UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्यांजलि Chapter 1 अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 1
Chapter Name अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
Number of Questions 5
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्यांजलि Chapter 1 अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

कवि का साहित्यिक परिचय और कृतिया

प्रश्न 1.
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ के जीवन एवं उनकी रचनाओं पर प्रकाश डालिए। [2009, 10, 11]
या
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए। [2013, 16, 18]
उत्तर
जीवन-परिचय-श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ आधुनिक हिन्दी खड़ी बोली के प्रथम महाकवि थे। इन्होंने काव्य के क्षेत्र में भाव और भाषा दोनों दृष्टियों से नये-नये प्रयोग किये और युगानुरूप नवीन आदर्शों की प्रतिष्ठा की। हरिऔध का जन्म संवत् 1922 वि० (सन् 1865 ई०) में ग्राम निजामाबाद (जिला आजमगढ़) के एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित भोलासिंह और माता का नाम रुक्मिणी देवी था। भोलासिंह के बड़े भाई पं० ब्रह्मसिंह ज्योतिष के अच्छे विद्वान् थे। हरिऔध जी की प्रारम्भिक शिक्षा इन्हीं की देख-रेख में हुई। मिडिल परीक्षा पास करने के पश्चात् ये काशी के क्वींस कॉलेज में पढ़ने के लिए भेजे गये, किन्तु अस्वस्थता के कारण पढ़ न सके। इन्होंने घर पर ही अंग्रेजी और उर्दू का अध्ययन किया। संवत् 1939 वि० (सन् 1882 ई०) में इनका विवाह हुआ। विवाह के पश्चात् इन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, इसलिए सर्वप्रथम इन्होंने निजामाबाद के तहसीली स्कूल में लगभग तीन वर्ष तक अध्यापन-कार्य किया। तदुपरान्त ये कानूनगो हो गये और उत्तरोत्तर उन्नति कर सदर कानूनगो के पद पर पहुँच गये। संवत् 1966 वि० (सन् 1909 ई०) में सरकारी नौकरी से अवकाश प्राप्त कर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अवैतनिक अध्यापक हो गये। सन् 1941 ई० तक वे इसी पद पर रहे। इसके पश्चात् अवकाश ग्रहण कर आजमगढ़ को अपना निवासस्थान बनाया और वहीं रहकर साहित्य-सेवा में अपना जीवन लगा दिया। यहीं संवत् 2002 (सन् 1945 ई० ) में इनका स्वर्गवास हो गया।

साहित्यिक सेवाएँ–हरिऔध जी द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि थे। इन्होंने खड़ी बोली को नया रूप प्रदान किया तथा प्राचीन कथानकों में नवीन उद्भावनाएँ समाहित कीं। भाषा की विविधता के साथ-साथ इन्होंने हिन्दी छन्दों में भी नवीन छन्द-पद्धति की उद्भावना की। इनके काव्य में वात्सल्य रस एवं विप्रलम्भ श्रृंगार
का जगमगाता रूप झलकता है।

रचनाएँ–हरिऔध जी ने गद्य-पद्य दोनों में ही सफलतापूर्वक रचना की है। इनके द्वारा रचे गये काव्यों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है—(1) प्रियप्रवास, (2) वैदेही-वनवास, (3) रस-कलश, (4) चौखे-चौपदे और चुभते-चौपदे, (5) इनके अतिरिक्त हरिऔध जी के अन्य काव्य-ग्रन्थ इस प्रकार हैं-(i) रुक्मिणीपरिणय, (ii) प्रद्युम्न-विजय, (iii) बोलचाल, (iv) पद्य-प्रसून, (v) पारिजात, (vi) ऋतु-मुकुर, (vii) काव्योपवन, (viii) प्रेम-पुष्पोपहार, (ix) प्रेम-प्रपंच, (४) प्रेमाम्बु-प्रस्रवण, (xi) प्रेमाम्बु-वारिधि। (6) इनके प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं- (i) ठेठ हिन्दी का ठाठ, (ii) अधखिला फूल, (iii) प्रेमकान्ता।।

