UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज (लक्ष्मीनारायण मिश्र) are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज (लक्ष्मीनारायण मिश्र).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name गरुड़ध्वज (लक्ष्मीनारायण मिश्र)
Number of Questions 6
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज (लक्ष्मीनारायण मिश्र)

प्रश्न 1.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक की कथावस्तु (कथानक) को संक्षेप में लिखिए। [2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 18]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक की कथा का सार अपनी भाषा में प्रस्तुत कीजिए। [2010, 11, 13, 14, 16]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के प्रथम अंक को कथासार अपने शब्दों में लिखिए। [2012, 13, 16]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के द्वितीय अंक की कथा (कथावस्तु) संक्षेप में लिखिए। [2009, 13, 14, 15, 16, 17, 18]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के अन्तिम (तृतीय) अंक की घटनाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए। [2009, 14, 16, 17]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के किसी एक अंक के कथानक पर प्रकाश डालिए। [2010]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक की कथावस्तु संक्षेप में इस प्रकार लिखिए कि उसमें निहित राष्ट्रीय एकता का भाव स्पष्ट हो। ‘गरुड़ध्वज’ नाटक के अन्तिम अंक का कथानक अपने शब्दों में लिखिए। [2015]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के तीसरे अंक की कथा अपने शब्दों में लिखिए। [2015, 16, 18]
उत्तर
श्री लक्ष्मीनारायण मिश्र कृत ‘गरुड़ध्वज’ नाटक की कथा ऐतिहासिक है। कथा में प्रथम शती ईसा पूर्व के भारतवर्ष की सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक तथा सामाजिक झाँकी प्रस्तुत की गयी है। कहानी में शुंग वंश के अन्तिम सेनापति विक्रमादित्य, मालवा के जननायक ‘विषमशील’ के त्याग और शौर्य की गाथा वर्णित है। विषमशील ही ‘विक्रमादित्य’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

प्रथम अंक-नाटक के प्रथम अंक में पहली घटना विदिशा में घटित होती है। विक्रममित्र स्वयं को सेनापति सम्बोधित कराते हैं, महाराज नहीं। विक्रममित्र के सफल शासन में प्रजा सुखी है। बौद्धों के पाखण्ड को समाप्त करके ब्राह्मण धर्म की स्थापना की गयी है। सेनापति विक्रममित्र ने वासन्ती नामक एक युवती का उद्धार किया है। उसके पिता वासन्ती को किसी यवन को सौंपना चाहते थे। वासन्ती, एकमोर नामक युवक से प्रेम करती है। इसी समय कवि और योद्धा कालिदास प्रवेश करते हैं। कालिदास; विक्रममित्र को आजन्म ब्रह्मचारी रहने के कारण भीष्म पितामह’ कहते हैं। विक्रममित्र इस समय सतासी वर्ष के हैं। इसी समय साकेत के एक यवन-श्रेष्ठी की कन्या कौमुदी का सेनापति देवभूति द्वारा अपहरण करने की सूचना विक्रममित्र को मिलती है। देवभूति कन्या का अपहरण कर उसे काशी ले जाते हैं। विक्रममित्र कालिदास को काशी पर आक्रमण करने की आज्ञा देते हैं।

द्वितीय अंक-नाटक के दूसरे अंक में दो घटनाएँ प्रस्तुत की गयी हैं। प्रथम में तक्षशिला के राजा अन्तिलिक का मन्त्री ‘हलोदर’ विक्रममित्र से अपने राज्य के दूत के रूप में मिलता है। हलोदर भारतीय संस्कृति में आस्था रखता है तथा सीमा विवाद को वार्ता के द्वारा सुलझाना चाहता है। वार्ता सफल रहती है। तथा हलोदर विक्रममित्र को अपने राजा की ओर से रत्नजड़ित स्वर्ण गरुड़ध्वज भेटस्वरूप देता है।
विक्रममित्र के आदेशानुसार कालिदास काशी पर आक्रमण करते हैं तथा अपने ज्ञान और विद्वत्ता से काशी के दरबार में बौद्ध आचार्यों को प्रभावित कर देते हैं। वे कौमुदी का अपहरण करने वाले देवभूति तथा काशी नरेश को बन्दी बनाकर विदिशा ले जाते हैं। नाटक के इसी भाग में वासन्ती काशी विजयी ‘कालिदास का स्वागत उनके गले में पुष्पमाला डालकर करती है।

तृतीय अंक-नाटक के तृतीय तथा अन्तिम अंक की कथा ‘अवन्ति’ में प्रस्तुत की गयी है। विषमशील के नेतृत्व में अनेक वीरों ने मालवा को शकों से मुक्त कराया। विषमशील के शौर्य के कारण अनेक राजा उसके समर्थक हो जाते हैं। अवन्ति में महाकाल का एक मन्दिर है, इस पर गरुड़ध्वज फहराता रहता है। मन्दिर का पुजारी मलयवती और वासन्ती को बताता है कि युद्ध की सभी योजनाएँ इसी मन्दिर में बनती हैं। इसी समय विषमशील युद्ध जीतकर आते हैं तथा काशिराज अपनी पुत्री वासन्ती का विवाह कालिदास के साथ विक्रममित्र की आज्ञा लेकर कर देते हैं। इसी अंक में विषमशील का राज्याभिषेक होता है। तथा कालिदास को मन्त्री-पद पर नियुक्त किया जाता है। राजमाता जैन आचार्यों को क्षमादान देती हैं। कालिदास की मन्त्रणा से विषमशील का नाम उसके पिता महेन्द्रादित्य तथा विक्रममित्र के आधार पर विक्रमादित्य रखा जाता है। विक्रममित्र संन्यासी बन जाते हैं तथा कालिदास अपने राजा विक्रमादित्य के नाम पर उसी दिन से विक्रम संवत् का प्रवर्तन करते हैं। नाटक की कथा यहीं समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 2.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक का नायक कौन है ? उसकी चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2011, 12]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के नायक की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [2015]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के प्रमुख पुरुष-पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2010, 11, 14, 15, 16]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के प्रमुख पात्र के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2016]
या
विक्रममित्र की चारित्रिक विशेषताओं का उदघाटन कीजिए। [2010, 11, 14, 16]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर विक्रममित्र के चरित्र पर प्रकाश डालिए। [2009, 10, 14, 16]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के किसी एक पुरुष-पात्र की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए। [2013, 14,17]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर विक्रममित्र के शौर्य एवं त्याग का वर्णन कीजिए। [2013]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर ‘विक्रममित्र’ की चारित्रिक विशेषताएँ उद्घाटित कीजिए। [2015]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के विक्रममित्र का चरित्रांकन कीजिए। [2016]
उत्तर

विक्रममित्र का चरित्र-चित्रण

श्री लक्ष्मीनारायण मिश्र कृत ‘गरुड़ध्वज’ नाटक में विषमशील तथा विक्रममित्र दो प्रमुख पात्र हैं। नाटक के नायक विक्रममित्र हैं, जो नाटक के आरम्भ से अन्त तक की सभी घटनाओं के साथ जुड़े रहते हैं। यह कहा जा सकता है कि सारे कथानक के मेरुदण्ड विक्रममित्र ही हैं, जिन्होंने मूल कथा को सबसे अधिक प्रभावित किया है। विक्रममित्र, पुष्यमित्र शुंग के वंश के अन्तिम शासक हैं। वे ब्रह्मचारी, सदाचारी, वीर, कुशल राजनीतिज्ञ तथा प्रजावत्सल हैं। वह शासन का संचालन कुशलता से करते हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नवत् हैं

(1) सज्जन महापुरुष–विक्रममित्र सज्जन महापुरुष हैं। वे स्वयं को ‘महाराज’ कहलवाना पसन्द नहीं करते, अत: लोग उन्हें ‘सेनापति’ कहते हैं। नारियों के प्रति सम्मान का भाव सदा उनके मन में रहता है।
(2) अनुशासनप्रिय-विक्रममित्र अनुशासनप्रिय हैं तथा कठोर अनुशासन का पालन करने और कराने के पक्षधर हैं। सेनापति के स्थान पर ‘महाराज’ कहे जाने पर सेवक को डर लगता है कि कहीं सेनापति उसे दण्ड न दे दें। विक्रममित्र के शासन में अनुशासन भंग करना और मर्यादा का उल्लंघन करना अक्षम्य अपराध है।
(3) प्रजा के सेवक-विक्रममित्र अपनी प्रजा को अपनी सन्तान की भाँति स्नेह करते हैं। वे अत्याचारी नहीं हैं। उनका मत है-”सेनापति धर्म और जाति का सबसे बड़ा सेवक है।”
(4) भागवत धर्म के रक्षक-विक्रममित्र भारतवर्ष में मिटती हुई वैदिक संस्कृति तथा ब्राह्मण धर्म के रक्षक हैं। वे भागवत धर्म और उसकी प्रतिष्ठा के लिए आजीवन संघर्ष करते हैं। उनका सेवक कालिदास काशी में बौद्धों को निरुत्तर कर देता है।
(5) संगठित राष्ट्र-निर्माता—उस समय देश छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था। विक्रममित्र ने उन्हें इकट्ठा करने का सफल प्रयास किया। विक्रममित्र का मत है—“देश का गौरव, इसके सुख और शान्ति की रक्षा मेरा धर्म है।” वे कालिदास का विवाह काशी-नरेश की पुत्री से कराते हैं। विक्रममित्र के संन्यास के समय तक मगध, साकेत तथा अवन्ति को मिलाकर एक सुदृढ़ राज्य की स्थापना हो चुकी होती है।
(6) निष्काम कर्मवीर विक्रममित्र राजा होते हुए भी महाराजा कहलाना पसन्द नहीं करते। वे स्वयं को प्रजा का सेवक ही मानते हैं। विषमशील के योग्य हो जाने पर उसे शासक बनाकर स्वयं संन्यासी हो जाते हैं। कालिदास का उन्हें ‘भीष्म पितामह’ कहना सटीक सम्बोधन है।
(7) नीतिप्रिय–आचार्य विक्रममित्र नीति के अनुसार चलने वाले जननायक हैं। कुमार विषमशील की सफलता का एकमात्र कारण सेनापति विक्रममित्र की नीतियाँ ही हैं। वह नागसेन और पुष्कर से कहते हैं- ‘तुम जानते हो विक्रममित्र के शासन में अनीति चाहे कितनी छोटी क्यों न हो, छिपी नहीं रह सकती है।”
(8) शरणागतवत्सल-विक्रममित्र अपनी शरण में आये हुए की रक्षा करते हैं। चंचु और कालकाचार्य को क्षमा-दान देना उनकी शरणागतवत्सलता के प्रमाण हैं।
(9) निरभिमानी-विक्रममित्र शासक होते हुए भी अभिमान से कोसों दूर रहते हैं। वे हलोदर से कहते हैं-“मैं लज्जा और संकोच से मरने लगता हूँ; राजदूत! जब इस युग का सारा श्रेय मुझे दिया जाता है।”

इस प्रकार विक्रममित्र न्यायप्रिय, प्रजावत्सल, वीर शासक तथा निष्काम महामानव हैं।

प्रश्न 3
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर (नायिका) वासन्ती का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2009, 12, 13, 14, 16, 18]
या
‘गरुड़ध्वज’ के प्रमुख नारी-पात्र (नायिका) के विषय में अपने विचार प्रकट कीजिए। [2010, 12, 13, 14]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के किसी एक नारी पात्र की चरित्रगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [2013]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के प्रमुख स्त्री-पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2015]
उत्तर

वासन्ती का चरित्र-चित्रण

श्री लक्ष्मीनारायण मिश्र कृत ‘गरुड़ध्वज’ नाटक की नायिका वासन्ती है। वासन्ती काशिराज की इकलौती पुत्री है। बौद्ध धर्म के अनुयायी होने के कारण वे वासन्ती का विवाह किसी राजकुल में नहीं कर पाते, अत: अपनी युवा पुत्री का विवाह शाकल के 50 वर्षीय यवन राजकुमार से निश्चित करते हैं, किन्तु इसी बीच विक्रममित्र के प्रयास से यह विवाह बीच में रोक दिया जाता है और वासन्ती को राजमहल में सुरक्षित पहुँचा दिया जाता है। बाद में वह कालिदास की प्रेयसी के रूप में हमारे सम्मुख आती है। वासन्ती के चरित्र में निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ पायी जाती हैं–

(1) अनुपम सुन्दरी-वासन्ती रूप और गुण दोनों में अद्वितीय है। उसका सौन्दर्य कालिदास जैसे संयमी पुरुष को भी आकर्षित कर लेता है। उसके सौन्दर्य की प्रशंसा करते हुए कुमार विषमशील कालिदास से कहते हैं और तुम्हारी वासन्ती–रूप और गुण का इतना अद्भुत मिश्रण …………..” पता नहीं, कितने कुण्ड इस पर्वतीय स्रोत के सामने फीके पड़ेंगे।”
(2) उदारता और प्रेमभावना से परिपूर्ण-वासन्ती विश्व के समस्त प्राणियों के लिए अपने हृदय में उदार भावना रखती है। उसमें बड़े-छोटे, अपने-पराये सभी के लिए एक समान प्रेमभाव ही भरा हुआ है।
(3) धार्मिक संकीर्णता से त्रस्त-पिता के बौद्ध धर्मानुयायी होने के कारण कोई भी राज-परिवार वासन्ती से विवाह-सम्बन्ध के लिए तैयार नहीं होता। अन्त में उसके पिता काशिराज उसे 50 वर्षीय यवन राजकुमार को सौंप देने का निश्चय कर लेते हैं, जब कि वासन्ती उससे विवाह नहीं करना चाहती। इस प्रकार वासन्ती तत्कालीन समाज में व्याप्त धार्मिक संकीर्णता से त्रस्त है।
(4) आत्मग्लानि से विक्षुब्ध–वासन्ती आत्मग्लानि से विक्षुब्ध होकर अपने जीवन से छुटकारा पाना चाहती है और अपनी जीवन-लीला समाप्त करने का प्रयास करती है, परन्तु विक्रममित्र उसको ऐसा करने से रोक लेते हैं। वह असहाय होकर कहती है-”वह महापुरुष कौन होगा, जो स्वेच्छा से आग के साथ विनोद करेगा।”
(5) स्वाभिमानिनी-वासन्ती धार्मिक संकीर्णता से त्रस्त होने पर भी अपना स्वाभिमान नहीं खोती। वह किसी ऐसे राजकुमार से विवाह-बन्धन में नहीं बँधना चाहती, जो विक्रममित्र के दबाव के कारण ऐसा करने के लिए विवश हो।।
(6) सहदय और विनोदप्रिय-वासन्ती विक्षुब्ध और निराश होने पर भी सहृदय और विनोदप्रिय दृष्टिगोचर होती है। वह कालिदास के काव्य-रस का पूरा आनन्द लेती है।।
(7) आदर्श प्रेमिका–वासन्ती एक सहृदया, सुन्दर, आदर्श प्रेमिका है। वह निष्कलंक और पवित्र है। सार रूप में यह कहा जा सकता है कि वासन्ती एक आदर्श नारी-पात्र है और इस नाटक की नायिका है।

प्रश्न 4
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर नायिका ‘मलयवती’ का चरित्रांकन कीजिए। [2016]
उत्तर
मलयवती का चरित्र-चित्रण मलयवती; श्री लक्ष्मीनारायण मिश्र कृत ‘गरुड़ध्वज’ नाटक के नारी-पात्रों में एक प्रमुख पात्र है। सम्पूर्ण नाटक में अनेक स्थलों पर उसका चरित्र पाठकों को आकर्षित करता है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं|

(1) अपूर्व सुन्दरी–मलयवती का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावपूर्ण है। वह मलय देश की राजकुमारी है। और अपूर्व सुन्दरी है। विदिशा के राजप्रासाद के उपवन में उसके रूप-सौन्दर्य को देखकर कुमार विषमशील भी उस पर मुग्ध हो जाते हैं।
(2) ललित कलाओं में रुचि-मलयवती की ललित-कलाओं में विशेष रुचि है। ललित कलाओं में दक्ष होने के उद्देश्य से ही वह विदिशा जाती है और वहाँ मलय देश की चित्रकला, संगीतकला आदि भी सीखती है।
(3) विनोदप्रिय–राजकुमारी मलयवती प्रसन्नचित्त और विनोदी स्वभाव की है। वासन्ती उसकी प्रिय सखी है और वह उसके साथ खुलकर हास-परिहास करती है। जब राजभृत्य उसे बताता है कि महाकवि कह रहे थे कि मलयवती और वासन्ती दोनों को ही राजकुमारी के स्थान पर राजकुमार होना चाहिए था तो मलयवती कहती है—“क्यों महाकवि को यह सूझी है? इस पृथ्वी की सभी कुमारियाँ कुमार हो जाएँ, तब तो अच्छी रही। कह देना महाकवि से इस तरह की उलट-फेर में कुमारों को कुमारियाँ होना होगा और महाकवि भी कहीं उस चक्र में न आ जाएँ।”
(4) आदर्श प्रेमिका–मलयवती के हृदय में कुमार विषमशील के प्रति प्रेम का भाव जाग्रत हो जाता है। वह विषमशील का मन से वरण कर लेने के उपरान्त, एकनिष्ठ भाव से केवल उन्हीं का चिन्तन करती है। वह स्वप्न में भी किसी अन्य की कल्पना करना नहीं चाहती। उसका प्रेम सच्चा है और उसे अपने प्रेम पर पूर्ण विश्वास है। अन्ततः प्रेम की विजय होती है और कुमार विषमशील के साथ उसका विवाह हो जाता है।

इस प्रकार मलयवती का चरित्र एवं व्यक्तित्व अनुपम है। वह एक आदर्श राजकुमारी की छवि प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 5
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर कालिदास का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2010, 11, 12, 13, 16, 18]
उत्तर
‘गरुड़ध्वज’ के पुरुष पात्रों में कालिदास भी एक प्रमुख पात्र हैं। विक्रममित्र शुंगवंशीय शासक एवं वीर सेनापति के रूप में प्रमुख पात्र है। इसके पश्चात् द्वितीय एवं तृतीय क्रम पर क्रमशः विषमशील, कालिदास का ही नाम आता है। विषमशील और विक्रममित्र तो प्रबुद्ध, शासक, सेनापति और शूरवीर पुरुष है। कालिदास शकारि विक्रमादित्य के दरबारी रत्नों में एक मुख्य रत्न माने जाते थे। ये एक विद्वान् कवि थे और वीर सैनिक भी थे; अतः वे विषमशील तथा विक्रममित्र से भी कुछ अधिक गुणों के स्वामी हैं। उनकी चरित्र की कुछ प्रमुख विशेषताएँ अग्रवत् हैं-

(1) वीरता–कालिदास एक वीर पुरुष हैं। जब देवभूति कौमुदी का अपहरण कर लेता है तो कालिदास उसे काशी में घेर कर पकड़ लाते हैं। उसकी इसी वीरता पर मुग्ध होकर काशी की राजकुमारी वासन्ती उससे प्रेम करने लगती है और काशिराज भी प्रसन्न होकर उन दोनों के विवाह की स्वीकृति देते हैं।
(2) सच्चा-मित्र-कालीदास विषमशील का मित्र है, इसीलिए विषमशील के साथ उसका हासपरिहास चलता रहता है। वह मलयवती के बारे में राजकुमार विषमशील से चुटकी लेता हुआ कहता है
किस तरह भूल गये विदिशा के प्रासाद का वह उपवन …………”। घूम-घाम कर मलयवती को आँखों से पी जाना चाहते थे।’
(3) सच्चा-प्रेमी और कवि-वह वासन्ती का सच्चा प्रेमी है। वासन्ती को भी उस पर पूरा विश्वास है। वह वासन्ती के बारे में कहता है-“मैं सब कुछ जानता हूँ। उन्होंने तो उस यवन को देखा भी नहीं, फिर उसकी पवित्रता में शंका उत्पन्न करना तो पार्वती की पवित्रता में शंका उत्पन्न करना होगा। इसके अतिरिक्त वे एक महाकवि भी हैं। जैसा कि मलयवती ने कहा भी है-“क्यों महाकवि को यह क्या सूझी है ?”

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कालिदास ‘गरुड़ध्वज’ के अन्य पुरुष-पात्रों की अपेक्षा विलक्षण हैं। वे वीर, सच्चे मित्र, सच्चे प्रेमी और महाकवि भी हैं। वे शासक भी हैं और शासित भी; वे वीर हैं, न्यायप्रिय हैं, कठोर हैं और कोमल भी हैं।

प्रश्न 6
‘गरुडध्वज’ के आधार पर विषमशील का चरित्र-चित्रण कीजिए। [2010, 15]
या
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर विषमशील के शौर्य एवं त्याग का वर्णन कीजिए। [2013]
उत्तर
कुमार विषमशील ‘गरुड़ध्वज’ नाटक के दूसरे प्रमुख पात्र हैं। ये धीरोदात्त स्वभाव के उच्च कुलीन श्रेष्ठ पुरुष हैं। आदि से अन्त तक इनके चरित्र का क्रमिक विकास होता है। इनके चरित्र में अग्रलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं-

(1) उदार और गुणग्राही–कुमार विषमशील मालवा के गर्दभिल्लवंशी महाराज महेन्द्रादित्य के वीर सुपुत्र हैं अपने महान् कुल के अनुरूप ही उनमें उदारता और गुणग्राहकता विद्यमान है। कवि कालिदास की विद्वत्ता, वीरता आदि गुणों को देखकर वे उनके गुणों पर ऐसे मुग्ध हो जाते हैं कि उनसे अलग होना नहीं चाहते।
(2) महान् वीर-वीरता कुमार विषमशील के चरित्र की महती विशेषता है। अपनी वीरता के कारण वह शकारि क्षत्रियों को पराजित कर भारी विजय प्राप्त करते हैं। कुमार की वीरता और योग्यता को देखकर ही आचार्य विक्रममित्र उसे सम्राट् बनाकर निश्चिन्त हो जाते हैं।
(3) सच्चा-प्रेमी–कुमार विषमशील एक भावुक व्यक्ति है। उसके हृदय में दया, प्रेम, उत्साह आदि मानवीय भावनाएँ पर्याप्त मात्रा में पायी जाती हैं। स्वभाव से धीर होते हुए भी कुमारी मलयवती को देखकर उनके हृदय में प्रेम अंकुरित हो जाता है।
(4) विवेकशीलकुमार विषमशील एक विवेकशील व्यक्ति के रूप में चित्रित हुए हैं। वे भली-भाँति समझते हैं कि किस प्रकार, किस अवसर पर अथवा किस स्थान पर किस प्रकार की बात करनी चाहिए। कालिदास के साथ उसका व्यवहार मित्रों जैसा होता है, हास और उपहास भी होता है किन्तु सेनापति विक्रममित्र के सामने वे सर्वत्र संयत और शिष्ट-आचरण करते हैं। वासन्ती और मलयवती के साथ बातें करते समय वह भावुक हो उठते हैं। किसी काम को करने से पूर्व वह विवेक से काम लेते हैं तथा उसके दूरगामी परिणाम को सोचते हैं। जब सेनापति विक्रममित्र साकेत और पाटलिपुत्र का राज्य भी उसे सौंपते हैं। तो वह बहुत विवेक से काम लेता है। अवन्ति में रहकर सुदूर पूर्व के इन राज्यों की व्यवस्था करना कोई सरल काम नहीं था। इसलिए वह विक्रममित्र से निवेदन करता है
“आचार्य! अभी कुछ दिन आप महात्मा काशिराज के साथ उधर की व्यवस्था करें। मैं चाहता हूँ, मेरे सिर पर किसी मनस्वी ब्राह्मण की छाया रहे और फिर मैं यह देख भी नहीं सकता कि जिस क्षेत्र में प्राय: डेढ़ सौ वर्षों से आपके पूर्व-पुरुषों का अनुशासन रहा, वह अकस्मात् इस प्रकार मिट जाये।”
(5) कृतज्ञता कुमार विषमशील दूसरे के किये हुए उपकार से अपने को उपकृत मानता है। कालिदास के उपकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए वह कहता है–
“और वह राज्य मुझे देकर मुझ पर, मेरे मन, मेरे प्राण पर राज्य करने की युक्ति निकाल ली। ……. मैं सुखी हूँ …….. तुम्हारा अधिकार मेरे मन पर सदैव बना रहे:…..: महाकाल से मेरी यही कामना है।’
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कुमार विषमशील का चरित्र एक सुयोग्य राजकुमार का चरित्र है। वह स्वभाव से उदार, गुणग्राही तथा भावुक व्यक्ति है। उसमें वीरता, विवेकशीलता आदि कुछ ऐसे गुण हैं। जिनके आधार पर उसमें एक श्रेष्ठ शासक बनने की क्षमता सिद्ध हो जाती है। उसका चरित्र स्वाभाविक तथा मानवीय है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज (लक्ष्मीनारायण मिश्र) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज (लक्ष्मीनारायण मिश्र), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability (सांतत्य तथा अवकलनीयता) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability (सांतत्य तथा अवकलनीयता)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 5
Chapter Name Continuity and Differentiability
Exercise Ex 5.1, Ex 5.2, Ex 5.3, Ex 5.4, Ex 5.5, Ex 5.6, Ex 5.7, Ex 5.8
Number of Questions Solved 121
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability

प्रश्नावली 5.1

प्रश्न 1.
सिद्ध कीजिए कि फलन f(x) = 5x – 3, x = 0, x = – 3 तथा x = 5 पर संतत है।
हल-
यहाँ, f(x) = 5x – 3
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 1
(iii) उपरोक्त की भाँति स्वयं हल कीजिए।
नोट-चूँकि दिया गया फलन f(x) = 5x – 3 बहुपद है।
∴ यह ∀ x ∈ R के लिए संतत है।

प्रश्न 2.
x = 3 पर फलन f(x) = 2x² – 1 के सातत्य की जाँच कीजिए।
हल-
यहाँ, f(x) = 2x -1
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 2
अतः x = 3 पर f संतत है।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
निम्नलिखित फलनों के सांतत्य की जाँच कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 3
हल-
(a) f(x) = x – 5
∵ (x – 5) एक बहुपद है।
अत: प्रत्येक बिन्दु x∈R पर f संतत है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 4
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 5

प्रश्न 4.
सिद्ध कीजिए कि फलन f(x) = xn, x = n पर संतत है, जहाँ n एक धन पूर्णाक है।
हल-
दिया है- f(x) = xn एक बहुपदीय फलन है।
संतत है, यदि x ∈ R तथा x ∈ N
यहाँ x = n एक पूर्णांक है।
अत: f(x) = xn संतत फलन है।

