UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds (उपसहसंयोजन यौगिक) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 9 Coordination Compounds (उपसहसंयोजन यौगिक).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 9
Chapter Name Coordination Compounds
Number of Questions Solved 72
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds (उपसहसंयोजन यौगिक)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखिए –

  1. टेट्राऐम्मीनडाइऐक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड (2018)
  2. पोटैशियम टेट्रासायनिडोनिकिलेट (II)
  3. ट्रिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड
  4. ऐम्मीनब्रोमिडोक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II)
  5. डाइक्लोरोबिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
  6. आयरन (III) हेक्सासायनिडोफेरेट (II) (2018)

उत्तर

  1. [Co(NH3)4(H2O)2]Cl3
  2. K2[Ni(CN)6]
  3. [Cr (en)3]Cl3
  4. [Pt (NH3) BrCl(NO2)]
  5. [PtCl2(en)2](NO3)2
  6. Fe4[Fe(CN)6]3

प्रश्न 2.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –

  1. [Co(NH3)6]Cl3
  2. [Co(NH3)Cl]Cl2
  3. K3[Fe(CN)6]
  4. K3[Fe(C2O4)3]
  5. K2[PdCl4]
  6. [Pt (NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl

उत्तर

  1. हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
  2. पेन्टाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
  3. पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)
  4. पोटैशियम ट्राइऑक्सेलेटोफेरेट (III)
  5. पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
  6. डाइऐम्मीनक्लोरिडो( मेथिलऐमीन)प्लैटिनम (II) क्लोराईड

प्रश्न 3.
निम्नलिखित संकुलों द्वारा प्रदर्शित समावयवता का प्रकार बतलाइए तथा इन समावयवों की संरचनाएँ बनाइए –

  1. K[Cr(H2O)2 (C2O4)2]
  2. [Co(en)3] Cl3
  3. [Co(NH3)5 (NO2)](NO3)2
  4. [Pt(NH3)(H2O)Cl2]

उत्तर
1. (क) इसके लिए ज्यामितीय (सिस-ट्रान्स) तथा प्रकाशिक समावयव सम्भव हैं।
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(ख) सिस के प्रकाशिक समावयव (d- तथा l-)
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2. इसके दो प्रकाशिक समावयव हो सकते हैं।
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3. आयनन समावयव – निम्न समावयव सम्भव हैं (इसके दो आयनन तथा दो बन्धनी समावयव सम्भव हैं)।
[Co(NH3)(NO2)](NO3)2, [Co(NH3)5(NO3)](NO2)(NO3)
बन्धनी समावयव 
[Co(NH3)5(NO2)](NO3)2, [Co(NH3)5(ONO)](NO3)2

4. इसके दो ज्यामितीय समावयव (सिस-, ट्रान्स-) सम्भव हैं।
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प्रश्न 4.
इसका प्रमाण दीजिए कि [Co(NH3)5 Cl]SO4 तथा [Co(NH3)5SO4]Cl आयनन समावयव हैं।
उत्तर
आयनन समावयव जल में घुलकर भिन्न आयन देते हैं, इसलिए विभिन्न अभिकर्मकों के साथ भिन्न-भिन्न अभिक्रियाएँ देते हैं।
[Co(NH3)5Cl]SO4 + Ba2+ → BaSO4 (s)
[Co(NH3)5SO4]Cl + Ba2+ → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5Cl]SO4 + Ag+ → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5SO4]Cl + Ag+ → AgCl (s)
चूँकि दिए गए संकुल विभिन्न अभिकर्मकों के साथ भिन्न अभिक्रियाएँ देते हैं, अतः ये आयनन समावयव हैं।

प्रश्न 5.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि वर्ग समतलीय संरचना वाला [Ni(CN)4]2- आयन प्रतिचुम्बकीय है तथा चतुष्फलकीय ज्यामिति वाला [NiCl4]2- आयन अनुचुम्बकीय है।
उत्तर
[Ni(CN)4]2- का चुम्बकीय व्यवहार (Magnetic behaviour of [Ni(CN)4]2- – Ni का परमाणु क्रमांक 28 है। Ni, Ni2+ तथा [Ni(CN)4]2- में निकिल की अवस्था के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं –
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संकुल आयन [Ni(CN)4]2- प्रतिचुम्बकीय है; क्योंकि इसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं।
[NiCl4]2- का चुम्बकीय व्यवहार (Magnetic behaviour of [NiCl4]2-)- इसमें Cl दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड है तथा यह इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं करता है।
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संकुल आयन [NiCl4]2- के d-उपकोश में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं, इसलिए यह अनुचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 6.
[NiCl4]2- अनुचुम्बकीय है, जबकि [Ni(CO)4] प्रतिचुम्बकीय है यद्यपि दोनों चतुष्फलकीय हैं। क्यों?
उत्तर
[Ni(CO)4] में निकिल शून्य ऑक्सीकरण अवस्था में है, जबकि [NiCl4]2- में यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था में है। CO लिगेण्ड की उपस्थिति में निकिल के अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं, परन्तु Cl दुर्बल लिगेण्ड होने के कारण अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करने योग्य नहीं होता है। अतः [Ni(CO)4] में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित नहीं होता, इसलिए यह प्रतिचुम्बकीय है तथा [NiCl4]2- में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण यह अनुचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 7.
[Fe(H2O)6]3+ प्रबल अनुचुम्बकीय है, जबकि [Fe(CN)6]3- दुर्बल अनुचुम्बकीय। समझाइए।
उत्तर
CN (प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में, 3d- इलेक्ट्रॉन युग्मित होकर केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं। d2 sp3 संकरण वाला आन्तरिक कक्षक संकुल बनता है। इसलिए [Fe(CN)6]3- दुर्बल अनुचुम्बकीय होता है। HO (दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में 3d-इलेक्ट्रॉन युग्मित नहीं होते अर्थात् संकरण spa है जो बाह्य कक्षक संकुल, जिसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, बनाता है, इसलिए [Fe(H2O)6]3+ प्रबल अनुचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 8.
समझाइए कि [Co(NH3)6]3+ एक आन्तरिक कक्षक संकुल है, जबकि [Ni(NH3)6]2+ एक बाह्य कक्षक संकुल है।
उत्तर
NH3 की उपस्थिति में Co के 3d- इलेक्ट्रॉन युग्मित होकर दो रिक्त d-कक्षक छोड़ते हैं जो [Co(NH3)6]3+ की स्थिति में आन्तरिक कक्षक संकुल बनाने वाले d2 sp3 संकरण में सम्मिलित होते हैं। [Ni(NH3)6]2+ में निकिल +2 ऑक्सीकरण अवस्था में है तथा इसका विन्यास 28 है। इसमें बाह्य कक्षक संकुल बनाने वाला sp3 d2 संकरण में सम्मिलित होता है।

प्रश्न 9.
वर्ग समतली (Pt(CN)4]2- आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बतलाइए।
उत्तर
78Pt आवर्त सारणी के वर्ग 10 में स्थित होता है तथा इसका विन्यास 5d9 6s1 है। अत: Pt2+ का विन्यास d8 है।
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वर्ग समतली संरचना के लिए संकरण dsp2 होता है। चूंकि 5d में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युग्मित होकर dsp2 संकरण के लिए एक रिक्त d-कक्षक बनाते हैं, अत: कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता।

प्रश्न 10.
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त को प्रयुक्त करते हुए समझाइए कि कैसे हेक्साऐक्वा मैंगनीज (II) आयन में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि हेक्सासायनो आयन में केवल एक ही अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
उत्तर
ऑक्सीकरण अवस्था +2 में Mn का विन्यास 3d5 होता है। लिगेण्ड के रूप में H2O (दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में इन पाँच इलेक्ट्रॉनों का वितरण t32g e2g होता है अर्थात् सभी इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रह जाते हैं। लिगेण्ड के रूप में CN (प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में वितरण  t52g e0g है। अर्थात् दो t2g कक्षकों में युग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि तीसरे t2g कक्षक में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता

प्रश्न 11.
[Cu(NH3)4]2+ संकुल आयन के β4 का मान 2.1 x 1013 है, इस संकुल के समग्र वियोजन स्थिरांक के मान की गणना कीजिए।
हल
समग्र वियोजन स्थिरांक, समग्र स्थायित्व स्थिरांक का व्युत्क्रम होता है।
अतः समग्र वियोजन स्थिरांक = [latex]\frac { 1 }{ { \beta }_{ 4 } } =\frac { 1 }{ { 2.1\times 10 }^{ 13 } } [/latex] = 4.7 x 10-14

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
वर्नर की अभिधारणाओं के आधार पर उपसहसंयोजन यौगिकों में आबन्धन को समझाइए।
उत्तर
उपसहसंयोजन यौगिकों में आबन्धन को समझाने के लिए वर्नर ने सन् 1898 में उपसहसंयोजन यौगिकों का सिद्धान्त प्रस्तुत किया। इस सिद्धान्त की मुख्य अभिधारणाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. उपसहसंयोजन यौगिकों में धातुएँ दो प्रकार की संयोजकताएँ दर्शाती हैं- प्राथमिक तथा द्वितीयक।
  2. प्राथमिक संयोजकताएँ सामान्य रूप से धातु परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था से सम्बन्धित होती हैं। तथा आयननीय होती हैं। ये संयोजकताएँ ऋणात्मक आयनों द्वारा सन्तुष्ट होती हैं।
  3. द्वितीयक संयोजकताएँ धातु परमाणु की उपसहसंयोजन संख्या से सम्बन्धित होती हैं। द्वितीयक संयोजकताएँ अन-आयननीय होती हैं। ये उदासीन अणुओं अथवा ऋणात्मक आयनों द्वारा सन्तुष्ट | होती हैं। द्वितीयक संयोजकता उपसहसंयोजन संख्या के बराबर होती है तथा इसका मान किसी धातु के लिए सामान्यत: निश्चित होता है।
  4. धातु से द्वितीयक संयोजकता से आबन्धित आयन समूह विभिन्न उपसहसंयोजन संख्या के अनुरूप दिक्स्थान में विशिष्ट रूप से व्यवस्थित रहते हैं।

आधुनिक सूत्रीकरण में इस प्रकार की दिक्स्थान व्यवस्थाओं को समन्वये बहुफलक (coordination polyhedra) कहते हैं। गुरुकोष्ठक में लिखी स्पीशीज संकुल तथा गुरु कोष्ठक के बाहर लिखे आयन प्रति आयन (counter ions) कहलाते हैं।

उन्होंने यह भी अभिधारणा दी कि संक्रमण तत्वों के समन्वय यौगिकों में सामान्यतः अष्टफलकीय, चतुष्फलकीय व वर्ग समतली ज्यामितियाँ पायी जाती हैं। इस प्रकार [Co(NH3)6]3+, [CoCl(NH3)5]2+ तथा [CoCl2(NH3)4]+ की ज्यामितियाँ अष्टफलकीय हैं, जबकि [Ni(CO)4)] तथा [PtCl4]2- क्रमश: चतुष्फलकीय तथा वर्ग समतली हैं।
उपर्युक्त अभिधारणाओं से वर्नर, जिसने निम्नलिखित यौगिकों को कोबाल्ट (III) क्लोराइड की NH3 से अभिक्रिया करके बनाया, ने इन यौगिकों (उपसहसंयोजक) की संरचना की सफलतापूर्वक व्याख्या की जिसका वर्णन निम्नलिखित है –

  • CoCl3.6NH3 नारंगी
  • CoCl3.5NH3 . H2O गुलाबी
  • CoCl3.5NH3 बैंगनी
  • CoCl3.4NH3 बैंगनी
  • CoCl3.3NH3 हरा

CoCl3.4NH3 के विभिन्न रंगों का कारण यह है कि यह समपक्ष तथा विपक्ष समावयव के रूप में उपस्थित होता है।
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प्रश्न 2.
FeSO4 विलयन तथा (NH4)2SO4 विलयन का 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रण Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, परन्तु CuSO4 व जलीय अमोनिया का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता। समझाइए क्यों?
उत्तर
FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन में 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर एक द्विक-लवण प्राप्त होता है, जिसे मोहर लवण (FeSO4.(NH4)2SO4.6H2O) कहते हैं। यह निम्न प्रकार आयनित होता है –
FeSO4 .(NH4)2 SO4 .6H4O → F2+ + 2NH+4 + 3SO2-4 + 6H2O

विलयन में Fe2+ आयनों की उपस्थिति के कारण यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है। जब CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रित किया जाता है, तो संकर लवण [Cu(NH4)4]SO4 प्राप्त होता है। यह विलयन में निम्न प्रकार आयनित होता है-
[Cu(NH3)4]SO4 → [Cu(NH3)4]2+ + SO2-4
संकर आयन [Cu(NH3)4]2+ पुन: आयनित होकर Cu2+ आयन नहीं देता है। इसलिए विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है।

प्रश्न 3.
प्रत्येक के दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए-समन्वय समूह, लिगेण्ड, उपसहसंयोजन संख्या, उपसहसंयोजन बहुफलक, होमोलेप्टिक तथा हेटरोलेप्टिक।
या
उपसहसंयोजक (समन्वय) संख्या को एक उदाहरण द्वारा ज्ञात कीजिए। (2018)
उत्तर
1. उपसहसंयोजन सत्ता या समन्वय समूह (Coordination entity) – केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन से किसी एक निश्चित संख्या में आबन्धित आयन अथवा अणु मिलकर एक उपसहसंयोजन सत्ता का निर्माण करते हैं। उदाहरणार्थ– [CoCl3(NH3)3] एक उपसहसंयोजन सत्ता है। जिसमें कोबाल्ट आयन तीन अमोनिया अणुओं तथा तीन क्लोराइड आयनों से घिरा है। अन्य उदाहरण हैं –
[Ni(CO)4],[PtCl2(NH3)2], [Fe(CN)6]4-, [Co(NH3)6]3+ आदि।

2. लिगेण्ड (Ligand) – उपसहसंयोजन सत्ता में केन्द्रीय परमाणु/आयन से परिबद्ध आयन अथवा अणु लिगेण्ड कहलाते हैं। ये सामान्य आयने हो सकते हैं; जैसे- Cl, F, CN, OH छोटे अणु हो सकते हैं; जैसे- H2O या NH3, बड़े अणु हो सकते हैं; जैसे- H2NCH2CH2NH2 या N(CH2CH2NH2)3 अथवा वृहदाणु भी हो सकते हैं; जैसे- प्रोटीन।

3. उपसहसंयोजन संख्या (Coordination number) – एक संकुले में धातु आयन की उपसहसंयोजन संख्या (CN) उससे आबन्धित लिगेण्डों के उन दाता परमाणुओं की संख्या के बराबर होती है, जो सीधे धातु आयन से जुड़े हों।
उदाहरणार्थ– संकुल आयनों [PtCl6]2- तथा [Ni(NH3)4]2+ में Pt तथा Ni की उपसहसंयोजन संख्या क्रमश: 6 तथा 4 है। इसी प्रकार संकुल आयनों [Fe(C2O4)3]3- और [Co(en)3]3+ में Fe और Co दोनों की समन्वय संख्या 6 है क्योंकि C2O2-4 तथा en (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) द्विदन्तुर लिगेण्ड हैं।

उपसहसंयोजन संख्या के सन्दर्भ में यह तथ्य महत्त्वपूर्ण है कि केन्द्रीय परमाणु/आयन की उपसहसंयोजन संख्या केन्द्रीय परमाणु/आयन तथा लिगेण्ड के मध्य बने केवल o (सिग्मा) आबन्धों की संख्या के आधार पर ही निर्धारित की जाती है। यदि लिगेण्ड तथा केन्द्रीय परमाणु/आयन के मध्य π (पाई) आबन्ध बने हों तो उन्हें नहीं गिना जाता।

4. उपसहसंयोजन बहुफलक (Coordination polyhedron) – केन्द्रीय परमाणु/आयन से सीधे जुड़े लिगेण्ड परमाणुओं की दिक्स्थान व्यवस्था (spacial arrangement) को उपसहसंयोजन बहुफलक कहते हैं। इनमें अष्टफलकीय, वर्ग समतलीय तथा चतुष्फलकीय मुख्य हैं। उदाहरणार्थ– [Co(NH3)6]3+ अष्टफलकीय है, [Ni(CO)4] चतुष्फलकीय है तथा [PtCl4]2- वर्ग समतलीय है। चित्र-1 में विभिन्न उपसहसंयोजन बहुफलकों की आकृतियाँ दर्शायी गई हैं।
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5. होमोलेप्टिक (Homoleptic) – संकुल जिनमें धातु परमाणु केवल एक प्रकार के दाता समूह (लिगेण्ड) से जुड़ा रहता है, होमोलेप्टिक संकुल कहलाते हैं। उदाहरणार्थ– [Co(NH3)6]3+ तथा [Fe(CN)6]4-.

6. हेटरोलेप्टिक (Heteroleptic) – संकुल जिनमें धातु परमाणु एक से अधिक प्रकार के दाता समूहों (लिगेण्डों) से जुड़ा रहता है, हेटरोलेप्टिक संकुल कहलाते हैं। उदाहरणार्थ – [Co(NH3)4Cl2]+ तथा [Pt(NH3)5Cl]3+.

प्रश्न 4.
एकदन्तुर, द्विदन्तुर तथा उभयदन्तुर लिगेण्ड से क्या तात्पर्य है? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
लिगेण्ड का एक परमाणु दाता परमाणु होता है जो केन्द्रीय धातु आयन को एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म दान करके उपसहसंयोजक आबन्ध बनाता है। जब एक लिगेण्ड धातु आयन से एक दाता परमाणु द्वारा परिबद्ध होता है; जैसे- Cl, H2O या NH3 तो लिगेण्ड एकदन्तुर (unidentate) कहलाता है। जब लिगेण्ड दो दाता परमाणुओं द्वारा परिबद्ध होता है; जैसे- H2NCH2CH2NH2 (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) अथवा C2O2-4 (ऑक्सेलेट) तो ऐसा लिगेण्ड द्विदन्तुर कहलाता है।

वह लिगेण्ड जो दो भिन्न परमाणुओं द्वारा जुड़ सकता है, उसे उभयदन्ती संलग्नी या उभयदन्तुर लिगेण्ड कहते हैं। ऐसे लिगेण्ड के उदाहरण हैं- NO2 तथा SCN आयन। NO2 आर्यन केन्द्रीय धातु परमाणु/आयन से या तो नाइट्रोजन द्वारा अथवा ऑक्सीजन द्वारा संयोजित हो सकता है। इसी प्रकार SCN आयन सल्फर अथवा नाइट्रोजन परमाणु द्वारा संयोजित हो सकता है।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में धातुओं के ऑक्सीकरण अंक का उल्लेख कीजिए –

  1. [Co(H2O)(CN)(en)2]2+
  2. [CoBr2(en)2]+
  3. [PtCl4]2-
  4. [K3[Fe(CN)6]
  5. [Cr(NH3)3Cl3].

उत्तर
माना कि दिये गये संकर आयनों में धातु के ऑक्सीकरण अंक x हैं। अत:

  1. x + (0) + (-1) + 2 × (0) = +2; ∴ x = +3
  2. x + 2 × (-1) + 2 × (0) = +1; ∴ x = +3
  3. x + 4 × (-1) = – 2, ∴ x = +2
  4. 3 × (+1) + x + 6 × (-1) = 0; ∴ x = +3
  5. x + 3 × (0) + 3 × (-1) = 0; ∴ x = +3

प्रश्न 6.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के लिए सूत्र लिखिए –

  1. टेट्राहाइड्रॉक्सिडोजिंकेट(II)
  2. पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
  3. डाइऐम्मीनडाइक्लोरिडोप्लैटिनम (II)
  4. पोटैशियम टेट्रासायनिडोनिकिलेट (II)
  5. पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो-O-कोबाल्ट(III)
  6. हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट(III) सल्फेट
  7. पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सेलेटो) क्रोमेट(III)
  8. हेक्साऐम्मीनप्लैटिनम(IV)
  9. टेट्राब्रोमिडोक्यूप्रेट(II)
  10. पेन्टाऐम्मीनंनाइट्रिटो-N-कोबाल्ट(III)

उत्तर

  1. [Zn(OH)4]2-
  2. K2[PdCl4]
  3. [Pt(NH3)2Cl2]
  4. K2[Ni(CN)4]
  5. [Co(NH3)5(ONO)]2+
  6. [Co(NH3)6]2(SO4)3
  7. K3[Cr(C2O4)3]
  8. [Pt(NH3)6]4+
  9. [CuBr4]2-
  10. [Co(NH3)5(NO2)]2+

प्रश्न 7.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के सुव्यवस्थित नाम लिखिए –

  1. [Co(NH3)6]Cl3
  2. [Pt(NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl
  3. [Ti(H2O)6]3+
  4. [Co(NH3)4Cl(NO2)]Cl
  5. [Mn(H2O)6]2+  (2018) 
  6. [NiCl4]2-
  7. [Ni(NH3)6]Cl2  (2017)
  8. [Co(en)3]3+
  9. [Ni(CO)4]

उत्तर

  1. हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
  2. डाइऐम्मीनक्लोरिडो( मेथिल ऐमीन)प्लैटिनम (II) क्लोराइड
  3. हेक्साऐक्वाटाइटेनियम (III) आयन
  4. टेट्राऐम्मीनक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-कोबाल्ट (III) क्लोराईड
  5. हेक्साऐक्वामैंगनीज (II) आयन
  6. टेट्राक्लोरिडोनिकिलेट (II) आयन
  7. हेक्साऐम्मीननिकिल (II) क्लोराइड
  8. ट्रिस(एथेन-1,2-डाइऐमीन) कोबाल्ट (III) आयन
  9. टेट्राकार्बोनिलनिकिल(0)।

प्रश्न 8.
उपसहसंयोजन यौगिकों के लिए सम्भावित विभिन्न प्रकार की समावयवताओं को सूचीबद्ध कीजिए तथा प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
उपसहसंयोजन यौगिकों में दो प्रमुख प्रकार की समावयवताएँ ज्ञात हैं। इनमें से प्रत्येक को पुनः प्रविभाजित किया जा सकता है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में कितने ज्यामितीय समावयव सम्भव हैं?

  1. [Cr(C2O4)3]3-
  2. [Co(NH3)Cl3]

उत्तर

  1. यह [M(AA)3] प्रकार का संकर आयन है तथा ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करने में असमर्थ है। इसलिए इसका कोई ज्यामितीय समावयवी सम्भव नहीं है।
  2. दो (फेशियल तथा पेरीफेरल)।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित के प्रकाशिक समावयवों की संरचनाएँ बनाइए –
(i) [Cr(C2O4)3]3-
(ii) [PtCl2(en)2]2+
(iii) [Cr(NH3)2Cl2(en)]+
उत्तर
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित के सभी समावयवों (ज्यामितीय व ध्रुवण) की संरचनाएँ बनाइए –

  1. [CoCl2(en)2]+
  2. [Co(NH3)Cl(en)2]2+
  3. [Co(NH3)Cl2(en)]+

उत्तर
1. CoCl2(en)2]+
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2. [Co(NH3)Cl(en)2]2+

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3. [Co(NH3)Cl2(en)]+

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सभी असममिताकार हैं, इसलिए सभी प्रकाशिक समावयवता अर्थात् d(+) तथा l(-) रूप प्रदर्शित करेंगे जो एक-दूसरे पर अध्यारोपित न होने वाले दर्पण प्रतिबिम्ब हैं।

प्रश्न 12.
[Pt(NH3)(Br)(Cl)(Py)] के सभी ज्यामितीय समावयव लिखिए। इनमें से कितने ध्रुवण अर्थात प्रकाशिक समावयवता दर्शाएँगे?
उत्तर
दिए गए यौगिक के तीन ज्यामितीय समावयव सम्भव हैं।
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इस प्रकार के समावयव ध्रुवण समावयवता नहीं दर्शाते हैं। ध्रुवण समावयवता वर्ग समतली या चतुष्फलकीय संकुलों में दुर्लभ रूप में पायी जाती है। जबकि इनमें असममिताकार कोलेटिंग लिगेण्ड उपस्थित हों।

प्रश्न 13.
जलीय कॉपर सल्फेट विलयन (नीले रंग का), निम्नलिखित प्रेक्षण दर्शाता है –

  1. जलीय पोटैशियम फ्लुओराइड के साथ हरा रंग
  2. जलीय पोटैशियम क्लोराइड के साथ चमकीला हरा रंग।

उपर्युक्त प्रायोगिक परिणामों को समझाइए।
उत्तर
जलीय कॉपर सल्फेट विलयन [Cu(H2O)4]SO4 के रूप में स्थित रहता है तथा [Cu(H2O)4]2+ आयनों के कारण इसका रंग नीला होता है।
1. जब KF विलयन मिलाया जाता है, तो दुर्बल H2O लिगेण्ड प्रबल F- लिगेण्ड्स के द्वारा। प्रतिस्थापित हो जाते हैं। इस प्रकार, [CuF4]2- आयन बनते हैं, जो हरा अवक्षेप देते हैं।
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2. जब KCl विलयन मिलाया जाता है तो Cl लिगेण्ड्स दुर्बल H2O लिगेण्ड्स को प्रतिस्थापित कर देते हैं और [CuCl4]2- आयन बनाते हैं, जो चमकीले हरे रंग के होते हैं।
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प्रश्न 14.
कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन में जलीय KCN को आधिक्य में मिलाने पर बनने वाली उपसहसंयोजन सत्ता क्या होगी? इस विलयन में जब H2S गैस प्रवाहित की जाती है तो कॉपर सल्फाइड का अवक्षेप क्यों नहीं प्राप्त होता?
उत्तर
जब जलीय KCN विलयन को जलीय कॉपर सल्फेट के विलयन में मिलाया जाता है, तो निम्न प्रकार से [Cu(CN)4]2- उपसहसंयोजन स्पीशीज प्राप्त होती है –
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इस प्रकार बनी उपसहसंयोजन स्पीशीज [Cu(CN)4]2- अत्यधिक स्थिर होती है क्योंकि CN प्रबल लिगेण्ड होते हैं। इसलिए इस विलयन में H2S गैस प्रवाहित करने पर CuS का अवक्षेप प्राप्त नहीं होता है क्योंकि मुक्त Cu2+ आयन उपलब्ध नहीं होते हैं।

प्रश्न 15.
संयोजकता आबन्धसिद्धान्त के आधार पर निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में आबन्ध की प्रकृति की विवेचना कीजिए –

  1. [Fe(CN)6]4-
  2. [FeF6]3-
  3. [CO(C2O4)3]3-
  4. [COF6]3-

उत्तर
1. [Fe(CN6)]4- – इस संकुल आयन में आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है।
Fe का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar] 3d6 4s2
Fe 2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar] 3d6
छह सायनाइड आयनों से छह इलेक्ट्रॉन युग्मों को स्थान देने के लिए आयरन (II) आयन को छह रिक्त कक्षक उपलब्ध करने चाहिए। ऐसा निम्नलिखित संकरण पद्धति के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है जिसमें d-उपकोश के इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं, चूँकि CN आयन प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड हैं।
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अत: छह सायनाइड आयनों से छह इलेक्ट्रॉन युग्म आयरन (II) आयन के छह संकरित कक्षकों को अध्यासित कर लेते हैं। इस प्रकार किसी भी कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं, इसलिए [Fe(CN)6]4- प्रतिचुम्बकत्व दर्शाता है। अतः [Fe(CN)6]4- प्रतिचुम्बकीय तथा अष्टफलकीय है।

2. [FeF6]3- – यह संकुल उच्च चक्रण (या चक्रण मुक्त) या बाह्य संकुल है, चूंकि केन्द्रीय धातु आयन, Fe(III) संकरण के लिए nd-कक्षकों का प्रयोग करता है। यह एक अष्टफलकीय संकुल है। जिसमें sp3 d2 संकरण होता है, प्रत्येक कक्षक में छह फ्लुओराइड आयनों से एक-एक एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म स्थान प्राप्त करता है जैसा कि निम्नांकित चित्र में दर्शाया गया है –
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चूँकि संकुल में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, अत: यह अनुचुम्बकीय है।

3. [CO(C2O4)3]3-
Co (Z = 27) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : [Ar] 3d7 4s2
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : [Ar] 3d6 4s0
C2O2-4 प्रबल क्षेत्रीय लिगेण्ड है जिसके कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है।
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अतः स्पष्ट है कि [Co(C2O4)3]3- प्रतिचुम्बकीय तथा अष्टफलकीय संकुल है।

4. [CoF6]3- – Co (27) : [Ar] 3d7 4s2
Co3+ : [Ar] 3d6 4s0
F एक दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड होने के कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं कर सकता है।
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अतः [CoF6]3- अनुचुम्बकीय तथा अष्टफलकीय संकुल है।

प्रश्न 16.
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d-कक्षकों के विपाटन को दर्शाने के लिए चित्र बनाइए।
उत्तर
माना छह लिगेण्ड कार्तिक अक्षों के अनुदिश सममित रूप से स्थित हैं तथा धातु परमाणु मूल बिन्दु पर है।
लिगेण्ड के निकट आने पर d-कक्षकों की ऊर्जा में मुक्त आयनों की तुलना में अपेक्षित वृद्धि होती है। जैसा कि गोलीय क्रिस्टल क्षेत्र की स्थिति में होता है।
अक्षों के अनुदिश कक्षक (dz2 तथा dx2– y2) dxy , dyz तथा dzx कक्षकों की तुलना में अधिक प्रबलता से प्रतिकर्षित होते हैं तथा इनमें अक्षों के मध्य निर्देशित पालियाँ (lobes) होती हैं। गोलीय क्रिस्टल क्षेत्र में औसत ऊर्जा की अपेक्षा dz2 तथा dx2– y2 कक्षक ऊर्जा में बढ़ जाते हैं तथा dxy, dyz, dzx, कक्षक ऊर्जा में न्यून हो जाते हैं।
अतः d- कक्षकों का समभ्रंश समूह (degenerate set) दो समूहों में विपाटित हो जाता है- निम्न ऊर्जा कक्षक समूह t2g तथा उच्च ऊर्जा कक्षक समूह eg ऊर्जा Δ0 द्वारा पृथक्कृत होती हैं।
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प्रश्न 17.
स्पेक्टमीरासायनिक श्रेणी क्या है? दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड तथा प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
स्पेक्टमीरासायनिक श्रेणी (Spectrochemical Series) – क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन, Δ0 लिगेण्ड तथा धातु आयन पर विद्यमान आवेश से उत्पन्न क्षेत्र पर निर्भर करता है। कुछ लिगेण्ड प्रबल क्षेत्र उत्पन्न कर सकते हैं तथा ऐसी स्थिति में विपाटन अधिक होता है, जबकि अन्य दुर्बल क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जिसके फलस्वरूप d-कक्षकों का विपाटन कम होता है। सामान्यत: लिगण्डों को उनके बढ़ती हुई क्षेत्र प्रबलता के क्रम में एक श्रेणी में निम्नानुसार व्यवस्थित किया जा सकता है –
I < Br < SCN < Cl < S2 < F < OH < C2O2-4 < H2O < NCS < EDTA4- < NH3 < en < CN < CO
इस प्रकार की श्रेणी स्पेक्ट्रमीरासायनिक श्रेणी (spectrochemical series) कहलाती है। यह विभिन्न लिगेण्डों के साथ बने संकुलों द्वारा प्रकाश के अवशोषण पर आधारित प्रायोगिक तथ्यों द्वारा निर्धारित श्रेणी है।

दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड तथा प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड के मध्य अन्तर (Difference between weak field ligand and strong field ligand) – वे लिगेण्ड जिनकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (CFSE), Δ0 का मान कम होता है, दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड कहलाते हैं। दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड के कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता तथा ये उच्च चक्रण संकुल बनाते हैं। वे लिगेण्ड जिनकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, Δ0 का मान अधिक होता है, प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड कहलाते हैं। प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड के कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है तथा ये निम्न चक्रण संकुल बनाते हैं।

प्रश्न 18.
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा क्या है? उपसहसंयोजन सत्ता में 4-कक्षकों का वास्तविक विन्यास A, के मान के आधार पर कैसे निर्धारित किया जाता है?
उत्तर
जब लिगेण्ड संक्रमण धातु आयन के निकट जाता है, तब d-कक्षक दो समुच्चयों में विपाटित हो जाते हैं, एक निम्न ऊर्जा के साथ तथा दूसरा उच्च ऊर्जा के साथ। कक्षकों के इन दो समुच्चयों के बीच ऊर्जा का अन्तर अष्टफलकीय क्षेत्र के लिए क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, Δ0 कहलाता है।
यदि Δ0 < P (युग्मन ऊर्जा) तो चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक है, कक्षक में प्रवेश करता है तथा t32g e1g विन्यास देकर उच्च चक्रण संकुल बनाता है। ऐसे लिगेण्ड (जिनके लिए, Δ0 < P) दुर्बल क्षेत्र लिंगैण्ड कहलाते हैं।
यदि Δ0 > P तो चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक है t2g कक्षक में युग्मित होता है तथा t42g e0g विन्यास देकर निम्न चक्रण संकुल बनाता है। ऐसे लिगेण्ड (जिनके लिए, Δ0 > P) प्रबल क्षेत्र लिंगेण्ड कहलाते

प्रश्न 19.
[Cr(NH3)6] अनुचुम्बकीय है, जबकि [Ni(CN)4] प्रतिचुम्बकीय, समझाइए क्यों?
उत्तर
[Cr(NH3)6]3+ का निर्माण (Formation of [Cr(NH3)6]3+)
[Cr(NH3)6]3+ आयन में क्रोमियम की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है। क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d5 4s1 है। संकरण को निम्नलिखित आरेख में दर्शाया गया है –
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Cr3+ आयन अमोनिया के छह अणुओं से छह इलेक्ट्रॉन युग्मों को स्थान देने के लिए छह रिक्त कक्षक उपलब्ध कराते हैं। परिणामत: संकुल [Cr(NH3)]3+ में d2 sp3 संकरण होता है तथा यह अष्टफलकीय होता है। संकुल में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति इसके अनुचुम्बकीय गुण को स्पष्ट करती हैं।

[Ni(CN)4]2- का निर्माण (Formation of [Ni(CN)4]2-)
[Ni(CN)4]2- में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d है। संकरण को निम्नवत् समझाया जा सकता है –
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प्रत्येक संकरित कक्षक सायनाइड आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति [Ni(CN)4]2- के प्रतिचुम्बकीय व्यवहार की पुष्टि करती है।

प्रश्न 20.
[Ni(H2O)6]2+ का विलयन हरा है, परन्तु [Ni(CN)4]2- का विलयन रंगहीन है। समझाइए।
उत्तर
[Ni(H2O)6]2+ विलयन में निकिल Ni2+ के रूप में स्थित रहता है तथा इसका 3d8 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। इसमें दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो कि दुर्बल जल लिगेण्डों की उपस्थिति में युग्मित नहीं हो पाते हैं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन d – d संक्रमण प्रदर्शित करते हैं जिसमें Ni2+ लाल प्रकाश अवशोषित करता है। इसलिए, संकर पूरक हरा रंग प्रदर्शित करता है।

[Ni(CN)4]2- में भी निकिल Ni2+ आयन के रूप में रहता है। इसका भी 3d8 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है, जिसमें दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं परन्तु प्रबल CN लिगेण्ड युग्मित हो जाते हैं अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति में d- d संक्रमण नहीं होता है तथा विलयन रंगहीन रहता है।

प्रश्न 21.
[Fe(CN)6]4- तथा [Fe(H2O)6]2+ के तनु विलयनों के रंग भिन्न होते हैं। क्यों?
उत्तर
दोनों जटिलों में आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। Fe2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d6 है। तथा इसमें चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। [Fe(CN)6]4- में CN लिगेण्ड्स प्रबल हैं तथा इलेक्ट्रॉनों को युग्मित कर देते हैं जबकि [Fe(H2O)6]2+ में H2O लिगेण्ड्स दुर्बल हैं तथा इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करने में असमर्थ होते हैं। अत: अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की संख्या में अन्तर के कारण ये जटिल तनु विलयन में भिन्न-भिन्न रंग प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 22.
धातु काबनिलों में आबन्ध की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
उत्तर
धातु कार्बोनिलों में आबन्ध की प्रकृति (Nature of Bonding in Metal Carbonyls) – धातु कार्बोनिलों में निम्नलिखित दो प्रकार के आबन्धन सम्मिलित होते हैं –

  1. CO के कार्बन से एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का धातु परमाणु के उचित रिक्त कक्षक में दान। यह एक अप्रत्यक्ष अतिव्यापन है तथा एक सिग्मा M ← C आबन्ध बनाता है।
  2. π-अतिव्यापन जिसमें पूरित धातु d-कक्षकों से इलेक्ट्रॉनों का CO के रिक्त प्रतिआबन्धन π* आण्विक
    कक्षकों में दान निहित होता है। इसके परिणामस्वरूप M → Cπ आबन्ध बनता है। धातु से लिगेण्ड का आबन्ध एक सहक्रियाशीलता का प्रभाव उत्पन्न करता है जो CO व धातु के मध्य आबन्ध को मजबूत बनाता है।

धातु कार्बोनिलों में आबन्धन निम्नवत् प्रदर्शित है –
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प्रश्न 23.
निम्नलिखित संकुलों में केन्द्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d-कक्षकों का अधिग्रहण एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए –
(i) K3[Co(C2O4)3]
(ii) cis-[CrCl2(en)2]Cl
(iii) (NH4)[CoF4]
(iv) [Mn(H2O)6]SO4
उत्तर
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प्रश्न 24.
निम्नलिखित संकुलों के IUPAC नाम लिखिए तथा ऑक्सीकरण अवस्था, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उपसहसंयोजन संख्या दर्शाइए। संकुल का त्रिविम रसायन तथा चुम्बकीय आघूर्ण भी बतलाइए –
(i) K[Cr(H2O)2(C2O4)2].3H2O
(ii) [CrCl3(Py)3]
(iii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iv) Cs[FeC4]
(v) K4[Mn(CN)6]
उतर
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प्रश्न 25.
उपसहसंयोजन यौगिक के विलयन में स्थायित्व से आप क्या समझते हैं? संकुलों के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
विलयन में उपसहसंयोजन यौगिकों को स्थायित्व (Stability of Coordination Compounds in Solution) – अधिकांश संकुल अत्यधिक स्थायी होते हैं। धातु आयन तथा लिगेण्ड के बीच अन्योन्यक्रिया को लुईस अम्ल-क्षार अभिक्रिया के समान माना जाता है। यदि अन्योन्यक्रिया प्रबल होगी तो बनने वाला संकुल ऊष्मागतिकीय रूप से अत्यधिक स्थायी होगा।
विलयन में संकुल के स्थायित्व का अर्थ है–साम्य अवस्था पर भाग ले रही दो स्पीशीज के मध्य संगुणन की मात्रा का मान। संगुणन के लिए साम्य स्थिरांक (स्थायित्व या विरचन) को परिमाण गुणात्मक रूप से स्थायित्व को प्रकट करता है। इस प्रकार यदि हम निम्न प्रकार की अभिक्रिया को लें –
M + 4L [latex]\rightleftharpoons [/latex] ML
K = [latex]\frac { [{ ML }_{ 4 }] }{ { [M][L] }^{ 4 } } [/latex]
साम्य स्थिरांक का मान जितना अधिक होगा, ML4 की विलयन में मात्रा उतनी ही अधिक होगी। विलयन में मुक्त धातु आयनों का अस्तित्व नगण्य होता है। अत: M सामान्यत: विलायक अणुओं से घिरा होगा जो लिगेण्ड अणुओं, L से प्रतिस्पर्धा करेंगे तथा धीरे-धीरे उनसे प्रतिस्थापित हो जाएँगे।

संकुलों के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारक
(Factors Affecting the Stability of Complexes)
संकुलों को स्थायित्व निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है –
I. केन्द्रीय आयन की प्रकृति (Nature of Central lon)
(i) केन्द्रीय धातु आयन पर आवेश (Charge on central metal ion) – सामान्यतया केन्द्रीय आयन पर आवेश घनत्व जितना अधिक होता है, उसके संकुलों का स्थायित्व भी उतना ही अधिक होता है। दूसरे शब्दों में, किसी आयन पर आवेश अधिक तथा आकार छोटा होने पर अर्थात् आयन का आवेश/त्रिज्या अनुपात अधिक होने पर इसके संकुलों का स्थायित्व अधिक होता है। उदाहरणार्थ– Fe2+ आयन की तुलना में Fe3+ आयन उच्च आवेश वहन करते हैं, परन्तु इनके आकार समान होते हैं। इसलिए Fe2+ आयन की तुलना में Fe3+ पर आवेश घनत्व उच्च होता है, इसलिए Fe3+ आयन के संकुल अधिक स्थायी होते हैं।
Fe3+ + 6CN → [Fe(CN)6]3-; K = 1.2 x 1031
Fe2+ + 6CN → [Fe(CN)6]4-; K = 1.8 x 106

(ii) धातु आयन का आकार (Size of metal ion) – धातु आयन का आकार घटने पर संकुल का स्थायित्व बढ़ता है। यदि हम द्विसंयोजी धातु आयन पर विचार करें तो इनके संकुलों का स्थायित्व केन्द्रीय धातु आयन की आयनिक त्रिज्या घटने के साथ बढ़ता है।
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इसलिए स्थायित्व का क्रम इस प्रकार है –
Mn2+ < Fe2+ < Co2+ < Ni2+ < Cu2+ < Zn2+
यह क्रम इवैग विलयम का स्थायित्व क्रम कहलाता है।

(iii) धातु आयन की विद्युतऋणात्मकता या आवेश वितरण (Electronegativity or Charge distribution of metal ion) – संकुल आयन का स्थायित्व धातु आयन पर इलेक्ट्रॉन आवेश वितरण से भी सम्बन्धित होता है। आरलेण्ड, चैट तथा डेविस के अनुसार धातु आयनों को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है –
(क) वर्ग ‘a’ ग्राही (Class ‘a’ acceptors) – ये पूर्णतया विद्युतधनात्मक धातुएँ होती हैं तथा इनमें वर्ग 1 तथा 2 की धातुएँ सम्मिलित होती हैं। इनके अतिरिक्त आन्तरसंक्रमण धातुएँ तथा संक्रमण श्रेणी के पूर्व सदस्य (वर्ग 3 से 6 तक), जिनमें अक्रिय गैस विन्यास से कुछ इलेक्ट्रॉन अधिक होते हैं, भी इस वर्ग में सम्मिलित होते हैं। ये N, O तथा F दाता परमाणुओं से युक्त लिगेण्डों के साथ अत्यधिक स्थायी उपसहसंयोजक सत्ता बनाते हैं।

(ख) वर्ग ‘b’ ग्राही (Class ‘b’ acceptors) – ये बहुत कम विद्युतधनात्मक होते हैं। इनमें भारी धातुएँ; जैसे- Rh, Pd, Ag, Ir, Pt, Au, Hg, Pb आदि, जिनमें भरित d-कक्षक होते हैं, सम्मिलित होती हैं। ये उन लिगेण्डों के साथ स्थायी संकुल बनाती हैं जिनमें N, O तथा F वर्ग के भारी सदस्य दाता परमाणु होते हैं।

