UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 4
Chapter Name गद्य-साहित्यका विकास मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न
Number of Questions 108
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न

मिश्रित बहुविकल्पीय प्रश्न

[ध्यान दें: नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के विकल्पों में सामान्य से अधिक काले छपे विकल्प को उचित विकल्प समझे।]

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘साहित्यालोचन’ और ‘हिन्दी साहित्य निर्माता’ इनकी प्रमुख रचनाएँ हैंया’साहित्यालोचन’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) श्यामसुन्दर दास

(2) ‘काशी नागरी प्रचारिणी सभा’ की स्थापना में इनका सराहनीय योगदान रहा है–
या
‘काशी नागरी प्रचारिणी सभा’ की स्थापना किसने की ? [2009, 12, 13, 14]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) श्यामसुन्दर दास
(घ) डॉ० सम्पूर्णानन्द

(3) निम्नलिखित में से कौन द्विवेदीयुगीन गद्य लेखक/लेखिका हैं ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) यशपाल
(घ) भगवतीचरण वर्मा

(4) ‘रूपक रहस्य’ के लेखक कौन हैं ? यह किस विधा की रचना है ?
(क) वियोगी हरि–नाटक
(ख) रामचन्द्र शुक्ल-निबन्ध
(ग) श्यामसुन्दर दास-आलोचना
(घ) प्रतापनारायण मिश्र-निबन्ध

(5) श्यामसुन्दर दास द्वारा किस पत्रिका का सम्पादन किया गया ?
(क) हिन्दी प्रदीप
(ख) माधुरी
(ग) इन्दु
(घ) नागरी प्रचारिणी पत्रिका

(6) ‘नासिकेतोपाख्यान’ शीर्षक से श्यामसुन्दर दास के अतिरिक्त किस लेखक ने गद्य-रचना की है? [2014]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) सदल मिश्र
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

(7) श्यामसुन्दर दास का जन्म-काल है–
(क) सन् 1875 ई०
(ख) सन् 1884 ई०
(ग) सन् 1892 ई०
(घ) सन् 1907 ई०

(8) मुंशी प्रेमचन्द का जन्म-काल है
(क) 1870 ई०
(ख) 1875 ई०
(ग) 1880 ई०
(घ) 1879 ई०

(9) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन का जन्म-काल है
(क) 1892 ई०
(ख) 1907 ई०
(ग) 1911 ई०
(घ) 1920 ई०

(10) इनके द्वारा ‘भारत कला भवन’ नाम के एक विशाल संग्रहालय की स्थापना की गयी
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) राय कृष्णदास

(11) इन्होंने हिन्दी में गद्यगीत विधा का प्रवर्तन किया–
(क) हरिशंकर परसाई
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(घ) राय कृष्णदास

(12) ‘भारत की चित्रकला’ तथा ‘भारतीय मूर्तिकला’ इनके प्रामाणिक ग्रन्थ हैं
(क) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ख) राहुल सांकृत्यायन
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) राय कृष्णदास

(13) ‘साधना’ नामक गद्यगीतों के संग्रह के रचयिता कौन हैं ?
(क) वृन्दावनलाल वर्मा
(ख) मोहन राकेश
(ग) राय कृष्णदास
(घ) विनय मोहन शर्मा

(14) राय कृष्णदास का लेखन-युग है
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(15) प्रेमचन्दोत्तर युग के श्रेष्ठ कथाकार के रूप में जाने जाते हैं-
(क) सरदार पूर्णसिंह
(ख) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) जैनेन्द्र कुमार

(16) जैनेन्द्र कुमार की कौन-सी रचना उपन्यास नहीं है ?
(क) कल्याणी
(ख) जयवर्धन
(ग) मुक्तिबोध
(घ) वातायन

(17) निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी रचना नाटक है ?
(क) मजदूरी और प्रेम
(ख) रस-मीमांसा
(ग) पाप और प्रकाश
(घ) भारत की एकता

(18) जैनेन्द्र कुमार द्वारा रचित निबन्ध-संग्रह है-
(क) पृथिवी-पुत्र और वाग्धारा
(ख) पूर्वोदय और प्रस्तुत प्रश्न
(ग) कुली
(घ) पथ के साथी

(19) ‘त्यागपत्र’ किस लेखक की उपन्यास-विधा की रचना है ?
(क) प्रेमचन्द
(ख) यशपाल
(ग) जैनेन्द्र कुमार
(घ) मोहन राकेश

(20) ‘साहित्य का श्रेय और प्रेय’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) आलोचना
(ग) निबन्ध
(घ) संस्मरण

(21) ‘अज्ञेय’ का वास्तविक नाम ( पूरा नाम) है—
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) कन्हैयालाल मिश्र
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

(22) ‘विशाल भारत’, ‘सैनिक’, ‘प्रतीक’, ‘वाक्’ तथा ‘दिनमान’ पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया [2012]
(क) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ख) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ ने
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी ने
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने

(23) उत्तर प्रियदर्शी’ नाटक के लेखक हैं-
(क) मोहन राकेश
(ख) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन’अज्ञेय’

(24) अरे यायावर रहेगा याद’ किस विधा की रचना है ? [2010]
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) कहानी
(घ) यात्रा-साहित्य

(25) अज्ञेय जी द्वारा रचित निम्नलिखित में से कौन-सी रचना निबन्ध विधा की रचना नहीं है ?
(क) विपथगा,
(ख) आत्मनेपद
(ग) त्रिशंकु
(घ) लिखि कागद कोरे

(26) इन्होंने भाषा सम्बन्धी विविध प्रयोग किये और शैली के क्षेत्र में भी नये प्रतिमान स्थापित किये
(क) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(घ) श्रीराम शर्मा

(27) अज्ञेय जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार से किस रचना के लिए सम्मानित किया गया था ?
(क) जयदोल
(ख) कितनी नावों में कितनी बार
(ग) एक बूंद सहसा उछली
(घ) अरी ओ करुणा प्रभामय

(28) ‘सन्नाटा’ के रचनाकार हैं [2013]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) राय कृष्णदास
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

(29) ‘हरिऔध’ का पूरा नाम क्या है ? [2010]
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय
(घ) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन

(30) ‘कामायनी’ की रचना विधा क्या है ?
(क) खण्डकाव्य
(ख) नाटिका
(ग) उपन्यास
(घ) महाकाव्य

(31) ‘भाषा योग-वाशिष्ठ’ के रचयिता हैं [2010, 18]
(क) रामप्रसाद निरंजनी
(ख) सदासुख मुंशीलाल ‘नियाज’
(ग) सदल मिश्र
(घ) इंशाअल्ला खाँ

(32) डॉ० रघुवीर सिंह का लेखन-युग है
(क) छायावाद युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(33) द्विवेदी युग का ख्याति प्राप्त तिलिस्मी उपन्यास है-
(क) आत्मदाह
(ख) गबन
(ग) नूतन ब्रह्मचारी
(घ) चन्द्रकान्ता सन्तति

(34) ‘भारतेन्दु युग’ की कालावधि मानी जाती है-
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1868 से 1900 ई०
(घ) 1868 ई० तेक

(35) ‘द्विवेदी युग’ की कालावधि मानी जाती है|
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1868 से 1900 ई०
(घ) 1938 ई० से अब तक

(36) ‘तितली’ उपन्यास के रचनाकार हैं [2013, 16]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) प्रेमचन्द
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(घ) जयशंकर प्रसाद

(37) ‘शुक्ल युग’ ( छायावाद युग) की कालावधि मानी जाती है|
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1938 से 1947 ई०
(घ) 1947 ई० से अब तक

(38) ‘शुक्लोत्तर युग’ ( छायावादोत्तर युग) की कालावधि मानी जाती है-
(क) 1900 से 1922 ई०
(ख) 1919 से 1938 ई०
(ग) 1938 से 1947 ई०
(घ) 1947 ई० से अब तक

(39) ‘द्विवेदी युग’ और ‘छायावादी युग’ दोनों युगों में लेखन-कार्य करने वाले लेखक-द्वय हैं [2014]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी व गुलाबराय
(ख) प्रतापनारायण मिश्र व प्रेमचन्द
(ग) गुलाबराय व जयशंकर प्रसाद
(घ) जयशंकर प्रसाद व जैनेन्द्र कुमार

(40) ‘छायावाद युग’ और ‘छायावादोत्तर युग’ दोनों युगों में अपनी रचनाधर्मिता से हिन्दी साहित्य में विशेष योगदान करने वाले लेखक हैं-
(क) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) डॉ० नगेन्द्र

(41) किस युग की रचनाएँ मार्क्सवाद से सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं ?
(क) छायावादी युग
(ख) छायावादोत्तर युगे
(ग) शुक्ल युग
(घ) द्विवेदी युग

(42) गद्य की विधा जो नहीं है
(क) निबन्ध
(ख) आलोचना
(ग) उपन्यास
(घ) गद्यकाव्य

(43) हिन्दी की गद्य और पद्य विधाओं में समान रूप से लिखने वाले विद्वान् हैं-
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) विष्णु प्रभाकर
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) तीनों में से कोई नहीं

(44) छायावादी युग के लेखक कौन नहीं हैं ?
(क) वियोगी हरि
(ख) भगवतीचरण वर्मा
(ग) नन्ददुलारे वाजपेयी
(घ) डॉ० रघुवीर सिंह

(45) निम्नलिखित में से कौन-सा साहित्यकार छायावादी नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) महादेवी वर्मा

(46) ‘संस्कृति के चार अध्याय’ किस युग की रचना है ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादोत्तर युग
(घ) छायावाद युग

(47) ‘हमीर हठ’ किस प्रकार की रचना है ?
(क) निबन्ध
(ख) कथा-साहित्य
(ग) आलोचना
(घ) इतिहास

(48) ‘खड़ी बोली’ गद्य के विकास का प्रारम्भिक युग कौन-सा है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) छायावाद युग।
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(49) निम्नलिखित में से किस निबन्धकार को ललित निबन्धकार माना जाता है ? [2009]
(क) कुबेरनाथ राय
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) सरदार पूर्णसिंह

(50) निम्नलिखित में असत्य कथन है
(क) गद्य व्याकरण सम्मत वाक्यबद्ध रचना है।
(ख) गद्य प्रधानतया विचार, तर्क चिन्तन एवं विश्लेषण प्रधान होता है।
(ग) गद्य में लय, यति एवं गति आदि का महत्त्व होता है।
(घ) आज का युग गद्य प्रधान है।

(51) कौन-सा युग हिन्दी गद्य के उत्कर्ष का सूर्योदय-काल था ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(52) छायावादोत्तर युग के लेखक नहीं हैं [2009]
(क) भीष्म साहनी
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ग) वासुदेवशरण अग्रवाल
(घ) बालकृष्ण भट्ट

(53) ‘द्विवेदी पत्रावली’ के संकलनकर्ता हैं-
(क) बैजनाथ सिंह
(ख) बनारसी दास चतुर्वेदी
(ग) पद्मसिंह शर्मा
(घ) वियोगी हरि

(54) हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल को गद्य काल की संज्ञा किसने दी ?
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) बाबू श्यामसुन्दर दास

(55) ‘बड़ों के प्रेरणादायक पत्र’ पत्र संकलन किसने प्रकाशित कराया? [2010]
(क) बैजनाथ सिंह
(ख) बनारसीदास चतुर्वेदी
(ग) वियोगी हरि
(घ) हरिवंशराय बच्चन

(56) ‘नूतन ब्रह्मचारी’ किस विधा की रचना है ? [2010]
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) जीवनी
(घ) आलोचना

(57) ‘हिन्दी प्रगतिशील लेखक संघ’ का प्रथम अधिवेशन हुआ [2011]
या
प्रेमचन्द की अध्यक्षता में प्रगतिशील लेखक संघ’ का अधिवेशन हुआ । [2014]
(क) सन् 1932 में
(ख) सन् 1936 में
(ग) सन् 1938 में
(घ) सन् 1940 में

(58) प्रारम्भिक गद्य लेखकों में दो राजाओं में से एक हैं [2012]
(क) सदासुख लाल
(ख) सदल मिश्र
(ग) शिवप्रसाद सितारेहिन्द
(घ) लल्लूलाल

(59) ‘दि मैड मैन’ का ‘पगला’ नाम से हिन्दी में अनुवाद किया है [2012]
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल ने
(ख) रायकृष्ण दास ने
(ग) डॉ० सम्पूर्णानन्द ने।
(घ) जी० सुन्दर रेड्डी ने

(60) निम्नलिखित में से सदल मिश्र की रचना है [2013]
(क) रानी केतकी की कहानी
(ख) नासिकेतोपाख्यान
(ग) राजा भोज का सपना
(घ) सत्यार्थ प्रकाश

(61) कौन-सी रचना धर्मवीर भारती की है ? (2013)
(क) अणिमा
(ख) अपरा।
(ग) अन्धा-युग
(घ) अर्चना

(62) ‘भारत-भारती’ की रचना-विधा है– [2014]
(क) कहानी
(ख) उपन्यास
(ग) नाटक
(घ) काव्य

(63) निम्नलिखित में असत्य कथन है [2014]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी निबन्धकार एवं उपन्यासकार हैं।
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी ‘सरस्वती’ पत्रिका के सम्पादक थे।
(ग) रामचन्द्र शुक्ल ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ ग्रन्थ के लेखक हैं।
(घ) प्रतापनारायण मिश्र हिन्दी प्रदीप’ के सम्पादक थे।

(64) ‘खड़ी बोली गद्य’ की प्रथम रचना है [2015]
(क) कविवचन सुधा।
(ख) गोरा बादल की कथा
(ग) कामायनी
(घ) चिदम्बरा

(65) ‘त्यागपत्र’ विधा की दृष्टि से रचना है [2015]
(क) कहानी
(ख) निबन्ध
(ग) उपन्यास
(घ) नाटक

(66) ‘अतिचार’ रचना के सम्पादक हैं [2015]
(क) बालमुकुन्द गुप्त
(ख) मुनि जिनविजय
(ग) किशोरीलाल गोस्वामी
(घ) नाभादास

(67) ‘श्रृंगार-रस-मंडन’ के रचनाकार हैं [2015]
(क) नाभादास
(ख) चतुर्भुज दास
(ग) बिट्ठलनाथ
(घ) ज्योतिरीश्वर ठाकुर

(68) ‘चिन्तामणि’ के रचनाकार हैं [2016, 18]
(क) प्रेमचन्द
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) गुलाब राय

(69) सरस्वती पत्रिका है [2016]
(क) शुक्ल युग की
(ख) द्विवेदी युग की
(ग) भारतेन्दु युग की
(घ) छायावादी युग की

(70) चन्द्रकांता सन्तति’ रचना है [2016]
(क) भारतेन्दु युग की
(ख) द्विवेदी युग की।
(ग) छायावादी युग की
(घ) छायावादोत्तर युग की

(71) ‘कालिदास की निरंकुशता’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) नन्द दुलारे वाजपेयी

(72) ‘राधाकृष्णदास’ लेखक थे [2015]
(क) भारतेन्दु युग के
(ख) द्विवेदी युग के
(ग) छायावाद युग के
(घ) छायावादोत्तर युग के

(73) ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ के लेखक हैं [2015]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) रामचन्द्र शुक्ल
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) डॉ० रामकुमार वर्मा

(74) गद्य विधा की संख्या है [2016]
(क) तीन
(ख) सात
(ग) ग्यारह
(घ) पन्द्रह

(75) ‘नूतन ब्रह्मचारी’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) सदल मिश्र
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) लल्लू लाल
(घ) मोहन राकेश

(76) ‘ग्यारह वर्ष का समय’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) मुंशी इंशा अल्ला खाँ
(ख) राजेन्द्र बाला घोस
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) जयशंकर प्रसाद

(77) गोरा बादल की कथा’ के लेखक हैं [2016]
(क) कवि गंग
(ख) जटमले
(ग) पं० दौलत राम
(घ) रामप्रसाद निरंजनी

(78) ‘मुद्रा राक्षस’ के लेखक हैं [2016]
(क) श्यामसुन्दर दास
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) जयशंकर प्रसाद

(79) रसज्ञ-रंजन’ कृति के लेखक हैं [2016]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) राहुल सांकृत्यायन

(80) सरदार पूर्णसिंह द्वारा लिखित निबन्ध नहीं है [2016]
(क) सच्ची वीरता
(ख) कन्यादान
(ग) पवित्रता
(घ) कालिदास की निरंकुशता

(81) ‘चिद्विलास’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ख) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ग) हरिशंकर परसाई
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

(82) ‘पन्दहा’ (आजमगढ़, उत्तर प्रदेश) जन्म-स्थान है [2016]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी को
(ख) राहुल सांकृत्यायन को
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का
(घ) मोहन राकेश का

(83) ‘पैरों में पंख बाँधकर’ यात्रावृत्तान्त कृति है [2016]
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी की।
(ख) डॉ० सम्पूर्णानन्द की
(ग) मोहन राकेश की
(घ) वासुदेवशरण अग्रवाल की

(84) आधुनिक काल के प्रारम्भिक डायरी-लेखक हैं [2016]
(क) घनश्याम दास बिड़ला
(ख) त्रिलोचन
(ग) शमशेर बहादुर सिंह
(घ) बच्चन

(85) ‘भारत दुर्दशा’ रचना है [2016]
(क) जयशंकर प्रसाद की
(ख) रामकुमार वर्मा की
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की
(घ) श्यामसुन्दर दास की.

(86) ‘वर्ण रत्नाकर’ के रचनाकार हैं [2017]
(क) मथुरानाथ शुक्ल
(ख) दौलतराम
(ग) रामप्रसाद निरंजनी
(घ) ज्योतिरीश्वर

(87) सरदार पूर्णसिंह किस युग के लेखक हैं? [2017]
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) प्रगतिवाद युग

(88) डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी की रचना है [2017]
(क) चिन्तामणि
(ख) पंच परमेश्वर
(ग) कुटज
(घ) चन्द्रकान्ता

(89) वासुदेवशरण अग्रवाल की रचना है [2017]
(क) अन्तराल
(ख) त्रिशंकु
(ग) तट की खोज
(घ) वाग्धारा

(90) संस्मरण विधा की रचना है– [2017]
(क) दीप जले शंख बजे
(ख) बाजे पायलिया के घंघरू
(ग) अरे यायावर रहेगा याद
(घ) तब की बात और थी

(91) आलोचनात्मक कृति ‘कालिदास की लालित्य-योजना’ के लेखक हैं [2017]
(क) हरिशंकर परसाई
(ख) मोहन राकेश
(ग) डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

(92) ‘वारिस’ कहानी-संग्रह है [2017]
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का
(ख) प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी का
(ग) मोहन राकेश का
(घ) “अज्ञेय’ का

(93) हरिशंकर परसाई की रचना है [2017]
(क) कल्पवृक्ष
(ख) धरती के फूल
(ग) तब की बात और थी
(घ) मेरे विचार

(94) डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखे गए निम्न ग्रन्थों में से हिन्दी साहित्य के इतिहास से सम्बन्धित ग्रन्थ नहीं है– [2017]
(क) हिन्दी साहित्य की भूमिका
(ख) हिन्दी साहित्य का आदिकाल
(ग) हिन्दी-साहित्य
(घ) चारुचन्द्र-लेख

(95) ‘भूले-बिसरे चेहरे’ रेखाचित्र के रचयिता हैं [2018]
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ख) अमृत राय
(ग) महावीरप्रसार द्विवेदी
(घ) राजेन्द्र यादव

(96) ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ के लेखक हैं|
(क) मोहन राकेश
(ख) अज्ञेय
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) हरिशंकर परसाई

(97) निम्नलिखित में से किस निबन्ध-संग्रह की रचना हरिशंकर परसाई द्वारा की गई है? [2018]
(क) पगडण्डियों का जमाना
(ख) क्षण बोले कण मुस्काए
(ग) चिन्तामणि
(घ) बाजे पायलिया के मुँघरू

(98) ‘परीक्षा-गुरु’ के लेखक हैं [2018]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) सदल मिश्र
(ग) लक्ष्मण सिंह
(घ) लाला श्रीनिवास दास

(99) ‘स्कन्दगुप्त’ नाटक के लेखक हैं [2018]
(क) प्रेमचन्द
(ख) लक्ष्मीनारायण मिश्र
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) धर्मवीर भारती

(100) ‘शेखर एक जीवनी’ के लेखक हैं [2018]
(क) भीष्म साहनी
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) प्रेमचन्द

(101) ‘नासिकेतोपाख्यान’ के लेखक हैं– [2018]
(क) लल्लूलाल
(ख) सदासुखलाल
(ग) सदल मिश्र
(घ) इंशाअल्ला खाँ

(102) बालमुकुन्द गुप्त किस युग के लेखक थे? [2018]
(क) भातेन्दु युग के
(ख) द्विवेदी युग के
(ग) छायावादी युग के
(घ) प्रगतिवादी युग के

(103) श्यामसुन्दर दास की शैली है [2018]
(क) व्यास
(ख) समास
(ग) भावात्मक
(घ) व्यंग्यात्मक

(104) किसके गद्य में करुण संवेदना की प्रधानता है? [2018]
(क) माखनलाल चतुर्वेदी के
(ख) पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ के
(ग) जयशंकर प्रसाद के
(घ) महादेवी वर्मा के

(105) निबन्ध प्रौढ़तम स्तर तक पहुँचा [2018]
(क) द्विवेदी युग में
(ख) शुक्ल युग में
(ग) शुक्लोत्तर युग में
(घ) प्रयोगवादी युग में

(106) किस रचना के लेखक प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हैं? [2018]
(क)’वैचारिकी, शोध और बोध
(ख) “भारत की मौलिक एकता’
(ग) विचार और वितर्क’
(घ) आत्मनेपद

(107) मोहन राकेश की रचना नहीं है [2018]
(क) “लहरों के राजहंस’
(ख) ‘बकलमखुद
(ग) ‘तट की खोज’
(घ), ‘समय-सारथी

(108) ‘शिकायत मुझे भी है’ निबन्ध-संग्रह है– [2018]
(क) धर्मवीर भारती का
(ख) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का
(ग) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का
(घ) हरिशंकर परसाई का

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UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक
Number of Questions 208
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

बहुविकल्पीय प्रश्न : एक

[ ध्यान दें: नीचे दिये गये बहुविकल्पीय प्रश्नों के विकल्पों में सामान्य से अधिक काले छपे विकल्प को उचित विकल्प समझे।] ।
उचित विकल्प का चयन करें-

(1) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आदिकाल से सम्बन्धित नहीं है?
(क) युद्धों का सजीव वर्णन मिलता है
(ख) लक्षण ग्रन्थों की रचना हुई
(ग) रासो ग्रन्थ रचे गये।
(घ) श्रृंगार प्रधान काव्यों की रचना हुई

(2) दलपति विजय किस काल के कवि हैं ?
(क) भक्तिकाल
(ख) रीतिकाल
(ग) आधुनिककाल
(घ) आदिकाल

(3) निम्नलिखित में से लौकिक साहित्य के अन्तर्गत हैं-
(क) रेवंतगिरि रास
(ख) खुसरो की पहेलियाँ
(ग) खुमाण रासो
(घ) कामायनी

(4) हिन्दी के प्रथम कवि के रूप में मान्य हैं [2015, 16]
(क) शबरपा
(ख) चन्द
(ग) लुइपा
(घ) सरहपा

(5) इतिवृत्तात्मकता की प्रधानता’ किस युग की मुख्य विशेषता थी ?
(क) छायावाद काल
(ख) द्विवेदी युग
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) प्रगति काल

(6) हिन्दी साहित्य का’आदिकाल’ निम्नांकित में से किस साम्राज्य की समाप्ति के समय से प्रारम्भ होता है ?
(क) अंग्रेजी साम्राज्य
(ख) वर्धन साम्राज्य
(ग) गुप्त साम्राज्य
(घ) मौर्य साम्राज्य

(7) जैन साहित्य का सबसे अधिक लोकप्रिय रूप है
(क) रासो ग्रन्थ
(ख) रीति ग्रन्थ
(ग) रास ग्रन्थ
(घ) लौकिक ग्रन्थ

(8) आदिकाल का एक अन्य नाम है-
(क) स्वर्ण युग
(ख) सिद्ध-सामन्त काल
(ग) श्रृंगार काल
(घ) भक्तिकाल

(9) वीरगाथाकाल के ग्रन्थों की भाषा है-
(क) अवधी
(ख) मैथिली
(ग) डिंगल-पिंगल
(घ) अपभ्रंश

(10) इनमें से हिन्दी का प्राचीनतम (प्रथम) महाकाव्य कौन-सा है ? [2010, 11]
था
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ आदिकाल का है ? [2013]
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) पद्मावत
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) प्रिय प्रवास