प्रश्न 5.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 6
हल-
x = 0 तथा x = 2 पर फलन एक बहुपद है।
अतः x = 0 तथा x = 2 पर फलन सतत है।
x = 1 पर, f(x) = x, x<1 के लिए, f(x) = 5, x>1 के लिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 7

प्रश्न 6.
f के सभी असातत्य बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जबकि f निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 8
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 9

प्रश्न 7.
f के सभी असातत्य बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जबकि f निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 10
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 11
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 12
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 13

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
f के सभी असातत्य बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जबकि f निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 14
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 15

प्रश्न 9.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 16
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 17
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 18

प्रश्न 10.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 19
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 20

प्रश्न 11.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 21
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 22

प्रश्न 12.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 23
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 24

प्रश्न 13.
क्या
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 25
द्वारा परिभाषित फलन, एक संतत फलन है?
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 26

प्रश्न 14.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 27
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 28
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 29

प्रश्न 15.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 30
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 31
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 32

प्रश्न 16.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 33
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 34
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 35
UP Board Solutions

प्रश्न 17.
a और b के उन मानों को ज्ञात कीजिए जिनके लिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 36
द्वारा परिभाषित फलन x = 3 पर संतत है।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 37
स्वेच्छा से b के मान के लिए a का मान ज्ञात किया जा सकता हैं।

प्रश्न 18.
λ के किस मान के लिए।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 38
यदि x = 0 द्वारा परिभाषित फलन x = 0 पर संतत है। x = 1 पर इसके सातत्य पर विचार कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 39

प्रश्न 19.
दर्शाइए कि g(x) = x – [x] द्वारा परिभाषित फलन समस्त पूर्णाक बिन्दुओं पर असंतत है। यहाँ [x] उस महत्तम पूर्णांक निरूपित करता है, जो x के बराबर अथवी x से कम है।
हल-
x = c पूर्णांक पर, g(x) = x – [x]
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 40
अतः x = c पूर्णाक पर, f संतत नहीं है।

प्रश्न 20.
क्या f(x) = x² – sin x + 5 द्वारा परिभाषित फलन x = π पर संतत है?
हल-
माना
f(x) = x² – sin x + 5
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 41

प्रश्न 21.
निम्नलिखित फलनों के सांतत्य पर विचार कीजिए
(a) f(x) = sin x + cos x
(b) f(x) = sin x – cos x
(c) f(x) = sin x.cos x
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 42
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 43
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 44
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 45

प्रश्न 22.
cosine, cosecant, secant और cotangent फलनों के सातत्य पर विचार कीजिए।
हल-
(a) माना f(x) = cos x
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 46
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 47

प्रश्न 23.
f के सभी असातत्यता के बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए, जहाँ
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 48
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 49

प्रश्न 24.
निम्न प्रकार से परिभाषित फलन की सातत्यता की जाँच x = 0 पर कीजिए
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 50
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 51UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 52

प्रश्न 25.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 53
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 54

प्रश्न 26.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 55
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 56

प्रश्न 27.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 57
द्वारा परिभाषित फलन x = 2 पर।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 58
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 59

प्रश्न 28.
k का मान ज्ञात कीजिए यदि फलन
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 60
द्वारा परिभाषित फलन x = π पर सतत् है।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 61

प्रश्न 29.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 62
द्वारा परिभाषित फलने x = 5 पर।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 63

प्रश्न 30.
a तथा b के मानों को ज्ञात कीजिए ताकि
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 64
द्वारा परिभाषित फलन एक संतत फलन हो।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 65
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 66

प्रश्न 31.
दर्शाइए कि f(x) = cos x² द्वारा परिभाषित फलन एक संतत फलन है।
हल-
ज्ञात है- f(x) = cos x²
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 67
f(c) = cos c²
अत: f(x) = cos x² एक संतत फलन है। इति सिद्धम्

UP Board Solutions

प्रश्न 32.
दर्शाइए कि f(x) =| cos x| द्वारा परिभाषित फलन एक संतत फलन है।
हल-
ज्ञात है- f(x) = | cos x|
माना x = c ∈ R पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 68
f(c) = | cos c|
अतः x = c ∈ R पर F एक संतत फलन है।। इति सिद्धम्

प्रश्न 33.
जाँचिए कि क्या sin|x| एक संतत फलन है।
हल-
माना f(x) = sin | x|
x = c ∈ R पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 69
f(c) = sin|c|
अतः x = c ∈ R पर f एक संतते फलन है।।

प्रश्न 34.
f(x) = |x|-|x + 1| द्वारा परिभाषित फलन f के सभी असातत्यता के बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए।
हल-
ज्ञात है- f(x) = |x|-|x +1|
f(x) = – x -[-(x + 1)] जब x< – 1]
= -x + x + 1 = 1
f(x) = – x – (x + 1), [जब – 1≤ x < 0]
= – x – x – 1
= – 2x – 1
f(x) = x – (x + 1), जब x≥ 0
= x – x – 1 = -1
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 70
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 71

प्रश्नावली 5.2

प्रश्न 1 से 8 में x के सापेक्ष निम्नलिखित फलनों का अवकलन कीजिए

प्रश्न 1.
sin(x²+5)
हल-
माना y = sin(x²+5)
x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 72
= cos (x² + 5) (2x + 0)
= 2x cos (x² + 5)

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
cos (sin x)
हल-
माना y = cos (sin x)
माना sin x = t
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dt }{ dx }=cosx[/latex]
∴ y = cos t से,
दोनों पक्षों का t के सापेक्ष अवकलन करने
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 73
= – sin t cos x = -sin (sin x)cos x

प्रश्न 3.
sin (ax+b)
हल-
माना y = sin (ax + b)
ax+ b = t रखने पर, y = sin t
दोनों पक्षों का है के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 74

UP Board Solutions

प्रश्न 4.
sec (tan√x)
हल-
माना y = sec (tan (√x))
x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 75

प्रश्न 5.
[latex s=2]\frac { sin(ax+b) }{ cos(cx+d) }[/latex]
हल-
माना [latex s=2]y=\frac { sin(ax+b) }{ cos(cx+d) }[/latex] …(1)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 76

प्रश्न 6.
cos x3.sin2 x5
हल-
माना y = cos x3.sin2 x5
समी० (1) का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 77

प्रश्न 7.
[latex s=2]2\sqrt { cot\left( { x }^{ 2 } \right) } [/latex]
हल-
माना [latex s=2]2\sqrt { cot\left( { x }^{ 2 } \right) } [/latex]
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 78
प्रश्न 8.
cos(√x)
हल-
माना y = cos(√x) ….(1)
समी० (1) का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 79

प्रश्न 9.
सिद्ध कीजिए कि फलन f(x) =|x – 1|, x ∈ R, x = 1 पर अवकलित नहीं है।
हल-
दिया है- f (x) = |x – 1| x∈R
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 80
R.H.D. ≠ L.H.D.
अत: x = 1 पर f अवकलनीय नहीं है। इति सिद्धम्

प्रश्न 10.
सिद्ध कीजिए कि महत्तम पूर्णाक फलन f(x) = [x],0 < x < 3, x = 1 तथा x = 2 पर अवकलित नहीं है।
हल-
ज्ञात है, f(x) = [x]
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 81

प्रश्नावली 5.3

निम्नलिखित प्रश्नों में [latex ]\frac { dy }{ dx }[/latex] ज्ञात कीजिए

प्रश्न 1
2x + 3y = sinx
हल-
ज्ञात है, 2x + 3y = sin x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 82

प्रश्न 2
2x + 3y = siny
हल-
दिया है- 2x + 3y = siny
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 83

प्रश्न 3
ax + by² = cosy
हल-
ज्ञात है- ax + by² = cosy
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 84

प्रश्न 4
xy + y² = tan x + y
हल-
दिया है xy + y² = tan x + y
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 85
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 86

प्रश्न 5
x² + xy + y² = 100
हल-
दिया है x² + xy + y² = 100
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 87

प्रश्न 6
x3 + x²y + xy² + y3 = 81
हल-
दिया है x3 + x²y + xy² + y3 = 81
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 88

प्रश्न 7
sin² y + cos xy = k
हल-
दिया है sin² y + cos xy = k
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 89UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 90

प्रश्न 8
sin² x + cos² y = 1
हल-
दिया है sin² x + cos² y = 1
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 91

प्रश्न 9.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 92
हल-
दिया है-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 93

प्रश्न 10.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 94
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 95

प्रश्न 11.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 96
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 97

प्रश्न 12.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 98
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 99

प्रश्न 13.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 100
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 101
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 102

प्रश्न 14.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 103
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 104

प्रश्न 15.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 105
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 106

प्रश्नावली 5.4

निम्नलिखित का x के सापेक्ष अवकलन कीजिए

प्रश्न 1
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 107
हल-
माना
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 107
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 108

UP Board Solutions

प्रश्न 2
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 109
हल-
माना
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 109
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 110

प्रश्न 3
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 111
हल-
माना
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 111
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 112

प्रश्न 4
sin(tan-1 ex)
हल-
माना sin(tan-1 ex)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 113

प्रश्न 5
log(cos ex)
हल-
माना log(cos ex)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 114

प्रश्न 6
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 115
हल-
माना
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 115
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 116

प्रश्न 7
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 117
हल-
माना
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 117
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 118

प्रश्न 8
log(log x), x>1
हल-
माना log(log x), x>1
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 119

प्रश्न 9
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 120
हल-
माना
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 120
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 121

प्रश्न 10
cos(log x + ex)
हल-
माना cos(log x + ex)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 122

प्रश्नावली 5.5

प्रश्न 1 से 11 तक के प्रश्नों में प्रदत्त फलनों का x के सापेक्ष अवकलन कीजिए

UP Board Solutions

प्रश्न 1.
cos x.cos 2x.cos 3x
हल-
माना y = cos x. cos 2x. cos 3x …(1)
दोनों पक्षों को लघुगणक लेने पर,
logy = log (cos x. cos2x. cos 3x)
= log cos x + log cos 2 x + log cos 3x
[∵ log m.n = log m + log n]
दोनों पक्षों में x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 123

प्रश्न 2.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 124
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 125
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 126

प्रश्न 3.
(log x)cos x
हल-
माना y = (log x)cos x
दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर,
log y = log (log x)cos x = cos x log (log x), [∵log mn = n log m]
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 127

प्रश्न 4.
xx – 2sin x
हल-
माना y = xx – 2sin x
पुनः माना u = xx, v = 2sin x
y = u – v
u = xx
से दोनों पक्षों को लघुगणक लेने पर, log u = log xx = x log x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 128

प्रश्न 5.
(x + 3)2 .(x + 4)3 .(x + 5)4
हल-
माना y = (x + 3)2 .(x + 4)3 .(x + 5)4
दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर,
log y = log [(x + 3)2 .(x + 4)3 (x + 5)4]
= log (x + 3)2 + log (x + 4)3 + log (x + 5)4
[∵ log mn = log m + log n]
= 2 log (x + 3) + 3 log (x + 4) + 4 log (x + 5)
[∵ log mn = n log m]
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 129

प्रश्न 6.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 130
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 131
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 132
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 133

प्रश्न 7.
(log x)x + xlog x
हल-
माना y = (log x)x + xlog x
पुनः माना y = u + v
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 134
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 135

प्रश्न 8.
(sin x)x + sin-1√x
हल-
माना y = (sin x)x + sin-1√x
पुनः माना y = u + v
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 136
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 137

प्रश्न 9.
xsin x + (sin x)cos x
हल-
माना xsin x + (sin x)cos x
पुनः माना y = u + v
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 139UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 138
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 139

UP Board Solutions

प्रश्न 10.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 140
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 141
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 142
प्रश्न 11.
(x cos x)x + (xsin x)1/x
हल-
माना y = (x cos x)x + (x sin x)1/x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 143
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 144

UP Board Solutions

प्रश्न 12.
xy + yx = 1
हल-
दिया है, ∵ xy + yx = 1
माना u = xy, v = yx ∵ u + v = 1
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 145
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 146

प्रश्न 13.
yx = xy
हल-
दिया है, yx = xy
दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर, log yx = log xy
x log y = y log x
दोनों पक्षों में x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 147

प्रश्न 14.
(cos x)y = (cos y)x
हल-
दिया है, (cos x)y = (cos y)x
दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर,
log (cos x)y = log (cos y)x या y log cos x = x log cos y
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 148

प्रश्न 15.
xy = e(x-y)
हल-
दिया है, xy = e(x-y)
दोनों पक्षों को लघुगणक लेने पर,
log (xy) = log e(x-y)
या log x + log y = (x – y) loge e [∵ log xy = log x + log y]
या log x + log y = x – y [∵ loge e = 1]
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 149

प्रश्न 16.
f(x) = (1 + x) (1 + x2) (1 + x4) (1 + x8) द्वारा प्रदत्त फलन का अवकलज ज्ञात कीजिए और इस प्रकार f'(1) ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, f(x) = (1 + x) (1 + x2) (1 + x4) (1 + x8)
दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर,
log f (x) = log [(1 + x) (1 + x2) (1 + x4) (1 + x8)]
या log f(x) = log (1 + x) + log (1 + x2) + log (1 + x4) + log (1 + x8)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 150

प्रश्न 17.
(x² – 5x + 8) (x3 + 7x + 9) का अवकलन निम्नलिखित तीन प्रकार से कीजिए
(i) गुणनफल नियम का प्रयोग करके
(ii) गुणनफल के विस्तारण द्वारा एक एकल बहुपद प्राप्त करके
(iii) लघुगणकीय अवकलन द्वारा
यह भी सत्यापित कीजिए कि इस प्रकार प्राप्त तीनों उत्तर समान हैं।
हल-
(i) गुणनफल नियम के प्रयोग द्वारा ।
माना y = (x2 – 5x + 8). (x3 + 7x + 9)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 151
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 152
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 153

UP Board Solutions

प्रश्न 18.
यदि u, v और w, x के फलन हैं तो दो विधियों अर्थात् प्रथम गुणनफल नियम की पुनरावृत्ति द्वारा, द्वितीय-लघुगणकीय अवकलन द्वारा दर्शाइए कि ।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 154
हल-
(i) माना y = u . v . w = u. (v. w)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 155

प्रश्नावली 5.6

यदि प्रश्न संख्या 1 से 10 तक में तथाy के लिए समीकरणों द्वारा, एक-दूसरे से प्राचलिक रूप में सम्बन्धित हों तो प्राचलों का विलोपन किए बिना [latex ]\frac { dy }{ dx }[/latex] ज्ञात कीजिए।

प्रश्न 1.
x = 2at2, y = at4
हल-
दिया है, x = 2at2 तथा y = at4
दोनों पक्षों का है के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 156

प्रश्न 2.
x = a cos θ, y = b cos θ
हल-
दिया है : x = a cos θ तथा y = b cos θ
दोनों पक्षों का θ के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 157

प्रश्न 3.
x = sin t, y = cos 2t
हल-
दिया है, x = sin t तथा y = cos 2t
दोनों पक्षों का है के सापेक्ष अवकलन करने पर,
[latex ]\frac { dx }{ dt }=cost[/latex]
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 158

प्रश्न 4.
x = 4t, [latex ]y=\frac { 4 }{ t }[/latex]
हल-
दिया है, x = 4t तथा [latex ]y=\frac { 4 }{ t }[/latex]
दोनों पक्षों का है के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 159

प्रश्न 5.
x = cos θ – cos 2θ, y = sin θ – sin 2θ
हल-
दिया है, x = cosθ – cos 2θ तथा y = sin θ – sin 2θ
x = cos θ – cos 2θ
दोनों पक्षों का θ के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 160

प्रश्न 6.
x = a(θ – sinθ), y = a(1 + cosθ)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 161

प्रश्न 7
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 162
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 163
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 164
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 165
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 166

प्रश्न 8
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 167
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 168

UP Board Solutions

प्रश्न 9.
x = a sec θ, y = b tan θ
हल-
दिया है, x = a sec θ तथा y = b tan θ
दोनों पक्षों का θ के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 169

प्रश्न 10.
x = a (cos θ + θ sin θ), y = a(sin θ – θcos θ)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 170

प्रश्न 11.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 171
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 172

प्रश्नावली 5.7

प्रश्न संख्या 1 से 10 तक में दिए फलनों के द्वितीय कोटि के अवकलज ज्ञात कीजिए

प्रश्न 1.
x² + 3x + 2
हल-
माना y = x² + 3x + 2
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex s=2]\frac { dy }{ dx }=2x+3[/latex]
दोनों पक्षों का पुन: x में सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 173

प्रश्न 2.
x20
हल-
माना y = x20
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 174

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
x cos x
हल-
माना y = x cos x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 175
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 176

प्रश्न 4.
log x
हल-
माना y = log x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 177
दोनों पक्षों को पुन: x के सापेक्ष अवकलन करने पर,

प्रश्न 5.
x3 log x
हल-
माना y = x3 log x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 178
= 2x + 3x + 6x log x
= 5x + 6x log x
= x (5 + 6 log x)

प्रश्न 6.
ex sin 5x
हल-
माना y = ex sin 5x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 179
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 180

प्रश्न 7.
e6x cos 3x
हल-
माना y = e6x cos 3x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 181

प्रश्न 8.
tan-1x
हल-
माना y = tan-1x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 182

UP Board Solutions

प्रश्न 9.
log (log x)
हल-
माना y = log (log x)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 183

प्रश्न 10.
sin (log x)
हल-
माना y = sin (log x)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 184

प्रश्न 11.
यदि y = 5 cos x – 3 sin x है तो सिद्ध कीजिए कि
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 185
हल-
दिया है, y = 5 cos x – 3 sin x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 186

प्रश्न 12.
यदि y = cos-1 x है तो [latex s=2]\frac { { d }^{ 2 }y }{ { dx }^{ 2 } } [/latex] को केवल y के पदों में ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, y = cos-1 x
⇒ x = cos y
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 187

प्रश्न 13.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 188
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 189

प्रश्न 14.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 190
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 191
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 192

प्रश्न 15
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 193
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 194

प्रश्न 16
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 195
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 196

प्रश्न 17
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 197
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 198
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 199

प्रश्नावली 5.8

प्रश्न 1.
फलन f(x) = x² + 2x – 8, x∈[-4,2] के लिए रोले के प्रमेय को सत्यापित कीजिए।
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 200

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
जाँच कीजिए कि रोले का प्रमेय निम्नलिखित फलनों में से किन-किन पर लागू होता है? इन उदाहरणों से क्या आप रोले के प्रमेय के विलोम के बारे में कुछ कह सकते हैं?
(i) f(x) = [x] के लिए x∈[5,9]
(ii) f(x) = [x] के लिए x∈[-2,2]
(ii) f(x) = x² – 1 के लिए x∈[1,2]
हल-
(i) f(x) = [x] के लिए x∈[5, 9]
f(x) = [x], बिन्दु x = 6, 7, 8 पर न तो संतत है तथा न ही अवकलनीय है।
∴ यहाँ रोले प्रमेय लागू नहीं है।
(ii) f(x) = [x], x∈[-2, 2]
f(x) = [x], बिन्दु x = -1, 0, 1 पर न तो संतत है तथा न ही अवकलनीय है।
∴ यहाँ रोले प्रमेय लागू नहीं है।
(iii) f(x) = (x² – 1), x∈[1, 2] के लिए
f(1) = 1 – 1 = 0,
f(2) = 2² – 1 = 4 – 1 = 3
f(1) ≠ f(2)
चूँकि f, [1, 2] में संतत है तथा फलन (1, 2) अवकलनीय भी है परन्तु f(1) ≠ f(2).
∴ यहाँ रोले प्रमेय लागू नहीं है।

प्रश्न 3.
यदि f :[-5, 5]→ R एक संतत फलन है और यदि f ‘ (x) किसी भी बिन्दु पर शून्य नहीं होता है तो सिद्ध कीजिए कि f(- 5) ≠ f(5).
हल-
दिया है, f:[-5, 5]→ R
f संतत है तथा अवकलनीय है लेकिन f” (x) ≠ 0
अन्तराल (-5, 5) में रोले प्रमेय के लिए आवश्यक है
(i) [a, b] में f संतत है।
(ii) (a, b) में f अवकलित होता है।
(iii) f(a) = f(b)
f ‘(c) = 0 c ∈(a, b)
f ‘(c) ≠ 0
⇒ f(a) ≠ f(b)
f(- 5) ≠ f(5) इति सिद्धम्

प्रश्न 4.
माध्यमान प्रमेय सत्यापित कीजिए, यदि अन्तराल [a, b] में f(x) = x² – 4x – 3, जहाँ a = 1 और  b = 4 है।
हल-
दिया है, (x) = x² – 4x – 3,[1,4] अन्तराल के लिए f एक बहुपदीय व्यंजक है। यह 1,4 में संतत तथा (1, 4) में अवकलनीय दोनों है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 201

प्रश्न 5.
माध्यमान प्रमेय सत्यापित कीजिए, यदि अन्तराल [a, b] में f(x) = x³ – 5x² – 3x, जहाँ a = 1 और b = 3 है। f ‘(c) = 0 के लिए c∈(1, 3) को ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, f(x) = x³ – 5x² – 3x
[1, 3] में f संतत है और (1, 3) में अवकलनीय है क्योकि यह बहुपदीय है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 202
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 203

प्रश्न 6.
प्रश्न संख्या 2 में उपर्युक्त दिए तीनों फलनों के लिए माध्यमान प्रमेय की अनुपयोगिता की जाँच कीजिए।
हल-
(i) f(x) = [x],
x∈[5,9]
दिये हुए अन्तराल (5, 9) में f(x) = [x] बिन्दु x = 6, 7, 8 पर न तो संतत है तथा न ही अवकलनीय है।
माध्यमान प्रमेय लागू नहीं है।
(ii)
f(x) =[x], x ∈[-2, 2 ]
दिये हुए अन्तराल [-2, 2] में f बिन्दु x = -1, 0, 1 पर न तो संतत है तथा न ही अवकलनीय है।
माध्यमान प्रमेय लागू नहीं है।
(iii) f(x) = x² – 1, x ∈[1, 2]
यह एक बहुपदीय फलन है। यह अन्तराल [1,2] में संतत है तथा (1, 2) में अवकलनीय है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability image 204

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability (सांतत्य तथा अवकलनीयता) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 5 Continuity and Differentiability (सांतत्य तथा अवकलनीयता), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 11 Minerals and Energy Resources

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 11 Minerals and Energy Resources (खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Geography. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 11 Minerals and Energy Resources (खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Geography
Chapter Chapter 11
Chapter Name Minerals and Energy Resources (खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन)
Number of Questions Solved 41
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 11 Minerals and Energy Resources (खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
लौह-अयस्क के प्रकार बताइए तथा विश्व में लोहे के उत्पादक देशों का वर्णन कीजिए।
या
विश्व के लौह-अयस्क के वितरण का भौगोलिक विवरण दीजिए।
या
लौह एवं इस्पात उद्योग के स्थानीकरण के कारकों की विवेचना कीजिए एवं विश्व में इस उद्योग के प्रमुख केन्द्रों का उल्लेख कीजिए। [2014]
उत्तर
लौह-अयस्क विश्व में प्राप्त होने वाले सभी खनिज पदार्थों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। यह वर्तमान वैज्ञानिक एवं औद्योगिक विकास की धुरी है। सूई से लेकर विशालकाये इंजन, जलपोत तथा बड़े-बड़े संयन्त्रों में लोहे का प्रयोग होता है। इसी कारण आधुनिक युग ‘लोहा-इस्पात युग’ के नाम से पुकारा जाता है। लोहा आधारभूत खनिज है। इसका उपयोग यन्त्रों, मशीनों, अनेक कल-पुर्जा, परिवहन साधनों एवं उपकरणों, रेल की पटरियों एवं बिजली के खम्भों, संचार के साधनों, कारखानों एवं मिलों के ढाँचों, पुलों, वायुयानों, जलयानों आदि के निर्माण में किया जाता है। सुरक्षा के लिए अस्त्र-शस्त्र, टैंक, तोप, गोले, पनडुब्बी, रॉकेट आदि के निर्माण में इसका प्रयोग किया जाता है।

वर्तमान समय में किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास के स्तर को नापने का श्रेय इस्पात उत्पादन को ही दिया जाता है। जिस देश में जितना अधिक लोहे एवं इस्पात का उत्पादन होता है, उसे उतना ही उन्नत माना जाता है। विश्व में अन्य धातुओं की अपेक्षा लोहे के भण्डार सबसे अधिक हैं। सभी धातुओं में लोहा सबसे सस्ता है। इसके प्रमुख गुण इसकी कठोरता, दृढ़ता, लचीलापन एवं स्थायित्व हैं। लौह-अयस्क में अनेक अशुद्धियाँ मिली होती हैं; अत: कच्ची धातु को भट्टियों में गलाकर शुद्ध एवं परिष्कृत किया जाता है। इसे कच्चा लोहा कहा जाता है। कच्चे लोहे में मैंगनीज, चूना, टंगस्टन आदि मिलाकर इसे कठोर अर्थात् इस्पात का निर्माण किया जाता है।

लौह-अयस्क के प्रकार
Types of Iron-ore

लोहे की कच्ची धातु निम्नलिखित चार प्रकार की होती है –

  1. हेमेटाइट – यह लाल एवं भूरे अथवा कत्थई रंग की धातु है। इसमें लोहांश की मात्रा 60 से 70% तक होती है। आग्नेय एवं रूपान्तरित शैलों से इस प्रकार की धातु प्राप्त होती है। विश्व में सबसे अधिक यही अयस्क प्राप्त होती है। यह धातु सर्वोत्तम मानी जाती है, क्योंकि यह आसानी से साफ हो जाती है। इसमें लोहे एवं ऑक्सीजन का मिश्रण होता है।
  2. मैगनेटाइट – हरी या भूरी झलक लिये काले रंग की इस धातु में लोहांश की मात्रा 72.4% तक होती है। इसमें गन्धक, फॉस्फोरस, टाइटेनियम आदि तत्त्व मिले होते हैं जिससे इसकी उपयोगिता सीमित हो जाती है। इसमें चुम्बकीय गुण होता है। उत्तरी स्वीडन में इस प्रकार का लोहा मिलता है।
  3. लिमोनाइट – पीलापन लिये भूरे रंग की यह धातु लोहांश की मात्रा 30% से 60% रखती है। परतदार चट्टानों में इसके जमाव पाये जाते हैं। यह लोहे, ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन का मिश्रण होती है। लोहांश की कमी के कारण विश्व में इस धातु का खनन कम ही किया जाता है।
  4. सिडेराइट – इस लौह-अयस्क में कार्बन का मिश्रण होता है जिससे इसका रंग राख के समान हो जाता है। इस अयस्क में लोहांश की मात्रा 10% से 48% तक होती है। इसमें अनेक अशुद्धियाँ मिली होती हैं।

