UP Board Solutions for Class 6 Computer Education (कम्प्यूटर शिक्षा)

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कम्प्यूटर का इतिहास

बच्चो, अभी तक आप कम्प्यूटर की उपयोगिता, प्रयोग क्षेत्र और उसके प्रमुख भागों के साथ-साथ यह तो जान ही गए हैं कि कम्प्यूटर की कक्षा में क्या-क्या सावधानियाँ रखनी (UPBoardSolutions.com) चाहिए। अब आप इस अध्याय में कम्प्यूटर के विकास तथा इसमें किन प्रमुख लोगों का योगदान रहा है, इसके बारे में जानेंगे। 

पहला कम्प्यूटर : अबाकस:

बच्चो, प्राचीन काल में लोग गणना करने के लिए कंकड़ों और पत्थरों का प्रयोग करते थे। जब इस तरह से गणना का कार्य कठिन लगने लगा तो उन्होंने अबाकस नामक एक उपकरण का आविष्कार किया। इस उपकरण को आज से लगभग दो हज़ार वर्ष पहले चीन में बनाया गया था। चित्र में आप इसे देख सकते हैं। यह उपकरण एक लकड़ी के फ्रेम का बना था, जिसमें कई छड़ें थीं। ये छड़ें एक समानान्तर छड़ से दो असमान भागों में बँटी होती थीं।
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लम्बवत छड़ों के ऊपरी भाग में दो गोलियाँ और निचले भाग में पाँच गोलियाँ होती थीं। ऊपर की एक गोली को पाँच इकाइयों के बराबर माना जाता था और नीचे की एक गोली को एक इकाई के। इन गोलियों को कुछ निश्चित नियमों के साथ प्रयोग करके गणना का कार्य किया जाता था, जिससे गणितीय समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाता था।

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कम्प्यूटर के जनक : चार्ल्स बैवेज़:
चार्ल्स बैवेज़ एक अंग्रेज गणितज्ञ थे। सबसे पहले इन्होंने कम्प्यूटर जैसी किसी मशीन की परिकल्पना की थी। इसी वजह से इन्हें कम्प्यूटर का जनक कहा जाता है। सन् 1823 में इन्होंने (UPBoardSolutions.com) एक ऐसी मशीन का आविष्कार किया जो तेजी से गणना करने में सक्षम थी। इस मशीन को डिफरेन्स इंजिन का नाम दिया गया। यह मशीन वर्तमान समय के कम्प्यूटर से काफी मिलती-जुलती थी।
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कम्प्यूटर पारचया

कम्प्यूटर परिचय बच्चो, पिछले अध्याय में आपने पढ़ा कि प्राचीन काल में मनुष्य गिनने के लिए और हिसाब-किताब रखने के लिए कंकड़ों और पत्थरों का प्रयोग करता था। इसके बाद उसने अबाकस नामक एक उपकरण बनाया जो चीन में दो हजार साल पहले बना था।

सन् 1823 में एक अंग्रेज गणितज्ञ, जिनका नाम चार्ल्स बैवेज़ था, उन्होंने डिफरेन्श इंजिन नामक एक मशीन बनायी, जो हमारे आज के कम्प्यूटर से काफी मिलती-जुलती थी। इसलिए चार्ल्स बैवेज़ को कम्प्यूटर का जनक कहा गया। आइए इस अध्याय में कम्प्यूटर के बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करें।

कम्प्यूटर क्या है?

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसके द्वारा सभी तरह की गणितीय और तार्किक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

हम कम्प्यूटर से गणित के सवाल हल कर सकते हैं, चित्र बना (UPBoardSolutions.com) सकते हैं, गेम खेल सकते हैं, पत्र लिखकर उन्हें प्रिंट कर सकते हैं, कार्ड बना सकते हैं और इसी तरह से अनेक कार्य कर सकते हैं।
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कम्प्यूटर बहुत ही तेजी व शुद्धता से कार्य करने वाली मशीन है। कम्प्यूटर की कार्य करने की गति हमसे बहुत तेज होती है। यदि हम किसी सवाल को एक मिनट में हल करते हैं तो कम्प्यूटर इस कार्य को एक सेकंड के हजारवें हिस्से में कर देगा। कम्प्यूटर की एक विशेषता यह भी है कि यह हमेशा सही उत्तर देता है।

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कम्प्यूटर और हम:
कम्प्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसका निर्माण मनुष्य ने किया है। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि मनुष्य का दिमाग ही कम्प्यूटर का मालिक है। कम्प्यूटर मनुष्य के द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करता है और इसमें खुद की सोचने व समझने की शक्ति नहीं होती है।
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कम्प्यूटर का प्रयोग क्यों?

कम्प्यूटर हमारे ऊपर पूरी तरह से निर्भर होते हैं, फिर भी हम इनका प्रयोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में करते हैं। इसके निम्न कारण हैं –

  • कम्प्यूटर की मेमोरी बहुत बड़ी होती है।
  • कम्प्यूटर कभी भी थकते नहीं हैं।
  • कम्प्यूटर बहुत तेजी से कार्य कर सकते हैं।
  • कम्प्यूटर हमेशा सही परिणाम देते हैं।
  • कम्प्यूटर बहुत बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर कर सकते हैं।

कम्प्यूटर की सीमाएँ:

जहाँ एक ओर कम्प्यूटर के बहुत से फायदे हैं, वहीं दूसरी (UPBoardSolutions.com) ओर इसकी कार्य संबंधी कुछ सीमाएँ भी हैं। आइए जानें कि ये सीमाएँ क्या हैं –

  • कम्प्यूटर खुद कोई कार्य नहीं कर सकता है।
  • कम्प्यूटर में मेमोरी तो होती है, लेकिन सोचने वाला दिमाग नहीं होता है।
  • ‘कम्प्यूटर बुद्धिमान नहीं होता है।
  • कम्प्यूटर कारणों की व्याख्या नहीं कर सकता है।
  • कम्प्यूटर हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों का ही पालन कर सकता है।

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कम्प्यूटर के मुख्य भाग

बच्चो, पिछले अध्याय में आपने कम्प्यूटर की विशेषताओं और सीमाओं के बारे में पढ़ा। इस अध्याय में आइए अब यह जानकारी प्राप्त करते हैं कि कम्प्यूटर के मुख्य भाग कौन-कौन से होते हैं।

कम्प्यूटर में क्या-क्या?

बच्चो, जिस तरह से हमारे शरीर में अलग-अलग कार्यों को करने के लिए अलग-अलग भाग होते हैं, ठीक उसी तरह से कम्प्यूटर में भी अलग-अलग कार्यों को करने के लिए अलग-अलग भाग होते हैं।

इन भागों को हम दो वर्गों में बाँट सकते हैं। पहले वर्ग में इसके अनिवार्य भाग होते हैं।

कम्प्यूटर के अनिवार्य भाग:-
बच्चो, कम्प्यूटर के तीन अनिवार्य भाग होते हैं। ये भाग निम्न हैं –
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ये तीनों भाग जुड़कर एक कम्प्यूटर का निर्माण करते हैं।

कम्प्यूटर का की-बोर्ड
की-बोर्ड कम्प्यूटर का पहला अनिवार्य भाग है। देखने में यह टाइपराइटर की तरह ही होता है। इसके द्वारा टाइप करके डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर के सीपीयू में भेजते हैं, इसीलिए (UPBoardSolutions.com) इसे इनपुट डिवाइस भी कहते हैं। टाइप करने के लिए जिन बटनों को दबाया जाता है, उन्हें कीज़ कहते हैं।
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की-बोर्ड को कम्प्यूटर के सीपीयू से जोड़ा जाता है। आजकल जिस तरह के की-बोर्ड प्रयोग किए जा रहे हैं, उनमें 104 से लेकर 124 तक कीज़ हो सकते हैं।

