UP Board Solutions for Class 11 English Poetry Short Poem Chapter 8 If

UP Board Solutions for Class 11 English Poetry Short Poem Chapter 8 If

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About the Poet: Rudyard Kipling was born in Mumbai in 1865. He got his education in England. He won great fame as a journalist. He wrote many stories about the jungles, beasts, army and navy of India. He wrote more than twenty books.
About the Poem: In this poem we note the spirited appeal of the poet to the youths of the country. He describes the qualities necessary to be a real man, e.g. balance of mind, patience, a strong will power, love and proper use of time.

Central Idea
It is a didactic poem of Rudyard Kipling. It has a universal appeal. It inspires our youths to acquire some qualities to be a real man. These qualities are balance of mind, patience, a strong will power, love and proper use of time. Moreover he should not leave the touch of common people and should not be proud in the company of great people. Then he will be an ideal man.

(यह रुडयार्ड किपलिंग की एक शिक्षाप्रद कविता है। इसमें सर्वव्यापी अपील है। यह नवयुवकों को एक वास्तविक मनुष्य बनने के लिए कुछ गुणों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। ये गुण हैं-मस्तिष्क का सन्तुलन, धैर्य, दृढ़ इच्छा-शक्ति, प्रेम तथा समय का उचित सदुपयोग। इसके अतिरिक्त उसे साधारण व्यक्तियों का सम्पर्क नहीं छोड़ना चाहिए और बड़े लोगों की संगति में अभिमान नहीं करना चाहिए। तब वह एक आदर्श मनुष्य होगा।)

EXPLANATIONS (With Meanings & Hindi Translation)

1. If you can keep your head when all about you
Are losing theirs and blaming it on you,
If you can trust yourself when all men doubt you,
But make allowance for their doubting too;
If you can wait and not be tired of waiting,
Or being lied about, don’t deal in lies,
Or being hated, don’t give way to hating,
And yet don’t look too good, not talk too wise;

[ Word-meanings : keep your head = सन्तुलित रहना to maintain the balance of mind; lose theirs = भावुक होना, उत्तेजित होना to get excited; blaming = दोष देनाः trust = भरोसा करना rely on; make allowance for their doubting too = यदि दूसरे सन्देह करें तो करने दो let others doubt or criticize if you are true, sincere and honest; being lied about = तुम्हारे विषय में जब लोग झूठ कहें, when people tell lies about you; deal in lies = झूठ बोलना tell lies; don’t look too good = अपने को दूसरों से महान् मत सिद्ध करो don’t show yourself too superior to others; not talk too wise = ऐसी बातें मत करो जिससे अधिक बुद्धिमान लगो।]

भावार्थ- एक अच्छा व्यक्ति उस समय भी शान्त रहता है और अपने मस्तिष्क का सन्तुलन नहीं खोता जब दूसरे व्यक्ति उस पर दोष लगाते हैं और उसकी आलोचना करते हैं। यदि दूसरे व्यक्ति उस पर सन्देह करें तब भी वह उस सन्देह पर विश्वास नहीं करता और अपने ऊपर भरोसा रखता है। वह व्यक्ति धैर्यवान होता है और धैर्य रखने से थकता नहीं। यदि उसके विषय में कोई व्यक्ति झूठी बातें कहे तब भी वह स्वयं झूठ नहीं बोलता या अन्य व्यक्ति उससे घृणा करें तब भी वह दूसरों से घृणा नहीं करता। न तो वह स्वयं को अन्य लोगों से महान् सिद्ध करता है और न ऐसी बातें करता है जिससे अधिक बुद्धिमान प्रतीत हो।

Reference : These lines have been taken from the poem If composed by Rudyard Kipling.
[ N.B. : The above reference and context will be used for all the explanations of this poem.]

Context: In these lines the poet addresses his son and tells him many qualities which are necessary to be a good man. A balanced mind, patience, courage, self-respect, etc. are some of the qualities which make him a real man. Such a man gets name and fame in the world.

Explanation : In this opening stanza the poet says that a good man should have balance of mind even when other people criticize him or blame him. He should not be excited. If other people doubt in him and have no faith in him, he should have courage and faith in himself. If other people tell lies about him, he should not tell lies. He should not hate anybody even if others hate him. He should not show himself superior to or wiser than others. Such a man will be loved and respected by others.