विश्व में लोहे के प्रमुख उत्पादक देश
Main Iron Producing Countries in the World

लौह-अयस्क उत्पादक प्रमुख देशों का विवरण निम्नलिखित है –
(1) CIS देश ( पूर्व सोवियत संघ ) – 1970 ई० से ही यह विश्व की अग्रणी इस्पात उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 20% से अधिक इस्पात तैयार होता है। इस्पात उत्पादन निम्नलिखित क्षेत्रों में अधिक विकसित है –

(i) यूक्रेन अथवा डोनबास क्षेत्र – यहाँ रूस का 1/2 ढला हुआ लोहा व इस्पात तैयार किया जाता है। डोनेज बेसिन की खदानों से कोयला तथा क्रिवोईराग व क्रीमिया में स्थित किर्क की खानों से लौह-धातु एवं नीपर नदी से विद्युत शक्ति तथा स्वच्छ जल की प्राप्ति होती है। इसी क्षेत्र में विश्व के विशालतम मैंगनीज भण्डार हैं। इस क्षेत्र में लौह-इस्पात उद्योग का विशेषीकरण पाया जाता है। कृषि उपकरण– रोस्टोव व ओडेसा में; इन्जीनियरिंग वस्तुएँ-नीप्रोपेट्रोवस्क, कीव, खारकोव तथा स्टालिनो में; मोटर वाहन-वोरोशिलोवग्राड में; इस्पात की विभिन्न वस्तुएँ–क्रिवोईराग व स्टालिनग्राड में तैयार होती हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण इस्पात केन्द्र किर्क जैपीरोझी व टोगनरॉग हैं।

(ii) मॉस्को-टुला क्षेत्र – यह क्षेत्र सोवियत रूस का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। यहाँ टुला की खदानों में घटिया कोयला, कुर्क से लौह धातु तथा वोल्गा नदी से सस्ते जल परिवहन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में इस्पात उद्योग का विशेषीकरण हो गया है। मॉस्को, टुला व गोर्की में-कृषि उपकरण, मोटरवाहन व ट्रैक्टर बनाये जाते हैं। कालूगा में कृषि उपकरण व ट्रैक्टर तथा किलोमना में-रेल के डिब्बे व इंजन बनाये जाते हैं। टुला लोहे-इस्पात का एक विशाल केन्द्र है। इसे ‘रूस का बर्मिंघम’ कहते हैं। लिपेस्क, लेनिनग्राड, गोर्की आदि अन्य महत्त्वपूर्ण केन्द्र हैं।

(iii) यूराल क्षेत्र – यह रूस का प्राचीन औद्योगिक व सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ ओर्क, मैग्नीटोगोर्क व जलाटूस्ट की खदानों से कोयला, साइबेरिया के कारागाण्डा व कुजबास क्षेत्रों की खदानों से लौह धातु, बाकू क्षेत्र से पेट्रोलियम एवं नदियों से जल-विद्युत प्राप्त होती है। यहाँ रेल के वैगन तथा अस्त्र-शस्त्र बनाये जाते हैं। चिल्याबिंस्क, स्वर्डलोवस्क, उस्र्क, बेलोरेस्क, निझनीतागिल व मैग्नीटोमेस्र्क महत्त्वपूर्ण इस्पात केन्द्र हैं।

(iv) कुजवास क्षेत्र – पश्चिमी साइबेरिया के कुजनेत्स्क बेसिन में यह क्षेत्र स्थित है। यहाँ प्राचीन काल से ही कुशल लुहार कारीगरों की बस्तियों की स्थापना के कारण यह क्षेत्र ‘कुजनेत्स्क’ (लुहारों की नगरी) कहलाता है। यहाँ पर्याप्त कोयला, गोरनाया शोरिया से लौह धातू व निकट ही मैंगनीज प्राप्त होता है। साइबेरिया के औद्योगिक क्षेत्रों के कारण बाजार की सुविधा भी प्राप्त है। नोवोकुजनेत्स्क, नोवोसिबिस्र्क, कामेन, टोमस्क आदि प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं। यहाँ यन्त्र तथा भारी मशीनरी निर्मित होते हैं।

(v) अन्य क्षेत्र – सोवियत संघ में वोल्गा क्षेत्र, काकेशस क्षेत्र, बैकाल क्षेत्र, सुदूर पूर्व आदि क्षेत्रों में भी लोहा-इस्पात उद्योग विकसित हुआ है।

(2) चीन – आधुनिक स्तर पर लोहा-इस्पात उद्योग का विकास यहीं सन् 1950 के पश्चात् आरम्भ हुआ। यहाँ तीन क्षेत्रों में इस्पात उद्योग विकसित है- दक्षिणी मंचूरिया, उत्तरी चीन तथा यांग्टीसी की निम्न घाटी। वुहान, फुकिंग, पाओतो, आनशान आदि प्रमुख केन्द्र हैं। अब यह विश्व का वृहत्तम इस्पात उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 17% इस्पात बनता है।

(3) जापान – यह एशिया का महान् औद्योगिक देश है। लोहा-इस्पात उद्योग में यह विश्व में द्वितीय स्थान पर है। यहाँ विश्व का 16% इस्पात तैयार किया जाता है। यहाँ लौह धातु व कोयले की बहुत कमी है। यहाँ चीन, भारत व मलेशिया से लौह धातु, ऑस्ट्रेलिया व संयुक्त राज्य से कोयला तथा विदेशों से धातु शोधक पदार्थ आयात करने पड़ते हैं। यहाँ समुद्री परिवहन तथा सघनी आबादी एवं औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त माँग तथा प्रचुर श्रमिकों की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। पर्वतीय देश होने के कारण तीव्रगामी नदियों से जल विद्युत एवं स्वच्छ जल प्राप्त होता है।

(4) संयुक्त राज्य अमेरिका – यह विश्व का तीसरा वृहत्तम लोहा-इस्पात उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 13% से अधिक इस्पात निर्मित होता है। यहाँ इस्पात उद्योग निम्नलिखित क्षेत्रों में अधिक विकसित है –
(i) उत्तरी अप्लेशियन क्षेत्र – यह संयुक्त राज्य का सबसे महत्त्वपूर्ण इस्पात उत्पादक क्षेत्र है। इसका विस्तारै ओहियो नदी-घाटी में है। यहाँ देश का 1/3 इस्पात तैयार किया जाता है। इस क्षेत्र को सुपीरियर झील क्षेत्र से लौह धातु तथा सस्ता जल परिवहन-अप्लेशियन क्षेत्र से कोयला तथा निकट ही चूना-पत्थर प्राप्त होता है। पूर्वी संयुक्त राज्य की सघन औद्योगिक जनसंख्या के कारण लोहा-इस्पात की माँग भी अधिक है। इस प्रदेश में लोहा-इस्पात उद्योग का विकास दो केन्द्रों पर अधिक हुआ है –

  1. पिट्सबर्ग क्षेत्र – यह विश्व का सबसे बड़ा औद्योगिक केन्द्र है। इस क्षेत्र के कारखाने ओहियो, अलघनी व मोनानधेला नदियों की घाटियों में स्थित हैं।
  2. यंग्सटाउन क्षेत्र – इस क्षेत्र के कारखाने महोनिंग व शैननगो नदियों की घाटियों में स्थित हैं। उत्तरी अप्लेशियन क्षेत्र के प्रमुख इस्पात केन्द्र पिट्सबर्ग, कारनेगी, एशलैण्ड, मिडिलटन, आयरटन, शैरोन पोर्ट्समाउथ व जॉन्सटन आदि हैं।

(ii) महान झील क्षेत्र – यह क्षेत्र सुपीरियर, मिशिगन व ईरी झीलों के मध्य स्थित है। यहाँ देश का 45% इस्पात तैयार किया जाता है। यहाँ इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण की निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं –

  1. सस्ते जल परिवहन द्वारा अप्लेशियन क्षेत्र से कोयला व झील क्षेत्र से लौह धातु आयात की जाती है।
  2. मिशिगन राज्य में चूना-पत्थर प्राप्त होता है।
  3. रेतीली अनुर्वर भूमि के कारण यहाँ कृषि अविकसित है किन्तु समतल व सस्ती भूमि कारखानों की स्थापना के लिए प्राप्त है।
  4. इस क्षेत्र में सघन औद्योगिक आबादी के कारण प्रचुर श्रमिक प्राप्त होते हैं।
  5. स्थानीय माँग व पूँजी भी उपलब्ध है। इस क्षेत्र को तीन उपक्षेत्रों में बाँटा जा सकता है –
    1. ईरी क्षेत्र – बफैलो से टोलैडो व डेट्रॉयड तक विस्तृत इस क्षेत्र में ईरी, बफैलो, डेट्रॉयड, लॉरेन, वारेन, टोलेडो, क्लीवलैण्ड आदि प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं। यहाँ इन्जीनियरिंग उद्योगों में इस्पांत की अधिक खपत होती है। यहाँ सुपीरियर झील क्षेत्र से लोहा व उत्तरी अप्लेशियन से कोयला प्राप्त होता है।
    2. मिशिगन क्षेत्र – यहाँ स्थानीय रूप से उत्तम लोहा व चूना तथा अप्लेशियन से कोयला प्राप्त होता है। शिकागो, गैरी, सेण्ट लुई व मिलावॉकी प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं।
    3. सुपीरियर झील क्षेत्र – मैसाबी श्रेणी से प्रचुर मात्रा में उत्तम लोहा, अप्लेशियन से कोयला तथा सस्ते जल परिवहन की सुविधाओं के कारण यहाँ इस्पात उद्योग विकसित है। डुलुथ व सुपीरियर प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं।

(iii) मध्य अटलांटिक क्षेत्र – यह क्षेत्र मैसाबुलेट्स से मैरीलैण्ड राज्य तक विस्तृत है। अधिकांश लौह धातु ब्राजील, स्पेन, वेनेजुएला व कनाडा से तथा कोयला अप्लेशियन क्षेत्र से मँगाया जाता है। चूना-पत्थर स्थानीय रूप से उपलब्ध होता है। तटीय स्थिति एवं समुद्री व्यापार की सुविधा के करण यहाँ इस्पात उद्योग विशेषतः विकसित हुआ है। वाशिंगटन से बोस्टन तक बाल्टीमोर, ट्रेन्टन, मॉरिसविले, स्पैरोपॉइन्ट, बेथलेहम, स्टीलटन, फिलोडेलफिया, वोरसेस्टर, वाटरबरी आदि अनेक इस्पात केन्द्र स्थापित हैं।

(iv) अलबामा क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार अलबामा राज्य में है। यहाँ कम्बरलैण्ड तथा दक्षिणी अलघनी पठार के भागों से बिटुमिनस कोयले के विशाल भण्डार पाये जाते हैं। लोहा व चूना भी निकट ही मिलते हैं। श्रमिक, भी यहाँ प्रचुर व सस्ते हैं। प्रमुख इस्पात केन्द्र बर्मिंघम, फ्लोरेन्स, शाटानुगा तथा वर्जीनिया हैं। बर्मिंघम “दक्षिण का पिट्सबर्ग” कहलाता है।

(v) पश्चिमी क्षेत्र – इस क्षेत्र में इस्पात उद्योग का विकास समिरिक दृष्टि से किया गया है। कोलोरेडो राज्य में– प्युबलो, ऊटाह में-जेनेवा तथा प्रशान्त तट पर– सानफ्रांसिस्को, लॉस एंजिल्स आदि प्रमुख केन्द्र हैं।

संयुक्त राज्य में इस्पात उद्योग का अत्यधिक विशेषीकरण हुआ है- जलयान निर्माण-न्यूयॉर्क, फिलाडेलफिया, बाल्टीमोर, न्यूपोर्ट तथा विलिंगटन में; मोटर गाड़ियाँ तथा वाहन-क्लीवलैण्ड, फिलाडेलफिया, डेट्रॉयड, इण्डियानापोलिस, कोनर्सविले, न्यूयॉर्क, टोलैडो तथा बफेलो में; रेल के इंजन एवं विद्युत मशीनरी-न्यूयॉर्क, फिलाडेलफिया, पिट्सबर्ग, शिकागो तथा मिलावॉकी में; कृषि उपकरण– शिकागो, इलिनोयस व मिनियापोलिस में तथा कपड़ा बुनने की मशीनरी– बोस्टन, वोरसेस्टर तथा फिलाडेलफिया में विकसित हैं।

(5) जर्मनी – इसका विश्व में लोहा-इस्पात उद्योग में छठा स्थान है। यहाँ लौह धातु, कोयला, उन्नत वैज्ञानिक, प्राविधिकी, औद्योगिक विकास के कारण लोहा-इस्पात की माँग, श्रमिक, परिवहन आदि की सुविधाएँ प्राप्त हैं। यहाँ लोहा-इस्पात निम्नलिखित क्षेत्रों में विकसित है

  1. रूर क्षेत्र – राइन नदी की निचली घाटी में स्थित इस क्षेत्र का विस्तार ड्यूसबर्ग से डार्टमण्ड तक है। यहाँ वेस्टफालिया क्षेत्र से उत्तम कोकिंग कोयला, रूर क्षेत्र के दक्षिण में सीजरलैण्ड, लानडिल, बेजिल्सबर्ग आदि से लौह धातु प्राप्त होती है। यहाँ उत्तम व सस्ते जलमार्गों द्वारा स्वीडन, लक्जमबर्ग, स्पेन तथा फ्रांस के लॉरेन क्षेत्र से लोहा आयात करने की सुविधाएँ प्राप्त हैं। बोखम, आकेन, एसेन, गैल्सन, किरचेन, ड्यूसबर्ग, डुसेलडोर्फ, सोलिंजन, मह्महीम डार्टमण्ड आदि प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं।
  2. साइलीशिया क्षेत्र – देश के पूर्वी भाग में इस क्षेत्र का विस्तार है। यहाँ कच्ची धातु आयात होती है, किन्तु कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है। ड्रेस्डन, लिपजिग, चिमनीज आदि प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं।

(6) ग्रेट ब्रिटेन – लोहा-इस्पात उत्पादन में ब्रिटेन यूरोप महाद्वीप में चतुर्थ तथा विश्व में आठवें स्थान पर है। 1750 ई० तक यहाँ विश्व का 70% इस्पात उत्पादन होता था। अब यहाँ विश्व का केवल 3% इस्पात उत्पन्न किया जाता है। यहाँ लौह धातु सीमित मात्रा में उपलब्ध है; अतः इसे स्वीडन, स्पेन, अल्जीरिया, कनाडा आदि देशों से लौह धातु आयात करनी पड़ती है। अधिकांश कोयला क्षेत्रों में स्थित पत्तन ही इस्पात के प्रमुख केन्द्र हैं, क्योंकि विदेशी व्यापार की सुविधा उन्हें प्राप्त है।

(7) पोलैण्ड – अपर साइलीशिया कोयला क्षेत्र में इस्पात उद्योग विशेष विकसित है। यहाँ लौह धातु रूस, चेक एवं स्लोवाकिया तथा स्वीडन से आयात की जाती है। प्रमुख इस्पात केन्द्र-कैटोवाइस तथा बिटम हैं।
(8) बेल्जियम – ईसा के आरम्भ से ही यहाँ लीज नगर इस्पात बनाने के लिए विख्यात रहा है। यहाँ कोयला पर्याप्त मात्रा में प्राप्त है। लौह धातु फ्रांस, लक्जमबर्ग व स्वीडन से प्राप्त की जाती है। देश के प्रमुख इस्पात केन्द्र लीज, नामूर शालेराय, मोंज तथा वरवियर्स हैं।

(9) इटली – कोयले के अभाव तथा लोहे की कमी के बावजूद इस देश ने इस्पात उद्योग में भारी प्रगति की है। यहाँ जलविद्युत शक्ति का उपयोग अधिक किया जाता है। जर्मनी से कोकिंग कोयलां व स्वीडन से लौह धातु आयात की जाती है। स्क्रैप लोहे का भी प्रयोग होता है। औद्योगिक देश होने के कारण इस्पात की स्थानीय खपत अधिक है। प्रमुख इस्पात केन्द्र-जेनेवा, मिलान, ट्रिएस्ट, टर्की, लोम्बार्डी, लिगुरिया आदि हैं।

(10) भारत – एशियाई देशों में चीन व जापान के पश्चात् भारत तीसरा प्रमुख इस्पात उत्पादक देश है। यहाँ झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आन्ध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में यह उद्योग विकसित है; क्योंकि इन्हीं क्षेत्रों में भारत का अधिकांश कोयला, लौह धातु, चूना व डोलोमाइट, धातुः शोधक पदार्थ व मैंगनीज तथा सिलिकन आदि प्राप्त होते हैं। प्रमुख इस्पात केन्द्र-जमशेदपुर, कुल्टी, हीरापुर, भद्रावती, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, बोकारो, सेलम, विशाखापट्टनम आदि हैं।
(11) कनाडा – यहाँ पर्याप्त कोयला, लौह धातु व जल प्राप्ति के कारण तीन प्रमुख क्षेत्रों में इस्पात उद्योग विकसित हुआ है-

  1. ओटेरिया झील के पश्चिमी भाग
  2. साल्टमेरी क्षेत्र व
  3. नोवास्कोशिया क्षेत्र। देश के प्रमुख इस्पात केन्द्र हैमिल्टन, पोर्ट कोलबोर्न, बेलैन्ड, साल्ट सिटी, सेण्टमैरी व सिडन हैं।

(12) ऑस्ट्रेलिया – आयरन नॉब के क्षेत्र में उत्तम लौह धातु परिवहन की सुविधाएँ, अधिक जनसंख्या के कारण श्रमिकों की सुविधाएँ प्राप्त हैं। कोयला व चूना-पत्थर आयात कर लिया जाता है। यहाँ के प्रमुख इस्पात केन्द्र-न्यूकैसिल, लिथगो, पोर्टकैम्बला, बाइला, क्वीनाना हैं।

(13) दक्षिणी अफ्रीका गणतन्त्र – यहाँ लोहा वे कोयला पर्याप्त मात्रा में मिलता है किन्तु स्थानीय माँग अधिक नहीं है। ट्रांसवाल में प्रिटोरिया वे वैरीनीसींग तथा नैटाल में न्यूकैसिल प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं।
(14) ब्राजील – दक्षिणी अमेरिकी देशों में ब्राजील में लोहा-इस्पात उद्योग सर्वाधिक विकसित हुआ है। सबसे बड़ा इस्पात केन्द्र पराइबो नदी-घाटी में वोल्टा रेडोण्डा स्थान पर है। लघु इस्पात केन्द्र मिनासगिरेस तथा साओपॉलो राज्यों में स्थित हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार International Trade
आधारभूत उद्योग होने के कारण लौह-इस्पात का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार काफी महत्त्वपूर्ण है। तैयार माल के प्रमुख निर्यातक देश जापान, पश्चिमी जर्मनी, बेल्जियम, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य व इटली हैं।
अफ्रीकी, पश्चिमी व दक्षिणी-पूर्वी एशियाई व दक्षिणी अमेरिकी देश प्रमुख आयातक हैं।

प्रश्न 2
विश्व में कोयले के उत्पादन, वितरण तथा आर्थिक महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए।
या
विश्व में कोयला संसाधनों का वर्णन कीजिए तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के तीन प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों का विवरण दीजिए। [2011]
या
संसार में कोयले के प्रमुख उत्पादक देशों के नाम बताइए तथा किसी एक देश में उसके वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए। [2009, 10]
या
विश्व के किन्हीं दो देशों में कोयले के उत्पादन व वितरण का वर्णन कीजिए। [2008]
या
विश्व में कोयले का वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए। [2013, 14, 15]
या
विश्व के प्रमुख कोयला उत्पादक देशों का विवरण दीजिए। [2011]
उत्तर

कोयले का महत्त्व Importance of Coal

बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में विश्व की औद्योगिक शक्ति का 90% भाग कोयले पर आधारित था। द्वितीय महायुद्ध से पूर्व विश्व की समस्त यान्त्रिक शक्ति का दो-तिहाई भाग कोयले से प्राप्त होता था। कोयले को ही आधार बनाकर ब्रिटेन ने उन्नीसवीं शताब्दी में औद्योगिक प्रमुखता प्राप्त की थी। कोयले का ही उपयोग कर बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका एवं सोवियत संघ ने औद्योगिक एवं व्यापारिक प्रमुखता प्राप्त की है। चीन एवं भारत की औद्योगिक प्रगति का आधार भी कोयला ही रहा है। वर्तमान समय में भी विश्व की 40% शक्ति कोयले से ही प्राप्त होती है, जब कि अब जेल-विद्युत के उपयोग पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत एवं अणु शक्ति के प्रयोग से कोयले का उपभोग वर्तमान समय में कम होता जा रहा है, फिर भी दो उद्योग ऐसे हैं जिनमें कोयला ही प्रधान है-

  1. लोहा एवं इस्पात तथा
  2. ताप-विद्युत उत्पादन में।

अतः ऐसी आशा की जाती है कि भविष्य में भी लम्बे समय तक कोयले द्वारा ही शक्ति प्राप्त की जाती रहेगी।

कोयले की उत्पत्ति Origin of Coal

कोयला, भूपटल की अवसादी शैलों से प्राप्त होता है। इसमें कुछ गैसें; जैसे-ऑक्सीजन, हाइड्रोजन एवं नाइट्रोजन तथा कुछ अन्य पदार्थ भी मिले होते हैं। प्राचीन युग में भूतल के विभिन्न भागों में दलदली वन छाये हुए थे जो भूगर्भीय हलचलों के कारण भूमि के नीचे दब गये। दबाव की प्रक्रिया के कारण यह दलदली वनस्पति कालान्तर में कोयले में परिणत हो गयी। करोड़ों वर्षों बाद बहुत-से क्षेत्रों में भूपटल में उत्थानिक क्रियाएँ होने के कारण कोयले की परतें ऊपरी सतह पर आ गयीं। इस प्रकार भूगर्भ में कोयला-निर्माण की प्रक्रिया के दो काल हैं –

  1. कार्बोनीफेरस युग एवं
  2. टर्शियरी युग।

विश्व में तीन-चौथाई से भी अधिक कोयला कार्बोनीफेरस युग का है। भारत में लगभग 98% कोयला गोण्डवाना युग (कार्बोनीफेरस युग का समकालीन) का मिलता है।

कोयले के प्रकार Types of Coal

कोयले में कार्बन की मात्रा तथा उसकी ऊर्जा-क्षमता के आधार पर उसे निम्नलिखित चार भागों में विभाजित किया जा सकता है –
(1) एन्थ्रासाइट (Anthracite) – यह कोयला सर्वोत्तम, अति कठोर, चमकदार, स्वच्छ एवं रवेदार होता है। इसमें कार्बन की मात्रा 90 से 95% तक होती है। वाष्प की मात्रा बहुत ही कम होती है; अतः जलने पर धुआँ नहीं के बराबर देता है तथा ताप बहुत अधिक देता है। विश्व में एन्थ्रासाइट के भण्डारे कुछ सीमित क्षेत्रों में हैं जिनमें संयुक्त राज्य का पेंसिलवानिया, ग्रेट ब्रिटेन का दक्षिण वेल्स क्षेत्र, रूस, जर्मनी, बेल्जियम तथा चीन प्रमुख हैं।

(2) बिटुमिनस (Biturminus) – इस कोयले में कार्बन की मात्रा 70 से 90% तक होती है। इसका रंग काला, चमकदार एवं हाथ काला करने वाला होता है। इसमें वाष्पशील तत्त्वों की मात्रा अधिक होती है; अतः जलने पर धुआँ देता है। कोलतार निकलने के कारण इसे बिटुमिनस कहा जाता है। विश्व में इस कोयले के भण्डार संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन, चीन, पोलैण्ड आदि देशों में पाये जाते हैं।

(3) लिग्नाइट (Ligmite) – इसे भूरा कोयला भी कहते हैं जिसमें कार्बन की मात्रा 45 से 70% तक होती है। यह जलने में अपेक्षाकृत अधिक धुआँ छोड़ता है तथा इसमें राख भी अधिक होती है। यह नवीन युग का कोयला है जिसमें वनस्पति अंशों की प्रधानता होती है। इसका उपयोग स्टीम बनाने तथा ताप-विद्युत के उत्पादन में किया जाता है। रूस तथा जर्मनी में इसके विशाल भण्डार हैं। चेकोस्लोवाकिया, हंगरी एवं भारत में भी लिग्नाइट की खाने पायी जाती हैं।

(4) पीट (Peat) – मौलिक वनस्पति से थोड़ा भिन्न यह कोयला सबसे नवीन युग का है। इसमें कार्बन की मात्रा 35 से 45% तक होती है। यह प्रायः लकड़ी की भाँति ही जलता है तथा जलने में बहुत अधिक धुआँ देता है। इसका अधिकांश उपयोग घरों में जलाने के लिए किया जाता है। इससे ताप-विद्युत अधिक बनायी जाती है। इसके अधिकांश भण्डार रूस, नार्वे, स्वीडन, पोलैण्ड, जर्मनी आदि देशों में हैं।

विश्व में कोयले की संचित राशि – विश्व में कोयले के संचित भण्डार रूस, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन तथा अन्य यूरोपीय देशों में हैं। भारत, कनाडा, दक्षिणी अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया में अपनी आवश्यकता के लिए पर्याप्त कोयले के भण्डार सुरक्षित हैं।

कोयले का विश्व वितरण
World Distribution of Coal

विश्व के प्रमुख कोयला उत्पादक देश निम्नलिखित हैं –
(1) संयुक्त राज्य अमेरिका – विश्व में कोयले की संचित राशि के दृष्टिकोण से संयुक्त राज्य अमेरिका, क्षीसरा स्थान रखता है, परन्तु वार्षिक उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। यहाँ विश्व का 28.5% कोयले का उत्पादन किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में कोयले के प्रमुख भण्डार अप्लेशियन के पश्चिम एवं झीलों के दक्षिण में स्थित हैं, जो औद्योगिक निर्माण केन्द्रों के समीप पड़ते हैं। इन्हीं के समीपवर्ती क्षेत्रों में संयुक्त राज्य अमेरिका की 70% जनसंख्या निवास करती है। कोयला उत्पादन के मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं –

  1. अप्लेशियन कोयला क्षेत्र – संयुक्त राज्य अमेरिका का यह प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र है। इस कोयला क्षेत्र के तीन उपक्षेत्र हैं, जो निम्नानुसार हैं –
    1. उत्तरी अप्लेशियन कोयला क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार पेंसिलवेनिया राज्य में है। यहाँ एन्थ्रासाइट और बिटुमिनस प्रकार का कोयला प्राप्त होता है।
    2. मध्य अप्लेशियन कोयला क्षेत्र – उत्तरी अप्लेशियन कोयला क्षेत्र के 800 किलोमीटर दक्षिण में यह कोयला क्षेत्र पश्चिमी वर्जीनिया राज्य में स्थित है। इस राज्य में 75 प्रतिशत धरातल के नीचे कोयले की परतें पायी जाती हैं।
    3. दक्षिणी अप्लेशियन कोयला क्षेत्र अथवा अलबामा क्षेत्र – अलबामा राज्य में बर्मिंघम के निकट कोयले की खाने हैं। यहाँ प्रत्येक वर्ष लगभग 270 लाख टन कोयला निकाला जाता है।
  2. अन्तर्रदेशीय कोयला क्षेत्र – संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य भाग में मिसौरी और मिसीसिपी नदियों की घाटी में कोयले के प्रचुर भण्डार हैं। कन्सास, मिसौरी, इण्डियाना, इलिनायस राज्यों में कोयले की खाने हैं।
  3. उत्तरी मैदान का कोयला क्षेत्र – कनाडा की सीमा के निकट कोयला निकाला जाता है।
  4. रॉकी पर्वत कोयला क्षेत्र – रॉकी पर्वत के पूर्वी ढालों पर कोयले की खानें स्थित हैं।
  5. खाड़ी तटीय कोयला क्षेत्र – दक्षिणी अलबामा से टेक्सास राज्य तक खाड़ी तट के सहारे लिग्नाइट किस्म का कोयला निकाला जाता है।
  6. प्रशान्त तटीय कोयला क्षेत्र – लिग्नाइट किस्म का कोयला वाशिंगटन राज्य में निकाला जाता है।

(2) भारत – एशिया महाद्वीप के कोयला भण्डारों में भारत का दूसरा स्थान है। यहाँ अधिकांश कोयला बिटुमिनस प्रकार का है। भूगर्भवेत्ताओं के एक अनुमानानुसार भारत में 600 मीटर की गहराई तक कोयले की संचित राशि लगभग 17,633 करोड़ मीटरी टन है, जब कि सामान्यतया 13,800 करोड़ मीटरी टन के भण्डार अनुमानित किये गये हैं। विश्व में भारत का कोयला उत्पादन में चौथा स्थान है। यहाँ विश्व का 8% से अधिक कोयला उत्पादन होता है। यहाँ निम्नलिखित दो कोयला पेटियाँ हैं –

  1. गोण्डवाना कोयला क्षेत्र – इस क्षेत्र में भारत के बिटुमिनस कोयले के 98.5% भण्डार हैं, जो बिहार, प० बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश की नदियों के बेसिनों में स्थित हैं।
  2. टर्शियरी कोयला क्षेत्र – असम, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर एवं तमिलनाडु में लिग्नाइट कोयला निकाला जाता है, जो कुल उत्पादन का 1.5% भाग है।

(3) चीन – चीन में कोयले के विशाल भण्डार विद्यमान हैं तथा उसका विश्व कोयला-उत्पादन में तीसरा स्थान है। यहाँ 27.5% कोयले का उत्पादन किया जाता है। चीन में 30 से भी अधिक स्थानों से कोयला निकाला जाता है। ह्वांगहो तथा यांगटिसीक्यांग नदियों के बेसिन मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं। प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं –

  1. शांसी क्षेत्र या लोयस उच्च प्रदेश
  2. शैन्सी क्षेत्र
  3. जेचवान बेसिन
  4. कांसू क्षेत्र
  5. मंचूरिया को आन्हेई प्रान्त
  6. शाटुंग प्रायद्वीपीय क्षेत्र
  7. होनान प्रान्त एवं
  8. होपे क्षेत्र।

(4) रूस – इस देश के कोयला भण्डारों का लगभग 90% भाग एशियाई रूस में स्थित है। वर्तमान समय में यूरोपीय रूस तथा मध्य एशिया की खाने उत्पादन में मुख्य स्थान रखती हैं। विश्व के कोयला उत्पादन में इसका छठा स्थान है तथा यहाँ विश्व का 4.4% कोयले का उत्पादन होता है। यहाँ लगमा 80 स्थानों से कोयले का खनन किया जाता है, परन्तु निम्नलिखित क्षेत्र उत्पादन में प्रमुख स्थान रखते हैं –

  1. डोनबास
  2. कुजबास
  3. यूराल
  4. मास्को-तुला
  5. इटस्क या बैकाल झील
  6. बुर्रिस्क
  7. कारागण्डा
  8. मध्य एशिया या फरगना बेसिन
  9. बुरेइन्स्क या आमूर बेसिन
  10. कान्स्क
  11. पैचोरा
  12. टुंगस्का या टुंगस
  13. नीना या याकूतिया
  14. कोलिमा एवं
  15. काकेशस।

(5) जर्मनी – जर्मनी के पूर्व में कोयले के भण्डार सेक्सोनी, रूर एवं सार की खानों में हैं, जहाँ बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है। यहाँ की प्रमुख खाने हल्ले, मेगडेनबर्ग तथा लिपजिग की निम्न भूमि में स्थित हैं। साइलेशिया क्षेत्र से भी कोयला प्राप्त किया जाता है। इस क्षेत्र में 20 करोड़ टन वार्षिक से भी अधिक कोयला उत्पन्न किया जाता है।

(6) ग्रेट ब्रिटेन – ब्रिटेन में उन्नीसवीं शताब्दी का औद्योगिक आधार कोयला ही था। यहाँ पर उत्तम किस्म का बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है। औद्योगिक केन्द्र भी कोयला क्षेत्रों के निकट स्थापित हुए हैं। उदाहरण के लिए, लंकाशायर क्षेत्र में सूती वस्त्र उद्योग, यार्कशायर में ऊनी वस्त्रे तथा डर्बीशायर में लौह-इस्पात उद्योग। ब्रिटेन में कोयला उत्पादन के क्षेत्र प्रमुख हैं –

  1. लंकाशीयर
  2. यार्कशायर
  3. डर्बीशायर
  4. नार्थम्बरलैण्ड
  5. डरहम
  6. मिडलैण्ड्स
  7. उत्तरी वेल्स
  8. दक्षिणी वेल्स
  9. ब्रिस्टल
  10. कम्बरलैण्ड
  11. कैंट एवं
  12. स्कॉटलैण्ड की घाटी।

किन्तु अब ग्रेट ब्रिटेन का विश्व के कोयला उत्पादकों में बारहवाँ स्थान है। यहाँ विश्व का 1.1% कोयले का उत्पादन होता है।

(7) अन्य यूरोपीय देश – यूरोप महाद्वीप में कोयला उत्पादक अन्य देश निम्नलिखित हैं –

  1. चेक एवं स्लोवाकिया (पिलजेन तथा दक्षिणी साइलेशिया)
  2. बुल्गारिया
  3. यूगोस्लाविया
  4. हंगरी
  5. रोमानिया एवं
  6. उत्तरी स्पेन।

(8) अन्य देश – अन्य उत्पादक देशों में जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका संघ, रोडेशिया, नाइजीरिया तथा अल्जीरिया प्रमुख हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार – अधिक भारी होने के कारण विश्व के कुल कोयला उत्पादन का 10% भाग ही व्यापार में प्रयुक्त किया जाता है।
निर्यातक देश – संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, पोलैण्ड एवं ऑस्ट्रेलिया।
आयातक देश – जापान, कनाडा, डेनमार्क, इटली, नीदरलैण्ड्स, फ्रांस, स्पेन, नार्वे, बेल्जियम, भारत एवं अर्जेण्टाइना।

कोयले का संरक्षण
Conservation of Coal

वर्तमान समय में कोयला महत्त्वपूर्ण शक्ति या ऊर्जा का स्रोत है। यह खनिज शक्ति स्रोत क्षयी संसाधन है। यदि वर्तमान क्षमता से कोयले का उपयोग होता रहा तो सभी कोयले के क्षेत्र 200 वर्षों में समाप्त हो जाएँगे और विश्व के समक्ष एक जटिल समस्या उत्पन्न हो जाएगी, जब कि वास्तविक स्थिति यह है कि कोयले का उत्पादन प्रतिवर्ष 7.5 से 10% बढ़ रहा है।

अत: यह आवश्यक है कि कोयला उत्पादन, उपयोग एवं संरक्षण के लिए एक सन्तुलन स्थापित किया जाए और उसकी सुरक्षा की जाए। औद्योगिक प्रगति को निरन्तर बनाये रखने के लिए खनन विधियों में निरन्तर सुधार, कोयले की खानों में लगी आग पर नियन्त्रण, घटिया किस्म के कोयले की अधिकतम धातु-शोषण एवं अन्य उद्योगों में उपयोग, कोयले के स्थानापन्न के रूप में जल-विद्युत, आणविक ऊर्जा और सौर आदि के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास तेजी से क्रियान्वित किये जाने चाहिए।

प्रश्न 3
विश्व में खनिज तेल उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों की विवेचना कीजिए। उसके महत्त्व तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को भी बताइए। (2007, 10)
या
दक्षिणी-पश्चिमी एशिया में खनिज तेल के वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए। [2008, 09, 16]
या
एशिया में पेट्रोलियम के वितरण, उत्पादन एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का वर्णन कीजिए। [2008]
या
विश्व में खनिज तेल के वितरण एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का विवरण प्रस्तुत कीजिए। [2009]
या
खनिज तेल के उत्पादन, वितरण तथा विश्व व्यापार की विवेचना कीजिए। [2014]
या
विश्व में पेट्रोलियम के वितरण एवं उत्पादन का विवरण दीजिए। [2011, 12, 13, 14, 16]
उत्तर

खनिज तेल का महत्त्व Importance of Mineral Oil

ऊर्जा के संसाधनों में खनिज तेल का महत्त्व सर्वाधिक व्यापक है। कोयले की अपेक्षा इसमें ताप-शक्ति कई गुना अधिक होती है। युद्ध काल में खनिज तेल का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है। खनिज तेल का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जाता है –

  1. खनिज तेल ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
  2. कारखानों एवं मिलों में इंजनों को चलाने के लिए, भट्टियों को ताप-शक्ति देने के लिए तथा ताप-विद्युत के उत्पादन में खनिज तेल प्रयोग किया जाता है।
  3. मोटरगाड़ियों, रेलगाड़ियों, जलयानों एवं वायुयानों को चलाने के लिए खनिज तेल शक्तिसंसाधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
  4. तेज गति से चलने वाली मशीनों के पुर्षों की ग्रीसिंग करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
  5. कुछ रासायनिक उद्योगों में खनिज तेल कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इससे निम्नलिखित प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है –
    1. कृत्रिम रबड़-टायर, ट्यूब, बैल्ट आदि
    2. अनेक प्रकार के कृत्रिम रेशों का निर्माण
    3. कृषि के लिए रासायनिक उर्वरकों का निर्माण
    4. विभिन्न प्रकार के अन्य चिकने तेलों का निर्माण तथा
    5. ओषधियों का निर्माण।

विश्व में खनिज तेल की संचित मात्रा एवं उत्पादन
Reserve Quantity and Production of Mineral Oil in the World

1. संचित मात्रा – विश्व में खनिज तेल के ज्ञात भण्डार सर्वाधिक फारस की खाड़ी के समीपवर्ती अर्थात् पश्चिमी एशियाई देशों में हैं, जिसे ‘मध्य-पूर्व’ (Middle-East) के नाम से पुकारा जाता है। यहाँ विश्व की 60% खनिज तेल की संचित राशि है। इसके समीप में ही रूस के तेल-भण्डार स्थित हैं। इस प्रकार कैस्पियन सागर, काला सागर, लाल सागर एवं फारस की खाड़ी से घिरा यह क्षेत्र विश्व के खनिज तेल भण्डार का सबसे प्रमुख क्षेत्र है। अन्य बड़े भण्डारों में संयुक्त राज्य, कैरेबियन सागरीय प्रदेश तथा उत्तरी अफ्रीका के अल्जीरिया एवं लीबिया देश हैं। इण्डोनेशिया, चीन, भारत, जापान, म्यांमार तथा ऑस्ट्रेलिया में भी तेल के छोटे-छोटे भण्डार विस्तृत हैं।

2. वार्षिक उत्पादन – विश्व के पेट्रोलियम उत्पादकों में सऊदी अरब, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ईरान, चीन, मैक्सिको, वेनेजुएला, नावें, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कनाडा आदि क्रमशः स्थान रखते हैं। तेल के प्रमुख उत्पादक देशों का विवरण निम्नलिखित है –

मध्य-पूर्व एशिया के देश
Mid-East Asian Countries

खनिज तेल के उत्पादन ने फारस की खाड़ी के मरुस्थली एवं निर्धन देशों को सुखी एवं धनी बना दिया है। कुवैत का 100%, सऊदी अरब का 99%, ईरान का 85% तथा इराक का 90% निर्यात; खनिज तेल एवं उससे निर्मित पदार्थों पर आधारित है तथा अर्थव्यवस्था को प्रमुख आधार है। प्रमुख उत्पादक देश निम्नलिखित हैं –

(1) सऊदी अरब – खनिज तेल के ज्ञात भण्डारों में सऊदी अरब का विश्व में दूसरा स्थान है। तथा उत्पादन में प्रथम स्थान है। यहाँ विश्व का 13.28% पेट्रोलियम उत्पादन होता है। प्रमुख तेल-क्षेत्रों में धहरान, दम्माम, अबक्वैक, आइनेदार, कातिफ एवं घवर हैं, जो 5 लाख वर्ग किमी क्षेत्रफल में विस्तृत हैं। यहाँ का तेल रासतनूरा शोधनशाला में साफ किया जाता है तथा वहाँ से 1,700 किमी लम्बी पाइप लाइन द्वारा भूमध्यसागरीय तट पर स्थित लेबनान के पत्तन सिदोन को भेज दिया जाता है। तेल का उत्पादन अरब-अमेरिकन कम्पनियाँ करती हैं।

(2) ईरान-मध्य – पूर्व का सर्वप्रथम तेल-क्षेत्र 1904 ई० में ईरान में खोजा गया था। यह क्षेत्र फारस की खाड़ी के उत्तर में 600 किमी की दूरी पर स्थित है। सर्वप्रथम 1908 ई० में एंग्लो-ईरानियन कम्पनी ने तेल उत्पादन का कार्य आरम्भ किया था। मस्जिदे-सुलेमान तेल उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। अन्य क्षेत्रों में नफ्तेशाह, कर्मनशाह, लाली, गाचसरन, कुम, हफ्तकेल, आगाजरी, नफ्दसफीद एवं खानकिन मुख्य हैं। अबादान एवं कर्मनशाह यहाँ की प्रमुख शोधनशालाएँ हैं। अबादान में विश्व की सबसे बड़ी शोधनाला है। ईरान विश्व का चौथा बड़ा तेल उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 4.77% पेट्रोलियम उत्पादन होता है।

(3) इराक – इराक के प्रमुख तेल-क्षेत्र उत्तरी भाग में 112 किमी लम्बी पेटी में किरकुक तथा मोसुल के समीपवर्ती भागों-किरकुक, नफ्तखान, बुटमाह, बसरा, जुबैर एवं रूमाइला- में हैं। यहाँ के तेल को पाइप लाइन द्वारा त्रिपोली (लेबनान) एवं बनियास (सीरिया) को भेजा जाता है। दक्षिण में जुबैर क्षेत्र से पाइप लाइन द्वारा तेल फारस की खाड़ी पर स्थित फाओ पत्तन को भेज दिया जाता है जहाँ से तेल का विदेशों को निर्यात किया जाता है। यहाँ विश्व का 3.75% पेट्रोलियम उत्पादन होता है।

(4) संयुक्त अरब अमीरात – इस तटीय पेटी में तेल का वार्षिक उत्पादन लगभग 10 करोड़ मीटरी टन है जो विश्व के उत्पादन का 3.32% है।
(5) कुवैत – कुवैत एक छोटा-सा देश है, परन्तु यहाँ विश्व का तीसरा प्रमुख तेल भण्डार है। यहाँ विश्व का 2.96% पेट्रोलियम उत्पादन होता है। यहाँ से तेल का उत्पादन सन् 1946 से प्रारम्भ किया गया था। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र बुरघान, अलअहमदी, सर्विया तथा गिनागिश हैं। अलअहमदी में तेल-शोधनशाला स्थापित की गयी है। कुवैत पत्तन से तेल का निर्यात किया जाता है।

(6) ओमान – ओमान में ट्रशियल का वार्षिक उत्पादन लगभग 3 करोड़ मीटरी टन तथा न्यूट्रल जोन का वार्षिक उत्पादन 25 करोड़ मीटरी टन है।
(7) बहरीन दीप – यहाँ तेल का उत्पादन 1934 ई० से प्रारम्भ किया गया था तथा इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 1 करोड़ मीटरी टन है।
(8) कतर – यहाँ पर तेल का उत्पादन 1948 ई० से प्रारम्भ किया गया था। इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 1 करोड़ मीटरी टन है।
(9) संयुक्त अरब गणराज्य (मिस्र) – मिस्र में लाल सागर तटीय पेटी में हुरघदा एवं रास-गरीब प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र हैं। इनका वार्षिक उत्पादन 4.6 करोड़ मीटरी टन है। तेल का शोधन स्वेज पत्तन की शोधनशाला में किया जाता है।

रूस Russia

रूस विश्व का दूसरा प्रमुख तेल उत्पादक देश है। यहाँ 30 करोड़ मीटरी टन वार्षिक उत्पादन होता है, जो विश्व के कुल उत्पादन का 12.65% है। रूस में अवसादी शैलों का विस्तार काकेशस प्रदेश से आर्कटिक सागर तक है। यहाँ पर प्रमुख तेल-क्षेत्र निम्नलिखित हैं –
1. वोल्गा-यूराल क्षेत्र – सन् 1950 के बाद से इस क्षेत्र का तेल उत्पादन में प्रथम स्थान है। रूस के तेल उत्पादन का 75% इसी क्षेत्र से प्राप्त होता है। मास्को के पूर्व में इस तेल-क्षेत्र का विस्तार वोल्गा नदी एवं यूराल पर्वत के मध्य में है। इस क्षेत्र को द्वितीय बाकू के नाम से पुकारा जाता है। पर्म, उफा तथा कुईबाईशेव इस क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक केन्द्र हैं। देश के अधिकांश क्षेत्र को तेल की आपूर्ति इसी क्षेत्र से की जाती है। यहाँ से 3,700 किमी लम्बी पाइप लाइन इटस्क को तेल ले जाती है जो विश्व की सबसे लम्बी पाइप लाइन है।

2. बाकू क्षेत्र – इसे काकेशस तेल-क्षेत्र भी कहते हैं। बाकू, माकचकाला, ग्रोझनी, माइकोप, रकूशा एवं कौसाहागिल प्रमुख तेल उत्पादक केन्द्र हैं। यहाँ से पाइप लाइन द्वारा तेल बातूम, तुआपसे, त्रुदोक्या. एवं ओर्क शोधनकेन्द्रों को भेजा जाता है। सन् 1950 से पहले इसका उत्पादन में प्रथम स्थान था जो इस समय द्वितीय स्थान पर आ गया है।

3. अन्य क्षेत्र – अन्य मुख्य क्षेत्र इस प्रकार हैं-

  1. ऐम्बा क्षेत्र
  2. पश्चिमी तुर्कमान क्षेत्र (नेबितदाग, कुमदाग, चेलेकिन आदि)
  3. मैंगिशलाक प्रायद्वीप
  4. बोरिस्लाव
  5. सखालीन द्वीप
  6. पेचोरा क्षेत्र
  7. फरगना घाटी क्षेत्र एवं
  8. पश्चिमी साइबेरिया में ओबे और यनीसी नदियों के बेसिन (भण्डारों का निर्धारण अभी तक नहीं हो पाया है)।

रूस अपनी आवश्यकता को पूरा करने के बाद पूर्वी यूरोप के मित्रराष्ट्रों को खनिज तेल निर्यात कर रहा है। वार्षिक उत्पादन के विचार से इसका विश्व में तीसरा स्थान है।

संयुक्त राज्य अमेरिका
United State of America

खनिज तेल के उत्पादन में संयुक्त राज्य का विश्व में तीसरा स्थान है। यहाँ तेल का वार्षिक उत्पादन लगभग 32 करोड़ मीटरी टन है जो विश्व के कुल उत्पादन का लगभग 10.74% है। तेल के उत्पादन में अग्रलिखित क्षेत्र मुख्य स्थान रखते हैं –

  1. टेक्सास क्षेत्र – इसके अन्तर्गत टेक्सास, दे०-१० अरकन्सास एवं प० लुजियानी राज्य सम्मिलित हैं। टेक्सास एवं मध्य महाद्वीपीय क्षेत्र, दोनों मिलकर संयुक्त राज्य का 60% खनिज तेल उत्पन्न करते हैं।
  2. गल्फतटीय क्षेत्र – इस क्षेत्र में लुजियाना, मिसीसिपी, टेक्सास, अलबामा तथा फ्लोरिडा राज्यों के भाग सम्मिलित हैं। तेल के उत्पादन में यह दूसरा स्थान रखता है।
  3. कैलीफोर्निया क्षेत्र – यह तेल के उत्पादन का तीसरा प्रमुख क्षेत्र है। हंटिंगटने-बीच, लौंग-बीच, सान्ताफे-स्प्रिंग्स प्रमुख उत्पादक केन्द्र हैं।
  4. मध्य महाद्वीपीय क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार पश्चिमी टेक्सास, ओक्लोहामा एवं द०-पू० कन्सास राज्यों में है।
  5. इण्डियाना तेल-क्षेत्र – दक्षिणी इलीनॉयस एवं दक्षिणी इण्डियाना राज्यों में विस्तृत यह तेल क्षेत्र संयुक्त राज्य का 5% तेल उत्पन्न करता है।
  6. रॉकी तेल-क्षेत्र – यहाँ पर केवल 3% खनिज तेल का उत्पादन होता है। यह औद्योगिक केन्द्रों से दूर पड़ने के कारण विकसित नहीं हो पाया है। भविष्य में यहाँ तेल के बड़े भण्डार मिलने की सम्भावना व्यक्त की गयी है।
  7. अप्लेशियन तेल-क्षेत्र – प्रारम्भ में इसी तेल-क्षेत्र का विकास किया गया था। अधिक शोषण कर लिये जाने के कारण इसका तेल समाप्ति की ओर अग्रसर है। यहाँ केवल 1% तेल का उत्पादन ही होता है।

अन्य देशों में खनिज तेल का उत्पादन
Production of Mineral Oil in Other Countries

इण्डोनेशिया – इण्डोनेशिया के प्रमुख उत्पादक सुमात्रा, बोर्नियो, जावा एवं सारावक द्वीप हैं। कुछ तेल सेलेबीज द्वीप से भी निकाला जाता है। इसकी विशेष सुविधा यह है कि यह दक्षिण-पूर्वी एशिया के सघन जनसंख्या वाले देशों-भारत, जापान, बांग्लादेश आदि के समीप स्थित है, जहाँ तेल की माँग अधिक है।
चीन – विश्व के तेल उत्पादन में चीन का पाँचवाँ स्थान है, जहाँ विश्व का 4.56% तेल उत्पन्न किया जाता है। चीन में तेल के प्रमुख भण्डार निम्नलिखित हैं –

  1. कान्सू
  2. जंगेरिया
  3. जेचवान बेसिन
  4. सैदाम बेसिन
  5. यूमेन
  6. औंसी तथा
  7. कारामाई।

भारत – भारत के खनिज तेल-क्षेत्रों का विवरण निम्नलिखित है –
(अ) असम में लखीमपुर क्षेत्र –

  1. डिगबोई (माकूम क्षेत्र)
  2. नांहर-कटिया
  3. रीजन-मोरेन
  4. बप्पापयॉग एवं
  5. हस्सापाँग क्षेत्र।

(ब) असम में सुरमा घाटी क्षेत्र –

  1. बदरपुर
  2. मसीमपुर एवं
  3. पथरिया क्षेत्र।

(स) गुजरात –

  1. खम्भात की खाड़ी में लुनेज क्षेत्र,
  2. अंकलेश्वर क्षेत्र एवं
  3. कलोल क्षेत्र।

(द) बॉम्बे हाई तेल-क्षेत्र (अरब सागर में)।
(य) तमिलनाडु के समीप पुदुचेरी तेल-क्षेत्र।
(र) पंजाब का ज्वालामुखी-क्षेत्र।

भारत में भू – वैज्ञानिकों द्वारा नये तेल-क्षेत्रों की खोज का कार्य किया जा रहा है। विशेष रूप से कच्छ के प्रायद्वीपीय क्षेत्र, कोरोमण्डल, पश्चिम बंगाल एवं नदियों की घाटियों में तेल मिलने की सम्भावनाएँ व्यक्त की गयी हैं।
म्यांमार – इस देश में इरावदी नदी की घाटी में तेल के भण्डार पाये जाते हैं। पेनांगयांग, सिंगू, येनांगयात एवं अक्याब प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

खनिज तेल का विश्व-व्यापार
World Trade of Mineral Oil

खनिज तेल का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्त्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि इसका उत्पादन कुछ सीमित देशों द्वारा किया जाता है, जब कि उपभोग लगभग सभी देशों द्वारा किया जाता है।
आयातक देश – तेल के प्रमुख आयातक विकसित देशों में सं० रा० अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैण्ड, ऑस्ट्रिया, इटली, चीन, जापान, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कोरिया, वियतनाम, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी एवं मध्य अफ्रीकी देश प्रमुख हैं।
निर्यातक देश – तेल के प्रमुख निर्यातक देश सऊदी अरब, रूस, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, ओमान, वेनेजुएला, कोलम्बिया, लीबिया, अफ्रीका एवं इण्डोनेशिया हैं।
प० यूरोप में ब्रिटेन, नीदरलैण्ड आदि देश कच्चे तेल का आयात कर और उसे अपनी शोधनशालाओं में साफ कर पेट्रोलियम पदार्थ विदेशों को निर्यात करते हैं।

प्रश्न 4
जल-विद्युत शक्ति के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा विश्व में इसके उत्पादन पर प्रकाश डालिए।
या
विश्व के किसी एक प्रमुख देश में जल-विद्युत के महत्त्व और उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर

जल-विद्युत का महत्त्व
Importance of Hydro-electricity

जल-विद्युत शक्ति को ऊर्जा का अक्षय स्रोत माना जाता है। जब तक धरातल पर नदियाँ प्रवाहित होती रहेंगी, तब तक अनवरत गति से जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन होता रहेगा। वास्तव में वर्तमान समय में जल-विद्युत शक्ति किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास एवं प्रगति का द्योतक है। अन्य शक्ति के संसाधनों की अपेक्षा यह शक्ति अधिक सस्ती एवं सुगम पड़ती है, क्योंकि इसके उत्पादन के लिए एक ही बार व्यय करना पड़ता है। इसके बाद अनवरत गति से उत्पादन प्राप्त होता रहता है। इसे दूरवर्ती उपभोक्ता केन्द्रों तक तारों की सहायता से सुगमतापूर्वक भेजा जा सकता है।

जल-विद्युत शक्ति उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ
Necessary Geographical Conditions for Producing Hydro-electricity

(अ) भौतिक दशाएँ Physical Conditions

  1. जलप्रपातयुक्त धरातलीय बनावट – प्राकृतिक जलप्रपात, कृत्रिम प्रपातों की अपेक्षा जल-शक्ति के लिए उत्पादन के अधिक अनुकूल होते हैं। इसकी सहायता से बहता हुआ जल ऊँचाई से गिरक़र अपने धक्के से टरबाइन को घुमाता रहता है। अतः प्रपातों की ऊँचाई जितनी अधिक होगी, उतनी ही अधिक मात्रा में शक्ति का उत्पादन सम्भव होगा।
  2. अत्यधिक वर्षा का होना – नदियों के उद्गम क्षेत्रों में भारी वर्षा होनी अति आवश्यक है, जिससे नदियों में पर्याप्त मात्रा में जल सतत रूप से प्रवाहित होता रहे।
  3. जल की समान मात्रा का प्रवाहित होना – नदियों में प्रवाहित जल की मात्रा एकसमान रहनी चाहिए। जल को नियन्त्रित करने के लिए मार्गों में जलाशयों एवं बाँधों का निर्माण किया जाना अत्यावश्यक है।
  4. ढाल की तीव्रता – तीव्र ढाल की स्थिति में नदियों की घाटियों में कई स्थानों पर प्रपातों की सहायता से जल-विद्युत शक्ति को उत्पादन सुगमता से कर लिया जाता है।
  5. शीतोष्ण जलवायु – जल-विद्युत उत्पादन क्षेत्रों का तापमान शीत ऋतु में भी हिमांक से ऊपर रहना चाहिए, जिससे नदियों का जल हिम में परिणत न हो सके। इसी कारण इसके लिए शीतोष्ण जलवायु उपयुक्त रहती है।
  6. जलधाराओं के मार्ग में झीलों की उपस्थिति – यदि बहते हुए जल के मार्ग में हिमानियों द्वारा निर्मित झीलें पड़ जाएँ तो वे बहुत ही उपयुक्त रहती हैं। इन झीलों द्वारा तलछट (अवसाद) को रोक लिया जाता है, जिससे जल स्वच्छ हो जाता है।
  7. अन्य शक्ति संसाधनों का अभाव – यदि किसी प्रदेश में शक्ति के अन्य संसाधन; जैसे- कोयला, खनिज तेल, गैस आदि न हों तो जल-विद्युत शक्ति के विकास की अधिक सम्भावनाएँ रहती हैं। एवं इसके उत्पादन का भी सतत प्रयत्न किया जाता है।

(ब) आर्थिक दशाएँ Economic Conditions

  1. उपभोक्ता क्षेत्रों की समीपता – जल-शक्ति उत्पादक केन्द्रों के समीप ही विद्युत की माँग के क्षेत्र होने चाहिए। इसके लिए सघन जनसंख्या, उद्योग-धन्धे एवं व्यापारिक केन्द्र अधिक उपयुक्त रहते हैं। जल विद्युत शक्ति 400-500 किमी से अधिक दूरी पर नहीं भेजी जा सकती, क्योंकि इससे अधिक दूरी पर विद्युत का ह्रास तीव्रता से होना आरम्भ हो जाता है।
  2. पर्याप्त पूँजी की उपलब्धि – जल-विद्युत शक्ति के उत्पादन में बहुत अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है, क्योंकि नदियों पर बाँध बनाने, जलाशयों का निर्माण करने, शक्ति-गृहों का निर्माण करने, खम्भे, तार, टरबाईन, जेनरेटर, इन्जीनियर आदि की आवश्यकता होती है। इसके लिए सार्वजनिक पूँजी लगाई जा सकती है, क्योंकि इसमें निजी पूँजी व्यय करना असम्भव है।।
  3. आवागमन के साधनों का विकास – विद्युत-शक्ति के उत्पादन के लिए बाँधों, जलाशयों, शक्ति-गृहों, खम्भे, तार आदि को ढोने के लिए तीव्र आवागमन के साधनों की अधिक आवश्यकता पड़ती है; अतः इन साधनों का विकास किया जाना अति आवश्यक है।
  4. तकनीकी ज्ञान – जल-शक्ति उत्पादन के लिए मशीनरी, तकनीशियन एवं इन्जीनियर आदि आवश्यक होते हैं; अतः आधुनिक तकनीकी विकसित होनी चाहिए।

विश्व में जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन
Production of Hydro-electricity in the World

विभिन्न देशों में जल-विद्युत उत्पादन की क्षमता अलग-अलग पायी जाती है, परन्तु इसके उत्पादन की क्षमता सबसे अधिक अफ्रीका महाद्वीप में निहित है, जब कि यहाँ पर उत्पादन बहुत ही कम होता है। जल-शक्ति का सबसे अधिक उत्पादन कनाडा में किया जाता है। द्वितीय स्थान संयुक्त राज्य का है। मानसूनी देशों में भी जल-शक्ति उत्पादन के अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ पायी जाती हैं। आर्थिक विकास के साथ-साथ जल-विद्युत शक्ति का विकास भी विकसित देशों में अधिक हुआ है। वर्तमान । समय में विश्व में 2077 अरब किलोवाट घण्टा जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है। निम्नलिखित देशों का जल-विद्युत शक्ति उत्पादन में प्रमुख स्थान है-

कनाडा – जल-विद्युत शक्ति के उत्पादन में विश्व में कनाडा का प्रथम स्थान है। यहाँ जलविद्युत शक्ति उत्पादन की सभी आदर्श भौगोलिक सुविधाएँ विद्यमान हैं। पर्वतीय एवं पठारी क्षेत्र इस शक्ति के उत्पादन में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। न्याग्रा प्रपात (संयुक्त राज्य व कनाडा के साझे में), ओण्टेरियो, क्यूबेक एवं ब्रिटिश कोलम्बिया क्षेत्र प्रमुख जल-शक्ति उत्पादक हैं।

रूस – यहाँ विश्व की जलविद्युत शक्ति उत्पादन का 6% भाग विद्यमान है तथा विश्वें में पाँचवाँ स्थान रखता है। यहाँ दक्षिणी सीमा के सहारे-सहारे मध्य एशिया से सुदूरपूर्व तक पर्वत-श्रेणियाँ फैली हैं, जो जल-विद्युत उत्पादन के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। यहाँ जल-शक्ति के निम्नलिखित केन्द्र प्रमुख हैं –

  1. सिम्ल्यान्सकाया
  2. म्यूमुश
  3. नीपर प्रोजेक्ट
  4. बर्खने-स्विर (लेनिनग्राड)
  5. मिंगेचौर (अजरबेजान)
  6. कामा
  7. कारगेव (नीपर नदी पर)
  8. गोर्की (वोल्गा नदी पर)
  9. नेर्वा
  10. क्यूबीशेव
  11. वोल्गाग्राद (वोल्गा नदी पर)
  12. बोत्कन्स्क (कामा नदी पर)
  13. क्रास्नोयार्क (यनीसी नदी पर) एवं
  14. ब्रास्क प्रोजेक्ट (विश्व का सबसे बड़ा विद्युत केन्द्र)।

संयुक्त देशों के राष्ट्रकुल की नदियों – नीपर, नीस्टर, डॉन, वोल्गा, दिवना, नीमेन, इर्टिश, ओबे, यनीसी, अंगारा आदि पर जलविद्युत उत्पादन केन्द्रों की स्थापना की गयी है। यहाँ पर जल-विद्युत उत्पादन का 85% भाग साइबेरियाई नदियों पर स्थित विद्युत-गृहों से प्राप्त होता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका – विश्व की जल-शक्ति उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका का दूसरा स्थान है। संयुक्त राज्य अमेरिका में जल-विद्युत का विकास सर्वप्रथम न्यू-इंग्लैण्ड राज्य में किया गया था। इसके बाद 1960 ई० से अन्य राज्यों में विकास किया गया। यहाँ प्रमुख जल-विद्युत उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित हैं –

  1. न्याग्रा प्रपात – जिस पर कई विद्युत शक्ति-गृहों की स्थापना की गयी है।
  2. मिनियापोलिस में सेंट अन्थोनी प्रपात।।
  3. अप्लेशियन प्रदेश – पेंसिलवानिया से अलबामा तक। यहाँ प्रपात-रेखा पर बहुत से जलविद्युत उत्पादक केन्द्र स्थापित किये गये हैं–कोलम्बिया, रैले, रिचमण्ड, हार्टफोर्ड, लावेल, मानचेस्टर, फॉलॅरिवर, लारेंस, ट्रेण्टन, वाशिंगटन, बाल्टीमोर, फिलाडेल्फिया, पेटरसन आदि।
  4. टेनेसी घाटी – नोरिस, बाट्सबरी, कोल्टर, शोल, चिकमंगा, ह्वीलर, विल्सन बाँध आदि।
  5. कोलम्बिया नदी बेसिन – यहाँ पर लगभग 200 विद्युत उत्पादक केन्द्र स्थापित किये गये हैं, जिनमें ग्राण्ड कूली बाँध, चीफ जोजेफ, केकनेरी, डलेस, जोहनडे एवं बोनविले बाँध मुख्य हैं।
  6. हूवर बाँध योजना – (कोलोरेडो नदी पर)।
  7. मिसौरी घाटी परियोजना – यह योजना टेनेसी घाटी योजना की अपेक्षा 6 गुने क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति करती है।
  8. शास्ता बाँध (सेक्रोमेण्टो नदी पर)।
  9. सैन-ज्वाकिन बाँध (कैलीफोर्निया)।

यूरोपीय देश – पश्चिमी यूरोपीय देश विश्व की 27% जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन करते हैं। प्रमुख उत्पादक देशों का विवरण निम्नलिखित है –

  1. इटली – आल्प्स पर्वत के दक्षिणी ढालों तथा एपीनाइन पर्वत के ढालों पर प्रवाहित नदियों से। विद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है।
  2. फ्रांस – आल्प्स पर्वत की रोन घाटी में मध्य पठारी भाग तथा पिरेनीज पर्वत-श्रेणी की घाटी में जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है।
  3. स्विट्जरलैण्ड – यहाँ कोयले एवं खनिज तेल की कमी है। इसीलिए यहाँ आल्प्स पर्वत से प्रवाहित नदियों से जल-विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
  4. जर्मनी – जर्मनी ने अपनी जल-विद्युत उत्पादन क्षमता का पूर्ण विकास कर लिया है तथा यहाँ 19 अरब किलोवाट विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
  5. नार्वे तथा स्वीडन – इन दोनों देशों में जल-विद्युत शक्ति का भरपूर विकास किया गया है। यहाँ कोयला, खंनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस आदि शक्ति-संसाधनों का पूर्ण अभाव है। विश्व में प्रति । व्यक्ति विद्युत-शक्ति नार्वे में सबसे अधिक उपलब्ध है, जहाँ 99% जनसंख्या को यह शक्ति प्राप्त हो। गयी है। यहाँ पर इस शक्ति पर आधारित रासायनिक उद्योग, कृत्रिम नाइट्रोजन; स्वीडन में लोहा-इस्पात आदि उद्योगों का विकास कर लिया गया है।

एशियाई देश – एशिया महाद्वीप में जल-विद्युत शक्ति के प्रमुख उत्पादक देश निम्नलिखित हैं –
(i) जापान – एशिया की जल-शक्ति उत्पादन में जापान का महत्त्वपूर्ण स्थान है। जापान में। 1,500 जलविद्युत उत्पादक केन्द्र हैं, जिनमें से 1,000 होशू द्वीप में विकसित हैं। अन्य शक्ति संसाधनों के अभाव के फलस्वरूप जापान ने जल-विद्युत शक्ति का विकास ऊर्जा के वैकल्पिक संसाधन के रूप में किया है। ऊबड़-खाबड़ पठारी धरातल एवं सदावाहिनी सरिताओं के कारण जल-शक्ति के उत्पादन को बल मिला है। जापान ने अपनी सम्भावित जल-शक्ति का पूर्ण विकास कर लिया है, परन्तु माँग के अनुसार पूर्ति नहीं हो पाती; अतः ताप विद्युत भी उत्पन्न की जाती है।

(ii) चीन – जल-विद्युत शक्ति उत्पादन में चीन विश्व में चौथे स्थान पर है। चीन में 20% विद्युत शक्ति जल से तथा 80% कोयले से उत्पन्न की जाती है। ह्वांग्हो, यांगटिसीक्यांग, सीक्यांग तथा उनकी सहायक नदियों पर जल-विद्युत केन्द्रों की स्थापना की गयी है। जलविद्युत शक्ति उत्पादन में चीन के निम्नलिखित केन्द्र मुख्य हैं –

  1. उत्तरी चीन में सुंगारी नदी पर फैंगमैन केन्द्र
  2. ह्वांगहो नदी पर सानमेन बाँध
  3. ल्यूकिया बाँध
  4. बीजिंग के निकट मुंगतिंग नदी पर कुऑतिंग विद्युत-गृह
  5. जेचवान प्रान्त में शिल्सेतान केन्द्र
  6. दक्षिणी चीन में ल्यूची नदी पर शांग्यू विद्युत केन्द्र
  7. सिनांन बाँध
  8. आह्नवे बाँध एवं
  9. सीक्यांग बाँध।

(iii) भारत – भारत में जल-शक्ति के विशाल भण्डार हैं, परन्तु अभी तक उनका पूर्ण विकास नहीं हो पाया है। सन् 1950 के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से बहुत-सी बहुउद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाओं का विकास किया गया है। एशिया महाद्वीप में जल-विद्युत का सर्वप्रथम उत्पादन भारत में कर्नाटक राज्य के शिवसमुद्रम् नामक स्थान पर 1902 ई० में आरम्भ किया गया था। कोयना, शिवसमुद्रम्, पायकारा, मैटूर, पापनाशम, पेरियार, पल्लीवासल, निजाम सागर, नागार्जुन सागर, हीराकुड, दामोदर घाटी, कोसी व शारदा योजना, माताटीला, रिहन्द, रामगंगा योजना, चम्बल योजना, भाखड़ा-नॉगल योजना आदि प्रमुख बहुध्येयी नदी-घाटी योजनाएँ हैं। जल-विद्युत शक्ति की बढ़ती हुई माँग को देखते हुए भारत सरकार इसके उत्पादन में वृद्धि करने के लिए निजी क्षेत्रों के सहयोग पर भी विचार कर रही है। यहाँ विश्व की 3.1% जल-विद्युत शक्ति उत्पन्न की जाती है।

अफ्रीकी देश – अधिकांश अफ्रीकी देश विषुवतरेखीय जलवायु प्रदेश में स्थित हैं तथा इन देशों की धरातलीय रचना भी जलविद्युत उत्पादन के अनुकूल है। इस प्रकार अफ्रीका महाद्वीप में जल-विद्युत शक्ति की सम्भावनाएँ विश्व में सर्वाधिक हैं, परन्तु आर्थिक एवं तकनीकी पिछड़ेपन के कारण इसे शक्ति का विकास नहीं हो पाया है। यहाँ सम्भावित जल-शक्ति का केवल 0.3% भाग का ही विकास हो सका है, परन्तु अब कुछ देशों ने आयातित तकनीकी द्वारा जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन आरम्भ किया है, जिनमें मिस्र, दक्षिणी रोडेशिया, जायरे, जाम्बिया आदि देश प्रमुख हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
खनिज तेल के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार पर एक टिप्पणी लिखिए। [2009]
उत्तर
खनिज तेल का भौगोलिक वितरण असमान होने के कारण विश्व के अनेक देशों; जैसे-पश्चिमी यूरोपीय देश, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि में पेट्रोलियम की बहुत कमी है। अतएव पेट्रोलियम को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार बहुत महत्त्वपूर्ण है, किन्तु इस व्यापार का स्वरूप निश्चित नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका, जो पेट्रोल का एक बड़ा निर्यातक देश है, समीपस्थ देश जैसे वेनेजुएला और कोलम्बिया से तथा दूरस्थ देशों जैसे मध्य-पूर्व, नीदरलैण्ड और इण्डोनेशिया से कच्चा तेल और परिष्कृत तेल आयात भी करता है।

यूरोपीय देश अधिकांश तेल मध्य-पूर्व तथा उत्तरी अफ्रीका से आयात करते हैं। ब्रिटेन और नीदरलैण्ड जैसे देशों के पास अपनी माँग के अनुरूप पर्याप्त तेल नहीं है; अतः वे कच्चा तेल आयात कर परिष्कृत पदार्थों का निर्यात करते हैं। एशिया में भारत, जापान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कोरिया, वियतनाम, श्रीलंका आदि देश भी तेल का आयात करते हैं। इसी प्रकार दक्षिणी तथा मध्य अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड भी तेल के आयातक देश हैं।
प्रमुख तेल निर्यातक देश हैं-

  1. मध्य-पूर्व के देश; जैसे-सऊदी अरब, कुवैत, ईरान, इराक, कतर, बहरीन, ओमान आदि,
  2. कैरेबियन देश; जैसे-वेनेजुएला, कोलम्बिया आदि,
  3. अफ्रीकी देश; जैसे-लीबिया, अल्जीरिया, नाइजीरिया तथा
  4. इण्डोनेशिया।

प्रश्न 2
किन्हीं दो गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का उल्लेख कीजिए
उत्तर
दो गैर-परम्परागत ऊर्जा के स्रोत अग्रलिखित हैं –

  1. पवन ऊर्जा – तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र आदि राज्यों में पवन ऊर्जा विकसित की गयी है।
  2. लहरी ऊर्जा – समुद्री लहरों से ऊर्जा प्राप्त करने का संयन्त्र केरल में तिरुवनन्तपुरम के निकट विजिंगम स्थान पर लगाया गया है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
कोयला किससे प्राप्त होता हैं?
उत्तर
कोयला भूपटल की अवसादी शैलों से प्राप्त होता है।

प्रश्न 2
विश्व में खनिज तेल का सर्वाधिक भण्डार कहाँ पाया जाता है?
उत्तर
विश्व में खनिज तेल के ज्ञात भण्डार सर्वाधिक फारस की खाड़ी के समीपवर्ती अर्थात् पश्चिमी एशियाई देशों में हैं।

प्रश्न 3
भारत में खनिज तेल के प्राप्ति-स्थान लिखिए।
उत्तर
भारत में खनिज तेल के प्राप्ति-स्थान हैं-असम के लखीमपुर एवं सुरमा घाटी क्षेत्र, गुजरात के खम्भात, अंकलेश्वर एवं कलौल क्षेत्र, बॉम्बे हाई तथा तमिलनाडु के कावेरी बेसिन तथा अपतटीय क्षेत्र।

प्रश्न 4
विश्व में खनिज तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन है? [2011]
उत्तर
विश्व में खनिज तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश सऊदी अरब है।

प्रश्न 5
विश्व में कोयले के चार प्रमुख उत्पादक देशों के नाम लिखिए। [2013, 14]
उत्तर

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका
  2. चीन
  3. ऑस्ट्रेलिया तथा
  4. भारत।

प्रश्न 6
लौह-इस्पात उद्योग के स्थानीकरण की चार आवश्यक दशाओं का उल्लेख कीजिए। [2014]
उत्तर

  1. कच्चे माल अर्थात् लौह-अयस्क की सुविधा
  2. शक्ति संसाधनों की उपलब्धता
  3. उपभोक्ता बाजार की समीपता
  4. परिवहन साधनों की सुलभता।

प्रश्न 7
एशिया के दो प्रमुख खनिज तेल उत्पादन देशों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. सऊदी अरब तथा
  2. कुवैत।

प्रश्ना 8
विश्व में सर्वाधिक सम्भाव्य जल-शक्ति किस महाद्वीप पर पायी जाती है?
उत्तर
विश्व में सर्वाधिक सम्भाव्य जल-शक्ति (41%) अफ्रीका महाद्वीप पर मिलती है।

प्रश्न 9
विश्व में सर्वाधिक विकसित जल-शक्ति किस महाद्वीप पर पायी जाती है?
उतर
विश्व में सबसे अधिक विकसित जल-शक्ति (40% से अधिक) उत्तरी अमेरिका महाद्वीप पर पायी जाती है।

प्रश्न 10
विश्व के चार अग्रणी जल-विद्युत उत्पादक देशों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. कनाडा
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका
  3. ब्राजील तथा
  4. चीन।

प्रश्न 11
संयुक्त राज्य अमेरिका के किसी एक खनिज तेल-क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर
टेक्सास क्षेत्र अमेरिका का प्रमुख खनिज तेल-क्षेत्र है। इसके अन्तर्गत टेक्सास, दक्षिण-पूर्वी अरकन्सास एवं प० लुशियाना राज्य सम्मिलित हैं। ।

प्रश्न 12
शक्ति के प्रमुख संसाधनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
शक्ति के प्रमुख संसाधन कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, जल-शक्ति तथा आणविक शक्ति हैं।

प्रश्न 13
कोयले की अपेक्षा पेट्रोलियम का महत्त्व अधिक क्यों है?
उत्तर
आधुनिक युग में कोयले की अपेक्षा पेट्रोलियम का अधिक महत्त्व है, क्योंकि यह केवल शक्ति का साधन ही नहीं, अपितु अनेक पेट्रो-रसायन उद्योगों के लिए कच्चा माल भी है।

प्रश्न 14
विश्व में जल-विद्युत शक्ति का महत्त्व क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर
जल-विद्युत शक्ति ऊर्जा का अक्षय स्रोत है, जब कि कोयला तथा पेट्रोलियम क्षयशील संसाधन हैं। अत: विश्व में जल-विद्युत शक्ति का महत्त्व बढ़ रहा है।

प्रश्न 15
जल-विद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
जलविद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं –

  • जल-प्रपात
  • अधिक वर्षा
  • सदावाहिनी नदियाँ तथा ढाल की तीव्रता।

प्रश्न 16
उन दो उद्योगों के नाम बताइए जिनमें कोयला प्रधान भूमिका निभाता है?
उत्तर
लोहा व इस्पात तथा ताप विद्युत उत्पादन।

प्रश्न 17
भारत में कोयला प्रमुख रूप से किस क्षेत्र में पाया जाता है?
उत्तर
भारत में कोयला प्रमुख रूप से गोंडवाना क्षेत्र में पाया जाता है जहाँ भारत के बिटुमिनसे कोयले के 98.5% भण्डार हैं।

प्रश्न 18
विश्व के खनिज तेल उत्पादक दो क्षेत्रों के नाम बताइए। [2007, 11, 15, 16]
उत्तर

  1. दम्माम क्षेत्र (सऊदी अरब) तथा
  2. बाकू क्षेत्र (रूस)।

प्रश्न 19
संयुक्त राज्य अमेरिका के दो प्रमुख कोयला उत्पादक प्रदेशों के नाम लिखिए। [2008]
उत्तर

  1. अप्लेशियन कोयला क्षेत्र तथा
  2. अन्तर्रदेशीय कोयला क्षेत्र।

प्रश्न 20
इटाबिरा की खान किस देश में स्थित है और क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर
इटाबिरा की खान ब्राजील में स्थित है। यह लौह-अयस्क के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 21
भारत में लोहे के चार उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. छत्तीसगढ़-बस्तर, दुर्ग।
  2. ओडिशा-क्योंझर, सुन्दरगढ़।
  3. झारखण्ड-सिंहभूम।
  4. कर्नाटक-बिलारी।

प्रश्न 22
विश्व के चार अग्रणी लौह-अयस्क उत्पादक देशों के नाम लिखिए। [2011]
उत्तर

  1. ब्राजील
  2. चीन
  3. ऑस्ट्रेलिया तथा
  4. भारत।

प्रश्न 23
दक्षिण अमेरिका के चार लौह-अयस्क उत्पादक देशों के नाम लिखिए ।
उत्तर
दक्षिणी अमेरिका के चार लौह-अयस्क उत्पादक देश हैं- ब्राजील, वेनेजुएला, चिली तथा पीरू।

प्रश्न 24
यूरोप के प्रमुख लौह-अयस्क उत्पादक देशों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
यूरोप के प्रमुख लौह-अयस्क उत्पादक देश हैं- स्वीडन, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन तथा रूस।

प्रश्न 25
संयुक्त राज्य अमेरिका के दो प्रमुख लौह-अयस्क उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. सुपीरियर झील क्षेत्र तथा
  2. अप्लेशियन क्षेत्र।

प्रश्न 26
विश्व के लौह-अयस्क उत्पादन के क्षेत्रों के नाम लिखिए। [2013, 14]
उत्तर

  1. सुपीरियर झील क्षेत्र (संयुक्त राज्य अमेरिका) तथा
  2. यूक्रेन अथवा डोनबास क्षेत्र (रूस)।

प्रश्न 27
दक्षिण-पश्चिम एशिया के किन्हीं चार खनिज तेल उत्पादक देशों के नाम लिखिए। [2014]
उत्तर

  1. ईरान
  2. इराक
  3. कुवैत तथा
  4. कतर।

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1
कोयला पाया जाता है –
(क) अवसादी शैलों में
(ख) रूपान्तरित शैलों में
(ग) आग्नेय शैलों में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(क) अवसादी शैलों में।

प्रश्न 2
पेट्रोलियम पाया जाता है –
(क) आग्नेय शैलों में
(ख) अवसादी शैलों में
(ग) कायान्तरित शैलों में
(घ) इन सभी में
उत्तर
(ख) अवसादी शैलों में।

प्रश्न 3
पेट्रोलियम का सबसे बड़ा उत्पादक देश है – [2009]
या
विश्व में निम्नांकित देशों में कौन-सा खनिज तेल का सर्वाधिक उत्पादन करता है? [2015]
(क) रूस
(ख) चीन
(ग) सऊदी अरब
(घ) सं० रा० अमेरिका
उत्तर
(ग) सऊदी अरब।

