UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name धातु रूप
Number of Questions Solved 41
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi धातु रूप

परिभाषा
क्रिया के मूल रूप को ‘धातु’ कहते हैं; जैसे—पठ, गम्, लिखू, नम् आदि। लकार की परिभाषा संस्कृत भाषा में काल को ‘लकार’ कहते हैं, जैसे-वर्तमान काल-लेट् लकार, भूतकाल-लङ्ग लकार, भविष्यत् काल तृट् लकार आदि।

लकार के भेद
संस्कृत में दस लकार होते हैं।

  1. लट् लकार
  2. लङ्ग लकार
  3. तृट् लकार
  4. लोट् लकार
  5. विधिलिङ्ग लकार
  6. लुट् लकार
  7. लिट् लकार
  8. लुङ्ग लकार
  9. लेट् लकार
  10. नृङ्ग लकार

नोट पाठ्यक्रम के अनुसार पाँच (लट्, लृट्, लोट्, विधिलिङ्ग एवं लङ् लकार) लकारों के बारे में ही चर्चा करेंगे।
संस्कृत में जितने शब्द होते हैं, उन सभी शब्दों को कारक और वचन के अनुसार तो प्रयोग किया ही जाता है, इसके अतिरिक्त संस्कृत के समस्त शब्दों को पुरुष में भी बाँटा (विभाजित) जाता है। ‘पुरुष’ शब्द का अर्थ ‘व्यक्ति से है अर्थात् कर्ता (क्रिया को करने वाला) इस प्रकार संस्कृत के सभी शब्दों को तीन प्रकार के शब्दों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार हैं

  1. प्रथम पुरुष जिसके विषय में बात की जाती है। (जो प्रत्यक्ष न हो) उसे प्रथम पुरुष कहते हैं, जैसे वह, वे दोनों, वे सब/ये ही प्रथम पुरुष के कर्ता हैं।
  2. मध्यम पुरुष जो बात करने का माध्यम होता है, उसे मध्यम पुरुष कहते हैं; जैसे—तुम, तुम दोनों, तुम सब/ये ही मध्यम पुरुष के कर्ता है।
  3. उत्तम पुरुष किसी विषय पर स्वयं बोलने वाले को उत्तम पुरुष कहते हैं; जैसे मैं, हम दोनों, हम सब/ये ही उत्तम पुरुष के कर्ता हैं।

धातु-भेद
अर्थ-भेद के आधार पर धातु के निम्न तीन भेद होते हैं।

  1. परस्मैपदी जिन धातुओं के अन्त में ति, तः, अन्ति आदि प्रत्यय लगते हैं, उन्हें ‘परस्मैपदी’ धातु कहते हैं। नोट पाठ्यक्रम के अनुसार, परस्मैपदी के अन्तर्गत स्था, पा, नी, कृ, चुर एवं दा ‘सम्मिलित किए गए हैं।
  2. आत्मनेपदी जिन धातुओं के अन्त में ते, एते, अन्ते आदि प्रत्यय लगते हैं, उन्हें आत्मनेपदी धातु कहते हैं; जैसे-सेवते, सेवेते, सेवन्ते
  3. भयपदी जिन धातुओं के रूप दोनों पदों (परस्मैपद एवं आत्मनेपद) में चलते हैं, उन्हें उभयपदी धातु कहते हैं, जैसे

‘याच’ धातु परस्मैपद में रूप-याचति याचतः याचन्ति
‘याच’ धातु आत्मनेपदी में रूप-याचते याचेते याचन्ते

प्रश्न 1.
‘दा’ धातु लुट्लकार प्रथम पुरुष, द्विवचन का रूप है।
(क) दास्यतः
(ख) दत्तः
(ग) दास्यावः
(घ) दास्यथः

प्रश्न 2. ‘नेष्यावः’ रूप है ‘नी’ धातु का (2010)
(क) लट्, उत्तम, द्विवचन
(ख) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ग) लृट्, मध्यम, बहुवचन
(घ) लृट्, उत्तम, द्विवचन

प्रश्न 3.
नयतः रूप है ‘नी’ धातु का
(क) लट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) लङ्, मध्यम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, एकवचन,
(घ) लोट्, उत्तम, एकवचन

प्रश्न 4.
‘तिष्ठ’ रूप है ‘स्था’ धातु का (2015)
(क) लट्, प्रथम पुरुष, एकवचन
(ख) लोट्, मध्यम पुरुष, एकवचन
(ग) विधिलिङ, उत्तम पुरुष, एकवचन
(घ) लङ, उत्तम पुरुष, एकवचन

प्रश्न 5.
‘पास्यामः’ रूप है-‘पिबु धातु का (2011)
(क) लट्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(ग) लङ्, मध्यम, एकवचन
(घ) लोट्, प्रथम, बहुवचन

प्रश्न 6.
‘एधि’ रूप है ‘अस्’ धातु का (2010)
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लडु, उत्तम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, बहुवचन
(घ) लोट्, मध्यम, एकवचन

प्रश्न 7.
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) तिष्ठेयुः
(ख) तिष्ठे:
(ग) तिष्ठेव
(घ) तिष्ठेयम्

प्रश्न 8.
‘कृ’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) करोतु
(ख) कुरु
(ग) कुरुत
(घ) अकरोत्

प्रश्न 9.
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा
(क) तिष्ठामि
(ख) तिष्ठ
(ग) स्थास्यति
(घ) तिष्ठेम

प्रश्न 10.
‘कृ’ धातु लोट्, मध्यम, द्विवचन का रूप होगा। (2011)
(क) कुरुताम्
(ख) कुरुथः
(ग) कुरुत
घ) कुरुतम्

प्रश्न 11.
‘भविष्यथ’ रूप है ‘अस्’ धातु का (2012)
(क) लोट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) विधिलिङ, उत्तम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन

प्रश्न 12.
‘कृ’ धातु लूट, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा (2015)
(क) करोति
(ख) करिष्यथ:
(ग) करिष्यामि
(घ) करिष्यत

प्रश्न 13.
‘चोरयाव’ रूप है ‘चुर्’ (चुराना) धातु का (2010)
(क) लट्, प्रथम, द्विवचन
(ख) विधिलिड्., मध्यम, एकवचन
(ग) लोट्, उत्तम, द्विवचन
(घ) लङ्, उत्तम, बहुवचन

प्रश्न 14.
‘स्था’ धातु लुट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा (2012)
(क) स्थास्यति
(ख) स्थास्यावः
(ग) स्थास्यथ
(घ) स्थास्यामि

प्रश्न 15.
‘अस्’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा (2011)
(क) स्थः
(ख) स्त
(ग) स्थ
(घ) भविष्यथ

प्रश्न 16.
‘अतिष्ठः’ रूप है ‘स्था’ थातु का (2010)
(क) लृट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) विधिलङ, उत्तम, एकवचन
(घ) लङ, मध्यम, एकवचन

प्रश्न 17.
‘आदः’ रूप है ‘अद्’ धातु का (2010)
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) बृद्, प्रथम, एकवचन
(ग) लङ्, मध्यम, एकवचन
(घ) लट्, प्रथम, द्विवचन

प्रश्न 18.
‘चुर्’ धातु लुट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2011, 10)
(क) चोरयति
(ख) चोरयिष्यति
(ग) अचोरयत
(घ) चोरयतु

प्रश्न 19.
‘पा’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा (2013)
(क) पिबथ
(ख) पिविष्यथ
(ग) पास्यथ
(घ) पास्यन्ति

प्रश्न 20.
‘दा’ धातु ललकार प्रथम पुरुष बहुवचन का रूप होगा। (2012)
(क) देहि
(ख) अददुः
(ग) दास्यन्ति
(घ) ददाति

प्रश्न 21.
‘कृ’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा (2010)
(क) कुर्याताम्
(ख) कुर्याम्
(ग) कुर्यातम्
(घ) कुर्यात

प्रश्न 22.
‘भू’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2013)
(क) भवताम्
(ख) भव
(ग) भवन्तु
(घ) भवानि

प्रश्न 23.
‘पठतु’ रूप है ‘पठ’ (पढ़ना) धातु का (2011)
(क) लट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, प्रथम, एकवचन
(ग) लोट्, मध्यम, द्विवचन,
(घ) लृट्, उत्तम, एकवचन

प्रश्न 24.
‘पा’ (पिब) धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप हैं। (2010)
(क) पिबसि
(ख) पिबामि
(ग) पिबन्ति
(घ) पिबति

प्रश्न 25.
‘स्थास्यथः’ रूप है ‘स्था’ धातु का (2011)
(क) विधिलिङ, मध्यम, बहुवचन
(ख) लोट् प्रथम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लट्, प्रथम, बहुवचन

प्रश्न 26.
‘ददाम’ रूप है ‘दा’ धातु का (2012)
(क) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन
(ख) ट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन
(ग) ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन
(घ) विधिलिङ्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

प्रश्न 27.
‘तिष्ठेव’ रूप है ‘स्था’ धातु का (2013)
(क) विधिलिङ्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन
(ख) विधिलिङ्लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन
(ग) ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन
(घ) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन

प्रश्न 28.
‘भू’ (होना) धातु ललकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2011)
(क) भवति
(ख) भवसि
(ग) भवामि
(घ) भवामः

प्रश्न 29.
‘नी’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप होगा (2011)
(क) नय
(ख) नयत
(ग) नयतु
(घ) नयति

प्रश्न 30.
‘कुर्मः’ रूप है ‘कृ’ धातु का (2010)
(क) लङ्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लृट्, मध्यम, एकवचन
(ग) विधिलिङ, प्रथम, द्विवचन
(घ) लट्, उत्तम, बहुवचन

प्रश्न 31.
‘कृ’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप होगा। (2010)
(क) कुरुथ
(ख) कुरुत
(ग) कुर्यात
(घ) कुर्यात्

प्रश्न 32.
‘पिबामः’ रूप है ‘पा’ (पिब्) धातु का (2009)
(क) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(ख) लोट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) लङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लट्, उत्तम, बहुवचन

प्रश्न 33.
‘अकरोत्’ रूप होता है ‘कृ’ धातु का (2011, 10)
(क) लङ्, प्रथम, एकवचन
(ख) विधिलिङ, मध्यम, द्विवचन
(ग) लृट्, उत्तम, बहुवचन
(घ) लट्, प्रथम, एकवचन

प्रश्न 34.
‘नयतम्’ रूप है ‘नी’ धातु का (2014, 12, 11)
(क) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लट्, मध्यम, बहुवचन
(ग) लृद्, प्रथम, एकवचन
(घ) लोट्, प्रथम, द्विवचन

प्रश्न 35.
‘स्युः’ रूप है ‘अस्’ धातु का (2010)
(क) लोट्, मध्यम, एकवचन
(ख) लृट्, उत्तम, द्विवचन
(ग) विधिलिङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लङ्, प्रथम, एकवचन

प्रश्न 36.
‘नयानि’ रूप है ‘नी’ धातु का
(क) लट्, प्रथम, एकवचन
(ख) लोट्, उत्तम, एकवचन
(ग) लृट्, मध्यम, द्विवचन
(घ) लोट्, मध्यम, बहुवचन

प्रश्न 37.
‘अपिबत’ रूप है ‘पा’ धातु का
(क) लड्, प्रथम, एकवचन
(ख) लङ्, मध्यम, बहुवचन
(ग) विधिलिङ्, उत्तम, एकवचन
(घ) लट्, प्रथम, द्विवचन

