UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 10 कण्ट्रोल स्टेटमेण्ट्स

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 10
Chapter Name कण्ट्रोल स्टेटमेण्ट्स
Number of Questions Solved 35
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 10 कण्ट्रोल स्टेटमेण्ट्स

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
if, if-else तथा switch स्टेटमेण्ट्स हैं।
(a) ब्रांचिंग
(b) जम्पिंग
(c) लूपिंग
(d) कण्डीशन
उत्तर:
(a) ब्रांचिंग

प्रश्न 2
निम्न में से कौन-सा लूप स्टेटमेण्ट नहीं है? [2013]
(a) if
(b) do-while
(c) while
(d) for
उत्तर:
(a) if एक ब्रांचिंग स्टेटमेण्ट है, जो प्रोग्राम में निर्णय लेने के लिए प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 3
default की-वई किसमें प्रयोग किया जाता है?
(a) goto
(b) if
(c) if-else
(d) switch
उत्तर:
(d) switch

प्रश्न 4
break स्टेटमेण्ट का प्रयोग निम्न में से किससे बाहर जाने में किया जा सकता है?
(a) for लूप
(b) while लूप
(c) Switch स्टेटमेण्ट
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 5
निम्न में से कौन-सा प्रोसेस संख्याओं को निश्चित अंक तक चलाने के लिए उच्चतम है?
(a) for
(b) while
(c) do-while
(d) ये सभी
उत्तर:
(a) for लूप अन्य सभी स्टेटमेण्ट से उच्चतम है।

प्रश्न 6
निम्न में से i++; स्टेटमेण्ट किसके समान है?
(a) i = i +i;
(b) i = i+1;
(c) i = i-1;
(d) i–;
उत्तर:
(b) i++; स्टेटमेण्ट से तात्पर्य है कि उसमें 1 अंक जुड़ जाए, इसलिए 1 = 1+ 1; इसके समान है।

प्रश्न 7. Unconditional branching statement का उदाहरण है [2007]
(a) if else
(b) go to
(c) switch
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) go to

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
कोई नम्बर 2 से विभाजित है अथवा नहीं इसके लिए स्टेटमेण्ट लिखिए।
उत्तर:
if (n%2 == 0)

प्रश्न 2
switch स्टेटमेण्ट का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
switch स्टेटमेण्टे का प्रयोग प्रोग्राम में दिए गए अनेक मार्गों में से किसी एक का चयन करने में किया जाता है।

प्रश्न 3
लूपिंग किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी प्रोग्राम में निर्देश या निर्देशों के समूहों को एक से अधिक बार एक्जीक्यूट करने को लूपिंग कहते हैं।

प्रश्न 4
जब हमें एक निश्चित संख्या में दोहराव (Repetition) करना हो, तो किस लूप का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
for लूप द्वारा निश्चित संख्या में दोहराव लाया जाता है।

प्रश्न 5
while लूप और do-while लूप में क्या अन्तर है? [2007]
उत्तर:
while लूप में पहले कण्डीशन चैक की जाती है। इसके बाद लूप की बॉडी एक्जीक्यूट होती है, जबकि do-while में पहले लूप की बॉडी एक्जीक्यूट होती है फिर कण्डीशन चैक की जाती है।

प्रश्न 6. किस स्टेटमेण्ट का प्रयोग किसी लूप के शेष स्टेटमेण्टों को छोड़कर
आगे बढ़ जाने के लिए किया जाता है? उत्तर continue स्टेटमेण्ट का प्रयोग किया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न I (2 अंक)

प्रश्न 1
ब्रांचिंग पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए। [2003]
उत्तर:
जब C++ प्रोग्राम में किसी स्टेटमेण्ट पर ऐसी स्थिति आती है कि वहाँ से आगे बढ़ने के लिए एक से अधिक मार्ग होते हैं, तो ऐसी स्थिति ब्रांचिंग कहलाती है। ब्रांचिंग स्थिति को हल करने के लिए ब्रांचिंग कण्ट्रोल स्टेटमेण्ट का प्रयोग किया जाता है, जो निम्न है।

  1. if स्टेटमेण्ट
  2. if-else स्टेटमेण्ट
  3. switch स्टेटमेण्ट
प्रश्न 2
लूप्स की नेस्टिंग उपयुक्त उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए। [2018]
उत्तर:
जब हम एक लूप के अन्दर दूसरी लुप लगाते हैं, तो इस प्रकार की लूप नेस्टिड लूप या लूप्स की नेस्टिंग कहलाती है।
उदाहरण
#include<iostream.h>
void main( )
{
int n, i;
for (n = 1; n< = 10; n = n+ 1)
cout <<"Table is : "<<endl;
for (1 = 1; i< = 10; i ++)
{
cout <<n*i <<endl;
}
cout <<endl;
}
}

प्रश्न 3
break एवं continue स्टेटमेण्ट की उपयोगिता को उदाहरण सहित समझाइए। [2006]
अथवा
break व continue में अन्तर स्पष्ट कीजिए। [2007]
अथवा
उपयुक्त उदाहरण देकर break व countinue स्टेटमेण्ट्स में भेद करें। [2018]
उत्तर:
break व continue में अन्तर निम्न हैं।

break लूप से बाहर निकलने के लिए break स्टेटमेण्ट का प्रयोग होता है।
continue लूप के शेष स्टेटमेण्टों को छोड़कर आगे बढ़ जाने के लिए continue स्टेटमेण्ट का प्रयोग होता है।
उदाहरण
for
(inti = 1; i<= 5; i ++)
{
if(1%2==0)
break;
cout<<i;

उदाहरण
for(inti=1; i<= 5; 1 ++)
{
if(i%2= =0)
continue;
cout<<i;
}
प्रश्न 4
किसी संख्या का फैक्टोरियल निकालने हेतु C++ में प्रोग्राम लिखिए। [2011]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
int num, i, f = 1;
cout<<"Enter the number:";
cin>>num;
for(i = num; i > 0; i--)
{
f=f*i;
}
cout<<"Factorial of the number:"<<f;
}

आउटपुट:
Enter the number: 5
Factorial of the number : 120

प्रश्न 5
C++ में प्रारम्भिक 10 संख्याओं का औसत मान ज्ञात करने के लिए प्रोग्राम लिखिए।
उत्तर:
#include<iostream.h>.
void main( )
int sum=0,n, i=1;
float avg;
cout<<"\n Enter the value of n:";
cin>>n;
do
{
sum = sum + i ;
i = i + 1;
}
while (i <= n);
cout<<"\n Sum is: "<<sum;
avg=(float) sum/n;
cout<<"\n Average is :"<<avg;
}

आउटपुट:
Enter the value of n: 10
Sum is: 55
Average is; 5.5

प्रश्न 6
एक C++ प्रोग्राम लिखिए, जो A से H तक सीरीज प्रिण्ट करे, परन्तु उसमें c तथा F उपस्थित न हो।
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
for (char i='A';i<='H'; ++i)
{
if (i == "c' ।। i == 'F')
{
continue;
}
cout<<<<"\t";
}
}

आउटपुट:
A B D E G H

लघु उत्तरीय प्रश्न II (3 अक)

प्रश्न 1
उदाहरण सहित do-while व for लूप में भेद करें। [2016, 14]
उत्तर:
do-tuhile व for लूप में निम्न अन्तर हैं।

do-while लूप do-while लूप
इस लूप में लूप काउण्टर, असाइनमेण्ट, कण्डीशन की जाँच तथा लूप काउण्टर में दृद्धि या कमी एक साथ नहीं लिखे जा सकते। इस लूप में लूप काउण्टर, असाइनमेण्ट, कण्डीशन की जाँच तथा लूप काउण्टर में दृद्धि या कमी एक साथ नहीं लिखे जा सकते।

उदाहरण
do-while की सहायता से 1 से 20 तक की संख्याओं का योग निकालना।

#include<iostream.h>
void main( )
{
int i= 1, sum = 0;
do
{
sum = sum + i;
i++;
} while(i<=20);
cout<<"The sum is:"<< sum;
}

आउटपुट:
The sum is : 210

उदाहरण
for लूप की सहायता से 1 से 20 तक की संख्याओं का योग निकालना।

#include<iostream.h>
void main( )
{
int i, sum = 0;
for(s = 1 ; i <= 20 : i++)
{
sum = sum + i;
}
cout<<"The sum is :" << sum;
}

आउटपुट:
The sum is : 210

प्रश्न 2
for लूप का प्रयोग करके प्रथम 1000 पूर्णांकों का योगफल ज्ञात - करने हेतु एक प्रोग्राम लिखिए। [2013]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int i;
long sum = 0;
for(i = 0; i < 1000; i++)
{
sum = sum + i;
}
cout<<"The sum is:"<<sum;
}

आउटपुट:
The sum is : 500500

प्रश्न 3
do-while लूप का प्रयोग करके प्रथम एक सौ विषम संख्याओं का योगफल छापने हेतु C++ भाषा में एक प्रोग्राम लिखिए। [2013, 03]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int i = 1, sum = 0;
do
{
if(1%2 ! = 0)
{
Sum=sum + 1;
}
1++;
} whi1e(i < = 100);
cout<<"The sum is :"<<sum;
}

आउटपुट:
The sum is : 2500

प्रश्न 4
goto, break व continue स्टेटमेण्ट्स को समझाइए। [2016]
उत्तर:
goto स्टेटमेण्ट इस स्टेटमेण्ट का प्रयोग प्रोग्राम के एक्जीक्यूशन का सामान्य क्रम बदलने के लिए किया जाता है, जिससे प्रोग्राम का नियन्त्रण प्रोग्राम में किसी अन्य स्थान पर बिना शर्त अन्तरित हो जाता है।
प्रारूप label:
goto label name;

break स्टेटमेण्ट इस स्टेटमेण्ट का प्रयोग किसी भी प्रकार के लूप से बाहर निकलने के लिए किया जा सकता है। यह केवल सबसे भीतरी लुप के लिए लागू होगा, जिसमें इसका प्रयोग किया गया हो।
प्रारूप break;

continue स्टेटमेण्ट इस स्टेटमेण्ट का प्रयोग किसी लुप के शेष स्टेटमेण्टो को छोड़कर आगे बढ़ जाने के लिए किया जाता है। इस स्टेटमेण्टो के प्रयोग से लूप समाप्त नहीं होता, बल्कि उस पास (Pass) में लूप के आगे के स्टेटमेण्ट को छोड़ दिया जाता है। अगले पासों में लूप सामान्य रूप में चलता रहता है।
प्रारूप continue;

प्रश्न 5
C++ में एक प्रोग्राम लिखिए, जो किसी दो अंकीय पूर्णांक का पहाड़ा छापे। [2016]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int n, i, table;
cout<<"Enter the number:";
cin>>n;
cout<<"Table\n";
for(i = 1; i< = 10; i++)
{
table = n* i;
cout<< table << endl;
}
}

आउटपुट
Enter the number: 12
Table
12
24
36
48
60
72
84
96
108
120

प्रश्न 6
C++ में तीन संख्याएँ इनपुट कीजिए तथा फिर उनमें से सबसे बड़ी को बताइए।
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int a, b, C;
cout<<"Enter the value of a, b. and c\n";
cina >>b>>c;
if( (a > b) && (a > c))
cout<< "a is the largest number";
{
else if ((b> a) && (b> c))
{
cout<<"b is the largest number";
}
else
cout<<"c is the largest number";
}

आउटपुट
Enter the value of a, b and c
12
34
54
c is the largest number

प्रश्न 7
C++ में एक पाँच अंकीय संख्या के समस्त अंकों का योग प्रदर्शित करने हेतु एक प्रोग्राम लिखिए। [2008]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
unsigned long i,pin, sum = 0;
cout<<"Enter any number:";
cin>>n;
while(n!=0)
{
p = n %10;
sum + = p;
n = n/10;
}
cout<<endl<<"Sum of digits is:"<<sum;
}

