UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem (पारितन्त्र) are part of UP Board Solutions for Class 12 Biology. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem (पारितन्त्र).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Biology
Chapter Chapter 14
Chapter Name Ecosystem
Number of Questions Solved 31
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem (पारितन्त्र)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों को भरो –

  1. पादपों को ……. कहते हैं; क्योंकि ये कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण करते हैं।
  2. पादप (वृक्ष) द्वारा प्रमुख पारितंत्र का पिरामिड (संख्या का) …… प्रकार का है।
  3. एकजलीय पारितन्त्र में उत्पादकता का सीमा कारक ……. है।
  4. हमारे पारितन्त्र में सामान्य अपरदाहारी …….. हैं।
  5. पृथ्वी पर कार्बन का प्रमुख भण्डार ……. है।

उत्तर

  1. स्वपोषी
  2. उल्टा
  3. प्रकाश
  4. केंचुए तथा सूक्ष्मजीवी,
  5. समुद्र।

प्रश्न 2.
एक खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में सर्वाधिक संख्या किसकी होती है?
(क) उत्पादक
(ख) प्राथमिक उपभोक्ता
(ग) द्वितीयक उपभोक्ता
(घ) अपघटक
उत्तर
(घ) अपघटक।

प्रश्न 3.
एक झील में द्वितीय (दूसरा) पोषण स्तर होता है –
(क) पादपप्लवक
(ख) प्राणिप्लवक
(ग) नितलक (बैनथॉस)
(घ) मछलियाँ
उत्तर
(ख) प्राणिप्लवक।

प्रश्न 4.
द्वितीयक उत्पादक हैं –
(क) शाकाहारी (शाकभक्षी)
(ख) उत्पादक
(ग) मांसाहारी (मांसभक्षी)
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) शाकाहारी (शाकभक्षी)।

प्रश्न 5.
प्रासंगिक सौर विकिरण में प्रकाश संश्लेषणात्मक सक्रिय विकिरण का क्या प्रतिशत होता है?
(क) 100%
(ख) 50%
(ग) 1 – 5%
(घ) 2 – 10%
उत्तर
(घ) 2 – 10%.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट करें –
(क) चारण खाद्य श्रृंखला एवं अपरद खाद्य श्रृंखला
(ख) उत्पादन एवं अपघटन
(ग) ऊर्ध्ववर्ती (शिखरांश) एवं अधोवर्ती पिरामिड
उत्तर
(क) चारण खाद्य श्रृंखला एवं अपरद खाद्य श्रृंखला में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-1
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-2

(ख) उत्पादन एवं अपघटन में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-3

(ग) ऊर्ध्ववर्ती एवं अधोवर्ती पिरामिड में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-4

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट करें –
(क) खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल (वेब) (2009, 10, 11, 14, 16, 17)
(ख) लिटर (कर्कट) एवं अपरद
(ग) प्राथमिक एवं द्वितीयक उत्पादकता
उत्तर
(क) खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-5

(ख) लिटर (कर्कट) एवं अपरद में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-6

(ग) प्राथमिक एवं द्वितीयक उत्पादकता में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-7

प्रश्न 8.
पारिस्थितिक तन्त्र के घटकों की व्याख्या कीजिए। (2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18)
या
परिस्थितिक तन्त्र की परिभाषा लिखिए। (2018)
उत्तर
स्थलमण्डल, जलमण्डल तथा वायुमण्डल का वह क्षेत्र जिसमें जीवधारी रहते हैं जैवमण्डल (biosphere) कहलाता है। जैवमण्डल में पाए जाने वाले जैवीय (biotic) तथा अजैवीय (abiotic) घटकों के पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन पारितन्त्र (ecosystem) कहलाता है। पारितन्त्र या पारिस्थितिक तन्त्र (ecosystem) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम टैन्सले (Tansley, 1935) ने किया था। यदि जीवमण्डल में जैविक, अजैविक अंश तथा भूगर्भीय, रासायनिक व भौतिक लक्षणों को शामिल करें तो यह पारिस्थितिक तन्त्र बनता है।

पारिस्थितिक तन्त्र सीमित व निश्चित भौतिक वातावरण का प्राकृतिक तन्त्र है जिसमें जीवीय (biotic) तथा अजीवीय (abiotic) अंशों की संरचना और कार्यों का पारस्परिक आर्थिक सम्बन्ध सन्तुलन में रहता है। इसमें पदार्थ तथा ऊर्जा का प्रवाह सुनियोजित मार्गों से होता है।

पारिस्थितिक तन्त्र के घटक
पारिस्थितिक तन्त्र के मुख्यतया दो घटक होते हैं- जैविक तथा अजैविक घटक।
1. जैविक घटक (Biotic components) – पारिस्थितिक तन्त्र में तीन प्रकार के जैविक घटक होते हैं- स्वपोषी (autotrophic), परपोषी (heterotrophic) तथा अपघटक (decomposers)।
(अ) स्वपोषी घटक (Autotrophic component) – हरे पादप पारितन्त्र के स्वपोषी घटक होते हैं। ये सौर ऊर्जा तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में CO2 तथा जल से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा कार्बनिक भोज्य पदार्थों का संश्लेषण करते हैं। हरे पादप उत्पादक (producer) भी कहलाते हैं। हरे पौधों में संचित खाद्य पदार्थ दूसरे जीवों का भोजन है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-8

(ब) परपोषी घटक (Heterotrophic components) – ये अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, ये भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों पर निर्भर रहते हैं। इन्हें उपभोक्ता (consumer) कहते हैं। उपभोक्ता तीन प्रकार के होते हैं –

  1. प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता अथवा शाकाहारी (Herbivores) – ये उपभोक्ता अपना भोजन सीधे उत्पादकों (हरे पौधों) से प्राप्त करते हैं। इन्हें शाकाहारी कहते हैं। जैसे-गाय, बकरी, भैंस, चूहा, हिरन, खरगोश आदि।
  2. द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता अथवा मांसाहारी (Carnivores) – द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता भोजन के लिए शाकाहारी जन्तुओं का भक्षण करते हैं, इन्हें मांसाहारी कहते हैं जैसे- मेढक, साँप आदि।
  3. तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता – तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता से भोजन प्राप्त करते हैं जैसे- शेर, चीता, बाज आदि।
    कुछ जन्तु सर्वाहारी (omnivores) होते हैं, ये पौधों अथवा जन्तुओं से भोजन प्राप्त कर सकते हैं जैसे- कुत्ता, बिल्ली, मनुष्य आदि।

(स) अपघटक (Decomposers) – ये जीव कार्बनिक पदार्थों को उनके अवयवों में तोड़ देते हैं। ये मुख्यत: उत्पादक व उपभोक्ता के मृत शरीर का अपघटन करते हैं। इन्हें मृतजीवी भी कहते हैं। सामान्यतः ये जीवाणु व कवक होते हैं। इसके फलस्वरूप प्रकृति में खनिज पदार्थों का चक्रण होता रहता है। उत्पादक, उपभोक्ता व अपघटक सभी मिलकर बायोमास (biomass) बनाते हैं।

2. अजैविक घटक (Abiotic components) – किसी भी पारितन्त्र के अजैविक घटक तीन भागों में विभाजित किए जा सकते हैं –

  1. जलवायवीय घटक (Climatic components) – जल, ताप, प्रकाश आदि।
  2. अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic substances) – C, O, N, CO2 आदि। ये विभिन्न चक्रों के माध्यम से जैव-जगत् में प्रवेश करते हैं।
  3. कार्बनिक पदार्थ (Organic substances) – प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा आदि। ये अपघटित होकर पुनः सरल अवयवों में बदल जाते हैं।
    कार्यात्मक दृष्टि से अजैविक घटक दो भागों में विभाजित किए जाते हैं –

    1. पदार्थ (Materials) – मृदा, वायुमण्डल के पदार्थ जैसे- वायु, गैस, जल, CO2, O2, N2, लवण जैसे- Ca, S, P कार्बनिक अम्ल आदि।
    2. ऊर्जा (Energy) – विभिन्न प्रकार की ऊर्जा जैसे- सौर ऊर्जा, तापीय ऊर्जा, गतिज ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा आदि।

प्रश्न 9.
पारिस्थितिकी पिरैमिड को परिभाषित कीजिए तथा जैवमात्रा या जैवभार तथा संख्या के पिरैमिडों की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए। (2014, 15, 16, 17)
उत्तर
पारिस्थितिक पिरैमिड
पारितन्त्र में खाद्य श्रृंखला के विभिन्न पोषक स्तरों में जीवधारियों के सम्बन्धों का रेखीय चित्रण पारिस्थितिक पिरैमिड (pyramid) कहलाता है। पिरैमिड पारितन्त्र में जीव की संख्या, जीवभार तथा जैव ऊर्जा को प्रदर्शित करते हैं। इनका सर्वप्रथम प्रदर्शन एल्टन (Elton, 1927) ने किया था। इनमें सबसे नीचे का पोषी स्तर उत्पादक का होता है तथा सबसे ऊपर का पोषी स्तर सर्वोच्च उपभोक्ता का होता है।

(i) जीवभार का पिरैमिड (Pyramid of biomass) – जीव के ताजे (fresh) अथवा शुष्क (dry) भार के रूप में प्रत्येक पोषी स्तर को मापा जाता है। स्थलीय पारितन्त्र में उत्पादक का जीवभार सर्वाधिक होता है। अतः पिरैमिड सीधा रहता है। तालाबीय पारितन्त्र में उत्पादक का भार सबसे कम होता है। अतः पिरैमिड उल्टा बनता है। जीवभार को g/m2 में मापा जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-9
(ii) संख्या का पिरैमिड (Pyramid of numbers) – इस पिरैमिड में विभिन्न पोषी स्तर के जीवों की संख्या को प्रदर्शित करते हैं। घास तथा तालाब पारितन्त्र में संख्या का पिरैमिड सीधा (upright) होता है। वृक्ष पारितन्त्र में उत्पादकों की संख्या सबसे कम (एक वृक्ष) तथा अन्तिम उपभोक्ता की संख्या सर्वाधिक होती है अतः यह पिरैमिड उल्टा होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-10

प्रश्न 10.
प्राथमिक उत्पादकता क्या है? उन कारकों की संक्षेप में चर्चा कीजिए जो प्राथमिक उत्पादकता को प्रभावित करते हैं।
उत्तर
प्राथमिक उत्पादकता (Primary Productivity) – हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में रूपान्तरित करके कार्बनिक पदार्थों में संचित कर देते हैं। यह क्रिया पर्णहरित तथा सौर प्रकाश की उपस्थिति में CO2 तथा जल के उपयोग द्वारा होती है। इस क्रिया के फलस्वरूप जैव जगत में सौर ऊर्जा का निरन्तर निवेश होता रहता है।

प्रकाश संश्लेषण द्वारा संचित ऊर्जा को प्राथमिक उत्पादन (primary production) कहते हैं। एक निश्चित अवधि में प्रति इकाई क्षेत्र में उत्पादित जीवभार (biomass) या कार्बनिक पदार्थ की मात्रा को भार (g/m2) या ऊर्जा (kcal/m2) के रूप में अभिव्यक्त करते हैं। ऊर्जा की संचय दर को प्राथमिक उत्पादकता (primary productivity) कहते हैं। इसे kcal/m2/yr  या  g/m2/r में अभिव्यक्त करते हैं।

प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में हरे पौधों द्वारा कार्बनिक पदार्थों में स्थिर (fixed) सौर ऊर्जा की कुल मात्रा को सकल प्राथमिक उत्पादन (Gross Primary Production : G.PP) कहते हैं।

प्राथमिक उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Primary Production)-प्राथमिक उत्पादकता एक सुनिश्चित क्षेत्र में पादप प्रजातियों की प्रकृति पर निर्भर करती है। यह विभिन्न प्रकार के पर्यावरणीय कारकों (प्रकाश, ताप, वर्षा, आर्द्रता, वायु, वायुगति, मृदा का संघटन, स्थलाकृतिक कारक तथा सूक्ष्मजैवीय कारक आदि), पोषकों की उपलब्धता (मृदा कारक) तथा पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता पर निर्भर करती है। इस कारण विभिन्न पारितन्त्रों की प्राथमिक उत्पादकता भिन्न-भिन्न होती है। मरुस्थल में प्रकाश तीव्र होता है, ताप की अधिकता और जल की कमी होती है। अत: इन क्षेत्रों में जल की कमी के कारण पोषकों की उपलब्धता कम रहती है। इस प्रकार प्राथमिक उत्पादकता प्रभावित होती है। इसके विपरीत उपयुक्त प्रकाश एवं ताप की उपलब्धता के कारण शीतोष्ण प्रदेशों में उत्पादन अधिक होता है।

प्रश्न 11.
अपघटन की परिभाषा दीजिए तथा अपघटन की प्रक्रिया एवं उसके उत्पादों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
अपघटन (Decomposition) – अपघटकों (decomposers) जैसे- जीवाणु, कवक आदि द्वारा जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों जैसे-कार्बन डाइऑक्साइड, जल एवं पोषक तत्त्वों में विघटित करने की प्रक्रिया को अपघटन (decomposition) कहते हैं।

पादपों के मृत अवशेष जैसे- पत्तियाँ, छाल, फूल आदि तथा जन्तुओं के मृत अवशेष, मलमूत्र आदि को अपरद (डेट्राइटस-detritus) कहते हैं। अपघंटन की प्रक्रिया के महत्त्वपूर्ण चरण खण्डन, निक्षालन, अपचयन, ह्यूमस निर्माण तथा पोषक तत्त्वों का मुक्त होना है। केंचुए आदि को अपरदाहारी (detritivores) कहते हैं। ये अपरदे को छोटे-छोटे कणों में खण्डित करते हैं। इस प्रक्रिया को खण्डन (fragmentation) कहते हैं।

निक्षालन (leaching) प्रक्रिया में जल में घुलनशील अकार्बनिक पोषक मृदा में प्रवेश कर जाते हैं। शेष पदार्थ का अपचय जीवाणु तथा कवक द्वारा होता है। ह्यूमस निर्माण (humification) के फलस्वरूप गहरे भूरे-काले रंग का भुरभुरा पदार्थ ह्युमस (humus) बनता है। खनिजीकरण (mineralization) के फलस्वरूप ह्युमस (humus) से पोषक तत्त्व मुक्त हो जाते हैं। गर्म तथा आर्द्र वातावरण में अपघटन प्रक्रिया तीव्र होती है।

प्रश्न 12.
एक पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा प्रवाह का वर्णन कीजिए। (2015)
उत्तर
पारितन्त्र में ऊर्जा प्रवाह
पारितन्त्र को ऊर्जा मुख्य रूप से सौर ऊर्जा के रूप में प्राप्त होती है। सौर ऊर्जा का उपयोग हरे पादप (उत्पादक) ही कर सकते हैं। उत्पादक (हरे पौधे) प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर कार्बनिक पदार्थों के रूप में संचित करते हैं। खाद्य पदार्थ के रूप में ऊर्जा उत्पादक (producers) से विभिन्न स्तर के उपभोक्ताओं (consumers) को प्राप्त होती है। ऊर्जा को प्रवाह एकदिशीय (unidirectional) होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-11

प्रत्येक खाद्य स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का 90% जीवधारी की जैविक क्रियाओं में खर्च हो जाता है, केवल 10% संचित ऊर्जा ही अगले खाद्य स्तर को हस्तान्तरित होती है। हस्तान्तरण के समय भी कुछ ऊर्जा का ह्रास होता है। इस प्रकार एक खाद्य स्तर से दूसरे खाद्य स्तर में केवल 10% ऊर्जा हस्तान्तरित होती है।

उदाहरणार्थ – एक खाद्य श्रृंखला में यदि उत्पादक के पास 100% ऊर्जा है तो प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता (शाकाहारी) को केवल 10% ऊर्जा मिलेगी। उससे दूसरी श्रेणी के उपभोक्ता (मांसाहारी) को केवल 1% ऊर्जा मिलेगी। इसी प्रकार अगली श्रेणी के उपभोक्ता को 0.1% ऊर्जा मिलती है। इस प्रकार एक से दूसरी श्रेणी के जीव को केवल 10% ऊर्जा पिछली श्रेणी से प्राप्त हो सकती है। उपभोक्ता में सर्वाधिक ऊर्जा केवल शाकाहारियों को प्राप्य है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-12
पारितन्त्र में ऊर्जा को एकपक्षीय प्रवाह तथा अकार्बनिक पदार्थों के परिसंचरण का पारिस्थितिकी सिद्धान्त सभी जीवों एवं पर्यावरण पर लागू होता है।

प्रश्न 13.
एक पारिस्थितिक तन्त्र में एक अवसादीय चक्र की महत्त्वपूर्ण विशिष्टताओं का वर्णन करें।
उत्तर
एक पारिस्थितिक तन्त्र में एक अवसादीय चक्र की महत्त्वपूर्ण विशिष्टताएँ इस प्रकार हैं –

  1. अवसादी चक्र (जैसे- सल्फर एवं फॉस्फोरस चक्र) के भण्डार धरती के पटल में स्थित होते हैं।
  2. पर्यावरणीय घटक (जैसे- मिट्टी, आर्द्रता, pH, ताप आदि) वायुमण्डल में पोषकों के मुक्त होने की दर तय करते हैं।
  3. एक भण्डार की क्रियाशीलता, कमी को पूरा करने के लिए होती है जोकि अन्तर्वाह एवं बहिर्वाह की दर के असंतुलन के कारण संपन्न होती है।
  4. अवसादी चक्र की गति गैसीय चक्र की अपेक्षा बहुत धीमी होती है।
  5. वायुमण्डल में अवसादी चक्र का निवेश कार्बन निवेश की अपेक्षा बहुत कम होता है।
  6. अवसादी पोषक तत्त्वों की एक बहुत घनी मात्रा पृथ्वी के अन्दर अचलायमान स्थिति में संचित रहती है।

प्रश्न 14.
एक पारिस्थितिक तंत्र में कार्बन चक्रण की महत्त्वपूर्ण विशिष्टताओं की रूपरेखा प्रस्तुत करें।
उत्तर
एक पारितन्त्र में कार्बन चक्रण की महत्त्वपूर्ण विशिष्टताएँ इस प्रकार हैं –

  1. जीवों के शुष्क भार का 49% भाग कार्बन से बना होता है।
  2. समुद्र में 71% कार्बन विलेय के रूप में विद्यमान है। यह सागरीय कार्बन भण्डार वायुमण्डल में CO2 की मात्रा को नियमित करता है।
  3. जीवाश्मी ईंधन भी कार्बन के एक भण्डार का प्रतिनिधित्व करता है।
  4. कार्बन चक्र वायुमण्डल, सागर तथा जीवित एवं मृतजीवों द्वारा संपन्न होता है।
  5. अनुमानतः जैव मण्डल में प्रकाश संश्लेषण के द्वारा प्रतिवर्ष 4 x 1013 किग्रा कार्बन का स्थिरीकरण होता है।
  6. एक महत्त्वपूर्ण कार्बन की मात्रा CO2 के रूप में उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं की श्वसन क्रिया के माध्यम से वायुमण्डल में वापस आती है। भूमि एवं सागरों में कचरा सामग्री एवं मृत कार्बनिक सामग्री के अपघटन की प्रक्रियाओं द्वारा भी CO2 की काफी मात्रा अपघटकों द्वारा छोड़ी जाती है।
  7. यौगिकीकृत कार्बन की कुछ मात्रा अवसादों में नष्ट होती है और संचरण द्वारा निकाली जाती है।
  8. लकड़ी के जलाने, जंगली आग एवं जीवाश्मी ईंधन के जलने के कारण, कार्बनिक सामग्री, ज्वालामुखीय क्रियाओं आदि अतिरिक्त स्रोतों द्वारा वायुमण्डल में CO2 को मुक्त किया जाता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी सिद्धान्त को प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिक का नाम बताइए (2016)
(क) ए०जी० टैन्सले
(ख) के०आर० स्पोनें
(ग) जे०डी० वाटसन
(घ) एफ०एच०सी० क्रिक
उत्तर
(क) ए०जी० टैन्सले

प्रश्न 2.
पारिस्थितिक तन्त्र से सम्बन्धित वैज्ञानिक हैं। (2016)
(क) बीरबल साहनी
(ख) आर० मिश्रा
(ग) राम उदार
(घ) के०सी० मेहता
उत्तर
(ख) आर० मिश्रा

प्रश्न 3.
पोखर पारिस्थितिक तन्त्र में निम्नलिखित में से कौन प्राथमिक उत्पादक है? (2012, 15)
(क) शैवाल
(ख) कवक
(ग) विषाणु
(घ) जीवाणु
उत्तर
(क) शैवाल

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऊर्जा के पिरैमिड की मुख्य विशेषता क्या है? (2016)
उत्तर
पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है तथा ऊर्जा का पिरैमिड सदैव सीधा होता है।

प्रश्न 2.
उस जीवाणु का नाम लिखिए जो दलहनी पौधों की जड़ों की ग्रन्थियों में पाया जाता है। (2017, 18)
उत्तर
राइजोबियम लेग्यूमिनोसेरमा

प्रश्न 3.
लेगहीमोग्लोबिन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2017)
उत्तर
सहजीवी जीवाणु राइजोबियम दाल वाले पौधों की जड़ों के कॉर्टेक्स में लेग-हीमोग्लोबिन वर्णक एवं नाइट्रोजनेज एन्जाइम का संश्लेषण करता है। लेग-हीमोग्लोबिन कॉर्टेक्स कोशिकाओं में अवायवीय अवस्था को बनाये रखने में सहायक होता है।

प्रश्न 4.
कौन-सा शैवाल नाइट्रोजन स्थिरीकरण में भाग लेता है? (2012)
उत्तर
नाइट्रोसोमोनास (Nitrosomonas)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्पादक तथा उपभोक्ता में अन्तर बताइए। (2013, 14, 17)
उत्तर
उत्पादक तथा उपभोक्ता में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-13

प्रश्न 2.
घास स्थल पारिस्थितिक तन्त्र की एक प्रारूपिक खाद्य श्रृंखला का वर्णन कीजिए। (2009)
या
खाद्य श्रृंखला पर टिप्पणी लिखिए। (2009, 10, 15)
उत्तर
खाद्य श्रृंखला
सभी जीवों को अपना जीवन तथा जैव क्रियाएँ चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पृथ्वी पर ऊर्जा का प्राथमिक तथा एकमात्र स्रोत सूर्य है। इस ऊर्जा को केवल हरे पौधे पर्णहरित द्वारा ग्रहण कर पाते हैं और इसी ऊर्जा का स्थानान्तरण विभिन्न श्रेणी के जन्तुओं में खाद्य स्तरों (trophic levels) द्वारा होता है। प्रत्येक स्तर पर विभिन्न रूपों में 90% ऊर्जा का अपव्यय होता है, जिसमें कुछ ऊर्जा का इस्तेमाल धारक जीव स्वयं करता है। एक खाद्य श्रृंखला में खाद्य स्तरों की संख्या 4 से 5 तक हो सकती है।

इस प्रकार ऊर्जा इन खाद्य स्तरों के सभी जीवों में होकर एक सीधी रेखा में प्रवाहित होती है। और इस प्रकार के जीवों को एक श्रृंखला के रूप में पहचाना जा सकता है। यही श्रृंखला खाद्य श्रृंखला या आहार श्रृंखला (food chain) है, अर्थात् खाद्य श्रृंखला, विभिन्न प्रकार के जीवधारियों का वह क्रम है, जिसके द्वारा एक पारिस्थितिक तन्त्र में खाद्य पदार्थों के रूप में ऊर्जा का प्रवाह एक ही सीधी दिशा में होता है।

किसी भी खाद्य श्रृंखला के लिए हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर खाद्य पदार्थों का निर्माण करते हैं तथा उसे संचित करते हैं। अतः ये उत्पादक (producers) कहलाते हैं। शाकाहारी जन्तु (herbivorous animals) इन उत्पादकों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं। अतः ये प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता (consumers) हैं। मांसाहारी जीव (carnivorous animals) अपने भोजन के लिए इन शाकाहारी अथवा अन्य मांसाहारियों पर निर्भर करते हैं।

ये द्वितीय अथवा तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता हैं। इसी प्रकार की खाद्य श्रृंखलाओं, जो एक-दूसरे जीव के भक्षण के लिए एक घास के मैदान में होती हैं, में से एक वह है, जिसमें टिड्डे (grasshopper) अर्थात् प्रथम उपभोक्ता पौधों (उत्पादकों) से अपना भोजन प्राप्त करते हैं, टिड्डों को मेढ़क (frog) खा जाते हैं। मेढ़कों को सर्प (snake) अपना भोजन बना लेते हैं; अन्त में सर्यों को बाज (hawk) अपना भोजन बनाता है।

यहाँ मेढ़क एक कीटाहारी तथा द्वितीय श्रेणी का उपभोक्ता है जबकि मेढ़क को अपना भोजन बनाने वाला सर्प मांसाहारी तथा तृतीय श्रेणी का उपभोक्ता है। सर्प को बाज खा जाता है, जिसको कोई नहीं खाता है अर्थात् बाज उच्चतम मांसाहारी (top carnivore) अथवा सर्वोच्च उपभोक्ता (top consumer) हुआ (चित्र देखिए)। किसी भी खाद्य श्रृंखला में वैकल्पिक रास्ते बनने से वह खाद्य जाल (food web) में बदल जाती है; जैसे-हरे पौधों को खाने वाले चूहे भी हो सकते हैं तथा चूहों को सर्प खा जाते हैं अर्थात् सर्प के लिए मेढ़क के साथ चूहा भी वैकल्पिक भोजन हुआ। इसी प्रकार, बाज के लिए चूहा, सर्प तथा मेढ़क तीनों वैकल्पिक भोजन हुए।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-14

किसी भी खाद्य श्रृंखला अथवा इनसे बने खाद्य जाल में मृत जीवों तथा इनके मृत अंगों अथवा इनके द्वारा त्यागे गये कार्बनिक पदार्थों को विभिन्न चक्रों के लिए कच्चे पदार्थों में बदलने वाले अपघटक (decomposers) भी होते हैं।
खाद्य श्रृंखलाएँ प्रमुखत: निम्नलिखित तीन प्रकार की होती हैं –

  1. परभक्षी श्रृंखला (Predator Chain) – यह श्रृंखला उत्पादकों अर्थात् हरे पौधों से आरम्भ होती है तथा छोटे जन्तुओं से क्रमशः बड़े जन्तुओं में जाती है।
  2. परजीवी श्रृंखला (Parasitic Chain) – यह श्रृंखला भी हरे पौधों से ही आरम्भ होती है, किन्तु बड़े जीवों से छोटे जीवों की ओर चलती है।
  3. मृतोपजीवी श्रृंखला (Saprophytic Chain) – यह श्रृंखला मृत जीवों या मृत कार्बनिक पदार्थ (dead organic matter) से सूक्ष्म-जीवों (micro-organisms) की ओर चलती है।

प्रश्न 3.
खाद्य जाल पर टिप्पणी लिखिए। (2015)
उत्तर
खाद्य जाल
विभिन्न खाद्य श्रृंखलाएँ मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं। किसी एक ही पारितन्त्र में एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाएँ पायी जाती हैं। ये पारितन्त्र में भोजन-प्राप्ति के वैकल्पिक पक्ष हैं। जिस पारितन्त्र में जितनी अधिक खाद्य श्रृंखलाएँ होती हैं वह उतना ही स्थिर होती है।

एक घास पारितन्त्र का खाद्य जाल निम्नवत् प्रदर्शित है –
आहारपूर्ति सम्बन्धों के अनुसार सभी जीवों का प्राकृतिक वातावरण या एक समुदाय में अन्य जीवों के साथ एक स्थान होता है। सभी जीव अपने पोषण या आहार के स्रोत के आधार पर आहार श्रृंखला में एक विशेष स्थान ग्रहण करते हैं, जिसे पोषण स्तर के नाम से जाना जाता है। उत्पादक प्रथम पोषण स्तर में आते हैं, शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) दूसरे एवं मांसाहारी (द्वितीयक उपभोक्ता) तीसरे पोषण स्तर से सम्बद्ध होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-15

उत्तरोत्तर पोषण स्तरों पर ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है। जब कोई जीव मरता है तो वह अपरद या मृत जैवमात्रा में बदल जाता है जो अपघटकों के लिए एक ऊर्जा स्रोत के रूप में काम करता है। प्रत्येक पोषण स्तर पर जीव अपनी ऊर्जा की आवश्यकता के लिए निम्न पोषण स्तर पर निर्भर रहता है।

प्रश्न 4.
मरुक्रमक पर टिप्पणी लिखिए। (2013)
उत्तर
यह चट्टानों पर प्रारम्भ होने वाला अनुक्रमण है। चट्टानों पर जल तथा कार्बनिक पदार्थों की अत्यधिक कमी होती है। चट्टानों पर सर्वप्रथम स्थापित होने वाला प्राथमिक समुदाय क्रस्टोज लाइकेन का होता है। मरुक्रमक में एक समुदाय निश्चित अवधि के पश्चात् दूसरे समुदाय से विस्थापित हो जाता है। इस क्रम में निम्न अवस्थाएँ पायी जाती हैं –

  1. क्रस्टोज लाइकेन अवस्था – अनावृत चट्टानों पर सर्वप्रथम क्रस्टोज लाइकेन, जैसे राइजोकापन, लिकोनोरा, गैफिस आदि उगते हैं। लाइकेन से स्रावित अम्ल चट्टानों का अपक्षय करते हैं। लाइकेन की मृत्यु से कार्बनिक पदार्थ एकत्र होने लगते हैं।
  2. फोलियोज लाइकेन अवस्था – मृदा की पतली पर्त पर फोलियोज लाइकेन, जैसे- पामलिया, डर्मेटोकापन, फाइसिया, जैन्थोरिया आदि उगते हैं। इनकी मृत्यु होने से मृदा तथा कार्बनिक पदार्थों की मोटी पर्त बन जाती है। इनके फलस्वरूप आवास फोलियोज लाइकेन के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।
  3. मॉस अवस्था – चट्टानों पर मृदा तथा ह्युमस की मोटी पर्त आवास को मॉस के लिए उपयुक्त बना देती है। इस आवास में पॉलीट्राइकम, टॉटुला, फ्यूनेरिया, पोगोनेटम आदि सफलतापूर्वक उगते हैं। ब्रायोफाइट्स के निरन्तर अपघटन से चट्टानों पर कार्बनिक पदार्थों से युक्त मोटा स्तर बन जाता है। अब आवास शाकीय पौधों के लिए उपयुक्त बनने लगता है।
  4. शाक अवस्था – शाकीय पौधों के लिए आवास के उपयुक्त हो जाने से पोआ, फेस्टुका, एरिस्टिडा, ट्राइडेक्स, ऐजिरेटम आदि शाकीय पौधे उग आते हैं। चट्टानों का निरन्तर अपक्षय होता रहता है, ह्युमस की मात्रा बढ़ती रहती है। इसके फलस्वरूप झाड़ीदार पौधों का आक्रमण प्रारम्भ हो जाता है।
  5. झाड़ीय अवस्था – चट्टानों पर ह्यूमस युक्त मृदा की मोटी पर्त बन जाने से शाकीय पौधों के मध्य झाड़ीदार पौधे उगने लगते हैं, जैसे-कैपेरिस, कैसिया, यूरेना, क्रोटालेरिया आदि। झाड़ियों के उगने के कारण चट्टान अपक्षय के कारण मृदा में बदलने लगती है। वृक्षों का अतिक्रमण प्रारम्भ हो जाता है।
  6. चरम अवस्था – मरुस्थलीय वृक्ष आवास में वृद्धि करने लगते हैं। ये वृक्ष अपने आवास के साथ सन्तुलन बनाये रखते हैं। इसके फलस्वरूप वन क्षेत्रों का विकास हो जाता है। वृक्षों का समुदाय लगभग स्थायी समुदाय होता है।

प्रश्न 5.
जलक्रमक अनुक्रमण एवं मरुक्रमक अनुक्रमण में अन्तर बताइए। (2014)
उत्तर
वह अनुक्रमण जो जलीय आवास में प्रारम्भ होता है, जलक्रमक अनुक्रमण कहलाता है; जैसे-तालाब या झील का अनुक्रमण। इस अनुक्रमण के अन्तिम चरण में आने से पहले ही जलाशय लुप्त हो जाता है और वहाँ चरम समुदाय के रूप में वृक्षों का बाहुल्य स्थापित हो जाता है। इसके विपरीत वह अनुक्रमण जो अत्यन्त शुष्क वातावरण अर्थात् जहाँ जल की अत्यधिक कमी बनी रहती है, में प्रारम्भ होता है, मरुक्रमक अनुक्रमण कहलाता है; जैसे-नग्न चट्टानों एवं बालू के टीलों पर, मरुस्थल आदि का अनुक्रमण। नग्न चट्टानों के अनुक्रमण को शैलक्रमक तथा बालू के टीलों पर अनुक्रमण को बलुकियक्रमक अनुक्रमण भी कहा जाता है।

प्रश्न 6.
प्रकृति में कार्बन चक्र का एक रेखीय चित्र सहित वर्णन कीजिए। (2016)
उत्तर
कार्बन को जीवों का आधार माना जाता है। सजीव शरीर के शुष्क भार का 49 प्रतिशत भाग कार्बन से बना होता है और जल के पश्चात् यही आता है। यदि हम भूमण्डलीय कार्बन की पूर्ण मात्रा की ओर ध्यान दें तो हम देखेंगे कि समुद्र में 71 प्रतिशत कार्बन विलेय के रूप में विद्यमान है। यह सागरीय कार्बन भण्डार वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को नियमित करता है। वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड सम्पूर्ण आयतन का लगभग 0.03% होता है।

जीवाश्मी ईंधन भी कार्बन के एक भण्डार का प्रतिनिधित्व करता है। कार्बन चक्र वायुमण्डल, सागर तथा जीवित एवं मृत जीवों द्वारा सम्पन्न होता है। एक अनुमान के अनुसार जैवमण्डल में प्रकाश-संश्लेषण के द्वारा प्रतिवर्ष 4 x 1013 किग्रा कार्बन का स्थिरीकरण होता है। कार्बन की कुछ मात्रा CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) के रूप में उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं की श्वसन क्रिया के माध्यम से वायुमण्डल में वापस आती है।

इसके साथ ही भूमि एवं सागरों की कचरा सामग्री एवं मृत जीवों के कार्बनिक पदार्थों के अपघटन प्रक्रियाओं के द्वारा भी कार्बन डाइऑक्साइड की काफी मात्रा अपघटकों (decomposers) द्वारा छोड़ी जाती है। यौगिकीकृत कार्बन की कुछ मात्रा अवसादों में नष्ट होती है और संचरण द्वारा निकाली जाती है। लकड़ी के जलाने, जंगली आग एवं जीवाश्मी ईंधन के जलने के कारण, कार्बोनेटी चट्टानों तथा ज्वालामुखीय क्रियाओं आदि अतिरिक्त स्रोतों द्वारा वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त किया जाता है।

यदि सड़ने- गलने की प्रक्रिया धीमी हो जाये तो कार्बन यौगिक की बहुत अधिक मात्रा का भण्डारण हो जाता है। जब ये पृथ्वी में दब जाते हैं तो इनका अपघटन नहीं हो पाता। धीरे-धीरे ये तेल एवं कोयला में परिवर्तित हो जाते हैं। तेल और कोयले को जब जलाया जाता है तो कार्बन पुनः वायुमण्डल में आ जाता है। कार्बनिक कार्बन (organic carbon) के पृथ्वी में दब जाने से लाइमस्टोन चट्टान (limestone rock) बनती है। इस चट्टान के क्षरण (weathering) से कार्बन डाइऑक्साइड वायुमण्डल में पुनः वापस आ जाती है।

वायुमण्डल में कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा संतुलित होती है, किन्तु मानवीय क्रियाकलापों के कारण इसका संतुलन बिगड़ रहा है। तेजी से जंगलों का विनाश तथा परिवहन एवं ऊर्जा के लिए जीवाश्मी ईंधनों को जलाने आदि से महत्त्वपूर्ण रूप से वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त करने की दर बढ़ी है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-16