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कम्प्यूटर का सीपीयू:
यह कम्प्यूटर का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग होता है। इसका पूरा नाम सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है। इसे आप कम्प्यूटर का दिमाग भी कह सकते हैं। सभी तरह की गणनाओं और तार्किक कार्यों को पूरा करने का काम सीपीयू द्वारा ही सम्पन्न होता है। वर्तमान समय में इसके दो रूप हैं। इन्हें आप निम्न चित्र में देख सकते हैं –
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कम्प्यूटर का मॉनीटर:

यह एक मॉनीटर है। मॉनीटर देखने में टेलीविजन की तरह ही दिखाई देता है। मॉनीटर के जिस भाग पर हमें चित्र या अक्षर दिखाई देते हैं, उसे स्क्रीन कहते हैं। तकनीकी भाषा में इसे सीआरटी कहा जाता है। इसका पूरा नाम है केथोड रे ट्यूब। की-बोर्ड के द्वारा जो भी टाइप किया जाता है, वह (UPBoardSolutions.com) मॉनीटर पर ही दिखाई देता है। काम पूरा होने पर हमें परिणाम भी मॉनीटर पर ही दिखाई देते हैं, इसलिए इसे आउट पुट डिवाइस कहा जाता है।।
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कम्प्यूटर का माउस:
माउस भी कम्प्यूटर की इनपुट डिवाइस है। इसके ऊपर दो या तीन बटनें होती हैं और यह एक तार के द्वारा सीपीयू से जुड़ा रहता है। (आजकल बिना तार के माउस भी आ गए हैं।)
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माउस को एक चौकोर पैड पर रखा जाता है, इसे माउस पैड कहते हैं। जब आप माउस पैड पर माउस को घुमाएँगे तो एक तीर के निशान की तरह का संकेतक (प्वाइन्टर) मॉनीटर पर हिलता हुआ दिखाई देगा।

इसे आम बोलचाल की भाषा में माउस प्वाइन्टर कहा जाता है। माउस के द्वारा कम्प्यूटर को निर्देश देने का काम भी किया जाता है, इसीलिए यह भी एक इनपुट डिवाइस है।

की-बोर्ड, मॉनीटर, सीपीयू और माउस को जोड़कर सम्पूर्ण पीसी अर्थात् पर्सनल कम्प्यूटर बनता है। वर्तमान समय में माउस भी एक महत्त्वपूर्ण इनपुट डिवाइस है। विंडोज (UPBoardSolutions.com) ऑपरेटिंग सिस्टम में इसके बिना काम करना बहुत ही मुश्किल है। तो यह तो थे आज के कम्प्यूटर के अनिवार्य भाग। आइए अब एक नजर कम्प्यूटर के सहायक उपकरणों पर डालें।

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प्रिंटर:
प्रिंटर कम्प्यूटर का एक प्रमुख उपकरण है। इसके द्वारा आप कम्प्यूटर में स्टोर सूचनाओं (डेटा) को कागज पर प्रिंट कर सकते हैं। इस समय कई तरह के प्रिंटर प्रयोग किए जा रहे हैं। इनमें डॉट मैट्रिक्स, इंकजेट और लेज़र प्रिंटर प्रमुख हैं। सामान्य प्रिंटर देखने में इस तरह से दिखाई देता है –
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चित्र में जो प्रिंटर दिखाई दे रहा है, वह डॉट मैट्रिक्स है। चूंकि प्रिंटर कम्प्यूटर में स्टोर सूचनाओं को कागज पर प्रिंट करता है, इसलिए इसे आउटपुट डिवाइस या आउटपुट उपकरण भी कहते हैं।

फ्लॉपी डिस्क:
फ्लॉपी डिस्क कम्प्यूटर में डेटा स्टोर करने का माध्यम है। कम्प्यूटर में स्टोर या उपलब्ध सूचनाओं को फ्लॉपी में भी कॉपी कर सकते हैं। इस समय सामान्य तौर पर जिस फ्लॉपी का प्रयोग किया जा रहा है, वह आकार में 3.5 इंच की होती है और यह वर्गाकार होती है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं –
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आप फ्लॉपी में कम्प्यूटर का डेटा स्टोर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर फ्लॉपी में स्टोर डेटा वापस कम्प्यूटर में ले जा सकते हैं। डेटा स्टोर करने की वजह से इसे स्टोरेज़ डिवाइस कहा जाता है।

सीडी अर्थात् कॉम्पैक्ट डिस्क:
सीडी का प्रयोग वर्तमान समय में प्रमुख स्टोरेज डिवाइस (UPBoardSolutions.com) के तौर पर किया जा रहा है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं।
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सीडी का डेटा स्टोर करने की क्षमता फ्लापी से कई सौ गुना ज्यादा होती है। इसमें आप संगीत, फिल्म और फोटो जैसा डेटा भी स्टोर कर सकते हैं।

कम्प्यूटर की कार्य प्रणाली

अभी आपने कम्प्यूटर के अनिवार्य और सहायक उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। कम्प्यूटर के अनिवार्य अंग आपस में जुड़कर एक सम्पूर्ण पीसी अर्थात् पर्सनल कम्प्यूटर का निर्माण करते हैं। जबकि सहायक उपकरण प्रिंटिंग करने और डेटा स्टोर करने जैसे कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। आइए, अब आगे यह समझते हैं कि कम्प्यूटर काम कैसे करता है।

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कैसे काम करता है कम्प्यूटर?
कम्प्यूटर के तीन प्रमुख अंगों को इनपुट डिवाइस (की-बोर्ड), प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) और आउटपुट डिवाइस (मॉनीटर) के नाम से जाना जाता है। अर्थात् इनपुट (UPBoardSolutions.com) डिवाइस सूचनाओं को कम्प्यूटर के अन्दर भेजती है। प्रोसेसिंग यूनिट इन्हें प्रोसेस करती है जबकि आउटपुट यूनिट हमें परिणाम दर्शाती है। आइए इसे एक और उदाहरण के द्वारा समझें।
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यदि आप सन्तरे का रस (जूस) निकालना चाहते हैं तो आपको जूसर नामक उपकरण में सन्तरे डालने होंगे। इस क्रिया में सन्तरे जूसर में इनपुट हो रहे हैं।

इसके पश्चात यह जूसर-मिक्सर प्रोसेसिंग करके इनका रस निकालेगा। इसे आप ग्लास या किसी तरह के किसी दूसरे बर्तन में इकट्ठा करेंगे। यहाँ पर आउटपुट को हमने ग्लास में एकत्रित किया। अर्थात इस क्रिया में इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट जैसे तीनों कार्य सम्पन्न हुए। इस कार्य प्रणाली को आप नीचे बने रेखा चित्र से समझ सकते हैं –
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इसी तरह से जब आपको अपने घर के फ्रिज का प्रयोग करके बर्फ जमानी होती है तो आप ट्रे में पानी लेकर फ्रीज़र प्रोसेसिंग करके बर्फ जमा लेते हैं, जिसे हम ट्रे से निकालकर एक बड़ी ट्रे में स्टोर कर देते हैं। यहाँ पर भी इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट जैसे तीनों कार्य होते हैं।

इस तरह आप समझ गए होंगे कि मशीनों की कार्यप्रणाली किस तरह से इन तीन प्रक्रियाओं से संचालित होती हैं और ये तीन चरण हैं –