(iv) कीलेट प्रभाव (Chelate effect) – स्थायित्व कीलेट वलयों के निर्माण पर भी निर्भर करता है। यदि L एक एकदन्तुर लिगेण्ड तथा L-L द्विदन्तुर लिगेण्ड हो तथा यदि L तथा L-L के दाता परमाणु एक ही तत्व के हों, तब L-L, L को प्रतिस्थापित कर देगा। कीलेशन के कारण यह स्थायित्व कीलेट प्रभाव कहलाता है। 5 तथा 6 सदस्यीय वलयों में कीलेट प्रभाव अधिकतम होता है। सामान्य रूप में वलय संकुल को अधिक स्थायित्व प्रदान करती है।

(v) वृहद्चक्रीय प्रभाव (Macrocyclic effect) – यदि एक बहुदन्तुर लिगेण्ड चक्रीय है तथा कोई अनुपयुक्त त्रिविम प्रभाव नहीं है तो बनने वाला संकुल बिना चक्रीय लिगेण्ड वाले सम्बन्धित संकुल की तुलना में अधिक स्थायी होगी। यह वृहद्चक्रीय प्रभाव कहलाता है।

II. लिगेण्ड की प्रकृति (Nature of Ligand)
(i) क्षारीय सामर्थ्य (Basic strength) – लिगेण्ड जितना अधिक क्षारीय होगा, उतनी ही अधिक सरलता उसे अपने एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म को दान देने में होगी, इसलिए इससे बनने वाले संकुल उतने ही अधिक स्थायी होंगे। अत: CN तथा F आयन एवं NH3, जो प्रबल क्षार हैं, अच्छे लिगेण्ड हैं। तथा अनेक स्थायी संकुल बनाते हैं।

(ii) लिगेण्डों का आकार तथा आवेश (Size and charge of ligands)-ऋणायनी लिगेण्डों के लिए आवेश उच्च तथा आकार छोटा होने पर बनने वाला संकुल अधिक स्थायी होता है। अतः F अधिक स्थायी संकुल देता है, परन्तु Cl आयन नहीं।

प्रश्न 26.
कीलेट प्रभाव से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
जब कोई बहुदन्तुर लिगेण्ड दो या अधिक दाता परमाणुओं के द्वारा केन्द्रीय धातु आयन से अपने आप को इस प्रकार जोड़ता है कि केन्द्रीय आयन के साथ 5 या 6 सदस्यीय चक्र बनता है, तो यह प्रभाव कीलेट प्रभाव कहलाता है। कीलेट संकर यौगिक को स्थिरता प्रदान करते हैं; जैसे –
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अर्थात् [PtCl2(en)]

प्रश्न 27.
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित में उपसहसंयोजन यौगिकों की भूमिका की संक्षिप्त विवेचना कीजिए –

  1. जैव प्रणालियाँ
  2. औषध रसायन
  3. विश्लेषणात्मक रसायन
  4. धातुओं का निष्कर्षण/धातुकर्म।

या
जैविक निकायों में उपसहसंयोजक यौगिकों के महत्त्व का उल्लेख कीजिए। (2018)
उत्तर
1. जैव प्रणालियाँ (Biological Systems) – उपसहसंयोजन यौगिक जैव तन्त्र में बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। प्रकाश संश्लेषण के लिए उत्तरदायी वर्णक, क्लोरोफिल, मैग्नीशियम का उपसहसंयोजन यौगिक हैं। रक्त का लाल वर्णक हीमोग्लोबिन, जो कि ऑक्सीजन का वाहक है, आयरन का एक उपसहसंयोजन यौगिक है। विटामिन B12 सायनोकोबालऐमीन, प्रतिप्रणाली अरक्तता कारक (antipernicious anaemia factor), कोबाल्ट का एक उपसहसंयोजन यौगिक है। जैविक महत्त्व के अन्य धातु आयन युक्त उपसहसंयोजन यौगिक; जैसे- कार्बोक्सीपेप्टिडेज-A (carboxypeptidase A) तथा कार्बोनिक एनहाइड्रेज (carbonic anhydrase) (जैव प्रणाली के उत्प्रेरक) एन्जाइम हैं।

2. औषध रसायन (Medicinal Chemistry) – औषधं रसायन में कीलेट चिकित्सा के उपयोग में अभिरुचि बढ़ रही है। इसका एक उदाहरण है-पौधे/जीव-जन्तु निकायों में विषैले अनुपात में विद्यमान धातुओं के द्वारा उत्पन्न समस्याओं का उपचार। इस प्रकार कॉपर तथा आयरन की अधिकता को D-पेनिसिलऐमीन तथा डेसफेरीऑक्सिम B लिगेण्डों के साथ उपसहसंयोजन यौगिक बनाकर दूर किया जाता है। EDTA को लेड की विषाक्तता के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है। प्लैटिनम के कुछ उपसहसंयोजन यौगिक ट्यूमर वृद्धि को प्रभावी रूप से रोकते हैं। उदाहरण हैं- समपक्ष-प्लैटिन (cis-platin) तथा सम्बन्धित यौगिक

3. विश्लेषणात्मक रसायन (Analytical Chemistry) – गुणात्मक (qualitative) तथा मात्रात्मक (quantitative) रासायनिक विश्लेषणों में उपसहसंयोजन यौगिकों के अनेक उपयोग हैं। अनेक परिचित रंगीन अभिक्रियाएँ जिनमें धातु आयनों के साथ अनेक लिगेण्डों (विशेष रूप से कीलेट लिगेण्ड) की उपसहसंयोजन सत्ता बनने के कारण रंग उत्पन्न होता है, चिरसम्मत (classical) तथा यान्त्रिक (instrumental) विधियों द्वारा धातु आयनों की पहचान व उनके मात्रात्मक आकलन का आधार हैं। ऐसे अभिकर्मकों के उदाहरण हैं- EDTA, DMG (डाइमेथिल ग्लाइऑक्सिम), α- नाइट्रोसो- β- नैफ्थॉल आदि।

4. धातुओं का निष्कर्षण/धातुकर्म (Extraction of the Metals/Metallurgy) – धातुओं की कुछ प्रमुख निष्कर्षण विधियों में; जैसे- सिल्वर तथा गोल्ड के लिए, संकुल विरचन का उपयोग होता, है। उदाहरणार्थ-ऑक्सीजन तथा जल की उपस्थिति में गोल्ड, सायनाइड आयन से संयोजित होकर जलीय विलयन में उपसहसंयोजन सत्ता, [Au(CN)2] बनाता है। इस विलयन में जिंक मिलाकर गोल्ड को पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 28.
संकुल [Co(NH3)6]Cl2 से विलयन में कितने आयन उत्पन्न होंगे?

  1. 6
  2. 4
  3. 3
  4. 2

उत्तर
3. 3 आयन
[Co(NH3)6]Cl2 → [Co(NH3)6]2+ + 2Cl

प्रश्न 29.
निम्नलिखित आयनों में से किसके चुम्बकीय आघूर्ण का मान सर्वाधिक होगा?

  1. [Cr(H2O)6]3+
  2. [Fe(H2O)6]2+
  3. [Zn(H2O)6]2+

उत्तर
[Fe(H2O)6]2+ का सबसे अधिक चुम्बकीय आघूर्ण है क्योंकि

  1. Cr3+ में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि
  2. में Fe2+ में चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं तथा
  3. Zn2+ में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।

प्रश्न 30.
K[Co(CO)4] में कोबाल्ट (Co) की ऑक्सीकरण संख्या है –

  1. +1
  2. +3
  3. – 1
  4. -3

उत्तर
3. -1
[+1 + x + 4 × (0) = 0: ∴ x = – 1 ]

प्रश्न 31.
निम्नलिखित में सर्वाधिक स्थायी संकुल है –

  1. [Fe(H2O)6]2+
  2. [Fe(NH3)6]3+
  3. [Fe(C2O4)3]3-
  4. [FeCl6]3-

उत्तर
3. [Fe(C2O4)6]3-
(C2O2-4 एक कीलेटिंग लिगेण्ड है तथा संकर योगिक को स्थिरता प्रदान करता है।)

प्रश्न 32.
निम्नलिखित के लिए दृश्य प्रकाश में अवशोषण की तरंगदैर्घ्य का सही क्रम क्या होगा?
[Ni(NO2)6]4-, [Ni(NH3)6]2+, [Ni(H2O)6)2+
उत्तर
स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी में दिये गये संकर यौगिकों में उपस्थित लिगेण्ड्स का क्रम निम्न प्रकार है –
H2O < NH3 < NO3

इसलिए अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य का क्रम निम्न होगा –
[Ni(H2O)6]2+ < [Ni(NH3)6]2+ < [Ni(NO2)6]4-

चूंकि अवलोकित तरंगदैर्घ्य अवशोषित तरंगदैर्घ्य की पूरक होती हैं, इसलिए अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ( E = [latex]\frac { hc }{ \lambda } [/latex]) विपरीत क्रम में होगी अर्थात्
[Ni(NO2)6]4- < [Ni(NH3)6]2+ < [Ni(H2O)6]2+

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
[Co(en)2Cl2]Cl में Co की समन्वय संख्या है – (2017)
(i) 3
(ii) 4
(iii) 5
(iv) 6
उत्तर
(iv) 6

प्रश्न 2.
[Cr(H,0) Cl,J+ आयन में Cr की संयोजकता होती है – (2017)
(i) 3
(ii) 1
(iii) 6
(iv) 5
उत्तर
(iii) 6

प्रश्न 3.
[Co(NH ) Cl]Cl, में Co की ऑक्सीकरण अवस्था है – (2017)
(i) +1
(ii) +2
(iii) +3
(iv) +4
उत्तर
(iii) +3

प्रश्न 4.
हैटरोलैप्टिक संकर है – (2015)
(i) [Fe(CN)6]4-
(ii) [Co(NH3)5SO4]+
(iii) [Hgl4]2-
(iv) [Co(NH3)6]3+
उत्तर
(ii) [Co(NH3)5SO4]+

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-सा आयन उपसहसंयोजन यौगिक नहीं बनाता है? (2017)
(i) Na+
(ii) Cr2+
(iii) Co+2
(iv) Cr3+
उत्तर
(i) Na+

प्रश्न 6.
कौन-सा धनायन अमोनिया के साथ ऐमीन संकुल नहीं बनाता है? (2017)
(i) Ag+
(ii) Al3+
(iii) Cd2+
(iv) Cu2+
उत्तर
(ii) Al3+

प्रश्न 7.
[Pt(NH3)2Cl2] यौगिक के त्रिविम समावयवियों की संख्या है- (2014)
(i) 1
(ii) 2
(iii) 4
(iv) 3
उत्तर
(ii) 2

प्रश्न 8.
जटिल यौगिक [Fe(H2O)5NO]SO4 में Fe के अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्यष्ट है –
(i) 2
(ii) 3
(iii) 4
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(i) 2

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लिगेण्ड क्या है? दो उदाहरण भी दीजिए। (2014, 17)
उत्तर
वह आण्विक अथवा आयनिक स्पीशीज जो संकर यौगिक में केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन से स्थायी रूप से जुड़ी होती है, लिगेण्ड कहलाती है। उदाहरणार्थ– K4[Fe(CN)6] में CN आयन लिगेण्ड है क्योंकि यह संकर में केन्द्रीय Fe2+ आयन से सीधे जुड़ा है। [Cu(NH3)4]2+ एक अन्य संकर आयन है जिसमें Cu2+ आयन चार NH3 लिगेण्ड से जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित लिगेण्डों के नाम लिखिए –
OH, H2O, NH3, NH2, CH2, NH2-CH2NH2, CH3COO, CN, NCS
उत्तर

  • OH ⇒ हाइड्रॉक्सो
  • H2O ⇒ एक्वा
  • NH3 ⇒ ऐम्मीन
  • NH2 ⇒ एमिडो
  • CH2NH2-CH2NH2 ⇒ एथीलिन डाइएमीन
  • CH3COO ⇒ एसीटेटो
  • CN ⇒ सायनो
  • NCS ⇒ थायोसायनेटो

प्रश्न 3.
निम्न में से धनायनिक, ऋणायनिक तथा उदासीन संकर यौगिकों को छाँटिए-
K2[Hg I4], [Co(NH3)6]Cl3, K4[Fe(CN)6], [Ni(CO)4], [Pt(NH3),Cl2], [Fe(H2O)6]Cl3
उत्तर

  • धनायनिक संकर यौगिक ⇒ [Co(NH3)6]Cl3, [Fe(H2O)6]Cl3
  • ऋणायनिक संकर यौगिक ⇒ K2[Hg I4], K4 [Fe(CN)6]
  • उदासीन संकर यौगिक ⇒ [Ni(CO)4], [Pt(NH3)2 Cl2]

प्रश्न 4.
K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O के जलीय विलयन में उपस्थित आयनों के नाम लिखिए।
उत्तर
K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O के जलीय विलयन में K+, Al3+ व SO2-4 आयन उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 5.
[Fe(C2O4)3] में केन्द्रीय धातु आयन की उपसहसंयोजकता (समन्वय संख्या) ज्ञात कीजिए। (2017)
उत्तर
समन्वय संख्या = 6

प्रश्न 6.
संकर [Fe(CN)6]4- की आवेश संख्या ज्ञात कीजिए।
हल
[Fe(CN)6]4- की आवेश संख्या = Fe2+ आयन पर आवेश + (6 × CN आयन पर आवेश) = 2+ 6 × (-1) = -4

प्रश्न 7.
[Cu(NH3)4] SO4 में Cu की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए। (2014)
हल
माना Cu की ऑक्सीकरण संख्या x है।
x + 4(0) + 1(-2) = 0
x – 2= 0
x = +2

प्रश्न 8.
IUPAC नियमों का प्रयोग करते हुए निम्न के नाम लिखिए –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 34
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 35
उत्तर
(i) पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सैलेटो) कोबाल्ट (III)
(ii) टेट्राकार्बोनिलनिकिल (0)
(iii) टेट्राऐम्मीन जिंक (II) क्लोराइड
(iv) पोटैशियम हेक्सा सायनो फैरेट (II)
(v) पोटैशियम ट्राइ ऑक्सेलेटो ऐलुमिनेट (III)
(vi) पोटैशियम ऐम्मीन ट्राइ ब्रोमाइडो प्लैटिनेट (III)
(vii) डाइऐम्मीन सिल्वर (I) डाइसायनो अर्जेन्टेट (I)
(viii) पोटैशियम टेट्रा आयोडो मरक्यूरेट (II)
(ix) सोडियम डाइ सायनो अर्जेन्टेट (I)
(x) टेट्राऐम्मीन कॉपर (II) सल्फेट
(xi) पेन्टा ऐक्वा क्लोरिडो क्रोमियम (III) क्लोराइड
(xii) पेन्टाऐम्मीन कार्बोनेटो कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(xiii) पोटैशियम पेन्टासायनोनाइट्रोसिलफैरेट (II) डाइहाइड्रेट
(xiv) हेक्सा ऐम्मीन प्लेटिनम (IV) क्लोराइड
(xv) पोटैशियम टेट्रासायनो निकिलेट (II)
(xvi) पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सैलेटो) क्रोमेट (III)
(xvii) टेट्राऐम्मीन क्लोराइडो कोबाल्ट (III) सल्फेट
(xviii) कैल्सियम हेक्सा सायनोफैरेट (II)
(xix) पोटैशियम ट्राइहेक्सा नाइट्रोकोबाल्ट (II)
(xx) हेक्साऐक्वाफैरेट (V) ट्राइक्लोराइड
(xxi) टेट्राऐम्मीनडाइऐक्वा कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(xxii) आयरन (III) हेक्सासायनिडोफरेट (II)

प्रश्न 9.
निम्न समावयवियों के युग्मों के द्वारा कौन-सी समावयवता प्रदर्शित होती है?

  1. [Pt(OH)2 (NH3)4]SO4 तथा Pt(SO4)(NH3)4](OH)2
  2. [Cu(NH3)4] [PtCl4) तथा [Pt(NH3)4] [Cucl4]

उत्तर

  1. आयनन समावयवता,
  2. उपसहसंयोजन समावयवता।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में से किस आयन का चुम्बकीय आघूर्ण सबसे अधिक है?

  1. [Cr(H2O)6]3+
  2. [Fe(H2O)6]2+
  3. [Zn(H2O)6]2+

उत्तर
2. [Fe(H2O)6]2+ का सबसे अधिक चुम्बकीय आघूर्ण है क्योंकि Cr3+ में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि Zn2+ में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है। यौगिक (ii) में Fe2+ में चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न11.
संयोजकता बन्ध सिद्धान्त के अनुसार निम्न उपसहसंयोजन स्पीशीज में बन्ध की प्रकृति बताइए

  1. [Fe(CN)6]4-
  2. [FeF6]3-
  3. [Co(C2O4)3]3-
  4. [CoF6]3-

उत्तर-
(i) d2 sp3, अष्टफलकीय, प्रतिचुम्बकीय,
(ii) sp3 d2, अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय,
(iii) d2 sp3, अष्टफलकीय, प्रतिचुम्बकीय,
(iv) sp3 d2, अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय।

प्रश्न 12.
VBT के आधार पर [FeF6]3- संकुल आयन की संरचना एवं चुम्बकीय प्रकृति बताइए। (2017)
उत्तर
sp3 d2 प्रकार का संकरण, अष्टफलकीय संरचना, अनुचुम्बकीय प्रकृति

प्रश्न 13.
प्रभावी परमाणु क्रमांक क्या है? उदाहरण द्वारा समझाइए। (2017)
उत्तर
प्रभावी परमाणु क्रमांक = परमाणु क्रमांक + ग्रहण किये गये इलेक्ट्रॉनों की संख्या – त्याग किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या।

प्रश्न 14.
[Fe(CN)6]3- में आयरन का प्रभावी परमाणु क्रमांक ज्ञात कीजिए। (Fe का परमाणु क्रमांक = 26) (2018)
उत्तर
[Fe(CN)6]3- में आयरन का प्रभावी परमाणु क्रमांक = [26- 3 + 2(6)] = 35

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आवेश के आधार पर लिगेण्डों को किस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है? उदाहरण देते हुए समझाइए। (2014)
उत्तर
आवेश के आधार पर लिगेण्ड निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं –

  1. धनात्मक लिगेण्ड – धनावेश वाले लिगेण्ड धनात्मक लिगेण्ड कहलाते हैं। ये संकर में बहुत कम पाये जाते हैं।
    उदाहरणार्थ– NO+, NH2 NH+3 आदि।
  2. ऋणात्मक लिगेण्ड – ऋणावेश वाले लिगेण्ड ऋणात्मक लिगेण्ड कहलाते हैं। ये ऋणात्मक स्पीशीज होती हैं जिनमें एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म पाये जाते हैं।
    उदाहरणार्थ– F, Cl, Br, CN आदि।
  3. उदासीन लिगेण्ड – ऐसे लिगेण्डों पर कोई आवेश नहीं होती है और ये प्राय: आण्विक स्पीशीज होती हैं जिनमें एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म उपस्थित रहते हैं।
    उदाहरणार्थ– H2O, NH3, CO, NO आदि।

प्रश्न 2.
संकर यौगिकों में निम्न में से प्रत्येक को उदाहरण सहित समझाइए-

  1. आयनन समावयवता तथा
  2. हाइड्रेट समावयवता।

या
उपसहसंयोजन यौगिकों की संरचना समावयवता की व्याख्या उचित उदाहरण के साथ कीजिए। (2017)
उत्तर
1. आयनन समावयवता – जब सहसंयोजक यौगिकों के अणुसूत्र समान होते हैं परन्तु वह भिन्न आयनन व्यवहार प्रदर्शित करते हैं तथा विलयन में भिन्न आयन प्रदान करते हैं तो इसे आयनन समावयवता कहते हैं। आयनन समावयवता, उपसहसंयोजन तथा आयनन मण्डल के मध्य समूहों के विनिमय के कारण होती है।
उदाहरणार्थ– Co(NH3)5 (Br)(SO4) सूत्र वाले दो भिन्न यौगिक इस प्रकार हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 36

2. हाइड्रेट समावयवता – जल के अणु लिगण्ड की भाँति तथा क्रिस्टलीकरण जल दोनों की भाँति व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं। जब दो योगिक इस प्रकार की भिन्नता प्रदर्शित करते हैं तो उन्हें हाइड्रेट समावयवी कहते हैं तथा इस घटना को हाइड्रेट समावयवता कहते हैं। उदाहरणार्थ– CrCl. 6H2O सूत्र के निम्नलिखित तीन हाइड्रेट समावयवी ज्ञात हैं –

  • [Cr(H2O)]Cl3 हेक्साऐक्वाक्रोमियम (III) क्लोराइड (बैंगनी)
  • [Cr(H2O)5Cl]Cl. H2O पेन्टाऐक्वाक्लोरिडोक्रोमियम (III) क्लोराइड मोनोहाइड्रेट (नीला-हरा)
  • [Cr(H2O)4Cl2]Cl . 2H2O टेट्राऐक्वाडाइक्लोरिडोक्रोमियम (III) क्लोराइड डाइहाइड्रेट (गाढ़ा-हरा)

प्रश्न 3.
निम्न संकर यौगिकों के सन्दर्भ में ज्यामितीय समावयवता को समझाइए

  1. [PtCl2(NH3)2]
  2. [Co(NH3)2Cl2] तथा
  3. [Pt(gly)2]

या
सिस समावयवता और ट्रांस समावयवता की परिभाषा बताइए। (2015)
उत्तर
जब समान समूह केन्द्रीय धातु परमाणु के एक ही ओर स्थित होते हैं तो उसे सिस समावयवी तथा जब विपरीत ओर स्थित होते हैं तो उसे ट्रांस समावयवी कहते हैं।
1. [PtCl2(NH3)2] के सिस एवं ट्रांस रूप नीचे चित्र में दर्शाए गए हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 37

2. [Co(NH3)4]+Cl2 के सिस एवं ट्रांस रूप नीचे चित्र में दर्शाए गए हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 38

3. [Pt(gly)2] के सिस एवं ट्रांस रूप नीचे चित्र में दर्शाए गए हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 39

प्रश्न 4.
द्विक-लवण क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
ये वे आण्विक अथवा योगात्मक यौगिक हैं जो कि ठोस अवस्था में रहते हैं परन्तु जल में घोलने पर ये अपने घटक आयनों में वियोजित हो जाते हैं। इस प्रकार घटक विलयन में अपनी पहचान खो देते हैं।
उदाहरणार्थ
1. पोटाश एलम (Potash alum), K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O द्विक-लवण है। इसे पोटैशियम सल्फेट तथा ऐलुमिनियम सल्फेट के संतृप्त विलयनों को मिलाकर तथा तत्पश्चात् मिश्रण का वाष्पीकरण करके प्राप्त किया जाता है।
K2SO4 + Al2(SO4)3 + 24H2O → K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O
जब पोटाश एलम को जल में घोला जाता है तो यह पहचान खोकर अपने आयनों में वियोजित हो जाता है।
K2SO4 . Al2(SO4) . 24H2O → 2K+ + 2Al3+ + 4SO2-4 + 24H2O
पोटाश एलम का जलीय विलयन K+, Al3+ तथा SO2-4 आयनों का परीक्षण देता है। अतः यह द्विक लवण है।

2. मोहर लवण (Mohr’s salt) FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O भी एक द्विक-लवण है तथा इसे फेरस सल्फेट तथा अमोनियम सल्फेट के संतृप्त विलयनों को मिश्रित करके तथा मिश्रण को ठण्डा करके प्राप्त किया जाता है।
FeSO4 + (NH4)2 SO4 . 6H2O  → FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O
जब मोहर लवण को जल में घोला जाता है तो वह अपने आयनों में निम्न प्रकार वियोजित होता है ” तथा उसकी पहचान समाप्त हो जाती है –
FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O  → Fe2+ + 2NH+4 + 2SO2-4 + 6H2O
इसका जलीय विलयन Fe2+, NH+4 तथा SO2-4 आयनों का परीक्षण देता है। अत: मोहर लवण एक द्विक-लवण है।

प्रश्न 5.
FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन के साथ 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर विलयन Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, परन्तु CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है। समझाइए क्यों?
उत्तर
FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन में 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर एक द्विक-लवण प्राप्त होता है, जिसे मोहर लवण (FeSO4.(NH4)2SO44.6H2O) कहते हैं। यह निम्न प्रकार आयनित होता है –
(FeSO4.(NH4)2SO44.6H2O) → F2+ + 2NH+4 + 3SO2-4 + 6H2O
विलयन में Fe2+ आयनों की उपस्थिति के कारण यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है।

जब CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रित किया जाता है, तो संकर लवण [Cu(NH3)4]SO4 प्राप्त होता है। यह विलयन में निम्न प्रकार आयनित होता है –
[Cu(NH3)4]SO4 → [Cu(NH3)4]2+ + SO2-4
संकर आयन [Cu(NH3)4]2+ पुनः आयनित होकर Cu2+ आयन नहीं देता है। इसलिए विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त (VBT) की मुख्य अवधारणाएँ क्या हैं? निकिल कार्बोनिल आयन की संरचना तथा चुम्बकीय व्यवहार को इस सिद्धान्त के आधार पर समझाइए।
उत्तर
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त – इस सिद्धान्त का प्रतिपादन लाइनस पॉलिंग (Linus Pauling) ने किया था। इस सिद्धान्त के अनुसार, संकर का निर्माण, एक लूइस बेस (लिगेण्ड) तथा एक लूइस अम्ल (धातु या धातु आयन) के मध्य हुई अभिक्रिया है जिसके परिणामस्वरूप लिगेण्ड तथा धातु के मध्य उपसहसंयोजन अथवा दाता आबन्ध का निर्माण होता है।
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त की अवधारणाएँ – संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त की मुख्य अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन में कई रिक्त कक्षक (उनके उपसहसंयोजन संख्या के बराबर) उपस्थित होते हैं जिनमें लिगेण्ड द्वारा दिये गये इलेक्ट्रॉन समावेशित होते हैं। प्रत्येक एकदंतुर लिगेण्ड केन्द्रीय परमाणु अथवा आयन को इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म प्रदान करता है।
  2. केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन के रिक्त परमाण्विक कक्षक आवश्यकतानुसार संकरण में भाग लेते हैं। संकरण में, कक्षक आपस में मिलकर अपनी ऊर्जा का पुनः वितरण करते हैं। इस प्रकार समान संख्या में समान ऊर्जा वाले संकरित कक्षकों का निर्माण होता है।
  3. जब लिगेण्ड, केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन के सम्पर्क में आता है, तो केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयने के संकरित कक्षक, लिगेण्ड के इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म युक्त कक्षकों के साथ अतिव्यापन करते हैं तथा प्रबल लिगेण्ड-धातु उपसहसंयोजक आबन्धों का निर्माण करते हैं।
  4. केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन के अनाबन्धी इलेक्ट्रॉन (non-binding electrons) अप्रभावित रहते हैं तथा रासायनिक आबन्ध निर्माण में भाग नहीं लेते हैं।
  5. संकर निर्माण प्रक्रिया में, हुण्ड के अधिकतम बहुलता के नियम का अनुसरण किया जाता है परन्तु प्रबल लिगेण्ड के प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन हुण्ड के नियम के विरुद्ध युग्मित हो सकते हैं।
  6. यदि किसी संकर में एक या अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों तो वह संकर अनुचुम्बकीय होता है। यदि संकर में उपस्थित सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं तो संकर प्रतिचुम्बकीय होता है।

निकिल कार्बोनिल [Ni(CO)4] – इस संकर में केन्द्रीय निकिल परमाणु चार CO लिगेण्डों से घिरा रहता है। यौगिक में निकिल की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है। निकिल परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 4s2 है। प्रबल CO लिगेण्डों की उपस्थिति में इलेक्ट्रॉन पुनर्व्यवस्थित होता है तथा 4s- इलेक्ट्रॉन 3d-कक्षक में प्रवेश करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। इस प्रकार निकिल में 4s- तथा 4p- कक्षक संकरण में भाग लेने के लिए बाध्य हो जाते हैं। एक 4s- तथा तीन 4p- कक्षक sp3 संकरण में भाग लेते हैं तथा समान ऊर्जा के चार संकरित कक्षक का निर्माण करते हैं जो कि एक नियमित चतुष्फलक के चार कोनों की ओर दिष्ट होते हैं। ये कक्षक CO लिगेण्ड के कक्षक के साथ अतिव्यापित हो जाते हैं और इस प्रकार चतुष्फलकीय [Ni(CO)4] संकर का निर्माण होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 40
यह संकर चतुष्फलकीय ज्यामिति युक्त है। इसमें सभी इलेक्ट्रॉनों के युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुम्बकीय है।

प्रश्न 2.
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त (CFT) को समझाइए। अष्टफलकीय व चतुष्फलकीय संकुल यौगिकों में d-कक्षकों को विपाटन स्पष्ट कीजिए।
या
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d-कक्षकों के विपाटन को दर्शाने हेतु चित्र बनाइए।
उत्तर
एच० बैथे (H. Bethe, 1929) तथा वी०व्लैक (Van Vleck) द्वारा 1932 ई० में उपसहसंयोजक यौगिकों के गुणों को स्पष्ट करने हेतु एक सिद्धान्त प्रस्तुत किया गया था, जिसे क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त (CFT) कहा गया, जो 1950 में लागू हुआ।
इस सिद्धान्त के मुख्य विन्दु निम्नवत् हैं –

  1. संक्रमण धातु संकुल के केन्द्रीय आयन का कार्य करती हैं। लिगण्ड एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करता है, जबकि संक्रमण धातु आयन के रिक्त कक्षक इन इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करते हैं।
  2. लिगेण्ड (ऋणात्मक/द्विध्रुवी) बिन्दु आवेश की तरह माने जाते हैं।
  3. संकुल यौगिकों में धातु आयन व लिगेण्ड के मध्य बनने वाले आबन्ध को पूर्णतया आयनिक माना जाता , है, अर्थात धातु आयन व लिगेण्ड परस्पर स्थित विद्युत आकर्षण बल द्वारा जुड़े रहते हैं।
  4. यह स्थिर विद्युत आकर्षण बल धनायन व ऋणायन के मध्य आयन-आयन आकर्षण बल हो सकता है या धनायन व उदासीन लिगेण्ड के मध्य आयन-द्विध्रुव आकर्षण बल हो सकता है।

अष्टफलकीय संकुल यौगिकों में 4-कक्षकों को विपाटन
एक मुक्त धातु आयन में सभी पाँच कक्षक (t2g और eg) अपभ्रंश होते हैं, अर्थात् उनकी ऊर्जा समान होती है। एक अष्टफलकीय संकर [ML6]n+ पर विचार करें जिसमें धातु आयन Mn+ अष्ट्रफलक के केन्द्र पर है तथा कोनों पर एकदन्ती लिगेण्ड (L) द्वारा घिरा हुआ है।
जब x,y और z अक्ष पर समस्त छ: लिगेण्ड धातु आयन की ओर अग्रसर होते हैं, तब लिगेण्ड के ऋण छोर (इलेक्ट्रॉन द्वारा) d-कक्षकों में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों से प्रतिकर्षित होते हैं। इस प्रतिकर्षण द्वारा पाँचों d-कक्षकों की ऊर्जाओं में परिवर्तन होता है। चूंकि eg, कक्षकों (dx2– y2 और dz2) की पालियाँ केन्द्रीय धातु आयन के समीप जाने वाले लिगेण्ड के मार्ग में आती हैं,
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 41
अत: t2g कक्षकों (dxy, dyz, dzx) की अपेक्षा इनमें इलेक्ट्रॉनों का प्रतिकर्षण अधिक होता है। इस कारण पाँच d-कक्षक दो ऊर्जा समूहों में विभक्त हो जाते हैं, अर्थात् eg कक्षकों की ऊर्जा में वृद्धि होती है। धातु आयन के पाँच d-कक्षकों का भिन्न ऊर्जा के दो समूहों में विभाजन, d – d विपाटन या क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन कहलाता है। t2g और eg कक्षकों की ऊर्जा के मध्य के अन्तर को Δ0 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। (Δ = ऊर्जा में अन्तर व 0 = अष्टफलकीय) इसे 10Dq द्वारा भी दर्शाया जाता है और यह क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा कहलाती है।

चतुष्फलकीय संकुल यौगिकों में d-कक्षकों का विपाटन – चतुष्फलकीय संकुलों में d- कक्षकों का विपाटन समझने के लिए कल्पना कीजिए कि एक घन में चतुष्फलक रखा हुआ है। चतुष्फलक के चार किनारे घन के एकान्तर कोनों पर स्थापित हैं जिन पर चार लिगेण्ड स्थित हैं तथा धातु आयन उसके केन्द्र पर है।
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अब, हम यदि केन्द्रीय धातु परमाणु के d-कक्षकों की तुलना में चार लिगेण्डों की स्थिति को अध्ययन करें तो अक्ष (dx2– y2 और dz2 अर्थात् eg कक्षक) पर t2g कक्षकों (dxy, dxz, dyz) की अपेक्षा चार लिगण्ड और अधिक दर हो जाते हैं। अतः eg कक्षक निम्न ऊर्जा के हैं और t2g कक्षक उच्च ऊर्जा के हैं। eg और t2g कक्षकों के मध्य ऊर्जा का अन्तर चतुष्फलकीय संकुलों के लिए क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा कहलाता है तथा इसको A) द्वारा दर्शाया जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 43

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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability (प्रायिकता) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability (प्रायिकता).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 13
Chapter Name Probability (प्रायिकता)
Exercise Ex 13.1, Ex 13.2, Ex 13.3, Ex 13.4, Ex 13.5
Number of Questions Solved 81
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability (प्रायिकता)

प्रश्नावली 13.1

प्रश्न 1.
यदि E और F इस प्रकार की घटनाएँ हैं कि P (E) = 0.6, P (F) = 0.3 और P(E ∩ F) = 02, तो [latex ]P\left( \frac { E }{ F } \right) [/latex] और [latex ]P\left( \frac { F }{ E } \right) [/latex] ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, P(E) = 0.6, P(F) = 0.3
और P (E ∩ F) = 0.2
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 1

UP Board Solutions

प्रश्न 2:
P(A | B) ज्ञात कीजिए यदि P(B) = 0.5 और P(A ∩ B) = 0.32
हल:
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 2

प्रश्न 3.
यदि P (A) = 0.8, P(B) = 0.5 और [latex ]P\left( \frac { B }{ A } \right) =0.4[/latex] तो ज्ञात कीजिए
(i) P(A ∩ B)
(ii) [latex ]P\left( \frac { A }{ B } \right) [/latex]
(iii) P(AU B)
हल-
दिया है, P(A) = 0.8, P(B) = 0.5 और [latex ]P\left( \frac { B }{ A } \right) =0.4[/latex]
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 3
(iii) ∵ P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= 0.8 + 0.5 – 0.32
= 1.3 – 0.32
= 0.98

प्रश्न 4:
P(A ∪ B) ज्ञात कीजिए यदि 2P(A) = P(B) = [latex]\frac { 5 }{ 13 }[/latex] और P(A| B) = [latex]\frac { 2 }{ 5 }[/latex]
हल :
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 4

प्रश्न 5:
यदि P(A) = [latex]\frac { 6 }{ 11 }[/latex] ,P(B) = [latex]\frac { 5 }{ 11 }[/latex] और P(A∪ B) = [latex]\frac { 7 }{ 11 }[/latex] तो ज्ञात कीजिए
(i) P(A ∩B)
(ii) P(A | B)
(iii) P(B | A)
हल:
(i) ∵ P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 5

• निम्नलिखित प्रश्न 6 से 9 तक [latex ]P\left( \frac { E }{ F } \right)[/latex] ज्ञात कीजिए।

प्रश्न 6.
एक सिक्के को तीन बार उछाला गया है
(i) E : तीसरी उछाल पर चित F : पहली दोनों उछालों पर चित
(ii) E : न्यूनतम दो चित F : अधिकतम एक चित ।
(iii) E : अधिकतम दो पट F : न्यूनतम एक पट
हल-
(i) सिक्के को तीन बार उछालने पर कुल प्रतिदर्श समष्टि (प्रकार) = 2³ = 8 समसंभाव्य प्रतिदर्श बिन्दुओं का समुच्चय है जो निम्न प्रकार है।
S = {HHH, HHT, HTH, HTT, THH, THT, TTH, TTT}
E = तीसरी उछाल पर चित = {HHH, HTH, THH, TTH}
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प्रश्न 7.
दो सिक्कों को एक बार उछाला गया है-
(i) E : एक सिक्के पर पट प्रकट होता है F : एक सिक्के पर चित प्रकट होता है।
(ii) E : कोई पट प्रकट नहीं होता है F : कोई चित प्रकट नहीं होता है।
हल-
(i) E = एक सिक्के पर पट प्रकट होता है। = {TH, HT}
F = एक सिक्के पर चित प्रकट होता है।
= {HT, TH}
∴ E ∩ F = {TH, HT}
दो सिक्कों को उछालने पर प्रतिदर्श समष्टि = 2² = 4
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प्रश्न 8.
एक पासे को तीन बार उछाला गया है
E : तीसरी उछाल पर संख्या 4 प्रकट होना
F : पहली दो उछालों पर क्रमशः 6 तथा 5 प्रकट होना।
हल-
E = तीसरी उछाल पर संख्या 4 प्रकट होना तथा F पहली दो उछालों पर क्रमश: 6 तथा 5 प्रकार होना
= (1,1, 4), (1, 2, 4), (1, 3, 4), … (1, 6, 4)
= (2, 1, 4), (2, 2, 4), (2, 3, 4), … (2, 6, 4)
= (3, 1, 4), (3, 2, 4), (3, 3, 4), … (3, 6, 4)
= (4,1, 4), (4, 2, 4), (4, 3, 4), … (4,6, 4)
= (5, 1, 4), (5, 2, 4), (5, 3, 4), … (5, 6, 4)
= (6,1, 4), (6, 2, 4), 6, 3, 4),… (6, 6, 4)
= 36 परिणाम
तथा F = {6, 5, 1), (6, 5, 2), (6, 5, 3), (6, 5, 4), (6, 5, 5), (6, 5, 6)} = 6 परिणाम
∴E ∩ F = {6, 5, 4}
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प्रश्न 9.
एक पारिवारिक चित्र में माता, पिता व पुत्र यादृच्छया खड़े हैं
E : पुत्र एक सिरे पर खड़ा है
F : पिता मध्य में खड़े हैं।
हल-
यदि एक पारिवारिक चित्र में (m), पिता (f) व पुत्र (s) यादृच्छया खड़े हैं।
कुल तरीके = 3. 2. 1 = 6
E = पुत्र एक सिरे पर खड़ा है।
= {(s m f), (s f m), (f m s), (m f s)}
F = पिता मध्य में खड़े हैं।
= {(m f s), (s f m)}
E ∩ F = {(m f s), (s f m)}
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प्रश्न 10.
एक काले और एक लाल पासे को उछाला गया है
(a) पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग 9 से अधिक होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता ज्ञात कीजिए यदि यह ज्ञात हो कि काले पासे पर 5 प्रकट हुआ है।
(b) पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग 8 होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता ज्ञात कीजिए यदि यह ज्ञात हो कि लाल पासे पर प्रकट संख्या 4 से कम है।
हल-
(a) माना A पासों पर प्राप्त संख्याओं को योगफल 9 से अधिक होने की घटना तथा F काले पासे पर 5 प्रकट होने की घटना को निरूपित करता है।
∴ A = {(4, 6), (5, 5), (6,4), (5, 6), (6, 5), (6, 6)}
तथा B = {(5, 1), (5, 2), (5, 3), (5,4), (5, 5), (5, 6)}
∴ A ∩ B = {(5, 5), (5, 6)}
तथा 2 पासों की उछाल में कुल परिणाम = 36
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(b) माना A घटना पासों पर प्राप्त संख्याओं का योगफल 8 होने तथा B घटना लाल पासे पर प्रकट संख्या 4 से कम घटित होने को निरूपित करते हैं।
A = {(2, 6), (3, 5), 4, 4), (5, 3), (6, 2)}
B = {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (1, 5), (1, 6), (2, 1), (2, 2), 2, 3), (2,4), (2, 5), (2, 6), (3, 1), (3, 2), (3, 3), 3, 4), 3, 5), (3, 6)}
कुल प्रकार = 18
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प्रश्न 11.
एक सम पाँसे को उछाला गया है। घटनाओं E = {1, 3, 5}, F = {2, 3} और G = {2, 3, 4,5} के लिए निम्नलिखित ज्ञात कीजिए।
(i) P(E | F) और P(F | E)
(ii) P(E | G) और P(G | E)
(iii) P(E ∪ F|G) और P(E ∩ F | G)
हल:
प्रश्नानुसार, n(E) = 3, n(F) = 2, n(G) = 4
तथा n(E ∩ F) = 1, n(E ∩ G) = 2
(E ∪ F) = {1, 2, 3, 5}, (E OF) = {3}
⇒  n(E∪F) = 4, n(E OF) =1
∴ (E ∪ F) 2G = {2, 3, 5}, E 0 F G = {3}
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प्रश्न 12.
मान लें कि जन्म लेने वाले बच्चे को लड़का या लड़की होना समसंभाव्य है। यदि किसी परिवार में दो बच्चे हैं तो दोनों बच्चों के लड़की होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता क्या है, यदि यह दिया गया है कि
(i) सबसे छोटा बच्चा लड़की है
(ii) न्यूनतम एक बच्चा लड़की है।
हल-
माना पहले तथा-दूसरे बच्चे, लड़कियाँ G1, G2 तथा लड़के B1, B2 हैं।
∴ S = { (G1, G2), (G1, B2), (G2, B1), (B1, B2)}
माना A = दोनों बच्चे लड़कियाँ हैं = {G1 G2}
B = सबसे छोटा बच्चा लड़की है = {G1G2, B1G2}
C = न्यूनतम एक बच्चा लड़की है = {G1B2, G1G2, B1G2}
A ∩ B = {G1G2}, A ∩C = {G1G2}
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प्रश्न 13:
एक प्रशिक्षक के पास 300 सत्य/असत्य प्रकार के आसान प्रश्न, 200 सत्य/असत्य प्रकार के कठिन प्रश्न, 500 बहुविकल्पीय प्रकार के आसान प्रश्न और 400 बहुविकल्पीय प्रकार के कठिन प्रश्नों का संग्रह है। यदि प्रश्नों के संग्रह से एक प्रश्न यदृच्छया चुना जाता है, तो एक आसान प्रश्न की बहुविकल्पीय होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना E = आसान प्रश्न पूछे जाने की घटना
तथा F = बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाने की घटना
तब n(E) = 300 + 500 = 800, n(F) = 500 + 400 = 900
तथा n(E ) F) = 500
∴  अभीष्ट घटना की प्रायिकता = p(F | E) = [latex]\frac { n(E\quad \cap \quad F) }{ n(E) }[/latex] =  [latex]\frac { 500 }{ 800 }[/latex] =  [latex]\frac { 5 }{ 8 }[/latex]

