UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि

UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि

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संस्कृत व्याकरण व अनुवाद

सब्धि

‘सन्धि’ का शाब्दिक अर्थ है-‘मेल’। जब पास-पास आये हुए दो वर्ण आपस में मिलकर एक नया रूप धारण करते हैं तो उस एकीकरण को सन्धि कहते हैं। सन्धि करने पर निकट के दो वर्ण मिलकर एक हो जाते हैं; जैसे-
हिम + आलयः = हिमालयः
सूर्य + उदयः = सूर्योदयः।
सु + आगतम् = स्वागतम् ।

सन्धि तीन प्रकार की होती हैं—

  1. स्वर सन्धि,
  2. व्यंजन सन्धि तथा
  3. विसर्ग सन्धि। ध्यातव्य-पाठ्यक्रम में (UPBoardSolutions.com) केवल स्वर सन्धि के ‘यण’ एवं ‘वृद्धि’ भेद ही निर्धारित हैं।

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स्वर सन्धि

जहाँ दो स्वरों के मेल से परिवर्तन होता है, वहाँ स्वर सन्धि होती है (स्वर + स्वर = स्वर सन्धि)। स्वर सन्धि के भी अनेक भेद हैं, जिनमें प्रमुख भेदों का नियमसहित विवरण नीचे दिया जा रहा है-

1. दीर्घ सन्धि (सूत्र–अकः सवर्णे दीर्घः)
नियम-यदि अ, इ, उ, ऋ, ले (ह्रस्व या दीर्घ) के बाद समान स्वर हो तो दोनों के स्थान पर उस वर्ण का दीर्घ; अर्थात् आ, ई, ऊ, ऋ, ऋ (लू नहीं) हो जाता है;
उदाहरण-
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2. गुण सन्धि (सूत्र-आद्गुणः)
नियम–यदि अ या आ के बाद इ, उ, ऋ, लू (ह्रस्व या दीर्घ) आएँ तो उनके स्थान पर क्रमशः ए, ओ, अर् और अल् हो जाते हैं;
उदाहरण-
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3. वृद्धि सन्धि (सूत्र-वृद्धिरेचि)
नियम-यदि अ या आ के बाद ए-ऐ तथा ओ-औ आएँ तो उनके स्थान पर क्रमश: ऐ तथा औ अर्थात् वृद्धि हो जाती है;
उदाहरण-
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4. यण् सन्धि (सूत्र–इको यणचि)
नियम–यदि इ, उ, ऋ, लू (ह्रस्व या दीर्घ) के बाद असमान स्वर आते हैं तो उनके स्थान पर क्रमशः य, व, र, ल् हो जाता है;
उदाहरण-
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अभ्यास

प्रश्न 1.
नीचे लिखे पदों का सन्धि-विच्छेद कीजिए और सन्धि का प्रकार भी लिखिए-
उत्तर
(I)
महौत्सुक्यम्, शुद्धौषधम्, गंगौघः, महैश्वर्यम्, समयौचित्यम्, तत्रैव, मतैक्य, तदैव, रामौदार्यम्।
(II) मात्राज्ञाः, प्रत्युत्तरम्, अत्यन्तम्, करोम्यहम्, ग्रामेष्वपि, यद्यपि, गुर्वाज्ञा, (UPBoardSolutions.com) अभ्युदयः, अन्वेषणम्, दध्यानय, स्वागतम्, पित्राकृतिः, प्रत्युपकार, देवेन्द्रः, हरिश्चन्द्रः, वाग्जाल, नमस्कार।

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प्रश्न 2.
नीचे लिखे पदों में सन्धि कीजिए-
उत्तर
(I)
कृष्ण + औत्कण्ठम्, महा + ऐक्यम्, अद्य + एव,
बाला + ओदनम्, अत्र + एव, रामस्य + एकः, अत्र + एव।
(II) लू + आकृतिः , इति + आदिः, वस्त्राणि + अपि, इति + उक्त्वा ,
मधु + अत्र, धातृ + अंशः, जाति + उपकारः, काष्ठ + ओषधिः।

प्रश्न 3.
यण् अथवा वृद्धि सन्धि की परिभाषा लिखिए तथा उदाहरण भी दीजिए। [2012]

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi पर्यायवाची शब्द

UP Board Solutions for Class 10 Hindi पर्यायवाची शब्द

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Hindi पर्यायवाची शब्द.

पर्यायवाची शब्द

पाठ्यक्रम में केवल पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द ही निर्धारित हैं।
नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 2 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।

एक ही अर्थ को प्रकट करने वाले एकाधिक शब्द पर्यायवाची कहलाते हैं। यद्यपि किसी भाषा में कोई दो शब्द समान अर्थ वाले नहीं होते, उनमें सूक्ष्म-सा अन्तर अवश्य होता है तथापि अर्थ के स्तर पर अधिक निकट होने वाले शब्दों को समानार्थी कहा जाता है; उदाहरणार्थ-अश्व, हय और तुरंग-तीनों घोड़े के लिए प्रयुक्त होते हैं। अत: ये पर्यायवाची शब्द हैं।-

हिन्दी भाषा के कुछ शब्दों के पर्यायवाची निम्नवत् हैं-

अमृत [2011, 12, 13, 15]-अमिय, सुधा, पीयूष, अमी।
अतिथि [2014, 18]-अभ्यागत, मेहमान, पाहुना, आगन्तुक।
असुर-दनुज, दानव, दैत्य, राक्षस, निशाचर, खल, रजनीचर।
अग्नि [2011, 12, 13, 15, 16]–हुताशन, वह्नि, अनल, पावक, आग, दहन, ज्वाला।
अनुपम-अद्भुत, अद्वितीय, अनोखा, अपूर्व, अनूठा।
अधर्म-पतित, भ्रष्ट, नीच, निकृष्ट, खल, (UPBoardSolutions.com) पामर, दुर्जन।
अपमान-अनादर, उपेक्षा, तिरस्कार, निरादर।।
अन्धकार—तम, तिमिर, तमिस्र, तमिस, तमर, तारीक।
अश्व [2013, 15]-घोड़ा, वाहन, हय, बाजी, घोटक, सैंधव, तुरंग।
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अहंकार-अभिमान, गर्व, घमण्ड, मद, दर्प।
आकाश [2011, 13, 14, 15, 16, 17] – अन्तरिक्ष, अम्बर, आसमान, व्योम, नभ, गगन।
आँख [2011, 12, 14, 16]-दृग, लोचन, चक्षु, अक्षि, नेत्र, नयन।।
आनन्द–प्रसन्नता, हर्ष, उल्लास, खुशी।
आम [2017]-आम्र, रसाल, सहकार, अमृतफल।
आभूषण--गहना, भूषण, अलंकार, जेवर इनाम-पुरस्कार, पारितोषिक, प्रीतिकर, आनन्दकर।
इच्छा-अभिलाषा, चाह, मनोरथ, कामना, आकांक्षा, लालसा।
इन्द्र [2011, 15, 17, 18]-देवेन्द्र, सुरेन्द्र, सुरपति, पुरन्दर, देवराज, शचीपति।
ईश्वर-ईश, परमात्मा, परमेश्वर, प्रभु, भगवान, जगदीश।
उषा—प्रभात, सवेरा, अरुणोदय, निशान्त।
उदर—पेट, जठर।
उत्पन्न–पैदा, उद्भूत, आविर्भाव, प्रादुर्भूत।
उन्नति–उदय, वृद्धि, उत्कर्ष, उत्थान।
उद्देश्य-अभिप्राय, आशय, लक्ष्य, ध्येय, इष्ट, तात्पर्य।
उद्यान [2012, 13]-उपवन, कुसुमाकर, बगीचा, बाग, वाटिका।
कोयल [2013, 18]-पिक, कोकिल, परभृत, वसन्तदूत।
किरण—-मरीचि, मयूख, कर, रश्मि, अंश।
कामदेव [2011, 13, 15]-मदन, मनसिज, रतिपति, पंचशर, अतनु, कन्दर्प, मन्मथ, मनोज, अनंग।
कमल [2011, 12, 13, 14, 15, 17, 18]-शतदल, पुण्डरीक, (UPBoardSolutions.com) उत्पल, वारिज, कोकनद, सरसिज, पद्म, नलिन, राजीव, सरोज, पंकज, अरविन्द, अम्बुज, जलज, सरोरुह, कंज, नीरज।
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कपड़ा [2016, 18]–वस्त्र, पट, वसन, चीर, अम्बर।।
किनारा-तट, तीर, कगार, कूल।
कृष्ण [2016]–घनश्याम, मोहन, केशव, माधव, वासुदेव, गिरिधर, गोपाल, मुरारि कथा-कहानी, आख्यान, गल्प, आख्यायिका।।
कलह–झगड़ा, विवाद।
कान-कर्ण, श्रोत्र, श्रवण।
कृपा–अनुग्रह, मेहरबानी, दया, अनुकम्पा।
क्रोध-गुस्सा, रोष, कोप, अमर्ष।
खग [2016]-पक्षी, पखेरू, विहंग, द्विज, चिड़िया
गणेश [2011, 12]-गणपति, भालचन्द्र, लम्बोदर, गजानन, विनायक।
गंगा [2015, 16, 17]-भागीरथी, देवनदी, सुरसरि, मंदाकिनी, नदीश्वरी।
गाय [2012, 13, 15, 16]–गौ, सुरभि, धेनु।
गोद-अंक, क्रोड, उत्सर्ग।।
घर (2011, 14, 15, 16)-सदन, धाम, गेह, आयतन, आलय, आगार, भवन, गृह, निकेतन।
चाँदनी—ज्योत्स्ना, कौमुदी, चन्द्रिका, चन्द्रमरीची।
चाँद [2011, 12, 13, 14, 15, 18]–निशाकर, हिमांशु, राकेश, निशिपति, कलानिधि, सुधाधर, चन्द्र, चन्द्रमा, विधु, सोम, शशि, शशांक, मयंक, इन्दु, रजनीश।
जल[2012, 14, 15, 16, 17, 18]-पय, सलिल, पानी, जीवन, तोय, अम्बु, वारि, उदक, नीर।
जंगल [2013, 17]-विपिन, कानन, अरण्य, वन।।
जीभ-जिह्वा, रसना, रसज्ञा, रसा।
जूता-चरणदास, जूत, जोड़ा, पदत्र, पादत्राण।
झण्डा-ध्वज, पताका, निशान, केतु।
तलवार-खड्ग, कृपाण, असि, शमशीर, करवाल।
तरंग-लहर, उर्मि, वीचि, हिलोर।
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तालाब [2011, 13, 14, 15, 17]-सर, सरोवर, तड़ाग, जलाशय, ताल, पोखर।
तारा-नक्षत्र, तारक, ऋण, नखत। तीर [2012]-बाण, शर, सायक, शिलीमुख।
दुष्ट-खल, दुर्जन, पामर, शठ।।
दूध [2017]–पय, दुग्ध, गोरस, क्षीर।
दन्त-दाँत, दर्शन, रद, द्विज, दंश।
दास—भृत्य, नौकर, सेवक, अनुचर, परिचारक।
दिन [2012, 16]-दिवस, वार, वासर, अहन्।
देवता–सुर, अमर, देव, त्रिदिव, गीर्वाण, आदित्य।
दुर्गा – भवानी, देवी, कालिका, (UPBoardSolutions.com) अम्बा, चण्डिका।।
दुःख-पीड़ा, कष्ट, व्यथा, विषाद, यातना, वेदना।
धनुष-धनु, कोदण्ड, चाप, कमान, कार्मुक, शरासन।
धन-द्रव्य, अर्थ, वित्त, सम्पत्ति, लक्ष्मी।
नदी [2011, 12, 15, 16, 18]-सरिता, तरंगिणी, जलमाता, नद, तटिनी।
नरक–दुर्गति, संघात, यमपुर, यमलोक, यमालय।
नेत्र [2016]–नयन, लोचन, चक्षु, आँख, दृग।।
नारी [2011]-स्त्री, कामिनी, महिला, अबला, वनिता, भामिनी, ललना, वामा, कान्ता, रमणी।
रात [2012,16]–निशा, यामिनी, रात्रि, रजनी, शर्वरी।।
नौका-नाव, तरिणी, जलयान, बेड़ा, पतंग, तरी।।
पण्डित [2014]–विद्वान, प्राज्ञ, बुद्धिमान, धीमान, वीर, सुधी।
पक्षी [2013]-खग, नभचर, विहग, विहंगम, पतंग, शकुंत, अण्डज, शकुनि, पखेरू, खेचर।
पत्नी [2015]-वधू, गृहिणी, स्त्री, प्राणप्रिया, अर्धांगिनी, वल्लभा, तिय, भार्या।।
पति-स्वामी, नाथ, वर, कान्त, प्राणनाथ, आर्य, ईश।।
पत्ता [2017]-पात, दल, पत्र, किसलय, पर्ण, पल्लव।
पराग-पुष्परज, कुसुमरज, पुष्पधूलि।
पर्वत [2012, 14, 16, 18]–गिरि, पहाड़, शैल, नग, अचल, महीधर, धराधर, अद्रि, भूधर।
पुत्र-सुत, बेटा, लड़का, पूत, तनय, पुत्र, आत्मज, तनु।
पुत्रीसुला, बेटी, लड़की, नन्दिनी, तनया, तनुजा, (UPBoardSolutions.com) दुहिता, आत्मजा।
पत्थर [2014, 15, 16]-पाषाण, वज्र, पाहन, उपल, शिला।
पुरुष-मनुज, आदमी, मर्द, जन, नर, मनुष्य।
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पृथ्वी [2011, 13, 14, 17, 18]-वसुन्धरा, वसुधा, अवनि, मेदिनी, धरती, धरा, भूमि, मही, वसुमति।।
पुष्प [2012, 13, 15] कुसुम, सुमन, फूल, पुहुप, मंजरी, प्रसून।
प्रकाश-उजाला, ज्योति, प्रभाव, विभा, आलोक।।
प्रसन्नता–हर्ष, खुशी, आह्लाद, मोद।
फल-रसाल, सस्य, पीलांक।
फूल [2016, 17, 18]-पुष्प, सुमन, कुसुम, मंजरी।
बादल [2012, 13, 14, 16, 17]-मेघ, जलद, नीरद, घन, वारिद, पयोद, धराधर, अम्बुद।
बन्दर–कपि, मर्कट, शाखामृग, हरि, वानर।
बिजली [2018]-दामिनी, सौदामिनी, विद्युत, चंचला, चपला, तड़ित।
बाल-अलक, कच, चिकुर, केश, कुन्तल।।
ब्राह्मण-भूसुर, द्विज, भूदेव, विप्र।।
बर्फ़-तुषार, हिम, तुहिन।
भ्रमर [2012, 17]-मधुप, मधुकर, भौंरा, भुंग, द्विरेफ, अलि, षट्पद।
भयानक–डरावना, भयजनक, विकट, गम्भीर
भिक्षा–भीख, याचना, माँगना, खैरात।
भूख-क्षुधा, बुभुक्षा, अन्नलिप्सा, आहारेच्छा।
भाई (2015)-भ्राता, सहोदर, बंधु, प्रियजन।
मछली-अण्डज, मीन, मत्स्य।
मदिरा-शराब, सुरा, मद्य, (UPBoardSolutions.com) वारुणी।
माता (2013, 14, 15)-जननी, माँ, मात, मैया, अम्बा।
मित्र-सखा, सहचर, साथी, मीत, दोस्त।
मुख-मुँह, मुखड़ा, आनन, वदन।
मृत्यु-निधन, देहान्त, अन्त, मौत।।
मनुष्य-मनुज, नर, आदमी, मानव, पुरुष।
मोर [2016]-मयूर, शिखी, शिखण्डी, कलापी।
मूर्ख-अज्ञ, अबोध, गॅवार, मूढ़।।
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मल्लाह–नाविक, माँझी, खेवट, कर्णधार, केवट।
महादेव-शिव, शम्भू, शंकर, महेश, त्रिलोचन, त्रिनेत्र, पशुपति, उमापति, कैलाशपति, रूद्र, भूतनाथ, नीलकण्ठ, पिनाकी।
यत्न-उद्यम, प्रयास, उद्योग, प्रयत्न, पुरुषार्थ।
यमुना [2014]-यम की बहन, नदी, कालिन्दी, दुर्गा।
यौवन-जवानी, युवावस्था, जीवन, शिरोमणि, तरुणाई।
युवक-जवान, युवा, तरुण।।
युद्ध-रण, संग्राम, लड़ाई, समर, संगर।
रात्रि [2012, 15, 16]–यामिनी, विभावरी, निशि, क्षपा, रात, रजनी, निशा।।
राजा-नरेश, भूपति, भूपाल, नरेन्द्र, महीपाल. नृप, नृपति, महीप।।
लक्ष्मी-इन्दिरा, कमला, रमा, हरिप्रिया, श्री।
लंहू-रक्त, खून, शोणित, रुधिर।।
लता [2016]-बेल, शोरा, वल्ली, आरोही, द्राक्षा।
वायु 2011, 12, 13, 15]-अनिल, वात, मारुत, पवमान, समीरण, हवा, पवन, प्रकम्पन, समीर।
वृक्ष [2017]-रुख, विटप, द्रुम, पादप, तरु, पेड़।
वज्र [2014, 18]-अश्मि, पवि, कुलिश।
वन [2011, 12, 13]-विपिन, जंगल, कानन, अटवी, अरण्य।
वर्ष-अब्द, साल, बरस, संवत्।।
वसन [2017]-वस्त्र, आवरण, चीर।
वानर [2018]–बन्दर, कपि, हरि, मर्कट, शाखामृग।
वर्षा (2016)–बारिश, बरसात, बौछारे, (UPBoardSolutions.com) वृष्टि।
विष्णु [2016, 18]-नारायण, जनदिन, चक्रपाणि, माधव, केशव।
व्यर्थ-निरर्थक, अर्थहीन, फ़िजूल।
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शत्रु-रिपु, दुश्मन, विपक्षी, अरि, वैरी, अराति।
शरीर-देह, काया, कलेवर, तन, वपु।।
शहद [2014]–मधु, अमृत, सुधा, घी।
शोभा–छवि, दीप्ति, कान्ति, सुषमा, आभा, छटा।
शिव [2017]–महादेव, शंकर, शम्भू, त्रिलोचन, महेश।
सेना –अनी, दल, चमू, कटेक, फौज।
सोना [2014]–हेम, हिरण्य, कंचन, स्वर्ण, कनक, कुन्दन।।
सूरज [2012, 13, 14, 16, 17, 18]–भानु, भास्कर, सूर्य, दिनेश, दिनकर, आदित्य, प्रभाकर, रवि, दिवाकर।
सूर [2017]-देवता, वसु, आदित्य।।
समुद्र [2012, 13, 14]-सागर, सिन्धु, रत्नाकर, उदधि, जलधि, जलनिधि, पारावार, अम्बुधि।
सिंह-हरि, शेर, केसरी, शार्दूल, व्याघ्र, केहरि, मृगेन्द्र, मृगराज, पंचानन।
स्वर्ग-द्युलोक, बैकुण्ठ, सुरलोक, देवलोक।
सवेरा–सूर्योदय, अरुणोदय, प्रातः, उषा, भोर।
साँप [2012, 14, 17]–नाग, फणि, व्याल, सर्प, अहि, भुजंग, पन्नग, विषधर।
संसार [2013]–विश्व, जगत, जग, दुनिया, (UPBoardSolutions.com) भव, भुवन।
सुगन्धि–सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू।
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सरस्वती-शारदा, भारती, गिरा, वाणी।
सन्तान-सन्तति, अपत्य, प्रजा, प्रसूति, औलाद।
हंस [2014]–मराल, कलहंस, मानसौकस।
हाथ [2016]-हस्त, कर, पाणिः ।
हिरण [2014, 18]–कुरंग, सारंग, मृग।
हाथी [2014, 17, 18]-दन्ती, कुंजर, द्विरद, द्विप, मतंग, हस्ती, गज, करी।
हनुमान-अंजनीनन्दन, कपीश्वर, पवनसुत, वज्रांगी, महावीर, बजरंगबली।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi तत्सम शब्द

