UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance (वंशागति का आणविक आधार) are part of UP Board Solutions for Class 12 Biology. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance (वंशागति का आणविक आधार).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Biology
Chapter Chapter 6
Chapter Name Molecular Basis of Inheritance
Number of Questions Solved 37
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance (वंशागति का आणविक आधार)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न को नाइट्रोजनीकृत क्षार व न्यूक्लिओटाइड के रूप में वर्गीकृत कीजिए-एडेनीन, साइटीडीन, थाइमीन, ग्वानोसीन, यूरेसील व साइटोसीन।
उत्तर
नाइट्रोजनीकृत क्षार – एडेनीन, थाइमीन, यूरेसील, साइटोसीन।
न्यूक्लिओटाइड – साइटीडीन, ग्वानोसीन।

प्रश्न 2.
यदि एक द्विरज्जुक DNA में 20 प्रतिशत साइटोसीन है तो DNA में मिलने वाले एडेनीन के प्रतिशत की गणना कीजिए।
उत्तर
चारग्राफ के नियमानुसार द्विरज्जुक DNA में →A + G = T + C = 1 होता है। अर्थात् एडेनीन = थाइमीन,
ग्वानिन = साइटोसीन
चूँकि साइटोसीन की दी गई मात्रा 20% है तो ग्वानिन भी 20% होगा।
ग्वानिन + साइटोसीन = 20 + 20 = 40%
A + G = 100 – 40%
A + G = 60%
चूँकि A = G होता है; अत: एडेनीन की मात्रा = 60/2 = 30% होगी।

प्रश्न 3.
यदि डी०एन०ए० के एकरज्जुक के अनुक्रम निम्नवत् लिखे हैं –
5′ – ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC – 3′
तो पूरक रज्जुक के अनुक्रम को 5 → 3 दिशा में लिखिए।
उत्तर
डी०एन०ए० द्विकुण्डली संरचना होती है अर्थात् यह दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं (polynucleotide chains) से बना होता है। दोनों श्रृंखलाएँ प्रतिसमानान्तर ध्रुवणता रखती हैं। इसका तात्पर्य है यदि एक श्रृंखला की ध्रुवणता 5 से 3′ की ओर हो तो दूसरे की ध्रुवणता 3 से 5′ की तरफ होगी।

दोनों श्रृंखलाओं के नाइट्रोजनी क्षार परस्पर हाइड्रोजन बन्ध (bonds) द्वारा जुड़े रहते हैं। ऐडेनीन दो हाइड्रोजन बन्ध द्वारा थाइमीन (A = T) से और साइटोसीन तीन हाइड्रोजन बन्ध द्वारा ग्वानीन (C ≡ G) से जुड़े होते हैं। इसके फलस्वरूप प्यूरीन (purine) के विपरीत दिशा में पिरिमिडीन (pyrimidine) होता है। इससे डी०एन०ए० द्विकुण्डली के दोनों पॉलिन्यूक्लियोटाइड के मध्य समान दूरी बनी रहती है। अतः डी०एन०ए० के पूरक रज्जुक (श्रृंखला) में नाइट्रोजनीकृत क्षार का अनुक्रम निम्नवत् होगा –
5′ – ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3′
3′ – TACGTACGTACGTACGTACGTACGTACG-5′

प्रश्न 4.
यदि अनुलेखन इकाई में कूट लेखन रज्जुक के अनुक्रम को निम्नवत् लिखा गया है –
5′ – ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC – 3′
तो दूत-आर०एन०ए० के अनुक्रम को लिखिए।
उत्तर
आर०एन०ए० का निर्माण डी०एन०ए० से होता है। आर०एन०ए० सामान्यतया एकरज्जुकी संरचना (single strand structure) होती है। इसमें थाइमीन नाइट्रोजनीकृत क्षार के स्थान पर यूरेसिल (uracil) पाया जाता है। डी०एन०ए० का एकरज्जुक (अनुलेखन इकाई) से आनुवंशिक सूचनाओं का दूत-आर०एन०ए० (m-R.N.A.) में प्रतिलिपिकरण करने की प्रक्रिया अनुलेखन (transcription) कहलाती है।
यदि कूटलेखन रज्जुक (coding strand) के अनुक्रम निम्नवत् हैं –
5′ – ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC – 3’।
तो दूत-आर०एन०ए० (m-R.N.A.) के अनुक्रम निम्नवत् होंगे –
5′ – AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC – 3′

प्रश्न 5.
DNA ढिकुंडली की कौन-सी विशेषता ने वाटसन व क्रिक को DNA प्रतिकृति के सेमी कंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया? इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर
वाटसन व क्रिक ने DNA का द्विकुंडली मॉडल दिया था। इस मॉडल की मुख्य विशेषता पॉलीन्यूक्लिओटाइड श्रृंखलाओं के बीच युग्मन का होना था। पॉलीन्यूक्लिओटाइड श्रृंखलाओं में क्षार युग्मन ही एक ऐसी विशेषता थी जिसने वाटसन व क्रिक को DNA प्रतिकृति के सेमी कंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया था। क्षार-युग्मन के इसी गुण के आधार पर श्रृंखलाएँ एक-दूसरे की पूरक बनती हैं अर्थात् एक DNA रज्जुक में क्षार अनुक्रम पता होने पर दूसरे रज्जुक के क्षार युग्मन को ज्ञात किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त DNA का प्रत्येक रज्जुक, नये DNA रज्जुक के संश्लेषण हेतु साँचे का कार्य करता है। इस साँचे से बना द्विकुंडलित DNA अपने जनक DNA के समरूप होता है। DNA प्रतिकृतिकरण की सेमी कंजर्वेटिव पद्धति में DNA के दोनों रज्जुक पृथक् होकर नये रज्जुक के संश्लेषण हेतु साँचे के समान कार्य करते हैं। DNA प्रतिकृति में एक जनक रज्जुक व एक नया रज्जुक होता है।

प्रश्न 6.
टेम्पलेट (डी०एन०ए० या आर०एन०ए०) की रासायनिक प्रकृति व इससे (डी०एन०ए० या आर०एन०ए०) संश्लेषित न्यूक्लीक अम्लों की प्रकृति के आधार पर न्यूक्लीक अम्ल पॉलिमरेज के विभिन्न प्रकार की सूची बनाइए।
उत्तर
न्यूक्लीक अम्ल पॉलिमरेज निम्नलिखित प्रकार के होते हैं –
1. डी०एन०ए० पॉलिमरेज (D.N.A. polymerase) एन्जाइम प्रतिकृति (replication) के लिए आवश्यक है। यह डी०एन०ए० टेम्पलेट का उपयोग डि-ऑक्सीन्यूक्लियोटाइड के बहुलकन (polymerisation) को प्रेरित करने के लिए करता है। डी०एन०ए० अणुओं की दोनों श्रृंखलाएँ एकसाथ पृथक् नहीं होतीं। डी०एन०ए० द्विकुण्डली प्रतिकृति हेतु छोटे-छोटे भागों में खुलती है। इसके फलस्वरूप बनने वाले खण्ड परस्पर डी०एन०ए० लाइगेज (D.N.A. ligase) एन्जाइम द्वारा जुड़ जाते हैं। डी०एन०ए० पॉलिमरेज स्वयं प्रतिकृति प्रक्रम का प्रारम्भ नहीं कर सकते। यह कुछ निश्चित स्थल पर संवाहक (vector) की सहायता से होती है।

2. आर०एन०ए० पॉलिमरेज (R.N.A. polymerase) – यह डी०एन०ए० पर निर्भर आर०एन०ए० पॉलिमरेज (D.N.A. dependent R.N.A. polymerase) होता है। यह D.N.A. को सभी प्रकार के आर०एन०ए० के अनुलेखन (transcription) के लिए उत्प्रेरित करता है। आर०एन०ए० पॉलिमरेजे अस्थायी रूप से प्रारम्भन कारक या समापन कारक से जुड़कर अनुलेखन का प्रारम्भ या समापन करता है। केन्द्रक में डी०एन०ए० पर निर्भर आर०एन०ए० पॉलिमरेज के अतिरिक्त निम्नलिखित तीन प्रकार के आर०एन०ए० पॉलिमरेज मिलते हैं –

  1. आर०एन०ए० पॉलिमरेज I – यह राइबोसोमल आर०एन०ए० (r-R.N.A.) को अनुलेखित (transcribes) करता है।
  2. आर०एन०ए० पॉलिमरेज III – यह ट्रान्सफर आर०एन०ए० (t-R.N.A.) तथा छोटे केन्द्रकीय आर०एन०ए० के अनुलेखन के लिए उत्तरदायी होता है।
  3. आर०एन०ए० पॉलिमरेज II – यह सन्देशवाहक आर०एन०ए० (m-R.N.A.) के पूर्ववर्ती विषमांगी केन्द्रकीय आर०एन०ए० (heterogenous nuclear R.N.A.-hnR.N.A.) का अनुलेखन करता है।

प्रश्न 7.
DNA आनुवंशिक पदार्थ है, इसे सिद्ध करने हेतु अपने प्रयोग के दौरान हर्णे व चेज ने DNA व प्रोटीन के बीच कैसे अंतर स्थापित किया?
उत्तर
हशें वे चेज ने DNA को आनुवंशिक पदार्थ सिद्ध करने हेतु P32 व P32 आइसोटॉप्स युक्त माध्यम, में ई० कोलाई जीवाणु का संवर्द्धन कराया। कुछ समय वृद्धि करने के पश्चात् जीवाणु को जीवाणुभोजी द्वारा संक्रमित कराया गया। संक्रमण के पश्चात् देखा गया कि जीवाणुभोजी का प्रोटीन आवरण S35 रेडियोधर्मी युक्त हो गया था जबकि इसके DNA में सल्फर नहीं होता। इसके विपरीत जीवाणुभोजी का DNA P32 रेडियोधर्मी आइसोटॉप्स की उपस्थिति दिखा रहा था, क्योंकि DNA में
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-1

फॉस्फोरस होता है। प्रोटीन आवरण में P32 अनुपस्थित था। P32 रेडियोधर्मी युक्त जीवाणुभोजी द्वारा ऐसे जीवाणु को संक्रमित कराया गया जिसमें रेडियोधर्मी तत्त्व नहीं थे। संक्रमण के पश्चात् देखा गया कि समस्त जीवाणु रेडियोधर्मी हो गये थे। अधिकांश रेडियोधर्मी आइसोटॉप्स जीवाणुभोजी की अगली पीढ़ी में भी स्थानांतरित हो गये थे।

रेडियोधर्मी तत्त्व रहित जीवाणुओं में S32 युक्त जीवाणुभोजी द्वारा संक्रमण कराने पर तथा जीवाणुभोजी पृथक् करने पर देखा गया कि जीवाणुओं में रेडियोधर्मी तत्त्व मौजूद नहीं थे बल्कि ये जीवाणुभोजी के प्रोटीन आवरण में ही रह गये थे। उपरोक्त प्रयोग सिद्ध करता है कि जीवाणुभोजी का DNA ही वह पदार्थ है जो नये जीवाणुभोजी उत्पन्न करता है व संक्रमण में भाग लेता है। यह सिद्ध हो गया कि DNA आनुवंशिक पदार्थ है, प्रोटीन नहीं। इसके अतिरिक्त DNA फॉस्फोरस युक्त होता है जबकि प्रोटीन में फॉस्फोरस नहीं होता है। DNA सल्फर रहित होता है, जबकि प्रोटीन, सल्फर युक्त होता है।

प्रश्न 8.
निम्न के बीच अंतर बताइए –
(क) पुनरावृत्ति DNA एवं अनुषंगी DNA
(ख) mRNA और tRNA
(ग) टेम्पलेट रज्जु और कोडिंग रज्जु
उत्तर
(क) पुनरावृत्ति DNA एवं अनुषंगी DNA में अंतर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-2

(ख) एमआरएनए और टीआरएनए में अंतर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-3

(ग) टेम्पलेट रज्जु और कोडिंग रज्जु में अंतर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-4

प्रश्न 9.
स्थानान्तरण के दौरान राइबोसोम की दो मुख्य भूमिकाओं की सूची बनाइए।
उत्तर
स्थानान्तरण (Translation) – इस प्रक्रिया में ऐमीनो अम्लों के बहुलकन (polymerisation) से पॉलिपेप्टाइड का निर्माण होता है। ऐमीनो अम्लों के क्रम व अनुक्रम सन्देशवाहक आर०एन०ए० में पाए जाने वाले क्षारों के अनुक्रम पर निर्भर करते हैं। ऐमीनो अम्ल पेप्टाइड बन्ध (peptide bonds) द्वारा जुड़े रहते हैं। स्थानान्तरण प्रक्रिया पूर्ण होने पर पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला राइबोसोम से पृथक् हो जाती है।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-5

