UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 11 प्राकृतिक आपदाएँ

UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 11 प्राकृतिक आपदाएँ

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अभ्यास

प्रश्न 1.
सही उत्तर पर सही (✓) का निशान लगायें –

(i) पाला किस मौसम में पड़ता है?

(क) सर्दी ✓ 
(ख) गर्मी
(ग) बरसात
(घ) उपरोक्त तीनों में

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(ii) ओलावृष्टि का अर्थ है –

(क) अत्यधिक वर्षा
(ख) बर्फ का गिरना
(ग) बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़ों का आसमान से गिरना ✓
(घ) पाला पड़ना

(iii) लू चलती है –

(क) बरसात के मौसम में
(ख) जाड़े के मौसम में
(ग) गर्मी के मौसम में ✓
(घ) तीनों मौसम में

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

(क) पाला पत्तियों के ऊपर जम जाता है। (पाला, ओस)
(ख) कुहरा की बूंदें पौधों की पत्तियों से टपकती हैं। (ओला, कुहरा)
(ग) पौधे पाले से मुरझा जाते हैं। (पाले से, बरसात से)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों में सही के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (✗) का निशान लगाइए –

(क) लू गर्मी में चलती है। (✓)
(ख) वर्षा ऋतु में पाला तथा कोहरा पड़ता है। (✗)
(ग) शरद ऋतु में लू अधिक चलती है। (✗)
(घ) कोहरा पौधे के लिए लाभदायक होता है। (✗)

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प्रश्न 4.

(क) प्राकृतिक आपदा किसे कहते हैं?
(ख) कोहरा किसे कहते हैं? इससे फसलों को क्या हानि होती है?
(ग) पाला किसे कहते हैं?
(घ) लू से पौधों को क्या हानि होती है?
(ङ) ओला गिरने से फसलों के किन भागों को हानि होती है?

उत्तर :

(क) वे प्रतिकूल परिस्थितियाँ जिनसे हमारी फसलों तथा जीव-जन्तुओं का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है, प्राकृतिक आपदाएँ कहलाती हैं।

(ख) पानी की बूंदें वातावरण में धूल व धुएँ के कणों के साथ मिलकर धरातल के कुछ ऊपर बादल का रूप ले लेती हैं, उसे कुहरा कहते हैं। लगातार कोहरे के कारण सूर्य की गर्मी व (UPBoardSolutions.com) प्रकाश पौधों को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है, जिससे फसलों की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और उपज घट जाती है। –

(ग) जलवाष्प का पौधों एवं अन्य पदार्थों के ऊपर सीधे बर्फ के रूप में जमने को पाला या तुषार कहते हैं।

(घ) लू से कोमल पौधों व पेड़ों की पत्तियाँ सूख जाती हैं।

(ङ) ओला पड़ने से पौधों के कोमल भाग और पत्तियाँ टूट जाती हैं। कभी-कभी इससे पूरी फसल ही नष्ट हो जाती है।

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प्रश्न 5.

(क) पाला पड़ने से पूर्व वातावरण में कौन-कौन से परिवर्तन होते हैं?
(ख) क्या कारण है कि कोहरा सूर्य निकलने के साथ-साथ कम होने लगता है?
(ग) पाला से बचाव के लिए क्या उपाय करेंगे?

उत्तर :

(क) पाला पड़ने से पूर्व वातावरण में कई परिवर्तन होते हैं, जैसे – आकाश का स्वच्छ होना, रात का तापमान कम होना, भूमि के निकट शून्य से भी कम हो जाना, दिन में ठंडी हवा का चलना और रात में शांत हो जाना और वायु में जलवाष्प की मात्रा कम होना।

(ख) सूर्योदय होने पर सूर्य की गर्मी से पानी की बूंदें धीरे-धीरे वाष्प में परिवर्तित हो जाती हैं और कुहरा समाप्त हो जाता है।

(ग) पाला से बचाव- खेतों की सिंचाई करनी चाहिए। (UPBoardSolutions.com) वायु के बहावे की दिशा में मेड़ों पर धुआँ करने से सुरक्षा होती है। पुआल घास, पालिथीन से पौधों को ढक देना चाहिए और खेतों में पाला अवरो जातियों की बुवाई करनी चाहिए।

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प्रोजेक्ट कार्य
नोट विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 10 फल परिरक्षण

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अभ्यास

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. परिरक्षण में 10 से 15% नमक जीवाणुओं के लिए विष का काम करता है।
  2. पेय पदार्थों को परिरक्षित करने में पोटैशियममेटाबाई सल्फाइड तथा सोडियम बेंजोएट रसायनों का प्रयोग किया जाता है।
  3. डिब्बा बन्दी में डिब्बे से हवा निकाल दी जाती है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित में सही के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (✗) का निशान लगाइए – अचार में तेल मिलाया जाता है –

