UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 3 Graphical Representation of Data

UP Board Solutions for Class 12 Geography Practical Work Chapter 3 Graphical Representation of Data (आंकड़ों का आलेखी निरूपण)

UP Board Class 12 Geography Chapter 3 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 3 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(i) जनसंख्या वितरण दर्शाया जाता है
(क) वर्णमात्री मानचित्रों द्वारा
(ख) सममान रेखा मानचित्रों द्वारा
(ग) बिन्दुकित मानचित्रों द्वारा
(घ) ऊपर में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(ग) बिन्दुकित मानचित्रों द्वारा।

(ii) जनसंख्या की दशकीय वृद्धि को सबसे अच्छा प्रदर्शित करने का तरीका है–
(क) रेखाग्राफ
(ख) दण्ड आरेख
(ग) वृत्त आरेख
(घ) ऊपर में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) रेखाग्राफ।

(iii) बहुरेखाचित्र की रचना प्रदर्शित करती है
(क) केवल एक चर
(ख) दो चरों से अधिक
(ग) केवल दो चर
(घ) ऊपर में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(ख) दो चरों से अधिक।

(iv) कौन-सा मानचित्र “गतिदर्शी मानचित्र” माना जाता है
(क) बिन्दुकित मानचित्र
(ख) सममान रेखा मानचित्र
(ग) वर्णमात्री मानचित्र
(घ) प्रवाह संचित्र।
उत्तर:
(घ) प्रवाह संचित्र।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के 30 शब्दों में उत्तर दीजिए :
(i) थिमैटिक मानचित्र क्या है?
उत्तर:
प्राकृतिक अथवा सांस्कृतिक वातावरण के किसी तत्त्व का किसी क्षेत्र में वितरण प्रदर्शित करने वाले मानचित्र को ‘थिमैटिक (वितरण) मानचित्र’ कहते हैं।

(ii) आँकड़ों के प्रस्तुतीकरणा से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण का तात्पर्य आँकड़ों द्वारा तथ्यों की विशेषताओं को प्रदर्शित किया जाना है। यह प्रस्तुतीकरण आलेख, आरेख अथवा मानचित्र, चार्ट आदि द्वारा किया जाता है।

(iii) बहुदण्ड आरेख और यौगिक दण्ड आरेख में अंतर बताइए।
उत्तर:
बहुदण्ड आरेख- यह आरेख तुलना के उद्देश्य के लिए दो या दो से अधिक चरों को प्रदर्शित करता है। पुरुष-स्त्री अनुपात, ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या अथवा विभिन्न साधनों द्वारा सिंचाई दर्शाने के लिए यह आरेख बनाया जाता है।
यौगिक दण्ड आरेख- इसे मिश्रित दण्ड आरेख भी कहते हैं। इसमें विभिन्न घटकों को चर के एक समूह में वर्गीकृत किया जाता है अथवा एक घटक के विभिन्न चर साथ-साथ रखे जाते हैं। .

(iv) एक बिन्दुकित मानचित्र की रचना के लिए क्या आवश्यकताएँ हैं?
उत्तर:
एक बिन्दुकित मानचित्र की रचना के लिए आवश्यक तत्त्व

  1. जिस क्षेत्र का बिन्दु मानचित्र बनाना है, उसका प्रशासनिक इकाइयों वाला रेखा मानचित्र।
  2. प्रत्येक प्रशासनिक इकाई के जनसंख्या सम्बन्धी निरपेक्ष आँकड़े।
  3. बिन्दु उचित स्थान पर लग सकें, इसके लिए उस क्षेत्र के धरातलीय मानचित्र, मृदा मानचित्र, जलवायु मानचित्र व सिंचाई मानचित्र इत्यादि का अवलोकन भी आवश्यक है। इन मानचित्रों से हमें यह अनुमान लगता है कि जनसंख्या का सांद्रण कहाँ-कहाँ हो सकता है।

(v) सममान रेखा मानचित्र क्या है? एक क्षेपक को किस प्रकार कार्यान्वित किया जाता है?
उत्तर:
सममान रेखा मानचित्र- काल्पनिक रेखाएँ जो समान मान के स्थानों को जोड़ती हैं, ‘सममान रेखाएँ’ कहलाती हैं। इन रेखाओं द्वारा भौगोलिक सत्य को मानचित्र पर दिखाना ‘सममान रेखा मानचित्र’ कहलाता है।
क्षेपक का कार्यान्वयन– क्षेपक का उपयोग दो स्टेशनों के प्रेक्षित मानों के बीच मध्यमान को प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जैसे—आगरा और मेरठ का तापमान या दो बिन्दुओं की ऊँचाइयाँ।
समान मानों के स्थानों को जोड़ने वाली सममान रेखाओं का चित्रण ‘क्षेपक’ कहलाता है। क्षेपक के कार्यान्वयन करने के लिए निम्न बातों की पालना करनी पड़ती है

  1. मानचित्र पर न्यूनतम और अधिकतम मान को निश्चित करना।
  2. मान की परास की गणना, जैसे-परास = अधिकतम मान – न्यूनतम मान।
  3. श्रेणी के आधार पर 5, 10, 15 आदि में अन्तराल निश्चित करना। . . .

(vi) एक वर्णमात्री मानचित्र को तैयार करने के लिए अनुसरण करने वाले महत्त्वपूर्ण चरणों की सचित्र व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र को तैयार करने के लिए अनुसरण करने वाले महत्त्वपूर्ण चरण
(1) जिस क्षेत्र के लिए वर्णमात्री मानचित्र बनाना है, उस क्षेत्र की प्रशासनिक इकाइयों वाला रेखा मानचित्र।
(2) मानचित्र पर जिस वस्तु का वितरण प्रदर्शित करना है, उसके सभी प्रशासनिक इकाइयों से सम्बन्धित नवीनतम आँकड़े।

उपर्युक्त दो वस्तुएँ प्राप्त करने के बाद सापेक्षिक आँकड़ों का वर्ग-अन्तराल निर्धारित करना होता है। वर्ग अन्तराल बहुत अधिक अथवा बहुत कम नहीं होना चाहिए। सामान्यत: 3 से 6 वर्ग अन्तराल उचित रहते हैं। इन चुने हुए वर्ग अन्तरालों के लिए आभा चुनते समय ध्यान रखना चाहिए कि घनत्व या मान बढ़ने के साथ आभा की गहराई भी उत्तरोत्तर बढ़नी चाहिए। निर्धारित की गई आभाओं का सूचक बनाना भी आवश्यक होता है।

(vii) आँकड़े को वृत्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित करने के लिए महत्त्वपूर्ण चरणों की विवेचना ‘कीजिए।
उत्तर:
आँकड़े को वृत्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित करने के लिए महत्त्वपूर्ण चरण

  • आँकड़ों को बढ़ते क्रम में लिखें।
  • आँकड़ों के लिए कोणों की गणना के लिए [latex]\frac{360}{100}[/latex] से गुणा करें।
  • उपयुक्त त्रिज्या का चयन करें।
  • वृत्त बनाएँ।
  • शीर्षक, उपशीर्षक और सूचिका द्वारा आरेख को पूरा किया जाता है तथा रंग भरे जा सकते हैं।

क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
निम्न आँकड़े को अनुकूल/उपयुक्त आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए :
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UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 3 Graphical Representation of Data 2
उत्तर:
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 3 Graphical Representation of Data 3

प्रश्न 2.
निम्नलिखित आँकड़े को उपयुक्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए:
भारत : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में साक्षरता और नामांकन अनुपात
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उत्तर:
(नोट–अध्यापक की सहायता से छात्र स्वयं करें।)

प्रश्न 3:
निम्नलिखित आँकड़े को वृत्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए :
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उत्तर:
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प्रश्न 4.
नीचे दी गई तालिका का अध्ययन कीजिए और दिए हुए आरेखों/मानचित्रों को खींचिए :
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(क) प्रत्येक राज्य में चावल के क्षेत्र को दिखाने के लिए एक बहुदण्ड आरेख की रचना कीजिए।
(ख) प्रत्येक राज्य में चावल के अन्तर्गत क्षेत्र के प्रतिशत को दिखाने के लिए एक वृत्त आरेख की रचना कीजिए।
(ग) प्रत्येक राज्य में चावल के उत्पादन को दिखाने के लिए एक बिन्दुकित मानचित्र की रचना कीजिए।
(घ) राज्यों में चावल उत्पादन के प्रतिशत को दिखाने के लिए एक वर्णमात्री मानचित्र की रचना कीजिए। .
उत्तर:
(नोट-अध्यापक की सहायता से छात्र स्वयं करें।)

प्रश्न 5.
कोलकाता के तापमान और वर्षा के निम्नलिखित आँकड़े को एक उपयुक्त आरेख द्वारा दर्शाइए:
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उत्तर:
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UP Board Class 12 Geography Chapter 3 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 3 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दण्ड आरेख बनाने सम्बन्धी आवश्यक निर्देशों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
दण्ड आरेख बनाने सम्बन्धी आवश्यक निर्देश
किसी भी आरेख को बनाने के लिए यूँ तो कोई विश्वव्यापी नियम तो नहीं होते, फिर भी कुछ हिदायतों का ध्यान रखना आवश्यक होता है

  1. सभी दण्ड एकसमान मोटाई के होने चाहिए। दण्डों की मोटाई दण्डों की संख्या व कागज के आकार पर निर्भर करती है।
  2. दण्ड समान दूरी पर स्थित होने चाहिए। दण्डों के बीच की दूरी दण्डों की चौड़ाई से कुछ कम होनी चाहिए ताकि तुलना करने में आसानी हो।
  3. दण्ड बनाने से पहले दिए गए आँकड़ों को पूर्णांक में बदल लेना चाहिए।
  4. आँकड़ों में न्यूनतम व उच्चतम सीमा और कागज पर स्थान देखकर ही मापनी का चुनाव करना चाहिए।
  5. आधार-रेखा के शून्य से दण्डों की लम्बाई मापी जाती है।
  6. दण्डों को सुन्दर, तुलनीय व आकर्षक बनाने के लिए उनमें काला रंग या आभा भरी जाती है। कई बार इन दण्डों में रंग भी भरे जाते हैं।

प्रश्न 2.
बिन्दु विधि के गुण व दोषों को समझाइए।
उत्तर:
बिन्द विधि के गण

  1. मात्रात्मक वितरण मानचित्र बनाने की सभी विधियों में बिन्दु विधि वितरण को सर्वाधिक शुद्ध रूप से प्रस्तुत करती है।
  2. यह विधि वस्तु की मात्रा और समानता दोनों गुणों को भली-भाँति प्रदर्शित करती है।
  3. इस विधि में वितरण की तीव्रता बिन्दुओं के सांद्रण से एकदम स्पष्ट हो जाती है।
  4. बिन्दु मानचित्र का दृष्टिक प्रभाव वितरण के अन्य मानचित्रों से अधिक होता है।
  5. बिन्दुओं को गिनकर पुनः आँकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं।

बिन्दु विधि के दोष

  1. बिन्दु मानचित्रों की रचना कठिन होती है, अत: अभ्यास और कुशलता के बिना इन्हें नहीं लगाया जा सकता।
  2. यह विधि केवल निरपेक्ष आँकड़ों को प्रदर्शित करती है।
  3. बिन्दु द्वारा मानचित्र पर घेरा हुआ स्थान वास्तविक क्षेत्रफल से काफी बड़ा होता है।
  4. प्रयास करने के बावजूद भी कई बिन्दु सही स्थिति पर नहीं लग पाते।
  5. क्षेत्र के भौगोलिक ज्ञान के बिना गए बिन्दु भ्रामक परिणाम प्रस्तुत करते हैं।

प्रश्न 3.
आरेखों की उपयोगिता/महत्त्व/लाभ पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आरेखों की उपयोगिता/महत्त्व/लाभ .
आरेखों की उपयोगिता/महत्त्व/लाभ अग्रलिखित हैं
1. सुबोध और सरल सूचना- आँकड़ों की लम्बी-लम्बी नीरस सूचनाएँ आरेखों द्वारा सहज ही समझ में आ जाती हैं। एक दृष्टि डालते ही बहुत-सी विशेषताएँ पता चल जाती हैं।

2. चिरस्मरणीय- इनके द्वारा प्रस्तुत आँकड़े लम्बे समय तक याद रहते हैं।

3. विशेषज्ञता आवश्यक नहीं- आरेखों को समझने के लिए किसी विशेष ज्ञान या प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती है। सामान्य व्यक्ति भी इनको समझ सकता है।

4. आकर्षक और प्रभावशाली- आरेख चित्रमय होते हैं। इन्हें आकर्षक बनाया जाता है।

5. समय व श्रम की बचत- आरेखों द्वारा आँकड़ों को समझने से अपेक्षाकृत कम समय लगता है तथा श्रम भी कम करना पड़ता है। एक चीनी कहावत है कि “एक चित्र हजार शब्दों के बराबर होता है।” छोटे से आकार का आरेख कई पृष्ठों पर लिखे विवरण की जानकारी दे देता है।

6. तुलना में सहायक- आरेखों से तथ्यों की तुलना करना सरल है।

7. सूचना के साथ मनोरंजन– इनसे मनोरंजन भी होता है।

8. अनुमान में सहायक- इनके द्वारा भावी प्रवृत्ति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

प्रश्न 4.
लखनऊ में मध्यमान मासिक वर्षा के आँकड़ों से एक सरल दण्ड आरेख की रचना कीजिए।
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उत्तर:
रचना विधि-दिए गए आँकड़ों में वर्षा की मात्रा समय के सन्दर्भ अर्थात् जनवरी, फरवरी इत्यादि के रूप में दी गई है। ऐसे आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में बिल्कुल नहीं करते। इनके लिए दण्ड भी खड़े बनाने होते हैं ताकि समय का आधार मानकर तुलना की जा सके।

सबसे पहले ग्राफ पेपर या ड्राइंगशीट को सामने रखकर, मापनी से मापकर यह अनुमान लगाइए कि शीर्षक की जगह छोड़ देने के बाद अधिकतम वर्षा 27.16 सेमी को दिखाने के लिए आरेख को कागज़ के निचले हिस्से में कहाँ से शुरू करें।

शीट या ग्राफ पेपर के निचले हिस्से में एक आधार रेखा लीजिए। उस पर वर्ष के 12 महीनों के दण्डों की चौड़ाई व उनके बीच की दूरी को अंकित कीजिए। आधार रेखा के बाएँ सिरे पर एक लम्बवत् रेखा 15 सेमी ऊँची लीजिए व उस पर 0 से 30 अंकित कीजिए। एक मापनी के अनुसार 1 सेमी की ऊँचाई 2 सेमी वर्षा प्रदर्शित करेगी। अब वर्ष के 12 महीनों के लिए मापनी के अनुसार दण्डों की लम्बाई निर्धारित कीजिए। जनवरी महीने की वर्षा 4.20 सेमी मापक के दुगुना हो जाने के कारण अब वास्तविक फुटे के अनुसार 4.20 ÷ 2 = 2.10 सेमी द्वारा तथा फरवरी की वर्षा 5.18÷ 2 = 2.59 सेमी लम्बे दण्ड से प्रदर्शित होगी। इसी प्रकार अन्य महीनों के दण्डों की लम्बाई ज्ञात करके उन्हें आधार-रेखा पर बनाइए। (चित्र)

