UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers (बहुलक) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 15 Polymers (बहुलक).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 15
Chapter Name Polymers
Number of Questions Solved 75
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers (बहुलक)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बहुलक क्या होते हैं? (2018)
उत्तर :
ऐसे वृहदाणु (macromolecules) जो कि पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयों के वृहत पैमाने पर जुड़ने से बनते हैं बहुलक कहलाते हैं। बहुलकों के कुछ उदाहरण हैं-पॉलिथीन, नाइलॉन-6, 6, बैकलाइट, रबर आदि।

प्रश्न 2.
संरचना के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?
उत्तर :
संरचना के आधार पर बहुलक तीन प्रकार के होते हैं
(1) रैखिक बहुलक (Linear polymers) :
इन बहुलकों में लम्बी और रेखीय श्रृंखलाएँ होती हैं। उच्च घनत्व पॉलिथीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड आदि इसके उदाहरण हैं। इन्हें निम्नानुसार निरूपित करते हैं
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(2) शाखित श्रृंखला बहुलक (Branched chain polymers) :
इन बहुलकों में रेखीय श्रृंखलाओं में कुछ शाखाएँ होती हैं। उदाहरण-निम्न घनत्व पॉलिथीन। इन्हें निम्नांकित प्रकार से चित्रित करते
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(3) तिर्यकबन्धित अथवा जालक्रम बहुलक (Cross linked polymers) :
यह साधारणत: द्विक्रियात्मक और त्रिक्रियात्मक समूहों वाले एकलकों से बनते हैं तथा विभिन्न रेखीय बहुलक श्रृंखलाओं के बीच प्रबल सहसंयोजक बन्ध होते हैं।
उदाहरणार्थ :
बँकेलाइट, मेलैमीन आदि। इन बहुलकों को व्यवस्थात्मक रूप में निम्नलिखित प्रकार से प्रदर्शित करते हैं
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित बहुलकों को बनाने वाले एकलकों के नाम लिखिए
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उत्तर :
(i) हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन, (H2N – (CH2)6– NH2) और ऐडिपिक अम्ल, (HOOC – (CH2)4– COOH)
(ii) कैपरोलैक्टम
(iii) टेट्राफ्लुओरोएथीन (F2C = CF2)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को योगज और संघनन बहुलकों में वर्गीकृत कीजिए टेरिलीन, बैकलाइट, पॉलिवाइनिल क्लोराइड, पॉलिथीन।
उत्तर :

  1. योगज बहुलक : पॉलिवाइनिल क्लोराइड, पॉलिथीन;
  2. संघनन बहुलक : टेरीलीन, बैकेलाइट।

प्रश्न 5.
ब्यूना – N और ब्यूना – S के मध्य अन्तर समझाइए।
उत्तर :
ब्यूना – N ब्यूटा -1, 3 -डाइईन और ऐक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक है। जबकि ब्यूना -S ब्यूटा -1, 3-डाइईन और स्टाइरीन का सहबहुलक है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित बहुलकों को उनके अन्तराआण्विक बलों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए

  1. नाइलॉन-6, 6, ब्यूना-S, पॉलिथीन
  2.  नाइलॉन-6, निओप्रीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड।

उत्तर :
अंतराआण्विक आकर्षण बलों को बढ़ता हुआ क्रम निम्न होता है। प्रत्यास्थ बहुलक (इलास्टोमर) < प्लास्टिक < रेशे। अत:

  1.  ब्यूना – S < पॉलिथीन < नाइलॉन 6, 6
  2.  निओप्रीन < पॉलिवाइनिल क्लोराइड < नाइलॉन 6

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
बहुलक और एकलक पदों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :

  1. बहुलक : ऐसे वृहदाणु जो कि पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयों के वृहत पैमाने पर जुड़ने से बनते हैं, बहुलक कहलाते हैं।
  2. एकलक : ऐसे सरल और क्रियाशील अणु जिनके योग तथा संघनन मे व्रहुलकों का निर्माण होता है, एकलक कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक और संश्लिष्ट बहुलक क्या हैं? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए। (2018)
उत्तर :
(i) प्राकृतिक बहुलक : प्रकृति (जन्तुओं और पौधों) में पाए जाने वाले बहुलक, प्राकृतिक बहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
स्टार्च, सेलुलोस, प्रोटीन, रबर आदि।

(ii) संश्लिष्ट बहुलक : ऐसे बहुलक जो प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से बनाए जाते हैं, संश्लिष्ट बहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
पॉलिथीन, PVC, नाइलॉन 6, 6 आदि।

प्रश्न 3.
समबहुलक और सहबहुलक पदों (शब्दों) में विभेद कर प्रत्येक को एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
समबहुलक :
जिन बहुलकों में पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाई की उत्पत्ति केवल एक ही प्रकार की एकलक इकाइयों से होती है, समबहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
पॉलिथीन, PVC, पॉलिस्टाइरीन, नाइलॉन 6 आदि। सहबहुलक-जिन बहुलकों में पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाई की उत्पत्ति दो या अधिक प्रकार की एकलक इकाइयों द्वारा होती है, सहबहुलक कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-ब्यूना – S, ब्यूना – N आदि।

प्रश्न 4.
एकलक की प्रकार्यात्मकता को आप किस प्रकार समझाएँगे?
उत्तर :
किसी एकलक में उपस्थित आबन्धी स्थलों (bonding sites) की संख्या उसकी प्रकार्यात्मकता कहलाती है।
उदाहरणार्थ :
एथीन, प्रोपीन तथा स्टाइरीन की प्रकार्यात्मकता 1 है जबकि 1, 3-ब्यूटाडाइईन, हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन तथा ऐडिपिक अम्ल की प्रकार्यात्मकता 2 है।

प्रश्न 5.
बहुलकन पद (शब्द) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
वह प्रक्रम जिसमें एक अथवा अधिक एकलकों से व्युत्पन्न पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ आपस में एक नियमित क्रम में जुड़कर अत्यधिक अणुभार वाले वृहदाणु (बहुलक) का निर्माण करती हैं। बहुलकन कहलाता है।

प्रश्न 6.
(NH-CHR-CO)n, एक समबहुलक है या सहबहुलक?
उत्तर :
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एक समबहुलक है क्योंकि पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाई में केवल एक ही प्रकार के एकलक अणु अर्थात्  NH2– CHR– COOH विद्यमान हैं।

प्रश्न 7.
आण्विक बलों के आधार पर बहुलक किन संवर्गों में वर्गीकृत किए जाते हैं? आण्विक बलों के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है? प्रत्येक का एक उदाहरण भी दीजिए। (2018)
उत्तर :
आण्विक बलों के आधार पर, बहुलकों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किया जाता है

  1. इलास्टोमर्स, (वल्कनीकृत रबड़)
  2. फाइबर (रेशे) (नायलॉन 6, 6)
  3.  ताप सुघट्य बहुलक (पॉलिथीन)
  4. ताप दृढ़ बहुलक (बैकेलाइट)

प्रश्न 8.
संकलन और संघनन बहुलकन के मध्य आप किस प्रकार विभेद करेंगे? ।
उत्तर :
योगात्मक बहुलकन में बहुत से समान अथवा असमान एकलक अणु आपस में जुड़कर बहुलक श्रृंखला बनाते हैं। एकलक इकाइयों में प्रायः द्वि या त्रिबंध उपस्थित रहते हैं। इस प्रक्रिया में H2O, NHजैसे छोटे अणुओं का निराकरण नहीं होता है। इसके विपरीत, संघनन बहुलकन में संघनन अभिक्रियाओं की एक श्रेणी सम्पन्न होती है जिसमें H2O, NH3 जैसे छोटे अणुओं का निराकरण होता है। इस प्रकार का बहुलकन दो या अधिक क्रियात्मक समूहों युक्त एकलकों के मध्य सम्पन्न होता है।

प्रश्न 9.
सहबहुलकन पद (शब्द) की व्याख्या कीजिए और दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
सहबहुलकन (copolymerisation) एक बहुलकन अभिक्रिया है जिसमें एक से अधिक प्रकार की एकलक स्पीशीज के मिश्रण का बहुलकन एक सहबहुलक बनाने के लिए किया जाता है। सहबहुलक को न केवल श्रृंखला वृद्धि बहुलकन से बनाया जा सकता है, अपितु पदशः वृद्धि बहुलकन से भी बनाया जा सकता है। अत: सहबहुलक में एक ही बहुलकन श्रृंखला में प्रत्येक एकलक की अनेक इकाइयाँ होती हैं।
उदाहरणार्थ :
ब्यूना-S; 1, 3-ब्यूटाडाईन तथा स्टाइरीन का सहबहुलक है, जबकि ब्यूना-N; 1, 3-ब्यूटाडाईन तथा ऐक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक हैं।

प्रश्न 10.
एथीन के बहुलकन के लिए मुक्त मूलक क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 11.
तापसुघट्य और तापदृढ़ बहुलकों को प्रत्येक के दो उदाहरण के साथ परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
1. तापसघटय बहुलक (Thermoplastic polymers) :
ये रेखीय या अल्पशाखित दीर्घ श्रृंखला अणु होते हैं। इन्हें बार-बार तापन द्वारा मृदुलित और शीतलन द्वारा कठोर बनाया जा सकता है। इन बहुलकों के अन्तराआण्विक आकर्षण बल प्रत्यास्थ बहुलकों और रेशों के मध्यवर्ती होते हैं। पॉलिथीन, पॉलिस्टाइरीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड आदि कुछ सामान्य तापसुघट्य बहुलक हैं।

2. तापदृढ़ बहुलक (Thermosetting polymers) :
ये बहुलक तिर्यकबद्ध अथवा अत्यधिक शाखित अणु होते हैं जो साँचों में तापन से विस्तीर्ण तिर्यकबन्ध में परिवर्तित हो जाते हैं और दोबारा दुर्गलनीय बन जाते हैं। इनका दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकता। बैकेलाइट, यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन आदि कुछ सामान्य तापदृढ़ बहुलक हैं।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक लिखिए

  1. पॉलिवाइनिल क्लोराइड
  2. टेफ्लॉन
  3. बैकलाइट

उत्तर :

  1. CH2,= CHCl (वाइनिल क्लोराइड)
  2.  F2C = = CF2, (टेट्राफ्लोरोएथीन)
  3.  C6H5O व HCHO (फीनॉल तथा फॉर्मेल्डिहाइड)

प्रश्न 13.
मुक्त मूलक योगज बहुलकन में प्रयुक्त एक सामान्य प्रारम्भक का नाम और संरचना लिखिए।
उत्तर :
बेन्जोइल परॉक्साइड।
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प्रश्न 14.
रबड़ अणुओं में द्विबन्धों की उपस्थिति किस प्रकार उनकी संरचना और क्रियाशीलता को प्रभावित करती है?
उत्तर :
प्राकृतिक रबर सिस-पॉलिआइसोप्रीन है तथा इसका निर्माण आइसोप्रीन इकाइयों के 1, 4-बहुलकन द्वारा निम्न प्रकार होता है
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इस बहुलक में प्रत्येक आइसोप्रीन इकाई के C2 व C3 के मध्य द्विबन्ध उपस्थित हैं। आइसोप्रीन इकाइयों की इस प्रकार सिस व्यवस्था के कारण बहुलक श्रृंखलाएँ दुर्बल अन्त:अणुक आकर्षण बल की उपस्थिति के कारण प्रभावशाली अन्तः अणुक क्रिया हेतु एक-दूसरे के समीप नहीं आ पातीं। अत: निकटस्थ श्रृंखलाओं के मध्य केवल दुर्बल वाण्डरवाल्स बल विद्यमान रहते हैं। इसलिए रबर की अनियमित कुण्डलित संरचना होती है। इसे एक स्प्रिंग की भाँति खींचा जा सकता है, अर्थात् इसमें प्रत्यास्थता का गुण पाया जाता है।

प्रश्न 15.
रबड़ के वल्कनीकरण के मुख्य उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
उत्तर :
रबड़ का वल्कनीकरण (Vulcanization of rubber) : 
प्राकृतिक रबड़ उच्च ताप (> 335 K) पर नर्म और निम्न ताप (< 283 K) पर भंगुर हो जाता है एवं उच्च जल अवशोषण क्षमता प्रदर्शित करता है। यह अध्रुवीय विलायकों में घुलनशील है और ऑक्सीकरण कर्मकों के आक्रमण के प्रति प्रतिरोधी नहीं है। इन भौतिक गुणों में सुधार के लिए वल्कनीकरण की प्रक्रिया की जाती है। इस प्रक्रिया में अपरिष्कृत रबड़ को सल्फर और उपयुक्त योगजों के साथ 373 K से 415 K के ताप परास के मध्य गर्म किया जाता है। वल्कनीकरण से द्विबन्धों की अभिक्रियाशील स्थितियों पर सल्फर तिर्यक बन्ध बनाता है और इस प्रकार रबड़ कठोर हो जाता है।

प्रश्न 16.
नाइलॉन-6 और नाइलॉन-6, 6 में पुनरावृत्त एकलक इकाइयाँ क्या हैं?
उत्तर :
नाइलॉन-6,
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प्रश्न 17.
निम्नलिखित बहुलकों के एकलकों का नाम और संरचना लिखिए
(i) ब्यूना-S
(ii) ब्यूना-N
(iii) डेक्रॉन
(iv) निओप्रीन।
उत्तर :
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित बहुलक संरचनाओं के एकलक की पहचान कीजिए
(i)
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(ii)
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उत्तर :
(i)
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(ii)
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प्रश्न 19.
एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल से डेक्रॉन किस प्रकार प्राप्त किया जाता है?
उत्तर :
डेक्रॉन को एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल के संघनन बहुलकन से जल के अणुओं के विलोपन के साथ प्राप्त किया जाता है। अभिक्रिया को 420 – 460 K पर जिंक ऐसीटेट तथा ऐण्टीमनी ट्राइऑक्साइड के मिश्रण से बने उत्प्रेरक की उपस्थिति में कराया जाता है।
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प्रश्न 20.
जैव-निम्नीकरणीय बहुलक क्या हैं? एक जैव-निम्नीकरणीय ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
वे बहुलक जो एक समय बाद जीवाण्विक निम्नीकरण के कारण स्वयं ही विघटित हो जाते हैं, जैव-निम्नीकरणीय बहुलक (biodegradable polymers) कहलाते हैं।
उदाहरण :
पॉलि – β – हाइड्रॉक्सीब्यूटिरेट-को – β -हाइड्रॉक्सी-वैलेरेट (PHBV) :
यह 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनोइक अम्ल और 3-हाइड्रॉक्सीपेन्टेनोइक अम्ल के सहबहुलकन से प्राप्त होता है। PHBV को उपयोग विशिष्ट पैकेजिंग, अस्थियों में प्रयुक्त युक्तियों और औषधों के नियन्त्रित मोचन में भी होता है। पर्यावरण में PHVB का जीवाण्विक निम्नीकरण हो जाता है।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से प्राकृतिक बहुलक है (2015)
(i)पॉलीथीन
(ii) सेलुलोस
(iii) पी० वी० सी०
(iv) टेफ्लॉन
उत्तर :
(ii) सेलुलोस

प्रश्न 2.
संश्लेषित बहुलक का उदाहरण है
(i) RNA
(ii) प्रोटीन
(iii) पॉलीऐमाइड
(iv) स्टार्च
उत्तर :
(iii) पॉलीऐमाइड

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में संघनन बहुलक नहीं है (2017)
(i) नाइलॉन 6, 6
(ii) स्टाइरीन
(iii) डेक्रॉन
(iv) टैरोलीन
उत्तर :
(ii) स्टाइरीन

प्रश्न 4.
संघनन बहुलक है (2015)
(i) टेफ्लॉन
(ii) पॉलीथीन
(iii) पॉलीवाइनिल क्लोराइड
(iv) टेरीलीन
उत्तर :
(iv) टेरीलीन

प्रश्न 5.
बैकेलाइट है एक (2016)
(i) प्राकृतिक बहुलक
(ii) योगात्मक बहुलक
(iii) संघनन बहुलक
(iv) समबहुलक
उत्तर :
(iii) संघनन बहुलक

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में कौन-सा थर्मोप्लास्टिक बहुलक नहीं है? (2015)
(i) बैकलाइट
(ii) टेफ्लॉन
(iii) पॉलीथीन
(iv) पी०वी०सी०
उत्तर :
(i) बैकेलाइट

प्रश्न 7.
ताप-सुनम्य प्लास्टिक का उदाहरण है (2017)
(i) बैकलाइट
(ii) टेफ्लॉन
(iii) रेजिन
(iv) मैलेमीन
उत्तर :
(ii) टेफ्लॉन

प्रश्न 8.
थर्मोसेटिंग प्लास्टिक है
(i) पी०वी०सी
(ii) पॉलीथीन
(iii) बैकेलाइट
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(iii) बैकलाइट।

प्रश्न 9.
प्रबल अन्तराण्विक बल जैसे हाइड्रोजन बन्ध युक्त बहुलक हैं (2018)
(i) प्राकृतिक रबड़
(ii) पॉलिस्टाइरिन
(iii) टेफ्लॉन
(iv) नायलॉन 6, 6
उत्तर :
(iv) नायलॉन 6, 6

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में से कौन-सा बहुलक है? (2018)
(i) पॉलिथीन
(ii) बैकेलाइट
(iii) रबड़
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

प्रश्न11.
निम्न में से कौन-सा पॉलीएमाइड है? (2015, 16, 17)
(i) बैकेलाइट
(ii) टेरीलीन
(iii) नाइलॉन-6, 6
(iv) टेफ्लॉन
उत्तर :
(iii) नाइलॉन-6, 6 (2015)

प्रश्न12.
निम्न में से कौन-सा एकलक बहुलक निओप्रीन देता है?
(i) CH2= CHCl
(ii) CCl2= CCl2
(iii) CH2= C(Cl) -C =H2
(iv) CF2= CF2
उत्तर :
(iii) CH2= C(Cl)-C =H2

प्रश्न13.
निम्न में से किस बहुलक का विरचन संघनन बहुलकन द्वारा किया जा सकता है?
(i) पॉलीस्टाइरीन
(ii) नाइलॉन-6,6
(iii) टेफ्लॉन
(iv) रबर
उत्तर :
(ii) नाइलॉन-6,6

प्रश्न14.
फीनॉल की किसके साथ अभिक्रिया से बैकलाइट प्राप्त होता है? (2016)
(i) HCHO
(ii) (CH2OH)2
(iii) CH3CHO
(iv) CH3COCH3
उत्तर :
(i) HCHO

प्रश्न15.
पॉलीवाइनिल क्लोराइड का एकलक है (2015)
(i) वाइनिल क्लोराइड
(ii) क्लोरोप्रीन
(iii) प्रोपिलीन
(iv) वाइनिल सायनाइड
उत्तर :
(i) वाइनिल क्लोराइड

प्रश्न 16.
निओप्रीन का एकलक है (2015)
(i) एथिलीन
(ii) टेट्राफ्लुओरोएथिलीन
(iii) फ्लु ओरीन
(iv) क्लोरोप्रीन
उत्तर :
(iv) क्लोरोप्रीन

प्रश्न 17.
टेरीलीन है (2014)
(i) पॉलीएमाइड
(ii) पॉलीस्टाइरीन
(iii) पॉलीएथिलीन
(iv) पॉलीएस्टर
उत्तर :
(iv) पॉलीएस्टर

प्रश्न18.
निम्न में से कौन-सा पॉलीस्टर बहुलक है?
(i) नाइलॉन-6,6
(ii) टेरीलीन
(iii) बैकलाइट
(iv) मैलेमीन
उत्तर :
(ii) टेरीलीन

प्रश्न19.
निम्न में से किस बहुलक का प्रयोग स्नेहक तथा अचालक के रूप में किया जाता है?
(i) SBR
(ii) PVC
(iii) PTFE
(iv) PAN
उत्तर :
(iii) PTFE

प्रश्न20.
निम्न में कौन एक पॉलीएमाइड वर्ग का जैव निम्नीकरणीय बहुलक है?
(i) डेक्स्ट्रॉन
(ii) नाइलॉन-2-नाइलॉन-6
(iii) नाइलॉन-6
(iv) PHPV
उत्तर :
(ii) नाइलॉन-2-नाइलॉन-6

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दो प्राकृतिक बहुलकों के नाम लिखिए।
उत्तर :
स्टार्च तथा प्रोटीन।

प्रश्न 2.
क्रॉस-लिंक बहुलकों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
बैकेलाइट तथा यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड।

प्रश्न 3.
बहुलकन की कोटि से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
बहुलक में उपस्थित पुनरावर्तित इकाइयों की संख्या को बहुलकन की कोटि कहते हैं।

प्रश्न 4.
रेशों (fibres) के गलनांक उच्च क्यों होते हैं?
उत्तर :
प्रबल अंतरा :
अणुक बलों के कारण रेशों की बहुलक श्रृंखलाओं की व्यवस्था निविड संकुलित होती है। इसी कारण से इनके गलनांक उच्च होते हैं।

प्रश्न 5.
प्लास्टिसाइजर क्या हैं?
उत्तर :
ऐसे कार्बनिक यौगिक जिन्हें प्लास्टिकों में मिलाने पर प्लास्टिक मुलायम और कार्यन योग्य (workable) हो जाती है प्लास्टिसाइजर कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
योगात्मक बहुलकीकरण को एक उदाहरण द्वारा समझाइए। (2016, 17)
उत्तर :
योगात्मक बहुलकीकरण में एकलक अणुओं के योग द्वारा बहुलक बनता है। उदाहरण के लिए, उच्च दाब और उच्च ताप पर ऑक्सीजन और परॉक्साइड की उपस्थिति में एथिलीन अणुओं के योग बहुलकीकरण द्वारा पॉलिएथिलीन बहुलक बनता है।
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प्रश्न 7.
किस प्रकार के बहुलकन में H2O, NH3 जैसे अणुओं का विलोपन होता है। योगात्मक बहुलकन में यो संघनन बहुलकन में?
उत्तर :
संघनन बहुलकन में।

प्रश्न 8.
मुक्त मूलक बहुलकन में हमेशा शुद्धतम एकलक का प्रयोग क्यों करना चाहिए?
उत्तर :
यदि अशुद्धियाँ उपस्थित हों तब ऐल्कीन एकलक या तो श्रृंखला स्थानान्तरण कारक या संदमक का कार्य करता है। यदि यह श्रृंखला स्थानान्तरण कारक के रूप में कार्य करता है तब कम अणु द्रव्यमान का बहुलक प्राप्त होता है और जब यह संदमक का कार्य करता है तब बहुलकन की क्रिया संदमित होती है। अत: इन जटिलताओं से बचने के लिए प्रयुक्त ऐल्कीन एकलक अति शुद्ध होने चाहिए।

प्रश्न 9.
बेन्जोक्विनोन मुक्त मूलक बहुलकन में संदमक का कार्य करता है, क्यों?
उत्तर :
बेन्जोक्विनोन बहुलीकृत होने वाले मुक्त मूलकों को जकड़ लेता है तथा अक्रियाशील मुक्त मूलक बनाता है।

प्रश्न 10.
इलेक्ट्रॉन दाता समूहों युक्त विनायलिक एकलकों के लिए धनायनिक बहुलकन को वरीयता क्यों दी जाती है?
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन दाता समूह(EDG) एकलक इकाई पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देते हैं जिसके परिणामस्वरूप धनायनिक आक्रमण शीघ्रता से होता है।
उदाहरणार्थ :
एक इलेक्ट्रॉन विमोचक CH समूह (+I प्रभाव)युक्त प्रोपीन का धनायनिक बहुलकन।

प्रश्न 11.
HO2CCH2CH2COOH , (सक्सिनिक अम्ल) तथा H2NCH2CH2NH2, (एथिलीनडाइऐमीन) के संयुक्त होने पर संघनन बहुलक में पुनरावर्तित इकाई क्या है?
उत्तर :
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प्रश्न12.
टेफ्लॉन बनाने का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2017)
उत्तर :
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प्रश्न 13.
टेफ्लॉन के दो उपयोग लिखिए। (2017)
उत्तर :

  1. इसका उपयोग तेल सीलों एवं गैस्केटों को बनाने में किया जाता है।
  2. इसका उपयोग रसोईघर में नॉनस्टिक बर्तन बनाने में किया जाता है।

प्रश्न14.
किस बहुलक से ऑरलॉन अथवा ऐक्रिलन जैसे रेशे बनाए जाते हैं ?
उत्तर :
पॉलीऐक्रिलोनाइट्राइल।

प्रश्न15.
नाइलॉन-6, 6 क्या है? इसके एकलकों से नाइलॉन-6, 6 बहुलक बनाने की अभिक्रिया समीकरण लिखिए। (2017)
उत्तर :
नाइलॉन-6, 6 ऐडिपिक अम्ल और हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन के संघनन बहुलीकरण द्वारा बनाया जाता है।
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प्रश्न 16.
किस बहुलक का प्रयोग कॉन्टैक्ट लेन्स (contact lens) बनाने के लिए किया जाता है?
उत्तर :
पॉलीमेथिलमेथएँक्रिलेट (PMMA).

प्रश्न 17.
प्राकृतिक रबर का एकलक क्या है?
उत्तर :
आइसोप्रीन।

प्रश्न 18.
किस सहबहुलक का प्रयोग न टूटने वाली प्लास्टिक क्रॉकरी बनाने के लिए किया जाता है?
उत्तर :
मैलेमीन-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन।

प्रश्न 19.
प्राकृतिक रबर और गुट्टा पर्चा में एक अंतर बताइए।
उत्तर :
प्राकृतिक रबर समपक्ष पॉलीआइसोप्रीन है जबकि गुट्टा पर्चा विपक्ष पॉलीआइसोप्रीन है।

प्रश्न 20.
वल्कनीकरण में सल्फर का क्या महत्त्व है? (2015)
उत्तर :
सल्फर बहुलीकृत श्रृंखलाओं में तिर्यक बन्धन उत्पन्न करता है जिससे रबर की तनन सामर्थ्य तथा प्रत्यास्थता बढ़ जाती है।

प्रश्न 21.
रेयॉन को कृत्रिम सिल्क तथा पुनर्जीनित तन्तु क्यों कहते हैं।
उत्तर :
क्योंकि इसकी चमक सिल्क के समान होती है तथा ये पुनर्जनित रेशों (regenerated fibres) से प्राप्त होता है।

प्रश्न 22.
पॉलीएथिलीन से पॉलीप्रोपिलीन को वरीयता क्यों दी जाती है?
उत्तर :
क्योकि पॉलीप्रोपिलीन पॉलीएथिलीन से कठोर तथा मजबूत होता है।

प्रश्न 23.
कोयले की खानों में निओप्रीन बैल्ट क्यों प्रयुक्त की जाती है?
उत्तर :
कोयले की खानों में निओप्रीन बैल्ट प्रयुक्त की जाती है क्योंकि यह आग नहीं पकड़ती है।

प्रश्न 24.
शल्यचिकित्सकीय ड्रेसिंग में रेयॉन कपास से श्रेष्ठ क्यों है?
उत्तर :
क्योंकि यह अपने भार का 90% जल अवशोषित कर लेती है तथा यह न चिपकने वाला होने के कारण घावों पर चिपकती नहीं है।

प्रश्न 25.
किसी एक जैव-निम्नीकरणीय पॉलीएमाइड सहबहुलक का नाम लिखिए।
उत्तर :
नाइलॉन 2-नाइलॉन 6

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
(i) एथीन के बहुलकन में बेन्जॉइल परॉक्साइड का क्या योगदान है?
(ii) LDPE तथा HDPE क्या हैं? इन्हें कैसे विरचित किया जाता है? (2015)
उत्तर :
(i) बेन्जॉइल परॉक्साइड एथीन के बहुलकन में प्रारम्भक (initiator) का कार्य करता है।
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(ii) LDPE का अभिप्राय निम्न घनत्व पॉलीएथिलीन (low density polyethylene) तथा HDPE का अभिप्राय उच्च घनत्व पॉलीएथिलीन (high density polyethylene) से है।
(a)
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(b)
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प्रश्न 2.
पॉलीवाइनिल क्लोराइड (PVC) के निर्माण की विधि एवं उपयोग लिखिए। (2014, 17)
उत्तर :
इसका निर्माण वाइनिल क्लोराइड के योगात्मक बहुलकीकरण द्वारा किया जाता है। इसका एकलक वाइनिल क्लोराइड (CH2, = CH—Cl) है। उच्च दाब एवं निष्क्रिय विलायक C6H5 – O— O— C6H5 की उपस्थिति में वाइनिल क्लोराइड को गर्म करने पर पॉलीवाइनिल क्लोराइड (PVC) बनता है।
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प्रश्न 3.
बैकेलाइट पर टिप्पणी लिखिए। (2016, 17)
उत्तर :
ये फीनॉल की अम्ल अथवा क्षार उत्प्रेरक की उपस्थिति में फॉर्मेल्डिहाइड के साथ संघनन अभिक्रिया द्वारा प्राप्त होते हैं। अभिक्रिया का आरम्भ 0-अथवा p-हाइड्रॉक्सीमेथिलफीनॉल व्युत्पन्नों के विरचन से होता है जो पुनः फोनॉल से अभिक्रिया करके ऐसे यौगिक बनाते हैं जिनमें आपस में, -CH2,-सेतुओं के माध्यम से जुड़ी वलय होती हैं। प्रारम्भिक उत्पाद एक रैखिक उत्पाद हो सकता है; जैसे-नोवोलेक, जिसका उपयोग पेंटों में किया जाता है।
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फॉर्मेल्डिहाइड के साथ गर्म करने पर नोवोलेक तिर्यक बंधन निर्मित करके एक दुर्गलनीय ठोस बनाता है। जिसे बैकलाइट (bakelite) कहते हैं।
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित बहुलक क्या हैं? इन्हें बनाने की विधि तथा उपयोग लिखिए।
(i) पॉलिऐमाइड
(ii) पॉलिएस्टर
(iii) फीनॉल-फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक
(iv) मेलैमीन-फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक।
उत्तर :
(i) पॉलिऐमाइड (Polyamide) :
ऐमाइड बन्ध युक्त बहुलक संश्लिष्ट रेशे के महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं, इन्हें नाइलॉन (nylon) कहा जाता है। इन्हें बनाने की सामान्य विधियों में डाइऐमीनों को डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों के साथ तथा ऐमीनो अम्लों और उनके लैक्टमों का भी संघनन बहुलकन होता है। नाइलॉनों का निर्माण या विरचन (Preparation of Nylons)
(a) नाइलॉन-6, 6 (Nylon-6, 6) :
इसका विरचन हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन एवं ऐडिपिक अम्ल के उच्च दाब और उच्च ताप पर संघनन द्वारा किया जाता है।
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उपयोग (Uses) :
नाइलॉन-6,6 का उपयोग शीटों, ब्रशों के शूकों (bristles) और वस्त्र उद्योग में किया जाता है।

(b) नाइलॉन-6 (Nylon-6) :
यह कैपरोलैक्टम को जल के साथ उच्च ताप पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है।
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उपयोग (Uses) :
नाइलॉन-6 का उपयोग टायर की डोरियों, वस्त्रों और रस्सियों के निर्माण में किया जाता है।

