 5-इलेक्ट्रॉन p-इलेक्ट्रॉन की तुलना में नाभिक की ओर अधिक आकर्षित होता है। बेरिलियम में बाह्यतम इलेक्ट्रॉन, जो अलग किया जाएगा, वह 5-इलेक्ट्रॉन होगा, जबकि बोरॉन में बाह्यतम इलेक्ट्रॉन (जो अलग किया जाएगा) p-इलेक्ट्रॉन होगा। उल्लेखनीय है कि नाभिक की ओर 2-इलेक्ट्रॉन का भेदन (penetration) 2p-इलेक्ट्रॉन की तुलना में अधिक होता है। इस प्रकार बोरॉन का 2p-इलेक्ट्रॉन बेरिलियम के 2-इलेक्ट्रॉन की तुलना में आन्तरिक क्रोड इलेक्ट्रॉनों द्वारा अधिक परिरक्षित होता है। चूंकि बेरिलियम के 25-इलेक्ट्रॉन की तुलना में बोरॉन को 2p-इलेक्ट्रॉन अधिक सरलता से पृथक् हो जाता है; अत: बेरिलियम की तुलना में बोरॉन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (∆iH) का मान कम होगा।

(ii) नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नांकित प्रकार हैं

7N = 2,5 या 1s2, 2s2 2p1x 2p1y 2p1z
8O= 2,6 या 1s2 , 2s2 2p2x 2p1y 2p1z

स्पष्ट है कि नाइट्रोजन में तीनों बाह्यतम 2p-इलेक्ट्रॉन विभिन्न p-कक्षकों में वितरित हैं (हुण्ड का नियम), जबकि ऑक्सीजन के चारों 2p-इलेक्ट्रॉनों में से दो 2p-इलेक्ट्रॉन एक ही 2p-ऑर्बिटल में हैं; फलतः इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है। फलस्वरूप नाइट्रोजन के तीनों 2p-इलेक्ट्रॉनों में से एक इलेक्ट्रॉन पृथक् करने की तुलना में ऑक्सीजन के चारों 2p-इलेक्ट्रॉनों में से चौथे इलेक्ट्रॉन को पृथक् करना सरल हो जाता है; अतः 6 की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (∆iH) का मान N से कम होता है। यही स्पष्टीकरण F के लिए भी दिया जा सकता है।

प्रश्न 17.
आप इस तथ्य की व्याख्या किस प्रकार करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है, किन्तु इसकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक है?
उत्तर
Na तथा Mg के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न हैं-
Na (Z= 11): 1s2 2s2 2p6 3s1
Mg (Z= 12): 1s2 2s2 2p6 3s2
चूँकि सोडियम (+11) ; में मैग्नीशियम’ (+12) की तुलना में कम नाभिकीय आवेश है, सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की तुलना में कम होगी।
प्रथम इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद, सोडियम Na+ आयन में परिवर्तित हो जाता है तथा मैग्नीशियम Mg+ में। इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न प्रकार से होगा-
Na+ : 1s2 2s2 2p6
Mg+ : 1s2 2s2 2p6 3s1
Na+ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निऑन के समान एक बहुत अधिक स्थाई इलेक्ट्रॉनिक विन्यास , है। इसलिए Naआयन से Mg की तुलना में इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी। इसी कारण से सोडियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी, मैग्नीशियम की तुलना में अधिक होती है।

प्रश्न 18.
मुख्य समूह तत्वों में आयनन एन्थैल्पी के किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के कौन-से कारक हैं?
उत्तर
मुख्य समूह तत्वों में आयनन एन्थैल्पी के किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के विभिन्न कारक निम्नलिखित हैं-

  1. समूह में नीचे जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
  2. समूह में नीचे जाने पर प्रत्येक तत्व में नए कोश जुड़ जाने के कारण परमाणु आकार बढ़ जाते ।
  3. समूह में नीचे जाने पर आन्तरिक इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है। इससे बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों पर आवरण-प्रभाव घट जाता है।

परमाणु आकार में वृद्धि तथा आवरण-प्रभाव का संयुक्त प्रभाव नाभिकीय आवेश में वृद्धि के प्रभाव से अधिक हो जाता है। ये प्रभाव इस प्रकार कार्य करते हैं कि नाभिक तथा बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों के मध्य आकर्षण बल कम हो जाता है। परिणामस्वरूप समूह में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी कम हो जाती है।

प्रश्न 19.
वर्ग 13 के तत्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान (kJ mol-1) में इस प्रकार हैं-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-11
उत्तर
सामान्य परम्परा के अनुसार वर्ग 13 में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है। लेकिन Ga तथा TI इसके अपवाद हैं। d तथा / इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) 5 तथा 2 इलेक्ट्रॉनों की तुलना में कम होता है। Ga में 3d इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि T1 में 5d तथा 47 इलेक्ट्रॉन होते हैं। कम परिरक्षण प्रभाव के कारण, Ga तथा T1 परमाणुओं के नाभिक संयोजी इलेक्ट्रॉन को मजबूती से बाँधे रखते हैं। इसी कारण से पड़ौसी तत्त्वों की तुलना में इनकी आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है।

प्रश्न 20.
तत्वों के निम्नलिखित युग्मों में किस तत्व की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी?
(i) O या F
(ii) F या Cl
उत्तर

  1. F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी। O से F तक जाने में, परमाणु आकार घटता है तथा नाभिकीय आवेश बढ़ता है। ये दोनों कारक फ्लुओरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान को अधिक ऋणात्मक बनाते हैं क्योंकि ये आने वाले इलेक्ट्रॉन के लिए नाभिकीय आकर्षण में वृद्धि करते हैं।
  2. CI की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है।

प्रश्न 21.
आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर
ऑक्सीजन (O) की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होती है। उदासीन ऑक्सीजन परमाणु में प्रथम इलेक्ट्रॉन के जुड़ने पर ऊर्जा का निष्कासन होता है तथा प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी ऋणात्मक होती है।

O(g)+e → O (g); ∆eg H= -141.0 kJ

और अधिक इलेक्ट्रॉन के जुड़ने के लिए ऊर्जा का अवशोषण आवश्यक है।

O(g)+e → O2-(g); ∆egH = +780.0kJ

इसका कारण यह है कि ऋण आवेशित 0 आयन तथा आने वाले इलेक्ट्रॉन के बीच प्रबल विद्युत स्थैतिक प्रतिकर्षण होता है। इस स्थिति में इलेक्ट्रॉन को जोड़ने के लिए ऊर्जा का अवशोषण आवश्यक है जो विद्युत स्थैतिक प्रतिकर्षण पर विजय प्राप्त करता है। इसी कारण से ऑक्सीजन की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होती है।

प्रश्न 22.
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता में क्या मूल अन्तर है?
उत्तर
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी किसी विलगित गैसीय परमाणु की एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति को संदर्भित करती है, जबकि विद्युत ऋणात्मकता किसी परमाणु के द्वारा सहसंयोजक बध में साझे के युग्मित इलेक्ट्रॉन को अपनी ओर खींचने की प्रवृत्ति है। इस प्रकार ये दोनों गुण एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं, जबकि दोनों एक परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति को संदर्भित करते हैं।

प्रश्न 23.
सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत ऋणात्मकता पॉलिंग पैमाने पर 3.0 है। आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे?
उत्तर
यह कथन विवादास्पद है क्योंकि एक परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता उसके सभी यौगिकों में स्थिर नहीं होती है। यह संकरण अवस्था तथा ऑक्सीकरण अवस्था के साथ बदलती है। उदाहरण के लिए, NO, तथा NO में N की विद्युत ऋणात्मकता, ऑक्सीकरण अवस्थाओं में भिन्नता के कारण, भिन्न होती है।

प्रश्न 24.
उस सिद्धान्त का वर्णन कीजिए, जो परमाणु की त्रिज्या से सम्बन्धित होता है,
(i) जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
(ii) जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
उत्तर
(i) जब परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है, तब ऋणायन बनता है। परमाणु के ऋणायन में परिवर्तन के दौरान एक या अधिक इलेक्ट्रॉन परमाणु के संयोजी कोश से जुड़ जाते हैं। नाभिकीय आवेश जनक परमाणु के समान ही रहता है। संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या में वृद्धि, इलेक्ट्रॉनों द्वारा परस्परीय परिरक्षण की अधिकता के कारण, प्रभावी नाभिकीय आवेश को कम कर देती है। परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉन-मेघ विस्तृत हो जाता है अर्थात् आयनिक त्रिज्या बढ़ जाती है।
(ii) जब परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है, तब धनायन बनता है। इस प्रकार प्राप्त धनायन सदैव अपने जनक परमाणु से आकार में छोटा होता है। ऐसा निम्नलिखित कारणों से हो सकता है-

  • संयोजी कोश के विलोपन द्वारा (By elimination of valence shell)-कुछ स्थितियों में, इलेक्ट्रॉन त्यागने पर संयोजी कोश को पूर्णतया विलोपन हो जाता है। बाह्यतम कोश विलुप्त होने के कारण धनायन के आकार में कमी आ जाती है।
  • प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के द्वारा (By increase in effective nuclear charge)-धनायन में, इलेक्ट्रॉनों की संख्या जनक परमाणु से कम होती है। कुल नाभिकीय आवेश समान रहता है। यह प्रभावी नाभिकीय आवेश को बढ़ा देता है। परिणामस्वरूप, इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक दृढ़ता से जुड़े रहते हैं जिससे इनके आकार में कमी आ जाती है।

प्रश्न 25.
किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर
एक तत्त्व के समस्थानिकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या, परमाणु नाभिकीय आवेश तथा आकार समान होता है। इसलिए इनकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान समान होते हैं।

प्रश्न 26.
धातुओं और अधातुओं में मुख्य अन्तर क्या है?
उत्तर
धातुएँ विद्युत धनात्मक तत्त्व हैं तथा एक या अधिक संयोजी इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर धनायनों का निर्माण करती हैं। ये एक अपचायक के रूप में कार्य करती हैं तथा इनकी आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉनिक लब्धि एन्थैल्पी तथा विद्युत ऋणात्मकता का मान कम होता है। ये बेसिक ऑक्साइड्स बनाती हैं। दूसरी तरफ, अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक तत्त्व हैं तथा अपने संयोजी कक्ष में एक या अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति दर्शाती हैं। ये ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करती हैं। इनकी आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तथा विद्युत ऋणात्मकता के मान अधिक होते हैं। ये अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं।

प्रश्न 27.
आवर्त सारणी का उपयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) उस तंव का नाम बताइए जिसके बाह्य उप-कोश में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(ख) उस तत्व का नाम बताइए जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की हो।
(ग) उस तत्व का नाम बताइए जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने की हो।
(घ) उस वर्ग का नाम बताइए जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हों।
उत्तर
(क) F(1s2 2s2 2p5)
(ख) Mg (1s2 2s2 2p6 3s2); Mg → Mg2+ +2 e
(ग) O(1s2 2s2 2p4); 0+2e → 02-
(घ) द्रव धातुएँ : Hg (वर्ग 12) तथा Ga (वर्ग 13) हैं।
द्रव अधातुएँ ब्रोमीन (वर्ग 17) हैं। गैसीय अधातुएँ : फ्लुओरीन तथा क्लोरीन (वर्ग 17), ऑक्सीजन (वर्ग 16), नाइट्रोजन (वर्ग 15) इत्यादि।

प्रश्न 28.
प्रथम वर्ग के तत्वों के लिए अभिक्रियाशीलता का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार है- Li < Na < K < Rb < Cs; जबकि वर्ग 17 के तत्वों में क्रम F > Cl> Br>I है।
इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर
वर्ग 1 के तत्त्व विद्युत धनात्मक तत्त्व होते हैं तथा संयोजी इलेक्ट्रॉन को त्यागकर एकल धनात्मक धनायन बनाते हैं। इनकी क्रियाशीलता आयनन एन्थैल्पी के मान पर निर्भर करती है। यदि आयनन एन्थैल्पी का मान कम है तो क्रियाशीलता अधिक होती है। चूंकि वर्ग में नीचे जाने पर, आयनन एन्थैल्पी का मान घटता है, अतः प्रथम वर्ग के तत्त्वों की क्रियाशीलता वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ती है। (अर्थात् इस क्रम में, Li Cl > Br> I)

