UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 9 गोस्वामी तुलसीदास (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 9 गोस्वामी तुलसीदास (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

इनका जन्म यमुना तट पर स्थित राजापुर (चित्रकूट) में हुआ। बचपन में ही इनके पिता आत्माराम दूबे और माता हुलसी का देहावसान होने पर इन्हें सन्त नरहरिदास ने अपने आश्रम में आश्रय दिया। (UPBoardSolutions.com) पन्द्रह वर्ष तक अध्ययन करके ये राजापुर आए और रत्नावली से विवाह किया। पत्नी की तीखी बातों से विरक्त होकर ये साधु वेश धारण करके श्रीराम की भक्ति को समर्पित हो गए।

भक्ति में लीन तुलसी को काशी में हनुमान और चित्रकूट में श्रीराम के दर्शन हुए। चित्रकूट से तुलसी अयोध्या आए। यहीं संवत् 1631 ई० में उन्होंने ‘रामचरितमानस’ की रचना आरम्भ की। यह दो वर्ष सात माह और छब्बीस दिनों में संवत् 1633 में पूरी हुई। जनभाषा में लिखा यह ग्रन्थ- रामचरितमानस, न केवल भारतीय साहित्य का बल्कि विश्व साहित्य का अद्वितीय ग्रन्थ है। इसका अनुवाद अन्य भारतीय भाषाओं के साथ विश्व की अनेक भाषाओं में हुआ है।

रामचरितमानसे में श्रीराम के चरित्र का वर्णन है। इसमें जीवन के सभी पहलुओं का नीतिगत वर्णन है। भाई का भाई के साथ, पति का पत्नी से, पत्नी का पति से, गुरु को शिष्य के प्रति, प्रजा का राजा से और राजा का प्रजा से कैसा व्यवहार होना चाहिए, उसका सजीव चित्रण है। राम की रावण पर विजय इस बात का प्रतीक है कि अच्छाई की बुराई पर, सत्य की असत्य पर विजय होती है। (UPBoardSolutions.com) तुलसी ने जीवन में सुख के लिए-न्याय, सत्य और प्राणीमात्र से प्रेम को अनिवार्य माना है। तुलसी ने रामचरितमानस जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया है। इसके अलावा तुलसी ने अन्य ग्रन्थ जैस विनयपत्रिका, कवितावली, दोहावली व गीतावली आदि भी लिखे।

तुलसीदास समन्वयवादी थे। बड़े विद्वान और कवि अब्दुर्रहीम खानखाना, जो तुलसी के मित्र थे, उनकी प्रशंसा में लिखा है-‘‘गोद लिए हुलसी फिरे, तुलसी सो सुत होय।” (UPBoardSolutions.com) तुलसीदास अपने अन्तिम समय में काशी में अस्सीघाट पर रहते थे। वहीं इनका देहावसान संवत् 1680 में हुआ। भक्त व साहित्यकार तुलसी हिन्दी भाषा के अमूल्य रत्न हैं।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
तुलसीदास का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर :
लसीदास का जन्म राजापुर (चित्रकूट) में हुआ।

प्रश्न 2.
तुलसीदास में रामभक्ति कैसे उत्पन्न हुई?
उत्तर :
तुलसीदास में रामभक्ति पत्नी की तीखी बातों के कारण उत्पन्न हुई।

प्रश्न 3.
रामचरित मानस की रचना कब प्रारम्भ हुई? यह कितने समय में पूर्ण हुई?
उत्तर :
रामचरित मानस की रचना संवत् 1631 में प्रारम्भ हुई। यह दो वर्ष, सात माह और छब्बीस दिनों में संवत् 1633 में पूरी हुई।

प्रश्न 4.
रामचरित मानस में तुलसी ने किन सामाजिक व्यवहारों का वर्णन किया है?
उत्तर :
रामचरित मानस में तुलसी ने भाई को भाई से, पत्नी का पति से, पति का पत्नी से, गुरु और शिष्य के प्रति, राजा का प्रजा से कैसा व्यवहार होना चाहिए, इसका सजीव चित्रण किया है।