प्रश्न 4
निम्नलिखित में से कौन-सा देश खनिज तेल का सर्वाधिक आयातक है? [2010]
(क) इराक
(ख) पेरू
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) कुवैत
उत्तर
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 5
निम्नलिखित में से कौन-सा देश खनिज तेल का निर्यातक नहीं है? [2007]
(क) वेनेजुएला
(ख) कुवैत
(ग) इराक
(घ) इंग्लैण्ड
उत्तर
(घ) इंग्लैण्ड।

प्रश्न 6
मेसाबी, बरमीलियन, कुयुना, मारक्वेट, गोजेबिक तथा मिनोमिनी लौह श्रेणियाँ स्थित हैं –
(क) कनाडा में
(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका में
(ग) मैक्सिको में
(घ) यूक्रेन में
उत्तर
(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका में।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 11 Minerals and Energy Resources

प्रश्न 7
निम्नलिखित में से कौन-सा देश लौह-अयस्क का भारी आयातक है?
(क) जापान
(ख) ब्राजील
(ग) भारत
(घ) दक्षिणी अफ्रीका संघ
उत्तर
(क) जापान।

प्रश्न 8
झारखण्ड का कोडरमा क्षेत्र प्रसिद्ध है – (2017)
(क) बॉक्साइट के लिए
(ख) अभ्रक के लिए
(ग) ताँबे के लिए।
(घ) मैंगनीज के लिए
उत्तर
(ख) अभ्रक के लिए।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 11 Minerals and Energy Resources (खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 11 Minerals and Energy Resources (खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 Urban Settlements

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 Urban Settlements (नगरीय अधिवास बस्तियाँ) are part of UP Board Solutions for Class 12 Geography. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 Urban Settlements (नगरीय अधिवास बस्तियाँ).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Geography
Chapter Chapter 9
Chapter Name Urban Settlements (नगरीय अधिवास बस्तियाँ)
Number of Questions Solved 14
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 Urban Settlements (नगरीय अधिवास बस्तियाँ)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
नगरों की उत्पत्ति एवं विकास के कारक बताइए तथा विकास-क्रम के आधार पर नगरों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिएं। नगरीकरण से क्या तात्पर्य है?
या
नगरीकरण की उत्पत्ति तथा विकास को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए। [2014, 16]
या
नगरीय अधिवास की मुख्य विशेषताएँ बताइए तथा कार्यों के अनुसार नगरीय अधिवासों का वर्गीकरण कीजिए।
या
नगरीय अधिवास की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (2015)

नगरीय अधिवास
Urban Settlement

नगरीय अधिवास उद्योग, व्यापार, प्रशासन, सुरक्षा, शिक्षा-तकनीकी, संस्कृति एवं मनोरंजन के केन्द्र होते हैं। ग्रामीण एवं नगरीय अधिवासों में कुछ अन्तर होता है- ग्रामीण अधिवास तो प्राथमिक व्यवसायों; जैसे-आखेट, मत्स्य संग्रहण, पशुचारण, कृषि आदि कार्य करने वाले लोगों की बस्तियाँ होती हैं, जबकि नगरीय अधिवास अकृषित कार्यों; जैसे- निर्माण उद्योग, परिवहन, व्यापार, वाणिज्य, उच्च सेवाओं, प्रशासनिक आदि कार्य करने वाले लोगों की बस्तियाँ होती हैं। इन नगरीय अधिवासों द्वारा इन कार्यों में से एक अथवा दो व्यवसाय या सभी कार्य भी किये जा सकते हैं।

नगरीकरण का अर्थ एवं परिभाषाएँ
Meaning and Definitions of Urbanization

नगरीकरण वर्तमान युग की एक महत्त्वपूर्ण घटना है। यद्यपि आज से हजारों वर्ष पूर्व भी पृथ्वी पर नगर थे परन्तु उस समय नगरीकरण की प्रक्रिया अत्यन्त मन्द थी। वस्तुतः नगरीकरण का आशय व्यक्तियों द्वारा शहरी संस्कृति को स्वीकार करना है। नगरीकरण की निम्नलिखित परिभाषाओं द्वारा इस तथ्य को ठीक प्रकार समझा जा सकता है –

  1. एण्डरसन के अनुसार, “गाँव से नगर की ओर जनसंख्या के गतिशील होने, साथ ही ग्रामीण जीवन के नगरीय जीवन में परिवर्तित होने की प्रक्रिया नगरीकरण कहलाती है।”
  2. ग्रिफिथ टेलर के अनुसार, “गाँवों से नगरों को जनसंख्या का स्थानान्तरण ही नगरीकरण कहलाता है।”

नगरीय अधिवास की विशेषताएँ
Characteristics of Urban Settlement

  1. नगर मिश्रित मकानों अथवा इमारतों का एक समूह होता है। इसमें निम्न, मध्यम एवं उच्च आय वर्गों के निवासस्थान, वाणिज्य क्षेत्र, कारखाने, शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, मनोरंजन, परिवहन, व्यापारिक तथा व्यावसायिक कार्य विकसित होते हैं। प्रशासनिक इकाइयाँ भी नगरीय व्यवस्था के प्रमुख अंग हैं।
  2. नगरों में व्यावसायिक विभिन्नताएँ पायी जाती हैं। इनके अधिकांश निवासी निर्माण, उद्योग, परिवहन, व्यापार-वाणिज्य, उच्च सेवाओं तथा प्रशासनिक आदि कार्यों में लगे होते हैं।
  3. नगरों में संगठित मकान अधिक पाये जाते हैं। यहाँ अनेक मंजिल वाले भवन बनाये जाते हैं। मकानों में सोने के कमरे, स्नानगृह, शौचालय तथा रसोईघर आदि सुविधाओं की पृथक् व्यवस्था होती है।
  4. नगरों में पक्की सड़कें तथा गलियाँ होती हैं। ये परिवहन मार्गों के केन्द्र होते हैं। इनमें गन्दे जल के निकास की व्यवस्था नालियों द्वारा की जाती है।
  5. नगरों में रोशनी, पेयजल, स्वच्छता एवं शान्ति बनाये रखने की भी व्यवस्था होती है।
  6. नगरों में व्यावसायिक, शैक्षणिक तथा प्रशासनिक आदि विभिन्न संस्थान भी होते हैं, जो नगरीय जीवन के आवश्यक एवं गतिशील अंग होते हैं।
  7. नगरों में परिवहन, संचार एवं दूरसंचार के साधनों की भी समुचित व्यवस्था होती है। यहाँ वनों का कर्णभेदी शोर तथा ग्रामीण प्रदेशों से आने वाले दैनिक व्यक्तियों की भीड़-भाड़ अधिक रहती है।
  8. अनेक नगर सुनियोजित ढंग से बसाये जाते हैं। इनमें पार्क, जल प्रदाय, धर्मशालाएँ आदि सार्वजनिक स्थान भी समुचित ढंग से बनाये जाते हैं।
  9. नगरों में सामाजिक-सांस्कृतिक सेवाओं में विद्यालय, अस्पताल, सामुदायिक विकास केन्द्र, खेल के मैदान, पार्क, क्लब, सिनेमाघर आदि भी पाये जाते हैं।
  10. नगरीय जीवन प्राकृतिक पर्यावरण से दूर फैशन एवं कृत्रिमता से पूर्ण होते हैं।

नगरों की उत्पत्ति एवं विकास के कारक
Origin and Factors of Development of Towns

नगर सांस्कृतिक विकास को प्रदर्शित करते हैं और इनका प्रारम्भ कृषि तथा पशुपालन के परिपक्व स्तर पर पहुँचने के कारण आज से पाँच-छ: हजार वर्षों पूर्व हुआ था। नगरों की उत्पत्ति एवं उनका विकास निम्नलिखित कारकों द्वारा हुआ है –
(1) अतिरिक्त उत्पादन (Surplus Production) – प्राथमिक उत्पादक क्षेत्रों में अतिरिक्त उत्पादन के कारण समाज के कुछ लोगों ने प्राथमिक उत्पादन से अवकाश ले लिया। इससे समाज में शैक्षणिक, व्यापारिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक कार्यों का प्रसार प्रारम्भ हुआ।
(2) प्रथम नगरीय क्रान्ति (First Urban Revolution) – प्राचीन नवपाषाण युग, जिसे नगरीय क्रान्ति युग’ भी कहते हैं, में नयी उत्पादन विधियों, नये विचार, आविष्कार एवं सृजनात्मक कार्य, कला-कौशल, भाषा, साहित्य, सामाजिक-राजनीतिक संगठन, उद्योग आदि नये कार्य प्रकट हुए। इससे नगरों की उत्पत्ति और उनके विकास आरम्भ हुए। पहले केन्द्रीय गाँव नगर बनने लगे।

(3) क्षेत्रीय केन्द्रीयता (Regional Centrality) – नगर, स्थानीय एवं क्षेत्रीय केन्द्रीयता के कारण विकास कार्यों के लिए केन्द्रीय स्थानों के रूप में उभरे।
(4) राजनीतिक कारक (Political Factors) – राजाओं व सम्राटों ने अपनी सत्ता कायम रखने के लिए नगरीय केन्द्रों को अपनी राजधानी बनाया। ये नगर प्रारम्भ से ही राजकीय शक्ति तथा सामाजिक-आर्थिक कार्यों के केन्द्र बन गये थे। इनके कारण कुछ ग्रामीण बस्तियाँ नगरीय केन्द्रों के रूप में उदित हुई हैं।

(5) आर्थिक, औद्योगिक-व्यापारिक कारक (Economic, Industrial, Commercial Factors) – उद्योग-धन्धे, विभिन्न व्यवसाय, बाजार, मण्डी, राजमहल जैसे- राजकीय कार्य या शिक्षण-प्रशिक्षण आदि संस्थाओं के एक केन्द्रीय स्थल पर एकत्रित होने के कारण नगरों की क्षेत्रीयता की शक्ति बढ़ गयी तथा इनके चारों ओर बसे मानव-समूहों पर राजसत्ता का नियन्त्रण अधिक सम्भव हो गया।

(6) धार्मिक-सामाजिक कारक (Religious-Social Factors) – पश्चिमी एशिया की आरम्भिक सभ्यताओं में राजा न केवल राजसत्ता, बल्कि धार्मिक कार्यों का भी प्रमुख होता था और उसकी सत्ता ईश्वर के रूप में मानी जाती थी। इस प्रकार धर्म एवं राजशक्ति, दोनों के एकजुट होने पर व्यापारिक कार्य तथा अन्य कार्य एक स्थान पर एकत्र होते गये तथा नगरों का भी विकास होता गया।

(7) सुरक्षा केन्द्र (Defence Centres) – राजधानी की सुरक्षा के लिए नगर सैनिक केन्द्र तथा आन्तरिक सुरक्षा केन्द्र बन गये। इन्हीं कारणों से प्राचीन तथा मध्ययुगीन नगर परकोटायुक्त तथा किले वाले बनाये जाते थे।

(8) बहुधन्धी विकास-मूलक कारक (Multi-Developmental Factors) – राजधानी, प्रशासन, धर्मसत्ता, व्यापार, उद्योग-धन्धे, सुरक्षा, शिक्षण-प्रशिक्षण, संगठन, विकास, कल्याण आदि सभी कार्यों के एकजुट हो जाने से नगर की सत्ता चारों ओर के समीपवर्ती क्षेत्र पर बढ़ती गयी।

(9) सांस्कृतिक कारक (Cultural Factors) – कला-कौशल, स्थापत्य कला, संगीत, धर्म आदि के ज्ञाताओं का कार्य-क्षेत्र केन्द्रीय स्थानों और राजधानियों में अधिक था। इसी कारण नगर सांस्कृतिक विकास के केन्द्र हो गये।

आधुनिक औद्योगिक विकास – आधुनिक औद्योगिक युग को द्वितीय नगरीय क्रान्ति’ (Second Urban Revolution) कहा जाता है। आधुनिक उद्योग-धन्धे वृहत् पैमाने पर विकसित हुए हैं। इनमें सम्पूर्ण विश्व में आधुनिक परिवहन साधनों द्वारा कच्चे माल की पूर्ति की जाती है तथा उत्पादों की खपत भी विश्व स्तर पर की जाती है। इस प्रकार पूँजी, श्रम, तकनीकी एवं प्रबन्ध कुशलता, ज्ञान-विज्ञान आदि का आदान-प्रदान विश्व स्तर पर हो गया है; अतः सम्पूर्ण विश्व एक इकाई होता जा रहा है। कृषि, उद्योग, व्यापार एवं परिवहन के क्षेत्र में उत्पन्न क्रान्तियों ने एकजुट होकर नगरीय-क्रान्ति को जन्म दिया है। औद्योगीकरण तथा नगर एक-दूसरे के लिए प्रेरक हो गये हैं।

किसी भी स्थल पर उद्योग-धन्धों के स्थापित होने के साथ-साथ नगर बसना आरम्भ हो जाता है। नगर बसने के साथ ही अन्य कार्य; जैसे-व्यापारिक दुकानें, सेवा करने वाली दुकानें, प्रशासनिक इकाइयाँ, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आवश्यकताओं को पूरा करने वाले अनेक कार्य आदि समय के साथ-साथ विकसित होते जाते हैं। पुनः जनसंख्या में वृद्धि से नये उद्योग-धन्धे स्थापित होने प्रारम्भ हो जाते हैं। इस आधार पर औद्योगीकरण से नगरीकरण तथा नगरीकरण से औद्योगीकरण का क्रम विकसित होता जाता है। अत: उद्योग-धन्धों के प्रसार से निम्नलिखित प्रकार के नगरों का विकास होता है –

  1. खनन नगर
  2. व्यापारिक नगर
  3. शैक्षणिक नगर
  4. मनोरंजन एवं स्वास्थ्यवर्द्धक नगर
  5. पर्वतीय नगर
  6. बन्दरगाह या पत्तन नगर
  7. क्रीड़ा नगर तथा
  8. परिवहन नगर।

नगरों का वर्गीकरण Classification of Towns
विकास-क्रम के आधार पर भी नगरों का वर्गीकरण किया जाता है। इस सम्बन्ध में लुईस ममफोर्ड एवं ग्रिफिथ टेलर के वर्गीकरण महत्त्वपूर्ण हैं –
(अ) लुईस ममफोर्ड का वर्गीकरण Louis Mumford’s Classification
अमेरिकी समाजशास्त्री लुईस ममफोर्ड ने नगरों के विकास की छः अवस्थाएँ. बतायी हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. इओपोलिस – ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित सेवा-केन्द्रों, केन्द्रीय बाजारों या कस्बों को प्राथमिक नगर अर्थात् इओपोलिस कहते हैं। यह नगरीय विकास की प्रारम्भिक अवस्था होती है।
  2. पोलिस – जब ये सेवा-केन्द्र या केन्द्रीय बाजार पूर्ण नगरों के रूप में विकसित होते हैं तो उन्हें पोलिस कहा जाता है। इनमें परिवहन, व्यापार एवं सेवा संस्थानों आदि का विकास परिपूर्ण हो जाता है।
  3. मेट्रोपोलिस – ये बड़े केन्द्रीय नगर होते हैं। ये राज्यों या देशों की राजधानियाँ, औद्योगिक नगर एवं व्यापारिक केन्द्र आदि महानगरों के रूप में होते हैं। इनमें पार्क, खेल के मैदान, सड़कें, सांस्कृतिक संस्थान आदि विकसित हो जाते हैं। इनमें उच्च सांस्कृतिक भू-दृश्य देखने को मिलता है।
  4. मेगालोपोलिस – यह नगरीय विकास का चरम बिन्दु होता है। व्यापार एवं उद्योगों के अतिरिक्तं यहाँ विशाल एवं बहुमंजिले भवन, विलास-स्थल, मनोरंजन केन्द्र, साहित्य एवं कला-कौशल के केन्द्र विशिष्ट रूप में विकसित होते हैं। आर्थिक-सामाजिक स्तर पर कुछ विशेष व्यक्तियों का एकाधिकार हो जाता है, जिससे इनका पतन होना प्रारम्भ हो जाता है।
  5. टायरेनोपोलिस – अधिक बड़े आकार की बस्ती, एकाधिकारी प्रभुसत्ता, बेरोजगारी, अपराध और दुष्कर्मों की अधिकता से आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से ह्रास करने लगती है। इन नगरों के निवासी इन्हें छोड़कर अन्यत्र स्थानों पर बसने के लिए चले जाते हैं।
  6. नेक्रोपोलिस – इस अवस्था में नगर का पतन चरम सीमा तक होता है। इसमें अपराध, दरिद्रता एवं अराजकता फैली रहती है। नगर-निवासियों की धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था टूट जाती है।

( ब ) ग्रिफिथ टेलर का वर्गीकरण Griffith Taylor’s Classification
ग्रिफिथ टेलर ने नगरों के विकास की सात अवस्थाएँ बतायी हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है –
(1) पूर्व-शैशवावस्था – यह नगरीय विकास की आरम्भिक अवस्था है। एक सड़क या गली के सहारे-सहारे लोग अस्थायी रूप से बस जाते हैं। यहाँ पर सामान्य आवश्यकता की कुछ दुकानें भी विकसित हो जाती हैं।

(2) शैशवावस्था – नगरीय विकास की इस अवस्था में मुख्य सड़क या गली के समानान्तर एवं लम्बवत् सड़कों व गलियों का विकास होता है। इससे सड़क मार्गों का एक जाल-सा बन जाता है। मुख्य सड़क-मार्गों एवं चौराहों पर विभिन्न दुकानें विकसित हो जाती हैं।
(3) बाल्यावस्था – इस अवस्था में नगर का विकास आरम्भ हो जाता है तथा नगर के केन्द्रीय भाग में चौक जैसा केन्द्रीय व्यापारिक गूर्त (C.B.D.) बन जाता है।

(4) किशोरावस्था – इसमें नगर का केन्द्रीय भाग पूर्ण रूप से स्पष्ट हो जाता है। व्यापार के अतिरिक्त विभिन्न कार्य; जैसे-उद्योग, परिवहन, शिक्षण-प्रशिक्षण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, वित्तीय एवं अन्य नगरीय सामाजिक-सांस्कृतिक सेवाएँ विकसित हो जाती हैं। नगर के बाहर की ओर मुख्य सड़क-मार्गों के सहारे-सहारे और अधिक नगरीय विकास होता है। नयी-नयी सड़कें बनने लगती हैं। समीपवर्ती ग्रामीण प्रदेश के लोग रोजगार की खोज में आने लगते हैं। इस प्रकार नगर के प्रत्येक कार्य का विकास अलग-अलग रूप में होने लगता है।

(5) प्रौढावस्था – इस अवस्था में न केवल व्यापार, उद्योग, परिवहन, सेवा-संस्थानों आदि का ही विकास होता है, बल्कि विभिन्न वर्गों की सामाजिक बस्तियों को भी अलगाव हो जाता है। इस प्रकार रिहायशी क्षेत्र उच्च, मध्यम एवं निम्न श्रेणियों में बँट जाते हैं एवं अपने स्तरों के अनुसार ही नागरिक रहना प्रारम्भ कर देते हैं।

(6) उत्तर-प्रौढावस्था – यह नगरीय विकास की चरम अवस्था है। नगरीय क्षेत्र सघन बसाव वाला हो जाता है। नगर के सुचारु रूप से संचालन के लिए परिवहन मार्गों, गन्दी बस्तियों, सेवा संस्थानों आदि का सुधार एवं नियोजन होना आरम्भ होता है।

(7) वृद्धावस्था – यह नगरों के ह्रास की अवस्था है। जब किसी नगर को जोड़ने वाली मुख्य सड़क उससे कुछ दूरी से होकर जाने लगती है या नगर अपने विकास की समस्याओं को सुलझाने में या उनका पुनरुद्धार करने में असमर्थ रहता है तो नगर का विध्वंस होना प्रारम्भ हो जाता है तथा नागरिक अन्यत्र स्थानों पर बसना आरम्भ कर देते हैं। तक्षशिला, नालन्दा, कन्नौज आदि प्राचीन नगर इसके मुख्य उदाहरण हैं।

प्रश्न 2
नगरीय अधिवासों के प्रकार तथा प्रतिरूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर

नगरीय अधिवासों के प्रकार
Types of Urban Settlements

कुल जनसंख्या को आधार मानकर विश्व-स्तर पर नगरीय अधिवासों को निम्नलिखित ग्यारह भागों में विभाजित किया गया है –
(1) केन्द्रीय पुरवे या सेवा केन्द्र (Central Hamlets or Service Centre) संयुक्त राज्य अमेरिका एवं कनाडा जैसे देशों में जहाँ एकल ग्रामीण आवासों का विकास हुआ, वहाँ चार-छः व्यापारिक संस्थानों वाले पुरवे विकसित हुए हैं। इन केन्द्रों में एक परचून की दुकान, ब्यूटीशॉप एवं नाई की दुकान, चर्च, स्कूल, छोटा अस्पताल, पोस्ट ऑफिस आदि पाये जाते हैं। यह एक सेवा केन्द्र की भाँति कार्य करता है।

(2) केन्द्रीय या नगरीय गाँव (Central or Urban Village) – ये पुरवे से बड़े सेवा केन्द्र होते हैं। इनमें 10 से 20 दुकानें एवं संस्थान होते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में 20 से 250, ब्रिटेन में 500 एवं : भारत में इनकी जनसंख्या 10,000 व्यक्तियों से भी अधिक होती है।

(3) छोटे कस्बे या (ग्राम-नगर ) ग्रागर केन्द्र (Small Towns or Rural-Urban Centres) – गालपिन (1915) ने ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियों के बीच वाले अधिवासों को ‘ग्रागर केन्द्र’ का नाम दिया है। ये वास्तव में बड़े एवं प्रभावशाली सेवा केन्द्र होते हैं। यहाँ पर बड़े बैंक, स्टोर, कृषि विकास संस्थाएँ, बस अड्डा आदि विभिन्न सुविधाएँ होती हैं। भारत में जिन बस्तियों को अभी तक कस्बे का नामकरण नहीं दिया गया है, वे इसी प्रकार के सेवा केन्द्र हैं। यहाँ इनकी जनसंख्या 1,000 से 30,000 व्यक्तियों के मध्य पायी जाती है।

(4) छोटे नगर (Small Towns) – अधिकांश देशों में इन छोटे नगरों की जनसंख्या 5,000 से 50,000 व्यक्ति तक मानी जाती है। सामान्यतया 5,000 से कम; 5,000 से 10,000; 10,000 से 20,000 तथा 20,000 से 50,000 तक के मध्य जनसंख्या रखने वाले अधिवासों को छोटा नगर ही माना गया है। भारत में 5,000 जनसंख्या रखने वाली बस्ती को नगरीय बस्ती का नाम दिया गया है।

(5) मध्यम आकार के नगर (Middle Towns) – विश्व के अधिकांश देशों में 20,000 से 50,000 एवं 50,000 से 1,00,000 तक की जनसंख्या रखने वाले अधिवासों को इस श्रेणी में रखा जाता है। भारत में भी द्वितीय श्रेणी के नगरों की जनसंख्या 50,000 से 1,00,000 व्यक्तियों के मध्य मानी गयी है।

(6) बड़े नगर (Large Cities) – एक लाख से अधिक जनसंख्या रखने वाले नगरों को इस श्रेणी में रखा जा सकता है।
(7) महानगर (Metropolis) – अधिकांशत: पाँच लाख से दस लाख जनसंख्या वाले नगरों को महानगर के नाम से पुकारा जाता है।
(8) दसलाखी महानगर (Milion City) – दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या रखने वाले बड़े नगरों को दसलाखी महानगर कहते हैं। ये नगर आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों में दूसरे बड़े महानगरों से अपना सम्बन्ध विच्छेद कर लेते हैं; जैसे-भारत में दिल्ली एवं मुम्बई महानगर।

(9) सन्नगर (Conurbation) – जब एक क्रम तथा एक सूत्र में अवस्थित एक या अधिक केन्द्रीय नगर अन्य छोटे समीपस्थ नगरों के साथ पारस्परिक रूप से कार्यात्मक एवं संरचनात्मक रूप से सम्बद्ध होते हैं तो ऐसी वृहद् महानगरीय श्रृंखला क्रम को ‘नगर संलयन या सन्नगर’ कहते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली महानगर से सहारनपुर नगर को जाने वाले सड़क-मार्ग पर प्रति 10 से 15 किमी के अन्तराल से छोटे-छोटे कस्बों का विकास हुआ है। दिल्ली, शाहदरा, लोनी व गाजियाबाद सन्नगर के उदाहरण हैं। इसी प्रकार कानपुर-मगखारा-उन्नाव नगर संलयन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

(10) मेगालोपोलिस (Megalopolis) – सन्नगरों से बड़ा मेगालोपोलिस होता है। उदाहरण के लिए, उत्तरी-पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका में बोस्टन से लेकर वाशिंगटन तक 600 किमी से अधिक लम्बाई में बसा क्षेत्र एक वृहद् महानगरीय शृंखला है।।

(11) एकुमेनोपोलिस (Ecumenopolis) – कई सौ किलोमीटर तक फैली मानवीय बस्तियों (नगरों) की श्रृंखलाबद्धता को एकुमेनोपोलिस कहा जाता है। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान से लेकर सम्पूर्ण उत्तर भारत के क्रमबद्ध मानव अधिवास 5,000 वर्ष बाद ऐसे क्रमबद्ध वृहद् नगरीय समाज का रूप धारण कर सकते हैं।
वास्तव में सन्नगर, मेगालोपोलिस एवं एकुमेनोपोलिस श्रेणियाँ नगरीय अधिवासों की क्रमबद्धता पर प्रकाश डालती हैं।

नगरीय अधिवासों के प्रतिरूप
Pattern of Urban Settlements

नगरीय अधिवासों के मुख्य रूप से निम्नलिखित नौ प्रतिरूप पाये जाते हैं –
(1) चेकरबोर्ड प्रतिरूप (Checker-board Pattern) – इस प्रकार के नगरों में सड़कें एक-दूसरे से समकोण पर मिलती हैं और परस्पर समानान्तर होती हैं। यह प्रतिरूप आयताकार होता है। इसे ‘ग्रिड प्रतिरूप’ भी कहते हैं। वर्तमान परिवहन युग में मोटर मार्गों के लिए यह एक उत्तम प्रणाली है। भारतवर्ष में बंगलुरु, नागपुर, इन्दौर, भोपाल, अमृतसर, जयपुर, चण्डीगढ़ आदि नगरों में यह पद्धति पायी जाती है।

(2) अरीय प्रतिरूप (Radial Pattern) – परिवहन साधनों के केन्द्र पर बसे नगर केन्द्र के चारों ओर निकले मार्गों और सड़कों के किनारे बसते जाते हैं। ऐसे नगर अरीय रूप धारण कर लेते हैं। इसका विकसित रूप मकड़ी के जाल की भाँति लगता है। लन्दन, बर्लिन, पेरिस, दिल्ली आदि नगरों का प्रतिरूप, ऐसा ही है।