कई बार हमें ग्राफ पेपर के स्थान पर ड्राइंगशीट पर दण्ड आरेख बनाने होते हैं। ऐसे में दण्ड सीधे रहें और उनकी आपसी दूरी बराबर रहे तो इसके लिए हमें आरेख के लगभग बीच में एक नकली आधार-रेखा बना लेनी चाहिए जिसे बाद में मिटा दिया जाता है। इस नकली आधार-रेखा पर भी दण्डों की चौड़ाई व उनके बीच के अन्तर को अंकित किया जाता है। बाद में प्रत्येक दण्ड को बनाते समय असली व नकली दोनों आधार रेखाओं के ‘ समान बिन्दुओं को मिलाकर दण्ड की ऊँचाई बनानी होती है। इससे दण्ड सीधे बनते हैं।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित तालिका में भारत की जनसंख्या के आँकड़े दिए गए हैं। इन्हें साधारण दण्ड आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए
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उत्तर:
रचना विधि-दिए गए आँकड़े समयानुसार हैं इसलिए इन्हें खड़े दण्ड आरेख द्वारा प्रदर्शित किया जाएगा। जब ‘स्थान एक समय अनेक’ हो तो ऐसे आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में नहीं किया जाता। आधार X-अक्ष पर समान दूरियों पर समान चौड़ाई वाले दण्ड बनाने के लिए चिह्न अंकित कीजिए। इस आधार-रेखा के बाएँ सिरे पर एक लम्बवत् रेखा खींचिए जिस पर जनसंख्या को दिखाने के लिए मापनी बनाई जाएगी। अब 1901 से 2011 की जनसंख्या के आँकड़ों को पूर्णांक बनाइए जो क्रमशः इस प्रकार होंगे23.84, 25.21, 25.13, 27.90, 31.87, 36.11, 43.92, 54.82, 68.38, 84.63, 102.70 व 121 करोड़। उच्चतम व न्यूनतम आँकड़ों को देखते हुए उचित मापनी लेनी होगी। उदाहरणत: 20 करोड़ जनसंख्या को प्रदर्शित करने के लिए यदि हम 1 इंच लम्बा दण्ड निश्चित करते हैं तो विभिन्न जनगणना वर्षों के दण्डों की लम्बाई क्रमश: 1.96, 1.26, 1.25, 1.39, 1.59, 1.80, 2.19, 2.74, 3.41, 4.23, 5.13 व 6.0 इंच होगी। शीर्षक व अन्य आवश्यक सूचनाएँ लिखकर आरेख तैयार कीजिए। (चित्र)
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प्रश्न 6.
नीचे दिए गए भारत के विदेश व्यापार से सम्बन्धित विभिन्न आँकड़ों को बहुदण्ड आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
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उत्तर:
रचना विधि-दिए गए आँकड़े एक ही तत्त्व ‘विदेश व्यापार’ के दो सम्बन्धित विषयों आयात और निर्यात के हैं, अत: हमें इन्हें दो-दो दण्डों के समुच्चयों द्वारा प्रदर्शित करेंगे।

इस आरेख के निर्माण के लिए ड्राइंगशीट या ग्राफ पेपर पर नीचे की तरफ एक आधार-रेखा लीजिए। इस पर दो-दो दण्डों के 10 समुच्चयों व उनके बीच की दूरी को अंकित कीजिए।

आँकड़ों तथा कागज के विस्तार को देखते हुए आधार रेखा के आरम्भिक बिन्दु से एक लम्बवत् रेखा खींचिए जो आयात-निर्यात के आँकड़ों को दिखाने के लिए मापनी का कार्य करेगी। मान लीजिए कि 1 सेमी का दण्ड आरेख 2,00,000 करोड़ रुपये को प्रदर्शित करता है तो हमें 14 सेमी ऊँचा मापक बनाना होगा जिसमें प्रत्येक सेमी का 1 टुकड़ा (1 mm) 20 हजार करोड़ रुपये को प्रदर्शित करेगा। अब संख्याओं को पूर्णांकों में बदलकर उनके मापक के अनुसार दण्ड-समुच्चय बनाइए। शीर्षक, अन्य सूचनाएँ व आभाओं को निर्देशिका बनाकर आरेख को पूर्ण कीजिए। (चित्र)
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प्रश्न 7.
भारत में साक्षरता दर के दिए गए आँकड़ों के आधार पर एक बहुदण्ड आरेख की रचना कीजिए। .
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उत्तर:
रचना विधि-उपर्युक्त तालिका में दिए गए आँकड़ों में भारत की कुल साक्षर जनसंख्या तथा पुरुष एवं महिला साक्षरता का प्रतिशत दिया गया है। ऐसे आँकड़ों को दर्शाने के लिए बहुदण्ड आरेख उपयुक्त है।
पहले दिए गए प्रश्नों की भाँति आधार रेखा तथा मापनी रेखा बनाकर कुल साक्षरों, पुरुष व महिला साक्षरों की प्रतिशत जनसंख्या को दर्शाने के लिए प्रत्येक वर्ष के तीन-तीन दण्ड समुच्चय बनाइए। इन दण्डों में विभिन्न आभाएँ भरकर उनका इंडेक्स बना दीजिए। इस तरह आरेख पूरा होगा। (चित्र)
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प्रश्न 8.
भारत में सिंचाई के 2010-11 के दिए गए आँकड़ों को वृत्तारेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए
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उत्तर:
रचना विधि—इस तालिका में विभिन्न घटकों के कोण ज्ञात करने से पूर्व इन्हें अवरोही क्रम में कर लें लेकिन ध्यान रहे कि ‘अन्य’ (Others) घटक को सबसे अन्त में रखे क्योंकि इसमें कई आँकड़े शामिल होते हैं। उपर्युक्त तालिका के आँकड़ों के कोण इस प्रकार निकाले गए हैं—
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों को वृत्तारेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए :
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उत्तर:
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प्रश्न 10.
मानचित्र में दिए गए वार्षिक तापान्तर (Annual Range of Temperature) के आँकड़ों के आधार पर एक समताप रेखा (Isotherm) मानचित्र बनाइए।
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उत्तर:
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प्रश्न 11.
चित्र में मुख्य नदी एवं उसकी सहायक नदियों में बहने वाली जल की मात्रा हजार घन फुट/प्रति घण्टा दी गई है। इसकी सहायता से इस नदी बेसिन के लिए एक जल प्रवाह आरेख बनाइए।
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उत्तर:
रचना विधि-नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थित विभिन्न बेसिनों के आँकड़ों को देखते हुए एक उचित मापनी का निर्धारण कीजिए जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, जल की मात्रा के अनुपात में फीता बनाइए। यह – आपेक्षिक प्रवाह आरेख है।
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लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वर्णमात्री अथवा छाया मानचित्र की उपयुक्तता को समझाइए।
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र की उपयुक्तता-जनसंख्या का घनत्व, कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत, जनसंख्या में लिंग तथा साक्षरता अनुपात, कुल भूमि में कृषि भूमि का अनुपात, कृषि-भूमि की प्रति हेक्टेयर उपज, जोत का औसत आकार, प्रति व्यक्ति आय, किसी वस्तु का प्रति व्यक्ति उपभोग आदि के आर्थिक तथ्यों के आँकड़ों को वर्णमात्री मानचित्रों के द्वारा बहुत अच्छी तरह प्रदर्शित किया जाता है। मानचित्र के प्रदर्शन की यह विधि भूगोलवेत्ता का महत्त्वपूर्ण उपकरण है।

प्रश्न 2.
वर्णमात्री मानचित्र के दोषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
वर्णमात्री मानचित्र के दोष

  1. भौगोलिक तथ्य के घनत्व में अन्तर भौगोलिक दशाओं के प्रभाव में आता है, प्रशासनिक इकाइयों के द्वारा नहीं। इससे भ्रम पैदा हो जाता है।
  2. राजनीतिक सीमाएँ अस्थिर होती हैं।
  3. पूरी इकाई की गहनता समान नजर आती है, जबकि वास्तव में प्रशासनिक इकाई (जिले) में भी गहनता में भारी अन्तर पाया जाता है।
  4. इस विधि में ऋणात्मक क्षेत्र भी शामिल होता है जो कि गलत है।

प्रश्न 3.
सममान रेखा मानचित्र के दोष बताइए।
उत्तर:
सममान रेखा मानचित्र के दोष

  • सममान रेखा मानचित्र बनाना एक कठिन कार्य है क्योंकि इसके लिए हमें पर्याप्त व सही आँकड़े तथा अनेक स्थानों पर शुद्ध अवस्थिति की आवश्यकता होती है।
  • मानचित्र पर मूल्यों को खोजने के लिए अन्तर्वेशन करना पड़ता है जिससे गलती होने की संभावना रहती है।
  • कम आँकड़ों के आधार पर बनाई गई सममान रेखाएँ भ्रामक परिणाम प्रस्तुत कर सकती हैं।
  • आकस्मिक या तीव्र परिवर्तनों को इन रेखाओं द्वारा प्रदर्शित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 4.
आरेखों की रचना में सावधानियों को समझाइए।
उत्तर:
आरेखों की रचना में सावधानियाँ

  1. आरेख आकर्षक और प्रभावशाली होने चाहिए।
  2. इनको उपयुक्त शीर्षक दिया जाना चाहिए।
  3. आरेख उचित मापनी पर बनाए जाने चाहिए।
  4. इनमें केवल चिह्नों व रंगों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  5. आरेखों को सरल बनाना चाहिए।
  6. आरेखों के साथ सारणी भी दी जानी चाहिए।

प्रश्न 5.
वर्णमात्री मानचित्रों के गुणों को समझाइए।
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र के गुण

  1. वस्तु के वितरण को समझाने के लिए यह एक सरल और प्रभावशाली विधि है।
  2. वितरण के तुलनात्मक अध्ययन के लिए वर्णमात्री विधि सर्वोत्तम मानी जाती है।
  3. वर्णमात्री विधि सापेक्षिक आँकड़ों जैसे प्रतिशत मान या प्रति इकाई घनत्व को दर्शाने की सर्वश्रेष्ठ विधि है।
  4. वस्तुओं के वितरण में आने वाले आकस्मिक और भारी परिवर्तनों को दिखाने के लिए इससे बेहतर विधि और कोई नहीं है।

प्रश्न 6.
सममान रेखा मानचित्रों के गुणों को समझाइए।
उत्तर:
सममान रेखा मानचित्र के गुण

  1. अन्य विधियों की तुलना में सममान रेखा विधि अधिक वैज्ञानिक है।
  2. ये रेखाएँ ढाल प्रवणता या घनत्व में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से प्रकट कर देती हैं।
  3. बिन्दु आँकड़ों के माध्यम से भौगोलिक वितरण दर्शाने की यह सर्वोत्तम विधि है।
  4. संक्रमण पेटी में स्थित तत्त्वों को प्रदर्शित करने के लिए सममान रेखा विधि उत्तम मानी जाती है।

प्रश्न 7.
प्रवाह आरेखों के महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
प्रवाह आरेखों का महत्त्व-प्रवाह आरेखं किसी क्षेत्र के प्रमुख परिवहन केन्द्रों व परिवहन मार्गों के निर्धारण में हमारी सहायता करते हैं। हमें इनसे उन केन्द्र बिन्दुओं (Nodal Points) का पता चलता है जहाँ अनेक मार्ग आकर मिलते हैं। क्षेत्रीय आयोजन में प्रवाह आरेखों का महत्त्व निर्विवाद है।

प्रश्न 8.
वर्णमात्री मानचित्र क्या हैं?
उत्तर:
वर्णमात्री (छाया) मानचित्र-ये वे मानचित्र हैं जिनमें प्रशासकीय इकाइयों को आधार मानकर आँकड़ों की सहायता से भौगोलिक तत्त्वों का क्षेत्रीय वितरण दर्शाया जाता है। वर्णमात्री विधि में क्षेत्रीय तथ्यों की मात्रा या घनत्व को दिखाने के लिए विभिन्न छायाओं (Shades) का प्रयोग किया जाता है। इस विधि की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें केवल सापेक्षिक.आँकड़ों का प्रयोग किया जाता है, शुद्ध या निरपेक्ष आँकड़ों का नहीं।

मौखिक प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
सांख्यिकीय आरेख क्या होते हैं?
उत्तर:
सांख्यिकीय आरेख ऐसे रेखाचित्र होते हैं जिनकी रचना सांख्यिकीय आँकड़ों के आधार पर की जाती है। .

प्रश्न 2.
क्या सांख्यिकीय आरेख आँकड़ों का शुद्ध प्रदर्शन कर पाते हैं?
उत्तर:
सांख्यिकीय आरेखों द्वारा आँकड़ों का शुद्ध प्रदर्शन सम्भव नहीं हो पाता क्योंकि आरेख बनाते समय हमें शुद्ध आँकड़ों को पूर्णांकों में बदलना पड़ता है।

प्रश्न 3.
क्या आरेख आँकड़ों का प्रतिस्थापन है?
उत्तर:
आरेख आँकड़ों का प्रतिस्थापन कभी नहीं हो सकता क्योंकि आँकड़ों की समस्त खूबियों को रेखाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 4.
दण्ड आरेख का गुण बताइए।
उत्तर:
दण्ड आरेख को आम आदमी समझ सकता है तथा इनसे तुलनात्मक अध्ययन भी आसान हो जाता है।

प्रश्न 5.
प्रवाह आरेख क्या है?
उत्तर:
परिवहन के साधनों, व्यक्तियों, वस्तुओं, नदियों व नहरों के जल के प्रवाह को दर्शाने वाले रेखाचित्र ‘प्रवाह आरेख’ कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
प्रवाह आरेखों की क्या उपयोगिता है?
उत्तर:

  • प्रवाह आरेखों से महत्त्वपूर्ण मार्गों व केन्द्रों के निर्धारण में सहायता मिलती है।
  • इनसे प्रमुख केन्द्रों के प्रवाह क्षेत्र को निर्धारित करने में भी सहायता मिलती है।

प्रश्न 7.
सममान रेखा विधि क्या होती है?
उत्तर:
यह मानचित्र पर बिन्दु आँकड़ों की सहायता से वितरण दिखाने की वह विधि है जिसमें समान मूल्य वाले बिन्दुओं को एक रेखा द्वारा मिला दिया जाता है।

प्रश्न 8.
अन्तर्वेशन क्या होता है? .
उत्तर:
सममान रेखा मानचित्र बनाते समय दो ज्ञात मूल्य वाले बिन्दुओं के बीच में किसी और मान वाले बिन्दु की स्थिति निर्धारित करना ‘अन्तर्वेशन’ कहलाता है।

बहविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आरेखों, आलेखों और मानचित्रों के चित्रांकन का सामान्य नियम है
(a) उपयुक्त विधि का चयन
(b) उपयुक्त मापनी का चयन
(c) अभिकल्पना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 2.
थिमैटिक मानचित्र का प्रकार है
(a) बिन्दुकित मानचित्र
(b) वर्णमात्री मानचित्र
(c) सममान रेखा मानचित्र
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 3.
आरेख का प्रकार है
(a) रेखाचित्र
(b) दण्ड आरेख
(c) वृत्त रेखाचित्र
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।।

प्रश्न 4.
दण्ड आरेख का प्रमुख प्रकार है.
(a) क्षैतिज दण्ड आरेख
(b) लम्बवत् दण्ड आरेख
(c) संश्लिष्ट दण्ड आरेख
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 5.
वितरण मानचित्र के प्रकार हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच।
उत्तर:
(a) दो।

प्रश्न 6.
परिवहन के साधनों, मनुष्यों, वस्तुओं की गति आदि को दर्शाने वाले आरेख को कहते हैं
(a) वृत्त रेखाचित्र
(b) प्रवाह आरेख
(c) मिश्रित दण्ड आरेख
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) प्रवाह आरेख।

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UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 2 Data Processing

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UP Board Class 12 Geography Chapter 2 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नांकित चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए
(i) केन्द्रीय प्रवृत्ति का जो माप चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है, वह है
(क) माध्य
(ख) माध्य तथा बहुलक
(ग) बहुलक
(घ) माध्यिका।
उत्तर:
(क) माध्य।

(ii) केन्द्रीय प्रवृत्ति का वह माप जो किसी वितरण के उभरे भाग से हमेशा संपाती होगा, वह
(क) माध्यिका
(ख) माध्य तथा बहुलक
(ग) माध्य
(घ) बहुलक।
उत्तर:
(ग) माध्य।

(iii) ऋणात्मक सहसम्बन्ध वाले प्रकीर्ण अंकन में अंकित मानों के वितरण की दिशा होगी
(क) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ
(ख) नीचे बाएँ से ऊपर दाएँ
(ग) बाएँ से दाएँ
(घ) ऊपर दाएँ से नीचे बाएँ।
उत्तर:
(क) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
(i) माध्य को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
माध्य ऐसा मूल्य है जिसके निकट अन्य सभी मूल्य केन्द्रित होते हैं। माध्य से अधिक तथा कम सभी मूल्यों का योग शून्य होता है। अथवा किसी चर के विभिन्न मूल्यों का साधारण अंकगणितीय औसत माध्य कहलाता है। अथवा माध्य वह मान है जो सभी मूल्यों के योग को कुल प्रेक्षणों की संख्या में विभाजित करने पर प्राप्त होता है।

(ii) बहलक के उपयोग के क्या लाभ हैं? .
उत्तर:
बहुलक के प्रयोग से गणना आसान हो जाती है और इसे समझना आसान हो जाता है (इसे निरीक्षण द्वारा ही ज्ञात कर लिया जाता है)।

(iii) अपकिरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
सरल भाषा में अपकिरण विभिन्न इकाइयों का माध्य मूल्य से विचलन को कहते हैं। अपकिरण माध्य मूल्य से प्रसार, बिखराव, प्रकीर्णन परिक्षेपण आदि हैं। कोनर के अनुसार, “जिस सीमा तक व्यक्तिगत पद-मूल्यों में भिन्नता होती है, उसके माप को अपकिरण कहते हैं।”

(iv) सहसम्बन्ध को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
चरों के बीच सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव की माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहते हैं।

(v) पूर्ण सहसम्बन्ध किसे कहते हैं?
उत्तर:
सहसम्बन्ध पूरा 1 (एक) होने पर (चाहे धनात्मक हो या ऋणात्मक) इसे ‘पूर्ण सहसम्बन्ध’ कहते हैं।

(vi) सहसम्बन्ध की अधिकतम सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सहसम्बन्ध की अधिकतम विस्तार (सीमा) 1 (एक) है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए
(i) आरेखों की सहायता से सामान्य तथा विषम वितरणों में माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की सापेक्षिक स्थितियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
केन्द्रीय प्रवृत्ति के तीन माप माध्य, माध्यिका और बहुलक की तुलना सामान्य वितरण वक्र द्वारा की जा सकती है। सामान्य वक्र घंटाकार वक्र होता है, जिसमें माध्य की उच्चतम आवृत्ति के दोनों तरफ आवृत्तियों का वितरण एकसमान होता है। माध्य के दोनों तरफ किनारों की ओर जाने पर आवृत्तियों की संख्या क्रमशः कम होती जाती है। इस वक्र में.माध्य, माध्यिका तथा बहुलक का मान समान होता है।

परन्तु विषम वक्र होने पर माध्य, माध्यिका तथा बहुलक का मूल्य भिन्न हो जाता है। चित्र में धनात्मक विषमता वाला वक्र दिखाया गया है जिसमें निम्न मूल्यों की आवृत्तियाँ अधिक तथा अधिक मूल्यों की आवृत्तियाँ कम हैं। इस अवस्था में पहले बहुलक, फिर माध्यिका और अन्त में माध्य आता है।
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अन्त में चित्र में ऋणात्मक विषमता वाला वक्र दिखाया गया है जिसमें कम मूल्य की आवृत्तियाँ कम तथा अधिक मूल्य की आवृत्तियाँ अधिक हैं। इस अवस्था में पहले माध्य, फिर माध्यिका और अन्त में बहुलक आता है।

(ii) माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए (संकेत : उनके गुण तथा दोषों से)।
उत्तर:
(I) माध्य

माध्य के गुण
माध्य के निम्नलिखित गुण हैं

  1. सरल-इसकी गणना करना तथा इसे समझना बहुत सरल है।
  2. प्रतिनिधि माध्य-यह श्रेणी की सभी इकाइयों पर आधारित होता है।
  3. निश्चित मूल्य-माध्य का मूल्य सदा निश्चित रहता है।
  4. स्थिर-यह स्थिर होता है।

माध्य के दोष
माध्य के निम्नलिखित दोष हैं

  1. चरम मूल्यों का प्रभाव-माध्य पर चरम मूल्यों का अधिक प्रभाव होता है।
  2. अप्रतिनिधि तथा अवास्तविक-माध्य वह मूल्य हो सकता है जो श्रेणी में उपस्थित न हो।
  3. हास्यास्पद परिणाम-माध्य द्वारा कभी-कभी भ्रमात्मक तथा असंगत निष्कर्ष निकल आते हैं जो हास्यास्पद होते हैं।

(II) माध्यिका
माध्यिका के गुण
माध्यिका के निम्नलिखित गुण हैं

  1. सरल-माध्यिका को समझना और ज्ञात करना सरल है।
  2. चरम मूल्यों का न्यूनतम प्रभाव-माध्यिका ज्ञात करने में श्रेणी के चरम मूल्यों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  3. आँकड़ों के अभाव में उपयुक्त-आँकड़ों का अभाव होने पर भी इसकी गणना की जा सकती है।
  4. बिन्दुरेखीय प्रदर्शन-माध्यिका मूल्य को ग्राफ की सहायता से ज्ञात किया जा सकता है।

माध्यिका के दोष
माध्यिका के निम्नलिखित दोष हैं.

  1. समंकों का क्रम-समंकों को क्रम में जमाने में अधिक समय लगता है।
  2. चरम मूल्यों की उपेक्षा-इसमें चरम मूल्यों की उपेक्षा की गई है।
  3. प्रतिनिधित्व का अभाव यह केवल संभावित माप होता है, वास्तविक नहीं।
  4. अनियमित आँकड़ों के लिए उपयुक्त नहीं-यह अनियमित आँकड़ों के लिए उपयुक्त विधि नहीं है।

(III) बहुलक
बहुलक के गुण
बहुलक के निम्नलिखित गुण हैं

  1. सरल गणना- इसकी गणना बड़ी सरल है।
  2. चरम मूल्यों का न्यूनतम प्रभाव- यह चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है।
  3. सर्वोत्तम प्रतिनिधित्व-यह श्रेणी का सर्वोत्तम प्रतिनिधित्व करता है।
  4. व्यावहारिक उपयोगिता- व्यवहार में बहुलक का काफी प्रयोग किया जाता है।

बहुलक के दोष
बहलक के निम्नलिखित दोष हैं

  1. अनिश्चित माध्य-बहुलक सबसे अधिक अनिश्चित व अस्पष्ट माध्य है।
  2. सभी मूल्यों पर आधारित नहीं-यह सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होता है।
  3. चरम मूल्यों की उपेक्षा-यह चरम मूल्यों की उपेक्षा करता है।
  4. वर्ग विस्तार से प्रभावित-यह वर्ग विस्तार से प्रभावित होता है।

(iii) एक काल्पनिक उदाहरण की सहायता से मानक विचलन की गणना की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
मानक विचलन- मानक विचलन किसी श्रेणी के विभिन्न मूल्यों के समान्तर माध्य से निकाले गए विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है। मानक विचलन हमेशा समान्तर माध्य के लिए जाते हैं और विचलन लेते समय शुद्धि की दृष्टि से +’ तथा ‘-‘ चिह्नों का पूरा ध्यान रखा जाता है। उन्हें पुन: धनात्मक बनाने के लिए उनके वर्ग कर लिए जाते हैं और फिर उनका वर्गमूल ज्ञात करके मानक विचलन निकाल लिया जाता है। इसे व्यक्त करने के लिए ग्रीक भाषा का अक्षर (छोटा सिग्मा) प्रयुक्त किया जाता है। अवर्गीकृत आँकड़ों का मानक विचलन ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-~–
मानक विचलन (σ) = [latex]\sqrt{\frac{\Sigma(X-\bar{X})^{2}}{N}}[/latex]
जहाँ Σ(X – [latex]\bar{X}[/latex])2 = विचलनों के वर्गों का योग
N = बारम्बारता,
उपर्युक्त सूत्र कुछ कठिन प्रतीत होगा। यदि X का मान दशमलव अंकों में हो और प्रेक्षणों की संख्या बहुत अधिक हो। उस स्थिति में हम निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करेंगे
[latex]\sqrt{\frac{\Sigma X^{2}}{N}-\left(\frac{\Sigma X}{N}\right)^{2}}[/latex]
उदाहरण- निम्न तालिका में आगरा के 10 वर्षों की वर्षा के आँकड़े दिए गए हैं। मानक विचलन ज्ञात कीजिए।
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(iv) प्रकीर्णन का कौन-सा माप सबसे अधिक अस्थिर है तथा क्यों?
उत्तर:
परिसर अथवा विस्तार किसी श्रृंखला में अधिकतम तथा न्यूनतम मानों के बीच अन्तर को परिसर (Range) कहते हैं। इसकी गणना निम्नलिखित सूत्र के द्वारा की जाती है, अर्थात्
R = L – S
यहाँ R= परिसर/विस्तार
L= अधिकतम मान
S = न्यूनतम मान प्रकीर्णन का परिसर (विस्तार) माप सबसे अधिक अस्थिर है, क्योंकि यह केवल अधिकतम तथा न्यूनतम मानों पर निर्भर करता है और अन्य मानों का प्रयोग नहीं करता जिससे इसका प्रयोग अधिक नहीं होता है। यद्यपि इसे ज्ञात करना अत्यन्त सरल है।
परिसर, परिवर्तनशीलता का अशोधित (crude) माप है और इसे सावधानी से केवल उसी परिस्थिति में प्रयोग करना चाहिए जहाँ आँकड़े लगातार तथा नियमित हों।

(v) सहसम्बन्ध की गहनता पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सहसम्बन्ध की गहनता सहसम्बन्ध की ऋणात्मक अथवा धनात्मक सहसम्बन्ध के अलावा हमारे लिए दो चरों के बीच सहसम्बन्ध .. की गहनता के सम्बन्ध में जानना भी आवश्यक है। साहचर्य की गहनता अधिक 1 से लेकर न्यूनतम -1 तक होती है और इन दो चरम सीमाओं के बीच शून्य (0) होती है।
इस विस्तार का रैखिक वर्णन चित्र में दर्शाया गया है। सहसम्बन्ध पूरा 1 (एक) होने पर (चाहे धनात्मक हो या ऋणात्मक) इसे पूर्ण सहसम्बन्ध कहते हैं। इस तरह गहनतम सहसम्बन्ध के दो विपरीत सिरों के ठीक मध्य में शून्य (0) सहसम्बन्ध स्थित होता है, जिस बिन्दु पर चरों के मध्य सहसम्बन्ध का अभाव अथवा सहसम्बन्ध अनुपस्थित होता है।
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(vi) कोटि सहसम्बन्ध की गणना के विभिन्न चरण कौन-से हैं?
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध (स्पीयरमैन) कोटि संहसम्बन्ध को सन् 1904 में स्पीयरमैन ने प्रतिपादित किया था। इस विधि के अनुसार सहसम्बन्ध की गणना कोटियों के आधार पर की जाती है। सांख्यिकी के संकेताक्षर p (ग्रीक अक्षर जिसका उच्चारण है रो-rho) है। इसकी गणना विधि आसान होने के कारण स्पीयरमैन सहसम्बन्ध का उपयोग अधिक प्रचलित है।
कोटि सहसम्बन्ध की गणना के विभिन्न चरण

  1. X – Y चरों को सारणी के क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय स्तम्भों में दिखाएँ।
  2. दोनों चर अलग कोटि के हैं। X के मान को तीसरे स्तम्भ में दिखाया गया है। इसी प्रकार Y के मान को चौथे स्तम्भ में दिखाया जाता है। सर्वाधिक मान को R1 तथा दूसरे सबसे अधिक मान को R2 दिखाते हैं।
  3. जब XR और YR प्राप्त कर लिए जाते हैं तो दोनों का अन्तर ज्ञात किया जाता है और पाँचवें स्तम्भ में रख दिया जाता है।
  4. इनमें प्रत्येक अन्तर का वर्ग ज्ञात किया जाता है और इनका जोड़ किया जाता है। इसे छठे स्तम्भ में रखते हैं।
  5. इस प्रकार कोटि सहसम्बन्ध का परिकलन निम्न सूत्र से किया जाता है
    ρ = 1 = [latex]\frac{6 \Sigma D^{2}}{N\left(N^{2}-1\right)}[/latex]
    जिसमें
    ρ = कोटि सहसम्बन्ध
    ΣD2 = दोनों कोटियों के अन्तर के वर्ग का योग
    N = X – Y युग्मों की संख्या

क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
भौगोलिक विश्लेषण के लिए प्रयुक्त कोई काल्पनिक उदाहरण लीजिए तथा अवर्गीकृत आँकड़ों की गणना करने की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विधियों को समझाइए।
उत्तर:
काल्पनिक उदाहरण
निम्नलिखित सारणी में लखनऊ के मासिक तापमान के आँकड़े दिए गए हैं। इससे लखनऊ का औसत तापमान ज्ञात कीजिए
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प्रश्न 2.
विभिन्न प्रकार के पूर्ण सहसम्बन्ध दर्शाने के लिए प्रकीर्ण आरेख बनाइए।
उत्तर:
(नोट-छात्र स्वयं करें।).