(क) स्वाद बढ़ाने के लिए (✗)
(ख) परिरक्षण के लिए (✓)
(ग) अचार की मात्रा बढ़ाने के लिए (✗)
(घ) सुगन्ध बढ़ाने के लिए। (✗)

प्रश्न 3.
परिरक्षण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
फलों एवं सब्जियों को खराब होने से बचाने हेतु अथवा उनकी गुणवत्ता अधिक समय तक बनाए रखने के लिए की जाने वाली क्रियाओं को फल परिरक्षण कहते हैं।

प्रश्न 4.
परिरक्षण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर :
फल और सब्जियों के सड़ने से भारी नुकसान होता है। इस नुकसान से बचने के लिए परिरक्षण की आवश्यकता पड़ती है।

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प्रश्न 5.
परिरक्षण के कितने प्रकार हैं?
उत्तर :
परिरक्षण के दो प्रकार हैं –

  • अस्थायी परिरक्षण एवं
  • स्थायी परिरक्षण।

अस्थायी परिरक्षण में वस्तुओं को जीवाणु रहित करना, नमी से दूर रखना, ठंडे स्थान में रखना या डिब्बा बन्दी करना आदि होता है। स्थायी परिरक्षण ऊष्मा द्वारा, नमक द्वारा, चीनी द्वारा, (UPBoardSolutions.com) रसायनों द्वारा तथा सुखाना आदि से होता है।

प्रश्न 6.
ऊष्मा द्वारा परिरक्षण कैसे किया जाता है?
उत्तर :
खाद्य पदार्थों के जीवाणुओं को सामान्यतः 65 डिग्री सेल्सियस ऊष्मा पर गर्म करके नष्ट किया जाता है।

प्रश्न 7.
स्थायी एवं अस्थाई परिरक्षण में अन्तर बताइए।
उत्तर :
प्रश्न 5 का उत्तर देखिए।

प्रश्न 8.
आम का अचार सिरके में कैसे तैयार किया जाता है?
उत्तर :
आम के कच्चे फलों को चार भागों में काट लेते हैं। नमक मिलाकर शीशे के बर्तन में रखते हैं। अदरक, लहसुन व लालमिर्च को सिरके में पीसते हैं। मेथी, राई, सौंफ, जीरा तथा मंगरैल को खरल में कूट लेते हैं। फिर आम के निकले हुए पानी में इन सभी मसालों को मिलाकर आम के टुकड़ों से (UPBoardSolutions.com) लपेटते हैं। सरसों का तेल या सिरका इन बर्तनों में भर देते हैं। एक सप्ताह धूप में रखते हैं। अचार खाने योग्य हो जाता है।

प्रश्न 9.
आपके घर में गाजर, फूलगोभी आदि का मिश्रित अचार कब और कैसे बनाया जाता है?
उत्तर :
गाजर, फूल गोभी व शलगम को अच्छी तरह धोते हैं। टुकड़े काटकर 5 मिनट उबले पानी में रखते हैं। फिर इनका पानी सुखाते हैं। मसाले को तेल में भूनकर प्याज, लहसुन, अदरक मिलाते हैं। तैयार सामग्री जार में रखकर गुड़ का घोल या एसिटिक एसिड मिला देते हैं और 3-4 दिन धूप में रखते हैं। मसाला मिलाने के लिए जार को कई बार हिलाते हैं।

आवश्यक सामग्री – गाजर के टुकड़े 500 ग्राम, गोभी टुकड़े -250, शलजम – 250 ग्राम, लहसुन – 20 ग्रां, लाल मिर्च – 20 ग्रा, गर्म मसाला – 30 ग्रा, नमक – 75 ग्रा, सरसों तेल – 250 ग्रा, एसिटिक एसिड – 10 ग्राम

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प्रश्न 10.
पपीते का अचार बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कच्चे पपीते को छीलकर छोटे टुकड़े करते हैं। 100 ग्राम नमक मिलाकर 4 घंटे धूप में रखते हैं। शीशे के जार में सिरका इतना डालें कि टुकड़े डूब जाएँ। टुकड़े तौल लेते हैं फिर प्रति किलो पर 2 चम्मच राई, लाल मिर्च, बड़ी इलायची, जीरा, काली पीपर, पाउडर (प्रत्येक 10 ग्रा) हल्दी डालकर (UPBoardSolutions.com) मिला देते हैं। समय-समय पर बर्तन को हिलाते रहते हैं, जिससे मसाला पूरी तरह मिल जाए। तीन सप्ताह बाद अचार खाने योग्य हो जाता है।

