UP Board Solutions for Practical Home Science प्रयोगात्मक गृह विज्ञान सम्बन्धी सैद्धान्तिक ज्ञान

UP Board Solutions for Practical  Home Science प्रयोगात्मक गृह विज्ञान सम्बन्धी सैद्धान्तिक ज्ञान (Theoretical Knowledge Regarding Practical Home Science)

UP Board Solutions for Practical Home Science प्रयोगात्मक गृह विज्ञान सम्बन्धी सैद्धान्तिक ज्ञान

पाक-कला

प्रश्न 1.
घर में तरकारियाँ या सब्जियाँ बनाने से पूर्व क्या-क्या सावधानियाँ रखनी आवश्यक हैं?
उत्तरः
तरकारियाँ बनाने से पूर्व सावधानियाँ –
प्रत्येक घर में तरकारियाँ बनाने से पूर्व निम्नलिखित सावधानी रखनी चाहिए –
प्रयोगात्मक गृहविज्ञान सम्बन्धी सैद्धान्तिक ज्ञान –

  • घर में हमेशा ताजी सब्जी प्रयोग में लानी चाहिए।
  • सब्जियाँ गली या सड़ी हुई नहीं होनी चाहिए।
  • पत्ते वाली हरी सब्जियों को अच्छी तरह साफ करके बनाना चाहिए।
  • कुछ सब्जियों में फली के अन्दर कीड़े पड़ जाते हैं; जैसे–मटर, सेम, रमास इत्यादि; इन्हें ध्यानपूर्वक देखकर साफ कर लेना चाहिए। .
  • सब्जियों को काटने से पूर्व अच्छी तरह धो लेना चाहिए।
  • काटने के पश्चात् सब्जी को धोना नहीं चाहिए अन्यथा उसके पोषक तत्त्व नष्ट हो जाएँगे।
  • जिन सब्जियों को घी में तलकर बनाना होता है उनका पानी अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए।
  • कटहल तथा जिमीकन्द आदि सब्जियों को काटने से पूर्व, चाकू तथा हाथ में सरसों का तेल लगा लेना चाहिए, जिससे सब्जी चिपकती नहीं है तथा हाथ में जलन भी नहीं होती है।
  • सब्जी को छीलते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि छिलका पतला ही उतारें अन्यथा व्यर्थ में सब्जी नष्ट होती है तथा कुछ पोषक तत्त्व जैसे खनिज तथा विटामिन भी व्यर्थ चले जाते हैं।
  • आलू, अरवी, शकरकन्द, कच्चा केला इत्यादि सब्जियों को छिलके सहित उबालना चाहिए।
  • बथुवे को उबालने के बाद उसके पानी को फेंकना नहीं चाहिए, इसे आटा गूंधने में प्रयोग किया जा सकता है।
  • यदि सब्जी प्रेशर कुकर में बनानी है तो सब्जी के टुकड़े कुछ बड़े काटने चाहिए।

प्रश्न 2.
घरेलू उपयोग में आने वाली निम्नलिखित वस्तुओं को आप कैसे तैयार करेंगी, संक्षेप में उत्तर दीजिए –
(क) सूखी सब्जी तैयार करना।
(ख) पत्तेदार सब्जियों को बनाना।
(ग) अरवी के पत्तों को तैयार करना।
उत्तरः
(क) सूखी सब्जी तैयार करना –
सब्जी को मोटे-मोटे टुकड़ों में काट लीजिए। कड़ाही में घी गर्म करके मसाला व प्याज भून लीजिए, उसी में दही या टमाटर भून लीजिए। फिर कटी हुई सब्जी उसमें डालकर पिसा हुआ नमक डाल दीजिए। पानी मत डालिए। धीमी आँच पर पकने दीजिए। बीच-बीच में थोड़ी-थोड़ी देर के अन्तर पर सब्जी को चला दीजिए जिससे वह जले नहीं और सभी टुकड़े समान रूप से गल जाएँ और उसमें मसाला व नमक अच्छी तरह से मिल जाएँ। सब्जी भुन जाने पर उसमें गरम मसाला व खटाई डाल दीजिए और कड़ाही को नीचे उतार लीजिए, अब सब्जी में ऊपर से हरा धनिया व हरी मिर्च डाल दीजिए।

सभी भरवाँ सब्जियाँ सूखी सब्जी के ही अन्तर्गत आती हैं। भरवाँ सब्जी में साबुत सब्जी को बीच से काटकर अन्दर मसाला भरकर बनाया जाता है। कुछ विशेष सब्जियाँ; जैसे परवल, करेला, बैंगन, तोरई, टमाटर, शिमला-मिर्च, टिण्डे, भिण्डी आदि को मसाला भरकर भी बनाया जाता है तथा काटकर भी।

ध्यान रखें कि जिस बर्तन में सब्जी पकाई जाए वह बर्तन भली प्रकार से कलई किया हुआ हो। आजकल उपलब्ध नॉनस्टिक कड़ाहियों तथा तवों पर भरवाँ सब्जियाँ बनाना अधिक अच्छा समझा जाता है।

(ख) पत्तेदार सब्जियों को बनाना –
पत्तेदार सब्जियों को धोकर साफ कर लीजिए, फिर चाकू से मोटा-मोटा काट लीजिए और डेगची में पानी उबलने के लिए रख दीजिए। अधिक बारीक काटने से कुछ पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। उबाल आने पर कटी हुई सब्जी व मूंग की (छिलके वाली) थोड़ी दाल डाल दीजिए और ढककर पका लीजिए। जब वह अच्छी तरह से गल जाए तब उसमें थोड़ा मक्का या गेहूँ का आटा पानी में घोलकर डाल दीजिए और ज्यादा मात्रा में हरा धनिया काटकर डाल दीजिए तथा गाढ़ा होने तक चमचे से चलाती रहिए। फिर हींग व जीरे की छोंक लगाकर थोड़ी मिर्च व खटाई डाल दीजिए। मेथी, पालक, चने, सरसों आदि का साग विशेष रूप से इसी प्रकार काटकर समान मात्रा में मिलाकर पकाया जाता है। बथुआ, मेथी, पालक, मूली, सरसों को एक साथ मिलाकर पकाया जाता है। यह बहुत स्वादिष्ट व पौष्टिक होता है।