प्रश्न 29.
S-, p-, d और f-ब्लॉक के तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर
(i) s-ब्लॉक तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1-2 (अर्थात् ns1 या ns2) होता है।
(ii) p-ब्लॉक तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np1-6 होता है।
(iii) d-ब्लॉक तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-1) d1-10 ns1-2 होता है।
(iv) f-ब्लॉक तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-2) f1-14 (n-1) 4d0-1ns2 होता है।

प्रश्न 30.
तत्व, जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित है, का स्थान आवर्त सारणी में बताइए-
(i) ns2np4, जिसके लिए n = 3 है।
(ii) (n-1) d2 ns2, जब n= 4 है तथा
(iii) (n-2)f7 (n-1) d1 ns2, जब n= 6 है।
उत्तर
(i) दिया गया तत्त्व तीसरे आवर्त (n=3) में उपस्थित है तथा इसके संयोजी कक्ष में 6(2+4) इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। यह एक p-ब्लॉक तत्त्व है क्योंकि विभेदी (differentiating) इलेक्ट्रॉन p-उपकक्ष में प्रवेश करता है।
∴ वर्ग की संख्या = 10+ संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 10+6= 16
इस प्रकार, यह तत्त्व तीसरे आवर्त तथा वर्ग 16 में स्थित है। यह सल्फर (S) है।
(ii) दिया गया तत्त्व चौथे आवर्त (n=4) में स्थित है। यह एक 4-ब्लॉक तत्त्व है क्योंकि d-उपकोश अपूर्ण है।
∴ वर्ग की संख्या = 2+ (n-1)d इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 2+2=4
इस प्रकार यह तत्त्व चौथे आवर्त तथा समूह 4 में स्थित है। यह Ti (टाइटेनियम) है।
(iii) दिया गया तत्त्व छठवें आवर्त में स्थित है। यह एक f-ब्लॉक तत्त्व है क्योंकि विभेदी इलेक्ट्रॉन (n-2)f उपकक्ष में प्रवेश करता है। यह तत्त्व वर्ग 3 में स्थित है क्योंकि सभी f-ब्लॉक के तत्त्वों को तीसरे वर्ग में रखा गया है। यह तत्त्व Gd (gadolinium) है।

प्रश्न 31.
कुछ तत्वों की प्रथम ∆iH1 और द्वितीय ∆iH2 आयनन एन्थैल्पी (kJ mol-1 में) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (∆egH) (kJ mol-1 में) निम्नलिखित है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-12
(क) सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है?
(ख) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है?
(ग) सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है?
(घ) सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु है?
(ङ) ऐसी धातु है, जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड (binary halide), जिनका सूत्र MX, (X= हैलोजेन) है, बनाता है।
(च) ऐसी धातु, जो मुख्यतः MX (X = हैलोजेन) वाले स्थायी सहसंयोजी हैलाइड बनाती है।
उत्तर
(क) तत्त्व V, क्योंकि इस प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान सर्वाधिक है तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान धनात्मक है। यह कर्म क्रियाशील धातु है। यह एक उत्कृष्ट गैस होनी चाहिये।
(ख) तत्त्व II, क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान न्यूनतम तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान कम है। इसे अधिक क्रियाशील धातु होना चाहिए। यह एक क्षारीय धातु होनी चाहिए।
(ग) तत्त्व III, क्योंकि इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान उच्च ऋणात्मक तथा प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान पर्याप्त उच्च है। यह एक हैलोजन (halogen) होना चाहिए।
(घ) तत्त्व IV, क्योंकि इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान उच्च ऋणात्मक तथा प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान काफी कम है। इसे सबसे कम क्रियाशील अधातु होना चाहिए। यह सम्भवतः एक ‘ कम क्रियाशील हैलोजन है।
(ङ) तत्त्व VI, क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान यद्यपि कम है, लेकिन फिर भी क्षार धातुओं से अधिक है। इसे एक मृदा क्षारीय धातु होना चाहिए। यह MX, प्रकार के द्विअंगी हैलाइड का निर्माण करेगा।
(च) तत्त्व I, क्योंकि इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान कम है लेकिन द्वितीय आयतन एन्थैल्पी का मान बहुत अधिक है। यह एक क्षारीय धातु है। यह Li होना चाहिए क्योंकि यह सूत्र MX का स्थायी सहसंयोजी हैलाइड बनाता है।

प्रश्न 32.
तत्वों के निम्नलिखित युग्मों के संयोजन से बने स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्रों की प्रगुक्ति कीजिए-
(क) लीथियम और ऑक्सीजन
(ख) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन
(ग) ऐलुमिनियम और आयोडीन
(घ) सिलिकन और ऑक्सीजन
(ङ) फॉस्फोरस और फ्लुओरीन
(च) 71वाँ तत्व और फ्लुओरीन
उत्तर
(क) लीथियम की संयोजकता (201, वर्ग 1) 1 है, जबकि ऑक्सीजन (2s2 2p4, वर्ग 16) की 2 है। इसलिए, दोनों के मध्य बना द्विअंगी यौगिक Li20 है।
(ख) मैग्नीशियम (3s2, वर्ग 2) की संयोजकता 2 है, जबकि नाइट्रोजन (2s2 2p4, वर्ग 15) की
संयोजकता 3 है। इसलिये दोनों के मध्य बना द्विअंगी यौगिक Mg3N2 है।
(ग) ऐलुमिनियम (3s2 3p1, समूह 13) की संयोजकता 3 है, जबकि आयोडीन (5s2, 5p5, वर्ग 17) की संयोजकता 1 है। इसलिए, दोनों के मध्य बना द्विअंगी यौगिक AII3 है।
(घ) सिलिकॉन (3s2 3p2, वर्ग 14) की संयोजकता 4 है, जबकि ऑक्सीजन (2s2 2p4, वर्ग 17) की संयोजकता 2 है। इसलिए दोनों के मध्य बना द्विअंगी यौगिक SiO2 है।
(ङ) फॉस्फोरस (3s2 3p3, वर्ग 15) की संयोजकता 3 तथा 5 है, जबकि फ्लुओरीन (2s2 2p4, वर्ग 17) की संयोजकता 1 है। इसलिए, दोनों के मध्य बना द्विअंगी यौगिक PF3 अथवा PF5 है।
(च) तत्त्व जिसका परमाणु क्रमांक 71(4f14 5d1 6s2) है, एक लैन्थेनाइड है तथा ल्यूटीशियम : (Lu) है। यह वर्ग 3 में स्थित है। इसकी संयोजकता 3 है। फ्लु ओरीन (2s2 2p5, वर्ग 17) की संयोजकता 1 है। इसलिए, दोनों के मध्य बना द्विअंगी यौगिक LuF, है।

प्रश्न 33.
आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त निम्नलिखित में से किसको व्यक्त करता है?
(क) परमाणु संख्या
(ख) परमाणु द्रव्यमान
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या
(घ) दिगंशी क्वाण्टम संख्या
उत्तर
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या
आधुनिक आवर्त सारणी में, प्रत्येक आवर्त एक नवीन कक्ष के भरने के साथ प्रारम्भ होता है।

प्रश्न 34.
आधुनिक आवर्त सारणी के लिए निम्नलिखित के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है।
(क) p-ब्लॉक में 6 स्तम्भ हैं, क्योंकि p-कोश के सभी कक्षक भरने के लिए अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ख) d-ब्लॉक में 8 स्तम्भ हैं, क्योंकि d-उपकोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ग) प्रत्येक ब्लॉक में स्तम्भों की संख्या उस उपकोश में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
(घ) तत्व के इलेक्ट्रॉन विन्यास को भरते समय अन्तिम भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉन को उपकोश उसके दिगंशी क्वाण्टम संख्या को प्रदर्शित करता है।
उत्तर
कथन (ख) असत्य है। 4-ब्लॉक में 10 स्तम्भ हैं क्योंकि एक d-उपकक्ष में अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन ही व्यवस्थित हो सकते हैं।

प्रश्न 35.
ऐसा कारक, जो संयोजकता इलेक्ट्रॉन को प्रभावित करता है, उस तत्व की रासायनिक , प्रवृत्ति भी प्रभावित करता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारक संयोजकता कोश को
प्रभावित नहीं करता?
(क) संयोजक मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ख) नाभिकीय आवेश (z)
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान
(घ) क्रोड इलेक्ट्रॉनों की संख्या
उत्तर
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान। नाभिकीय द्रव्यमान संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता है।

प्रश्न 36.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज F, Ne और Na+ का आकार इनमें से किससे प्रभावित : होता है?
(क) नाभिकीय आवेश (Z)
(ख) मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ग) बाह्य कक्षकों में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्यक्रिया
(घ) ऊपर दिए गए कारणों में से कोई भी नहीं, क्योंकि उनका आकार समान है।
उत्तर
(क) नाभिकीय आवेश। समइलेक्ट्रॉनिक आयनों की त्रिज्या नाभिकीय आवेश के बढ़ने पर घटती है। दी गई समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज में विभिन्न नाभिकीय आवेश हैं और इस प्रकार उनके आकार भिन्न हैं। इनका आकार निम्न क्रम में घटता है-
F (+9)> Ne(+10)> Na+ (+11)

प्रश्न 37.
आयनन एन्थैल्पी के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा असत्य/गलत है?
(क) प्रत्येक उत्तरोत्तर इलेक्ट्रॉन से आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है।
(ख) क्रोड उत्कृष्ट गैस के विन्यास से जब इलेक्ट्रॉन को निकाला जाता है, तब आयनन एन्थैल्पी का मान अत्यधिक होता है।
(ग) आयनन एन्थैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करती है।
(घ) कम मान वाले कक्षकों से अधिक n मान वाले कक्षकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।
उत्तर
कथन (घ) असत्य है। अधिक » मान वाले कक्षकों से इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है, क्योंकि निकलने वाला इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होता है।

प्रश्न 38.
B, AI, Mg, K तत्वों के लिए धात्विक अभिलक्षण का सही क्रम इनमें कौन-सा है?
(क) B > Al> Mg > K
(ख) Al> Mg > B > K
(ग) Mg > Al> K > B
(घ) K > Mg > Al> B
उत्तर
(घ) K> Mg> Al> B
यह क्रम इसलिए सही है क्योंकि धात्विक गुण आवर्त में आगे बढ़ने पर घटता है। इसलिए, Al, Mg तथा K के धात्विक गुण इस क्रम में होंगे-K > Mg > Al। इसके अतिरिक्त धात्विक गुण एक वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ते हैं। अत: B को Al की तुलना में कम धात्विक होना चाहिए।

प्रश्न 39.
तत्वों B, C, N, F और Si के लिए अधातु अभिलक्षण का इनमें से सही क्रम कौन-सा है?
(क) B > C> Si> N > F
(ख) Si> C> B > N > F
(ग) F> N > C> B > Si
(घ) F > N > C > Si > B
उत्तर
(ग) F > N >C>B> Si
यह इसलिए है क्योकि अधातु अभिलक्षण एक आवर्त में बायें से । दायें ओर जाने पर बढ़ते हैं तथा वर्ग में नीचे जाने पर घटते हैं।

प्रश्न 40.
तत्वों F, CI, O और N तथा ऑक्सीकरण गुणधर्मों के आधार पर उनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता का क्रम निम्नलिखित में से कौन-से तत्वों में है?
(क) F > Cl> O > N
(ख) F> O> Cl> N
(ग) Cl> F> O > N
(घ) O> F> N > Cl
उत्तर
(ख) F>O>Cl>N
तत्त्वों का ऑक्सीकारक गुणधर्म एक आवर्त में बायें से दायें चलने पर बढ़ता है तथा वर्ग में नीचे जाने पर घटता है। ऑक्सीजन Cl की तुलना में एक प्रबल ऑक्सीकारक पदार्थ है क्योंकि 0 अधिक विद्युत ऋणात्मक है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक तत्त्व में अन्तिम इलेक्ट्रॉन के लिए चारों क्वाण्टम संख्याओं के माने n = 5;1 = 1; m = -1; s = [latex]-\frac { 1 }{ 2 } [/latex], हैं। तत्त्व है।
(i) आन्तरिक संक्रमण तत्त्व
(ii) संक्रमण तत्त्व
(iii) अक्रिय गैस
(iv) क्षारीय धातु
उत्तर
(iii) अक्रिय गैस