प्रश्न 14.
यह दिया गया है कि दो पासों को फेंकने पर प्राप्त संख्याएँ भिन्न-भिन्न हैं। दोनों संख्याओं का योग 4 होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल-
दो पासों को फेंकने से प्रतिदर्श समष्टि के परिणाम = 6 x 6 = 36
माना A = दो संख्याओं का योग 4 = {(1,3), (2, 2), (3, 1}}
दो पासों को फेंकने पर समान संख्या वाले परिणाम ।
= {(1, 1), (2, 2), (3, 3), 4, 4), (5, 5), 6, 6)} कुल 6 हैं।
∴B = जब संख्या भिन्न हो तो ऐसे परिणाम = 36 – 6 ≠ 30
A ∩ B = {(1, 3), (3, 1)}
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प्रश्न 15.
एक पासे को फेंकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। यदि पासे पर प्रकट संख्या 3 का गुणज है तो पासे को पुनः फेंकें और यदि कोई अन्य संख्या प्रकट हो तो एक सिक्के को उछालें। घटना न्यूनतम एक पासे पर संख्या 3 प्रकट होना’ दिया गया है तो घटना ‘सिक्के पर पट प्रकट होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिए गए परीक्षण के परिणामों को निम्न समुच्चय के द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
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∴ n(S) = 20
माना घटना E सिक्के पर पट प्रकट होना तथा घटना F न्यूनतम एक पासे पर संख्या 3 प्रकट होना को निरूपित करते हैं।
E = [(1, T), (2, T), (4, T), (5, T)] ⇒ n (E) = 4
F = [(3, 1), (3, 2), (3, 3), (3, 4), (3, 5), (3, 6), (6, 3)]
n(F) = 7
E ∩ F = 0 क्योंकि कोई उभयनिष्ठ बिन्दु नहीं है।
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निम्नलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक में सही उत्तर चुनें।

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प्रश्न 16.
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हल-
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प्रश्न 17.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 19a
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 20

प्रश्नावली 13.2

प्रश्न 1:
यदि  P(A)= [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] और  P(B) = [latex]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] A व B स्वतन्त्र घटनायें हैं, तो P(A ∩ B) ज्ञात कीजिए। 
हल:
∵ A व B स्वतन्त्र घटनाये हैं।
∴  P(A ∩ B) = P(A) . P(B) =  [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] x [latex]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] = [latex]\frac { 3 }{ 25 }[/latex]

प्रश्न 2.
52 पत्तों की एक गड्डी में से यदृच्छया बिना प्रतिस्थापित किये दो पत्ते निकाले गए। दोनों पत्तों के काले रंग का होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
ताश की गड्डी में 26 काले पत्ते होते हैं।
आगे उपरोक्त प्रश्न की भाँति हल करें।
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प्रश्न 3.
सन्तरों के एक डिब्बे का निरीक्षण उसमें से तीस सन्तरों को यदृच्छया बिना प्रतिस्थापित किये हुए निकाल कर किया जाता है। यदि तीनों निकाले गये सन्तरें अच्छे हैं; तो डिब्बे को बिक्री के लिए स्वीकृत किया जाता है अन्यथा अस्वीकृत कर देते हैं। एक डिब्बा जिसमें 15 सन्तरें हैं जिनमें से 12 अच्छे व ३ खराब सन्तरें हैं, के बिक्री के लिए स्वीकृत होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना पहली, दूसरी व तीसरी निकाल में अच्छा सन्तरा निकलने की घटनायें क्रमश: A, B व C है।
तब अभीष्ट प्रायिकता = P(A ∩ B ∩ C)
अब P(A) = पहली निकाल में अच्छा सन्तरा निकलने की प्रायिकता =  [latex]\frac { 12 }{ 15 }[/latex] x [latex]\frac { 4 }{ 5 }[/latex]
पहली निकाल में एक अच्छा सन्तरा निकलने के बाद शेष सन्तरों की संख्या 14 है जिसमें 11 सन्तरे अच्छे हैं।
∴ P(B | A) =  [latex]\frac { 11 }{ 14 }[/latex]
दूसरी निकाल में भी एक अच्छा सन्तरा निकलने के बाद शेष सन्तरे 13 हैं जिसमें 10 सन्तरे अच्छे हैं।
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प्रश्न 4.
एक न्याय्य सिक्का और एक अभिनत पाँसे को उछाला गया। माना A घटना ‘सिक्के पर चित प्रकट होता है और B घटना पाँसे पर संख्या 3 प्रकट होती है’ को निरूपित करते हैं। निरीक्षण कीजिए कि घटनाएँ स्वतन्त्र हैं या नहीं ?
हल:
इस प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि इस प्रकार होगी
S = {(H, 1), (H, 2), (H, 3), (H, 4), (H, 5), (H, 6), (T, 1),(T, 2), (T, 3), (T, 4), T, 5), (T, 6)}
A = सिक्के पर चित प्रकट होना; B = पाँसे पर संख्या 3 प्रकट होती है।
(A ∩ B) = {(H, 3}}
तब n(S) = 12, n(A) = 6, n(B) = 2
तथा n(A ∩ B) = 1
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प्रश्न 5.
एक पाँसे पर 1, 2, 3 लाल रंग से और 4, 5, 6 हरे रंग से लिखे गए हैं। इस पाँसे को उछाला गया। माना A घटना संख्या सम है’ और B घटना ‘संख्या लाल रंग से लिखी गई है’ को निरूपित करते हैं। क्या A और B स्वतन्त्र हैं?
हल:
इस प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि S = {1, 2, 3, 4, 5, 6} ⇒ n(S) = 6
घटना A = {2, 4, 6} }  ⇒ n(A) = 3
तथा घटना B = {1, 2, 3} ⇒  n(B) = 3
तब (A ∩ B) = {2} ⇒  n(A ∩ B) = 1
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प्रश्न 6.
माना E तथा F दो घटनाएँ इस प्रकार हैं कि P(E) = [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] , P(F) = [latex]\frac { 3 }{ 10 }[/latex]  और P(E ∩ F) = [latex]\frac { 1 }{ 5 }[/latex]  तब क्या E तथा F स्वतन्त्र हैं?
हल:
∵ P(E). P(F) = [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] x  [latex]\frac { 3 }{ 10 }[/latex] = [latex]\frac { 9 }{ 50 }[/latex] ≠ P(E ∩ F)
∴ घटनायें स्वतन्त्र नहीं हैं।

प्रश्न 7.
A और B ऐसी घटनाएँ दी गई हैं जहाँ P(A) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex],P(A ∪ B) = [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] तथा P(B) = p, तो p का मान ज्ञात कीजिए यदि (i) घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं, (ii) घटनाएँ स्वतन्त्र हैं। 
हल :
(i) चूँकि घटनायें परस्पर अपवर्जी हैं।
∴ P(A ∩ B) = 0
पुन: P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
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प्रश्न 8:
माना A और B स्वतन्त्र घटनायें है तथा P(A) = 0.3 और P(B) = 0.4 तब
(i) P (A ∩ B)
(i) P(A ∪ B)
(iii) P(A| B)
(iv) P(B | A) ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) ∵ A व B स्वतन्त्र घटनायें हैं।
∴ P(A ∩ B) = P(A): P(B) = 0.3 x 0.4 = 0.12
(ii) P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= 0.3 + 0.4 – 0.12 = 0.58
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प्रश्न 9.
दी गई घटनाएँ A और B ऐसी हैं, जहाँ P(A) = [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex],P(B) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] और P(A ∩ B) = [latex]\frac { 1 }{ 8 }[/latex] तब P(A- नहीं और B -नहीं) ज्ञात कीजिए।
हल:
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प्रश्न 10:
माना A और B दो घटनाएँ हैं और P(A) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] तथा P(B) = [latex]\frac { 7 }{ 12 }[/latex] और P(A- नहीं और B-नहीं)= [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex], क्या A और B स्वतन्त्र घटनायें हैं?
हल:
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प्रश्न 11:
A और B स्वतन्त्र घटनाएँ दी गई हैं जहाँ P(A) = 0.3, P(B) = 0.6 तो
(i) P(A और B)
(ii) P(A और B – नहीं)
(iii) P(A या B)
(iv) P(A और B में कोई भी नहीं) का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) P(A और B) = P(A ∩ B) = P(A): P(B) ∵ P(A) व P(B) स्वतन्त्र घटनायें हैं।
= 0.3 x 0.6 = 0.18

(ii) P(A और B -नहीं) = P(A ∩ [latex]\overline { B }[/latex]) = P(A): P([latex]\overline { B }[/latex])
= P(A): [1 – P(B)]
= 0.3 [1 – 0.6] = 0.3 x 0.4 = 0.12

(iii) P(A या B) = P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= 0.3 + 0.6 – 0.18 = 0.72

(iv) P(A और B में कोई भी नहीं) = P([latex]\overline { A }[/latex] ∩ [latex]\overline { B }[/latex])
= P([latex]\overline { A\cup B }[/latex]) = 1 – P(A ∪ B)
= 1 – 0.72 = 0.28

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प्रश्न 12.
एक पाँसे को तीन बार उछाला जाता है कम से कम एक बार विषम संख्या प्राप्त होने की प्राकियता ज्ञात कीजिए। 
हल:
पाँसे की पहली उछाल में कुल अंक प्राप्त होने की स्थिति = 6
तथा विषम अंक प्राप्त न होने की स्थिति = 3
∴  पहले उछाल में विषम अंक प्राप्त न होने की प्रायिकता P(A) = [latex]\frac { 3 }{ 6 }[/latex]  = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
इसी प्रकार दूसरे उछाल में विषम अंक प्राप्त न होने की प्रायिकता P(B) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
तीसरे उछाल में विषम अंक प्राप्त न होने की प्रायिकता P(C) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
∵  उपरोक्त तीनों घटनायें स्वतन्त्र हैं।
∴ तीनों के एक साथ घटने की प्रायिकता अर्थात् प्रत्येक उछाल में विषम संख्या प्राप्त न होने की घटना
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प्रश्न 13.
दो गेंदें एक बॉक्स से बिना प्रतिस्थापित किये निकाली जाती हैं। बॉक्स में 10 काली और 8 लाल गेंदें हैं तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(i) दोनों गेंदें लाल हों।
(ii) प्रथम काली एवं दूसरी लाल हो।
(iii) एक काली तथा दूसरी लाल हो।
हल:
माना R = लाल गेंद निकलने की घटना; B = काली गेंद निकलने की घटना
(i) पहले निकाल में लाल गेंद निकलने की प्रायिकता P(R) = [latex]\frac { 8 }{ 10+8 }[/latex] = [latex]\frac { 8 }{ 18 }[/latex] = [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]
क्योंकि गेंद पुनः वापस डाल दी जाती है।
∴  दूसरे निकाल में लाल गेंद निकलने की प्रायिकता P(R) = [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]
∴  दोनों गेंद लाल निकलने की प्रायिकता = P(R). P(R) =

(ii) पहले निकाल में काली गेंद निकलने की प्रायिकता P(B) = [latex]\frac { 10 }{ 18 }[/latex]  = [latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex]
दूसरे निकाल में लाल गेंद निकलने की प्रायिकता P(R) = [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]
∴  P(पहली काली और दूसरी लाल) = P(B). P(R) = [latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex]  x [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]  = [latex]\frac { 20 }{ 81 }[/latex]

(iii) P(एक काली और एक लाल) = P(प्रथम काली और दूसरी लाल) +P(प्रथम लाल और दूसरी काली)
= [latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex] .[latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]  + [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex] .[latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex] = [latex]\frac { 40 }{ 81 }[/latex]

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प्रश्न 14.
एक विशेष प्रश्न को A और B द्वारा स्वतन्त्र रूप से हल करने की प्रायिकताएँ क्रमशः [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]  और [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex]  हैं। यदि दोनों स्वतन्त्र रूप से समस्या हल करने का प्रयास करते हैं, तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि
(i) प्रश्ल हल हो जाता है।
(ii) उनमें से तथ्यतः कोई एक प्रश्न हल कर लेता है।
हल:
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प्रश्न 15.
ताश के 52 पत्तों की एक ठीक से फैटी गई गड्डी से एक पत्ता यदृच्छया निकाला जाता है। निम्नलिखित में से किन दशाओं में घटनाएँ E और F स्वतन्त्र हैं?
(i) E : ‘निकाला गया पत्ता हुकुम का है
F : ‘निकाला गया पत्ता इक्का है ।

(ii) E : निकाला गया पत्ता काले रंग का है।
F : निकाला गया पत्ता एक बादशाह है।

(iii) E : निकाला गया पत्ता एक बादशाह या एक बेगम है।
F : निकाला गया पत्ता एक बेगम या एक गुलाम है।
हल:
(i) E : निकाला गया पत्ता हुकुम का है।
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(ii)
E : निकाला गया पत्ता काले रंग का है।
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(iii) E: निकाला गया पत्ता एक बादशाह या एक बेगम है।
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प्रश्न 16.
एक छात्रावास में 60% विद्यार्थी हिंदी का, 40% अंग्रेजी का और 20% दोनों अखबार पढ़ते हैं। एक छात्रा को यदृच्छया चुना जाता है।
(a) प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह न तो हिंदी और न ही अंग्रेजी का अखबार पढ़ती है।
(b) यदि वह हिंदी का अखबार पढ़ती है तो उसके अंग्रेजी का अखबार भी पढ़ने वाली होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(c) यदि वह अंग्रेजी का अखबार पढ़ती है तो उसके हिंदी का अखबार भी पढ़ने वाली होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना H = हिंदी का अखबार पढ़ने की घटना; E = अंग्रेजी का अखबार पढ़ने की घटना
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प्रश्न 17.
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हल:
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प्रश्न 18.
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हल:
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प्रश्नावली 13.3

प्रश्न 1.
एक कलश में 5 लाल और 5 काली गेंदें हैं। यादृच्छया एक गेंद निकाली जाती है, इसका रंग नोट करने के बाद पुनः कलश में रख दी जाती है। पुनः निकाले गएं रंग की 2 अतिरिक्त गेंदें कलश में रख दी जाती हैं तथा कलश में से एक गेंद निकाली जाती है दूसरी गेंद की लाल होने की प्रायिकता क्या है?
हल-
क्योंकि एक कलश में 5 लाल और 5 काली गेंदें हैं।
(i) माना एक लाल गेंद निकाली जाती है।
∴ कुल 10 गेंदों में से एक लाल गेंद निकालने की प्रायिकता = [latex]\frac { 5 }{ 10 } =\frac { 1 }{ 2 } [/latex].
अब यदि दो लाल गेंदें कलश में रख दी जाती हैं।
कलश में 7 लाल और 5 काली गेंदें हैं।
लाल गेंद निकालने की प्रायिकता = [latex ]\frac { 7 }{ 12 }[/latex]

(ii) माना पहले काली गेंद निकाली जाती है।
कुल 10 गेंदों में से एक काली गेंद निकालने की प्रायिकता = [latex]\frac { 5 }{ 10 } =\frac { 1 }{ 2 } [/latex].
फिर दो काली गेंदें कलश में रख दी जाती हैं।
अब कलश में 5 लाल और 7 काली गेंदें हैं।
एक लाल गेंद होने की प्रायिकता = [latex ]\frac { 5 }{ 12 }[/latex]
दूसरी लाल गेंद होने की प्रायिकता =
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प्रश्न 2.
एक थैले में 4 लाल और 4 काली गेंदें हैं और एक अन्य थैले में 2 लाल और 6 काली गेंदें हैं। दोनों थैलों में से एक को यदृच्छया चुना जाता है और उसमें से एक गेंद निकाली जाती है जो कि लाल है। इस बात की प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि गेंद पहले थैले से निकाली गयी है।
हल :
माना पहले वे दूसरे थैले को चुनने की घटनायें क्रमश: E1 व E2 हैं, तब
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प्रश्न 3.
छात्रों में से एक कॉलेज में, यह ज्ञात है कि 60% छात्रावास में रहते हैं और 40% दिन विद्वान हैं (छात्रावास में नहीं रहते हैं)। पिछले साल के परिणाम रिपोर्ट करते हैं कि छात्रावास में रहने वाले सभी छात्रों में से 30% एक ग्रेड प्राप्त करते हैं और दिन के 20% विद्वान अपनी वार्षिक परीक्षा में एक ग्रेड प्राप्त करते हैं। वर्ष के अंत में, एक छात्र को कॉलेज से यादृच्छिक रूप से चुना जाता है और उसके पास ए-ग्रेड होता है क्या छात्र संभावना है कि छात्र एक होस्टल हो?
हल:
E1, E2 और ए निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करते हैं:
E1 = हॉस्टल में रहने वाले छात्र,
E2 दिन विद्वान (छात्रावास में नहीं रह रहे हैं)
और A = छात्र जो ग्रेड A प्राप्त करते हैं
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प्रश्न 4.
एक बहुविकल्पीय प्रश्न का उतर देने में एक विद्यार्थी या तो प्रश्न का उत्तर जानता है या वह अनुमान लगाता है। माना कि उसके उत्तर जानने की प्रायिकता [latex]\frac { 3 }{ 4 }[/latex]  है और अनुमान लगाने की प्रायिकता [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex]  है। मान लें कि छात्र के प्रश्न के उत्तर का अनुमान लगाने पर सही उत्तर देने की प्रायिकता [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex]  है तो इस बात की प्रायिकता क्या है कि कोई छात्र प्रश्न का उत्तर जानता है यदि यह ज्ञात है कि उसने सही उत्तर दिया है?
हल:
माना E1 : विद्यार्थी उत्तर जानता है; E2 : विद्यार्थी अनुमान लगाता हो।
E: विद्यार्थी सही उत्तर देता है।
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प्रश्न 5.
किसी विशेष रोग के सही निदान के लिए रक्त की जाँच 99% असरदार है, जब वास्तव में रोगी उस रोग से ग्रस्त होता है। किंतु 0.5% बार किसी स्वस्थ व्यक्ति की रक्त जाँच करने पर निदान गलत रिपोर्ट देता है यानी व्यक्ति को रोग से ग्रस्त बतलाता है। यदि किसी जनसमुदाय में 0.1% लोग उस रोग से ग्रस्त हैं तो क्या प्रायिकता है कि कोई यदृच्छया चुना गया व्यक्ति उस रोग से ग्रस्त होगा यदि उसके रक्त की जाँच में ये बताया जाता है कि उसे यह रोग है?
हल:
माना E1 : एक व्यक्ति को विशेष रोग होना;
E2 : एक व्यक्ति को विशेष रोग न होना।
तथा E : घटना जब जाँच की रिपोर्ट पॉजीटिव है।
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प्रश्न 6.
तीन सिक्के दिए गए हैं। एक सिक्के के दोनों ओर चित्त ही है। दूसरा सिक्का अभिनत (biased) है जिसमें चित्त 75% बार प्रकट होता है और तीसरा अनभिनत सिक्का है। तीनों में से एक सिक्के को यदृच्छयो चुना गया और उसे उछाला गया है। यदि सिक्के पर चित्त प्रकट हो, तो क्या
प्रायिकता है कि वह दोनों चित्त वाला सिक्का है?
हल:
E1 : सिक्का जिसमें दोनों तरफ चित्त है, चुने जाने की घटना।
E2 : अभिनत सिक्का जिसमें चित्त 75% प्रकट होता है, चुने जाने की घटना
E3 : अनभिनत सिक्का चुने जाने की घटना
E : सिक्के पर चित्त प्रकट होने की घटना
प्रश्नानुसार,
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प्रश्न 7.
एक बीमा कम्पनी 2000 स्कुटर चालकों, 4000 कार चालकों और 6000 ट्रक चालकों का बीमा करती है। दुर्घटनाओं की प्रायिकताएँ क्रमशः 0.01, 0.03 और 0.15 है। बीमाकृत व्यक्तियों ( चालकों ) में से एक दुर्घटना ग्रस्त हो जाता है। उस व्यक्ति के स्कूटर चालक होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना E1 : बीमित व्यक्ति एक स्कूटर चालक है; E2 : बीमित व्यक्ति एक कार चालक है।
E3 : बीमित व्यक्ति एक ट्रक चालक है; E : बीमित व्यक्ति दुर्घटना ग्रस्त है।
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प्रश्न 8.
एक कारखाने में A और B दो मशीनें लगी हैं। रिकार्ड से ज्ञात होता है कि कुल उत्पादन का 60% मशीन A और 40% मशीन B द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त मशीन A का 2% और मशीन B का 1% उत्पादन खराब है। यदि कुल उत्पादन का एक ढेर बना लिया जाता है और उसे ढेर से यदृच्छया निकाली गई वस्तु खराब हो तो इस वस्तु के मशीन A द्वारा बने होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि घटनायें E1 व E2 इस प्रकार हैं।
E1 = वस्तु मशीन A द्वारा बनायी गयी है; E2 = वस्तु मशीन B द्वारा बनायी गयी है। E = वस्तु खराब है।
तब प्रश्नानुसार, P(E1) = 0.6, P(E2) = 0.4
P(E | E1 ) = वस्तु के खराब होने की प्रायिकता जबकि वह मशीन A द्वारा बनायी गयी है।
=  [latex]\frac { 2 }{ 100 }[/latex] = 0.02
इसी प्रकार P(E | E2) =  [latex]\frac { 1 }{ 100 }[/latex] = 0.01
अब वस्तु के मशीन A द्वारा बने होने की प्रायिकता जबकि वह खराब है = P(E1 | E)
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प्रश्न 9.
दो समूह निगम के निदेशक मंडल की स्थिति के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। संभावनाएं जो पहले और दूसरे समूह जीतेंगे क्रमश: 0.6 और 0.4 हैं। इसके अलावा, यदि पहला समूह जीतता है, तो एक नया उत्पाद पेश करने की संभावना 0.7 है और दूसरा समूह जीतने पर संबंधित संभावना 0.3 है। संभावना है कि नए उत्पाद को पेश किया गया नया उत्पाद दूसरे समूह द्वारा किया गया था।
हल:
दिया गया: P (G1) = 0.6, P (G2) = 0.4
P नए उत्पाद P (P | G1) = 0.7 और P (P | G2) = 0.3 के लॉन्चिंग का प्रतिनिधित्व करता है
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प्रश्न 10.
कोई लड़की एक पाँसा उछालती है। यदि उसे 5 या 6 की संख्या प्राप्त होती है तो वह एक सिक्के को तीन बार उछालती है और ‘चित्तों की संख्या नोट करती है। यदि उसे 1, 2, 3 या 4 की संख्या प्राप्त होती है तो वह एक सिक्के को एक बार उछालती है और यह नोट करती है कि उस पर चित्त या पट प्राप्त हुआ। यदि उसे ठीक एक चित्त प्राप्त होता है, तो उसके द्वारा उछाले गए पाँसे पर 1, 2, 3 या 4 प्राप्त होने की प्रायिकता क्या है? 
हल:
माना E1 = एक पाँसे के उछाल पर संख्या 5 या 6 का आना
E= एक पाँसे के उछाल पर संख्या 1, 2, 3 या 4 का आना
E = सिक्के के उछाल में एक ही चित्त का आना
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प्रश्न 11.
एक निर्मात्म के पास A, B तथा C मशीन ऑपरेटर है। प्रथम ऑपरेटर A,1% खराब सामग्री उत्पादित करता है तथा ऑपरेटर B और C क्रमशः 5% और 7% खराब सामग्री उत्पादित करते हैं। कार्य पर A कुल समय का 50% लगाता है, B कुल समय का 30% तथा कुले समय का 20% लगाता है। यदि एक खराब सामग्री उत्पादित है तो इसे A द्वारा उत्पादित किए जाने की प्रायिकता क्या है?
हल:
माना E1 : ऑपरेटर A द्वारा उत्पादित होने की घटना
E2 : ऑपरेटर B द्वारा उत्पादित होने की घटना
E3 : ऑपरेटर C द्वारा उत्पादित होने की घटना
E : एक खराब सामग्री उत्पादित होने की घटना
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प्रश्न 12.
52 ताशों की गड्डी से एक पत्ता खो जाता है। शेष पत्तों से दो पत्ते निकाले जाते हैं जो ईंट के पत्ते हैं। खो गये पत्ते की ईंट होने की प्रायिकता क्या है?
हल:
माना E1 : खोने वाला पत्ता ईंट का है;
E2 : खोने वाला पत्ता पान का है।
E3 : खोने वाला पत्ता चिड़ी का है
E4 : खोने वाला पत्ता हुकम का है।
E : शेष पत्तों से 2 ईंट के पत्ते निकालने की घटना
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प्रश्न 13:
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हल:
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प्रश्न 14:
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हल:
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प्रश्नावली 13.4

प्रश्न 1:
बताइए कि निम्नलिखित प्रायिकता बंटनों में कौन-से एक यादृच्छिक चर के लिए सम्भव नहीं है। अपना उत्तर कारण सहित लिखिए।
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हल:
(i) यहाँ पर P(X = 0) + P(X = 1) + P(X = 2) = 0.4 + 0.4 + 0.2 = 1
और सभी P(X) ≥ 0
∴ यह प्रायिकता बंटन सम्भव है।
(ii) यहाँ पर P (X = 0) + P(X = 1) + P(X = 2) + P(X = 3) + P(X = 4)
= 0.1 + 0.5 + 0.2-0.1 + 0.3 = 1.0
परन्तु P(X = 3) = -0.1 < 0
∴ यह प्रायिकता बंटन सम्भव नहीं है।
(iii) यहाँ पर, P(Y = – 1) + P{Y = 0) + P(Y = 1)
= 0.6 + 0.1 + 0.2 = 0.9 ≠ 1
∴  यह प्रायिकता बंटन सम्भव नहीं है।
(iv) यहाँ पर, P(Z = 3) + P(Z = 2) + P(Z = 1) + P(2 = 0) + P(Z = -1)
= 0.3 + 0.2 + 0.4 + 0.1 + 0.05 ≠  1.054 1
∴ यह प्रायिकता बंटन सम्भव नहीं है।

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प्रश्न 2:
एक कलश में 5 लाल और 2 काली गेंद हैं। दो गेंद यदृच्छया निकाली गई। मान लीजिए x काली गेंदों की संख्या को व्यक्त करता है। X के सम्भावित मान क्या हैं? क्या X यदृच्छिक चर है ?
हल:
हमारे पास 5 लाल और 2 काली गेंदें हैं। जब दो गेंद यदृच्छया निकाली गईं, तब निम्नलिखित सम्भावना बन सकती हैं।
(i) निकाली गई दोनों गेंदें लाल हैं  (ii) 1 गेंद लाल, एक काली (iii) दोनों काली
(i) में X = 0                                 (ii) में X = 1                     (iii) में X = 2
∴ परिणाम X = {0, 1, 2}
∵ X का परिसर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है।
इसलिए x एक यादृच्छिक चर है।

प्रश्न 3:
यदि X चित्तों की संख्या और पटों की संख्या में अन्तर को व्यक्त करता है, जबकि एक सिक्के को 6 बार उछाला जाता है। सम्भावित मूल्य क्या हैं?
हल:
यदि एक सिक्का 6 बार उछाला गया हो तो, चित्तों व पटों की कुल संख्याएँ = 26 = 64
चित्त व पट इस प्रकार आ सकते हैं।
(i) 6 चित्त, 0 पट
(ii) 5 चित्त, 1 पेट
(iii) 4 चित्त, 2 पट
(iv) 3 चित्त, 3 पट
(v) 2 चित्त, 4 पट
(vi) 1 चित्त, 5 पट
(vii) 0 चित्त, 6 पट
चूँकि X: चित्तों की संख्या और पटों की संख्या में अन्तर को व्यक्त करता है।
इसलिए
(i) में       X = 6 – 0= 6
(ii) में      X = 5 – 1 = 4
(iii) में     X = 4 – 2 = 2
(iv) में     X = 3 – 3 = 0
(v) में      X = 4 – 2 = 2
(vi) में     X = 5 -1 = 4
(vii) में    X = 6 – 0 = 6
इसलिए X के सम्भावित मूल्य = 0, 2, 4, 6

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प्रश्न 4:
निम्नलिखित के प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए
(i) एक सिक्के की दो उछालों में चित्तों की संख्या का
(ii) तीन सिक्कों को एक साथ एक बार उछालने पर पटों की संख्या का
(ii) एक सिक्के की चार उछालों में चित्तों की संख्या का 
हल:
(i) सिक्के की दो उछालों की प्रतिदर्श समष्टि : S = {HH, HT, TH, TT}
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प्रश्न 5:
एक पाँसा दो बार उछालने पर सफलता की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए जहाँ
(i) ‘4 से बड़ी संख्या’ को एक सफलता माना गया है।
(ii) न्यूनतम एक ‘पाँसे पर संख्या 6 प्रकट होना’ को एक सफलता माना गया है।
हल:
(i) पॉसे की एक उछाल की प्रतिदर्श समष्टि S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}
सफलता की प्रायिकता =P(सफलता)
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प्रश्न 6.
30 बल्बों के समूह में, जिसमें 6 खराब हैं, 4 बल्बों का एक नमूना ( प्रतिदर्श ) यदृच्छया बिना प्रतिस्थापन के निकाला जाता है। खराब बल्बों की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए।
हल:
कुल बल्ब = 30
खराब बल्ब = 6, सही बल्ब = 30 – 6 = 24
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प्रश्न 7.
एक सिक्का समसर्वय सन्तुलित नहीं है जिसमें चित्त प्रकट होने की सम्भावना पट प्रकट होने की सम्भावना की तीन गुनी है। यदि सिक्का दो बार उछाला जाता है तो पटों की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए।
हल:
क्योंकि चित्त और पट की प्रायिकता का अनुपात 3 : 1 है।
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प्रश्न 8.
एक यादृच्छिक चर x का प्रायिकता बंटन नीचे दिया गया है।  (NCERT)
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ज्ञात कीजिए
(i) k
(ii) P(X < 3)
(iii) P(X > 6)
(iv) P(0<X <3)
हल:
(i) चूंकि ∑P(X) = 1
∴  0+k+ 2k + 2k + 3k + k2 + 2k2 + 7k2 + k = 1
⇒ 10k2 + 9k-1 = 0
⇒  (10k – 1) (k + 1) = 0 ⇒  k = [latex]\frac { 1 }{ 10 }[/latex], -1
क्योंकि P(X) ≥ 0 ∴ k = -1 नहीं हो सकता
अतः  k = [latex]\frac { 1 }{ 10 }[/latex]
P(X < 3) = P(X = 0) + P(X = 1) + P(X = 2)
= 0 + k+ 2k = 3k = [latex]\frac { 3 }{ 10 }[/latex]
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प्रश्न 9.
एक यादृच्छिक चर X का प्रायिकता फलन P(x) निम्न प्रकार से है, जहाँ # कोई संख्या है।
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(a) k का मान ज्ञात कीजिए।
(b) P(x<2), (x≤2),P(x≥2) ज्ञात कीजिए।
हल-
(a) चूंकि किसी यादृच्छिक चर के प्रायिकता बंटन का कुल योग 1 के बराबर होता है।
अर्थात ∑P(X) = 1
अत: P(0) + P(1) + P(2) + P (अन्यथा) = 1
∴ k + 2k + 3k + 0 = 1 या 6k = 1 ∴ [latex s=2]k=\frac { 1 }{ 6 }[/latex]
∴ अभीष्ट प्रायिकता बंटन निम्नलिखित है
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प्रश्न 10:
एक न्याय्य सिक्के की तीन उछालों पर प्राप्त चित्तों की संख्या का माध्यज्ञात कीजिए।
हल:
माना तीन सिक्कों की उछाल में X चित्त आने की संख्या दर्शाता है।
तब X = 0, 1, 2 या 3
अब P(H) = एक सिक्के के उछाल पर चित्त आने की प्रायिकता =  [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
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प्रश्न 11:
दो पाँसों को युग्मत् उछाला गया। यदि x, छक्कों की संख्या को व्यक्त करता है, तो x की प्रत्याशा ज्ञात कीजिए।
हल:
स्पष्ट है कि X = 0, 1, 2
P(X = 0) = किसी भी पासे पर 6 न आने की प्रायिकता = [latex]\frac { 25 }{ 36 }[/latex]
केवल एक पाँसे पर 6 आने की घटना
{(1, 6), (2, 6), (3, 6), (4, 6), (5, 6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), (6, 5)}
∴  P(X = 1) = एक 6 आने की प्रायिकता = [latex]\frac { 10 }{ 36 }[/latex]
P(X = 2) = P((6, 6)) =  [latex]\frac { 1 }{ 36 }[/latex]
अत: X का प्रायिकता बंटन है।
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प्रश्न 12:
प्रथम छः धन पूर्णाकों में से दो संख्याएँ यदृच्छया ( बिना प्रतिस्थापन ) चुनी गई। मान लें x दोनों संख्याओं में से बड़ी संख्या को व्यक्त करता है। E(X) ज्ञात कीजिए।
हल:
स्पष्ट है X का मान 2, 3, 4, 5, 6 हो सकता है।
P(X = 2) = प्रायिकता जब दोनों संख्याओं में बड़ी संख्या 2 है।
⇒ P(X = 2) = P((1, 2) या (2, 1))
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प्रश्न 13:
मान लीजिए दो पाँसों को फेंकने पर प्राप्त संख्याओं के योग को x से व्यक्त किया गया है। X का प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात कीजिए।
हल:
दो पाँसों की फेंक में कुल घटनायें = 6 x 6 = 36
जिन्हें (xi ;yi}) के रूप में लिख सकते हैं,
जहाँ xi = 1, 2, 3, 4, 5, 6, yi = 1, 2, 3, 4, 5, 6
यादृच्छिक चर X के मान अर्थात् पाँसों पर प्राप्त संख्याओं का योग 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 या 12 हो सकता है।
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प्रश्न 14:
एक कक्षा में 15 छात्र हैं जिनकी आयु 14, 17, 15, 14, 21, 17, 19, 20, 16, 18, 20, 17, 16, 19 और 20 वर्ष हैं। एक छात्र को इस प्रकार चुना गया कि प्रत्येक छात्र के चुने जाने की सम्भावना समान है और चुने गए छात्र की आयु (X) को लिखा गया। यादृच्छिक चर x को प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए। x का माध्य, प्रसरण व मानक विचलन भी ज्ञात कीजिए।
हल:
X का प्रायिकता बंटन इस प्रकार होगा (स्वयं ज्ञात कीजिए।)
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प्रश्न 15.
एक बैठक में 70% सदस्यों ने किसी प्रस्ताव का अनुमोदन किया और 30% सदस्यों ने विरोध किया। एक सदस्य को यदृच्छया चुना गया और, यदि उसे सदस्य ने प्रस्ताव का विरोध किया हो तो x = 0 लिया गया, जब कि यदि उसने प्रस्ताव का अनुमोदन किया हो तो x = 1 लिया गया। Ex)
और प्रसरण (X) ज्ञात कीजिए।
हल:
X का प्रायिकता बंटन इस प्रकार होगा।
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• निम्नलिखित में से प्रत्येक में सही उत्तरे चुनें।।

प्रश्न 16.
तीन चेहरे पर 1 लिखा हुआ मरने पर प्राप्त संख्या का मतलब, दो चेहरों पर 2 और एक चेहरे पर 5 है
(a) 1
(b) 2
(c) 5
(d) [latex s=2]\frac { 8 }{ 3 }[/latex]
हल:
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Mean 2
विकल्प (b) सही है

प्रश्न 17.
मान लीजिए कि दो कार्ड कार्ड के डेक से यादृच्छिक रूप से खींचे जाते हैं। X को प्राप्त एसेस की संख्या होने दें। E(X) का मूल्य क्या है?
(a) [latex s=2]\frac { 37 }{ 221 }[/latex]
(b) [latex s=2]\frac { 5 }{ 13 }[/latex]
(c) [latex s=2]\frac { 1 }{ 13 }[/latex]
(d) [latex s=2]\frac { 2 }{ 13 }[/latex]
हल:
n(S) = 52, n(A) = 4
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अभी व E(X) = [latex s=2]\frac { 2 }{ 13 }[/latex]
विकल्प (d) सही है

प्रश्नावली 13.5

प्रश्न 1:
एक पाँसे को 6 बार उछाला जाता है।
यदि ‘पाँसे पर सम संख्या प्राप्त होना’ एक सफलता है तो निम्नलिखित की प्रायिकता क्या होंगी?
(i) तथ्यतः 5 सफलताएँ
(ii) न्यूनतम 5 सफलताएँ
(iii) अधिकतम 5 सफलताएँ
हल:
मानी प्रयोग में सफलता की प्रायिकता = p
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प्रश्न 2:
बड़ी मात्रा में वस्तुओं में 5% दोषपूर्ण वस्तुएं हैं। संभावना है कि 10 वस्तुओं के नमूने में एक से अधिक दोषपूर्ण आइटम शामिल नहीं होंगे?
हल:
एक दोषपूर्ण वस्तु प्राप्त करने की संभावना = 5%
= [latex s=2]\frac { 5 }{ 100 }[/latex]
= [latex s=2]\frac { 1 }{ 20 }[/latex]
एक अच्छी वस्तु प्राप्त करने की संभावना = [latex s=2]1-\frac { 1 }{ 20 }[/latex] = [latex s=2]\frac { 19 }{ 20 }[/latex]
10 आइटम के नमूने में एक से अधिक दोषपूर्ण आइटम शामिल नहीं हैं।
=> नमूना में सबसे अधिक है (मुझे दोषपूर्ण आइटम इसकी संभावना = P (0) + P (1)
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प्रश्न 3.
वस्तुओं के एक ढेर में 5% त्रुटियुक्त वस्तुएँ हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि 10 वस्तुओं के एक प्रतिदर्श में एक से अधिक त्रुटियुक्त वस्तुएँ नहीं होंगी?
हल-
एक त्रुटियुक्त वस्तु प्राप्त होने की प्रायिकता p = 5 % = [latex ]\frac { 5 }{ 100 }[/latex] = [latex ]\frac { 1 }{ 20 }[/latex]
एक अच्छी वस्तु प्राप्त होने की प्रायिकता q = [latex s=2]1-\frac { 1 }{ 20 }[/latex] = [latex s=2]\frac { 19 }{ 20 }[/latex]
10 वस्तुओं के एक प्रतिदर्श में एक से अधिक त्रुटियुक्त वस्तुएँ नहीं होंगी।
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प्रश्न 4.
पासा की एक जोड़ी 4 बार फेंक दिया जाता है। यदि डबलेट प्राप्त करना सफल माना जाता है, तो दो सफलताओं की संभावनाएं पाएं।
हल-
n(S) = 36, A = {11,22,33,44,55,66}
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प्रश्न 5.
किसी फैक्ट्री में बने एक बल्ब की 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज होने की प्रायिकता 0.05 है। इसकी प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि इस प्रकार के 5 बल्बों में से
(i) एक भी नहीं
(ii) एक से अधिक नहीं
(iii) एक से अधिक
(iv) कम-से-कम एक, 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज हो जाएँगे।
हल-
150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज होने की प्रायिकता p = 0.05
150 दिनों में उपयोग के बाद फ्यूज न होने की प्रायिकता q = 1 – 0.05 = 0.95
(i) P पाँचों में से कोई भी बल्ब 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज नहीं होगा
= (0.95)5
(ii) P (एक से अधिक बल्ब फ्यूज नहीं होंगे)
= (एक भी बल्ब फ्यूज न हो + एक बल्ब फ्यूज हो) की प्रायिकता
= P(0) + P (1) = (0.95)5 + 5C1 x (0.95)4 x (0.05)
= (0.95)4[ 0.95 + 5 x 0.05]
= (0.95)4 [ 0.95 + 0.25]
= (0.95)4 x 1.2
(iii) P (एक से अधिक बल्ब फ्यूज होंगे) = (2 बल्ब + 3 बल्ब +4 बल्ब + 5 बल्ब) फ्यूज होने की अलग-अलग प्रायिकता
= P (2) + P (3) + P (4) + P (5)
= [P (0) + P (1) + P (2) + P (3) + P (4) + P (5) – [P (0) + P (1)]
= 1 – [P (0) + P (1)]
= 1- (0.95)4 x 1.2
(iv) P (कम-से-कम एक बल्ब फ्यूज होता है)
= P (1) + P (2) + P (3) + P (4) + P (5)
= P (0) + P (1) + P (2) + P (3) + P (4) + P (5)- P (0)
= 1 – P (0)
= 1- (0.95)5

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प्रश्न 6:
एक थैले में 10 गेंदें हैं जिनमें से प्रत्येक पर 0 से 9 तक के अंकों में से एक अंक लिखा है। यदि थैले से 4 गेंदें उत्तरोत्तर पुनः वापस रखते हुए निकाली जाती है, तो इसकी क्या प्रायिकता है कि उनमें से किसी भी गेंद पर अंक 0 न लिखा हो ? 
हल:
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प्रश्न 7:
एक सत्य-असत्य प्रकार के 20 प्रश्नों वाली परीक्षा में माना कि एक विद्यार्थी एक न्याय्य (unbiased) सिक्के को उछाल कर प्रत्येक प्रश्न का उत्तर निर्धारित करता है। यदि पाँसे पर चित्त प्रकट हो, तो प्रश्न का उत्तर ‘सत्य’ देता है और यदि पट प्रकट हो, तो असत्य’ लिखता है। इसकी प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह कम से कम 12 प्रश्नों का सही उत्तर देता है।
हल:
प्रश्न का सही उत्तर देने की प्रायिकता (p) = पाँसे पर चित्त आने की प्रायिकता =  [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
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प्रश्न 8:
माना कि X का बंटन B (6, [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] )है। दर्शाएँ कि X = 3 अधिकतम प्रायिकता चाला परिणाम है।
हल:
यहाँ पर X का द्विपद बंटन है जहाँ
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 86
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 87

प्रश्न 9:
एक बहु-विकल्पीय परीक्षा में 5 प्रश्न हैं जिनमें प्रत्येक के तीन सम्भावित उत्तर हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि एक विद्यार्थी केवल अनुमान लगा कर चार या अधिक प्रश्नों के सही उत्तर दे देगा ? 
हल:
माना X : सही उत्तरों की संख्या
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 88

प्रश्न 10:
एक व्यक्ति एक लॉटरी के 50 टिकट खरीदता है, जिसमें उसके प्रत्येक में जीतने की। प्रायिकता  [latex]\frac { 1 }{ 100 }[/latex] है। इसकी क्या प्रायिकता है कि वह (a) न्यूनतम एक बार (b) तथ्यत: एक बार (c) न्यूनतम दो बार, इनाम जीतेगा ?
हल:
माना X : जीतने की संख्या
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 89

प्रश्न 11:
एक पाँसे को 7 बार उछालने पर तथ्यतः दो बार 5 आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
मानी सफलता की प्रायिकता = p।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 90

प्रश्न 12:
एक सँसे को 6 बार उछालने पर अधिकतम 2 बार छः आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
प्रश्नानुसार, n = 6, पाँसे की उछाल पर 6 आने की प्रायिकता अर्थात् सफलता की प्रायिकता
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 91a