UP Board Class 12 Geography Chapter 2 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 2 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सहसम्बन्ध किसे कहते हैं? इसके प्रकारों को समझाइए।
उत्तर:
सहसम्बन्ध का अर्थ प्रकृति में प्रत्येक तथ्य एवं परिघटना किसी अन्य तथ्य या परिघटना से प्रभावित और संबंधित होती है। इसी कारण दो या दो से अधिक श्रेणियों में परस्पर सम्बन्ध पाया जाता है अर्थात् एक श्रेणी में परिवर्तन आने पर दूसरी श्रेणी में भी परिवर्तन आ जाता है।
उदाहरण- किसी स्थान पर तापमान बढ़ने से वहाँ का वायुदाब कम होने लगता है। चरों के बीच सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव के माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहा जाता है।
“जब सम्बन्ध संख्यात्मक प्रकृति का होता है तो उसे खोजने, मापने तथा सूत्र में व्यक्त करने की विधि को ‘सहसम्बन्ध’ कहते हैं।”

सहसम्बन्ध के प्रकार
सहसम्बन्ध के दो प्रकार निम्नलिखित हैं
1. धनात्मक सहसम्बन्ध- जब दो चरों में परिवर्तन एक ही दिशा में होता है अर्थात् एक चर के बढ़ने पर दूसरा चर भी बढ़ता है और एक के घटने पर दूसरा भी घटता है तो ऐसे सहसम्बन्ध को ‘धनात्मक सहसम्बन्ध’ कहते हैं।

2. ऋणात्मक सहसम्बन्ध- जब दो चरों में परिवर्तन एक-दूसरे की विपरीत दिशाओं में होता है तो इसे ‘ऋणात्मक सहसम्बन्ध’ कहते हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित आँकड़ों से माध्य विचलन ज्ञात कीजिए15, 17, 19, 25, 30, 35, 48.
हल:
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 2 Data Processing 8
चरण
(1) मदों को X मानिए।
(2) समान्तर माध्य ([latex]\bar{X}[/latex]) ज्ञात कीजिए।
(3) प्रत्येक मद में से [latex]\bar{X}[/latex] घटाइए (X – [latex]\bar{X}[/latex] = d)
(4) प्रत्येक विचलन को जोड़कर Σd ज्ञात करें।
(5) विचलनों के योग को मदों की संख्या से भाग दीजिए।
सूत्र = माध्य विचलन = [latex]\frac{\Sigma d}{n}=\frac{64}{7}[/latex] = 9.14

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ को स्पष्ट कीजिए
(i) आवृत्ति या बारंबारता, (ii) वर्ग, (iii) वर्ग-आवृत्ति, (iv) आवृत्ति-वितरण श्रृंखला, (v) मिलान रेखाएँ।
उत्तर:
(i) आवृत्ति या बारंबारता- किन्हीं आँकड़ों के समूह में एक मद (विशेष अंक) कितनी बार आता है अर्थात् उस संख्या की कितनी बार पुनरावृत्ति होती है, उसे उस मद की आवृत्ति या बारंबारता कहते हैं। उदाहरणत: किसी सारणी में मद 135 की चार बार पुनरावृत्ति हुई है, अत: 135 की बारंबारता 4 है।

(ii) वर्ग- यदि मदों (आँकड़ों) की संख्या बहुत अधिक हो तो विभिन्न मानों को छोटे-छोटे समूहों में बाँट दिया जाता है, जिन्हें वर्ग कहते हैं; जैसे-119-129, 129-139 वर्ग हैं।

(iii) वर्ग-आवृत्ति- किसी भी एक वर्ग में आने वाले मदों की संख्या को ‘वर्ग आवृत्ति’ कहते हैं।

(iv) आवृत्ति-वितरण श्रृंखला- यह आवृत्तियों के बंटन को प्रदर्शित करने वाली श्रृंखला है जिसमें मात्रात्मक सूचनाओं को संक्षिप्त करके व्यवस्थित रूप में रखा जाता है।

(v) मिलान रेखाएँ- आवृत्ति श्रृंखला की रचना करते समय प्रत्येक वर्ग में पड़ने वाली मद को एक छोटी-सी रेखा के द्वारा प्रकट किया जाता है जिसे ‘मिलान रेखा’ कहा जाता है। प्रत्येक चार मिलान रेखाओं के समूह के बाद पाँचवीं मिलान रेखा उन चारों रेखाओं को काटती हुई खींची जाती है, जैसे। फिर इन्हें गिनकर उस वर्ग-विशेष के सामने लिख दिया जाता है।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
माध्य क्या है?
उत्तर:
माध्य- इसे औसत भी कहते हैं। आँकड़ों को समझने और उनकी तुलना करने में औसत सर्वाधिक प्रभावशाली है। माध्य या औसत एक ऐसी अकेली संख्या है जो पूरी श्रृंखला के सभी आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करती है। औसत तो अधिकतम और न्यूनतम मूल्यों के बीच का एक मूल्य या मद होती है जो अधिक या कम सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व कर देती है।

प्रश्न 2.
सहसम्बन्ध में स्वतन्त्र व आश्रित चर को समझाइए।
उत्तर:
सहसम्बन्ध में स्वतन्त्र व आश्रित चर-सहसम्बन्ध के कुछ चर दूसरे चरों को प्रभावित करते हैं; इसीलिए उनमें सहसम्बन्ध होता है। जो चर प्रभावित होते हैं उन्हें ‘आश्रित चर’ कहा जाता है। इसके विपरीत जो चर प्रभावित करते हैं उन्हें ‘स्वतन्त्र चर’ कहा जाता है। उदाहरणत: कृषि उत्पादकता सिंचाई पर निर्भर करती है। इसमें सिंचाई ‘स्वतन्त्र चर’ व कृषि ‘आश्रित चर’ मानी जाती है।

प्रश्न 3.
माध्य की उपयोगिता तथा उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
माध्य की उपयोगिता तथा उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. माध्य संक्षिप्तीकरण में सहायक है।
  2. यह तुलना में सहायक है।
  3. यह विश्लेषण में सहायक है।
  4. यह अनुपात निर्धारण में सहायक है।
  5. यह समग्र का प्रतिनिधित्व करता है।
  6. यह मार्गदर्शन प्रदान करता है।

प्रश्न 4.
एक आदर्श माध्य के आवश्यक तत्त्व/विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
एक आदर्श माध्य के आवश्यक तत्त्व/विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. आदर्श माध्य की स्थिर परिभाषा होती है।
  2. यह सभी मूल्यों पर आधारित है।
  3. यह सरल और बोधगम्य है।
  4. यह शीघ्र गणनीय होता है।
  5. यह बीजगणितीय विवेचन के योग्य है।
  6. यह निदर्शन परिवर्तनों से न्यून प्रभावित होता है।

प्रश्न 5.
बहुलक की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
बहुलक की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. बहुलक में सर्वाधिक आवृत्ति होती है।
  2. इसमें एकाधिक माध्य होता है।
  3. यह आवृत्ति पर निर्भर करती है।
  4. इसकी परिकलन विधि आसान है।
  5. इसमें अधिक व न्यून मूल्य का महत्त्व नहीं होता है।

प्रश्न 6.
माध्यिका की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
माध्यिका की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • माध्यिका का निर्धारण करने के लिए पदों को आरोही (बढ़ते हुए) या अवरोही (घटते हुए) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
  • माध्यिका समंकमाला के केन्द्र में स्थित पद का मूल्य होता है।
  • माध्यिका सम्पूर्ण समंक श्रेणी को दो बराबर-बराबर भागों में बाँटती है तथा विभाजित करती है।
  • माध्यिका को पद-मूल्यों की क्रमिक वृद्धि पर आधारित किया जाता है, जिसके एक तरफ मूल्य कम तथा दूसरी तरफ अधिक मूल्य होते हैं।

प्रश्न 7.
विस्तार के गुणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
विस्तार के गुण निम्नलिखित हैं

  1. विस्तार को सफलतापूर्वक मापा जा सकता है।
  2. विस्तार को समझना भी सरल है।
  3. इसका प्रयोग बड़े उद्योगों एवं कल-कारखानों में उत्पादन की वस्तुओं की गुणवत्ता के नियन्त्रण में विशेष रूप से किया जाता है।

प्रश्न 8.
विस्तार के दोषों को समझाइए।
उत्तर:
विस्तार के दोष निम्नलिखित हैं-

  • विस्तार किसी भी श्रेणी के विचरण का स्थायी माप नहीं होता है।
  • अधिकतम और न्यूनतम के मध्य पद मूल्यों में होने वाले प्रभाव का विस्तार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • विस्तार की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें चरम मूल्यों के बीच स्थित पद-मूल्यों के विचलन का ज्ञान नहीं हो पाता है।
  • आवृत्ति बंटनों के लिए विस्तार हमेशा उपयुक्त नहीं होते हैं।

प्रश्न 9.
मानक विचलन की विशेषताएँ समझाइए।
उत्तर:
मानक विचलन की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. इसके आकलन में मूल्य के विचलन सदैव समान्तर माध्य से ही ज्ञात किए जाते हैं।
  2. इसकी माप में धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-) चिह्नों को छोड़ा नहीं जाता है, बल्कि विचलनों का . वर्ग तो लिया जाता है।

प्रश्न 10.
विचरण के गुणांक को समझाइए।
उत्तर:
विचरण का गुणांक-प्रमाप विचलन के गुणांक का प्रयोग विभिन्न श्रेणियों में प्रमाप विचलन का तुलनात्मक अध्ययन एवं विवेचन किया जाता है। इसका मूल्य सामान्यतया एक से कम दशमलव 1 से 9 तक संख्या हो सकती है।
प्रमाप विचलन का प्रतिशत ही विचरण का गुणांक होता है। इसका सूत्र निम्नलिखित है
[latex]\frac{\mathrm{S} . \mathrm{D}}{x}.[/latex] × 100
अथवा Coefficient of S.D. × 100.

प्रश्न 11.
प्रमाप विचलन के लाभ बताइए।
उत्तर:
प्रमाप विचलन के लाभ निम्नलिखित हैं

  1. प्रमाप विचलन सभी मूल्यों पर आधारित है।
  2. यह स्पष्ट व निश्चित माप होता है।
  3. इसमें परिवर्तन पर न्यूनतम प्रभाव होता है।
  4. यह उच्चस्तरीय सांख्यिकी में प्रयोग किया जाता है।
  5. यह अपकिरण के माप की सर्वश्रेष्ठ विधि है।

प्रश्न 12.
प्रमाप विचलन के दोष/अवगुण/कमियाँ समझाइए।
उत्तर:
प्रमाप विचलन के दोष/अवगुण/कमियाँ निम्नलिखित हैं·
(1) प्रमाप विचलन की गणनाविधि एवं प्रक्रिया अन्य अपकिरण की माप की विधियों से कठिन है। इसे समझना, गणना करना आदि कष्टसाध्य है।
(2) इसके माप में चरम मूल्यों को अत्यधिक महत्त्व दिया जाता है।

मौखिक प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप क्या होता है?
उत्तर:
आँकड़ों की समंक श्रेणी में एक ऐसा प्रतिनिधि मूल्य जो सम्पूर्ण श्रेणी की केन्द्रीय प्रवृत्ति को सरल और संक्षिप्त रूप से अभिव्यक्त करे, केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप’ कहलाता है।

प्रश्न 2.
केन्द्रीय प्रवृत्ति के प्रमुख माप कौन-कौन-से हैं?
उत्तर:
सामान्यतः केन्द्रीय प्रवृत्ति के 3 माप होते हैं

  1. अंकगणितीय माध्य/औसत
  2. माध्यिका तथा
  3. बहुलक।

प्रश्न 3.
केन्द्रीय प्रवृत्ति का कौन-सा माप स्थितिजन्य है?
उत्तर.

  • माध्यिका एवं
  • बहुलक।

प्रश्न 4.
आँकड़ों में विचरणशीलता का विक्षेपण को जानना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
यह जानने के लिए कि माध्य आँकड़ों का उचित प्रतिनिधित्व कर रहा है अथवा नहीं, विचरणशीलता का अध्ययन आवश्यक है।

प्रश्न 5.
प्रकीर्णन के मापन की प्रमुख विधियों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रकीर्णन के मापन की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. माध्य विचलन
  4. मानक विचलन (S.D.) तथा विचरण गुणांक (C.V.)
  5. लारेन्ज वक्र।

प्रश्न 6.
सहसम्बन्ध किसे कहते हैं?
उत्तर:
विभिन्न चरों के बीच संख्यात्मक सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव के माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहते हैं।

प्रश्न 7.
सहसम्बन्ध ज्ञात करने की मात्रिक विधियाँ कौन-कौन-सी हैं?
उत्तर:

  1. कार्ल पियर्सन का सहसम्बन्ध का गुणांक (r) तथा
  2. स्पीयरमैन कोटिक्रम सहसम्बन्ध (rK)

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
केन्द्रीय प्रवृत्ति का प्रमुख माप है
(a) अंकगणितीय माध्य
(b) माध्यिका
(c) बहुलक .
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 2.
केन्द्रीय प्रवृत्ति का स्थितिजन्य माप है
(a) माध्यिका
(b) बहुलक
(c) (a) व (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) व (b) दोनों।

प्रश्न 3.
प्रकीर्णन के मापन की विधि नहीं है
(a) विस्तार
(b) बहुलक
(c) माध्य विचलन
(d) लॉरेन्ज वक्र।
उत्तर:
(b) बहुलक।

प्रश्न 4.
‘विस्तार’ का संकेताक्षर है..
(a) R
(b) L
(c) S
(d) P
उत्तर:
(a) R.

प्रश्न 5.
पूर्ण ऋणात्मक सहसम्बन्ध होता है
(a) 1
(b) 0
(c) – 1
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) – 1.

प्रश्न 6.
पूर्ण सहसम्बन्ध होता है
(a) – 1
(b) +1
(c) ±1
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) ±1.