प्रश्न 7.
‘पारिस्थितिक तन्त्र में मानव की भूमिका’ शीर्षक पर टिप्पणी लिखिए। (2015)
उत्तर
बहुत पुराने समय से मनुष्य प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्र (natural ecosystem) को नष्ट करके अपनी इच्छानुसार बदलता रहा है। उसे मकान बनाने के लिए और ईंधन के लिए लकड़ी की आवश्यकता होती है। साथ ही वह अपनी इच्छानुसार विभिन्न फसलें उगाने व फलों के उद्यान लगाने के लिए भी प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्र को नष्ट करता रहा है।

जिस समय संसार में कम मानव थे, प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्र कम ही नष्ट होता था और मामूली रूप में बदल पाता था, परन्तु जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ रहने के लिए वे सड़क, आदि बनाने के लिए स्थान की आवश्यकता, मकान बनाने की सामग्री व ईंधन की आवश्यकता और खेती के लिए भूमि की आवश्यकता बढ़ती गई, जिस कारण प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्र को उत्पादन, इत्यादि के विचार के बिना ही नष्ट कर दिया गया या उसका स्वरूप बहुत बदल दिया गया। इस प्रकार धीरे-धीरे सन्तुलित पारिस्थितिक तन्त्र (balanced ecosystem) समाप्त होने लगे, क्योंकि ऊर्जा और दूसरे पदार्थों का सन्तुलन मनुष्यों व जन्तुओं द्वारा नष्ट कर दिया गया।

मिट्टी की ऊपर की उपजाऊ सतह अथवा परत वायु व वर्षा के जल द्वारा अपरदन (erosion) से नष्ट होकर वनस्पतिविहीन हो गई। इस प्रकार मनुष्य द्वारा कृत्रिम पारिस्थितिक तन्त्र (artificial ecosystem) का विकास हुआ। बहुत से खरपतवार (weed) व जीवनाशी (pests) मनुष्य द्वारा भूमण्डल पर फैलकर प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्र को बहुत हानि पहुँचाते हैं। प्राकृतिक वनस्पति के विनाश के कारण अपरदन (erosion), बाढ़ (flooding), रेत का एकत्रित होना (silting) अधिक तेजी से होता है। स्वच्छ जल के तालाबों का पारिस्थितिक तन्त्र बाढ़ से नष्ट हो जाता है। जलीय पारिस्थितिक तन्त्र (aquatic ecosystem ), गन्दे जल और कारखानों के बेकार बचे हुए पदार्थ से दूषित होकर बदल जाता है।

इसी प्रकार कोयला, गैस व तेल के अधिक मात्रा में जलने से वायु दूषित हो जाती है, क्योंकि इनके जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड व धुएँ के छोटे-छोटे कण पौधे की वृद्धि पर प्रभाव डालते हैं। मनुष्य विघ्न डालने वाले कार्यों द्वारा स्थिर पारिस्थितिक तन्त्रों को कम स्थिर पारिस्थितिक तन्त्रों में बदलता रहता है जिससे प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्रों की स्थिरता नष्ट हो जाती है। जिस समय शहर बनते हैं, पारिस्थितिक तन्त्र का और अधिक विनाश हो जाता है। खाद्य आपूर्ति में आने वाली फसलों के कारण पारिस्थितिक तन्त्रों को बदलना अधिक आवश्यक होता जा रहा है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक तन्त्र कितने प्रकार के होते हैं? एक तालाब के पारिस्थितिक तन्त्र के विभिन्न घटकों का वर्णन कीजिए। (2010, 12, 13, 14, 17)
या
भारतीय पर्यावरण के एक पारिस्थितिक समूह का उदाहरण दीजिए तथा इसकी विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए। यह किस प्रकार असन्तुलित हो सकता है? (2014)
या
सन्तुलित पारिस्थितिक तन्त्र से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए। (2015)
उत्तर
पारिस्थितिक तन्त्र के प्रकार
पारिस्थितिक तन्त्र प्रमुखत: दो प्रकार के हो सकते हैं –

  1. जलीय (aquatic),
  2. स्थलीय (terrestrial)।

जलीय पारिस्थितिक समूह, भारतीय पर्यावरण में अलवणीय जल (fresh water), जैसे- तालाबीय पारितन्त्र (pond ecosystem) अथवा लवणीय जल (marine water); जैसे- कुछ झील, समुद्र आदि के पारितन्त्र हो सकते हैं।

तालाबीय पारितन्त्र के विभिन्न घटक
कोई जैव समुदाय तथा उसका पर्यावरण मिलकर एक जैविक इकाई (biological unit) बनाते हैं। तालाब में मिलने वाली जैव जातियाँ तथा अजैवीय वस्तुएँ परस्पर अन्तक्रियाएँ करके एक आत्मनिर्भर इकाई बनाते हैं। इसे तालाब का पारितत्र (pond ecosystem) कहते हैं। तालाब के पारितन्त्र के दो प्रमुख प्रकार के घटक इस प्रकार हैं –

1. अजैवीय घटक
जल, ताप, प्रकाश, अकार्बनिक पदार्थ, खनिज लवण, विभिन्न गैसें (CO2 एवं O2), कार्बनिक अवशेष, ह्युमस आदि अजैवीय घटक हैं।

2. जैवीय घटक
इन्हें निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित करते हैं –
(i) उत्पादक (Producers) – जलीय तथा उभयचारी (amphibious) हरे पौधे होते हैं. ये स्वपोषी (autotrophs) हैं। इनके जलाशय के तट से धरातल तक अनेक उदाहरण हो सकते हैं; जैसे-तट की दलदली मृदा से टाइफा (Typha), रेननकुलस (Ranunculus) आदि एवं जल में अनेक शैवाल, हाइड्रिला, वैलिसनेरिया आदि तथा पादप प्लवक (phytoplanktons) आदि। ये पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-17

(ii) उपभोक्ता (Consumers) – ये कई श्रेणियों में बँटे होते हैं; जैसे –

  1. प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता – जल में पाये जाने वाले छोटे-छोटे कीट- जन्तु प्लवक (zooplanktons), कोपीपोड (copepods), कीटों के लार्वी, कुछ ऐनीलिड्स (annelids) तथा मॉलस्क्स (molluscs) आदि। ये शाकाहारी (herbivores) हैं। और शैवालों, पत्तियों इत्यादि को भोजन के रूप में लेते हैं।
  2.  द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता – ये प्रमुखतः शिकारी कीट छोटी मछलियाँ आदि होती हैं, जो शाकाहारी उपभोक्ताओं का शिकार करते हैं; जैसे- मूंग (beetles) आदि। मेढ़क (frogs) भी प्रायः इसी श्रेणी के जन्तु होते हैं।
  3. तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता – विभिन्न प्रकार की मांसाहारी मछलियाँ (carnivorous fish) जो सभी श्रेणी के अन्य उपभोक्ताओं को अपना भोजन बनाती हैं। यहाँ उच्चतम उपभोक्ता (top consumers) ये ही हैं।

(iii) अपघटक (Decomposers) – मृत जीवों पर आश्रित रहने वाले जीव अर्थात् मृतोपजीवी जैसे- जीवाणु, कवक आदि। ये जीव तालाब में मृत जीवों का अपघटन कर उनके अवयवों को पर्यावरण में मुक्त करते हैं ताकि उत्पादक अर्थात् हरे पौधे इनको उपभोग कर सकें। इस प्रकार हरे पौधे जिन पदार्थों का उपयोग करके भोजन बनाते हैं अन्त में ये पदार्थ चक्रीकरण द्वारा विभिन्न जीवों से होते हुए अन्त में वापस जलीय भूमि में आ जाते हैं।

पारिस्थितिक तन्त्र का सन्तुलन
पारिस्थितिक तन्त्र का सन्तुलन उसमें उपस्थित खाद्य जाल (food web) की जटिलता और विशालता पर निर्भर करता है। खाद्य जाल जितना जटिल होता है उतना ही पारितन्त्र अधिक स्थायी होता है। जटिल खाद्य जाल में किसी भी उपभोक्ता के लिए अधिक प्रकार के जीव (खाद्य ऊर्जा) उपभोग के लिए उपलब्ध होंगे। अत: एक जीव के किसी कारण से कम हो जाने या नष्ट हो जाने से भी खाद्य जाल की स्थिरता पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि उस स्थान की पूर्ति उसी स्तर का कोई दूसरा जीव कर देगा अर्थात् अधिक संख्या में वैकल्पिक पथ होने पर पारिस्थितिक तन्त्र अधिक स्थिर तथा सन्तुलित रहता है।

असन्तुलन की दशा किसी भी पोषण स्तर (trophic level) में विनष्टीकरण की क्रिया से होती है। यह असन्तुलन चाहे तो उस स्तर के जीवों की स्वयं कमी के कारण, कम वैकल्पिक पथ होने पर अथवा प्रदूषण (pollution) के कारण हो सकता है। तालाबीय पारितन्त्र में जल प्रदूषण अनेक प्रकार के कीटनाशक, अपतृणनाशक आदि के कारण हो सकता है अथवा औद्योगिक संस्थानों से निकले अनावश्यक पदार्थों से भी हो सकता है, इनमें तापीय प्रदूषण भी सम्मिलित है। इनसे जलीय जीव-जन्तु मरने लगते हैं। सबसे अधिक प्रभाव छोटे जीवों पर होता है इससे प्रारम्भिक पोषक स्तरों के नष्ट होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

प्रश्न 2.
अनुक्रमण (यथाक्रम) से आप क्या समझते हैं ? तालाब में अनुक्रमण की क्रिया का वर्णन कीजिए। (2009, 11)
या
तालाब में होने वाले अनुक्रमण का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए। (2015)
उत्तर
अनुक्रम या अनुक्रमण
जिस प्रकार किसी पारितन्त्र के घटकों (components) में जैवीय घटेकों (biotic components) का अत्यधिक महत्त्व है, उसी प्रकार किसी पारितन्त्र के निर्माण के समय उसके जैव समुदायों में पादप समुदाय का विशेष महत्त्व है। पादप समुदाय की उत्पत्ति तथा उसका परिवर्द्धन ही अन्य जैव समुदायों की दिशा भी निर्धारित करता है।

किसी स्थान को यदि वनस्पति विहीन कर दिया जाए तथा उसे मानव व मानव द्वारा पाले जाने वाले पशुओं की क्रियाओं से भी विलग कर दिया जाए तो धीरे-धीरे लेकिन एक निश्चित क्रम में उस स्थान पर वनस्पति उगनी प्रारम्भ होगी। कालान्तर में, एक स्थिति ऐसी आएगी जब वहाँ पर अपेक्षाकृत अधिक स्थायी समुदाय (stable community) निर्मित हो जाएगा।

इस प्रकार किसी नग्न स्थान पर शनैः-शनैः पादप समुदाय के जमाव को पादप अनुक्रम या अनुक्रमण (plant succession) कहते हैं। अनुक्रमण की विचारधारा को सर्वप्रथम वार्मिंग (Warming 1899) ने प्रस्तुत किया तथा क्लीमेण्ट्स (Clements, 1907 – 1916) ने इसे पोषित किया। क्लीमेण्ट्स ने इसे प्राकृतिक प्रक्रम कहा जिसमें पादप समुदायों के विभिन्न समूहों द्वारा क्रमिक रूप से एक ही क्षेत्र का उपनिवेशन (colonization) सम्मिलित है।

सामान्यतः समुदाय स्थायी इकाई नहीं है, बल्कि यह एक गतिक (dynamic) इकाई है जिसमें सन्तुलन के कारण आत्मनिर्भरता बनी रहती है। पर्यावरण में परिवर्तन होने से समुदाय की पादप जातियों में भी परिवर्तन आते हैं। परिवर्तन के प्रमुख कारणों में जलवायवीय, भू-आकृतिक अथवा जैविक परिवर्तन हो सकते हैं। जैव समुदाय की विभिन्न जातियों की क्रिया-प्रतिक्रियाएँ इन जैविक परिवर्तनों का आधार होती हैं। कालान्तर में उपर्युक्त प्रकार के परिवर्तनों के कारण समुदाय की संरचना में शनैः-शनैः परिवर्तन होते जाते हैं। इस प्रकार प्रमुख जातियाँ अन्य जातियों द्वारा प्रतिस्थापित होती जाती हैं। प्रतिस्थापन की ये प्रक्रियाएँ तब तक होती रहती हैं जब तक कि समुदाय की जातियों तथा पर्यावरण में परस्पर अपेक्षाकृत अधिक स्थायी सन्तुलन स्थापित नहीं हो जाता। इस प्रकार की समय के साथ समुदाय में परिवर्तन की प्रक्रिया को पारिस्थितिक अनुक्रमण (ecological succession) कहा गया है। ओडम ने इस प्रक्रिया को पारितन्त्र का परिवर्द्धन माना है।

स्पष्ट है, अनुक्रमण या परिवर्द्धन एक निर्धारित दिशा में बढ़ने वाली व्यवस्थित प्रक्रिया है। जिसमें समयान्तर के बाद जाति संरचना में परिवर्तन होता जाता है। इस प्रकार के परिवर्तन में ऊसर क्षेत्र (barren area) में, प्रारम्भिक रूप में, स्थापित समुदाय पुरोगामी समुदाय (pioneer community) तथा अन्तिम समुदाय को चरम समुदाय (climax community) कहा जाता है। अनुक्रम की इस प्रक्रिया के मध्य में चूंकि क्रमकी समुदायों (seral communities) का प्रतिस्थापन होता है अतः सम्पूर्ण प्रक्रिया या अनुक्रम क्रमक (sere) कहलाता है।

इस परिवर्तन का मूल कारण समुदाय के सदस्यों द्वारा पर्यावरण में परिवर्तन उत्पन्न करना है। इससे यह भी स्पष्ट है कि अनुक्रमण समुदाय द्वारा ही नियन्त्रित होता है और भौतिक वातावरण इसमें परिवर्तन की दर, इसके प्रतिरूप तथा परिवर्द्धन की सीमा को निर्धारित करता है। उपर्युक्त के परिणाम में समुदाय एक स्थायी पारितन्त्र (ecosystem) बन जाता है।
अनुक्रम निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं –

  1. प्राथमिक अनुक्रम (Primary Succession) – यह अनुक्रम उन नग्न स्थानों पर आरम्भ होता है जहाँ पर पहले किसी भी प्रकार की वनस्पति नहीं पाई जाती है।
  2. द्वितीयक अनुक्रम (Secondary Succession) – यह अनुक्रम उन स्थानों पर पाया जाता है। जहाँ पर पहले पूर्ण विकसित वनस्पति थी किन्तु बाद में किसी कारण से वह नष्ट हो गई।

अनुक्रमण की प्रक्रिया
क्लीमेण्ट्स ने सन् 1916 में अनुक्रमण की निम्नलिखित अवस्थाओं का उल्लेख किया-

  1. न्यूडेशन
  2. आक्रमण
  3. स्पर्धा
  4. प्रतिक्रिया
  5. चरम अवस्था।

जलक्रमक : खाली तालाब की अनुक्रम
जलक्रमक की विभिन्न अवस्थाओं को समझने के लिए कोई झील या सरोवर एक आदर्श स्थान हो सकता है जहाँ जल मध्य में तो गहरा होता है तथा किनारों की ओर क्रमशः छिछला (कम गहरा) होता चला जाता है। ऐसी परिस्थिति में जिन विभिन्न अवस्थाओं से चरम पादप समुदाय का विकास होता है, वे इस प्रकार हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-22

1. प्लवक अवस्था (Plankton Stage) – जल की गहराई में पुरोगामी के रूप में पादप प्लवक (phytoplankton) तथा जन्तु प्लवक (zooplanktons) उत्पन्न होते हैं। ये मुख्यत: एककोशिकीय अथवा निवही (colonial) और समूह में रहने वाले हरे शैवाल, जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्म जीव हैं जो जल की ऊपरी सतह पर तैरते रहते हैं। जल की गहराई में पादप जीवन
अनुपस्थित होता है।

2. निमग्न अवस्था (Submerged Stage) – 10 फीट या इससे कम गहरे पानी वाले झील क्षेत्र में पूर्णत: निमग्न पौधे तथा मुक्त प्लावी पौधे पाये जाते हैं। इनकी जड़े प्रायः नीचे कीचड़ में जमी रहती हैं। उदाहरण के लिए- मिरियोफिलम (Myriophyllum), इलोडीया (Elodea), पोटेमोजेटॉन (Potamogeton), हाइड्रिला (Hydrilla), वैलिसनेरिया (Vallisneria), यूट्रीक्युलरिया (Utricularia) आदि। इन पौधों के साथ शैवाल गुच्छ चिपके रहते हैं। किनारों से अपरदित मिट्टी के कण, जो गॅदले पानी में तैरते रहते हैं, इन पौधों द्वारा रोक लिये जाते हैं। इन पौधों की मृत्यु पर इनके अवशेष ह्युमस में परिवर्तित होकर तल में बैठ जाते हैं। इस प्रकार झीलों के तल में लगातार मिट्टी, कीचड़ ह्यूमस के जमा होते रहने से प्रतिवर्ष झील उत्तरोत्तर कम गहरी होती चली जाती है। गहराई कम होने के कारण अब यह स्थान निमग्न पादपों के लिए कम अनुकूल तथा नये पादपों के लिए अधिक अनुकूल हो जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-18

3. जड़ित प्लावी अवस्था (Rooted Floating Stage) – उपर्युक्त वर्णित अनेक कारणों से जल कम गहरा हो जाता है तथा 5 से 10 फीट गहरे पानी में प्लावी जातियाँ उगने लगती हैं। इन पौधों की जड़े तल में जमी रहती हैं परन्तु स्तम्भ अथवा पर्णवृन्त लगभग पानी के ऊपर पहुँच जाते हैं। तथा इनकी पत्तियाँ जल सतह पर तैरती रहती हैं। इनमें निम्फिया (Nymphaea), नीलम्बियम (Nelumbium), रैननकुलस (Ranunculus sp.), मोनोकोरिया (Monochoria), एपोनोजीटॉन (Aponogeton), ट्रापा (Trupa) प्रमुख हैं। इनके साथ ही कुछ मुक्त प्लावी जातियाँ; जैसे- लेम्ना (Lemng), वॉल्फिया (Wolfia), एजोली (Azolla), पिस्टिया (Pistiq), सालविनिया (Salvinia) इत्यादि निमग्न जातियों तक प्रकाश को नहीं पहुँचने देतीं जिसके फलस्वरूप निमग्न जातियाँ समाप्त हो जाती हैं। अपघटित कार्बनिक पदार्थ इत्यादि जमा होने से जल की गहराई कम होती जाती है। धीरे-धीरे प्लावी अवस्था भी समाप्त हो जाती है।

4. नइ अनूप अवस्था (Reed Swamp Stage) – जब जल की गहराई 2 से 3 फुट रह जाती है। तो नड़ अनूप या नरकुल अनूप जैसे पादप उगने लगते हैं। यहाँ पर टाइफा (Typha), सेजिटेरिया (Sagittaria), सिरपस (Scirpus), फ़ैगमाइट्स (Phragmites), रैननकुलस (Ranunculus) जैसे पादपों के साथ ही अत्यन्त कम जल में रूमेक्स (Rumex), एक्लिप्टा (Eclipta), इत्यादि पादप उगने लगते हैं। ये पौधे तल में जड़ों द्वारा जमे रहते हैं। इनके कुछ भाग पानी में डूबे रहते हैं। यहाँ पर दलदल बनने लगता है तथा धीरे-धीरे मिट्टी के जमाव के कारण यह स्थान कच्छ (marshy) भूमि में परिवर्तित होने लगती है।

5. कच्छ शादुल अवस्था (Marsh Meadow Stage) – मिट्टी के जमाव के कारण यह क्षेत्र कच्छ भूमि (जहाँ केवल कुछ इंच पानी ही हो) में परिवर्तित हो चुका होता है। इस भूमि पर पॉलीगोनम (Polygonum), पोदीना कुल के पौधे, ऊँची घास की जातियाँ- साइप्रस (Cyperus), जंकस (Juncus), कैरेक्स (Carex), इलीयोकैरिस (Eleocharis) आदि आकर जमने लगती हैं। यह एक शाद्वल (meadow) बन जाता है। ये पौधे भूमि जल का अत्यधिक अवशोषण करते हैं और इसे वाष्पोत्सर्जन द्वारा उड़ा देते हैं। इनके मृत अवशेषों के संचयन से, जल वाहित मृदा तथा वातोढ़ मृदा को रोककर भूमि का निर्माण करते हैं। ऐसी भूमि जलीय पौधों के पनपने के लिए अनुकूल नहीं होती; अतः अब यहाँ पर क्षुप तथा वृक्षों के पनपने की परिस्थिति बनने लगती है।

6. काष्ठीय वनस्पति अवस्था (Woodland Stage) – आर्द्र जलवायु में इस अनुक्रमण का अगला चरण क्षुपों; जैसे- सैलिक्स (Salix), कॉर्नस (Cormus) आदि तथा वृक्षों; जैसे- एल्मस (Almus), पॉपुलस (Populus) आदि की जातियों का पनपेना है। इस अवस्था में ऐसे पौधे पुरोगामी होते हैं जो अपनी जड़ों के आस-पास आंशिक जलाक्रान्त परिस्थितियों को सहन कर सकें। ये काष्ठीय पौधे आवास को अपने पूर्ववर्ती पौधों के समान ही छाया डालकर तथा तीव्र वाष्पोत्सर्जन द्वारा प्रभावित करते हैं। ये काष्ठीय पादप वातोढ़ मिट्टी को रोककर तथा पादप अवशेषों के संचयन द्वारा मिट्टी को शुष्क बनाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-19

7. चरम वन (Climax Forest) – जैसे- जैसे ह्यूमस का संचयन होता है जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्म जीव भूमि में बढ़ने लगते हैं और भूमि अधिक उर्वर होती चली जाती है। इस भूमि पर नये समोभिद वृक्ष प्रकट होने लगते हैं। ये वृक्ष भूमि को अपनी तरह से प्रभावित करते हैं। इनकी छाया (tree canopy) के नीचे वायु आई रहती है और इनकी छाया के नीचे छायासह (shade tolerant) क्षुप व शाक पनपने लगते हैं।

इस प्रकार एक क्षेत्र, जो जलमग्न था, अन्त में वन में परिवर्तित हो जाता है। यहाँ पर यह याद रखना आवश्यक है कि चरम समुदाय की प्रकृति वहाँ उपस्थित जलवायु पर निर्भर करती है; जैसे- शीतोष्ण (temperate) जलवायु में मिश्रित वन बनते हैं जिसमें एल्मस (Almus), एसर (Acer), क्वेरकस (Quercus) की जातियाँ होती हैं। उष्ण कटिबन्धीय या उपउष्ण कटिबन्धीय (subtropical) जलवायु में वर्षा की कमी या अधिकता के अनुसार वनों का विकास होता है; जैसे–कम वर्षा में पर्णपाती वन या मानसूनी वन, अधिक वर्षा में उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन आदि। वन समुदाय का विकास तभी होगा जब जलवायु आर्द्र होगी। शुष्क जलवायु में चरम समुदाय (climax community) घास स्थल (grass land) अथवा कोई अन्य शुष्कस्थली समुदाय हो सकता है।

प्रश्न 3.
नाइट्रोजन चक्र का वर्णन कीजिए और नाइट्रोजन स्थिरीकरण के महत्त्व को समझाइए। (2010, 11)
या
प्रकृति में नाइट्रोजन चक्र का वर्णन कीजिए। पौधों में इसके महत्त्व की व्याख्या कीजिए। (2009, 12)
या
केवल रेखीय चित्र की सहायता से नाइट्रोजन चक्र का प्रदर्शन कीजिए। (2015, 18)
या
नाइट्रीकरण का वर्णन कीजिए। (2015)
या
जीवाणु तथा नील-हरित शैवाल द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण पर टिप्पणी लिखिए। (2017)
या
दलहनी पौधों की जड़ में पाये जाने वाले जीवाणु का नाम लिखिए। ये पौधे जमीन की उर्वरा शक्ति को कैसे बढ़ाते हैं? (2018)
उत्तर
नाइट्रोजन तथा वायुमण्डल में इसका भौतिक चक्र
वायुमण्डल की गैसों में सबसे अधिक, लगभग 78 प्रतिशत मुक्त नाइट्रोजन होती है, किन्तु कुछ जीवाणु तथा नीली-हरी शैवालों को छोड़कर अन्य जीव इसका सीधे उपयोग करने में अक्षम हैं। इस मुक्त नाइट्रोजन का केवल कुछ प्रतिशत भौतिक व प्राकृतिक कारणों से ऑक्सीजन के साथ संयोग करके ऑक्साइड्स (NO2, NO आदि) बना लेता है। इस क्रिया में तड़ित क्रिया सम्मिलित है। ये ऑक्साइड्स वर्षा के जल के साथ भूमि पर गिरकर खनिजों के साथ क्रिया करते हैं और उनके नाइट्रेट्स आदि बना लेते हैं।
N2 + O2 → 2NO (nitric oxide)
2NO + O2 → 2NO2 (nitrogen peroxide)
2NO2 + H20 → HNO2 + HNO3 (nitrous acid + nitric acid)
यह क्रिया बहुत ही कम मात्रा में नाइट्रोजन को स्थिर कर पाती है।

नाइट्रोजन चक्र में हरे पौधों का महत्त्व
हरे पौधे भूमि से जड़ों द्वारा नाइट्रेट्स (nitrates =NO–3) आदि खनिज लवणों को लेकर कार्बोहाइड्रेट के साथ मिलाते हैं तथा अपनी कोशिकाओं में प्रोटीन जैसे पदार्थों का निर्माण करते हैं। जन्तु किसी-न-किसी रूप में इसी प्रोटीन को भोजन के रूप में पौधों से प्राप्त करते हैं। जन्तुओं का जीवद्रव्य इन प्रोटीन्स को अमीनो अम्लों के रूप में ग्रहण कर, जन्तु प्रोटीन्स के रूप में आत्मसात कर लेता है। जन्तुओं के शरीर में अधिक मात्रा में बने अमीनो अम्लों को वे अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल आदि के रूप में बदलकर, उत्सर्जी पदार्थों के रूप में शरीर से बाहर निकाल देते हैं। पौधों तथा जन्तुओं के मृत होने पर भी ये नाइट्रोजन गुक्त यौगिक भूमि में आ जाते हैं।

सूक्ष्म जीवों का नाइट्रोजन स्थिरीकरण में महत्त्व
जीवाणुओं का नाइट्रोजन चक्र में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण योगदान है। मिट्टी में स्वतन्त्र रूप से रहने वाले कुछ जीवाणु वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन स्थिर करके यौगिकों में बदल देते हैं: जैसे- एजोटोबैक्टर (Azotobacter), क्लॉस्ट्रीडियम (Clostridium) आदि। इसके अतिरिक्त लेग्यूमिनोसी (दलहनी) कुल के पौधों की जड़ों पर छोटी-छोटी गुलिकाओं में रहने वाले जीवाणु राइजोबियम लेग्यूमिनोसैरम (Rhizobium leguminosdrum) वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदल देते हैं। जीवाणुओं द्वारा छोड़े गये नाइट्रोजन के ऐसे घुलनशील यौगिक पौधों द्वारा ग्रहण किये जाते हैं।

नील- हरित शैवाल जैसे नोस्टॉक, ऐनाबीना, रिबुलेरिया, ग्लीयोट्राइकिया, ऑलोसिरा आदि भी वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं।
अमोनीकरण एवं नाइट्रीकरण (Ammonification and Nitrification) – कुछ जीवाणु नाइट्रोजनी कार्बनिक पदार्थों को तोड़कर उपस्थित नाइट्रोजन को अमोनिया में बदल देते हैं। ऐसे जीवाणु अपघटक कहलाते हैं। अमोनिया जैसे पदार्थ हानिकारक हैं। कुछ जीवाणु, जैसे-नाइट्रोसोमोनासे (Nitrosomonas) अमोनिया को नाइट्राइट में और नाइट्रोबैक्टर (Nitrobacter) नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदल देते हैं। इन जीवाणुओं को नाइट्रीकारक जीवाणु (nitrifying bacteria) कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-20

वायुमण्डल में नाइट्रोजन का कुछ अंश तड़ित विद्युत द्वारा ऑक्साइड्स में बदल जाता है जो बाद में जल के साथ मिलकर नाइट्रस व नाइट्रिक अम्ल (nitrous and nitric acid) बना लेता है। ये अम्ल भूमि में खनिजों के साथ मिलकर नाइट्रेट बनाते हैं, जिन्हें पौधे अवशोषित करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem img-21

विनाइट्रीकरण (Denitrification) – कुछ अन्य प्रकार के जीवाणु मिट्टी में मिलने वाले नाइट्रेट्स (nitrates) को तोड़कर नाइट्रोजन को वायु में मुक्त कर देते हैं। ऐसे जीवाणु विनाइट्रीकारी जीवाणु (denitrifying bacteria) कहलाते हैं तथा ये प्राय: अनॉक्सी अवस्थाओं में पाये जाते हैं; जैसे- थायोबैसिलस (Thiobacillus) व माइक्रोकॉकस (Micrococcus) की जातियाँ।
नाइट्रोजन का यह चक्र पर्यावरण में निरन्तर चलता रहता है और मृदा की उर्वरा शक्ति क्षीण नहीं होने पाती है।

नाइट्रोजन चक्र का महत्त्व
पृथ्वी पर प्रोटीन के बिना जीवों का अस्तित्व नहीं समझा जा सकता। ये जीवद्रव्य के अभिन्न अंग हैं। पौधे जड़ों से नाइट्रेट्स जैसे खनिज लवण अवशोषित कर अपनी कोशिकाओं में प्रोटीन का निर्माण करते हैं। जीव-जन्तु पौधों को खाते हैं। इस प्रकार जीवन को बनाये रखने तथा जीवद्रव्य की वृद्धि करने के लिए नाइट्रोजन चक्र का होना नितान्त आवश्यक है।
नाइट्रोजन चक्र के अन्य प्रमुख महत्त्व इस प्रकार हैं –

  1. नाइट्रोजन चक्र से ही वायु में नाइट्रोजन का सन्तुलन बना रहता है, जो ऑक्सीजन की सक्रियता को कम करने के लिए आवश्यक है।
  2. पौधों की वृद्धि तथा प्रकृति में भोजन प्राप्त कराने के लिए नाइट्रोजन चक्र अत्यन्त आवश्यक चक्र है।
  3. जीव-जन्तुओं की उचित वृद्धि खाद्य पदार्थों के बिना असम्भव है, जो नाइट्रोजन चक्र से आवश्यकतानुसार सम्भव है।
  4. वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन का उपयोग करके, नाइट्रोजन के अनेक यौगिक विभिन्न उपयोगों के लिए प्राप्त किये जाते हैं।
  5. विभिन्न अपद्रव्यों का अपघटन होता रहता है।

अत: नाइट्रोजन चक्र प्रकृति का अत्यन्त आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण चक्र है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem (पारितन्त्र) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 Ecosystem (पारितन्त्र), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations (जीव और समष्टियाँ) are part of UP Board Solutions for Class 12 Biology. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations (जीव और समष्टियाँ).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Biology
Chapter Chapter 13
Chapter Name Organisms and Populations
Number of Questions Solved 35
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations (जीव और समष्टियाँ)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शीत निष्क्रियता (हाइबर्नेशन) से उपरति (डायपाज) किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर
शीत निष्क्रियता (Hibernation) – यह इक्टोथर्मल या शीत निष्क्रिय जन्तुओं (cold-blooded animals), जैसे-एम्फिबियन्स तथा रेप्टाइल्स की शरद नींद (winter sleep) है। जिससे वे अपने आपको ठंड से बचाते हैं। इसके लिए वे निवास स्थान, जैसे-खोह, बिल, गहरी मिट्टी आदि में रहने के लिए चले जाते हैं। यहाँ शारीरिक क्रियाएँ अत्यधिक मन्द हो जाती हैं। कुछ चिड़ियाँ एवं भालू के द्वारा भी शीत निष्क्रियता सम्पन्न की जाती है।

उपरति (Diapause) – यह निलंबित वृद्धि या विकास का समय है। प्रतिकूल परिस्थितियों में झीलों और तालाबों में प्राणिप्लवक की अनेक जातियाँ उपरति में आ जाती हैं जो निलंबित परिवर्धन की एक अवस्था है।

प्रश्न 2.
अगर समुद्री मछली को अलवणजल (फ्रेशवाटर) की जलजीवशाला (एक्वेरियम) में रखा जाता है तो क्या वह मछली जीवित रह पाएगी? क्यों और क्यों नहीं?
उत्तर
अगर समुद्री मछली को अलवणजल (freshwater) की जल-जीवशाला में रखा जाए तो वह परासरणीय समस्याओं के कारण जीवित नहीं रह पाएगी तथा मर जाएगी। तेज परासरण होने के कारण रक्त दाब तथा रक्त आयतन बढ़ जाता है जिससे मछली की मृत्यु हो जाती है।

प्रश्न 3.
लक्षण प्ररूपी (फीनोटाइपिक) अनुकूलन की परिभाषा दीजिए। एक उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर
लक्षण प्ररूपी अनुकूलन जीवों का ऐसा विशेष गुण है जो संरचना और कार्यिकी की विशेषताओं के द्वारा उन्हें वातावरण विशेष में रहने की क्षमता प्रदान करता है। मरुस्थल के छोटे जीव, जैसे-चूहा, सॉप, केकड़ा दिन के समय बालू में बनाई गई सुरंग में रहते हैं तथा रात को जब तापक्रम कम हो जाता है तब ये भोजन की खोज में बिल से बाहर निकलते हैं। मरुस्थलीय अनुकूलन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण ऊँट है। इसके खुर की निचली सतह,चौड़ी और गद्देदार होती है। इसके पीठ पर संचित भोजन के रूप में वसा एकत्रित रहती है जिसे हंप कहते हैं। भोजन नहीं मिलने पर इस वसा का उपयोग ऊँट ऊर्जा के लिए करता है। जल उपलब्ध होने पर यह एक बार में लगभग 50 लीटर जल पी लेता है जो शरीर के विभिन्न भागों में शीघ्र वितरित हो जाता है। उत्सर्जन द्वारा इसके शरीर से बहुत कम मात्रा में जल बाहर निकलता है। यह प्रायः सूखे मल का त्याग करता है।

प्रश्न 4.
अधिकतर जीवधारी 45° सेंटीग्रेड से अधिक तापमान पर जीवित नहीं रह सकते। कुछ सूक्ष्मजीव (माइक्रोब) ऐसे आवास में जहाँ तापमान 100° सेंटीग्रेड से भी अधिक है, कैसे जीवित रहते हैं?
उत्तर
सूक्ष्मजीवों में बहुत कम मात्रा में स्वतन्त्र जल रहता है। शरीर से जल निकलने से उच्च तापक्रम के विरुद्ध प्रतिरोध उत्पन्न होता है। सूक्ष्मजीवों की कोशाभित्ति में ताप सहन अणु तथा तापक्रम प्रतिरोधक एंजाइम्स भी पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
उन गुणों को बताइए जो व्यष्टियों में तो नहीं पर समष्टियों में होते हैं।
उत्तर
समष्टि (population) में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो व्यष्टि (individual) में नहीं पाए जाते। जैसे व्यष्टि जन्म लेता है, इसकी मृत्यु होती है, लेकिन समष्टि की जन्मदर (natality) और मृत्युदर (mortality) होती है। समष्टि में इन दरों को क्रमशः प्रति व्यष्टि जन्मदर और मृत्युदर कहते हैं। जन्म और मृत्युदर को समष्टि के सदस्यों के सम्बन्धों में संख्या में वृद्धि का ह्रास (increase or decrease) के रूप में प्रकट किया जाता है। जैसे- किसी तालाब में गत वर्ष जल लिली के 20 पौधे थे और इस वर्ष जनन द्वारा 8 नए पौधे और बन जाते हैं तो वर्तमान में समष्टि 28 हो जाती है तो हम जनन दर की गणना 8/20 = 0.4 संतति प्रति जल लिली की दर से करते हैं। अगर प्रयोगशाला समष्टि में 50 फल मक्खियों में से 5 व्यष्टि किसी विशेष अन्तराल (जैसे- एक सप्ताह) में नष्ट हो जाती हैं तो इस अन्तराल में समष्टि में मृत्युदर 5/50 = 0.1 व्यष्टि प्रति फलमक्खी प्रति सप्ताह कहलाएगी।

समष्टि की दूसरी विशेषता लिंग अनुपात अर्थात् नर एवं मादा का अनुपात है। सामान्यतया समष्टि में यह अनुपात 50 : 50 होता है, लेकिन इसमें भिन्नता भी हो सकती है जैसे- समष्टि में 60 प्रतिशत मादा और 40 प्रतिशत नर हैं।