प्रश्न 38.
‘अनयः रूप है ‘नी’ धातु का
(क) लट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लङ्, मध्यम, एकवचन
(ग) लङ, प्रथम, बहुवचन
(घ) लृट्, प्रथम, एकवचने

प्रश्न 39.
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन का रूप होगा (2012, 10)
(क) स्थास्यथः
(ख) स्थास्यतः
(ग) तिष्ठथः
(घ) तिष्ठतम्

प्रश्न 40.
‘अतिष्ठाव’ रूप है ‘स्था’ धातु का
(क) लोट्, मध्यम, द्विवचन
(ख) लड्, उत्तम, द्विवचन
(ग) विधिलिङ्, प्रथम, बहुवचन
(घ) लृटु, मध्यम, एकवचन

प्रश्न 41.
निम्नलिखित धातुओं के यथानिर्देश रूप लिखिए।
‘पा’ (पिब) धातु ललकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = पिबामः (2018)
‘नी’ धातु लट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = नयामः (2018)
‘पा’ धातु लोटलकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = पिबत (2018)
‘दा’ धातु लुट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = दास्यथः (2018)
‘नी’ धातु लोटलकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नय, नयतात् (2018)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = देहि (2018)
‘कृ’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अकुतम् (2018)
‘दा’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = दत्तः (2018)
‘पा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = पिबावः (2018)
‘नी’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = नयावः। (2018)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = दत्त (2018)
‘चुर’ धातु लङ्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन = अचोरयत् (2018)
‘नी’ धातु लोट्लकार’ मध्यम पुरुष, बहुवचने = नयत (2018, 17)
‘कृ’ धातु ‘लोट्लकार’ मध्यम पुरुष, बहुवचन = कुरूत (2018, 17)
‘पा’ धातु ‘लिङ्लकार’ मध्यम पुरुष, द्विवचन
‘दा’ धातु ‘लिङ्लकार’ मध्यम पुरुष, द्विवचन
‘चुर’ धातु ‘ललकार’ मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप लिखिए = चोरयसि (2017)
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठथ (2016)
‘कृ’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = कृथ (2016)
‘नी’ धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = नेष्यामः (2016)
‘कृ’ धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = करिष्यम् (2016)
‘मा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = अपिषाव (2016)
‘अस्’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = आस्थ (2016)
‘स्था’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = तिष्ठतम् (2017, 16)
‘नी’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = नयतम् (2016)
‘या’ धातु विधिलिङ् लकार, मध्यम पुरुष, द्विवधन = पिबेतम् (2017, 16)
‘नी’ धातु विधिलिङ् लकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = नयेतम् (2017, 16)
‘कृ’ धातु लोट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = कुरुताम् (2016)
दा’ धातु लोट्लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = दत्ताम्। (2016)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = दोहि
‘पा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = पिब (2018)
‘स्था’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठन्। (2013)
‘दा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = देहि, दत्तात्। (2016, 14, 13)
‘नी’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = अनयन् । (2013)
‘दा’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अदम् (2018, 13)
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, द्विवचन = अतिष्ठतम् (2017, 13)
‘चुर्’ धातु ललकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन = चोरयतः (2013)
‘स्था’ धातु लट्लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठन्ति (2014)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = दास्यावः (2012)
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = तिष्ठे: (2013)
‘पा’ (पिब) धातु ललकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = पिबन्ति (2014)
‘कृ’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = कुर्यात (2013)
‘ढा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = अढद्म (2012)
‘स्था’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = तिष्ठ (2014)
‘स्था’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठत (2013)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = दाः (2012)
‘नी’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नयस (2017, 13)
‘स्था’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = स्थास्यावः (2012)
‘नी’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = नयेत (2013)
‘स्था’ धातु लुट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवधन = अतिष्ठाम (2012)
‘दा’ धातु लृट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = दास्यामः (2012)
‘स्था’ लङ्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन = अतिष्ठाम (2012)
‘पा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = पिबामि (2014)
‘दा’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = अददाः (2013)
‘नी’ धातु ललकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = नयथ : (2013)
‘चुर्’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = चोरय (2013)
‘स्था’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = तिष्ठामि. (2014)
‘स्था’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = तिष्ठेत (2013)
‘पा’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = पिब (2018, 16, 14, 13)
‘नी’ धातु विधिलिङ्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = नयेः (2013)
‘पा’ धातु लृट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन = पास्यथ (2017, 13)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, एकवचन = अददाम्। (2013)
‘दा’ धातु ललकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन = अदद्वः (2013)
‘पठ’ धातु लृट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन = पठिष्यति (2014)
‘कृ’ धातु लोट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन = कुरु कुरुताम् (2014)

उत्तर
1. (क), 2. (घ), 3. (क), 4. (ख), 5. (ख), 6. (घ), 7. (ख), 8. (ख), 9. (घ), 10. (घ), 11. (ग) 12. (ख), 13. (ग), 14. (ग), 15. (घ), 16. (घ), 17. (घ), 18. (ख), 19. (ग), 20. (ख), 21. (ग), 22. (ख), 23. (ख), 24. (ग), 25. (ग), 26. (क), 27. (ख), 28. (ख), 29. (क), 30. (घ), 31. (ग), 32. (घ), 33. (क), 34. (क), 35. (ग), 36. (ख), 37. (क), 38. (ख), 39. (क), 40. (ख),

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi विज्ञान आधारित निबन्ध

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 10
Chapter Name विज्ञान आधारित निबन्ध
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi विज्ञान आधारित निबन्ध

1. विज्ञान के बढ़ते कदम (2018, 16, 15)
अन्य शीर्षक विज्ञान और मानव जीवन (2018), विज्ञान : वरदान या अभिशाप (2017), विज्ञान की प्रगति और विश्वशान्ति (2015), जीवन में विज्ञान का महत्त्व (2014), विज्ञान की उपलब्धियाँ (2010)
संकेत बिन्दु वरदान के रूप में विज्ञान, विज्ञान के विषय में भ्रान्ति, मानवीय व्यस्तता, विज्ञान का दुरुपयोग, उपसंहार।

वरदान के रूप में विज्ञान हम अपने आस-पास मानव निर्मित जिन चीज़ों को देखते हैं, उनमें से अधिकाधिक चीजें विज्ञान के बल पर ही आकार पाने में सफल हो पाई हैं। विज्ञान ने मानव जीवन को सुखद व सुगम बना दिया है। पहले लम्बी दूरी की। यात्रा करना मनुष्य के लिए अत्यन्त कष्टदायी होता था। अब विज्ञान ने मनुष्य की हर प्रकार की यात्रा को सुखमय बना दिया है। सड़कों पर दौड़ती मोटरगाड़ियाँ एवं रेलवे स्टेशनों व एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ इसके प्रमाण हैं। पहले मनुष्य के पास मनोरंजन के लिए विशेष साधन उपलब्ध नहीं थे। अब उसके पास मनोरंजन के हर प्रकार के साधन उपलब्ध हैं। रेडियो, टेपरिकॉर्डर से आगे बढ़कर अब एल सी डी, वी सी डी, डी वी डी एवं डी टी एच का जमाना आ गया है। यही नहीं मनुष्य विज्ञान की सहायता से शारीरिक कमजोरियों एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से पार पाने में अब पहले से कहीं अधिक सक्षम हो गया है और यह सब सम्भव हुआ चिकित्सा क्षेत्र में आई वैज्ञानिक प्रगति से। अब ऐसी असाध्य बीमारियों का इलाज भी सम्भव है, जिन्हें पहले लाइलाज समझा जाता था। अब टीबी सहित कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को प्रारम्भिक स्तर पर ही खत्म करना सम्भव हुआ है। आज हर हाथ में मोबाइल का दिखना भी विज्ञान के वरदान का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

विज्ञान के विषय में भ्रान्ति कुछ लोग कहते हैं कि विज्ञान ने आदमी को मशीन बना दिया है, किन्तु यह कहना उचित नहीं है। मशीनों का आविष्कार मनुष्य ने अपनी सुख-सुविधा के लिए किया है। यदि मशीनें नहीं होतीं, तो मनुष्य इतनी तेजी से प्रगति नहीं कर पाता एवं उसका जीवन तमाम तरह के झंझावातों के बीच ही गुम होकर रह जाता। मशीनों से मनुष्य को लाभ हुआ है।

यदि उसे भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त हो रही हैं, तो उसमें मशीनों का योगदान प्रमुख है। मशीनों को कार्यान्वित करने के लिए मनुष्य को उन्हें परिचालित करना पड़ता है। इस कार्य में उसे अधिक नहीं परिश्रम करना पड़ता। यदि कोई व्यक्ति मशीन के बिना कार्य करे तो उसे अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता पड़ेगी।

इस दृष्टि से देखा जाए तो मशीनों के कारण मनुष्य का जीवन यन्त्रवत् नहीं हुआ | है, बल्कि उसके लिए हर प्रकार का कार्य करना सरल हो गया है। यह विज्ञान का ही | वरदान है कि अब डेबिट-क्रेडिट कार्ड के रूप में लोगों के पर्स में प्लास्टिक मनी आ गई है एवं वह जब भी चाहे, जहाँ भी चाहे रुपये निकाल सकता है। रुपये निकालने के लिए अब बैंकों में घण्टों लाइन में लगने की जरूरत ही नहीं!

मानवीय व्यस्तता यद्यपि, मशीन का आविष्कार मनुष्य ने अपने कार्यों को आसान करने के लिए किया था, किन्तु कोई भी मशीन मनुष्य के बिना अधूरी है। जैसे-जैसे मनुष्य वैज्ञानिक प्रगति करता जा रहा है, उसकी मशीनों पर निर्भरता भी बढ़ती जा रही हैं। फलतः मशीनों को चलाने के लिए उसे यन्त्रवत् उसके साथ व्यस्त राहना पड़ता है। आधुनिक मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राथमिकता देता है, इसके लिए वह दिन रात परिश्रम करता है। वह चाहता है कि उसके पास गाड़ी, बंगला, ऐशोआराम की सभी चीजें हों। इसके लिए वह अपने सुख चैन को भी त्यागकर काम में व्यस्त रहता। इस काम के चक्कर में उसने अपनी जीवनशैली अत्यन्त व्यस्त बना ली है। खासकर शहर के लोगों में यह प्रवृत्ति सामान्यतः दिखाई देती है। मनुष्य ने अपने लिए रोबोट का भी आविष्कार कर लिया, फिर भी उसकी आवश्यकता कम नहीं हुई है। वह दिन-रात अन्तरिक्ष के रहस्यों को जानने के लिए परिश्रम कर रहा है।

विज्ञान का दुरुपयोग कहते हैं दुनिया की किसी भी चीज़ का दुरुपयोग बुरा ‘ होता है। विज्ञान के मामलों में भी ऐसा ही है। विज्ञान का यदि दुरुपयोग किया जाए, तो इसका परिणाम भी बुरा ही होगा। इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो विज्ञान का सहयोग मनुष्य के लिए एक अभिशाप के रूप में सामने आया है। विज्ञान की सहायता से मानव ने घातक हथियारों का आविष्कार किया। ये हथियार पूरी मानव सभ्यता का विनाश करने में सक्षम हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय परमाणु बमों के प्रयोग से मानव को जो क्षति हुई, उसकी पूर्ति असम्भव है। विज्ञान की सहायता से मनुष्य ने मशीनों का आविष्कार अपने सुख-चैन के लिए किया, किन्तु अफसोस की बात यह है कि मशीनों के साथ-साथ वह भी मशीन होता जा रहा है एवं उसकी जीवन-शैली भी अत्यन्त व्यस्त हो गई है। विज्ञान की सहायता से मशीनों के आविष्कार के बाद छोटे-छोटे एवं सामान्य कार्यों के लिए भी मशीनों पर निर्भरता बढ़ी है।

