UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

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Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 13
Chapter Name बीजक एवं विक्रय विवरण
Number of Questions Solved 27
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
बीजक तैयार किया जाता है।
(a) क्रेता द्वारा
(b) एजेण्ट द्वारा
(c) विक्रेता द्वारा
(d) ये सभी
उत्तर:
(c) विक्रेता द्वारा

प्रश्न 2.
बीजक साधारणतः कितनी प्रतियों में बनाया जाता है?
(a) दो
(b) तीन
(c) एक
(d) चार
उत्तर:
(d) दो

प्रश्न 3.
एजेण्ट द्वारा अपने प्रधान को बनाकर भेजा जाता है
(a) बीजक
(b) विक्रय विवरण
(c) नाम की चिट्ठी
(d) जमा की चिट्ठी
उत्तर:
(b) विक्रय विवरण

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प्रश्न 4.
परिशोध कमीशन की गणना की जाती है।
(a) सकल विक्रय मूल्य पर
(b) व्यापारिक मूल्य घटाने के बाद शेष मूल्य पर
(c) व्यापारिक व्ययों की राशि जोड़ने पर
(d) व्यापारिक छूट घटाने तथा व्यापारिक व्ययों को जोड़ने पर
उत्तर:
(d) सकल विक्रय मूल्य पर

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
बीजक बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
बीजक से यह पता लगाया जा सकता है कि क्रेता को कितनी धनराशि चुकानी है।

प्रश्न 2.
पक्का बीजक कब तैयार किया जाता है?
उत्तर:
माल बेचने के पश्चात्

प्रश्न 3.
बीजक में व्यापारिक छूट को जोड़ा जाता है/घटाया जाता है।
उत्तर:
घटाया जाता है

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प्रश्न 4.
जब बीजक का योग अधिक लग गया हो, तो कौन-सा प्रलेख तैयार किया जाता है?
उत्तर:
जमा-पत्र

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
बीजक व सूचनार्थ बीजक को परिभाषित कीजिए। (2015)
उत्तर:
बीजक प्रो. जे. एल. हैन्सन के अनुसार, “बीजक व्यवसाय में प्रयुक्त किया जाने वाला एक ऐसा प्रलेख है, जो किसी वस्तु के विक्रय से सम्बन्धित होता है तथा जो किसी विक्रय व्यवहार को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है।” सूचनार्थ (कच्चा) (UPBoardSolutions.com) बीजक यह बीजक अनुमानित अंकों के आधार पर तैयार किया जाता है। इसके द्वारा पूर्वानुमान लगाया जाता है। इसे ‘अनुमानित बीजक या ‘कच्चा बीजक’ (Proforma Invoice) भी कहते हैं।

प्रश्न 2.
नकद छूट से क्या तात्पर्य है? (2014)
उत्तर:
शीघ्र भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से विक्रेता द्वारा क्रेता को जो छूट दी जाती है, उसे नकद छूट कहते हैं। इससे क्रेता व विक्रेता दोनों पक्षों को लाभ होता है।

प्रश्न 3.
जमा की चिट्ठी व नाम की चिट्ठी से क्या आशय है? (2015)
उत्तर:
जमा की चिट्ठी जब विक्रेता द्वारा बीजक तैयार करते समय वास्तविक मूल्य से अधिक राशि लिख दी जाती है, तब इस अशुद्धि को सुधारने के लिए विक्रेता द्वारा क्रेता को एक सूचना-पत्र भेजा जाता है, जिसे जमा-पत्र (Credit Note) या जमा की चिट्ठी कहा जाता है। नाम की चिट्ठी जब विक्रेता बीजक बनाते समय वास्तविक मूल्य से कम राशि लिख देता है, तो इस अशुद्धि को सुधारने के लिए क्रेता द्वारा विक्रेता को एक सूचना-पत्र भेजा जाता है, जिसे नाम की चिट्ठी (Debit Note) कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
डेबिट नोट तथा क्रेडिट नोट में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2008)
उत्तर:
डेबिट नोट तथा क्रेडिट नोट में अन्तर निम्नलिखित है
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लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
बीजक किसे कहते हैं? बीजक तथा सूचनार्थ बीजक में अन्तर बताइए। (2009)
उत्तर:
बीजक जब विक्रेता द्वारा क्रेता को उसके आदेशानुसार माल भेजा जाता है, तब विक्रेता भेजे गए माल के सम्बन्ध में क्रेता के पास एक विवरण भेजता है, जिसे बीजक’ कहा जाता है। बीजक दो प्रतियों में बनाया जाता है। एक प्रति ग्राहक को दी जाती है तथा दूसरी प्रति भावी सन्दर्भ के लिए रखी जाती है। बीजक में निम्न बातों का उल्लेख किया जाता है

  1. माल का नाम, किस्म व मात्रा
  2. माल की दर, प्रति इकाई मूल्य
  3. व्यापारिक छूट
  4. ग्राहक से प्राप्त कुल राशि
  5. माल भेजने का तरीका
  6. वाहक के कहने से किए गए व्यय
  7. बिल्टी कैसे भेजी जा रही है
  8. भूल के लिए क्षमा, प्रार्थना
  9. विक्रेता के हस्ताक्षर
  10. अन्य आवश्यक विवरण

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प्रो. जे. एल. हैन्सन के अनुसार, “बीजक व्यवसाय में प्रयुक्त किया जाने वाला एक ऐसा प्रलेख होता है, जो किसी वस्तु के विक्रय से सम्बन्धित होता है तथा जो किसी विक्रय व्यवहार को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है।” डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार, “विक्रेता (UPBoardSolutions.com) जब क्रेता को उधार माल बेचता है तब वह भेजे गए माल की मात्रा, किस्म, दर, मूल्य, छूट एवं कुल देय धन, आदि को दर्शाते हुए एक विवरण–पत्र तैयार करके क्रेता के पास भेजता है। यह विवरण-पत्र या प्रलेख ही बीजक कहलाता है।”

बीजक तथा सूचनार्थ बीजक में अन्तर 
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प्रश्न 2.
बीजक व विक्रय विवरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2007)
उत्तर:
बीजक व विक्रय विवरण में अन्तर
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प्रश्न 3.
जमा-पत्र तथा नाम-पत्र को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
अथवा
जमा-पत्र एवं नाम-पत्र से आप क्या समझते हैं? दोनों के नमूने दीजिए। (2016)
अथवा
जमा-पत्र से आप क्या समझते हैं? यह कब तैयार किया जाता है? जमा-पत्र का नमूना दीजिए। (2016)
उत्तर:
डेबिट नोट या नाम-पत्र जब विक्रेता बीजक बनाते समय वास्तविक मूल्य से कम राशि लिख देता है, तो इस अशुद्धि को सुधारने के लिए क्रेता द्वारा विक्रेता को एक सूचना-पत्र भेजा जाता है, जिसे डेबिट नोट या नाम-पत्र कहा जाता है। इसके द्वारा यह सूचित किया (UPBoardSolutions.com) जाता है कि उसके खाते में से सम्बन्धित धनराशि नाम या डेबिट की गई है। इससे क्रेता की यह धनराशि लेन-देन में समायोजित कर ली जाती है।

नाम-पत्र बनाने के कारण

  1. जब बीजक का योग गलती से कम लग गया हो।
  2. जब किसी वस्तु का मूल्य बीजक में कम लगाया गया हो।
  3. जब किसी वस्तु का मूल्य बीजक में लगने से रह गया हो।
  4. जब किसी व्यय का लेखा विक्रेता ने क्रेता की ओर बीजक में न किया हो।

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डेबिट नोट का नमूना
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क्रेडिट नोट या जमा-पत्र जब विक्रेता द्वारा बीजक तैयार करते समय वास्तविक मूल्य से अधिक धनराशि लिख दी जाती है, तब इस अशुद्धि को सुधारने के लिए विक्रेता द्वारा क्रेता को एक सूचना-पत्र भेजा जाता है, जिसे जमा-पत्र या क्रेडिट नोट कहा जाता है। इसमें क्रेता (UPBoardSolutions.com) को सूचना दी जाती है कि सम्बन्धित धनराशि उसके खाते में जमा या क्रेडिट कर दी गई है, इसलिए भविष्य में इस धनराशि का भुगतान कम होगा।

जमा-पत्र बनाने के कारण

  1. जब बीजक को योग अधिक लग गया हो।
  2. जब क्रेता को किसी कारणवश अतिरिक्त कमीशन दिया गया हो।
  3. जब बीजक में किसी वस्तु का मूल्य अधिक लगाया गया हो।
  4. जब क्रेता से कुछ माल वापस आ गया हो।
  5. जब किसी वस्तु को न भेजने पर भी उसका मूल्य बीजक में लगा दिया गया हो।

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क्रेडिट नोट का नमूना
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
बीजक क्यों, कब और किसके द्वारा बनाया जाता है? काल्पनिक मदों के आधार पर एक बीजक तैयार कीजिए। (2018, 16)
अथवा
बीजक क्या है? काल्पनिक आँकड़ों की सहायता से एक बीजक तैयार कीजिए। (2011)
अथवा
बीजक किसे कहते हैं? काल्पनिक आँकड़ों से उचित रूप में बीजक बनाइए। (2008)
उत्तर:
बीजक
बीजक जब विक्रेता द्वारा क्रेता को उसके आदेशानुसार माल भेजा जाता है, तब विक्रेता भेजे गए माल के सम्बन्ध में क्रेता के पास एक विवरण भेजता है, जिसे बीजक’ कहा जाता है। बीजक दो प्रतियों में बनाया जाता है। एक प्रति ग्राहक को दी जाती है तथा दूसरी प्रति भावी सन्दर्भ के लिए रखी जाती है। बीजक में निम्न बातों का उल्लेख किया जाता है

  1. माल का नाम, किस्म व मात्रा
  2. माल की दर, प्रति इकाई मूल्य
  3. व्यापारिक छूट
  4. ग्राहक से प्राप्त कुल राशि
  5. माल भेजने का तरीका
  6. वाहक के कहने से किए गए व्यय
  7. बिल्टी कैसे भेजी जा रही है
  8. भूल के लिए क्षमा, प्रार्थना
  9. विक्रेता के हस्ताक्षर
  10. अन्य आवश्यक विवरण

प्रो. जे. एल. हैन्सन के अनुसार, “बीजक व्यवसाय में प्रयुक्त किया जाने वाला एक ऐसा प्रलेख होता है, जो किसी वस्तु के विक्रय से सम्बन्धित होता है तथा जो किसी विक्रय व्यवहार को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है।” डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार, “विक्रेता जब (UPBoardSolutions.com) क्रेता को उधार माल बेचता है तब वह भेजे गए माल की मात्रा, किस्म, दर, मूल्य, छूट एवं कुल देय धन, आदि को दर्शाते हुए एक विवरण–पत्र तैयार करके क्रेता के पास भेजता है। यह विवरण-पत्र या प्रलेख ही बीजक कहलाता है।”

बीजक तथा सूचनार्थ बीजक में अन्तर 
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काल्पनिक आँकड़ों से बीजक का नमूना

                                            श्याम ब्रदर्स

तार : ‘श्याम’                                                                   लखनऊ,
दूरभाष : 2867429                                  दिनांक 28 मार्च, 2015
कोड सं : ए.बी.सी. (अष्टम संस्करण)

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 1

सेवा में,
मैसर्स राधेलाल एण्ड कम्पनी, इलाहाबाद।
शर्त : 2 माह में भुगतान करने पर 24% नकद छूट।
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भूल-चूक लेनी-देनी।                                                      श्याम ब्रदर्स के लिए
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया                                   रमेश कुमार (साझेदार)
रेलवे रसीद (बिल्टी) नं. 1982
दिनांक : 15 मार्च, 2015

प्रश्न 2.
विक्रय विवरण क्या हैं? यह क्यों और किसके द्वारा बनाया जाता है? काल्पनिक मदों की सहायता से एक विक्रय विवरण तैयार कीजिए। (2016, 07, 06)
अथवा
विक्रय विवरण क्या है? काल्पनिक आँकड़ों (सूचनाओं) की सहायता से एक विक्रय विवरण तैयार कीजिए। (2013, 11)
अथवा
विक्रय विवरण क्यों और किसके द्वारा बनाया जाता है? काल्पनिक मदों के आधार पर एक विक्रय विवरण तैयार कीजिए। (2006)
उत्तर:
विक्रय विवरण अधिकांश व्यापारी अपने माल की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से अलग-अलग स्थानों पर अपना एक-एक एजेण्ट नियुक्त कर देते हैं। इन एजेण्टों को व्यापारी विक्रय किए जाने वाले माल पर कमीशन देते हैं। एजेण्ट विक्रय किए गए माल (UPBoardSolutions.com) का विवरण अपने प्रधान या व्यापारी के पास भेजता है। इसी विवरण को विक्रय विवरण के नाम से जाना जाता है। यह एजेण्ट के द्वारा बनाया जाता है।

इसमें निम्नलिखित सूचनाओं का उल्लेख रहता है–

  1. बिके माल का पूरा विवरण।
  2. प्रधान को देय शुद्ध राशि।
  3. ‘भूल-चूक लेन-देनी’ शब्द का उल्लेख।
  4. ग्राहकों को दिया गया व्यापारिक बट्टा।
  5. माल बेचने वाले एजेण्ट का नाम व पता।
  6. एजेण्ट का कमीशन व परिशोध कमीशन।
  7. विक्रय विवरण बनाए जाने की तिथि।
  8. एजेण्ट के हस्ताक्षर।
  9. धनराशि भेजने का ढंग।
  10. माल भेजने वाले का नाम।

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विक्रय विवरण बनाने के उद्देश्य विक्रय विवरण निम्न उद्देश्यों के लिए बनाया जाता है-

  1. व्यापारी को एजेण्ट के द्वारा माल से सम्बन्धित किए गए व्ययों का ज्ञान होता है।
  2. इस विवरण से व्यापारी को एजेण्ट द्वारा विक्रय किए गए माल के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त हो जाती है।
  3. इससे व्यापारी को माल से सम्बन्धित बाजार मूल्य की जानकारी मिल जाती है।
  4. व्यापारी को एजेण्ट के पास शेष माल (UPBoardSolutions.com) के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त होती है।
  5. व्यापारी की पुस्तकों में लेखा इसी विवरण के आधार पर किया जाता है।

काल्पनिक मदों से विक्रय विवरण का नमूना

                                 विक्रय विवरण
तार का पता: ‘अग्रवाल’                      अग्रवाल एण्ड सन्स, काशीपुर
दूरभाष : 4253901
मैसर्स फैन्सी क्लॉथ भण्डार, मुरादाबाद से प्राप्त तथा उनके जोखिम तथा हिसाब पर बेचे गए माल का विक्रय विवरण

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण
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भूल-चूक लेन-देनी                                            वास्ते अग्रवाल एण्ड सन्स
दिनांकः 15 मार्च, 2015                                आलोक अग्रवाल (साझेदार)