(ग) अरवी के पत्तों को तैयार करना –
अरवी के पत्तों को धोकर साफ कर लीजिए। अब थोड़ा बेसन घोलकर उसमें नमक, मिर्च, धनिया आदि डालकर पत्तों पर लेप कर लीजिए और पत्तों को रोल कर लीजिए। फिर पतीली या भगोने में पानी उबालिए और वे रोल टोस्टर में रखकर उसके ऊपर रख दीजिए तथा किसी तश्तरी आदि से ढक दीजिए। थोड़ी देर पश्चात् नीचे उतार लीजिए। थाली में रखकर गँडेरी की भाँति चाकू से काट लीजिए, अब कड़ाही में घी गर्म करके उन टुकड़ों को बेसन में लपेटकर तल लीजिए। ये चटनी या सॉस के साथ खाने में बहुत स्वादिष्ट लगते हैं। यदि सब्जी बनानी हो तो पिसा मसाला

घी में भूनकर सभी टुकड़ों को उसमें डालकर पानी व नमक डाल दीजिए तथा पक जाने पर खटाई व गरम मसाला डालकर उतार लीजिए। हरा धनिया और काली मिर्च भी डाले जा सकते हैं।

प्रश्न 3.
तलने की सामान्य विधि लिखिए।
उत्तरः
तलने की सामान्य विधि कुछ खाद्य-व्यंजन तलकर तैयार किए जाते हैं। खाद्य-सामग्री को तलकर पकाने के लिए माध्यम के रूप में घी, तेल आदि वसाप्रधान तरल पदार्थों को अपनाया जाता है। कड़ाही में ‘घी’ या ‘तेल’ की मात्रा इतनी डालनी चाहिए कि तली जाने वाली खाद्य-सामग्री अच्छी तरह से डूब जाए। खाद्य-सामग्री तेल में डालने से पूर्व तेल के गर्म हो जाने पर उसमें नीबू की दो-चार बूंदें निचोड़ दीजिए। नीबू के अभाव में थोड़ा पिसा नमक तेल में डाल दीजिए, जिससे तेल में तेज धुआँ निकलेगा। अब तेल को नीचे उतारकर ठण्डा कर लीजिए और छानकर खाद्य-सामग्री बनाने के लिए प्रयोग कीजिए।

ऐसा करने से तली जाने वाली खाद्य-सामग्री में तेल की अरुचिकर गन्ध नहीं आती है और पौष्टिकता की दृष्टि से भी यह सरल और सुपाच्य हो जाता है। यदि खाद्य-सामग्री को घी में तलना हो तो घी को इतना अधिक गर्म मत कीजिए कि उसमें से तेज धुआँ निकलने लगे। उसको इतना ही गर्म करिए कि कड़ाही के तले (कड़ाही का निचला भाग) में कुछ लाली या गर्माहट अनुभव हो। उसी समय तले जाने वाले खाद्य पदार्थ को घी में छोड़ दीजिए। धीरे-धीरे यदि आग के तेज होने का आभास हो तो कड़ाही को नीचे उतार लीजिए। यदि गैस का चूल्हा या स्टोव हो तो आग को थोड़ा कम कर दीजिए। ‘घी’ या ‘तेल’ के अधिक गर्म हो जाने पर आग के तेज होने से खाद्य-सामग्री ऊपर से जल जाती है और अन्दर से भली प्रकार सिक नहीं पाती है। ऐसी खाद्य-सामग्रियाँ स्वादहीन लगती हैं। अत: खाद्य-सामग्री को तलने में विशेष सावधानी रखिए।

मठरी, सेव आदि को तलने के लिए घी को अधिक तेज गर्म मत कीजिए क्योंकि ये वस्तुएँ मैदा या बेसन से बनाई जाती हैं जो ऊपर से शीघ्र ही लाल दिखाई पड़ती हैं। ऊपर से अधिक लाल होने पर देखने में आकर्षक नहीं मालूम होती हैं; अत: इन्हें मन्दी आँच पर तलना चाहिए।

प्रश्न 4.
घर में प्रयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की निम्नलिखित सब्जियों को कैसे बनाओगी –
(क) भरवाँ केला
(ख) पालक-पनीर कोफ्ता
(ग) भरवाँ करेले.
(घ) भरवाँ टमाटर
(ङ) टमाटर का सूप
(च) बैंगन का भुरता
(छ) दम गोभी।
उत्तरः
(क) भरवाँ केला तैयार करना –
सामग्री – 200 ग्राम कच्चा केला, 200 ग्राम आलू, प्याज, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च, हल्दी, नमक, जीरा, गरम मसाला, धनिया, खटाई, घी आदि।

विधि – केलों को छील लीजिए और बीच से थोड़ा गूदा निकाल दीजिए। आलुओं को उबालकर व छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए। प्याज व लहसुन को कड़ाही में तल लीजिए। प्याज का रंग गुलाबी हो जाने पर कटे हुए आलुओं को डालकर सभी मसाले डाल दीजिए और थोड़ी देर तक भूनिए। अब केलों में आलू भरकर कड़ाही में थोड़ा अधिक घी डालकर केलों को उसमें डालकर ढक दीजिए। मन्दी आग पर पकाइए। केलों के गल जाने पर उतार लीजिए।

सावधानियाँ –

  1. केलों का छिलका अच्छी तरह से थोड़ा मोटा उतारिए अन्यथा गलाने में कठिनाई होगी तथा स्वाद में कसैलापन रहेगा।
  2. केलों के बीच के भाग को भी आलुओं के साथ भून लीजिए।

(ख) पालक-पनीर कोफ्ता –
सामग्री – पालक 250 ग्राम, पनीर 30 ग्राम, डबलरोटी 2 स्लाईस, हल्दी थोड़ी-सी, नमक आवश्यकतानुसार, घी तलने के लिए।

विधि – पालक धोकर बारीक काट लीजिए तथा इसे खुले पतीले में धीमी आँच पर पकाइए। डबल रोटी के टुकड़े को पानी में भिगो दीजिए। जब पालक गल जाए तो उसमें डबल रोटी के टुकड़े को निचोड़ कर भली प्रकार मिलाइए। अब इसमें थोड़ा नमक मिला दीजिए। पनीर में थोड़ा नमक मिलाकर दो भागों में बॉट लीजिए तथा इसके 1/2 भाग में हल्दी मिलाकर पीला बना लीजिए। कोफ्ते इस प्रकार बनाइए कि पहले पनीर का पीला भाग फिर उसके ऊपर सफेद भाग एवं उसके ऊपर पालक की सतह आ जाए। इन्हें गर्म घी में तल लीजिए तथा तरी में डालकर थोड़े समय के लिए पकाइए।

