UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 6 शाप-मुक्ति (मंजरी)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 6 शाप-मुक्ति (मंजरी)

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महत्वपूर्ण गद्यांश की व्याख्या

दादी का स्वभाव …………………. नहीं हुई।
संदर्भ:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मंजरी’ के ‘शाप-मुक्ति’ नामक पाठ से लिया गया है। इस कहानी के लेखक रमेश उपाध्याय हैं।

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प्रसंग:
दादी को नेत्रों के इलाज के लिए दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक (UPBoardSolutions.com) डॉ० प्रभात के पास ले जाया गया। बातचीत में पता चला कि वह इलाहाबाद के वकील का लड़का मंटू था जिसने बचपन में आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें फोड़ दी थीं।

व्याख्या:
दादी ने निश्चय कर लिया था कि वह डॉ० प्रभात से नेत्र चिकित्सा नहीं कराएँगी। दादी जो ठान लेती थी, बच्चों की तरह हठपूर्वक वही करती थीं। दादी को समझाने की सब कोशिशें बेकार गईं। दादी ने डॉ० प्रभात द्वारा लिखी गई आँखों की दवाई, जो दादी की आँख में डाली जानी थी, मँगाने से साफ इनकार कर दिया। अच्छी तरह से समझाने पर भी दादी ने अपना निश्चय नहीं बदला।

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पाठ का सार (सश)

मैं दादी के नेत्रों की चिकित्सा कराने दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सालय में डॉ० प्रभात के पास गया। बात-बात में पता चला कि डॉ० प्रभात इलाहाबाद में पड़ोस में रहने वाला ‘मंटू’ था, जो मेरे (बब्बू का) बचपन का साथी था। दादी भी (UPBoardSolutions.com) यह जानकर प्रसन्न हुई। परंतु साथ ही दादी ने डॉ० प्रभात को यह भी बताया कि इलाहाबाद में एक वकील को बदमाश लड़का भी ‘मंटू’ नाम का था। , दादी ने मुझे बताया कि मंटू ने बचपन में आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें फोड़ दी थीं। उस घटना को यादकर मैं हैरान रह गया। दादी को पैंतीस साल पहले की वह घटना याद थी। दादी ने निश्चय किया कि वह मंटू यानी डॉ० प्रभात से इलाज नहीं कराएँगी। डॉ० प्रभात दादी को समझाने स्वयं घर आया। उसने दादी से कहा, “मैंने बचपन में पिल्लों की आँखें फोड़कर जो पाप किया वह मुझे याद है। उस पाप के प्रायश्चित्त में ही मैं नेत्र चिकित्सक बना। दादी के शाप से अपनी आँखें फूटने से पहले कितनों को आँखें दे जाऊँगा। उसमें दो आँखें दादी की भी होंगी।”

डॉ० प्रभात की बात सुनकर दादी ने उसे गले लगा लिया। उसे आशीर्वाद देते हुए कहा कि
तुम्हारी आँखों की ज्योति हमेशा बनी रहे। इस प्रकार डॉ० प्रभात को दादी के शाप से मुक्ति मिली।

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प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को

प्रश्न 1:
आक के पौधे से गाढ़ा दूध निकलता है। अन्य किन-किन पेड़-पौधों से गाढ़ा दूध निकलता है, उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
बरगद, धतूरा, कटहल आदि पेड़-पौधों से भी गाढ़ा दूध निकलता है।

प्रश्न 2:
अपने पास के किसी अस्पताल में जाकर किसी (UPBoardSolutions.com) आँख के डॉक्टर से मिलिए और पूछिए कि उन्होंने यह पेशा क्यों चुना।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

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प्रश्न 3:
किसी दृष्टिहीन व्यक्ति से मिलिए, उससे बातचीत (UPBoardSolutions.com) कीजिए और महसूस कीजिए कि उसकी कल्पना में दुनिया कैसी है।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 4.
यह जानकारी हम …………………. डाल रहा था। उपर्युक्त अनुच्छेद को ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से पूछने के लिए चार प्रश्न बनाइए।
उत्तर:
प्र०1. कुतिया ने तीन पिल्ले कहाँ दिए थे?
प्र०2. पिल्ले कैसे (UPBoardSolutions.com) थे?
प्र०3. मंटू ने कौन-सा प्रयोग किया?
प्र०4. मंटू के प्रयोग का दुष्परिणाम क्या हुआ?

