UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name काव्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक
Number of Questions 198
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

[ ध्यान दें : नीचे दिये गये बहुविकल्पीय प्रश्नों के विकल्पों में सामान्य से अधिक काले छपे विकल्प को उचित विकल्प सम्झे।]

उचित विकल्प का चयन करें-

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आदिकाल से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) युद्धों का सजीव वर्णन मिलता है
(ख) लक्षण ग्रन्थों की रचना हुई।
(ग) रासो ग्रन्थ रचे गये
(घ) श्रृंगार प्रधान काव्यों की रचना हुई
उत्तर:
(ख) लक्षण ग्रन्थों की रचना हुई।

प्रश्न 2.
दलपति विजय किस काल के कवि हैं ?
(क) भक्तिकाल
(ख) रीतिकाल
(ग) आधुनिक काल
(घ) आदिकाल
उत्तर:
(घ) आदिकाल

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से लौकिक साहित्य के अन्तर्गत हैं
(क) रेवंतगिरि रास
(ख) खुसरो की पहेलियाँ
(ग) खुमाण रासो
(घ) कामायनी
उत्तर:
(ख) खुसरो की पहेलियाँ

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किसे हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है ?
(क) शबरपा
(ख) सरहपा
(ग) लुइपा
(घ) कण्हपा
उत्तर:
(ख) सरहपा

प्रश्न 5.
हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है
(क) शबरपा
(ख) सरहपा
(ग) लुइपा
(घ) कण्हपा
उत्तर:
(ख) सरहपा

प्रश्न 6.
हिन्दी साहित्य का ‘आदिकाल’ निम्नांकित में से किस साम्राज्य की समाप्ति के समय से प्रारम्भ होता है ?
(क) अंग्रेजी साम्राज्य
(ख) वर्द्धन साम्राज्य
(ग) गुप्त साम्राज्य
(घ) मौर्य साम्राज्य
उत्तर:
(ख) वर्द्धन साम्राज्य

प्रश्न 7.
जैन साहित्य का सबसे अधिक लोकप्रिय रूप है
(क) रासो ग्रन्थ
(ख) रीति ग्रन्थ
(ग) रास ग्रन्थ
(घ) लौकिक ग्रन्थ
उत्तर:
(ग) रास ग्रन्थ

प्रश्न 8.
आदिकाल का एक अन्य नाम है–
(क) स्वर्ण युग
(ख) सिद्ध-सामन्त काल
(ग) श्रृंगार काल
(घ) भक्तिकाल
उत्तर:
(ख) सिद्ध-सामन्त काल

प्रश्न 9.
वीरगाथाकाल के ग्रन्थों की भाषा है|
(क) अवधी
(ख) मैथिली
(ग) डिंगल-पिंगल
(घ) अपभ्रंश
उत्तर:
(ग) डिंगल-पिंगल

प्रश्न 10.
इनमें से हिन्दी का प्राचीनतम (प्रथम) महाकाव्य कौन-सा है ?
या
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ आदिकाल का है ?
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) पद्मावत
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) प्रिय प्रवास
उत्तर:
(ग) पृथ्वीराज रासो

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन आदिकाल के कवि नहीं हैं ?
(क) शारंगधर
(ख) जगनिक
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) चन्दबरदायी
उत्तर:
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त

प्रश्न 12.
‘बीसलदेव रासो’ रचना है
(क) नरपति नाल्ह की
(ख) भट्ट केदार की
(ग) जगनिक की
(घ) दलपति विजय की
उत्तर:
(क) नरपति नाल्ह की

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ आदिकाल का है ?
(क) सूरसागर
(ख) पद्मावत
(ग) बीसलदेव रासो
(घ) आँसू
उत्तर:
(ग) बीसलदेव रासो

प्रश्न 14.
हिन्दी साहित्य के आदिकाल की रचना नहीं है
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) परमाल रासो
(ग) पद्मावत
(घ) विद्यापति पदावली
उत्तर:
(ग) पद्मावत

प्रश्न 15.
आदिकाल की रचना नहीं है
(क) उक्ति-व्यक्ति प्रकरण
(ख) जयचंद प्रकाश
(ग) राउल वेल
(घ) मृगावती
उत्तर:
(घ) मृगावती

प्रश्न 16.
किस आलोचक ने ‘पृथ्वीराज रासो’ को अर्द्ध प्रामाणिक रचना माना है ?
(क) आचार्य रार्मचन्द्र शुक्ल
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) डॉ० गणपतिचन्द्र गुप्त
उत्तर:
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में कौन-सी प्रवृत्ति आदिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) संसार की असरिता का प्रतिपादन
(ख) अलंकरण के सभी साधन अपनाये गये
(ग) श्रृंगार का पूर्ण बहिष्कार
(घ) युद्धों का सुन्दर और सजीव वर्णन
उत्तर:
(घ) युद्धों का सुन्दर और सजीव वर्णन

प्रश्न 18.
कौन-सा कथन आदिकाल ( वीरगाथा काल) से सम्बन्धित है ?
(क) आश्रयदाताओं के युद्धोत्साह, केलि-क्रीड़ा आदि के बड़े सरस वर्णन हैं।
(ख) काव्य-भाषा के रूप में खड़ी बोली हिन्दी को मान्यता मिली।
(ग) भारतीय काव्य-शास्त्र का हिन्दी में अवतरण हुआ
(घ) ईश्वर की लीलाओं का ज्ञान तथा लोकोन्मुखी भावनाओं का प्रतिपादन
उत्तर:
(क) आश्रयदाताओं के युद्धोत्साह, केलि-क्रीड़ा आदि के बड़े सरस वर्णन हैं।

प्रश्न 19.
भाट या चारण कवि क्या करते थे ?
(क) युद्ध-काल में वीर रस के गीत गा-गाकर सेना को प्रोत्साहित करते थे
(ख) अपने आश्रयदाताओं की वीरता का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन करते थे
(ग) अपने आश्रयदाताओं की वीरता के गुणगान सम्बन्धी गीत बनाते एवं सुनाते थे
(घ) उपर्युक्त तीनों
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त तीनों

प्रश्न 20.
कौन-सी प्रवृत्ति आदिकाल के काव्य में वर्णित साहित्य से सम्बन्धित है ?
(क) जीवन की नश्वरता का वर्णन
(ख) युद्ध का विशद वर्णन
(ग) श्रृंगारिक बातों का वर्णन
(घ) काव्य में अलंकरण का वर्णन
उत्तर:
(ख) युद्ध का विशद वर्णन

प्रश्न 21.
कौन से व्यक्तिनाथ’ साहित्य के व्यवस्थापक (प्रवर्तक) माने जाते हैं ?
(क) विश्वनाथ
(ख) रवीन्द्रनाथ
(ग) जगन्नाथ
(घ) गोरखनाथ
उत्तर:
(घ) गोरखनाथ

प्रश्न 22.
कौन-सा ग्रन्थ रासो परम्परा का श्रेष्ठ महाकाव्य हैं ?
(क) खुमाण रासो
(ख) बीसलदेव रासो
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) परमाल रोसो
उत्तर:
(ग) पृथ्वीराज रासो

प्रश्न 23.
कौन-सी रचना वीर गाथात्मक है ?
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) विद्यापति
(ग) खुसरो की पहेलियाँ
(घ) साहित्य लहरी
उत्तर:
(क) पृथ्वीराज रासो

प्रश्न 24.
पृथ्वीराज रासो’ में प्रधानता है
(क) श्रृंगार रस की
(ख) वीर रस की
(ग) शान्त रस की
(घ) हास्य रस की
उत्तर:
(ख) वीर रस की

प्रश्न 25.
वीरगाथा काल में लिखित कौन-सी रचना है ?
(क) रस विलास
(ख) ललित ललाम
(ग) कवित्त रत्नाकर
(घ) सन्देश रासक
उत्तर:
(घ) सन्देश रासक

प्रश्न 26.
निर्गुणभक्ति की ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रधान (प्रतिनिधि) कवि हैं
(क) रैदास
(ख) कबीरदास
(ग) मलूकदास
(घ) नानक
उत्तर:
(ख) कबीरदास

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से कौन ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) नानक
(ख) दादू
(ग) केशव
(घ) मलूकदास
उत्तर:
(ग) केशव

प्रश्न 28.
किसे खड़ी बोली का प्रथम कवि माना जाता है ?
(क) अब्दुर्रहमान
(ख) नरपति नाल्ह
(ग) अमीर खुसरो
(घ) धनपाल
उत्तर:
(ग) अमीर खुसरो

प्रश्न 29.
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ज्ञानाश्रयी शाखा का नहीं है ?
(क) मलिक मुहम्मद जायसी
(ख) रैदास
(ग) नानक
(घ) कबीर
उत्तर:
(क) मलिक मुहम्मद जायसी

प्रश्न 30.
“भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे।” प्रस्तुत कथन किस लेखक का है ?
(क) नन्ददुलारे वाजपेयी
(ख) रामचन्द्र शुक्ल
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) रामविलास शर्मा
उत्तर:
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी

प्रश्न 31.
निर्गुण काव्य-धारा की प्रवृत्ति है
(क) वात्सल्य रस की प्रधानता
(ख) प्रकृति पर चेतन सत्ता का आरोप
(ग) रुढ़ियों एवं बाह्य आडम्बर का विरोध
(घ) आश्रयदाता की प्रशंसा
उत्तर:
(ग) रुढ़ियों एवं बाह्य आडम्बर का विरोध

प्रश्न 32.
‘कबीरदास’ भक्तिकाल की किस धारा के कवि हैं ?
(क) सन्त काव्यधारा
(ख) प्रेम काव्यधारा
(ग) राम काव्यधारा
(घ) कृष्ण काव्यधारा
उत्तर:
(क) सन्त काव्यधारा

प्रश्न 33.
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ज्ञानाश्रयी शाखा से सम्बन्धित नहीं है?
(क) कबीर
(ख) नानक
(ग) रैदास
(घ) कुतुबन
उत्तर:
(घ) कुतुबन

प्रश्न 34.
सन्त काव्यधारा के कवि नहीं हैं—
(क) कबीर
(ख) रैदास
(ग) कुतुबन
(घ) दादू दयाल
उत्तर:
(ग) कुतुबन

प्रश्न 35.
निम्नलिखित में से भक्तिकालीन कवि कौन हैं ?
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) कुम्भनदास
(ग) हरिऔध
(घ) महादेवी
उत्तर:
(ख) कुम्भनदास

प्रश्न 36.
इस शाखा में केवल सौन्दर्य वृत्ति से प्रेरित स्वच्छन्द प्रेम तथा प्रगाढ़ प्रणय-भावना है
(क) कृष्णभक्ति शाख
(ख) रामभक्ति शाखा
(ग) प्रेमाश्रयी शाखा
(घ) ज्ञानाश्रयी शाखा
उत्तर:
(घ) ज्ञानाश्रयी शाखा

प्रश्न 37.
निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी शाखा (सूफी काव्यधारा) के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं
(क) कुतुबन
(ख) मंझन
(ग) उस्मान
(घ) जायसी
उत्तर:
(घ) जायसी

प्रश्न 38.
काव्य साहित्य में कौन-सा काल स्वर्ण-काल कहलाता है ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिककाल
उत्तर:
(ख) भक्तिकाल

प्रश्न 39.
‘रुनकता’ नामक स्थान सम्बन्धित है
(क) जयशंकर प्रसाद से
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ से
(ग) कबीरदास से
(घ) सूरदास से
उत्तर:
(घ) सूरदास से

प्रश्न 40.
प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा का सम्बन्ध किससे है ?
(क) कृष्णभक्ति
(ख) सगुणभक्ति’
(ग) निर्गुणभक्ति
(घ) रामभक्ति
उत्तर:
(ग) निर्गुणभक्ति

प्रश्न 41.
कृष्णभक्ति शाखा के कवि नहीं हैं ।
(क) सूरदास
(ख) नन्ददास
(ग) नाभादास
(घ) जगन्नाथ दास
उत्तर:
(ग) नाभादास

प्रश्न 42.
कृष्णभक्ति शाखा के कौन कवि नहीं हैं ?
(क) मलिक मुहम्मद जायसी
(ख) तुलसीदास
(ग) सूरदास
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त
उत्तर:
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

प्रश्न 43.
निम्नलिखित कवियों में वल्लभाचार्य का शिष्य कौन था ?
(क) भूषण
(ख) भिखारीदास
(ग) रघुराज सिंह
(घ) कृष्णदास
उत्तर:
(घ) कृष्णदास

प्रश्न 44.
कृष्णभक्ति शाखा का प्रथम कवि कहते हैं
(क) सूरदास को
(ख) विद्यापति को
(ग) मीराबाई को
(घ) रसखान को
उत्तर:
(ख) विद्यापति को

प्रश्न 45.
वात्सल्य रस के सम्राट कहे जाते हैं
या
श्रृंगार’ और ‘वात्सल्य रस के अमर कवि हैं
(क) तुलसीदास
(ख) सूरदास
(ग) परमानन्ददास
(घ) कुम्भनदास
उत्तर:
(ख) सूरदास

प्रश्न 46.
कौन सगुण भक्ति शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) सूरदास
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) तुलसीदास
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 47.
कृष्णभक्ति काव्यधारा के अन्तर्गत आते हैं
(क) सभी ब्रजभाषा के कवि
(ख) भक्तिकाल के कवि
(ग) अष्टछाप के कवि
(घ) सभी श्रृंगारिक रचनाकार
उत्तर:
(ग) अष्टछाप के कवि

प्रश्न 48.
मर्यादा पुरुषोत्तम राम की अवधारणा दी
(क) वाल्मीकि
(ख) तुलसीदास
(ग) कुम्भनदास
(घ) नन्ददास
उत्तर:
(ख) तुलसीदास

प्रश्न 49.
राम भक्ति शाखा से सम्बन्धित हैं
(क) कुम्भनदास
(ख) परमानन्ददास
(ग) नाभादास
(घ) चतुर्भुजदास
उत्तर:
(ग) नाभादास

प्रश्न 50.
हिन्दुओं के लिए कौन-से कवि आदरणीय हैं ?
(क) कबीर
(ख) रहीम
(ग) सूरदास
(घ) तुलसीदास
उत्तर:
(घ) तुलसीदास

प्रश्न 51.
तुलसीदास ने ‘श्रीरामचरितमानस’ की रचना की है
(क) ब्रजभाषा में
(ख) भोजपुरी में
(ग) अवधी में
(घ) खड़ी बोली में
उत्तर:
(ग) अवधी में

प्रश्न 52.
कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित नहीं है?
(क) जीवन की नश्वरता का वर्णन
(ख) ईश्वर के नाम-स्मरण की महत्ता
(ग) सहयोग और समन्वय की भावना
(घ) नारी को भोप्य सम्पत्ति के रूप में प्रस्तुत करना
उत्तर:
(घ) नारी को भोप्य सम्पत्ति के रूप में प्रस्तुत करना

प्रश्न 53.
कुम्भनदास, परमानन्द दास, क्षीत स्वामी, गोविन्द स्वामी, चतुर्भुज दास, नन्ददास तथा सूरदास को किस श्रेणी काकवि माना जाता था ?
(क) सन्त कवि
(ख) गायक कवि
(ग) महान् कवि
(घ) अष्टछाप के कवि
उत्तर:
(घ) अष्टछाप के कवि

प्रश्न 54.
‘अष्टछाप’ के कवियों का सम्बन्ध भक्तिकाल की किस शाखा से है ?
(क) ज्ञानाश्रयी शाखा
(ख) प्रेमाश्रयी शाखा
(ग) कृष्णभक्ति शाखा
(ग) रामभक्ति शाखा
उत्तर:
(ग) कृष्णभक्ति शाखा

प्रश्न 55.
मलिक मुहम्मद जायसी, मंझन तथा कुतुबन किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) ज्ञानाश्रयी निर्गुण काव्यधारा
(ख) सगुण भक्ति काव्यधारा
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण काव्यधारा
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण काव्यधारा

प्रश्न 56.
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि प्रेमाश्रयी शाखा से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) जायसी
(ख) मंझेन
(ग) चन्दबरदाई
(घ) कुतुबन
उत्तर:
(ग) चन्दबरदाई

प्रश्न 57.
‘प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा’ का सम्बन्ध किससे था ?
(क) कृष्ण-भक्ति
(ख) सगुण भक्ति
(ग) निर्गुण भक्ति
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) निर्गुण भक्ति