  • इनपुट
  • प्रोसेसिंग
  • आउटपुट

बच्चो, कम्प्यूटर इसी तरह से अपना कार्य करता है। कम्प्यूटर पर जब आप उसे किन्हीं दो संख्याओं को जोड़ने के लिए कहते हैं, उसमें सबसे पहले ये दो संख्याएँ की-बोर्ड के द्वारा टाइप करके इनपुट की जाती हैं। इनपुट होते ही ये सीपीयू में पहुँचती हैं।

सीपीयू में प्रोसेसिंग यूनिट के द्वारा गणना करने का कार्य पूरा होता है और इस प्रक्रिया में ये दोनों संख्याएँ आपस में जुड़ जाती हैं। इन्हें जोड़ने के लिए हम कम्प्यूटर को कुछ निर्देश देते हैं। इसी निर्देश के परिणामस्वरूप प्रोसेसिंग यूनिट अपना कार्य करती है।

निर्देश का पालन करते हुए प्रोसेसिंग यूनिट संख्याओं को आपस में जोड़कर उनका परिणाम आउटपुट यूनिट पर भेजती है और हमें मॉनीटर के स्क्रीन पर यह रिजल्ट दिखाई (UPBoardSolutions.com) देता है। जोड़ने की तरह ही दूसरे कार्य भी इन्हीं चरणों का पालन करते हुए सम्पन्न होते हैं। निम्न रेखा चित्र में आप इन तीनों चरणों को समझ सकते हैं –
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इनपुट उपकरण

अभी तक आप यह तो समझ ही गए हैं कि कम्प्यूटर में डेटा और निर्देशों को इनपुट किया जाता है। डेटा इनपुट करने के बाद निर्देश देकर उसे प्रोसेस करते हैं और परिणाम प्राप्त करते हैं। कम्प्यूटर डेटा और निर्देशों के बगैर कोई भी कार्य नहीं कर सकता है। जिन उपकरणों को इसके लिए प्रयोग किया जाता है, उन्हें इनपुट उपकरण कहते हैं। निम्न रेखाचित्र में आप इस प्रक्रिया को समझ सकते हैं –
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कम्प्यूटर में इनपुट करने के लिए वैसे तो आजकल कई उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा की-बोर्ड और माउस को इसके लिए इस्तेमाल करते हैं। की-बोर्ड को प्राइमरी इनपुट डिवाइस भी कहा जाता है। इस अध्याय में आइए की-बोर्ड और माउस के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

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की-बोर्ड:
कम्प्यूटर का की-बोर्ड टाइपराइटर के की-बोर्ड जैसा होता है। इसके बटन टाइपराइटर के बटनों की अपेक्षा आसानी से दबते हैं। इससे कार्य करने में आसानी होती है। इसकी एक (UPBoardSolutions.com) खासियत यह है कि यदि एक बटन को लम्बे समय तक दबाए रखें तो अक्षर स्वयं को दोहराने लगता है।
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की-बोर्ड एक केबल (तार) के जरिए कंप्यूटर से जुड़ा होता है। इस तार के दूसरे सिरे पर लगा प्लग कम्प्यूटर के पीछे के बने एक सॉकेट में लग जाता है। यह केबल ही दोनों के बीच संपर्क का काम करता है।

की-बोर्ड की कीज़:
की-बोर्ड में कुछ अतिरिक्त कीज़ होती हैं, जो टाइपराइटर में नहीं होती हैं। जैसे – तीर (एरो कीज) तथा दूसरे संचालन करने वाली विशेष कीज़। आइए, इन्हें क्रम में समझें –

फंक्शन कीज़:
फंक्शन कीज़ का प्रयोग कम्प्यूटर को विशेष कमांड देने के लिए किया जाता है। वर्तमान समय में जो की-बोर्ड प्रयोग किए जाते हैं, उनमें इनकी संख्या बारह होती है। चित्र में आप इन्हें देख सकते हैं-
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बैकस्पेस की:
इस की का प्रयोग टाइप किए हुए अक्षरों को दाएँ से बाईं ओर मिटाने के लिए किया जाता है। की-बोर्ड में यह अपनी तरह की एक ही की होती है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं-
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स्पेसबार की :
यह की-बोर्ड की सबसे लम्बी की होती है। इसका प्रयोग अक्षरों और शब्दों के बीच स्पेस देने के लिए किया जाता है। चित्र में आप इसे देख सकते हैं –
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एंटर या रिटर्न की :
इस की का प्रयोग सीपीयू में डेटा और कमांड्स को भेजने (UPBoardSolutions.com) के लिए किया कुछ की-बोर्ड में इस पर रिटर्न भी लिखा होता है। देखने में यह इस तरह से है
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कैप्स लॉक की:

इस की का प्रयोग की-बोर्ड में कैपिटल लेटर्स (बड़े अक्षर) को स्मॉल लेटर्स (छोटे अक्षर) में या फिर स्मॉल लेटर्स को कैपिटल लेटर्स में बदलने के लिए किया जाता है।
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एरो कीज़ :
इन कीज़ के द्वारा आप कर्सर को स्क्रीन पर चारों दिशाओं में ले जा सकते हैं। यह संख्या में चार होती हैं। चित्र में आप देख सकते हैं –
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कर्सर कंट्रोल कीज :
इन पर अलग-अलग दिशा के तीर के निशान बने होते हैं। कर्सर कंट्रोल की इन कीज़ को लेफ्ट, राइट, अप एंड डाउन कीज़ कहा जाता है। यह कीज़ कर्सर को ऊपर-नीचे, दाएँ, बाएँ ले जाने का काम करती हैं। कर्सर नियंत्रक चार दूसरी कीज़ होम, एंड, पेजअप, पेज डाउन हैं। इन पर (Home. End, PgUp, PgDn) लिखा होता है।

पेजअप का मतलब इस की को दबाकर पहले वाले पेज को स्क्रीन पर देखना और काम करना है। पेज डाउन से पेज के नीचले हिस्से को सामने लाकर वहाँ काम करना है। होम (UPBoardSolutions.com) कीज़ को दबाने से स्क्रीन पर लगे दस्तावेज की शुरुआत में पहुँचा या लाइन के शुरू में जाया जा सकता है। एंड वाली कीज़ को दबाने से लाइन के आखिर में जाया जा सकता है।

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न्यूमेरिक कीज़ :
ये की-बोर्ड के दायीं तरफ होती हैं। इनमें से कुछ के दोहरे काम होते हैं। जब नम लॉक ऑन होता है तो (मतलब ऊपर की हरी लाइट चालू होना) ये सभी नंबर की तरह काम करती हैं और लॉक बन्द या लाइट बन्द होने पर ये कीज कर्सर की तरह काम करती हैं। यह ० से लेकर ६ तक होती है –
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शिफ्ट कीज़ :
यदि किसी की पर दो संकेत या कैरक्टर हैं तो उसके ऊपर के अक्षर को टाइप करने के लिए शिफ्ट कीज़ को अक्षर कीज़ के साथ दबाना होता है।

एस्केप की :
इसे दबाने का मतलब, पहले दी कमांड या प्रविष्टि को रद्द करना है। देखने में यह Esed इस तरह से दिखाई देती है –
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पॉज या ब्रेक की :
यदि डॉस मोड में काम कर रहे हैं और किसी कमांड के प्रयोग से स्क्रीन पर एक के बाद एक लगातार मैटर आता जाए तो इस कीज़ को दबाने पर वह रुक जाएगा।
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टैब की:
यह ऐज में पैराग्राफ, टेक्स्ट, संख्या आदि पहले तय करने यानी कर्सर को एक लाइन के साथ नि-सेट जगह पर ले जाने वाली की है।

