UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 4 Population : Growth, Density, Distribution and Structure

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Geography
Chapter Chapter 4
Chapter Name Population : Growth, Density, Distribution and Structure (जनसंख्या : वृद्धि, घनत्व, वितरण एवं संरचना)
Number of Questions Solved 35
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 4 Population : Growth, Density, Distribution and Structure (जनसंख्या : वृद्धि, घनत्व, वितरण एवं संरचना)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
संसार में जनसंख्या के घनत्व तथा वितरण को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारकों की विवेचना कीजिए। [2007, 08, 10, 14]
या
जनसंख्या के असमान वितरण के लिए उत्तरदायी भौगोलिक कारकों का वर्णन कीजिए। (2007)
विश्व में एशिया के असमान वितरण की व्याख्या कीजिए तथा ऐसे असमान वितरण के किन्हीं तीन कारणों का वर्णन कीजिए। [2016]
या
जनसंख्या-वृद्धि के लिए उत्तरदायी भौगोलिक कारकों का विश्लेषण कीजिए। [2012,16]
या
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों की समीक्षा कीजिए। [2008, 14]
या

विश्व की जनसंख्या का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए –
(क) जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारक
(ख) जनसंख्या का वितरण। [2013]
उत्तर
मानव- भूगोल के अध्ययन में मानवे का केन्द्रीय स्थान है, क्योकि मानव ही अपने प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यावरण का उपभोग करता है, उनसे प्रभावित होता है और उनमें अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तन करता है। पृथ्वीतल पर सभी आर्थिक व्यवसाय मानव द्वारा सम्पन्न होते हैं। इसी कारण पृथ्वीतल पर जनसंख्या कितनी है, उसका वितरण किन प्रदेशों में अधिक या कम है, उसमें कितनी वृद्धि अथवा कमी हुई है, उसकी क्षमता कैसी है तथा उसकी समस्याएँ क्या हैं आदि सभी तथ्यों का अध्ययन करना बड़ा महत्त्वपूर्ण है।
जनसंख्या अध्ययन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वीतल के विभिन्न प्रदेशों में जनसंख्या की स्थिति, वृद्धि अथवा कमी, उसकी भिन्नताएँ, घनत्व, आवास-प्रवास, शारीरिक शक्ति, आयु-वर्ग, पुरुष-महिला अनुपात तथा जनसंख्या के आर्थिक विकास की अवस्थाओं का पता लगाना होता है।

विश्व में जनसंख्या के वितरण में प्राचीन काल से अब तक बहुत-से परिवर्तन हुए हैं। पृथ्वी पर जनसंख्या के वितरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भूतल पर मनुष्यों का निवास असमान है। केवल कुछ प्रदेश ऐसे हैं जहाँ मानव-निवास अति सघन है, जबकि बहुत-से भूभाग खाली पड़े हैं। विश्व की 50 प्रतिशत जनसंख्या; भू-स्थल के केवल 5 प्रतिशत भाग पर निवास करती है, जबकि 7 प्रतिशत क्षेत्रफल ऐसा है जहाँ केवल 5% जनसंख्या ही रहती है; अत: स्थल-खण्ड का कम बसा भाग बहुत बड़ा है। पश्चिमी गोलार्द्ध के स्थल भाग पर केवल एक-चौथाई जनसंख्या निवास करती है। इस वितरण पर प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विषमताओं का भी प्रभाव पड़ता है।

जनसंख्या के घनत्व तथा वितरण को प्रभावित करने वाले कारक
Factors Affecting the Density and Distribution of Population

जनसंख्या का घनत्व – जनसंख्या के घनत्व का आशये किसी क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या की सघनता से है। जनसंख्या के घनत्व को प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या के रूप में मापा जाता है। घनत्व ज्ञात करने के लिए किसी क्षेत्र की कुल जनसंख्या को उसके क्षेत्रफल से भाग दिया जाता है। घनत्व से जनसंख्या के किसी क्षेत्र में संकेन्द्रण की मात्रा का बोध होता है।
जनसंख्या के घनत्व तथा वितरण पर निम्नलिखित भौगोलिक एवं अन्य कारकों का प्रभाव पड़ता है –

1. स्थिति (Location) – किसी प्रदेश की स्थिति का प्रभाव उसके समीपवर्ती देशों, परिवहन, व्यापार तथा मानव इतिहास पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, हिन्द महासागर में भारत की स्थिति केन्द्रीय होने के कारण मध्य-पूर्व के देशों तथा पूर्वी गोलार्द्ध के देशों के साथ समुद्री व्यापार की सुविधा रखने वाली है। विश्व की लगभग 75 प्रतिशत जनसंख्या तटीय भागों तथा उनकी सीमा-पेटियों में निवास करती है। भूमध्यसागरीय भागों में उसके चारों ओर प्राचीन काल से ही मानव-बस्तियों का विकास होता रही हैं। यहाँ मछलियों की प्राप्ति, सम-जलवायु, समतल मैदानी भूमि जिसमें कृषि, उद्योग, परिवहन एवं मानव-आवासों का तीव्र गति से विकास हुआ है। इसीलिए इन भागों में सघन जनसंख्या का संकेन्द्रण हुआ है।

2. जलवायु (Climate) – सभी कारकों में जलवायु महत्त्वपूर्ण साधन है, जो जनसंख्या को । किसी स्थान पर बसने के लिए प्रेरित करती है। विश्व के सबसे घने बसे भाग मानसूनी प्रदेश तथा सम-शीतोष्ण जलवायु के प्रदेश हैं। चीन, जापान, भारत, म्यांमार, वियतनाम, बांग्लादेश तथा पूर्वी-द्वीप समूह की जलवायु मानसूनी है, जबकि पश्चिमी यूरोप एवं संयुक्त राज्य की जलवायु सम-शीतोष्ण है; अतः इन देशों में सघन जनसंख्या का निवास हुआ है।

इसके विपरीत जिन प्रदेशों की जलवायु उष्ण एवं शुष्क है, वहाँ बहुत ही कम जनसंख्या निवास करती है। उदाहरण के लिए, सहारा, कालाहारी, अटाकामा, अरब, थार एवं ऑस्ट्रेलियाई मरुस्थलों में जनसंख्या का घनत्व एक व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। अति उष्ण एवं आर्दै प्रदेशों में भी जनसंख्या कम है; जैसे- अमेजन बेसिन के पर्वतीय एवं पठारी क्षेत्रों में।
मानव-आवास के लिए स्वस्थ अनुकूलतम जलवायु वह है जिसमें ग्रीष्म ऋतु का अधिकतम औसत तापमान 18°सेग्रे से कम तथा शीत ऋतु के सबसे ठण्डे महीने का तापमान 3° सेग्रे से कम न हो। सामान्यतया 4°-21° सेग्रे तापमान के प्रदेश जनसंख्या के आवास के लिए सर्वाधिक अनुकूल माने जाते हैं। वर्षा की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ जनसंख्या के घनत्व में भी वृद्धि होती जाती है तथा उसके घटने के साथ-साथ जनसंख्या घनत्व में कमी होती जाती है।

3. भू-रचना (Terrain) – भू-रचना का जनसंख्या से गहरा सम्बन्ध है। समतल मैदानी भागों में कृषि, सिंचाई, परिवहन, व्यापार आदि का विकास अधिक होता है; अतः मैदानी क्षेत्र सघन रूप से बस जाते हैं। पर्वतीय एवं पहाड़ी क्षेत्रों में कष्टदायकं एवं विषम भूमि की बनावट होने के कारण बहुत कम लोग निवास करना पसन्द करते हैं। भारत के असम राज्य में केवल 397 मानव प्रति वर्ग किमी निवास करते हैं, जबकि गंगा के डेल्टा में 800 से भी अधिक व्यक्ति प्रति वर्ग किमी निवास कर रहे हैं। विश्व में जनसंख्या के चार समूहों का संकेन्द्रण हुआ है-

  1. चीन एवं जापान,
  2. भारत एवं बांग्लादेश,
  3. यूरोपीय देश एवं
  4. पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका।

विश्व में उपजाऊ भूमि के कारण नदी-घाटियाँ भी सघन रूप से बसी हैं।

4. स्वच्छ जल की पूर्ति (Supply of Clean water) – जल मानव की मूल आवश्यकता है। जल की आवश्यकता मुख्यत: तीन प्रकार की है –

  1. घरेलू आवश्यकताओं के लिए जल की पूर्ति
  2. औद्योगिक कार्यों के लिए जल की पूर्ति एवं
  3. सिंचाई के लिए जल की पूर्ति।

अतः जिन प्रदेशों एवं क्षेत्रों में शुद्ध एवं स्वच्छ मीठे जल की पूर्ति की सुविधी होती है, वहाँ जनसंख्या भी अधिक निवास करने लगती है; जैसे-नदी-घाटियों एवं समुद्रतटीय क्षेत्रों में।

5. मिट्टियाँ (Soils) – जनसंख्या का मूल आधार भोजन है जिसके बिना वह जीवित नहीं रह सकती। शाकाहारी भोजन प्रत्यक्ष रूप से एवं मांसाहारी भोजन अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी में ही उत्पन्न होते हैं। जिन प्रदेशों की मिट्टियाँ उपजाऊ होती हैं, वहाँ सघन जनसंख्या निवास करती है। चीन, भारत एवं यूरोपीय देशों में नदियों की घाटियों में मिट्टी की अधिक उर्वरा शक्ति के कारण सघन जनसंख्या निवास कर रहा है।

6. खनिज पदार्थ (Minerals) – जिन प्रदेशों में खनिज पदार्थों का बाहुल्य होता है, वहाँ उद्योगों के विकसित होने की पर्याप्त सम्भावनाएँ रहती हैं। इस कारण ये क्षेत्र जनसंख्या को अपनी ओर आकर्षित करते हैं तथा विषम परिस्थितियों में भी इन प्रदेशों में सघन जनसंख्या का आवास रहता है। यूरोप महाद्वीप के सघन बसे प्रदेश कोयले एवं लोहे की खानों के समीप ही स्थित मिलते हैं। इसी प्रकार रूस के उन क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक है, जहाँ खनिज भण्डार अधिक हैं।

7. शक्ति के संसाधन (Power Resources) – उद्योगों एवं परिवहन के साधनों के संचालन में कोयला, पेट्रोलियम, जल-विद्युत एवं प्राकृतिक गैस की आवश्यकता होती है तथा इनकी प्राप्ति वाले क्षेत्रों में जनसंख्या भी सघन रूप में निवास करने लगती है।

8. आर्थिक उन्नति की अवस्था (Stage of Economic Progress) – किसी प्रदेश की आर्थिक स्थिति में वृद्धि होने पर उसकी जनसंख्या-पोषण की क्षमता में भी वृद्धि हो जाती है; अत: इन प्रदेशों में जनसंख्या भी अधिक निवास करने लग जाती है। कृषि उत्पादन कम होने पर भी इन प्रदेशों में खाद्यान्न विदेशों से आयात कर लिये जाते हैं, क्योंकि आयात करने के लिए उनकी आर्थिक स्थिति अनुकूल होती है।

9. तकनीकी प्रगति का स्तर (Level of Technological Progress) – तकनीकी विकास के द्वारा नवीन यन्त्रों, उपकरणों एवं मशीनों के उत्पादन में वृद्धि होती है जिससे विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादों में भी वृद्धि होती है एवं ऋतु तथा जलवायु की विषमताओं पर नियन्त्रण कर लिया जाता है। इन सुविधाओं के स्तर में वृद्धि से जनसंख्या में भी वृद्धि हो जाती है। यूरोप के औद्योगिक प्रदेशों में 700 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से भी अधिक जन-घनत्व इसी कारण मिलता है।

10. सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक (Social and Cultural Factors) – सामाजिक रीतिरिवाजों, धार्मिक विश्वासों एवं जीवन के प्रति दृष्टिकोण का प्रभाव जनसंख्या वितरण पर भी पड़ता है। जिस समाज में लोग भाग्यवादी होते हैं, उनमें परिवार-कल्याण कार्यक्रमों के प्रति विश्वास एवं रुचि न होने के कारण अधिक सन्तति से जनसंख्या में वृद्धि होती चली जाती है। उदाहरण के लिए, भारत में मुस्लिम लोगों का परिवार-कल्याण के प्रति धार्मिक विश्वास न होने के कारण उनकी जनसंख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि होती जा रही है।

11. राजनीतिक कारक (Political Factors) – राजनीतिक नियमों का प्रभाव भी जनसंख्या वितरण पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। उदाहरणार्थ- ऑस्ट्रेलिया का क्षेत्रफल भारत की अपेक्षा लगभग तीन गुना अधिक है, जब कि ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या भारत की जनसंख्या का केवल 1/50 भाग ही है। इसका प्रमुख कारण ऑस्ट्रेलिया सरकार की श्वेत नीति (White Policy) है जो गोरी जातियों के अतिरिक्त दूसरी नस्ल के लोगों को ऑस्ट्रेलिया में बसने से रोकती है।

12. मनोवैज्ञानिक कारक (Psychological Factors) – किसी प्रदेश में मानव के कम या अधिक निवास के लिए उसकी छाँट दो सीमाओं के मध्य रहती है। एक ओर प्राकृतिक पर्यावरण द्वारा निश्चित की हुई सीमा तथा दूसरी ओर सरकारी नीति। इस प्रकार कुछ मानव थोड़े संसाधनों के क्षेत्र में बसे होते हैं तथा उनकी जीविकोपार्जन की विधि भी पिछड़ी हुई होती है। ऐसे उदाहरण पर्वतीय तथा वन-क्षेत्रों में अधिक मिलते हैं। विश्व के दक्षिणी महाद्वीपों में ऐसे क्षेत्र अधिक मिलते हैं।

13. पर्यावरण की वांछनीयता (Environmental Desirability) – मानवीय सभ्यता के विकास के साथ-सांथ परिवहन, संचार आदि साधनों में वृद्धि से विभिन्न प्रदेशों की वांछनीयता में भी परिवर्तन हो जाते हैं। जहाँ आर्थिक विकास की सम्भावनाएँ अत्यधिक दिखलाई पड़ती हैं, उन क्षेत्रों में मानव के बसने की इच्छा भी अधिक रहती है। उदाहरणार्थ-बिहार राज्य के उत्तरी भाग में कृषि द्वारा सघन जनसंख्या पोषण करने की क्षमता विद्यमान है और दक्षिण की ओर छोटा नागपुर पठारे में खनिज पदार्थों के कारण औद्योगिक विकास की भारी क्षमता है। अत: बिहार राज्य में इन सम्भावनाओं के कारण जनसंख्या भी सघन होती जा रही है। इसके विपरीत सम्भावनाओं की कमी के कारण हिमालय के तराई प्रदेश में जनसंख्या विरल है।

14. अन्तर्राष्ट्रीय पारस्परिक निर्भरता (International Interdependence) – वर्तमान समय में विशेषीकरण में वृद्धि के फलस्वरूप सभ्य राष्ट्र अपनी खाद्यान्न आवश्यकता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन तथा जर्मनी के खाद्यान्न अधिकतर ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अर्जेण्टाइना आदि देशों से मशीनों के बदले आते हैं; अर्थात् एक देश दूसरे देश की उपज को आसानी से बदल सकता है। इससे विशेषीकरण में वृद्धि होती है तथा अधिक जनसंख्या का पोषण सम्भव हो सकता है। इसी प्रकार जापान ने भी सघन जनसंख्या के पोषण की क्षमता आसानी से प्राप्त कर ली है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार ने विभिन्न देशों की आर्थिक निर्भरता की अपेक्षा विशेषीकरण को प्रोत्साहन दिया है, परन्तु कभी-कभी राजनीतिक सम्बन्ध खराब होने से विभिन्न देशों में युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अतः इसके लिए एक देश को दूसरे देश की विशेषताओं को उचित प्रकार से समझना चाहिए।

प्रश्न 2
एशिया में जनसंख्या के असमान वितरण हेतु भौगोलिक कारकों की विवेचना कीजिए। [2015]
या
एशिया में जनसंख्या के असमान वितरण के कारणों की विवेचना कीजिए। [2008, 10, 11, 16]
उत्तर
विश्व में जनसंख्या का वितरण समान नहीं है। सन् 1992 में विश्व की जनसंख्या 5.48 अरब थी जो 2013 ई० तक बढ़कर 7.125 अरब पहुँच गयी है। इस प्रकार विश्व जनसंख्या में 9.7 करोड़ मानव प्रतिवर्ष बढ़ जाते हैं। ऐसा अनुमान किया जाता है कि सन् 2050 तक विश्व की जनसंख्या 9.10 अरब हो जाएगी। यह जनसंख्या 135 करोड़ वर्ग किमी क्षेत्रफल पर निवास करती है। विश्व में जनसंख्या का सामान्य घनत्व 93 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। किन्तु कहीं-कहीं पर यह 3,000 से 4,000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से भी अधिक पाया जाता है, जबकि कुछ प्रदेशों में 5 व्यक्तियों से भी कम है।

इस प्रकार दो-तिहाई जनसंख्या कुल क्षेत्रफल के सातवें भाग पर निवास करती है। इससे पता चलता है कि विश्व की जनसंख्या का वितरण बड़ा ही असमान है। यदि जनसंख्या-वितरण का अध्ययन करें तो पता चलता है। कि एशिया महाद्वीप में विश्व की सबसे अधिक अर्थात् 60.8% जनसंख्या निवास करती है। यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका महाद्वीपों में क्रमश: 12%, 13.9%, 7% तथा 5.8% जनसंख्या निवास करती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में बहुत ही कम अर्थात् केवल 0.7 प्रतिशत जनसंख्या ही निवास करती है। निम्नांकित तालिकी विश्व में जनसंख्या वितरण को प्रकट करती है-
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 4 Population Growth, Density, Distribution and Structure 1

यदि विश्व में जनसंख्या वृद्धि का अध्ययन किया जाये तो पता चलता है कि जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है। ऐसे क्षेत्र, जो पहले जनशून्य थे, अब मानव ने उन निर्जन क्षेत्रों में भी अपने बसाव प्रारम्भ कर दिये हैं। मानव ने अपने जीवन-निर्वाह के साधनों की खोज में अब पर्वतीय, पठारी, मरुस्थलीय एवं ध्रुवीय प्रदेशों की ओर प्रयास तेज कर दिये हैं। विश्व की अधिकांश जनसंख्या थोड़े-से क्षेत्रफल में ही निवास करती है; अर्थात् विश्व की दो-तिहाई जनसंख्या केवल तीन बड़े क्षेत्रों में केन्द्रित है –

  1. दक्षिणी-पूर्वी एशियाई मानसूनी देश
  2. पश्चिमी और मध्य यूरोपीय देश
  3. पूर्वी तथा मध्य

संयुक्त राज्य अमेरिका। विश्व का अधिकांश क्षेत्रफल कम जनसंख्या रखने वाला है। इन तथ्यों को जनसंख्या के महाद्वीपीय वितरण से समझा जा सकता है।

जनसंख्या का महाद्वीपीय वितरण
Continental Distribution of Population

एशियाई जनसमूह – एशिया महाद्वीप में विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या निवास करती है। विश्व के लगभग 60.8% अर्थात् लगभग 357 करोड़ लोग एशिया महाद्वीप में निवास करते हैं, परन्तु यहाँ पर जनसंख्या का वितरण बड़ा ही असमान है। चीन, जापान, कोरिया, फिलीपीन्स तथा वियतनाम देशों में कुल मिलाकर विश्व की लगभग 25% जनसंख्या निवास करती है। चीन की जनसंख्या 138.4 करोड़ (सन् 2016 में) हो गयी है। जापान में भी 12 करोड़ 81 लाख (लगभग) व्यक्ति निवास कर रहे हैं। दक्षिणी-पूर्वी एशिया में इस महाद्वीप की जनसंख्या को 75% भाग समुद्रतटीय क्षेत्रों तथा नदियों की घाटियों में निवास करता है।

भारतवर्ष में सन् 2011 की जनगणनानुसार 121.01 करोड़ व्यक्ति निवास कर रहे थे। इस प्रकार”एशिया महाद्वीप में बहुत थोड़े क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ घनी आबादी निवास करती है, जबकि अधिकांश क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ बहुत ही कम लोग निवास करते हैं।” एशिया महाद्वीप के कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 550 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, जबकि कुछ भागों में 1 से 25 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी ही है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। मंगोलिया, सिक्यांग एवं तिब्बत का पठार तथा साइबेरिया के विस्तृत भाग और अरब का मरुस्थल विशेष रूप से कम जनसंख्या रखने वाले विस्तृत प्रदेश हैं।

एशिया महाद्वीप में जनसंख्या के सघन कुंज लगभग 10 से 40° उत्तरी अक्षांशों के मध्य पाये जाते हैं। यहाँ जनसंख्या का मुख्य आर्थिक आधार कृषि-कार्य हैं। मानसूनी जलवायु, सिंचाई की सुविधाएँ,
उपजाऊ कॉप मिट्टी के मैदान, परिश्रमी कृषक, सदावाहिनी नदियों से जल की उपलब्धि आदि के द्वारा वर्ष में 2 से 3 तक फसलों का उत्पादन किया जाता है। नदियों की घाटियाँ और डेल्टाई भागों में गेहूं एवं चावल उत्पादक क्षेत्र मानव समूहों से भरे पड़े हैं। इन देशों में 70% से 80% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।

यूरोपीय जनसमूह – यूरोप महाद्वीप का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में तृतीय स्थान है। यहाँ पर 727 करोड़ व्यक्ति निवास करते हैं। यहाँ जनसंख्या का घनत्व 101 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। विश्व की 12.8% जनसंख्या इस महाद्वीप में निवास करती है। जनसंख्या के समूह 40° उत्तरी अक्षांश से 60° उत्तरी अक्षांश के मध्य फैले हैं, किन्तु सबसे सघन बसाव 45° उत्तर से 55° उत्तरी अक्षांशों के बीच है जहाँ कोयला अधिक मात्रा में प्राप्त होता है। 50°उत्तरी अक्षांश के साथ जनसंख्या का जमाव पश्चिम में इंग्लिश चैनल से लेकर पूरब में यूक्रेन देश तक विस्तृत है।

इस क्षेत्र को ‘यूरोपीय जनसंख्या की धुरी’ कहा जाता है जो पश्चिम से पूरब की ओर सँकरी होती गयी है। वास्तव में यूरोप की जनसंख्या का आधार औद्योगिक-प्राविधिक विकास है। औद्योगिक विकास के साथ-साथ परिवहन के साधनों का विकास एवं विस्तार हुआ जिससे व्यापार को प्रश्रय मिला। यही कारण है कि यूरोप के जनसंख्या जमघट में नगरों का विशेष महत्त्व है, क्योंकि नगर ही सम्पर्क तथा आर्थिक कार्यों के केन्द्र बिन्दु हैं। इन देशों की 70%-85% जनसंख्या नगरीय केन्द्रों में निवास करती है।

उत्तरी अमेरिकी जनसमूह – एशिया एवं यूरोप महाद्वीप की अपेक्षा उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में जनसंख्या कम है। यहाँ पर विश्व की लगभग 7% जनसंख्या निवास करती है तथा घनत्व 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। जनसंख्या का जमघट पूर्वी भाग में 100° पश्चिमी देशान्तर से पूर्व में 30° से 45° उत्तरी अक्षांशों के मध्य हुआ है। उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भाग में यूरोपियन प्रवासी सबसे पहले आकर बसे थे, परन्तु अब पश्चिमी भागों में कैलीफोर्निया में भी जनसंख्या अधिक हो गयी है। यहाँ पर औद्योगिक विकास के साथ-साथ कृषि भी आधुनिक ढंग से की जाती है।