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प्रश्न 5.
अब्दुर्रहीम खानखाना ने तुलसी की प्रशंसा में कौन सा दोहा लिखा था?
उत्तर :
अब्दुर्रहीम खानखाना ने तुलसी की प्रशंसा में निम्न दोहा लिखा था (UPBoardSolutions.com)

सुरतिय, नरतिय, नागतिय, यह चाहत सब कोय।
गोद लिए हुलसी फिरै, तुलसी सो सुत होय।

प्रश्न 6.
सबसे बड़ा धर्म क्या है?
उत्तर :
दूसरों की भलाई की प्रवृत्ति ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।

प्रश्न 7.
सही वाक्य पर (✓) और गलत वाक्य पर (✗) का निशान लगाइए(सही-गलते का निशान लगाकर)
(क) तुलसीदास समन्वयवादी कवि थे। (✓)
(ख) हरिद्वार में तुलसी को श्रीराम के दर्शन हुए। (✗)
(ग) रामचरितमानस विश्व का अद्वितीय ग्रन्थ है। (✓)
(घ) तुलसीदास ने सम्पूर्ण भारत की यात्रा की। (✗)

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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 8 आदि गुरु शंकराचार्य (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

शंकराचार्य का बचपन का नाम शंकर था। इनका जन्म आठवीं सदी में केरल में पूर्णा नदी के तट पर स्थित कालड़ी ग्राम में हुआ। इसके पिता का नाम शिवगुरु व माता आर्यम्बा थी। शंकर के पिता व दादा वेद-शास्त्री के धुरन्धर पण्डित थे। ज्योतिषियों ने शंकर के पिता को बताया कि उनका पुत्र महान पण्डित, यशस्वी और भाग्यशाली होगा। तीन वर्ष की उम्र में शंकर के पिता का देहान्त होने पर माँ ने अध्ययन के लिए गुरु के पास भेजा। थोड़े ही समय में वेदशास्त्रों और धर्मग्रन्थों में पारंगत होने से इनकी गणना प्रथम कोटि के पण्डितों में होने लगी।

विद्याध्ययन के बाद शंकर घर लौटे। माँ से आज्ञा लेकर वह संन्यासी बनने नर्मदा के तट पर तपस्या में लीन संन्यासी गोविन्दनाथ के पास पहुँचे। उन्होंने इनका नाम शंकराचार्य रखा। ये गुरु की अनुमति लेकर सत्य (UPBoardSolutions.com) की खोज में निकल पड़े। गुरु ने पहले काशी जाने का सुझाव दिया।

काशी में गंगास्नान करने जाते हुए उन्हें एक चाण्डाल मिला। उसकी बातों से इन्हें सत्य का ज्ञान हुआ। इन्होंने काशी के प्रकाण्ड विद्वान मण्डन मिश्र और उनकी पत्नी भारती को शास्त्रार्थ में हराकर अपना शिष्य बना लिया। ये बड़े-बड़े विद्वानों को परास्त करने वाले दिग्विजयी पण्डित कुमारिल भट्ट से शास्त्रार्थ करने प्रयागधाम पहुँचे। इसी प्रकार ये अन्य स्थानों पर भी भ्रमण करते रहे। जब ये 2शृंगेरी में थे तो इन्हें माँ की बीमारी का पता चला। ये तत्क्षण अपनी माँ के पास पहुँच गए। माँ इन्हें देखकर खुश हुई। माँ की मृत्यु के बाद लोगों द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद इन्होंने माँ का दाह-संस्कार किया। शंकाराचार्य ने धर्म की (UPBoardSolutions.com) स्थापना के लिए सारे भारत का भ्रमण किया। उन्होंने नए मन्दिरों का निर्माण कराया और पुराने मन्दिरों की मरम्मत कराई। लोगों को राष्ट्रीयता के सूत्र में पिरोने के लिए इन्होंने भारत के चारों कोनों पर चार धामों (मठों) की स्थापना की। इनके नाम हैं- श्री बद्रीनाथ, द्वारिकापुरी, जगन्नाथपुरी तथा श्री रामेश्वरम्। ये चारों धाम आज भी मौजूद हैं। इनकी शिक्षा का सार है