(11) निम्नलिखित में से कौन आदिकाल के कवि नहीं हैं ?
(क) शारंगधर
(ख) जगनिक
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) चन्दबरदाई

(12) ‘बीसलदेव रासो’ रचना है [2010]
(क) नरपति नाल्ह की
(ख) भट्ट केदार की
(ग) जगनिक की
(घ) दलपति विजय की

(13) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ आदिकाल का है ? [2010, 13]
(क) सूरसागर
(ख) पद्मावत
(ग) बीसलदेव रासो
(घ) आँसू

(14) हिन्दी साहित्य के आदिकाल की रचना नहीं है [2013, 14]
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) परमाल रासो
(ग) पद्मावत
(घ) विद्यापति पदावली

(15) आदिकाल की रचना नहीं है [2013]
(क) उक्ति-व्यक्ति प्रकरण
(ख) जयचंद प्रकाश
(ग) राउल वेल
(घ) मृगावती

(16) किस आलोचक ने ‘पृथ्वीराज रासो’ को अर्द्ध प्रामाणिक रचना माना है ?
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) डॉ० गणपतिचन्द्र गुप्त

(17) निम्नलिखित में कौन-सी प्रवृत्ति आदिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) संसार की असारता का प्रतिपादन
(ख) अलंकरण के सभी साधन अपनाये गये
(ग) श्रृंगार का पूर्ण बहिष्कार
(घ) युद्धों का सुन्दर और सजीव वर्णन

(18) कौन-सा कथन आदिकाल ( वीरगाथा काल) से सम्बन्धित है ?
(क) आश्रयदाताओं के युद्धोत्साह, केलि-क्रीड़ा आदि के बड़े सरस वर्णन हैं।
(ख) काव्य-भाषा के रूप में खड़ी बोली हिन्दी को मान्यता मिली
(ग) भारतीय काव्य-शास्त्र का हिन्दी में अवतरण हुआ
(घ) ईश्वर की लीलाओं का ज्ञान तथा लोकोन्मुखी भावनाओं का प्रतिपादन

(19) भाट यो चारण कवि क्या करते थे ?
(क) युद्ध-काल में वीर रस के गीत गा-गाकर सेना को प्रोत्साहित करते थे
(ख) अपने आश्रयदाताओं की वीरता का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन करते थे
(ग) अपने आश्रयदाताओं की वीरता के गुणगान सम्बन्धी गीत बनाते एवं सुनाते थे
(घ) उपर्युक्त तीनों

(20) कौन-सी प्रवृत्ति आदिकाल के काव्य में वर्णित साहित्य से सम्बन्धित है ?
(क) जीवन की नश्वरता का वर्णन
(ख) युद्ध का विशद वर्णन
(ग) श्रृंगारिक बातों का वर्णन
(घ) काव्य में अलंकरण का वर्णन

(21) कौन-से व्यक्ति ‘नाथ’ साहित्य के व्यवस्थापक (प्रवर्तक) माने जाते हैं ?
(क) विश्वनाथ
(ख) रवीन्द्रनाथ
(ग) जगन्नाथ
(घ) गोरखनाथ

(22) कौन-सा ग्रन्थ रासो परम्परा का श्रेष्ठ महाकाव्य हैं ?
(क) खुमाण रासो
(ख) बीसलदेव रासो
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) परमाल रासो

(23) कौन-सी रचना वीर गाथात्मक है ?
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) विद्यापति
(ग) खुसरो की पहेलियाँ
(घ) साहित्य लहरी

(24) ‘पृथ्वीराज रासो’ में प्रधानता है [2012]
(क) श्रृंगार रस की
(ख) वीर रस की
(ग) शान्त रस की
(घ) हास्य रस की

(25) वीरगाथा काल में लिखित कौन-सी रचना है ?
(क) रस विलास
(ख) ललित ललाम
(ग) कवित्त रत्नाकर
(घ) सन्देश रासक

(26) निर्गुणभक्ति की ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रधान (प्रतिनिधि) कवि हैं [2010, 13]
(क) रैदास
(ख) कबीरदास
(ग) मलूकदास
(घ) नानक

(27) निम्नलिखित में से कौन ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) नानक
(ख) दादू
(ग) केशव
(घ) मलूकदास

(28) किसे खड़ी बोली का प्रथम कवि माना जाता है ?
(क) अब्दुर्रहमान
(ख) नरपति नाल्ह
(ग) अमीर खुसरो
(घ) धनपाल

(29) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ज्ञानाश्रयी शाखा का नहीं है ? [2009]
(क) मलिक मुहम्मद जायसी
(ख) रैदास
(ग) नानक
(घ) कबीर

(30) “भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे।” प्रस्तुत कथन किस लेखक का है ? [2015]
(क) नन्ददुलारे वाजपेयी
(ख) रामचन्द्र शुक्ल
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) रामविलास शर्मा

(31) निर्गुण काव्य-धारा की प्रवृत्ति है|
(क) वात्सल्य रस की प्रधानता
(ख) प्रकृति पर चेतन सत्ता का आरोप
(ग) रुढ़ियों एवं बाह्य आडम्बर का विरोध
(घ) आश्रयदाता की प्रशंसा

(32) ‘कबीरदास’ भक्तिकाल की किस धारा के कवि हैं ?
(क) सन्त काव्यधारा
(ख) प्रेम काव्यधारा
(ग) राम काव्यधारा
(घ) कृष्ण काव्यधारा

(33) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ज्ञानाश्रयी शाखा से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) कबीर
(ख) नानक
(ग) रैदास
(घ) कुतुबन

(34) सन्त काव्यधारा के कवि नहीं हैं [2013]
(क) कबीर
(ख) रैदास
(ग) कुतुबन
(घ) दादू दयाल

(35) निम्नलिखित में से भक्तिकालीन कवि कौन हैं ? [2013]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) कुम्भनदास
(ग) हरिऔध
(घ) महादेवी

(36) इस शाखा में केवल सौन्दर्य वृत्ति से प्रेरित स्वच्छन्द प्रेम तथा प्रगाढ़ प्रणय-भावना है-
(क) कृष्णभक्ति शाखा
(ख) रामभक्ति शाखा
(ग) प्रेमाश्रयी शाखा
(घ) ज्ञानाश्रयी शाखा

(37) निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी शाखा (सूफी काव्यधारा ) के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं
(क) कुतुबन
(ख) मंझन
(ग) उस्मान
(घ) जायसी

(38) काव्य साहित्य में कौन-सा काल स्वर्ण-काल कहलाता है ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिककाल

(39) ‘रुनकता’ नामक स्थान सम्बन्धित है [2013]
(क) जयशंकर प्रसाद से
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ से
(ग) कबीरदास से
(घ) सूरदास से

(40) प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा का सम्बन्ध किससे है ? [2013]
(क) कृष्णभक्ति
(ख) सगुणभक्ति
(ग) निर्गुणभक्ति
(घ) रामभक्ति

(41) कृष्णभक्ति शाखा के कवि नहीं हैं [2013, 14]
(क) सूरदास
(ख) नन्ददास
(ग) नाभादास
(घ) जगन्नाथ दास

(42) कृष्णभक्ति शाखा के कौन कवि नहीं हैं ?
(क) मलिक मुहम्मद जायसी
(ख) तुलसीदास
(ग) सूरदास
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(43) निम्नलिखित कवियों में वल्लभाचार्य का शिष्य कौन था ?
(क) भूषण
(ख) भिखारीदास
(ग) रघुराज सिंह
(घ) कृष्णदास

(44) कृष्णभक्ति शाखा का प्रथम कवि कहते हैं
(क) सूरदास को
(ख) विद्यापति को
(ग) मीराबाई को
(घ) रसखान को

(45) वात्सल्य रस के सम्राट कहे जाते हैं| या ‘श्रृंगार’ और ‘वात्सल्य रस के अमर कवि हैं [2015]
(क) तुलसीदास
(ख) सूरदास
(ग) परमानन्ददास
(घ) कुम्भनदास

(46) कौन सगुण भक्ति शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) सूरदास
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) तुलसीदास
(घ) ये सभी

(47) कृष्णभक्ति काव्यधारा के अन्तर्गत आते हैं-
(क) सभी ब्रजभाषा के कवि
(ख) भक्तिकाल के कवि
(ग) अष्टछाप के कवि
(घ) सभी श्रृंगारिक रचनाकार

(48) मर्यादा पुरुषोत्तम राम की अवधारणा दी
(क) वाल्मीकि
(ख) तुलसीदास
(ग) कुम्भनदास
(घ) नन्ददास

(49) राम भक्ति शाखा से सम्बन्धित हैं [2009]
(क) कुम्भनदास
(ख) परमानन्ददास
(ग) नाभादास
(घ) चतुर्भुजदास

(50) हिन्दुओं के लिए कौन-से कवि आदरणीय हैं ?
(क) कबीर
(ख) रहीम
(ग) सूरदास
(घ) तुलसीदास

(51) तुलसीदास ने ‘श्रीरामचरितमानस’ की रचना की है [2013]
(क) ब्रजभाषा में
(ख) भोजपुरी में
(ग) अवधी में
(घ) खड़ी बोली में

(52) कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) जीवन की नश्वरता का वर्णन
(ख) ईश्वर के नाम-स्मरण की महत्ता
(ग) सहयोग और समन्वय की भावना
(घ) नारी को भोग्य सम्पत्ति के रूप में प्रस्तुत करना

(53) कुम्भनदास, परमानन्द दास, क्षीत स्वामी, गोविन्द स्वामी, चतुर्भुज दास, नन्ददास तथा सूरदास को किस श्रेणी का कवि माना जाता था ?
(क) सन्त कवि
(ख) गायक कवि
(ग) महान् कवि
(घ) अष्टछाप के कवि

(54) ‘अष्टछाप’ के कवियों का सम्बन्ध भक्तिकाल की किस शाखा से है ? [2015, 18]
(क) ज्ञानाश्रयी शाखा
(ख) प्रेमाश्रयी शाखा
(ग) कृष्णभक्ति शाखा
(ग) रामभक्ति शाखा

(55) मलिक मुहम्मद जायसी, मंझन तथा कुतुबन किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) ज्ञानाश्रयी निर्गुण काव्यधारा
(ख) सगुण भक्ति काव्यधारा
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण काव्यधारा
(घ) इनमें से कोई नहीं

(56) निम्नलिखित में से कौन-सी कवि प्रेमाश्रयी शाखा से सम्बन्धित नहीं है ?
(क) जायसी
(ख) मंझन
(ग) चन्दबरदाई
(घ) कुतुबन

(57) ‘प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा’ का सम्बन्ध किससे था ?
(क) कृष्ण-भक्ति
(ख) सगुण भक्ति
(ग) निर्गुण भक्ति
(घ) इनमें से कोई नहीं

(58) लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम का प्रतिपादन किस काव्यधारा के काव्य के अन्तर्गत किया गया है ?
(क) निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) प्रेमाश्रयी निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(घ) सगुण भक्ति काव्यधारा

(59) रसखान किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) प्रेमाश्रयी काव्यधारा
(ख) निर्गुण भक्ति काव्यधारा
(ग) सगुण भक्ति काव्यधारा
(घ) कृष्णभक्ति काव्यधारा

(60) गोस्वामी तुलसीदास केशवदास, हृदयराम तथा प्राणचन्द किस काव्यधारा के कवि थे ?
(क) सगुण भक्ति काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) ज्ञानाश्रयी भक्ति काव्यधारी।
(घ) रामभक्ति काव्यधारा

(61) सखा-भाव की भक्ति-भावना की प्रधानता तथा श्रृंगार एवं वात्सल्य रस की प्रधानता किस काव्यधारा की मुख्य विशेषताएँ हैं ?
(क) प्रेमाश्रयी काव्यधारा
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा
(ग) सगुण भक्ति काव्यधारा
(घ) रामभक्ति काव्यधारा

(62) सेवक-सेव्य भाव की भक्ति की प्रधानता है-
(क) सन्त काव्यधारा में ।
(ख) कृष्णभक्ति काव्यधारा में
(ग) रामभक्ति काव्यधारा में
(घ) सगुण भक्ति काव्यधारा में

(63) ‘भक्तिकाल’ का समय आचार्य रामचन्द्रशुक्ल ने माना है [2012]
(क) संवत् 1000 से संवत् 1375 तक
(ख) संवत् 1374 से संवत् 1700 तक
(ग) संवत् 1040 से संवत् 1370 तक
(घ) संवत् 950 से संवत् 1440 तक

(64) निम्नांकित में से कौन प्रेमाश्रयी शाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) जायसी
(ख) सूरदास
(ग) मंझन
(घ) कुतुबन

(65) भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा के कवि हैं [2012]
(क) कुम्भनदास
(ख) दादूदयाल
(ग) मंझन
(घ) नन्ददास

(66) निम्नलिखित में से कौन-सी प्रवृत्ति ज्ञानाश्रयी शाखा के काव्य में नहीं पायी जाती ?
(क) गुरु-गोविन्द की महत्ता
(ख) समाज-सुधार का दृष्टिकोण
(ग) नायक-नायिका का वर्णन
(घ) आडम्बर का विरोध

(67) निम्नलिखित में एक रचना तुलसीदास की नहीं है; उसका नाम लिखिए
(क) श्रीकृष्णगीतावली
(ख) साहित्यलहरी
(ग) विनयपत्रिका
(घ) पार्वतीमंगल

(68) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना भक्तिकाल में लिखी गयी है ?
(क) कामायनी
(ख) सूरसागर
(ग) भारतभारती
(घ) उद्धवशतक

(69) गोस्वामी तुलसीदास रचित ‘विनयपत्रिका’ की भाषा है [2010, 16]
(क) अवधी
(ख) मैथिली
(ग) ब्रज
(घ) खड़ी बोली

(70) गोस्वामी तुलसीदास के बचपन का नाम था [2012, 13]
(क) तुकाराम
(ख) आत्माराम
(ग) सीताराम,
(घ) रामबोला

(71) रामचन्द्र शुक्ल ने भक्तिकाल को सर्वश्रेष्ठ लोकवादी कवि किसे कहा है ?
(क) कबीरदास
(ख) सूरदास
(ग) मलिक मुहम्मद जायसी
(घ) तुलसीदास

(72) निम्नलिखित में से किस कवि का काव्य श्रीमद्भागवत से अत्यधिक प्रभावित है ?
(क) केशव
(ख) सूर
(ग) तुलसी
(घ) बिहारी

(73) निम्नलिखित में से किस कवि को बाल-वर्णन क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है ?
(क) तुलसीदास
(ख) बिहारी
(ग) सूरदास
(घ) केशवदास

(74) निम्नलिखित कवियों में स्वामी रामानन्द का शिष्य कौन था ?
(क) नानक
(ख) मलूकदास
(ग) रैदास
(घ) कबीरदास

(75) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित है ?
(क)लोकोन्मुखी प्रवृत्ति के कारण इस काल की भक्ति-भावना लोक-प्रचलित है।
(ख) इस काल का समस्त साहित्य आक्रमण एवं युद्ध के प्रभावों की मन:स्थितियों का प्रतिफलन है।
(ग) हिन्दी साहित्य में आधुनिकता का सूत्रपात अंग्रेजों की साम्राज्यवादी शासन-प्रणाली के नवीन अनुभव से हुआ था
(घ) प्रगतिवाद के साथ-साथ मनुष्य के मन के यथार्थ को अभिव्यक्त करने वाली प्रयोगवादी धारा भी प्रवाहित हुई।

(76) “वह इस असार संसार को न देखने के वास्ते आँखें बन्द किये थे।” यह किसका कथन है? [2012]
(क) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का।
(ख) मलिक मुहम्मद जायसी का
(ग) भारतेन्दु हश्चिन्द्र का
(घ) जगन्नाथदास रत्नाकर का

(77) कौन-सा कथन भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा से सम्बद्ध है ?
(क) स्वच्छन्दवादी काव्य-रचनाओं का कला–पक्ष भी नवीनता लिये हुए होता है।
(ख) सामाजिक रूढ़ियों से मुक्त एवं सौन्दर्य-वृत्ति से प्रेरित स्वच्छन्द प्रेम तथा प्रगाढ़ प्रणय भावना ही इस काव्य का मूल विषय रहा है।
(ग) श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में वात्सल्य रस की प्रमुखता है।
(घ) कवियों ने अपने-अपने आश्रयदाताओं की इच्छा के अनुरूप श्रृंगार रस में ही अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं

(78) निम्नलिखित में से कौन सगुण भक्तिशाखा के कवि नहीं हैं ?
(क) सूरदास
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) तुलसी
(घ) केशवदास

(79) निम्नांकित में रामभक्ति शाखा में कौन नहीं हैं ?
(क) तुलसीदास
(ख) चतुर्भुज दास
(ग) अग्रदास
(घ) नाभादास

(80) भक्तिकाल की रचनाओं में निम्नलिखित में से कौन सबसे अधिक लोकप्रिय है ?
(क) पद्मावत
(ख) श्रीरामचरितमानस
(ग) रामचन्द्रिका
(घ) सूरदास

(81) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ सगुण भक्तिधारा का श्रेष्ठ ग्रन्थ है ?
(क) कवितावली
(ख) साहित्य लहरी
(ग) श्रीरामचरितमानस
(घ) रामलला नहछू

(82) भक्तिकाल की काव्य नहीं है [2012]
(क) पद्मावत
(ख) पृथ्वीराज रासो
(ग) श्रीरामचरितमानस
(घ) सूरसागर

(83) भक्तिकाल की कृति है [2010]
(क) साकेत
(ख) पार्वती-मंगल
(ग) कामायनी
(घ) पृथ्वीराज रासो

(84) सामाजिक दृष्टि से घोर अध:पतन का काल था
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) छायावाद काल

(85) रीतिकाल से सम्बन्धित विशेषता है
(क) सख्य भाव की भक्ति की प्रधानता
(ख) समन्वयकारी भावना
(ग) भक्ति की प्रधानता
(घ) नारी-सौन्दर्य का विलासितापूर्ण चित्रण

(86) रीतिकाल का अन्य नाम है– [2010, 13]
(क) स्वर्णकाल
(ख) उद्भव कोल
(ग) श्रृंगार काल
(घ) संक्रान्तिकाल

(87) रीतिकाल के कवियों की रचनाओं में प्रधानता है-
(क) भावुकता की
(ख) समाज-सुधार की
(ग) अलंकार-प्रदर्शन की
(घ) राष्ट्रीय भावना की

(88) ‘कठिन काव्य का प्रेत’ कहा जाता है [2013, 16]
(क) घनानन्द को
(ख) ‘भूषण’ को
(ग) ‘केशव’ को
(घ) ‘पद्माकर’ को

(89) कौन-सा ग्रन्थ रीतिकालीन काव्य-परम्परा से सम्बन्धित है ?
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) बिहारी सतसई
(ग) दीपशिखा
(घ) रश्मिरथी

(90) निम्नलिखित में कौन-से कवि रीतिकाल के हैं ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामधारी सिंह दिनकर
(ग) मलूकदास
(घ) बिहारी

(91) रीतिबद्ध काव्यधारा के कवि हैं
(क) केशवदास
(ख) बिहारी
(ग) घनानन्द
(घ) बोधा

(92) ‘बिहारी सतसई’ की भाषा है [2013]
(क) अवधी
(ख) खड़ी बोली
(ग) ब्रजभाषा
(घ) मैथिली

(93) रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि हैं [2013, 14, 15]
(क) घनानन्द
(ख) सेनापति
(ग) बिहारी
(घ) वृन्द

(94) रीतिकाल की कृति है [2010, 11]
(क) रसमंजरी
(ख) प्रेमसागर
(ग) आर्या सप्तशती
(घ) बिहारी सतसई

(95) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन रीतिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) भागवत धर्म के प्रचार तथा प्रसार के परिणामस्वरूप भक्ति आन्दोलन का सूत्रपात हुआ था
(ख) वीरगाथाओं की रचना प्रवृत्ति की प्रधानता थी
(ग) सामान्य रूप से श्रृंगारप्रधान लक्षण-ग्रन्थों की रचना हुई।
(घ) गुरु और गोविन्द की महत्ता का प्रतिपादन हुआ

(96) निम्नलिखित में रीतिमुक्त कवि कौन हैं ?
(क) महाकवि देव
(ख) आलम
(ग) मतिराम
(घ) पद्माकर

(97) रीतिकाल की निम्नलिखित प्रमुख प्रवृत्तियों में से कौन-सी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है ?
(क) राज-प्रशस्ति
(ख) श्रृंगारिकता
(ग) रीति निरूपण
(घ) नीति

(98) निम्नलिखित कवियों में से रीतिकाल का कवि कौन नहीं है ?
(क) घनानन्द
(ख) मतिराम
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) पद्माकर

(99) ‘कवितावर्धिनी’ साहित्यिक संस्था की स्थापना की थी [2016]
(क) जयशंकर प्रसाद ने
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी ने।
(ग) महादेवी वर्मा ने
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने।

(100) भारतेन्दु युग की रचना है [2010]
(क) प्रेम-माधुरी
(ख) कामायनी
(ग) निरुपमा
(घ) युगवाणी

(101) ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ पत्रिका के सम्पादक थे–
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(102) साहित्य सुधानिधि’ के सम्पादक हैं [2013]
(क) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(103) ‘हरिऔध’ का जन्म-स्थान है [2013]
(क) एबटाबाद
(ख) निजामाबाद
(ग) काशी
(घ) फर्रुखाबाद

(104) मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक काल के किस युग से सम्बन्धित हैं ?
(क) शुक्ल युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादी युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(105) मैथिलीशरण गुप्त का प्रथम काव्य-संग्रह है [2012]
(क) अनद्य
(ख) भारत भारती
(ग) पंचवटी
(घ) सिद्धराज

(106) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ किस युग के कवि हैं ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) प्रगतिवाद युग
(ग) द्विवेदी युग
(घ) छायावाद युग

(107) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ द्विवेदी युग से सम्बन्धित है ?
(क) कामायनी
(ख) पल्लव
(ग) साकेत
(घ) यामा

(108) निम्नलिखित में से द्विवेदी युग की रचना है [2018]
(क) कामायनी
(ख) तार-सप्तक
(ग) प्रिय-प्रवास
(घ) ग्राम्या

(109) द्विवेदी युग में लिखी गयी रचना है
(क) सान्ध्यगीत
(ख) गीतावली
(ग) पंचवटी
(घ) कवि प्रिया

(110) द्विवेदी युग का महाकाव्य नहीं है [2013]
(क) प्रियप्रवास
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) द्वापर

(111) श्रृंगार के पूर्ण बहिष्कार से सौन्दर्य को स्रोत सूख गया था
(क) भारतेन्दु युग में
(ख) द्विवेदी युग में
(ग) छायावाद युग में
(घ) रीतिकाल में

(112) ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’—यह प्रसिद्ध पंक्ति किस काल की देन है ?
(क) छायावादोत्तर काल
(ख) भारतेन्दु काल
(ग) छायावादी काल
(घ) रीतिकाल

(113) हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल’ का सूत्रपात किस शासन-काल में हुआ ?
(क) स्व-शासन-काल
(ख) ब्रिटिश शासन-काल
(ग) मुगल शासन-काल
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

(114) हिन्दी साहित्य में आधुनिकता का प्रवर्तक साहित्यकार किसे माना जाता है ?
(क) भूषण
(ख) भारतेदु हरिश्चन्द्र
(ग) मतिराम
(घ) गंग कवि

(115) हिन्दी जागरण के अग्रदूत थे-
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) मुंशी प्रेमचन्द

(116) निम्नांकित में से कौन-सी रचना भारतेन्दु युग में लिखी गयी है ?
(क) प्रेममाधुरी
(ख) कामायनी
(ग) निरुपमा
(घ) युगवाणी

(117) निम्नलिखित में से उस ग्रन्थ का नाम लिखिए जो ‘हरिऔध’ जी का नहीं है
(क) चोखे चौपदे
(ख) वैदेही वनवास
(ग) चित्राधार
(घ) प्रियप्रवास

(118) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावादी नहीं है ? [2011]
(क) महादेवी वर्मा
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(119) निम्नलिखित में से छायावादयुगीन कवि हैं [2011, 17]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर
(ग) रामधारीसिंह ‘दिनकर’
(घ) कबीरदास

(120) निम्नलिखित में से कौन-सा छायावादी कवि है?
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला‘
(ख) भूषण
(ग) बिहारी
(घ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

(121) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन छायावाद से सम्बन्धित है ?
(क) सौन्दर्य का स्रोत सूख गया था
(ख) ब्रजभाषा का एकछत्र साम्राज्य था।
(ग) सामाजिक समस्याओं का चित्रण हुआ
(घ) मानव की अन्तरात्मा के सौन्दर्य का उद्घाटन हुआ