निर्धारित समय में समष्टि भिन्न आयु वाले व्यष्टियों से मिलकर बनती है। यदि समष्टि के सदस्यों की आयु वितरण को आलेखित (plotted) किया जाए तो इससे बनने वाली संरचना आयु पिरैमिड (age pyramid) कहलाती है। पिरेमिड का आकार समष्टि की स्थिति को प्रतिबिम्बित करता है

  • क्या यह बढ़ रहा है,
  • स्थिर है या
  • घट रहा है।

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-1

समष्टि का आकार आवास में उसकी स्थिति को स्पष्ट करता है। यह सजातीय, अन्तर्जातीय प्रतिस्पर्धा, पीड़कनाशी, वातावरणीय कारकों आदि से प्रभावित होता है। इसे तकनीकी भाषा में समष्टि घनत्व से स्पष्ट करते हैं। समष्टि घनत्व का आकलन विभिन्न प्रकार से किया जाता है।
किसी जाति के लिए समष्टि घनत्व (आकार) निश्चित नहीं होता। यह समय-समय पर बदलता रहता है। इसका कारण भोजन की मात्रा, परिस्थितियों में अन्तर, परभक्षण आदि होते हैं। समष्टि की वृद्धि चार कारकों पर निर्भर करती है जिनमें जन्मदर (natality) और आप्रवासन (immigration) समष्टि में वृद्धि करते हैं, जबकि मृत्युदर (death rate-mortality) तथा उत्प्रावसन (emigration) इसे घटाते हैं। यदि आरम्भिक समष्टि No है, Nt एक समय अन्तराल है तथा । बाद की समष्टि है तो
Nt = No + (B + I) – (D + E)
= No + B + 1 – D – E

समीकरण से स्पष्ट है कि यदि जन्म लेने वाले ‘B’ संख्या + अप्रवासी ‘1’ की संख्या (B + I) मरने वालों की संख्या ‘D’ + उत्प्रवासी ‘E’ की संख्या से अधिक है तो समष्टि घनत्व बढ़ जाएगा अन्यथा घट जाएगा।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-2

प्रश्न 6.
अगर चरघातांकी रूप से (एक्स्पोनेन्शियली) बढ़ रही समष्टि 3 वर्ष में दोगुने साइज की हो जाती है तो समष्टि की वृद्धि की इन्ट्रिन्जिक दर (r) क्या है?
उत्तर
चरघातांकी वृद्धि (Exponential growth) – किसी समष्टि की अबाधित वृद्धि उपलब्ध संसाधनों (आहार, स्थान आदि) पर निर्भर करती है। असीमित संसाधनों की उपलब्धता होने पर समष्टि में संख्या वृद्धि पूर्ण क्षमता से होती है। जैसा कि डार्विन ने प्राकृतिक वरण सिद्धान्त को प्रतिपादित करते हुए प्रेक्षित किया था, इसे चरघातांकी अथवा ज्यामितीय (exponential or geometric) वृद्धि कहते हैं। अगर N साइज की समष्टि में जन्मदर ‘b’ और मृत्युदर ‘d’ के रूप में निरूपित की जाए, तब इकाई समय अवधि ‘t’ में समष्टि की वृद्धि या कमी होगी –
[latex s=2]\frac { dN }{ dt } =(b\quad -\quad d)\quad \times \quad N[/latex]
मान लीजिए (b – a) =r है, तब
[latex s=2]\frac { dN }{ dt } =rN[/latex]

‘r’ प्राकृतिक वृद्धि की इन्ट्रिन्जिक दर (intrinsicrate) कहलाती है। यह समष्टि वृद्धि पर जैविक या अजैविक कारकों के प्रभाव को निर्धारित करने के लिए महत्त्वपूर्ण प्राचल (parameter) है। यदि समष्टि 3 वर्ष में दोगुने साइज की हो जाती है तो समष्टि की वृद्धि की इन्टिन्जिक दर 3r’ होगी।

प्रश्न 7.
पादपों में शाकाहारिता (हार्बिवोरी) के विरुद्ध रक्षा करने की महत्त्वपूर्ण विधियाँ बताइए।
उत्तर

  1. पत्ती की सतह पर मोटी क्यूटिकल का निर्माण।
  2. पत्ती पर काँटों का निर्माण, जैसे- नागफनी।
  3. काँटों के रूप में पत्तियों का रूपान्तरण, जैसे-डुरेन्टा।
  4. पत्तियों पर कॅटीले किनारों का निर्माण।
  5. पत्तियों में तेज सिलिकेटेड किनारों का विकास।
  6. बहुत से पादप ऐसे रसायन उत्पन्न और भण्डारित करते हैं जो खाए जाने पर शाकाहारियों को बीमार कर देते हैं। उनकी पाचन का संदमन करते हैं। उनके जनन को भंग कर देते हैं। यहाँ तक कि मार देते हैं, जैसे- कैलोट्रोपिस अत्यधिक विषैला पदार्थ ग्लाइकोसाइड उत्पन्न करता है।

प्रश्न 8.
ऑर्किड पौधा, आम के पेड़ की शाखा पर उग रहा है। ऑर्किड और आम के पेड़ के बीच पारस्परिक क्रिया का वर्णन आप कैसे करेंगे?
उत्तर
ऑर्किड पौधा तथा आम के पेड़ की शाखा सहभोजिता प्रदर्शित करता है। यह ऐसी पारस्परिक क्रिया है जिसमें एक जाति को लाभ होता है और दूसरी जाति को न लाभ और न हानि होती है। आम की शाखा पर अधिपादप के रूप में उगने वाले ऑर्किड को लाभ होता है जबकि आम के पेड़ को उससे कोई लाभ नहीं होता।

प्रश्न 9.
कीट पीड़कों (पेस्ट/इंसेक्ट) के प्रबन्ध के लिए जैव-नियन्त्रण विधि के पीछे क्या पारिस्थितिक सिद्धान्त है?
उत्तर
कृषि पीड़कनाशी के नियन्त्रण में अपनाई गई जैव नियन्त्रण विधियाँ परभक्षी की समष्टि नियमन की योग्यता पर आधारित हैं। परभक्षी, स्पर्धा शिकार जातियों के बीच स्पर्धा की तीव्रता कम करके किसी समुदाय में जातियों की विविधता बनाए रखने में भी सहायता करता है। परभक्षी पीड़कों का शिकार करके उनकी संख्या को उनके वास स्थान में नियन्त्रित रखते हैं। गेम्बूसिया मछली मच्छरों के लार्वा को खाती है और इस प्रकार कीटों की संख्या को नियन्त्रित रखती है।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित के बीच अन्तर कीजिए
(क) शीत निष्क्रियता और ग्रीष्म निष्क्रियता (हाइबर्नेशन एवं एस्टीवेशन)
(ख) बाह्योष्मी और आन्तरोष्मी (एक्टोथर्मिक एवं एंडोथर्मिक)
उत्तर
(क) शीत निष्क्रियता और ग्रीष्म निष्क्रियता के बीच अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-3

(ख) बाह्योष्मी और आन्तरोष्मी के बीच अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-4

प्रश्न 11.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
(क) मरुस्थलीय पादपों और प्राणियों का अनुकूलन, (2018)
(ख) जल की कमी के प्रति पादपों का अनुकूलन,
(ग) प्राणियों में व्यावहारिक (बिहेवियोरल) अनुकूलन,
(घ) पादपों के लिए प्रकाश का महत्त्व,
(ङ) तापमान और जल की कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन।
उत्तर
(क) 1. मरुस्थलीय पादपों के अनुकूलन इस प्रकार हैं –

  1. इनकी जड़ें बहुत लम्बी, शाखित, मोटी एवं मिट्टी के नीचे अधिक गहराई तक जाती हैं।
  2. इनके तने जल-संचय करने के लिए मांसल और मोटे होते हैं।
  3. रन्ध्र स्टोमैटल गुहा में धंसे रहते हैं।
  4. पत्तियाँ छोटी, शल्कपत्र या काँटों के रूप में परिवर्तित हो जाती हैं।
  5. तना क्यूटिकिल युक्त तथा घने रोम से भरा होता है।

2. मरुस्थलीय प्राणियों के अनुकूलन इस प्रकार हैं –

  1. मरुस्थल के छोटे जीव, जैसे- चूहा, साँप, केकड़ा दिन के समय बालू में बनाई गई सुरंग में रहते हैं तथा रात को बिल से बाहर निकलते हैं।
  2. कुछ मरुस्थलीय जन्तु अपने शरीर के मेटाबोलिज्म से उत्पन्न जल का उपयोग करते हैं। उत्तरी अमेरिका के मरुस्थल में पाया जाने वाला कंगारू चूहा जल की आवश्यकता की पूर्ति अपनी आन्तरिक वसा के ऑक्सीकरण से करता है।
  3. जन्तु प्रायः सूखे मल का त्याग करता है।
  4. फ्रीनोसोमा तथा मेलोच होरिडस में काँटेदार त्वचा पाई जाती है।

(ख) जल की कमी के प्रति पादपों में अनुकूलन- ये मरुस्थलीय पादप कहलाते हैं। अत: इनका अनुकूलन मरुस्थलीय पादपों के समान होगा।

(ग) प्राणियों में व्यावहारिक अनुकूलन इस प्रकार हैं –

  1. शीत निष्क्रियता,
  2. ग्रीष्म निष्क्रियता,
  3. सामयिक सक्रियता,
  4. प्रवास आदि।

(घ) पादपों के लिए प्रकाश का महत्त्व इस प्रकार है –

  1. ऊर्जा का स्रोत,
  2. दीप्तिकालिक आवश्यकता,
  3. वाष्पोत्सर्जन,
  4. पुष्पन,
  5. पादप गति,
  6. पिग्मेंटेशन,
  7. वृद्धि
  8. कंद निर्माण आदि।

(ङ) 1. तापमान में कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन इस प्रकार है –

  1. शीत निष्क्रियता,
  2. सामयिक सक्रियता,
  3. प्रवास आदि।

2. जल की कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन इस प्रकार है –

  1. सूखे मल का त्याग करना।
  2. अपने शरीर के मेटाबोलिज्म से उत्पन्न जल का उपयोग करना।
  3. सूखे वातावरण को सहने की क्षमता।
  4. उत्तरी अमेरिका के मरुस्थल में पाया जाने वाला कंगारू चूहा जल की आवश्यकता की पूर्ति अपने आन्तरिक वसा के ऑक्सीकरण से करता है।

प्रश्न 12.
अजैवीय (abiotic) पर्यावरणीय कारकों की सूची बनाइए।
उत्तर
अजैवीय पर्यावरणीय कारक (Abiotic Environmental Factors) – विभिन्न अजैवीय कारकों को निम्नलिखित तीन समूहों में बाँट सकते हैं –

  1. जलवायवीय कारक (Climatic factors) – प्रकाश, ताप, वायुगति, वर्षा, वायुमण्डलीय नमी तथा वायुमण्डलीय गैसें।
  2. मृदीय कारक (Edaphic factors) – खनिज पदार्थ, कार्बनिक पदार्थ, मृदा जल तथा मृदा वायु।
  3. स्थलाकृतिक कारक (Topographic factors) – स्थान की ऊँचाई, भूमि का ढाल, पर्वत की दिशा आदि।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित का उदाहरण दीजिए –

  1. आतपोभिद् (हेलियोफाइट)
  2. छायोदभिद (स्कियोफाइट)
  3. सजीवप्रजक (विविपेरस) अंकुरण वाले पादप
  4. आन्तरोष्मी (एंडोथर्मिक) प्राणी
  5. बाह्योष्मी (एक्टोथर्मिक) प्राणी
  6. नितलस्थ (बैन्थिक) जोन का जीव।

उत्तर

  1. सूर्यमुखी
  2. फ्यूनेरिया
  3. राइजोफोरा
  4. पक्षी तथा स्तनधारी
  5. ऐम्फीबियन्स तथा रेप्टाइल्स
  6. जीवाणु, स्पंज, तारा मछली आदि।

प्रश्न 14.
समष्टि (पॉपुलेशन) और समुदाय (कम्युनिटी) की परिभाषा दीजिए।
उत्तर

  1. समष्टि (Population) – किसी खास समय और क्षेत्र में एक ही प्रकार की स्पीशीज के व्यष्टियों या जीवों की कुल संख्या को समष्टि कहते हैं।
  2. समुदाय (Community) – किसी विशिष्ट आवास-स्थान की जीव-समष्टियों का स्थानीय संघ समुदाय कहलाता है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित की परिभाषा दीजिए और प्रत्येक का एक-एक उदाहरण भी दीजिए –

  1. सहभोजिता,
  2. परजीविता,
  3. छद्मावरण,
  4. सहोपकारिता, (2018)
  5. अन्तरजातीय स्पर्धा।

उत्तर

  1. सहभोजिता (Commensalism) – यह ऐसी पारस्परिक क्रिया है जिसमें एक जाति को लाभ होता है और दूसरी जाति को न लाभ और न हानि होती है। उदाहरण-आम की शाखा पर उगने वाला ऑर्किड तथा ह्वेल की पीठ पर रहने वाला बार्नेकल।
  2. परजीविता (Parasitism) – दो जातियों के बीच पारस्परिक सम्बन्ध जिसमें एक जाति को लाभ होता है जबकि दूसरी जाति को हानि, परजीविता कहलाती है। उदाहरण-मानव यकृत पर्णाभ (लिवर फ्लूक)।
  3. छद्मावरण (Camouflage) – जीवों के द्वारा अपने आपको परभक्षी द्वारा आसानी से पहचान लिए जाने से बचने के लिए गुप्त रूप से रंगा होना, छद्मावरण कहलाता है। उदाहरण- कीट एवं मेंढक की कुछ जातियाँ।
  4. सहोपकारिता (Mutualism) – दो जातियों के बीच पारस्परिक सम्बन्ध जिसमें दोनों जातियों को लाभ होता है, सहोपकारिता कहलाती है। उदाहरण- शैवाल एवं कवक से मिलकर बना | हुआ लाइकेन।
  5. अन्तरजातीय स्पर्धा (Interspecies Competition) – जब निकट रूप से सम्बन्धित जातियाँ उपलब्ध संसाधनों (भोजन, आवास) के लिए स्पर्धा करती हैं जो सीमित हैं, अन्तरजातीय स्पर्धा कहलाती है। उदाहरण-गैलापैगोस द्वीप में बकरियों के आगमन से एबिंग्डन का विलुप्त होना। बार्नेकल बेलनेस के द्वारा बार्नेकल चैथेमैलस को भगाना।

प्रश्न 16.
उपयुक्त आरेख की सहायता से लॉजिस्टिक (सम्भार तन्त्र) समष्टि वृद्धि का वर्णन कीजिए।
उत्तर
प्रकृति में किसी भी समष्टि के पास इतने असीमित साधन नहीं होते कि चरघातांकी वृद्धि होती रहे। इसी कारण सीमित संसाधनों के लिए व्यष्टियों में प्रतिस्पर्धा होती है। आखिर में योग्यतम् व्यष्टि जीवित बना रहेगा और जनन करेगा। प्रकृति में दिए गए आवास के पास अधिकतम सम्भव संख्या के पालन-पोषण के लिए पर्याप्त संसाधन होते हैं, इससे आगे और वृद्धि सम्भव नहीं है। उस आवास में उस जाति के लिए इस सीमा को प्रकृति की पोषण क्षमता (K) मान लेते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-5

किसी आवास में सीमित संसाधनों के साथ वृद्धि कर रही समष्टि आरम्भ में पश्चता प्रावस्था (लैग फेस) दर्शाती है। उसके बाद त्वरण और मंदन और अन्ततः अनन्तस्पर्शी प्रावस्थाएँ आती हैं। समष्टि घनत्व पोषण क्षमता प्रकार की समष्टि वृद्धि विर्हस्ट-पर्ल लॉजिस्टिक वृद्धि कहलाता है। इसे निम्न समीकरण के द्वारा निरूपित किया जाता है –
[latex s=2]\frac { dN }{ dt } [/latex] = rN = [latex s=2]\frac { K-N }{ K } [/latex] जहाँ, N = समय t में समष्टि घनत्व,
r = प्राकृतिक वृद्धि की दर,
K = पोषण क्षमता।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित कथनों में परजीविता को कौन-सा कथन सबसे अच्छी तरह स्पष्ट करता है?
(क) एक जीव को लाभ होता है।
(ख) दोनों जीवों को लाभ होता है।
(ग) एक जीव को लाभ होता है, दूसरा प्रभावित नहीं होता है।
(घ) एक जीव को लाभ होता है, दूसरा प्रभावित होता है।
उत्तर
(घ) एक जीव को लाभ होता है, दूसरा प्रभावित होता है।

प्रश्न 18.
समष्टि की कोई तीन महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ बताइए और व्याख्या कीजिए।
उत्तर
समष्टि की तीन महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ इस प्रकार हैं –

  1. समष्टि आकार और समष्टि घनत्व (population size and population density)
  2. जन्मदर (birth rate),
  3. मृत्युदर (mortality rate)।

व्याख्या (i) समष्टि आकार और समष्टि घनत्व – किसी जाति के लिए समष्टि का आकार स्थैतिक प्रायता नहीं है। यह समय-समय पर बदलता रहता है जो विभिन्न कारकों, जैसे- आहार उपलब्धती, परभक्षण दाब और मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। समष्टि घनत्व बढ़ रहा है। अथवा घट रहा है कारण कुछ भी हो, परन्तु दी गई अवधि के दौरान दिए गए आवास में समष्टि का घनत्व चार मूलभूत प्रक्रमों में घटता-बढ़ता है। इन चारों में से दो (जन्मदर और आप्रवासन) समष्टि घनत्व को बढ़ाते हैं और दो (मृत्युदर और उत्प्रवासन) इसे घटाते हैं।
अगर समय t में समष्टि घनत्व N है तो समय t + 1 में इसका घनत्व Nt + 1 = Nt + (B + I) – (D + E) होगा।

उपरोक्त समीकरण में आप देख सकते हैं कि यदि जन्म लेने वालों की संख्या + आप्रवासियों की संख्या (B + I) मरने वालों की संख्या + उत्प्रवासियों की संख्या (D + E) से अधिक है तो समष्टि घनत्व बढ़ जाएगा, अन्यथा यह घट जाएगा।

(ii) जन्मदर – यह साधारणत: प्रतिवर्ष प्रति समष्टि के 1000 व्यक्ति प्रति जन्म की संख्या द्वारा व्यक्त की जाती है। जन्मदर समष्टि आकार तथा समष्टि घनत्व को बढ़ाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-6

(iii) मृत्युदर – यह जन्मदर के विपरीत है। यह साधारणतः प्रतिवर्ष प्रति समष्टि के 1000 व्यक्ति प्रति मृत्यु की संख्या द्वारा व्यक्त की जाती है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-7

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
स्पर्धा (competition) प्रभाव डालती है
(क) आबादी घनत्व पर
(ख) उत्पादन क्षमता पर
(ग) समुदाय विकास पर
(घ) इन सभी पर
उत्तर
(घ) इन सभी पर

प्रश्न 2.
खरपतवार वाले पौधे फसल वाले पौधों से स्पर्धा करते हैं –
(क) केवल स्थान के लिए।
(ख) स्थान और पोषण के लिये
(ग) स्थान, पोषण और प्रकाश के लिये
(घ) केवल प्रकाश के लिये
उत्तर
(ग) स्थान, पोषण और प्रकाश के लिये

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न का कारण स्पष्ट कीजिए (2015)

  1. जलोभिदों में वायु अवकाश अत्यधिक विकसित होते हैं।
  2. मध्योभिद् पौधा नमक के जल में रखने पर मर जाता है।

उत्तर

  1. जलोभिदों में उपस्थित वायु अवकाशों में वायु भरी होने के कारण, गैसीय विनिमय सुलभ हो जाता है, पौधे हल्के हो जाते हैं, ताकि पानी में ठहर सकें। इसके अतिरिक्त यह अंगों के मुड़ने के तनाव का प्रतिरोध भी करता है।
  2. यदि मध्योभिद् पौधे को नमक के घोल में रखा जाता है तो वह इस घोल का अवशोषण करने लगता है जिसके फलस्वरूप उसके अन्दर लवण की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण वह मुरझा जाता है तथा अन्ततः मर जाता है।

प्रश्न 2.
लवणमृदोभिद कहाँ पाये जाते हैं? इनके केवल दो मुख्य लक्षण लिखिए। (2016)
उत्तर
लवणमृदोभिद पौधे दलदली तटों पर पाये जाते हैं जहाँ के भूमि में लवणों की मात्रा अधिक होती है।

  1. इन पौधों में श्वसन जड़ें पायी जाती हैं।
  2. इनमें पितृस्थ अंकुरण या जरायुजता पायी जाती है।

प्रश्न 3.
मरुदभिद पौधों में कांटे किसका रूपान्तरण हैं? (2016)
उत्तर
मरुभिद् पौधों (जैसे- नागफनी) में कांटे पत्तियों के रूपान्तर हैं।

प्रश्न 4.
जरायुजता (vivipary) क्या है ? (2009, 16, 17)
उत्तर
यह घटना राइजोफोरा (Rhizophora) पौधे में देखी जा सकती है। इस पौधे में बीज जब फल में ही होते हैं तथा पौधे पर लगे होते हैं तभी अंकुरण आरम्भ हो जाता है। जरायुजता मैंग्रोव (mangrove) वनस्पति की विशेषता होती है।

प्रश्न 5.
एक अलेग्यूमीनोसीय पौधे का नाम बताइए जिसमें मूल ग्रन्थियाँ होती हैं। (2011)
उत्तर
कैजुराइना (Casudrina), रूबस (Rubas) की जड़ ग्रन्थियों में माइकोबैक्टीरियम जीवाणु पाया जाता है।

प्रश्न 6.
उत्पादक तथा अपघटक में अन्तर कीजिए। (2017)
उत्तर
उत्पादक हरे पौधे होते हैं, जो प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन निर्माण करते हैं। अपघटक के अन्तर्गत सूक्ष्म जीव जैसे जीवाणु एवं कवक आते हैं जो मृत पौधों एवं जन्तुओं का अपघटन करते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वनस्पति समूह को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो पारिस्थितिक कारकों का उल्लेख कीजिए। (2017)
उत्तर
वनस्पति समूह को प्रभावित करने वाले दो पारिस्थितिक कारक निम्न हैं –

  1. जलवायु सम्बन्धी कारक – इसके अन्तर्गत प्रकाश, तापमान, जल, वर्षा जल, वायमुण्डलीय गैसें, वायुमण्डलीय आर्द्रता आदि का वनस्पति समूहों पर प्रभाव के बारे में अध्ययन किया जाता है।
  2. स्थलाकृतिक कारक – इसके अन्तर्गत समुद्र की सतह से ऊँचाई, पर्वतों तथा घाटियों की दिशा, ढलान की प्रवणता, आदि कारक आते हैं जो जल-वायवीय कारकों के साथ कार्य करते हैं।

प्रश्न 2.
मृदा परिच्छेदिका पर टिप्पणी लिखिए। (2017)
उत्तर
मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) – मृदा के बनने व विकसित होने में अनेक क्रियाओं के फलस्वरूप मृदा स्तरीय बन जाती है। मृदा के इन स्तरों के अनुक्रम (sequence), रचनात्मक व स्थानीय लक्षणों तथा स्वभाव को मृदा परिच्छेदिका कहते हैं। मृदा परिच्छेदिका की प्रकृति जलवायु एवं क्षेत्र की वनस्पति पर निर्भर करती है। अधिकतर मृदा की खड़ी काट (vertical section) का अध्ययन करने पर इसमें 3 – 4 स्तर एवं अनेक उपस्तर पाये जाते हैं। सामान्य रूप से इसमें निम्नलिखित स्तर पाये जाते हैं –

1. संस्तर ओ (Horizon O) – यह सबसे ऊपरी स्तर है जो कार्बनिक पदार्थों का बना होता है। इसमें पूर्ण अपघटिते (completely decomposed), अनअपघटित (undecomposed), अर्धअपघटित (partially decomposed) तथा नये कार्बनिक पदार्थ मिलते हैं।
यह निम्न दो उपस्तरों का बना हो सकता है –

  1. O1 या A00 उपस्तर – यह सबसे ऊपरी उपस्तर है जो हाल ही में गिरी पत्तियों, पुष्पों, फलों, शाखाओं तथा मृत जीवों एवं जीवों के उत्सर्जी पदार्थों युक्त होता है और मुख्यतः अनअपघटित होता है।
  2. O2 या A0 उपस्तर – इस उपस्तर में कार्बनिक पदार्थ अपघटन की विभिन्न अवस्थाओं में रहता है।

2. संस्तर ए (Horizon A) – ऊपरी सतह से मिला यह स्तर खनिज पदार्थों से भरपूर होता है। इसमें ह्यूमस भी प्रचुर मात्रा में मिलता है। यह मुख्य रूप से बलूई मृदा (sandy soil) का बना होता है। इसमें उपस्थित घुलनशील लवण (soluble salts), लोहा (iron) आदि घुलकर नीचे की तरफ जाते रहते हैं। इसी कारण इस स्तर को अवक्षालन क्षेत्र (zone of eluviation) कहते हैं। अधिकांशतः पौधों की जड़े इसी स्तर में होती हैं।

3. संस्तर बी (Horizon B) – इसमें निक्षालन (leaching) के कारण चिकनी मिट्टी (clay soil), लोहा, ऐलुमिनियम आदि के ऑक्साइड एकत्रित होते हैं। इसको समपोट (illuviation) क्षेत्र कहते हैं। यह क्षेत्र गहरे रंग का होता है। संस्तर ओ, ए तथा बी को मिलाकर उपरिमृदी (top soil) कहते हैं। संस्तर ए तथा बी खनिज मृदा (mineral soil) अथवा सोलम (solum) बनाते हैं।

4. संस्तर सी (Horizon C) – यह भी खनिज पदार्थों का स्तर है। इसमें चट्टानें तथा अपूर्ण रूप से अपक्षीय चट्टानें मिलती हैं। इस स्तर को अवमृदा (sub soil) भी कहते हैं।

5. संस्तर आर (Horizon R) – यह परिच्छेदिका का सबसे निचला स्तर होता है। इसमें अनपक्षीण (unweathered) जनक चट्टानें (parent bed rocks) होती हैं।

प्रश्न 3.
कीस्टोन जातियों से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। (2010, 11, 12)
या
‘कीस्टोन प्रजातियाँ पर टिप्पणी लिखिए। (2009, 10, 15, 16)
उत्तर
कीस्टोन जातियाँ
प्रत्येक समुदाय में यद्यपि विभिन्न जातियाँ पायी जाती हैं, परन्तु समुदाय की सभी जातियाँ समान रूप से महत्त्वपूर्ण नहीं होतीं। एक या अधिक जातियाँ अन्य जातियों की तुलना में अधिक संख्या में, अधिक सुस्पष्टतया तथा अधिक क्षेत्र में फैली होती हैं। ये जातियाँ तेजी से वृद्धि करती हैं तथा समुदाय की अन्य जातियों की वृद्धि व संख्या का नियन्त्रण भी करती हैं।

इस प्रकार ये समुदाय की प्रमुख जाति या जातियाँ (dominant species) कहलाती हैं। अनेक बार यही जातियाँ, कीस्टोन जातियाँ (keystone species) कहलाती हैं, क्योंकि ये संख्या में अधिक होने के अतिरिक्त पर्यावरण को प्रमुखता से बदलने में सक्षम होती हैं। इस कारण से समुदाय का नाम भी इसी प्रमुख जाति या जातियों के नाम पर पड़ जाता है; जैसे–चीड़ वन, देवदार वन, चीड़-देवदार वन आदि।

उपर्युक्त से स्पष्ट है कि कीस्टोन जातियाँ (keystone species) या जातियों का पादप समुदाय की रचना में ही महत्त्वपूर्ण भाग नहीं होता वरन् यह उसके पर्यावरण को भी पूर्णतः प्रभावित करके रखती हैं। ये वहाँ की जलवायु को भी प्रभावित करती हैं। यहाँ तक कि ये अपने आस-पास के भौतिक पर्यावरण को परिवर्तित करके अपना एक सूक्ष्म जलवायु क्षेत्र (microclimatic region) ही बना लेती हैं जो उस वृहत् जलवायु क्षेत्र (macroclimatic zone) से अत्यधिक भिन्न भी हो सकता है। एक स्वच्छ धूप वाले दिन किसी घने वृक्ष के नीचे तथा खुले क्षेत्र की जलवायु अर्थात् तापमान, आपेक्षिक आर्द्रता, प्रकाश तीव्रता (temperature, relative humidity, light intensity) आदि में तुलना की जा सकती है।

कीस्टोन जातियाँ मृदा की रचना, मृदा रसायन एवं खनिजों के स्तर, ह्युमस आदि को भी परिवर्तित तथा प्रभावित करने में सक्षम होती हैं। अनेक बार मृदा में उपस्थित सूक्ष्मजीव भी कीस्टोन जातियों के उदाहरण होते हैं, ऐसे में वे मृदा के पर्यावरण के साथ-साथ मृदा के बाहर के पर्यावरण को बदलने में भी पूर्ण प्रभाव रखती हैं।

ये जातियाँ भू-जैवीय-रासायनिक चक्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाकर, कार्बनिक पदार्थों को अपघटित करके, ह्यूमस बढ़ाना, मृदा की उपजाऊ शक्ति बढ़ाना, जल को उपयोगी व प्राप्य जल के रूप में मृदा में स्थित रखना आदि अनेकानेक प्रभाव दिखाती हैं तथा ये प्रभाव मृदा पर जातियों को बसने, उन्हें भली-भाँति वृद्धि करने आदि के लिए प्रोत्साहित ही नहीं करते, बल्कि इन प्रक्रियाओं में उनका पूर्ण सहयोग भी करते हैं।

कीस्टोन प्रजातियाँ सूक्ष्म जलवायु, मृदा की बनावट तथा मृदा रसायन एवं खनिजों के स्तर को भी प्रभावित और परिवर्तित करने में सक्षम होती हैं। इनके प्रतिकूल प्रभाव वहाँ के भौतिक पर्यावरण में शीघ्र ही दिखाई देने लगते हैं, जो वहाँ के समुदायों पर बाहरी समुदायों के आक्रमण के रूप में परिलक्षित होते हैं। ऐसे ही परिवर्तनों से किसी स्थान विशेष पर अनुक्रमण (succession) सम्पन्न होते हैं।

प्रश्न 4.
परभक्षी की परिभाषा लिखिए। परभक्षी तथा शिकार के बीच अन्तःक्रिया का वर्णन कीजिए। (2010)
या
परभक्षी पर टिप्पणी लिखिए। (2014)
उत्तर
परभक्षी (शिकारी) तथा भक्ष्य (शिकार)
किसी पारिस्थितिक तन्त्र (ecosystem) के जैवीय तथा अजैवीय घटकों (biotic and abiotic components) के आपसी सम्बन्ध, चक्रण आदि पर ही उस पारितन्त्र के सन्तुलन का अस्तित्व है। जैवीय घटकों के आपसी सम्बन्ध, ऊर्जा तथा पोषक पदार्थों के प्रवाह को सुनिश्चित करते हैं। जैवीय घटकों में तीन प्रकार के जीव प्रमुख हैं- उत्पादक (producers), उपभोक्ता (consumers) तथा अपघटक (decomposers)।

उपभोक्ता विभिन्न श्रेणियों (orders) के यथा शाकाहारी (herbivores), मांसाहारी (carnivores) या सर्वाहारी (Omnivores) होते हैं। इनमें भी प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता सदैव शाकाहारी होते हैं और अपने पोषण के लिए उत्पादकों (producers) पर निर्भर करते हैं। . शाकाहारी जन्तु अगली श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए खाद्य पदार्थों को अपने अन्दर संचित करते हैं।
चूंकि ये जीव प्राय: जन्तु (animals) ही होते हैं अतः द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं (consumers of second order) को तो इनको किसी न किसी प्रकार पकड़कर अथवा शिकार करके ही अपना खाद्य बनाना होगा। स्पष्ट है यह मांसाहारी (carnivore) जो अपने शिकार या भक्ष्य (prey) को मार कर अपना भोजन बनाता है शिकारी या परभक्षी (predator) कहलाता है।

परभक्षी तथा भक्ष्य के मध्य अन्तर्सम्बन्ध
पारितन्त्र में परभक्षी तथा भक्ष्य के सम्बन्ध निश्चित होते हैं तथा यह परस्पर दोनों की जनन शक्ति, भक्षण बारम्बारता, दोनों के आकार-परिमाप तथा रुचियों पर निर्भर करते हैं। परभक्षी एकाहारी (monophagous), अल्पभक्षी (oligophagous) अथवा विविध भक्षी (polyphagous) हो सकते हैं। कुछ भी हो परभक्षी भक्ष्य की जनसंख्या को क्रम से खाकर कम करने का अनायास प्रयास करता रहता है; उदाहरण के लिए सर्यों की उपस्थिति में चूहों की संख्या बहुत कम हो जाती है।

इसी प्रकार, एक घास के मैदान के पारितन्त्र में मेढकों की संख्या सर्यों द्वारा नियन्त्रित रहती है। यहाँ यह भी विशिष्ट है कि एक पारितन्त्र में भक्ष्य तथा परभक्षी की संख्या सन्तुलित रहती है। यह सन्तुलन, भक्ष्य को कितने प्रकार के परभक्षी अपना शिकार बनाते हैं तथा कितने अन्तराल के बाद कोई परभक्षी भक्ष्य का शिकार करता है, इन दोनों बातों के अतिरिक्त सामान्य परिस्थितियों में भक्ष्य उस पारितन्त्र में अपनी जनसंख्या को कितनी शीघ्रता से बढ़ा सकते हैं, पर निर्भर करता है।

एक उदाहरण से यह बात स्पष्ट हो सकती है-किसी जैव समुदाय में एक एकाहारी (monophagous) परभक्षी अर्थात् एक ही भक्ष्य पर निर्भर परभक्षी के लिए भक्ष्य काफी संख्या में उपलब्ध हैं। परभक्षी एक के बाद एक अपने भक्ष्यों का भक्षण करता जाता है; भक्ष्यों की संख्या स्पष्टतः कम होती जाती है, अब परभक्षी भूखे मरेंगे क्योंकि और तो कुछ वे खायेंगे ही नहीं, कुछ अपने भक्ष्य की खोज में अपने जैव समुदाय को ही छोड़ जायेंगे। इधर परभक्षियों की संख्या कम हुई तो भक्ष्यों की संख्या वृद्धि प्रोत्साहित होगी।

इनकी संख्या बढ़ने से परभक्षियों की संख्या वृद्धि का वातावरण तैयार करेगा। इस प्रकार भक्ष्य व परभक्षियों का संख्या घनत्व निश्चित रह सकता है। यहाँ यह आवश्यक रूप से निहित है कि प्रायः परभक्षी उच्चतम परभक्षी को छोड़कर भी तो किसी अन्य का भक्ष्य है।

प्रश्न 5.
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए – स्पर्धा (प्रतिस्पर्धा) (2014,15)
उत्तर
स्पर्धा (प्रतिस्पर्धा)
जब डार्विन ने प्रकृति में जीवन-संघर्ष और योग्यतम की उत्तरजीविता के बारे में कहा तो वह निश्चयी था कि जैव विकास में अंतरजातीय स्पर्धा एक शक्तिशाली बल है। जीवों के बीच स्थान, भोजन, जल, खनिज लवण, सम्भोग साथी तथा अन्य संसाधनों के लिए स्पर्धा होती है। जब यह स्पर्धा एक ही जाति के सदस्यों के बीच होती है तब इसे अन्तरजातीय स्पर्धा (interspecific competition) कहते हैं तथा जब स्पर्धा विभिन्न प्रजाति के जीवों के बीच होती है। तब इसे अन्तराजातीय स्पर्धा (intraspecific competition) कहते हैं। इस प्रकार स्पर्धाएँ निम्नलिखित दो प्रकार की होती हैं –