प्रश्न 58.
लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम का प्रतिपादन किस काव्यधारा के काव्य के अन्तर्गत किया गया है ?
(क) निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(घ) सगुण भक्ति काव्यधारा
उत्तर:
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण भक्ति काव्यधारा

प्रश्न 59.
रसखान किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) प्रेमाश्रयी काव्यधारा
(ख), निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(ग) सगुण भक्ति काव्यधारा
(घ) कृष्णभक्ति काव्यधारा
उत्तर:
(घ) कृष्णभक्ति काव्यधारा

प्रश्न 60.
गोस्वामी तुलसीदास केशवदास, हृदयराम तथा प्राणचन्द किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) सगुण भक्ति काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) ज्ञानाश्रयी भक्ति काव्यधारा
(घ) रामभक्ति काव्यधारा
उत्तर:
(घ) रामभक्ति काव्यधारा

प्रश्न 61.
सखा-भाव की भक्ति-भावना की प्रधानता तथा श्रृंगार एवं वात्सल्य रस की प्रधानता किस काव्यधारा की मुख्य विशेषताएँ हैं ?
(क) प्रेमाश्रयी काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) सगुण भक्ति काव्यधारा
(घ) रामभक्ति काव्यधारा
उत्तर:
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा

प्रश्न 62.
सेवक-सेव्य भाव की भक्ति की प्रधानता है
(क) सन्त काव्यधारा में
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा में
(ग) रामभक्ति काव्यधारा में
(घ) सगुण भक्ति काव्यधारा में
उत्तर:
(ग) रामभक्ति काव्यधारा में

प्रश्न 63.
‘भक्तिकाल’ का समय आचार्य रामचन्द्रशुक्ल ने माना है
(क) संवत् 1000 से संवत् 1375 तक
(ख) संवत् 1374 से संवत् 1700 तक
(ग) संवत् 1040 से संवत् 1370 तक
(घ) संवत् 950 से संवत् 1440 तक
उत्तर:
(ख) संवत् 1374 से संवत् 1700 तक

प्रश्न 64.
निम्नांकित में से कौन प्रेमाश्रयी शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) जायसी
(ख) सूरदास
(ग) मंझन
(घ) कुतुबन
उत्तर:
(ख) सूरदास

प्रश्न 65.
भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा के कवि हैं
(क) कुम्भनदास
(ख) दादूदयाल
(ग) मंझन
(घ) नन्ददास
उत्तर:
(ग) मंझन

प्रश्न 66.
निम्नलिखित में से कौन-सी प्रवृत्ति ज्ञानाश्रयी शाखा के काव्य में नहीं पायी जाती ?
(क) गुरु-गोविन्द की महत्ता
(ख) समाज-सुधार का दृष्टिकोण
(ग) नायक-नायिका का वर्णन
(घ) आडम्बर का विरोध
उत्तर:
(ग) नायक-नायिका का वर्णन

प्रश्न 67.
निम्नलिखित में एक रचना तुलसीदास की नहीं है; उसका नाम लिखिए
(क) श्रीकृष्णगीतावली
(ख) साहित्यलहरी
(ग) विनयपत्रिका
(घ) पार्वतीमंगल
उत्तर:
(ख) साहित्यलहरी

प्रश्न 68.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना भक्तिकाल में लिखी गयी है ?
(क) कामायनी
(ख) सूरसागर
(ग) भारतभारती
(घ) उद्धवशतक
उत्तर:
(ख) सूरसागर

प्रश्न 69.
गोस्वामी तुलसीदास रचित ‘विनयपत्रिका’ की भाषा है
(क) अवधी
(ख) मैथिली
(ग) ब्रज
(घ) खड़ी बोली
उत्तर:
(ग) ब्रज

प्रश्न 70.
गोस्वामी तुलसीदास के बचपन का नाम था
(क) तुकाराम
(ख) आत्माराम
(ग) सीताराम
(घ) रामबोला
उत्तर:
(घ) रामबोला

प्रश्न 71.
रामचन्द्र शुक्ल ने भक्तिकाल का सर्वश्रेष्ठ लोकवादी कवि किसे कहा है ?
(क) कबीरदास
(ख) सूरदास
(ग) मलिक मुहम्मद जायसी
(घ) तुलसीदास
उत्तर:
(घ) तुलसीदास

प्रश्न 72.
निम्नलिखित में से किस कवि को काव्य श्रीमद्भागवत से अत्यधिक प्रभावित है ?
(क) केशव
(ख) सूर
(ग) तुलसी
(घ) बिहारी
उत्तर:
(ख) सूर

प्रश्न 73.
निम्नलिखित में से किस कवि को बाल-वर्णन क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है ?
(क) तुलसीदास
(ख) बिहारी
(ग) सूरदास
(घ) केशवदास
उत्तर:
(ग) सूरदास

प्रश्न 74.
निम्नलिखित कवियों में स्वामी रामानन्द का शिष्य कौन था ?
(क) नानक
(ख) मलूकदास
(ग) रैदास
(घ) कबीरदास
उत्तर:
(घ) कबीरदास

प्रश्न 75.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) लोकोन्मुखी प्रवृत्ति के कारण इस काल की भक्ति-भावना लोक-प्रचलित है।
(ख) इस काल को समस्त साहित्य आक्रमण एवं युद्ध के प्रभावों की मन:स्थितियों का प्रतिफलन है।
(ग) हिन्दी साहित्य में आधुनिकता का सूत्रपात अंग्रेजों की साम्राज्यवादी शासन-प्रणाली के नवीन अनुभव से हुआ था।
(घ) प्रगतिवाद के साथ-साथ मनुष्य के मन के यथार्थ को अभिव्यक्त करने वाली प्रयोगवादी धारा भी प्रवाहित हुई।
उत्तर:
(क) लोकोन्मुखी प्रवृत्ति के कारण इस काल की भक्ति-भावना लोक-प्रचलित है।

प्रश्न 76.
“वह इस असार संसार को न देखने के वास्ते आँखें बन्द किये थे।” यह किसका कथन है?
(क) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का
(ख) मलिक मुहम्मद जायसी का
(ग) भारतेन्दु हश्चिन्द्र का
(घ) जगन्नाथदास रत्नाकर का
उत्तर:
(ग) भारतेन्दु हश्चिन्द्र का

प्रश्न 77.
कौन-सा कथन भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा से सम्बद्ध है ?
(क) स्वच्छन्दवादी काव्य-रचनाओं का कला-पक्ष भी नवीनता लिये हुए होता है।
(ख) सामाजिक रूढ़ियों से मुक्त एवं सौन्दर्य-वृत्ति से प्रेरित स्वच्छन्द प्रेम तथा प्रगाढ़ प्रणय भावना ही इस काव्य का मूल विषय रहा है।
(ग) श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में वात्सल्य रस की प्रमुखता है।
(घ) कवियों ने अपने-अपने आश्रयदाताओं की इच्छा के अनुरूप श्रृंगार रस में ही अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
उत्तर:
(ख) सामाजिक रूढ़ियों से मुक्त एवं सौन्दर्य-वृत्ति से प्रेरित स्वच्छन्द प्रेम तथा प्रगाढ़ प्रणय भावना ही इस काव्य का मूल विषय रहा है।

प्रश्न 78.
निम्नलिखित में से कौन सगुण भक्तिशाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) सूरदास
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) तुलसी
(घ) केशवदास
उत्तर:
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 79.
निम्नांकित में रामभक्ति शाखा में कौन नहीं हैं ?
(क) तुलसीदास
(ख) चतुर्भुज दास
(ग) अग्रदास
(घ) नाभादास
उत्तर:
(ख) चतुर्भुज दास

प्रश्न 80.
भक्तिकाल की रचनाओं में निम्नलिखित में से कौन सबसे अधिक लोकप्रिय है ?
(क) पद्मावत
(ख) श्रीरामचरितमानस
(ग) रामचन्द्रिका
(घ) सूरदास
उत्तर:
(ख) श्रीरामचरितमानस

प्रश्न 81.
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ सगुण भक्तिधारा का श्रेष्ठ ग्रन्थ है ?
(क) कवितावली
(ख) साहित्य लहरी
(ग) श्रीरामचरितमानस
(घ) रामलला नहळू
उत्तर:
(ग) श्रीरामचरितमानस

प्रश्न 82.
भक्तिकाल का काव्य नहीं है
(क) पद्मावत
(ख) पृथ्वीराज रासो
(ग) रामचरितमानस
(घ) सूरसागर
उत्तर:
(ख) पृथ्वीराज रासो

प्रश्न 83.
भक्तिकाल की कृति है
(क) साकेत
(ख) पार्वती-मंगल
(ग) कामायनी
(घ) पृथ्वीराज रासो
उत्तर:
(ख) पार्वती-मंगल

प्रश्न 84.
सामाजिक दृष्टि से घोर अध:पतन का काल था
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) छायावाद काल
उत्तर:
(ग) रीतिकाल

प्रश्न 85.
रीतिकाल से सम्बन्धित विशेषता है
(क) सख्य भाव की भक्ति की प्रधानता
(ख) समन्वयकारी भावना
(ग) भक्ति की प्रधानता
(घ) नारी-सौन्दर्य का विलासितापूर्ण चित्रण
उत्तर:
(घ) नारी-सौन्दर्य का विलासितापूर्ण चित्रण

प्रश्न 86.
रीतिकाल का अन्य नाम है
(क) स्वर्णकाल
(ख) उद्भव काल
(ग) श्रृंगार काल
(घ) संक्रान्तिकाल
उत्तर:
(ग) श्रृंगार काल

प्रश्न 87.
रीतिकाल के कवियों की रचनाओं में प्रधानता है
(क) भावुकता की
(ख) समाज-सुधार की
(ग) अलंकार-प्रदर्शन की
(घ) राष्ट्रीय भावना की
उत्तर:
(ग) अलंकार-प्रदर्शन की

प्रश्न 88.
‘कठिन काव्य का प्रेत’ कहा जाता है
(क) घनानन्द’ को
(ख) “भूषण’ को
(ग) ‘केशव’ को
(घ) ‘पद्माकर’ को
उत्तर:
(ग) ‘केशव’ को

प्रश्न 89.
कौन-सा ग्रन्थ रीतिकालीन काव्य-परम्परा से सम्बन्धित है ?
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) बिहारी सतसई
(ग) दीपशिखा
(घ) रश्मिरथी
उत्तर:
(ख) बिहारी सतसई

प्रश्न 90.
निम्नलिखित में कौन-से कवि रीतिकाल के हैं ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ग) मलूकदास
(घ) बिहारी
उत्तर:
(घ) बिहारी

प्रश्न 91.
रीतिबद्ध काव्यधारा के कवि हैं
(क) केशवदास
(ख) बिहारी
(ग) घनानन्द
(घ) बोधा
उत्तर:
(ख) बिहारी

प्रश्न 92.
‘बिहारी सतसई’ की भाषा है
(क) अवधी
(ख) खड़ी बोली
(ग) ब्रजभाषा
(घ) मैथिली
उत्तर:
(ग) ब्रजभाषा

प्रश्न 93.
रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि हैं
(क) घनानन्द
(ख) सेनापति
(ग) बिहारी
(घ) वृन्द
उत्तर:
(क) घनानन्द

प्रश्न 94.
रीतिकाल की कृति है
(क) रसमंजरी
(ख) प्रेमसागर
(ग) आर्या सप्तशती
(घ) बिहारी सतसई
उत्तर:
(घ) बिहारी सतसई

प्रश्न 95.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन रीतिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) भागवत धर्म के प्रचार तथा प्रसार के परिणामस्वरूप भक्ति आन्दोलन का सूत्रपात हुआ था
(ख) वीरगाथाओं की रचना प्रवृत्ति की प्रधानता थी
(ग) सामान्य रूप से श्रृंगारप्रधान लक्षण-ग्रन्थों की रचना हुई।
(घ) गुरु और गोविन्द की महत्ता का प्रतिपादन हुआ।
उत्तर:
(ग) सामान्य रूप से श्रृंगारप्रधान लक्षण-ग्रन्थों की रचना हुई।

प्रश्न 96.
निम्नलिखित में रीतिमुक्त कवि कौन हैं ?
(क) महाकवि देव
(ख) आलम
(ग) मतिराम
(घ) पद्माकर
उत्तर:
(ख) आलम

प्रश्न 97.
रीतिकाल की निम्नलिखित प्रमुख प्रवृत्तियों में से कौन-सी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है ?
(क) राज-प्रशस्ति
(ख) शृंगारिकता
(ग) रीति निरूपण
(घ) नीति
उत्तर:
(ख) शृंगारिकता

प्रश्न 98.
निम्नलिखित कवियों में से रीतिकाल का केवि कौन नहीं है ?
(क) घनानन्द
(ख) मतिराम
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) पद्माकर
उत्तर:
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 99.
‘कवितावर्धिनी’ साहित्यिक संस्था की स्थापना की थी–
(क) जर्यशंकर प्रसाद ने
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(ग) महादेवी वर्मा ने
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने
उत्तर:
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने

प्रश्न 100.
भारतेन्दु युग की रचना है
(क) प्रेम-माधुरी
(ख) कामायनी
(ग) निरुपमा
(घ) युगवाणी
उत्तर:
(क) प्रेम-माधुरी

प्रश्न 101.
‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ पत्रिका के सम्पादक थे
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त
उत्तर:
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 102.
साहित्य सुधानिधि’ के सम्पादक हैं
(क) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
उत्तर:
(क) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर

प्रश्न 103.
‘हरिऔध’ का जन्म-स्थान है
(क) एबटाबाद
(ख) निजामाबाद
(ग) काशी
(घ) फर्रुखाबाद
उत्तर:
(ख) निजामाबाद

प्रश्न 104.
मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक काल के किस युग से सम्बन्धित हैं ?
(क) शुक्ल युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादी युग
(घ) छायावादोत्तर युग
उत्तर:
(ख) द्विवेदी युग

प्रश्न 105.
मैथिलीशरण गुप्त का प्रथम काव्य-संग्रह है
(क) अनद्य
(ख) भारत भारती
(ग) पंचवटी
(घ) सिद्धराज
उत्तर:
(ख) भारत भारती

प्रश्न 106.
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ किस युग के कवि हैं ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) प्रगतिवाद युग
(ग) द्विवेदी युग
(घ) छायावाद युग
उत्तर:
(ग) द्विवेदी युग

प्रश्न 107.
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ द्विवेदी युग से सम्बन्धित है?
(क) कामायनी
(ख) पल्लव
(ग) साकेत
(घ) यामी
उत्तर:
(ग) साकेत

प्रश्न 108.
निम्नलिखित में से द्विवेदी युग की रचना है
(क) कामायनी
(ख) तार-सप्तक
(ग) प्रिय-प्रवास
(घ) ग्राम्या
उत्तर:
(ग) प्रिय-प्रवास

प्रश्न 109.
द्विवेदी युग में लिखी गयी रचना है
(क) सान्ध्यगीत
(ख) गीतावली
(ग) पंचवटी
(घ) कवि प्रिया
उत्तर:
(ग) पंचवटी

प्रश्न 110.
द्विवेदी युग का महाकाव्य नहीं है
(क) प्रियप्रवास
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) द्वापर
उत्तर:
(ग) कामायनी

प्रश्न 111.
श्रृंगार के पूर्ण बहिष्कार से सौन्दर्य का स्रोत सूख गया था
(क) भारतेन्दु युग में
(ख) द्विवेदी युग में
(ग) छायावाद युग में
(घ) रीतिकाल में
उत्तर:
(ख) द्विवेदी युग में

प्रश्न 112.
‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’-यह प्रसिद्ध पंक्ति किस काल की देन है
(क) छायावादोत्तर काल
(ख) भारतेन्दु काल
(ग) छायावादी काल
(घ) रीतिकाल
उत्तर:
(ख) भारतेन्दु काल

प्रश्न 113.
हिन्दी साहित्य में ‘आधुनिक काल’ का सूत्रपात किस शासन-काल में हुआ ?
(क) स्व-शासन-काल
(ख) ब्रिटिश शासन-काल
(ग) मुगल शासन-काल
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) ब्रिटिश शासन-काल