प्रश्न 11.
आम का मीठा अचार कैसे तैयार किया जाता है?
उत्तर :
आम का मीठा अचार –

इसे बनाने के लिए आवश्यक सामग्री – आम की फाँके – 1 किलोग्राम, नमक – 200 ग्रा, चीनी – 600, ग्रा, लालमिर्च पीसी – 20 ग्रा, गर्ममसाला – 20 ग्रा, सोंट – 15 ग्रा, सौंफ – 20 ग्रा, हींग – थोड़ा-सा

बनाने की विधि – आमों को ठंडे पानी में धोते हैं। छिलका उतारकर लम्बाई में बड़े सरौते से काटकर फॉकों को स्टील के काँटों से छेदते हैं। आम की फाँके चीनी की चासनी को अच्छी तरह सोखती हैं। चासनी अचार को सुरक्षित रखती है। काँच के बर्तन में रखकर मसाले और चीनी को (UPBoardSolutions.com) अच्छी तरह मिलाते रहें। 4-5 दिन धूप में रखते हैं।

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UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 9 फलों की खेती

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अभ्यास

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

(क) आम में विटामिन विटामिन (ए, बी, सी) प्रचुर मात्रा में पायी जाती है।
(ख) सब्जीवाला/पका खाने वाले केला की किस्म है।
(ग) इलाहाबादी सुख अमरूद की किस्म है।
(घ) भेट कलम तथा वीनियर आम की व्यावसायिक प्रसारण विधि है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों में सही कथन पर (✓) तथा गलत कथन पर (✗) का निशान लगाइए –

(क) लखनऊ-49 अमरूद की किस्म है। (✓)
(ख) इलाहाबादी-सफेदा अमरूद की प्रजाति है। (✓)
(ग) चौसा आम की प्रजाति है। (✓)
(घ) अमरूद पौधों की आपसी दूरी 8 मी0 x 8 मी0 होती है। (✓)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेल कीजिए – (सुमेल करके)
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 9 फलों की खेती 1

प्रश्न 4.

  1. आम के फल का चित्र बनाइए।
  2. अमरूद के पौधों के बीच खाली जगह में कौन-2 से फल के पौधे लगाए जाते हैं?
  3. केला के प्रवर्धन विधि का वर्णन कीजिए।
  4. अमरूद में तना छेदक कीट की रोकथाम कैसे की जाती है?

उत्तर :

1. आम
UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 9 फलों की खेती 2
2. पपीता, फालसा तथा मटर आदि के पौधे लगाए जा सकते हैं।
3. केला के प्रवर्धन अधेभूस्तारी (सकर) से किया जाता है। तलवार के समान पत्तियों वाले ओजस्वी भूस्तारी प्रवर्धन के लिए उत्तम होते हैं। चौड़ी पत्ती वाली पुत्ती (सकर) को नहीं लगाना चाहिए।
4. अमरूद में तना छेदक कीट नियन्त्रण के लिए रुई को मिट्टी के तेल में भिगोकर कीट द्वारा बनाए छिद्रों में डालकर गीली मिट्टी से बन्द कर देते हैं।

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प्रश्न 5.
अमरूद की खेती का वर्णन कीजिए
उत्तर :
अमरूद 3, 4 वर्ष के बाद से 30 वर्ष तक फल देता है। अमरूद सभी प्रकार की मिट्टयों में उगाया जा सकता है लेकिन दोमट भूमि सर्वोत्तम मानी जाती है। इसके लिए शुष्क जलवायु अच्छी रहती है। इसका पौधा बीज द्वारा तथा वानस्पतिक भागों द्वारा दोनों तरह से तैयार होता है। अच्छी नर्सरी से पौधे लेकर 8 x 8 मीटर की दूरी पर लगाते हैं। पौधा लगाने का उचित समय जुलाई-अगस्त है। इसमें प्रति वर्ष गोबर की (UPBoardSolutions.com) खाद व रासायनिक खाद, राख व हड्डी का चूर्ण डालते हैं। इसकी सिंचाई थाला विधि से करते हैं। समय-समय पर निराई करके खरपतवार निकालते हैं। इलाहाबादी-सफेदा, बेदाना, सेबिया, संगम आदि अच्छी किस्में हैं।

प्रश्न 6.
केला की फसल में खाद एवं उर्वरक की मात्रा बताइए।
उत्तर :
केले की अच्छी फसल के लिए पौधे लगाने के पहले, दूसरे, तीसरे माह में 3 किग्रा अण्डी की खली तथा 8 किग्रा गोबर की खाद हर पौधे को देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रति पौधा 2 किग्रा अण्डी की खली, डेढ़ किग्रा अमोनियम सल्फेट, 250 ग्राम म्युरेट आफ पोटाश तथा 400 ग्राम सुपर फॉस्फेट देनी चाहिए।