कोफ्ता के लिए तरी –
सामग्री-प्याज 1/2 छोटी, लाल मिर्च 1/4 छोटी चम्मच, अदरक एक छोटा टुकड़ा, गरम मसाला 1/2 छोटा चम्मच, लहसुन 1 टुकड़ा, नमक स्वादानुसार, हरी मिर्च 1, कश्मीरी मिर्च 1/4 चम्मच (रंग के लिए), टमाटर 1/2, हल्दी थोड़ी-सी, हरा धनिया थोड़ा-सा, घी 15 ग्राम, पानी 2 कप।

विधि – प्याज, अदरक, लहसुन एवं हरी मिर्च को पीस लें। टमाटर को गर्म पानी में डालकर निकाल लें तथा छीलकर काट लें। घी को गर्म करके उसमें पिसा हुआ मसाला डालकर तब तक भूने जब तक घी अलग होने लगे। ऊपर के मसाले में टमाटर डालकर नमक, मिर्च एवं हल्दी भी डाल दें। इसे तब तक पकाएँ जब तक वह एक-सा न हो जाए। (यदि जरूरत हो तो थोड़ा पानी डाल दें)। इसमें अब पानी डालकर 10-15 मिनट तक पकाएँ। अन्त में गरम मसाला एवं हरा धनिया डाल दें। यही तरी सभी प्रकार के कोफ्तों के लिए प्रयोग में लाएँ।

(ग) भरवाँ करेले तैयार करना –
सामग्री – 500 ग्राम करेले, 200 ग्राम आलू, प्याज, मसाले, नमक, तेल आदि।

विधि – करेलों को छीलकर बीच में से इस प्रकार काटिए कि वे नीचे से जुड़े रहें। अन्दर व बाहर से अच्छी तरह से नमक लगाकर रख दीजिए। थोड़ी देर पश्चात् स्वच्छ जल से धो लीजिए। आलुओं को उबालकर कद्दूकस से कस दीजिए। प्याज को बारीक काट लीजिए। अब कड़ाही में तेल डालकर प्याज को गुलाबी रंग का भून लीजिए। जीरा डालकर आलुओं को उसमें डालकर सभी मसाले डाल दीजिए और थोड़ा भून लीजिए। नमक डाल दीजिए। उस मसाले को करेले में दबा-दबाकर भर दीजिए। करेलों को धागे से लपेट दीजिए जिससे मसाला बाहर नहीं निकल सकेगा। अब कड़ाही में तेल गर्म करके करेलों को उसमें डाल दीजिए और धीमी आँच पर ढककर पकाइए। जब करेले गल जाएँ तो उन्हें कड़ाही से निकालकर अलग बर्तन में रख दीजिए।

सावधानियाँ –

  1. करेले पके होने पर बीज निकाल दीजिए।
  2. करेलों को अन्दर से ध्यानपूर्वक देख लीजिए कि कीड़े आदि न हों।

(घ) भरवाँ टमाटर तैयार करना –
सामग्री – 500 ग्राम टमाटर, 250 ग्राम आलू, प्याज, लहसुन, सभी मसाले, नमक, घी आदि।

विधि – टमाटरों को धोकर उनके ऊपर के भाग को चाकू से गोला काटकर अलग कर दीजिए और बीच से गूदा निकालकर साफ कर लीजिए। अब आलुओं को उबालकर कद्दूकस में कस लीजिए। देगची में घी डालकर प्याज को बारीक काटकर भून लीजिए। उसी में आलुओं को डालिए। सभी मसाले व नमक डालकर भून लीजिए। खटाई मत डालिए। अब टमाटरों के खोखले भाग में उसे भर दीजिए और टोपी को उस पर ढक दीजिए। कड़ाही में घी गर्म करके टमाटरों को उसमें छोड़ दीजिए और ढक दीजिए। आग बहुत धीमी कर दीजिए और टमाटरों के गलने पर नीचे उतारिए।

(ङ) टमाटर का सूप तैयार करना –

सामग्री – 250 ग्राम टमाटर (लाल), एक छोटा चम्मच मैदा, चीनी, घी, तीन चम्मच दूध, प्याज, अदरक, नमक, काली मिर्च आदि।

विधि – टमाटरों को स्वच्छ जल से धोकर काट लीजिए और थोड़े पानी में उबालने के लिए रख दीजिए। उसी में अदरक व प्याज डाल दीजिए। जब टमाटर अच्छी तरह से गल जाएँ तब चमचे से घोट दीजिए और स्वच्छ कपड़े में छान लीजिए। भगोना आग पर रखकर उसमें घी गर्म कीजिए और मैदा को उसमें डालकर गुलाबी रंग का भून लीजिए। भुन जाने पर दूध डाल दीजिए और चमचे से चलाती रहिए, जिससे गाँठ न पड़ने पाए। जब घोल गाढ़ा हो जाए तब छने हुए टमाटर डालकर नमक डाल दीजिए, थोड़ी देर पकाइए, फिर नीचे उतारकर रख दीजिए। सूप को आकर्षक बनाने के लिए बारीक कटा हुआ धनिया ऊपर से डाल दीजिए।

रोगी का सूप बनाना हो तो उसमें घी और मैदा नहीं डाला जाता है। अधिक लाल रंग लाने के लिए उबालते समय थोड़ा चुकन्दर डाल दीजिए।

(च) बैंगन का भरता तैयार करना –
सामग्री – 500 ग्राम ताजे व गोल बैंगन, घी, प्याज, लहसुन, मसाले, नमक आदि।