प्रश्न 13:
यह ज्ञात है कि किसी विशेष प्रकार की निर्मित वस्तुओं की संख्या में 10% खराब है। इसकी क्या प्रायिकता है कि इस प्रकार की 12 वस्तुओं के यादृच्छिक प्रतिदर्श में से 9 खराब है।
हल:
यहाँ n = 12, r = 9
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 91

प्रश्न 14.
100 बल्ब युक्त बॉक्स में, 10 दोषपूर्ण हैं। 5 बल्बों के नमूने से बाहर होने की संभावना, कोई भी दोषपूर्ण नहीं है
(a) [latex s=2]{ 10 }^{ -1 }[/latex]
(b) [latex s=2]{ \left( \frac { 1 }{ 2 } \right) }^{ 5 }[/latex]
(c) [latex s=2]{ \left( \frac { 9 }{ 10 } \right) }^{ 5 }[/latex]
(d) [latex s=2]\frac { 9 }{ 10 }[/latex]
हल:
p = [latex s=2]\frac { 1 }{ 10 }[/latex]
q = [latex s=2]\frac { 9 }{ 10 }[/latex] n = 5, r = 0, P(X=0) = [latex s=2]{ \left( \frac { 9 }{ 10 } \right) }^{ 5 }[/latex]
Option (c) is correct

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प्रश्न 15.
संभावना है कि एक छात्र तैराक नहीं है [latex s=2]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] है। फिर संभावना है कि पांच छात्रों में से चार, तैराक हैं:
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 92
हल:
p = [latex s=2]\frac { 4 }{ 5 }[/latex] , q = [latex s=2]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] , n = 5,r = 4
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 93
Option (a) is true

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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions (प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions (प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 2
Chapter Name Inverse Trigonometric Functions
Exercise Ex 1.1, Ex 1.2
Number of Questions Solved 35
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions

प्रश्नावली 2.1

प्रश्न 1.
[latex s=2]{ sin }^{ -1 }\left( -\frac { 1 }{ 2 } \right) [/latex] का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
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प्रश्न 2.
[latex s=2]{ cos }^{ -1 }\left( \frac { \sqrt { 3 } }{ 2 } \right) [/latex] का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
cos-1 की मुख्य मान शाखा परिसर [0, π] है।
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प्रश्न 3.
cosec-1 (2) का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
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प्रश्न 4.
tan-1 (-√3) का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 4

प्रश्न 5.
[latex s=2]{ cos }^{ -1 }\left( -\frac { 1 }{ 2 } \right) [/latex] का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
cos-1 की मुख्य मान शाखा परिसर [0, π] है।
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प्रश्न 6.
tan-1(-1) का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 6

प्रश्न 7.
[latex s=2]{ sec }^{ -1 }\left( \frac { 2 }{ \sqrt { 3 } } \right) [/latex] का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 7

प्रश्न 8.
cot-1(√3) का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-
cot-1 का मुख्य मान शाखा परिसर (0, π) है।
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प्रश्न 9.
[latex s=2]cos^{ -1 }\left( \frac { -1 }{ \sqrt { 2 } } \right) [/latex] का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
cos-1 का मुख्य मान शाखा परिसर [0, π] है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 9

प्रश्न 10.
cosec-1 (-√2) का मुख्य मान ज्ञात कीजिए।
हल-

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प्रश्न 11.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 10
का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 11

प्रश्न 12.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 12
का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 13

प्रश्न 13.
यदि sin-1 x = y, तो
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 14
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 15

प्रश्न 14.
tan-1√3 – sec-1(-2) का मान बराबर है
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हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 17
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 18a

प्रश्नावली 2.2

निम्नलिखित को सिद्ध कीजिए–

प्रश्न 1.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 18
हल-
माना sin-1x = θ ∴ sin θ = x
पुनः sin 3θ = 3 sin3 θ – 4 sin० θ
⇒ sin 3θ = 3x – 4x3
⇒ 3θ = sin-1(3x – 4x3)
∴ 3sin-1x = sin-1(3x – 4x3) इति सिद्धम्

प्रश्न 2.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 19
हल-
माना cos-1 x = θ ∴ cosθ = x
∴ cos 3θ = 4cos3θ – 3 cos θ
⇒ cos 3θ = 4x3 – 3x
⇒ 3θ = cos-1(4x3 – 3x)
∴ 3cos-1x = cos-1(4x3 – 3x) इति सिद्धम्

प्रश्न 3.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 20
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 21

प्रश्न 4.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 22
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 23

निम्नलिखित फलनों को सरलतम रूप में लिखिए

प्रश्न 5.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 24
हल-
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प्रश्न 6.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 26
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 27

प्रश्न 7.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 28
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 29

प्रश्न 8.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 30
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 30a

प्रश्न 9.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 31
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 32

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प्रश्न 10.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 33
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 34

प्रश्न 11.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 35
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 36

प्रश्न 12.
cot (tan-1 a + cot-1 a)
हल-
माना y = cot (tan-1 a + cot-1 a)
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प्रश्न 13.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 38
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 39

प्रश्न 14.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 40
हल-
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प्रश्न 15.
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हल-
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प्रश्न 16.
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हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 47

प्रश्न 17.
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हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 49

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 50

प्रश्न 18.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 51
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 52

प्रश्न 19.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 53
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 54

प्रश्न 20.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 55
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 56

प्रश्न 21.
tan-1√3 – cot-1(-√3) का मान है
(A) π
(B) [latex]-\frac { \pi }{ 2 } [/latex]
(C) 0
(D) 2√3
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 2 Inverse Trigonometric Functions image 57

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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics (तरंग-प्रकाशिकी) are part of UP Board Solutions for Class 12 Physics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics (तरंग-प्रकाशिकी).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Physics
Chapter Chapter 10
Chapter Name Wave Optics (तरंग-प्रकाशिकी)
Number of Questions Solved 99
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics (तरंग-प्रकाशिकी)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
589 nm तरंगदैर्ध्य का एकवर्णीय प्रकाश वायु से जल की सतह पर आपतित होता है।
(a) परावर्तित, तथा (b) अपवर्तित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति तथा चाल क्या होगी?
जल का अपवर्तनांक 1.33 है।
हल-
दिया है, आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य
λ1 = 589 nm = 589 x 109 मीटर
वायु में प्रकाश की चाल c = 3 x 108 मी/से
तथा [latex s=2]{ _{ a }{ \mu }_{ \omega } }[/latex] = 1.33
(a) परावर्तित प्रकाश के लिए
(i) चूंकि परावर्तित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य अपरिवर्तित रहती है, अतः परावर्तित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य
λa = λ1 = 589 nm
(ii) चूंकि परावर्तन में माध्यम नहीं बदलता अतः परावर्तित प्रकाश की चाल c = 3 x 108 मी/से
(iii) सूत्र c = υλ से
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित दशाओं में प्रत्येक तरंगाग्र की आकृति क्या है?
(a) किसी बिन्दु स्रोत से अपसरित प्रकाश।
(b) उत्तल लेन्स से निर्गमित प्रकाश, जिसके फोकस बिन्दु पर कोई बिन्दु स्रोत रखा है।
(c) किसी दूरस्थ तारे से आने वाले प्रकाश तरंगाग्र का पृथ्वी द्वारा अवरोधित (intercepted) भाग।
उत्तर-
(a) जब एक बिन्दु स्रोत से प्रकाश अपसरित होता है, तब तरंगाग्र गोलीय अभिसारी प्रकार का होता है।
(b) जब बिन्दु स्रोत को उत्तल लेन्स के फोकस पर रखा जाता है, तब लेन्स से निर्गत प्रकाश किरणें एक-दूसरे के समान्तर होती हैं तथा तरंगाग्र समतल होता है।
(c) इस स्थिति में तरंगाग्र की आकृति लगभग समतल होती है क्योंकि प्रकाश स्रोत पृथ्वी से दूरस्थ तारा है, अत: बड़े गोले के पृष्ठ पर छोटा क्षेत्रफल लगभग समतल है।

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प्रश्न 3.
(a) काँच का अपवर्तनांक 1.5 है। काँच में प्रकाश की चाल क्या होगी? (निर्वात में प्रकाश की चाल 3.0 x 10 m-1 है।)
(b) क्या काँच में प्रकाश की चाल, प्रकाश के रंग पर निर्भर करती है? यदि हाँ, तो लाल तथा बैंगनी में से कौन-सा रंग काँच के प्रिज्म में धीमा चलता है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics

प्रश्न 4.
यंग के द्विझिरी प्रयोग में झिर्रियों के बीच की दूरी 0.28 mm है तथा परदा 1.4 m की दूरी पर रखा गया है। केन्द्रीय दीप्त फ्रिन्ज एवं चतुर्थ दीप्त फ्रिन्ज के बीच की दूरी 1.2 cm मापी गई है। प्रयोग में उपयोग किए गए प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics Q4

प्रश्न 5.
यंग के द्विझिरी प्रयोग में, λ तरंगदैर्घ्य का एकवर्णीय प्रकाश उपयोग करने पर, परदे के एक बिन्दु पर जहाँ पथान्तर λ है, प्रकाश की तीव्रता K इकाई है। उस बिन्दु पर प्रकाश की तीव्रता कितनी होगी जहाँ पथान्तर λ/3 है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics

प्रश्न 6.
यंग के द्विझिर्स प्रयोग में व्यतिकरण फ्रिन्जों को प्राप्त करने के लिए 650 nm तथा 520 nm तरंगदैघ्र्यों के प्रकाश-पुंज का उपयोग किया गया।
(a) 650 nm तरंगदैर्घ्य के लिए परदे पर तीसरे दीप्त फ्रिन्ज की केन्द्रीय उच्चिष्ठ से दूरी ज्ञात कीजिए।
(b) केन्द्रीय उच्चिष्ठ से उस न्यूनतम दूरी को ज्ञात कीजिए जहाँ दोनों तरंगदैर्यों के कारण दीप्त फ्रिन्ज संपाती (coincide) होते हैं। (दिया है, D = 120 cm तथा d = 2 mm)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics Q6

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics

प्रश्न 7.
एक द्विझिरी प्रयोग में एक मीटर दूर रखे परदे पर एक फ्रिन्ज की कोणीय चौड़ाई 0.2° पाई गई है। उपयोग किए गए प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 600 nm है। यदि पूरा प्रायोगिक उपकरण जल में डुबो दिया जाए तो फ्रिन्ज की कोणीय चौड़ाई क्या होगी? जल का अपवर्तनांक [latex]\frac { 4 }{ 3 }[/latex] लीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics

प्रश्न 8.
वायु से काँच में संक्रमण (transition) के लिए बूस्टर कोण क्या है? (काँच का अपवर्तनांक = 1.5)।
हल-
बूस्टर के नियम से, n = tan ip
बूस्टर कोण अर्थात् ध्रुवण कोण ip = tan-1 (n)
यहाँ n = 1.5 अतः ip = tan-1 (1.5) = 56.3°

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प्रश्न 9.
5000 Å तरंगदैर्घ्य का प्रकाश एक समतल परावर्तक सतह पर आपतित होता है। परावर्तित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य एवं आवृत्ति क्या है? आपतन कोण के किस मान के लिए परावर्तित किरण आपतित किरण के लम्बवत होगी?
हल-
यहाँ λ = 5000 Å = 5000 x 10-10 मीटर = 5 x 10-7
वायु में प्रकाश की चाले c = 3 x 108 मी/से
वायु में प्रकाश की आवृत्ति
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics Q9
आपतित तथा परावर्तित किरण दोनों एक ही माध्यम (वायु) में होंगे।
अतः परावर्तित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य = आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य = 5000 Å
परावर्तित प्रकाश की आवृत्ति = आपतित प्रकाश की आवृत्ति = 6 x 1014 हज
परावर्तन कोण r = आपतन कोण i
तथा परावर्तित किरण आपतित किरण के लम्बवत् है; अतः
i + r = 90°, i + i = 90°
वांछित आपतन कोण i = 45°

प्रश्न 10.
उस दूरी का आकलन कीजिए जिसके लिए किसी 4 mm के आकार के द्वारक तथा 400 nm तरंगदैर्घ्य के प्रकाश के लिए किरण प्रकाशिकी सन्निकट रूप से लागू होती है।
हल-
दिया है, λ = 400 nm = 400 x 10-9 m, d = 4 x 10-3 m
माना एकल झिरीं विवर्तन प्रतिरूप में प्रथम निम्निष्ठ केन्द्रीय उच्चिष्ठ से θ1 कोण पर प्राप्त होता है, तब
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 11.
एक तारे में हाइड्रोजन से उत्सर्जित 6563 Å की Hα लाइन में 15 Å का अभिरक्त-विस्थापन (red-shift) होता है। पृथ्वी से दूर जा रहे तारे की चाल का आकलन कीजिए।
हल-
दिया है, λ = 6563 Å, अभिरक्त विस्थापन Δλ = 15 Å
तारे की चाल = ?
प्रकाश की चाल c = 3 x 108 ms-1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics Q11

प्रश्न 12.
किसी माध्यम (जैसे जल) में प्रकाश की चाल निर्वात में प्रकाश की चाल से अधिक है। न्यूटन के कणिका सिद्धान्त द्वारा इस आशय की भविष्यवाणी कैसे की गई। क्या जल में प्रकाश की चाल प्रयोग द्वारा ज्ञात करके इस भविष्यवाणी की पुष्टि हुई? यदि नहीं, तो प्रकाश के चित्रण का कौन-सा विकल्प प्रयोगानुकूल है?
उत्तर-
न्यूटन के कणिका सिद्धान्त के अनुसार जब प्रकाश किसी विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है तो प्रकाश कणिकाओं पर, माध्यमों की सीमा पृष्ठ के अभिलम्बवत् दिशा में एक आकर्षण बल (विरल से सघने माध्यम की ओर) कार्य करने लगता है। इस बल के कारण कणिकाओं को, सीमा पृष्ठ के अभिलम्बवत् घटक बढ़ने लगता है, जबकि सीमा पृष्ठ के समान्तर घटक अपरिवर्तित रहता है। इससे प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुकती हुई सघन माध्यम में अपवर्तित हो जाती है।
सीमा पृष्ठ का समान्तर घटक अपरिवर्तित रहता है; अतः
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics
परन्तु प्रयोग द्वारा न्यूटन की इस भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं हो पाई अपितु इसके विपरीत प्रयोग द्वारा यह ज्ञात हुआ कि सघन माध्यम में प्रकाश की चाल विरल माध्यम की तुलना में कम हाती है। इससे न्यूटन के कणिका सिद्धान्त को अमान्य करार दिया गया और हाइगेन्स के तरंगिका सिद्धान्त को मान्यता मिल गई। इससे ज्ञात होता है कि हाइगेन्स का तरंगिका सिद्धान्त प्रयोग संगत है।

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प्रश्न 13.
आप मूल पाठ में जान चुके हैं कि हाइगेन्स का सिद्धान्त परावर्तन और अपवर्तन के नियमों के लिए किस प्रकार मार्गदर्शक है। इसी सिद्धान्त का उपयोग करके प्रत्यक्ष रीति से निगमन (deduce) कीजिए कि समतल दर्पण के सामने रखी किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब आभासी बनता है, जिसकी दर्पण से दूरी, बिम्ब से दर्पण की दूरी के बराबर होती है।
उत्तर-
एक बिन्दु बिम्ब तथा एक समतल दर्पण लीजिए। बिन्दु बिम्ब को केन्द्र मानते हुए तथा दर्पण को स्पर्श करते हुए एक वृत्त खींचिए। यह बिम्ब से चलकर दर्पण तक पहुँचने वाले गोलीय तरंगाग्र का समतलीय भाग है। अब t समय पश्चात् दर्पण की उपस्थिति में तथा अनुपस्थिति में इस तरंगाग्र की स्थितियाँ आरेखित कीजिए। इस प्रकार दर्पण के दोनों ओर सर्वत्रसम चाप प्राप्त होंगे। इनमें से एक परावर्तित तरंगाग्र है। (पहचानिए)। सरल ज्यामिति के उपयोग से देखा जा सकता है कि परावर्तित तरंगाग्र का केन्द्र (बिम्ब को प्रतिबिम्ब) दर्पण से बिम्ब के बराबर दूरी पर है।

प्रश्न 14.
तरंग संचरण की चाल को प्रभावित कर सकने वाले कुछ सम्भावित कारकों की सूची है
(i) स्रोत की प्रकृति,
(ii) संचरण की दिशा,
(iii) स्रोत और / या प्रेक्षक की गति,
(iv) तरंगदैर्घ्य, तथा
(v) तरंग की तीव्रता।
बताइए कि …………
(a) निर्वात में प्रकाश की चाल,
(b) किसी माध्यम (माना काँच या जल) में प्रकाश की चाल इनमें से किन कारकों पर निर्भर करली है?
उत्तर-
(a) निर्वात् में प्रकाश की चाल एक सार्वत्रिक नियतांक है जो उपर्युक्त में से किसी भी कारक पर निर्भर नहीं करती। यहाँ तक कि स्रोत व प्रेक्षक के बीच आपेक्षिक गति पर भी नहीं। (b) किसी माध्यम में प्रकाश की चाल
(i) स्रोत की प्रकृति,
(ii) संचरण की दिशा,
(iii) स्रोत तथा माध्यम के बीच आपेक्षिक गति, तथा
(v) तरंग की तीव्रता पर निर्भर नहीं करती।
परन्तु यह
(iii) माध्यम तथा प्रेक्षक के बीच आपेक्षिक गति, तथा
(iv) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करती है।

प्रश्न 15.
ध्वनि तरंगों में आवृत्ति विस्थापन के लिए डॉप्लर का सूत्र निम्नलिखित दो स्थितियों में थोड़ा-सा भिन्न है-
(i) स्रोत विरामावस्था में तथा प्रेक्षक गति में हो, तथा
(ii) स्रोत गति में परन्तु प्रेक्षक विरामावस्था में हो।
जबकि प्रकाश के लिए डॉप्लर के सूत्र निश्चित रूप से निर्वात में, इन दोनों स्थितियों में एकसमान हैं। ऐसा क्यों है? स्पष्ट कीजिए। क्या आप समझते हैं कि ये सूत्र किसी माध्यम में प्रकाश गमन के लिए भी दोनों स्थितियों में पूर्णतः एकसमान होंगे?
उत्तर-
निर्वात् में गतिमान प्रकाश के लिए डॉप्लर प्रभाव में प्रेक्षक द्वारा ग्रहण किए गए प्रकाश की आभासी आवृत्ति दोनों ही दशाओं में समान होती है। भले ही दर्शक, स्थिर स्रोत की ओर गति कर रहा हो अथवा स्रोत समान चाल से दर्शक की ओर गतिमान हो। इस प्रकार प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव सममित है। दूसरी ओर ध्वनि तरंगों को चलने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है, इसलिए भले ही चाहे उक्त दोनों स्थितियों में प्रेक्षक तथा स्रोत के बीच समान आपेक्षिक गति होने के कारण ये स्थितियाँ समान प्रतीत होती हैं परन्तु वे समान नहीं हैं। ऐसा इस कारण से है कि दोनों दशाओं में प्रेक्षक का माध्यम के सापेक्ष वेग भिन्न-भिन्न है; अतः उक्त दोनों दशाओं में सुनी गई ध्वनि की आभासी आवृत्तियाँ समान नहीं हो सकतीं।

यदि किसी माध्यम में प्रकाश की गति की बात की जाए तो पुनः दोनों स्थितियाँ अलग-अलग हो जाएँगी चूंकि दोनों स्थितियों में प्रेक्षक का माध्यम के सापेक्ष वेग भिन्न-भिन्न होगा। अतः इस दशा में प्रेक्षक द्वारा ग्रहण किए गए प्रकाश की आवृत्ति के भिन्न डॉप्लर सूत्रों की अपेक्षा की जानी चाहिए।

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प्रश्न 16.
द्विझिरी प्रयोग में, 600 nm तरंगदैर्घ्य का प्रकाश करने पर, एक दूरस्थ परदे पर बने फ्रिज की कोणीय चौड़ाई 0.1° है। दोनों झिर्रियों के बीच कितनी दूरी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics

प्रश्न 17.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(a) एकल झिरी विवर्तन प्रयोग में, झिरीं की चौड़ाई मूल चौड़ाई से दोगुनी कर दी गई है। यह केन्द्रीय विवर्तन बैंड के साइज तथा तीव्रता को कैसे प्रभावित करेगी?
(b) द्विझिरी प्रयोग में, प्रत्येक झिरी का विवर्तन, व्यतिकरण पैटर्न से किस प्रकार सम्बन्धित है?
(c) सुदूर स्रोत से आने वाले प्रकाश के मार्ग में जब एक लघु वृत्ताकार वस्तु रखी जाती है तो वस्तु की छाया के मध्य एक प्रदीप्त बिन्दु दिखाई देता है। स्पष्ट कीजिए क्यों?
(d) दो विद्यार्थी एक 10 m ऊँची कक्ष विभाजक दीवार द्वारा 7m के अन्तर पर हैं। यदि ध्वनि और प्रकाश दोनों प्रकार की तरंगें वस्तु के किनारों पर मुड़ सकती हैं तो फिर भी वे विद्यार्थी एक-दूसरे को देख नहीं पाते यद्यपि वे आपस में आसानी से वार्तालाप किस प्रकार कर पाते हैं?
(e) किरण प्रकाशिकी, प्रकाश के सीधी रेखा में गति करने की संकल्पना पर आधारित है। यद्यपि विवर्तन प्रभाव (जब प्रकाश का संचरण एक द्वारक/झिरी या वस्तु के चारों ओर प्रेक्षित किया जाए) इस संकल्पना को नकारता है तथापि किरण प्रकाशिकी की संकल्पना प्रकाशकीय यन्त्रों में प्रतिबिम्बों की स्थिति तथा उनके दूसरे अनेक गुणों को समझने के लिए सामान्यतः उपयोग में लाई जाती है। इसका क्या औचित्य है?
उत्तर-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics Q17

अत: झिरीं की चौड़ाई दोगुनी करने पर, केन्द्रीय विवर्तन बैंड की चौड़ाई आधी रह जाएगी, जबकि तीव्रता चार गुनी (तीव्रता ∝ झिरीं का क्षेत्रफल) हो जाएगी।

(b) द्विझिरीं प्रयोग में व्यतिकरण पैटर्न की फ्रिन्ज एकल झिरीं विवर्तन पैटर्न की फ्रिन्जों के साथ अध्यारोपित होती हैं।

(c) वृत्तीय अवरोध के किनारों से विवर्तित तरंगें जब वस्तु की छाया के मध्य बिन्दु पर मिलती हैं तो वहाँ पथान्तर शून्य होने के कारण परस्पर संपोषी व्यतिकरण करती हैं; अत: वहाँ चमकदार बिन्दु दिखाई पड़ता है।

(d) दीवार की ऊँचाई 10 m, ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्घ्य की कोटि की है; अत: यह ध्वनि तरंगों में पर्याप्त विवर्तन उत्पन्न करती है और एक विद्यार्थी की ध्वनि दीवार से विवर्तित होकर दूसरे विद्यार्थी तक पहुँच जाती है। वहीं प्रकाश की तरंगदैर्घ्य, दीवार की ऊँचाई की तुलना में अत्यन्त सूक्ष्म है; अत: दीवार प्रकाश तरंगों में पर्याप्त विवर्तन उत्पन्न नहीं कर पाती। इसी कारण विद्यार्थी एक-दूसरे को नहीं देख पाते।

(e) सामान्यतः प्रकाशिक यन्त्रों में प्रयुक्त लेन्सों के द्वारकों का साइज प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में काफी बड़ा होता है; अत: इन यन्त्रों द्वारा बने प्रतिबिम्बों में विवर्तन का प्रभाव नगण्य ही रहता है। यही कारण है कि प्रतिबिम्बों की स्थिति तथा अन्य गुणों को समझने के लिए प्रायः किरण प्रकाशिकी का ही प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 18.
दो पहाड़ियों की चोटी पर दो मीनारें एक-दूसरे से 40 km की दूरी पर हैं। इनको जोड़ने वाली रेखा मध्य में आने वाली किसी पहाड़ी के 50 m ऊपर से होकर गुजरती है। उन रेडियो तरंगों की अधिकतम तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए, जो मीनारों के मध्य बिना पर्याप्त विवर्तन प्रभाव के भेजी जा सकें?
हल-
फ्रेजनल दूरी तय करने पर ही तरंग प्रभाव ज्यामितीय प्रभाव पर हावी हो जाता है। अत: फ्रेजनल दूरी
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प्रश्न 19.
500 pm तरंगदैर्ध्य का एक समान्तर प्रकाश-पुंज एक पतली झिरीं पर गिरता है तथा 1 m दूर परदे पर परिणामी विवर्तन पैटर्न देखा जाता है। यह देखा गया कि पहला निम्निष्ठ परदे पर केन्द्र से 2.5 mm दूरी पर है। झिरीं की चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल-
विवर्तन प्रारूप में निम्निष्ठों के लिए e sin θ = mλ …(1)
प्रथम कोटि के निम्निष्ठों के लिए m = 1 तथा विवर्तन कोण 8 के छोटे मानों के लिए
sin θ = tan θ ~ θ = [latex]\frac { x }{ D }[/latex]
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प्रश्न 20.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(a) जब कम ऊँचाई पर उड़ने वाला वायुयान ऊपर से गुजरता है तो हम कभी-कभी टेलीविजन के परदे पर चित्र को हिलते हुए पाते हैं। एक सम्भावित स्पष्टीकरण सुझाइए।
(b) जैसा कि आप मूल पाठ में जान चुके हैं कि विवर्तन तथा व्यतिकरण पैटर्न में तीव्रता का वितरण समझने का आधारभूत सिद्धान्त तरंगों का रेखीय प्रत्यारोपण है। इस सिद्धान्त की तर्कसंगति क्या है?
उत्तर-
(a) ऐसा टेलीविजन के एन्टीना तक सीधे पहुंचने वाले तथा हवाई जहाज से टकराकर एन्टीना तक पहुँचने वाले संकेतों के बीच होने वाले व्यतिकरण के कारण होता है।

(b) तरंग गति को नियन्त्रित करने वाले अवकल समीकरण का चरित्र रेखीय होता है। यदि y1 तथा y2 ऐसे किसी समीकरण के दो अलग-अलग हल हैं तो y1 + y2 भी इस समीकरण का एक हल होगा (रेखीय अवकल समीकरण का गुण)। यही गुण तरंगों के रेखीय प्रत्यारोपण को तर्कसंगत ठहराता है।

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प्रश्न 21.
एकल झिरी विवर्तन पैटर्न की व्युत्पत्ति में कथित है कि [latex s=2]\frac { n\lambda }{ a }[/latex] कोणों पर तीव्रता शून्य है। इस निरसन (cancillation) को, झिरीं को उपयुक्त भागों में बाँटकर सत्यापित कीजिए।
हल-
माना e चौड़ाई की एकल झिरीं n छोटी झिर्रियों में बाँटी गयी है। अत: प्रत्येक झिर्रा की चौड़ाई
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अतः n झिर्रियों में से प्रत्येक θ कोण की दिशा में शून्य तीव्रता प्रेरित करती है जिनमें प्रत्येक की चौड़ाई e’ है। अतः परिणामस्वरूप n झिर्रियों की तीव्रताओं का परिणामी भी शून्य ही होगा।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हाइगेन्स के अनुसार, प्रकाश की तरंगें होती हैं|
(i) यान्त्रिक, अनुदैर्घ्य
(ii) यान्त्रिक, अनुप्रस्थ
(iii) विद्युत, चुम्बकीय
(iv) यान्त्रिक, गोलीय
उत्तर-
(i) यान्त्रिक, अनुदैर्घ्य

प्रश्न 2.
वायु में प्रकाश की चाल 3.0 x 108 मीटर/सेकण्ड है। 1.5 अपवर्तनांक वाले काँच में प्रकाश की चाल होगी- (2012)
(i) 1.5 x 108 मीटर/सेकण्ड
(ii) 2.0 x 108 मीटर/सेकण्ड
(iii) 1.0 x 108 मीटर/सेकण्ड
(iv) 2.5 x 108 मीटर/सेकण्ड
उत्तर-
(ii) 2.0 x 108 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 3.
वायु में 4000 Å तरंगदैर्घ्य के एकवर्णी प्रकाश की किरणें जल (जिसका अपवर्तनांक = 4/3 है) में प्रवेश करती हैं। जल में इनकी तरंगदैर्ध्य होगी- (2011)
(i) 2500 Å
(ii) 3000 Å
(iii) 4000 Å
(iv) 5333 Å
उत्तर-
(ii) 3000 Å

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प्रश्न 4.
जल की सतह पर तेल की पतली परत बिछी हुई है। सूर्य के प्रकाश में इस सतह पर सुन्दर रंग दिखाई देने का कारण है- (2013)
(i) प्रकाश का वर्णं विक्षेपण
(ii) प्रकाश का ध्रुवण,
(iii) प्रकाश का व्यतिकरण
(iv) प्रकाश का विवर्तन
उत्तर-
(iii) प्रकाश का व्यतिकरण

प्रश्न 5.
व्यतिकरण की घटना का कारण है|
(i) कलान्तर
(ii) आयाम परिवर्तन
(iii) वेग परिवर्तन
(iv) तीव्रता
उत्तर-
(i) कलान्तर

प्रश्न 6.
यदि व्यतिकरण करने वाली दो तरंगों की तीव्रताओं का अनुपात 16 : 9 है, तो व्यतिकरण प्रारूप में महत्तम एवं न्यूनतम तीव्रताओं को अनुपात है- (2010, 13)
(i) 4 : 3
(ii) 49 : 1
(iii) 25 : 7
(iv) 256 : 81
उत्तर-
(ii) 49 : 1

प्रश्न 7.
समान आयाम व समान तरंगदैर्ध्य की दो प्रकाश तरंगें अध्यारोपित की जाती हैं। परिणामी तरंग का आयाम अधिकतम होगा जब उनके बीच कलान्तर है- (2015)
(i) शून्य
(ii) [latex s=2]\frac { \pi }{ 4 }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { \pi }{ 2 }[/latex]
(iv) π
उत्तर-
(i) शून्य

प्रश्न 8.
प्रकाश-तरंगों का किसी अवरोध की ज्यामितीय छाया में मुड़ना कहलाता है-
(i) प्रकाश का व्यतिकरण
(ii) विवर्तन
(iii) ध्रुवंण
(iv) वर्ण-विक्षेपण
उत्तर-
(ii) विवर्तन

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प्रश्न 9.
प्रकाश सरल रेखा में चलता प्रतीत होता है, क्योंकि-
(i) सह वायुमण्डल द्वारा अवशोषित नहीं होता है।
(ii) इसकी चाल बहुत अधिक है।
(iii) इसकी तरंगदैर्ध्य बहुत छोटी है।
(iv) यह वायुमण्डल के ऊपरी भाग से परावर्तित हो जाता है।
उत्तर-
(iii) इसकी तरंगदैर्घ्य बहुत छोटी है।

प्रश्न 10.
एक एकल स्लिट, जिसकी चौड़ाई e है, तरंगदैर्घ्य λ के प्रकाश द्वारा प्रकाशित की जाती है। प्रथम निम्निष्ठ 60° के विवर्तन कोण पर प्राप्त होगा। यदि
(i) e = [latex s=2]\frac { \lambda }{ \surd 3 }[/latex]
(ii) e = [latex s=2]\frac { 2\lambda }{ \surd 3 }[/latex]
(iii) e = [latex s=2]\frac { 4\lambda }{ \surd 3 }[/latex]
(iv) e = [latex s=2]\frac { \sqrt { 3 } \lambda }{ 2 }[/latex]
उत्तर-
(ii) e = [latex s=2]\frac { 2\lambda }{ \surd 3 }[/latex]

प्रश्न 11.
वह घटना जो प्रकाश की अनुप्रस्थ तरंग प्रकृति दर्शाती है, है- (2010, 12)
(i) व्यतिकरण
(ii) विवर्तन
(iii) ध्रुवण
(iv) अपवर्तन
उत्तर-
(iii) ध्रुवण

प्रश्न 12.
सम्बन्ध n = tan ip, कहलाता है-
(i) परावर्तन
(ii) व्यतिकरण
(iii) बूस्टर का नियम
(iv) न्यूटन का नियम
उत्तर-
(iii) बूस्टर का नियम

प्रश्न 13.
अपवर्तनांक n वाले पृष्ठ पर आपतित प्रकाश के लिए ध्रुवण कोण (बूस्टर कोण) होगा- (2013)
(i) sin-1 (n)
(ii) tan-1 (n)
(ii) cos-1 (n)
(iv) tan ([latex]\frac { 1 }{ n }[/latex])
उत्तर-
(ii) tan-1 (n)

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प्रश्न 14.
ध्रुवण कोण (p) तथा क्रान्तिक कोण (C) में सम्बन्ध व्यक्त होता है- (2017)
(i) tan p = cosec C
(ii) tan p = sin C
(iii) tan p = sec C
(iv) tan p = cos C
उत्तर-
(i) tan p = cosec C

प्रश्न 15.
एक पोलेराइड की पारदर्शी प्लेट उसी प्रकार की एक अन्य प्लेट पर इस प्रकार रखी है कि इनकी ध्रुवण दिशाओं के बीच 30° का कोण बनता है। प्लेटों के इस युग्म में से एक पर । अधूवित प्रकाश आपतित होता है। निर्गत प्रकाश तथा आपतित अधूवित प्रकाश की तीव्रताओं का अनुपात होगा- (2017)
(i) 1 : 4
(ii) 1 : 3
(iii) 3 : 4
(iv) 3 : 8
उत्तर-
(ii) 1 : 3

प्रश्न 16.
प्रकाश तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति की पुष्टि होती है- (2017)
(i) ध्रुवण के द्वारा
(ii) विवर्तन के द्वारा
iii) व्यतिकरण के द्वारा
(iv) आवर्तन के द्वारा
उत्तर-
(i) ध्रुवण के द्वारा

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तरंगाग्र के लम्बवत् रेखा किसकी दिशा को प्रदर्शित करती है?
उत्तर-
तरंग-संचरण की दिशा को।

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प्रश्न 2.
ऐसी दो भौतिक घटनाओं का उल्लेख कीजिए जो प्रकाश की तरंग प्रकृति की पुष्टि करती हैं।
उत्तर-
व्यतिकरण तथा विवर्तन।

प्रश्न 3.
निर्वात में किसी प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 4800 Å है, जल में तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए। जल का अपवर्तनांक [latex]\frac { 4 }{ 3 }[/latex] है। (2010)
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प्रश्न 4.
काँच-जल के मध्यपृष्ठ पर क्रान्तिक कोण ज्ञात कीजिए, यदि वायु के सापेक्ष काँच एवं जल के अपवर्तनांक क्रमशः [latex]\frac { 3 }{ 2 }[/latex] एवं [latex]\frac { 4 }{ 3 }[/latex] हैं। (2010)
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प्रश्न 5.
समान आवृत्ति वाली दो तरंगों के आयामों का अनुपात 5 : 3 है। इनके अध्यारोपण से उत्पन्न परिणामी तरंग की अधिकतम तथा न्यूनतम तीव्रताओं को अनुपात ज्ञात कीजिए। (2009, 11, 16)
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प्रश्न 6.
कला-सम्बद्ध स्रोतों से आप क्या समझते हैं? (2010)
उत्तर-
ऐसे दो स्रोतों को जिनके बीच कलान्तर सदैव नियत रहता है, कला-सम्बद्ध स्रोत (coherent sources) कहते हैं। दो कला-सम्बद्ध स्रोतों से हम स्थायी (sustained) व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे स्रोत किसी युक्ति द्वारा एक ही स्रोत से प्राप्त किये जाते हैं।

प्रश्न 7.
यंग के व्यतिकरण प्रयोग में यदि दो प्रकाश-स्रोतों में से एक के मार्ग में काँच की पतली प्लेट रख दी जाए, तो फ्रिन्ज की चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि व्यतिकरण प्रारूप उसी स्लिट की दिशा में विस्थापित हो जाएगा।

प्रश्न 8.
ध्वनि के व्यतिकरण पर आधारित दो यन्त्रों के नाम लिखिए। (2009)
उत्तर-
क्विण्के की नली, स्वरित्र द्विभुज।

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प्रश्न 9.
प्रकाश के व्यतिकरण का एक प्राकृतिक तथा एक प्रायोगिक उदाहरण बताइए। (2009)
उत्तर-
तेल की परत का रंगीन दिखायी देना, यंग का प्रयोग।

प्रश्न 10.
अध्यारोपण का सिद्धान्त लिखिए। (2009)
उत्तर-
किसी माध्यम में दो अथवा दो से अधिक प्रगामी तरंगें एक साथ परन्तु एक-दूसरे की गति को बिना प्रभावित किये चल सकती हैं। अत: माध्यम के प्रत्येक कण का किसी क्षण परिणामी विस्थापन दोनों तरंगों द्वारा अलग-अलग उत्पन्न विस्थापनों के सदिश (vector) योग के बराबर होता है। इस सिद्धान्त को ‘अध्यारोपण का सिद्धान्त’ कहते हैं।

प्रश्न 11.
तरंगों के अध्यारोपण से कितने प्रकार के प्रभाव प्राप्त होते हैं? कौन-कौन से? (2009)
उत्तर-
तरंगों के अध्यारोपण से तीन प्रकार के प्रभाव प्राप्त होते हैं-

  • व्यतिकरण,
  • विस्पन्द,
  • अप्रगामी तरंगें।

प्रश्न 12.
यदि समान आयाम a की दो प्रकाश तरंगों के व्यतिकरण से परिणामी तरंग का आयाम a ही प्राप्त हो तब दोनों तरंगों के मध्य कलान्तर क्या होगा? (2016)
हल-
दोनों तरंगों के मध्य कलान्तर 120° होगा।

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प्रश्न 13.
समान आवृत्ति की दो प्रकाश तरंगों के आयाम 4 : 3 के अनुपात में हैं। यदि दोनों तरंगें व्यतिकरण करें तो महत्तम व न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात क्या होगा? (2017)
हल-
दिया है, आयामों का अनुपाते, a1 : a2 = 4 : 3
अधिकतम तीव्रता के स्थान पर आयाम = (a1 + a2)
न्यूनतम तीव्रता के स्थान पर आयाम = (a1 ~ a2)
सूत्र I ∝ a2 से,
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प्रश्न 14.
दो प्रकाश तरंगों की तीव्रताओं का अनुपात 81 : 49 है। उनके आयामों का क्या अनुपात होगा? (2017)
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प्रश्न 15.
यदि स्लिट की चौड़ाई कम कर दी जाए तो केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर-
कोणीय चौड़ाई = 2λ/d अर्थात् यह रेखा-छिद्र की चौड़ाई d के व्युत्क्रमानुपाती है। इसलिए स्लिट की चौड़ाई कम करने से केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई बढ़ जाएगी।

प्रश्न 16.
एकल रेखा-छिद्र से प्राप्त विवर्तन प्रारूप में निम्निष्ठों की स्थिति के लिए सूत्र लिखिए तथा प्रयुक्त संकेतों के अर्थ स्पष्ट कीजिए। (2009)
उत्तर-
θ = ± mλ/e.
जहाँ, θ = कोणीय स्थिति, m कोई पूर्णांक,
λ = तरंगदैर्घ्य,
e = स्लिटों के बीच की दूरी।

प्रश्न 17.
किसी 1 x 10-5 मी की चौड़ाई वाली झिरीं पर 6000 Å तरंगदैर्घ्य का प्रकाश लम्बवत् पड़ रहा है। विवर्तन प्रारूप के केन्द्रीय उच्चिष्ठ की.कोणीय चौड़ाई की गणना कीजिए।
हल-
केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई
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प्रश्न 18.
0.2 मिमी चौड़ाई वाले रेखाछिद्र से 2 मीटर दूर रखे पर्दे पर विवर्तन प्राप्त होता है। पर्दे पर केन्द्रीय उच्चिष्ठ के दोनों ओर 5 मिमी पर प्रथम निम्निष्ठ पाया जाता है। प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए। (2011, 17)
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प्रश्न 19.
एकल स्लिट द्वारा विवर्तन में द्वितीय निम्निष्ठ 6.0 के विवर्तन में कोण पर प्राप्त होता है। यदि प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ हो तब स्लिट की चौड़ाई क्या होगी? (2015)
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प्रश्न 20.
ध्रुवण-कोण से क्या तात्पर्य है? (2012)
या
ध्रुवर्ण-कोण से आप क्या समझते हैं? (2014)
या
ध्रुवण-कोण क्या है? (2017)
उत्तर-
पारदर्शी माध्यम पर आपतित प्रकाश का वह आपतन कोण जिसके लिए परावर्तित प्रकाश पूर्णतया समतल ध्रुवित होता है, धुवण-कोण कहलाता है। इसको ip से प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न 21.
एक पोलेराइड पर समतल-धुवित प्रकाश, पोलेराइड की ध्रुवण दिशा में (i) 45° के कोण पर, (ii) 60° के कोण पर गिरता है। पोलेराइड से निर्गत प्रकाश की तीव्रता, आपतित प्रकाश की तीव्रता की कितने प्रतिशत होगी? (2009)
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प्रश्न 22.
प्रकाश के ध्रुवण से प्रकाश की प्रकृति के किस तथ्य की पुष्टि होती है ? (2011)
उत्तर-
प्रकाश के ध्रुवण से प्रकाश के तरंग रूप की अनुप्रस्थ प्रकृति की पुष्टि होती है।

प्रश्न 23.
द्विवर्णता क्या है?
उत्तर-
टूरमैलीन क्रिस्टल द्वारा द्वि-अपवर्तन की घटना में इस क्रिस्टल द्वारा दो ध्रुवित अपवर्तित किरणों में से एक किरण को क्रिस्टल द्वारा अवशोषित करने का गुण द्विवर्णता कहलाता है।

प्रश्न 24.
ध्रुवित प्रकाश में कम्पन:-तल तथा ध्रुवण-तल के मध्य का कोण कितना होता है? (2009)
उत्तर-
90°

प्रश्न 25.
द्वि-अपवर्तन से आप क्या समझते हैं? (2011, 16)
उत्तर-
द्वि-अपवर्तन (Double Refraction)- टूरमैलीन, कैलसाइट, क्वार्ट्ज जैसे कुछ क्रिस्टल ऐसे होते हैं कि जब उन पर साधारण प्रकाश (अधुवित प्रकाश) की कोई किरण डाली जाती है, तो वह क्रिस्टल में प्रवेश करने पर दो अपवर्तित किरणों में बँट जाती है। इस घटना को द्वि-अपवर्तन कहते हैं। इन दो। अपवर्तित किरणों में से जो एक किरण अपवर्तन के नियमों का पालन करती है, साधारण किरण (ordinary ray) कहलाती है तथा दूसरी किरण जो अपवर्तन के नियमों का पालन नहीं करती, असाधारण किरण (extra-ordinary ray) कहलाती है। ये दोनों किरणें परस्पर लम्बवत् तलों में समतल ध्रुवित होती हैं।