आउटपुट
Enter any number: 36768
Sum of digits is : 30

प्रश्न 8
किसी दी हुई संख्या को उलट कर लिखने के लिए एक C++ प्रोग्राम forced [2009]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int n, rev = 0, rem;
cout<< "Enter an integer:";
cin>>n;
while(n! = 0)
{
rem = n$10;
rev = rev * 10+rem;
n = n/10;
}
cout<<"Reversed number=" <<rev;
}

आउटपुट
Enter an integer : 4567
Reversed number = 7654

प्रश्न 9
do-while लूप की सहायता से 8 व 11 का पहाड़ा लिखने हेतु C++ भाषा में एक प्रोग्राम लिखिए। (2003)
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int n,m;
cout<<"Enter n:";
cin>>n;
cout<<"Enter m:";
cin>>m;
int i = 1;
do
{
cout<<n*i<<"\t"<<m*i<<end1
i++;
} while (i< = 10);
}

आउटपुट
Enter n: 8
Enter m: 11
8        11
16      22
24     33
32     44
40    55
48    66
56     77
64    88
72    99
80   110

प्रश्न 10
- 100 व 100 के बीच पड़ने वाली सभी विषम संख्याओं का योग निकालने के लिए C++ में एक प्रोग्राम लिखिए। [2018]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int i, sum=0;
for (1= -100; 1<=100; 1< = 100; i=1+2)
{
if (i%2!=0)
{
sum = sum + i;
}
}
cout<<"The sum is:" <<sum;
}

आउटपुट
The sum is : 0
प्रश्न 11
for लूप का प्रयोग करते हुए 5 का पहाड़ा छापने के लिए C++ में एक प्रोग्राम लिखिए। [2018]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int i, n=5;
cout<< "The table is:" <<endl;
for (i=1; i<=10; i++)
{
cout<<n*i<<end1;
}
}

आउटपुट
The table is
5
1o
15
20
25
30
35
40
45
50

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1
ब्रांचिंग का संक्षिप्त विवरण दीजिए। दी गई संख्या सम है या विषम, जानने के लिए C++ में प्रोग्राम लिखिए। [2012, 03]
उत्तर
जब C++ प्रोग्राम में किसी स्टेटमेण्ट पर ऐसी स्थिति आती है कि वहाँ से आगे बढ़ने के लिए एक से अधिक मार्ग होते हैं तो ऐसी स्थिति ब्रांचिंग कहलाती है। ब्रांचिंग स्थिति को हल करने के लिए ब्रांचिंग कण्ट्रोल स्टेटमेण्ट का प्रयोग किया जाता है, जो निम्न हैं।

  1. if स्टेटमेण्ट
  2. if-else स्टेटमेण्ट
  3. switch स्टेटमेण्ट

दी गई संख्या सम है या विषम, जानने के लिए प्रोग्राम

#include<iostream.h>
void main( )
{
int num;
cout<<"Enter the number:";
cin>>num;
if (nurm2 == 0)
cout<<"The number is Even";
else
cout<<"The number is Odd";
}

आउटपुट
Enter the number : 25
The number is Odd

प्रश्न 2
C++ में, for तथा while loops का वर्णन कीजिए। C++ में, स्क्रीन पर निम्न चित्र को दर्शाने हेतु प्रोग्राम लिखिए। [2014, 12]
* * * * * *
* * * *
* * *
* *
*
उत्तर:
for लूप इस लूप का प्रयोग प्रोग्राम में ऐसे स्थानों पर किया जाता हैं। जब हमें किसी स्टेटमेण्ट या स्टेटमेण्ट के समूह का एक्जीक्यूशन एक निश्चित बार कराना हो।
while लूप इस लूप का प्रयोग प्रोग्राम में ऐसे स्थानों पर किया जाता है, जहाँ हमें यह पता नहीं होता कि लूप का एक्जीक्यूशन कितनी बार किया जाएगा। इसमें प्रत्येक बार लूप का एक्जीक्यूशन करने से पहले एक शर्त की जाँच की जाती है, जिसके सत्य होने पर ही लूप के स्टेटमेण्टों को एक्जीक्यूट किया जाता है अन्यथा कण्ट्रोल लूप से बाहर आ जाता है।

#include<iostream.h>
void main( )
{
int i, j, rows=5;
for(i=rows; i>= 1; --i)
{
for(j=1; j<=i ; ++j)
{
cout«"* ";
}
cout<<"\n";
}
}
प्रश्न 3
1 से 10 तक का पहाड़ा लिखने के लिए C++ में while लूप का प्रयोग करते हुए एक प्रोग्राम लिखिए। [2014]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int i, j;
for(i = 1; i <=10 : i + + )
{
j = 1;
while(i <=10)
{
cout<<i*j<<"\t";
j++;
}
cout<< endl;
}
}

आउटपुट
UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 10 कण्ट्रोल स्टेटमेण्ट्स img-1

प्रश्न 4
C++ में किन्हीं दस संख्याओं का योग एवं औसत प्रदर्शित करने हेतु प्रोग्राम लिखिए। (अपनी इच्छानुसार अंक ले) (2008)
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int i, sum = 0, avg, num;
cout<<"Enter the numbers"<< endl;
for(i = 0; i < 10 ; i++)
{
cin>>num;
sum = sum + num;
}
avg = sum/10;
cout<<"The sum is:"<<sum <<endl;
cout<<"The average is:"<<avg;
}

आउटपुट
Enter the numbers
3
4
5
7
4
9
8
5
4
9
The sum is : 58
The average is : 5

प्रश्न 5:
निम्न श्रेणी का योग ज्ञात करने के लिए C++ में एक प्रोग्राम लिखिए। 1 + [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] + [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex] + [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] +.......+[latex]\frac { 1 }{ n }[/latex] [2009]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int n;
double i, sum = 0;
cout<<"1 + [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] + [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex] + [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] +.......+[latex]\frac { 1 }{ n }[/latex]"<<end1;
cout<<"Enter the value of n:"<<end1;
cin >>n;
for(i = 1; i <=n; i++)
{
sum = sum (1/i);
}
cout<< "The sum of series is:"<< sum;
}

आउटपुट
1 + [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] + [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex] + [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] +…….+[latex]\frac { 1 }{ n }[/latex]
Enter the value of n:5
The sum of series is : 2.283333

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi वाक्यों में त्रुटि-मार्जन

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi वाक्यों में त्रुटि-मार्जन are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi वाक्यों में त्रुटि-मार्जन.

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Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 6
Chapter Name वाक्यों में त्रुटि-मार्जन
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi वाक्यों में त्रुटि-मार्जन

नवीनतम पाठ्यक्रम में वाक्यों में त्रुटि-मार्जन अर्थात् वाक्य-संशोधन को सम्मिलित किया गया है। इसमें लिंग, वचन, कारक, काल तथा वर्तनी सम्बन्धी त्रुटियों के संशोधन कराये जाते हैं। इसके लिए कुल 2 अंक निर्धारित हैं।

वाक्य भाषा की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई होती है। यदि वाक्य-रचना निर्दोष हो तो वक्ता/लेखक का आशय श्रोता/पाठक को समझने में कठिनाई नहीं होती। दोषपूर्ण वाक्य से आशय स्पष्ट नहीं हो पाता; अतः वाक्य-रचना का निर्दोष होना अत्यन्त आवश्यक है। वाक्य-रचना में दोष अनेक कारणों से हो सकते हैं। यदि वाक्य में लिंग, वचन, पुरुष, काल, वाच्य, विभक्ति, शब्दक्रम आदि में कोई भी दोषपूर्ण हुआ तो वाक्य सदोष हो जाता है। शुद्ध वाक्य-रचना के लिए व्याकरण-ज्ञान परमावश्यक है। वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ निम्नलिखित प्रकार की हो सकती हैं-

  1. अन्विति सम्बन्धी अशुद्धियाँ।
  2. पदक्रम सम्बन्धी अशुद्धियाँ।
  3. वाच्य सम्बन्धी अशुद्धियाँ।
  4. पुनरुक्ति सम्बन्धी अशुद्धियाँ।
  5. पदों की अनुपयुक्तता सम्बन्धी अशुद्धियाँ।
  6. वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ।

(1) अन्विति सम्बन्धी अशुद्धियाँ
वाक्यों में पदों की एकरूपता (लिंग, वचन, पुरुष आदि) के साथ क्रिया की भी अनुरूपता होनी चाहिए। हिन्दी में पदों की क्रिया के साथ इसी अनुरूपता अर्थात् अन्विति के कुछ विशेष नियम हैं-
(क) कर्ता-क्रिया की अन्विति
(1) विभक्तिरहित कर्ता वाले वाक्य की क्रिया सदा कर्ता के अनुसार होती है। यदि कर्ता के साथ ‘ने’ विभक्ति चिह्न जुड़ा हो तो सकर्मक क्रिया कर्म के लिंग, वचन के अनुसार होती है; जैसे

  • लड़का पुस्तक पढ़ता है। (कर्ता के अनुसार)
  • लड़की पत्र पढ़ती है। (कर्ता के अनुसार)
  • लड़के ने पुस्तक पढ़ी। (कर्म के अनुसार)
  • लड़की ने पत्र पढ़ा। (कर्म के अनुसार)

(2) कर्ता और कर्म दोनों विभक्ति-चिह्नसहित हों तो क्रिया पुंल्लिग एकवचन में होती है; जैसे-

  • प्रधानाचार्य ने अध्यापिका को बुलाया।
  • नेताओं ने किसानों को समझाया।

(3) यदि समान लिंग के विभक्ति-चिह्नरहित अनेक कर्ता पद ‘और’ से जुड़े हों तो क्रिया उसी लिंग की तथा बहुवचन में होती है; जैसे–

  • स्वाति, चित्रा और मधु आएँगी।
  • डेविड, नीरज और असलम खेल रहे हैं।

(4) ‘या’ से जुड़े विभक्तिरंहित कर्ता पदों की क्रिया अन्तिम कर्ता के अनुसार होती है; जैसे-
भाई या बहन आएगी।
(5) विभिन्न लिंगों के अनेक कर्त्ता यदि ‘और’ से जुड़े हों तो क्रिया पुंल्लिग बहुवचन में होती है; जैसे-
गणतन्त्र दिवस की परेड को लाखों बालक, वृद्ध और नारी देख रहे थे।
(6) यदि कर्ता भिन्न-भिन्न पुरुषों के हों तो उनका क्रम होगा—पहले मध्यम पुरुष, फिर अन्य पुरुष और अन्त में उत्तम पुरुष। क्रिया अन्तिम कर्ता के लिंग के अनुसार बहुवचन में होगी; जैसे-

  • तुम, गीता और मैं नाटक देखने चलेंगे।
  • तुम, विकास और मैं टेनिस खेलेंगे।

(7) कर्ता का लिंग अज्ञात हो तो क्रिया पुंल्लिग में होगी; जैसे-

  • देखो, कौन आया है ?
  • तुम्हारा पालन-पोषण कौन करता है ?

(8) आदर देने के लिए एकवचन कर्ता के लिए भी क्रिया बहुवचन में प्रयुक्त होती है; जैसे-

  • मुख्यमन्त्री भाषण दे रहे हैं।
  • महात्मा गाँधी राष्ट्रपिता माने जाते हैं।

(9) सम्बन्ध कारक का लिंग उसके सम्बन्धी के लिंग के अनुसार होता है–यदि ये लोग भिन्न-भिन्न लिंग के हों तथा ‘और’ से जुड़े हों तो संज्ञा-सर्वनाम का लिंग प्रथम सम्बन्धी के अनुसार होगा; जैसे—

  • मेरा बेटा और बेटी दिल्ली गये हैं।
  • मेरे भाई-बहन पढ़ रहे हैं।
  • तुम्हारे भाई और बहन आजकल क्या कर रहे हैं ?