स्थानान्तरण में राइबोसोम की भूमिका
1. राइबोसोम का छोटा सबयूनिट m-R.N.A. के प्रथम कोडॉन (AUG) के साथ बन्धित होकर समारम्भ कॉम्प्लैक्स (initiation complex) ऐमीनो ऐसिल t-R.N.A. बनाता है जिसकी पहचान प्रारम्भक t-R.N.A. द्वारा की जाती है। ऐमीनो अम्ल t-R.N.A. से जुड़कर एक जटिल रचना बनाते हैं जो आगे चलकर t-R.N.A. के प्रति प्रकूट (anticodon) से पूरक क्षार युग्म बनाकर m-R.N.A. के उचित आनुवंशिक कोडॉन से जुड़ जाती है।

2. राइबोसोम के बड़े सबयूनिट पर t-R.N.A. अणुओं के जुड़ने के लिए दो खाँच होती हैं, इन्हें P-site या दाता स्थल और A-site या ग्राही स्थल कहते हैं। P-site (दाता-स्थल) पर पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला को धारण करने वाला t-R.N.A. जुड़ता है। A-site (ग्राही स्थल) पर ऐमीनो ऐसिल t-R.N.A. जुड़ता है। बड़े सबयूनिट के पेप्टाइड सिन्थेटेज (peptide synthetase) एन्जाइम पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के ऐमीनो अम्ल के -COOH तथा ऐमीनो ऐसिल t-R.N.A. के ऐमीनो अम्ल के – NH, के मध्य पेप्टाइड बन्ध बनाता है।

प्रश्न 10.
उस संवर्धन में जहाँ ई० कोलाई वृद्धि कर रहा हो लैक्टोस डालने पर लैक-ओपेरॉन उत्प्रेरित होता है, तब कभी संवर्धन में लैक्टोस डालने पर लैक-ओपेरॉन कार्य करना क्यों बन्द कर देता है?
उत्तर
ओपेरॉन संकल्पना
मनुष्य की आँत में पाए जाने वाले जीवाणु ई० कोलाई सामान्यतया लैक्टोस के अपचय से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। जैकब एवं मोनोड (Jacob & Monod, 1961) ने पता लगाया कि इसके D.N.A. में तीन जीन का एक समूह लैक्टोस का अपचय करने वाले तीन एन्जाइम्स के संश्लेषण से सम्बन्धित होता है। पोषण माध्यम में लैक्टोस होता है तो ये जीन सक्रिय होते हैं। पोषण माध्यम में लैक्टोस के अभाव में ये निष्क्रिय रहते हैं। जैकब एवं मोनोड ने इस जीन की सक्रियता के नियमन के लिए ओपेरॉन संकल्पना (operon concept) प्रस्तुत की।

ओपेरॉन संकल्पना के अनुसार जीन की सक्रियता का नियमन अनुलेखन स्तर पर प्रेरण या दमन (induction or repression) द्वारा होता है। लैक्टोस का अपचय करने वाले एन्जाइम्स β –गैलेक्टोसाइडेज (β-galactosidase), गैलेक्टोस परमीएज (galactose permease) तथा थायोगैलेक्टोसाइडेज ट्रान्सऐसीटिलेज (thiogalactosidase transacetylase) हैं। इनके संरचनात्मक जीन्स (structural genes) को क्रमशः सिस्ट्रॉन-z, सिस्ट्रॉन-y तथा सिस्ट्रॉन-a द्वारा प्रदर्शित करते हैं। ये एक-दूसरे के निकट स्थित होते हैं। इनमें परस्पर समन्वय होता है।

तीन जीन इनको कन्ट्रोल करते हैं, इन्हें रेगुलेटर जीन (regulator gene), प्रोमोटर जीन (promoter gene) तथा ओपरेटर जीन (operator gene) कहते हैं। किसी उपापचयी तन्त्र में एन्जाइम्स को कोड करने वाले जीन सामान्यतया समूह (cluster) के रूप में गुणसूत्र पर स्थित होती हैं। ये एक कार्यक जटिल (functional complex) बनाती हैं। इस पूरे तन्त्र को लैक ओपेरॉन कहते हैं। इसमें संरचनात्मक जीन (structural genes), प्रोमोटर जीन (promoter gene), ओपरेटर जीन (operator gene) तथा रेगुलेटर जीन (regulater gene) आदि मिलती हैं।

लैक ओपेरॉन = रेगुलेटर जीन + प्रोमोटर जीन + ओपेरेटर जीन + संरचनात्मक जीन लैक ओपेरॉन का प्रकार्य
(A) लैक्टोस की अनुपस्थिति में (In absence of Lactose) – लैक्टोस प्रेरक की अनुपस्थिति में
रेगुलेटर जीन एक लैक निरोधक या दमनकारी प्रोटीन बनाता है। यह ओपरेटर जीन से बन्धित होकर इसके अनुलेखन को रोकता है। इसके फलस्वरूप संरचनात्मक जीन m-R.N.A.
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-6
का संश्लेषण नहीं कर पाते और प्रोटीन संश्लेषण रुक जाता है। यह दमनकर (repression) का उदाहरण है।

(B) लैक्टोस की उपस्थिति में (In presence of Lactose) – माध्यम में लैक्टोस प्रेरक के उपस्थित होने पर प्रोमोटर कोशिका में प्रवेश करके रेगुलेटर जीन से उत्पन्न दमनकर से बन्धित होकर जटिल यौगिक बनाता है। इसके कारण दमनकर ओपरेटर से बन्धित नहीं हो पाता। और ओपरेटर स्वतन्त्र रहता है। यह R.N.A.-पॉलिमरेज को प्रोमोटर जीन के समारम्भन स्थल से बन्धित होने के लिए प्रेरित करता है जिसके फलस्वरूप पॉलिसिस्ट्रोनिक लैक m-R.N.A. का अनुलेखन होता है। यह लैक्टोस अपचय के लिए आवश्यक तीनों एन्जाइम्स को कोडित करता है। इस क्रिया को एन्जाइम उत्प्रेरण कहते हैं। यह उत्प्रेरण या प्रेरण (induction) का उदाहरण है। इसमें लैक्टोस उत्प्रेरक का कार्य करता है।

(C) सहदमनकर (Co-repressor) – कभी-कभी मेटाबोलाइट (लैक्टोस) से बन्धित होने पर निरोधक या दमनकर की संरचना में परिवर्तन हो जाता है। यह ओपरेटर से बन्धित होकर इसके अनुलेखन (transcription) को रोकता है। इसमें मेटाबोलाइट (लैक्टोस) को सहदमनकर कहते हैं, क्योंकि यह ओपरेटर स्थल (operator site) को निष्क्रिय करने के लिए दमनकर को सक्रिय करता है।

प्रश्न 11.
निम्न के कार्यों का वर्णन (एक अथवा दो पंक्तियों में) कीजिए –

  1. उन्नायक (प्रोमोटर)
  2. अन्तरण आर०एन०ए० (t-RNA)
  3. एक्जॉन (Exons)

उत्तर

  1. प्रोमोटर – DNA का यह अनुक्रम जीन अनुलेखन इकाई बनाता है तथा अनुलेखन इकाई में स्थित टेम्पलेट व कूटलेखन रज्जुक का निर्धारण करता है।
  2. tRNA – tRNA प्रोटीन संश्लेषण के दौरान अमीनो अम्लों को कोशिकाद्रव्य से राइबोसोम तक स्थानान्तरित करता है।
  3. एक्जॉन (Exon) – एक्जॉन में नाइट्रोजनी क्षारकों का अनुक्रम होता है तथा ये mRNA के संश्लेषण में सहायता करते हैं।

प्रश्न 12.
मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना क्यों कहा जाता है?
उत्तर
मानव जीनोम परियोजना एक अत्यन्त व्यापक स्तर की योजना है जिसके अन्तर्गत मनुष्य के जीनोम में उपस्थित समस्त जीनों की पहचान की जाती है। मानव जीनोम में 3 x 109 क्षार युग्म हैं तथा प्रति क्षार पहचानने के लिए तीन अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है। इस प्रकार संपूर्ण योजना पर लगभग 9 मिलियन डॉलर का खर्च आएगा। ज्ञात अनुक्रमों का संग्रह करने के लिए 1000 पृष्ठों की लगभग 3300 पुस्तकों की आवश्यकता होगी, यदि प्रत्येक पृष्ठ पर 10000 शब्द लिखे जायें। इस योजना को पूरी होने में 13 वर्ष का समय अनुमानित किया गया है।

अनेक देशों के हजारों वैज्ञानिक एक साथ इस पर कार्य करते हैं तो इसकी प्रथम प्रक्रिया पूर्ण होने में 10 वर्ष का समय लगता है। इतने स्तर के आँकड़ों के संग्रह, समापन व विश्लेषण के लिए उच्च कोटि के सांख्यिकीय साधनों की आवश्यकता होगी। अतः अपने इस वृहद् स्तर के कारण यह योजना, महापरियोजना कहलाती है।

प्रश्न 13.
डी०एन०ए० अंगुलिछापी क्या है? इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालिए। (2014, 15, 16, 17, 18)
उत्तर
डी०एन०ए० अंगुलिछापी
डी०एन०ए० फिंगर प्रिन्टिंग तकनीक (अंगुलिछापी) को सर्वप्रथम एलेक जेफ्रे (Alec Jaffreys) ने इंग्लैण्ड में विकसित किया था। इसकी सहायता से विभिन्न व्यक्तियों अथवा जीवधारियों के मूल आनुवंशिक पदार्थ (D.N.A.) में भिन्नताओं को देखा जा सकता है। जैसा कि ज्ञात है कि जीवधारी की प्रजाति के सभी सदस्यों के डी०एन०ए० प्रारूप भिन्न होते हैं। यही कारण है कि समरूपी जुड़वाँ (identical twins) को छोड़कर किसी भी व्यक्ति का फिंगर प्रिन्ट एक-दूसरे से मेल नहीं करता। प्रत्येक जीवधारी की सभी कोशिकाओं में एक जैसा डी०एन०ए० पाया जाता है। डी०एन०ए० के कारण एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है। डी०एन०ए० के फिंगर प्रिन्टिग द्वारा डी०एन०ए० में स्थित उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में किसी भी मात्रा में भिन्नता दर्शाते हैं।

डी०एन०ए० के इन्हीं क्षेत्रों के कारण शरीर में विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। इन विभिन्नता दर्शाने वाले सैटेलाइट डी०एन०ए० (Satellite D.N.A.) को प्रोब (परीक्षण करने वाली सलाई) की भाँति प्रयोग करते हैं। इसमें काफी बहुरूपता होती है। एक्स-रे फिल्म पर एक पट्टिकाओं (bands) के क्रम के रूप में प्राप्त करके उनकी स्थिति, विशिष्टता और पहचान कर सकते हैं। किसी एक व्यक्ति के डी०एन०ए० के क्रम पट्टियों के रूप में अनिवार्य रूप से विशिष्ट होते हैं। समरूप जुड़वाँ के डी०एन०ए० पूर्णरूपेण समरूप हो सकते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-7

इन पट्टियों का परिचित्र इलेक्ट्रोफोरेसिस तथा एक रेडियोऐक्टिव पदार्थ की सहायता से प्राप्त किया जाती है। विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में क्षारों की मात्रा विलोमानुपाती ढंग से दूरियाँ तय करती है जो कि बैण्ड्स या पट्टिकाओं के रूप में दृष्टिगोचर होती है।

डी०एन०ए० फिंगर प्रिन्ट विभिन्न ऊतकों (खून, बाल पुटक, त्वचा, अस्थि, लार, शुक्राणु आदि) से प्राप्त किए जा सकते हैं। डी०एन०ए० फिंगर प्रिन्ट का उपयोग अपराध मामलों जैसे-खूनी, बलात्कारी को पहचानने के लिए, पितृत्व के झगड़ों में पारिवारिक सम्बन्धों को ज्ञात करने आदि में किया जाता है।