परिणामस्वरूप जो कार्य पहले मानव द्वारा किया जाते थे, वे अब मशीनों से पूर्ण किए जाते हैं। यही कारण है कि बेरोजगारी में वृद्धि हुई है। मशीनों के प्रयोग एवं पर्यावरण के दोहन के कारण पर्यावरण सन्तुलन बिगड़ गया है तथा प्रदूषण के कारण मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। यही नहीं, विज्ञान की सहायता से प्रगति के लिए मनुष्य ने पृथ्वी पर मौजूद संसाधनों का व्यापक रूप से दोहन किया है, जिसके कारण उसके लिए ऊर्जा-संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

उपसंहार विज्ञान के दुरुपयोग के कारण यह मनुष्य के लिए विध्वंसक अवश्य लगा है, किन्तु इसमें कोई सन्देह नहीं कि इसके कारण ही मनुष्य का जीवन सुखमय हो सका है और आज हम जो प्रगति एवं विकास की बहार देख रहे हैं, वह विज्ञान के बल पर ही सम्भव हुआ है। इस तरह विज्ञान मानव के लिए सृजनात्मक ही साबित हुआ है। | विज्ञान के दुरुपयोग के लिए विज्ञान को नहीं, बल्कि मनुष्य को दोषी ठहराया जाना चाहिए।

विज्ञान कभी नहीं कहता कि उसका दुरुपयोग किया जाए। इस तरह आज तक विज्ञान की सहायता से तैयार हथियारों के दुरुपयोग के लिए विज्ञान को विध्वंसात्मक कहना विज्ञान के साथ अन्याय करने के बराबर है। विज्ञान को अभिशाप बनाने के लिए मनुष्य दोषी है। अन्ततः देखा जाए तो विज्ञान मनुष्य के लिए वरदान है।

2. मनोरंजन के आधुनिक साधन (2017, 14)
अन्य शीर्षक मनोरंजन के हाई-टेक साधन, मनोरंजन के अत्याधुनिक स्वरूप।।
संकेत बिन्दु भूमिका, टेलीविजन, रेडियो, कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट, सिनेमा, उपसंहार।।

भूमिका एक समय था, जब मनोरंजन के लिए लोग शिकार खेला करते थे। सभ्यता में विकास के बाद अन्य खेल लोगों के मनोरंजन के साधन बने। आज भी खेल मनोरंजन के प्रमुख साधन हैं, किन्तु आजकल खेलों को प्रत्यक्ष रूप से देखने के बजाय किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इन्हें देखने वालों की संख्या बढ़ी है। इस समय टेलीविजन, रेडियो तथा इण्टरनेट एवं कम्प्यूटर मनोरंजन के प्रमुख एवं हाई-टेक साधन हैं।

टेलीविजन टेलीविजन आजकल लोगों के मनोरंजन का एक प्रमुख साधन बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि टेलीविजन पर हर आयु वर्ग के लोगों के लिए कार्यक्रम मौजूद हैं।

गृहिणियाँ भोजन बनाने वाले कार्यक्रमों सहित सास बहुओं पर आधारित टी.वी. शो देख सकती हैं। बच्चे कार्टून कार्यक्रम सहित तमाम तरह के गीत-संगीत पर आधारित रियलिटी शो देख सकते हैं। पुरुष न्यूज चैनलों के साथ-साथ क्रिकेट मैचों का प्रसारण देख सकते हैं। बुजुर्ग लोग समाचारों, धारावाहिकों के अलावा धार्मिक चैनलों पर सत्संग एवं प्रवचन आदि का आनन्द ले सकते हैं।

रेडियो आधुनिक काल में रेडियो मनोरंजन का एक प्रमुख साधन बनकर उभरा है। रेडियो पर गीत-संगीत के अलावा सजीव क्रिकेट कमेटरी श्रोताओं को आनन्दित तो करती ही है, जब से एफ.एम. चैनलों का पदार्पण भारत में हुआ है, रेडियो की उपयोगिता और बढ़ गई है।

आजकल हम लोगों को मोबाइल फोन के माध्यम से विभिन्न एफ.एम, स्टेशनों को सुनते देखते हैं। रेडियो मिर्ची, रेड एफ.एम., रेडियो सिटी, रेडियो म्याऊ इत्यादि चर्चित एफ.एम. स्टेशन हैं। ये श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं। आज एफ.एम. प्रसारण दुनियाभर में रेडियो प्रसारण का पसन्दीदा माध्यम बन चुका है।

इसका एक कारण इससे उच्च गुणवत्ता युक्त स्टीरियोफोनिक आवाज की प्राप्ति भी है। शुरुआत में इस प्रसारण की देशभर में कवरेज केवल 30% थी, किन्तु अब इसकी कवरेज बढ़कर 60% से अधिक तक जा पहुंची है।

कम्प्युटर एवं इण्टरनेट आधुनिक मनोरंजन के साधनों में कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट का स्थान अग्रणी है। भारतीय युवाओं में इनका प्रयोग तेजी से बढ़ी है। इण्टरनेट को तो कोई जादू, कोई विज्ञान का चमत्कार, तो कोई ज्ञान का सागर कहता हैं।

आप इसे जो भी कहिए, किन्तु इस बात में कोई सन्देह नहीं कि सूचना क्रान्ति की देन यह इण्टरनेट न केवल मानव के लिए अति उपयोगी साबित हुआ है, बल्कि संचार में गति एवं विविधता के माध्यम से इसने दुनिया को बिल्कुल बदल कर रख दिया है।

इण्टरनेट ने सरकार, व्यापार और शिक्षा को नए अवसर दिए हैं। सरकारें अपने प्रशासनिक कार्यों के संचालन, विभिन्न कर प्रणाली, प्रबन्धन और सूचनाओं के प्रसारण जैसे अनेकानेक कार्यों के लिए इण्टरनेट का उपयोग करती हैं। कुछ वर्ष पहले तक इण्टरनेट व्यापार और वाणिज्य में प्रभावी नहीं था, लेकिन आज सभी तरह के विपणन और व्यापारिक लेन-देन इसके माध्यम से सम्भव हैं।

इण्टरनेट पर आज पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित हो रही हैं, रेडियो के चैनल उपलब्ध हैं और टेलीविज़न के लगभग सभी चैनल भी मौजूद हैं। इण्टरनेट के माध्यम से मीडिया हाउस ध्वनि और दृश्य दोनों माध्यम के द्वारा ताजातरीन खबरें और मौसम सम्बन्धी जानकारियाँ हम तक आसानी से पहुंचा रहे हैं।
नेता हो या अभिनेता, विद्यार्थी हो या शिक्षक, पाठक हो या लेखक, वैज्ञानिक हो या चिन्तक सबके लिए इण्टरनेट उपयोगी साबित हो रहा है।

सिनेमा बात मनोरंजन के आधुनिक साधनों की हो या पूर्व साधनों की, यह सिनेमा के बिना अधूरी है। सिनेमा पहले भी लोगों के मनोरंजन का एक शक्तिशाली माध्यम था, आज भी है।

आज पारिवारिक एवं हास्य से भरपूर फिल्में दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन कर रही हैं। एक व्यक्ति तनावपूर्ण वातावरण से निकलने एवं मनोरंजन के लिए सिनेमा का रुख करता है, हालाँकि वर्तमान समय में बहुत सी फिल्में हिंसा एवं अश्लीलता का भौण्डा प्रदर्शन भी करती हैं, किन्तु इन जैसी खामियों को दरकिनार कर दें, तो सिनेमा दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन ही करते हैं।

उपसंहार इस प्रकार देखा जाए तो मनोरंजन के इन सभी हाई-टेक साधनों से न सिर्फ हमारा मनोरंजन होता है, बल्कि ये हमारे ज्ञान का विस्तार करने में भी सहायक हैं। इनकी सहायता से हम कठिन से कठिन विषयों को भी बड़ी सुगमता के साथ कम समय में ही ठीक प्रकार से समझ लेते हैं।

अतः हमें जीवन की एकरसता दूर करने व मानसिक स्फूर्ति प्रदान करने हेतु | मनोरंजन के तौर पर सीमित प्रयोग के साथ-साथ इन साधनों का प्रयोग अपने ज्ञान-विज्ञान को परिष्कृत किए जाने में करना चाहिए, तभी हम इनका अधिकाधिक लाभ लेकर अपने समाज तथा देश को उन्नत बना सकेंगे।

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi संमास

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 6
Chapter Name संमास
Number of Questions Solved 10
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi संमास

परिभाषा
जब दो या दो से अधिक शब्द अपने बीच की विभक्ति को छोड़कर आपस में मिल जाएँ तो उसे समास कहते हैं, जैसे- सूर्यस्य उदयः (सूर्य का उदय) से नया शब्द ‘सूर्योदयः’ बनता है, जिसमें षष्ठी विभक्ति लुप्त हो जाती है। शब्दों के ऐसे मेल से जो एक स्वतन्त्र शब्द बनता है उसे सामासिक पद अथवा समस्त पद कहते हैं। सामासिक पद को अनुसार विभक्तियों सहित तोड़ना समास-विग्रह कहलाता है। जैसे–सामासिक पद श्वेताम्बरम् का विग्रह होगा श्वेतम् अम्बरम्। यहाँ ‘श्वेतम्’ पूर्व पद एवं ‘अम्बरम्’ उत्तर पद हैं।

समास के भेद
समास के छ: भेद हैं।

  1. तत्पुरुष
  2. कर्मधारय
  3. अव्ययीभाव
  4. द्विगु
  5. बहुव्रीहि
  6. द्वन्द्व

आइए, पाठ्यक्र में सम्मिलित तीन समास कर्मधारय, अव्ययीभाव एवं बहुप्रीहि के वारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

1. कर्मधारय समास
विशेषण विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय वाले समास को कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें दोनों शब्द (पूर्व पद एवं उत्तर पद) प्रथमा विभक्ति में होते हैं तथा दोनों ही पदों की प्रधानता होती है; जैसे—’कृष्णाश्वः’ में प्रथम पद ‘कृ’:’ अर्थात् काला विशेषण, जबकि अन्तिम पद ‘अश्वः’ अर्थात् घोड़ा विशेष्य है। इसका विग्रह होगा ‘कृष्णः अश्वः’ अर्थात् काला घोड़ा। उदाहरण-
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2. अव्ययीभाव समास
जिस समास में प्रथम पद अव्यय तथा अन्तिम पद संज्ञा हो तथा प्रथम पद अर्थात् अव्यय के ही अर्थ की प्रधानता हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इस समास के | शब्द हमेशा नपुंसकलिंग एकवचन में ही रहते हैं। इस समास को अपने पदों में विग्रह नहीं होता; जैसे–’निर्धनः’ का विग्रह होगा ‘धनानां अभावः
उदाहरण-
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3. बहुव्रीहि समास
जिस समास में दोनों पद (पूर्व पद एवं उत्तर पद) को छोड़कर कोई अन्य पद प्रधान हो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। इस प्रकार इसमें सामासिक अर्थ दोनों पदों से भिन्न होता है; जैसे–’त्रीनेत्र’ का विग्रह ‘त्रीणि नेत्राणि यस्य सः’ (तीन हैं नेत्र जिसके) है, जिससे ‘शंकर’ का बोध होता है।
उदाहरण
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बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रामस्य पुत्रः का समस्तपद होगा
(क) रामपुत्रः
(ख) रामेपुत्रः
(ग) रामायपुत्रः
(घ) राममपुत्रः