(ii) पॉलिएस्टर (Polyester) :
ये द्विकार्बोक्सिलिक अम्लों और डाइऑल के बहुसंघनन उत्पाद हैं। पॉलिएस्टर का सबसे अधिक ज्ञात उदाहरण डेक्रॉन अथवा टेरिलीन है। बनाने की विधि (Method of preparation)— यह एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल के मिश्रण को 420K से 460K ताप तक जिंक ऐसीटेट-एण्टीमनी ट्राइऑक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में गर्म करने पर उपर्युक्त अभिक्रिया की भाँति निर्मित होता है।
उपयोग (Uses) :
डेक्रॉन रेशा (टेरिलीन) क्रीजरोधी है और इसका उपयोग सूती तथा ऊनी रेशे के साथ सम्मिश्रण करने में तथा सुरक्षा हैल्मेट (helmets) आदि में काँच प्रबलन पदार्थों की तरह होता है।

(iii) फीनॉल :
फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक (Phenol-Formaldehyde Polymer)–फीनॉलफॉर्मेल्डिहाइड बहुलक सबसे प्राचीन तथा संश्लिष्ट बहुलक हैं। बनाने की विधि (Method of preparation) – ये फीनॉल की अम्ल अथवा क्षार उत्प्रेरक की उपस्थिति में फॉर्मेल्डिहाइड के साथ संघनन अभिक्रिया द्वारा प्राप्त होते हैं। अभिक्रिया का आरम्भ 0तथा/अथवा p-हाइड्रॉक्सीमेथिलफीनॉल व्युत्पन्नों के बनने से होता है, जो पुनः फोनॉल के साथ अभिक्रिया करके इस प्रकार के यौगिक बनाते हैं जिनमें आपस में -CH2, समूहों के माध्यम से जुड़ी वलय होती है। प्रारम्भिक उत्पाद एक रैखिक उत्पाद हो सकता है; जैसे-नोवोलेका
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फॉर्मेल्डिहाइड के साथ गर्म करने पर नोवोलेक तिर्यकबन्धन निर्मित करके एक दुर्गलनीय ठोस बनाता है। जिसे बैकलाइट कहते हैं।
उपयोग (Uses) :
नोवोलेक का उपयोग प्रलेपों (paints) में होता है तथा बैकेलाइट का उपयोग कंघियों, फोनोग्राफ रिकॉर्ड/अभिलेखों, विद्युत स्विचों, बर्तनों के हत्थे बनाने में किया जाता है।
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(iv) मेलैमीन :
फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक (Melamine-Formaldehyde Polymer) बनाने की विधि (Method of preparation) – यह मेलैमीन और फॉर्मेल्डिहाइड के संघनन बहुलकन द्वारा प्राप्त होता है।
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उपयोग (Uses) :
इसका उपयोग अभंजनीय बर्तनों (unbreakable crockery) के निर्माण में किया जाता है।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 14
Chapter Name Biomolecules
Number of Questions Solved 96
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं, जबकि साइक्लोहेक्सेन अथवा बेन्जीन (सामान्य छह सदस्यीय वलय युक्त यौगिक) जल में अविलेय होते हैं। समझाइए।
उत्तर :
ग्लूकोस तथा सुक्रोस में क्रमश: 5 तथा 8 –OH समूह होते हैं। ये जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाते हैं। अत्यधिक H- आबन्धन के कारण ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं। दूसरी ओर, साइक्लोहेक्सेन में –OH समूह नहीं होते हैं। यह जल के साथ हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनाता है, अतएव इसमें अविलेय रहता है।

प्रश्न 2.
लैक्टोस के जल-अपघटन से किन उत्पादों के बनने की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर :
जल-अपघटन पर लैक्टोस मोनोसैकेराइड के दो अणु देता है अर्थात् D – (+) – ग्लूकोस तथा D – (+) गैलेक्टोस का एक-एक अणु।
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प्रश्न 3.
D – ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में आप ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति को कैसे । समझाएँगे?
उत्तर :
ग्लूकोस ऐल्डोहेक्सोस होने के कारण ऐल्डिहाइड समूह की लाक्षणिक अभिक्रियाएँ देता है; जैसे -NH2OH, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया। ग्लूकोस के ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड के साथ ऐसिलीकरण से प्राप्त ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट इन अभिक्रियाओं को नहीं देता है।
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इसका अभिप्राय है कि ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह या तो अनुपस्थित होता है या इन अभिक्रियाओं के लिए उपलब्ध नहीं रहता है। वास्तव में D – ग्लूकोस के पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह हेमीऐसीटल संरचना का भाग होता है, अतएव इन अभिक्रियाओं में भाग लेने के लिए उपलब्ध नहीं रहता है।

प्रश्न 4.
ऐमीनो अम्लों के गलनांक एवं जल में विलेयता सामान्यतः संगत हैलो अम्लों की तुलना में अधिक होती है। समझाइए।
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल ज्विट्टर आयन (H3  [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] -CHR-COO) के रूप में पाए जाते हैं। द्विध्रुवीय लवण सदृश लक्षण के कारण इनमें प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव अथवा स्थिर-विद्युत आकर्षण बल पाए जाते हैं, अतएव ऐमीनो अम्लों के क्वथनांक उच्च होते हैं। ऐमीनो अम्ल H20 अणुओं के साथ प्रबल अन्योन्यक्रिया करते हैं। तथा इसमें विलेय होते हैं। हैलो अम्लों की लवण सदृश्य संरचना नहीं होती है, अत: इनके क्वथनांक निम्न होते हैं। हैलोअम्ल ऐमीनो अम्लों की तरह H20 अणुओं के साथ प्रबलता के साथ अन्योन्यक्रिया नहीं करते हैं, अत: जल में ऐमीनो अम्लों की विलेयता हैलोअम्लों से अधिक होती है।

प्रश्न 5.
अण्डे को उबालने पर उसमें उपस्थित जल कहाँ चला जाता है?
उत्तर :
उबालने पर अण्डे में उपस्थित प्रोटीनों का पहले विकृतिकरण और फिर स्कंदन हो जाता है। इन स्कंदित प्रोटीनों द्वारा जल अवशोषित या अधिशोषित हो जाता है।

प्रश्न 6.
हमारे शरीर में विटामिन C संचित क्यों नहीं होता?
उत्तर :
विटामिन C (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) जल में विलेय होता है। यह शीघ्र ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं रह सकता है।

प्रश्न 7.
यदि DNA के थायमीनयुक्त न्यूक्लियोटाइड का जल-अपघटन किया जाए तो कौन-कौन से उत्पाद बनेंगे?
उत्तर :
2-डीऑक्सी-D-राइबोस, फॉस्फोरिक अम्ल तथा थायमीन।

प्रश्न 8.
जब RNA का जल-अपघटन किया जाता है तो प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता। यह तथ्य RNA की संरचना के विषय में क्या संकेत देता है?
उत्तर :
DNA अणु में दो कुण्डलिनियों (strands) में चार पुरक क्षारक परस्पर युग्म बनाए रखते हैं जैसे साइटोसीन (C) सदैव ग्वानीन (G) के साथ युग्म बनाता है, जबकि थायमीन (T) सदैव ऐडेनीन के साथ युग्म बनाता है। इसलिए जब एक DNA अणु जल-अपघटित होता है, तब साइटोसीन की मोलर मात्राएँ सदैव ग्वानीन के तुल्य तथा इसी प्रकार ऐडेनीन की सदैव थायमीन के तुल्य होती हैं। RNA में भी चार क्षारक होते हैं जिनमें प्रथम तीन DNA के समान, परन्तु चौथा क्षारक यूरेसिल (U) होता है। चूंकि RNA में प्राप्त चारों क्षारकों (C,G, A तथा U) की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता है, इसलिए क्षारक-युग्मन सिद्धान्त (अर्थात् A के साथ U तथा C के साथ G का युग्म) का पालन नहीं होता है, इससे यह संकेत मिलता है कि DNA के विपरीत RNA में एक कुण्डलिनी होती है।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
मोनोसैकेराइड क्या होते हैं? (2018)
उत्तर :
वे कार्बोहाइड्रेट जो छोटे अणुओं में जल – अपघटित नहीं हो सकते, मोनोसैकेराइड कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
अपचायी शर्करा क्या होती है?
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करते हैं तथा फेहलिंग विलयन के साथ लाल अवक्षेप देते हैं, अपचायी शर्कराएँ कहलाते हैं। सभी मोनोसैकेराईड (ऐल्डोस तथा कीटोस) तथा डाइसैकेराइड (सुक्रोस को छोड़कर) अपचायी शर्कराएँ हैं।

प्रश्न 3.
पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।
उत्तर :
(i) पादप कोशिका भित्तियों का संरचनात्मक पदार्थ (Structural material for plant cell walls)
उदाहरणार्थ :
पॉलीसैकेराइड सेलुलोस पादप कोशिका भित्ति का प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होता है।

(ii) जैव ईंधन (Bio fuels) कार्बोहाइड्रेट जैसे :
ग्लूकोस, फ्रक्टोस, शर्करा, स्टार्च तथा ग्लाइकोजन जैव ईंधनों के रूप में कार्य करते हैं तथा जैव तन्त्रों में विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उदाहरणार्थ :
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिएराइबोस, 2-डिऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलेक्टोस, फ्रक्टोस तथा लैक्टोस
उत्तर :

  1. मोनोसैकेराइड :राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलेक्टोस, तथा फ्रक्टोस।
  2. डाइसैकेराइड :माल्टोस तथा लैक्टोस।

प्रश्न 5.
ग्लाइकोसाइडी बन्ध से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
दो मोनोसैकेराइड अणु परस्पर ऑक्सीजन आबन्ध द्वारा जुड़े होते हैं जिसका निर्माण जल के अणु की हानि से होता है। दो मोनोसैकेराइड इकाइयों के मध्य ऑक्सीजन से होकर आबन्ध ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
माल्टोस अणु में ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध नीचे प्रदर्शित है
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प्रश्न 6.
ग्लाइकोजन क्या होता है तथा ये स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर :
जन्तुओं के शरीर में कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन के रूप में संचित रहता हैं। इसे जन्तु स्टार्च भी कहते हैं, क्योंकि इसकी संरचना ऐमाइलोपेक्टिन के समान होती है, लेकिन यह इससे अत्यधिक शाखित होता है। यह यकृत तथा पेशियों में संचित रहता है। जब हमारे शरीर को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है तब एन्जाइम ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में परिवर्तित कर देते हैं। दूसरी ओर, स्टार्च ऐमाइलोस (15-20%) जो कि जल में विलेय होता है तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80-85%) जो कि जल में अविलेय होता है का मिश्रण होता है। ग्लाइकोजन तथा ऐमाइलोपेक्टिन दोनों α -D.ग्लूकोस के शाखित बहुलक होते हैं। स्टार्च पौधों का प्रमुख संचित पॉलीसैकेराइड होता है।

प्रश्न 7.
(अ) सुक्रोस तथा
(ब) लैक्टोस के जल-अपघटन से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर :
(अ) सुक्रोस जल :
अपघटित होकर 1-अणु ग्लूकोस तथा 1-अणु फ्रक्टोस देता है।
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(ब) लैक्टोस जल :
अपघटित होकर D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस का सममोलर मिश्रण देता है।
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प्रश्न 8.
स्टार्च तथा सेलुलोस में मुख्य संरचनात्मक अन्तर क्या है?
उत्तर :
स्टार्च ऐमिलोस तथा ऐमिलोपेक्टिन से मिलकर बनता है। ऐमिलोस α – D -ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है, जबकि सेलुलोस β – D-ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है। ऐमिलोस में एक ग्लूकोस इकाई का C-1 अन्य ग्लूकोस इकाई के C-4 से α – ग्लाइकोसाइडी बन्ध द्वारा जुड़ा रहता है। इसे अग्रांकित चित्र में देखा जा सकता है
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सेलुलोस, β – D -ग्लूकोस से बनी ऋजु शृंखलायुक्त पॉलिसैकेराइड है जिसमें एक ग्लूकोस इकाई के C-1 तथा दूसरी ग्लूकोस इकाई के C-4 के मध्य β ग्लाइकोसाइडी बन्ध बनता है।

प्रश्न 9.
क्या होता है जब D-ग्लूकोस की अभिक्रिया निम्नलिखित अभिकर्मकों से करते हैं?
(i) HI
(ii) ब्रोमीन जल
(iii) HNO3.
उत्तर :
(i)
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प्रश्न 10.
ग्लूकोस की उन अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जो इसकी विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकतीं।
उत्तर :
निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ग्लूकोस की विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकती हैं, इन्हें बॉयर ने प्रस्तावित किया था

  1.  ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होते हुए भी ग्लूकोस 2 , 4 – DNP परीक्षण तथा शिफ़-परीक्षण नहीं देता एवं यह NaHSO3 के साथ हाइड्रोजन सल्फाइड योगज उत्पाद नहीं बनाता।
  2. ग्लूकोस का पेन्टाऐसीटेट, हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता जो मुक्त —CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करता है।
  3.  जब D-ग्लूकोस को शुष्क हाइड्रोजन क्लोराईड गैस की उपस्थिति में मेथेनॉल के साथ अभिकृत कराया जाता है, तब यह दो समावयव मोनोमेथिल व्युत्पन्न देता है जिन्हें मेथिल -α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β-D-ग्लूकोसाइड के नाम से जाना जाता है। ये ग्लूकोसाइड फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते तथा हाइड्रोजन सायनाइड अथवा हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं तथा मुक्त -CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करते हैं।

प्रश्न 11.
आवश्यक तथा अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
(i) आवश्यक ऐमीनो अम्ल (Essential amino acids) :
ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है, लेकिन इनका संश्लेषण मनुष्य के शरीर में नहीं होता है, आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-वेलिन, ल्यूसीन, फेनिलऐलानीन आदि।
(ii) अनावश्यक ऐमीनो अम्ल (Non-essential amino acids) :
ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है तथा जिनका संश्लेषण मानव शरीर में होता है, अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-ग्लाइसीन, ऐलानीन, ऐस्पार्टिक अम्ल आदि।

प्रश्न 12.
प्रोटीन के सन्दर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए
(i) पेप्टाइड बन्ध
(ii) प्राथमिक संरचना
(iii) विकृतीकरण। (2015)
उत्तर :
(i) पेप्टाइड बन्ध (Peptide bond) :
रासायनिक रूप से पेप्टाइड आबन्ध, -COOH समूह तथा -NH2, समूह के मध्य बना एक आबन्ध होता है। दो एक जैसे अथवा भिन्न ऐमीनो अम्लों के अणुओं के मध्य अभिक्रिया एक अणु के ऐमीनो समूह तथा दूसरे अणु के कार्बोक्सिल समूह के मध्य संयोग से होती है जिसके फलस्वरूप एक जल का अणु मुक्त होता है तथा पेप्टाइड आबन्ध -CO-NH- बनता है। चूँकि उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों के द्वारा बनता है, अत: इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं। उदाहरणार्थ :
जब ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलेनीन के ऐमीनो समूह के साथ संयोग करता है तो हमें एक डाइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलैनीन प्राप्त होता है।
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(ii) प्राथमिक संरचना (Primary structure) :
प्रोटीन में एक अथवा अनेक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ उपस्थित हो सकती हैं। किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट क्रम में संयुक्त होते हैं। ऐमीनो अम्लों का यह विशिष्ट क्रम प्रोटीन्स की प्राथमिक संरचना बनाता है। प्राथमिक संरचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन अर्थात् ऐमीनो अम्लों के क्रम में परिवर्तन से भिन्न प्रोटीन उत्पन्न होती हैं।

(iii) विकृतीकरण (Denaturation) :
जैविक निकाय में पायी जाने वाली विशेष त्रिविम संरचना तथा जैविक सक्रियता वाली प्रोटीन, प्राकृत प्रोटीन कहलाती हैं। जब प्राकृत प्रोटीन में भौतिक परिवर्तन जैसे ताप में परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन करते हैं (जैसे-pH में परिवर्तन आदि) तो हाइड्रोजन आबन्धों में अस्तव्यस्तता उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हेलिक्स अकुण्डलित हो जाती है तथा प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देती है। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं। विकृतीकरण के दौरान 2° तथा 3° संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, परन्तु 1° संरचना अप्रभावित रहती है। उबालने पर अण्डे की सफेदी का स्कन्दन विकृतीकरण का एक सामान्य उदाहरण है। एक अन्य उदाहरण दही का जमना है जो दूध में उपस्थित बैक्टीरिया द्वारा लैक्टिक अम्ल उत्पन्न होने के कारण होता है।

प्रश्न 13.
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के सामान्य प्रकार क्या हैं?
उत्तर :
किसी प्रोटीन की द्वितीयक संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला विद्यमान होती है। यह दो भिन्न प्रकार की संरचनाओं में विद्यमान होती हैं α – हेलिक्स तथा β – प्लीटेड शीट संरचना। ये संरचनाएँ पेप्टाइड आबन्ध के
[latex]\\ \begin{matrix} O \\ \parallel \\ -C- \end{matrix}[/latex]
तथा – NH -समूह के मध्य हाइड्रोजन आबन्ध के कारण पॉलिपेप्टाइड की मुख्य श्रृंखला के नियमित कुण्डलन में उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 14.
प्रोटीन की -हेलिक्स संरचना के स्थायीकरण में कौन-से आबन्ध सहायक होते हैं?
उत्तर :
प्रोटीन की z-हेलिक्स संरचना एक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट के C=0 तथा चतुर्थ ऐमीनो अम्ल अवशेष के N – H के मध्य अन्तरा – आणविक H-आबन्ध द्वारा स्थायित्व प्राप्त करती है।

प्रश्न 15.
रेशेदार तथा गोलिकाकार (globular) प्रोटीन को विभेदित कीजिए।
उत्तर :
(i) रेशेदार प्रोटीन (Fibrous proteins) :
जब पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ समानान्तर होती हैं। तथा हाइड्रोजन एवं डाइसल्फाइड आबन्धों द्वारा संयुक्त रहती हैं तो रेशासम (रेशे जैसी) संरचना बनती है। इस प्रकार के प्रोटीन सामान्यत: जल में अविलेय होती हैं। रेशेदार प्रोटीन जन्तु ऊतकों की प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होती हैं। कुछ सामान्य उदाहरण किरेटिन (बाल, ऊन तथा रेशम में उपस्थित) तथा मायोसिन (मांसपेशियों में उपस्थित) आदि हैं।

(ii) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular proteins) :
जब पॉलिपेप्टाइड की श्रृंखलाएँ कुण्डली बनाकर गोलाकृति प्राप्त कर लेती हैं तो ऐसी संरचनाएँ प्राप्त होती हैं। ये सामान्यतः जल में विलेय होती हैं क्योकि इनके अणु दुर्बल अन्तराअणुक बलों द्वारा जुड़े रहते हैं। इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन इनके सामान्य उदाहरण

प्रश्न 16.
ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति को आप कैसे समझाएँगे? (2016, 18)
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल में एक कार्बोक्सिल समूह (अम्लीय) तथा एक ऐमीन समूह (क्षारीय) समान अणु में पाए जाते हैं। जलीय विलयन में -COOH समूह एक H+ खोता है तथा —NH2, समूह इसे स्वीकार करता है। इस प्रकार ज्विट्टर आयन (zwitter ion) का निर्माण होता है।
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द्विध्रुवीय या ज्विट्टर आयन संरचना के कारण ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी (amphoteric) प्रकृति के होते हैं। ऐमीनो अम्ल की अम्लीय प्रकृति [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] के कारण होती है तथा क्षारीय प्रकृति COO समूह के कारण होती है।
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प्रश्न 17.
एन्जाइम क्या होते हैं? (2016, 17, 18)
उत्तर :
एन्जाइम जैव-उत्प्रेरक होते हैं। जीवधारियों में होने वाली विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में समन्वयन के कारण ही जीवन सम्भव होता है।
उदाहरणार्थ :
भोजन का पाचन, उपयुक्त अणुओं का अवशोषण तथा अन्तत: ऊर्जा का उत्पादन। इस प्रक्रम में अभिक्रियाएँ एक अनुक्रम में होती हैं तथा ये सभी अभिक्रियाएँ शरीर में मध्यम परिस्थितियों में सम्पन्न होती हैं। यह कुछ जैव-उत्प्रेरकों की सहायता से होता है। इन्हीं जैव-उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहा जाता है। रासायनिक रूप में लगभग सभी एन्जाइम गोलिकाकार प्रोटीन होते हैं। एन्जाइम किसी विशेष अभिक्रिया अथवा विशेष क्रियाधार के लिए विशिष्ट होते हैं अर्थात् प्रत्येक जैव-तन्त्र के लिए भिन्न एन्जाइम की आवश्यकता होती है, इसलिए एन्जाइम अन्य प्रचलित उत्प्रेरकों से भिन्न होते हैं। ये अत्यन्त सक्रिय होते हैं तथा इनकी अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा की ही आवश्यकता होती है। ये अनुकूल ताप (310K) तथा pH(7.4) एवं एक वायुमण्डलीय दाब पर कार्य करते हैं।

प्रश्न 18.
प्रोटीन की संरचना पर विकृतीकरण का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर :
प्रोटीन ऊष्मा, खनिज अम्ल, क्षार आदि की क्रिया के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। गर्म करने या खनिज अम्लों की क्रिया कराने पर गोलिकामय प्रोटीन (विलेय प्रोटीन) स्कन्दित या अवक्षेपित होकर तन्तुमय प्रोटीन देते हैं जोकि जल में अविलेय होते है जिसके परिणामस्वरूप प्रोटीन की जैव सक्रियता समाप्त हो जाती है। रासायनिक रूप से विकृतिकरण प्राथमिक संरचना को परिवर्तित नहीं करता है, लेकिन प्रोटीन की द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ परिवर्तित हो जाती हैं।

प्रश्न 19.
विटामिनों को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है? रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन का नाम दीजिए। (2016)
उत्तर :
विटामिनों को जल या वसा में विलेयता के आधार पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है

  1. जल में विलेय विटामिन (Water soluble vitamins) : विटामिन B-कॉम्प्लेक्स तथा विटामिन Cl
  2. वसा में विलेय विटामिन (Fat soluble vitamins) : विटामिन A, D, E, K आदि। विटामिन K रक्त के थक्के जमने के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 20.
विटामिन A व C हमारे लिए आवश्यक क्यों हैं? उनके महत्त्वपूर्ण स्रोत दीजिए।
उत्तर :
विटामिन A की कमी से जीरोफ्थैल्मिया (xerophthalmia) तथा रतौंधी (night blindness) हो जाते हैं, अत: इसका प्रयोग हमारे लिए आवश्यक होता है।
(i) स्रोत (Sources) :
मछली के यकृत का तेल, गाजर, मक्खन तथा दूध। विटामिन C की कमी से स्कर्वी (scurvy) तथा पायरिया हो जाता है।
(ii) स्रोत (Sources) :
नींबू, आँवला, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंकुरित अनाज आदि।

प्रश्न 21.
न्यूक्लीक अम्ल क्या होते हैं? इनके दो महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए। (2016, 17)
उत्तर :
न्यूक्लीक अम्ल वे जैव-अणु होते हैं जो सभी जीवित कोशिकाओं के नाभिकों में न्यूक्लियो- प्रोटीन अथवा क्रोमोसोम के रूप में पाए जाते हैं। न्यूक्लीक अम्ल मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं—डिऑक्सीराइबोस न्यूक्लीक अम्ल (DNA) तथा राइबोसन्यूक्लीक अम्ल (RNA)। चूंकि न्यूक्लीक अम्ल न्यूक्लियोटाइडों की लम्बी श्रृंखला वाले बहुलक होते हैं, अतः इन्हें पॉलिन्यूक्लियोटाइड भी कहते हैं। न्यूक्लीक अम्लों के दो महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं

(i) DNA आनुवंशिकता का रासायनिक आधार है तथा इसे आनुवंशिक सूचनाओं के संग्राहक के रूप में जाना जाता है। DNA लाखों वर्षों से किसी जीव की विभिन्न प्रजातियों की पहचान बनाए रखने के लिए विशिष्ट रूप से उत्तरदायी है। कोशिका विभाजन के समय एक DNA अणु स्वप्रतिकरण (self replication) में सक्षम होता है तथा पुत्री कोशिका में समान DNA रज्जुक का अन्तरण होता है।
(ii) न्यूक्लीक अम्ल (DNA तथा RNA) का दूसरा महत्त्वपूर्ण कार्य कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण है। वास्तव में कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण विभिन्न RNA अणुओं द्वारा होता है, परन्तु किसी विशेष प्रोटीन के संश्लेषण का सन्देश DNA में उपस्थित होता है।

प्रश्न 22.
न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड में क्या अन्तर होता है? (2012)
उत्तर :
1. न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides) :
न्यूक्लियोसाइड में न्यूक्लिक अम्ल के दो आधारीय घटक होते हैं—पेण्टोस शर्करा तथा एक नाइट्रोजनी क्षारक।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा → न्यूक्लियोसाइड
उपस्थित शर्करा के आधार पर न्यूक्लियोसाइड राइबोसाइड तथा डीऑक्सीराइबोसाइड प्रकार के होते हैं।

2. न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides) :
न्यूक्लियोटाइड में न्यूक्लिक अम्लों के तीनों घटक अर्थात् H3 PO4, पेण्टोस शर्करा तथा नाइट्रोजनी क्षारक पाए जाते हैं।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा + H3 PO4 न्यूक्लियोटाइड  या  न्यूक्लियोसाइड + H3 PO न्यूक्लियोटाइड
उपस्थित शर्करा के प्रकार के आधार पर न्यूक्लियोटाइड दो प्रकार के होते हैं

  1. राइबोन्यूक्लियोटाइड
  2. डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटइड।

प्रश्न 23.
DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं। समझाइए।
उत्तर :
DNA अणु में दो रज्जुक, एक रज्जुक के प्यूरीन क्षारक तथा अन्य के पिरिमिडीन क्षारक के मध्य या इसके विपरीत के मध्य हाइड्रोजन आबन्धों के द्वारा जुड़े रहते हैं। क्षारकों के विभिन्न आकारों एवं ज्यामितियों के कारण DNA में एकमात्र सम्भव युग्मन G (ग्वानीन) तथा C (साइटोसीन) के मध्य तीन हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा हो सकता है। दूसरे शब्दों में क्षारकों A (ऐडीनीन) तथा T (थायमीन) के मध्य दो हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा युग्मन सम्भव होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules image 13
इस क्षारक-युग्मन सिद्धान्त के कारण एक रज्जुक में क्षारकों का अनुक्रम दूसरे रज्जुक में क्षारकों के अनुक्रम को स्वत: व्यवस्थित कर देता है। अत: DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

प्रश्न 24.
DNA तथा RNA में महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अन्तर लिखिए।
उत्तर :
संरचनात्मक अन्तर (Structural Difference)
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules image 14
क्रियात्मक अन्तर (Functional Difference)
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules image 15

प्रश्न 25.
कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA कौन-से हैं?
उत्तर :
कोशिका में तीन प्रकार के RNA पाए जाते हैं

  1. राइबोसोमल RNA (r-RNA)
  2. सन्देशवाहक RNA (m-RNA)
  3. स्थानान्तरण RNA (t-RNA)

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
यौगिकों का युग्म जिसमें दोनों यौगिक टॉलेन्स अभिकर्मक के साथ धनात्मक परीक्षण देते (2016)
(i) ग्लूकोस तथा सुक्रोस
(ii) फ्रक्टोस तथा सुक्रोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस

प्रश्न 2.
सुक्रोस (sucrose) है एक (2017)
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
उत्तर :
(i) डाइसैकेराइड

प्रश्न 3.
इन्युलिन के जल-अपघटन से प्राप्त होता है (2017)
(i) ग्लूकोस
(ii) फ्रक्टोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) लैक्टोस
उत्तर :
(ii) फ्रक्टोस

प्रश्न 4.
सेलुलोस (cellulose) है एक (2017)
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
उत्तर :
(iv) पॉलिसैकेराइड

प्रश्न 5.
ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह के अतिरिक्त होता है
(i) एक द्वितीयक तथा चार प्राथमिक –OH समूह
(ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह
(iii) दो प्राथमिक -OH तथा तीन द्वितीयक –OH समूह
(iv) तीन प्राथमिक –OH तथा दो द्वितीयक –OH समूह
उत्तर :
(ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह

प्रश्न 6.
लैक्टोस के तनु अम्ल के साथ जल-अपघटन में प्राप्त होता है
(i) D-ग्लूकोस तथा D.ग्लूकोस का सममोलर मिश्रण।
(ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस को सममोलर मिश्रण
(iii) D-ग्लूकोस तथा D-फ्रक्टोस का सममोलर मिश्रण
(iv) L-ग्लूकोस तथा D.फ्रक्टोस को सममोलर मिश्रण
उत्तर :
(ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस का सममोलर मिश्रण

प्रश्न 7.
ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन के आधिक्य से क्रिया करके बनाता है
(i) ग्लूकोसाजोन
(ii) ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन
(iii) ग्लूकोस ऑक्सिम
(iv) सोरबिटॉल
उत्तर :
(i) ग्लूकोसाजोन

प्रश्न 8.
मेथिल α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β -D-ग्लूकोसाइड हैं
(i) ऐपीमर
(ii) एनोमर
(iii) एनेन्शियोमर
(iv) डाइस्टीरियोमर
उत्तर :
(ii) एनोमर

प्रश्न 9.
वह कार्बोहाइड्रेट, जो मनुष्यों के पाचन तन्त्र में नहीं पचता है, है (2014)
(i) स्टार्च
(ii) सेलुलोस
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) ग्लूकोस
उत्तर :
(ii) सेलुलोस

प्रश्न 10.
निम्न में से कौन-सा यौगिक बाइयूरेट परीक्षण नहीं देता है? (2014)
(i) कार्बोहाइड्रेट
(ii) पॉलीपेप्टाइड
(iii) यूरिया
(iv) प्रोटीन
उत्तर :
(i) कार्बोहाइड्रेट

प्रश्न 11.
दूध में शर्करा होती है
(i) सुक्रोस
(ii) माल्टोस
(iii) ग्लूकोस
(iv) लैक्टोस
उत्तर :
(iv) लैक्टोस

प्रश्न 12.
शरीर में आरक्षित ग्लूकोस के रूप में कार्य करने वाला कार्बोहाइड्रेट है (2017)
(i) सुक्रोस
(ii) स्टार्च
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) फ्रक्टोस
उत्तर :
(iii) ग्लाइकोजन

प्रश्न 13.
इन्सुलिन किसके उपापचय को नियन्त्रित करता है?
(i) खनिज
(ii) ऐमीनो अम्ल
(iii) ग्लूकोस
(iv) विटामिन
उत्तर :
(iii) ग्लूकोस

प्रश्न 14.
शर्करा के किस कार्बन परमाणु पर हाइड्रॉक्सिल समूह की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति RNA तथा DNA में विभेद करती है?
(i) दूसरे
(ii) तीसरे
(iii) चौथे
(iv) पहले
उत्तर :
(i) दूसरे

प्रश्न 15.
बायर अभिकर्मक का उपयोग किया जाता है (2016)
(i) ऑक्सीकरण के लिए
(ii) द्वि-बन्ध की जाँच के लिए
(iii) ग्लूकोस की जाँच के लिए
(iv) अपचयन के लिए।
उत्तर :
(i) ऑक्सीकरण के लिए