प्रश्न 114.
हिन्दी साहित्य में आधुनिकता का प्रवर्तक साहित्यकार किसे माना जाता है ?
(क) भूषण
(ख) भारतेदु हरिश्चन्द्र
(ग) मतिराम
(घ) गंग कवि
उत्तर:
(ख) भारतेदु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 115.
हिन्दी जागरण के अग्रदूत थे
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) मुंशी प्रेमचन्द
उत्तर:
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 116.
निम्नांकित में से कौन-सी रचना भारतेन्दु युग में लिखी गयी है ?
(क) प्रेममाधुरी
(ख) कामायनी
(ग) निरुपमा
(घ) युगवाणी
उत्तर:
(क) प्रेममाधुरी

प्रश्न 117.
निम्नलिखित में से उस ग्रन्थ का नाम लिखिए जो ‘हरिऔध’ जी का नहीं है
(क) चोखे चौपदे
(ख) वैदेही वनवास
(ग) चित्राधार
(घ) प्रियप्रवास
उत्तर:
(ग) चित्राधार

प्रश्न 118.
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावादी नहीं है ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त
उत्तर:
(ग) मैथिलीशरण गुप्त

प्रश्न 119.
निम्नलिखित में से छायावादयुगीन कवि हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर
(घ) रामधारीसिंह ‘दिनकर’
(ङ) कबीरदास
उत्तर:
(क) जयशंकर प्रसाद

प्रश्न 120.
निम्नलिखित में से कौन-सा छायावादी कवि है ?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’
(ख) भूषण
(ग) बिहारी
(घ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
उत्तर:
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’

प्रश्न 121.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन छायावाद से सम्बन्धित है ?
(क) सौन्दर्य को स्रोत सूख गया था
(ख) ब्रजभाषा की एकछत्र साम्राज्य था
(ग) सामाजिक समस्याओं का चित्रण हुआ
(घ) मानव की अन्तरात्मा के सौन्दर्य का उद्घाटन हुआ
उत्तर:
(घ) मानव की अन्तरात्मा के सौन्दर्य का उद्घाटन हुआ

प्रश्न 122.
छायावाद युग का समय कब से कब तक माना जाता है ?
(क) 1938-1943 ई०
(ख) 1868-1900 ई०
(ग) 1919-1938 ई०
(घ) 1900–1922 ई०
उत्तर:
(ग) 1919-1938 ई०

प्रश्न 123.
‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से विभूषित किया गया है
(क) रामकुमार वर्मा को
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को
(ग) महादेवी क्र्मा को
(घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ को
उत्तर:
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को

प्रश्न 124.
छायावादी कविता के ह्रास का सबसे बड़ा कारण था
(क) भक्ति-भावना
(ख) विदेशी शासन के दमन-चक्र की पीड़ा
(ग) नारी को भोग्य सम्पत्ति का रूप देना
(घ) लक्षण ग्रन्थों की रचना
उत्तर:
(ख) विदेशी शासन के दमन-चक्र की पीड़ा

प्रश्न 125.
छायावादी काव्य की विशेषता नहीं है
(क) रहस्यवादे की प्रधानता
(ख) स्वदेश प्रेम की अभिव्यक्ति
(ग) मानवतावादी दृष्टिकोण
(घ) व्यक्तिवादी भावना एवं अतिशय भावुकता
उत्तर:
(ख) स्वदेश प्रेम की अभिव्यक्ति

प्रश्न 126.
छायावाद की मुख्य विशेषता है–
(क) प्रकृति-चित्रण
(ख) युद्धों का वर्णन
(ग) यथार्थ-चित्रण
(घ) भक्ति की प्रधानता
उत्तर:
(क) प्रकृति-चित्रण

प्रश्न 127.
छायावाद’ की विशेषता है
(क) इतिवृत्तात्मकता,
(ख) श्रृंगारिक भावना
(ग) सौन्दर्य एवं प्रेम
(घ) उपदेशात्मक वृत्ति
उत्तर:
(ख) श्रृंगारिक भावना

प्रश्न 128.
छायावादी कवि हैं
(क) सुमित्रानन्दन पन्त
(ख) नागार्जुन
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
उत्तर:
(क) सुमित्रानन्दन पन्त

प्रश्न 129.
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावादी है ?
(क) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(ख) श्रीधर पाठक
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) मैथिलीशरण गुप्त
उत्तर:
(ग) महादेवी वर्मा

प्रश्न 130.
प्रकृति के सुकुमार कवि कहलाते हैं
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त

प्रश्न 131.
छायावादी काव्य की वृहत्-त्रयी के रचनाकार नहीं हैं
(क) प्रसाद
(ख) पन्त
(ग) निराला
(घ) महादेवी
उत्तर:
(घ) महादेवी

प्रश्न 132.
‘प्रसाद’ का काव्य प्रवृत्ति-निवृत्ति मिश्रित है
(क) लहर’ में
(ख) ‘आँसू’ में।
(ग) “झरना’ में
(घ) ‘कामायनी’ में
उत्तर:
(घ) ‘कामायनी’ में

प्रश्न 133.
कौन-सा नया अलंकार छायावाद की देन है ?
(क) अनुप्रास
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) सन्देह
(घ) मानवीकरण
उत्तर:
(घ) मानवीकरण

प्रश्न 134.
कौन-सा कवि छायावाद के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ग) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(ग) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’

प्रश्न 135.
आधुनिक युग की मीरा हैं
(क) महादेवी वर्मा
(ख) सुभद्राकुमारी चौहान
(ग) सुमित्रा कुमारी सिन्हा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) महादेवी वर्मा

प्रश्न 136.
इतिवृत्तात्मकता की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप किस वाद का प्रादुर्भाव हुआ ?
(क) मानववाद
(ख) छायावाद
(ग) प्रगतिवाद
(घ) प्रयोगवाद
उत्तर:
(ख) छायावाद

प्रश्न 135.
इतिवृत्तांत्मकता की प्रधानता’ किस युग की मुख्य विशेषता थी ?
(क) छायावाद काल
(ख) द्विवेदी युग
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) प्रगति काल
उत्तर:
(ख) द्विवेदी युग

प्रश्न 137.
‘पन्त’ जी के उस काव्य-ग्रन्थ का नाम लिखिए जिसमें उनकी सांस्कृतिक एवं दार्शनिक विचारधारा व्यक्त हुई है
(क) चिदम्बरी
(ख) उत्तरा
(ग) पल्लव
(घ) लोकायतन
उत्तर:
(घ) लोकायतन

प्रश्न 138.
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कौन-सी पत्रिका प्रकाशित की थी ?
(क) कविवचन सुधा
(ख) सरस्वती
(ग) कल्पना
(घ) ज्ञानोदय
उत्तर:
(क) कविवचन सुधा

प्रश्न 139.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना छायावाद युग में लिखी गयी है ?
(क) प्रेम-माधुरी
(ख) उद्धव शतक
(ग) चित्राधार
(घ) सूरसारावली
उत्तर:
(ग) चित्राधार

प्रश्न 140.
‘कामायनी’ और ‘झरना’ किस युग की रचनाएँ हैं ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादी युग
(घ) प्रगतिवादी युग
उत्तर:
(ग) छायावादी युग

प्रश्न 141.
‘कामायनी’ महाकाव्य में सर्गों की संख्या है
(क) नौ
(ख) बारह
(ग) पन्द्रह
(घ) सत्रह
उत्तर:
(ग) पन्द्रह

प्रश्न 142.
निम्नलिखित में कौन-सा कथन छायावाद से सम्बन्धित है ?
(क) इस काव्य में लौकिक वर्णनों के माध्यम से अलौकिकता की व्यंजना की गयी है।
(ख) धार्मिक क्षेत्र में रूढ़िवाद और बाह्याडम्बर का विरोध किया गया है।
(ग) इस काव्य में मूलतः सौन्दर्य और प्रेम-भावना मुखरित हुई है।
(घ) इस काव्य में भाव-पक्ष की अपेक्षा कला–पक्ष की प्रधानता है।
उत्तर:
(क) इस काव्य में लौकिक वर्णनों के माध्यम से अलौकिकता की व्यंजना की गयी है।

प्रश्न 143.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आधुनिक काल से सम्बन्धित है ?
(क) हिन्दी काव्य कवियों के स्वच्छन्द और समर्थ व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है।
(ख) विलास के साधनों से हीन वर्ग कर्म एवं आचार के स्थान में अन्धविश्वासी हो चला था
(ग) साहित्य मानव-समाज की भावनात्मक स्थिति और गतिशील चेतना की अभिव्यक्ति है।
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(क) हिन्दी काव्य कवियों के स्वच्छन्द और समर्थ व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है।

प्रश्न 144.
निम्नलिखित उद्धरणों में कौन-सी उद्धरण आधुनिक काल से सम्बन्धित है ?
(क) जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है।
(ख) लौकिक (देशभाषा) साहित्य देशभाषा डिंगल में उपलब्ध होता है।
(ग) हिन्दी साहित्य में मार्क्स के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के दर्शन को प्रगतिवाद और फ्रायड के मनोविश्लेषण को प्रयोगवाद की संज्ञा दी गयी।
(घ) रहस्यवाद के दर्शन से इस धारा के अधिकांश कवियों का भक्त कवियों में अन्तर्भाव हो जाता है।
उत्तर:
(ग) हिन्दी साहित्य में मार्क्स के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के दर्शन को प्रगतिवाद और फ्रायड के मनोविश्लेषण को प्रयोगवाद की संज्ञा दी गयी।

प्रश्न 145.
विदेशी सत्ता प्रतिष्ठित हो जाने के कारण देश की जनता में गौरव, गर्व और उत्साह का अवसर न रह गया था।” यह कथन निम्नलिखित लेखकों में से किस लेखक का है ?
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा
(घ) डॉ० नगेन्द्र
उत्तर:
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

प्रश्न 146.
‘वह तोड़ती पत्थर’ नामक कविता किस प्रकार की है ?
(क) प्रयोगवादी
(ख) रीतिकालीन
(ग) द्विवेदीयुगीन
(घ) प्रगतिवादी
उत्तर:
(घ) प्रगतिवादी

प्रश्न 147.
प्रगतिवादी कवि नहीं है
(क) शिवमंगल सिंह सुमन
(ख) रामविलास शर्मा
(ग) नागार्जुन
(घ) भवानीप्रसाद मिश्र
उत्तर:
(घ) भवानीप्रसाद मिश्र

प्रश्न 148.
प्रगतिवादी कवि कौन है ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) पाल भसीन
(ग) नागार्जुन
(घ) प्रभाकर माचवे
उत्तर:
(ग) नागार्जुन

प्रश्न 149.
काव्य में हालावाद के प्रवर्तक हैं
(क) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) हरिवंश राय बच्चन
उत्तर:
(घ) हरिवंश राय बच्चन

प्रश्न 150.
निम्नलिखित में प्रगतिवाद की कौन-सी समयावधि मान्य है ?
(क) 1920 ई० से 1918 ई०
(ख) 1918 ई० से 1936 ई०
(ग) 1936 ई० से 1943 ई०
(घ) 1943 ई० से 1953 ई०
उत्तर:
(ग) 1936 ई० से 1943 ई०

प्रश्न 151.
काव्य जगत् में व्याप्त प्राचीन रूढ़ियों और मान्यताओं का स्पष्ट विरोध’ तथा काव्य के ‘मानवतावाद की प्रधानता’ किस काल की मुख्य विशेषता है?
(क) द्विवेदी काल
(ख) प्रगतिवादी काल
(ग) छायावादी काल
(घ) प्रयोगवादी काल
उत्तर:
(ख) प्रगतिवादी काल

प्रश्न 152.
निम्नलिखित में छायावादोत्तर कवि कौन है ?
(क) हरिऔध
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) अज्ञेय
उत्तर:
(घ) अज्ञेय

प्रश्न 153.
‘नयी कविता’ का शुभारम्भ हुआ
(क) सन् 1954 में
(ख) सन् 1940 में
(ग) सन् 1950 में
(घ) सन् 1947 में
उत्तर:
(क) सन् 1954 में

प्रश्न 154.
नयी कविता की आधारभूत विशेषता है
(क) आध्यात्मिक छाया-दर्शन
(ख) श्रृंगार की प्रधानता
(ग) किसी भी दर्शन से बँधी हुई नहीं है।
(घ) लाक्षणिकता
उत्तर:
(ग) किसी भी दर्शन से बँधी हुई नहीं है।

प्रश्न 155.
किसी भी दर्शन के साथ बँधी हुई नहीं है|
(क) छायावादी कविता
(ख) नयी कविता
(ग) प्रगतिवादी कविता
(घ) रीतिकालीन कविता
उत्तर:
(ख) नयी कविता

प्रश्न 156.
कनुप्रिया’ किस युग से सम्बन्धित रचना है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) शुक्ल युग
(ग) छायावादी युग
(घ) छायावादोत्तर युग
उत्तर:
(घ) छायावादोत्तर युग

प्रश्न 157.
प्रयोगवादी काव्यधारा के जनक (प्रवर्तक) हैं
(क) ‘अज्ञेय’
(ख) ‘दिनकर’
(ग) “मुक्तिबोध’
(घ) “धूमिल’
उत्तर:
(क) ‘अज्ञेय’

प्रश्न 158.
निम्नलिखित में कौन प्रगतिवादी कवि नहीं है ?
(क) प्रभाकर माचवे
(ख) मुक्तिबोध
(ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
(घ) अज्ञेय
उत्तर:
(घ) अज्ञेय

प्रश्न 159.
प्रयोगवाद काव्य के क्षेत्र में
(क) चिरकाल तक रहा
(ख) शीघ्र ही समाप्ति की ओर चला गया
(ग) बहुत प्रसिद्ध हुआ
(घ) अधिक सफल नहीं हुआ
उत्तर:
(घ) अधिक सफल नहीं हुआ

प्रश्न 160.
घोर वैयक्तिकता, अति यथार्थवाद, अति बौद्धिकता तथा सभी पुरानी मान्यताओं के विरुद्ध पूर्ण विद्रोह किस काव्यधारा की विशेषताएँ हैं ?
(क) छायावादी काव्यधारा
(ख) प्रगतिवादी काव्यधारा
(ग) प्रयोगवादी काव्यधारा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) प्रयोगवादी काव्यधारा

प्रश्न 161.
‘प्रयोग सभी कालों के कवियों ने किया है।” …………………. किसी एक काल में किसी विशेष दिशा में प्रयोग करने की प्रवृत्ति स्वाभाविक ही है।” यह वक्तव्य निम्नलिखित रचनाकारों में किसका है?
(क) निराला
(ख) अज्ञेय
(ग) प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(ख) अज्ञेय

प्रश्न 162.
निम्नलिखित में से प्रयोगवादी कवि कौन है ?
(क) भूषण
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) बिहारी
(घ) अज्ञेय
उत्तर:
(घ) अज्ञेय

प्रश्न 163.
‘अज्ञेय’ ने ‘तार सप्तक’ को प्रकाशन कियाया ‘तार सप्तक’ का प्रकाशन वर्ष है
(क) सन् 1947 में
(ख) सन् 1943 में
(ग) सन् 1950 में
(घ) सन् 1931 में
उत्तर:
(ख) सन् 1943 में

प्रश्न 164.
तार सप्तक’ के सम्पादक हैं
(क) विद्यानिवास मिश्र
(ख) मुक्तिबोध
(ग) अज्ञेय
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी
उत्तर:
(ग) अज्ञेय

प्रश्न 165.
तार सप्तक से सम्बन्धित हैं
(क) रामविलास शर्मा
(ख) नरेन्द्र शर्मा
(ग) भवानी प्रसाद मिश्र
(घ) धर्मवीर भारती
उत्तर:
(क) रामविलास शर्मा

प्रश्न 166.
‘प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना कब हुई ?
(क) सन् 1943 में
(ख) सन् 1954 में
(ग) सन् 1938 में
(घ) सन् 1936 में
उत्तर:
(घ) सन् 1936 में

प्रश्न 167.
निम्नलिखित में कौन प्रेमाश्रयी शाखा को कवि नहीं है?
(क) जायसी
(ख) बिहारीलाल
(ग) कुतुबन
(घ) मंझन
उत्तर:
(ख) बिहारीलाल