प्रश्न 14.
निम्न का संक्षिप्त वर्णन कीजिए

  1. अनुलेखन, (2015)
  2. बहुरूपता,
  3. स्थानांतरण,
  4. जैव सूचना विज्ञान

उत्तर
1. अनुलेखन (Transcription) – DNA के रज्जुक में कूट के रूप में निहित आनुवंशिक सूचनाओं का mRNA में प्रतिलिपिकरण, अनुलेखन कहलाता है। इस प्रक्रिया के लिए RNA पॉलीमरेज नामक एंजाइम सहायक होता है। सर्वप्रथम DNA के न्यूक्लिओटाइड्स बनते हैं। तत्पश्चात् DNA रज्जुक अलग होकर साँचे के समान कार्य करने लगते हैं जिसके अनुसार नयी श्रृंखला में क्षारक क्रम व्यवस्थित होते हैं व H-बंधों द्वारा आपस में जुड़ जाते हैं।

2. बहुरूपता (Polymorphism) – जीन जनसंख्या में आनुवंशिक उत्परिवर्तनों का, उच्च आवृत्ति में होना, बहुरूपता कहलाता है। ऐसे उत्परिवर्तन DNA अनुक्रमों के परिवर्तित होने के कारण उत्पन्न होते हैं तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंशागत होकर एकत्रित होते हैं तथा बहुरूपता का कारण बनते हैं। बहुरूपता अनेक प्रकार की होती है तथा इसमें एक ही न्यूक्लिओटाइड में अथवा वृहद स्तर पर परिवर्तन होते हैं।

3. स्थानान्तरण (Translation) – mRNA न्यूक्लिओटाइड की श्रृंखलाओं का अमीनो अम्ल की | पॉलीपेप्टाइड शृंखलाओं में परिवर्तित होना, स्थानान्तरण कहलाता है। यह प्रक्रिया राइबोसोम पर, प्रोटीन संश्लेषण के दौरान होती है। इसमें सर्वप्रथम एंजाइम व ATP द्वारा अमीनो अम्ल का सक्रियकरण होता है। सक्रिय अमीनो अम्ल tRNA पर स्थानांतरित होते हैं वे संश्लेषण प्रारंभ हो जाता है। तत्पश्चात् पॉलीपेप्टाइड अनुक्रम निर्धारित होते हैं। tRNA अणुओं के मध्य उपस्थित पेप्टाइड स्थल द्वारा पेप्टाइड बंध निर्मित होते हैं।

4. जैव सूचना विज्ञान (Bioinformatics) – जीव विज्ञान का वह क्षेत्र जिसके अंतर्गत जीवों के जीनोम संबंधी आँकड़ों का संग्रह, विश्लेषण किया जाता है, जैव सूचना विज्ञान कहलाता है। इसमें मानव जीनोम के मानचित्र बनाये जाते हैं वे DNA के अनुक्रमों को पंक्तिबद्ध किया जाता है। इसका उपयोग कृषि सुधार, ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण सुधार, स्वास्थ्य सुरक्षा आदि में किया जाता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
फॉस्फोडाइएस्टर बन्ध उपस्थित है – (2017)
(क) एडीपी में ।
(ख) एटीपी में
(ग) सी०एएमपी में
(घ) इनमें से किसी में नहीं
उत्तर
(घ) इनमें से किसी में नहीं

प्रश्न 2.
हरगोविन्द खुराना जाने जाते हैं – (2015, 17)
(क) प्रोटीन संश्लेषण के लिए
(ख) RNA संरचना की खोज के लिए
(ग) DNA संरचना की खोज के लिए
(घ) DNA लाइगेज एन्जाइम की खोज के लिए
उत्तर
(क) प्रोटीन संश्लेषण के लिए

प्रश्न 3.
डी०एन०ए० और आर०एन०ए० में समानता है – (2017)
(क) दोनों न्यूक्लियोटाइड्स की पॉलीमर श्रृंखला है।
(ख) दोनों में एक समान शर्करा पायी जाती है।
(ग) दोनों एक समान पाइरीमिडाइन्स से युक्त होते हैं।
(घ) दोनों इकहरी पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं के रूप में होते हैं।
उत्तर
(क) दोनों न्यूक्लियोटाइड्स की पॉलीमर श्रृंखला है।

प्रश्न 4.
संदेशवाहक आर०एन०ए० का निर्माण होता है – (2017)
(क) केन्द्रक में
(ख) राइबोसोम में
(ग) गॉल्जीकाय में
(घ) एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम में
उत्तर
(क) केन्द्रक में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिकता के गुणसूत्रीय सिद्धान्त को किसने प्रतिपादित किया? (2009)
उत्तर
सट्टन तथा बोवेरी (Sutton & Boveri, 1902) ने।

प्रश्न 2.
जीन की परिभाषा दीजिए। ये कहाँ पाये जाते हैं? (2014)
उत्तर
एक जीव के किसी भी लक्षण को निर्धारित करने वाले मेंडेलियन कारक को जीन कहते हैं। ये आनुवंशिक पदार्थ की एक प्रकार्यक इकाई होती है। जीन गुणसूत्र पर उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 3.
अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए। (2014)
डी०एन०ए० →…… → प्रोटीन्स” अणुजैविकी का केन्द्रीय सिद्धान्त है।
उत्तर
“डी०एन०ए० → आर०एन०ए० → प्रोटीन्स” अणुजैविकी का केन्द्रीय सिद्धान्त है।

प्रश्न 4.
न्यूक्लियोसाइड्स तथा न्यूक्लियोटाइड्स में अन्तर बताइए। (2010, 14)
उत्तर

  1. एक न्यूक्लियोटाइड न्यूक्लिक अम्ल की एक पूर्ण इकाई है, जबकि न्यूक्लियोसाइड में एक फॉस्फेट मूलक (PO4) की कमी होती है।
  2. स्वभाव में न्यूक्लियोसाइड्स क्षारकीय होते हैं जबकि न्यूक्लियोटाइड्स अम्लीय होते हैं।

प्रश्न 5.
न्यूक्लिओटाइड्स में पायी जाने वाली दो शर्कराओं के नाम सूत्र सहित लिखिए। (2010, 11)
उत्तर

  1. राइबोज शर्करा – C5H10O5 तथा
  2. डीऑक्सीराइबोज शर्करा – C5H10O4

प्रश्न 6.
न्यूक्लिओटाइड्स में पाये जाने वाले प्यूरीन के नाम लिखिए।
उत्तर
एडीनीन (adenine) तथा ग्वानीन (guanine)।

प्रश्न 7.
आर०एन०ए० तथा डी०एन०ए० का पूरा नाम लिखिए। (2015)
उत्तर
आर०एन०ए० = राइबो न्यूक्लिक ऐसिड
डी०एन०ए० = डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड

प्रश्न 8.
प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक डी०एन०ए० में अन्तर बताइए। (2012)
उत्तर
प्रोकैरियोटिक DNA के साथ प्रोटीन जुड़े नहीं रहते जबकि यूकैरियोटिक DNA के साथ हिस्टोन प्रोटीन जुड़े रहते हैं।

प्रश्न 9.
यूकैरियोटिक कोशिकाओं में कौन-से दो प्रकार के डी०एन०ए० पाये जाते हैं?
उत्तर
B – DNA तथा Z – DNA

प्रश्न 10.
Z – DNA क्या है? इसके प्रत्येक कुण्डल में कितने न्यूक्लिओटाइड्स होते हैं?
उत्तर
उच्च लवणता की स्थिति में B – DNA परिवर्तित होकर Z – DNA बनाता है। इसमें कुण्डलन वामावर्त होता है। कुण्डल का व्यास 18 Å तथा प्रत्येक कुण्डल में 12 जोड़ी न्यूक्लिओटाइड्स होते हैं।

प्रश्न 11.
डी०एन०ए० अणु का द्विकुण्डलित मॉडल किसने और कब प्रतिपादित किया? (2011)
उत्तर
डी०एन०ए० अणु का द्विकुण्डलित मॉडल 1953 ई० में वाटसन, क्रिक, विलकिन्स व फैंकलिन (J.D. Watson, F.H.C. Crick, M.H.F. Wilkins and R. Franklin) नामक वैज्ञानिकों ने प्रतिपादित किया। इनके इस कार्य के लिए इन्हें सन् 1962 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 12.
पारक्रमण (transduction) क्या है? (2014)
उत्तर
पारक्रमण वह प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत वायरस (विषाणु) के द्वारा DNA का स्थानान्तरण एक जीवाणु से दूसरे जीवाणु में किया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डीऑक्सीराइबोज शर्करा क्या है? इस शर्करा की अणु संरचना बनाइए। (2012, 14)
उत्तर
डीऑक्सीराइबोज शर्करा (deoxyribose sugar) DNA में पाई जाती है। यह पाँच कार्बन युक्त (5C) होती है। इसका पाँचवाँ कार्बन परमाणु वलय से बाहर होता है। शर्करा का पहला कार्बन परमाणु हमेशा नाइट्रोजन क्षारक के साथ ग्लाइकोसिडिक बन्ध (glycosidic bond) द्वारा जुड़ा रहता है जबकि तीसरा तथा पाँचवाँ कार्बन परमाणु हमेशा फॉस्फेट अणु के साथ जुड़ता है। दो शर्करा अणु एक-दूसरे के साथ तीसरे कार्बन (3C) तथा पाँचवें कार्बन (5C) के साथ एक फॉस्फेट अणु फॉस्फोडाइएस्टर बन्ध (phosphodiester bond) द्वारा जुड़े रहते हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-8

प्रश्न 2.
DNA अणु की संरचना में चारगैफ के नियमों की महत्ता को स्पष्ट कीजिए। (2012)
उत्तर
चारगैफ (Chargaff) ने विभिन्न जीवों के DNA का अध्ययन किया और बताया कि

  1. सभी DNA अणुओं में प्यूरीन क्षारक की मात्रा पिरीमिडीन क्षारक के बराबर होती है। अतः
    [latex s=2]\frac { adenine+guanine }{ purine } =\frac { thymine+cytosine }{ pyrimidine } [/latex]
  2. भिन्न-भिन्न जातियों के जीवों के DNA में एडीनीन + थाइमीन तथा ग्वानीन + साइटोसीन का अनुपात
    (A + T : G + C) भिन्न-भिन्न होता है परन्तु एक ही जातियों के जीवों में यह समान होता है।
  3. एक ही जीव-जाति के सदस्यों में पाये जाने वाले DNA के कुल अणुओं में क्षारकों की संख्या समान होती है।

उपर्युक्त विचारों को “चारगैफ नियम” (Chargaff’s rule) के रूप में जाना जाता है।
वाटसन एवं क्रिक (Watson and Crick) ने भी DNA का मॉडल प्रस्तुत करने के लिये चारगैफ के नियमों की सहायता ली।

प्रश्न 3.
डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए० में अन्तर लिखिए। (2009, 10, 11, 12, 13, 14, 16, 17)
उत्तर
डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए० में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-9

प्रश्न 4.
RNA कितने प्रकार के होते हैं? इनके कार्य बताइए। (2013, 16)
या
राइबोसोमल आर०एन०ए० पर टिप्पणी लिखिए। (2010)
या
प्रोटीन संश्लेषण में भाग लेने वाले विभिन्न प्रकार के RNA अणुओं का वर्णन कीजिए। (2012)
या
विभिन्न प्रकार के आर०एन०ए० का नाम लिखिए। (2014)
उत्तर
आर०एन०ए० के प्रकार
RNA अधिक अणुभार वाली पॉलीन्यूक्लियोटाइड से मिलकर बना है। यह DNA से भिन्न होता है, क्योंकि इसमें डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा के स्थान पर राइबोज शर्करा होती है और नाइट्रोजन बेस थाइमीन के स्थान पर यूरेसिल होता है। प्रत्येक कोशिका में RNA निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं –

1. सन्देशवाहक आर0एन0ए0 (mRNA) – इनका निर्माण केन्द्रक में उपस्थित DNA पर ट्रांसक्रिप्शन की क्रिया द्वारा होता है। ये कोशिका की कुल RNA का 3 – 5% होते हैं और इनका आणविक-भार 500,000 से 2,000,000 होता है। केन्द्रक में DNA साँचे पर इनका निर्माण होता है। सन् 1961 में फ्रैंसिस जैकब (Francis Jacob) तथा जैक्यू मोनाड (Jacques Monod) ने इन्हें सन्देशवाहक RNA अणुओं का नाम दिया।
कार्य – सन्देशवाहक RNA अणु केन्द्रक से बाहर कोशिकाद्रव्य में आ जाता है। यहाँ यह केन्द्रक से आदेश लेकर राइबोसोम पर विभिन्न प्रकार के प्रोटीन बनाता है।