(i) अन्तराजातीय स्पर्धा (Intraspecific Competition) – इस प्रकार की स्पर्धा भिन्न-भिन्न जातियों (species) के सदस्यों के बीच एक ही प्रकार के संसाधनों (resources) का उपयोग करने के कारण उत्पन्न होती है।
उदाहरण – जन्तुओं में परभक्षी-भक्ष्य (predator-prey) के सम्बन्ध में विभिन्न परभक्षी (predators) जन्तु अपने भक्ष्य (prey) को पाने के लिए स्पर्धा करते हैं। पौधों में विभिन्न प्रजातियाँ प्रकाश (light), पोषक पदार्थों (nutrients), वास स्थलों (habitats) के लिए आपस में स्पर्धा करती रहती हैं।

(ii) अन्तरजातीय स्पर्धा (Interspecific Competition) – इस प्रकार की स्पर्धा एक ही जाति (species) के सदस्यों के बीच पाई जाती है जिसमें एक ही जाति के विभिन्न सदस्य, आवास, भोजन, सहवास सदस्य आदि के लिए आपस में स्पर्धा करते हैं।
उदाहरण – फसल का मैदान जहाँ एक ही जाति के पौधों के बीच सीमित संसाधनों के कारण इस प्रकार की स्पर्धा पाई जाती है।

प्रश्न 6.
सहोपकारिता (परस्परता) किसे कहते हैं? उदाहरण देकर इसको स्पष्ट कीजिए। (2017, 18)
उत्तर
सहोपकारिता (Mutualism) – यह दो भिन्न प्रजाति के जीवों के बीच पाया जाने वाला सहजीवी (symbiotic) सम्बन्ध होता है जिसमें दोनों जीवों को परस्पर लाभ (benefit) होता है। कवक और प्रकाश-संश्लेषी शैवाल या सायनोबैक्टीरिया के बीच घनिष्ठ सहोपकारी सम्बन्ध का उदाहरण लाइकेन में देखा जा सकता है। इसी प्रकार कवकों और उच्चकोटि पादपों की जड़ों के बीच कवकमूल (माइकोराइजी) साहचर्य है। कवक मृदा से अत्यावश्यक पोषक तत्वों के अवशोषण में पादपों की सहायता करते हैं, जबकि बदले में पादप कवकों को ऊर्जा-उत्पादी कार्बोहाइड्रेट देते हैं। इसी प्रकार लेग्यूम-राइजोबियम सह-सम्बन्ध है।

सहोपकारिता के सबसे शानदार और विकास की दृष्टि से लुभावने उदाहरण पादप-प्राणी सम्बन्ध में पाए जाते हैं। पादपों को अपने पुष्प परागित करने और बीजों के प्रकीर्णन के लिए प्राणियों की सहायता चाहिए। स्पष्ट है कि पादप को जिन सेवाओं की अपेक्षा प्राणियों से है उसके लिए शुल्क तो देना होगा। पुरस्कार अथवा शुल्क के रूप में ये परागणकारियों को पराग और मकरंद तथा प्रकीर्णकों को रसीले और पोषक फल देते हैं।

लेकिन परस्पर लाभकारी तंत्र की ‘धोखेबाजी’ से रक्षा होनी चाहिए, उदाहरण के लिए, ऐसे प्राणी जो परागण में सहायता किए बिना ही मकरंद चुराते हैं। अब आप देख सकते हैं कि पादप-प्राणी पारस्परिक क्रिया में सहोपकारियों के लिए प्राय: सह-विकास’ क्यों शामिल है, अर्थात् पुष्प और इसके परागणकारी जातियों के विकास एक-दूसरे से मजबूती से जुड़े हुए हैं।

अंजीर के पेड़ों के अनेक जातियों में बर्र की परागणकारी जातियों के बीच मजबूत सम्बन्ध है। इसका अर्थ यह है कि कोई दी गई अंजीर जाति केवल इसके साथी’ बर्र की जाति से ही परागित हो सकती है, बर्र की दूसरी जाति से नहीं। मादा बर्र फल को न केवल अंडनिक्षेपण के लिए काम में लेती है; बल्कि फल के भीतर ही वृद्धि कर रहे बीजों को डिंबकों के पोषण के लिए प्रयोग करती है।

अंडे देने के लिए उपयुक्त स्थल की तलाश करते हुए बर्र अंजीर पुष्पक्रम को परागित करती है। इसके बदले में अंजीर अपने कुछ परिवर्धनशील बीज, परिवर्धनशील बर्र के डिंबंकों को, आहार के रूप में देता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए

  1. परजीविता (2015, 17)
  2. सहभोजिता (2013, 15)
  3. सहजीवन। (2009, 10, 11, 13, 15, 17)

उत्तर
1. परजीविता
ये विषमपोषी (heterotrophic) जीव हैं जो अपने परपोषी (host) के शरीर से आहार प्राप्त करते हैं। परजीवी विकल्पी (facultative) तथा अविकल्पी (obligate) दो प्रकार के हो सकते हैं। विकल्पी परजीवी मुख्यत: मृतोपजीवी (saprophytic) होते हैं, जो विशेष परिस्थितियों में ही परजीवी बनते हैं; जैसे-अधिकांश कवक या जीवाणु। अविकल्पी परजीवी, परपोषी (host) के परभक्षी (predator) होते हैं। कुछ आवृतबीजी (angiosperms) भी परजीवी स्वभाव को व्यक्त करते हैं, जैसे- कुस्कुटा (Cuscuta) – पूर्ण तना परजीवी; विस्कम (Viscum) तथा लोरेन्थस (Loranthus) – आंशिक तना परजीवी, रेफ्लेसिया (Rufflesia) और औरोबैकी (Orobanchae) – पूर्ण जड़ परजीवी; सैन्टेलम एलबम (Suntalum album) – आंशिक जड़ परजीवी है।

2. सहभोजिता
यह दो जीवों के बीच परस्पर सम्बन्ध है जिसमें एक जीव को लाभ होता है और दूसरे जीव को न हानि न लाभ होता है। आम की शाखा पर अधिपादप के रूप में उगने वाला ऑर्किड और हेल की पीठ को आवास बनाने वाले बार्नेकल को लाभ होता है जबकि आम के पेड़ और ह्वेल को उनसे कोई लाभ नहीं होता। पक्षी बगुला और चारण पशु निकट साहचर्य में रहते हैं। सहभोजिता का यह उत्कृष्ट उदाहरण है। जहाँ पशु चरते हैं उसके पास ही बगुले भोजन प्राप्ति के लिए रहते हैं क्योंकि जब पशु चलते हैं तो वनस्पति को हिलाते हैं और उसमें से कीट बाहर निकलते हैं। बगुले उन कीटों को खाते हैं अन्यथा वानस्पतिक कीटों को ढूंढ़ना और पकड़ना बगुले के लिए कठिन होता। सहभोजिता का दूसरा उदाहरण समुद्री ऐनिमोन दंशन स्पर्शक हैं, जिसमें उनके बीच क्लाउन मछली रहती है। मछलियों को परभक्षियों से सुरक्षा मिलती है जो दंशन स्पर्शकों से दूर रहते हैं। क्लाउन मछली से ऐनिमोन को कोई लाभ मिलता हो ऐसा नहीं लगती।

3. सहजीवन
यह दो भिन्न प्रजाति के जीवों के बीच पाया जाने वाला सहजीवी (Symbiotic) सम्बन्ध होता है। जिसमें दोनों जीवों को परस्पर लाभ (benefit) होता है। कवक और प्रकाश संश्लेषी शैवाल या सायनोबैक्टीरिया के बीच घनिष्ठ सहोपकारी सम्बन्ध का उदाहरण लाइकेन में देखा जा सकता है। इसी प्रकार कवकों और उच्चकोटि पादपों की जड़ों के बीच कवकमूल (माइकोराइजी) साहचर्य है। कवक, मृदा से अत्यावश्यक पोषक तत्त्वों के अवशोषण में पादपों की सहायता करते हैं जबकि बदले में पादप, कवकों को ऊर्जा-उत्पादी काबोहाइड्रेट देते हैं।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनुकूलन को परिभाषित कीजिए। अनुकूलन में होने वाले परिवर्तन का विस्तार से वर्णन कीजिए। उदाहरण सहित विभिन्न प्रकार के अनुकूलन का वर्णन कीजिए। (2015)
या
मैन्ग्रोव वनस्पतियाँ कहाँ पायी जाती हैं? इनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (2014)
या
मैन्ग्रोव पौधों में पितृस्थ अंकुरण (जरायुजता) एक विशिष्ट अनुकूलन है। स्पष्ट कीजिए। (2017)
या
टिप्पणी लिखिए-मैन्ग्रोव वनस्पति। (2014, 15)
उत्तर
अनुकूलन
पौधों की बाह्य आकारिकी तथा आन्तरिक संरचना (external morphology and internal structure) पर उनके वातावरण का प्रभाव पड़ता है। पौधों में अपने आपको वातावरण में समायोजित करने की सामर्थ्य होती है जिसे अनुकूलन (adaptation) कहते हैं। दूसरे शब्दों में पौधों में अनुकूलन से तात्पर्य उन विशेष बाह्य अथवा आन्तरिक लक्षणों से है जिनके कारण पौधे किसी विशेष वातावरण में रहने, वृद्धि करने, फलने-फूलने तथा प्रजनन के लिए पूर्णतया सक्षम होते हैं और अपना जीवन-चक्र पूरा करते हैं। इन विशेष पारिस्थितिकीय अनुकूलनों तथा आवास के आधार पर पौधों को भिन्न पारिस्थितिक समूहों में रखा गया है जो निम्नलिखित चार हैं –

  1. जलोद्भिद् (Hydrophytes)
  2. शुष्कोभिद् = मरुद्भिद् (Xerophytes)
  3. मध्योद्भिद् = समोद्भिद् (Mesophytes)
  4. लवणोद्भिद् (Halophytes)

I. जलोभिद पौधों में अनुकूलन
(A) जलोभिद् पौधों में आकारिकीय अनुकूलन
1. जड़ों में अनुकूलन

  1. जलीय पौधों का शरीर जल के सम्पर्क में रहता है जिससे जल-अवशोषण के लिए जड़ों की आवश्यकता नहीं रह जाती। अतः जड़े बहुत कम विकसित अथवा अनुपस्थित होती हैं, उदाहरण- वॉल्फिया (Wolffa), सिरेटोफिल्लम (Ceratophyllum) आदि।
  2. जड़ें यदि उपस्थित हैं तो वे प्रायः रेशेदार (fibrous), अपस्थानिक (adventitious), छोटी तथा शाखाविहीन (unbranched) अथवा बहुत कम शाखीय होती हैं। लेम्ना (Lemna) में इनका कार्य केवल सन्तुलन (balancing) तथा तैरने में सहायता करना है।
  3. मूलरोम (root hairs) अनुपस्थित अथवा कम विकसित होते हैं।
  4. मूलगोप (root caps) प्रायः अनुपस्थित होती हैं। कुछ पौधों, उदाहरण- समुद्रसोख (Eichhornia) तथा पिस्टिया (Pistia) में मूलगोप के स्थान पर एक अन्य रचना मूल-पॉकेट (root-pocket) होती है।
  5. सिंघाड़े (Trapa) की जड़े स्वांगीकारक (assimilatory) होती हैं, अर्थात् हरी होने के कारण प्रकाश-संश्लेषण करती हैं।

2. तनों में अनुकूलन

  1. जलनिमग्न पौधों में तने प्रायः लम्बे, पतले, मुलायम तथा स्पंजी होते हैं जिससे पानी के बहाव के कारण इन्हें हानि नहीं होती।
  2. स्वतन्त्र तैरक (free floating) पौधों में तना पतला होता है तथा जल की सतह पर क्षैतिज दिशा में तैरता है, उदाहरण-एजोला (Azolla) समुद्रसोख (Eichhormia) तथा पिस्टिया (Pistia) में तना छोटा, मोटा तथा स्टोलन के रूप में (stoloniferous) होता है।
  3. स्थिर तैरक (fixed floating) पौधों में तना, धरातल पर फैला रहता है, इसे प्रकन्द (rhizome) कहते हैं। यह जड़ों द्वारा कीचड़ में स्थिर रहता है, उदाहरण- जलकुम्भी (Nymphaed) तथा निलम्बियम (Nelumbium)।

3. पत्तियों में अनुकूलन

  1. जलनिमग्न पौधों में पत्तियाँ पतली होती हैं, वेलिसनेरिया (Valisneria) में ये लम्बी तथा फीतेनुमा (ribbon-shaped), पोटामोजेटोन (Potamogeton) में लम्बी, रेखाकार (linear) तथा सिरेटोफिल्लम (Ceratophyllum) में ये महीन तथा कटी-फटी होती हैं। तैरक पौधों की पत्तियाँ बड़ी, चपटी व पूर्ण होती हैं। जलकुम्भी (Nymphaed) की पत्ती की ऊपरी सतह पर मोमीय पदार्थ की परत (waxy coating) होती है तथा पर्णवृन्त लम्बे होते हैं व श्लेष्म से ढके रहते हैं।
  2. सिंघाड़े (Trupa) तथा समुद्रसोख (Eichhormia) में पर्णवृन्त फूला होता है तथा स्पंजी होता हैं।
  3. कुछ जलस्थली (amphibious) पौधों, जैसे-सेजिटेरिया (Sagittaria), जलधनिया (Ranunculus), आदि में विषमपर्णी (heterophylly) दशा होती है। इसमें जलनिमग्न पत्तियाँ अधिक लम्बी तथा कटी-फटी होती हैं, जल की सतह पर तैरने वाली पत्तियाँ अथवा वायवीय पत्तियाँ चौड़ी व पूर्ण होती हैं। यह अनुकूलन प्रकाश प्राप्ति के लिए होता है। जलनिमग्न पौधों की कटी-फटी पत्तियाँ अधिकतम प्रकाश ग्रहण करने का प्रयास करती हैं।

4.पुष्प व बीज में अनुकूलन
जलनिमग्न पौधों में प्राय: पुष्प उत्पन्न नहीं होते, जहाँ पर पुष्प उत्पन्न होते हैं, उनमें बीज नहीं बनते।

(B) जलोभिद् पौधों में शारीरिकीय अनुकूलन
जलीय पौधों के विभिन्न भागों की आन्तरिक रचना (शारीरिकी) में निम्न विशेषताएँ या अनुकूलन पाए जाते हैं –

1. बाह्यत्वचा (Epidermis) – बाह्यत्वचा प्रायः मृदूतक कोशिकाओं की बनी इकहरी परत के रूप में होती है। इस पर उपत्वचा (cuticle) नहीं होती, परन्तु तैरने वाली पत्तियों की ऊपरी बाह्यत्वचा पर मोमीय परत (उदाहरण- जलकुम्भी, Nymphaea) अथवा रोमिल परत (उदाहरण- साल्विनिया- Salvyinic) होती है। बाह्यत्वचा की कोशिकाओं में प्रायः पर्णहरिम (chlorophyll) पाया जाता है। टाइफा (Typha) में बाह्यत्वचा पर उपचर्म (cuticle) की परत होती है।

2. रन्ध्र (Stomata) – जलनिमग्न (submerged) पौधों में रन्ध्र प्रायः अनुपस्थित होते हैं। तैरक (floating) पौधों में रन्ध्र प्रायः पत्ती की ऊपरी सतह तक ही सीमित रहते हैं; जबकि
जलस्थलीय (amphibious) पौधों की जल से बाहर निकली पत्तियों में रन्ध्र दोनों सतहों पर होते हैं।

3. अधस्त्वचा (Hypodermis) – जलनिमग्न पौधों, उदाहरण-हाइड्रिलो (Hydrilla) तथा पोटामोजेटोन (Potamogeton) के तनों में अधस्त्वचा अनुपस्थित होती है, यद्यपि कुछ तैरक (floating) पौधों व जलस्थलीय (amphibious) पौधों में यह मोटी भित्ति वाली मृदूतकीय कोशिकाओं के रूप में अथवा स्थूलकोण ऊतक के रूप में होती है।

4. यान्त्रिक ऊतक (Mechanical Tissue) – जलोभिदों में यान्त्रिक ऊतक प्राय: अनुपस्थित अथवा बहुत कम विकसित होता है।

5. वल्कुट (Cortex) – जड़ व तनों में वल्कुट (cortex) सुविकसित होता है तथा पतली भित्ति की मृदूतक कोशिकाओं का बना होता है। वल्कुट (cortex) के अधिकांश भाग में बड़ी-बड़ी वायु-गुहिकाएँ (air cavities) उत्पन्न हो जाती हैं। इस ऊतक को वायूतंक (aerenchyma) कहते हैं। वायु-गुहिकाओं में भरी वायु के कारण, गैसीय विनिमय सुलभ हो जाता है, पौधे हल्के हो जाते हैं, ताकि पानी में ठहर सकें। इसके अतिरिक्त यह अंगों के मुड़ने के तनाव का प्रतिरोध (resistance to bending stress) भी करता है।

6. पत्तियों में पर्णमध्योतक (Mesophyll Tissue in Leaves) – जलनिमग्न पत्तियों में पर्णमध्योतक अभिन्नित (undifferentiated) होता है। तैरक पत्तियों, जैसे-जलकुम्भी (Nymphaea) में यह खम्भ ऊतक (palisade tissue) व स्पंजी मृदूतक (spongy parenchyma) में भिन्नत होता है, इसमें बड़ी वायु-गुहिकाएँ (air cavities) भी पाई जाती हैं।

7. संवहन बण्डल (Vascular Bundle) – संवहन ऊतक कम विकसित होता है। जलनिमग्ने पौधों में यह कम भिन्नित होता है। जाइलम में प्रायः वाहिकाएँ (tracheids) ही उपस्थित होती हैं, वाहिनिकाएँ (vessels) कम होती हैं, यद्यपि जलस्थलीय (amphibious) पौधों में संवहन बण्डल अपेक्षाकृत अधिक विकसित तथा जाइलम व फ्लोएम में भिन्नत होते हैं।

(C) कुछ अन्य अनुकूलन

  1. जलीय पौधे प्रायः बहुवर्षीय (perennials) होते हैं।
  2. अधिकतर जलीय पौधों में भोजन प्रायः प्रकन्दों (rhizomes) में संचित रहता है।
  3. अधिकांश जलीय पौधों में वर्षी या कायिक प्रजनन (vegetative reproduction) तीव्रता से होता है।
  4. जलीय पौधों में द्वितीयक वृद्धि (secondary growth) नहीं होती।
  5. जलीय पौधों में पूर्ण शरीर पर श्लेष्मिक आवरण होता है जिससे पौधे पानी में गल नहीं पाते।

II. शुष्कोभिद् = मरुभिद् पौधों में अनुकूलन
इसका अध्ययन विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में करें।

III. मध्योदभिद् = समोदभिद् पौधों में अनुकूलन
मध्योभिद पौधे उन स्थानों पर उगते हैं, जहाँ की जलवायु न तो बहुत शुष्क है और न ही बहुत नम है। तथा ताप व वायुमण्डल की आपेक्षिक आर्द्रता (relative humidity) भी साधारण होती है। ये पौधे शाक, झाड़ी तथा वृक्ष सभी रूपों में होते हैं, उदाहरण-गेहूँ, चना, मक्का, गुड़हल, आम, शीशम, जामुन आदि, यद्यपि इन पौधों में जलोभिद् तथा मरुभिद् पौधों की भाँति विशिष्ट रचनात्मक या क्रियात्मक अनुकूलन तो नहीं होते, परन्तु कुछ अर्थों में ये जलोभि व मरुभिद् पौधों के बीच की स्थिति रखते हैं। इनके प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं –

  1. जड़ तन्त्र सुविकसित होता है। जड़े सामान्यतः शाखित होती हैं, इनमें मूलरोम (root hairs) व मूलगोप (root caps) पाए जाते हैं।
  2. तना वायवीय, ठोस तथा जाति के अनुसार, स्वतन्त्र रूप से शाखित होता है।
  3. पत्तियाँ प्रायः बड़ी, चौड़ी तथा विभिन्न आकृतियों की होती हैं, प्रायः क्षैतिज दिशा में रहती हैं। तथा इन पर रोम व मोमीय परत आदि नहीं होती।
  4. बाह्यत्वचा (epidermis) सुविकसित होती है। सभी वायवीय भागों की बाह्यत्वचा पर उपत्वचा | (cuticle) का पतला स्तर होता है।
  5. रन्ध्र (stomata) प्रायः पत्तियों की दोनों सतहों पर होते हैं, यद्यपि इनकी संख्या निचली सतह पर अधिक होती है।
  6. पर्णमध्योतक ऊतक (mesophyll tissue), खम्भ ऊतक (palisade tissue) व स्पंजी मृदूतक (spongy parenchyma) में विभेदित होता है।
  7. संवहन ऊतक (vascular tissue) तथा यान्त्रिक ऊतक (mechanical tissue) विकसित होते हैं तथा भली प्रकार विभेदित होते हैं।
  8. इन पौधों में प्रायः दोपहर के समय अस्थाई म्लानता (temporary wilting) देखी जा सकती है।

IV. लवणोदभिद् पौधों में अनुकूलन
(A) लवणोभिद् पौधों में आकारिकीय अनुकूलन
लवणोभिद् पौधों को मैन्ग्रोव वनस्पतियाँ भी कहते हैं। इनके विभिन्न भागों की बाह्य रचना में निम्नलिखित विशेषताएँ अथवा अनुकूलन प्रमुख हैं –

1. जड़ (Root) – जड़े दो प्रकार की होती हैं- वायवीय (aerial) तथा भूमिगत (subterranean)। वायवीय जड़े दलदल से बाहर सीधी निकल जाती हैं और ख़ुटी जैसी रचनाओं के रूप में दिखाई देती हैं। ये जड़े ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षी (negatively geotropic) होती हैं तथा इन पर अनेक छिद्र होते हैं। ये जड़े श्वसन का कार्य करती हैं, इन्हें श्वसन मूल (pneumatophores) कहते हैं, उदाहरण-सोनेरेशिया (Sonnerutia) तथा एवीसीर्निया (Avicennia), आदि। श्वसन मूलों द्वारा ग्रहण की गई ऑक्सीजन न केवल जलनिमग्न जड़ों के काम आती है, बल्कि इसे उस रुके लवणीय जल में रहने वाले जन्तु भी प्रयुक्त करते हैं। राइजोफोरा में प्रॉप मूल (prop roots) भी होती है जो पौधे को दलदल वाली भूमि में स्थिर रखती है।

2. तना (Stem) – तने प्रायः मोटे, मांसल व सरसे होते हैं।
3. पत्तियाँ (Leaves) – पत्तियाँ प्रायः मोटी व सरस होती हैं। ये सदाहरित (evergreen) होती हैं। कुछ पौधों में ये पतली तथा छोटी होती हैं।
4. पितृस्थ अंकुरण (Vivipary) – मैन्ग्रोव पौधों में पितृस्थ अंकुरण एक विशिष्ट अनुकूलन है। प्रायः बीजों को अंकुरित होने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। लवणीय दलदल में ऑक्सीजन की कमी होती है। अत: बीज, मातृ पौधे पर फल के अन्दर रहते हुए ही अंकुरित हो जाते हैं। इस गुण को पितृस्थ अंकुरण (vivipary) कहते हैं।

(B) लवणोभिद् पौधों में शारीरिकीय अनुकूलन
1. जड़ों में अनुकूलन
जड़ की आन्तरिक रचना में निम्न अनुकूलन या विशेषताएँ पाई जाती हैं –

  1. भूमिगत जड़ों में चारों ओर बहुस्तरीय कॉर्क पाई जाती हैं।
  2. जड़ की वल्कुट (cortex) की कोशिकाएँ ताराकृति (star-shaped) की होती हैं और परस्पर पार्श्व भुजाओं (lateral arms) द्वारा सम्बन्धित रहती हैं। कुछ कोशिकाएँ तेल व टैनिनयुक्त होती हैं।
  3. पिथ कोशिकाएँ मोटी भित्ति की होती हैं और इनमें भी तेल व टैनिन संचित रहता है।

2. तनों में अनुकूलन
तने की आन्तरिक रचना में निम्नलिखित अनुकूलन या विशेषताएँ होती हैं –

  1. बाह्यत्वचा की कोशिकाएँ मोटी भित्ति वाली होती हैं। तरुण तने में भी बाह्यत्वचा के चारों ओर उपत्वचा (cuticle) का मोटा स्तर होता है। बाह्यत्वचा की कोशिकाएँ तेल व टैनिनयुक्त होती हैं।
  2. बाह्यत्वचा के नीचे बहुस्तरीय, मोटी भित्ति वाली कोशिकाओं की बनी अधस्त्वचा होती है।
  3. प्राथमिक वल्कुट (cortex) में अनेक बड़े स्थान (lacunae) होते हैं, इनकी कोशिकाओं में टैनिन वे तेल होता है। कुछ कोशिकाओं में कैल्सियम ऑक्सेलेट (calcium oxalate) के रवे होते हैं। H- की आकृति की कण्टिकाएँ (spicules) भी होती हैं जो वल्कुट को यान्त्रिक शक्ति (mechanical strength) प्रदान करती हैं।
  4. परिरम्भ (pericycle) बहुस्तरीय तथा दृढ़ोतकीय (sclerenchymatous) होता है।
  5. पिथ में भी ‘H’ की आकृति की कण्टिकाएँ होती हैं।
  6. संवहन बण्डल सुविकसित होते हैं।

3. पत्तियों में अनुकूलन
पत्ती की आन्तरिक रचना में निम्नलिखित अनुकूलन या विशेषताएँ होती हैं।

  1. ऊपरी तथा निचली बाह्यत्वचा पर उपत्वचा की मोटी परत होती है।
  2. बाह्यत्वचा की कोशिकाएँ अधिक मोटी होती हैं और उनमें कैल्सियम ऑक्सेलेट (calcium oxalate) के रवे होते हैं।
  3. रन्ध्र (stomata) प्रायः पत्ती की निचली सतह पर होते हैं तथा गड्ढों में स्थित होते हैं। (sunken stomata)।
  4. ऊपरी बाह्यत्वचा के नीचे पतली भित्ति वाली कोशिकाओं के अनेक स्तर होते हैं जिनमें पानी भरा होता है, बाहरी स्तरों की कोशिकाओं में तेल व टैनिन भी होता है।
  5. पर्णमध्योतक, भली प्रकार भिन्नित होता है।
  6. पत्ती की निचली सतह पर कॉर्क क्षेत्र (cork areas) पाए जाते हैं।

प्रश्न 2.
मरुदभि क्या हैं? इनके आकारिकीय एवं आन्तरिक लक्षणों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए। (2013)
या
मरुदभिद् पौधों के लक्षण लिखिए। (2011, 14)
या
मरुभिद् पौधों के विभिन्न आकारीय अनुकूलनों का वर्णन कीजिए।(2009, 10, 11, 18)
या
नागफनी एक मरुदभि है। कारण सहित व्याख्या कीजिए। (2015)
उत्तर
मरुभिद्
शुष्क आवास स्थल पर पाई जाने वाली वनस्पति को शुष्कोभिद् या मरुद्भिद् (xerophytes) कहते हैं। ऐसे वासस्थलों में जल की अत्यधिक कमी पायी जाती है। इस प्रकार के पादप लम्बी अवधि के शुष्क अनावृष्टि काल में भी जीवित रह सकते हैं। अतः इनमें जलाभाव की अत्यधिक सहिष्णुता होती है। अत्यधिक मात्रा में जल उपलब्ध होने के पश्चात् भी जल पौधों को उपलब्ध नहीं हो पाता। इस प्रकार के आवास कार्यिकी दृष्टि से शुष्क (physiologically dry) होते हैं। शुष्क आवास स्थल भी निम्नलिखित प्रकार के होते हैं –

1. भौतिक दृष्टि से शुष्क आवास स्थल (Physically Dry Habitat) – ऐसे स्थलों की मृदा में जल को धारण करने व इसे रोके रखने की क्षमता बहुत ही कम होती है तथा वहाँ की जलवायु भी शुष्क पाई जाती है; जैसे- मरुस्थल व व्यर्थ भूमि, चट्टानी सतह इत्यादि।

2. कार्यिकी दृष्टि से शुष्क आवास स्थल (Physiologically Dry Habitat) – ऐसे आवास स्थलों पर जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहता है परन्तु पौधे सुगमता से इसका अवशोषण या उपयोग नहीं कर पाते हैं; जैसे–अत्यधिक लवणीय या अम्लीय या ठण्डे स्थान। अत्यधिक लवणीय या अम्लीय अवस्था तथा जल के बर्फ रूप में रहने के कारण पौधे जल का अवशोषण नहीं कर पाते।

3. भौतिक व कार्यिकी दृष्टि से शुष्क आवास स्थल (Physically and Physiologically Dry Habitat) – कुछ स्थल ऐसे होते हैं जहाँ न तो जल धारण की क्षमता उपलब्ध होती है और न ही पौधे उसका उपयोग करने में सक्षम होते हैं अतः ऐसे आवास स्थल कार्यिकी व भौतिक दृष्टि से शुष्क आवास स्थल होते हैं। जैसे–पर्वतों की ढलानें। नागफनी के पौधे में निम्नलिखित लक्षण पाये जाते हैं जिसके आधार पर यह सिद्ध होता है कि यह एक मरुद्भिद् है।

आकारिकीय लक्षण
1. मूल (Root) – मरुभिद् पादप जलाभाव वाले स्थानों पर पाये जाते हैं अतः जल प्राप्त करने के लिए इनका मूल तन्त्र अत्यधिक विकसित होता है। इनमें पाये जाने वाले लक्षण निम्न प्रकार हैं –

(i) जड़े सुविकसित तथा भूमि में चारों तरफ फैली हुई रहती हैं। जड़े प्राय: मूसला (tap root) होती हैं तथा भूमि में गहराई तक जाती हैं और इनकी शाखाओं का मृदा में एक विस्तृत जाल फैला रहता है। अनेक मरुस्थलीय पौधों में मूल केवल भूमि की ऊपरी सतहों में ही रहती हैं परन्तु ऐसा एकवर्षीय या छोटे शाकीय पौधों या मांसल पादपों में ही होता है।
ओपेनहाइमर (Oppenheimer, 1960) के अनुसार प्रोसोपिस अल्हेगी (Prosophis athagi) की जड़े 20 मीटर तथा अकेशिया (Acacid) और टेमेरिक्स (Tamarix) के वृक्षों की जड़े भूमि में 30 मीटर की गहराई तक पहुँच जाती हैं।

(ii) जड़ों की वृद्धि दर अधिक होती है। यह 10 से 50 सेमी प्रति दिन तक की होती है। शैलोभिद् पादपों की जड़े चट्टानों के ऊपर और अन्दर भी वृद्धि करने में सक्षम होती हैं।

(iii) जड़ों में मूल रोम (root hairs) और मूल गोप (root cap) सुविकसित होते हैं जिससे ये पौधे भूमि से अधिक से अधिक जल का अवशोषण करने में सक्षम होते हैं।

(iv) इन पादपों में जड़ों की अत्यधिक वृद्धि होने के फलस्वरूप जड़ एवं प्ररोह की लम्बाई का अनुपात root and shoot ratio) 3 से 10 तक का पाया जाता है।

2. स्तम्भ (Shoot) – मरुद्भिद् पौधों के स्तम्भ में अनेक प्रकार के लक्षण पाये जाते हैं क्योंकि इसे वहाँ के वायव पर्यावरण को भी सहन करना पड़ता है। इनमें पाये जाने वाले लक्षण निम्न प्रकार हैं –

  1. अधिकांश पौधों में तना छोटा, शुष्क व काष्ठीय होता है। तने के ऊपर मोटी छाल (bark) पायी जाती है।
  2. पौधों में स्तम्भ वायव (aerial) या भूमिगत (underground) होता है। कुछ पौधों में शाखाएँ अधिक संख्या में होती हैं। किन्तु ये आपस में सटी हुई होती हैं, जैसे-सिट्रलस कोलोसिन्थिस (Citrullus colocynthis)
  3. तने पर अत्यधिक मात्रा में बहुकोशिकीय रोम (multicellular hairs) पाये जाते हैं; जैसे- आरनिबिया (Arnebia) तथा कुछ में तने की सतह पर मोम और सिलिका का आवरण पाया जाता है, जैसे-मदार (Calotropis), इक्वीसीटम (Equesetum) आदि।
  4. कुछ मरुद्भिद् के तने कंटकों में परिवर्तित हो जाते हैं; जैसे-यूफोबिया स्पलेनडेन्स (Euphorbid splendens), डूरन्टा (Duranta), सोलेनम जेन्थोकार्पम (Solanum xanthocarpum = नीली कटेली), यूलक्स (Ulex) आदि।
  5. प्रायः मरुभिद् पादपों में पर्ण के छोटे हो जाने से प्रकाश संश्लेषण में कमी आ जाती है। अत: इसकी पूर्ति हेतु तना चपटा व हरे पर्ण की जैसी गूदेदार रचना में परिवर्तित हो जाता है; जैसे–नागफनी (Opurntia), रसकस (Ruscus), कोकोलोबा (Cocoloba) इत्यादि। इस रूपान्तरण को पर्णाभ स्तम्भ (phylloclade) भी कहते हैं। यूफोर्बिया स्पलेनडेन्स (Euphorbia splendens) में भी स्तम्भ मांसल तथा हरा हो जाता है। ऐसपेरेगस (Asparagus) पौधों की कक्षस्थ शाखाएँ भी हरे रंग की सूजाकार (needle like) रचनाओं में परिवर्तित हो जाती हैं। इन्हें पर्णाभ पर्व (cladode) कहते हैं। इनके पर्णाभ स्तम्भ व पर्णाभ पर्व जैसी रचनाएँ पत्तियों के अभाव में प्रकाश संश्लेषण का कार्य करती हैं।

3. पत्तियाँ (Leaves) – इन पौधों की पत्तियों में निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं –

(i) अनेक मरुभिद् पादपों की पत्तियाँ प्रारम्भ में ही लुप्त हो जाती हैं और इस प्रकार से इनमें पत्तियाँ पर्णपाती तथा आशुपाती (caducous) लक्षणों वाली होती हैं, जैसे-लेप्टेडीनिया (Laptadenia), केर (Capparis)। किन्तु कुछ में पत्तियों रूपान्तरित होकर कॅटीले रूप भी धारण कर लेती हैं, जैसे- नागफनी (Opuntia) या शल्क पर्ण में परिवर्तित हो जाती हैं, जैसे-रसकस (Ruscus), ऐसपेरेगस (Asparagus), केज्यूराइना (Casudrina), मूहलनबेकिया (Muehelenbeckia) इत्यादि। ये समस्त रूपान्तरण कुल मिलाकर पौधे की वाष्पोत्सर्जन दर को कम करते हैं।

(ii) प्रायः पत्तियों का आकार छोटा होता है तथा जिन पौधों की पत्तियों का आकार बड़ा होता है उनकी सतह चिकनी व चमकदार होती है, जिससे प्रकाश परिवर्तित हो जाता है। फलस्वरूप पत्ती का तापक्रम कम हो जाने से वाष्पोत्सर्जन की क्रिया भी मंद होती है। चीड़ (Pinus) की पत्तियों का आकार तो सूजाकार (needle like) होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-8

(iii) पत्तियों की सतह पर मोम (wax), सिलिका की परतें आवरित रहती हैं और कभी – कभी उपत्वचा कोशिकाओं में टेनिन और गोंद पाये जाते हैं।

(iv) मरुस्थलीय क्षेत्रों में तेज गति वाली हवाएँ बहती रहती हैं, ऐसे स्थानों पर पाये जाने वाले मरुभिद् पादपों की पत्तियों की सतह बहुकोशीय रोमों (hairs) से ढकी रहती है, जैसे- कनेर (Nerium), आरनिबिया (Armebid), मदार (Calotropis) इत्यादि। ये रन्ध्र वाष्पोत्सर्जन की दर को न्यून करते हैं। ऐसे मरुभिद् जिनकी पत्तियों पर अधिक संख्या में रोम पाये जाते हैं उन्हें रोमपर्णी पादप (trichophyllous plants) कहते हैं।

(v) मरुद्भिद् पादपों की पत्तियों का आकार अर्थात् पर्ण फलक (leaf blade) छोटा हो जाता है; जैसे- बबूल (Acacid), खेजड़ा (Prosopis) तथा पर्ण शिराओं को एक गहरा जाल बिछा रहता है। विलायती कीकर (Parkinsonia aculeata) के पर्णक (leaflate) अधिक छोटे होते हैं किन्तु इसका रेकिस (rachis) मोटा और चपटा होता है। तेज धूप के समय यह किस पर्णकों को ताप से बचाता है।