प्रश्न 2.
‘नीलोत्पलम’ में विग्रह है।
(क) नीलम् उत्पलम्
(ख) निलमुत्पलम्
(ग) नलमोत्पलम्
(घ) नलस्योत्पलम्

प्रश्न 3.
‘यथाशक्ति’ में समास है।
(क) कर्मधारय
(ख) तत्पुरुष
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्विगु

प्रश्न 4.
एकं
एकं प्रति का सामासिक पद होगा
(क) प्रत्येक
(ख) हरेक
(ग) द्विरेकं
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 5.
‘त्रिलोकी में समास है।
(क) द्वन्ट्स
(ख) द्विगु
(ग) तत्पुरुष
(घ) बहुव्रीहि

प्रश्न 6.
‘प्राप्तोदकः’ में समास है।
(क) तत्पुरुष
(ख) बहुव्रीहि
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु

प्रश्न 7.
‘घनश्यामः’ में समास है।
(क) द्विगु
(ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय
(घ) बहुव्रीहि

प्रश्न 8.
‘रामस्य समीपे’ का सामासिक पद होगा।
(क) उपरामम्
(ख) उपारामम्
(ग) उपेरामम्
(घ) उपोरामम्

प्रश्न 9.
‘चन्द्रशेखरः’ में समास है।
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) बहुव्रीहि
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 10.
‘महान् च असौ देवः’ का सामासिक पद होगा।
(क) महादेव
(ख) महादेवी
(ग) शिवः
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर

1. (क, 2. (क), 3. (ग), 4. (क), 5. (ख), 6. (ख), 7. (ग), 8. (क), 9. (ग), 10. (क)

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद

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Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Name हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद
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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद

अनुवाद।
एक भाषा की किसी पंक्ति को किसी अन्य भाषा में परिवर्तित करना ही अनुवाद कहलाता है। जैसे—यदि हम संस्कृत के किसी वाक्य को हिन्दी में परिवर्तित करते हैं तो यह ‘संस्कृत का हिन्दी में अनुवाद’ कहा जाता है। ठीक उसी प्रकार यदि हम हिन्दी के किसी वाक्य को संस्कृत में परिवर्तित करते हैं तो यही ‘हिन्दी का संस्कृत में अनुवाद’ कहा जाता है।

हिन्दी भाषा के वाक्यों को संस्कृत भाषा में परिवर्तित करने के लिए निश्चित नियम हैं। उन नियमों के अनुसार हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद ठीक प्रकार से किया जा सकता है। वे नियम या बातें निम्न प्रकार हैं।
हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करने के लिए संस्कृत व्याकरण के इन नियमों को भली-भाँति समझना आवश्यक है

संस्कृत में तीन पुरुष, तीन वचन और तीन लिंग होते हैं।
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संस्कृत में कर्ता के पुरुष एवं वचन के आधार पर क्रिया का रूप निर्धारित होता है, किन्तु क्रिया पर लिंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।। उदाहरणार्थ-‘राम पढ़ता है’ वाक्य के लिए संस्कृत में लिखा जाएगा ‘रामः पठति’, जबकि ‘सीता पढ़ती है’ के लिए भी ‘सीता पठति’ ही लिखा जाएगा। इस प्रकार यहाँ क्रिया कर्ता के लिंग से अप्रभावित है। हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करने के लिए कर्ता के पुरुष और वचन की पहचान करना अति आवश्यक है। संस्कृत में प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष एवं उत्तम पुरुष के प्रत्येक वचन के लिए एक-एक कर्ता होता है।

अतः तीन वचन होने से प्रथम पुरुष के तीन कर्ता, मध्यम पुरुष के तीन कर्ता और उत्तम पुरुष के तीन कर्ता होंगे। इस प्रकार कुल नौ कर्ता हुए। आइए, इस तालिका को समझे-.
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यह ध्यान देने योग्य बात यह है कि ‘तुम’ का बहुवचन में प्रयोग होने पर मध्यम पुरुष बहुवचन की क्रिया ही ली जाती है। उदाहरणार्थ-बालक! तुम विद्यालय जाओ’। का संस्कृत में अनुवाद होगा ‘बालक! यूयं विद्यालयं गच्छत।’ संस्कृत में क्रिया को ‘धातु के नाम से जाना जाता है और मुख्यतः पाँच लकारों के द्वारा धातुओं (क्रियाओं) का बोध कराया जाता है। वर्तमान काल के अर्थ में लट्लकार का, भूतकाल के अर्थ में ललकार का एवं भविष्यत् काल के अर्थ में लट्लकार का प्रयोग होता है। आज्ञा देना, प्रार्थना करना, प्रस्ताव रखना एवं इच्छा ध्या करने के अर्थ में लोट्लकार तथा चाहिए, सम्भावना एवं शनि प्रदर्शन के अर्थ में विधिलिङ्लकार को प्रयोग में लाया जाता हैं। नीचे ‘भू’ धातु अर्थात् ‘होना’ क्रिया के तीनों कालों के लिए लकार में रूप दिए जा रहे हैं

भू (होना)
लट्लकार (वर्तमान काल)

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(उपर्युक्त धातुओं के भू के तुल्य रूप चलेंगे।)
हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि कर्ता जिस वचन का होगा, क्रिया भी उसी वचन की ली जाएगी।
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विभक्तियाँ
संस्कृत में हिन्दी के कारक चिह्नों (परसर्ग) के स्थान पर सात विभक्तियाँ एवं आठवीं सम्बोधन प्रयुक्त किए जाते हैं, जो इस प्रकार हैं-
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प्रथम विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) मोहन लिखता है। मोहनः लिखति।
(ii) मालती बोलती है। मालतीं वदति।
(iii) आप नहीं खाते हैं। भवान् न खादति।
(iv) यमुना बहती है। यमुना वहति।।

द्वितीय विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) तुम सब पुस्तक पढ़ते हो। यूयं पुस्तकं पठथ।
(ii) पण्डित ज्ञान देता है। पण्डितः ज्ञानं ददाति।
(iii) मैंने पत्र दिया। अहं पत्रम् अददाम्।
(iv) सीता दान करती है। सीता दानं करोति।

तृतीय विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) राजा स्वभाव से सज्जन है। नृपः प्रकृत्या सज्जनः अस्ति।
(ii) उमेश सिर से गंजा है। उमेशः शिरसा खल्वाटोऽरित।
(iii) विनीत कमर से कुबड़ा है। विनीत कटया कुजः अस्ति।
(iv) वह आँखों से देखती हैं। सः नेत्राभ्यां पश्यति।

चतुर्थी विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) राजा पण्डित को दान देता है। नृपः पण्डिताय दानं ददाति।
(ii) अनीता को लड्डू अच्छा लगता है। अनीतायै मोदकम् रोचते।
(iii) इस बालक के लिए मिठाई लाओ। अस्मै बालकाय मिष्टान्नम् अन्य।
(iv) मोहन ने गरीब को धन दिया। मोहनः दरिद्राय सम्पदाम् अदात्।

पञ्चमी विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) पेड़ से पत्ते गिरते हैं। (2018) वृक्षात् पत्राणि पतन्ति।
(ii) गाँव से बाहर विद्यालय है।। ग्रामात् बहिः विद्यालयः अस्ति।
(iii) ममता नदी से जल लाती है। ममता नद्याः जलम् आनयति।
(iv) सज्जन दुर्जन से डरता है। सज्जनः दुर्जनात् बिमैति।

षष्ठी विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) यह राम की किताब है। इदं रामस्य पुस्तकम् अस्ति।
(ii) कृष्ण का घर कहाँ है? कृष्णस्य गृहम् कुत्र अस्ति?
(iii) वह किसका हाथी है? सः कस्य गजः अस्ति?
(iv) अशोक मगध के राजा थे? अशोक: मगधस्य नृपः आसीत्।

सप्तमी विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) सन्ध्या विद्यालय में है। सन्ध्या विद्यालये अस्ति।
(ii) भीम युद्ध में प्रवीण था।। भीमः युद्धे प्रवीणः आसीत्।
(iii) कार्यालय में छुट्टी है। कार्यालये अवकाशः अस्ति।
(iv) पण्डित आसन पर बैठा है। पण्डितः आसने तिष्ठति।

सम्बोधन विभक्ति पर आधारित संस्कृत अनुवाद

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(i) हे देव! कल्याण करो। हे देव! कल्याणं कुरु।
(ii) प्रभु! मेरी रक्षा करो। भों प्रभु! मां रक्षा
(iii) बालकों! तुम सब घर जाओ। हे बालकाः! यूयं गृहं गछता
(iv) हे दुर्योधन! प्रिय वचन बोलो। हे दुर्योधनः! प्रिय वचनं वद।

बोर्ड परीक्षा में पूछे गए हिन्दी-संस्कृत अनुवाद

वर्ष 2018

हिन्दी वाक्य संस्कृत वाक्य
1. विद्यालय के सामने उपवन है। विद्यालयं सम्मुखें उपवनम्अस्ति ।
2. हम दोनों को हँसना चाहिए। आवां हसेव।
3. घोड़ा पाँव से लँगड़ा है। अश्वः पादेन पङ्गु अस्ति।
4. पुस्तकों में गीता श्रेष्ठ है। पुस्तकानां पुस्तकेषु वा गीता श्रेष्ठ अस्ति
5. हम लोग कहाँ जाएँगे? वयं कुत्र गामिष्यामः।
6. बालक पढ़ रहे हैं। बालकाः पठन्ति।
7. कल मैं विद्यालय जाऊँगा। श्वः अहं विद्यालयं गमिष्यामि।
8. हमें सदा सत्य बोलना चाहिए। वयं सदा सत्यं वदेम।
9. विद्या व्यय से बढ़ती है। विद्या व्ययात् वर्धते।
10. मोहन गा रहा है। मोहनः गीयते।
11. कवियों में कालिदास श्रेष्ठ हैं। कवीनां कवीषु वा कालिदासः श्रेष्ठः अस्ति।
12. प्रयाग के दोनों तरफ गंगा बहती है। प्रयागं परितः गंगा वहति।
13. राधा कृष्ण के साथ यमुना किनारे जाती थी राधा कृष्णेन सह यमुनातरे गच्छति स्म।
14. भिक्षुक के लिए कपड़ा दीजिए। भिक्षुकाय वस्त्रं यच्छ।
15, प्रतिदिन प्रातःकाल गुरु जी को प्रणाम करो। प्रतिदिनं प्रातः गुरवे नमः कुरु।
16. मेरा बड़ा भाई पिता से लड्डू माँगता है। ममं अग्रजः पितर मोदकं याचते।
17, मैदान के चारों ओर हरे वृक्ष हैं। क्षेत्रं परितः हरितानि वृक्षाणि सन्ति
18. कवियों में तुलसीदास श्रेष्ठ कवीनां कवीषु वा तुलसीदासः श्रेष्ः अस्ति।
19. पथिक किसान से रास्ता पूछता है। पथिकः कृषकं मार्गं पृच्छति।
20. हम लोग तुमको यह पुस्तक देंगे। वयं तुभ्यं इदं पुस्तकं दास्यामः।
21. भगवान शंकर को नमस्कार है। भगवते शंकराय नमः
22. संस्कृत भाषा सब भाषाओं की जननी है। संस्कृत भाषा सर्वांषां भाषाणां जननी अस्ति।
23. दुष्ट कभी दुष्टता नहीं छोड़ता।। दुष्टः कदापि दुष्टता न त्यजति।
24. प्रतिदिन ईश्वर का स्मरण करो। प्रतिदिनं ईश्वर स्मर।
25. आज वह वाराणसी जाएगा। अद्य सः चाराणसीम गमिष्यति।
26. हमें प्रतिदिन खेलना चाहिए। वयं प्रतिदिन क्रीडेम।
27. ईष्र्या मनुष्य की शत्रु है। ईष्र्या मनुष्याणां शत्रु अस्ति।
28. सदाचार मनुष्य का आभूषण है। सदाचारः मनुष्यानाम् आभूषणम् अस्ति
29. कल वर्षा अवश्य होगी। श्वः वर्षा अबश्या भविष्यति।
30. तुम लोग शीघ्र विद्यालय जाओ। यूयं शीघ् विद्यालयं गच्छत्।
31. वृक्ष से पत्ते गिरते हैं। वृक्षात् पत्राणि पतन्ति।