(122) छायावाद युग का समय कब से कब तक माना जाता है?
(क) 1938-1943 ई०
(ख) 1868-1900 ई०
(ग) 1919-1938 ई०
(घ) 1900-1922 ई०

(123) ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से विभूषित किया गया है [2010]
या
राष्ट्रकवि का सम्मान मिला है। [2018]
(क) रामकुमार वर्मा को
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को
(ग) महादेवी वर्मा को
(घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ को

(124) छायावादी कविता के ह्रास का सबसे बड़ा कारण था-
(क) भक्ति-भावना
(ख) विदेशी शासन के दमन-चक्र की पीड़ा
(ग) नारी को भोग्य सम्पत्ति का रूप देना
(घ) लक्षण ग्रन्थों की रचना

(125) छायावादी काव्य की विशेषता नहीं है-
(क) रहस्यवाद की प्रधानता
(ख) स्वदेश प्रेम की अभिव्यक्ति
(ग) मानवतावादी दृष्टिकोण
(घ) व्यक्तिवादी भावना एवं अतिशय भावुकता

(126) छायावाद की मुख्य विशेषता है– [2010, 11]
(क) प्रकृति-चित्रण
(ख) युद्धों का वर्णन
(ग) यथार्थ-चित्रण
(घ) भक्ति की प्रधानता

(127) ‘छायावाद’ की विशेषता है
(क) इतिवृत्तात्मकता
(ख) शृंगारिक भावना
(ग) सौन्दर्य एवं प्रेम
(घ) उपदेशात्मक वृत्ति

(128) छायावादी कवि हैं– [2010]
(क) सुमित्रानन्दन पन्त
(ख) नागार्जुन
(ग) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

(129) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावादी है ? [2009]
(क) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(ख) श्रीधर पाठक
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) मैथिलीशरण गुप्त

(130) प्रकृति के सुकुमार कवि कहलाते हैं [2011]
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा

(131) छायावादी काव्य की वृहत्-त्रयी के रचनाकार नहीं हैं [2012]
(क) प्रसाद
(ख) पन्त
(ग) निराला
(घ) महादेवी

(132) ‘प्रसाद’ का काव्य प्रवृत्ति-निवृत्ति मिश्रित है [2013]
(क) ‘लहर’ में
(ख) “आँसू’ में
(ग) ‘झरना’ में
(घ) ‘कामायनी’ में

(133) कौन-सा नया अलंकार छायावाद की देन है ?
(क) अनुप्रास
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) सन्देह
(घ) मानवीकरण

(134) कौन-सा कवि छायावाद के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला
(ग) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर
(घ) महादेवी वर्मा

(135) आधुनिक युग की मीरा हैं [2013]
(क) महादेवी वर्मा
(ख) सुभद्राकुमारी चौहान
(ग) सुमित्रा कुमारी सिन्हा
(घ) इनमें से कोई नहीं

(136) इतिवृत्तात्मकता की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप किस वाद का प्रादुर्भाव हुआ ?
(क) मानवतावाद
(ख) छायावाद
(ग) प्रगतिवाद
(घ) प्रयोगवाद

(137) ‘पन्त’ जी के उस काव्य-ग्रन्थ का नाम लिखिए जिसमें उनकी सांस्कृतिक एवं दार्शनिक विचारधारा व्यक्त हुई है-
(क) चिदम्बरा
(ख) उत्तरा
(ग) पल्लव
(घ) लोकायतन

(138) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कौन-सी पत्रिका प्रकाशित की थी ?
(क) कविवचन सुधा
(ख) सरस्वती
(ग) कल्पना
(घ) ज्ञानोदय

(139) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना छायावाद युग में लिखी गयी है ?
(क) प्रेम-माधुरी
(ख) उद्धव शतक
(ग) चित्राधार
(घ) सूरसारावली

(140) ‘कामायनी’ और ‘झरना’ किस युग की रचनाएँ हैं ? [2011, 13]
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादी युग
(घ) प्रगतिवादी युग

(141) ‘कामायनी’ महाकाव्य में सर्गों की संख्या है [2013, 14]
(क) नौ
(ख) बारह
(ग) पन्द्रह
(घ) सत्रह

(142) निम्नलिखित में कौन-सा कथन छायावाद से सम्बन्धित है ?
(क) इस काव्य में लौकिक वर्णनों के माध्यम से अलौकिकता की व्यंजना की गयी है।
(ख) धार्मिक क्षेत्र में रूढ़िवाद और बाह्याडम्बर का विरोध किया गया है।
(ग) इस काव्य में मूलतः सौन्दर्य और प्रेम-भावना मुखरित हुई है।
(घ) इस काव्य में भाव-पक्ष की अपेक्षा कला-पक्ष की प्रधानता है।

(143) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आधुनिक काल से सम्बन्धित है ?
(क) हिन्दी काव्य कवियों के स्वच्छन्द और समर्थ व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है।
(ख) विलास के साधनों से हीन वर्ग कर्म एवं आचार के स्थान में अन्धविश्वासी हो चला था
(ग) साहित्य मानव-समाज की भावनात्मक स्थिति और गतिशील चेतना की अभिव्यक्ति है।
(घ) उपर्युक्त सभी

(144) निम्नलिखित उद्धरणों में कौन-सा उद्धरण आधुनिक काल से सम्बन्धित है ?
(क) जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है।
(ख) लौकिक (देशभाषा) साहित्य देशभाषा डिंगल में उपलब्ध होता है।
(ग) हिन्दी साहित्य में मार्क्स के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के दर्शन को प्रगतिवाद और फ्रायड के मनोविश्लेषण को प्रयोगवाद की संज्ञा दी गयी।
(घ) रहस्यवाद के दर्शन से इस धारा के अधिकांश कवियों का भक्त कवियों में अन्तर्भाव हो जाता है।

(145) “विदेशी सत्ता प्रतिष्ठित हो जाने के कारण देश की जनता में गौरव, गर्व और उत्साह का अवसर न रह गया था।” यह कथन निम्नलिखित लेखकों में से किस लेखक का है ?
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा
(घ) डॉ० नगेन्द्र

(146) ‘वह तोड़ती पत्थर’ नामक कविता किस प्रकार की है ?
(क) प्रयोगवादी
(ख) रीतिकालीन
(ग) द्विवेदीयुगीन
(घ) प्रगतिवादी

(147) प्रगतिवादी कवि नहीं है [2010]
(क) शिवमंगल सिंह सुमन
(ख) रामविलास शर्मा
(ग) नागार्जुन
(घ) भवानीप्रसाद मिश्र

(148) प्रगतिवादी कवि कौन है ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) पाल भसीन
(ग) नागार्जुन
(घ) प्रभाकर माचवे

(149) काव्य में हालावाद के प्रवर्तक हैं
(क) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) हरिवंश राय बच्चन’

(150) निम्नलिखित में प्रगतिवाद की कौन-सी समयावधि मान्य है ? [2009]
(क) 1900 ई० से 1918 ई०
(ख) 1918 ई० से 1936 ई०
(ग) 1936 ई० से 1943 ई०
(घ) 1943 ई० से 1953 ई०

(151) ‘काव्य जगत् में व्याप्त प्राचीन रूढ़ियों और मान्यताओं का स्पष्ट विरोध’ तथा काव्य के ‘मानवतावाद की प्रधानता’ किस काल की मुख्य विशेषता है ?
(क) द्विवेदी काल
(ख) प्रगतिवादी काल
(ग) छायावादी काल
(घ) प्रयोगवादी काल

(152) निम्नलिखित में छायावादोत्तर कवि कौन है ?
(क) हरिऔध
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) अज्ञेय

(153) ‘नयी कविता’ का शुभारम्भ हुआ [2012, 13]
(क) सन् 1954 में
(ख) सन् 1940 में
(ग) सन् 1950 में
(घ) सन् 1947 में

(154) नयी कविता की आधारभूत विशेषता है-
(क) आध्यात्मिक छाया-दर्शन
(ख) श्रृंगार की प्रधानता
(ग) किसी भी दर्शन से बँधी हुई नहीं है।
(घ) लाक्षणिकता

(155) किसी भी दर्शन के साथ बँधी हुई नहीं है-
(क) छायावादी कविता
(ख) नयी कविता
(ग) प्रगतिवादी कविता
(घ) रीतिकालीन कविता

(156) ‘कनुप्रियां’ किस युग से सम्बन्धित रचना है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) शुक्ल युग
(ग) छायावादी युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(157) प्रयोगवादी काव्यधारा के जनक (प्रवर्तक) हैं [2011, 12]
(क) ‘अज्ञेय’
(ख) “दिनकर’
(ग) “मुक्तिबोध’
(घ) “धूमिल’

(158) निम्नलिखित में कौन प्रगतिवादी कवि नहीं है ?
(क) प्रभाकर माचवे
(ख) मुक्तिबोध
(ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
(घ) अज्ञेय

(159) प्रयोगवाद काव्य के क्षेत्र में—
(क) चिरकाल तक रहा
(ख) शीघ्र ही समाप्ति की ओर चला गया
(ग) बहुत प्रसिद्ध हुआ
(घ) अधिक सफल नहीं हुआ।

(160) घोर वैयक्तिकता, अति यथार्थवाद, अति बौद्धिकता तथा सभी पुरानी मान्यताओं के विरुद्ध पूर्ण विद्रोह किस काव्यधारा की विशेषताएँ हैं ?
(क) छायावादी काव्यधारा
(ख) प्रगतिवादी काव्यधारा
(ग) प्रयोगवादी काव्यधारा
(घ) इनमें से कोई नहीं

(161) “प्रयोग सभी कालों के कवियों ने किया है। ::::किसी एक काल में किसी विशेष दिशा में प्रयोग करने की प्रवृत्ति स्वाभाविक ही है।” यह वक्तव्य निम्नलिखित रचनाकारों में किसका है ?
(क) निराला
(ख) अज्ञेय
(ग) प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा

(162) निम्नलिखित में से प्रयोगवादी कवि कौन है ?
(क) भूषण
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) बिहारी
(घ) अज्ञेय

(163) ‘अज्ञेय’ ने तार सप्तक’ का प्रकाशन किया [2009, 10, 11, 13, 14]
या
‘तारसप्तक’ का प्रकाशन वर्ष है– [2015, 16,17, 18]
(क) सन् 1947 में
(ख) सन् 1943 में
(ग) सन् 1950 में
(घ) सन् 1931 में

(164) तार सप्तक’ के सम्पादक हैं [2010, 13, 15, 17]
(क) विद्यानिवास मिश्र
(ख) मुक्तिबोध
(ग) अज्ञेय
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी

(165) तार सप्तक से सम्बन्धित हैं [2009]
(क) रामविलास शर्मा
(ख) नरेन्द्र शर्म
(ग) भवानीप्रसाद मिश्र
(घ) धर्मवीर भारती

(166) ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना कब हुई ? [2012, 18]
(क) सन् 1943 में
(ख) सन् 1954 में
(ग) सन् 1938 में
(घ) सन् 1936 में

(167) निम्नलिखित में कौन प्रेमाश्रयी शाखा का कवि नहीं है ?
(क) जायसी
(ख) बिहारीलाल
(ग) कुतुबन
(घ) मंझन

(168) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भक्तिकाल से सम्बन्धित है ?
(क) सामाजिक दृष्टि से यह काल घोर अध:पतन का काल था
(ख) सिद्धों की वाममार्गी योग साधना की प्रतिक्रिया से नायपंथियों की हठयोग साधना आरम्भ हुई
(ग) जीवन का समन्वयवादी एवं मर्यादावादी दृष्टिकोण ही तुलसी की सबसे बड़ी देन है।

(169) विनय-पत्रिका किस भाषा की कृति है ? [2010]
(क) अवधी
(ख) ब्रजभाषा
(ग) खड़ी बोली हिन्दी
(घ) भोजपुरी

(170) कृष्णकाव्य-धारा के प्रतिनिधि कवि हैं [2011]
(क) मीरा
(ख) रसखान
(ग) परमानन्ददास
(घ) सूरदास

(171) कृष्णकाव्य-धारा के कवि नहीं हैं
(क) नन्ददास
(ख) चतुर्भुजदास
(ग) सूरदास
(घ) लालदास

(172) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि ‘कृष्णभक्ति धारा’ से सम्बन्धित नहीं है ? (2009)
(क) सूरदास
(ख) नाभादास
(ग) कृष्णदास
(घ) नन्ददास

(173) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना वीरगाथात्मक नहीं है ? [2009]
(क) परमाल रासो
(ख) विद्यापति
(ग) पृथ्वीराज रासो
(घ) बीसलदेव रासो

(174) निम्नलिखित में से कौन-सा भक्तिकाल का काव्य है ?
(क) श्रीरामचरितमानस
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) बीसलदेव रासो

(175) निम्नलिखित कवियों में बल्लभाचार्य के शिष्य कौन हैं ?
(क) रघुराज सिंह
(ख) बिहारीलाल
(ग) भूषण
(घ) कृष्णदास

(176) ‘भक्ति-आन्दोलन’ का श्रेय जाता है [2016]
(क) वल्लभाचार्य को
(ख) शंकराचार्य को
(ग) रामानुजाचार्य को
(घ) निम्बार्काचार्य को

(177) निम्नलिखित में से रीतिकाल का काव्य है [2009]
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) रामचन्द्रिका
(ग) कामायनी
(घ) विनय पत्रिका

(178) निम्नलिखित में कौन-सा कवि ‘रीतिमुक्त’ काव्यधारा का है ?
(क) चिन्तामणि
(ख) केशव
(ग) ठाकुर
(घ) देव

(179) मैथिलीशरण आधुनिक काल के किस युग से सम्बन्धित हैं ?
(क) शुक्लयुग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(180) निम्नलिखित में कौन-सी महादेवी वर्मा की रचना है ?
(क) धूप के धान
(ख) चाँद का मुँह टेढ़ा
(ग) सान्ध्य गीत
(घ) पल्लव

(181) शोषण का विरोध एवं शोषकों के प्रति घृणा किस काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ मानी गयी हैं?
(क) छायावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) प्रयोगवाद
(घ) नयी कविता

(182) नयी कविता के कवि हैं [2011]
(क) नरेन्द्र शर्मा
(ख) अज्ञेय
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(183) ज्ञानाश्रयी काव्यधारा के कवि नहीं हैं [2014]
(क) कबीरदास
(ख) मलूकदास
(ग) नन्ददास
(घ) रैदास

(184) अमीर खुसरो कवि हैं [2014]
(क) आदिकाल के
(ख) भक्तिकाल के
(ग) रीतिकाल के
(घ) आधुनिककाल के

(185) ‘रीतिकाल’ को ‘ श्रृंगारकाल’ नाम दिया है [2014]
या
रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के जिस काल को ‘रीतिकाल’ कहा है, उसे ‘ श्रृंगार काल’ नाम दिया है [2015, 18]
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
(ख) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ग) आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने।
(घ) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने

(186) रीतिकालीन कवि हैं [2014]
(क) मीराबाई
(ख) रसखान
(ग) द्विजदेव
(घ) विद्यापति

(187) ”हिन्दी साहित्य के हजार वर्षों में कबीर जैसा व्यक्तित्व लेकर कोई लेखक उत्पन्न नहीं हुआ।” यह कथन है [2014]
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का
(ख) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का
(ग) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का
(घ) आचार्य श्यामसुन्दर दास का

(188) रामचन्द्र शुक्ल ने जिस काल को ‘वीरगाथाकाल’ कहा है, उसे आदिकाल कहा है-[2014]
(क) राहुल सांकृत्यायन ने
(ख) हजारीप्रसाद द्विवेदी ने
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(घ) डॉ० धीरेन्द्र वर्मा ने

(189) ‘दूसरा सप्तक’ के कवि हैं [2014]
(क) रामविलास शर्मा
(ख) गिरिजा कुमार माथुर
(ग) केदारनाथ सिंह
(घ) भवानीप्रसाद मिश्र

(190) खड़ी बोली’ का प्रथम महाकाव्य है [2014]
(क) वैदेही वनवास
(ख) प्रिय प्रवास
(ग) साकेत
(घ) कामायनी

(191) ‘रामभक्ति शाखा’ के कवि नहीं हैं [2014]
(क) तुलसीदास
(ख) अग्रदास
(ग) चतुर्भुजदास
(घ) नाभादास

(192) ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है [2014]
(क) सुमित्रानन्दन पन्त को
(ख) मैथिलीशरण गुप्त को
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को
(घ) महादेवी वर्मा को

(193) ‘बसुआ गोविन्दपुर’ में जन्म हुआ था [2014]
(क) रत्नाकर का
(ख) सूरदास का
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का
(घ) बिहारी का

(194) सूकर खेत’ स्थान सम्बन्धित है [2014]
(क) कबीरदास से
(ख) सूरदास से
(ग) तुलसीदास से।
(घ) केशवदास से

(195) ‘आदिकाल’ का नाम ‘अपभ्रंश काल दिया है [2014]
(क) मिश्रबन्धु ने
(ख) राहुल सांकृत्यायन ने
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने।

(196) भवानीप्रसाद मिश्र कवि-रूप में संगृहीत हैं [2015]
(क) तारसप्तक में
(ख) दूसरा सप्तक में
(ग) तीसरा सप्तक में
(घ) चौथा सप्तक में

(197) हिन्दी साहित्य के ‘आदिकाल’ के लिए बीज-वपन काल’ नाम दिया है [2015, 16]
(क) रामचन्द्र शुक्ल ने
(ख) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(ग) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) डॉ० मोहन अवस्थी ने।

(198) चिन्तामणि कवि हैं [2016]
(क) रीतिसिद्ध वर्ग के
(ख) रीतियुक्त वर्ग के
(ग) रीतिरहित वर्ग के
(घ) रीतिबद्ध वर्ग के

(199) मैथिलीशरण गुप्त की रचना में राष्ट्रप्रेम की भावना परिलक्षित होती है– [2016]
(क) भारत-भारती में
(ख) जयद्रथ वध में
(ग) साकेत में
(घ) पंचवटी में

(200) ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ काव्य कृति है [2016]
(क) गजानन माधव मुक्तिबोध की
(ख) रामधारीसिंह ‘दिनकर’ की
(ग) गिरिजाकुमार माथुर की
(घ) धर्मवीर भारती की

(201) कला और बूढ़ा चाँद’ पर सुमित्रानन्दन पन्त को पुरस्कार प्राप्त हुआ [2016, 17]
(क) साहित्य अकादमी
(ख) ज्ञानपीठ
(ग) मंगलाप्रसाद
(घ) सोवियत लैण्ड नेहरू

(202) ‘अलंकार-रत्नाकर’ के लेखक हैं [2016]
(क) याकूब खाँ
(ख) जसवन्त सिंह
(ग) दलपति राय वंशीधर
(घ) भिखारीदास

(203) मध्वाचार्य का वाद हैं [2016]
(क) द्वैतवाद
(ख) अद्वैतवाद
(ग) द्वैताद्वैतवाद
(घ) शुद्धाद्वैतवाद

(204) ‘मुकरियाँ’ रचना है (2016)
(क) मधुकर कवि की
(ख) कुशल राय की
(ग) अमीर खुसरो की
(घ) भट्ट केदार की

(205) ‘प्रयोगवाद’ को ‘नई कविता’ की संज्ञा दी [2016]
(क) गिरिजाकुमार माथुर
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) अज्ञेय
(घ) धर्मवीर भारती

(206) आदिकाल को वीरगाथा काल का नामकरण किया [2016]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी ने।
(ख) डॉ० रामकुमार वर्मा ने
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
(घ) मिश्रबन्धु ने

(207) प्रेम माधुरी के रचयिता हैं [2016]
(क) प्रतापनारायण मिश्र
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) लाला श्री निवासदास
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(208) मैथिलीशरण गुप्त की रचना है– [2016]
(क) प्रिय-प्रवास
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) लोकापतन

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UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name गद्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो
Number of Questions 127
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi गद्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो

पत्र/पत्रिका विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘प्रजाहितैषी’ नाम के पत्र का प्रकाशन/सम्पादन किया– [2013]
(क) राजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द ने
(ख) राजा लक्ष्मण सिंह ने
(ग) बाबू नवीनचन्द्र राय ने।
(घ) सुखदयाल शास्त्री ने

(2) भारतेन्दु युग में प्रकाशित ‘आनन्द कादम्बिनी’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे [2009, 10, 11, 15]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
(ग) राय कृष्णदास
(घ) धर्मवीर भारती

(3) बालकृष्ण भट्ट द्वारा सम्पादित पत्रिका है [2009, 11, 12, 13]
(क) हिन्दी प्रदीप
(ख) इन्दु
(ग) माधुरी
(घ) प्रभा

(4) हिन्दी दीप्ति-प्रकाश’ नामक पत्रिका का सम्पादन किया-
(क) प्रतापनारायण मिश्र ने
(ख) कार्तिकप्रसाद खत्री ने
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने
(घ) राय कृष्णदास ने

(5) ‘इन्दु’, ‘सुदर्शन’, ‘समालोचक’, ‘प्रभा’, ‘मर्यादा’ और ‘माधुरी’ पत्रिकाएँ किस युग में प्रकाशित हुई ?
(क) भारतेन्दु युग में
(ख) द्विवेदी युग में
(ग) छायावाद युग में
(घ) छायावादोत्तर युग में

(6) ‘ब्राह्मण’ पत्र के सम्पादक हैं [2009, 12, 13, 14]
(क) बालकृष्ण भट्ट
(ख) राधाचरण गोस्वामी
(ग) प्रतापनारायण मिश्र
(घ) पं० लल्लूलाल

(7) ‘कवि-वचन-सुधा’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे-
(क) प्रतापनारायण मिश्र
(ख) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) श्यामसुन्दर दास
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द

(8) ‘विशाल-भारत’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे–
(क) प्रेमचन्द
(ख) श्रीराम शर्मा
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) प्रतापनारायण मिश्र

(9) ‘हंस’ नामक पत्रिका के सम्पादक थे [2010, 14, 16, 17, 18]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) बालकृष्ण भट्ट
(घ) मुंशी प्रेमचन्द

(10) महावीरप्रसाद द्विवेदी द्वारा सम्पादित पत्रिका है [2009, 13]
(क) प्रदीप
(ख) इन्दु
(ग) प्रभा
(घ) सरस्वती

(11) निम्नलिखित में से कौन पत्रिका नहीं है? [2011]
(क) इन्दु
(ख) भारत दुर्दशा
(ग) सरस्वती
(घ) आनन्द कादम्बिनी

(12) ‘दिनकर के पत्र का प्रकाशन-वर्ष है [2012, 16]
(क) 1970
(ख) 1977
(ग) 1981
(घ) 1991

(13) ‘सरस्वती’ पत्रिका के प्रथम सम्पादक हैं [2014, 16]
(क) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) हरदेव बाहरी

(14) हिन्दी प्रदीप’ पत्र का सम्पादन होता था (2015)
(क) इलाहाबाद से
(ख) वाराणसी से
(ग) कानपुर से
(घ) दिल्ली से

(15) ‘ज्ञानोदय’ पत्रिका के सम्पादक थे [2016]
(क) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ख) पं० महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ग) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर
(घ) रामवृक्ष बेनीपुरी

उत्तर (1) ख, (2) ख, (3) क, (4) ख, (5) ख, (6) ग, (7) घ, (8) ख, (9) घ, (10) घ, (11) ख, (12) ग,
(13) खे, (14) के, (15) ग।

नादळ विथा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘रणधीर’ और ‘प्रेम मोहिनी’ नाट्य कृतियों के नाटककार हैं-
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) प्रतापनारायण मिश्र
(ग) बालकृष्ण भट्ट
(घ) लाला श्रीनिवास दास

(2) ‘स्वर्णविहीन’, ‘रक्षाबन्धन’, ‘प्रतिशोध’ के रचयिता हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) हरिकृष्ण ‘प्रेमी’
(ग) रामकुमार वर्मा
(घ) लक्ष्मीनारायण मिश्र

(3) संन्यासी’ और ‘मुक्ति का रहस्य’ के रचयिता हैं-
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) हरिकृष्ण ‘प्रेमी
(ग) रामकुमार वर्मा
(घ) लक्ष्मीनारायण मिश्र

(4) निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी रचना नाटक है ?
(क) नमक का दारोगा
(ख) गोदान
(ग) आखिरी चट्टान तक
(घ) राजमुकुट

(5) सूतपुत्र’ नाटक के रचनाकार हैं-
(क) डॉ० गंगासहाय ‘प्रेमी
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) विष्णु प्रभाकर
(घ) हरिकृष्ण प्रेमी