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तत्सम शब्द

नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 2 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।
ध्यातव्य – प्रस्तुत प्रकरण के अन्तर्गत शब्द-रचना/शब्द-भण्डार से सम्बन्धित सामग्री किंचित विस्तार से दी गयी है। विद्यार्थियों को ज्ञान-बोध के लिए सम्पूर्ण सामग्री का अध्ययन करना चाहिए।

शब्द–निश्चित अर्थ को प्रकट करने वाले स्वतन्त्र वर्ण-समूह को शब्द कहते हैं; जैसे–घर, मकानं, विद्यालय, सुन्दरता आदि। ये सभी शब्द वर्गों के मेल से बने हैं। इनका अपना निश्चित अर्थ है। ये स्वयं में स्वतन्त्र इकाइयाँ हैं।

शब्दों का महत्त्व—जिस प्रकार व्यक्ति के बिना समाज नहीं बन सकता, बूंद के बिना जल नहीं बन सकता, उसी प्रकार शब्द के बिना भाषा का निर्माण नहीं हो सकता। हमारे प्रत्येक भाव या विचार शब्दों के द्वारा प्रकट होते हैं। (UPBoardSolutions.com) शब्दों के बिना हम अपनी बात दूसरों तक नहीं पहुँचा सकते।।

शब्द-भण्डार–किसी भाषा में प्रयुक्त हो रहे या हो सकने वाले सभी शब्दों के समूह को उस भाषा का ‘शब्द-भण्डार’ कहते हैं। किसी भाषा के सभी शब्दों की गिनती करना सम्भव नहीं है। कारण यह है कि समय के साथ-साथ कुछ शब्दों का प्रयोग समाप्त होता रहता है तथा कुछ नये शब्द बढ़ते रहते हैं। उदाहरणार्थ-रत्ती, तोला, छटाँक, सेर आदि शब्द आजकल बाह्य (आउट ऑफ डेट) हो गये हैं। इसलिए इनका महत्त्व समाप्त होता जा रहा है। दूसरी ओर, (UPBoardSolutions.com) नयी सभ्यता के साथ-साथ टी०वी०, दूरदर्शन, वीडियो, पॉलीथिन, ऑडियो आदि शब्दों का प्रचलन बढ़ रहा है।

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शब्द-भण्डार का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है-

  1. इतिहास या स्रोत के आधार पर,
  2. चना के आधार पर,
  3. योग के आधार पर,
  4. करणिक प्रकार्य के आधार पर तथा
  5. अर्थ के आधार पर।

इतिहास या स्रोत की दृष्टि से वर्गीकरण

हिन्दी की शब्दावली मुख्यत: चार स्रोतों से आयी है। ये स्रोत हैं–तत्सम (संस्कृत), तद्भव, देशी भाषाएँ और विदेशी भाषाएँ। इन्हीं के आधार पर हिन्दी के शब्दों को भी चार भागों में बाँटा जाता है– तत्सम, तद्भव, देशी तथा विदेशी।

1. तत्सम शब्द-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द, जो हिन्दी में भी अपने मूल रूप में प्रचलित हैं, तत्सम कहलाते हैं; जैसे–पुष्प, पुस्तक, बालक, कन्या, विद्या, साधु, आत्मा, तपस्वी, विद्वान, राजा, पृथ्वी, नेता, माता, अहंकार, नवीन, सुन्दर, सहसा, नित्य, अकस्मात् आदि।।

इनके अतिरिक्त जिन संस्कृत शब्दों में संस्कृत के ही प्रत्यय लगाकर नवीन शब्दों का निर्माण किया गया है, वे भी तत्सम शब्द कहलाते हैं; जैसे-आकाशवाणी, दूरदर्शन, आयुक्त, उत्पादनशील, क्रयशक्ति, प्रौद्योगिकी आदि।

संस्कृत भाषा ने अपने समय में जिन शब्दों को अन्य भाषाओं से लिया था, उन्हें (UPBoardSolutions.com) भी हम तत्सम मानते हैं। ऐसे कुछ शब्द हैं-केन्द्र, यवन, असुर, पुष्प, नीर, गण, मर्कट, रात्रि, गंगा, कदली, ताम्बूल, दीनार, सिन्दूर, मुद्रा, तीर आदि।

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2. तद्भव शब्द-संस्कृत के जो शब्द प्राकृत, अपभ्रंश, पुरानी हिन्दी आदि सोपानों से गुजरने के कारण आज हिन्दी में परिवर्तित रूप में मिल रहे हैं, वे तद्भव कहलाते हैं। हिन्दी में प्रचलित कुछ तद्भव शब्द मूल संस्कृत रूपों के साथ नीचे दिये जा रहे हैं-
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3.देशी या देशज शब्द-देशी या देशज शब्द वे हैं, जिनका स्रोत संस्कृत नहीं है, बल्कि वे भारत के ग्राम्य क्षेत्रों और जनजातियों में बोली जाने वाली देशी बोलियों में से लिये गये हैं। इनका स्रोत अज्ञात है; जैसे—झाडू, टट्टी, ठोकर, भोंपू, अटकल, भोंदू, पगड़ी, लोटा, झोला, टाँग, ठेठ, पेट, खिड़की, झंझट, थप्पड़, थूकं, चीनी आदि।

4. आगत (विदेशी) शब्द-हिन्दी में अरबी, फ़ारसी, अंग्रेज़ी भाषा के शब्द (UPBoardSolutions.com) प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसका कारण यह है कि इन भाषाभाषियों ने भारत पर पर्याप्त समय तक राज्य किया। इनके अतिरिक्त ग्रीक, तुर्की, पुर्तगाली तथा फ्रांसीसी भाषा के शब्द भी यत्र-तत्र मिल जाते हैं।