(ख) कर्म और क्रिया की अन्विति
(1) यदि कर्ता ‘को’ प्रत्यय से जुड़ा हो तथा कर्म के स्थान पर कोई क्रियार्थक संज्ञा प्रयुक्त हुई हो तो क्रिया सदैव एकवचन, पुंल्लिग तथा अन्य पुरुष में होगी; जैसे

  • उसे (उसको) पुस्तक पढ़ना नहीं आता।
  • तुम्हें (तुमको) बात करने नहीं आता।

(2) यदि वाक्य में कर्ता ‘ने’ विभक्ति से युक्त हो तथा कर्म की ‘को’ विभक्ति प्रयुक्त नहीं हुई हो तो वाक्य की क्रिया कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार प्रयुक्त होगी; जैसे-

  • श्याम ने पुस्तक पढ़ी।
  • श्यामा ने क्षमा माँगी।

(3) यदि एक ही लिंग और वचन के अनेक अप्रत्यय कर्म एक साथ एक वचन में आयें तो क्रिया एक वचन में होगी; जैसे

  • राघव ने एक घोड़ा और एक ऊँट खरीदा।
  • रमेश ने एक पुस्तक और एक कलम खरीदी।

(4) यदि एक ही लिंग और वचन के अनेक प्राणिवाचक अप्रत्यय कर्म एक साथ प्रयुक्त हों तो क्रिया उसी लिंग में तथा बहुवचन में प्रयुक्त होगी; जैसे-

  • महेश ने गाय और बकरी मोल लीं।
  • लक्ष्मण ने दूध के लिए गाय और भैंस खरीदीं।

(5) यदि वाक्य में भिन्न-भिन्न लिंग के एकाधिक अप्रत्यय कर्म प्रयुक्त हों तथा वे ‘और’ से जुड़े हों तो क्रिया-अन्तिम कर्म के लिंग और वचन के अनुसार प्रयुक्त होगी; जैसे-

  • रमेश ने चावल, दाल और रोटी खायी।
  • सुरेश ने रोटी, दाल और चावल खाया।

(ग) विशेषण और विशेष्य की अन्विति,
(1) विशेषण का लिंग और वचन अपने विशेष्य के अनुसार होता है; जैसे

  • यहाँ उदार और परिश्रमी लोग रहते हैं।
  • गोरे मुखड़े पर काला तिल अच्छा लगता है।

(2) यदि एक से अधिक विशेषण हों, तब भी उपर्युक्त नियम का ही पालन होता है; जैसे| वह गिरती-उठती, ऊँची-ऊँची लहरों को निहारती रही।
(3) अनेक समासरहित विशेष्यों को विशेषण निकटवर्ती विशेष्य के अनुरूप होता है; जैसे-

  • भोले-भाले बालक और बालिकाएँ।
  • भोली-भाली बालिकाएँ और बालक।

(घ) सर्वनाम और संज्ञा की अन्विति
(1) सर्वनाम उसी संज्ञा के लिंग-वचन का अनुसरण करता है, जिसके स्थान पर वह आया है; जैसे-

  • मैंने सुमन को देखा, वह आ रही थी।
  • मैंने विजय को देखा, वह आ रहा था।

(2) आदर के लिए बहुवचन सर्वनाम का प्रयोग होता है; जैसे-

  • दादाजी आये हैं। वे एक महीना रुकेंगे।
  • कंथावाचक व्यास जी आ चुके हैं। अब वे नियमित पन्द्रह दिन तक प्रवचन करेंगे।

(3) वर्ग का प्रतिनिधि अपने लिए ‘मैं’ के स्थान पर ‘हम’ का प्रयोग करता है; जैसे–

  • शिक्षा मन्त्री ने कहा कि हमें अपने देश से अशिक्षा दूर करनी है।।
  • शिक्षक ने कहा कि हमें अपने देश का गौरव बढ़ाना है।

अन्विति सम्बन्धी अशुद्धियों के उदाहरण

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(2) पदक्रम सम्बन्धी अशुद्धियाँ

वाक्य पदों और पदबन्धों से बनता है। वाक्य के साँचे में पदों का क्या क्रम हो, इसके कुछ निश्चित नियम हैं-
(1) प्रायः कर्तापद वाक्य में सबसे पहले आता है और क्रियापद सबसे अन्त में; जैसे–

  • भिखारी आ रहा है।
  • सूर्योदय हो गया।

(2) सम्बोधन और विस्मयसूचक पद वाक्य के प्रारम्भ में कर्ता से भी पहले आते हैं; जैसे-

  • अरे ! भिखारी आ रहा है।
  • अहा ! सूर्योदयं हो गया।

(3) कर्मपद कर्ता और क्रियापदों के बीच रहता है; जैसे।

  • राजेश पाठ पढ़ाता है।
  • बच्चे ने गीत सुनाया।

(4) सम्बन्धकारक अपने सम्बन्धी शब्द से पूर्व आता है; जैसे-

  • भिखारी के बच्चे ने रहीम का पद सुनाया।
  • वह तुम्हारा नाम पूछ रहा था।

(5) प्रश्नवाचक पद प्रश्न के विषय में पूर्व आता है; जैसे-

  • कौन खड़ा है ? (कर्ता पर प्रश्न)
  • तुम क्या खा रही हो ? (कर्म पर प्रश्न)
  • वह कैसे आया ? (रीति पर प्रश्न)

(6) कर्ता और कर्म को छोड़कर शेष सभी कारक कर्ता-कर्म के बीच आते हैं। एक से अधिक कारक रूप होने पर ये उल्टे क्रम में (पहले अधिकरण) रखे जाते हैं; जैसे-

  • मजदूर खेत में रहट से सिंचाई कर रहे थे।
  • छात्र मैदान में अपने मित्रों के साथ हॉकी खेलने लगे।

(7) पूर्वकालिक क्रिया, मुख्य क्रिया से पहले आती है; जैसे-

  • कल पढ़कर आइए।
  • कल मुँह धोकर आना।।

(8) ‘न’ या ‘नहीं’ का प्रयोग निषेध के अर्थ में हो तो क्रिया से पूर्व और आग्रह के अर्थ में हो तो क्रिया के बाद होता है; जैसे-

  • मैं नहीं जाऊँगा।
  • तुम आओ न।।

(9) पदक्रमों में महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वाक्य के विभिन्न पदों में ऐसी तर्कसंगत निकटता होनी चाहिए, जिससे कि वाक्य द्वारा अपेक्षित अर्थ स्पष्ट हो। उदाहरण के लिए निम्नलिखित वाक्य देखें-

  • फल बच्चे को काटकर खिलाओ।
  • गर्म गाय का दूध स्वास्थ्यवर्द्धक होता है।

उपर्युक्त दोनों वाक्यों का अर्थ अटपटा और हास्यास्पद है। इन वाक्यों का उचित क्रम होगा

  • बच्चे को फल काटकर खिलाओ।
  • गाय का गर्म दूध स्वास्थ्यवर्द्धक होता है।

अन्य उदाहरण

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(3) वाच्य सम्बन्धी अशुद्धियाँ

वाच्य सम्बन्धी अशुद्धियों से भाषा का सौन्दर्य नष्ट हो जाता है। इस प्रकार की अशुद्धियों से अर्थ का अनर्थ होने का भय प्रायः कम ही रहता है। इस प्रकार की अशुद्धियों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं–

अशुद्ध वाक्य

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(4) पुनरुक्ति सम्बन्धी अशुद्धियाँ

पीछे दिये गये तीन भेदों के अतिरिक्त वाक्य में कुछ ऐसी अशुद्धियाँ भी मिलती हैं, जिनके मूल में एक ही घटक को दो भिन्न रीतियों से एक साथ उद्धृत किया गया होता है; जैसे-

(क) मुझे केवल दस रुपये मात्र मिले। (अशुद्ध)
(ख) मुझे केवल दस रुपये मिले। (शुद्ध)
(ग) मुझे दस रुपये मात्र मिले। (शुद्ध)

यहाँ प्रथम वाक्य अशुद्ध है; क्योंकि केवल’ शब्द के अर्थ को दो विभिन्न रीतियों के माध्यम से एक साथ प्रयुक्त कर दिया गया है। ऐसी अशुद्धियों के मूल में पुनरावृत्ति या पुनरुक्ति की भावना रहती है। आगे कुछ उदाहरणों की सहायता से इसे और अधिक स्पष्ट किया जा रहा है-
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(5) पदों की अनुपयुक्तता सम्बन्धी अशुद्धियाँ

कई बार लिखते समय हम वाक्यों में पदों के अनुपयुक्त रूपों का प्रयोग करके उन्हें अशुद्ध बना देते हैं। इस प्रकार की अशुद्धियों से बचने के लिए व्याकरण का ज्ञान होना अति आवश्यक है। पद-भेदों के अनुसार इस प्रकार की अशुद्धियों के भी अनेक भेद हैं, जिन्हें उदाहरणसहित यहाँ समझाया जा रहा है। दिये गये उदाहरणों में अनुपयुक्त पद को मोटे अक्षरों में अंकित किया गया है और उनके उपयुक्त (शुद्ध) रूप को वाक्य के सम्मुख कोष्ठक में दिया गया है।
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(6) वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ

वर्तनी का शाब्दिक अर्थ है-वर्तन यानि अनुवर्तन करना अर्थात् पीछे-पीछे चलना। लेखन-व्यवस्था में वर्तनी शब्द-स्तर पर शब्द की ध्वनियों का अनुवर्तन करती है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि शब्द-विशेष के लेखन में शब्द की एक-एक करके आने वाली ध्वनियों के लिए लिपि-चिह्नों के क्या रूप हों और उनका कैसा संयोजन हो यह वर्तनी (वर्ण-संयोजन) का कार्य है।

वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ प्रायः निम्नलिखित कारणों से होती हैं—

(1) असावधानी अथवा शीघ्रता--वर्तनी सम्बन्धी अधिकांश अशुद्धियाँ असावधानी व शीघ्रता के कारण ही होती हैं। बहुत बार अच्छी तरह से ज्ञात शब्द के लिखने में भी अशुद्धि हो जाती है; जैसे-गौण का गौड़, धन का घन, पत्ता का पता आदि। ऐसी भूलों के निवारण के लिए यही सलाह दी जा सकती है कि लेखन-कार्य अत्यधिक सावधानी से करना चाहिए।

(2) उच्चारण-हिन्दी भाषा की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि वह जैसे बोली जाती है, वैसे ही लिखी जाती है और जैसे लिखी जाती है वैसे ही पढ़ी या बोली भी जाती है। उच्चारण अवयव में दोष, बोलने में अंसावधानी, शुद्ध उच्चारण का ज्ञान न होने आदि कारणों से उच्चारण में अन्तर आ जाता है और इस भूल का निराकरण न होने तक वर्तनी से सम्बन्धित अशुद्धियाँ होती ही रहती हैं।

(3) स्थानिक प्रभाव-भाषा का सौन्दर्य और सौष्ठव उसके गठन और उच्चारण की शुद्धता पर आधारित होता है। शुद्ध उच्चारण से ही भाषा का लिखित रूप (वर्तनी) शुद्ध होता है। अंग्रेजी बोलने वाला कितना ही अभ्यास कर ले, जब भी वह हिन्दी बोलेगा, उसके उच्चारण में अंग्रेजी का पुट जाने-अनजाने आ ही जाएगा। यही स्थिति हिन्दी में भी होती है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग, दिल्ली व हरियाणा के निवासी ‘क, ख, ग’ को ‘कै, खै, गै, बोलते हैं, जबकि पूर्वी अंचल में इसका अभ्यास ‘क, खे, ग’ का ही विकसित होता है। स्वाभाविक है कि क्षेत्र-विशेष के उच्चारण का प्रभाव लिखने पर भी पड़ता है; परिणामस्वरूप वर्तनी में भी ऐसी ही भूलें दिखाई देती हैं। हिन्दी भाषा में वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ निम्नलिखित प्रकार की होती हैं-

  • स्वर (मात्रा) सम्बन्धी
  • व्यंजन सम्बन्धी
  • सन्धि सम्बन्धी
  • समास सम्बन्धी
  • विसर्ग सम्बन्धी तथा
  • हलन्त सम्बन्धी

वर्तनी से सम्बन्धित उपर्युक्त समस्त बिन्दुओं पर विवरण देना यहाँ नितान्त अप्रासंगिक है और परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी भी नहीं है। विद्यार्थियों से तो इतनी ही अपेक्षा है कि वे हिन्दी को अधिक-से-अधिक शुद्ध रूप में लिखें। इसके लिए उन्हें अधिकाधिक हिन्दी लिखने का अभ्यास करना चाहिए। हिन्दी की स्तरीय पुस्तकों का अध्ययन इसमें सहायक सिद्ध होगा।

अशुद्धियों के बहु-प्रचलित कुछ उदाहरण

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक are the part of UP Board Solutions for Class 10 Commerce. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक.

Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 18
Chapter Name सहकारी बैंक
Number of Questions Solved 21
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
भारत में सहकारी समिति अधिनियम कब पारित हुआ? (2014)
(a) सन् 1901 में
(b) सन् 1904 में
(c) सन् 1903 में
(d) सन् 1905 में
उत्तर:
(b) सन् 1904 में

प्रश्न 2.
केन्द्रीय सहकारी बैंक किस स्तर पर होते हैं?
(a) ग्राम स्तर पर
(b) प्रदेश स्तर पर
(c) जिला स्तर पर
(d) मण्डल स्तर पर
उत्तर:
(c) जिला स्तर पर

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प्रश्न 3.
केन्द्रीय सहकारी बैंक कितने प्रतिशत लाभ का वितरण करते हैं?
(a) 25%
(b) 30%
(c) 75%
(d) 40%
उत्तर:
(c) 75%

प्रश्न 4.
केन्द्रीय सहकारी बैंक का मुख्य कार्य होता है।
(a) जननिक्षेप प्राप्त करना
(b) क्षेत्रीय व्यवस्था को प्रोत्साहित करना
(c) ग्रामीण साख-सुविधा प्रदान करना
(d) उपभोक्ताओं को ऋण देना
उत्तर:
(c) ग्रामीण साख-सुविधा प्रदान करना

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
केन्द्रीय सहकारी बैंक का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
जिला सहकारी बैंक

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प्रश्न 2.
केन्द्रीय सहकारी बैंक की स्थापना गाँव/शहर में की जाती हैं।
उत्तर:
शहर

प्रश्न 3.
केन्द्रीय सहकारी बैंकों का प्रबन्ध किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
संचालक मण्डल

प्रश्न 4.
केन्द्रीय सहकारी बैंक अल्पकालीन/दीर्घकालीन ऋण देते हैं।
उत्तर:
अल्पकालीन

प्रश्न 5.
राज्य सहकारी बैंक का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
शीर्ष बैंक

प्रश्न 6.
भारत के सहकारी साख आन्दोलन में सरकारी हस्तक्षेप कम/अधिक होता है।
उत्तर:
अधिक

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प्रश्न 7.
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना सन् 1975/1980 में की गई। (2014)
उत्तर:
सन् 1975 में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
सहकारी बैंकों के दो लक्षण बताइए।
उत्तर :
सहकारी बैंक के दो लक्षण निम्नलिखित हैं

  1. प्रबन्ध इन बैंकों के प्रबन्ध का कार्य लोकतान्त्रिक आधार पर किया जाता है।
  2. स्थापना का उद्देश्य सहकारी बैंकों की (UPBoardSolutions.com) स्थापना व्यक्तियों द्वारा स्वयं के कल्याण अर्थात् स्वयं की सहायता के उद्देश्य से की जाती है।

प्रश्न 2.
सहकारी बैंक के प्रकार बताइए।
उत्तर:
सहकारी बैंक निम्नलिखित निम्न प्रकार के होते हैं

  1. केन्द्रीय सहकारी बैंक
  2. राज्य सहकारी बैंक

प्रश्न 3.
केन्द्रीय सहकारी बैंक से क्या आशय है?
उत्तर:
केन्द्रीय सहकारी बैंक को ‘जिला सहकारी बैंक (District Co-operative Bank) भी कहते हैं। इन बैंकों का प्रमुख उद्देश्य जिले की प्राथमिक समितियों से सम्पर्क स्थापित करना, उनका निरीक्षण करना व उन्हें सहयोग प्रदान करना होता है। यह प्रत्येक (UPBoardSolutions.com) जिले में एक ही होता है तथा इसकी स्थापना शहर में की जाती है।

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प्रश्न 4.
सहकारी बैंक के चार कार्य लिखिए। (2018)
उत्तर:
सहकारी बैंक के चार कार्य निम्नलिखित हैं

  1. ये बैंक सहकारी शिक्षा को बढ़ावा देते हैं।
  2. ये बैंक सम्पूर्ण प्रादेशिक सहकारी आन्दोलने के लिए वित्त की व्यवस्था ए करते हैं।
  3. ये बैंक केन्द्रीय सहकारी बैंक के मार्गदर्शक होते हैं।
  4. ये बैंक प्रदेश के अनेक केन्द्रीय बैंकों के मध्य सन्तुलन बनाए रखते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
सहकारी बैंक के बारे में आप क्या जानते हैं? वर्णन कीजिए। (2010)
उत्तर:
सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) व्यक्तियों के ऐसे संगठन, जो समानता, स्वयं सहायता व प्रजातान्त्रिक आधार पर सभी के हित के लिए बैंकिंग सम्बन्धी सभी कार्य करते हैं, सहकारी बैंक कहलाते हैं। सहकारी बैंक, सहकारी समितियों का एक संगठन होता है। इन बैंकों की स्थापना सन् 1904 में सहकारी साख अधिनियम के पारित होने के बाद हुई। हेनरी वोल्फ के अनुसार, “सहकारी बैंकिंग एक ऐसी एजेन्सी है, जो छोटे वर्ग के व्यक्तियों से व्यवहार करने की स्थिति में है तथा जो अपनी शर्तों के अनुसार उनकी जमाओं को स्वीकार करती है व ऋण प्रदान करती है।

सहकारी बैंक कृषकों को वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन उधार देते हैं। सहकारी बैंक कषकों को बीज व खाद खरीदने, मजदरी का भगतान करने, भमि में सधार करवाने, कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए किसानों को ऋण देते हैं। सहकारी बैंक किसानों (UPBoardSolutions.com) को सस्ती ब्याज दर एवं सरल शर्तों पर ऋण प्रदान करते हैं। भारत में सहकारी बैंक का ढाँचा त्रि-स्तरीय है। सहकारी बैंक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

  1. जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक इनके द्वारा प्राथमिक साख समितियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूर्ण किया जाता है।
  2. राज्य स्तर पर शीर्ष बैंक ये बैंक राज्य में सहकारी आन्दोलन के विकास हेतु उत्तरदायी होते हैं।

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प्रश्न 2.
सहकारी बैंकों के दोषों का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
सहकारी बैंकों के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं-

  1. सरकार को अधिक नियन्त्रण इन बैंकों पर सरकार का अधिक नियन्त्रण रहता है, इसलिए जनता इन्हें अपना सहायक न मानकर सरकारी संस्थाएँ मानती है।
  2. अकुशल संचालक ग्रामीण क्षेत्रों की समितियों के संचालक बैंकों का प्रबन्ध सुव्यवस्थित प्रकार से नहीं कर पाते हैं।
  3. पूँजी की कमी भारतीय सहकारी बैंकों के पास पूँजी का अभाव पाया जाता है, इसलिए ये बैंक कुशलता से कार्य करने में असमर्थ होते हैं।
  4. ऋण वसूल करने में देरी सहकारी बैंकों द्वारा दिए गए ऋणों की राशि समय (UPBoardSolutions.com) पर वसूल नहीं हो पाती है। इससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
  5. अधिक ब्याज दर इन बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में नकद कोष नहीं होता है, इसलिए ये समितियाँ दूसरों के ऋण पर निर्भर रहती हैं। अत: इनके ब्याज की दर अन्य संस्थाओं से अधिक होती है।
  6. सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान न होना भारतीय ग्रामीण जनता व इन समितियों के कर्मचारियों को सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान नहीं होता है। इससे ये संस्थाएँ सफल नहीं हो पाती हैं।

प्रश्न 3.
वाणिज्यिक बैंक व सहकारी बैंक में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2009,07)
उत्तर:
वाणिज्यिक व सहकारी बैंकों में अन्तर
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
को-ऑपरेटिव बैंक (सहकारी बैंक) क्या है? इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए।
अथवा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सहकारी बैंकों की भूमिका की विवेचना कीजिए। (2011, 06)
अथवा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी बैंक का महत्त्व बताइए। (2008)
अथवा
सहकारी बैंकों के गुणों का वर्णन कीजिए। (2007)
उत्तर:
को-ऑपरेटिव बैंक से आशय

सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) व्यक्तियों के ऐसे संगठन, जो समानता, स्वयं सहायता व प्रजातान्त्रिक आधार पर सभी के हित के लिए बैंकिंग सम्बन्धी सभी कार्य करते हैं, सहकारी बैंक कहलाते हैं। सहकारी बैंक, सहकारी समितियों का एक संगठन होता है। इन बैंकों की स्थापना सन् 1904 में सहकारी साख अधिनियम के पारित होने के बाद हुई। हेनरी वोल्फ के अनुसार, “सहकारी बैंकिंग एक ऐसी एजेन्सी है, जो छोटे वर्ग के व्यक्तियों से व्यवहार करने की स्थिति में है तथा जो अपनी शर्तों के अनुसार उनकी जमाओं को स्वीकार करती है व ऋण प्रदान करती है।

सहकारी बैंक कृषकों को वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन उधार देते हैं। सहकारी बैंक कषकों को बीज व खाद खरीदने, मजदरी का भगतान करने, भमि में सधार करवाने, कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए किसानों को ऋण देते हैं। सहकारी बैंक किसानों को सस्ती ब्याज दर एवं सरल शर्तों पर ऋण प्रदान करते हैं। भारत में सहकारी बैंक का ढाँचा त्रि-स्तरीय है। सहकारी बैंक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

  1. जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक इनके द्वारा प्राथमिक साख समितियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूर्ण किया जाता है।
  2. राज्य स्तर पर शीर्ष बैंक ये बैंक राज्य में सहकारी आन्दोलन के विकास हेतु उत्तरदायी होते हैं।

भारत में सहकारी बैंकों को महत्त्व व गुण या भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी बैंकों की भूमिका सहकारी बैंक देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख कर्णधार हैं। इन बैंकों की व्यवस्था से समाज की आर्थिक स्थिति उन्नत हुई। है व कृषि क्षेत्र में अनेक लाभ हुए हैं। इसके प्रमुख लाभों या महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट कर सकते हैं