(6) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना नाटक है? [2009]
(क) सन्नाटा
(ख) निन्दा रस
(ग) गरुड़ध्वज
(घ) राष्ट्र का स्वरूप

(7) निम्नलिखित में से नाटक है [2011]
(क) उसने कहा था
(ख) कलम का सिपाही
(ग) चन्द्रगुप्त
(घ) आँसू

(8) निम्नलिखित में से नाटककार हैं [2013]
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) मोहन राकेश
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) महादेवी वर्मा

(9) निम्नलिखित में से नाटक है [2014]
(क) त्रिशंकु
(ख) आत्मनेपद
(ग) विपथगा।
(घ) उत्तर प्रियदर्शी

(10) हिन्दी का प्रथम नाटक है [2014]
(क) सती-प्रताप
(ख) अजातशत्रु
(ग) स्कन्दगुप्त
(घ) नहुष

(11) स्कन्दगुप्त नाटक के लेखक हैं [2015]
(क) प्रेमचन्द
(ख) लक्ष्मीनारायण मिश्र
(ग) जयंशकर प्रसाद
(घ) धर्मवीर भारती

(12) श्री चन्द्रावली’ नामक नाटक के लेखक हैं [2016]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) हरिकृष्ण प्रेमी
(घ) श्रीनिवास दास

(13) ‘मुद्रा राक्षस’ नामक नाटक के रचनाकार हैं [2016]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) मोहन राकेश
(ग) धमवीर भारती
(घ) राहुल सांकृत्यायन

उत्तर (1) घ, (2) ख, (3) घ, (4) घ, (5) क, (6) ग, (7) ग, (8) ख, (9) घ, (10) घ, (11) ग, (12) क,
(13) के।।

एकांकी विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘एक बूंट’ को हिन्दी का प्रथम एकांकी मानते हैं। इसके रचयिता हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) जैनेन्द्र कुमार
(ग) रामकुमार वर्मा
(घ) उदयशंकर भट्ट

(2) ‘पृथ्वीराज की आँखें’ एकांकी संग्रह के एकांकीकार हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) जैनेन्द्र कुमार
(ग) रामकुमार वर्मा
(घ) सेठ गोविन्ददास

(3) ‘बहू की विदा’ एकांकी के रचयिता हैं
(क) सेठ गोविन्ददास
(ख) हरिकृष्ण प्रेमी
(ग) मोहन राकेश
(घ) विनोद रस्तोगी

(4) निम्नलिखित में से कौन एकांकीकार नहीं हैं ?
(क) उपेन्द्रनाथ अश्क’
(ख) विष्णु प्रभाकर
(ग) लक्ष्मीनारायण मिश्र
(घ) सीताराम वर्मा

(5) हिन्दी एकांकी का विकास किस युग से माना जाता है ? [2008]
(क) छायावाद युग
(ख) छायावादोत्तर युग
(ग) द्विवेदी युग
(घ) भारतेन्दु युग

(6) हिन्दी एकांकी का जनक माना जाता है– [2017]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा
(घ) उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’

उतर (1) क, (2) ग, (3) घे, (4) घ, (5) ख, (6) ग।

कहानी विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) हिन्दी की प्रथम कहानी के नाम से जानी जाती है-
(क) दुलाईवाली
(ख) इन्दुमती
(ग) प्लेग की चुडैल
(घ) ग्यारह वर्ष का समय

(2) आधुनिक ढंग की कहानियों को प्रारम्भ किस पत्रिका के प्रकाशन काल से माना जाता है ?
(क) सरस्वती
(ख) माधुरी
(ग) इन्दु
(घ) मर्यादा

(3) हिन्दी गद्य की कालजयी कहानी ‘उसने कहा था’ के लेखक हैं-
(क) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी
(ख) प्रेमचन्द
(ग) सुदर्शन
(घ) जयशंकर प्रसाद

(4) कहानियों के क्षेत्र में सर्वाधिक चर्चित कहानीकार प्रेमचन्द के कहानियों के संकलन प्रकाशित हुए
(क) क्षीरसागर’ शीर्षक से
(ख) मानसरोवर’ शीर्षक से
(ग) “मानसागर’ शीर्षक से
(घ) कथा-संग्रह’ शीर्षक से

(5) ‘ग्राम’, ‘आकाशदीप’, ‘गुण्डा’, ‘चित्रमन्दिर’, ‘आँधी’, ‘सलीम’, ‘मधुआ’ आदि कहानियाँ किस कहानीकार द्वारा रचित हैं ? [2010]
(क) भगवतीचरण वर्मा
(ख) उपेन्द्रनाथ अश्क
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) प्रेमचन्द

(6) ‘धर्मयुद्ध’, ‘फूल की चोरी’, ‘चार आने’, ‘अभिशप्त’, ‘कर्मफल’, ‘परदा’, ‘फूलों का कुर्ता’ किस कहानीकार द्वारा रचित प्रसिद्ध कहानियाँ हैं ? [2010]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) यशपाल
(ग) प्रेमचन्द
(घ) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

(7) ‘तीसरी कसम’, ‘पान की बेगम’, ‘रसपिरिया’ किस लेखक की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं ?
(क) फणीश्वरनाथ रेणु
(ख) शिवप्रसाद सिंह
(ग) प्रेमचन्द
(घ) अमरकान्त

(8) ‘रानी केतकी की कहानी’ नामक कहानी विधा की रचना के रचयिता हैं[ 2010, 11, 13, 17]
(क) पं० लल्लूलाल
(ख) मुंशी इंशा अल्ला खाँ
(ग) सदल मिश्र
(घ) रामप्रसाद निरंजनी

(9) पंचलाइट की रचना-विधा है
(क) निबन्ध
(ख) संस्मरण
(ग) कहानी
(घ) आत्मकथा

(10) ‘नमक का दारोगा’ के कहानीकार हैं
(क) जैनेन्द्र कुमार
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) प्रेमचन्द

(11) निम्नलिखित में से कौन-सी कहानी भारतेन्दु के पूर्व की है ?
(क) इन्दुमती
(ख) ग्यारह वर्ष का समय
(ग) रानी केतकी की कहानी
(घ) दुलाईवाली

(12) ‘दुलाईवाली’ किस विधा की रचना है ? [2010]
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) कहानी
(घ) रेखाचित्र

(13) मुंशी प्रेमचन्द ने किस विधा को ‘मानव चरित्र का चित्रमात्र’ कहा है ? [2010]
(क) जीवनी
(ख) उपन्यास
(ग) कहानी
(घ) संस्मरण

(14) ‘हरखू’ पात्र किस कहानी से सम्बन्धित है ? [2012]
(क) बलिदान
(ख) आकाशदीप
(ग) प्रायश्चित्त
(घ) समय

(15) ‘मधुआ’ किस विधा की रचना है ? [2013]
(क) रेखाचित्र
(ख) कहानी
(ग) आत्मकथा
(घ) संस्मरण

(16) ‘जिन्दगी और जोंक’ के लेखक हैं [2014]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) अमरकान्त
(ग) शिवानी
(घ) शिवप्रसाद सिंह

(17) इन्दुमती है [2015]
(क) प्रथम कहानी
(ख) प्रथम उपन्यास
(ग) निबन्ध
(घ) इनमें से कोई नहीं

(18) गद्य-विधा की दृष्टि से ‘वोल्गा से गंगा’ है [2016]
(क) उपन्यास
(ख) कहानी
(ग) आत्मकथा
(घ) संस्मरण

(19) ‘वोल्गा से गंगा’ कहानी संग्रह है [2016]
(क) जैनेन्द्र कुमार का
(ख) यशपाल का
(ग) राहुल सांकृत्यायन का
(घ) प्रेमचन्द का

उत्तर (1) ख, (2) क, (3) क, (4) ख, (5) ग, (6) ख, (7) क, (8) ख, (9) ग, (10) घ, (11) ग, (12) ग,
(13) ग, (14) के, (15) ख, (16) ख, (17) क, (18) ख, (19) (ग)

उपन्यास विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए—

(1) हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास माना जाता है [2008, 13, 14, 17]
(क) परीक्षा-गुरु
(ख) भूतनाथ
(ग) चन्द्रकान्ता
(घ) सेवासदन

(2) ‘भाग्यवती’ को हिन्दी का प्रथम सामाजिक उपन्यास माना जाता है। इसके लेखक थे [2016]
(क) नवीनचन्द्र राय
(ख) गोपालराम गहमरी
(ग) श्रद्धाराम फुल्लौरी
(घ) देवकीनन्दन खत्री

(3) हिन्दी उपन्यासों की विकास-परम्परा का अध्ययन किस लेखक के नाम से किया जाता है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) प्रेमचन्द
(ग) जैनेन्द्र कुमार
(घ) यशपाल

(4) ‘गोदान’, ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’, ‘कर्मभूमि’ किस लेखक की रचनाएँ हैं ? [2009, 13]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) यशपाल
(ग) प्रेमचन्द
(घ) जैनेन्द्र कुमार

(5) ‘कंकाल’ और ‘तितली’ जैसे उपन्यास हिन्दी-साहित्य को किस लेखक ने दिये ? [2010]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(ग) मागार्जुन
(घ) प्रेमचन्द

(6) निम्नलिखित में से कौन उपन्यासकार प्रेमचन्द युग का नहीं है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’
(ग) बालकृष्ण भट्ट
(घ) भगवतीप्रसाद वाजपेयी

(7) निम्नलिखित उपन्यासकारों में से कौन आंचलिक उपन्यासकारों की श्रेणी में आते हैं ?
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) फणीश्वरनाथ ‘रेणु’
(ग) रांगेय राघव
(घ) अमृतलाल नागर

(8) निम्नलिखित में से कौन उपन्यास नहीं है ?
(क) बाणभट्ट की आत्मकथा
(ख) मैला आँचल
(ग) शेखर : एक जीवनी
(घ) संस्कृति के चार अध्याय

(9) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना उपन्यास नहीं है ? [2011]
(क) परीक्षा गुरु
(ख) तितली
(ग) अशोक के फूल
(घ) गबन

(10) ‘परीक्षागुरु’ की रचना-विधा है [2013]
(क) कहानी
(ख) उपन्यास
(ग) नाटक
(घ) जीवनी

(11) ‘गिरती दीवारें’ (उपन्यास) के रचनाकार हैं [2013]
(क) उपेन्द्रनाथ अश्क’
(ख) शिवप्रसाद सिंह
(ग) सही०वा०‘अज्ञेय’
(घ) रामविलास शर्मा

(12) ‘सुनीता’ विधा की दृष्टि से रचना है [2014]
(क) कहानी
(ख) आलोचना
(ग) निबन्ध
(घ) उपन्यास

(13) ‘बलचनमा’ उपन्यास है [2014]
(क) फणीश्वरनाथ रेणु’ का
(ख) नागार्जुन का
(ग) अमृतराय का
(घ) अमरकान्त का

(14) उपन्यास विधा पर आधारित रचना है– [2016]
(क) स्कन्दगुप्त
(ख) गोदान
(ग) अशोक के फूल
(घ) चिन्तामणि

(15) ‘चारुचन्द्र लेख’ विधा है—- [2016]
(क) कहानी
(ख) उपन्यास
(ग) निबन्ध
(घ) नाटक

उत्तर (1) क, (2) ग, (3) ख, (4) ग, (5) क, (6) ग, (7) ख, (8) घे, (9) ग, (10) ख, (11) क, (12) घ,
(13) ख, (14) ख, (15) ख।

निबन्ध विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) निम्नलिखित में से कौन भारतेन्दुयुगीन निबन्धकार नहीं हैं ?
(क) प्रतापनारायण मिश्र
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) बालमुकुन्द गुप्त
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

(2) ‘चिन्तामणि’ निबन्ध-संग्रह में शुक्ल युग के किस निबन्धकार के निबन्ध संकलित हैं? [2013]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) सम्पूर्णानन्द

(3) इनमें से कौन शुक्ल युग के निबन्धकार नहीं हैं ?
(क) वियोगी हरि
(ख) राय कृष्णदास
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) वासुदेवशरण अग्रवाल

(4) श्रीराम शर्मा और राहुल सांकृत्यायन किस युग के निबन्धकार हैं ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) शुक्ल युग
(घ) शुक्लोत्तर युग

(5) ‘अशोक के फूल’ के रचनाकार हैं [2009]
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ख) मोहन राकेश
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(घ) कुबेरनाथ राय

(6) ‘रस-मीमांसा’ के रचयिता हैं-
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) रघुवीर सिंह
(ग) डॉ० नगेन्द्र
(घ) रामचन्द्र शुक्ल

(7) इनमें से कौन शुक्लोत्तर युग के निबन्धकार नहीं हैं ?
(क) डॉ० नगेन्द्र
(ख) रामचन्द्र शुक्ल
(ग) हजारीप्रसाद द्विवेदी .
(घ) नन्ददुलारे वाजपेयी

(8) महादेवी वर्मा, विजयेन्द्र स्नातक और विद्यानिवास मिश्र किस युग के निबन्धकार हैं ?
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) शुक्ल युग
(घ) शुक्लोत्तर युग

(9) निम्नलिखित में से कौन हास्य-व्यंग्य प्रधान निबन्धों के रचनाकार नहीं हैं ?
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ख) श्रीनारायण चतुर्वेदी
(ग) हरिशंकर परसाई
(घ) शरद जोशी

(10) ‘गेहूँ और गुलाब’ की रचना-विधा है–
(क) निबन्ध
(ख) संस्मरण
(ग) डायरी
(घ) आत्मकथा

(11) निबन्ध विधा की रचना है
(क) मेला-झमेला
(ख) भारत-दुर्दशा
(ग) रसज्ञ-रंजन
(घ) आचरण की सभ्यता

(12) ‘राष्ट्र का स्वरूप’ निबन्ध के लेखक हैं [2009, 13]
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ख) सरदार पूर्णसिंह
(ग) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर
(घ) “अज्ञेय

(13) विद्यानिवास मिश्र ने किस प्रकार के निबन्ध अधिक लिखे हैं ? [2009]
(क) ललित
(ख) ऐतिहासिक
(ग) मनोविश्लेषणात्मक निबन्ध
(घ) विश्लेषणात्मक निबन्ध

(14) निबन्ध’ शब्द के अंग्रेजी पर्याय शब्द ‘एसे’ का अर्थ है
(क) प्रयोग
(ख) प्रयास
(ग) प्रबन्ध
(घ) प्रकीर्ण

(15) निम्नलिखित में कौन-सा वर्णनात्मक निबन्ध है ? [2008]
(क) आचरण की सभ्यता
(ख) महाकवि माघ का प्रभात वर्णन
(ग) कुटज
(घ) निन्दा रस

(16) छायावादोत्तर काल के लेखक हैं [2010]
(क) विद्यानिवास मिश्र
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) बाबू गुलाबराय
(घ) श्यामसुन्दर दास

(17) वासुदेवशरण अग्रवाल द्वारा लिखित निबन्ध राष्ट्र का स्वरूप’ किस निबन्ध-संग्रह से लिया गया [2011]
(क) धरती पुत्र
(ख) पृथ्वी-पुत्र
(ग) राष्ट्र-चेतना
(घ) सांस्कृतिक गौरव

(18) निम्नलिखित में से कौन निबन्धकार नहीं है ? [2011]
(क) विद्यानिवास मिश्र
(ख) प्रेमचन्द
(ग) कुबेरनाथ राय
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी

(19) ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ हिन्दी गद्य की विद्या है– [2011]
(क) निबन्ध
(ख) उपन्यास
(ग) आलोचना
(घ) नाटक

(20) अशोक के फूल’ निबन्ध है [2012]
(क) मनोवैज्ञानिक निबन्ध
(ख) ललित निबन्ध
(ग) बुद्धिप्रधान निबन्ध
(घ) ऐतिहासिक निबन्ध

(21) ‘चिन्तामणि’ की गद्य-विधा है [2013, 15]
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) निबन्ध
(घ) कहानी

(22) निबन्ध विधा का सर्वाधिक विकास हुआ [2013]
(क) द्विवेदी युग के
(ख) छायावादी युग के
(ग) भारतेन्दु युग में
(घ) छायावादोत्तर यग में

उत्तर (1) घ, (2) ग, (3) ग, (4) ग, (5) ग, (6) घ, (7) ख, (8) घ, (9) क, (10) क, (11) घ, (12) क,
(13) क, (14) खे, (15) ख, (16) क, (17) ख, (18) ख, (19) क, (20) ख, (21) ग, (22) क

आलोचना विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए–

(1) ‘हिन्दी नवरत्न’ नामक आलोचनात्मक निबन्ध-संग्रह के रचयिता हैं-
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) श्यामसुन्दर दास
(ग) मिश्रबन्धु
(घ) मोहन राकेश

(2) ‘कबीर’ नामक आलोचनात्मक ग्रन्थ के रचयिता हैं [2011]
(क) डॉ० सम्पूर्णानन्द
(ख) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ग) राहुल सांकृत्यायन
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी

(3) निम्नलिखित में से कौन प्रसिद्ध आलोचक हैं ?
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) मुंशी प्रेमचन्द
(घ) जयशंकर प्रसाद

(4) निम्नलिखित में से छायावादोत्तर काल के समालोचक नहीं हैं [2010]
(क) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) डॉ० नगेन्द्र
(ग) बाबू गुलाबराय
(घ) रामविलास शर्मा

(5) त्रिवेणी’ किस विधा की रचना है ? [2011]
(क) निबन्ध
(ख) संस्मरण
(ग) आलोचना
(घ) कहानी

(6) साहित्यलोचन’ गद्य-विधा की रचना है? [2012]
(क) नाटक
(ख) उपन्यास
(ग) आलोचना
(घ) निबन्ध

उत्तर (1) ग, (2) घ, (3) क, (4) ग, (5) ग, (6) ग।

आत्मकथा विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘क्या भूलें क्या याद करूँ’ ( हरिवंशराय बच्चन) किस विधा की रचना है ? [2017, 18]
(क) आत्मकथा
(ख) जीवनी
(ग) संस्मरण
(घ) कहानी

(2) नीड़ का निर्माण फिर’ किस विधा और लेखक की रचना है ?
(क) संस्मरण-सुमित्रानन्दन पन्त
(ख) आत्मकथा-डॉ० हरिवंशराय बच्चन
(ग) जीवनी–सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(घ) रेखाचित्र–महादेवी वर्मा

(3) ‘अपनी खबर’ (पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’) किस विधा की रचना है ? [2010, 15]
(क) निबन्ध
(ख) आत्मकथा
(ग) उपन्यास
(घ) कहानी

(4) ‘मेरी असफलताएँ’ ( बाबू गुलाबराय) किस विधा की रचना है ? [2011, 13, 15]
(क) जीवनी-साहित्य
(ख) कहानी
(ग) डायरी
(घ) आत्मकथा

(5) वियोगी हरि कृत ‘मेरा जीवन प्रवाह’ किस विधा की रचना है ? [2009]
(क) जीवनी
(ख) आत्मकथा,
(ग) संस्मरण
(घ) कहानी

(6) गद्य की किस विधा में काल्पनिक प्रसंगों का स्थान नहीं है? [2012]
(क) कहानी
(ख) उपन्यास
(ग) नाटक
(घ) आत्मकथा

(7) गद्य-विद्या की दृष्टि से आत्मकथा है [2014]
(क) आवारा मसीहा
(ख) कलम का सिपाही
(ग) नीड़ का निर्माण फिर
(घ) शिखर से सागर तक

(8) गुड़िया भीतर गुड़िया’ की विधा है [2016]
(क) कहानी
(ख) आत्मकथा
(ग) रेखाचित्र
(घ) संस्मरण

उत्तर (1) क, (2) ख, (3) ख, (4) घ, (5) ख, (6) घ, (7) ग, (8) ख।।

जीवनी विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘आवारा मसीहा’ (शरत्चन्द्र की जीवनी) के रचयिता कौन हैं ? (2010, 12, 13, 16, 17]
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) रांगेय राघव
(ग) विष्णु प्रभाकर
(घ) राहुल सांकृत्यायन

(2) ‘कलम का सिपाही’ (प्रेमचन्द की जीवनी) के रचयिता कौन हैं ? [2011, 18]
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) रांगेय राघव
(ग) अमृतराय
(घ) राहुल सांकृत्यायन

(3) निराला की साहित्य-साधना’ (सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ की जीवनी) के लेखक हैं—
(क) रामविलास शर्मा
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) शान्ति जोशी
(घ) अमृतराय

(4) ‘मनीषी की लोकयात्रा’ ( गोपीनाथ कविराज की जीवनी) के लेखक हैं
(क) रामविलास शर्मा
(ख) भगवतीप्रसाद सिंह
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) रामनरेश त्रिपाठी

(5) ‘आवारा मसीहा’ है (2015)
(क) आत्मकथा
(ख) जीवनी
(ग) उपन्यास
(घ) कहानी

उत्तर (1) ग, (2) ग, (3) क, (4) खे, (5) ख।

संस्मरण/रेखाचित्र विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी रचना ‘रेखाचित्र’ है ?
(क) नीरजा
(ख) जयसन्धि
(ग) स्मृति की रेखाएँ
(घ) बिखरे फूल

(2) निम्नलिखित में से कौन-सी रचना देवेन्द्र सत्यार्थी की, रेखाचित्र विधा की रचना नहीं है?
(क) रेखाएँ बोल उठीं
(ख) सौन्दर्य बोध
(ग) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(घ) लाल तारा

(3) ‘पथ के साथी’ की रचना-विधा है [2009]
(क) कहानी
(ख) जीवनी
(ग) आत्मकथा
(घ) संस्मरण

(4) ‘राबर्ट नर्सिंग होम में रचना-विधा की दृष्टि से है
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) रेखाचित्र
(घ) रिपोर्ताज

(5) ‘माटी हो गई सोना’ किस विधा की रचना है ? [2009]
(क) उपन्यास
(ख) नाटक
(ग) रेखाचित्र
(घ) संस्मरण

(6) ‘मेरे पिताजी’ संस्मरण के लेखक हैं [2012]
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ख) हरिशंकर परसाई
(ग) मोहन राकेश
(घ) हजारीप्रसाद द्विवेदी

(7) हिन्दी के रेखाचित्रकार हैं [2016]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) रामकुमार वर्मा
(घ) विष्णु प्रभाकर

उत्तर (1) ग, (2) घ, (3) घ, (4) घ, (5) ग, (6) क, (7) ख।

डायरी विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) ‘डायरी’ विधा का प्रारम्भ युग है
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावाद युग
(घ) छायावादोत्तर युग

(2) ‘मेरी कॉलेज डायरी’ नामक डायरी के लेखक हैं
(क) डॉ० धीरेन्द्र वर्मा
(ख) श्रीराम शर्मा
(ग) जयप्रकाश भारती
(घ) धर्मवीर भारती

(3) ‘डायरी के पन्ने’ नामक डायरी के लेखक हैं-
(क) धर्मवीर भारती
(ख) घनश्याम दास बिड़ला
(ग) सुन्दरलाल त्रिपाठी
(घ) नरदेव शास्त्री ‘वेदतीर्थ

(4) हिन्दी साहित्य में डायरी-लेखन का उद्देश्य है
(क) जीवन-वृत्त
(ख) समाज-सुधार
(ग) आत्मालोचन
(घ) संस्मरण

(5) हिन्दी के प्रथम डायरी लेखक कौन हैं ? (2009)
(क) धीरेन्द्र वर्मा
(ख) इलाचन्द्र जोशी
(ग) शमशेर बहादुर सिंह
(घ) नरदेव शास्त्री ‘वेदतीर्थ

उत्तर (1) ग, (2) क, (3) ख, (4) ग, (5) घ।

रिपोर्ताज एवं यात्रावृत्त विधा पर आधारित

उचित विकल्प का चयन कीजिए-

(1) रिपोर्ताज विधा का प्रारम्भिक युग है
या
‘रिपोर्ताज’ साहित्य विधा किस युग की देन है ?
(क) द्विवेदी युग
(ख) छायावाद युग
(ग) छायावादोत्तर युग
(घ) भारतेन्दु युग

(2) ‘तूफानों के बीच’ किस विधा और लेखक की रचना है ?
(क) संस्मरण-रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) गद्यगीत–राय कृष्णदास
(ग) रेखाचित्र—महादेवी वर्मा
(घ) रिपोर्ताज-डॉ० रांगेय राघव

(3) रिपोर्ताज विधा की रचना नहीं है-
(क) लक्ष्मीपुरा
(ख) पहाड़ों में प्रेममयी संगीति
(ग) युद्ध यात्रा
(घ) दैनन्दिनी

(4) हिन्दी में रिपोर्ताज विधा का प्रवर्तक किसे माना जाता है ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) राहुल सांकृत्यायन
(ग) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर
(घ) बाबू गुलाबराय