प्रश्न 168.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) सामाजिक दृष्टि से यह काल घोर अध:पतन का काल था।
(ख) सिद्धों की वाममार्गी योग साधना की प्रतिक्रिया से नायपंथियों की हठयोग साधना आरम्भ हुई
(ग) जीवन का समन्वयवादी एवं मर्यादावादी दृष्टिकोण ही तुलसी की सबसे बड़ी देन है।
उत्तर:
(ग) जीवन का समन्वयवादी एवं मर्यादावादी दृष्टिकोण ही तुलसी की सबसे बड़ी देन है।

प्रश्न 169.
विनय-पत्रिका किस भाषा की कृति है ?
(क) अवधी
(ख) ब्रजभाषा
(ग) खड़ी बोली हिन्दी
(घ) भोजपुरी
उत्तर:
(ख) ब्रजभाषा

प्रश्न 170.
कृष्णकाव्य-धारा के प्रतिनिधि कवि हैं
(क) मीरा
(ख) रसखान
(ग) परमानन्ददास’
(घ) सूरदास
उत्तर:
(घ) सूरदास

प्रश्न 171.
कृष्णकाव्य-धारा के कवि नहीं हैं
(क) नन्ददास
(ख) चतुर्भुजदास,
(ग) सूरदास
(घ) लालदास
उत्तर:
(घ) लालदास

प्रश्न 172.
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ‘कृष्णभक्ति धारा’ से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) सूरदास
(ख) नाभादास
(ग) कृष्णदास
(घ) नन्ददास
उत्तर:
(ख) नाभादास

प्रश्न 173.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना वीरगाथात्मक नहीं है ?
(क) परमाल रासो
(ख) विद्यापति
(ग) पृथ्वीराज रासो’
(घ) बीसलदेव रासो
उत्तर:
(ख) विद्यापति

प्रश्न 174.
निम्नलिखित में से कौन-सा भक्तिकाल का काव्य है ?
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) बीसलदेव रासो
उत्तर:
(क) श्रीरामचरितमानस

प्रश्न 175.
निम्नलिखित कवियों में बल्लभाचार्य के शिष्य कौन हैं ?
(क) रघुराज सिंह
(ख) बिहारीलाल
(ग) भूषण
(घ) कृष्णदास
उत्तर:
(घ) कृष्णदास

प्रश्न 176.
निम्नलिखित में से भक्तिकाल का महाकाव्य है
(क) साकेत
(ख) कामायनी
(ग) श्रीरामचरितमानस
(घ) पृथ्वीराज रासो
उत्तर:
(ग) श्रीरामचरितमानस

प्रश्न 177.
निम्नलिखित में से रीतिकाल का काव्य है
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) रामचन्द्रिका
(ग) कामायनी
(घ) विनय पत्रिका
उत्तर:
(ख) रामचन्द्रिका

प्रश्न 178.
निम्नलिखित में कौन-सा कवि ‘रीतिमुक्त’ काव्यधारा का है ?
(क) चिन्तामणि
(ख) केशव
(ग) ठाकुर
(घ) देव
उत्तर:
(ग) ठाकुर

प्रश्न 179.
मैथिलीशरण आधुनिक काल के किस युग से सम्बन्धित हैं?
(क) शुक्लयुग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग
उत्तर:
(ख) द्विवेदी युग

प्रश्न 180.
निम्नलिखित में कौन-सी महादेवी वर्मा की रचना है ?
(क) धूप के धान
(ख) चाँद का मुँह टेढ़ा
(ग) सान्ध्यगीत
(घ) पल्लव
उत्तर:
(ग) सान्ध्यगीत

प्रश्न 181.
शोषण का विरोध एवं शोषकों के प्रति घृणा किस काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ मानी गयी हैं ?
(क) छायावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) प्रयोगवाद
(घ) नयी कविता
उत्तर:
(ख) प्रगतिवाद

प्रश्न 182.
नयी कविता के कवि हैं
(क) नरेन्द्र शर्मा
(ख) अज्ञेय
(ग) रामधारी सिंह दिनकर
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त
उत्तर:
(क) नरेन्द्र शर्मा

प्रश्न 183.
ज्ञानाश्रयी काव्यधारा के कवि नहीं हैं
(क) कबीरदास
(ख) मलूकदास
(ग) नन्ददास
(घ) रैदास
उत्तर:
(ग) नन्ददास

प्रश्न 184.
अमीर खुसरो कवि हैं
(क) आदिकाल के
(ख) भक्तिकाल के
(ग) रीतिकाल के
(घ) आधुनिककाल के
उत्तर:
(क) आदिकाल के

प्रश्न 185.
‘रीतिकाल’ को ‘ श्रृंगारकाल’ नाम दिया हैया रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के जिस काल को ‘रीतिकाल’ कहा है, उसे ‘ श्रृंगार काल’ नाम दिया है
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ग) आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने
(घ) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने
उत्तर:
(ग) आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने

प्रश्न 186.
रीतिकालीन कवि हैं
(क) मीराबाई
(ख) रसखान
(ग) द्विजदेव
(घ) विद्यापति
उत्तर:
(ग) द्विजदेव

प्रश्न 187.
‘हिन्दी साहित्य के हजार वर्षों में कबीर जैसा व्यक्तित्व लेकर कोई लेखक उत्पन्न नहीं हुआ।”यह कथन है
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का
(ख) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का
(ग) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का
(घ) आचार्य श्यामसुन्दर दास का
उत्तर:
(ग) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का

प्रश्न 188.
रामचन्द्र शुक्ल ने जिस काले को ‘वीरगाथाकाल’ कहा है, उसे आदिकाल कहा है
(क) राहुल सांकृत्यायन ने
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(घ) डॉ० धीरेन्द्र वर्मा ने
उत्तर:
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी ने

प्रश्न 189.
‘दूसरा सप्तक’ के कवि हैं
(क) रामविलास शर्मा
(ख) गिरिजा कुमार माथुर
(ग) केदारनाथ सिंह
(घ) भवानी प्रसाद मिश्र
उत्तर:
(घ) भवानी प्रसाद मिश्र

प्रश्न 190.
खड़ी बोली’ का प्रथम महाकाव्य है।
(क) वैदेही वनवास
(ख) प्रिय प्रवास
(ग) साकेत
(घ) कामायनी
उत्तर:
(ख) प्रिय प्रवास

प्रश्न 191.
‘रामभक्ति शाखा के कवि नहीं हैं—
(क) तुलसीदास
(ख) अग्रदास
(ग) चतुर्भुजदास
(घ) नाभादास
उत्तर:
(ग) चतुर्भुजदास

प्रश्न 192.
‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है|
(क) सुमित्रानन्दन पन्त को
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को
(घ) महादेवी वर्मा को
उत्तर:
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को

प्रश्न 193.
‘बसुआ गोविन्दपुर’ में जन्म हुआ था
(क) रत्नाकर का
(ख) सूरदास का
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का
(घ) बिहारी का
उत्तर:
(घ) बिहारी का

प्रश्न 194.
‘सूकर खेत’ स्थान सम्बन्धित है
(क) कबीरदास से
(ख) सूरदास से
(ग) तुलसीदास से
(घ) केशवदास से
उत्तर:
(ग) तुलसीदास से

प्रश्न 195.
‘आदिकाल’ का नाम ‘अपभ्रंश काल’ दिया है
(क) मिश्रबन्धु ने
(ख) राहुल सांकृत्यायन ने
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने

प्रश्न 196.
भवानीप्रसाद मिश्र कवि-रूप में संगृहीत हैं
(क) तारसप्तक में
(ख) दूसरा सप्तक में
(ग) तीसरा सप्तक में
(घ) चौथा सप्तक में
उत्तर:
(ख) दूसरा सप्तक में

प्रश्न 197.
हिन्दी साहित्य के ‘आदिकाल’ के लिए ‘बीज-वपन काल’ नाम दिया है
(क) रामचन्द्र शुक्ल ने
(ख) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(ग) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) डॉ० मोहन अवस्थी ने
उत्तर:
(ग) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने

प्रश्न 198.
तारसप्तक के सम्पादक हैं
(क) ‘अज्ञेय’
(ख) गिरिजाकुमार माथुर
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) मुक्तिबोध
उत्तर:
(क) ‘अज्ञेय’

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो
Number of Questions 119
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो

पत्र/पत्रिका विधा पर आधारित

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-1

(2) भारतेन्दु युग में प्रकाशित ‘आनन्द कादम्बिनी’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
(ग) राय कृष्णदास
(घ) धर्मवीर भारती

(3)
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-2
(4) ‘हिन्दी दीप्ति-प्रकाश’ नामक पत्रिका का सम्पादन किया
(क) प्रतापनारायण मिश्र ने
(ख) कार्तिकप्रसाद खत्री ने
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने
(घ) राय कृष्णदास ने

(5) ‘इन्दु’, ‘सुदर्शन’, ‘समालोचक’, ‘प्रभा’, ‘मर्यादा’और’माधुरी’ पत्रिकाएँ किस युग में प्रकाशित हुईं?
(क) भारतेन्दु युग में
(ख) द्विवेदी युग में
(ग) छायावाद युग में
(घ) छायावादोत्तर युग में

(6) ‘ब्राह्मण’ पत्र के सम्पादक हैं
(क) बालकृष्ण भट्ट
(ख) राधाचरण गोस्वामी
(ग) प्रतापनारायण मिश्र
(घ) पं० लल्लूलाल

(7) कवि-वचन-सुधा’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे–
(क) प्रतापनारायण मिश्र
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) श्यामसुन्दर दास
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द

(8) ‘विशाल-भारत’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे
(क) प्रेमचन्द
(ख) श्रीराम शर्मा
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) प्रतापनारायण मिश्र

(9) ‘हंस’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे–
(क) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) बालकृष्ण भट्ट
(घ) मुंशी प्रेमचन्द

(10) महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा सम्पावित पत्रिका है
(क) प्रदीप
(ख) इन्दु
(ग) प्रभा
(घ) सरस्वती 

(11) निम्नलिखित में से कौन पत्रिका नहीं है?
(क) इन्द्र
(ख) भारत दुर्दशा
(ग) सरस्वती
(घ) आनन्द कादम्बिनी

(12) ‘दिनकर के पत्र’ को प्रकाशन-वर्ष है
(क) 1970
(ख) 1977
(ग) 1981
(घ) 1991

(13) ‘सरस्वती’ पत्रिका के प्रथम सम्पादक हैं
(क) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) हरदेव बाहरी

(14) हिन्दी प्रदीप’ पत्र का सम्पादन होता था
(क) इलाहाबाद से
(ख) वाराणसी से
(ग) कानपुर से
(घ) दिल्ली से

उत्तर: (1) ख, (2) खे, (3) क, (4) ख, (5) ख, (6) ग,(7) घ, (8) ख, (9) घ, (10) घ, (11) ख, (12) क, (13) ख, (14) क।

नाटक विधा पर आधारित

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-3

(2)
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(3)
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(4) निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी रचना नाटक है?
(क) नमक का दारोगा
(ख) गोदान
(ग) आखिरी चट्टान तक
(घ) राजमुकुट

(5) सूतपुत्र’ नाटक के रचनाकार हैं
(क) डॉ० गंगासहाय ‘प्रेमी’
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) विष्णु प्रभाकर
(घ) हरिकृष्ण प्रेमी

(6) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना नाटक है?
(क) सन्नाटा
(ख) निन्दा रस
(ग) गरुड़ध्वज
(घ) राष्ट्र का स्वरूप

(7) निम्नलिखित में से नाटक है
(क) उसने कहा था
(ख) कलम का सिपाही
(ग) चन्द्रगुप्त
(घ) आँसू

(8) निम्नलिखित में से नाटककार हैं
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) मोहन राकेश
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) महादेवी वर्मा

(9) निम्नलिखित में से नाटक है-
(क) त्रिशंकु
(ख) आत्मनेपद
(ग) विपथगा
(घ) उत्तर प्रियदर्शी

(10) हिन्दी का प्रथम नाटक है
(क) सती-प्रताप
(ख) अजातशत्रु
(ग) स्कन्दगुप्त
(घ) नहुष

(11) स्कन्दगुप्त नाटक के लेखक है
(क) प्रेमचन्द
(ख) लक्ष्मीनारायण मिश्र
(ग) जयंशकर प्रसाद
(घ) धर्मवीर भारती

उत्तर: (1) घ, (2) ख, (3) घ, (4) घ, (5) क, (6) ग, (7) ग, (8) ख, (9), घ, (10) घ, (11) ग

एकांकी विधा पर आधारित

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-6
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-7

(4) निम्नलिखित में से कौन एकांकीकार नहीं हैं ?
(क) उपेन्द्रनाथ अश्क’
(ख) विष्णु प्रभाकर
(ग) लक्ष्मीनारायण मिश्र
(घ) सीताराम वर्मा

(5) हिन्दी एकांकी का विकास किस युग से माना जाता है ?
(क) छायावाद युग
(ख) छायावादोत्तर युग
(ग) द्विवेदी युग
(घ) भारतेन्दु युग

उत्तर: (1) क, (2) ग, (3) घ, (4) घ, (5) ख।

कहानी विधा पर आधारित

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(4)
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(5)
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(6)
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(7) ‘तीसरी कसम’, ‘पान की बेगम’, ‘रसपिरिया’ किस लेखक की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं ?
(क) फणीश्वरनाथ ‘रेणु’
(ख) शिवप्रसाद सिंह
(ग) प्रेमचन्द
(घ) अमरकान्त

(8) ‘रानी केतकी की कहानी’ नामक कहानी-विधा की रचना के रचयिता हैं
(क) पं० लल्लूलाल
(ख) मुंशी इंशाअल्ला खाँ
(ग) सदल मिश्र
(घ) रामप्रसाद निरंजनी

(9) पंचलाइट की रचना-विधा है
(क) निबन्ध ।
(ख) संस्मरण
(ग) कहानी
(घ) आत्मकथा

(10) ‘नमक का दारोगा’ के कहानीमर हैं
(क) जैनेन्द्र कुमार
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) प्रेमचन्द ”

(11) निम्नलिखित में से कौन-सी कहानी भारतेन्दु के पूर्व की है ?
(क) इन्दुमती
(ख) ग्यारह वर्ष का समय
(ग) रानी केतकी की कहानी
(घ) बुलाईवाली

(12) ‘दुलाईवाली’ किस विधा की रचना है ?
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) कहानी
(घ) रेखाचित्र

(13) मुंशी प्रेमचन्द ने किस विधा को ‘मानव चरित्र का चित्रमात्र’ कहा है ?
(क) जीवनी
(ख) उपन्यास
(ग) कहानी
(घ) संस्मरण

(14) ‘हरखू’ पात्र किस कहानी से सम्बन्धित है ?
(क) बलिदान
(ख) आकाशदीप
(ग) प्रायश्चित
(घ) समय

(15) ‘मधुआ’ किस विधा की रचना है ?
(क) रेखाचित्र
(ख) कहानी
(ग) आत्मकथा
(घ) संस्मरण

(16) ‘जिन्दगी और जोंक’ के लेखक हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) अमरकान्त
(ग) शिवानी
(घ) शिवप्रसाद सिंह

(17) इन्दुमती है
(क) प्रथम कहानी
(ख) प्रथम उपन्यास
(ग) निबन्ध
 (घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (1) ख, (2) क, (3) क, (4) ख, (5) , (6) ख, (7) क, (8) ख, (9) ग, (10) घ, (11) ग, (12) ग, (13).ग, (14) के, (15) खे, (16) ख, (17) क। 

उपन्यासविधा पर आधारित

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-13

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-14

(4) ‘गोदान’, ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’, ‘कर्मभूमि’ किस लेखक की रचनाएँ हैं ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) यशपाल
(ग) प्रेमचन्द
(घ) जैनेन्द्र कुमार

(5) ‘कंकाल’ और ‘तितली’ जैसे उपन्यास हिन्दी-साहित्य को किस लेखक ने दिये ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ग) नागार्जुन
(घ) प्रेमचन्द

(6) निम्नलिखित में से कौन उपन्यासकार प्रेमचन्द युग का नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र’
(ग) बालकृष्ण भट्ट
(घ) भगवतीप्रसाद वाजपेयी

(7)
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-15

(8) निम्नलिखित में से कौन उपन्यास नहीं है ?
(क) बाणभट्ट की आत्मकथा
(ख) मैला आँचल
(ग) शेखर : एक जीवनी
(घ) संस्कृति के चार अध्याय