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प्रश्न 3.
बीजक से आप क्या समझते हैं? बीजक और विक्रय विवरण में क्या अन्तर है? काल्पनिक सूचनाओं के आधार पर एक बीजक बनाइए। (2008, 07, 06)
उत्तर:
बीजक से आशय
बीजक जब विक्रेता द्वारा क्रेता को उसके आदेशानुसार माल भेजा जाता है, तब विक्रेता भेजे गए माल के सम्बन्ध में क्रेता के पास एक विवरण भेजता है, जिसे बीजक’ कहा जाता है। बीजक दो प्रतियों में बनाया जाता है। एक प्रति ग्राहक को दी जाती है तथा दूसरी प्रति भावी सन्दर्भ के लिए रखी जाती है। बीजक में निम्न बातों का उल्लेख किया जाता है

  1. माल का नाम, किस्म व मात्रा
  2. माल की दर, प्रति इकाई मूल्य
  3. व्यापारिक छूट
  4. ग्राहक से प्राप्त कुल राशि
  5. माल भेजने का तरीका
  6. वाहक के कहने से किए गए व्यय
  7. बिल्टी कैसे भेजी जा रही है
  8. भूल के लिए क्षमा, प्रार्थना
  9. विक्रेता के हस्ताक्षर
  10. अन्य आवश्यक विवरण

प्रो. जे. एल. हैन्सन के अनुसार, “बीजक व्यवसाय में प्रयुक्त किया जाने वाला एक ऐसा प्रलेख होता है, जो किसी वस्तु के विक्रय से सम्बन्धित होता है तथा जो किसी विक्रय व्यवहार को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है।” डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार, (UPBoardSolutions.com) “विक्रेता जब क्रेता को उधार माल बेचता है तब वह भेजे गए माल की मात्रा, किस्म, दर, मूल्य, छूट एवं कुल देय धन, आदि को दर्शाते हुए एक विवरण–पत्र तैयार करके क्रेता के पास भेजता है। यह विवरण-पत्र या प्रलेख ही बीजक कहलाता है।”

बीजक तथा सूचनार्थ बीजक में अन्तर 
UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

बीजक और विक्रय विवरण में अन्तर 
UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

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काल्पनिक आँकड़ों से बीजक का नमूना

श्याम ब्रदर्स

तार : ‘श्याम’                                                                   लखनऊ,
दूरभाष : 2867429                                  दिनांक 28 मार्च, 2015
कोड सं : ए.बी.सी. (अष्टम संस्करण)

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 1

सेवा में,
मैसर्स राधेलाल एण्ड कम्पनी, इलाहाबाद।
शर्त : 2 माह में भुगतान करने पर 24% नकद छूट।

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

भूल-चूक लेनी-देनी।                                                      श्याम ब्रदर्स के लिए
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया                                   रमेश कुमार (साझेदार)
रेलवे रसीद (बिल्टी) नं. 1982
दिनांक : 15 मार्च, 2015

प्रश्न 4.
स्थानीय मूल्य बीजक किसे कहते हैं? काल्पनिक आँकड़ों की सहायता से स्थानीय मूल्य बीजक का नमूना प्रस्तुत कीजिए। (2007)
उत्तर:
इस बीजक में केवल वस्तु का मूल्य लिखा जाता है। (UPBoardSolutions.com) इसके अतिरिक्त विक्रेता के गोदाम से क्रेता के घर तक पहुँचाने का व्यय क्रेता को ही वहन करना पड़ता है। ये सब स्थानीय मूल्य बीजक में दर्शाया जाता है।

इसमें निम्न प्रकार से व्यय जोड़े जाते हैं
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स्थानीय मूल्य बीजक का नमूना

                             गणेश पब्लिकेशन
(पुस्तक प्रकाशक एवं विक्रेता)

तार का पता : ‘गणेश’                             दूरभाष : 5289674
त्रिपोल्पि बाजार, मेरठ                           दिनांक : 10 अप्रैल, 2015

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 2

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सेवा में,
सर्वश्री गोविन्द बुक डिपो,
सोनीपत
शर्त : 2% नकद छूट एक माह के भीतर भुगतान करने पर।

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 3
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भूल-चूक लेनी–देनी
माल सवारीगाड़ी द्वारा भेजा गया                                         पब्लिकेशन के लिए
जिसका बिल्टी नं. 2548 है।                                          गणेश गोयल (साझेदार)

क्रियात्मक प्रश्न (8 अक)

प्रश्न 1.
मै. वाराणसी फैन्स लिमिटेड, वाराणसी ने मै. राजा इलेक्ट्रिकल्स, इलाहाबाद को निम्नलिखित माल बेचा
50 सीलिंग फैन 48″                    प्रति फैन ₹ 800
24 टेबिल फैन                             प्रति फैन ₹ 500
उन्होंने माल भेजने में निम्न व्यय किए
पैकिंग व्यय                                             ₹500
ढुलाई                                                     ₹ 400
ट्रक भाड़ा                                               ₹ 1,000
बीमा                                                       ₹ 500
क्रेता को विक्रय मूल्य पर 7.5% की दर से व्यापारिक छूट और देय (UPBoardSolutions.com) राशि एक सप्ताह में भुगतान करने पर 2% की दर से नकद छूट देने की शर्त पर माल बेचा गया।
उपरोक्त विवरण से एक बीजके तैयार कीजिए। (2006)
हल
                                                          बीजक
                                           वाराणसी फैन्स लिमिटेड
(पंखों के निर्माता)

दूरप्रेष्य : ‘फैन’                                                                        वाराणसी
दूरभाष : 2386921                                         दिनांक : 15 मई, 2005
कोड : अ. ब. स. (तृतीय संस्करण)वाराणसी।

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 4

सेवा में,
मै. राजा इलेक्ट्रिकल्स,
इलाहाबाद।
शर्त : देय राशि का एक सप्ताह में भुगतान करने पर 2% नकद छूट।

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

भूल-चूक लेनी–देनी                                       वास्ते वाराणसी फैन्स लिमिटेड
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया                                       रामकुमार (प्रबन्धक)
बिल्टी संख्या : R 09682
दिनांक : 15 मई, 2015 को बिल्टी पंजाब नेशनल बैंक द्वारा भेजी गई।

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प्रश्न 2.
मैं. शारदा पुस्तक सदन, इलाहाबाद ने मै. कंसल बुक डिपो, नैनीताल को निम्नांकित पुस्तकें उधार बेचीं

  1. मानव भूगोल डॉ. एस. डी. मौर्या, ₹ 100 प्रतियाँ, प्रत्येक ₹ 160 की दर से।
  2. जनसंख्या भूगोल डॉ. एस. डी. मौर्या, ₹ 50 प्रतियाँ, प्रत्येक ₹ 180 की दर से।
  3. भौतिक भूगोल डॉ. एस. लाल, 40 प्रतियाँ, प्रत्येक ₹ 150 की दर से। पुस्तकों के प्रेषण पर निम्न व्यय हुए पैकिंग व्यय ₹100, ढुलाई ₹ 80, रेलभाड़ा ₹ 120, बीमार ₹ 150 सभी पुस्तकों के क्रय पर क्रेता को 15% की दर से व्यापारिक छूट और 15 दिन के अन्दर भुगतान करने पर 5% की दर से नकद छूट

प्रदान की जाती है। उपरोक्त विवरण से उचित प्रारूप में बीजक बनाइए।
हल
                                                                बीजक
                                                     शारदा पुस्तक सदन
(पुस्तक प्रकाशक एवं विक्रेता)
तार का पता : ‘शारदा’                                                                     इलाहाबाद
दूरभाष : 234986                                                    दिनांक : 6 अगस्त, 2006

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 5

सेवा में,
मैसर्स कंसल बुक डिपो
नैनीताल
शर्त : पन्द्रह दिन के अन्दर भुगतान करने पर 5% नकद छूट।

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

भूल-चूक लेनी–देनी                                             वास्ते शारदा पुस्तक सदन
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया                                सत्यवीर सिंह (साझेदार)
बिल्टी संख्या : R 0869261/2014
दिनांक : 06 अगस्त, 2014 को बिल्टी इलाहाबाद बैंक से भेजी गई।

प्रश्न 3.
मै. प्लास्टिको लि., मुम्बई ने मै. राज ट्रेडर्स, इलाहाबाद को निम्नलिखित माल बेचा
200 प्लास्टिक बाल्टियाँ, ₹ 20 ली प्रत्येक ₹ 40 की दर से
100 प्लास्टिक टब, ₹ 30 ली.; प्रत्येक ₹ 60 की दर से
100 प्लास्टिक ट्रे, 8 x 15 प्रत्येक ₹ 30 की दर से।
क्रेता को विक्रय मूल्य पर 10% की दर से व्यापारिक छूट और देय राशि पर एक सप्ताह में भुगतान करने पर 2% की दर से नकद छूट देने की शर्त पर माल बेचा गया।
उपरोक्त विवरण से उचित प्रारूप में एक बीजक बनाइए। (2010)

UP Board Solutions
हल
बीजक
प्लास्टिको लि.
दूरप्रेष्य : ‘प्लास्टिको’                                        116, एस.बी. रोड, मुम्बई-8
दूरभाष : 039863682                                   दिनांक : 6 मार्च, 2010
कोड : अ. ब. स. (द्वितीय संस्करण)

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 6

सेवा में,
मैसर्स राज ट्रेडर्स
एम. जी. रोड,
इलाहाबाद।
शर्त : एक सप्ताह में भुगतान करने पर 2% की दर से नकद छूट दी जाती है।

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

भूल-चूक लेनी–देनी।                                                     वास्ते प्लास्टिको लि.
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया।                                  एस. सावन्त (साझेदार)
बिल्टी संख्या : R 032369
दिनांक : 6 मार्च, 2010 को बिल्टी इलाहाबाद बैंक द्वारा भेजी गई।

प्रश्न 4.
मै. साहित्य भवन अस्पताल मार्ग आगरा ने मै. अमन एण्ड चमन ब्रदर्स, वाराणसी को निम्न पुस्तकें उधार बेचीं

  1. 60 प्रति हाईस्कूल वाणिज्य, ₹ 80 प्रति की दर से।
  2. 40 प्रति हाईस्कूल अर्थशास्त्र, ₹ 60 प्रति की दर से।
  3. 40 प्रति हाईस्कूल बैंकिंग, ₹ 50 प्रति की दर से।

व्यय : भाड़ा ₹ 200, पैकिंग ₹ 300।
व्यापारिक छूट 10% की दर से और 15 दिन के अन्दर भुगतान (UPBoardSolutions.com) करने पर 2% की दर से नकद छूट देय है।
उपरोक्त विवरण से बीजक बनाइए। (2012)
हल
                                            बीजक
                                   मै. साहित्य भवन
(पुस्तक प्रकाशक एवं विक्रेता)

दूरप्रेष्य : ‘भवन’                                                                कोलकाता
कोड : अ. ब. स. (तृतीय संस्करण)                दिनांक : 7 मार्च, 2012
दूरभाष : 286965

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 7a

सेवा में,
मै, अमन एण्ड चमन ब्रदर्स, वाराणसी।
अस्पताल मार्ग, आगरा।
शर्त : पन्द्रह दिन के अन्दर भुगतान करने पर 2% की दर से नकद छूट देय है।

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

भूल-चूक लेनी-देनी                                                    वास्ते मै. साहित्य भवन
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया                                  राजीव अग्रवाल (प्रबन्धक)
बिल्टी संख्या : R008963
दिनांक : 7 मार्च, 2012 को बिल्टी पंजाब नेशनल बैंक द्वारा भेजी गई।

प्रश्न 5.
मैसर्स तूफानी फैन्स लि. कोलकाता ने मैसर्स सोनू एण्ड सन्स, सोनभद्र को निम्नलिखित पंखे उधार बेचे
30 सीलिंग फैन 48″                              दर प्रति फैन ₹ 1,800
10 सीलिंग फैन 36″                               दर प्रति फैन ₹,600
20 टेबिल फैन डीलक्स                          दर प्रति फैन ₹ 1,500
मै. तूफानी फैन्स लि. ने निम्नलिखित व्यय किए
रेलभाड़ा ₹ 600, पैकिंग व्यय ₹ 1,200, अन्य व्यय ₹ 400
व्यापारिक छूट 10% की दर से और 15 दिन के अन्दर भुगतान करने पर 2% की दर से नकद छूट देय है। उपरोक्त विवरण से बीजक बनाइए। (2013)
हल
                                                    बीजक
                                        मैसर्स तूफानी फैन्स लि.
(पंखों के निर्माता एवं विक्रेता)

दूरप्रेष्य : ‘तूफानी’                                                                        कोलकाता
दूरभाष : 033-6896923b                                  दिनांक : 26 अप्रैल, 2013
कोड : अ. ब. स.

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 8

सेवा में,
मैसर्स सोनू एण्ड सन्स,
सोनभद्र।
शर्त : 15 दिन के अन्दर भुगतान करने पर 2% की दर से नकद छूट देय।

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण 9
UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

भूल-चूक लेनी-देनी                                                     वास्ते तूफानी फैन्स लि.
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया                                    संजीव विश्नोई (साझेदार)
बिल्टी संख्या : R 1008695
दिनांक : 26 अप्रैल, 2013 को बिल्टी इलाहाबाद बैंक से भेजी गई।

प्रश्न 6.
कान्हा एण्ड सन्स, इटावा ने रैली फैन्स प्रा. लि. लखनऊ की ओर से निम्नलिखित पंखें बेचे
30 टेबिल फैन, ‘जनता’ 16″ दर ₹ 1,000 प्रति फैन
32 टेबिल फैन ‘डीलक्स’ 16″ दर ₹ 1,200 प्रति फैन
20 सीलिंग फैन ‘पॉपुलर’ 48″ दर ₹ 1,500 प्रति फैन
एजेण्ट ने निम्नांकित व्यय किए
रेलभाड़ा के 500, चुंगी 600, अन्य व्यय ₹ 400।
एजेण्ट को विक्रय पर 20% कमीशन मिलता है। उपरोक्त विवरणों के आधार पर एक बिक्री विवरण तैयार कीजिए। (2008)
हल
                                                     विक्रय विवरण
                                                  कान्हा एण्ड सन्स
तार : ‘कान्हा’                                                                                     इटावा
दूरभाष : 2896853                                          दिनांक : 19 जुलाई, 2007

सर्वश्री रैली फैन्स प्रा. लि. लखनऊ की ओर से प्राप्त माल तथा उन्हीं के जोखिम पर बेचे (UPBoardSolutions.com) गये माल का विक्रय विवरण मात्रा विवरण

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भूल-चूक लेनी-देनी                                                    वास्ते कान्हा एण्ड सन्स
उपरोक्त देय राशि के लिए।                                    ओमपाल सिंह (साझेदार)
चैक सं. UQ8256
दिनांक : 19 जुलाई, 2007, स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया का संलग्न है।