(5) ‘आखिरी चट्टान तक’ की रचना-विधा है [2012, 16]
(क) आत्मकथा
(ख) रिपोर्ताज
(ग) यात्रावृत्त
(घ) कहानी

(6) ‘मेरी तिब्बत-यात्रा’ यात्रावृत्त किस काल की अमूल्य थाती है ? [2009]
(क) भारतेन्दु युग
(ख) द्विवेदी युग
(ग) छायावादोत्तर युग
(घ) छायावाद युग

(7) ‘रिपोर्ताज’ विधा की सफल प्रस्तुति है [2008, 11]
(क) गेहूं बनाम गुलाब
(ख) आचरण की सभ्यता
(ग) कुटज
(घ) राबर्ट नर्सिंग होम में

(8) रिपोर्ताज के लेखक हैं [2010]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) विष्णुकान्त शास्त्री
(ग) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(घ) डॉ० सम्पूर्णानन्द

(9) ‘बंगाल का अकाल’ विधा है [2016]
(क) डायरी
(ख) रेखाचित्र
(ग) रिपोर्ताज
(घ) भेटवार्ता

उत्तर (1) ग, (2) घे, (3) घ, (4) ग, (5) ग, (6) ग, (7) घे, (8) ख, (9) ग

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UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 1
Chapter Name काव्य-साहित्यका विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Number of Questions 133
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

सामान्य प्रश्न

प्रश्न 1
हिन्दी-काव्य-साहित्य के विविध कालों का समय बताइए।
उत्तर

  1. आदिकाल (वीरगाथाकाल) —– सन् 993 ई० से सन् 1318 ई० तक।
  2. पूर्व-मध्यकाल (भक्तिकाल) – सन् 1318 ई० से सन् 1643 ई० तक।
  3. उत्तर-मध्यकाल (रीतिकाल) – सन् 1643 ई० से सन् 1843 ई० तक।
  4. आधुनिककाल (गद्यकाल) – सन् 1843 ई० से अब तक।

उपर्युक्त काल-विभाजन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के ‘हिन्दी-साहित्य का इतिहास के आधार पर दिया गया है।

प्रश्न 2
कविता के बाह्य तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
कविता के बाह्य तत्त्व हैं—

  1. लय,
  2. तुक,
  3. छन्द,
  4. शब्द-योजना,
  5. चित्रात्मक भाषा तथा
  6. अलंकार

प्रश्न 3
कविता के आन्तरिक तत्त्व कौन-कौन से हैं ?
उत्तर
कविता के आन्तरिक तत्त्व हैं—

  1. अनुभूति की व्यापकता,
  2. कल्पना की उड़ान,
  3. रसात्मकता और सौन्दर्य-बोध तथा
  4. भावों का उदात्तीकरण।

प्रश्न 4 हिन्दी पद्य-साहित्य के इतिहास के विभिन्न कालों के नाम लिखिए।
उत्तर
हिन्दी-पद्य साहित्य के विभिन्न कालों के नाम हैं-

  1. वीरगाथाकाल (आदिकाल),
  2. भक्तिकाल (पूर्व-मध्यकाल),
  3. रीतिकाल (उत्तर-मध्यकाल) एवं
  4. आधुनिककाल।

प्रश्न 5
काव्य के कितने भेद होते हैं ?
उत्तर
काव्य के दो भेद होते हैं–

  1. श्रव्य काव्य और
  2. दृश्य काव्य।

प्रश्न 6
श्रव्य काव्य के कौन-कौन से भेद होते हैं ?
उत्तर
श्रव्य काव्य के दो भेद होते हैं—

  1. प्रबन्ध काव्य और
  2. मुक्तक काव्य।

प्रश्न 7
दृश्य काव्य तथा श्रव्य काव्य का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
दृश्य काव्य का रंगमंच पर अभिनय किया जा सकता है, जब कि श्रव्य काव्य का अभिनय नहीं किया जा सकता। दृश्य काव्य का आनन्द उसे देखकर अथवा सुनकर लिया जा सकता है, जब कि श्रव्य काव्य का आनन्द केवल सुनकर ही लिया जा सकता है।

प्रश्न 8
प्रबन्ध काव्य के कितने भेद होते हैं ?
उत्तर
प्रबन्ध काव्य के दो भेद होते हैं—

  1. महाकाव्य और
  2. खण्डकाव्य।

प्रश्न 9
महाकाव्य और खण्डकाव्य में अन्तर बताइए।
उत्तर
महाकाव्य की कथा में जीवन की सर्वांगीण झाँकी होती है, जब कि खण्डकाव्य में जीवन के एक पक्ष का चित्रण होता है। महाकाव्य की विस्तृत कथावस्तु पर अनेक खण्डकाव्य लिखे जा सकते हैं।

प्रश्न 10
दो महाकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर दो महाकाव्यों के नाम हैं—

  1. श्रीरामचरितमानस और
  2. कामायनी।

प्रश्न 11
दो खण्डकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर
दो खण्डकाव्यों के नाम हैं-

  1. जयद्रथ-वध और
  2. हल्दीघाटी।

आदिकाल (वीरगाथाकाल)

प्रश्न 12
हिन्दी के आदिकाल का समय निर्देश कीजिए और हिन्दी के प्रथम कवि का नाम बताइए।
उत्तर
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार आदिकाल का समय 993 ई० से 1318 ई० तक माना जाता है। सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है।

प्रश्न 13
हिन्दी का प्रथम कवि किसे माना जाता है ? उनका रचना-काल कब से प्रारम्भ हुआ ?
उत्तर
सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। उनका रचना-काल 769 ई० से प्रारम्भ हुआ। कुछ विद्वान् हिन्दी का प्रथम कवि ‘पृथ्वीराज रासो’ के रचयिता चन्दबरदाई को मानते हैं।

प्रश्न 14 आदिकाल (वीरगाथाकाल) की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। [2009]
या
आदिकालीन हिन्दी-साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
या
आदिकाल (वीरगाथाकाल) की रचनाओं की दो प्रमुख काव्य-प्रवृत्तियाँ लिखिए।
या
आदिकाल के योगदान की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
आदिकाल के रासो साहित्य की प्रमुख विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
उत्तर
विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ)-

  1. आदिकाल में अधिकांश रासो ग्रन्थ लिखे गये; जैसेपृथ्वीराज रासो, परमाल रासो आदि। इनमें आश्रयदाताओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा है।
  2. वीर और श्रृंगार रस की प्रधानता है।
  3. युद्धों का सजीव वर्णन किया गया है।
  4. काव्यभाषा के रूप में डिंगल और पिंगल का प्रयोग हुआ है।
  5. काव्य-शैलियों में प्रबन्ध और गीति शैलियों का प्रयोग मिलता है।
  6. सामूहिक राष्ट्रीय भावना का अभाव रहा है।

प्रश्न 15
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के प्रमुख कवियों और उनकी कृतियों के नाम बताइए। आदिकाल की रचना है। [2011]
या
आदिकाल के रचनाकार हैं। [2011]
या
आदिकाल के दो रचनाकारों के नाम लिखिए। [2015]
उत्तर
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैंचन्दबरदाई (पृथ्वीराज रासो), नरपति-नाल्ह (बीसलदेव रासो), दलपति विजय (खुमान रासो), जगनिक (परमाल रासो या आल्ह खण्ड), विद्यापति (पदावली), अब्दुल रहमान (सन्देश रासक), स्वयंभू (पउमचरिउ), धनपाल (भविसयत्तकहा), जोइन्दु (परमात्मप्रकाश), पुष्पदन्त (उत्तरपुराण) एवं अमीर खुसरो की फुटकर रचनाएँ।

प्रश्न 16
वीरगाथाकाल (आदिकाल) की रचनाओं में वर्णित विषय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
आदिकाल के साहित्य में रणोन्मत्त राजपूत वीरों, रणबाँकुरों, राजपूत महिलाओं, रण-स्थल के रक्तरंजित क्रियाकलापों, गर्जन-तर्जन व हाहाकार का सजीव चित्रण है।

प्रश्न 17
वीरगाथाकाल (आदिकाल) में साहित्य रचना की प्रमुख धाराओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
इस काल की तीन प्रमुख काव्यधाराएँ निम्नलिखित हैं

  1. संस्कृत काव्यधारा,
  2. प्राकृत एवं अपभ्रंश काव्यधारा तथा
  3. हिन्दी काव्यधारा।

प्रश्न 18
आदिकाल के विभिन्न नाम बताइए।
या
‘वीरगाथाकाल’ के लिए प्रयुक्त दो अतिरिक्त नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
वीरगोथाकाल, अपभ्रंशकाल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल, चारणकाल, बीजवपनकाल एवं सिद्ध-सामन्त युग आदि।।

प्रश्न 19
वीरगाथाकाल में रचनाएँ कौन-कौन-से काव्य-रूपों (विधाओं) में लिखी गयीं ?
उत्तर
प्रबन्ध काव्य और मुक्तक काव्यों के रूप में लिखी गयी हैं।।

प्रश्न 20
वीरगाथाकाल की रचनाओं में कौन-सी भाषा प्रयुक्त हुई है ?
उत्तर
डिंगल और पिंगल।

प्रश्न 21
आदिकाल के साहित्य को कितने वर्गों में विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर
पाँच वर्गों में—

  1. सिद्ध साहित्य,
  2. जैन साहित्य,
  3. नाथ साहित्य,
  4. रासो साहित्य,
  5. लौकिक साहित्य।

प्रश्न 22
जैन साहित्य का सबसे अधिक लोकप्रिय रूप किन ग्रन्थों में मिलता है ?
उत्तर
जैन साहित्य का सर्वाधिक लोकप्रिय रूप ‘रास’ ग्रन्थों में मिलता है।

प्रश्न 23
जैन धर्म के चार रास ग्रन्थों और उनके रचयिताओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. देवसेन रचित ‘श्रावकाचार रास’,
  2. मुनि जिनविजय कृत ‘भरतेश्वर बाहुबली रास’,
  3. जिनधर्मसूरि कृत ‘स्थूलभद्र रास’ तथा
  4. विजयसेन सूरि कृत रेवंतगिरि रास’।

प्रश्न 24
नाथ साहित्य के प्रणेता कौन थे ?
उत्तर
नाथ साहित्य के प्रणेता गोरखनाथ थे।

प्रश्न 25
कवियों तथा उनके ग्रन्थों का सही मेल करें-
कवि–दलपति विजय, चन्दबरदाई, नरपति नाल्ह, नल्हसिंह भाट तथा जगनिक।
ग्रन्थ—पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, विजयपाल रासो, आल्ह खण्ड, खुमान रासो।
उत्तर
कवि ग्रन्थ
दलपति विजय – खुमान रासो [2011]
चन्दबरदाई – पृथ्वीराज रासो [2013]
नरपति नाल्ह – बीसलदेव रासो
नल्हसिंह भाट – विजयपाल रासो
जगनिक – आल्ह खण्ड (परमाल रासो) [2014]

भक्तिकाल

प्रश्न 26
भक्तिकाल की सभी प्रमुख काव्यधाराओं का परिचय दीजिए।
उत्तर
भक्तिकाल में हिन्दी-कविता दो धाराओं में प्रवाहित हुई–निर्गुण भक्ति-धारा और सगुण भक्ति-धारा। निर्गुणवादियों में भी जिन्होंने ज्ञान को अपनाया, वे ज्ञानमार्गी और जिन्होंने प्रेम को अपनाया, वे प्रेममार्गी कहलाये।।

जिन कवियों ने भगवान् के दुष्टदलनकारी-लोकरक्षक रूप को सामने रखी, वे रामभक्ति शाखा से सम्बद्ध माने गये और जिन्होंने भगवान् के लोकरंजक रूप को सामने रखा, वे कृष्णभक्ति शाखा के कवि कहलाये।।

प्रश्न 27
भक्तिकाल की प्रमुख काव्यधाराओं और उनके कवियों के नाम लिखिए।
या
भक्तिकाल की विभिन्न धाराओं के नाम बताइट।
उत्तर
भक्तिकाल में दो प्रकार की काव्य-रचना हुई—

  1. निर्गुणमार्गीय तथा
  2. सगुणमार्गीय।

निर्गुण काव्य की दो धाराएँ हैं—
(क) ज्ञानाश्रयी-काव्यधारा तथा
(ख) प्रेमाश्रयी-काव्यधारा।

सगुण काव्य की भी दो धाराएँ हैं—
(क) कृष्णभक्ति-काव्यधारा तथा
(ख) रामभक्ति-काव्यधारा।

प्रश्न 28
सन्तकाव्य का अर्थ स्पष्ट कीजिए। इस धारा के प्रमुख कवि का नाम भी लिखिए।
उत्तर
सन्तकाव्य से आशय निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा से है। ये भक्त निर्गुण-निराकार की उपासना करते हैं और ज्ञान को उसकी प्राप्ति का साधन मानते हैं। इस धारा के प्रमुख कवि हैं—कबीर, रैदास, नानक, दादू, मलूकदास आदि।

प्रश्न 29
भक्तिकाल की निर्गुण तथा सगुण भक्तिधारा का परिचय दीजिए।
उत्तर
जिस धारा में भगवान् के निर्गुण-निराकार रूप की आराधना पर बल दिया गया, वह निर्गुण धारा कहलायी और जिसमें सगुण-साकार रूप की आराधना पर बल दिया गया, वह सगुण धारा कहलायी। निर्गुणवादियों में जिन्होंने भगवत्-प्राप्ति के साधन-रूप में ज्ञान को अपनाया, वे ज्ञानमार्गी और जिन्होंने प्रेम को अपनाया, वे प्रेममार्गी कहलाये। ज्ञानमार्गी शाखा के सबसे प्रमुख कवि कबीर और प्रेममार्गी (सूफी) शाखा के मलिक मुहम्मद जायसी हुए।

प्रश्न 30
ज्ञानाश्रयी निर्गुण (सन्त) काव्यधारा की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
या
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख कीजिए।
या
ज्ञानाश्रयी भक्ति-शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। भक्तिकाल की कोई एक विशेषता का उल्लेख कीजिए। [2016]
उत्तर

  1. सद्गुरु का महत्त्व सर्वाधिक; सत्संग पर भी बल।
  2. निर्गुण की उपासना एवं अवतारवाद का खण्डन।
  3. भगवान् के नाम-स्मरण तथा भजन पर बल।
  4. धर्म के क्षेत्र में रूढ़िवाद, बाह्याचार एवं आडम्बर का विरोध तथा सामाजिक क्षेत्र में विषमता, ऊँचे-नीच एवं छुआछूत का खण्डन।
  5. आन्तरिक शुद्धि एवं प्रेम साधना पर बल।
  6. ईश्वर की एकता पर बल; राम-रहीम अभिन्न हैं।

प्रश्न 31
ज्ञानाश्रयी शाखा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर
कवि-कबीर; रचित ग्रन्थ-बीजक, कबीर-ग्रन्थावली।

प्रश्न 32
प्रेमाश्रयी भक्ति-शाखा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ) लिखिए।
या
निर्गुण-पन्थ की प्रेमाश्रयी-शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर

  1. मुसलमान होकर भी हिन्दू प्रेमगाथाओं का वर्णन, जिनमें हिन्दू संस्कृति का चित्रण मिलता है।
  2. सूफी सिद्धान्तों का निरूपण।
  3. रहस्यवाद की चरम अभिव्यक्ति।
  4. लौकिक वर्णनों के माध्यम से अलौकिकता की व्यंजना।
  5. मसनवी शैली का प्रयोग।
  6. पूर्वी अवधी भाषा तथा दोहा-चौपाई छन्दों का प्रयोग।

प्रश्न 33
भक्तिकाल की सगुण भक्तिधारा का संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर
सगुण भक्ति में जिन्होंने भगवान् के लोकरंजक रूप को सामने रखा, वे कृष्णोपासक कहलाये तथा जिन्होंने भगवान् के दुष्ट-दलनकारी लोकरक्षक रूप को सामने रखा, वे रामभक्ति शाखा से सम्बद्ध माने गये।

प्रश्न 34
कृष्ण-काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ बताइट। या भक्तिकाल की सगुण कृष्णभक्ति शाखा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ बताइट।
उत्तर

  1. श्रीमद्भागवत का आधार लेकर कृष्णलीला-गान।
  2. सख्य, वात्सल्य एवं माधुर्य भाव की उपासना एवं लोकपक्ष की उपेक्षा।
  3. काव्य में श्रृंगार एवं वात्सल्य रसों की प्रधानता; मूल आधार कृष्ण के बाल और किशोर रूप का लीला-वर्णन।
  4. ब्रज भाषा में मुक्तक काव्य-शैली की प्रधानता, जिसमें अद्भुत संगीतात्मकता का गुण विद्यमान है।

प्रश्न 35
कृष्णभक्ति-काव्य में वर्णित प्रमुख रसों का नामोल्लेख करते हुटे उस रचना का नाम भी बताइए, जिसमें उन सभी रसों का सर्वश्रेष्ठ चित्रण हुआ है।
उत्तर
कृष्णभक्ति-काव्य में श्रृंगार रस का सांगोपांग एवं वात्सल्य और भक्ति रसों का प्रयोग प्रमुखता से हुआ है। सूरदास के ‘सूरसागर’ में इन सभी रसों का सर्वश्रेष्ठ चित्रण है।

प्रश्न 36 कृष्ण-काव्यधारा के प्रमुख कवियों के नाम लिखिए। [2009]
या
अष्टछाप के किन्हीं दो कवियों का नाम लिखिए।
उत्तर
अष्टछाप के कवि ही कृष्ण-काव्यधारा के प्रमुख कवि थे। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के चार शिष्यों एवं अपने चार शिष्यों को मिलाकर महाप्रभु के सुपुत्र गोसाईं विट्ठलनाथ जी ने अष्टछाप की स्थापना की, जिसके आठ कवि थे-सूरदास, कुम्भनदास, परमानन्ददास, कृष्णदास, छीतस्वामी, गोविन्ददास, चतुर्भुजदास, नन्ददास। इनके अतिरिक्त कृष्ण काव्यधारा के अन्य प्रमुख कवि हैं-मीरा, रसखान, हितहरिवंश और नरोत्तमदास।

प्रश्न 37
राम-काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर

  1. लोकसंग्रह (लोकहित) की भावना के कारण मर्यादा की प्रबल भावना।
  2. राम का परब्रह्मत्व।
  3. दास्य भाव की उपासना।
  4. समन्वय की विराट् चेष्टा।
  5. स्वान्त:सुखाय काव्य-रचना।
  6. अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं, प्रबन्ध और मुक्तक दोनों काव्य-शैलियों एवं विविध छन्दों का प्रयोग।

प्रश्न 38
रामाश्रयी शाखा के दो प्रमुख कवियों का नाम दीजिए।
या
राम को नायक मानकर रचना करने वाले दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
गोस्वामी तुलसीदास और आचार्य केशवदास रामाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं। इन दोनों ने राम को नायक मानकर अपने काव्यों की रचना की है।

प्रश्न 39
भक्तिकालीन काव्य को ‘हिन्दी कविता का स्वर्ण युग’ क्यों कहा जाता है ? स्पष्ट कीजिए।
या
हिन्दी साहित्य के विकास में भक्तिकाल के योगदान का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
भावों की उदात्तता, महती प्रेरकता, अनुभूति-प्रवणता, लोकहित का मुखरित स्वर, भारतीय संस्कृति का मूर्तिमान रूप, समन्वय की विराट् चेष्टा तथा कलापक्ष की समृद्धि इस काल की ऐसी विशेषताएँ हैं, जो किसी अन्य काल के काव्य में इतनी उच्च कोटि की नहीं मिलतीं। इसीलिए भक्तिकाल को हिन्दी काव्य को स्वर्ण युग कहा जाता है।

प्रश्न 40
भक्तिकाल में भक्तिभावना के कौन-से दो रूप मिलते हैं ?
उत्तर
निर्गुण भक्ति और सगुण भक्ति।

प्रश्न 41
भक्तिकाव्य की दो प्रमुख शाखाओं के नाम लिखिए।

  1. निर्गुण भक्ति-शाखा और
  2. सगुण भक्ति-शाखा।

प्रश्न 42
भक्तिकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
कबीरदास, मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास और तुलसीदास।

प्रश्न 43
भक्तिकालीन विभिन्न काव्यधाराओं में किस धारा का काव्य सर्वश्रेष्ठ है और उसका सर्वश्रेष्ठ कवि कौन है ?
उत्तर
सर्वश्रेष्ठ काव्यधारा–रामाश्रयी काव्यधारा तथा सर्वश्रेष्ठ कवि–गोस्वामी तुलसीदास।

प्रश्न 44
भक्तिकाल की चार प्रमुख काव्यकृतियों के नाम लिखिए। भक्ति काव्यधारा की दो पुस्तकों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर
बीजक, पद्मावत, सूरसागर तथा श्रीरामचरितमानस।

प्रश्न 45
निर्गुण काव्यधारा की दो शाखाएँ कौन-सी हैं ?
उत्तर

  1. ज्ञानाश्रयी (सन्त) काव्यधारा तथा
  2. प्रेमाश्रयी (सूफी) काव्यधारा।

प्रश्न 46
निर्गुण-काव्यधारा की कोई एक प्रमुख विशेषता बताइए और उसके प्रमुख कवि का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर
निर्गुण काव्य में परम ब्रह्म के निराकार स्वरूप की उपासना हुई तथा ज्ञान एवं प्रेम तत्त्व की प्रधानता रही। कबीर एवं जायसी इस धारा के प्रमुख कवि हैं।

प्रश्न 47
सन्त काव्यधारा के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
कबीरदास, रैदास, दादू तथा नानक।

प्रश्न 48
प्रेममार्गी निर्गुण (सूफी) काव्यधारा के प्रमुख कवि का नाम तथा उनकी प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
कवि-मलिक मुहम्मद जायसी। रचना-पद्मावत।।

प्रश्न 49
सूफी काव्यधारा की कुछ प्रमुख कृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर
पद्मावत, मृगावती (कुतुबन), मधुमालती (मंझन), चित्रावली (उसमान) आदि।

प्रश्न 50
सगुण कृष्णभक्ति-शाखा के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
सूरदास, मीरा, रसखान, कुम्भनदास, गोविन्ददास, नरोत्तमदास एवं परमानन्ददास।

प्रश्न 51
कृष्णभक्ति-शाखा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का नाम लिखिए।
या
प्रेमाश्रयी अथवा कृष्णकाव्य की दो प्रमुख काव्य-रचनाओं के नाम बताइट।
या
महाकवि सूरदास की दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. सूरदास-सूरसागर व साहित्यलहरी तथा
  2. मीराबाई नरसी जी का मायरा।

प्रश्न 52
राम-काव्यधारा के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
तुलसीदास राम-काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं। अन्य प्रमुख कवि हैं–केशवदास, नाभादास एवं अग्रदास।।

प्रश्न 53
राम-काव्यधारा की रचना किन भाषाओं में हुई है ?
उत्तर
राम-काव्यधारा की रचना अवधी तथा ब्रजभाषा में हुई है।

प्रश्न 54
ब्रजभाषा तथा अवधी भाषा के मध्यकालीन एक-एक प्रसिद्ध महाकाव्य का नाम लिखिए।
उत्तर

  1. ब्रजभाषा–सूरसागर तथा
  2. अवधी भाषा-श्रीरामचरितमानस।

प्रश्न 55
रामभक्ति-शाखा के किसी एक कवि तथा उसके द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
या
सगुण भक्तिधारा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर
तुलसीदास जी के चार ग्रन्थों के नाम हैं–

  1. श्रीरामचरितमानस,
  2. विनयपत्रिका,
  3. कवितावली तथा
  4. गीतावली।

प्रश्न 56
उत्तर भारत में भक्ति-भावना को प्रवाहित करने का श्रेय किसको है ?
उत्तर
स्वामी रामानन्द तथा महाप्रभु वल्लभाचार्य को।

प्रश्न 57
हिन्दी काव्य के भक्तिकाल की दो प्रमुख धाराओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. निर्गुण काव्यधारा (ज्ञानमार्गी तथा प्रेममार्गी)।
  2. सगुण काव्यधारा (रामभक्ति तथा कृष्णभक्ति)।

प्रश्न 58
ज्ञानमार्गी शाखा के दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. कबीर तथा
  2. नानक

प्रश्न 59
हिन्दी-साहित्य की भक्तिकालीन ज्ञानाश्रयी शाखा की दो विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।
उत्तर

  1. ज्ञानाश्रयी शाखा में निर्गुण ब्रह्म की उपासना हुई तथा
  2. जाति-पाँति, रूढ़ियों और मिथ्याडम्बरों का विरोध हुआ।