“ब्रह्म सत्य है तथा जगत् माया है।”

शंकराचार्य उज्ज्वल चरित्र के सच्चे संन्यासी थे, जिन्होंने अनेक ग्रन्थों की रचना की। 32 वर्ष की आयु में उनका देहावसान हो गया। उनका अन्तिम उपदेश था, “हे मानव! तू स्वयं को पहचान, स्वयं को पहचानने के बाद तू ईश्वर को पहचान जाएगा।”

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अभ्यास – प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
प्रश्न 1.
बालक शंकर के विषय में ज्योतिषियों ने क्या कहा था?
उत्तर :
लक शंकर के विषय में ज्योतिषियों ने कहा था, “शंकर महान पण्डित, यशस्वी और भाग्यशाली होगा।”

प्रश्न 2.
गुरु शंकराचार्य को सत्य का ज्ञान कहाँ और कैसे हुआ?
उत्तर :
गुरु शंकराचार्य को सत्य को ज्ञान काशी में एक चाण्डाल से मिलने पर हुआ। चाण्डाल ने शरीर को नश्वर और आत्मा को एक ही बताया क्योंकि ब्रह्म एक है।

प्रश्न 3.
गुरु शंकराचार्य का अन्तिम उपदेश क्या था?
उत्तर :
शंकराचार्य का अन्तिम उपदेश था “हे मानव! तू स्वयं को पहचान, स्वयं को पहचानने के बाद, तू ईश्वर को पहचान जाएगा।”

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प्रश्न 4.
शंकराचार्य की शिक्षा का सार क्या है?
उत्तर :
शंकराचार्य की शिक्षा का सार है- “ब्रह्म सत्य है तथा जगत मिथ्या है’

प्रश्न 5.
गुरु शंकराचार्य द्वारा कौन से मठों की स्थापना की गई है?
उत्तर :
बदरीनाथ, द्वारिकापुरी, जगन्नाथपुरी तथा श्री रामेश्वरम्।

प्रश्न 6.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)

  • इनका परिवार पाण्डित्य के लिए विख्यात था।
  • इनके गुरु भी इनकी प्रखर मेधा को देखकर आश्चर्यचकित थे।
  • गुरु शंकराचार्य का देहावसान मात्र बत्तीस वर्ष की अवस्था में हो गया।

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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 23 सन्त गाडगे बाबा (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 23 सन्त गाडगे बाबा (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

सन्त गाडगे बाबा का पूरा नाम देव ‘डेबू जी’ झिंगराजी जाणोरकर था। इनका जन्म 23 फरवरी, सन् 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेणगाँव में हुआ था। इनके पिता का

नाम झिंगराजी जाणोरकर और माता सखूबाई थीं। ये हमेशा मिट्टी का गडुआ या मटका रखते थे, इस कारण इनको लोग गाडगे बाबा कहते थे। 8 वर्ष की आयु में इनके पिता का देहान्त हो गया। इनका पालन-पोषण बहुत गरीबी में हुआ। एका विवाह 16 वर्ष की आयु में कुन्ताबाई से हुआ। एक साहूकार की धोखाधड़ी के कारण इनके मामा का देहान्त हो गया। तब इन्होंने संकल्प लिया कि गरीब लोगों की सहायता करेंगे और उन्हें शिक्षित करेंगे ताकि गाँव वाले किसी के धोखे के शिकार न हों। इन्होंने मांस-मदिरा का सेवन करने वाले अन्धविश्वासी लोगों का अन्धविश्वास दूर किया। लोगों को अच्छे-बुरे का ज्ञान कराया।