प्रश्न 7.
5 जनवरी, 2013 को मैसर्स बदरुद्दीन एण्ड सन्स, अमीनाबाद, लखनऊ ने मैसर्स करुणा ब्रदर्स, महात्मा गाँधी मार्ग, कानपुर की ओर से निम्नलिखित माल बेचा
100 सिल्क साड़ियाँ,                                   ₹ 500 प्रति साड़ी की दर से
100 सूती साड़ियाँ,                                     ₹ 200 प्रति साड़ी की दर से
500 मी शर्लिंग,                                         ₹ 80 प्रति.मी की दर से
100 धोती मरदानी,                                    ₹ 150 प्रति धोती की दर से
रेलभाड़ा ₹ 2,100, गाड़ी भाड़ा ₹ 150, पैकिंग ₹ 250, अन्य व्यय ₹ 150 एवं कमीशन 15% की दर से। उपरोक्त सूचनाओं से विक्रय विवरण तैयार कीजिए। (2014)
हल
                                          विक्रय विवरण
                                मैसर्स बदरुद्दीन एण्ड सन्स

दूरभाष : 2695430                                                   अमीनाबाद, लखनऊ
                                                                          दिनांक : 05 मार्च, 2013

मैसर्स करुणा ब्रदर्स, महात्मा गाँधी मार्ग, कानपुर की ओर से प्राप्त तथा उन्हीं के आदेश पर बेचे गये माल का विक्रय विवरण

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भूल-चूक लेनी-देनी।                                     वास्ते बदरुद्दीन एण्ड सन्स
बदरुद्दीन (साझेदार)

प्रश्न 8.
निम्नलिखित विवरण से बीजक तैयार कीजिए।
विक्रेता राजू पुस्तक भण्डार, आदर्श नगर, कानपुर
क्रेता रामपाल एण्ड सन्स, कटरा, इलाहाबाद।
लेन-देनों का विवरण
50 प्रतियाँ – हाईस्कूल वाणिज्य दर ₹ 50 प्रति।
50 प्रतियाँ – इण्टरमीडिएट वाणिज्य दर ₹ 100 प्रति।
40 प्रतियाँ – एडवान्स एकाउण्टेन्सी दर ₹ 80 प्रति।
किए गए व्यय
पैकिंग                                   ₹ 200
भाड़ा।                                   ₹ 175
लोडिंग                                  ₹ 80
बीमा                                     ₹ 400
शर्ते

  1. व्यापारिक छूट 10%
  2. एक माह के अन्दर भुगतान कर देने पर 2% नकद छूट प्रदान की जाती (2015)

हल
                                          बीजक
                               राजू पुस्तक भण्डार

तारः ‘राजू’                                                        आदर्श नगर, कानपुर
दूरभाष :033-6896923                             दिनांक : 25 मार्च, 2015

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सेवा में,
मैसर्स रामपाल एण्ड सन्स
कटरा,
इलाहाबाद
शर्त : एक माह के अन्दर भुगतान करने पर 2% नकद छूट देय है।

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 13 बीजक एवं विक्रय विवरण

भूल-चूक लेनी–देनी                                             वास्ते राजू पुस्तक भण्डार
माल सवारीगाड़ी से भेजा गया                                                हारून विश्नोई
बिल्टी संख्या : R 1009685                                                       (साझेदार)
दिनांक : 25 मार्च, 2015 को बिल्टी इलाहाबाद बैंक से भेजी गई।

प्रश्न 9.
सम्भल के अनुराग ने सम्भल के ठुल्ला भाई की ओर से निम्नलिखित माल
का विक्रय किया है।
4 ड्रम मेंथा ऑयल प्रत्येक 100 लीटर दर ₹ 850 प्रति लीटर
20 टीन मेंथा ऑयले प्रत्येक 15 लीटर दर ₹ 900 प्रति लीटर
      व्यय                                     (₹)
1. टूक भाड़ा                             2,000
2. बीमा                                     1,000
3. ढुलाई                                     800
4. गोदाम किराया                    9,000
5. अन्य व्यय                            2,000

कमीशन 15% की दर से काटा गया है। विक्रय विवरण तैयार कीजिए। (2017)
हल
                                                     विक्रय विवरण
                                                    मैसर्स अ, ब, स
दूरभाष : 12345678                                                                             सम्भल।
                                                                                   दिनांक : 05-07-2017

ठुल्ला भाई, सम्भल की ओर से प्राप्त तथा उन्हीं के (UPBoardSolutions.com) आदेश पर बेचे गए माल का विक्रय विवरण

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 1
Chapter Name काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Number of Questions 133
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

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उपर्युक्त काल-विभाजन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के ‘हिन्दी-साहित्य का इतिहास के आधार पर दिया गया है।
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प्रश्न 4.
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प्रश्न 5.
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प्रश्न 6.
श्रव्य काव्य के कौन-कौन से भेद होते हैं ?
उत्तर:
श्रव्य काव्य के दो भेद होते हैं—

  1. प्रबन्ध काव्य और
  2. मुक्तक काव्य।

प्रश्न 7.
दृश्य काव्य तथा अव्य काव्य का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
दृश्य काव्य का रंगमंच पर अभिनय किया जा सकता है, जब कि श्रव्य काव्य का अभिनय नहीं किया जा सकता। दृश्य काव्य का आनन्द उसे देखकर अथवा सुनकर लिया जा सकता है, जब कि श्रव्ये काव्य का आनन्द केवल सुनकर ही लिया जा सकता है।

प्रश्न 8.

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प्रश्न 9.
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प्रश्न 10.
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प्रश्न 11.
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प्रश्न 12.

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प्रश्न 13.
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कुछ विद्वान् हिन्दी का प्रथम कवि ‘पृथ्वीराज रासो’ के रचयिता चन्दबरदायी को मानते हैं।

प्रश्न 14.
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प्रश्न 15.
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के प्रमुख कवियों और उनकी कृतियों के नाम बताइए।
या
आदिकाल की रचना है
या
आदिकाल के रचनाकार हैं।
या
आदिकाल के दो रचनाकारों के नाम लिखिए।

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प्रश्न 16.
वीरगाथाकाल (आदिकाल) की रचनाओं में वर्णित विषय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
आदिकाल के साहित्य में रणोन्मत्त राजपूत वीरों, रणबाँकुरों, राजपूत महिलाओं, रण-स्थल के रक्तरंजित क्रियाकलापों, गर्जन-तर्जन व हाहाकार का सजीव चित्रण है।

प्रश्न 17.
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प्रश्न 18.
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प्रश्न 19.
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प्रबन्ध काव्य और मुक्तक काव्यों के रूप में लिखी गयी हैं।

प्रश्न 20.
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उत्तर:
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प्रश्न 21.
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प्रश्न 22.
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प्रश्न 23.
जैन धर्म के चार रास ग्रन्थों और उनके रचयिताओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. देवसेन रचित ‘श्रावकाचार रास’,
  2. मुनि जिनविजय कृत ‘भरतेश्वर बाहुबली रास’,
  3. जिनधर्मसूरि कृत ‘स्थूलभद्र रास’ तथा
  4. विजयसेन सूरि कृत रेवंतगिरि रास।

प्रश्न 24.
नाथ साहित्य के प्रणेता कौन थे ?
उत्तर:
नाथ साहित्य के प्रणेता गोरखनाथ थे।

प्रश्न 25.
कवियों तथा उनके ग्रन्थों का सही मेल करें-
कवि-दलपति विजय, चन्दबरदाय, नरपति नाल्ह, नल्हसिंह भाट तथा जगनिक।
ग्रन्थ-पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, विजयपाल रासो, आल्ह खण्ड, खुमान रासो।
उत्तर:
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भक्तिकाल

प्रश्न 26.

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प्रश्न 27.
भक्तिकाल की प्रमुख काव्यधाराओं और उनके कवियों के नाम लिखिए।
या
भक्तिकाल की विभिन्न धाराओं के नाम बताइए।

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प्रश्न 28.
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प्रश्न 29.
भक्तिकाल की निर्गुण तथा सगुण भक्तिधारा का परिचय दीजिए।
या
निर्गुण भक्ति की ज्ञानाश्रयी शाखा का परिचय संक्षेप में लिखिए।
या
निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी शाखा का संक्षेप में परिचय दीजिए।

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प्रश्न 30.
ज्ञानाश्रयी निर्गुण (सन्त) काव्यधारा की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
या
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख कीजिए।
या
ज्ञानाश्रयी भक्ति-शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

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प्रश्न 31.
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प्रश्न 32.
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प्रश्न 33.
भक्तिकाल की सगुण भक्तिधारा का संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर:
सगुण भक्ति में जिन्होंने भगवान् के लोकरंजक रूप को सामने रखा, वे कृष्णोपासक कहलाये तथा जिन्होंने भगवान् के दुष्ट-दलनकारी लोकरक्षक रूप को सामने रखा, वे रामभक्ति शाखा से सम्बद्ध माने गये।

प्रश्न 34.
कृष्ण-काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ बताइट।
या
भक्तिकाल की सगुण कृष्णभक्ति शाखा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ बताइए।
उत्तर:

  1. श्रीमद्भागवत का आधार लेकर कृष्णलीला-गान।
  2. सख्य, वात्सल्य एवं माधुर्य भाव की उपासना एवं लोकपक्ष की उपेक्षा।
  3. काव्य में श्रृंगार एवं वात्सल्य रसों की प्रधानता; मूल आधार कृष्ण के बाल और किशोर रूप की लीला-वर्णन।
  4. ब्रज भाषा में मुक्तक काव्य-शैली की प्रधानता, जिसमें अद्भुत संगीतात्मकता का गुण विद्यमान है।

प्रश्न 35.
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प्रश्न 36.
कृष्ण-काव्यधारा के प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
या
अष्टछाप के किन्हीं दो कवियों का नाम लिखिए।
उत्तर:

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प्रश्न 37.
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प्रश्न 38.
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प्रश्न 39.
भक्तिकालीन काव्य को ‘हिन्दी कविता का स्वर्ण युग’ क्यों कहा जाता है ? स्पष्ट कीजिए।
या
हिन्दी साहित्य के विकास में भक्तिकाल के योगदान का उल्लेख कीजिए।
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प्रश्न 40.
भक्तिकाल में भक्तिभावना के कौन-से दो रूप मिलते हैं ?
उत्तर:
निर्गुण भक्ति और सगुण भक्ति।

प्रश्न 41.
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न img-35

प्रश्न 42.
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प्रश्न 43.
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न img-37

प्रश्न 44.
भक्तिकाल की चार प्रमुख काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
या
भक्ति काव्यधारा की दो पुस्तकों के नाम लिखिए।
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प्रश्न 45.
निर्गुण काव्यधारा की दो शाखाएँ कौन-सी हैं ?
उत्तर:

  1. ज्ञानाश्रयी (सन्त) काव्यधारा तथा
  2. प्रेमाश्रयी (सूफी) काव्यधारा।

प्रश्न 46.
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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न img-40

प्रश्न 47.
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प्रश्न 48.
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न img-42

प्रश्न 49.
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प्रश्न 50.
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प्रश्न 51.
कृष्णभक्ति-शाखा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का नाम लिखिए।
या
प्रेमाश्रयी अथवा कृष्णकाव्य की दो प्रमुख काव्य-रचनाओं के नाम बताइए।
या
महाकवि सूरदास की दो रचनाओं के नाम लिखिए।

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प्रश्न 52.
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प्रश्न 53.
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प्रश्न 54.
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प्रश्न 55.
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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi काव्य-साहित्य विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न img-51

प्रश्न 56.
उत्तर भारत में भक्ति-भावना को प्रवाहित करने का श्रेय किसको है ?
उत्तर:
स्वामी रामानन्द तथा महाप्रभु वल्लभाचार्य को।

प्रश्न 57.
हिन्दी काव्य के भक्तिकाल की दो प्रमुख धाराओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. निर्गुण काव्यधारा (ज्ञानमार्गी तथा प्रेममार्गी)।
  2. सगुण काव्यधारा (रामभक्ति तथा कृष्णभक्ति)।

प्रश्न 58.
ज्ञानमार्गी शाखा के दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. कबीर तथा
  2. नानक

प्रश्न 59.
हिन्दी-साहित्य की भक्तिकालीन ज्ञानाश्रयी शाखा की दो विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:

  1. ज्ञानाश्रयी शाखा में निर्गुण ब्रह्म की उपासना हुई तथा
  2. जाति-पाँति, रूढ़ियों और मिथ्याडम्बरों का विरोध हुआ।

प्रश्न 60.
निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी शाखा की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. यह फारसी की मसनवी शैली में रचित है तथा
  2. अवधी भाषा में काव्य-रचना हुई।

प्रश्न 61.
भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा के एक प्रमुख कवि और उसकी एक प्रमुख रचना 
(महाकाव्य) का नाम लिखिए।
या
प्रेमाश्रयी शाखा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कवि-मलिक मुहम्मद जायसी और उनकी रचना का नाम है पद्मावत (महाकाव्य) और अखरावट।।

प्रश्न 62.
रामभक्ति शाखा की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. श्रीराम की प्रतिष्ठा पूर्ण ब्रह्म के रूप में हुई है तथा
  2. यह काव्य ब्रज तथा अवधी दोनों ही भाषाओं में रचा गया।

प्रश्न 63.
भक्तिकाल की तीन सामान्य प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. जीव की नश्वरता का समान रूप से वर्णन है।
  2. प्रभु के नाम स्मरण तथा गुरु की महत्ता का वर्णन सभी कवियों ने किया है।
  3. कवियों के नामोल्लेख की प्रवृत्ति रही है।

प्रश्न 64.
तुलसीदास द्वारा विरचित दो प्रसिद्ध काव्यकृतियों के नाम लिखिए जिनमें एक अवधी तथा दूसरी ब्रजभाषा की हो।
उत्तर:

  1. श्रीरामचरितमानस-अवधी भाषा तथा
  2. विनयपत्रिका-ब्रजभाषा।

रीतिकाल

प्रश्न 65.
रीतिकालीन काव्य की प्रमुख विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।
या
रीतिकाल की दो प्रमुख प्रवृत्तियों को उल्लेख कीजिए।

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प्रश्न 66.
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प्रश्न 67.
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प्रश्न 68.
रीतिकाल में कौन-कौन-सी काव्यधाराएँ मिलती हैं ?
या
रीतिकालीन कविता की दोनों प्रमुख धाराओं का नाम बताइए।
उत्तर:

  1. रीतिबद्ध काव्यधारा तथा
  2. रीतिमुक्त काव्यधारा।

प्रश्न 69.
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उत्तर:
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प्रश्न 70.
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उत्तर:
रीतिकाल में वीर रस में रचना करने वाले प्रमुख कवि भूषण’ थे। उनकी प्रमुख रचनाओं के नाम है-‘शिवराज भूषण’, ‘शिवा बावनी’, ‘शिवा शौर्य’, ‘छत्रसाल दशक आदि।

प्रश्न 71.
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प्रश्न 72.
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प्रश्न 73.
रीतिकाल की पाँच प्रमुख काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. बिहारी-सतसई,
  2. रसराज (मतिराम),
  3. शिवराजभूषण (भूषण),
  4. भावविलास (देव) तथा
  5. घनानन्द कवित्त।

प्रश्न 74.
रीतिकाल के चार रीतिबद्ध कवियों के नाम लिखिए।
या
रीतिकालीन किसी एक कवि का नाम लिखिए।

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प्रश्न 75.
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प्रश्न 76.
निम्नलिखित कवियों में से रीतिबद्ध तथा रीतिमुक्त कवियों का चुनाव कीजिए
(क) भूषण,
(ख) घनानन्द,
(ग) बिहारी,
(घ) बोधा ठाकुर,
(ङ) आचार्य केशवदास।
उत्तर:

  1. रीतिबद्ध कवि-(ङ) आचार्य केशवदास, (ग) बिहारी, (क) भूषण।
  2. रीतिमुक्त कवि-(ख) घनानन्द तथा (घ) बोधा ठाकुर।

प्रश्न 77.
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प्रश्न 78.
रीतिमुक्त काव्य से आप क्या समझते हैं ? इस काव्यधारा की मुख्य प्रवृत्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
रीतिकालीन परम्परा पर आधारित रूढ़ियों एवं साहित्यिक बन्धनों से मुक्त काव्य को रीतिमुक्त काव्य कहा जाता है। इस काव्यधारा की मुख्य प्रवृत्तियाँ हैं—

  1. शास्त्रीय मान्यताओं एवं रूढ़ियों से मुक्त स्वच्छन्द काव्य-रचना,
  2. कल्पना की प्रचुरता एवं सांकेतिकता,
  3. अनुभूति, आवेश आदि को विशेष महत्त्व इत्यादि।

प्रश्न 79.
रीतिकाल के किन्हीं दो आचार्य कवियों के नाम लिखिए। या रीतिकाल के किसी आचार्य कवि की एक रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. आचार्य केशव-रामचन्द्रिका तथा
  2. आचार्य चिन्तामणि-रस-विलास।

प्रश्न 80.
रीतिकाल में काव्य-रचना जिन छन्दों में की गयी है उनमें से किन्हीं दो प्रमुख छन्दों के नाम 
लिखिए।
उत्तर:

  1. कवित्त तथा
  2. सवैया।

आधुनिककाल

प्रश्न 81.
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प्रश्न 82.