(9) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना उपन्यास नहीं है ?
(क) परीक्षा गुरु
(ख) तितली
(ग) अशोक के फूल
(घ) गबन

(10) ‘परीक्षागुरु’ की रचना-विधा है
(क) कहानी
(ख) उपन्यास
(ग) नाटक
(घ) जीवनी

(11) ‘गिरती दीवारें’ (उपन्यास) के रचनाकार हैं
(क) उपेन्द्रनाथ अश्क’
(ख) शिवप्रसाद सिंह ,
(ग) सही०वा०’अज्ञेय’
(घ) रामविलास शर्मा

(12) ‘सुनीता’ विधा की दृष्टि से रचना है
(क) कहानी
(ख) आलोचना
(ग) निबन्ध
(घ) उपन्यास

(13) ‘बलचनमा’ उपन्यास है
(क) फणीश्वरनाथ रेणु का
(ख) नागार्जुन का
(ग) अमृतराय का
(घ) अमरकान्त का

उत्तर: (1) क, (2) ग, (3) ख, (4) ग, (5) क, (6) ग, (7) ख, (8) घ, (9) ग, (10) ख, (11) क, (12) घ,  (13) ख।

निबन्ध-विधा पर आधारित

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-16

(2) ‘चिन्तामणि’ निबन्ध-संग्रह में शुक्ल युग के किस निबन्धकार के निबन्ध संकलित हैं?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) सम्पूर्णानन्द

(3) इनमें से कौन शुक्ल युग के निबन्धकार नहीं हैं ?
(क) वियोगी हरि
(ख) राय कृष्णदास
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) वासुदेवशरण अग्रवाल

(4)
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-17

(5)
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(6)
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(7)
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(8) महादेवी वर्मा, विजयेन्द्र स्नातक और विद्यानिवास मिश्र किस युग के निबन्धकार हैं ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) शुक्ल युग
(घ) शुक्लोत्तर युग

(9)
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(10) ‘गेहूँ और गुलाब’ की रचना-विधा है
(क) निबन्ध
(ख) संस्मरण
(ग) डायरी
(घ) आत्मकथा

(11) निबन्ध विधा की रचना है
(क) मेला-झमेला
(ख) भारत-दुर्दशा
(ग) रसज्ञ-रंजन
(घ) आचरण की सभ्यता

(12) ‘राष्ट्र का स्वरूप’ निबन्ध के लेखक हैं
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ख) सरदार पूर्णसिंह
(ग) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(घ) अज्ञेय

(13) विद्यानिवास मिश्र ने किस प्रकार के निबन्ध अधिकं लिखे हैं ?
(क) ललित
(ख) ऐतिहासिक
(ग) मनोविश्लेषणात्मक निबन्ध
(घ) विश्लेषणात्मक निबन्ध

(14) निबन्ध’ शब्द के अंग्रेजी पर्यायै शब्द ‘एसे’ का अर्थ है
(क) प्रयोग
(ख) प्रयास
(ग) प्रबन्ध
(घ) प्रकीर्ण

(15) निम्नलिखित में कौन-सा वर्णनात्मक निबन्ध है ?
(क) आचरण की सभ्यता
(ख) महाकवि माघ का प्रभात वर्णन
(ग) कुटज
(घ) निन्दा रेस

(16) छायावादोत्तर काल के लेखक हैं
(क) विद्यानिवास मिश्र
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) बाबू गुलाबराय
(घ) श्यामसुन्दर दास

(17) वासुदेवशरण अग्रवाल द्वारा लिखित निबन्ध ‘राष्ट्र का स्वरूप’ किस निबन्ध-संग्रह से लिया गया है ?
(क) धरती पुत्र
(ख) पृथ्वी पुत्र
(ग) राष्ट्र-चेतना
(घ) सांस्कृतिक गौरव

(18) निम्नलिखित में से कौन निबन्धकार नहीं है ?
(क) विद्यानिवास मिश्र
(ख) प्रेमचन्द
(ग) कुबेरनाथ राय
(घ) हजारी प्रसाद द्विवेदी

(19) ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ हिन्दी गद्य की विद्या है
(क) निबन्ध
(ख) उपन्यास
(ग) आलोचना
(घ) नाटक

(20) अशोक के फूल’ निबन्ध है
(क) मनोवैज्ञानिक निबन्ध
(ख) ललित निबन्ध
(ग) बुद्धिप्रधान निबन्ध
(घ) ऐतिहासिक निबन्ध

(21) ‘चिन्तामणि’ की गद्य-विधा है
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) निबन्ध
(घ) कहानी

(22) निबन्ध-विधा का सर्वाधिक विकास हुआ
(क) द्विवेदी युग के
(ख) छायावादी युग के
(ग) भारतेन्दु युग में
(घ) छायावादोत्तर युग में

उत्तर: (1) घ, (2) ग, (3) ग, (4) ग, (5) ग, (6) घ, (7) ख, (8) घ, (9) क, (10) क, (11) घ, (12) क, (13) क, (14) ख, (15) खे, (16) क, (17) ख, (18) ख, (19) क, (20) ख, (21) ग, (22) क।

आलोचना विधा पर आधारित

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(2) ‘कबीर’ नामक आलोचनात्मक ग्रन्थ के रचयिता हैं
(क) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) राहुल सांकृत्यायन
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी 

(3) निम्नलिखित में से कौन प्रसिद्ध आलोचक हैं ?
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) मुंशी प्रेमचन्द
(घ) जयशंकर प्रसाद

(4) निम्नलिखित में से छायावादोत्तर काल के समालोचक नहीं हैं
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) डॉ० नगेन्द्र ।
(ग) बाबू गुलाबराय
(घ) राम विलास शर्मा

(5) ‘त्रिवेणी’ किस विधा की रचना है ?
(क) निबन्ध
(ख) संस्मरण
(ग) आलोचना
(घ) कहानी

(6) साहित्यलोचन’ गद्य-विधा की रचना है ?
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) आलोचना
(घ) निबन्ध

उत्तर: (1) ग, (2) घ, (3) क, (4) ग, (5) ग, (6) ग

आत्मकथा विधा पर आधारित

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-23

(2) नीड़ का निर्माण फिर’ किस विधा और लेखक की रचना है ?
(क) संस्मरण-सुमित्रानन्दन पन्त
(ख) आत्मकथा-डॉ० हरिवंशराय बच्चन
(ग) जीवनी–सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(घ) रेखाचित्र—महादेवी वर्मा

(3)
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-24

(4)
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-25

(5)
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-26

(6) गद्य की किस विधा में काल्पनिक प्रसंगों का स्थान नहीं है ?
(क) कहानी
(ख) उपन्यास,
(ग) नाटक
(घ) आत्मकथा

(7) गद्य-विद्या की दृष्टि से आत्मकथा है
(क) आवारा मसीहा
(ख) कलम का सिपाही
(ग) नीड़ का निर्माण फिर
(घ) शिखर से सागर तक

उत्तर: (1) क, (2) ख, (3) ख, (4) घ, (5) खे, (6) घ, (7) ग।

जीवनी-विधा पर आधारित

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-27

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-28

(5) ‘आवारा मसीहा’ है
(क) आत्मकथा
(ख) जीवनी
(ग) उपन्यास
(घ) कहानी

उत्तर: (1) ग, (2) ग, (3) क, (4) ख, (5) ख।

संस्मरण/रेखाचित्र विधा पर आधारित 

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न दो img-29

(2) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना देवेन्द्र सत्यार्थी की, रेखाचित्र विधा की रचना नहीं है ?
(क) रेखाएँ बोल उठीं
(ख) सौन्दर्य बोध
(ग) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(घ) लाल तारा

(3) ‘पथ के साथी’ की रचना-विधा है
(क) कहानी
(ख) जीवनी
(ग) आत्मकथा
(घ) संस्मरण

(4) ‘राबर्ट नर्सिंग होम में’ की रचना-विधा है
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) रेखाचित्र
(घ) रिपोर्ताज

(5) ‘माटी हो गई सोना’ किस विधा की रचना है ?
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) रेखाचित्र
(घ) संस्मरण

(6) ‘मेरे पिताजी’ संस्मरण के लेखक हैं
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ख) हरिशंकर परसाई
(ग) मोहन राकेश
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी

उत्तर: (1) ग, (2) घ, (3) घ, (4) घ, (5) ग, (6) का 

डायरी विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए

(1) ‘डायरी’ विधा का प्रारम्भ युग है–
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युगे

(2) ‘मेरी कॉलेज डायरी’ नामक डायरी के लेखक हैं
(क) डॉ० धीरेन्द्र वर्मा
(ख) श्रीराम शर्मा
(ग) जयप्रकाश भारती
(घ) धर्मवीर भारती

(3) ‘डायरी के पन्ने’ नामक डायरी के लेखक हैं
(क) धर्मवीर भारती
(ख) घनश्याम दास बिड़ला
(ग) सुन्दरलाल त्रिपाठी,
(घ) नरदेव शास्त्री ‘वेदतीर्थ

(4) हिन्दी साहित्य में डायरी-लेखन का उद्देश्य है–
(क) जीवन-वृत्त
(ख) समाज-सुधार
(ग) आत्मालोचन
(घ) संस्मरण

(5) हिन्दी के प्रथम डायरी लेखक कौन हैं ?
(क) धीरेन्द्र वर्मा
(ख) इलाचन्द्र जोशी
(ग) शमशेर बहादुर सिंह
(घ) नरदेव शास्त्री ‘वेदतीर्थ

उतर: (1) ग, ‘(2) क, (3) ख, (4) ग, (5) घ।

रिपोर्ताज एवं यात्रावृत्त विधा पर आधारित

उचित विक्ल्प का चयन कीजिए

(1) रिपोर्ताज विधा का प्रारम्भिक युग है
या
‘रिपोर्ताज’ साहित्य विधा किस युग की देन है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) छायावाद युग
(ग) छायावादोत्तर युग
(घ) भारतेन्दु युग

(2) ‘तूफानों के बीच किस विधा और लेखक की रचना है ?
(क) संस्मरण-रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) गद्यगीत–राय कृष्णदास
(ग) रेखाचित्र—महादेवी वर्मा
(घ) रिपोर्ताज-डॉ० रांगेय राघव

(3) रिपोर्ताज विधा की रचना नहीं है–
(क) लक्ष्मीपुरा
(ख) पहाड़ों में प्रेममयी संगीति
(ग) युद्ध यात्रा
(घ) दैनन्दिनी

(4) हिन्दी में रिपोर्ताज विधा का प्रवर्तक किसे माना जाता है ?
(क) महादेवी वर्मा,
(ख) राहुल सांकृत्यायन
(ग) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर”
(घ) बाबू गुलाबराय

(5), ‘आखिरी चट्टान तक’ की रचना-विधा है
(क) आत्मकथा
(ख) रिपोर्ताज
(ग) यात्रावृत्त
(घ) कहानी

(6) ‘मेरी तिब्बत-यात्रा’ यात्रावृत्त किस काल की अमूल्य थाती है ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादोत्तर युग
(घ) छायावाद युग

(7) ‘रिपोर्ताज’ विधा की सफल प्रस्तुति है
(क) गेहूँ बनाम गुलाब
(ख) आचरण की सभ्यता
(ग) कुटज
(घ) राबर्ट नर्सिंग होम में

(8) रिपोर्ताज के लेखक हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) विष्णुकान्त शास्त्री
(ग) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(घ) डॉ० सम्पूर्णानन्द

उतर: (1) ग, (2) घ, (3) घ, (4) ग, (5) ग, (6) ग, (7) घ, (8) ख

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi अनेकार्थी शब्द

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name अनेकार्थी शब्द
Number of Questions 16
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi अनेकार्थी शब्द

नवीनतम पाठ्यक्रम में अनेकार्थी शब्दों को भी सम्मिलित किया गया है, जिसके लिए 2 अंक निर्धारित हैं।

प्रत्येक भाषा में ऐसे बहुत-से शब्द होते हैं, जो एकाधिक अर्थों का बोध कराते हैं। प्रसंग के अनुसार भिन्न-भिन्न स्थलों पर इनके भिन्न-भिन्न अर्थ प्रतीत होते हैं। भाषा को समझने और समझाने में इस प्रकार के शब्दों का ज्ञान बहुत उपयोगी होता है। इस प्रकार के शब्दों को ‘अनेकार्थी शब्द कहते हैं। हिन्दी भाषा में भी इस प्रकार के अनेकानेक शब्द हैं। अध्ययन में सुगमता की दृष्टि से हिन्दी भाषा के ऐसे कुछ एक शब्द और उनके एकाधिक अर्थ दिये जा रहे हैं। छात्रों को इन्हें याद कर लेने का प्रयास करना चाहिए।
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बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (क) निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए|

प्रश्न 1.
‘गो’ शब्द का अर्थ नहीं है—
(क) गाय
(ख) किरण
(ग) पृथ्वी
(घ) हाथी
उत्तर:
(घ)

प्रश्न 2.
वर्ण’ शब्द का अर्थ नहीं है—
(क) अक्षर
(ख) रंग
(ग) काला
उत्तर:
(ग)

प्रश्न 3.
‘कर’ शब्द के अन्य अर्थ हैं—
(क) सोना
(ख) हाथ
(ग) घोड़ा।
(घ) किरण
(ङ) चन्द्रमा
(च) सँड़
उत्तर:
(ख), (घ), (च)

प्रश्न 4.
‘अंक’ शब्द का अर्थ नहीं है—
(क) गोद
(ख) संख्या
(ग) नाटक का एक अंश
(घ) अन्य
उत्तर:
(घ)

प्रश्न 5.
‘हार’ शब्द के सही अर्थों को चुनकर लिंखिए—
(क) गले का आभूषण
(ख) पराजय
(ग) घबराना
(घ) दुःख
उत्तर:
(क), (ख)

प्रश्न 6.
द्विज का अर्थ है—
(क) ब्राह्मण
(ख) पशु
(ग) सिंह
(घ) क्षत्रिय
उत्तर:
(क)

प्रश्न 7.
‘अंबर’ शब्द का कौन-सा अर्थ नहीं है ?—
(क) आकाश
(ख) वस्त्र
(ग) आम
(घ) केसर
उत्तर:
(ग)

प्रश्न 8.
‘अकाल’ शब्द का अर्थ नहीं है।—
(क) दुर्भिक्ष
(ख) मृत्यु
(ग) कमी
(घ) असमय
उत्तर:
(ग)

प्रश्न 9.
‘तारा’ शब्द का अर्थ है—
(क) नक्षत्र
(ख) चन्द्र
(ग) लेखनी
(घ) रश्मि
उत्तर:
(क)

प्रश्न 10.
‘उदधि’ शब्द का कौन-सा अर्थ सही नहीं है?—
(क) उत्तम दधि
(ख) समुद्र
(ग) सागर
(घ) जलधि
उत्तर:
(क)

प्रश्न 11.
‘करि’ शब्द के सही अर्थों को चुनकर लिखिए—
(क) हाथी
(ख) सँड वाला
(ग) करने वाला
(घ) चोर
उत्तर:
(ख)

प्रश्न 12.
‘अमृत’ शब्द का अर्थ नहीं है—
(क) अमर होना
(ख) जल
(ग) दूध; अन्न
(घ) स्वर्ग
उत्तर:
(ख)

प्रश्न 13.
‘ईश्वर’ का अर्थ है—
(क) राजा
(ख) प्रेम
(ग) ईर्ष्या
(घ) जलन
उत्तर:
(ख)

प्रश्न 14.
‘बाण’ शब्द का अर्थ नहीं है—
(क) तीर
(ख) आदत
(ग) महाकवि बाण
(घ) चतुर
उत्तर:
(ख)

प्रश्न (ख)
निम्नलिखित में से किन्हीं दो के दो-दो अर्थ लिखिए—
(क) अक्षत
(ख) हार
(ग) द्विज
(घ) काल
उत्तर:
(क) अक्षत – अखण्डित, क्षतहीन।
(ख) हार – गले का आभूषणे, पराजय।
(ग) द्विज – ब्राह्मण, दाँत।
(घ) काल – समये, मृत्यु।