प्रश्न 16.
प्रोटीनों में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्ल जिन्हें मानव शरीर संश्लेषित करता है, हैं
(i) 20
(ii) 10
(iii) 5
(iv) 4
उत्तर :
(ii) 10

प्रश्न 17.
निम्न में से कौन-सा परीक्षण प्रोटीनों के लिए नहीं किया जाता है?
(i) मिलन परीक्षण
(ii) मोलिश परीक्षण
(iii) बाइयूरेट परीक्षण
(iv) निनहाइडूिन परीक्षण
उत्तर :
(ii) मोलिश परीक्षण

प्रश्न 18.
मानव शरीर में संश्लेषित हो सकने वाला ऐमीनो अम्ल है
(i) लाइसीन
(ii) हिस्टीडीन
(iii) वेलीन
(iv) ऐलानीन
उत्तर :
(iv) ऐलानीन

प्रश्न 19.
α -ऐमीनो अम्ल जिसमें ऐरोमैटिक पाश्र्व श्रृंखला होती है, है
(i) प्रोलीन
(ii) टाइरोसीन
(iii) वेलीन
(iv) ट्रिप्टोफेन
उत्तर :
(iv) ट्रिप्टोफेन

प्रश्न 20.
ऐमीनो अम्लों के सन्दर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(i) ये सभी प्रोटीनों के घटक होते हैं
(ii) ये सभी उच्च गलनांक वाले होते हैं
(iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।
(iv) इनके अभिलाक्षणिक आइसोइलेक्ट्रिक बिन्दु होते हैं।
उत्तर :
(iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।

प्रश्न 21.
ऐमीनो अम्ल निम्न में से किसके निर्माण की इकाई होते हैं? (2011, 12)
(i) कार्बोहाइड्रेट के
(ii) प्रोटीन के
(iii) वसा के
(iv) विटामिन के
उत्तर :
(ii) प्रोटीन के

प्रश्न 22.
एन्जाइम होते हैं (2017)
(i) तेल
(ii) वसा-अम्ल
(iii) प्रोटीन
(iv) खनिज
उत्तर :
(iii) प्रोटीन

प्रश्न 23.
विटामिन B1, का रासायनिक नाम है (2016, 18)
(i) एस्कॉर्बिक अम्ल
(ii) रिबोफ्लेविन
(iii) थायमिन
(iv) पाइरीडॉक्सीन
उत्तर :
(iii) थायमिन

प्रश्न 24.
मानव शरीर में निम्न में से किसका निर्माण नहीं हो सकता है?
(i) एन्जाइम
(ii) DNA
(iii) विटामिन्स
(iv) हॉर्मोन्स
उत्तर :
(iii) विटामिन्स

प्रश्न 25.
कैल्सीफेरॉल कहलाता है (2011)
(i) विटामिन A
(ii) विटामिन B
(iii) विटामिन C
(iv) विटामिन D
उत्तर :
(iv) विटामिन D

प्रश्न 26.
विटामिन A की कमी से होता है (2012)
(i) स्कर्वी
(ii) बेरी-बेरी
(iii) रतौंधी
(iv) अरक्तता
उत्तर :
(iii) रतौंधी

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन स्कर्वी रोग के लिए उत्तरदायी है? (2011)
(i) A
(ii) C
(iii) K
(iv) D
उत्तर :
(ii) C

प्रश्न 28.
ऐस्कॉर्बिक अम्ल है (2010)
(i) प्रोटीन
(ii) एन्जाइम
(iii) हॉर्मोन
(iv) विटामिन
उत्तर :
(iv) विटामिन

प्रश्न 29.
बन्ध्यारोधी विटामिन है
(i) विटामिन D
(ii) विटामिन B समूह
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन A
उत्तर :
(iii) विटामिन E

प्रश्न 30.
वसा के साथ आँत में अवशोषित होने वाले विटामिन हैं
(i) A, D
(ii) B, C
(iii) A, C
(iv) B, D
उत्तर :
(i) A, D

प्रश्न 31.
बायोटीन यीस्ट में पाये जाने वाला कार्बनिक पदार्थ है। इसे अन्य किस नाम से पुकारते हैं?
(i) विटामिन H
(ii) विटामिन K
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन B12
उत्तर :
(i) विटामिन H

प्रश्न 32.
वह विटामिन जो न तो जल में और न ही वसा में विलेय है, है
(i) बायोटीन
(ii) थायमीन
(iii) कैल्सीफेरॉल
(iv) ये सभी
उत्तर :
(i) बायोटीन

प्रश्न 33.
निम्न में से प्यूरीन व्युत्पन्न है
(i) साइटोसीन
(ii) ग्वानीन
(iii) यूरेसिल
(iv) थायमीन
उत्तर :
(ii) ग्वानीन

प्रश्न 34.
DNA की द्विकुण्डलीत संरचना का कारण है
(i) स्थिर विद्युत आकर्षण
(ii) वाण्डरवाल्स बल
(iii) द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन
उत्तर :
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन

प्रश्न 35.
DNA में पाये जाने वाले पिरीमिडीन क्षार हैं
(i) साइटोसीन तथा ऐडेनीन
(ii) साइटोसीन तथा ग्वानीन
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन
(iv) साइटोसीन तथा यूरेसिल
उत्तर :
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन

प्रश्न 36.
निम्न में से कौन-सा अंग फाइट या फ्लाइट हॉर्मोन स्रावित करता है?
(i) ऐड्रीनेलिन
(ii) ऐड्रीनल
(iii) पिट्यूटरी
(iv) वृक्क
उत्तर :
(ii) ऐड्रीनल

प्रश्न 37.
निम्न में से किस हॉर्मोन में आयोडीन होती है?
(i) टेस्टेस्टोरेन
(ii) ऐड्रीनेलिन
(iii) थायरोक्सिन
(iv) इन्सुलिन
उत्तर :
(iii) थायरोक्सिन

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोहाइड्रेट को परिभाषित कीजिए। (2016, 17)
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेट ध्रुवण घूर्णक पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन होते हैं या वे पदार्थ होते हैं जो जल-अपघटित होकर मोनोसैकेराइड के कई अणु देते हैं।

प्रश्न 2.
स्टार्च तथा सेलुलोस के मोनोमरों में संरचनात्मक अन्तर क्या होता है।
उत्तर :
स्टार्च ऐमाइलोस (20%) तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80%) से बना होता है तथा ये दोनों α – D -ग्लूकोस से बने होते हैं। सेलुलोस β – D -ग्लूकोस अणुओं का रैखिक (linear) बहुलक (polymer) होता है।

प्रश्न 3.
मानव शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व क्या है? (2017)
उत्तर :

  1. कार्बोहाइड्रेट्स पौधों तथा जन्तुओं दोनों के लिये आवश्यक हैं ये भोजन का मुख्य घटक हैं।
  2. मोनोसैकेराइड शरीर की उपापचयी क्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  3.  ये शारीरिक ईंधन के रूप में कार्य करते हैं।
  4. ग्लूकोस शरीर के रक्त का एक मुख्य घटक है।
  5. कार्बोहाइड्रेट संचित ऊर्जा के रूप में कार्य करता है।

प्रश्न 4.
ग्लूकोस के दो रासायनिक परीक्षण लिखिए। (2009)
उत्तर :

  1. शुष्क परखनली में ग्लूकोस गर्म करने पर पिघलता है और फिर भूरा पड़ जाता है तथा जली शर्करा की-सी गन्ध आती है।
  2. अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ ग्लूकोस चाँदी का दर्पण देता है।

प्रश्न 5.
मोलिश परीक्षण क्या है? (2012, 17, 18)
उत्तर :
यह कार्बोहाइड्रेट का परीक्षण है। एक परखनली में ग्लूकोस का जलीय विलयन लेकर उसमें 2 मिली 2-नैफ्थॉल का ऐल्कोहॉलिक विलयन मिलाकर उसमें कुछ बूंद सान्द्र H2SO4 की डालने पर दो द्रवों के बीच बैंगनी रंग का वलय बनता है।

प्रश्न 6.
सुक्रोस का रासायनिक सूत्र लिखिए। शुष्क अवस्था में गर्म करने का इस पर क्या प्रभाव होता है? (2010)
उत्तर :
सुक्रोस का रासायनिक सूत्र  C12H22O11 है। शुष्क अवस्था में गर्म करने पर यह भूरे रंग का पदार्थ बनाता है।

प्रश्न 7.
इनुलिन क्या है ? इनुलिन से फ्रक्टोस कैसे प्राप्त करते हैं। समीकरण दीजिए। (2009, 17, 18)
उत्तर :
इनुलिन डहेलिया के पौधे की गाँठों से प्राप्त एक प्रकार का स्टार्च है। इनुलिन को तनु H2SO4 के साथ जल-अपघटित करने पर फ्रक्टोस औद्योगिक मात्रा में बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules image 16

प्रश्न 8.
किस बैक्टीरिया की सहायता से पशु सेलुलोस को पचाते हैं। (2014)
उत्तर :

  1. फाइब्रोबैक्टर सक्सिनोजिनस (Fibrobactor succinoginus)।
  2. रूमिनोकस फ्लेवीफेशियन्स (Ruminocus flacifaciens)।

प्रश्न 9.
स्टार्च तथा ग्लूकोस में दो अन्तर बताइए। (2016)
उत्तर :
स्टार्च तथा ग्लूकोस में प्रमुख अन्तर निम्नवत् हैं

  1. स्टार्च फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप नहीं बनाता है, जबकि ग्लूकोस बनाता है।
  2. स्टार्च टॉलेन अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर सिल्वर दर्पण नहीं बनाता है जबकि ग्लूकोस बनाता

प्रश्न 10.
प्रोटीन के मुख्य स्रोत क्या हैं? इनमें पाये जाने वाले विभिन्न तत्त्वों के नाम लिखिए। प्रोटीन का हमारे भोजन में क्या महत्त्व है? (2009, 10, 11, 13, 15, 18)
उत्तर :
मुख्य स्रोत : दूध, अण्डा, दालें, मछली, माँस आदि।
मुख्य तत्त्व : C, H, N, 0, S हैं। महत्त्व-प्रोटीन हमारे शरीर की वृद्धि के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। ये हमारे शरीर में नये ऊतकों का निर्माण करते हैं तथा पुराने ऊतकों की टूट-फूट को ठीक करते हैं। प्रोटीन हमारे शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करते हैं, परन्तु यह कार्य कार्बोहाइड्रेट तथा वसा की अनुपस्थिति में होता है। प्रोटीन संकीर्ण नाइट्रोजनयुक्त यौगिक हैं। ये हमारे शरीर में पाये जाने वाले खून आदि का pH भी ठीक रखते हैं।

प्रश्न 11.
प्रोटीन क्या हैं? इनके महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए। (2009, 16, 17)
उत्तर :
प्रोटीन :
प्रोटीन उच्च अणुभार वाले नाइट्रोजन युक्त जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जो वनस्पति तथा जन्तु दोनों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और जल अपघटन पर 2-ऐमीनो अम्ल देते हैं। ये सभी जीव-जन्तुओं के शरीर का प्रमुख अवयव हैं। जन्तु शरीर का लगभग 19% भाग प्रोटीन का बना होता है। प्रोटीनों के उपयोग

  1. आहार के रूप में : यह भोजन का आवश्यक अंग हैं; जैसे-अण्डा, मांस, दाल इत्यादि।
  2. एन्जाइम : समस्त एन्जाइम प्रोटीन हैं।
  3. हॉर्मोन : शरीर की अनेक आवश्यक क्रियाओं में भाग लेने वाले पदार्थ प्रोटीन ही हैं।
  4. वस्त्रों में : केसीन (casein) का उपयोग कृत्रिम ऊन और रेशम के बनाने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त केसीन प्लास्टिक का उपयोग बटन बनाने में किया जाता है।
  5. औषधियों में : जिलेटिन का उपयोग कैप्सूल (capsules) और फोटोग्राफी की फिल्म तथा प्लेट बनाने में किया जाता है। दवाइयों में प्रयुक्त होने वाले ऐमीनो अम्ल प्रोटीन से प्राप्त किए जाते हैं।
  6. चमड़ा उद्योग में : चमड़े का निर्माण जानवरों की खालों की प्रोटीनों की कमाई (tanning) करके किया जाता है।

प्रश्न 12.
विटामिन A का अणुसूत्र क्या है ? इसकी कमी से क्या हानि होती है? (2010)
उत्तर :
विटामिन A का अणुसूत्र C20H29OH है। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्र रोग हो जाता है।

प्रश्न 13.
उन बीमारियों के नाम बताइए जो विटामिन ‘B’ की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं। इसके दो स्रोत भी लिखिए। या विटामिन B का क्या महत्त्व है? या विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2012)
उत्तर :
विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जल में विलेय कई विटामिनों B, B2, B6, B12 आदि का जटिल मिश्रण है। आजतक लगभग 12 विटामिन B ज्ञात हैं और इनको B1, B2,…., B6…. B12आदि कहा जाता है। बेरी-बेरी का रोग विटामिन B1 के अभाव से होता है। विटामिन B2 की कमी से त्वचा के रोग हो जाते हैं। विटामिन B12 की कमी से ऐनीमिया हो जाता है। अधिक कमी होने पर स्नायविक दोष हो जाते हैं। इनकी कमी से बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है। यह विटामिन खमीर में अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त दाल, अनाज, पत्तेदार तरकारियाँ, दूध के पदार्थ, माँस, कलेजी, अण्डे आदि इसके मुख्य स्रोत हैं।

प्रश्न 14.
विटामिन C का रासायनिक नाम तथा अणुसूत्र लिखिए। शरीर में इस विटामिन की कमी होने पर क्या हानि होती है? (2009, 11, 15, 16)
उत्तर :
विटामिन C का रासायनिक नाम ऐस्कॉर्बिक ऐसिड है तथा इसका अणुसूत्र C6H806 है। इस विटामिन के अभाव से स्कर्वी रोग हो जाता है, हड्डियाँ भंगुर होने लगती हैं तथा मसूड़े फूल जाते हैं और उनमें से रक्त आने लगता है तथा दाँत ढीले होकर गिरने लगते हैं। गर्म करने पर यह विटामिन नष्ट हो जाता है परन्तु आँवले में पाया जाने वाला विटामिन C गर्मी से नष्ट नहीं होता है। जल में अत्यधिक विलेय होने के कारण यह मूत्र के साथ शीघ्र उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं हो पाता। स्रोत-नींबू, आँवला, नारंगी, टमाटर, फल आदि।

प्रश्न 15.
विटामिन A तथा विटामिन D के क्या स्रोत हैं? शरीर में इनकी कमी से कौन-सी बीमारियाँ हो सकती हैं? (2009, 10, 15, 17)
उत्तर :
(i) विटामिन A के मुख्य स्रोत :
दूध, कॉड मछली का तेल, पालक, पपीता, गाजर, टमाटर आदि। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्ररोग हो जाता है।
(ii) विटामिन D के मुख्य स्रोत :
सूर्य का प्रकाश, मक्खन, घी, अण्डे, मछली का तेल आदि। विटामिन D की कमी से हड्डियाँ कमजोर, लचीली और टेढ़ी पड़ जाती हैं और रिकेट्स नामक रोग हो जाता है। इसकी कमी से दाँत भी कमजोर हो जाते हैं।

प्रश्न 16.
सूर्य की किरणों की उपस्थिति में त्वचा के द्वारा कौन-सा विटामिन संश्लेषित होता है और कैसे? (2009)
उत्तर :
सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा में स्थित अगस्टीरॉल, अल्ट्रा-वायलेट किरणों के प्रभाव में विटामिन D2 में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न17.
विटामिन E की कमी से होने वाले रोग का नाम बताइए तथा इसके दो स्रोत लिखिए। (2014)
उत्तर :
विटामिन E की कमी से पेशियों में अपह्यसन होता है तथा जन्तुओं में बन्ध्यता रोग उत्पन्न होता है। विटामिन E गेहूँ के अंकुर के तेल, बिनौले के तेल आदि में पाया जाता है।

प्रश्न 18.
लिपिड क्या हैं? इनके मुख्य कार्य क्या हैं? (2014, 16)
उत्तर :
वे वसा और तेल जो जन्तुओं एवं वनस्पतिओं से प्राप्त होते हैं उन्हें लिपिड वर्ग के अन्तर्गत रखा गया है। लिपिड जल में अविलेय कार्बनिक पदार्थ हैं जो निम्न ध्रुवण के कार्बनिक विलायकों (जैसे-ईथर, क्लोरोफॉर्म) में विलेय होते हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण लिपिड इस प्रकार हैं

  1. वसा और तेल
  2. फॉस्फोलिपिड
  3. स्टेरॉयड
  4. टर्मीन्स

लिपिड के कार्य :

  1. कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के अभाव में शरीर को ऊर्जा प्रदान करना।
  2. शरीर के ताप को नियन्त्रित करना।
  3. स्टेरॉयड कोशिका झिल्ली के घटक हैं।
  4. ये हॉर्मोन्स विकास, वृद्धि, पोषण, जनन क्षमता को नियन्त्रित करते हैं।

प्रश्न 19.
मानव शरीर के लिए वसा का क्या महत्त्व है? ।
उत्तर :
वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। शरीर के कोमल भागों की रक्षा करती है और शरीर को बाहरी सर्दी, गर्मी से बचाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड तथा पॉलीसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट से आप क्या समझते हैं? इनमें कैसे विभेद कीजिएगा? । (2012) कार्बोहाइड्रेटों को उदाहरण देते हुए वर्गीकृत कीजिए। (2011, 12, 13, 17) या मोनोसैकेराइड एवं पॉलीसैकेराइड से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित वर्णन (2018) कीजिए।
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेटों का वर्गीकरण-कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण उनकी आणविक जटिलता या उनके जल-अपघटन पर उत्पन्न पदार्थों पर आधारित है। कार्बोहाइड्रेटों को निम्नलिखित मुख्य वर्गों में बाँटा गया है।
1. मोनोसैकेराइड :
ये सरल शक्कर होती हैं। इनका जल-अपघटन नहीं किया जा सकता है। इसके अणु में कार्बन परमाणु 6 से अधिक नहीं होते हैं, जैसे कि- C6H12O6 (ग्लूकोस), C6H12O6 (फ्रक्टोस) आदि।

2. ओलिगोसैकेराइड :
जो शर्कराएँ जल-अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के कुछ अणु (2 से 10 अणु ) देती हैं ओलिगोसैकेराइड कहलाती हैं। ये शर्कराएँ डाइसैकेराइड, ट्राइसैकेराइड आदि प्रकार की होती हैं।

3. डाइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटने पर मोनोसैकेराइडों के दो अणु देती हैं; जैसे कि— C12H22O11 (सुक्रोस), C12H22O11 (माल्टोस) आदि।
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4. ट्राइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के तीन अणु देती हैं, जैसे कि– C18H32O16 (रैफिनोस)।
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5. पॉलीसैकेराइड :
ये स्वाद में मीठे नहीं होते हैं; अत: इन्हें शक्कर नहीं कहते हैं। ये जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के बहुत अधिक अणु बनाते हैं। इनका सामान्य सूत्र (C6H10O5)n, है। इनका अणुभार बहुत अधिक होता है, जैसे कि स्टार्च, सेलुलोस आदि।
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प्रश्न 2.
(i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण लिखिए।
(ii) फ्रक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित कर देता है, जबकि उसमें कीटोन समूह होता है। (2016)
उत्तर :
(i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण निम्नवत् हैं
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(ii) फ्रक्टोस, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन द्वारा ऑक्सीकृत होकर क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप बनाता है। इसका कारण यह है कि दोनों अभिकर्मकों में उपस्थित क्षार की उपस्थिति में फ्रक्टोस का ग्लूकोस में पुनर्विन्यास हो जाता है, इस प्रकार प्राप्त ग्लूकोस की टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन से अभिक्रिया के फलस्वरूप क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 3.
ग्लूकोस तथा सुक्रोस में विभेद करने वाले दो रासायनिक समीकरण लिखिए। (2016)
उत्तर :
1. ग्लूकोस सान्द्रH2SO4 के साथ ठण्डे में नहीं झुलसता परन्तु गर्म करने पर काला हो जाता है।
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2. सुक्रोस सान्द्र H2SO4 के साथ ठण्डे में झुलसकर काली हो जाती है।
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प्रश्न 4.
डाइसैकेराइड क्या हैं? इनके प्रकार तथा किसी एक के रासायनिक परीक्षण भी लिखिए। (2017)
उत्तर :
डाइसैकेराइड (Disaccharides) :
जो कार्बोहाइड्रेट जल अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के दो अणु देते हैं, डाइसैकेराइड कहलाते हैं
उदाहरण :
सुक्रोस, नाटोस, लैक्टोस। डाइसैकेराइड दो प्रकार के होते हैं

  1. अपचायी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित करते हैं उन्हें अपचायी शर्करा कहते हैं; जैसे—माल्टोज और लैक्टोस
  2. अनपचयी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते हैं उन्हें अनपचयी शर्करा कहते हैं; जैसे-सुक्रोस

परीक्षण :

  1. डाइसैकेराइड भी अन्य कार्बोहाड्रेट की तरह मॉलिश परीक्षण देते हैं।
  2. सुक्रोस फेहलिग विलयन को अपचयित नहीं करता जबकि माल्टोस और लेक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित करता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्लूकोस का संरचना सूत्र लिखिए। इसकी तीन रासायनिक अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जिनसे इसके पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड का होना सिद्ध होता है। (2015) या  उस रासायनिक समीकरण का उल्लेख कीजिए जिससे ज्ञात होता है कि ग्लूकोस में पाँच हाइड्रॉक्सिल समूह उपस्थित हैं। (2014, 15, 16)
उत्तर :
ग्लूकोस की संरचना
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(i) ग्लूकोस में –OH समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की CH3,COCI के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस पेन्टा ऐसीटेट बनता है जिससे यह सिद्ध होता है कि ग्लूकोस में 5(–OH) समूह उपस्थित
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(ii) ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की HCN के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस सायनोहाइड्रिन बनता है।
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(iii) ग्लूकोस में-CHO समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस फेहलिंग विलयन एवं टॉलेन अभिकर्मक को अपचयितं करता है।
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उपर्युक्त अभिक्रियाओं से यह प्रदर्शित होता है कि ग्लूकोस पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड है।

प्रश्न 2.
ऐमीनो अम्ल क्या हैं? इनका वर्गीकरण कैसे किया जाता है। उदाहरण देकर समझाइए। (2015)
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल-ऐमीनो अम्लों के अणु प्रोटीन अणुओं की निर्माण की इकाई या एकलक इकाइयाँ हैं।
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जहाँ  R  ऐल्किल या ऐरिल समूह है।
ऐमीनो अम्लों का वर्गीकरण
1.
प्रकृति के आधार पर
(i) उदासीन ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें -NH2, तथा —COOH समूह की संख्या समान होती है, उन्हें उदासीन ऐमीनो अम्ल कहते हैं।
उदाहरण :
-NH2-CH2-COOH

(ii) अम्लीय ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें प्रत्येक अणु में केवल एक ऐमीनो (-NH2) समूह तथा एक से अधिक कार्बोक्सिल (-COOH) समूह होते हैं।
उदाहरण :
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(iii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें एक-COOH समूह तथा एक से अधिक -NH2, समूह होते हैं।
उदाहरण :
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(iv) सल्फरयुक्त ऐमीनो अम्ल :
इनमें सल्फर उपस्थित होता है।
उदाहरण :
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2.
हाइड्रोकार्बन की प्रकृति के आधार पर
(i) ऐलिफैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐल्किल समूह होता है।
उदाहरण :
ग्लाइसीन, ऐलानीन आदि।

(ii) ऐरोमैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐरिल समूह होता है।
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(iii) विषम चक्रीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R विषम चक्रीय होता है।
उदाहरण :
प्रोलीन
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प्रश्न 3.
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना से आप क्या समझते हैं। प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले कारकों को लिखिए। (2016)
उत्तर :
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना-किसी प्रोटीन की द्वितीयक (2°) संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला पायी जाती हैं। ये दो प्रकार की संरचनाएँ हैं α -हैलिक्स तथा β-प्लीटेड शीट संरचना।
1.α -हैलिक्स संरचना :
इस संरचना में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला दक्षिणावर्ती पेंच के समान मुड़ी रहती है। इसमें प्रत्येक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट का – NH समूह, कुण्डली के अगले मोड़ पर स्थित (- C = O) समूह के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाता है। हैलिक्स संरचना को 3-613हैलिक्स भी कहते हैं क्योंकि हैलिक्स के प्रत्येक घुमाव में 3- 6 ऐमीनो अम्ल अवशेष रहते हैं। हैलिक्स विभिन्न भागों में C = O तथा —NH समूहों के मध्य H – आबन्ध द्वारा 13 सदस्य वलय बनाती है। बालों व ऊन जैसी रेशेदार प्रोटीनों की संरचना इस प्रकार की होती है।

2. β -प्लीटेड शीट संरचना :
इस प्रकार की संरचना में सभी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ खुली हुई अवस्था में एक-दूसरे के पार्श्व में स्थित होती हैं तथा परस्पर अन्तराण्विक हाइड्रोजन बन्धों द्वारा
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जुड़ी होती हैं। अत: इस प्रकार की संरचना वाली प्रोटीन मुलायम होती है। रेशम की संरचना ऐसी ही होती है।
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प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले कारक प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले प्रमुख कारक निम्न हैं

    1. आयनिक आबन्ध या लवण आबन्ध
    2. हाइड्रोजन आबन्ध
  1. हाइड्रोफोबिक आबन्ध (जलविरोधी बन्ध)
  2. डाइसल्फाइड आबन्ध

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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) are part of UP Board Solutions for Class 12 Physics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Physics
Chapter Chapter 7
Chapter Name Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा)
Number of Questions Solved 85
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
एक 100 Ω का प्रतिरोधक 220 V, 50 Hz आपूर्ति से संयोजित है।
(a) परिपथ में धारा का rms मान कितना है?
(b) एक पूरे चक्र में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 2.
(a) ac आपूर्ति का शिखर मान 300 V है। rms वोल्टता कितनी है?
(b) ac परिपथ में धारा का rms मान 10 A है। शिखर धारा कितनी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q2

प्रश्न 3.
एक 44 mH को प्रेरित्र 220 V, 50 Hz आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 4.
एक 60 µF का संधारित्र 110 V, 60 Hz ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q4.1

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प्रश्न 5.
प्रश्न 3 व 4 में एक पूरे चक्र की अवधि में प्रत्येक परिपथ में कितनी नेट शक्ति अवशोषित होती है? अपने उत्तर का विवरण दीजिए।
हल-
प्रश्न 3 व 4 दोनों में ही पूरे चक्र में नेट शून्य शक्ति व्यय होती है।
विवरण- शुद्ध प्रेरित्र तथा शुद्ध धारिता दोनों में धारा तथा विभवान्तर के बीच 90° का कलान्तर होता है।
शक्ति गुणांक cos φ = cos 90° = 0
प्रत्येक में नेट शक्ति व्यय P = Vrms x irms x cos φ = 0

प्रश्न 6.
एक LCR परिपथ की, जिसमें L = 2.0 H, C = 32 µF तथा R = 10 Ω अनुनाद आवृत्ति ωr परिकलित कीजिए। इस परिपथ के लिए Q का क्या मान है?
हल-
दिया है, L = 2.0 हेनरी
C = 32 x 10-6 फैराडे
R = 10 ओम
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 7.
30 µF का एक आवेशित संधारित्र 27 mH के प्रेरित्र से जोड़ा गया है। परिपथ के मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति कितनी है?
हल-
दिया है,
C = 30 µF = 30 x 10-6 F, L = 27 mH = 27 x 10-3 H
प्रारम्भिक आवेश, q0 = 6 mC = 6 x 10-3 C
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 7 में संधारित्र पर प्रारम्भिक आवेश 6 mC है। प्रारम्भ में परिपथ में कुल कितनी ऊर्जा संचित होती है? बाद में कुल ऊर्जा कितनी होगी?
हल-
दिया है, C = 30 x 10-6 F, Q0 = 6 x 10-3 C
प्रारम्भ में परिपथ में संचित ऊर्जा
E = संधारित्र की ऊर्जा + प्रेरित्र की ऊर्जा
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q8
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q8.1
परिपथ में कोई प्रतिरोध नहीं जुड़ा है तथा शुद्ध धारिता तथा शुद्ध प्रेरक में ऊर्जा हानि नहीं होती है। अतः बाद में परिपथ में कुल 0.6 J ऊर्जा ही बनी रहेगी।

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प्रश्न 9.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को, जिसमें R = 20 Ω, L = 1.5 H तथा C = 35 µF, एक परिवर्ती आवृत्ति की 200V ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। जब आपूर्ति की आवृत्ति परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर होती है तो एक पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित की गई माध्य शक्ति कितनी होगी?
हल-
जब आपूर्ति की आवृत्ति = परिपथ की मूल आवृत्ति, तो परिपथ (L-C-R) अनुनादी परिपथ होगा जिसकी प्रतिबाधा Z = ओमीय प्रतिरोध R = 20 ओम
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 10.
एक रेडियो को MW प्रसारण बैण्ड के एक खण्ड के आवृत्ति परास के एक ओर से दूसरी ओर (800 kHz से 1200 kHz) तक समस्वरित किया जा सकता है। यदि इसके LC परिपथ का प्रभावकारी प्रेरकत्व 200 µH हो तो उसके परिवर्ती संधारित्र की परास कितनी होनी चाहिए?
[संकेत : समस्वरित करने के लिए मूल आवृत्ति अर्थात् LC परिपथ के मुक्त दोलनों की आवृत्ति रेडियो तरंग की आवृत्ति के समान होनी चाहिए]
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 11.
चित्र 7.1 में एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथदिखलाया गया है जिसे परिवर्ती आवृत्ति के 230 V के स्रोत से जोड़ा गया है। L = 5.0 H, C = 80 µF, R = 40 Ω.
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current
(a) स्रोत की आवृत्ति निकालिए जो परिपथ में अनुनाद उत्पन्न करे।
(b) परिपथ की प्रतिबाधा तथा अनुनादी आवृत्ति पर धारा का आयाम निकालिए।
(c) परिपथ के तीनों अवयवों के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए। दिखलाइए कि अनुनादी आवृत्ति पर LC संयोग के सिरों पर विभवपात शून्य है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q11.1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 12.
किसी LC परिपथ में 20 mH का एक प्रेरक तथा 50 uF का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश 10 mC है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है t = 0 है।
(a) प्रारम्भ में कुल कितनी ऊर्जा संचित है? क्या यह LC दोलनों की अवधि में संरक्षित है?
(b) परिपथ की मूल आवृत्ति क्या है?
(c) किस समय पर संचित ऊर्जा ।
(i) पूरी तरह से विद्युत है (अर्थात वह संधारित्र में संचित है)?
(ii) पूरी तरह से चुम्बकीय है (अर्थात प्रेरक में संचित है)?
(d) किन समयों पर सम्पूर्ण ऊर्जा प्रेरक एवं संधारित्र के मध्य समान रूप से विभाजित है?
(e) यदि एक प्रतिरोधक को परिपथ में लगाया जाए तो कितनी ऊर्जा अन्ततः ऊष्मा के रूप में क्षयित होगी?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q12
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q12.2