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प्रश्न 83.
भारतेन्दु युग के दो कवियों के नाम उनकी एक-एक रंचनासहित लिखिए।
या
भारतेन्दु युग के किन्हीं दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र–प्रेम माधुरी तथा
  2. श्रीधर पाठक-वनाष्टक।

प्रश्न 84.
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प्रश्न 85.
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प्रश्न 86.
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प्रश्न 87.
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प्रश्न 88.
द्विवेदी युग के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. मैथिलीशरण गुप्त तथा
  2. अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

प्रश्न 89.
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प्रश्न 90.
द्विवेदीयुगीन काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की दो-दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. श्री मैथिलीशरण गुप्त; रचनाएँ-भारत-भारती तथा यशोधरा,
  2. श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’; रचनाएँ-रुक्मिणी परिणय तथा वैदेही वनवास।।

प्रश्न 91.
कविता के आधुनिककाल के तृतीय युग का नाम लिखिए तथा उस युग के एक प्रमुख कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
कविता के आधुनिककाल के तृतीय युग का नाम ‘छायावादी युग’ है तथा इस युग के प्रमुख कवि श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं।

प्रश्न 92.
छायावादी काव्य की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख करते हुए किन्हीं दो, 
छायावादी कवियों के नाम लिखिए। या छायावाद की दो प्रमुख प्रवृत्तियों के नाम लिखिए।

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प्रश्न 93.
छायावादी क्रविता के हास के कारण लिखिए।
उत्तर:
विदेशी शासन के दमन के कारण जनसाधारण की निरन्तर बढ़ती पीड़ा छायावाद के ह्रास का मुख्य कारण बनी। इस दमन को देखकर कविगण कल्पना लोक से उबरकरे यथार्थ के कठोर धरातल पर आ गये। पूँजी की वृद्धि तथा दीनता का प्रसार भी छायावाद के ह्रास का कारण बना।

प्रश्न 94.
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प्रश्न 95.
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प्रश्न 96.
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प्रश्न 97.
छायावादी कविता के हास के कारण संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:

  1. छायावादी कविता में सूक्ष्म और वायवीय कल्पनाओं की अधिकता थी।
  2. स्थूल जगत की कठोर वास्तविकता से उसका कोई सम्बन्धं नहीं रह गया था।
  3. समाज में पूँजी के विरुद्ध आवाज उठ रही थी, इसलिए अतिशय कल्पना को छोड़ रोटी, कपड़ा और मकान कविता का विषय बनने लगे थे।

प्रश्न 98.
निम्नलिखित कवियों की एक-एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए-
या
जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’, सुमित्रानन्दन पन्त, रामधारी सिंह ‘दिनकर’।
उत्तर:

  1. जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’, रचना–गंगावतरण।
  2. सुमित्रानन्दन फ्न्त, रचना–चिदम्बरा।।
  3. रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रचना-उर्वशी।

प्रश्न 99.
निम्नलिखित कवियों में से किन्हीं दो द्वारा रचित एक-एक महाकाव्य का नाम लिखिए-

  1. चन्दबरदायी,
  2. तुलसीदास,
  3. अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’,
  4. रामधारी सिंह ‘दिनकर’।

उत्तर:

  1. पृथ्वीराज रासो,
  2. श्रीरामचरितमानस,
  3. प्रियप्रवास तथा
  4. कुरुक्षेत्र।

प्रश्न 100.
बिहारी, मैथिलीशरण गुप्त, अज्ञेय, रत्नाकर, पन्त, दिनकर में से किन्हीं दो की एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
अज्ञेय–आँगन के पार द्वार। जगन्नाथदास रत्नाकर’-उद्धवशतक।

प्रश्न 101.
आधुनिक युग (छायावादी काव्यधारा) के किसी एक महाकाव्य और उसके रचनाकार का नाम लिखिए।
या
‘कामायनी’ महाकाव्य के सर्गों के नाम लिखिए।
उत्तर:
महाकाव्य-कामायनी; रचनाकार–जयशंकर प्रसाद।
‘कामायनी’ महाकाव्य के सर्गों के नाम हैं-

  1. चिन्ता,
  2. आशा,
  3. श्रद्धा,
  4. काम,
  5. वासना,
  6. लज्जा,
  7. कर्म,
  8. ईष्र्या,
  9. इडा,
  10. स्वप्न,
  11. संघर्ष,
  12. निर्वेद,
  13. दर्शन,
  14. रहस्य तथा
  15. आनन्द।।

प्रश्न 102.
प्रगतिवादी काव्य का परिचय दीजिए।
उत्तर:
प्रगतिवादी काव्य का उद्भव छायावादी काव्य की काल्पनिक एवं भावुकतापूर्ण अभिव्यक्ति के विद्रोहस्वरूप हुआ। इस वाद के काव्यों में स्थूल जगत् की वास्तविकता, सामाजिक-आर्थिक विसंगतियों एवं वर्ग-शोषण के स्वर को अलंकारविहीन तथा सरल रूप में अभिव्यक्ति दी गयी।

प्रश्न 103.
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प्रश्न 104.
प्रगतिवाद के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
या
प्रगतिवादी काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का उल्लेख कीजिए।

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प्रश्न 105.
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प्रश्न 106.
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प्रश्न 107.
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प्रश्न 108.
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प्रश्न 109.
प्रयोगवादी काव्यधारा का नेतृत्व करने वाले कवि का नामोल्लेख कीजिए और उनके एक 
प्रमुख प्रकाशन का नाम लिखिए।

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प्रश्न 110.
प्रथम तारसप्तक के कवियों के नाम लिखिए। या हिन्दी में प्रयोगवादी काव्यधारा के किन्हीं चार कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, गजानन माधव मुक्तिबोध’, गिरिजाकुमार माथुर, प्रभाकर माचवे, नेमिचन्द्र जैन, भारत भूषण और रोमविलास शर्मा। सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय ने इन सात कवियों की रचनाएँ ‘तारसप्तक’ के नाम से सन् 1943 ई० में प्रकाशित कीं।

प्रश्न 111.
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प्रश्न 112.
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प्रश्न 113.
‘दूसरा सप्तक’ के कवियों के नाम लिखिए। यह कब प्रकाशित हुआ ?
उत्तर:
‘दूसरा सप्तक’ में भवानी प्रसाद मिश्र, शकुन्त माथुर, हरिनारायण व्यास, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय तथा धर्मवीर भारती की कविताएँ संकलित थीं। इस सप्तक की रचनाओं में 
आत्मान्वेषण पर बल दिया गया था तथा यह सन् 1951 ई० में प्रकाशित हुआ।

प्रश्न 114.
‘तीसरा सप्तक’ के कवियों के नाम लिखिए। यह कब प्रकाशित हुआ ?
या
तीसरा सप्तक के प्रकाशन-वर्ष का उल्लेख कीजिए। [2012,14]
उत्तर:
‘तीसरा सप्तक’ के अन्तर्गत प्रयागनारायण त्रिपाठी, कीर्ति चौधरी, मदन वात्स्यायन, केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण, विजयदेव नारायण साही तथा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचनाएँ संकलित हैं। इस सप्तक की कविताओं में सौन्दर्यवादी प्रवृत्ति के साथ-साथ युगीन सत्य की भी निश्छल अभिव्यक्ति मिलती है। इसका प्रकाशन सन् 1959 ई० में हुआ।

प्रश्न 115.
‘चौथा सप्तक’ कब प्रकाशित हुआ ? इसके कवियों के नाम लिखिए।
उतर:
सन् 1979 ई० में चौथा सप्तक प्रकाशित हुआ। इसमें अवधेश कुमार, राजकुमार कुम्भज, स्वदेश भारती, नन्दकिशोर आचार्य, सुमन राजे, श्रीराम वर्मा, राजेन्द्र किशोर की रचनाएँ संकलित हैं।

प्रश्न 116.
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प्रश्न 117.
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प्रश्न 118.
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प्रश्न 119.
नयी कविता से आप क्या समझते हैं ? इसके आरम्भ होने का समय लिखिए। ।
उत्तर:
इसका आरम्भ सन् 1954 ई० में जगदीश गुप्त और डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी के सम्पादन में ‘नयी कविता’ के प्रकाशन से हुआ। यह कविता किसी वाद से बँधकर नहीं चलती।

प्रश्न 120.
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प्रश्न 121.
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प्रश्न 122.
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प्रश्न 123.
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प्रश्न 124.
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प्रश्न 125.
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प्रश्न 126.
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प्रश्न 127.
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प्रश्न 128.
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प्रश्न 129.
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प्रश्न 130.
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प्रश्न 131.
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प्रश्न 132.
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प्रश्न 133.
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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक
Number of Questions 67
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

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(8) निम्नलिखित में से कौन भारतेन्दु युग के लेखक नहीं हैं ?
(क) बालकृष्ण भट्टे
(ख) प्रताषनारायण मिश्र
(ग) राधाचरण गोस्वामी
(घ) बालमुकुन्द गुप्त

(9) हिन्दी खड़ी बोली गद्य साहित्य के जनक माने जाते हैं
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) पं० लल्लूलाल
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) इंशा अल्ला खाँ

(10) भारतेन्दु युग के लेखक हैं
(क) बालकृष्ण भट्ट
(ख) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ग) अध्यापक पूर्णसिंह
(घ) डॉ सम्पूर्णानन्द

(11) ‘भारतेन्दु युग’ के उल्लेखनीय पत्रकार हैं
(क) बाबू गुलाबराय
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) गणेश शंकर विद्यार्थी

(12) हरिश्चन्द्र को ‘भारतेन्दु’ की पदवी से सुशोभित किया गया–
(क) सन्,1860 में
(ख) सन् 1865 में
(ग) सन् 1875 में
(घ) सन् 1880 में

(13) ‘अँधेर नगरी’ के रचनाकार हैं—
(क) प्रतापरायण मिश्र
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) हरिकृष्पा प्रेमी
(घ) रामकुमार वर्मा

(14) ‘बालाबोधिनी’ पत्रिका के सम्पादक थे
(क) शिवप्रसाद सितारेहिन्द
(ख) भारतेन्द्र हरिश्चन्द्र
(ग) ठाकुर जगमोहन सिंह
(घ) काशीनाथ खत्री

(15) ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ की स्थापना हुई
(क) द्विवेदी युग में
(ख) भारतेन्दु युग में
(ग) छायावाद युग में
(घ) प्रगतिवाद युग में

(16) हिन्दी का प्रथम यात्रा-वृत्तान्त “सरयूपार की यात्रा’ लिखा गया है
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी द्वारा
(ग) प्रेमचन्द्र द्वारा
(घ) राहुल सांकृत्यायन द्वारा

उत्तर: (1) घ, (2) घ, (3) क, (4) के, (5) ख, (6) क, (7) घ, (8) घ, (9) ग, (10) क, (11) ख, (14) , (13) ख, (14) ख, (15) ख, (16) का

महावीरप्रसाद द्विवेदी

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य-साहित्य विकास बहुविकल्पीय प्रश्न एक img-6

(5) निम्नलिखित में से कौन द्विवेदीयुगीन गद्य लेखक-निबन्धकार हैं ?
(क) राय कृष्णदास
(ख) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) उपेन्द्रनाथ अश्क’

(6) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ महावीरप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित मौलिक ग्रन्थों की श्रेणी में आता है ?
(क) अतीत-स्मृति
(ख) रघुवंश
(ग) शिक्षा
(घ) स्वाधीनता

(7) द्विवेदी युग के लेखक हैं
(क) बनारसीदास चतुर्वेदी
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) दौलतराम
(घ) वियोगी हरि

(8) ‘द्विवेदी युग’ किसके नाम पर पड़ा है ?
(क) महावीरप्रसाद
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) हजारीप्रसाद
(घ) रामकुमार

(9) महावीर प्रसाद द्विवेदी ने ‘सरस्वती’ को सम्पादन किस समय से प्रारम्भ किया ? या महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ‘सरस्वती’ पत्रिका के सम्पादक बने
(क) सन् 1901
(ख) सन् 1902
(ग) सन् 1903
(घ) सन् 1904

(10) निम्नलिखित में से कौन ‘द्विवेदी युग’ का लेखक नहीं है?
(क) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
(ख) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) लाला भगवानदास

(11) महावीर प्रसाद द्विवेदी को किस संस्था ने आचार्य की उपाधि से सम्मानित किया?
(क) हिन्दी साहित्य सम्मेलन
(ख) नागरी प्रचारिणी सभा
(ग) केन्द्रीय शिक्षा संस्थान
(घ) सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय

(12) “दौलतपुर” (रायबरेली, उत्तर प्रदेश) जन्म-स्थान है
(क) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी का
(ग) डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल का
(घ) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का

(13) सम्पादन द्वारा लेखों की भाषायी विसंगतियों को दूर किया
(क) भारतेन्दु हरिशचन्द्र ने
(ख) प्रतापनारायण मिश्र ने।
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने

(14) आर्य महावीरप्रसाद द्विवेदी की रचना है
(क) अशोक के फूल
(ख) त्रिवेणी
(ग) साहित्य-सीकर
(घ) कल्पवृक्ष

(15) महावीरप्रसाद द्विवेदी लेखक हैं
(क) जीवन और दर्शन के
(ख) आँखों की थाह के
(ग) रसज्ञ-रंजन के
(घ) तिब्बत-यात्रा के