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Practical Work Chapter 1 Data: Its Source and Compilation (आंकड़े-स्रोत और संकलन)

UP Board Class 12 Geography Chapter 1 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 1 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(i) एक संख्या अथवा लक्षण जो मापन को प्रदर्शित करता है, कहते हैं
(क) अंक
(ख) आँकड़े
(ग) संख्या
(घ) लक्षण।
उत्तर:
(ख) आँकड़े।

(ii) एकल आधार सामग्री एकमात्र माप है
(क) तालिका
(ख) आवृत्ति
(ग) वास्तविक संसार
(घ) सूचना।
उत्तर:
(क) तालिका।

(iii) एक मिलान चिह्न में, फोर एवं क्रॉसिंग फिफ्थ द्वारा समूहीकरण को कहते हैं
(क) फोर एंड क्रॉस विधि
(ख) मिलान चिह्न विधि
(ग) आवृत्ति अंकित विधि
(घ) समावेश विधि।
उत्तर:
(क) फोर एंड क्रॉस विधि।

(iv) ओजाइव एक विधि है जिसमें
(क) साधारण आवृत्ति नापी जाती है
(ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती है
(ग) साधारण आवृत्ति अंकित की जाती है
(घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती है।
उत्तर:
(ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती है।

(v) यदि वर्ग के दोनों अन्त आवृत्ति समूह में लिए गए हों, इसे कहते हैं
(क) बहिष्कार विधि
(ख) समावेशी विधि
(ग) चिह्न विधि
(घ) सांख्यिकीय विधि।
उत्तर:
(ख) समावेशी विधि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
(i) आँकड़ा और सूचना के बीच अन्तर।
उत्तर:
आँकड़ा- आँकड़ों को ऐसी संख्याओं के रूप में परिभाषित किया गया है जो यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करती हैं।
सूचना- सूचना को एक प्रश्न के अर्थपूर्ण उत्तर अथवा अर्थपूर्ण उद्दीपक के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे अगले प्रश्नों में सोपानित किया जा सकता है।

(ii) आँकड़ों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आँकड़ों को ऐसी संख्याओं के रूप में परिभाषित किया गया है जो यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करती हैं।

(iii) एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ हैं?
उत्तर:
तालिका में दी गई पाद टिप्पणी से लाभ यह है कि उससे तालिका के स्रोत की जानकारी हो जाती है तथा अन्य संकेतों का पता चलता है।

(iv) आँकड़ों के प्राथमिक स्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जो आँकड़े प्रथम बार व्यक्तिगत रूप से अथवा व्यक्तियों के समूह/संस्था अथवा संगठन द्वारा एकत्रित किए जाते हैं, आँकड़ों के प्राथमिक स्रोत कहलाते हैं।

(v) द्वितीयक आँकड़ों के पाँच स्रोत बताइए।
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़ों के पाँच स्रोत हैं

  1. सरकारी प्रकाशन
  2. अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन
  3. अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन
  4. निजी प्रकाशन एवं
  5. समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ।

(vi) आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्जी विधि क्या है?
उत्तर:
आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्जी विधि में एक वर्ग के उच्च मूल्य को उसी वर्ग में शामिल किया जाता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए
(i) राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा कीजिए जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्र किए जा सकते हैं।
उत्तर:
राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय अभिकरण निम्नलिखित हैं जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्र किए जा सकते हैं
(1) सरकारी प्रकाशन- केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों के अनेक मंत्रालय तथा विभाग और जिलों के बुलेटिन द्वितीय सूचनाओं के महत्त्वपूर्ण साधन हैं।
इनमें महत्त्वपूर्ण द्वितीय वर्ग की सूचनाएँ मिलती हैं। इसमें भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित भारत की जनगणना, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्टे, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की मौसम रिपोर्ट, राज्य सरकारों द्वारा प्रकाशित सांख्यिकीय सारांश और विभिन्न आयोगों द्वारा प्रकाशित आवधिक रिपोर्ट शामिल की जाती हैं।

(2) अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन- इनमें नगर विकास प्राधिकरणों और विभिन्न नगरों और शहरों के नगर-निगमों और जिला परिषदों के प्रकाशन और रिपोर्ट आते हैं।

(3) अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन- इसमें वार्षिकी, संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अभिकरणों; जैसे—संयुक्त राष्ट्र, अभिकरण, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, विश्व स्वास्थ्य संगठन, खाद्य व कृषि परिषद् आदि द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट और मोनोग्राफ शामिल किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के कुछ महत्त्वपूर्ण आवधिक प्रकाशन भी हैं जिनमें डैमोग्राफिक इयर बुक, स्टेटिस्टीकल इयर बुक और मानव विकास रिपोर्ट आदि महत्त्वपूर्ण हैं।

(ii) सूचकांक का क्या महत्त्व है? सूचकांक की परिकलन की प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए।
उत्तर:
सूचकांक- सूचकांक चर अथवा एक सांख्यिकीय माप है, जिसे चर अथवा समय भौगोलिक स्थिति या दूसरी विशेषताओं के सन्दर्भ में सम्बन्धित चरों के सम्बन्धित समूह में परिवर्तन को दर्शाने के लिए अभिकल्पित किया जाता है। सूचकांक का महत्त्व
सूचकांक का निम्नलिखित महत्त्व है
(1) सूचकांक न केवल समय के साथ हुए परिवर्तनों की माप करता है बल्कि विभिन्न स्थानों, उद्योगों, नगरों अथवा देशों की आर्थिक दशाओं की तुलना भी करता है।

(2) सूचकांक का उपयोग व्यापक रूप में अर्थशास्त्र और व्यवसाय में लागत और मात्रा में आए परिवर्तनों को देखने के लिए किया जाता है।
सूचकांक के परिकलन के लिए साधारण समुच्चय विधि सर्वाधिक उपयोगी है। इसका सूत्र निम्नलिखित
[latex]\frac{\Sigma q_{1}}{\Sigma q_{0}}[/latex] × 100
Σq1 = वर्तमान वर्ष के उत्पादन का योग
Σq0 = आधार वर्ष के उत्पादन का योग
उदाहरण— निम्न तालिका में भारत में लौह इस्पात के उत्पादन और 1980-81 से 2010-11 तक के सूचकांकों के परिवर्तन को दर्शाती
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 1 Data Its Source and Compilation 1

क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
भूगोल की 35 विद्यार्थियों की कक्षा में, निम्नलिखित अंक 10 अंक के यूनिट टेस्ट में प्राप्त किए हैं
1, 0, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 2, 3, 4, 0, 2, 5, 8, 4, 5, 3, 6, 3, 2, 7, 6, 5, 4, 3, 7, 8, 9, 7, 9, 4, 5, 4, 3 आँकड़े को संचयी आवृत्ति वितरण में प्रस्तुत कीजिए।
हल:
वर्गीकरण
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 1 Data Its Source and Compilation 2

प्रश्न 2.
अपनी कक्षा के भूगोल विषय की अन्तिम परीक्षा का परिणाम एकत्र कीजिए और प्राप्तांकों को संचयी आवृत्ति वितरण के रूप में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
नोट-छात्र स्वयं करें।

UP Board Class 12 Geography Chapter 1 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 1 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
साक्षात्कार लेते समय बरती जाने वाली सावधानियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
साक्षात्कार लेते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ-साक्षात्कार लेते समय शोधकर्ता के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है

  • जिस व्यक्ति का साक्षात्कार लेना है उसके साथ मैत्रीपूर्वक मेलजोल स्थापित करना चाहिए।
  • प्राप्त की जाने वाली सूचना की परिशुद्ध सूची बना लेनी चाहिए।
  • अपने सर्वेक्षण के उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए और कोई झूठा वादा नहीं करना चाहिए।
  • उत्तर देने वाले से उसके परिवार की कुशलता के विषय में बातचीत करने से काम आसान हो जाएगा।
  • संवेदनशील प्रश्न पूछने से पहले उत्तर देने वाले व्यक्ति को विश्वास में ले लेना चाहिए।
  • प्रश्नों की भाषा सरल व शिष्ट होनी चाहिए।
  • जब उत्तरदाता व्यस्त हो तो उससे प्रश्न नहीं पूछना चाहिए।
  • उत्तरंदाता के आत्मसम्मान और धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाले प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए।
  • उत्तरदाता से प्राप्त उत्तर को तुरन्त नोट कर लिया जाना चाहिए।
  • साक्षात्कार के बाद उत्तरदाता को धन्यवाद अवश्य देना चाहिए।

प्रश्न 2.
प्राथमिक व द्वितीयक आँकड़ों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
प्राथमिक व द्वितीयक आँकड़ों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
प्राथमिक आँकड़ों की विशेषताएँ

  1. ये आँकड़े विस्तृत क्षेत्र और विस्तृत जानकारी के लिए उपयुक्त हैं।
  2. इन आँकड़ों के अध्ययन में लचीलापन होता है।
  3. इनके द्वारा गुप्त सूचनाएँ एकत्रित की जा सकती हैं।
  4. ये आँकड़े विश्वसनीय होते हैं।
  5. इन आँकड़ों को एकत्रित करने में समय व धन अपेक्षाकृत अधिक लगता है।
  6. व्यवस्थित ढंग व पूर्ण निर्धारित उद्देश्य से संकलित ये आँकड़े उपयोगी होते हैं।
  7. इन आँकड़ों का उपयोग करते समय विशेष ध्यान देने की आवश्यकता नहीं होती।

द्वितीयक आँकड़ों की विशेषताएँ

  1. द्वितीयक आँकड़े मौलिक नहीं होते, क्योंकि अनुसन्धानकर्ता अन्य एजेन्सियों द्वारा एकत्रित आँकड़ों का प्रयोग करते हैं।
  2. इन आँकड़ों के संकलन में समय, श्रम व धन अपेक्षाकृत कम लगता है।
  3. ये आँकड़े उपयोगी हो भी सकते हैं और नहीं भी।
  4. द्वितीयक आँकड़ों का प्रयोग अत्यन्त सावधानी से करना चाहिए।
  5. विस्तृत क्षेत्र व विस्तृत जानकारी के लिए उपयुक्त नहीं है।
  6. ये आँकड़े विश्वसनीय नहीं होते हैं।
  7. इन आँकड़ों का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
प्राथमिक आँकड़ों के साधनों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़ों के साधन प्राथमिक आँकड़ों के साधन हैं— व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली अथवा अनुसूची एवं अन्य विधियाँ।
1. व्यक्तिगत प्रेक्षण- इस विधि में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा क्षेत्र में प्रत्यक्ष प्रेक्षण द्वारा आँकड़े एकत्रित किए जाते हैं। प्रेक्षक स्वयं क्षेत्र में जाकर सूचनाएँ एकत्रित करता है। प्रेक्षणकर्ता को विषय का सैद्धान्तिक ज्ञान होना आवश्यक है, ताकि मूल्यांकन वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष हो सके।

2. साक्षात्कार- इस विधि में शोधकर्ता उत्तर देने वाले व्यक्ति के साथ प्रत्यक्ष सम्पर्क स्थापित करता है और संवाद तथा बातचीत द्वारा सूचनाएँ अथवा आँकड़े प्राप्त करता है।

3. प्रश्नावली- इस विधि में वांछित सूचना से सम्बन्धित साधारण प्रश्नों को उनके सम्भावित उत्तरों के साथ एक सादे कागज पर लिखा जाता है और उत्तर देने वाले व्यक्ति को दिए गए विकल्पों में सही उत्तर पर निशान लगाने को कहा जाता है।

4. अनुसूची- अनुसूची लगभग प्रश्नावली जैसी ही होती है, क्योंकि इसमें भी जाँच-पड़ताल से सम्बन्धित प्रश्न दिए हुए होते हैं। इन दोनों में अन्तर केवल यह है कि प्रश्नावली में उत्तर देने वाला प्रश्नावलियों को स्वयं भरता है, जबकि अनुसूची में परिगणक उत्तर देने वाले से प्रश्न पूछकर स्वयं भरता है।

5. अन्य विधियाँ- उपर्युक्त विधियों के अलावा कुछ अन्य विधियों की सहायता से भी आँकड़े एकत्रित किए जा सकते हैं।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
समावेशी विधि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
समावेशी विधि-समावेशी विधि में एक मूल्य जो वर्ग की उच्च सीमा के मूल्य के समान होता है, उसे उसी वर्ग में रखा जाता है; इसीलिए इस विधि को ‘समावेशी विधि’ कहते हैं। इस विधि में वर्गों को अलग प्रकार से प्रदर्शित किया जाता है। साधारणतया वर्ग की उच्च सीमा में अगले वर्ग की निम्न सीमा से 1 का अंतर होता है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस विधि में वर्ग का विस्तार 10 इकाइयों तक होता है।.

प्रश्न 2.
ओजाइव क्या है?
उत्तर:
ओजाइव-जब आवृत्ति को जोड़ दिया जाता है, उन्हें संचयी आवृत्ति कहा जाता है और जिस सारणी में सूचीगत किए जाते हैं, उसे संचयी आवृत्ति सारणी कहते हैं। संचयी आवृत्ति द्वारा प्राप्त किए गए वक्र को ‘ओजाइव’ कहते हैं। इसका निर्माण या तो कमतर विधि या अधिकतर विधि द्वारा करते हैं।

प्रश्न 3.
सूचकांक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सूचकांक-सूचकांक चर अथवा एक सांख्यिकीय माप है जिसे चर अथवा समय भौगोलिक स्थिति या दूसरी विशेषताओं के सन्दर्भ में सम्बन्धित चरों के सम्बन्धित समूह में परिवर्तन को दर्शाने के लिए अभिकल्पित किया जाता है। सूचकांक न केवल समय के साथ हुए परिवर्तनों की माप करता है बल्कि विभिन्न स्थानों, उद्योगों, नगरों अथवा देशों की आर्थिक दशाओं की तुलना भी करता है।

प्रश्न 4.
प्राथमिक आँकड़े को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़े-वे आँकड़े जो क्षेत्र से सीधे किसी तत्त्व की गणना द्वारा अथवा लोगों से साक्षात्कार करके प्राप्त किए जाते हैं, उन्हें प्राथमिक आँकड़े’ कहते हैं। प्राथमिक आँकड़ों का मुख्य स्रोत सर्वेक्षण होता है। ये आँकड़े प्रथम बार व्यक्तिगत रूप से अथवा व्यक्तियों के समूह, संस्था/संगठन आदि द्वारा एकत्रित किए जाते हैं।
उदाहरणत- किसी कारखाने में कर्मचारियों की आय या किसी गाँव में भू-उपयोग से सम्बन्धित आँकड़े इत्यादि।

प्रश्न 5.
द्वितीयक आँकड़े को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़े-द्वितीयक आँकड़े प्रयोगकर्ता द्वारा स्वयं एकत्रित नहीं किए जाते हैं। ये बहुधा प्रकाशित होते हैं। कई बार अप्रकाशित साधनों से भी द्वितीयक आँकड़े प्राप्त किए जाते हैं। प्रयोगकर्ता ऐसे आँकड़ों को लेकर उन्हें सही व विश्वसनीय मानते हुए अपना निष्कर्ष निकालते हैं।

प्रश्न 6.
सारणीयन के उद्देश्यों को समझाइए।
उत्तर:
सारणीयन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं

  • सारणीयन का प्रमुख उद्देश्य अनुसन्धान द्वारा प्राप्त सामग्री को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना है।
  • सारणीयन से बोधगम्य सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं।
  • संकलित सामग्री को स्पष्ट करने के लिए उन्हें सारणियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
  • सारणीयन से तुलना करना, निष्कर्ष निकालना एवं व्याख्या करना आसान हो जाता है।
  • सारणीयन का उद्देश्य तथ्यों को संक्षिप्त रूप से प्रदर्शित करना है।

प्रश्न 7.
सारणीयन के लाभों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सारणीयन के निम्नलिखित लाभ हैं

  1. सारणीयन से अंकों की गणना आदि करने में आसानी रहती है।
  2. सारणीयन से तुलनात्मक अध्ययन करने में सुविधा रहती है।
  3. सारणीयन से समय व स्थान की बचत होती है।
  4. सारणीयन से तथ्यों का व्यवस्थित क्रम रहता है।
  5. सारणीयन से स्मरण करने में आसानी रहती है।
  6. सारणीयन सूचनाओं का स्पष्ट चित्र है।