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प्रश्न 13.
एक कुण्डली को जिसका प्रेरण 0.50 H तथा प्रतिरोध 100 Ω है, 240 V व 50 Hz की एक आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) कुण्डली में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) वोल्टेज शीर्ष व धारा शीर्ष के बीच समय-पश्चता (time lag) कितनी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q13.1

प्रश्न 14.
यदि परिपथ को उच्च आवृत्ति की आपूर्ति (240V, 10 kHz) से जोड़ा जाता है तो प्रश्न 13 (a) तथा (b) के उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्ति पर किसी परिपथ में प्रेरक लगभग खुले परिपथ के तुल्य होता है। स्थिर अवस्था के पश्चात किसी dc परिपथ में प्रेरक किस प्रकार का व्यवहार करता है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 15.
40 Ω प्रतिरोध के श्रेणीक्रम में एक 100 μF के संधारित्र को 110 V, 60 Hz की आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) परिपथ में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) धारा शीर्ष व वोल्टेज शीर्ष के बीच समय-पश्चता कितनी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q15
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 16.
यदि परिपथ को 110 V, 12 kHz आपूर्ति से जोड़ा जाए तो प्रश्न 15 (a) व (b) का उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्तियों पर एक संधारित्र चालक होता है। इसकी तुलना उस व्यवहार से कीजिए जो किसी dc परिपथ में एक संधारित्र प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 17.
स्रोत की आवृत्ति को एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ की अनुनासी आवृत्ति के बराबर रखते हु तीन अवयवों L c तथा को समान्तर क्रम में लगाते हैहाल्ल्शाइए किसमान्तर LCR परिपथ में इस आवृत्ति पर कुल धारा न्यूनतम है। इस आवृति के लिए प्रश्न 11 में निर्दिष्ट स्रोत तथा अवयवों के लिए परिपथ की हर शाखा में धारा के rms मान को परिकलित। कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q17
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 18.
एक परिपथ को जिसमें 80 mH का एक प्रेरक तथा 60 µF का संधारित्र श्रेणीक्रम में है, 230V, 50 Hz की आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है।
(a) धारा का आयाम तथा rms मानों को निकालिए।
(b) हर अवयव के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए।
(c) प्रेरक में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(d) संधारित्र में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(e) परिपथ द्वारा अवशोषित कुल माध्य शक्ति कितनी है?
[‘माध्य में यह समाविष्ट है कि इसे पूरे चक्र के लिए लिया गया है।]
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प्रश्न 19.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 18 में प्रतिरोध 15 Ω है। परिपथ के हर अवयव को स्थानान्तरित माध्य शक्ति तथा सम्पूर्ण अवशोषित शक्ति को परिकलित कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 20.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को जिसमें L = 0.12 H, C = 480 nF, R = 23 Ω, 230 V परिवर्ती आवृत्ति वाल स्रोत से जोड़ा गया है।
(a) स्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिस पर धारा आयाम अधिकतम है? इस अधिकतम मान को निकालिए।
(b) स्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिसके लिए परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति अधिकतम है?
(c) स्रोत की किस आवृत्ति के लिए परिपथ को स्थानान्तरित शक्ति अनुनादी आवृत्ति की शक्ति की आधी है?
(d) दिए गए परिपथ के लिए Q कारक कितना है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q20UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 21.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ के लिए जिसमें L = 3.0 H, C = 27 µF तथा R = 7.4 Ω अनुनादी आवृत्ति तथा ९कारक निकालिए। परिपथ के अनुनाद की तीक्ष्णता को सुधारने की इच्छा से “अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई” को 2 गुणक द्वारा घटा दिया जाता है। इसके लिए उचित उपाय सुझाइए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q21
अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई को आधा करने अथवा समान आवृत्ति के लिए Q को दोगुना करने हेतु प्रतिरोध R का आधा कर देना चाहिए।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  1. क्या किसी ac परिपथ में प्रयुक्त तात्क्षणिक वोल्टता परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़े गए अवयवों के सिरों पर तात्क्षणिक वोल्टताओं के बीजगणितीय योग के बराबर होता है? क्या यही बात rms वोल्टताओं में भी लागू होती है?
  2. प्रेरण कुण्डली के प्राथमिक परिपथ में एक संधारित्र का उपयोग करते हैं।
  3. एक प्रयुक्त वोल्टता संकेत एक dc (UPBoardSolutions.com) वोल्टता तथा उच्च आवृत्ति के एक ac वोल्टता के अध्यारोपण से निर्मित है। परिपथ एक श्रेणीबद्ध प्रेरक तथा संधारित्र से निर्मित है। दर्शाइए कि dc संकेत C तथा ac संकेत L के सिरे पर प्रकट होगा।
  4. एक लैम्प से श्रेणीक्रम में जुड़ी चोक को एक dc लाइन से जोड़ा गया है। लैम्प तेजी से चमकता है। चोक में लोहे के क्रोड को प्रवेश कराने पर लैम्प की दीप्ति में कोई अन्तर नहीं पड़ता है। यदि एक ac लाइन से लैम्प का संयोजन किया जाए तो तदनुसार प्रेक्षणों की प्रागुक्ति कीजिए।
  5. ac मेंस के साथ कार्य करने वाली फ्लोरोसेंट ट्यूब में प्रयुक्त चोक कुण्डली की आवश्यकता क्यों होती है? चोक कुण्डली के स्थान पर सामान्य प्रतिरोधक का उपयोग क्यों नहीं होता?

उत्तर-

  1. हाँ, परन्तु यह तथ्य rms वोल्टताओं के लिए सत्य नहीं है क्योंकि विभिन्न अवयवों की rms वोल्टताएँ समान कला में नहीं होती।
  2. संधारित्र को जोड़ने से, परिपथ को तोड़ते समय चिनगारी देने वाली धारा संधारित्र को आवेशित करती है; अतः चिनगारी नहीं निकल पाती।
  3. संधारित्र dc सिग्नल को रोक देता है; अत: dc सिग्नल वोल्टता संधारित्र के सिरों पर प्रकट होगा जबकि ac सिग्नल प्रेरक के सिरों पर प्रकट होगा।
  4. dc लाइन के लिए V = 0
    अतः चोक की प्रतिबाधा XL = 2πvL = 0
    अतः चोक दिष्ट धारा के मार्ग में कोई रुकावट नहीं डालती, इससे लैम्प तेज चमकता है। ac लाइन में चोक उच्च प्रतिघात उत्पन्न करती है (L का (UPBoardSolutions.com) मान अधिक होने के कारण); अतः लैम्प में धारा घट जाती है और उसकी चमक मद्धिम पड़ जाती है।
  5. चोक कुण्डली एक प्रेरक का कार्य करती है और बिना शक्ति खर्च किए ही धारा को कम कर देती है। यदि चोक के स्थान पर प्रतिरोधक का प्रयोग करें तो वह धारा को कम तो कर देगा परन्तु इसमें विद्युत शक्ति ऊष्मा के रूप में व्यय होती रहेगी।

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प्रश्न 23.
एक शक्ति संप्रेषण लाइन अपचायी ट्रांसफॉर्मर में जिसकी प्राथमिक कुण्डली में 4000 फेरे हैं, 2300 वोल्ट पर शक्ति निवेशित करती है। 230V की निर्गत शक्ति प्राप्त करने के लिए द्वितीयक में कितने फेरे होने चाहिए?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 24.
एक जल विद्युत शक्ति संयंत्र में जल दाब शीर्ष 300 m की ऊँचाई पर है तथा उपलब्ध जल प्रवाह 100 m3s-1 है। यदि टरबाइन जनित्र की दक्षता 60% हो तो संयंत्र से उपलब्ध विद्युत शक्ति का आकलन कीजिए, g = 9.8 m s-2
हल-
दिया है, h = 300m, g = 9.8m/s, जल का आयतन V = 100 m3, समय t = 1 s, जनित्र की दक्षता = 60%
जल विद्युत शक्ति = जल-स्तम्भ का दाब x प्रति सेकण्ड प्रवाहित जल का आयतन
= hvg x V= 300 x 10 x 9.8 x 100 = 29.4 x 107 W
जनित्र द्वारा उत्पन्न विद्युत शक्ति = कुल शक्ति x दक्षता
= 29.4 x 107 x [latex]\frac { 60 }{ 100 }[/latex]
= 176.4 x 106 W = 176.4 MW

प्रश्न 25.
440V पर शक्ति उत्पादन करने वाले किसी विद्युत संयंत्र से 15 km दूर स्थित एक छोटे से कस्बे में 220 V पर 800 kW शक्ति की आवश्यकता है। विद्युत शक्ति ले जाने वाली दोनों तार की लाइनों का प्रतिरोध 0.5 Ω प्रति किलोमीटर है। कस्बे को उप-स्टेशन में लगे 4000-220V अपचायी ट्रांसफॉर्मर से लाइन द्वारा शक्ति पहुँचती है।
(a) ऊष्मा के रूप में लाइन से होने वाली शक्ति के क्षय का आकलन कीजिए।
(b) संयंत्र से कितनी शक्ति की आपूर्ति की जानी चाहिए, यदि क्षरण द्वारा शक्ति का क्षय नगण्य है।
(c) संयंत्र के उच्चायी ट्रांसफॉर्मर की विशेषता बताइए।
हल-
(a) तार की लाइनों का प्रतिरोध R = 30 km x 0.5 Ω km-1 = 15 Ω
उप-स्टेशन पर लगे ट्रांसफॉर्मर के लिए Vp = 4000 V, Vs = 220 v माना।
प्राथमिक परिपथ में धारा = ip
द्वितीयक परिपथ में धारा = is
ट्रांसफॉर्मर द्वारा द्वितीयक परिपथ में दी गई शक्ति
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यह धारा सप्लाई लाइन से होकर गुजरती है।
लाइन में होने वाला शक्ति क्षय P = ip2 x R = (200)2 x 15 W = 600 kW

(b) संयंत्र द्वारा आपूर्ति की जाने वाली शक्ति = 800 kW + 600 kW = 1400 kW

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात V = ip x R = 200 x 15 = 3000 V
उप-स्टेशन पर लगा अपचायी ट्रांसफॉर्मर 4000 V – 220 V प्रकार का है;
अतः इस ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली पर विभवपात = 4000 V
संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली वोल्टता = 3000 + 4000 = 7000 V
अत: यह ट्रांसफॉर्मर 440 V – 7000 V प्रकार का होना चाहिए।
सप्लाई लाइन में प्रतिशत शक्ति क्षय = [latex]\frac { 600 kW }{ 1400 kW }[/latex] x 100 = 42.86 %

प्रश्न 26.
प्रश्न 25 को पुनः कीजिए। इसमें पहले के ट्रांसफॉर्मर के स्थान पर 40,000-220 V का अपचायी ट्रांसफॉर्मर है। [पूर्व की भाँति क्षरण के कारण हानियों को नगण्य मानिए। यद्यपि अब यह सन्निकटन उचित नहीं है, क्योंकि इसमें उच्च वोल्टता पर संप्रेषण होता है] अतः समझाइए कि क्यों उच्च वोल्टता संप्रेषण अधिक वरीय है?
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(b) संयंत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली शक्ति = 800 kW + 6 kW = 808 W

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात V = Ip x R = 20 x 15 = 300 V
उपस्टेशन पर लगा ट्रांसफॉर्मर 40000 V – 220 V प्रकार का है; अतः इसकी।
प्राथमिक कुण्डली पर विभवपात = 40000 V
संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली
वोल्टता = 40000 V + 300 V = 40300 V
संयंत्र पर लगा ट्रांसफॉर्मर 440 V – 40300 V प्रकार का होना चाहिए।
सप्लाई लाइन में प्रतिशत शक्ति क्षय = [latex]\frac { 6 }{ 806 }[/latex] x 100 = 0.74%

प्रत्यावर्ती धारा 247 प्रश्न 25 व 26 के हलों से स्पष्ट है कि विद्युत शक्ति उच्च वोल्टता पर सम्प्रेषित करने से सप्लाई लाइन में होने वाला शक्ति क्षय बहुत घट जाता है। यही कारण है (UPBoardSolutions.com) कि विद्युत उत्पादन संयंत्रों से विद्युत शक्ति का सम्प्रेषण उच्च वोल्टता पर किया जाता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वोल्टमीटर द्वारा मापे गए प्रत्यावर्ती धारा के मेन्स का विभव 200 वोल्ट प्राप्त होता है, तो इस विभव का वर्ग-माध्य-मूल मान होगा- (2017)
(i) 200√2 वोल्ट
(ii) 100√2 वोल्ट
(iii) 200 वोल्ट
(iv) 400/π वोल्ट
उत्तर-
(iii) 200 वोल्ट

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प्रश्न 2.
एक ऐमीटर का प्रत्यावर्ती परिपथ में पाठ्यांक 4 ऐम्पियर है। परिपथ में धारा का शिखर मान है- (2014)
(i) 4 ऐम्पियर
(ii) 8 ऐम्पियर
(iii) 4√2 ऐम्पियर
(iv) 2√2 ऐम्पियर
उत्तर-
(iii) 4√2 ऐम्पियर

प्रश्न 3.
विशुद्ध प्रेरकीय परिपथ में शक्ति गुणांक का मान है- (2011)
(i) शून्य
(ii) 0.1
(iii) 1
(iv) अनन्त
उत्तर-
(i) शून्य

प्रश्न 4.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में 8 ओम का प्रतिरोध तथा 6 ओम प्रतिघात का प्रेरकत्व श्रेणीक्रम में लगे हैं। परिपथ की प्रतिबाधा होगी
(i) 2 ओम
(ii) 10 ओम
(iii) 14 ओम
(iv) 14√2 ओम
उत्तर-
(ii) 10 ओम

प्रश्न 5.
अनुनाद की स्थिति में L-C परिपथ की आवृत्ति है- (2010, 17)
(i) 2π√LC
(ii) [latex s=2]\frac { 1 }{ 2\Pi } \sqrt { LC }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { 1 }{ 2\Pi } \sqrt { \frac { 1 }{ LC } }[/latex]
(iv) [latex s=2]2\Pi \sqrt { \frac { 1 }{ LC } }[/latex]
उत्तर-
(iii) [latex s=2]\frac { 1 }{ 2\Pi } \sqrt { \frac { 1 }{ LC } }[/latex]

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प्रश्न 6.
एक श्रेणी अनुनादी LCR परिपथ में धारिता C से 4C परिवर्तित की जाती है। उतनी ही अनुनादी आवृत्ति के लिए प्रेरकत्व Lको परिवर्तित करना चाहिए- (2016)
(i) 2L
(ii) [latex]\frac { L }{ 2 }[/latex]
(iii) 4L
(iv) [latex]\frac { L }{ 4 }[/latex]
उत्तर-
(iv) [latex]\frac { L }{ 4 }[/latex]

प्रश्न 7.
एक L-C-R परिपथ को प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत से जोड़ा गया है। अनुनाद की स्थिति में लगाये गये विभवान्तर एवं प्रवाहित धारा में कलान्तर होगा- (2017)
(i) शून्य
(ii) [latex s=2]\frac { \Pi }{ 4 }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { \Pi }{ 2 }[/latex]
(iv) π
उत्तर-
(i) शून्य

प्रश्न 8.
किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में वोल्टेज V तथा धारा i हो तब शक्ति क्षय- (2014)
(i) Vi
(ii) [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] Vi
(ii) [latex s=2]\frac { 1 }{ \surd 2 }[/latex] Vi
(iv) V तथा के बीच कला कोण पर निर्भर करता है।
उत्तर-
(iv) V तथा i के बीच कला कोण पर निर्भर करता है।

प्रश्न 9.
किसी ट्रांसफॉर्मर में क्या सम्भव नहीं है ? (2010)
(i) भंवर धारा
(ii) दिष्ट धारा
(iii) प्रत्यावर्ती धारा
(iv) प्रेरित धारा
उत्तर-
(ii) दिष्ट धारा

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में विभवान्तर का वंर्ग-माध्य-मूल मान 220 V है। विभव का शिखर मान क्या है? (2014)
हल-
विभव का शिखर मान V0 = Vrms √2 = 200√2 वोल्ट.

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प्रश्न 2.
किसी प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग-माध्य-मूल मान 8 ऐम्पियर है। इसका शिखर मान ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
धारा का शिखर मान i0 = irms √2 = 8√2 ऐम्पियर

प्रश्न 3.
किसी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा का शीर्ष मान √2 A है। धारा का वर्ग-माध्य-मूल (rms) मान ज्ञात कीजिए। (2015)
हल-
धारा का वर्ग-माध्य-मूल (rms) मान
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प्रश्न 4.
एक प्रत्यावर्ती विभव E = 240√2 sin300πt से प्रदर्शित है। विभव का वर्ग-माध्य-मूल मान एवं आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल-
प्रत्यावर्ती विभव के समीकरण E = 240√2 sin300πt की तुलना E = E0 sinωt से करने पर
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प्रश्न 5.
एक प्रत्यावर्ती धारा का समीकरण i = 4 sin (100πt – θ) है। धारा का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए। (2017)
हल-
समीकरण i = 4 sin (100πt – θ) की समीकरण i = i0 sin (2πft – θ) से तुलना करने पर
2πft = 100πt
f = 50 हर्ट्ज़
धारा का आवर्तकाल T = [latex]\frac { 1 }{ f }[/latex] = [latex]\frac { 1 }{ 50 }[/latex] = 0.2 सेकण्ड

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प्रश्न 6.
एक प्रत्यावर्ती वोल्टता का समीकरण V = 100√2 sin (100πt) है। वोल्टता का वर्ग माध्य मूल मान तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए। (2017)
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प्रश्न 7.
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रेरण प्रतिघात का अर्थ समझाइए। (2013)
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में शुद्ध प्रेरकत्व द्वारा धारा के मार्ग में उत्पन्न प्रभावी प्रतिरोध परिपथ को प्रेरण प्रतिघात कहलाता है। इसे XL से व्यक्त करते हैं तथा
XL = ωL = 2πfL

प्रश्न 8.
100 mH प्रेरकत्व की कुण्डली में 50 Hz आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली का प्रेरण प्रतिघात ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
L = 100 mH = 100 x 10-3 H = 0.1 H
f = 50 Hz
प्रेरण प्रतिघात XL = 2πfL = 2 x 3.14 x 50 x 0.1 = 31.4 ओम

प्रश्न 9.
निम्न चित्र से प्रेरक कुण्डली के प्रतिघात की गणना कीजिए- (2012)
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हल-
दी गयी समीकरण V = 10 sin 1000 t की समीकरण V = V0 sinωt है से तुलना करने पर
ω = 1000 सेकण्ड-1
कुण्डली का प्रतिघात XL = ωL = 1000 x 20 x 10-3 Ω = 20 Ω

प्रश्न 10.
किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में 8 ओम का प्रतिरोध 6 ओम प्रतिघात के प्रेरकत्व से श्रेणीक्रम में जुड़ा है। परिपथ के प्रतिबाधा की गणना कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 10

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प्रश्न 11.
एक कुण्डली की प्रतिबाधा 141.4 Ω तथा प्रतिरोध 100 Ω है। उसका प्रतिघात कितना होगा ? (2010)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 11.1
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प्रश्न 12.
L-R परिपथ के शक्ति गुणांक का सूत्र लिखिए। (2011)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 12

प्रश्न 13.
कुण्डली में उत्पन्न वैद्युत वाहक बल का व्यंजक कोणीय चाल के पदों में लिखिए। (2014)
उत्तर-
कुण्डली में उत्पन्न वैद्युत वाहक बल e = NBAω sinωt
sinωt की महत्तम मान 1 होता है तब वैद्युत वाहक बल e = NBAω

प्रश्न 14.
प्रत्यावर्ती धारा तथा प्रत्यावर्ती वोल्टेज के समीकरण लिखिए जब प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से एक संधारित्र जोड़ा जाता है। (2013)
उत्तर-
i = i0 sin(ωt + 90°) तथा V = V0 sin ωt.
इन दोनों समीकरणों से स्पष्ट है कि धारा i वोल्टता V से 90° कलान्तर अग्रगामी है।

प्रश्न 15.
एक LC परिपथ अनुनाद की स्थिति में है। यदि C = 1.0 x 10-6 F तथा L = 0.25 H हो, तो परिपथ में दोलन की आवृत्ति ज्ञात कीजिए। (2015)
हल-
परिपथ में दोलन की आवृत्ति
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प्रश्न 16.
RC का विमीय समीकरण निकालिए जबकि R प्रतिरोध तथा C धारिता है। (2017)
हल-
RC की विमा = [R की विमा] [C की विमा]
= [ML2T-3A-2][M-1L-2T4A2]
= [M0L0T]

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प्रश्न 17.
एक L-C-R परिपथ के शक्ति गुणांक का व्यंजक क्या है? इसका अधिकतम और न्यूनतम मान क्या है? (2014, 17, 18)
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प्रश्न 18.
नीचे दिए गए प्रत्यावर्ती परिपथ (i), (ii) व (iii) में आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टेज की आवृत्ति बढ़ाने पर धारा के मान पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (2012, 14)

उत्तर-
परिपथ (i) में धारा घट जायेगी क्योंकि परिपथ का प्रभावी प्रतिरोध XL (= ωL) आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ जायेगा। परिपथ (ii) में वही धारा रहेगी क्योंकि प्रतिरोध R वोल्टेज की आवृत्ति पर निर्भर नहीं करता। परिपथ (ii) में धारा बढ़ जायेगी क्योंकि इसका प्रभावी प्रतिरोध XC = ([latex s=2]\frac { 1 }{ \omega c }[/latex]) आवृत्ति बढ़ाने पर घट जायेगा।

प्रश्न 19.
L-C-Rपरिपथ में अनुनाद की दशा में शक्ति गुणांक का मान कितना होता है? (2014)
उत्तर-
L-C-R परिपथ में अनुनाद की दशा में शक्ति गुणांक का मान 1 होता है।

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प्रश्न 20.
चित्र 7.4 में प्रत्यावर्ती वोल्टमीटर द्वारा नापे गए विभवान्तर VL, VC तथा VR क्रमशः 20 V, 11 V तथा 12 V प्राप्त हुए। परिणामी विभवान्तर तथा परिपथ धारा में कलान्तर ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
परिणामी विभवान्तर तथा परिपथ धारा में कलान्तर

प्रश्न 21.
दिए गए परिपथ में प्रत्यावर्ती स्रोत का विद्युत वाहक बल तथा परिपथ का शक्ति गुणांक ज्ञात कीजिए। (2017, 18)

प्रश्न 22.
वैद्युत अनुनाद से आप क्या समझते हैं? (2015)
उत्तर-
किसी वैद्युत परिपथ की वह स्थिति, जब किसी विशेष अनुनादी आवृत्ति पर उस परिपथ की प्रतिबाधाओं या प्रवेश्यता के मान परस्पर निरस्त हो जाएँ, ‘वैद्युत अनुनाद’ कहलाती है।

प्रश्न 23.
दिष्ट धारा परिपथ में ट्रांसफॉर्मर का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है? (2012)
उत्तर-
दिष्ट धारा परिपथ में ट्रांसफॉर्मर का उपयोग (UPBoardSolutions.com) नहीं किया जा सकता क्योंकि दिष्ट धारा से क्रोड में परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न नहीं हो सकता।

प्रश्न 24.
एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर 220 वोल्ट पर कार्य करता है तथा एक लोड में 3 ऐम्पियर धारा देता है। प्राथमिक तथा द्वितीयक फेरों की संख्या का अनुपात 1:15 है। प्राथमिक कुण्डली में धारा की गणना कीजिए। (2009)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 24

लघु उत्तरीय प्रश्न

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प्रश्न 1.
प्रत्यावर्ती धारा के वर्ग-माध्य-मूल मान का व्यंजक प्राप्त कीजिए। किसी प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान 10√2 ऐम्पियर है। धारा का वर्ग-माध्य-मूल मान ज्ञात कीजिए। (2015, 17, 18)
हल-
प्रत्यावर्ती धारा की एक पूर्ण साइकिल के लिए धारा के वर्ग i2 के औसत मान के वर्गमूल को धारी का ‘वर्ग-माध्य-मूल मान’ (rms value) कहते हैं। इसे irms से प्रदर्शित करते हैं।
एक पूर्ण साइकिल के लिए i2 का माध्य (औसत) मान
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प्रश्न 2.
प्रत्यावर्ती वोल्टता के वर्ग-माध्य-मूल मान की परिभाषा लिखिए। एक प्रत्यावर्ती वोल्टता का समीकरण V = 300√2 sin500πt वोल्ट है। प्रत्यावर्ती धारा के वर्ग-माध्य-मूल मान एवं आवृत्ति की गणना कीजिए। (2016)
उत्तर-
प्रत्यावर्ती वोल्टता का वर्ग-माध्य-मूल मान- (UPBoardSolutions.com) प्रत्यावर्ती वोल्टेज की एक पूर्ण साइकिल के लिए वोल्टेज के वर्ग के औसत मान के वर्गमूल को वोल्टता का वर्ग-मध्य-मूल मान कहते हैं। इसे Vrms से प्रदर्शित करते हैं।
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प्रश्न 3.
0.21 हेनरी का प्रेरक तथा 12 ओम का प्रतिरोध 220 वोल्ट एवं 50 हर्ट्ज के प्रत्यावर्ती आवृत्ति धारा स्रोत से जुड़े हैं। परिपथ में धारा का मान और धारा एवं स्रोत के विभवान्तर में कलान्तर ज्ञात कीजिए। (2014)
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प्रश्न 4.
दिए गए वैद्युत परिपथ में प्रतिबाधा, ऐमीटर का पाठ्यांक एवं शक्ति गुणांक ज्ञात कीजिए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 4
हल-
यहाँ, R = 40 Ω, L = 0.1 हेनरी
दी गई समीकरण V = 200 sin300t की तुलना
समीकरण V = V0 sinωt से करने पर,
V0 = 200 वोल्ट, ω = 300 रेडियन/सेकण्ड
प्रेरण प्रतिघात = XL = ωL = 300 x 0.1 = 30 Ω
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प्रश्न 5.
0.1 हेनरी का प्रेरकत्व तथा 30 ओम प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में V = 10 sin400t प्रत्यावर्ती वोल्टेज से जोड़ा गया है। परिपथ में प्रेरण प्रतिघात, प्रतिबाधा, धारा का शिखर मान एवं वोल्टेज और धारा के बीच कलान्तर ज्ञात कीजिए। (2014)
हल-
दी गयी समीकरण V = 10 sin400t वोल्ट की प्रत्यावर्ती वोल्टता समीकरण V= V0sinωt से तुलना करने पर,
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प्रश्न 6.
प्रतिघात का विमीय समीकरण लिखिए। दिए गये परिपथ में ज्ञात कीजिए-
(i) परिपथ में प्रवाहित धारा का अधिकतम मान
(ii) परिपथ में प्रवाहित धारा का वर्ग-माध्य-मूल मान
(iii) वोल्टता एवं धारा में कलान्तर। (2013)

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 6
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 6.1

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प्रश्न 7.
प्रत्यावर्ती परिपथ के लिए औसत शक्ति का व्यंजक प्राप्त कीजिए तथा वाटहीन धारा को समझाइए। (2010, 12)
या
वाटहीन धारा क्या है ? (2012, 15, 17)
या
किसी प्रत्यावर्ती धारा की शक्ति के लिए सूत्र ज्ञात कीजिए। शक्ति गुणांक किसे कहते हैं? (2013)
या
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में व्यय शक्ति का सूत्र लिखिए। (2018)
उत्तर-
LR परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा की औसत शक्ति-यदि किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रतिरोध है तथा प्रेरकत्व L दोनों हैं तो धारा i वोल्टता V से कला में पश्चगामी होती (UPBoardSolutions.com) है। यदि धारा और वोल्टता के बीच का कलान्तर φ है तो परिपथ के लिए किसी क्षण वोल्टता तथा धारा के मान निम्नलिखित समीकरणों से व्यक्त कर सकते हैं।
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प्रश्न 8.
चोक कुण्डली का कार्य-सिद्धान्त समझाइए। चोक कुण्डली में वाटहीन धारा के महत्त्व को समझाइए। (2010, 12, 14, 17)
उत्तर-
चोक कुण्डली- प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में वैद्युत ऊर्जा का ह्रास हुए बिना धारा को कम करने का एक साधन उपलब्ध है जिसे चोक कुण्डली कहते हैं। यह एक ऊँचे (UPBoardSolutions.com) प्रेरकत्व की कुण्डली होती है जो एक पृथक्कृत (insulated) ताँबे के मोटे तार को बहुत-से फेरों में लोहे की पटलित क्रोड पर लपेटकर बनायी जाती है। इस कुण्डली का ओमीय प्रतिरोध लगभग शून्य रहता है। इसका प्रेरकत्व काफी ऊँचा रहता है।
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इस प्रकारे समी० (1) के अनुसार चोक कुण्डली में औसत शक्ति लगभग शून्य होगी। इस प्रकार चोक कुण्डली का कार्य-सिद्धान्त वाटहीन धारा के सिद्धान्त पर आधारित है। अतः प्रत्यावर्ती धारा परिपथों में चोक कुण्डली के उपयोग से ऊर्जा क्षय में पर्याप्त कमी हो जाती है।

प्रश्न 9.
10 वोल्ट, 2 कीटंक बल्ब को 100 वोल्ट, 40 हर्ट्ज के प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से जलाना है। बल्ब के श्रेणीक्रम में जोड़े जाने हेतु आवश्यक चोक-कुण्डली के प्रेरकत्व की गणना कीजिए। (2014)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 9.1

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प्रश्न 10.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में 100 हर्टज आवृत्ति पर सप्लाई विभवान्तर 80 वोल्ट है। एक संधारित्र को श्रेणीक्रम में 10 ओम प्रतिरोधक के साथ इस परिपथ में जोड़ा जाता है तो परिपथ का शक्ति गुणांक 0.5 हो जाता है। इस संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए। (2015)
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प्रश्न 11.
एक 50 वाट 100 वोल्ट के वैद्युत लैम्प को 200 वोल्ट, 60 हर्ट्ज के विद्युत मेन्स से जोड़ना है। लैम्प के श्रेणी क्रम में आवश्यक संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 11
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 12.
दिए गए परिपथ में ज्ञात कीजिए (i) ऐमीटर (A) का पाठ्यांक (ii) वोल्टमीटर (V) का पाठ्यांक (iii) शक्ति-गुणांक। (2013, 17)
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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q12.1

प्रश्न 13.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रेरकत्व (L), संधारित्र (C) तथा प्रतिरोध (R) श्रेणीक्रम में जोड़े गये हैं। परिपथ से L को हटा देने पर वोल्टता तथा विद्युत धारा के बीच 1/3 का कलान्तर होता है। यदि के बजाय परिपथ सेc को हटा दें तब भी कलान्तर [latex s=2]\frac { \Pi }{ 3 }[/latex] रहता है। परिपथ का शक्ति गुणांक क्या होगा? (2015)
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प्रश्न 14.
एक प्रत्यावर्ती परिपथ में प्रतिरोध, संधारित्र तथा प्रेरण कुण्डली एक प्रत्यावर्ती स्रोत से श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। इनके सिरों के विभवान्तर क्रमशः 40 वोल्ट, 20 वोल्ट तथा 50 वोल्ट हैं। परिपथ में प्रत्यावर्ती स्रोत का विभव एवं परिपथ का शक्ति-गुणांक ज्ञात कीजिए। (2012, 15)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 14