उपर्युक्त प्रमुख स्रोतों के अतिरिक्त शब्दों के निर्माण में निम्नलिखित विधियों का भी प्रयोग हुआ है-

अनुकरणात्मक शब्द-खटखटाना, फ़ड़फड़ाना, फुफकार, ठसक आदि।
संकर शब्द-दो विभिन्न स्रोतों से आये शब्दों को मिलाकर जो शब्द बनते हैं, उन्हें ‘संकर’ कहते हैं; जैसे-
हिन्दी और संस्कृत-वर्षगाँठ, माँगपत्र, कपड़ा-उद्योग, पूँजीपति आदि।
हिन्दी और विदेशी–किताबघर, घड़ीसाज, थानेदार, बैठकबाज, रेलगाड़ी, पानदान आदि।
संस्कृत और विदेशी–रेलयात्री, योजना कमीशन, कृषि, मजदूर, (UPBoardSolutions.com) रेडियोतरंग, छायादार आदि।
अरबी/फ़ारसी और अंग्रेज़ी-अफ़सरशाही, बीमापॉलिसी, पार्टीबाजी, सीलबंद आदि।

रचना के आधार पर वर्गीकरण

रचना की दृष्टि से शब्द दो प्रकार के होते हैं-

  1. मूल शब्द तथा
  2. व्युत्पन्न शब्द।

1. मूल शब्द–इन्हें रूढ़ भी कहते हैं। ये स्वतन्त्र और अपने में पूर्ण होते हैं। इनकी रचना अन्य किसी शब्द या शब्दांश की सहायता से नहीं होती। इसलिए इनके सार्थक खण्ड नहीं हो सकते; जैसे-सेना, फूल, कुत्ता, कुरसी, दिन, किताब, घर, मुँह, काला, घड़ा, (UPBoardSolutions.com) घोड़ा, जल, कमल, कपड़ी, घास आदि।

2. व्युत्पन्न शब्द-व्युत्पन्न का अर्थ है-उत्पन्न। दो या अधिक शब्दों अथवा शब्दांशों के योग से बने शब्द ‘व्युत्पन्न’ कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-यौगिक तथा योगरूढ़।

यौगिक शब्द-जो शब्द किसी शब्द में अन्य शब्द या शब्दांश (उपसर्ग, प्रत्यय) लगाने से उत्पन्न होते हैं, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं; जैसे–

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योगरूढ़ शब्द-जिन यौगिक शब्दों का एक रूढ़ अर्थ हो गया है और अपने विशिष्ट अर्थ में उनका प्रयोग होने लगा है, ऐसे शब्द योगरूढ़ कहे जाते हैं; उदाहरण के लिए-पंकज एक यौगिक शब्द है जिसमें एक शब्द पंक (कीचड़) और प्रत्यय-ज (से उत्पन्न) है। इस यौगिक का सामान्य अर्थ है-कीचड़ से उत्पन्न वस्तु। परन्तु यह शब्द केवल ‘कमल’ के लिए रूढ़ हो गया है। इसलिए यह योगरूढ़ है।
बहुव्रीहि समास के सभी शब्द योगरूढ़ के ही उदाहरण हैं; यथा–
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प्रयोग के आधार पर वर्गीकरण

प्रयोग की दृष्टि से शब्दों को निम्नलिखित दो वर्गों में बाँटा जा सकता है–

1. सामान्य शब्द-सामान्य शब्दावली वह शब्दावली है जिसका प्रयोग सामान्य जन अपने दैनिक कार्य-व्यवहार में करते हैं। ऐसी शब्दावली प्राय: अधिक प्रचलित होती है तथा लोक-व्यवहार से इसका ज्ञान होता है; उदाहरणार्थ
हाथ, नाक, पैर, रेडियो, स्कूल, कॉलेज, माता-पिता, ईश्वर, दुकान, नमक, चीनी, साइकिल, चाचा, मामा, मेज, कुर्सी, सुबह, शाम, घर, बाज़ार, दाल, भात आदि।

2. पारिभाषिक शब्द-इसे तकनीकी शब्दावली भी कहते हैं। पारिभाषिक (UPBoardSolutions.com) शब्द का अर्थ है- ऐसे शब्द, जिनकी परिभाषा सुनिश्चित हो। ये शब्द किसी एक शास्त्र से सम्बन्धित होते हैं तथा एक ही सुनिश्चित अर्थ का वहन करते हैं।

विज्ञान से सम्बन्धित पारिभाषिक शब्द निम्नवत् हैं-
बल, रेखा, अनुक्रिया, प्रदूषण, पर्यावरण।।
प्रशासन से सम्बन्धित पारिभाषिक शब्द निम्नवत् हैं
आयोग, कनिष्ठ, वरिष्ठ, पदोन्नति, बन्धपत्र, कार्यवृत्त, सीमा-शुल्क आदि।
राजनीतिशास्त्र से सम्बन्धित पारिभाषिक शब्द निम्नवत् हैं-
राज्य, राष्ट्रपति, राज्यपाल, संविधान, महान्यायवादी आदि।
साहित्य से सम्बन्धित पारिभाषिक (UPBoardSolutions.com) शब्द निम्नवत् हैं—
छायावाद, दोहा, रूपक, उपमा, समास, सन्धि, साधारणीकरण आदि।

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व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर वर्गीकरण

व्याकरणिक दृष्टि से शब्दों को उनके प्रकार्य के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है—

  1. विकारी तथा
  2. अविकारी।

(1) विकारी शब्द-जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक अथवा काल (UPBoardSolutions.com) आदि के अनुसार परिवर्तन या विकार होता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया विकारी शब्द हैं। निम्नलिखित उदाहरण देखिए-

(क) संज्ञा-
लड़का-लड़के, लड़कों, लड़कपन।
लड़की-लड़कियाँ, लड़कियों।
माता-माताएँ, माताओं।

(ख) सर्वनाम-
मैं-मुझ (को); मुझे; मेरा।
यह–उस (को); उन्हें; ये—उन्होंने।

(ग) विशेषण-
अच्छा-अच्छे, अच्छी, अच्छों।

(घ) क्रिया-
जाना—जाऊँगा, जाता हूँ, जाएँ, जाओ, जाते आदि।

(2) अविकारी शब्द अथवा अव्यय-जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक अथवा काल आदि के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता, वे अविकारी शब्द अथवा अव्यय कहलाते हैं। क्रिया-विशेषण, सम्बन्धसूचक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक शब्द अविकारी शब्द अथवा अव्यय हैं। उदाहरणार्थ

  • क्रिया-विशेषण-जो शब्द क्रिया की विशेषता को प्रकट करें, उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं; जैसे-धीरे, सहसा, इधर, कहाँ, अधिक आदि।
  • सम्बन्धसूचक-जो अव्यय शब्द संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों के साथ सम्बन्ध प्रकट करें, उन्हें सम्बन्धसूचक कहते हैं; जैसे-तक, भर, यहाँ, साथ आदि।
  • समुच्चयबोधक-जो अव्यय शब्द दो या अधिक शब्दों और वाक्यों को जोड़ते हैं, (UPBoardSolutions.com) उन्हें समुच्चयबोधक कहते हैं; जैसे—तथा, और, किन्तु, अथवा आदि।
  • विस्मयादिबोधक-विस्मय, पीड़ा, हर्ष, शोक, घृणा आदि मानसिक भावों को प्रकट करने वाले शब्द विस्मयादिबोधक कहलाते हैं; जैसे–अहो ! ओहो ! छी-छी ! आदि।

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अर्थ के आधार पर वर्गीकरण

शब्द भाषा की लघुतम सार्थक इकाई है। इसका अर्थ से केवल एक ही निश्चित सम्बन्ध नहीं होता। किसी शब्द का एक निश्चित अर्थ होता है, किसी के एक से अधिक अर्थ होते हैं तथा किसी शब्द के समानार्थी शब्दों की उपलब्धता रहती है। कुछ शब्द अन्य शब्दों (UPBoardSolutions.com) के विरोधी भाव को प्रकट करते हैं। इस प्रकार शब्द के निम्नलिखित चार भेद हो जाते हैं-

  1. पर्यायवाची शब्द,
  2. विलोमार्थी शब्द,
  3. एकार्थी शब्द तथा
  4. अनेकार्थी शब्द।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi समास

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समास

नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 2 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।

ध्यातव्य-पाठ्यक्रम में केवल द्वन्द्व, द्विगु, कर्मधारय तथा बहुव्रीहि समास ही निर्धारित हैं, अतः यहाँ केवल उन्हीं का विस्तृत वर्णन किया जा रहा है।

उपसर्ग तथा प्रत्यय की तरह समास भी यौगिक शब्द बनाते हैं। परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बनने वाले एक स्वतन्त्र शब्द को समास Samas कहते हैं; जैसे-दही-बड़ा, राजकुमार, पीताम्बर, धरोहर, दैनिक, गंगा-तट आदि। समास शब्द संस्कृत का है जो ‘अस्’ धातु में ‘सम्’ उपसर्ग तथा ‘घञ्’ प्रत्यय लगकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “संक्षिप्त करना। समास में किसी प्रकार का अर्थ (UPBoardSolutions.com) परिवर्तन नहीं होता। संक्षिप्त किये गये शब्दों को ‘समस्त पद’ या ‘सामासिक शब्द’ कहते हैं।

विशेषताएँ–समास की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं

(1) हिन्दी में समास प्राय: दो शब्दों से बनते हैं। इसके विपरीत संस्कृत में समास अनेक शब्दों से बनते हैं और पर्याप्त लम्बे-लम्बे भी होते हैं। हिन्दी में सम्भवत: ‘सुत-बित-नारि-भवन-परिवारा’ ही सबसे लम्बा समास है।

(2) समास कुछ अपवादों को छोड़कर प्राय: दो सजातीय शब्दों में ही होता है; जैसे—रसोईघर एवं पाठशाला शब्द ही बन सकते हैं; रसोईशाला’ तथा ‘पाठघर’ नहीं बन सकते।

(3) सामासिक शब्द या तो मिलाकर लिखे जाते हैं या दोनों के बीच योजक-चिह्न लगाकर; जैसे–घरबार, दहीबड़ा अथवा घर-बार, दही-बड़ा आदि।

(4) किसी शब्द में समास ज्ञात करने के लिए समस्त पद के खण्डों को अलग-अलग करना पड़ता है, जिसे विग्रह कहते हैं; जैसे–माँ-बाप’ का विग्रह माँ और बाप तथा गंगा-तट’ का विग्रह गंगा की तट है।

(5) सामासिक शब्द बनाते समय दोनों शब्दों के बीच की विभक्तियाँ या योजक आदि अव्यय शब्दों का लोप हो जाता है।

(6) समास बहुधा वहीं होता है, जहाँ परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दो या अधिक शब्द मिलकर एक तीसरा सार्थक शब्द बनाते हैं।

(7) समास के दोनों शब्दों (पदों) को क्रमशः पूर्व-पद अर्थात् (UPBoardSolutions.com) पहला पद तथा उत्तर-पद अर्थात् दूसरा । पद कहते हैं; जैसे-‘राम-लक्ष्मण’ शब्द में ‘राम’ पूर्व-पद है और लक्ष्मण उत्तरं-पद है।

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(8) हिन्दी में मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन प्रकार के सामासिक शब्द ही प्रयोग में आते हैं-

  • संस्कृत के-यथाशक्ति, पीताम्बर, मनसिज, पुरुषोत्तम आदि।
  • हिन्दी के–अनबन, नील-कमल, बैल-गाड़ी आदि।
  • उर्दू-फ़ारसी आदि के–खुशबू, सौदागर, बेशक, लाइलाज आदि।

इसके अतिरिक्त हिन्दी में रेलवे स्टेशन, बुकिंग ऑफिस, टिकट चेकर आदि इंग्लिश शब्द तथा कुछ संकर शब्द भी प्रयोग में आते हैं; जैसे—बस अड्डा, पुलिस चौकी, चकबन्दी, गुरुडम, पार्टीबाज आदि।

(9) सामासिक शब्दों में पुंल्लिग शब्द पहले और स्त्रीलिंग शब्द बाद में आते हैं; जैसे-लोटा-थाली, देखा-देखी, भाई-बहन, दूध-रोटी आदि।

(10) कभी-कभी विग्रह के आधार पर एक ही शब्द कई (UPBoardSolutions.com) समासों का उदाहरण हो जाता है। जैसे-पीताम्बर का विग्रह यदि “पीत है जो अम्बर’ करें तो कर्मधारय तथा “पीत हैं अम्बर (वस्त्र जिसके) अर्थात् कृष्ण’ करें तो बहुव्रीहि होगा।

भेद–पदों की प्रधानता के आधार पर समास के निम्नलिखित चार भेद किये जाते हैं.