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प्रश्न 26.
√3 अपवर्तनांक वाले माध्यम के लिए ध्रुवण-कोण कितना होता है? (2012, 14)
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प्रश्न 27.
एक पारदर्शी माध्यम पर आपतित प्रकाश परावर्तन के बाद पूर्णतः समतल ध्रुवित पाया जाता है। माध्यम के लिए ध्रुवण कोण 45° है। माध्यम का अपवर्तनांक तथा अपवर्तन कोण का मान ज्ञात कीजिए। (2011)
हल-
ध्रुवण कोण हो, ip = 45°
माध्यम का अपवर्तनांक n = tan ip = tan 45° = 1
ip + r = 90
अपवर्तन कोण r = 90° – ip = 90° – 45° = 45°

प्रश्न 28.
उने दो भौतिक घटनाओं का उल्लेख कीजिए जिनसे प्रकाश के तरंग प्रकृति की पुष्टि होती- (2011, 17)
उत्तर-
व्यतिकरण तथा ध्रुवण।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रिज्म द्वारा किसी समतल तरंगाग्र के परावर्तन तथा अपवर्तन को समझाइए।
उत्तर-
माना एक समतल तरंगाग्र PQ अल्प अपवर्तन कोण के प्रिज्म ABC पर आपतित होता है। हाइगेन्स के सिद्धान्तानुसार, तरंगाग्र PQ का प्रत्येक बिन्दु एक नये विक्षोभ केन्द्र की तरह कार्य करता है। ये विक्षोभ केन्द्र द्वितीयक तरंगिकाएँ उत्पन्न करते हैं। भिन्न-भिन्न द्वितीयक तरंगिकाएँ भिन्न-भिन्न मोटाइयों से होकर गुजरती हैं। Q से द्वितीयक तरंगिका C तक पहुँचने में प्रिज्म की सम्पूर्ण लम्बाई तय करेगी। दूसरी ओर प्रिज्म के बिन्दु A पर आपतन कोण के बाद P से द्वितीयक तरंगिका वायु में लगभग सम्पूर्ण दूरी तय करेगी। यह तरंगिका प्रिज्म में बहुत ही अल्प दूरी तय करने के पश्चात् बाहर निर्गत् होती है और पुन: वायु में गति करती है।

जिस समय तरंगिका प्रिज्म में B से C तक गति करती है। ठीक उसी समय P से तरंगिका वायु में लगभग सम्पूर्ण दूरी तय करने के पश्चात् C’ बिन्दु तक पहुँचती है और C’ भी उसी कला में होता है। परिणामस्वरूप एक समतल तरंगाग्र CC’ प्राप्त होता है जिसे निर्गत् समतल तरंगाग्र कहा जाता है। इस प्रकार हम निष्कर्ष निकालते हैं कि प्रिज्म से कोई समतल तरंगाग्रं एक समतल तंरंगाग्र के रूप में ही बाहर निकलता है।
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प्रश्न 2.
प्रकाश के व्यतिकरण से क्या तात्पर्य है? इसके लिए आवश्यक प्रतिबन्ध क्या हैं? (2009, 11, 12, 13, 14, 15, 16)
या
दो प्रकाश पुंजों द्वारा बनी व्यर्तिकरण फ्रिन्जों को प्राप्त करने के लिये आवश्यक प्रतिबन्धों का उल्लेख कीजिए। (2010, 12)
या
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते बताइए। (2016)
उत्तर-
समान आवृत्ति की दो प्रकाश-तरंगें जिनके आयाम समान हों, जब किसी माध्यम में एक साथ चलती हैं तो माध्यम के विभिन्न बिन्दुओं पर प्रकाश की तीव्रता उने तरंगों की अलग-अलग तीव्रताओं के योग से भिन्न होती है। कुछ स्थानों पर प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम (लगभग शून्य) होती है, जबकि कुछ स्थानों पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम होती है। प्रकाश-तरंगों की इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं। जिन स्थानों पर तीव्रता न्यूनतम होती है, उन स्थानों पर हुए व्यतिकरण को ‘विनाशी-व्यतिकरण’ तथा जिन स्थानों पर तीव्रता अधिकतम होती है, उन स्थानों पर हुए व्यतिकरण को संपोषी व्यतिकरण’, कहते हैं।
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते निम्नलिखित हैं|

  • दोनों प्रकाश-स्रोत ‘कला सम्बद्ध’ होने चाहिए, अर्थात् दोनों स्रोतों से प्राप्त तरंगों के बीच कलान्तर समय के साथ स्थिर रहना चाहिए।
  • दोनों तरंगों की आवृत्तियाँ (अथवा तरंगदैर्घ्य) बराबर होनी चाहिए।
  • दोनों तरंगों के आयाम बराबर होने चाहिए।
  • प्रकाश के दोनों स्रोतों के बीच दूरी बहुत कम होनी चाहिए जिससे दोनों तरंगाग्र एक ही दिशा में चलें और फ्रिजें अधिक चौड़ी बने।
  • दोनों प्रकाश-स्रोत बहुत संकीर्ण होने चाहिए।

प्रश्न 3.
तरंगों के संपोषी तथा विनाशी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते बताइए। (2010, 13)
उत्तर-
संपोषी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते
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अतः संपोषी व्यतिकरण के लिए आवश्यक है, कि
(i) दोनों तरंगों के बीच कलान्तर शून्य अथवा π का सम गुणक होना चाहिए, अर्थात् तरंगें एक ही कला में मिलनी चाहिए।
(ii) दोनों तरंगों के बीच पथान्तर शून्य अथवा तरंगदैर्घ्य λ का पूर्ण गुणक होना चाहिए।

विनाशी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते
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अत: विनाशी व्यतिकरण के लिए आवश्यक है, कि
(i) दोनों तरंगों के बीच कलान्तर π का विषम गुणक होना चाहिए, अर्थात् तरंगें विपरीत कला में मिलनी चाहिए।
(ii) दोनों तरंगों के बीच पथान्तर अर्द्ध-तरंगदैर्घ्य (λ/2) का विषम गुणक होना चाहिए।

प्रश्न 4.
यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग में स्लिटें 0.28 mm दूरी पर हैं और पर्दा 1.4 मीटर दूर रखा है। केन्द्रीय दीप्त-फ्रिज और चौथी दीप्त फ्रिज के बीच की दूरी 1.2 सेमी है। प्रयोग में प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य एवं दीप्त फ्रिन्ज की चौड़ाई ज्ञात कीजिए। (2015)
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प्रश्न 5.
समान आवृत्ति की दो तरंगें जिनकी तीव्रताएँ I0 तथा 9I0 हैं, अध्यारोपित की जाती हैं। यदि किसी बिन्दु पर परिणामी तीव्रता 7I0 हो तो उस बिन्दु पर तरंगों के बीच न्यूनतम कलान्तंर ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 6.
यंग के प्रयोग में प्रीला प्रकाश तरंगदैर्घ्य 6000 Å, प्रयुक्त होने पर दृष्टि क्षेत्र में 60 फ्रिजें दिखाई देती हैं। यदि नीला प्रकाश जिसका तरंगदैर्घ्य 4500 Å है, प्रयोग में लाया जाये, तो कितनी फ्रिजें दिखाई देंगी ? (2012)
हल-
पीला प्रकाश (λ = 6000 Å) प्रयुक्त करने पर 60 फ्रिजें दिखाई पड़ती हैं; अतः
दृष्टि-क्षेत्र का विस्तार = फ्रिन्जों की संख्या x फ्रिन्ज की चौड़ाई
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प्रश्न 7.
यंग के प्रयोग में दो स्लिटों के बीच की दूरी 2 x 10-4 मीटर है। 6 x 10-7 मीटर तरंगदैर्घ्य के प्रकाश द्वारा व्यतिकरण फ्रिजें 80.0 सेमी दूर पर्दे पर बनती हैं। केन्द्रीय फ्रिन्जे से द्वितीय दीप्त फ्रिन्ज की दूरी ज्ञात कीजिए। (2013)
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प्रश्न 8.
यंग केद्वि-स्लिट प्रयोग में स्लिटों के बीच की दूरी 10-3 मीटर, स्लिटों तथा पर्दे के बीच की दूरी 3.0 मीटर तथा फ्रिज चौड़ाई 2.1 x 10-3 मीटर पायी गयी। प्रयोग में प्रयुक्त प्रकाश का तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 9.
दो झिर्रियों के बीच की दूरी 3 मिलीमीटर है। इस पर 6000 Å तरंगदैर्ध्य का प्रकाश लम्बवत् आपतित हो रहा है। 1 मीटर दूर पर्दे पर व्यतिकरण प्रारूप प्राप्त हो रहा है। फ्रिन्जों की चौडाई और केन्द्रीय फ्रिज से दूसरी अदीप्त फ्रिज की दूरी की गणना कीजिए।
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प्रश्न 10.
यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग में 6600 Å तरंगदैर्ध्य का प्रकाश पर्दे पर व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त है। फ्रिज की चौड़ाई 1.5 मिमी परिवर्तित हो जाती है जब पर्दा 50 सेमी द्विक रेखा छिद्र की ओर लाया जाता है। दोनों द्विक रेखा छिद्रों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए। (2016)
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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics SAQ 10.1

प्रश्न 11.
यंग के प्रयोग में दो स्लिटों के बीच की दूरी 0.4 मिमी है। प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 6000 Å है। व्यतिकरण प्रारूप 100 सेमी दूर रखे पर्दे पर देखा जाता है। केन्द्रीय फ्रिज से द्वितीय अदीप्त एवं तृतीय दीप्त फ्रिज की दूरी की गणना कीजिए। (2017)
हल-
यदि स्लिटों के बीच की दूरी d, प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ तथा पर्दे की स्लिटों से दूरी D हो, तो केन्द्रीय फ्रिन्ज से m वीं अदीप्ते फ्रिन्ज की दूरी
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प्रश्न 12.
यंग के द्वि-रेखाछिद्र प्रयोग में, स्लिटों के बीच की दूरी 0.2 मिमी और पर्दा 1.6 मी दूर है। यह देखा गया कि केन्द्रीय दीप्त फ्रिज और चौथी अदीप्त फ्रिज के बीच की दूरी 1.8 सेमी है। प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए। (2017)
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प्रश्न 13.
यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में स्लिटों के बीच दूरी 0.4 मिमी है। प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 6000 Å है। 2 मीटर दूर रखे पर्दे पर प्राप्त व्यतिकरण प्रतिरूप में केन्द्रीय फ्रिन्ज से पाँचवें अदीप्त फ्रिन्ज की दूरी तथा फ्रिन्ज की चौड़ाई ज्ञात कीजिए। (2017)
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प्रश्न 14.
यंग के व्यतिकरण प्रयोग में 6000 Å तरंगदैर्घ्य के प्रकाश के लिए स्लिटों से एक मीटर की दूरी पर रखे पर्दे पर फ्रिन्ज की चौड़ाई 0.06 सेमी है। इसी स्थिति में यदि 5000 Å तरंगदैर्घ्य का प्रकाश प्रयोग में लाया जाये तो फ्रिन्जों की चौड़ाई कितनी होगी? (2014)
हल-
यदि स्लिटों के बीच अन्तराल d, स्लिटों से पर्दे की दूरी D तथा प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ हो तो फ्रिन्ज की चौड़ाई
W = [latex s=2]\frac { D\lambda }{ d }[/latex]
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प्रश्न 15.
किसी 1 x 10-5 मीटर चौड़ाई वाली झिरीं पर 6000 Å तरंगदैर्घ्य का प्रकाश लम्बवत् पड़ रहा है। विवर्तन प्रारूप के केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई की गणना कीजिए। (2012)
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प्रश्न 16.
व्यतिकरण तथा विवर्तन में क्या अन्तर है? (2016, 17)
या
प्रकाश के व्यतिकरण तथा विवर्तन की घटनाओं में अन्तर के लिए किसी एक विशिष्टता का उल्लेख कीजिए। (2014)
उत्तर-
व्यतिकरण तथा विवर्तन में निम्न अन्तर हैं-
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प्रश्न 17.
किसी 2 x 10-5 मी चौड़ी स्लिट पर 5000 Å तरंगदैर्घ्य का प्रकाश अभिलम्बवत पड़ रही है। विवर्तन प्रारूप में प्रथम निम्निष्ठ, केन्द्रीय उच्चिष्ठ से कितनी कोणीय चौड़ाई पर स्थित होगा ? केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई भी ज्ञात कीजिए। (2010, 17)
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प्रश्न 18.
किसी 2 x 10-5 मीटर चौड़ी स्लिट (झिरी) पर 5000 Å तरंगदैर्घ्य का प्रकाश अभिलम्बवत गिर रहा है। विवर्तन प्रतिरूप में केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई ज्ञात कीजिए। (2015)
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प्रश्न 19.
कम्पन-तल तथा ध्रुवण-तल की परिभाषा दीजिए। (2011)
या
ध्रुवण-तल की परिभाषा लिखिए। (2014)
उत्तर-
कम्पन-तल (Plane of Vibration)- समतल-ध्रुवित प्रकाश में उस तल को जिसमें प्रकाश के चलने की दिशा तथा वैद्युत वेक्टर के कम्पन की दिशा दोनों स्थित हों, ‘कम्पन-तल’ कहते हैं।
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ध्रुवण-तल (Plane of Polarisation)- वह तल, जिसमें प्रकाश के चलने की दिशा स्थित हो तथा जो कम्पन-तल के अभिलम्बवत् हो ‘ध्रुवण-तल’ कहलाता है। इस तल में प्रकाश के कम्पन नहीं होते।

प्रश्न 20.
प्रकाश के ध्रुवण से आप क्या समझते हैं? समतल-धूवित प्रकाश उत्पन्न करने के लिए एक विधि का वर्णन कीजिए। (2009)
या
परावर्तन द्वारा आप समतल धुवित प्रकाश कैसे प्राप्त कर सकते हैं? (2012)
या
प्रकाश के ध्रुवण से आप क्या समझते हैं? (2014)
या
बूस्टर का नियम क्या है? किसी पारदर्शी माध्यम के लिए अपवर्तनांक एवं ध्रुवण कोण में सम्बन्ध लिखिए। (2016)
उत्तर-
प्रकाश का धुवण- प्रकाश की तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें हैं जिनमें वैद्युत वेक्टर के कम्पन तरंग के संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में सभी दिशाओं में होते हैं। टूरमैलीन क्रिस्टल में से गुजारने पर निर्गत् प्रकाश में वैद्युत वेक्टर के ये कम्पन संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में केवल एक दिशा में रह जाते हैं, जबकि, शेष सभी कम्पन क्रिस्टल द्वारा अवशोषित कर लिये जाते हैं। क्रिस्टल से निर्गत् प्रकाश को ‘समतल-धुवित प्रकाश’ कहते हैं तथा यह घटना प्रकाश का धुवण’ कहलाती है।

परावर्तन द्वारा धूवित प्रकाश उत्पन्न करना- जब साधारण अथवा अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे–कॉच) के पृष्ठ से परावर्तित होता है तो वह आंशिक रूप से समतल ध्रुवित हो जाता है। परावर्तित प्रकाश में ध्रुवित प्रकाश की मात्रा, आपतन कोण पर निर्भर करती है। एक विशेष आपतन कोण in के लिए परावर्तित प्रकाश पूर्णतया समतल ध्रुवित होता है तथा इसके कम्पन आपतन तल के लम्बवत् होते हैं। इस आपतन कोण को ‘ध्रुवण-कोण’ (angle of polarization) कहते हैं। ध्रुवण-कोण पर परावर्तित एवं अपवर्तित किरणें परस्पर लम्बवत् होती हैं। परावर्तक माध्यम के अपवर्तनांक (n) और ध्रुवण-कोण (ip) में निम्नलिखित सम्बन्ध होता है-
n = tan ip
(यह सम्बन्ध बूस्टर का नियम कहलाता है।)
वायु-काँच के लिए कोण ip का मान 57° होता है।

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प्रश्न 21.
किसी पारदर्शी माध्यम का ध्रुवण-कोण 60° है। ज्ञात कीजिए
(i) माध्यम का अपवर्तनांक,
(ii) अपवर्तन कोण। [दिया गया है, tan 60° = √3] (2009, 17)
या
किसी पारदर्शी माध्यम के लिए ध्रुवण कोण 60° है। माध्यम के अपवर्तनांक की गणना कीजिए। (2015, 18)
हल-
(i) बूस्टर के नियम से अपवर्तनांक n = tan ip
n = tan 60° = √3 =1.782
(ii) ip + r = 90°
अतः अपवर्तन कोण r = 90° – ip
r = 90° – 60° = 30°

प्रश्न 22.
किसी माध्यम के लिए ध्रुवण-कोण 60° है। इसके लिए क्रान्तिक कोण कितना होगा?
या
एक पारदर्शी माध्यम का ध्रुवण कोण 60° है। माध्यम का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए। (tan 60° = √3) (2013)
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प्रश्न 23.
बूस्टर का नियम क्या है? दिखाइए कि जब प्रकाश, माध्यम पर ध्रुवण-कोण पर आपतित होता है, तो परावर्तित तथा अपवर्तित किरणें परस्पर लम्बवत होती हैं। (2009, 10, 11, 17)
या
ध्रुवण में बूस्टर के नियम का उल्लेख कीजिए। (2017)
या
ध्रुवण-कोण पर आपतित प्रकाश किरण की परावर्ती एवं अपवर्ती किरणों के मध्य कोण का मान ज्ञात कीजिए। (2012)
या
सिद्ध कीजिए कि ध्रुवण-कोण पर किसी किरण के आपतित होने पर परावर्तित एवं अपवर्तित किरणें परस्पर लम्बवत होती हैं। (2014, 17)
उत्तर-
बूस्टर का नियम-किसी पारदर्शी माध्यम के अपवर्तनांक (n) तथा ध्रुवण (ip) के बीच सम्बन्ध n = tan ip है। इसे बूस्टर का नियम कहते हैं।
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प्रश्न 24.
क्षितिज के ऊपर सूर्य का प्रकाश किस कोण पर आपतित हो जिससे शान्त जल के तल से परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो? (जल का अपवर्तनांक 1.327 तथा tan 53° = 1.327) (2014, 17)
हल-
माना सूर्य के क्षैतिज के ऊपर θ कोण पर होने पर जल के तल से परावर्तित प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित है। इस स्थिति में, सूर्य से आपतित प्रकाश का जल के तल पर आपतन कोण MON = ध्रुवण कोण ip होगा। परावर्तित प्रकाश पूर्णत: समतल-ध्रुवित होने की दशा में,
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बूस्टर के नियम से, अपवर्तनांक n = tan ip,
अथवा 1.327 = tan ip = tan 53°
अतः आपतन कोण ip = 53°
क्षैतिज से कोण θ = 90° – 53° = 37°

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तरंगाग्र किसे कहते हैं? हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धान्त लिखिए। (2009, 11, 12, 13, 18)
या
हाइगेन्स के तरंग संचरण सम्बन्धी सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए। (2009, 17)
या
तरंगाग्र किसे कहते हैं? (2014, 18)
या
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए। (2016, 17, 18)
उत्तर-
तरंगाग्र (Wavefront)- किसी एक माध्यम में जिसमें कोई तरंग संचरित हो रही हो, यदि हम कोई ऐसा पृष्ठ (surface) खींचें जिसमें स्थित कण कम्पन की समान कला में हों, तो ऐसे पृष्ठ को ‘तरंगाग्र कहते हैं। समांग (isotropic) माध्यम में किसी तरंग का तरंगाग्र सदैव तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होता है। अत: तरंगाग्र के लम्बवत् खींची गयी रेखा तरंग के चलने की दिशा को व्यक्त करती है। इसको ही किरण (ray) कहते हैं। तरंगाग्र विविध आकृतियों के होते हैं।

हाइगेन्स का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धान्त (Huygens Principle of Secondary Wavelets)
1. जब कोई कम्पन-स्रोत तरंगें उत्पन्न करता है, तो उसके चारों ओर माध्यम (ईथर) के कण कम्पन करने लगते हैं। माध्यम को वह पृष्ठ (surface) जिसमें स्थित सभी कण एक ही कला (phase) में कम्पन कर रहे होते हैं, “तरंगाग्र’ (wavefront) कहलाता है। समांग (homogeneous) माध्यम में किसी तरंग का तरंगाग्र, तरंग के संचरण की दिशा में लम्बवत् होता है। अत: तरंगाग्र के अभिलम्बवत् खींची गयी रेखा तरंग के संचरण की दिशा को व्यक्त करती है तथा इसे किरण (ray) कहते हैं।

2. माध्यम में जहाँ भी तरंगाग्र पहुँचता है वहाँ पर स्थित प्रत्येक कण एक नया तरंग स्रोत बन जाता है। जिसमें नयी तरंगें सभी दिशाओं में निकलती हैं। इन तरंगों को द्वितीयक तरंगिकाएँ (secondary wavelets) कहते हैं। द्वितीयक तरंगिकाएँ प्राथमिक तरंग की चाल से ही आगे बढ़ती हैं।

3. किसी क्षण सभी द्वितीयक तरंगिकाओं को स्पर्श करता हुआ खींचा गया पृष्ठ अर्थात् ‘एन्वलोप’ (envelope) उस क्षण तरंगाग्र की नवीन स्थिति को प्रदर्शित करता है। इस प्रकार तरंग आगे बढ़ती चली जाती है।
चित्र 10.5 (a) में S एक बिन्दु स्रोत है जिससे तरंगें निकल रही हैं। माना कि तरंगों की चाल v है। माना कि किसी क्षण तरंगाग्र की स्थिति AB है।
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AB पर स्थित प्रत्येक बिन्दु से द्वितीयक गोलीय तरंग प्राथमिक तरंग की चाल से चारों ओर फैल रही है। माना कि हमें । समय उपरान्त तरंगाग्र की स्थिति ज्ञात करनी है। इतने समय में प्रत्येक द्वितीयक तरंगिका ut दूरी तय करेगी। अत: हम AB पर स्थित बिन्दुओं; जैसे 1, 2, 3, 4, 5,…… पर vt त्रिज्या के गोले खींचते हैं। इन गोलों को स्पर्श करता हुआ खींचा गया पृष्ठ A1B1 ‘एन्वलोप है। यही तरंगाग्र की नवीन स्थिति है। गोलों का एन्वलोप A2B2 पीछे की दिशा में भी है, परन्तु हाइगेन्स का सिद्धान्त पीछे की दिशा में स्थित ‘एन्वलोप’ को स्वीकार नहीं करता। ठीक इसी प्रकार चित्र 10.5 (b) में समतले तरंगाग्र का बढ़ना समझाया गया है।

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प्रश्न 2.
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त की सहायता से तरंगों के अपवर्तन की व्याख्या कीजिए तथा स्नैल के नियम का निगमन कीजिए। (2011)
या
हाइगेन्स तरंग सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश तरंगों के अपवर्तन की व्याख्या कीजिए। (2013, 18)
या
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश तरंगों के अपवर्तन के नियम की व्याख्या कीजिए। (2014, 18)
उत्तर-
जब कोई तरंग एक समांग माध्यम में चलकर किसी दूसरे समांग माध्यम में प्रवेश करती है तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। इस घटना को अपवर्तन कहते हैं। इसमें तरंग की आवृत्ति नहीं बदलती परन्तु तरंग की चाल एवं तरंगदैर्घ्य बदल जाती हैं।

चित्र 10.6 में ZZ’ समतल पृष्ठ है जो दो माध्यमों को अलग करता है। माना इन माध्यमों में किसी तरंग की चालें क्रमशः v1 व v2 हैं। माना पहले माध्यम में एक समतल तरंगाग्र AB तिरछा आपतित होता है। और पहले माध्यम में पृष्ठ ZZ’ के बिन्दु A को t = 0 समय पर स्पर्श करता है तथा तरंगाग्र के बिन्दु B को A’ तक पहुँचने में है समय लगता है, तब BA’ = v1t
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तरंगाग्र AB के आगे बढ़ने पर वह सीमा पृष्ठ के A व A’ के बीच के बिन्दुओं से टकराता है। इन बिन्दुओं से हाइगेन्स की गोलीय तरंगिकाएँ निकलने लगती हैं जो पहले माध्यम में v1 चाल से और दूसरे माध्यम में v2 चाल से चलने लगती हैं। सर्वप्रथम A से चलने वाली द्वितीयक तरंगिका । समय में दूसरे माध्यम में AB’ (= v2t) दूरी तय करती है और इतने ही समय में बिन्दु B, पहले माध्यम में BA’ (= v1t) दूरी चलकर A’ पर पहुँच जाता है जहाँ से अब द्वितीयक तरंगिका चलना प्रारम्भ करती है। इस प्रकार
AB’ = v2t , BA’ = v1t

बिन्दु A को केन्द्र मानकर AB’ त्रिज्या का एक चाप खींचते हैं तथा A’ से इस चाप पर स्पर्श रेखा A B’ खींचते हैं। जैसे-जैसे आपतित तरंगाग्रे AB आगे बढ़ता जाता है, A व A’ के बीच सभी बिन्दुओं से एक के बाद एक चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाएँ एक साथ A’B’ को स्पर्श करेंगी; अर्थात् A’B’ सभी द्वितीयक तरंगिकाएँ को स्पर्श करेगा। अत: A’B’ ‘अपवर्तित’ तरंगाग्र होगा। माना कि आपतित तरंगाग्र AB तथा अपवर्तित तरंगाग्र A’B’ अपवर्तक तल ZZ’ के साथ क्रमश: कोण तथा r बनाते हैं। अब समकोण त्रिभुज ABA’ में
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यही अपवर्तन का प्रथम नियम है। इसको ही स्नैल का नियम कहते हैं। चित्र 10.6 से स्पष्ट है कि आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब एक ही तल में हैं (यही अपवर्तन का दूसरा नियम है।)

स्नैल के नियम में प्रयुक्त नियतांक को दूसरे माध्यम का (पहले माध्यम के सापेक्ष) अपवर्तनांक कहते हैं तथा इसे ‘[latex s=2]{ _{ 1 }{ n }_{ 2 } }[/latex]’ से प्रदर्शित करते हैं।
अतः
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प्रश्न 3.
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त के आधार पर परावर्तन के नियमों की व्याख्या कीजिए। (2012, 14)
या
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश के परावर्तन की व्याख्या कीजिए। (2017)
उत्तर-
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश के परावर्तन के नियमों की व्याख्या- चित्र 10.7 में ZZ’ एक परावर्तक पृष्ठ है। जिस पर ABएक समतल तरंगाग्र कोण i के झुकाव पर आपतित है। माना कि है = 0समय पर तरंगाग्र, पृष्ठ ZZ’ को बिन्दु A पर स्पर्श करता है। माना कि तरंगाग्र की चाल v है तथा तरंगाग्र, के बिन्दु B को पृष्ठ के बिन्दु A तक पहुँचने में है समय लगता है। जैसे-जैसे तरंगाग्र AB आगे बढ़ता है, वह परावर्तक पृष्ठ के A व A’ के बीच के बिन्दुओं से टकराता जाता है। हाइगेन्स के सिद्धान्त के अनुसार, A व A’ के बीच स्थित ये सभी बिन्दु नये तरंग स्रोतों का कार्य करते हैं। इनमें नई गोलीय तरंगिकाएँ सभी दिशाओं में निकलती हैं जो चाल के माध्यम से फैलती हैं। सबसे पहले बिन्दु A से द्वितीयक तरंगिका चलती है जो t समय में AB’ (= vt) दूरी तय करती है। परन्तु इसी समय में तरंगाग्र का बिन्दु B, दूरी BA’ चलकर A’ को स्पर्श कर लेता है, यहाँ से भी अब द्वितीयक तरंगिका चलनी शुरू हो जाती है। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि
AB’ = BA’ = vt ……(1)
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बिन्दु A को केन्द्र मानते हुए AB’ त्रिज्या का एक गोलीय चाप खींचते हैं तथा A’ से इस चाप पर स्पर्श रेखा (tangent) A’B’ खींच लेते हैं। जैसे-जैसे आपतित तरंगाग्र AB आगे बढ़ता है, परावर्तक पृष्ठ के A व A’ के बीच स्थित सभी बिन्दुओं से एक के बाद एक चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाएँ भी एक साथ A’B’ को स्पर्श करेंगी, अथवा A’B’ सभी द्वितीयक तरंगिकाओं को स्पर्श करती है। हाइगेन्स के अनुसार यह A’B’ ही परावर्तित तरंगाग्र है। माना कि यह पृष्ठ ZZ’ से r कोण के झुकाव पर है। अब समकोण त्रिभुज ABA’ तथा A’B’A में भुजा AA’ उभयनिष्ठ है तथा BA = AB’; अत: दोनों त्रिभुज सर्वांगसम (congruent) हैं, इसलिए कोण BAA’ = कोण B’A’ A.

स्पष्ट है कि आपतित तरंगाग्र AB तथा परावर्तित तरंगाग्र A’ B’ परावर्तक पृष्ठ ZZ’ से बराबर कोण बनाते हैं। चूँकि तरंगाग्र के अभिलम्बवत् खींची गई रेखा किरण होती है, अतः आपतित तथा परावर्तित किरणे पृष्ठ ZZ’ खींचे गये अभिलम्ब से भी बराबर कोण बनाती हैं। अतः
आपतन कोण i = परावर्तन कोण r (यह परावर्तन का दूसरा नियम है।)
चूँकि AB, A’B’ व ZZ’ कागज के तेल में हैं। इन पर खींचे गये अभिलम्ब भी एक तल में होंगे। इस प्रकार आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में है। यही परावर्तन का प्रथम नियम है।

प्रश्न 4.
यंग के व्यतिकरण प्रयोग में दो समान्तर स्लिटों के बीच की दूरी d तथा उनसे पर्दे की दूरी D है। यदि प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ हो, तो पर्दे पर केन्द्रीय फ्रिज से किसी
(i) दीप्त फ्रिज,
(ii) अदीप्त फ्रिन्ज की दूरी के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए।
या
यंग के व्यतिकरण प्रयोग में दो समान्तर स्लिटों के बीच की दूरीd तथा उनसे पर्दे की दूरी D है। यदि प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ हो तो पर्दे पर केन्द्रीय फ्रिन्ज से किसी दीप्त फ्रिज की दूरी के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए। इससे फ्रिन्ज की चौड़ाई के लिए सूत्र W = [latex s=2]\frac { D\lambda }{ d }[/latex] ज्ञात कीजिए। (2014)
या
द्वि-झिरी प्रयोग में बनी दीप्त फ्रिन्जों की चौड़ाई के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए। (2013)
या
यंग के द्विक स्लिट प्रयोग में दीप्त अथवा अदीप्त फ्रिन्जों की चौड़ाई w के लिए सूत्र W = [latex s=2]\frac { D\lambda }{ d }[/latex] व्युत्पादित कीजिए। प्रयुक्त संकेतों के सामान्य अर्थ हैं। (2013)
या
यंग के दो स्लिटों के प्रयोग में दीप्त फ्रिन्ज की चौड़ाई के लिए व्यंजक W = [latex s=2]\frac { D\lambda }{ d }[/latex] प्राप्त कीजिए, जहाँ प्रयुक्त संकेतों के अर्थ सामान्य हैं। (2009)
या
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए यंग के प्रयोग का विवरण दीजिए। फ्रिन्जों की चौड़ाई के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए। (2012, 14, 17)
या
दो पतली समान्तर झिरीं, जो एक-दूसरे से d दूरी पर स्थित हैं, λ तरंगदैर्घ्य के प्रकाश से प्रकाशित की जाती हैं तथा झिर्रियों से D दूरी पर स्थित पर्दे पर फ्रिन्ज बनाती हैं। फ्रिन्जों की चौड़ाई के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। (2015)
या
व्यतिक्रण की शर्तों का उल्लेख कीजिए। यंग के द्वि-झिरीं प्रयोग बनाने वाली फ्रिन्जों की चौड़ाई के लिए W = [latex s=2]\frac { D\lambda }{ d }[/latex] का निगमन कीजिए। जहाँ प्रयुक्त संकेतों का अर्थ सामान्य है। (2016)
या
यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में प्राप्त व्यतिकरण फ्रिन्जों की चौड़ाई हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए। (2017)
उत्तर-
व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्त- लघु उत्तरीय प्रश्न 2 को उत्तर देखें।
फ्रिन्जों की चौड़ाई के लिए सूत्र-चित्र 10.8 में, S एक रेखा-छिद्र है जिसे एकवर्णी प्रकाश से प्रकाशित किया जाता है। इस रेखा-छिद्र से आगे दो रेखा-छिद्र S1 व S2 हैं जो एक-दूसरे के बहुत समीप हैं, S के संमान्तर हैं तथा उससे समान दूरी पर स्थित हैं। S से चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाएँ S1 व S2 पर समान कला में पहुँचती हैं। S1 व S2 भी द्वितीयक तरंगिकाओं के स्रोत बन जाते हैं। इससे निकली तरंगें एक-दूसरे के साथ अध्यारोपण के पश्चात् D दूरी पर स्थित पर्दे पर व्यतिकरण फ्रिजें बनाती हैं। इन फ्रिन्जों की चौड़ाई नापकर प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की भी गणना की जा सकती है।
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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 10 Wave Optics LAQ 4.3

प्रश्न 5.
यंगके द्विक रेखाछिद्र (द्विझिरीं) के प्रयोग में 1.5 अपवर्तनांक वाली काँच की एक पतली प्लेट किसी एक स्लिट (झिरी) से आने वाली प्रकाश किरण के मार्ग में रख दी जाती है। केन्द्रीय दीप्त फ्रिन्ज हटकर चौथी दीप्त फ्रिन्ज की स्थिति में पहुँच जाती है। यदि प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 6000 Å हो, तो प्लेट की मोटाई ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
माना केन्द्रीय फ्रिन्ज की चौड़ाई = W
स्लिटों के बीच की दूरी = d
तथा स्लिटों से पर्दे की दूरी = D
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प्रश्न 6.
यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में दो तरंगदैर्यों 6500 Å तथा 5200 Å के प्रकाश पुंज का उपयोग करके व्यतिकरण फ्रिजें प्राप्त की जाती हैं।
(i) तरंगदैर्घ्य 5200 A के लिए पर्दे पर केन्द्रीय फ्रिन्ज (उच्चिष्ठ) से द्वितीय अदीप्त फ्रिज की दूरी ज्ञात कीजिए।
(ii) केन्द्रीय उच्चिष्ठ से वह न्यूनतम दूरी क्या है, जहाँ पर दोनों तरंगदैर्घ्य से उत्पन्न दीप्त फ्रिजें सम्पाती हों? स्लिटों के बीच की दूरी 2 मिमी तथा स्लिटों व पर्दे के बीच की दूरी 120 सेमी हैं। (2016)
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प्रश्न 7.
कलमसम्बद्ध स्रोत से क्या तात्पर्य है? व्यतिकरण की शर्तों का उल्लेख कीजिए। प्रकाश के व्यतिकरण सम्बन्धी प्रयोग में दो स्लिटों के बीच अन्तराल 0.2 मिमी है। इनसे निर्गत प्रकाश के व्यतिकरण से 1 मीटर दूर पर्दे पर बनी व्यतिकरण फ्रिन्ज की चौड़ाई 3 मिमी है। स्लिटों पर आपतित प्रकाश के तरंगदैर्घ्य एवं केन्द्रीय दीप्त फ्रिन्ज से तृतीय अदीप्त फ्रिज की दूरी ज्ञात कीजिए। (2016)
हल-
ऐसे दो स्रोतों को जिनके बीच कलान्तर सदैव नियत रहता है, कलासम्बद्ध स्रोत (coherent source) कहते हैं। दो कलासम्बद्ध स्रोतों से हम स्थायी (sustained) व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे स्रोत किसी युक्ति द्वारा एक ही स्रोत से प्राप्त किये जाते हैं।
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते- लघु उत्तरीय प्रश्न 2 का उत्तर देखें। दिया है, d = 0.2 मिमी = 2 x 10-4 मी, D = 1 मी,
W = 3 मिमी = 3 x 10-3 मी
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प्रश्न 8.
प्रकाश के विवर्तन से आप क्या समझते हैं? एक पतली झिरी से प्रकाश के विवर्तन के कारण प्राप्त विवर्तन प्रारूप की व्याख्या कीजिए। (2010, 11, 16, 17)
या
एक पतली झिरी से होने वाले प्रकाश के विवर्तन की विवेचना विवर्तन प्रतिमान खींचकर कीजिए। (2011)
या
किसी पतली झिरी द्वारा एकवर्णी प्रकाश के विवर्तन की विवेचना कीजिए तथा केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई ज्ञात कीजिए। (2012, 13, 16, 17)
उत्तर-
प्रकाश का विवर्तन- जब प्रकाश किसी अवरोध (obstacle) या द्वारक (aperture) पर जिसका आकार प्रकाश के तरंगदैर्घ्य के क्रम का हो, आपतित होता है तो अवरोध या द्वारक के किनारों पर प्रकाश ऋजुरेखीय संचरण से विचलित होकर मुड़ जाता है। जिस स्थान पर ज्यामितीय छाया बननी चाहिए। थी वहाँ भी कुछ प्रकाश पहुँच जाता है। अवरोध या द्वारक के किनारों पर प्रकाश का यह मुड़ना प्रकाश का विवर्तन कहलाता है। प्रकाश का विवर्तन

निम्नलिखित दो घटनाओं से प्रदर्शित होता है-
(i) ज्यामितीय छाया में प्रकाश का पहुँचना।
(ii) एकसमान प्रदीप्त क्षेत्र में फ्रिन्जों का बनना।

एक पतली झिर्रा से प्रकाश का विवर्तन-  चित्र 10.10 में S एक बिन्दुवत् एकवर्णी (monochromatic) प्रकाश-स्रोत है। यह लेन्स L के प्रथम फोकस पर रखा है। अत: S, से चली प्रकाश किरणेंलेन्स L से अपवर्तन के पश्चात् एक समान्तर किरण-पुंज के रूप में निकलेंगी। समानान्तर किरणों का यह किरण-पुंज एक समतल तरंगाग्र (wavefront) ww’ का निर्माण करता है। इस लेन्स L के सामने एक लम्बी संकीर्ण स्लिट AB रखी है जिस पर यह समतल तरंगाग्र लम्बवत् आपतित होता है। स्लिट की चौड़ाई से है। जैसे ही यह तरंगाग्र स्लिट पर आपतित होती है तो हाइगेन्स के तरंग संचरण सम्बन्धी द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्तानुसार, तरंगाग्र का प्रत्येक बिन्दु नये तरंग उत्पादक स्रोत का कार्य करता है तथा इनसे द्वितीयक तरंगिकाएँ निकलने लगती हैं। इन विवर्तित किरणों को लेन्स L2 द्वारा पर्दे YY’ पर फोकस कर लिया जाता है। स्लिट से एक नियत कोण पर विवर्तित सभी किरणें पर्दे के एक बिन्दु पर फोकस होती हैं। इस प्रकार पर्दे पर विवर्तन प्रारूप (diffraction pattern) प्राप्त हो जाता है।

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व्याख्या (Explanation)- जो तरंगिकाएँ θ = शून्य कोण पर विवर्तित होकर पर्दे के केन्द्रीय बिन्दु P, पर अध्यारोपित होती हैं वे सभी समान कला में होती हैं; अर्थात् उनके बीच कलान्तर शून्य होता है। इसलिए Py पर एक दीप्त फ्रिन्ज (बैण्ड) प्राप्त होता है। यह एक दीप्त चौड़ी पट्टी होती है। एक केन्द्रीय बैण्ड के दोनों ओर घटती हुई तीव्रता के अदीप्त व दीप्त बैण्ड एकान्तर क्रम में प्राप्त होते हैं। इस प्रकार पर्दे पर प्राप्त दीप्त व अदीप्त बैण्डों का यह प्रारूप विवर्तन प्रारूप कहलाता है। रेखा-छिद्र (slit) जितना कम चौड़ाई का होता है, उसका विवर्तन प्रारूप उतना ही अधिक फैला होता है तथा केन्द्रीय बैण्ड (पट्टी) उतना ही अधिक चौड़ा होता है।
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विवर्तन प्रारूप में PO पर बना दीप्त बैण्ड केन्द्रीय उच्चिष्ठ अथवा मुख्य उच्चिष्ठ (principal maxima) कहलाता है तथा इसके दोनों ओर घटती तीव्रता के दीप्तं बैण्ड गौण

गौण उच्चिष्ठ उच्चिष्ठ (secondary maxima) कहलाते हैं। दो क्रमागत दीप्त बैण्डों के बीच स्थित अदीप्त बैण्ड निम्निष्ठ (minima) कहलाते हैं। जो द्वितीयक तरंगिकाएँ रेखा-छिद्र AB पर है। कोण से विवर्तित होती हैं वे पर्दे YY’ पर केन्द्रीय बिन्दु PO से ऊपर बिन्दु P पर फोकस होती हैं। ये तरंगिकाएँ रेखा-छिद्र AB के विभिन्न भागों से एक ही कला में चलती हैं, परन्तु P पर भिन्न-भिन्न कलाओं में (पथान्तर के अनुसार) पहुँचकर परस्पर अध्यारोपित होती हैं। चित्र 10.10 में BG पर AG लम्ब डाला गया है। तल AG से पर्दे पर बिन्दु P एक प्रकाशीय पथ बराबर है। अतः रेखा-छिद्र के बिन्दु A तथा B से चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं के बीच पथान्तर BG है। माना पथान्तर BG = λ जंहाँ λ प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य है। माना AB की चौड़ाई को n बराबर भागों में विभाजित कर लिया जाता है। प्रत्येक अर्द्ध-भाग के संगत बिन्दुओं से चलने वाली । तरंगिकाओं के बीच पथान्तर λ/2 होगा; अत: वे P पर अदीप्त बैण्ड उत्पन्न करेंगी। यह प्रथम निम्निष्ठ होगा जिसके लिए BG = λ.