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सी धातु एक से अधिक ऑक्सीकरण अवस्था प्रकट करती है?
(i) Na
(ii) Mg
(iii) Al
(iv) Fe
उत्तर
(iv) Fe

प्रश्न 3.
निम्नलिखित आयनों की त्रिज्या का सही क्रम है ।
(i) F <O2-< Na+<Mg2+
(ii) Mg2+<Na+<F <O2-
(iii) Na+ <Mg2+<O2-<F
(iv) O2-<F < Na+< Mg2+
उत्तर
(ii) Mg2+ <Na+ <F <O2-

प्रश्न 4.
सर्वाधिक धन-विद्युतीय तत्त्व है।
(i) [He]2s1
(ii) [He]2s2
(iii) [Xe]6s1
(iv) [Xe]6s2
उत्तर
(iii) [Xe]6s1

प्रश्न 5.
धन विद्युती लक्षण का सही क्रम है
(i) Cs > Rb >K > Na> Li।
(ii) Rb>Cs >K> Na >Li
(iii) Li> Na> K> Rb>Cs
(iv) K> Na> Rb>Cs>Li
उत्तर
(i) Cs > Rb >K >Na >Li।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित धनायनों की त्रिज्याओं का सही क्रम है।
(i) Li+ > Na+ > Na2+ > Be2+
(ii) Na+ > Mg2+ >Li+ > Be2+
(iii) Na+ > Li+ > Mg2+ > Be2+
(iv) Mg2+ > Na2+ > Li+ > Be2+
उत्तर
(ii) Na+ > Mg2+ > Li+ > Be2+

प्रश्न 7.
ऋण विद्युती लक्षण का सही क्रम है।
(i) I> Br>Cl> F
(ii) Br>Cl> F>I
(iii) F>Cl> Br>I
(iv) Cl> Br>I> F
उत्तर
(iii) F> Cl> Br> I

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से ऋणायनों की त्रिज्याओं का सही क्रम है।
(i) F > Cl > S2- >O2-
(ii) S2- > Cl > O2- > F
(iii) Cl > S2- > O2- > F
(iv) O2- > Cl > F > S2-
उत्तर
(ii) S2- > Cl >O2- > F

प्रश्न 9.
आयन जिसका प्रथम आयनन विभव निम्न समइलेक्ट्रॉनिक आयनों में सबसे अधिक है, .
(i) Ca2+
(ii) Cl
(iiii) K+
(iv) S2-
उत्तर
(i) Ca2+

प्रश्न 10.
निम्नलिखित समइलेक्ट्रॉनिक आयनों में सबसे छोटा आयन है।
(i) Na+
(ii) Mg2+
(iii) Al3+
(iv) Si4+
उत्तर
(iv) Si4+

प्रश्न 11.
प्रथम आयनन ऊर्जा का सही क्रम है।
(i) C> B> Be> Li
(ii) C> Be> B> Li
(iii) B>C> Be> Li
(iv) Be> Li> B>C
उत्तर
(ii)
C> Be> B> Li

प्रश्न 12.
निम्न में से किसकी आयनन ऊर्जा (आयनन विभव) सबसे अधिक है ?
(i) B
(ii) N
(iii) C
(iv) O
उत्तर
(ii) N

प्रश्न 13.
निम्न में किसका आकार सबसे बड़ा है?
(i) Mg
(ii) Ba
(iii) Be
(iv) Ra
उत्तर
(iv) Ra

प्रश्न 14.
इलेक्ट्रॉन बन्धुता अधिकतम होती है।
(i) F की
(ii) CI की
(iii) Br की
(iv) I की
उत्तर
(i) Cl की

प्रश्न 15.
F, Cl, Br तथा I में तत्त्वों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता का घटता क्रम है।
(i) F> Cl> Br>I
(ii) I> Br>Cl> F
(iii) F > Br> Ci>I
(iv) Cl> F > Br>I
उत्तर
(iv) Cl> F > Br>I

प्रश्न 16.
सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्त्व है।
(i) O
(ii) F
(iii) Cl
(iv) N
उत्तर
(ii) F

प्रश्न 17.
C, N, P और Si तत्त्वों की विद्युत ऋणात्मकता के बढ़ने का क्रम है।
(i) C, N, Si, P
(ii) N, Si, C, P
(iii) Si, P, C, N
(iv) P, Si, N, C
उत्तर
(iii) Si, P, C, N

प्रश्न 18.
निम्न में कौन-सा अम्लीय है ?
(i) Na20
(ii) MgO
(iii) SiO
(iv) FeO
उत्तर
(iii) SiO

प्रश्न 19.
दिए गए अम्लों की अम्लीयता का सही क्रम है
(i) HClO4 < HClO3 < HClO2 < HClO
(ii) HClO< HClO2 < HClO3 < HClO4
(iii) HClO < HClO4 < HClO3 < HClO2
(iv) HCIO4 <HClO2 <HClO3 < HClO
उत्तर
(ii) HClO<HClO2 <HCIO3 <HClO4

प्रश्न 20.
निम्नलिखित में किस अणुक प्रजाति में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं?
(i) N2
(ii) F2
(iii) O2
(iv) O2-2
उत्तर
(iii) O2

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
न्यूलैण्ड का अष्टक नियम लिखिए।
उत्तर
न्यूलैण्ड (1864) ने ज्ञात किया कि तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भारों के क्रम में व्यवस्थित करने पर प्रत्येक आठवें तत्व के गुण प्रथम तत्वों के गुणों से मिलते हैं। इसे ही न्यूलैण्ड का अष्टक नियम कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-13

प्रश्न 2.
परमाणु क्रमांक 19 वाले तत्त्व का आवर्त सारणी में स्थान कारण सहित लिखिए।
उत्तर
परमाणु क्रमांक 19 वाले तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2 , 2s2 2p6 , 3s2 3p6 ,4s1 होता है। चूंकि इसमें चार कोश सम्मिलित हैं; अतः यह चौथे आवर्त का तत्त्व है। चूंकि इसके बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन s कक्षक में है; अतः यह s-ब्लॉक तथा प्रथम समूह का तत्त्व है।

प्रश्न 3.
आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों के स्थान की विवेचना कीजिए।
उत्तर
उत्कृष्ट (अक्रिय) गैसों के बाह्यकोश और आन्तरिक कोश पूर्ण भरे होते हैं। हीलियम (He) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 152 तथा अन्य उत्कृष्ट गैसों के बाह्यकोश का विन्यास ns- np है। इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों में समरूपता, रासायनिक निष्क्रियता और मिलते-जुलते अन्य लक्षणों के कारण उत्कृष्ट गैसों को एक साथ आवर्त सारणी के शून्य वर्ग (18वें) में रखा गया है।

प्रश्न 4.
आवर्त सारणी के किन वर्गों के तत्त्वों को p-ब्लॉक तत्त्व कहते हैं और क्यों?
उत्तर
जिन तत्त्वों में अन्तिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के p-उपकोश में प्रवेश करता है, p-ब्लॉक तत्त्व कहलाते हैं। आवर्त सारणी में IIIA से VIIA तथा शून्य वर्ग के तत्त्व p-ब्लॉक तत्त्व कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
d-ब्लॉक तत्त्वों (संक्रमण तत्त्व) को परिभाषित करते हुए उनकी स्थिति बताइए। या संक्रमण तत्त्व किन्हें कहते हैं? दीर्घ आवर्त सारणी में इनको कहाँ रखा गया है? ऐसे किन्हीं चार तत्त्वों के नाम बताइए।
उत्तर
जिन तत्त्वों में अन्तिम इलेक्ट्रॉन बाह्य कोश (n) से पिछले कोश के 4-ऑर्बिटलों में भरते हैं, d-ब्लॉक तत्त्व या संक्रमण तत्त्व कहलाते हैं। 4-ब्लॉक तत्त्वों के बाह्य कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns’ या ns होता है तथा पिछले कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-1)s2 , p6 ,d1से10 होता है। आवर्त सारणी में संक्रमण तत्त्वों को IB से VIIB उपवर्गों तथा VIII उपवर्ग में -तथा p-ब्लॉक के तत्त्वों के बीच 10 ऊर्ध्वाधर खानों में रखा गया है। उदाहरणार्थ-स्कैण्डियम (Sc), टाइटेनियम (Ti), वैनेडियम (V), क्रोमियम (Cr) आदि।

प्रश्न 6.
कारण देते हुए समझाइए कि संक्रमण तत्त्वों में उत्प्रेरक गुण होता है।
उत्तर
संक्रमण तत्त्वों व उनके यौगिकों में उत्प्रेरक गुण होता है। इन धातुओं का यह गुण उनकी परिवर्ती संयोजकता एवं उनके पृष्ठ में स्थित परमाणुओं की मुक्त संयोजकताओं के कारण होता है।

प्रश्न 7.
किसी तत्त्व का परमाणु क्रमांक 25 है। आवर्त सारणी में इसका स्थान निर्धारित कीजिए।
उत्तर
परमाणु क्रमांक 25 वाला तत्त्व मैंगनीज (Mn) है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार है।
Mn (25)= 1s2,2s2 2p6,3s2 3p6 3d5,4s2
इस तत्त्व में कुल चार कोश हैं। अत: यह चौथे आवर्त का तत्त्व है। इसमें अन्तिम इलेक्ट्रॉन अन्तिम से दूसरे कोश के 4-उपकोश में जाता है; अतः यह दीर्घ आवर्त सारणी के d-ब्लॉक में है तथा यह एक संक्रमण तत्त्व है और सातवें समूह में उपस्थित है।

प्रश्न 8.
निम्न में सबसे छोटा आयन कौन-सा है ? कारण सहित समझाइए। )
Na+, Mg2+, Al3+
उत्तर
सबसे छोटा आयन Al3+ है। किसी आवर्त में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर परमाणु त्रिज्याएँ घटती हैं क्योंकि परमाणु क्रमांक वृद्धि से प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।

प्रश्न 9.
Li+,Mg2+,K+,Al3+ को बढ़ते हुए आयनिक त्रिज्याओं के क्रम में लिखिए।
उत्तर
Li+< Al3+ < Mg2+ < K+

प्रश्न 10.
Ca2+ तथा K+ में किसकी आयनिक त्रिज्या कम है व क्यों ?
उत्तर
Ca2+ तथा K+ के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार हैं।
Ca2+ = 1s2,2s2 2p6,3s2 3p6
K+ = 1s2,2s2 2p6,3s2 3p6

परन्तु Ca2+ के नाभिक में धनावेश 20 इकाई, K+ के नाभिक में उपस्थित धनावेश 19 इकाई से अधिक है। अत: यह बाह्य इलेक्ट्रॉनों को अधिक तीव्र बल से अपनी ओर आकर्षित करता है। फलतः इसकी आयनिक त्रिज्या कम होती है।

प्रश्न 11.
सोडियम प्रबल विद्युत धनात्मक धातु है जबकि क्लोरीन प्रबल विद्युत ऋणात्मक अधातु कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
सोडियम परमाणु के बाह्यतम कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। अतः यह इसे त्यागकर स्थायी होने की तीव्र प्रवृत्ति रखता है। अतः यह प्रबल वैद्युत धनात्मक है। इसके विपरीत, क्लोरीन परमाणु के ब्राह्यतम कोशे में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थायी विन्यास प्राप्त करने की तीव्र प्रवृत्ति रखता है। अर्थात् यह प्रबल वैधुत ऋणात्मक है।

प्रश्न 12.
C, N, 0 तथा F को इनके बढ़ते हुए प्रथम आयनन विभव के अनुसार व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर
C, N, 0 तथा F को इनके बढ़ते हुए प्रथम आयनन विभव के अनुसार इस प्रकार व्यवस्थित करेंगे
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-14