  1. पहला पद प्रधान–अव्ययीभाव
  2. दूसरा पद प्रधान—तत्पुरुष
  3. दोनों पद प्रधान–द्वन्द्व
  4. कोई भी पद प्रधान नहीं-बहुव्रीहि

इन चारों प्रमुख भेदों के अतिरिक्त कर्मधारय और द्विगु दो समास और भी हैं, जिन्हें विद्वद्वर्ग तत्पुरुष के भेद बताता है। इनको मिलाकर समास के छ: भेद हो जाते हैं

  1. अव्ययीभाव
  2. तत्पुरुष
  3. कर्मधारय
  4. द्विगु
  5. द्वन्द्व
  6. बहुव्रीहि

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1. कर्मधारय समास

जिस तत्पुरुष में एक पद उपमेय या विशेषण हो तथा दूसरा पद उपमान या विशेष्य हो, उसे ‘कर्मधारय समास’ कहते हैं। कर्मधारय समास के दो भेद होते हैं–

  1. विशेषण-विशेष्य कर्मधारय तथा
  2.  उपमानउपमेय कर्मधारय।

उदाहरण-

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2. द्विगु समास

जिस समास में पहला पद संख्यावाचक (गिनती बताने वाला) हो, दोनों पदों के बीच विशेषणविशेष्य सम्बन्ध हो और समस्तपद समूह या समाहार का ज्ञान कराये, उसे द्विगु समास कहते हैं।
उदाहरण—

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3. बहुव्रीहि समास

जिस समास में न तो पूर्व पद प्रधान होता है, न उत्तर पद; वरन् समस्तपद किसी अन्य पद का विशेषण होता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं; जैसे-पीताम्बर’। इसका विग्रह हुआ-पीत् + अम्बर = पीला है। वस्त्र जिसका (कृष्ण)। यहाँ न ‘पीत’ प्रधान है, न (UPBoardSolutions.com) ‘अम्बर’; वरन् पीले वस्त्र वाला कृष्ण प्रधान है, अतः यहाँ बहुव्रीहि समास है।
उदाहरण–

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4. द्वन्द्व समास

जिस समास में दोनों पद समान हों, वहाँ द्वन्द्व समास होता है। द्वन्द्व में दो शब्दों का मेल होता है। समास होने पर दोनों को मिलाने वाले ‘और’ या अन्य समुच्चयबोधक अव्यय का लोप हो जाता है।
उदाहरण-
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समास से सम्बन्धित अतिरिक्त सामग्री

प्रश्न 1
निम्नलिखित में विग्रहसहित समास बताइए-
दीनदयाल, मन-मयूर, श्रेय-प्रेय, नयनाभिराम, दृष्टिपात, तहखाना, स्वर्णकलश, महाशय, सायंकाल, जल-प्लावन, विद्यार्थी, पुनरावृत्ति, चिन्ताग्रस्त, पवनपुत्र।
उत्तर
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प्रश्न 2
निम्नलिखित में नामसहित समास-विग्रह कीजिए–
ताम्रपत्र, शौर्यपूर्ण, जीवन-दर्पण, राजमार्ग, रस-मग्न, देशकाल, तुलसीकृत, सत्याग्रह।
उत्तर
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प्रश्न 3
निम्नलिखित में समास-विग्रह कीजिए और बताइए कि इनमें कौन-सा समास है ? हिमालय, शीर्षासन, जलराशि, पर्वतमाला, तन्द्रालस, प्रसन्नक्दन।
उत्तर
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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 12 (Section 3)

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 12 मानवीय संसाधन : सेवाएँ, परिवहन, दूरसंचार, व्यापार (अनुभाग – तीन)

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में वायु परिवहन सेवा का वर्णन और परीक्षण कीजिए।
या
वायु परिवहन के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
या
वायु परिवहन आजकल अधिक उपयोगी क्यों है? कोई तीन बिन्दु लिखिए। [2017]
उत्तर :

भारत में वायु परिवहन

आधुनिक परिवहन साधनों में वायु परिवहन सबसे तीव्रगामी साधन है। दुर्गम क्षेत्रों; जैसे–पर्वत, सघन वन एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में रेल एवं सड़क-मार्गों का विकास करना असम्भव लगता है, परन्तु वायु परिवहन द्वारा इन क्षेत्रों को सरलता से जोड़ा जा सकता है। वर्तमान युग में किसी भी राष्ट्र के त्वरित आर्थिक विकास हेतु इसके महत्त्व को कम करके नहीं आँका जा सकता। भारत में वायु परिवहन का विकास सन् 1920 (UPBoardSolutions.com) से प्रारम्भ  हुआ, किन्तु स्वतन्त्रता से पूर्व इसका उपयोग अधिकतर सैनिक कार्यों के लिए ही किया जाता था। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद सरकार ने वायु परिवहन के विकास हेतु एक समिति का गठन किया, जिसके सुझाव पर 1953 ई० में वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। वर्तमान में सभी विमान कम्पनियों को निम्नलिखित तीन निगमों में विभाजित कर दिया गया

1. इण्डियन ( इण्डियन एयरलाइन्स) – इसका प्रमुख कार्य देश के भीतरी भागों में वायु सेवाओं का संचालन करना है। इसे कुछ पड़ोसी देशों से भी वायु सेवा सम्पर्क का दायित्व सौंपा गया है। इसका प्रधान कार्यालय नयी दिल्ली में है। इस निगम की सेवाएँ दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता एवं चेन्नई वायु-पत्तनों से संचालित की जाती हैं। इसके विमान में हम देश के प्रमुख नगरों तथा पड़ोसी देशों के बीच उड़ान भरते हैं। ये सेवाएँ 16 विदेशी केन्द्रों तथा 79 राष्ट्रीय केन्द्रों को विमान सेवा प्रदान करती हैं। वर्तमान समय में प्राइवेट एयरलाइन्स भी अन्तर्देशीय विमान सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं। वर्तमान में इस निगम के नियन्त्रण में 70 से अधिक विमानों का बेड़ा है तथा इसका नाम परिवर्तित (इण्डियन) कर दिया गया है।

वायुदूत – 20 जनवरी, 1981 ई० को वायुदूत नामक निगम उत्तर-पूर्वी राज्यों के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास हेतु स्थापित किया गया। बाद में वर्ष 1992-93 में वायुदूत का विलय इण्डियन एयरलाइन्स में कर दिया।

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2. एयर इण्डिया – इस निगम को लम्बी दूरी के अन्तर्राष्ट्रीय मार्गों पर वायु सेवाओं के संचालन का दायित्व सौंपा गया है। भारत में आने वाली अन्य अन्तर्राष्ट्रीय एयरलाइन्स भी. अन्तर्राष्ट्रीय सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं। एयर इण्डिया लि० द्वारा संचालित 4 वायुमार्ग निम्नलिखित हैं

  • मुम्बई-काहिरा-रोम-जेनेवा-पेरिस-लन्दन।
  • दिल्ली-अमृतसर-काबुल-मास्को।
  • कोलकाता-सिंगापुर-सिडनी-पर्थ।
  • मुम्बई-काहिरा-रोम-डसेलडर्फ-लन्दन-न्यूयॉर्क।

अन्तर्राष्ट्रीय उड़ान भरने के लिए एयर इण्डिया के पास 32 विमान हैं। वर्ष 2002-03 में इसने लगभग तेंतीस लाख यात्रियों को उनके गन्तव्य तक पहुँचाया है।

3. पवन हंस हेलीकॉप्टर्स लि० – इसकी स्थापना 15 अक्टूबर, 1985 ई० को की गयी थी। यह पेट्रोलियम क्षेत्र, जिनमें ओ०एन०जी०सी० और ऑयल इण्डिया लि० सम्मिलित हैं, को सहायतार्थ सेवाएँ उपलब्ध कराता है तथा देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के दूरस्थ और दुर्गम (UPBoardSolutions.com) क्षेत्रों को जोड़ता है। यह अन्य ग्राहकों; जैसे राज्य और संघ राज्य क्षेत्र सरकारें, सरकारी क्षेत्र के उपक्रम और निजी क्षेत्र की कम्पनियों को भी सेवाएँ उपलब्ध कराता है। वर्तमान में इस निगम के पास तीस से अधिक हेलीकॉप्टर

इसके अतिरिक्त देश में निजी वायु सेवाएँ भी संचालित हो रही हैं। निजी वायु सेवाओं में सहा एयरवेज, जेट एयरवेज आदि हैं। लगभग 41 निजी एयर लाइनें, एयर-टैक्सी और घरेलू वायुयानों से घरेलू हवाई यातायात के 42% भाग संचालित हो रहे हैं।

महत्त्व
वायु परिवहन वैज्ञानिक युग का एक आश्चर्यजनक आविष्कार है। परिवहन के इस तीव्रगामी साधन ने समय’ और ‘दूरी की समस्या के समाधान में अद्वितीय योगदान दिया है। वर्तमान समय में वायु परिवहन का महत्त्व निम्नलिखित बातों से भली-भाँति स्पष्ट हो जाएगा–

1. बहुमूल्य तथा हल्की वस्तुओं का स्थानान्तरण – वायु परिवहन द्वारा मूल्यवान, हल्की व शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं को कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान को भेजा जा सकता है।

2. न्यूनतम मार्ग व्यय – 
परिवहन के अन्य साधनों; जैसे–रेलों, सड़कों आदि की तरह वायु परिवहन के लिए मार्ग बनाने का कोई व्यय नहीं करना पड़ता। केवल हवाई अड्डे बनाने पड़ते हैं।

3. भौगोलिक बाधाओं से मुक्ति – 
वायुयानों के मार्ग में वनों, रेगिस्तानों, दलदली भूमि, बर्फीले प्रदेशों, पहाड़ों, नदियों, समुद्रों आदि से कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती। इस प्रकार परिवहन का यह साधन भौगोलिक बाधाओं से मुक्त है।

4. कृषि में सहायक – 
अमेरिका, ऑस्ट्रिया आदि विकसित राष्ट्रों में अनाज बोने तथा खेतों में खाद डालने में वायुयानों की सहायता ली जाती है। फसलों में बीमारियों के फैलने पर वायुयानों द्वारा कीटनाशक दवाइयाँ छिड़ककर फसलों की (UPBoardSolutions.com) रक्षा की जाती है।

5. व्यावसायिक लाभ – 
विमान दूरस्थ स्थानों पर मूल्यवान वस्तुओं को शीघ्रता से कम जोखिम तथा कम समय में पहुँचाकर उनके बाजार-क्षेत्र का विस्तार करने में सहायक होते हैं।

6. शान्ति और व्यवस्था की स्थापना – 
देश के किसी भी भाग में अशान्ति तथा अव्यवस्था (दंगे आदि) की स्थिति उत्पन्न हो जाने पर विमानों द्वारा सैनिक, हथियार आदि भेजकर स्थिति पर शीघ्रता से नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है।

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7. प्राकृतिक विपत्तियों में सहायक – 
बाढ़, अकाल, भूकम्प, अनावृष्टि आदि विपत्तियों के समय विमानों द्वारा शीघ्रता से जीवन-रक्षक सामग्री पहुँचाकर जनता की प्रार्णरक्षा की जा सकती है।

8. सैनिक दृष्टि से युद्ध स्थल तक गोला – 
बारूद, अस्त्र-शस्त्र व सैनिकों को पहुँचाने, सैनिकों को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालने, शत्रु-सेना पर बमबारी करने आदि में वायु परिवहन का अत्यधिक महत्त्व है।

9. डाक सेवा – 
‘वायु डाक सेवा’ द्वारा डाक को लाने व ले जाने में समय की बहुत अधिक बचत होती है।

10. पर्यटन का विकास – 
अधिकांश विदेशी पर्यटक (UPBoardSolutions.com) देश के दर्शनीय स्थानों को देखने के लिए विमानों द्वारा जाते हैं, जिससे देश को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में अनेक परिवर्तन हुए हैं। भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