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प्रश्न 15.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रेरकत्व, संधारित्र तथा प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़े गये हैं। प्रत्यावर्ती वोल्टेज तथा धारा के समीकरण दिये गये हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 15
ज्ञात कीजिए-
(i) प्रत्यावर्ती धारा स्रोत की आवृत्ति
(ii) V तथा i के मध्य कलान्तर
(iii) परिपथ की प्रतिबाधा। (2013)
हल-
धारा तथा वोल्टता के समीकरणों से स्पष्ट है कि
V0 = 200 वोल्ट, i0 = 5 ऐम्पियर
तथा ω = 314 रेडियन/सेकण्ड
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प्रश्न 16.
एक श्रेणी L-C-R परिपथ, जिसमें L = 10.0 H, C = 40 µF तथा R = 60 Ω को 240 V के परिवर्ती आवृत्ति के प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से जोड़ा गया है। गणना कीजिए-
(i) स्रोत की कोणीय आवृत्ति जो परिपथ को अनुनाद की अवस्था में लाता है।
(ii) अनुनादी आवृत्ति पर धारा। (2014)
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प्रश्न 17.
चित्र 7.12 में प्रदर्शित प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रतिरोध R, संधारित्र C तथा प्रेरक कुण्डली L के सिरों के बीच उपलब्ध विभवान्तर प्रदर्शित किए गए हैं। प्रत्यावर्ती धारा स्रोत के विद्युत वाहक बले की गणना कीजिए। (2015)
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प्रश्न 18.
अनुनादी परिपथ से क्या अभिप्राय है? श्रेणी व समान्तर अनुनादी परिपथ के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध तथा प्रत्येक अनुनाद की स्थिति में आवृत्ति का व्यंजक लिखिए। इनमें अन्तर भी स्पष्ट कीजिए। (2010)
उत्तर-
अनुनादी परिपथ (Resonant Circuits)- वे प्रत्यावर्ती धारा परिपथ जो अपने पर आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति के एक विशेष मान के संगत प्रत्यावर्ती धारा को अपने अन्दर से प्रवाहित होने देते हैं अथवा प्रवाहित होने से रोक देते हैं, अनुनादी परिपथ कहलाते हैं। ये निम्न दो प्रकार के होते हैं-

1. श्रेणी अनुनादी परिपथ (Series Resonant Circuit)- वह प्रत्यावर्ती धारा परिपथ जिसमें प्रेरकत्व L, धारिता C तथा प्रतिरोध R परस्पर श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं तथा यह परिपथ इस पर आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति के एक विशेष मान fo के संगत अधिकतम प्रत्यावर्ती धारा (UPBoardSolutions.com) को अपने अन्दर से प्रवाहित होने देता है, श्रेणी अनुनादी परिपथ कहलाता है।
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2. समान्तर अनुनादी परिपथ (Parallel Resonant Circuit)- वह प्रत्यावर्ती धारा परिपथ जिसमें कुण्डली (प्रेरकत्व = L) व संधारित्र (धारिता = C) प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत से समान्तर क्रम में जुड़े हों तथा यह परिपथ इस पर आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति के विशेष मान fo के संगत धारा को अपने अन्दर से प्रवाहित नहीं होने देता हो; समान्तर अनुनादी परिपथ कहलाता है। यह विशेष आवृत्ति fo इसकी अनुनादी आवृत्ति कहलाती है। यह (L-C) परिपथ की स्वाभाविक आवृत्ति होती है।
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प्रश्न 19.
L-C-R संयोजन के लिए श्रेणी क्रम अनुनादी परिपथ बनाइए। इस परिपथ के लिए अनुनादी आवृत्ति का सूत्र प्राप्त कीजिए। (2017)
या
एक प्रत्यावर्ती वोल्टेज स्रोत V = V0 sinωt से प्रेरकत्व L संधारित्र C तथा प्रतिरोध R श्रेणी क्रम में जुड़े हैं। वेक्टर आरेख खींचकर परिपथ की प्रतिबाधा तथा कला कोण के सूत्र निकालिए। (2016)
या
किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में L, C और R श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। इस परिपथ का आरेख बनाइए। परिपथ की प्रतिबाधा एवं अनुनादी आवृति के लिए सूत्र लिखिए। यदि परिपथ में लगा प्रत्यावर्ती विभव 300 वोल्ट हो, प्रेरण प्रतिघात 50 ओम, धारितीय प्रतिघात 50 ओम तथा ओमीय प्रतिरोध 10 ओम हों तो परिपथ की प्रतिबाधा तथा L, C व R के सिरों के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए।
या
प्रत्यावर्ती वोल्टेज स्रोत V = V0 sinωt से विप्रेरक L संधारित C तथा प्रतिरोध R तीनों श्रेणी क्रम में जुड़े हैं। सिद्ध कीजिए कि परिपथ की प्रतिबाधा Z का मान
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हल-
माना प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में, प्रेरकत्व L की एक कुण्डली, धारिता C का संधारित्र तथा प्रतिरोध R को श्रेणीक्रम में जोड़कर प्रत्यावर्ती धारा-स्रोत V = V0 sinωt से जोड़ देते हैं [चित्र 7.15 (a)]। इस दशा में प्रतिरोध R के सिरों के बीच प्रेरित विभवान्तर VR तथा धारा i समान कला में होंगे, (UPBoardSolutions.com) प्रेरकत्व L के सिरों के बीच प्रेरित विभवान्तर VL, धारा i से कला में 90° अग्रगामी होगा तथा धारिता C सिरों के बीच प्रेरित विभवान्तर VC, धारा i से कला में 90° पश्चगामी होगा। [चित्र 7.15 (b) ]। अतः VL तथा VC का परिणामी विभवान्तर VL – VC होगा। यदि L-C-R परिपथ में परिणामी विभवान्तर V हो, तब
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प्रश्न 20.
एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक एवं द्वितीयक कुण्डलियों में फेरों की संख्या क्रमशः 1100 एवं 110 है। प्राथमिक कुण्डली में सप्लाई वोल्टेज 220 वोल्ट है। यदि द्वितीयक कुण्डली से जुड़े यंत्र की प्रतिबाधा 220 ओम हो, तो प्राथमिक कुण्डली द्वारा ली गई धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2014)
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प्रश्न 21.
220 वोल्ट आपूर्ति से किसी आदर्श ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली द्वारा उस समय कितनी धारा ली जाती है जब यह 110V-550 W के रेफ्रिजरेटर को शक्ति प्रदान करता (2017)
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प्रश्न 22.
एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक तथा द्वितीयक कुण्डलियों में फेरों की संख्याओं का अनुपात 1 : 200 है। यदि इसे 200 वोल्ट की प्रत्यावर्ती धारा की मेन लाइन से जोड़ दें तो द्वितीयक में प्राप्त वोल्टता ज्ञात कीजिए। यदि प्राथमिक में धारा का मान 2.0 ऐम्पियर हो तो द्वितीयक में प्रवाहित अधिकतम धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2013)
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ट्रांसफॉर्मर की रचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। (2017)
या
ट्रांसफॉर्मर का नामांकित चित्र बनाइए तथा उसके परिणमन अनुपात का सूत्र व्युत्पादित कीजिए। (2010)
या
ट्रांसफॉर्मर का सिद्धान्त क्या है? (2018)
उत्तर-
ट्रांसफॉर्मर (Transformer)- अन्योन्य प्रेरण (mutual induction) के सिद्धान्त पर आधारित यह एक ऐसी युक्ति है जिससे प्रत्यावर्ती धारा के विभव को कम अथवा अधिक किया जाता है। ट्रांसफॉर्मर केवल प्रत्यावर्ती धारा या विभव को ही परिवर्तित करने के काम आते हैं, दिष्ट धारा या विभव के परिवर्तन में नहीं। ये दो प्रकार के होते हैं-

  1. उच्चायी ट्रांसफॉर्मर (Step-up Transformer)- इनके द्वारा कम विभवे वाली प्रबल प्रत्यावर्ती धारा को ऊँचे विभव वाली निर्बल धारा में बदला जाता है।
  2. अपचायी ट्रांसफॉर्मर (Step-down Transformer)- इनके द्वारा ऊँचे विभव वाली निर्बल प्रत्यावर्ती धारा को कम विभव वाली प्रबल धारा में बदला जाता है।

रचना- इसमें कच्चे लोहे की आयताकार गोलाकार मुड़ी हुई पत्तियाँ एक पटलित क्रोड (laminated core) के रूप में होती हैं। ये पत्तियाँ एक-दूसरे के ऊपर वार्निश से जोड़ दी जाती हैं जिससे कि ये एक-दूसरे से पृथक्कृत रहें। फलतः क्रोड में कम भंवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं और वैद्युत ऊर्जा का ह्रास घट जाता है। इस क्रोड पर ताँबे के तार की दो कुण्डलियाँ इस प्रकार लपेटी जाती हैं कि वे एक-दूसरे से (UPBoardSolutions.com) तथा लोहे की क्रोड से पृथक्कृत रहें [चित्र 7.16 (a)] इनमें से एक पर ताँबे के मोटे तार के कम फेरे होते हैं तथा दूसरी में ताँबे के पतले तार के अधिक फेरे होते हैं। इनमें एक को प्राथमिक कुण्डली (Primary coil) और दूसरी को ‘द्वितीयक कुण्डली’ (Secondary coil) कहते हैं। उच्चायी ट्रांसफॉर्मर में मोंटे तार की कम फेरों वाली प्राथमिक कुण्डली होती है, और पतले तार की अधिक फेरों वाली कुण्डली द्वितीयक कुण्डली होती है [चित्र 7.16 (b)] अपचायी ट्रांसफॉर्मर में इसके विपरीत होता है [चित्र 7.16 (c)]]
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कार्यविधि- जिस वि० वा० बल को परिवर्तित करना होता है, उसे सदैव प्राथमिक कुण्डली से जोड़ते हैं। जब प्राथमिक कुण्डली में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है तो धारा के प्रत्येक चक्कर में क्रोड एक बार एक दिशा में चुम्बकित होती है तथा दूसरी बार दूसरी दिशा में। अतः क्रोड में एक परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस प्रकार प्राथमिक कुण्डली की वैद्युत-ऊर्जा का क्रोड में चुम्बकीय ऊर्जा के रूप में स्थानान्तरण हो जाता है। चूंकि द्वितीयक कुण्डली इस क्रोड पर लिपटी रहती है, अतः क्रोड के बार-बार चुम्बकन तथा विचुम्बकन होने की क्रिया से इस कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय-फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है। इस प्रकार (UPBoardSolutions.com) वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के प्रभाव से द्वितीयक कुण्डली में उसी आवृत्ति का प्रत्यावर्ती वि० वा० बल उत्पन्न हो जाता है। इस प्रेरित वि० वा० बल का मान दोनों कुण्डलियों के फेरों की संख्या के अनुपात तथा प्राथमिक कुण्डली को दिये गये वि० वा० बल पर निर्भर करता है। माना कि प्राथमिक एवं द्वितीयक कुण्डलियों में तार के फेरों की संख्या क्रमशः N, और N, हैं। मान लो कि चुम्बकीय फ्लक्स का कोई क्षरण (leakage) नहीं होता है जिससे कि दोनों कुण्डलियों के प्रत्येक फेरे में से समान फ्लक्स गुजरता है। माना कि किसी क्षण कुण्डलियों के प्रत्येक फेरे से बद्ध फ्लक्स का मान ऎ है। तब फैराडे के वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के नियमानुसार प्राथमिक कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वि० वा० बल
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यदि प्राथमिक परिपथ का प्रतिरोध नगण्य हो तथा ऊर्जा का कोई क्षय न हो तो प्राथमिक कुण्डली में प्रेरित वि० वा० बल ep, का मान प्राथमिक परिपथ में लगाये गये विभवान्तर Vp के तुल्य (लगभग) होगा। इसके अतिरिक्त यदि द्वितीयक परिपथ खुला हो (अर्थात् प्रतिरोध अनन्त हो) तो द्वितीयक कुण्डली के सिरों के बीच विभवान्तर Vs उसमें उत्पन्न प्रेरित वि० वा० बल es के तुल्य होगा। इन आदर्श परिस्थितियों में
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current LAQ 1.2जहाँ r को ‘परिणमन-अनुपात’ (transformation ratio) कहते हैं। उच्चायी ट्रांसफॉर्मर के लिए r का मान r से अधिक तथा अपचायी ट्रांसफॉर्मर के लिए 1 से कम होता है।

यदि ट्रांसफॉर्मर द्वारा वैद्युत विभव को बढ़ाना है तो विद्युत वाहक बल के स्रोत को उस कुण्डली से सम्बन्धित करते हैं जिसके तार मोटे हैं और जिसमें फेरों की संख्या कम होती है। उपर्युक्त सूत्र से स्पष्ट है। कि इस दशा में Vs, Vp से बड़ा होगा; अर्थात् r का माने 1 से अधिक होगा। (UPBoardSolutions.com) वैद्युत-विभव को कम करने के लिए विद्युत वाहक बल के स्रोत को पतले तार से बनी अधिक फेरों वाली कुण्डली से जोड़ते हैं। स्पष्ट है कि इस दशा में Vs का मान Vp से कम होगा जिसके फलस्वरूप r का मान 1 से कम होगा।

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प्रश्न 2.
एक समांग चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् किसी अक्ष के परितः कोणीय वेग से घूमती हुई आयताकार कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र निगमित कीजिए। प्रेरित विद्युत वाहक बल कब महत्तम होगा और कब शून्य? (2011)
उत्तर-
माना एक कुण्डली के तल का क्षेत्रफल A है तथा इसमें तार के N फेरे हैं। इस कुण्डली को एक नियत कोणीय वेग ω से चित्र 7.17 (a) की भाँति एक ऊर्ध्वाधर अक्ष YY’ के परितः एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में दक्षिणावर्त दिशा में घुमाया जा रहा है।
माना किसी क्षण कुण्डली के तल पर खींचा गया अभिलम्ब अर्थात् कुण्डली का अक्ष चित्र 7.17 (b) की भाँति [latex s=2]\vec { B }[/latex] की दिशा के साथ θ कोण (UPBoardSolutions.com) बनाता है। इस क्षण चुम्बकीय क्षेत्र B का कुण्डली के तल के लम्बवत् घटक B cosθ से होगा।
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e = NBAω sinωt …(1)
प्रेरित वि० वी० बल के लिए सूत्र (1) से स्पष्ट है कि प्रेरित वि० वा० बल का मान समय t के साथ-साथ निरन्तर बदलता रहेगा परन्तु sinωt का अधिकतम मान 1 होता है। अतः प्रेरित विद्युत वाहक बल e का
अधिकतम मान = NBAω होगा। यदि इसको e0 से प्रदर्शित किया जाए तो प्रेरित विद्युत वाहक बल के लिए सूत्र (1) को निम्नलिखित रूप में व्यक्त किया जाता है।
e = e0 sinωt …(2)

जहाँ e का अधिकतम मान e0 = NBAω
उपर्युक्त सूत्र (2) से स्पष्ट है कि जब किसी कुण्डली (UPBoardSolutions.com) को चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है जो ज्या-वक्र (sine curve) की भाँति बदलता रहता है। इसका मान कुण्डली के घुमाव कोण θ = ωt पर निर्भर करता है।

जब कुण्डली का तल चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् होता है तब से θ = 0°
अतः e = e0 sin 0° = 0
अर्थात् e का मान शून्य होता है। यह कुण्डली की प्रारम्भिक स्थिति है तथा प्रत्येक चक्कर के पश्चात् यही स्थिति होती है।

जब कुण्डली चौथाई चक्कर घूम जाती है तो θ = 90°
तथा इस दशा में e = e0 sin 90° = e0 (अधिकतम)
यही स्थिति कुण्डली के तीन-चौथाई चक्कर घूमने पर आती है परन्तु विपरीत दिशा में प्रेरित विद्युत वाहक बल अधिकतम होता है।
अर्थात् e = – e0
इस प्रकार कुण्डली के पहले आधे चक्कर में कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वि० वी० बल शून्य से बढ़कर अधिकतम मान को प्राप्त करता है तथा पुनः घटकर शून्य हो (UPBoardSolutions.com) जाता है, जबकि शेष आधे चक्कर में यह विपरीत दिशा में अधिकतम मान को प्राप्त करता है तथा पुनः घटकर शून्य हो जाता है। यही क्रिया बार-बार दोहरायी जाती है।

प्रश्न 3.
ए०सी० जनित्र की रचना एवं कार्यविधि समझाइए। दिष्ट धारा की तुलना में प्रत्यावर्ती धारा के क्या लाभ हैं जिनके कारण अब आमतौर पर प्रत्यावर्ती धारा ही प्रयोग की जाती है?
हल-
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र का सिद्धान्त तथा कार्य-प्रणाली चित्र द्वारा समझाइए। (2014)
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र अथवा डायनमो
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की क्रिया का सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग विद्युत जनित्र अथवा डायनमो में किया गया है। यह एक ऐसी विद्युत चुम्बकीय मशीन है जिसके द्वारा यान्त्रिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। प्रत्यावर्ती धारा को उत्पन्न करने के लिये प्रत्यावर्ती-धारा डायनमो तथा दिष्ट धारा को उत्पन्न करने के लिए दिष्ट-धारा डायनमो का उपयोग होती है।

सिद्धान्त- जब किसी बन्द कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तो उसमें से गुजरने वाली फ्लक्स-रेखाओं की संख्या में लगातार परिवर्तन होता रहता है। जिसके (UPBoardSolutions.com) कारण कुण्डली में वैद्युत धारा प्रेरित हो जाती है। कुण्डली को घुमाने में जो कार्य करना पड़ता है (अर्थात् यान्त्रिक ऊर्जा व्यय होती है) वही कुण्डली में वैद्युत ऊर्जा के रूप में प्राप्त होता है।
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रचना- इसके तीन मुख्य भाग होते हैं (चित्र 7.18)।
(i) क्षेत्र चुम्बक (Field Magnet)- यह एक शक्तिशाली चुम्बक NS होता है। इसके द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की बल रेखाएँ चुम्बक के ध्रुव N से S की ओर होती हैं।
(ii) आर्मेचर (Armature)- चुम्बक के ध्रुवों के N बीच में पृथक्कृत ताँबे के तारों की एक कुण्डली ABCD होती है, जिसे आर्मेचर कुण्डली कहते सर्दी-वलय हैं। कुण्डली कई फेरों की होती है तथा ध्रुवों के बीच क्षैतिज अक्ष पर जल के टरबाइन से घुमाई जाती है।
(iii) सप वलय तथा ब्रुश (Slip Rings and Brushes)- कुण्डली के सिरों का सम्बन्ध अलग-अलग दो ताँबे के छल्लों से होता है जो आपस में एक-दूसरे को स्पर्श नहीं करते और कुण्डली के साथ उसी अक्ष पर घूमते हैं। इन्हें ‘सप वलय’ कहते हैं। इन छल्लों को दो कार्बन की ब्रुश X तथा ? स्पर्श करती रहती हैं। ये ब्रुश स्थिर रहती हैं तथा छल्ले इन ब्रुशों के नीचे फिसलते हुए घूमते हैं। इन ब्रुशों का सम्बन्ध उस बाह्य परिपथ से कर देते हैं जिसमें वैद्युत धारा भेजनी होती है।

क्रिया- जब आमेचर-कुण्डली ABCD घूमती है तो कुण्डली में से होकर जाने वाली फ्लक्स-रेखाओं की संख्या में परिवर्तन होता है। अत: कुण्डली में धारा प्रेरित हो जाती है। मान लो कुण्डली दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में घूम रही है तथा किसी क्षण क्षैतिज अवस्था में है (चित्र 7.18)। इस क्षण कुण्डली की भुजा AB ऊपर उठ रही है तथा भुजा CD नीचे आ रही है। फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम अनुसार, (UPBoardSolutions.com) इन भुजाओं में प्रेरित धारा की दिशा वही है जो चित्र में दिखाई गई है। अत: धारा ब्रुश X से बाहर जा रही है (अर्थात् यह ब्रुश धन ध्रुव है) तथा ब्रुश Y पर वापस आ रही है (अर्थात् यह ब्रुश ऋण ध्रुव है)। जैसे ही कुण्डली अपनी ऊध्र्वाधर स्थिति से गुजरेगी, भुजा AB नीचे की ओर आने लगेगी तथा CD ऊपर की ओर जाने लगेगी। अतः अब धारा ब्रुश Y से बाहर जायेगी तथा ब्रुश X पर वापस आयेगी। इस प्रकार आधे चक्कर के बाद बाह्य परिपथ में धारा की दिशा बदल जायेगी। अत: परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा’ (alternating current) उत्पन्न होती है।

प्रत्यावर्ती धारा की-दिष्ट-धारा की तुलना में उपयोगिता आजकल घरेलू व औद्योगिक कार्यों में प्रत्यावर्ती धारा का ही उपयोग होता है क्योंकि दिष्ट-धारा की तुलना में इसके निम्न लाभ हैं|

(i) प्रत्यावर्ती धारा को पावर हाऊस से किसी स्थान पर ट्रांसफॉर्मर की सहायता से उच्च वोल्टेज पर भेजा जा सकता है तथा वहाँ इसे पुन: निम्न वोल्टेज पर लाया जा सकता है। इस प्रकार भेजने में लागत भी कम आती है तथा ऊर्जा ह्रास भी बहुत घट जाता है। ट्रांसफॉर्मर का उपयोग दिष्ट-धारा के लिए नहीं किया जा सकता। अत: दिष्ट-धारा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने में ऊर्जा ह्रास भी होता है तथा लागत भी अधिक आती है।

(ii) प्रत्यावर्ती धारा को चोक-कुण्डली द्वारा बहुत कम ऊर्जा ह्रास पर नियन्त्रित किया जा सकता है, जबकि दिष्ट-धारा ओमीय प्रतिरोध द्वारा ही नियन्त्रित की जा सकती है जिसमें अत्यधिक ऊर्जा ह्रास होता है।

(iii) प्रत्यावर्ती धारा वाले यन्त्र; जैसे-वैद्युत मोटर, दिष्ट-धारा वाले यन्त्रों की तुलना में सुदृढ़ व सुविधाजनक होते हैं।

(iv) जहाँ दिष्ट धारा की आवश्यकता होती है (जैसे-विद्युत अपघटन में, संचायक सेलों को आवेशित करने में, वैद्युत चुम्बक बनाने में) वहाँ दिष्टकारी (rectifer) द्वारा प्रत्यावर्ती धारा को सुगमता से | दिष्ट-धारा में बदल लिया जाता है।

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प्रश्न 4.
एक कुण्डली 220 वोल्ट, 50 हर्ट्ज वाले प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से 20 ऐम्पियर धारा तथा 200 वाट शक्ति लेती है। कुण्डली का प्रतिरोध तथा प्रेरकत्व ज्ञात कीजिए। (2017)
हल-
कुण्डली में शक्ति-क्षय P, केवल इसके ओमीय प्रतिरोध R के कारण है। अतः  UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes (हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes (हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 10
Chapter Name Haloalkanes and Haloarenes
Number of Questions Solved 65
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes (हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए –
(i) 2- क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन
(ii) 1-क्लोरो-4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iii) 4-तृतीयक-ब्यूटिल-3-आयोडोहेप्टेन
(iv) 1, 4-डाइब्रोमोब्यूट-2-ईन ।
(v) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक-ब्यूटिल-2-मेथिलबेंजीन।
उत्तर
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प्रश्न 2.
ऐल्कोहॉल तथा KI की अभिक्रिया में सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग क्यों नहीं करते हैं?
उत्तर
2KI + H2SO4 → 2KHSO4 + 2HI
2HI + H2SO4 → 2H2O + I2 + SO2
इन अभिक्रियाओं में H,SO, एक ऑक्सीकारक है। यह अभिक्रिया के दौरान निर्मित HI को I2 में ऑक्सीकृत कर देता है एवं HI तथा ऐल्कोहॉल की क्रिया से ऐल्किल हैलाइड के निर्माण को रोकता है। इस समस्या के निदान के लिए H2SO4 के स्थान पर फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) का प्रयोग किया जाता है, जो कि अभिक्रिया के लिए HI उपलब्ध कराता है तथा H2SO4 के समान I2 नहीं देता है।

प्रश्न 3.
प्रोपेन के विभिन्न डाइहैलोजेन व्युत्पन्नों की संरचनाएँ लिखिए।
उत्तर
प्रोपेन (CH3 CH2 CH3) के चार समावयवी डाइहैलोजन व्युत्पन्न सम्भव हैं।
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प्रश्न 4.
C5H12 अणुसूत्र वाले समावयवी ऐल्केनों में से उसको पहचानिए जो प्रकाश रासायनिक क्लोरीनीकरण पर देता है –
(i) केवल एक मोनोक्लोराइड
(ii) तीन समावयवी मोनोक्लोराइड
(iii) चार समावयवी मोनोक्लोराइड
उत्तर
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निओपेन्टेन निओपेन्टेन के सभी H-परमाणु तुल्य हैं अतएव किसी भी H-परमाणु के प्रतिस्थापन से समान उत्पाद प्राप्त होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 5
[latex]\overset { a }{ C } { H }_{ 3 }[/latex] [latex]\overset { b }{ C } { H }_{ 2 }[/latex] [latex]\overset { c }{ C } { H }_{ 2 }[/latex] [latex]\overset { b }{ C } { H }_{ 2 }[/latex] [latex]\overset { a }{ C } { H }_{ 3 }[/latex] में समान H-परमाणुओं के तीन समुच्चय हैं, जिन्हें a, b तथा c से चिह्नित किया गया है। प्रत्येक समुच्चय से किसी एकसमान हाइड्रोजन के विस्थापन से समान उत्पाद प्राप्त होता है। अत: तीन समावयवी मोनोक्लोराइड सम्भव हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 6
चार प्रकार के तुल्य H-परमाणु उपस्थित हैं, जिन्हें a, b,c तथा d से चिह्नित किया गया है। अतः चार समावयवी मोनोक्लोराइड संभव हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया के लिए मोनोहैलो उत्पाद की संरचना बनाइए-
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उत्तर
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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 9

प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों को क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –

  1. ब्रोमोमेथेन, ब्रोमोफॉर्म, क्लोरोमेथेन, डाइब्रोमोमेथेन
  2. 1-क्लोरोप्रोपेन, आइसोप्रोपिल क्लोराइड, 1-क्लोरोब्यूटेन

उत्तर

  1. क्वथनांकों का बढ़ता क्रम है- क्लोरोमेथेन < ब्रोमोमेथेन < डाइब्रोमोमेथेन < ब्रोमोफॉर्म
    कारण (Reason) – आण्विक द्रव्यमान बढ़ने के साथ क्वथनांक बढ़ता है।
  2. क्वथनांकों का बढ़ता क्रम है –
    आइसोप्रोपिल क्लोराइड < 1-क्लोरोप्रोपेन < 1-क्लोरोब्यूटेन
    कारण (Reason) – आण्विक द्रव्यमान बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है। समावयवी ऐल्किल हैलाइडों में शाखित समावयवी का क्वथनांक निम्न होता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित युग्मों में से आप कौन-से ऐल्किल हैलाइड द्वारा SK 2क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करने की अपेक्षा करते हैं? अपने उत्तर को समझाइए।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 10
उत्तर
यदि विशेष सूत्र के समावयवियों में छोड़ने वाला समूह (leaving group) समान हो तब SN 2 क्रियाविधि के सापेक्ष समावयवियों की क्रियाशीलता त्रिविम बाधा (steric hindrance) बढ़ने के साथ घटती है, अतः
(i) CH3 CH2 CH2 CH2 Br (1° ऐल्किल हैलाइड)CH3CH2– CHBr – CH3 (2° ऐल्किल हैलाइड) से अधिक क्रियाशील होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 11
(2° ऐल्किल हैलाइड), (CH3)3 CBr (3° ऐल्किल हैलाइड) से अधिक क्रियाशील होता है।

(iii) दोनों 2° ऐल्किल हैलाइड हैं, लेकिन (II) ऐल्किल हैलाइड में C2 पर स्थित- CH3 समूह Br परमाणु के निकट स्थित है जबकि (I) ऐल्किल हैलाइड में C3 पर स्थित -CH3 समूह Br परमाणु से कुछ दूर स्थित है। इसके परिणामस्वरूप ऐल्किल हैलाइड (II) अधिक त्रिविम बाधा अनुभव करता है, अतएव SN 2 अभिक्रिया में (I), (II) की तुलना में अधिक तीव्रता से क्रिया करेगा।

प्रश्न 8.
हैलोजेन यौगिकों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा यौगिक तीव्रता से SN 1 अभिक्रिया करेगा?
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 12
उत्तर
SN 1 अभिक्रिया में हैलोजेन यौगिकों की क्रियाशीलता आयनन के परिणामस्वरूप निर्मित कार्बोधनायन के स्थायित्व पर निर्भर करती है। स्थायित्व का क्रम तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक है। अत:
(i) (a) 3° ऐल्किल क्लोराइड है जबकि (b) 2° ऐल्किल क्लोराइड है। अतएव (a) SN 1 अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील है।
(ii) (a) 2° ऐल्किल क्लोराइड है जबकि (b) 1° ऐल्किल क्लोराइड है। अतएव 2° ऐल्किल क्लोराइड sN 1 अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में A,B,C,D,E,R तथा R’ को पहचानिए –
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उत्तर
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अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित हैलाइडों के नाम आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) पद्धति से लिखिए तथा उनका वर्गीकरण, ऐल्किल, ऐलिलिक, बेन्जिलिक (प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक), वाइनिल अंथवा ऐरिल हैलाइड के रूप में कीजिए –

  1. (CH3)2CHCH(Cl)CH3
  2. CH3CH2CH(CH3)CH(C2H5)Cl
  3. CH3CH2C(CH3)2CH2I
  4. (CH3)3 CCH2CH(Br)C6H5
  5. CH3CH(CH3)CH(Br)CH3
  6. CH3C(C2H5)2CH2Br
  7. CH3C(Cl)(C2H5)CH2CH3
  8. CH3CH = C(Cl)CH2CH(CH3)2
  9. CH3CH = CHC(Br)(CH3)2
  10. p-ClC6H4CH2CH(CH3)2
  11. m-ClCH2C6H4CH2C(CH3)3
  12. o-Br-C6H4CH(CH3)CH2CH3

उत्तर

  1. 2-क्लोरो-3-मेथिलब्यूटेन, 2° ऐल्किल हैलाइड
  2. 3-क्लोरो-4 मेथिलहेक्सेन, 2° ऐल्किल हैलाइड
  3. 1-आयोडो-2,2-डाइमेथिलब्यूटेन, 1° ऐल्किल हैलाईड
  4. 1-ब्रोमो-3, 3-डाइमेथिल-1- फेनिलब्यूटेन, 2° बेन्जिलिक हैलाइड
  5. 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन, 2° ऐल्किल हैलाइड
  6. 1-ब्रोमो-2-एथिल-2-मेथिलब्यूटेन, 1° ऐल्किल हैलाइड
  7. 3-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन, 3° ऐल्किल हैलाइड
  8. 3-क्लोरो-5-मेथिलहेक्स-2-ईन, वाइनिलिक हैलाइड
  9. 4-ब्रोमो-4-मेथिलपेन्ट-2-ईन, ऐलीलिक हैलाइड
  10. 1-क्लोरो-4-(2-मेथिलप्रोपिल)- बेंजीन, ऐरिल हैलाइड
  11. 1-क्लोरोमेथिल-3-(2, 2-डाइमेथिलप्रोपिल) बेंजीन, 1° बेंजाइलिक हैलाइड
  12. 1-ब्रोमो-2-(1-मेथिलप्रोपिल) बेंजीन, ऐरिल हैलाइड

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिए –

  1. CH3CH(Cl)CH(Br)CH3
  2. CHF2CBrClF
  3. ClCH2C ≡ CCH2Br
  4. (CCl3)3CCl
  5. CH3C(p- ClC6H4)2CH(Br)CH3
  6. (CH3)3CCH = ClC6HI-P

उत्तर

  1. 2-ब्रोमो-3-क्लोरोब्यूटेन
  2. 1-ब्रोमो-1-क्लोरो-1, 2, 2-ट्राइफ्लोरोएथेन
  3. 1-ब्रोमो-4-क्लोरोब्यूट-2-आइन
  4. 2-(ट्राइक्लोरोमेथिल) -1,1,1, 2, 3, 3, 3,-हैप्टाक्लोरोप्रोपेन
  5. 2-ब्रोमो-3,3-बिस (4-क्लोरोफेनिल)ब्यूटेन
  6. 1-क्लोरो-1-(4-आयोडोफेनिल)-3, 3-डाइमेथिलब्यूट- 1-ईन

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कार्बनिक हैलोजेन यौगिकों की संरचना दीजिए –
(i) 2-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन
(ii) p-ब्रोमोक्लोरो बेन्जीन
(iii) 1-क्लोरो-4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iv) 2-(2-क्लोरोफेनिल)-1-आयोडोऑक्टेन
(v) 2-ब्रोमोब्यूटेन
(vi) 4-तृतीयक-ब्यूटिल-3-आयोडोहेप्टेन
(vii) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक-ब्यूटिल-2-मेथिल बेन्जीन
viii) 1,4-डाइब्रोमोब्यूट-2-ईन।
उत्तर
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक होगा?