(vi) ऑस्ट्रेलियन बबूल (Acacid melanoxylon) में जल की हानि को रोकने के लिए द्विपिच्छकी संयुक्त पर्ण (bipinnate compound leaf) सूखकर गिर जाती है परन्तु इसका पर्णवृन्त चपटा और पत्ती के समान हरा हो जाता है। पत्ती के इस चपटे और हरे वृन्त को पर्णाभ वृन्त (phyllode) कहते हैं। ये पर्णाभ वृन्त जल का संग्रह और प्रकाश संश्लेषण का कार्य करते हैं तथा वाष्पोत्सर्जन की दर को अत्यधिक कम कर देते हैं।

(vii) मरुभिद् पादपों में पाई जाने वाली चौड़ी पत्तियाँ मोटी, गूदेदार या मांसल व चर्मल (leathery) होती हैं; जैसे-साइकस (Cycas)

(viii) कुछ पादपों में पत्तियों के अनुपर्ण काँटों में रूपान्तरित हो जाते हैं; जैसे- बेर (Ziyphus jujuba), बबूल (Acacia nilotica), केर (Capparis decidua), खेजड़ा (Prosopis)
आदि।

(ix) कुछ एकबीजपत्री मरुभिद् पौधे; जैसे-पोआ (Pou) और सामा (Psamma) घास और एमोफिला (Ammophilla) व एगरोपाइरोन (Agropyron) की पत्तियाँ जलाभाव के समय गोलाई में लिपट जाती हैं। एक्टिनोप्टेरिस (Actinopteris), एसप्लियम (Asepteum) में भी जलाभाव के समय पत्तियाँ नलिकाकार होकर पर्णवृन्त पर लिपट जाती हैं। इन पौधों की पत्तियों की ऊपरी अधिचर्म में बड़ी आकृति की मृदूतक कोशिकाएँ होती हैं जिन्हें हिंज या मोटर या बुलीफार्म या आवर्धक कोशिकाएँ (hing or motor or bulliform cells) कहते हैं। इन्हीं कोशिकाओं के कारण पत्तियाँ गोलाई में लिपट
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-9

जाती हैं, इस प्रकार शुष्कता से रक्षा करती हैं। इसी प्रकार शुष्कता के समय कुछ पौधों से शाखाएँ कुण्डली मारकर गेंद की जैसे सिमट जाती हैं (जैसे- सिलेजिनेला में), किन्तु जल उपलब्ध होते ही पुन: फैलकर वृद्धि करने लगती हैं। इस प्रकार के पौधों को पुनर्जीवनक्षम पादप (resurrection plants) या प्रोपोफाइट कहते हैं।

4. पुष्प, फल और बीज (Flower, Fruit and Seed) – मरुभिद् पौधों में पुष्प व फल का निर्माण अनुकूल समय में ही होता है। फल व बीज कठोर, मोटे आवरण से ढके होते हैं।
आन्तरिक लक्षण
मरुद्भिद् पादपों का मुख्य उद्देश्य जलव्यय को कम करने का होता है। इसी आधार पर आन्तरिक लक्षणों में परिवर्तन आता है जो निम्न प्रकार से हैं –

1. मूल पूर्ण विकसित, संवहन ऊतक अधिक मात्रा में होता है।
2. अधिचर्म पर लिग्निन व क्यूटिन की मोटी परत, कुछ में मोम व सिलिका का जमाव भी होता है। कनेर (Nerium) में बाह्यत्वचा बहुपर्तीय (multilayered epidermis) होती है।
3. अधिचर्म की कोशिकाएँ छोटी, सटी हुई जमी होती हैं। पत्तियों की बाहरी सतह चमकीली होने से सूर्य प्रकाश को परावर्तित कर रक्षा करती है।

4. कुछ पौधों में तने की रूपरेखा उभार (ridge) व खांचों में विभेदित होती है; जैसे-केज्यूराइना (Casurina) व इनमें रन्ध्र गहरे गर्तों में खांचों के तल अथवा किनारों पर स्थित होते हैं, इन्हें गर्तीय रन्ध्र (sunken stomata) कहते हैं। इसी प्रकार कनेर की पत्ती की निचली अधिचर्म गर्ते में व्यवस्थित रहती है। इन गर्तो को रन्ध्रीय गुहिका (stomatal cavity) कहते हैं। इन गुहिकाओं के अधिचर्म में रोम व अधिचर्मीय रोम पाये जाते हैं जिससे ये सीधे शुष्क हवा के सम्पर्क में न रहकर वाष्पोत्सर्जन को कम करते हैं। पौधों के अधिचर्म में गर्तीय रन्ध्र (sunken stomata) पाये जाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations img-10

5. विशेष प्रकार की घास; जैसे-सामा (Psamma), पौआ (Poa) में जलाभाव के समय पत्तियाँ गोलाई में लिपट कर अपनी सुरक्षा करती हैं ये प्रवृत्ति बुलीफॉर्म कोशिकाओं (Bulliform cells) के द्वारा होती है जो कि पत्तियों की ऊपरी बाह्यत्वचा में पाई जाती हैं। इस प्रकार की कोशिकाएँ एग्रोपाइरोन (Agropyron), बांस, गन्ने की पत्ती, टाइफा (Typha), एमोफिला (Ammophilla) में भी पाई जाती हैं।

6. उपत्वचा (Hypodermis) – यह पूर्ण विकसित होती है तथा प्राय: दृढ़ोतकीय ऊतकों की बनी होती है जो यांत्रिक सामर्थ्य (mechanical support) प्रदान करती है।

7. वल्कुट (Cortex) – यह मृदूतक कोशिकाओं (parenchymatous cells) का बना होता है। कोशिकाओं के मध्य अन्तराकोशिकीय स्थान (intercellular spaces) नहीं पाये जाते हैं। इसमें रेजिने तथा लेटेक्स वाहिकाओं की उपस्थिति होती है, जैसे-पाइनस (Pinus) और कैलोट्रोपिस (Calotropis)। जिन पादपों में पर्ण सुविकसित या बहुत छोटी आकृति की या शल्की पर्ण होती है उनमें आशुपाती (caducous) प्रवृत्ति होने के कारण झड़ जाती है। इन पौधों के स्तम्भ वल्कुट में प्रायः खम्भाकार ऊतक (patlisade tissue) पाया जाता है जो पर्ण के अभाव की पूर्ति कर प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सम्पन्न करवाता है; जैसे-केज्यूराइना, केलोट्रोपिस, केपेरिस, एक्वीजिटम इत्यादि। जिन पौधों की पत्तियों का सूक्ष्म आकार होता है, उन्हें माइक्रोफिलस पादप (microphyllous plants) भी कहते हैं।

8. इन पादपों में प्रायः कोशिकाओं का आकार अपेक्षाकृत छोटा तथा अन्तरकोशिकीय स्थानों का कुल आयतन अत्यधिक कम होता है। इनकी आन्तरिक शारीरिक रचना में दृढ़ोतकीय ऊतकों की बहुलता होती है। इनकी उपस्थिति शुष्कानुकुलित गुणों में एक महत्त्वपूर्ण लक्षण है। दृढ़ोतक कोशिकाओं के अतिरिक्त दृढ़ोतक या दृढ़क कोशिकाओं (sclereids or sclerotic cells) की अनेक प्रकार की कोशिकाओं; जैसे- समव्यासी दृढ़ कोशिकाएँ (brachysclereids), वृहत् कोशिकाएँ (macrosclereids), अस्थिदृढक (osteosclereids) भी पाई जाती हैं।

9. पत्तियों में पर्ण मध्योतक पूर्ण रूप से खम्भाकार और स्पंजी मृदूतक (palisade and spongy parenchyma) में विभेदित होता है। इन दोनों प्रकार के ऊतकों में से खम्भ ऊतक, स्पंजी ऊतक की तुलना में अधिक मात्रा में परिवर्धित होता है; जैसे- कनेर में खम्भ ऊपर और निचली अधिचर्मों के निकट होता है तथा स्पंजी मृदूतक इन दोनों खम्भ ऊतकों के बीच व्यवस्थित रहता है। पाइनस (Pinus) की सूजाकार पत्तियों की पर्ण मध्योतक की कोशिकाओं की भीतरी सतह पर वलन (folds) होते हैं तथा अनुप्रस्थ काट में खूटी के समान, कोशिका गुहा (cell cavity) में निकले हुए प्रतीत होते हैं। ये वलन पर्ण मध्योतक की क्रियात्मक सतह बढ़ा देते हैं।

10. अन्तःत्वचा (Endodermis) – अन्त:त्वचा की कोशिकाओं में स्टार्च कण विद्यमान होते हैं। इसलिए इसे स्टार्च आच्छद (starch sheath) भी कहते हैं। कभी कभी इन कोशिकाओं में केस्पेरीयन पट्टियाँ (casparian strips) भी पाई जाती हैं।

11. संवहन ऊतक सुविकसित होता है। प्रायः दारू (xylem) की मात्रा फ्लोएम (phloem) की तुलना में अधिक होती है। संवहन पूलों (vascular bundles) की संख्या बढ़कर एक जाल सा बन जाता है। जाइलम में कोशिकाओं का आकार छोटा होता है किन्तु वाहिकाएँ (vessels) बड़ी और लम्बी होती हैं तथा भित्तियों पर लिग्निन की अधिक मात्रा पाई जाती है। फ्लोएम में बास्ट तन्तु (bast fibres) अधिक मात्रा में पाये जाते हैं।

12. पादपों में द्वितीयक वृद्धि के कारण कॉर्क, छाल व वार्षिक वलय पाई जाती हैं।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations (जीव और समष्टियाँ) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 13 Organisms and Populations (जीव और समष्टियाँ), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants (सारणिक) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants (सारणिक)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 4
Chapter Name Determinants
Exercise Ex 4.1, Ex 4.2, Ex 4.3, Ex 4.4, Ex 4.5, Ex 4.6
Number of Questions Solved 68
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants

प्रश्नावली 4.1

प्रश्न 1.
मान ज्ञात कीजिए ।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 1
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 2

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
मान ज्ञात कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 3
हल-
(i)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 4
(ii)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 5
= (x² – x + 1)(x + 1) – (x + 1) (x – 1)
= (x + 1)[x² – x + 1 – x + 1]
= (x + 1)(x² – 2x + 2)
= x³ – 2x² + 2x + x² – 2x + 2
= x³ – x² + 2

प्रश्न 3.
यदि [latex s=2]A=\begin{bmatrix} 1 & 2 \\ 4 & 2 \end{bmatrix}[/latex] तो दिखाइए कि |2A| = 4|A|
हल-
|A|= 1 x 2 – 4 x 2 = -6
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 6

प्रश्न 4.
यदि [latex s=2]A=\left[ \begin{matrix} 1 & 0 & 1 \\ 0 & 1 & 2 \\ 0 & 0 & 4 \end{matrix} \right] [/latex] हो तो दिखाइए कि |3A| = 27|A|
हल-
|A| = 1.(1 x 4 – 0 x 2) – 0 + 0 = 4
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 7
∴ बायाँ पक्ष = |3A| = 3 (3 x 12 – 0 x 6) – 0 + 0
= 108
= 27 x 4
= 27|A] = दायाँ पक्ष

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
निम्नलिखित सारणिकों के मान ज्ञात कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 8
हल-
(i) द्वितीय पंक्ति के सापेक्ष प्रसार करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 9

प्रश्न 6.
यदि [latex s=2]A=\left[ \begin{matrix} 1 & 1 & -2 \\ 2 & 1 & -3 \\ 5 & 4 & -9 \end{matrix} \right] [/latex], तो |A| ज्ञात कीजिए।
हल-
प्रथम पंक्ति के सापेक्ष प्रसार करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 10
= [1 x (-9) – 4 x (-3)] – (1) [2x(-9) – 5x(-3)] + (-2)[2×4 – 5×1]
= 3 + 3 – 6
= 0

प्रश्न 7.
x के मान ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 11
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 12
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 13

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
यदि
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 14
हो तो x बराबर है
(A) 6
(B) ±6
(C) -6
(D) 0
हल-
दिया है,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 14
दोनों ओर सारणिक का विस्तार करने पर,
x × x – 2 × 18 = 6 × 6 – 2 × 18
x² – 36 = 36 – 36
x² – 36 = 0
⇒ x² = 36
x = ±6
अतः विकल्प (B) सही है।

प्रश्नावली 4.2

बिना प्रसरण किए और सारणिकों के गुणधर्मों का प्रयोग करके निम्नलिखित प्रश्न 1 से 5 को सिद्ध कीजिए

प्रश्न 1.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 16
हल-
बायाँ पक्ष = ∆
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 17
∵ यहाँ दो स्तम्भ (C1 = C3) बराबर है। इति सिद्धम्

प्रश्न 2.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 18
हल-
माना बायाँ पक्ष = ∆
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 19
∵ यहाँ पहले स्तम्भ C1 के सभी अवयव शून्य हैं। इति सिद्धम्

प्रश्न 3.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 20
हल-
माना बायाँ पक्ष =
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 21
∵ यहाँ तीसरे स्तम्भ C3 के सभी अवयव शून्य हैं। इति सिद्धम्

प्रश्न 4.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 22
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 23
∵ यहाँ प्रथम स्तम्भ तथा तृतीय स्तम्भ (C1 = C3) बराबर हैं। इति सिद्धम्

प्रश्न 5.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 24
हल-
माना
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 25
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 26
R2 और R3 में से -1 उभयनिष्ठ लेने पर इति सिद्धम्

सारणिकों के गुणधर्मों का प्रयोग करके प्रश्न 6 से 14 तक को सिद्ध कीजिए

प्रश्न 6.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 27
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 28

प्रश्न 7.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 29
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 30

प्रश्न 8.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 31
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 32
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 33
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 34
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 35

UP Board Solutions

प्रश्न 9.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 36
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 37

प्रश्न 10.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 38
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 39
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 40

प्रश्न 11.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 41
हल-
(i)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 42UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 43

प्रश्न 12.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 44
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 45
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 46

प्रश्न 13.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 47
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 48
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 49

UP Board Solutions

प्रश्न 14.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 50

हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 51

प्रश्न 15.
यदि A एक 3×3 कोटि का वर्ग आव्यूह है तो |kA| का मान होगा
(A) k[A]
(B) k² |A|
(C) k³ |A|
(D) 3k|A |
हल –
| kA| को |A| के पद में व्यक्त करने पर
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 52

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(A) सारणिक एक वर्ग आव्यूह है।
(B) सारणिक एक आव्यूह से सम्बद्ध एक संख्या है।
(C) सारणिक एक वर्ग आव्यूह से सम्बद्ध एक संख्या है।
(D) इनमें से कोई नहीं।
हल-
हम जानते हैं कि प्रत्येक n क्रम के वर्ग आव्यूह A = [aij] जहाँ aij = A का (ij) वा अवयव है, को किसी व्यंजक या संख्या के साथ संबद्ध किया जा सकता है जिसे सारणिक कहते हैं।
अतः विकल्प (C) सही है।

प्रश्नावली 4.3

प्रश्न 1.
दिए गए शीर्ष बिन्दुओं वाले त्रिभुजों का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए
(i) (1, 0), (6, 0), 4, 3)
(ii) (2, 7), (1, 1), (10, 8)
(iii) (-2, -3), (3, 2), (-1, – 8)
हल-
शीर्ष बिन्दुओं (x1, y1), (x2, y2), (x3, y3) से होकर जाने वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 53

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
दर्शाइए कि बिन्दु A(a, b + c), B (b, c + a) और c(c, a + b) संरेख हैं।
हल-
ज्ञात है, त्रिभुज के शीर्ष A (a, b + c), B(b, c + a) और C (c, a + b)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 54
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 55

प्रश्न 3.
प्रत्येक में k का मान ज्ञात कीजिए यदि त्रिभुजों का क्षेत्रफल 4 वर्ग इकाई है। जहाँ शीर्ष बिन्दु निम्नलिखित हैं।
(i) (k, 0), 4, 0), (0, 2)
(ii) (-2, 0), (0, 4), (0, k)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 56
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 57

प्रश्न 4.
(i) सारणिकों का प्रयोग करके (1, 2) और (3, 6) को मिलाने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
(ii) सारणिकों का प्रयोग करके (3, 1) और (9, 3) को मिलाने वाली रेखा को समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल-
(i) माना कोई बिन्दु (x, y) है।
इसलिए त्रिभुज के शीर्ष (x, y), (1, 2), (3,6) होंगे।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 58
(ii) माना बिन्दुओं A(3, 1) और B(9, 3) को मिलाने वाली रेखा पर बिन्दु P(x, y) है। तब बिन्दु A, P और B संरेख हैं।
∴ क्षेत्रफल (∆APB) = 0
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 59

प्रश्न 5.
यदि शीर्ष (2,-6), (5, 4) और (k, 4) वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल 35 वर्ग इकाई हो तो k का मान है|
(a) 12
(b) -2
(c) -12,-2
(d) 12,-2
हल-
दिया है, त्रिभुज के शीर्ष (2, -6), (5, 4) तथा (k, 4)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 60
धनात्मक चिह्न लेने पर, 7 = 5 – k ⇒ k = 5 – 7 = – 2
ऋणात्मक चिह्न लेने पर, -7 = 5 – k ⇒ – 12 = – k ⇒ k = 12
अतः k = 12, -2
अत: विकल्प (d) सही है।

UP Board Solutions

प्रश्नावली 4.4

निम्नलिखित सारणिकों के अवयवों के उपसारणिक एवं सहखण्ड लिखिए।

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणिकों के अवयवों के उपसारणिक एवं सहखण्ड ज्ञात कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 61
हल-
(i) उपसारणिक M11 = 3, M12 = 0, M21 = -4, M22 = 2
तथा सहखण्ड A11 = 3, A12 = 0, A21 = -(-4) = 4, A22 = 2
(ii) उपसारणिक M11 =d, M12 = b, M21 = c, M22 = a
तथा सहखण्ड A11 = d, A12 = -b, A21 = -c A22 = a

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सारणिकों के अवयवों के उपसारणिक एवं सहखण्ड ज्ञात कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 62
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 63
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 64
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 65

प्रश्न 3.
दूसरी पंक्ति के अवयवों के सहखण्डों का प्रयोग करके
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 66
का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
दूसरी पंक्ति के सहखण्ड इस प्रकार होंगे
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 67

प्रश्न 4
तीसरे स्तम्भ के अवयवों के सहखण्डों का प्रयोग करके
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 68
का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
तीसरे स्तम्भ के सहखण्ड इस प्रकार होंगे
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 69
∆ = a13 A13 + a23 A23 + a33 A33
= yz(z – y) + zx(x – z) + xy (y – x)
= yz² – y²z + zx² – z²x + xy² – x²y
= zx² – x²y + xy² – z²x + yz² – y²z
= x²(z – y) + x(y – z)(y + z) + yz(z – y)
= (z – y)[x² – x(y + z) + yz]
= (z – y)[x² – xy – xz + yz]
= (z – y)[x(x – y) – z(x – y)]
= (z – y)(x – y)(x – z)
= (x – y)(y – z)(z – x)

UP Board Solutions

प्रश्न 5
यदि
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 70
और aij का सहखण्ड Aij हो तो Δ का मान निम्नलिखित रूप में व्यक्त किया जाता है–
(a) a11 A31 + a12 A32 + a13 A33
(b) a11 A11 + a12 A21 + a13 A31
(c) a21 A11 + a22 A12 + a23 A13
(d) a11 A11 + a21 A21 + a31 A31
हल-
∆ = किसी पंक्ति अथवा स्तम्भ के अवयवों तथा उनके संगत महखण्डों के गुणन का योग
C1 स्तम्भ के अवयव (a11, a21, a31)
इनके सहखण्ड A11, A21, A31
⇒ ∆ = a11 A11 + a21 A21 + a31 A31
अत: विकल्प (d) सही है।

प्रश्नावली 4.5

प्रश्न 1 और 2 में प्रत्येक आव्यूह का सहखण्डज (adjoint) ज्ञात कीजिए।

प्रश्न 1.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 71
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 72

प्रश्न 2.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 73
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 74

प्रश्न 3 और 4 में सत्यापित कीजिए कि A (adj A) = (adj A). A = |A|.I है।

प्रश्न 3.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 75
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 76
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 77

प्रश्न 4.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 78
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 79
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 80

प्रश्न 5 से 11 में दिए गए प्रत्येक आव्यूहों के व्युत्क्रम (जिनका अस्तित्व हो ) ज्ञात कीजिए।

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 81
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 82

प्रश्न 6.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 83
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 84

प्रश्न 7.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 85
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 86
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 87
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 88

प्रश्न 8.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 89
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 90
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 91

प्रश्न 9.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 92
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 93

प्रश्न 10.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 94
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 95
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 96

प्रश्न 11.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 97
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 98
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 99

प्रश्न 12.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 100
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 101
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 102

प्रश्न 13.
यदि [latex s=2]A=\begin{bmatrix} 3 & 1 \\ -1 & 2 \end{bmatrix}[/latex] है तो दर्शाइए कि A² – 5A + 7I = 0 है। इसकी सहायता से A-1 ज्ञात कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 103
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 104
UP Board Solutions

प्रश्न 14.
आव्यू [latex s=2]A=\begin{bmatrix} 3 & 2 \\ 1 & 1 \end{bmatrix}[/latex] के लिए a और b ऐसी संख्याएँ ज्ञात कीजिए ताकि A² + aA + bI = 0 है।
हल-
प्रश्नानुसार,
A² + aA + bI = 0
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 105UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 106

प्रश्न 15.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 107
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 108
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 109

UP Board Solutions

प्रश्न 16.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 110
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 111
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 112

प्रश्न 17.
यदि A, 3×3 कोटि का आव्यूह है तो |adj A| का मान है|
(a) |A|
(b) |A|²
(c) |A|³
(d) 3|A|
हल-
चूँकि हम जानते हैं कि |adj A| = |A|n-1 यहाँ n = 3
∴ |adj A| = |A|²
अत: विकल्प (b) सही है।

प्रश्न 18.
यदि A कोटि 2 को व्युत्क्रमणीय आव्यूह है तो det (A-1) बराबर है
(a) det (A)
(b) [latex s=2]\frac { 1 }{ det(A) }[/latex]
(c) 1
(d) 0
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 113

प्रश्नावली 4.6

निम्नलिखित प्रश्नों 1 से 6 तक दी गई समीकरण निकायों का संगत अथवा असंगत के रूप में वर्गीकरण कीजिए।

प्रश्न 1
x + 2y = 2
2x + 3y = 3
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 114
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 115

प्रश्न 2
2x – y = 5
x + y = 4
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 116

UP Board Solutions

प्रश्न 3
x + 3y = 5
2x + 6y = 8
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 117

प्रश्न 4.
x + y + z = 1
2x + 3y + 2z = 2
ax + ay + 2az = 4
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 118

प्रश्न 5
3x – y – 2z = 2
2y – z = – 1
3x – 5y = 3
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 119UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 120

प्रश्न 6
5x – y + 4z = 5
2x + 3y + 5z = 2
5x – 2y + 6z = – 1
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 121
निम्नलिखित प्रश्न 7 से 14 तक प्रत्येक समीकरण निकाय को आव्यूह विधि से हल कीजिए।

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
5x + 2y = 4
7x + 3y = 5
हल-
दिया हुआ समीकरण निकाय
5x + 2y = 4
7x + 3y = 5
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 122
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 123

प्रश्न 8.
2x – y = – 2
3x + 4y = 3
हल-
दिया हुआ समीकरण निकाय
2x – y = – 2
3x + 4y = 3
समीकरण निकाय AX = B के रूप में लिखा जा सकता है अत: x = A-1B
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 124

प्रश्न 9.
4x – 3y = 3
3x – 5y = 7
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 125

प्रश्न 10.
5x + 2y = 3
3x + 2y = 5
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 126

प्रश्न 11.
2x + y + z = 1
x – 2y – z = [latex]\frac { 3 }{ 2 }[/latex]
3y – 5z = 9
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 127
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 128

प्रश्न 12.
x – y + 2 = 4
2x + y – 3z = 0
x + y + z = 2
हल-
दिया हुआ समीकरण निकाय
x – y + 2 = 4
2x + y – 3z = 0
x+ y + z = 2
समीकरण निकाय AX = B के रूप में लिखा जा सकता है अतः x = A-1B
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 129
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 130
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 131
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 132

UP Board Solutions

प्रश्न 13.
2x + 3y + 3z = 5
x – 2y + z = – 4
3x – y – 2z = 3
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 133

प्रश्न 14.
x – y + 2z = 7
3x + 4y – 5z = – 5
2x – y + 3z = 12
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 134
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 135

प्रश्न 15.
यदि [latex s=2]A=\left[ \begin{matrix} 2 & -3 & 5 \\ 3 & 2 & -4 \\ 1 & 1 & -2 \end{matrix} \right] [/latex] है तो A-1 ज्ञात कीजिए।
A-1 का प्रयोग करके निम्नलिखित समीकरण निकाय को हल कीजिए
2x – 3y + 5z = 11
3x + 2y – 4z = -5
x + y – 2z = -3
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 136
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 137

प्रश्न 16.
4 किग्रा प्याज, 3 किग्रा गेहूँ और 2 किग्रा चावल मूल्य Rs 60 है 2 किग्रा प्याज, 4 किग्रा गेहूँ और 6 किग्रा चावल का मूल्य Rs 90 है। 6 किग्रा प्याज, 2 किग्रा गेहूँ और 3 किग्रा चावल का मूल्य Rs 70 है। आव्यूह द्वारा प्रत्येक का मूल्य प्रति किग्रा ज्ञात कीजिए।
हल-
माना प्याज का मूल्य Rs प्रतिकिग्रा = x
गेहूं का मूल्य Rs प्रतिकिग्रा = y
चावल को मूल्य Rs प्रतिकिग्रा = z
तब दिये गये प्रतिबन्धों के अनुसार,
4x + 3y + 2z = 60;
2x + 4y + 6z = 90;
6x + 2y + 3z = 70
इस समीकरण निकाय को AX = B के रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 138
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants image 139

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants (सारणिक) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 4 Determinants (सारणिक), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids (ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids (ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 12
Chapter Name Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids
Number of Questions Solved 99
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids (ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचना लिखिए –
(i) a-मेथॉक्सीप्रोपिऑनेल्डिहाइड
(ii) 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
(iii) 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन कार्बोल्डिहाइड
(iv) 4-ऑक्सोपेन्टेनल
(v) डाइ-द्वितीयक-ब्यूटिल कीटोन
(vi) 4-क्लोरोऐसीटोफीनोन।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिए –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 2
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 3

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
CH3CHO, CH3CH2OH, CH3OCH3, CH3CH2CH2
उत्तर
यौगिकों के मोलर द्रव्यमान तुलनात्मक हैं- CH3CHO (44), CH3CH2OH (46), CH3OCH3 (46), CH3CH2CH3 (44)। CH3CH2OH अत्यधिक अन्तराण्विक हाइड्रोजन आबन्ध प्रदर्शित करता है, अतएव यह संयुक्त अणुओं के रूप में पाया जाता है। अतः इसका क्वथनांक उच्चतम होता है (351 K)। CH3CHO के द्विध्रुव आघूर्ण (2.72 D) का मान CH3OCH3 (1.18D) से उच्च होता है, अतएव CH3CHO में द्विध्रुव-द्विधुव अन्योन्यक्रियाएँ CH3OCH3 से प्रबल होती हैं। अत: CH3CHO का क्वथनांक CH3OCH3 से उच्च होता है। CH3CH2CH3 केवल दुर्बल वाण्डर वाल बलों को प्रदर्शित करता है। CH3OCH3 में कुछ प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ होती हैं। अत: CH3OCH3 का क्वथनांक CH3CH2CH3 से अधिक होता है, अतएव यौगिकों के क्वथनांकों का बढ़ता क्रम निम्नवत् है –
CH3CH2CH3 < CH3OCH3 < CH3CHO < CH3CH2OH

प्रश्न 4.
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी योगज अभिक्रियाओं में उनकी बढ़ती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए –

  1. एथेनल, प्रोपेनल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन
  2. बेन्जेल्डिहाइड, p-टॉलूऐल्डिहाइड, p-नाइट्रोबेन्जेल्डिहाइड, ऐसीटोफीनोन।

[संकेत– त्रिविम प्रभाव व इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव को ध्यान में रखें।]
उत्तर
1. कार्बोनिल यौगिकों की नाभिकरागी योगज अभिक्रियाओं के प्रति क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम है –
ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपनल < एथेनल

2. क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम है –
ऐसीटोफीनोन < p-टॉलूऐल्डिहाइड < बेन्जेल्डिहाइड < p-नाइट्रोबेन्जेल्डिहाइड
ऐसीटोफीनोन कीटोन है, जबकि अन्य सदस्य ऐल्डिहाइड हैं। अत: यह सबसे कम क्रियाशील होता है। p-टॉलूऐल्डिहाइड में CH3 समूह कार्बोनिल समूह के सापेक्ष p:स्थान पर है जो कार्बोनिल समूह के कार्बन पर अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है और इसे बेन्जेल्डिहाइड से कम क्रियाशील बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 4
दूसरी ओर p-नाइट्रोबेन्जेल्डिहाइड में -NO2 समूह शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन निष्कासक समूह है। यह अनुनाद के कारण इलेक्ट्रॉन निष्कासित करता है। अत: कार्बोनिल समूह के कार्बन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घटाता है। यह नाभिकस्नेही के आक्रमण की सुविधा प्रदान करता है तथा इसे बेन्जेल्डिहाइड की तुलना में अधिक क्रियाशील बनाता है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिए –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 5
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 6

प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम दीजिए –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 7
उत्तर
(i) 3-फेनिलप्रोपेनोइक अम्ल
(ii) 3-मेथिलब्यूट-2-इनोइक अम्ल
(iii) 2-मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल ।
(iv) 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल

प्रश्न 7.
निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है?
(i) एथिल बेन्जीन
(ii) ऐसीटोफीनोन
(iii) ब्रोमोबेन्जीन
(iv) फेनिलएथीन (स्टाइरीन)।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 8
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 9

प्रश्न 8.
नीचे प्रदर्शित अम्लों के प्रत्येक युग्म में कौन-सा अम्ल अधिक प्रबल है?
(i) CH3CO2H अथवा CH2FCO2H
(ii) CH2FCO2H अथवा CH2CICO2H
(iii) CH2FCH2CH2CO2H अथवा CH3CHFCH2CO2H
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 10
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 11
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 12
अत: O–H आबन्ध में कम इलेक्ट्रॉन-घनत्व तथा FCH2COO– आयन के उच्च स्थायित्व के कारण FCH2COOH, CH3COOH की अपेक्षा एक प्रबल अम्ल है।
(ii) FCH2COO– आयन, Cl की तुलना में F के अधिक प्रबल -I प्रभाव के कारण ClCH2COO– आयन से अधिक स्थायी होता है। अत: ClCH2COOH की तुलना में FCH2COOH अधिक प्रबल अम्ल है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 13
प्रेरक प्रभाव दूरी के साथ घटता जाता है, इसलिए F– का -I प्रभाव, 4-फ्लुओरोब्यूटेनोइक अम्ल की तुलना में 3-फ्लुओरोब्यूटेनोइक अम्ल में अधिक प्रबल होता है। इसलिए FCH2CH2CH2COOH की तुलना में CH3CHFCH2COOH प्रबल अम्ल है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 14
इसलिए, CH3– C6H4COO– (p) आयन से F3C-C6H4-COO– (p) आयन के अधिक स्थायी होने के कारण F3C-C6H4-COOH (p) प्रबल अम्लीय है।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) से आप क्या समझते हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।

  1. सायनोहाइड्रिन
  2. ऐसीटल
  3. सेमीकार्बजोन
  4. ऐल्डोले
  5. हेमीऐसीटल
  6. ऑक्सिम
  7. कीटैल
  8. इमीन
  9. 2, 4-DNP व्युत्पन्न
  10. शिफ-क्षारक।

उत्तर
1. ऐल्डिहाइड तथा कीटोन हाइड्रोजन सायनाइड से अभिकृत होकर संगत सायनोहाइड्रिन (cyanohydrins) देते हैं। शुद्ध HCN के साथ यह अभिक्रिया बहुत धीमी होती है, अत: यह क्षार द्वारा उत्प्रेरित की जाती है तथा जनित सायनाइड (CN–) आयन प्रबल नाभिकस्नेही कार्बोनिल यौगिकों पर संयोजित होकर संगत सायनोहाइड्रिन देते हैं।
सायनोहाइड्रिन उपयोगी संश्लेषित मध्यवर्ती होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 15

2. जैम-डाइऐल्कॉक्सी यौगिक जिनमें दो ऐल्कॉक्सी समूह टर्मिनल (अन्तस्थ) कार्बन परमाणु पर उपस्थित होते हैं, ऐसीटल (acetal) कहलाते हैं। ये ऐल्डिहाइड की मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल की दो तुल्यांक मात्रा के साथ शुष्क हाइड्रोजन क्लोराइड की उपस्थिति में अभिक्रिया होने पर बनते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 16
ऐसीटल जलीय खनिज अम्लों के साथ जल-अपघटित होकर संगत ऐल्डिहाइड देते हैं, इसलिए कार्बनिक संश्लेषण में इनका प्रयोग ऐल्डिहाइड समूह की रक्षा के लिए किया जाता है।

3. सेमीकाबेंजोन, ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों के व्युत्पन्न होते हैं तथा उन पर सेमीकाबेंजाइड की दुर्बल अम्लीय माध्यम में अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 17
इन्हें ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों की पहचान एवं गुणधर्मों के अध्ययन के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

4. जिन ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों में कम-से-कम एक α-हाइड्रोजन विद्यमान होता है, वे तनु क्षार की (उत्प्रेरक के रूप में) उपस्थिति में अभिक्रिया द्वारा क्रमशः β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड (ऐल्डोल) अथवा β-हाइड्रॉक्सी कीटोन (कीटोल) प्रदान करते हैं। इस अभिक्रिया को ऐल्डोल अभिक्रिया (aldol reaction) कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 18
उत्पाद में विद्यमान दो प्रकार्यात्मक समूहों, ऐल्डिहाइड व ऐल्कोहॉल के नामों से ऐल्डोल का नाम व्युत्पन्न होता है। ऐल्डोल व कीटोल आसानी से जल निष्कासित करके α, β-असंतृप्त कार्बोनिल यौगिक देते हैं, जो ऐल्डोल संघनन उत्पाद हैं और यह अभिक्रिया ऐल्डोल संघनन (aldol condensation) कहलाती है।

5. जैम- ऐल्कॉक्सीऐल्कोहॉल हेमीऐसीटल कहलाते हैं। ये मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल के एक अणु का ऐल्डिहाइड के साथ शुष्क HCl गैस की उपस्थिति में योग होने पर उत्पन्न होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 19
6. जब ऐल्डिहाइड तथा कीटोन दुर्बल अम्लीय माध्यम में हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया करते हैं, तब ऑक्सिम (oximes) उत्पन्न होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 20
7. जैम-ऐल्कॉक्सीऐल्केन कीटैल (ketals) कहलाते हैं। कीटैल में दो ऐल्कॉक्सी समूह श्रृंखला के भीतर समान कार्बन पर उपस्थित होते हैं। जब कीटोन को शुष्क HCl गैस अथवा p-टॉलूईनसल्फोनिक अम्ल (PTS) की उपस्थिति में एथिलीन ग्लाइकॉल के साथ गर्म किया जाता है तो कीटैल प्राप्त होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 21
ये जलीय खनिज अम्लों के साथ जल-अपघटित होकर संगत कीटोन देते हैं। इसलिए कीटैल कार्बनिक संश्लेषण में कीटो समूह के रक्षण हेतु प्रयुक्त किए जाते हैं।

8. UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 22 समूह युक्त यौगिक इमीन (imines) कहलाते हैं। ये ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों की अमोनिया व्युत्पन्नों के साथ अभिक्रिया से बनाए जाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 23
Z = ऐल्किल/ऐरिल समूह, -NH2,-OH, C6H5NH, -NHCONH2 आदि।

9. जब ऐल्डिहाइड अथवा कीटोन दुर्बल अम्लीय माध्यम में 2,4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्राजीन के साथ अभिक्रिया करते हैं तो 2,4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रोजोन (2,4-DNP व्युत्पन्न) उत्पन्न होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 24
2,4- DNP व्युत्पन्न ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों की पहचान एवं गुणधर्मों के अध्ययन में प्रयोग किए जाते हैं।