2. राइबोसोमल आर0एन0ए0 (rRNA) – ये RNA के संरचनात्मक (structural) अणु होते हैं। यह कोशिका की कुल RNA का 80% होता है। rRNA केन्द्रक में DNA से उत्पन्न होता है। तीनों प्रकार के RNA में यह सर्वाधिक समय तक क्रियाशील रहता है। प्रत्येक राइबोसोम का लगभग 65% भाग rRNA का तथा शेष 35% भाग प्रोटीन का होता है।
कार्य – rRNA राइबोसोम्स की रचना में भाग लेते हैं। यह प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करता है।

3. स्थानान्तरण आर0एन0ए0 (tRNA or sRNA) – यह कोशिका की कुल आर०एन०ए० का 15-18% होता है। यह कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है। ये सबसे छोटे व घुलनशील अणु होते हैं; अतः इन्हें विलेय RNA अणु (soluble RNA molecules) भी कहते हैं। इनको निर्माण केन्द्रक में DNA के साँचे (DNA template) पर होता है।
कार्य – ये विभिन्न प्रकार के अमीनो अम्लों को राइबोसोम्स पर लाते हैं, जहाँ प्रोटीन का संश्लेषण होता है।

प्रश्न 5.
आनुवंशिक कूट या जेनेटिक कोड्स क्या हैं? आनुवंशिक कोड में पाये जाने वाले एक समारम्भ व एक समापन कोडॉन को स्पष्ट कीजिए। (2009, 10, 12, 16)
या
आनुवंशिक कूट क्या है? इसकी कोई चार विशेषताएँ लिखिए। (2015, 17)
या
समारंभन कोडॉन एवं समापन कोडॉन से आप क्या समझते हैं? (2017)
उत्तर
आनुवंशिक कूट या जेनेटिक कोड
डी०एन०ए० (DNA) आनुवंशिक सूचनाओं या सन्देशों के टेप की भाँति है जिसमें नाइट्रोजन क्षारकों के अनुक्रमांक के रूप में आनुवंशिक सन्देश होते हैं। प्रोटीन में प्रायः विभिन्न प्रकार के 20 अमीनो अम्ल होते हैं परन्तु न्यूक्लिक अम्ल में केवल चार ही क्षारक होते हैं। इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं कि प्रोटीन भाषा की वर्णमाला में 20 अमीनो अम्ल रूपी अक्षर (alphabets) होते हैं। इसी प्रकार न्यूक्लिक अम्लों की भाषा की वर्णमाला में चार क्षारक रूपी अक्षर होते हैं क्योंकि आनुवंशिक सूचना m-RNA से होकर प्रोटीन तक पहुँचती है, अतः RNA की भाषा का प्रोटीन की भाषा में अनुवाद करने के लिए एक शब्दकोष को तैयार करना आनुवंशिक कूट (genetic code) की समस्या थी।

एक चार अक्षरों की भाषा और दूसरी 20 अक्षरों की भाषा होने के कारण यह सम्भव नहीं है कि RNA भाषा का एक अक्षर अर्थात् एक क्षारक प्रोटीन भाषा के एक अक्षर अथवा एक अमीनो अम्ल के समतुल्य हो सके। इस प्रकार आनुवंशिक संकेत पद्धति में कुल 43 =4 x 4 x 4 = 64 कोडॉन होते हैं।

इस सम्बन्ध में अनेक सिद्धान्त प्रस्तुत किये गये परन्तु क्रिक (EH.C. Crick) द्वारा प्रस्तुत सिद्धान्त ही सर्वाधिक मान्य है। इस सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक अमीनो अम्ल के लिए तीन नाइट्रोजन क्षारकों का एक अनुक्रम या त्रिक् कोड (triplet code) होता है; अतः आनुवंशिक कूट या जेनेटिक कोड डी०एन०ए० अणुओं में स्थित नाइट्रोजन क्षारकों का वह अनुक्रम है जिसमें प्रोटीन अणुओं के संश्लेषण के लिए सन्देश निहित रहते हैं।

कोडॉन (Codon) – न्यूक्लियोटाइड्स के उस समूह को जिसमें किसी एक अमीनो अम्ल के लिए सन्देश या कोड हो, कोडॉन (codon) कहते हैं; जैसे-AUG समारम्भ कोडॉन है।
एण्टीकोडॉन (Anticodon) – t-RNA में उपस्थित उस तीन क्षारक समूह को जो m-RNA में उपस्थित कोडॉन का पूरक हो, एण्टीकोडॉन (anticodon) कहते हैं।

त्रिक कोड (Triplet code) – गैमो (Gamow, 1954) ने तीन अक्षरीय कोड की सम्भावना प्रकट की। DNA व RNA में कुल चार न्यूक्लियोटाइड्स होते हैं और लगभग 20 अमीनो अम्लों के विन्यास का कोड (code) इनके विन्यास पर आधारित होता है। अगर यह मान लिया जाये कि प्रत्येक कोड केवल एक न्यूक्लिओटाइड का बना होता है तो इससे कुल चार कोड बनेंगे जो केवल 4 अमीनो अम्लों के विन्यास को नियन्त्रित कर सकते हैं। अगर प्रत्येक कोड को दो न्यूक्लियोटाइड्स का बना हुआ माना जाये तो (4 x 4) केवल 16 कोड्स बनेंगे। ये भी 20 अमीनो अम्लों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। तीन न्यूक्लियोटाइड्स के बने कोड से (4 x 4 x 4 = 64) 64 कोड शब्द बनते हैं। ये बीस अमीनो अम्लों के लिए आवश्यकता से अधिक हो जाते हैं; अतः गैमो की तीन अक्षरीय कोड की सम्भावना सही है।

श्रृंखला का समारम्भ एवं समापन करने वाले कोडॉन
सिस्ट्रोन के प्रथम कोडॉन को समारम्भ कोडॉन (initiation codon) कहते हैं। यह पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के कोडित होने के सन्देश को प्रारम्भ करता है। अधिकतर श्रृंखलाओं में AUG समारम्भ कोडॉन होता है। यह मेथिओनिन (methionine) नामक अमीनो अम्ल को कोडित करता है। इसी प्रकार सिस्ट्रोन का अन्तिम कोडॉन पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला का समापन करता है। इसे समापन कोडॉन (termination codon) कहते हैं। समापन कोडॉन तीन होते हैं-UAA, UGA तथा UAG। प्रारम्भ में जब इनके कार्य का ज्ञान नहीं था तो ये निरर्थक कोडॉन (nonsense codon) कहलाते थे।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डी०एन०ए० की आणविक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए तथा डी०एन०ए० के द्विगुणन में इसका महत्त्व समझाइए। (2009,12)
या
डी०एन०ए० की संरचना के वाटसन एवं क्रिक मॉडल को उपयुक्त चित्र बनाकर समझाइए। (2014, 16)
या
न्यूक्लिक अम्ल की परिभाषा लिखिए। वाटसन एवं क्रिक द्वारा प्रतिपादित डी०एन०ए० मॉडल की संरचना का वर्णन कीजिए। (2014)
या
वाटसन एवं क्रिक द्वारा प्रस्तुत डी०एन०ए० की रासायनिक संरचना का वर्णन कीजिए तथा इसकी आनुवंशिक पदार्थ के रूप में मान्यता का उल्लेख कीजिए। (2015, 17)
उत्तर
न्यूक्लिक अम्ल
सर्वप्रथम आल्टमान (1889) ने केन्द्रकीय पदार्थ को निकालकर इसमें से प्रोटीन्स को पृथक् किया तथा शेष फॉस्फोरस युक्त पदार्थ को अम्लीय होने के कारण न्यूक्लिक अम्ल कहा। ये दो प्रकार के होते हैं-DNA व RNA

डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल (DNA) तथा इसकी संरचना
एक डी०एन०ए० (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल) अणु एक बहुलक (polymer) है जो आनुवंशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानान्तरित करता है; अतः इसे आनुवंशिक अणु (molecule of heredity) भी कहते हैं। डी०एन०ए० (DNA = deoxyribo nucleic acid) की खोज फ्रीडरिक मीशर (Friedrich Miescher, 1869) ने की थी। सबसे पहले विलकिन्स तथा फ्रैंकलिन (Wilkins and Franklin, 1952) ने बताया कि डी०एन०ए० एक कुण्डलित (helical) संरचना होती है। 1953 ई० में वाटसन तथा क्रिक (Watson and Crick) ने डी०एन०ए० संरचना का द्विकुण्डलित मॉडल (Double Helix Model) प्रस्तुत किया।

यह दो लम्बी श्रृंखलाओं के बने दो। कुण्डल (helices) होते हैं जो आधारभूत रूप में विशेष इकाइयों जिन्हें न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) कहा जाता है, से बने होते हैं। इस प्रकार, एक अणु में सहस्रों से लेकर लाखों तक न्यूक्लियोटाइड्स होते हैं अर्थात् ये श्रृंखलाएँ पॉलीन्यूक्लियोटाइड (polynucleotide) श्रृंखलाएँ होती हैं। इस प्रकार, डी०एन०ए० की संरचना अनेक बहुलकों (polymers) की श्रृंखलाओं (chains) के दोहरे होने से बनती है। ये श्रृंखलाएँ काफी लम्बी तथा अणु अत्यधिक बड़े होते हैं। प्रत्येक श्रृंखला का प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड एक विशिष्ट तथा जटिल संरचना है। यह स्वयं तीन प्रकार के अणुओं या मूलकों (radicals) से मिलकर बना होता है, जिनमें

1. एक पेन्टोज शर्करा (pentose sugar), डीऑक्सीराइबोज (deoxyribose) प्रकार की अर्थात् | यह एक पाँच कार्बन वाली शर्करा होती है।
2. एक फॉस्फेट (phosphate) मूलक जो एक अणु फॉस्फोरिक अम्ल (phosphoric acid = H3PO4) से बनता है।
3. एक नाइट्रोजन क्षारक (nitrogen base) जो दो प्रकार के तथा कुल चार क्षारकों में से एक होता है। ये इस प्रकार हैं –
(क) प्यूरीन (purine) प्रकार के जिनमें 2-N रिंग होती है; ये हैं – एडीनीन (adenine) व ग्वानीन (guanine) तथा
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-10
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-11

(ख) पिरामिडीन (pyrimidine) प्रकार के जिनमें नाइट्रोजन की एकल रिंग होती है; उदाहरण हैं – साइटोसीन (cytosine) तथा थाइमीन (thymine) क्षारक।

DNA के एक अणु में डीऑक्सीराइबोज शर्करा (deoxyribose sugar) का एक अणु क्षारक (base) के एक अणु से जुड़ा रहता है। इस यौगिक को डीऑक्सीराइबोसाइड (deoxyriboside) कहते हैं। यह एक न्यूक्लिओसाइड (nucleoside) है। अब यह न्यूक्लिओसाइड एक फॉस्फोरिक अम्ल (HI PO4) से मिलकर डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिओटाइड (deoxyribo nucleotide) बनाता है। न्यूक्लिओटाइड के एक अणु में क्षारक का अणु सदैव शर्करा के अणु से जुड़ता है। इसी तरह फॉस्फोरिक अम्ल का एक अणु भी शर्करा के एक अणु से जुड़ा रहता है।

चार विभिन्न नाइट्रोजन बेस होने के कारण डी०एन०ए० (DNA) के अणु में चार प्रकार के न्यूक्लिओसाइड व चार न्यूक्लिओटाइड होते हैं। एक डी०एन०ए० अणु में दो लम्बी श्रृंखलाएँ होती हैं जिनमें क्षारक (base) का अणु अक्ष (axis) की ओर होता है। दोनों श्रृंखलाओं के क्षारकों के अणु एक-दूसरे से हाइड्रोजन बन्ध (H-bonds) से जुड़कर क्षारक का एक जोड़ा बना लेते हैं। इन हाइड्रोजन बन्धों के मध्य 2.83 – 2.90 A का स्थान होता है। इन बन्धों से न्यूक्लिओटाइड्स की दो श्रृंखलाएँ बँधी होती हैं।

ये दोनों शृंखलाएँ एक-दूसरे की परिपूरक (complementary) होती हैं। ये दोनों श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से उल्टी दिशा में (antiparallel) होती हैं अर्थात् एक श्रृंखला में फॉस्फोडाइएस्टर लिंकेज (phosphodiester linkage) 3’→ 5′ एक दिशा में तथा दूसरी श्रृंखला में 5’→ 3′ उल्टी दिशा में होते हैं। इस प्रकार डी०एन०ए० एक सीढ़ी की तरह लगता है। DNA का व्यास (diameter) 20 Å होता है।