(इस प्रथम पद्यांश में कवि कहता है कि एक भले मनुष्य को मस्तिष्क उस समय भी सन्तुलित होना चाहिए जब अन्य व्यक्ति उसकी आलोचना करें और उसे दोष दें। उसे उत्तेजित नहीं होना चाहिए। यदि अन्य व्यक्ति उस पर सन्देह भी करें और उसमें विश्वास न रखें तब भी उसे अपने ऊपर विश्वास होना चाहिए और उसे साहस रखना चाहिए। यदि अन्य व्यक्ति उसके विषय में झूठ बोलें तब भी उसे झूठ नहीं बोलना चाहिए। यदि अन्य व्यक्ति उससे घृणा भी करें तब भी उसे उनसे घृणा नहीं करनी चाहिए। उसे स्वयं को अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा बड़ा या बुद्धिमान प्रदर्शित नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को सभी के द्वारा प्रेम किया जाएगा तथा उसे सम्मानित किया जाएगा।)

2. If you can dream and not make dreams your master,
If you can think-and not make thoughts your aim,
If you can meet with Triumph and Disaster
And treat those two impostors just the same;
If you can bear to hear the Truth you have spoken
Twisted by knaves to make a trap for fools,
Or watch the things you gave your life to, broken,
And stop and build’em up with worn-out tools;

[Word-meanings : dream = कल्पना करना, महत्त्वाकांक्षा करना to imagine, to be ambitious; not make dreams your master = कल्पनाओं के अधीन मत होओ don’t be overpowered merely by imaginations; triumph = विजय, सफलता success, joys; disaster = असफलता, दुःख failures, sorrows; impostors = धोखेबाज deceivers, swindlers; twisted = तोड़-मरोड़कर कहना misrepresented; knaves = दुष्ट लोग wicked people; make a trap = जाल में फंसाना to cheat; watch = देखना to see; worn out tools = पुराने औजार old tools; gave your life to = समर्पित करना to devote.]

भावार्थ– इस पद्यांश में कवि कहता है कि मनुष्य को महत्त्वाकांक्षी होना चाहिए किन्तु केवल कल्पनाओं के अधीन ही नहीं होना चाहिए बल्कि उसे साकार भी करना चाहिए, केवल स्वप्न देखना ही अपने जीवन का ध्येय मत बनाओ बल्कि सोची हुई बातों को पूरा भी करो। सुख और दुःख में तथा सफलता या असफलता में समान रहो, क्योंकि कभी-कभी सफलता मनुष्य को अभिमानी बना देती है और असफलता निराशा को जन्म देती है। जब दुष्ट व्यक्ति तुम्हारे कहे हुए सत्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करे और धोखे से तुम्हें अपने चंगुल में फंसाना चाहे यदि तुम उसे भी सहन करने के योग्य हो, यदि तुम उन बातों को नष्ट होता हुआ देखने के योग्य हो जिनके लिए तुमने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और यदि तुम उन्हें अपने पुराने औजारों से पुनः बनाने के योग्य हो, तब तुम वास्तव में एक अच्छे मनुष्य बन सकते हो।

Explanation: In this stanza the poet advises us that we should have ambitions but we should not depend only on imaginations and dreaming. We should be able to give concrete shape to our dreams. We should be same in weal and woe. We should not be proud on our success and should not be disappointed in failures. We should be able to bear the misrepresented truths also. We should be able to rebuild the things which we made by our life-long efforts but now they have been destroyed. If we have all these qualities in ourselves, we shall be a man in real sense.

(इस पद्यांश में कवि हमको शिक्षा देता है कि हमें महत्त्वाकांक्षा रखनी चाहिए, किन्तु हमें केवल कल्पनाओं पर ही आधारित नहीं होना चाहिए। हमें अपनी कल्पनाओं को साकार रूप देने के योग्य होना चाहिए। हमें सुख और दुःख में समान रहना चाहिए। हमें अपनी सफलता पर अभिमान नहीं करना चाहिए और असफलता में निराश नहीं होना चाहिए। हमें गलत ढंग से प्रस्तुत किए हुए सत्य को भी सहन करने के योग्य होना चाहिए। हमें उन बातों के पुनर्निर्माण के योग्य होना चाहिए जिनको हमने अपनी जीवन-पर्यन्त की कोशिशों से किया था और अब वे नष्ट कर दी गई हैं। यदि हम अपने अन्दर यह सभी गुण पैदा कर लें तब हम वास्तव में एक मनुष्य बन सकते हैं।)

3. If you can make one heap of all your winnings
And risk it on one turn of pitch-and-toss,
And lose, and start again at your beginnings
And never breathe a word about your loss;
If you can force your heart and nerve and sinew
To serve your turn long after they are gone,
And so hold on when there is nothing in you,
Except the Will which says to them, “Hold on !”

[Word-meanings: heap = ढेर pile; winnings = सफलताएँ successes; risk = खतरे में डालना take the chance of loss; pitch-and-toss = सिक्का उछालकर भाग्य का निर्धारण करना; breathe a word = एक शब्द भी कहना to say even a single word; loss = हानि harm; force = विवश करना compel;
nerve and sinew = अपनी समस्त शक्तियाँ all your energies; turn = उद्देश्य purpose; hold on = डटे रहो, काम जारी रखो keep the work on; will = दृढ़ इच्छा-शक्ति determination.]