1. भारत का 90% अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्गों द्वारा सम्पन्न होता है। वायु, सड़क एवं रेल परिवहन का योगदान मात्र 10% है।
2. भारत के कुल निर्यात का 51.04% निर्यात एशिया और ओशियाना को हुआ। इसके बाद यूरोप 23.8% और अमेरिका 16.05% का स्थान रहा। उसी अवधि में भारत का आयात भी एशिया एवं ओशियाना से | सर्वाधिक 61.7% रहा, उसके बाद यूरोप 18.7% और अमेरिका (9.5%) का स्थान रहा।
3. भारत स्वतन्त्रता-प्राप्ति से पूर्व आयात अधिक करता था, परन्तु स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् आयात में वृद्धि के साथ-साथ निर्यात में भी वृद्धि हुई है।
4. भारत के आयात में मशीनें, खाद्य पदार्थ, खनिज तेल, इस्पात-निर्मित सामान, लम्बे रेशे की कपास, मोती एवं बहुमूल्य रत्न, सोना, चाँदी, रासायनिक पदार्थ एवं उर्वरक, कच्चा जूट, कागज व अखबारी कागज, रबड़, कल-पुर्जे तथा विद्युत उपकरण प्रमुख हैं।
5. भारत से सूती वस्त्र एवं सिले-सिलाए परिधान, जूट का सामान, चाय, चीनी, चमड़े की वस्तुएँ, वनस्पति तेल, खनिज पदार्थ, इंजीनियरिंग का सामान, मशीनी उपकरण, भारी संयन्त्र, परिवहन उपकरण, परियोजनागत सामान रत्न एवं आभूषण, खेल का सामान, उर्वरक, रबड़ की वस्तुएँ, मछली एवं उससे निर्मित वस्तुएँ, नारियल, काजू तथा गर्म मसाले आदि पदार्थ निर्यात किए जाते हैं।
6. स्वतन्त्रता-प्राप्ति से पूर्व भारत कच्चे माल का निर्यात अधिक (UPBoardSolutions.com) मात्रा में करता था, परन्तु स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् औद्योगीकरण में प्रगति होने के कारण अब तैयार माल विदेशों को भेजा जाने लगा है।
7. भारत में खनिज तेल की माँग निरन्तर बढ़ती जा रही है, जिससे उसका आयात भी निरन्तर बढ़ती जा रहा है। देश में सम्पूर्ण आयात का लगभग 34% भाग खनिज तेल का ही होता है।
8. भारत में खाद्यान्न के आयात में निरन्तर कमी आई है, क्योंकि यहाँ खाद्यान्नों के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। अब देश से गेहूँ एवं चावल का निर्यात समीपवर्ती देशों को भी किया जाने लगा है।
9. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत की भागीदारी घटती जा रही है। निर्यात व्यापार में यह भागीदारी मात्र 0.8 प्रतिशत है।
10. भारत का विदेश व्यापार अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों के आधार पर किया जाता है। देश का अधिकांश अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार केवल 35 देशों के मध्य होता है।
11. भारत का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार देश के पूर्वी तथा पश्चिमी तट पर स्थित 13 बड़े पत्तनों द्वारा सम्पन्न किया। जाता है। इनके अतिरिक्त 200 मध्यम एवं लघु आकार के पत्तन हैं जो अल्पमात्रा में विशिष्ट वस्तुओं का व्यापार करते हैं। मुम्बई सबसे बड़ा पत्तन है जो देश का लगभग 25% व्यापार सम्पन्न करता है। इसके भार को कम करने के लिए इसके समीप में ही न्हावाशेवा नामक एक नवीन पत्तन स्थापित किया गया है।
12. व्यापार में वृद्धि के लिए भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेता है तथा उनका आयोजन (UPBoardSolutions.com) अपने देश में भी करता रहता है।
13. भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आकार में तेजी से वृद्धि हो रही है।
14. सरकार निर्यात पर अधिक बल दे रही है, अतः उन्हीं कम्पनियों को आयात की छूट दी जा रही है जो निर्यात अधिक कर सकती हैं।
15. भारत विदेशी मुद्रा संकट का समाधान केवल निर्यात व्यापार को बढ़ाकर ही कर सकता है।
16. भारत अपने निर्यात व्यापार में वृद्धि करने के लिए प्रयत्नशील है।

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प्रश्न 3.
यातायात अथवा परिवहन के साधनों का उल्लेख कीजिए।
या
भारत में उपलब्ध परिवहन सेवाओं के नाम लिखिए तथा उनमें से किसी एक के विकास की विवेचना कीजिए। [2014]
या
परिवहन सेवाओं के तीनों भागों का वर्णन कीजिए। [2013]
उत्तर :

यातायात (परिवहन) के साधन

यातायात के साधनों से अभिप्राय उन साधनों से है जो लोगों, वस्तुओं, डाक आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। मोटे तौर पर यातायात के साधनों को निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है
1. थल यातायात – रेल यातायात तथा सड़क यातायात।
2. जल यातायात – आन्तरिक जलमार्ग तथा बाह्य जलमार्ग–नाव, जहाज, मोटर-बोट, स्टीमर आदि।
3. वायु यातायात – हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर आदि। तीनों (UPBoardSolutions.com) प्रकार के यातायात के साधनों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है
1. थल यातायात – इसके अन्तर्गत मुख्यतया दो प्रकार के यातायात के साधन आते हैं- (i) सड़क यातायात तथा (ii) रेल यातायात।

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(i) सड़क यातायात –
सड़क यातायात का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण साधन है। सड़कों पर कार, मोटर, टूक, रिक्शे, ताँगे, ठेले, पशु आदि के द्वारा लोगों तथा सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाया जाता है। सड़कें गाँवों, कस्बों तथा नगरों को एक-दूसरे से जोड़ती हैं। निर्माण की दृष्टि से सड़कें दो प्रकार की होती हैं-कच्ची सड़कें तथा पक्की सड़कें। प्रबन्ध की दृष्टि से पक्की सड़कों को भारत में पाँच वर्गों में बाँटा जाता है— (1) राष्ट्रीय राजमार्ग, (2) प्रान्तीय राजमार्ग, (3) जिला सड़कें, (4) ग्रामीण सड़कें तथा (5) सीमा सड़कें। देश में सड़कों की कुल लम्बाई लगभग 33 लाख किमी है।
(ii) रेल यातायात – आन्तरिक परिवहन की दृष्टि से भारतीय अर्थव्यवस्था में रेलों का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। भारत के रेल यातायात का एशिया महाद्वीप में प्रथम तथा विश्व में चौथा स्थान है। भारतीय रेलमार्गों की लम्बाई लगभग 63,221 किलोमीटर है। देश में प्रतिदिन लगभग 7,116 स्टेशनों के बीच 13 हजार गाड़ियाँ चलती हैं तथा लगभग 14.5 लाख किलोमीटर की दूरी तय . करती हैं। भारतीय रेल व्यवस्था में 16 लाख लोग लगे हुए हैं। कुशल प्रबन्ध हेतु भारत में रेल यातायात को 16 प्रशासनिक मण्डलों में विभाजित किया गया है। इस प्रतिष्ठान में सरकार की लगभग १ 9,000 करोड़ की पूंजी लगी हुई है।

2. जल यातायात – जलमार्गों के अनुसार जल यातायात को दो भागों में बाँटा जाता है—(i) आन्तरिक जल यातायात तथा (ii) समुद्री यातायात। देश के भीतरी भागों में नदियाँ तथा नहरें आन्तरिक जल परिवहन का मुख्य साधन हैं। गंगा, यमुना, घाघरा, (UPBoardSolutions.com) ब्रह्मपुत्र आदि समतल मैदानों में धीमी गति से बहने वाली नदियाँ नावें तथा स्टीमर चलाने के लिए उपयुक्त हैं। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल की नहरें तथा ओडिशा की तटीय नहरें आन्तरिक यातायात के लिए उपयोगी हैं। समुद्री यातायात का भारत में प्राचीन काल से ही महत्त्व रहा है। भारतीय जलयाने समुद्री मार्ग से दूर स्थित देशों को माल ले जाते हैं तथा वहाँ से ढोकर लाते हैं। समुद्री यातायात की सुविधा हेतु देश में बारह बड़े बन्दरगाह हैं, जिनमें छ: पूर्वी तट पर तथा छ: पश्चिमी तट पर हैं।

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3. वायु यातायात – इसे मुख्य रूप से निम्नलिखित भागों में विभाजित किया गया है–
(1) इण्डियन एयरलाइन्स निगम – यह निगम देश के आन्तरिक भागों तथा समीपवर्ती देशों पाकिस्तान, म्यांमार, नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव एवं श्रीलंका के साथ वायुमार्गों की व्यवस्था करता है। इस निगम का प्रधान कार्यालय नयी दिल्ली में है। वायुदूत-20 जनवरी, 1981 ई० से वायुदूत नामक निगम स्थापित किया गया। बाद में 1992-93 ई० में वायुदूत का विलय इण्डियन एयरलाइन्स (वर्तमान में इंडियन) में कर दिया गया।
(ii) एयर इण्डिया निगम – यह निगम विदेशों के लिए वायुमार्गों की व्यवस्था करता है तथा लगभग 97 देशों के साथ भारत का सम्बन्ध स्थापित करता है। इस निगम द्वारा संचालित 4 प्रमुख वायुमार्ग हैं—(1) मुम्बई-काहिरा-रोम-जेनेवा-पेरिस-लन्दन। (2) दिल्ली-अमृतसर-काबुल-मास्को।(3) कोलकाता-सिंगापुर-सिडनी–पर्थ।(4) मुम्बई-काहिरा-रोम-डसेलडर्फ-लन्दन-न्यूयॉर्क।
(iii) इसके पश्चात् पवन हंस लिमिटेड की स्थापना 15 अक्टूबर, 1985 ई० में हुई, जो दुर्गम क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों की सेवाएँ उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त देश में निजी वायु सेवाएँ भी संचालित हो रही हैं। लगभग 41 निजी एयर लाइनें एयर टैक्सी (UPBoardSolutions.com) और घरेलू वायुयानों से घरेलू हवाई यातायात के 42 प्रतिशत भाग को संचालित कर रहे हैं। वर्तमान में भारत में पाँच अन्तर्राष्ट्रीय तथा बीस से अधिक राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं।

प्रश्न 4.
संचार अथवा सन्देशवाहन के मुख्य साधनों का उल्लेख करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था पर इनके प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
या
आर्थिक विकास में संचार के प्रमुख साधनों का उल्लेख कीजिए तथा उनके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
या
भारत के मुख्य संचार साधनों का उल्लेख कीजिए।
या
संचार के माध्यमों में रेडियो तथा दूरदर्शन की उपयोगिता लिखिए।
या
भारतीय अर्थव्यवस्था पर परिवहन के साधनों के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
या
परिवहन तथा संचार के विभिन्न साधनों को किसी राष्ट्र तथा उसकी अर्थव्यवस्था की जीवन-रेखाएँ क्यों कहा जाता है ?
या
विश्व में भारत के बदलते स्तर का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए(i) परिवहन तथा (ii) दूरसंचार।
या
संचार सेवाओं का अर्थ, प्रकार तथा महत्त्व बताइए। [2018]

उत्तर :
भारत में संचार (सन्देशवाहन) के मुख्य साधन सन्देशवाहन के साधनों से अभिप्राय उन साधनों से है जिनके द्वारा हम कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर सूचना भेजते हैं। भारत के मुख्य सन्देशवाहन के साधन निम्नलिखित हैं|

1. डाक सेवा – 
भारत में डाक सेवा का संचालन (UPBoardSolutions.com) डाकघरों के माध्यम से भारत सरकार का केन्द्रीय संचार मन्त्रालय करता है। डाक-व्यवस्था के संचालन की सुविधा के लिए समस्त देश को 16 डाकसर्किलों में बाँटा गया है। डाक रेल, बस तथा वायुयान द्वारा ढोई जाती है। देश के लगभग सभी गाँवों में डाक सेवा की व्यवस्था कर दी गयी है। अब देश में लगभग 1.50 लाख से भी अधिक डाकघर हैं।

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2. तार सेवाएँ – 
भारत में तार सेवा लगभग 142 वर्ष पुरानी है। देश के लगभग सभी नगरों तथा कस्बों में तारघरों की व्यवस्था कर दी गयी है। भारत में तारघर डाक विभाग के अन्तर्गत आते हैं। इस समय देश में 62,000 तारघर हैं। अब अंग्रेजी के अतिरिक्त हिन्दी तथा क्षेत्रीय भाषाओं में भी तार भेजे जाने लगे हैं।

3. विदेशी तार (केबिलग्राम) – 
इसके अन्तर्गत तार की मोटी-मोटी लाइनें समुद्र के अन्दर बिछाई जाती हैं। फिर ऐसे बिछे हुए तारों द्वारा विदेशों को समाचार भेजे जाते हैं।

4. बेतार का तार – 
इस साधन द्वारा समाचार भेजने के लिए न तो भूमि पर तार के खम्भे गाड़ने पड़ते हैं। और ने समुद्र में तार बिछाने पड़ते हैं। इसके अन्तर्गत ट्रांजिस्टर जैसे वायरलेस यन्त्र की सहायता से वायु द्वारा ही समाचार भेज दिया जाता है।

5. टेलीफोन – 
टेलीफोन की सहायता से आप न केवल अपने देश के व्यक्तियों वरन् अन्य राष्ट्रों में रह . रहे व्यक्तियों से भी बातचीत कर सकते हैं। इस समय देश में लगभग 17 हजार टेलीफोन एक्सचेंज हैं। देश के 886 नगरों में एस०टी०डी० की सुविधा प्रदान की गयी है, जिसके अन्तर्गत सीधे डायल घुमाकर अन्य शहरों के व्यक्तियों से बातचीत की जा सकती है। विश्व के 178 देशों के साथ प्रत्यक्ष टेलीफोन सम्बन्ध स्थापित कर दिये गये हैं। वर्तमान में देश में फिक्स्ड लाइनें तथा सेल्युलर (मोबाइल) लाइनें एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगा रही हैं, जिसमें मोबाइल फोन सेवाएँ फिक्स्ड लाइन सेवाओं से बहुत आगे हैं।