वर्ष 2017

हिन्दी वाक्य संस्कृत वाक्य
1. तुम्हें क्या करना चाहिए? त्वं किं कुर्या:?
2. हम जा रहे हैं। वयं गच्छामः।
3. आज समाज उनका ऋणी है। अद्य समाजः तेषा ऋणी अरित।
4. रीतिका एक मेधावी छात्रा है। रीतिको एक मेधावी छात्रा अस्ति!
5. वे दोनों कल काशी गए थे। तौ हुयः काशीम् अगच्छातम्।
6. कवियों में कालिदास श्रेष्ठ । कविषु कालिदासः श्रेष्ठः
7. राम श्याम के साथ घर जाता है। राम: श्यामेन सह गृहं गच्छतः।
8. पक्षी आकाश में उड़ते है। खगाः गगने विचरन्ति
9. भिक्षुक राजा से वस्त्र माँगता है। भिक्षुकः राजानाम् वस्त्रं याचति।
10. अध्यापक के चारों ओर विद्यार्थी दौड़ते हैं। अध्यापकं परितः छात्राः धावन्ति।
11. हनुमान वानरों के साथ लङ्का गए। हनुमानः वानरैः सह लङ्काम् अगच्छन्।
12. वृक्ष से पके हुए फल गिरते हैं। वृक्षात् पक्वानि फलानि पतन्ति।
13. देवी दुर्गा को नमस्कार है। दुर्गादेव्याः नयः।
14. गीता का छोटा भाई छात्राओं को पुस्तकें देता है। गीतायाः कनिष्ठ भातरः छात्राणाम् पुस्तकं ददति।।
15. खेत के दोनों ओर भवन हैं। क्षेत्रम् अभितः भवनानि सन्ति।
16. राम ने रावण को बाण से मारा। (2017) रामः रावणं बाणेन अह्नत्।
17. मोहन चावलों से भात पकाता है। मोहनः तण्डुलेन् ओदनं पचति।
18. हिमालय भारत की रक्षा करता हैं। हिमालयः भारतस्य रक्षां करोति।
19. तुम प्रतिदिन ईश्वर का स्मरण करो। त्वं प्रतिदिनं ईश्वरस्य स्मरणं कुरू।
20. धीर पुरुष न्याय के रास्ते से विचलित नहीं होते। न्यायपथात् प्रविचलन्ति पढ़ा न धीराः।

वर्ष 2016

हिन्दी वाक्य संस्कृत वाक्य
1. शिव पार्वती के साथ कैलाश गए। शिवः पार्वत्या सह कैलाशम् अगच्छत्।
2. रमेश की छोटी बहन पैर से लंगड़ी हैं। रमेशस्य अनुजा (भगिनी) पादेन खजः अस्ति।
3. सभी देवताओं को नमस्कार है। सर्वे देवेभ्यःनमः।।
4. दाता भिखारियों को अन्न देता है। दाता भिक्षुकेभ्यः अन्नं यच्छति।
5. वृक्ष से फल गिरते हैं। वृक्षात् फलानि पतन्ति।
6. गाँव के सब ओर उपवन है। ग्रामम् सर्वतः उपनामि सन्ति।
7. वह भिखारी को भिक्षा देता है। सः भिक्षुकाय भिक्षा ददाति।
8. बालकों में रमेश सबसे बड़ा है। बालकेषु रमेशः ज्येष्ठ अस्ति।
9. वे दोनों कहाँ जा रहे हैं? तौ कुत्र गच्छतः।
10. मैं कल प्रयाग गया था। अहम् श्वः प्रयागम् अगच्छम्।
11. तुम लोग माँ के साथ जाओ। यूयम् मात्रा सह गच्छता
12. हमें नित्य पढ़ना चाहिए। अस्माभिः नित्यं पठितव्यम्।।
13. आकाश कल कहाँ जाएगा? आकाशः इवः कुत्र गामिष्यतिः
14. श्री राम ने पूछा मुझे कहाँ  रहना चाहिए? श्री रामः अपृच्छत्-मया कुत्र स्थातव्यम्।।
15. सड़क के दोनों ओर हरे वन हैं।। मार्गम् उभयतः हरितानि वनानि सन्ति
16. पिता पुत्र को मिठाई देता है। पिता पुत्राय मिष्ठान्नम् यच्छति।
17. बालिकाएँ अध्यापिकाओं के साथ गीत गाती हैं। बालिकाः अध्यापिकाभिः सह गीत गायन्ति।
18. कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल को मारा। कृष्णः सुदर्शन चक्रणे शिशुपाल अनत्।।
19. मेरा बड़ा भाई अपने साथियों में सबसे कुशाग्र हैं। मम अग्रजः निज मित्रेषु कुशाग्रः अस्ति
20. हमें अपने गुरुजनों का सदैव आदर केरना चाहिए। अस्माभिः सदैव निजगुरुजनान् सम्मानं कर्तव्यम्।
21. योग स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। योगः स्वस्थ जीवनाय आवश्यकम्। अस्ति

वर्ष 2015

हिन्दी वाक्य संस्कृत वाक्य
1. नदियों में गंगा श्रेष्ठ है। नदीषु गङ्गा श्रेष्ठा अस्ति।
2. राम विद्यालय गया। रामः विद्यालयम् अगच्छत्।
3. यह मोहन की पुस्तक है। इदं मोहनस्य पुस्तकं अस्ति।
4. मोहन गैर से लंगड़ा है। मोहनः पार्दन खजः अस्ति।
5. नदी के दोनों ओर नगर हैं। नदीं उभयतः नगरम् अस्ति।
6. अध्यापक छात्र को पुस्तक देता है। अध्यापक: छात्राय पुस्तकं ददाति।
7. नदी के दोनों ओर हरे-भरे खेत हैं। नदीं उभयतः स्यश्यामलानि क्षेत्राणि सन्ति
8. रमेश अपनी बहन को मीठे फल देती हैं। रमेशः स्वभगिन्यै मधुरं फलं ददाति।
9. अध्यापकों ने विद्यालय आकर छात्रों को पढ़ाया। अध्यापकाः विद्यालये आगत्य छषान् अध्यापयन्ति स्म।
10. सीता का छोटा भाई मोहन के साथ खेलने जाएगा। सीतायाः अनुजः मोहनेन सह क्रीडष्यति
11. भिखारी दोनों आँखों से अन्धा है। भिक्षुक नेत्राभ्याम् अन्धः अस्ति।
12. अभिज्ञानशाकुन्तलम् अन्य नाटकों से अधिक रम्य हैं। अभिज्ञानशाकुन्तलम् अन्येषुनाटकेषु अधिकं रम्यम् अस्ति।

वर्ष 2014

हिन्दी वाक्य संस्कृत वाक्य
1. वे दोनों क्या करते हैं? तौ किं कुरुतः?
2. आकाश विद्वानों में श्रेष्ठ है। आकाशः विद्वत्सु श्रेष्ठः अस्ति।
3. अध्यापिका छात्रा से प्रश्न का उत्तर पूछती है। अध्यापिका छात्र प्रश्नोत्तरं पृच्छति।
4. तुम दोनों कल मेरे साथ बाजार नहीं जाओगे। युवा श्वः मया सह आपणं न गमिष्यथः।
5. स्नान करने से रूप की रक्षा होती है। स्नानेन रूपस्य रक्षा भवति।
6. लोभ पाप का कारण होता है। लोभः पापस्य कारणं भवति।
7. वे अपने विद्यालय जाएँ। ते स्वविद्यालयं गच्छन्तु।
8. पिता की आज्ञा से श्रीराम वन को गए। पितुः आज्ञया श्रीरामः वनम् अगच्छतु।
9. सुरेश दोनों कानों से बहरा है। सुरेशः कर्णभ्यां बधिरः अस्ति।
10. हम लोगों ने पानी पीकर अपना पाठ पड़ा। वयं जलं पीत्वा स्वपाठम् अपठाम्।

वर्ष 2013

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
1. तालाब में कमल खिलते हैं। तड़ागे कमलानि विकसन्ति।
2. वे दोनों विद्यालय जाते हैं। तौ विद्यालयं गच्छतः।
3. किसी वन में एक सिंह रहता था। (2017) कस्मिंश्चिद् वने एकः सिंह: निवसति स्म।
4. मैं तुम्हारे साथ विद्यालय नहीं जाऊँगी। अहं त्वया सह विद्यालयं न गमिष्यामि।
5. पिता की आज्ञा से श्रीराम वन को गए। पितुः आज्ञया श्रीरामः वनम् अगच्छत्।
6. कुएँ के चारों ओर लोग बैठते हैं कूपं परितः जनाः तिष्ठन्ति।
7. गाँव के चारों ओर वृक्ष हैं। (2017) ग्रामं परितः वृक्षाः सन्ति।
8. छात्रों में राम श्रेष्ठ हैं छात्रेषु रामः श्रेष्ठः अस्ति।
9. चरित्र की यत्नपूर्वक रक्षा करनी चाहिए। वृत्तं यत्नेन संरक्षेत्।
10. वह चावलों से भात पकाएगी सा तण्डुलैः ओदनं पक्ष्यति।
11. भिखारी दोनों कानों से बहरा है। भिक्षुकः कर्णाभ्यां बधिरः, अस्ति।
12. विद्यार्थी को सुख छोड़ना चाहिए। विद्यार्थी सुखं त्यजेत्।।
13: संस्कृत भाषा देवभाषा है। संस्कृतभाषा देवभाषा अस्ति।
14. तुम सब संस्कृत पढौ।। यूयं संस्कृतं पठतम्।।
15. सोनू सिंह से नहीं डरता। सोनू सिंहात् न बिभेति।

वर्ष 2012

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
1. मैं कल बाजार जाऊँगा।। अहं श्वः आपणं गमिष्यामि।
2. सदा सत्य और प्रिय वचन बोलो। सदा सत्यं प्रियवचनं च वद।
3. पुरुषोत्तम राम यहाँ आए थे। पुरुषोत्तमः रामः अत्र आगच्छत्।
4. तेरी पुस्तक कहाँ है? तव पुस्तकं कुत्र अस्ति?
5. वह मेरे साथ विद्यालय में पढ़ता है। सः मया सह विद्यालये पठति।
6. हिमालय उत्तर दिशा में स्थित है। हिमालयः उत्तरदिशि स्थितः।।
7. साँप वेग से चलता है। सर्पः वेगेन चलति।
8. बाग में आम के पेड़ हैं। उद्याने आम्रवृक्षाः सन्ति।
9. हम मित्रों के साथ भोजन करेंगे। वयं मित्रैः सह भोजनं करिष्यामः।
10. यह मेरा विद्यालय है। अयं मम विद्यालयः अस्ति।
11. मैं दूध नहीं पीऊँगा। अहं दुग्धं न पास्यामि।
12. तुम सब कहाँ पढ़ते हो? यूयं कुत्र पथ?
13. छात्रों को विद्यालय जाना चाहिए। छात्राः विद्यालयं गच्छेयुः।
14. बालकों में राम श्रेष्ठ है। बालकेषु रामः श्रेष्ठः अस्ति।
15. मेरी माताजी गृहकार्य में निपुण हैं। मम माता गृहकार्यं निपुणा अस्ति।