प्रश्न 7.
अमरूद एवं आम के लिए उचित भूमि एवं जलवायु का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अमरूद के लिए शुष्क जलवायु तथा आम के लिए गर्म एवं तर जलवायु अच्छी रहती है। अमरूद तथा आम दोनों के लिए दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है।

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UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 8 बाग

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अभ्यास

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर के सामने सही (✓) का निशान लगाइए –

(i) फलदार वृक्ष होते हैं –

(क) अल्प आयु
(ख) दीर्घायु
(ग) एक वर्षीय
(घ) द्विवर्षीय

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(ii) बाग के लिए सबसे उपयुक्त मृदा है –

(क) दोमट 
(ख) बलुई
(ग) काली
(घ) लाल

(iii) नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं –

(क) बीज से
(ख) तने से
(ग) जड़ से
(घ) उपर्युक्त सभी से 

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

(क) शहर के पास की भूमि में षट्भुजाकार विधि से पौधे लगाए जाते हैं।
(ख) बाग की सुरक्षा के लिए चारों तरफ बाड़ लगाई जाती है।
(ग) बाग लगाने की सबसे प्रचलित वर्गाकार विधि है।

प्रश्न 3.
दिए गए प्रश्नों में सही कथन के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (✗) का निशान लगाइए –

(क) बाग लगाने की कंटूर विधि मैदानी क्षेत्रों में अफ्नाई जाती है। (✗)
(ख) बाग लगाने की वर्गाकार विधि सबसे प्रचलित विधि है। (✓)
(ग) बाग लगाने की पंचकोणीय विधि को पूरक विधि के नाम से जाना जाता है। (✓)

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथनों में सत्य व असत्य कथन छाँटिए –

(क) पौधशाला में मातृ वृक्ष पूर्णतः स्वस्थ होना चाहिए। (सत्य)
(ख) नर्सरी हेतु क्यारियाँ जमीन से नीची होनी चाहिए। (असत्य)
(ग) नर्सरी के लिए मृदा बलुई या बलुई दोमट होनी चाहिए। (सत्य)
(घ) संवेष्टन क्षेत्र में खादों का रख-रखाव होता है। (असत्य।)

प्रश्न 5.
बाग लगाने की किस विधि में 15 प्रतिशत पौधे अधिक लगाए जाते हैं?
उत्तर :
षट्भुजाकार विधि में

प्रश्न 6.
कंटूर विधि द्वारा पौधे किन क्षेत्रों में लगाए जाते हैं?
उत्तर :
पहाड़ी क्षेत्रों में।

प्रश्न 7.
बाग क्यों लगाते हैं?
उत्तर :
बाग आहार उपलब्ध कराने, पर्यावरण सन्तुलन बनाने तथा (UPBoardSolutions.com) प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाने वाले होते हैं। इन्हीं कारणों से लोग बाग लगाते हैं।

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प्रश्न 8.
बाग लगाने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
उत्तर :
बाग लगाने की निम्न विधियाँ हैं –

  1. वर्गाकार विधि
  2. आयताकार विधि
  3. त्रिभुजाकार विधि
  4. पंचकोणीय विधि
  5. षट्भुजाकार विधि
  6. कंटूर विधि

प्रश्न 9.
बाग लगाने के पहले किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
उत्तर :
बाग लगाने से पहले निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए –

  1. बाग का स्थान चुनते समय सड़क एवं यातायात सुविधा देखनी चाहिए।
  2. उस स्थान की मिट्टी बलुई दोमट, दोमट या चिकनी हो।
  3. सिंचाई और जल निकास सुविधा हो।
  4. जानवरों से नुकसान की सम्भावना कम हो।
  5. चयनित स्थान की जलवायु फलवृक्षों के अनुकूल हो।
  6. फल विपणन की सुविधा हो।

प्रश्न 10.
पौंधघर (नर्सरी) से आप क्या समझते हैं? इसकी आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर :
पौधे बीज, जड और तना आदि से तैयार किए जाते हैं। पौधे जिस स्थान पर तैयार किए जाते हैं, उसे हम पौधघर या नर्सरी के नाम से पुकारते हैं। अच्छी किस्म के पौधे प्राप्त करने (UPBoardSolutions.com) के लिए पौधघर की आवश्यकता होती हैं। उद्यान की सफलता के लिए अच्छी नर्सरी जरूरी होती है।

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प्रश्न 11.
एक व्यावसायिक पौथशाला में मुख्यतः कौन-कौन से भाग होने चाहिए? वर्णन कीजिए।
उत्तर :
एक व्यावसायिक पौधशाला में मातृ पौधों का क्षेत्र अलग होने के साथ-साथ निम्नलिखित भाग शामिल होने चाहिए –

