UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 16
Chapter Name Chemistry in Everyday Life
Number of Questions Solved 87
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 16 Chemistry in Everyday Life (दैनिक जीवन में रसायन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अनिद्राग्रस्त रोगियों को चिकित्सक नींद लाने वाली गोलियाँ लेने का परामर्श देते हैं, परन्तु बिना चिकित्सक से परामर्श लिए इनकी खुराक लेना उचित क्यों नहीं है?
उत्तर :
नींद की गोलियों में प्रशांतक या प्रतिअवसादक होते हैं। ये तंत्रिका तन्त्र को प्रभावित करके नींद लाते हैं। यदि इनकी खुराक भली प्रकार नियन्त्रित न हो तब ये हानिकारक प्रभाव डालते हैं तथा विष की तरह कार्य करके मृत्यु तक कारित करते हैं। अत: यह सलाह दी जाती है कि इन नींद की गोलियों को चिकित्सक की सलाह से लेना चाहिए।

प्रश्न 2.
किस वर्गीकरण के आधार पर वक्तव्य, रेनिटिडीन प्रतिअम्ल हैं, दिया गया है?
उत्तर :
यह वक्तव्य औषध के फार्माकोलोजिकल (pharmacological) आधार पर वर्गीकरण की ओर संकेत करता है क्योंकि औषध जिसका प्रयोग आमाशय में उपस्थित अम्ल के आधिक्य को उदासीन करता है, प्रतिअम्ल (antacid) कहलाता है।

प्रश्न 3.
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर :
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता कैलोरी कम करने तथा दंतक्षय को रोकने के लिए पड़ती है।

प्रश्न 4.
ग्लिसरिल ओलिएट तथा ग्लिसरिल पामिटेट से सोडियम साबुन बनाने के लिए रासायनिक
समीकरण लिखिए। इनके संरचनात्मक सूत्र नीचे दिए गए हैं
(i) (C15H31COO)3 C3H– ग्लिसरिल पामिटेट
(ii) (C15H32COO)3 C3H– ग्लिसरिल ओलिएट।
उत्तर :
(i)
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(ii)
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रकार के अनायनिक अपमार्जक, द्रव अपमार्जकों, इमल्सीकारकों और क्लेदन कारकों (wetting agents) में उपस्थित होते हैं। अणु में जलरागी तथा जलविरागी हिस्सों को दर्शाइए। अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह की पहचान कीजिए।
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उत्तर :
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अपमार्जक अणु में उपस्थित विभिन्न प्रकार्यात्मक समूह हैं

  1. ईथर,
  2. प्राथमिक (1°) ऐल्कोहॉलीय समूह।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
हमें औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर :
औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने के अनेक लाभ हैं। उदाहरणार्थ, फार्माकोलोजिकल प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण डॉक्टरों के लिए लाभदायक है क्योंकि इससे उन्हें किसी रोग विशेष के उपचार के लिए उपलब्ध सभी औषधों की जानकारी मिलती है। इसी प्रकार जैवरासायनिक प्रक्रम पर प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण से वांछित औषध के संश्लेषण के लिए सही यौगिक के चयन में सहायता मिलती है। अणु लक्ष्यों के आधार पर वर्गीकरण से केमिस्टों को किसी विशेष ग्राही स्थल के लिए सर्वाधिक प्रभावी औषध के निर्माण में सहायता मिलती है। स्पष्ट है कि प्रत्येक प्रकार के वर्गीकरण की अपनी उपयोगिता है।

प्रश्न 2.
औषध रसायन के पारिभाषिक शब्द, लक्ष्य-अणु अथवा औषध-लक्ष्य को समझाइए।
उत्तर :
औषध सामान्यत: जैविक वृहदाणुओं जैसे-कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, प्रोटीन, न्यूक्लीक अम्ल के साथ अन्योन्यक्रियाएँ करते हैं जिन्हें औषध लक्ष्य कहते हैं।

प्रश्न 3.
उन वृहद-अणुओं के नाम लिखिए जिन्हें औषध-लक्ष्य चुना जाता है।
उत्तर :
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, न्यूक्लीक अम्ल आदि।

प्रश्न 4.
बिना डॉक्टर से फ्रामर्श लिए दबाइयाँ क्यों नहीं लेनी चाहिए?
उत्तर :
बिना डॉक्टर के परामर्श के दवाइयाँ इसलिए नहीं लेनी चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में दवा विषैला प्रभाव डालती है तथा जीवधारी के कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करती है।

प्रश्न 5.
रसायनचिकित्सा शब्द की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
रसायन विज्ञान की वह शाखा जो रसायनों के द्वारा रोगों के उपचार से संबंधित होती है, रसायन चिकित्सा कहलाती है।

प्रश्न 6.
एन्जाइम की सतह पर औषध को थामने के लिए कौन-से बल कार्य करते हैं?
उत्तर :
आयनिक बन्धन, हाइड्रोजन बन्धन, द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ या वाण्डरवाल्स अन्योन्यक्रियाएँ।

प्रश्न 7.
प्रतिअम्ल एवं प्रति-एलर्जी औषध हिस्टैमिन के कार्य में बाधा डालती हैं, परन्तु ये एक-दूसरे के कार्य में बाधक क्यों नहीं होती?
उत्तर :
औषधों का प्रयोग अंग विशेष की व्याधियों को दूर करने में किया जाता है लेकिन ये अन्य को प्रभावित नहीं करती हैं क्योंकि ये अलग-अलग ग्राहियों (receptors) पर कार्य करती हैं।
उदाहरणार्थ :
हिस्टैमिन का स्रावण एलर्जी (allergy) उत्पन्न करता है। यह आमाशय में HCl विमोचित करने के कारण अम्लता (acidity) भी उत्पन्न करता है। प्रतिएलर्जिक तथा प्रतिअम्ल भिन्न ग्राहियों पर कार्य करते हैं। अत: प्रतिहिस्टैमिन एलर्जी दूर करते हैं जबकि प्रतिअम्ल अम्लता दूर करते हैं।

प्रश्न 8.
नॉरऐड्रीनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के लिए किस प्रकार की औषध की आवश्यकता होती है? दो औषधों के नाम लिखिए।
उत्तर :
इस समस्या के निदान के लिए प्रतिअवसादक औषधों (antidepressant drugs) की आवश्यकता होती है। ये औषध नोरएड्रिनेलिन के निम्नीकरण को उत्प्रेरित करने वाले एंजाइमों को बाधित करते हैं। इससे नेरएड्रिनेलिन धीरे उपापचयित होता है और ग्राही को लंबे समय तक सक्रियित रखता है। जिससे अवसाद कम हो जाता है।
उदाहरणार्थ :
इप्रोनाइजिड, फिनल्जिन आदि।

प्रश्न 9.
‘वृहद्-स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी’ शब्द से आप क्या समझते हैं? समझाइए। (2011)
उत्तर :
वे प्रतिजैविक जो कि कई प्रकार के हानिकारक सूक्ष्म-जीवों के प्रति प्रभावी होते हैं, ‘वृहद-स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक’ कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-टेट्रासाइक्लिन, क्लोरम्फेनिकोल आदि।

प्रश्न 10.
पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी किस प्रकार से भिन्न हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
पूतिरोधी वे रसायन होते हैं जो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं या उनकी वृद्धि रोकते है तथा जीवित ऊतकों को हानि नहीं पहुंचाते हैं। विसंक्रामी सूक्ष्म-जीवों को मार देते हैं तथा जीवित मानव ऊतकों को हानि पहुँचाते हैं।
उदाहरणार्थ :

  1. पूतिरोधी (Antiseptic) : डिटॉल, आयोडोफॉर्म, टिंक्चर आयोडीन।
  2. विसंक्रामी (Disinfectants) : क्लोरीन (> 0.4 ppm), फीनॉल (> 1 % विलयन)।

प्रश्न 11.
सिमेटिडीन तथा दैनिटिडीन सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या | ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में श्रेष्ठ प्रतिअम्ल क्यों हैं?
उत्तर :
सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन श्रेष्ठ प्रतिअम्ल हैं क्योंकि ये आमाशय भित्ति में उपस्थित ग्राहियों (receptors) तथा हिस्टैमिन के मध्य अन्योन्यक्रिया को रोकते हैं जिसके परिणामस्वरूप कम मात्रा में अम्ल मुक्त होता है। दूसरी ओर, सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड केवल लक्षणों पर कार्य करते हैं. कारण पर नहीं

प्रश्न 12.
एक ऐसे पदार्थ का उदाहरण दीजिए जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर :
फीनॉल का 0.2% विलयन पूतिरोधी का कर्य करता है जबकि 1% विलक्नविसंक्रामी का कार्य करता है।

प्रश्न 13.
डेटॉल के प्रमुख संघटक कौन-से हैं?
उत्तर :
डेटॉल क्लोरोजाइलिनोल तथा α -टरपीनिऑल का मिश्रण होता है।

प्रश्न 14.
आयोडीन का टिंक्चर क्या होता है? इसके क्या उपयोग हैं? ।
उत्तर :
आयोडीन का ऐल्कोहॉल या जल में 2 – 3 % विलयन आयोडीन का टिंक्चर कहलाता है। यह शक्तिशाली पूतिरोधी होता है। इसका प्रयोग घावों पर किया जाता है।

प्रश्न 15.
खाद्य पदार्थ परिरक्षक क्या होते हैं?
उत्तर :
खाद्य परिरक्षक वे पदार्थ होते हैं जो सूक्ष्म-जीवों द्वारा होने वाले किण्वन, अम्लीकरण या अन्य विघटन को बाधित करके भोजन को खराब होने से रोकते हैं।

प्रश्न 16.
ऐस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठण्डे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित क्यों है?
उत्तर :
यह पकाने के ताप पर विघटित हो जाता है अतः इसका प्रयोग केवल ठण्डे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित है।

प्रश्न 17.
कृत्रिम मधुरक क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
कृत्रिम मधुरक रासायनिक पदार्थ होते हैं जो स्वाद में मीठे होते हैं लेकिन हमारे शरीर को कैलोरी प्रदान नहीं करते हैं। ये हमारे शरीर से अपरिवर्तित अवस्था में उत्सर्जित हो जाते हैं।
उदाहरणार्थ :
सैकरीन, एस्पार्टेम, सुक्रोलोस आदि।

प्रश्न 18.
मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले मधुरक का क्या नाम है?
उत्तर :
सैकरीन।

प्रश्न 19.
ऐलिटेम को कृत्रिम मधुरक की तरह उपयोग में लाने पर क्या समस्याएँ होती हैं?
उत्तर :
ऐलिटेम उच्च क्षमता का कृत्रिम मधुरक है इसलिए इसका प्रयोग करने पर भोजन की मिठास को नियंत्रित करना कठिन होता है।

प्रश्न 20.
साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक किस प्रकार श्रेष्ठ हैं?
उत्तर :
अपमार्जक का प्रयोग मृदु तथा कठोर जल दोनों में किया जा सकता है क्योंकि ये कठोर जल में भी झाग देते हैं। इसका कारण यह है कि सल्फोनिक अम्ल तथा इनके कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण जल में विलेय होते हैं जबकि वसीय अम्ल तथा इनके कैल्सियम और मैग्नीशियम लवण अविलेय होते हैं।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित शब्दों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा समझाइए
(क) धनात्मक अपमार्जक
(ख) ऋणात्मक अपमार्जक
(ग) अनायनिक अपमार्जक
उत्तर :
(क)
धनात्मक अपमार्जक (Cationic detergents) :

धनात्मक अपमार्जक ऐमीनों के ऐसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड ऋणायनों के साथ बने चतुष्क लवण होते हैं। उदाहरणार्थ सेटिल ट्राइमेथिल अमोनियम क्लोराइड।

(ख)
ऋणात्मक अपमार्जक (Anionic detergents) :

ऋणात्मक अपमार्जक लम्बी श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सल्फोनेटित व्युत्पन्न होते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं
(i) सोडियम ऐल्किल सल्फेट (Sodium alkyl sulphates)
उदाहरणार्थ :
सोडियम लॉरिल सल्फेट, C11H23CH2OSO3Na.

(ii) सोडियम ऐल्किल बेन्जीन सल्फेट (Sodium alkyl benzene sulphate) : सर्वाधिक प्रयोग किया जाने वाला घरेलू अपमार्जक सोडियम-4-(-1-डोडेसिल) बेन्जीन सल्फोनेट (SDS) हैं।
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(ग)
अनायनिक अपमार्जक (Non-ionic detergents) :

अनायनिक अपमार्जक, उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों के साथ वसा अम्लों के एस्टरे होते हैं।
उदाहरणार्थ :
पॉलिएथिलीन  ग्लाइकॉल स्टिऐरेट CH(CH2)COO (CH2CH2O)n CH2CH2OH.

प्रश्न 22.
जैव-निम्नीकृत होने वाले और जैव-निम्नीकृत न होने वाले अपमार्जक क्या हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जैव-अपघट्य (निम्नीकृत) अपमार्जक सीधी हाइड्रोकार्बन शृंखलायुक्त होते हैं। ये अपमार्जक जीवाणुओं द्वारा नष्ट हो जाते हैं। जैव-अनपघट्य (अनिम्नीकृत) अपमार्जक शाखित हाइड्रोकार्बन श्रृंखलायुक्त होते हैं। ये अपमार्जक जीवाणुओं द्वारा नष्ट नहीं होते हैं। अनपघट्य अपमार्जक प्रदूषण का स्रोत होते हैं।

  1. जैव अपघट्य अपमार्जक : सोडियम लॉरिल सल्फेट
  2. अनपघट्य अपमार्जक : सोडियम 4 – (1, 3, 5, 7 – टेट्रामेथिलऑक्टिल) बेन्जीनसल्फोनेट।

प्रश्न 23.
साबुन कठोर जल में कार्य क्यों नहीं करता?
उत्तर :
कठोर जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम के लवण होते हैं। साबुन को कठोर जल में डालने पर साबुन कैल्सियम और मैग्नीशियम साबुन के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं। ये साबुन अविलेय होने के कारण कपड़ों पर चिपचिपे पदार्थ के रूप में चिपक जाते हैं।

प्रश्न 24.
क्या आप साबुन तथा संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए कर सकते हैं?
उत्तर :
साबुन कठोर जल में अविलेय कैल्सियम तथा मैग्नीशियम साबुनों के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं, लेकिन अपमार्जक नहीं। इसलिए साबुन का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए किया जा सकता है, अपमार्जकों का नहीं।

प्रश्न 25.
साबुन की शोधन क्रिया समझाइए।
उत्तर :
साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action of Soaps) :
साबुन का अणु दो भागों का बना होता है। साबुन के अणु का एक भाग तो लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है जो अनायनिक होती है तथा साबुन के अणु का दूसरा भाग छोटा कार्बोक्सिलिक समूह (COO Na+) होता है जो आयनिक होता है। साबुन के अणु को चित्र – 1 द्वारा दर्शाया जाता है जिसमें टेढ़ी-मेढ़ी लम्बी रेखा तो हाइड्रोकार्बन श्रृंखला को निरूपित करती है, जबकि काला गोर्लीय भाग आयनिक समूह (COO) को निरूपित करता है।
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साबुन के अणु का हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला भाग जल को प्रतिकर्षित करने वाला होता है (या जलविरोधी होता है), परन्तु वह धूल तथा चिकनाई जैसे  मैल के कार्बनिक कणों को अपने साथ जोड़ लेता है। इसलिए मैले कपड़ों की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के कण साबुन के अणु के हाइड्रोकार्बन वाले  भाग से जुड़ जाते हैं। साबुन के अणु का आयनिक  भाग (COO) जलस्नेही होता है जो जल के अणुओं की ओर आकर्षित होता है और अपने हाइड्रोकार्बन भाग में चिपके धूल तथा चिकनाई के कणों को अपने साथ खींचकर जल में ले आता है। इस प्रकार मैले कपड़े की सतह पर लगे धूल तथा चिकनाई के सारे कण साबुन के अणुओं के साथ लगकर जल में आ जाते हैं तथा मैला कपड़ा साफ हो जाता है।
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जब साबुन को जल में घोलते हैं तो वह मिसेल (micelles) बनाता है  (क) इस मिसेल में साबुन के अणु अरीय (radially) ढंग से व्यवस्थित होते हैं जिसमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला भाग केन्द्र की ओर होता है। तथा जल को आकर्षित करने वाला कार्बोक्सिलिक भाग बाहर की ओर रहता है जैसा कि (ख) में दिखाया गया है।

जब साबुन के पानी में धूल तथा चिकनाई लगा मैला कपड़ा डालते हैं तो मिसेलों के हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं वाले सिरे मैले कपड़े की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के कणों के साथ जुड़ जाते हैं तथा उन्हें अपने बीच फंसा लेते हैं। इसके बाद मिसेलों के बाहर की ओर वाले आयनिक सिरे जल के अणुओं की ओर आकर्षित होते हैं जिससे हाइड्रोकार्बन वाले सिरों में फँसे मैल के कण कपड़े की सतह से खिंचकर जल में आ जाते हैं तथा कपड़ा साफ हो जाता है। साबुन द्वारा चिकनाई तथा धूल को पृथक् करने के प्रक्रम को निम्नांकित चित्र-3 द्वारा दर्शाया गया है
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प्रश्न 26.
यदि जल में कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट घुला हो तो आप कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जकों में से किसका प्रयोग करेंगे?
उत्तर :
कैल्सियम बाइकार्बोनेट जले को कठोर बनाता है, अतएव साबुन इस जल में अवक्षेपित हो जाएगा। इसके विपरीत, अपमार्जक के कैल्सियम लवण जल में विलेय होते हैं। अत: संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग , कठोर जल में कपड़े धोने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित यौगिकों में जलरागी एवं जलविरागी भाग दर्शाइए
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उत्तर :
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
डाइजीन (digene) है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) पूतिरोधी
(iii) प्रतिअम्ल
(iv) प्रतिहिस्टैमिन
उत्तर :
(iii) प्रतिअम्ल

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सा प्रतिअम्ल है?
(i) ग्रास्त्रीवॉल
(ii) फीनॉल
(iii) ओमेप्राजोल
(iv) डेटॉल
उत्तर :
(iii) ओमेप्राजोल

प्रश्न 3.
डूगों का वह वर्ग जिसका प्रयोग तनाव के उपचार के लिए किया जाता है, है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) पूतिरोधी
(iii) प्रतिहिस्टैमिन
(iv) प्रशांतक
उत्तर :
(iv) प्रशांतक

प्रश्न 4.
निम्न में से किसका प्रयोग प्रशांतक के रूप में किया जाता है?
(i) नेप्रोक्सेन
(ii) टेट्रासाइक्लिन
(iii) क्लोरफेनेरामाइन
(iv) इक्वैनिल
उत्तर :
(iv) इक्वैनिल

प्रश्न 5. बार्बिट्यूरिक अम्ल का प्रयोग किस रूप में होता है?
(i) ज्वरनाशी
(ii) पूतिरोधी
(iii) पोड़ाहारी
(iv) प्रशांतक
उत्तर :
(iv) प्रशांतक

प्रश्न 6.
निम्न में से सम्भवतः किसका प्रयोग बिना व्यसन उत्पन्न किए पीड़ाहारी के रूप में किया जाता है?
(i) मॉर्फीन
(ii) N-ऐसीटिल-पैरा-ऐमीनोफीनॉल
(iii) डाइजीपाम
(iv) मेथिल सैलिसिलेट
उत्तर :
(ii) N-ऐसीटिल-पैरा-ऐमीनोफीनॉल

प्रश्न 7.
ऐसीटॉक्सी बेंजोइक अम्ल कार्य करता है।
(i) पीड़ाहारी
(ii) ज्वरनाशी
(iii) पूतिरोधी
(iv) प्रतिजैविक
उत्तर :
(i) पीड़ाहारी

प्रश्न 8.
ऐस्प्रिन है।
(i) प्रतिजैविक
(ii) ज्वरनाशी
(iii) पूतिरोधी
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ii) ज्वरनाशी

प्रश्न 9.
ऐसीटिल सैलिसिलिक ऐसिड कहलाता है।
(i) पूतिरोधी
(ii) ऐस्प्रिन
(iii) प्रतिजैविक
(iv) रंजक
उत्तर :
(ii) ऐस्प्रिन

प्रश्न10.
निम्न में से कौन शरीर का ताप कम करता है?
(i) ज्वरनाशी
(ii) पीड़ाहारी
(iii) प्रतिजैविक
(iv) वैलियम
उत्तर :
(i) ज्वरनाशी

प्रश्न11.
ऐसीटिल सैलिसिलिक ऐसिड का प्रयोग किस रूप में होता है?
(i) प्रतिमलेरियल
(ii) प्रति अवसादक
(iii) पूतिरोधी
(iv) ज्वरनाशी
उत्तर :
(iv) ज्वरनाशी

प्रश्न12.
टिंक्चर आयोडीन है।
(i) I2 का जलीय विलयन
(ii) जलीय KI में I2 का विलयन
(iii) I2 का ऐल्कोहॉलीय विलयन
(iv) KI का जलीय विलयन
उत्तर :
(iii) I2 का ऐल्कोहॉलीय विलयन

प्रश्न 13.
निम्न में से कौन प्रतिजैविक नहीं है?
(i) पेनिसिलीन
(ii) ऑक्सीटॉसिन
(iii) टेट्रासाइक्लीन
(iv) एरिथ्रोमाइसिन
उत्तर :
(ii) ऑक्सीटॉसिन

प्रश्न 14.
बीटाडीन है।
(i) पूतिरोधी
(ii) प्रशांतक
(iii) विसंक्रामी
(iv) प्रतिजैविक
उत्तर :
(i) पूतिरोधी

प्रश्न 15.
पैरासीटेमॉल प्रयुक्त होता है।
(i) प्रतिजैविक के रूप में
(ii) मलेरिया रोधी के रूप में
(iii) ज्वरनाशी के रूप में
(iv) पूतिरोधी के रूप में
उत्तर :
(iii) ज्वरनाशी के रूप में

प्रश्न 16.
पेनिसिलीन है
(i) पूतिरोधी
(ii) ज्वरनाशी
(iii) ऐण्टीबायोटिक
(iv) खाद्य परिरक्षक
उत्तर :
(iii) ऐण्टीबायोटिक

प्रश्न 17.
फीनॉल का 0.2% विलयन निम्न रूप में कार्य करता है।
(i) दर्दनाशक
(ii) ऐण्टीसेप्टिक
(iii) संक्रमण रोधी
(iv) एण्टीबायोटिक
उत्तर :
(ii) ऐण्टीसेप्टिक

प्रश्न 18.
डेटॉल है एक
(i) प्रतिजैविक
(ii) ज्वररोधी
(iii) दर्दनाशक
(iv) पूतिरोधी
उत्तर :
(iv) पूतिरोधी

प्रश्न 19.
पैरासीटामोल की संरचना है।
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उत्तर :
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प्रश्न 20.
पूतिरोधी तथा विसंक्रामी सूक्ष्मजीवों का विनाश करते हैं या उनकी वृद्धि को रोकते हैं। निम्न में से जो कथन सही नहीं है, उसको पहचानिए।
(i) क्लोरीन व आयोडीन प्रबल विसंक्रामी की तरह प्रयोग में आते हैं।
(ii) बोरिक अम्ल व हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन प्रबल पूतिरोधी होता है।
(iii) विसंक्रामी जीवित ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं।
(iv) फीनॉल का 0.2% विलयन पूतिरोधी है, जबकि 1% विलयन विसंक्रामी है।
उत्तर :
(ii) बोरिक अम्ल व हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन प्रबल पूतिरोधी होता है।

प्रश्न21.
निम्न में से किसका प्रयोग ‘मॉर्निग ऑफ्टर पिल’ के रूप में किया जाता है?
(i) एथिनिलएस्ट्राडाइऑल
(ii) मिफैप्रिस्टोन
(iii) बाइथायोनल
(iv) प्रोमैथेजिन
उत्तर :
(ii) मिफैप्रिस्टोन

प्रश्न 22.
क्लोरीन मुक्त कृत्रिम मधुरक जिसकी दिखावट और स्वाद शर्करा (sugar) के समान होता है और जो पकाने के ताप पर स्थायी होता है, है।
(i) एस्पार्टेम
(ii) सैकेरिन
(iii) सुक्रोलोस
(iv) ऐलीटेम
उत्तर :
(iii) सुक्रोलोस

प्रश्न 23.
सॉर्बिक अम्ल और प्रोपिओनिक अम्ल हैं।
(i) प्रतिऑक्सीकारक
(ii) खाद्य परिरक्षक
(iii) पोषक पूरक
(iv) अपमार्जक
उत्तर :
(ii) खाद्य परिरक्षक

प्रश्न 24.
केश कंडीशनरों में प्रयुक्त कार्बनिक अपमार्जक है।
(i) सोडियम लॉरिल सल्फेट
(ii) सोडियम डोडेसिलबेंजीन सल्फोनेट
(iii) सोडियम स्टेरिल सल्फेट
(iv) सेटिलाइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड
उत्तर :
(iv) सेटिलट्राइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ड्रग क्या है?
उत्तर :
वह रासायनिक पदार्थ जो रोग का उपचार करता है और जिसके प्रयोग से व्यक्ति उसका आदि हो जाता है, ड्रग कहलाता है।

प्रश्न 2.
ड्रग का अणुभार कितना होता है?
उत्तर :
100-500 u.

प्रश्न 3.
एंजाइम क्या हैं? (2018)
उत्तर :
प्रोटीन जो जैव उत्प्रेरकों की तरह कार्य करते हैं तथा शरीर में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं, एंजाइम कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
ग्राही कहाँ स्थित होते हैं?
उत्तर :
ग्राही कोशिका कला की बाहरी सतह पर स्थित होते हैं।

प्रश्न 5.
ऐलोस्टैरिक स्थान से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
एंजाइम का वह स्थान (सक्रिय स्थान से अलग) जहाँ पर एक अणु जुड़कर सक्रिय स्थान की आकृति को परिवर्तित कर देता है, ऐलोस्टैरिक स्थान कहलाता है।

प्रश्न 6.
ओमेप्राजोल किस प्रकार प्रतिअम्ल का कार्य करती है?
उत्तर :
ओमेप्राजोल आमाशय में HCl के बनने को रोककर प्रतिअम्ल का कार्य करती है।

प्रश्न 7.
किस औषध का प्रयोग हृदयाघातों को रोकने के लिए किया जाता है?
उत्तर :
एस्पिरिन।

प्रश्न 8.
एस्पिरिन किस प्रकार पीड़ाहारी का कार्य करती है?
उत्तर :
ऐस्पिरिन प्रोस्टाग्लैन्डिन के संश्लेषण को रोककर पीड़ाहारी का कार्य करती है। प्रोस्टाग्लैन्डिन ऊतकों की सूजन में वृद्धि कर दर्द उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 9.
एक पदार्थ का नाम लिखिए जो दोनों के समान कार्य करता है।

  1. पीड़ाहारी और ज्वरनाशी तथा
  2. पूतिरोधी और विसंक्रामी।

उत्तर :

  1. ऐस्पिरिन तथा
  2. फीनॉल।

प्रश्न 10.
प्रतिसूक्ष्मजैविक क्या होते हैं? या प्रतिजैविक क्या होते हैं? किन्हीं दो प्रतिजैविकों के नाम लिखिए। (2014)
उत्तर :
वे ड्रग जिनका प्रयोग सूक्ष्मजीवों; जैसे-जीवाणु, वाइरस, कवक आदि के द्वारा उत्पन्न रोगों के निवारण के लिए किया जाता है, प्रतिसूक्ष्मजैविक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
पेनिसिलीन तथा स्ट्रेप्टोमाइसिन।

प्रश्न 11.
अतिअम्तृता किस प्रकार हानिकारक है?
उत्तर :
अतिअम्लता से व्रण (ulcers) हो जाते हैं।

प्रश्न 12.
एक विस्तृत परास वाले प्रतिजैविक का नाम लिखिए।
उत्तर :
क्लोरमफेनिकॉल।

प्रश्न 13.
सल्फा ड्रग का मूल यौगिक क्या है?
उत्तर :
सल्फोनिलेमाइड

प्रश्न 14.
सल्फा ड्रग्स प्रतिजैविकों की तरह कार्य करती हैं लेकिन प्रतिजैविक नहीं होती हैं। क्या यह कथन सत्य है और क्यों?
उत्तर :
यह कथन सत्य है। सल्फा ड्रग्स सूक्ष्मजीवियों के प्रति प्रतिजैविकों के समान व्यवहार करती हैं। लेकिन सूक्ष्मजीवियों से प्राप्त नहीं होती हैं।

प्रश्न 15.
आँखों के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पूतिरोधी का नाम लिखिए।
उत्तर :
बोरिक अम्ल (HBO3) का प्रयोग आँखों के लिए प्रतिरोधी के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 16.
रासायनिक रूप से सैकेरिन क्या है?
उत्तर :
ऑथोंसल्फोबेन्जीमाइड।

प्रश्न 17.
एक कृत्रिम मधुरक का नाम लिखिए जो सुक्रोस का व्युत्पन्न है।
उत्तर :
सुक्रोलोस।

प्रश्न 18.
D – शर्कराएँ अन्तर्ग्रहीत कैलोरी बढ़ाती हैं, जबकि L – शर्कराएँ नहीं, क्यों?
उत्तर :
L – शर्कराएँ अन्तर्ग्रहीत कैलोरी नहीं बढ़ातीं क्योंकि हमारे शरीर में इनका उपापचय करने वाले । एंजाइम नहीं पाए जाते हैं; अतः ये पूर्वावस्था में ही उत्सर्जित हो जाती हैं।

प्रश्न 19.
दो अम्लों के नाम लिखिए जिनके सोडियम लवण खाद्य परिरक्षकों की भाँति प्रयोग किए जाते हैं।
उत्तर :
बेन्जोइक अम्ल तथा सॉर्बिक अम्ल।

प्रश्न 20.
संश्लेषित अपमार्जक क्या होते हैं? किन्हीं दो अपर्माजकों के नाम लिखिए।
उत्तर :
यह एक विशेष प्रकार का कृत्रिम आयनिक कार्बनिक पदार्थ है जिसमें साबुन की तरह मैल घोलने का गुण पाया जाता है। इसका प्रयोग कठोर एवं मृदु दोनों प्रकार के जल के साथ किया जा सकता है। यह प्रबल कार्बनिक अम्ल और प्रबल कार्बनिक क्षारक से बने हुए अति उच्च अणुभार के लवण होते हैं। जिसके धनायन या ऋणायन में 12 से 18 कार्बनिक परमाणुओं वाली हाइड्रोकार्बन शृंखला और जल विरोधी व जल स्नेही दोनों प्रकार उपस्थित होते हैं।
उदाहरण :
(i)
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(ii) सोडियम P डोडेसिलबेन्जीन सल्फोनेट
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प्रश्न 21.
मृदु साबुन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
ओलिक अम्ल, पामीटिक अम्ल, स्टियरिक अम्ल आदि वसीय अम्लों के पोटैशियम लवण मृदु . साबुन कहलाते हैं।

प्रश्न 22.
साबुनों में बाइथायोनल क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर :
बाइथायोनल एक पूतिरोधी है। यह त्वचा पर जैव पदार्थों के जीवाणुओं द्वारा अपघटन से उत्पन्न दुर्गंध को समाप्त कर देता है इसलिए इसका प्रयोग साबुनों में किया जाता है।

प्रश्न 23.
किस प्रकार के अपमार्जक का उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है?
उत्तर :
धनायनिक अपमार्जकों का।

प्रश्न 24.
किन अपमार्जकों को बर्तन धोने के लिए प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
अन-आयनिक अपमार्जकों को।

प्रश्न 25.
किस प्रकार के अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं?
उत्तर :
अत्यधिक शाखित अपमार्जक।