साहित्य में स्थान-नि:संकोच हम यह कह सकते हैं कि हरिऔध जी की काव्य-प्रतिभा विविधरूपिणी है। वे अपनी रचनाओं में कहीं रीतिकालीन हैं तो कहीं भारतेन्दुकालीन, कहीं द्विवेदीकालीन हैं तो कहीं नवयुगकालीन। इनके इन समस्त रूपों में इनका द्विवेदीकालीन रूप ही प्रमुख है। भाव और भाषा दोनों ही क्षेत्रों में इन्होंने नये-नये प्रयोग किये और आधुनिक युगानुरूप नवीन उद्भावनाएँ भी दीं। निश्चय ही ये हिन्दी के गौरव हैं।

पद्यांशों पर आधारित प्रश्नोचर

पवन-दूतिका

प्रश्न–दिए गए पद्यांशों को फ्ढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1.
बैठी खिन्ना यक दिवस वे गेह में थीं अकेली ।
आके आँसू दृग-युगल में थे धरा को भिगोते ।।
आई धीरे इस सदन में पुष्प-सद्गंध को ले ।
प्रात: वाली सुपवन इसी काल वातायनों से ।।
संतापों को विपुल बढ़ता देख के दु:खिता हो ।
धीरे बोली स-दुःख उससे श्रीमति राधिका यों ।।
प्यारी प्रात: पवन इतना क्यों मुझे है सताती ।
क्या तू भी है कलुषित हुई काल की क्रूरता से ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) घर में दुःखी होकर एक दिन अकेले कौन बैठा था?
(iv) फूलों की सुगंध से युक्त होकर राधा के घर में किसने प्रवेश किया?
(v) राधा ने प्रातःकालीन वायु से दुःखित होकर क्या कहा?
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।।
अथवा
शीर्षक नाम- पवन-दूतिका।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या–प्रात:कालीन सुखद वायु पुष्यों की सुगंध लेकर धीरे से खिड़कियों के रास्ते उस घर में प्रविष्ट हुई। जो राधा घर में बहुत दु:खी होकर अकेली बैठी थीं। वायु संयोग में सुखद लगती थी, वही अब वियोग में दु:ख बढ़ाने वाली सिद्ध हुई. अत: उस वायु के कारण अपनी व्यथा को और बढ़ता देखकर राधा बहुत दु:खित होकर उससे बोली कि हे प्यारी प्रभातकालीन वायु! तू मुझे इतना क्यों सता रही है? क्या तू भी मेरे भाग्य की कठोरता से प्रभावित होकर दूषित हो गयी है अर्थात् समय या भाग्य तो मेरे विपरीत है ही, पर क्या तू भी उससे प्रभावित होकर मेरा दु:ख बढ़ाने पर तुली है, जब कि सामान्यत: तू लोगों को सुख देने वाली मानी जाती है?’
(iii) एक दिन राधा घर में दु:खी होकर अकेली बैठी हुई थीं।
(iv) फूलों की सुगंध से युक्त होकर राधा के घर प्रात:कालीन सुखद वायु ने प्रवेश किया।
(v) राधा ने प्रात:कालीन वायु से दुःखित होकर कहा कि हे प्रभातकालीन वायु! तू मुझे क्यों सताती है? का तू भी मेरे भाग्य की कठोरता से प्रभावित होकर दूषित हो गई है।

प्रश्न 2.
लज्जाशीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आये ।
होने देना विकृत-वसना तो न तू सुन्दरी को ।।
जो थोड़ी भी श्रमित वह हो गोद ले श्रान्ति खोना ।
होंठों की औ कमल-मुख की म्लानतायें मिटाना ।।
कोई क्लान्ता कृषक-ललना खेत में जो दिखावे ।
धीरे-धीरे परस उसकी क्लान्तियों को मिटाना ।।
जाता कोई जलद यदि हो व्योम में तो उसे ला।
छाया द्वारा सुखित करना, तप्त भूतांगना को ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) राधा पवन-दूतिका से राह में पथिकों के साथ कैसा व्यवहार करने को कहती हैं?
(iv) राधा ने पवन-दूतिका को पथिक कृषक-स्त्री के ऊपर किसके द्वारा छाया करने को कहा
(v) ‘कृषक ललना’ शब्द में कौन-सा समास होगा?
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।
अथवा
शीर्षक नाम- पवन-दूतिका।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध’।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-हे पवन ! यदि तुझे मार्ग में कोई लाजवन्ती स्त्री दिखाई पड़े तो इतने वेग से न बहना कि उसके वस्त्र उड़कर अस्त-व्यस्त हो जाएँ और उसका शरीर उघड़ जाए। यदि वह थोड़ी-सी भी थकी दिखाई दे तो उसे गोद में लेकर अर्थात् उसे चारों ओर से घेरकर उसकी थकान मिटा देना, जिससे कि (थकान के कारण) उसके सूखे होंठ और मुरझाया हुआ कमल-सदृश मुख प्रफुल्लित हो उठे।।
(iii) राधा पवन-दूतिका से राह में पथिकों के साथ परोपकार का व्यवहार करने को कहती हैं।
(iv) राधा ने पवन-दूतिका को थकित कृषक-स्त्री के ऊपर मेघ द्वारा छाया करने को कहा है।
(v) ‘कृषक-ललना’ शब्द में ‘तत्पुरुष समास’ होगा।