डिलीट को :
स्क्रीन पर जहाँ कर्सर है और उस शब्द को मिटाना है तो इसे दबाने से वह मिट जाएगा।
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टाइपिंग कीज़ :
ज्यादातर यह सफेद रंग की कीज़ होती है। इन पर अक्षर (A-Z) संख्या और विराम के संकेत होते हैं। यह टाइपराइटर के कीज़ जैसी होती है।।

माउस
यह बहुत छोटा उपकरण है, जिसे हाथ से मेज की सतह पर इधर-उधर सरकाया जाता है। इसमें दो-तीन बटन होते हैं, जिन्हें अंगुलियों से क्लिक किया जाता है अथवा दबाया जाता (UPBoardSolutions.com) यह एक इनपुट उपकरण है जो पीसी से एक केबल द्वारा जुड़ा हो है। इसके कई तार होते हैं। केबल के दूसरे सिरे पर लगा प्लग पीसी पीछे लगे सीरियल पोर्ट वाले सॉकेट में लगा दिया जाता है।
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माउस को मेज की सतह पर जब इधर-उधर सरकाया जाता है मॉनीटर के पटल पर एक तीर की आकृति का चिह्न इधर-उधर चल दिखाई पड़ता है। इस तीर के निशान को माउस का प्वाइंट कहते हैं।

माउस बहुपयोगी है। इससे अनेक कार्य सम्पन्न किए जा सकते। विशेष रूप से ग्राफिक्स के लिए तो इसका बहुत अधिक उपयोग है। जब आपका मन ग्राफिक्स के प्रोग्राम में रेखा खींचने का हो तो यह माउस प्वाइन्टर तीर की बजाए एक पेंसिल की शक्ल अख्तियार कर लेता है। यदि किसी रेखा या चित्र को मिटाना चाहें तो रबड़ और यदि रंग भरने का विचार रखेंगे तो रंग के डिब्बे की आकृति ग्रहण कर लेगा।

वैसे सामान्य स्थिति में यह अपने पूर्ववत रूप में यानी प्वाइन्टर रूप में चला आएगा। माउस के नीचे एक छोटी गेंद लगी होती है, जिससे माउस को सतह पर इधर-उधर सरकाने में आसानी होती है। इसे एक पैड पर घुमाते हैं, जिसे माउस पैड के नाम से जाना जाता है। आजकल ऐसे माउस भी (UPBoardSolutions.com) चलन में हैं, जिनमें प्रकाश परावर्तन तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इन्हें ऑप्टिकल माउस कहते हैं। इसके अलावा बिना तार वाले वायरलेस माउस भी अब खूब इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

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माउस से जुड़ी शब्दावली:
जब आप माउस से कम्प्यूटर पर कार्य करेंगे तो कई शब्द आपको इस तरह के पता चलेंगे, जिन्हें आप अभी तक जानते ही नहीं हैं। माउस को सरलता से प्रयोग किया जा सके, इसलिए पहले इन शब्दों के अर्थ जानते हैं

क्लिक करना:
जब माउस के प्वाइन्टर अर्थात संकेतक को मॉनीटर की स्क्रीन पर किसी आइकन (चित्र) पर ले जाकर उसकी बाईं बटन को दबाते हैं तो यह क्रिया क्लिक करना कहलाती है। क्लिक करने से आप मॉनीटर के ऑब्जेक्ट को सिलेक्ट कर सकते हैं।

डबल क्लिक करना :
जब आप किसी ऑब्जेट पर एक बार क्लिक करके उसे सिलेक्ट करते हैं तो वह केवल सिलेक्ट होता है। उस ऑब्जेक्ट या उससे जुड़े प्रोग्राम को खोलने के लिए ऑब्जेक्ट पर तेजी से दो बार लगातार क्लिक करते हैं तो इससे प्रोग्राम क्रियान्वित हो जाता है। यह क्रिया डबल क्लिकिंग कहलाती है।

ड्रैग एंड ड्रॉप करना :
मॉनीटर की स्क्रीन पर दिखाई दे रहे ऑब्जेक्ट पर माउस प्वांइटर ले जाकर जब एक बार क्लिक करके उसे सिलेक्ट करते हैं तथा आप इस बाएँ बटन को यदि दबाए रखें और माउस को पैड पर घुमाएँ तो ऑब्जेक्ट भी स्क्रीन पर स्थान बदलेगा। इस क्रिया को ड्रैग करना कहते हैं।

ड्रैग करके ऑब्जेक्ट को नए स्थान पर लाकर छोड़ना (अर्थात् नए स्थान पर आने के बाद बाएँ बटन को छोड़ देना) ड्राप करना कहलाता है।

प्रोसेसिंग उपकरण

जैसा कि आप अभी तक यह जान गए होंगे कि सभी कम्प्यूटर तीन अनिवार्य भागों में विभाजित होते है। ये भाग हैं – इनपूट यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट और आउटपुट यूनिट। पिछले अध्याय में आपने इनपुट यूनिट के बारे में पढ़ा। इस अध्याय में आप प्रोसेसिंग यूनिट के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट:
कम्प्यूटर की प्रोसेसिंग यूनिट को सीपीयू अर्थात सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कहते हैं। इसमें कम्प्यूटर के बहुत ही जरूरी उपकरण होते हैं जो प्रोसेसिंग का कार्य सम्पन्न करते हैं। सभी तरह की गणनाएँ यहीं पूरी होती हैं, इसलिए इसे कम्प्यूटर का दिमाग भी कहते हैं।
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आजकल जिस तरह के सीपीयू का सर्वाधिक प्रयोग किया जा रहा है, उसे चित्र में दर्शाया गया है।
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट तीन मुख्य भागों में विभाजित होती हैं-

  • अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट
  • मेमोरी यूनिट क
  • कंट्रोल यूनिट

ये तीनों भाग मिलकर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण करते हैं।
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अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट:
सीपीयू के इस भाग में ही सभी तरह की गणनाओं के कार्य सम्पन्न होते हैं। इसके अलावा कम्प्यूटर तार्किक कार्य भी इसी के द्वारा पूरा करता है। इस तरह के कार्यों में एक (UPBoardSolutions.com) कम्प्यूटर की तुलना दूसरे से कर सकते है।

उदाहरण के लिए यदि यह पता लगाना है कि १० और ४० में छोटा कौन है तो यह तुलना करने वाला काम भी अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट ही करेगा।

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मेसोरी यूनिट:
कम्प्यूटर की मेमोरी यूनिट डेटा को स्टोर करती है। इसके अलावा कम्प्यूटर को दिए जाने वाले निर्देश भी इसी में जमा रहते हैं। प्रोसेसिंग के पहले और बाद दोनों स्थितियों में डेटा और परिणाम मेमोरी यूनिट में ही रहते हैं।

कंट्रोल यूनिट:
कम्प्यूटर की यह यूनिट इसके सभी भागों पर नियन्त्रण बनाए रखती है। इसके द्वारा इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस और अर्थमेटिक एंड लॉजिक यूनिट से प्रोसेसिंग के पश्चात परिणाम प्राप्त करने की प्रक्रिया भी नियंत्रित होती है अर्थात् कम्प्यूटर का पूरा कंट्रोल यहीं से होता है।

आउटपुट उपकरण

जैसा कि आप अभी तक यह जान गए होंगे कि सभी कम्प्यूटर तीन अनिवार्य भागों में विभाजित होते हैं। ये भाग हैं – इनपुट यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट और आउटपूट यूनिट। पिछले अध्याय में आपने सीपीयू के बारे में पढ़ा। इस अध्याय में आप आउटपुट यूनिट के बारे में पढ़ेंगे।

प्राइमरी तौर पर मॉनीटर मुख्य आउटपुट डिवाइस है और प्रिंटर सहायक आउटपुट डिवाइस की श्रेणी में आता है।