प्रश्न 26.
उस प्रतिऑक्सीकारक का नाम लिखिए जो मक्खन के भण्डारण के लिए प्रयुक्त होता है।
उत्तर :
BHA या सस्टेन।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रतिहिस्टैमिन क्या होते हैं। दो उदाहरण दीजिए। समझाइए कि ये मानव शरीर पर कैसे कार्य करते हैं?
उत्तर :
वे ड्रग जो हिस्टैमिन के प्रभावों को समाप्त करने के लिए प्रयोग की जाती हैं, प्रतिहिस्टैमिन कहलाती हैं।
उदाहरणार्थ :
ब्रोमफेनिरामिन, टरफेनाडिन, डाइफेनिलहाइड्रेजीन, क्लोरफेनिरैमीन मैलिएट आदि। प्रतिहिस्टैमिन हिस्टैमिन के साथ ‘ग्राही की उस बंधनी सतह के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं जिस पर हिस्टैमिन अपना प्रभाव डालती हैं। इस प्रकार ये हिस्टैमिन के प्राकृतिक कार्य में बाधा डालती हैं तथा हमारे । शरीर को उनके प्रभावों से मुक्ति दिलाती हैं।

प्रश्न 2.
ऐण्टीफर्टीलिटी ड्रग्स (antifertility drugs) से आप क्या समझते हैं? समझाइए।
उत्तर :
वे रासायनिक पदार्थ जो जनन अथवा उत्पादकता (productivity) पर नियन्त्रण रखते हैं, प्रतिजनन क्षमता औषधि (antifertility drugs) कहलाते हैं। इनको विकसित करने का उद्देश्य विश्व की बढ़ती हुई आबादी को कम करना एवं उसको नियन्त्रित करना है। इस दिशा में प्रयोग चूहे, मानव, खरगोश एवं बन्दरों पर करके सार्थक परिणाम निकाले गए। जनन नियन्त्रण औषधियों में संश्लेषित ऐस्ट्रोजन (estrogen) तथा प्रोजेस्टेरोन (progesterone) व्युत्पन्नों का मिश्रण होता है। संश्लेषित प्रोजेस्टोरोन व्युत्पन्न प्राकृतिक प्रोजेस्टेरोन से अधिक प्रभावशाली होते हैं। दोनों ही यौगिक हॉर्मोन होते हैं।

(1) संश्लेषित एस्ट्रोजन :
मौखिक गर्भ निरोधकों के रूप में दो संश्लेषित एस्ट्रोजन प्रयोग किए जा रहे हैं; जैसे-एथाइनिल एस्ट्रोडाइऑल (ethynyl estradiol)।

(2) संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन :
ये तीन प्रकार के होते हैं— प्रेगानेन, ओएस्ट्रॉन और गोनॉन। इनमें प्रेगानेन लम्बे समय तक नहीं दी जाती है क्योंकि स्तन कैंसर का भय रहता है। इसी प्रकार ओएस्ट्रॉन जिसे 19 – नॉरटेस्टोस्टेरोन भी कहते हैं, का अधिक समय तक प्रयोग नहीं किया जाता है। गोनॉन सबसे पसंदीदा गर्भ निरोधक हॉर्मोन है जो आजकल प्रयुक्त की जा रही है।

प्रोजेस्टेरोन अण्डोत्सर्ग को निरोधित करता है। नॉरएथिनड्रॉन (norethindrone) संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न को एक उदाहरण है जो व्यापक रूप से जनन नियन्त्रण गोलियों में प्रयोग होता है। एथाइनिलएस्ट्राडाइऑल (ethynylestradiol) एक एस्ट्रोजन व्युत्पन्न है जो प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न के साथ जनन नियन्त्रण गोलियों में प्रयुक्त होता है।
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माइफप्रिस्टॉन एक संश्लेषित स्टेरॉयड है। यह प्रोजेस्टेरोन के प्रभाव को अवरोधित करके गर्भ नियन्त्रण का कार्य करता है।
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गर्म निरोधक औषधियों के विभिन्न पार्श्व प्रभाव हैं; जैसे :

  1. ये मासिक धर्म को अकथनीय रूप में, लम्बे समय के लिए अधिक रक्तस्राव में बदल देती हैं।
  2. इनसे बाँझपन भी उत्पन्न हो जाता है।
  3. इनसे महिलाओं का वजन भी बढ़ता है।

प्रश्न 3.
प्रतिऑक्सीकारक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
प्रतिऑक्सीकारक :
वे रासायनिक पदार्थ जो वसा तथा वसा युक्त पदार्थों से मिलकर उनके ऑक्सीकरण को रोकते हैं और उनके जीवनकाल को बढ़ाते हैं, प्रतिऑक्सीकारक कहलाते हैं। ये ऑक्सीजन के प्रति अत्यन्त क्रियाशील होते हैं। प्रतिस्थापी फीनॉलिक (phenolic) यौगिकों का उपयोग । प्रतिऑक्सीकारक के रूप में होता है। ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी ऐनिसोल (BHA) (butyl hydroxy anisol) एक अविषैला (non-toxic) प्रतिऑक्सीकारक है जिसका व्यापारिक नाम सस्टेन (sustane) है। यह मक्खन के लिए अच्छा ऑक्सीकारक है। इसके अतिरिक्त ब्यूटिल हाइड्रॉक्सी टॉलूईन (BHT) 2, 3 – डाइतृतीयक ब्यूटिल p-ऐनिसॉल (2, 3 – ditertiary butyl p  anisol) (BHA) तथा प्रोपिल-3, 4, 5 -ट्राइहाइड्रॉक्सी बेन्जोएट (propyl-3, 4, 5 -trihydroxy  benzoate) जिसे प्रोपिल गैलेट (propyl gallate) या (PG) भी कहते हैं, आदि प्रतिऑक्सीकारक हैं। ये बहुत कम सान्द्रता (< 0.01%) पर प्रभावी होते हैं। ये भोज्य पदार्थ में उपस्थित आवश्यक वसीय अम्ल (fatty acids) तथा विटामिन (vitamins) के पौष्टिक मान (nutritional value) को बराबर रखते हैं।
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इसके अतिरिक्त, विटामिन E, सल्फर डाइऑक्साइड तथा ऐस्कॉर्बिक अम्ल विटामिन C को भी प्रतिऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है। इनका उपयोग सामान्य रूप में शराब व बीयर, मीठे तरल पदार्थ, सब्जी तथा कटे, छिले शुष्क फलों के लिए प्रतिऑक्सीकारकों के रूप में किया जाता है। ऐस्कॉर्बिक अम्ल एन्जाइमकृत फेनिल यौगिक के ऑक्सीकरण से उत्पन्न भूरेपन को रोकता है।

प्रश्न 4.
निम्न पर टिप्पणी लिखिए|
(i) ऐस्प्रिन औषधि हृदयाघात से बचाती है।
(ii) डायबिटीज रोगियों को प्राकृतिक मधुरकों के स्थान पर कृत्रिम मधुरक लेने की सलाह दी जाती है।
(iii) अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं जबकि साबुन जैव निम्नीकरणीय होते हैं।
उत्तर :
(i) ऐस्प्रिन औषधि हृदयाघात से बचाती है, क्योंकि यह रक्त स्कन्दन रोधी होती है अर्थात् यह रक्त के स्कन्दित होने को कम करती है और स्कन्दित रक्त को तरल में परिवर्तित करती है जिससे रक्त का सुचारु प्रवाह शरीर में होता रहता है और हम हृदयाघात से बच जाते हैं।

(ii) डायबिटीज रोगियों को प्राकृतिक मधुरकों के स्थान पर कृत्रिम मधुरक लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि प्राकृतिक मधुरक रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाते हैं, जबकि कृत्रिम मधुरक रक्त शर्करा का स्तर नहीं बढ़ाते हैं जिससे रोगी स्वस्थ रहता है।

(iii) अपमार्जकों में अत्यधिक शाखित हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाएँ होती हैं जिन्हें जीवाणु अपघटित नहीं कर पाते हैं, जबकि साबुन को जीवाणु आसानी से अपघटित कर देते हैं। इसलिए अपमार्जक जैव अनिम्नीकरणीय व साबुन जैव निम्नीकरण होते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया को समझाइए।
उत्तर :
1. औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया (Interaction between Drug and Enzyme) :
जैविक वृहद्-अणु शरीर में विभिन्न कार्य करते हैं जैसे जैव उत्प्रेरक का कार्य करने वाले प्रोटीन्स को एन्जाइम कहते हैं तथा जो प्रोटीन शरीर की संचार व्यवस्था में निर्णायक होते हैं, उन्हें ग्राही कहते हैं। औषध साधारणतया इन वृहद्-अणुओं से अन्योन्यक्रिया करती हैं। औषध तथा एन्जाइम के मध्य अन्योन्यक्रिया को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि एन्जाइम अभिक्रिया का उत्प्रेरण कैसे करते हैं।

2. एन्जाइम का उत्प्रेरण कार्य (Catalytic Function of Enzyme) :
उत्प्रेरण क्रिया में एन्जाइम दो प्रमुख कार्य करते हैं जो निम्नलिखित हैं
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(i) एन्जाइम का पहला कार्य क्रियाधार (सबस्ट्रेट) को रासायनिक अभिक्रिया के लिए बाँधे रखना है। एन्जाइम की सक्रिय सतह क्रियाधार अणु को उपयुक्त स्थिति में बाँधे रखती है जिससे इस पर अभिक्रियक द्वारा प्रभावकारी आक्रमण हो सके। क्रियाधार एन्जाइम की सक्रिय सतह पर विभिन्न प्रकार की अन्योन्यक्रियाओं द्वारा बँधते हैं; जैसे-आयनिक आबन्ध, हाइड्रोजन आबन्ध, वान्डरवाल्स अन्योन्यक्रिया या द्विध्रुव-द्विध्रुव बल।

(ii) एन्जाइम का दूसरा कार्य क्रियाधार पर आक्रमण करके रासायनिक अभिक्रिया करने के लिए प्रकार्यात्मक समूह उपलब्ध कराना है, जो क्रियाधार पर आक्रमण करके रासायनिक अभिक्रिया करेगा। औषध-एन्जाइम अन्योन्यक्रिया

3. (Drug-Enzyme Interaction) :
औषध एन्जाइम की उपर्युक्त गतिविधियों में से किसी में भी अवरोध उत्पन्न करती हैं। ये एन्जाइम की बन्धनी सतह को अवरुद्ध कर सकती हैं और क्रियाधार के आबन्धन में रुकावट डाल सकती हैं अथवा ये एन्जाइम के उत्प्रेरक कार्य में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं, ऐसी औषधों को एन्जाइम संदमक (enzyme inhibitors) कहते हैं। औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर क्रियाधार के संयोजन में दो प्रकार से अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं
(i) औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर संयोजन के लिए वास्तविक क्रियाधार से स्पर्धा करती हैं। ऐसी औषधों को स्पर्धा संदमक (competitive inhibitors) कहते हैं।
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(ii) कुछ औषध एन्जाइम की सक्रिय सतह पर संयोजन नहीं करतीं। ये एन्जाइम की भिन्न सतह पर संयोजन करती हैं जिसे ऐलोस्टीरिक सतह कहते हैं। इस प्रकार संदमके के ऐलोस्टीरिक सतह पर संयोजन से सक्रिय सतह की आकृति इस प्रकार परिवर्तित हो जाती है कि क्रियाधार इसे पहचान नहीं
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यदि एन्जाइम तथा संदमक के बीच बना आबन्ध मजबूत सहसंयोजी आबन्ध हो और आसानी से तोड़ा न जा सके तो एन्जाइम स्थायी रूप से अवरुद्ध हो जाता है, तब शरीर एन्जाइम-संदमक संकुल को निम्नीकृत कर देता है और नया एन्जाइम बनाता है।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 11 Alcohols Phenols and Ethers

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 11 Alcohols Phenols and Ethers (ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 11 Alcohols Phenols and Ethers (ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 11
Chapter Name Alcohols Phenols and Ethers
Number of Questions Solved 81
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 11 Alcohols Phenols and Ethers (ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉल में वर्गीकृत कीजिए –
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उत्तर
प्राथमिक ऐल्कोहॉल : (i), (ii), (iii)
द्वितीयक ऐल्कोहॉल : (iv), (v)
तृतीयक ऐल्कोहॉल : (vi)

प्रश्न 2.
उपर्युक्त उदाहरणों में से ऐलिलिक ऐल्कोहॉलों को पहचानिए।
उत्तर
(ii) तथा (vi)।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नामपद्धति से नाम दीजिए –
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उत्तर
(i) 3-क्लोरोमेथिल-2-आइसोप्रोपिलपेण्टेन-1-ऑल
(ii) 2,5-डाइमेथिलहेक्सेन -1,3-डाइऑल
(iii) 3-ब्रोमोसाइक्लोहेक्सेनॉल
(iv) हेक्स-1-ईन-3-ऑल
(v) 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूट-2-ईन-1-ऑल

प्रश्न 4.
दर्शाइए कि मेथेनल पर उपयुक्त ग्रीन्यार अभिकर्मक से अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित ऐल्कोहॉल कैसे विरचित किए जाते हैं?
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उत्तर
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित अभिक्रिया के उत्पादों की संरचना लिखिए –
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उत्तर
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(ii) NaBH4 एक दुर्बल अपचायक है, यह ऐल्डिहाइड/कीटोन को अपचयित कर सकता है, परन्तु एस्टर को नहीं।
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(iii) -CHO समूह -CH2OH में अपचयित हो जाता है।
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प्रश्न 6.
यदि निम्नलिखित ऐल्कोहॉल क्रमशः (a) HCl-ZnCl2, (b) HBr, (c) SOCl2 से अभिक्रिया करें तो आप अपेक्षित उत्पादों की संरचनाएँ दीजिए।
(i) ब्यूटेन-1-ऑल
(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल।
उत्तर
(a) HCl-ZnClz (ल्यूकास अभिकर्मक) के साथ
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(b) HBr के साथ
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(c) SOCl2 के साथ
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प्रश्न 7.
(i) 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल और (ii) ब्यूटेन-1-ऑल के अम्ल उत्प्रेरित निर्जलन के मुख्य उत्पादों की प्रागुक्ति कीजिए।
या
किसी ऐल्कोहॉल की किसी एक निर्जलीकरण अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2018)
उत्तर
(i) 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल का अम्ल उत्प्रेरित निर्जलन दो उत्पाद, I तथा II दे सकता है। चूँकि उत्पाद (I) अधिक उच्च प्रतिस्थापित है, इसलिए सेटजेफ नियम के अनुसार यह मुख्य उत्पाद है।
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(ii) ब्यूटेन-1-ऑल का अम्ल उत्प्रेरित निर्जलन मुख्य उत्पाद के रूप में ब्यूट-2-ईन तथा गौण उत्पाद के रूप में ब्यूट-1-ईन उत्पन्न करता है। इसका कारण यह है कि ऐल्कोहॉलों का निर्जलन कार्बोधनायने माध्यमिकों के द्वारा होता है। पुनः ब्यूटेन-1-ऑल 1° ऐल्कोहॉल होने के कारण प्रोटॉनीकरण तथा H2O के विलोपन पर पहले 1° कार्बोधनायन (I) देता है जो कम स्थायी होने के कारण पुनर्व्यवस्थित होकर अधिक स्थायी 2° कार्बोधनायन (II) बनाता है, तब यह दो भिन्न प्रकारों से प्रोटॉन निकालकर ब्यूट-2-ईन या ब्यूटन-1-ईन बनाता है। चूंकि ब्यूट-2-ईन अधिक स्थायी है, इसलिए सेटजेफ नियम के अनुसार यह मुख्य उत्पाद होता है।
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प्रश्न 8.
ऑथों तथा पैरा-नाइट्रोफीनॉल, फीनॉल से अधिक अम्लीय होते हैं। उनके संगत फीनॉक्साइड आयनों की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।
उत्तर
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प्रतिस्थापित फीनॉलों में इलेक्ट्रॉन निष्कासक समूह (electron withdrawing group) जैसे नाइट्रो समूह; फीनॉल की अम्लीय सामर्थ्य को बढ़ा देते हैं। जब ऐसे समूह ऑर्थों एवं पैरा स्थितियों पर उपस्थित होते हैं तो यह प्रभाव अधिक प्रबल हो जाता है। इसका कारण फोनॉक्साइड आयन के ऋणायन का प्रभावी विस्थानने (delocalisation) है। अत: फीनॉल की तुलना में 0-तथा p-नाइट्रोफीनॉल अधिक अम्लीय होते हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में सम्मिलित समीकरण लिखिए –

  1. राइमर-टीमैन अभिक्रिया
  2. कोल्बे अभिक्रिया अथवा कोल्बे श्मिट अभिक्रिया। (2018)

उत्तर
1. राइमर-टीमैन अभिक्रिया (Reimer-Teimann Reaction) – फीनॉल की सोडियम हाइड्रॉक्साइड की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म के साथ अभिक्रिया से बेन्जीन में,—CHO समूह ऑर्थो स्थिति पर प्रवेश कर जाता है। इस अभिक्रिया को राइमर-टीमैन अभिक्रिया कहते हैं।
प्रतिस्थापित मध्यवर्ती बेन्जिल क्लोराइड क्षार की उपस्थिति में अपघटित होकर सैलिसिलैल्डिहाइड बनाता है।
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2. कोल्बे अभिक्रिया अथवा कोल्बे श्मिट अभिक्रिया (Kolbe’s Reaction or Kolbe Schmidt Reaction) – फीनॉल को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिकृत कराने से बना फीनॉक्साइड आयन, फीनॉल की अपेक्षा इलेक्ट्रॉनरागी ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति अधिक क्रियाशील होता है। अतः यह CO2 जैसे दुर्बल इलेक्ट्रॉनरागी के साथ इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करता है। इससे ऑथों-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
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प्रश्न 10.
एथेनॉल एवं 3-मेथिलपेन्टेन-2-ऑल से प्रारम्भ कर 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेन्टेन के विलियमसन संश्लेषण की अभिक्रिया लिखिए –
उत्तर
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प्रश्न 11.
1-मेथॉक्सी-4-नाइट्रोबेन्जीन के विरचन के लिए निम्नलिखित अभिकारकों में से कौन-सा युग्म उपयुक्त है और क्यों?
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उत्तर
अभिकारकों के दोनों युग्म उपयुक्त हैं। प्रथम युग्म में, -NO2 समूह के इलेक्ट्रॉन निष्कासक प्रभाव के कारण Br परमाणु सक्रियित होता है। CH3ONa के नाभिकस्नेही आक्रमण तथा उसके पश्चात् NaBr के विलोपन से वांछित ईथर प्राप्त होता है। दूसरे युग्म में, मेथिल ब्रोमाइड पर 4-नाइट्रोफीनॉक्साइड आयन के नाभिकस्नेही आक्रमण द्वारा वांछित ईथर प्राप्त होता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों का अनुमान लगाइए –
(i) CH3-CH2-CH2-O-CH3 + HBr →
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(iv) (CH3)3C – OC2H5 [latex]\underrightarrow { HI } [/latex]
उत्तर
(i) ऑक्सीजन से जुड़े दोनों ऐल्किल समूह प्राथमिक हैं, इसलिए Br आयन की अभिक्रिया छोटे ऐल्किल समूह (मेथिल समूह) से होगी तथा प्रोपेन-1-ऑल तथा ब्रोमोमेथेन का निर्माण होगा।
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(ii) अनुनाद के कारण, C6H5-O आबन्ध में कुछ द्विआबन्ध गुण विद्यमान होता है, इसलिए यह O-C2H5 आबन्ध से प्रबल होता है। अत: दुर्बल O-C2H5 आबन्ध का विदलन होता है तथा फीनॉल एवं ब्रोमोएथेन प्राप्त होते हैं।
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(iii) इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन में, ऐल्कॉक्सी समूह ऐरोमैटिक वलय को सक्रिय बनाता है तथा प्रवेश करने वाले समूह को 0-तथा p-स्थितियों की ओर निर्दिष्ट करता है। इसलिए एथॉक्सीबेन्जीन का नाइट्रीकरण 2-तथा 4-नाइट्रोएथॉक्सीबेन्जीन का मिश्रण देता है जिसमें 4-नाइट्रोएथॉक्सीबेन्जीन 2-स्थिति पर त्रिविमीय बाधा के कारण मुख्य उत्पाद होता है।
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(iv) चूंकि एथिल कार्बोधनायन की तुलना में तृतीयक-ब्यूटिल कार्बोधनायन अत्यधिक स्थायी होता है, इसीलिए अभिक्रिया SN 1 क्रियाविधि द्वारा होती है तथा तृतीयक-ब्यूटिल आयोडाइड एवं एथेनॉल निम्नलिखित प्रकार बनते हैं –
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अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नाम लिखिए –
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उत्तर
(i) 2, 2, 4-ट्राइमेथिलपेन्टेन-3-ऑल
(ii) 5-एथिलहेप्टेन-2, 4-डाइऑल
(iii) ब्यूटेन-2, 3-डाइऑल
(iv) प्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल
(v) 2-मेथिलफीनॉल
(vi) 4-मेथिलफीनॉल
(vii) 2,5-डाइमेथिलफोनॉल
(viii) 2,6-डाइमेथिलफीनॉल
(ix) 1-मेथॉक्सी-2-मेथिलप्रोपेन
(x) एथॉक्सीबेन्जीन
(xi) 1-फीनॉक्सीहेप्टेन
(xii) 2-एथॉक्सीब्यूटेन

प्रश्न 2.
निम्नलिखित आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नाम वाले यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए –
(i) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल
(ii) 1-फेनिलप्रोपेन-2-ऑल
(iii) 3,5-डाइमेथिलहेक्सेन-1,3,5-ट्राइऑल
(iv) 2,3-डाइएथिलफीनॉल
(v) 1-एथॉक्सीप्रोपेन
(vi) 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेन्टेन
(vii) साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल
(viii) 3-साइक्लोहेक्सिलपेन्टेन-3-ऑल
(ix) साइक्लोपेन्टेन-3-ईन-1-ऑल
(x) 3-क्लोरोमेथिलपेन्टेन-1-ऑल।
उत्तर
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प्रश्न 3.
(i) С5H12O आणिवक सूत्र वाले ऐलकोहॉलों के सभी समावयवो की सरचना लिखिए एवं  उनके आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नाम दीजिए।
(ii) प्रश्न 3(i) के समावयवी ऐल्कोहॉलों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉलों में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर
C5H12O के 8 समावयवी सम्भव हैं। ये निम्नवत् हैं –
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(ii)

  • प्राथमिक ऐल्कोहॉल – उपर्युक्त में से (i), (iv), (v), (vii)
  • द्वितीयक ऐल्कोहॉल – उपर्युक्त में से (ii), (iii), (viii)
  • तृतीयक ऐल्कोहॉल – उपर्युक्त में से (vi)

प्रश्न 4.
समझाइए कि प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक क्यों होता है?
उत्तर
प्रोपेनॉल तथा ब्यूटेन लगभग समान अणु द्रव्यमान के होते हैं, लेकिन प्रोपेनॉल का क्वथनांक उच्च होता है, क्योंकि इसके अणुओं के मध्य अन्तरा-आण्विक हाइड्रोजन आबन्धन पाये जाते हैं। ब्यूटेन में ध्रुवीय –OH समूह की अनुपस्थिति के कारण H-आबन्धन नहीं पाये जाते हैं। ये परस्पर दुर्बल वीण्डरवाल आकर्षण बलों द्वारा जुड़े रहते हैं।
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प्रश्न 5.
समतुल्य आण्विक भार वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं। इस तथ्य को समझाइए।
उत्तर
समतुल्य अणुभार वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं क्योंकि ऐल्कोहॉल अणु जल के साथ हाइड्रोजन आबन्धन बनाते हैं तथा जल के अणुओं के मध्य पहले से उपस्थित H-आबन्धों को तोड़ भी सकते हैं। हाइड्रोकार्बन ऐसा नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 6.
हाइड्रोबोरॉनीकरण-ऑक्सीकरण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
डाइबोरेन का ऐल्कीनों से योग द्वारा ट्राइऐल्किलबोरेन का निर्माण तथा इसके क्षारीय H2O2 द्वारा ऑक्सीकरण से ऐल्कोहॉल का निर्माण, यह अभिक्रिया हाइड्रोबोरॉनीकरण-ऑक्सीकरण कहलाती है।
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प्रश्न 7.
आण्विक सूत्र C7H8O वाले मोनोहाइड्रिक फीनॉलों की संरचनाएँ तथा आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नाम लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 8.
ऑर्थों तथा पैरा-नाइट्रोफीनॉलों के मिश्रण को भाप-आसवन द्वारा पृथक करने में भाप-वाष्पशील समावयवी का नाम बताइए। इसका कारण दीजिए।
उत्तर
o-नाइट्रोफीनॉल अन्त:अणुक हाइड्रोजन आबन्धन (intra-molecular hydrogen bonding) के कारण भाप वाष्पशील होता है, जबकि p-नाइट्रोफीनॉल अन्तरा-अणुक हाइड्रोजन आबन्धन (intermolecular hydrogen bonding) के कारण कम वाष्पशील होता है।

प्रश्न 9.
क्यूमीन से फीनॉल बनाने की अभिक्रिया का समीकरण दीजिए। (2018)
उत्तर
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प्रश्न 10.
क्लोरोबेन्जीन से फीनॉल बनाने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। (2018)
उत्तर
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प्रश्न 11.
एथीन के जलयोजन से एथेनॉल प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर
किसी अम्ल की उपस्थिति में एथीन का जल से सीधा योग नहीं होता है। एथीन को सर्वप्रथम सान्द्र H2SO4 में प्रवाहित किया जाता है जिससे एथिल हाइड्रोजन सल्फेट बनता है।
H2SO4 → H+ + [latex]\overset { – }{ O } [/latex]SO2OH
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एथिल हाइड्रोजन सल्फेट एथिल हाइड्रोजन सल्फेट को जल के साथ उबालकर जल-अपघटन करने पर एथेनॉल बनता है।
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प्रश्न 12.
आपको बेन्जीन, सान्द्र H2SO4 और NaOH दिए गए हैं। इन अभिकर्मकों के उपयोग द्वारा फीनॉल के विरचन की समीकरण लिखिए। (2013, 18)
उत्तर
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प्रश्न 13.
आप निम्नलिखित को कैसे संश्लेषित करेंगे? दर्शाइए।

  1. एक उपयुक्त ऐल्कीन से 1-फेनिलएथेनॉल
  2. SN 2 अभिक्रिया द्वारा ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल
  3. एक उपयुक्त ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से पेन्टेन-1-ऑल।

उत्तर
1. तनु H2SO4 की उपस्थिति में एथिनिलबेन्जीन से जल का योग 1-फेनिलएथेनॉल देता है।
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2. जलीय NaOH द्वारा साइक्लोहेक्सिलमेथिल ब्रोमाइड का जल-अपघटन साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल देता है।
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3. जलीय NaOH द्वारा 1-ब्रोमोप्रोपेन का जल-अपघटन प्रोपेन-1-ऑल देता है।
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प्रश्न 14.
ऐसी दो अभिक्रियाएँ दीजिए जिनसे फीनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित होती हो, फीनॉल की अम्लता की तुलना एथेनॉल से कीजिए।
उत्तर
फीनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित करने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं –
(i) सोडियम से अभिक्रिया (Reaction with sodium) – फीनॉल सक्रिय धातुओं; जैसे–सोडियम से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन मुक्त करता है।
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(ii) NaOH से अभिक्रिया (Reaction with NaOH) – फीनॉल NaOH में घुलकर सोडियम फीनॉक्साइड तथा जल बनाता है।
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फीनॉल तथा एथेनॉल की अम्लता की तुलना
(Comparison of Acidity of Phenol and Ethanol)
एथेनॉल की तुलना में फीनॉल अधिक अम्लीय होता है। इसका कारण यह है कि फीनॉल से एक प्रोटॉन निकल जाने के बाद प्राप्त फोनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेता है, जबकि एथॉक्साइड आयन (एथेनॉल से एक प्रोटॉन निकलने के बाद) स्थायी नहीं होता है।
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प्रश्न 15.
समझाइए कि ऑर्थों-नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थों-मेथॉक्सीफीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होता है।
उत्तर
NO2 समूह के प्रबल –R तथा -[ प्रभाव के कारण O-H आबन्ध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घट जाता है, अत: प्रोटॉन आसानी से मुक्त हो जाता है।
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प्रोटॉन त्यागने के पश्चात् शेष बचा o-नाइट्रोफीनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त करता है।
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ऑर्थों-नाइट्रोफीनॉक्साइड आयन अनुनाद स्थायी होता है, अत: 0- नाइट्रोफीनॉल एक प्रबल अम्ल है। दूसरी तरफ OCH3 समूह के +R प्रभाव के कारण O–H आबन्ध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है, अत: प्रोटॉन का निष्कासन कठिन हो जाता है।
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अब o- मेथॉक्सीफोनॉक्साइड आयन जो कि प्रोटॉन के खोने के बाद शेष रहता है, अनुनाद के कारण विस्थायी (destablized) हो जाता है।
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दो ऋणावेश परस्पर प्रतिकर्षित करते हैं तथा 0-मेथॉक्सीफीनॉक्साइड आयन को विस्थायी (destablize) करते हैं, अत: o-नाइट्रोफीनॉल, o-मेथॉक्सीफीनॉल से अधिक अम्लीय होता है।

प्रश्न 16.
समझाइए कि बेन्जीन वलय से जुड़ा–OH समूह उसे इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति कैसे सक्रियित करता है?
उत्तर
फीनॉल को निम्नलिखित संरचनाओं को अनुनादी संकर माना जाता है –
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–OH समूह का + R प्रभाव बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देता है जिससे इलेक्ट्रॉनस्नेही की आक्रमण सरल हो जाता है। अतः –OH समूह की उपस्थिति से बेन्जीन वलय इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन क्रियाओं के प्रति सक्रियित होती है। चूंकि ऑथों तथा पैरा स्थानों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व आपेक्षिक रूप से उच्च होता है, अत: इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन मुख्यत: ऑर्थों तथा पैरा स्थानों पर अधिक होता है।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण दीजिए –
(i) प्रोपेन-1-ऑल का क्षारीय KMnO4 के साथ ऑक्सीकरण
(ii) ब्रोमीन की CS2 में फीनॉल के साथ अभिक्रिया
(iii) तनु HNO3 की फीनॉल से अभिक्रिया
(iv) फीनॉल की जलीय NaOH की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म के साथ अभिक्रिया।
उत्तर
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए –

  1. कोल्बे अभिक्रिया (2018)
  2. राइमर-टीमैन अभिक्रिया
  3. विलियमसन ईथर संश्लेषण
  4. असममित ईथर।