उत्तरी अमेरिका में नदियों के बेसिन तथा उपजाऊ मैदान सघन बसे हैं। महान् झीलों का समीपवर्ती क्षेत्र, पूर्वी तटीय भाग, मध्यवर्ती क्षेत्र तथा मिसीसिपी का मैदान तथा कनाडा में झीलों एवं सेण्ट लारेंस के निकटवर्ती क्षेत्र सर्वाधिक जनसंख्या रखने वाले हैं। यहाँ पर जन-घनत्व 200 से 300 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। पश्चिमी द्वीप समूह, मध्य एवं पूर्वी मैक्सिको तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यवर्ती भागों में जनसंख्या का घनत्व 50 से 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। ग्रीनलैण्ड, अलास्का, न्यूफाउण्डलैण्ड, रॉकी पर्वत तथा मरुस्थलीय प्रदेश कम जनसंख्या रखने वाले हैं, जहाँ जनसंख्या का घनत्व केवल 10 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। इन प्रदेशों में विषम जलवायु तथा आर्थिक विषमताएँ मानव-बसाव में बाधक बनी हुई हैं।

दक्षिणी अमेरिकी जनसमूह – जनसंख्या के दृष्टिकोण से यह महाद्वीप अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं है। क्षेत्रफल की तुलना में जनसंख्या बहुत ही कम (विश्व की लगभग 5.8%) है। जनसंख्या का घनत्व भी केवल 16 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।असमतल धरातल, विषम जलवायु, सघन वन, शुष्क मरुस्थल तथा अनुपजाऊ भूमि के कारण यहाँ जनसंख्या कम मिलती है। यहाँ पर कुछ जनसंख्या समूहों के रूप में भी बसी है। प्रमुख रूप से मध्यवर्ती पूर्वी भागों में जनसंख्या के जमघट विकसित हुए हैं। इन तटीय भागों में उपजाऊ भूमि के कारण मानव-आवास संघन हुए हैं तथा जनसंख्या का घनत्व भी 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से अधिक मिलता है। इस महाद्वीप की सघन जनसंख्या कृषि क्षेत्रों, तटीय भागों, विशाल नगरों तथा राजधानियों में निवास करती है। दक्षिणी-पूर्वी ब्राजील, लाप्लाटा बेसिन, मध्य चिली, कैरेबियन तट तथा ओरीनीको डेल्टा घने बसे हुए क्षेत्र हैं।

इस महाद्वीप के उत्तरी तथा उत्तरी-पश्चिमी तटीय भागों में मध्यम जनसंख्या निवास करती है। यहाँ पर जनसंख्या का घनत्व 10 से 30 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। कोलम्बिया के पूर्वी तट, वेनेजुएला का उत्तरी भाग, पीरू का उत्तरी-पश्चिमी तट, इक्वेडोर, बोलीविया का मध्य भाग, अर्जेण्टाइना का मध्य भाग तथा पैराग्वे का मध्य भाग मध्यम जनसंख्या के क्षेत्रों में सम्मिलित किये जा सकते हैं। दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप के पर्वतीय क्षेत्रों, मरुस्थलों, अविकसित क्षेत्रों तथा दलदली भागों में बहुत ही कम जनसंख्या निवास करती है। पैन्टागोनिया एवं अटाकामा के शुष्क मरुस्थल, एण्डीज तथा बोलीविया के उच्च शिखरों पर विरल जनसंख्या पायी जाती है। यहाँ पर 40% क्षेत्र में न्यून जनसंख्या निवास करती है। इस महाद्वीप की 65% से 70% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।

अफ्रीकी जनसमूह – अफ्रीका महाद्वीप में क्षेत्रफल की अपेक्षा जनसंख्या बहुत ही कम है। जनसंख्या के दृष्टिकोण से विश्व में एशिया एवं यूरोप महाद्वीप के बाद अफ्रीका का स्थान आता है। यहाँ 81.8 करोड़ मानव निवास करते हैं जो विश्व की कुल जनसंख्या का 13.9% भाग है तथा जनसंख्या घनत्व 20 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। अफ्रीका महाद्वीप को अधिकांश क्षेत्रफल ऊबड़-खाबड़, असमतल, पठारी, मरुस्थलीय तथा विषम जलवायु एवं कठोर पर्यावरण वाला होने के कारण मानव-आवास के अयोग्य है।

अफ्रीका महाद्वीप के उत्तरी – पूर्वी भागों में सघन जनसंख्या निवास करती है। इन भागों में जनसंख्या का घनत्व 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। नील नदी के डेल्टाई भागों में 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से भी अधिक मानव निवास करते हैं। इसके अतिरिक्त दक्षिणी अफ्रीकी संघ, तटीय मैदानी भाग तथा उत्तरपश्चिमी भागों में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक है। अल्जीरिया के उत्तरी भाग, घाना, नाइजीरिया तथा मेडागास्कर में मध्यम जनसंख्या निवास करती है, जहाँ जन-घनत्व 50 से 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। इस महाद्वीप का 50% क्षेत्र न्यून जनसंख्या रखने वाला है, जहाँ जनसंख्या का घनत्व केवल 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। इनमें सहारा का मरुस्थल, कालाहारी मरुस्थल तथा अबीसीनिया का पठार सम्मिलित हैं।

ऑस्ट्रेलियाई जनसमूह – ऑस्ट्रेलिया विश्व में सबसे कम जनसंख्या रखने वाला महाद्वीप है। यहाँ विश्व की केवल 0.7% जनसंख्या ही निवास करती है। जनसंख्या का घनत्व भी 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। यहाँ पर यूरोपियन श्वेत लोगों का आधिक्य है जो सोना एवं अन्य बहुमूल्य खनिजों की खोज में आये थे।
दक्षिण – पूर्वी तथा दक्षिण-पश्चिमी एवं समुद्रतटीय भागों में मरे-डार्लिंग एवं स्वॉन नदी का डेल्टा, मेलबोर्न तथा सिडनी के निकटवर्ती भागों में जनसंख्या का आधिक्य है। इन भागों में जनसंख्या का घनत्व 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी तट, पश्चिमी तथा दक्षिणी तट मध्यम जनसंख्या के क्षेत्र हैं। यहाँ औसत घनत्व 30 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी मिलता है। तस्मानिया द्वीप भी इसी श्रेणी में आता है। पर्वतीय, पठारी तथा मरुस्थलीय क्षेत्रों में विरल जनसंख्या है जहाँ जन-घनत्व केवल 1 से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

प्रश्न 3
विश्व में मानव-निवास क्षेत्रों की व्याख्या कीजिए।
या
“विश्व के कुछ भाग घने बसे हैं और अधिकांश भाग जनशून्य हैं।” इस कथन की सत्यता की परख कीजिए।
उत्तर

विश्व में जनसंख्या-वितरण
Population Distribution in the World

विश्व-मानचित्र पर यदि हम जनसंख्या के वितरण पर दृष्टिपात करें तो जनसंख्या-वितरण की असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या विस्फोट, तो कुछ क्षेत्र जनसंख्याविहीन दृष्टिगोचर होते हैं। विश्व की लगभग 60.8% जनसंख्या एशिया महाद्वीप में, 12% यूरोप महाद्वीप में, 7% उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में, 13.9% अफ्रीका महाद्वीप में, 5.8% जनसंख्या दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में तथा 0.7% ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपों में निवास करती है। उपर्युक्त आँकड़ों में सबसे अधिक आकर्षित करने वाले इस तथ्य से पता चलता है कि विश्व की दो-तिहाई जनसंख्या इसके क्षेत्रफल के सातवें भाग पर ही केन्द्रित है। इससे हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि विश्व के कुछ भाग अत्यन्त घने बसे हुए हैं और अधिकांश भाग जनशून्य हैं अथवा बहुत ही कम जनसंख्या वाले हैं।

विश्व की अधिकांश जनसंख्या तीन बसे हुए क्षेत्रों में केन्द्रित है। जनसंख्या के इन जमघटों का समूह उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। मानव-बसाव के आधार पर विश्व को इन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
(क) सघन बसे हुए क्षेत्र Densed Region
विश्व के निम्नलिखित क्षेत्र जनसंख्या के घने बसे हुए क्षेत्रों के अन्तर्गत आते हैं –

1. पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया के मानव समूह – इस क्षेत्र में विश्व की 60% जनसंख्या निवास करती है। दक्षिण-पूर्वी एशिया के बसे हुए क्षेत्रों के अन्तर्गत भारत में गंगा की निम्न घाटी एवं डेल्टाई क्षेत्र, चीन में ह्वांग्हो, यांगटिसीक्यांग और जेचुआन बेसिन (रेड बेसिन), जापान में पूर्वी समुद्रतटीय मैदानी क्षेत्र, पाकिस्तान में सिंचित क्षेत्र, बांग्लादेश तथा इण्डोनेशिया सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र में जनसंख्या का संकेन्द्रण पूर्णत: कृषि-कार्यों पर आधारित है। इस क्षेत्र की लगभग 70से भी अधिक जनसंख्या की आजीविका को साधन कृषि-कार्यों पर ही निर्भर करता है। एशिया के इस विशाल जन-समूह को ‘कृषि सभ्यता’ या ‘चावल सभ्यता’ के नाम से भी पुकारा जाता है, क्योंकि यहाँ का मुख्य धन्धा कृषि एवं प्रमुख फसल चावल है।

2. उत्तर-पश्चिमी यूरोप के मानव समूह – उत्तर-पश्चिमी यूरोपीय देश भी बहुत सघन बसे हुए हैं। इस क्षेत्र को यूरोप की जनसंख्या की धुरी की संज्ञा दी जाती है। इस क्षेत्र में ब्रिटेन से लेकर रूस के डोनेत्ज बेसिन तक जनसंख्या के सघन संकेन्द्रण पाये जाते हैं। इस क्षेत्र के अन्तर्गत विश्व की लगभग 20% जनसंख्या निकस करती है। इसमें रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, हॉलैण्ड, बेल्जियम, फ्रांस, पोलैण्ड, इटली तथा स्पेन आदि देश सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र के जनसमूह का मुख्य आधार उद्योग, वाणिज्य तथा व्यापार है।

3. उत्तरी अमेरिका के उत्तर-पूर्वी मानव समूह – उत्तरी अमेरिका को यह जनसमूह महान् झीलों के पूर्वी क्षेत्र में 30° उत्तरी अक्षांश से 45° उत्तरी अक्षांश तथा 100° पश्चिमी देशान्तर के पूर्व तक विस्तृत है। यहाँ इस महाद्वीप की लगभग 85% जनसंख्या निवास करती है। इस क्षेत्र में जनसंख्या का बसाव मिसीसीपी नदी के पूर्व में, ओहियो नदी के उत्तर में तथा सेण्ट लारेंस नदी की घाटी में केन्द्रित है। इस जनसमूह में विश्व की केवल 5% जनसंख्या पायी जाती है। इस क्षेत्र में संयुक्त राज्य की कृषि-पेटियाँ स्थित हैं। अधिकांश जनसंख्या विस्तृत एवं आधुनिक यन्त्रों से सुसज्जित कृषि-फार्मों तथा औद्योगिक केन्द्रों में बसी हुई है।

(ख) विरल बसे हुए क्षेत्र Rared Region
वास्तव में विश्व का 70% क्षेत्र अति विरल जनसंख्या वाला है जिसमें विश्व की केवल 5% जनसंख्या ही निवास करती है। इन क्षेत्रों की विषम तथा कठोर परिस्थितियाँ; जैसे- कठोर जलवायु, विषम धरातल, मरुस्थलीय क्षेत्रों का विस्तार, पर्वत तथा पठार आदि संरचना पायी जाती हैं। बिना बसे हुए क्षेत्रों के अन्तर्गत विश्व के निम्नलिखित क्षेत्र सम्मिलित हैं –

1. अत्यधिक ठण्डे क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार उत्तर में आर्कटिक महासागर तथा दक्षिण में अण्टार्कटिक महाद्वीप के समीपवर्ती क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके अन्तर्गत ग्रीनलैण्ड, अण्टार्कटिका, उत्तरी साइबेरिया, उत्तरी कनाडा तथा अलास्का आदि देश सम्मिलित हैं। इन क्षेत्रों में कठोर शीत ऋतु, न्यूनतम तापमान, हिम एवं पाले की कठोरता के फलस्वरूप अत्यन्त अल्प जनसंख्या निवास करती है। टुण्ड्रा प्रदेश में 60° उत्तरी अक्षांश के उत्तर में जन-विन्यास केवल नाममात्र को ही पाया जाता है। आन्तरिक महाद्वीपीय भागों में बर्फ से ढकी पर्वत श्रेणियाँ भी जनसंख्यारहित क्षेत्र हैं।

2. मध्य अक्षांशीय उष्ण मरुस्थलीय क्षेत्र – इन क्षेत्रों में बालू की प्रधानता, शुष्क एवं उष्ण जलवायु, भीषण तापमान तथा प्राकृतिक संसाधनों का अभाव मानव-बसाव में बाधक हैं। इन क्षेत्रों में जल की कमी होने के कारण कृषि व्यवसाय तथा अन्य आर्थिक कार्य विकसित नहीं हो पाये हैं। अफ्रीका महाद्वीप में सहारा व कालाहारी के उष्ण मरुस्थल; एशिया महाद्वीप में गोबी, थार, अरब, तुर्किस्तान व मंगोलिया; ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप का मरुस्थल; उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के संयुक्त राज्य अमेरिका में ग्रेट बेसिन व आन्तरिक पठार तथा दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में पेंटागोनिया तथा अटाकामा के मरुस्थल इन क्षेत्रों के अन्तर्गत आते हैं। जल की कमी, शुष्कता तथा उष्णता के कारण ये क्षेत्र प्रायः मानव बसाव के योग्य नहीं हैं; अत: यहाँ पर बहुत-ही कम जनसंख्या निवास करती है।

3. विषुवतरेखीय उष्णार्द्र वन प्रदेश – ये क्षेत्र उच्च तापमान, अत्यधिक वर्षा, विषैली मक्खी एवं मच्छर तथा संक्रामक महामारियों जैसी विषम परिस्थितियों के कारण अल्प जनसंख्या रखने वाले हैं। इस क्षेत्र के अन्तर्गत दक्षिणी अमेरिका के अमेजन तथा अफ्रीका के कांगो-बेसिन के सघन वन क्षेत्र आते हैं। इन क्षेत्रों में भूमध्यरेखीय उष्ण एवं आर्द्र जलवायु के कारण सघन वनस्पति पायी जाती है। यह जलवायु मानव-बसाव के अनुकूल नहीं है; अतः यहाँ जनसंख्या का बसाव बहुत कम है।

4. ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी व पठारी क्षेत्र – उच्च पर्वत तथा पठारी क्षेत्र भी कम बसे हुए भागों के अन्तर्गत आते हैं। ये क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ धरातल, कठोर एवं विषम जलवायु, कृषि-योग्य भूमि की कमी, यातायात के साधनों का अभाव, उद्योग-धन्धों की कमी आदि के कारण जन-शून्य हो गये हैं। विश्व में हिमालय, रॉकी, आल्प्स तथा एण्डीज पर्वतों के भू-भाग कम बसे हुए हैं। एशिया के मध्यवर्ती पर्वतीय तथा पठारी क्षेत्रों को इसी कारण ‘एशिया का मृत हृदय’ कहकर पुकारा जाता है।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 4 Population : Growth, Density, Distribution and Structure

प्रश्न 4
जनसंख्या की विभिन्न विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जनसंख्या के भौगोलिक अध्ययन में निम्नलिखित तथ्य सम्मिलित किये जाते हैं –

  1. संख्या
  2. घनत्व एवं
  3. वृद्धि।

परन्तु केवल इन्हीं तथ्यों को ही जान लेना पर्याप्त नहीं है, वरन् यह जानना भी आवश्यक है कि किसी प्रदेश की जनसंख्या में मनुष्यों का

  1. स्वास्थ्य कैसा है?
  2. उनमें लिंग-अनुपात (स्त्री-पुरुष अनुपात) क्या है?
  3. उनकी आयु-संरचना अर्थात् जनसंख्या का आयु- संघटन क्या है?
  4. विभिन्न व्यवसायों का स्तर कैसा है?
  5. ग्रामीण एवं नगरीयं जनसंख्या को अनुपात क्या है? तथा
  6. शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीकी प्रगति किस अवस्था तक हुई है?

उपर्युक्त सभी तथ्यों के सम्मिलित अध्ययन से किसी देश की जनसंख्या की वास्तविक शक्ति और उन्नति की क्षमता को ठीक-ठीक अनुमान लगाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, शीतोष्ण कटिबन्धीय प्रदेश के किसी देश में उद्योगों तथा वैज्ञानिक संस्थानों में काम करने वाले 1,000 मानव में तथा उष्ण कटिबन्धीय प्रदेश के किसी देश में निवास करने वाले 1,000 मानव में, दोनों की संख्या तो बराबर है, परन्तु उनकी उत्पादन क्षमता में बहुत भारी अन्तर हो सकता है। इसीलिए जनसंख्या की विभिन्न विशेषताओं को जान लेना अति आवश्यक है, जिनका विवरण निम्नलिखित है –

आयु-संरचना (Age-composition) – जनसंख्या की क्षमता और शक्ति के अध्ययन में सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता उसकी आयु-संरचना है। इसके अन्तर्गत यह अध्ययन किया जाता है कि किसी देश की जनसंख्या में विभिन्न आयु के व्यक्तियों की संख्या कितने प्रतिशत है; अर्थात् उसमें बच्चों, जवानों और बूढ़ों की संख्या कितनी है? इसके द्वारा अग्रलिखित तीन बातों का पता चलता है –

  1. किसी राष्ट्र की वास्तविक और भावी श्रम-शक्ति कितनी है?
  2. सैन्य महत्त्व की दृष्टि से सैनिक मानव-शक्ति कितनी है?
  3. भविष्य में कितने मानवों के लिए शिक्षा और सहायता की योजना बनाई जाए। सरकारी कार्यालयों, सुरक्षा मन्त्रालयों, योजना समितियों और रोजगार देने वालों को इस प्रकार की जानकारी आवश्यक होती है।

आयु-संरचना के विचार से जनसंख्या के निम्नलिखित चार बड़े वर्ग होते हैं –

  1. बाल्यावस्था-15 वर्ष से कम,
  2. किशोरावस्था-15 से 20 वर्ष तक,
  3. सामान्य श्रमिक अवस्था—20 से 65 वर्ष तक तथा
  4. उत्तरावस्था अथवा वृद्धावस्था-65 वर्ष से अधिक।

स्टाम्प ने मानव की आयु के केवल तीन खण्ड बताये हैं। उन्होंने बालक और किशोर दोनों अवस्थाओं को एक साथ मिलाकर 0 से 19 वर्ष तक पहला खण्ड,20 से 64 वर्ष तक दूसरा खण्ड और 65 वर्ष से ऊपर तीसरा खण्ड माना है। इस गणना के आधार पर स्टाम्प ने विश्व को आयु-संरचना के दृष्टिकोण से निम्नलिखित चार बड़े वर्गों में बाँटा है –

  1. प्रथम वर्ग में उत्तर-पश्चिमी यूरोपीय देश, ब्रिटेन, बेल्जियम, फ्रांस, डेनमार्क, नीदरलैण्ड आदि देश हैं जिनमें उत्तरावस्था और श्रमिक आयु के मनुष्यों की संख्या बहुत अधिक है तथा बच्चों की संख्या कम है। जापान भी इसी वर्ग में सम्मिलित है।
  2. द्वितीय वर्ग में एशियाई और अफ्रीकी देश आते हैं जिनमें उच्च जन्म-दर और निम्न प्रत्याशित आयु है, जिसके कारण जनसंख्या में बच्चों की संख्या अधिक है और वृद्धि कम।
  3. तीसरे वर्ग में दक्षिणी अमेरिकी देश सम्मिलित हैं जिनकी संख्या में बच्चे अधिक हैं।
  4. चौथे वर्ग में मध्य अक्षांशों में स्थित नये बसे हुए देश संयुक्त राज्य, ऑस्ट्रेलिया आदि हैं। जिनमें पश्चिमी यूरोप के सघन देशों की अपेक्षा छोटी उम्र के बच्चे अधिक हैं और वृद्धों की संख्या कुछ कम है।

जनसंख्या के आयु-संरचना की दृष्टि से पिछले 70 वर्षों में काफी परिवर्तन हुए हैं। अब से 100 वर्ष पूर्व ब्रिटेन में चिकित्सा विज्ञान की उतनी उन्नति नहीं हुई थी। उस समय ब्रिटेन में बच्चों की संख्या अधिक थी तथा वृद्धों की कम। द्वितीय महायुद्ध के पश्चात् ब्रिटेन में प्रत्याशित आयु में वृद्धि हो गयी, तब 35 वर्ष से 40 वर्ष की आयु वाले स्त्री-पुरुषों की संख्या बढ़ गयी थी। सन् 1960 में ब्रिटेन में 20 वर्ष से 64 वर्ष की आयु के व्यक्तियों की संख्या लगभग 60% हो गयी थी। बेल्जियम में श्रमिक आयु के व्यक्ति 61% के लगभग हैं, जबकि भारत में यह जनसंख्या केवल 49% है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में सन् 1850 में 15 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 42% थी जो सन् 1950 में 27% रह गयी, परन्तु सन् 1950 के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्म-दर में कुछ वृद्धि हुई है, जिसके फलस्वरूप 1970 ई० में वहाँ बच्चों की संख्या लगभग 31% थी।
एशियाई देशों में जैसे भारत, चीन, जापान, श्रीलंका आदि; दक्षिणी अमेरिकी तथा अफ्रीकी देशों में कम आयु की जनसंख्या अधिक है। इनमें 35% से 40% जनसंख्या 15 वर्ष से कम आयु की है। इन देशों में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्रों में इतनी प्रगति नहीं हुई है जितनी पश्चिमी यूरोपीय देशों एवं संयुक्त राज्य में हुई है।

लिंगानुपात (Sex Ratio) – जनसंख्या में स्त्री-पुरुष अनुपात से जनसंख्या की शारीरिक शक्ति का अनुमान होता है। भारत में सन् 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति 1,000 पुरुषों के पीछे 940 स्त्रियाँ हैं, जब कि 1981-1991 के दशक में यह संख्या 927 थी, परन्तु राज्यों में यह अन्तर अलग-अलग है। पंजाब में स्त्रियों की संख्या 893, पश्चिमी बंगाल में 947, उत्तर प्रदेश में 908, तमिलनाडु में 995 और केरल में 1,084 है। इस स्थिति की एक व्याख्या यह है कि अधिकांश व्यक्ति लड़का चाहते हैं और लड़की की मन से देखभाल करना पसन्द नहीं करते हैं।

ब्रिटेन में प्रति 1,000 पुरुषों के पीछे लगभग 1,090 स्त्रियाँ हैं। जिन देशों की जनसंख्या विदेशों को प्रवास कर गयी है; जैसे- इटली, नार्वे आदि, उन देशों में स्त्रियों की जनसंख्या अधिक है। इसके विपरीत जिन देशों में विदेशों से जनसंख्या को आवास हुआ है; जैसे-कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि में, वहाँ पुरुषों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इसका प्रमुख कारण यह है कि प्रवास करने वाली जनसंख्या में पुरुषों की संख्या अधिक होती है, जबकि स्त्रियाँ कम होती हैं।

साक्षरता (Literacy) – जनसंख्या में साक्षरता से व्यक्ति के मानसिक स्तर का अनुमान होता है। यूरोप में साक्षरता का प्रतिशत बहुत अधिक है, जबकि एशिया में यह अपेक्षाकृत काफी कम है। भारत में स्त्री और पुरुषों में साक्षरता के प्रतिशत में बहुत अन्तर है। पुरुषों में साक्षरता का स्तर 2011 ई० की जनगणना के आधार पर 82.14% है, जबकि स्त्रियों में यह 65.46% प्रतिशत है। केरल भारत का सबसे अधिक साक्षर प्रदेश है। यहाँ पर 93.91 प्रतिशत जनसंख्या साक्षर है। साक्षरता की सबसे कम दर बिहार में है, जहाँ केवल 63.82 प्रतिशत व्यक्ति ही साक्षर हैं।