मॉनीटर:
मॉनीटर देखने में टेलीविज़न की तरह ही होता है। इनपुट होते समय सूचना और निर्देश तथा प्रोसेसिंग के बाद सभी परिणाम इस पर ही दिखाई देते हैं।
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हमारे देश में दो तरह के मॉनीटर प्रयोग किए जा रहे हैं। मॉनीटरों का यह वर्गीकरण रंगों के आधार पर है और ये हैं –

  • मोनोक्रोम मॉनीटर
  • कलर मॉनीटर

मोनोक्रोम मॉनीटर :
इस श्रेणी में आने वाले सभी मॉनीटर केवल एक रंग में ही सूचनाओं को दर्शाते हैं, इसीलिए इनके संदर्भ में मोनो शब्द का प्रयोग किया जाता है। अब इनका चलन लगातार कम होता जा रहा है।

कलर मॉनीटर:
इस श्रेणी में आने वाले मॉनीटर सभी रंगों में सूचनाओं को दर्शाते हैं, इसीलिए इनके संदर्भ में कलर शब्द का प्रयोग किया जाता है। हमारे देश में कीमतें कम होने से इनका चलन लगातार बढ़ रहा है।

प्रिंटर:
प्रिंटर कम्प्यूटर का एक प्रमुख सहायक उपकरण है। इसके द्वारा आप कम्प्यूटर में स्टोर सूचनाओं (डेटा) को कागज पर प्रिंट कर सकते हैं। इस समय कई तरह के प्रिंटर प्रयोग किए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख है

  • डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर
  • इंकजेट प्रिंटर
  • लेज़र प्रिंटर

निम्न चित्रों में आप इन तीनों तरह के प्रिंटर देख सकते हैं –
UP Board Solutions for Class 6 Computer Education (कम्प्यूटर शिक्षा) 33

लेज़र प्रिंटर डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर :
इस तकनीक से काम करने वाले सभी प्रिंटर पिनों की सहायता से प्रिंटिंग करते हैं। ये पिनें एक रिबन पर दबाव बनाती हैं, जिससे कागज पर अक्षर छप जाता है। ये बहुत ही (UPBoardSolutions.com) साधारण क्वालिटी की प्रिंटिंग करते हैं। इन्हें बैंकों और इसी तरह के बड़े-बड़े संस्थानों में बहुत बड़ी मात्रा में डेटा प्रिंट करने के लिए प्रयोग करते हैं। इनकी छपाई की लागत भी बहुत कम होती है।

इंक जेट प्रिंटर:
इस तकनीक से काम करने वाले सभी प्रिंटर एक जेट से फुहार छोड़कर प्रिंटिंग करते हैं। यह भी कीमत में सस्ते होते हैं और ये काली तथा रंगीन दोनों तरह की प्रिंटिंग करने की क्षमता रखते हैं। इनके द्वारा आप फोटो क्वालिटी की प्रिंटिंग भी कर सकते हैं। लेकिन इनके द्वारा होने वाली छपाई बहुत महँगी होती है और ये धीमी गति से कार्य करते हैं।

लेज़र प्रिंटर :
इस तकनीक से काम करने वाले सभी प्रिंटर लेज़र किरण की सहायता से प्रिंटिंग करते हैं। इसमें लेज़र किरण टोनर नामक पाउडर जैसी स्याही को पिघलाकर कागज पर अक्षरों को प्रिंट करती है। ये कीमत में बहुत महँगे होते हैं और इनके द्वारा तीव्र गति से बेहतरीन प्रिंटिंग की जा सकती है।

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कम्प्यूटर ऑन/ऑफ करना
अभी तक आप कम्प्यूटर के प्रमुख भागों और सहायक उपकरणों के साथ-साथ उसकी कार्य-प्रणाली के बारे में जान गए होंगे। आइए अब यह सीखते हैं कि कम्प्यूटर पर काम की शुरुआत कैसे करते हैं।

कम्प्यूटर ऑन करना:

  • सबसे पहले अपनी कम्प्यूटर किताब लें।
  • कम्प्यूटर प्रयोगशाला में हमेशा टीचर के साथ जाएँ।।
  • मुख्य पॉवर स्विच को ऑन करें।
  • सीवीटी या यूपीएस को ऑन करने के बाद कम्प्यूटर को ऑन करें।
  • यदि मॉनीटर सीपीयू के विद्युत् प्रवाह से नहीं जुड़ा है तो मॉनीटर का स्विच ऑन करें।
  • इसके पश्चात् सीपीयू का स्विच ऑन करें।
  • विंडोज़ डेस्कटॉप आने का इंतजार करें।

विंडोज़ के डेस्कटॉप में आपको जो छोटे-छोटे चित्र दिखाई देते हैं, उन्हें आइकन कहते हैं। इसमें सबसे नीचे टास्क बार होता है। टास्कबार के बाएँ कोने पर स्टार्ट बटन होती है, जिस पर क्लिक करके आप अपने काम की शुरुआत कर सकते हैं।

आपको विंडोज़ के डेस्कटॉप पर माउस प्वाइन्टर भी दिखाई देगा। जब आप माउस को पैड पर घुमाएँगे तो यह भी घूमेगा।

यदि आप विंडोज़ में कोई काम करना चाहते हैं तो आपको वह प्रोग्राम शुरू करना होगा। इस कक्षा में आप पेंट जैसे प्रोग्रामों में काम कर सकते हैं। इसमें आप तरह-तरह की पिक्चर बना सकते हैं। इस सम्बन्ध में आप अपने अध्यापक से कहें।

कम्प्यूटर ऑफ करना:

काम समाप्त होने के पश्चात् कम्प्यूटर को निम्न क्रम में बन्द करें –

  • सबसे पहले विंडोज़ के स्टार्ट बटन पर क्लिक करें। आपके सामने यह इस तरह से खुलकर आ जायेगा-
  • इसमें दिए शटडाउन या टर्न ऑफ विकल्प पर क्लिक करें। आपके सामने यह विकल्प बॉक्स आ जाएगा
  • इसमें शटडाउन या टर्न ऑफ विकल्प पर क्लिक करके ओके बटन पर क्लिक करें। आपके सामने यह संदेश आएगा

It’s now safe to turn off your computer

  • इस संदेश को पढ़ने के बाद सीपीयू का स्विच बन्द करें।
  • मॉनीटर का स्विच बन्द करें।
  • सीवीटी या यूपीएस को बन्द करें।
    • मुख्य विद्युत् आपूर्ति स्विच बन्द करें।

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UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 10 पुष्य मूति वंश

UP Board Solutions for Class 6 History Chapter 10 पुष्य मूति वंश

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प्रश्न 1.
मानचित्र देखकर हर्ष के साम्राज्य विस्तार को लिखिए।
उत्तर :
मानचित्र के अनुसार – हर्ष का साम्राज्य उत्तर में थानेश्वर से लेकर मध्य भारत के साँची तक तथा पूर्व में पुण्ड्रवर्धन से लेकर पश्चिम में बलभी तक फैला हुआ था।

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अभ्यास

प्रश्न 1.
हर्ष की बहन का क्या नाम था?
उत्तर :
हर्ष की बहन का नाम राज्यश्री था।

प्रश्न 2.
हर्षवर्धन की राजधानी कहाँ-कहाँ थी ?
उत्तर :
हर्षवर्धन जिस समय गद्दी पर बैठा उस समय उसकी राजधानी थानेश्वर थी। बाद में उसने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया।