उत्तर
1. पाठ्यनिहित प्रश्न संख्या 9 (ii) देखिए।
2. पाठ्यनिहित प्रश्न संख्या 9 (i) देखिए।
3. विलियमसन ईथर संश्लेषण (Williamson Ether Synthesis) – यह सममित और असममित ईथरों को बनाने की एक महत्त्वपूर्ण प्रयोगशाला विधि है। इस विधि में ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।
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प्रतिस्थापित (द्वितीयक अथवा तृतीयक) ऐल्किल समूह युक्त ईथर भी इस विधि द्वारा बनाए जा सकते हैं। इस अभिक्रिया में प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड पर ऐल्कॉक्साइड आयन का (SN 2) आक्रमण होता है।
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यदि ऐल्किल हैलाइड प्राथमिक होता है तो अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्किल हैलाइडों की अभिक्रिया में विलोपन, प्रतिस्पर्धा में प्रतिस्थापन से आगे होता है। यदि तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का उपयोग किया जाए तो उत्पाद के रूप में केवल ऐल्कीन प्राप्त होती है तथा कोई ईथर नहीं बनता। उदाहरणार्थ– CH3ONa की (CH3)3C-BF के साथ अभिक्रिया द्वारा केवल 2-मेथिलप्रोपीन प्राप्त होती है।
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4. असममित ईथर (Unsymmetrical ethers) – यदि ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े ऐल्किल या ऐरिल समूह भिन्न-भिन्न होते हैं तो ईथर को असममित ईथर कहा जाता है। उदाहरणार्थ– एथिल मेथिल ईथर, मेथिल फेनिल ईथर आदि।
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प्रश्न 19.
एथेनॉल के अम्लीय निर्जलन से एथीन प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर
क्रियाविधि (Mechanism) – एथेनॉल के अम्लीय निर्जलन से एथीन प्राप्त करने की क्रियाविधि निम्नलिखित पदों में सम्पन्न होती है –
प्रथम पद : प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल का बनना (Formation of protonated alcohol) –
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द्वितीय पद : कार्बोधनायन का बनना (Formation of Carbocation) – यह सबसे धीमा पद है, अतः यह अभिक्रिया का दर निर्धारक पद होता है।
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तृतीय पद : प्रोटॉन के निकल जाने से एथीन को बनना (Formation of ethene by elimination of a proton) –
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प्रथम पद में प्रयुक्त अम्ल, अभिक्रिया के तृतीय पद में मुक्त हो जाता है। साम्य को दायीं ओर विस्थापित करने के लिए एथीन बनते ही निष्कासित कर ली जाती है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित परिवर्तनों को किस प्रकार किया जा सकता है?
(i) प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल
(ii) बेन्जिल क्लोराइड → बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड → प्रोपेन-1-ऑल
(iv) मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड → 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल।
उत्तर
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में प्रयुक्त अभिकर्मकों के नाम बताइए –

  1. प्राथमिक ऐल्कोहॉल का कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकरण
  2. प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऐल्डिहाइड में ऑक्सीकरण
  3. फीनॉल का 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफीनॉल में ब्रोमीनीकरण
  4. बेन्जिल ऐल्कोहॉल से बेन्जोइक अम्ल
  5. प्रोपेन-2-ऑल का प्रोपीन में निर्जलन ।
  6. ब्यूटेन-2-ऑन से ब्यूटेन-2-ऑल।

उत्तर

  1. अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट या उदासीन, अम्लीय या क्षारीय KMnO4
  2. पिरीडीनियम क्लोरोक्रोमेट (PCC), C5H5NH+Cr CrO3Cl (CH2Cl2 में)
    या पिरीडीनियम डाइक्रोमेट (PDC), (C5H5[latex]\overset { + }{ N }[/latex]H)2Cr2O7 (CH2Cl2 में)
  3. जलीय ब्रोमीन अर्थात् Br2/H2O
  4. अम्लीकृत या क्षारीय KMnO4
  5. सान्द्र H2SO4 (443 K पर)
  6. Ni/H2 या LiAlH4 या NaBH4

प्रश्न 22.
कारण बताइए कि मेथॉक्सीमेथेन की तुलना में एथेनॉल का क्वथनांक उच्च क्यों होता है?
उत्तर
ऋणविद्युती ऑक्सीजन परमाणु के हाइड्रोजन परमाणु से जुड़े होने के कारण एथेनॉल में अन्तरा-अणुक हाइड्रोजन आबन्धन पाया जाता है जिसके परिणामस्वरूप एथेनॉल संयुग्मी अणु के रूप में पाया जाता है। H-आबन्धों को तोड़ने के लिए ऊर्जा की अत्यधिक मात्रा की आवश्यकता पड़ती है। अतः एथेनॉल का क्वथनांक मेथॉक्सीमेथेन, जो कि हाइड्रोजन आबन्धन नहीं बनाता है, से उच्च होता है।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित ईथरों के आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) नाम दीजिए –
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उत्तर
(i) 1.एथॉक्सी-2-मेथिलप्रोपेन
(ii) 2-क्लोरो-1-मेथॉक्सीएथेन
(iii) 4.नाइट्रोऐनिसोल
(iv) 1-मेथॉक्सीप्रोपेन
(v) 4-एथॉक्सी-1,1-डाइमेथिलसाइक्लोहेक्सेन
(vi) एथॉक्सीबेन्जीन

प्रश्न 24.
निम्नलिखित ईथरों को विलियमसन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मकों के नाम एवं समीकरण लिखिए –
(i) 1-प्रोपॉक्सीप्रोपेन
(ii) एथॉक्सीबेन्जीन
(iii) 2-मेथॉक्सी-2-मेथिलप्रोपेन
(iv) 1-मेथॉक्सीएथेन।
उत्तर
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प्रश्न 25.
कुछ विशेष प्रकार के ईथरों को विलियमसन संश्लेषण द्वारा बनाने की सीमाओं को उदाहरणों से समझाइए।
उत्तर
विलियमसन संश्लेषण को तृतीयक ऐल्किल हैलाइडों को बनाने में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है, चूंकि इससे ईथर के स्थान पर ऐल्कीन प्राप्त होते हैं। उदाहरणार्थ– CH3ONa की (CH3)3C-Br के साथ अभिक्रिया द्वारा केवल 2-मेथिलप्रोपीन प्राप्त होती है।
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ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐल्कॉक्साइड ने केवल नाभिकरागी होते हैं, अपितु प्रबल क्षारक भी होते हैं। वे ऐल्किल हैलाइडों के साथ विलोपन, अभिक्रिया देते हैं।

प्रश्न 26.
प्रोपेन-1-ऑल से 1-प्रोपॉक्सीप्रोपेन को किस प्रकार बनाया जाता है? इस अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर
निम्नलिखित विधि का प्रयोग किया जाता है –
(a) विलियमसन संश्लेषण द्वारा (By Williamson synthesis)
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(b) 413 K पर 1-प्रोपेनॉल का सान्द्र H2SO4 के साथ निर्जलन द्वारा (By dehydration of 1-propanol with conc. H2SO4 at 413 K)
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प्रश्न 27.
द्वितीयकृ अथवा तृतीयक ऐल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन द्वारा ईथरों को बनाने की विधि उपयुक्त नहीं है। कारण बताइए।
उत्तर
प्राथमिक ऐल्कोहॉलों का ईथरों में अम्लीय निर्जलन SN 2 क्रियाविधि द्वारा होता है जिसमें ऐल्कोहॉल अणु का नाभिकस्नेही आक्रमण प्रोटॉनीकृत ऐल्कोहॉल अणु पर होता है।
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इन परिस्थितियों में द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉल ईथरों के स्थान पर ऐल्कीन देते हैं। प्रोटॉनीकृत ऐल्कोहॉल अणु पर ऐल्कोहॉल अणु का नाभिकस्नेही आक्रमण नहीं होता है। इसके स्थान पर प्रोटॉनीकृत द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉल जल का एक अणु खोकर स्थायी 2° तथा 3° कार्बोधनायन बनाते हैं। ये कार्बोधनायन वरीयता से H+ खोकर ऐल्कीन बनाते हैं।
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समान प्रकार से 3° ऐल्कोहॉल ईथरों के स्थान पर ऐल्कीन देते हैं।
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प्रश्न 28.
हाइड्रोजन आयोडाइड की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए –
(i) 1-प्रोपॉक्सीप्रोपेन
(ii) मेथॉक्सीबेन्जीन तथा
(iii) बेन्जिल एथिल ईथर।
उत्तर
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प्रश्न 29.
ऐरिल ऐल्किल ईथरों में निम्नलिखित तथ्यों की व्याख्या कीजिए –

  1. ऐल्कॉक्सी समूह बेन्जीन वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति सक्रियित करता है। तथा
  2. यह प्रवेश करने वाले प्रतिस्थापियों को बेन्जीन वलय की ऑर्थोएवं पैरास्थितियों की ओर निर्दिष्ट करता है।

उत्तर
1. ऐरिल ऐल्किल ईथरों में ऐल्कॉक्सी समूह +R प्रभाव के कारण बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देता है तथा बेन्जीन वलय को इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति सक्रिय करता है।
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2. चूँकि इलेक्ट्रॉन घनत्व m-स्थानों की तुलना में ऑर्थो तथा पैरा स्थानों पर अधिक हो जाता है, इसलिए इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ मुख्यत: ऑर्थों तथा पैरा स्थानों पर होती हैं।
उदाहरणार्थ
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ऐरोमैटिक ईथर फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐल्किलीकरण तथा फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐसिलीकरण अभिक्रियाएँ भी देते हैं।
उदाहरणार्थ
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 11 Alcohols Phenols and Ethers image 73

प्रश्न 30.
मेथॉक्सीमेथेन की HI के साथ अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर
मेथॉक्सीमेथेन तथा HI की सममोलर मात्राएँ मेथिल ऐल्कोहॉल तथा मेथिल आयोडाइड का मिश्रण बनाती हैं। अभिक्रिया की क्रियाविधि इस प्रकार है –
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यदि HI की अधिक मात्रा का प्रयोग किया जाता है तो द्वितीय पद में बना मेथेनॉल निम्नलिखित क्रियाविधि द्वारा मेथिल आयोडाइड में परिवर्तित हो जाता है –
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प्रश्न 31.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए –

  1. फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया-ऐनिसोल का ऐल्किलीकरण
  2. ऐनिसोल का नाइट्रीकरण
  3. एथेनोइक अम्ल माध्यम में ऐनिसोल का ब्रोमीनीकरण
  4. ऐनिसोल का फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐसीटिलीकरण।

उत्तर
1. फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया (Friedel-Crafts reaction) – ऐनिसोल फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया दर्शाता है अर्थात् निर्जलीय ऐलुमिनियम क्लोराइड (लुईस अम्ल) उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्किल हैलाइड से अभिक्रिया होने पर ऐल्किल समूह ऑर्थों तथा पैरास्थितियों पर निर्देशित हो जाता है।
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2. ऐनिसोल को नाइट्रीकरण (Nitration of Anisole) – ऐनिसोल की अभिक्रिया सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल तथा सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के मिश्रण से कराने पर ऑथों तथा पैरा-नाइट्रोऐनिसोल का मिश्रण प्राप्त होता है।
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3. एथेनोइक अम्ल के माध्यम में ऐनिसोल का ब्रोमीनीकरण ( हैलोजेनीकरण) [Bromination of Anisole in medium of Ethanoic Acid (Halogenation)] – फेनिलऐल्किल ईथर बेन्जीन वलय में सामान्य हैलोजेनीकरण दर्शाते हैं; उदाहरणार्थ– ऐनिसोल आयरन (II) ब्रोमाइड उत्प्रेरक की अनुपस्थिति में भी एथेनोइक अम्ल माध्यम में ब्रोमीन के साथ ब्रोमीनीकरण दर्शाता है। ऐसा मेथॉक्सी समूह द्वारा बेन्जीन वलय को सक्रियत करने के कारण होता है। पैरा समावयव की 90% मात्रा प्राप्त होती है।
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4. ऐनिसोल का फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐसीटिलीकरण (Friedel-Crafts acetylation of anisole) –
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प्रश्न 32.
उपयुक्त ऐल्कीनों से आप निम्नलिखित ऐल्कोहॉलों का संश्लेषण कैसे करेंगे?
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उत्तर
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4-मेथिलहेप्ट-3-ईन से अम्ल की उपस्थिति में H2O के योग से वांछित ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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पेन्ट-1-ईन से H2O का योग होने पर वांछित ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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अतः वांछित ऐल्कीन पेन्ट-2-ईन के स्थान पर पेन्ट-1-ईन होगा।
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इनमें से किसी भी ऐल्कीन से अम्ल की उपस्थिति में H2O के योग से वांछित ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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प्रश्न 33.
3-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल को HBr से अभिकृत कराने पर अग्रलिखित अभिक्रिया होती है –
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[संकेत-चरण II में प्राप्त द्वितीयक कार्बोकैटायन हाइड्राईड आयन विचलन के कारण पुनर्विन्यासित होकर स्थायी तृतीयक कार्बोकैटायन बनाते हैं।
उत्तर
दिए गए ऐल्कोहॉल के प्रोटॉनित होकर जल के अणु को निष्कासित करने पर 2° काबकैटायन (I) प्राप्त होता है जो अस्थायी होने के कारण 1,2-हाइड्राइड शिफ्ट द्वारा पुनर्व्यवस्थित होकर अधिक स्थायी 3° कार्बोकिटायन (II) देता है। इस कार्योकैटायन (II) पर Br आयन की नाभिकरागी अभिक्रिया अन्तिम उत्पाद देती है।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
ऐल्केनॉल समजात श्रेणी को प्रदर्शित करने वाला सामान्य सूत्र है
(i) CnH2n+2O
(ii) CnH2nO2
(iii) CnH2nO
(iv) CnH2n+1O
उत्तर
(i) CnH2n+2O

प्रश्न 2.
CH3-O-CH3 का सामान्य एवं IUPAC नाम क्या है? (2013)
(i) क्रमश: डाइमेथिल ईथर व मेथॉक्सी मेथेन
(ii) क्रमश: डाइमेथिल ईथर व मेथॉक्सी एथेन
(iii) क्रमश: डाइएथिल ईथर व मेथॉक्सी मेथेन
(iv) क्रमशः डाइएथिल ईथर व मेथॉक्सी एथेन
उत्तर
(i) क्रमश: डाइमेथिल ईथर व मेथॉक्सी मेथेन

प्रश्न 3.
ग्लूकोस को एथिल ऐल्कोहॉल में परिवर्तित करने के लिए प्रयुक्त एन्जाइम है – (2016)
(i) इनवटेंस
(ii) जाइमेस
(iii) डायस्टेस
(iv) ये सभी
उत्तर
(ii) जाइमेस

प्रश्न 4.
जब एक ऐल्कोहॉल सान्द्र H2SO4 से क्रिया करता है, तब निर्मित मध्यवर्ती है –
(i) कार्बोधनायन
(ii) ऐल्कॉक्सी आयन
(iii) ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फेट
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(i) कार्बोधनायन

प्रश्न 5.
तनु अम्ल की उपस्थिति में आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल वायु-ऑक्सीकृत होकर देता है –
(i) C6H5COOH
(ii) C6H5COCH3
(iii) C6H5CHO
(iv) C6H5OH
उत्तर
(iv) C6H5OH

प्रश्न 6.
फीनॉल पहले सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल से क्रिया करता है, फिर सान्द्र नाइट्रिक अम्ल से क्रिया करके देता है – (2017)
(i) p-नाइट्रोफीनॉल
(ii) नाइट्रोबेंजीन
(iii) 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रोबेंजीन
(iv) 0-नाइट्रोफीनॉल
उत्तर
(iv) 0-नाइट्रोफीनॉल

प्रश्न 7.
सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में फीनॉल को थैलिक ऐनहाइड्राइड के साथ गर्म करने पर बनता है – (2017)
(i) थैलिक अम्ल
(ii) फीनोन
(iii) क्वीनोन
(iv) फिनॉल्फ्थे लीन
उत्तर
(iv) फिनॉल्फ्थेलीन

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में पिक्रिक अम्ल है – (2017)
(i) ०-हाइड्रॉक्सी बेन्जोइक अम्ल
(ii) m-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iii) 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रो फीनॉल
(iv) ०, ऐमीनो बेन्जोइक अम्ल
उत्तर
(iii) 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रो फीनॉल

प्रश्न 9.
आयोडोफॉर्म परीक्षण देने वाला यौगिक है – (2017)
(i) CH3CH2COCH2CH3
(ii) (CH3)2CHOH
(iii) CH3CH2COC6H5
(iv) CH3CH2CH2-OH
उत्तर
(ii) (CH3)2CHOH

प्रश्न10.
ल्यूकास अभिकर्मक का प्रयोग मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल के विभेद में किया जाता है – (2017)
(i) प्राथमिक
(ii) द्वितीयक
(iii) तृतीयक
(iv) इनमें से सभी
उत्तर
(iv) इनमें से सभी

प्रश्न 11.
फीनॉल का 0.20% विलयन निम्न में से किस रूप में कार्य करता है? (2016)
(i) ऐन्टीसेप्टिक
(ii) प्रतिऑक्सीकारक
(iii) ज्वरनाशक
(iv) ऐन्टीबायोटिक
उत्तर
(i) ऐन्टीसेप्टिक

प्रश्न 12.
जब ऐल्किल हैलाइड को शुष्क Ag2O के साथ गर्म करते हैं, तब यह बनाता है –
(i) एस्टर।
(ii) ईथर
(iii) कीटोन
(iv) ऐल्कोहॉल
उत्तर
(ii) ईथर

प्रश्न13.
क्लोरोबेन्जीन की क्रिया क्यूप्रस ऑक्साइड की उपस्थिति में अमोनिया से कराने पर प्राप्त होता है – (2017)
(i) फीनॉल
(ii) एनिलीन
(iii) बेन्जीन
(iv) बेन्जोइक ऐसिड
उत्तर
(ii) ऐनिलीन

प्रश्न 14.
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(i) एथेन
(ii) एथिलीन
(iii) ब्यूटेन
(iv) प्रोपेन
उत्तर
(i) एथेन

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राथमिक ऐल्कोहॉल की तुलना में t-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल धात्विक सोडियम से कम तेजी से क्रिया करता है, क्यों?
उत्तर
तृतीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल में केन्द्रीय C-परमाणु पर उपस्थित तीन -CH3 समूहों की उपस्थिति के कारण यह आंशिक ऋणावेशित हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप यह O-H के इलेक्ट्रॉन युग्म को हाइड्रोजन परमाणु की ओर धकेलता है, अत: H-परमाणु आसानी से प्रतिस्थापित नहीं होता है।

प्रश्न 2.
C2H5OH तथा CH3OCH3 दोनों के अणुभार समान हैं किन्तु कमरे के ताप पर C2H5OH द्रव है तथा CH3OCH3 गैस है क्यों? (2015)
उत्तर
C2H5OH के अणुओं के मध्य अन्तराणुक हाइड्रोजन बन्ध बनता है जिसके कारण इसके अणुओं का संगुणन हो जाता है और यह द्रव अवस्था में रहता है जबकि CH3O-CH3 के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बंध नहीं है इसलिए यह गैस है।

प्रश्न 3.
दुर्बल ऐल्कोहॉल जल में विलेय होते हैं प्रबल ऐल्कोहॉल नहीं, क्यों?
उत्तर
दुर्बल ऐल्कोहॉल जल के साथ H-आबन्ध बनाते हैं, लेकिन प्रबल ऐल्कोहॉल वृहद् जलविरागी भाग के कारण H-आबन्ध नहीं बना सकते हैं।

प्रश्न 4.
क्या होता है जब एथेनॉल को 453 K पर सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म किया जाता है? अभिक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर
जब एथेनॉल को 453 K पर सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म किया जाता है, तब एथीन बनती है।
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प्रश्न 5.
सैटजैफ नियम को उदाहरण सहित लिखिए। (2017)
उत्तर
मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल को सान्द्र H2SO4 के साथ 160 – 170°C पर गर्म करने पर ऐल्कोहॉल का –OH तथा α-hydrogen परमाणु मिलकर H2O के अणु के रूप में निकल जाते हैं तथा एथिलीन बनती हैं।
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प्रश्न 6.
आप मेथिल ऐल्कोहॉल और एथिल ऐल्कोहॉल में विभेद कैसे करेंगे? (केवल एक रासायनिक परीक्षण तथा अभिक्रिया का समीकरण दीजिए)। (2013, 16)
उत्तर
मेथिल ऐल्कोहॉल और एथिल ऐल्कोहॉल में विभेद आयोडोफॉर्म परीक्षण द्वारा किया जा सकता है। एथिल ऐल्कोहॉल को जब आयोडीन तथा जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड या जलीय सोडियम कार्बोनेट विलयन के साथ गर्म करते हैं तो पीला क्रिस्टलीय ठोस आयोडोफॉर्म बनता है।
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मेथिल ऐल्कोहॉल आयोडोफॉर्म परीक्षण नहीं देता है।

प्रश्न 7.
एथेनॉल के उपयोग लिखिए। (2016)
उत्तर
एथेनॉल के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं –

  1. मेथिलित स्पिरिट बनाने में।
  2. पेन्ट, वार्निश, गोंद, सल्फर, आयोडीन आदि के विलयन के रूप में।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित यौगिकों को अम्ल की बढ़ती हुई प्रबलता के क्रम में लिखिए- (2015)
(i) Phenol
(ii) 0-Cresol
(iii) m-Cresol
(iv) p-Cresol
उत्तर
o-Cresol < p-Cresol < m-Cresol < Phenol अम्ल की प्रबलता का बढ़ता हुआ क्रम है।

प्रश्न 9.
फीनॉल का लीबरमान अभिक्रिया द्वारा परीक्षण लिखिए। (2013, 18)
उत्तर
जब फीनॉल सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल में घुले सोडियम नाइट्राइट से अभिक्रिया करता है तो नीला या हरा रंग प्रकट होता है। क्रियाकारी मिश्रण को जल से तनु करने पर रंग लाल हो जाता है तथा आधिक्य में NaOH मिलाने पर रंग पुनः नीला हो जाता है। इस अभिक्रिया को ही लीबरमान अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 10.
आण्विक सूत्र C4H10O वाले सभी सम्भव ईथरों के संरचना सूत्र लिखिए। (2017, 18)
उत्तर
(i) C2H5-O-C2H5 डाइएथिल ईथर
(ii) CH3-O-CH2-CH2-CH3 मेथिल n-प्रोपिल ईथर
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प्रश्न 11.
उदाहरण देते हुए समझाइए कि ईथर लूइस-बेस के समान व्यवहार करता है और अम्लों के साथ क्रिया करके ऑक्सोनियम लवण बनाता है। (2014)
उत्तर
ईथर अणु में ऑक्सीकरण परमाणु पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होते हैं जिसके कारण यह प्रबल अम्लों के प्रति क्षारक जैसा व्यवहार प्रदर्शित करता है। ईथर (C2H5-O-C2H5) सान्द्र H2SO4 के साथ ऑक्सोनियम लवण बनाता है।
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प्रश्न 12.
ईथर पर क्लोरीन की अभिक्रिया निरूपित कीजिए। (2009, 10)
उत्तर
ईथरों की क्रिया क्लोरीन से कराने पर ईथरों में कार्बन परमाणु पर प्रतिस्थापन होता है। उदाहरणार्थ– डाइएथिल ईथर अंधेरे में क्लोरीन से क्रिया करके 1, 1 -डाइक्लोरो- डाइएथिल ईथर बनाता है।
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प्रकाश की उपस्थिति में परक्लोरोडाइएथिल ईथर बनता है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यौगिक C4H10O एक ऐल्केन की H2SO4/H2O के साथ क्रिया से निर्मित होता है जो कि प्रकाशिक समावयवियों में पृथक नहीं होता है। यौगिक की पहचान कीजिए।
उत्तर
सूत्र सुझाता है कि यौगिक एक ऐल्कोहॉल है। चूंकि यह समावयवियों में पृथक् नहीं होता है अतः यह सममित है तथा यह तृतीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल है। संगत ऐल्केन आइसोब्यूटेन है। ऐल्कोहॉल का निर्माण निम्नवत् होता है –
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प्रश्न 2.
मेथिल ऐल्कोहॉल बनाने की दो विधियों का वर्णन कीजिए। आवश्यक रासायनिक समीकरण भी लिखिए मेथिल ऐल्कोहॉल से डाइमेथिल ईथर कैसे प्राप्त करेंगे? (2016)
उत्तर
मेथिल ऐल्कोहॉल बनाने की दो विधियाँ निम्नवत् हैं –
1. मेथेन के ऑक्सीकरण द्वारा मेथिल ऐल्कोहॉल का निर्माण – मेथेन और ऑक्सीजन के 9 : 1 (आयतन से) मिश्रण को 100 वायुमण्डल दाब और 200°C ताप पर कॉपर की नली में से प्रवाहित करने पर मेथेन का मेथिल ऐल्कोहॉल में ऑक्सीकरण होता है।
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2. कार्बन मोनॉक्साइड के हाइड्रोजनीकरण द्वारा मेथिल ऐल्कोहॉल का निर्माण – उच्च ताप (300- 400°C) और उच्च दाब (200- 300 atm) पर ZnO – Cr2O3 उत्प्रेरक की उपस्थिति में कार्बन मोनॉक्साइड का हाइड्रोजनीकरण करने पर मेथिल ऐल्कोहॉल बनता है।
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मेथिल ऐल्कोहॉल से डाइमेथिल ईथर का निर्माण – मेथिल ऐल्कोहॉल की अधिकता में 140°C पर डाइमेथिल ईथर बनता है।
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प्रश्न 3.
मेथिल ऐल्कोहॉल से एथिल ऐल्कोहॉल कैसे प्राप्त करेंगे? (2015, 16)
उत्तर
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प्रश्न 4.
प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉलों में विभेद करने वाला एक रासायनिक परीक्षण लिखिए। समीकरण भी दीजिए। (2009)
या
ल्यूकास परीक्षण क्या है ? यह किस प्रकार के यौगिकों की पहचान में उपयोगी है? (2010, 12, 17, 18)
उत्तर
ल्यूकास परीक्षण – यह प्राइमरी, सेकण्डरी तथा टर्शियरी ऐल्कोहॉलों में विभेद करने की अत्यन्त सरल विधि है। यह भिन्न-भिन्न ऐल्कोहॉलों की ‘ल्यूकास अभिकर्मक’ (सान्द्र HCl + निर्जल ZnCl2) के प्रति भिन्न-भिन्न गति से अभिक्रिया करने पर आधारित है। किसी ऐल्कोहॉल में ल्यूकास अभिकर्मक मिलाने पर ऐल्किल क्लोराइड बनते हैं जिससे धुंधलापन उत्पन्न होता है। इस प्रकार,
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  1. कमरे के ताप पर टर्शियरी ऐल्कोहॉल तुरन्त धुंधलापन उत्पन्न करते हैं।
  2. कमरे के ताप पर सेकण्डरी ऐल्कोहॉल 5-10 मिनट बाद धुंधलापन उत्पन्न करते हैं।
  3. कमरे के ताप पर प्राइमरी ऐल्कोहॉल धुंधलापन उत्पन्न नहीं करते हैं; अत: विलयन पारदर्शक होता है।

प्रश्न 5.
सोडियम एथॉक्साइड तथा निर्जल ऐल्कोहॉल की उपस्थिति में फीनॉल तथा एथिल आयोडाइड की क्रिया से प्राप्त मुख्य उत्पाद डाइएथिल ईथर होता है, फेनीटोल नहीं। क्यों?
उत्तर
एथॉक्साइड आयन की उपस्थिति में फीनॉल फीनेट आयन (C6H5O) में परिवर्तित हो जाता है, इस पर नाभिकस्नेही C2H5I के आक्रमण से अपेक्षित फेनीटोल प्राप्त होना चाहिए लेकिन C2H5O, C6H5O की तुलना में फेनिल समूह की इलेक्ट्रॉन निष्कासक (electron withdrawing) प्रवृत्ति के कारण प्रबल नाभिकस्नेही (nucleophile) होता है, अत: C2H5O आयन C2H5I से क्रिया करके उत्पाद में डाइएथिल ईथर बनाता है।
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फेनीटोल (C6H5-O-C2H5) लघु मात्रा में बन सकता है।

प्रश्न 6.
ऐल्कोहॉल, फीनॉल तथा ईथर के प्रमुख उपयोग लिखिए। (2016)
उत्तर
ऐल्कोहॉल के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं

  1. मेथिल ऐल्कोहॉल तथा गैसोलीन का 20% मिश्रण एक श्रेष्ठ मोटर ईंधन है।
  2. इसका प्रयोग तेल, वसा तथा वार्निश के विलायक के रूप में किया जाता है।
  3. इसका प्रयोग स्वचालित वाहनों के रेडिएटरों में प्रतिशीतलक के रूप में किया जाता है।
  4. इसका प्रयोग रंजक, औषधियों तथा सुगन्धियों के निर्माण में किया जाता है।
  5. इसका प्रयोग टेरीलीन तथा पॉलीथीन के निर्माण में भी होता है।
  6. इसका प्रयोग ऐल्कोहॉलीय पेय पदार्थ बनाने में किया जाता है।

फीनॉल के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं

  1. इसका प्रयोग पिक्रिक अम्ल (विस्फोटक) के निर्माण में तथा रेशम व ऊन के रंजन में किया जाता है।
  2. इसका प्रयोग साइक्लोहेक्सेनॉल विलायक के निर्माण में किया जाता है।
  3. इसका प्रयोग साबुन, लोशन तथा आयण्टमेण्ट में ऐण्टिसेप्टिक के रूप में किया जाता है।
  4. इसका प्रयोग ऐजो रंजक, फीनॉल्फ्थेलीन आदि के निर्माण में किया जाता है।
  5. इसका प्रयोग बैकेलाइट प्लास्टिक के निर्माण में किया जाता है।
  6. इसका प्रयोग ऐस्प्रिन, सेलॉल आदि औषधियों के निर्माण में किया जाता है।

ईथरों के प्रमुख उपयोग निम्नवत् हैं

  1. इनका सर्वाधिक प्रयोग प्रयोगशाला एवं उद्योगों में तेल, रेजिन, गोद आदि के विलायकों के रूप में किया जाता है।
  2. ईथर ग्रिगनार्ड अभिकर्मकों के बनाने तथा वुज अभिक्रिया में अभिकर्मक के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
  3. ईथर का प्रयोग ‘सामान्य बेहोशीकारक (anaesthetic) के रूप में किया जाता है।
  4. ऐल्कोहॉल तथा ईथर के मिश्रण का प्रयोग पेट्रोल के विकल्प के रूप में किया जाता है।
  5. ईथर का प्रयोग प्रशीतक के रूप में किया जाता है क्योंकि यह वाष्पन पर ठण्डक उत्पन्न करता है। ईथर तथा शुष्क बर्फ (ठोस CO2) -110°C ताप उत्पन्न करता है।
  6. ईथर का प्रयोग धुआँरहित (smokeless) पाउडर बनाने में करते हैं। इनका प्रयोग सुगन्धी उद्योग में भी किया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को समझाइए – (2015)

  1. ऐल्कोहॉलों का अणुभार बढ़ने पर जल में इनकी विलेयता घटती है।
  2. पावर ऐल्कोहॉल क्या है? उसका उपयोग क्या है?
  3. फीनॉल अम्लीय होते हैं। क्यों? (2009, 11, 12, 13, 17)