  1. बीज की क्यारियाँ (सीड बेड)
  2. रोपण क्यारियाँ गमला क्षेत्र
  3. संवेष्टन क्षेत्र (Packing Yard)
  4. कार्यालय
  5. भण्डार
  6. मालीगृह
  7. खाद के गड्ढे आदि।

प्रश्न 12.
बाग लगाने की वर्गाकार विधि एवं त्रिभुजाकार विधि का चित्र की सहायता से अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 13.
पौध रोपण करते समय किन-किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर :
पौध रोपण करते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ –

  1. पौधों के रोपण से पहले, रोपण विधि के अनुसार स्थान चिन्हित कर लेना चाहिये।
  2. औसतनं आधा मीटर लम्बाई, चौड़ाई एवं गहरायी के गंडूढे खोदकर तथा इन गड्ढों को गोबर की खाद, बालू, तालाब की मिट्टी आदि मिलाकर भर देना चाहिये, तत्पश्चात् इन गड्ढों में ही पौध रोपन करना चाहिये।
  3. पौधों को गड्ढे के केन्द्र में रोपित करना ५४चाहिये।
  4. रोपण करते समय पौधे की पिण्डी फूटने न पाये परन्तु पिण्डी में लगी पालिथीन को ब्लेड आदि से काटकर सावधनीपूर्वक हटा (UPBoardSolutions.com) देनी चाहिए।
  5. पौध को मिट्टी में पिण्डी तक ही दबाना चाहिये। पौधा किसी भी दशा में रोपण के समय तिरछा न होने पाये। यदि तना किसी तरफ झुक रहा हो तो बाँस आदि की छड़ी की सहायता से बाँध कर सहारा देना चाहिये।
  6. रोपण के बाद तुरन्त हल्की सिंचाई कर देनी चाहिये।
  7. रोपण वर्षा ऋतु में या फरवरी मार्च में करना चाहिये।

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प्रश्न 14.
पौध खरीदते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर :
पौध खरीदते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ –

1. प्रजाति के अनुसार चुनाव – पौध विक्रेता एवं नर्सरी मालिक कई प्रकार की प्रजातियों के पौधों को एक में मिलाकर बेच देते हैं। जब यह पौधे दस बारह साल बाद फलते हैं तब उनकी प्रजाति का पता चलता है और पूरा बाग खराब हो जाता है। अतः पौधे खरीदते समय वांछित प्रजाति की पहचान करके ही खरीदें।

2. कलमी पौधों की जगह देशी पौधों का रोपण – पौध विक्रेता देशी पौधे सस्ते होने के कारण कलमी पौधे के साथ देशी पौधों को बेच देते हैं। पौध खरीदते समय तनां पर (UPBoardSolutions.com) कलिकायने अथवा ग्राफ्टिंग का चीरा देखकर कलमी पौधे पहचाने जा सकते हैं तथा धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।

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UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 7 मुख्य फसलों की खेती

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अभ्यास

प्रश्न 1.
सही उत्तर पर सही (✓) का निशान लगायें

(1) धान की खेती होती है –

(क) खरीफ ✓
(ख) रबी
(ग) जायद
(घ) इनमें से कोई नहीं

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(2) धान की नर्सरी लगायी जाती है –

(क) मई के अंतिम सप्ताह में ✓
(ख) जून के अंतिम सप्ताह में
(ग) जुलाई के प्रथम सप्ताह में
(घ) इनमें से कोई नहीं

(3) खरीफ की प्रमुख फसल है –

(क) धान ✓
(ख) गेहूँ
(ग) चना
(घ) मटर

(4) धान की सीधी बुवाई में प्रजाति का प्रयोग करते हैं –

(क) साकेत – 4 ✓
(ख) सरजू-52
(ग) आई आर – 8
(घ) उपर्युक्त सभी

(5) सुगंधित धान की प्रजाति है –

(क) टा-3
(ख) बासमती-370
(ग) पूसा बासमती – 1
(घ) उपर्युक्त सभी ✓

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(6) मक्का की खेती की जाती है –

(क) खरीफ
(ख) रबी
(ग) जायद
(घ) उपर्युक्त सभी में ✓

(7) मक्का की खेती के लिए उपयुक्त भूमि होती है –

(क) दोमट ✓
(ख) चिकनी मिट्टी
(ग) भावर मिट्टी
(घ) इसमें से कोई नहीं

(8) संकर मक्का की प्रजाति है –

(क) गंगा – 2
(ख) गंगा – 11
(ग) डेकन – 107
(घ) उपर्युक्त सभी ✓

(9) संकुल मक्का की प्रजाति है –

(क) नवीन
(ख) कंचन
(ग) श्वेता
(घ) उपर्युक्त सभी ✓

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(10) उड़द फसल है –

(क) दलहनी ✓
(ख) तिलहनी
(ग) दलहनी एवं तिलहनी दोनों
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(11) कुफरी चन्द्रमुखी प्रजाति है –