इन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में घर परिवार छोड़कर संन्यास ले लिया। 12 वर्ष तक उन्होंने साधना की। कबीर, तुकाराम, ज्ञानदेव, नामदेव, नानक, स्वामी विवेकानन्द, जैसे सन्तों के उदाहरणों को देकर वे अपने प्रवचन में साधारण बोल-चाल की भाषा का प्रयोग करते थे, जिस कारण लोग उनसे बहुत प्रभावित हुए। सन्त गाडगे बाबा ने मूर्ति पूजा का विरोध किया और कहा मन्दिर बनवाने से अच्छा धर्मशाला बनवाएँ, जहाँ लोग ठहर सकते हैं और भोजन प्राप्त कर सकते हैं। इन्होंने सैकड़ों स्कूल बनवाए। विद्यार्थियों को प्रभु की मूर्तियों की उपाधि दी। ये समाज की कुव्यवस्था और कुरीतियों से बहुत दुखी थे। इन्होंने दहेज प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी बुराइयों को दूर करने के लिए संघर्ष किए। इनका कहना था “सच्चा ईश्वर दरिद्र नारायण के रूप में तुम्हारे सामने खड़ा है, उसकी सेवा करो।”

सन्त गाडगे की मुलाकात डॉ० भीमराव अम्बेडकर और गांधी जी से भी हुई। बाबा मधुमेह की बीमारी से पीड़ित थे। सन् 1955 में बाबा को अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल का खर्च उठाना मुश्किल हो गया और (UPBoardSolutions.com) वे बिना बताए ही रात को अस्पताल से निकल गए। 6 दिसम्बर, 1956 को डॉ० भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु का समाचार पाकर वे रो पड़े और खाना-पीना छोड़ दिया। 20 दिसम्बर, 1956 को सन्त गाडगे बाबा का स्वर्गवास हो गया।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखो
(क) सन्त गाडगे जी का नाम क्या था?
उत्तर :
सन्त गाड़गे जी का नाम देव डेबू जी झिंगराजी जाणोरकर था।

(ख)
डेबूजी के पिता ने अन्तिम समय में डेबूजी की माँ से क्या कहा?
उत्तर :
डेबू जी के पिता ने अन्तिम समय में डेबू जी की माँ से कहा कि मैं कुछ दिन का मेहमान हूँ। डेबू जी का ध्यान रखना और मांस-मदिरा से दूर रहने की सलाह देना।

(ग)
मामा की मृत्यु के बाद डेबूजी ने क्या संकल्प किया? (UPBoardSolutions.com)
उत्तर :
मामी की मृत्यु के बाद डेबू जी ने संकल्प लिया कि गरीब लोगों की सहायता करेंगे और शिक्षित करेंगे ताकि गाँव वाले किसी के धोखे के शिकार न हो सकें।

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(घ) संत गाडगे बाबा ने कौन-कौन से कार्य किए ?
उत्तर :
सन्त गाडगे बाबा ने निम्न कार्य किए- उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया, दहेज प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी बुराइयों को दूर करने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (पूर्ति करके)
(क) डेबूजी के पिता झिंगराजी जाणोरकर और माता सखूबाई थीं।
(ख) इनका विवाह 18 वर्ष की आयु में कुन्ताबाई से हो गया।
(ग) उनके पिता की मृत्यु का मुख्य कारण मदिरा थी।
(घ) भोजन में शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसा गया। (UPBoardSolutions.com)
(ङ) वे मन्दिर बनवाने की अपेक्षा धर्मशाला बनवाना अच्छा समझते थे।

प्रश्न 3.
सही वाक्य के सामने सही (✓) तथा गलत वाक्य के सामने गलत (✗) का निशान लगाइए (निशान लगाकर)
उत्तर :
(क) सन्त गाडगे जी के पिता का नाम झिंगराजी जाणोरकर और माता सखूबाई थीं। (✓)
(ख) 20 दिसम्बर, 1956 को सन्त गाडगे बाबा की मृत्यु हो गई। (✓)
(ग) डेबू जी आँत की बीमारी से पीड़ित थे। (✗)
(घ) सन्त गाडगे बाबा मूर्ति पूजा के विरोधी थे। (✓)

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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 21 लाला लाजपत राय (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 21 लाला लाजपत राय (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

लाला लाजपत राय का जन्म फिरोजपुर जिले के ढोडिके गाँव में 28 जनवरी सन् 1865 ई० में हुआ। इनके पिता राधाकिशन स्कूल में अध्यापक और माता गुलाबी देवी थी।