परन्तु चित्र 10.10 से, BG = AB sin θ = e sin θ (जहाँ AB = e)
अत: P पर प्रथम निम्निष्ठ की स्थिति के लिए सूत्र e sin θ = λ.
अतः सभी निम्निष्ठों की स्थिति के लिए सामान्य सूत्र निम्नलिखित होगा-
e sin θ = ± mλ. (जहाँ m = 1, 2, 3…) …(1)
जबकि m = 0 मुख्य उच्चिष्ठ की स्थिति के संगत है।
यहाँ ± चिह्नों का अर्थ है कि निम्निष्ठ P पर बनने वाले मुख्य उच्चिष्ठ के दोनों ओर बनते हैं।
दो क्रमागत निम्निष्ठों के बीच भी कुछ प्रकाश पहुँच जाता है जहाँ कम चमकीले उँच्चिष्ठ प्राप्त होते हैं। इनको गौण उच्चिष्ठ (secondary maxima) कहते हैं। इनकी तीव्रता मुख्य उच्चिष्ठ के दोनों ओर चित्र 10.11 की भाँति तेजी से गिरती जाती है।
θ बहुत छोटा होने पर sin θ = θ …(2)
अतः उपर्युक्त समी० (1) से।
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चित्र 10.11 में प्रदर्शित वक्र एकल पतले रेखा-छिद्र द्वारा प्राप्त विवर्तन प्रारूप का तीव्रता वितरण वक्र है। इसमें आपतित प्रकाश की तीव्रता का अधिकतम भाग केन्द्रीय उच्चिष्ठ में केन्द्रित होता है और शेष तीव्रता द्वितीयक उच्चिष्ठों में तेजी से घटते क्रम में पायी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि केन्द्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता I0 है तो द्वितीयक उच्चिष्ठों की तीव्रताएँ क्रमशः I0/22, I0/61,…… इत्यादि होती हैं।
केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई के लिए व्यंजक
केन्द्रीय उच्चिष्ठ के दोनों ओर प्रथम निम्निष्ठों के बीच की कोणीय दूरी केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई कहलाती है।
अतः केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई = θ + θ = 2θ = 2(λ/e)
यदि लेन्स L2 की फोकस दूरी f हो जो रेखा-छिद्र AB के काफी समीप रखा हो, तो इससे दूरस्थ पर्दे पर केन्द्रीय उच्चिष्ठ की रैखिक चौड़ाई निम्न प्रकार ज्ञात की जाती है-
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प्रश्न 9.
ध्रुवित तथा अधुवित प्रकाश में अन्तर समझाइए। (2012, 15)
उत्तर-
धुवित तथा अधुवित प्रकाश में अन्तर- साधारण प्रकाश में वैद्युत वेक्टर के कम्पन तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् सभी दिशाओं में होते हैं, अर्थात् ये तरंग संचरण की दिशा के परितः सममित होते हैं, अत: साधारण प्रकाश को अधुवित प्रकाश (unpolarised light) कहा जाता है। यदि किसी युक्ति द्वारा साधारण प्रकाश के वैद्युत वेक्टरों के कम्पन, तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में केवल एक दिशा में सीमित कर दिये जायें, अर्थात् इन कम्पनों को तरंग संचरण की दिशा के परितः असममित कर दिया जाये तो इस प्रकार प्राप्त प्रकाश धुवित प्रकाश (polarised light) कहलाता है। इसी को समतल ध्रुवित प्रकाश भी कहते हैं। प्रकाश सम्बन्धी यह घटेंना प्रकाश का धुवण (polarisation of light) कहलाती है।

अधूवित प्रकाश में प्रकाश के संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में कम्पन की सभी दिशाएँ सम्भव हैं, अतः अध्रुवित प्रकाश को एक तारे द्वारा प्रदर्शित किया जाता है [चित्र 10.12 (a)]।
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प्रकाश के समतल-ध्रुवित पूँज में कम्पन एक सीधी रेखा के अनुदिश होते हैं। जब कम्पन कागज के तल के समान्तर होते हैं, तो वे तीर युक्त रेखाओं द्वारा निरूपित किये जाते हैं [चित्र 10.12 (b)]। जब कम्पन कागज के तल के लम्बवत् एक सीधी रेखा के अनुदिश होते हैं, तो वे बिन्दुओं द्वारा निरूपित किये जाते हैं [चित्र 10.12 (c)]

प्रश्न 10.
पोलेराइड किसे कहते हैं? इसकी सहायता से कैसे पता लगायेंगे कि दिया गया प्रकाश अधुवित है, आंशिक रूप से धुवित है या पूर्णतः ध्रुवित है? (2015)
या
पोलेराइड से किसी प्रकाश किरण के धुवित होने की जाँच आप कैसे करेंगे?
या
पोलेराइड द्वारा समतल ध्रुवित प्रकाश के उत्पन्न करने तथा विश्लेषण करने की विधि का वर्णन कीजिए। (2010, 11)
या
समतल ध्रुवित प्रकाश के उत्पादन तथा संसूचन की किसी विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011)
या
पोलेराइड क्या है? इसकी कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसकी सहायता से अधुवित तथा समतल ध्रुवित प्रकाश में किस प्रकार अन्तर कर सकते हैं? (2013)
या
समतल ध्रुवित प्रकाश उत्पन्न करने हेतु किसी एक विधि का वर्णन कीजिए। (2015)
उत्तर-
पोलेराइड एक बड़े आकार की फिल्म होती है जिसे दो काँच की प्लेटों के बीच रखा जाता है। इस फिल्म को बनाने के लिए कार्बनिक यौगिक हरपेथाइट या आयोडो सल्फेट ऑफ क्यूनाइन के अतिसूक्ष्म क्रिस्टल, नाइट्रो-सेलुलोस की पतली चादर पर विशेष विधि द्वारा इस प्रकार फैला दिये जाते हैं कि सभी क्रिस्टलों की प्रकाशिक असें समान्तर रहें। ये क्रिस्टल द्विवर्णक होते हैं।

कार्यविधि- अधूवित प्रकाश में वैद्युत वेक्टर सभी दिशाओं में होते हैं। जब कोई प्रकाश किरण पोलेराइड फिल्म पर आपतित होती है, तो यह दो समतल ध्रुवित किरणों में विभक्त हो जाती है। एक किरण में वैद्युत वेक्टर हरपेथाइट क्रिस्टल की अक्ष के समान्तर तथा दूसरे में अक्ष के लम्बवत् होते हैं। इनमें से हरपेथाइट की अक्ष के लम्बवत् वैद्युत वेक्टर वाली किरण पूर्णतया अवशोषित हो जाती है। इस प्रकार निर्गत प्रकाश पूर्णतया ध्रुवित होता है। पोलेराइड से निर्गत प्रकाश समतल ध्रुवित होता है, इसकी जाँच एक-दूसरे पोलेराइड द्वारा संचरित हो जाता है [चित्र 10.13 (a)]। जब द्वितीय पोलेराइड को 90° से घुमाकर उसको क्रॉस स्थिति में लाते हैं, तो उनमें से प्रकाश संचरित नहीं होता [चित्र 10.13 (b)]। इस स्थिति में दोनों पोलेराइड की ध्रुवण दिशाएँ परस्पर लम्बवत् होती हैं। इस दशा में पोलेराइड क्रॉसित पोलेराइड हैं। उपर्युक्त प्रक्रिया में पहला (analyser) कहलाता है।
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धूवित प्रकाश प्राप्त करना- जब ध्रुवित प्रकाश का एक किरण-पुंज पोलेराइड फिल्म में से गुजरता है, तो फिल्म केवल उन घटकों को पार होने देती है जिनके वैद्युत-वेक्टर पोलेराइड की ध्रुवण दिशा के समांन्तर कम्पन करते हैं। इस प्रकार पारगमित प्रकाश समतल-ध्रुवित प्रकाश होता है।
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समतल-धुवित प्रकाश का संसूचन- पोलेराइड की सहायता से अधुवित, आंशिक रूप से ध्रुवित अथवा, पूर्णतया ध्रुवित प्रकाश का पता लगाया जाता है। किसी पोलेराइड को आपतित प्रकाश के परितः पूरा एक चक्कर घुमाने से यदि निर्गत प्रकाश की तीव्रता में कोई अन्तर नहीं पड़ता तो आपतित प्रकाश अधूवित है, निर्गत प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन तो होता है, परन्तु किसी भी स्थिति में तीव्रता शून्य नहीं होती तो आपतित प्रकाश आंशिक रूप से ध्रुवित है, यदि निर्गत प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन होता है। तथा पोलेराइड के एक चक्कर में दो बार तीव्रता अधिकतम तथा दो बार शून्य हो जाती है तो आपतित प्रकाश पूर्णत: समतल-ध्रुवित है।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements (p-ब्लॉक के तत्त्व) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements (p-ब्लॉक के तत्त्व).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 7
Chapter Name The p Block Elements
Number of Questions Solved 141
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements (p-ब्लॉक के तत्त्व)

अभ्यास के अन्तर्गत दिएर गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ट्राइसैलाइडों से पेन्टाहैलाइड अधिक सहसंयोजी क्यों होते हैं?
उत्तर
किसी अणु में केन्द्रीय परमाणु की जितनी उच्च धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था होती है, उसकी ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होती है जिसके कारण केन्द्रीय परमाणु और अन्य परमाणु के मध्य बने आबन्ध में सहसंयोजी गुण बढ़ता जाता है।
इस प्रकार चूंकि पेन्टालाइडों में केन्द्रीय परमाणु +5 ऑक्सीकरण अवस्था में होता है, जबकि ट्राइहैलाइडों में यह +3 ऑक्सीकरण अवस्था में होता है, इसलिए ट्राइलाइडों से पेन्टाहैलाइड अधिक सहसंयोजी होते हैं।

प्रश्न 2.
वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH3 सबसे प्रबल अपचायक क्यों है?
उत्तर
वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH3 के प्रबल अपचायक होने का कारण यह है कि इस वर्ग के हाइड्राइडों में Bi-H आबन्ध की लम्बाई सबसे अधिक होती है जिसके कारण BiH3 सबसे कम स्थायी होता है।

प्रश्न 3.
N2 कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है?
उत्तर
N2 कमरे के ताप पर कम क्रियाशील होती है; क्योंकि प्रबल pπ – pπ अतिव्यापन के कारण त्रिओबन्ध N ≡ N बनता है।

प्रश्न 4.
अमोनिया की लब्धि को बढ़ाने के लिए आवश्यक स्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अमोनिया का निर्माण हेबर प्रक्रम से किया जाता है। इसकी लब्धि बढ़ाने के लिए ला-शातेलिए। सिद्धान्त के अनुसार आवश्यक स्थितियाँ निम्नवत् हैं –

  1. तापमान = 700 K
  2. उच्च दाब 200 x 105 Pa (लगभग 200 वायुमण्डल)
  3. उत्प्रेरक; जैसे- K2O तथा Al2O5 मिश्रित आयरन ऑक्साइड।

प्रश्न 5.
Cu2+ आयन के साथ अमोनिया कैसे क्रिया करती है?
उत्तर
Cu2+ आयन अमोनिया से क्रिया करके गहरे नीले रंग का संकुल बनाते हैं।
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प्रश्न 6.
N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता क्या है?
उत्तर
सहसंयोजकता इलेक्ट्रॉनों के सहभाजित युग्मों की संख्या पर निर्भर करती है। चूंकि N2O5 में, प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के चार सहभाजित युग्म उपस्थित हैं जैसा कि निम्नवत् दिखाया गया है –
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इसलिए N2O5 में N की सहसंयोजकता 4 है।

प्रश्न 7.
PH3 से PH+4 ई का आबन्ध कोण अधिक है। क्यों?
उत्तर
PH3 तथा PH+4 दोनों sp3 संकरित हैं। PH+4 में चारों कक्षक आबन्धित होते हैं, जबकि PH3 में P पर इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म उपस्थित होता है जो PH3 में एकाकी युग्म-आबन्ध युग्म प्रतिकर्षण के लिए उत्तरदायी है जिससे आबन्ध कोण 109°28′ से कम हो जाता है।
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प्रश्न 8.
क्या होता है जब श्वेत फॉस्फोरस को CO2 के अक्रिय वातावरण में सान्द्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करते हैं?
उत्तर
श्वेत फॉस्फोरस NaOH से अभिक्रिया करके फॉस्फीन (PH3) बनाता है।UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 4

प्रश्न 9.
क्या होता है जब PCl5 को गर्म करते हैं?
उत्तर
PCl5 में तीन निरक्षीय (equatorial) [202 pm] तथा दो अक्षीय (axial) [240 pm] बन्ध होते हैं। चूंकि अक्षीय बन्ध निरक्षीय बन्धों से दुर्बल होते हैं, इसलिए जब PCl5 को गर्म किया जाता है तो कम स्थायी अक्षीय बन्ध टूटकर PCl3 बनाते हैं।
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प्रश्न 10.
PCl5 की भारी पानी में जल-अपघटन अभिक्रिया का सन्तुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर
PCl5 भारी जल (D2O) से अभिक्रिया करके फॉस्फोरस ऑक्सी-क्लोराइड (POCl3) तथा ड्यूटीरियम क्लोराइड (DCl) बनाता है।
PCl5 + D2O → POCl3 + 2 DCl

प्रश्न 11.
H3PO4 की क्षारकता क्या है?
उत्तर
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H3PO4 अणु में तीन -OH समूह उपस्थित हैं, इसलिए इसकी क्षारकता 3 है।

प्रश्न 12.
क्या होता है जब H3PO4 को गर्म करते हैं?
उत्तर
ऑफॉस्फोरस अम्ल या फॉस्फोरस अम्ल (H3PO4) गर्म करने पर असमानुपातित होकर ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल या फॉस्फोरिक अम्ल तथा फॉस्फीन देता है।
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प्रश्न 13.
सल्फर के महत्त्वपूर्ण स्रोतों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर
भूपर्पटी में सल्फर की मात्रा 0.03 – 0.1% होती है। संयुक्त अवस्था में सल्फर सल्फेट के रूप में—जिप्सम (CaSO4 . 2H2O), एप्सम लवण (MgSO4 . 7H2O), बेराइट (BaSO4) तथा सल्फाइड के रूप में– गैलेना (PbS), जिंक ब्लैण्ड (ZnS), पाइराइट (CuFeS2) में पाया जाता है। कार्बनिक पदार्थों जैसे अण्डा, प्रोटीन, लहसुन, प्याज, सरसों, बाल तथा फर में सल्फर पाया जाता है। ज्वालामुखी में सल्फर के अंश H2S के रूप में पाए जाते हैं।

प्रश्न 14.
वर्ग 16 के तत्वों के हाइड्राइडों के तापीय स्थायित्व के क्रम को लिखिए।
उत्तर
चूँकि तत्वों का आकार वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ता है, इसलिए E-H बन्ध वियोजन ऊर्जा घटती है। जिससे E-H बन्ध सरलता से टूट जाते हैं। अत: वर्ग 16 के तत्वों के हाइड्रोइडों का ऊष्मीय स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर घटता है।
H2O > H2S > H2Se > H2Te > H2Po

प्रश्न 15.
H2O एक द्रव तथा H2S गैस क्यों है?
उत्तर
ऑक्सीजन के छोटे आकार तथा उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण H2O में अन्तराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाए जाने के परिणामस्वरूप यह कमरे के ताप पर द्रव होता है। H2S सल्फर के बड़े आकार के कारण हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाती है, अतः इसके अणुओं के मध्य दुर्बल वान्डर वाल्स बल कार्य करते हैं। इस कारण कक्ष ताप पर H2S गैस होती है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व ऑक्सीजन के साथ सीधे अभिक्रिया नहीं करता?
Zn, Ti, Pt, Fe
उत्तर
प्लैटिनम एक उत्कृष्ट धातु है। इसकी पहली चार आयनन एन्थैल्पियों का योग बहुत अधिक होता है, इसलिए यह ऑक्सीजन से सीधे संयोग नहीं करती है। दूसरी ओर Zn, Ti तथा Fe सक्रिय धातुएँ हैं, इसलिए ये ऑक्सीजन से सीधे संयोग करके संगत ऑक्साइड बनाती हैं।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए –

  1. C2H4 + O2
  2. 4 Al + 3O2

उत्तर

  1. C2H4 + 3O2 [latex]\underrightarrow { \triangle } [/latex] 2CO2 ↑ + 2H2O
  2. 4Al + 3O2 [latex]\underrightarrow { \triangle } [/latex] 2Al2O3

प्रश्न 18.
O3 एक प्रबल ऑक्सीकारक की तरह क्यों क्रिया करती है?
उत्तर
O3 शीघ्रता से अपघटित होकर नवजात ऑक्सीजन उत्पन्न करती है, जो विभिन्न पदार्थों को ऑक्सीकृत कर देती है। इसलिए यह प्रबल ऑक्सीकारक की तरह क्रिया करती है।
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प्रश्न 19.
O3 का मात्रात्मक आकलन कैसे किया जाता है?
उत्तर
जब ओजोन पोटैशियम आयोडाइड के आधिक्य, जिसे बोरेट बफर (pH 9.2) के साथ बफरीकृत करते हैं, से अभिक्रिया करती है तो आयोडीन उत्पन्न होती है, इसे सोडियम थायोसल्फेट के मानक विलयन के साथ अनुमापित करते हैं। इस प्रकार O3 का मात्रात्मक आकलन किया जाता है।

प्रश्न 20.
तब क्या होता है जब सल्फर डाइऑक्साइड को Fe(III) लवण के जलीय विलयन में से प्रवाहित करते हैं?
उत्तर
SO2 अपचायक की भाँति कार्य करती है, इसलिए यह आयरन (III) लवण को आयरन (II) लवण में अपचयित कर देती है।
SO2 + 2H2O → SO2-4 + 4H+ + 2e
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प्रश्न 21.
दो S-O आबन्धों की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए जो SO2 अणु बनाते हैं। क्या SO2 अणु के ये दोनों S-O आबन्ध समतुल्य हैं?
उत्तर
SO2 में बनने वाले दोनों S-O आबन्ध सहसंयोजक (covalent) हैं तथा अनुनादी संरचनाओं के कारण समान रूप से प्रबल होते हैं।

प्रश्न 22.
SO2 की उपस्थिति का पता कैसे लगाया जाता है?
उत्तर
SO2 एक तीक्ष्ण गन्ध वाली गैस है। इसकी उपस्थिति को निम्नलिखित दो परीक्षणों से ज्ञात किया जा सकता है –
(i) SO2 गुलाबी-बैंगनी रंग के अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट (VII) विलयन को MnO4 के Mn2+ आयन में अपचयन के कारण रंगहीन कर देती है।
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(ii) SO2 अम्लीकृत K2Cr2O7 को Cr2O2-7 के Cr3+ आयनों में अपचयन के कारण हरा कर देती है।
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प्रश्न 23.
उन तीन क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए जिनमें H2SO4 महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तर

  1. उर्वरकों; जैसे- अमोनियम सल्फेट, सुपर फॉस्फेट के निर्माण में।
  2. पेट्रोलियम शोधन में।
  3. सीसा संचायक बैटरियों में।

प्रश्न 24.
संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 की मात्रा में वृद्धि करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों को लिखिए।
उत्तर
H2SO4 के निर्माण में प्रमुख पद SO2 का O2 के साथ उत्प्रेरकीय ऑक्सीकरण है। इसमें V2O5 उत्प्रेरक की उपस्थिति में SO3 प्राप्त होती है।
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अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय है। अग्रगामी अभिक्रिया में आयतन का ह्रास होता है। इसलिए कम ताप तथा उच्च दाब उत्पाद की मात्रा में वृद्धि करने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हैं, परन्तु ताप अत्यधिक कम नहीं होना चाहिए, अन्यथा अभिक्रिया की दर कम हो जाएगी।

प्रश्न 25.
जल में H2SO4 के लिए Ka2 << Ka1 क्यों है?
उत्तर
H2SO4 एक द्विक्षारकीय अम्ल है, यह दो पदों में आयनित होता है, इसलिए इसके दो वियोजन स्थिरांक होते हैं।

  1. H2SO4 (aq) + H2O (l) → H3O+ (aq) + HSO4 (aq); Ka1 > 10
  2. HSO4 (aq) + H2O (l) → H3O+ (aq) + SO2-4 (aq); Ka2 = 1.2 x 10-2

Ka1 (>10) के अधिक मान से तात्पर्य यह है कि H2SO4, H3O+ तथा HSO4 में अधिक वियोजित है।
मुख्यत: H3O+ और H2SO4 में प्रथम आयनन के कारण H2SO4 जल में प्रबल अम्ल है। HSO4 का H3O+ तथा SO2-4 आयनों में आयनन लगभग नगण्य होता है;
अत: Ka2 << Ka1

प्रश्न 26.
आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तथा जलयोजन एन्थैल्पी जैसे प्राचलों को महत्त्व देते हुए F2 तथा Cl2 की ऑक्सीकारक क्षमता की तुलना कीजिए।
उत्तर
ऑक्सीकारक क्षमता F2 से Cl2 तक घटती है। जलीय विलयन में हैलोजेनों की ऑक्सीकारक क्षमता वर्ग में नीचे की ओर घटती है (F से Cl तक)। फ्लुओरीन का इलेक्ट्रोड विभव (+287 V) क्लोरीन (+136 V) की तुलना में उच्च होता है, इसलिए F2 क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है। इलेक्ट्रोड विभव निम्नलिखित प्राचलों पर निर्भर करता है –
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अत: Fप्रबल ऑक्सीकारक है।

प्रश्न 27.
दो उदाहरणों द्वारा फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार को दर्शाइए।
उत्तर
फ्लुओरीन का असामान्य व्यवहार इसके-

  1. लघु आकार
  2. उच्च विद्युत ऋणात्मकता
  3. कम F-F आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी तथा
  4. इसके संयोजी कोश में d-कक्षकों की अनुपलब्धता के कारण होता है।

उदाहरणार्थ

  1. फ्लुओरीन केवल एक ऑक्सोअम्ल बनाती है, जबकि अन्य हैलोजेन अधिक संख्या में ऑक्सो- अम्लों का निर्माण करते हैं।
  2. हाइड्रोजन फ्लुओराइड प्रबल हाइड्रोजन बन्धों के कारण द्रव होता है, जबकि अन्य हाइड्रोजन हैलाइड गैसीय होते हैं।

प्रश्न 28.
समुद्र कुछ हैलोजेन का मुख्य स्रोत है। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर
समुद्र जल में मैग्नीशियम, कैल्सियम, सोडियम तथा पोटैशियम के क्लोराइड, ब्रोमाइड तथा आयोडाइड पाए जाते हैं जिनमें सोडियम क्लोराइड (द्रव्यमान अनुसार 2.5%) प्रमुख हैं। समुद्री जमाव में सोडियम क्लोराइड तथा कार्नेलाइट [KCI . MgCl. 6H2O] प्रमुख होते हैं। कुछ समुद्री जीवधारियों के तन्त्र में आयोडीन पायी जाती है। कुछ समुद्री खरपतवारों ( लेमिनेरिया प्रजाति) में 0.5% आयोडीन तथा चिली साल्टपीटर में 0.2% सोडियम आयोडेट होता है।

प्रश्न 29.
Cl2 की विरंजक क्रिया का कारण बताइए। (2012)
उत्तर
Cl2 की विरंजक क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है। नमी अथवा जलीय विलयन की उपस्थिति में Cl2 नवजात ऑक्सीजन मुक्त करती है।
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यह नवजात ऑक्सीजन वनस्पतियों तथा कार्बनिक द्रव्यों में उपस्थित रंगीन पदार्थों का ऑक्सीकरण करके उन्हें रंगहीन पदार्थ में परिवर्तित कर देती है।
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ
अत: Cl2 की विरंजक क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है।

प्रश्न 30.
उन दो विषैली गैसों के नाम लिखिए जो क्लोरीन गैस से बनाई जाती हैं?
उत्तर
फॉस्जीन (COCl2) तथा मस्टर्ड गैस (ClCH2CH2SCH2CH2Cl)।

प्रश्न 31.
I2 से ICl अधिक क्रियाशील क्यों है?
उत्तर
I2 से ICl अधिक क्रियाशील होता है क्योंकि I-I आबन्ध से I-Cl आबन्ध दुर्बल होता है। परिणामस्वरूप ICl सरलता से टूटकर हैलोजेन परमाणु देता है जो तीव्रता से अभिक्रिया करते हैं।

प्रश्न 32.
हीलियम को गोताखोरी के उपकरणों में उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर
आधुनिक गोताखोरी के उपकरणों में हीलियम ऑक्सीजन के तनुकारी के रूप में उपयोग में आती है; क्योंकि रुधिर में इसकी विलेयता बहुत कम है।

प्रश्न 33.
निम्नलिखित समीकरण को सन्तुलित कीजिए –
XeF6 + H2O →XeO2F2 + HF
उत्तर
XeF6 + 2H2O → XeO2F2 + 4 HF

प्रश्न 34.
रेडॉन के रसायन का अध्ययन करना कठिन क्यों था?
उत्तर
रेडॉन अत्यन्त कम अर्द्धआयुकाल का रेडियोऐक्टिव तत्व है, इस कारण रेडॉन के रसायन का अध्ययन करना कठिन था।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
वर्ग 15 के तत्वों के सामान्य गुणधर्मो की उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था, परमाण्विक आकार, आयनन एन्थैल्पी तथा विद्युत ऋणात्मकता के सन्दर्भ में विवेचना कीजिए।
उत्तर
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration) – इन तत्वों के संयोजी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 , np3 होता है। इनमें s-कक्षक पूर्णतया भरे हुए तथा p- कक्षक अर्द्धपूरित होते हैं, जो इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को अधिक स्थायी बनाते हैं।

(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (Oxidation states) – इन तत्वों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ -3, +3 तथा +5 हैं। तत्वों द्वारा -3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने की प्रवृत्ति वर्ग में नीचे जाने पर परमाणु आकार तथा धात्विक गुण बढ़ने के कारण घटती है। वस्तुतः अन्तिम तत्व बिस्मथ कठिनता से -3 ऑक्सीकरण अवस्था में यौगिक बनाता है। ऑक्सीकरण अवस्था +5 का स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर घटता है। इस अवस्था में केवल Bi(V) का यौगिक BiF5 ज्ञात है। ऑक्सीकरण अवस्था +5 तथा ऑक्सीकरण अवस्था +3 का स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर क्रमशः घटता तथा बढ़ता है (अक्रिय युग्म प्रभाव)। नाइट्रोजन +1, +2, +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है, जबकि यह ऑक्सीजन के साथ अभिकृत होता है। फॉस्फोरस कुछ ऑक्सोअम्लों में +1 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है।

(iii) परमाणु आकार (Atomic size) – समूह में नीचे जाने पर सहसंयोजी तथा आयनिक त्रिज्याएँ बढ़ती हैं। N से P तक सहसंयोजी त्रिज्याओं में पर्याप्त वृद्धि होती है, जबकि As से Bi तक सहसंयोजी त्रिज्याओं में सूक्ष्म वृद्धि प्रेक्षित होती है। यह भारी सदस्यों में पूर्णतया भरे हुए d तथा f-कक्षकों की उपस्थिति के कारण होता है।

(iv) आयनन एन्थैल्पी (Ionisation enthalpy) – वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी में परमाणु आकार में क्रमिक वृद्धि के कारण कमी आती है। इस प्रकार अधिक स्थायी अर्द्धपूरित p-कक्षक के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तथा छोटे आकार के कारण वर्ग 15 के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी के मान वर्ग 14 के तत्वों से सम्बन्धित आवर्गों में अधिक होते हैं। आयनन एन्थैल्पी का उत्तरोत्तर बढ़ता क्रम निम्नवत् है –
ΔiHi < ΔiH2 < ΔiH3

(v) विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) – किसी समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के साथ विद्युत ऋणात्मकता सामान्यतः घटती है। यद्यपि भारी तत्वों में इस प्रकार का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 2.
नाइट्रोजन की क्रियाशीलता फॉस्फोरस से भिन्न क्यों है?
उत्तर
N2 अणु में उपस्थित N ≡ N बन्ध की अत्यधिक बन्ध वियोजन एन्थैल्पी (941.4 kJ mol-1) के कारण नाइट्रोजन अणु फॉस्फोरस अणु की तुलना में बहुत कम क्रियाशील हैं। फॉस्फोरस अणु (P4) में उपस्थित P-P बन्धों की बन्ध वियोजन एन्थैल्पी काफी कम (201.6 kJ mol-1) होती है।

प्रश्न 3.
वर्ग 15 के तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता की प्रवृत्ति की विवेचना कीजिए।
उत्तर
1. हाइड्राइड (Hydrides) – वर्ग 15 के सभी तत्व MH3 तथा MH4 प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं। (M = N, P, As, Sb, Bi)।

  1. क्षारीय गुण (Basic character) – हाइड्राइडों के क्षारीय गुण उनके आकार बढ़ने अर्थात् इलेक्ट्रॉन घनत्व घटने के साथ घटते हैं।
    UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 15
  2. ऊष्मीय स्थायित्व (Thermal stability) – वर्ग में नीचे जाने पर हाइड्राइडों का ऊष्मीय स्थायित्व घटता है क्योंकि परमाणु आकार बढ़ता है जिससे बन्ध लम्बाई (M – H) बढ़ती है।
  3. अपचायक गुण (Reducing character) – यह वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ता है क्योंकि स्थायित्व घटता है। NH3 के अतिरिक्त सभी प्रबल अपचायक होते हैं।
  4. क्वथनांक (Boiling point) – NH3 का क्वथनांक हाइड्रोजन आबन्ध के कारण PH3 से अधिक होता है। क्वथनांक PH3 से आगे जाने पर बढ़ते हैं क्योंकि आण्विक द्रव्यमान बढ़ने के कारण वान्डर वाल्स बलों में वृद्धि होती है।

अभिक्रियाएँ

  • Ca3P2 + 6H2O → 2PH3 ↑ + 3 Ca(OH)2
  • P4 + 3 KOH + 3H2O → PH3 ↑ + 3 KH2PO2
  • 2NH3 + NaOCl → N2H4 + NaCl + H2O

2. हैलाइड (Halides) :
(i) ट्राइहैलाइड (Trihalides) – ये सभी प्रकार के हैलोजेनों से सीधे संयोग करके MX3 प्रकार के ट्राइलाइड बनाते हैं। NBr3 तथा NI3 को छोड़कर सभी ट्राइहैलाइड स्थायी तथा पिरैमिडी संरचना के होते हैं। BiF3 के अतिरिक्त सभी ट्राइहैलाइड सहसंयोजी प्रकृति के होते हैं। ट्राइहैलाइडों की सहसंयोजी प्रकृति तत्व के आकार के बढ़ने पर घटती है।
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ट्राइहैलाइड सरलता से जल-अपघटित हो जाते हैं –

  • NCl3 + 3H2O → NH3 ↑ + 3 HOCl
  • PCl3 + 3H2O → H3PO3 + 3 HCl
  • 4 AsCl3 + 6H2O → As4O6 + 12 HCl
  • SbCl3 + H2O → SbOCl + 2 HCl
  • BiCl3 + H2O → BiOCl + 2 HCl

फॉस्फोरस तथा एण्टीमनी के ट्राइहैलाइड लूइस अम्ल की भाँति व्यवहार करते हैं।

  • PF3 + F2 → PF5
  • SbF3 + 2F → [SbF5]2-

(ii) पेन्टाहैलाइड (Pentahalides) – P, As तथा Sb सूत्र MCl5 के पेन्टालाइड बनाते हैं। N पेन्टाहलाइड नहीं बनाता है; क्योंकि इलेक्ट्रॉन के उत्तेजन के लिए d-कक्षक अनुपस्थित होते हैं। Bi अक्रिय-युग्म प्रभाव के कारण पेन्टाहैलाइड नहीं बनाता। पेन्टाक्लोराइडों में sp3 संकरण होता है तथा इनकी संरचना त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी होती है।

3. ऑक्साइड (Oxides) – ये ऑक्सीजन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़कर अधिक संख्या में ऑक्साइड बनाते हैं।
(i) नाइट्रोजन के ऑक्साइड (Oxides of nitrogen) – नाइट्रोजन ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके कई प्रकार के ऑक्साइड बनाता है। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नांकित रूप में तालिकाबद्ध है –
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(ii) फॉस्फोरस के ऑक्साइड (Oxides of phosphorus) – फॉस्फोरस के दो महत्त्वपूर्ण ऑक्साइड P4O6 (P2O3 का द्विलक) तथा P4O10 (P2O5 का द्विलक) हैं। इन्हें अग्रवत् प्राप्त किया जाता है –
P4 + 6O (सीमित) [latex]\underrightarrow { \triangle } [/latex] P4O6
P4 + 5O2 (आधिक्य) → P4O10

(iii) अन्य तत्वों के ऑक्साइड (Oxides of other elements) – As4O6, As2O5, Sb4O6, Sb2O5, Bi2O3 तथा Bi2O5.
N, P तथा As के ट्राइऑक्साइड अम्लीय होते हैं। अम्लीय गुण वर्ग में नीचे जाने पर घटता है। Sb का ऑक्साइड उभयधर्मी होता है, जबकि Bi का ऑक्साइड क्षारीय होता है। सभी पेन्टाऑक्साइड अम्लीय होते हैं। N2O5 प्रबलतम तथा Bi2O5 दुर्बलतम अम्लीय ऑक्साइड होता है।

(4) ऑक्सी-अम्ल (Oxy-acids) – Bi को छोड़कर अन्य सभी तत्व ऑक्सी-अम्लों (जैसे- HNO3, H3PO4, H3AsO4, तथा H2SbO4) का निर्माण करते हैं। ऑक्सी-अम्लों का सामर्थ्य तथा स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर घटता है।
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प्रश्न 4.
NH3 हाइड्रोजन बन्ध बनाती है, परन्तु PH3 नहीं बनाती, क्यों?
उत्तर
नाइट्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता (3: O) हाइड्रोजन (2 : 1) से अधिक होती है। अत: N – H आबन्ध ध्रुवीय होता है। इसलिए NH3 में अन्तराआण्विक हाइड्रोजन आबन्ध होते हैं। इसके विपरीत P तथा H दोनों की विद्युत ऋणात्मकता 2 : 1 होती है, इसलिए PH बन्ध ध्रुवीय नहीं होता, अत: इसमें हाइड्रोजन बन्ध नहीं होता है।

प्रश्न 5.
प्रयोगशाला में नाइट्रोजन कैसे बनाते हैं? सम्पन्न होने वाली अभिक्रिया के रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
प्रयोगशाला में अमोनियम क्लोराइड के सममोलर जलीय विलयन की सोडियम नाइट्राइट के साथ अभिक्रिया से नाइट्रोजन बनाते हैं। इस अभिक्रिया में द्विअपघटन के परिणामस्वरूप अमोनियम नाइट्राइट बनता है जो अस्थायी होने के कारण अपघटित होकर डाइनाइट्रोजन गैस बनाता है।
NH4Cl(aq) + NaNO2 (aq) → NH4NO2 (aq) + NaCl (aq)
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प्रश्न 6.
अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन कैसे किया जाता है?
उत्तर
अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन हेबर प्रक्रम से किया जाता है।
N2 (g) + 3H2 (g) [latex]\rightleftharpoons [/latex] 2NH(g), ΔfH = – 46.1 kJ mol-1
शुष्क नाइट्रोजन तथा हाइड्रोजन को 1 : 3 में लेकर उच्च दाब (200 से 300 वायुमण्डल) तथा ताप । (723 K से 773 K) पर Al2O3 मिश्रित आयरन उत्प्रेरक पर प्रवाहित करने पर NH3 प्राप्त होती है। जिसे द्रवित करके तरल रूप में प्राप्त कर लेते हैं।

प्रश्न 7.
उदाहरण देकर समझाइए कि कॉपर धातु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके किस प्रकार भिन्न उत्पाद दे सकती है?
उत्तर
तनु HNO3 कॉपर के साथ अभिक्रिया करके कॉपर नाइट्रेट तथा नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है, जबकि सान्द्र HNO3 कॉपर के साथ अभिक्रिया करके कॉपर नाइट्रेट तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बनाता है।
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प्रश्न 8.
NOतथा N2O5 की अनुनादी संरचनाओं को लिखिए।
उत्तर
(i) NO2 की अनुनादी संरचनाएँ
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(ii) N2O5 की अनुनादी संरचनाएँ
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प्रश्न 9.
HNH कोण का मान, HPH, HAsH तथा HSbH कोणों की अपेक्षा अधिक क्यों होता है?
(संकेत- NH3 में sp3 संकरण के आधार तथा हाइड्रोजन और वर्ग के दूसरे तत्वों के बीच केवल s-p आबंधन के द्वारा व्याख्या की जा सकती है।)
उत्तर
MH3 प्रकार के हाइड्राइडों में केन्द्रीय परमाणु M इलेक्ट्रॉनों के तीन बन्ध युग्मों (bond pairs) तथा एक एकल युग्म (lone pair) से निम्न प्रकार से घिरा रहता है –
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नाइट्रोजन परमाणु का आकार में बहुत छोटे तथा अधिक विद्युत ऋणात्मक होने के कारण NH3 में N परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व का मान अधिकतम होता है। इस कारण बन्ध युग्मों के मध्य अधिकतम प्रतिकर्षण होता है और इस कारण HNH बन्ध कोण का मान अधिकतम होता है। परमाणु आकार में वृद्धि होने के कारण N से Bi की ओर जाने पर M की विद्युत ऋणात्मकता घटती है। फलस्वरूप इलेक्ट्रॉन युग्मों के मध्य प्रतिकर्षण कम हो जाता है। यही कारण है कि NH3 से BiH3 की ओर जाने पर H-M-H बन्ध कोण घटता है।

प्रश्न 10.
R3P = O पाया जाता है जबकि R3N = O नहीं, क्यों (R = ऐल्किल समूह)?
उत्तर
d- ऑर्बिटलों की अनुपस्थिति के कारण, N अपनी सहसंयोजकता को 4 से अधिक करने में और dπ – pπ बन्धों का निर्माण करने में असमर्थ है। इस कारण, यह R3N = O प्रकार के यौगिकों का निर्माण नहीं करता है। इसके विपरीत P के पास d- ऑर्बिटल होते हैं और यह dπ – pπ बहुल बन्ध बनाने में सक्षम है। अत: यह अपनी सहसंयोजकता को 5 तक बढ़ाकर R3P = 0 प्रकार के यौगिक बनाता है।

प्रश्न 11.
समझाइए कि क्यों NH3 क्षारकीय है, जबकि BiH3 केवल दुर्बल क्षारक है?
उत्तर
N परमाणु का आकार (70 pm), Bi के परमाणु आकार (148 pm) की तुलना में काफी कम है। इस कारण NH3 में N परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व का मान BiH3 में Bi पर इलेक्ट्रॉन घनत्व के मान से काफी अधिक होता है। इस कारण BiH3 की तुलना में NH3 अधिक प्रभावशाली ढंग से इलेक्ट्रॉनों के एकल युग्म को दे सकता है। यही कारण है कि BiH3 की तुलना में NH3 अधिक क्षारीय है।

प्रश्न 12.
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाया जाता है तथा फॉस्फोरस P4 के रूप में, क्यों?
उत्तर
छोटे परमाणु आकार तथा अधिक विद्युत ऋणात्मकता के कारण नाइट्रोजन में स्वयं से pπ – pπ बहुल बन्धों को बनाने की प्रबल प्रवृत्ति होती है। इस प्रकार, यह N ≡ N बन्ध का निर्माण कर एक द्वि-परमाणविक अणु (N2 ) के रूप में पाया जाता है। इसके विपरीत, बड़े परमाणु आकार तथा कम विद्युत ऋणात्मकता के कारण फॉस्फोरस में स्वयं से pπ – pπ बहुल बन्धों को बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती है। अत: यह P – P एकल बन्धों को बनाकर एक समचतुष्फलकीय P4 अणु का निर्माण करता है।

प्रश्न 13.
श्वेत फॉस्फोरस तथा लाल फॉस्फोरस के गुणों की मुख्य भिन्नताओं को लिखिए।
उत्तर
श्वेत फॉस्फोरस तथा लाल फॉस्फोरस के गुणों की मुख्य भिन्नताएँ निम्नलिखित हैं –
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श्वेत तथा लाल फॉस्फोरस की संरचनाएँ निम्नवत् होती हैं –
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प्रश्न 14.
फॉस्फोरस की तुलना में नाइट्रोजन श्रृंखलन गुणों को कम प्रदर्शित करती है, क्यों?
उत्तर
शृंखलन का गुण तत्व की बन्ध प्रबलता पर निर्भर करता है। चूंकि N-N बन्ध की प्रबलता (159 kJ mol-1), P-P बन्ध की प्रबलता (212 kJ mol-1) से कम होती है, इसलिए नाइट्रोजन फॉस्फोरस की तुलना में कम श्रृंखलन गुणों को दर्शाती है।

प्रश्न 15.
H3PO3 की असमानुपातन अभिक्रिया दीजिए।
उत्तर
गर्म किये जाने पर H3PO3 निम्न प्रकार से असमानुपातन प्रदर्शित करता है –
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प्रश्न 16.
क्या PCl5 ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों का कार्य कर सकता है? तर्क दीजिए।
उत्तर
PCl5 में P की ऑक्सीकरण अवस्था +5 है जो P की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था है। अतः, यह अपनी ऑक्सीकरण अवस्था को +5 से अधिक प्रदर्शित नहीं कर सकता है, अर्थात् इसे और अधिक ऑक्सीकृत नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार यह अपचायक की भाँति व्यवहार नहीं कर सकता है। इसके विपरीत, यह आसानी से एक ऑक्सीकारक की भाँति व्यवहार कर सकता है क्योंकि यह अपनी ऑक्सीकरण अवस्था को +5 से घटाकर +3 कर सकता है।
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प्रश्न 17.
O, Se, Te तथा Po को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था तथा हाइड्राइड निर्माण के सन्दर्भ में आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में रखने का तर्क दीजिए।
उत्तर
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration)-इन सभी तत्वों का संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान, ns2 np2 (n = 2 से 6 तक) होता है। इससे इन तत्वों को आवर्त सारणी के वर्ग 16 में रखा जाना चरितार्थ होता है।
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(ii) ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state) – इन्हें समीपवर्ती अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए अर्थात् द्विऋणात्मक आयन बनाने के लिए दो अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए इन तत्वों की न्यूनतम ऑक्सीकरण अवस्था -2 होनी चाहिए। ऑक्सीजन विशिष्ट रूप से तथा सल्फर कुछ मात्रा में विद्युत ऋणात्मक होने के कारण -2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। इस वर्ग के अन्य तत्व, 0 तथा S से अधिक विद्युत ऋणात्मक होने के कारण ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करते हैं। चूंकि इन तत्वों के संयोजी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए ये तत्व अधिकतम +6 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित कर सकते हैं। इन तत्वों द्वारा प्रदर्शित अन्य धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ +2 तथा +4 हैं। यद्यपि ऑक्सीजन 4-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण +4 तथा +6 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित नहीं करता, अतः न्यूनतम तथा अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्थाओं के आधार पर इन तत्वों को समान वर्ग अर्थात् वर्ग 16 में रखा जाना पूर्णतया न्यायोचित है।

(iii) हाइड्राइडों का निर्माण (Formation of hydrides) – सभी तत्व अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों में से दो इलेक्ट्रॉनों की हाइड्रोजन के 1s-कक्षक के साथ सहभागिता करके अपने-अपने अष्टक पूर्ण कर लेते हैं। तथा सामान्य सूत्र EH, के हाइड्राइड बनाते हैं; जैसे- H2O, H2S, H2Se. H2Te तथा H2Po, इसलिए सामान्य सूत्र EH2 वाले हाइड्राइड बनाने के आधार पर इन तत्वों को समान वर्ग अर्थात् वर्ग 16 में रखा जाना पूर्णतया न्यायोचित है।