प्रश्न 8.
सूचकांक की उपयोगिता एवं महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सूचकांक की उपयोगिता एवं महत्त्व निम्नलिखित हैं

  1. सूचकांक की उपयोगिता सार्वभौमिक है।
  2. सूचकांक से जटिल तथ्यों का सरलीकरण हो जाता है।
  3. सूचकांक नीति-निर्माण में सहायक है।
  4. सूचकांक तुलना में सहायक है।
  5. सूचकांक भावी प्रवृत्तियों के संकेत हैं।

प्रश्न 9.
साक्षात्कार प्रविधि का महत्त्व समझाइए।
उत्तर:
साक्षात्कार प्रविधि का महत्त्व निम्नलिखित है

  1. साक्षात्कार से सभी प्रकार की सूचनाओं का संकलन होता है।
  2. इससे भूतकालीन घटनाओं का अध्ययन होता है।
  3. यह परस्पर प्रेरणात्मक अध्ययन है।
  4. यह एक मनोवैज्ञानिक अध्ययन है।
  5. यह अमूर्त-अदृश्य घटनाओं का अध्ययन है।
  6. इसमें सत्यापन की क्षमता होती है।

प्रश्न 10.
साक्षात्कार प्रविधि की सीमाएँ बताइए।
उत्तर:
साक्षात्कार प्रविधि की सीमाएँ निम्नलिखित हैं

  1. साक्षात्कार में सूचनादाता पर निर्भरता होती है।
  2. इसमें व्यक्तिगत पक्षपात की सम्भावना रहती है।
  3. इसमें स्मरण शक्ति पर निर्भरता होती है।
  4. सूचनादाता द्वारा गलत सूचना देने की सम्भावना रहती है।
  5. यह एक महँगी विधि है।
  6. यह बड़े अध्ययन क्षेत्र के लिए अनुपयुक्त है।

मौखिक प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
आँकड़ों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी लक्षण के सम्बन्ध में प्राप्त मात्रात्मक सूचनाओं को, जो स्थान, समय या दशा से जुड़ी हुई होती हैं, ‘आँकड़े’ कहलाती हैं।

प्रश्न 2.
प्राथमिक व द्वितीयक आँकड़ों में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जब शोधकर्ता स्वयं क्षेत्र में या आँकड़ों के स्रोत पर पहुँचकर मात्रात्मक सूचनाएँ प्राप्त करता है तो उन्हें ‘प्राथमिक आँकड़े’ कहते हैं। सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, व्यक्तिगत प्रकाशनों तथा पत्र-पत्रिकाओं, रिपोर्टों से प्राप्त आँकड़े ‘द्वितीयक आँकड़े’ कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
प्राथमिक आँकड़ों को एकत्रित करने के स्रोतों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार द्वारा
  2. अप्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार द्वारा
  3. संवाददाताओं से प्राप्त सूचना
  4. डाक द्वारा प्रश्नावली भेजकर
  5. परिगणकों द्वारा प्रश्नावली भेजकर।

प्रश्न 4.
निरपेक्ष आँकड़ा क्या है?
उत्तर:
जब आँकड़े अपने मूल रूप में पूर्णांक की तरह प्रस्तुत किए जाते हैं, उन्हें ‘निरपेक्ष आँकड़े’ (कच्चे आँकड़े) कहा जाता है।

प्रश्न 5.
द्वितीयक आँकड़ों के स्रोतों के नाम बताइए।
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़ों के दो स्रोत हैं
(1) प्रकाशित एवं
(2) अप्रकाशित स्रोत।

1. प्रकाशित एवं

  • सरकारी प्रकाशन
  • अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन
  • अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन
  • निजी प्रकाशन
  • समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ
  • इलेक्ट्रॉनिक।

2. अप्रकाशित स्रोत

  • सरकारी प्रलेख
  • अर्द्ध-सरकारी प्रलेख
  • निजी प्रलेख।

प्रश्न 6.
प्राथमिक आँकड़ों के साधनों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़ों के साधन

  1. व्यक्तिगत प्रेक्षण
  2. साक्षात्कार
  3. प्रश्नावली व अनुसूची एवं
  4. अन्य विधियाँ।

प्रश्न 7.
आवृत्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
मदों की संख्याएँ ‘आवृत्ति’ कहलाती हैं।

प्रश्न 8.
संचयी आवृत्ति को किससे प्रदर्शित करते हैं?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति को cf से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 9.
समूहों या वर्गों को तैयार करने के लिए लाई जाने वाली विधियों के नाम बताइए।
उत्तर:

  • अपवर्ती विधि एवं
  • समावेशी विधि।

प्रश्न 10.
आवृत्ति बहुभुज किसे कहते हैं?
उत्तर:
आवृत्तियों के वितरण का ग्राफ ‘आवृत्ति बहुभुज’ के नाम से जाना जाता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आँकड़े एकत्रित करने के स्रोत हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच।
उत्तर:
(a) दो।

प्रश्न 2.
प्राथमिक आँकड़ों का साधन नहीं है
(a) साक्षात्कार
(b) प्रश्नावली
(c) अनुसूची
(d) सरकारी प्रकाशन।
उत्तर:
(d) सरकारी प्रकाशन।

प्रश्न 3.
आँकड़ों के द्वितीयक स्रोत का अप्रकाशित साधन है
(a) सरकारी प्रलेख
(b) अर्द्धसरकारी प्रलेख
(c) निजी प्रलेख
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
साधारण आवृत्ति को प्रदर्शित करने वाला संकेताक्षर है
(a)f
(b) cf
(c) s
(d) t.
उत्तर:
(a) f.

प्रश्न 5.
समूहों या वर्गों को तैयार करने के लिए कौन-सी विधि प्रयोग में लायी जाती है
(a) समावेशी विधि
(b) अपवर्जी विधि
(c) (a) व (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) व (b) दोनों।

UP Board Solutions for Class 12 Geography

UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 6 Spatial Information Technology

UP Board Solutions for Class 12 Geography Practical Work Chapter 6 Spatial Information Technology (स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी)

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(i) स्थानिक आँकड़ों के लक्षण निम्नांकित स्वरूप में दिखाई देते हैं
(क) अवस्थितिक
(ख) रैखिक
(ग) क्षेत्रीय
(घ) उपर्युक्त सभी स्वरूपों में।
उत्तर:
(क) अवस्थितिक।

(ii) विश्लेषक मॉड्यूल सॉफ्टवेयर के लिए कौन-सा एक प्रचालन आवश्यक है
(क) आँकड़ा संग्रहण
(ख) आँकड़ा प्रदर्शन
(ग) आँकड़ा निष्कर्षण
(घ) बफरिंग।
उत्तर:
(क) आँकड़ा संग्रहण।

(iii) चित्ररेखापुंज (रैस्टर) आँकड़ा फॉरमेट का एक अवगुण क्या है
(क) सरल आँकड़ा संरचना
(ख) सहज एवं कुशल उपरिशायी
(ग) सुदूर संवेदन प्रतिबिम्ब के लिए सक्षम
(घ) कठिन परिपथ चाल विश्लेषण।
उत्तर:
(क) सरल ऑकड़ा संरचना।

(iv) सदिश (वेक्टर) आँकड़ा फॉरमेट का एक गुण क्या है
(क) समिश्र आँकड़ा संरचना
(ख) कठिन उपरिशायी प्रचालन
(ग) सुदूर संवेदन आँकड़ों के साथ कठिन सुसंगतता
(घ) सघन आँकड़ा संरचना।
उत्तर:
(ग) सुदूर संवेदन आँकड़ों के साथ कठिन सुसंगतता।

(v) भौगोलिक सूचना तंत्र कोट में उपयोग कर नगरीय परिवर्तन की पहचान कुशलतापूर्वक की जाती है
(क) उपरिशायी प्रचालन
(ख) सामीप्य विश्लेषण
(ग) परिपथ जाल विश्लेषण
(घ) बफरिंग।
उत्तर:
(घ) बफरिंग।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
(i) चित्ररेखाएंज एवं सदिश (वेक्टर) आँकड़ा मॉडल के मध्य अंतर।
उत्तर:
चित्ररेखाएंज (रैस्टर) आँकड़े वर्गों के जाल के प्रारूप में आँकड़ों का ग्राफीय प्रदर्शन करते हैं जबकि सदिश (वेक्टर) आँकड़े वस्तु का प्रदर्शन विशिष्ट बिन्दुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में करते हैं।

(ii) उपरिशायी विश्लेषण क्या है?
उत्तर:
उपरिशायी विश्लेषण में भू-संदर्भित सूचना के प्रक्रमण, स्थिति निर्धारण आदि सूचनाओं का विश्लेषण किया जाता है।

(iii) भौगोलिक सूचना तन्त्र में हस्तचलित विधि के गुण क्या हैं?
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र में हस्तचलित विधि के गुण निम्नलिखित हैं

  1. प्रयोक्ता प्रदर्शित किए जाने वाले स्थानिक लक्षणों के सम्बन्ध में प्रश्न पूछ सकते हैं।
  2. गुण न्यास की जाँच करके अथवा विश्लेषण करके मानचित्र आलेखित किए जा सकते हैं।
  3. स्थानिक प्रचालकों का समन्वित सूचनाधार पर अनुप्रयोग करके सूचनाओं के नये समुच्चयन उत्पन्न किए जा सकते हैं।
  4. विशेष आँकड़ों के विभिन्न आइटम एक-दूसरे के साथ अंश अवस्थिति कोड की सहायता से जोड़े जा सकते हैं।

(iv) भौगोलिक सूचना तन्त्र के महत्त्वपूर्ण घटक क्या हैं?
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र के महत्त्वपूर्ण घटक हैं

  1. हार्डवेयर
  2. सॉफ्टवेयर,
  3. आँकड़े एवं
  4. लोग।

(v) भौगोलिक सूचना तन्त्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि क्या हैं?
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि निम्नलिखित हैं

  1. आँकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक रूप में आँकड़े प्राप्त करना।
  2. विद्यमान अनुरूप ऑकड़ों का अंकीकरण करना।
  3. भौगोलिक सत्ताओं का स्वयं सर्वेक्षण करके।

(vi) स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?
उत्तर:
स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से अभिप्राय किसी स्थान अथवा क्षेत्र विशेष से सम्बन्धित आँकड़ों एवं सूचनाओं का एकत्रीकरण करना तथा कम्प्यूटर द्वारा उन सूचनाओं की संगणना, भण्डारण, विश्लेषण और उपयोग करने से है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों में दीजिए
(i) चित्ररेखाएंज (रैस्टर) एवं सदिश (वेक्टर) आँकड़ा फॉर्मेट को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
किारेखा{ज (रैस्टर) आँकड़ा फॉर्मेट चित्ररेखाएंज आँकड़े वर्गों के जाल के रूप में आँकड़ों का ग्राफीय प्रदर्शन करते हैं जिसमें स्तम्भ एवं पंक्तियों का जाल होता है। स्तम्भों व पंक्तियों के जाल को ‘ग्रिड’ (Grid) तथा एक स्तम्भ एवं पंक्ति के भेदन स्थल को ‘सेल’ (Cell) कहते हैं।

मान लीजिए कागज पर एक तिरछी रेखा खींची गई है। चित्ररेखाएंज में इसे ग्राफ पेपर पर बने आयतों की भाँति प्रदर्शित किया जाता है और उसके आधार पर इसका मूल्य निर्धारित किया जाता है। (चित्र) आँकड़ों का यह प्रदर्शन प्रयोक्ता को प्रतिबिम्ब के पुनर्गठन अथवा दृश्यांकन में सहायता करता है।
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 6 Spatial Information Technology 1
सेलों के आकार और उनकी संख्या के बीच सम्बन्ध को चित्ररेखाएंज (रैस्टर) के विभेदन के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है।
नीचे दिए गए चित्र में चित्ररेखाएंज फॉर्मेट में आँकड़ों पर जाल या वर्ग के आकार को स्पष्ट किया गया है।
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 6 Spatial Information Technology 2
सदिश आँकड़ा फॉर्नेट
उसी तिरछी रेखा का सदिश (वेक्टर) प्रदर्शन केवल निर्देशांकों के आरम्भिक एवं अन्तिम बिन्दुओं को दर्ज कर रेखा की स्थिति को दर्ज करके होगा। प्रत्येक बिन्दु की अभिव्यक्ति दो अथवा तीन संख्याओं के रूप में होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदर्शन द्वि-आयामी था या त्रि-आयामी, जिसे प्राय: X, Y अथवा X, Y, Z निर्देशांकों द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। (चित्र)
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 6 Spatial Information Technology 3
पहली संख्या X, बिन्दु और कागज की बाईं सीमा के बीच की दूरी है; Y बिन्दु तथा कागज की निचली सीमा के बीच दूरी; Z कागज के ऊपर अथवा नीचे से बिन्दु की उच्चता है। मापे गए बिन्दुओं को मिलाने से सदिश का निर्माण होता है।
UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 6 Spatial Information Technology 4

(ii) भौगोलिक सूचना तन्त्र से सम्बन्धित कार्यों को क्रमबद्ध रूप में किस प्रकार किया जाता है? एक व्याख्यात्मक लेख प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र की क्रियाओं का अनुक्रम
भौगोलिक सूचना तन्त्र से सम्बन्धित कार्यों का अनुक्रम निम्नलिखित है
1. स्थानिक आँकड़ा निवेश- स्थानिक आँकड़ा निवेश के विभिन्न स्रोतों को निम्नलिखित दो वर्गों में संक्षेपित किया जाता है

  • आँकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक आँकड़ा समुच्चय का प्रग्रहण।
  • हस्तेन निवेश द्वारा आंकिक आँकड़ा समुच्चयों की रचना।

2. गुण न्यास की प्रविष्टि- गुण न्यास उन स्थानिक विशेषताओं को परिभाषित करता है, जिसे भौगोलिक सूचना तन्त्र में निपटाने की आवश्यकता होती है।

3. आँकड़ों का सत्यापन और सम्पादन- भौगोलिक सूचना तन्त्र में प्रग्रहित आँकड़ों का सत्यापन एवं सम्पादन अति आवश्यक है, क्योंकि इससे आँकड़ों की शुद्धता तथा त्रुटियों की पहचान होती है। इसे कम्प्यूटर की सहायता से किया जाता है।
त्रुटियों का वर्गीकरण

  • स्थानिक आँकड़े अपूर्ण अथवा दोहरे हैं।
  • स्थानिक आँकड़े गलत मापनी पर हैं।
  • स्थानिक आँकड़े विरूपित हैं।

4. स्थानिक और गुण न्यास आँकड़ों की सहलग्नता– स्थानिक और गुण न्यास आँकड़ों की सहलग्नता का पूरा ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि ये भौगोलिक सूचना तन्त्र के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं।