प्रश्न 60
निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी शाखा की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर

  1. यह फारसी की मसनवी शैली में रचित है तथा
  2. अवधी भाषा में काव्य-रचना हुई।

प्रश्न 61
भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा के एक प्रमुख कवि और उसकी एक प्रमुख रचना (महाकाव्य) का नाम लिखिए।
या
प्रेमाश्रयी शाखा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर
कवि–मलिक मुहम्मद जायसी और उनकी रचना का नाम है पद्मावत (महाकाव्य) और अखरावट।

प्रश्न 62
रामभक्ति शाखा की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर

  1. श्रीराम की प्रतिष्ठा पूर्ण ब्रह्म के रूप में हुई है तथा
  2. यह काव्य ब्रज तथा अवधी दोनों ही भाषाओं में रचा गया।

प्रश्न 63
भक्तिकाल की तीन सामान्य प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. जीव की नश्वरता का समान रूप से वर्णन है।
  2. प्रभु के नाम स्मरण तथा गुरु की महत्ता का वर्णन सभी कवियों ने किया है।
  3. कवियों के नामोल्लेख की प्रवृत्ति रही है।

प्रश्न 64
तुलसीदास द्वारा विरचित दो प्रसिद्ध काव्यकृतियों के नाम लिखिए जिनमें एक अवधी तथा दूसरी ब्रजभाषा की हो।
उत्तर

  1. श्रीरामचरितमानस–अवधी भाषा तथा
  2. विनयपत्रिका-ब्रजभाषा।

रीतिकाल

प्रश्न 65
रीतिकालीन काव्य की प्रमुख विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।
या
रीतिकाल की दो प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए। [2015]
उत्तर

  1. राज्याश्रित कवियों द्वारा लक्षण-लक्ष्य पद्धति पर काव्य-रचना की गयी, ये कवि रीतिबद्ध कहलाये। जिन्होंने रीति पद्धति का तिरस्कार कर स्वतन्त्र काव्य-रचना की, वे रीतिमुक्त कवि कहलाये।
  2. श्रृंगार रस की प्रधानता, परन्तु वीर रस का भी ओजस्वी वर्णन।
  3. मुख्यत: मुक्तक शैली एवं ब्रज भाषा का प्रयोग।
  4. भाव पक्ष की अपेक्षा कला पक्ष पर बल।

प्रश्न 66
रीतिबद्ध काव्य के अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए इस प्रवृत्ति की किन्हीं दो रचनाओं और उसके रचयिताओं के नाम लिखिए।
उत्तर
जिस काव्य में काव्य-तत्त्वों का लक्षण देकर उदाहरण रूप में काव्य-रचना प्रस्तुत की जाती है, उसे ‘रीतिबद्ध काव्य’ कहते हैं। इस प्रवृत्ति के दो कवियों की रचनाओं के नाम निम्नलिखित हैं-

  1. रस-विलास–आचार्य चिन्तामणि तथा
  2. कविप्रिया-आचार्य केशवदास।

प्रश्न 67
हिन्दी में रीतिबद्ध और रीतिमुक्त कविता का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
रीतिबद्ध काव्य के अन्तर्गत वे ग्रन्थ आते हैं, जिनमें काव्य-तत्त्वों के लक्षण देकर उदाहरण के रूप में काव्य-रचनाएँ की जाती हैं, जब कि रीतिमुक्त काव्यधारा की रचनाओं में रीति–परम्परा के साहित्यिक बन्धनों एवं रूढ़ियों से मुक्त; स्वच्छन्द रचनाएँ। इस काव्यधारा के कवियों में घनानन्द का प्रमुख स्थान है और रीतिबद्ध काव्यकारों में आचार्य चिन्तामणि का प्रथम स्थान है।

प्रश्न 68
रीतिकाल में कौन-कौन-सी काव्यधाराएँ मिलती हैं ?
उत्तर

  1. रीतिबद्ध काव्यधारा तथा
  2. रीतिमुक्त काव्यधारा।

प्रश्न 69
रीतिकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए। [2011]
उत्तर
केशवदास, बिहारीलाल, देव एवं घनानन्द।

प्रश्न 70
रीतिकाल में वीर रस का प्रमुख कवि कौन था ? उसकी रचनाओं के नाम लिखिए। [2011]
उत्तर
रीतिकाल में वीर रस में रचना करने वाले प्रमुख कवि ‘भूषण’ थे। उनकी प्रमुख रचनाओं के नाम है-‘शिवराज भूषण’, ‘शिवा बावनी’, ‘शिवा शौर्य’, ‘छत्रसाल दशक आदि।

प्रश्न 71
केशवदास की दो प्रमुख काव्य-रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1.  रामचन्द्रिका तथा
  2. कविप्रिया।

प्रश्न 72
रीतिकाल की दो काव्यकृतियों और उनके रचनाकारों के नाम लिखिए। [2008]
उत्तर

  1. सतसई-बिहारी तथा
  2. रामचन्द्रिका–केशवदास।

प्रश्न 73
रीतिकाल की पाँच प्रमुख काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. बिहारी-सतसई,
  2. रसराज (मतिराम),
  3. शिवराजभूषण (भूषण),
  4. भावविलास (देव) तथा
  5. घनानन्द कवित्त।

प्रश्न 74
रीतिकाल के चार रीतिबद्ध कवियों के नाम लिखिए।
या
रीतिकालीन किसी एक कवि का नाम लिखिए। [2011]
उत्तर

  1. चिन्तामणि,
  2. मतिराम,
  3. भूषण तथा
  4. देव

प्रश्न 75
रीतिकाल के चार रीतिमुक्त कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. घनानन्द,
  2. ठाकुर,
  3. बोधा तथा
  4. आलम।

प्रश्न 76
निम्नलिखित कवियों में से रीतिबद्ध तथा रीतिमुक्त कवियों का चुनाव कीजिए
(क) भूषण,
(ख) घनानन्द,
(ग) बिहारी,
(घ) बोधा ठाकुर,
(ङ) आचार्य केशवदास।
उत्तर
(1) रीतिबद्ध कवि-(ङ) आचार्य केशवदास, (ग) बिहारी, (क) भूषण।
(2) रीतिमुक्त कवि-(ख) घनानन्द तथा (घ) बोधा ठाकुर।

प्रश्न 77
रीतिकाव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. आश्रयदाताओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा।
  2. श्रृंगार और वीर रस की प्रधानता।
  3. रीतिकाल की कविता का प्रमुख स्वर श्रृंगार का था।
  4. रीतिकाल के कवियों ने नारी को भोग्या रूप में प्रस्तुत किया।

प्रश्न 78
रीतिमुक्त काव्य से आप क्या समझते हैं ? इस काव्यधारा की मुख्य प्रवृत्तियाँ लिखिए।
उत्तर
रीतिकालीन परम्परा पर आधारित रूढ़ियों एवं साहित्यिक बन्धनों से मुक्त काव्य को रीतिमुक्त काव्य कहा जाता है। इस काव्यधारा की मुख्य प्रवृत्तियाँ हैं—

  1. शास्त्रीय मान्यताओं एवं रूढ़ियों से मुक्त स्वच्छन्द काव्य-रचना,
  2. कल्पना की प्रचुरता एवं सांकेतिकता,
  3. अनुभूति, आवेश आदि को विशेष महत्त्व इत्यादि।

प्रश्न 79
रीतिकाल के किन्हीं दो आचार्य कवियों के नाम लिखिए।
या
रीतिकाल के किसी आचार्य कवि की एक रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. आचार्य केशव-रामचन्द्रिका तथा
  2. आचार्य चिन्तामणि-रस-विलास।

प्रश्न 80
रीतिकाल में काव्य-रचना जिन छन्दों में की गयी है उनमें से किन्हीं दो प्रमुख छन्दों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. कवित्त तथा
  2. सवैया।

आधुनिककाल

प्रश्न 81
कविता के आधुनिककाल के प्रथम युग का नाम लिखिए तथा उस युग के एक प्रमुख कवि का नाम बताइट।
उत्तर
कविता के आधुनिककाल का प्रथम युग–भारतेन्दु युग। प्रमुख कवि-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

प्रश्न 82
पुनर्जागरण काल (भारतेन्दु युग) का समय लिखिए।
उत्तर
सन् 1857 से 1900 ई० तक।

प्रश्न 83
भारतेन्दु युग के दो कवियों के नाम उनकी एक-एक रचनासहित लिखिए।
या
भारतेन्दु युग के किन्हीं दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र-प्रेम माधुरी तथा
  2. श्रीधर पाठक–वनाष्टक।

प्रश्न 84
निम्नलिखित में से किन्हीं दो की एक-एक प्रसिद्ध काव्य-रचना का नाम लिखिए
(1) महादेवी वर्मा,
(2) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’,
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,
(4) केशवदास।
उत्तर
(1) महादेवी वर्मा-‘दीपशिखा’।
(2) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’-‘परिमल’।
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र-‘प्रेम-फुलवारी’।
(4) केशवदास-‘रामचन्द्रिका’।

प्रश्न 85
द्विवेदीकालीन दो प्रमुखतम महाकाव्यों के नाम लिखिए।
या
आधुनिककाल के दो महाकाव्यों और उनके रचयिताओं के नाम बताइए।
उत्तर

  1. साकेत – मैथिलीशरण गुप्त।
  2. प्रियप्रवास – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

प्रश्न 86
द्विवेदीयुगीन कविता की दो प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर
द्विवेदी युग के काव्य की दो विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) निम्नलिखित हैं-

  1. काव्य में ब्रजभाषा के स्थान पर खड़ी बोली की प्रतिष्ठा हुई।
  2. स्वदेश प्रेम तथा स्वदेशी गौरव पर काव्य-रचनाएँ की गयीं।

प्रश्न 87
कविता के आधुनिककाल के द्वितीय युग का नाम तथा उस युग के एक प्रमुख कवि तथा एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर
आधुनिककाल के द्वितीय युग का नाम द्विवेदी युग’ है। कवि–मैथिलीशरण गुप्त; रचना–साकेत।

प्रश्न 88
द्विवेदी युग के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. मैथिलीशरण गुप्त तथा
  2. अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

प्रश्न 89
द्विवेदी युग की समय-सीमा बताइए।
उत्तर
द्विवेदी युग की समय-सीमा 1900 ई० से 1918 ई० तक है।

प्रश्न 90
द्विवेदीयुगीन काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की दो-दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. श्री मैथिलीशरण गुप्त; रचनाएँ–भारत-भारती तथा यशोधरा,
  2. श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध’; रचनाएँ—रुक्मिणी परिणय तथा वैदेही वनवास।

प्रश्न 91
कविता के आधुनिककाल के तृतीय युग का नाम लिखिए तथा उस युग के एक प्रमुख कवि का नाम लिखिए।
उत्तर
कविता के आधुनिककाल के तृतीय युग का नाम ‘छायावादी युग’ है तथा इस युग के प्रमुख कवि श्री जयशंकर प्रसाद जी हैं।

प्रश्न 92
छायावादी काव्य की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख करते हुए किन्हीं दो छायावादी कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. मूलतः सौन्दर्य और प्रेम का काव्य,
  2. प्रकृति का मानवीकरण,
  3. अज्ञात के प्रति जिज्ञासा (रहस्यवादी प्रवृत्ति),
  4. नारी की महिमा का वर्णन,
  5. राष्ट्रीयता की भावना,
  6. वैराग्य, वेदना और पलायनवादिता,
  7. प्रतीकात्मकता और लाक्षणिकता,
  8. चित्रात्मकता,
  9. प्रगतिमयता तथा
  10. खड़ी बोली का अतिशय परिमार्जन।

दो छायावादी कवियों के नाम-

  1. जयशंकर प्रसाद तथा
  2. सुमित्रानन्दन पन्त।

प्रश्न 93
छायावादी कविता के हास के कारण लिखिए।
उत्तर
विदेशी शासन के दमन के कारण जनसाधारण की निरन्तर बढ़ती पीड़ा छायावाद के ह्रास का मुख्य कारण बनी। इस दमन को देखकर कविगण कल्पना लोक से उबरकर यथार्थ के कठोर धरातल पर आ गये। पूँजी की वृद्धि तथा दीनता का प्रसार भी छायावाद के ह्रास का कारण बना।

प्रश्न 94
छायावाद काल की समय-सीमा बताइए।
उत्तर
सन् 1918 से 1938 ई० तक का समय छायावाद के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 95
छायावाद के चार कवि और उनकी दो-दो रचनाएँ लिखिए।
या
पायावाद के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. जयशंकर प्रसाद कामायनी; आँसू,
  2. सुमित्रानन्दन पन्त-पल्लव; ग्राम्या,
  3. सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’–परिमल; गीतिका,
  4. महादेवी वर्मा–दीपशिखा; सान्ध्य-गीत।।

प्रश्न 96
दो रहस्यवादी कवि और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. सुमित्रानन्दन पन्त कृत ‘पल्लव’ तथा
  2. महादेवी वर्मा कृत ‘दीपशिखा’।

प्रश्न 97
छायावादी कविता के हास के कारण संक्षेप में लिखिए।
उत्तर

  1. छायावादी कविता में सूक्ष्म और वायवीय कल्पनाओं की अधिकता थी।
  2. स्थूल जगत की कठोर वास्तविकता से उसका कोई सम्बन्ध नहीं रह गया था।
  3. समाज में पूँजी के विरुद्ध आवाज उठ रही थी, इसलिए अतिशय कल्पना को छोड़ रोटी, कपड़ा और मकान कविता का विषय बनने लगे थे।

प्रश्न 98
निम्नलिखित कवियों की एक-एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’, सुमित्रानन्दन पन्त, रामधारी सिंह ‘दिनकर’।
उत्तर

  1. जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’, रचना-गंगावतरण।
  2. सुमित्रानन्दन पन्त, रचना-चिदम्बरी।
  3. रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रचना–उर्वशी।

प्रश्न 99
निम्नलिखित कवियों में से किन्हीं दो द्वारा रचित एक-एक महाकाव्य का नाम लिखिए
(1) चन्दबरदाई,
(2) तुलसीदास,
(3) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’,
(4) रामधारी सिंह ‘दिनकर’।।
उत्तर
(1) पृथ्वीराज रासो,
(2) श्रीरामचरितमानस,
(3) प्रियप्रवास तथा
(4) कुरुक्षेत्र।

प्रश्न 100
बिहारी, मैथिलीशरण गुप्त, अज्ञेय, रत्नाकर, पन्त, दिनकर में से किन्हीं दो की एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर
अज्ञेय–आँगन के पार द्वार। जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’-उद्धवशतक।

प्रश्न 101
आधुनिक युग (छायावादी काव्यधारा) के किसी एक महाकाव्य और उसके रचनाकार का नाम लिखिए।
या
‘कामायनी’ महाकाव्य के सर्गों के नाम लिखिए। [2013]
उत्तर
महाकाव्य-कामायनी; रचनाकार–जयशंकर प्रसाद।
‘कामायनी’ महाकाव्य के सर्गों के नाम हैं—

  1. चिन्ता,
  2. आशा,
  3. श्रद्धा,
  4. काम,
  5. वासना,
  6. लज्जा ,
  7. कर्म,
  8. ईष्र्या,
  9. इडा,
  10. स्वप्न,
  11. संघर्ष,
  12. निर्वेद,
  13. दर्शन,
  14. रहस्य तथा
  15. आनन्द

प्रश्न 102
प्रगतिवादी काव्य का परिचय दीजिए।
उत्तर
प्रगतिवादी काव्य का उद्भव छायावादी काव्य की काल्पनिक एवं भावुकतापूर्ण अभिव्यक्ति के विद्रोहस्वरूप हुआ। इस वाद के काव्यों में स्थूल जगत् की वास्तविकता, सामाजिक-आर्थिक विसंगतियों एवं वर्ग-शोषण के स्वर को अलंकारविहीन तथा सरल रूप में अभिव्यक्ति दी गयी।

प्रश्न 103
प्रगतिवादी कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
या
प्रगतिवादी काव्य की दो प्रमुख प्रवृत्तियों (विशेषताओं) का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. साम्यवाद का काव्यात्मक रूपान्तर (अर्थात् मार्क्स और रूस का गुणगान, पूँजीवाद का विरोध एवं कृषक-मजदूर-राज्य की स्थापना का स्वप्न),
  2. यथार्थवाद,
  3. परम्पराओं और रूढ़ियों का विरोध,
  4. धर्म और ईश्वर में अविश्वास,
  5. श्रम की महत्ता की स्थापना,
  6. शोषितों के प्रति सहानुभूति,
  7. वेदना और निराशा,
  8. नारी के प्रति आधुनिक यथार्थवादी दृष्टिकोण,
  9. जन-भाषा का आग्रह तथा
  10. छन्दों और अलंकारों का बहिष्कार।

प्रश्न 104
प्रगतिवाद के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
या
प्रगतिवादी काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
नागार्जुन (युगधारा), केदारनाथ अग्रवाल (युग की गंगा), शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ (प्रलयसृजन), त्रिलोकचन्द शास्त्री (धरती)।

प्रश्न 105
प्रगतिवादी युग के दो कवियों तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर

  1. रामधारी सिंह ‘दिनकर’-उर्वशी तथा
  2. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’–विन्ध्य हिमालय से।।

प्रश्न 106
छायावादोत्तर काल की कविता का काल-विभाजन लिखिए।
उत्तर
(क) प्रगतिवाद, प्रयोगवाद (1938-1959 ई०);
(ख) नयी कविता का काल (1959 ई० से वर्तमान तक)।।

प्रश्न 107
प्रयोगवादी कविता की मुख्य विशेषताएँ बताइए। या छायावादोत्तर काल की काव्य-प्रवृत्तियाँ लिखिए।
उत्तर

  1. अति वैयक्तिकता,
  2. निराशा, कुण्ठा और घुटन,
  3. फ्रायड के प्रभाववश नग्न यौन-चित्रण,
  4. अतियथार्थवाद (नग्न यथार्थ),
  5. पराजय, पलायन और वेदना,
  6. बौद्धिकता,
  7. क्षण का महत्त्व,
  8. अवचेतन के यथावत् प्रकाशन का आग्रह,
  9. अनगढ़ भाषा का प्रयोग एवं
  10. नया शिल्पविधान (नये उपमानों, बिम्बों, प्रतीकों का प्रयोग तथा छन्दहीनता का आग्रह)।

प्रश्न 108
प्रयोगवाद से आप क्या समझते हैं ? ‘नयी कविता’ क्या है ?
उत्तर
सन् 1943 में प्रकाशित ‘तारसप्तक’ की कविताओं में नये बिम्ब-विधानों, नये अलंकारों और नयी भावाभिव्यक्ति को अपनाया गया। काव्य की इसी नयी विधा को ‘प्रयोगवादी काव्य’ के नाम से अभिहित किया गया। नयी कविता इस प्रयोगवादी कविता का ही विकसित रूप है।

प्रश्न 109
प्रयोगवादी काव्यधारा का नेतृत्व करने वाले कवि का नामोल्लेख कीजिए और उनके एक प्रमुख प्रकाशन का नाम लिखिए। [2011]
उत्तर
प्रयोगवादी काव्यधारा का नेतृत्व करने वाले कवि सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय हैं। इन्होंने ‘तारसप्तक’ नामक एक काव्य-संकलन सन् 1943 ई० में प्रकाशित किया। ‘कितनी नावों में कितनी बार इनकी एक प्रमुख रचना है, जिस पर इन्हें ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार की प्राप्ति हुई है।

प्रश्न 110
प्रथम तारसप्तक के कवियों के नाम लिखिए।
या
हिन्दी में प्रयोगवादी काव्यधारा के किन्हीं चार कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, गजानन माधव मुक्तिबोध’, गिरिजाकुमार माथुर, प्रभाकर माचवे, नेमिचन्द्र जैन, भारत भूषण और रामविलास शर्मा। सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने इन सात कवियों की रचनाएँ ‘तारसप्तक’ के नाम से सन् 1943 ई० में प्रकाशित कीं।

प्रश्न 111
‘तारसप्तक’ का प्रकाशन किसने और किस समय किया? इसके सम्पादक कौन थे ?
उत्तर
श्री सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने सन् 1943 ई० में अपनी पीढ़ी के अन्य छ: कवियों के सहयोग से ‘तारसप्तक’ का प्रकाशन किया। इसके सम्पादक श्री सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ स्वयं थे।

प्रश्न 112
‘तारसप्तक’ की कविताएँ किस काव्यधारा से सम्बन्धित हैं ?
उत्तर
‘तारसप्तक’ की कविताएँ प्रयोगवादी काव्यधारा से सम्बन्धित हैं।।

प्रश्न 113
‘दूसरा सप्तक’ के कवियों के नाम लिखिए। यह कब प्रकाशित हुआ ? [2016]
उत्तर
‘दूसरा सप्तक’ में भवानी प्रसाद मिश्र, शकुन्त माथुर, हरिनारायण व्यास, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय तथा धर्मवीर भारती की कविताएँ संकलित थीं। इस सप्तक की रचनाओं में आत्मान्वेषण पर बल दिया गया था तथा यह सन् 1951 ई० में प्रकाशित हुआ।

प्रश्न 114
‘तीसरा सप्तक’ के कवियों के नाम लिखिए। यह कब प्रकाशित हुआ ? या तीसरा सप्तक के प्रकाशन-वर्ष का उल्लेख कीजिए। | [2012, 14, 17]
उत्तर
‘तीसरा सप्तक’ के अन्तर्गत प्रयागनारायण त्रिपाठी, कीर्ति चौधरी, मदन वात्स्यायन, केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण, विजयदेव नारायण साही तथा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचनाएँ संकलित हैं। इस सप्तक की कविताओं में सौन्दर्यवादी प्रवृत्ति के साथ-साथ युगीन सत्य की भी निश्छल अभिव्यक्ति मिलती है। इसका प्रकाशन सन् 1959 ई० में हुआ।

प्रश्न 115
‘चौथा सप्तक’ कब प्रकाशित हुआ ? इसके कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
सन् 1979 ई० में चौथा सप्तक प्रकाशित हुआ। इसमें अवधेश कुमार, राजकुमार कुम्भज, स्वदेश भारती, नन्दकिशोर आचार्य, सुमन राजे, श्रीराम वर्मा, राजेन्द्र किशोर की रचनाएँ संकलित हैं।

प्रश्न 116
प्रयोगवादी काव्य की पाँच रचनाओं और रचयिताओं के नाम लिखिए।
या
प्रयोगवादी काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का उल्लेख कीजिए। उत्तर भग्नदूत (सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’), चाँद का मुँह टेढ़ा (गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’); ओ अप्रस्तुत मन (भारतभूषण अग्रवाल), धूप के धान (गिरिजाकुमार माथुर), गीतफरोश (भवानीप्रसाद मिश्र)।।

प्रश्न 117
आधुनिक युग की कविता की चार मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर

  1. यथार्थ का उन्मुक्त चित्रण,
  2. नारी-मुक्ति का आह्वान,
  3. लघुता के प्रति सजगता और
  4. गेय तत्त्व की अवहेलना।

प्रश्न 118
आधुनिक कविता के प्रमुख वादों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, हालावाद, स्वच्छन्दतावाद आदि आधुनिक कविता के प्रमुख वाद हैं।

प्रश्न 119
नयी कविता से आप क्या समझते हैं ? इसके आरम्भ होने का समय लिखिए। [2013]
उत्तर
इसका आरम्भ सन् 1954 ई० में जगदीश गुप्त और डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी के सम्पादन में ‘नयी कविता’ के प्रकाशन से हुआ। यह कविता किसी वाद से बँधकर नहीं चलती।

प्रश्न 120
नयी कविता को अकविता क्यों कहा जाता है ?
उत्तर
नयी कविता परम्परागत कविता के स्वरूप से नितान्त भिन्न हो गयी है। यह किसी वाद या दर्शन से जुड़ी नहीं है, इसलिए इसे अकविता कहा जाता है।

प्रश्न 121
नयी कविता की किन्हीं दो प्रमुख रचनाओं का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर

  1. युग की गंगा-केदारनाथ अग्रवाल तथा
  2. बूंद एक टपकी-भवानीप्रसाद मिश्र।।

प्रश्न 122
‘नयी कविता’ से सम्बन्धित किन्हीं दो पत्रिकाओं के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. कल्पना’ तथा
  2. ‘ज्ञानोदय’।

प्रश्न 123
नयी कविता के पाँच प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
उत्तर
जगदीश गुप्त, धर्मवीर भारती, नरेश मेहता, लक्ष्मीकान्त वर्मा तथा सर्वेश्वरदयाल सक्सेना।