6. रेडियो –
रेडियो व ट्रांजिस्टर की सहायता से घर बैठे ही विश्वव्यापी घटनाओं का पता लग जाता है। व्यावसायिक विज्ञापन, आवश्यक घोषणाएँ, मनोरंजन के साधन आदि के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। इसका केन्द्रीय कार्यालय नयी दिल्ली में है, जिसे ‘आकाशवाणी’ के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में देश की 99% जनसंख्या तक इसकी पहुँच हो गयी है। रेडियो मनोरंजन का सस्ता और उत्तम साधन भी है।

7. टेलीविजन या दूरदर्शन – 
भारत में टेलीविजन सेवा का प्रारम्भ 15 सितम्बर, 1959 ई० को नयी दिल्ली में किया गया था। अब देश में दूरदर्शन केन्द्रों का जाल बिछा दिया गया है। प्रमुख शहरों में दूरदर्शन प्रसारण केन्द्र स्थापित किये गये हैं। राष्ट्रीय महत्त्व के प्रसारण उपग्रह संचार व्यवस्था द्वारा समस्त देश में एक साथ प्रसारित किये जाते हैं। यह राष्ट्रीय एकीकरण का एक सशक्त माध्यम है। दूरदर्शन के देश में 900 से अधिक ट्रांसमीटर हैं तथा 90% जनसंख्या तक इसकी पहुँच भी हो चुकी है।

8. टेलेक्स सेवा – 
राष्ट्रीय टेलेक्स सेवा सन् 1963 में प्रारम्भ की गयी थी। अब देश में लगभग 332 टेलेक्स एक्सचेंज कार्य कर रहे हैं। इनके द्वारा टेलीप्रिंटर की सहायता से मुद्रित सन्देशों का आदान-प्रदान किया जाता है। इस व्यवस्था द्वारा विदेशों को भी सन्देशों का आदान-प्रदान सम्भव है।

9. विदेश संचार सेवा –
भारत की अन्य देशों के साथ दूर-संचार सेवाएँ, समुद्र पार संचार सेवा (O.C.S.) नामक कार्यालय द्वारा संचालित होती हैं, जिसके मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई तथा नयी दिल्ली में चार केन्द्र हैं। इसके अन्तर्गत उपग्रह के माध्यम से विदेशी तार, टेलेक्स, टेलीफोन, रेडियो, फोटो आदि की सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। सन् 1971 में पूना के निकट आर्वी तथा सन् 1976 में देहरादून में स्थापित दो उपग्रह भूकेन्द्रों की सहायता से (UPBoardSolutions.com) ओ०सी०एस० कार्यालय हिन्द महासागर में स्थित इण्टेलसेट के माध्यम से विदेश संचार सेवाएँ प्रदान करता है।

10. ई-मेल – 
इस साधन ने संचार-व्यवस्था को उन्नति की चरम सीमा पर पहुंचा दिया है। अब संसार के किसी भी कोने से, किसी भी कोने में सन्देश भेजा जा सकता है। आपकी अनुपस्थिति में भी आपको भेजा गया सन्देश स्वीकृत हो जाता है। इस समाचार को आप पढ़ सकते हैं और आवश्यक कार्यवाही कर सकते हैं।

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11. मुद्रण माध्यम – 
समाचार-पत्र तथा अन्य पत्र-पत्रिकाएँ जो दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक एवं मासिक रूप से प्रकाशित की जाती हैं, प्रमुख मुद्रण-संचार माध्यम हैं। प्रेस रजिस्ट्रार द्वारा जारी सन् 2001 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विभिन्न भाषाओं में 52,000 से भी अधिक समाचार-पत्र एवं पत्रिकाओं का प्रकाशन किया जा रहा था। ये देश की जनता, सरकार, व्यापार व उद्योग के बीच विचारों व सन्देशों के आदान-प्रदान के प्रभावी माध्यम हैं।

महत्त्व
संचार के साधनों का महत्त्व निम्नलिखित है

  • संचार के साधनों में रेडियो व दूरदर्शन देशवासियों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा भी प्रदान करते हैं।
  • संचार के साधन सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ जनता को जागरूक बनाने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
  • संचार के साधनों के माध्यम से मौसम सम्बन्धी भविष्यवाणी प्रसारित की जाती है, जिससे कृषि, यातायात व अन्य क्षेत्रों में होने वाली क्षति कम हो गयी है।
  • संचार के साधन व्यापार एवं वाणिज्य के विकास में सहायक तो हैं ही, इनके द्वारा पिछड़े क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायता मिलती है।
  • संचार के माध्यमों द्वारा जन-सामान्य को आर्थिक व वैज्ञानिक प्रगति की जानकारी मिलती है तथा देश में वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान का प्रसार होता है।
  • संचार के साधन समाज के विभिन्न वर्गों को परस्पर जोड़ने का कार्य भी करते हैं। इससे राष्ट्रीय एकता का वातावरण निर्मित होता है।
  • संचार के साधनों द्वारा विचारों का विनिमय होता है। (UPBoardSolutions.com) ये धन के स्थानान्तरण में भी सहायक हैं।
  • वर्तमान समय में संचार के साधनों द्वारा सर्वेक्षण, विज्ञापन, चेतावनी, परामर्श आदि दी जाने लगी हैं। इससे महामारियों पर नियन्त्रण पाने में भी सहायता मिली है।

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भारतीय अर्थव्यवस्था पर परिवहन तथा संचार-साधनों का प्रभाव

परिवहन के प्रमुख साधन सड़कें, रेलमार्ग, वायुमार्ग तथा जलमार्ग हैं। ये साधन किसी भी राष्ट्र की धमनियाँ होते हैं। देश का आर्थिक तथा सामाजिक विकास इन्हीं साधनों पर निर्भर करता है। परिवहन तथा संचार के साधन राष्ट्र में एक ऐसा संगठन खड़ा कर देते हैं, जो लोगों की गतिशीलता, माल का परिवहन तथा समाचारों के आदान-प्रदान में सहायक हों। यदि कृषि एवं उद्योग-धन्धे किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास में शरीर एवं हड्डियों की भाँति कार्य करते हैं तो परिवहन एवं संचार के साधन धमनियों तथा शिराओं की भाँति कार्य करते हैं। परिवहन एवं संचार-प्रणाली के ठप हो जाने से अर्थव्यवस्था मृतप्राय हो जाती है। इसीलिए इन्हें राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की जीवन-रेखाएँ कहा जाता है। राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में परिवहन तथा संचार के साधनों की भूमिका (प्रभाव) तथा महत्त्व निम्नलिखित हैं

1. आधुनिक औद्योगिक विकास के लिए परिवहन तथा संचार के साधन पहली आवश्यकता बन गये हैं। ये कच्चे माल को कारखानों तक तथा उनके द्वारा निर्मित माल को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।

2.
सड़कें, रेलें, जलमार्ग तथा वायुमार्ग परिवहन के विभिन्न साधन हैं, जब कि डाक-तार, रेडियो, टेलीविजन, दूरभाष, कृत्रिम उपग्रह आदि संचार के विभिन्न साधन हैं, जिन्होंने भावनात्मक एकता को बनाये रखकर देश में आर्थिक विकास की गति को बढ़ाया है।

3.
परिवहन तथा संचार के साधन वस्तुओं के उत्पादन एवं वितरण में सहायक हैं। इनसे लोगों की गतिशीलता में वृद्धि होती है, जिससे वे अधिक धनोपार्जन कर सकते हैं तथा उन्हें भावनात्मक सन्तोष प्राप्त होता है।

4.
परिवहन और संचार के द्रुतगामी एवं सूक्ष्म साधनों द्वारा आज पूरा संसार सिमटकर रह गया है। वह एक घर-परिवार की भाँति है, क्योंकि जब चाहें घर बैठे ही एक-दूसरे से बात कर सकते हैं अथवा कुछ ही घण्टों के अन्तराल में परस्पर मिल सकते हैं।

5.
इन साधनों के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में हुए (UPBoardSolutions.com) परिवर्तनों की जानकारी तुरन्त प्राप्त की जा सकती है। अत: लोगों की आपसी निर्भरता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है।

6.
परिवहन एवं संचार के साधनों द्वारा देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई है, जिससे जीवन सुख-सुविधाओं से सम्पन्न और समृद्ध हो गया है।

7.
ये साधन देश के आर्थिक जीवन को एकता के सूत्र में बाँधे हुए हैं तथा युद्ध, अकाल व महामारियों के समय अपनी सेवाओं के द्वारा इन आपदाओं से छुटकारा दिलाने में सहायक सिद्ध हुए हैं।

8.
राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई है तथा आर्थिक विकास की गति में भी तीव्रता आयी है।। इस प्रकार उपर्युक्त आधार पर कहा जा सकता है कि परिवहन तथा संचार के विभिन्न साधने राष्ट्र एवं उसकी अर्थव्यवस्था की जीवन-रेखाएँ हैं।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेलों के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
या
रेल परिवहन के किन्हीं तीन आर्थिक लाभों का वर्णन कीजिए। [2014, 16]
या
देश के आर्थिक विकास में रेलों का क्या महत्त्व है ?
या
भारत के आर्थिक विकास में रेलमार्गों के तीन महत्त्व पर प्रकाश डालिए। [2012]
उत्तर :
देश में परिवहन के साधनों में रेलों का महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट होता है

  • सार्वजनिक क्षेत्र में रेलवे सबसे बड़ा प्रतिष्ठान है। इसमें १ 9,000 करोड़ से अधिक की पूँजी तथा 16 लाख कर्मचारी संलग्न हैं।
  • रेलों से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये किराये व भाड़े के रूप में सरकार को प्राप्त होते हैं।
  • रेलों ने कृषि उपजों के विकास में बहुत योगदान दिया। अतिरिक्त कृषि उत्पादों को रेलों द्वारा दूरवर्ती भागों तक भेजना सम्भव हुआ है। कृषि उत्पादन में वृद्धि उर्वरकों, उत्तम बीज, नवीन यन्त्रों तथा कीटनाशकों के (UPBoardSolutions.com) अधिकाधिक उपयोग का फल है, जो रेलों द्वारा ही ढोये जाते हैं।
  • कृषि एवं खनिजों पर आधारित उद्योगों के विकास में रेलों ने प्रमुख भूमिका निभायी है, क्योंकि भारी पदार्थों का परिवहन करने में रेल परिवहन ही सफल हो सकता है। इसके साथ ही उद्योगों का विकेन्द्रीकरण भी रेल परिवहन द्वारा ही सम्भव हुआ है।
  • रेलें देश के सुदूर भागों के मध्य सम्पर्क स्थापित कराती हैं।
  • अकाल व बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में सामान पहुँचाने का उत्तम साधन रेले हैं।
  • कृषि उपजों को सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पहुँचाने का कार्य रेलों द्वारा ही सम्पन्न होता है।
  • औद्योगिक उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में रेलों का योगदान है।
  • परिवहन के सभी साधनों में रेलें सबसे सस्ती हैं।
  • रेलों के कारण गतिशीलता बढ़ी है, जिससे भारतवासियों में एकता व सौहार्द की भावना बढ़ी है।
  • रेलों द्वारा पत्तनों व भीतरी नगरों के बीच आदान-प्रदान बढ़ा है, इससे आन्तरिक तथा विदेशी व्यापार को प्रोत्साहन मिला है।
  • शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं का परिवहन (UPBoardSolutions.com) सुविधाजनक हो गया है।
  • रेलमार्गों के साथ ही अनेक बस्तियाँ विकसित हुई हैं, जिन्होंने बड़े नगरों का रूप ले लिया है।
  • संघन आबाद मैदानी भागों में रेले परिवहन का उत्तम साधन हैं, इसीलिए वहाँ रेलों का घना जाल मिलता है।

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प्रश्न 2.
गाँवों के आर्थिक विकास में सड़कों के चार योगदानों की विवेचना कीजिए।
या
भारत के किसी राज्य का उदाहरण देते हुए सड़कों के सामाजिक तथा सांस्कृतिक महत्त्व को बताइए।
उत्तर :
भारत के आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास में पक्की सड़कों की भूमिका अग्रलिखित है