प्रश्न 13.
अक्रिय गैसों के आयनन विभव बहुत ऊँचे होते हैं, क्यों ?
उत्तर
आवर्त में उच्चतम आयनन विभव अक्रिय गैस का होता है, क्योंकि उसका संवृत्त कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बहुत स्थायी होता है।

प्रश्न 14.
बेरीलियम का प्रथम आयनन विभव बोरॉन से अधिक है। समझाइए।
उत्तर
बेरीलियम का प्रथम आयनन विभव बोरॉन से अधिक है क्योंकि Be के बाह्यकोश में s ऑर्बिटल पूर्ण भरे हुए (ns2) हैं। यह एक अधिक स्थायी व्यवस्था है।

प्रश्न 15.
कारण सहित बताइए कि नाइट्रोजन का प्रथम आयनन विभव ऑक्सीजन से अधिक होता है।
उत्तर
7N= 1s2,2s2,2p1x,2p1y, 2p1z;
8O= 1s2, 2s2,2p2x,2p1y, 2p1z
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से स्पष्ट है कि नाइट्रोजन के 2p-ऑर्बिटल आधे भरे हुए हैं। नाइट्रोजन के p-ऑर्बिटल में समदिश चक्रण के 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं जिससे N का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास O की अपेक्षा अधिक स्थायी है। अत: N का प्रथम आयनन विभव O से अधिक होता है।

प्रश्न 16.
तत्त्वों के द्वितीय आयनन विभव का मान सदैव प्रथम आयनन विभव से अधिक क्यों होता है?
उत्तर
परमाणु से प्रथम इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद बने धनायन से दूसरे इलेक्ट्रॉन का निकलना बहुत कठिन हो जाता है, क्योंकि शेष बचे इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ जाता है। अतः द्वितीय आयनन विभव का मान प्रथम आयनन विभवे से अधिक होता है।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित तत्त्वों को बढ़ते हुए आयनन विभव के क्रम में लिखिए
6A12,8B16,8C16,9D18
उत्तर
उपर्युक्त तत्त्वों के आयनन विभव का बढ़ता क्रम निम्नवत् है-
6A12 < 8B16 <8C16 <9D18

प्रश्न 18.
फॉस्फोरस का प्रथम आयनन विभव सल्फर से अधिक होता है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
चूँकि आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर चलने पर आयनन विभव घटता है; इसलिए फॉस्फोरस (पंचम वर्ग) का प्रथम आयनन विभव सल्फर (षष्ठम् वर्ग) से अधिक होता

प्रश्न 19.
P, S, Cl तथा F में से किसकी ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन-लब्धि एन्थैल्पी अधिकतम तथा किसकी न्यूनतम होगी? समझाइए।
उत्तर
हम जानते हैं कि आवर्त में बायीं ओर से दायीं ओर बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन-लब्धि एन्थैली बढ़ती जाती है, जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर बढ़ने पर यह घटती जाती है। 3p-कक्षक में इलेक्ट्रॉन प्रवेश कराने की तुलना में जब 2p-कक्षक में इलेक्ट्रॉन जाता है, तब इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अधिक होता है। अतः अधिकतम ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन-लब्धि एन्थैल्पी क्लोरीन की होगी तथा सबसे कम ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन-लब्धि एन्थैल्पी फॉस्फोरस की होगी।

प्रश्न 20.
Cu+ आयन प्रतिचुम्बंकीय है, जबकि Cu2+ आयन अनुचुम्बकीय है, क्यों? समझाइए।
उत्तर
Cu+ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार है।
Cu+:1s2,2s2 2p6,3s2 3p6 3d10
Cu+आयन में सभी उपकोश पूर्ण भरे हैं और सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं, अत: Cu+ प्रतिचुम्बकीय है।
Cu2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार है।
Cu2+ : 1s2,2s2 2p6,3s2 3p6 3d9
Cu2+ आयन में 3d उपकोश अपूर्ण है तथा इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
अत: Cu2+ आयन अनुचुम्बकीय है।

प्रश्न 21.
Mg2+,O2-,Na+ तथा F को आकार के घटते हुए क्रम में लिखिए।
उत्तर
O2->F> Na+ > Mg2+

प्रश्न 22.
समझाइए कि क्यों Mg2+ आयन O2- आयन से छोटा है, यद्यपि दोनों की इलेक्ट्रॉनिक संख्या समान है?
उत्तर
Mg2+ आयन में 12 प्रोटॉन तथा 02- आयन में 8 प्रोटॉन हैं, फलत: Mg2+ आयन में उसके इलेक्ट्रॉनों पर लगने वाला नाभिकीय आकर्षण बल O2- से ज्यादा होगा जिससे इसका आकार O2- से छोटा हो जाएगा।

प्रश्न 23.
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर आयनन ऊर्जा बढ़ती है, किन्तु Al की प्रथम आयनन ऊर्जा Mg से कम होती है। क्यों? समझाइए।
उत्तर
Al: 13 = 1s2, 2s2 2p6, 3s2 3p1
Mg : 12 = 1s2, 2s2 2p6, 3s2
Mg के 3s के इलेक्ट्रॉन की वेधन मात्रा अर्थात् नाभिक से निकटता AI के 3p की तुलना में अधिक है। इसलिए Mg का प्रथम आयनन विभव Al से अधिक है।

प्रश्न 24.
N3-,Na+,F,O2- तथा Mg2+ को आयनिक आकार के बढ़ते क्रम में लिखिए।
उत्तर
Mg2+<Na+ <F <O2- <N3-

प्रश्न 25.
निम्न को समझाइए।
F आयन Na+ आयन से बड़े आकार का होता है।
उत्तर
F में इलेक्ट्रॉन की संख्या = 10 तथा प्रोटॉन की संख्या = 9
Na+ में इलेक्ट्रॉन की संख्या = 10 तथा प्रोटॉन की संख्या =11
Na+ में कार्यरत् प्रभावी नाभिकीय आवेश F से अधिक है इसलिए F का आकार Na+ से बड़ा है।

प्रश्न 26.
अक्रिय गैसों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता शून्य होती है, क्यों? समझाइए।
उत्तर
अक्रिय गैसों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता शून्य होती है, क्योंकि इनके कक्षों के इलेक्ट्रॉन कक्षक पूर्णतया भरे होने के कारण इनमें अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन प्रवेश नहीं कर सकता है।

प्रश्न 27.
नाइट्रोजन की इलेक्ट्रॉन बन्धुता कार्बन से कम होती है। कारण दीजिए।
उत्तर
क्योंकि नाइट्रोजन में 5 उपकोश पूर्ण तथा p उपकोश आधा भरा होता है।

प्रश्न 28.
F, CI, Br, I को उनके बढ़ते हुए इलेक्ट्रॉन बन्धुता के क्रम में तथा Li, Na, K, Rb को उनके बढ़ते हुए विद्युत ऋणात्मकता के क्रम में लिखिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-15

प्रश्न 29.
F, O, Cl की इलेक्ट्रॉन बन्धुता घटने का क्रम लिखिए।
उत्तर
F, O, Cl की इलेक्ट्रॉन बन्धुता घटते क्रम में निम्नवत् है–
Cl> F>O

प्रश्न 30.
O, F, Be, C, N को घटती हुई इलेक्ट्रॉन बन्धुता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर
O, F, Be, C तथा N की घटती हुई इलेक्ट्रॉन बन्धुता का क्रम निम्नवत् है–
F>O>N>C> Be

प्रश्न 31.
Cl,s2-,ca2+,Ar को आकार के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर
Cl,s2-,Ca2+ तथा Ar का बढ़ते हुए आकार को क्रम निम्नवत् है-
Ca2+< Ar<Cl,S2-

प्रश्न 32.
F, CI, Br तथा I को बढ़ती हुई ऋण-विद्युतता के अनुसार व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर
बढ़ती हुई ऋण-विद्युतता के अनुसार F, CI, Br तथा I की व्यवस्था इस प्रकार है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-16

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी के किन-किन वर्गों के तत्त्वों को 5-ब्लॉक तत्त्व कहते हैं और क्यों ? इन तत्वों के किन्हीं चार मुख्य अभिलक्षणों को लिखिए।
उत्तर
तत्त्वों के परमाणु क्रमांक की वृद्धि के साथ जब उनके बाह्यतम कोश के -उपकोश में इलेक्ट्रॉन प्रवेश करते हैं, उन्हें ब्लॉक तत्त्व कहते हैं। इन तत्त्वों के बाह्य कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास या अभिलाक्षणिक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns’ या nsहोता है तथा (n-1) कोश में प्रायः 8 इलेक्ट्रॉन (H, Li वे Be को छोड़कर) होते हैं।

वर्ग 1-A (Li, Na, K, Rb, Cs, Fr) तथा वर्ग II-A (Be, Mg, Ca, Sr, Ba, Ra) के तत्त्व -ब्लॉक तत्त्व : होते हैं। हाइड्रोजन और हीलियम भी ब्लॉक के तत्त्व हैं। इनमें I-A उपवर्ग के तत्त्वों को क्षारीय धातु (H को छोड़कर) कहते हैं तथा II-A उपवर्ग के तत्त्वों को क्षारीय मृदा धातुएँ कहते हैं।
S-ब्लॉक के तत्त्वों के गुणधर्म

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-इन तत्त्वों के बाह्य कोश के 3-उपकोश में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन तथा उससे पहले कोश में सभी उपकोश पूर्ण भरे होते हैं।
  2. संयोजकता—इन तत्त्वों की एक निश्चित संयोजकता होती है, जो उनके बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है; अतः I-A के क्षार धातुओं (जैसे-Li, Na, K आदि) की संयोजकता 1 तथा II-A के क्षारीय मृदा धातुओं (जैसे-Mg, Ca, Sr) की संयोजकता 2 होती है।
  3. परमाणु त्रिज्या–हाइड्रोजन तथा हीलियम को छोड़कर सभी 5-ब्लॉक तत्त्वों की परमाणु त्रिज्या अपेक्षाकृत काफी बड़ी होती है; जैसे-Li (1.23 A), Mg (1.36 A) आदि।।
  4. आयनन विभव-हाइड्रोजन तथा हीलियम को छोड़कर, सभी 5-ब्लॉक तत्त्वों के आयनन विभव निम्न होते हैं; जैसे—Li (5.4 eV), Mg (7.6 ev) आदि। इस कारण ये तत्त्व प्रबल धन-विद्युती (electropositive) हैं तथा बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं।
    उदाहरणार्थ-Na+, K+, Mg2+, Ca2+ आदि।

प्रश्न 2.
d-ब्लॉक तत्त्वों के प्रमुख लक्षण (विशेषताएँ या गुण क्या हैं?
उत्तर
d-ब्लॉक तत्त्वों को संक्रमण तत्त्व कहते हैं। इनके मुख्य लक्षण/गुण/विशेषताएँ इस प्रकार

  1. इन तत्त्वों में बाह्य कोश (n) से पिछले कोश (n-1) के 4-ऑर्बिटलों में इलेक्ट्रॉन भरते हैं। इन तत्त्वों के बाह्य कोश में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन तथा उससे पिछले कोश में 9 से 18 इलेक्ट्रॉन तक होते हैं।
  2. ये परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं।
  3. ये सभी तत्त्व धातु हैं। इन धातुओं के क्वथनांक, गलनांक तथा घनत्व ऊँचे होते हैं। ये सभी | तत्त्व ऊष्मा तथा वैद्युत के कुचालक होते हैं और मिश्र धातु बनाने का गुण भी व्यक्त करते हैं।
  4. ये तत्त्व अनुचुम्बकीय (paramagnetic) होते हैं, क्योंकि (n-1) 4-उपकोश में प्रायः अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  5. इन तत्त्वों के जिन आयनों में (n-1)d उपकोश पूरा भरा नहीं होता है उनके आयन तथा यौगिक रंगीन होते हैं; जैसे-Cu2+ आयन (4) तथा क्यूप्रिंक यौगिक नीले रंग के होते हैं।
  6. ये तत्त्व और इनके यौगिक उत्प्रेरक गुण प्रदर्शित करते हैं।
  7. ये संकर आयन बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं।