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  1. कृषि कार्यों के लिए ऋण सहकारी बैंक किसानों को खाद, बीज, कृषि यन्त्रों, आदि के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करवाते हैं।
  2. कुटीर उद्योगों का विकास सहकारी बैंकों द्वारा कुटीर उद्योगों को सहायता प्रदान किए जाने से इनका विकास हुआ है।
  3. ग्रामीणों के रोजगार में वृद्धि सहकारी बैंकों द्वारा ऋण देने से कृषि कार्यों का विकास होता है, जिससे ग्रामीण जनता को अधिक रोजगार प्राप्त होता है।
  4. महाजनों के प्रभाव में कमी कृषि विकास बैंकों की स्थापना के बाद से यह बैंक किसानों को आवश्यकतानुसार ऋण प्रदान करते रहते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारों का प्रभाव कम हुआ है।
  5. कृषि उपज के विपणन में सहायता इन बैंकों के द्वारा कृषि विपणन समितियों की स्थापना से किसानों को फसल का उचित दाम मिल जाता है।
  6. सामाजिक गुणों का विकास इन बैंकों व समितियों के सक्रिय रूप से कार्य करने के कारण लोगों में सहयोग, मित्रता, आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।
  7. सहयोग की भावना में वृद्धि सहकारी बैंकों से जनता में परस्पर सहयोग (UPBoardSolutions.com) की भावना में वृद्धि हुई है।
  8. बचत की आदत का विकास ये समितियाँ प्रजातान्त्रिक सिद्धान्त पर कार्य करती हैं। इससे किसानों में बैंक के प्रयोग व उनमें बचत करने की आदत को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 2.
हमारे देश में सहकारी बैंकों की असफलता के क्या कारण हैं? इन्हें उपयोगी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए? (2016)
उत्तर:
सहकारी बैंकों की असफलता के प्रमुख कारण

  1. सहकारी बैंकों पर सरकार का अत्यधिक नियन्त्रण सरकार ने इन बैंकों पर अनेक प्रकार के नियन्त्रण लगाए हैं। इससे जनता इन्हें सरकार का बैंक समझती है।
  2. उचित प्रबन्ध का न होना इन बैंकों में कुशल व्यक्तियों का अभाव होता है। फलस्वरूप इनको लाभ के स्थान पर हानि अधिक होती है।
  3. पर्याप्त पूँजी का अभाव इन बैंकों के पास पूँजी की कमी होती है, क्योंकि इनके अधिकांश सदस्यों के पास धन नहीं होता है।
  4. ऋण वसूली करने में देरी सहकारी बैंक ऋण राशि को सही समय पर वसूल करने में असफल रहते हैं। परिणामस्वरूप, जिन्हें आवश्यकता होती है, उन्हें धन नहीं मिल पाता।
  5. अपूर्ण ज्ञान सहकारी बैंकों को ग्रामीण जनता व समितियों के सिद्धान्तों का ज्ञान नहीं होती है।

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भारत में सहकारी बैंकों के सुधार के लिए सुझाव

  1. पूँजी में वृद्धि इन समितियों को अपने रक्षित कोषों में वृद्धि करनी चाहिए।
  2. सरकारी नियन्त्रण में कमी सहकारी संगठन पर सरकारी नियन्त्रण में कमी कर देनी चाहिए, जिससे कि समिति के सदस्यों पर उत्तरदायित्व का भार डाला जा सके।
  3. सहकारिता के सिद्धान्तों का प्रचार इन बैंकों में सहकारिता के सिद्धान्तों की शिक्षा प्रदान करने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
  4. समन्वय एवं सहयोग इन बैंकों का व्यापारिक बैंकों के साथ सहयोग और समन्वय (UPBoardSolutions.com) होना चाहिए, जिससे ये बैंक अधिक सुविधाएँ प्रदान कर सकें।
  5. कर्मचारियों के लिए उचित प्रशिक्षण सहकारी बैंकों में अनेक स्थानों पर उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे योग्य कर्मचारियों की सेवाएँ बैंकों को उपलब्ध हो सकें।
  6. ब्याज की दर इन समितियों को ब्याज की दर में कमी करनी चाहिए।

प्रश्न 3.
सहकारी बैंक क्या है? इसके गुण वे दोषों का वर्णन कीजिए। (2013)
उत्तर:
सहकारी बैंक से आशय

सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) व्यक्तियों के ऐसे संगठन, जो समानता, स्वयं सहायता व प्रजातान्त्रिक आधार पर सभी के हित के लिए बैंकिंग सम्बन्धी सभी कार्य करते हैं, सहकारी बैंक कहलाते हैं। सहकारी बैंक, सहकारी समितियों का एक संगठन होता है। इन बैंकों की स्थापना सन् 1904 में सहकारी साख अधिनियम के पारित होने के बाद हुई। हेनरी वोल्फ के अनुसार, “सहकारी बैंकिंग एक ऐसी एजेन्सी है, जो छोटे वर्ग के व्यक्तियों से व्यवहार करने की (UPBoardSolutions.com) स्थिति में है तथा जो अपनी शर्तों के अनुसार उनकी जमाओं को स्वीकार करती है व ऋण प्रदान करती है।

सहकारी बैंक कृषकों को वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन उधार देते हैं। सहकारी बैंक कषकों को बीज व खाद खरीदने, मजदरी का भगतान करने, भमि में सधार करवाने, कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए किसानों को ऋण देते हैं। सहकारी बैंक किसानों को सस्ती ब्याज दर एवं सरल शर्तों पर ऋण प्रदान करते हैं। भारत में सहकारी बैंक का ढाँचा त्रि-स्तरीय है। सहकारी बैंक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

  1. जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक इनके द्वारा प्राथमिक साख समितियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूर्ण किया जाता है।
  2. राज्य स्तर पर शीर्ष बैंक ये बैंक राज्य में सहकारी आन्दोलन के विकास हेतु उत्तरदायी होते हैं।

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सहकारी बैंकों के गुण

भारत में सहकारी बैंकों को महत्त्व व गुण या भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी बैंकों की भूमिका सहकारी बैंक देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख कर्णधार हैं। इन बैंकों की व्यवस्था से समाज की आर्थिक स्थिति उन्नत हुई। है व कृषि क्षेत्र में अनेक लाभ हुए हैं। इसके प्रमुख लाभों या महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट कर सकते हैं

  1. कृषि कार्यों के लिए ऋण सहकारी बैंक किसानों को खाद, बीज, कृषि यन्त्रों, आदि के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करवाते हैं।
  2. कुटीर उद्योगों का विकास सहकारी बैंकों द्वारा कुटीर उद्योगों को सहायता प्रदान किए जाने से इनका विकास हुआ है।
  3. ग्रामीणों के रोजगार में वृद्धि सहकारी बैंकों द्वारा ऋण देने से कृषि कार्यों का विकास होता है, जिससे ग्रामीण जनता को अधिक रोजगार प्राप्त होता है।
  4. महाजनों के प्रभाव में कमी कृषि विकास बैंकों की स्थापना के बाद से यह बैंक किसानों को आवश्यकतानुसार ऋण प्रदान करते रहते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारों का प्रभाव कम हुआ है।
  5. कृषि उपज के विपणन में सहायता इन बैंकों के द्वारा कृषि विपणन समितियों की स्थापना से किसानों को फसल का उचित दाम मिल जाता है।
  6. सामाजिक गुणों का विकास इन बैंकों व समितियों के सक्रिय रूप से कार्य करने के कारण लोगों में सहयोग, मित्रता, आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।
  7. सहयोग की भावना में वृद्धि सहकारी बैंकों से जनता में परस्पर सहयोग की भावना में वृद्धि हुई है।
  8. बचत की आदत का विकास ये समितियाँ प्रजातान्त्रिक सिद्धान्त पर कार्य करती हैं। इससे किसानों में बैंक के प्रयोग व उनमें बचत करने की आदत को प्रोत्साहन मिलता है।

सहकारी बैंकों के दोष

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सहकारी बैंकों के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं-

  1. सरकार को अधिक नियन्त्रण इन बैंकों पर सरकार का अधिक नियन्त्रण रहता है, इसलिए जनता इन्हें अपना सहायक न मानकर सरकारी संस्थाएँ मानती है।
  2. अकुशल संचालक ग्रामीण क्षेत्रों की समितियों के संचालक बैंकों का प्रबन्ध सुव्यवस्थित प्रकार से नहीं कर पाते हैं।
  3. पूँजी की कमी भारतीय सहकारी बैंकों के पास पूँजी का अभाव पाया जाता है, इसलिए ये बैंक कुशलता से कार्य करने में असमर्थ होते हैं।
  4. ऋण वसूल करने में देरी सहकारी बैंकों द्वारा दिए गए ऋणों की राशि समय पर वसूल नहीं हो पाती है। इससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
  5. अधिक ब्याज दर इन बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में नकद कोष नहीं होता है, इसलिए (UPBoardSolutions.com) ये समितियाँ दूसरों के ऋण पर निर्भर रहती हैं। अत: इनके ब्याज की दर अन्य संस्थाओं से अधिक होती है।
  6. सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान न होना भारतीय ग्रामीण जनता व इन समितियों के कर्मचारियों को सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान नहीं होता है। इससे ये संस्थाएँ सफल नहीं हो पाती हैं।

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण

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Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 3
Chapter Name बैंक समाधान विवरण
Number of Questions Solved 25
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण

बहुविकल्पीय प्रश्न ( 1 अंक)
                   

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण किसके द्वारा बनाया जाता है?
(a) व्यापारी
(b) बैंक
(c) देनदार
(d) लेनदार
उत्तर:
(a) व्यापारी

प्रश्न 2.
बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है?
(a) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष से
(b) रोकड़ पुस्तक के रोकड़ कॉलम शेष से
(c) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष यो पास बुक के शेष से
(d) पास बुक के शेष से
उत्तर:
(c) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष या पास बुक के शेष से

प्रश्न 3.
बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है
(a) व्यापारी की इच्छानुसार
(b) अन्तिम खाते बनाने से पूर्व
(c) अन्तिम खाते बनाने के पश्चात्
(d) छमाही
उत्तर:
(d) व्यापारी की इच्छानुसार

प्रश्न 4.
बैंक अधिविकर्ष होता है।
(a) जब ग्राहक का रुपया बैंक में जमा होता है।
(b) जब बैंक ग्राहक को उसकी जमा राशि से अधिक रुपया ऋण के रूप में दे देता है।
(c) जब ग्राहक खाता बन्द कर देता है।
(d) उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं।
उत्तर:
(b) जब बैंक ग्राहक को उसकी जमा राशि से अधिक रुपया ऋण के रूप में दे देता है।

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निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
रोकड़ पुस्तक और पास बुक के शेषों का मिलान करने के लिए तैयार किए जाने वाले विवरण का नाम लिखिए। (2014)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण

प्रश्न 2.
बैंक समाधान विवरण में कितने खाने होते हैं?
उत्तर:
तीन खाने

प्रश्न 3.
रोकड़ बही में ओवरड्राफ्ट (अधिविकर्ष) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर;
रोकड़ बही का क्रेडिट शेष

प्रश्न 4.
बैंक पास बुक का कौन-सा शेष अधिविकर्ष कहलाता है?
उत्तर:
ऋणी शेष

प्रश्न 5.
रोकड़ बही का डेबिट शेष क्या दर्शाता है?
उत्तर:
नकद रोकड़

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न  (2अंक)

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण क्या है?
उत्तर:
बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है।

प्रश्न 2.
रोकड़ बही एवं बैंक पास बुक में अन्तर के कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर:
रोकड़ बही एवं बैंक पास बुक में अन्तर के दो कारण निम्नलिखित

  1. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु (UPBoardSolutions.com) भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए।
  2. चैक बैंक में वसूली के लिए भेजे, जो अभी तक वसूल नहीं हुए।

लघु उत्तरीय प्रश्न  (4 अंक)

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण क्या है? यह क्यों तैयार किया जाता है? (2016, 11)
अथवा
बैंक समाधान विवरण से आप क्या समझते हैं? एक व्यापारी के द्वारा यह विवरण बनाया जाना क्यों आवश्यक है? (2007)
अथवा
बैंक समाधान विवरण बनाने के मुख्य उद्देश्यों को बताइए। (2008)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण का अर्थ
1. बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।

2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।

3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में (UPBoardSolutions.com) कर देता है। यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।

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4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे—बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि। इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।

5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।

6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।

7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अत: चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।