सामाजिक एवं आर्थिक विशेषताएँ (Social and Economic Characteristics) – इस प्रकार की विशेषताओं के अन्तर्गत सामाजिक संगठन, शिक्षा का स्तर, व्यावसायिक स्थिति, धार्मिक विश्वास, ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियाँ, आर्थिक उत्पादन आदि का विचार किया जाता है।
यूरोप, संयुक्त राज्य, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड एवं जापान में तकनीकी-वैज्ञानिक शिक्षा का स्तर बहुत ऊँचा है, जबकि एशियाई देशों में यह स्तर नीचा है तथा अफ्रीकी देशों में और भी अधिक कम है। जिन देशों में वैज्ञानिक प्रगति अधिक है उनमें यान्त्रिक कृषि, निर्माण उद्योग एवं व्यापार, परिवहन आदि कार्यों का विकास अधिक हुआ है।

ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या के विचार से विश्व की 75% जनसंख्या ऐसे देशों में रहती है, जहाँ लोग कृषि कार्य करते हुए ग्रामों में निवास करते हैं। सबसे अधिक नगरीय बस्तियाँ इन चार प्रदेशों में विकसित हुई हैं-

  1. उत्तर-पश्चिमी यूरोप,
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका एवं कनाडा,
  3. ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैण्ड तथा
  4. दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप का दक्षिणी भाग।

भारत में 26%, जापान में 60%, संयुक्त राज्य में 82% तथा ब्रिटेन में 92% व्यक्ति नगरीय बस्तियों में निवास करते हैं। वास्तव में नगरीकरण का प्रचार यूरोप की औद्योगिक क्रान्ति से आरम्भ हुआ है। यूरोपीय देशों से प्रवासी बहुत-से नये बसे हुए देशों को गये हैं और वहाँ यूरोपीय सभ्यता के प्रचार-प्रसार द्वारा नगरीय बस्तियों को विकसित किया है। जापान में औद्योगिक क्रान्ति के श्रीगणेश द्वारा नगरीय जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है। टोकियो विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नगर है। इसके बाद साओपालो एवं न्यूयॉर्क नगरों का स्थान आता है। एशियाई एवं अफ्रीकी देशों में अधिकांश जनसंख्या ग्रामों में निवास करती है। भारतवर्ष में सन् 2011 की जनगणना के अनुसार 70% जनसंख्या ग्रामों में निबास कर रही थी।

प्रश्न 5
नगरीकरण क्या है? भारत में नगरीकरण की समस्याओं और उनके समाधान की विवेचना कीजिए। [2007,14,16]
या
नगरीकरण की प्रमुख समस्याओं का विवरण दीजिए तथा उनके समाधान हेतु उपायों को सुझाइए। [2012,13]
या
नगरीकरण क्या है? बढ़ते नगरीकरण के कारणों को बताइए। [2015]
उत्तर

नगरीकरण का अर्थ

नगरीकरण से आशय व्यक्तियों द्वारा नगरीय संस्कृति को स्वीकारना है। नगरीकरण की प्रक्रिया नगर से सम्बन्धित है। नगर सामाजिक विभिन्नताओं का वह समुदाय है जहाँ द्वितीयक एवं तृतीयक समूहों-उद्योग और व्यापार, सघन जनसंख्या और वैयक्तिक सम्बन्धों की प्रधानता हो। नगरीकरण की प्रक्रिया द्वारा गाँव धीरे-धीरे कस्बे, कस्बे से नगर में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में ग्रामीण बस्ती का प्राथमिक भूमि उपयोग; द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में परिवर्तित हो जाता है। श्री बर्गेल ग्रामों के नगरीय क्षेत्र में रूपान्तरित होने की प्रक्रिया को ही नगरीकरण कहते हैं।
विभिन्न विद्वानों ने नगरीकरण को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया है –

  1. ग्रिफिथ टेलर ने ग्रामों से नगरों की ओर जनसंख्या की अभिमुखता” को नगरीकरण की संज्ञा दी है।
  2. जी०टी० ट्विार्थ के अनुसार, “कुल जनसंख्या में नगरीय स्थानों में रहने वाली जनसंख्या के अनुपात को नगरीकरण का स्तर कहा जाता है।”

नगरीकरण के कारण उत्पन्न समस्याएँ एवं उनका समाधान

  1. अपर्याप्त आधारभूत ढाँचा और सेवाएँ
  2. परिवहन की असुविधा
  3. अपराधों में वृद्धि
  4. आवास की कमी
  5. औद्योगीकरण
  6. द्वितीयक समूहों की प्रधानता
  7. वर्गीय व्यवस्था का उदय
  8. अनौपचारिक सामाजिक नियन्त्रण का अभाव
  9. अवैयक्तिक सम्बन्धों की अधिकता
  10. भौतिकवादी विचारधारा का विकास
  11. पारम्परिक सामाजिक मूल्यों की प्रभावहीनता

1. अपर्याप्त आधारभूत ढाँचा और सेवाएँ यद्यपि नगरीकरण की तीव्रता से विकास की गति प्रकट होती है, परन्तु अति तीव्र नगरीकरण से नगरों में नगरीय सेवाओं और सुविधाओं का अभाव हो जाता है। यह सर्वविदित तथ्य है कि दस-लक्षीय महानगरों की 30% से 40% तक जनसंख्या गन्दी बस्तियों (Slums) में निवास करती रही है। नगरों में ऐसी आवासविहीन जनसंख्या बहुत अधिक है जिसका जीवन-स्तर बहुत ही निम्न होता है।

एक अनुमान के अनुसार नगरीय केन्द्रों में केवल 35% घरों में विद्युत की सुविधा है, 33% घरों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध है और 68% घरों में शौच की सुविधा उपलब्ध है। अत: नगरीय जनसंख्या में वृद्धि के आधार पर नगरीय प्रशासन के आधारभूत ढाँचे और सेवाओं में विस्तार करना चाहिए। इसके लिए वित्तीय साधनों की पूर्ति नगरीय सेवाओं के बदले लगाए गए करों और केन्द्र सरकार द्वारा अनुदानों के द्वारा की जा सकती है।

2. परिवहन की असुविधा नगरों में जनसंख्या की भीड़ बढ़ने से परिवहन की समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं, परिवहन के साधन कम पड़ने लगे हैं तथा परिवहन मार्ग संकुचित हो गए हैं जिससे दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है।

3. अपराधों में वृद्धि आज नगरों में अपराधों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। चोरी, डकैती, हत्या, जुआखोरी, शराबखोरी, बलात्कार, धोखाधड़ी आदि का कारण तेजी से बढ़ती हुई नगरीय जनसंख्या ही है।

4. आवास की कमी जितनी तेजी से नगरों की जनसंख्या बढ़ रही है, उतनी तेजी से आवासों का निर्माण नहीं हो पा रहा है; अतः नगरों में आवासों की भारी कमी हो गई है।
नगरों में बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण परिवहन एवं आवास की समस्याएँ जटिल रूप धारण करती जा रही हैं। इसी के कारण नगरों में अपराधों की संख्या में भी वृद्धि होती है। अतः नगरों में परिवहन एवं आवास समस्याओं को दूर करने के लिए नगर मास्टर प्लान बनाया जाना चाहिए, साथ ही भूमि उपयोग नियोजन और भूमि क्रय-विक्रय नीति बनाई जानी चाहिए। अपराधों को रोकने के लिए सुरक्षा और जनशिक्षा का प्रसार महत्त्वपूर्ण उपाय होगा।

5. औद्योगीकरण नमरों का विकास हो जाने के कारण औद्योगीकरण की प्रक्रिया में तीव्रती आई है। प्राचीन उद्योग-धन्धे समाप्त हो गए हैं। नवीन उद्योग-धन्धों के विकास के कारण भारत में सामाजिक संगठन में परिवर्तन हुए हैं। पूँजीपति एवं श्रमिक वर्ग के बीच संघर्ष बढ़ गए हैं। स्त्रियों की आत्मनिर्भरता में वृद्धि हुई है। व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करने लगे हैं। कारखानों की स्थापना से गन्दी बस्तियों की समस्याओं एवं हड़तालों आदि के कारण जीवन में अनिश्चितता आ गई है।

6. द्वितीयक समूहों की प्रधानता नगरीकरण के कारण भारत में परिवार, पड़ोस आदि जैसे प्राथमिक समूह प्रभावहीन होते जा रहे हैं। वहाँ पर समितियों, संस्थाओं एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के द्वारा
ही सामाजिक सम्बन्धों की स्थापना की जा सकती है। इस प्रकार के सम्बन्धों में अवैयक्तिकता की भावना पायी जाती है।

7. वर्गीय व्यवस्था का उदय नगरीकरण के प्रभाव से समाज में वर्गों का संगठन विभिन्न आधारों पर हो रहा है। एक वर्ग के व्यक्ति केवल अपने ही वर्ग के सदस्यों के साथ सम्बन्धों की स्थापना करते हैं। और उन्हीं का हित चाहते हैं। ये वर्ग प्रायः व्यवसायों के आधार पर बन गए हैं। इसीलिए आज अध्यापक वर्ग, श्रमिक वर्ग, लिपिक वर्ग, कर्मचारी वर्ग, अधिकारी वर्ग आदि के नाम सुने जाते हैं। इन वर्गों ने समाज को विभिन्न टुकड़ों में विभाजित कर दिया है।

वर्गीय व्यवस्था में परस्पर सामाजिक एकता की भावना के विकास हेतु सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। गन्दी बस्तियों की समस्याओं हेतु नगरों से पर्याप्त दूरी पर निर्बल वर्गीय आवासों का प्रबन्धन सरकारी स्तर पर किया जाना उपयुक्त होगा। इससे वर्गीय असन्तोष एवं समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

8. अनौपचारिक सामाजिक नियन्त्रण का अभाव नगरीकरण के कारण व्यक्तिवादी भावना का जन्म हुआ है। इस भावना के परिणामस्वरूप प्राचीन सामाजिक रीति-रिवाज प्रभावहीन हो गए हैं। प्राचीन समय में लोग समाज के नीति-रिवाज, पारिवारिक प्रथाओं तथा परम्पराओं के अनुसार काम करते थे, परन्तु नगरीकरण द्वारा उत्पन्न वैयक्तिक भावना के कारण सामाजिक नियन्त्रण के अनौपचारिक साधन (जैसे–परिवार, प्रथाएँ, परम्पराएँ, रूढ़ियाँ, धर्म इत्यादि) प्रभावहीन हो गए हैं; अतः इन साधनों को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।

9. अवैयक्तिक सम्बन्धों की अधिकता नगरीकरण के कारण नगरों में जनसंख्या की तीव्र वृद्धि हुई है। जनसंख्या की इस वृद्धि के कारण लोगों में व्यक्तिगत सम्बन्धों में कमी आ गई है। इसी आधार पर आर० एन० मोरिस ने लिखा है-“जैसे-जैसे नगर विस्तृत होते जाते हैं, वैसे-वैसे इस बात की सम्भावना भी कम हो जाती है कि दो व्यक्ति एक-दूसरे को जानेंगे। नगरों में सामाजिक सम्पर्क अवैयक्तिक, क्षणिक, अनावश्यक तथा खण्डात्मक होता है। अत: नगरों में जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने हेतु विकास पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए।

10. भौतिकवादी विचारधारा का विकास नगरीकरण का विकास नागरिकों के दृष्टिकोण में भारी परिवर्तन लाया है। अभी तक भारत में अध्यात्मवाद की भावना पर बल दिया जाता था, परन्तु नगरों का विकास हो जाने से लोगों में भौतिकवाद की भावना का जन्म हुआ है। इस भौतिकवाद के कारण व्यक्ति का दृष्टिकोण उपयोगितावादी बन गया है। वह प्रत्येक वस्तु अथवा विचारधारा को उसी समय ग्रहण करता है जबकि वह उसके लिए भौतिक दृष्टि से उपयोगी हो या उसकी आर्थिक स्थिति में वृद्धि करती हो। इस भौतिकवादी दृष्टिकोण के कारण भारत में वैयक्तिक सम्बन्धों का अभाव पाया जाता है।

11. पारम्परिक सामाजिक मूल्यों की प्रभावहीनता नगरीकरण के कारण व्यक्तिवादी विचारधारा का विकास हुआ है। इस विचारधारा के कारण प्राचीन सामाजिक मूल्यों का ह्रास होने लगा है। प्राचीन समय में बड़े-बुजुर्गों का आदर, तीर्थ-स्थानों की पवित्रता, धर्म के प्रति आस्था, ब्राह्मण, गाय व गंगा नदी के प्रति श्रद्धा की मान्यता थी, परिवार की सामाजिक स्थिति का ध्यान रखा जाता था। परन्तु नगरीकरण का विकास हो जाने से प्राचीन सामाजिक मूल्य प्रभावहीन हो गए हैं। उनका स्थान भौतिकवाद तथा व्यक्तिवाद ने ले लिया है। अत: लोगों में नैतिक शिक्षा और मूल्यों के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

नगरीकरण से उत्पन्न उपर्युक्त समस्याओं और उनके समाधान की विवेचना से स्पष्ट है कि जब तक नगर और ग्राम दोनों के विकास पर समान स्तर पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक इनमें उत्पन्न समस्याओं का समाधान कठिन है। वर्तमान समय में ग्रामों में विकास के प्रति उदासीनता के कारण ग्रामीण जनसंख्या नगरों की ओर पलायन कर रही है जिससे नगरों में जनसंख्या दबाव के कारण और ग्रामों से जनसंख्या प्रवास के कारण सामाजिक व आर्थिक अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इसलिए नगरीय समस्याओं को रोकने के लिए ग्रामों का विकास सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण समाधान है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में जनसंख्या के असमान वितरण के लिए उत्तरदायी दो कारकों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर
ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप सबसे विरल आबाद महाद्वीप है, जहाँ जनसंख्या का औसत घनत्व 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से भी कम है। किन्तु इस महाद्वीप पर जनसंख्या का वितरण बहुत विषम है। दक्षिण-पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी समुद्रतटीय भागों में जनसंख्या का घनत्व 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, जब कि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मरुस्थलीय भागों में औसत जनघनत्व 1 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से भी कम है। इस विषम वितरण के अग्रलिखित कारण हैं –

  1. महाद्वीप के विशाल क्षेत्र पर मरुस्थल का विस्तार है, जहाँ कठोर जलवायु के कारण आबादी का घनत्व बहुत कम है।
  2. पूर्वी तथा दक्षिणी समुद्रतटीय भागों में पर्याप्त वर्षा, नदियों द्वारा जल की उपलब्धता, निचली पहाड़ियों के कारण मनोरम जलवायु, यातायात आदि सुविधाएँ प्राप्त होने के कारण घनी आबादी मिलती है।

प्रश्न 2
विश्व में अधिक जनसंख्या घनत्व वाले तीन क्षेत्रों का सकारण विवरण दीजिए। [2010]
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 के अन्तर्गत (क) सघन बसे हुए क्षेत्र शीर्षक देखें।

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प्रश्न 3
नगरीकरण वृद्धि के दो प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए। (2008, 15)
उत्तर
नगरीकरण वृद्धि के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  1. ग्रामीण जनसंख्या का प्रवास वर्तमान समय में ग्रामीण जनसंख्या नगरों की ओर तेजी से प्रवास कर रही है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन के लिए पर्याप्त आवश्यक सुविधाओं का अभाव है।
  2. असन्तुलित विकास ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास के असन्तुलन के कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग जीवनयापन के लिए रोजगार और अन्य आधारभूत सेवाओं के लिए नगरों में चले जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लिए उपलब्ध कृषि विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुटीर और लघु उद्योगों का भी ग्रामों में विकास नहीं किया गया है। इसलिए इस असन्तुलित
    आर्थिक विकास के कारण नगरीकरण में वृद्धि होती रहती है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
जनसंख्या घनत्व से क्या तात्पर्य है? [2009, 10]
उत्तर
जनसंख्या के घनत्व का आशय किसी क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या की सघनता से है। जनसंख्या के घनत्व को प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या के रूप में मापा जाता है।

प्रश्न 2
पृथ्वीतल पर सभी आर्थिक व्यवसाय किसके द्वारा सम्पन्न होते हैं?
उत्तर
पृथ्वीतल पर सभी आर्थिक व्यवसाय मानव द्वारा सम्पन्न होते हैं।

प्रश्न 3
भूमध्यसागरीय भागों में मानव-बस्तियों के विकास के क्या कारण हैं?
उत्तर
भूमध्यसागरीय भागों में उसके चारों ओर मानव-बस्तियों के विकास के कारण हैं- मछलियों की प्राप्ति, सम जलवायु, समतल मैदानी भूमि जिसमें कृषि, परिवहन एवं मानव के आवासों का तीव्र गति से विकास हुआ है।

प्रश्न 4
वर्ष 2011 के अनुसार पृथ्वीतल पर कितनी जनसंख्या है?
उत्तर
वर्ष 2011 के अनुसार पृथ्वीतल पर 6.90 अरब जनसंख्या है।

प्रश्न 5
पृथ्वी पर जनसंख्या वितरण की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर
पृथ्वी पर जनसंख्या क्तिरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भूतल पर मनुष्यों का निवास असमान है।

प्रश्न 6
लिंगानुपात से क्या तात्पर्य है? [2009, 12, 15]
या
लिंग-अनुपात की व्याख्या कीजिए। [2013, 14]
उत्तर
लिंगानुपात या स्त्री-पुरुष अनुपात से अभिप्राय प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या से है।

प्रश्न 7
विश्व में जनसंख्या के किन चार समूहों का संकेन्द्रण हुआ है?
उत्तर
विश्व में जनसंख्या के जिनं चार समूहों का संकेन्द्रण हुआ है, वे हैं-

  1. चीन वं जापान
  2. भारत एवं बांग्लादेश
  3. यूरोपीय देश एवं
  4. पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 8
भारत में 2011 ई० की जनगणना के आधार पर जनसंख्या घनत्व क्या था?
उत्तर
2011 ई० की जनगणना के आधार पर भारत में जनसंख्या का घनत्व 382 प्रति वर्ग किमी था।

प्रश्न 9
दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में जनसंख्या का घनत्व क्यों कम है?
उत्तर
असमतल धरातल, विषम जलवायु, सघन वन, शुष्क मरुस्थल तथा अनुपजाऊ भूमि के कारण, दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में जनसंख्या घनत्व कम (16 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) है।

प्रश्न 10
अफ्रीका महाद्वीप के वे प्रमुख क्षेत्र बताइए जहाँ जनसंख्या का घनत्व मात्र 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।
उत्तर
अफ्रीका महाद्वीप के वे क्षेत्र जहाँ जनसंख्या का घनत्व मात्र 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, इस प्रकार हैं-सहारा का मरुस्थल, कालाहारी मरुस्थल तथा अबीसीनिया का पठार।

प्रश्न 11
किस जनसमूह को ‘कृषि सभ्यता या ‘चावल सभ्यता के नाम से पुकारा जाता है?
उत्तर
पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया के मानव समूह को ‘कृषि सभ्यता’ या ‘चावल सभ्यता’ के नाम से पुकारा जाता है, क्योंकि यहाँ का मुख्य धन्धा कृषि एवं प्रमुख फसल चावल है।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 4 Population : Growth, Density, Distribution and Structure

प्रश्न 12
विश्व के किस महाद्वीप में सबसे कम जनसंख्या निवास करती है?
उत्तर
ऑस्ट्रेलिया विश्व में सबसे कम जनसंख्या रखने वाला महाद्वीप है। यहाँ विश्व की केवल 0.7% जनसंख्या निवास करती है तथा यहाँ जनसंख्या का घनत्व भी 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

प्रश्न 13
उत्तर-पश्चिमी यूरोप को जनसंख्या की धुरी की संज्ञा क्यों दी जाती है?
उत्तर
यूरोप के उत्तर-पश्चिमी देश बहुत सघन बसे हुए हैं, इसी कारण इस क्षेत्र को जनसंख्या की धुरी की संज्ञा दी जाती है।

प्रश्न 14
एशिया का ‘मृत हृदय से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
एशिया के मध्यवर्ती पर्वतीय तथा पठारी क्षेत्र लगभग जन-शून्य हैं। इन क्षेत्रों को एशिया का ‘मृत हृदय’ कहा जाता है।

प्रश्न 15
जनसंख्या के कृषि घनत्व से आप क्या समझते हैं? [2007, 12, 15]
उत्तर
कृषि के अन्तर्गत क्षेत्रफल एवं कृषक जनता के अनुपात को कृषि घनत्व कहते हैं।

प्रश्न 16
अंकगणितीय घनत्व से आप क्या समझते हैं? या जनसंख्या के गणितीय घनत्व की व्याख्या कीजिए। [2010]
उत्तर
किसी प्रदेश के क्षेत्रफल तथा वहाँ निवास करने वाली जनसंख्या का अनुपात गणितीय घनत्व कहलाता है। जनसंख्या में क्षेत्रफल से भाग देने पर प्रति वर्ग किलोमीटर घनत्व प्राप्त हो जाता है।
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प्रश्न 17
विश्व के किन्हीं दो जन संकुल क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए। [2011]
उत्तर

  1. चीन व जापान तथा
  2. भारत एवं बांग्लादेश।

प्रश्न 18
जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना की विवेचना कीजिए। [2009]
उत्तर
कुल जनसंख्या में कार्यशील जनसंख्या जो विभिन्न प्रकार के व्यवसायों में संलग्न है; व्यावसायिक जनसंख्या की संरचना करती है। इस जनसंख्या को उच्च मानव संसाधन माना जाता है। देश के आर्थिक विकास एवं सामाजिक और परिवार के विकास में इसका महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1
विश्व के तटीय भागों तथा सीमा-पेटियों में निवास करने वाली जनसंख्या है –
(क) 28 प्रतिशत
(ख) 75 प्रतिशत
(ग) 57 प्रतिशत
(घ) 70 प्रतिशत
उत्तर
(ख) 75 प्रतिशत।

प्रश्न 2
निम्नलिखित में से कौन-सा देश निम्नजन्मदर एवं निम्न मृत्युदर से सम्बन्धित है?
(क) डेनमार्क
(ख) बेल्जियम
(ग) ब्रिटेन
(घ) इटली
उत्तर
(क) डेनमार्क।

प्रश्न 3
निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में जनसंख्या सर्वाधिक पाई जाती है?
(क) पूर्वी एशिया
(ख) दक्षिणी-पूर्वी एशिया
(ग) पश्चिमी यूरोप व उत्तरी पूर्वी
(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर
(ख) दक्षिणी-पूर्वी एशिया।

प्रश्न 4.
वह महाद्वीप जिसका क्षेत्रफल विश्व का 16% है और जनसंख्या निवास केवल 8% है, वह है –
(क) एशिया महाद्वीप
(ख) अफ्रीका महाद्वीप
(ग) उत्तरी अमेरिका महाद्वीप
(घ) दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप
उत्तर
(ग) उत्तरी अमेरिका महाद्वीप।

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प्रश्न 5
विकासशील देशों में जनाधिक्य होने का मुख्य कारण है –
(क) उच्च मृत्यु-दर
(ख) निम्न मृत्यु-दर
(ग) उच्च जन्म-दर
(घ) जन्म-दर की अपेक्षा कम मृत्यु-दर
उत्तर
(घ) जन्म-दर की अपेक्षा कम मृत्यु-दर।

प्रश्न 6
निम्नांकित में किसमें जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक पाया जाता है?
(क) भूमध्यरेखीय प्रदेश
(ख) उष्ण मानसूनी प्रदेश
(ग) चीन तुल्य प्रदेश
(घ) स्टेपी तुल्य प्रदेश
उत्तर
(ग) चीन तुल्य प्रदेश।