प्रश्न 3.
आयनन विभव की परिभाषा लिखिए। किसी वर्ग में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ आयनन विभव/ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर
किसी तत्त्व के एक विलग, (isolated) गैसीय परमाणु में से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए जितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे तत्त्व का आयनन विभव या प्रथम आयनन विभव कहते हैं। इसी प्रकार दूसरे तथा तीसरे इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकालने के लिए प्रयुक्त ऊर्जा को क्रमशः द्वितीय आयनन विभव तथा तृतीय आयनन विभव कहते हैं।
आयनन विभव को इलेक्ट्रॉन वोल्ट (ev) या किलो कैलोरी प्रति मोल (kcal/mol) या किलो जूल प्रति मोल (kJ/mol) में व्यक्त करते हैं। किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर अर्थात् परमाणु क्रमांक में वृद्धि से नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है और परमाणु का आकार कम होने लगता है जिससे परमाणु के आयनीकरण में अधिक ऊर्जा प्रयुक्त होती है जिससे आयनन विभव का मान बढ़ जाता है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-17
किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर अर्थात् परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ इनके परमाणु आकार में वृद्धि होती है जिससे नाभिकीय आवेश का बाहरी कक्षाओं के इलेक्ट्रॉन पर आकर्षण कम हो जाता है। और इलेक्ट्रॉनों को निकालने में कम ऊर्जा लगती है जिससे आयनन विभव का मान कम हो जाता है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-18

प्रश्न 4.
इलेक्ट्रॉन बन्धुता की परिभाषा दीजिए। क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बन्धुता फ्लोरीन से अधिक है। स्पष्ट कीजिए।
या
आवर्त सारणी में किसी आवर्त तथा वर्ग में इलेक्ट्रॉन बन्धुता में क्या परिवर्तन होता है? समझाइए।
उत्तर
किसी तत्त्व के परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋण आयन बनने में उत्सर्जित ऊर्जा को उस तत्त्व की इलेक्ट्रॉन बन्धुता कहते हैं। ऊर्जा का उत्सर्जन जितना अधिक होगा, इलेक्ट्रॉन बन्धुता उतनी ही अधिक होगी। हैलोजनों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता सबसे अधिक होती है। इलेक्ट्रॉन बन्धुता इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) प्रति परमाणु में व्यक्त की जाती है तथा E या E, अक्षरों द्वारा व्यक्त की जाती है।

Cl+e → Cl + E यहाँ E = 3.61 ev

आवर्त में आगे की ओर जाने पर इलेक्ट्रॉन बन्धुता बढ़ती है तथा वर्ग में नीचे की ओर जाने पर यह घटती है।

क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बन्धुता फ्लोरीन से अधिक है क्योंकि फ्लोरीन परमाणु की त्रिज्या बहुत छोटी एवं इलेक्ट्रॉन घनत्व बहुत उच्च होने के कारण फ्लोरीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन डालना ऊर्जा की दृष्टि से क्लोरीन परमाणु की तुलना में कुछ कम अनुकूल होता है। इसलिए फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बन्धुता क्लोरीन से कम है।

प्रश्न 5.
वैद्युत ऋणात्मकता किसे कहते हैं? आवर्त सारणी में बाएँ से दाएँ जाने पर वैद्युत ऋणात्मकता किस प्रकार परिवर्तित होती है?
या
वैद्युत ऋणात्मकता पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
किसी यौगिक के परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की प्रवृत्ति को उस परमाणु की वैद्युत ऋणात्मकता कहा जाता है। वे परमाणु जिनके नाभिक अधिक धनात्मक होते हैं और जिनकी त्रिज्याएँ कम होती हैं, अधिक वैद्युत ऋणात्मक होते हैं।

आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर अर्थात् परमाणु क्रमांक में वृद्धि से वैद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है क्योंकि परमाणु त्रिज्याएँ घटती हैं, जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे आने अर्थात् परमाणु क्रमांक बढ़ने से वैद्युत ऋणात्मकता प्राय: घटती है क्योंकि परमाणु त्रिज्याएँ क्रम से बढ़ती हैं। उदाहरणार्थ।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 Classification of Elements and Periodicity in Properties img-19अक्रिय गैसों (Ar, Ne) इत्यादि में इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की प्रवृत्ति नहीं होती है, अत: उनकी वैद्युत ऋणात्मकता शून्य होती है।
उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट है कि फ्लोरीन हैलोजन वर्ग में सबसे ऊपर है अत: इसकी वैद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त नियम के आधार पर बनी दीर्घ आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
दीर्घाकार आवर्त सारणी का निर्माण बोर के परमाणु की कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों के वितरण के सिद्धान्त के आधार पर हुआ है। अतः इसे बोर की आवर्त सारणी भी कहते हैं। इस सारणी के मुख्य लक्षण/विशेषताएँ/गुण इस प्रकार हैं।

  1. दीर्घाकार आवर्त सारणी में मेंडलीव की आवर्त सारणी की भाँति ही क्षैतिज पंक्तियों की संख्या 7 है जिन्हें आवर्त कहते हैं (अर्थात् आवर्तों की कुल संख्या 7 है) जबकि ऊर्ध्वाधर स्तम्भों की कुल संख्या 18 है जिन्हें वर्ग या समूह अथवा परिवार या फेमिलीज कहते हैं, अर्थात् इनमें वर्गों की कुल संख्या 18 है। इस आवर्त सारणी में बाईं ओर से दाईं ओर चलने पर उपर्युक्त वर्गों को निम्नलिखित रूप में व्यवस्थित किया गया है।
    I-A, II-A, III-B, IV-B, V-B, VI-B, VII-B, VIII, VIII, VIII, I-B, II-B, III-A, IV-A, V-A, VI-A, VII-A तथा शून्य। IUPAC पद्धति के अनुसार आजकल ये वर्ग क्रमशः 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17 व 18 तक वर्गों के रूप में भी व्यक्त किए जाते हैं। इन वर्गों को आजकल क्रसश: 1 से 18 वर्गों के रूप में भी व्यक्त किया जाता है। , इनमें VIII वर्ग में तीन ऊर्ध्वाधर स्तम्भ हैं, अर्थात् VIII वर्ग तीन ऊध्र्वाधर स्तम्भों में रखा गया है।
  2. इस सारणी के आवर्गों में पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें तथा छठे आवर्गों में क्रमश: तत्त्वों की संख्याएँ 2, 8, 8, 18 तथा 32 हैं, इनको मैजिक संख्याएँ कहते हैं, जबकि सातवाँ आवर्त अपूर्ण है।
  3. इस सारणी में छठे आवर्त के 14 तत्त्वों, परमाणु क्रमांक 58 से 71 तक को और सातवें आवर्त के 14 तत्त्वों, परमाणु क्रमांक 90 से 103 तक को दो श्रेणियों में क्रमशः लैन्थेनाइड तथा ऐक्टिनाइड के रूप में सारेणी के नीचे रखा गया है।
  4. प्रत्येक आवर्त का प्रथम तत्त्व क्षार धातु तथा अन्तिम तत्त्व अक्रिय गैस है; जैसे-तृतीय आवर्त का पहला तत्त्व Li (क्षार धातु) तथा अन्तिम तत्त्व Ne (अक्रिय गैस) है।
  5. इस सारणी में तत्त्वों को परमाणु क्रमांक के वृद्धि क्रम में उस समय तक श्रेणीबद्ध किया गया है जब तक कि समान गुण वाला तत्त्व पुन: नहीं आ गया है।
  6. इस सारणी में प्रत्येक आवर्त में एक नई मुख्य क्वाण्टम संख्या के साथ बाह्यतम कक्ष में ” इलेक्ट्रॉन भरना शुरू होता है और बाह्यतम कक्ष के पूर्ण होने के साथ आवर्त समाप्त हो जाता है। किसी आवर्त की क्रम संख्या उस आवर्त के तत्त्वों की बाह्यतम कक्ष की मुख्य क्वाण्टम संख्या होती है।
  7. इस सारणी में शून्य वर्ग के तत्त्वों को अक्रिय गैस कहते हैं; क्योंकि इनकी सभी उपकक्षाएँ पूर्ण होती हैं।
  8. इस सारणी में I-A उपवर्ग (H को छोड़कर) के तत्त्वों को क्षारीय धातु तथा II-A उपवर्ग के तत्त्वों को क्षारीय मृदा धातुएँ कहते हैं।
  9. इस सारणी में III-A, IV-A, V-A, VI-A तथा VII-A उपवर्गों या वर्गों में तत्त्वों को सामान्य .तत्त्व कहते हैं, जिसमें धातु, अधातु एवं उपधातु हैं।
  10. इस सारणी में III-B, IV-B, V-B, VI-B, VII-B, VIII, I-B, II-B उपवर्गों या वर्गों के तत्त्वों को | संक्रमण तत्त्व कहते हैं क्योंकि इन तत्त्वों को क्षार धातुओं तथा सामान्य तत्त्वों के बीच में रखा गया
  11.  इस सारणी में उपस्थित किसी उपवर्ग या वर्ग के सभी तत्त्वों की बाह्यतम कक्ष में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्याएँ समान होने के कारण उनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एकसमान होता है। के कारण उनके गुणों में समानताएँ होती हैं। किसी भी उपवर्ग या वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर चलने पर तत्त्वों के परमाणु क्रमांकों की वृद्धि के साथ, उपकक्षों की संख्या में भी वृद्धि होती है जिसके कारण उन तत्त्वों के गुणों में भी क्रमिक परिवर्तन होता है।
  12.  इस सारणी में तत्त्वों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर चार ब्लॉकों में विभक्त किया गया है।
    • s-ब्लॉक
    • p-ब्लॉक,
    • 4-ब्लॉक तथा
    • f-ब्लॉक।

प्रश्न 2.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में तत्त्वों का वर्गीकरण लिखिए। या प्रवर्धित आवर्त सारणी के प्रारूप को 5, p, d व f-ब्लॉक के तत्वों के आधार पर
समझाइए।
उत्तर
तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तथा आवर्त सारणी किसी परमाणु के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का वितरण उसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहलाता है। किसी तत्त्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उसकी आवर्त सारणी में स्थिति में सीधा सम्बन्ध होता है। किसी तत्त्व की आवर्त सारणी में स्थिति से, भरें जाने वाले अन्तिम कक्ष की मुख्य क्वाण्टम संख्या (n) और दिगंशी, क्वाण्टम संख्या (l) के विषय में भी जानकारी मिलती है।
आवर्त में तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

आवर्त बाह्यतम कोश के लिए n का मान बताता है। आवर्त 1, 2, 3,… आदि का तात्पर्य क्रमशः 1, 2, 3,… आदि मुख्य ऊर्जा स्तरों के भरने से है। प्रत्येक आवर्त में तत्त्वों की संख्या, भरे जाने वाले ऊर्जा स्तर में उपलब्ध परमाणु कक्षकों की संख्या से दोगुनी होती है।

प्रथम आवर्त में इलेक्ट्रॉन प्रथम ऊर्जा स्तर (n=1) में भरते हैं। इस आवर्त में केवल एक कक्षक (ls) होता है और इलेक्ट्रॉन इसी में भरते हैं। इसमें दो तत्त्व हाइड्रोजन (Z= 1) और हीलियम (Z=2) होते हैं। जिनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमशः 1s1 तथा 1s2 होते हैं।

दूसरे आवर्त में इलेक्ट्रॉन दूसरे ऊर्जा स्तर (n= 2) में भरते हैं। यह आवर्त लीथियम (z= 3) से शुरू होता है जिसमें दो इलेक्ट्रॉन 1s कक्षक में होते हैं और तीसरा इलेक्ट्रॉन 2s कक्षक में प्रवेश करता है (1s+ 2s1), अगले तत्त्व बेरीलियम (Z = 4) में 1s तथा 2s दोनों कक्षकों में 2-2 इलेक्ट्रॉन होते हैं (1s2 2s2) इसके पश्चात् बोरॉन (Z= 5) से निऑन (Z = 10) तक पहुँचने पर 2p कक्षक पूर्ण रूप से इलेक्ट्रॉनों से भर जाता है। इस तरह L कोश (n=2) निऑन (1s2,2s2 2p6) तत्त्व के साथ पूर्ण हो जाता है।