डी०एन०ए० का द्विकुण्डल प्रतिरूप
सन् 1953 में वाटसन, क्रिक, विलकिन्स व फ्रैंकलिन (J.D. Watson, EH.C. Crick, M.H.E Wilkins and R. Franklin) नामक वैज्ञानिकों ने एक्स-रे विश्लेषण (X-ray diffraction studies) द्वारा डी०एन०ए० (DNA) का द्विकुण्डल प्रतिरूप (double helical model) प्रस्तुत किया जिस पर उन्हें सन् 1962 में नोबेल पुरस्कार मिला। इस मॉडल के अनुसार डी०एन०ए० (DNA) अणु पॉलीन्यूक्लियोटाइट्स के दो स्टैण्ड्स (strands) का बना होता है। दोनों स्टैण्ड्स एक ही केन्द्रीय अक्ष पर कुण्डलित रहते हैं और अक्ष के चारों ओर एक द्विचक्राकार (double helical) संरचना बना लेते हैं। प्रत्येक चक्राकार संरचना में न्यूक्लिओटाइड्स के 10 युगल (ten pairs) होते हैं और एक चक्र से दूसरे चक्र की दूरी 34 में होती है अर्थात् एक न्यूक्लिओटाइड का दूसरे न्यूक्लिओटाइड से अन्तर 3.4 Å होता है। Φ × 174 कॉलीफेज (coliphage) तथा 513 ई० कोलाई फेज (E. coti phase) नामक वाइरस (virus) में अपवाद स्वरूप डी०एन०ए० (DNA) में पॉली डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिओटाइड की एक श्रृंखला (single strand) ही होती है।

प्रत्येक क्षारक युग्म में प्यूरीन प्रकार का क्षारक एडिनीन (adenine) हमेशा पिरीमिडीन प्रकार के क्षारक थाइमीन (thymine) से तथा ग्वानीन (guanine) प्रकार का प्यूरीन क्षारक हमेशा पिरीमिडीन प्रकार के साइटोसीन (cytosine) क्षारक के साथ ही जुड़कर पगदण्ड का एक भाग बनाता है। इसमें अन्य किसी भी प्रकार का युग्म सम्भव नहीं है। इस प्रकार, यदि एक श्रृंखला में T-C-G-A-T-C-G आदि हैं तो दूसरी श्रृंखला में T के सामने A, c के सामने G, G के सामने C तथा A के सामने T आदि ही होंगे। इस प्रकार
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-12

पगदण्ड में न्यूक्लियोटाइड के क्षारक हाइड्रोजन बन्धों (H-bonds) के द्वारा जुड़े होते हैं। इसमें एडिनीन, थाइमीन के साथ दो साइटोसीन, ग्वानीन के साथ तीन बन्धों से बन्धनयुक्त होता है। क्षारकों का निश्चित क्रम डी०एन०ए० की रासायनिक शब्दावली बनाता है जिससे आनुवंशिक लक्षणों की स्थापना होती है।
[संकेत–डी०एन०ए० की संरचना का महत्त्व विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 2 के उत्तर में देखिए।]

प्रश्न 2.
डी०एन०ए० द्विगुणन (replication of DNA) के प्रमुख चरणों का उल्लेख कीजिए। DNA के महत्त्वपूर्ण कार्य क्या हैं?
या
डी०एन०ए० के द्विगुणन (प्रतिकृतियन) का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (2015, 16)
या
डी०एन०ए० की अर्धसंरक्षी द्विगुणन विधि का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर
डी०एन०ए० का द्विगुणन
वाटसन एवं क्रिक (Watson and Crick) ने बताया कि डी०एन०ए० (DNA) एक द्विकुण्डलिनी संरचना है, जो दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से मिलकर बना है। ये श्रृंखलाएँ प्रतिसप्तान्तर (antiparallel) तथा एक-दूसरे की पूरक (complementary) होती हैं। डी०एन०ए० अणु का द्विगुणन अर्द्धसंरक्षी (semiconservative) होता है। इसका तात्पर्य यह है कि नये बने DNA अणु में एक सूत्र (strand) पैतृक होगा तथा दूसरा सूत्र नवनिर्मित होगा। सन् 1958 में मैथ्यू मेसेल्सन । (Matthew Meselson) तथा फ्रैंकलिन स्टाहल (Franklin Stahl) ने एश्केरीशिया कोलाई (Eischerichia coli = E. coli) नामक जीवाणु के डी०एन०ए० अणु पर ऐसे द्विगुणन की पुष्टि की। डी०एन०ए० के द्विगुणन को हम निम्नलिखित प्रमुख चरणों में बाँट सकते हैं –

1. डी0एन0ए0 अणुओं के पराकुण्डलों का अकुण्डलन एवं पुनर्कुण्डलन (Decoiling and Recoiling of Supercoils of DNA Molecules) – डी०एन०ए० अणुओं के पराकुण्डलन एवं अकुण्डलन का नियमन कुछ विशेष एन्जाइम करते हैं, जिन्हें टोपोआइसोमेरेज (topoisomerase) कहते हैं। द्विगुणन के लिए ये एन्जाइम धीरे-धीरे डी०एन०ए० अणु के छोटे-छोटे स्थानीय खण्डों में इसका पराकुण्डलन समाप्त करके द्विकुण्डलिनी (duplex) को खोलते रहते हैं और द्विगुणन के बाद सन्तति अणुओं का पुनर्कुण्डलन भी करते रहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-टोपोआइसोमेरेज-1 (topoisomerase-I) तथा टोपोआइसोमेरेज-II (topoisomerase-II)।

टोपोआइसोमेरेज-I DNA की द्विकुण्डलिनी के एक सूत्र में कटाव (nick) पैदा करता है, जबकि टोपोआइसोमेरेज-II DNA द्विकुण्डलिनी के दोनों सूत्रों में कटाव उत्पन्न करता है। इसे डी०एन०ए० गाइरेज (DNA gyrase) भी कहते हैं। इन कटावों के बनने से ही स्थानीय अकुण्डलन से शेष द्विकुण्डलिनी में होने वाला घूर्णन (rotation) समाप्त । होता है।

2. द्विकुण्डलिनी का खुलना (Unwinding of Double Helix) – डी०एन०ए० अणु का द्विगुणन कुछ निर्दिष्ट स्थानों पर ही होता है, जिन्हें द्विगुणन मूल (replication origins) कहते हैं। यूकैरियोटिक कोशिकाओं में DNA अपेक्षाकृत लम्बे, रेखीय वे एक से लेकर कई युग्मों (pairs) में होते हैं। प्रत्येक अणु के द्विगुणन के लिए इसमें अनेक द्विगुणन मूल होते हैं। इन द्विगुणन मूल पर कुछ विशेष प्रकार की मूल-बन्धिनी प्रोटीन्स (origin-binding proteins) द्विकुण्डलिनी से जुड़ जाती हैं। यहीं पर विभिन्न प्रकार के प्रोटीन्स व एन्जाइम्स एकत्र होकर द्विगुणन में विविध भूमिकाएँ निभाते हैं।

ई० कोलाई (E. coli) में इन मूल-बन्धिनी प्रोटीन्स को ‘ori C’ का नाम दिया गया है। ये प्रोटीन्स ए०टी०पी० की सहायता से द्विगुणन मूलों के समाक्षारों के युग्मों से H-बन्धों (H-bonds) को हटा देती हैं। द्विगुणने मूल H-बन्धों (H-bonds) के टूटते ही दोहरा हैलिक्स खुल जाता है, इसे डी०एन०ए० अणु का द्रवण (melting) कहते हैं। दोनों कुण्डल के अलग होने से ‘Y’ आकार की चिमटी के समान द्विशाखी, द्विगुणन काँटे (replication fork) जैसी संरचना बन जाती है। प्रत्येक द्विशाख पर एक सूत्र से डी०एन०ए० हेलिकेज (DNA helicase) नामक एन्जाइम का एक बड़ा अणु लिपट जाता है। यह एन्जाइम डी०एन०ए० के सूत्रों को धीरे-धीरे खोलने अर्थात् द्रवण का कार्य करता है।

3. न्यूक्लियोटाइड्स का सक्रियकरण (Activation of Nucleotides) – न्यूक्लियोसाइड एन्जाइम फॉस्फोराइलेज (phosphorylase) तथा ए०टी०पी० की उपस्थिति में सक्रिय हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को फॉस्फोरिलेशन कहते हैं।

4. आर0एन0ए0 प्रवेशक का निर्माण (Formation of RNA Prirmers) – द्विगुणन शाखाओं के बनते ही प्रत्येक द्विशाख पर अलग हुए प्रत्येक DNA सूत्र पर राइबोन्यूक्लियोटाइड (ribonucleotide) अणुओं की एक छोटी अनुपूरक (complementary) श्रृंखला (RNA का छोटा अणु) बन जाती है। इन RNA अणुओं को प्रवेशक (primer) कहते हैं, क्योंकि इन्हीं के 3′ छोरों पर डीऑक्सीराइबो न्यूक्लियोटाइड अणुओं को जोड़कर DNA की एक नयी श्रृंखला का संश्लेषण किया जाता है। आर०एन०ए० प्राइमर का संश्लेषण प्राइमेज (primase) एन्जाइम  या RNA पॉलीमेरेज (RNA polymerase) की सहायता से होता है।

5. डी0एन0ए0श्रृंखला का निर्माण तथा दीर्धीकरण (Formation and Elongation of DNA Chain) – एन्जाइम डी०एन०ए० पॉलीमेरेज-III (DNA polymerase-III) RNA प्राइमर में 5’→3′ दिशा में नये क्षारकों को जोड़ता है। इन क्षारकों का क्रम DNA टेम्पलेट के अनुसार होता है। डी०एन०ए० अणु के दो सूत्र प्रतिसमान्तर होते हैं अर्थात् एक की दिशा 5’→3′ तथा दूसरे की 3′ → 5′ होती है।

एन्जाइम डी०एन०ए० पॉलीमरेज III क्षारकों को केवल 5′ – 3′ दिशा में ही जोड़ सकता है; अत: 3′ – 5′ दिशा वाले DNA टेम्पलेट पर नई DNA श्रृंखला का सतत् निर्माण (continuous synthesis) होता है। ऐसे सूत्र को अगुआ सूत्र या अग्रक रज्जुक (leading strand) कहते हैं। इसके विपरीत जिस नई DNA श्रृंखला का निर्माण 3’→ 5′ दिशा में होता है अर्थात् 5’→3′ दिशा वाले पैतृक सूत्र पर यह असतत् होता है। इस प्रकार यह निर्माण छोटे-छोटे खण्डों के रूप में होता है, ये खण्ड ओकाजाकी खण्ड (Okajaki fragments) कहलाते हैं। इस प्रकार, खण्डों के रूप में हुए निर्माण के कारण इस नये सूत्र को पश्चगामी रज्जुक या पिछुआ सूत्र (lagging strand) कहते हैं। पिछुआ सूत्र के पृथक्-पृथक् टुकड़ों में बनने की प्रक्रिया की खोज रोजी ओकाजाकी (Reiji Okajaki 1968) ने की थी ।
UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance img-13

6. आर0एन0ए0 प्रवेशक का हटना (Removal of RNA Primer) – DNA श्रृंखला की लम्बाई बढ़ने के बाद आर०एन०ए०प्रवेशक (RNA primer) श्रृंखला से हट जाता है। आर०एन०ए० प्रवेशक के हटने से उत्पन्न रिक्त स्थान को भरने में डी०एन०ए०पॉलीमेरेज-1 (DNA polymerase-I) सहायता करता है। जब DNA का निर्माण पूरा हो जाता है तो एन्जाइम DNA हेलिकेज की क्रिया रुक जाती है।

डी०एन०ए० का महत्त्व तथा कार्य
न्यूक्लिक अम्लों को जीवन को चलाये रखने का प्रमुख आधार माना जाता है। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी लक्षणों के प्रकटन से लेकर उन लक्षणों के अन्तर्गत विभिन्न क्रियाओं को उनके निर्दिष्ट तक उचित विधि द्वारा, उचित स्वरूप में तथा नियमित एवं नियन्त्रित अनुक्रियाओं के द्वारा, पहुँचाने का कार्य करते हैं। इस प्रकार –

  1. डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल (DNA) आनुवंशिक सूचनाओं के वाहक का कार्य करता है। तथा सभी आनुवंशिक लक्षणों को पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी में पहुँचाता है।
  2. DNA के द्वारा निर्मित राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) विभिन्न अमीनो अम्लों से DNA द्वारा निर्देशित प्रोटीन का संश्लेषण करते हैं जो विभिन्न प्रकार की क्रियाओं-अनुक्रियाओं को होने देने में एन्जाइम्स (enzymes) के रूप में सहायक होती हैं।
  3. DNA के भाग या उसके द्वारा निर्मित कुछ न्यूक्लियोटाइड हॉर्मोन्स (hormones), सह-एन्जाइमों (co-enzymes) आदि के रूप में कार्य करते हैं।
  4. जिस मास्टर योजना (master plan) के अन्तर्गत जन्म से मृत्यु तक किसी जीव में कोशिकाएँ बनती हैं और कार्य करती हैं, उसकी मूल रूपरेखा (original blue print) डी०एन०ए० के रूप में होती है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance (वंशागति का आणविक आधार) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 Molecular Basis of Inheritance (वंशागति का आणविक आधार), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry (पर्यावरणीय रसायन)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry (पर्यावरणीय रसायन).

पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पर्यावरणीय रसायन शास्त्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत पर्यावरणीय प्रदूषण, और पर्यावरण में होने वाली विभिन्न प्रकार की रासायनिक और प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, पर्यावरणीय रसायन शास्त्र कहलाता है।

प्रश्न 2.
क्षोभमण्डलीय प्रदूषण को लगभग 100 शब्दों में समझाइए।
उत्तर
क्षोभमण्डल में अवान्छित गैसों तथा विविक्त वायु प्रदूषकों की इस सीमा तक वृद्धि कि वे मानव जाति तथा उसके पर्यावरण पर अनिष्ट प्रभाव आरोपित कर सकें, क्षोभमण्डलीय प्रदूषण कहलाता है।

  1. गैसीय प्रदूषक-जैसे—सल्फर के ऑक्साइड (S2, SO3) नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NO, NO2 ), कार्बन के ऑक्साइड (CO, CO2), हाइड्रोजन सल्फाइड हाइड्रोकार्बन, ऐल्डिहाइड, कीटोन इत्यादि।
  2. विविक्त या कणिकीय प्रदूषक-जैसे-धुंध, धुआँ, धूम (fumes), धूल, कार्बन, कण, लेड और कैडमियम यौगिक, जीवाणु, कवक, मॉल्ड इत्यादि। क्षोभमण्डलीय प्रदूषण ईंधनों के दहन, औद्योगिक प्रक्रमों, कीटनाशकों एवं विषैले पदार्थों के उपयोग द्वारा होता है। इसे जीवाश्म ईंधनों (fossil fuels) के प्रयोग को हतोत्साहित कर, ऑटोमोबाइलों से निकलने वाली गैसों को स्वच्छ कॅर, साइक्लोन एकत्रक (cyclone collector) का उपयोग कर एवं उचित अवशिष्ट प्रबन्धन (waste management) द्वारा नियन्त्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
कार्बन डाइऑक्साइड की अपेक्षा कार्बन मोनोऑक्साइड अधिक खतरनाक क्यों है? समझाइए।
उत्तर
कार्बन मोनोऑक्साइड एक अत्यधिक हानिकारक गैस है। यह रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन (haemoglobin) से क्रिया कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (carboxyhaemoglobin) बनाती है जो रक्त में O2 का परिवहन रोक देता है। परिणामस्वरूप शरीर में O2 की कमी हो जाती है। CO के वायु में 100 ppm सान्द्रण पर चक्कर आना तथा सिरदर्द होने लगता है। अधिक सान्द्रता पर CO प्राणघातक हो सकती है। कार्बन डाइऑक्साइड हीमोग्लोबिन के साथ कोई क्रिया नहीं करती है। इस कारण यह कम हानिकारक है, यद्यपि यह ग्लोबल वार्मिंग (global warming) उत्पन्न करती है।

प्रश्न 4.
ग्रीन हाउस-प्रभाव के लिए कौन-सी गैसें उत्तरदायी हैं? सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर
CO2 मुख्य रूप से ग्रीन हाउस प्रभाव (green house effect) के लिये उत्तरदायी है। परन्तु दूसरी गैसें जो ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करती हैं वे मेथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन, ओजोन तथा जल-वाष्प हैं।

प्रश्न 5.
अम्लवर्षा मूर्तियों तथा स्मारकों को कैसे दुष्प्रभावित करती है?
उत्तर
अधिकांश मूर्तियाँ तथा स्मारक संगमरमर (marble) के बने होते हैं जिन पर अम्ल वर्षा का बुरा प्रभाव पड़ता है। क्योंकि इन स्मारकों के चारों ओर उपस्थित वायु में इनके पास स्थित उद्योगों तथा ऊर्जा संयन्त्रों (power plants) से निकलने वाले नाइट्रोजन व सल्फर के ऑक्साइड बहुत अधिक मात्रा में विद्यमान हो सकते हैं। ये ऑक्साइड ही अम्ल वर्षा का कारण हैं। अम्ल वर्षा में उपस्थित अम्ल . मार्बल से क्रिया करके मूर्तियों तथा स्मारकों को नष्ट कर देते हैं।

प्रश्न 6.
धूम कुहरा क्या है? सामान्य धूम कुहरा प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे से कैसे भिन्न है?
उत्तर
धूम कुहरा (Smog)–‘धूम-कुहरा’ शब्द ‘धूम’ एवं ‘कुहरे से मिलकर बना है। अत: जब धूम, कुहरे के साथ मिल जाता है, तब यह धूम कुहरा कहलाता है। विश्व के अनेक शहरों में प्रदूषण इसका आम उदाहरण है। धूम कुहरे दो प्रकार के होते हैं-

  1. सामान्य धूम कुहरा (General Smog)—यह ठण्डी नम जलवायु में होता है तथा धूम, कुहरे एवं सल्फर डाइऑक्साइड का मिश्रण होता है। रासायनिक रूप से यह एक अपचायक मिश्रण है। अत: इसे ‘अपचायक धूम-कुहरा’ भी कहते हैं।
  2. प्रकाश रासायनिक धूम कुहरा (Photochemical Smog)-उष्ण, शुष्क एवं साफ धूपमयी जलवायु में होता है। यह स्वचालित वाहनों तथा कारखानों से निकलने वाले नाइट्रोजन के ऑक्साइडों एवं हाइड्रोकार्बनों पर सूर्यप्रकाश की क्रिया के कारण उत्पन्न होता है। प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे की रासायनिक प्रकृति ऑक्सीकारक है। चूंकि इसमें ऑक्सीकारक अभिकर्मकों की सान्द्रता उच्च रहती है; अत: इसे ‘ऑक्सीकारक धूम कुहरा’ कहते हैं।

प्रश्न 7.
प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के निर्माण के दौरान होने वाली अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर
प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के निर्माण के दौरान होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-1
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-2

प्रश्न 8.
प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के दुष्परिणाम क्या हैं? इन्हें कैसे नियन्त्रित किया जा सकता है?
उत्तर
प्रकाश रासायनिक धूम-कुहरे के दुष्परिणाम (Bad Results of Photochemical Smog)-प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के सामान्य घटक ओजोन, नाइट्रिक ऑक्साइड, ऐक्रोलीन, फॉर्मेल्डिहाइड एवं परॉक्सीऐसीटिल नाइट्रेट (PAN) हैं। प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के कारण गम्भीर स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं। ओजोन एवं नाइट्रिक ऑक्साइड नाक एवं गले में जलन पैदा करते हैं। इनकी उच्च सान्द्रता से सिरदर्द, छाती में दर्द, गले का शुष्क होना, खाँसी एवं श्वास अवरोध हो सकता है। प्रकाश रासायनिक धूम कुहरा रबर में दरार उत्पन्न करता है एवं पौधों पर हानिकारक प्रभाव डालता है। यह धातुओं, पत्थरों, भवन-निर्माण के पदार्थों एवं रंगी हुई सतहों (painted surfaces) का क्षय भी करता है।

प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के नियंत्रण के उपाय (Measures to Control the Photochemical Smog)–प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे को नियन्त्रित या कम करने के लिए कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यदि हम प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के प्राथमिक पूर्वगामी; जैसे- NO, एवं हाइड्रोकार्बन को नियन्त्रित कर लें तो द्वितीयक पूर्वगामी; जैसे-ओजोन एवं PAN तथा प्रकाश रासायनिक धूम कुहरा स्वतः ही कम हो जाएगा। सामान्यतया स्वचालित वाहनों में उत्प्रेरित परिवर्तक उपयोग में लाए जाते हैं, जो वायुमण्डल में नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को रोकते हैं। कुछ पौधों (जैसे- पाइनस, जूनीपर्स, क्वेरकस, पायरस तथा विटिस), जो नाइट्रोजन ऑक्साइड का उपापचय कर सकते हैं, का रोपण इस सन्दर्भ में सहायक हो सकता है।

प्रश्न 9.
क्षोभमण्डल पर ओजोन परत के क्षय में होने वाली अभिक्रिया कौन-सी है?
उत्तर
ओजोन परत में अवक्षय को मुख्य कारण क्षोभमण्डल से क्लोरोफ्लुओरोकार्बन (CFC) यौगिकों का उत्सर्जन है। CFC वायुमण्डल की अन्य गैसों से मिश्रित होकर सीधे समतापमण्डल में पहुँच जाते हैं। समतापमण्डल में ये शक्तिशाली विकिरणों द्वारा अपघटित होकर क्लोरीन मुक्त मूलक उत्सर्जित करते हैं।

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-3

क्लोरीन मुक्त मूलक तब समतापमण्डलीय ओजोन से अभिक्रिया करके क्लोरीन मोनोक्साइड मूलक तथा आण्विक ऑक्सीजन बनाते हैं।

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-4

क्लोरीन मोनोक्साइड मूलक परमाण्वीय ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके अधिक क्लोरीन मूलक उत्पन्न करता है।

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-5

क्लोरीन मूलक लगातार पुनर्योजित होते रहते हैं एवं ओजोन को विखण्डित करते हैं। इस प्रकार CFC , समतापमण्डल में क्लोरीन मूलकों को उत्पन्न करने वाले एवं ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाले परिवहनीय कारक हैं।

प्रश्न 10.
ओजोन छिद्र से आप क्या समझते हैं? इसके परिणाम क्या हैं?
उत्तर
सन् 1980 में वायुमण्डलीय वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका पर कार्य करते हुए दक्षिणी ध्रुव के ऊपर ओजोन परत के क्षय, जिसे सामान्य रूप से ‘ओजोन-छिद्र’ कहते हैं, के बारे में बताया। यह पाया गया कि ओजोन छिद्र के लिए परिस्थितियों का एक विशेष समूह उत्तरदायी था। गर्मियों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड परमाणु [अभिक्रिया (i)] क्लोरीन मुक्त मूलकों [अभिक्रिया (ii)] से अभिक्रिया करके क्लोरीन सिंक बनाते हैं, जो ओजोन-क्षय को अत्यधिक सीमा तक रोकता है। जबकि सर्दी के मौसम में विशेष प्रकार के बादल, जिन्हें ‘ध्रुवीय समतापमण्डलीय बादल’ कहा जाता। है, अंटार्कटिका के ऊपर बनते हैं। ये बादल एक प्रकार की सतह प्रदान करते हैं जिस पर बना हुआ क्लोरीन नाइट्रेट (अभिक्रिया (i)] जलयोजित होकर हाइपोक्लोरसे अम्ल बनाता है [अभिक्रिया (ii)]। अभिक्रिया में उत्पन्न हाइड्रोजन क्लोराइड से भी अभिक्रिया करके यह आण्विक क्लोरीन देता है।

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-6

वसन्त में अंटार्कटिका पर जब सूर्य का प्रकाश लौटता है, तब सूर्य की गर्मी बादलों को विखण्डित कर देती है एवं HOCI तथा Cl2 सूर्य के प्रकाश से अपघटित हो जाते हैं (अभिक्रिया v तथा vi)।

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-7

इस प्रकार उत्पन्न क्लोरीन मूलक, ओजोन-क्षय के लिए श्रृंखला अभिक्रिया प्रारम्भ कर देते हैं।

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-8

ओजोन छिद्र के परिणाम (Results of Ozone hole)
ओजोन छिद्र के साथ अधिकाधिक पराबैंगनी विकिरण क्षोभमण्डल में छनित होते हैं। पराबैंगनी विकिरण से त्वचा का जीर्णन, मोतियाबिन्द, सनबर्न, त्वचा-कैन्सर, कई पादपप्लवकों की मृत्यु, मत्स्य उत्पादन की क्षति आदि होते हैं। यह भी देखा गया है कि पौधों के प्रोटीन पराबैंगनी विकिरणों से आसानी से प्रभावित हो जाते हैं जिससे कोशिकाओं का हानिकारक उत्परिवर्तन होता है। इससे पत्तियों के रंध्र से जल का वाष्पीकरण भी बढ़ जाता है जिससे मिट्टी की नमी कम हो जाती है। बढ़े हुए पराबैंगनी विकिरण रंगों एवं रेशों को भी हानि पहुँचाते हैं जिससे रंग जल्दी हल्के हो जाते हैं।