प्रश्न (ग)
निम्नलिखित शब्दों में से कोई एक शब्द चुनिए और उसके एकाधिक अर्थ लिखिए—
(क) अम्बरे
(ख) पत्र
(ग) वर
उत्तर:
(क) अम्बर – आकाश, वस्त्र, केसर।
(ख) पत्र – पत्ता, चिट्ठी, पंख।।
(ग) वर – दूल्हा, श्रेष्ठ, वरदान।

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi वाणिज्य सम्बन्धी निबन्ध

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Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Name वाणिज्य सम्बन्धी निबन्ध
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi वाणिज्य सम्बन्धी निबन्ध

कुटीर एवं लघु उद्योग

प्रमुख विचार-बिन्दु

  1. प्रस्तावना,
  2. कटार उद्योगों को स्वतन्त्र
  3. कुटीर उद्योग की आवश्यकता,
  4. गाँधी जी का योगदान,
  5. कुटीर उद्योगों का नया स्वरूप,
  6. उपसंहार

प्रस्तावना–वर्तमान सभ्यता को यदि यान्त्रिक सभ्यता कहा जाए तो कोई अत्युक्ति न होगी। पश्चिमी देशों की सभ्यता यान्त्रिक बन चुकी है। हाथ से बनी वस्तु और यन्त्र से निर्मित वस्तु में किसी प्रकार की होड़ हो ही नहीं सकती; क्योंकि यन्त्र-युग अपने साथ अपरिमित शक्ति एवं साधन लेकर आया है। परन्तु विज्ञान का यह वरदान मानव-शान्ति के लिए अभिशाप भी सिद्ध हो रहा है। इसलिए युग-पुरुष महात्मा गाँधी ने यान्त्रिक सभ्यता के विरुद्ध कुटीर एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की आवाज उठायी। वे कुटीर एवं लघु उद्योगों के माध्यम से ही गाँवों के देश भारत में आर्थिक समता लाने के पक्ष में थे।

थोड़ी पूँजी द्वारा सीमित क्षेत्र में अपने हाथ से अपने घर में ही वस्तुओं का निर्माण करना कुटीर तथा लघु उद्योग के अन्तर्गत है। यह व्यवसाय प्रायः परम्परागत भी होता है। दरियाँ, गलीचे, रस्सियाँ बनाना, खद्दर, मोजे, शाल बुना, लकड़ी, सोने, चाँदी, ताँबे, पीतल की दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं को निर्माण करना आदि अनेक प्रकार की हस्तकला के कार्य इसके अन्तर्गत आते हैं।

कुटीर उद्योगों की स्वतन्त्रतापूर्व स्थिति-औद्योगिक दृष्टि से भारत का अतीतकाल अत्यन्त स्वर्णिम एवं सुखद था। लंगभग सभी प्रकार के कुटीर एवं लघु उद्योग अपनी उन्नति की पराकाष्ठा पर थे। ‘ढाके की मलमल’ अपनी कलात्मकता में बहुत ऊँची उठ गयी थी। मुसलमानी बादशाहों और नवाबों के द्वारा भी इसे विशेष प्रोत्साहन मिला। देश को आर्थिक दृष्टि से कुछ इस प्रकार व्यवस्थित किया गया था कि प्रायः प्रत्येक गाँव स्वयं में अधिक-से-अधिक आर्थिक स्वावलम्बन प्राप्त कर सके। किन्तु अंग्रेजी शासन की विनाशकारी आर्थिक नीति तथा यान्त्रिक सभ्यता की दौड़ में न टिक सकने के कारण ग्रामीण जीवन की औद्योगिक स्वावलम्बता छिन्न-भिन्न हो गयी। देश की राजनीतिक पराधीनता इसके लिए पूर्ण उत्तरदायी थी। ग्रामीण-उद्योगों के समाप्त होने से ग्राम्य जीवन का सारा सुख भी समाप्त हो गया।

कुटीर उद्योगों की आवश्यकता–भारत की दरिद्रता का प्रधान कारण कुटीर एवं लघु उद्योगों का विनाश ही रहा है। भारत में उत्पादन का पैमाना अत्यन्त छोटा है। देश की अधिकांश जनता अब भी छोटे-छोटे व्यवसायों से अपनी जीविका चलाती है। भारत के किसानों को वर्ष में कई महीने बेकार बैठना पड़ता है। कृषि में रोजगार की प्रकृति मौसमी होती है। इस बेरोजगारी को दूर करने के लिए कुटीर-उद्योग का सहायक साधनों के रूप में विकास होना आवश्यक है। जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली, रूस आदि सभी देशों में गौण-उद्योग की प्रथा प्रचलित है।।

भारत में कुटीर-उद्योगों और छोटे पैमाने के कला-कौशल के विकास के महत्त्व इस रूप में भी विशेष महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि यदि हम अपने बड़े पैमाने के संगठित उद्योगों में चौगुनी-पंचगुनी वृद्धि कर दें तो भी देश में वृत्तिहीनता की विशाल समस्या सुलझायी नहीं जा सकती। ऐसा करके हम केवल मुट्ठी भर व्यक्तियों की रोटी का ही प्रबन्ध कर सकते हैं। इस जटिल समस्या के सुलझाने का एकमात्र उपाय बड़े पैमाने के साथ-साथ कुटीर एवं लघु उद्योगों का समुचित विकास ही है, जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों को सहायक व्यवसाय और किसानों को अपनी आय में वृद्धि करने का अवसर मिल सके।

गाँधी जी का योगदान–गाँधी जी का विचार था कि बड़े पैमाने के उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन न देकर विशालकाय मशीनों के उपयोग को रोका जाए तथा छोटे उद्योगों द्वारा पर्याप्त मात्रा में आवश्यक वस्तुएँ उत्पादित की जाएँ। कुटीर उद्योग मनुष्य की स्वाभाविक रुचियों और प्राकृतिक योग्यताओं के विकास के लिए पूर्ण सुविधा प्रदान करता है। मशीन के मुंह से निकलने वाले एक मीटर टुकड़े को भी कौन अपना कह सकता है, जबकि वह भी उसी मजदूर के खून-पसीने से तैयार हुआ है। हाथ से बनी हुई प्रत्येक वस्तु पर बनाने वाले के नैतिक, सांस्कृतिक तथा आत्मिक व्यक्तित्व की छाप अंकित होती है, जबकि मशीनं की स्थिति में इनका लोप हो जाता है और व्यक्ति केवल उस मशीन का एक निर्जीव पुर्जा मात्र रह जाता है।

कुटीर एवं लघु उद्योगों में आधुनिक औद्योगीकरण से उत्पन्न वे दोष नहीं पाये जाते, जो औद्योगिक नगरों की भीड़-भाड़, पूँजी तथा उद्योगों के केन्द्रीकरण, लोक-स्वास्थ्य की पेचीदा समस्याओं, आवास की कमी तथा नैतिक पतन के कारण उत्पन्न होते हैं।

कुटीर, लघु उद्योग थोड़ी पूँजी के द्वारा जीविका-निर्वाह के साधन प्रस्तुत करते हैं। पारस्परिक सहयोग से कुटीर-उद्योग बड़े पैमाने में भी परिणत किया जा सकता है। कुटीर-उद्योग में छोटे-छोटे बालकों एवं स्त्रियों के परिश्रम का भी सुन्दर उपयोग किया जा सकता है। कुटीर उद्योग की इन्हीं विशेषताओं से प्रभावित होकर बड़े- बड़े औद्योगिक राष्ट्रों में भी कुटीर एवं लघु उद्योग की प्रथा प्रचलित है। जापान में 60 प्रतिशत उद्योगशालाएँ कुटीर एवं लघु उद्योग से संचालित हैं। कहा जाता है कि जर्मनी में प्रत्येक मनुष्य को रोटी देने का प्रबन्ध करने के लिए हिटलर ने कुटीर-उद्योगों की ही शरण ली थी।

कुटीर उद्योगों का नया स्वरूप–इस समय देश में छोटे कारखानों की संख्या मोटे तौर पर एक करोड़ से अधिक आँकी गयी है, परन्तु तेल की घानियाँ, खाँडसारी और ऐसी वस्तुओं के छोटे कारखाने, जिन्हें केवल एक आदमी चलाता है आदि को मिलाकर इनकी संख्या बहुत कम है। पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य उद्योगों को आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने का रहा है। अतः मुख्य रूप से ध्यान इस पर दिया जाएगा कि उद्योगों का विकास विकेन्द्रीकरण के आधार पर हो, शिल्पिक कुशलता में सुधार किया जाए और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सहायता देकर छोटे उद्योग वालों की आय बढ़ाने में सहायता की जाए तथा दस्तकारों को सहकारिता के आधार पर संगठित करने के प्रयास किये जाएँ। इससे छोटे उद्योगों में उत्पादन का क्षेत्र बढ़ेगा।

उपसंहार–छोटे उद्योगों की गाँवों में स्थापना से न केवल ग्रामीण दस्तकारों की स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि गाँवों में रोजगार की सुविधा भी बढ़ी है। अतः ग्राम विकास कार्यक्रमों में कुटीर एवं लघु उद्योगों का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए हमारी सरकार इन्हें वैज्ञानिक पद्धति से सहकारिता के आधार पर संचालित करने की व्यवस्था कर रही है। इसकी सफलता पर ही हमारे जीवन में पूर्ण शान्ति, सुख और समृद्धि की कल्याणकारी पूँज ध्वनित हो सकेगी।

आर्थिक उदारीकरण एवं निजीकरण की नीति

प्रमुख विचार-बिन्दु

  1. प्रस्तावना,
  2. पं० नेहरू की विचारधारा,
  3. भारतीय अर्थव्यवस्था,
  4. उदारीकरण का अर्थ,
  5. निजीकरण का अर्थ,
  6. नयी औद्योगिक नीति,
  7. उपसंहार

प्रस्तावना-आजकल ‘उदारीकरण’ शब्द का प्रयोग अत्यधिक प्रचलित हो गया है और इसे इस प्रकार प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे देश की जर्जर अर्थव्यवस्था का उद्धार केवल यही पद्धति कर सकती है। इस व्यवस्था के पक्षधरों का मानना है कि स्वातन्त्र्योत्तर भारत ने आर्थिक विकास हेतु जिस नीति का अनुगमन किया वह सरकारी नियन्त्रण पर आधारित रही और निजी उद्यमिता इससे प्रभावित हुई। फलत: देश की आर्थिक उन्नति में अपेक्षित उन्नति नहीं हुई। यह भी तर्क दिया जा रहा है कि परमिट लाइसेंस राज ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था में गतिरोध ही उत्पन्न किया है।

पं० नेहरू की विचारधारा--ज्ञातव्य है कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र किसी भी उन्नतिशील देश के विकास के मूल में होते हैं और इन्हीं से उस देश की आर्थिक प्रक्रिया नियन्त्रित होती है। पं० जवाहरलाल नेहरू का विचार था कि यदि देश का सर्वांगीण विकास करना है तो प्रमुख उद्योगों को विकसित किया जाना आवश्यक होगा। उनका विचार था कि दुनिया में अनेक आर्थिक विचारधाराओं में संघर्ष हो रहा है। मुख्यतः दो धाराएँ हैं-एक ओर तो तथाकथित पूँजीवादी विचारधारा है और दूसरी ओर तथाकथित सोवियत रूस की साम्यवादी विचारधारा। प्रत्येक पक्ष अपने दृष्टिकोण की यथार्थता का कायल है। लेकिन इससे जरूरी तौर पर यह नतीजा नहीं निकलता है कि आप इन दोनों पक्षों में से एक को स्वीकार करें। बीच के कई दूसरे तरीके भी हैं। पूँजीवादी औद्योगिक व्यवस्था ने उत्पादन की समस्या को अत्यधिक सफलता से हल किया है। लेकिन उसने कई समस्याओं को हल नहीं भी किया है। यदि वह इन समस्याओं को हल नहीं कर सकता तो कोई और रास्ता निकालना होगी। यह सिद्धान्त का नहीं कठोर तथ्य का सवाल है। भारत में यदि हम अपने देश की भोजन, वस्त्र, मकान आदि की बुनियादी समस्याएँ हल नहीं कर सकते तो हम अलग कर दिये जाएँगे और हमारी जगह कोई और आएगा। इस समस्या के हल के लिए चरमपंथी तरीका ही नहीं वरन् बीच का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था--भारत में जिस प्रकार की अर्थव्यवस्था प्रारम्भ हुई उसे मिश्रित अर्थव्यवस्था का नाम दिया गया। मिश्रितृ अर्थव्यवस्था से तात्पर्य है ऐसी व्यवस्था जहाँ कुछ क्षेत्र में सरकारी नियन्त्रण रहता है तथा अन्य क्षेत्र निजी घ्यवस्था के अधीन रहते हैं और क्षेत्रों का वर्गीकरण पूर्णतय पूर्व सुनिश्चित रहता है।

हिन्दुस्तान में आजादी से पूर्व किसी सुनियोजित औद्योगिक नीति की घोषणा नहीं हुई थी। स्वातन्त्र्योत्तर प्रथम औद्योगिक नीति की घोषणा मिश्रित अर्थव्यवस्था की संकल्पना पर आधारित थी। सन् 1956 में जो औद्योगिक नीति बनी, वह प्रमुख एवं आधारभूत उद्योगों के त्वरित विकास तथा समाजवादी समाज की स्थापना जैसे लक्ष्यों पर आधारित थी। बाद में उसमें कतिपय नीतिगत परिवर्तन हुए जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त अवरोधों को दूर किया जा सका।

उदारीकरण का अर्थ-आर्थिक प्रतिबन्धों की न्यूनता को ही उदारीकरण कह सकते हैं। प्रतिबन्धों के कारण प्रतियोगिता का अभाव रहता है, फलतः उत्पादक वर्ग वस्तु की गुणवत्ता के प्रति उदासीन रहता है। किन्तु यदि प्रतिबन्धों का अभाव कर दिया जाए तो इसका परिणाम दूरगामी होती है। उदारवादियों का मानना है और नियन्त्रित अर्थव्यवस्था या सरकारीकरण से उद्यमिता का विकास बाधित होता है।

यहाँ पर उल्लेख किया जाना आवश्यक है कि निजीकरण को सम्प्रति विश्व के अधिकांश विकसित एवं अर्द्धविकसित देशों में अपनाया गया है। चूंकि सरकारी उद्योगों में प्रतियोगिता का अभाव रहता है और इसमें उत्पादकता को बढ़ाने का कोई विशेष प्रयास नहीं होता। फलतः इन उद्योगों में कुशलता घट जाती है, किन्तु विकल्प रूप में निजीकरण ही सबसे बेहतर व्यवस्था है, यह भी नहीं कहा जा सकता।

निजीकरणका अर्थ-निजीकरण’ का अर्थ उत्पादनों के साधनों का निजी हाथों में होना है। इसमें सबसे बड़ी त्रुटि यह है कि निजीकरण का उद्देश्य अल्पकाल में अधिक से अधिक लाभ कमाना होता है। इस कारण यह दीर्घकालीन प्रतिस्पर्धात्मक बाजार नहीं बनाये रहता। प्रायः सरकारी घाटों को पूरा करने के लिए निजीकरण का तरीका अपनाया जाता है। सार्वजनिक सम्पत्ति का निजी हाथों में विक्रय उसी दशा में किया जाना चाहिए जब कि वह राष्ट्रीय ऋण को कम करने में सहायक हो।

सन् 1993 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि उदारीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप बेरोजगारी और मुद्रा स्फीति दोनों में वृद्धि हुई है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर रुद्र दत्त ने ‘इम्पैक्ट ऑफ इकनॉमिक पॉलिसी ऑन लेबर एण्ड इण्डस्ट्रियल रिलेशन की रिपोर्ट में कहा था कि उदारीकरण ने उत्पादन की संरचना को भी विकृत किया है।

‘नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एण्ड पॉलिसी के प्रमुख शोधकर्ता सुदीप्तो मण्डल का मानना है कि उदारीकरण के परिणामस्वरूप मिल-मालिकों की उग्रता बढ़ी है जबकि श्रमिक वर्ग के जुझारूपन में कमी आयी है।

नयी औद्योगिक नीति–विगत वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था अत्यधिक नियन्त्रित एवं विनियमित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हुई है। 24 जुलाई, 1991 को भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के एक अंग के रूप में विकसित करने के लिए नयी औद्योगिक नीति तैयार हुई जिसे उदार एवं क्रान्तिकारी नीति की संज्ञा दी गयी है। इस नीति का लक्ष्य है-