भावार्थ- कवि के अनुसार अच्छा व्यक्ति वही होगा जो अपनी सारी कमाई. एवं सफलताओं को इकट्ठा करके एक साथ दाँव पर लगा सके और खो देने पर उसे पुनः आरम्भ करने का साहस रख सके और अपनी हानि के सम्बन्ध में एक शब्द भी न कहे। ऐसा व्यक्ति जो अपनी सारी शक्ति एवं कार्यक्षमता नष्ट हो जाने पर भी पुन: अपने कार्य में पूरी लगन से लग सके और अपने कार्य पर डटे रहने की दृढ़ इच्छा-शक्ति रखता हो वही व्यक्ति अच्छा व्यक्ति होगा।

Explanation : In this stanza the poet says that a good man never complains even though he may have lost everything which he has earned. He should be prepared to face any situation and should never complain. If he has lost everything even then he should be prepared to do his best to earn those things again. If he has lost all his energies yet he should have a firm will-power to start it again. Such a man will be a man in real sense.

(इस पद्यांश में कवि कहता है कि एक भला मनुष्य कभी भी शिकायत नहीं करता, चाहे वह सभी कुछ खो दे जो उसने कमाया है। उसे प्रत्येक स्थिति का सामना करने के लिए तैयार होना चाहिए और कभी भी शिकायत नहीं करनी चाहिए। यदि उसने सब कुछ भी खो दिया है तब भी उसे इन वस्तुओं को पुन: प्राप्त करने के लिए तैयार होना चाहिए। यदि उसने अपनी सारी शक्तियों को भी खो दिया है तब भी उसके पास इन्हें पुन: आरम्भ करने के लिए दृढ़ इच्छा-शक्ति होनी चाहिए। ऐसा व्यक्ति वास्तव में सच्चा मनुष्य होगा।)

4. If you can talk with crowds and keep your virtue,
Or walk with Kings-nor lose the common touch,
If neither foes nor loving friends can hurt you,
If all men count with you, but none too much,
If you can fill the unforgiving minute
With sixty seconds, worth of distance run.
Yours is the Earth and everything that is in it,
And-which is more-you’ll be a man, my son !

[Word-meanings: common touch = साधारण व्यक्तियों का सम्पर्क friendship with common people; keep = कायम रखना maintain; foes = दुश्मन enemies; hurt = हानि पहुंचाना give harm;
count with = महत्त्व रखना have importance; the unforgiving minute = समय जो किसी को क्षमा नहीं करता या पुनः नहीं लौटता time which never returns.]

भावार्थ- इस अन्तिम पद्यांश में कवि कहता है कि एक अच्छा व्यक्ति जब साधारण व्यक्तियों में रहता है। या उनसे बातचीत करता है तब अपने गुणों को बनाए रखता है। यदि वह राजाओं या बड़े व्यक्तियों के साथ रहता है तब भी साधारण व्यक्तियों से अपना सम्पर्क नहीं तोड़ता अर्थात् अपने ऊपर अभिमान नहीं करता। न तो उसके मित्र ही और न दुश्मन उसे हानि पहुँचाते हैं। सभी व्यक्ति उसका महत्त्व समझते हैं, किन्तु कोई भी अत्यधिक महत्त्व नहीं समझता। एक अच्छा मनुष्य अपने समय के प्रत्येक पल का महत्त्व समझता है, क्योंकि बीता हुआ समय पुनः नहीं आता। अंन्त में कवि अपने पुत्र को सम्बोधित करते हुए उससे कहता है कि यदि उपर्युक्त सभी गुण तुम अपने अन्दर पैदा कर लो तब तुम इस पृथ्वी के स्वामी बन जाओगे और इस पृथ्वी पर सभी कुछ तुम्हारा हो जाएगा तथा तुम एक सच्चे मनुष्य बन जाओगे।

Explanation : In this concluding stanza the poet advises the young men that they should not lose their virtues in the company of common people. They should not be proud in the company of great people. Their behaviour should be so noble that their friends as well as their enemies should love them. They should use every minute of their time in useful pieces of work. They should always remember that time once lost never returns. So he addresses his son and advises him to develop all these qualities in him. Then he will become the true master of this world and he will be able to fulfil his ambitions. Thus the poet encourages all young men to be real men.

(इस अन्तिम पद्यांश में कवि नवयुवकों को शिक्षा देता है कि उन्हें साधारण व्यक्तियों की संगति में अपने । सद्गुणों को नहीं खोना चाहिए। महान् व्यक्तियों की संगति में उन्हें गर्व नहीं करना चाहिए। उनका व्यवहार इतना अच्छा होना चाहिए कि उनके मित्र भी और उनके दुश्मन भी उनसे प्यार करें। उन्हें अपने समय के प्रत्येक पल का सदुपयोग अच्छे कार्यों में करना चाहिए। उन्हें सदा याद रखना चाहिए कि एक बार खोया हुआ समय फिर लौटकर नहीं आता। इसलिए वह अपने पुत्र को सम्बोधित करता है और उसे शिक्षा देता है। कि वह अपने अन्दर इन सभी गुणों को पैदा करे। तब वह इस संसार का सच्चा स्वामी बनेगा और वह अपनी अभिलाषाओं को पूरा कर सकेगा। इस प्रकार कवि सभी नवयुवकों को सच्चा मनुष्य बनने के लिए प्रेरित करता है।)

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