प्रश्न 11.
जल-प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं? समझाइए।
उत्तर
जल-प्रदूषण के मुख्य कारण (Main Causes of Water Pollution)

  1. रोगजनक (Pathogens)—सबसे अधिक गम्भीर जल-प्रदूषक रोगों के कारकों को ‘रोगजनक’ कहा जाता है। रोगजनकों में जीवाणु एवं अन्य जीव हैं, जो घरेलू सीवेज एवं पशु-अपशिष्ट द्वारा जल में प्रवेश करते हैं। मानव-अपशिष्ट एशरिकिआ कोली, स्ट्रेप्टोकॉकस फेकेलिस आदि जीवाणु होते हैं, जो जठरांत्र बीमारियों के कारक होते हैं।
  2. कार्बनिक अपशिष्ट (Organic waste)-अन्य मुख्य जल-प्रदूषक कार्बनिक पदार्थ; जैसेपत्तियाँ, घास, कूड़ा-करकट आदि हैं। ये जल को प्रदूषित करते हैं। जल में पादप-प्लवकों की अधिक बढ़ोतरी भी जल-प्रदूषण का एक कारण है।

प्रश्न 12.
क्या आपने अपने क्षेत्र में जल-प्रदूषण देखा है? इसे नियन्त्रित करने के कौन-से उपाय हैं?
उत्तर
हाँ, हमारे क्षेत्र में जल प्रदूषित है। जल के प्रदूषित होने की जाँच भी हम स्वयं ही कर सकते हैं। इसके लिए हम स्थानीय जल-स्रोतों का निरीक्षण कर सकते हैं जैसे कि नदी, झील, हौद, तालाब आदि का पानी अप्रदूषित या आंशिक प्रदूषित या सामान्य प्रदूषित अथवा बुरी तरह प्रदूषित है। जल को देखकर या उसकी pH जाँचकर इसे देखा जा सकता है। निकट के शहरी या औद्योगिक स्थल, जहाँ से प्रदूषण उत्पन्न होता है, के नाम का प्रलेख करके इसकी सूचना सरकार द्वारा प्रदूषण-मापन के लिए। गठित ‘प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड कार्यालय को दी जा सकती है तथा समुचित कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है। हम इसे मीडिया को भी बता सकते हैं। जल प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए हमें नदी, तालाब, जलधारा या जलाशय में घरेलू अथवा औद्योगिक अपशिष्ट को सीधे नहीं डालना चाहिए। बगीचों में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर कम्पोस्ट का प्रयोग करना चाहिए। डी०डी०टी०, मैलाथिऑन आदि कीटनाशी के प्रयोग से बचना चाहिए तथा यथासम्भव नीम की सूखी पत्तियों का प्रयोग कीटनाशी के रूप में करना चाहिए। घरेलू पानी टंकी में पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO,) के कुछ क्रिस्टल अथवा ब्लीचिंग पाउडर की थोड़ी मात्रा डालनी चाहिए।

प्रश्न 13.
आप अपने जीव रसायनी ऑक्सीजन आवश्यकता (BOD) से क्या समझते हैं?
उत्तर
जल के एक नमूने के निश्चित आयतन में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ को विखण्डित करने के लिए जीवाणु द्वारी आवश्यक ऑक्सीजन को जैवरासायनिक ऑक्सीजन मॉग (BOD)’ कहा जाता है। अत: जल में BOD की मात्रा कार्बनिक पदार्थ को जैवीय रूप में विखण्डित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा होगी। स्वच्छ जल की BOD का मान 5 ppm से कम होता है, जबकि अत्यधिक प्रदूषित जल में यह 17 ppm या इससे अधिक होता है।

प्रश्न 14.
क्या आपने आस-पास के क्षेत्र में भूमि-प्रदूषण देखा है? आप भूमि-प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए क्या प्रयास करेंगे?
उत्तर
हाँ, हमने अपने आस-पास के क्षेत्र में भूमि-प्रदूषण देखा है। भूमि प्रदूषण की रोकथाम के उपाय (Measures to Control Soil Pollution) मृदा प्रदूषण की रोकथाम के लिए हम निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं

  1. फसलों पर विषैले कीटनाशकों का छिड़काव विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए।
  2. डी०डी०टी० का प्रयोग प्रतिबन्धित हो।
  3. सिंचाई और उर्वरकों का प्रयोग करने से पहले मिट्टी और जल का वैज्ञानिक परीक्षण करा लेना चाहिए
  4. रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर कम्पोस्ट तथा हरी खाद (Compost and Green Manuring) के प्रयोग को वरीयता देनी चाहिए।
  5. खेतों में जलं के निकास की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
  6. क्षारीय भूमि को वैज्ञानिक ढंग से शोधित किया जाना चाहिए। जिप्सम, सिंचाई तथा रासायनिक खादों का प्रयोग करके क्षारीय मिट्टी को उर्वर बनाया जा सकता है।
  7.  स्थानान्तरणशील कृषि (jhuming) पर रोक लगाई जानी चाहिए।
  8. मिट्टी के कटाव को रोकने के उपाय किए जाने चाहिए।
  9. जीवांशों की वृद्धि के लिए खेतों में पेड़-पौधों की पत्तियाँ, डण्ठल, छिलके, जड़े, तने आदि सड़ाए जाने चाहिए।
  10. खेतों के किनारे (मेडों पर) और ढालू भूमि पर वृक्षारोपण किया जाना चाहिए।

प्रश्न 15.
पीड़कनाशी तथा शाकनाशी से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहिँत समझाइए।
उत्तर
पीड़कनाशी (Pesticides)-पीड़कनाशी मूल रूप से संश्लेषित रसायन होते हैं। इनका प्रयोग फसलों को हानिकारक कीटों तथा कई रोगों से बचाने हेतु किया जाता है। ऐल्ड्रीन, डाइऐल्ड्रीन बी०एच०सी० आदि पीड़कनाशी के कुछ उदाहरण हैं। ये कार्बनिक जीव-विष जल में अविलेय तथा अजैवनिम्नीकरणीय होते हैं। ये उच्च प्रभाव वाले जीव-विष भोजन श्रृंखला द्वारा निम्नपोषी स्तर से उच्चपोषी स्तर तक स्थानान्तरित होते हैं। समय के साथ-साथ उच्च प्राणियों में जीव-विषों की सान्द्रता इस स्तर तक बढ़ जाती है कि उपापचयी तथा शरीर क्रियात्मक अव्यवस्था का कारण बन जाती है।
शाकनाशी (Herbicides)-वे रसायन जो खरपतवार (weeds) का नाश करने के लिए प्रयोग किए। जाते हैं, शाकनाशी कहलाते हैं। सोडियम क्लोरेट (NaClO3) सोडियम आर्सिनेट (Na32AsO3) आदि शाकनाशी के उदाहरण हैं। अधिकांश शाकनाशी स्तनधारियों के लिए विषैले होते हैं, परन्तु ये कार्ब-क्लोराइड्स के समान स्थायी नहीं होते तथा कुछ ही माह में अपघटित हो जाते हैं। मानव में । जन्मजात कमियों का कारण कुछ शाकनाशी हैं। यह पाया गया है कि मक्का के खेतं, जिनमें शाकनाशी का छिड़काव किया गया हो, कीटों के आक्रमण तथा पादप रोगों के प्रति उन खेतों से अधिक सुग्राही होते हैं जिनकी निराई हाथों से की जाती है।

प्रश्न 16.
हरित रसायन से आप क्या समझते हैं? यह वातावरणीय प्रदूषण को रोकने में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर
हरित रसायन (Green Chemistry)
हमारे देश ने 20वीं सदी के अन्त तक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग तथा कृषि की उन्नत विधियों का प्रयोग करके अच्छी किस्म के बीजों, सिंचाई आदि से खाद्यान्नों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है, परन्तु मृदा के अधिक शोषण एवं उर्वरकों तथा कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मृदा, जल एवं वायु की गुणवत्ता घटी है।

इस समस्या का समाधान विकास के प्रारम्भ हो चुके प्रक्रम को रोकना नहीं अपितु उन विधियों को खोजना है, जो वातावरण के असन्तुलन को रोक सकें। रसायन विज्ञान तथा अन्य विज्ञानों के उन सिद्धान्तों का ज्ञान, जिससे पर्यावरण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके, ‘हरित रसायन’ कहलाता है।

हरित रसायन उत्पादन का वह प्रक्रम है, जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या असन्तुलन लाता है। इसके आधार पर यदि एक प्रक्रम में उत्पन्न होने वाले सहउत्पादों को यदि लाभदायक रूप से उपयोग नहीं किया गया तो वे पर्यावरण-प्रदूषण के कारक होते हैं। ऐसे प्रक्रम न सिर्फ पर्यावरणीय दृष्टि से हानिकारक हैं अपितु महँगे भी हैं। विकास-कार्यों के साथ-साथ वर्तमान ज्ञान का रासायनिक हानि को कम करने के लिए उपयोग में लाना ही हरित रसायन का आधार है।

एक रासायनिक अभिक्रिया की सीमा, ताष, दाब, उत्प्रेरक के उपयोग आदि भौतिक मापदण्ड पर निर्भर करती हैं। हरित रसायन के सिद्धान्तों के अनुसार यदि एक रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक एक पर्यावरण अनुकूल माध्यम में पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल उत्पादों में परिवर्तित हो जाए तो पर्यावरण में कोई रासायनिक प्रदूषक नहीं होगा।

इसी प्रकार संश्लेषण के दौरान प्रारम्भिक पदार्थ का चयन करते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए जिससे जब भी वह अन्तिम उत्पाद में परिवर्तित हो तो अपविष्ट उत्पन्न ही न हो। यह संश्लेषण के दौरान अनुकूल परिस्थितियों को प्राप्त करके किया जाता है। जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा तथा कम। वाष्पशीलता के कारण इसे संश्लेषित अभिक्रियाओं में माध्यम के रूप में प्रयुक्त किया जाना वांछित है। जल सस्ता, अज्वलनशील तथा अकैंसरजन्य प्रभाव वाला माध्यम है। हरित रसायन के उपयोग से वातावरणीय प्रदूषण को रोकने में किए जाने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण प्रयासों का वर्णन निम्नलिखित है-

  1. कपड़ों की निर्जल धुलाई में (In drycleaning of clothes)--टेट्राक्लोरोएथीन [Cl2C=CCl2] का उपयोग प्रारम्भ में निर्जल धुलाई के लिए विलायक के रूप में किया जाता था। यह यौगिक भू-जल को प्रदूषित कर देता है। यह एक सम्भावित कैंसरजन्य भी है। धुलाई की प्रक्रिया में इस यौगिक का द्रव कार्बन डाइऑक्साइड एवं उपयुक्त अपमार्जक द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। हैलोजेनीकृत विलायक का द्रवित CO2 से प्रतिस्थापन भू-जल के लिए कम हानिकारक है।
    आजकल हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग लॉण्ड्री में कपड़ों के विरंजन के लिए लिया जाता है। जिससे परिणाम तो अच्छे निकलते ही हैं, जल का भी कम उपयोग होता है।
  2. पेपर का विरंजन (Bleaching of paper)-पूर्व में पेपर के विरंजन के लिए क्लोरीन गैस उपयोग में आती थी। आजकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन परॉक्साइड, जो विरंजन क्रिया की दर को बढ़ाता है, उपयोग में लाया जाता है।
  3. रसायनों का संश्लेषण (Synthesis of chemicals)-औद्योगिक स्तर पर एथीन का ऑक्सीकरण आयनिक उत्प्रेरकों एवं जलीय माध्यम की उपस्थिति में करवाया जाए तो लगभग 90% एथेनल प्राप्त होता है।
    UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-9
    निष्कर्षतः हरित रसायन एक कम लागत उपागम है, जो कम पदार्थ, ऊर्जा-उपभोग एवं अपविष्ट जनन से सम्बन्धित है।