(3) तारा प्रतिरूप (Star Pattern) – जब अरीय प्रतिरूप वाले नगर का विकास बाह्य मार्गों पर दूर तकै विस्तृत फैलाव के साथ-साथ होता जाता है, तब नगर का विन्यास तारे जैसा हो जाता है।

(4) वृत्ताकार प्रतिरूप (Circular Pattern) – प्राचीन काल में नगरों का विकास संकेन्द्रीय प्रतिरूप में विकसित होता था। इनके चारों ओर दीवारें, प्राचीरें, गहरी खाइयाँ, किले आदि विकसित होते थे तथा उनका प्रतिरूप वृत्ताकार हो जाया करता था। इनके मध्य में राजमहल या व्यापारिक क्षेत्र होते थे। सड़कें वृत्ताकार होती थीं। आगरा, जयपुर, बीजापुर या पुरानी दिल्ली आदि नगर इसी प्रतिरूप द्वारा निर्मित हुए हैं।

(5) रेखीय प्रतिरूप (Linear Pattern) – कभी-कभी किसी सड़क, रेलमार्ग, नदी या नहर आदि के किनारे-किनारे लगातार नगर का फैलाव होता जाता है, जिसे रेखीय प्रतिरूप कहते हैं।

(6) मिश्रित प्रतिरूप (Mixed Pattern) – विश्व में अधिकांश नगर मिश्रित प्रतिरूपों में विकसित हुए हैं। इनमें कहीं पर वृत्ताकार, कहीं रेखीय, कहीं ग्रिड प्रतिरूप आदि मिश्रित होते हैं।

(7) पंखा प्रतिरूप (Fan Pattern) – जब नगर किसी समुद्री-तट पर या किसी बड़ी नदी के किनारे लम्बे रूप में विकसित हो तो उससे कई सड़कें पीछे की ओर विकसित हो जाती हैं। इन पीछे के मार्गों के सहारे फैली बस्ती पंखे के रूप में विकसित हो जाती है। चेन्नई इसका महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।

(8) अनाकार प्रतिरूप (Amorphous Pattern) – कई नगरों का प्रतिरूप आकृतिहीन लगता है। कई छोटे नगरों का विकास इसी प्रकार होता है। उत्तर प्रदेश राज्य में लार एवं उत्तराखण्ड में रुद्रपुर आदि छोटे नगर इसके उत्तम उदाहरण हैं।

(9) अन्य प्रतिरूप (Other Patterns) – अधिकांश छोटे नगरों की आकृति अंग्रेजी के अक्षर 7 आदि प्रतिरूपों में होती है। झीलों व नदी-मोड़ों पर बसे नगरों का प्रतिरूप अर्द्ध-चन्द्राकार हो जाता है।

प्रश्न 3
नगरों का कार्यों के अनुसार वर्गीकरण कीजिए। नगरों में विभिन्न सुविधाओं एवं समस्याओं का आकलन कीजिए तथा इनका समाधान भी बताइए।
या
नगरीकरण से उत्पन्न समस्याओं के हल के लिए उपायों की विवेचना कीजिए। [2007, 10, 12]
या
कार्यों के आधार पर नगरों को वर्गीकृत कीजिए तथा भारत के सन्दर्भ में नगरीकरण की समस्याओं की विवेचना कीजिए। [2016]
या
नगरीय अधिवास के गुण-दोषों की विवेचना कीजिए। नगरीय अधिवासों के कार्यों का सोदाहरण वर्णन कीजिए। [2010, 16]
या
टिप्पणी लिखिए-नगरीकरण की समस्याएँ। [2010]
या
नगरीकरण की प्रमुख समस्याओं का विवरण दीजिए तथा उनके समाधान हेतु उपायों को सुझाइए। [2012]
या
कार्यों के आधार पर नगरीय अधिवास को वर्गीकृत कीजिए। [2012]
उत्तर

नगरों का कार्यिक वर्गीकरण Functional Classification of Towns
वर्तमान समय में अधिकांश नगरों में अनेक कार्य किये जाते हैं। इनमें से कुछ किसी एक कार्य में ही विशेषीकृत भी हो गये हैं। इन नगरों में उद्योग, व्यापार, परिवहन, बन्दरगाह, प्रशासन, उत्खनन, सुरक्षा, शिक्षा, धार्मिक, मनोरंजन, स्वास्थ्य आदि विशिष्ट कार्य भी मिलते हैं, परन्तु नगरों के कार्यों में विशिष्टीकरण के साथ-साथ अन्य कार्य भी मिलते हैं। विशिष्ट कार्य एवं व्यवसाय की प्रमुखता के आधार पर नगरों को अग्रलिखित आठ वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –

(1) प्रशासनिक नगर (Administrative Towns) – देश, राज्य या बड़े प्रदेश की राजधानियों का प्रमुख कार्य प्रशासन होता है। ऐसे नगरों को प्रशासनिक नगर कहा जाता है। इनमें प्रशासनिक कार्यालय व विभिन्न इमारतों आदि की भरमार रहती है। भारत में नई दिल्ली पूर्णतया प्रशासनिक नगर है। इसी प्रकार वाशिंगटन (डी० सी०), इस्लामाबाद, ब्रासीलिया, बर्लिन, कैनबरा, बीजिंग, मास्को आदि प्रशासनिक नगर हैं।

(2) औद्योगिक नगर (Industrial Towns) – जिन नगरों में उद्योग-धन्धों की प्रधानता होती है. उन्हें औद्योगिक नगर कहते हैं। कच्चा माल, ईंधन और ऊर्जा, श्रम, व्यापार, बाजार, यातायात, पूँजी, बैंकिंग, जलापूर्ति, आयात-निर्यात आदि की सुविधाओं के केन्द्रीकरण होने से ऐसे नगरों में उद्योगों की प्रधानता हो जाती है। ग्लासगो, बर्मिंघम, मानचेस्टर, पिट्सबर्ग, मैंगनीटोगोर्क, कानपुर, मुम्बई, अहमदाबाद आदि औद्योगिक नगर हैं।

(3) व्यापारिक नगर (Commercial Towns) – इन नगरों में व्यापार प्रमुख कार्य होता है। न्यूयॉर्क, लन्दन, हांगकांग, सिंगापुर, कोलकाता आदि व्यापारिक नगर हैं। इस प्रकार के नगर यातायात एवं परिवहन के केन्द्र भी होते हैं।

(4) परिवहन नगर (Transport Towns) – वें नगरे जो परिवहन कार्यों की प्रमुखता रखते हैं, उन्हें परिवहन नगर कहते हैं। शिकागो, पर्थ, वेनिस, मुगलसराय आदि ऐसे ही नगरों के उदाहरण हैं।

(5) खनन नगर (Mining Towns) – खनिज पदार्थ वाले क्षेत्रों में ऐसे नगरों का विकास होता है। झारखण्ड में कोडरमा और गिरिडीह; कर्नाटक में कोलार खनन नगर हैं। इसी प्रकार विश्व के अन्य भागों में जोहांसबर्ग (दक्षिणी अफ्रीका), कालगूर्ती-कुलगार्डी (ऑस्ट्रेलिया), स्क्राण्टन (सं० रा० अ०) तथा सडबरी (कनाडा) प्रमुख खनन केन्द्र हैं। खनिज भण्डार समाप्त हो जाने पर ऐसे नगर उजड़ जाते हैं। इन्हें प्रेत नगर (Ghost Towns) भी कहते हैं।

(6) मण्डी या बाजार नगर (Market Towns) – कृषि या पशुचारण प्रदेशों में विभिन्न वस्तुओं के संग्रहण और वितरण केन्द्रों के रूप में बाजारों या मण्डियों का विकास होता है। ब्रिटेन का नार्विक, उत्तर प्रदेश का हापुड़, बिहार का बिहार-शरीफ, घाना का कुमासी ऐसे ही नगर हैं। ऐसी मण्डियाँ समय के स्मथ-साथ व्यापारिक नगरों का रूप ले लेती हैं।

(7) सुरक्षा केन्द्र (Defence Towns) – सैनिक छावनियाँ, किले वाले अथवा नौ-सेना अथवा वायु सेना मुख्यालय वाले केन्द्र सुरक्षा नगर कहलाते हैं। ये प्रमुख नगरों से अलग क्षेत्र में उदित होते हैं। पाकिस्तान में रावलपिण्डी, भारत में काम्पटी एवं शिलांग ऐसे ही नगर हैं।

(8) सांस्कृतिक-धार्मिक-शैक्षिक नगर (Cultural-Religious-Educational Towns) – इन नगरों में संस्कृति, धर्म एवं शिक्षा का बोलबाला होता है अर्थात् इनमें इन्हीं कार्यों की प्रधानता होती है। वाराणसी इसका सर्वोत्तम नमूना है। इसे भारत की सांस्कृतिक राजधानी की संज्ञा दी जाती है। ब्रिटेन का ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज, जर्मनी का हाइडेलबर्ग, संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रिंस्टन, स्वीडन का लुण्ड,नीदरलैण्ड का लीडेन विश्व-प्रसिद्ध शैक्षणिक-सांस्कृतिक नगर हैं। इसी प्रकार रोम, येरुसलम, मक्का, हरिद्वार आदि धार्मिक नगर हैं।

नगरों की विशेषताएँ या गुण
Characteristics or Merits of Towns

नगरों में मानवोपयोगी अनेक सुविधाएँ पायी जाती हैं जिनके आकर्षण से समीपवर्ती प्रदेश के लोग यहाँ रहने के लिए प्रवास कर जाते हैं अथवा अपनी सेवाओं एवं आवश्यकताओं को पूर्ण कर अपने घरों को वापस चले जाते हैं। ये सुविधाएँ (गुण) निम्नलिखित हैं –

  1. नगरों में आजीविका के अनेक साधन होते हैं जिससे वहाँ पर रोजगार मिलने में सुविधा रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर जनसंख्या का अधिक भार होने के कारण बहुत-से लोगों को बेकारी का सामना करना पड़ता है जिससे ये लोग रोजगार की तलाश में नगरों को पदार्पण कर जाते हैं।
  2. नगरों में परिवहन के अनेक साधनों-घोड़ागाड़ी, मोटरगाड़ी, नगर बस-सेवा, टैक्सी, रेलगाड़ी आदि की सुविधा मिलती है।
  3. नगरों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, मनोरंजन, विद्युत तथा जल-आपूर्ति की सुविधाएँ होती हैं।
  4. नगरों में स्कूल, कॉलेज, शिक्षण-प्रशिक्षण, विश्वविद्यालयी-शिक्षा की सुविधाएँ अधिक मिलती हैं।
  5. सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस प्रबन्ध की व्यवस्था नगरों में उपलब्ध रहती है।
  6. नगरों में संचार के साधनों; जैसे—डाक, तारघर, टेलीफोन तथा समाचार-पत्रों की सुलभता पायी जाती है।
  7. नगरीय लोगों के रहन-सहन का स्तर उच्च होता है। अत: इस स्तर को बनाये रखने के लिए एवं अपने कार्यों की देखभाल के लिए अनेक व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है, जिस कारण बहुत-से लोग ग्रामों को छोड़कर नगरों में बस जाते हैं।
  8. नागरिक प्रशासन नगर में जल, सीवर, विद्युत, सफाई, चिकित्सा आदि अनेक कार्यों का प्रबन्ध करता है। यह व्यवस्था ग्रामों में नहीं पायी जाती है।
  9. नगरों में विभिन्न सामाजिक संस्थाएँ, धार्मिक स्थान मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारे तथा सांस्कृतिक संस्थाएँ–संगीतालय, सिनेमाघर आदि मनोरंजन के साधनों का आकर्षण बना रहता है।
  10. ग्रामों में जो लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं, वे अपने लिए नौकरी की खोज में नगरों की ओर पलायन कर जाते हैं।

नगरों की समस्याएँ या दोष
Problems or Demerits of Towns

नगरों में सुविधाओं के साथ-साथ कुछ समस्याएँ भी होती हैं जिनका समाधान खोजना अत्यावश्यक है। ये समस्याएँ निम्नलिखित हैं –

  1. जनसंख्यां में अतिशय वृद्धि के कारण नगरों के आकार में भी वृद्धि हो जाती है जिससे नगरों में जनसंख्या की सघनता की समस्या हो जाती है। खाली भूमि महँगी हो जाती है। नगर के निवासी छोटे-छोटे मकानों में रहने को विवश हो जाते हैं। यातायात में कठिनाई उत्पन्न हो जाती है। यहाँ पर प्रात:काल तथा सायंकाल जनसंख्या की अत्यधिक भीड़ देखने को मिलती है।
  2. नगरों में प्राथमिक आवश्यकताओं-दूध, अनाज, साग-सब्जी, फल आदि-की पूर्ति समीपवर्ती देहात क्षेत्रों से की जाती है। कभी-कभी उत्पादन की कमी से या अन्य कमी के कारण इनके मूल्य ऊँचे हो जाते हैं। धनी लोग तो अधिक मूल्य देकर इन वस्तुओं को खरीद लेते हैं, जब कि साधारण आय के लोग देखते ही रह जाते हैं।
  3. नगरीय क्षेत्रों में खाद्य-पदार्थों; जैसे-आटे, घी, तेल, दूध आदि में मिलावटे बहुत अधिक होती है, जिससे लोगों को भोज्य-पदार्थ भी शुद्ध नहीं मिल पाते।
  4. नगरीय केन्द्रों के मकानों का किराया बहुत ऊँचा होता है। कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, अहमदाबाद, कानपुर आदि नगरों में काफी व्यक्ति बिना मकान, रात्रि में नगर की सड़कों की पटरियों पर, पार्क, गलियों या गन्दी बस्तियों में ही सो जाते हैं। इससे वर्ग-संघर्ष की भावना को बल मिलता है।
  5. भारत के कुछ नगरों में जनसंख्या की सघनता बहुत अधिक है जितनी कि विश्व के वृहत्तम् नगरों में भी नहीं है। मुम्बई महानगर में 20,000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी निवास करते हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क नगर में 10,000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी ही निवास करते हैं।
  6. न्यूयॉर्क आदि नगरों में इतनी जनसंख्या की सघनता औसत रूप से 15 या 20 मंजिल के मकानों में रहकर है, परन्तु भारत में उससे अधिक सघनता केवल एक या दो मंजिलों के मकानों में रहते हुए है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि नगरों में लोग बहुत तंग जगह में निवास करते हैं।
  7. कभी-कभी बड़े नगरों में पेयजल तथा विद्युत-आपूर्ति की कमी से बड़ी असुविधा हो जाती है।
  8. नगरों के आकार में वृद्धि होने पर उनके प्रबन्ध एवं प्रशासन की समस्या आती है।
  9. नगरों में समीपवर्ती ग्रामों में जो लोग आकर बसते हैं, वे अधिकतर पुरुष होते हैं। इस कारण नगरों की जनसंख्या में पुरुष-महिला अनुपात का सन्तुलन बिगड़ जाता है।
  10. बड़े नगरों के लिए पुलिस आदि की व्यवस्था अधिक करनी पड़ती है, जिससे कर आदि अधिक लगते हैं और महँगाई बढ़ जाती है।
  11. बड़े-बड़े नगर देश की सम्पत्ति होते हैं; अत: युद्ध-काल में बड़े नगरों को बम वर्षा का भय बना रहता है। द्वितीय महायुद्ध में जापान के केवल दो नगरों-हिरोशिमा एवं नागासाकी–पर अणुबम के प्रहार से जापान को हार मान लेनी पड़ी थी। इसीलिए बड़े नगरों को सुरक्षा की भी एक समस्या रहती
  12. बड़े नगरों में सामाजिक-आर्थिक वर्गों की विषमता की समस्या बहुत गम्भीर हो जाती है। श्रमिक आन्दोलन, हड़ताले आदि बढ़ जाती हैं। धनी एवं निर्धनों में वर्गभेद उत्पन्न हो जाते हैं।

नगरों की समस्याओं का समाधान Remedies of Urban Problems
नगरों के दोषों को दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि नगरों का पुनर्निर्माण किया जाए और मास्टर प्लान योजनाओं द्वारा इन दोषों को दूर किया जाये तथा औद्योगिक क्षेत्रों का भी सुनियोजित विकास किया जाए। योजनाओं द्वारा नगरों के बाह्य विस्तृत भागों में, चौड़ी सड़कों के सहारे-सहारे कम मंजिलों की बस्तियाँ बसाई जानी चाहिए। मिलों एवं कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए मिलों से दूर एवं नगरों के बाह्य भागों में साफ-सुथरे, स्वास्थ्यवर्द्धक मौहल्ले या वार्ड बसाये जाएँ तथा उनके रिहायशी क्षेत्रों से दैनिक काम करने वाले स्थानों तक परिवहन के साधनों-मोटर, बसों या रेलगाड़ियों का प्रबन्ध किया जाना चाहिए। नगर-निर्माण की योजनाएँ बनाने के लिए भूगोलवेत्ताओं का सहयोग अति आवश्यक है। नगर में चौड़ी सड़कें, विद्युत, जल-आपूर्ति, चिकित्सा एवं शिक्षा और रोजगार की योजनाएँ बनाकर उनको तत्परता से कार्यान्वित किया जाना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
नगरीकरण किसे कहते हैं? [2010, 14, 16]
या
नगरीकरण को परिभाषित कीजिए। [2008]
उत्तर
नगरीकरण को अंग्रेजी में Urbanization कहा जाता है। इसका अर्थ है-व्यक्ति या जनसंख्या को नगरीय बना देना अर्थात् ऐसी जनसंख्या को, जो ग्रामीण या अर्द्ध-ग्रामीण है, नगरीय जनसंख्या के रूप में परिवर्तित करना नगरीकरण कहलाता है। वास्तव में यदि मनुष्यों का चिन्तन, आचार-विचार तथा सामाजिक मूल्य नगरीय है तो वे ग्रामों में रहते हुए भी नगरीकृत हैं, परन्तु यहाँ पर हमारा उद्देश्य समाज के उस वर्ग से है जो प्रायः अकृषि कार्यों में लगा हुआ है; अतः नगरीकरण . सामाजिक जीवन के सम्पूर्ण क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन की ओर संकेत करता है। इसलिए बर्गेल (E. E. Bergel) ने कहा है कि ग्रामों के नगरीय क्षेत्र में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को नगरीकरण कहते हैं। अत: नगरीकरण एक प्रक्रिया है जो वर्तमान समय की महत्त्वपूर्ण घटना मानी जा सकती है। यह वास्तव में एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नगरों की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 2
नगरीकरण की समस्या के निराकरण के किन्हीं दो उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
नगरीय समस्याओं के निराकरण हेतु निम्नलिखित दो उपाय किये जा सकते हैं –

  1. नगरों की सीमाओं का निश्चित परिसीमन किया जाए, जिससे उनमें असामान्य रूप से वृद्धि न हो सके और कृषि-भूमि का भी अतिक्रमण रुक सके।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि की जाए, जिससे नगरों की ओर जनसंख्या के पलायन को रोका जा सके।

प्रश्न 3
कस्बों तथा नगर में क्या अन्तर है? [2014]
उत्तर
कस्बा (Town) कस्बा नगरीय गाँव की अपेक्षा एक बड़ी इकाई है। इसमें मकान सटे हुए, सड़कें तंग तथा गलियाँ सँकरी होती हैं। ये कस्बे सड़क मार्गों के संगम या रेलपथ पर स्थित होते हैं। इसके दो क्षेत्र होते हैं- आवासीय एवं व्यावसायिक। नगरों से इसका पृथक्करण जनसंख्या के आधार : पर किया जाता है। सामान्य रूप से इनकी जनसंख्या 5,000 से 10,000 व्यक्ति तक मानी गई है।

नगर (City) नगर उस क्षेत्र को कहते हैं, जहाँ विशाल जनसमूह निवास करता है, जो समीपवर्ती क्षेत्र से अतिरिक्त उत्पादक वस्तुएँ एकत्रित करता है तथा आर्थिक, व्यापारिक, धार्मिक तथा राजनीतिक क्रिया-कलापों का केन्द्र होता है। 50 हजार से 10 लाख तक की जनसंख्या रखने वाली बस्ती को प्रायः नगर कहा जाता है। नगर अपने समीपवर्ती क्षेत्र से आर्थिक शक्ति ग्रहण कर तेजी से विकसित होते हैं। नगर वस्तुतः एक विशिष्ट प्रकार का सामाजिक संगठन होता है। नगरों के विकास का आधार उद्योग-धन्धे तथा व्यापारिक गतिविधियाँ होती हैं।

प्रश्न 4
नगरीय अधिवासों के दो प्रकारों का वर्णन कीजिए। [2013, 14, 16]
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के अन्तर्गत नगरीय अधिवासों के प्रकार’ शीर्षक देखें।

प्रश्न 5
नगरीकरण से उत्पन्न किन्हीं चार समस्याओं का वर्णन कीजिए। [2010, 12, 13, 14]
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 के अन्तर्गत नगरों की समस्याएँ या दोष’ शीर्षक देखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
जनसंख्या एवं नागरिक कार्यों के आधार पर नगरीय बस्तियों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर
जनसंख्या एवं नागरिक कार्यों के आधार पर नगरीय बस्तियों को चार भागों में बाँटा जा सकता है-

  1. पुरवा या टोला
  2. नगरीय या बाजार गाँव
  3. कस्बा और
  4. नगर।

प्रश्न 2
खनन नगर से क्या अभिप्राय है?
उत्तर
खनिज पदार्थ वाले क्षेत्रों में ऐसे नगरों का विकास होता है। झारखण्ड के कोडरमा, गिरिडीह और कर्नाटक का कोलार खनन नगर हैं।

प्रश्न 3
नगरीकरण से उत्पन्न किसी एक समस्या की विवेचना कीजिए। [2010]
उत्तर
नगरीकरण होने से जनसंख्या की अतिशय वृद्धि होती है जिससे नगरों के आकार में वृद्धि हो जाती है तथा जनसंख्या की सघनता की समस्या हो जाती है। भूमि तथा भवनों के किराये बढ़ जाते हैं तथा भीड़ के कारण यातायात में कठिनाई उत्पन्न हो जाती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1
मेगालोपोलिस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
(क) टेलर ने
(ख) जीन गोटमैन ने
(ग) डेविस ने
(घ) पेन्क ने
उत्तर
(ख) जीन गोटमैन ने।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 Urban Settlements

प्रश्न 2
लिपिसे-कौन औद्योगिक नगर नहीं है ?
(क) र
(ख) सिन्द्री
(ग) रंग
(घ) पुणे
उत्तर
(घ) पुसी।

प्रश्न 3
सन्नगर नहीं हैं –
(क) पुणे
(ख) हावड़ा
(ग) गाजियाबाद
(घ) नैनी
उत्तर
(क) पुणे।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 Urban Settlements (नगरीय अधिवास बस्तियाँ) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 Urban Settlements (नगरीय अधिवास बस्तियाँ), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name शब्दों में सूक्ष्म अन्तर
Number of Questions 63
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर

शब्दों में सूक्ष्म अन्तर

नवीनतम पाठ्यक्रम में शब्द-रचना के अन्तर्गत शब्दों के सूक्ष्म अन्तर को सम्मिलित किया गया है, जिसके लिए विभिन्न प्रकार के शब्द-युग्मों का अध्ययन किया जाना चाहिए। इसके लिए 2 अंक निर्धारित हैं। शब्द-युग्म से अभिप्राय है-शब्दों का जोड़ा। विभिन्न प्रकार के शब्दों के जोड़े बनाकर शब्द-रचना की जाती है।

शब्द-युग्म में दो स्वतन्त्र अर्थ वाले शब्द होते हैं, जो अलग-अलग रहने पर तो पृथक्-पृथक् अर्थ देते हैं, किन्तु जब उन शब्दों का युग्म बनाकर एक शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है तो वे शब्द अपने अर्थों से भिन्न अर्थ देने लगते हैं; उदाहरणार्थ-‘दिन’ और ‘रात’ दो पृथक्-पृथक् अर्थ रखने वाले शब्द हैं, किन्तु जब इन शब्दों का युग्म बनाकर एक शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है, तो ये दोनों शब्द अपने-अपने अर्थ को त्यागकर एक नवीन अर्थ का बोध कराने लगते हैं; जैसे—

  1. लोग दिन में जागते हैं और रात को सोते हैं।
  2. दिनेश ने रात-दिन कड़ी मेहनत की है।

यहाँ प्रथम वाक्य में ‘रात’ और ‘दिन’ अपने वास्तविक अर्थ को व्यक्त कर रहे हैं, किन्तु द्वितीय वाक्य में जब वे युग्म के रूप में प्रयुक्त हुए हैं तो वे अपने मूल अर्थ को छोड़कर एक नवीन अर्थ को व्यक्त कर रहे हैं। यहाँ ‘रात-दिन’ शब्द ‘निरन्तरता’ को व्यक्त कर रहा है। इस प्रकार शब्द-युग्म के रूप में एक नवीन अर्थबोधक शब्द की रचना हो गयी है।
शब्द-युग्मों की रचना-शब्द-युग्मों की रचना निम्नलिखित सात प्रकारों से की जाती है-

  1. एक ही शब्द की पुनरुक्ति द्वारा,
  2. सजातीय या समानार्थक शब्दों के द्वारा,
  3. विलोम शब्दों के द्वारा,
  4. सार्थक और निरर्थक शब्दों के द्वारा,
  5. निरर्थक शब्दों के द्वारा,
  6. परसर्गों के साथ शब्द की पुनरावृत्ति द्वारा,
  7. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्दों के द्वारा।। उपर्युक्त विधियों द्वारा निर्मित शब्द-युग्म जिन नवीन अर्थों का बोध कराते हैं, उन्हें वाक्य प्रयोग द्वारा भली प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है।

(1) एक ही शब्द की पुनरुक्ति द्वारा
पुनरुक्ति = पुनः + उक्ति; अर्थात् एक ही शब्द को फिर से कहना उस शब्द की पुनरुक्ति कहलाता है। पुनरुक्ति भी शब्द-युग्म बनाने का प्रमुख तत्त्व है। इसमें एक ही शब्द को प्राय: एक बार दोहराकर शब्द-युग्म बनाया जाता है, किन्तु जब किसी ध्वनि के द्वारा किसी क्रिया को बताया जाता है, तब ध्वनिवाचक शब्द की एक बार से अधिक आवृत्ति की जाती है। साहित्य में इसे ध्वन्यर्थ अलंकार के नाम से जाना जाता है। एक और अनेक आवृत्ति द्वारा शब्द-युग्म बनाने की प्रक्रिया को निम्नवत् समझा जा सकता है–