लाला लाजपत राय ने अपने पिता से पढ़ने-लिखने का उत्साह पाया। सन् 1882 ई० में जब वे लाहौर कालेज में छात्र थे, आर्य समाज में शामिल हो गए। 23 वर्ष की अवस्था में ये सन् 1888 ई० में कांग्रेस में शामिल हुए और इन्होंने कांग्रेस का ध्यान जनता की गरीबी और निरक्षरता की ओर दिलाया।

लाला लाजपत राय की आस्था और विश्वास के कारण उन्हें पंजाब केसरी और शेरे पंजाब की उपाधि दी गई। ब्रिटिश सरकार की निर्मय आलोचना करने के कारण उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया। अँग्रेजों ने मई 1907 ई० में लाला जी को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। कांग्रेस के भीतर और बाहर उन्हें कांग्रेस का योग्य नेता समझा जाता था। भारत का नेतृत्व करने और समर्थन पाने के लिए वे इंग्लैण्ड और यूरोप कई बार गए।

लाला लाजपतराय ने 30 अक्टूबर, 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन का बहिष्कार करने वाली जनता का शान्तिपूर्ण ढंग से नेतृत्व किया। लाठियों के प्रहार के फलस्वरूप लाला जी को गंभीर चोटें (UPBoardSolutions.com) आईं और 16 नवम्बर, 1929 ई० में रात में दशा खराब होने से प्रातः उनकी मृत्यु हो गई।

लाला जी राजनैतिक गतिविधियों के अलावा सामाजिक सुधार कार्यक्रमों और शिक्षा के प्रसार के लिए भी सक्रिय थे। जनता के उत्थान के लिए वे शिक्षा को अनिवार्य मानते थे। वे हृदय से शिक्षा शास्त्री थे। उनका महिलाओं की समस्याओं को देखने का दृष्टिकोण प्रगतिशील था। सन् 1896 ई० में उत्तर भारत में भीषण अकाल के समय जनता को राहत पहुँचाने के कार्य में वे सबसे आगे थे। इसी प्रकार पंजाब में भूकम्प पीड़ितो को राहत पहुँचाने और उनकी सहायता में अग्रणी रहे। राहत कार्य के दौरान इन्होंने ‘सर्वेट्स ऑफ पीपुल सोसाइटी’ की स्थापना की। जिसके सदस्य देशभक्त थे और जिसका ध्येय जनसेवा था।

लाला लाजपतराय ने कई पुस्तकें लिखीं जैसे- ए हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, महाराज अशोक, वैदिक ट्रैक्ट और अनहैप्पी इण्डिया। इन्होंने कई पत्रिकाओं की स्थापना और सम्पादन भी किया। देशवासियों के लिए उनका योगदान, त्याग और बलिदान चिरस्मरणीय रहेगा।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
लाला लाजपत राय का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर :
लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी सन् 1865 ई० में फिरोजपुर जिले के ढोडिके गाँव में हुआ।

प्रश्न 2.
लाला लाजपत राय को कौन-सी उपाधि दी गई थी और क्यों?
उत्तर :
लाला लाजपत राय को आस्था और विश्वास के कारण पंजाब केसरी तथा शेरे पंजाब की उपाधि दी गई।

प्रश्न 3.
लाला लाजपत राय अंग्रेजों के विशेष निशाने पर क्यों रहते थे?
उत्तर :
ब्रिटिश सरकार की निर्भय आलोचना, अपने दृढ़ विश्वास और (UPBoardSolutions.com) भारतीय जनता में अपनी गहरी पैठ के कारण वे अंग्रेजों के विशेष निशाने पर रहते थे।

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प्रश्न 4.
लाला लाजपत राय का सामाजिक कार्यों में क्या योगदान रहा?
उत्तर :
लाला जी का सामाजिक कार्यों में बड़ा योगदान था। वे गरीबों की सहायता और शिक्षा के प्रसार की दिशा में सक्रिय रहे। अकाल और भूकम्प के समय पीड़ित जनता के लिए राहत कार्यों में वे आगे रहते थे। उन्होंने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना और देशभक्ति की प्रेरणा भरने की कोशिश की। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं के अस्तित्व के लिए अपनी बचत से 40000 रुपये दान दिया।