9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है

10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ छूट प्रदान करता है, जिससे व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अत: रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि। इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के (UPBoardSolutions.com) कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।

12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।

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बैंक समाधान विवरण के उद्देश्य

बैंक समाधान विवरण का अर्थ  बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है|

1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।

2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।

3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।

4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।

5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।

6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।

बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है

1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।

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(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है

  1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
  2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान।
  4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा (UPBoardSolutions.com) कर देना।
  5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक में भेज दिए गए।

जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है

  1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
  2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान।
  4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
  5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।

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(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।

2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष (UPBoardSolutions.com) या अधिविकर्ष द्वारा बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दावलियों की सोदाहरण व्याख्या कीजिए।

  1. अधिविकर्ष
  2. पास बुक (2007)

उत्तर:
1. अधिविकर्ष बैंक अपने चालू खाताधारकों को एक विशेष सुविधा प्रदान करता है कि यदि वे चाहें तो आवश्यकता के समय अपनी जमा की हुई धनराशि से अधिक धनराशि बैंक से निकाल सकते हैं। यह सुविधा बैंक अधिविकर्ष’ कहलाती है। इसमें व्यापारी बैंक का ऋणी और बैंक व्यापार का ऋणदाता बन जाता है। उदाहरण-यदि बैंक में ₹ 2,00,000 जमा हों और व्यापारी ₹ 2,50,000 निकाल लेता है, तो ₹ 2,50,000 – ₹ 2,00,000 = ₹ 50,000 का अधिविकर्ष कहलाता है।

2. पास बुक यह एक छोटी-सी पुस्तक होती है, जिसमें ग्राहक व बैंक के बीच हए सभी लेन-देनों का लेखा किया जाता है। यह बैंक की पुस्तकों में खुले ग्राहक के खाते की प्रतिलिपि होती है। इसमें बैंक में धनराशि जमा कराने, धनराशि निकालने तथा ब्याज, आदि का तिथि के साथ विवरण दिया जाता है। उदाहरण-

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण 1

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न  (8 अंक)

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण क्या है? रोकड़ शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के आठ कारणों का उल्लेख कीजिए।  (Imp 2007)
अथवा
किसी निश्चित तिथि पर पास बुक तथा रोकड़ पुस्तक के शेषों में अन्तर होने के क्या-क्या कारण होते हैं? वर्णन कीजिए। (2011)
उत्तर:
1. बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या (UPBoardSolutions.com) विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।

2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।

3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में कर देता है। यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।

4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि। इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।

5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।

6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।

7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अत: चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।

9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है

10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ (UPBoardSolutions.com) छूट प्रदान करता है, जिससे व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अत: रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि। इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।

12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।

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प्रश्न 2.
बैंक समाधान विवरण क्या है? इसकी क्या उपयोगिता है? इसको बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 देखें। बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है|

1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।

2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।

3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।

4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।

5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।

6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।

बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है

1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।

(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है

  1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
  2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान।
  4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा कर देना।
  5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक में भेज दिए गए।

जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया (UPBoardSolutions.com) जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है

  1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
  2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान।
  4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
  5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।

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(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।

2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष या अधिविकर्ष द्वारा बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता

प्रश्न 3.
बैंक समाधान विवरण क्या है? यह क्यों बनाया जाता है? रोकड़ बही के शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के किन्हीं छः कारणों का उल्लेख कीजिए। (2008)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण का अर्थ
बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।

2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।

3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में कर देता है। (UPBoardSolutions.com) यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।

4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे—बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि। इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।

5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।

6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।

7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अत: चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।

9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है

10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ छूट प्रदान करता है, जिससे (UPBoardSolutions.com) व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अत: रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

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11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि। इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।

12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।

बैंक समाधान विवरण बनाने के उददेश्य

बैंक समाधान विवरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 देखें। बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है|

1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।

2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।

3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।

4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।

5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।

6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण (UPBoardSolutions.com) भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।

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रोकड़ बही के शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के कारण

बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है

1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।

(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है

  1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
  2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान।
  4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा कर देना।
  5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक (UPBoardSolutions.com) में भेज दिए गए।

जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है

  1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
  2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान।
  4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
  5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।

(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।

2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष या अधिविकर्ष द्वारा बैंक (UPBoardSolutions.com) समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता

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क्रियात्मक प्रश्न  (8 अंक)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सूचना से एक बैंक समाधान विवरण 31 मार्च, 2016 को बनाइए।

  1. इस तिथि को रोकड़ बही में बैंक खाते का शेष ₹ 3,000 था।
  2. ₹ 200 का चैक बैंक में जमा किया गया था, परन्तु बैंक खाते में अभी तक जमा नहीं हुआ।
  3. लेनदारों को ₹ 1,800 के दो चैक दिए थे, उनमें से बैंक के पास ₹ 800 का एक चैक ही भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया।
  4. निम्नलिखित प्रविष्टियाँ पास बुक में की गई थी, परन्तु रोकड़ बही में उस तिथि तक नहीं लिखी गई थी।
  • बैंक व्यय ₹ 40
  • ₹ 200 का बीमा प्रीमियम बैंक द्वारा चुकाया गया था।
  • एक ग्राहक द्वारा बैंक में ₹ 500 सीधे जमा कर दिए गए। (2017)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 मार्च, 2016 को)
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प्रश्न 2.
निम्न से बैंक समाधान विवरण-पत्र तैयार कीजिए।

  1. दिनांक 31-12-2014 को रोकड़ बही के अनुसार बैंक शेष ₹ 3,200 है।
  2. बैंक व्यय ₹ 20 था।
  3. बैंक ने ₹ 100 लाभांश एकत्रित किया।
  4. ₹ 1,780 के चैक जारी किए गए, लेकिन भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  5. ₹ 860 के बैंक बैंक में जमा कराए, किन्तु अभी क्रेडिट नहीं हुए। (2016)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2014 को)

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण

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प्रश्न 3.
निम्न विवरण से 31 मार्च, 2015 को बैंक समाधान विवरण-पत्र बनाइए।

  1. रोकड़ बही के बैंक खाते का क्रेडिट शेष (अधिविकर्ष) ₹ 14,400 हैं।
  2. ₹ 6,160 के चैक बैंक में जमा कराए गए, परन्तु राशि जमा नहीं हुई।
  3. देनदारों को ₹ 2,880 के चैक जारी किए गए, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  4. बैंक ने ₹ 200 अपना बैंक व्यय लगाया।
  5. ₹ 4,000 एक ग्राहक ने व्यापारी के बैंक खाते में सीधे जमा करवाए। (2016)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 मार्च, 2015 को)
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित विवरण से रनवीर सिंह, मुम्बई का 31 दिसम्बर, 2013 का बैंक समाधान विवरण बनाइए।

  1. 31 दिसम्बर, 2013 को पास बुक का क्रेडिट शेष ₹ 6,225 था।
  2. ₹ 2,375 का चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया था, किन्तु संग्रह नहीं हुआ।
  3. 1,750 और ₹ 1,500 के दो चैकों को निर्गमित किया गया, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  4. बैंक द्वारा ₹ 225 ब्याज के क्रेडिट किए गए।
  5. ग्राहक की ओर से ₹ 1,200 का बीमा प्रीमियम का बैंक द्वारा सीधे भुगतान किया गया।

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2013 को)
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित विवरण से श्यामनन्दन, कानपुर का 31 दिसम्बर, 2012 का बैंक समाधान विवरण बनाइए।

  1. 31 दिसम्बर, 2012 को रोकड़ बही के अनुसार ₹ 5,000 डेबिट शेष था।
  2. संग्रह हेतु भेजा गया, ₹ 1,000 के चैक का बैंक द्वारा संग्रह नहीं हुआ।
  3. ₹ 500 का एक निर्गमित चैक भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किया गया।
  4. बैंक द्वारा ब्याज के पास बुक में हैं  ₹ 125 क्रेडिट किए गए, किन्तु रोकड़ । पुस्तक लेखा नहीं हुआ।
  5. बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के ₹ 500 का भुगतान सीधे कर दिया गया।

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2012 को)
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प्रश्न 6.
निम्नलिखित विवरण से मै, अमर चन्द्र, कुँवर चन्द्र, वाराणसी का 31 दिसम्बर, 2011 को बैंक समाधान विवरण बनाइए।

  1. 31 दिसम्बर, 2011 को रोकड़ बही के अनुसार ₹ 6,023 का डेबिट शेष था।
  2. बैंक में संग्रह हेतु ₹ 1,420 का चैक भेजा गया था जिसका संग्रह नहीं हुआ था।
  3. ₹ 3,000 के चैक निर्गमित किए गए थे, किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किए गए।
  4. ₹ 1,850 बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के लिए सीधे भुगतान किए गए।
  5. ₹ 120 बैंक ने ब्याज के क्रेडिट किए। (2012)

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हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2011 को)
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प्रश्न 1.
निम्नलिखित सूचनाओं से 31 दिसम्बर, 2010 को एक बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए।

  1. रोकड़ पुस्तक के अनुसार शेष ₹ 8,000 था।
  2. ₹ 11,000 का चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया, किन्तु संग्रह नहीं हुआ।
  3. ₹ 12,000 के चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान के लिए केवल ₹ 10,000 के चैक प्रस्तुत किए गए।
  4. एक ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में ₹ 4,000 जमा कर दिए गए।
  5. बैंक द्वारा ब्याज के लिए हैं ₹ 500 क्रेडिट किए गए।
  6. बैंक द्वारा ₹ 1,500 बीमा प्रीमियम के लिए भुगतान किया गया। (2011)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2010 को)
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित सूचनाओं के आधार पर 31 दिसम्बर, 2005 को बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए।

  1. पास बुक के अनुसार क्रेडिट शेष ₹ 9,000 था।
  2. ₹ 7,000 के चैक वसूली के लिए भेजे गए, किन्तु वसूल नहीं हुए।
  3. बैंक व्यय के ₹ 60 डेबिट किए गए, किन्तु रोकड़ पुस्तक में लेखा नहीं हुआ।
  4. ₹ 9,600 के चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान हेतु उन्हें प्रस्तुत नहीं किया गया।
  5. पास बुक में गलती से ₹ 3,000 डेबिट हो गए।  (2006)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2005 को)
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प्रश्न 10.
निम्नलिखित सूचनाओं के आधार पर बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए। 31 दिसम्बर, 2004 को मोहन की पास बुक में ₹ 8,000 का डेबिट शेष था। रोकड़ बही से मिलान करने पर निम्नलिखित अन्तर ज्ञात हुए

  1. बैंक में जमा किया गया ₹ 1,000 का चैक अभी तक वसूल नहीं हुआ।
  2. ₹ 1,000 के चैक निर्गमित किए गए, परन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  3. ग्राहक ने ₹ 1,000 सीधे मोहन के खाते में जमा कर दिए।
  4. ₹ 500 विनियोग पर ब्याज बैंक ने वसूल किया।
  5. बैंक द्वारा लिया गया ब्याज ₹ 1,000।

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2004 को)
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प्रश्न 11.
निम्न से बैंक समाधान विवरण-पत्र तैयार कीजिए।

  1. दिनांक 31.12.2017 को पास बुक के अनुसार बैंक शेष (जमा) ₹ 6,428 था।
  2. बैंक व्यय ₹ 120 था।
  3. बैंक ने ₹ 1,000 लाभांश एकत्रित किया।
  4. ₹ 2,600 के चैक जारी किए गए, लेकिन भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  5. ₹ 1,600 के चैक बैंक में जमा कराए, किन्तु अभी तक क्रेडिट नहीं हुए। (2018)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2017 को)
UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 21 परिवार कल्याण एवं परिवार नियोजन