उत्तर: (1) घ, (2) घ, (3) घ, (4) ख, (5) ख, (6) क, (7) क, (8) क, (9) गे, (10) ग, (11) ख, (12) क, (13) ग, (14) ग, (15) ग

सरदार पूर्णसिंह

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(4)
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(5) ‘सरदार पूर्णसिंह’ का लेखन-युग है
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(6) ‘पवित्रता’ निबन्ध के लेखक हैं
(क) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) सरदार पूर्णसिंह
(ग) हरिशंकर परसाई
(घ) डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल

उत्तर: (1) घ, (2) घ, (3) घ, (4) ग, (5) ख, (6) ख।

डॉ० सम्पूर्णानन्द

उचित विकल्प का चयन कीजिए 

(1) प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री, कुशल राजनीतिज्ञ एवं मर्मज्ञ साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं-
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) जयशंकर प्रसाद्र
(ग) मोहन राकेश
(घ) डॉ० सम्पूर्णानन्द :

(2)
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(3) डॉ० सम्पूर्णानन्द द्वारा रचित रचनाओं में कौन-सी रचना इतिहास से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) आर्यों का आदिदेश
(ख) सम्राट हर्षवर्धन
(ग) महात्मा गांधी
(घ) सम्राट अशोक

(4)
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(6) डॉ० सम्पूर्णानन्द का जन्म-काल है
(क) 1881 ई०
(ख) 1890 ई०
(ग) 1907 ई०
(घ) 1911 ई०

(7) ‘शिक्षा का उद्देश्य के निबन्धकार हैं
(क) श्यामसुन्दर दास
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी

(8) ‘शिक्षा का उद्देश्य’ निबन्ध सम्पूर्णानन्द जी द्वारा लिखित किस निबन्ध-संग्रह से संकलित है ?
(क) भाषा की शक्ति
(ख) शिक्षा की दिशा और दशा
(ग) शिक्षा और संस्कृति
(घ) शिक्षा और समाज

(9) डॉ० सम्पूर्णानन्द को ‘मंगलाप्रसाद’ पुरस्कार प्राप्त हुआ
(क) गणेश’ पर
(ख) ‘चिद्विलास’ पर
(ग) “समाजवाद’ पर
(घ) “आर्यों का आदि देश’ पर

(10) सम्पूर्णानन्द द्वारा प्रकाशित (सम्पादित) पत्रिका है
(क) धर्मयुग
(ख) हंस
(ग) मर्यादा
 (घ) सरस्वती

(11) उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षामन्त्री और मुख्यमन्त्री पद को अलंकृत करने वाले साहित्यकार हैं
(क) राहुल सांकृत्यायन
(ख) डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (1) घ, (2) ग, (3) ग, (4) ग, (5) क, (6) ख, (7) ग, (8) क, (9) गं, (10) ग, (11) ग

राहुल सांकृत्यायन

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(2) ‘सिंह सेनापति’ और ‘जय यौधेय’ किस विधा की रचनाएँ हैं ?
(क) निबन्ध
(ख) कहानी
(ग) नाटक
(घ) उपन्यास

(3)
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(4) ‘मेरी जीवन यात्रा’ किस विधा की रचना है ? इसके रचनाकार कौन हैं ?
या
‘मेरी जीवन यात्रा’ कहानी है

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(5) मेरी यूरोप यात्रा’ और ‘यात्रा के पन्ने’ नामक यात्रा-साहित्य के लेखक हैं
(क) राहुल सांकृत्यायन
(ख) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ग) सरदार पूर्णसिंह।
(घ) जी० सुन्दर रेड्डी

(6) निम्नलिखित में से कौन छायावादोत्तर युग के गद्य लेखक नहीं हैं ?
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) हरिशंकर परसाई
(ग) राहुल सांकृत्यायन
(घ) रामवृक्ष बेनीपुरी

(7) ‘केदारनाथ पाण्डे’ किस लेखक का वास्तविक नाम है ?
(क) अज्ञेय का
(ख) राहुल सांकृत्यायन का
(ग) रामवृश्चै बेनीपुरी का
(घ) जैनेन्द्र कुमार का

(8) ‘अथातो घुर्मक्कड़ जिज्ञासा’ किसकी रचना है ?
(क) प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी
(ख) सरदार पूर्णसिंह
(ग) राहुल सांकृत्यायन
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

उत्तर: (1) घ, (2) घ, (3) घ, (4) ख, (5) क, (6) ग, (7) ख, (8) ग। 

रामवृक्ष बेनीपूरी

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(3)
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(4)
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(5) ‘लाल तारा’ किस विधा की रचना है ?
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) रेखाचित्र
(घ) कहानी

(6) ‘वन्दे वाणी-विनायकौ’ में इनके श्रेष्ठ निबन्ध संकलित हैं—
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) जैनेन्द्र कुमार

(7) रामवृक्ष बेनीपुरी की रचना है
(क) वोल्गा से वोल्गा तक
(ख) वाग् विलास
(ग) पतितों के देश में
(घ) चिन्तामणि

(8) निम्नलिखित में से छायावादोत्तर युग के प्रमुख गद्य-लेखक कौन हैं ?
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) विद्यानिवास मिश्र
(घ) फणीश्वरनाथ ‘रेणु’

(9) ‘रामवृक्ष बेनीपुरी’ का लेखन-युग है
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(10) ‘गेहूँ बनाम गुलाब’ के लेखक हैं
(क) सरदार पूर्णसिंह
(ख) राहुल सांकृत्यायन
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) मोहन राकेश

(11) ‘गेहूँ बनाम गुलाब’ निबन्ध में गुलाब किस प्रकार की प्रगति का द्योतक है ?
(क) आर्थिक
(ख) सामाजिक :
(ग) सांस्कृतिक
(घ) राजनीतिक

उत्तर: (1) घ, (2) घ, (3) ख, (4) क, (5) ग, (6) क, (7) ग, (8) क, (9) घ, (10) ग, (11) ग।

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 5 जननतन्त्रः प्रारम्भिक क्रिया विज्ञान एवं अन्तः स्त्रायी ग्रन्थयाँ

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 5 जननतन्त्रः प्रारम्भिक क्रिया विज्ञान एवं अन्तः स्त्रायी ग्रन्थयाँ are part of UP Board Solutions for Class 12 Home Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 5 जननतन्त्रः प्रारम्भिक क्रिया विज्ञान एवं अन्तः स्त्रायी ग्रन्थयाँ.

Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 5
Chapter Name जननतन्त्रः प्रारम्भिक क्रिया विज्ञान एवं अन्तः स्त्रायी ग्रन्थयाँ
Number of Questions Solved 30
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 5 जननतन्त्रः प्रारम्भिक क्रिया विज्ञान एवं अन्तः स्त्रायी ग्रन्थयाँ

बहुविकल्पीय प्रश्न  (1 अंक)

प्रश्न 1.
बाह्य मादा जननांगों को सम्मिलित रूप से कहते हैं
(a) जघन उत्थान
(b) भग
(c) भगशेफ
(d) प्रकोष्ठ
उत्तर:
(b) भग

प्रश्न 2.
नर जनन अंगों से सम्बन्धित ग्रन्थि है
(a) प्रोस्टेट ग्रन्थि
(b) स्वेद ग्रन्थि
(c) एड्रीनल ग्रन्थि
(d) एपिडिडाइमिस
उत्तर:
(a) प्रोस्टेट ग्रन्थि

प्रश्न 3.
नर में शुक्राणुजनन किन नलिकाओं में होता है?
(a) अपवाही नलिका में
(b) शुक्रवाहिनी में
(c) शुक्रनलिका में
(d) स्खलन नलिका में
उत्तर:
(c) शुक्रनलिकाओं

प्रश्न 4.
वृषण की अन्तराली (लीडिंग) कोशिकाओं से स्रावित हॉर्मोन है
(a) टेस्टोस्टेरॉन
(b) एस्ट्रोजन
(c) FSH
(d) प्रोजेस्टेरॉन
उत्तर:
(a) टेस्टोस्टेरॉन

प्रश्न 5.
निम्न में से कौन मानव में मादी जनन तन्त्र का भाग नहीं हैं?
(a) अण्डाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिनी
(d) योनि
उत्तर:
(c) शुक्रवाहिनी

प्रश्न 6.
ग्राफियन पुटिका पाई जाती है
(a) स्तनधारियों के अण्डाशय में
(b) लसीका गाँठों में
(c) स्तनधारियों की प्लीहा में
(d) मेंढक के अण्डाशय में
उत्तर:
(a) स्तनधारियों के अण्डाशय में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

प्रश्न 1.
लैंगिक जनन की इकाइयाँ क्या कहलाती हैं? केवल उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
नर तथा मादा युग्मकों का संग्युमन लैंगिक जनन कहलाता है। दो युग्मों के संयुग्मन (fusion) से युग्मनज (Zygote) बनता है। समान युग्मकों को संयुग्मन (Isogzmy) कहते हैं।

प्रश्न 2.
अनिषेकजनन की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
अनिषेकजनन (Parthenogenesis) निषेचन के बिना अण्डाणु से वृद्धि और विभाजन द्वारा वयस्क का निर्माण होना अनिषेकजनन कहलाता है। नर मधुमक्खी और ततैया में अनिषेकजनन होता है।

प्रश्न 3.
वृषण जालिका क्या है?
उत्तर:
वृषण जालिका (Rete testes) शुक्रजनन नलिकाएँ वृषण की भीतरी सतह पर नलिकाओं के एक घने जाल में खुलती हैं, इसे वृषण जालिका कहते हैं। इससे 5-20 शुक्र वाहिकाएँ निकलकर एपिडिडाइमिस वाहिका (Epididymis duct) में खुलती है। एपिडिडाइमिस या अधिवृषण के अन्तिम भाग से शुक्रवाहिनी निकलती है।

प्रश्न 4.
शुक्राणुजनन का क्या अर्थ है?
उत्तर:
वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा वृषणों में शुक्राणुओं का निर्माण होता है, शुक्राणुजनन कहलाती हैं। वृषणों की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई शुक्रजंने नलिकाएँ होती हैं। यहीं पर शुक्राणु जनन होता हैं।

प्रश्न 5.
सर्टोली कोशिकाओं पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
वृषण की शुक्रजनन नलिकाओं (Seminiferous tubules) की जननिक एपीथीलियम में जनन कोशिकाओं के मध्य में स्थान-स्थान पर फूली हुई लम्बी सटली कोशिकाएँ पाई जाती हैं। ये शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।

प्रश्न 6.
शुक्राणु में एक्रोसोम का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
शुक्राणु में एक्रोसोम से हायल्यूरोनिडेज एन्जाइम का स्रावण होता है, जो अण्डाणु की चाहा भित्ति के पाचन में सहायक हैं, जिसके कारण शुक्राणु अण्डाणु में सुगमता से प्रवेश कर पाता है।

प्रश्न 7.
मानव, स्त्री के एक अण्डाणु में कितने और किस प्रकार के गुणसूत्रं पाए जाते हैं?
उत्तर:
मानव, स्त्री के एक अण्डाणु में 28 गुणसूत्र उपस्थित होते हैं, जिसमें 22 कायिक गुणसूत्र और एक लिंग गुणसूत्र (Sex chromosome) ‘X’ होता है।

प्रश्न 8.
युग्मनज़ क्या है? इसमें गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती है?
उत्तर:
शुक्राणु (n) और अण्डाणु (n) के संयोजन से युग्मनज का निर्माण होता  है। इसमें गुणसूत्रों की संख्या द्विगुणित (2n) होती है।

प्रश्न 9.
स्तनधारियों में निषेचन कहाँ होता है?
उत्तर:
नर शुक्राणु (n) व मादा अण्डाणु (n) युग्मकों के संयोजन को निषेचन कहते हैं। स्तनधारियों में निषेचन फैलोपियन नलिका में होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

प्रश्न 1.
लैंगिक जनन से आप क्या समझते हैं? मानव शरीर में नर तथा मादा युग्मक कहाँ बनते हैं? पूर्णशक्त युग्मनज क्या है?
उत्तर:
लैंगिक जनन (Sexual reproduction) नर तथा मादा युग्मकों अर्थात् शुक्राणु और अण्डाणु का संयुग्मन लैंगिक जनन कहलाता है, जिसके फलस्वरूप युग्मनज़ बनता है। नर युग्मक का निर्माण वृषण (Testis) की शुक्रजनन नलिकाओं में होता है। मादा युग्मक (अण्डाणु) का निर्माण अण्डाशय की ग्राफिया पुटिका में होता है। एक युग्मनज, जिसमें वृद्धि एवं विभाजन द्वारा भूण
का निर्माण होता है, पूर्णशक्त युग्मनज कहलाता है।

प्रश्न 2.
नर मनुष्य में वृषण उदर गुहा के बाहर क्यों होते हैं?
उत्तर:
नर मनुष्य में वृषण शरीर से बाहर वृषण कोष (Scrotum) में उपस्थित होते हैं। वृषण कोष का तापमान शरीर के तापमान से 3°C कम होता है, जिस पर शुक्राणुओं का निर्माण होता है। शरीर का तापमान अधिक होने के कारण शरीर के अन्दर शुक्राणुओं का निर्माण सम्भव नहीं हैं। अतः जन्म के समय वृषण अपने मूल स्थान से हटकर वृषण कोष में आ जाते हैं।

प्रश्न 3.
शुक्रजनन नलिका की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
शुक्रजनन नलिका (वृषण) की अनुप्रस्थ काट

Arihant Home Science Class 12 Chapter 5 1
प्रश्न 4.
शुक्राणुजनन क्या है? शुक्राणुजनन की विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा वृषणों में शुक्राणुओं का निर्माण होता है, शुक्राणुजनन कहलाती है। यह प्रक्रिया लैंगिक हॉर्मोन्स द्वारा नियमित होती है। शुक्राणुजनन की प्रक्रिया निम्नलिखित तीन चरणों में पूर्ण होती है।
1. गुणन प्रावस्था (Multiplication Phase) शुक्रजनन नलिकाओं की जनन उपकला की कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणुजन कोशिकाओं या स्पर्मेटोगोनिया का निर्माण होता है। ये कोशिकाएँ द्विगुणित (27) होती हैं।

2. वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase) शुक्राणुजन कोशिकाएँ पोषक पदार्थों का संचय करके प्राथमिक शुक्रकोशिका (Prirmiry spermatocytes) में रूपान्तरित हो जाती हैं।

3. परिपक्वन प्रावस्था (Maturation Phas) प्राथमिक शुक्रकोशिकाओं स्पमेंटोसाइट्स में अर्द्धसूत्री प्रथम विभाजन द्वारा अगुणित या द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाओं का निर्माण होता है। यह अर्द्धसूत्री द्वितीय विभाजन द्वारा प्राक्शुक्राणु कोशिका या स्पर्मेटिड बनाती हैं।
अतः एक प्राथमिक शुक्राणु कोशिकाओं से चार प्राक्शुक्राणु कोशिकाओं का निर्माण होता है। शुक्र-कायान्तरण (Sperritiogenesis) द्वारा अचल प्राक्शुक्राणु परिपक्व से चल शुक्राणु बनता है।