तीसरे आवर्त में इलेक्ट्रॉन तीसरे ऊर्जा स्तर (n=3) में भरते हैं। यह आवर्त सोडियम (Z= 11) से शुरू होता है। इसमें इलेक्ट्रॉन 3s कक्षक में प्रवेश करता है। इस आवर्त में सोडियम (3s1) से लेकर आर्गन (3s2 3p6) तक उत्तरोतर 3s एवं 3p कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरते हैं। 3d कक्षकों की ऊर्जा 4s कक्षकों से अधिक होती है इसलिए वे 4s कक्षकों के पश्चात् भरते हैं। चौथे आवर्त में इलेक्ट्रॉन चौथे ऊर्जा स्तर (n=4) में भरते हैं। यह आवर्त पोटैशियम (Z=19) से प्रारम्भ होता है और इसमें इलेक्ट्रॉन 4s कक्षक में प्रवेश करता है। कैल्सियम (Z = 20) में 4s कक्षक भर जाता है। चूंकि 3d-कक्षकों की ऊर्जा 4p-कक्षकों से कम होती है इसलिए 4p-कक्षकों से पहले 3d-कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरते हैं। इस प्रकार हमें तत्त्वों की 3d संक्रमण श्रेणी (transition series) प्राप्त होती है। यह स्कैण्डियम (Z=21) से प्रारम्भ होती है। इसको बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d 4s होता है। 3d-कक्षक जिंक (Z= 30) पर पूर्ण रूप से भर जाता है। इसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d10 4s2 होता है। इसके पश्चात् गैलियम (z=31) से 4p-कक्षक का भरना प्रारम्भ होता है जो क्रिप्टॉन पर समाप्त होता है। क्रिप्टॉन का बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4s2 3d10 4p6 होता है। इस आवर्त में 18 तत्त्व होते हैं तथा इसमें 9’कक्षक भरते हैं। 4d और 4f-कक्षकों की ऊर्जा अधिक होने के कारण वे इस आवर्त में नहीं भरते हैं। पाँचवें आवर्त में इलेक्ट्रॉन पाँचवें ऊर्जा स्तर (n = 5) में भरते हैं। यह आवर्त रूबिडियम (Z=37) से प्रारम्भ होता है जिसमें 1 इलेक्ट्रॉन 5s-कक्षक में प्रवेश करता है। 55-कक्षक के भरने के पश्चात् 4d संक्रमण श्रेणी प्रारम्भ हो जाती है जिसमें इलेक्ट्रॉन 4d-कक्षकों में भरते हैं। यह इट्रियम (Z= 39) से प्रारम्भ होकर कैडमियम (Z=48) पर समाप्त होती है। इसके पश्चात् 5p-कक्षक भरते हैं। इनका भरना इंडियम (Z= 49) से प्रारम्भ होकर जीनॉन (Z=54) पर समाप्त होता है। छठे आवर्त में इलेक्ट्रॉन छठे ऊर्जा स्तर (n= 6) में भरते हैं। यह आवर्त सीजियम (Z = 55) से प्रारम्भ होता है जिसमें 1 इलेक्ट्रॉन 6s-कक्षक में प्रवेश करता है। 6s-कक्षक के भरने के पश्चात् अगला इलेक्ट्रॉन La में 5d-कक्षक में प्रवेश करता है। इसके पश्चात् सीरियम (Z= 58) से प्रारम्भ करके ल्यूटीशियम (Z= 71) तक इलेक्ट्रॉन 4f-कक्षकों में भरते हैं। इसे 4 आंतरिक संक्रमण श्रेणी (inner transitional series) या लैन्थेनाइड श्रेणी (lanthanide series) कहते हैं। इसके पश्चात् हैफनियम (Z = 72) से मर्करी (Z = 80) तक इलेक्ट्रॉन 5d-कक्षकों में भरते हैं। इस प्रकार 54 सक्रमण श्रेणी प्राप्त होती है। इसके पश्चात् इलेक्ट्रॉन थैलियम (Z= 81) से रेडॉन (Z= 86) तक 6p-कक्षकों में भरते हैं।

सातवें आवर्त में इलेक्ट्रॉन सातवें ऊर्जा स्तर (n= 7) में भरते हैं। यह आवर्त फ्रैंशियम (Z = 87) से प्रारम्भ होता है जिसमें 7s-कक्षक में 1 इलेक्ट्रॉन प्रवेश करता है। 7s-कक्षक के भरने के पश्चात् ऐक्टिनियम (Z = 89) और थोरियम (Z=90) में इलेक्ट्रॉन 6d-कक्षक में प्रवेश करते हैं और उसके पश्चात् 5f-कक्षकों का भरना शुरू होता है। यह प्रोऐक्टिनियम (Z=91) से लॉरेन्शियम (Z = 103) तक चलता है। इस प्रकार 5f आंतरिक संक्रमण श्रेणी या ऐक्टिनाइड श्रेणी (actinide series) प्राप्त होती है। ऐक्टिनियम (Z= 89) से Uub (Z = 112) तक 6d-कक्षक भरते हैं और हमें 6d संक्रमण श्रेणी प्राप्त होती है। 6d-कक्षकों के भरने के पश्चात् 7p-कक्षक भरते हैं।

वर्गवार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
एक ही वर्ग के सभी तत्त्वों के बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (संयोजकता कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास) समान होते हैं। इनके बाह्य कक्षकों में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या एवं गुणधर्म भी समान होते हैं।
उदाहरणार्थ-Li, Na, K, Rb, Cs और Fr सभी का संयोजकता कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1 है। तथा वे सभी समान गुण प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि किसी तत्त्व के गुण उसके परमाणु क्रमांक पर निर्भर करते हैं न कि उसके सापेक्षिक परमाणु द्रव्यमान पर।
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तत्त्वों का s, p, a तथा f ब्लॉकों में वर्गीकरण
प्रवर्धित आवर्त सारणी के विभिन्न तत्त्वों को चार ब्लॉकों (s, p, d तथा f) में वर्गीकृत किया गया है। इनका यह वर्गीकरण उनके उस कक्षक के नाम पर किया गया है जिसमें अन्तिम इलेक्ट्रॉन प्रवेश करता है।
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UP Board Solutions for Class 11 Home Science Chapter 8 उत्सर्जन तन्त्र

UP Board Solutions for Class 11 Home Science Chapter 8 उत्सर्जन तन्त्र (Excretory System)

UP Board Solutions for Class 11 Home Science Chapter 8 उत्सर्जन तन्त्र

UP Board Class 11 Home Science Chapter 8 विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उत्सर्जन एवं उत्सर्जन तन्त्र से आप क्या समझती हैं? मुख्य उत्सर्जक अंग के रूप में गुर्दो की संरचना एवं कार्य-विधि का वर्णन कीजिए।
अथवा उत्सर्जन अंग कौन-कौन से हैं? वृक्क का चित्र बनाकर उसके कार्य समझाइए।
अथवा उत्सर्जन तन्त्र से क्या तात्पर्य है? वृक्क की रचना व कार्य चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
अथवा उत्सर्जन तन्त्र से आप क्या समझती हैं? इसके विभिन्न अंगों के नाम लिखिए।वृक्क की रचना एवं कार्य नामांकित चित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
उत्सर्जन तथा उत्सर्जन तन्त्र (Excretion and Excretory System):
शरीर में विभिन्न प्रकार की उपापचयी (metabolic) क्रियाओं के फलस्वरूप ऐसे पदार्थ बनते रहते हैं, जिन्हें शरीर में एकत्र नहीं किया जा सकता है। ये पदार्थ या तो व्यर्थ होते हैं अथवा हानिकारक। अधिक मात्रा में एकत्र होने पर व्यर्थ पदार्थ भी हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं; अतः इन पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना आवश्यक है। व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों की शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन अथवा विसर्जन (excretion) कहते हैं। शरीर के जिन अंगों के माध्यम से व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाता है, उन अंगों को उत्सर्जक अंग कहा जाता है। हमारे शरीर में विभिन्न उत्सर्जक अंग हैं। अत: हम कह सकते हैं-“उन विभिन्न अंगों की व्यवस्था को उत्सर्जन तन्त्र के रूप में जाना जाता है, जो शरीर में से व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करते हैं।”

उत्सर्जी अंग तथा उनके कार्य (Excretory Organs and their Functions):
व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का कार्य करने वाले शरीर के अंगों को उत्सर्जक या उत्सर्जी अंग कहा जाता है। गुर्दे या वृक्क, फेफड़े, त्वचा तथा बड़ी आँत शरीर के मुख्य उत्सर्जक अंग हैं। इनके अतिरिक्त यकृत भी अप्रत्यक्ष रूप से कुछ उत्सर्जी क्रिया करता है।

फेफड़े प्रमुखतः श्वसन क्रिया में सहायक होते हैं, किन्तु कार्बन डाइ-ऑक्साइड जैसी दूषित गैस को बाहर निकालने के कारण उत्सर्जी अंग की भूमिका भी निभाते हैं। त्वचा से पसीना निकलता है। पसीने में अनेक उत्सर्जी पदार्थ होते हैं। अत: त्वचा सुरक्षा करने का साधन होने के साथ-साथ उत्सर्जन का कार्य भी करती है। यकृत रुधिर में से अधिक मात्रा में प्राप्त अमीनो अम्लों (amino acids) को तोड़कर अमोनिया को यूरिया, यूरिक अम्ल आदि कम हानिकारक पदार्थों में बदलता है। ये हानिकारक पदार्थ गुर्दो के माध्यम से मूत्र में घुलित अवस्था में विसर्जित होते हैं। इस स्थिति में गुर्दे या वृक्क महत्त्वपूर्ण उत्सर्जन-अंग के रूप में कार्य करते हैं। बड़ी आँत मल या विष्ठा के साथ अपच पदार्थों को तो निकालती ही है, कुछ अन्य उत्सर्जी पदार्थों को भी यह बाहर निकाल देती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गुर्दे, त्वचा, फेफड़े तथा बड़ी आँत मुख्य उत्सर्जक अंग हैं।

वृक्क की संरचना (Structure of Kidney):
बाह्य संरचना: उत्सर्जन तन्त्र का एक मुख्य अंग वृक्क या गुर्दे (kidneys) हैं। वृक्क संख्या में दो होते हैं। ये उदर गुहा में कशेरुक दण्ड (रीढ़ की हड्डी) के इधर-उधर (दाएँ व बाएँ) स्थित होते हैं। ये भूरे रंग की तथा सेम के बीज के आकार की संरचनाएँ हैं। प्रत्येक वृक्क लगभग 10 सेमी लम्बा, 6 सेमी चौड़ा तथा 2.5 सेमी मोटा होता है। बायाँ वृक्क दाएँ की अपेक्षा कुछ पीछे स्थित होता है। सामान्यतः वयस्क पुरुष के वृक्क का भार लगभग 125 ग्राम किन्तु स्त्री के वृक्क का भार 115-120 ग्राम होता है।

प्रत्येक वृक्क का बाहरी किनारा उभरा हुआ किन्तु भीतरी किनारा धंसा हुआ होता है, जिसमें से मूत्र नलिका (ureter) निकलती है। इस धंसे हुए भाग को नाभि कहते हैं। मूत्र नलिका नीचे जाकर एक पेशीय थैले में खुलती है जिसे मूत्राशय कहते हैं। मूत्र नली की लम्बाई 30 से 35 सेमी होती है।
UP Board Solutions for Class 11 Home Science Chapter 1 45
मनुष्य के वृक्क तथा उससे सम्बन्धित अंग। मूत्राशय श्रोणि गुहा में स्थित होता है (उदर गुहा का निचला भाग) और नीचे की ओर क्रमश: संकरा होकर मूत्र मार्ग का निर्माण करता है, जो अन्त में बाहर खुलता है।