UP Board Solutions for Class 12  Home Science Chapter 21 परिवार कल्याण एवं परिवार नियोजन are part of UP Board Solutions for Class 12  Home Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 12  Home Science Chapter 21 परिवार कल्याण एवं परिवार नियोजन

Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 21
Chapter Name परिवार कल्याण एवं परिवार नियोजन
Number of Questions Solved 19
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 21 परिवार कल्याण एवं परिवार नियोजन

बहुविकल्पीय प्रश्न ( 1 अंक)

प्रश्न 1.
जनसंख्या विस्फोट के क्या कारण हैं? (2008, 12, 13)
(a) अशिक्षा
(b) खराब स्वास्थ्य/गरीबी
(c) विकास के साधनों की कमी
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) अशिक्षा

प्रश्न 2.
जनसंख्या विस्फोट के क्या परिणाम है? (2008)
(a) अशिक्षा
(b) खराब स्वास्थ्य
(c) विकास के साधनों की कमी
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3.
जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। (2014)
(a) 9 जुलाई को
(b) 11 जुलाई को
(C) 15 जुलाई को
(d) 20 जुलाई को
उत्तर:
(b) 11 जुलाई को

प्रश्न 4.
परिवार नियोजन द्वारा किस समस्या का समाधान हो सकता है? (2014, 18)
(a) जनसंख्या नियन्त्रण
(b) देश के विकास में वृद्धि
(c) माँ तथा शिशु की मृत्यु में कमी
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5.
परिवार नियोजन कार्यक्रम सफल क्यों नहीं हो पाते हैं? (2013)
(a) यौन शिक्षा की कमी
(b) निर्धनता के कारण
(c) अज्ञानता
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

प्रश्न 1.
परिवार कल्याण की अवधारणा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
परिवार कल्याण से आशय उस दृष्टिकोण से है, जिसके अन्तर्गत परिवार से सम्बन्धित सभी पक्षों को अधिक उत्तम बनाने का प्रयास किया जाता है। इसके अन्तर्गत परिवार की बहुपक्षीय उन्नति एवं प्रगति के लिए हरसम्भव उपाय एवं प्रयास किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
वर्ष 2011 की जनगणना के समय भारत की जनसंख्या क्या थी?
उत्तर:
वर्ष 2011 की जनगणना के समय भारत की जनसंख्या 121.02 करोड़ थी, जो निरन्तर बढ़ रही है।

प्रश्न 3.
भारतीय समाज में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर:
कम आयु में विवाह, संयुक्त परिवार प्रणाली, पुत्र सन्तान की अनिवार्यता, अज्ञानता, गर्म जलवायु, गर्भ निरोधक उपायों की सीमित जानकारी आदि कारक भारतीय समाज में जनसंख्या वृद्धि के लिए उत्तरदायी हैं।

प्रश्न 4.
परिवार नियोजन से क्या आशय है?
उत्तर:
पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार नियोजित रूप से परिवार के आकार को सीमित रखना ही परिवार नियोजन है।

प्रश्न 5.
भारत के सन्दर्भ में परिवार को सीमित रखने की आवश्यकता का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर को नियन्त्रित करने के लिए परिवार को सीमित रखना आवश्यक है।

प्रश्न 6.
परिवार को सीमित रखने से बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
परिवार को सीमित रखने से बच्चों का पालन-पोषण एवं बहुपक्षीय विकास उत्तम हो सकता है।

प्रश्न 7.
परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता हेतु कोई दो प्रभावी उपाय लिखिए।
उत्तर:
परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता हेतु कोई दो प्रभावी उपाय निम्नलिखित हैं।

  1. परिवार नियोजन सुविधाओं का विस्तार एवं सम्बन्धित भ्रान्तियों का निराकरण आवश्यक है।
  2. परिवार नियोजन करने वाले दम्पत्तियों को प्रोत्साहनस्वरूप कुछ विशेष सुविधाएँ मिलनी चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50३ब्द)

प्रश्न 1.
“जनसंख्या वृद्धि रोजगार के अवसरों के बीच असन्तुलन का कारण है।” समझाइए। (2011)
उत्तर:
रोजगार एक व्यक्ति एवं परिवार के सामान्य जीवन-निर्वाह के लिए प्राथमिक आवश्यकता है। अत: रोजगार के अवसरों तक पहुँच किसी भी देश के नागरिकों का मौलिक अधिकार है। नागरिकों के इसी अधिकार को सुनिश्चित करने हेतु सरकार द्वारा नियमित रूप से, विभिन्न उपलब्ध संसाधनों एवं देश की औद्योगिक व्यावसायिक प्रगति को ध्यान में रखकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।

वस्तुत: हमारे देश में औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रगति पर्याप्त सन्तोषजनक है, परन्तु देश की जनसंख्या वृद्धि दर अधिक होने के कारण, उपलब्ध रोजगार के अवसर कम प्रतीत हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनसंख्या आधिक्य की स्थिति में सभी व्यक्तियों को शिक्षा के समान स्तरीय अवसर उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।

अत: रोजगार के इच्छुक व्यक्ति कुशल प्रशिक्षण के अभाव में, रोजगार के अवसरों की माँग को पूरा करने में असमर्थ होते हैं। इस प्रकार रोजगार के उपलब्ध अवसरों तथा रोजगार के इच्छुक व्यक्तियों के बीच उत्पन्न असन्तुलन की स्थिति बेरोजगारी की समस्या को जन्म देती है।

प्रश्न 2.
जनसंख्या विस्फोट के नियन्त्रण के उपाय बताइए।
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि या जनसंख्या विस्फोट पर नियन्त्रण
जनसंख्या वृद्धि एक गम्भीर राष्ट्रीय समस्या है। समाज तथा राष्ट्र की प्रगति एवं समृद्धि के लिए इस समस्या का समाधान अति आवश्यक है। इसके निवारण हेतु जन्म-दर को घटाना अनिवार्य हो गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विभिन्न प्रयास करने आवश्यक हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण प्रयासों का विवरण निम्नलिखित है।

  1. जनसंख्या नियन्त्रण हेतु सर्वप्रथम शिक्षा का प्रसार आवश्यक है। विद्यालय शिक्षा के अन्तर्गत जनसंख्या शिक्षा को सम्मिलित करके भावी पीढ़ी को छोटे परिवार की महत्ता समझायी जा सकती है। शिक्षित व्यक्ति अन्धविश्वासों एवं मिथ्या धारणाओं से मुक्त होते हैं तथा वे नियोजित परिवार के महत्त्व को समझते हैं।
  2. इसके अतिरिक्त बाल-विवाह तथा कम आयु में होने वाले विवाहों को रोकना चाहिए। यह उपाय प्रजनन दर को कम करने में सहायक हो सकता है।
  3. छोटे परिवार के महत्त्व एवं लाभों के प्रति जन-जागरूकता का प्रसार करना चाहिए तथा देश के सभी नागरिकों को स्वेच्छा से परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस दिशा में छोटे परिवार वाले व्यक्तियों को विभिन्न प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं, जैसे कि वेतन में वृद्धि, बच्चे के शिक्षा-शुल्क में छूट आदि। उल्लेखनीय है कि जनसंख्या नियन्त्रण के प्रति जागरूकता विकसित करने के लिए प्रतिवर्ष 11 जुलाई को ‘विश्व  जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है।

प्रश्न 3.
परिवार नियोजन की आवश्यकता को समझाइए।
उत्तर:
परिवार नियोजन की आवश्यकता
भारत एक विकासशील देश है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के उपरान्त, विशेषकर वर्ष 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद से, हमारे देश में तीव्र वैज्ञानिक एवं आर्थिक प्रगति हुई है, परन्तु उत्पादन वृद्धि दर में हुई इस उल्लेखनीय प्रगति का समुचित लाभ देश की जनता को प्राप्त नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप आज भी हमारे देश में निर्धनता एवं निम्न जीवन-स्तर की समस्या विकराल रूप धारण किए हुए है। इस विरोधाभासी स्थिति का एक प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि दर का अत्यधिक होना है। अत: देश के विकास एवं जनता के कल्याण हेतु आवश्यक है कि देश की जनसंख्या को बढ़ने से रोका जाए।

दूसरे शब्दों में, जन्म-दर को घटाने का प्रयास किया जाए, यही परिवार नियोजन का मुख्य उद्देश्य है, इसके साथ-साथ परिवार कल्याण अर्थात् समग्र पारिवारिक जीवन को उत्तम बनाने के लिए भी परिवार नियोजन अर्थात् परिवार को सीमित रखना आवश्यक है।

प्रश्न 4.
परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता में प्रमुख बाधाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता में प्रमुख बाधाएँ निम्नलिखित हैं।
1. अशिक्षा एवं जनसहयोग का अभाव – अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण परिवार नियोजन कार्यक्रमों को अपेक्षित जन सहयोग नहीं मिल पाता है। वस्तुतः अशिक्षित या अल्प-शिक्षित लोग रूढ़ियों एवं पूर्व-धारणाओं के प्रभाव के कारण सन्तानोत्पत्ति को ईश्वर की देन के रूप में स्वीकार करते हैं। वे लोग परिवार नियोजन के लाभों को पहचानने एवं उत्तम भविष्य की कल्पना करने का दृष्टिकोण विकसित नहीं कर पाते हैं।

2. यौन-शिक्षा का अभाव- यौन शिक्षा के अभाव के कारण भी । परिवार नियोजन कार्यक्रम के प्रति अपेक्षित जागरूकता उत्पन्न नहीं हो पाई है।

3. निर्धनता-
 निर्धनता की स्थिति में, कुछ लोग परिवार नियोजन के साधनों को प्राप्त करने में असफल रहते हैं। यद्यपि सरकार द्वारा निरोध आदि के नि:शुल्क वितरण की व्यवस्था की गई है, किन्तु नसबन्दी करवाने जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है।

4. शत-प्रतिशत अचूक उपायों को उपलब्ध न होना- भारत की वृहद जनसंख्या की तुलना में, परिवार नियोजन के शत-प्रतिशत अचूक उपाय पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। यह स्थिति परिवार नियोजन कार्यक्रम की पूर्ण सफलता में बाधक है।

5. ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन सुविधाओं एवं प्रचार का अभाव- भारत के ग्रामीण एवं दूर-दूराज के क्षेत्रों में परिवार नियोजन के व्यवस्थित केन्द्रों की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है। इस स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन कार्यक्रम की लोकप्रियता सीमित ही है।

प्रश्न 5.
परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कोई दो सूझाव दीजिए। (2018)
अथवा
परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सुझाव दीजिए। (2014)
उत्तर:
परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता हेतु सुझाव
भारत जैसे विकासशील देशों में परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय एवं प्रयास किए जा सकते हैं।

1. जन-जागरूकता- परिवार नियोजन के महत्त्व एवं आवश्यकता का अधिक-से-अधिक प्रचार किया जाना चाहिए, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी अत्यधिक आवश्यकता है। इसके लिए जनसंचार के यथासम्भव सभी माध्यमों; जैसे- रेडियो, दूरदर्शन, समाचार-पत्र, पोस्टर्स, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली का खेल आदि का अधिक-से-अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए।

2. समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों से सहयोग- परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने की दिशा में, देश के धार्मिक नेताओं, जन-प्रतिनिधियों, समाज-सुधारकों, बुद्धिजीवियों, अभिनेताओं आदि को जन-साधारण के समक्ष स्वयं अपना आदर्श स्थापित करना चाहिए।

3. परिवार नियोजन सुविधाओं का विस्तार तथा सम्बन्धित भ्रान्तियों का- निराकरण परिवार नियोजन सुविधाओं का अधिक-से-अधिक विस्तार तथा सर्वसुलभता सुनिश्चित होनी चाहिए। सभी क्षेत्रों में जन्म नियन्त्रण के सस्ते एवं सुविधाजनक उपकरणों एवं औषधियों को सर्वसुलभ कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही नसबन्दी ऑपरेशनों के विषय में जनता में व्याप्त भ्रान्तियों एवं अकारण भय का निराकरण किया जाना चाहिए।