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प्रश्न 3.
ह्वेनसांग ने हर्ष के विषय में क्या लिखा है ?
उत्तर :
हुवेनसांग ने हर्ष के विषय में लिखा है कि हर्षवर्धन एक प्रजापालक एवं उदार शासक था। उसने जिन राज्यों पर विजय प्राप्त की थी, उन राजाओं ने हर्ष की अधीनता स्वीकार कर ली हर्षवर्धन ने अपने सम्पूर्ण साम्राज्य की व्यवस्था के लिए उसे भुक्तियों (प्रांतों), विषयों (जिलों) तथा ग्रामों में विभाजित किया। उसके शासन में अपराध कम होते थे। अपराध करने वाले को कठोर दण्ड दिया जाता था। हर्ष को बौद्ध (UPBoardSolutions.com) धर्म से लगाव था। उसने कन्नौज में एक विशाल धर्म सभा भी बुलाई थी। वह बहुत दानी था। वह हर पाँच वर्ष में अपनी सारी संचित सम्पत्ति प्रयाग के मेले में दान कर देता था। उन्होंने कहा भारत महान देश हर्ष जैसे लोगों की वजह से ही है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित का उत्तर दो वाक्यों में लिखिए –
(अ) हर्षवर्धन और बौद्ध धर्म
(ब) शिक्षा के संरक्षक के रूप में हर्षवर्धन
उत्तर :
(अ) हर्षवर्धन और बौद्ध धर्म – हर्ष को बौद्ध धर्म से लगाव था। उसने कन्नौज में एक, विशाल धर्म सभा बुलाई।
(ब) शिक्षा के संरक्षक के रूप में हर्षवर्धन – हर्ष विद्वान और कला प्रेमी था। उसने संस्कृत में तीन नाटक – नागानन्द, रत्नावली व प्रियदर्शिका आदि लिखे। नालन्दा विश्वविद्यालय हर्ष के शासन में प्रसिद्ध विश्वविद्यालय था।

प्रश्न 5.
सत्य और असत्य बताइए –

(अ) हर्षकालीन इतिहास जानने का मुख्य स्रोत चीनी यात्री फाह्यान का विवरण है। (असत्य)
(ब) हर्ष के दरबारी कवि बाणभट्ट थे। (सत्य)
(स) हर्षवर्धन की राजधानी कन्नौज थी। (सत्य)
(द) हर्षवर्धन के भाई का नाम राज्यवर्धन था। (सत्य)

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प्रश्न 6.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(अ) वर्धनवंश का प्रथम शासक प्रभाकरनवर्धन था।
(ब) हर्षवर्धन ने तीन नाटक

  1. नागानंद
  2. रत्नावली
  3. प्रियदर्शिका कीरचना की।

(स) हर्षचरित्र के लेखक बाणभट्ट हैं।
(द) हर्षवर्धन की मृत्यु 647 ई० में हुई।

प्रोजेक्ट कार्य –
नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 6 Hindi प्रार्थना पत्र (पत्र – लेखन)

UP Board Solutions for Class 6 Hindi प्रार्थना पत्र (पत्र – लेखन)

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पत्रों के भेद – पत्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं –

  1. व्यक्तिगत पत्र (सामाजिक पत्र)।
  2. व्यापारिक पत्र।
  3. सरकारी पत्र।

कुछ मुख्य प्रशस्ति – सूचक तथा अभिवादन एवं अन्त में लिखे जानेवाले शब्द –
UP Board Solutions for Class 6 Hindi प्रार्थना पत्र (पत्र - लेखन) 1

पुत्र का पिता के नाम पत्र

राजकीय इन्टर कॉलेज,
लखन
दिनांक 1 अप्रैल, 20xx
पूजनीय पिता जी,
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ कुशल हैं और आपकी कुशलता की ईश्वर से कामना करता हूँ। मैं मन लगाकर पढ़ रहा हैं। अब शीघ्र ही मेरी वार्षिक परीक्षाएँ शुरू होने वाली हैं। (UPBoardSolutions.com)
संमयाभाव के कारण इस बार मैं घर आने में असमर्थ रहूँगा। पूज्य माता जी को सादर प्रणाम। छोटे भाई-बहनों को शुभ आशीर्वाद।
आपका प्रिय पुत्र
सुनील कुमार

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निमन्त्रण पत्र

बुलन्दशहर
दिनांक 10 जून, 20xx
प्रिय शर्मा जी,
सादर नमस्ते।
ईश्वर की अनुकंपा से मेरे पुत्र सुनील का जन्मदिन दिनांक 15 जून, 20xx को है। आपसे प्रार्थना है कि आप इस मंगल बेला में सपरिवार पधारकर उत्सव की शोभा बढ़ाएँ।
आपका दर्शनाभिलाषी
अजय सिन्हा

मित्र को पत्र

इलाहाबाद
दिनांक 1 जून, 20xx
अभिन्न हृदयं मयंक,
सस्नेह नमस्कार।
मैं कुशलता से हूँ और तुम्हारी कुशलता की कामना ईश्वर से करता हूँ। तुम्हारा और तुम्हारे पत्र का इंतजार हर समय रहता हैं लेकिन आशा-निराशा में बदल जाती है न तुम आते हो, न तुम्हारा पत्र। मैं इससे अनभिज्ञ हूँ कि इस उपेक्षा और निष्ठुरता का क्या कारण है। अतीत की स्मृतियाँ दिन-रात तुमसे मिलने के लिए बेचैन करती रहती हैं। अगर मेरे (UPBoardSolutions.com) इस पत्र का उत्तर नहीं दोगे तो आगे से मेरा भी तुम्हें कोई पत्र नहीं मिलेगा। पत्र का उत्तर शीघ्र देना। भाभी जी को प्रणाम के बच्चों को प्यार।
तुम्हारा मित्र
राजेश

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बधाई पत्र

इलाहाबाद
दिनांक 25 जुलाई, 20xx
स्नेहमयी ज्योति,
यह ज्ञात होने पर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हुई कि तुमने मेरठ विश्वविद्यालय में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए। इस सफलता के लिए मैं तुम्हें हार्दिक बधाई देती हैं और आशा करती हूँ कि तुम्हें एम०ए० में भी ऐसा गौरव प्राप्त हो। आशा है विश्वविद्यालय की तरफ से तुम्हें स्वर्ण-पदक भी प्राप्त होगा। ईश्वर सदैव तुम्हारा पथ प्रशस्त करता रहे।
मैं सपरिवार तुम्हें तुम्हारी सफलता के लिए बधाई देती हूँ। घर में सबको नमस्कार कहना।
तुम्हारी मित्र
सीमा।

शोक पत्र

कानपुर
दिनांक 12 फरवरी, 20xx
प्रिय श्रीमती शशि देवी जी,
आपके आदरणीय पति के असामयिक देहावसान का समाचार सुनकर हृदय को अत्यधिक दुख हुआ। निःसन्देश यह आपके और आपके परिवार के ऊपर एक भयंकर वज्रपात हुआ है लेकिन मृत्यु के ऊपर किसी का वश नहीं। भयंकर परिस्थितियों का सामना करना ही मानव का परम कर्तव्य है। इस कर्तव्य का पालन करके ही वह अपने जीवन में सफल हो सकता है।
मैं इस दुःखद घड़ी में आपकी हर प्रकार से सहायता करने के लिए तैयार हैं। आप धीरज रखें। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
आपकी बहन
रेनू

व्यावसायिक पत्र
(पुस्तक विक्रेता से पुस्तकें मँगाने के सम्बन्ध में)

राजकीय इन्टर कॅलेज,
लखनऊ
दिनांक 1 अप्रैल, 20xx
अशोक प्रकाशन,
डिप्टी गंज, बुलन्दशहर।
मान्यवर महोदय,
कृपया निम्नलिखित पुस्तकों को उचित कमीशन काटकर वी०पी०पी० पार्सल द्वारा शीघ्र भेजने की कृपा करें।