उत्तर

  1. क्योंकि ऐल्किल समुह जलविरोधी होते हैं तथा जल में अविलेय हैं। निम्न ऐल्कोहॉल में ऐल्किल समूह छोटा होता है तथा ऐल्कोहॉल का -OH समूह अणु को जल में विलेय बनाने में प्रभावी रहता है। जैसे-जैसे ऐल्किल समूह का आकार बढ़ता है उच्च अणुभार के ऐल्कोहॉलों में ऐल्किल समूह की जल विरोधी प्रकृति -OH समूह की जल स्नेही प्रकृति पर प्रभावी होती जाती है इसलिए विलेयता घटती है।
  2. परिशोधित स्पिरिट बेंजीन की उपस्थिति में पेट्रोल में मिश्रित हो जाती है। पेट्रोल + औद्योगिक ऐल्कोहॉल और बेंजीन का मिश्रण मोटर ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। यह मिश्रण पावर
    ऐल्कोहॉल कहलाता है।
  3. फीनॉल को जल में घोलने पर यह H+ आयन तथा फीनॉक्साइड आयन देता है जो अनुनाद के कारण स्थायी होता है इसलिए फीनॉल अम्लीय गुण प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 2.
स्टार्च से एथिल ऐल्कोहॉल उत्पादन की औद्योगिक विधि का वर्णन कीजिए। सम्बन्धित रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। परिशुद्ध ऐल्कोहॉल उत्पादन कैसे किया जाता है? (2009, 11, 12, 13)
उत्तर
स्टार्च से एथिल ऐल्कोहॉल के निर्माण में आलू, चावल, जौ आदि स्टार्चयुक्त पदार्थ कच्चे पदार्थ के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
1. स्टार्च से वाश बनाना – अंकुरित जौ को उबालकर, पीसकर छानने से प्राप्त निष्कर्ष को माल्ट-निष्कर्ष (malt-extract) कहते हैं। इसमें डायस्टेस एन्जाइम होता है। स्टार्चयुक्त पदार्थों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर वे कुचलकर उच्च दाब तथा 150°C ताप पर भाप में गर्म करते हैं, जिससे एक पेस्ट बन जाता है। इस पदार्थ को मैश (mash) कहते हैं। इसमें स्टार्च होता है। मैश में माल्ट-निष्कर्ष मिलाकर उसे 50-60°C पर गर्म करते हैं। माल्ट-निष्कर्ष में उपस्थित डायस्टेस एन्जाइम स्टार्च को माल्टोस नामक शर्करा में जल-अपघटित कर देता है।
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माल्टोस के तनु विलयन में यीस्ट मिलाने पर, यीस्ट में उपस्थित माल्टेस एन्जाइम, माल्टोस को ग्लूकोस में जल अपघटित कर देता है, जिसे यीस्ट में उपस्थित जाइमेस एन्जाइम, एथिल ऐल्कोहॉल में अपघटित कर देता है, इससे प्राप्त विलयन को वाश कहते हैं, जिसमें लगभग 10% एथिल ऐल्कोहॉल होता है।
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2. वाश से शुद्ध एथिल ऐल्कोहॉल प्राप्त करना – वाश के प्रभाजी आसवन से एथिल ऐल्कोहॉल कॉफे भभके (Coffey’s still) द्वारा प्राप्त किया जाता है। इस भभके में दो प्रभाजक स्तम्भ होते हैं, इनमें एक विश्लेषक (analyser) और दूसरा परिशोधक (rectifier) कहलाता है। विश्लेषक तथा परिशोधक एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। विश्लेषक ताँबे की प्लेटों द्वारा कई खानों में विभक्त रहता है। जिनके तल समान्तर रहते हैं। इन प्लेटों में छिद्र होते हैं, जिनमें ऊपर की ओर खुलने वाले वाल्व लगे। होते हैं। प्रत्येक से एक नली निकलकर अपने से नीचे वाले प्याले में डूबी रहती है। परिशोधक (rectifier) का निचला आधा अंश भी विश्लेषक (analyser) की भाँति इसी प्रकार खानों में विभक्त होता है।

वाश को शोधन में ले जाने वाली सर्पाकार नली में पम्प द्वारा विश्लेषक के ऊपर पहुँचाकर नीचे छोड़ा जाता है। विश्लेषक में नीचे से ऊपर की ओर भाप प्रवाहित की जाती है, जो नीचे आने वाले द्रव के वाष्पशील द्रव को वाष्पों में बदलकर ऊपर ले जाती है। यह वाष्प विश्लेषक से लगी नली द्वारा परिशोधक के नीचे पहुँचती है और फिर परिशोधक में ऊपर उठती है। परिशोधक के ऊपर एक नली लगी होती है जो एक संघनित्र से जुड़ी होती है। ऊपर आने वाली वाष्प इस नली से होती हुई परिशोधक के ऊपर पहुँचती है और ठण्डी होकर द्रवित हो जाती है। जिसमें 95.6% एथिल ऐल्कोहॉल होता है। इसको परिशोधित स्पिरिट (rectified spirit) कहते हैं। विश्लेषक (analyser) के पेंदे में बचा हुआ पदार्थ स्पेन्ट वाश (spent wash) कहलाता है।
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3. परिशोधित स्पिरिट का शोधन – कॉफे भभके से प्राप्त परिशोधित स्पिरिट में जल के अतिरिक्त, ग्लिसरीन, सक्सिनिक अम्ल, ऐसीटेल्डिहाइड और फ्यूजेल तेल आदि अशुद्धियाँ मिली होती हैं। इन | अशुद्धियों को दूर करने के लिए पहले परिशोधित स्पिरिट को कोयले के छन्ने में छान लेते हैं और फिर इसका प्रभाजी आसवन करते हैं। प्रभाजी आसवन से मुख्य तीन अंश मिलते हैं –

  1. प्रथम अंश-इसमें ऐसीटेल्डिहाइड होता है।
  2. द्वितीय अंश-इसमें 95.6% शुद्ध एथिल ऐल्कोहॉल तथा 4.4% जल होता है।
  3. अन्तिम अंश-इसमें फ्यूजेल तेल होता है। यह बहुत विषैला पदार्थ होता है, जिसके मिलाने पर एथिल ऐल्कोहॉल दवाइयाँ बनाने के लिए अयोग्य हो जाता है।

4. व्यापारिक मात्रा में परिशुद्ध ऐल्कोहॉल बनाना – परिशोधित स्पिरिट और बेंजीन के मिश्रण का प्रभाजी आसवन करने से 64.8°C पर जल, ऐल्कोहॉल तथा बेंजीन को स्थिर क्वथनी मिश्रण (constant boiling mixture) प्राप्त होता है। फिर 68.30°C पर बेंजीन तथा ऐल्कोहॉल का स्थिर क्वथनी मिश्रण अलग हो जाता है। इस मिश्रण को पुनः आसवित करने पर 78.3°C पर परिशुद्ध ऐल्कोहॉल पृथक् हो जाता है।

प्रश्न 3.
मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल बनाने की दो सामान्य विधियाँ लिखिए और एथिल ऐल्कोहॉल की सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ भिन्न तापों पर अभिक्रिया लिखिए। उपर्युक्त अभिक्रियाओं से सम्बन्धित सभी समीकरण भी दीजिए। (2016)
उत्तर
मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल बनाने की सामान्य विधियाँ निम्नलिखित हैं –
1. ऐल्किल हैलाइडों के जल-अपघटन द्वारा – ऐल्किल हैलाइड (RX) को जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड या नम (moist) सिल्वर ऑक्साइड के साथ गर्म करने पर ऐल्कोहॉल बनता है।
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2. एस्टरों के जल-अपघटन द्वारा – एस्टर का सोडियम हाइड्रॉक्साइड या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड विलयन द्वारा जल-अपघटन करने पर कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण और ऐल्कोहॉल बनते हैं।
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3. प्राथमिक ऐमीनों की नाइट्रस अम्ल से क्रिया द्वारा – ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन की नाइट्रस अम्ल (NaNO2 + HCl) से क्रिया कराने पर ऐल्कोहॉल बनता है और नाइट्रोजन गैस निकलती है।
NaNO2 + HCl → NaCl + HNO2
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उदाहरणार्थ– एथिलऐमीन की नाइट्रस अम्ल (NaNO2 + HCl) से क्रिया कराने पर एथिल ऐल्कोहॉल बनता है और नाइट्रोजन गैस निकलती है।
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4. ऐल्कीनों के जलयोजन द्वारा – सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल में ऐल्कीन को अवशोषित करने पर ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फेट बनता है, जिसका जल-अपघटन करने पर ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
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एथिल ऐल्कोहॉल की सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया – एथिल ऐल्कोहॉल पर सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया से भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न पदार्थ बनते हैं।
(i) एथिल ऐल्कोहॉल और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण को 100°C पर गर्म करने पर एथिल हाइड्रोजन सल्फेट बनता है।
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एथिल हाइड्रोजन सल्फेट का समानीत दाब (reduced pressure) पर आसवन करने पर एथिल सल्फेट बनता है।
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(ii) एथिल ऐल्कोहॉल के आधिक्य को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ 140°C पर गर्म करने पर डाइ एथिल ईथर बनता है। अभिक्रिया अग्रलिखित पदों में होती है –
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(iii) एथिल ऐल्कोहॉल को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के आधिक्य में 170-180°C पर गर्म करने पर एथिलीन बनती है।
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प्रश्न 4.
प्रयोगशाला में डाइ एथिल ईथर बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। सम्बन्धित रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। इस विधि को अविरत ईथरीकरण विधि क्यों कहते हैं? इसके मुख्य रासायनिक गुण भी दीजिए। (2010)
या
डाइ एथिल ईथर बनाने की प्रयोगशाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। सम्बन्धित अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी दीजिए। इसकी अंधेरे में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया का समीकरण दीजिए। (2009, 12, 16, 17)
या
ईथर की शुद्धता का परीक्षण कैसे करेंगे? (2012)
उत्तर
प्रयोगशाला में डाइ एथिल ईथर, एथिल ऐल्कोहॉल के आधिक्य और सान्द्र H2SO4 को 140°C पर गर्म करके बनाया जाता है।
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एक गोल पेंदी के फ्लास्क में C2H5OH और सान्द्र H2SO4, 2 : 1 के अनुपात में लेकर उपकरण को चित्रानुसार लगाया जाता है। फ्लास्क को बालू ऊष्मक पर 140-145°C तक गर्म करते हैं जिससे ईथर बर्फ के जल में रखे ग्राही पात्र में एकत्र होने लगता है। इस विधि को अविरत ईथरीकरण विधि कहते हैं, क्योंकि एथिल ऐल्कोहॉल और सल्फ्यूरिक अम्ल के गर्म मिश्रण में एथिल ऐल्कोहॉल डालकर ईथर लगातार प्राप्त किया जा सकता है।
इस प्रकार प्राप्त आसवित ईथर में अल्प मात्रा में H2SO4, ऐल्कोहॉल और जल की अशुद्धियाँ मिली रहती हैं। इसके लिए ईथर को कास्टिक सोडा विलयन के साथ धोते हैं फिर इसमें निर्जल CaCl2 डालकर रख देते हैं। इसके बाद छानकर आसवित करने पर 34-35°C पर शुद्ध एवं शुष्क ईथर एकत्र कर लिया जाता है।

1. PCl5 से क्रिया – एथिल क्लोराइड बनता है।
C2H5OC2H5 + PCl5 → 2C2H5Cl + POCl3

2. अंधेरे में ईथर क्लोरीन और ब्रोमीन के साथ हैलोजनीकृत व्युत्पन्न देता है।
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3. H2O के साथ अभिक्रिया – ईथर साधारण परिस्थितियों में अम्लों या क्षारों द्वारा जल अपघटित नहीं होते हैं। तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ उच्च दाब और उच्च ताप पर गर्म करने पर डाइएथिल ईथर बहुत कठिनाई से एथिल ऐल्कोहॉल में जल अपघटित होता है।
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4. ठण्डे HI के साथ अभिक्रिया – डाइ एथिल ईथर की ठण्डे सान्द्र हाइड़िऑडिक अम्ल (HI) से क्रिया कराने पर एक अणु एथिल आयोडाइड और एक अणु एथिल ऐल्कोहॉल बनता है।
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ईथर की शुद्धता का परीक्षण – ईथर की शुद्धता का परीक्षण पोटेशियम आयोडाइड विलयन द्वारा करते हैं। यदि ईथर में पोटैशियम आयोडाइड डालने पर आयोडीन मुक्त होती है तो ईथर अशुद्ध है। शुद्ध ईथर में आयोडीन मुक्त नहीं होती है।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers (बहुलक) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 15 Polymers (बहुलक).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 15
Chapter Name Polymers
Number of Questions Solved 75
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers (बहुलक)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बहुलक क्या होते हैं? (2018)
उत्तर :
ऐसे वृहदाणु (macromolecules) जो कि पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयों के वृहत पैमाने पर जुड़ने से बनते हैं बहुलक कहलाते हैं। बहुलकों के कुछ उदाहरण हैं-पॉलिथीन, नाइलॉन-6, 6, बैकलाइट, रबर आदि।

प्रश्न 2.
संरचना के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?
उत्तर :
संरचना के आधार पर बहुलक तीन प्रकार के होते हैं
(1) रैखिक बहुलक (Linear polymers) :
इन बहुलकों में लम्बी और रेखीय श्रृंखलाएँ होती हैं। उच्च घनत्व पॉलिथीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड आदि इसके उदाहरण हैं। इन्हें निम्नानुसार निरूपित करते हैं
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers image 1
(2) शाखित श्रृंखला बहुलक (Branched chain polymers) :
इन बहुलकों में रेखीय श्रृंखलाओं में कुछ शाखाएँ होती हैं। उदाहरण-निम्न घनत्व पॉलिथीन। इन्हें निम्नांकित प्रकार से चित्रित करते
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(3) तिर्यकबन्धित अथवा जालक्रम बहुलक (Cross linked polymers) :
यह साधारणत: द्विक्रियात्मक और त्रिक्रियात्मक समूहों वाले एकलकों से बनते हैं तथा विभिन्न रेखीय बहुलक श्रृंखलाओं के बीच प्रबल सहसंयोजक बन्ध होते हैं।
उदाहरणार्थ :
बँकेलाइट, मेलैमीन आदि। इन बहुलकों को व्यवस्थात्मक रूप में निम्नलिखित प्रकार से प्रदर्शित करते हैं
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित बहुलकों को बनाने वाले एकलकों के नाम लिखिए
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उत्तर :
(i) हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन, (H2N – (CH2)6– NH2) और ऐडिपिक अम्ल, (HOOC – (CH2)4– COOH)
(ii) कैपरोलैक्टम
(iii) टेट्राफ्लुओरोएथीन (F2C = CF2)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को योगज और संघनन बहुलकों में वर्गीकृत कीजिए टेरिलीन, बैकलाइट, पॉलिवाइनिल क्लोराइड, पॉलिथीन।
उत्तर :

  1. योगज बहुलक : पॉलिवाइनिल क्लोराइड, पॉलिथीन;
  2. संघनन बहुलक : टेरीलीन, बैकेलाइट।

प्रश्न 5.
ब्यूना – N और ब्यूना – S के मध्य अन्तर समझाइए।
उत्तर :
ब्यूना – N ब्यूटा -1, 3 -डाइईन और ऐक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक है। जबकि ब्यूना -S ब्यूटा -1, 3-डाइईन और स्टाइरीन का सहबहुलक है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित बहुलकों को उनके अन्तराआण्विक बलों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए

  1. नाइलॉन-6, 6, ब्यूना-S, पॉलिथीन
  2.  नाइलॉन-6, निओप्रीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड।

उत्तर :
अंतराआण्विक आकर्षण बलों को बढ़ता हुआ क्रम निम्न होता है। प्रत्यास्थ बहुलक (इलास्टोमर) < प्लास्टिक < रेशे। अत:

  1.  ब्यूना – S < पॉलिथीन < नाइलॉन 6, 6
  2.  निओप्रीन < पॉलिवाइनिल क्लोराइड < नाइलॉन 6

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
बहुलक और एकलक पदों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :

  1. बहुलक : ऐसे वृहदाणु जो कि पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयों के वृहत पैमाने पर जुड़ने से बनते हैं, बहुलक कहलाते हैं।
  2. एकलक : ऐसे सरल और क्रियाशील अणु जिनके योग तथा संघनन मे व्रहुलकों का निर्माण होता है, एकलक कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक और संश्लिष्ट बहुलक क्या हैं? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए। (2018)
उत्तर :
(i) प्राकृतिक बहुलक : प्रकृति (जन्तुओं और पौधों) में पाए जाने वाले बहुलक, प्राकृतिक बहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
स्टार्च, सेलुलोस, प्रोटीन, रबर आदि।

(ii) संश्लिष्ट बहुलक : ऐसे बहुलक जो प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से बनाए जाते हैं, संश्लिष्ट बहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
पॉलिथीन, PVC, नाइलॉन 6, 6 आदि।

प्रश्न 3.
समबहुलक और सहबहुलक पदों (शब्दों) में विभेद कर प्रत्येक को एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
समबहुलक :
जिन बहुलकों में पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाई की उत्पत्ति केवल एक ही प्रकार की एकलक इकाइयों से होती है, समबहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
पॉलिथीन, PVC, पॉलिस्टाइरीन, नाइलॉन 6 आदि। सहबहुलक-जिन बहुलकों में पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाई की उत्पत्ति दो या अधिक प्रकार की एकलक इकाइयों द्वारा होती है, सहबहुलक कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-ब्यूना – S, ब्यूना – N आदि।

प्रश्न 4.
एकलक की प्रकार्यात्मकता को आप किस प्रकार समझाएँगे?
उत्तर :
किसी एकलक में उपस्थित आबन्धी स्थलों (bonding sites) की संख्या उसकी प्रकार्यात्मकता कहलाती है।
उदाहरणार्थ :
एथीन, प्रोपीन तथा स्टाइरीन की प्रकार्यात्मकता 1 है जबकि 1, 3-ब्यूटाडाइईन, हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन तथा ऐडिपिक अम्ल की प्रकार्यात्मकता 2 है।

प्रश्न 5.
बहुलकन पद (शब्द) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
वह प्रक्रम जिसमें एक अथवा अधिक एकलकों से व्युत्पन्न पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ आपस में एक नियमित क्रम में जुड़कर अत्यधिक अणुभार वाले वृहदाणु (बहुलक) का निर्माण करती हैं। बहुलकन कहलाता है।

प्रश्न 6.
(NH-CHR-CO)n, एक समबहुलक है या सहबहुलक?
उत्तर :
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एक समबहुलक है क्योंकि पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाई में केवल एक ही प्रकार के एकलक अणु अर्थात्  NH2– CHR– COOH विद्यमान हैं।

प्रश्न 7.
आण्विक बलों के आधार पर बहुलक किन संवर्गों में वर्गीकृत किए जाते हैं? आण्विक बलों के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है? प्रत्येक का एक उदाहरण भी दीजिए। (2018)
उत्तर :
आण्विक बलों के आधार पर, बहुलकों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किया जाता है

  1. इलास्टोमर्स, (वल्कनीकृत रबड़)
  2. फाइबर (रेशे) (नायलॉन 6, 6)
  3.  ताप सुघट्य बहुलक (पॉलिथीन)
  4. ताप दृढ़ बहुलक (बैकेलाइट)

प्रश्न 8.
संकलन और संघनन बहुलकन के मध्य आप किस प्रकार विभेद करेंगे? ।
उत्तर :
योगात्मक बहुलकन में बहुत से समान अथवा असमान एकलक अणु आपस में जुड़कर बहुलक श्रृंखला बनाते हैं। एकलक इकाइयों में प्रायः द्वि या त्रिबंध उपस्थित रहते हैं। इस प्रक्रिया में H2O, NHजैसे छोटे अणुओं का निराकरण नहीं होता है। इसके विपरीत, संघनन बहुलकन में संघनन अभिक्रियाओं की एक श्रेणी सम्पन्न होती है जिसमें H2O, NH3 जैसे छोटे अणुओं का निराकरण होता है। इस प्रकार का बहुलकन दो या अधिक क्रियात्मक समूहों युक्त एकलकों के मध्य सम्पन्न होता है।

प्रश्न 9.
सहबहुलकन पद (शब्द) की व्याख्या कीजिए और दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
सहबहुलकन (copolymerisation) एक बहुलकन अभिक्रिया है जिसमें एक से अधिक प्रकार की एकलक स्पीशीज के मिश्रण का बहुलकन एक सहबहुलक बनाने के लिए किया जाता है। सहबहुलक को न केवल श्रृंखला वृद्धि बहुलकन से बनाया जा सकता है, अपितु पदशः वृद्धि बहुलकन से भी बनाया जा सकता है। अत: सहबहुलक में एक ही बहुलकन श्रृंखला में प्रत्येक एकलक की अनेक इकाइयाँ होती हैं।
उदाहरणार्थ :
ब्यूना-S; 1, 3-ब्यूटाडाईन तथा स्टाइरीन का सहबहुलक है, जबकि ब्यूना-N; 1, 3-ब्यूटाडाईन तथा ऐक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक हैं।

प्रश्न 10.
एथीन के बहुलकन के लिए मुक्त मूलक क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 11.
तापसुघट्य और तापदृढ़ बहुलकों को प्रत्येक के दो उदाहरण के साथ परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
1. तापसघटय बहुलक (Thermoplastic polymers) :
ये रेखीय या अल्पशाखित दीर्घ श्रृंखला अणु होते हैं। इन्हें बार-बार तापन द्वारा मृदुलित और शीतलन द्वारा कठोर बनाया जा सकता है। इन बहुलकों के अन्तराआण्विक आकर्षण बल प्रत्यास्थ बहुलकों और रेशों के मध्यवर्ती होते हैं। पॉलिथीन, पॉलिस्टाइरीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड आदि कुछ सामान्य तापसुघट्य बहुलक हैं।

2. तापदृढ़ बहुलक (Thermosetting polymers) :
ये बहुलक तिर्यकबद्ध अथवा अत्यधिक शाखित अणु होते हैं जो साँचों में तापन से विस्तीर्ण तिर्यकबन्ध में परिवर्तित हो जाते हैं और दोबारा दुर्गलनीय बन जाते हैं। इनका दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकता। बैकेलाइट, यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन आदि कुछ सामान्य तापदृढ़ बहुलक हैं।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक लिखिए

  1. पॉलिवाइनिल क्लोराइड
  2. टेफ्लॉन
  3. बैकलाइट

उत्तर :

  1. CH2,= CHCl (वाइनिल क्लोराइड)
  2.  F2C = = CF2, (टेट्राफ्लोरोएथीन)
  3.  C6H5O व HCHO (फीनॉल तथा फॉर्मेल्डिहाइड)

प्रश्न 13.
मुक्त मूलक योगज बहुलकन में प्रयुक्त एक सामान्य प्रारम्भक का नाम और संरचना लिखिए।
उत्तर :
बेन्जोइल परॉक्साइड।
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प्रश्न 14.
रबड़ अणुओं में द्विबन्धों की उपस्थिति किस प्रकार उनकी संरचना और क्रियाशीलता को प्रभावित करती है?
उत्तर :
प्राकृतिक रबर सिस-पॉलिआइसोप्रीन है तथा इसका निर्माण आइसोप्रीन इकाइयों के 1, 4-बहुलकन द्वारा निम्न प्रकार होता है
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इस बहुलक में प्रत्येक आइसोप्रीन इकाई के C2 व C3 के मध्य द्विबन्ध उपस्थित हैं। आइसोप्रीन इकाइयों की इस प्रकार सिस व्यवस्था के कारण बहुलक श्रृंखलाएँ दुर्बल अन्त:अणुक आकर्षण बल की उपस्थिति के कारण प्रभावशाली अन्तः अणुक क्रिया हेतु एक-दूसरे के समीप नहीं आ पातीं। अत: निकटस्थ श्रृंखलाओं के मध्य केवल दुर्बल वाण्डरवाल्स बल विद्यमान रहते हैं। इसलिए रबर की अनियमित कुण्डलित संरचना होती है। इसे एक स्प्रिंग की भाँति खींचा जा सकता है, अर्थात् इसमें प्रत्यास्थता का गुण पाया जाता है।

प्रश्न 15.
रबड़ के वल्कनीकरण के मुख्य उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
उत्तर :
रबड़ का वल्कनीकरण (Vulcanization of rubber) : 
प्राकृतिक रबड़ उच्च ताप (> 335 K) पर नर्म और निम्न ताप (< 283 K) पर भंगुर हो जाता है एवं उच्च जल अवशोषण क्षमता प्रदर्शित करता है। यह अध्रुवीय विलायकों में घुलनशील है और ऑक्सीकरण कर्मकों के आक्रमण के प्रति प्रतिरोधी नहीं है। इन भौतिक गुणों में सुधार के लिए वल्कनीकरण की प्रक्रिया की जाती है। इस प्रक्रिया में अपरिष्कृत रबड़ को सल्फर और उपयुक्त योगजों के साथ 373 K से 415 K के ताप परास के मध्य गर्म किया जाता है। वल्कनीकरण से द्विबन्धों की अभिक्रियाशील स्थितियों पर सल्फर तिर्यक बन्ध बनाता है और इस प्रकार रबड़ कठोर हो जाता है।

प्रश्न 16.
नाइलॉन-6 और नाइलॉन-6, 6 में पुनरावृत्त एकलक इकाइयाँ क्या हैं?
उत्तर :
नाइलॉन-6,
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प्रश्न 17.
निम्नलिखित बहुलकों के एकलकों का नाम और संरचना लिखिए
(i) ब्यूना-S
(ii) ब्यूना-N
(iii) डेक्रॉन
(iv) निओप्रीन।
उत्तर :
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित बहुलक संरचनाओं के एकलक की पहचान कीजिए
(i)
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(ii)
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उत्तर :
(i)
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(ii)
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प्रश्न 19.
एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल से डेक्रॉन किस प्रकार प्राप्त किया जाता है?
उत्तर :
डेक्रॉन को एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल के संघनन बहुलकन से जल के अणुओं के विलोपन के साथ प्राप्त किया जाता है। अभिक्रिया को 420 – 460 K पर जिंक ऐसीटेट तथा ऐण्टीमनी ट्राइऑक्साइड के मिश्रण से बने उत्प्रेरक की उपस्थिति में कराया जाता है।
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प्रश्न 20.
जैव-निम्नीकरणीय बहुलक क्या हैं? एक जैव-निम्नीकरणीय ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
वे बहुलक जो एक समय बाद जीवाण्विक निम्नीकरण के कारण स्वयं ही विघटित हो जाते हैं, जैव-निम्नीकरणीय बहुलक (biodegradable polymers) कहलाते हैं।
उदाहरण :
पॉलि – β – हाइड्रॉक्सीब्यूटिरेट-को – β -हाइड्रॉक्सी-वैलेरेट (PHBV) :
यह 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनोइक अम्ल और 3-हाइड्रॉक्सीपेन्टेनोइक अम्ल के सहबहुलकन से प्राप्त होता है। PHBV को उपयोग विशिष्ट पैकेजिंग, अस्थियों में प्रयुक्त युक्तियों और औषधों के नियन्त्रित मोचन में भी होता है। पर्यावरण में PHVB का जीवाण्विक निम्नीकरण हो जाता है।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से प्राकृतिक बहुलक है (2015)
(i)पॉलीथीन
(ii) सेलुलोस
(iii) पी० वी० सी०
(iv) टेफ्लॉन
उत्तर :
(ii) सेलुलोस

प्रश्न 2.
संश्लेषित बहुलक का उदाहरण है
(i) RNA
(ii) प्रोटीन
(iii) पॉलीऐमाइड
(iv) स्टार्च
उत्तर :
(iii) पॉलीऐमाइड

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में संघनन बहुलक नहीं है (2017)
(i) नाइलॉन 6, 6
(ii) स्टाइरीन
(iii) डेक्रॉन
(iv) टैरोलीन
उत्तर :
(ii) स्टाइरीन

प्रश्न 4.
संघनन बहुलक है (2015)
(i) टेफ्लॉन
(ii) पॉलीथीन
(iii) पॉलीवाइनिल क्लोराइड
(iv) टेरीलीन
उत्तर :
(iv) टेरीलीन

प्रश्न 5.
बैकेलाइट है एक (2016)
(i) प्राकृतिक बहुलक
(ii) योगात्मक बहुलक
(iii) संघनन बहुलक
(iv) समबहुलक
उत्तर :
(iii) संघनन बहुलक

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में कौन-सा थर्मोप्लास्टिक बहुलक नहीं है? (2015)
(i) बैकलाइट
(ii) टेफ्लॉन
(iii) पॉलीथीन
(iv) पी०वी०सी०
उत्तर :
(i) बैकेलाइट

प्रश्न 7.
ताप-सुनम्य प्लास्टिक का उदाहरण है (2017)
(i) बैकलाइट
(ii) टेफ्लॉन
(iii) रेजिन
(iv) मैलेमीन
उत्तर :
(ii) टेफ्लॉन

प्रश्न 8.
थर्मोसेटिंग प्लास्टिक है
(i) पी०वी०सी
(ii) पॉलीथीन
(iii) बैकेलाइट
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(iii) बैकलाइट।

प्रश्न 9.
प्रबल अन्तराण्विक बल जैसे हाइड्रोजन बन्ध युक्त बहुलक हैं (2018)
(i) प्राकृतिक रबड़
(ii) पॉलिस्टाइरिन
(iii) टेफ्लॉन
(iv) नायलॉन 6, 6
उत्तर :
(iv) नायलॉन 6, 6

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में से कौन-सा बहुलक है? (2018)
(i) पॉलिथीन
(ii) बैकेलाइट
(iii) रबड़
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

प्रश्न11.
निम्न में से कौन-सा पॉलीएमाइड है? (2015, 16, 17)
(i) बैकेलाइट
(ii) टेरीलीन
(iii) नाइलॉन-6, 6
(iv) टेफ्लॉन
उत्तर :
(iii) नाइलॉन-6, 6 (2015)

प्रश्न12.
निम्न में से कौन-सा एकलक बहुलक निओप्रीन देता है?
(i) CH2= CHCl
(ii) CCl2= CCl2
(iii) CH2= C(Cl) -C =H2
(iv) CF2= CF2
उत्तर :
(iii) CH2= C(Cl)-C =H2

प्रश्न13.
निम्न में से किस बहुलक का विरचन संघनन बहुलकन द्वारा किया जा सकता है?
(i) पॉलीस्टाइरीन
(ii) नाइलॉन-6,6
(iii) टेफ्लॉन
(iv) रबर
उत्तर :
(ii) नाइलॉन-6,6

प्रश्न14.
फीनॉल की किसके साथ अभिक्रिया से बैकलाइट प्राप्त होता है? (2016)
(i) HCHO
(ii) (CH2OH)2
(iii) CH3CHO
(iv) CH3COCH3
उत्तर :
(i) HCHO

प्रश्न15.
पॉलीवाइनिल क्लोराइड का एकलक है (2015)
(i) वाइनिल क्लोराइड
(ii) क्लोरोप्रीन
(iii) प्रोपिलीन
(iv) वाइनिल सायनाइड
उत्तर :
(i) वाइनिल क्लोराइड

प्रश्न 16.
निओप्रीन का एकलक है (2015)
(i) एथिलीन
(ii) टेट्राफ्लुओरोएथिलीन
(iii) फ्लु ओरीन
(iv) क्लोरोप्रीन
उत्तर :
(iv) क्लोरोप्रीन

प्रश्न 17.
टेरीलीन है (2014)
(i) पॉलीएमाइड
(ii) पॉलीस्टाइरीन
(iii) पॉलीएथिलीन
(iv) पॉलीएस्टर
उत्तर :
(iv) पॉलीएस्टर

प्रश्न18.
निम्न में से कौन-सा पॉलीस्टर बहुलक है?
(i) नाइलॉन-6,6
(ii) टेरीलीन
(iii) बैकलाइट
(iv) मैलेमीन
उत्तर :
(ii) टेरीलीन

प्रश्न19.
निम्न में से किस बहुलक का प्रयोग स्नेहक तथा अचालक के रूप में किया जाता है?
(i) SBR
(ii) PVC
(iii) PTFE
(iv) PAN
उत्तर :
(iii) PTFE

प्रश्न20.
निम्न में कौन एक पॉलीएमाइड वर्ग का जैव निम्नीकरणीय बहुलक है?
(i) डेक्स्ट्रॉन
(ii) नाइलॉन-2-नाइलॉन-6
(iii) नाइलॉन-6
(iv) PHPV
उत्तर :
(ii) नाइलॉन-2-नाइलॉन-6

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दो प्राकृतिक बहुलकों के नाम लिखिए।
उत्तर :
स्टार्च तथा प्रोटीन।

प्रश्न 2.
क्रॉस-लिंक बहुलकों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
बैकेलाइट तथा यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड।

प्रश्न 3.
बहुलकन की कोटि से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
बहुलक में उपस्थित पुनरावर्तित इकाइयों की संख्या को बहुलकन की कोटि कहते हैं।

प्रश्न 4.
रेशों (fibres) के गलनांक उच्च क्यों होते हैं?
उत्तर :
प्रबल अंतरा :
अणुक बलों के कारण रेशों की बहुलक श्रृंखलाओं की व्यवस्था निविड संकुलित होती है। इसी कारण से इनके गलनांक उच्च होते हैं।

प्रश्न 5.
प्लास्टिसाइजर क्या हैं?
उत्तर :
ऐसे कार्बनिक यौगिक जिन्हें प्लास्टिकों में मिलाने पर प्लास्टिक मुलायम और कार्यन योग्य (workable) हो जाती है प्लास्टिसाइजर कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
योगात्मक बहुलकीकरण को एक उदाहरण द्वारा समझाइए। (2016, 17)
उत्तर :
योगात्मक बहुलकीकरण में एकलक अणुओं के योग द्वारा बहुलक बनता है। उदाहरण के लिए, उच्च दाब और उच्च ताप पर ऑक्सीजन और परॉक्साइड की उपस्थिति में एथिलीन अणुओं के योग बहुलकीकरण द्वारा पॉलिएथिलीन बहुलक बनता है।
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प्रश्न 7.
किस प्रकार के बहुलकन में H2O, NH3 जैसे अणुओं का विलोपन होता है। योगात्मक बहुलकन में यो संघनन बहुलकन में?
उत्तर :
संघनन बहुलकन में।

प्रश्न 8.
मुक्त मूलक बहुलकन में हमेशा शुद्धतम एकलक का प्रयोग क्यों करना चाहिए?
उत्तर :
यदि अशुद्धियाँ उपस्थित हों तब ऐल्कीन एकलक या तो श्रृंखला स्थानान्तरण कारक या संदमक का कार्य करता है। यदि यह श्रृंखला स्थानान्तरण कारक के रूप में कार्य करता है तब कम अणु द्रव्यमान का बहुलक प्राप्त होता है और जब यह संदमक का कार्य करता है तब बहुलकन की क्रिया संदमित होती है। अत: इन जटिलताओं से बचने के लिए प्रयुक्त ऐल्कीन एकलक अति शुद्ध होने चाहिए।

प्रश्न 9.
बेन्जोक्विनोन मुक्त मूलक बहुलकन में संदमक का कार्य करता है, क्यों?
उत्तर :
बेन्जोक्विनोन बहुलीकृत होने वाले मुक्त मूलकों को जकड़ लेता है तथा अक्रियाशील मुक्त मूलक बनाता है।

प्रश्न 10.
इलेक्ट्रॉन दाता समूहों युक्त विनायलिक एकलकों के लिए धनायनिक बहुलकन को वरीयता क्यों दी जाती है?
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन दाता समूह(EDG) एकलक इकाई पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देते हैं जिसके परिणामस्वरूप धनायनिक आक्रमण शीघ्रता से होता है।
उदाहरणार्थ :
एक इलेक्ट्रॉन विमोचक CH समूह (+I प्रभाव)युक्त प्रोपीन का धनायनिक बहुलकन।

प्रश्न 11.
HO2CCH2CH2COOH , (सक्सिनिक अम्ल) तथा H2NCH2CH2NH2, (एथिलीनडाइऐमीन) के संयुक्त होने पर संघनन बहुलक में पुनरावर्तित इकाई क्या है?
उत्तर :
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प्रश्न12.
टेफ्लॉन बनाने का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2017)
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 15 Polymers image 19

प्रश्न 13.
टेफ्लॉन के दो उपयोग लिखिए। (2017)
उत्तर :

  1. इसका उपयोग तेल सीलों एवं गैस्केटों को बनाने में किया जाता है।
  2. इसका उपयोग रसोईघर में नॉनस्टिक बर्तन बनाने में किया जाता है।

प्रश्न14.
किस बहुलक से ऑरलॉन अथवा ऐक्रिलन जैसे रेशे बनाए जाते हैं ?
उत्तर :
पॉलीऐक्रिलोनाइट्राइल।

प्रश्न15.
नाइलॉन-6, 6 क्या है? इसके एकलकों से नाइलॉन-6, 6 बहुलक बनाने की अभिक्रिया समीकरण लिखिए। (2017)
उत्तर :
नाइलॉन-6, 6 ऐडिपिक अम्ल और हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन के संघनन बहुलीकरण द्वारा बनाया जाता है।
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प्रश्न 16.
किस बहुलक का प्रयोग कॉन्टैक्ट लेन्स (contact lens) बनाने के लिए किया जाता है?
उत्तर :
पॉलीमेथिलमेथएँक्रिलेट (PMMA).