10. ऐल्डिहाइड तथा कीटोन प्राथमिक ऐलिफैटिक अथवा ऐरोमैटिक ऐमीनों से अभिक्रिया करके ऐजोमेथाइन अथवा शिफ़ क्षारक (Shiff’s Base) बनाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 25

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नामपद्धति में नाम लिखिए –

  1. CH3CH(CH3)CH2CH2CHO
  2. CH3CH2COCH(C2H5)CH2CH2Cl
  3. CH3CH = CHCHO
  4. CH3COCH2COCH3
  5. CH3CH(CH3)CH2C(CH3)2COCH3
  6. (CH3)3CCH2COOH
  7. OHCC6H4CHO-p

उत्तर

  1. 4-मेथिलपेन्टेनल
  2. 6-क्लोरो-4-एथिलहेक्सेन-3-ओन
  3. ब्यूट-2-इनल
  4. पेन्टेन-2,4-डाइओन
  5. 3,3,5-ट्राइमेथिलहेक्सेन-2-ओन
  6. 3,3-डाइमेथिलब्यूटेनोइक अम्ल
  7. बेन्जीन-1,4-डाइकार्बोल्डिहाइड

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचना बनाइए –
(i) 3-मेथिलब्यूटेनल
(ii) p-नाइट्रोप्रोपिओफीनोन
(iii) p-मेथिलबेन्जेल्डिहाइड
(iv) 4-मेथिलपेन्ट-3-ईन-2-ओन
(v) 4-क्लोरोपेन्टेन-2-ओन
(vi) 3-ब्रोमो-4-फेनिल पेन्टेनोइक अम्ल
(vii) p, p’-डाइहाइड्रॉक्सीबेन्जोफीनोन
(viii) हेक्स-2-ईन-4-आइनोइक अम्ल।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 26
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 27

प्रश्न 4.
निम्नलिखित ऐल्डिहाइडों एवं कीटोनों के आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नाम लिखिए और जहाँ सम्भव हो सके साधारण नाम भी दीजिए।
(i) CH3CO(CH2)4CH3
(ii) CH3CH2CHBrCH2CH(CH3)CHO
(iii) CH3(CH2)5CHO
(iv) Ph-CH = CH-CH-CHO
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 28
(vi) PhCOPh
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 29

प्रश्न 5.
निम्नलिखित व्युत्पन्नों की संरचना बनाइए –
(i) बेन्जेल्डिहाइड का 2,4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रेजोन
(ii) साइक्लोप्रोपेनोन ऑक्सिम
(iii) ऐसीटेल्डिहाइडडाइमेथिलऐसीटल
(iv) साइक्लोब्यूटेनोन का सेमीकाबेंजोन
(v) हेक्सेन-3-ओन का एथिलीन कीटैल
(vi) फॉर्मेल्डिहाइड का मेथिल हेमीऐसीटल।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 30

प्रश्न 6.
साइक्लोहेक्सेनकार्बोल्डिहाइड की निम्नलिखित अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया से बनने वाले उत्पादों को पहचानिए –
(i) PhMgBr एवं तत्पश्चात् H3O+
(ii) टॉलेन अभिकर्मक
(iii) सेमीकाबेंजाइड एवं दुर्बल अम्ल
(iv) एथेनॉल का आधिक्य तथा अम्ल
(v) जिंक अमलगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 31
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 32
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 33

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-से यौगिकों में ऐल्डोल संघनन होगा, किनमें कैनिजारो अभिक्रिया होगी और किनमें उपर्युक्त में से कोई क्रिया नहीं होगी? ऐल्डोल संघनन तथा कैनिजारो अभिक्रिया में सम्भावित उत्पादों की संरचना लिखिए –
(i) मेथेनल
(ii) 2-मेथिलपेन्टेनल
(iii) बेन्जेल्डिहाइड
(iv) बेन्जोफीनोन
(v) साइक्लोहेक्सेनोन
(vi) 1-फेनिलप्रोपेनोन
(vii) फेनिलऐसीटेल्डिहाइड
(viii) ब्यूटेन-1-ऑल
(ix) 2,2-डाइमेथिलब्यूटेनल।
उत्तर
(a) 2-मेथिल पेन्टेनल, साइक्लोहेक्सेनोन, 1-फेनिलप्रोपेनोन तथा फेनिलऐसीटैल्डिहाइड में 1 या अधिक -हाइड्रोजन उपस्थित हैं। अतः इनमें ऐल्डोल संघनन होगा। अभिक्रिया तथा सम्भावित उत्पादों की संरचनाएँ निम्नवत् हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 34
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 35
(b) मेथेनल, बेन्जेल्डिहाइड तथा 2,2-डाइमेथिलब्यूटेनल में α-हाइड्रोजन नहीं होती है; अत: ये कैनिजारो (Cannizzaro reaction) अभिक्रिया देते हैं। अभिक्रियाएँ तथा सम्भावित उत्पाद निम्नवत् हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 36
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 37
(c) (iv) बेन्जोफीनोन एक कीटोन है। इसमें α-हाइड्रोजन नहीं होती है, जबकि (viii) ब्यूटेन-1-ऑल एक ऐल्कोहॉल है। ये न ऐल्डोल संघनन और न कैनिजारो अभिक्रिया प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 8.
एथेनल को निम्नलिखित यौगिकों में कैसे परिवर्तित करेंगे?
(i) ब्यूटेन-1,3-डाइऑल
(ii) ब्यूट-2-ईनल
(iii) ब्यूट-2-ईनोइक अम्ल।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 38
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 38

प्रश्न 9.
प्रोपेनल एवं ब्यूटेनल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले चार सम्भावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए। प्रत्येक में बताइए कि कौन-सा ऐल्डिहाइड नाभिकरागी और कौन-सा इलेक्ट्रॉनरागी होगा?
उत्तर
1. प्रोपेनल नाभिकरागी तथा इलेक्ट्रॉनरागी की तरह –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 39
2. प्रोपेनल इलेक्ट्रॉनरागी तथा ब्यूटेनल नाभिकरागी की तरह –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 40
3. ब्यूटेनल एक इलेक्ट्रॉनरागी तथा प्रोपेनल नाभिकरागी की तरह –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 41
4. ब्यूटेनल नाभिकरागी तथा इलेक्ट्रॉनरागी दोनों के रूप में –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 42

प्रश्न10.
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C9H10O है 2,4-DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है तथा कैनिजारो अभिक्रिया देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1,2-बेन्जीनडाइकार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।
उत्तर
1. अणुसूत्र C9H10O का दिया गया यौगिक 2,4-DNP यौगिक बनाता है तथा टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है; अत: यह ऐल्डिहाइड होगा।
2. यह कैनिजारो अभिक्रिया देता है। अत: -CHO समूह सीधा बेन्जीन वलय से जुड़ा होगा।
3. प्रबल ऑक्सीकरण पर यह 1,2-बेन्जीन डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल देता है, अत: यह ऑर्थोप्रतिस्थापी बेन्जेल्डिहाइड होगा। अणुसूत्र C9H10O का ऐसा ऐल्डिहाइड o-एथिल बेन्जेल्डिहाइड होगा।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 43

प्रश्न11.
एक कार्बनिक यौगिक ‘क’ (आण्विक सूत्र, C8H16O2) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ जल-अपघटित करने के उपरान्त एक कार्बोक्सिलिक अम्ल ‘ख’ एवं एक ऐल्कोहॉल ग’ प्राप्त हुए। ‘ग’ को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर ‘ख’ उत्पन्न होता है। ‘ग’ निर्जलीकरण पर ब्यूट-1-ईन देता है। अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाली सभी रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 44

प्रश्न 12.
निम्नलिखित यौगिकों को उनसे सम्बन्धित (कोष्ठकों में दिए गए) गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(i) ऐसीटेल्डिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तृतीयक-ब्यूटिलकीटोन, मेथिल तृतीयक ब्यूटिलकीटोन (HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता)।
(ii) CH3CH2CH(Br)COOH, CH3CH(Br)CH2COOH, (CH3)2CHCOOH, CH3CH2CH2COOH (अम्लता के क्रम में)
(iii) बेन्जोइक अम्ल, 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल, 3,4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल, 4-मेथॉक्सी बेन्जोइक अम्ल (अम्लता की सामर्थ्य के क्रम में)।
उत्तर
(i) डाइ-तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < तृतीयक ब्यूटिल मेथिल कीटोन < ऐसीटोन < ऐसीटैल्डिहाइड
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 45
(iii) 4.मेथॉक्सी बेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल <3,4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित यौगिक युग्मों में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षणों को दीजिए –

  1. प्रोपेनल एवं प्रोपेनोन
  2. ऐसीटोफीनोन एवं बेन्जोफीनोन
  3. फीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल
  4. बेन्जोइक अम्ल एवं एथिल बेन्जोएट
  5. पेन्टेन-2-ऑन एवं पेन्टेन-3-ऑन
  6. बेन्जेल्डिहाइड एवं ऐसीटोफीनोन
  7. एथेनल एवं प्रोपेनल।

उत्तर
1. प्रोपेनल एवं प्रोपेनोन – इन यौगिकों में विभेद करने के लिए आयोडोफॉर्म परीक्षण का प्रयोग किया जाता है। यह परीक्षण प्रोपेनोन द्वारा दिया जाता है, परन्तु प्रोपेनल द्वारा नहीं। प्रोपेनोन गर्म NaOH/I2 से अभिक्रिया करके CHI3 का पीला अवक्षेप देता है, जबकि प्रोपेनल नहीं देता।
2NaOH + I2 → NaI + NaOI + H2O
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 46

2. ऐसीटोफीनोन एवं बेन्जोफीनोन – ऐसीटोफीनोन आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, परन्तु बेन्जोफीनोन नहीं देता।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 47

3. फीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल – बेन्जोइक अम्ल NaHCO3 से अभिक्रिया करके बुदबुदाहट के साथ CO2 गैस देता है, जबकि फीनॉल नहीं देता।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 48
फीनॉल Br2 जल को रंगहीन करके सफेद अवक्षेप देता है, परन्तु बेन्जोइक अम्ल नहीं देता।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 49

4. बेन्जोइक अम्ल एवं एथिल बेन्जोएट – बेन्जोइक अम्ल सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया पर तीव्र बुदबुदाहट के साथ CO2 गैस मुक्त करता है, जबकि एथिल बेन्जोएट ऐसा नहीं करता।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 50

5. पेन्टेन-2-ऑन एवं पेन्टेन-3-ऑन – पेन्टेन-2-ऑन आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अर्थात् NaOH व  I2 के साथ आयोडोफॉर्म बनाता है, जबकि पेन्टेन-3-ऑन यह परीक्षण नहीं देता।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 51

6. बेन्जेल्डिहाइड एवं ऐसीटोफीनोन – ऐसीटोफीनोन आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, परन्तु बेन्जेल्डिहाइड यह परीक्षण नहीं देता।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 52

7. एथेनल एवं प्रोपेनल – एथेनल आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, परन्तु प्रोपेनल नहीं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 53

प्रश्न 14.
बेन्जीन से निम्नलिखित यौगिकों का विरचन आप किस प्रकार करेंगे? आप कोई भी अकार्बनिक अभिकर्मक एवं कोई भी कार्बनिक अभिकर्मक, जिसमें एक से अधिक कार्बन न हों, का उपयोग कर सकते हैं।
(i) मेथिल बेन्जोएट
(ii) m-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iii) p-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iv) फेनिलऐसीटिक अम्ल
(v) p-नाइट्रोबेन्जेल्डिहाइड।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 54
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 55
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 56
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 57

प्रश्न15.
आप निम्नलिखित रूपान्तरणों को अधिकतम दो चरणों में किस प्रकार से सम्पन्न करेंगे?

  1. प्रोपेनोन से प्रोपीन
  2. बेन्जोइक अम्ल से बेन्जेल्डिहाइड
  3. एथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
  4. बेन्जीन से m-नाइट्रोऐसीटोफीनोन
  5. बेन्जेल्डिहाइड से बेन्जोफीनोन
  6. ब्रोमोबेन्जीन से 1-फेनिलएथेनॉल
  7. बेन्जेल्डिहाइड से 3-फेनिलप्रोपेन-1-ऑल
  8. बेन्जेल्डिहाइड से α-हाइड्रॉक्सीफेनिलऐसीटिक अम्ल
  9. बेन्जोइक अम्ल से m-नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल।

उत्तर
1. प्रोपेनोन से प्रोपीन –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 58
2. बेन्जोइक अम्ल से बेन्जेल्डिहाइड –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 59
3. एथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 60
4. बेन्जीन से m-नाइट्रोऐसीटोफीनोन –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 61
5. बेन्जेल्डिहाइड से बेन्जोफीनोन –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 62
6. ब्रोमोबेन्जीन से 1-फेनिलएथेनॉल –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 63
7. बेन्जेल्डिहाइड से 3-फेनिलप्रोपेन-1-ऑल –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 64
8. बेन्जेल्डिहाइड से α-हाइड्रॉक्सीफेनिलऐसीटिक अम्ल –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 65
9. बेन्जोइक अम्ल से m-नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 66

प्रश्न16.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) का वर्णन कीजिए –

  1. ऐसीटिलिनन अथवा फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐसीटिलीकरण
  2. कैनिजारो अभिक्रिया
  3. क्रॉस ऐल्डोल संघनन
  4. विकार्बोक्सिलन।

उत्तर
1. ऐसीटिलिनन (Acetylation) – ऐल्कोहॉलों, फीनॉलों अथवा ऐमीनों के एक सक्रिय हाइड्रोजन का एक ऐसिल (-RCO) समूह के साथ प्रतिस्थापन, जिसके फलस्वरूप संगत एस्टर या ऐमाइड बनते हैं, ऐसीटिलिनन कहलाता है। यह प्रतिस्थापन किसी क्षारक; जैसे- पिरिडीन अथवा डाइमेथिलऐनिलीन की उपस्थिति में अम्ल क्लोराइड अथवा अम्ल ऐनहाइड्राइड का प्रयोग करके कराया जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 67
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 68

2. कैनिजारो अभिक्रिया (Cannizzaro’s Reaction) – ऐल्डिहाइड, जिनमें α-हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते, सान्द्र क्षार की उपस्थिति में स्वऑक्सीकरण व अपचयन (असमानुपातन) की अभिक्रिया प्रदर्शित करते हैं। इस अभिक्रिया में ऐल्डिहाइड का एक अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित होता है, जबकि दूसरा अणु कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण में ऑक्सीकृत हो जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 69
इन अभिक्रियाओं में ऐल्डिहाइड असमानुपातन दर्शाता है। इसका तात्पर्य है कि ऐल्डिहाइड का एक अणु कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकृत हो जाता है तथा अन्य ऐल्कोहॉल में अपचयित हो जाता है। कीटोन ये अभिक्रिया नहीं देते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 70

3. क्रॉस ऐल्डोल संघनन (Cross Aldol Condensation) – जब दो भिन्न-भिन्न ऐल्डिहाइड और/या कीटोन के मध्य ऐल्डोल संघनन होता है तो उसे क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहते हैं। यदि प्रत्येक में g-हाइड्रोजन हो तो ये चारे उत्पादों का मिश्रण देते हैं। इसे निम्नलिखित एथेनल व प्रोपेनल के मिश्रण की ऐल्डोल संघनन अभिक्रिया द्वारा समझाया गया है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 71
क्रॉस ऐल्डोल संघनन में कीटोन भी एक घटक के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 72

4. विकार्बोक्सिलन (Decarboxylation) – कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम लवणों को सोडलाइम (NaOH तथा CaO, 3 : 1 के अनुपात में) के साथ गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकल जाती है एवं हाइड्रोकार्बन प्राप्त होते हैं। यह अभिक्रिया विकार्बोक्सिलने (decarboxylation) कहलाती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 73
कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्षार धातु लवणों के जलीय विलयन का विद्युत अपघटन द्वारा विकार्बोक्सिलन हो जाता है तथा ऐसे हाइड्रोकार्बन निर्मित होते हैं जिसमें कार्बन परमाणुओं की संख्या, अम्ल के ऐल्किल समूह में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या से दुगुनी होती है। इस अभिक्रिया को कोल्बे विद्युत-अपघटन (Kolbe electrolysis) कहते हैं।

प्रश्न17.
निम्नलिखित प्रत्येक संश्लेषण में छूटे हुए प्रारम्भिक पदार्थ, अभिकर्मक अथवा उत्पादों को लिखकर पूर्ण कीजिए –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 74
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 75
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 76
(iii) H2NNHCONH2 का अधिक नाभिकरागी NH2NH भाग अभिक्रिया करके सेमीकाबेंजोन बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 77
(iv)
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 78

(v) केवल ऐल्डिहाइड ही टॉलेन अभिकर्मक द्वारा ऑक्सीकृत होते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 79
(vi) सायनोहाइड्रिन निर्माण ऐल्डिहाइड समूह पर होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 80
(viii) केवल कीटो समूह NaBH4 द्वारा अपचयित होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 81
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 82

प्रश्न18.
निम्नलिखित के सम्भावित कारण दीजिए –
(i) साइक्लोहेक्सेनोन अच्छी लब्धि में सायनोहाइड्रिन बनाता है, परन्तु 2,2,6- ट्राइमेथिल साइक्लोहेक्सेनोन ऐसा नहीं करता।
(ii) सेमीकाबेंजाइड में दो -NH2 समूह होते हैं, परन्तु केवल एक -NH2 समूह ही सेमीकाबेंजोन विरचन में प्रयुक्त होता है।
(iii) कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल से अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एस्टर के विरचन के समय जल अथवा एस्टर जैसे ही निर्मित होता है, उसको निकाल दिया जाना चाहिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 83
α-स्थानों पर तीन मेथिल समूहों की उपस्थिति के कारण CN– आयनों का नाभिकस्नेही आक्रमण नहीं होता है। साइक्लोहेक्सेन में यह स्टेरिक अवरोध अनुपस्थित होता है। अत: CN– आयनों का नाभिकस्नेही आक्रमण शीघ्रता से होता है। अत: साइक्लोहेक्सेनोन सायनोहाइडूिन अच्छी मात्रा में प्राप्त होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 84
सेमीकाबेंजाइड में दो -NH2 समूह होते हैं, लेकिन इनमें से एक (ऊपर प्रदर्शित) अनुनाद में भाग लेता है जिसके परिणामस्वरूप इस NH2 समूह पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घट जाता है। अतः यह नाभिकस्नेही नहीं है, लेकिन दूसरे NH2 समूह पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन अनुनाद में भाग नहीं लेता है। अत: ऐल्डिहाइडों एवं कीटोनों के C == O समूह पर आक्रमण के लिए उपलब्ध होता है।

(iii) कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा ऐल्कोहॉल से अम्ल की उपस्थिति में एस्टरों के निर्माण की प्रक्रिया उत्क्रमणीय अभिक्रिया होती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 85
साम्यावस्था को अग्र दिशा (forward direction) में विस्थापित करने के लिए जल या एस्टर को निर्मित होते ही निष्कासित कर लिया जाना चाहिए।

प्रश्न19.
एक कार्बनिक यौगिक में 69.77% कार्बन, 11.63% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है। यौगिक का आण्विक द्रव्यमान 86 है। यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता, परन्तु सोडियम हाइड्रोजनसल्फाइट के साथ योगज यौगिक देता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर एथेनोइक तथा प्रोपेनोइक अम्ल देता है। यौगिक की सम्भावित संरचना लिखिए। (2010)
हल
(क) यौगिक का अणुसूत्र ज्ञात करना –
कार्बन का प्रतिशत = 69.77%
हाइड्रोजन का प्रतिशत = 11.63%
∴ ऑक्सीजन का प्रतिशत = 100 – (69.77 + 11.63)
= 18.6%
C : H : O = [latex]\frac { 69.77 }{ 12 } :\frac { 11.6.3 }{ 1 } :\frac { 18.6 }{ 16 }[/latex]
=5.81 : 11.63 : 1.16
∴ सरल अनुपात = 5 : 10 : 1
दिए गए यौगिक का मूलानुपाती सूत्र = C5H10O
मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान = 5 × 12 + 10 × 1 + 1 × 16 = 86
आण्विक द्रव्यमान = 86 (दिया है)
अणुसूत्र = C5H10O × [latex]\frac { 86 }{ 86 } [/latex] = C5H10O
इस प्रकार दिए गए यौगिक का अणुसूत्र = C5H10O

(ख) यौगिक की संरचना ज्ञात करना –

  1. चूंकि दिया गया यौगिक सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ योगज यौगिक बनाता है, इसलिए यह एक ऐल्डिहाइड अथवा कीटोन होना चाहिए।
  2. चूंकि यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता, इसलिए यह ऐल्डिहाइड नहीं हो सकता। अतः यह कीटोन होना चाहिए।
  3. चूँकि यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, इसलिए दिया गया यौगिक मेथिल कीटोन है।
  4. चूँकि दिया गया यौगिक प्रबल ऑक्सीकरण पर एथेनोइक अम्ले तथा प्रोपेनोइक अम्ल का मिश्रण देता है, इसलिए मेथिल कीटोन पेन्टेन-2-ओन है। इसकी संरचना इस प्रकार है –
    UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 86

(ग) सम्मिलित अभिक्रियाओं का विवरण –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 87

प्रश्न 20.
यद्यपि फीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक हैं, परन्तु कार्बोक्सिलिक अम्ल फीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है, क्यों?
उत्तर
काबॉक्सिलेट आयन में ऋणावेश दो ऑक्सीजन परमाणुओं पर विस्थानित होता है, जबकि फीनॉक्साइड आयन में ऋणावेश एक ऑक्सीजन परमाणु पर ही विस्थानित होता है, इसलिए फोनॉक्साइड आयन की तुलना में कार्बोक्सिलेट आयन अधिक स्थायी होता है, फलस्वरूप कार्बोक्सिलिक अम्ल फीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल होते हैं।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
निम्न में से कौन जलीय KOH को गर्म करने पर ऐसीटेल्डिहाइड बनाता है ?
(i) CH3CH2Cl
(ii) CH3Cl,CH2Cl
(iii) CH3CHCl2
(iv) CH3COCl
उत्तर
(iii) CH3CHCl2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन 50% सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन के साथ क्रिया करके संगत ऐल्कोहॉल तथा अम्ल देता है?
(i) ब्यूटेनॉल
(ii) बेन्जेल्डिहाइड
(iii) फीनॉल
(iv) बेन्जोइक अम्ल
उत्तर
(ii) बेन्जेल्डिहाइड

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन के साथ संगत ऐल्कोहॉल तथा अम्ल देगा?
(i) C6H5CHO
(ii) CH3CH2CH2CHO
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 88
(iv) C6H5CH2CHO
उत्तर
(i) C6H5CHO

प्रश्न 4.
निम्न में से कौन-सा यौगिक कैनिजारो अभिक्रिया नहीं देता है? (2017)
(i) HCHO
(ii) CH3CH2CHO
(iii) CCl3CHO
(iv) (CH3)3C .CHO
उत्तर
(ii) CH3CH2CHO

प्रश्न 5.
ऐसीटिल ब्रोमाइड CH3Mgl के आधिक्य तथा NH4Cl के संतृप्त विलयन से क्रिया करके देता है –
(i) 2-मेथिल प्रोपेन-2-ऑल ।
(ii) ऐसीटैमाइड
(iii) ऐसीटोन
(iv) ऐसीटिल आयोडाइड
उत्तर
(i) 2-मेथिल प्रोपेन-2-ऑल

प्रश्न 6.
C6H5COCl का IUPAC नाम है –
(i) क्लोरोबेन्जिले कीटोन
(ii) बेन्जीन क्लोरोकीटोन
(iii) बेन्जीन कार्बोनिल क्लोराइड
(iv) क्लोरोफेनिल कीटोन
उत्तर
(i) क्लोरोबेन्जिल कीटोन

प्रश्न 7.
एक प्रबल क्षार किससे -हाइड्रोजन कम कर सकता है?
(i) कीटोन
(ii) ऐल्केन
(iii) ऐल्कीन
(iv) ऐमीन
उत्तर
(i) कीटोन

प्रश्न 8.
वह अभिकर्मक जिसके साथ ऐसीटेल्डिहाइड तथा ऐसीटोन दोनों आसानी से अभिक्रिया करते हैं, है – (2017)
(i) फेहलिंग अभिकर्मक
(ii) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक
(iii) शिफ अभिकर्मक
(iv) टॉलेन अभिकर्मक
उत्तर
(ii) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक

प्रश्न 9.
ऐल्डोल संघनन में निर्मित उत्पाद है –
(i) α, β-असंतृप्त ईथर
(ii) α, β-हाइड्रॉक्सी अम्ल
(iii)α, β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड तथा कीटोन
(iv) एक α-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन
उत्तर
(iii) α β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड तथा कीटोन

प्रश्न 10.
एक द्रव को एथेनॉल में मिश्रित करके एक बूंद सान्द्र H So, मिलाया गया। फलों जैसी गंध वाला एक यौगिक निर्मित हुआ। द्रव था (2017)
(i) HCHO
(ii) CH3COCH3
(iii) CH3COOH
(iv) CH3OH
उत्तर
(iii) CH3COOH

प्रश्न11.
प्रोपियोनिक अम्ल Brg/P के साथ डाइब्रोमो उत्पाद देता है। इसकी संरचना होगी –
(i) HCBr2 – CH2COOH
(ii) CH2Br-CH2-COBr
(iii) CH3-CBr2-COOH
(iv) CH2Br-CHBr-COOH
उत्तर
(iii) CH3-CBr2-COOH

प्रश्न 12.
ऐसीटिक अम्ल की हाइड्रोजोइक अम्ल के साथ सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में 0°C पर क्रिया कराने पर बनता है – (2017)
(i) मेथेन
(ii) मेथिल ऐमीन
(iii) मेथिल सायनाइड
(iv) ऐथिल ऐमीन
उत्तर
(ii) मेथिल ऐमीन

प्रश्न 13.
ऐसीटिक अम्ल की क्रिया डाइएजोमेथेन से कराने पर बनने वाला यौगिक है – (2017)
(i) मेथिल ऐसीटेट
(ii) ऐथिल ऐसीटेट
(iii) मेथेन
(iv) मेथिल ऐमीन
उत्तर
(i) मेथिल ऐसीटेट

प्रश्न 14.
निम्न में कौन फेहलिंग विलयन का अपचयन नहीं कर सकता है? (2017)
(i) फॉर्मिक अम्ल
(ii) ऐसीटिक अम्ल
(iii) फॉर्मेल्डिहाइड
(iv) ऐसीटेल्डिहाइड
उत्तर
(ii) ऐसीटिक अम्ल

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइड स्थान समावयवता प्रदर्शित नहीं करते, क्यों?
उत्तर
ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों में -CHO समूह हमेशा सिरे पर होता है, अतः ये स्थान समावयवता प्रदर्शित नहीं करते हैं।

प्रश्न 2.
ऐसिड क्लोराइडों को संगत ऐल्डिहाइडों में परिवर्तन के लिए अभिक्रिया का नाम तथा प्रयुक्त अभिकर्मक लिखिए।
उत्तर
रोजेनमुण्ड अभिक्रिया। अभिकर्मक Pd/BaSO4 द्वारा समर्थित तथा सल्फर या क्विनोलीन द्वारा आंशिक विषाक्त में हाइड्रोजन
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 89

प्रश्न 3.
ऐल्डिहाइडों के क्वथनांक जनक ऐल्केनों तथा संगत ऐल्कोहॉलों के मध्यवर्ती होते हैं। समझाइए।
उत्तर
ऐल्डिहाइडों का अणुभार जनक ऐल्केनों से अधिक होता है तथा ऐल्डिहाइडों में अधिक ध्रुवता के कारण ये जनक ऐल्केनों से अधिक क्वथनांक वाले होते हैं। दूसरी तरफ, ऐल्डिहाइड ऐल्कोहॉलों के समान संयुग्मित द्रव नहीं होते हैं, अत: इनके क्वथनांक संगत ऐल्कोहॉलों से निम्न होते हैं।

प्रश्न 4.
यूरोट्रोपीन पर टिप्पणी लिखिए। (2010)
उत्तर
फॉर्मेल्डिहाइड अमोनिया से अभिक्रिया करके हेक्सा मेथिलीन टेट्राऐमीन बनाती है जिसे हेक्सामीन या यूरोट्रोपीन कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 90

प्रश्न 5.
एक ऐल्डिहाइड का नाम लिखिए जो फेहलिंग विलयन परीक्षण नहीं देता है।
उत्तर
बेन्जेल्डिहाइड।

प्रश्न 6.
क्या होता है जब फॉर्मेल्डिहाइड की अभिक्रिया सान्द्र NaOH विलयन से कराते हैं ?
उत्तर
मेथिल ऐल्कोहॉल तथा सोडियम फॉर्मेट बनता है। यह कैनिजारो अभिक्रिया है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित को HCN के प्रति बढ़ती क्रियाशीलता के क्रम में लिखिए –
CH3CHO, CH3COCH3, HCHO, C2H5COCH3
उत्तर
C2H5COCH3 < CH3COCH3 < CH3CHO < HCHO

प्रश्न 8.
किस प्रकार के ऐल्डिहाइड कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं?
उत्तर
ऐल्डिहाइड जिनमें 2-हाइड्रोजन नहीं होती, जैसे-फॉर्मेल्डिहाइड तथा बेन्जेल्डिहाइड कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं।

प्रश्न 9.
फेहलिंग विलयन क्या होता है?
उत्तर
समान आयतन में CuSO4 विलयन (फेहलिंग A) तथा रोशले लवण के क्षारीय विलयन (फेहलिंग B) का मिश्रण फेहलिंग विलयन कहलाता है।

प्रश्न 10.
ऐल्डिहाइड समूह की पहचान के लिए फेहलिंग विलयन परीक्षण दीजिए।
उत्तर
RCHO + 2Cu2+ + 5OH– → RCO0 + Cu2O + 3H2O

प्रश्न 11.
एथेनल को HI तथा लाल P के साथ उच्च दाब पर गर्म करने पर होने वाली क्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 91

प्रश्न 12.
उस उत्पाद की संरचना तथा नाम लिखिए जब ओजोन एथिलीन के साथ क्रिया करती है तथा अन्तिम उत्पाद को जल अपघटित करते हैं।
उत्तर
फॉर्मेल्डिहाइड (मेथेनल), HCHO.

प्रश्न 13.
आप ऐसीटेल्डिहाइड से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल किस प्रकार प्राप्त करेंगे?
उत्तर
ऐल्डोल संघनन द्वारा।

प्रश्न 14.
क्या होता है जब ऐसीटेल्डिहाइड को H2SO4 की उपस्थिति में K2Cr2O7 से अभिकृत कराते हैं?
उत्तर
ऐसीटेल्डिहाइड ऐसीटिक अम्ल में ऑक्सीकृत हो जाता है।

प्रश्न 15.
फॉर्मेल्डिहाइड ऐल्डोल संघनन में भाग क्यों नहीं लेता है?
उत्तर
ऐल्डोल संघनन में किसी विशेष कार्बोनिल यौगिक के एक अणु से जनित कार्बोधनायन का नाभिकस्नेही आक्रमण दूसरे अणु पर होता है। इसके लिए कार्बोनिल यौगिक में कम-से-कम एक α-हाइड्रोजन उपस्थित होना चाहिए। चूंकि फॉर्मेल्डिहाइड में α-हाइड्रोजन उपस्थित नहीं होता। अतः यह ऐल्डोल संघनन में भाग नहीं लेता, लेकिन यह α-हाइड्रोजन परमाणु युक्त अन्य कार्बोनिल यौगिक के साथ क्रॉस ऐल्डोल संघनन में भाग ले सकता है। उदाहरणार्थ- फॉर्मेल्डिहाइड तथा ऐसीटेल्डिहाइड।

प्रश्न 16.
फॉर्मेलिन क्या है? इसके उपयोग लिखिए। (2011)
उत्तर
फॉर्मेलिन, फॉर्मेल्डिहाइड का जलीय विलयन होता है जिसमें फॉर्मेल्डिहाइड की अधिकतम सान्द्रता 40% तक होती है। यह विलयन मृत जीवों के परिरक्षण में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 17.
एथेनल से ऐसीटोन कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 92

प्रश्न18.
क्या होता है जब कैल्सियम ऐसीटेट को शुष्क आसवित करते हैं ?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 93

प्रश्न 19.
कौन-सा यौगिक बनता है जब बेन्जीन को निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में CH3COCl के साथ अभिकृत कराते हैं?
उत्तर
ऐसीटोफीनोन।

प्रश्न 20.
कीटोन ऐल्डिहाइडों की तुलना में कम सक्रिय होते हैं, क्यों?
उत्तर
कीटोनों में दो ऐल्किल समूहों के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I प्रभाव) के कारण कार्बन परमाणु कम धनात्मक हो जाता है तथा इन्हें ऐल्डिहाइडों से कम सक्रिय बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 94

प्रश्न 21.
कीटोनों के क्वथनांक समावयवी ऐल्डिहाइडों से उच्च होते हैं। कारण बताइए।
उत्तर
कीटोनों में दो इलेक्ट्रॉन विमोचक ऐल्किल समूह उपस्थित होते हैं जबकि ऐल्डिहाइडों में एक समूह उपस्थित होता है जिसके परिणामस्वरूप कीटोनों में ऐल्किल समूह ऐल्डिहाइडों से अधिक ध्रुवीय होता है। अत: कीटोनों के क्वथनांक समावयवी ऐल्डिहाइडों से उच्च होते हैं।

प्रश्न 22.
ऐल्डिहाइड तथा कीटोनों के हाइड्रोजोनों का निर्माण प्रबल अम्लीय माध्यम में नहीं किया जा सकता, क्यों?
उत्तर
हाइड्राजोनों को निर्माण कार्बोनिल यौगिकों की हाइड्राजीन से क्रिया द्वारा होता है जो कि नाभिकस्नेही की तरह कार्य करता है। प्रबल अम्लीय माध्यम में हाइड्राजीन प्रोटॉनीकृत हो जाती है। अत: यह नाभिकस्नेही के समान कार्य करने के योग्य नहीं रहती जिसके परिणामस्वरूप ऐल्डिहाइड तथा कीटोनों को प्रबल अम्लीय माध्यमों में नहीं बनाया जा सकता।

प्रश्न 23.
किस प्रकार के ऐल्डिहाइड एवं कीटोन ऐल्डोल संघनन प्रदर्शित करते हैं?
उत्तर
वे ऐल्डिहाइड तथा कीटोन जिनमें α-हाइड्रोजन होती है।

प्रश्न 24.
किस प्रकार के कीटोन आयोडोफॉर्म अभिक्रिया देते हैं ?
उत्तर
कीटोन जिनमें CH3CO- समूह होता है।

प्रश्न 25.
डाइ t-ब्यूटिल कीटोन NaHSO3 एडक्ट नहीं देता जबकि ऐसीटोन देता है, क्यों?
उत्तर
बड़े t-ब्यूटिल समूह के कारण उत्पन्न स्टेरिक अवरोध के कारण बाइसल्फेट आयन कार्बोनिल समूह के योग को प्रेरित नहीं करते हैं।

प्रश्न 26.
आप ऐसीटोन को एथेनोइक ऐसिड में कैसे बदलोगे?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 95

प्रश्न 27.
क्लीमेन्स अपचयन को उदाहरण देते हुए समझाइए। (2014)
उत्तर
ऐल्डिहाइड या कीटोन का Zn/C2H5OH/HCl के द्वारा अपचयन कराने पर ऐल्केन बनता है। इसे क्लीमेन्स अपचयन कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 96

प्रश्न 28.
कार्बोनिल यौगिक ऐल्कोहॉलों से अधिक ध्रुवीय होते हैं जबकि C तथा O परमाणु के मध्य विद्युत्-ऋणात्मकता का अन्तर H तथा O परमाणुओं से कम होता है। समझाइए।
उत्तर
कार्बोनिल समूह UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 97 में π इलेक्ट्रॉन युग्म ढीला बँधा रहता है और आसानी से ऑक्सीजन परमाणु की ओर स्थानान्तरित हो जाता है। ऐसा ऐल्कोहॉल समूह (O-H) में नहीं होता। अतः कार्बोनिल यौगिक अधिक ध्रुवीय होते हैं और इनके द्विध्रुव आघूर्णमान (2.3 से 2.80) ऐल्कोहॉलों (1.6-1.8 D) से उच्च होते हैं।

प्रश्न 29.
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 98
उत्तर
हेक्स-2-ईन-4-आइनोइक अम्ल।