वर्ष 2011

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
1. पुत्र प्रातः पिता को प्रणाम करता है। पुत्रः प्रातःकाले पितरं प्रणाम करोति।।
2. क्या राम ने अभी को अपनी पुस्तक अददात्? किं रामः प्रभायै स्वपुस्तकं न नहीं दी?
3. वह प्रतिदिन प्रातःकाल उठता है। सः प्रतिदिन प्रातःकाले उत्तिष्ठति।
4. मैं अपने मित्र के साथ विद्यालय जाता हैं। अहं स्वमित्रेण सह विद्यालयं गच्छामि।
5. इन्द्र बादलों से खेल रहे हैं। इन्द्रः मेघैः क्रीडति।।
6. सड़क के दोनों ओर हरे-भरे खेत हैं। मार्ग उभयतः हरितानि क्षेत्राणि सन्ति।
7. मैं कल दिल्ली जाऊँगा। अहं श्वः दिल्लीं गमिष्यामि।
8. प्रजा का कल्याण हो। प्रजाभ्यः स्वस्ति।
9. सदा सत्य और प्रिय वचन बोलो। सदा सत्यं प्रियवचनं च वद।
10. राजा दिलीप एक महापुरुष थे। राजा दिलीपः एकः महापुरुषः आसीत्।
11. राम, लक्ष्मण के साथ वन में गए। रामः लक्ष्मणेन सह वनम् अगच्छत्।
12. बालकों में गोविन्द श्रेष्ठ है। बालकेषु गोविन्दः श्रेष्ठः अस्ति।
13. श्रीकृष्ण के दोनों ओर गोपाल हैं। श्रीकृष्णम् उभयतः गोपालकाः सन्ति।
14 .हम सब कल प्रयाग गए थे। वयं ह्यः प्रयागम् अगच्छाम।।
15. फूलों पर भौंरे गूंजते हैं। पुष्पेषु भ्रमराः गुञ्जन्ति।

वर्ष 2010

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
1. क्या तुम आज वाराणसी जाओगे? किं त्वम् अद्य वाराणसीं गमिष्यति?
2. छात्रों को गुरु के प्रति विनम्र होना चाहिए। शिष्याः गुरु प्रति विनमः भवेयुः।
3. जानवर सायंकाल जंगल से घर आ गए। पशवः सायंकाले वनात् गृहे आगच्छन्।
4. पिताजी बालक के साथ विद्यालय जाते हैं। पिता बालकेन सह विद्यालयं गच्छति।।
5. सफलता के लिए हमें अति परिश्रम करना चाहिए। सफलतायाः हेतो वयं अतिपरिश्रम कुर्याम्।
6. उमेश दोनों कानों से बहरा है। उमेशः कर्णाभ्यां दधिरः अस्ति।
7. छात्रों में मोहन श्रेष्ठ है। छात्रेषु मोहनः श्रेष्ठः अस्ति।
8. विद्यालय का वार्षिकोत्सव कब होगा? विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवः कदा भविष्यति?
9. विद्यालय के चारों ओर वृक्ष हैं। विद्यालयं परितः वृक्षाः सन्ति
10. हिमालय से गंगा निकलती है। हिमालयात् गङ्गा प्रभवति।
11. सरोवरों में कमल खिलते हैं। सरोवरेषु कमलानि विकसन्ति।
12. मनुष्य सदाचार से यश प्राप्त करता है। मनुष्यः सदाचारेण यशं प्राप्नोति।
13. तुम जल्दी घर जाओ। त्वं शीघ्रं गृहं गच्छ।
14. गुरु को नमस्कार है। गुरुवे नमः।।
15. मैं तुम्हारे साथ विद्यालय नहीं जाऊँगी। अहं त्वया सह विद्यालयं न गमिष्यामि।

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi अलंकार

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name अलंकार
Number of Questions Solved 55
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi अलंकार

अलंकार का अर्थ एवं परिभाषा
प्रसिद्ध संस्कृत आचार्य दण्डी ने अपनी रचना ‘काव्यादर्श’ में अलंकार को परिभाषित करते हुए लिखा है-‘अलंकरोतीति अलंकारः’ अर्थात् शोभाकारक पदार्थ को अलंकार कहते हैं। हिन्दी में रीतिकालीन कवि आचार्य केशवदास ने ‘कविमिया’ रचना में अलंकार की विशेषताओं का विवेचन प्रस्तुत किया है।

वस्तुतः भाषा को शब्द एवं शब्द के अर्थ से सुसज्जित एवं सुन्दर बनाने की मनोरंजक प्रक्रिया को ‘अलंकार” कहा जाता है। ‘अलंकार’ काव्य भाषा के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं। यह भाव की अभिव्यक्ति को अधिक प्रभावी बनाते हैं।

अलंकार के भेद
अलंकार को दो रूपों में व्यक्त किया जाता है- शब्दालंकार एवं अर्थालंकार)

1. शब्दालंकार
शब्द निर्माण की प्रक्रिया में ‘ध्वनि’ तथा ‘अर्थ’ का महत्वपूर्ण समन्वय होता है। ध्वनि के आधार पर काव्य में उत्पन्न विशिष्टता अथवा साज-सwण। ‘शब्दालंकार’ की सृष्टि करते हैं। इस अलंकार में वर्ण या शब्दों की लयात्मकता अथवा संगीतात्मकता उपस्थित होती है। ‘शब्दालंकार’ वर्णगत, शब्दगत तथा वाक्यगत होते हैं। अनुमास, यमक, श्लेष इत्यादि प्रमुख शब्दालंकार हैं।

2. अर्थालंकार
जब शब्द, वाक्य में प्रयुक्त होकर उसके अर्थ को चमत्कृत या अलंकृत करने वाला स्वरूप प्रदान करे तो वहाँ ‘अर्थालंकार’ की सृष्टि होती है। *अर्थालंकार’ की एक विशेषता यह है कि यदि वाक्य से किसी शब्द को हटाकर उसकी जगह उसके पर्याय शब्द को रखा जाए, तब भी अलंकार की प्रवृत्ति में कोई अन्तर नहीं आता। वस्तुतः ‘अर्थालंकार” की निर्भरता शब्द पर न होकर शब्द के अर्थ पर होती है। उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, दृष्टान्त, मानवीकरण इत्यादि प्रमुख अर्थालंकार हैं।

शब्दालंकार
1. अनुप्रास अलंकार (2018, 17, 16, 15, 14, 13, 12)
अनुप्रास वर्णनीय रस की अनुकूलता के अनुसार समान वर्गों का बार-बार प्रयोग है। यह एक प्रचलित अलंकार है, जिसका प्रयोग ,छेकानुप्रास, वृत्यानुप्रास, लाटानुप्रास
आदि के रूप में होता है।
उदाहरण सम सुबरनं सुखाकर सुजस न थोर।
इस वाक्यांश (काव्यांश) में ‘स’ वर्ण की आवृत्ति दिखती है। यह आवृत्ति ‘अनुप्रास अलंकार’ के रूप में जानी जाती हैं।
अनुप्रास अलंकार के भेद
इसके पाँच भेद हैं।

  • श्रुत्यानुप्रास एक ही स्थान से उच्चारित होने वाले वर्षों की आवृत्ति।
  • वृत्यानुप्रास समान वर्ण की अनेक बार आवृत्ति।
  • छेकानुप्रास जब कोई वर्ण मात्र दो बार ही आए।
  • लाटानुप्रास शब्द व अर्थ की आवृत्ति के बाद भी अन्य के उपरान्त भिन्न अर्थ मिले।
  • अन्त्यानुप्रास शब्दों के अन्त में समान ध्वनि की आवृत्ति।

2. यमक अलंकार(2018, 17, 16, 15, 14, 13, 12)
‘यमक’ एक शब्दालंकार है। यमक का अर्थ होता है-‘युग्म्’ अर्थात् ‘जोड़ा। इसमें भिन्न अर्थ के साथ किसी वर्ण अथवा शब्द की आवृत्ति होती हैं।
उदाहरण ”कहै कवि बेनी ब्याल की चुराय लीनी बेनी”
इस काव्यांश में ‘बेनी’ की आवृत्ति है। प्रथम ‘बेनी’ का अर्थ है-‘कवि बेनीप्रसाद’ तथा दूसरे ‘बेनी’ का अर्थ है- ‘चोटी’।।

3. श्लेष अलंकार (2018, 17, 16, 13, 12)
जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर दो-या-दो से अधिक भिन्न-भिन्न अर्थ दे तो वहीं ‘श्लेष अलंकार’ होता है। इस अलंकार के अन्तर्गत एक शब्द एक से अधिक अर्थों का बोध कराकर पूरे काव्य को विशिष्ट अर्थ प्रदान करने में सक्षम होता है।
उदाहरण “सुबरन को इँदै फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर।”
इस काव्य पंक्ति में ‘सुबरन’ के कई अर्थ ध्वनित हो रहे हैं। ‘सुबरम्’ का अर्थ यहाँ | कवि, व्यभिचारी और चोर से सम्बन्धित है। यथा- कवि ‘सुबरन’ अर्थात् सुवर्ण (अच्छे शब्द) को ढूंढता है। व्यभिचारी ‘सुबरन’ अर्थात् ‘गौरी’ को ढूँढता है। चोर ‘सुबरन’ अर्थात् ‘स्वर्ण’ को ढूंढता है। अतः यहाँ श्लेष अलंकार हैं।

अर्थालंकार
1. उपमा अलंकार (2017, 16, 14, 13)
जब काव्य में समान धर्म के आधार पर एक वस्तु की समानता अथवा तुलना अन्य वस्तु से की जाए, तब वह उपमा अलंकार होता है, जिसकी उपमा दी जाए उसे उपमेय तथा जिसके द्वारा उपमा यानी तुलना की जाए उसे उपमान कहते हैं। उपमेय और उपमान की समानता प्रदर्शित करने के लिए सादृश्यवाचक शब्द प्रयोग किए जाते हैं।
उदाहरण ”मुख मयंक सम मंजु मनोहर।”
इस काव्य पंक्ति में ‘मुख’ उपमेय है, ‘चन्द्रमा’ उपमान है, ‘मनो५’ समान धर्म है। तथा ‘सम’ सादृश्य वाचक शब्द होने से उपमा अलंकार परिपुष्ट हो रहा है।

2. रूपक अलंकार (2018, 17, 16, 15, 14)
रूपक का अर्थ होता है- एकता। रूपक अलंकार में पूर्ण साम्य होने के कारण प्रस्तुत में प्रस्तुत का आरोप कर अभेद की स्थिति को स्पष्ट किया जाता है। इस प्रकार जहाँ ‘उपमेय’ और ‘उपमान’ की अत्यधिक समानता को प्रकट करने के लिए ‘उपमेय’ में ‘उपमान’ का आरोप होता है, वहाँ ‘रूपक अलंकार’ उपस्थित होता है।
उदाहरण “चरण कमल बन्द हरिराई।”
इस काव्य पंक्ति में उपमेय ‘धरण’ पर उपमान ‘कमल’ का आरोप कर दिया गया है। दोनों में अभिन्नता है, पर दोनों साथ-साथ हैं। इस अभेदता के कारण यहाँ रूपक अलंकार है।
रूपक अलंकार के भेद रूपक के विभिन्न भेदों में से तीन मुख्य भेद नीचे दिए गए हैं।