(क) मक्का
(ख) आलू
(ग) मूंग
(घ) अरहर ✓

(12) सरसो में तेल पाया जाता है –

(क) 30 – 40% ✓
(ख) 20 – 22%
(ग) 10 – 12%
(घ) इसमें से कोई नहीं

(13) अरहर की उपज होती है –

(क) 20-25 कुन्तल प्रति हेक्टेयर ✓
(ख) 34-66 कुन्तल प्रति हेक्टेयर
(ग) 35-40 कुन्तल प्रति हेक्टेयर
(घ) उपर्युक्त सभी ठीक है।

(14) आलू की फसल तैयार होती है

(क) 120-125 दिन में ✓
(ख) 230-235 दिन में
(ग) 215-220 दिन में
(घ) उपर्युक्त सभी ठीक है।

(15) गेहूं के अच्छे उत्पादन हेतु भूमि की आवश्यकता होती है –

(क) दोमट मिट्टी ✓
(ख) बलुई दोमट मिट्टी
(ग) चिकनी मिट्टी
(घ) इसमें से कोई नहीं

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. धान खरीफ की फसल है।
  2. रोपाई के लिए धान की उपयुक्त प्रजाति नरेन्द्र-97 अच्छी है।
  3. सुगंधित धान की उपयुक्त प्रजाति टा-3 है।
  4. एक हेक्टेयर नर्सरी में जिंक सल्फेट 5 किग्रा प्रयोग किया जाता है।
  5. धान की रोपाई 3, 4 सेमी गहराई पर करते हैं।
  6. देशी मक्का की बीज दर 18 से 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर है।
  7. सोयाबीन में 40 से 42 % प्रोटीन पाई जाती है।
  8. गेहूं की फसल में 5-6 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  9. मटर की बुवाई 3-4 सेमी गहराई पर की जाती है।
  10. अरहर की बुवाई 7.5 सेमी गहराई पर की जाती है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों में सही के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (✗) का निशान लगाइए –

  1. धान की खेती केवल रोपाई विधि द्वारा की जाती है। (✗)
  2. धान की नर्सरी में खैरा रोग से बचाव हेतु जिंक का प्रयोग आवश्यक है। (✓)
  3. एक हेक्टेयर धान की नर्सरी से 15 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई की जा सकती है। (✓)
  4. देशी मक्का का बीज दर संकुल मक्का से कम होता है। (✓)
  5. मक्का की खेती के लिए उपयुक्त भूमि दोमट होती है। (✓)
  6. मक्का तीनों ऋतुओं में उगायी जाती है। (✓)
  7. संकर एवं संकुल मक्का के लिए 80 किग्रा नाइट्रोजन का प्रयोग किया जाता है। (✗)
  8. मक्का की फसल को गिरने से बचाने के लिए मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है। (✓)
  9. अलंकार उड़द की प्रजाति है। (✗)
  10. सरसों से तेल निकाला जाता है। (✓)
  11. उड़द की फसल में राइजोबियम कल्चर का प्रयोग करना चाहिए। (✓)
  12. गेहूं में प्रोटीन नहीं पाया जाता है। (✗)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेल कीजिए – (सुमेल करके)
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 7 मुख्य फसलों की खेती 1

प्रश्न 5.
(1) सिंचित दशा में धान की फसल में नाइट्रोजन की मात्रा बताइए।
उत्तर :
120 किग्रा०

(2) सुगन्धित थान की दो प्रजातियों के नाम लिखिए।
उत्तर :
टा-3, बासमती-370

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(3) धान की रोपाई के समय नाइट्रोजन की कितनी मात्रा प्रयोग करनी चाहिए।
उत्तर :
60 किग्रा० प्रति हेक्टेयर

(4) धान की उन्नतशील फसल के लिए फॉस्फोरस की मात्रा बताइए।
उत्तर :
60 किग्रा० प्रति हेक्टेयर

(5) महीन थान की नर्सरी के लिए बीज की प्रति हेक्टेयर मात्रा बताइए।
उत्तर :
30 किग्रा०

(6) एक हेक्टेयर धान की नर्सरी से कितने हेक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई की जाती है?
उत्तर :
15 हेक्टेयर

(7) नर्सरी में खैरा रोग से नियन्त्रण हेतु कितनी जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर प्रयोग की जाती है?
उत्तर :
5 किग्रा०

(8) धान की रोपाई के समय एक स्थान पर कितने पौधे लगाए जाते हैं?
उत्तर :
2-3 पौधे

(9) संकर मक्का की दो प्रजातियों का माम बताइए।
उत्तर :
गंगा-2, गंगा-11

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(10) देशी मक्का की बुवाई के लिए बीज की प्रति हेक्टेयर मात्रा बताइए।
उत्तर :
18-20 किग्रा०