  1. CH2Cl2
  2. CHCl3
  3. CCl4

उत्तर
CH2Cl2 का द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक है। इसका कारण यह है कि इसमें दोनों C-Cl आबन्ध आघूर्गों का परिणामी तथा दोनों C-H आबन्ध आघूर्गों के परिणामी एक ही दिशा में कार्य करते हैं।
CHCl3 में दोनों C – Cl आबन्ध आघूर्गों का परिणामी तीसरे C – Cl आबन्ध आघूर्ण के विपरीत दिशा में कार्य करता है।
CCl4 की आकृति सममित होने के कारण इसका द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है।
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प्रश्न 5.
एक हाइड्रोकार्बन C5H10 अँधेरे में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता, परन्तु सूर्य के तीव्र प्रकाश में केवल एक मोनोक्लोरो यौगिक C5H9Cl देता है। हाइड्रोकार्बन की संरचना क्या है?
उत्तर
हाइड्रोकार्बन C5H10 या तो एक ऐल्कीन है अथवा साइक्लोऐल्केन। चूँकि यह क्लोरीन से अन्धेरे में क्रिया नहीं करता है, अतएव यह ऐल्कीन नहीं हो सकता। इस प्रकार इसे एक साइक्लोऐल्केन होना चाहिए।
साइक्लोऐल्केन सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में Cl2 से अभिक्रिया करके मोनोक्लोरो यौगिक, C5H9Cl देता है। इसलिए साइक्लोऐल्केन के सभी 10 H-परमाणु तुल्य होंगे। अत: साइक्लोऐल्केन साइक्लोपेन्टेन (cyclopentane) है। सूर्य के प्रकाश में साइक्लोपेन्टेन निम्न प्रकार से क्लोरीन से क्रिया कर एक मोनोक्लोरो यौगिक C5H9Cl देता है –
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इस प्रकार C5H10 साइक्लोपेन्टेन है।

प्रश्न 6.
C4H9Br सूत्र वाले यौगिक के सभी समावयवी लिखिए।
उत्तर
C4H9Br एक संतृप्त यौगिक है, क्योंकि इसका पितृ हाइड्रोकार्बन C4H10 है। इसके समावयवी निम्न हैं –
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित से 1-आयोडोब्यूटेन प्राप्त करने की समीकरण दीजिए –
(i) 1-ब्यूटेनॉल
(ii) 1-क्लोरोब्यूटेन
(iii) ब्यूट-1-ईन।
उत्तर
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प्रश्न 8.
उभयदन्ती नाभिकरागी क्या होते हैं? एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर
जो नाभिकरागी अभिकर्मक किसी इलेक्ट्रॉन न्यून केन्द्र पर अपने दो भिन्न परमाणुओं के माध्यम से आक्रमण करने में सक्षम होते हैं, उन्हें उभयदन्ती नाभिकरागी कहा जाता है; जैसे- सायनाइड आयन एक उभयदन्ती नाभिकरागी है, क्योंकि यह निम्न दो अनुनाद संरचनाओं का एक संकर है और C तथा N, दोनों परमाणुओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉन न्यून केन्द्र पर आक्रमण करने में सक्षम है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रत्येक युग्मों में से कौन-सा यौगिक OH के साथ SN 2 अभिक्रिया में अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा?

  1. CH2Br अथवा CH3I
  2. (CH3)3 CCl अथवा CH3Cl

उत्तर

  1. CH3I अधिक तेजी से क्रिया करेगा, क्योंकि Br की अपेक्षा I आसानी से यौगिक को छोड़ देगा।
  2. कम त्रिविम बाधा (steric hindrance) प्रदर्शित करने के कारण CH3Cl,SN 2अभिक्रिया में तेजी से क्रिया करेगा।

प्रश्न10.
निम्नलिखित हैलाइडों के एथेनॉल में सोडियम हाइड्रॉक्साइडे द्वारा विहाइड्रोहैलोजेनीकरण के फलस्वरूप बनने वाली सभी ऐल्कीनों की संरचना लिखिए। इसमें से मुख्य ऐल्कीन कौन-सी होगी?

  1. 1-ब्रोमो-1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेन
  2. 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन
  3. 2,2,3-ट्राइमेथिल-3-ब्रोमोपेन्टेन।

उत्तर
1. चूँकि Br के दोनों ओर स्थित है-हाइड्रोजन परमाणु समतुल्य हैं, अतएव केवल एक ऐल्कीन प्राप्त होगी।
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2. 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन में समतुल्य β- हाइड्रोजनों के 2 अलग-अलग समुच्चय हैं अत: यह 2 ऐल्कीन देगा।
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चूँकि अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन अधिक स्थायी होगी अत: 2-मेथिलब्यूट-2-ईन ही मुख्य ऐल्कीन होगी।
(iii) हैलाइड में दो भिन्न प्रकार के β- हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हैं। अतएव विहाइड्रोहैलोजनीकरण अभिक्रिया में यह दो ऐल्कीन 3,4,4-ट्राइ-मेथिल पेंट-2-ईन तथा 2-एथिल-3, डाइमेथिलब्यूट-1-ईन का निर्माण करेगा। पहला ऐल्कीन अधिक स्थिर है, क्योंकि यह अधिक प्रतिस्थापित (more substituted) है (सैटजैफ नियम के अनुसार)। अतएव यह प्रमुख उत्पाद है।
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित परिवर्तन आप कैसे करेंगे?
(i) एथेनॉल से ब्यूट-1-आइन
(ii) एथीन से ब्रोमोएथेन
(iii) प्रोपीन से 1-नाइट्रोप्रोपीन
(iv) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(v) प्रोपीन से प्रोपाइन
(vi) एथेनॉल से एथिल फ्लुओराइड
(vii) ब्रोमोमेथेन से प्रोपेनोन
(viii) ब्यूट-1-ईन से ब्यूट-2-ईन
(ix) 1-क्लोरोब्यूटेन से n-ऑक्टेन
(x) बेन्जीन से बाइफेनिल
उत्तर
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प्रश्न 12.
समझाइए, क्यों –

  1. क्लोरोबेन्जीन का द्विध्रुव आघूर्ण साइक्लोहेक्सिले क्लोराइड की तुलना में कम होता है?
  2. ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय होते हुए भी जल में अमिश्रणीय हैं?
  3. ग्रीन्यार अभिकर्मक का विरचन निर्जलीय अवस्थाओं में करना चाहिए?

उत्तर
1. उच्च s- लक्षण के कारण sp2 – संकरित कार्बन sp3 – संकरित कार्बन से अधिक ऋणविद्युती होता है। अत: क्लोरोबेंजीन में C-Cl आबन्ध के sp2 – संकरित कार्बन में साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड के sp3 – ‘संकरित कार्बन की तुलना में Cl की इलेक्ट्रॉन मुक्त करने की प्रवृत्ति कम होती है, जिसके परिणामस्वरूप क्लोरोबेंजीन में C-Cl आबन्ध साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड में C-Cl आबन्ध से कम ध्रुवीय होता है। बेंजीन वलय पर Cl परमाणु के एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकरण (delocalization) के कारण क्लोरोबेंजीन के C-Cl आबन्ध में आंशिक द्विआबन्ध लक्षण आ जाते हैं। दूसरे शब्दों में क्लोरोबेंजीन में C-Cl आबन्ध साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड में C-Cl आबन्ध से छोटा होता है।
चूँकि द्विध्रुव आघूर्ण आवेश तथा दूरी को गुणनफल होता है, अत: क्लोरोबेंजीन को द्विध्रुव आघूर्ण साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड से कम होता है।

2. ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय (polar) होते हैं अत: इनके अणु द्विध्रुव आकर्षण द्वारा परस्पर बँधे रहते हैं। H2O के अणु परस्पर हाइड्रोजन आबन्ध द्वारा जुड़े रहते हैं। चूँकि जल तथा ऐल्किल हैलाइड में नये बने आबन्ध बल पूर्व से उपस्थित बलों से दुर्बल होते हैं। अतः ऐल्किल हैलाइड जल में अमिश्रणीय (immiscible) होते हैं।

3. ग्रिगनार्ड (ग्रीन्यार) अभिकर्मक अत्यधिक क्रियाशील होते हैं। ये उपकरण के अन्दर उपस्थित नमी से अभिक्रिया करते हैं। अतः ग्रिगनार्ड अभिकर्मकों को निर्जल परिस्थितियों (anhydrous conditions) में बनाते हैं।
R – MgX + H – OH → RH + Mg(OH)X

प्रश्न 13.
फ्रेऑन-12, DDT, कार्बन टेट्राक्लोराइड तथा आयोडोफॉर्म के उपयोग दीजिए। (2017, 18)
उत्तर
फ्रेऑन-12 के उपयोग (Uses of Freon-12) – यह ऐरोसॉल प्रणोदक, प्रशीतक तथा वायु शीतलन में उपयोग करने के लिए उत्पादित किए जाते हैं।
DDT के उपयोग (Uses of DDT) – DDT का उपयोग कीटनाशी के रूप में किया जाता है, परन्तु जीवों में इसके सतत अन्तर्ग्रहण से उत्पन्न विषैले प्रभावों के कारण इसे प्रतिबन्धित कर दिया गया है।
कार्बन टेट्राक्लोराइड के उपयोग (Uses of Carbon Tetrachloride)

  1. यह शुष्क धुलाई में विलायक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  2. यह औषधियों में हुकवर्म तथा कीटनाशक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  3. यह वसा, तेल, मोम तथा रेजिन के लिए भी उचित विलायक है।
  4. आयोडाइड तथा ब्रोमाइड के क्लोरीन जल परीक्षण में भी यह विलायक के रूप में प्रयुक्त किया जाता
  5. इससे फ्रेऑन-12 भी प्राप्त होता है।
  6. यह पाइरीन नाम से अग्निशामक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसके घने वाष्प जलते पदार्थ के ऊपर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं और ऑक्सीजन या वायु को जलते पदार्थ के सम्पर्क में आने से रोकते हैं। इसके उपयोग के बाद कक्ष का संवातन (ventilation) करते हैं जिससे बनी हुई फॉस्जीन पूर्णतया दूर हो जाए।

आयोडोफॉर्म के उपयोग (Uses of Iodoform) – इसका उपयोग प्रारम्भ में पूतिरोधी (ऐण्टीसेप्टिक) के रूप में किया जाता था, परन्तु आयोडोफॉर्म का यह पूतिरोधी गुण आयोडोफॉर्म के कारण स्वयं नहीं, बल्कि मुक्त हुई आयोडीन के कारण होता है। इसकी अरुचिकर गन्ध के कारण अब इसके स्थान पर आयोडीनयुक्त अन्य दवाओं का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया में बनने वाले मुख्य कार्बनिक उत्पाद की संरचना लिखिए –
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उत्तर
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए –
n-BuBr + KCN [latex]\underrightarrow { { EtOH-H }_{ 2 }O } [/latex] nBuCN
उत्तर
KCN निम्न संरचनाओं का अनुनादी संकर होता है –
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अत: CN उभयदन्ती नाभिकस्नेही के रूप में कार्य करता है। अतः यह n – BuBr में C-Br आबन्ध के कार्बन परमाणु पर C या N परमाणु से आक्रमण करता है। चूंकि C-N आबन्ध, C-C आबन्ध से दुर्बल होता है अत: C पर आक्रमण होता है तथा n -ब्यूटिल सायनाइड बनता है।
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प्रश्न 16.
SN 2 प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता के आधार पर इन यौगिकों के समूहों को क्रमबद्ध कीजिए –

  1. 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमोपेन्टेन, 2-ब्रोमोपेन्टेन
  2. 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन
  3. 1-ब्रोमोब्यूटेन, 1-ब्रोमो-2,2-डाइमेथिलप्रोपेन, 1-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन।

उत्तर

  1. 1-ब्रोमोपेन्टेन > 2-ब्रोमोपेन्टेन > 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन
  2. 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन
  3. 1-ब्रोमोब्यूटेन > 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 1-ब्रोमो-2- मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमो-2, 2-डाइमेथिलप्रोपेन

प्रश्न 17.
C6H5CH2Cl तथा C6H5CHClC6H5 में से कौन-सा यौगिक जलीय KOH से , शीघ्रता से जल-अपघटित होगा?
उत्तर

  • SN 1 परिस्थितियों में C6H5CHClC6H5,C6H5CH2Cl की तुलना में शीघ्रता से जल अपघटित होगा।
  • SN 2 परिस्थितियों में C6H5CH2Cl, C6H5CHClC6H5 की तुलना में शीघ्रता से जल-अपघटित होगा।

प्रश्न 18.
o- तथा m- समावयवियों की तुलना में p- डाइक्लोरोबेन्जीन का गलनांक उच्च एवं विलेयता निम्न होती है, विवेचना कीजिए।
उत्तर
p-समावयव अधिक सममिताकार होने के कारण क्रिस्टल जालक में भली-भाँति स्थित हो जाता है, इसलिए इसमें o- तथा m- समावयवों की तुलना में प्रबल अन्तराअणुक आकर्षण बल उपस्थित होते हैं।
चूँकि संगलन अथवा विलायकीकरण (solvation) के दौरान क्रिस्टल जालक टूटता है, इसलिए p- समावयव के संगलन अथवा इसे विलेय करने के लिए सम्बन्धित o- तथा m- समावयवों की तुलना में अधिक ऊष्मा की आवश्यकता होती है। दूसरे शब्दों में, p- समावयव का गलनांक सम्बन्धित o- तथा m- समावयव की तुलना में उच्च होता है, जबकि इसकी विलेयता निम्न होती है।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित परिवर्तन कैसे सम्पन्न किए जा सकते हैं?
(i) प्रोपीन से प्रोपेन-1-ऑल
(ii) एथेनॉल से ब्यूट-2-आइन
(iii) 1-ब्रोमोप्रोपेन से 2-ब्रोमोप्रोपेन
(iv) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल।
(v) बेन्जीन से 4-ब्रोमोनाइट्रोबेन्जीन
(vi) बेन्जिल ऐल्कोहॉल से 2-फेनिल एथेनोइक अम्ल
(vii) एथेनॉल से प्रोपेननाइट्राइल
(viii) ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन
(ix) 2-क्लोरोब्यूटेन से 3,4-डाइमेथिलहेक्सेन
(x) 2-मेथिल-1-प्रोपीन से 2-क्लोरो-1-मेथिलप्रोपेन
(xi) एथिल क्लोराइड से प्रोपेनोइक अम्ल
(xii) ब्यूट-1-ईन से n-ब्यूटिल आयोडाइड
(xiii) 2-क्लोरोप्रोपेन से 1-प्रोपेनॉल
(xiv) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल से आयोडोफॉर्म
(xv) क्लोरोबेन्जीन से p-नाइट्रोफीनॉल
(xvi) 2-ब्रोमोप्रोपेन से 1-ब्रोमोप्रोपेन
(xvii) क्लोरोएथेन से ब्यूटेन
(xviii) बेन्जीन से डाइफेनिल
(xiv) तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड से आइसो-ब्यूटिल ब्रोमाइड
(xx) ऐनिलीन से फेनिलआइसोसायनाइडे।
उत्तर
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प्रश्न 20.
ऐल्किल क्लोराइड की जलीय KOH से अभिक्रिया द्वारा ऐल्कोहॉल बनता है, लेकिन ऐल्कोहॉलिक KOH की उपस्थिति में ऐल्कीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। समझाइए।
उत्तर
जलीय विलयन में KOH लगभग पूर्ण आयनित होकर OH आयन देता है जो प्रबल नाभिकरागी होने के कारण ऐल्किल हैलाइडों पर प्रतिस्थापन अभिक्रिया करके ऐल्कोहॉल बनाते हैं। जलीय विलयन में OH आयन उच्च जलयोजित होते हैं। इससे OH आयनों का क्षारीय गुण घट जाता है जिससे ये ऐल्किल हैलाइड के β- कार्बन से हाइड्रोजन परमाणु पृथक्कृत करने में असफल हो जाते हैं तथा ऐल्कीन नहीं बना पाते।
दूसरी ओर KOH के ऐल्कोहॉली विलयन में ऐल्कॉक्साइड (RO) आयन होते हैं जो OH से प्रबल क्षार होने के कारण सरलतापूर्वक ऐल्किल क्लोराइड से HCl अणु का विलोपन करके ऐल्कीन बना लेते हैं।

प्रश्न 21.
प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड C4H9Br (क), ऐल्कोहॉलिक KOH से अभिक्रिया द्वारा यौगिक (ख) देता है। यौगिक ‘ख’ HBr के साथ अभिक्रिया से यौगिक ‘ग देता है जो कि यौगिक ‘क’ का समावयवी है। जब यौगिक ‘क’ की अभिक्रिया सोडियम धातु से होती है तो यौगिक ‘घ’ C8H18 बनता है, जो कि ब्यूटिल ब्रोमाइड की सोडियम से अभिक्रिया द्वारा बने उत्पाद से भिन्न है। यौगिक ‘क’ का संरचना सूत्र दीजिए तथा सभी अभिक्रियाओं की समीकरण दीजिए।
उत्तर
आण्विक सूत्र C4H9Br के दो प्राथमिक हैलाइड निम्नलिखित हो सकते हैं –
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अतः यौगिक (क) या तो n- ब्यूटिल ब्रोमाइड है या आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड।
चूँकि यौगिक ‘क’ की अभिक्रिया सोडियम धातु से होने पर यौगिक ‘घ’ (आण्विक सूत्र C8H18) प्राप्त होता है जो कि n-ब्यूटिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम धातु से होने पर प्राप्त यौगिक से भिन्न है, इसलिए यौगिक ‘क’ आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड होना चाहिए तथा यौगिक ‘घ’ 2,5-डाइमेथिलहेक्सेन होना चाहिए।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 41
अब यदि यौगिक ‘क’ आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड है तो यौगिक ‘ख’, जो यौगिक ‘क’ की ऐल्कोहॉलिक KOH से अभिक्रिया द्वारा प्राप्त होता है, 2-मेथिल-1-प्रोपीन होना चाहिए।
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यौगिक ‘ख’ HBr के साथ अभिक्रिया से मार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार यौगिक ‘ग’ देता है। इसलिए यौगिक ‘ग’ तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड है जो यौगिक ‘क’ (आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड) का एक समावयव है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 43
इस प्रकार, ‘क’ आईसोब्यूटिल ब्रोमाइड, ‘ख’ 2-मेथिल-1-प्रोपीन, ‘ग’ तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड तथा ‘घ’ 2,5-डाइमेथिलहेक्सेन है।

प्रश्न 22.
तब क्या होता है जब –
(i) n-ब्यूटिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ अभिकृत किया जाता है?
(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोबेन्जीन की अभिक्रिया मैग्नीशियम से होती है?
(iii) क्लोरोबेन्जीन का जल-अपघटन किया जाता है?
(iv) एथिल क्लोराइड की अभिक्रिया जलीय KOH से होती है?
(v) शुष्क ईथर की उपस्थिति में मेथिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम से होती है?
(vi) मेथिल क्लोराइड की अभिक्रिया KCN से होती है?
उत्तर
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(vi) मेथिल सायनाइड बनता है।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
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(i) 1, 1-डाइएथिल-2, 2-डाइमेथिलपेन्टेन
(ii) 4, 4 डाइमेथिल-5, 5-डाइएथिलपेन्टेन
(iii) 5, 5- डाइएथिल-4, 4-डाइमेथिलपेन्टेन
(iv) 3-एथिल-4, 4-डाइमेथिलहेप्टेन
उत्तर
(iv) 3-एथिल-4, 4-डाइमेथिलहेप्टेन

प्रश्न 2.
प्रदर्शित यौगिक का IUPAC नाम है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes image 47
(i) 2-ब्रोमो-6-क्लोरोसाइक्लोहेक्स-1-ईन
(ii) 6-ब्रोमो-2-क्लोरोसाइक्लोहेक्सेन
(iii) 3-ब्रोमो-1-क्लोरोसाइक्लोहेक्सीन
(iv) 1-ब्रोमो-3-क्लोरोसाइक्लोहेक्सीन
उत्तर
(iii) 3-ब्रोमो-1-क्लोरोसाइक्लोहेक्सीन

प्रश्न 3.
निम्न यौगिकों में से किसका क्वथनांक उच्चतम है?
(i) CH3CH2CH2Cl
(ii) CH3CH2CH2CH2Cl
(iii) CH3CH2(CH3)CH2Cl
(iv) (CH3)3Cl
उत्तर
(ii) CH3CH2CH2CH2Cl

प्रश्न 4.
3-फेनिलप्रोपीन HBr से क्रिया करके मुख्य उत्पाद देता है –
(i) C6H5CH2CH(Br)CH3
(ii) C6H5CH(Br)CH2CH3
(iii) C6H5CH2CH2CH2Br
(iv) C6H5CH(Br)CH = CH2
उत्तर
(i) C6H5CH2CH(Br)CH3

प्रश्न 5.
ऐल्कोहॉलीय KOH के प्रति निम्न में से सर्वाधिक क्रियाशील है- ,
(i) CH = CHBr
(ii) CH3COCH2CH2Br
(iii) CH3CH2Br
(iv) CH3CH2CH2Br
उत्तर
(iv) CH3CH2CH2Br

प्रश्न 6.
अभिक्रियाओं के निम्न अनुक्रम में ऐल्कीन यौगिक बनाती है। यौगिक B है
CH3CH = CHCH3 [latex]\xrightarrow [ { O }_{ 3 } ]{ { cCl }_{ 4 } } [/latex] A [latex]\xrightarrow [ { H }_{ 2 }O ]{ Zn }[/latex] B
(i) CH3CH2CHO
(ii) CH3COCH3
(iii) CH3CH2COCH3
(iv) CH3CHO
उत्तर
(iv) CH3CHO

प्रश्न 7.
CH3CH BrCH2 -CH3 [latex]\underrightarrow { Alc.KOH } [/latex] का मुख्य उत्पाद है – (2017)
(i) प्रोपीन-1
(ii) ब्यूटीन-2
(iii) ब्यूटेन
(iv) ब्यूटाइन-1
उत्तर
(ii) ब्यूटीन-2

प्रश्न 8.
ऐल्कोहॉलीय KOH की उपस्थिति में किस मिश्रण के साथ कार्बिल ऐमीन परीक्षण किया जाता है? (2017)
(i) क्लोरोफॉर्म एवं रजत चूर्ण
(ii) त्रि-हैलोजनीकृत मेथेन और एक प्राथमिक ऐमीन
(iii) एक ऐल्किल हैलाइड और एक प्राथमिक ऐमीन
(iv) एक ऐल्किल सायनाइड और एक प्राथमिक ऐमीन
उत्तर
(ii) त्रि-हैलोजनीकृत मेथेन और एक प्राथमिक ऐमीन

प्रश्न 9.
निम्नलिखित अभिक्रिया C6H6 + Cl, I उत्पाद, में उत्पाद है। (2014)
(i) C6H5Cl
(ii) o- C6C4Cl2
(iii) C6H6Cl6
(iv) p-C6H4Cl2
उत्तर
(iii) C6H6Cl6

प्रश्न 10.
CHCl3 ऑक्सीकरण पर देता है – (2017, 18)
(i) फॉस्जीन
(ii) फॉर्मिक अम्ल
(iii) कार्बन टेट्रा क्लोराइड
(iv) क्लोरोपिक्रिन
उत्तर
(i) फॉस्जीन

प्रश्न11.
क्लोरोपिक्रिन है – (2018)
(i) CCl3HNO2
(ii) CCl3. NO2
(iii) CCl2(NO2)2
(iv) CCl2H2NO2
उत्तर
(ii) CCl3. NO2

प्रश्न 12.
जब क्लोरोफॉर्म सान्द्र HNO3 से अभिक्रिया करता है तो निम्न में से क्या बनता है? (2017)
(i) CHCl3NO2
(ii) C(NO2)Cl3
(iii) CHCl3HNO3
(iv) CHCl2NO2
उत्तर
(ii) C(NO2)Cl3

प्रश्न 13.
फॉस्जीन है – (2017)
(i) PH3
(ii) POCl3
(iii) CS2
(iv) COCl2
उत्तर
(iv) C0Cl2

प्रश्न 14.
क्लोरोफॉर्म का प्रयोग होता है – (2014)
(i) एक कीटनाशक के रूप में।
(ii) एक फफूदीनाशक के रूप में
(iii) औद्योगिक विलायक के रूप में
(iv) अवशोषक के रूप में
उत्तर
(iii) औद्योगिक विलायक के रूप में

प्रश्न 15.
आयोडोफॉर्म निम्न में से किससे नहीं बनाई जा सकती?
(i) एथिल मेथिल कीटोन
(ii) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल
(iii) 2-मेथिल-2-ब्यूटेनॉन
(iv) आइसोब्यूटिल ऐल्कोहॉल
उत्तर
(iv) आइसोब्यूटिल ऐल्कोहॉल

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कारण दीजिए- ऐल्किल हैलाइडों में C-X के ध्रुवीय होने पर भी यह जल में अविलेय होता है।
उत्तर
ऐसा जल के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाने की अयोग्यता एवं जल में उपस्थित हाइड्रोजन आबन्ध को न तोड़ पाने के कारण होता है।

प्रश्न 2.
ध्रुवण घूर्णक पदार्थ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
वह पदार्थ जो समतल ध्रुवित प्रकाश के तल को एक निश्चित कोण तक घुमाने की प्रवृत्ति रखता है, ध्रुवण घूर्णक पदार्थ कहलाता है।

प्रश्न 3.
असममित कार्बन परमाणु किसे कहते हैं?
उत्तर
वह कार्बन परमाणु जिसकी चारों संयोजकताएँ भिन्न-भिन्न परमाणुओं या समूहों द्वारा सन्तुष्ट होती हैं, उसे असममित कार्बन परमाणु कहते हैं।

प्रश्न 4.
प्रकाश समावयवी से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
समान अणुसूत्र तथा समान रासायनिक संरचनाओं वाले दो-या-दो से अधिक यौगिक जो समतल ध्रुवित प्रकाश के प्रति भिन्न व्यवहार दर्शाते हैं, प्रकाश समावयवी कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
C2H5O2Br सूत्र वाला एक कार्बोक्सिलिक अम्ल प्रकाश सक्रिय है। उसकी संरचना लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 6.
किस ऐल्किल हैलाइड का घनत्व सर्वाधिक होता है और क्यों?
उत्तर
CH3I का घनत्व सर्वाधिक होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसमें कार्बन की संख्या न्यूनतम है और यह सबसे भारी हैलोजन है।

प्रश्न 7.
निम्न को क्वथनांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
CH3 CH2 CH2 CH2Br, (CH3)3 CBr, (CH3)2 CHCH2Br
उत्तर
(CH3)3 CBr < (CH3)2 CHCH2Br < CH3CH2CH2CH2Br

प्रश्न 8.
कारण दीजिए-ऐल्किल हैलाइड ऐरिल हैलाइड से श्रेष्ठ विलायक होते हैं।
उत्तर
हैलोऐल्केनों में C- X आबन्ध हैलोऐरीनों से अधिक ध्रुवीय होता है। C – X आबन्ध की ध्रुवता के कारण ऐल्किल हैलाइड ऐरिल हैलाइड से श्रेष्ठ विलायक होते हैं।

प्रश्न 9.
कारण दीजिए-उद्योगों में प्रयुक्त विलायक हैलोऐल्केन ब्रोमो यौगिकों के विपरीत क्लोरो यौगिक होते हैं।
उत्तर
क्लोरीन, ब्रोमीन की तुलना में अधिक ऋणविद्युती होने के कारण ऐल्किल क्लोराइड में C-Cl आबन्ध ऐल्किल ब्रोमाइड में C- Br आबन्ध से अधिक ध्रुवीय (polar) होता है। आबन्ध की उच्च ध्रुवता के कारण क्लोरोऐल्केन ब्रोमोऐल्केनों की तुलना में श्रेष्ठ विलायक होते हैं।

प्रश्न 10.
किन परिस्थितियों में 2-मेथिलप्रोपीन को हाइड्रोजन ब्रोमाइड द्वारा आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड में परिवर्तित किया जा सकता है?
उत्तर
परॉक्साइडों की उपस्थिति में HBr के प्रतिमार्कोनीकॉफ योग द्वारा।
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प्रश्न11.
निम्न में से कौन-सा यौगिक SN 2 अभिक्रिया में OH के साथ शीघ्रता से अभिक्रिया करेगा?
CH2= CHBr अथवा CH= CHCH2Br
उत्तर
CH2= CHCH2Br शीघ्रता से अभिक्रिया करेगा क्योंकि ऐलिल ब्रोमाइड, वाइनिल ब्रोमाइड से अधिक क्रियाशील होते हैं।

प्रश्न 12.
वाइनिल क्लोराइड एथिल क्लोराइड की तुलना में धीमे जल-अपघटित होता है, क्यों?
उत्तर
वाइनिल क्लोराइड को निम्नलिखित संरचनाओं के अनुनादी संकर के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है –
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अनुनाद के कारण C-Cl आबन्ध में कुछ द्विआबन्ध लक्षण आ जाते हैं। दूसरी ओर एथिल क्लोराइड में कार्बन-क्लोरीन आबन्ध शुद्ध एकल आबन्ध होता है। अतः वाइनिल क्लोराइड एथिल क्लोराइड की तुलना में धीमे जल-अपघटित होता है।