5. स्थानिक विश्लेषण– भौगोलिक सूचना तन्त्र में स्थानिक विश्लेषण की क्षमता है उनकी विश्लेषणात्मक क्रियाएँ यथार्थ विश्व से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सूचनाधार में स्थानिक तथा गैर-स्थानिक गुणों का प्रयोग करती हैं।
भौगोलिक सूचना तन्त्र का प्रयोग करते हुए स्थानिक विश्लेषण के निम्नलिखित प्रचालनों को शामिल किया जाता है

  • अधिचित्रण
  • बफर विश्लेषण
  • परिपथ जाल विश्लेषण, एवं
  • आंकिक भू-भाग मॉडल।

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भौगोलिक सूचना तन्त्र के लाभ/महत्त्व/उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र के मुख्य लाभ/महत्त्व/उपयोगिता निम्नलिखित हैं

  1. भौगोलिक सूचना तन्त्र की सहायता से भूगोलवेत्ता स्थानिक प्रतिरूपों और प्रक्रियाओं की पहचान कर उनका विश्लेषण कर सकता है।
  2. इसकी सहायता से भौगोलिक तत्त्वों के बीच पाए जाने वाले अन्तर्सम्बन्धों की व्याख्या की जा सकती है। उदाहरणतः शुष्क प्रदेशों में नहरी जल की व्यवस्था के बीच अन्तर्सम्बन्ध।
  3. इसमें परिवहन तन्त्र और नगरों के विकास के अध्ययन में सहायता मिलती है।
  4. इससे कम समय और कम लागत से भौगोलिक विश्लेषण सम्भव होता है।
  5. इससे समाज के गरीबी रेखा के नीचे बसर कर रहे लोगों के सम्बन्ध में विश्वसनीय जानकारी हासिल हो सकती है।
  6. वर्तमान में G.I.S. का उपयोग पर्यावरण, कृषि, भूमि उपयोग, नियोजन, आपदा प्रबन्धन, परिवहन तन्त्र, जनांकिकीय विश्लेषण तथा नगरीय सुविधाओं के क्षेत्र में बढ़ रहा है।
  7. भौगोलिक सूचना तन्त्र का एक और उपयोग पुराने पड़ गए मानचित्रों को आधुनिक बनाना है। उदाहरणत: जलीय क्षेत्रों, नगरीय क्षेत्रों तथा वन क्षेत्रों को दिखाने वाले मानचित्रों में एक निश्चित समय अन्तराल के बाद संशोधन करना अनिवार्य होता है।

प्रश्न 2.
चित्ररेखाएंज संरचना के गुण व दोषों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चित्ररेखाएंज संरचना के गुण चित्ररेखाएंज संरचना के गुण निम्नलिखित हैं

  1. इसे समझना व कार्यान्वित करना सरल होता है।
  2. प्रत्येक सेल का अपना गुण होता है, जिससे भूमि उपयोग तथा मृदा के प्रकार जैसे समीपस्थ लक्षणों को प्रदर्शित करने में सहायक होता है।
  3. उच्च स्थानिक परिवर्तनशीलता को आसानी से प्रदर्शित किया जा सकता है।
  4. प्रिन्टर, प्लॉटर जैसे अधिकांश उत्पादक उपकरण चित्ररेखापुँज में उपलब्ध होते हैं।
  5. उपग्रह दूर संवेदन तथा अंकीय वायुचित्र से सीधे ही चित्ररेखाएंज में आँकड़े प्राप्त हो जाते हैं और आँकड़ों के परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती।

चित्ररेखा{ज संरचना के दोष चित्ररेखाएंज संरचना के दोष निम्नलिखित हैं

  1. प्रत्येक सेल केवल एक गुण का ही भण्डारण करता है।
  2. आँकड़ों के भण्डारण में उच्च कोटीय स्मृति व्यवस्था होती है और आँकड़ों के संपीडन की आवश्यकता होती है।
  3. नेटवर्क संबंधों को सुचारु रूप से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता।
  4. मिश्रित सेलों की स्थिति में अशुद्धियाँ आ जाती हैं।
  5. सेलों के खुरदरेपन से छोटे-छोटे लक्षण छूट जाते हैं।

प्रश्न 3.
भौगोलिक सूचना तन्त्र क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए। –
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र-भौगोलिक सूचना तन्त्र (G.I.S.) एक ऐसा सूचना तन्त्र है जिसे भौगोलिक अथवा स्थानिक आँकड़ों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए बनाया गया है। यह वास्तव में एक आँकड़ा संचय तन्त्र है जिसमें भौगोलिक आँकड़ों को शामिल करने के साथ-साथ उनके संसाधन और विश्लेषण की क्षमता भी होती है।
भौगोलिक सूचना तन्त्र के प्रकार
स्थानिक उपग्रहों के भण्डारण और विश्लेषण की तकनीक के आधार पर भौगोलिक सूचना तन्त्र निम्नलिखित दो प्रकार का होता है
1. रेखाएंज- यह मानचित्रों, फोटोग्राफों तथा अन्य दो आयामी वितरण को अंक रूप में भण्डारित करने की एक पद्धति है। यह पद्धति स्थान के अनुसार निरन्तर बदलने वाली परिघटनाओं को हैण्डल करने के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। यही कारण है कि पर्यावरण विज्ञानों में रेखाएंज पद्धति का उपयोग निरन्तर बढ़ रहा है।

2. सदिश- इस पद्धति में सभी वस्तुओं का अंकन बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र के रूप में किया जाता है। अंकीकरण की इस पद्धति में ‘X’, ‘Y निर्देशांकों का उपयोग किया जाता है।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रेखाएंज भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
रेखाएंज भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ (गुण) निम्नलिखित हैं

  1. इसमें भौगोलिक सूचनाओं को कोष्ठिकाओं के माध्यम से दिखाया जाता है।
  2. यह पर्यावरण और भौतिक विज्ञानों के अध्ययन के लिए उपयोगी है।
  3. इसमें एक-दूसरे से पृथक् वस्तुओं के अंकन में सुविधा होती है।
  4. यह पद्धति बताती है कि “प्रत्येक स्थान पर क्या है?”

प्रश्न 2.
सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ निलिखित हैं

  1. इसमें भौगोलिक सूचनाओं, बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र (बहुभुज) का उपयोग किया जाता है।
  2. सामाजिक सुविधाओं, उद्योगों के मानचित्रण और भौगोलिक रूप से वितरित सुविधाओं के अंकन में सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र उपयोगी है।
  3. इसमें सड़कों के अंकीकृत जाल से दो बिन्दुओं के मध्य यात्रा समयावधि का अनुभव किया जा सकता है।
  4. यह पद्धति बताती है कि “प्रत्येक वस्तु कहाँ है?”

प्रश्न 3.
हस्तेन विधियों की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
हस्तेन विधियों की सीमाएँ निम्नलिखित हैं

  1. मानचित्रीय सूचना एक विशेष ढंग से प्रक्रमित और प्रदर्शित की गई होती है।
  2. एक मानचित्र एक अथवा. एक से अधिक पूर्व-निर्धारित विषय-वस्तुओं को दर्शाता है।
  3. मानचित्रों में चित्रित सूचना में परिवर्तन करने पर एक नया मानचित्र आलेखित करना पड़ता है।

प्रश्न 4.
चित्ररेखापुँज फाइल फॉर्मेटों का अधिकतर प्रयोग किन क्रियाओं में किया जाता है?
उत्तर:
चित्ररेखा(ज फाइल फॉर्मेटों का अधिकतर प्रयोग निम्नलिखित क्रियाओं में किया जाता है

  • वायव फोटोग्राफी, उपग्रहीय प्रतिबिम्बों, क्रमवीक्षितं कागजी मानचित्रों के आंकिक प्रदर्शन और अत्यधिक ब्यौरेवार प्रतिबिम्बों वाले अन्य अनुप्रयोग के लिए।
  • जब लागत का कम करना आवश्यक हो।
  • जब मानचित्र में व्यक्तिगत मानचित्रीय लक्षण का विश्लेषण अपेक्षित न हो।
  • जब ‘बैकड्रॉप’ मानचित्रों की आवश्यकता हो।

प्रश्न 5.
सदिश फाइलों का प्रयोग किन परिस्थितियों में किया जाता है?
उत्तर:
सदिश फाइलों का प्रयोग मुख्यत: निम्न परिस्थितियों में किया जाता है

  1. उच्च परिष्कृत अनुप्रयोग की आवश्यकता हो।
  2. फाइलों के आकार महत्त्वपूर्ण हों।
  3. मानचित्र के प्रत्येक लक्षण का विश्लेषण आवश्यक हो।
  4. वर्णनात्मक सूचना का भण्डारण अनिवार्य हो।

प्रश्न 6.
सदिश संरचना के गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
सदिश संरचना के गुण निम्नलिखित हैं

  1. यह सांस्कृतिक लक्षणों को प्रदर्शित करने के लिए अधिक उपयोगी है।
  2. ग्लोबल पोजीशनल सिस्टम (GPS) तथा टोटल स्टेशनों से आँकड़े सीधे ही प्राप्त हो सकते हैं।
  3. इसमें कम स्मृति की आवश्यकता होती है।
  4. स्थालाकृतियों को दर्शाने तथा उनके विश्लेषण में अधिक शुद्धता होती है।

प्रश्न 7.
चित्ररेखापुंज (रैस्टर) मॉडल की हानियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चित्ररेखापुंज (रैस्टर) मॉडल की हानियाँ निम्नलिखित हैं

  1. कम्प्यूटर भण्डारण का अदक्ष प्रयोग होता है।
  2. इसके परिमाप और आकृति में त्रुटियाँ होती हैं।
  3. परिपथ जाल का विश्लेषण कठिन होता है।
  4. प्रक्षेपण का रूपान्तरण अदक्ष वृहत् सैलों का प्रयोग करते समय सूचना का ह्रास होता है।
  5. कम परिशुद्ध मानचित्र होता है।

प्रश्न 8.
सदिश (वेक्टर) मॉडल की हानियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
सदिश (वेक्टर) मॉडल की हानियाँ निम्नलिखित हैं

  1. इसकी आँकड़ा संरचना जटिल होती है।
  2. अधिचित्रण में कठिन प्रचालन होता है।
  3. उच्च स्थानिक विचरणशीलता का अदक्ष प्रतिनिधित्व होता है।
  4. यह सुदूर संवेदन प्रतिबिंबों के साथ असंगत होता है।

प्रश्न 9.
भौगोलिक सूचना तन्त्र को किन स्रोतों से आँकड़े प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र को निम्नलिखित स्रोतों से आँकड़े प्राप्त होते हैं

  • भारतीय सर्वेक्षण विभाग के स्थलाकृतिक मानचित्र तथा वायुचित्र।
  • उपभोक्ताओं द्वारा एकत्रित प्राथमिक आँकड़े।
  • भारतीय जनगणना विभाग के विशाल आँकड़े और मानचित्र।
  • राष्ट्रीय दूर संवेदी एजेन्सी, हैदराबाद।
  • राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबन्ध प्रणाली, बंगलुरु।
  • महानगरों के विकास प्राधिकरण।
  • राज्यों और जिलों के सांख्यिकीय विभाग। .
  • राष्ट्रीय विषयक मानचित्र संगठन, कोलकाता।

मौखिक प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य किसी क्षेत्र से सम्बन्धित सूचनाओं का कम्प्यूटर में संचयन, संगणना, भण्डारण और उपयोग से है।

प्रश्न 2.
भौगोलिक सूचना तन्त्र में किसी वस्तु या वाहन की स्थिति कैसे प्रदर्शित की जाती है?
उत्तर:
अक्षांशों व देशान्तरों के माध्यम से स्थिति प्रदर्शित की जाती है।

प्रश्न 3.
भौगोलिक सूचना तन्त्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तन्त्र एक आँकड़ा संचय तन्त्र है जिसमें भौगोलिक आँकड़ों का संचयन, संगणना और विश्लेषण किया जाता है।

प्रश्न 4.
सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र में आँकड़ों का प्रदर्शन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र के रूप में।

प्रश्न 5.
किस पद्धति से पता चलता है कि “प्रत्येक स्थान पर क्या है?”
उत्तर:
रेखा(ज। प्रश्न 6-किस पद्धति से पता चलता है कि “प्रत्येक वस्तु कहाँ है?” उत्तर-सदिश पद्धति से।

प्रश्न 7.
सहलग्नता क्या है?
उत्तर:
सहलग्नता में एक भौगोलिक सूचना तन्त्र में विभिन्न प्रकार के आँकड़ों को जोड़ने की क्षमता होती है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी में शामिल है
(a) सुदूर संवेदन
(b) भौगोलिक सूचना तन्त्र
(c) वैश्विक स्थिति-निर्धारण तन्त्र
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 2.
कितने प्रकार के आँकड़े भौगोलिक सूचना प्रदान करते हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच।
उत्तर:
(a) दो।

प्रश्न 3.
स्थानीय आँकड़ों का प्रकार है
(a) बिन्दु
(b) रेखा
(c) क्षेत्र
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 4.
स्थानिक सूचना तन्त्र का घटक है
(a) हार्डवेयर
(b) सॉफ्टवेयर
(c) आँकड़े
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 5.
आँकड़ा संरचना के प्रकार हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच।
उत्तर:
(a) दो।

UP Board Solutions for Class 12 Geography

UP Board Class 12 Geography Practical Work Chapter 5 Field Surveys

UP Board Solutions for Class 12 Geography Practical Work Chapter 5 Field Surveys (क्षेत्रीय सर्वेक्षण)

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से एक सही उत्तर का चुनाव कीजिए
(i) क्षेत्र सर्वेक्षण की योजना के लिए नीचे दी गई विधियों में कौन-सी विधि सहायक है
(क) व्यक्तिगत साक्षात्कार
(ख) द्वितीयक सूचनाएँ
(ग) मापन
(घ) प्रयोग।
उत्तर:
(ख) द्वितीयक सूचनाएँ।

(ii).क्षेत्र-सर्वेक्षण के निष्कर्ष के लिए क्या किया जाना चाहिए
(क) आँकड़ा प्रवेश एवं सारणीयन
(ख) प्रतिवेदन लेखन
(ग) सूचकांकों का अभिकलन
(घ) उपर्युक्त में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(ख) प्रतिवेदन लेखन।

(iii) क्षेत्र-सर्वेक्षण के प्रारंभिक स्तर पर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण क्या है
(क) उद्देश्य का निर्धारण करना
(ख) द्वितीयक आँकड़ों का संग्रहण
(ग) स्थानिक एवं विषयक सीमाओं को परिभाषित करना
(घ) निदर्शन अभिकल्पना।
उत्तर:
(ग) स्थानिक एवं विषयक सीमाओं को परिभाषित करना।

(iv) क्षेत्र सर्वेक्षण के समय किस स्तर की सूचनाओं को प्राप्त करना चाहिए
(क) बृहत् स्तर की सूचनाएँ
(ख) मध्यम स्तर की सूचनाएँ
(ग) लघु स्तर की सूचनाएँ
(घ) उपर्युक्त सभी स्तर की सूचनाएँ।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी स्तर की सूचनाएँ।