(11) संकर एवं संकुल प्रजातियों के लिए बीज की प्रति हेक्टेयर कितनी मात्रा प्रयोग की जाती है।
उत्तर :
20-25 किग्रा०

(12) मक्के की बुवाई कितनी गहराई पर करते हैं?
उत्तर :
5 सेमी०

(13) मक्के के खेत में दीमक के नियन्त्रण हेतु किस कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
20 से 25 किग्रा० रेत के साथ 2% मिथाइल पैराथियान छिड़काव प्रति हेक्टेयर करना चाहिए।

(14) गेहूं की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन की कितनी मात्रा प्रयोग करनी चाहिए?
उत्तर :
120 किग्रा० प्रति हेक्टेयर

(15) गेहूं की फसल के लिए नाइट्रोजन फॉस्फोरस एवं पोटाश की मात्रा प्रति हेक्टेयर बताइए।
उत्तर :
120 किग्रा० नाइट्रोजन, 60 किग्रा० फास्फोरस, 40 किग्रा० पोटाश।

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(16) उड़द को बुवाई से पूर्व किस रसायन से उपचारित करते हैं?
उत्तर :
उड़द को बुवाई से पूर्व अच्छी पैदावार व सही बढ़ोतरी के लिए राइजोबियम जैसे रसायन से उपचारित करते हैं।

(17) मूंग की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर कितने किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है?
उत्तर :
मूंग की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 15-20 किग्रा0 बीज की आवश्यकता होती है।

(18) सरसो की बुवाई का उपयुक्त समय बताइये।
उत्तर :
सरसो की बुवाई सितम्बर से अक्टूबर के महीने में करनी चाहिए।

प्रश्न 6.
धान की नर्सरी तैयार करने की विधि बताइए।
उत्तर :
नर्सरी –  एक हेक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई के लिए महीन धान का 30 किग्रा०, मध्यम धान का 35 किग्रा० और मोटे धान का 40 किग्रा बीज पौधा तैयार करने के लिए पर्याप्त होता है एक हेक्टेयर नर्सरी में। 15 हेक्टेयर की रोपाई होती है। नर्सरी में पौधों की उचित बढ़वार के लिए 100 किग्रा० नाइट्रोजन, 50 किग्रा० । फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए। नर्सरी में खैरा रोग नियन्त्रण हेतु 5 किग्रा० (UPBoardSolutions.com) जिंक सल्फेट का 2% यूरिया के साथ घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। नर्सरी में कीड़ों के बचाव हेतु क्लोरोपाइरीफारस 20 ईसी (Emultion Concentrate) को 1.5 लीटर को 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

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प्रश्न 7.
धान की रोपित फसल में फसल सुरक्षा के क्या उपाय किए जाते हैं?
उत्तर :
फसल सुरक्षा – धान के खेत में रोपाई से कटाई तक अनेक कीड़े व रोग लगते हैं। ये कीड़े दीमक, गंधी बग, सैनिक कीट, हरा फुदका, पत्ती लपेट कीट तथा तना छेदक आदि हैं।

5% मैलाथियान धूल का 20 से 25 किग्रा० प्रति हेक्टेयर फसलों पर छिड़काव करें। सैनिक कीट नियन्त्रण इंडोसल्फान 35 ई०सी० का छिड़काव किया जाता है। जिंक की कमी से खैरा रोग होता है। 5 किग्रा० जिंक सल्फेट तथा 2.5 किग्रा बुझा हुआ चूना अथवा 20 किग्रा यूरिया 1000 ली० पानी में (UPBoardSolutions.com) घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़कावं करना चाहिए। झुलसा रोग के उपचार के लिए 15 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन व कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की 500 ग्राम मात्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर 2 से 3 बार छिड़काव करना चाहिए।

प्रश्न 8.
धान की फसल में खाद एवं उर्वरक की मात्रा प्रति हेक्टेयर बताइए तथा देने की विधि भी लिखिए।
उत्तर :
धान की फसल में उर्वरकों का प्रयोग मृदा परिरक्षण के आधार पर किया जाता है। सिंचित दशा में नाइट्रोजन 120 किग्रा०, फॉस्फोरस 60 किग्रा० एवं पोटाश 60 किग्रा० प्रति हेक्टेयर देना चाहिए। नाइट्रोजन की आधी मात्रा तथा फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के एक या दो दिन बाद खेत में देनी चहिए। नाइट्रोजन की शेष मात्रा कल्ले निकलते समय एवं बालियाँ निकलने से पूर्व छिड़क देनी चाहिए।