शब्द-युग्म                        वाक्य-प्रयोग।
1. अंग-अंग – माँ ने अपने बेटे का अंग-अंग चूम डाला।
2. अपना-अपना – आज सभी अपना-अपना राग अलापने में लगे हैं।
3. कोना-कोना – कस्तूरी की सुगन्ध से वन का कोना-कोना महक उठा।
4. खाली-खाली – बच्चों के बिना घर खाली-खाली लगता है।
5. गाँव-गाँव – आज गाँव-गाँव में बिजली पहुँच गयी है।
6. गाते-गाते – गाते-गाते रात कट गयी।
7. घर-घर – घर-घर में सास-बहू की एक ही कहानी है।
8. छिपते-छिपते – सूरज के छिपते-छिपते मैं घर पहुँच गया।
9. तार-तार – उसके तन के कपड़े तार-तार हो गये।
10. पानी-पानी – अपनी गलती पर वह शर्म से पानी-पानी हो गयी।
11. बूंद-बूंद – कल लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाएँगे।
12. मचल मचल – कश्मीर के सौन्दर्य परे मन मचल-मचल जाता है।
13. रटते-रटते – तुम्हें एक ही बात रटते-रटते दो घण्टे हो गये।
14. रोम-रोम – श्रीराम को देखकर हनुमान जी का रोम-रोम पुलकित हो गया।
15. लम्बी-लम्बी – ईदगाह पर नमाजियों की लम्बी-लम्बी कतारें लगती हैं।
16. सहते-सहते – पति के अत्याचार सहते-सहते अन्तत: निर्मला टूट ही गयी।
17. साफ-साफ – मैं साफ-साफ कहने में विश्वास रखता हूँ।
18. हँसते-हँसते – दु:खों का हँसते-हँसते ही सामना करना चाहिए।
19. छम-छम-छम – उसके पैरों के घुघरू छम-छम-छम कर बज उठे।
20. झम-झमझम – देखते-ही-देखते झम-झम-झम वर्षा होने लगी।
21. गुन-गुन-गुन – गुन-गुन-गुन भौंरे गाते हैं।

(2) सजातीय या समानार्थक शब्दों के द्वारा
सजातीय अथवा समानार्थक लगने वाले दो शब्दों को मिलाकर भी शब्द-युग्म की रचना की जाती है। इसमें दोनों ही शब्द मिलते-जुलते अर्थ देने वाले होते हैं, किन्तु दोनों का अर्थ एक नहीं होता; जैसे-
शब्द-युग्म                          वाक्य-प्रयोग
1. ईर्ष्या-द्वेष – मन में ईष्र्या-द्वेष रखकर कोई सुखी नहीं रह सकता है।
2. उद्योग-धन्धे – सरकार को उद्योग-धन्धों पर विशेष बल देना चाहिए।
3. ऋद्धि-सिद्धि – भगवान् की भक्ति ही सभी ऋद्धि-सिद्धि देने वाली होती है।
4. खेल-तमाशा – अब खेल-तमाशों का समय नहीं रहा है।
5. चमक-दमक – व्यक्ति को बाहरी चमक-दमक से बचना चाहिए।
6. जादू-टोना – जादू-टोना अब गुजरे हुए कल की बातें हैं।
7. झाड़-पोंछ – किसी भी सामान की झाड़-पोंछ आवश्यक है।
8. तोड़-फोड़ – उपद्रवियों ने पूरे शहर में अत्यधिक तोड़-फोड़ की।
9. दीन-हीन – दीन-हीन को सताना अच्छी बात नहीं है।
10. धन-दौलत – धन-दौलत से सुख नहीं खरीदा जा सकता।
11. फल-फूल – उपवास में महाराज जी केवल फल-फूल ही खाते हैं।
12. मार-पीट – बच्चों को मार-पीट कर नहीं सुधारा जा सकता।
13. रीति-रिवाज – रीति-रिवाज हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं।
14. विधि-विधान – सभी कार्य विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न हुए।
15. साधु-सन्त – कबीर सदैव साधु-सन्तों की संगत में रहते थे।
16. हँसी-खुशी – सभी के दिन हँसी-खुशी से बीते।

(3) विलोम शब्दों के द्वारा
दो विलोम शब्दों को मिलाकर भी शब्द-युग्म की रचना की जाती है। इस प्रकार के शब्द-युग्मों से युक्त वाक्य प्रायः सूक्तिपरक और नैतिकता से ओत-प्रोत होते हैं; जैसे-
शब्द-युग्म                     वाक्य-प्रयोग
1. आगे-पीछे – लोग नेताओं के आगे-पीछे घूमते-फिरते हैं।
2. आना-जाना – उनका बाहर आना-जाना लगा ही रहता है।
3. उचित-अनुचित – मनुष्य को उचित-अनुचित का ध्यान रखना ही चाहिए।
4. गुण-दोष – मित्रों के गुण-दोष की परख विपत्ति में ही होती है।
5. रात-दिन – रात-दिन पढ़ाई में जुटकर मैंने प्रथम श्रेणी पायी है।
6. धर्म-अधर्म – धर्म-अधर्म को सभी धर्मग्रन्थों ने एक समान रूप में परिभाषित किया है।
7. न्याय-अन्याय – व्यक्ति को प्रत्येक कार्य में न्याय-अन्याय का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।
8. मान-अपमान – सज्जन मान-अपमान को एक समान लेते हैं।
9. शुभ-अशुभ – कर्मशील व्यक्ति शुभ-अशुभ का विचार नहीं करते।
10. सवाल-जवाब – इन व्यर्थ के सवाल-जवाब का क्या औचित्य है ?
11. साधु-असाधु – किसी व्यक्ति के कार्य ही उसे साधु-असाधु की श्रेणी में रखते हैं।
12. सोते-जागते – उसे सोते-जागते कमाने की ही धुन सवार रहती है।
13. होनी-अनहोनी – होनी-अनहोनी दोनों ही नहीं टलतीं।
14. ज्ञान-अज्ञान – ज्ञान-अज्ञान को जानने वाला ही विद्वान् है।

(4) सार्थक और निरर्थक शब्दों के द्वारा
यद्यपि निरर्थक शब्दों को भाषा में शब्द ही नहीं माना जाता और इसी कारण उनका अध्ययन भी भाषा के अन्तर्गत नहीं किया जाता, तथापि इन निरर्थक शब्दों का भी भाषा में बड़ा महत्त्व है। सार्थक शब्दों के साथ मिलाकर जब इनसे शब्द-युग्म की रचना की जाती है तो ये सार्थक हो उठते हैं। यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि शब्द-युग्म द्वारा जब ये निरर्थक शब्द सार्थक हो उठते हैं, तब भी उनके अर्थ को सार्थक शब्द के अर्थ से पृथक् करके नहीं देखा जा सकता। इनकी सार्थकता सदैव अपने साथ प्रयुक्त होने वाले सार्थक शब्दों पर ही निर्भर करती है। इस प्रकार के शब्द-युग्मों में सार्थक शब्द पहले अथवा बाद में कहीं भी आ सकता है; जैसे-
शब्द-युग्म                            वाक्य-प्रयोग
1. आमने-सामने – जरा–सी बात पर दोनों भाई आमने-सामने आ गये।
2. आस-पास – हमारे आस-पास का वातावरण बड़ी सुहावना था।
3. उल्टा-पुल्टा – बच्चों ने जरा-सी देर में सब-कुछ उल्टा-पुल्टा कर दिया।
4. खाना-वाना – बहुत देर हो गयी है अब खाना-वाना खाना है या नहीं।
5. घर-वर – अब घर-वर चलोगे या नहीं।
6. चाय-शाय – अरे भई गौरव को चाय-शाय पिलायी या नहीं ?
7. चिट्ठी-विट्ठी – नीरज कोई चिट्ठी-विट्ठी नहीं लिखता।
8. ठीक-ठाक – घर पर सब ठीक-ठाक है।
9. देख-भाल – बच्चों की उचित देख-भाल एक पढ़ी-लिखी माँ ही कर सकती है।
10. बची-खुचा – मैंने बचा-खुचा सामान भिखारी को दे दिया।
11. भीड़-भाड़ – आजकल शहरों में सभी जगह भीड़-भाड़ है।
12. मिठाई-विठाई – बच्चों को ज्यादा मिठाई-विठाई नहीं खानी चाहिए।
13. चाकू-वाकू – मैंने कोई चाकू-वाकू नहीं देखा।
14. गुम-सुम – वह अकसर गुम-सुम रहता है।
15. तोल-ताल – सामान को जल्दी से तोल-ताल पर छुट्टी करो।।
16. मार-धाड़ – अब मार-धाड़ वाली फिल्में ही अधिक बनती हैं।
17. ठाट-बाट – दिनेश के ठाट-बाट देखते ही बनते हैं।
18. पीट-पाट – अब तुम यहाँ से तुरन्त चले जाओ नहीं तो कोई पीट-पाट देगा।

(5) निरर्थक शब्दों के द्वारा
साधारण बोलचाल की भाषा में दो निरर्थक शब्दों को मिलाकर उनसे शब्द-युग्म की रचना करके एक विशेष अर्थ की अभिव्यक्ति की जाती है; जैसे-
शब्द-युग्म                वाक्य-प्रयोग
1. अफरा-तफरी – अचानक मंत्री जी के आने की खबर सुनकर कार्यालय में अफरा-तफरी मच गयी।
2. इक्के-दुक्के – रात में इक्के-दुक्के लोग ही पार्क में घूमते हैं।
3. ऊल-जलूल – उसकी ऊल-जलूल बातों पर कौन ध्यान देता है?
4. चूं-चपड़ – जाओ अब अपना रास्ता देखो, ज्यादा चूं-चपड़ मत करो।
5. हेक्का-बक्का – भाई की मृत्यु का समाचार सुनकर वह हक्का-बक्का रह गया।
6. हट्टा-कट्टा – वैभव देखने में हट्टा-कट्टा लगता है।

(6) परसर्गों के साथ शब्द की पुनरावृत्ति द्वारा
पुनरावृत्ति द्वारा बने शब्द-युग्मों के मध्य परसर्ग लगाकर भी शब्द-युग्म की रचना की जाती है। इस प्रकार के शब्द-युग्म में परसर्ग के दोनों ओर संयोजक चिह्न लगाते हैं; जैसे-
शब्द-युग्म                       वाक्य-प्रयोग
1. अपनी-ही-अपनी – सब अपनी-ही-अपनी चलाते हैं, दूसरों की कोई नहीं सुनता।
2. आगे-ही-आगे – चोर पुलिस के आगे-ही-आगे दौड़ता हुआ गायब हो गया।
3. ऊपर-ही-ऊपर – झीलों में बर्फ ऊपर-ही-ऊपर जमती है।
4. और-ही-और – लक्ष्मी के जन्म से गिरधर की हालत और-ही-और होती चली गयी।
5. कभी-न-कभी – कभी-न-कभी तो उसके दिन भी फिरेंगे।
6. कहीं-न-कहीं – यह दवाई हूँढ़ने पर कहीं-न-कहीं मिल ही जाएगी।
7. कुछ-का-कुछ – डर के मारे वह कुछ-का-कुछ कहने लगा।
8. ढेर-का-ढेर – खलिहान में गेहूं का ढेर-का-ढेर जलकर राख हो गया।
9. नीचे-ही-नीचे – वह नदी में नीचे-ही-नीचे तैर लेता है।
10. लोग-ही-लोग – संगम पर जहाँ तक दृष्टि जाती है, लोग-ही-लोग दिखते हैं।

(7) समोच्चारित भिन्नार्थक शब्दों के द्वारा
जो शब्द उच्चारण में लगभग समान प्रतीत होते हैं, परन्तु उनके अर्थ भिन्न होते हैं, उन्हें समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द-युग्म भी कहा जाता है; यथा-
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 1
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 2
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 3
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 4
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 5
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 6
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 7
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 8
UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर img 9

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (क) निम्नलिखित शब्द-युग्मों में से किसी एक शब्द-युग्म में बताइए कि उसका कौन-सा अर्थ सही है-

(1) अनल-अनिल [2009, 11, 15, 17]
(क) पृथ्वी और आकाश
(ख) अग्नि और वायु
(ग) जल और वायु
(घ) पानी और आग

(2) सकल-शकल [2010, 17]
(क) कला और कृति
(ख) सन् और सम्वत्
(ग) सम्पूर्ण और अंश
(घ) सबल और निर्बल

(3) पुरुष-परुष—- (2015, 17]
(क) नर और नारी
(ख) आदमी और फरसा
(ग) पुरुष और पैसा
(घ) आदमी और कठोर

(4) गृह-ग्रह
(क) घर और नक्षत्र
(ख) घर और गृहस्थी
(ग) गिरोह और घर
(घ) गाँव और घर

(5) वृत्त-वित्त
(क) चरित्र और धन
(ख) धन और दौलत
(ग) गिरोह और घर
(घ) गाँव और घर

(6) बात-वात
(क) भात और दाल
(ख) बातचीत और वायु
(ग) हवा और पानी
(घ) बाट और तराजू

(7) कपट-कपाट [2016]
(क) कप और प्लेट
(ख) किवाड़ और खिड़की
(ग) धोखा और दरवाजा
(घ) पर्दा और किवाड़

(8) पतन-पत्तन-
(क) गिरना और उठना
(ख) पत्ता और फूल
(ग) गिरना और बन्दरगाह
(घ) पर्दा और किवाड़

(9) सुत-सूत [2012]
(क) पुत्र और पिता
(ख) पुत्र और सारथी
(ग) पुत्र और माता
(घ) पुत्र और पत्नी।।

(10) अभिराम-अविराम [2009, 10, 14, 15, 17]
(क) सुन्दर और लगातार
(ख) राम और लक्ष्मण
(ग) अब और तब
(घ) सुन्दर और मजबूत।

(11) पास-पाश [2010]
(क) उत्तीर्ण और निकट
(ख) निकट और जाल
(ग) निकट और ऊँचा
(घ) समीप और दूर

(12) पंथ-पथ-
(क) पथिक और रास्ता
(ख) सम्प्रदाय और मार्ग
(ग) चलना और बैठना
(घ) मार्ग और कार्य

(13) अभय-उभय-
(क) निडर और दोनों
(ख) भयरहित और निडर
(ग) निर्भय और कायर
(घ) आभायुक्त और अन्य

(14) अम्बुज-अम्बुद– [2013, 14, 16]
(क) कमल और बादल
(ख) जल और कमल
(ग) बादल और समुद्र
(घ) समुद्र और कमल

(15) मेघ-मेध–
(क) बादल और कील
(ख) बादल और यज्ञ
(ग) काला और बुद्धि
(घ) बादल और चर्बी

(16) अंस-अंश [2013,17]
(क) अंकुर और हिस्सा
(ख) हिस्सा और अंकुर
(ग) कंधा और हिस्सा
(घ) हिस्सा और कंधा।

(17) जलज-जलद [2009, 14, 16]
(क) बादल और कमल
(ख) कमल और बादल
(ग) कमल और तालाब
(घ) तालाब और कमल

(18) अन्न-अन्य–
(क) अनाज और दूसरा
(ख) भोजन और अनेक
(ग) गेहूँ और वह
(घ) बेकार और दूसरा

(19) उपकार-अपकार [2013]
(क) दूसरे का कार्य और बुरा
(ख) पुकार और न बोलना
(ग) भलाई और बुराई
(घ) अच्छा और दुष्ट

(20) अचार-आचार-
(क) बुरा आचरण और अच्छा
(ख) मुरब्बा और आचरण
(ग) स्थिर और चल
(घ) आम और चारा

(21) भित्ति-भीत–
(क) भक्ति और भाग्य
(ख) द्वार और दीवार
(ग) दीवार और डरा हुआ
(घ) बाहर और भीतर

(22) अमूल्य-अमूल-
(क) मूल-रहित और दूध
(ख) मूलरहित और जड़ रहित
(ग) मूल्य सहित और मूलभूत
(घ) अधिक मूल्यवाला और मूर्ख

(23) भारती-भारतीय
(क) सरस्वती और भारत का रहने वाला।
(ख) भार ढोने वाली और भर्ती करने वाला
(ग) भार में लगी हुई और चुनाव
(घ) एक जाति और एक व्यक्ति

(24) श्रान्त-आन्ति-
(क) थकान और खिन्नता
(ख) शान्ति और खिन्नता
(ग) खिल और थकान
(घ) शस्त और अशान्त।

(25) प्रारम्भ-प्रारब्ध-
(क) आरम्भ और योजना
(ख) अथ और इति
(ग) आरम्भ और भाग्य
(घ) शुरू करने की स्थिति और समाप्ति

(26) छात्र-क्षात्र– [2011,14]
(क) छतरीधारी और विद्यार्थी
(ख) विद्यार्थी और नेता
(ग) क्षत्रियधर्मी और विद्यार्थी
(घ) विद्यार्थी और क्षत्रियोचित

(27) नियत-नियति [2013]
(क) निश्चित और भाग्य
(ख) आदत और भाग्य
(ग) प्रकृति और गणना
(घ) आदत और गणना

(28) वहन-बहन
(क) टोना-भागिनी
(ख) बहना-बहिनी
(ग) ढोना-बहना
(घ) ढोना-ढहाना

(29) आय-आयु
(क) आना-उम्र
(ख) आमदनी-उम्र
(ग) आना-आज्ञा
(घ) आमदनी-आना

(30) श्रवण-श्रमण
(क) पाप और पुण्य
(ख) सज्जन और दुर्जन
(ग) कान और भिक्षु
(घ) सावन और परिश्रमी

(31) अंश-अंशु– [2015, 17]
(क) भाग और सूर्य
(ख) सूर्य और भाग
(ग) भाग और किरण
(घ) भाग और वरुण

(32) कटिबंध-कटिबद्ध-
(क) फेंटा और तैयार
(ख) करधनी और तैयार
(ग) तैयार और बाजूबन्द
(घ) उद्यत और उद्धत

(33) निहत-निहित–
(क) डरा हुआ और छिपा हुआ
(ख) छिपा हुआ और डरा हुआ
(ग) मरा हुआ और छिपा हुआ
(घ) हारा हुआ और मरा हुआ

(34) बिहग-बिहंग
(क) पक्षी और बालक
(ख) पक्षी और तोता
(ग) पक्षी और आकाश
(घ) आकाश और पक्षी

(35) अतिथि-अतिथेय (2010)
(क) जिसके आने की कोई तिथि न हो–अतिथि सेवा करने वाला
(ख) अधिक तिथि–आने वाली तिथि
(ग) अतिथिविहीन-तिथि सहित
(घ) जिसके आने की तिथि हो-जो निश्चित तिथि पर आये

(36) अग-अघ [2010,16]
(क) आगे-पीछे
(ख) अचल-पाप
(ग) नया–पुराना
(घ) सम्पूर्ण-पुण्य

(37) आरत-आराति [2012]
(क) आरती और आरती करने वाला
(ख) प्रेमी और प्रेम से रहित
(ग) दु:ख और शत्रु
(घ) रात्रि के पहले और रात्रि के बाद

(38) जलद-जलधि [2012]
(क) कमल और समुद्र
(ख) बादल और समुद्र
(ग) सिन्धु और आकाश
(घ) जलना और जो जला न हो

(39) श्वपच-स्वपच– [2012]
(क) दुष्ट और सज्जन
(ख) चाण्डाल और स्वयंपाकी
(ग) स्वयंपाकी और चाण्डाल
(घ) दुर्जन और साधु

(40) आतप-आपात [2012]
(क) धूप और संकट
(ख) संकट और धूप
(ग) धूप और छाया
(घ) उजाला और अँधेरा

(41) आवरण-आभरण- [2016]
(क) प्रारम्भ और अन्त
(ख) परदा और अन्त
(ग) परदा और गहना
(घ) मृत्यु और ढकना

(42) दुर्लभ-अप्राप्य [2013]
(क) कठिनाई से मिले – बिलकुल न मिले
(ख) हर समय मिले – कभी न मिले
(ग) कभी-कभी मिले – हर समय न मिले
(घ) मिलता हो – खो जाता हो।

(43) उच्छृखल-उद्दण्ड [2013]
(क) तत्पर और उद्धत
(ख) अवांछनीय और साहसी
(ग) नियमबद्ध न होना और जो दण्ड से न डरता हो
(घ) अन्याय से उत्पन्न भय और डर से उत्पन्न व्याकुलता

(44) निद्रा-तन्द्रा [2013]
(क) सो जाना और नींद की अर्द्ध-अवस्था या ऊँघना
(ख) नींद और आलस्य
(ग) जागना और सोने जैसी स्थिति
(घ) आलस्य और जाग्रत

(45) आपात-ऑपाद [2014]
(क) विपदा और सम्पदा
(ख) सुख और दुःख
(ग) संकट और निष्कण्टक
(घ) संकटे और पैर तक

(46) क्षति-क्षिति [2014]
(क) हानि और लाभ
(ख) हानि और आकाश
(ग) आकाश और पृथ्वी
(घ) हानि और पृथ्वी

(47) अम्ब-अम्भ (2015)
(क) माता और पानी
(ख) माता और पिता
(ग) आकाश और स्वर्ग
(घ) देवी और देवता

(48) अलि-आली (2015)
(क) भौंरा और सखी
(ख) भौंरा और कली
(ग) कली और भौंरा
(घ) सखी और भौंरा

(49) जगत्-जगत [2015]
(क) संसार और कुएँ का चबूतरा
(ख) संसार और संसारी
(ग) कुआँ और संसार
(घ) घड़ा और पानी

(50) उपल-उत्पल– [2015]
(क) उत्पन्न और ऊपर
(ख) ऊपर और नीचे
(ग) ओला और कमल
(घ) समाप्त और प्रारम्भ

(51) भव-भव्य (2015)
(क) संसार और सुन्दर
(ख) विश्व और व्यापक
(ग) सुख और दुःख
(घ) भौतिक और आध्यात्मिक

(52) कर्म-क्रम [2015]
(क) धर्म और कर्म
(ख) काम और आरम्भ
(ग) कार्य और क्रम
(घ) काम और सिलसिला

(53) आमरण-आभरण– [2013,15]
(क) मृत्यू और आभार
(ख) मृत्यु के निकट और सुन्दर
(ग) मृत्युपर्यन्त और आभूषण
(घ) मृत्यु होना और ढकना

(54) अपत्य-अपथ्य (2016)
(क) पतिविहीन और कुमार्ग
(ख) पुत्रहीन और भोजन
(ग) सन्तान और अहितकर
(घ) पुत्र और बीमारी

(55) कपिश-कपीश [2016]
(क) मटमैला और अंगद
(ख) मटमैला और हनुमान
(ग) बालि और अंगद
(घ) हनुमान और मैला

(56) प्रथा-पृथा– [2016]
(क) तरीका और परम्परा
(ख) अर्जुन और कुन्ती
(ग) रीति-रिवाज और कुन्ती
(घ) परम्परा और पृथ्वी

(57) अनुभव-अनुभूति [2018]
(क) व्यवहार रहित ज्ञान और अव्यावहारिक ज्ञान
(ख) व्यवहार से प्राप्त आन्तरिक ज्ञान और चिन्तन से प्राप्त आन्तरिक ज्ञान ।
(ग) अल्पकालिक ज्ञान और दीर्घकालिक प्राप्त ज्ञान
(घ) व्यावहारिक ज्ञान ओर अव्यावहारिक ज्ञान

(58) ईष्र्या-स्पर्धा [2018]
(क) दूसरों की उन्नति से प्रसन्न होना और दूसरों से प्रेरणा लेना
(ख) दूसरों से द्वेष करना और दूसरों से प्रेम करना
(ग) दूसरों की उन्नति से जलना और दूसरों की उन्नति और गुणों को प्राप्त करने की होड़
(घ) अवनति और उन्नति

(59) अशक्त-आसक्त– [2018]
(क) शक्तिमान-निकट
(ख) समर्थ-लगाव रखने वाला।
(ग) असमर्थ-लगाव रखने वाला
(घ) शक्तिरहित-प्रेम करने वाला

(60) देव-दैव [2018]
(क) देना-आकाश
(ख) देवता-भाग्य
(ग) दाता-विधाता
(घ) दान-भाग्य

(61) अपेक्षा-उपेक्षा [2018]
(क) तुलना और अवहेलना
(ख) समीक्षा और तुलना
(ग) तुलना और स्वागत
(घ) स्वागत और अनादर

(62) कुल-कूल [2018]
(क) वंश और तट
(ख) योग और वियोग
(ग) वंश और योग
(घ) योग और किनारा

उत्तर
1, (ख), 2. (ग), 3. (घ), 4. (क), 5. (क). 6. (ख). 7. (ग), 8. (ग), 9, (ख). 10. (क), 11. (ख), 12, (ख), 13. (क), 14. (क), 15, (ख), 16. (ग), 17. 19. (ग), 20. (ख), 21. (ग), 22, (घ), 23. (क), 24. (क), 25. (ग), 26. (घ), 27. (क), 28. (क), 29. (ख), 30. (ग),31. (क), 32. (क),33. (ग), 34. (घ), 35.(क), 36. (ख),37. (ग), 38. (ख),39. (ख),40. (क),41. (ग),42. (क),43. (ग),44. (क),45. (घ),46. (घ), 47, (घ), 48. (क),49. (क), 50. (ग),51. (क), 52. (घ),53. (ग),54. (ग), 55. (ख), 56. (ग), 57. (ख), 58. (ग), 59. (घ), 60. (ख), 61. (क), 62. (क)

प्रश्न (ख)
निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्द-युग्मों के सूक्ष्म अन्तर को स्पष्ट कीजिए-
(i) अविराम-अभिराम,
(ii) अवलम्ब-अविलम्ब,
(iii) ग्रह-गृह,
(iv) कुल-कूल,
(v) अभिज्ञ-अनभिज्ञ,
(vi) क्षात्र-छात्र,
(vii) पुरुष-परुष।
उत्तर
(i) अविराम-अभिराम का अर्थ है–निरन्तर-सुन्दर,
(ii) अवलम्ब-अविलम्ब का अर्थ है-सहाराशीघ्र,
(iii) ग्रह-गृह का अर्थ है-नक्षत्र-घर,
(iv) कुल-कूल का अर्थ है-वंश-किनारा,
(v) अभिज्ञ-अनभिज्ञ का अर्थ है—जानकार-अनजान,
(vi) क्षात्र-छात्र का अर्थ हैं–क्षत्रिय-विद्यार्थी,
(vii) पुरुष-परुष का अर्थ है—मनुष्य-कठोर।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi शब्दों में सूक्ष्म अन्तर, drop a comment below and we will get back to you at the earliest.