प्रश्न 7
निम्नांकित में किस राज्य में लिंग-अनुपात न्यूनतम है? [2007]
(क) छत्तीसगढ़
(ख) ओडिशा
(ग) हरियाणा
(घ) गुजरात
उत्तर
(ग) हरियाणा।

प्रश्न 8
निम्नलिखित देशों में से किस देश की जनसंख्या सर्वाधिक है ? [2010, 11, 12]
(क) भारत
(ख) चीन
(ग) रूस
(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर
(ख) चीन।

प्रश्न 9
जैनसंख्यों के अधिक घनत्व के सम्बन्ध में निम्नलिखित में कौन सही है ? [2009]
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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Natural Vegetation

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Natural Vegetation (प्राकृतिक वनस्पति) are part of UP Board Solutions for Class 12 Geography. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Natural Vegetation (प्राकृतिक वनस्पति).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Geography
Chapter Chapter 1
Chapter Name Natural Vegetation (प्राकृतिक वनस्पति)
Number of Questions Solved 28
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Natural Vegetation (प्राकृतिक वनस्पति)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
प्राकृतिक वनस्पति से आप क्या समझते हैं? उसके प्रकारों पर प्रकाश डालिए।
या
संसार में कोणधारी वनों का वितरण बताइए तथा उनकी आर्थिक उपयोगिता का वर्णन कीजिए। [2007]
या
विश्व के प्रमुख वन प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर

प्राकृतिक वनस्पति Natural Vegetation

विश्व के प्रत्येक भाग में किसी-न-किसी प्रकार की वनस्पति अवश्य ही पायी जाती है, चाहे वह झाड़ियों या घास के रूप में हो अथवा सघन वनों के रूप में हो। ये सभी प्राकृतिक रूप से उगते हैं। वास्तव में यह प्रकृति द्वारा मानव को दिये गये अमूल्य उपहार हैं। भूतल पर पेड़-पौधे आदिकाल से ही उगते आ रहे हैं; अतः तभी से मानव का सम्बन्ध उनसे स्थापित हुआ है। मानव प्राचीन काल से ही इनका शोषण करतो आयो है।
प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार – सामान्यतया धरातल पर तीन प्रकार की प्राकृतिक वनस्पतियाँ पायी जाती हैं-

  1. वन,
  2. घास के मैदान तथा
  3. झाड़ियाँ।

उपर्युक्त तीनों में से वन सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं। विश्व के कुल क्षेत्रफल के 25,620 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर वनों का विस्तार है जिनमें से 59% पहुँच योग्य हैं, जिन्हें काटकर लकड़ियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। शेष वन मानव की पहुँच से बाहर हैं। ये वन रूस के भीतरी भागों, कनाडा, अलास्का, एशिया तथा दक्षिणी अमेरिका के अनेक भागों में विस्तृत हैं।

विश्व में वनों के प्रकार
Types of Forests in World

वनों को उनमें पाये जाने वाले वृक्षों एवं उनकी जातियों के आधार पर निम्नलिखित पाँच प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है –
(1) उष्ण कटिबन्धीय चौड़ी पत्ती वाले सदापर्णी वन (Tropical Evergreen Forests) – इन वनों का विस्तार विषुवत् रेखा के दोनों ओर 5°उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के मध्य है। उष्ण कटिबन्धीय भागों में अत्यधिक वर्षा एवं भीषण गर्मी पड़ने के कारण सघन वन आसानी से उग आते हैं। इन प्रदेशों में शीत एवं ग्रीष्म काल का तापान्तर बहुत ही कम होता है, जिससे वृक्षों में पतझड़ का कोई निश्चित समय नहीं होता।

इसी कारण वृक्षों में हर समय नयी पत्तियाँ निकलती रहती हैं जिससे इन्हें सदाबहार वन कहा जाता है। इनकी औसत ऊँचाई 60 से 100 मीटर तक होती है। इनके नीचे लताओं एवं झाड़ियों के फैले रहने के कारण सदैव अन्धकार छाया रहता है तथा सूर्य का प्रकाश भी धरातल तक नहीं पहुंच पाता जिससे यहाँ दलदल मिलती है। इन वनों की लकड़ी बड़ी कठोर होती है; अतः इन्हें काटने में भी बड़ी असुविधा रहती है। इन वनों के वृक्षों में आबनूस, महोगनी, बाँस, रोजवुड, लॉगवुड, रबड़, नारियल, केला, ग्रीन हार्ट, सागौन, सिनकोना, बेंत आदि मुख्य हैं।

वितरण – धरातल पर इन वनों का विस्तार 145 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर है। इनमें से 54.5% दक्षिणी अमेरिका में, 20% अफ्रीका में, 18% एशिया में, 7.5% ऑस्ट्रेलिया में तथा अन्य देशों में पाये जाते हैं। ये वन विशेषतः अमेजन बेसिन, अफ्रीका के पश्चिमी भागों तथा दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों में मिलते हैं, जहाँ वर्ष भर तापमान काफी ऊँचे तथा वर्षा का औसत 200 सेमी से अधिक रहता है।

(2) उष्ण कटिबन्धीय चौड़ी पत्ती के पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests) – विश्व के जिन भागों में 100 से 200 सेमी वार्षिक वर्षा का औसत रहता है, वहाँ सदाबहार वनों के स्थान पर मानसूनी वनों की अधिकता पायी जाती है। इन वनों से बहुमूल्य लकड़ी प्राप्त होती है जो फर्नीचर एवं इमारती कार्यों में प्रयुक्त की जाती है। इन वनों के प्रसिद्ध वृक्ष सागवान, बॉस, साल, ताड़, चन्दन, शीशम, आम, जामुन, नारियल आदि हैं।

वितरण – इन प्रदेशों में इस प्रकार के वन भारत, उत्तरी म्यांमार, थाईलैण्ड, लाओस, उत्तरी वियतनाम, मध्य अमेरिकी देशों, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका, मलेशिया आदि देशों में मिलते हैं। इन वनों के वृक्ष की पत्तियाँ ग्रीष्म ऋतु के आरम्भ में गिर जाती हैं। केवल ग्रीष्म ऋतु में ही वर्षा होने के कारण विताने वाले वृक्ष उत्पन्न होते हैं जो वर्षा एवं शीत ऋतु में तो हरे रहते हैं, परन्तु ग्रीष्मकाल के प्रारम्भ में भीतरी जल का विनाश रोकने के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।

(3) शीतोष्ण कटिबन्धीय चौड़ी पत्ती वाले शुष्क सदापर्णी वन (Temperate Deciduous Dry Forests) – ये वनं उत्तरी गोलार्द्ध में 30° से 45° अक्षांशों के मध्य महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में 40°अक्षांश से सुदूर दक्षिण तक पाये जाते हैं। इस प्रदेश की वनस्पति को मुख्य रूप से दो कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है- शीत ऋतु में ठण्ड तथा ग्रीष्म ऋतु में जल का अभाव। इसी कारण केवल वसन्त ऋतु में ही यहाँ की वनस्पति भली-भाँति वृद्धि कर सकती है। ऐसा भूमध्यसागरीय जलवायु वाले प्रदेशों में होता है।

इन प्रदेशों में सदैव हरे-भरे रहने वाले वृक्ष मिलते हैं जो कम वर्षा तथा अनुपजाऊ मिट्टी के कारण कँटीली झाड़ियों में बदल गये हैं। यहाँ वृक्षों के हरे-भरे रहने का कारण शीतकाल की नमी का होना है जिससे इनकी पत्तियाँ झड़ नहीं पातीं। ग्रीष्म ऋतु की गर्मी से बचने के लिए इन वृक्षों में कुछ विशेषताएँ होती हैं। इन वृक्षों की जड़े लम्बी, मोटी, तने मोटे और खुरदरी छाल वाले होते हैं जिनमें काफी जल भरा रहता है। इनकी पत्तियाँ मोटी, चिकनी तथा लसदार होती हैं जिससे इनका जल वाष्प बनकर नहीं उड़ने पाता। इन वनों के मुख्य वृक्षों में ओक, जैतून, अंजीर, पाइन, फर, साइप्रस, कॉरीगम, यूकेलिप्टस, चेस्टनट, लारेल, शहतूत, वालनट आदि हैं। यहाँ पर रस वाले फलदार वृक्षों में नींबू, नारंगी, अंगूर, अनार, नाशपाती, शहतूत आदि मुख्य हैं।

वितरण – पृथ्वी पर इस प्रकार के वनों का विस्तार 47 केरोड़ हेक्टेयर भूमि पर है, जिसमें से 47.5%एशिया महाद्वीप में, 14.1% उत्तरी अमेरिका में, 16.2% यूरोप में, 9.6% दक्षिणी अमेरिका में, 9.4% अफ्रीका में तथा 1.2% ऑस्ट्रेलिया में पाये जाते हैं। इन वनों का विस्तार चीन, जापान, कोरिया, मंचूरिया, पश्चिमोत्तर यूरोप, पश्चिमी कनाडा, पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के सेण्ट लॉरेंस प्रदेश में विशेष रूप से है।

(4) शीतोष्ण कटिबन्धीय चौड़ी पत्ती वाले पर्णपाती वन (Temperate Deciduous Forests) – भूतल पर सामान्यतया ये वन शीत-प्रधान, सम-शीतोष्ण या पश्चिमी यूरोप तुल्य जलवायु वाले प्रदेशों में उगते हैं। उत्तरी गोलार्द्ध में इनका विस्तार भीतरी महाद्वीपीय शुष्क भागों के पूर्व में 40°से 60° अक्षांश तथा दक्षिणी गोलार्द्ध के पूर्वी तटीय भागों में 35° अक्षांश से तथा पश्चिमी तटीय भागों में 40° अक्षांशों से सुदूर दक्षिण तक है।

ग्रीष्म ऋतु में साधारण गर्मी, शीत ऋतु में कठोर सर्दी तथा वर्ष भर अच्छी वर्षा के कारण कठोर लकड़ी वाले वृक्ष उगते हैं। इनकी पत्तियाँ कड़ी ठण्ड से बचने के लिए शीत ऋतु में झड़ जाती हैं। इनके मुख्य वृक्ष ओक, मैपिल, बीच, एल्म, हैमलॉक, अखरोट, चेस्टनट, पॉपलर, एश, चेरी, हिकोरी, बर्च आदि हैं। ये वृक्ष इमारती लकड़ियों के भण्डार माने जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में इन वनों को काटकर अबे कृषि की जाने लगी है।

वितरण – पृथ्वी पर इस प्रकार के वनों का विस्तार 47 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर है, जिसमें से 47.5% एशिया महाद्वीप में, 14 1% उत्तरी अमेरिका में, 16.2% यूरोप में, 9.6% दक्षिणी अमेरिका में, 9.4% अफ्रीका में तथा 12% ऑस्ट्रेलिया में पाये जाते हैं। इन वनों का विस्तार चीन, जापान, कोरिया, मंचूरिया, पश्चिमोत्तर यूरोप, पश्चिमी कनांडा, पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के सेण्ट लॉरेंस प्रदेश में विशेष रूप से है।

(5) शीत कटिबन्धीय शंकुल सदापर्णी वन या टैगा वन (Temperate Coniferous Forests or Taiga Forests) – इन्हें टैगा या बोरियल वनों के नाम से जाना जाता है। एशिया महाद्वीप में इनकी दक्षिणी सीमा 55° उत्तरी अक्षांश है, जब कि उत्तरी पश्चिमी यूरोप में 60° उत्तरी अक्षांश तक है। उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के पूर्व में इन वनों की दक्षिणी सीमा 45° उत्तरी अक्षांश तक है, जब कि दक्षिणी गोलार्द्ध में ये वन अधिक नहीं मिलते हैं।
उत्तरी गोलार्द्ध में इन वनों का विस्तार शीतोष्ण कटिबन्ध के उत्तरी भागों में है। ग्रीष्म ऋतु में 10° सेग्रे तापमान तथा जल का अभाव वृक्षों की पत्तियों को नुकीली बना देता है जिससे पत्तियों के द्वारा वायु के साथ अधिक जल वाष्प बनकर नहीं उड़ पाता।

उपयोगिता – इन वनों में झाड़-झंखाड़ नहीं मिलते हैं। अत: इनका शोषण सरलता से किया जा सकता है। ये कोमल एवं उपयोगी होते हैं।
वितरण – इन वनों का विस्तार लगभग 106 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र पर है। इसमें से 30.5% उत्तरी अमेरिका में, 40% एशिया में, 215% यूरोप में, 5% दक्षिणी अमेरिका में तथा 3% अफ्रीका में हैं। ये वन मुख्यत: उत्तरी अमेरिका तथा यूरेशिया के उत्तरी भागों में पाये जाते हैं। पूर्व सोवियत संघ में साइबेरिया के वनों को टैगा कहते हैं, जो बहुत बड़े क्षेत्र पर विस्तृत हैं।
इन वनों में चीड़, स्पूस, हेमलॉक, फर, लार्च, सीडर, साइप्रस आदि उपयोगी वृक्ष उगते हैं, जो वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं। ये हिम्न, पाला एवं कठोर शीत को सहने में सक्षम होते हैं। हिमावरण के कारण इने वनों का पूर्ण शोषण नहीं हो पाया है।

कोणधारी वनों की आर्थिक उपयोगिता – कोणधारी वन आर्थिक दृष्टि से बहुत उपयोगी होते हैं। हिमावरण एवं कठोर शीत में उगने के पश्चात् भी प्रकृति ने इन वनों को आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण बनाया है। कोणधारी वनों का आर्थिक महत्त्व निम्नवत् है –

  1. उपयोगी मुलायम लकड़ी की प्राप्ति – कोणधारी वनों से उपयोगी तथा मुलायम लकड़ी प्राप्त होती है। इस लकड़ी से कागज की लुग्दी, पेटियाँ तथा अन्य फर्नीचर बनाये जाते हैं। दियासलाई बनाने का उद्योग भी इन्हीं वनों पर निर्भर है। उपयोगी लकड़ी की दृष्टि से ये वन प्राकृतिक वरदान हैं।
  2. उपयोगी पशुओं की उपलब्धि – इन वनों में लम्बे बाल और कोमल खाल वाले समूरधारी पशु पाये जाते हैं। ये समूरधारी पशु उपयोगी खाल प्रदान करते हैं। इस खाल से मानवोपयोगी वस्त्र तथा मूल्यवान वस्तुएँ बनायी जाती हैं।
  3. मांस की प्राप्ति – कोणधारी वनों में रहने वाले पशु, आखेटकों को स्वादिष्ट मांस उपलब्ध कराते हैं। मांस यहाँ के निवासियों के जीवन का आधार है। ये लोग इन पशुओं को मारकर उनका मांस बर्फ में दबा देते हैं तथा समय-समय पर इसे निकालकर अपनी उदर-पूर्ति करते रहते हैं।
  4. उद्योग-धन्धों का आधार – इने वनों से अनेक उद्योग-धन्धों को कच्चे माल प्राप्त होते हैं। ये वन कागज उद्योग, फर्नीचर तथा दियासलाई उद्योग को पर्याप्त मात्रा में लकड़ी प्रदान करते हैं, जब कि खाल के वस्त्र बनाने वाले उद्योग के लिए ये समूर वाली खाले प्रदान करते हैं। इस प्रकार कोणधारी वन अनेक उद्योगों को कच्चा माल जुटाकर उन्हें सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं।

वनों का आर्थिक महत्त्व
Economic importance of Forests

वन प्रकृति प्रदत्त निःशुल्क उपहारों में सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। मानव का नाता वृक्षों से चिर-प्राचीन है। पं० जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में, “उगता हुआ वृक्ष, प्रगतिशील राष्ट्र का प्रतीक होता है।” वृक्षों की उपयोगिता को के० एम० मुंशी ने निम्नलिखित शब्दों में व्यक्त किया है, ”वृक्षों का अर्थ है-जल, जल का अर्थ है-रोटी और रोटी ही जीवन है।” मत्स्यपुराण में वृक्षों का महत्त्व इस प्रकार व्यक्त किया गया है, “एक पौधा रोपना दस गुणवान पुत्र उत्पन्न करने के समान है।”
वास्तव में वन किसी भी राष्ट्र की अमूल्य निधि होते हैं, जो मानव की तीनों प्राथमिक आवश्यकताओं-भोजन, वस्त्र एवं आवास की आपूर्ति करते हैं। वन राष्ट्र की समृद्धि की नींव हैं।

इनसे प्रति व्यक्ति आय एवं राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। वन राष्ट्रीय सौन्दर्य में भी वृद्धि करते हैं। वर्तमान पर्यावरण-प्रदूषण की समस्या का हल वनों द्वारा ही सम्भव है। वनों से ढकी भूमि तथा प्राकृतिक वनस्पति युक्त पर्वतीय ढाल बड़े ही रमणीक तथा सुरम्य प्रतीत होते हैं। वनों के आर्थिक महत्त्व को निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है –
(1) वनों के प्रत्यक्ष लाभ – इसके अन्तर्गत वनों के वे लाभ सम्मिलित हैं जिनका अनुभव हमें प्रत्यक्ष रूप से होता है। इसके अन्तर्गत वनों के आर्थिक लाभों को सम्मिलित किया जाता है, जो निम्नलिखित हैं –

  1. बहुमूल्ये लकड़ी की प्राप्ति –
    • फर्नीचर बनाने के लिए,
    • ईंधन के लिए,
    • व्यावसायिक उपभोग के लिए; जैसे-कागज, दियासलाई तथा पेटियाँ बनाने के लिए,
  2. विभिन्न उद्योग-धन्धों के लिए कच्चे मालों की प्राप्ति,
  3. पशुपालन एवं पशुचारण के लिए उत्तम चरागाह,
  4. फल-फूलों की प्राप्ति,
  5. वन्य पशुओं की प्राप्ति तथा उनका आखेट,
  6. जड़ी-बूटियों एवं ओषधियों की प्राप्ति,
  7. भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि,
  8. राष्ट्रीय आय में वृद्धि,
  9. वनों से प्राप्त निर्यातक वस्तुओं द्वारा विदेशी मुद्रा का अर्जन।

(2) वनों के अप्रत्यक्ष लाभ – वनों से हमें निम्नलिखित अप्रत्यक्ष लाभ भी होते हैं –

  1. वर्षा कराने में सहायक,
  2. बाढ़ों की रोकथाम में सहायक,
  3. मरुस्थल के प्रसार पर रोक,
  4. मिट्टी का अपक्षय एवं अपरदन रोकने में सहायक,
  5. भूमिगत-जल का स्तर ऊँचा बनाये रखने में सहायक,
  6. वायुमण्डल को प्रदूषण मुक्त करने में सहायक,
  7. प्राकृतिक सौन्दर्य का भण्डार,
  8. कृषि-कार्यों में सहायक,
  9. वन्य पशु-पक्षियों को आश्रय स्थल,
  10. वायुमण्डल की आर्द्रता में वृद्धि तथा
  11. पारिस्थितिक तन्त्र को सन्तुलित बनाये रखना।

प्रश्न 2
जीव-जन्तुओं, वनस्पति एवं जलवायु के पारस्परिक सम्बन्धों की समीक्षा कीजिए।
या
वनस्पति पर जलवायु कारकों के प्रभाव की विवेचना कीजिए। [2012, 15]
या
जलवायु तथा वनस्पति के जीव-जन्तुओं से सह-सम्बन्ध की सोदाहरण विवेचना कीजिए। [2012, 13]
उत्तर
पृथ्वी पर जलवायु एकमात्र ऐसा तत्त्व है जिसके व्यापक प्रभाव से पेड़-पौधों से लेकर छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़े तथा हाथी जैसे विशालकाय पशु भी नहीं बच पाते। जलवायु का जीव पर समग्र प्रभाव पारिस्थितिकी तन्त्र कहलाता है। पारिस्थितिकी तन्त्र जैव जगत् के जैवीय सम्मिश्रण का ही दूसरा नाम है। ओडम के शब्दों में, “पारिस्थितिकी तन्त्र पौधों और पशुओं की परस्पर क्रिया करती हुई वह इकाई है जिसके द्वारा ऊर्जा का मिट्टियों से पौधों और पशुओं तक प्रवाह होता है तथा इस तन्त्र के जैव व अजैव तत्त्वों में पदार्थों का विनिमय होता है।”

हम जानते हैं कि प्रत्येक जीवोम अपने पारिस्थितिकी तन्त्र का परिणाम होता है। सृष्टि के प्रारम्भ से लेकर आज तक जैव विकास की एक लम्बी कहानी है। सृष्टि के प्रारम्भ में जो जीवधारी उत्पन्न हुए प्राकृतिक पर्यावरण के साथ-साथ उनका स्वरूप भी बदलता गया। रीढ़विहीन प्राणी बाद में रीढ़ वाले प्राणी के रूप में विकसित हुए। डायनासोर से लेकर वर्तमान ऊँट और जिराफ तक सभी प्राणी जलवायु दशाओं के ही परिणाम हैं।

वनस्पति जगत् के जीवन-वृत्त में झाँकने से स्पष्ट हो जाता है कि अब तक पेड़-पौधे जलवायु दशाओं के फलस्वरूप नया आकार, प्रकारे और कलेवर धारण करते रहे हैं। काई से लेकर विशाल वृक्षों के निर्माण में लम्बा युग बीता है।

आइए निरीक्षण करें कि पेड़-पौधे और जीव-जन्तु जलवायु के साथ किस प्रकार के सह-सम्बन्ध बनाये हुए हैं –
(1) वनस्पति पर जलवायु को प्रभाव अथवा पेड़ – पौधों और जलवायु का सह-सम्बन्ध – प्राकृतिक वनस्पति अपने विशिष्ट पर्यावरण की देन होती है। यही कारण है कि पेड़-पौधों और जलवायु के मध्य सम्बन्धों की प्रगाढ़ता पायी जाती है। विभिन्न जलवायु प्रदेशों में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों का पाया जाना यह स्पष्ट करता हैं कि जलवायु और वनस्पति का अटूट सम्बन्ध है। टुण्ड्रा प्रदेश में कठोर शीत, तुषार और हिमावरण के कारण वृक्ष कोणधारी होते हैं। ढालू वृक्षों पर हिमपात का कोई प्रभाव नहीं होता। इन प्रदेशों में स्थायी तुषार रेखा पायी जाने तथा भूमि में वाष्पीकरण कम होने के कारण पेड़-पौधों का विकास कम होता है। टुण्ड्रा और टैगा प्रदेशों में वृक्ष बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं। इनकी लकड़ी मुलायम होती है।