प्रश्न 30.
आप बेन्जीन को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित करेंगे? (2018)
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 99

प्रश्न 31.
बेन्जोइक अम्ल ऐसीटिक अम्ल से प्रबल अम्ल क्यों होता है?
उत्तर
बेन्जोइक अम्ल का K, मान (6.3 × 10-5) ऐसीटिक अम्ल के K मान (1.75 × 10-5) से अधिक होता है क्योंकि-I प्रभाव युक्त C6H5 समूह बेन्जोइक अम्ल से H+ का विमोचन सुलभ बनाता है जबकि + I प्रभाव युक्त CH3 समूह इसे रोके रखता है।

प्रश्न 32.
आप ऐसीटिक अम्ल का मेथिलेमीन में परिवर्तन कैसे करेंगे?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 100

प्रश्न 33.
बेन्जेल्डिहाइड तथा बेन्जोइक अम्ल के मध्य विभेद के लिए रासायनिक परीक्षण दीजिए।
उत्तर
बेन्जोइक अम्ल सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ गर्म करने पर तेजी से झाग देता है जबकि बेन्जेल्डिहाइड क्रिया नहीं करता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 101

प्रश्न 34.
आप ऐसीटिक अम्ल को ऐसीटेल्डिहाइड में किस प्रकार परिवर्तित करेंगे?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 102

प्रश्न 35.
निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए – (2013)
CH2 = CH2 + O3 [latex]\underrightarrow { { CCl }_{ 4 } } [/latex] A [latex]\underrightarrow { { Zn+H }_{ 2 }O } [/latex] B
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 103

प्रश्न 36.
उदाहरण द्वारा हैल-वोल्हार्ड-जेलिन्सकी अभिक्रिया समझाइए। (2017)
उत्तर
लाल फॉस्फोरस या आयोडीन उत्प्रेरक की अल्प मात्रा की उपस्थिति में उच्च ताप पर मोनोकार्बोक्सिलिक अम्ल की क्लोरीन से अभिक्रिया कराने पर 2-हैलोजने अम्ल बनते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 104

प्रश्न 37.
ऐसीटिक अम्ल को लाल P तथा Cl2 की उपस्थिति में हैलोजनीकृत किया जा सकता है। लेकिन फॉर्मिक अम्ल को नहीं, क्यों?
उत्तर
फॉर्मिक अम्ल में α-हाइड्रोजन नहीं पाया जाता है। अत: यह हैलोजनीकृत (halogenated) नहीं होता है जबकि ऐसीटिक अम्ल में α-कार्बन परमाणु होता है तथा हैलोजनीकरण -कार्बन परमाणु पर होता है।

प्रश्न 38.
किसका क्वथनांक उच्च होगा-ब्यूटेनोइक अम्ल या एथिल ऐसीटेट ? समझाइए।
उत्तर
दोनों यौगिक समावयवी हैं तथा इनके अणुभार समान हैं। ब्यूटेनोइक अम्ल में OH समूह होता है। अतः यह हाइड्रोजन आबन्ध बनाने में सक्षम होता है। एथिल ऐसीटेट में हाइड्रोजन आबन्ध नहीं पाया जाता है। ब्यूटेनोइक अम्ल का क्वथनांक उच्च होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 105

प्रश्न 39.
टॉलेन अभिकर्मक क्या होता है?
उत्तर
टॉलेन अभिकर्मक सिल्वर नाइट्रेट का अमोनीकृत विलयन होता है।

प्रश्न 40.
फॉर्मिक अम्ल टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है, समझाइए।
उत्तर
फॉर्मिक अम्ल में मुक्त ऐल्डिहाइड समूह होता है जो शीघ्रता से ऑक्सीकृत होता है, अत: यह टॉलेन अभिकर्मक (अमोनीकृत सिल्वर नाइट्रेट विलयन) को रजत दर्पण (silver mirror) में अपचयित करता है।

प्रश्न 41.
फॉर्मिक अम्ल गर्म करने पर ऐनहाइड्राइड क्यों नहीं बनाता है?
उत्तर
गर्म करने पर फॉर्मिक अम्ल H2O का एक अणु खोकर CO में निर्जलीकृत (dehydrated) हो जाता है, अत: यह गर्म करने पर ऐनहाइड्राइड नहीं बनाता है।
HCOOH [latex]\underrightarrow { \triangle } [/latex] H2O + CO ↑

प्रश्न 42.
श्मिट अभिक्रिया द्वारा प्राथमिक ऐमीन कैसे बनायी जाती है? रासायनिक समीकरण भी दीजिए। (2014, 18)
उत्तर
कार्बोक्सिलिक अम्ल को हाइड्राजोइक अम्ल (N3H) के साथ सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में गर्म करने पर प्राथमिक ऐमीन बनती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 106

प्रश्न43.
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 107
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 108

प्रश्न 44.
रीमर-टीमेन अभिक्रिया को समीकरण सहित लिखिए। (2014, 15, 16)
उत्तर
फीनॉल के क्षारीय विलयन को CCl4 के साथ 60 – 70°C पर reflux करने के पश्चात् मिश्रण को HCl द्वारा अम्लीय करने पर o-हाइड्रॉक्सी बेन्जोइक ऐसिड प्राप्त होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 109

प्रश्न 45.
आप बेन्जोइक अम्ल को बेन्जामाइड में कैसे परिवर्तित करेंगे?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 110

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक एस्टर का अणुभार 102 है। इसका जलीय अपघटन करने पर एक क्षारकीय अम्ल तथा एक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है। यदि अम्ल का 0.185 ग्राम 0.1 NNaOH के 25 mL को पूर्णतया उदासीन करता है, तो बने हुए अम्ल, ऐल्कोहॉल तथा एस्टर के संरचना सूत्र लिखिए। (2015)
हल
माना एस्टर RCOOR’ है
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 111
जहाँ, R = R’ या R≠ R’
0.185 ग्राम अम्ल = 25 mL 0.1 N NaOH ≡ 25 mL N NaOH
∵ 1 N NaOH के 2.5 mL उदासीन करता है = 0.185 ग्राम अम्ल को
∵ 1 N NaOH के 1000 mL उदासीन करती है = [latex]\frac { 0.185\times 1000 }{ 2.5 } [/latex] = 74
अतः अम्ल का तुल्यांकी भार = 74
अम्ल का अणुभार = 74
RCOOH का अणुभार = 74
R + 12 + 32 + 1 = 74
R का अणुभार = 74 – 45 = 29
अत: R, C2H5 एथिल समूह है। अम्ल का अणुसूत्र C2H3COOH है। एस्टर का अणुभार = 102
RCOOR’ का अणुभार = 102
29 + 12 + 32 + R’ = 102
R’ = 29
अत: R = R’ है, तो एस्टर C2H5COOC2H5 है और ऐल्कोहॉल का अणुसूत्र C2H5OH है।
अम्ल = C2H5COOH, ऐल्कोहॉल = C2H5OH
एस्टर = C2H5COOC2H5

प्रश्न 2.
विशिष्ट गन्ध वाला कार्बनिक यौगिक A, सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ क्रिया करके दो यौगिक B तथा C बनाता है। यौगिक B का अणुसूत्र C7H8O है। इसका ऑक्सीकरण करने पर पुनः यौगिक A बनता है। यौगिक C को सोडालाइम के साथ गर्म करने पर बेंजीन प्राप्त होती है। A, B तथा C कार्बनिक यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए। सम्बन्धित अभिक्रियाओं के समीकरण भी लिखिए। (2014)
उत्तर
यौगिक A की C6H5CHO होने की सम्भावना लगती है। प्रश्नानुसार यौगिक A की NaOH से क्रिया कराने पर यौगिक B तथा C बनता है। यौगिक B का अणुसूत्र C7H8O है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 112
यौगिक B C6H5CH2OH के ऑक्सीकरण से पुनः यौगिक A C6H5CHO प्राप्त होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 113
यौगिक C, C6H5COONa को सोडा लाइम के साथ गर्म करने पर बेंजीन बनती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 114
अत: यौगिक
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 115
B= C6H5CH2OH (बेन्जिल ऐल्कोहॉल), C= सोडियम बेन्जोएट

प्रश्न 3.
एक कार्बनिक यौगिक A जिसका अणुसूत्र C5H10 है ब्रोमीन जल को रंगहीन करता है। यौगिक A अपचयन करने पर 2 मेथिल ब्यूटेन और ओजोनीकरण करने पर ऐथेनल तथा प्रोपेनोन देता है। यौगिक A की पहचान कीजिए। सम्बन्धित अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए। (2014)
उत्तर
यौगिक के अणुसूत्र C5H10 से इसके UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 116 होने की सम्भावना लगती है। चूंकि ओजोनीकरण के उपरान्त एथेनल तथा प्रोपेनोन बनता है तथा यह ब्रोमीन जल को रंगहीन करता है। इससे यौगिक की असंतृप्त होने की पुष्टि होती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 117
यौगिक के अपचयन से 2-मेथिल ब्यूटेन बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 118
यौगिक A के ओजोनीकरण से एथेनल तथा प्रोपेनोन बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 119
अतः यौगिक A 3-मेथिल-1-ब्यूटीन है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित यौगिकों को अम्लीयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा अपने उत्तर को समझाइए –
(a) ब्यूटेनोइक अम्ल
(b) 2-क्लोरोब्यूटेनोइक अम्ल
(c) 3-क्लोरोब्यूटेनोइक अम्ल
उत्तर
अम्लीयता का क्रम निम्नवत् है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 120
2-क्लोरो प्रतिस्थापी प्रेरणिक प्रभाव द्वारा ब्यूटेनोइक अम्ल की अम्लीयता बढ़ाता है। 3-क्लोरो प्रतिस्थापी अम्लीयता कम मात्रा में बढ़ाता है, क्योंकि C-Cl आबन्ध कार्बोक्सिल समूह से दूर हो जाता है। दूरी बढ़ने से प्रेरणिक प्रभाव घटता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रयोगशाला में फॉर्मेल्डिहाइड बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। इसकी (i) सान्द्र NaOH घोल तथा (ii) अमोनिया के साथ होने वाली क्रियाओं को समीकरण सहित समझाइए। (2010, 11, 16, 17)
उत्तर
प्रयोगशाला में फॉर्मेल्डिहाइड बनाना – मेथिल ऐल्कोहॉल के उत्प्रेरित ऑक्सीकरण द्वारा प्रयोगशाला में फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) बनाया जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 121
विधि
– एक फ्लास्क में मेथिल ऐल्कोहॉल लेकर वायु भेजने के लिए तथा वाष्प निकलने के लिए दो नलियाँ लगाई जाती हैं। वायु निकलने वाली नली को प्लेटिनमयुक्त ऐस्बेस्टॉस से भरी एक नली से जोड़ दिया जाता है, जिसमें से एक अन्य नली जल भरे चूषण पम्पयुक्त फ्लास्क में लगा दी जाती है। मेथिल ऐल्कोहॉल तथा प्लेटिनमयुक्त ऐस्बेस्टॉस को गर्म करने के लिए दो अलग-अलग बर्नर लगा दिए जाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 122
प्लेटिनमयुक्त ऐस्बेस्टॉस से भरी नली को लाल तप्त होने तक गर्म करके चूषण पम्प द्वारा फ्लास्क की वायु निकाल देते हैं। मेथिल ऐल्कोहॉलयुक्त फ्लास्क में वायु प्रवाहित करते हुए 250°C से 300°C ताप के बीच गर्म करने पर मेथिल ऐल्कोहॉल की वाष्प Pt के सम्पर्क में आती है, जिससे इसके ऑक्सीकरण से फॉर्मेल्डिहाइड गैस बनती है, जो ग्राही के जल में विलेय होता है। फॉर्मेल्डिहाइड गैसयुक्त जलीय विलयन को फॉर्मेलिन कहते हैं। इसमें 40% फॉर्मेल्डिहाइड तथा शेष जल होता है।

(i) सान्द्र NaOH घोल से अभिक्रिया – फॉर्मेल्डिहाइड की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के सान्द्र विलयन से क्रिया कराने पर मेथिल ऐल्कोहॉल और सोडियम फॉर्मेट बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 123
यह अभिक्रिया कैनिजारो अभिक्रिया कहलाती है।

(ii) अमोनिया से अभिक्रिया – फॉर्मेल्डिहाइड सान्द्र अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके हेक्सामेथिलीन टेट्राऐमीन बनाती है जिसे हेक्सामीन या यूरोट्रोपिन कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 124

प्रश्न 2.
प्रयोगशाला में शुद्ध ऐसीटेल्डिहाइड बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। रासायनिक समीकरण भी दीजिए। इसके कुछ प्रमुख रासायनिक गुण भी दीजिए। (2009, 11, 13, 15, 18)
उत्तर
एथिल ऐल्कोहॉल का K2Cr2O7 तथा तनु H2SO4 द्वारा ऑक्सीकरण कराकर प्रयोगशाला में ऐसीटेल्डिहाइड बनाया जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 125
विधि – प्रयुक्त होने वाला उपकरण चित्रानुसार सजाया जाता है। गोल पेंदी के फ्लास्क में K2Cr2O7 चूर्ण (50 ग्राम) तथा जल (200 मिली) लेकर उसमें बिन्दु कीप द्वारा ऐल्कोहॉल (24 मिली) तथा तनु H2SO4 (60 मिली) का मिश्रण बूंद-बूंद करके गिराया जाता है और फ्लास्क को बालू ऊष्मक पर धीरे-धीरे गर्म किया जाता है। फ्लास्क में अभिक्रिया के फलस्वरूप बनी ऐसीटेल्डिहाईड वाष्प को हिम मिश्रण में रखे गए अमोनिया से संतृप्त ईथरयुक्त फ्लास्क में प्रवाहित किया जाता है, जिससे ऐसीटेल्डिहाइड अमोनिया के बने क्रिस्टलों को धोकर, सुखाकर तनु H2SO4 से आसवित करने पर 21°C पर शुद्ध ऐसीटेल्डिहाइड प्राप्त होता है जो ठण्डा होने पर द्रवित हो जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 126
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 127

रासायनिक परीक्षण – (1) यह I2 व NaOH के साथ पीले रंग का क्रिस्टलीय पदार्थ आयोडोफॉर्म बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 128
2. अपचायक गुण – यह फेहलिंग विलयन को अपचयित कर Cu20 को लाल रंग देता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 129
3. NH2OHसे अभिक्रिया –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 130
4. NaHSO3 से अभिक्रिया –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 131

प्रश्न 3.
ऐसीटेल्डिहाइड बनाने की ऑक्सीकरण एवं उत्प्रेरकीय तथा विहाइड्रोजनीकरण विधियों के रासायनिक समीकरण लिखिए। ऐसीटोन की संघनन अभिक्रिया का समीकरण भी लिखिए। (2014)
या
ऐल्डिहाइडों को बनाने की किन्हीं दो विधियों के रासायनिक समीकरण लिखिए। ऐसीटेल्डिहाइड तनु NaOH तथा टॉलेन अभिकर्मक के साथ किस प्रकार क्रिया करता है? सम्बंधित रासायनिक समीकरण लिखिए। (2015, 18)
उत्तर
(i) ऐसीटेल्डिहाइड बनाने की ऑक्सीकरण एवं उत्प्रेरकीय विधि
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 132
(ii) ऐसीटेल्डिहाइड बनाने की विहाइड्रोजनीकरण विधि
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 133
NaOH से क्रिया –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 134
टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 135

प्रश्न 4.
शुद्ध ऐसीटोन बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए। इसके प्रमुख रासायनिक गुण भी दीजिए। (2009, 10, 12, 13, 16, 18)
या
ऐसीटोन की क्षारीय आयोडीन के साथ अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2018)
उत्तर
प्रयोगशाला में निर्जल कैल्सियम ऐसीटेट के शुष्क आसवन से ऐसीटोन बनाया जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 136
विधि – धातु या काँच के रिटॉर्ट में निर्जल कैल्सियम ऐसीटेट लेकर उपकरण को दिये गये चित्र के । अनुसार व्यवस्थित किया जाता है। रिटॉर्ट को गर्म करने पर ऐसीटोन की वाष्प बनती है जिसे संघनित्र में प्रवाहित करने पर द्रव ऐसीटोन ग्राही में एकत्र हो जाता है। यह ऐसीटोन अशुद्ध होता है। इसे संतृप्त NaHSO3 विलयन के साथ मिलाकर हिलाने के बाद 4-5 घण्टे के लिए रख दिया जाता है, जिससे ऐसीटोन सोडियम बाइसल्फाइट के क्रिस्टल बनते हैं। इन क्रिस्टलों को पृथक् करके इनमें Na2CO3 मिलाकर मिश्रण का आसवन करने पर शुद्ध ऐसीटोन प्राप्त होता है जिसमें जल का कुछ अंश होता है। शुद्ध एवं शुष्क ऐसीटोन प्राप्त करने के लिए ऐसीटोन को निर्जल CaCl2 से सुखाकर पुनः आसवित करने पर 56°C पर शुद्ध ऐसीटोन प्राप्त होता है जिसको संघनित्र द्वारा ग्राही में एकत्र कर लिया जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 137

अमोनिया के साथ क्रिया – डाइऐसीटोन ऐमीन बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 138
क्लोरोफॉर्म से क्रिया – क्लोरीटोन बनता है। (2009)
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 139
H2SO4 से क्रिया – ऐसीटोन का सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ आसवन करने पर मेसिटलीन बनती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 140
आयोडीन से क्रिया – ऐसीटोन को आयोडीन और NaOH के जलीय विलयन के साथ गर्म करने पर आयोडोफॉर्म का पीला अवक्षेप बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 141

प्रश्न 5.
फॉर्मिक अम्ल बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए तथा अभिक्रियाओं के समीकरण भी दीजिए। इसके दो अपचायक गुणों को लिखिए। (2011, 13)
या
फॉर्मिक अम्ल बनाने की प्रयोगशाला विधि का वर्णन नामांकित चित्र सहित कीजिए तथा अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए। फॉर्मिक अम्ल की फेहलिंग विलयन तथा टॉलेन अभिकर्मक के साथ क्या क्रिया होती है? (2011, 13)
या
फॉर्मिक अम्ल की लेड कार्बोनिल के साथ अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2018)
उत्तर
प्रयोगशाला में फॉर्मिक अम्ल, ऑक्सैलिक अम्ल तथा निर्जल ग्लिसरॉल के मिश्रण को 100-110°C ताप पर गर्म करके बनाया जाता है। अभिक्रिया निम्नलिखित पदों में होती है –
1. ऑक्सैलिक अम्ल ग्लिसरॉल के साथ अभिक्रिया करके ग्लिसरॉल मोनोऑक्सैलेट (एस्टर) बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 142

2. ग्लिसरॉल मोनो ऑक्सैलेट 100-110°C ताप पर अपघटित होकर ग्लिसरॉल मोनो फॉर्मेट बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 143
3. ग्लिसरॉल मोनो फॉर्मेट में ऑक्सेलिक अम्ल के क्रिस्टलों की कुछ मात्रा मिलाते हैं। इन क्रिस्टलों का जल, ग्लिसरॉल मोनो फॉर्मेट का जल अपघटन कर फॉर्मिक अम्ल तथा ग्लिसरॉल बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 144
अभिक्रिया में बना फॉर्मिक अम्ल आसुत हो जाता है तथा शेष बचे ग्लिसरॉल में फिर ऑक्सैलिक अम्ल मिलाकर फॉर्मिक अम्ल की अधिक मात्रा प्राप्त कर लेते हैं। प्रयुक्त उपकरण का नामांकित चित्र निम्न है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 145
निर्जल फॉर्मिक अम्ल बनाना – निर्जल फॉर्मिक अम्ल बनाने के लिए जल मिश्रित अम्ल को उबालकर लेड कार्बोनेट द्वारा उदासीन कर लेते हैं। गर्म विलयन को छानकर, द्रव को ठण्डा करने पर लेड फॉर्मेट के क्रिस्टल पृथक् हो जाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 146
लेड फॉर्मेट लेड फॉर्मेट के क्रिस्टलों को छानकर तथा सुखाकर एक काँच की झुकी नली में लेते हैं। इसके ऊपर शुष्क H2S गैस प्रवाहित करते हैं जिसके फलस्वरूप फॉर्मिक अम्ल बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 147
ठोस लेड सल्फाइड नली में नीचे रह जाता है तथा द्रव फॉर्मिक अम्ल को बहाकर दूसरे पात्र में एकत्र कर लेते हैं। इससे निर्जल अम्ल बन जाता है।

अपचायक गुण – (i) फॉर्मिक अम्ल टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 148
(ii) फॉर्मिक अम्ल फेहलिंग विलयन को अपचयित कर देता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 149

प्रश्न 6.
ऐसीटिक अम्ल के औद्योगिक निर्माण की क्विक विनेगर प्रक्रम की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। इसकी PCls के साथ अभिक्रिया लिखिए। इसका एक परीक्षण भी लिखिए। (2016)
या
शीघ्र सिरका विधि द्वारा ऐसीटिक अम्ल बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। इसके साथ एथिल ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर
ऐसीटिक अम्ल का निर्माण निम्नलिखित विधियों से किया जाता है –

  1. ऐसीटिलीन से
  2. लकड़ी के भंजक आसवन से प्राप्त पाइरोलिग्नियस अम्ले से
  3. किण्वने द्वारा
  4. सोडियम मेथॉक्साइड द्वारा।

क्विक विनेगर विधि या किण्वन विधि
किण्वन विधि द्वारा ऐसीटिक अम्ल बनाना – इस विधि को शीघ्र सिरका (Quick vinegar) विधि कहते हैं। इस विधि में एथिल ऐल्कोहॉल का माइकोडर्मा ऐसीटी नामक जीवाणुओं द्वारा किण्वन कराके ऐसीटिक अम्ल का तनु विलयन (सिरका) प्राप्त किया जाता है। ये जीवाणु वायु में उपस्थित रहते हैं। ये अपनी वृद्धि के लिए एथिल ऐल्कोहॉल के विलयन में पहुँच जाते हैं और किण्वन द्वारा ऐल्कोहॉल को सिरके में ऑक्सीकृत कर देते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 150
ऐसीटिक अम्ले
किण्वन क्रिया एक लकड़ी के पीपे में होती है। इस पीपे में ऊपर और नीचे की ओर छिद्रयुक्त लकड़ी के तख्ते लगे होते हैं। इन दोनों तख्तों के बीच में लकड़ी का बरादा भरा रहता है जो माईकोडर्मा ऐसीटीयुक्त सिरके से गीला कर दिया जाता है। पीपे के चारों ओर दीवारों में भी छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। पीपे के निचले भाग में बने हुए सिरके को निकालने के लिए एक टोंटी लगी रहती है।

उपकरण को पूर्णतया व्यवस्थित करके पीपे के ऊपरी भाग में 10% एथिल ऐल्कोहॉल का विलयन धीरे-धीरे टपकाया जाता है। यह लकड़ी के बुरादे में उपस्थित माइकोडर्मा ऐसीटी की उपस्थिति में वायु की ऑक्सीजन से ऑक्सीकृत होकर ऐसीटिक अम्ल (सिरका) में परिवर्तित होता रहता है। इस प्रक्रम में पीपे का ताप 30-35°C रखा जाता। है। निचले भाग से प्राप्त द्रव को कई बार पीपे में ऊपर से टपकाया जाता है जिससे 6-8% ऐसीटिक अम्लयुक्त सिरका प्राप्त होता है। इस विधि से सिरका बनने में लगभग एक सप्ताह लगता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 151

ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल बनाना – सिरके को NaOH या Na2CO3 से उदासीन करके निर्जल सोडियम ऐसीटेट प्राप्त कर लिया जाता है। इसका सान्द्र H2SO4 के साथ आसवन करने पर 99% अम्ल प्राप्त होता है। इसको ठण्डा करके ग्लेशियल अम्ल प्राप्त कर लेते हैं।

PCl5 से क्रिया – ऐसीटिल क्लोराईड बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 152
C2H5OH से क्रिया – एथिल ऐसीटेट (एस्टर) बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 153
ऐसीटिक अम्ल का परीक्षण – ऐसीटिक अम्ल को NaOH विलयन द्वारा उदासीन करके FeCl3 का विलयन मिलाने पर लाल रंग का विलयन प्राप्त होता है।
CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 154

प्रश्न 7.
ऑक्सैलिक अम्ल के निर्माण की प्रमुख विधियाँ लिखिए। इसके कुछ प्रमुख रासायनिक गुण भी लिखिए। (2016)
उत्तर
निर्माण विधि
1. सुक्रोस के ऑक्सीकरण द्वारा – प्रयोगशाला में ऑक्सैलिक अम्ल सुक्रोस (चीनी) का वैनेडियम पेन्टॉक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में सान्द्र नाइट्रिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण करके बनाते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 155

2. सोडियम फॉर्मेट से – सोडियम फॉर्मेट को 360°C पर गर्म करने पर सोडियम ऑक्सैलेट बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 156

सोडियम ऑक्सैलेट को जल में विलीन करके उसमें कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन डालते हैं। जिससे कैल्सियम ऑक्सैलेट के अवक्षेप बनते हैं। अविलेय कैल्सियम ऑक्सैलेट को छानकर पृथक् करते हैं और उसकी तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की आवश्यक मात्रा से क्रिया कराते हैं जिससे कैल्सियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप और ऑक्सैलिक अम्ल बनते हैं। अविलेय कैल्सियम सल्फेट को छानकर अलग कर देते हैं और फिल्टरित को वाष्पित करके सान्द्र करते हैं। विलयन को ठण्डा करने पर हाइड्रेटेड ऑक्सैलिक अम्ल (C2O4H2 . 2H2O) के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।

रासायनिक गुण
1. एस्टरीकरण अभिक्रिया – एथिल ऐल्कोहॉल के साथ अभिक्रिया करके यह दो प्रकार के एस्टर बनाता है जिनको अम्लीय तथा सामान्य एस्टर कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 157

2. अमोनिया से अभिक्रिया – अमोनिया के साथ अभिक्रिया करने पर यह मोनो तथा डाइअमोनियम ऑक्सैलेट बनाता है जो गर्म करने पर मोनोऑक्सैमाइड (ऑक्सैमिक अम्ल) तथा ऑक्सैमाइड देते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 158
ऑक्सैमाइड को P2O5 के साथ गर्म करने पर सायनोजन बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 159

3. फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड से अभिक्रिया – फॉस्फोग्स पेन्टाक्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके ऑक्सैलिक अम्ल ऑक्सैलिल क्लोराइड देता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 160
4. कैल्सियम क्लोराइड के साथ अभिक्रिया – ऑक्सैलिक अम्ल के NH4OH द्वारा उदासीन विलयन में कैल्सियम क्लोराइड विलयन डालने पर कैल्सियम ऑक्सैलेट का सफेद अवक्षेप बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 161

प्रश्न 8.
बेन्जोइक अम्ल बनाने की प्रयोगशाला विधि का वर्णन कीजिए। सम्बन्धित रासायनिक समीकरण, रासायनिक गुण तथा उपयोग भी बताइए।
उत्तर
प्रयोगशाला विधि – बेन्जिल क्लोराइड का क्षारीय माध्यम में पोटैशियम परमैंगनेट द्वारा पोटैशियम बेन्जोएट में ऑक्सीकरण करके मिश्रण को HCl द्वारा अम्लीय करने पर बेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 162
विधि – एक गोल पेंदी के फ्लास्क में निर्जल सोडियम कार्बोनेट (4g), जल (200 मिली), पोटैशियम परमैंगनेट (9 g) और बेन्जिल क्लोराइड (5 g) लेते हैं और फ्लास्क में एक पश्चवाही संघनित्र लगाकर मिश्रण को अभिक्रिया पूर्ण होने तक (लगभग 1-2 घण्टे) उबालते हैं। बेन्जिल क्लोराइड बेन्जोइक अम्ल के लवण में ऑक्सीकृत हो जाता है और पोटैशियम परमैंगनेट मैंगनीज डाइऑक्साइड में अपचयित होता है। मिश्रण को ठण्डा करके उसे सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (लगभग 40 मिली) द्वारा अम्लीय करते हैं। फिर उसमें सोडियम सल्फाइड का जलीय विलयन (20%) मैंगनीज डाइऑक्साइड के पूरा घुलने तक डालते हैं। ठण्डे मिश्रण को छानकर बेन्जोइक अम्ल के सफेद क्रिस्टलों को पृथक् कर लेते हैं। फिर गर्म जल से उनका पुनः क्रिस्टलन कराकर शुद्ध बेन्जोइक अम्ल (m.p. 122°C) प्राप्त कर लेते हैं।

रासायनिक गुण
1. फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड से अभिक्रिया – बेन्जोइक अम्ल की फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड के साथ अभिक्रिया कराने पर बेन्जॉयल क्लोराइड बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 163

2. विकार्बोक्सिलकरण – बेन्जोइक अम्ल या सोडियम बेन्जोएट को सोडालाइम के साथ गर्म करने पर बेन्जीन बनती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids image 164
इस अभिक्रिया में अम्ल के अणु से कार्बन डाइ ऑक्साइड का एक अणु निष्कासित होता है। यह अभिक्रिया अम्ल का विकार्बोक्सिलकरण कहलाती है।
उपयोग

  1. सोडियम बेन्जोएट का उपयोग अचार, मुरब्बे, टमाटर की चटनी, फलों के रस एवं अन्य खाद्य पदार्थों के परिरक्षण (preservation) में परिरक्षक (preservative) के रूप में होता है।
  2. ऐनिलीन-ब्लू रंजक बनाने में
  3. बेन्जोइक अम्ल और उसके लवणों का उपयोग औषधि में मूत्रीय पूतिरोधी के रूप में होता है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids (ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 12 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids (ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 16
Chapter Name Chemistry in Everyday Life
Number of Questions Solved 87
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अनिद्राग्रस्त रोगियों को चिकित्सक नींद लाने वाली गोलियाँ लेने का परामर्श देते हैं, परन्तु बिना चिकित्सक से परामर्श लिए इनकी खुराक लेना उचित क्यों नहीं है?
उत्तर :
नींद की गोलियों में प्रशांतक या प्रतिअवसादक होते हैं। ये तंत्रिका तन्त्र को प्रभावित करके नींद लाते हैं। यदि इनकी खुराक भली प्रकार नियन्त्रित न हो तब ये हानिकारक प्रभाव डालते हैं तथा विष की तरह कार्य करके मृत्यु तक कारित करते हैं। अत: यह सलाह दी जाती है कि इन नींद की गोलियों को चिकित्सक की सलाह से लेना चाहिए।

प्रश्न 2.
किस वर्गीकरण के आधार पर वक्तव्य, रेनिटिडीन प्रतिअम्ल हैं, दिया गया है?
उत्तर :
यह वक्तव्य औषध के फार्माकोलोजिकल (pharmacological) आधार पर वर्गीकरण की ओर संकेत करता है क्योंकि औषध जिसका प्रयोग आमाशय में उपस्थित अम्ल के आधिक्य को उदासीन करता है, प्रतिअम्ल (antacid) कहलाता है।

प्रश्न 3.
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर :
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता कैलोरी कम करने तथा दंतक्षय को रोकने के लिए पड़ती है।

प्रश्न 4.
ग्लिसरिल ओलिएट तथा ग्लिसरिल पामिटेट से सोडियम साबुन बनाने के लिए रासायनिक
समीकरण लिखिए। इनके संरचनात्मक सूत्र नीचे दिए गए हैं
(i) (C15H31COO)3 C3H5 – ग्लिसरिल पामिटेट
(ii) (C15H32COO)3 C3H5 – ग्लिसरिल ओलिएट।
उत्तर :
(i)
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 1
(ii)
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 2

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रकार के अनायनिक अपमार्जक, द्रव अपमार्जकों, इमल्सीकारकों और क्लेदन कारकों (wetting agents) में उपस्थित होते हैं। अणु में जलरागी तथा जलविरागी हिस्सों को दर्शाइए। अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह की पहचान कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 3
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 4
अपमार्जक अणु में उपस्थित विभिन्न प्रकार्यात्मक समूह हैं

  1. ईथर,
  2. प्राथमिक (1°) ऐल्कोहॉलीय समूह।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
हमें औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर :
औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने के अनेक लाभ हैं। उदाहरणार्थ, फार्माकोलोजिकल प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण डॉक्टरों के लिए लाभदायक है क्योंकि इससे उन्हें किसी रोग विशेष के उपचार के लिए उपलब्ध सभी औषधों की जानकारी मिलती है। इसी प्रकार जैवरासायनिक प्रक्रम पर प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण से वांछित औषध के संश्लेषण के लिए सही यौगिक के चयन में सहायता मिलती है। अणु लक्ष्यों के आधार पर वर्गीकरण से केमिस्टों को किसी विशेष ग्राही स्थल के लिए सर्वाधिक प्रभावी औषध के निर्माण में सहायता मिलती है। स्पष्ट है कि प्रत्येक प्रकार के वर्गीकरण की अपनी उपयोगिता है।

प्रश्न 2.
औषध रसायन के पारिभाषिक शब्द, लक्ष्य-अणु अथवा औषध-लक्ष्य को समझाइए।
उत्तर :
औषध सामान्यत: जैविक वृहदाणुओं जैसे-कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, प्रोटीन, न्यूक्लीक अम्ल के साथ अन्योन्यक्रियाएँ करते हैं जिन्हें औषध लक्ष्य कहते हैं।

प्रश्न 3.
उन वृहद-अणुओं के नाम लिखिए जिन्हें औषध-लक्ष्य चुना जाता है।
उत्तर :
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, न्यूक्लीक अम्ल आदि।

प्रश्न 4.
बिना डॉक्टर से फ्रामर्श लिए दबाइयाँ क्यों नहीं लेनी चाहिए?
उत्तर :
बिना डॉक्टर के परामर्श के दवाइयाँ इसलिए नहीं लेनी चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में दवा विषैला प्रभाव डालती है तथा जीवधारी के कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करती है।

प्रश्न 5.
रसायनचिकित्सा शब्द की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
रसायन विज्ञान की वह शाखा जो रसायनों के द्वारा रोगों के उपचार से संबंधित होती है, रसायन चिकित्सा कहलाती है।

प्रश्न 6.
एन्जाइम की सतह पर औषध को थामने के लिए कौन-से बल कार्य करते हैं?
उत्तर :
आयनिक बन्धन, हाइड्रोजन बन्धन, द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ या वाण्डरवाल्स अन्योन्यक्रियाएँ।

प्रश्न 7.
प्रतिअम्ल एवं प्रति-एलर्जी औषध हिस्टैमिन के कार्य में बाधा डालती हैं, परन्तु ये एक-दूसरे के कार्य में बाधक क्यों नहीं होती?
उत्तर :
औषधों का प्रयोग अंग विशेष की व्याधियों को दूर करने में किया जाता है लेकिन ये अन्य को प्रभावित नहीं करती हैं क्योंकि ये अलग-अलग ग्राहियों (receptors) पर कार्य करती हैं।
उदाहरणार्थ :
हिस्टैमिन का स्रावण एलर्जी (allergy) उत्पन्न करता है। यह आमाशय में HCl विमोचित करने के कारण अम्लता (acidity) भी उत्पन्न करता है। प्रतिएलर्जिक तथा प्रतिअम्ल भिन्न ग्राहियों पर कार्य करते हैं। अत: प्रतिहिस्टैमिन एलर्जी दूर करते हैं जबकि प्रतिअम्ल अम्लता दूर करते हैं।

प्रश्न 8.
नॉरऐड्रीनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के लिए किस प्रकार की औषध की आवश्यकता होती है? दो औषधों के नाम लिखिए।
उत्तर :
इस समस्या के निदान के लिए प्रतिअवसादक औषधों (antidepressant drugs) की आवश्यकता होती है। ये औषध नोरएड्रिनेलिन के निम्नीकरण को उत्प्रेरित करने वाले एंजाइमों को बाधित करते हैं। इससे नेरएड्रिनेलिन धीरे उपापचयित होता है और ग्राही को लंबे समय तक सक्रियित रखता है। जिससे अवसाद कम हो जाता है।
उदाहरणार्थ :
इप्रोनाइजिड, फिनल्जिन आदि।

प्रश्न 9.
‘वृहद्-स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी’ शब्द से आप क्या समझते हैं? समझाइए। (2011)
उत्तर :
वे प्रतिजैविक जो कि कई प्रकार के हानिकारक सूक्ष्म-जीवों के प्रति प्रभावी होते हैं, ‘वृहद-स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक’ कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-टेट्रासाइक्लिन, क्लोरम्फेनिकोल आदि।

प्रश्न 10.
पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी किस प्रकार से भिन्न हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
पूतिरोधी वे रसायन होते हैं जो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं या उनकी वृद्धि रोकते है तथा जीवित ऊतकों को हानि नहीं पहुंचाते हैं। विसंक्रामी सूक्ष्म-जीवों को मार देते हैं तथा जीवित मानव ऊतकों को हानि पहुँचाते हैं।
उदाहरणार्थ :

  1. पूतिरोधी (Antiseptic) : डिटॉल, आयोडोफॉर्म, टिंक्चर आयोडीन।
  2. विसंक्रामी (Disinfectants) : क्लोरीन (> 0.4 ppm), फीनॉल (> 1 % विलयन)।

प्रश्न 11.
सिमेटिडीन तथा दैनिटिडीन सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या | ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में श्रेष्ठ प्रतिअम्ल क्यों हैं?
उत्तर :
सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन श्रेष्ठ प्रतिअम्ल हैं क्योंकि ये आमाशय भित्ति में उपस्थित ग्राहियों (receptors) तथा हिस्टैमिन के मध्य अन्योन्यक्रिया को रोकते हैं जिसके परिणामस्वरूप कम मात्रा में अम्ल मुक्त होता है। दूसरी ओर, सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड केवल लक्षणों पर कार्य करते हैं. कारण पर नहीं

प्रश्न 12.
एक ऐसे पदार्थ का उदाहरण दीजिए जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर :
फीनॉल का 0.2% विलयन पूतिरोधी का कर्य करता है जबकि 1% विलक्नविसंक्रामी का कार्य करता है।

प्रश्न 13.
डेटॉल के प्रमुख संघटक कौन-से हैं?
उत्तर :
डेटॉल क्लोरोजाइलिनोल तथा α -टरपीनिऑल का मिश्रण होता है।

प्रश्न 14.
आयोडीन का टिंक्चर क्या होता है? इसके क्या उपयोग हैं? ।
उत्तर :
आयोडीन का ऐल्कोहॉल या जल में 2 – 3 % विलयन आयोडीन का टिंक्चर कहलाता है। यह शक्तिशाली पूतिरोधी होता है। इसका प्रयोग घावों पर किया जाता है।

प्रश्न 15.
खाद्य पदार्थ परिरक्षक क्या होते हैं?
उत्तर :
खाद्य परिरक्षक वे पदार्थ होते हैं जो सूक्ष्म-जीवों द्वारा होने वाले किण्वन, अम्लीकरण या अन्य विघटन को बाधित करके भोजन को खराब होने से रोकते हैं।

प्रश्न 16.
ऐस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठण्डे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित क्यों है?
उत्तर :
यह पकाने के ताप पर विघटित हो जाता है अतः इसका प्रयोग केवल ठण्डे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित है।

प्रश्न 17.
कृत्रिम मधुरक क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
कृत्रिम मधुरक रासायनिक पदार्थ होते हैं जो स्वाद में मीठे होते हैं लेकिन हमारे शरीर को कैलोरी प्रदान नहीं करते हैं। ये हमारे शरीर से अपरिवर्तित अवस्था में उत्सर्जित हो जाते हैं।
उदाहरणार्थ :
सैकरीन, एस्पार्टेम, सुक्रोलोस आदि।

प्रश्न 18.
मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले मधुरक का क्या नाम है?
उत्तर :
सैकरीन।

प्रश्न 19.
ऐलिटेम को कृत्रिम मधुरक की तरह उपयोग में लाने पर क्या समस्याएँ होती हैं?
उत्तर :
ऐलिटेम उच्च क्षमता का कृत्रिम मधुरक है इसलिए इसका प्रयोग करने पर भोजन की मिठास को नियंत्रित करना कठिन होता है।

प्रश्न 20.
साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक किस प्रकार श्रेष्ठ हैं?
उत्तर :
अपमार्जक का प्रयोग मृदु तथा कठोर जल दोनों में किया जा सकता है क्योंकि ये कठोर जल में भी झाग देते हैं। इसका कारण यह है कि सल्फोनिक अम्ल तथा इनके कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण जल में विलेय होते हैं जबकि वसीय अम्ल तथा इनके कैल्सियम और मैग्नीशियम लवण अविलेय होते हैं।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित शब्दों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा समझाइए
(क) धनात्मक अपमार्जक
(ख) ऋणात्मक अपमार्जक
(ग) अनायनिक अपमार्जक
उत्तर :
(क)
धनात्मक अपमार्जक (Cationic detergents) :

धनात्मक अपमार्जक ऐमीनों के ऐसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड ऋणायनों के साथ बने चतुष्क लवण होते हैं। उदाहरणार्थ सेटिल ट्राइमेथिल अमोनियम क्लोराइड।

(ख)
ऋणात्मक अपमार्जक (Anionic detergents) :

ऋणात्मक अपमार्जक लम्बी श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सल्फोनेटित व्युत्पन्न होते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं
(i) सोडियम ऐल्किल सल्फेट (Sodium alkyl sulphates)
उदाहरणार्थ :
सोडियम लॉरिल सल्फेट, C11H23CH2OSO3Na.