विधि – जिन बैंगनों का भुस्ता तैयार करना होता है उनको मन्दी आग पर रखकर भून लीजिए। इससे उनका छिलका नर्म हो जाएगा, उसे उतार दीजिए और बैंगनों को भगोने में रखकर अच्छी तरह से मल लीजिए। अब डेगची में घी गर्म करके पिसा मसाला (प्याज सहित) डालकर भून लीजिए। मसाला भुन जाने पर बैंगन उसमें डालकर नमक डाल दीजिए। डेगची के ऊपर गहरे बर्तन में पानी भरकर रख दीजिए। धीमी आग पर पकाइए। थोड़ी देर पश्चात् चमचे से घोट दीजिए।

(छ) दम गोभी तैयार करना –
सामग्री – 500 ग्राम गोभी के फूल, आधा प्याला दही, 1 चम्मच पिसी अदरक, 1 चम्मच पिसी हरी मिर्च, आधा चम्मच कश्मीरी मिर्च, जीरा, धनिया व गरम मसाला, आधा चम्मच पिसा नमक, हरा धनिया, एक-चौथाई चम्मच पिसी दालचीनी और दो छोटी इलायची पिसी हुई।

विधि – गोभी के फूल के डण्ठल उतार लें और नीचे से डण्ठल को ऐसे काट लें कि गोभी का फूल पतीली में खड़ा रह सके। ऊपर लिखे सारे मसाले दही में मिला लें। गोभी धोकर छुरी या काँटे से छेद दें जिससे नमक अन्दर जा सके, अब सारा दही वाला मसाला लगाकर गोभी को दो-तीन घण्टे ऐसे ही रहने दें, फिर कड़ाही में एक बड़ा चम्मच घी डालकर गोभी के फूल को तब तक पकाएँ जब तक कि दही का पानी सूख न . जाए। फिर नीचे उतारकर रख लें। छुरी से काटकर प्लेट में परोसें, ऊपर से हरा धनिया, मिर्च डाल दें।

विभिन्न प्रकार के अचार 

प्रश्न 1.
घर में विभिन्न प्रकार के अचार तैयार करने की विधि लिखिए।
उत्तरः
घर में विभिन्न प्रकार के अचार तैयार करना –
विभिन्न प्रकार के अचार भोजन को खाते समय उसे स्वादिष्ट बना देते हैं लेकिन अचारों का प्रयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए। अधिक मात्रा में अचारों का प्रयोग हानिकारक होता है। आजकल कई प्रकार के अचार तैयार किए जाते हैं जिनमें से कुछ अचारों को तैयार करने की विधि निम्नवर्णित है –

(1) आम का मीठा अचार तैयार करना-

सामग्री –
कच्चा आम – 5 किग्रा
जीरा – 150 ग्राम
लौंग – 15 ग्राम
काली मिर्च – 150 ग्राम
बड़ी इलायची – 100 ग्राम
भुनी हींग – 2 ग्राम
नमक – 600 ग्राम
चीनी – 300 ग्राम

अचार बनाने की विधि – आमों को पानी में भिगो देना चाहिए। इसके पश्चात् उनका छिलका उतार लेना चाहिए। एक आम की 4-4 फाँकें इस प्रकार काटिए कि वे एक-दूसरे से अलग न हों बल्कि एक ही स्थान पर जुड़ी रहें। अब दिए गए मसाले को साफ करके कूटकर उसमें नमक, चीनी व हींग मिलाकर फाँकों के बीच में मसाला भरकर मर्तबान में भरते जाइए। जब मर्तबान भर जाए तो उसके ऊपर कपड़ा बाँध देना चाहिए। मर्तबान को 15-20 दिन तक धूप में रखना चाहिए। आमों के गल जाने पर उन्हें खाने के लिए प्रयोग में लाना चाहिए।

(2) आम का पानी वाला अचार तैयार करना –

सामग्री –
कच्चे आम – 10 किग्रा
नमक – 1(1/2) किग्रा
मेथी – 300 ग्राम
हल्दी -300 ग्राम
लाल मिर्च – 200 ग्राम
तेल – 300 ग्राम
हींग – 4 ग्राम
राई (पिसी हुई) – 500 ग्राम

अचार बनाने की विधि – आमों को पानी में धोकर अलग-अलग फाँकें काट लेते हैं। इन फाँकों में नमक, हल्दी व हींग मिलाकर धूप में रख देते हैं। लगभग एक हफ्ते बाद भली प्रकार सुखाकर इन फाँकों को थोड़े-से उबले हुए पानी में (ठण्डा करके) एक दिन के लिए भीगा रहने देते हैं। अब फाँकों को किसी बर्तन में बाहर निकाल लेते हैं। शेष पानी में राई डालकर, झाग उत्पन्न कर लेते हैं। अब तेल में शेष मसाला डालकर भूनने के पश्चात् फाँकों में मिला लेते हैं तथा राई के पानी में डाल देते हैं। इसे मर्तबान में भरकर 3-4 दिन के लिए धूप में सुखा देते हैं। गल जाने पर अचार को प्रयोग में लाते हैं।

(3) नीबू का मीठा अचार तैयार करना –

सामग्री –
कागजी नीबू – 50 नग
गुड़ या चीनी – 1 किग्रा
नमक – 125 ग्राम
लाल मिर्च – 25 ग्राम
गरम मसाला – 50 ग्राम
काला नमक – 300 ग्राम

अचार बनाने की विधि – सर्वप्रथम नीबुओं को चार फाँकों में विभाजित कर लेते हैं, चीनी या गुड़ को छोड़कर बाकी का मसाला फाँकों में भरकर नीबू का रस भी उसमें छोड़ देते हैं। प्रतिदिन मर्तबान को धूप में सुखाते रहते हैं। जब नीबू का छिलका गल जाए तब उसमें चीनी या गुड़ डालना चाहिए। चीनी या गुड़ धीरे-धीरे गाढ़े हो जाएंगे और उसमें मिल जाएंगे। 1 या 1(1/2) महीने के बाद अचार खाने योग्य बन जाता है।

(4) विभिन्न सब्जियों का मिश्रित अचार तैयार करना –

सामग्री – विभिन्न सब्जियाँ (गोभी, गाजर, शलगम, मूली आदि) 5 किलोग्राम
सरसों का तेल – 1 किलोग्राम
नमक – 500 ग्राम
राई – 250 ग्राम
जीरा – 100 ग्राम
गरम मसाला – 250 ग्राम
लाल मिर्च – 150 ग्राम
गुड़ – 400 ग्राम
सिरका – 400 ग्राम
हींग – 5 ग्राम