प्रश्न 13.
ट्राइक्लोरोमेथेन को गहरी रंगीन बोतलों में संगृहीत करते हैं। तर्क दीजिए। (2017)
उत्तर
ट्राइक्लोरोमेथेन या क्लोरोफॉर्म प्रकाश की उपस्थिति में वायुमण्डलीय ऑक्सीजन से ऑक्सीकृत होकर अत्यधिक विषैली गैस फॉस्जीन (COCl2) बनाता है।
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अत: प्रकाश से बचाने के लिए क्लोरोफॉर्म को गहरी रंगीन, बोतलों में संगृहीत किया जाता है।

प्रश्न 14.
कारण दीजिए-क्लोरोफॉर्म क्लोरीन यौगिक है फिर भी यह सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ कोई अवक्षेप नहीं देता है, क्यों?
उत्तर
क्लोरोफॉर्म सहसंयोजी यौगिक है, अत: यह क्लोराइड आयन नहीं देता है। इसलिए यह AgNO3 के साथ किसी प्रकार का अवक्षेप नहीं देता है।

प्रश्न 15.
क्लोरोफॉर्म को प्रकाश एवं वायु के प्रभाव से बचाने के लिए कौन-सी सावधानियाँ बरती जाती हैं? (2017)
उत्तर
क्लोरोफॉर्म को रंगीन बोतलों में, काले कागज में लपेटकर, अंधेरे में, मुँह तक भर कर तथा 1 % C2H5OH की कुछ बूंद मिलाकर रखना चाहिए।

प्रश्न 16.
क्लोरोबेन्जीन की बेन्जीन रिंग की एक प्रतिस्थापन अभिक्रिया को समीकरण लिखिए। (2017)
उत्तर
क्लोरोबेन्जीन का नाइट्रीकरण
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प्रश्न17.
कौन-सा रसायन ओजोन परत को क्षति पहुँचाता है?
उत्तर
फ्रेऑन (CFCs)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए

  1. राइमर टीमन अभिक्रिया (2016, 17)
  2. कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया (2016)
  3. वुज-फिटिग अभिक्रिया। (2016, 17, 18)
  4. फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया (2016)
  5. विहाइड्रोहैलोजेनीकरण या डिहाइड्रोहैलोजेनीकरण (2016)

उत्तर
1. जब फीनॉल, क्लोरोफॉर्म तथा ऐल्कोहॉलिक KOH के मिश्रण को गर्म किया जाता है तो सैलिसिलेल्डिहाइड बनता है, जिसे ऑर्थों-हाइड्रॉक्सीबेन्जेल्डिहाइड कहते हैं।
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यह अभिक्रिया राइमर यमन अभिक्रिया कहलाती है।
2. क्लोरोफॉर्म को ऐनिलीन और ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर अभिक्रिया द्वारा तीव्र दुर्गन्ध युक्त पदार्थ आइसोसायनाइड बनता है। यह अभिक्रिया कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहलाती है।
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3. जब ऐरिल हैलाइड को ऐल्किल हैलाइड के साथ धात्विक सोडियम की उपस्थिति में शुष्क ईथर विलयन में अभिकृत किया जाता है तो बेन्जीन का ऐल्किल व्युत्पन्न प्राप्त होता है। यह अभिक्रिया वुज-फिटिग अभिक्रिया कहलाती है।
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4. क्लोरोबेन्जीन मेथिल क्लोराइड के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में अभिक्रिया द्वारा o- मेथिल तथा p- मेथिल क्लोरोबेन्जीन का मिश्रण देता है।
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यह अभिक्रिया फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया कहलाती है।
5. ऐल्कोहॉलिक KOH वे NaNH2 को गर्म करने पर ऐल्काइन बनते हैं।
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इसे विहाइड्रोहैलोजेनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 2.
ट्राइआयोडोमेथेन (आयोडोफॉर्म) पर एक टिप्पणी लिखिए। (2017, 18)
उत्तर
यह मेथेन का ट्राइआयोडो व्युत्पन्न (derivative) है तथा औषधियों एवं रासायनिक उद्योगों में कई प्रकार से उपयोग किया जाता है। सामान्यत: इसे आयोडोफॉर्म (iodoform) कहते हैं।
यह विशिष्ट गन्ध वाला पीला क्रिस्टलीय ठोस है। इसका उपयोग प्रारम्भ में पूतिरोधी (ऐंटिसेप्टिक) के रूप में किया जाता था। आयोडोफॉर्म का यह पूतिरोधी गुण स्वयं आयोडोफॉर्म के कारण नहीं बल्कि मुक्त हुई आयोडीन के कारण होता है। इसकी अरुचिकर गंध के कारण अब इसके स्थान पर आयोडीनयुक्त अन्य दवाओं का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
फ्रेऑन क्या है? इसका पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है? (2016, 17)
या
किसी फ्रेऑन का रासायनिक सूत्र लिखिए। (2017)
या
फ्रेऑन क्या है? इसका एक उपयोग लिखिए। (2018)
उत्तर
ऐल्केनों के पॉलिक्लोरोफ्लुओरो व्युत्पन्नों को फ्रेऑन कहते हैं। पॉलिक्लोरोफ्लुओरोमेथेन तथा पॉलिक्लोरोफ्लुओरोएथेन महत्त्वपूर्ण फ्रेऑन हैं, जैसे –

  1. CFCl3 ट्राइक्लोरोफ्लुओरोमेथेन (फ्रेऑन-11)
  2. CF2Cl2 डाइक्लोरोडाइफ्लुओरोमेथेन (फ्रेऑन-12)
  3. C2F2Cl4 ट्रेट्रीक्लोरोडाइफ्लुओरोएथेन (फ्रेऑन-112)

CFCl3 में कार्बन तथा फ्लुओरीन का अनुपात 1: 1 है, अत: इस कारण इसका नाम फ्रेऑन-11 है। CF2Cl2 में कार्बन तथा फ्लुओरीन का अनुपात 1: 2 है, अतः इस कारण इसका नाम फ्रेऑन-12 है।
फ्रेऑन के गुण – फ्रेऑन रंगहीन, गन्धहीन, विषहीन, अत्यन्त अक्रिय तथा कम क्वथनांक वाले द्रव हैं। ये बहुत कम दाब पर ही गैस अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं, इस कारण इनका उपयोग रेफ्रीजेरेटर तथा वातानुकूलन में प्रशीतक के रूप में होता है। इन यौगिकों को संक्षिप्त रूप में CFCs भी कहते हैं। इनका पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। इनको ओजोन परत को नष्ट करने के लिए उत्तरदायी माना जा रहा है।

प्रश्न 4.
डी डी टी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2017)
या
डी डी टी का उपयोग लिखिए तथा पर्यावरण पर इसका क्या प्रभाव पडता है? (2016, 17)
उत्तर
DDT का उपयोग एक सम्पर्क कीटनाशक (contact insecticide) की भाँति किया जाता है। सस्ता तथा शक्तिशाली होने के कारण मक्खी, मच्छर, कीड़े-मकोड़े, शलभ तथा कृषि पीड़कों को मारने के लिए इसका व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है।
यह मुख्यत: मलेरिया फैलाने वाले ऐनोफीलीज मच्छर (Anopheles mosquito) तथा टाइफस वाहक जुओं को समाप्त करने में प्रभावकारी है।

द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् कीटनाशक के रूप में DDT का उपयोग विश्व स्तर पर तेजी से बढ़ा। 1940 ई० के अन्त में DDT के अत्यधिक उपयोग के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएँ सामने आने लगीं। कीटों की अनेक प्रजातियों ने DDT के प्रति प्रतिरोधात्मकता विकसित कर ली तथा यह मछलियों के लिए अति विषैली सिद्ध हुई। DDT के अत्यधिक रासायनिक स्थायित्व तथा इसकी वसा में विलेयता ने समस्या को और जटिल बना दिया। जन्तुओं द्वारा DDT का शीघ्रता से उपापचय नहीं होता है बल्कि यह वसीय ऊतकों में एकत्र तथा संग्रहित हो जाती है। यदि जन्तु इसका निरन्तर अन्तर्ग्रहण करता रहता है तो समय के साथ इसकी मात्रा निरन्तर बढ़ती जाती है। यह बढ़ी हुई मात्रा जन्तुओं के जनन तन्त्र पर विपरीत प्रभाव डालती है। इसके दुष्प्रभावों (ill effects) को देखते हुए, यू० एस० ए० ने 1973 ई० में DDT पर प्रतिबन्ध लगा दिया था यद्यपि विश्व में अनेक स्थानों पर इसका उपयोग आज भी हो रहा है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्लोरोबेन्जीन बनाने की विधियों का वर्णन कीजिए। इसके भौतिक तथा रासायनिक गुण लिखिए। इसके उपयोग बताइए। (2016)
या
टिप्पणी लिखिए-सैण्डमायर अभिक्रिया। (2016)
या
क्लोरोबेन्जीन का हैलोजन वाहक की उपस्थिति में हैलोजनीकरण किस प्रकार होता है? सम्बन्धित समीकरण लिखिए। (2018)
उत्तर
सूत्र
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प्रयोगशाला विधि – प्रयोगशाला में क्लोरोबेन्जीन को विरचन बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ क्यूप्रस क्लोराइड (Cu2Cl2) की उपस्थिति में लगभग 60°C ताप पर गर्म करके किया जाता है। इस अभिक्रिया को सैण्डमायर अभिक्रिया कहते हैं। अभिक्रिया में प्रयुक्त डाइऐजोनियम लवण ऐनिलीन की 0°C से 5°C पर सोडियम नाइट्राइट तथा तनु HCl की डाइऐजोटीकरण (diazotisation) अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।
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बेन्जीन से – हैलोजेनवाहक की उपस्थिति में गर्म बेन्जीन में शुष्क क्लोरीन गैस प्रवाहित करने से क्लोरोबेन्जीन बनती है।
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फीनॉल से – फीनॉल पर फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड की अभिक्रिया से C6H5Cl बनता है। इस अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद (C6H5)3PO4 होता है।
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गाटरमान अभिक्रिया द्वारा – इस अभिक्रिया में बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को कॉपर चूर्ण व HCl के साथ गर्म करने पर क्लोरोबेन्जीन बनती है।
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भौतिक गुण – क्लोरोबेन्जीन रंगहीन, सुगन्धित भारी द्रव होता है। इसका क्वथनांक 132°C होता है। यह जल में अविलेय, परन्तु ऐल्कोहॉल तथा ईथर में पूर्ण विलेय है।

रासायनिक गुण 
1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया – क्लोरोबेन्जीन को उच्च दाब (200 वायुमण्डल) तथा उच्च ताप (300°C) पर जलीय NaOH के साथ अभिकृत करने पर फीनॉल बनता है।
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2. अमोनिया की अभिक्रिया – क्लोरोबेन्जीन को अमोनिया के जलीय विलयन के साथ क्यूप्रस ऑक्साइड की उपस्थिति में उच्च दाब पर 200°C ताप तक गर्म करने पर इसका CI परमाणु-NH, समूह द्वारा प्रतिस्थापित होकर ऐनिलीन बनाता है।
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3. वुज-फिटिग अभिक्रिया – जब एक अणु ऐरिल हैलाइड तथा दूसरा अणु ऐल्किल हैलाइड सोडियम के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में अभिक्रिया करके ऐल्किल ऐरीन देता है, तो यह अभिक्रिया वुज-फिटिग अभिक्रिया कहलाती है। जैसे- क्लोरोबेन्जीन शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम और मेथिल क्लोराइड के साथ गर्म करने पर टॉलुईन देती है।
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4. फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया – इस अभिक्रिया में क्लोरोबेन्जीन मेथिल क्लोराइड के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में अभिक्रिया द्वारा o-मेथिल तथा p- मेथिल क्लोरोबेन्जीन का मिश्रण देता है।
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5. हैलोजनीकरण – जब क्लोरोबेन्जीन का किसी हैलोजनवाहक की उपस्थिति में हैलोजनीकरण कराया जाता है, तो 0- वे p- डाईक्लोरोबेंजीन की प्राप्ति होती है।
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क्लोरोबेन्जीन के उपयोग

  1. विभिन्न ऐरोमैटिक यौगिकों के निर्माण में।
  2. कीटनाशक पदार्थ डी०डी०टी० के निर्माण में।
  3. फफूदनाशी, डाइऐजोरंजकों आदि के निर्माण में।

प्रश्न 2.
प्रयोगशाला में क्लॉरोफॉर्म बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। प्राप्त क्लॉरोफॉर्म से शुद्ध क्लोरोफॉर्म कैसे प्राप्त करोगे? इसके प्रमुख गुणधर्म व उपयोग भी दीजिए। या रासायनिक समीकरण देते हुए समझाइए कि एथिल ऐल्कोहॉल से क्लोरोफॉर्म कैसे बनाया जाता है? क्लोरोफॉर्म को गहरे रंग की बोतलों में क्यों रखा जाता है? (2017)
उत्तर
सूत्र– CHCl3 I.U.P.A.C. नाम – ट्राइक्लोरोमेथेन
प्रयोगशाला में शुद्ध क्लॉरोफॉर्म का विरचन – प्रयोगशाला में शुद्ध क्लोरोफॉर्म का विरचन निम्न दो प्रकार से किया जाता है –
(i) एथिल ऐल्कोहॉल से क्लोरोफॉर्म – एथिल ऐल्कोहॉल को नम विरंजक चूर्ण (bleaching powder) के साथ मिलाकर आसवन करने पर क्लोरोफॉर्म प्राप्त होता है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित पदों में होती है –
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(ii) ऐसीटोन से क्लोरोफॉर्म – ऐसीटोन के नम विरंजक चूर्ण के साथ आसवन से भी क्लोरोफॉर्म बनता है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित पदों में होती है –
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एक गोल पेंदी के फ्लास्क में 200 ग्राम विरंजक चूर्ण की 400 मिली जल से बनी लेई और 50 मिली ऐसीटोन या ऐल्कोहॉल लेकर जल ऊष्मक के ऊपर गर्म करते हैं। जिससे जल तथा क्लोरोफॉर्म का मिश्रण आसवित होकर जल से भरे ग्राही पात्र में इकट्ठा हो जाता है। पृथक्कारी कीप द्वारा आसुत द्रव का नीचे वाला अंश एकत्रित करते हैं। अम्लीय अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसे NaOH विलयन द्वारा धोकर, फिर जल से धोकर और इसमें निर्जल CaCl2 मिलाकर पुन: आसवित करते हैं जिससे लगभग 61°C पर शुद्ध क्लोरोफॉर्म प्राप्त होता है।

भौतिक गुण – यह एक रंगहीन, मीठी गन्ध वाला, ज्वलनशील द्रव है। इसका क्वथनांक 61°C तथा आपेक्षिक घनत्व 1.485 है। यह जल में अविलेय, किन्तु ईथर व ऐल्कोहॉल में विलेय है। इसकी वाष्प को सँघने से कुछ समय के लिए मूच्र्छा आ जाती है। इसी गुण के कारण इसका उपयोग निश्चेतक (anaesthetic) के रूप में किया जाता है।

रासायनिक गुण
1. ऑक्सीकरण – सूर्य के प्रकाश तथा वायु में खुला रखने से फॉस्जीन (विषैली) या कार्बोनिल क्लोराइड गैस बनती है।
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क्लोरोफॉर्म को गहरे भूरे रंग की बोतल में ऊपर तक भरकर इसलिए रखते हैं, जिससे प्रकाश और वायु अन्दर न पहुँच सके अन्यथा क्लोरोफॉर्म धीरे-धीरे ऑक्सीकृत होकर फॉस्जीन गैस बनाता है जो कि अत्यन्त घातक विष है। क्लोरोफॉर्म में 1% एथिल ऐल्कोहॉल संदमक (inhibitor) के रूप में डालते हैं और लाल-भूरे रंग की बोतल में रखते हैं जो प्रकाश को रोकती है। एथेनॉल इस अभिक्रिया में ऋणात्मक उत्प्रेरक का कार्य करता है। एथिल ऐल्कोहॉल की उपस्थिति में वायु द्वारा क्लोरोफॉर्म के ऑक्सीकरण की गति अत्यन्त धीमी पड़ जाती है अर्थात् क्लोरोफॉर्म को स्थायित्व बढ़ जाता है। यदि कुछ फॉस्जीन बनता भी है तो वह एथिल ऐल्कोहॉल से अभिक्रिया करके डाइएथिल कार्बोनेट बनाता है जो विषैला नहीं होता है।
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2. अपचयन – यह जिंक और जल के साथ उबालने पर अपचयित होकर मेथेन देता है, Zn और तनु HCl के साथ अपचयित होकर मेथिलीन क्लोराइड देता है, जबकि Zn तथा ऐल्कोहॉलिक HCl द्वारा अपचयन पर मेथिल क्लोराइड बनता है।
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3. क्लोरीन से अभिक्रिया – कार्बन टेट्रोक्लोराइड प्राप्त होता है।
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4. ऐसीटोन से अभिक्रिया – क्षार की उपस्थिति में ऐसीटोन से संघनन अभिक्रिया द्वारा क्लोरीटोन प्राप्त होता है जिसका उपयोग निद्राकारी औषधि के निर्माण में होता है।
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5. नाइट्रिक अम्ल से क्रिया – नाइट्रोक्लोरोफॉर्म (या क्लोरोपिक्रिन) प्राप्त होता है, जिसका उपयोग कीटनाशक व अश्रु (tear) गैस के रूप में होता है।
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उपयोग – क्लोरोफॉर्म के निम्नलिखित उपयोग हैं –

    1. 30% ईथर में इसका विलयन शल्य चिकित्सा में निश्चेतक के रूप में।
    2. लाख, रबड़, चर्बी आदि के लिए विलायक के रूप में।
  1. दवाईयों के रूप में।
  2. जीवाणुनाशक के रूप में।
  3. सुगन्धित पदार्थ के रूप में।
  4. टेफ्लॉन (PTFE) के निर्माण में।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines (ऐमीन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 13 Amines (ऐमीन).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 13
Chapter Name Amines
Number of Questions Solved 67
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines (ऐमीन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए.
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines image 1
(iii) (C2H5)CHNH2,
(iv) (C2H5)2 NH.
उत्तर :
(i) प्राथमिक ऐमीन
(ii) तृतीयक ऐमीन ।
(iii) प्राथमिक ऐमीन
(iv) द्वितीयक ऐमीन।

प्रश्न 2.
(i) अणुसूत्र C4H11N  से प्राप्त विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना लिखिए।
(ii) सभी समावयवों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए।
(iii) विभिन्न युग्मों द्वारा कौन-से प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है? या सूत्र  C4H11N  से कितने प्राथमिक ऐमीन सम्भव हैं?
उत्तर :
आठ समावयवी ऐल्कीन सम्भव हैं
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N,N-डाइमेथिलएथेनेमीन (तृतीयक)
विभिन्न ऐमीनों द्वारा प्रदर्शित समावयवता :

  • श्रृंखला समावयवी : (i) तथा(ii); (iii) तथा (iv); (i) तथा (iv)
  • स्थाने समावयवी : (ii) तथा (iii); (ii) तथा (iv)
  • मध्यावयवी : (v) तथा (vi); (vii) तथा (viii)
  • क्रियात्मक समावयवी : तीनों प्रकार की ऐमीन एक-दूसरे की क्रियात्मक समावयवी होती हैं।

प्रश्न 3.
आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे?
(i) बेन्जीन से ऐनिलीन
(ii) बेन्जीन से N, N-डाइमेथिल ऐनिलीन
(iii) Cl—(CH2)4—Cl से हेक्सेन – 1, 6 – डाइऐमीन
उत्तर :
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित को उनके बढ़ते हुए क्षारकीय प्रबलता के क्रम में लिखिए
(i) C2H5NH2,  C6H5NH2,  NH3,  C6H5NH2NH2)  तथा  (C2H5)2 NH
(ii) C2H5NH2,  (C2H5)2 NH,  (C2H5)3 N,  C6H5NH2
(iii) CH3NH2,  (CH3)2NH,  (CH3)3N,  C6H5NH2,  C6H5CH2NH2
उत्तर :
(i) C6H5NH2 < NH3 < C6H5CH2NH2 < C2H5NH2, < (C2H5)2 NH
(ii) C6H5NH2 <  C2H5NH2<  (C2H5)3N < (C2H5)2 NH
(iii) C6H5NH2  <  C6H5CH2NH2 < (CH3)3N < CH3NH2 < (CH3)2NH

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अम्ल-क्षारक अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए तथा उत्पादों के नाम लिखिए
(i) CH3CH2CH2NH2 + HCl →
(ii) ( (C2H5)2 N  + HCl   →
उत्तर :
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प्रश्न 6.
सोडियम कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में मेथिल आयोडाइड के आधिक्य द्वारा ऐनिलीन के ऐल्किलन में उत्पन्न होने वाले उत्पादों के लिए अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 7.
ऐनिलीन की बेन्जोइल क्लोराइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 8.
अणुसूत्र C3H9 N से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिए। उन समावयवों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए जो नाइट्रस अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त। करते हैं।
उत्तर :
आण्विक सूत्र C3H9 N चार समावयवी ऐलिफैटिक ऐमीनों को निरूपित करता है। ये निम्नवत् है।
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केवल प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल (HONO) के साथ क्रिया करके N2 गैस मुक्त करती हैं तथा संगत प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाती हैं।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित परिवर्तन कीजिए
(i) 3 – मेथिल ऐनिलीन से 3 – नाइट्रोटॉलूईन
(ii) ऐनिलीन से 1, 3, 5 – ट्राइब्रोमो बेन्जीन।
उत्तर :
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अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए तथा इनके आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए

  1. (CH3)2CHNH2
  2. CH3(CH2)2CH2NH2
  3. CH3NHCH(CH3)2
  4. (CH3)3CNH2
  5.  C6H5NHCH3
  6. (CH3CH2)2NCH3
  7. m-BrC6H4NH

उत्तर :

  1. प्रोपेन-2-ऐमीन (1°)
  2. प्रोपेन-1-ऐमीन (1°)
  3. N-मेथिल प्रोपेन-2-ऐमीन (2°)
  4. 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (3°)
  5. N-मेथिलबेन्जीनेमीन या N-मेथिलऐनिलीन (2°)
  6. N-एथिल, N-मेथिलऐथेनेमीन (3°)
  7. 3-ब्रोमोबेन्जैनेमीन या 3-ब्रोमोऐनिलीन (1°)

प्रश्न 2.
निम्नलिखित युग्मों के यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए
(i) मेथिल ऐमीन एवं डाइमेथिल ऐमीन
(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन
(iii) एथिल ऐमीन एवं ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन एवं बेन्जिल ऐमीन
(v) ऐनिलीन एवं N-मेथिल ऐनिलीन।
उत्तर :
(i) मेथिल ऐमीन एवं डाइमेथिल ऐमीन :
इनमें कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। मेथिलऐमीन प्राथमिक ऐमीन है, इसलिए यह कार्बिलऐमीन परीक्षण देती है अर्थात् KOH के ऐल्कोहॉलिक विलयन तथा CHCl3 के साथ गर्म करने पर यह मेथिल काबिलेमीन की तीव्र गन्ध देती है। इसके विपरीत, डाइमेथिलऐमीन एक द्वितीयक ऐमीन है, इसलिए यह कार्बिलऐमीन परीक्षण नहीं देती।
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(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन :
इनमें लिबरमैन नाइट्रोसोऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। द्वितीयक ऐमीन लिबरमैन नाइट्रोसोऐमीन परीक्षण देती हैं, जबकि तृतीयक ऐमीन ये परीक्षण नहीं देती।। द्वितीयक ऐमीन HNO2, से अभिक्रिया करके पीले रंग का तैलीय N-नाइट्रोसोऐमीन देती हैं। यहाँ HNO2, को खनिज अम्ल (HCI) तथा सोडियम नाइट्राइट की अभिक्रिया द्वारा माध्यम में (in situ) ही बनाया जाता है
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N-नाइट्रोसोडाइएथिल ऐमीन को फीनॉल के क्रिस्टल तथा सान्द्र H2SO2 के साथ गर्म करने पर यह एक हरा विलयन देती है जिसे जलीय NaOH के साथ क्षारीय बनाए जाने पर गहरा नीला विलयन प्राप्त होता है जो तनुकरण पर लाल हो जाता है। तृतीयक ऐमीन यह परीक्षण नहीं देती हैं।

(iii) एथिल ऐमीन एवं ऐनिलीन : 
एथिलऐमीन प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन है, जबकि ऐनिलीने प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन है। इन्हें ऐजो रंजक परीक्षण द्वारा विभेदित किया जा सकता है। ऐजो रंजक परीक्षण – इसमें ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन की HNO2, (NaNO2, + तनु HCl ) के साथ 273–278K पर अभिक्रिया होती है तथा इसके पश्चात् 2 नैफ्थॉल (β – नैफ्थॉल) के क्षारीय विलयन के साथ अभिक्रिया से गहरे पीले, नारंगी या लाल रंग का रंजक प्राप्त होता है।
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ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन उपर्युक्त परिस्थितियों के अन्तर्गत प्राथमिक ऐल्कोहॉलों के निर्माण के साथ नाइट्रोजन गैस तीव्रता से मुक्त करती हैं अर्थात् विलयन पारदर्शी ही रहता है।
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(iv) ऐनिलीन एवं बेन्जिल ऐमीन :
इन्हें नाइट्रस अम्ल परीक्षण द्वारा विभेदित किया जा सकता है। नाइट्रस अम्ल परीक्षण – बेन्जिल ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाती है जो कम ताप पर भी अस्थायी होने के कारण N2, के विमुक्तन के साथ विघटित हो जाता है।
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ऐनिलीन HNO2, से अभिक्रिया करके बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनाती है जो 273 – 278 K पर स्थायी होता है, इसलिए विघटित होकर नाइट्रोजन गैस नहीं देता है।
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(v) ऐनिलीन एवं N-मेथिल ऐनिलीन :
इनमें कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। ऐनिलीन प्राथमिक ऐमीन होने के कारण कार्बिलऐमीन परीक्षण देती है अर्थात् ऐल्कोहॉलिक KOH विलयन तथा CHCl3 के साथ गर्म करने पर यह फेनिल आइसोसायनाइड की हानिकारक गन्ध देती है। इसके विपरीत, N – मेथिल ऐनिलीन द्वितीयक ऐमीन होने के कारण यह परीक्षण नहीं देती।
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित के कारण बताइए
(i) ऐनिलीन का pKb मेथिल ऐमीन की तुलना में अधिक होता है।
(ii) एथिल ऐमीन जल में विलेय है, जबकि ऐनिलीन नहीं।
(iii) मेथिल ऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देती है।
(iv) यद्यपि ऐमीनो समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में ऑर्थों एवं पैरा-निर्देशक होता है, फिर भी ऐनिलीन नाइट्रीकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में     मेटा-नाइट्रोऐनिलीन देती है।
(v) ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं।
(vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती
उत्तर :
(i) ऐनिलीन, मेथिलऐमीन से अधिक दुर्बल क्षार होती है। ऐनिलीन में  N – परमाणु पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घट जाता है। दूसरी ओर, मेथिलऐमीन में CH3 समूह के + I  प्रभाव के कारण N-परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। अत: ऐनिलीन मेथिलऐमीन से दुर्बल क्षार होता है, अत: इसका  pKb, मान मेथिलऐमीन से उच्च होता है।

(ii) एथिलऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाने के कारण जल में विलेय होती है।
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दूसरी ओर, ऐनिलीन जल में वृहत् हाइड्रोकार्बन भाग CH5 के कारण अविलेय होता है, क्योंकि यह हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनाता है।

(iii) मेथिलऐमीन जल से अधिक क्षारीय होने के कारण जल से प्रोटॉन ग्रहण करके OH आयन मुक्त करती है।
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ये OH आयन जल में उपस्थित Fe3+ आयनों से संयुक्त होकर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का भूरा अवक्षेप देती हैं।
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(iv) नाइट्रीकरण की प्रक्रिया सान्द्र HNO3 तथा सान्द्र H2SO4 के मिश्रण की उपस्थिति में होती है। इन अम्लों की उपस्थिति में अधिकांश ऐनिलीन प्रोटॉनीकृत होकर ऐनिलीनियम आयन बनाती है। अतः । अम्लों की उपस्थिती में अभिक्रिया मिश्रण में ऐनिलीन और ऐनिलीनियम आयन होते हैं -NH2, समूह ऐनिलीन में ऑर्थों तथा पैरा निर्देशक होता है तथा सक्रियक (dactivating) होता है, जबकि ऐनिलीनियम आयन में [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] समूह मेटा निर्देशक तथा निष्क्रियकारक होता है। ऐनिलीन के नाइट्रीकरण से p-नाइट्रोऐनिलीन प्राप्त होती है, जबकि ऐनिलीनियम आयन मेटा नाइट्रोऐनिलीन देता है।
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अतः ऐनिलीन का नाइट्रीकरण ऐमीनो समूह के प्रोटॉनीकरण द्वारा m – नाइट्रोऐनिलीन देता है।

(v) ऐल्किलीकरण तथा ऐसिलीकरण की तरह ऐनिलीन फ्रीडल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देती है क्योंकि यह एलुमिनियम क्लोराइड जो कि उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है (लुईस अम्ल) के साथ लवण बनाती है। इस नाइट्रोजन परमाणु के कारण ऐनिलीन -NH2, समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर धनावेश आ जाता है अतः यह पुनः अभिक्रिया के लिए प्रबल निष्क्रियकारक समूह का कार्य करता है।

(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों के लवणों से अधिक स्थायी होते हैं। क्योंकि निम्न ताप पर ऐलिफैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण वियोजित होकर नाइट्रोजन गैस देते हैं।
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(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड अभिक्रिया से शुद्ध प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है। अतएव, इसका प्रयोग प्राथमिक ऐमीनों के संश्लेषण में किया जाता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को क्रम में लिखिए
(i) pKb, मान के घटते क्रम में
C2H5NH2, C6H5NHCH3, (C2H5)2 NH एांव C6H5NH2,

(ii) क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2, (C2H5)2 NH, एांव CH3NH2

(iii) क्षारकीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में
(क) ऐनिलीन, पैरा-नाइट्रोऐनिलीन एवं पैरा-टॉलूडीन
(ख)C6H5NH2, C6H5NHCH3, C6H5CH2NH2

(iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में
C2H5NH2, (C2H5)2 NH, (C2H5)3 N एवं  NH3

(v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में
C2H5OH, (CH3)2NH, C6H5NH2

(vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में
C2H5NH2,  (C2H5)2 NH, C2H5NH2
उत्तर :
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प्रश्न 5.
इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे
(i) एथेनोइक अम्ल को मेथेनेमीन में
(ii) हेक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमीनोपेन्टेन में
(iii) मेथेनॉल को एथेनोइक अम्ल में
(iv) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में
(v) एथेनोइक अम्ल को प्रोपेनोइक अम्ल में
(vi) मेथेनेमीन को एथेनेमीन में
(vii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिल ऐमीन में
(viii) प्रोपेनोइक अम्ल को एथेनोइक अम्ल में?
उत्तर :
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प्रश्न 6.
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
उत्तर :
बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड (C6H5SO4Cl), जिसे हिन्सबर्ग अभिकर्मक भी कहा जाता है, प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीनों से अभिक्रिया करके सल्फोनेमाइड बनाता है।
(i) बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड और प्राथमिक ऐमीन की अभिक्रिया से N-एथिलबेन्जीन सल्फोनेमाइड प्राप्त होता है।
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सल्फोनेमाइड की नाइट्रोजन से जुड़ी हाइड्रोजन प्रबल इलेक्ट्रॉन खींचने वाले सल्फोनिल समूह की उपस्थिति के कारण प्रबल अम्लीय होती है, अत: यह क्षार में विलेय होता है।