प्रश्न 5.
मानव के शुक्राणु की संरचना का वर्णन कीजिए।
अथवा
मानव शुक्राणु का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
शुक्राणु की संरचना प्रत्येक शुक्राणु तीन भागों में विभेदित होता है।
1. शीर्ष (Head) शीर्ष प्रायः फूला हुआ, घुण्डीदार होता है, परन्तु अनेक जन्तु
जातियों में यह लम्बा, दण्डनुमा होता है। इसमें केन्द्रक स्थित होता हैं और केन्द्रक के चारों ओर थोड़ा-सा कोशिकाद्रव्य होता हैं। इसके शीर्ष पर गॉल्जीकाय की बनी एक्रोसोम नामक रचना टोपी की भांति की होती है।

2. मध्य खण्ड (Middle piece) यह केन्द्र शीर्ष से पतला, दण्डनुमा भाग होता
है, जो छोटी-सी ग्रीवा (Neck) द्वारा शीर्ष से जुड़ा रहता है। मध्य खण्ड में माइटोकॉण्डुिया उपस्थित होते हैं। माइटोकॉण्डूिया के आगे ग्रीवा में एवं पीछे दो तारक केन्द्र (Centrioles) उपस्थित होते हैं।

Arihant Home Science Class 12 Chapter 5 5

3. पुच्छ (Tail) पुच्छ प्रायः लम्बी, जाबुकनुमा और अत्यधिक गतिशील होती हैं।
पुच्छ द्वारा शुक्राणु तरल माध्यम में तैरता है।

प्रश्न 6.
मानव के स्त्रीजनन तन्त्र का नामांकित आरेखीय चित्र बनाइए।
उत्तर:

Arihant Home Science Class 12 Chapter 5 6

प्रश्न 7.
अण्डाशय की अनुप्रस्थ काट (TS) का एक नामांकित आरेख बनाइए।
उत्तर:

Arihant Home Science Class 12 Chapter 5 7

प्रश्न 8.
मानव अण्डाणु का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:

Arihant Home Science Class 12 Chapter 5 8

प्रश्न 9.
यौवनारम्भ क्या है? इस अवस्था में बालक एवं बालिकाओं के शरीर में होने वाले परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पुरुष में यौवनारम्भ का प्रारम्भ
यौवनारम्भ (Puberty) प्राणी के प्रजनन के योग्य हो जाने को यौवनारम्भ कहते हैं। पुरुष (बालक) में यौवनारम्भ 13-16 वर्ष की आयु में होता है।
वृषण द्वारा स्रावित टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) और एण्ड्रोस्टेरॉन (Androsterone) लिंग हॉर्मोन्स से यौवनारम्भ प्रेरित होता है, जिसके फलस्वरूप बालकों में निम्नलिखित लक्षण विकसित होने लगते हैं।

  1.  पुरुष की आवाज भारी होने लगती है और शरीर की लम्बाई में वृद्धि होती है।
  2. अस्थियाँ और मांसपेशियाँ अधिक सुदृढ़ हो जाती हैं, कन्धे भी चौड़े हो जाते हैं।
  3. दाढ़ी, पूँछ निकल आती हैं।
  4. मैथुन अंग शिश्न और वृषण कोष सुविकसित हो जाते हैं।
  5. शुक्रजनन नलिकाओं में शुक्राणुओं का निर्माण आरम्भ हो जाता है।

स्त्री में यौवनारम्भ का प्रारम्भ
बालिकाओं में, यौवनारम्भ लड़कों की अपेक्षा जल्दी प्रारम्भ हो जाता है। इनमें 12-13 वर्ष की आयु में आर्तव चक्र प्रारम्भ हो जाता है। एस्ट्रोजन (Ostrogen) और FSH हॉमन्स यौवनावस्था को प्रेरित करते हैं, जिसके फलस्वरूप बालिकाओं में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं।

  1. बाह्य जननांगों और स्तनों का विकास होने लगता है।
  2. आर्तव चक्र (Menstrual cycle) और अण्डोत्सर्ग (Ovulation) का प्रारम्भ हो जाता है।
  3. चेहरे, जाँघ और नितम्बों पर वसा का संचय प्रारम्भ हो जाता है।
  4. श्रोणि मेखला (Pelvice girdle) फैलकर चौड़ी हो जाती हैं।
  5. स्वर तीव्र और मधुर होने लगता है।
  6. कक्षीय और जघन बालों का उगना।

प्रश्न 10.
हॉर्मोन्स का क्या महत्त्व है? (2001)
अथवा
हॉर्मोन्स क्या है? शरीर में इसका क्या महत्त्व है? (2018)
अथवा
मानव शरीर में हॉर्मोन्स के विभिन्न कार्यों को लिखिए2006)
उत्तर:
अन्त:स्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित रासायनिक यौगिकों को हॉर्मोन्स कहते हैं। ये ग्रन्थियों द्वारा सीधे रुधिर में मुक्त होकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुँचते हैं। हॉर्मोन्स सक्रिय उत्प्रेरक के रूप में विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का नियन्त्रण एवं समन्वये करते हैं। इनकी सूक्ष्म मात्रा ही विशेष अंगों की कायिकी को वातावरणीय दशाओं की आवश्यकतानुसार अनुकूलित करती है।
अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ, तन्त्रिका तन्त्र के नियन्त्रण में कार्य करती हैं, किन्तु इनका स्वयं तन्त्रिका तन्त्र पर भी नियन्त्रण होता है। इस प्रकार शरीर में विभिन्न तन्त्रों की क्रियाओं का परस्पर समन्वय सुनिश्चित होता हैं।

हॉर्मोन्स का महत्त्व अथवा कार्य
हॉर्मोन्स द्वारा शरीर में विभिन्न महत्त्वपूर्ण कार्य सम्पन्न किए जाते हैं, जो निम्नलिखित हैं।

  1. हॉर्मोन्स शरीर की कोशिकाओं के उपापचय का नियन्त्रण करके शरीर की कार्यात्मक क्षमता को बनाए रखते हैं। ये शरीर की समुचित वृद्धि एवं विकास को सुनिश्चित करते हैं। कुछ हॉमन्स, रक्त में ग्लूकोज, लवण, आयरन आदि की मात्रा को नियन्त्रित करते हैं एवं शरीर के अन्त: वातावरण के सन्तुलन की अवस्था को बनाए रखते हैं।
  2. कुछ हॉर्मोन्स हृदय स्पन्दन दर, श्वास दर आदि को नियमित रखते हैं।
  3. लिग हॉमन्स द्वारा प्रजनन से सम्बन्धित अंगों का विकास तथा उनको सम्पूर्ण क्रियाविधि पर नियन्त्रण का कार्य किया जाता है।
  4. आहारनाल के विभिन्न भागों की श्लेष्मिका से स्रावित हॉमोंन पाचक रसों के स्रावण को प्रेरित करते हैं।
  5. कुछ हॉर्मोन्स; जैसे-एड्रीनेलिन, शरीर को संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। इस प्रकार हॉर्मोन्स की हमारे शरीर में विशेष भूमिका होती है। यदि इनका स्रावण समुचित रूप से न हो, तो शरीर कई कार्यात्मक रोगों (Functional diseases) से ग्रस्त हो जाता है।

प्रश्न 11.
पीयूष ग्रन्थि पर टिप्पणी लिखिए। (2002)
उत्तर:
पीयूष ग्रन्थि (Pituitary gland) एक नलिकाविहीन (अन्तःस्रावी) ग्रन्थि है। यह अग्र मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस की दीवार के पास, स्फेनॉइड हड्डी के गर्त में पाई जाती है। यह अन्य अन्त:स्रावी ग्रन्थियों के स्रावण को नियन्त्रित करती है। अत: इसे मास्टर ग्रन्थि भी कहा जाता है। ग्रन्थि के दो मुख्य भाग होते हैं- अग्न पिण्ड तथा पश्च पिण्ड। दोनों के मध्य एक संकरा मध्य पिण्ड होता हैं।

Arihant Home Science Class 12 Chapter 5 11

पीयूष ग्रन्थि के विभिन्न भागों से स्रावित हॉर्मोन्स के कार्य
ग्रन्थि के विभिन्न भागों से स्रावित हॉर्मोन्स के कार्य इस प्रकार हैं।

  1. वृद्धि हॉर्मोन्स, शरीर की उचित वृद्धि के लिए आवश्यक है। बाल्यकाल में इसके अल्पस्रावण से बौनेपन (Dwarfism) एवं अतिस्रावण से भीमकायता (Giantism) की समस्या उत्पन्न होती है। वृद्धिकाल के बाद अति स्रावण से शरीर बेडौल, भीमकाय एवं कुरूप हो जाता है। इस अवस्था को एक्रोमीगैली कहते हैं। थायरॉइड प्रेरक हॉमन्स, थायरॉइड ग्रन्थि की क्रियाशीलता को बनाए रखता है।
  2. ACTII (एड्रीनल कॉर्टेक्स ट्रॉपिक हॉर्मोन) हॉर्मोन्स, एड्रीनल ग्रन्थि के कॉर्टेक्स भाग को क्रियाशील बनाता है।
  3. इस ग्रन्थि से स्रावित हॉमन्स पुरुषों में शुक्राणुओं एवं स्त्रियों में अण्डजनन को प्रेरित करता है। ल्यूटिन प्रेरक हॉमन्स, स्त्री एवं पुरुष में लैंगिक हॉर्मोन्स के स्रावण को प्रेरित करता है।
  4. प्रोलैक्टिन या मैमोट्रॉपिक हॉर्मोन, गर्भकाल में स्तनों की वृद्धि तथा दुग्ध स्रावण को प्रेरित करता है।

वैसोप्रेसिन, वृक्क की वाहिनियों एवं कोशिकाओं में जल के अवशोषण को नियन्त्रित करता है एवं मूत्र की मात्रा को कम करता है, इसी कारण इसे मूत्र रोधी कहते हैं। ऑक्सीटोसिन, प्रसव के समय गर्भाशय को फैलने तथा प्रसव के पश्चात् गर्भाशय के सिकुड़ने को प्रेरित करता है। यह दुग्ध स्रावण को प्रेरित करता हैं।

विस्तृत उत्तर प्रश्न (5 अंक 100 शब्द)

प्रश्न 1.
नर जनन तन्त्र या पुरुष के जनन अंगों का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नर जनन अंगों को निम्नलिखित तीन भागों में बाँट सकते हैं।

1. मुख्य जनन अंग इन अंगों में युग्मकों का निर्माण होता हैं।
(i) वृषण (Testis) वृषण एक जोड़ी होते हैं। ये उदर गुहा से बाहर वृषण कोष (Scrotal sac) में स्थित होते हैं। वृषण लगभग 4-5 सेमी लम्बा 2,5 सेमी चौड़ा व 3 सेमी मोटा होता है। वृषण अनेक कुण्डलित नलिकाओं के बने होते हैं, जो शुक्रजनन नलिकाएँ कहलाती हैं। शुक्रजनन नलिकाओं में शुक्राणुओं का निर्माण होता है।
Arihant Home Science Class 12 Chapter 5 5M 1

2. सहायक जनन अंग ये अंग जनन की प्रक्रिया में सहायक अंग होते हैं। इनका वर्णन निम्नलिखित हैं।
(i) अधिवृषण (Epididymis) ये लगभग 6 मीटर लम्बी, पतली तथा अत्यधिक कुण्डलित नलिका होती है, जो वृषण के अग्र पश्च तथा भीतरी भाग को ढकने में सहायक हैं। यह अति कुण्डलित होकर लगभग 4 सेमी लम्बी, चपटी, कोमा के आकार की संरचना बनाती हैं।

एपीडिडाइमिस में शुक्राणु का संग्रहण व परिपक्वन होता है। एपीडिडाइमिस के तीन भाग होते हैं-शीर्ष एपीडिडाइमिस (Caput epididymis), मध्य भाग या एपौडिडाइमिस काय (Corpus epididymis) तथा पुच्छ एपीडिडाइमिस (Cauda epididymis) से एक शुक्रवाहिनी निकलकर वृषण नाल से होती हुई उदरगुहा में प्रवेश करते हुए मूत्रमार्ग के अधर भाग में खुलती हैं।

(ii) शुक्रवाहिनी (Vas deferens) एपोडिडाइमिस से एक शुक्रवाहिनी निकलकर वृषण नाल से होती हुई उदरगुहा में प्रवेश करते हुए मूत्रमार्ग के अधर भाग में खुलती है।

(iii) शुक्राशय (Serminal vesicle) यह एक द्विपालित थैलीनुमा ग्रन्थिल संरचना होती है। इससे चिपचिपा द्रव स्रावित होता है, जो वीर्य का मुख्य भाग बनाता है तथा शुक्राणुओं का पोषण करता हैं।

(iv) शिश्न (Penis) यह मैथुन अंग है। यह वृषण कोषों के मध्य स्थित होता है। शिश्न के मध्य मूत्रमार्ग (Urethra) गुजरता है, जो शिश्न के अग्र छोर पर खुलता है। मूत्रमार्ग द्वारा ही वीर्य के साथ शुक्राणु बाहर निकलते हैं।

3. सहायक जनन ग्रन्थियाँ इन ग्रन्थियों का स्रावण जनन प्रक्रिया में सहायक है। वर्णन निम्नलिखित हैं।
(i) प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate gland) यह ग्रन्थि मूत्रमार्ग के अधर तल पर स्थित होती है। यह अनेक पिण्डों (Lobules) की बनी होती है। इस ग्रन्थि से हल्का क्षारीय तरल स्रावित होता है। यह मूत्रमार्ग की अम्लीयता को नष्ट करता है, जिससे शुक्राणु सक्रिय बने रहते हैं।

(ii) काउपर्स ग्रन्थियाँ (Cowper’s glands) ये एक जोड़ी ग्रन्थियाँ होती हैं तथा मूत्रमार्ग के दाएँ व बाएँ ओर स्थित होती हैं। काउपर्स ग्रन्थियाँ मैथुन से पहले एक क्षारीय एवं चिकने द्रव का स्रावण करती हैं। यह मूत्रमार्ग की अम्लता को समाप्त करता है तथा योनि मार्ग को चिकना बनाकर मैथुन में सहायक है।

(iii) पेरीनियल ग्रन्थियाँ (Perineal glands) एक जोड़ी ग्रन्थियाँ मलाशय के पास स्थित होती हैं। इनसे स्रावित रसायन विशेष गन्ध प्रदान करता है।