4. योग्य चिकित्सकों की व्यवस्था- परिवार नियोजन कार्यक्रमों में योग्य चिकित्सकों एवं शल्य चिकित्सकों की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे लोगों में विश्वास उत्पन्न होगा तथा वे नियोजन सम्बन्धी उपाय अपनाने में जोखिम का अनुभव नहीं करेंगे। नसबन्दी ऑपरेशनों में दूरबीन विधि को अधिक अपनाया जाना चाहिए।

5. शिक्षा का विस्तार- अन्धविश्वासों के निराकरण एवं परिवार नियोजन के महत्त्व की जानकारी प्रदान करने हेतु शिक्षा के अधिकाधिक प्रसार के साथ-साथ यौन शिक्षा की भी समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक, 100 शब्द)

प्रश्न 1.
जनसंख्या विस्फोट एक राष्ट्रीय समस्या है, इसके क्या परिणाम हैं? (2006)
अथवा
जनसंख्या वृद्धि की हानियाँ लिखिए। (2007)
अथवा
जनसंख्या विस्फोट के परिणाम लिखिए। (2013)
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट-एक राष्ट्रीय समस्या
जनसंख्या विस्फोट से अभिप्राय है-जनसंख्या वृद्धि की दर का अत्यधिक होना। हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि दर निरन्तर कम होने के बावजूद (1991 के पश्चात् से) अभी भी जनसंख्या विस्फोट की श्रेणी में है तथा यह एक गम्भीर राष्ट्रीय समस्या है। जनसंख्या वृद्धि की इस उच्च दर ने देश के पूर्ण सम्भावित विकास के प्रयासों को प्रायः विफल कर दिया है।

जनसंख्या समस्या के कारण सीमित संसाधनों में आवास, पोषण, शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा तथा रोजगार के क्षेत्र में बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाना असम्भव हो रहा है। अतः जनसंख्या विस्फोट को राष्ट्रीय समस्या स्वीकार करते हुए, इसके समाधान के ठोस उपाय किए जाना अपरिहार्य हो गया है।

जनसंख्या विस्फोट के परिणाम
जनसंख्या वृद्धि के परिणामों अथवा हानियों का विवरण निम्नलिखित है।

  • निर्धनता में वृद्धि
  • भुखमरी
  • जीवन-स्तर को निम्न होना
  • स्वास्थ्य स्तर का निम्न होना
  • कृषि योग्य भूमि को बँट जाना
  • वैयक्तिक विघटन
  • पारिवारिक विघटन
  • सामाजिक विघटन

1. निर्धनता में वृद्धि निर्धनता व्यापक अर्थ में विकास के अवसरों का अभाव जनसंख्या विस्फोट है। उल्लेखनीय है कि भारत जैसे के परिणाम विकासशील देश में, जहाँ संसाधन सीमित होते हैं, जनसंख्या आधिक्य निर्धनता में वृद्धि का कारण बनता है।

2. भुखमरी- निर्धनता के साथ-साथ भुखमरी की समस्या भी उठ खड़ी होती है। खाद्यान्न उत्पादन के सीमित होने की स्थिति में यदि जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, तो निश्चित रूप से लोगों को आवश्यकता से कम मात्रा में खाद्य-सामग्री उपलब्ध होती है। यह दशा प्राय: भुखमरी एवं अभाव की समस्या का रूप ले सकती है।

3. जीवन-स्तर का निम्न होना- तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण सम्बन्धित समाज के लोगों का जीवन-स्तर सामान्यत: निम्न होता जाता है। जन-सामान्य को आवास, पोषण, शिक्षा, चिकित्सा एवं परिवहन सम्बन्धी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है।

4. स्वास्थ्य स्तर का निम्न होना- जनसंख्या वृद्धि की स्थिति में, रहन-सहन के निम्न स्तर का प्रभाव जन-सामान्य के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। पौष्टिक एवं सन्तुलित आहार की अनुपलब्धता एवं स्वास्थ्यवर्द्धक आवास सुविधाओं का अभाव स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ उत्पन्न करता है। स्वास्थ्य स्तर निम्न होने पर विभिन्न संक्रामक एवं अभावजनित रोग विकराल रूप धारण कर लेते हैं।

5. कृषि योग्य भूमि का बँट जाना- कृषि योग्य भूमि एक सीमित संसाधन है। जनसंख्या में वृद्धि होने पर, इस भूमि का बँटवारा होता जाता है तथा भूमि छोटे-छोटे टुकड़ों में बँटकर अनार्थिक जोतों का रूप ले लेती है और भारत | जैसे कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले देश को अनाज की कमी की गम्भीर
समस्या का सामना करना पड़ता है।

6. वैयक्तिक विघटन- जनसंख्या विस्फोट की स्थिति समाज में अनेक अभावों को जन्म देती है। निर्धनता तथा बेरोजगारी की परिस्थितियों में वैयक्तिक विघटन की दर भी बढ़ने लगती है। अनेक व्यक्ति अपराधों, मद्यपान तथा | आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों के शिकार होने लगते हैं।

7. पारिवारिक विघटन- वैयक्तिक विघटन का प्रभाव, पारिवारिक संगठन पर पड़ना स्वाभाविक है। अभाव की परिस्थितियों में पारिवारिक कलह तथा
तनाव में भी वृद्धि होने लगती है।

8. सामाजिक विघटन- व्यक्ति समाज की मूल इकाई है। अत: वैयक्तिक एवं पारिवारिक विघटन की स्थिति में समाज को प्रभावित होना स्वाभाविक है। इस स्थिति में सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था विघटित होने लगती है तथा भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ सामाजिक संस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

प्रश्न 2.
परिवार नियोजन से क्या आशय है? परिवार नियोजन की मुख्य विधियों का उल्लेख कीजिए। (2003)
अथवा
टिप्पणी लिखिए-परिवार नियोजन। (2006)
अथवा
“समाज के लिए परिवार कल्याण एवं परिवार नियोजन सुझाव ही नहीं, चेतावनी है।” क्यों? इस ज्वलन्त समस्या का निराकरण आप कैसे करेंगी? (2007, 10)
उत्तर:
परिवार नियोजन से आशय
नियोजन का अभिप्राय एक ऐसी व्यवस्था से होता है, जिसमें कुछ निश्चित लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं और इन लक्ष्यों को एक निश्चित अवधि में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्राप्त किया जाता है। परिवार के सन्दर्भ में नियोजन का प्रमुख रूप परिवार नियोजन है। मूल रूप से परिवार नियोजन का आशय परिवार के आकार को सीमित रखने से है, यद्यपि आधुनिक परिस्थितियों में इसे विस्तृत अवधारणा के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जिसका अन्तिम लक्ष्य सम्पूर्ण परिवार का कल्याण है।

इस रूप में परिवार नियोजन का क्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है, इसमें परिवार को सीमित रखने के साथ-साथ सन्तानहीन को मातृत्व का लाभ दिलाना एवं माता व शिशु दोनों की देखभाल सुनिश्चित करना आदि सम्मिलित हैं। उपरोक्त विवरण को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि, “हमारे समाज के लिए परिवार कल्याण एवं परिवार नियोजन सुझाव ही नहीं, चेतावनी है।”

परिवार नियोजन की विधियाँ
आधुनिक समय में पुरुषों-स्त्रियों के लिए परिवार नियोजन के विभिन्न भौतिक साधन प्रचलित हैं। परिवार नियोजन के मुख्य साधनों का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है

परिवार नियोजन की विधियाँ
( पुरुषों के लिए)

  • कण्डोम
  • नसबन्दी है।

1.कण्डोम (निरोध) यह रबड़ की थैली के समान होता है, जिसे पुरुष सहवास से पूर्व अपने लिंग पर धारण कर सकता है। यह गर्भधारण से बचाव का कारगर उपाय है। कण्डोम के प्रयोग से यौन संक्रमण से होने वाले रोगों से भी बचा जा सकता है।

2. नसबन्दी- यह एक छोटा-सा ऑपरेशन होता है, इस ऑपरेशन में डॉक्टर कुछ नसों को काटकर बाँध देता है। इससे शुक्राणु वीर्य में नहीं आ पाते और स्त्री के गर्भ ठहरने की आशंका नहीं रहती है। इस उपाय द्वारा अवांछित गर्भ से सदा के लिए मुक्ति मिल जाती है। अतः नसबन्दी तभी करानी चाहिए, जब पति-पत्नी अन्तिम रूप से और सन्तान न करने का निर्णय ले लें।

( स्त्रियों के लिए)

  • लूप
  • नसबन्दी
  • डायाफ्राम
  • झागदार गोलियाँ
  • ओरल पिल्स

1. लूप यह प्लास्टिक का बना हुआ एक छोटा-सा छल्ला होता है, जिसे डॉक्टर द्वारा स्त्री की बच्चेदानी में एक सरल विधि से रख दिया जाता इस पूरी प्रक्रिया में स्त्री को किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती। जब तक बच्चेदानी में रहता है, तब तक स्त्री को गर्भ ठहरने की आशंका नहीं। जेली और क्रीम रहती। इस उपाय से पति-पत्नी के संसर्ग में भी किसी प्रकार की बाधा नहीं आती है। इस प्रकार यह गर्भ निरोध की सरल एवं विश्वसनीय विधि है।

2. नसबन्दी- यह ऑपरेशन स्त्रियों के लिए भी होती है, इसे कभी भी कराया जा सकता है। इस ऑपरेशन के बाद भी स्त्री को मासिक धर्म पूर्व की भाँति नियमित रूप से होता है। इससे पति-पत्नी के सहवास में भी कोई अन्तर नहीं अतिा है। वर्तमान में दूरबीन विधि द्वारा भी स्त्रियों की नसबन्दी सम्भव है, इसके तुरन्त बाद स्त्री को घर भेज दिया जाता है तथा इससे कोई परेशानी नहीं होती।

3. डायाफ्राम- यह मुलायम रबड़ की टोपी के समान होता है, जो गर्भाशय के | मुँह को ढक देता है, जिससे गर्भ ठहरने की सम्भावना नहीं रहती।

4. जेली और क्रीम- ये वस्तुएँ एक ट्यूब में आती हैं। इसके साथ लगाने की पिचकारी भी आती है, जिससे जेली या क्रीम को बच्चेदानी के मुँह तक पहुँचा दिया जाता है। ये ऐसी औषधियों से युक्त होती हैं, जो शुक्राणुओं को गर्भाशय में जाने से रोकने का कार्य करती हैं।

5. झागदार गोलियाँ इन गोलियों में विद्यमान दवाई शुक्राणुओं को नष्ट करने में सक्षम होती है। सहवास के पूर्व स्त्री द्वारा ये गोलियाँ पानी में गीली करके योनि में रख ली जाती हैं। इन गोलियों से उत्पन्न होने वाला झाग शुक्राणुओं को निष्क्रिय कर देता है। इन गोलियों का प्रयोग यद्यपि सरल होता है, किन्तु ये गोलियाँ डायाफ्राम या जेली की भाँति पूर्णरूपेण सफल नहीं होती हैं।

6. ओरल पिल्स गर्भनिरोधक गोलियाँ मुख से ग्रहण की जाती हैं; जैसे–माला डी आदि। ये गोलियाँ प्रतिदिन या निश्चित समय पर लेने से गर्भ ठहरने का भय नहीं रहता, यद्यपि इनके प्रयोग से पूर्व चिकित्सक की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए। परिवार नियोजन के उपरोक्त उपायों में से किसी का भी प्रयोग करके परिवार को आदर्श परिवार बनाया जा सकता है।

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