प्रश्न 124
नयी कविता की विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख करते हुए किन्हीं दो प्रतिनिधि कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
नयी कविता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. यथार्थता,
  2. वर्जनाओं से मुक्ति (अर्थात् सामाजिक मर्यादाओं एवं बन्धनों का तिरस्कार करके नि:संकोचे अश्लील चित्रण),
  3. हृदयपक्ष की अपेक्षा बुद्धिपक्ष की प्रधानता,
  4. निराशा तथा अवसाद (खिन्नता) की प्रबलता,
  5. खिचड़ी भाषा, जिसमें हिन्दी की विभिन्न बोलियों, प्रादेशिक भाषाओं एवं अंग्रेजी आदि के शब्दों का घालमेल तथा
  6. प्रतीकों, बिम्बों एवं मुक्त छन्द पर बल। | नयी कविता के दो प्रतिनिधि कवि हैं-जगदीश गुप्त और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना।।

प्रश्न 125
नवगीत’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
‘नवगीत’ छायावादी एवं प्रगतिवादी दोनों ही काव्यों की कई विशेषताओं से युक्त ऐसा काव्य है, जिसमें आधारभूत चेतना, जीवन-दृष्टि, भाव-भूमि एवं अभिव्यंजना शैली की व्यापकता, सूक्ष्मता, विविधता, यथार्थता एवं लौकिकता का एकान्तिक संयोग है।

प्रश्न 126
‘नवगीत’ की किन्हीं दो आधारभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
नवगीत की दो आधारभूत विशेषताएँ हैं-

  1. सर्वत्र भावानुकूल भाषा का प्रयोग तथा
  2. स्वस्थ बिम्ब एवं प्रतीक विधान।।

प्रश्न 127
नवगीत’ के दो महत्त्वपूर्ण गीतकारों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर
नवगीत’ के दो महत्त्वपूर्ण गीतकार और उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. शम्भूनाथ सिंह (‘उदयाचल’, ‘दिवालोक’, ‘समय की शिला पर’, ‘जहाँ दर्द नील हैं’ आदि।) तथा
  2. वीरेन्द्र मिश्र (‘गीतम’, ‘लेखनी बेला’, ‘अविराम चल मधुवन्ति’ आदि।)

प्रश्न 128
नवगीतधारा के प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
उत्तर
रमानाथ अवस्थी, डॉ० शम्भूनाथ सिंह, श्रीपाल सिंह ‘क्षेम’, गुलाब खण्डेलवाल, सुमित्राकुमारी सिन्हा, शान्ति मेहरोत्रा, हंसकुमार तिवारी, सोम ठाकुर, गोपालदास नीरज’, वीरेन्द्र मिश्र तथा डॉ० कुँवर बेचैन।

प्रश्न 129
साठोत्तरी कविता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
साठोत्तरी कविता मोह-भंग, आक्रोश, अस्वीकार, तनाव और विद्रोह की कविता है। इसको मुहावरा नया है, शैली बेपर्द है और इसमें जिजीविषा का गहरा रंग है।

प्रश्न 130
साठोत्तरी कविता की किन्हीं दो आधारभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
साठोत्तरी कविता की दो आधारभूत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  1. अन्याय के विरुद्ध और शासन द्वारा कही जाने वाली चिकनी-चुपड़ी बातों की आक्रोशयुक्त स्वर में अभिव्यक्ति तथा
  2. व्यक्ति और उसके परिवेश की हर परत की बेपर्द अभिव्यक्ति।

प्रश्न 131
साठोत्तरी कविता के किन्हीं दो प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर
साठोत्तरी कविता के दो महत्त्वपूर्ण कवि और उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं–

  1. धूमिल (‘संसद से सड़क तक’, ‘कल सुनना मुझे’, ‘सुदामा पाण्डे का प्रजातन्त्र’ आदि) तथा
  2. रामदरश मिश्र (‘पथ के गीत’, ‘बैरंग बेनाम चिट्ठियाँ’, ‘पक गयी है धूप’, ‘कन्धे पर सूरज’ आदि)।

प्रश्न 132
‘नया दोहा’ के प्रमुख संकलनों के नाम लिखिए।
उत्तर
नया दोहा’ के प्रमुख संकलनों के नाम निम्नलिखित हैं

  1. अमलतास की छाँव (पाल भसीन),
  2. आँखों खिले पलाश (पं० देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’),
  3. कटुक सतसई (विश्वप्रकाश दीक्षित ‘बटुक’),
  4. कालाय तस्मै नमः (भारतेन्दु मिश्र) आदि।

प्रश्न 133
वर्तमान युग के पाँच जीवित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
वर्तमान युग के पाँच जीवित कवियों के नाम हैं—पं० देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’, पाल भसीन, विश्वप्रकाश दीक्षित ‘बटुक, भारतेन्दु मिश्र और दिवाकर आदित्य शर्मा।।

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Man and His Environment

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Man and His Environment (मानव एवं उसका पर्यावरण) are part of UP Board Solutions for Class 12 Geography. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Man and His Environment (मानव एवं उसका पर्यावरण).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Geography
Chapter Chapter 3
Chapter Name Man and His Environment (मानव एवं उसका पर्यावरण)
Number of Questions Solved 19
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Man and His Environment (मानव एवं उसका पर्यावरण)

विस्तृत उतरीय प्रश्न

प्रश्न 1
पर्यावरण से क्या अभिप्राय है? पर्यावरण के तत्त्वों पर प्रकाश डालिए। [2007]
या
प्राकृतिक पर्यावरण के तत्त्वों का वर्णन कीजिए। [2007]
या
भौतिक पर्यावरण के चार क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए। [2009] पर्यावरण के दो प्रमुख संघटकों का उल्लेख कीजिए। (2010, 13, 14, 15, 16)
या
पर्यावरण के प्रमुख तत्त्वों की विवेचना कीजिए तथा मानव के क्रियाकलापों पर उनके प्रभावों की व्याख्या कीजिए। (2014)
उत्तर

पर्यावरण का अर्थ Meaning of Environment

पर्यावरण भूगोल का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। पर्यावरण’ भूतल पर चारों ओर का वह आवरण है जो मानव को प्रत्येक ओर से घेरे हुए है और उसके जीवन तथा क्रियाकलापों पर प्रभाव डालता है तथा संचालित करता है। इस दशा में मानव से सम्बन्धित समस्त बाह्य तथ्य, वस्तुएँ, स्थितियाँ तथा दशाएँ शामिल होती हैं, जिनकी क्रिया-प्रतिक्रियाएँ मानव के जीवन-विकास को प्रभावित करती हैं। प्राकृतिक पर्यावरण द्वारा मानव के सभी । क्रियाकलाप निर्धारित होते हैं। ये प्राकृतिक परिस्थितियाँ–धरातलीय बनावट, जलवायु, वनस्पति, मिट्टी, खनिज-सम्पदा तथा जैविक तत्त्व-किसी-न-किसी प्रकार मानव को प्रभावित करते हैं; अर्थात् मानव इस प्राकृतिक पर्यावरण की देन है। पर्यावरण के सम्बन्ध में सभी भूगोलवेत्ता एकमत नहीं हैं। अत: पर्यावरण को समझने के लिए निम्नांकित विद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषाओं का अध्ययन एवं विश्लेषण करना आवश्यक होगा –

जर्मन वैज्ञानिक फिटिंग ने पर्यावरण को परिभाषित करते हुए कहा है कि, “जीव के परिस्थिति कारकों का योग पर्यावरण है; अर्थात् जीवन की परिस्थिति के समस्त तथ्य मिलकर पर्यावरण कहलाते हैं।”
ए० जी० तांसले के अनुसार, “प्रभावकारी दशाओं का वह सम्पूर्ण योग जिसमें जीव निवास करते हैं, पर्यावरण कहलाता है।”
एम० जे० हर्सकोविट्ज के अनुसार, “पर्यावरण उन समस्त बाह्य दशाओं और प्रभावों का योग है। जो प्राणी के जीवन एवं विकास पर प्रभाव डालते हैं।”
प्रो० डेविस के अनुसार, “मानव के सम्बन्ध में भौगोलिक पर्यावरण से अभिप्राय भूमि अथवा मानव के चारों ओर फैले उन भौतिक स्वरूपों से है, जिनमें वह निवास करता है, जिनका उसकी आदतों और क्रियाओं पर प्रभाव पड़ता है।”

पर्यावरण के प्रकार एवं तत्त्व
Elements and Types of Environment

पर्यावरण को निम्नलिखित दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है –
1. भौतिक या प्राकृतिक पर्यावरण (Physicalor Natural Environment) – इसके अन्तर्गत वे समस्त भौतिक शक्तियाँ, तत्त्व एवं क्रियाएँ सम्मिलित की जा सकती हैं जिनको प्रत्यक्ष प्रभाव मानव के क्रियाकलापों पर पड़ता है। भौतिक शक्तियों में पृथ्वी की गतियाँ, सूर्यातप, गुरुत्वाकर्षण बल, भूकम्प एवं ज्वालामुखी क्रिया, भू-पटल की गतियाँ तथा प्राकृतिक तथ्यों से सम्बन्धित सभी दृश्य सम्मिलित किये जाते हैं। इन शक्तियों द्वारा भू-तल पर अनेक क्रियाओं का जन्म होता है, जिनसे पर्यावरण के तत्त्वों का जन्म होता है। इन शक्तियों अथवा क्रियाओं और तत्त्वों का सम्मिलित प्रभाव मानव के क्रियाकलापों पर पड़ता है।

भौतिक क्रियाओं में भूमि का अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण, ताप विकिरण, संचालन, संवाहन, वायु एवं जल की गतियाँ, जीवधारियों की उत्पत्ति तथा उनका विकास एवं विनाश आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं। इन प्रक्रियाओं से प्राकृतिक वातावरण अपनी अनेक क्रियाओं का क्रियान्वयन करता है, जिनका प्रत्यक्ष । प्रभाव मानव के क्रियाकलापों पर पड़ता है।
भौतिक पर्यावरण के तत्त्व – इनकी उत्पत्ति एवं विकास धरातल पर विभिन्न शक्तियों और प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप होता है। भौतिक पर्यावरण के प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. भौगोलिक स्थिति
  2. महासागर और तट
  3. नदियाँ और झीलें
  4. मिट्टियाँ, खनिज पदार्थ
  5. उच्चावच
  6. भूमिगत जल
  7. देशों का आकार एवं विस्तार
  8. जलवायु (तापमान, वर्षा, आर्द्रता आदि)
  9. प्राकृतिक वनस्पति तथा
  10. जैविक तत्त्व।

उपर्युक्त सभी तत्वों द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण का निर्माण होता है। इन सभी का सम्मिलित एवं व्यापक प्रभाव मानव-जीवन पर अवश्य ही पड़ता है। ये सभी तत्त्व मानव के लिए महत्त्वपूर्ण नि:शुल्क प्राकृतिक उपहार हैं। प्रो० हरबर्टसन के अनुसार, “भौतिक शक्तियों को मानव पर इतना अधिक प्रभाव पड़ता है कि वे मानव-जीवन एवं उसके क्रियाकलापों में स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं।”

2. सांस्कृतिक या मानव-निर्मित पर्यावरण (Cultural or Man-made Environment) – प्राकृतिक पर्यावरण को मनुष्य ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीकी विकास द्वारा परिवर्तित कर उन्हें अपने अनुरूप ढालने का प्रयास करता है; क्योकि वह (मानव) एक सजीव तथा क्रियाशील इकाई है। भूमि को जोतकर कृषि करना, उसमें नहरें, रेलपथ एवं सड़कें बनाना, वनों को साफ करना, पर्वतों को काटकर सुरंगें बनाना, नवीन बस्तियाँ बसाना, विभिन्न इमारतों का निर्माण करना, भू-गर्भ से खनिज पदार्थों का शोषण करना, उद्योग-धन्धे स्थापित करना आदि मानवीय क्रियाओं के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं। इस प्रकार मानव एक केन्द्रीय कारक है। मानव-निर्मित इस प्रकार के पर्यावरण को सांस्कृतिक या प्राविधिक पर्यावरण के नाम से पुकारा जाता है।

मानव-निर्मित वातावरण में भी विभिन्न शक्तियाँ, तत्त्व एवं प्रक्रियाएँ क्रियाशील रहती हैं। सांस्कृतिक वातावरण की शक्तियों में क्षेत्र-विशेष के जनसमूह के विभिन्न पहलुओं; जैसे-जनसंख्या, वितरण, लिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीकी आदि को सम्मिलित किया जाता है। सांस्कृतिक प्रक्रियाओं के अन्तर्गत पोषण, समूहीकरण, पुन: उत्पादन, प्रभुत्व स्थापन, प्रवास, पृथक्करण, अनुकूलन, समाचौर्जन, विशेषकरण तथा अनुक्रमण आदि सम्मिलित किये जाते हैं।
साँस्कृतिक वातावरण के तत्त्व – सांस्कृतिक वातावरण के तत्त्व मानव एवं उसके समूह दोनों की प्रभावित करते हैं। ये तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. प्राथमिक या अनिवार्य आवश्यकताएँ – भोजन, वस्त्र एवं आवास।
  2. आर्थिक व्यवसाय के प्रतिरूप – प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक व्यवसाय; जैसे-खाद्यान्न संग्रहण, आखेट करना, मछली पकड़ना, निर्माण उद्योग, परिवहन, वाणिज्य एवं व्यापार विभिन्न सेवाएँ आदि।
  3. तकनीकी प्रतिरूप – यन्त्र, उपकरण, यातायात एवं संचार के साधन।
  4. सामाजिक आवश्यकताएँ – शिक्षा, भाषा, धर्म, दर्शन, कला एवं साहित्य।
  5. सामाजिक संगठन – समुदाय, प्रबन्ध, सहकारिता, घर-परिवार, सामाजिक प्रथाएँ, लोक-रीतियाँ आदि।
  6. राजनीतिक संगठन – राज्य, सरकार, सम्पत्ति, कानून, शक्तियाँ, जनमत एवं अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध आदि।

प्राकृतिक पर्यावरण का मानव के क्रियाकलापों से सम्बन्ध
Relation between Natural Environment and Human Activities

प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक दोनों ही वातावरणों का सामूहिक प्रभाव मानव के क्रियाकलापों पर पड़ता है। इसके अन्तर्गत समय तत्त्व भी महत्त्वपूर्ण है। मानव भूगोल में दोनों ही प्रकार के वातावरण का विशेष महत्त्व है। वातावरण के सभी प्राकृतिक तत्त्व, सांस्कृतिक तत्त्वों से जुड़े हुए हैं। कुमारी सेम्पुल के शब्दों में, “मानव पृथ्वी के धरातल की उपज है। सभी जड़ एवं चेतन पदार्थों में भौगोलिक वातावरण का प्रभाव अन्तिम है।” प्रो० वायने सांस्कृतिक पर्यावरण को मानव-क्रियाओं और भौतिक पर्यावरण के पारस्परिक सम्बन्धों की अभिव्यक्ति मानते हैं। उनके अनुसार, “मानवीय क्रियाएँ जो विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सम्पन्न की जाती हैं, भौतिक वातावरण से सामंजस्य स्थापित करती हैं। इनके फलस्वरूप भौतिक पर्यावरण परिवर्तित होता है और सांस्कृतिक पर्यावरण का विकास होता है। मनुष्य स्वयं भी इस पर्यावरण का अभिन्न अंग बन जाता है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि मानव भूगोल के अध्ययन के लिए पर्यावरण के दोनों अंगों अर्थात् प्राकृतिक व सांस्कृतिक पर्यावरण का प्रारम्भिक ज्ञान होना अत्यन्त आवश्यक है।
[ मानव के क्रियाकलापों पर प्रभाव – इसके लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 का उत्तर देखें।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Man and His Environment

प्रश्न 2
उदाहरण देकर मानव की आर्थिक क्रियाओं पर प्राकृतिक पर्यावरण के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
या
उदाहरण देते हुए मानवीय क्रियाकलापों पर भौतिक वातावरण के प्रभाव को समझाइए।
या
मैदानों को सभ्यता का पालना” क्यों कहा जाता है ?
उत्तर
मानव भूगोल में उन प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक तथ्यों का अध्ययन किया जाता है जिनका प्रत्यक्ष सम्बन्ध मानव और उसके जीवन के क्रियाकलापों से होता है। ये तथ्य पर्यावरण से सम्बन्धित होते हैं। पर्यावरण के दो भेद हैं-

  1. प्राकृतिक पर्यावरण एवं
  2. सांस्कृतिक पर्यावरण।

प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यावरण के तत्त्व एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं तथा उनका सम्मिलित प्रभाव मानवीय जीवन एवं उसके कार्यों पर पड़ता है। यह भौगोलिक पर्यावरण ही होता है जो मानव के क्रियाकलापों एवं उसकी आदतों को निर्धारित करता है। इस सम्बन्ध में रैटजेल ने कहा है कि पर्यावरण एवं मानव के पारस्परिक सम्बन्धों में पर्यावरण अधिक शक्तिशाली है, यहाँ तक कि संसार के विभिन्न प्रदेशों में मनुष्यों के रहन-सहन, आर्थिक, औद्योगिक, सामाजिक एवं संस्कृति को वातावरण की ही देन माना गया है। कुमारी सेम्पुल ने इनके साथ-साथ मानने के विचारों, भावनाओं एवं धार्मिक विश्वासों पर भी प्राकृतिक़ पर्यावरण का प्रभाव बताया है। कार्ल रिट्र का मत था कि पृथ्वी और उसके निवासियों में परस्पर गहनतम सम्बन्ध होता है तथा एक के बिना दूसरे का वर्णन नहीं हो सकता। इस प्रकार-इस विचारधारा के समर्थकों को वातावरण निश्चयवाद‘ के प्रतिपादक के रूप में जाना जाता है। इस आधार पर प्राकृतिक पर्यावरण का प्रभाव मानव पर अनेक रूपों में पड़ता है, जिसे निम्नलिखित रूपों में समझा जा सकता है –

1. भौगोलिक स्थिति एवं मानव – पृथ्वीतल पर भिन्न-भिन्न क्षेत्रों और स्थानों की स्थिति की विभिन्नता देखी जाती है तथा भिन्न-भिन्न प्रकार के पर्यावरण का प्रभाव मानव-जीवन पर भी भिन्न-भिन्न होता है। भौगोलिक स्थिति का प्रभाव उस प्रदेश के निवासियों के रूप, रंग, आकृति, भोजन, वस्त्र, आवास, रहन-सहन और रीति-रिवाजों पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। यही कारण है कि द्वीपीय स्थिति मानव-निवास के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है, क्योंकि यहाँ पर सम जलवायु एवं बन्दरगाहों द्वारा व्यापार की सुविधाएँ रहती हैं। इन्हीं कारणों से जापान एवं ब्रिटेन ने अपनी द्वीपीय स्थिति का लाभ उठाया है तथा उनके निवासी प्रगति के चरम बिन्दु पर पहुँचे हैं। महाद्वीपीय स्थिति किसी प्रदेश के आर्थिक विकास में बाधक होती है। यही कारण है कि मंगोलिया एवं अफगानिस्तान सदृश देश आर्थिक प्रगति में अभी भी बहुत पीछे हैं। व्यापारिक मार्गों एवं उन्नत संसाधन-प्रदेशों के निकट स्थित देश भी विकास की गति में आगे रहते हैं। सिंगापुर एवं कोरिया इसके महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं। इस प्रकार उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि भौगोलिक स्थिति का मानव पर्यावरण पर अत्यन्त गहरा प्रभाव पड़ता है। तथा यह उसके आर्थिक विकास में सहायक होती है।

2. जलवायु एवं मानव – प्राकृतिक पर्यावरण का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व जलवायु है। मानवीय जीवन को प्रभावित करने और दिशा निर्धारित करने में जलवायु सबसे शक्तिशाली कारक है। मानव के लिए भोजन, वस्त्र, मकानों की आकृति तथा कृषि-फसलों को जलवायु ही निर्धारित करती है। पृथ्वीतल पर मानव का निवास जलवायु द्वारा निश्चित होता है। मानसूनी, उपोष्ण कटिबन्धीय तथा सम-शीतोष्ण जलवायु प्रदेशों में विश्व की 98% जनसंख्या निवास करती है। इसके विपरीत शीत-प्रधान टुण्ड्रा, उष्ण मरुस्थलों तथा आर्कटिक एवं हिमाच्छादित प्रदेशों के अस्थायी निवासों में विरल जनसंख्या निवास करती है। जलवायु द्वारा मानव-जीवन के निम्नलिखित पक्ष प्रभावित होते हैं –

  1. मानव का स्वास्थ्य एवं किसी प्रदेश में रह सकने की क्षमता तथा मानवीय भौतिक शक्ति
  2. मानव की खाद्य पूर्ति और पेयजल की उपलब्धि
  3. वस्त्र एवं उनके प्रकार
  4. मकान व उनके निर्माण की सामग्री तथा उनकी आकृति
  5. मानवीय क्रियाकलाप अर्थात् व्यवसाय तथा
  6. मानवीय संस्कृति।

जलवायु द्वारा ही मानव के व्यवसाय एवं कृषि-फसलें निर्धारित होती हैं। उदाहरण के लिए, भारतवर्ष में 100 सेमी से अधिक वर्षा वाले भागों में चावल एवं गन्ने का उत्पादन किया जाता है, जब कि 50 से 100 सेमी वर्षा वाले भागों में मिश्रित खाद्यान्न फसलें निर्धारित हुई हैं। अनुकूल जलवायु के कारण ही भूमध्यसागरीय प्रदेशों में गेहूं व फलों आदि की कृषि की जाती है। कठोर एवं विषम जलवायु के कारण विषुवतेरेखीय प्रदेशों में प्राकृतिक संसाधनों का बाहुल्य है, परन्तु औद्योगिक पिछड़ापन पाया जाता है।

उष्ण कटिबन्धीय एवं उपोष्ण कटिबन्धीय जलवायु प्रदेशों में सूती वस्त्र पहने जाते हैं, परन्तु शीत-प्रधान देशों में वर्ष-भर ऊनी या समूर के वस्त्र पहने जाते हैं। अधिक वर्षा वाले भागों में मकानों की छतें ढलवाँ बनाई जाती हैं, जिससे वर्षा का जल नीचे को बह जाए। हिम प्रदेशों में मकानों की छतें चौरस बनाई जाती हैं। टुण्ड्रा प्रदेशों के निवासी अपने मकानों के दरवाजे बहुत छोटे बनाते हैं जिससे उनमें बर्फीली वायु प्रवेश न कर सके। इसीलिए हंटिंगटन ने जलवायु को ही मानव संस्कृति का कारक और द्योतक बताया है।

3. स्थलाकृतियाँ एवं मानव – धरातल पर स्थलाकृतियाँ, पहाड़ी, पठारी, मरुस्थलीय तथा मैदानी प्रतिरूपों में मिलती हैं। मानव-आवास के लिए सर्वोत्तम क्षेत्र मैदान हैं। यहाँ पर जीविका चलाने के लिए कृषि, सिंचाई, पशुपालन, निर्माण उद्योग, परिवहन, संचार आदि सभी सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। अतः जनसंख्या तथा मानव-आवासों के लिए मैदान सबसे अधिक उपयुक्त होते हैं।

मैदानों की अपेक्षा पठारी भूमि पर कृषि एवं आवासों की सुविधाएँ कम होती हैं। पठारी व पहाड़ी क्षेत्रों में ऊँची-नीची भूमि से मानवीय जीवन में बाधा पड़ती है तथा आर्थिक विकास की गति भी धीमी रहती है। परिवहन साधनों के अभाव के कारण वृहत् उद्योगों का अभाव होता है। मानव जीवन-निर्वाह कृषि, पशुचारण एवं फलों की कृषि पर निर्भर करता है। पर्वतों का मानव को सबसे बड़ा लाभ हिम क्षेत्रों द्वारा नदियों को प्राप्त होने वाली जल की मात्रा है। संत्त वाहिनी नदियों के ऊपर जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है। इसी कारण जापान, स्विट्जरलैण्ड, नॉर्वे, स्वीडन आदि देशों में उद्योग-धन्धों का पर्याप्त विकास हुआ है। मैदानों में मानवीय आवास तथा आर्थिक विकास के निम्नलिखित कारण हैं –

  1. कृषि के लिए समतल एवं उपजाऊ भूमि
  2. सिंचाई के लिए नहरें तथा कुओं आदि की सुविधा
  3. कृर्षि-कार्यो के लिए उपजाऊ भूमि की प्राप्ति
  4. परिवहन के लिए सड़क एवं रेलमार्गों के निर्माण की सुविधा तथा
  5. उद्योग, वाणिज्य एवं व्यापार की बड़े पैमाने पर प्राप्त सुविधाएँ।