प्रश्न 18.
क्यों डाइऑक्सीजन एक गैस है, जबकि सल्फर एक ठोस है?
उत्तर
ऑक्सीजन pπ – pπ बहुल बन्ध बनाता है। छोटे आकार तथा उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण ऑक्सीजन द्विपरमाणुक अणु (O2) के रूप में पाया जाता है। ये अणु परस्पर दुर्बल वाण्डर वाल्स आकर्षण बलों द्वारा जुड़े रहते हैं जो कमरे के ताप पर अणुओं के संघट्टों द्वारा सरलता से हट जाते हैं। अत: O2 कमरे के ताप पर एक गैस होती है।
सल्फर अपने विशाल आकार तथा कम विद्युत ऋणात्मकता के कारण pπ – pπ बहुल बन्ध नहीं बनाता है, अपितु यह S – S एकल बन्ध बनाते हैं। पुनः O – O एकल बन्धों से अधिक प्रबल S – S बन्धों के कारण सल्फर में श्रृंखलन का गुण ऑक्सीजन से अधिक होता है। अत: सल्फर श्रृंखलन की उच्च प्रवृत्ति तथा pπ – pπ बहुल बन्ध बनाने की अल्प प्रवृत्ति के कारण अष्टपरमाणुक अणु (S8) बनाता है जिसकी संकुचित वलय संरचना (puckered ring structure) होती है। विशाल आकार के कारण S8 अणुओं को परस्पर बाँधे रखने वाले आकर्षण बल पर्याप्त प्रबल होते हैं जिन्हें कमरे के ताप पर अणुओं के संघट्टों द्वारा नहीं हटाया जा सकता है। अत: सल्फर कमरे के ताप पर एक ठोस होता है।
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प्रश्न 19.
यदि O → O तथा O → O2- के इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी मान पता हों, जो क्रमशः 141 तथा 702 kJ mol-1 हैं तो आप कैसे स्पष्ट कर सकते हैं कि O2- स्पीशीज वाले ऑक्साइड अधिक बनते हैं न कि O वाले?
(संकेत-यौगिकों के बनने में जालक ऊर्जा कारक को ध्यान में रखिए।)
उत्तर
O2- मूलक युक्त ऑक्साइडों (अर्थात् MO प्रकार के ऑक्साइड) की जालक ऊर्जा (lattice energy) का मान O2- मूलक युक्त ऑक्साइडों (अर्थात् M2O प्रकार के ऑक्साइड) की जालक ऊर्जाओं से काफी अधिक होता है क्योंकि O2- तथा M2+ पर आवेश की मात्रा अधिक होती है। इसलिए O → O2- की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान O → O के सम्बन्धित मान की तुलना में काफी अधिक होने के बाद भी MO का निर्माण M2O के निर्माण की तुलना में ऊर्जा की दृष्टि से अधिक सम्भाव्य है। यही कारण है कि MO प्रकार के ऑक्साइडों की संख्या M2O प्रकार के ऑक्साइडों की तुलना में काफी अधिक है।

प्रश्न 20.
कौन-से ऐरोसॉल्स ओजोन को कम करते हैं?
उत्तर
क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) ऐरोसॉल जैसे-फ्रियोन (CCl2F2) वायुमण्डल के स्ट्रेटोस्फियर : (stratosphere) में उपस्थित ओजोन पर्त को विच्छेदित करते हैं। निहित अभिक्रियाएँ निम्न हैं –
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प्रश्न 21.
संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 के उत्पादन का वर्णन कीजिए। (2009, 12, 15, 16)
उत्तर
संस्पर्श विधि द्वारा H2SO4 का उत्पादन
(Production of H2SO4 by Contact Process)
सल्फ्यूरिक अम्ल का उत्पादन संस्पर्श प्रक्रम द्वारा तीन चरणों में सम्पन्न होता है।
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  1. सल्फर अथवा सल्फाइड अयस्कों को वायु में जलाकर सल्फर डाइऑक्साइड का उत्पादन करना।
  2. उत्प्रेरक (V2O5) की उपस्थिति में ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कराकर SO2 का SO3 में परिवर्तन करना।
  3. SO3 को सल्फ्यूरिक अम्ल में अवशोषित करके ओलियम (H2S2O7) प्राप्त करना।

सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन का प्रवाह चित्र, चित्र-7 में दिया गया है।
प्राप्त सल्फर डाइऑक्साइड को धूल के कणों एवं आर्सेनिक यौगिकों जैसी अन्य अशुद्धियों से मुक्त कर शुद्ध कर लिया जाता है।
सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में ऑक्सीजन द्वारा SO2 गैस का V2O5 उत्प्रेरक की उपस्थिति में SO3 प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरकी ऑक्सीकरण मूल पद है।
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यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय है एवं अग्र अभिक्रिया में आयतन में कमी आती है। अतः कम ताप और उच्च दाब उच्च लब्धि (yield) के लिए उपयुक्त स्थितियाँ हैं, परन्तु तापक्रम बहुत कम नहीं होना चाहिए अन्यथा अभिक्रिया की गति धीमी हो जाएगी। सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में प्रयुक्त संयन्त्र का संचालन 2 bar दाब तथा 720 K ताप पर किया जाता है। उत्प्रेरकी परिवर्तक से प्राप्त SO3 गैस, सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल,में अवशोषित होकर ओलियम (H2S2O7) बना देती है। जल द्वारा ओलियम का तनुकरण करके वांछित सान्द्रता वाला सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त कर लिया जाता है। प्रक्रम के सतत संचालन तथा लागत में भी कमी लाने के लिए उद्योग में उपर्युक्त दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ सम्पन्न की जाती हैं।

  • SO3 + H2SO4 → H2S2O7
  • H2S2O7 + H2O → 2 H2SO4

संस्पर्श विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल की शुद्धता सामान्यतः 96 – 98% होती है।

प्रश्न 22.
SO2 किस प्रकार से एक वायु प्रदूषक है?
उत्तर
SO2 एक अत्यन्त हानिकारक गैस है। वायुमण्डल में इसकी उपस्थिति से श्वसन रोग, हृदय रोग, गले तथा आँखों में अनेक परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं। यह अम्ल वर्षा (acid rain) का मुख्य कारण है। अम्ल वर्षा जन्तुओं, वनस्पतियों एवं भवनों के लिए अत्यन्त घातक है। अम्ल वर्षा से सम्बन्धित प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्न हैं –

  • SO2 + hv → SO2
  • SO2 + O2 → SO3 + O
  • SO2 + SO2 → SO3 + SO
  • SO + SO2 → SO3 + S
  • SO + H2O → H2SO4

इस प्रकार, SO2 एक घातक वायु प्रदूषक है।

प्रश्न 23.
हैलोजेन प्रबल ऑक्सीकारक क्यों होते हैं?
उत्तर
हैलोजेनों में अल्प आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, उच्च विद्युत ऋणात्मकता तथा अधिक ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित होने की प्रबल प्रवृत्ति होती है।
X + e → X
अत: हैलोजेन प्रबल ऑक्सीकरण कर्मक या ऑक्सीकारक होते हैं। यद्यपि इनकी ऑक्सीकारक क्षमता F2 से I2 तक घटती है जैसा कि इनके इलेक्ट्रोड विभवों से सत्यापित होता है –
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इसलिए F2 प्रबलतम तथा I2 दुर्बलतम ऑक्सीकारक होता है।

प्रश्न 24.
स्पष्ट कीजिए कि फ्लुओरीन केवल एक ही ऑक्सो-अम्ल, HOF क्यों बनाता है?
उत्तर
फ्लोरीन सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्त्व है और केवल -1 ऑक्सीकरण अवस्था ही प्राप्त कर सकती है। इसका परमाणु आकार भी काफी कम होता है। इस कारण यह उच्च ऑक्सी अम्लों जैसे- HOXO, HOXO2 तथा HOXO3 आदि में केन्द्रीय परमाणु के रूप में स्थित नहीं हो पाती है और केवल एक ही ऑक्सी अम्ल HOF का निर्माण करती है। इस अम्ल में इसकी ऑक्सीकरण अवस्था-1 है।

प्रश्न 25.
व्याख्या कीजिए कि क्यों लगभग एकसमान विद्युत ऋणात्मकता होने के पश्चात् भी नाइट्रोजन हाइड्रोजन आबन्ध निर्मित करता है, जबकि क्लोरीन नहीं।
उत्तर
यद्यपि O तथा Cl दोनों की विद्युत ऋणात्मकताओं के मान लगभग समान हैं, तथापि उनके परमाणु आकार काफी भिन्न होते हैं (O = 66 pm, Cl = 99 pm)। इस कारण Cl परमाणु की तुलना में O परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व का मान काफी अधिक होता है। इस कारण ही ऑक्सीजन तो हाइड्रोजन बन्ध बनाने में सक्षम है, लेकिन Cl नहीं।

प्रश्न 26.
ClO2 के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर

  1. ClO2 एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक तथा क्लोरीनीकारक है। अत: इसका उपयोग जल के शुद्धीकरण में किया जाता है।
  2. यह एक उत्कृष्ट विरंजक (bleaching agent) है और इसका उपयोग कागज की लुगदी तथा वस्त्रों के विरंजन में किया जाता है।

प्रश्न 27.
हैलोजेन रंगीन क्यों होते हैं? (2014)
उत्तर
सभी हैलोजेन रंगीन होते हैं। इसका कारण यह है कि इनके अणु दृश्य क्षेत्र में प्रकाश अवशोषित कर लेते हैं जिसके फलस्वरूप इनके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तरों में चले जाते हैं, जबकि शेष प्रकाश उत्सर्जित हो जाता है। हैलोजेनों का रंग वास्तव में इस उत्सर्जित प्रकाश का रंग होता है। उत्तेजन के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा परमाणु आकार के अनुसार F से I तक लगातार घटती है, अतः उत्सर्जित प्रकाश की ऊर्जा F से I तक बढ़ती है। दूसरे शब्दों में, हैलोजेन का रंग F2 से I2 तक गहरा होता जाता है।
उदाहरणार्थ– F2 बैंगनी प्रकाश अवशोषित करके हल्का पीला दिखाई देता है, जबकि आयोडीन पीला तथा हरा प्रकाश अवशोषित करके गहरा बैंगनी रंग का प्रतीत होता है। इसी प्रकार हम Cl2 के हरे-पीले तथा ब्रोमीन के नारंगी-लाल रंग की व्याख्या कर सकते हैं।

प्रश्न 28.
जल के साथ F2 तथा Cl2 की अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
प्रबल ऑक्सीकारक होने के कारण F, जल को 0, या 0; में ऑक्सीकृत कर देता है।

  • 2F2 (g) + 2H2O (l) → 4HF (aq) + O2 (g)
  • 3F2 (g) + 3H2O (l) → 6HF (aq) + O3 (g)

Cl2 जल से क्रिया कर हाइड्रोक्लोरिक तथा हाइपोक्लोरस अम्लों का निर्माण करता है।
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प्रश्न 29.
आप HCl से Cl2 तथा Cl2 से HCl को कैसे प्राप्त करेंगे? केवल अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर

  1. HCl से cl2 :
    • MnO2 (s) + 4HCl (aq) → MnCl2 (aq) + 2H2O (l) + Cl2 (g)
  2. Cl2 से HCl :
    • Cl2 (g) + H2 (g) → 2HCl (g)

प्रश्न 30.
एन-बार्टलेट Xe तथा PtF6 के बीच अभिक्रिया कराने के लिए कैसे प्रेरित हुए?
उत्तर
नील बार्टलेट ने प्रेक्षित किया कि PtF6 की अभिक्रिया O2 से होने पर एक आयनिक ठोस O+2PtF6 प्राप्त होता है।
O2 (g) + PtF(g) → O+2[PtF6]
यहाँ O2, PtF6 द्वारा O+2 में ऑक्सीकृत हो जाता है।

बार्टलेट ने पाया कि Xe की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (1170 kJ mol-1) O2 अणुओं की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (1175 kJ mol-1) के लगभग समान है, इसलिए PtF6 द्वारा Xe को Xe+ में ऑक्सीकृत करना चाहिए। इस प्रकार वे Xe तथा PtF6 के बीच अभिक्रिया कराने के लिए प्रेरित हुए। जब Xe तथा PtF6 को मिश्रित किया गया, तब एक तीव्र अभिक्रिया हुई तथा सूत्र Xe+PtF6 का एक लाल ठोस पदार्थ प्राप्त हुआ।
Xe + PtF6 [latex]\underrightarrow { 278K } [/latex] xe+ [PtF6]

प्रश्न 31.
निम्नलिखित में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्या हैं?
(i) H2PO2
(ii) PCl3
(iii) Ca3P2
(iv) Na3PO4
(v) POF3
उत्तर
माना कि फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था : है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 35

प्रश्न 32.
निम्नलिखित के लिए सन्तुलित समीकरण दीजिए –
(i) जब NaCl को MnO2 की उपस्थिति में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म किया जाता है।
(ii) जब क्लोरीन गैस को NaI के जलीय विलयन में से प्रवाहित किया जाता है।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 36
(ii) Cl(g) + 2NaI (aq) → 2NaCl (aq) + I2 (s)

प्रश्न 33.
जीनॉन फ्लुओराइड XeF2, XeF4 तथा XeF6 कैसे बनाए जाते हैं?
उत्तर
जीनॉन फ्लुओराइडों को Xe तथा F2 के मध्य विभिन्न परिस्थितियों में सीधे अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।

  • Xe (g) + F2 (g) [latex]\underrightarrow { 673K,1bar } [/latex] XeF(s)
  • Xe (g) + 2F2 (g) [latex]\underrightarrow { 873K,7bar } [/latex] XeF4 (s)
  • Xe (g) + 3F2 (g) [latex]\underrightarrow { 573K,60-70bar } [/latex] XeF6 (s)

प्रश्न 34.
किस उदासीन अणु के साथ ClO समइलेक्ट्रॉनी है? क्या यह अणु एक लूइस क्षारक है?
उत्तर
ClO में कुल 17 + 8 + 1 = 26 इलेक्ट्रॉन हैं। यह ClF अणु से समइलेक्ट्रॉनिक है क्योंकि ClF में भी 17 + 9 = 26 इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। ClF एक लूइस बेस की भाँति व्यवहार करता है क्योंकि [latex s=2] _{ . }^{ . }{ { \overset { .. }{ \underset { .. }{ Cl } } } } [/latex] – F में क्लोरीन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के तीन एकल युग्म (lone pairs) उपस्थित हैं। यह पुनः F से क्रिया कर ClF3 बना सकती है।

प्रश्न 35.
XeO3 तथा XeF4 किस प्रकार बनाए जाते हैं?
उत्तर
XeF4 तथा XeF6 के जल-अपघटन पर XeO3 बनता है।

  • 6XeF4 + 12H2O → 4Xe + 2XeO3 + 24HF + 3O2
  • XeF6 + 3H2O → XeO3 + 6HF

जीनॉन तथा फ्लु ओरीन को 1 : 5 अनुपात में लेकर 873 K तथा 7 bar पर अभिक्रिया कराने पर XeF4 बनता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 37

प्रश्न 36.
निम्नलिखित प्रत्येक समुच्चय को सामने लिखे गुणों के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए –

  1. F2, Cl2, Br2, I2 – आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी बढ़ते क्रम में।
  2. HF, HCl, HBr, HI – अम्ल सामर्थ्य बढ़ते क्रम में।
  3. NH3, PH3, AsH3, SbH3, BiH3 – क्षारक सामर्थ्य बढ़ते क्रम में।

उत्तर
1. F2 से I2 तक आबन्ध दूरी बढ़ने पर आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी घटती है क्योंकि F से I की ओर जाने पर परमाणु के आकार में वृद्धि होती है। यद्यपि F-F आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, Cl – Cl की तुलना में कम होती है तथा Br – Br की आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी से भी कम होती है। इसका कारण यह है कि F परमाणु अत्यधिक छोटा होता है तथा प्रत्येक F परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के तीन एकाकी युग्म F2 अणु में F-परमाणुओं को बाँधे रखने वाले आबन्ध युग्मों को प्रतिकर्षित करते हैं। अत: आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी का बढ़ता क्रम इस प्रकार होता है- I2 < F2 < Br2 < Cl2.

2. HF, HCl, HBr, HI की आपेक्षिक अम्ल सामर्थ्य इनकी आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी पर निर्भर करती है। F से I तक परमाणु का आकार बढ़ने पर H-X आबन्ध की आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी H – F से H – I तक घटती है। इसलिए अम्ल सामर्थ्य विपरीत क्रम में इस प्रकार बढ़ता है –
HF < HCl < HBr < HI.

3. NH3, PH3, AsH3, BiH3 में केन्द्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म की उपस्थिति के कारण ये सभी लुईस क्षारों की भाँति व्यवहार करते हैं। यद्यपि NH3 से BiH3 तक जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है, परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म अधिक आयतन घेर लेता है। दूसरे शब्दों में, केन्द्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घटता है तथा क्षारक सामर्थ्य NH3 से BiH3 तेक घटती है, इसलिए क्षारक सामर्थ्य का बढ़ता क्रम है- BiH3 < SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3 .

प्रश्न 37.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक अस्तित्व में नहीं है?

  1. XeOF4
  2. NeF2
  3. XeF2
  4. XeF6.

उत्तर
NeF2 अस्तित्व में नहीं है। इसका कारण यह है कि फ्लोरीन Ne को Ne+2 में ऑक्सीकृत नहीं कर सकता क्योंकि Ne की प्रथम तथा द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के योग का मान Xe की तुलना में काफी अधिक है। इसलिए XeF2, XeOF4, तथा XeF6 प्राप्त किये जा सकते हैं, लेकिन NeF2 नहीं।

प्रश्न 38.
उस उत्कृष्ट गैस स्पीशीज का सूत्र देकर संरचना की व्याख्या कीजिए जो कि इनके साथ समसंरचनीय है –

  1. ICl4
  2. IBr2
  3. BrO3

उत्तर
1. ICl4, XeF4 से समइलेक्ट्रॉनिक है। दोनों वर्ग समतलीय हैं।
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2. IBr2, XeF2 से समइलेक्ट्रॉनिक है। दोनों रेखीय हैं।
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3. BrO3, XeO3 से समइलेक्ट्रॉनिक है। दोनों पिरामिडीय आकृति के होते हैं।
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प्रश्न 39.
उत्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े क्यों होते हैं?
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों की परमाण्विक त्रिज्या अपने सम्बन्धित आवर्गों में सर्वाधिक होती है। इसका कारण यह है कि उत्कृष्ट गैसों की त्रिज्या केवल वाण्डर वाल्स त्रिज्या होती है (क्योंकि ये अणु नहीं बनाती हैं), जबकि अन्यों की सहसंयोजक त्रिज्याएँ होती है। वाण्डर वाल्स त्रिज्या सहसंयोजक त्रिज्या से अधिक होती है, अतः उत्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े होते हैं।

प्रश्न 40.
निऑन तथा आर्गन गैसों के उपयोग सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर
निऑन के उपयोग (Uses of Neon) –

  1. निऑन का उपयोग विसर्जन ट्यूब तथा प्रदीप्त बल्बों में विज्ञापन प्रदर्शन हेतु किया जाता है।
  2. निऑन बल्बों का उपयोग वनस्पति उद्यान तथा ग्रीन हाउस में किया जाता है।

आर्गन के उपयोग (Uses of Argon) –

  1. आर्गन का उपयोग उच्चताप धातुकर्मीय प्रक्रमों में अक्रिय वातावरण उत्पन्न करने के लिए किया जाता है ( धातुओं तथा उपधातुओं के आर्क वेल्डिंग में)।
  2. इसका उपयोग विद्युत-बल्ब को भरने के लिए किया जाता है।
  3. प्रयोगशाला में इसका उपयोग वायु सुग्राही पदार्थों के प्रबन्धन में भी किया जाता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
निम्नलिखित में सर्वाधिक स्थायी है – (2017)
(i) AsH3
(ii) SbH3
(iii) pH3
(iv) NH3
उत्तर
(iv) NH3

प्रश्न 2.
सफेद फॉस्फोरस को किस द्रव में रखते हैं? (2012)
(i) जल
(ii) केरोसीन
(iii) एथिल ऐल्कोहॉल
(iv) क्लोरोफॉर्म
उत्तर
(i) जल

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से किसकी अभिक्रिया से फॉस्फोरस से फॉस्फीन बनाया जाता है? (2017)
(i) HCl
(ii) NaOH
(iii) CO2
(iv) CO2
उत्तर
(ii) NaOH

प्रश्न 4.
अमोनिया और फॉस्फीन गैसों के कौन-से निम्नलिखित गुण में भिन्नता है? (2011)
(i) अणु संरचनाओं में
(ii) क्लोरीन के साथ अभिक्रियाओं में
(iii) अपचायक गुण में
(iv) वायु में जलने में
उत्तर
(iv) वायु में जलने में

प्रश्न 5.
SO2 अणु में सल्फर परमाणु का संकरण है – (2017)
(i) sp
(ii) SP2
(iii) sp3
(iv) sp3d
उत्तर
(ii) sp2

प्रश्न 6.
प्रबल विद्युत ऋणात्मक हैलोजन है – (2017)
(i) F2
(ii) Cl2
(iii) Br2
(iv) I2
उत्तर
(i) F2

प्रश्न 7.
सर्वाधिक इलेक्ट्रॉन बन्धुता वाला तत्त्व है –
(i) N
(ii) 0
(iii) Cl
(iv) F
उत्तर
(iii) Cl

प्रश्न 8.
F, Ci, Br तथा I तत्त्वों के इलेक्ट्रॉन बन्धुता का सही क्रम है – (2016)
(i) F > Cl > Br > I
(ii) I > Br > Cl > F
(iii) F > Br > Cl > I
(iv) F > Cl > Br > I
उत्तर
(i) F > Cl > Br > I

प्रश्न 9.
निम्न में से कौन-सा कथन सही है? (2012)
(i) NO2 नाइट्रिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
(ii) CO फॉर्मिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
(iii) Cl2O3 हाइपोक्लोरस अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
(iv) Cl2O7 परक्लोरिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है
उत्तर
(iv) Cl2O7 परक्लोरिक अम्ल का ऐनहाइड्राइड है

प्रश्न 10.
निम्न में से विस्फोटक है – (2013)
(i) Hg2Cl2
(ii) PCl3
(iii) NCl3
(iv) SbCl3
उत्तर
(iii) NCl3

प्रश्न11.
क्लोरीन का प्रबलतम ऑक्सी अम्ल है – (2016)
(i) HClO2
(ii) HClO4
(iii) HClO
(iv) HClO3
उत्तर
(ii) HClO4

प्रश्न12.
निष्क्रिय गैसों की खोज का श्रेय जाता है – (2012)
(i) रैले को
(ii) विलियम रैमसे को
(iii) जॉनसन को
(iv) डेवार को
उत्तर
(i) रैले को

प्रश्न 13.
वायुमण्डल में सर्वाधिक पायी जाने वाली गैस है – (2017)
(i) हीलियम
(ii) निऑन
(iii) आर्गन
(iv) क्रिप्टन
उत्तर
(iii) आर्गन

प्रश्न14.
निम्न में से कौन-सी गैस वायुयानों के टायरों में भरी जाती है? (2012)
(i) H,
(ii) He
(iii) Np
(iv) Ar
उत्तर
(ii) He

प्रश्न15.
वायुमण्डल में पायी जाने वाली अक्रिय गैस है – (2011)
(i) He तथा Ne
(ii) He, Ne तथा Ar
(iii) He, Ne, Ar तथा Kr
(iv) Rn को छोड़कर सभी
उत्तर
(iv) Rn को छोड़कर सभी

प्रश्न16.
हीलियम का मुख्य स्रोत है – (2012)
(i) वायु
(ii) मोनाजाइट रेत
(iii) रेडियम
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(ii) मोनोजाइट रेत

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अमोनिया की क्लोरीन से क्या अभिक्रिया होती है? (2014)
उत्तर
अमोनिया की क्लोरीन से अभिक्रिया निम्नलिखित दो प्रकार से होती है –

  1. जब अमोनिया आधिक्य में होती है तो N2 तथा NH4Cl प्राप्त होते हैं।
    • 8 NH3 + 3 Cl2 → N2 ↑ + 6 NH4Cl
  2. जब क्लोरीन आधिक्य में होती है तो NCl3 तथा HCl प्राप्त होते हैं।
    • NH3 + 3 Cl2 → NCl3 + 3 HCl

प्रश्न 2.
नाइट्रस अम्ल, ऑक्सीकारक एवं अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक को एक-एक उदाहरण देकर समझाइए। (2010, 12)
उत्तर
नाइट्रस अम्ल अपघटित होकर नवजात ऑक्सीजन देता है
2HNO2 → 2NO ↑ + [O] + H2O
नवजात ऑक्सीजन विभिन्न पदार्थों को ऑक्सीकृत कर देती है। इसके विपरीत यह प्रबल ऑक्सीकारकों के प्रति अपचायक का कार्य भी करती है, क्योंकि यह उनमें नवजात ऑक्सीजन ग्रहण करके स्वयं नाइट्रिक अम्ल में बदल जाती है।
HNO2 + [O] → HNO3
उदाहरण –

  1. ऑक्सीकारक गुण – नाइट्रस अम्ल सल्फर डाइऑक्साइड को सल्फ्यूरिक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देता है।
    • SO2 + 2HNO2 → H2SO4 + 2NO
  2. अपचायक गुण – नाइट्रस अम्ले H2O2 को H2O में अपचयित कर देता है।
    • H2O2 + HNO2 → HNO3 + H2O

प्रश्न 3.
फॉस्फोरस के अपररूप लिखिए। (2017)
उत्तर
फॉस्फोरस के तीन मुख्य अपररूप निम्नवत् हैं –

  1. सफेद या पीला फॉस्फोरस
  2. लाल फॉस्फोरस
  3. काला फॉस्फोरस

प्रश्न 4.
सफेद फॉस्फोरस से लाल फॉस्फोरस कैसे प्राप्त किया जाता है? (2015)
उत्तर
सफेद फॉस्फोरस को निष्क्रिय वातावरण में 240°C ताप पर गर्म करने से वह लाल फॉस्फोरस में बदल जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 41

प्रश्न 5.
फॉस्फोरस के निम्नलिखित ऑक्सी अम्लों के संरचना सूत्र लिखिए – (2017)
(i) हाइपो फॉस्फोरिक अम्ल
(ii) फॉस्फोरिक अम्ल
(iii) ऑर्थों फॉस्फोरिक अम्ल
(iv) पाइरो फॉस्फोरिक अम्ल
उत्तर
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 42

प्रश्न 6.
एक अभिक्रिया लिखिए जिसमें ओजोन अपचायक हो परन्तु स्वयं भी अपचयित होती है – (2017)
उत्तर
ओजोन हाइड्रोजन परॉक्साइड को जल में अपचयित करती है और स्वयं भी अपचयित हो जाती है।
H2O2 + O3 → 2O2 ↑ + H2O

प्रश्न 7.
सल्फर के किन्हीं चार ऑक्सी अम्लों के नाम लिखिए। (2017)
उत्तर

  1. H2SO4 (सल्फ्यूरिक अम्ल)
  2. H2S2O7 (डाइसल्फ्यूरिक अम्ल)
  3. H2S2O3 (थायोसल्फ्यूरिक अम्ल)
  4. H2S2O6 (डाइथायोनिक अम्ल)

प्रश्न 8.
रासायनिक समीकरण देते हुए SO2 की विरंजक क्रिया का कारण समझाइए। (2012, 17)
उत्तर
SO2 अपचयन के आधार पर विरंजक गुण व्यक्त करती है।
SO2 + 2H2O → H2SO4 + 2[H]
रंगीन पदार्थ + [H] → रंगहीन पदार्थ

प्रश्न 9.
जल की अपेक्षा आयोडीन, KI विलयन में क्यों अधिक विलेय है? (2009)
उत्तर
जल के द्वारा आयोडीन का बिल्कुल भी अपघटन नहीं होता है जबकि आयोडीन KI विलयन में घुलकर भूरे रंग का पोटैशियम ट्राइआयोडाइड (KI3) संकर यौगिक बनाती है।
KI + I2 → KI3

प्रश्न10.
सामान्य ताप एवं दाब पर ब्रोमीन एक द्रव है जबकि आयोडीन ठोस। कारण स्पष्ट कीजिए। (2014)
उत्तर
आयोडीन का अणुभार तथा आकार दोनों ब्रोमीन से अधिक हैं चूंकि आयोडीन अणु के मध्य लगने वाला आणविक आकर्षण बल ब्रोमीन की तुलना में अधिक है, इसलिए आयोडीन ठोस तथा ब्रोमीन द्रव है।

प्रश्न 11.
हैलोजनों के दो ऑक्सी अम्लों के संरचना सूत्र लिखिए। (2016, 17)
उत्तर
हैलोजनों के दो ऑक्सी अम्लों के संरचना सूत्र निम्नवत् हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 43

प्रश्न 12.
HCl का क्वथनांक HF से कम क्यों होता है? (2016)
उत्तर
हाइड्रोजन हैलाइडों के क्वथनांक HCl से HI तक बढ़ते हैं। HF का क्वथनांक अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्धन के कारण अपसामान्य रूप से इन सबसे उच्च है।

प्रश्न 13.
उत्कृष्ट प्रैसे क्या होती हैं? उत्कृष्ट गैसों के नाम लिखिए। (2009)
उत्तर
आवर्त सारणी में शून्य वर्ग के तत्त्वों को उत्कृष्ट गैसें कहते हैं, क्योंकि ये तत्त्व रासायनिक रूप से अक्रिय होते हैं। हीलियम, आर्गन, निऑन, रेडॉन, क्रिप्टॉन तथा जीनॉन उत्कृष्ट गैसें हैं।

प्रश्न 14.
अक्रिय गैसों की चार विशेषताएँ/गुण लिखिए। (2009, 10)
उत्तर
अक्रिय गैसों के गुण

  1. ये रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन गैसें हैं।
  2. इनकी अन्तिम कक्षा का विन्यास ns2np6 (हीलियम को छोड़कर) होता है।
  3. इनकी संयोजकता शून्य होती है।
  4. ये एक परमाणुक गैसें हैं, जिनकी विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात (Cp/Cυ) 1.66 होता है।

प्रश्न15.
अक्रिय गैसों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता शून्य क्यों होती है? (2017)
उत्तर
क्योंकि इनके अन्दर और बाहर के सभी कोश पूर्ण रूप से भरे होते हैं।

प्रश्न 16.
उत्कृष्ट गैसें अक्रिय क्यों होती हैं? इनके द्वारा बनाये गये दो यौगिकों के सूत्र लिखिए। (2010, 13, 16)
उत्तर
उत्कृष्ट या अक्रिय गैसों के सभी कक्ष पूर्णतया भरे होने के कारण ये संतृप्त होती हैं और इसी कारण रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं। इन तत्त्वों के आयनन विभव स्थायी इलेक्ट्रॉन कक्ष होने के कारण उच्च होते हैं, अतः ये रासायनिक क्रिया में भाग नहीं लेते हैं। इनके द्वारा बनाये गये दो यौगिक क्रमश: WHe2 व Ar6H2O हैं।

प्रश्न 17.
उत्कृष्ट गैसों के आयनन विभव के मान ऊँचे होते हैं? समझाइए। (2013, 15)
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों के उच्च आयनन विभव इनके छोटे आकार के कारण होते हैं।

प्रश्न 18.
कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि He उत्कृष्ट गैसों में सबसे ज्यादा निष्क्रिय है। (2013)
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों की आयनन ऊर्जाओं का क्रम निम्नवत् होता है –
He > Ne > Ar > Kr > Xe > Rn.
इससे स्पष्ट है कि He की आयनन ऊर्जा सर्वोच्च है। अत: इसमें से इलेक्ट्रॉन निष्कासित करना आसान नहीं है। इसी के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि He उत्कृष्ट गैसों में सबसे ज्यादा निष्क्रिय है।

प्रश्न 19.
He और Ne फ्लोरीन के साथ यौगिक नहीं बनाते हैं क्यों? (2017)
उत्तर
He और Ne के फ्लोरीन के साथ यौगिक न बनाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  1. छोटा आकार
  2. d कक्षक की अनुपस्थिति
  3. उच्च आयनन ऊर्जा

प्रश्न 20.
अक्रिय गैसों में सबसे अधिक यौगिक बनाने वाली अर्थात् सबसे अधिक क्रियाशील गैस का नाम एवं इसके कोई भी दो यौगिकों के सूत्र लिखिए। (2009, 11, 12)
उत्तर
जीनॉन। यौगिक :

  • जीनॉन डाइफ्लुओराइड (XeF2)
  • जीनॉन टेट्राफ्लुओराइड (XeF4)

प्रश्न 21.
हीलियम तथा निऑन के मिश्रण को पृथक् करने की विधि लिखिए। (2011)
उत्तर
हीलियम तथा निऑन के मिश्रण को 180°C पर चारकोल के सम्पर्क में लाने पर He मुक्त हो। जाती है तथा निऑन अधिशोषित हो जाती है। इसको गर्म करने पर निऑन प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 22.
निष्क्रिय वातावरण के लिए किस अक्रिय गैस का प्रयोग किया जाता है और क्यों? (2012)
उत्तर
आर्गन को, क्योंकि यह किसी पदार्थ से क्रिया नहीं करती है।

प्रश्न 23.
रेडॉन की खोज किसने की? इसका किस रोग के उपचार में उपयोग किया जाता है? (2010, 12, 17)
उत्तर
रेडॉन (Rn) की खोज डॉर्न ने की थी। इसका प्रयोग कैंसर के उपचार में किया जाता है।

प्रश्न 24.
88Ra266 से प्राप्त होने वाली अक्रिय गैस का नाम तथा इसका प्रमुख उपयोग लिखिए। (2012)
उत्तर
88Ra266 के रेडियोऐक्टिव विघटन से रेडॉन (Rn) गैस प्राप्त होती है।
88Ra266 → 86Ra222 + 2He4
इसका उपयोग कैंसर के उपचार में तथा रेडियोऐक्टिवता के शोध कार्य में किया जाता है।

प्रश्न 25.
क्लीवाइट खनिज में कौन-सी अक्रिय गैस पाई जाती है? इस गैस का एक उपयोग लिखिए। (2018)
उत्तर
क्लीवाइट खनिज में हीलियम गैस पाई जाती है। यह गैस वायुयान के टायरों में भरी जाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
NF5 नहीं बनता है जबकि PF ज्ञात है। समझाइए। (2014)
उत्तर
नाइट्रोजन (N) 1s2,2s2,2p3 में निम्न ऊर्जा का रिक्त d-कक्षक उपलब्ध नहीं होता है इसलिए नाइट्रोजन अपने अष्टक का प्रसार नहीं कर पाता है अर्थात् अपने वाह्य कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रख सकता है जिसके कारण NF5 नहीं बन पाता है।
चूँकि फॉस्फोरस में निम्न ऊर्जा का रिक्त 3d -कक्षक उपलब्ध है इसलिए यह अपने अष्टक का प्रसार करता है अर्थात् अपने बाह्य कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन रख सकता है जिसके कारण PF5 बनता है।
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PF5 में फॉस्फोरस के पाँच सहसंयोजक हैं तथा फॉस्फोरस के बाह्य कोश में कुल 10 इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न 2.
अमोनिया तथा फॉस्फीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का रासायनिक समीकरण लिखिए तथा सफेद फॉस्फोरस की क्लोरीन से अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण भी लिखिए। (2016)
उत्तर
अमोनिया गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि का रासायनिक समीकरण – प्रयोगशाला में अमोनिया गैस अमोनियम क्लोराइड को बुझे हुए चूने के साथ गर्म करके बनायी जाती है।
2NH4Cl + Ca(OH)2 → CaCl2 + 2NH3 + 2H2O

फॉस्फीन गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि का रासायनिक समीकरण – प्रयोगशाला में फॉस्फीन गैस वायु की अनुपस्थिति में सफेद फॉस्फोरस को सान्द्र कास्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करके बनायी जाती है।
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सफेद फॉस्फोरस की क्लोरीन से अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण – सफेद फॉस्फोरस साधारण ताप पर क्लोरीन गैस में स्वत: जलने लगता है।
P4 + 6Cl2 → 4PCl3
P4 + 10Cl2 → 4PCl5

प्रश्न 3.
फॉस्फीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। इसके दो गुण एवं उपयोग लिखिए। (2009, 10, 12, 13, 16, 17, 18)
उत्तर
प्रयोगशाला में फॉस्फीन को सान्द्र सोडियम हाइड्रॉक्साइड को अक्रिय वातावरण में सफेद फॉस्फोरस के साथ उबालकर प्राप्त करते हैं।
P4 + 3NaOH + 3H2O → 3NaH2PO2 + PH3
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इसके दो प्रमुख गुण निम्नवत् हैं –

  1. यह वायु से भारी तथा जल में अल्प विलेय होती है।
  2. यह विषैली प्रकृति की होती है।

इसके दो प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं –

  1. इसका उपयोग धातुओं के फॉस्फाइड बनाने में किया जाता है।
  2. इसका उपयोग समुद्री यात्राओं में होम्ज सिग्नल के लिए किया जाता है।

प्रश्न 4.
अमोनिया तथा फॉस्फीन के दो रासायनिक विभेदीय परीक्षण लिखिए। (2014)
उत्तर

  1. अमोनिया जलीय कॉपर सल्फेट के साथ गहरा नीला विलयन बनाती है जबकि फॉस्फीन जलीय कॉपर सल्फेट के साथ कॉपर फॉस्फाइड बनाती है।
  2. अमोनिया सान्द्र HCl के साथ सघन श्वेत धूम देती है जबकि फॉस्फीन HCl से क्रिया करके फॉस्फोनियम क्लोराइड बनाती है।

प्रश्न 5.
होम्ज सिग्नल में किस गैस का प्रयोग किया जाता है और कैसे? (2010)
उत्तर
होम्ज सिग्नल में फॉस्फीन गैस का प्रयोग किया जाता है। इस कार्य के लिए कैल्सियम फॉस्फाइड व कैल्सियम कार्बाइड से भरे हुए दो डिब्बे छेद करके समुद्र में डाल दिये जाते हैं। जल के सम्पर्क में आने पर फॉस्फीन तथा ऐसीटिलीन दोनों ही साथ-साथ जलती हैं।

  • Ca3P2 + 6H2O → 3Ca(OH)2 + 2PH3
  • CaC2 + 2H2O → Ca(OH)2 + C2H2 ↑

फॉस्फीन शीघ्र ज्वलनशील होने के कारण ऐसीटिलीन को जला देती है जिससे प्रकाश उत्पन्न होता है तथा दूर से ऐसा लगता है कि समुद्र में आग लग रही है। इस प्रकार से सूचना समुद्री जहाज के चालकों को मिल जाती है।

प्रश्न 6.
डाइऑक्सीजन के विरचन की प्रमुख विधियाँ तथा इसके रासायनिक गुण एवं उपयोग लिखिए। (2016)
उत्तर
विरचन की विधियाँ

  1. ब्रिन विधि – बेरियम ऑक्साइड वायु में 500°C पर गर्म करने पर बेरियम परॉक्साइड में बदल जाता है तथा बेरियम परॉक्साइड 800°C पर गर्म करने से पुन: BaO और O2 में अपघटित हो जाता है।
    • 2 BaO + O2 [latex]\underrightarrow { { 500 }^{ 0 }C } [/latex] 2BaO2
    • 2BaO2 [latex]\underrightarrow { { 800 }^{ 0 }C } [/latex] 2BaO + O2
  2. प्रयोगशाला विधि – प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस पोटैशियम क्लोरेट और मैंगनीज डाइऑक्साइड के मिश्रण को 340°C तक गर्म करके बनायी जाती है।
    UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 47

रासायनिक गुण
ऑक्सीकारक गुण – लगभग सभी तत्त्व ऑक्सीजन से सीधे संयोग करके ऑक्साइड बनाते हैं।

  1. C + O2 → CO2 + ऊष्मा + प्रकाश
  2. S + O2 → SO2 + ऊष्मा + प्रकाश
  3. 4P + SO2 → 2P2O5 + ऊष्मा + प्रकाश
  4. 3Fe + 2O2 → Fe3O4
  5. CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O

उपयोग

  1. ऑक्सीकारक के रूप में
  2. श्वसन में,
  3. रासायनिक उद्योगों में
  4. ऑक्सी-ऐसीटिलीन ज्वाला प्राप्त करने में

प्रश्न 7.
सीमेन्स और हाल्सके ओजोनाइजर द्वारा ओजोन के निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए तथा पोटैशियम फैरोसायनाइड और स्टेनस क्लोराइड पर इसकी अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए। (2016)
उत्तर
सीमेन्स और हाल्सके ओजोनाइजर द्वारा ओजोन का औद्योगिक निर्माण – ओजोन का औद्योगिक निर्माण सीमेन्स और हाल्सके (Siemens and Halske) ओजोनाइजर द्वारा किया जाता है। इस ओजोनाइजर की रचना संलग्न चित्र में प्रदर्शित है। यह ओजोनाइजर लोहे का एक बॉक्स होता है जिसमें काँच या पॉर्सिलेने की कई बेलनाकार नलियाँ होती हैं। इन नलियों में ऐलुमिनियम की छड़े लगी होती हैं। जिनका निचला सिरा काँच की प्लेट पर टिका रहता है। ये छड़े इलेक्ट्रोडों का कार्य करती हैं।

उपकरण को ठण्डा रखने के लिए बेलनाकार नलियों के चारों ओर ठण्डा जल लगातार प्रवाहित किया जाता है। लोहे के बॉक्स को भू-सम्पर्कित करके छड़ों को लगभग 10 हजार वोल्ट के विभव पर रखा जाता है। ओजोनाइजर के निचले भाग से शुद्ध और शुष्क ऑक्सीजन गैस की मन्द धारा ओजोनाईजर में प्रवाहित की जाती है। छड़ों और नलियों के बीच के वलयाकार अन्तराल (annular space) में ऑक्सीजन प्रवेश करती है तथा ऊपर की ओर उठती है और ओजोन में परिवर्तित हो जाती है। बाहर निकलने वाली ओजोनित ऑक्सीजन में ओजोन आयतन से 10% तक होती है।
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ओजोन की पोटैशियम फैरोसायनाइड से अभिक्रिया
यह पोटैशियम फैरोसायनाइड को पोटैशियम फैरीसायनाड में ऑक्सीकृत करती है।
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ओजोन की स्टेनस क्लोराइड से अभिक्रिया
यह स्टैनस क्लोराइड को स्टैनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत करती है।
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प्रश्न 8.
ओजोन एक ऑक्सीकारक एवं अपचायक पदार्थ है। उदाहरणों द्वारा समीकरण देते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। (2012)
उत्तर
ओजोन एक ऑक्सीकारक एवं अपचायक दोनों है। इसे हम निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा समझ सकते हैं –

  1. ऑक्सीकारक गुण – ओजोन जल की उपस्थिति में सल्फर को सल्फ्यूरिक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देती है।
    • S + H2O + 3O3 → H2SO4 + 3O2
  2. अपचायक गुण – ओजोन बेरियम परॉक्साइड को बेरियम मोनोऑक्साइड में अपचयित कर देती है।
    • BaO2 + O3 → BaO + 2O2

प्रश्न 9.
ओजोन की मर्करी, शुष्क आयोडीन तथा स्टैनस क्लोराइड से अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2016)
उत्तर