प्रश्न 2.
अण्डाणुजनन क्या है? अण्डाणुजनन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। अण्डाणुजनन तथा शुक्राणुजनन में समानताएँ एवं असमानताएँ बताइए।
अथवा
युग्मकजनन किसे कहते हैं? शुक्रजनन एवं अण्डजनन का तुलनात्मक विवरण दीजिए। युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या के आधार पर युग्मकजनन के महत्व की विवेचना कीजिए।
अथवा
अण्डाणुजनन तथा शुक्राणुजनन में अन्तर लिखिए।
अथवा
युग्मकजनन की परिभाषा लिखिए। अण्डाणुजनन की क्रिया समझाइए। अण्डाणुजनन तथा शुक्राणुजनन में अन्तर बताइट।
उत्तर:
युग्मकजनन (Gametogenesis) युग्मकजनन एक जटिल प्रक्रम है, इसमें अर्द्धसूत्री और समसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित (Haploid) युग्मकों (शुक्राणु/अण्डाणु) का निर्माण होता है।
अण्डाणुजनन (Oogenesis) अण्डाशय की ग्राफियन पुटिका (Graafian follicles) के निर्माण की प्रक्रिया, अण्डाणुजनन कहलाती है।
अण्डाणुजनन प्रक्रिया अण्डजनन की प्रक्रिया को तीन भागों में बाँटा गया है।
1. गुणन प्रावस्था (Multiplication Phase) अण्डाशय के निर्माण के समय ही प्राथमिक जनन कोशिकाएँ अण्डाशयी पुटिकाओं (0varian follicles) के रूप में एकत्रित हो जाती हैं, जिसमें से एक कोशिका अण्डाणु मातृ कोशिका (Egg mother cell) के रूप में विभेदित होती है।

2. वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase) यह प्रावस्था बहुत लम्बी होती है। अण्डाणु मातृ कोशिका, अण्डाणु जनन कोशिका या ऊगोनियम (0ogonium) में विभेदित होकर वृद्धि प्रावस्था में प्रवेश करती हैं। यह अधिक मात्रा में पोषक पदार्थों को संचित करके आकार में वृद्धि कर लेती है। इसे पूर्व अण्डाणु कोशिका या प्राथमिक ऊसाइट (Primary 0OCyte) कहते हैं।

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3. परिपक्वन अवस्था (Maturation Phase) ग्राफियन पुटिका के
परिपक्व होने के बाद इसमें उपस्थित प्राथमिक ऊसाइट (Primary 00cyte) में प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन होता है, जो असमान होता है, जिसके फलस्वरूप एक अगुणित द्वितीयक ऊसाइट (Haploid Secondary 00cyte) और एक छोटी लोपिकाओं (Polar body) का निर्माण होता है। ग्राफियन पुटिका के फटने से यह द्वितीयक अण्डाणु कोशिका मुक्त होकर फैलोपियन नलिका में प्रवेश कर जाती है। इसमें द्वितीय अर्धसूत्री विभाजन शुक्राणु के अण्डाणु में प्रवेश के पश्चात् होता है ।

शुक्राणुजनन और अण्डाणुजनन में अन्तर निम्नलिखित हैं

शुक्राणुजनन

अण्डाणुजनन

यह प्रक्रिया वृषणों में होती है। यह प्रक्रिया अण्डाशयों में होती है।
इसमें वृद्धि प्रावस्था छोटी होती है। वृद्धि प्रावस्था बहुत लम्बी होती है।
एक प्राथमिक शुक्राणु कोशिका से चार अगुणित शुक्राणुओं का निर्माण होता है। प्राथमिक अण्डाणु कोशिका से  केवल एक अगुणित निर्माण होता है।
स्पर्मेटिइस से थान्तरण द्वारा गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। अचल आण्डाणु में कायान्तरण नहीं होता है।
दोनों अर्द्धसूत्री विभाजन शुक्राणु निर्माण  से पूर्व हो जाते हैं। दूसरा अर्द्धसूत्री विभाजन अण्डाणु में शुक्राणु के प्रवेश के बाद पूर्ण होता है।

शुक्राणुजनन और अण्डाणुजनन में समानताएँ

  1. दोनों क्रियाएँ तीन प्रावस्था में पूर्ण होती हैं- गुणन प्रावस्था, वृद्धि प्रावस्था और परिपक्वन प्रावस्था।
  2. दोनों क्रियाएँ जनदों की जनन उपकला कोशिकाओं में होती हैं।

युग्मकजनन का महत्त्व युग्मकजनन एक जटिल प्रक्रम है। इसमें अर्द्धसूत्री और समसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित युग्मकों का निर्माण होता है। नर और मादा युग्मकों के निषेचन के समय समेकन (Fusion) से द्विगुणित युग्मनज का निर्माण होता है। युग्मकजनन और निषेचन के फलस्वरूप जीवधारी का गुणसूत्र प्रारूप निश्चित बना रहता है।

प्रश्न 3.
मादा जनन तन्त्र का वर्णन करते हुए मासिक चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं के सन्दर्भ में संक्षिप्त में लिखिए।
उत्तर:
मादा जनन तन्त्र इसके अन्तर्गत निम्नलिखित जनन अंग आते हैं।
1. अण्डाशय एक जोड़ी अण्डाशय उदरगुहा में स्थित होते हैं। अण्डाशय संयोजी ऊतक से बनी ठोस अण्डाकार संरचना (लगभग 3 सेमी लम्बा, 2 सेमी चौड़ा तथा 1 सेमी मोटा) होती है।
अण्डाशय में ग्राफियन पुटिकाएँ छोटे-छोटे दानों-जैसी रचनाओं के रूप में उभरी होती हैं। यहीं अण्डाणु का निर्माण होता है।

2. अण्डवाहिनी इसका प्रारम्भिक भाग अण्डाशय से सटी हुई झालरदार कीपनुमा संरचना अण्डवाहिनी मुखिका (Oviducal funnel) बनाता है, जो फैलोपियन नलिका में खुलती हैं। अण्डवाहिनी का प्रारम्भिक संकरा भाग फैलोपियन नलिका तथा पश्च भाग गर्भाशय कहलाता है। अण्डे का निषेचन फैलोपियन नलिका में होता है।

3. गर्भाशय दोनों अण्डवाहिनी मिलकर पेशीय थैलीनुमा एवं उल्टे नाशपाती के आकार की संरचना गर्भाशय में खुलती हैं। इसका सामान्य आकार 8 सेमी लम्बा, 5 सेमी चौड़ा तथा 2 सेमी मोटा होता है। गर्भाशय अत्यधिक फैल सकता है। गर्भावस्था में भ्रूण का रोपण गर्भाशय में होता हैं।

4. योनि यह लगभग 8 सेमी लम्बी नलिकारूपी संरचना होती है। मूत्राशय तथा योनि मादा जनन छिद्र द्वारा शरीर से बाहर खुलती है। मादा जनन छिद्र भाग की बाह्य सतह पर एक पेशीय संरचना क्लाइटोरिस होती हैं।

5. बार्थोलिन ग्रन्थियाँ ये योनि के पार्श्व में स्थित होती हैं। इनसे स्रावित तरल योनि को क्षारीय तथा चिकना बनाता है।

6. पेरीनियल ग्रन्थियाँ इनसे विशिष्ट गन्धवत् तरल स्रावित होता है, जो लैंगिक आकर्षण पैदा करता है।

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मासिक चूक (Menstrual Cycle)
व्यस्क स्त्रियों में एक माह की अवधि के दौरान गर्भाशय में चक्रीय परिवर्तन होते हैं, जिसे मासिक चक्र या आर्तव चक्र कहते हैं। मासिक चूक मासिक चूक की तीन अवस्थाएँ होती हैं।
1. क्रम प्रसारी अवस्था (Proliferative Phase) FSH, पुटिकाओं को एस्ट्रोजन के स्रावण के लिए प्रेरित करता है। इस अवस्था का अन्तराल 10-12 दिनों का होता हैं। यह पुटिकीय अवस्था (Follicular phase) भी कहलाती हैं।

2. स्रावित अवस्था (Secretory Phase) कॉर्पस ल्यूटियम, प्रोजेस्टेरॉन का स्रावण करती हैं। इस अवस्था का अन्तराल 12-14 दिन का होता है।

3. मासिक अवस्था (Menstrual Phase) यह पुराने मासिक चक्र की अन्तिम तथा नए मासिक चक्र की प्रारम्भिक अवस्था होती है। यदि अण्डाणु निषेचित नहीं होता है, तो कॉर्पस ल्यूटियम, प्रोजेस्टेरॉन स्तर में कमी के कारण नष्ट हो जाता है। एण्डोमीट्रियम के टूटने से रुधिर का स्राव होता है। यह स्राव लगभग पाँच दिन चलता है।
यह FSH, LH, एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरॉन के द्वारा नियन्त्रित होता है। मासिक चक्र गर्भावस्था तथा दुग्ध स्रावण (Lactation) के दौरान नहीं होता है।

रजोनिवृत्त (Menopause)
इसमें अण्डोत्सर्ग तथ मासिक चक्र स्थायी रूप से रुक जाता है। यह 45 या 50 साल की आयु में होता हैं। इस अवस्था में स्त्री में जनन की क्षमता नहीं होती है।

प्रश्न 4.
नलिकाविहीन ग्रन्थियों पर टिप्पणी लिखिए। (2004)
अथवा
अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ क्या हैं? मानव शरीर में पाई जाने वाली अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के कार्यों का वर्णन कीजिए। (2016)
अथवा
मानव शरीर के विभिन्न अन्तः स्रावी ग्रन्थियों के नाम लिखिए। (2018)
उत्तर:
मानव शरीर में पाई जाने वाली ऐसी विशिष्ट ग्रन्थियाँ, जिनमें स्रावित पदार्थ को लक्ष्य स्थान तक ले जाने के लिए नलिकाएँ नहीं होती, नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ कहलाती हैं। इन ग्रन्थियों को अन्त:स्रावी ग्रन्थि भी कहते हैं।
इनसे स्रावित पदार्थ, सीधे रक्त में मुक्त होकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुँचता हैं। इन स्रावित पदार्थों को हॉमन्स कहते हैं। हॉमन्स रासायनिक यौगिक हैं, जो प्राणियों में विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का नियन्त्रण एवं समन्वय करते हैं। ये उपापचय क्रियाओं, शारीरिक वृद्धि एवं विकास, लैंगिक लक्षणों एवं जनन आदि के नियन्त्रण में भाग लेते हैं।

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मानव शरीर में नलिकाविहीन/अन्त: स्रावी ग्रन्थियाँ
मानव शरीर में निम्नलिखित नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं
1. पीयूष ग्रन्थि (Pituitary Gland) यह अग्र मस्तिष्क के ‘हाइपोथैलेमस’ की दीवार के पास, स्फेनॉइड हड्डी के गर्त में पाई जाती है। इसे मास्टर ग्रन्थि भी कहा जाता हैं, क्योकि यह अन्य अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के स्रावण को नियन्त्रित करती हैं। इसके साथ यह व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य वृद्धि एवं लैंगिक विकास को भी प्रेरित करती है।

2. थायरॉइड ग्रन्थि (Thyroid Gland) यह दो पिण्डों की रचना है एवं श्वासनली के | दोनों ओर लैरिक्स (Larynx) के नीचे स्थित रहती हैं। इससे स्रावित थायरॉक्सिन, हॉर्मोन शरीर की उपापचयी क्रियाओं का नियमन तथा नियन्त्रण करता है।

3. पैराथायरॉइड ग्रन्थि (Parathyroid Gland) यह थायरॉइड ग्रन्थि के पीछे स्थित रहती हैं। इसके द्वारा स्रावित पैराथॉर्मोन नामक हॉमोंन रक्त में कैल्शियम तथा फॉस्फोरस की मात्रा का नियन्त्रण करता है। यह अस्थि एवं दाँतों के निर्माण में सहायक होता है।

4. थायमस ग्रन्थि (Thymus Gland) यह ग्रन्थि वक्ष में हृदय के सामने स्थित होती है। युवावस्था तक यह लुप्त हो जाती है। इस ग्रन्थि से स्रावित थायमोसिन हॉर्मोन, लिम्फोसाइट्स को भिन्न-भिन्न प्रकार के जीवाणुओं और एण्टीजन को नष्ट करने हेतु प्रेरित करता है।

5. अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal Gland) यह ग्रन्थि प्रत्येक वृक्क (Kidney) के ऊपरी भाग पर स्थित होती है, इसका बाहरी भाग काँटेक्स व आन्तरिक भाग मेड्यूला कहलाता है। कॉर्टेक्स से स्रावित हॉमोंन उपापचयी नियन्त्रण, रक्त में लवण की मात्रा का नियन्त्रण एवं लैंगिक परिपक्वता आदि को नियन्त्रित करते हैं। मेड्यूला से स्रावित, एडीनलीन तथा नॉर एडीनेनीन हॉमन्स शरीर को संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।

6. अग्न्याशय (Pancreas) यह एक मिश्रित ग्रन्थि है, इसका बहि:स्रावी भाग, अग्न्याशय रस स्रावित करता है। अग्न्याशय में विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं के समूह पाए जाते हैं, जिन्हें लैंगरहँन्स की द्वीपिकाएँ (Iglete of Langarhans) कहते हैं।
ये अन्त:स्रावी ग्रन्थि का काम करती हैं। इनसे स्रावित हॉर्मोन्स निम्नलिखित हैं

  • इन्सुलिन आवश्यकता से अधिक ग्लुकोज का ग्लाइकोजन में परिवर्तन करता है। इसकी कमी से शरीर से शर्करा की मात्रा मूत्र में आने लगती है, जिसे मधुमेह रोग कहते हैं।
  • ग्लूकैगॉन ग्लाइकोजन से ग्लूकोज को संश्लेषण करता है।

7. जनन ग्रन्थियाँ (Gonada) स्त्री में अण्डाशय (Ovary) तथा पुरुष में वृषण (Testha) विशेष हॉर्मोन्स स्रावित करते हैं, जिनसे लैंगिक लक्षणों का विकास होता है। स्त्रियों में एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरॉन का स्रावण होता है, जबकि पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन स्रावित होता है।

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UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय are part of UP Board Solutions for Class 12 Computer. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 9
Chapter Name C++ का परिचय
Number of Questions Solved 32
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
निम्न में से कौन-सी प्रोग्रामिंग भाषा ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड प्रोग्रामिंग की सुविधा देती है?
(a) C
(b) C++
(c) BASIC
(d) ये सभी
उत्तर:
(b) C++ भाषा ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड प्रोग्रामिंग की सुविधा देती है।

प्रश्न 2
निम्न में से कौन-सा शब्द आइडेण्टीफायर नहीं हो सकता?
(a) lotus_123
(b) word
(c) const
(d) sum
उत्तर:
(c) const एक की-वर्ड है, जो आइडेण्टीफायर की तरह प्रयोग नहीं हो सकता।

प्रश्न 3
निम्न में से कौन C++ का मान्य फ्लोटिंग प्वॉइण्ट स्थिरांक है? [2018]
(a) 22.0/7
(b) 120
(c) 1.2.3
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) 22.0/7

प्रश्न 4
टाइप डाटा का साइज होता है। [2018, 17]
(a) 1 बाइट
(b) 2 बाइट
(c) 4 बाइट
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 2 बाइट

प्रश्न 5
किस डाटा टाइप का परास – 32768 से 32767 है? [2016]
(a) इण्ट
(b) अनसाइण्ड इण्ट
(c) साइण्ड इण्ट
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) इण्ट डाटा टाइप का आकार 2 बाइट है, जिसकी रेंज (परास)- 32768 से 32767 होती है।