प्रश्न 17.
प्राकृतिक रबर का एकलक क्या है?
उत्तर :
आइसोप्रीन।

प्रश्न 18.
किस सहबहुलक का प्रयोग न टूटने वाली प्लास्टिक क्रॉकरी बनाने के लिए किया जाता है?
उत्तर :
मैलेमीन-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन।

प्रश्न 19.
प्राकृतिक रबर और गुट्टा पर्चा में एक अंतर बताइए।
उत्तर :
प्राकृतिक रबर समपक्ष पॉलीआइसोप्रीन है जबकि गुट्टा पर्चा विपक्ष पॉलीआइसोप्रीन है।

प्रश्न 20.
वल्कनीकरण में सल्फर का क्या महत्त्व है? (2015)
उत्तर :
सल्फर बहुलीकृत श्रृंखलाओं में तिर्यक बन्धन उत्पन्न करता है जिससे रबर की तनन सामर्थ्य तथा प्रत्यास्थता बढ़ जाती है।

प्रश्न 21.
रेयॉन को कृत्रिम सिल्क तथा पुनर्जीनित तन्तु क्यों कहते हैं।
उत्तर :
क्योंकि इसकी चमक सिल्क के समान होती है तथा ये पुनर्जनित रेशों (regenerated fibres) से प्राप्त होता है।

प्रश्न 22.
पॉलीएथिलीन से पॉलीप्रोपिलीन को वरीयता क्यों दी जाती है?
उत्तर :
क्योकि पॉलीप्रोपिलीन पॉलीएथिलीन से कठोर तथा मजबूत होता है।

प्रश्न 23.
कोयले की खानों में निओप्रीन बैल्ट क्यों प्रयुक्त की जाती है?
उत्तर :
कोयले की खानों में निओप्रीन बैल्ट प्रयुक्त की जाती है क्योंकि यह आग नहीं पकड़ती है।

प्रश्न 24.
शल्यचिकित्सकीय ड्रेसिंग में रेयॉन कपास से श्रेष्ठ क्यों है?
उत्तर :
क्योंकि यह अपने भार का 90% जल अवशोषित कर लेती है तथा यह न चिपकने वाला होने के कारण घावों पर चिपकती नहीं है।

प्रश्न 25.
किसी एक जैव-निम्नीकरणीय पॉलीएमाइड सहबहुलक का नाम लिखिए।
उत्तर :
नाइलॉन 2-नाइलॉन 6

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
(i) एथीन के बहुलकन में बेन्जॉइल परॉक्साइड का क्या योगदान है?
(ii) LDPE तथा HDPE क्या हैं? इन्हें कैसे विरचित किया जाता है? (2015)
उत्तर :
(i) बेन्जॉइल परॉक्साइड एथीन के बहुलकन में प्रारम्भक (initiator) का कार्य करता है।
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(ii) LDPE का अभिप्राय निम्न घनत्व पॉलीएथिलीन (low density polyethylene) तथा HDPE का अभिप्राय उच्च घनत्व पॉलीएथिलीन (high density polyethylene) से है।
(a)
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(b)
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प्रश्न 2.
पॉलीवाइनिल क्लोराइड (PVC) के निर्माण की विधि एवं उपयोग लिखिए। (2014, 17)
उत्तर :
इसका निर्माण वाइनिल क्लोराइड के योगात्मक बहुलकीकरण द्वारा किया जाता है। इसका एकलक वाइनिल क्लोराइड (CH2, = CH—Cl) है। उच्च दाब एवं निष्क्रिय विलायक C6H5 – O— O— C6H5 की उपस्थिति में वाइनिल क्लोराइड को गर्म करने पर पॉलीवाइनिल क्लोराइड (PVC) बनता है।
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प्रश्न 3.
बैकेलाइट पर टिप्पणी लिखिए। (2016, 17)
उत्तर :
ये फीनॉल की अम्ल अथवा क्षार उत्प्रेरक की उपस्थिति में फॉर्मेल्डिहाइड के साथ संघनन अभिक्रिया द्वारा प्राप्त होते हैं। अभिक्रिया का आरम्भ 0-अथवा p-हाइड्रॉक्सीमेथिलफीनॉल व्युत्पन्नों के विरचन से होता है जो पुनः फोनॉल से अभिक्रिया करके ऐसे यौगिक बनाते हैं जिनमें आपस में, -CH2,-सेतुओं के माध्यम से जुड़ी वलय होती हैं। प्रारम्भिक उत्पाद एक रैखिक उत्पाद हो सकता है; जैसे-नोवोलेक, जिसका उपयोग पेंटों में किया जाता है।
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फॉर्मेल्डिहाइड के साथ गर्म करने पर नोवोलेक तिर्यक बंधन निर्मित करके एक दुर्गलनीय ठोस बनाता है। जिसे बैकलाइट (bakelite) कहते हैं।
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित बहुलक क्या हैं? इन्हें बनाने की विधि तथा उपयोग लिखिए।
(i) पॉलिऐमाइड
(ii) पॉलिएस्टर
(iii) फीनॉल-फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक
(iv) मेलैमीन-फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक।
उत्तर :
(i) पॉलिऐमाइड (Polyamide) :
ऐमाइड बन्ध युक्त बहुलक संश्लिष्ट रेशे के महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं, इन्हें नाइलॉन (nylon) कहा जाता है। इन्हें बनाने की सामान्य विधियों में डाइऐमीनों को डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों के साथ तथा ऐमीनो अम्लों और उनके लैक्टमों का भी संघनन बहुलकन होता है। नाइलॉनों का निर्माण या विरचन (Preparation of Nylons)
(a) नाइलॉन-6, 6 (Nylon-6, 6) :
इसका विरचन हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन एवं ऐडिपिक अम्ल के उच्च दाब और उच्च ताप पर संघनन द्वारा किया जाता है।
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उपयोग (Uses) :
नाइलॉन-6,6 का उपयोग शीटों, ब्रशों के शूकों (bristles) और वस्त्र उद्योग में किया जाता है।

(b) नाइलॉन-6 (Nylon-6) :
यह कैपरोलैक्टम को जल के साथ उच्च ताप पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है।
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उपयोग (Uses) :
नाइलॉन-6 का उपयोग टायर की डोरियों, वस्त्रों और रस्सियों के निर्माण में किया जाता है।

(ii) पॉलिएस्टर (Polyester) :
ये द्विकार्बोक्सिलिक अम्लों और डाइऑल के बहुसंघनन उत्पाद हैं। पॉलिएस्टर का सबसे अधिक ज्ञात उदाहरण डेक्रॉन अथवा टेरिलीन है। बनाने की विधि (Method of preparation)— यह एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल के मिश्रण को 420K से 460K ताप तक जिंक ऐसीटेट-एण्टीमनी ट्राइऑक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में गर्म करने पर उपर्युक्त अभिक्रिया की भाँति निर्मित होता है।
उपयोग (Uses) :
डेक्रॉन रेशा (टेरिलीन) क्रीजरोधी है और इसका उपयोग सूती तथा ऊनी रेशे के साथ सम्मिश्रण करने में तथा सुरक्षा हैल्मेट (helmets) आदि में काँच प्रबलन पदार्थों की तरह होता है।

(iii) फीनॉल :
फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक (Phenol-Formaldehyde Polymer)–फीनॉलफॉर्मेल्डिहाइड बहुलक सबसे प्राचीन तथा संश्लिष्ट बहुलक हैं। बनाने की विधि (Method of preparation) – ये फीनॉल की अम्ल अथवा क्षार उत्प्रेरक की उपस्थिति में फॉर्मेल्डिहाइड के साथ संघनन अभिक्रिया द्वारा प्राप्त होते हैं। अभिक्रिया का आरम्भ 0तथा/अथवा p-हाइड्रॉक्सीमेथिलफीनॉल व्युत्पन्नों के बनने से होता है, जो पुनः फोनॉल के साथ अभिक्रिया करके इस प्रकार के यौगिक बनाते हैं जिनमें आपस में -CH2, समूहों के माध्यम से जुड़ी वलय होती है। प्रारम्भिक उत्पाद एक रैखिक उत्पाद हो सकता है; जैसे-नोवोलेका
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फॉर्मेल्डिहाइड के साथ गर्म करने पर नोवोलेक तिर्यकबन्धन निर्मित करके एक दुर्गलनीय ठोस बनाता है। जिसे बैकलाइट कहते हैं।
उपयोग (Uses) :
नोवोलेक का उपयोग प्रलेपों (paints) में होता है तथा बैकेलाइट का उपयोग कंघियों, फोनोग्राफ रिकॉर्ड/अभिलेखों, विद्युत स्विचों, बर्तनों के हत्थे बनाने में किया जाता है।
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(iv) मेलैमीन :
फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक (Melamine-Formaldehyde Polymer) बनाने की विधि (Method of preparation) – यह मेलैमीन और फॉर्मेल्डिहाइड के संघनन बहुलकन द्वारा प्राप्त होता है।
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उपयोग (Uses) :
इसका उपयोग अभंजनीय बर्तनों (unbreakable crockery) के निर्माण में किया जाता है।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 14
Chapter Name Biomolecules
Number of Questions Solved 96
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं, जबकि साइक्लोहेक्सेन अथवा बेन्जीन (सामान्य छह सदस्यीय वलय युक्त यौगिक) जल में अविलेय होते हैं। समझाइए।
उत्तर :
ग्लूकोस तथा सुक्रोस में क्रमश: 5 तथा 8 –OH समूह होते हैं। ये जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाते हैं। अत्यधिक H- आबन्धन के कारण ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं। दूसरी ओर, साइक्लोहेक्सेन में –OH समूह नहीं होते हैं। यह जल के साथ हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनाता है, अतएव इसमें अविलेय रहता है।

प्रश्न 2.
लैक्टोस के जल-अपघटन से किन उत्पादों के बनने की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर :
जल-अपघटन पर लैक्टोस मोनोसैकेराइड के दो अणु देता है अर्थात् D – (+) – ग्लूकोस तथा D – (+) गैलेक्टोस का एक-एक अणु।
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प्रश्न 3.
D – ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में आप ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति को कैसे । समझाएँगे?
उत्तर :
ग्लूकोस ऐल्डोहेक्सोस होने के कारण ऐल्डिहाइड समूह की लाक्षणिक अभिक्रियाएँ देता है; जैसे -NH2OH, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया। ग्लूकोस के ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड के साथ ऐसिलीकरण से प्राप्त ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट इन अभिक्रियाओं को नहीं देता है।
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इसका अभिप्राय है कि ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह या तो अनुपस्थित होता है या इन अभिक्रियाओं के लिए उपलब्ध नहीं रहता है। वास्तव में D – ग्लूकोस के पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह हेमीऐसीटल संरचना का भाग होता है, अतएव इन अभिक्रियाओं में भाग लेने के लिए उपलब्ध नहीं रहता है।

प्रश्न 4.
ऐमीनो अम्लों के गलनांक एवं जल में विलेयता सामान्यतः संगत हैलो अम्लों की तुलना में अधिक होती है। समझाइए।
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल ज्विट्टर आयन (H3  [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] -CHR-COO) के रूप में पाए जाते हैं। द्विध्रुवीय लवण सदृश लक्षण के कारण इनमें प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव अथवा स्थिर-विद्युत आकर्षण बल पाए जाते हैं, अतएव ऐमीनो अम्लों के क्वथनांक उच्च होते हैं। ऐमीनो अम्ल H20 अणुओं के साथ प्रबल अन्योन्यक्रिया करते हैं। तथा इसमें विलेय होते हैं। हैलो अम्लों की लवण सदृश्य संरचना नहीं होती है, अत: इनके क्वथनांक निम्न होते हैं। हैलोअम्ल ऐमीनो अम्लों की तरह H20 अणुओं के साथ प्रबलता के साथ अन्योन्यक्रिया नहीं करते हैं, अत: जल में ऐमीनो अम्लों की विलेयता हैलोअम्लों से अधिक होती है।

प्रश्न 5.
अण्डे को उबालने पर उसमें उपस्थित जल कहाँ चला जाता है?
उत्तर :
उबालने पर अण्डे में उपस्थित प्रोटीनों का पहले विकृतिकरण और फिर स्कंदन हो जाता है। इन स्कंदित प्रोटीनों द्वारा जल अवशोषित या अधिशोषित हो जाता है।

प्रश्न 6.
हमारे शरीर में विटामिन C संचित क्यों नहीं होता?
उत्तर :
विटामिन C (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) जल में विलेय होता है। यह शीघ्र ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं रह सकता है।

प्रश्न 7.
यदि DNA के थायमीनयुक्त न्यूक्लियोटाइड का जल-अपघटन किया जाए तो कौन-कौन से उत्पाद बनेंगे?
उत्तर :
2-डीऑक्सी-D-राइबोस, फॉस्फोरिक अम्ल तथा थायमीन।

प्रश्न 8.
जब RNA का जल-अपघटन किया जाता है तो प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता। यह तथ्य RNA की संरचना के विषय में क्या संकेत देता है?
उत्तर :
DNA अणु में दो कुण्डलिनियों (strands) में चार पुरक क्षारक परस्पर युग्म बनाए रखते हैं जैसे साइटोसीन (C) सदैव ग्वानीन (G) के साथ युग्म बनाता है, जबकि थायमीन (T) सदैव ऐडेनीन के साथ युग्म बनाता है। इसलिए जब एक DNA अणु जल-अपघटित होता है, तब साइटोसीन की मोलर मात्राएँ सदैव ग्वानीन के तुल्य तथा इसी प्रकार ऐडेनीन की सदैव थायमीन के तुल्य होती हैं। RNA में भी चार क्षारक होते हैं जिनमें प्रथम तीन DNA के समान, परन्तु चौथा क्षारक यूरेसिल (U) होता है। चूंकि RNA में प्राप्त चारों क्षारकों (C,G, A तथा U) की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता है, इसलिए क्षारक-युग्मन सिद्धान्त (अर्थात् A के साथ U तथा C के साथ G का युग्म) का पालन नहीं होता है, इससे यह संकेत मिलता है कि DNA के विपरीत RNA में एक कुण्डलिनी होती है।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
मोनोसैकेराइड क्या होते हैं? (2018)
उत्तर :
वे कार्बोहाइड्रेट जो छोटे अणुओं में जल – अपघटित नहीं हो सकते, मोनोसैकेराइड कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
अपचायी शर्करा क्या होती है?
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करते हैं तथा फेहलिंग विलयन के साथ लाल अवक्षेप देते हैं, अपचायी शर्कराएँ कहलाते हैं। सभी मोनोसैकेराईड (ऐल्डोस तथा कीटोस) तथा डाइसैकेराइड (सुक्रोस को छोड़कर) अपचायी शर्कराएँ हैं।

प्रश्न 3.
पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।
उत्तर :
(i) पादप कोशिका भित्तियों का संरचनात्मक पदार्थ (Structural material for plant cell walls)
उदाहरणार्थ :
पॉलीसैकेराइड सेलुलोस पादप कोशिका भित्ति का प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होता है।

(ii) जैव ईंधन (Bio fuels) कार्बोहाइड्रेट जैसे :
ग्लूकोस, फ्रक्टोस, शर्करा, स्टार्च तथा ग्लाइकोजन जैव ईंधनों के रूप में कार्य करते हैं तथा जैव तन्त्रों में विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उदाहरणार्थ :
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिएराइबोस, 2-डिऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलेक्टोस, फ्रक्टोस तथा लैक्टोस
उत्तर :

  1. मोनोसैकेराइड :राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलेक्टोस, तथा फ्रक्टोस।
  2. डाइसैकेराइड :माल्टोस तथा लैक्टोस।

प्रश्न 5.
ग्लाइकोसाइडी बन्ध से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
दो मोनोसैकेराइड अणु परस्पर ऑक्सीजन आबन्ध द्वारा जुड़े होते हैं जिसका निर्माण जल के अणु की हानि से होता है। दो मोनोसैकेराइड इकाइयों के मध्य ऑक्सीजन से होकर आबन्ध ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
माल्टोस अणु में ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध नीचे प्रदर्शित है
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प्रश्न 6.
ग्लाइकोजन क्या होता है तथा ये स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर :
जन्तुओं के शरीर में कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन के रूप में संचित रहता हैं। इसे जन्तु स्टार्च भी कहते हैं, क्योंकि इसकी संरचना ऐमाइलोपेक्टिन के समान होती है, लेकिन यह इससे अत्यधिक शाखित होता है। यह यकृत तथा पेशियों में संचित रहता है। जब हमारे शरीर को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है तब एन्जाइम ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में परिवर्तित कर देते हैं। दूसरी ओर, स्टार्च ऐमाइलोस (15-20%) जो कि जल में विलेय होता है तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80-85%) जो कि जल में अविलेय होता है का मिश्रण होता है। ग्लाइकोजन तथा ऐमाइलोपेक्टिन दोनों α -D.ग्लूकोस के शाखित बहुलक होते हैं। स्टार्च पौधों का प्रमुख संचित पॉलीसैकेराइड होता है।

प्रश्न 7.
(अ) सुक्रोस तथा
(ब) लैक्टोस के जल-अपघटन से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर :
(अ) सुक्रोस जल :
अपघटित होकर 1-अणु ग्लूकोस तथा 1-अणु फ्रक्टोस देता है।
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(ब) लैक्टोस जल :
अपघटित होकर D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस का सममोलर मिश्रण देता है।
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प्रश्न 8.
स्टार्च तथा सेलुलोस में मुख्य संरचनात्मक अन्तर क्या है?
उत्तर :
स्टार्च ऐमिलोस तथा ऐमिलोपेक्टिन से मिलकर बनता है। ऐमिलोस α – D -ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है, जबकि सेलुलोस β – D-ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है। ऐमिलोस में एक ग्लूकोस इकाई का C-1 अन्य ग्लूकोस इकाई के C-4 से α – ग्लाइकोसाइडी बन्ध द्वारा जुड़ा रहता है। इसे अग्रांकित चित्र में देखा जा सकता है
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सेलुलोस, β – D -ग्लूकोस से बनी ऋजु शृंखलायुक्त पॉलिसैकेराइड है जिसमें एक ग्लूकोस इकाई के C-1 तथा दूसरी ग्लूकोस इकाई के C-4 के मध्य β ग्लाइकोसाइडी बन्ध बनता है।

प्रश्न 9.
क्या होता है जब D-ग्लूकोस की अभिक्रिया निम्नलिखित अभिकर्मकों से करते हैं?
(i) HI
(ii) ब्रोमीन जल
(iii) HNO3.
उत्तर :
(i)
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प्रश्न 10.
ग्लूकोस की उन अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जो इसकी विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकतीं।
उत्तर :
निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ग्लूकोस की विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकती हैं, इन्हें बॉयर ने प्रस्तावित किया था

  1.  ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होते हुए भी ग्लूकोस 2 , 4 – DNP परीक्षण तथा शिफ़-परीक्षण नहीं देता एवं यह NaHSO3 के साथ हाइड्रोजन सल्फाइड योगज उत्पाद नहीं बनाता।
  2. ग्लूकोस का पेन्टाऐसीटेट, हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता जो मुक्त —CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करता है।
  3.  जब D-ग्लूकोस को शुष्क हाइड्रोजन क्लोराईड गैस की उपस्थिति में मेथेनॉल के साथ अभिकृत कराया जाता है, तब यह दो समावयव मोनोमेथिल व्युत्पन्न देता है जिन्हें मेथिल -α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β-D-ग्लूकोसाइड के नाम से जाना जाता है। ये ग्लूकोसाइड फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते तथा हाइड्रोजन सायनाइड अथवा हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं तथा मुक्त -CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करते हैं।

प्रश्न 11.
आवश्यक तथा अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
(i) आवश्यक ऐमीनो अम्ल (Essential amino acids) :
ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है, लेकिन इनका संश्लेषण मनुष्य के शरीर में नहीं होता है, आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-वेलिन, ल्यूसीन, फेनिलऐलानीन आदि।
(ii) अनावश्यक ऐमीनो अम्ल (Non-essential amino acids) :
ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है तथा जिनका संश्लेषण मानव शरीर में होता है, अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-ग्लाइसीन, ऐलानीन, ऐस्पार्टिक अम्ल आदि।

प्रश्न 12.
प्रोटीन के सन्दर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए
(i) पेप्टाइड बन्ध
(ii) प्राथमिक संरचना
(iii) विकृतीकरण। (2015)
उत्तर :
(i) पेप्टाइड बन्ध (Peptide bond) :
रासायनिक रूप से पेप्टाइड आबन्ध, -COOH समूह तथा -NH2, समूह के मध्य बना एक आबन्ध होता है। दो एक जैसे अथवा भिन्न ऐमीनो अम्लों के अणुओं के मध्य अभिक्रिया एक अणु के ऐमीनो समूह तथा दूसरे अणु के कार्बोक्सिल समूह के मध्य संयोग से होती है जिसके फलस्वरूप एक जल का अणु मुक्त होता है तथा पेप्टाइड आबन्ध -CO-NH- बनता है। चूँकि उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों के द्वारा बनता है, अत: इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं। उदाहरणार्थ :
जब ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलेनीन के ऐमीनो समूह के साथ संयोग करता है तो हमें एक डाइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलैनीन प्राप्त होता है।
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(ii) प्राथमिक संरचना (Primary structure) :
प्रोटीन में एक अथवा अनेक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ उपस्थित हो सकती हैं। किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट क्रम में संयुक्त होते हैं। ऐमीनो अम्लों का यह विशिष्ट क्रम प्रोटीन्स की प्राथमिक संरचना बनाता है। प्राथमिक संरचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन अर्थात् ऐमीनो अम्लों के क्रम में परिवर्तन से भिन्न प्रोटीन उत्पन्न होती हैं।

(iii) विकृतीकरण (Denaturation) :
जैविक निकाय में पायी जाने वाली विशेष त्रिविम संरचना तथा जैविक सक्रियता वाली प्रोटीन, प्राकृत प्रोटीन कहलाती हैं। जब प्राकृत प्रोटीन में भौतिक परिवर्तन जैसे ताप में परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन करते हैं (जैसे-pH में परिवर्तन आदि) तो हाइड्रोजन आबन्धों में अस्तव्यस्तता उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हेलिक्स अकुण्डलित हो जाती है तथा प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देती है। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं। विकृतीकरण के दौरान 2° तथा 3° संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, परन्तु 1° संरचना अप्रभावित रहती है। उबालने पर अण्डे की सफेदी का स्कन्दन विकृतीकरण का एक सामान्य उदाहरण है। एक अन्य उदाहरण दही का जमना है जो दूध में उपस्थित बैक्टीरिया द्वारा लैक्टिक अम्ल उत्पन्न होने के कारण होता है।

प्रश्न 13.
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के सामान्य प्रकार क्या हैं?
उत्तर :
किसी प्रोटीन की द्वितीयक संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला विद्यमान होती है। यह दो भिन्न प्रकार की संरचनाओं में विद्यमान होती हैं α – हेलिक्स तथा β – प्लीटेड शीट संरचना। ये संरचनाएँ पेप्टाइड आबन्ध के
[latex]\\ \begin{matrix} O \\ \parallel \\ -C- \end{matrix}[/latex]
तथा – NH -समूह के मध्य हाइड्रोजन आबन्ध के कारण पॉलिपेप्टाइड की मुख्य श्रृंखला के नियमित कुण्डलन में उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 14.
प्रोटीन की -हेलिक्स संरचना के स्थायीकरण में कौन-से आबन्ध सहायक होते हैं?
उत्तर :
प्रोटीन की z-हेलिक्स संरचना एक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट के C=0 तथा चतुर्थ ऐमीनो अम्ल अवशेष के N – H के मध्य अन्तरा – आणविक H-आबन्ध द्वारा स्थायित्व प्राप्त करती है।

प्रश्न 15.
रेशेदार तथा गोलिकाकार (globular) प्रोटीन को विभेदित कीजिए।
उत्तर :
(i) रेशेदार प्रोटीन (Fibrous proteins) :
जब पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ समानान्तर होती हैं। तथा हाइड्रोजन एवं डाइसल्फाइड आबन्धों द्वारा संयुक्त रहती हैं तो रेशासम (रेशे जैसी) संरचना बनती है। इस प्रकार के प्रोटीन सामान्यत: जल में अविलेय होती हैं। रेशेदार प्रोटीन जन्तु ऊतकों की प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होती हैं। कुछ सामान्य उदाहरण किरेटिन (बाल, ऊन तथा रेशम में उपस्थित) तथा मायोसिन (मांसपेशियों में उपस्थित) आदि हैं।

(ii) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular proteins) :
जब पॉलिपेप्टाइड की श्रृंखलाएँ कुण्डली बनाकर गोलाकृति प्राप्त कर लेती हैं तो ऐसी संरचनाएँ प्राप्त होती हैं। ये सामान्यतः जल में विलेय होती हैं क्योकि इनके अणु दुर्बल अन्तराअणुक बलों द्वारा जुड़े रहते हैं। इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन इनके सामान्य उदाहरण

प्रश्न 16.
ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति को आप कैसे समझाएँगे? (2016, 18)
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल में एक कार्बोक्सिल समूह (अम्लीय) तथा एक ऐमीन समूह (क्षारीय) समान अणु में पाए जाते हैं। जलीय विलयन में -COOH समूह एक H+ खोता है तथा —NH2, समूह इसे स्वीकार करता है। इस प्रकार ज्विट्टर आयन (zwitter ion) का निर्माण होता है।
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द्विध्रुवीय या ज्विट्टर आयन संरचना के कारण ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी (amphoteric) प्रकृति के होते हैं। ऐमीनो अम्ल की अम्लीय प्रकृति [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] के कारण होती है तथा क्षारीय प्रकृति COO समूह के कारण होती है।
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प्रश्न 17.
एन्जाइम क्या होते हैं? (2016, 17, 18)
उत्तर :
एन्जाइम जैव-उत्प्रेरक होते हैं। जीवधारियों में होने वाली विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में समन्वयन के कारण ही जीवन सम्भव होता है।
उदाहरणार्थ :
भोजन का पाचन, उपयुक्त अणुओं का अवशोषण तथा अन्तत: ऊर्जा का उत्पादन। इस प्रक्रम में अभिक्रियाएँ एक अनुक्रम में होती हैं तथा ये सभी अभिक्रियाएँ शरीर में मध्यम परिस्थितियों में सम्पन्न होती हैं। यह कुछ जैव-उत्प्रेरकों की सहायता से होता है। इन्हीं जैव-उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहा जाता है। रासायनिक रूप में लगभग सभी एन्जाइम गोलिकाकार प्रोटीन होते हैं। एन्जाइम किसी विशेष अभिक्रिया अथवा विशेष क्रियाधार के लिए विशिष्ट होते हैं अर्थात् प्रत्येक जैव-तन्त्र के लिए भिन्न एन्जाइम की आवश्यकता होती है, इसलिए एन्जाइम अन्य प्रचलित उत्प्रेरकों से भिन्न होते हैं। ये अत्यन्त सक्रिय होते हैं तथा इनकी अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा की ही आवश्यकता होती है। ये अनुकूल ताप (310K) तथा pH(7.4) एवं एक वायुमण्डलीय दाब पर कार्य करते हैं।

प्रश्न 18.
प्रोटीन की संरचना पर विकृतीकरण का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर :
प्रोटीन ऊष्मा, खनिज अम्ल, क्षार आदि की क्रिया के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। गर्म करने या खनिज अम्लों की क्रिया कराने पर गोलिकामय प्रोटीन (विलेय प्रोटीन) स्कन्दित या अवक्षेपित होकर तन्तुमय प्रोटीन देते हैं जोकि जल में अविलेय होते है जिसके परिणामस्वरूप प्रोटीन की जैव सक्रियता समाप्त हो जाती है। रासायनिक रूप से विकृतिकरण प्राथमिक संरचना को परिवर्तित नहीं करता है, लेकिन प्रोटीन की द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ परिवर्तित हो जाती हैं।