धान की सीधी बुवाई मैं – नाइट्रोजन 100 किग्रा०, फॉस्फोरस 50 तथा पोटाश 50 किग्रा० प्रति हेक्टेयर दिया जाता है। नाइट्रोजन की एक चौथाई मात्रा तथा फॉस्फोरस व पोटाश की (UPBoardSolutions.com) पूरी मात्रा कैंडों में बीज के नीचे डालना चाहिए। नाइट्रोजन का दो चौथाई भाग कल्ले फटते समय तथा शेष बाली बनने से पूर्व प्रयोग करना चाहिए।

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प्रश्न 9.
मक्का में लगने वाले रोग एवं उनसे बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर :
मक्का में झुलसा रोग लगता है। इसके उपचार हेतु 2 से ढाई किग्रा० इंडोफिल एम-45 को 800-1000 ली० पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर 2-3 छिड़काव करने चाहिए। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तना सड़न रोग होता है। जिसके उपचार के लिए 15 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन को 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से रोग नियंत्रित हो जाता है।

प्रश्न 10.
मक्का की फसल में खाद एवं उर्वरक की मात्रा प्रति हेक्टेयर एवं प्रयोग की विधि लिखिए।
उत्तर :
विद्यार्थी प्रश्न 9. का उत्तर देखें।

प्रश्न 11.
सोयाबीन से कौन-कौन से व्यंजन तैयार किए जाते हैं?
उत्तर :
सोयाबीन से दूध, दही, मगौड़ी, बड़ियाँ इत्यादि पौष्टिक पेय एवं खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं।

प्रश्न 12.
सोयाबीन की फसल में खाद एवं उर्वरक की आवश्यकता एवं प्रयोग करने की विधि लिखिए।?
उत्तर :
सोयाबीन की अच्छी पैदावार हेतु 15-20 किंग्रा० नाइट्रोजन, 40-60 किग्रा० फॉस्फोरस तथा 30-40 किग्रा० पोटाश प्रति हेक्टेयर प्रयोग करते हैं। उर्वरक की पूरी मात्रा अंतिम जुताई (UPBoardSolutions.com) पर हल के पीछे कूड़ों में 6-7 सेमी गहराई पर डालनी चाहिए।

प्रश्न 13.
गेहूं की खेती के लिए खाद एवं उर्वरक की मात्रा तथा प्रयोग करने की विधि बताइए।
उत्तर :
गेहूँ के लिए खाद एवं उर्वरक का प्रयोग- गेहूँ फसल के लिए 120 किग्रा० नाइट्रोजन, 60 किग्रा० फॉस्फोरस तथा 40 किग्रा० पोटाश प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। नाइट्रोजन की आधी मात्रा तथा बाकी दो की पूरी मात्रा बीज के साथ कैंड़ में 5 सेमी० गहराई पर देनी चाहिए तथा शेष (UPBoardSolutions.com) नाइट्रोजन दो भागों में कल्ले निकलते समय तथा बालियाँ बनते समय देनी चाहिए। नाइट्रोजन शाम को खड़ी फसल में दी जाती है। सिंचाई के बाद जब पैर का हलका निशान बने तब यूरिया लगाना चाहिए।

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प्रश्न 14.
मटर की सिंचित असिंचित क्षेत्र में खेती हेतु उर्वरक की मात्रा एवं प्रयोग विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मटर की खेती में कम्पोस्ट खाद लगाने के बाद 25-30 किग्रा० नाइट्रोजन, 50-60 किग्रा० फॉस्फोरस तथा 40-50 किग्रा० पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से लगाना चाहिए।

प्रश्न 15.
मटर की फसल में लगने वाले महत्त्वपूर्ण कीड़ों एवं बचाव के उपाय बताइए।
उत्तर :
मटर में चूँड़ियों से नियन्त्रण हेतु दो किलो मैलाथियान, 50% घुलनशील चूर्ण 800-1000 ली० पानी में घोलकर छिड़कना चाहिए अथवा मैलाथियान 50 ई०सी० की 1 ली० पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़कना चाहिए।

फली छेदक कीटक के अलावा पत्ती में सुरंग बनाने वाले कीट भी लगते हैं। इनके नियन्त्रण हेतु मेटासिस्टक्स 25 ई०सी० 1 लीटर दवा 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर दर से छिड़काव करना चाहिए।

प्रश्न 16.
गेहूं की फसल में सिंचाई प्रबन्धन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सामान्यतः गेहूँ में 5-6 सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बोने के 20-25 दिन बाद की जाती है, जो महत्त्वपूर्ण होती है। इसके बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई करते (UPBoardSolutions.com) रहना चाहिए। अंतिम सिंचाई से पहले वाली सिंचाई दूधिया अवस्था में करनी चाहिए। अन्त में हलकी सिंचाई दाना पकते समय करनी चाहिए।

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प्रोजेक्ट कार्य
नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।

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