  1. राष्ट्र बाल भारती कक्षा 6 – 25 प्रतियाँ
  2. राष्ट्र बाल भारती कक्षा 7 – 25 प्रतियाँ
  3. राष्ट्र बाल भारती कक्षा 8 – 25 प्रतियाँ

भवदीय
कमलकिशोर (अध्यापक)

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प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र

श्रीयुत प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय इन्टर कॉलेज आगरा
श्रीमान जी,
निवेदन यह है कि मुझे रात्रि से बुखार आ रहा है। मैं कॉलेज आने में असमर्थ हैं। अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे दो दिन का अवकाश देने की कृपा करें। आपकी अति कृपा होगी।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
नीरज कुमार, कक्षा 6 (अ)
दिनांक 12 जुलाई, 20xx

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UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा

UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा

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अभ्यास 5(a)

प्रश्न 1.
शिक्षक प्रत्येक शिक्षार्थी को 3 पेंसिल देते हैं। यदि कक्षा में शिक्षार्थियों की कुल संख्या हो तो बताइए कि शिक्षक शिक्षार्थियों को कुल कितनी पेंसिलें देते हैं?
उत्तर-
शिक्षक द्वारा 1 शिक्षार्थी को दी (UPBoardSolutions.com) गई पेंसिल की संख्या = 3
तो शिक्षक द्वारा शिक्षार्थी को दी गई पेंसिल की संख्या = 3 x x = 3x पेंसिल।

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प्रश्न 2.
अपनी उत्तर पुस्तिका पर रिक्त स्थानों में संख्याओं की जगह कोई बीज लिखिए और बताइए कि उसका प्रयोग किस संख्या के लिए किया गया है।
उत्तर-
माना कि बीज x है।
UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा 1

प्रश्न 3.
रहीम के पास 10 रुपये थे, उसने रजिया को कुछ रुपये दे दिए। उसके पास कितने रुपए बचे। इस सम्बन्ध को अक्षर संख्याओं की सहायता से व्यक्त कीजिए।
हल:
माना कि रहीम ने रजिया को x रुपये दिए।
प्रश्नानुसार, रहीम के पास बचे = 10 – x रुपये

प्रश्न 4.
एक बगीचे में कुछ पेड़ थे। 50 पेड़ और लगा देने पर पेड़ों की संख्या 120 हो गई? इस कथन को अक्षर संख्या की सहायता से व्यक्त कीजिए।
हल:
माना कि बगीचे में x पेड़ थे।
प्रश्नानुसार, x + 50 = 120

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प्रश्न 5.
अक्षर N और M का प्रत्येक प्रतिरूप तीलियों से बनाने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या के लिए नियम ज्ञात कीजिए। नियम लिखने के लिए एक चर का प्रयोग कीजिए।
हल:
N का एक प्रतिरूप तैयार करने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या = 3 x 1 = 3
N के दो प्रतिरूप तैयार करने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या = 3 x 2 = 6
N के तीन प्रतिस्प तैयार करने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या = 3 x 3 = 9
इसी प्रकार यदि N के n प्रतिरूप बनाने हों तो आवश्यक तीलियों की संख्या 3 x n = 3n
इस नियम को हम निम्नलिखित सारणी द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं।
UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा 2
फिर, M के प्रतिरूप तैयार करने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या = 4 x 1 = 4
M के दो प्रतिरूप तैयार करने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या = 4 x 2 = 8
M का तीन प्रतिरूप तैयार करने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या = 4 x 3 = 12
इसी प्रकार, M के n प्रतिरूप बनाने के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या = 4 x n = 4n
इसी नियम को निम्नलिखित सारणी द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं।
UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा 3

अभ्यास 5(b)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को बीजगणितीय रूप में लिखिए-
(i) 6 और x का योगफल
(i) x में से 7 घटाने पर शेष
(iii) x का 5 गुना
(iv) x का एक तिहाई
हल:
(i) 6 और x का योगफल = 6 + x
(ii) x में से 7 घटाने पर शेष = x – 7
(iii) x का 5 गुना = 5x
(iv) x का एक तिहाई = [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex] x = [latex]\frac { x }{ 3 }[/latex]

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों को संख्याओं, बीजों तथा मूल संक्रियाओं के चिह्नों की सहायता से व्यक्त कीजिए-
UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा 4
(i) वृत्त का व्यास उसकी त्रिज्या का दूना होता है।
उत्तर-
वृत्त का व्यास = 2 x त्रिज्या
d = 2 x r
जहाँ 4 वृत्त का व्यास है तथा rवृत्त की त्रिज्या है।
(ii) वर्ग का परिमाप उसकी एक भुजा का 4 गुना होता है।
उत्तर-
वर्ग को परिमाप = 4 x भुजा
s = 4 x x
जहाँ s वर्ग का परिमाप है तथा x वर्ग की भुजा है।
(iii) आयत का क्षेत्रफल उसकी लम्बाई तथा चौड़ाई का गुणनफल होता है।
उत्तर-
आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई x चौड़ाई
A = x x y
जहाँ A आयत का क्षेत्रफल है तथा x, y आयत की क्रमशः लम्बाई तथा चौड़ाई हैं।
(iv) लाभ, विक्रय मूल्य तथा क्रय मूल्य के अन्तर के बराबर होता है, जब विक्रम मूल्य क्रय मूल्य से अधिक हो
उत्तर-
लाभ = विक्रय मूल्य – क्रय मूल्य
I = SP – CP
जहाँ लाभ = I, विक्रय मूल्य = SP, क्रय मूल्य = CP हैं।

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प्रश्न 3.
(a) एक टोकरी में 50 आम हैं तथा एक दूसरी टोकरी में आम हैं। पहली टोकरी में दूसरी टोकरी से कितने आम अधिक हैं?
हल:
पहली टोकरी में आम = 50
तथा दूसरी टोकरी में आम = x
अतः पहली टोकरी में दूसरी टोकरी से अधिक आम = (50 – x) आम
(b) एक विद्यालय में कुल 100 छात्र हैं। जिनमें से x छात्र प्रदूषित जल पीने से बीमार हो गए, तो स्वस्थ छात्रों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
विद्यालय में छात्रों की कुल संख्या = 100
बीमार छात्रों की संख्या = x
स्वस्थ छात्रों की कुल संख्या = 100 – x

प्रश्न 4.
पावं चित्र में आयत की आसन्न भुजाएँ x मीटर तथा y मीटर हैं। आयत का परिमाप लिखिए।
UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा 5
हल:
आयत का परिमाप = 2 (आसन्न भुजाओं का योग) = 2 (x + y) मीटर = 2x + 2y मीटर

प्रश्न 5.
एक गुब्बारे का मूल्य x पैसे है। ऐसे 12 गुब्बारों का मूल्य कितना होगा?
हल:
एक गुब्बारे का मूल्य = x पैसे
12 गुब्बारे का मूल्य = 12 x x = 12x पैसे

प्रश्न 6.
कक्षा में विद्यार्थी हैं। जिनमें एक चौथाई बालिकाएँ हैं। कक्षा में कितनी बालिकाएँ हैं?
हल:
कक्षा में कुल विद्यार्थियों की संख्या = x
कक्षा में बालिकाओं की संख्या = [latex]\frac { x }{ 4 }[/latex] बालिकाएँ

प्रश्न 7.
पाश्र्वांकित चित्र में एक वर्ग की भुजा सेमी है। वर्ग का परिमाप लिखिए।
UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा 6
हल:
वर्ग का परिमाप = 4 x एक भुजा = 4 x a सेमी = 4a सेमी