प्रश्न 6
किसका उपयोग इनपुट देने में किया जाता है?
(a) cin
(b) gets( )
(C) getchar( )
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) C++ में, cin, gets ( ) तथा getchar ( ) को प्रयोग इनुपट युक्तियों से इनपुट देने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 7
फंक्शन gets ( ), puts ( ), getchar ( ) तथा putchar ( ) किस हैडर फाइल में शामिल होते हैं?
(a) stdio.h
(b) iostream.h
(c) conio.h
(d) ये सभी
उत्तर:
(a) stdio.h

प्रश्न 8
निम्न में से कौन-सा इस्केप कैरेक्टर कर्सर के दायीं ओर 8 स्थान होता है? [2018]
(a) la
(b) \b
(c) \t
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \t

प्रश्न 9
कर्सर को Next Page पर ले जाने के लिए निम्न Escape sequence characters में से कौन-सा प्रयुक्त होता है? [2017]
(a) \t
(b) \n
(c) \f
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \f

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1अंक)

प्रश्न 1
टोकन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
प्रोग्राम में प्रयुक्त होने वाली सबसे छोटी इकाई को टोकन कहते हैं।

प्रश्न 2
वैरिएबल को परिभाषित कीजिए। [2011]
उत्तर:
मेमोरी की वह स्थिति जिसमें कोई मान या डाटा संग्रहीत रहता है। वैरिएबल कहलाता है।

प्रश्न 3
कैरेक्टर कॉन्स्टेण्ट से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
कैरेक्टर कॉन्स्टेण्ट में कोई वर्ण (अक्षर, अंक या चिह्न) एकल कोटेशन चिह्न (‘ ‘) में लिखे जाते हैं; जैसे-‘N’, ‘8’ तथा ‘*’ आदि।

प्रश्न 4.
जो ऑपरेटर दो ऑपरेण्डों पर क्रिया करते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
उत्तर:
बाइनरी ऑपरेटर

प्रश्न 5
रिलेशनल ऑपरेटर्स को परिभाषित कीजिए। [2011]
उत्तर:
जिन ऑपरेटर्स का प्रयोग दो विभिन्न संख्याओं या एक्सप्रेशन की तुलना करने के लिए किया जाता है, रिलेशनल ऑपरेटर्स कहलाते हैं।

प्रश्न 6
C++ में, लॉजिकल ऑपरेटर्स कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
C++ में लॉजिकल ऑपरेटर्स निम्न हैं।

  1. लॉजिकल एण्ड (AND)
  2. लॉजिकल और (OR)
  3. लॉजिकल नॉट (NOT)

प्रश्न 7.
जो ऑपरेटर वैरिएबल के बाद उपयोग किए जाते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
उत्तर:
पॉस्टफिक्स ऑपरेटर

प्रश्न 8
पॉइण्टर एक्सप्रेशन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
ऐसी एक्सप्रेशन जो एड्रेस का मान स्टोर और उसे प्रस्तुत करती है, पॉइण्टर एक्सप्रेशन कहलाती है।

प्रश्न 9
वैरिएबल sum का मान कॉन्सोल (स्क्रीन) पर दिखाने के लिए क्या कथन होगा?
उत्तर:
cout<<sum;

प्रश्न 10
प्रोग्राम के पहले आउटपुटों को क्लीयर करने के लिए किस कमाण्ड का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
clrscr ( ) फंक्शन का प्रयोग पहले आउटपुटों को क्लीयर करने के लिए किया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न I (2 अंक)

प्रश्न 1
C++ की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2015, 14, 08]
उत्तर:
C++ की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं।

  1. इसमें किसी भी समस्या की जटिलता को कम करने की क्षमता होती हैं।
  2. इसमें अलग-अलग प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन होने की क्षमता होती है।
  3. यह गणितीय एवं तार्किक ऑपरेटर का प्रयोग करता है।
  4. यह मशीन पर आत्मनिर्भर भाषा है।

प्रश्न 2
उदाहरण सहित टोकन का अर्थ समझाइए। [2015, 07]
उत्तर:
प्रोग्राम में प्रयुक्त होने वाली सबसे छोटी इकाई को टोकन कहते हैं। टोकन प्रोग्राम की अविभाज्य इकाई है। अनेक टोकन की क्रमबद्ध श्रृंखला से स्टेटमेण्ट बनते हैं। C++ में प्रयुक्त टोकन निम्न प्रकार हैं।

  1. की-वर्ड
  2. आइडेण्टीफायर
  3. कॉन्स्टेण्ट
  4. ऑपरेटर्स
  5. स्टिंग

प्रश्न 3
आइडेण्टीफायर तथा की-वई में अन्तर बताइए।
उत्तर:
आइडेण्टीफायर तथा की-वर्ड में अन्तर इस प्रकार हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय img-1

प्रश्न 4
हैडर फाइल पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए। [2012]
उत्तर:
वे फाइलें जिनमें लाइब्रेरी फंक्शन्स संकलित होते हैं, हैडर फाइल कहलाती हैं। C++ में, अनेक हैडर फाइल्स होती हैं, जो अलग-अलग फंक्शन्स को सम्मिलित करती हैं।
जैसे <iostream.h> हैडर फाइल cin और cout के लिए तथा <atdio.h> हैडर फाइल gets ( ), puts ( ), getchar ( ) और putchar ( ) फंक्शन्स के लिए होती हैं।

प्रश्न 5
निम्नलिखित प्रोग्राम का आउटपुट क्या होगा?
#include<iostream.h>
void main( )
{
int age;
cout<<“Mera “;
cout<<” Bharat “;
cout<<” Mahan. “;
cout<<“Vande Mataram !”;
}
उत्तर:
Mera Bharat Mahan. Vande Mataram !

प्रश्न 6
डाटा प्रकार के उदाहरण देकर व्याख्या संक्षेप में कीजिए। [2018]
उत्तर:
कम्प्यूटर में दिए जाने वाले इनपुट को डाटा कहते हैं। प्रत्येक प्रोग्राम किसी डाटा पर किसी विशेष क्रम में क्रियाएँ करता है और ये डाटा एक टाइप पर निर्भर करते हैं, जिन्हें डाटा टाइप कहते हैं।
उदाहरण
इण्टीजर डाटा टाइप जैसे – 453, 75 आदि
करैक्टर डाटा टाइप जैसे – ‘M’, ‘+’ आदि।
फ्लोट डाटा टाइप जैसे – 154.02, 145.44 आदि

प्रश्न 7
C व C ++ के बीच कोई दो अन्तर बताइट। [2017]
उत्तर:

C एक प्रोसीजर ओरिएण्टेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है। c++ एक प्रोसीजर प्रोग्रामिंग तथा ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड प्रोग्रामिंग दोनों लैंग्वेज का मिश्रण है।
C में इनहेरिटेन्स की सुविधा उपलब्ध नहीं है। C++ में इनहेरिटेन्स की सुविधा उपलब्ध है।

लघु उत्तरीय प्रश्न II (3 अंक)

प्रश्न 1
C++ के सन्दर्भ में अर्थमैटिक तथा लॉजिकल ऑपरेटर्स को समझाइए। [2011, 09]
उत्तर:
अर्थमैटिक ऑपरेटर्स ये ऑपरेटर्स सामान्य अर्थमैटिक क्रियाओं में प्रयोग किए जाते हैं। इस प्रकार के ऑपरेटर को बाइनरी ऑपरेटर भी कहा जाता है। अर्थमैटिक ऑपरेटर्स निम्न प्रकार हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय img-2

लॉजिकल ऑपरेटर्स इन ऑपरेटर्स का प्रयोग दो लॉजिकल या सम्बन्धवाचक एक्सप्रेशन को जोड़ने में किया जाता है। ये ऑपरेटर्स बूलियन बीजगणित के अन्तर्गत आते हैं। लॉजिकल ऑपरेटर्स निम्न प्रकार हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय img-3

प्रश्न 2
रिलेशनल ऑपरेटर का प्रयोग करके एक प्रोग्राम लिखिए। [2016]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int a = 20, b= 10;
if (a==b)
{
cout<<“a is equal to b”;
}
else
{
cout<<“a is not equal to b”;
}
}

प्रश्न 3
C++ में ऑपरेटर्स तथा एक्सप्रेशन्स को समझाइए। [2016]
उत्तर:
ऑपरेटर्स किसी विशेष प्रकार के डाटा पर की जाने वाली क्रिया को व्यक्त करने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, उसे ऑपरेटर कहते हैं।
ऑपरेटर्स निम्न प्रकार के होते हैं।

  1. अंकगणितीय ऑपरेटर
  2. लॉजिकल ऑपरेटर
  3. रिलेशनल ऑपरेटर
  4. असाइनमेण्ट ऑपरेटर
  5. कण्डीशनल ऑपरेटर
  6.  इन्क्रीमेण्ट तथा डिक्रीमेण्ट ऑपरेटर्स

एक्सप्रेशन कोई एक्सप्रेशन एक या एक से अधिक वैरिएबलों, कॉन्स्टेण्टों तथा ऑपरेटरों का एक ऐसा वैध (Valid) समूह है, जिसका C++ भाषा में एक निश्चित मान निकाला जा सकता है। सभी एक्सप्रेशन को ऑपरेटर की प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाता है। एक से ज्यादा ऑपरेटर्स की समान प्राथमिकता होने पर एक्सप्रेशन को बाएँ से दाएँ हल किया जाता है। एक्सप्रेशन निम्न प्रकार की होती है।

  1. अंकगणितीय एक्सप्रेशन
  2. सम्बन्धवाचक एक्सप्रेशन
  3. लॉजिकल एक्सप्रेशन
  4. पॉइण्टर एक्सप्रेशन

प्रश्न 4
निम्न को परिभाषित कीजिए।
(i) cin
(ii) cout
(ii) getch ( )
उत्तर:
(i) cin यह एक फंक्शन न होकर ऑपरेटर है, जिसका कार्य इनपुट युक्तियों द्वारा इनपुट देना है। cin को >> चिह्न के साथ प्रयोग किया जाता है। इसकी हैडर फाइल <iostream.h> है।
(ii) cout यह भी एक ऑपरेटर है, जिसका कार्य आउटपुट युक्ति द्वारा ‘ आउटपुट प्रदर्शित करना है। यह << चिह्न के साथ प्रयोग किया जाता है। इसकी हैडर फाइल <iostream.h> है।
(iii) getch ( ) यह एक फंक्शन है, जिसका प्रयोग प्रोग्राम रन करने के बाद आउटपुट को स्क्रीन पर रोकने के लिए किया जाता है। इसकी हैडर फाइल <conio.h> है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1
उदाहरण सहित C++ के विभिन्न प्रकार के ऑपरेटर्स को समझाइए। [2007]
उत्तर:
किसी विशेष प्रकार के डाटा पर की जाने वाली क्रिया को व्यक्त करने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, उसे ऑपरेटर कहते हैं।
C++ में प्रयुक्त ऑपरेटर्स के निम्न प्रकार हैं।

(i) अंकगणितीय ऑपरेटर्स ये ऑपरेटर्स सामान्य अर्थमैटिक क्रियाओं में प्रयोग किए जाते हैं, इन्हें बाइनरी ऑपरेटर भी कहा जाता है। अंकगणितीय ऑपरेटर्स निम्न हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय img-4

(ii) रिलेशनल ऑपरेटर्स इन ऑपरेटर्स का प्रयोग दो विभिन्न संख्याओं या एक्सप्रेशन की तुलना करने के लिए किया जाता है। रिलेशनल ऑपरेटर्स निम्न हैं। कम अधिक कम या बराबर अधिक या बराबर बराबर
बराबर नहीं।
UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 9 C++ का परिचय img-5

(iii) लॉजिकल ऑपरेटर्स इन ऑपरेटर्स का प्रयोग दो लॉजिकल या सम्बन्धवाचक एक्सप्रेशन को जोड़ने में किया जाता है। ये ऑपरेटर्स बूलियन बीजगणित के अन्तर्गत आते हैं। लॉजिकल ऑपरेटर्स निम्न हैं।
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(iv) असाइनमेण्ट ऑपरेटर्स इन ऑपरेटर्स का प्रयोग किसी वैरिएबल की वैल्यू निश्चित करने या बदलने के लिए किया जाता है।
असाइनमेण्ट ऑपरेटर्स निम्न हैं।
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प्रश्न 2
निम्न पर टिप्पणी लिखिए
(i) ऑपरेटर प्राथमिकता
(ii) इनपुट-आउटपुट फंक्शन
उत्तर:
(i) ऑपरेटर प्राथमिकता एक्सप्रेशन को हल करने के लिए ऑपरेटर की प्राथमिकता का ज्ञान होना आवश्यक है, क्योंकि सभी एक्सप्रेशन को ऑपरेटर्स की प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाता है। एक एक्सप्रेशन में दो या दो से अधिक ऑपरेटर्स की समान प्राथमिकता होने पर एक्सप्रेशन को बाएँ से दाएँ क्रम में हल किया जाता है।
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(ii) इनपुट-आउटपुट फंक्शन सभी कम्प्यूटर प्रोग्राम में, इनपुट युक्तियों द्वारा इनपुट दिया जाता है, जो प्रोसेस होकर आउटपुट युक्तियों द्वारा उटपुट प्रदर्शित करता है। C++ भाषा में, इनपुट-आउटपुट क्रियाओं के लिए, जो फंक्शन प्रयोग किए गए हैं, उन्हें इनपुट-आउटपुट फंक्शन कहा जाता है, जिनकी अलग हैडर फाइल होती है। C++ में प्रयुक्त होने वाले कुछ इनपुट-आउटपुट फंक्शन निम्न प्रकार हैं।

  • gets( )
  • puts( )
  • putchar( )
  • getchar( )

प्रश्न 3
C++ के प्रोग्राम के ढाँचे को समझाइए। [2013, 11, 09]
उत्तर:
C++ भाषा में, प्रोग्राम की संरचना का ज्ञान होना अति आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना हम कोई भी प्रोग्राम नहीं बना सकते हैं।
C++ का साधारण प्रोग्राम

#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void main( )
{
clrscr( );
cout<<“This is Arihant”;
getch( );
}

उपरोक्त प्रोग्राम की पहली पंक्ति # include<iostream.h> से शुरू है, जो प्रीप्रोसेसर डाइरेक्टिव है जिसमें cout की परिभाषा शामिल है।

दूसरी पंक्ति में #include<conio.h>, clrscr( ) तथा getch( ) फंक्शन्स की हैडर फाइल हैं जो इनके बारे में सूचना देती है।
यदि प्रोग्राम में क्लास डिफाइन नहीं है तो इसके बाद main( ) फंक्शन आता है, जिसमें प्रोग्राम का कथन लिखा जाता है।
{ } (curly braces) का प्रयोग main ( ) फंक्शन की शुरुआत व अन्त को प्रदर्शित करता है।
clrscr ( ) फंक्शन का प्रयोग आउटपुट स्क्रीन से पहले आउटपुट को हटाने के लिए किया जाता है।
cout<<” This is Arihant”;
यह प्रोग्राम का मुख्य कथन है, जो स्क्रीन पर This is Arihant प्रदर्शित करेगा।
getch ( ) फंक्शन का प्रयोग आउटपुट को स्क्रीन पर रोकने के लिए किया जाता है।

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