  • देश में पक्की सड़कों का जाल बिछा, हुआ है। बड़े-बड़े नगर और राज्यों को पक्की सड़कों द्वारा ही जोड़ा गया है; जैसे—दिल्ली-मुम्बई राजमार्ग, दिल्ली-चेन्नई राजमार्ग, दिल्ली-कोलकाता राजमार्ग, दिल्ली-जम्मू राजमार्ग आदि।
  • सड़कों को तीव्र ढलानों पर भी बनाया जा सकता है। इसी कारण पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें ही बनायी गयी हैं। उदाहरण के लिए-जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र में मनाली-लेह सड़क मार्ग है।
  • पक्की सड़कों का हर मौसम में उपयोग किया जा सकता है तथा कम समय में अधिक दूरी भी तय की जा सकती है।
  • पक्की सड़कों का निर्माण किसी भी प्रकार के धरातल पर किया जा सकता है।
  • पक्की सड़कों की भार-वहन क्षमता बहुत अधिक (UPBoardSolutions.com) होती है।
  • आधुनिक जीवन-शैली और सुख-सुविधाएँ प्रदान करने वाली वस्तुएँ इन्हीं सड़कों से होकर देश के कोने-कोने में पहुँचती हैं; जैसे-पंजाब का गेहूँ असोम और केरल राज्यों में जाता है तथा असोम की चाय पूरे भारत में पी जाती है।
  • सड़क मार्गों ने देश को एकता के सूत्र में बाँध दिया है। सड़कों के द्वारा ही विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक गतिविधियाँ परस्पर प्रभावित होती हैं और देश में सांस्कृतिक एकता स्थापित करती हैं।

प्रश्न 3.
भारत के किन्हीं दो राजमार्गों के नाम बताइए तथा इनके महत्व को स्पष्ट कीजिए। उत्तर भारत के दो राजमार्ग हैं—(1) ग्राण्ड ट्रंक रोड तथा (2) मुम्बई-कोलकाता रोड या ग्रेट दकन रोड।
1. ग्राण्ड ट्रंक रोड – यह सड़क कोलकाता, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर, अलीगढ़, दिल्ली, करनाल,
अम्बाला होती हुई अमृतसर तक जाती है। यह सड़क मार्ग पूर्वी भारत को पश्चिमी भारत से जोड़ता है। पंजाब राज्य के कृषि उत्पादों को सम्पूर्ण भारत में पहुँचाने में यह सड़क मार्ग महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी प्रकार विभिन्न औद्योगिक उत्पादों तथा सैन्य-सामग्री को पश्चिमी सीमा तक पहुंचाने
में इस सड़क-मार्ग का महत्त्वपूर्ण योगदान है।

2. मुम्बई-कोलकाता रोड या ग्रेट दकन रोड – 
यह सड़क-मार्ग मुम्बई, नागपुर, रायपुर, सम्बलपुर होता हुआ कोलकाता तक जाता है। यह भारत के पश्चिमी तट पर विकसित पत्तनों को सड़क मार्ग द्वारा पूर्वी तट पर स्थित पत्तनों से जोड़ता है। कोलकाता तथा मुम्बई के औद्योगिक उत्पादों को लाने
और ले जाने, प्रशासनिक कार्यों के सम्पादन तथा आन्तरिक (UPBoardSolutions.com) प्रदेशों के विकास में इस सड़क का
महत्त्वपूर्ण स्थान है।

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प्रश्न 4.
देश के आर्थिक विकास में जलमार्गों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर :
देश के आर्थिक विकास में जलमार्गों का महत्त्व निम्नलिखित कारणों से है—

  • जलमार्ग परिवहन का सबसे सस्ता साधन है। यह हमारे लिए प्राकृतिक उपहार है। इसके निर्माण व रख-रखाव पर कोई व्यय नहीं करना पड़ता। इसलिए रेलों व सड़कों की अपेक्षा जलमार्ग सस्ती यातायात सेवा प्रदान करते हैं।
  • भारी पदार्थों को दूरस्थ स्थानों या देशों में भेजने के लिए जलमार्ग विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि जलयानों में भार खींचने की क्षमता अधिक होती है तथा जल-परिवहन का घर्षण भी कम होता है।
  • जलमार्ग देशों के बीच वाणिज्य तथा व्यापार का विकास करते हैं। भारत के आयात-निर्यात व्यापार का लगभग 92% भाग जलमार्गों द्वारा ही होता है।
  • राष्ट्रीय प्रतिरक्षा की दृष्टि से भी जलमार्गों का (UPBoardSolutions.com) बहुत अधिक महत्त्व है। पुलों को नष्ट करके शत्रु द्वारा रेल व सड़क-मार्ग को तो सेवा के अयोग्य बनाया जा सकता है; परन्तु जलमार्गों-नदी, नहर और समुद्र-का ऐसा विध्वंस सम्भव नहीं होता।
  • ये आपसी सहयोग तथा संस्कृति के आदान-प्रदान में भी सहायक होते हैं।

प्रश्न 5.
विदेशी व्यापार में आयात और निर्यात को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
आयात और निर्यात को निम्नवत् परिभाषित किया जाता है
आयात-जब कोई देश अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ अन्य देश से मँगाता है, तो इसे आयात कहा जाता है। इस प्रकार कोई भी देश किसी वस्तु का आयात इसलिए करता है कि या तो अमुक वस्तु का उत्पादन उस देश में नहीं किया जाता अथवा उसकी उत्पादन लागत उसके आयात-मूल्य से अधिक पड़ती है।

निर्यात-जब कोई देश अपने अधिकतम उत्पादन को अन्य देशों को भेजता है तो उसे निर्यात कहा जाता है। इस प्रकार किसी वस्तु का निर्यात इसलिए किया जाता है कि उस देश में उत्पन्न की गई उस अतिरिक्त उत्पादित वस्तु की माँग विदेशों में है तथा उसे निर्यात कर विदेशी मुद्रा प्राप्त की जा सकती है। अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध स्थापित करने के उद्देश्य से भी निर्यात किया जाता है।

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प्रश्न 6.
पाइप लाइन परिवहन की आवश्यकता तथा महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
या
भारत में पाइप लाइन परिवहन के दो महत्त्व बताइट।
उत्तर :
पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए भारत में पाइप लाइनों का विकास किया गया है। इसे विकसित करने की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है–

  • पाइप लाइनों के द्वारा तेल तथा प्राकृतिक गैस (UPBoardSolutions.com) को उत्पादन क्षेत्रों से शोधनशालाओं तथा बाजारों (उपभोग क्षेत्रों) तक पहुँचाना अधिक सरल और सुगम है। पहले यह कार्य रेलों तथा ट्रकों द्वारा किया जाता था।
  • पाइप लाइनों द्वारा पेट्रोलियम तथा इसके पदार्थों का देशभर में वितरण सुनिश्चित तथा आसान हो गया
  • पाइप लाइनों के निर्माण में आरम्भिक व्यय के बाद इससे पदार्थों के परिवहन में व्यय नहीं होता। इनकी देख-रेख पर भी बहुत कम व्यय होता है। अतः तेल और गैस के परिवहन में पाइप लाइनें बहुत उपयोगी सिद्ध हुई हैं।
  • पाइप लाइनों से परिवहन के दौरान चोरी, क्षति या विलम्ब का भय नहीं रहता।

प्रश्न 7.
भारत के आयात की चार प्रमुख मदें लिखिए।
उत्तर :
भारत के आयात की चार प्रमुख मदें निम्नलिखित हैं
1. पेट्रोलियम – भारत में पेट्रोलियम तथा उससे सम्बन्धित उत्पादों द्वारा देश की लगभग 40% आवश्यकता ही पूर्ण हो पाती है, शेष आवश्यकता के लिए हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। भारत कच्चे तेल का आयात अधिक करता है, जिसका शुद्धिकरण देश की परिष्करणशालाओं में किया जाता है। तेल का आयात मुख्यतः ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन द्वीप म्यांकार (बर्मा), मैक्सिको, अल्जीरिया, इण्डोनेशिया एवं रूस से किया जाता है।

2. मशीनरी तथा परिवहन के उपकरण – 
भारत आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए सुधरी हुई एवं उन्नत किस्म की मशीनों का भारी मात्रा में आयात करता है। इनमें विभिन्न प्रकार के उद्योगों के लिए मशीनें, विद्युत मशीनें, खदान खोदने की मशीनें तथा परिवहन उपकरण प्रमुख हैं, जिनका आयात संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, पोलैण्ड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रेलिया व रूस आदि देशों से किया जाता है।

3. खाद्यान्न एवं खाद्य तेल – 
यद्यपि भारत भोजन के लिए अनाज पैदा करने में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है, परन्तु तेजी से बढ़ती जनसंख्या की अनाज की आवश्यकता की पूर्ति के लिए कभी-कभी अनाजों का आयात करना पड़ जाता है। अनाज एवं खाद्य (UPBoardSolutions.com) तेलों का आयात संयुक्त राज्य अमेरिका, म्यांमार (बर्मा), ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, श्रीलंका आदि देशों से किया जाता है।

4. लोहा एवं इस्पात – 
भारत में उद्योग के हो रहे तेजी से विकास के कारण लोहे एवं इस्पात की माँग में वृद्धि हुई है। इसका आयात संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन एवं जर्मनी से किया जाता है।

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प्रश्न 8.
स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग योजना क्या है ?
या
स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग योजना बनाने के प्रमुख दो उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
वर्ष 1999 के लगभग 13 हजार किमी इकहरे राजमार्ग को चार से छ: लेन में बदलने की एक वृहत् योजना का प्रारूप तैयार किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग gविकास परियोजना के तहत इस कार्यक्रम पर १ 54,000 करोड़ की लागत (वर्ष 1999 के मूल्य-स्तर पर) (UPBoardSolutions.com) अनुमानित की गयी। उपर्युक्त वृहत् योजना के अन्तर्गत दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई व कोलकाता प्रमुख शहरों को चार या छः लेन वाले द्रुतगामी सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए हैं 27 हजार करोड़ की जो योजना बनायी गयी, वह स्वर्णिम चतुर्भुज योजना कहलाती है। 5,846 किमी लम्बे इस सड़क-मार्ग को 2004 ई० तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह लक्ष्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इस राजमार्ग को बनाने के दो प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  • महानगरों से नगरों तक देश के अन्य केन्द्रों को समृद्ध कर आर्थिक गतिविधियों में तीव्रता लाना।
  • लघुतम समयावधि में देश के चार महानगरों की यात्रा पूरी करना।

प्रश्न 9.
भारत से निर्यात की जाने वाली चार प्रमुख मदें लिखिए।
उत्तर :
भारत से निर्यात की जाने वाली चार प्रमुख मदों का विवरण निम्नलिखित है-

1. वस्त्र एवं सिले-सिलाए वस्त्र – भारत सूती वस्त्र, सूती धागा, जूट का रेशा व जूटनिर्मित सामान–गलीचे, दरियाँ आदि–तथा सिले-सिलाए वस्त्रों (Readymade Garments) भारी मात्रा में निर्यात करता है।
2. चमड़ा एवं चमड़े का सामान – भारत पशुधन की संख्या में विश्व में प्रथम स्थान रखता है। अत: देश में पर्याप्त मात्रा में चमड़े का उत्पादन होता है। चमड़े के साथ-साथ उससे बनी विभिन्न वस्तुओं; जूता, चप्पल, बेल्ट, अटैची आदि का भी निर्माण होता है, जिनका निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में प्रमुख स्थान है।
3. रत्न एवं आभूषण – रत्न एवं आभूषणों के निर्यात में (UPBoardSolutions.com) भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापर में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इनके निर्यात व्यापार में भी तेजी से वृद्धि ही होती जा रही है। इन वस्तुओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारत रत्नों एवं बहुमूल्य धातुओं को विदेशों से कम मूल्य पर आयात करता है तथा पुनः उनके आभूषण एवं अन्य वस्तुएँ बनाकर विदेशों को निर्यात कर देता है।
4. रसायन एवं सहायक उत्पाद – इसके अन्तर्गत कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों का महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिनमें औषधियाँ, कीटनाशक दवाइयाँ, प्लास्टिक एवं उससे बने सामान एवं रंग-रोगन आदि उल्लेखनीय हैं।

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प्रश्न 10.
भारत में सड़क परिवहन रेल परिवहन की अपेक्षा किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है ?
उत्तर :
भारत में सड़क परिवहन रेल परिवहन की अपेक्षा अधिक उपयोगी एवं लाभप्रद सिद्ध हुआ है, जिसे निम्नलिखित तथ्यों द्वारा समझा जा सकता है