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प्रश्न 8.
लीला राधा की छोटी बहन है। वह राध से 6 वर्ष छोटी है। लीला की आयु राधा की आयु के पदों में लिखिए।
हल:
मानी राधा की आयु = x वर्ष
लीला की आयु = (राधा की आयु – 6) वर्ष = (x – 6) वर्ष

अभ्यास 5(c)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को घातांकीय रूप में लिखिए-
(i) c x c x c ………. 5 बार = c x c x c x c x c = c5
(ii) 5 x a x a x b x b x b = 5a2b3
(iii) 7 x 7 x 7 = 73
(iv) t x t x y x y = t2y2

प्रश्न 2.
निम्नांकित को गुणा के रूप में लिखिए-
(i) a2b2 = a x a x b x b
(ii) 9ab3 = 9 x a x b x b x b
(iii) 10x3y3z3 = 10 x x x x x x x y x y x y x z x z x z

प्रश्न 3.
निम्नलिखित को घातांकीय रूप में लिखिए-
(i) a x a x a x ………………. n बार = an
(ii) b x b x b x b x …………. बार = bn
(iii) 3 x 3 x 4 x 4 x a x a ……………. = 144a2
(iv) a x s x t x t ……………. = ast2

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प्रश्न 4.
एक व्यक्ति की वर्तमान आय a रुपए है। उसकी आय प्रतिवर्ष गुनी हो जाती है। तीन वर्ष बाद उसकी आय कितनी होगी?
हल:
प्रश्नानुसार, एक व्यक्ति की वर्तमान आय = a
तीन वर्ष बाद आय a x b x b x b = ab3

अभ्यास 5(d)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों में सत्य तथा असत्य कथन छाँटिए (अँटकर)-
(i) x अचर राशि है। (असत्य)
(ii) 5 एक अचर राशि है। (सत्य)
(iii) (x + 5) एक अचर राशि है। (असत्य)
(iv) x5 अचर राशि है। (असत्य)

प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों में अचर लिखिए (लिखकर) –
(i) y = 4x
उत्तर-
अचर = 4
(ii) y = x + 7
उत्तर-
अचर = 7
(iii) x + y = 3
उत्तर-
अचर = 3
(iv) [latex]\frac { x }{ 3 }[/latex] + [latex]\frac { y }{ 4 }[/latex] = 1
उत्तर-
अचर- [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex] , [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] , 1

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दक्षता अभ्यास – 5

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गणितीय कथनों पर ध्यान दीजिए तथा अपनी अभ्यास पुस्तिका में बॉक्स के स्थान पर अक्षर संख्याओं के लिए संख्या लिखिए-
(i) 6 + 4 = x
6 + 4 = 10
(ii) 3 x 9 = y
3 x 9 = 27
(iii) 6 – 2 = a
6 – 2 = 4
(iv) b ÷ 2 = 5
10 ÷ 2 = 5

प्रश्न 2.
ज्ञात कीजिए (ज्ञात करके)-
(i) 10 में से घटाने पर प्राप्त संख्या = 10 – x
(ii) 2x और 3y को जोड़ने पर प्राप्त संख्या = 2x + 3y
(ii) y की 6 गुनी संख्या = y x 6 = 6y
(iv) a में 3 का भाग देने पर प्राप्त संख्या = a ÷ 3 = [latex]\frac { a x 1 }{ 3 }[/latex] = [latex]\frac { a }{ 3 }[/latex]

प्रश्न 3.
यदि a = 5 तथा b = 9, तो निम्नांकित के मान ज्ञात कीजिए (ज्ञात करके)-
(i) a + 10 = 5 + 10 = 15
(ii) b – 3 = 9 – 3 = 6
(iii) a + b – 14 = 5 + 9 – 14 = 14 – 14 = 0
(iv) a x b = 5 x 9 = 45
(v) 30 ÷ a = 30 ÷ 5 = 6

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प्रश्न 4.
विस्तृत रूप को घातांकीय रूप में लिखिए (लिखकर)-
(i) x x x x x x y = x3y
(i) q x q x q = q3
(iii) 2 x y x y x y = 2y3
(iv) 5 x 5 x 5 x x x y x y x y = 125xy3
(v) m x m x m x m = m4

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति अपनी अभ्यास पुस्तिका में कीजिए-
UP Board Solutions for Class 6 Maths Chapter 5 बीजगणितीय अवधारणा 7

प्रश्न 6.
अधोलिखित कथनों को देखकर उसमें चर और अचर छाँटिए (अँटकर)
(i) 5x2y2z3
(i) 7x2y2
(iii) m4n2
(iv) a3b5
उत्तर-
(i) चर = x, y, z
अचर = 5
(ii) चर = x, y
अचर = 7
(iii) चर = m, n
(iv) चर = a, b

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UP Board Solutions for Class 6 Hindi Chapter 5 नीतिश्लोकाः (अनिवार्य संस्कृत)

UP Board Solutions for Class 6 Hindi Chapter 5 नीतिश्लोकाः (अनिवार्य संस्कृत)

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1. सर्वे भवन्तु ………………………………………. दुःखभाग्भवेत्।।

हिन्दी अनुवाद – सब सुखी हों, सब नीरोग हों, सब सज्जन हों, कोई दुखी न हो।

2. अलसस्य ……………………………………….. कुतः सुखम् ।।

हिन्दी अनुवाद – आलसी व्यक्ति को विद्या कहाँ? विद्या के बिना धन कहाँ? धन के बिना मित्र कहाँ और मित्र के बिना सुख कहाँ?

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3. विद्या ददाति …………………………………….. ततः सुखम् ।।

हिन्दी अनुवाद – विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता आती है, योग्यता से धन आता है, धन – से धर्म और धर्म से सुख मिलता है।

4. पुस्तकस्था ……………………………………….. तद् धनम् ।।

हिन्दी अनुवाद – पुस्तक में छिपी विद्या और दूसरे के हाथों में गया धने समय पर काम नहीं आता; अर्थातू अपना ज्ञान तथा अपने पास का धन ही मौके पर साथ देता है।

5. परोपकाराय …………………………………………… शरीरम् ।।

हिन्दी अनुवाद – परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं; परोपकार के लिए नदियाँ बहती (जल देती) हैं। परोपकार के लिए गायें दूध देती हैं; परोपकार के लिए ही यह मानव शरीर है; अर्थातू मानवों का जन्म ही परोपकार करने के लिए हुआ है।

अभ्यास

प्रश्न 1.
उच्चारण करें –
नोट – विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
एक पद में उत्तर दें –

(क) सर्वे किं पश्यन्तु?
(ख) कस्य मित्रं न भवति?
(ग) विद्या किं ददाति?
(घ) कीदृशं धनं धनं न भवति?

उत्तर :

(क) भद्राणि।
(ख) अधनस्य।
(ग) विनयं।
(घ) परहस्तगतं।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (पूर्ति करके) –

(क) सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
(ख) अमित्रस्य कुतः सुखम्?
(ग) परोपकाराय दुहन्ति गावः।
(घ) धनात् धर्मः ततः सुखम् ।

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प्रश्न 4.
बड़े वृत्त में दिए गए पदों के साथ छोटे वृत्त में दिए गए उचित क्रियापदों को जोड़ते हुए वाक्य रचना करें। (वाक्य रचना करके) –

(क) सर्वे सन्तु निरामयाः ।
(ख) विनयात् याति पात्रताम् ।
(ग) परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
(च) परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः ।
(छ) सर्वे भवन्तु सुखिनः ।
(ज) विद्या ददाति विनयं ।

प्रश्न 5.

UP Board Solutions for Class 6 Hindi Chapter 5 नीतिशलोकाः (अनिवार्य संस्कृत) 1

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