अचार बनाने की विधि – जिन सब्जियों का अचार डालना होता है, उन सभी सब्जियों को छीलकर, धोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं। तेल को कड़ाही में गर्म करके फिर उसमें गुड़ पीसकर मिला लेते हैं। जब गुड़ घुल जाए तो ऊपर दिए गए मसाले को मिलाकर सब्जियों के कटे हुए टुकड़ों के साथ भली प्रकार मिला लेते हैं। जब सब्जी व मसाला ठण्डा हो जाए तो मर्तबान में भरकर धूप में सुखाना चाहिए। लगभग एक हफ्ते पश्चात् मर्तबान के अचार में सिरका डाल देते हैं। जब अचार अच्छी तरह गल जाता है तब उसका प्रयोग करते हैं।

मुरब्बा 

प्रश्न 1.
आँवले का मुरब्बा कैसे तैयार करोगी?
उत्तरः
आँवले का मुरब्बा तैयार करना –
सामग्री –
1 किग्रा आँवले, 1 किग्रा चीनी, टाटरी, आवश्यकतानुसार पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट या सोडियम बेंजोएट, ऐसेंस।

बनाने की विधि – आँवलों को स्वच्छ जल से धोकर गोदने के पश्चात् फिटकरी या चूने के घोल में डालकर तीन या चार दिन तक रखा रहने दीजिए। पानी प्रतिदिन बदलती रहिए। फिर स्वच्छ जल से धोकर पानी उबालकर उसमें उन्हें डाल दीजिए और थोड़ी देर आग पर रखा रहने दीजिए। जब आँवले, कुछ मुलायम हो जाएँ तो उतारकर चलनी में डाल दीजिए। चीनी की चाशनी तैयार करके उसमें दूध या खटास डालकर मैल साफ कर लीजिए। फिर छानने के पश्चात् आँवलों को उसमें डालकर आग पर पकाइए, थोड़ी देर पक जाने के पश्चात् उतारकर रात भर के लिए रखा रहने दीजिए। दूसरे दिन ऑवलों को निकालकर चाशनी को पकाइए। फिर वे आँवले उसमें डालकर थोड़ी देर बाद आग से उतारकर रख दीजिए। तीसरे दिन चाशनी को फिर थोड़ा गाढ़ा कीजिए और आँवले तथा टाटरी (पिसी हुई) डालकर थोड़ा पकाइए। ठण्डा होने पर ऐसेंस व सोडियम बेंजोएट डालकर स्वच्छ किए हुए बर्तन में भर दीजिए।

सावधानियाँ –

  • आँवले गुठली तक गुदे हुए होने चाहिए।
  • चूने का घोल प्रतिदिन बदलते रहना चाहिए।
  • चाशनी पकाते समय आँवलों को बाहर निकाल लेना चाहिए।
  • चाशनी अधिक गाढ़ी नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 2.
आँवले का सूखा मुरब्बा कैसे बनता है?
उत्तरः
आँवले का सूखा मुरब्बा तैयार करना –
बनाने की विधि – आँवलों को उबालने तक की क्रिया उपर्युक्त बताए ढंग के अनुसार कर लीजिए। एक किग्रा आँवलों के लिए 1- 250 किग्रा चीनी ले लीजिए। चीनी में पानी मिलाकर उबाल लीजिए। उबाल आ जाने पर खटास या दूध डालकर मैल साफ करने के पश्चात् शर्बत को छान लीजिए। आँवलों को उसमें डालकर पका दीजिए। पीछे बताए गए अनुसार दो दिन तक बराबर पकाइए। तीसरे दिन इतना पकाइए कि चाशनी गाढ़ी हो जाए। इस चाशनी को 221°F पर उतार लीजिए और छलनी के ऊपर डाल दीजिए जिससे . चीनी की चाशनी फलों से अलग हो जाए। अब आँवलों को चीनी के रवे में लपेट लीजिए।

प्रश्न 3.
आम का मुरब्बा कैसे बनाओगी?
उत्तर
आम का मुरब्बा तैयार करना –
सामग्री –
1 किग्रा आम का गूदा, 1 किग्रा चीनी, 20 ग्राम चूना, आम का ऐसेंस, रंग पीला (खाने वाला), 5 ग्राम साइट्रिक एसिड आदि।

बनाने की विधि – आमों को स्वच्छ जल से धोकर बीच से काट लीजिए। (आम बिना रेशे वाला होना चाहिए) एक भगोने में चूने का घोल तैयार कर लीजिए। लकड़ी की तीली या काँटे से आम के टुकड़ों को थाली में रखकर अच्छी तरह से गोद लीजिए, फिर 5 घण्टे तक चूने के घोल में भीगे रहने दीजिए। इसके उपरान्त टुकड़ों को स्वच्छ जल से धोकर उबलने के लिए रख दीजिए और हल्का-सा गला लीजिए। भगोने में 250 ग्राम पानी लेकर आम के टुकड़ों को डालकर चीनी डाल दीजिए। उबाल आने पर दूध डालकर मैल साफ कर लीजिए और स्वच्छ कपड़े में छान लीजिए। उबले हुए आम के टुकड़ों को उसमें डालकर पका लीजिए। 20 मिनट पश्चात् उतारकर रख दीजिए। दूसरे दिन आम के टुकड़ों को चाशनी से निकाल लीजिए और चाशनी को पकाइए। थोड़ी देर पकाने के पश्चात् निकाले गए आम के टुकड़ों को उसी में डालकर पका लीजिए। यह क्रिया तीन दिन तक कीजिए। चौथे दिन थोड़ा-सा रंग पानी में घोलकर मिला लीजिए और थोड़ा पकाइए। साइट्रिक एसिड डाल लीजिए। ठण्डा होने पर ऐसेंस डाल दीजिए।

सावधानियाँ –

  • आम का छिलका पूर्णतः उतार लेना चाहिए।
  • मुरब्बा बनाने के पश्चात् सुरक्षित रखने के लिए सोडियम बेंजोएट डाल दीजिए।

प्रश्न 4.
पेठे का मुरब्बा कैसे तैयार करोगी?
उत्तरः
पेठे का मुरब्बा तैयार करना –
सामग्री – 1 किग्रा पेठा, 11/2 किग्रा चीनी, 5 ग्राम साइट्रिक एसिड इत्यादि।