(ii) द्वितीयक ऐमीन की अभिक्रिया से N,N-डाइएथिलबेन्जीनसल्फोनेमाइड बनता है।
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N, N – डाइएथिलबेन्जीन सल्फोनेमाइड N, N – डाइएथिलबेन्जीन सल्फोनेमाइड में कोई भी हाइड्रोजन परमाणु नाइट्रोजन परमाणु से नहीं जुड़ा है। अत: यह अम्लीय नहीं होता तथा क्षार में अविलेय होता है।

(iii) तृतीयक ऐमीन बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड से अभिक्रिया नहीं करती। विभिन्न वर्गों के ऐमीनों का यह गुण जिसमें वे बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड से भिन्न-भिन्न प्रकार से अभिक्रिया करती हैं, प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में विभेद करने एवं इन्हें मिश्रण से पृथक् करने में प्रयुक्त होता है। यद्यपि आजकल बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड के स्थान पर p – टॉलूईन सल्फोनिल क्लोराइड का प्रयोग होता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पर लघु टिप्पणी लिखिए
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया (2014, 16, 17)
(ii) डाइऐजोकरण (2015)
(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (2018)
(iv) युग्मन अभिक्रिया
(v) अमोनीअपघटन
(vi) ऐसीटिलन
(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण।
उत्तर :
(i) काबिलऐमीन अभिक्रिया (Carbylamine Reaction) :
जब ऐलिफैटिक या ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन (जैसे – ऐनिलीन, एथिल या मेथिल ऐमीन) को ऐल्कोहॉलीय KOH की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म की कुछ बूंदों के साथ गर्म किया जाता है तो तीव्र दुर्गन्धयुक्त आइसोसायनाइड प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया को कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहते हैं। इसका उपयोग प्राथमिक ऐमीन समूह की उपस्थिति ज्ञात करने में होता है।
उदाहरण :
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(ii) डाइऐजोकरण अभिक्रिया (Diazotisation Reaction) :
वह क्रिया जिसमें ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन सोडियम नाइट्राइट व तनु HCl के मिश्रण (तनु खनिज अम्ल) के साथ 273 से 278 K ताप पर अभिक्रिया द्वारा ऐमीनो समूह को डाइऐजो समूह में परिवर्तित करते हों, डाइऐजोकरण अभिक्रिया कहलाती है।
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उदाहरण :
ऐनिलीन को सोडियम नाइट्राइट व तनु HCl के मिश्रण के साथ 273 से 278 K ताप पर अभिकृत करने पर बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनता है।
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(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (Hofmann’s Bromamide Reaction) : 
वह अभिक्रिया जिसमें ऐलिफैटिक या ऐरोमैटिक ऐसिड ऐमाइड द्रव ब्रोमीन के साथ कास्टिक पोटाश के जलीय विलयन की उपस्थिति में अभिक्रिया करके प्राथमिक ऐमीन (1C कम का) बनाते हैं, तो यह अभिक्रिया हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया कहलाती है। इस अभिक्रिया की सहायता से – CONH2, समूह को -NH2, समूह में परिवर्तित किया जाता है।
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इस अभिक्रिया में ऐसीटेमाइड, प्रोपिल ऐमाइड तथा बेन्जेमाइड को क्रमशः मेथिल ऐमीन, एथिल ऐमीन । तथा ऐनिलीन में परिवर्तित किया जा सकता है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित पदों में होती है
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(iv) युग्मन अभिक्रिया (Coupling Reaction) :
डाइऐजोनियम लवणों की फीनॉलों तथा ऐरोमैटिक ऐमीनों के साथ अभिक्रिया जिससे सामान्य सूत्र, Ar – N = N – Ar के ऐजो यौगिक बनते हैं। युग्मन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इस अभिक्रिया में डाइऐजो समूह का नाइट्रोजन परमाणु उत्पाद में भी उपस्थित रहता है। फीनॉलों के साथ युग्मन अल्प क्षारीय माध्यम में होता है, जबकि ऐमीनों के साथ यह पर्याप्त अम्लीय माध्यम में होता है।
उदाहरणार्थ :
बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड फीनॉल से अभिक्रिया करके इसके पैरा स्थान पर युग्मित होकर पैरा हाइड्रॉक्सीऐजोबेन्जीन बनाता है। इसी प्रकार की अभिक्रिया को युग्मन अभिक्रिया कहते हैं। इसी प्रकार से डाइऐजोनियम लवण की ऐनिलीन से अभिक्रिया द्वारा पैरा-ऐमीनोऐजोबेन्जीन बनती है। यह एक इलेक्ट्रॉनरागी अभिक्रिया का उदाहरण है।
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युग्मन सामान्यतया पैरा स्थिति [हाइड्रॉक्सिल अथवा ऐमीनो समूह के सापेक्ष (यदि मुक्त है)] पर होता है, अन्यथा यह ऑर्थो स्थिति पर होता है।

(v) अमोनीअपघटन (Ammonolysis) :
ऐल्किल अथवा बेन्जिल हैलाइडों में कार्बन-हैलोजेन आबन्ध नाभिकरागी द्वारा सरलता से विदलित हो जाता है, इसलिए ऐल्किल अथवा बेन्जिल हैलाइड अमोनिया के एथेनॉलिक विलयन से नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं जिसमें हैलोजेन परमाणु ऐमीनो (NH2) समूह से प्रतिस्थापित हो जाता है। अमोनिया अणु द्वारा C-X आबन्ध के विदलन की प्रक्रिया को अमोनीअपघटन (ammonolysis) कहते हैं। यह अभिक्रिया 373 K ताप पर सील बन्द नलिका में कराते हैं। इस प्रकार से प्राप्त प्राथमिक ऐमीन नाभिकरागी की तरह व्यवहार करती है और पुनः ऐल्किल हैलाइड से अभिक्रिया करके द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन तथा अन्तत: चतुष्क अमोनियम लवण बना सकती है।
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इस अभिक्रिया में हैलाइडों की ऐमीनों से अभिक्रियाशीलता का क्रम RI > RBr > RCI होता है। अमोनियम लवण से मुक्त ऐमीन प्रबल क्षार द्वारा अभिक्रिया से प्राप्त की जा सकती है।
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अमोनीअपघटन में यह असुविधा है कि इससे प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन तथा चतुष्क अमोनियम लवण का मिश्रण प्राप्त होता है। यद्यपि अमोनिया आधिक्य में लेने पर प्राप्त मुख्य उत्पाद प्राथमिक ऐमीन हो सकता है।

(vi) ऐसीटिलन या ऐसीटिलीकरण (Acetylation) :
किसी –OH या –NH, समूह के हाइड्रोजन परमाणु का ऐसीटिल (CH3CO) समूह द्वारा विस्थापन ऐसीटिलन या ऐसीटिलीकरण कहलाता है। यह प्रक्रम ऐसीटिल क्लोराइड (CH3COCI), ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड या ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल द्वारा किया जाता है।
उदाहरण :
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इस प्रक्रम का उपयोग ऐमीनो तथा हाइड्रॉक्सी समूहों की संख्या ज्ञात करने में होता है।

(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis) :
गैब्रिएल संश्लेषण का प्रयोग प्राथमिक ऐमीनों के विरचन के लिए किया जाता है। थैलिमाइड एथेनॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया द्वारा थैलिमाइड का पोटैशियम लवण बनाता है जो ऐल्किल हैलाइड के साथ गर्म करने के पश्चात् क्षारीय जल-अपघटन द्वारा संगत प्राथमिक ऐमीन उत्पन्न करता है।
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ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन इस विधि से नहीं बनाई जा सकती क्योंकि ऐरिल हैलाइड थैलिमाइड से प्राप्त ऋणायन के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं कर सकते।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित परिवर्तन निष्पादित कीजिए
(i) नाइट्रोबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल
(ii) बेन्जीन से m-ब्रोमोफीनॉल
(iii) बेन्जोइक अम्ल से ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन से 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन
(v) बेन्जिल क्लोराइड से 2 – फेनिलएथेनेमीन
(vi) क्लोरोबेन्जीन से p – क्लोरोऐनिलीन
(viii) बेन्जेमाइड से टॉलूईन
(vii) ऐनिलीन से p – ब्रोमोऐनिलीन
(ix) ऐनिलीन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
उत्तर :
(i)
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(ix) (vii) के समान ऐनिलीन से अभिक्रिया लिखिए, तब
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में  A, B  तथा  C की संरचना दीजिए
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उत्तर :
(i)
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प्रश्न 10.
एक ऐरोमैटिक यौगिक  ‘A’  जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर यौगिक  ‘B’  बनाता है जो Br2, (ब्रोमीन) एवं KOH के साथ गर्म करने पर अणुसूत्र C6H7N वाला यौगिक ‘C’ बनाता है। A, B एवं C यौगिकों की संरचना एवं इनके आई०यू०पी०ए०सी० नाम। लिखिए।
उत्तर :
चूंकि यह ऐरोमैटिक यौगिक है अत: इसमें बेन्जीन वलय होगी। B, Brतथा KOH के साथ गर्म करने पर (हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया) यौगिक ‘C’ (अणुसूत्र C6H7N ) बनाता है। केवल उच्च ऐमाइड हॉफमैन ब्रोमेमाइड अभिक्रिया [Br2 +KOH] द्वारा निम्न ऐमीन देते हैं। अतएव  B, C6H5CONH2, तथा  C, C6H5NH, हैं। चूंकि यौगिक C6H5CONH2, A से प्राप्त होता है, अत: A, C6H5COOH (कार्बोक्सिलिक अम्ल) होगा, अभिक्रियाओं का अनुक्रम और A, B तथा C की संरचनाएँ अग्रवत् होंगी
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए
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उत्तर :
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प्रश्न 12.
ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण से क्यों नहीं बनाया जा सकता?
उत्तर :
ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा नहीं बनाई जा सकती क्योंकि ऐरिल हैलाइड थैलिमाइड द्वारा निर्मित ऋणीयन के साथ नाभिकस्नेही प्रतिस्थापने अभिक्रियाएँ नहीं देते हैं।
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प्रश्न.13.
ऐलिपैटिक एवं ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर :
(i) ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन HCI की उपस्थिचिभमें माइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके ऐरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण बनाती हैं।
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(ii) ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया करके प्राथमिक ऐल्कोहॉल तथानाइट्रोजन गैस देती हैं।
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित में प्रत्येक का सम्भावित कारण बताइए
(i) समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है।
(ii) प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफैटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं।
उत्तर :
(i) किसी ऐमीन से एक प्रोटॉन निकलने पर ऐमाइड आयन प्राप्त होता है, जबकि ऐल्कोहॉल से एक प्रोटॉन निकलने पर ऐल्कॉक्साइड आयन प्राप्त होता है जैसा कि निम्नवत् दर्शाया गया है
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चूँकि N की तुलना में 0 अधिक विद्युतऋणात्मक है, इसलिए RO° पर ऋणावेश RNH° की तुलना में अधिक सरलता से रह सकता है। दूसरे शब्दों में, ऐमीन ऐल्कोहॉल से कम अम्लीय होती हैं।

(ii) प्राथमिक ऐमीनों के N-परमाणुओं पर दो हाइड्रोजन परमाणुओं की उपस्थिति के कारण ये विस्तीर्ण अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्ध दर्शाती हैं, जबकि तृतीयक ऐमीन में नाइट्रोजन पर हाइड्रोजन अणुओं के अभाव के कारण अन्तराआण्विक संघटन नहीं होता। इसलिए प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
उदाहरणार्थ :
n-ब्यूटिलऐमीन का क्वथनांक (351 K) तृतीयक ब्यूटिलऐमीन (क्वथनांक 319 K) से अधिक होता है।
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(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफेटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं क्योंकि
(क) ऐरोमैटिक ऐमीनों में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है, इसलिए यह प्रोटॉनीकरण के लिए सरलतापूर्वक उपलब्ध हो जाता है।
(ख) ऐरिल ऐमीन आयनों को स्थायित्व संगत ऐरिल ऐमीनों की तुलना में कम होता है अर्थात् ऐरोमैटिक ऐमीनों का प्रोटॉनीकरण उपयुक्त नहीं होता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण का प्रयोग किसके विरचन के लिए किया जाता है?
(i) 1° ऐमीन
(ii) 2° ऐमीन
(iii) 3° ऐमीन
(iv) ये सभी
उत्तर :
(i) 1° ऐमीन

प्रश्न 2.
क्लोरोफॉर्म तथा ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ किसे गर्म करने पर कार्बिलऐमीन की अरुचिकर गन्ध प्राप्त होती है?
(i) कोई ऐरोमैटिक ऐमीन
(ii) कोई प्राथमिक ऐमीन
(iii) कोई ऐमीन
(iv) कोई ऐलिफैटिक ऐमीन
उत्तर :
(ii) कोई प्राथमिक ऐमीन

प्रश्न 3.
निम्न में से किस अभिक्रिया द्वारा ऐमाइड ऐमीन में परिवर्तित किये जा सकते हैं?
(i) पर्किन
(ii) क्ले जन
(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड
(iv) क्लीमेन्सन
उत्तर :
(iii) हॉफमैन ब्रोमेमाइड

प्रश्न 4.
निम्न में से कौन हॉफमान अभिक्रिया द्वारा प्राथमिक ऐमीन देता है?
(i) RCOCI
(ii) RCONHCH3
(iii) RCONH2
(iv) RCOOR
उत्तर :
(iii) RCONH2

प्रश्न 5.
C3H7NH2, NH3, CH3NH2, C2H5NH2  तथा   C6H5NH, में से सबसे कम क्षारीय यौगिक है।
(i) C3H7NH2
(ii) NH3
(iii) CH3NH2
(iv) C6H5NH2
उत्तर :
(iv) C6H5NH2

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक KOH तथा प्राथमिक ऐमीन के साथ गर्म करने पर कार्बिलेमीन परीक्षण देता है?
(i) CHCl3
(ii) CH3Cl
(iii) CH3OH
(iv) CH3 CN
उत्तर :
(i) CHCl3

प्रश्न 7.
निम्न में से कौन-सी ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया करके N, मुक्त नहीं करती है?
(i) ट्राइमेथिलेमीन
(ii) ऐथिलेमीन
(iii) s – ब्यूटिलेमीन
(iv) t – ब्यूटिलेमीन
उत्तर :
(i) ट्राइमेथिलेमीन

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन – सी ऐमीन  KMnO4, द्वारा संगत नाइट्रोयौगिक में सीधे ऑक्सीकृत हो जाती है?
(i)CH3NH2
(ii) C6H5NH2
(iii) (CH3)2NH
(iv) (CH3)3C– NH2
उत्तर :
(iii) (CH3)2NH

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से धनात्मक कार्बिलेमीन परीक्षण कौन देता है?
(i) 2,  4 – डाइमेथिलेनिलीन
(ii) N, N – डाइमेथिलेनिलीन
(iii) N – मेथिल -o- मेथिलेनिलीन
(iv) p – मेथिलबेन्जिलेमीन
उत्तर :
(i) 2, 4-डाइमेथिलेनिलीन

प्रश्न10.
n – प्रोपिलेमीन वाष्पशील यौगिक X देती है जो ऐल्कोहॉलीय क्षार तथा क्लोरोफॉर्म के साथ गर्म करने पर अरुचिकर गन्ध देती है।xकी संरचना है।
(i) CHCH2CHCN
(ii) (CH3)2CHCN
(iii) CHCH2CHNC
(iv) (CH3)2CHNC
उत्तर :
(iii) CHCH2CHNC

प्रश्न 11.
नाइट्रोबेन्जीन का प्रबल अम्लीय माध्यम में अपचयन करने पर अन्तिम उत्पाद बनता है (2017)
(i) ऐनिलीन
(ii) फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन
(iii) p – ऐमीनो फीनॉल
(iv) ऐजोबेन्जीन
उत्तर :
(i) ऐनिलीन

प्रश्न 12.
नाइट्रोबेन्जीन को कहते हैं   (2017)
(i) कसीस का तेल
(ii) मिरवेन का तेल
(iii) सिनेमन ऑयल
(iv) विन्टरग्रीन का तेल
उत्तर :
(ii) मिरवेन का तेल

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐमीन किन्हें कहते हैं? प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन का एक-एक उदाहरण दीजिए तथा उनके साधारण नाम लिखिए।
उत्तर :
ऐमीन :
अमोनिया के ऐल्किल व्युत्पन्न को ऐल्किल ऐमीन कहते हैं।
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प्रश्न 2.
नाइट्रोबेन्जीन के उदासीन माध्यम में अपचयन की अभिक्रिया लिखिए। (2014, 15)
उत्तर :
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प्रश्न 3.
क्या होता है जब ऐनिलीन की क्रिया Br, जल से करायी जाती है?
उत्तर :
2, 4, 6 – ट्राइब्रोमोऐनिलीन बनता है।

प्रश्न 4.
क्या होता है जब एथिलेमीन की क्रिया बेन्जेल्डिहाइड से कराते हैं?
उत्तर :
बेन्जेलिडीन एथिलेमीन (शिफ क्षारक) बनता है।
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प्रश्न 5.
मेण्डियस अभिक्रिया को प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर :
यह ऐल्किल या ऐरिल सायनाइडों का सोडियम तथा ऐल्कोहॉल के साथ अपचयन है, इससे प्राथमिक (1°) ऐमीन प्राप्त होती है।
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प्रश्न 6.
क्या होता है जब बेन्जेमाइड को ब्रोमीन के साथ क्षार की उपस्थिति में गर्म किया जाता है? रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
ऐनिलीन बनती है।
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प्रश्न 7.
आप एथेनेमाइड को मेथेनेमीन में किस प्रकार परिवर्तित करेंगे?
उत्तर :
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प्रश्न 8.
क्या होता है जब R – N = C का जल अपघटन अम्लीय माध्यम में किया जाता है? रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 9.
निम्न अभिक्रियाओं को पूर्ण कर उनके नाम लिखिए
(i) RNH2 +CHCl+ 3KOH
(ii) RCONH2 + Br2 + 4NaOH 
उत्तर :
(i)
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यह अभिक्रिया कार्बिलेमीन अभिक्रिया कहलाती है।
(ii)
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इस अभिक्रिया को हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया या हॉफमान निम्नीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 10.
निम्न में A तथा B को पहचानिए
उत्तर :
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प्रश्न 11.
ऐमीनों के क्वथनांक संगत ऐल्केनों से उच्च क्यों होते हैं?
उत्तर :
ऐमीनों के क्वथनांक संगत ऐल्केनों से हाइड्रोजन आबन्धन के कारण उच्च होते हैं। ऐल्केनों में केवल दुर्बल वाण्डरवाल्स बल पाए जाते हैं।

प्रश्न 12.
ट्राइमेथिलेमीन तथा n-प्रोपिलेमीन का अणुभार समान होता है लेकिन ट्राइमेथिलेमीन निम्न ताप (276 K) तथा n-प्रोपिलेमीन अधिक ताप (322 K) पर उबलता है। समझाइए।
उत्तर :
n-प्रोपिलेमीन में N-परमाणु पर दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, अत: इसका क्वथनांक अन्तरा – आणविक हाइड्रोजन आबन्धन के कारण अधिक होता है। ट्राइमेथिलेमीन (CH3)2N तृतीयक ऐमीन होने के कारण इसमें N-परमाणु पर H-परमाणु नहीं होते हैं। जिसके परिणामस्वरूप इसमें हाइड्रोजन आबन्धन अनुपस्थित होता है तथा इसका क्वथनांक निम्न होता है।

प्रश्न13.
कौन अधिक क्षारीय है-ऐनिलीन या अमोनिया?
उत्तर :
अमोनिया ऐनिलीन से अधिक क्षारीय होती है।

प्रश्न 14.
बेन्जीन वलय पर एक इलेक्ट्रॉन विमोचक प्रतिस्थापी की उपस्थिति किस प्रकार ऐरोमैटिक ऐमीन की क्षारीय सामर्थ्य को प्रभावित करती है?
उत्तर :
ऐरोमैटिक ऐमीन की क्षारीय सामर्थ्य बढ़ती है।

प्रश्न 15.
ऐरोमैटिक ऐमीनों में इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन, बेन्जीन की तुलना में शीघ्रता से क्यों होता है।
उत्तर :
अनुनाद के कारण ऐनिलीन के N-परमाणु पर इलेक्ट्रॉन बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत (delocalised) हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। दूसरे शब्दों में, ऐनिलीन सक्रिय हो जाती है अत: ऐनिलीन में इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन शीघ्रता से होता है।

प्रश्न16.
क्या होता है जब एथिलेमीन की क्रिया एथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड से कराते हैं?
उत्तर :
एथेन बनती है।

प्रश्न 17.
एथिलेमीन से एथिल आइसोसायनाइड के विरचन के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न18.
एथिल ऐमीन की पहचान करने वाला एक रासायनिक परीक्षण लिखिए। (2017)
उत्तर :
C2H5NH2, को CHCl3 और (alc.) KOH के साथ गर्म करने पर तीव्र दुर्गन्ध युक्त पदार्थ एथिल आइसोसायनाइड बनता है।
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प्रश्न19.
ऐमीनोएथेन (एथिलेमीन) किस प्रकार एथेनल (ऐसीटेल्डिहाइड) से प्राप्त करते हैं?
उत्तर :
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प्रश्न 20.
निम्न अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए
उत्तर :
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प्रश्न 21.
ऐमाइड ऐमीनों से अधिक अम्लीय होते हैं, क्यों?
उत्तर :
ऐमाइड ऐमीनों से अधिक अम्लीय होते हैं, क्योंकि -NH, समूह के N-परमाणु में एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है, लेकिन एकाकी युग्म में निम्नवत् अनुनाद (resonance) पाया जाता है
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+R प्रभाव के कारण –NH, समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन की उपलब्धता घटती है जिसके परिणामस्वरूप ऐसिड ऐमाइड ऐमीन से दुर्बल क्षार होते हैं। N-परमाणु पर धनावेश के कारण यह आसानी से प्रोटॉन त्यागकर दुर्बल अम्ल के समान व्यवहार करता है।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित को घटते हुए अम्लीयता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए
0 – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
p – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
m – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
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प्रश्न 23.
सल्फैनेलिक अम्ल के दो महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए।
उत्तर :
सल्फैनेलिक अम्ल का प्रयोग सल्फा औषधियों तथा रंजकों के निर्माण के लिए किया जाता है।

प्रश्न 24.
बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से बेन्जोनाइट्राइल के निर्माण का रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 25.
अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए C6H5NCI+KI 
उत्तर :
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प्रश्न 26.
आप बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को नाइट्रोबेन्जीन में किस प्रकार परिवर्तित करेंगे ?
उत्तर :
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प्रश्न 27.
निम्न अभिक्रिया के मुख्य उत्पाद का सूत्र दीजिए
उत्तर :
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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नाइट्रोबेन्जीन की —NO2, समूह तथा बेन्जीन वलय की एक-एक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए। (2016)
उत्तर :
NO2, समूह की अभिक्रिया :
नाइट्रोबेन्जीन में नाइट्रोसमूह बेन्जीन वलय से जुड़ा होता है जो एक ऑक्सीकारक समूह है। इस कारण अभिक्रियाओं में इसका अपचयन होता है।
अपचयन :
नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन निम्न पदों में होता है
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नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन उत्पाद माध्यम के pH और अपचायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
बेन्जीन वलय की अभिक्रिया
इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया नाइट्रोबेन्जीन में – NO2 समूह बेन्जीन वलय से जुड़ा होता है। नाइट्रीकरण – नाइट्रोबेन्जीन को सान्द्र नाइट्रिक अम्ल तथा सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ 95- 100°C पर गर्म करने पर m-डाइनाइट्रो बेन्जीन बनती है।
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प्रश्न 2.
एक कार्बनिक यौगिक A के अपचयन से अणुसूत्र C2H7N वाला ऐमीन प्राप्त होता है जो क्लोरोफॉर्म तथा कास्टिक पोटाश के साथ गर्म करने पर तीव्र दुर्गन्ध वाला यौगिक B बनाता है। A तथा B के संरचनात्मक सूत्र तथा नाम लिखिए। (2017)
उत्तर :
प्रश्नानुसार यौगिक A की C6H5NO2, होने की सम्भावना लगती है।
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प्रश्न 3.
डाइऐजोनियम लवण क्या है? बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से क्लोरोबेन्जीन प्राप्त करने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। (2016)
उत्तर :
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रयोगशाला में एथिल ऐमीन बनाने की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए तथा सम्बन्धित अभिक्रिया भी लिखिए। इसके दो रासायनिक गुण भी दीजिए। (2012, 13)
उत्तर :
प्रयोगशाला विधि :
प्रोपिओनेमाइड पर ब्रोमीन तथा कास्टिक पोटाश विलयन (आधिक्य में) की क्रिया कराने से एथिल ऐमीन बनती है। यह क्रिया हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया कहलाती है और यह निम्नलिखित पदों में होती है
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संलग्न चित्रानुसार, एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में 20 ग्राम प्रोपिओनेमाइड और 18 मिली ब्रोमीन लेकर ठण्डा करते हैं, फिर इसमें 10% KOH का 200 मिली विलयन मिलाते हैं। मिश्रण को तब तक हिलाते रहते हैं जब तक कि ब्रोमो प्रोपिओनेमाइड के कारण पीले रंग का विलयन न बन जाए। अब इसमें 50% KOH को 100 मिली विलयन पृथक्कारी कीप से डालकर जल ऊष्मक पर 60-70°C पर गर्म करते हैं जिससे विलयन रंगहीन हो जाए। तत्पश्चात् फ्लास्क के द्रव का आसवन करते हैं जिससे एथिल ऐमीन गैस निकलती है जो ग्राही में रखे तनु HCI से क्रिया करके एथिल ऐमीन हाइड्रोक्लोराइड का विलयन देती है। इसे तनु KOH विलयन से क्रिया कराकर एथिल ऐमीन प्राप्त कर ली जाती है। एथिल ऐमीन के रासायनिक गुण
(i) ऐसीटिल क्लोराइड से अभिक्रिया :
प्रतिस्थापित ऐमाइड बनाता है।
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(ii) ऐल्कोहॉलीय कास्टिक पोटाश तथा क्लोरोफॉर्म के साथ क्रिया करके एथिल आइसोसायनाइड (C2H5NC) बनता है।
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प्रश्न 2.
प्रयोगशाला में ऐनिलीन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी दीजिए तथा इसका प्रमुख रासायनिक गुण एवं उपयोग भी बताइए।
उत्तर :
प्रयोगशाला विधि प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन का टिन तथा सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल द्वारा अपचयन करने से ऐनिलीन प्राप्त होती है।
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उपर्युक्त अभिक्रिया में बनी ऐनिलीन, स्टैनिक क्लोराइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से संयोग करके ऐनिलीन स्टैनिक क्लोराइड नामक ठोस लवण बनाती है।
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जब इस ठोस लवण को कास्टिक सोड़े के सान्द्र विलयन के साथ हिलाते हैं तो ऐनिलीन काले रंग के तेल के रूप में पृथक् हो जाती है।
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मिश्रण का भाप आसवन करने पर ऐनिलीन आसुत में आ जाती है।
रासायनिक गुण
1. कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया :
फेनिल आइसोसायनाइड बनता है।
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2. ऐल्डिहाइडों के साथ अभिक्रिया :
बेन्जिलीडीनऐनिलीन बनता है।
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3. ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया-ऐनिलीन ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोकार्बन बनाती है।
C2H5MgBr + C6H5NH→ C2H6 + C6H5NHMgBr
पयोग :

  1. दवाइयाँ तथा सल्फा औषधियों के निर्माण में
  2. ऐजोरंजक बनाने में मध्यवर्ती यौगिक के रूप में
  3. रबड़ उत्पाद बनाने में
  4. फेनिल आइसोसायनेट बनाने में जिसका उपयोग पॉलियूरिथेन नामक प्लास्टिक बनाने में होता है।

प्रश्न 3.
प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए तथा सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी लिखिए। इसके प्रमुख रासायनिक गुण एवं उपयोग भी बताइए।
उत्तर :
प्रयोगशाला विधि प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन बेन्जीन को सान्द्र नाइट्रिक अम्ल और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण के साथ 50- 60°C ताप पर गर्म करके बनाते हैं।
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विधि :
एक गोल पेंदी के फ्लास्क में बेन्जीन (60 मिली) लेकर उसमें धीरे-धीरे सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (60 मिली) और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल (90 मिली) का ठण्डा मिश्रण मिलाते हैं। फ्लास्क में एक सीधा खड़ा हुआ वायु संघनित्र लगाकर मिश्रण को जल-ऊष्मक पर 50- 60°C पर लगभग 1 घण्टे तक गर्म करते हैं। नाइट्रोबेन्जीन बनती है और अम्ल के ऊपर पीले रंग के द्रव की परत के रूप में एकत्रित हो जाती है। फ्लास्क को ठण्डा करके एक पृथक्कारी फनल की सहायता से अम्ल की परत को नाइट्रोबेन्जीन की परत से अलग कर देते हैं। नाइट्रोबेन्जीन को क्रमशः सोडियम कार्बोनेट विलयन और जल से धोकर निर्जल कैल्सियम क्लोराइड के ऊपर सुखाते हैं। फिर एक सूखे हुए वायु-संघनित्र लगे आसवन फ्लास्क में उसका आसवन करते हैं। शुद्ध नाइट्रोबेन्जीन 208- 211°C ताप रेन्ज में आसवित होकर ग्राही में एकत्रित हो जाती है।
रासायनिक गुण
अपचयन :
नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन निम्नलिखित पदों में होता है
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नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन उत्पाद माध्यम के pH और अपचायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
1. अम्लीय माध्यम में अपचयन :
टिन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Sn + HCl), या आयरन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Fe+ HCl), द्वारा नाइट्रोबेन्जीन का ऐनिलीन में अपचयन होता है।
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2. उदासीन माध्यम में अपचयन :
ऐलुमिनियम-मर्करी युग्म और जल, या जिंक चूर्ण और अमोनियम क्लोराइड (Zn + NH4Cl), द्वारा नाइट्रोबेन्जीन का फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन में
अपचयन होता है।
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बेन्जीन वलय की प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ।
1. सल्फोनीकरण :
नाइट्रोबेन्जीन को सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर m-नाइट्रोबेन्जीनसल्फोनिक अम्ल बनता है।
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2. हैलोजनीकरण :
नाइट्रोबेन्जीन की क्लोरीन के साथ क्रिया कराने पर m-क्लोरोनाइट्रोबेन्जीन बनती
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उपयोग :

  1. विलायक के रूप में।
  2. मिरबेन के तेल के नाम से जूतों की पॉलिश और साबुन बनाने में सस्ती सुगन्ध के रूप में।
  3. ऐनिलीन और ऐजो-रंजकों (azo-dyes) के निर्माण में।
  4. ऑक्सीकारक के रूप में।

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