प्रश्न 19.
विटामिनों को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है? रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन का नाम दीजिए। (2016)
उत्तर :
विटामिनों को जल या वसा में विलेयता के आधार पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है

  1. जल में विलेय विटामिन (Water soluble vitamins) : विटामिन B-कॉम्प्लेक्स तथा विटामिन Cl
  2. वसा में विलेय विटामिन (Fat soluble vitamins) : विटामिन A, D, E, K आदि। विटामिन K रक्त के थक्के जमने के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 20.
विटामिन A व C हमारे लिए आवश्यक क्यों हैं? उनके महत्त्वपूर्ण स्रोत दीजिए।
उत्तर :
विटामिन A की कमी से जीरोफ्थैल्मिया (xerophthalmia) तथा रतौंधी (night blindness) हो जाते हैं, अत: इसका प्रयोग हमारे लिए आवश्यक होता है।
(i) स्रोत (Sources) :
मछली के यकृत का तेल, गाजर, मक्खन तथा दूध। विटामिन C की कमी से स्कर्वी (scurvy) तथा पायरिया हो जाता है।
(ii) स्रोत (Sources) :
नींबू, आँवला, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंकुरित अनाज आदि।

प्रश्न 21.
न्यूक्लीक अम्ल क्या होते हैं? इनके दो महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए। (2016, 17)
उत्तर :
न्यूक्लीक अम्ल वे जैव-अणु होते हैं जो सभी जीवित कोशिकाओं के नाभिकों में न्यूक्लियो- प्रोटीन अथवा क्रोमोसोम के रूप में पाए जाते हैं। न्यूक्लीक अम्ल मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं—डिऑक्सीराइबोस न्यूक्लीक अम्ल (DNA) तथा राइबोसन्यूक्लीक अम्ल (RNA)। चूंकि न्यूक्लीक अम्ल न्यूक्लियोटाइडों की लम्बी श्रृंखला वाले बहुलक होते हैं, अतः इन्हें पॉलिन्यूक्लियोटाइड भी कहते हैं। न्यूक्लीक अम्लों के दो महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं

(i) DNA आनुवंशिकता का रासायनिक आधार है तथा इसे आनुवंशिक सूचनाओं के संग्राहक के रूप में जाना जाता है। DNA लाखों वर्षों से किसी जीव की विभिन्न प्रजातियों की पहचान बनाए रखने के लिए विशिष्ट रूप से उत्तरदायी है। कोशिका विभाजन के समय एक DNA अणु स्वप्रतिकरण (self replication) में सक्षम होता है तथा पुत्री कोशिका में समान DNA रज्जुक का अन्तरण होता है।
(ii) न्यूक्लीक अम्ल (DNA तथा RNA) का दूसरा महत्त्वपूर्ण कार्य कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण है। वास्तव में कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण विभिन्न RNA अणुओं द्वारा होता है, परन्तु किसी विशेष प्रोटीन के संश्लेषण का सन्देश DNA में उपस्थित होता है।

प्रश्न 22.
न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड में क्या अन्तर होता है? (2012)
उत्तर :
1. न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides) :
न्यूक्लियोसाइड में न्यूक्लिक अम्ल के दो आधारीय घटक होते हैं—पेण्टोस शर्करा तथा एक नाइट्रोजनी क्षारक।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा → न्यूक्लियोसाइड
उपस्थित शर्करा के आधार पर न्यूक्लियोसाइड राइबोसाइड तथा डीऑक्सीराइबोसाइड प्रकार के होते हैं।

2. न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides) :
न्यूक्लियोटाइड में न्यूक्लिक अम्लों के तीनों घटक अर्थात् H3 PO4, पेण्टोस शर्करा तथा नाइट्रोजनी क्षारक पाए जाते हैं।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा + H3 PO4 न्यूक्लियोटाइड  या  न्यूक्लियोसाइड + H3 PO न्यूक्लियोटाइड
उपस्थित शर्करा के प्रकार के आधार पर न्यूक्लियोटाइड दो प्रकार के होते हैं

  1. राइबोन्यूक्लियोटाइड
  2. डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटइड।

प्रश्न 23.
DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं। समझाइए।
उत्तर :
DNA अणु में दो रज्जुक, एक रज्जुक के प्यूरीन क्षारक तथा अन्य के पिरिमिडीन क्षारक के मध्य या इसके विपरीत के मध्य हाइड्रोजन आबन्धों के द्वारा जुड़े रहते हैं। क्षारकों के विभिन्न आकारों एवं ज्यामितियों के कारण DNA में एकमात्र सम्भव युग्मन G (ग्वानीन) तथा C (साइटोसीन) के मध्य तीन हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा हो सकता है। दूसरे शब्दों में क्षारकों A (ऐडीनीन) तथा T (थायमीन) के मध्य दो हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा युग्मन सम्भव होता है।
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इस क्षारक-युग्मन सिद्धान्त के कारण एक रज्जुक में क्षारकों का अनुक्रम दूसरे रज्जुक में क्षारकों के अनुक्रम को स्वत: व्यवस्थित कर देता है। अत: DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

प्रश्न 24.
DNA तथा RNA में महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अन्तर लिखिए।
उत्तर :
संरचनात्मक अन्तर (Structural Difference)
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क्रियात्मक अन्तर (Functional Difference)
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प्रश्न 25.
कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA कौन-से हैं?
उत्तर :
कोशिका में तीन प्रकार के RNA पाए जाते हैं

  1. राइबोसोमल RNA (r-RNA)
  2. सन्देशवाहक RNA (m-RNA)
  3. स्थानान्तरण RNA (t-RNA)

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
यौगिकों का युग्म जिसमें दोनों यौगिक टॉलेन्स अभिकर्मक के साथ धनात्मक परीक्षण देते (2016)
(i) ग्लूकोस तथा सुक्रोस
(ii) फ्रक्टोस तथा सुक्रोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस

प्रश्न 2.
सुक्रोस (sucrose) है एक (2017)
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
उत्तर :
(i) डाइसैकेराइड

प्रश्न 3.
इन्युलिन के जल-अपघटन से प्राप्त होता है (2017)
(i) ग्लूकोस
(ii) फ्रक्टोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) लैक्टोस
उत्तर :
(ii) फ्रक्टोस

प्रश्न 4.
सेलुलोस (cellulose) है एक (2017)
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
उत्तर :
(iv) पॉलिसैकेराइड

प्रश्न 5.
ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह के अतिरिक्त होता है
(i) एक द्वितीयक तथा चार प्राथमिक –OH समूह
(ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह
(iii) दो प्राथमिक -OH तथा तीन द्वितीयक –OH समूह
(iv) तीन प्राथमिक –OH तथा दो द्वितीयक –OH समूह
उत्तर :
(ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह

प्रश्न 6.
लैक्टोस के तनु अम्ल के साथ जल-अपघटन में प्राप्त होता है
(i) D-ग्लूकोस तथा D.ग्लूकोस का सममोलर मिश्रण।
(ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस को सममोलर मिश्रण
(iii) D-ग्लूकोस तथा D-फ्रक्टोस का सममोलर मिश्रण
(iv) L-ग्लूकोस तथा D.फ्रक्टोस को सममोलर मिश्रण
उत्तर :
(ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस का सममोलर मिश्रण

प्रश्न 7.
ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन के आधिक्य से क्रिया करके बनाता है
(i) ग्लूकोसाजोन
(ii) ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन
(iii) ग्लूकोस ऑक्सिम
(iv) सोरबिटॉल
उत्तर :
(i) ग्लूकोसाजोन

प्रश्न 8.
मेथिल α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β -D-ग्लूकोसाइड हैं
(i) ऐपीमर
(ii) एनोमर
(iii) एनेन्शियोमर
(iv) डाइस्टीरियोमर
उत्तर :
(ii) एनोमर

प्रश्न 9.
वह कार्बोहाइड्रेट, जो मनुष्यों के पाचन तन्त्र में नहीं पचता है, है (2014)
(i) स्टार्च
(ii) सेलुलोस
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) ग्लूकोस
उत्तर :
(ii) सेलुलोस

प्रश्न 10.
निम्न में से कौन-सा यौगिक बाइयूरेट परीक्षण नहीं देता है? (2014)
(i) कार्बोहाइड्रेट
(ii) पॉलीपेप्टाइड
(iii) यूरिया
(iv) प्रोटीन
उत्तर :
(i) कार्बोहाइड्रेट

प्रश्न 11.
दूध में शर्करा होती है
(i) सुक्रोस
(ii) माल्टोस
(iii) ग्लूकोस
(iv) लैक्टोस
उत्तर :
(iv) लैक्टोस

प्रश्न 12.
शरीर में आरक्षित ग्लूकोस के रूप में कार्य करने वाला कार्बोहाइड्रेट है (2017)
(i) सुक्रोस
(ii) स्टार्च
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) फ्रक्टोस
उत्तर :
(iii) ग्लाइकोजन

प्रश्न 13.
इन्सुलिन किसके उपापचय को नियन्त्रित करता है?
(i) खनिज
(ii) ऐमीनो अम्ल
(iii) ग्लूकोस
(iv) विटामिन
उत्तर :
(iii) ग्लूकोस

प्रश्न 14.
शर्करा के किस कार्बन परमाणु पर हाइड्रॉक्सिल समूह की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति RNA तथा DNA में विभेद करती है?
(i) दूसरे
(ii) तीसरे
(iii) चौथे
(iv) पहले
उत्तर :
(i) दूसरे

प्रश्न 15.
बायर अभिकर्मक का उपयोग किया जाता है (2016)
(i) ऑक्सीकरण के लिए
(ii) द्वि-बन्ध की जाँच के लिए
(iii) ग्लूकोस की जाँच के लिए
(iv) अपचयन के लिए।
उत्तर :
(i) ऑक्सीकरण के लिए

प्रश्न 16.
प्रोटीनों में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्ल जिन्हें मानव शरीर संश्लेषित करता है, हैं
(i) 20
(ii) 10
(iii) 5
(iv) 4
उत्तर :
(ii) 10

प्रश्न 17.
निम्न में से कौन-सा परीक्षण प्रोटीनों के लिए नहीं किया जाता है?
(i) मिलन परीक्षण
(ii) मोलिश परीक्षण
(iii) बाइयूरेट परीक्षण
(iv) निनहाइडूिन परीक्षण
उत्तर :
(ii) मोलिश परीक्षण

प्रश्न 18.
मानव शरीर में संश्लेषित हो सकने वाला ऐमीनो अम्ल है
(i) लाइसीन
(ii) हिस्टीडीन
(iii) वेलीन
(iv) ऐलानीन
उत्तर :
(iv) ऐलानीन

प्रश्न 19.
α -ऐमीनो अम्ल जिसमें ऐरोमैटिक पाश्र्व श्रृंखला होती है, है
(i) प्रोलीन
(ii) टाइरोसीन
(iii) वेलीन
(iv) ट्रिप्टोफेन
उत्तर :
(iv) ट्रिप्टोफेन

प्रश्न 20.
ऐमीनो अम्लों के सन्दर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(i) ये सभी प्रोटीनों के घटक होते हैं
(ii) ये सभी उच्च गलनांक वाले होते हैं
(iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।
(iv) इनके अभिलाक्षणिक आइसोइलेक्ट्रिक बिन्दु होते हैं।
उत्तर :
(iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।

प्रश्न 21.
ऐमीनो अम्ल निम्न में से किसके निर्माण की इकाई होते हैं? (2011, 12)
(i) कार्बोहाइड्रेट के
(ii) प्रोटीन के
(iii) वसा के
(iv) विटामिन के
उत्तर :
(ii) प्रोटीन के

प्रश्न 22.
एन्जाइम होते हैं (2017)
(i) तेल
(ii) वसा-अम्ल
(iii) प्रोटीन
(iv) खनिज
उत्तर :
(iii) प्रोटीन

प्रश्न 23.
विटामिन B1, का रासायनिक नाम है (2016, 18)
(i) एस्कॉर्बिक अम्ल
(ii) रिबोफ्लेविन
(iii) थायमिन
(iv) पाइरीडॉक्सीन
उत्तर :
(iii) थायमिन

प्रश्न 24.
मानव शरीर में निम्न में से किसका निर्माण नहीं हो सकता है?
(i) एन्जाइम
(ii) DNA
(iii) विटामिन्स
(iv) हॉर्मोन्स
उत्तर :
(iii) विटामिन्स

प्रश्न 25.
कैल्सीफेरॉल कहलाता है (2011)
(i) विटामिन A
(ii) विटामिन B
(iii) विटामिन C
(iv) विटामिन D
उत्तर :
(iv) विटामिन D

प्रश्न 26.
विटामिन A की कमी से होता है (2012)
(i) स्कर्वी
(ii) बेरी-बेरी
(iii) रतौंधी
(iv) अरक्तता
उत्तर :
(iii) रतौंधी

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन स्कर्वी रोग के लिए उत्तरदायी है? (2011)
(i) A
(ii) C
(iii) K
(iv) D
उत्तर :
(ii) C

प्रश्न 28.
ऐस्कॉर्बिक अम्ल है (2010)
(i) प्रोटीन
(ii) एन्जाइम
(iii) हॉर्मोन
(iv) विटामिन
उत्तर :
(iv) विटामिन

प्रश्न 29.
बन्ध्यारोधी विटामिन है
(i) विटामिन D
(ii) विटामिन B समूह
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन A
उत्तर :
(iii) विटामिन E

प्रश्न 30.
वसा के साथ आँत में अवशोषित होने वाले विटामिन हैं
(i) A, D
(ii) B, C
(iii) A, C
(iv) B, D
उत्तर :
(i) A, D

प्रश्न 31.
बायोटीन यीस्ट में पाये जाने वाला कार्बनिक पदार्थ है। इसे अन्य किस नाम से पुकारते हैं?
(i) विटामिन H
(ii) विटामिन K
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन B12
उत्तर :
(i) विटामिन H

प्रश्न 32.
वह विटामिन जो न तो जल में और न ही वसा में विलेय है, है
(i) बायोटीन
(ii) थायमीन
(iii) कैल्सीफेरॉल
(iv) ये सभी
उत्तर :
(i) बायोटीन

प्रश्न 33.
निम्न में से प्यूरीन व्युत्पन्न है
(i) साइटोसीन
(ii) ग्वानीन
(iii) यूरेसिल
(iv) थायमीन
उत्तर :
(ii) ग्वानीन

प्रश्न 34.
DNA की द्विकुण्डलीत संरचना का कारण है
(i) स्थिर विद्युत आकर्षण
(ii) वाण्डरवाल्स बल
(iii) द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन
उत्तर :
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन

प्रश्न 35.
DNA में पाये जाने वाले पिरीमिडीन क्षार हैं
(i) साइटोसीन तथा ऐडेनीन
(ii) साइटोसीन तथा ग्वानीन
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन
(iv) साइटोसीन तथा यूरेसिल
उत्तर :
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन

प्रश्न 36.
निम्न में से कौन-सा अंग फाइट या फ्लाइट हॉर्मोन स्रावित करता है?
(i) ऐड्रीनेलिन
(ii) ऐड्रीनल
(iii) पिट्यूटरी
(iv) वृक्क
उत्तर :
(ii) ऐड्रीनल

प्रश्न 37.
निम्न में से किस हॉर्मोन में आयोडीन होती है?
(i) टेस्टेस्टोरेन
(ii) ऐड्रीनेलिन
(iii) थायरोक्सिन
(iv) इन्सुलिन
उत्तर :
(iii) थायरोक्सिन

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोहाइड्रेट को परिभाषित कीजिए। (2016, 17)
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेट ध्रुवण घूर्णक पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन होते हैं या वे पदार्थ होते हैं जो जल-अपघटित होकर मोनोसैकेराइड के कई अणु देते हैं।

प्रश्न 2.
स्टार्च तथा सेलुलोस के मोनोमरों में संरचनात्मक अन्तर क्या होता है।
उत्तर :
स्टार्च ऐमाइलोस (20%) तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80%) से बना होता है तथा ये दोनों α – D -ग्लूकोस से बने होते हैं। सेलुलोस β – D -ग्लूकोस अणुओं का रैखिक (linear) बहुलक (polymer) होता है।

प्रश्न 3.
मानव शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व क्या है? (2017)
उत्तर :

  1. कार्बोहाइड्रेट्स पौधों तथा जन्तुओं दोनों के लिये आवश्यक हैं ये भोजन का मुख्य घटक हैं।
  2. मोनोसैकेराइड शरीर की उपापचयी क्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  3.  ये शारीरिक ईंधन के रूप में कार्य करते हैं।
  4. ग्लूकोस शरीर के रक्त का एक मुख्य घटक है।
  5. कार्बोहाइड्रेट संचित ऊर्जा के रूप में कार्य करता है।

प्रश्न 4.
ग्लूकोस के दो रासायनिक परीक्षण लिखिए। (2009)
उत्तर :

  1. शुष्क परखनली में ग्लूकोस गर्म करने पर पिघलता है और फिर भूरा पड़ जाता है तथा जली शर्करा की-सी गन्ध आती है।
  2. अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ ग्लूकोस चाँदी का दर्पण देता है।

प्रश्न 5.
मोलिश परीक्षण क्या है? (2012, 17, 18)
उत्तर :
यह कार्बोहाइड्रेट का परीक्षण है। एक परखनली में ग्लूकोस का जलीय विलयन लेकर उसमें 2 मिली 2-नैफ्थॉल का ऐल्कोहॉलिक विलयन मिलाकर उसमें कुछ बूंद सान्द्र H2SO4 की डालने पर दो द्रवों के बीच बैंगनी रंग का वलय बनता है।

प्रश्न 6.
सुक्रोस का रासायनिक सूत्र लिखिए। शुष्क अवस्था में गर्म करने का इस पर क्या प्रभाव होता है? (2010)
उत्तर :
सुक्रोस का रासायनिक सूत्र  C12H22O11 है। शुष्क अवस्था में गर्म करने पर यह भूरे रंग का पदार्थ बनाता है।

प्रश्न 7.
इनुलिन क्या है ? इनुलिन से फ्रक्टोस कैसे प्राप्त करते हैं। समीकरण दीजिए। (2009, 17, 18)
उत्तर :
इनुलिन डहेलिया के पौधे की गाँठों से प्राप्त एक प्रकार का स्टार्च है। इनुलिन को तनु H2SO4 के साथ जल-अपघटित करने पर फ्रक्टोस औद्योगिक मात्रा में बनता है।
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प्रश्न 8.
किस बैक्टीरिया की सहायता से पशु सेलुलोस को पचाते हैं। (2014)
उत्तर :

  1. फाइब्रोबैक्टर सक्सिनोजिनस (Fibrobactor succinoginus)।
  2. रूमिनोकस फ्लेवीफेशियन्स (Ruminocus flacifaciens)।

प्रश्न 9.
स्टार्च तथा ग्लूकोस में दो अन्तर बताइए। (2016)
उत्तर :
स्टार्च तथा ग्लूकोस में प्रमुख अन्तर निम्नवत् हैं

  1. स्टार्च फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप नहीं बनाता है, जबकि ग्लूकोस बनाता है।
  2. स्टार्च टॉलेन अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर सिल्वर दर्पण नहीं बनाता है जबकि ग्लूकोस बनाता

प्रश्न 10.
प्रोटीन के मुख्य स्रोत क्या हैं? इनमें पाये जाने वाले विभिन्न तत्त्वों के नाम लिखिए। प्रोटीन का हमारे भोजन में क्या महत्त्व है? (2009, 10, 11, 13, 15, 18)
उत्तर :
मुख्य स्रोत : दूध, अण्डा, दालें, मछली, माँस आदि।
मुख्य तत्त्व : C, H, N, 0, S हैं। महत्त्व-प्रोटीन हमारे शरीर की वृद्धि के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। ये हमारे शरीर में नये ऊतकों का निर्माण करते हैं तथा पुराने ऊतकों की टूट-फूट को ठीक करते हैं। प्रोटीन हमारे शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करते हैं, परन्तु यह कार्य कार्बोहाइड्रेट तथा वसा की अनुपस्थिति में होता है। प्रोटीन संकीर्ण नाइट्रोजनयुक्त यौगिक हैं। ये हमारे शरीर में पाये जाने वाले खून आदि का pH भी ठीक रखते हैं।

प्रश्न 11.
प्रोटीन क्या हैं? इनके महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए। (2009, 16, 17)
उत्तर :
प्रोटीन :
प्रोटीन उच्च अणुभार वाले नाइट्रोजन युक्त जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जो वनस्पति तथा जन्तु दोनों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और जल अपघटन पर 2-ऐमीनो अम्ल देते हैं। ये सभी जीव-जन्तुओं के शरीर का प्रमुख अवयव हैं। जन्तु शरीर का लगभग 19% भाग प्रोटीन का बना होता है। प्रोटीनों के उपयोग

  1. आहार के रूप में : यह भोजन का आवश्यक अंग हैं; जैसे-अण्डा, मांस, दाल इत्यादि।
  2. एन्जाइम : समस्त एन्जाइम प्रोटीन हैं।
  3. हॉर्मोन : शरीर की अनेक आवश्यक क्रियाओं में भाग लेने वाले पदार्थ प्रोटीन ही हैं।
  4. वस्त्रों में : केसीन (casein) का उपयोग कृत्रिम ऊन और रेशम के बनाने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त केसीन प्लास्टिक का उपयोग बटन बनाने में किया जाता है।
  5. औषधियों में : जिलेटिन का उपयोग कैप्सूल (capsules) और फोटोग्राफी की फिल्म तथा प्लेट बनाने में किया जाता है। दवाइयों में प्रयुक्त होने वाले ऐमीनो अम्ल प्रोटीन से प्राप्त किए जाते हैं।
  6. चमड़ा उद्योग में : चमड़े का निर्माण जानवरों की खालों की प्रोटीनों की कमाई (tanning) करके किया जाता है।

प्रश्न 12.
विटामिन A का अणुसूत्र क्या है ? इसकी कमी से क्या हानि होती है? (2010)
उत्तर :
विटामिन A का अणुसूत्र C20H29OH है। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्र रोग हो जाता है।

प्रश्न 13.
उन बीमारियों के नाम बताइए जो विटामिन ‘B’ की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं। इसके दो स्रोत भी लिखिए। या विटामिन B का क्या महत्त्व है? या विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2012)
उत्तर :
विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जल में विलेय कई विटामिनों B, B2, B6, B12 आदि का जटिल मिश्रण है। आजतक लगभग 12 विटामिन B ज्ञात हैं और इनको B1, B2,…., B6…. B12आदि कहा जाता है। बेरी-बेरी का रोग विटामिन B1 के अभाव से होता है। विटामिन B2 की कमी से त्वचा के रोग हो जाते हैं। विटामिन B12 की कमी से ऐनीमिया हो जाता है। अधिक कमी होने पर स्नायविक दोष हो जाते हैं। इनकी कमी से बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है। यह विटामिन खमीर में अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त दाल, अनाज, पत्तेदार तरकारियाँ, दूध के पदार्थ, माँस, कलेजी, अण्डे आदि इसके मुख्य स्रोत हैं।

प्रश्न 14.
विटामिन C का रासायनिक नाम तथा अणुसूत्र लिखिए। शरीर में इस विटामिन की कमी होने पर क्या हानि होती है? (2009, 11, 15, 16)
उत्तर :
विटामिन C का रासायनिक नाम ऐस्कॉर्बिक ऐसिड है तथा इसका अणुसूत्र C6H806 है। इस विटामिन के अभाव से स्कर्वी रोग हो जाता है, हड्डियाँ भंगुर होने लगती हैं तथा मसूड़े फूल जाते हैं और उनमें से रक्त आने लगता है तथा दाँत ढीले होकर गिरने लगते हैं। गर्म करने पर यह विटामिन नष्ट हो जाता है परन्तु आँवले में पाया जाने वाला विटामिन C गर्मी से नष्ट नहीं होता है। जल में अत्यधिक विलेय होने के कारण यह मूत्र के साथ शीघ्र उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं हो पाता। स्रोत-नींबू, आँवला, नारंगी, टमाटर, फल आदि।

प्रश्न 15.
विटामिन A तथा विटामिन D के क्या स्रोत हैं? शरीर में इनकी कमी से कौन-सी बीमारियाँ हो सकती हैं? (2009, 10, 15, 17)
उत्तर :
(i) विटामिन A के मुख्य स्रोत :
दूध, कॉड मछली का तेल, पालक, पपीता, गाजर, टमाटर आदि। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्ररोग हो जाता है।
(ii) विटामिन D के मुख्य स्रोत :
सूर्य का प्रकाश, मक्खन, घी, अण्डे, मछली का तेल आदि। विटामिन D की कमी से हड्डियाँ कमजोर, लचीली और टेढ़ी पड़ जाती हैं और रिकेट्स नामक रोग हो जाता है। इसकी कमी से दाँत भी कमजोर हो जाते हैं।

प्रश्न 16.
सूर्य की किरणों की उपस्थिति में त्वचा के द्वारा कौन-सा विटामिन संश्लेषित होता है और कैसे? (2009)
उत्तर :
सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा में स्थित अगस्टीरॉल, अल्ट्रा-वायलेट किरणों के प्रभाव में विटामिन D2 में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न17.
विटामिन E की कमी से होने वाले रोग का नाम बताइए तथा इसके दो स्रोत लिखिए। (2014)
उत्तर :
विटामिन E की कमी से पेशियों में अपह्यसन होता है तथा जन्तुओं में बन्ध्यता रोग उत्पन्न होता है। विटामिन E गेहूँ के अंकुर के तेल, बिनौले के तेल आदि में पाया जाता है।

प्रश्न 18.
लिपिड क्या हैं? इनके मुख्य कार्य क्या हैं? (2014, 16)
उत्तर :
वे वसा और तेल जो जन्तुओं एवं वनस्पतिओं से प्राप्त होते हैं उन्हें लिपिड वर्ग के अन्तर्गत रखा गया है। लिपिड जल में अविलेय कार्बनिक पदार्थ हैं जो निम्न ध्रुवण के कार्बनिक विलायकों (जैसे-ईथर, क्लोरोफॉर्म) में विलेय होते हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण लिपिड इस प्रकार हैं

  1. वसा और तेल
  2. फॉस्फोलिपिड
  3. स्टेरॉयड
  4. टर्मीन्स

लिपिड के कार्य :

  1. कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के अभाव में शरीर को ऊर्जा प्रदान करना।
  2. शरीर के ताप को नियन्त्रित करना।
  3. स्टेरॉयड कोशिका झिल्ली के घटक हैं।
  4. ये हॉर्मोन्स विकास, वृद्धि, पोषण, जनन क्षमता को नियन्त्रित करते हैं।

प्रश्न 19.
मानव शरीर के लिए वसा का क्या महत्त्व है? ।
उत्तर :
वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। शरीर के कोमल भागों की रक्षा करती है और शरीर को बाहरी सर्दी, गर्मी से बचाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड तथा पॉलीसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट से आप क्या समझते हैं? इनमें कैसे विभेद कीजिएगा? । (2012) कार्बोहाइड्रेटों को उदाहरण देते हुए वर्गीकृत कीजिए। (2011, 12, 13, 17) या मोनोसैकेराइड एवं पॉलीसैकेराइड से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित वर्णन (2018) कीजिए।
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेटों का वर्गीकरण-कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण उनकी आणविक जटिलता या उनके जल-अपघटन पर उत्पन्न पदार्थों पर आधारित है। कार्बोहाइड्रेटों को निम्नलिखित मुख्य वर्गों में बाँटा गया है।
1. मोनोसैकेराइड :
ये सरल शक्कर होती हैं। इनका जल-अपघटन नहीं किया जा सकता है। इसके अणु में कार्बन परमाणु 6 से अधिक नहीं होते हैं, जैसे कि- C6H12O6 (ग्लूकोस), C6H12O6 (फ्रक्टोस) आदि।

2. ओलिगोसैकेराइड :
जो शर्कराएँ जल-अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के कुछ अणु (2 से 10 अणु ) देती हैं ओलिगोसैकेराइड कहलाती हैं। ये शर्कराएँ डाइसैकेराइड, ट्राइसैकेराइड आदि प्रकार की होती हैं।

3. डाइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटने पर मोनोसैकेराइडों के दो अणु देती हैं; जैसे कि— C12H22O11 (सुक्रोस), C12H22O11 (माल्टोस) आदि।
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4. ट्राइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के तीन अणु देती हैं, जैसे कि– C18H32O16 (रैफिनोस)।
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5. पॉलीसैकेराइड :
ये स्वाद में मीठे नहीं होते हैं; अत: इन्हें शक्कर नहीं कहते हैं। ये जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के बहुत अधिक अणु बनाते हैं। इनका सामान्य सूत्र (C6H10O5)n, है। इनका अणुभार बहुत अधिक होता है, जैसे कि स्टार्च, सेलुलोस आदि।
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प्रश्न 2.
(i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण लिखिए।
(ii) फ्रक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित कर देता है, जबकि उसमें कीटोन समूह होता है। (2016)
उत्तर :
(i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण निम्नवत् हैं
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(ii) फ्रक्टोस, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन द्वारा ऑक्सीकृत होकर क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप बनाता है। इसका कारण यह है कि दोनों अभिकर्मकों में उपस्थित क्षार की उपस्थिति में फ्रक्टोस का ग्लूकोस में पुनर्विन्यास हो जाता है, इस प्रकार प्राप्त ग्लूकोस की टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन से अभिक्रिया के फलस्वरूप क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 3.
ग्लूकोस तथा सुक्रोस में विभेद करने वाले दो रासायनिक समीकरण लिखिए। (2016)
उत्तर :
1. ग्लूकोस सान्द्रH2SO4 के साथ ठण्डे में नहीं झुलसता परन्तु गर्म करने पर काला हो जाता है।
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2. सुक्रोस सान्द्र H2SO4 के साथ ठण्डे में झुलसकर काली हो जाती है।
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प्रश्न 4.
डाइसैकेराइड क्या हैं? इनके प्रकार तथा किसी एक के रासायनिक परीक्षण भी लिखिए। (2017)
उत्तर :
डाइसैकेराइड (Disaccharides) :
जो कार्बोहाइड्रेट जल अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के दो अणु देते हैं, डाइसैकेराइड कहलाते हैं
उदाहरण :
सुक्रोस, नाटोस, लैक्टोस। डाइसैकेराइड दो प्रकार के होते हैं

  1. अपचायी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित करते हैं उन्हें अपचायी शर्करा कहते हैं; जैसे—माल्टोज और लैक्टोस
  2. अनपचयी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते हैं उन्हें अनपचयी शर्करा कहते हैं; जैसे-सुक्रोस

परीक्षण :

  1. डाइसैकेराइड भी अन्य कार्बोहाड्रेट की तरह मॉलिश परीक्षण देते हैं।
  2. सुक्रोस फेहलिग विलयन को अपचयित नहीं करता जबकि माल्टोस और लेक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित करता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्लूकोस का संरचना सूत्र लिखिए। इसकी तीन रासायनिक अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जिनसे इसके पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड का होना सिद्ध होता है। (2015) या  उस रासायनिक समीकरण का उल्लेख कीजिए जिससे ज्ञात होता है कि ग्लूकोस में पाँच हाइड्रॉक्सिल समूह उपस्थित हैं। (2014, 15, 16)
उत्तर :
ग्लूकोस की संरचना
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(i) ग्लूकोस में –OH समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की CH3,COCI के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस पेन्टा ऐसीटेट बनता है जिससे यह सिद्ध होता है कि ग्लूकोस में 5(–OH) समूह उपस्थित
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(ii) ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की HCN के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस सायनोहाइड्रिन बनता है।
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(iii) ग्लूकोस में-CHO समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस फेहलिंग विलयन एवं टॉलेन अभिकर्मक को अपचयितं करता है।
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उपर्युक्त अभिक्रियाओं से यह प्रदर्शित होता है कि ग्लूकोस पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड है।