उष्ण मरुस्थलीय भागों में वर्षा की कमी तथा उष्णता के कारण वृक्ष छोटे-छोटे तथा काँटेदार होते हैं। वृक्षों की छाल मोटी तथा पत्तियाँ छोटी-छोटी होती हैं। अनुपजाऊ भूमि तथा कठोर जलवायु दशाएँ वृक्षों के विकास में बाधक बन जाती हैं।
मानसूनी प्रदेशों में वृक्ष ग्रीष्म ऋतु की शुष्कता से बचने के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। वर्षा ऋतु में यहाँ वृक्षों का विकास सर्वाधिक होता है।
भूमध्यसागरीय प्रदेशों में जाड़ों में वर्षा होती है; अतः वृक्ष लम्बी गाँठदार जड़ों में जल एकत्र करके ग्रीष्म की शुष्कता से अपना बचाव कर लेते हैं। जाड़ों की गुलाबी धूप तथा हल्की ठण्ड ने यहाँ रसदार फलों के उत्पादन में बहुत सहयोग दिया है।
घास बहुल क्षेत्रों में वर्षा की कमी के कारण वृक्ष नहीं उगते। यहाँ लम्बी-लम्बी हरी घास उगती है। घास ही यहाँ की प्राकृतिक वनस्पति होती है।
भूमध्यरेखीय प्रदेशों में अधिक गर्मी तथा अधिक वर्षा के कारण घने तथा ऊँचे-ऊँचे वृक्ष उगते हैं। इन वृक्षों को काटना सुविधाजनक नहीं है। वृक्षों के नीचे छोटे वृक्ष तथा लताएँ उगती हैं। ये वृक्ष सदाबहार होते हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में ऊँचाई के साथ जलवायु में बदलाव आने के साथ ही वनस्पति के प्रकार एवं स्वरूप में भी अन्तर उत्पन्न होता जाता है। उच्च अक्षांशों एवं पर्वतीय क्षेत्रों में जहाँ बर्फ पड़ती है, वहाँ नुकीली पत्ती वाले कोणधारी वन पाये जाते हैं।
इस प्रकार स्पष्ट है कि किसी स्थान की जलवायु ही वहाँ की वनस्पति की नियन्त्रक होती है। इसके विपरीत जलवायु पर वनस्पति जगत् का प्रभाव भी पड़ता है। वनस्पति जलवायु को स्वच्छ करती है। पेड़-पौधे भाप से भरी पवनों को आकर्षित कर वर्षा कराते हैं। वृक्ष वायुमण्डल में नमी छोड़कर जलवायु को नम रखते हैं। वृक्ष पर्यावरण के प्रदूषण को रोककर जलवायु के अस्तित्व को बनाये रखते हैं। इस प्रकार पेड़-पौधे तथा जलवायु का परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध है। जहाँ पेड़-पौधे जलवायु को प्रभावित करते हैं, वहीं जलवायु पेड़-पौधों पर अपनी अमिट छाप छोड़ती है।

(2) जीव-जन्तुओं और जलवायु का सह-सम्बन्ध – किसी भी स्थान के जैविक तन्त्र की रचना जलवायु के द्वारा ही होती है। जीव-जगत् जलवायु पर उतना ही निर्भर करता है जितना वनस्पति जगत्। जीव-जन्तुओं के आकार, प्रकार, रंग-रूप, भोजन तथा आदतों के निर्माण में जलवायु सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
टुण्ड्रा और टैगी प्रदेश में शीत-प्रधान जलवायु के कारण ही समूरधारी जानवर उत्पन्न होते हैं। प्रकृति द्वारा दिये गये उनके लम्बे तथा मुलायम बाल ही उन्हें हिमपात तथा कठोर शीत से बचाते हैं। ये पशु इस क्षेत्र के पौधों के पत्ते खाकर जीवित रहते हैं। रेण्डियर, श्वेत ‘भालू तथा मिन्क इस क्षेत्र की जलवायु की ही देन हैं।

उष्ण मरुस्थलीय क्षेत्रों में ऊँट तथा भेड़-बकरियाँ ही पनप पाती हैं। ये पशु शुष्क जलवायु में रह सकते हैं। ऊँट रेगिस्तान का जहाज कहलाता है। ये सभी पशु मरुस्थलीय क्षेत्रों में उगी वनस्पतियों के पत्ते खाकर जीवित रहते हैं। ऊँची-ऊँची झाड़ियों के पत्ते खाने में भी ऊँट सक्षम है। मरुस्थलीय प्रदेशों में दूरदूर तक पेड़-पौधों तथा जल के दर्शन तक नहीं होते। यही कारण है कि यहाँ का मुख्य पशु ऊँट बगैर कुछ खाये-पिये. हफ्तों तक जीवित रह सकता है। इन क्षेत्रों के जीवों को पानी की कम आवश्यकता होती है।
मानसूनी प्रदेश के वनों में शाकाहारी तथा मांसाहारी पशुओं की प्रधानता है। शाकाहारी पशु वृक्षों के पत्ते खाकर तथा मांसाहारी पशु शाकाहारी पशुओं को खाकर जीवित रहते हैं।

घास बहुल क्षेत्रों में घास खाने वाले पशु ही अधिक विकसित हो पाते हैं। जेबरां तथा जिराफ सवाना तुल्य जलवायु के मुख्य पशु हैं। जिराफ ऊँची-से-ऊँचीं डाल की पत्तियाँ खाने का प्रयास करता है; अतः उसकी गर्दन लम्बी हो जाती है।
विषुवतेरेखीय प्रदेश की उष्ण एवं नम जलवायु में मांसाहारी पशुओं से लेकर वृक्षों की शाखाओं पर रहने वाले बन्दर, गिलहरी तथा साँप एवं जल में पाये जाने वाले मगरमच्छ तथा दरियाई घोड़े पाये जाते हैं। उष्ण जलवायु ने यहाँ के मक्खी और मच्छरों को विषैला बना दिया है।
इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि किसी भी स्थान पर पाये जाने वाले जीव-जन्तु उस स्थान की जलवायु का परिणाम हैं। जलवायु का प्रभाव जीव-जन्तुओं के आकार, रंग-रूप, भोजन, स्वभाव आदि सभी गुणों पर देखने को मिलती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
जैवमण्डल का अर्थ एवं उसके मुख्य तत्त्व बताइए। [2009, 16]
उत्तर
जैवमण्डल का अर्थ जैवमण्डल में पृथ्वी के निकट का वह कटिबन्ध सम्मिलित है जो किसी-न-किसी रूप में जैव विकास के लिए अनुकूल पड़ता है। इसका निर्माण स्थलमण्डल, जलमण्डल और वायुमण्डल तीनों के सम्पर्क क्षेत्र से होता है। इन तीनों के संयोग से ऐसा पर्यावरण बन जाता है जो वनस्पति जगत, जीव-जन्तु और मानव शरीर के विकास के लिए अनुकूल दशाएँ प्रदान करता है। पृथ्वी तेल के निकट स्थित यह क्षेत्र ही जैवमण्डल (Biosphere) कहलाता है। विद्वानों ने जैवमण्डल को तीन पर्यावरणीय उपविभागों में बाँटा है-

  1. महासागरीय,
  2. ताजे जल एवं
  3. स्थलीय जैवमण्डल।

इनमें स्थलीय जैवमण्डल अधिक महत्त्वपूर्ण है।
जैवमण्डल के तत्त्व जैवमण्डल के तीन प्रमुख तत्त्व हैं-

  1. वनस्पति के विविध प्रकार,
  2. जन्तुओं के विविध प्रकार,
  3. मानव समूह।

वनस्पति – जगत में समुद्री पेड़-पौधों से लेकर पर्वतों की उच्च श्रेणियों तक पाए जाने वाले वनस्पति के विविध प्रकार सम्मिलित हैं। जन्तु-जगत में समुद्रों में पाए जाने वाले विविध जीव, मिट्टियों को बनाने वाले बैक्टीरिया और स्थल पर पाए जाने वाले विविध जीव-जन्तु सम्मिलित हैं। जैवमण्डल के तत्त्व-वायु, जल, सूर्य के प्रकाश और मिट्टियों पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर होते हैं। जैवमण्डल के तत्त्वों में परस्पर गहरा सम्बन्ध होता है। किसी तत्त्व में कमी या अवरोध उत्पन्न होने पर जैवमण्डल पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

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प्रश्न 2
वनों के संरक्षण से आप क्या समझते हैं? [2016]
उत्तर
वन किसी भी देश की अमूल्य सम्पदा होते हैं। ये प्राकृतिक संसाधन ही नहीं, भौगोलिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण होते हैं। वनों को जलवायु का नियन्त्रक’ कहा जाता है। ये तापमानों की वृद्धि रोकते हैं तथा वर्षा कराने में उपयोगी होते हैं। ये बाढ़ों की आवृत्ति तथा भूमि अपरदन को भी रोकते हैं। वनों में अनेक प्रकार के जीव-जन्तु रहते हैं जो पारिस्थितिकीय सन्तुलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही नहीं, वनों में अनेक मानवे वर्ग (जनजातियाँ) भी निवास करते हैं। इन सब कारणों से वन बहुत उपयोगी हैं।

इनके विनाश को रोकना अनिवार्य है। विभिन्न देश वनों के संरक्षण के अनेक उपाय अपनाते हैं, जिनमें-अतिशय कटाई । पर नियन्त्रण, वैज्ञानिक विधि से लकड़ी काटना, वनों का वैज्ञानिक प्रबन्धन, वन-रोपण आदि प्रमुख उपाय हैं। वनों के संरक्षण के लिए विभिन्न देश अनेक कार्यक्रम अपनाते हैं। विश्व के प्राय: सभी देशों में वर्ष के किसी-न-किसी दिन या सप्ताह में वृक्षारोपण उत्सव (वन महोत्सव) मनाया जाता है। संयुक्त राज्य, फिलीपीन्स तथा कम्बोडिया में ‘ArborDay’, जापान में ‘Green Week’, इजराइल में ‘NewYear’s Day of Tree’, आइसलैण्ड में ‘Student’s Afforestation Day’ तथा भारत में ‘वन महोत्सव मनाया जाता है। देशों के स्तर पर ही नहीं अपितु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वनों का संरक्षण एक चिन्तनीय विषय है।

प्रश्न 3
वनों से होने वाले प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ बताइए। [2011, 15, 16]
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 1 के अन्तर्गत ‘वनों का आर्थिक महत्त्व’ शीर्षक देखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
जैवमण्डल को परिभाषित कीजिए। [2008, 09, 10, 11, 16]
उत्तर
जैवमण्डल धरातल से ऊपर कुछ ऊँचाई तक तथा समुद्रों, महासागरों एवं अन्य जलराशियों में कुछ गहराई तक विस्तृत वह संकीर्ण परत है जिसमें समस्त प्रकार का जीवन (वनस्पति, जीव-जन्तु, प्राणी, मानव, कीड़े-मकोड़े, पक्षी आदि) पाया जाता है।

प्रश्न 2
विश्व में वनों के विस्तार का कुल क्षेत्रफल कितना है और उसमें से कितना मनुष्य की पहुँच के योग्य है?
उत्तर
विश्व में वनों के विस्तार का कुल क्षेत्रफल 25,620 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 59% मनुष्य की पहुँच के योग्य है।

प्रश्न 3
वनस्पति को प्रभावित करने वाले मुख्य घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर
वनस्पति को प्रभावित करने वाले मुख्य घटक हैं-

  1. तापमान
  2. जल-पूर्ति
  3. प्रकाश
  4. पवन और
  5. मिट्टी।

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प्रश्न 4
दक्षिण अमेरिका के दो घास के मैदानों के नाम लिखिए।
उत्तर
दक्षिण अमेरिका के दो घास के मैदानों के नाम हैं-

  1. मानोज एवं
  2. सवाना।

प्रश्न 5
पृथ्वी पर ऐसा कौन-सा तत्त्व है जिसके प्रभाव से कोई नहीं बच सकता?
उत्तर
पृथ्वी पर जलवायु एकमात्र ऐसा तत्त्व है जिसके व्यापक प्रभाव से पेड़-पौधे से लेकर : छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़े तथा हाथी जैसे विशालकाय पशु भी नहीं बच पाते।

प्रश्न 6
प्राकृतिक वनस्पति के प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
प्राकृतिक वनस्पति तीन प्रकार की होती हैं-

  1. वन
  2. घास के मैदान तथा
  3. झाड़ियाँ।

प्रश्न 7
भूमध्यरेखीय प्रदेशों में घने तथा ऊँचे-ऊँचे वृक्ष क्यों उगते हैं तथा इन वृक्षों की क्या विशेषता होती है?
उत्तर
भूमध्यरेखीय प्रदेशों में अधिक गर्मी तथा अधिक वर्षा के कारण घने तथा ऊँचे-ऊँचे वृक्ष उगते हैं। ये वृक्ष सदाबहार होते हैं।

प्रश्न 8
मानसूनी प्रदेशों में वृक्ष अपनी पत्तियाँ क्यों गिरा देते हैं? इनका विकास किस ऋतु में सर्वाधिक होता है?
उत्तर
मानसूनी प्रदेशों में वृक्ष ग्रीष्म ऋतु की शुष्कता से बचने के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। वर्षा ऋतु में इनका विकास सर्वाधिक होता है।

प्रश्न 9
सवाना तुल्य. जलवायु के मुख्य पशु कौन-से हैं?
उत्तर
सवाना तुल्य जलवायु के मुख्य पशु हैं—जेबरा तथा जिराफ।

प्रश्न 10
सिनकोना का महत्त्व लिखिए। यह कहाँ पाया जाता है?
उत्तर
सिनकोना नामक वृक्ष की छाल से कुनैन बनाया जाता है। यह वृक्ष 200 सेमी से 300 सेमी वर्षा वाले भागों में भारत, श्रीलंका, मैलागासी और जावा में पाया जाता है।

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प्रश्न 11
वन-संरक्षण हेतु कोई दो उपाय सुझाइए। [2013, 14]
उत्तर

  1. व्यापक वृक्षारोपण और सामाजिक वानिकी कार्यक्रमों के द्वारा वन और वृक्ष के आच्छादन में महत्त्वपूर्ण बढ़ोतरी की जाए।
  2. वन उत्पादों के उचित उपयोग को बढ़ावा देना और लकड़ी के अनुकूलतम विकल्पों की खोज की जाए।

प्रश्न 12
शंकुल सदापर्णी वनों के प्रमुख वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर
शंकुल सदापर्णी वनों के प्रमुख वृक्षों के नाम हैं-चीड़, स्पूहै, हैमलॉक, लार्च, सीडर, फर, साइप्रस आदि।

प्रश्न 13
चिपको आन्दोलन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर
भारत में वनों की अन्धाधुन्ध कटाई को रोकने के लिए उत्तराखण्ड में श्री सुन्दरलाल बहुगुणा द्वारा चिपको आन्दोलन वनों की सुरक्षा के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

प्रश्न 14
वन-विनाश के किन्हीं दो कारणों की विवेचना कीजिए। [2012]
या
वनों का संरक्षण क्यों आवश्यक हो गया है? दो कारण बताइए [2016]
उत्तर

  1. जनसंख्या वृद्धि के कारण भूमि की बढ़ती हुई माँग को पूरा करने के लिए वनों का अधिक मात्रा में काटा जाना।
  2. प्राकृतिक कारणों, जैसे भूस्खलन एवं वृक्षों को परस्पर घर्षण से वनाग्नि के कारण वनों का विनाश होना।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1
जैव-प्रदूषण समस्या का कारण है –
(क) झूमिंग कृषि
(ख) वनों का कटान
(ग) जलीय जीवों का संहार
(घ) ये सभी
उत्तर
(घ) ये सभी।

प्रश्न 2
सामान्यतया धरातल पर प्राकृतिक वनस्पति पायी जाती है –
(क) वनों के रूप में
(ख) घास के रूप में
(ग) झाड़ियों के रूप में
(घ) इन सभी रूपों में
उत्तर
(घ) इन सभी रूपों में।

प्रश्न 3
प्रेयरी घास के मैदान निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में पाये जाते हैं? [2007]
(क) दक्षिणी अमेरिका
(ख) उत्तरी अमेरिका
(ग) अफ्रीका
(घ) यूरोप
उत्तर
(ख) उत्तरी अमेरिका।

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प्रश्न 4
निम्नलिखित में से किस जलवायु प्रदेश में कोणधारी वन पाए जाते हैं ? [2008, 10]
(क) मानसून
(ख) भूमध्यसागरीय
(ग) भूमध्यरेखीय
(घ) टेगा
उत्तर
(घ) टैगा।

प्रश्न 5
निम्नलिखित में से पतझड़ वन किस जलवायु प्रदेश में पाये जाते हैं –
(क) भूमध्यरेखीय जलवायु प्रदेश
(ख) टैगा जलवायु प्रदेश
(ग) टुण्ड्रा जलवायु प्रदेश :
(घ) मानसूनी जलवायु प्रदेश
उत्तर
(घ) मानसूनी जलवायु प्रदेश।

प्रश्न 6
सदाबहार वन निम्नलिखित में से किस प्रदेश में पाये जाते हैं?
(क) भूमध्यसागरीय जलवायु प्रदेश
(ख) विषुवत्रेखीय जलवायु प्रदेश
(ग) रेगिस्तानी जलवायु प्रदेश
(घ) टैगा जलवायु प्रदेश
उत्तर
(ख) विषुवत्रेखीय जलवायु प्रदेश।

प्रश्न 7
लानोज घास के मैदान निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में पाये जाते हैं? [2009]
(क) अफ्रीका
(ख) दक्षिणी अमेरिका
(ग) ऑस्ट्रेलिया
(घ) उत्तरी अमेरिका
उत्तर
(ख) दक्षिणी अमेरिका।

प्रश्न 8
वेल्ड्स घास के मैदान कहाँ पाए जाते हैं? [2013, 14, 15]
(क) ब्राजील में
(ख) दक्षिण अमेरिका में
(ग) ऑस्ट्रेलिया में
(घ) मध्य एशिया में
उत्तर
(ख) दक्षिण अमेरिका में

प्रश्न 9
सवाना घास के मैदान कहाँ पाए जाते हैं? [2015, 16]
(क) अमेजन बेसिन में
(ख) सूडान में
(ग) मध्य एशिया में
(घ) टैगा प्रदेश में
उत्तर
(ख) सूडान में

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UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 भाषा और आधुनिकता

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 भाषा और आधुनिकता (जी० सुन्दर रेड्डी) are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 भाषा और आधुनिकता (जी० सुन्दर रेड्डी).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 4
Chapter Name भाषा और आधुनिकता (जी० सुन्दर रेड्डी)
Number of Questions 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 भाषा और आधुनिकता (जी० सुन्दर रेड्डी)

लेखक का साहित्यिक परिवय और कृतिया

प्रश्न 1.
जी० सुन्दर रेड्डी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए। [2010]
या
प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी रचनाओं (कृतियों) का उल्लेख कीजिए। [2016, 17]
उत्तर
जीवन-परिचय–प्रोफेसर रेड्डी का जन्म आन्ध्र प्रदेश में सन् 1919 ई० में हुआ। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा यद्यपि संस्कृत और तेलुगू में हुई, लेकिन ये हिन्दी के प्रकाण्ड विद्वान् हैं। 30 वर्षों से भी अधिक समय तक ये आन्ध्र विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे। ये वहाँ के स्नातकोत्तर अध्ययन एवं अनुसन्धान विभाग के अध्यक्ष एवं प्रोफेसर भी रहे। इनके निर्देशन में हिन्दी और तेलुगू साहित्यों के विविध पक्षों के तुलनात्मक अध्ययन पर पर्याप्त शोधकार्य हुए हैं। साहित्यिक योगदान–जी० सुन्दर रेड्डी ने दक्षिण भारत की चारों भाषाओं तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम तथा उनके साहित्य का इतिहास प्रस्तुत करते हुए उनकी आधुनिक गतिविधियों को सूक्ष्म विवेचन प्रस्तुत किया है। इनके साहित्य में इनका मानवतावादी दृष्टिकोण स्पष्ट झलकता है। तेलुगूभाषी होते हुए भी हिन्दी-भाषा में रचना करके इन्होंने एक श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया है। ऐसा करके आपने दक्षिण भारतीयों को हिन्दी और उत्तर भारतीयों को दक्षिण भारतीय भाषाओं के अध्ययन की प्रेरणा दी है। आपके निबन्ध हिन्दी, तेलुगू और अंग्रेजी भाषा की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। भाषा की समस्याओं पर अनेक विद्वानों ने बहुत कुछ लिखा है, किन्तु भाषा और आधुनिकता पर वैज्ञानिक दृष्टि से विचार करने वालों में प्रोफेसर रेड्डी सर्वप्रमुख हैं।

रचनाएँ-अब तक प्रोफेसर रेड्डी के कुल 8 ग्रन्थ प्रकाशित हो चुके हैं(1) साहित्य और समाज, (2) मेरे विचार, (3) हिन्दी और तेलुगू : एक तुलनात्मक अध्ययन, (4) दक्षिण की भाषाएँ और उनका साहित्य, (5) वैचारिकी, (6) शोध और बोध, (7) तेलुगू वारुल (तेलुगू ग्रन्थ), (8) लैंग्वेज प्रॉब्लम इन इण्डिया (सम्पादित अंग्रेजी ग्रन्थ)।

साहित्य में स्थान-प्रोफेसर रेड्डी एक श्रेष्ठ विचारक, समालोचक और निबन्धकार हैं। अहिन्दी भाषी प्रदेश के निवासी होते हुए भी हिन्दी भाषा के ये प्रकाण्ड विद्वान् हैं। शोधकार्य एवं तुलनात्मक अध्ययन इनके प्रमुख विषय हैं। अहिन्दी क्षेत्र में आपका हिन्दी-रचना कार्य, हिन्दी-साहित्य के लिए वरदानस्वरूप है। गैर हिन्दी भाषी होते हुए भी प्रो० रेड्डी हिन्दी-साहित्य में एक आदर्श उदाहरण बने हुए हैं।

गद्यांशों पर आधारित प्रश्नोचर

प्रश्न–दिए गए गद्यांशों को पढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

प्रश्न 1.
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परम्परा से नि:सृत होने पर भी, परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नये प्रयोगों की, नयी भाव-योजनाओं को व्यक्त करने के लिए नये शब्दों की खोज की महती आवश्यकता है।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) प्रस्तुत अवतरण के माध्यम से लेखक ने किस बात पर बल दिया है?
(iv) संस्कृति का एक अटूट अंग क्या है?
(v) किसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है?
उत्तर
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘गद्य-गरिमा’ में संकलित तथा श्रेष्ठ विचारक वे निबन्धकार जी० सुन्दर रेड्डी द्वारा लिखित ‘भाषा और आधुनिकता’ शीर्षक शोधपरक निबन्ध से अवतरित है।
अथवा
पाठ का नाम- भाषा और आधुनिकता।
लेखक का नाम-प्रो०जी० सुन्दर रेड्डी।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-भाषा में जो प्रयोग प्राचीनकाल से चले आ रहे हैं, वे नये सांस्कृतिक परिवर्तनों को व्यक्त करने में समर्थ नहीं हैं। नित्यप्रति संस्कृति में हुए परिवर्तनों को भाषा द्वारा व्यक्त करने के लिए भाषा में नये-नये प्रयोगों, नये-नये शब्दों की खोज का कार्य होना बहुत आवश्यक है, जिससे बदलते हुए नये भावों को उचित रूप से व्यक्त किया जा सके।
(iii) प्रस्तुत गद्यावतरण में लेखक ने विज्ञान की प्रगति के कारण जो सांस्कृतिक परिवर्तन होता है, उसे शब्दों द्वारा व्यक्त करने के लिए भाषा में नये प्रयोगों की आवश्यकता पर बल दिया है।
(iv) संस्कृति का एक अटूट अंग भाषा है।।
(v) संस्कृति की गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है।

प्रश्न 2.
विज्ञान की प्रगति के कारण नयी चीजों का निरंतर आविष्कार होता रहता है। जब कभी नया आविष्कार होता है, उसे एक नयी संज्ञा दी जाती है। जिस देश में उसकी सृष्टि की जाती है वह देश उस आविष्कार के नामकरण के लिए नया शब्द बनाता है; वही शब्द प्रायः अन्य देशों में बिना परिवर्तन के वैसे ही प्रयुक्त किया जाता है। यदि हर देश उस चीज के लिए अपना-अपना अलग नाम देता रहेगा, तो उस चीज को समझने में ही दिक्कत होगी। जैसे रेडियो, टेलीविजन, स्पुतनिक।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) कौन-सा देश किसी आविष्कृत चीज के नामकरण के लिए नया शब्द देता है?
(iv) यदि हर देश आविष्कृत चीजों को अपना-अपना अलग नाम देता रहे तो क्या होगा?
(v) नई चीजों के आविष्कार होने का क्या कारण है?
उत्तर
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘गद्य-गरिमा’ में संकलित तथा श्रेष्ठ विचारक वे निबन्धकार जी० सुन्दर रेड्डी द्वारा लिखित ‘भाषा और आधुनिकता’ शीर्षक शोधपरक निबन्ध से अवतरित है।
अथवा
पाठ का नाम- भाषा और आधुनिकता।।
लेखक का नाम-प्रो०जी० सुन्दर रेड्डी।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक का कथन है कि यदि कोई विदेशी शब्द अपने भाव का सम्प्रेषण करने में सक्षम है तो उसमें परिवर्तन नहीं करना चाहिए। उदाहरण के लिए-आज प्रत्येक देश में विज्ञान के क्षेत्र में भिन्न-भिन्न आविष्कार हो रहे हैं और उन्हें नये-नये नाम दिये जा रहे हैं। प्रत्येक देश अपने द्वारा आविष्कृत वस्तु का अपनी भाषा के अनुसार नामकरण कर रहा है और दूसरे देशों में भी वही नाम प्रचलित होता जा रहा है।
(iii) जिस देश में किसी चीज की सृष्टि की जाती है वही देश उस आविष्कृत चीज के नामकरण के लिए नया शब्द देता है।
(iv) यदि हर देश आविष्कृत चीजों को अपना-अपना अलग नाम देता रहे तो उस चीज को समझने में दिक्कत होगी।
(v) नई चीजों के आविष्कार होने का कारण विज्ञान की प्रगति है।