(ii) सोडियम ऐल्किल बेन्जीन सल्फेट (Sodium alkyl benzene sulphate) : सर्वाधिक प्रयोग किया जाने वाला घरेलू अपमार्जक सोडियम-4-(-1-डोडेसिल) बेन्जीन सल्फोनेट (SDS) हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 5

(ग)
अनायनिक अपमार्जक (Non-ionic detergents) :

अनायनिक अपमार्जक, उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों के साथ वसा अम्लों के एस्टरे होते हैं।
उदाहरणार्थ :
पॉलिएथिलीन  ग्लाइकॉल स्टिऐरेट CH3 (CH2)6 COO (CH2CH2O)n CH2CH2OH.

प्रश्न 22.
जैव-निम्नीकृत होने वाले और जैव-निम्नीकृत न होने वाले अपमार्जक क्या हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जैव-अपघट्य (निम्नीकृत) अपमार्जक सीधी हाइड्रोकार्बन शृंखलायुक्त होते हैं। ये अपमार्जक जीवाणुओं द्वारा नष्ट हो जाते हैं। जैव-अनपघट्य (अनिम्नीकृत) अपमार्जक शाखित हाइड्रोकार्बन श्रृंखलायुक्त होते हैं। ये अपमार्जक जीवाणुओं द्वारा नष्ट नहीं होते हैं। अनपघट्य अपमार्जक प्रदूषण का स्रोत होते हैं।

  1. जैव अपघट्य अपमार्जक : सोडियम लॉरिल सल्फेट
  2. अनपघट्य अपमार्जक : सोडियम 4 – (1, 3, 5, 7 – टेट्रामेथिलऑक्टिल) बेन्जीनसल्फोनेट।

प्रश्न 23.
साबुन कठोर जल में कार्य क्यों नहीं करता?
उत्तर :
कठोर जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम के लवण होते हैं। साबुन को कठोर जल में डालने पर साबुन कैल्सियम और मैग्नीशियम साबुन के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं। ये साबुन अविलेय होने के कारण कपड़ों पर चिपचिपे पदार्थ के रूप में चिपक जाते हैं।

प्रश्न 24.
क्या आप साबुन तथा संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए कर सकते हैं?
उत्तर :
साबुन कठोर जल में अविलेय कैल्सियम तथा मैग्नीशियम साबुनों के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं, लेकिन अपमार्जक नहीं। इसलिए साबुन का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए किया जा सकता है, अपमार्जकों का नहीं।

प्रश्न 25.
साबुन की शोधन क्रिया समझाइए।
उत्तर :
साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action of Soaps) :
साबुन का अणु दो भागों का बना होता है। साबुन के अणु का एक भाग तो लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है जो अनायनिक होती है तथा साबुन के अणु का दूसरा भाग छोटा कार्बोक्सिलिक समूह (COO– Na+) होता है जो आयनिक होता है। साबुन के अणु को चित्र – 1 द्वारा दर्शाया जाता है जिसमें टेढ़ी-मेढ़ी लम्बी रेखा तो हाइड्रोकार्बन श्रृंखला को निरूपित करती है, जबकि काला गोर्लीय भाग आयनिक समूह (COO–) को निरूपित करता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 6
साबुन के अणु का हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला भाग जल को प्रतिकर्षित करने वाला होता है (या जलविरोधी होता है), परन्तु वह धूल तथा चिकनाई जैसे  मैल के कार्बनिक कणों को अपने साथ जोड़ लेता है। इसलिए मैले कपड़ों की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के कण साबुन के अणु के हाइड्रोकार्बन वाले  भाग से जुड़ जाते हैं। साबुन के अणु का आयनिक  भाग (COO–) जलस्नेही होता है जो जल के अणुओं की ओर आकर्षित होता है और अपने हाइड्रोकार्बन भाग में चिपके धूल तथा चिकनाई के कणों को अपने साथ खींचकर जल में ले आता है। इस प्रकार मैले कपड़े की सतह पर लगे धूल तथा चिकनाई के सारे कण साबुन के अणुओं के साथ लगकर जल में आ जाते हैं तथा मैला कपड़ा साफ हो जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 7
जब साबुन को जल में घोलते हैं तो वह मिसेल (micelles) बनाता है  (क) इस मिसेल में साबुन के अणु अरीय (radially) ढंग से व्यवस्थित होते हैं जिसमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला भाग केन्द्र की ओर होता है। तथा जल को आकर्षित करने वाला कार्बोक्सिलिक भाग बाहर की ओर रहता है जैसा कि (ख) में दिखाया गया है।

जब साबुन के पानी में धूल तथा चिकनाई लगा मैला कपड़ा डालते हैं तो मिसेलों के हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं वाले सिरे मैले कपड़े की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के कणों के साथ जुड़ जाते हैं तथा उन्हें अपने बीच फंसा लेते हैं। इसके बाद मिसेलों के बाहर की ओर वाले आयनिक सिरे जल के अणुओं की ओर आकर्षित होते हैं जिससे हाइड्रोकार्बन वाले सिरों में फँसे मैल के कण कपड़े की सतह से खिंचकर जल में आ जाते हैं तथा कपड़ा साफ हो जाता है। साबुन द्वारा चिकनाई तथा धूल को पृथक् करने के प्रक्रम को निम्नांकित चित्र-3 द्वारा दर्शाया गया है
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 8

प्रश्न 26.
यदि जल में कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट घुला हो तो आप कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जकों में से किसका प्रयोग करेंगे?
उत्तर :
कैल्सियम बाइकार्बोनेट जले को कठोर बनाता है, अतएव साबुन इस जल में अवक्षेपित हो जाएगा। इसके विपरीत, अपमार्जक के कैल्सियम लवण जल में विलेय होते हैं। अत: संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग , कठोर जल में कपड़े धोने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित यौगिकों में जलरागी एवं जलविरागी भाग दर्शाइए
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 9
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 10

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
डाइजीन (digene) है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) पूतिरोधी
(iii) प्रतिअम्ल
(iv) प्रतिहिस्टैमिन
उत्तर :
(iii) प्रतिअम्ल

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सा प्रतिअम्ल है?
(i) ग्रास्त्रीवॉल
(ii) फीनॉल
(iii) ओमेप्राजोल
(iv) डेटॉल
उत्तर :
(iii) ओमेप्राजोल

प्रश्न 3.
डूगों का वह वर्ग जिसका प्रयोग तनाव के उपचार के लिए किया जाता है, है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) पूतिरोधी
(iii) प्रतिहिस्टैमिन
(iv) प्रशांतक
उत्तर :
(iv) प्रशांतक

प्रश्न 4.
निम्न में से किसका प्रयोग प्रशांतक के रूप में किया जाता है?
(i) नेप्रोक्सेन
(ii) टेट्रासाइक्लिन
(iii) क्लोरफेनेरामाइन
(iv) इक्वैनिल
उत्तर :
(iv) इक्वैनिल

प्रश्न 5. बार्बिट्यूरिक अम्ल का प्रयोग किस रूप में होता है?
(i) ज्वरनाशी
(ii) पूतिरोधी
(iii) पोड़ाहारी
(iv) प्रशांतक
उत्तर :
(iv) प्रशांतक

प्रश्न 6.
निम्न में से सम्भवतः किसका प्रयोग बिना व्यसन उत्पन्न किए पीड़ाहारी के रूप में किया जाता है?
(i) मॉर्फीन
(ii) N-ऐसीटिल-पैरा-ऐमीनोफीनॉल
(iii) डाइजीपाम
(iv) मेथिल सैलिसिलेट
उत्तर :
(ii) N-ऐसीटिल-पैरा-ऐमीनोफीनॉल

प्रश्न 7.
ऐसीटॉक्सी बेंजोइक अम्ल कार्य करता है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) ज्वरनाशी
(iii) पूतिरोधी
(iv) प्रतिजैविक
उत्तर :
(i) पीड़ाहारी

प्रश्न 8.
ऐस्प्रिन है।
(i) प्रतिजैविक
(ii) ज्वरनाशी
(iii) पूतिरोधी
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ii) ज्वरनाशी

प्रश्न 9.
ऐसीटिल सैलिसिलिक ऐसिड कहलाता है।
(i) पूतिरोधी
(ii) ऐस्प्रिन
(iii) प्रतिजैविक
(iv) रंजक
उत्तर :
(ii) ऐस्प्रिन

प्रश्न10.
निम्न में से कौन शरीर का ताप कम करता है?
(i) ज्वरनाशी
(ii) पीड़ाहारी
(iii) प्रतिजैविक
(iv) वैलियम
उत्तर :
(i) ज्वरनाशी

प्रश्न11.
ऐसीटिल सैलिसिलिक ऐसिड का प्रयोग किस रूप में होता है?
(i) प्रतिमलेरियल
(ii) प्रति अवसादक
(iii) पूतिरोधी
(iv) ज्वरनाशी
उत्तर :
(iv) ज्वरनाशी

प्रश्न12.
टिंक्चर आयोडीन है।
(i) I2 का जलीय विलयन
(ii) जलीय KI में I2 का विलयन
(iii) I2 का ऐल्कोहॉलीय विलयन
(iv) KI का जलीय विलयन
उत्तर :
(iii) I2 का ऐल्कोहॉलीय विलयन

प्रश्न 13.
निम्न में से कौन प्रतिजैविक नहीं है?
(i) पेनिसिलीन
(ii) ऑक्सीटॉसिन
(iii) टेट्रासाइक्लीन
(iv) एरिथ्रोमाइसिन
उत्तर :
(ii) ऑक्सीटॉसिन

प्रश्न 14.
बीटाडीन है।
(i) पूतिरोधी
(ii) प्रशांतक
(iii) विसंक्रामी
(iv) प्रतिजैविक
उत्तर :
(i) पूतिरोधी

प्रश्न 15.
पैरासीटेमॉल प्रयुक्त होता है।
(i) प्रतिजैविक के रूप में
(ii) मलेरिया रोधी के रूप में
(iii) ज्वरनाशी के रूप में
(iv) पूतिरोधी के रूप में
उत्तर :
(iii) ज्वरनाशी के रूप में

प्रश्न 16.
पेनिसिलीन है
(i) पूतिरोधी
(ii) ज्वरनाशी
(iii) ऐण्टीबायोटिक
(iv) खाद्य परिरक्षक
उत्तर :
(iii) ऐण्टीबायोटिक

प्रश्न 17.
फीनॉल का 0.2% विलयन निम्न रूप में कार्य करता है।
(i) दर्दनाशक
(ii) ऐण्टीसेप्टिक
(iii) संक्रमण रोधी
(iv) एण्टीबायोटिक
उत्तर :
(ii) ऐण्टीसेप्टिक

प्रश्न 18.
डेटॉल है एक
(i) प्रतिजैविक
(ii) ज्वररोधी
(iii) दर्दनाशक
(iv) पूतिरोधी
उत्तर :
(iv) पूतिरोधी

प्रश्न 19.
पैरासीटामोल की संरचना है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 11
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 12

प्रश्न 20.
पूतिरोधी तथा विसंक्रामी सूक्ष्मजीवों का विनाश करते हैं या उनकी वृद्धि को रोकते हैं। निम्न में से जो कथन सही नहीं है, उसको पहचानिए।
(i) क्लोरीन व आयोडीन प्रबल विसंक्रामी की तरह प्रयोग में आते हैं।
(ii) बोरिक अम्ल व हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन प्रबल पूतिरोधी होता है।
(iii) विसंक्रामी जीवित ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं।
(iv) फीनॉल का 0.2% विलयन पूतिरोधी है, जबकि 1% विलयन विसंक्रामी है।
उत्तर :
(ii) बोरिक अम्ल व हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन प्रबल पूतिरोधी होता है।

प्रश्न21.
निम्न में से किसका प्रयोग ‘मॉर्निग ऑफ्टर पिल’ के रूप में किया जाता है?
(i) एथिनिलएस्ट्राडाइऑल
(ii) मिफैप्रिस्टोन
(iii) बाइथायोनल
(iv) प्रोमैथेजिन
उत्तर :
(ii) मिफैप्रिस्टोन

प्रश्न 22.
क्लोरीन मुक्त कृत्रिम मधुरक जिसकी दिखावट और स्वाद शर्करा (sugar) के समान होता है और जो पकाने के ताप पर स्थायी होता है, है।
(i) एस्पार्टेम
(ii) सैकेरिन
(iii) सुक्रोलोस
(iv) ऐलीटेम
उत्तर :
(iii) सुक्रोलोस

प्रश्न 23.
सॉर्बिक अम्ल और प्रोपिओनिक अम्ल हैं।
(i) प्रतिऑक्सीकारक
(ii) खाद्य परिरक्षक
(iii) पोषक पूरक
(iv) अपमार्जक
उत्तर :
(ii) खाद्य परिरक्षक

प्रश्न 24.
केश कंडीशनरों में प्रयुक्त कार्बनिक अपमार्जक है।
(i) सोडियम लॉरिल सल्फेट
(ii) सोडियम डोडेसिलबेंजीन सल्फोनेट
(iii) सोडियम स्टेरिल सल्फेट
(iv) सेटिलाइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड
उत्तर :
(iv) सेटिलट्राइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ड्रग क्या है?
उत्तर :
वह रासायनिक पदार्थ जो रोग का उपचार करता है और जिसके प्रयोग से व्यक्ति उसका आदि हो जाता है, ड्रग कहलाता है।

प्रश्न 2.
ड्रग का अणुभार कितना होता है?
उत्तर :
100-500 u.

प्रश्न 3.
एंजाइम क्या हैं? (2018)
उत्तर :
प्रोटीन जो जैव उत्प्रेरकों की तरह कार्य करते हैं तथा शरीर में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं, एंजाइम कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
ग्राही कहाँ स्थित होते हैं?
उत्तर :
ग्राही कोशिका कला की बाहरी सतह पर स्थित होते हैं।

प्रश्न 5.
ऐलोस्टैरिक स्थान से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
एंजाइम का वह स्थान (सक्रिय स्थान से अलग) जहाँ पर एक अणु जुड़कर सक्रिय स्थान की आकृति को परिवर्तित कर देता है, ऐलोस्टैरिक स्थान कहलाता है।

प्रश्न 6.
ओमेप्राजोल किस प्रकार प्रतिअम्ल का कार्य करती है?
उत्तर :
ओमेप्राजोल आमाशय में HCl के बनने को रोककर प्रतिअम्ल का कार्य करती है।

प्रश्न 7.
किस औषध का प्रयोग हृदयाघातों को रोकने के लिए किया जाता है?
उत्तर :
एस्पिरिन।

प्रश्न 8.
एस्पिरिन किस प्रकार पीड़ाहारी का कार्य करती है?
उत्तर :
ऐस्पिरिन प्रोस्टाग्लैन्डिन के संश्लेषण को रोककर पीड़ाहारी का कार्य करती है। प्रोस्टाग्लैन्डिन ऊतकों की सूजन में वृद्धि कर दर्द उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 9.
एक पदार्थ का नाम लिखिए जो दोनों के समान कार्य करता है।

  1. पीड़ाहारी और ज्वरनाशी तथा
  2. पूतिरोधी और विसंक्रामी।

उत्तर :

  1. ऐस्पिरिन तथा
  2. फीनॉल।

प्रश्न 10.
प्रतिसूक्ष्मजैविक क्या होते हैं? या प्रतिजैविक क्या होते हैं? किन्हीं दो प्रतिजैविकों के नाम लिखिए। (2014)
उत्तर :
वे ड्रग जिनका प्रयोग सूक्ष्मजीवों; जैसे-जीवाणु, वाइरस, कवक आदि के द्वारा उत्पन्न रोगों के निवारण के लिए किया जाता है, प्रतिसूक्ष्मजैविक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
पेनिसिलीन तथा स्ट्रेप्टोमाइसिन।

प्रश्न 11.
अतिअम्तृता किस प्रकार हानिकारक है?
उत्तर :
अतिअम्लता से व्रण (ulcers) हो जाते हैं।

प्रश्न 12.
एक विस्तृत परास वाले प्रतिजैविक का नाम लिखिए।
उत्तर :
क्लोरमफेनिकॉल।

प्रश्न 13.
सल्फा ड्रग का मूल यौगिक क्या है?
उत्तर :
सल्फोनिलेमाइड

प्रश्न 14.
सल्फा ड्रग्स प्रतिजैविकों की तरह कार्य करती हैं लेकिन प्रतिजैविक नहीं होती हैं। क्या यह कथन सत्य है और क्यों?
उत्तर :
यह कथन सत्य है। सल्फा ड्रग्स सूक्ष्मजीवियों के प्रति प्रतिजैविकों के समान व्यवहार करती हैं। लेकिन सूक्ष्मजीवियों से प्राप्त नहीं होती हैं।

प्रश्न 15.
आँखों के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पूतिरोधी का नाम लिखिए।
उत्तर :
बोरिक अम्ल (H3 BO3) का प्रयोग आँखों के लिए प्रतिरोधी के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 16.
रासायनिक रूप से सैकेरिन क्या है?
उत्तर :
ऑथोंसल्फोबेन्जीमाइड।

प्रश्न 17.
एक कृत्रिम मधुरक का नाम लिखिए जो सुक्रोस का व्युत्पन्न है।
उत्तर :
सुक्रोलोस।

प्रश्न 18.
D – शर्कराएँ अन्तर्ग्रहीत कैलोरी बढ़ाती हैं, जबकि L – शर्कराएँ नहीं, क्यों?
उत्तर :
L – शर्कराएँ अन्तर्ग्रहीत कैलोरी नहीं बढ़ातीं क्योंकि हमारे शरीर में इनका उपापचय करने वाले । एंजाइम नहीं पाए जाते हैं; अतः ये पूर्वावस्था में ही उत्सर्जित हो जाती हैं।

प्रश्न 19.
दो अम्लों के नाम लिखिए जिनके सोडियम लवण खाद्य परिरक्षकों की भाँति प्रयोग किए जाते हैं।
उत्तर :
बेन्जोइक अम्ल तथा सॉर्बिक अम्ल।

प्रश्न 20.
संश्लेषित अपमार्जक क्या होते हैं? किन्हीं दो अपर्माजकों के नाम लिखिए।
उत्तर :
यह एक विशेष प्रकार का कृत्रिम आयनिक कार्बनिक पदार्थ है जिसमें साबुन की तरह मैल घोलने का गुण पाया जाता है। इसका प्रयोग कठोर एवं मृदु दोनों प्रकार के जल के साथ किया जा सकता है। यह प्रबल कार्बनिक अम्ल और प्रबल कार्बनिक क्षारक से बने हुए अति उच्च अणुभार के लवण होते हैं। जिसके धनायन या ऋणायन में 12 से 18 कार्बनिक परमाणुओं वाली हाइड्रोकार्बन शृंखला और जल विरोधी व जल स्नेही दोनों प्रकार उपस्थित होते हैं।
उदाहरण :
(i)
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 13

(ii) सोडियम P डोडेसिलबेन्जीन सल्फोनेट
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 14

प्रश्न 21.
मृदु साबुन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
ओलिक अम्ल, पामीटिक अम्ल, स्टियरिक अम्ल आदि वसीय अम्लों के पोटैशियम लवण मृदु . साबुन कहलाते हैं।

प्रश्न 22.
साबुनों में बाइथायोनल क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर :
बाइथायोनल एक पूतिरोधी है। यह त्वचा पर जैव पदार्थों के जीवाणुओं द्वारा अपघटन से उत्पन्न दुर्गंध को समाप्त कर देता है इसलिए इसका प्रयोग साबुनों में किया जाता है।

प्रश्न 23.
किस प्रकार के अपमार्जक का उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है?
उत्तर :
धनायनिक अपमार्जकों का।

प्रश्न 24.
किन अपमार्जकों को बर्तन धोने के लिए प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
अन-आयनिक अपमार्जकों को।

प्रश्न 25.
किस प्रकार के अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं?
उत्तर :
अत्यधिक शाखित अपमार्जक।

प्रश्न 26.
उस प्रतिऑक्सीकारक का नाम लिखिए जो मक्खन के भण्डारण के लिए प्रयुक्त होता है।
उत्तर :
BHA या सस्टेन।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रतिहिस्टैमिन क्या होते हैं। दो उदाहरण दीजिए। समझाइए कि ये मानव शरीर पर कैसे कार्य करते हैं?
उत्तर :
वे ड्रग जो हिस्टैमिन के प्रभावों को समाप्त करने के लिए प्रयोग की जाती हैं, प्रतिहिस्टैमिन कहलाती हैं।
उदाहरणार्थ :
ब्रोमफेनिरामिन, टरफेनाडिन, डाइफेनिलहाइड्रेजीन, क्लोरफेनिरैमीन मैलिएट आदि। प्रतिहिस्टैमिन हिस्टैमिन के साथ ‘ग्राही की उस बंधनी सतह के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं जिस पर हिस्टैमिन अपना प्रभाव डालती हैं। इस प्रकार ये हिस्टैमिन के प्राकृतिक कार्य में बाधा डालती हैं तथा हमारे । शरीर को उनके प्रभावों से मुक्ति दिलाती हैं।

प्रश्न 2.
ऐण्टीफर्टीलिटी ड्रग्स (antifertility drugs) से आप क्या समझते हैं? समझाइए।
उत्तर :
वे रासायनिक पदार्थ जो जनन अथवा उत्पादकता (productivity) पर नियन्त्रण रखते हैं, प्रतिजनन क्षमता औषधि (antifertility drugs) कहलाते हैं। इनको विकसित करने का उद्देश्य विश्व की बढ़ती हुई आबादी को कम करना एवं उसको नियन्त्रित करना है। इस दिशा में प्रयोग चूहे, मानव, खरगोश एवं बन्दरों पर करके सार्थक परिणाम निकाले गए। जनन नियन्त्रण औषधियों में संश्लेषित ऐस्ट्रोजन (estrogen) तथा प्रोजेस्टेरोन (progesterone) व्युत्पन्नों का मिश्रण होता है। संश्लेषित प्रोजेस्टोरोन व्युत्पन्न प्राकृतिक प्रोजेस्टेरोन से अधिक प्रभावशाली होते हैं। दोनों ही यौगिक हॉर्मोन होते हैं।

(1) संश्लेषित एस्ट्रोजन :
मौखिक गर्भ निरोधकों के रूप में दो संश्लेषित एस्ट्रोजन प्रयोग किए जा रहे हैं; जैसे-एथाइनिल एस्ट्रोडाइऑल (ethynyl estradiol)।

(2) संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन :
ये तीन प्रकार के होते हैं— प्रेगानेन, ओएस्ट्रॉन और गोनॉन। इनमें प्रेगानेन लम्बे समय तक नहीं दी जाती है क्योंकि स्तन कैंसर का भय रहता है। इसी प्रकार ओएस्ट्रॉन जिसे 19 – नॉरटेस्टोस्टेरोन भी कहते हैं, का अधिक समय तक प्रयोग नहीं किया जाता है। गोनॉन सबसे पसंदीदा गर्भ निरोधक हॉर्मोन है जो आजकल प्रयुक्त की जा रही है।

प्रोजेस्टेरोन अण्डोत्सर्ग को निरोधित करता है। नॉरएथिनड्रॉन (norethindrone) संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न को एक उदाहरण है जो व्यापक रूप से जनन नियन्त्रण गोलियों में प्रयोग होता है। एथाइनिलएस्ट्राडाइऑल (ethynylestradiol) एक एस्ट्रोजन व्युत्पन्न है जो प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न के साथ जनन नियन्त्रण गोलियों में प्रयुक्त होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 15
माइफप्रिस्टॉन एक संश्लेषित स्टेरॉयड है। यह प्रोजेस्टेरोन के प्रभाव को अवरोधित करके गर्भ नियन्त्रण का कार्य करता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 16
गर्म निरोधक औषधियों के विभिन्न पार्श्व प्रभाव हैं; जैसे :

  1. ये मासिक धर्म को अकथनीय रूप में, लम्बे समय के लिए अधिक रक्तस्राव में बदल देती हैं।
  2. इनसे बाँझपन भी उत्पन्न हो जाता है।
  3. इनसे महिलाओं का वजन भी बढ़ता है।

प्रश्न 3.
प्रतिऑक्सीकारक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
प्रतिऑक्सीकारक :
वे रासायनिक पदार्थ जो वसा तथा वसा युक्त पदार्थों से मिलकर उनके ऑक्सीकरण को रोकते हैं और उनके जीवनकाल को बढ़ाते हैं, प्रतिऑक्सीकारक कहलाते हैं। ये ऑक्सीजन के प्रति अत्यन्त क्रियाशील होते हैं। प्रतिस्थापी फीनॉलिक (phenolic) यौगिकों का उपयोग । प्रतिऑक्सीकारक के रूप में होता है। ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी ऐनिसोल (BHA) (butyl hydroxy anisol) एक अविषैला (non-toxic) प्रतिऑक्सीकारक है जिसका व्यापारिक नाम सस्टेन (sustane) है। यह मक्खन के लिए अच्छा ऑक्सीकारक है। इसके अतिरिक्त ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी टॉलूईन (BHT) 2, 3 – डाइतृतीयक ब्यूटिल p-ऐनिसॉल (2, 3 – ditertiary butyl p  anisol) (BHA) तथा प्रोपिल-3, 4, 5 -ट्राइहाइड्रॉक्सी बेन्जोएट (propyl-3, 4, 5 -trihydroxy  benzoate) जिसे प्रोपिल गैलेट (propyl gallate) या (PG) भी कहते हैं, आदि प्रतिऑक्सीकारक हैं। ये बहुत कम सान्द्रता (< 0.01%) पर प्रभावी होते हैं। ये भोज्य पदार्थ में उपस्थित आवश्यक वसीय अम्ल (fatty acids) तथा विटामिन (vitamins) के पौष्टिक मान (nutritional value) को बराबर रखते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 17
इसके अतिरिक्त, विटामिन E, सल्फर डाइऑक्साइड तथा ऐस्कॉर्बिक अम्ल विटामिन C को भी प्रतिऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है। इनका उपयोग सामान्य रूप में शराब व बीयर, मीठे तरल पदार्थ, सब्जी तथा कटे, छिले शुष्क फलों के लिए प्रतिऑक्सीकारकों के रूप में किया जाता है। ऐस्कॉर्बिक अम्ल एन्जाइमकृत फेनिल यौगिक के ऑक्सीकरण से उत्पन्न भूरेपन को रोकता है।

प्रश्न 4.
निम्न पर टिप्पणी लिखिए|
(i) ऐस्प्रिन औषधि हृदयाघात से बचाती है।
(ii) डायबिटीज रोगियों को प्राकृतिक मधुरकों के स्थान पर कृत्रिम मधुरक लेने की सलाह दी जाती है।
(iii) अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं जबकि साबुन जैव निम्नीकरणीय होते हैं।
उत्तर :
(i) ऐस्प्रिन औषधि हृदयाघात से बचाती है, क्योंकि यह रक्त स्कन्दन रोधी होती है अर्थात् यह रक्त के स्कन्दित होने को कम करती है और स्कन्दित रक्त को तरल में परिवर्तित करती है जिससे रक्त का सुचारु प्रवाह शरीर में होता रहता है और हम हृदयाघात से बच जाते हैं।

(ii) डायबिटीज रोगियों को प्राकृतिक मधुरकों के स्थान पर कृत्रिम मधुरक लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि प्राकृतिक मधुरक रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाते हैं, जबकि कृत्रिम मधुरक रक्त शर्करा का स्तर नहीं बढ़ाते हैं जिससे रोगी स्वस्थ रहता है।

(iii) अपमार्जकों में अत्यधिक शाखित हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाएँ होती हैं जिन्हें जीवाणु अपघटित नहीं कर पाते हैं, जबकि साबुन को जीवाणु आसानी से अपघटित कर देते हैं। इसलिए अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय व साबुन जैव निम्नीकरण होते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया को समझाइए।
उत्तर :
1. औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया (Interaction between Drug and Enzyme) :
जैविक वृहद्-अणु शरीर में विभिन्न कार्य करते हैं जैसे जैव उत्प्रेरक का कार्य करने वाले प्रोटीन्स को एन्जाइम कहते हैं तथा जो प्रोटीन शरीर की संचार व्यवस्था में निर्णायक होते हैं, उन्हें ग्राही कहते हैं। औषध साधारणतया इन वृहद्-अणुओं से अन्योन्यक्रिया करती हैं। औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि एन्जाइम अभिक्रिया का उत्प्रेरण कैसे करते हैं।

2. एन्जाइम का उत्प्रेरण कार्य (Catalytic Function of Enzyme) :
उत्प्रेरण क्रिया में एन्जाइम दो प्रमुख कार्य करते हैं जो निम्नलिखित हैं
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 18
(i) एन्जाइम का पहला कार्य क्रियाधार (सबस्ट्रेट) को रासायनिक अभिक्रिया के लिए बाँधे रखना है। एन्जाइम की सक्रिय सतह क्रियाधार अणु को उपयुक्त स्थिति में बाँधे रखती है जिससे इस पर अभिक्रियक द्वारा प्रभावकारी आक्रमण हो सके। क्रियाधार एन्जाइम की सक्रिय सतह पर विभिन्न प्रकार की अन्योन्यक्रियाओं द्वारा बँधते हैं; जैसे-आयनिक आबन्ध, हाइड्रोजन आबन्ध, वान्डरवाल्स अन्योन्यक्रिया या द्विध्रुव-द्विध्रुव बल।

(ii) एन्जाइम का दूसरा कार्य क्रियाधार पर आक्रमण करके रासायनिक अभिक्रिया करने के लिए प्रकार्यात्मक समूह उपलब्ध कराना है, जो क्रियाधार पर आक्रमण करके रासायनिक अभिक्रिया करेगा। औषध-एन्जाइम अन्योन्यक्रिया

3. (Drug-Enzyme Interaction) :
औषध एन्जाइम की उपर्युक्त गतिविधियों में से किसी में भी अवरोध उत्पन्न करती हैं। ये एन्जाइम की बन्धनी सतह को अवरुद्ध कर सकती हैं और क्रियाधार के आबन्धन में रुकावट डाल सकती हैं अथवा ये एन्जाइम के उत्प्रेरक कार्य में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं, ऐसी औषधों को एन्जाइम संदमक (enzyme inhibitors) कहते हैं। औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर क्रियाधार के संयोजन में दो प्रकार से अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं
(i) औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर संयोजन के लिए वास्तविक क्रियाधार से स्पर्धा करती हैं। ऐसी औषधों को स्पर्धा संदमक (competitive inhibitors) कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 19

(ii) कुछ औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर संयोजन नहीं करतीं। ये एन्जाइम की भिन्न सतह पर संयोजन करती हैं जिसे ऐलोस्टीरिक सतह कहते हैं। इस प्रकार संदमके के ऐलोस्टीरिक सतह पर संयोजन से सक्रिय सतह की आकृति इस प्रकार परिवर्तित हो जाती है कि क्रियाधार इसे पहचान नहीं
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life image 20
यदि एन्जाइम तथा संदमक के बीच बना आबन्ध मजबूत सहसंयोजी आबन्ध हो और आसानी से तोड़ा न जा सके तो एन्जाइम स्थायी रूप से अवरुद्ध हो जाता है, तब शरीर एन्जाइम-संदमक संकुल को निम्नीकृत कर देता है और नया एन्जाइम बनाता है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.