बनाने की विधि-पेठे को छीलकर 2 1/2 सेमी चौड़े व 5 सेमी लम्बे पीस काट लीजिए। काँटों से टुकड़ों को गोद लीजिए और चने का घोल बताए गए अनुसार तैयार करके उन टुकड़ों को उसमें डाल दीजिए और 4 या 5 घण्टे भीगा रहने दीजिए। फिर स्वच्छ जल से धोकर कपड़े में टुकड़ों को बाँधकर उबलते हुए पानी में इतनी देर डाल दीजिए कि टुकड़े नर्म हो जाएँ। कुल चीनी का आधा भाग लेकर पानी डालकर चाशनी बना लीजिए। दूध डालकर उसका मैल निकालने के पश्चात् छान लीजिए। फिर आग पर चढ़ा दीजिए, उन टुकड़ों को उसमें डालकर पका लीजिए। थोड़ी देर बाद उतारकर रख दीजिए, उन टुकड़ों को उसी में पड़ा रहने दीजिए और रात भर के लिए ढककर रख दीजिए। दूसरे दिन उसको गर्म कीजिए और टुकड़ों को निकाल लीजिए, चाशनी गाढ़ी कीजिए व टुकड़े उसी में डाल दीजिए। यह प्रक्रिया 3 या 4 दिन तक अपनाएँ फिर साइट्रिक एसिड डाल दीजिए।

सावधानियाँ –

  • टुकड़ों को भली भाँति गोदना चाहिए।
  • फल के ऊपर का हरा भाग अच्छी तरह से छीलकर साफ कर दीजिए।
  • तीन या चार दिन तक बराबर पकाइए।

प्रश्न 5.
गाजर का तर मुरब्बा कैसे तैयार करोगी?
उत्तरः
गाजर का तर.मुरब्बा तैयार करना –
सामग्री –
1 किग्रा गाजर, 750 ग्राम चीनी, 5 ग्राम साइट्रिक एसिड, लाल रंग (खाने वाला), दूध।

बनाने की विधि-बहुत छोटी-छोटी गाजरों को छीलकर स्वच्छ जल से धो लीजिए, फिर गोदकर चूने के घोल में डाल दीजिए और लगभग 6 घण्टे तक भीगा रहने दीजिए। फिर स्वच्छ जल से धोकर हल्का-सा उबाल लीजिए। चीनी में 300 ग्राम पानी डालकर आग पर उबाल लीजिए। फिर थोड़ा दूध डालकर मैल निकाल लीजिए और स्वच्छ कपड़े में छान लीजिए। उबाली हुई गाजरों को उसमें डाल दीजिए और थोड़ी देर पकाइए। फिर दूसरे व तीसरे दिन पकाइए। चौथे दिन पानी में थोड़ा-सा रंग घोलकर मिला दीजिए तथा साइट्रिक एसिड डाल दीजिए। ठण्डा होने पर मर्तबान में भरिए।

सावधानियाँ –

  • गाजरों को अच्छी तरह गोदिए।
  • ऊपर का हरा भाग चाकू से काटकर साफ कर दीजिए।
  • यदि अन्दर पीला भाग हो तो पतली छुरी से निकाल दीजिए।

प्रश्न 6.
गाजर का सूखा मुरब्बा कैसे तैयार करोगी?
उत्तरः
गाजर का सूखा मुरब्बा तैयार करना –
सामग्री –
1 किग्रा लाल गाजर, 1 किग्रा चीनी, 5 ग्राम साइट्रिक एसिड, दूध, लाल रंग (खाने वाला), केवड़ा।

बनाने की विधि – गाजरों को धोकर छील लीजिए और बीच से काटकर उनका पीला कड़ा भाग निकाल लीजिए। फिर 6 सेमी लम्बे और 3 सेमी चौड़े टुकड़े काट लीजिए। उनको गोदकर चूने के घोल में 5 घण्टे के लगभग भीगा रहने दीजिए तथा स्वच्छ जल से धोकर भगोने में डालकर हल्का उबाल लीजिए। फिर उतारकर छलनी में डाल दीजिए। थोड़ी चीनी का रवा बना लीजिए। 750 ग्राम चीनी में 300 ग्राम पानी डालकर आग पर रख दीजिए, उबाल आने पर थोड़ा दूध डाल दीजिए। मैल के ऊपर आ जाने पर कलछी से उसे निकालकर हटा दीजिए। शर्बत को स्वच्छ कपड़े द्वारा छान लीजिए। उबली हुई गाजरों को उसमें डालकर पका लीजिए, 10 मिनट पश्चात् उतारकर रख दीजिए। दूसरे दिन गाजरों को निकालकर चाशनी 5 मिनट तक गर्म कीजिए। फिर गाजरों को डालकर 5-7 मिनट पकाइए। तीसरे दिन पुनः यही क्रिया कीजिए। चौथे दिन साइट्रिक एसिड व रंग को पानी में घोलकर डाल दीजिए, चाशनी को 70% से 75% तक गाढ़ा कर लीजिए, फिर उतारकर छलनी में डाल दीजिए। थोड़ा केवड़ा उनके ऊपर डाल दीजिए। जब ठण्डे हो जाएँ तब उन टुकड़ों को रवे में लपेट लीजिए।

सावधानियाँ –

  • गाजर का ऊपर का हरा भाग निकाल देना चाहिए।
  • अधिक न उबालिए वरना टुकड़े टूट जाएँगे।

वस्त्र एवं सिलाई 

प्रश्न 1.
सिलाई की मशीन के मुख्य-मुख्य पुों का वर्णन कीजिए।
उत्तरः
सिलाई की मशीन के मुख्य-मुख्य पुर्जे –
सिलाई की मशीन को यदि खोलकर उसके विभिन्न भागों को देखा जाए तो निम्नलिखित पुर्जे दिखाई देंगे –