प्रश्न 2.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए
(i) क्षेत्र सर्वेक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण का आयोजन वांछित सूचनाओं के एकत्रण के लिए किया जाता है ताकि अन्वेषण के अन्तर्गत समस्या का पूर्व निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप गहन अध्ययन किया जा सके।

(ii) क्षेत्र सर्वेक्षण के उपकरण एवं प्रविधियों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण के उपकरण एवं प्रविधियाँ निम्नलिखित हैं

  1. अभिलिखित एवं प्रकाशित आँकड़े
  2. क्षेत्रीय पर्यवेक्षण
  3. मापन एवं
  4. साक्षात्कार।

(iii) क्षेत्र सर्वेक्षण के चुनाव के पहले किस प्रकार के व्याप्ति क्षेत्र की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण के चुनाव के लिए अन्वेषक को यह निर्णय करना होता है कि सर्वेक्षण सम्पूर्ण जनसंख्या अथवा समग्र के लिए आयोजित किया जाना है। बृहत् आकार की स्थिति में जनसंख्या के घटकों का प्रतिनिधित्व करने वाले चयनित प्रतिदर्श तक अध्ययन को सीमित किया जा सकता है।

(iv) सर्वेक्षण अभिकल्पना को संक्षिप्त में समझाएँ।
उत्तर:
सर्वेक्षण अभिकल्पना-क्षेत्र सर्वेक्षण का आयोजन वांछित सूचनाओं के एकत्रण के लिए किया जाता है ताकि अन्वेषण में समस्याओं का गहन अध्ययन किया जा सके। यह पर्यवेक्षण द्वारा संभव है जो सूचनाओं के एकत्रण और उनसे निष्कर्ष प्राप्त करने की एक उपयोगी विधि है।

(v) क्षेत्र सर्वेक्षण के लिए प्रश्नों की अच्छी संरचना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
प्रश्नावली द्वारा उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सम्बन्धित सूचनाएँ एकत्र करने में सहायता मिलती है। उस क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति के अपने परिवेश से सम्बन्धित अनुभव व ज्ञान तथा सूचनाएँ मिलती हैं। उस क्षेत्र की समस्याओं का ज्ञान होता है। इसी कारण सर्वेक्षण के लिए प्रश्नों की अच्छी संरचना आवश्यक है।

प्रश्न 3.
निम्नांकित समस्याओं में से किसी एक के लिए क्षेत्र सर्वेक्षण अभिकल्पना का निर्माण कीजिए
(1) पर्यावरण प्रदूषण, (2) मृदा अपघटन, (3) बाढ़, (4) आपदा विषयक, (5) भूमि उपयोग परिवर्तन की पहचान।
उत्तर:
बाढ़
भारत एक मानसूनी देश हैं। यहाँ वर्षा एक निश्चित समय और असमान वितरण के साथ होती है। देश के कुछ भागों में वर्षा अधिक होती है जिससे बाढ़ का प्रकोप बना रहता है। इन भागों में असम, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि राज्य मुख्य हैं। बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है। इसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
उद्देश्य
(1) बाढ़ का कारण समझना।
(2) उन क्षेत्रों की पहचान करना जहाँ बाढ़ की पुनरावृत्ति होती है।
(3) बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से निपटने के सुझाव देना।

  • व्याप्ति- सर्वेक्षण के क्षेत्रीय, कालिक तथा विषयक व्याप्ति के पहलुओं को समझना आवश्यक है।
  • क्षेत्रीय- बिहार या असोम प्रदेश में बाढ़ का विशेष क्षेत्रीय सर्वेक्षण करना।
  • कालिक- बाढ़ की समस्या चिरकालिक है। इसे समझने के लिए सम्पूर्ण प्रदेश का अध्ययन आवश्यक है।
  • विषयक- विषयक दृष्टि से कृषि उत्पादन, भूमि उपयोग का मूल्यांकन, वर्षा की मात्रा तथा अन्य संबंधित कारकों का अध्ययन करना।
  • द्वितीयक सूचनाएँ- किन नदियों में बाढ़ आती है? बाढ़ से कितना क्षेत्र प्रभावित होता है? इसके लिए हमें प्रदेश का मानचित्र, जिला रिपोर्ट आदि प्राप्त करनी होगी। राजस्व अधिकारी द्वारा यह जानकारी प्रदान की जाएगी कि फसलों की कितनी क्षति हुई है।
  • प्रेक्षण- प्रेक्षण का अर्थ है-चारों तरफ दृष्टिपात करना, लोगों से बातचीत करना तथा जल भराव, फसल खराब होने, चारे की कमी, भूख से मृत्यु आदि के सम्बन्ध में किए गए प्रेक्षण का अभिलेखन करना।

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्षेत्रीय सर्वेक्षण करने से पूर्व अध्यापक द्वारा विद्यार्थियों को दिए जाने वाले निर्देश क्या हैं?
उत्तर:
क्षेत्रीय सर्वेक्षण करने से पूर्व अध्यापक द्वारा विद्यार्थियों को दिए जाने वाले निर्देश निम्नलिखित

  • क्षेत्रीय लोगों के साथ निकट का सम्बन्ध बनाना।
  • क्षेत्रीय लोगों को अपने सर्वेक्षण से सम्बन्धित सही जानकारी देना।
  • प्रश्न सरल, छोटे और केवल सर्वेक्षण से सम्बन्धित ही होने चाहिए।
  • उत्तरदाता यदि किसी कार्य में व्यस्त है तो उससे प्रश्न नहीं पूछा जाना चाहिए।
  • अपना प्रश्न पूछने से पहले उत्तरदाता से उसके परिवार की कुशल-मंगल आदि के सम्बन्ध में बात करने की औपचारिकता अवश्य निभानी चाहिए।
  • उत्तरदाता से प्राप्त प्रश्न के उत्तर को तुरन्त अपनी नोटबुक में नोट करना चाहिए, ताकि बाद में भूल न जाएँ।
  • यदि उत्तरदाता अपना दिया गया उत्तर नोट न करवाना चाहता हो तो उसके सामने ऐसा नहीं करना चाहिए।
  • सर्वेक्षक को ऐसा कोई वचन नहीं देना चाहिए, जो कि बाद में पूरा न किया जा सके।

प्रश्न 2.
सर्वेक्षण प्रक्रिया के चरणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पूरे सर्वेक्षण को निम्नलिखित पाँच चरणों में बाँटा जाता है

  1. प्रारम्भिक चरण- इसमें सर्वेक्षक को सर्वेक्षण की योजना बनानी होती है। इसे योजना चरण (Planning Stage) भी कहा जाता है।
  2. क्रियान्वयन चरण- इसमें क्षेत्र में जाकर योजना के आधार पर सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया जाता है।
  3. परिगणन चरण- सर्वेक्षण कार्य पूरा होने पर प्राप्त सूचना की विभिन्न तालिकाएँ तैयार की जाती हैं।
  4. मानचित्र चरण- इसमें विभिन्न ऑकड़ों को मानचित्रों की सहायता से दर्शाया जाता है।
  5. रिपोर्ट चरण- सर्वेक्षण का सारा काम पूरा हो जाने के बाद उसकी रिपोर्ट लिखी जाती है। रिपोर्ट में सर्वेक्षण से निकले परिणामों का उल्लेख किया जाता है।

प्रश्न 3.
एक अच्छी प्रश्नावली के गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक अच्छी प्रश्नावली में निम्नलिखित गुण आवश्यक रूप से होने चाहिए

  1. प्रश्नावली के साथ एक अनुरोध पत्र संलग्न हो जो अन्वेषक का परिचय व अन्वेषण के उद्देश्य को स्पष्ट करें।
  2. प्रश्नावली के प्रश्नों की संख्या उतनी रखी जाए, जितनी आवश्यक हो।
  3. प्रश्न और उसकी भाषा दोनों ही सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।
  4. जहाँ तक संभव हो सके व्यक्तिगत जीवन अथवा भावनाओं से जुड़े संवेदनशील प्रश्न नहीं पूछने चाहिए।
  5. प्रश्नों का क्रम तर्कसंगत होना चाहिए। इससे आँकड़ों के वर्गीकरण एवं सारणीयन में मदद मिलती है।
  6. गणितीय गणना वाले प्रश्नों को प्रश्नावली में शामिल नहीं करना चाहिए।
  7. प्रश्नावली भरने के लिए सूचनादाताओं को कुछ आवश्यक निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि उत्तर की शुद्धता व एकरूपता बनी रह सके।
  8. कुछ प्रश्न ऐसे भी होने चाहिए जिनसे दिए गए उत्तरों की सत्यता की जाँच हो सके।
  9. प्रश्न विभिन्न शीर्षकों और उप-शीर्षकों में वर्गीकृत हों और सुविधा के लिए प्रश्नों का क्रमांक भी दिया हुआ होना चाहिए।

प्रश्न 4.
मानचित्र के दिक्विन्यास की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानचित्र के दिक्विन्यास का अर्थ-मानचित्र के दिक्विन्यास का अर्थ है कि मानचित्र को इस पर ‘सेट’ या व्यवस्थित करना ताकि पृथ्वी और मानचित्र की दिशाएँ एक हो जाएँ। यहाँ मानचित्र के दिक्विन्यास । की प्रमुख विधियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है
1. ट्रफ कम्पास की सहायता से- जिस क्षेत्र के मानचित्र का दिविन्यास करना है, वहाँ जाकर ट्रफ कम्पास को भूमि पर रखिए। चुम्बकीय उत्तर दिशा निर्धारित करने के लिए जब नॉब (Knob) को ढीला किया जाता है तो सुई की नोक डिबिया के पार्श्व (Side) से टकराने लगती है। इस टकराने वाली दिशा की ओर डिबिया को तब तक घुमाते रहना चाहिए जब तक सुई की दोनों नोंक अंशांकित चापों पर छपे शून्य पर न आ जाए। ऐसी अवस्था में चुम्बकीय सुईं का ‘N’ वाला सिरा चुम्बकीय उत्तर की ओर संकेत करेगा।

2. सूर्य की सहायता से- सूर्य पूर्व दिशा से निकलता है। यदि हम अपना मुँह सूर्योदय की दिशा में करके खड़े हो जाएँ तो हमारी पीठ पश्चिम दिशा में, बाईं बाजू उत्तर दिशा में तथा दाईं बाजू दक्षिण दिशा में होगी। यदि हम मानचित्र को बताई हुई स्थिति में खड़े होकर बाईं बाजू की ओर व्यवस्थित करते हैं तो मानचित्र उत्तर दिशा के अनुरूप व्यवस्थित हो जाएगा।

3. प्रदर्शित तत्त्वों की पारस्परिक स्थिति द्वारा- मानचित्र पर अनेक प्रकार की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक वस्तुओं (Objects) का प्रदर्शन किया जाता है। जिस जगह पर मानचित्र है, वहाँ जाकर मानचित्र को इस प्रकार व्यवस्थित कीजिए कि मानचित्र पर दिखाई गई वस्तुएँ धरातल पर दिखाई गई वस्तुओं के अनुरूप हों। इस प्रकार भी मानचित्र का दिक्विन्यास हो जाता है।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्षेत्रीय अध्ययन की उपयोगिता क्या है?
उत्तर:
क्षेत्रीय अध्ययन की निम्नलिखित उपयोगिता है

  1. क्षेत्रीय अध्ययन से समस्याओं के समाधान में सहायता मिलती है।
  2. इससे छात्रों को सिद्धान्तों का व्यावहारिक ज्ञान हो जाता है।
  3. इससे छात्रों का बौद्धिक (ज्ञानात्मक) विकास होता है।
  4. प्रत्यक्ष प्रेक्षणों से ज्ञान और नये-नये विचार मिलते हैं।
  5. छात्रों में भावनाओं, मूल्यों और अच्छी मनोवृत्तियों का विकास होता है।
  6. क्षेत्र के प्रति मानवीय दृष्टिकोण का विकास होता है।

प्रश्न 2.
परिवार के सर्वेक्षण के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर:
परिवार के सर्वेक्षण के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. परिवार के सम्बन्ध में समस्त जानकारी प्राप्त करना।
  2. परिवार की आमदनी तथा उसके स्रोतों की जानकारी प्राप्त करना।
  3. परिवार को विभिन्न आय वर्गों में विभक्त करना।
  4. परिवार के सदस्यों की शैक्षिक तथा वैवाहिक स्थिति ज्ञात करना।

मौखिक प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
भूगोल किस तरह का विज्ञान है?
उत्तर:
भूगोल एक क्षेत्र वर्णनी विज्ञान है।

प्रश्न 2.
क्षेत्रीय सर्वेक्षण की कार्यविधि का प्रथम चरण क्या है?
उत्तर:
समस्या को परिभाषित करना।

प्रश्न 3.
क्षेत्रीय सर्वेक्षण की कार्यविधि का अन्तिम चरण क्या है?
उत्तर:
प्रस्तुतीकरण।

प्रश्न 4.
सामाजिक मुद्दों से जुड़े क्षेत्रीय सर्वेक्षणों व सूचनाओं का एकत्रण किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
व्यक्तिगत साक्षात्कार के द्वारा।

प्रश्न 5.
क्षेत्र-सर्वेक्षण से क्या आशय है?
उत्तर:
जब हम स्वयं क्षेत्र में जाकर किसी विषय पर सर्वेक्षण करते हैं तो उसे क्षेत्र-सर्वेक्षण’ कहते हैं। .

प्रश्न 6.
सेम्पल सर्वेक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब क्षेत्र काफी बड़ा हो और पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण करना कठिन हों तो पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण न करके उसके कुछ चुने हुए भागों का ही सर्वेक्षण किया जाता है, उसे ‘सेम्पल सर्वेक्षण’ कहते हैं।

प्रश्न 7.
मानचित्र का दिक्विन्यास किसे कहते हैं?
उत्तर:
मानचित्र को सही दिशा में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को मानचित्र का दिक्विन्यास’ कहते हैं।

बहविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्षेत्रीय सर्वेक्षण की कार्यविधि को कितने चरणों में पूरा किया जाता है
(a) चार
(b) पाँच
(c) छह
(d) सात।
उत्तर:
(d) सात।

प्रश्न 2.
सर्वेक्षण प्रक्रिया को कितने चरणों में बाँटा गया है
(a) चार
(b) पाँच
(c) छह
(d) आठ।
उत्तर:
(b) पाँच।

प्रश्न 3.
प्रश्नावली के प्रकार हैं
(a) चार
(b) पाँच
(c) छह
(d) साता
उत्तर:
(a) चार।।

प्रश्न 4.
क्षेत्रीय सर्वेक्षण की कार्यविधि का प्रथम चरण है
(a) समस्या को परिभाषित करना
(b) उद्देश्य
(c) प्रयोजन
(d) विधियाँ एवं तकनीकें।
उत्तर:
(a) समस्या को परिभाषित करना।

प्रश्न 5.
प्रश्नावली के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न होने चाहिए
(a) सरल व संक्षिप्त प्रश्न
(b) सर्वेक्षण से सम्बन्धित प्रश्न
(c) क्रमबद्ध प्रश्न
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

UP Board Solutions for Class 12 Geography