प्रश्न 2.
ऐमीनो अम्ल क्या हैं? इनका वर्गीकरण कैसे किया जाता है। उदाहरण देकर समझाइए। (2015)
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल-ऐमीनो अम्लों के अणु प्रोटीन अणुओं की निर्माण की इकाई या एकलक इकाइयाँ हैं।
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जहाँ  R  ऐल्किल या ऐरिल समूह है।
ऐमीनो अम्लों का वर्गीकरण
1.
प्रकृति के आधार पर
(i) उदासीन ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें -NH2, तथा —COOH समूह की संख्या समान होती है, उन्हें उदासीन ऐमीनो अम्ल कहते हैं।
उदाहरण :
-NH2-CH2-COOH

(ii) अम्लीय ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें प्रत्येक अणु में केवल एक ऐमीनो (-NH2) समूह तथा एक से अधिक कार्बोक्सिल (-COOH) समूह होते हैं।
उदाहरण :
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(iii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें एक-COOH समूह तथा एक से अधिक -NH2, समूह होते हैं।
उदाहरण :
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(iv) सल्फरयुक्त ऐमीनो अम्ल :
इनमें सल्फर उपस्थित होता है।
उदाहरण :
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2.
हाइड्रोकार्बन की प्रकृति के आधार पर
(i) ऐलिफैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐल्किल समूह होता है।
उदाहरण :
ग्लाइसीन, ऐलानीन आदि।

(ii) ऐरोमैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐरिल समूह होता है।
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(iii) विषम चक्रीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R विषम चक्रीय होता है।
उदाहरण :
प्रोलीन
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प्रश्न 3.
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना से आप क्या समझते हैं। प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले कारकों को लिखिए। (2016)
उत्तर :
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना-किसी प्रोटीन की द्वितीयक (2°) संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला पायी जाती हैं। ये दो प्रकार की संरचनाएँ हैं α -हैलिक्स तथा β-प्लीटेड शीट संरचना।
1.α -हैलिक्स संरचना :
इस संरचना में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला दक्षिणावर्ती पेंच के समान मुड़ी रहती है। इसमें प्रत्येक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट का – NH समूह, कुण्डली के अगले मोड़ पर स्थित (- C = O) समूह के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाता है। हैलिक्स संरचना को 3-613हैलिक्स भी कहते हैं क्योंकि हैलिक्स के प्रत्येक घुमाव में 3- 6 ऐमीनो अम्ल अवशेष रहते हैं। हैलिक्स विभिन्न भागों में C = O तथा —NH समूहों के मध्य H – आबन्ध द्वारा 13 सदस्य वलय बनाती है। बालों व ऊन जैसी रेशेदार प्रोटीनों की संरचना इस प्रकार की होती है।

2. β -प्लीटेड शीट संरचना :
इस प्रकार की संरचना में सभी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ खुली हुई अवस्था में एक-दूसरे के पार्श्व में स्थित होती हैं तथा परस्पर अन्तराण्विक हाइड्रोजन बन्धों द्वारा
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जुड़ी होती हैं। अत: इस प्रकार की संरचना वाली प्रोटीन मुलायम होती है। रेशम की संरचना ऐसी ही होती है।
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प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले कारक प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले प्रमुख कारक निम्न हैं

    1. आयनिक आबन्ध या लवण आबन्ध
    2. हाइड्रोजन आबन्ध
  1. हाइड्रोफोबिक आबन्ध (जलविरोधी बन्ध)
  2. डाइसल्फाइड आबन्ध

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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) are part of UP Board Solutions for Class 12 Physics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Physics
Chapter Chapter 7
Chapter Name Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा)
Number of Questions Solved 85
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
एक 100 Ω का प्रतिरोधक 220 V, 50 Hz आपूर्ति से संयोजित है।
(a) परिपथ में धारा का rms मान कितना है?
(b) एक पूरे चक्र में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 2.
(a) ac आपूर्ति का शिखर मान 300 V है। rms वोल्टता कितनी है?
(b) ac परिपथ में धारा का rms मान 10 A है। शिखर धारा कितनी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q2

प्रश्न 3.
एक 44 mH को प्रेरित्र 220 V, 50 Hz आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 4.
एक 60 µF का संधारित्र 110 V, 60 Hz ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q4.1

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प्रश्न 5.
प्रश्न 3 व 4 में एक पूरे चक्र की अवधि में प्रत्येक परिपथ में कितनी नेट शक्ति अवशोषित होती है? अपने उत्तर का विवरण दीजिए।
हल-
प्रश्न 3 व 4 दोनों में ही पूरे चक्र में नेट शून्य शक्ति व्यय होती है।
विवरण- शुद्ध प्रेरित्र तथा शुद्ध धारिता दोनों में धारा तथा विभवान्तर के बीच 90° का कलान्तर होता है।
शक्ति गुणांक cos φ = cos 90° = 0
प्रत्येक में नेट शक्ति व्यय P = Vrms x irms x cos φ = 0

प्रश्न 6.
एक LCR परिपथ की, जिसमें L = 2.0 H, C = 32 µF तथा R = 10 Ω अनुनाद आवृत्ति ωr परिकलित कीजिए। इस परिपथ के लिए Q का क्या मान है?
हल-
दिया है, L = 2.0 हेनरी
C = 32 x 10-6 फैराडे
R = 10 ओम
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 7.
30 µF का एक आवेशित संधारित्र 27 mH के प्रेरित्र से जोड़ा गया है। परिपथ के मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति कितनी है?
हल-
दिया है,
C = 30 µF = 30 x 10-6 F, L = 27 mH = 27 x 10-3 H
प्रारम्भिक आवेश, q0 = 6 mC = 6 x 10-3 C
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 7 में संधारित्र पर प्रारम्भिक आवेश 6 mC है। प्रारम्भ में परिपथ में कुल कितनी ऊर्जा संचित होती है? बाद में कुल ऊर्जा कितनी होगी?
हल-
दिया है, C = 30 x 10-6 F, Q0 = 6 x 10-3 C
प्रारम्भ में परिपथ में संचित ऊर्जा
E = संधारित्र की ऊर्जा + प्रेरित्र की ऊर्जा
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q8
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q8.1
परिपथ में कोई प्रतिरोध नहीं जुड़ा है तथा शुद्ध धारिता तथा शुद्ध प्रेरक में ऊर्जा हानि नहीं होती है। अतः बाद में परिपथ में कुल 0.6 J ऊर्जा ही बनी रहेगी।

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प्रश्न 9.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को, जिसमें R = 20 Ω, L = 1.5 H तथा C = 35 µF, एक परिवर्ती आवृत्ति की 200V ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। जब आपूर्ति की आवृत्ति परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर होती है तो एक पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित की गई माध्य शक्ति कितनी होगी?
हल-
जब आपूर्ति की आवृत्ति = परिपथ की मूल आवृत्ति, तो परिपथ (L-C-R) अनुनादी परिपथ होगा जिसकी प्रतिबाधा Z = ओमीय प्रतिरोध R = 20 ओम
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 10.
एक रेडियो को MW प्रसारण बैण्ड के एक खण्ड के आवृत्ति परास के एक ओर से दूसरी ओर (800 kHz से 1200 kHz) तक समस्वरित किया जा सकता है। यदि इसके LC परिपथ का प्रभावकारी प्रेरकत्व 200 µH हो तो उसके परिवर्ती संधारित्र की परास कितनी होनी चाहिए?
[संकेत : समस्वरित करने के लिए मूल आवृत्ति अर्थात् LC परिपथ के मुक्त दोलनों की आवृत्ति रेडियो तरंग की आवृत्ति के समान होनी चाहिए]
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 11.
चित्र 7.1 में एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथदिखलाया गया है जिसे परिवर्ती आवृत्ति के 230 V के स्रोत से जोड़ा गया है। L = 5.0 H, C = 80 µF, R = 40 Ω.
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current
(a) स्रोत की आवृत्ति निकालिए जो परिपथ में अनुनाद उत्पन्न करे।
(b) परिपथ की प्रतिबाधा तथा अनुनादी आवृत्ति पर धारा का आयाम निकालिए।
(c) परिपथ के तीनों अवयवों के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए। दिखलाइए कि अनुनादी आवृत्ति पर LC संयोग के सिरों पर विभवपात शून्य है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q11.1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 12.
किसी LC परिपथ में 20 mH का एक प्रेरक तथा 50 uF का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश 10 mC है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है t = 0 है।
(a) प्रारम्भ में कुल कितनी ऊर्जा संचित है? क्या यह LC दोलनों की अवधि में संरक्षित है?
(b) परिपथ की मूल आवृत्ति क्या है?
(c) किस समय पर संचित ऊर्जा ।
(i) पूरी तरह से विद्युत है (अर्थात वह संधारित्र में संचित है)?
(ii) पूरी तरह से चुम्बकीय है (अर्थात प्रेरक में संचित है)?
(d) किन समयों पर सम्पूर्ण ऊर्जा प्रेरक एवं संधारित्र के मध्य समान रूप से विभाजित है?
(e) यदि एक प्रतिरोधक को परिपथ में लगाया जाए तो कितनी ऊर्जा अन्ततः ऊष्मा के रूप में क्षयित होगी?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q12
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q12.2

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प्रश्न 13.
एक कुण्डली को जिसका प्रेरण 0.50 H तथा प्रतिरोध 100 Ω है, 240 V व 50 Hz की एक आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) कुण्डली में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) वोल्टेज शीर्ष व धारा शीर्ष के बीच समय-पश्चता (time lag) कितनी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q13.1

प्रश्न 14.
यदि परिपथ को उच्च आवृत्ति की आपूर्ति (240V, 10 kHz) से जोड़ा जाता है तो प्रश्न 13 (a) तथा (b) के उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्ति पर किसी परिपथ में प्रेरक लगभग खुले परिपथ के तुल्य होता है। स्थिर अवस्था के पश्चात किसी dc परिपथ में प्रेरक किस प्रकार का व्यवहार करता है?
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प्रश्न 15.
40 Ω प्रतिरोध के श्रेणीक्रम में एक 100 μF के संधारित्र को 110 V, 60 Hz की आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) परिपथ में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) धारा शीर्ष व वोल्टेज शीर्ष के बीच समय-पश्चता कितनी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q15
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 16.
यदि परिपथ को 110 V, 12 kHz आपूर्ति से जोड़ा जाए तो प्रश्न 15 (a) व (b) का उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्तियों पर एक संधारित्र चालक होता है। इसकी तुलना उस व्यवहार से कीजिए जो किसी dc परिपथ में एक संधारित्र प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 17.
स्रोत की आवृत्ति को एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ की अनुनासी आवृत्ति के बराबर रखते हु तीन अवयवों L c तथा को समान्तर क्रम में लगाते हैहाल्ल्शाइए किसमान्तर LCR परिपथ में इस आवृत्ति पर कुल धारा न्यूनतम है। इस आवृति के लिए प्रश्न 11 में निर्दिष्ट स्रोत तथा अवयवों के लिए परिपथ की हर शाखा में धारा के rms मान को परिकलित। कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q17
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प्रश्न 18.
एक परिपथ को जिसमें 80 mH का एक प्रेरक तथा 60 µF का संधारित्र श्रेणीक्रम में है, 230V, 50 Hz की आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है।
(a) धारा का आयाम तथा rms मानों को निकालिए।
(b) हर अवयव के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए।
(c) प्रेरक में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(d) संधारित्र में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(e) परिपथ द्वारा अवशोषित कुल माध्य शक्ति कितनी है?
[‘माध्य में यह समाविष्ट है कि इसे पूरे चक्र के लिए लिया गया है।]
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प्रश्न 19.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 18 में प्रतिरोध 15 Ω है। परिपथ के हर अवयव को स्थानान्तरित माध्य शक्ति तथा सम्पूर्ण अवशोषित शक्ति को परिकलित कीजिए।
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प्रश्न 20.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को जिसमें L = 0.12 H, C = 480 nF, R = 23 Ω, 230 V परिवर्ती आवृत्ति वाल स्रोत से जोड़ा गया है।
(a) स्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिस पर धारा आयाम अधिकतम है? इस अधिकतम मान को निकालिए।
(b) स्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिसके लिए परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति अधिकतम है?
(c) स्रोत की किस आवृत्ति के लिए परिपथ को स्थानान्तरित शक्ति अनुनादी आवृत्ति की शक्ति की आधी है?
(d) दिए गए परिपथ के लिए Q कारक कितना है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q20UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 21.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ के लिए जिसमें L = 3.0 H, C = 27 µF तथा R = 7.4 Ω अनुनादी आवृत्ति तथा ९कारक निकालिए। परिपथ के अनुनाद की तीक्ष्णता को सुधारने की इच्छा से “अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई” को 2 गुणक द्वारा घटा दिया जाता है। इसके लिए उचित उपाय सुझाइए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q21
अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई को आधा करने अथवा समान आवृत्ति के लिए Q को दोगुना करने हेतु प्रतिरोध R का आधा कर देना चाहिए।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  1. क्या किसी ac परिपथ में प्रयुक्त तात्क्षणिक वोल्टता परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़े गए अवयवों के सिरों पर तात्क्षणिक वोल्टताओं के बीजगणितीय योग के बराबर होता है? क्या यही बात rms वोल्टताओं में भी लागू होती है?
  2. प्रेरण कुण्डली के प्राथमिक परिपथ में एक संधारित्र का उपयोग करते हैं।
  3. एक प्रयुक्त वोल्टता संकेत एक dc (UPBoardSolutions.com) वोल्टता तथा उच्च आवृत्ति के एक ac वोल्टता के अध्यारोपण से निर्मित है। परिपथ एक श्रेणीबद्ध प्रेरक तथा संधारित्र से निर्मित है। दर्शाइए कि dc संकेत C तथा ac संकेत L के सिरे पर प्रकट होगा।
  4. एक लैम्प से श्रेणीक्रम में जुड़ी चोक को एक dc लाइन से जोड़ा गया है। लैम्प तेजी से चमकता है। चोक में लोहे के क्रोड को प्रवेश कराने पर लैम्प की दीप्ति में कोई अन्तर नहीं पड़ता है। यदि एक ac लाइन से लैम्प का संयोजन किया जाए तो तदनुसार प्रेक्षणों की प्रागुक्ति कीजिए।
  5. ac मेंस के साथ कार्य करने वाली फ्लोरोसेंट ट्यूब में प्रयुक्त चोक कुण्डली की आवश्यकता क्यों होती है? चोक कुण्डली के स्थान पर सामान्य प्रतिरोधक का उपयोग क्यों नहीं होता?

उत्तर-

  1. हाँ, परन्तु यह तथ्य rms वोल्टताओं के लिए सत्य नहीं है क्योंकि विभिन्न अवयवों की rms वोल्टताएँ समान कला में नहीं होती।
  2. संधारित्र को जोड़ने से, परिपथ को तोड़ते समय चिनगारी देने वाली धारा संधारित्र को आवेशित करती है; अतः चिनगारी नहीं निकल पाती।
  3. संधारित्र dc सिग्नल को रोक देता है; अत: dc सिग्नल वोल्टता संधारित्र के सिरों पर प्रकट होगा जबकि ac सिग्नल प्रेरक के सिरों पर प्रकट होगा।
  4. dc लाइन के लिए V = 0
    अतः चोक की प्रतिबाधा XL = 2πvL = 0
    अतः चोक दिष्ट धारा के मार्ग में कोई रुकावट नहीं डालती, इससे लैम्प तेज चमकता है। ac लाइन में चोक उच्च प्रतिघात उत्पन्न करती है (L का (UPBoardSolutions.com) मान अधिक होने के कारण); अतः लैम्प में धारा घट जाती है और उसकी चमक मद्धिम पड़ जाती है।
  5. चोक कुण्डली एक प्रेरक का कार्य करती है और बिना शक्ति खर्च किए ही धारा को कम कर देती है। यदि चोक के स्थान पर प्रतिरोधक का प्रयोग करें तो वह धारा को कम तो कर देगा परन्तु इसमें विद्युत शक्ति ऊष्मा के रूप में व्यय होती रहेगी।

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प्रश्न 23.
एक शक्ति संप्रेषण लाइन अपचायी ट्रांसफॉर्मर में जिसकी प्राथमिक कुण्डली में 4000 फेरे हैं, 2300 वोल्ट पर शक्ति निवेशित करती है। 230V की निर्गत शक्ति प्राप्त करने के लिए द्वितीयक में कितने फेरे होने चाहिए?
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प्रश्न 24.
एक जल विद्युत शक्ति संयंत्र में जल दाब शीर्ष 300 m की ऊँचाई पर है तथा उपलब्ध जल प्रवाह 100 m3s-1 है। यदि टरबाइन जनित्र की दक्षता 60% हो तो संयंत्र से उपलब्ध विद्युत शक्ति का आकलन कीजिए, g = 9.8 m s-2
हल-
दिया है, h = 300m, g = 9.8m/s, जल का आयतन V = 100 m3, समय t = 1 s, जनित्र की दक्षता = 60%
जल विद्युत शक्ति = जल-स्तम्भ का दाब x प्रति सेकण्ड प्रवाहित जल का आयतन
= hvg x V= 300 x 10 x 9.8 x 100 = 29.4 x 107 W
जनित्र द्वारा उत्पन्न विद्युत शक्ति = कुल शक्ति x दक्षता
= 29.4 x 107 x [latex]\frac { 60 }{ 100 }[/latex]
= 176.4 x 106 W = 176.4 MW

प्रश्न 25.
440V पर शक्ति उत्पादन करने वाले किसी विद्युत संयंत्र से 15 km दूर स्थित एक छोटे से कस्बे में 220 V पर 800 kW शक्ति की आवश्यकता है। विद्युत शक्ति ले जाने वाली दोनों तार की लाइनों का प्रतिरोध 0.5 Ω प्रति किलोमीटर है। कस्बे को उप-स्टेशन में लगे 4000-220V अपचायी ट्रांसफॉर्मर से लाइन द्वारा शक्ति पहुँचती है।
(a) ऊष्मा के रूप में लाइन से होने वाली शक्ति के क्षय का आकलन कीजिए।
(b) संयंत्र से कितनी शक्ति की आपूर्ति की जानी चाहिए, यदि क्षरण द्वारा शक्ति का क्षय नगण्य है।
(c) संयंत्र के उच्चायी ट्रांसफॉर्मर की विशेषता बताइए।
हल-
(a) तार की लाइनों का प्रतिरोध R = 30 km x 0.5 Ω km-1 = 15 Ω
उप-स्टेशन पर लगे ट्रांसफॉर्मर के लिए Vp = 4000 V, Vs = 220 v माना।
प्राथमिक परिपथ में धारा = ip
द्वितीयक परिपथ में धारा = is
ट्रांसफॉर्मर द्वारा द्वितीयक परिपथ में दी गई शक्ति
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यह धारा सप्लाई लाइन से होकर गुजरती है।
लाइन में होने वाला शक्ति क्षय P = ip2 x R = (200)2 x 15 W = 600 kW

(b) संयंत्र द्वारा आपूर्ति की जाने वाली शक्ति = 800 kW + 600 kW = 1400 kW

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात V = ip x R = 200 x 15 = 3000 V
उप-स्टेशन पर लगा अपचायी ट्रांसफॉर्मर 4000 V – 220 V प्रकार का है;
अतः इस ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली पर विभवपात = 4000 V
संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली वोल्टता = 3000 + 4000 = 7000 V
अत: यह ट्रांसफॉर्मर 440 V – 7000 V प्रकार का होना चाहिए।
सप्लाई लाइन में प्रतिशत शक्ति क्षय = [latex]\frac { 600 kW }{ 1400 kW }[/latex] x 100 = 42.86 %

प्रश्न 26.
प्रश्न 25 को पुनः कीजिए। इसमें पहले के ट्रांसफॉर्मर के स्थान पर 40,000-220 V का अपचायी ट्रांसफॉर्मर है। [पूर्व की भाँति क्षरण के कारण हानियों को नगण्य मानिए। यद्यपि अब यह सन्निकटन उचित नहीं है, क्योंकि इसमें उच्च वोल्टता पर संप्रेषण होता है] अतः समझाइए कि क्यों उच्च वोल्टता संप्रेषण अधिक वरीय है?
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(b) संयंत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली शक्ति = 800 kW + 6 kW = 808 W

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात V = Ip x R = 20 x 15 = 300 V
उपस्टेशन पर लगा ट्रांसफॉर्मर 40000 V – 220 V प्रकार का है; अतः इसकी।
प्राथमिक कुण्डली पर विभवपात = 40000 V
संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली
वोल्टता = 40000 V + 300 V = 40300 V
संयंत्र पर लगा ट्रांसफॉर्मर 440 V – 40300 V प्रकार का होना चाहिए।
सप्लाई लाइन में प्रतिशत शक्ति क्षय = [latex]\frac { 6 }{ 806 }[/latex] x 100 = 0.74%

प्रत्यावर्ती धारा 247 प्रश्न 25 व 26 के हलों से स्पष्ट है कि विद्युत शक्ति उच्च वोल्टता पर सम्प्रेषित करने से सप्लाई लाइन में होने वाला शक्ति क्षय बहुत घट जाता है। यही कारण है (UPBoardSolutions.com) कि विद्युत उत्पादन संयंत्रों से विद्युत शक्ति का सम्प्रेषण उच्च वोल्टता पर किया जाता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वोल्टमीटर द्वारा मापे गए प्रत्यावर्ती धारा के मेन्स का विभव 200 वोल्ट प्राप्त होता है, तो इस विभव का वर्ग-माध्य-मूल मान होगा- (2017)
(i) 200√2 वोल्ट
(ii) 100√2 वोल्ट
(iii) 200 वोल्ट
(iv) 400/π वोल्ट
उत्तर-
(iii) 200 वोल्ट

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प्रश्न 2.
एक ऐमीटर का प्रत्यावर्ती परिपथ में पाठ्यांक 4 ऐम्पियर है। परिपथ में धारा का शिखर मान है- (2014)
(i) 4 ऐम्पियर
(ii) 8 ऐम्पियर
(iii) 4√2 ऐम्पियर
(iv) 2√2 ऐम्पियर
उत्तर-
(iii) 4√2 ऐम्पियर

प्रश्न 3.
विशुद्ध प्रेरकीय परिपथ में शक्ति गुणांक का मान है- (2011)
(i) शून्य
(ii) 0.1
(iii) 1
(iv) अनन्त
उत्तर-
(i) शून्य

प्रश्न 4.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में 8 ओम का प्रतिरोध तथा 6 ओम प्रतिघात का प्रेरकत्व श्रेणीक्रम में लगे हैं। परिपथ की प्रतिबाधा होगी
(i) 2 ओम
(ii) 10 ओम
(iii) 14 ओम
(iv) 14√2 ओम
उत्तर-
(ii) 10 ओम

प्रश्न 5.
अनुनाद की स्थिति में L-C परिपथ की आवृत्ति है- (2010, 17)
(i) 2π√LC
(ii) [latex s=2]\frac { 1 }{ 2\Pi } \sqrt { LC }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { 1 }{ 2\Pi } \sqrt { \frac { 1 }{ LC } }[/latex]
(iv) [latex s=2]2\Pi \sqrt { \frac { 1 }{ LC } }[/latex]
उत्तर-
(iii) [latex s=2]\frac { 1 }{ 2\Pi } \sqrt { \frac { 1 }{ LC } }[/latex]

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प्रश्न 6.
एक श्रेणी अनुनादी LCR परिपथ में धारिता C से 4C परिवर्तित की जाती है। उतनी ही अनुनादी आवृत्ति के लिए प्रेरकत्व Lको परिवर्तित करना चाहिए- (2016)
(i) 2L
(ii) [latex]\frac { L }{ 2 }[/latex]
(iii) 4L
(iv) [latex]\frac { L }{ 4 }[/latex]
उत्तर-
(iv) [latex]\frac { L }{ 4 }[/latex]

प्रश्न 7.
एक L-C-R परिपथ को प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत से जोड़ा गया है। अनुनाद की स्थिति में लगाये गये विभवान्तर एवं प्रवाहित धारा में कलान्तर होगा- (2017)
(i) शून्य
(ii) [latex s=2]\frac { \Pi }{ 4 }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { \Pi }{ 2 }[/latex]
(iv) π
उत्तर-
(i) शून्य

प्रश्न 8.
किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में वोल्टेज V तथा धारा i हो तब शक्ति क्षय- (2014)
(i) Vi
(ii) [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] Vi
(ii) [latex s=2]\frac { 1 }{ \surd 2 }[/latex] Vi
(iv) V तथा के बीच कला कोण पर निर्भर करता है।
उत्तर-
(iv) V तथा i के बीच कला कोण पर निर्भर करता है।

प्रश्न 9.
किसी ट्रांसफॉर्मर में क्या सम्भव नहीं है ? (2010)
(i) भंवर धारा
(ii) दिष्ट धारा
(iii) प्रत्यावर्ती धारा
(iv) प्रेरित धारा
उत्तर-
(ii) दिष्ट धारा

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में विभवान्तर का वंर्ग-माध्य-मूल मान 220 V है। विभव का शिखर मान क्या है? (2014)
हल-
विभव का शिखर मान V0 = Vrms √2 = 200√2 वोल्ट.

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प्रश्न 2.
किसी प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग-माध्य-मूल मान 8 ऐम्पियर है। इसका शिखर मान ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
धारा का शिखर मान i0 = irms √2 = 8√2 ऐम्पियर

प्रश्न 3.
किसी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा का शीर्ष मान √2 A है। धारा का वर्ग-माध्य-मूल (rms) मान ज्ञात कीजिए। (2015)
हल-
धारा का वर्ग-माध्य-मूल (rms) मान
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प्रश्न 4.
एक प्रत्यावर्ती विभव E = 240√2 sin300πt से प्रदर्शित है। विभव का वर्ग-माध्य-मूल मान एवं आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल-
प्रत्यावर्ती विभव के समीकरण E = 240√2 sin300πt की तुलना E = E0 sinωt से करने पर
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प्रश्न 5.
एक प्रत्यावर्ती धारा का समीकरण i = 4 sin (100πt – θ) है। धारा का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए। (2017)
हल-
समीकरण i = 4 sin (100πt – θ) की समीकरण i = i0 sin (2πft – θ) से तुलना करने पर
2πft = 100πt
f = 50 हर्ट्ज़
धारा का आवर्तकाल T = [latex]\frac { 1 }{ f }[/latex] = [latex]\frac { 1 }{ 50 }[/latex] = 0.2 सेकण्ड

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प्रश्न 6.
एक प्रत्यावर्ती वोल्टता का समीकरण V = 100√2 sin (100πt) है। वोल्टता का वर्ग माध्य मूल मान तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए। (2017)
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प्रश्न 7.
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रेरण प्रतिघात का अर्थ समझाइए। (2013)
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में शुद्ध प्रेरकत्व द्वारा धारा के मार्ग में उत्पन्न प्रभावी प्रतिरोध परिपथ को प्रेरण प्रतिघात कहलाता है। इसे XL से व्यक्त करते हैं तथा
XL = ωL = 2πfL

प्रश्न 8.
100 mH प्रेरकत्व की कुण्डली में 50 Hz आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली का प्रेरण प्रतिघात ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
L = 100 mH = 100 x 10-3 H = 0.1 H
f = 50 Hz
प्रेरण प्रतिघात XL = 2πfL = 2 x 3.14 x 50 x 0.1 = 31.4 ओम

प्रश्न 9.
निम्न चित्र से प्रेरक कुण्डली के प्रतिघात की गणना कीजिए- (2012)
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हल-
दी गयी समीकरण V = 10 sin 1000 t की समीकरण V = V0 sinωt है से तुलना करने पर
ω = 1000 सेकण्ड-1
कुण्डली का प्रतिघात XL = ωL = 1000 x 20 x 10-3 Ω = 20 Ω

प्रश्न 10.
किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में 8 ओम का प्रतिरोध 6 ओम प्रतिघात के प्रेरकत्व से श्रेणीक्रम में जुड़ा है। परिपथ के प्रतिबाधा की गणना कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 10

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प्रश्न 11.
एक कुण्डली की प्रतिबाधा 141.4 Ω तथा प्रतिरोध 100 Ω है। उसका प्रतिघात कितना होगा ? (2010)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 11.1
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प्रश्न 12.
L-R परिपथ के शक्ति गुणांक का सूत्र लिखिए। (2011)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 12

प्रश्न 13.
कुण्डली में उत्पन्न वैद्युत वाहक बल का व्यंजक कोणीय चाल के पदों में लिखिए। (2014)
उत्तर-
कुण्डली में उत्पन्न वैद्युत वाहक बल e = NBAω sinωt
sinωt की महत्तम मान 1 होता है तब वैद्युत वाहक बल e = NBAω

प्रश्न 14.
प्रत्यावर्ती धारा तथा प्रत्यावर्ती वोल्टेज के समीकरण लिखिए जब प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से एक संधारित्र जोड़ा जाता है। (2013)
उत्तर-
i = i0 sin(ωt + 90°) तथा V = V0 sin ωt.
इन दोनों समीकरणों से स्पष्ट है कि धारा i वोल्टता V से 90° कलान्तर अग्रगामी है।

प्रश्न 15.
एक LC परिपथ अनुनाद की स्थिति में है। यदि C = 1.0 x 10-6 F तथा L = 0.25 H हो, तो परिपथ में दोलन की आवृत्ति ज्ञात कीजिए। (2015)
हल-
परिपथ में दोलन की आवृत्ति
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प्रश्न 16.
RC का विमीय समीकरण निकालिए जबकि R प्रतिरोध तथा C धारिता है। (2017)
हल-
RC की विमा = [R की विमा] [C की विमा]
= [ML2T-3A-2][M-1L-2T4A2]
= [M0L0T]

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प्रश्न 17.
एक L-C-R परिपथ के शक्ति गुणांक का व्यंजक क्या है? इसका अधिकतम और न्यूनतम मान क्या है? (2014, 17, 18)
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प्रश्न 18.
नीचे दिए गए प्रत्यावर्ती परिपथ (i), (ii) व (iii) में आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टेज की आवृत्ति बढ़ाने पर धारा के मान पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (2012, 14)

उत्तर-
परिपथ (i) में धारा घट जायेगी क्योंकि परिपथ का प्रभावी प्रतिरोध XL (= ωL) आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ जायेगा। परिपथ (ii) में वही धारा रहेगी क्योंकि प्रतिरोध R वोल्टेज की आवृत्ति पर निर्भर नहीं करता। परिपथ (ii) में धारा बढ़ जायेगी क्योंकि इसका प्रभावी प्रतिरोध XC = ([latex s=2]\frac { 1 }{ \omega c }[/latex]) आवृत्ति बढ़ाने पर घट जायेगा।

प्रश्न 19.
L-C-Rपरिपथ में अनुनाद की दशा में शक्ति गुणांक का मान कितना होता है? (2014)
उत्तर-
L-C-R परिपथ में अनुनाद की दशा में शक्ति गुणांक का मान 1 होता है।

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प्रश्न 20.
चित्र 7.4 में प्रत्यावर्ती वोल्टमीटर द्वारा नापे गए विभवान्तर VL, VC तथा VR क्रमशः 20 V, 11 V तथा 12 V प्राप्त हुए। परिणामी विभवान्तर तथा परिपथ धारा में कलान्तर ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
परिणामी विभवान्तर तथा परिपथ धारा में कलान्तर

प्रश्न 21.
दिए गए परिपथ में प्रत्यावर्ती स्रोत का विद्युत वाहक बल तथा परिपथ का शक्ति गुणांक ज्ञात कीजिए। (2017, 18)