  1. अर्थव्यवस्था में खुलेपन को लाना।
  2. अर्थव्यवस्था को अनावश्यक नियन्त्रणों से मुक्त रखना।
  3. विदेशी सहयोग एवं भागीदारी को बढ़ावा देना।
  4. रोजगार के अवसर बढ़ाना।
  5. सार्वजनिक क्षेत्र को प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना।
  6. आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था को विकसित करना।
  7. निर्यात बढ़ाने के लिए आयातों को उदार बनाना।
  8. उत्पादकता वृद्धि हेतु प्रोत्साहन देना आदि।।

वर्तमान औद्योगिक नीति के अन्तर्गत उद्योगों पर लगे प्रशासनिक एवं कानूनी नियन्त्रणों में शिथिलता दी गयी है। सभी मौजूदा उत्पादन इकाइयों को विस्तार परियोजनाओं को लागू करने के लिए पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं है। उच्च प्राथमिकता वाले उद्योगों में विदेशी पूँजी के निवेश को 40 प्रतिशत के स्थान पर 51 प्रतिशत तक की अनुमति देने के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के महत्त्व को बनाये रखने पर बल दिया गया है। विदेशी तकनीशियनों की सेवाएँ किराये पर लेने तथा स्वदेश में विकसित प्रौद्योगिकी की विदेशों में जाँच करने के लिए अब स्वतः अनुमति की व्यवस्था है।

यह तो ठीक है कि नयी औद्योगिक नीति से उत्पादन वृद्धि, निर्यात संवर्द्धन, औद्योगीकरण, तकनीकी सुधार, प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति का विकावा तथा नये उद्यमियों को प्रोत्साहन प्राप्त होगा किन्तु अत्यधिक उदारीकरण एवं विदेशी पूँजी के निवेश की स्वतन्त्र छूट से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था बहुराष्ट्रीय निगमों एवं वड़े औद्योगिक घरानों के चक्र में फँस जाएगी। इस नीति के निम्नलिखित दूरगामी दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं

  1. आर्थिक विषमता में वृद्धि।
  2. आत्मनिर्भरता में ह्रास।
  3. आयतित संस्कृति को बढ़ावा।
  4. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों एवं विदेशी विनियोजकों को स्वतन्त्र छूट देने से देशी उद्यमियों का प्रतिस्पर्धा में। टिक पाना कठिन।
  5. अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के दबाव।
  6. काले धन की समानान्तर अर्थव्यवस्था।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि उदारीकरण की हवा पश्चिम से चली है। ठीक है कि निजी उद्योगों की उत्पादन संवृद्धि में विशेष भूमिका हो सकती है किन्तु हस्तक्षेप के अभाव में निजी उद्यमिता विनाशात्मक हो सकती है और किसी भी रूप में निजीकरण सार्वजनिक इकाइयों की त्रुटियों को दूर करने वाला प्रभावपूर्ण उपकरण नहीं हो सकता है। निजीकरण से निजी क्षमता का लाभ होगा और सार्वजनिक इकाइयाँ अस्वस्थ होंगी।

उपसंहार-उदारीकरण से आशय यह नहीं है कि सरकार की भूमिका इसमें कम होती है, अपितु इसमें उसका उत्तरदायित्व और बढ़ जाता है और आर्थिक उदारीकरण का औचित्य सही मायने में तभी सिद्ध हो सकेगा, जब उससे जन-साधारण लाभान्वित हो सकेगा। उदारीकरण की नीति भारतीय अर्थव्यवस्था को गतिशील एवं प्रतिस्पर्धात्मक बनाने में सफल हो सकती है। किन्तु विदेशी पूँजी पर आश्रितता, विदेशी आर्थिक उपनिवेशवाद की स्थापना एवं बड़े औद्योगिक घरानों का वर्चस्व बढ़ेगा, जिससे गरीबी और बेरोजगारी में वृद्धि होगी। अतः इस नीति को दूरदर्शितापूर्वक लागू करना होगा अन्यथा अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों के भारत में आने से भारतीय कम्पनियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा, जो कि आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के लिए अत्यधिक हानिकारक है।

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi कृषि सम्बन्धी निबन्ध

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Name कृषि सम्बन्धी निबन्ध
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi कृषि सम्बन्धी निबन्ध

ग्राम्य विकास की समस्याएँ और उनका समाधान

सम्बद्ध शीर्षक

  • भारतीय कृषि की समस्याएँ
  • भारतीय किसानों की समस्याएँ और उनके समाधान
  • ग्रामीण कृषकों की समस्या
  • आज का किसान : समस्याएँ और समाधान
  • भारतीय किसान का जीवन
  • कृषक जीवन की त्रासदी

प्रमुख विचार-बिन्दु

  1. प्रस्तावना,
  2. भारतीय कृषि का स्वरूप,
  3. भारतीय कृषि की समस्याएँ,
  4. समस्या का समाधान,
  5. ग्रामोत्थान हेतु सरकारी योजनाएँ,
  6. आदर्श ग्राम की कल्पना,
  7. उपसंहार

प्रस्तावना-प्राचीन काल से ही भारत एक कृषिप्रधान देश रहा है। भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनता गाँवों में निवास करती है। इस जनसंख्या का अधिकांश भाग कृषि पर ही निर्भर है। कृषि ने ही भारत को अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में विशेष ख्याति प्रदान की है। भारत की सकल राष्ट्रीय आय का लगभग 30 प्रतिशत कृषि से ही आता है। भारतीय समाज का संगठन और संयुक्त परिवार-प्रणाली आज के युग में कृषि व्यवसाय के कारण ही अपना महत्त्व बनाये हुए है। आश्चर्य की बात यह है कि हमारे देश में कृषि बहुसंख्यक जनता का मुख्य और महत्त्वपूर्ण व्यवसाय होते हुए भी बहुत ही पिछड़ा हुआ और अवैज्ञानिक है। जब तक भारतीय कृषि में सुधार नहीं होता, तब तक भारतीय किसानों की स्थिति में सुधार की कोई सम्भावना नहीं और भारतीय किसानों की स्थिति में सुधार के पूर्व भारतीय गाँवों के विकास की कल्पना ही नहीं की जा सकती। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि भारतीय कृषि, कृषक और गाँव तीनों ही एक-दूसरे पर अवलम्बित हैं। इनके उत्थान और पतन, समस्याएँ और समाधान भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

भारतीय कृषि का स्वरूप-भारतीय कृषि और अन्य देशों की कृषि में बहुत अन्तर है। कारण अन्य देशों की कृषि वैज्ञानिक ढंग से आधुनिक साधनों द्वारा की जाती है, जब कि भारतीय कृषि अवैज्ञानिक और अविकसित है। भारतीय कृषक आधुनिक तरीकों से खेती करना नहीं चाहते और परम्परागत कृषि पर ही आधारित हैं। इसके साथ-ही भारतीय कृषि कां स्वरूप इसलिए भी अव्यवस्थित है कि यहाँ पर कृषि प्रकृति की उदारता पर निर्भर है। यदि वर्षा ठीक समय पर उचित मात्रा में हो गयी तो फसल अच्छी हो जाएगी। अन्यथा बाढ़ और सूखे की स्थिति में सारी की सारी उपज नष्ट हो जाती है। इस प्रकार प्रकृति की अनिश्चितता पर निर्भर होने के कारण भारतीय कृषि सामान्य कृषकों के लिए आर्थिक दृष्टि से लाभदायक नहीं है।

भारतीय कृषि की समस्याएँ-आज के विज्ञान के युग में भी कृषि के क्षेत्र में भारत में अनेक समस्याएँ विद्यमान हैं, जो कि भारतीय कृषि के पिछड़ेपन के लिए उत्तरदायी हैं। भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याओं में सामाजिक, आर्थिक और प्राकृतिक कारण हैं। सामाजिक दृष्टि से भारतीय कृषक की दशा अच्छी नहीं है। अपने शरीर की चिन्ता न करते हुए सर्दी, गर्मी सभी ऋतुओं में वह अत्यन्त कठिन परिश्रम करता है तब भी उसे पर्याप्त लाभ नहीं हो पाता। भारतीय किसान अशिक्षित होता है। इसका कारण आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार का न होना है। शिक्षा के अभाव के कारण वह कृषि में नये वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग नहीं कर पाता तथा अंच्छे खाद और बीज के बारे में भी नहीं जानता। कृषि करने के आधुनिक वैज्ञानिक यन्त्रों के विषय में भी उसैका ज्ञान शून्य होता है तथा आज भी वह प्रायः पुराने ढंग के ही खाद और बीजों का प्रयोग करता है। भारतीय किसानों की आर्थिक स्थिति भी अत्यन्त शोचनीय है। वह आज भी महाजनों की मुट्ठी में जकड़ा हुआ हैं। प्रेमचन्द ने कहा था, “भारतीय किसान ऋण में ही जन्म लेता है, जीवन भर ऋण ही चुकाता रहता है और अन्ततः ऋणग्रस्त अवस्था में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।’ धन के अभाव में ही वह उन्नत बीज, खाद और कृषि-यन्त्रों का प्रयोग नहीं कर पाता। सिंचाई के साधनों के अभाव के कारण वह प्रकृति पर अर्थात् वर्षों पर निर्भर करता है।

प्राकृतिक प्रकोपों—बाढ़, सूखा, ओला आदि से भारतीय किसानों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। अशिक्षित होने के कारण वह वैज्ञानिक विधियों की खेती में प्रयोग करना नहीं जानता और न ही उन पर विश्वास करना चाहता है। अन्धविश्वास, धर्मान्धता, रूढ़िवादिता आदि उसे बचपन से ही घेर लेते हैं। इस सबके अतिरिक्त एक अन्य समस्या है-भ्रष्टाचार की, जिसके चलते न तो भारतीय कृषि का स्तर सुधर पाता है और न ही भारतीय कृषक का। हमारे पास दुनिया की सबसे अधिक उपजाऊ भूमि है। गंगा-यमुना के मैदान में इतना अनाज पैदा किया जा सकता है कि पूरे देश का पेट भरा जा सकता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण दूसरे देश आज भी हमारी ओर ललचाई नजरों से देखते हैं। लेकिन हमारी गिनती दुनिया के भ्रष्ट देशों में होती है। हमारी तमाम योजनाएँ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं। केन्द्र सरकार अथवा विश्व बैंक की कोई भी योजना हो, उसके इरादे कितने ही महान् क्यों न हों पर हमारे देश के नेता और नौकरशाह योजना के उद्देश्यों को धूल चटा देने की कला में माहिर हो चुके हैं। ऊसर भूमि सुधार, बाल पुष्टाहार, आँगनबाड़ी, निर्बल वर्ग आवास योजना से लेकर कृषि के विकास और विविधीकरण की तमाम शानदार योजनाएँ कागजों और पैम्फ्लेटों पर ही चल रही हैं। आज स्थिति यह है कि गाँवों के कई घरों में दो वक्त चूल्हा भी नहीं जलता है तथा ग्रामीण नागरिकों को पानी, बिजली, स्वास्थ्य, यातायात और शिक्षा की बुनियादी सुविधाएँ भी ठीक से उपलब्ध नहीं हैं। इन सभी समस्याओं के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि का प्रति एकड़ उत्पादन, अन्य देशों की अपेक्षा गिरे हुए स्तर का रहा है।

समस्या का समाधान-भारतीय कृषि की दशा को सुधारने से पूर्व हमें कृषक और उसके वातावरण की ओर वृष्टिपात करना चाहिए। भारतीय कृषक जिन ग्रामों में रहता है, उनकी दशा अत्यन्त शोचनीय है। अंग्रेजों के शासनकाल में किसानों पर ऋण का बोझ बहुत अधिक था। शनैः-शनै: किसानों की आर्थिक दशा और गिरती चली गयी एवं गाँवों का सामाजिक-आर्थिक वातावरण अत्यन्त दयनीय हो गया। अत: किसानों की स्थिति में सुधार तभी लाया जा सकता है, जब विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इन्हें लाभान्वित किया जा सके। इनको अधिकाधिक संख्या में साक्षर बनाने हेतु एक मुहिम छेड़ी जाए। ऐसे ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रम तैयार किये जाएँ, जिनसे हमारा किसान कृषि के आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से अवगत हो सके।

ग्रामोत्थान हेतु सरकारी योजनाएँ-ग्रामों की दुर्दशा से भारत की सरकार भी अपरिचित नहीं है। भारत ग्रामों का ही देश है; अत: उनके सुधारार्थ पर्याप्त ध्यान दिया जाता है। पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा गाँवों में सुधार किये जा रहे हैं। शिक्षालय, वाचनालय, सहकारी बैंक, पंचायत, विकास विभाग, जलकल, विद्युत आदि की व्यवस्था के प्रति पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रकार सर्वांगीण उन्नति के लिए भी प्रयत्न हो रहे हैं, किन्तु इनकी सफलता ग्रामों में बसने वाले निवासियों पर भी निर्भर है। यदि वे अपना कर्तव्य समझकर विकास में सक्रिय सहयोग दें, तो ये सभी सुधार उत्कृष्ट साबित हो सकते हैं। इन प्रयासों के बावजूद ग्रामीण जीवन में अभी भी अनेक सुधार अपेक्षित हैं।

आदर्श ग्राम की कल्पना-गाँधी जी की इच्छा थी कि भारत के ग्रामों का स्वरूप आदर्श हो तथा उनमें सभी प्रकार की सुविधाओं, खुशहाली और समृद्धि का साम्राज्य हो। गाँधी जी का आदर्श गाँव से अभिप्राय एक ऐसे गाँव से था, जहाँ पर शिक्षा का सुव्यवस्थित प्रचार हो; सफाई, स्वास्थ्य तथा मनोरंजन की सुविधाएँ हो; सभी व्यक्ति प्रेम, सहयोग और सद्भावना के साथ रहते हों; रेडियो, पुस्तकालय, पोस्ट ऑफिस आदि की सुविधाएँ हों; भेदभाव, छुआछूत आदि की भावना न हो; तथा लोग सुखी और सम्पन्न हों। परन्तु आज भी हम देखते हैं कि उनका स्वप्न मात्र स्वप्न ही रह गया है। आज भी भारतीय गाँवों की दशा अच्छी नहीं है। चारों ओर बेरोजगारी और निर्धनता का साम्राज्य है। गाँधी जी का आदर्श ग्राम तभी सम्भव है। जब कृषि जो कि ग्रामवासियों का मुख्य व्यवसाय है, की स्थिति में सुधार के प्रयत्न किये जाएँ और कृषि से सम्बन्धित सभी समस्याओं का यथासम्भव शीघ्रातिशीघ्र निराकरण किया जाए।

उपसंहार-ग्रामों की उन्नति भारत के आर्थिक विकास में अपना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। भारत सरकार ने स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् गाँधी जी के आदर्श ग्राम की कल्पनो को साकार करने का यथासम्भव प्रयास किया है। गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई आदि की व्यवस्था के प्रयत्न किये हैं। कृषि के लिए अनेक सुविधाएँ; जैसे-अच्छे बीज, अच्छे खोद, अच्छे उपकरण और साख एवं सुविधाजनक ऋण-व्यवस्था आदि देने का प्रबन्ध कियगया है। इस दशा में अभी और सुधार किये जाने की आवश्यकता है। वह दिन दूर नहीं है जब हम अपनी संस्कृति के मूल्य को पहचानेंगे और एक बार फिर उसके सर्वश्रेष्ठ होने का दावा करेंगे। उस समय हमारे स्वर्ग से सुन्दर देश के वैसे ही गाँव अँगूठी में जड़े नग की तरह सुशोभित होंगे और हम कह सकेंगे—

हमारे सपनों का संसार, जहाँ पर हँसती हो साकार,
जहाँ शोभा-सुख-श्री के साज, किया करते हैं नित श्रृंगार।
यहाँ यौवन मदमस्त ललाम, ये हैं वही हमारे ग्राम ॥

भारत में वैज्ञानिक कृषि

सम्बद्ध शीर्षक

  • भारतीय विज्ञान एवं कृषि
  • वैज्ञानिक विधि अपनाएँ : अधिक अंन्न उपजाएँ
  • भारत का किसान और विज्ञान
  • भारतीय कृषि एवं विज्ञान
  • व्यावसायिक कृषि का प्रसार : किसान का आधार