  • नीडिल प्लेट (needle plate)—यह प्रेशर फुट के नीचे लगा हुआ स्टील का चमकदार भाग होता है। इसमें एक छिद्र होता है जिसमें होकर सुई नीचे चली जाती है और फन्दा बनाती है। यह कपड़े को सिलाई के स्थान पर समतल रखती है तथा मशीन के निचले भाग में धूल जाने से रोकती है।
  • स्लाइड प्लेट (slide plate)—यह नीडिल प्लेट के बाईं ओर लगी होती है। इसको सुगमता से बाहर की ओर खींचा जा सकता है और उस खुले स्थान से बॉबिन व शटल अन्दर फिट हो जाती है।
  • फीड डॉग (feed dog)-इसमें दाँत होते हैं और नीडिल प्लेट के नीचे लगा होता है तथा कपड़े को आगे बढ़ाता है।
  • प्रेशर फुट (pressure foot) – यह वस्त्र को दबाने का काम करता है जो कि समकोण की आकृति का होता है। यह नीडिल बार के एक सिरे पर एक स्क्रू द्वारा फिट रहता है।
  • नीडिल बार (needle bar)-यह स्टील की एक रॉड होती है। इसके निचले सिरे पर क्लैम्प द्वारा एक सुई कसी रहती है। यह सुई को गति प्रदान करती है।
  • प्रेशर फुट लिफ्टर (pressure foot lifter)–यह लीवर प्रेशर फुट को उठाने व गिराने के काम आता है।
  • टेकअप लीवर (take-up lever)–यह फेस प्लेट पर स्टील का बना होता है। इसके अग्रभाग में छिद्र होता है जिसमें धागा डाला जाता है।
  • फेस प्लेट (face plate)—यह मशीन में बाईं ओर बाहर की तरफ होती है तथा धूल और मिट्टी से मशीन की रक्षा करती है।
  • थैड गाइडर (thread guider)-यह स्टील का बना मोटा छल्ला होता है। टेक अप लीवर के पश्चात् धागा इसमें डाला जाता है। तत्पश्चात् सुई में डाला जाता है।
  • थैड टेंशन डिवाइडर (thread tension divider)—इसमें स्टील की बनी दो गोल चकियाँ होती हैं। इनके बीच से होकर धागा गुजरता है। फेस प्लेट पर लगे इस पुर्जे का प्रयोग सिलाई के टाँकों को ठीक करने के लिए किया जाता है।
  • स्पूल पिन (spool pin)—यह मशीन में ऊपर की तरफ लगी रहती है। पेचक, रील आदि लगाने में इसका प्रयोग किया जाता है।
  • फ्लाई व्हील (fly wheel)—यह मशीन में दाईं ओर लगा हुआ एक पहिया है। इसके घुमाने से मशीन चलती है।
  • बॉबिन वाइण्डर (bobbin winder)-इसमें एक छोटी स्टील की छड़ होती है, जिसमें बॉबिन लगा दी जाती है।
  • बॉबिन वाइण्डर टेंशन ऐंगिल (bobbin winder tension angle)-बॉबिन पर धागा लपेटते समय इसमें धागा लगा देने से धागे का तनाव ठीक रहता है।
  • स्टिच रेग्यूलेटर स्क्रू (stich regulator screw)-सभी कपड़ों पर एक समान बखिया नहीं की जाती है। मोटे कपड़ों पर मोटी सिलाई व महीन कपड़ों पर महीन सिलाई की जाती है। इसके लिए इस स्क्रू का प्रयोग किया जाता है।
  • हैण्डिल ड्राइवर (handle driver)—यह हाथ द्वारा चलाई जाने वाली मशीन में लगा होता है। इसका सिरा लकड़ी का होता है, जिसे पकड़कर मशीन का पहिया घुमाया जाता है।
  • प्रेशर बार रेग्यूलेटिंग स्क्रू (pressure bar regulating screw)-यह प्रेशर बार में बाईं ओर लगा रहता है। कपड़े की मोटाई के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के दबाव की आवश्यकता होती है। इसके द्वारा दबाव को घटाने या बढ़ाने का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 2.
सिलाई में प्रयोग होने वाले उपकरणों का वर्णन कीजिए।
उत्तरः
सिलाई में प्रयोग होने वाले उपकरण –
सिलाई करते समय कुछ विशेष उपकरणों को प्रयोग में लाने से वस्त्र की कटाई व सिलाई में सुगमता हो जाती है तथा सिलने पर वस्त्र सुन्दर दिखाई देता है। ये उपकरण अग्रलिखित हैं –

  • 1. कैंची (scissors) – साधारण वस्त्र काटने के उपयोग में आती है।
  • शियर (shear) – यह कैंची की अपेक्षा बड़ी होती है। पकड़ने वाला एक छिद्र बड़ा तथा दूसरा छोटा होता है। बड़े भाग में चारों उँगलियाँ डालकर इसको चलाया जाता है। यह भारी वस्त्रों को काटने के लिए विशेष उपयोगी होती है।
  • अंगुस्ताना (thimble) – उँगली की सुरक्षा के लिए तुरपन या हेम करते समय यह उँगली में पहन लिया जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं-खुले या बन्द।
  • सुइयाँ (needles) – हाथ की सिलाई (कच्चा) या तुरपन, रफू आदि करने के लिए साधारणतया 6, 7, 8, 16 तथा 18 नम्बर की सुइयों का प्रयोग किया जाता है।
  • मिल्टन चॉक (milton chalk) – ये विभिन्न आकारों गोल, चौकोर आदि में मिलते हैं। वस्त्र पर इनसे निशान लगाए जाते हैं जो ब्रुश से झाड़ने पर सुगमता से मिट जाते हैं।
  • फीता (measuring tape) – नाप लेने तथा वस्त्र पर निशान लगाने के प्रयोग में आता है। इसको सुगमता से घुमाया जा सकता है। शरीर के अंगों की नाप लेने के लिए उपयोगी है।
  • हाथ का बुश (hand brush) – यह मुलायम बालों का बना होता है। वस्त्र पर रेशे व निशान आदि को हटाने के लिए इसका उपयोग होता है।
  • इस्तरी (press) – सिलाई से पहले कपड़े को सीधा करने के लिए तथा सिलाई के पश्चात् वस्त्र की समुचित तह बिठाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
  • महीन कपड़ा – जो वस्त्र ऐसे होते हैं जिनको सीधे इस्तरी के सम्पर्क में नहीं लाया जा सकता, उन पर प्रेस करने के लिए इस कपड़े को गीला करके प्रेस किए जाने वाले वस्त्र के ऊपर बिछा लिया जाता है।
  • बोर्ड (board) – यह समतल व चिकना तख्ता होता है। इस पर वस्त्र को फैलाकर काटा जाता है।
  • बटन होल कैंची (button hole scissors) – बनावट में कैंची की ही भाँति होता है। केवल एक स्क्रू लगा होता है जिसे एक चौड़ाई पर कस दिया जाता है जिससे सारे काज एक ही साइज में कटते हैं।