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विचार और कल्पना

प्रश्न 1:
और
प्रश्न 3: विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2:
जब उस पिल्ले की आँखें चली गयी होंगी तो उसे क्या-क्या कठिनाइयाँ हुई होंगी। सोचिए और लिखिए।।
उत्तर:
उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता होगा, आने-जाने (UPBoardSolutions.com) में कठिनाई होती होगी इत्यादि।

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प्रश्न 4:
बचपन में मंटू ने पिल्लों के साथ बहुत खराब काम किया था। इस विषय में आप के मन में जो विचार आ रहे हैं, उन्हें लिखिए।
उत्तर:
बचपन में मंटू ने सच में बहुत खराब काम किए थे। उसने मासूम पिल्लों की आँख में आक का दूध डालकर उन्हें अनजाने में ही सही लेकिन अंधा बना दिया। मंटू को इस तरह का प्रयोग नहीं करना चाहिए था।

कहानी से

प्रश्न 1:
डॉ० प्रभात का चेहरा किसे दुःखदायी स्मृति से काला-सा हो गया?
उत्तर:
डॉ० प्रभात का चेहरा दुखदायी स्मृति से (UPBoardSolutions.com) इसलिए काला पड़ गया, क्योंकि बचपन में डॉ० प्रभात ने आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें फोड़ दी थीं।

प्रश्न 2:
मंटू ने बचपन में क्या पाप किया था और उस पाप का प्रायश्चित उसने किस प्रकार किया?
उत्तर:
मंटू ने बचपन में आक के दूध से तीन पिल्लों की आँखें फोड़ दी थीं। इसका प्रायश्चित्त उसने नेत्र चिकित्सक बनकर किया।

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प्रश्न 3:
“पर मैं तो आँखों का डॉक्टर हैं दादी अम्मा! बुढ़ापे का इलाज मेरे पास कहाँ?” डॉ० प्रभात ने यह जवाब दादी के किस बात के उत्तर में दिया था?
उत्तर:
दादी जब लेखक के साथ डॉक्टर प्रभात के क्लीनिक में पहुँची तो उन्होंने मुस्कुराते हुए उनका स्वागत किया, आओ, आओ, दादी अम्मा! कहाँ, क्या तकलीफ है? उसकी इस बात पर दादी बोलीं “कोई तकलीफ नहीं, बेटा। बस बुढ़ापे (UPBoardSolutions.com) में नजर कमजोर हो ही जाती है।” दादी के इसी बात का उत्तर देते हुए डॉ. प्रभात ने उपरोक्त वाक्य कहे।

प्रश्न 4:
दादी डॉ० प्रभात से अपनी आँखों का इलाज क्यों नहीं करवाना चाहती थीं, फिर वह इलाज के लिए कैसे तैयार हुई?
उत्तर:
दादी डॉ० प्रभात से आँखों का इलाज करवाने के लिए इसलिए तैयार नहीं थी क्येंकि डॉ० प्रभात ने बचपन में पिल्लों की आँखें फोड़ दी थीं। लेकिन डॉ० प्रभात ने समझाया कि वह उसी प्रायश्चित्त के कारण ही नेत्र चिकित्सक बना है। उसे दादी का वह शाप भी याद है जिसमें उन्होंने कहा था (UPBoardSolutions.com) कि एक दिन उसकी आँखें भी फूट जाएँगी। इसलिए अपनी आँखें फूटने से पहले वह अधिक से अधिक लोगों को आँखें दे जाना चाहता है। डॉ० प्रभात की यह बात सुनकर दादी इलाज के लिए तैयार हो गईं।

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भाषा की बात

नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 1:
निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए- नयी, ठंड, पाप, बूढ़ा।
उत्तर:
नयी        – पुरानी
ठण्ड      – गर्म
पाप        – पुण्य
बूढा        – युवा

प्रश्न 2:
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए टस से मस न होना, हृदय से लगाना, मुस्कान लुप्त होना।
उत्तर:
टस से मस न होना (स्थिर रहना): दादी अपने निर्णय से टस से मस न हुईं।
हृदय से लगाना (प्यार करना): दादी ने डॉ० प्रभात को हृदय से लगा लिया।
मुस्कान लुप्त होना (फिक्र में पड़ जाना): परिचय हो जाने पर डॉ० प्रभात की (UPBoardSolutions.com) मुस्कान लुप्त हो गई, क्योंकि उसे बचपन के पाप का ध्यान आ गया।

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प्रश्न 3:
बच्चा’ शब्द में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर ‘बचपन’ शब्द बना है जो भाववाचक संज्ञा है। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाइए लड़का, अपना, अनाड़ी, रूखा।
उत्तर:
लड़का           –        लड़कपन
अपना            –        अपनापन
अनाड़ी           –        अनाड़ीपन
रूखा             –        रूखापन

प्रश्न 4:
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित (UPBoardSolutions.com) पदों के कारक बताइए
(क) मैं तो आँखों का डॉक्टर हूँ। – संबंध कारक
(ख) मैं तुम्हारी दवाई लिख रहा हूँ। – संबंध कारक
(ग) दूध पिल्ले की आँखों में डाल रहा था। – अधिकरण कारक
(घ) सब लोगों ने मंटू को बुरा-भला कहा। – कर्म कारक

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यह भी करें:
नोट– विद्यार्थी स्वयं करें।

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