प्रमुख विचार-बिन्दु

  1. प्रस्तावना,
  2. प्रजनन : कृषि की विशिष्ट वैज्ञानिक विधि,
  3. विज्ञान की नयी तकनीकों के प्रयोग का सुखद परिणाम,
  4. उत्पादन के भण्डारण और भू-संरक्षण के लिए विज्ञान की उपादेयता,
  5. उपसंहार

प्रस्तावना-किसान और खेती इस देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसलिए सच ही कहा गया है। कि हमारे देश की समृद्धिका रास्ता खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है; क्योंकि यहाँ की दो-तिहाई जनता कृषि-कार्य में संलग्न है। इस प्रकार हमारी कृषि-व्यवस्था पर ही देश की समृद्धि निर्भर करती है और कृषि-व्यवस्था को विज्ञान ने एक सुदृढ़ आधार प्रदान किया है, जिसके कारण पिछले दशकों में आत्मनिर्भरता की स्थिति तक उत्पादन बढ़ा है। इस वृद्धि में उन्नत किस्म के बीजों, उर्वरकों, सिंचाई के साधनों, जल-संरक्षण एवं पौध-संरक्षण का उल्लेखनीय योगदान रहा है और यह सब कुछ विज्ञान की सहायता से ही सम्भव हो सका है। इस प्रकार विज्ञान और कृषि आज एक-दूसरे के पूरक हो गये हैं।

मनुष्यों को जीवित रहने के लिए खाद्यान्न, फल और सब्जियाँ चाहिए। ये सभी चीजें कृषि से ही प्राप्त होंगी। दूसरी ओर किसानों को अपनी कृषि की उपज बढ़ाने के लिए नयी तकनीक चाहिए, उन्नत किस्म के बीज चाहिए, उर्वरक और सिंचाई के साधनों के अलावा बिजली भी चाहिए। विज्ञान का ज्ञान ही उन्हें यह सब उपलब्ध करा सकता है।

प्रजनन: कृषि की विशिष्ट वैज्ञानिक विधि-चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वित्तीय वर्ष 1999-2000 में गेहूँ की चार नयी प्रजातियाँ विकसित कीं। कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर जियाउद्दीन अहमद के अनुसार, ‘अटल’, ‘नैना’, ‘गंगोत्री एवं प्रसाद’ नाम की ये प्रजातियाँ रोटी को और अधिक स्वादिष्ट बनाने में सक्षम होंगी। पहली प्रजाति-के-9644 को प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जोड़कर ‘अटल’ नाम दिया गया है, जिन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ के साथ ‘जय विज्ञान’ जोड़कर एक नया नारा दिया है। यह गेहूँ ऐच्छिक पौधों के प्रकार के साथ, वर्षा की विविध स्थितियों में भी श्रेयस्कर उत्पादक स्थितियाँ सँजोये रखेगा। हरी पत्ती और जल्दी पुष्पित होने वाली इस प्रजाति का गेहूँ कड़े दाने वाला होगा। इसमें अधिक उत्पादकता के साथ अधिक प्रोटीन भी होगा। प्रजनन की विशिष्ट विधि का प्रयोग करके वैज्ञानिकों ने के-7903 नैना प्रजाति का विकास किया है, जो 75 से 100 दिन में पक जाता है। इसमें 12 प्रतिशत प्रोटीन होता है और इसकी उत्पादन-क्षमता 40 से 50 क्विटल प्रति हेक्टेयर है। इसी प्रकार विकसित के-9102 प्रजाति को गंगोत्री नाम दिया है। इसकी परिपक्वता अवधि 90 से 105 दिन के बीच घोषित की गयी है। इसमें 13 प्रतिशत प्रोटीन होता है और 40 से 50 क्विटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन-क्षमता होती है। प्रजनन की विशिष्ट वैज्ञानिक विधि से ही ऐसा सम्भव हो पाया है।

विज्ञान की नयी तकनीकों के प्रयोग का सुखद परिणाम-आधारभूतं वैज्ञानिक तकनीकें जो कृषि के क्षेत्र में प्रयुक्त हुई और हो रही हैं, उन्हें अब व्यापक स्वीकृति भी मिल रही है। ये वे आधार बनी हैं, जिससे कृषि की उपलब्धियाँ ‘भीख के कटोरे’ से आज निर्यात के स्तर तक पहुँच गयी हैं। कृषि में वृद्धि, विशेषकर पैदावार और उत्पादन में अनेक गुना वृद्धि, मुख्य अनाज की फसलों के उत्पादन में वृद्धि से सम्भव हुई है। पहले गेहूं की हरित क्रान्ति हुई और इसके बाद धान के उत्पादन में क्रान्ति आयी। उत्तर प्रदेश के 167.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की जाती है, जिसमें वर्ष 1999-2000 में 452.36 लाख मी० टन खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन हुआ, जो देश के कुल उत्पादन का 23 प्रतिशत है। विज्ञान की नयी-नयी तकनीकों के प्रयोग से ही यह सम्भव हो सकती है।

उत्पादन के भण्डारण और भू-संरक्षण के लिए विज्ञान की उपादेयता-–पर्याप्त मात्रा में उत्पादन के बाद उसके भण्डारण की भी आवश्यकता होती है। आलू, फल आदि के भण्डारण के लिए शीतगृहों एवं प्रशीतित वाहनों के लिए वैज्ञानिक विधियों की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। फसलों के निर्यात के लिए साफ-सुथरी सड़कों, ट्रैक्टरों और ट्रकों का निर्माण विज्ञान के ज्ञान से ही सम्भव हो सका है, जिनकी आवश्यकता कृषकों के लिए होती है। इसके अलावा चीनी मिले, आटा मिल, चावल मिल, दाल मिल और तेल मिल की आवश्यकता पड़ती है। इन मिलों की स्थापना वैज्ञानिक विधि से ही हो सकती है। ट्यूबवेल एवं कृषि पर आधारित उद्योगों के लिए बिजली की आवश्यकता को वैज्ञानिक ज्ञान के आधार पर पूरा किया जा सकता है। इसी प्रकार खेत की मिट्टी की जाँच कराकर, विश्लेषण के परिणामों के आधार पर सन्तुलित उर्वरकों एवं जैविक खादों के प्रयोग के लिए भी विज्ञान के ज्ञान की ही आवश्यकता होती है।

उपसंहार—इस प्रकार विज्ञान और कृषि का बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध है। भूमण्डलीकरण के युग में आज विज्ञान की सहायता के बिना कृषि और कृषक को उन्नत नहीं बनाया जा सकता। यह भी सत्य है कि जब तक गाँव की खेती तथा किसान की दशा नहीं सुधरती, तब तक देश के विकास की बात बेमानी ही कही जाएगी। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन 23 दिसम्बर को किसान-दिवस’ के रूप में मनाये जाने की घोषणा से कृषि और कृषक के उज्ज्वल भविष्य की अच्छी सम्भावनाएँ दिखाई देती हैं।

भारत में कृषि क्रान्ति एवं कृषक आन्दोलन

प्रमुख विचार-बिन्दु

  1. प्रस्तावना,
  2. किसानों की समस्याएँ,
  3. कृषक संगठन व उनकी माँग,
  4. कृषक आन्दोलनों के कारण,
  5. उपसंहार

प्रस्तावना—हमारा देश कृषि प्रधान है और सच तो यह है कि कृषि क्रिया-कलाप ही देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ग्रामीण क्षेत्रों की तीन-चौथाई से अधिक आबादी अब भी कृषि एवं कृषि से संलग्न क्रिया-कलापों पर निर्भर है। भारत में कृषि मानसून पर आश्रित है और इस तथ्य से सभी परिचित हैं कि प्रत्येक वर्ष देश की एक बहुत बड़ा हिस्सा सूखे एवं बाढ़ की चपेट में आता है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय जन-जीवन का प्राणतत्त्व है। अंग्रेजी शासन-काल में भारतीय कृषि का पर्याप्त ह्रास हुआ।

किसानों की समस्याएँ--भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। भारत की अधिकांश जनता गाँवों में बसती है। यद्यपि किसान समाज का कर्णधार है किन्तु इनकी स्थिति अब भी बदतर है। उसकी मेहनत के अनुसार उसे पारितोषिक नहीं मिलता है। यद्यपि सकल घरेलू उत्पाद में कृषि-क्षेत्र का योगदान 30 प्रतिशत है, फिर भी भारतीय कृषक की दशा शोचनीय है।

देश की आजादी की लड़ाई में कृषकों की एक वृहत् भूमिका रही। चम्पारण आन्दोलन अंग्रेजों के खिलाफ एक खुला संघर्ष था। स्वातन्त्र्योत्तर जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ। किसानों को भू-स्वामित्व का अधिकार मिला। हरित कार्यक्रम भी चलाया गया और परिणामत: खाद्यान्न उत्पादकता में वृद्धि हुई; किन्तु इस हरित क्रान्ति का विशेष लाभ सम्पन्न किसानों तक ही सीमित रहा। लघु एवं सीमान्त कृषकों की स्थिति में कोई आशानुरूप सुधार नहीं हुआ।

आजादी के बाद भी कई राज्यों में किसानों को भू-स्वामित्व नहीं मिला जिसके विरुद्ध बंगाल, बिहार एवं आन्ध्र प्रदेश में नक्सलवादी आन्दोलन प्रारम्भ हुए।

कृषक संगठन वे उनकी माँग--किसानों को संगठित करने का सबसे बड़ा कार्य महाराष्ट्र में शरद जोशी ने किया। किसानों को उनकी पैदावार का समुचित मूल्य दिलाकर उनमें एक विश्वास पैदा किया कि वे संगठित होकर अपनी स्थिति में सुधार ला सकते हैं। उत्तर प्रदेश के किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत ने । किसानों की दशा में बेहतर सुधार लाने के लिए एक आन्दोलन चलाया है और सरकार को इस बात का अनुभव करा दिया कि किसानों की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। टिकैत के आन्दोलन में किसानों के मन में कमोवेश यह भावना भर दी कि वे भसंगठित होकर अपनी आर्थिक उन्नति कर सकते हैं।

किसान संगठनों को सबसे पहले इस बारे में विचार करना होगा कि “आर्थिक दृष्टि से अन्य वर्गों के साथ उनका क्या सम्बन्ध है। उत्तर प्रदेश की सिंचित भूमि की हदबन्दी सीमा 18 एकड़ है। जब किसान के लिए सिंचित भूमि 18 एकड़ है, तो उत्तर प्रदेश की किसान यूनियन इस मुद्दे को उजागर करना चाहती है कि 18 एकड़ भूमि को सम्पत्ति-सीमा का आधार मानकर अन्य वर्गों की सम्पत्ति अथवा आय-सीमा निर्धारित होनी चाहिए। कृषि पर अधिकतम आय की सीमा साढ़े बारह एकड़ निश्चित हो गयी, किन्तु किसी व्यवसाय पर कोई भी प्रतिबन्ध निर्धारित नहीं हुआ। अब प्रौद्योगिक क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी शनैः-शनैः हिन्दुस्तान में अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाती जा रही हैं। किसान आन्दोलन इस विषमता एवं विसंगति को दूर करने के लिए भी संघर्षरत है। वह चाहता है कि भारत में समाजवाद की स्थापना हो, जिसके लिए सभी प्रकार के पूँजीवाद तथा इजारेदारी का अन्त होना परमावश्यक है। यूनियन की यह भी माँग है कि वस्तु विनिमय के अनुपात से कीमतें निर्धारित की जाएँ, न कि विनिमयं का माध्यम रुपया माना जाए। यह तभी सम्भव होगा जब उत्पादक और उपभोक्ता दोनों रूपों में किसान के शोषण को समाप्त किया जा सके। सारांश यह है कि कृषि उत्पाद की कीमतों को आधार बनाकर ही अन्य औद्योगिक उत्पादों की कीमतों को निर्धारित किया जाना चाहिए।”

किसान यूनियन किसानों के लिए वृद्धावस्था पेंशन की पक्षधर है। कुछ लोगों का मानना है कि किसान यूनियन किसानों का हित कम चाहती है, वह राजनीति से प्रेरित ज्यादा है। इस सन्दर्भ में किसान यूनियन का कहना है “हम आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक शोषण के विरुद्ध किसानों को संगठित करके एक नये समाज की संरचना करना चाहते हैं। आर्थिक मुद्दों के अतिरिक्त किसानों के राजनीतिक शोषण से हमारा तात्पर्य जातिवादी राजनीति को मिटाकर वर्गवादी राजनीति को विकसित करना है। आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक दृष्टि से शोषण करने वालों के समूह विभिन्न राजनीतिक दलों में विराजमान हैं और वे अनेक प्रकार के हथकण्डे अर्पनाकर किसानों को मुंह बन्द करना चाहते हैं। कभी जातिवादी नारे देकर, कभी किसान विरोधी आर्थिक तर्क देकर, कभी देश-हित का उपदेश देकर आदि, परन्तु वे यह भूल जाते हैं कि किसानों की उन्नति से ही भारत नाम का यह देश, जिसकी जनसंख्या का कम-से-कम 70% भाग किसानों का है, उन्नति कर सकता है। कोई चाहे कि केवल एक-आध प्रतिशत राजनीतिज्ञों, अर्थशास्त्रियों, स्वयंभू समाजसेवियों तथा तथाकथित विचारकों की उन्नति हो जाने से देश की उन्नति हो जाएगी तो ऐसा सोचने वालों की सरासर भूल होगी।

यहाँ एक बात का उल्लेख करना और भी समीचीन होगा कि आर्थर डंकल के प्रस्तावों ने कृषक आन्दोलन में घी का काम किया है। इससे आर्थिक स्थिति कमजोर होगी और करोड़ों कृषक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के गुलाम बन जाएँगे।

कृषक आन्दोलनों के कारण-भारत में कृषक आन्दोलन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  1. भूमि-सुधारों का क्रियान्वयन दोषपूर्ण है। भूमि का असमान वितरण इसे आन्दोलन की मुख्य जड़ है।
  2. भारतीय कृषि को उद्योग का दर्जा न दिये जाने के कारण किसानों के हितों की उपेक्षा निरन्तर हो रही है।
  3. किसानों द्वारा उत्पादित वस्तुओं का मूल्य-निर्धारण सरकार करती है जिसका समर्थन मूल्य बाजार मूल्य से नीचे रहता है। मूल्य-निर्धारण में कृषकों की भूमिका नगण्य है।
  4. दोषपूर्ण कृषि विपणन प्रणाली भी कृषक आन्दोलन के लिए कम उत्तरदायी नहीं है। भण्डारण की अपर्याप्त व्यवस्था, कृषि मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ावों की जानकारी न होने से भी किसानों को पर्याप्त आर्थिक घाटा सहना पड़ता है।
  5. बीजों, खादों, दवाइयों के बढ़ते दाम और उस अनुपात में कृषकों को उनकी उपज का पूरा मूल्य भी न मिल पाना अर्थात् बढ़ती हुई लागत भी कृषक आन्दोलन को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी है।
  6. नयी कृषि तकनीक का लाभ आम कृषक को नहीं मिल पाता है।
  7. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का पुलन्दा लेकर जो डंकल प्रस्ताव भारत में आया है, उससे भी किसान बेचैन हैं और उनके भीतर एक डर समाया हुआ है।
  8. कृषकों में जागृति आयी है और उनका तर्क है कि चूंकि सकल राष्ट्रीय उत्पाद में उनकी महती भूमिका है; अत: धन के वितरण में उन्हें भी आनुपातिक हिस्सा मिलना चाहिए।

उपसंहार–विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं का अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है कि कृषि की हमेश उपेक्षा हुई है; अतः आवश्यक है क़ि कृषि के विकास पर अधिकाधिक ध्यान दिया जाए।

स्पष्ट है कि कृषक हितों की अब उपेक्षा नहीं की जा सकती। सरकार को चाहिएं कि कृषि को उद्योग का दर्जा प्रदान करे। कृषि उत्पादों के मूलँ-निर्धारण में कृषकों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। भूमि-सुधार कार्यक्रम के दोषों का निवारण होना जरूरी है तथा सरकार को किसी भी कीमत पर डंबल प्रस्ताव को अस्वीकृत कर देना चाहिए और सरकार द्वारा किसानों की माँगों और उनके आन्दोलनों पर गम्भीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।

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