आन्तरिक संरचना: वृक्क को बाहर से अन्दर की ओर लम्बाई में काटने से उसकी आन्तरिक संरचना देखी जा सकती है। इसके मध्य में लगभग खोखला तथा कीप के आकार का भाग होता है। यही भाग क्रमश: संकरा होकर मूत्र नलिका का निर्माण करता है। यह स्थान शीर्ष गुहा (pelvis) कहलाता है। वृक्क का शेष भाग ठोस तथा दो भागों में बँटा होता है। बाहरी, हल्के बैंगनी रंग का भाग वल्कुट या कॉर्टेक्स तथा भीतरी, गहरे रंग का भाग मेड्यूला कहलाता है।

वृक्क में असंख्य सूक्ष्म नलिकाएँ होती हैं। ये अत्यन्त कुण्डलित तथा लम्बी संरचनाएँ हैं। इन्हें वृक्क नलिकाएँ कहते हैं। प्रत्येक वृक्क नलिका के दो प्रमुख भाग होते हैं-एक प्याले के आकार का ग्रन्थिल भाग मैल्पीघियन कणिका (malpighian corpuscle) तथा दूसरा अत्यन्त कुण्डलित नलिकाकार भाग। यह नलिकाकार भाग एक स्थान पर ‘U’ के आकार में भी स्थित होता है और बाद में फिर शीर्ष गुहा कुण्डलित हो जाता है। यह नलिका एक बड़ी संग्रह । नलिका में खुलती है। प्रत्येक संग्रह नलिका एक मीनार जैसे भाग, पिरामिड में खुलती है। वृक्कों में ऐसे 10-12 पिरामिड दिखाई देते हैं जो अपने सँकरे भाग से शीर्षआन्तरिक संरचना का गुहा में खुलते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Home Science Chapter 1 46
वृक्क नलिका द्वारा मूत्र छनना : वृक्क की क्रिया-विधि (Filteration of Urine by Renal Duct : Mechanism of Kidney):
मैल्पीघियन कणिका में दो भाग होते हैं-
(i) प्याले के आकार का बोमेन सम्पुट तथा
(ii) वृक्क में आई धमनी की एक छोटी शाखा से बना केशिकाओं का जाल अर्थात् केशिकागुच्छ। केशिकागुच्छ में धमनी की जो शाखा आती है, वह इससे निकलने वाली शाखा से काफी चौड़ी होती है। इस प्रकार केशिका गुच्छ में अधिक रुधिर आता है, किन्तु निकल कम पाता है; अत: इसका प्लाज्मा केशिकाओं की पतली भित्ति से छन जाता है और सम्पुट में होकर वृक्क नलिका में आ जाता है। इस छने हुए तरल में आवश्यक तथा अनावश्यक सभी प्रकार के पदार्थ उपस्थित होते हैं। बाद में नलिका के अन्दर आगे बढ़ते हुए प्लाज्मा (तरल पदार्थ) से भोजन, लवण आदि आवश्यक पदार्थ वृक्क नलिका तथा उस पर लिपटी अनेक रुधिर केशिकाओं की भित्ति में होकर रुधिर में अवशोषित कर लिए जाते हैं; किन्तु अन्य पदार्थ, जिनमें हानिकारक उत्सर्म्य पदार्थ भी सम्मिलित हैं, अधिकांश जल के साथ वृक्क नलिका में ही रह जाते हैं। यही तरल मूत्र (urine) है। वृक्क नलिकाओं से मूत्र संग्रह नलिका, पिरामिड, शीर्ष गुहा से होता हुआ मूत्र नलिका द्वारा मूत्राशय में एकत्रित होता रहता है।
UP Board Solutions for Class 11 Home Science Chapter 1 47
वृक्क नलिका के ‘U’ भाग पर लिपटी हुई रुधिर केशिकाओं का निर्माण, केशिकागुच्छ से निकलने वाली धमनी की शाखा से होता है। बाद में केशिकाओं के जाल से छोटी-सी एक शिरा बन जाती है तथा वृक्क के अन्दर इस प्रकार की सभी शिराएँ मिलकर वृक्कीय शिरा (renal vein) का निर्माण करती हैं।

प्रश्न 2.
त्वचा की संरचना चित्र द्वारा समझाइए और इसके मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।
अथवा त्वचा की रचना समझाइए एवं उसके मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।
अथवा चित्र द्वारा त्वचा की बनावट तथा कार्य लिखिए।
उत्तर:
त्वचा की संरचना (Structure of Skin):
सम्पूर्ण शरीर के बाहरी आवरण को त्वचा कहते हैं। त्वचा की आन्तरिक रचना का अध्ययन करने के लिए जब हम त्वचा के किसी भाग की अनुदैर्घ्य काट को सूक्ष्मदर्शी यन्त्र के द्वारा देखते हैं, तो ज्ञात होता है कि इसके मुख्य दो भाग होते हैं-
(1) अधिचर्म (Epidermis)
(2) चर्म (Dermis)

(1) अधिचर्म (Epidermis): यह त्वचा की मोटी और ऊपरी परत होती है। इसमें कोशिकाओं की 3 या 4 परतें होती हैं। सबसे बाहरी परत में कोशिकाएँ मृत होती हैं, जिसको सिंगी स्तर (horny layer) कहते हैं। इसके नीचे की ओर जीवित कोशिकाओं की बनी परत, मैल्पीघियन स्तर (malpighian layer) कहलाती है। इसकी कोशिकाएँ विभाजित होती रहती हैं। जब शरीर की बाहरी त्वचा का सिंगी स्तर समाप्त हो जाता है, तब उसका स्थान मैल्पीघियन स्तर की सबसे बाहरी परत लेती है। यह परत भी इसके अन्दर उपस्थित परतों से बनती है। अधिचर्म (epidermis) के बाहरी ओर कुछ बाल और नलिकाएँ होती हैं, ये दोनों ही आन्तरिक त्वचा के भाग कहलाते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Home Science Chapter 1 48
(2) चर्म (Dermis): यह परत अधिचर्म से काफी मोटी होती है। इसमें निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण भाग पाए जाते हैं

  • रोम ग्रन्थियाँ (hair glands): ये ग्रन्थियाँ सम्पूर्ण शरीर में पायी जाती हैं। इनके स्तरों में एक ऊँची जगह होती है, जिनमें रक्त केशिकाएँ पायी जाती हैं। इनके अन्दर से एक पतला बाल निकलता है, जो ऊपर की ओर बाल नली द्वारा एक छिद्र से बाहर निकलता है।
  • पसीने की ग्रन्थियाँ (sweat or sebaceous glands): रोम ग्रन्थियों के ही आस-पास कुण्डलीदार आकृति वाली ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं। प्रत्येक ग्रन्थि एक लहरदार नलिका द्वारा अधिचर्म के बाहरी भाग में एक अलग छिद्र द्वारा खुलती है। इन ग्रन्थियों से शरीर में बना दूषित पदार्थ पसीने के रूप में बाहर निकलता रहता है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से इन ग्रन्थियों का विशेष महत्त्व होता है।
  • तेल ग्रन्थियाँ (oil glands): पसीने की ग्रन्थियों के कुछ ऊपर बाल नलिका के दोनों ओर अनियमित आकार की ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं। इनसे एक तेल जैसा चिकना पदार्थ निकलता है, जो बालों के छिद्रों द्वारा शरीर से बाहर निकलता रहता है।
  • नाड़ी सूत्र (nerve fibre): पिन चुभने या काँटा लगने पर इसका अनुभव तुरन्त हो जाता है। यह अनुभव नाड़ी सूत्रों के द्वारा होता है, जो त्वचा में जाल के रूप में बिछे रहते हैं।
  • रक्त केशिकाएँ (blood capillaries): चर्म भाग में शिरा और धमनियों की रक्त केशिकाएँ पायी जाती हैं। इनके द्वारा ही त्वचा के प्रत्येक भाग को रक्त मिलता है।
  • मांसपेशियाँ (muscles): शरीर के कुछ भागों में पेशियाँ पायी जाती हैं; जैसे-पेट तथा तलवे की त्वचा।
  • क्रोमेटोफोर्स (chromatophores): इनसे मनुष्य की त्वचा का रंग बनता है।
  • वसा के कण (fat granules): इन छोटे-छोटे कणों के गुच्छे चर्म की निचली सतह पर पाए जाते हैं। इनको वसा स्तर भी कहते हैं। त्वचा में पाए जाने वाले इन वसा स्तरों का मुख्य कार्य शरीर के ताप को नियमित बनाए रखना होता है।

त्वचा के कार्य (Functions of Skin):

  • सुरक्षा: त्वचा शरीर के भीतरी कोमल अंगों पर एक रक्षक आवरण बनाती है। उन्हें रगड़, धक्के या चोट से बचाती है तथा जीवाणुओं व अन्य हानिकारक जीवों को शरीर में नहीं घुसने देती है।
  • उत्सर्जन: मनुष्य व अन्य दूध देने वाले प्राणियों में त्वचा में विद्यमान पसीने की ग्रन्थियाँ (स्वेद ग्रन्थियाँ) पसीने के रूप में अनेक हानिकारक, दूषित एवं विजातीय पदार्थों का विसर्जन करती हैं। विसर्जन के इस गुण के कारण ही त्वचा को तीसरा गुर्दा भी कहा जाता है।
  • ताप नियन्त्रण: त्वचा में पाए जाने वाले वसा स्तर शरीर की गर्मी को रोकते हैं। पसीने के द्वारा भी शरीर के ताप का नियमन होता है। त्वचा से निकलने वाले पसीने के वाष्पन के लिए शरीर से गुप्त ऊष्मा ली जाती है। इससे शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है तथा शरीर को वातावरण की
  • गर्मी परेशान नहीं करती।
  • संवेदनशीलता: त्वचा में तन्त्रिकाओं के सूत्र समाप्त होते हैं, इसलिए यह स्पर्श, दबाव, सर्दी, गर्मी, पीड़ा इत्यादि का अनुभव कराती है।
  • पोषण: मादा स्तनधारी प्राणियों की त्वचा में दूध की ग्रन्थियाँ मिलती हैं। इनसे उत्पन्न दूध शिशुओं के पोषण का सर्वोत्तम साधन है।
  • सौन्दर्य: आन्तरिक अंगों और पेशियों पर चढ़ा त्वचा का आवरण शरीर को सुन्दरता प्रदान करता है। त्वचा में एकत्र वसा भी इस कार्य में अंगों को सुडौल बनाने में सहायक होती है। यदि शरीर की त्वचा को उतार दिया जाए तो शरीर भयानक एवं कुरूप दिखाई देगा।

UP Board Class 11 Home Science Chapter 8 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उत्सर्जन तन्त्र के महत्त्व का उल्लेख कीजिए। अथवा उत्सर्जन तन्त्र की शरीर में क्या उपयोगिता है?
उत्तर:
उत्सर्जन तन्त्र के महत्त्व शारीरिक स्वास्थ्य एवं सुचारु क्रियाशीलता के लिए उत्सर्जन तन्त्र का विशेष महत्त्व है। उत्सर्जन तन्त्र के विभिन्न अंग शरीर में उत्पन्न होने वाले सभी व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर विसर्जित करने का अति महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य कार्य करते हैं। शारीरिक आवश्यकताओं के लिए निरन्तर आहार, जल तथा वायु ग्रहण किए जाते हैं। ये पदार्थ जहाँ एक ओर पोषण के लिए तथा शरीर की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होते हैं, वहीं दूसरी ओर इनके पाचन आदि के उपरान्त शरीर में कुछ व्यर्थ एवं विजातीय तत्त्व भी उत्पन्न होते हैं। ये व्यर्थ पदार्थ गैसीय, द्रव, ठोस एवं अर्द्ध-ठोस अवस्था में पाए जाते हैं।

ये व्यर्थ पदार्थ न केवल व्यर्थ एवं विजातीय ही होते हैं बल्कि ये शरीर के लिए हानिकारक तथा विषैले भी होते हैं; अतः इन पदार्थों का शरीर से शीघ्र बाहर निकलना अति आवश्यक होता है। इन व्यर्थ पदार्थों के नियमित विसर्जन की स्थिति में हमारा शरीर स्वस्थ तथा नीरोग बना रहता है। यदि इन विजातीय तत्त्वों का समुचित विसर्जन रुक जाए तो निश्चित रूप से शरीर विकार-युक्त हो जाता है। इसीलिए उत्सर्जन तन्त्र का शरीर में विशेष महत्त्व है। वास्तव में उत्सर्जन तन्त्र शरीर की आन्तरिक सफाई की व्यवस्था को बनाए रखता है।