  • सांगरूपक इसमें अवयवों के साथ उपमेय पर उपमान आरोपित किए जाते
  • निरंग रूपक इसमें अवयवों के बिना ही उपमेय पर उपमान आरोपित किए जाते हैं।
  • परम्परित रूपक इसमें उपमेय पर प्रयुक्त आरोप ही दूसरे आरोप का कारण बनता है।

3. उत्प्रेक्षा अलंकार (2018, 17, 15, 14, 12)
‘उत्प्रेक्षा’ का अर्थ है- किसी वस्तु के सम्भावित रूप की उपेक्षा करना। उपमेय अर्थात् प्रस्तुत में उपमान अर्थात् अप्रस्तुत की सम्भावना को ‘उत्प्रेक्षा अलंकार’ कहते हैं। ‘उत्प्रेक्षा अलंकार’ में मानों, जानों, जनु, मनु, ज्यों इत्यादि शब्दों का प्रयोग होता है।
उदाहरण

“सोहत ओढ़ पीत-पट, श्याम सलोने गात।।
मनहुँ नीलमणि सैल पर, आतपु परयौ प्रभात।”

इस काव्यांश में श्रीकृष्ण के श्यामल शरीर पर नीलमणि पर्वत की तथा पीत-पट पर प्रातःकालीन धूप की सम्भावना व्यक्त की गई है। अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

4. भ्रान्तिमान् (2014, 13, 12, 11, 10)
जब उपमेय को भ्रम के कारण उपमान समझ लिया जाता है तब वहीं ‘भ्रान्तिमान अलंकार’ होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो इस अलंकार में उपमेय में उपमान का धोखा हो जाता है।
उदाहरण

“नाक का मोती अधर की कान्ति से,
बीज दाड़िम का समझकर भ्रान्ति से।
देख उसको ही हुआ शुक मौन है,
सोचता है अन्य शुक यह कौन हैं?”

5. सन्देह अलंकार (2017, 16, 13, 12)
जब किसी वस्तु में उसी के सदृश अन्य वस्तुओं का सन्देह हों और सदृशता के कारण अनिश्चित की मनोदशा हो तब वहाँ सन्देह अलंकार होता है।
उदाहरण

“सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है,
सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।”

6. अतिशयोक्ति अलंकार (2014, 13)
जब किसी वस्तु, व्यक्ति अथवा स्थिति की प्रशंसा करते हुए कोई बात बहुत बढ़ा-चढ़ा कर अथवा लोक सीमा का उल्लंघन करके कहीं जाए, तब वहाँ ‘अतिशयोक्ति अलंकार’ उपस्थित होता है।
उदाहरण

“आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा उतरे कैसे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।।

इस काव्यांश में राणा अभी नदी पार करने की सोच ही रहे थे कि उनका घोड़ा चेतक नदी के पार भी हो गया। यहाँ वेग (गति) के विषय में बहुत बढ़ा चढ़ा कर कहने से अतिशयोक्ति अलंकार परिपुष्ट हुआ है।

7. अनन्वय अलंकार (2016, 12)
काव्य में जहाँ उपमान के अभाव के कारण उपमेय को ही उपमान बना दिया जाए वहाँ ‘अनन्वय अलंकार’ होता है।
उदाहरण

“राम-से राम, सिया-सी सिया,
सिरमौरे बिरंचि बिचारि सँवारे।”

8. प्रतीप अलंकार (2017, 15, 14, 13, 11)
जहाँ उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बना दिया गया हो तो यह ‘प्रतीप अलंकार’ होता है। प्रतीप अलंकार में उपमा अलंकार की विपरीत स्थिति होती है। उदाहरण “उसी तपस्वी से लम्बे थे देवदारु दो चार खड़े।”

9. दृष्टान्त अलंकार (2018, 13)
उपमेय एवं उपमान के साधारण धर्म में भिन्नता होने पर भी बिम्ब-प्रतिबिम्य भाव से कथन करने को ‘दृष्टान्त अलंकार’ कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो दृष्टान्त अलंकार के अन्तर्गत पहले एक बात कहकर उसको स्पष्ट करने के लिए उससे मिलती-जुलती अन्य बात कही जाती है।
उदाहरण

‘परी प्रेम नन्दलाल के मोहि न भावत जोग।
मधुप राजपद पाइकै भीखन माँगत लोग।।”

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
“चरन धरत चिन्ता करत, चितवत चारित्र ओर।।
सुबरन को खोजत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर।।”
में अलंकार है। (2014, 12)
(क) उपमा
(ख) यमक
(ग) रूपक
(घ) श्लेष
उत्तर:
(घ) श्लेष

प्रश्न 2.
जहाँ एक शब्द अथवा शब्द-समूह का एक से अधिक बार प्रयोग हो, किन्तु उसका अर्थ प्रत्येक बार भिन्न हो, वहाँ कौन-सा अलंकार होता (2010)
(क) अनुप्रास
(ख) श्लेष
(ग) यमक
(घ) भ्रान्तिमान्
उत्तर:
(ग) यमके

प्रश्न 3.
जहाँ उपमेय में उपमान का भेदरहित आरोप हो, वहाँ अलंकार होता है। (2010)
अथवा
जहाँ उपमेय (प्रस्तुत) पर उपमान (अप्रस्तुत) का अभेद आरोप किया जाए, वहाँ अलंकार होता है। (2010)
(क) उपमा
(ख) रूपक
(ग) उत्प्रेक्षा
(घ) प्रतीप
उत्तर:
(ख) रूपक

प्रश्न 4.
“ऊधौ जोग जोग हम नाहीं।” इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? (2010)
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) उत्प्रेक्षा
उत्तर:
(ख) यमक

प्रश्न 5.
जहाँ उपमेय और उपमान के साधारण धर्म में भिन्नता होते हुए भी बिम्ब-प्रतिबिम्ब भाव से कथन किया जाए, वहाँ अलंकार होता है। (2011)
(क) उपमा
(ख) अनन्वय
(ग) उत्प्रेक्षा
(घ) दृष्टान्त
उत्तर:
(घ) दृष्टान्त

प्रश्न 6.
“अर्जी तरयौना ही रह्यौ श्रुति सेवत इक रंग।
नाक बास बेसरि लह्यौ, बसि मुकतनु के संग।।”
इस दोहे में अलंकार है। (2010)
(क) यमक
(ख) श्लेष
(ग) उत्प्रेक्षा
(घ) उपमा
उत्तर:
(ख) श्लेष

प्रश्न 7.
“अम्बर पनघट में डुबो रही, तरा-घट ऊषा-नागरी।”
उपरोक्त पद में अलंकार है। (2011)
(क) रूपक
(ख) श्लेष
(ग) उत्प्रेक्षा
(घ) उपमा
उत्तर:
(क) रूपक

प्रश्न 8.
“अब जीवन की कपि आस न कोय।
कनगुरिया की मुदरी कँगना होय।।”
पद में निहित अलंकार का नाम निम्नांकित विकल्पों में से लिखिए। (2011)
(क) दृष्टान्त
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) उपमा
(घ) अतिशयोक्ति
उत्तर:
(घ) अतिशयोक्ति

प्रश्न 9.
“पापी मनुज भी आज मुख से राम-राम निकालते।
देखो भयंकर भेड़िये भी, आज आँसू ढालते।।”
इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है? (2011, 10)
(क) सन्देह
(ख) भ्रान्तिमान्
(ग) दृष्टान्त
(घ) अतिशयोक्ति
उत्तर:
(ग) दृष्टान्त

प्रश्न 10.
जहाँ किसी वस्तु की इतनी प्रशंसा की जाए कि लोक-मर्यादा का अतिक्रमण हो जाए, वहाँ अलंकार होता है। (2011)
अथवा
जहाँ किसी वस्तु का इतना बढ़ा-चढ़ा कर वर्णन किया जाए कि सामान्य लोक सीमा का उल्लंघन हो जाए, वहाँ कौन-सा अलंकार होता (2011)
(क) रूपक
(ख) भ्रान्तिमान्
(ग) सन्देह
(घ) अतिशयोक्ति
उत्तर:
(घ) अतिशयोक्ति

प्रश्न 11.
जहाँ उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बना दिया जाए, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है? (2011, 10)
अथवा
जहाँ प्रसिद्ध उपमान को उपमेय बना दिया जाए अथवा उसकी व्यर्थता प्रदर्शित की जाए, वहाँ अलंकार होता है (2011, 10)
(क) रूपक
(ख) प्रतीप
(ग) अनन्वय
(घ) उत्प्रेक्षा
उत्तर:
(ख) प्रतीप

प्रश्न 12.
“रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।।”
में अलंकार है। (2013, 10)
(क) उपमा
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) रूपक
उत्तर:
(ग) श्लेष

प्रश्न 13.
“उस काल मारे क्रोध के तनु काँपने उनका लगा।
मानो हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगा।।”
में निहित अलंकार है (2011)
(क) भ्रान्तिमान्
(ख) दृष्टान्त
(ग) उत्प्रेक्षा
(घ) सन्देह
उत्तर:
(ग) उत्प्रेक्षा

प्रश्न 14.
जहाँ उपमान के अभाव में उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है, वहाँ अलंकार होता है।
अथवा
“वयं विषय को बहुत उत्कृष्ट दिखाने के क्रम में, उसके समान कोई अन्य है ही नहीं, सूचित करने के लिए उपमेय को ही उपमान बना देना,” किस अलंकार का लक्षण हैं? (2011)
(क) उपमा
(ख) रूपक
(ग) अनन्वय
(घ) सन्देह
उत्तर:
(ग) अनन्वय

प्रश्न 15.
जहाँ रूप-रंग आदि के सादृश्य से उपमेय में उपमान का संशय बना रहे, वहाँ अलंकार होता है। (2010)
(क) सन्देह
(ख) भ्रान्तिमान्
(ग) दृष्टान्त
(घ) प्रतीप
उत्तर:
(ख) भ्रान्तिमान्

प्रश्न 16.
उपमेय में उपमान की सम्भावना (या कल्पना) किस अलंकार में होती है? (2011)
अथवा
जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाए, वहाँ अलंकार होता है। (2011, 10)
(क) सन्देह
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) भ्रान्तिमान्
(घ) अतिशयोक्ति
उत्तर:
(ख) उत्प्रेक्षा

प्रश्न 17.
‘कैर्धी ब्योमबीथिका भरे हैं भूरि धूमकेतु,
वीररस बीर तरवारि-सी उघारी है।’
उपरोक्त पद में कौन-सा अलंकार है? (2010)
(क) अनन्वय
(ख) भ्रान्तिमान्
(ग) सन्देह
(घ) दृष्टान्त
उत्तर:
(ग) सन्देह

प्रश्न 18.
‘रहिमन अँसुआ नयन ढरि, जिय दुख प्रगट करे।
जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कहि देड़।।”
उक्त पंक्तियों में अलंकार हैं। (2010)
(क) अनन्वय
(ख) रूपक
(ग) सन्देह
(घ) दृष्टान्त
उत्तर:
(घ) दृष्टान्त

प्रश्न 19.
“बंदउँ कोमल कमल से, जग जननी के पाँय” उक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? (2014)
(क) उत्प्रेक्षा
(ख) रूपक
(ग) दृष्टान्त
(घ) उपमा
उत्तर:
(घ) उपमा