  1. ओजोन की मर्करी से अभिक्रिया का समीकरण
    ओजोन मर्करी को मयूरस ऑक्साइड में ऑक्सीकृत कर देती है।
    UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 51
  2. ओजोन की शुष्क आयोडीन से अभिक्रिया का समीकरण
    ओजोन शुष्क आयोडीन को पीले रंग के ऑक्साइड (I4O9) में ऑक्सीकृत कर देती है।
    UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 52
  3. ओजोन की स्टैनस क्लोराइड से अभिक्रिया का समीकरण
    ओजोन स्टैनस क्लोराइड को स्टैनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत कर देती है।
    UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 53

प्रश्न 10.
‘सल्फर के अपररूप’ पर टिप्पणी लिखिए। (2016)
उत्तर
सल्फर के अनेक क्रिस्टलीय अपररूप ज्ञात हैं; जैसे- रोम्बिक सल्फर (rhombic sulphur or d-sulphur), मोनोक्लाइनिक सल्फर (monoclinic sulphur or B-sulphur), अमॉरफस सल्फर (amorphous sulphur), कोलॉइडी सल्फर (colloidal sulphur), प्लास्टिक सल्फर (plastic sulphur) आदि। रीम्बिक सल्फर और मोनोक्लाइनिक सल्फर, सल्फर के दो मुख्य अपररूप हैं। रोम्बिक और मोनोक्लाइनिक सल्फर दोनों के क्रिस्टल S8 अणुओं से बने होते हैं किन्तु क्रिस्टलों में अणओं की व्यवस्था में अन्तर होता है। साधारण ताप पर सल्फर का स्थायी रूप रोम्बिक सल्फर है। गर्म करने पर 95.6°C पर रोम्बिक सल्फर धीरे-धीरे मोनोक्लाइनिक सल्फर में बदल जाती है। 95.6°C से ऊपर के किसी ताप से ठण्डा करने पर मोनोक्लाइनिक सल्फर 95.6°C पर पुन: रोम्बिक सल्फर में बदल जाती है।
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95.6°C से नीचे सल्फर का स्थायी रूप रोम्बिक रूप और 95.6°C से ऊपर मोनोक्लाइनिक रूप विद्यमान होता है।

प्रश्न 11.
सल्फर डाइऑक्साइड के निर्माण की प्रयोगशाला विधि का वर्णन कीजिए। इसके ऑक्सीकारक और अपचायक गुण देते हुए इसके उपयोग भी दीजिए। (2016, 17)
उत्तर
प्रयोगशाला विधि – प्रयोगशाला में सल्फर डाइऑक्साइड गैस कॉपर धातु की छीलन को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करके बनाई जाती है।
Cu + 2H2SO4 → CuSO4 + 2H2O + SO2
ऑक्सीकारक गुण – सल्फर डाइऑक्साइड अनेक क्रियाओं में ऑक्सीकारक का कार्य करती हैं; जैसे-

  1. H2S का S में ऑक्सीकरण
    • 2H2S + SO2 → 3S + 2H2O
  2. आयरन का फेरस ऑक्साइड में ऑक्सीकरण
    • 3Fe + SO2 → 2FeO + FeS

अपचायक गुण – सल्फर डाइऑक्साइड अनेक क्रियाओं में अपचायक का कार्य करती हैं; जैसे-

  1. K2Cr2O7 का Cr2(SO4)3 में अपचयन
    • K2Cr2O7 + H2SO4 + 3SO2 → K2SO4 + Cr2(SO4)3 + H2O
  2. Cl को HCl में अपचयन
    • Cl2 + 2H2O + SO2 → H2SO4 + 2HCl

उपयोग

  1. ऑक्सीकारक के रूप में
  2. अपचायक के रूप में
  3. कीटाणु और रोगाणुनाशक के रूप में
  4. चीनी उद्योग में

प्रश्न 12.
सीसा कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए। संयंत्र के प्रत्येक भाग में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी दीजिए। (2016, 18)
उत्तर
सीसा कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करने में सल्फर डाइऑक्साइड, वायु और नाइट्रिक ऑक्साइड (उत्प्रेरक) मिश्रण के भाग से क्रिया कराने पर सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त होता है।
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इस विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करने में प्रयुक्त संयंत्र संलग्न चित्र में प्रदर्शित है। इस संयंत्र के गुणक भाग और उनमें होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण निम्नवत् हैं –
1. पाइराइट बर्नर

  • 4FeS2 + 11O2 → 2Fe2O3 + 8SO2
  • S +O2 → SO2

2. धूल कक्ष – पाइराइट बर्नर में प्राप्त सल्फर डाइऑक्साइड गैस और वायु के मिश्रण को धूल कक्ष में भेजा जाता है। इस कक्ष में गैसीय मिश्रण भाप के सम्पर्क में आता है और उसमें उपस्थित धूल के कण भारी होकर कक्ष की पेंदी में बैठ जाते हैं।
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3. नाइटर पात्र 
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4. ग्लोवर टावर 

  • SO2 + NO2 + H2O → H2SO4 + NO
  • 2(NO . HSO4) + H2O → 2H2SO4 + NO2 + NO

5. सीसा कक्ष 

  • 2SO2 + O2 + 2NO + 2H2O → 2H2SO4 + 2NO

6. गे-लुसैक टावर

  • 2H2SO4 + NO + NO2 → 2(NO . HSO4) + H2O

प्रश्न 13.
सल्फ्यूरिक अम्ल एक ऑक्सीकारक एवं निर्जलीकारक है। इसके एक-एक उदाहरण दीजिए। (2009, 10, 11, 12, 16, 18)
उत्तर
1. ऑक्सीकारक गुण – गर्म करने पर सान्द्र H2SO4 अपघटित होकर ऑक्सीजन परमाणु देता है और ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
H2SO4 → SO2 + H2O + O

(i) HBr तथा HI को क्रमश: Br2 और I2 में ऑक्सीकृत कर देता है।

  • 2HBr + H2SO4 → Br2 ↑ + SO2 ↑ + 2H2O
  • 2HI + H2SO4 → I2 ↑ + SO2 ↑ + 2H2O

(ii) कार्बन को CO2 में तथा सल्फर को SO2 में ऑक्सीकृत करता है।

  • C + 2 H2SO4 → CO2 ↑ + 2SO2 ↑ + 2H2O
  • S + 2 H2SO4 → 3SO2 ↑ + 2H2O

2. निर्जलीकारक गुण – यह कार्बनिक यौगिकों; जैसे–चीनी, फॉर्मिक अम्ल तथा ऑक्लैलिक अम्ल से जल का शोषण कर लेता है। अतः चीनी काली पड़ जाती है।
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प्रश्न 14.
क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन के फ्लोरीन से बने किन्हीं चार अन्तरा हैलोजन यौगिकों के बनाने का रासायनिक समीकरण दीजिए। (2016)
उत्तर
अन्तरा हैलोजन यौगिक दो भिन्न हैलोजनों के सीधे संयोग द्वारा या निम्न अन्तरा हैलोजन यौगिक की हैलोजन से क्रिया द्वारा बनाए जाते हैं।

  • Cl2 + F2 [latex]\underrightarrow { { 250 }^{ 0 }C } [/latex] 2ClF
  • Cl2 + 3F2 (आधिक्य) [latex]\underrightarrow { { 500 }^{ 0 }C } [/latex] 2ClF3
  • Br2 + 5F2 (आधिक्य) [latex]\underrightarrow { { 500 }^{ 0 }C } [/latex] 2BrF5
  • IF5 + F2 → IF7

प्रश्न 15.
अन्तरा हैलोजन यौगिक क्या हैं? उदाहरण द्वारा समझाइए। AB3 प्रकार के क्लोरीन तथा फ्लोरीन के अन्तरा हैलोजन यौगिक बनाने का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2014, 16)
या
ClF3 के बनाने की विधि का ताप तथा दाब की परिस्थितियों को दिखाते हुए रासायनिक समीकरण लिखिए। (2017)
उत्तर
दो भिन्न हैलोजन परमाणु X तथा X’ से बने यौगिक अन्तरा हैलोजन यौगिक कहलाते हैं। इनका सामान्य सूत्र XX’ और XX’n है। (जहाँ n = 3 से 7 तक)
IF को छोड़कर सभी XX’ प्रकार के अन्तराहैलोजन यौगिक बनाये गए हैं।
AB3 प्रकार के क्लोरीन तथा फ्लोरीन के अन्तरा हैलोजन यौगिक
Cl2 + 3F2 [latex]\underrightarrow { { 300 }^{ 0 }C } [/latex] 2ClF3

प्रश्न16.
आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों के स्थान की विवेचना कीजिए। (2015)
उत्तर
आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों को दायीं ओर शून्य समूह (वर्ग-18) में रखा गया है। इन तत्त्वों को इनके गुणों में समानता होने के कारण एक साथ रखा गया है। He को छोड़कर सभी अक्रिय गैसों के बाह्य कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। रेडॉन को छोड़कर सभी अक्रिय गैसें वायुमण्डल में मौजूद हैं। आन्तरिक और बाह्य सभी कोश पूर्ण होने के कारण ये रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं। अत: इन्हें अक्रिय गैस कहा जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर नाइट्रोजन वर्ग (पाँचवे वर्ग) के तत्त्वों की आवर्त सारणी में स्थिति की विवेचना कीजिए। (2009, 10, 11, 12, 15)
उत्तर
नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, आर्सेनिक, ऐण्टिमनी तथा बिस्मथ को आवर्त सारणी के V-A उपसमूह में रखा गया है। इन तत्त्वों को नाइट्रोजन परिवार के तत्त्व कहते हैं। इन्हें प्रायः निक्टोजन (Pnictogen) भी कहते हैं। ये तत्त्व p-ब्लॉक के तत्त्व हैं। इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न प्रकार है –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 59
सभी तत्त्वों के बाहरी कोश में 5 इलेक्ट्रॉन हैं और बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास nsnp3 है। भीतर के सभी उपकोश पूर्ण हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता होने के कारण इनको एक ही उपसमूह में रखा जाना उचित है।
इनके गुणों में समानता तथा उनमें क्रमिक परिवर्तन तत्त्वों को एक ही उपवर्ग में रखे जाने की पुष्टि करते हैं।
गुणों में समानता

  1. इन तत्त्वों की मुख्य संयोजकता 3 तथा 5 है।
  2. ये (N2 को छोड़कर) स्वतन्त्र अवस्था में नहीं पाये जाते हैं।
  3. N2 के अतिरिक्त सभी ठोस हैं।
  4. N2 को छोड़कर सभी अपररूपता प्रदर्शित करते हैं।
  5. ये सभी हाइड्राइड बनाते हैं और सभी सहसंयोजक यौगिक हैं; जैसे- NH3, PH3, AsH3, SbH3 तथा BiH3.
  6. ये सभी बहु-परमाणुकता प्रकट करते हैं।
  7. ये सभी M2O3 तथा M2O5 प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं। नाइट्रोजन N2O, NO, NO2 प्रकार के भी ऑक्साइड बनाती है।
  8. ये सभी MX3 प्रकार के हैलाइड बनाते हैं, जिनका जल-अपघटन हो जाता है।
    • NCl3 +3 H2O → NH3 ↑ + 3HOCl
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गुणों में क्रमिक परिवर्तन – परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ ऊपर से नीचे की ओर चलने पर

  1. परमाणु त्रिज्या तथा इलेक्ट्रॉन बन्धुता बढ़ती है।
  2. आयनन विभव तथा ऋण-विद्युतता घटती है।
  3. धात्विक लक्षण बढ़ता है।
    • UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 62
  4. इनके क्वथनांक तथा घनत्व क्रमशः बढ़ते हैं।
  5. इनके ऑक्साइडों का अम्लीय लक्षण घटता है।
    • UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 63
  6. जबकि नाइट्रोजन के ऑक्साइडों में अम्लीय प्रकृति का क्रम इस प्रकार है –
    • N2O < NO < N2O3 < N2O4 < N2O5
  7. हाईड्राइडों का स्थायित्व घटता है, विषैलापन बढ़ता है और क्षारीय गुण घटता है, जबकि अम्लीय गुण बढ़ता है।
    • UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 64
  8. इनके गलनांक व क्वथनांक NH3 से SbH3 तक घटते हैं, जबकि अपचायक क्रम इस प्रकार है –
    • BiH3 > SbH3 > AsH3 > PH3
  9. इन सभी में sp3 -संकरण होता है और पिरेमिड ज्यामिति होती है, परन्तु बन्ध कोण NH3 से BiH तक घटता है।
  10. इनके ऑक्सी-अम्लों की प्रबलता घटती है।
    • HNO3 > H3PO4 > H3AsO4 > H3SbO4 > H3BiO4
  11. इनके हैलाइडों का स्थायित्व N से Bi तक बढ़ता है तथा वाष्पशीलता घटती है। अतः ये ट्राइहैलाइड बनाते हैं।
    • UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 65

नाइट्रोजन को छोड़कर अन्य सभी तत्त्व पेण्टाहैलाइड भी बनाते हैं।

प्रश्न 2.
हेबर विधि द्वारा अमोनिया के औद्योगिक निर्माण का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए। इसके दो प्रमुख गुण एवं दो उपयोग लिखिए। इस विधि में ला-शातेलिए नियम का क्या महत्त्व है ? (2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 17)
उत्तर
हेबर विधि का सिद्धान्त–यदि शुद्ध नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के 1 : 3 अनुपात के मिश्रण को गर्म किया जाए तो अमोनिया बनती है।
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यह एक ऊष्माक्षेपी उत्क्रमणीय अभिक्रिया है और क्रिया के पश्चात् आयतन में कमी होती है, इसलिए ला-शातेलिए के नियमानुसार कम ताप और अधिक दाब पर अमोनिया अधिक उत्पन्न होगी। कम ताप पर अभिक्रिया का वेग बढ़ाने के लिए एक उत्प्रेरक प्रयोग किया जाता है। इस अभिक्रिया का उत्प्रेरक की उपस्थिति में अनुकूलतम ताप 450°-500°C तथा उच्च दाब 200 वायुमण्डल है; क्योंकि अभिक्रिया उत्क्रमणीय है, इसलिए अमोनिया को बराबर क्रिया क्षेत्र से हटाने के बाद, अमोनिया गैस अधिक बनेगी। इस अभिक्रिया में लोहे का बारीक चूर्ण (उत्प्रेरक) तथा मॉलिब्डेनम (उत्प्रेरक वर्धक) की सूक्ष्म मात्रा प्रयुक्त होती है। इसमें गैसीय मिश्रण शुद्ध होना चाहिए जिससे उत्प्रेरक विषाक्त न हो।
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विधि- शुद्ध N2 तथा H2 को 1 : 3 अनुपात में मिलाकर 200 वायुमण्डल दाब पर तप्त लोहे के बारीक चूर्ण (उत्प्रेरक) को, जिसमें मॉलिब्डेनम (उत्प्रेरक वर्धक) मिला होता है, 500°C ताप पर गर्म करते हैं। इस विधि में 10 – 15% अमोनिया बनती है, जिसे संघनित्र में प्रवाहित करके द्रवित कर लेते हैं। शेष गैसों को फिर से उत्प्रेरक कक्ष में प्रवाहित करते हैं जिससे N2 व H2 के संयोजन द्वारा NH3 का लगातार उत्पादन होता रहता है।
रासायनिक गुण
1. क्षारीय गुण – यह क्षारीय गैस है तथा लाल लिटमस को नीला कर देती है। यह अम्लों से क्रिया करके लवण बनाती है।
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2. धातु ऑक्साइडों का अपचयन – यह धातु ऑक्साइडों को अपचयित कर देती है।
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उपयोग

  1. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में।
  2. बर्फ बनाने तथा कोल्ड स्टोरेज में प्रशीतक के रूप में; क्योंकि इसके वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 327 कैलोरी/ग्राम (उच्च) होती है।

प्रश्न 3.
प्रयोगशाला में नाइट्रस ऑक्साइड बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। नाइट्रस ऑक्साइड के दो प्रमुख रासायनिक गुण एवं दो उपयोग लिखिए। (2009, 11)
उत्तर
प्रयोगशाला में नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) को सोडियम नाइट्रेट तथा अमोनियम सल्फेट के मिश्रण को अथवा केवल अमोनियम नाइट्रेट को गर्म करके बनाया जाता है।
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अमोनियम सल्फेट व सोडियम नाइट्रेट के मिश्रण को एक गोल पेंदे के फ्लास्क में लेकर गर्म किया जाता है। इस क्रिया से N2O बनती है, जिसमें Cl2, NO व NH3 की अशुद्धियाँ होती हैं। अत: इस गैस को क्रमशः NaOH विलयन, FeSO4 विलयन व सान्द्र H2SO4 में से प्रवाहित किया जाता है जहाँ क्रमशः Cl2, NO व NH3 एवं जल-वाष्प आदि अशुद्धियाँ अवशोषित हो जाती हैं। N2O ठण्डे जल में अत्यन्त विलेय है; अतः इसे गर्म पानी के ऊपर गैस जार में एकत्रित कर लेते हैं।
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रासायनिक गुण

  1. सोडामाइड से अभिक्रिया होने पर सोडियम ऐजाइड बनता है।
    • NaNH2 + N2O → NaN3 + H2O
  2. KMnO4 इसको नाइट्रिक ऑक्साइड में ऑक्सीकृत कर देता है।
    • N2O + [O] [latex]\xrightarrow [ { KMnO }_{ 4 } ]{ { H }_{ 2 }{ SO }_{ 4 } } [/latex] 2NO ↑

उपयोग

  1. ऑक्सीजन के साथ इसका मिश्रण दाँतों की शल्य चिकित्सा (dental surgery) में निश्चेतक (anaesthetic) के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  2. सोडियम ऐजाइड बनाने में।

प्रश्न 4.
ओस्टवाल्ड विधि द्वारा नाइट्रिक अम्ल के औद्योगिक निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए। सम्बन्धित अभिक्रियाओं का समीकरण दीजिए। तनु नाइट्रिक अम्ल (20%) की लेड पर अभिक्रिया लिखिए। (2011, 14, 15, 16, 17)
या
अमोनिया से नाइट्रिक अम्ल के निर्माण की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए तथा अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी दीजिए। Cu पर इस अम्ल की क्रिया किस प्रकार होती है? यदि अम्ल (i) गर्म और सान्द्र हो (ii) ठण्डा और तनु हो। सभी अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। (2009, 11, 13)
उत्तर
ओस्टवाल्ड विधि- इसमें अमोनिया गैस वायु से ऑक्सीकृत होकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाती है जो फिर ऑक्सीकृत होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड देती है। यह जल से क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल में परिवर्तित हो जाती है।

  • 4NH3 + 5O2 [latex]\underrightarrow { Pt } [/latex] 4NO + 6H2O
  • 2NO + O2 → 2NO2
  • 3NO2 + H2O → 2HNO3 + NO ↑

शुद्ध NH3 व वायु का मिश्रण 1 : 9 के अनुपात में परिवर्तक में प्रवाहित किया जाता है। यहाँ प्लेटिनम की जाली 650° – 800°C पर गर्म रखी जाती है जो उत्प्रेरक का कार्य करती है। यहाँ NH3 का 90% भाग ऑक्सीकृत होकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है। अब गैसों का मिश्रण ऑक्सीकारक स्तम्भ में पहुँचाया जाता है, जहाँ NO ऑक्सीकृत होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड देती है। NO2 अवशोषण स्तम्भ में जल में अवशोषित होकर नाइट्रिक अम्ल बनाती है।
इस प्रकार प्राप्त नाइट्रिक अम्ल तनु होता है। इसका आसवन करने पर एक निश्चित क्वथनांक का मिश्रण प्राप्त होता है, जिसे साधारण सान्द्र नाइट्रिक अम्ल कहते हैं।
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तनु नाइट्रिक अम्ल की लेड पर अभिक्रिया– इस अभिक्रिया के फलस्वरूप लेड नाइट्रेट, NO व जल बनता है।
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Cu पर क्रिया

  1. गर्म और सान्द्र HNO3 कॉपर से क्रिया करके Cu (NO3)2, N2 और जल देता है।
    • 5Cu + 12HNO3 → 5Cu (NO3)2 + N2 ↑ + 6H2O
  2. ठण्डा और तनु HNO, कॉपर से क्रिया करके Cu(NO3)2 N2O और जल देता है।
    • 4Cu + 10HNO3 → 4Cu (NO3)2 + N2O ↑ + 5H2O

प्रश्न 5.
हड्डी की राख से फॉस्फोरस प्राप्त करने की आधुनिक विधि का वर्णन कीजिए। फॉस्फोरस से फॉस्फीन गैस कैसे बनाओगे? (2009, 10, 11)
उत्तर
हड्डियों की राख या खनिज कैल्सियम फॉस्फेट [Ca3(PO4)2] को कोक एवं रेत के साथ मिलाकर हॉपर मार्ग से पेचदार चालक की सहायता से विद्युत भट्ठी में गिराते हैं। इस भट्ठी में दो कार्बन इलेक्ट्रोड होते हैं जिनके बीच विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है। जिसके फलस्वरूप 1500°C ताप उत्पन्न हो जाता है। सर्वप्रथम कैल्सियम फॉस्फेट [Ca3(PO4)2], रेत (SiO2) के साथ क्रिया कर कैल्सियम सिलिकेट (CaSiO3) और फॉस्फोरस पेन्टॉक्साइड (P2O5) बनाता है। फिर P2O5 कार्बन द्वारा अपचयित होकर फॉस्फोरस की वाष्प देता है। यह वाष्प ऊपर के द्वार से निकलकर जल में ठोस रूप में एकत्रित हो जाती है। कैल्सियम सिलिकेट (धातुमल) नीचे के द्वार से निकाल लिया जाता है।
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2P2O5 + 10C → P4 + 10CO ↑

शुद्धिकरण– इस प्रकार प्राप्त फॉस्फोरस में कुछ अशुद्धियाँ होती हैं। इनको पृथक् करने के लिए एक टैंक में अशुद्ध फॉस्फोरस को क्रोमिक अम्ल (K2Cr2O7 + सान्द्र H2SO4) में डालकर पिघलाते हैं। इससे अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर मल के रूप में द्रव के ऊपर तैरने लगती हैं और फॉस्फोरस एक निर्मल और रंगहीन द्रव के रूप में टैंक के पेंदे में बैठ जाता है। पिघले हुए फॉस्फोरस को एक लम्बी नली में से प्रवाहित करते हैं जिसमें वह ठण्डा होकर जम जाता है। नली में जल डालकर ठोस फॉस्फोरस को जल में एकत्रित करते हैं।
फॉस्फोरस से फॉस्फीन गैस बनाना – फॉस्फोरस को निष्क्रिय वातावरण में NaOH के सान्द्र विलयन के साथ गर्म करने पर फॉस्फीन गैस बनती है।
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प्रश्न 6.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में ऑक्सीजन एवं सल्फर तत्त्वों की स्थिति की विवेचना कीजिए। (2010)
या
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में ऑक्सीजन परिवार (VI-A वर्ग के तत्त्वों) के तत्त्वों की स्थिति की विवेचना कीजिए। (2012)
उत्तर
मेंडलीव की आवर्त सारणी के VI-A समूह में पाँच तत्त्व हैं। तत्त्वों का यह परिवार ‘ऑक्सीजन परिवार’ कहलाता है। इस समूह के प्रथम चार तत्त्वों को सामूहिक रूप में ‘कैल्कोजन’ (chalcogen) के रूप में पुकारा जाता है। इस समूह में परमाणु भार की वृद्धि के साथ धात्विक या धन विद्युतीय गुण बढ़ता है तथा घनत्व, क्वथनांक और गलनांक में वृद्धि होती है। इस समूह में O, S अधातु हैं, जबकि Se व Te उपधातुएँ हैं और Po धातु है।
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रासायनिक गुणों में ऑक्सीजन, परिवार के अन्य तत्त्वों से भिन्न है, परन्तु अन्य सभी तत्त्वों के गुणों में समानता पाई जाती है।

  1. 1. ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम परमाणु के बाह्यतम संयोजी कक्ष में 6 इलेक्ट्रॉन हैं।UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 77
    अतः इन तीनों तत्त्वों के परमाणु रासायनिक अभिक्रिया में अन्य परमाणुओं से 2 इलेक्ट्रॉन लेकर अथवा 2 इलेक्ट्रॉन के जोड़े साझा करके अपनी बाह्यतम कक्ष में अधिकतम इलेक्ट्रॉन (8) प्राप्त करने हेतु संयोग करते हैं।
  2. तीनों ही अधातु हैं (Se धात्विक गुण भी रखती है) जो प्रकृति में स्वतन्त्र व संयुक्त अवस्था में पाये जाते है।
  3. तीनों समान यौगिक बनाते हैं।
    • CO2, H2O, P2O5, As2O5,
    • SO2, H2S, P2S5, As2S5,
    • SeO2, H2Se, P2Se3,
    • C2H2OH तथा C2H2SH; C2H2-O-C2H5 तथा C2H5-S-C2H5
  4. तीनों ही हाइड्रोजन के साथ संयोग कर लेते हैं।
    • H2O, H2S, H2S3, H2Se,
    • H2O2, H2S2, H2S4
  5. तीनों ही RO2 प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं; जैसे- O3,SO2, SeO2 आदि। O3 ऑक्सीजन का ऑक्साइड माना जाता है।
  6. तीनों ही कार्बन के साथ संयोग करके क्रमश: CO2, CS2 व CSe2 बनाते हैं।
  7. तीनों ही अपररूपती प्रदर्शित करते हैं।
  8. तीनों तत्त्व ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम शृंखलन गुण भी व्यक्त करते हैं।
  9. धातु से क्रिया– ये Na, Cu, Zn, Fe आदि धातुओं के साथ क्रिया करके क्रमश: ऑक्साइड, सल्फाइड व सेलिनाइड बनाते हैं।
  10. ऑक्साइड व ऑक्सी अम्ल– ये तत्त्व ऑक्सीजन से संयोग करके डाई ऑक्साइड बनाते हैं। (सल्फर ट्राइ ऑक्साइड) भी बनाते हैं; जैसे- SO2, SeO2 आदि। ये जल में घुलकर ऑक्सी अम्ल बनाते हैं।
    • SO2 + H2 → H2SO3
    • SeO2 + H2O → H2SeO3
      इनकी प्रबलता का क्रम H2SO3 > H2SeO3 है।

अतः स्पष्ट है कि ऑक्सीजन, सल्फर व सेलीनियम तीनों को ही आवर्त सारणी के षष्ठम् समूह में एक साथ रखना औचित्यपूर्ण है।

प्रश्न 7.
शुद्ध ओजोन किस प्रकार प्राप्त करते हैं? Sncl2, FeSO2 और KI के साथ इसकी अभिक्रियाएँ लिखिए। (2009, 11, 14)
या
ओजोन बनाने की प्रयोगशाला विधि का वर्णन कीजिए। प्रयुक्त उपकरण का नामांकित रेखाचित्र दीजिए तथा इसके दो ऑक्सीकारक गुण दीजिए। समीकरण भी लिखिए। (2011, 13)
या
ब्रॉडी के ओजोनाइजर द्वारा ओजोन बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। इसके दो मुख्य उपयोग भी लिखिए। (2009)
या
ब्रॉडी ओजोनाइजर का नामांकित चित्र बनाइए। (2018)
उत्तर
प्रयोगशाला में ओजोन, ऑक्सीजन के नीरव विद्युत विसर्जन विधि द्वारा प्राप्त की जाती है।
3O2 → 2O3
नीरव विद्युत विसर्जन के लिए सीमेन्स का ओजोनाइजर या ब्रॉडी का ओजोनाइजर प्रयोग किया जाता है।
ब्रॉडी का ओजोनाइजर – यह एक U आकार की नली का बना होता है जिसका एक सिरा काफी चौड़ा होता है। इस सिरे में एक पतली परखनली को डालकर ऊपर वाले भाग को बन्द कर दिया जाता है। परखनली में तनु H2SO4 भरा होता है और उसमें एक प्लेटिनम का तार लटका देते हैं। सारे उपकरण को तनु H2SO4 में रखते हैं। इस बर्तन में भी एक प्लेटिनम का तार लटका देते हैं। प्लेटिनम के दोनों इलेक्ट्रोडों को चित्रानुसार प्रेरण कुण्डली से जोड़ देते हैं। नली में शुष्क ऑक्सीजन प्रवाहित करते हैं, जिससे 25% ओजोन प्राप्त होती है।
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ऑक्सीकारक गुण

  1. 1. यह स्टेनस क्लोराइड को तनु HCl की उपस्थिति में स्टेनिक क्लोराइड में ऑक्सीकृत कर देती है।
    • 3SnCl2 +6HCl +O3 → 3SnCl4 +3H2O
  2. 2. यह फेरस सल्फेट को तनु H2SO4 की उपस्थिति में फेरिक सल्फेट में ऑक्सीकृत कर देती है।
    • 2FeSO2 + O3 + H2SO4 → Fe2(SO4)3 + H2O + O2
  3. KI विलयन में प्रवाहित करने पर I2 में ऑक्सीकृत कर देती है।
    • 2KI + H2O + O3 → 2KOH + I2 ↑ + O2

उपयोग

  1. प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में।
  2. जीवाणुनाशक के रूप में।

प्रश्न 8.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर क्लोरीन, ब्रोमीन एवं आयोडीन की आवर्त सारणी में स्थिति स्पष्ट कीजिए (2010)
या
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में हैलोजनों की स्थिति की विवेचना कीजिए। (2010, 12)
उत्तर
क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन को फ्लोरीन तथा ऐस्टैटीन के साथ आवर्त सारणी के VIIA उप-समूह में रखा गया है। VIIA के प्रथम चार तत्त्वों (F, CI, Br, I) को हैलोजन कहते हैं। ‘हैलोजन’ शब्द की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों ‘हैल्स’ (Hals) तथा ‘जेन्स’ (Genes) से हुई है, जिसका अर्थ है-समुद्री लवण पैदा करने वाला। ये सभी तत्त्वे अपने लवण के रूप में समुद्री जल में पाये जाते हैं। इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 79
इन सभी तत्त्वों के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं और बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 np5 है तथा भीतर के सभी कोश पूर्ण हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता होने के कारण इनके गुणों में समानता है और उनमें क्रमिक परिवर्तन पाया जाता है।
गुणों में समानता

  1. ये वैद्युत संयोजकता (-1) तथा सह-संयोजकता दोनों ही प्रकट करते हैं।
  2. इनकी वाष्प रंगीन तथा तीक्ष्ण गन्ध वाली होती है।
  3. गैसीय अवस्था में ये द्वि-परमाणुक होते हैं।
  4. सभी प्रारूपिक अधातु हैं।
  5. हाइड्रोजन से सीधा संयोग कर हाइड्रो अम्ल बनाते हैं; जैसे- HCl, HBr, HI
  6. इनकी धातुएँ वाष्प में जलकर हैलाइड बनाती हैं।
    • 2Na + Cl2 → 2NaCl
    • Mg + Br2 → MgBr2
  7. Cl2 तथा Br2 जल के साथ क्रिया कर O2 निकालती है।
    • 2Cl2 + 2H2O → 4HCl + O2
  8. Cl2, Br2,I2, ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
  9. ये तत्त्व वैद्युत तथा ऊष्मा के कुचालक होते हैं।
  10. क्षारों के साथ समान रूप से क्रिया करते हैं।
  11. सभी प्रबल ऑक्सीकारक हैं।
    • H2S + Cl2 → 2HCl + S
    • SO2 + Cl2 + 2H2O → 2HCl + H2SO4
  12. सभी अम्लीय ऑक्साइड बनाते हैं।

गुणों में क्रमिक परिवर्तन – परमाणु संरचना तथा गुणों की समानता से स्पष्ट है कि इन तत्त्वों को एक ही समूह में रखना न्यायोचित है। इसके अतिरिक्त तत्त्वों के गुणों में श्रेणीबद्ध परिवर्तन परमाणु क्रमांक के परिवर्तन पर निर्भर करता है तथा किसी समूह में तत्त्वों की विभिन्न स्थानों पर स्थिति का निर्णायक भी है। इन तत्त्वों के गुणों में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर श्रेणीबद्ध परिवर्तन इस प्रकार हैं –

  1. तत्त्वों की अवस्था में क्रमिक परिवर्तन होता है; जैसे- क्लोरीन गैस है, ब्रोमीन द्रव तथा आयोडीन ठोस है।
  2. गैसों का रंग गहरा होता जाता है। अत: फ्लोरीन हल्की पीली है, क्लोरीन हरी-पीली, ब्रोमीन लाल-भूरी तथा आयोडीन वाष्प गहरी बैंगनी है।
  3. इनकी क्रियाशीलता घटती है।
  4. इनका ऑक्सीकारक स्वभाव भी घटता है।
  5. क्वथनांक बढ़ते हैं तथा आपेक्षिक ताप घटते हैं।
  6. परमाणु त्रिज्याएँ बढ़ती हैं।
  7. आयनन विभव घटते हैं।

इन तत्त्वों के गुणों में समानता तथा परमाणु क्रमांक में क्रमिक वृद्धि के साथ गुणों में श्रेणीबद्ध परिवर्तन इस बात का निर्णायक है कि ये तत्त्व एक समूह में रखे जाने चाहिए। इनके परमाणुओं के बाहरी कोश की ns2 np5 संरचना सह इंगित करती है कि इनकी सातवें समूह में स्थिति न्यायोचित है।

प्रश्न 9.
डीकन विधि द्वारा क्लोरीन के निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए। यह निम्नलिखित से किस प्रकार की क्रिया करती है? (2015)
(i) सोडियम आर्सेनाइट विलयन, (ii) गर्म चूने का पानी।
या
डीकन विधि द्वारा क्लोरीन के औद्योगिक निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए। इसकी अमोनिया के साथ अभिक्रिया लिखिए। आवश्यक रासायनिक समीकरण भी लिखिए। (2013, 15, 16, 18)
या
क्लोरीन के एक ऑक्सीकारक गुण का रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर
क्लोरीन के औद्योगिक निर्माण की निम्नलिखित तीन विधियाँ हैं-

  1. वेल्डन विधि
  2. डीकन विधि तथा
  3. वैद्युत-अपघटनी विधि।

डीकन विधि या HCl से क्लोरीन के निर्माण की विधि – इस विधि में HCl का ऑक्सीकरण क्यूप्रस क्लोराइड (उत्प्रेरक) की उपस्थिति में वायु की ऑक्सीजन द्वारा निम्न प्रकार किया जाता है –
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4HCl + O2 [latex]\underrightarrow { { Cu }_{ 2 }{ Cl }_{ 2 } } [/latex] 2H2O +2Cl2 ↑
उत्प्रेरक कक्ष में झाँबा पत्थर क्यूप्रस क्लोराइड विलयन में भिगोकर रख देते हैं तथा ताप 450°C कर देते हैं। HCl तथा वायु का मिश्रण 4 : 1 के अनुपात में लेकर उत्प्रेरक कक्ष में प्रवाहित किया जाता है। यहाँ क्लोरीन बनती है, पर इसमें HCl, N2,O2 तथा जल-वाष्प मिले होते हैं। इस मिश्रण को स्क्रबर में प्रवाहित करके HCl हटा देते हैं। दूसरे कक्ष में प्रवाहित करने पर सान्द्र H2SO4 द्वारा जल-वाष्प पृथक् कर देते हैं। इस प्रकार N2,O2 मिश्रित क्लोरीन प्राप्त होती है।
उत्प्रेरक की क्रिया निम्न प्रकार होती है –

  • 2Cu2Cl2 + O2 → 2Cu2OCl2
  • 2HCl + Cu2OCl2 → 2CuCl2 + H2O
  • 2CuCl2 → Cu2Cl2 + Cl2

क्रियाएँ

  1. यह सोडियम आर्सेनाईट को सोडियम आर्सिनेट में ऑक्सीकृत कर देती है।
    • Na3AsO3 + H2O + Cl2 → Na3AsO4 +2HCl
  2. क्लोरीन गर्म चूने के पानी के साथ कैल्सियम क्लोराइड तथा कैल्सियम क्लोरेट बनाती है।
    • 6Ca(OH)2 + 6Cl2 → 5CaCl2 + Ca(ClO3)2 + 6H2O

ऑक्सीकारक गुण – यह H2S को सल्फर में ऑक्सीकृत कर देती है।
H2S + Cl2 → 2HCl + S ↓
NH3 से अभिक्रिया
NH3 + 3Cl2 → NCl3 + 3HCl

प्रश्न10.
प्रयोगशाला में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विरचन की विधि, प्रमुख रासायनिक गुण तथा उपयोग का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विरचन की प्रयोगशाला विधि – प्रयोगशाला में हाइड्रोजन क्लाराइड गैस सोडियम क्लोराइड (नमक) को सान्द्र H2SO4 के सार्थ गर्म करके बनाई जाती है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 81
हाइड्रोजन क्लोराइड गैस को जल में अवशोषित करने पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल प्राप्त होता है। हाइड्रोजन क्लोराइड गैस के जलीय विलयन को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल कहते हैं।
हाइड्रोजन क्लोराइड गैस एवं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाने में प्रयुक्त उपकरण संलग्न चित्र में प्रदर्शित है।

1. हाइड्रोजन क्लोराइड गैस बनाने की विधि – एक गोल पेंदे के फ्लास्क में कुछ सोडियम क्लोराईड (ठोस) लो और थिसेल फनल द्वारा सावधानी से सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल फ्लास्क में डालो जिससे फनल का निचला सिरा अम्ल में डूब जाए। फ्लास्क को गर्म करो। गर्म करने पर हाइड्रोजन क्लोराइड गैस बनती हैं और निकास नली से बाहर निकलने लगती है। गैस को वायु के उपरिमुखी विस्थापन द्वारा एक गैस जार में एकत्रित कर लो।। शुष्क HCl गैस प्राप्त करने के लिए निकास नली को सान्द्र H2SO4 की बोतल से जोड़ दो जिससे कि नम HCl गैस सान्द्र H2SO4 में से प्रवाहित होकर शुष्क हो जाए। सान्द्र H2SO4 युक्त बोतल में लगी दूसरी निकास नली से निकल रही शुष्क HCl गैस को अब जार में एकत्रित कर लो।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 82

2. हाइड्रोजन क्लोराइड गैस से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाने की विधि – चित्र में प्रदर्शित फ्लास्क में लगी हुई निकास नली के बाहर निचले सिरे पर रबर की नली के द्वारा एक साधारण फनल (छोटे स्तम्भ की) जोड़ दो। फनल का कुछ भाग एक पात्र में भरे जल में डुबा दो। निकास नली से फनल के द्वारा HCl गैस जल में पहुँचेगी और जल में विलेय हो जाएगी। इस प्रकार HCl गैस का जलीय विलयन अर्थात् हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बन जाएगा।

रासायनिक गुण
1. धातुओं से क्रिया – कॉपर, मरकरी, सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम धातुओं को छोड़कर लगभग सभी धातुएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करती हैं। क्रिया में धातु क्लोराइड बनता है और हाइड्रोजन गैस निकलती है।

  • 2Na + 2HCl → 2NaCl + H2
  • Mg + 2HCl → MgCl2 + H2
  • Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2
  • Fe + 2HCl → FeCl2 + H2
  • 2Al + 6HCl → 2AlCl2 + 3H2

सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के आयतन से 3 : 1 मिश्रण को ‘ऐक्वारेजिया’ (aquaregia) कहते हैं। इस मिश्रण में गोल्ड (Au), प्लेटिनम (Pt) आदि धातुएँ घुल जाती हैं।
3HCl + HNO3 → NOCl + Cl2 + 2H2O
Au + Cl2 + NOCl → AuCl3 + NO
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2. क्षारों से क्रिया – क्षार और अम्ल के परस्पर क्रिया करने से लवण और जल बनता है। इस क्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं।

  • NaOH + HCl → NaCl + H2O
  • Ba(OH)2 + 2HCl → BaCl + 2H2O

3. धातु ऑक्साइडों से क्रिया – धातु ऑक्साइड और अम्ल की परस्पर क्रिया कराने पर लवण और जल बनता है।

  1. MgO + 2HCl → MgCl2 + H2O
  2. CuO + 2HCl → CuCl2 + H2O
  3. ZnO + 2HCl → ZnCl2 + H2O

4. अमोनिया से क्रिया – अमोनिया और HCl गैस की परस्पर क्रिया से अमोनियम क्लोराइड के सफेद धूम (fumes) बनते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 7 The p Block Elements image 84
अमोनियम के जलीय विलयन की HCl विलयन से क्रिया कराने पर अमोनियम क्लोराइड और जल बनता है।
NH4OH + HCl → NH4Cl+ H2O

5. धातु कार्बोनेट से क्रिया – धातु कार्बोनेट की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया कराने पर लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं।

  • Na2CO3 + 2HCl → 2NaCl + H2O + CO2
  • CaCO3 + 2HCl → CaCl2 + H2O + CO2

उपयोग

  1. धातुओं के क्लोराइड बनाने में।
  2. अम्ल के रूप में।
  3. ऐक्वारेजिया (आयतन से 1 भाग सान्द्र HNO3 +3 भाग सान्द्र HCl) बनाने में।
  4. क्लोरीन गैस बनाने में।
  5. गाई, चमड़े और अन्य उद्योगों में।

प्रश्न 11.
विरंजक चूर्ण क्या है? विरंजक चूर्ण के निर्माण की विधि का वर्णन नामांकित चित्र के साथ कीजिए तथा इसका एक ऑक्सीकारक गुण भी लिखिए। (2016)
उत्तर
यह एक मिश्रित लवण है जिसको कैल्सियम क्लोरोहाइपोक्लोराइट भी कहते हैं। विरंजक चूर्ण के एक अणु में एक कैल्सियम आयन (Ca2+), एक क्लोराइड आयन (Cl) तथा एक हाइपोक्लोराइट आयन (OCl) होते हैं, जिसको Ca2+ (Cl) (OCl) रूप में भी व्यक्त कर सकते हैं। विरंजक चूर्ण का निर्माण बैचमान विधि द्वारा किया जाता है। इसके अन्तर्गत शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन की अभिक्रिया करायी जाती है।
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विधि- यह विधि विरंजक चूर्ण (CaOCl2) बनाने की आधुनिक विधि है। इसमें लोहे का बना हुआ एक टॉवर होता है जिसमें खाने बने होते हैं। संयंत्र के ऊपरी भाग से हॉपर द्वारा बुझा हुआ चूना [Ca(OH2)] डाला जाता है। टॉवर में नीचे से गर्म वायु और क्लोरीन की धारा प्रवाहित की जाती है। Ca(OH)2 व Cl2 गैस की क्रिया से विरंजक चूर्ण बनता है, जिसे संयंत्र के निचले भाग से बाहर निकाल लेते हैं। व्यर्थ गैसें संयंत्र के ऊपरी भाग से बाहर निकल जाती हैं।

ऑक्सीकारक गुण – यह तनु अम्ल की अभिक्रिया से ऑक्सीजन देता है, अत: यह एक ऑक्सीकारक है।

    1. यह PbO को PbO2 में ऑक्सीकृत कर देता है।
      • 2CaOCl2 + 2PbO → 2CaCl2 + 2PbO2
  1. यह अम्लीय माध्यम में KI को I2 में ऑक्सीकृत कर देता है।
    • CaOCl2 + 2CH3COOH + 2KI → (CH3COO)2Ca + 2KCl + I2 ↑ + H2O

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