1. सड़क-मार्गों का निर्माण रेलमार्गों की अपेक्षा सस्ता पड़ता है। सड़क मार्गों के रख-रखाव में भी ‘ बहुत कम व्यय होता है। इनके निर्माण में कम समय, कम श्रमिक, कम पूँजी तथा कम तकनीकी की आवश्यकता होती है।
2. किसी भी प्रकार की स्थालाकृति; यथा-पर्वतीय, पठारी, मैदानी, मरुस्थलीय, ऊँची-नीची, ढालू तथा बीहड़ में सड़क-मार्गों का निर्माण सम्भव है, जब कि रेलमार्गों को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में विकसित नहीं किया जा सकता।
3. सड़कें व्यक्ति को उसके दरवाजे तक छोड़ सकती हैं, जबकि रेले निर्धारित स्टेशनों पर ही रुकती हैं।
4. सड़कों के माध्यम से निर्माण केन्द्रों में उत्पादित अनेक वस्तुएँ (UPBoardSolutions.com) उपभोक्ताओं तक प्रत्यक्ष रूप से पहुँचा दी जाती हैं। इसमें माल को बार-बार लादना-उतारना नहीं पड़ता। इसके विपरीत, रेलमार्गों द्वारा उपभोक्ताओं को विभिन्न वस्तुएँ उपलब्ध कराने के लिए निर्माण केन्द्रों से माल स्टेशन तक पहुँचाने तथा स्टेशन से गन्तव्य तक भेजने में बार-बार उतारना एवं लादना पड़ता है, जिससे वस्तुओं के टूटने-फूटने का खतरा बना रहता है तथा अधिक समय एवं धन नष्ट करना पड़ता है।
5. सड़क-मार्गों पर संचालित वाहनों का उपयोग किसी भी समय किया जा सकता है, अर्थात् इच्छित यात्रा सड़क-मार्गों द्वारा ही सम्भव है। इसके विपरीत रेलों का संचालन नियत समय पर ही होता है, जिससे यात्रियों को बड़ा सतर्क रहना पड़ता है।
6. सड़क-मार्गों द्वारा अल्प दूरी तय करना अथवा सामान भेजना सस्ता एवं सुविधाजनक तथा कम व्ययसाध्य होता है, जब कि रेलमार्गों से ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है।
7. शीघ्र खराब होने वाले पदार्थों को गन्तव्य तक पहुँचाने में सड़क मार्ग, रेलमार्ग की तुलना में अधिक उपयोगी है। अण्डा, दूध, फल, सब्जी, मांस, पनीर आदि का परिवहन अधिकांशत: सड़क मार्गों द्वारा ही किया जाता है।
8. रेलों द्वारा ढोये गये माल को उच्च पर्वतीय, दुर्गम तथा सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचाने का कार्य सड़क मार्गों द्वारा ही किया जाता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में रेल इंजन कहाँ बनाये जाते हैं?
उत्तर :
भारत में रेल इंजन चित्तरंजन में बनाये जाते हैं।

प्रश्न 2.
भारत में रेलमार्गों को कितने गेज में बाँटा गया है?
उत्तर :
तीन गेज में।

प्रश्न 3.
भारत में दक्षिण रेलवे का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
उत्तर :
भारत में दक्षिण रेलवे को मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।

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प्रश्न 4.
भारत में मेट्रो रेल कहाँ पायी जाती है?
उत्तर :
भारत में मेट्रो रेल कोलकाता तथा दिल्ली में पायी जाती है।

प्रश्न 5.
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्गों के नाम लिखिए।
उत्तर :
कांडला, मुम्बई, मार्मागाओ, न्यू मंगलौर, (UPBoardSolutions.com) कोच्चि, तूतीकोरिन, चेन्नई, पारादीप, हल्दिया आदि प्रमुख जलमार्ग हैं।

प्रश्न 6.
भारत के आयात की सबसे प्रमुख वस्तु कौन-सी है?
उत्तर :
भारत के आयात की सबसे प्रमुख वस्तु खनिज तेल, कागज व अखबारी कागज, कलपुर्जे तथा विद्युत उपकरण प्रमुख हैं।

प्रश्न 7.
भारत में सबसे अधिक समाचार-पत्र किस भाषा में प्रकाशित होते हैं?
उत्तर :
भारत में सबसे अधिक समाचार-पत्र हिन्दी भाषा में प्रकाशित होते हैं।

प्रश्न 8.
भारत में परिवहन के प्रमुख साधन कौन-से हैं ?
उत्तर :
भारत में परिवहन के प्रमुख साधन सड़कें, रेलमार्ग, वायुमार्ग तथा जलमार्ग हैं।

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प्रश्न 9.
भारत में सबसे लम्बी सड़क का नाम लिखिए।
उत्तर :
‘ग्राण्ड ट्रंक रोड’ भारत की सबसे लम्बी सड़क है, जो (UPBoardSolutions.com) कोलकाता को अमृतसर से जोड़ती है। इसकी एक शाखा जालन्धर से श्रीनगर तक जाती है।

प्रश्न 10.
भारतीय रेलों के कितने गेज होते हैं ?
उत्तर :
भारतीय रेलों के तीन गेज होते हैं—(1) बड़ी गेज (1.69 मीटर), (2) मीटर गेज (1.00 मीटर) तथा (3) छोटी गेज (0.73 मीटर)।

प्रश्न 11.
भारतीय रेलों में कितने प्रकार के इंजन प्रयुक्त होते हैं ?
उत्तर :
भारतीय रेलों में अब मुख्य रूप से दो प्रकार के इंजन प्रयुक्त होते हैं—(1) डीजल इंजन तथा (2) विद्युत इंजन।

प्रश्न 12.
भारत की कौन-सी दो नदियाँ नौ-परिवहन के योग्य हैं ?
उत्तर :
भारत की (1) गंगा तथा (2) ब्रह्मपुत्र नदियाँ नौ-परिवहन के योग्य हैं।

प्रश्न 13.
भारत के पूर्वी तट पर स्थित उस प्राचीन पत्तन का नाम बताइए जो कृत्रिम है।
उत्तर : भारत के पूर्वी तट पर स्थित कृत्रिम और प्राचीन पत्तन है-चेन्नई।

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प्रश्न 14.
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित दो पत्तनों के नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित दो पत्तन हैं—(1) मुम्बई तथा (2) कांडला।

प्रश्न 15.
भारत के किन दो पत्तनों से लौह-अयस्क का सर्वाधिक निर्यात किया जाता है ?
उत्तर :
भारत के दो पत्तनों-पारादीप (ओडिशा) तथा (UPBoardSolutions.com) विशाखापत्तनम् (आन्ध्र प्रदेश) से लौहअयस्क का सर्वाधिक निर्यात किया जाता है।

प्रश्न 16.
भारत के दो-दो प्रमुख आयात-निर्यात पदार्थों के नाम लिखिए
उत्तर :
दो प्रमुख आयात पदार्थ–

  • पेट्रोलियम अथवा कच्चा तेल तथा
  • लोहा एवं इस्पात।

दो प्रमुख निर्यात पदार्थ–

  • सूती सिले-सिलाए वस्त्र तथा जूट निर्मित सामान व
  • रत्न एवं आभूषण।

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प्रश्न 17.
भारत की दो सुपरफास्ट ट्रेनों के नाम बताइए।
उत्तर :
भारत की दो सुपरफास्ट ट्रेनों के नाम हैं—

  • राजधानी एक्सप्रेस तथा
  • शताब्दी एक्सप्रेस।

प्रश्न 18.
भारत का प्रथम रेलमार्ग कब बनाया गया था ?
उत्तर :
भारत का प्रथम रेलमार्ग 1853 ई० में बनाया गया था।

प्रश्न 19.
भारत के चार प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत के चार प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय (UPBoardSolutions.com) हवाई अड्डों के नाम हैं–

  • नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, दमदम (कोलकाता),
  • छत्रपति शिवाजी (मुम्बई),
  • इन्दिरा गांधी (नयी दिल्ली) तथा
  • चेन्नई, मीनाबक्कम (चेन्नई)।

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प्रश्न 20.
भारत की चार वायु सेवाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत की चार वायु सेवाओं के नाम हैं–

  • एयर इण्डिया इण्टरनेशनल,
  • इण्डियन एयरलाइन्स (वर्तमान में इण्डियन),
  • पवन हंस लिमिटेड तथा
  • निजी वायु सेवाएँ–सहारा एयरवेज, जेट एयरवेज आदि।

प्रश्न 21.
संचार के विभिन्न साधन कौन-से हैं ?
उत्तर :
भारत में संचार के (UPBoardSolutions.com) विभिन्न साधन हैं–

  • डाक,
  • टेलीफोन,
  • टेलेक्स व टेलीप्रिण्टर,
  • टेलीविजन,
  • फैक्स,
  • मुद्रण माध्यम,
  • उपग्रह सेवाएँ आदि।

प्रश्न 22.
कांडला बन्दरगाह किस राज्य में स्थित है ?
उत्तर :
कांडला बन्दरगाह गुजरात राज्य में स्थित है।

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प्रश्न 23.
विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख माध्यम क्या है ?
उत्तर :
विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख माध्यम टेलीफोन है।

प्रश्न 24.
‘पेजिंग सेवा’ क्या है ?
उत्तर :
रेडियो पेजिंग’ दूरसंचार की एक (UPBoardSolutions.com) आधुनिक तकनीक है, जिसके द्वारा एक निश्चित दूरी (दायरे) में पेजर धारक को कहीं भी सन्देश दिया जा सकता है।

प्रश्न 25.
टेलीफोन उपयोग में भारत का एशिया में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर :
टेलीफोन उपयोग में भारत का एशिया में प्रथम स्थान है।

प्रश्न 26.
भारत में वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण कब हुआ ?
उत्तर :
भारत में वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण सन् 1953 ई० में किया गया।

प्रश्न 27.
राष्ट्रीय राजमार्ग किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वे सड़क मार्ग जो सभी प्रान्तीय राजधानियों को जोड़ते हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग कहलाते हैं।

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प्रश्न 28.
दिल्ली किस रेलवे मण्डल में स्थित है ?
या
उत्तर रेलवे का मुख्यालय किस स्थान पर स्थित है ? [2009]
उत्तर :
दिल्ली उत्तरी रेलमण्डल में स्थित है तथा इसका मुख्यालय भी है।

प्रश्न 29.
भारत की किन्हीं दो समाचार एजेन्सियों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  • पी०टी०आई० तथा
  • आई०ए०एन०एस०।

प्रश्न 30.
पाइप लाइन परिवहन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस का परिवहन करने के लिए भूमिगत या भूमि के ऊपर पाइप लाइनें बिछायी जाती हैं। इसे ही पाइप लाइन परिवहन कहते हैं।

प्रश्न 31.
पिन कोड से क्या अभिप्राय है?
उत्तर :
पिन कोड छ: अंकों की एक संख्या होती है, जो सम्पूर्ण देश के नगरों एवं कस्बों को आवण्टित की गयी है। इस कोड की सहायता से राज्य, जनपद, तहसील एवं डाकघर का सुगमता से पता चल जाता है। 406 VIDYA कम्पलीट कोर्स सामाजिक (UPBoardSolutions.com) विज्ञान कक्षा-10

प्रश्न 32.
न्हावा-शेवा बन्दरगाह कहाँ पर स्थित है ?
उत्तर :
न्हावा-शेवा बन्दरगाह महाराष्ट्र राज्य में मुम्बई के निकट स्थित है। यह सबसे आधुनिक, कम्प्यूटरीकृत तथा पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है।

बहुविकल्पीय

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से किसके निर्माण एवं रख-रखाव का उत्तरदायित्व केन्द्र सरकार के अधीन है?

(क) राष्ट्रीय राजमार्ग
(ख) प्रादेशिक राजमार्ग
(ग) जिलामार्ग
(घ) ग्रामीण सड़कें

2. पूर्वी रेलवे का मुख्यालय है [2013]

(क) बरौनी
(ख) गोरखपुर
(ग) कोलकाता
(घ) मालेगाँव

3. न्हावा-शेवा का नया पत्तन किस नगर के पास है?

(क) कोलकाता
(ख) मुम्बई
(ग) कांडला
(घ) विशाखापत्तनम्।

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4. किस मार्ग के द्वारा भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार किया जाता है?

(क) रेलमार्ग द्वारा।
(ख) वायुमार्ग द्वारा
(ग) समुद्री मार्ग द्वारा
(घ) सड़क मार्ग द्वारा

5. ग्राण्ड ट्रंक रोड जाती है [2015].

(क) कोलकाता से जयपुर
(ख) कोलकाता से लाहौर।
(ग) कोलकाता से अमृतसर
(घ) कोलकाता से मुम्बई

6. निम्नलिखित में से उस विकल्प को खोजिए जो जन-संचार का माध्यम नहीं है

(क) रेडियो
(ख) दूरदर्शन
(ग) वायु परिवहन
(घ) टेलेक्स।

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7. निम्नलिखित में से संचार का माध्यम कौन है? [2015, 18]

(क) वायु सेवा
(ख) रेल सेवा
(ग) दूरदर्शन
(घ) जल सेवा

8. भारत का सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग है [2014]

(क) एन० एच० 7
(ख) एन० एच० 1
(ग) एन० एच० 32
(घ) एन० एच० 8

उत्तरमाला

1. (क), 2. (ग), 3. (ख), 4. (ग), 5. (ग), 6. (ग), 7. (ग), 8. (क)।

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