प्रश्न 2:.
वृक्क के चार प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
वृक्क के चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

  • उत्सर्जन (excretion): वृक्क मूत्र के रूप में नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है।
  • जल सन्तुलन (water balance): शरीर की विभिन्न क्रियाओं को सुचारु रूप में चलाने के लिए हम अत्यधिक मात्रा में जल पीते हैं। वृक्क मूत्र के रूप में जल की अतिरिक्त मात्रा को शरीर से बाहर निकालकर शरीर में जल का सन्तुलन बनाए रखते हैं।
  • लवण सन्तुलन (salt balance): मूत्र के साथ रुधिर में प्राप्त अतिरिक्त व व्यर्थ लवणों को वृक्क शरीर से बाहर निकालते हैं।
  • भ्रूणावस्था में वृक्क लाल रुधिर कणिकाओं का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 3.
यकृत के प्रमुख उत्सर्जी कार्यों को बताइए।
उत्तर:
यकृत की उत्सर्जन में भूमिका यकृत की उत्सर्जन क्रिया में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यकृत के उत्सर्जन सम्बन्धी कुछ विशेष कार्य निम्नलिखित हैं
1. पित्त रस का स्राव करता है: यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि है, जो एक विशेष प्रकार का क्षारीय द्रव बनाती है, जिसे पित्त रस कहते हैं। पित्त रस यद्यपि भोजन के पाचन आदि में सहायता करता है, तथापि इसके द्वारा उत्सर्जन का कार्य भी किया जाता है। पित्त वर्णक; लवण आदि उत्सर्जी पदार्थों को यकृत से लेकर आहार नाल में पहुँचा देता है। यहाँ से ये पदार्थ मल के साथ शरीर से बाहर कर दिए जाते हैं।

2. अतिरिक्त ऐमीनो अम्लों को यूरिया, यूरिक अम्ल आदि में बदलता है: यकृत ही अतिरिक्त ऐमीनो अम्लों को निम्नलिखित प्रक्रिया द्वारा यूरिया में बदलता है

(क) डीएमीनेशन: अतिरिक्त ऐमीनो अम्लों को यकृत कोशिकाओं में ऑक्सीजन की उपस्थिति में तोड़ा जाता है। इस क्रिया में अमोनिया बनती है। इसमें पाइरुविक अम्ल भी बनता है जो श्वसन के काम में आ जाता है।

(ख) यूरिया का निर्माण: अमोनिया एक हानिकारक गैस है। इसको यकृत कोशिकाएँ ही कार्बन डाइ-ऑक्साइड के साथ मिलाकर यूरिया (urea) का निर्माण करती हैं। इस कार्य के लिए अनेक जैव-रासायनिक क्रियाएँ होती हैं। ये सब क्रियाएँ एक चक्र के रूप में होती हैं।

प्रश्न 4.
एक रोगी मनुष्य के यकृत ने कार्य करना बन्द कर दिया है। उस मनुष्य पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
यकृत का कार्य करना बन्द कर देना
मनुष्य का यकृत सभी कशेरुकीय प्राणियों की तरह एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ग्रन्थि है। यह ग्रन्थि यदि किसी मनुष्य में कार्य करना बन्द कर दे तो वह मनुष्य अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकेगा क्योंकि इसके निम्नलिखित दुष्प्रभाव होते हैं-

  1. यकृत के द्वारा सम्पादित उत्सर्जी कार्यों में बाधा पड़ जाएगी, जिसके कारण शरीर में हानिकारक पदार्थ एकत्रित हो जाएँगे।
  2. शरीर में टूटी-फूटी कोशिकाएँ; जैसे मृत रुधिर कोशिकाएँ एकत्रित हो जाएँगी, जो इन पदार्थों या अंगों को कार्य नहीं करने देंगी। इससे श्वसन क्रिया पर प्रभाव पड़ेगा।
  3. रोगी के शरीर का ताप नियन्त्रित नहीं रहेगा।
  4. रोगी का पाचन बिल्कुल बन्द.हो जाएगा क्योंकि यकृत पाचन के लिए पित्त बनाकर क्षारीय माध्यम बनाता है।

प्रश्न 5.
मूत्र क्या है? यह कहाँ एकत्रित रहता है? मूत्र त्याग करने से शरीर को क्या लाभ होते हैं?
उत्तर:
मूत्र तथा मूत्र त्याग मत्र हल्के पीले रंग का जल-जैसा तरल पदार्थ है, जिसमें अधिकतर भाग जल (लगभग 96%) तथा अन्य उत्सर्जी पदार्थ; प्रमुखत: यूरिया (urea), यूरिक अम्ल (uric acid) आदि कार्बनिक पदार्थ (लगभग 2%) होते हैं। शेष पदार्थों में लवण (लगभग 1.5%) होते हैं।

साधारण अवस्था में, एक स्वस्थ मनुष्य प्रतिदिन लगभग 1.5 से 2 : 0 लीटर मूत्र त्याग करता है। मूत्र वृक्क नलिकाओं से बनकर हर समय बूंद-बूंद मूत्राशय में आता रहता है। मूत्रमार्ग के निरन्तर बन्द रहने के कारण मूत्र इसी में एकत्रित होता रहता है। इसके द्वार पर वर्तुल पेशियाँ (circular muscles) होती हैं, जो फैलने पर ही मूत्र को बाहर जाने देती हैं। मूत्राशय में मूत्र की पर्याप्त मात्रा (लगभग 200-250 मिली) एकत्र हो जाने पर मूत्र त्याग की इच्छा अनुभव होने लगती है तथा मूत्र त्याग कर दिया जाता है। इस प्रकार मूत्र त्याग करने से मूत्र के माध्यम से शरीर के अनेक व्यर्थ एवं विषैले पदार्थ शरीर से विसर्जित हो जाते हैं।

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प्रश्न 1.
उत्सर्जन तन्त्र से क्या आशय है?
उत्तर:
शरीर के उन विभिन्न अंगों की व्यवस्था को उत्सर्जन तन्त्र के रूप में जाना जाता है जो शरीर से व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करते हैं।

प्रश्न 2.
हमारे शरीर के मुख्य उत्सर्जक अंग कौन-कौन से हैं? अथवा मलोत्सर्जन संस्थान ( उत्सर्जन तन्त्र) के विभिन्न अंगों के नाम लिखिए।
उत्तर:
हमारे शरीर के मुख्य उत्सर्जक अंग हैं-गुर्दे या वृक्क, फेफड़े, त्वचा, बड़ी आँत तथा यकृत।

प्रश्न 3.
किसी भी उत्सर्जक अंग के कार्य न करने की स्थिति में क्या होता है?
उत्तर:
किसी भी उत्सर्जक अंग के कार्य न करने की स्थिति में शरीर में व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है तथा इससे स्वास्थ्य एवं जीवन को खतरा उत्पन्न हो जाता है।

प्रश्न 4.
फेफड़े मुख्य रूप से किस हानिकारक गैस का उत्सर्जन करते हैं?
उत्तर:
फेफड़े मुख्य रूप से कार्बन डाइ-ऑक्साइड नामक हानिकारक गैस का उत्सर्जन करते हैं।

प्रश्न 5.
त्वचा किस रूप में व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों का उत्सर्जन करती है?
उत्तर:
त्वचा पसीने के रूप में व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों का उत्सर्जन करती है।

प्रश्न 6.
स्वेद ग्रन्थियों की स्थिति और कार्य लिखिए।
उत्तर:
हमारे शरीर में त्वचा के चर्म (Dermis) भाग में स्वेद ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं। स्वेद ग्रन्थियों का मुख्य कार्य शरीर में से दूषित पदार्थों को पसीने के माध्यम से बाहर निकालना है।

प्रश्न 7.
उत्सर्जन कार्यों को ध्यान में रखते हुए त्वचा को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
उत्सर्जन कार्यों को ध्यान में रखते हुए त्वचा को तीसरा गुर्दा कहा जाता है।

प्रश्न 8.
गुर्दे शरीर के हानिकारक पदार्थों को किस माध्यम से शरीर से विसर्जित करते हैं?
उत्तर:
गुर्दे मूत्र के माध्यम से हानिकारक पदार्थों को शरीर से विसर्जित करते हैं।

प्रश्न 9.
मूत्र के माध्यम से मुख्य रूप से किन दूषित पदार्थों का विसर्जन किया जाता है?
उत्तर:
मूत्र के माध्यम से मुख्य रूप से यूरिया, यूरिक अम्ल तथा कुछ लवण विसर्जित किए जाते हैं।

प्रश्न10.
स्वस्थ व्यक्ति के मूत्र में किन पदार्थों का अभाव होना चाहिए?
उत्तर:
स्वस्थ व्यक्ति के मूत्र में ग्लूकोज, ऐल्बुमिन, पीव-कोशिकाएँ तथा लाल रक्त कण नहीं होने चाहिए।

प्रश्न 11.
गर्मी के मौसम में मूत्र की मात्रा कम क्यों हो जाती है?
उत्तर:
गर्मी के मौसम में शरीर के तापक्रम को नियमित रखने के लिए त्वचा से पसीने की अधिक मात्रा विसर्जित होने लगती है। इस स्थिति में शरीर की अतिरिक्त जल की मात्रा पसीने के माध्यम से निकल जाने के कारण मूत्र की मात्रा घट जाती है।

प्रश्न 12.
बड़ी आँत किस रूप में हानिकारक पदार्थों का शरीर से विसर्जन करती है?
उत्तर:
बड़ी आँत मल के रूप में हानिकारक पदार्थों का शरीर से विसर्जन करती है।

प्रश्न 13.
मल क्या होता है?
उत्तर:
ग्रहण किए गए भोजन का व्यर्थ तथा बिना पचा दूषित भाग मल होता है।

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निर्देश : निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए

प्रश्न 1.
शरीर में बनने वाले व्यर्थ एवं हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने वाले अंगों की व्यवस्था को कहते हैं
(क) गुर्दे एवं मूत्र प्रणाली
(ख) बड़ी आँत
(ग) पाचन तन्त्र
(घ) उत्सर्जन अथवा विसर्जन तन्त्र।
उत्तर:
(घ) उत्सर्जन अथवा विसर्जन तन्त्र

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा अंग उत्सर्जक अंग नहीं है
(क) गुर्दे (ख) त्वचा
(ग) हृदय/आमाशय
(घ) बड़ी आँत।
उत्तर:
(ग) हृदय/आमाशय।

प्रश्न 3.
उत्सर्जन तन्त्र द्वारा कार्य करना बन्द कर देने पर क्या होगा
(क) शरीर अत्यधिक मोटा हो जाएगा
(ख) व्यक्ति अधिक शक्तिशाली हो जाएगा
(ग) व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं जीवन खतरे में हो जाएगा
(घ) कोई प्रभाव नहीं होगा।
उत्तर:
(ग) व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं जीवन खतरे में हो जाएगा।

प्रश्न 4.
रक्त में से हानिकारक पदार्थों को छानकर अलग करने का कार्य करते हैं
(क) हृदय
(ख) गुर्दे
(ग) बड़ी आँत
(घ) तिल्ली।
उत्तर:
(ख) गुर्दे।

प्रश्न 5.
रुधिर की शुद्धि किस अंग में होती है
(क) श्वसन नलिका
(ख) आमाशय
(ग) फेफड़े
(घ) हृदया
उत्तर:
(ग) फेफड़े।

प्रश्न 6.
पसीना किस अंग द्वारा निकलता है
(क) हृदय
(ख) फेफड़े
(ग) त्वचा
(घ) कान।
उत्तर:
(ग) त्वचा।

प्रश्न 7.
सामान्य दशाओं में मूत्र में नहीं पाया जाता
(क) यूरिया
(ख) यूरिक अम्ल
(ग) लवण
(घ) रक्त कण।
उत्तर:
(घ) रक्त कण।

प्रश्न 8.
मूत्र की शुद्धि किस अंग में होती है
(क) आमाशय
(ख) फेफड़े
(ग) वृक्क
(घ) हृदय।
उत्तर:
(ग) वृक्का

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