प्रश्न 3.
नये शब्द, नये मुहावरे एवं नयी रीतियों के प्रयोगों से युक्त भाषा को व्यावहारिकता प्रदान करना ही भाषा में आधुनिकता लाना है। दूसरे शब्दों में केवल आधुनिक-युगीन विचारधाराओं के अनुरूप नये शब्दों के गढ़ने मात्र से ही भाषा का विकास नहीं होता; वरन् नये पारिभाषिक शब्दों को एवं नूतन शैली-प्रणालियों
को व्यवहार में लाना ही भाषा को आधुनिकता प्रदान करना है।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) किसके गढ़ने मात्र से भाषा का विकास नहीं होता?
(iv) किन चीजों को व्यवहार में लाना ही भाषा को आधुनिकता प्रदान करना है?
(v) उपर्युक्त गद्यांश के माध्यम से लेखक ने कौन-सी बात बताई है?
उत्तर
(i) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘गद्य-गरिमा’ में संकलित तथा श्रेष्ठ विचारक व निबन्धकार जी० सुन्दर रेड्डी द्वारा लिखित ‘भाषा और आधुनिकता’ शीर्षक शोधपरक निबन्ध से अवतरित है।
अथवा
पाठ का नाम – भाषा और आधुनिकता।
लेखक का नाम – प्रो०जी० सुन्दर रेड्डी।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-किसी भाषा में आधुनिकता का समावेश तभी हो सकता है, जब उसमें नये-नये जनप्रचलित शब्दों, मुहावरों तथा लोकोक्तियों को समाहित कर लिया जाए। इन बातों के समावेश से भाषा व्यावहारिक हो जाती है।
(iii) आधुनिक युगीन विचारधाराओं के अनुरूप नये शब्दों के गढ़ने मात्र से भाषा का विकास नहीं होता।
(iv) नये पारिभाषिक शब्दों को एवं नूतन शैली प्रणालियों को व्यवहार में लाना ही भाषा को आधुनिकता प्रदान करना है।
(v) उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने भाषा को आधुनिक बनाने के उपाय बताए हैं।

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UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 4
Chapter Name गद्य-साहित्यका विकास मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न
Number of Questions 108
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न

मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न

[ध्यान दें: नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के विकल्पों में सामान्य से अधिक काले छपे विकल्प को उचित विकल्प समझे।]

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘साहित्यालोचन’ और ‘हिन्दी साहित्य निर्माता’ इनकी प्रमुख रचनाएँ हैंया’साहित्यालोचन’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) श्यामसुन्दर दास

(2) ‘काशी नागरी प्रचारिणी सभा’ की स्थापना में इनका सराहनीय योगदान रहा है–
या
‘काशी नागरी प्रचारिणी सभा’ की स्थापना किसने की ? [2009, 12, 13, 14]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) श्यामसुन्दर दास
(घ) डॉ० सम्पूर्णानन्द

(3) निम्नलिखित में से कौन द्विवेदीयुगीन गद्य लेखक/लेखिका हैं ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) यशपाल
(घ) भगवतीचरण वर्मा

(4) ‘रूपक रहस्य’ के लेखक कौन हैं ? यह किस विधा की रचना है ?
(क) वियोगी हरि–नाटक
(ख) रामचन्द्र शुक्ल-निबन्ध
(ग) श्यामसुन्दर दास-आलोचना
(घ) प्रतापनारायण मिश्र-निबन्ध

(5) श्यामसुन्दर दास द्वारा किस पत्रिका का सम्पादन किया गया ?
(क) हिन्दी प्रदीप
(ख) माधुरी
(ग) इन्दु
(घ) नागरी प्रचारिणी पत्रिका

(6) ‘नासिकेतोपाख्यान’ शीर्षक से श्यामसुन्दर दास के अतिरिक्त किस लेखक ने गद्य-रचना की है? [2014]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) सदल मिश्र
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

(7) श्यामसुन्दर दास का जन्म-काल है–
(क) सन् 1875 ई०
(ख) सन् 1884 ई०
(ग) सन् 1892 ई०
(घ) सन् 1907 ई०

(8) मुंशी प्रेमचन्द का जन्म-काल है
(क) 1870 ई०
(ख) 1875 ई०
(ग) 1880 ई०
(घ) 1879 ई०

(9) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन का जन्म-काल है
(क) 1892 ई०
(ख) 1907 ई०
(ग) 1911 ई०
(घ) 1920 ई०

(10) इनके द्वारा ‘भारत कला भवन’ नाम के एक विशाल संग्रहालय की स्थापना की गयी
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) राय कृष्णदास

(11) इन्होंने हिन्दी में गद्यगीत विधा का प्रवर्तन किया–
(क) हरिशंकर परसाई
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(घ) राय कृष्णदास

(12) ‘भारत की चित्रकला’ तथा ‘भारतीय मूर्तिकला’ इनके प्रामाणिक ग्रन्थ हैं
(क) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ख) राहुल सांकृत्यायन
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) राय कृष्णदास

(13) ‘साधना’ नामक गद्यगीतों के संग्रह के रचयिता कौन हैं ?
(क) वृन्दावनलाल वर्मा
(ख) मोहन राकेश
(ग) राय कृष्णदास
(घ) विनय मोहन शर्मा

(14) राय कृष्णदास का लेखन-युग है
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(15) प्रेमचन्दोत्तर युग के श्रेष्ठ कथाकार के रूप में जाने जाते हैं-
(क) सरदार पूर्णसिंह
(ख) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) जैनेन्द्र कुमार

(16) जैनेन्द्र कुमार की कौन-सी रचना उपन्यास नहीं है ?
(क) कल्याणी
(ख) जयवर्धन
(ग) मुक्तिबोध
(घ) वातायन

(17) निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी रचना नाटक है ?
(क) मजदूरी और प्रेम
(ख) रस-मीमांसा
(ग) पाप और प्रकाश
(घ) भारत की एकता

(18) जैनेन्द्र कुमार द्वारा रचित निबन्ध-संग्रह है-
(क) पृथिवी-पुत्र और वाग्धारा
(ख) पूर्वोदय और प्रस्तुत प्रश्न
(ग) कुली
(घ) पथ के साथी

(19) ‘त्यागपत्र’ किस लेखक की उपन्यास-विधा की रचना है ?
(क) प्रेमचन्द
(ख) यशपाल
(ग) जैनेन्द्र कुमार
(घ) मोहन राकेश

(20) ‘साहित्य का श्रेय और प्रेय’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) आलोचना
(ग) निबन्ध
(घ) संस्मरण

(21) ‘अज्ञेय’ का वास्तविक नाम ( पूरा नाम) है—
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) कन्हैयालाल मिश्र
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

(22) ‘विशाल भारत’, ‘सैनिक’, ‘प्रतीक’, ‘वाक्’ तथा ‘दिनमान’ पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया [2012]
(क) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ख) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ ने
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी ने
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने

(23) उत्तर प्रियदर्शी’ नाटक के लेखक हैं-
(क) मोहन राकेश
(ख) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन’अज्ञेय’

(24) अरे यायावर रहेगा याद’ किस विधा की रचना है ? [2010]
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) कहानी
(घ) यात्रा-साहित्य

(25) अज्ञेय जी द्वारा रचित निम्नलिखित में से कौन-सी रचना निबन्ध विधा की रचना नहीं है ?
(क) विपथगा,
(ख) आत्मनेपद
(ग) त्रिशंकु
(घ) लिखि कागद कोरे

(26) इन्होंने भाषा सम्बन्धी विविध प्रयोग किये और शैली के क्षेत्र में भी नये प्रतिमान स्थापित किये
(क) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) श्रीराम शर्मा

(27) अज्ञेय जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार से किस रचना के लिए सम्मानित किया गया था ?
(क) जयदोल
(ख) कितनी नावों में कितनी बार
(ग) एक बूंद सहसा उछली
(घ) अरी ओ करुणा प्रभामय

(28) ‘सन्नाटा’ के रचनाकार हैं [2013]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) राय कृष्णदास
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

(29) ‘हरिऔध’ का पूरा नाम क्या है ? [2010]
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन

(30) ‘कामायनी’ की रचना विधा क्या है ?
(क) खण्डकाव्य
(ख) नाटिका
(ग) उपन्यास
(घ) महाकाव्य

(31) ‘भाषा योग-वाशिष्ठ’ के रचयिता हैं [2010, 18]
(क) रामप्रसाद निरंजनी
(ख) सदासुख मुंशीलाल ‘नियाज’
(ग) सदल मिश्र
(घ) इंशाअल्ला खाँ

(32) डॉ० रघुवीर सिंह का लेखन-युग है
(क) छायावाद युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(33) द्विवेदी युग का ख्याति प्राप्त तिलिस्मी उपन्यास है-
(क) आत्मदाह
(ख) गबन
(ग) नूतन ब्रह्मचारी
(घ) चन्द्रकान्ता सन्तति

(34) ‘भारतेन्दु युग’ की कालावधि मानी जाती है-
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1868 से 1900 ई०
(घ) 1868 ई० तेक

(35) ‘द्विवेदी युग’ की कालावधि मानी जाती है|
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1868 से 1900 ई०
(घ) 1938 ई० से अब तक

(36) ‘तितली’ उपन्यास के रचनाकार हैं [2013, 16]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) प्रेमचन्द
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(घ) जयशंकर प्रसाद

(37) ‘शुक्ल युग’ ( छायावाद युग) की कालावधि मानी जाती है|
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1938 से 1947 ई०
(घ) 1947 ई० से अब तक

(38) ‘शुक्लोत्तर युग’ ( छायावादोत्तर युग) की कालावधि मानी जाती है-
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1938 से 1947 ई०
(घ) 1947 ई० से अब तक

(39) ‘द्विवेदी युग’ और ‘छायावादी युग’ दोनों युगों में लेखन-कार्य करने वाले लेखक-द्वय हैं [2014]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी व गुलाबराय
(ख) प्रतापनारायण मिश्र व प्रेमचन्द
(ग) गुलाबराय व जयशंकर प्रसाद
(घ) जयशंकर प्रसाद व जैनेन्द्र कुमार

(40) ‘छायावाद युग’ और ‘छायावादोत्तर युग’ दोनों युगों में अपनी रचनाधर्मिता से हिन्दी साहित्य में विशेष योगदान करने वाले लेखक हैं-
(क) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) डॉ० नगेन्द्र

(41) किस युग की रचनाएँ मार्क्सवाद से सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं ?
(क) छायावादी युग
(ख) छायावादोत्तर युगे
(ग) शुक्ल युग
(घ) द्विवेदी युग

(42) गद्य की विधा जो नहीं है
(क) निबन्ध
(ख) आलोचना
(ग) उपन्यास
(घ) गद्यकाव्य

(43) हिन्दी की गद्य और पद्य विधाओं में समान रूप से लिखने वाले विद्वान् हैं-
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) विष्णु प्रभाकर
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) तीनों में से कोई नहीं

(44) छायावादी युग के लेखक कौन नहीं हैं ?
(क) वियोगी हरि
(ख) भगवतीचरण वर्मा
(ग) नन्ददुलारे वाजपेयी
(घ) डॉ० रघुवीर सिंह

(45) निम्नलिखित में से कौन-सा साहित्यकार छायावादी नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) महादेवी वर्मा

(46) ‘संस्कृति के चार अध्याय’ किस युग की रचना है ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादोत्तर युग
(घ) छायावाद युग

(47) ‘हमीर हठ’ किस प्रकार की रचना है ?
(क) निबन्ध
(ख) कथा-साहित्य
(ग) आलोचना
(घ) इतिहास

(48) ‘खड़ी बोली’ गद्य के विकास का प्रारम्भिक युग कौन-सा है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) छायावाद युग।
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(49) निम्नलिखित में से किस निबन्धकार को ललित निबन्धकार माना जाता है ? [2009]
(क) कुबेरनाथ राय
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) सरदार पूर्णसिंह

(50) निम्नलिखित में असत्य कथन है
(क) गद्य व्याकरण सम्मत वाक्यबद्ध रचना है।
(ख) गद्य प्रधानतया विचार, तर्क चिन्तन एवं विश्लेषण प्रधान होता है।
(ग) गद्य में लय, यति एवं गति आदि का महत्त्व होता है।
(घ) आज का युग गद्य प्रधान है।

(51) कौन-सा युग हिन्दी गद्य के उत्कर्ष का सूर्योदय-काल था ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(52) छायावादोत्तर युग के लेखक नहीं हैं [2009]
(क) भीष्म साहनी
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ग) वासुदेवशरण अग्रवाल
(घ) बालकृष्ण भट्ट

(53) ‘द्विवेदी पत्रावली’ के संकलनकर्ता हैं-
(क) बैजनाथ सिंह
(ख) बनारसी दास चतुर्वेदी
(ग) पद्मसिंह शर्मा
(घ) वियोगी हरि

(54) हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल को गद्य काल की संज्ञा किसने दी ?
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) बाबू श्यामसुन्दर दास

(55) ‘बड़ों के प्रेरणादायक पत्र’ पत्र संकलन किसने प्रकाशित कराया? [2010]
(क) बैजनाथ सिंह
(ख) बनारसीदास चतुर्वेदी
(ग) वियोगी हरि
(घ) हरिवंशराय बच्चन

(56) ‘नूतन ब्रह्मचारी’ किस विधा की रचना है ? [2010]
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) जीवनी
(घ) आलोचना

(57) ‘हिन्दी प्रगतिशील लेखक संघ’ का प्रथम अधिवेशन हुआ [2011]
या
प्रेमचन्द की अध्यक्षता में प्रगतिशील लेखक संघ’ का अधिवेशन हुआ । [2014]
(क) सन् 1932 में
(ख) सन् 1936 में
(ग) सन् 1938 में
(घ) सन् 1940 में

(58) प्रारम्भिक गद्य लेखकों में दो राजाओं में से एक हैं [2012]
(क) सदासुख लाल
(ख) सदल मिश्र
(ग) शिवप्रसाद सितारेहिन्द
(घ) लल्लूलाल

(59) ‘दि मैड मैन’ का ‘पगला’ नाम से हिन्दी में अनुवाद किया है [2012]
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल ने
(ख) रायकृष्ण दास ने
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द ने।
(घ) जी० सुन्दर रेड्डी ने

(60) निम्नलिखित में से सदल मिश्र की रचना है [2013]
(क) रानी केतकी की कहानी
(ख) नासिकेतोपाख्यान
(ग) राजा भोज का सपना
(घ) सत्यार्थ प्रकाश

(61) कौन-सी रचना धर्मवीर भारती की है ? (2013)
(क) अणिमा
(ख) अपरा।
(ग) अन्धा-युग
(घ) अर्चना

(62) ‘भारत-भारती’ की रचना-विधा है– [2014]
(क) कहानी
(ख) उपन्यास
(ग) नाटक
(घ) काव्य

(63) निम्नलिखित में असत्य कथन है [2014]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी निबन्धकार एवं उपन्यासकार हैं।
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी ‘सरस्वती’ पत्रिका के सम्पादक थे।
(ग) रामचन्द्र शुक्ल ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ ग्रन्थ के लेखक हैं।
(घ) प्रतापनारायण मिश्र हिन्दी प्रदीप’ के सम्पादक थे।

(64) ‘खड़ी बोली गद्य’ की प्रथम रचना है [2015]
(क) कविवचन सुधा।
(ख) गोरा बादल की कथा
(ग) कामायनी
(घ) चिदम्बरा

(65) ‘त्यागपत्र’ विधा की दृष्टि से रचना है [2015]
(क) कहानी
(ख) निबन्ध
(ग) उपन्यास
(घ) नाटक

(66) ‘अतिचार’ रचना के सम्पादक हैं [2015]
(क) बालमुकुन्द गुप्त
(ख) मुनि जिनविजय
(ग) किशोरीलाल गोस्वामी
(घ) नाभादास

(67) ‘श्रृंगार-रस-मंडन’ के रचनाकार हैं [2015]
(क) नाभादास
(ख) चतुर्भुज दास
(ग) बिट्ठलनाथ
(घ) ज्योतिरीश्वर ठाकुर

(68) ‘चिन्तामणि’ के रचनाकार हैं [2016, 18]
(क) प्रेमचन्द
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) गुलाब राय

(69) सरस्वती पत्रिका है [2016]
(क) शुक्ल युग की
(ख) द्विवेदी युग की
(ग) भारतेन्दु युग की
(घ) छायावादी युग की

(70) चन्द्रकांता सन्तति’ रचना है [2016]
(क) भारतेन्दु युग की
(ख) द्विवेदी युग की।
(ग) छायावादी युग की
(घ) छायावादोत्तर युग की

(71) ‘कालिदास की निरंकुशता’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) नन्द दुलारे वाजपेयी

(72) ‘राधाकृष्णदास’ लेखक थे [2015]
(क) भारतेन्दु युग के
(ख) द्विवेदी युग के
(ग) छायावाद युग के
(घ) छायावादोत्तर युग के

(73) ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ के लेखक हैं [2015]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) रामचन्द्र शुक्ल
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) डॉ० रामकुमार वर्मा

(74) गद्य विधा की संख्या है [2016]
(क) तीन
(ख) सात
(ग) ग्यारह
(घ) पन्द्रह

(75) ‘नूतन ब्रह्मचारी’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) सदल मिश्र
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) लल्लू लाल
(घ) मोहन राकेश

(76) ‘ग्यारह वर्ष का समय’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) मुंशी इंशा अल्ला खाँ
(ख) राजेन्द्र बाला घोस
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) जयशंकर प्रसाद

(77) गोरा बादल की कथा’ के लेखक हैं [2016]
(क) कवि गंग
(ख) जटमले
(ग) पं० दौलत राम
(घ) रामप्रसाद निरंजनी

(78) ‘मुद्रा राक्षस’ के लेखक हैं [2016]
(क) श्यामसुन्दर दास
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) जयशंकर प्रसाद

(79) रसज्ञ-रंजन’ कृति के लेखक हैं [2016]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) राहुल सांकृत्यायन

(80) सरदार पूर्णसिंह द्वारा लिखित निबन्ध नहीं है [2016]
(क) सच्ची वीरता
(ख) कन्यादान
(ग) पवित्रता
(घ) कालिदास की निरंकुशता

(81) ‘चिद्विलास’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ख) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ग) हरिशंकर परसाई
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

(82) ‘पन्दहा’ (आजमगढ़, उत्तर प्रदेश) जन्म-स्थान है [2016]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी को
(ख) राहुल सांकृत्यायन को
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का
(घ) मोहन राकेश का

(83) ‘पैरों में पंख बाँधकर’ यात्रावृत्तान्त कृति है [2016]
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी की।
(ख) डॉ० सम्पूर्णानन्द की
(ग) मोहन राकेश की
(घ) वासुदेवशरण अग्रवाल की

(84) आधुनिक काल के प्रारम्भिक डायरी-लेखक हैं [2016]
(क) घनश्याम दास बिड़ला
(ख) त्रिलोचन
(ग) शमशेर बहादुर सिंह
(घ) बच्चन

(85) ‘भारत दुर्दशा’ रचना है [2016]
(क) जयशंकर प्रसाद की
(ख) रामकुमार वर्मा की
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की
(घ) श्यामसुन्दर दास की.