उपर्युक्त कारणों से ही विश्व की 97 प्रतिशत जनसंख्या मैदानों में निवास करती है। चीन, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, पश्चिमी यूरोपीय देश, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि देशों में अधिकांश जनसंख्या मैदानों में निवास करती है तथा ये मैदान’जनसंख्या का पालना’ (Cradle of Mankind) कहे जाते हैं। विश्व की प्राचीन सभ्यताओं का विकास भी इन्हीं मैदानों में हुआ है।

4. मिट्टियाँ और मानव – विश्व के सभी प्राणियों का भोजन प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी पर निर्भर करता है। शाकाहारी मानव को भोजन कृषि उत्पादन से प्राप्त होता है, जबकि मांसाहारी लोगों को भोजन पशुओं से प्राप्त होता है। इस प्रकार मानव के साथ-साथ पशुओं के भोज्य पदार्थों में भी मिट्टी को होथ रहता है। कांप एवं लावा मिट्टियों की उत्पादकता के कारण इनमें अधिक मानव आवास मिलते हैं; जैसे-सतलुज-गंगा का मैदान, यांगटिसीक्यांग का मैदान, डेन्यूब, राइन, डॉन, वोल्गा नदियों की घाटियों तथा मिसीसिपी के बेसिन में।
पर्वतीय मिट्टियों की अपेक्षा मैदानों की मिट्टियाँ अधिक उपजाऊ होती हैं, क्योंकि मैदानी मिट्टियाँ अधिक बारीक होती हैं तथा उनकी परतें भी अधिक गहरी होती हैं एवं उनमें पोषक तत्त्व भी अधिक होते हैं। इसके विपरीत पर्वतीय मिट्टियों में अपरदन के कारण पोषक तत्त्व बह जाते हैं तथा उत्पादकता की कमी के कारण कम मानव निवास करते हैं।

5. प्राकृतिक वनस्पति एवं मानव – प्राकृतिक वनस्पति जलवायु की देन होती है। प्रत्येक प्रकार की वनस्पति का मानव-जीवन पर अपना अलग-अलग प्रभाव होता है। वनों में निवास करने वाले लोगों को लकड़ी पर्याप्त मात्रा में मिल जाती है; अत: उनके मकानों में लकड़ी का प्रयोग अधिक होता है। पेड़-पौधों द्वारा वायु-प्रदूषण कम होता है तथा मानव को पर्याप्त प्राणदायिनी ऑक्सीजन प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त इनसे बाढ़, जलवृष्टि, अपरदन तथा मरुस्थलों के प्रसार जैसी समस्याओं पर नियन्त्रण पाया जा सकता है एवं वे आर्थिक विकास में सहायक होते हैं। वन नमीयुक्त पवनों के मार्ग में बाधा उपस्थित कर वर्षा कराने में सहायक होते हैं। ये कृषि-कार्यों में भी सहायक हैं एवं पशुओं को चार उपलब्ध कराते हैं। इनसे उद्योग-धन्धों को कच्चा माल प्राप्त होता है। विषुवत्रेखीय प्रदेशों में वन ही आजीविका के महत्त्वपूर्ण साधन हैं। घास के मैदानों में पशुपालन का कार्य अधिक किया जाता है। इसीलिए प्रेयरी, स्टेप्स, पम्पाज आदि घास के मैदानों में कृषि के बड़े-बड़े फार्म हैं। इस प्रकार प्राकृतिक वनस्पति किसी-न-किसी रूप में मानव को प्रभावित करती है।

6. जन्तु-जगत् एवं मानव-मानव पशु – जगत् की सहायता से अपने पर्यावरण के साथ समायोजन में लगा रहता है। वास्तव में मानव और जन्तु एक-दूसरे को सहायता एवं सहयोग देकर, दूसरे का सहयोग प्राप्त कर सह-जीवन द्वारा अपने सहअस्तित्व की स्थापना करते हैं। पशुओं से मानव को दूध, मांस, खाल, ऊन, समूर, सवारी तथा सुरक्षा प्राप्त होती है। खिरगीज लोगों की अर्थव्यवस्था का आधार पशु ही हैं। डेनमार्क में दुधारू पशु पाले जाने के कारण यह विश्व का महत्त्वपूर्ण दुग्ध उत्पादक, देश बन गया है। ऑस्ट्रेलिया में उत्तम नस्ल की भेड़े पाले जाने के कारण वह विश्व का मुख्य ऊन उत्पादक देश बन गया है। पश्चिमी यूरोपीय तट व मध्य-पूर्वी प्रशान्त सागरीय तटे मछली के अक्षय भण्डार होने के कारण जनसंख्या को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मरुस्थलों में ऊँट परिवहन का एकमात्र साधन है तथा ‘रेगिस्तान का जहाज‘ कहलाता है, परन्तु यहाँ पर कम जनसंख्या निवास करती : है। पर्वतीय एवं उच्च पठारी क्षेत्रों में याक नामक पशु बोझा एवं सवारी ढोने के काम आता है। एस्किमो प्रजाति अपने आर्थिक विकास के लिए पूर्णत: पशुओं पर आधारित है।

बहुत-से पशु एवं छोटे जीव मानव के लिए हानिकारक भी होते हैं। वन्य पशुओं में शेर, चीता, भालू आदि हिंसक होते हैं, जबकि रेंगकर चलने वाले जीवों में सर्प आदि प्राणघातक होते हैं। उड़ने वाले जन्तुओं में टिड्डी सबसे अधिक हानिकारक है। इस प्रकार जीव-जन्तु प्रकृति के सन्तुलन को बनाये रखने में सहायक होते हैं।

7. शैल एवं खनिज पदार्थ तथा मानव – मानव सभ्यता का विकास खनिजों द्वारा हुआ है। पाषाण युग से लेकर अणु युग तक मानव ने विकास की अनेक सीढ़ियाँ पार की हैं। कुछ खनिज पदार्थ शक्ति के स्रोत होते हैं; जैसे- कोयला एवं पेट्रोलियम। इनसे कारखाने चलाये जाते हैं। यूरेनियम, थोरियम आदि खनिज़ों से परमाणु शक्ति गृहों का संचालन किया जाता है।

वर्तमान काल में खनिज पदार्थ किसी राष्ट्र की शक्ति का पर्याय माने जाते हैं। जिस देश के पास जितने अधिक कोयला, पेट्रोल, यूरेनियम, लोहा, ताँबा, जस्ता, ऐलुमिनियम आदि खनिजों के भण्डार होते हैं, वह देश उतना ही अधिक शक्तिशाली एवं विकसित माना जाता है। ब्रिटेन ने उन्नीसवीं शताब्दी में लोहे एवं कोयले के बल पर ही औद्योगिक क्रान्ति का श्रीगणेश किया था। खनिज पदार्थों की समाप्ति पर आर्थिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। कुछ खनिज पदार्थ मानव समुदाय के लिए घातक होते हैं। इनमें अणु एवं परमाणु खनिजों का प्रमुख स्थान है। द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा किये गये अणु बम प्रहार से जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी नगरों का विनाश हो गया था तथा बहुत-से लोग। काल-कवलित हो गये थे। इस प्रकार के अणु एवं परमाणु युद्ध विश्व शान्ति के लिए एक स्थायी खतरा बन गये हैं, परन्तु फिर भी खनिज उत्पादक क्षेत्र विषम परिस्थितियों को रखते हुए भी जनसंख्या के संकेन्द्रण बने हुए हैं।

8. महासागर एवं मानव – पृथ्वीतल के भाग पर जलमण्डल (सागर एवं महासागर) का विस्तार है। महासागर और उसका तट मानव-जीवन के लिए बड़े महत्त्वपूर्ण हैं। इनके प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. जलवायु में परिवर्तन एवं उसका समकारी प्रभाव
  2. मानव के भोज्य पदार्थों की उपलब्धि
  3. खनिज संसाधनों की प्राप्ति
  4. औद्योगिक प्रोत्साहन
  5. यात्रा एवं व्यापारिक मार्गों की सुविधा
  6. शक्ति संसाधनों की प्राप्ति
  7. सभ्यता का विकास तथा
  8. स्वास्थ्य-मनोरंजन के केन्द्र।

सागरों एवं महासागरों में प्रवाहित गर्म एवं ठण्डे जल की धाराएँ किसी स्थान अथवा प्रदेश की जलवायु में परिवर्तन ला देती हैं। महासागरे मत्स्य उत्पादन के अक्षय भण्डार हैं; जैसे- ग्रान्ड बैंक्स (Grand Banks) एवं डॉगर बैंक्स। इनमें नमक, पोटाश, मैग्नीशियम, मोती, मूंगा, सीप आदि बहुमूल्य खनिज पदार्थ प्राप्त होते हैं। स्वेज एवं पनामा नहर मार्गों ने विश्व को एक-दूसरे के समीप ला दिया है। महासागरीय ज्वार-भाटे से जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन भी किया जाता है। बहुत-से समुद्र तटवर्ती नगर एवं पत्तन पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित हुए हैं। इस प्रकार महासागर मानव के लिए बहुत उपयोगी हैं एवं उनकी भावी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के महत्त्वपूर्ण स्रोत बन सकने की सामर्थ्य रखते हैं।

इस प्रकार स्पष्ट है कि प्राकृतिक पर्यावरण मानवीय क्रियाकलापों को बहुत अधिक प्रभावित करता है तथा पर्यावरण में उसकी केन्द्रीय भूमिका है, क्योंकि प्राकृतिक पर्यावरण के तत्त्वों का मानव वर्ग द्वारा ही उपभोग किया जाता है अथवा उपयोगिता प्राप्त की जाती है।

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प्रश्न 3
“मानव ने प्राकृतिक भू-दृश्य में परिवर्तन कर सांस्कृतिक भू-दृश्य का निर्माण किया है।” तर्क एवं उदाहरणों सहित अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
या
“मानव एवं प्राकृतिक पर्यावरण एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं।” उपयुक्त उदाहरणों की सहायता से इस कथन की पुष्टि कीजिए।
या
मानव और पर्यावरण के सम्बन्ध की विवेचना कीजिए। [2011, 14, 15, 16]
उत्तर
भौगोलिक पर्यावरण के दो महत्त्वपूर्ण अंग हैं- प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक। दोनों ही प्रकार के वातावरणों का प्रभाव मानवीय जीवन एवं उनके क्रियाकलापों पर पड़ता है, परन्तु मानव अपने बुद्धि-बल के प्रयास से इन दोनों ही पर्यावरणों में कुछ परिवर्तन करता है, जिससे वह अपनी सत्ता बनाये रख सके एवं उन्नति के मार्ग पर बढ़ता रहे। प्राकृतिक पर्यावरण मानव को अनेक रूपों में प्रभावित करता है तथा आर्थिक एवं सामाजिक क्रियाओं का समन्वय करता है।
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सांस्कृतिक पर्यावरण मानव द्वारा निर्मित भू-दृश्य होता है। इसके द्वारा मानव अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति विभिन्न प्रकार के पर्यावरण में रहता हुआ पूरी करता है। प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यावरण के तत्त्व मानव के भोजन, वस्त्र, आवास, व्यवसाय एवं सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों पर व्यापक रूप से अपना प्रभाव डालते हैं। इसी प्रभाव के कारण वह अपने रहन-सहन का अनुकूलन करती है। इन क्रियाओं को ‘पर्यावरण समायोजन’ कहते हैं। इसे निम्नलिखित रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है –
अनुकूलन से तात्पर्य मानव को स्वयं पर्यावरण के अनुकूल बनाने का प्रयास है। इसे स्वयं द्वारा किया हुआ परिवर्तन भी कह सकते हैं। अनुकूलन में मानव दो प्रकार की क्रियाएँ करता है-

  1. आन्तरिक एवं
  2. बाह्य। आन्तरिक अनुकूलन भी दो प्रकार का होता है –
    1. ऐच्छिक एवं
    2. अनैच्छिक या प्राकृतिक रूपान्तरण भी दो प्रकार का होता है –
      • प्राकृतिक पर्यावरण का रूपान्तरण एवं
      • सांस्कृतिक पर्यावरण का रूपान्तरण।

यदि यूरोप के किसी देश; जैसे नार्वे, स्वीडन या ब्रिटेन का कोई मानव समुदाय भारत में आकर दक्षिण तमिलनाडु राज्य में निवास करने लगता है तो तमिलनाडु राज्य की जलवायु उसे अपने देश की जलवायु की अपेक्षा बहुत गर्म लगती है तथा ग्रीष्म काल में सूर्यातप भी अधिक असहनीय हो जाता है। इसीलिए गर्मी से बचने के लिए वह यूरोपियन समुदाय कुछ कृत्रिम साधनों; जैसे वातानुकूलित कमरों एवं रेफ्रीजरेटर तथा कूलर का प्रयोग करता है। धूप से बचाव के लिए ऊनी कपड़ों के स्थान पर सूती कपड़े, छाते आदि का प्रयोग करने लगता है; अर्थात् अपने को प्राकृतिक पर्यावरण के अनुसार ढाल लेता है तथा तदनुसार अपना अनुकूलन कर लेता है।

एक यूरोपियन परिवार ने दक्षिणी भारत में आने के बाद अपने आपको पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए तमिल भाषा के कुछ शब्द सीखे हैं। नमस्कार की विधि तथा खान-पान की नयी प्रणालियाँ सीखने के साथ-साथ कुछ भोज्य-पदार्थों में अपनी रुचि जाग्रत की है। यह कार्य उनका ऐच्छिक अथवा आन्तरिक अनुकूलन है, परन्तु उस यूरोपियन परिवार के कई पीढ़ियों तक निवास करते-करते उसकी सन्तान की त्वचा में श्याम वर्ण के कण बनने लगेंगे तथा सूर्यातप को सहन करने में भी समर्थ होने लगेंगे। इस प्रकार यह क्रिया उन लोगों का अनैच्छिक आन्तरिक अनुकूलन या प्राकृतिक अनुकूलन कहलाएगी। उन्होंने तमिल समाज में अपना मेल-जोल बैठाने के लिए भारतीय वेशभूषा के कुछ अंश भी अपना लिये हैं, यह उनका बाह्य अनुकूलन है। जलवायु की विषमता से बचने के लिए उन्होंने वातानुकूलित मकान, कूलर, रेफ्रीजरेटर एवं छातों का प्रयोग किया है। यह कार्य प्राकृतिक पर्यावरण को रूपान्तरण कहलाएगा।

इस प्रकार मानव ने अपने ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी तथा नवीन प्रविधियों द्वारा पर्यावरण में परिवर्तन के प्रयास किये हैं तथा उसे अपने अनुकूल ढाला है; अत: मानव द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण को अपने अनुकूल ढालने की प्रक्रिया समायोज़न कहलाती है। मानव अब निराशावादी नहीं है, वह अपनी परिस्थितियों का दास मात्र भी नहीं है। जॉर्ज टैथम ने भी कहा है कि पर्यावरण.मानव को निःसन्देह प्रभावित करता है, परन्तु प्रतिक्रिया-स्वरूप वह भी अपने पर्यावरण को प्रभावित करता है। मानव द्वारा चन्द्रतल पर पदार्पण, बड़ी-बड़ी नदियों पर बाँध बनाकर जल-प्रवाह को व्यवस्थित करना, साइबेरिया के उत्तर में स्थित टुण्ड्रा प्रदेशों में समूर फार्मों की स्थापना तथा आर्कटिक प्रदेशों में काँच के घरों का निर्माण कर सब्जियों का उत्पादन करना आदि सभी कार्य प्राकृतिक पर्यावरण को अपने अनुकूल बनाने का ही प्रयास है।

इस प्रकार प्राकृतिक पर्यावरण की सीमा में किसी प्रदेश का मानव-वर्ग अपनी आवश्यकताओं, क्षमताओं और छाँट के अनुसार, पर्यावरण के साथ समायोजन कर, उन प्रदेशों का क्षेत्र संगठन करता है। मानव प्राकृतिक पर्यावरण का प्रयोग कर सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण करता है। सांस्कृतिक पर्यावरण के तत्त्व भी प्रभावशाली होते हैं; उनका प्रभाव प्राकृतिक तत्त्वों पर तो होता ही है। इसके साथ-साथ वे एक-दूसरे को भी प्रभावित करते हैं। अत: पर्यावरण एवं मानवीय क्रियाएँ एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं तथा संगठित एवं मिश्रित रूप में ही उनको अध्ययन किया जाना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
मानव प्राकृतिक पर्यावरण पर विजय प्राप्त कर चुका है।” आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
उत्तर
वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान तथा प्रविधियों द्वारा मानव ने प्राकृतिक पर्यावरण पर विजय प्राप्त करने का प्रयास किया है। उसने ऊँचे-ऊँचे पर्वतों को पार कर लिया है, नदियों के प्रवाह मार्ग को अपनी इच्छानुसार मोड़ लिया है। वह अन्तरिक्ष में गया है तथा अनेक नवीन नक्षत्रों की खोज की है। जो अभी उससे अछूते हैं, उन्हें खोजने का प्रयास अभी जारी है। भौगोलिक पर्यावरण मानवे पर अपना व्यापक प्रभाव डालता है। उसे जहाँ पर भी परिवर्तन की सम्भावनाएँ दिखलाई पड़ती हैं, वह अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर लेता है, परन्तु पर्यावरण का प्रत्यक्ष प्रभाव मानव के क्रियाकलापों पर पड़ता है। अतः मानव सबसे उत्तम भौगोलिक कारक है, वह उसका उपयोग अपने ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर करता है। इस सम्बन्ध में बोमैन ने भी कहा है कि “वातावरण के भौगोलिक तत्त्व मानव का सम्पर्क पाकर परिवर्तनशील हो जाते हैं।’

यहाँ यह समझ लेना आवश्यक है कि मानव ने प्राकृतिक पर्यावरण पर पूर्ण रूप से विजय प्राप्त नहीं की है। उस पर पूर्ण रूप से विजय प्राप्त करना सम्भव नहीं है। उदाहरण के लिए, ध्रुवीय शीत प्रदेशों में चावल का उत्पादन तथा विषुवत्रेखीय प्रदेशों में रेण्डियर का पालना आज भी असम्भव है, परन्तु उन्होंने अनुकूलन द्वारा कुछ प्रायोगिक प्रयास किये हैं। उसे अनुकूलता के लिए कुछ समय प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है तथा परिस्थितियाँ अनुकूल होते ही वह इन तत्त्वों को अपने पक्ष में कर लेगा। कुमारी सेम्पुल ने कहा है, “मानव प्रकृति पर विजय उसकी आज्ञा मानकर ही प्राप्त कर सकता है। मानव अपनी बुद्धि एवं शक्ति का प्रयोग करता है, क्योंकि पर्यावरण उसे उन्नति का अवसर प्रदान करता है। अत: मानव तथा पर्यावरण का सम्बन्ध बहुत ही घनिष्ठ है।”

प्रश्न 2
पर्यावरण से क्या तात्पर्य है? [2014]
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 के अन्तर्गत ‘पर्यावरण का अर्थ’ शीर्षक देखें।

प्रश्न 3
“मानव और जन्तु एक-दूसरे के पूरक है” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के अन्तर्गत शीर्षक (6) देखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
भौतिक अथवा प्राकृतिक पर्मवरण से का तात्पर्य है?
या
भौतिक पर्यावरण को परिभाषित कीजिए। (2012, 13, 16)
उत्तर
प्राकृतिक पर्यावरण से तात्पर्य उन समस्त भौतिक शक्तियों (सूर्यातप, पृथ्वी की गतियाँ, गुरुत्वाकर्षण, ज्वालामुखी आदि), प्रक्रियाओं (भूमि अपक्षय अवसादीकरण, विकिरण, चालन, संवहन, वायु-जल की गति, जीवन-मरण विकास आदि) से है; जिनका प्रत्यक्ष प्रभाव मानव-जीवन पर पड़ता है।

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प्रश्न 2
द्वीपीय स्थिलि मानव-विकास के लिए कैसी मानी गयी है?
उत्तर
द्वीपीय स्थिति मानव-विकास के लिए सर्वोत्तम मानी गयी है, क्योंकि यहाँ पर सम जलवायु एवं बन्दरगाहों पर व्यापार की व्यापक सुविधाएँ रहती हैं। उदाहरणार्थ- जापान एवं ब्रिटेन।

प्रश्न 3
कौन-सी सिट्टियाँ अधिक उपजाऊ हैं-पर्वतीय मिट्टियाँ या मैदानी मिट्टियाँ?
उत्तर
मैदानी मिट्टियाँ अधिक उपजाऊ हैं, क्योंकि ये अधिक बारीक होती हैं तथा इनकी परतें भी अधिक गहरी होती हैं। इनमें पोषक तत्त्व भी अधिक पाये जाते हैं।

प्रश्न 4
प्राकृतिक वनस्पति किसकी देन है?
उत्तर
प्राकृतिक वनस्पति जलवायु की देन है।

प्रश्न 5
वर्तमान काल में किसी राष्ट्र की शक्ति का पर्याय किसे माना जाता है?
उत्तर
वर्तमान काल में जो देश अपनी खनिज सम्पदा का जितना अधिक दोहन कर रहा है वह शक्तिशाली होता जा रहा है। अत: किसी राष्ट्र की शक्ति का पर्याय उस राष्ट्र की खनिज सम्पदा है।

प्रश्न 6
पर्यावरण के दो प्रकार बताइए। [2009]
उत्तर
पर्यावरण के दो प्रकार निम्नवत् हैं –

  1. भौतिक या प्राकृतिक पर्यावरण तथा
  2. सांस्कृतिक या मानवनिर्मित पर्यावरण।

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1
“पर्यावरण उन समस्त बाह्य दशाओं और प्रभावों का योग है जो प्राणी के जीवन एवं विकास पर प्रभाव डालते हैं। पर्यावरण की यह परिभाषा दी है –
(क) प्रो० डेविस ने
(ख) जर्मन वैज्ञानिक फिटिंग ने
(ग) ए०जी० तांसले ने
(घ) एमजे० हर्सकोविट्ज ने
उत्तर
(घ) एम०जे० हर्सकोविट्ज ने।

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प्रश्न 2
पर्वतों का मानव को सबसे बड़ा लाभ है-
(क) प्राकृतिक वनस्पति की प्राप्ति
(ख) प्राकृतिक पर्यावरण की प्राप्ति
(ग) हिम क्षेत्रों द्वारा नदियों को प्राप्त होने वाले जल की मात्रा
(घ) (क) एवं (ख) दोनों की प्राप्ति
उत्तर
(ग) हिम क्षेत्रों द्वारा नदियों को प्राप्त होने वाले जल की मात्रा।

प्रश्न 3
वर्तमान काल में किसी राष्ट्र की शक्ति का पर्याय माना जाता है –
(क) उस राष्ट्र की सैनिक क्षमता
(ख) उस राष्ट्र का कृषि उत्पादन
(ग) उस राष्ट्र की जनसंख्या
(घ) उस राष्ट्र की खनिज सम्पदा
उत्तर
(घ) उस राष्ट्र की खनिज सम्पदा।

प्रश्न 4
निम्नांकित में कौन भौतिक पर्यावरण का तत्त्व नहीं है ?
(क) भूमि के रूप
(ख) मिट्टियाँ
(ग) खनिज पदार्थ
(घ) अधिवास
उत्तर
(घ) अधिवास।

प्रश्न 5
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है। [2016]
(क) पर्यावरण की कार्यप्रणाली प्राकृतिक नियमों से संचालित होती है।
(ख) पर्यावरण जैविक संसाधनों का भण्डार है।
(ग) पर्यावरणीय व्यवस्था में स्वयं संवर्द्धन की क्षमता है।
(घ) पर्यावरणीय तत्त्वों में पार्थिव एकता विद्यमान है।
उत्तर
(ख) पर्यावरण जैविक संसाधनों का भण्डार है।

प्रश्न 6
पर्यावरण ज्ञान के लिए प्रयुक्त होने वाले पारिस्थितिकी शब्द का अंग्रेजी पर्याय ‘इकोलॉजी सर्वप्रथम किस जर्मन जैव वैज्ञानिक ने प्रस्तावित किया था? [2016]
(क) ओडम
(ख) अर्नस्ट हैकल
(ग) डेविस
(घ) हरबर्टसन
उत्तर
(ख) अर्नस्ट हैकल

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प्रश्न 7
“मानव पृथ्वी के धरातल की उपज है।” यह कथन निम्नलिखित में से किस विद्वान का है। [2016]
(क) डिमाजियाँ
(ख) रेटजैल
(ग) हेटनर
(घ) कुमारी सेम्पुल
उत्तर
(घ) कुमारी सेम्पुल।

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