प्रश्न 5.
लाला लाजपत राय की किन्हीं तीन रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
लाला लाजपत राय की रचनाओं के नाम ए हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, महाराज अशोक और वैदिक ट्रैक्ट हैं।

प्रश्न 6.
“लाला लाजपत राय हृदय से शिक्षाशास्त्री थे।” पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
लाला लाजपत राय ने अति वंचित एवं पिछड़े लोगो के लिए एक शिक्षण संस्था की स्थापना की। इसके बाद इस तरह की कई संस्थाएँ खोली गई। इनके लिए उन्होनें अपनी बचत से 40,000 रुपया दान दिया। लाला लाजपत राय हृदय से शिक्षा शास्त्री थे। उनका विश्वास था कि जनता के उत्थान लिए शिक्षा अनिवार्य है।

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प्रश्न 7.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)

  • लाला लाजपत राय की माता ने उन्हें धर्म की शिक्षा दी। (UPBoardSolutions.com)
  • लाला लाज़पत राय का विचार था कि जनता के उत्थान के लिए शिक्षा अनिवार्य है।
  • पंजाब में भूकम्प पीड़ितों के लिए राहत कार्य के लिए उन्होंने सर्वेट्स ऑफ पीपुल सोसाइटी की स्थापना की।
  • लाला लाजपत राय का सारा समय जन-कल्याण तथा सारा जीवन राष्ट्र की सेवा में बीता।

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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 15 टीपू सुल्तान (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 15 टीपू सुल्तान (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

टीपू सुल्तान का जन्म सन् 1753 ई० में हुआ। इसके पिता का नाम हैदरअली था। इनके पिता मैसूर के शासक थे। उन्होंने मैसूर राज्य की सीमा को काफी विस्तृत किया। टीपू सुल्तान की अवस्था जब तीस वर्ष थी, हैदरअली की मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के बाद टीपू सुल्तान मैसूर का शासक बना।

उस समय ईस्ट इण्डिया कम्पनी का राज्य बढ़ रहा था। अंग्रेजों ने मराठों से सन्धि करे टीपू पर आक्रमण कर दिया। टीपू ने अपनी सेना को सुदृढ़ नहीं किया था। टीपू की हार हुई और युद्ध क्षेत्र में वह (UPBoardSolutions.com) वीरगति को प्राप्त हुआ। अंग्रेजों एवं मराठा सैनिकों ने उसके खजाने को लूट लिया।

टीपू सुल्तान महान वीर, कुशल शासक और देशभक्त था। उसके राज्य में कोई शराब नहीं पी सकता था। राजाज्ञा का उल्लंघन करने वालों को कठोर दण्ड दिया जाता था। हिन्दुओं के प्रति टीपू सहिष्णु था। शिक्षा- देशभक्ति प्राणों से भी प्रिय होनी चाहिए।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
टीपू सुल्तान कौन था? उसकी जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर :
टीपू सुल्तान हैदरअली का पुत्र था तथा उसका जन्म मैसूर में हुआ था।

प्रश्न 2.
टीपू सुल्तान ने अपने राज्य में कौन-कौन से सुधार किए?
उत्तर :
टीपू ने एक स्त्री के कई लोगों से विवाह करने की प्रथा बन्द करा दी और नियम बनाया कि जो ऐसा करेगा, उसे कठोर दण्ड दिया जाएगा। उसने शराब पर रोक लगा दी।

प्रश्न 3.
टीपू ने किन-किन विषयों की पुस्तकें लिखीं?
उत्तर :
टीपू ने साहित्य, कविता, गणित, ज्योतिष, विज्ञान तथा कला पर पुस्तकें लिखीं।

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प्रश्न 4.
टीपू ने अपने पिता के समक्ष क्या प्रतिज्ञा की थी? (UPBoardSolutions.com)
उत्तर :
टीपू ने अपने पिता के समक्ष प्रतिज्ञा की थी कि मैं कभी झूठ नहीं बोलूंगा, किसी को धोखा नहीं दूंगा तथा चोरी नहीं करूंगा।

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