(86) ‘वर्ण रत्नाकर’ के रचनाकार हैं [2017]
(क) मथुरानाथ शुक्ल
(ख) दौलतराम
(ग) रामप्रसाद निरंजनी
(घ) ज्योतिरीश्वर

(87) सरदार पूर्णसिंह किस युग के लेखक हैं? [2017]
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) प्रगतिवाद युग

(88) डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी की रचना है [2017]
(क) चिन्तामणि
(ख) पंच परमेश्वर
(ग) कुटज
(घ) चन्द्रकान्ता

(89) वासुदेवशरण अग्रवाल की रचना है [2017]
(क) अन्तराल
(ख) त्रिशंकु
(ग) तट की खोज
(घ) वाग्धारा

(90) संस्मरण विधा की रचना है– [2017]
(क) दीप जले शंख बजे
(ख) बाजे पायलिया के घंघरू
(ग) अरे यायावर रहेगा याद
(घ) तब की बात और थी

(91) आलोचनात्मक कृति ‘कालिदास की लालित्य-योजना’ के लेखक हैं [2017]
(क) हरिशंकर परसाई
(ख) मोहन राकेश
(ग) डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

(92) ‘वारिस’ कहानी-संग्रह है [2017]
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का
(ख) प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी का
(ग) मोहन राकेश का
(घ) “अज्ञेय’ का

(93) हरिशंकर परसाई की रचना है [2017]
(क) कल्पवृक्ष
(ख) धरती के फूल
(ग) तब की बात और थी
(घ) मेरे विचार

(94) डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखे गए निम्न ग्रन्थों में से हिन्दी साहित्य के इतिहास से सम्बन्धित ग्रन्थ नहीं है– [2017]
(क) हिन्दी साहित्य की भूमिका
(ख) हिन्दी साहित्य का आदिकाल
(ग) हिन्दी-साहित्य
(घ) चारुचन्द्र-लेख

(95) ‘भूले-बिसरे चेहरे’ रेखाचित्र के रचयिता हैं [2018]
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ख) अमृत राय
(ग) महावीरप्रसार द्विवेदी
(घ) राजेन्द्र यादव

(96) ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ के लेखक हैं|
(क) मोहन राकेश
(ख) अज्ञेय
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) हरिशंकर परसाई

(97) निम्नलिखित में से किस निबन्ध-संग्रह की रचना हरिशंकर परसाई द्वारा की गई है? [2018]
(क) पगडण्डियों का जमाना
(ख) क्षण बोले कण मुस्काए
(ग) चिन्तामणि
(घ) बाजे पायलिया के मुँघरू

(98) ‘परीक्षा-गुरु’ के लेखक हैं [2018]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) सदल मिश्र
(ग) लक्ष्मण सिंह
(घ) लाला श्रीनिवास दास

(99) ‘स्कन्दगुप्त’ नाटक के लेखक हैं [2018]
(क) प्रेमचन्द
(ख) लक्ष्मीनारायण मिश्र
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) धर्मवीर भारती

(100) ‘शेखर एक जीवनी’ के लेखक हैं [2018]
(क) भीष्म साहनी
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) प्रेमचन्द

(101) ‘नासिकेतोपाख्यान’ के लेखक हैं– [2018]
(क) लल्लूलाल
(ख) सदासुखलाल
(ग) सदल मिश्र
(घ) इंशाअल्ला खाँ

(102) बालमुकुन्द गुप्त किस युग के लेखक थे? [2018]
(क) भातेन्दु युग के
(ख) द्विवेदी युग के
(ग) छायावादी युग के
(घ) प्रगतिवादी युग के

(103) श्यामसुन्दर दास की शैली है [2018]
(क) व्यास
(ख) समास
(ग) भावात्मक
(घ) व्यंग्यात्मक

(104) किसके गद्य में करुण संवेदना की प्रधानता है? [2018]
(क) माखनलाल चतुर्वेदी के
(ख) पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ के
(ग) जयशंकर प्रसाद के
(घ) महादेवी वर्मा के

(105) निबन्ध प्रौढ़तम स्तर तक पहुँचा [2018]
(क) द्विवेदी युग में
(ख) शुक्ल युग में
(ग) शुक्लोत्तर युग में
(घ) प्रयोगवादी युग में

(106) किस रचना के लेखक प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हैं? [2018]
(क)’वैचारिकी, शोध और बोध
(ख) “भारत की मौलिक एकता’
(ग) विचार और वितर्क’
(घ) आत्मनेपद

(107) मोहन राकेश की रचना नहीं है [2018]
(क) “लहरों के राजहंस’
(ख) ‘बकलमखुद
(ग) ‘तट की खोज’
(घ), ‘समय-सारथी

(108) ‘शिकायत मुझे भी है’ निबन्ध-संग्रह है– [2018]
(क) धर्मवीर भारती का
(ख) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का
(ग) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का
(घ) हरिशंकर परसाई का

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UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक
Number of Questions 208
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

[ ध्यान दें: नीचे दिये गये बहुविकल्पीय प्रश्नों के विकल्पों में सामान्य से अधिक काले छपे विकल्प को उचित विकल्प समझे।] ।
उचित विकल्प का चयन करें-

(1) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आदिकाल से सम्बन्धित नहीं है?
(क) युद्धों का सजीव वर्णन मिलता है
(ख) लक्षण ग्रन्थों की रचना हुई
(ग) रासो ग्रन्थ रचे गये।
(घ) श्रृंगार प्रधान काव्यों की रचना हुई

(2) दलपति विजय किस काल के कवि हैं ?
(क) भक्तिकाल
(ख) रीतिकाल
(ग) आधुनिककाल
(घ) आदिकाल

(3) निम्नलिखित में से लौकिक साहित्य के अन्तर्गत हैं-
(क) रेवंतगिरि रास
(ख) खुसरो की पहेलियाँ
(ग) खुमाण रासो
(घ) कामायनी

(4) हिन्दी के प्रथम कवि के रूप में मान्य हैं [2015, 16]
(क) शबरपा
(ख) चन्द
(ग) लुइपा
(घ) सरहपा

(5) इतिवृत्तात्मकता की प्रधानता’ किस युग की मुख्य विशेषता थी ?
(क) छायावाद काल
(ख) द्विवेदी युग
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) प्रगति काल

(6) हिन्दी साहित्य का’आदिकाल’ निम्नांकित में से किस साम्राज्य की समाप्ति के समय से प्रारम्भ होता है ?
(क) अंग्रेजी साम्राज्य
(ख) वर्धन साम्राज्य
(ग) गुप्त साम्राज्य
(घ) मौर्य साम्राज्य

(7) जैन साहित्य का सबसे अधिक लोकप्रिय रूप है
(क) रासो ग्रन्थ
(ख) रीति ग्रन्थ
(ग) रास ग्रन्थ
(घ) लौकिक ग्रन्थ

(8) आदिकाल का एक अन्य नाम है-
(क) स्वर्ण युग
(ख) सिद्ध-सामन्त काल
(ग) श्रृंगार काल
(घ) भक्तिकाल

(9) वीरगाथाकाल के ग्रन्थों की भाषा है-
(क) अवधी
(ख) मैथिली
(ग) डिंगल-पिंगल
(घ) अपभ्रंश

(10) इनमें से हिन्दी का प्राचीनतम (प्रथम) महाकाव्य कौन-सा है ? [2010, 11]
था
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ आदिकाल का है ? [2013]
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) पद्मावत
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) प्रिय प्रवास

(11) निम्नलिखित में से कौन आदिकाल के कवि नहीं हैं ?
(क) शारंगधर
(ख) जगनिक
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) चन्दबरदाई

(12) ‘बीसलदेव रासो’ रचना है [2010]
(क) नरपति नाल्ह की
(ख) भट्ट केदार की
(ग) जगनिक की
(घ) दलपति विजय की

(13) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ आदिकाल का है ? [2010, 13]
(क) सूरसागर
(ख) पद्मावत
(ग) बीसलदेव रासो
(घ) आँसू

(14) हिन्दी साहित्य के आदिकाल की रचना नहीं है [2013, 14]
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) परमाल रासो
(ग) पद्मावत
(घ) विद्यापति पदावली

(15) आदिकाल की रचना नहीं है [2013]
(क) उक्ति-व्यक्ति प्रकरण
(ख) जयचंद प्रकाश
(ग) राउल वेल
(घ) मृगावती

(16) किस आलोचक ने ‘पृथ्वीराज रासो’ को अर्द्ध प्रामाणिक रचना माना है ?
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) डॉ० गणपतिचन्द्र गुप्त

(17) निम्नलिखित में कौन-सी प्रवृत्ति आदिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) संसार की असारता का प्रतिपादन
(ख) अलंकरण के सभी साधन अपनाये गये
(ग) श्रृंगार का पूर्ण बहिष्कार
(घ) युद्धों का सुन्दर और सजीव वर्णन

(18) कौन-सा कथन आदिकाल ( वीरगाथा काल) से सम्बन्धित है ?
(क) आश्रयदाताओं के युद्धोत्साह, केलि-क्रीड़ा आदि के बड़े सरस वर्णन हैं।
(ख) काव्य-भाषा के रूप में खड़ी बोली हिन्दी को मान्यता मिली
(ग) भारतीय काव्य-शास्त्र का हिन्दी में अवतरण हुआ
(घ) ईश्वर की लीलाओं का ज्ञान तथा लोकोन्मुखी भावनाओं का प्रतिपादन

(19) भाट यो चारण कवि क्या करते थे ?
(क) युद्ध-काल में वीर रस के गीत गा-गाकर सेना को प्रोत्साहित करते थे
(ख) अपने आश्रयदाताओं की वीरता का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन करते थे
(ग) अपने आश्रयदाताओं की वीरता के गुणगान सम्बन्धी गीत बनाते एवं सुनाते थे
(घ) उपर्युक्त तीनों

(20) कौन-सी प्रवृत्ति आदिकाल के काव्य में वर्णित साहित्य से सम्बन्धित है ?
(क) जीवन की नश्वरता का वर्णन
(ख) युद्ध का विशद वर्णन
(ग) श्रृंगारिक बातों का वर्णन
(घ) काव्य में अलंकरण का वर्णन

(21) कौन-से व्यक्ति ‘नाथ’ साहित्य के व्यवस्थापक (प्रवर्तक) माने जाते हैं ?
(क) विश्वनाथ
(ख) रवीन्द्रनाथ
(ग) जगन्नाथ
(घ) गोरखनाथ

(22) कौन-सा ग्रन्थ रासो परम्परा का श्रेष्ठ महाकाव्य हैं ?
(क) खुमाण रासो
(ख) बीसलदेव रासो
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) परमाल रासो

(23) कौन-सी रचना वीर गाथात्मक है ?
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) विद्यापति
(ग) खुसरो की पहेलियाँ
(घ) साहित्य लहरी

(24) ‘पृथ्वीराज रासो’ में प्रधानता है [2012]
(क) श्रृंगार रस की
(ख) वीर रस की
(ग) शान्त रस की
(घ) हास्य रस की

(25) वीरगाथा काल में लिखित कौन-सी रचना है ?
(क) रस विलास
(ख) ललित ललाम
(ग) कवित्त रत्नाकर
(घ) सन्देश रासक

(26) निर्गुणभक्ति की ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रधान (प्रतिनिधि) कवि हैं [2010, 13]
(क) रैदास
(ख) कबीरदास
(ग) मलूकदास
(घ) नानक

(27) निम्नलिखित में से कौन ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) नानक
(ख) दादू
(ग) केशव
(घ) मलूकदास

(28) किसे खड़ी बोली का प्रथम कवि माना जाता है ?
(क) अब्दुर्रहमान
(ख) नरपति नाल्ह
(ग) अमीर खुसरो
(घ) धनपाल

(29) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ज्ञानाश्रयी शाखा का नहीं है ? [2009]
(क) मलिक मुहम्मद जायसी
(ख) रैदास
(ग) नानक
(घ) कबीर

(30) “भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे।” प्रस्तुत कथन किस लेखक का है ? [2015]
(क) नन्ददुलारे वाजपेयी
(ख) रामचन्द्र शुक्ल
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) रामविलास शर्मा

(31) निर्गुण काव्य-धारा की प्रवृत्ति है|
(क) वात्सल्य रस की प्रधानता
(ख) प्रकृति पर चेतन सत्ता का आरोप
(ग) रुढ़ियों एवं बाह्य आडम्बर का विरोध
(घ) आश्रयदाता की प्रशंसा

(32) ‘कबीरदास’ भक्तिकाल की किस धारा के कवि हैं ?
(क) सन्त काव्यधारा
(ख) प्रेम काव्यधारा
(ग) राम काव्यधारा
(घ) कृष्ण काव्यधारा

(33) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ज्ञानाश्रयी शाखा से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) कबीर
(ख) नानक
(ग) रैदास
(घ) कुतुबन

(34) सन्त काव्यधारा के कवि नहीं हैं [2013]
(क) कबीर
(ख) रैदास
(ग) कुतुबन
(घ) दादू दयाल

(35) निम्नलिखित में से भक्तिकालीन कवि कौन हैं ? [2013]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) कुम्भनदास
(ग) हरिऔध
(घ) महादेवी

(36) इस शाखा में केवल सौन्दर्य वृत्ति से प्रेरित स्वच्छन्द प्रेम तथा प्रगाढ़ प्रणय-भावना है-
(क) कृष्णभक्ति शाखा
(ख) रामभक्ति शाखा
(ग) प्रेमाश्रयी शाखा
(घ) ज्ञानाश्रयी शाखा

(37) निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी शाखा (सूफी काव्यधारा ) के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं
(क) कुतुबन
(ख) मंझन
(ग) उस्मान
(घ) जायसी

(38) काव्य साहित्य में कौन-सा काल स्वर्ण-काल कहलाता है ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिककाल

(39) ‘रुनकता’ नामक स्थान सम्बन्धित है [2013]
(क) जयशंकर प्रसाद से
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ से
(ग) कबीरदास से
(घ) सूरदास से

(40) प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा का सम्बन्ध किससे है ? [2013]
(क) कृष्णभक्ति
(ख) सगुणभक्ति
(ग) निर्गुणभक्ति
(घ) रामभक्ति

(41) कृष्णभक्ति शाखा के कवि नहीं हैं [2013, 14]
(क) सूरदास
(ख) नन्ददास
(ग) नाभादास
(घ) जगन्नाथ दास

(42) कृष्णभक्ति शाखा के कौन कवि नहीं हैं ?
(क) मलिक मुहम्मद जायसी
(ख) तुलसीदास
(ग) सूरदास
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(43) निम्नलिखित कवियों में वल्लभाचार्य का शिष्य कौन था ?
(क) भूषण
(ख) भिखारीदास
(ग) रघुराज सिंह
(घ) कृष्णदास

(44) कृष्णभक्ति शाखा का प्रथम कवि कहते हैं
(क) सूरदास को
(ख) विद्यापति को
(ग) मीराबाई को
(घ) रसखान को

(45) वात्सल्य रस के सम्राट कहे जाते हैं| या ‘श्रृंगार’ और ‘वात्सल्य रस के अमर कवि हैं [2015]
(क) तुलसीदास
(ख) सूरदास
(ग) परमानन्ददास
(घ) कुम्भनदास

(46) कौन सगुण भक्ति शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) सूरदास
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) तुलसीदास
(घ) ये सभी

(47) कृष्णभक्ति काव्यधारा के अन्तर्गत आते हैं-
(क) सभी ब्रजभाषा के कवि
(ख) भक्तिकाल के कवि
(ग) अष्टछाप के कवि
(घ) सभी श्रृंगारिक रचनाकार

(48) मर्यादा पुरुषोत्तम राम की अवधारणा दी
(क) वाल्मीकि
(ख) तुलसीदास
(ग) कुम्भनदास
(घ) नन्ददास

(49) राम भक्ति शाखा से सम्बन्धित हैं [2009]
(क) कुम्भनदास
(ख) परमानन्ददास
(ग) नाभादास
(घ) चतुर्भुजदास

(50) हिन्दुओं के लिए कौन-से कवि आदरणीय हैं ?
(क) कबीर
(ख) रहीम
(ग) सूरदास
(घ) तुलसीदास

(51) तुलसीदास ने ‘श्रीरामचरितमानस’ की रचना की है [2013]
(क) ब्रजभाषा में
(ख) भोजपुरी में
(ग) अवधी में
(घ) खड़ी बोली में

(52) कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) जीवन की नश्वरता का वर्णन
(ख) ईश्वर के नाम-स्मरण की महत्ता
(ग) सहयोग और समन्वय की भावना
(घ) नारी को भोग्य सम्पत्ति के रूप में प्रस्तुत करना

(53) कुम्भनदास, परमानन्द दास, क्षीत स्वामी, गोविन्द स्वामी, चतुर्भुज दास, नन्ददास तथा सूरदास को किस श्रेणी का कवि माना जाता था ?
(क) सन्त कवि
(ख) गायक कवि
(ग) महान् कवि
(घ) अष्टछाप के कवि

(54) ‘अष्टछाप’ के कवियों का सम्बन्ध भक्तिकाल की किस शाखा से है ? [2015, 18]
(क) ज्ञानाश्रयी शाखा
(ख) प्रेमाश्रयी शाखा
(ग) कृष्णभक्ति शाखा
(ग) रामभक्ति शाखा

(55) मलिक मुहम्मद जायसी, मंझन तथा कुतुबन किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) ज्ञानाश्रयी निर्गुण काव्यधारा
(ख) सगुण भक्ति काव्यधारा
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण काव्यधारा
(घ) इनमें से कोई नहीं

(56) निम्नलिखित में से कौन-सी कवि प्रेमाश्रयी शाखा से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) जायसी
(ख) मंझन
(ग) चन्दबरदाई
(घ) कुतुबन

(57) ‘प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा’ का सम्बन्ध किससे था ?
(क) कृष्ण-भक्ति
(ख) सगुण भक्ति
(ग) निर्गुण भक्ति
(घ) इनमें से कोई नहीं

(58) लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम का प्रतिपादन किस काव्यधारा के काव्य के अन्तर्गत किया गया है ?
(क) निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(घ) सगुण भक्ति काव्यधारा

(59) रसखान किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) प्रेमाश्रयी काव्यधारा
(ख) निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(ग) सगुण भक्ति काव्यधारा
(घ) कृष्णभक्ति काव्यधारा

(60) गोस्वामी तुलसीदास केशवदास, हृदयराम तथा प्राणचन्द किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) सगुण भक्ति काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) ज्ञानाश्रयी भक्ति काव्यधारी।
(घ) रामभक्ति काव्यधारा

(61) सखा-भाव की भक्ति-भावना की प्रधानता तथा श्रृंगार एवं वात्सल्य रस की प्रधानता किस काव्यधारा की मुख्य विशेषताएँ हैं ?
(क) प्रेमाश्रयी काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) सगुण भक्ति काव्यधारा
(घ) रामभक्ति काव्यधारा

(62) सेवक-सेव्य भाव की भक्ति की प्रधानता है-
(क) सन्त काव्यधारा में ।
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा में
(ग) रामभक्ति काव्यधारा में
(घ) सगुण भक्ति काव्यधारा में

(63) ‘भक्तिकाल’ का समय आचार्य रामचन्द्रशुक्ल ने माना है [2012]
(क) संवत् 1000 से संवत् 1375 तक
(ख) संवत् 1374 से संवत् 1700 तक
(ग) संवत् 1040 से संवत् 1370 तक
(घ) संवत् 950 से संवत् 1440 तक

(64) निम्नांकित में से कौन प्रेमाश्रयी शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) जायसी
(ख) सूरदास
(ग) मंझन
(घ) कुतुबन

(65) भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा के कवि हैं [2012]
(क) कुम्भनदास
(ख) दादूदयाल
(ग) मंझन
(घ) नन्ददास

(66) निम्नलिखित में से कौन-सी प्रवृत्ति ज्ञानाश्रयी शाखा के काव्य में नहीं पायी जाती ?
(क) गुरु-गोविन्द की महत्ता
(ख) समाज-सुधार का दृष्टिकोण
(ग) नायक-नायिका का वर्णन
(घ) आडम्बर का विरोध

(67) निम्नलिखित में एक रचना तुलसीदास की नहीं है; उसका नाम लिखिए
(क) श्रीकृष्णगीतावली
(ख) साहित्यलहरी
(ग) विनयपत्रिका
(घ) पार्वतीमंगल

(68) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना भक्तिकाल में लिखी गयी है ?
(क) कामायनी
(ख) सूरसागर
(ग) भारतभारती
(घ) उद्धवशतक

(69) गोस्वामी तुलसीदास रचित ‘विनयपत्रिका’ की भाषा है [2010, 16]
(क) अवधी
(ख) मैथिली
(ग) ब्रज
(घ) खड़ी बोली

(70) गोस्वामी तुलसीदास के बचपन का नाम था [2012, 13]
(क) तुकाराम
(ख) आत्माराम
(ग) सीताराम,
(घ) रामबोला

(71) रामचन्द्र शुक्ल ने भक्तिकाल को सर्वश्रेष्ठ लोकवादी कवि किसे कहा है ?
(क) कबीरदास
(ख) सूरदास
(ग) मलिक मुहम्मद जायसी
(घ) तुलसीदास

(72) निम्नलिखित में से किस कवि का काव्य श्रीमद्भागवत से अत्यधिक प्रभावित है ?
(क) केशव
(ख) सूर
(ग) तुलसी
(घ) बिहारी

(73) निम्नलिखित में से किस कवि को बाल-वर्णन क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है ?
(क) तुलसीदास
(ख) बिहारी
(ग) सूरदास
(घ) केशवदास

(74) निम्नलिखित कवियों में स्वामी रामानन्द का शिष्य कौन था ?
(क) नानक
(ख) मलूकदास
(ग) रैदास
(घ) कबीरदास

(75) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित है ?
(क)लोकोन्मुखी प्रवृत्ति के कारण इस काल की भक्ति-भावना लोक-प्रचलित है।
(ख) इस काल का समस्त साहित्य आक्रमण एवं युद्ध के प्रभावों की मन:स्थितियों का प्रतिफलन है।
(ग) हिन्दी साहित्य में आधुनिकता का सूत्रपात अंग्रेजों की साम्राज्यवादी शासन-प्रणाली के नवीन अनुभव से हुआ था
(घ) प्रगतिवाद के साथ-साथ मनुष्य के मन के यथार्थ को अभिव्यक्त करने वाली प्रयोगवादी धारा भी प्रवाहित हुई।

(76) “वह इस असार संसार को न देखने के वास्ते आँखें बन्द किये थे।” यह किसका कथन है? [2012]
(क) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का।
(ख) मलिक मुहम्मद जायसी का
(ग) भारतेन्दु हश्चिन्द्र का
(घ) जगन्नाथदास रत्नाकर का

(77) कौन-सा कथन भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा से सम्बद्ध है ?
(क) स्वच्छन्दवादी काव्य-रचनाओं का कला–पक्ष भी नवीनता लिये हुए होता है।
(ख) सामाजिक रूढ़ियों से मुक्त एवं सौन्दर्य-वृत्ति से प्रेरित स्वच्छन्द प्रेम तथा प्रगाढ़ प्रणय भावना ही इस काव्य का मूल विषय रहा है।
(ग) श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में वात्सल्य रस की प्रमुखता है।
(घ) कवियों ने अपने-अपने आश्रयदाताओं की इच्छा के अनुरूप श्रृंगार रस में ही अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं

(78) निम्नलिखित में से कौन सगुण भक्तिशाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) सूरदास
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) तुलसी
(घ) केशवदास

(79) निम्नांकित में रामभक्ति शाखा में कौन नहीं हैं ?
(क) तुलसीदास
(ख) चतुर्भुज दास
(ग) अग्रदास
(घ) नाभादास

(80) भक्तिकाल की रचनाओं में निम्नलिखित में से कौन सबसे अधिक लोकप्रिय है ?
(क) पद्मावत
(ख) श्रीरामचरितमानस
(ग) रामचन्द्रिका
(घ) सूरदास

(81) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ सगुण भक्तिधारा का श्रेष्ठ ग्रन्थ है ?
(क) कवितावली
(ख) साहित्य लहरी
(ग) श्रीरामचरितमानस
(घ) रामलला नहछू

(82) भक्तिकाल की काव्य नहीं है [2012]
(क) पद्मावत
(ख) पृथ्वीराज रासो
(ग) श्रीरामचरितमानस
(घ) सूरसागर

(83) भक्तिकाल की कृति है [2010]
(क) साकेत
(ख) पार्वती-मंगल
(ग) कामायनी
(घ) पृथ्वीराज रासो

(84) सामाजिक दृष्टि से घोर अध:पतन का काल था
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) छायावाद काल

(85) रीतिकाल से सम्बन्धित विशेषता है
(क) सख्य भाव की भक्ति की प्रधानता
(ख) समन्वयकारी भावना
(ग) भक्ति की प्रधानता
(घ) नारी-सौन्दर्य का विलासितापूर्ण चित्रण

(86) रीतिकाल का अन्य नाम है– [2010, 13]
(क) स्वर्णकाल
(ख) उद्भव कोल
(ग) श्रृंगार काल
(घ) संक्रान्तिकाल

(87) रीतिकाल के कवियों की रचनाओं में प्रधानता है-
(क) भावुकता की
(ख) समाज-सुधार की
(ग) अलंकार-प्रदर्शन की
(घ) राष्ट्रीय भावना की

(88) ‘कठिन काव्य का प्रेत’ कहा जाता है [2013, 16]
(क) घनानन्द को
(ख) ‘भूषण’ को
(ग) ‘केशव’ को
(घ) ‘पद्माकर’ को

(89) कौन-सा ग्रन्थ रीतिकालीन काव्य-परम्परा से सम्बन्धित है ?
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) बिहारी सतसई
(ग) दीपशिखा
(घ) रश्मिरथी

(90) निम्नलिखित में कौन-से कवि रीतिकाल के हैं ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामधारी सिंह दिनकर
(ग) मलूकदास
(घ) बिहारी

(91) रीतिबद्ध काव्यधारा के कवि हैं
(क) केशवदास
(ख) बिहारी
(ग) घनानन्द
(घ) बोधा

(92) ‘बिहारी सतसई’ की भाषा है [2013]
(क) अवधी
(ख) खड़ी बोली
(ग) ब्रजभाषा
(घ) मैथिली

(93) रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि हैं [2013, 14, 15]
(क) घनानन्द
(ख) सेनापति
(ग) बिहारी
(घ) वृन्द

(94) रीतिकाल की कृति है [2010, 11]
(क) रसमंजरी
(ख) प्रेमसागर
(ग) आर्या सप्तशती
(घ) बिहारी सतसई

(95) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन रीतिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) भागवत धर्म के प्रचार तथा प्रसार के परिणामस्वरूप भक्ति आन्दोलन का सूत्रपात हुआ था
(ख) वीरगाथाओं की रचना प्रवृत्ति की प्रधानता थी
(ग) सामान्य रूप से श्रृंगारप्रधान लक्षण-ग्रन्थों की रचना हुई।
(घ) गुरु और गोविन्द की महत्ता का प्रतिपादन हुआ

(96) निम्नलिखित में रीतिमुक्त कवि कौन हैं ?
(क) महाकवि देव
(ख) आलम
(ग) मतिराम
(घ) पद्माकर