प्रश्न 3.
तू देखेगी जलद-तन को जा वहीं तद्गता हो ।
होंगे लोने नयन उनके ज्योति-उत्कीर्णकारी ।।
मुद्रा होगी वर बदन की मूर्ति-सी सौम्यता की ।
सीधे साधे वचन उनके सिक्त होंगे सुधा से ।।
नीले फूले कमल दल-सी गात की श्यामता है।
पीला प्यारा वसन कटि में पैन्हते हैं फबीला ।।
छूटी काली अलके मुख की कान्ति को है बढ़ाती ।
सद्वस्त्रों में नवल तन की फूटती-सी प्रभा है ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) प्रस्तुत पंक्तियों में राधा पवन-दूतिका को किसकी पहचान बताती हैं?
(iv) श्रीकृष्ण के नेत्रों की शोभा कैसी है?
(v) श्रीकृष्ण कटि में कैसा वस्त्र धारण करते हैं?
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धत है।
अथवा
शीर्षक नाम- पवन-दूतिका।।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-राधा कहती हैं कि हे पवन! वहाँ जाकर तू मेघ के समान शोभा वाले श्रीकृष्ण को देखेगी। उनके शरीर की श्यामलता खिले हुए नीलकमल के समान मोहक है। मेरे प्रियतम कृष्ण कटि में आकर्षक पीला वस्त्र धारण करते हैं। उनके मुख पर लटकी हुई काले बालों की लट उनकी शोभा को चार चाँद लगा रही होगी। उनके सुन्दर वस्त्रों से उनके मनोहर शरीर की शोभा अत्यधिक बढ़ रही होगी।
(iii) प्रस्तुत पंक्तियों में राधा पवन-दूतिका को श्रीकृष्ण की पहचान बताती हैं।
(iv) श्रीकृष्ण के सुन्दर नेत्र प्रकाश बिखेरते हैं।
(v) श्रीकृष्ण कटि में पीला वस्त्र धारण करते हैं।

प्रश्न 4.
कोई प्यारा कुसुमे कुम्हला गेह में जो पड़ा हो ।
तो प्यारे के चरण पर ला डाल देना उसी को ।।
यों देना ऐ पवन बतला फूल-सी एक बाला ।
म्लाना हो हो कमल-पग को चूमना चाहती है ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) राधा पवन-दृतिका से मुरझाए हुए पुष्प को कहाँ डाल देने के लिए कह रही हैं?
(iv) मुरझाए हुए पुष्प की उपमा किससे की गई है?
(v) श्रीकृष्ण के कमल के समान कोमल चरणों को कौन चूमना चाहता है?
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धत है।
अथवा
शीर्षक नाम- पवन-दूतिका।
कवि का नाम–अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या–हे पवन ! कृष्ण के घर पहुँचकर यदि कोई मुरझाया हुआ सुन्दर फूल वहाँ पड़ा मिल जाए तो उसे प्रिय कृष्ण के चरणों में लाकर रख देना। इस प्रकार तू उन्हें यह बता देना कि इसी फूल की तरह विरह में मुरझाई हुई एक तरुणी (राधा) आपके कमल समान कोमल घरणों को चूमना चाहती है। शायद उस मुरझाए फूल को देखकर ही उन्हें मेरी याद आ जाए।
(iii) राधा पवन-दूतिका से मुरझाए हुए पुष्प को श्रीकृष्ण के चरणों में लाकर डाल देने के लिए कह रही हैं।
(iv) मुरझाए हुए पुष्प की उपमा राधा से की गई है।
(v) श्रीकृष्ण के कमल के समान कोमल चरणों को राधाजी चूमना चाहती हैं।

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