UP Board Solutions for Practical Home Science प्रयोगात्मक गृह विज्ञान सम्बन्धी सैद्धान्तिक ज्ञान 1
प्रश्न 3.
सिलाई करते समय कौन-कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए?
उत्तरः
सिलाई करते समय ध्यान देने योग्य बातें –
सिलाई करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए –

  • सिलाई करने से पूर्व ध्यान से देख लीजिए कि वस्त्र उल्टा है या सीधा। वस्त्र सिल जाने के पश्चात् उसको उधेड़ने से समय व वस्त्र की सुन्दरता दोनों नष्ट होते हैं।
  • वस्त्र के अनुकूल रंग व नम्बर का धागा प्रयोग में लाना चाहिए।
  • सिलाई करते समय शरीर को सीधा रखना चाहिए। झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी में तनाव उत्पन्न होता है, फेफड़ों तथा आँखों पर जोर पड़ता है।
  • मशीन को 1 फुट ऊँची चौकी पर रखना चाहिए।
  • रेशमी वस्त्र सिलते समय चोर बखिया का प्रयोग कीजिए।
  • सिलाई अधिक किनारे पर मत कीजिए वरना थोड़े दिनों बाद निकल जाएगी और वस्त्र देखने में गन्दा प्रतीत होगा।
  • कपड़ा बाएँ हाथ की ओर रखिए जिससे मशीन की गन्दगी उसमें नहीं लग सकेगी।
  • रेशमी व ऊनी वस्त्रों को थोड़ा-थोड़ा सिलने के पश्चात् प्रेस करते जाइए।
  • वस्त्र सिल जाने के पश्चात् उसमें लटकते धागों को कैंची से काटकर साफ कर दीजिए।
  • छोटी-छोटी सिलाइयों को पृथक्-पृथक् सिलने से धागा व समय दोनों नष्ट होते हैं। जिन सिलाइयों को करना है उन्हें एक के बाद दूसरी उसी से जोड़ते हुए करते चले जाइए। जिन वस्त्रों में कच्चा करने की आवश्यकता हो उन्हें कच्चा करके उसके साथ ही पक्का कर लीजिए। सब सिलाई पूरी होने के पश्चात् थोड़ा कपड़ा (रफ) उसके साथ सिल देना चाहिए। सिलाई करने पर उसे निकाल देना चाहिए।
  • सिले हुए वस्त्र में दो धागे, ऊपर व नीचे के होते हैं। उनको पकड़कर गाँठ बाँध दीजिए।
  • जाली, जार्जट, लेस आदि वस्त्रों को सिलते समय नीचे बारीक कागज लगा लीजिए। बाद में फाड़कर निकाल दीजिए।

प्रश्न 4.
शरीर के विभिन्न अंगों का नाप कैसे लिया जाता है?
उत्तरः
शरीर के विभिन्न अंगों का नाप लेना –
प्रत्येक मनुष्य के शरीर में भिन्नता होती है, फलस्वरूप नाप भी भिन्न-भिन्न होती है। अत: शरीर के विभिन्न भागों का नाप लेना आवश्यक है। नाप लेने की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं –

  1. छाती का नाप लेना
  2. शरीर के विभिन्न अंगों का नाप लेना।

1. छाती का नाप लेना – केवल छाती का नाप लेकर उसी हिसाब से विभिन्न अंगों का नाप निकाला जाता है। माना छाती का नाप 90 सेमी है तो गला बनाने के लिए छाती का 1/6 लेकर गले का निशान लगा लेते हैं। इसी प्रकार विभिन्न अंगों की लम्बाई व नाप छाती के ही नाप से ली जाती है।
2. शरीर के विभिन्न अंगों का नाप लेना – नाप लेने की यह विधि अधिक उपयुक्त है। इस विधि में विभिन्न अंगों की नाप लेकर ही वस्त्रों पर निशान लगाए जाते हैं और इस प्रकार वस्त्र सिल जाने के बाद शरीर पर उचित लगता है। शरीर के ऊपरी भागों के वस्त्र सिलने पर ऊपर के अंगों का नाप लिया जाता है तथा नीचे के वस्त्र सिलने पर ‘हिप’, ‘कमर’, ‘लम्बाई’ तथा ‘मोहरी’ आदि का नाप लिया जाता है।
शरीर के विभिन्न अंगों का नाप निम्न प्रकार लिया जाता है –

  • सीने का नाप लेना-फीते को बगल से सटाकर रखते हुए कमर के चारों ओर से घुमाकर सामने की ओर लाइए। अन्दर की ओर दो उँगलियाँ रखकर नम्बर नोट कर लीजिए।
  • लम्बाई-ऊपर गले के पास फीता रखकर, जितना वस्त्र लम्बा बनाना हो वहाँ तक फीते का नम्बर नोट कर लीजिए।
  • कमर का नाप-कमर का वस्त्र फिट आए, इसके लिए कमर की नाप ली जाती है। कमर के चारों तरफ फीता घुमाकर तीन उँगलियाँ बन्द करके नाप लिया जाता है।
  • आस्तीन का नाप-पूरी आस्तीन बनाने के लिए पूरी बाँह का नाप लिया जाता है। फीते को कन्धे पर रखकर बाँह को मोड़ते हुए कलाई तक नाप लीजिए।
  • नीचे की नाप-नीचे का वस्त्र बनाने के लिए कुछ नाप की आवश्यकता होती है। कमर पर फीता रखकर जितनी लम्बाई रखनी हो वहाँ तक नोट कर लिया जाता है।
  • हिप-पेडू के चारों ओर फीता घुमाकर वस्त्र की चौड़ाई के लिए इस माप की आवश्यकता होती है।
  • मोहरी–पाँयचे की चौड़ाई रखने के लिए इस नाप की आवश्यकता होती है। टखने के पास से गोलाई में फीता घुमाकर यह नाप लिया जाता है।

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