प्रश्न 20.
“विदग्ध होके कण धूलि राशि का, तपे हुए लौह कणों समान था।” उक्त पद में अलंकार है। (2011)
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) उपमा
उत्तर:
(घ) उपमा

प्रश्न 21.
“ओ चिन्ता की पहली रेखा, अरे विश्व वन की व्याली।” में अलंकार है। (2011)
(क) यमक
(ख) रूपक
(ग) श्लेष
(घ) प्रतीप
उत्तर:
(ख) रूपक

प्रश्न 22.
“जनक बचन छुट बिरवा लजाऊ के से,
वीर रहे सकल सकुचि सिर नाय के।”
उपरोक्त पद में अलंकार हैं।
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) उपमा
उत्तर:
(घ) उपमा

प्रश्न 23.
मंजु मेचक मृदुल तनु, अनुहरत भूवन भरनि।
मनहूँ सुभग सिंगार सिमु-तरु फरयौ अद्भुत फरनि।।
उपरोक्त पंक्तियों में अलंकार है।
(क) उपमा
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) यमक
(घ) श्लेष
उत्तर:
(ख) उत्प्रेक्षा

प्रश्न 24.
“कनक कनक तै सौ गुनी, मादकता अधिकाइ।
उहिं खाएँ बौराई जग, इहिं पाएँ बौराई।।”
उपरोक्त पद में अलंकार है
(क) रूपक
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) यमक
(घ) श्ले ष
उत्तर:
(ग) यमक

प्रश्न 25.
‘हरि पद कोमल कमल-से’ पद में अलंकार है। (2010)
(क) अनुप्रास
(ख) उपमा
(ग) उत्प्रेक्षा।
(घ) यमक
उत्तर:
(ख) उपमा

प्रश्न 26.
जहाँ रूप-रंग आदि के सादृश्य से उपमेय में उपमान का संशय बना रहे, वहाँ अलंकार होता है (2010)
(क) उत्प्रेक्ष
(ख) भ्रान्तिमान्
(ग) उपमा
(घ) सन्देह
उत्तर:
(घ) सन्देह

प्रश्न 27.
सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।
कि सारी ही की नारी है कि नारी ही सारी है।।
उपरोक्त पद में अलंकार है। (2011)
(क) भ्रान्तिमान्
(ख) दृष्टान्त
(ग) सन्देह
(घ) अतिशयोक्ति
उत्तर:
(ग) सन्देह

प्रश्न 28.
जहाँ काव्य की शोभा का कारण शब्द होता है, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?
(क) अर्थालंकार
(ख) शब्दालंकार
(ग) उपमा
(घ) सन्देह
उत्तर:
(ख) शब्दालंकार

प्रश्न 29.
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम। उक्त पंक्तियों में अलंकार है।
(क) यमक
(ख) श्लेष
(ग) अनुप्रास
(घ) उपमा
उत्तर:
(ग) अनुप्रास

प्रश्न 30.
जहाँ उपमेय की उपमान के रूप में सम्भावना की जाए, वहाँ अलंकार होता है।
(क) उपमा
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) रूपक
(घ) यमक
उत्तर:
(ख) उत्प्रेक्षा

प्रश्न 31.
‘नील घन-शावक से सुकुमार,
सुधा भरने को विधु के पास।
उक्त पंक्तियों में अलंकार है।
(क) उपमा
(ख) रूपक
(ग) दृष्टान्त
उत्तर:
(क) उपमा

प्रश्न 32.
‘रण-कमल बन्द हरिराई।’ में अलंकार हैं।
(क) उपेक्षा
(ख) अनुपास
(ग) रूपक
(घ) उपमा
उत्तर:
(ग) रूपक

प्रश्न 33.
रूपक अलंकार के भेद हैं।
(क) 4
(ख) 2
(ग) 5
(घ) 3
उत्तर:
(घ) 3

प्रश्न 34.
जहाँ समान वर्गों की बार-बार आवृत्ति होती है, वहाँ अलंकार होता है।
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) भ्रान्तिमान
(घ) उपमा
उत्तर:
(क) अनुप्रास

प्रश्न 35.
उपमा अलंकार का विपरीत अलंकार होता है।
(क) दृष्टान्त
(ख) श्लेष
(ग) प्रतीप
(घ) सन्देह
उत्तर:
(ग) प्रतीप

प्रश्न 36.
उपमेय और उपमान के साधारण धर्म में भिन्नता होने पर अलंकार होता
(क) भ्रान्तिमान
(ख) सन्देह
(ग) उपमान
(घ) दृष्टान्त
उत्तर:
(घ) दृष्टान्त

प्रश्न 37.
जहाँ उपमेय को ही उपमान बना दिया जाए, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?
(क) प्रतीप
(ख) अनन्वय
(ग) उत्प्रेक्षा
(घ) भ्रान्तिमान
उत्तर
(ख) अनन्वये

प्रश्न 38.
प्रस्तुत में अप्रस्तुत की सम्भावना को कौन-सा अलंकार कहते हैं?
(क) उपमा
(ख) उत्प्रेक्षा।
(ग) रूपक
(घ) भ्रान्तिमान
उत्तर:
(ख) उत्प्रेक्षा

प्रश्न 39.
‘तरनि-तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।’ उक्त काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार हैं? (2008)
(क) यमक
(ख) श्लेष
(ग) उपमा
(घ) अनुप्रास
उत्तर:
(घ) अनुप्रास

प्रश्न 40.
माला फेरत जुग भया, फिरा न मनका फेर।
करका मनका हारि दे मनका-मनका फेर।।
उक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है?
(क) श्लेष
(ख) यमक
(ग) अनुप्रास
(घ) रूपक
उत्तर:
(ख) यमके।

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों में अलंकार का नाम और उसका लक्षण लिखिए।
सोहत ओढे पीत पट स्याम सलोने गात।
मनुहुँ नीलमणि शैल पर आतप परयो प्रभात।।
उत्तर:
यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है। जहाँ प्रस्तुत में अप्रस्तुत की सम्भावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसके वाचक शब्द, मनु, जनु, मनहु, जनहु, मानो, जानों आदि हैं।

प्रश्न 2.
रूपक अलंकार के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
रूपक अलंकार के तीन भेद होते हैं, जो निम्न प्रकार हैं।
(क) सांग रूपक
(ख) निरंग रूपक
(ग) परम्परित रूपक

प्रश्न 3.
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में अलंकार का नाम तथा उसका लक्षण लिखिए।
‘कमल-नैन को छाँड़ि महातम, और देव को ध्यानँ।’
उत्तर:
यहाँ रूपक अलंकार हैं। जहाँ उपमेय में उपमान का भेद रहित आरोप हो, वहाँ रूपक अलंकार होता है।

प्रश्न 4.
‘पूत सपूत तो क्यों धन संचे।’
पूत कपूत तो क्यों धन संचे।।
उत्तर:
यहाँ अनुप्रास का एक भेद लाटानुप्रास है। जहाँ शब्द और अर्थ की आवृत्ति हो अर्थात् जहाँ एकार्थक शब्दों की आवृत्ति तो हो, परन्तु अन्वय करने पर अर्थ भिन्न हो जाए, वहाँ लाटानुप्रास अलंकार होता है।

प्रश्न 5.
कहत नटत रीझत खीझत मिलत खिलत लजियात।
भरे भौन में करत हैं, नैननु हीं सौं बात।।
उक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है? उसका लक्षण लिखिए।
उत्तर:
यहाँ अनुप्रास का एक भेद अन्त्यानुप्रास’ है। जब छन्द के शब्दों के अन्त में समान स्वर या व्यंजन की आवृत्ति हो, वहाँ ‘अन्त्यानुप्रास’ अलंकार होता है।

प्रश्न 6.
रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चुन।।।
उक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है? उसका लक्षण लिखिए।
उत्तर:
यहाँ श्लेष अलंकार है। जहाँ एक शब्द के एक से अधिक अर्थ होते हैं, वहाँ श्लेष अलंकार होता हैं।

प्रश्न 7.
अनुप्रास अलंकार का लक्षण एवं उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
जहाँ समान वर्षे की आवृत्ति बार-बार होती है अर्थात् कोई वर्ण एक से अधिक बार आता है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है; जैसे
उदाहरण

रघुपति राघव राजा राम,
पतित पावन सीता राम।।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सबको सम्मति दे भगवान।

प्रश्न 8.
मकराकृति गोपाल के, सोहत कुण्डल कान।
धयो मनौ हिय धर समरु, इयौढी लसत निसान।।
उक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है? उसका लक्षण लिखिए।
उत्तर:
यहाँ रूपक अलंकार है। जहाँ उपमेय और उपमान में अभिन्नता प्रकट की जाए अर्थात् उन्हें एक ही रूप में प्रकट किया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है।

प्रश्न 9.
‘तेरी बरछी ने बरछीने हैं खलन के।’
उक्त काव्य पंक्ति में अलंकार का नाम तथा उसका लक्षण लिखिए।
उत्तर:
यहाँ यमक अलंकार है। जहाँ कोई शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त होता है और प्रत्येक बार उसके अर्थ अलग होते हैं। वहाँ यमक अलंकार होता है।

प्रश्न 10.
‘पछताने की परछाहीं-सी, तुम उदास छाई हो कौन?’ इस पंक्ति में अलंकार का नाम और उसका लक्षण लिखिए।
उत्तर:
यहाँ उपमा अलंकार है। जहाँ उपमेय (संज्ञा) की उपमान (विशेषण) से समानता बताई जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। इसके वाचक शब्द हैं, सी, सा, से, सम, सरिस आदि।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित पंक्तियों में अलंकार का नाम तथा उसका लक्षण लिखिए।
‘चरण-कमल बन्द हरिराई।’ (2013, 10)
उत्तर:
उक्त रूपक अलंकार है। जहाँ उपमेय में उपमान का भेद रहित आरोप हो, वहाँ रूपक अलंकार होता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित दोहे में अलंकार का नाम तथा लक्षण लिखिए।
चिरजीव जोरी जुरै, क्यों न सनेह गम्भीर
को घटि ए वृषभानुजा, वे हलधर के वीर।।
उत्तर:
यहाँ श्लेष अलंकार है। जहाँ एक शब्द एक ही स्थान पर प्रयुक्त हो और उसके एक से अधिक अर्थ हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में कौन-सा अलंकार है?
मुख मयंक सम मंजु मनोहर।।
उत्तर:
यहाँ उपमा अलंकार है, क्योंकि मुख की समानता चन्द्रमा से की गई है। तथा मंजु और मनोहर साधारण धर्म हैं साथ में वाचक शब्द सा भी प्रयुक्त है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में कौन-सा अलंकार है?
ओ चिन्ता की पहली रेखा, अरे विश्व वन की व्याली।
उत्तर:
इस पंक्ति में रूपक अलंकार है, क्योंकि चिन्ता उपमेय में विश्व वन की व्याली में उपमान का आरोप किया गया है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
नाक का मोती अधर की कान्ति से,
बीज़ दाडिम का समझकर भ्रान्ति से।
देख उसको ही हुआ शुक मौन है,
सोचता है अन्य शुक यह कौन है?
उत्तर:
इन पंक्तियों में भ्रान्तिमान अलंकार है। जहाँ समानता के कारण एक वस्तु को दूसरी समझ लिया जाता है। वहाँ भ्रान्तिमान अलंकार होता है। इसमें तोता उर्मिला की नाक के मोती को भ्रमवश अनार का दाना और उसकी नाक को दूसरा तोता समझकर भ्रमित हो जाता है। इस कारण यहाँ पर भ्रान्तिमान अलंकार है।

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