प्रश्न 22.
वैद्युत अनुनाद से आप क्या समझते हैं? (2015)
उत्तर-
किसी वैद्युत परिपथ की वह स्थिति, जब किसी विशेष अनुनादी आवृत्ति पर उस परिपथ की प्रतिबाधाओं या प्रवेश्यता के मान परस्पर निरस्त हो जाएँ, ‘वैद्युत अनुनाद’ कहलाती है।

प्रश्न 23.
दिष्ट धारा परिपथ में ट्रांसफॉर्मर का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है? (2012)
उत्तर-
दिष्ट धारा परिपथ में ट्रांसफॉर्मर का उपयोग (UPBoardSolutions.com) नहीं किया जा सकता क्योंकि दिष्ट धारा से क्रोड में परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न नहीं हो सकता।

प्रश्न 24.
एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर 220 वोल्ट पर कार्य करता है तथा एक लोड में 3 ऐम्पियर धारा देता है। प्राथमिक तथा द्वितीयक फेरों की संख्या का अनुपात 1:15 है। प्राथमिक कुण्डली में धारा की गणना कीजिए। (2009)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current VSAQ 24

लघु उत्तरीय प्रश्न

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प्रश्न 1.
प्रत्यावर्ती धारा के वर्ग-माध्य-मूल मान का व्यंजक प्राप्त कीजिए। किसी प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान 10√2 ऐम्पियर है। धारा का वर्ग-माध्य-मूल मान ज्ञात कीजिए। (2015, 17, 18)
हल-
प्रत्यावर्ती धारा की एक पूर्ण साइकिल के लिए धारा के वर्ग i2 के औसत मान के वर्गमूल को धारी का ‘वर्ग-माध्य-मूल मान’ (rms value) कहते हैं। इसे irms से प्रदर्शित करते हैं।
एक पूर्ण साइकिल के लिए i2 का माध्य (औसत) मान
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प्रश्न 2.
प्रत्यावर्ती वोल्टता के वर्ग-माध्य-मूल मान की परिभाषा लिखिए। एक प्रत्यावर्ती वोल्टता का समीकरण V = 300√2 sin500πt वोल्ट है। प्रत्यावर्ती धारा के वर्ग-माध्य-मूल मान एवं आवृत्ति की गणना कीजिए। (2016)
उत्तर-
प्रत्यावर्ती वोल्टता का वर्ग-माध्य-मूल मान- (UPBoardSolutions.com) प्रत्यावर्ती वोल्टेज की एक पूर्ण साइकिल के लिए वोल्टेज के वर्ग के औसत मान के वर्गमूल को वोल्टता का वर्ग-मध्य-मूल मान कहते हैं। इसे Vrms से प्रदर्शित करते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 3.
0.21 हेनरी का प्रेरक तथा 12 ओम का प्रतिरोध 220 वोल्ट एवं 50 हर्ट्ज के प्रत्यावर्ती आवृत्ति धारा स्रोत से जुड़े हैं। परिपथ में धारा का मान और धारा एवं स्रोत के विभवान्तर में कलान्तर ज्ञात कीजिए। (2014)
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प्रश्न 4.
दिए गए वैद्युत परिपथ में प्रतिबाधा, ऐमीटर का पाठ्यांक एवं शक्ति गुणांक ज्ञात कीजिए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 4
हल-
यहाँ, R = 40 Ω, L = 0.1 हेनरी
दी गई समीकरण V = 200 sin300t की तुलना
समीकरण V = V0 sinωt से करने पर,
V0 = 200 वोल्ट, ω = 300 रेडियन/सेकण्ड
प्रेरण प्रतिघात = XL = ωL = 300 x 0.1 = 30 Ω
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 5.
0.1 हेनरी का प्रेरकत्व तथा 30 ओम प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में V = 10 sin400t प्रत्यावर्ती वोल्टेज से जोड़ा गया है। परिपथ में प्रेरण प्रतिघात, प्रतिबाधा, धारा का शिखर मान एवं वोल्टेज और धारा के बीच कलान्तर ज्ञात कीजिए। (2014)
हल-
दी गयी समीकरण V = 10 sin400t वोल्ट की प्रत्यावर्ती वोल्टता समीकरण V= V0sinωt से तुलना करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

प्रश्न 6.
प्रतिघात का विमीय समीकरण लिखिए। दिए गये परिपथ में ज्ञात कीजिए-
(i) परिपथ में प्रवाहित धारा का अधिकतम मान
(ii) परिपथ में प्रवाहित धारा का वर्ग-माध्य-मूल मान
(iii) वोल्टता एवं धारा में कलान्तर। (2013)

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 6
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 6.1

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प्रश्न 7.
प्रत्यावर्ती परिपथ के लिए औसत शक्ति का व्यंजक प्राप्त कीजिए तथा वाटहीन धारा को समझाइए। (2010, 12)
या
वाटहीन धारा क्या है ? (2012, 15, 17)
या
किसी प्रत्यावर्ती धारा की शक्ति के लिए सूत्र ज्ञात कीजिए। शक्ति गुणांक किसे कहते हैं? (2013)
या
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में व्यय शक्ति का सूत्र लिखिए। (2018)
उत्तर-
LR परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा की औसत शक्ति-यदि किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रतिरोध है तथा प्रेरकत्व L दोनों हैं तो धारा i वोल्टता V से कला में पश्चगामी होती (UPBoardSolutions.com) है। यदि धारा और वोल्टता के बीच का कलान्तर φ है तो परिपथ के लिए किसी क्षण वोल्टता तथा धारा के मान निम्नलिखित समीकरणों से व्यक्त कर सकते हैं।
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प्रश्न 8.
चोक कुण्डली का कार्य-सिद्धान्त समझाइए। चोक कुण्डली में वाटहीन धारा के महत्त्व को समझाइए। (2010, 12, 14, 17)
उत्तर-
चोक कुण्डली- प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में वैद्युत ऊर्जा का ह्रास हुए बिना धारा को कम करने का एक साधन उपलब्ध है जिसे चोक कुण्डली कहते हैं। यह एक ऊँचे (UPBoardSolutions.com) प्रेरकत्व की कुण्डली होती है जो एक पृथक्कृत (insulated) ताँबे के मोटे तार को बहुत-से फेरों में लोहे की पटलित क्रोड पर लपेटकर बनायी जाती है। इस कुण्डली का ओमीय प्रतिरोध लगभग शून्य रहता है। इसका प्रेरकत्व काफी ऊँचा रहता है।
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इस प्रकारे समी० (1) के अनुसार चोक कुण्डली में औसत शक्ति लगभग शून्य होगी। इस प्रकार चोक कुण्डली का कार्य-सिद्धान्त वाटहीन धारा के सिद्धान्त पर आधारित है। अतः प्रत्यावर्ती धारा परिपथों में चोक कुण्डली के उपयोग से ऊर्जा क्षय में पर्याप्त कमी हो जाती है।

प्रश्न 9.
10 वोल्ट, 2 कीटंक बल्ब को 100 वोल्ट, 40 हर्ट्ज के प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से जलाना है। बल्ब के श्रेणीक्रम में जोड़े जाने हेतु आवश्यक चोक-कुण्डली के प्रेरकत्व की गणना कीजिए। (2014)
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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 9.1

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प्रश्न 10.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में 100 हर्टज आवृत्ति पर सप्लाई विभवान्तर 80 वोल्ट है। एक संधारित्र को श्रेणीक्रम में 10 ओम प्रतिरोधक के साथ इस परिपथ में जोड़ा जाता है तो परिपथ का शक्ति गुणांक 0.5 हो जाता है। इस संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए। (2015)
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प्रश्न 11.
एक 50 वाट 100 वोल्ट के वैद्युत लैम्प को 200 वोल्ट, 60 हर्ट्ज के विद्युत मेन्स से जोड़ना है। लैम्प के श्रेणी क्रम में आवश्यक संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current SAQ 11
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प्रश्न 12.
दिए गए परिपथ में ज्ञात कीजिए (i) ऐमीटर (A) का पाठ्यांक (ii) वोल्टमीटर (V) का पाठ्यांक (iii) शक्ति-गुणांक। (2013, 17)
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UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current Q12.1

प्रश्न 13.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रेरकत्व (L), संधारित्र (C) तथा प्रतिरोध (R) श्रेणीक्रम में जोड़े गये हैं। परिपथ से L को हटा देने पर वोल्टता तथा विद्युत धारा के बीच 1/3 का कलान्तर होता है। यदि के बजाय परिपथ सेc को हटा दें तब भी कलान्तर [latex s=2]\frac { \Pi }{ 3 }[/latex] रहता है। परिपथ का शक्ति गुणांक क्या होगा? (2015)
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प्रश्न 14.
एक प्रत्यावर्ती परिपथ में प्रतिरोध, संधारित्र तथा प्रेरण कुण्डली एक प्रत्यावर्ती स्रोत से श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। इनके सिरों के विभवान्तर क्रमशः 40 वोल्ट, 20 वोल्ट तथा 50 वोल्ट हैं। परिपथ में प्रत्यावर्ती स्रोत का विभव एवं परिपथ का शक्ति-गुणांक ज्ञात कीजिए। (2012, 15)
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प्रश्न 15.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रेरकत्व, संधारित्र तथा प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़े गये हैं। प्रत्यावर्ती वोल्टेज तथा धारा के समीकरण दिये गये हैं।
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ज्ञात कीजिए-
(i) प्रत्यावर्ती धारा स्रोत की आवृत्ति
(ii) V तथा i के मध्य कलान्तर
(iii) परिपथ की प्रतिबाधा। (2013)
हल-
धारा तथा वोल्टता के समीकरणों से स्पष्ट है कि
V0 = 200 वोल्ट, i0 = 5 ऐम्पियर
तथा ω = 314 रेडियन/सेकण्ड
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प्रश्न 16.
एक श्रेणी L-C-R परिपथ, जिसमें L = 10.0 H, C = 40 µF तथा R = 60 Ω को 240 V के परिवर्ती आवृत्ति के प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से जोड़ा गया है। गणना कीजिए-
(i) स्रोत की कोणीय आवृत्ति जो परिपथ को अनुनाद की अवस्था में लाता है।
(ii) अनुनादी आवृत्ति पर धारा। (2014)
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प्रश्न 17.
चित्र 7.12 में प्रदर्शित प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रतिरोध R, संधारित्र C तथा प्रेरक कुण्डली L के सिरों के बीच उपलब्ध विभवान्तर प्रदर्शित किए गए हैं। प्रत्यावर्ती धारा स्रोत के विद्युत वाहक बले की गणना कीजिए। (2015)
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प्रश्न 18.
अनुनादी परिपथ से क्या अभिप्राय है? श्रेणी व समान्तर अनुनादी परिपथ के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध तथा प्रत्येक अनुनाद की स्थिति में आवृत्ति का व्यंजक लिखिए। इनमें अन्तर भी स्पष्ट कीजिए। (2010)
उत्तर-
अनुनादी परिपथ (Resonant Circuits)- वे प्रत्यावर्ती धारा परिपथ जो अपने पर आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति के एक विशेष मान के संगत प्रत्यावर्ती धारा को अपने अन्दर से प्रवाहित होने देते हैं अथवा प्रवाहित होने से रोक देते हैं, अनुनादी परिपथ कहलाते हैं। ये निम्न दो प्रकार के होते हैं-

1. श्रेणी अनुनादी परिपथ (Series Resonant Circuit)- वह प्रत्यावर्ती धारा परिपथ जिसमें प्रेरकत्व L, धारिता C तथा प्रतिरोध R परस्पर श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं तथा यह परिपथ इस पर आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति के एक विशेष मान fo के संगत अधिकतम प्रत्यावर्ती धारा (UPBoardSolutions.com) को अपने अन्दर से प्रवाहित होने देता है, श्रेणी अनुनादी परिपथ कहलाता है।
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2. समान्तर अनुनादी परिपथ (Parallel Resonant Circuit)- वह प्रत्यावर्ती धारा परिपथ जिसमें कुण्डली (प्रेरकत्व = L) व संधारित्र (धारिता = C) प्रत्यावर्ती वोल्टता स्रोत से समान्तर क्रम में जुड़े हों तथा यह परिपथ इस पर आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति के विशेष मान fo के संगत धारा को अपने अन्दर से प्रवाहित नहीं होने देता हो; समान्तर अनुनादी परिपथ कहलाता है। यह विशेष आवृत्ति fo इसकी अनुनादी आवृत्ति कहलाती है। यह (L-C) परिपथ की स्वाभाविक आवृत्ति होती है।
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प्रश्न 19.
L-C-R संयोजन के लिए श्रेणी क्रम अनुनादी परिपथ बनाइए। इस परिपथ के लिए अनुनादी आवृत्ति का सूत्र प्राप्त कीजिए। (2017)
या
एक प्रत्यावर्ती वोल्टेज स्रोत V = V0 sinωt से प्रेरकत्व L संधारित्र C तथा प्रतिरोध R श्रेणी क्रम में जुड़े हैं। वेक्टर आरेख खींचकर परिपथ की प्रतिबाधा तथा कला कोण के सूत्र निकालिए। (2016)
या
किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में L, C और R श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। इस परिपथ का आरेख बनाइए। परिपथ की प्रतिबाधा एवं अनुनादी आवृति के लिए सूत्र लिखिए। यदि परिपथ में लगा प्रत्यावर्ती विभव 300 वोल्ट हो, प्रेरण प्रतिघात 50 ओम, धारितीय प्रतिघात 50 ओम तथा ओमीय प्रतिरोध 10 ओम हों तो परिपथ की प्रतिबाधा तथा L, C व R के सिरों के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए।
या
प्रत्यावर्ती वोल्टेज स्रोत V = V0 sinωt से विप्रेरक L संधारित C तथा प्रतिरोध R तीनों श्रेणी क्रम में जुड़े हैं। सिद्ध कीजिए कि परिपथ की प्रतिबाधा Z का मान
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हल-
माना प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में, प्रेरकत्व L की एक कुण्डली, धारिता C का संधारित्र तथा प्रतिरोध R को श्रेणीक्रम में जोड़कर प्रत्यावर्ती धारा-स्रोत V = V0 sinωt से जोड़ देते हैं [चित्र 7.15 (a)]। इस दशा में प्रतिरोध R के सिरों के बीच प्रेरित विभवान्तर VR तथा धारा i समान कला में होंगे, (UPBoardSolutions.com) प्रेरकत्व L के सिरों के बीच प्रेरित विभवान्तर VL, धारा i से कला में 90° अग्रगामी होगा तथा धारिता C सिरों के बीच प्रेरित विभवान्तर VC, धारा i से कला में 90° पश्चगामी होगा। [चित्र 7.15 (b) ]। अतः VL तथा VC का परिणामी विभवान्तर VL – VC होगा। यदि L-C-R परिपथ में परिणामी विभवान्तर V हो, तब
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प्रश्न 20.
एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक एवं द्वितीयक कुण्डलियों में फेरों की संख्या क्रमशः 1100 एवं 110 है। प्राथमिक कुण्डली में सप्लाई वोल्टेज 220 वोल्ट है। यदि द्वितीयक कुण्डली से जुड़े यंत्र की प्रतिबाधा 220 ओम हो, तो प्राथमिक कुण्डली द्वारा ली गई धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2014)
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प्रश्न 21.
220 वोल्ट आपूर्ति से किसी आदर्श ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली द्वारा उस समय कितनी धारा ली जाती है जब यह 110V-550 W के रेफ्रिजरेटर को शक्ति प्रदान करता (2017)
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प्रश्न 22.
एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक तथा द्वितीयक कुण्डलियों में फेरों की संख्याओं का अनुपात 1 : 200 है। यदि इसे 200 वोल्ट की प्रत्यावर्ती धारा की मेन लाइन से जोड़ दें तो द्वितीयक में प्राप्त वोल्टता ज्ञात कीजिए। यदि प्राथमिक में धारा का मान 2.0 ऐम्पियर हो तो द्वितीयक में प्रवाहित अधिकतम धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2013)
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ट्रांसफॉर्मर की रचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। (2017)
या
ट्रांसफॉर्मर का नामांकित चित्र बनाइए तथा उसके परिणमन अनुपात का सूत्र व्युत्पादित कीजिए। (2010)
या
ट्रांसफॉर्मर का सिद्धान्त क्या है? (2018)
उत्तर-
ट्रांसफॉर्मर (Transformer)- अन्योन्य प्रेरण (mutual induction) के सिद्धान्त पर आधारित यह एक ऐसी युक्ति है जिससे प्रत्यावर्ती धारा के विभव को कम अथवा अधिक किया जाता है। ट्रांसफॉर्मर केवल प्रत्यावर्ती धारा या विभव को ही परिवर्तित करने के काम आते हैं, दिष्ट धारा या विभव के परिवर्तन में नहीं। ये दो प्रकार के होते हैं-

  1. उच्चायी ट्रांसफॉर्मर (Step-up Transformer)- इनके द्वारा कम विभवे वाली प्रबल प्रत्यावर्ती धारा को ऊँचे विभव वाली निर्बल धारा में बदला जाता है।
  2. अपचायी ट्रांसफॉर्मर (Step-down Transformer)- इनके द्वारा ऊँचे विभव वाली निर्बल प्रत्यावर्ती धारा को कम विभव वाली प्रबल धारा में बदला जाता है।

रचना- इसमें कच्चे लोहे की आयताकार गोलाकार मुड़ी हुई पत्तियाँ एक पटलित क्रोड (laminated core) के रूप में होती हैं। ये पत्तियाँ एक-दूसरे के ऊपर वार्निश से जोड़ दी जाती हैं जिससे कि ये एक-दूसरे से पृथक्कृत रहें। फलतः क्रोड में कम भंवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं और वैद्युत ऊर्जा का ह्रास घट जाता है। इस क्रोड पर ताँबे के तार की दो कुण्डलियाँ इस प्रकार लपेटी जाती हैं कि वे एक-दूसरे से (UPBoardSolutions.com) तथा लोहे की क्रोड से पृथक्कृत रहें [चित्र 7.16 (a)] इनमें से एक पर ताँबे के मोटे तार के कम फेरे होते हैं तथा दूसरी में ताँबे के पतले तार के अधिक फेरे होते हैं। इनमें एक को प्राथमिक कुण्डली (Primary coil) और दूसरी को ‘द्वितीयक कुण्डली’ (Secondary coil) कहते हैं। उच्चायी ट्रांसफॉर्मर में मोंटे तार की कम फेरों वाली प्राथमिक कुण्डली होती है, और पतले तार की अधिक फेरों वाली कुण्डली द्वितीयक कुण्डली होती है [चित्र 7.16 (b)] अपचायी ट्रांसफॉर्मर में इसके विपरीत होता है [चित्र 7.16 (c)]]
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कार्यविधि- जिस वि० वा० बल को परिवर्तित करना होता है, उसे सदैव प्राथमिक कुण्डली से जोड़ते हैं। जब प्राथमिक कुण्डली में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है तो धारा के प्रत्येक चक्कर में क्रोड एक बार एक दिशा में चुम्बकित होती है तथा दूसरी बार दूसरी दिशा में। अतः क्रोड में एक परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस प्रकार प्राथमिक कुण्डली की वैद्युत-ऊर्जा का क्रोड में चुम्बकीय ऊर्जा के रूप में स्थानान्तरण हो जाता है। चूंकि द्वितीयक कुण्डली इस क्रोड पर लिपटी रहती है, अतः क्रोड के बार-बार चुम्बकन तथा विचुम्बकन होने की क्रिया से इस कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय-फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है। इस प्रकार (UPBoardSolutions.com) वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के प्रभाव से द्वितीयक कुण्डली में उसी आवृत्ति का प्रत्यावर्ती वि० वा० बल उत्पन्न हो जाता है। इस प्रेरित वि० वा० बल का मान दोनों कुण्डलियों के फेरों की संख्या के अनुपात तथा प्राथमिक कुण्डली को दिये गये वि० वा० बल पर निर्भर करता है। माना कि प्राथमिक एवं द्वितीयक कुण्डलियों में तार के फेरों की संख्या क्रमशः N, और N, हैं। मान लो कि चुम्बकीय फ्लक्स का कोई क्षरण (leakage) नहीं होता है जिससे कि दोनों कुण्डलियों के प्रत्येक फेरे में से समान फ्लक्स गुजरता है। माना कि किसी क्षण कुण्डलियों के प्रत्येक फेरे से बद्ध फ्लक्स का मान ऎ है। तब फैराडे के वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के नियमानुसार प्राथमिक कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वि० वा० बल
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यदि प्राथमिक परिपथ का प्रतिरोध नगण्य हो तथा ऊर्जा का कोई क्षय न हो तो प्राथमिक कुण्डली में प्रेरित वि० वा० बल ep, का मान प्राथमिक परिपथ में लगाये गये विभवान्तर Vp के तुल्य (लगभग) होगा। इसके अतिरिक्त यदि द्वितीयक परिपथ खुला हो (अर्थात् प्रतिरोध अनन्त हो) तो द्वितीयक कुण्डली के सिरों के बीच विभवान्तर Vs उसमें उत्पन्न प्रेरित वि० वा० बल es के तुल्य होगा। इन आदर्श परिस्थितियों में
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current LAQ 1.2जहाँ r को ‘परिणमन-अनुपात’ (transformation ratio) कहते हैं। उच्चायी ट्रांसफॉर्मर के लिए r का मान r से अधिक तथा अपचायी ट्रांसफॉर्मर के लिए 1 से कम होता है।

यदि ट्रांसफॉर्मर द्वारा वैद्युत विभव को बढ़ाना है तो विद्युत वाहक बल के स्रोत को उस कुण्डली से सम्बन्धित करते हैं जिसके तार मोटे हैं और जिसमें फेरों की संख्या कम होती है। उपर्युक्त सूत्र से स्पष्ट है। कि इस दशा में Vs, Vp से बड़ा होगा; अर्थात् r का माने 1 से अधिक होगा। (UPBoardSolutions.com) वैद्युत-विभव को कम करने के लिए विद्युत वाहक बल के स्रोत को पतले तार से बनी अधिक फेरों वाली कुण्डली से जोड़ते हैं। स्पष्ट है कि इस दशा में Vs का मान Vp से कम होगा जिसके फलस्वरूप r का मान 1 से कम होगा।

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प्रश्न 2.
एक समांग चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् किसी अक्ष के परितः कोणीय वेग से घूमती हुई आयताकार कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र निगमित कीजिए। प्रेरित विद्युत वाहक बल कब महत्तम होगा और कब शून्य? (2011)
उत्तर-
माना एक कुण्डली के तल का क्षेत्रफल A है तथा इसमें तार के N फेरे हैं। इस कुण्डली को एक नियत कोणीय वेग ω से चित्र 7.17 (a) की भाँति एक ऊर्ध्वाधर अक्ष YY’ के परितः एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में दक्षिणावर्त दिशा में घुमाया जा रहा है।
माना किसी क्षण कुण्डली के तल पर खींचा गया अभिलम्ब अर्थात् कुण्डली का अक्ष चित्र 7.17 (b) की भाँति [latex s=2]\vec { B }[/latex] की दिशा के साथ θ कोण (UPBoardSolutions.com) बनाता है। इस क्षण चुम्बकीय क्षेत्र B का कुण्डली के तल के लम्बवत् घटक B cosθ से होगा।
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e = NBAω sinωt …(1)
प्रेरित वि० वी० बल के लिए सूत्र (1) से स्पष्ट है कि प्रेरित वि० वा० बल का मान समय t के साथ-साथ निरन्तर बदलता रहेगा परन्तु sinωt का अधिकतम मान 1 होता है। अतः प्रेरित विद्युत वाहक बल e का
अधिकतम मान = NBAω होगा। यदि इसको e0 से प्रदर्शित किया जाए तो प्रेरित विद्युत वाहक बल के लिए सूत्र (1) को निम्नलिखित रूप में व्यक्त किया जाता है।
e = e0 sinωt …(2)

जहाँ e का अधिकतम मान e0 = NBAω
उपर्युक्त सूत्र (2) से स्पष्ट है कि जब किसी कुण्डली (UPBoardSolutions.com) को चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है जो ज्या-वक्र (sine curve) की भाँति बदलता रहता है। इसका मान कुण्डली के घुमाव कोण θ = ωt पर निर्भर करता है।

जब कुण्डली का तल चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् होता है तब से θ = 0°
अतः e = e0 sin 0° = 0
अर्थात् e का मान शून्य होता है। यह कुण्डली की प्रारम्भिक स्थिति है तथा प्रत्येक चक्कर के पश्चात् यही स्थिति होती है।

जब कुण्डली चौथाई चक्कर घूम जाती है तो θ = 90°
तथा इस दशा में e = e0 sin 90° = e0 (अधिकतम)
यही स्थिति कुण्डली के तीन-चौथाई चक्कर घूमने पर आती है परन्तु विपरीत दिशा में प्रेरित विद्युत वाहक बल अधिकतम होता है।
अर्थात् e = – e0
इस प्रकार कुण्डली के पहले आधे चक्कर में कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वि० वी० बल शून्य से बढ़कर अधिकतम मान को प्राप्त करता है तथा पुनः घटकर शून्य हो (UPBoardSolutions.com) जाता है, जबकि शेष आधे चक्कर में यह विपरीत दिशा में अधिकतम मान को प्राप्त करता है तथा पुनः घटकर शून्य हो जाता है। यही क्रिया बार-बार दोहरायी जाती है।

प्रश्न 3.
ए०सी० जनित्र की रचना एवं कार्यविधि समझाइए। दिष्ट धारा की तुलना में प्रत्यावर्ती धारा के क्या लाभ हैं जिनके कारण अब आमतौर पर प्रत्यावर्ती धारा ही प्रयोग की जाती है?
हल-
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र का सिद्धान्त तथा कार्य-प्रणाली चित्र द्वारा समझाइए। (2014)
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र अथवा डायनमो
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की क्रिया का सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग विद्युत जनित्र अथवा डायनमो में किया गया है। यह एक ऐसी विद्युत चुम्बकीय मशीन है जिसके द्वारा यान्त्रिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। प्रत्यावर्ती धारा को उत्पन्न करने के लिये प्रत्यावर्ती-धारा डायनमो तथा दिष्ट धारा को उत्पन्न करने के लिए दिष्ट-धारा डायनमो का उपयोग होती है।

सिद्धान्त- जब किसी बन्द कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तो उसमें से गुजरने वाली फ्लक्स-रेखाओं की संख्या में लगातार परिवर्तन होता रहता है। जिसके (UPBoardSolutions.com) कारण कुण्डली में वैद्युत धारा प्रेरित हो जाती है। कुण्डली को घुमाने में जो कार्य करना पड़ता है (अर्थात् यान्त्रिक ऊर्जा व्यय होती है) वही कुण्डली में वैद्युत ऊर्जा के रूप में प्राप्त होता है।
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रचना- इसके तीन मुख्य भाग होते हैं (चित्र 7.18)।
(i) क्षेत्र चुम्बक (Field Magnet)- यह एक शक्तिशाली चुम्बक NS होता है। इसके द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की बल रेखाएँ चुम्बक के ध्रुव N से S की ओर होती हैं।
(ii) आर्मेचर (Armature)- चुम्बक के ध्रुवों के N बीच में पृथक्कृत ताँबे के तारों की एक कुण्डली ABCD होती है, जिसे आर्मेचर कुण्डली कहते सर्दी-वलय हैं। कुण्डली कई फेरों की होती है तथा ध्रुवों के बीच क्षैतिज अक्ष पर जल के टरबाइन से घुमाई जाती है।
(iii) सप वलय तथा ब्रुश (Slip Rings and Brushes)- कुण्डली के सिरों का सम्बन्ध अलग-अलग दो ताँबे के छल्लों से होता है जो आपस में एक-दूसरे को स्पर्श नहीं करते और कुण्डली के साथ उसी अक्ष पर घूमते हैं। इन्हें ‘सप वलय’ कहते हैं। इन छल्लों को दो कार्बन की ब्रुश X तथा ? स्पर्श करती रहती हैं। ये ब्रुश स्थिर रहती हैं तथा छल्ले इन ब्रुशों के नीचे फिसलते हुए घूमते हैं। इन ब्रुशों का सम्बन्ध उस बाह्य परिपथ से कर देते हैं जिसमें वैद्युत धारा भेजनी होती है।

क्रिया- जब आमेचर-कुण्डली ABCD घूमती है तो कुण्डली में से होकर जाने वाली फ्लक्स-रेखाओं की संख्या में परिवर्तन होता है। अत: कुण्डली में धारा प्रेरित हो जाती है। मान लो कुण्डली दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में घूम रही है तथा किसी क्षण क्षैतिज अवस्था में है (चित्र 7.18)। इस क्षण कुण्डली की भुजा AB ऊपर उठ रही है तथा भुजा CD नीचे आ रही है। फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम अनुसार, (UPBoardSolutions.com) इन भुजाओं में प्रेरित धारा की दिशा वही है जो चित्र में दिखाई गई है। अत: धारा ब्रुश X से बाहर जा रही है (अर्थात् यह ब्रुश धन ध्रुव है) तथा ब्रुश Y पर वापस आ रही है (अर्थात् यह ब्रुश ऋण ध्रुव है)। जैसे ही कुण्डली अपनी ऊध्र्वाधर स्थिति से गुजरेगी, भुजा AB नीचे की ओर आने लगेगी तथा CD ऊपर की ओर जाने लगेगी। अतः अब धारा ब्रुश Y से बाहर जायेगी तथा ब्रुश X पर वापस आयेगी। इस प्रकार आधे चक्कर के बाद बाह्य परिपथ में धारा की दिशा बदल जायेगी। अत: परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा’ (alternating current) उत्पन्न होती है।

प्रत्यावर्ती धारा की-दिष्ट-धारा की तुलना में उपयोगिता आजकल घरेलू व औद्योगिक कार्यों में प्रत्यावर्ती धारा का ही उपयोग होता है क्योंकि दिष्ट-धारा की तुलना में इसके निम्न लाभ हैं|

(i) प्रत्यावर्ती धारा को पावर हाऊस से किसी स्थान पर ट्रांसफॉर्मर की सहायता से उच्च वोल्टेज पर भेजा जा सकता है तथा वहाँ इसे पुन: निम्न वोल्टेज पर लाया जा सकता है। इस प्रकार भेजने में लागत भी कम आती है तथा ऊर्जा ह्रास भी बहुत घट जाता है। ट्रांसफॉर्मर का उपयोग दिष्ट-धारा के लिए नहीं किया जा सकता। अत: दिष्ट-धारा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने में ऊर्जा ह्रास भी होता है तथा लागत भी अधिक आती है।

(ii) प्रत्यावर्ती धारा को चोक-कुण्डली द्वारा बहुत कम ऊर्जा ह्रास पर नियन्त्रित किया जा सकता है, जबकि दिष्ट-धारा ओमीय प्रतिरोध द्वारा ही नियन्त्रित की जा सकती है जिसमें अत्यधिक ऊर्जा ह्रास होता है।

(iii) प्रत्यावर्ती धारा वाले यन्त्र; जैसे-वैद्युत मोटर, दिष्ट-धारा वाले यन्त्रों की तुलना में सुदृढ़ व सुविधाजनक होते हैं।

(iv) जहाँ दिष्ट धारा की आवश्यकता होती है (जैसे-विद्युत अपघटन में, संचायक सेलों को आवेशित करने में, वैद्युत चुम्बक बनाने में) वहाँ दिष्टकारी (rectifer) द्वारा प्रत्यावर्ती धारा को सुगमता से | दिष्ट-धारा में बदल लिया जाता है।

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प्रश्न 4.
एक कुण्डली 220 वोल्ट, 50 हर्ट्ज वाले प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से 20 ऐम्पियर धारा तथा 200 वाट शक्ति लेती है। कुण्डली का प्रतिरोध तथा प्रेरकत्व ज्ञात कीजिए। (2017)
हल-
कुण्डली में शक्ति-क्षय P, केवल इसके ओमीय प्रतिरोध R के कारण है। अतः  UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 7 Alternating Current

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