(97) रीतिकाल की निम्नलिखित प्रमुख प्रवृत्तियों में से कौन-सी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है ?
(क) राज-प्रशस्ति
(ख) श्रृंगारिकता
(ग) रीति निरूपण
(घ) नीति

(98) निम्नलिखित कवियों में से रीतिकाल का कवि कौन नहीं है ?
(क) घनानन्द
(ख) मतिराम
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) पद्माकर

(99) ‘कवितावर्धिनी’ साहित्यिक संस्था की स्थापना की थी [2016]
(क) जयशंकर प्रसाद ने
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी ने।
(ग) महादेवी वर्मा ने
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने।

(100) भारतेन्दु युग की रचना है [2010]
(क) प्रेम-माधुरी
(ख) कामायनी
(ग) निरुपमा
(घ) युगवाणी

(101) ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ पत्रिका के सम्पादक थे–
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(102) साहित्य सुधानिधि’ के सम्पादक हैं [2013]
(क) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(103) ‘हरिऔध’ का जन्म-स्थान है [2013]
(क) एबटाबाद
(ख) निजामाबाद
(ग) काशी
(घ) फर्रुखाबाद

(104) मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक काल के किस युग से सम्बन्धित हैं ?
(क) शुक्ल युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादी युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(105) मैथिलीशरण गुप्त का प्रथम काव्य-संग्रह है [2012]
(क) अनद्य
(ख) भारत भारती
(ग) पंचवटी
(घ) सिद्धराज

(106) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ किस युग के कवि हैं ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) प्रगतिवाद युग
(ग) द्विवेदी युग
(घ) छायावाद युग

(107) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ द्विवेदी युग से सम्बन्धित है ?
(क) कामायनी
(ख) पल्लव
(ग) साकेत
(घ) यामा

(108) निम्नलिखित में से द्विवेदी युग की रचना है [2018]
(क) कामायनी
(ख) तार-सप्तक
(ग) प्रिय-प्रवास
(घ) ग्राम्या

(109) द्विवेदी युग में लिखी गयी रचना है
(क) सान्ध्यगीत
(ख) गीतावली
(ग) पंचवटी
(घ) कवि प्रिया

(110) द्विवेदी युग का महाकाव्य नहीं है [2013]
(क) प्रियप्रवास
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) द्वापर

(111) श्रृंगार के पूर्ण बहिष्कार से सौन्दर्य को स्रोत सूख गया था
(क) भारतेन्दु युग में
(ख) द्विवेदी युग में
(ग) छायावाद युग में
(घ) रीतिकाल में

(112) ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’—यह प्रसिद्ध पंक्ति किस काल की देन है ?
(क) छायावादोत्तर काल
(ख) भारतेन्दु काल
(ग) छायावादी काल
(घ) रीतिकाल

(113) हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल’ का सूत्रपात किस शासन-काल में हुआ ?
(क) स्व-शासन-काल
(ख) ब्रिटिश शासन-काल
(ग) मुगल शासन-काल
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(114) हिन्दी साहित्य में आधुनिकता का प्रवर्तक साहित्यकार किसे माना जाता है ?
(क) भूषण
(ख) भारतेदु हरिश्चन्द्र
(ग) मतिराम
(घ) गंग कवि

(115) हिन्दी जागरण के अग्रदूत थे-
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) मुंशी प्रेमचन्द

(116) निम्नांकित में से कौन-सी रचना भारतेन्दु युग में लिखी गयी है ?
(क) प्रेममाधुरी
(ख) कामायनी
(ग) निरुपमा
(घ) युगवाणी

(117) निम्नलिखित में से उस ग्रन्थ का नाम लिखिए जो ‘हरिऔध’ जी का नहीं है
(क) चोखे चौपदे
(ख) वैदेही वनवास
(ग) चित्राधार
(घ) प्रियप्रवास

(118) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावादी नहीं है ? [2011]
(क) महादेवी वर्मा
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(119) निम्नलिखित में से छायावादयुगीन कवि हैं [2011, 17]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर
(ग) रामधारीसिंह ‘दिनकर’
(घ) कबीरदास

(120) निम्नलिखित में से कौन-सा छायावादी कवि है?
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला
(ख) भूषण
(ग) बिहारी
(घ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

(121) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन छायावाद से सम्बन्धित है ?
(क) सौन्दर्य का स्रोत सूख गया था
(ख) ब्रजभाषा का एकछत्र साम्राज्य था।
(ग) सामाजिक समस्याओं का चित्रण हुआ
(घ) मानव की अन्तरात्मा के सौन्दर्य का उद्घाटन हुआ

(122) छायावाद युग का समय कब से कब तक माना जाता है?
(क) 1938-1943 ई०
(ख) 1868-1900 ई०
(ग) 1919-1938 ई०
(घ) 1900-1922 ई०

(123) ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से विभूषित किया गया है [2010]
या
राष्ट्रकवि का सम्मान मिला है। [2018]
(क) रामकुमार वर्मा को
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को
(ग) महादेवी वर्मा को
(घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ को

(124) छायावादी कविता के ह्रास का सबसे बड़ा कारण था-
(क) भक्ति-भावना
(ख) विदेशी शासन के दमन-चक्र की पीड़ा
(ग) नारी को भोग्य सम्पत्ति का रूप देना
(घ) लक्षण ग्रन्थों की रचना

(125) छायावादी काव्य की विशेषता नहीं है-
(क) रहस्यवाद की प्रधानता
(ख) स्वदेश प्रेम की अभिव्यक्ति
(ग) मानवतावादी दृष्टिकोण
(घ) व्यक्तिवादी भावना एवं अतिशय भावुकता

(126) छायावाद की मुख्य विशेषता है– [2010, 11]
(क) प्रकृति-चित्रण
(ख) युद्धों का वर्णन
(ग) यथार्थ-चित्रण
(घ) भक्ति की प्रधानता

(127) ‘छायावाद’ की विशेषता है
(क) इतिवृत्तात्मकता
(ख) शृंगारिक भावना
(ग) सौन्दर्य एवं प्रेम
(घ) उपदेशात्मक वृत्ति

(128) छायावादी कवि हैं– [2010]
(क) सुमित्रानन्दन पन्त
(ख) नागार्जुन
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

(129) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावादी है ? [2009]
(क) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(ख) श्रीधर पाठक
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) मैथिलीशरण गुप्त

(130) प्रकृति के सुकुमार कवि कहलाते हैं [2011]
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा

(131) छायावादी काव्य की वृहत्-त्रयी के रचनाकार नहीं हैं [2012]
(क) प्रसाद
(ख) पन्त
(ग) निराला
(घ) महादेवी

(132) ‘प्रसाद’ का काव्य प्रवृत्ति-निवृत्ति मिश्रित है [2013]
(क) ‘लहर’ में
(ख) “आँसू’ में
(ग) ‘झरना’ में
(घ) ‘कामायनी’ में

(133) कौन-सा नया अलंकार छायावाद की देन है ?
(क) अनुप्रास
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) सन्देह
(घ) मानवीकरण

(134) कौन-सा कवि छायावाद के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला
(ग) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर
(घ) महादेवी वर्मा

(135) आधुनिक युग की मीरा हैं [2013]
(क) महादेवी वर्मा
(ख) सुभद्राकुमारी चौहान
(ग) सुमित्रा कुमारी सिन्हा
(घ) इनमें से कोई नहीं

(136) इतिवृत्तात्मकता की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप किस वाद का प्रादुर्भाव हुआ ?
(क) मानवतावाद
(ख) छायावाद
(ग) प्रगतिवाद
(घ) प्रयोगवाद

(137) ‘पन्त’ जी के उस काव्य-ग्रन्थ का नाम लिखिए जिसमें उनकी सांस्कृतिक एवं दार्शनिक विचारधारा व्यक्त हुई है-
(क) चिदम्बरा
(ख) उत्तरा
(ग) पल्लव
(घ) लोकायतन

(138) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कौन-सी पत्रिका प्रकाशित की थी ?
(क) कविवचन सुधा
(ख) सरस्वती
(ग) कल्पना
(घ) ज्ञानोदय

(139) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना छायावाद युग में लिखी गयी है ?
(क) प्रेम-माधुरी
(ख) उद्धव शतक
(ग) चित्राधार
(घ) सूरसारावली

(140) ‘कामायनी’ और ‘झरना’ किस युग की रचनाएँ हैं ? [2011, 13]
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादी युग
(घ) प्रगतिवादी युग

(141) ‘कामायनी’ महाकाव्य में सर्गों की संख्या है [2013, 14]
(क) नौ
(ख) बारह
(ग) पन्द्रह
(घ) सत्रह

(142) निम्नलिखित में कौन-सा कथन छायावाद से सम्बन्धित है ?
(क) इस काव्य में लौकिक वर्णनों के माध्यम से अलौकिकता की व्यंजना की गयी है।
(ख) धार्मिक क्षेत्र में रूढ़िवाद और बाह्याडम्बर का विरोध किया गया है।
(ग) इस काव्य में मूलतः सौन्दर्य और प्रेम-भावना मुखरित हुई है।
(घ) इस काव्य में भाव-पक्ष की अपेक्षा कला-पक्ष की प्रधानता है।

(143) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आधुनिक काल से सम्बन्धित है ?
(क) हिन्दी काव्य कवियों के स्वच्छन्द और समर्थ व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है।
(ख) विलास के साधनों से हीन वर्ग कर्म एवं आचार के स्थान में अन्धविश्वासी हो चला था
(ग) साहित्य मानव-समाज की भावनात्मक स्थिति और गतिशील चेतना की अभिव्यक्ति है।
(घ) उपर्युक्त सभी

(144) निम्नलिखित उद्धरणों में कौन-सा उद्धरण आधुनिक काल से सम्बन्धित है ?
(क) जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है।
(ख) लौकिक (देशभाषा) साहित्य देशभाषा डिंगल में उपलब्ध होता है।
(ग) हिन्दी साहित्य में मार्क्स के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के दर्शन को प्रगतिवाद और फ्रायड के मनोविश्लेषण को प्रयोगवाद की संज्ञा दी गयी।
(घ) रहस्यवाद के दर्शन से इस धारा के अधिकांश कवियों का भक्त कवियों में अन्तर्भाव हो जाता है।

(145) “विदेशी सत्ता प्रतिष्ठित हो जाने के कारण देश की जनता में गौरव, गर्व और उत्साह का अवसर न रह गया था।” यह कथन निम्नलिखित लेखकों में से किस लेखक का है ?
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा
(घ) डॉ० नगेन्द्र

(146) ‘वह तोड़ती पत्थर’ नामक कविता किस प्रकार की है ?
(क) प्रयोगवादी
(ख) रीतिकालीन
(ग) द्विवेदीयुगीन
(घ) प्रगतिवादी

(147) प्रगतिवादी कवि नहीं है [2010]
(क) शिवमंगल सिंह सुमन
(ख) रामविलास शर्मा
(ग) नागार्जुन
(घ) भवानीप्रसाद मिश्र

(148) प्रगतिवादी कवि कौन है ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) पाल भसीन
(ग) नागार्जुन
(घ) प्रभाकर माचवे

(149) काव्य में हालावाद के प्रवर्तक हैं
(क) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) हरिवंश राय बच्चन’

(150) निम्नलिखित में प्रगतिवाद की कौन-सी समयावधि मान्य है ? [2009]
(क) 1900 ई० से 1918 ई०
(ख) 1918 ई० से 1936 ई०
(ग) 1936 ई० से 1943 ई०
(घ) 1943 ई० से 1953 ई०

(151) ‘काव्य जगत् में व्याप्त प्राचीन रूढ़ियों और मान्यताओं का स्पष्ट विरोध’ तथा काव्य के ‘मानवतावाद की प्रधानता’ किस काल की मुख्य विशेषता है ?
(क) द्विवेदी काल
(ख) प्रगतिवादी काल
(ग) छायावादी काल
(घ) प्रयोगवादी काल

(152) निम्नलिखित में छायावादोत्तर कवि कौन है ?
(क) हरिऔध
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) अज्ञेय

(153) ‘नयी कविता’ का शुभारम्भ हुआ [2012, 13]
(क) सन् 1954 में
(ख) सन् 1940 में
(ग) सन् 1950 में
(घ) सन् 1947 में

(154) नयी कविता की आधारभूत विशेषता है-
(क) आध्यात्मिक छाया-दर्शन
(ख) श्रृंगार की प्रधानता
(ग) किसी भी दर्शन से बँधी हुई नहीं है।
(घ) लाक्षणिकता

(155) किसी भी दर्शन के साथ बँधी हुई नहीं है-
(क) छायावादी कविता
(ख) नयी कविता
(ग) प्रगतिवादी कविता
(घ) रीतिकालीन कविता

(156) ‘कनुप्रियां’ किस युग से सम्बन्धित रचना है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) शुक्ल युग
(ग) छायावादी युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(157) प्रयोगवादी काव्यधारा के जनक (प्रवर्तक) हैं [2011, 12]
(क) ‘अज्ञेय’
(ख) “दिनकर’
(ग) “मुक्तिबोध’
(घ) “धूमिल’

(158) निम्नलिखित में कौन प्रगतिवादी कवि नहीं है ?
(क) प्रभाकर माचवे
(ख) मुक्तिबोध
(ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
(घ) अज्ञेय

(159) प्रयोगवाद काव्य के क्षेत्र में—
(क) चिरकाल तक रहा
(ख) शीघ्र ही समाप्ति की ओर चला गया
(ग) बहुत प्रसिद्ध हुआ
(घ) अधिक सफल नहीं हुआ।

(160) घोर वैयक्तिकता, अति यथार्थवाद, अति बौद्धिकता तथा सभी पुरानी मान्यताओं के विरुद्ध पूर्ण विद्रोह किस काव्यधारा की विशेषताएँ हैं ?
(क) छायावादी काव्यधारा
(ख) प्रगतिवादी काव्यधारा
(ग) प्रयोगवादी काव्यधारा
(घ) इनमें से कोई नहीं

(161) “प्रयोग सभी कालों के कवियों ने किया है। ::::किसी एक काल में किसी विशेष दिशा में प्रयोग करने की प्रवृत्ति स्वाभाविक ही है।” यह वक्तव्य निम्नलिखित रचनाकारों में किसका है ?
(क) निराला
(ख) अज्ञेय
(ग) प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा

(162) निम्नलिखित में से प्रयोगवादी कवि कौन है ?
(क) भूषण
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) बिहारी
(घ) अज्ञेय

(163) ‘अज्ञेय’ ने तार सप्तक’ का प्रकाशन किया [2009, 10, 11, 13, 14]
या
‘तारसप्तक’ का प्रकाशन वर्ष है– [2015, 16,17, 18]
(क) सन् 1947 में
(ख) सन् 1943 में
(ग) सन् 1950 में
(घ) सन् 1931 में

(164) तार सप्तक’ के सम्पादक हैं [2010, 13, 15, 17]
(क) विद्यानिवास मिश्र
(ख) मुक्तिबोध
(ग) अज्ञेय
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी

(165) तार सप्तक से सम्बन्धित हैं [2009]
(क) रामविलास शर्मा
(ख) नरेन्द्र शर्म
(ग) भवानीप्रसाद मिश्र
(घ) धर्मवीर भारती

(166) ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना कब हुई ? [2012, 18]
(क) सन् 1943 में
(ख) सन् 1954 में
(ग) सन् 1938 में
(घ) सन् 1936 में

(167) निम्नलिखित में कौन प्रेमाश्रयी शाखा का कवि नहीं है ?
(क) जायसी
(ख) बिहारीलाल
(ग) कुतुबन
(घ) मंझन

(168) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) सामाजिक दृष्टि से यह काल घोर अध:पतन का काल था
(ख) सिद्धों की वाममार्गी योग साधना की प्रतिक्रिया से नायपंथियों की हठयोग साधना आरम्भ हुई
(ग) जीवन का समन्वयवादी एवं मर्यादावादी दृष्टिकोण ही तुलसी की सबसे बड़ी देन है।

(169) विनय-पत्रिका किस भाषा की कृति है ? [2010]
(क) अवधी
(ख) ब्रजभाषा
(ग) खड़ी बोली हिन्दी
(घ) भोजपुरी

(170) कृष्णकाव्य-धारा के प्रतिनिधि कवि हैं [2011]
(क) मीरा
(ख) रसखान
(ग) परमानन्ददास
(घ) सूरदास

(171) कृष्णकाव्य-धारा के कवि नहीं हैं
(क) नन्ददास
(ख) चतुर्भुजदास
(ग) सूरदास
(घ) लालदास

(172) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ‘कृष्णभक्ति धारा’ से सम्बन्धित नहीं है ? (2009)
(क) सूरदास
(ख) नाभादास
(ग) कृष्णदास
(घ) नन्ददास

(173) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना वीरगाथात्मक नहीं है ? [2009]
(क) परमाल रासो
(ख) विद्यापति
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) बीसलदेव रासो

(174) निम्नलिखित में से कौन-सा भक्तिकाल का काव्य है ?
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) बीसलदेव रासो

(175) निम्नलिखित कवियों में बल्लभाचार्य के शिष्य कौन हैं ?
(क) रघुराज सिंह
(ख) बिहारीलाल
(ग) भूषण
(घ) कृष्णदास

(176) ‘भक्ति-आन्दोलन’ का श्रेय जाता है [2016]
(क) वल्लभाचार्य को
(ख) शंकराचार्य को
(ग) रामानुजाचार्य को
(घ) निम्बार्काचार्य को

(177) निम्नलिखित में से रीतिकाल का काव्य है [2009]
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) रामचन्द्रिका
(ग) कामायनी
(घ) विनय पत्रिका

(178) निम्नलिखित में कौन-सा कवि ‘रीतिमुक्त’ काव्यधारा का है ?
(क) चिन्तामणि
(ख) केशव
(ग) ठाकुर
(घ) देव

(179) मैथिलीशरण आधुनिक काल के किस युग से सम्बन्धित हैं ?
(क) शुक्लयुग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(180) निम्नलिखित में कौन-सी महादेवी वर्मा की रचना है ?
(क) धूप के धान
(ख) चाँद का मुँह टेढ़ा
(ग) सान्ध्य गीत
(घ) पल्लव

(181) शोषण का विरोध एवं शोषकों के प्रति घृणा किस काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ मानी गयी हैं?
(क) छायावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) प्रयोगवाद
(घ) नयी कविता

(182) नयी कविता के कवि हैं [2011]
(क) नरेन्द्र शर्मा
(ख) अज्ञेय
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(183) ज्ञानाश्रयी काव्यधारा के कवि नहीं हैं [2014]
(क) कबीरदास
(ख) मलूकदास
(ग) नन्ददास
(घ) रैदास

(184) अमीर खुसरो कवि हैं [2014]
(क) आदिकाल के
(ख) भक्तिकाल के
(ग) रीतिकाल के
(घ) आधुनिककाल के

(185) ‘रीतिकाल’ को ‘ श्रृंगारकाल’ नाम दिया है [2014]
या
रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के जिस काल को ‘रीतिकाल’ कहा है, उसे ‘ श्रृंगार काल’ नाम दिया है [2015, 18]
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ग) आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने।
(घ) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने

(186) रीतिकालीन कवि हैं [2014]
(क) मीराबाई
(ख) रसखान
(ग) द्विजदेव
(घ) विद्यापति

(187) ”हिन्दी साहित्य के हजार वर्षों में कबीर जैसा व्यक्तित्व लेकर कोई लेखक उत्पन्न नहीं हुआ।” यह कथन है [2014]
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का
(ख) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का
(ग) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का
(घ) आचार्य श्यामसुन्दर दास का

(188) रामचन्द्र शुक्ल ने जिस काल को ‘वीरगाथाकाल’ कहा है, उसे आदिकाल कहा है-[2014]
(क) राहुल सांकृत्यायन ने
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(घ) डॉ० धीरेन्द्र वर्मा ने

(189) ‘दूसरा सप्तक’ के कवि हैं [2014]
(क) रामविलास शर्मा
(ख) गिरिजा कुमार माथुर
(ग) केदारनाथ सिंह
(घ) भवानीप्रसाद मिश्र

(190) खड़ी बोली’ का प्रथम महाकाव्य है [2014]
(क) वैदेही वनवास
(ख) प्रिय प्रवास
(ग) साकेत
(घ) कामायनी

(191) ‘रामभक्ति शाखा’ के कवि नहीं हैं [2014]
(क) तुलसीदास
(ख) अग्रदास
(ग) चतुर्भुजदास
(घ) नाभादास

(192) ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है [2014]
(क) सुमित्रानन्दन पन्त को
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को
(घ) महादेवी वर्मा को

(193) ‘बसुआ गोविन्दपुर’ में जन्म हुआ था [2014]
(क) रत्नाकर का
(ख) सूरदास का
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का
(घ) बिहारी का

(194) सूकर खेत’ स्थान सम्बन्धित है [2014]
(क) कबीरदास से
(ख) सूरदास से
(ग) तुलसीदास से।
(घ) केशवदास से

(195) ‘आदिकाल’ का नाम ‘अपभ्रंश काल दिया है [2014]
(क) मिश्रबन्धु ने
(ख) राहुल सांकृत्यायन ने
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने।

(196) भवानीप्रसाद मिश्र कवि-रूप में संगृहीत हैं [2015]
(क) तारसप्तक में
(ख) दूसरा सप्तक में
(ग) तीसरा सप्तक में
(घ) चौथा सप्तक में

(197) हिन्दी साहित्य के ‘आदिकाल’ के लिए बीज-वपन काल’ नाम दिया है [2015, 16]
(क) रामचन्द्र शुक्ल ने
(ख) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(ग) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) डॉ० मोहन अवस्थी ने।

(198) चिन्तामणि कवि हैं [2016]
(क) रीतिसिद्ध वर्ग के
(ख) रीतियुक्त वर्ग के
(ग) रीतिरहित वर्ग के
(घ) रीतिबद्ध वर्ग के

(199) मैथिलीशरण गुप्त की रचना में राष्ट्रप्रेम की भावना परिलक्षित होती है– [2016]
(क) भारत-भारती में
(ख) जयद्रथ वध में
(ग) साकेत में
(घ) पंचवटी में

(200) ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ काव्य कृति है [2016]
(क) गजानन माधव मुक्तिबोध की
(ख) रामधारीसिंह ‘दिनकर’ की
(ग) गिरिजाकुमार माथुर की
(घ) धर्मवीर भारती की

(201) कला और बूढ़ा चाँद’ पर सुमित्रानन्दन पन्त को पुरस्कार प्राप्त हुआ [2016, 17]
(क) साहित्य अकादमी
(ख) ज्ञानपीठ
(ग) मंगलाप्रसाद
(घ) सोवियत लैण्ड नेहरू

(202) ‘अलंकार-रत्नाकर’ के लेखक हैं [2016]
(क) याकूब खाँ
(ख) जसवन्त सिंह
(ग) दलपति राय वंशीधर
(घ) भिखारीदास

(203) मध्वाचार्य का वाद हैं [2016]
(क) द्वैतवाद
(ख) अद्वैतवाद
(ग) द्वैताद्वैतवाद
(घ) शुद्धाद्वैतवाद

(204) ‘मुकरियाँ’ रचना है (2016)
(क) मधुकर कवि की
(ख) कुशल राय की
(ग) अमीर खुसरो की
(घ) भट्ट केदार की

(205) ‘प्रयोगवाद’ को ‘नई कविता’ की संज्ञा दी [2016]
(क) गिरिजाकुमार माथुर
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) अज्ञेय
(घ) धर्मवीर भारती

(206) आदिकाल को वीरगाथा काल का नामकरण किया [2016]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी ने।
(ख) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
(घ) मिश्रबन्धु ने

(207) प्रेम माधुरी के रचयिता हैं [2016]
(क) प्रतापनारायण मिश्र
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) लाला श्री निवासदास
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(208) मैथिलीशरण गुप्त की रचना है– [2016]
(क) प्रिय-प्रवास
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) लोकापतन

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