प्रश्न 17.
क्या होता, जब भू-वायुमण्डल में ग्रीन हाउस गैसें नहीं होती? विवेचना कीजिए।
उत्तर
यद्यपि ग्रीन हाउस गैसें (CO2,CH4,O3, CFCs, जल-वाष्प) ग्लोबल वार्मिंग (global warming) उत्पन्न करती हैं, परन्तु फिर भी ये पृथ्वी पर सामान्य जीवन के लिए आवश्यक हैं। ग्रीन हाउस गैसें पृथ्वी की सतह से विकिरणित सौर ऊर्जा को अवशोषित करके वातावरण को गर्म रखती हैं। जो पृथ्वी पर प्राणियों (living beings) के जीवन तथा पादपों (plants) की वृद्धि के लिए आवश्यक है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) द्वारा पादपों के भोजन बनाने के लिए आवश्यक है। ओजोन एक छाते की तरह कार्य करती है तथा हमें हानिकारक पराबैंगनी किरणों (U.V. radiation) से बचाती है। अतः, यदि पृथ्वी के वायुमण्डल को ग्रीन हाउस गैसों से पूर्ण रूप से मुक्त कर दिया जाये तो पृथ्वी पर न तो प्राणी शेष रहेंगे और न ही पादप।

प्रश्न 18.
एक झील में अचानक असंख्य मृत मछलियाँ तैरती हुई मिलीं। इसमें कोई विषाक्त पदार्थ नहीं था, परन्तु बहुतायत में पादप्लवक पाए गए। मछलियों के मरने का कारण बताइए।
उत्तर
पादप्लवक (पानी की सतह पर तैरने वाले पौधे) जैव क्षयी (biodegradable) होते हैं और जीवाणुओं की एक बड़ी संख्या द्वारा अपघटित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में जीवाणु पानी में घुली ऑक्सीजन का बहुत अधिक मात्रा में उपयोग करते हैं जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। जलीय जीवों जैसे मछलियों को जीवित रहने के लिए जलीय ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जब पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर, एक निश्चित स्तर (6ppm) से नीचे पहुँच जाता है, तो मछलियाँ मृत होकर पानी की सतह ऊपर तैरने लगती हैं।

प्रश्न 19.
घरेलू अपविष्ट किस प्रेकार खाद के रूप में काम आ सकते हैं?
उत्तर
घरेलू अपशिष्ट पदार्थों के जैव क्षयी (biodegradable) भाग को कुछ महीनों के लिए भूमि में दबा देने पर खाद के रूप में काम में लाया जा सकता है। समय बीतने के साथ, यह खाद में परिवर्तित हो जाता है। घरेलू अपशिष्ट का अजैव क्षयी भाग (जैसे कॉच, प्लास्टिक, धातु की खुरचन इत्यादि) जो सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित नहीं होती, खाद के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। यह भाग पुनः चक्रण (recycling) के लिए कारखानों में भेज दिया जाता है।

प्रश्न 20.
आपने अपने कृषि-क्षेत्र अथवा उद्यान में कम्पोस्ट खाद के लिए गड़े बना रखे हैं। उत्तम कम्पोस्ट बनाने के लिए इस प्रक्रिया की व्याख्या दुर्गंध, मक्खियों तथा अपविष्टों के चक्रीकरण के सन्दर्भ में कीजिए।
उत्तर
कम्पोस्ट खाद के लिए बने गड्ढे घर के बहुत निकट नहीं होने चाहिए। ये गड्ढे ऊपर से ढके होने चाहिए। जिससे मक्खियाँ इनमें प्रवेश न कर सके तथा दुर्गंध वायुमण्डल में न फैल सके। केवल जैव क्षयी भाग ही गड्ढों में डालना चाहिए। घरेलू अपशिष्टों का अजैव क्षयी भाग जैसे, काँच प्लास्टिक, धातु की खुरचन इत्यादि को गड्ढों में डालने से पहले अलग कर देना चाहिए तथा पुनः चक्रण के लिए बेच देना चाहिए।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गैसीय वायु प्रदूषक है।
(i) कुहरा
(ii) वाष्प
(iii) ऐरोसॉल
(iv) ओजोन
उत्तर
(ii) वाष्प

प्रश्न 2.
कणीय वायु प्रदूषक है।
(i) अमोनिया
(ii) कज्जल
(iii) क्लोरीन
(iv) ये सभी
उत्तर
(ii) कज्जल

प्रश्न 3.
अकार्बनिक वायु प्रदूषक है।
(i) नाइट्रोजन ऑक्साइड
(ii) मेथेन
(iii) एथेन
(iv) ऐल्कोहॉल
उत्तर
(i) नाइट्रोजन ऑक्साइड

प्रश्न 4.
मुख्य वायु प्रदूषक है।
(i) NO
(ii) CO
(iii) SO2
(iv) ये सभी
उत्तर
(iv) ये सभी

प्रश्न 5.
ध्रुवों पर बर्फ किस प्रदूषण के कारण पिघल सकती है?
(i) जल
(ii) तापीय
(iii) मृदा
(iv) ये सभी
उत्तर
(ii) तापीय

प्रश्न 6.
वैश्विक तापन का प्रमुख कारण है।
(i) अम्ल वर्षा
(ii) नाभिकीय दुर्घटनाएँ
(iii) हरित गृह प्रभाव
(iv) भूकम्प
उत्तर
(iii) हरित गृह प्रभाव

प्रश्न 7.
हरित गृह गैसों के फलस्वरूप प्रभाव उत्पन्न होता है।
(i) पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि
(ii) पृथ्वी के तापक्रम में कमी
(iii) पृथ्वी के तापक्रम में कोई परिवर्तन नहीं होता
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर
(i) पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन-सी क्रिया वातावरण में co, की मात्रा में वृद्धि नहीं करती है?
(i) जन्तुओं का विघटन,
(ii) श्वसन
(iii) प्रकाश संश्लेषण
(iv) ईंधन का जलना
उत्तर
(iii) प्रकाश संश्लेषण

प्रश्न 9.
CO2 के अतिरिक्त अन्य हरित गृह गैस है।
(i) N2
(ii) Ar
(iii) O2
(iv) CH4
उत्तर
(iv) CH4

प्रश्न 10.
ग्रीन हाउस प्रभाव प्रदर्शित करने वाला युग्म है।
(i) N2,O2
(ii) H2,N2
(iii) CO2, H2O
(iv) O2, CH4
उत्तर
(iii) CO2, H2O

प्रश्न 11.
ओजोन पाई जाती है।
(i) तापमण्डल में
(ii) मध्यमण्डल में
(iii) समतापमण्डल में
(iv) क्षोभमण्डल में
उत्तर
(iii) समतापमण्डल में

प्रश्न 12.
ओजोन परत की मोटाई की मापक इकाई है।
(i) डेसीमल
(ii) आर्मस्ट्राँग
(iii) डॉब्सन
(iv) क्यूरी
उत्तर
(iii) डॉब्सन

प्रश्न 13.
हानिकारक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी के ऊपरी वायुमण्डल के कारण पृथ्वी पर नहीं पहुँच पाती हैं, क्योंकि वहाँ उपस्थित होती है।
(i) CO2
(ii) O2
(iii) O3
(iv) N2
उत्तर
(ii) O3

प्रश्न 14.
क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स से होता है।
(i) वायुमण्डलीय ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि
(ii) ओजोन परत का क्षय
(iii) हरित गृह गैसों का ह्रास
(iv) दोनों (i) एवं (ii)
उत्तर
(ii) ओजोन परत का क्षय

प्रश्न 15.
अन्टार्कटिका के ऊपर सर्वप्रथम किस वर्ष में ओजोन छिद्र देखा गया?
(i) 1965 में
(ii) 1985 में
(iii) 1987 में
(iv) 1989 में
उत्तर
(ii) 1985 में

प्रश्न 16.
ओजोन परत के अपक्षय से सम्बन्धित निम्नलिखित में से कौन-सा प्रभाव सही नहीं है?
(i) त्वचा कैंसर होना।
(ii) पेड़-पौधों में प्रकाश संश्लेषण की दर में वृद्धि
(iii) ध्रुवीय बर्फ का पिघलना
(iv) आनुवंशिक लक्षणों में परिवर्तन
उत्तर
(iv) आनुवंशिक लक्षणों में परिवर्तन

प्रश्न 17.
जल प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
(i) उद्योगों से निकला अपशिष्ट
(ii) खेती में उर्वरक का प्रयोग
(iii) पीड़कनाशियों का प्रयोग
(iv) ये सभी
उत्तर
(iv) ये सभी

प्रश्न 18.
निम्न में से प्रतिबन्धित रसायन है।
(i) BHC
(ii) फोरेट
(iii) मैलाथियॉन
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(i) BHC

प्रश्न 19.
जैविक मृदा-प्रदूषण क़िसके द्वारा होता है?
(i) जल
(ii) जीव-जन्तु
(iii) वायु
(iv) ये सभी
उत्तर
(i) जल

प्रश्न 20.
सिलिकोसिस रोग होता है ।
(i) रुई का काम करने वालों को
(ii) पत्थर तोड़ने वालों को
(iii) ऐस्बेस्टॉस का काम करने वालों को
(iv) ये सभी
उत्तर
(ii) पत्थर तोड़ने वालों को

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रदूषण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
वायु, जल एवं स्थल की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक विशेषताओं में वह अवांछनीय । परिवर्तन जो उन्हें मानव, अन्य जीवों, भवनों तथा अन्य सांस्कृतिक धरोहरों के लिए हानिकारक बना देता है, प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 2.
वायुमण्डल के विभिन्न क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर
वायुमण्डल को निम्नलिखित चार क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है।

  1. क्षोभमण्डल
  2. समतापमण्डल
  3. मध्यमण्डल
  4. तापमण्डल

प्रश्न 3.
आयनमण्डल के दो भाग कौन-कौन से हैं?
उत्तर
आयनमण्डल के दो भाग मध्यमण्डल तथा तापमण्डल हैं।

प्रश्न 4.
ओजोनमण्डल का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर
ओजोनमण्डल का दूसरा नाम समतापमण्डल है।

प्रश्न 5.
जीवमण्डल से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
जीवमण्डल स्थलमण्डल, जलमण्डल तथा वायुमण्डल का वह भाग है जिसमें जीवधारी वास करते हैं।

प्रश्न 6.
वायुमण्डल के किन क्षेत्रों में ताप ऊँचाई में वृद्धि के साथ बढ़ता है?
उत्तर
वायुमण्डल के समतापमण्डल क्षेत्र में ताप -56°C से -2°C तक बढ़ता है तथा तापमण्डल क्षेत्र में ताप -92°C से 1200°C तक बढ़ता है।

प्रश्न 7.
वायु प्रदूषण क्या है? वायु को प्रदूषित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
वायुमण्डल में विभिन्न गैसों का एक निश्चित और सन्तुलित अनुपात है। यदि किसी कारणवश इस अनुपात में परिवर्तन हो जाए, तो सभी जीवधारियों पर इनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है। इस वायु को प्रदूषित वायु और इस घटना को वायु प्रदूषण कहते हैं। वायु को प्रदूषित करने वाले कारक निम्नवत् हैं-

  1. जनसंख्या वृद्धि,
  2. लगातार वनों का कटना,
  3. कल-कारखानों की आबादी में होना,
  4. कोयले से चालित इंजन,
  5. घरों में धुआँ,
  6. वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि होना।

प्रश्न 8.
वायुमण्डल के दो प्राथमिक तथा दो द्वितीयक प्रदूषकों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. प्राथमिक प्रदूषक = SO2 तथा NO2 गैसे
  2. द्वितीयक प्रदूषक == परॉक्सीऐसिल नाइट्रेट तथा ओजोन

प्रश्न 9.
वायुमण्डल के दो जैव निम्नीकरणीय तथा दो जैव अनिम्नीकरणीय प्रदूषकों के नाम लिखिए।
उत्तर

  1. जैव निम्नीकरणीय प्रदूषक = वाहित मल तथा गोबर
  2. जैव अनिम्नीकरणीय प्रदूषक = मर्करी तथा ऐलुमिनियम

प्रश्न 10.
वायुमण्डलीय प्रदूषण के दो प्राकृतिक स्रोतों के नाम बताइए।
उत्तर
वायुमण्डलीय प्रदूषण के दो प्राकृतिक स्रोतों के नाम ज्वालामुखी विस्फोट तथा तड़ित झंझावात हैं।

प्रश्न 11.
कौन-सा नाइट्रोजन ऑक्साइड लाल-भूरे रंग का होता है?
उत्तर
नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) लाल-भूरे रंग का होता है।

प्रश्न 12.
PAN का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर
PAN का पूरा नाम परॉक्सीऐसिल नाइट्रेट (peroxy acyl nitrate) है।

प्रश्न 13.
पृथ्वी का तापमान लगातार क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर
पृथ्वी का तापमान लगातार हरित गृह प्रभाव के कारण बढ़ रहा है।

प्रश्न 14.
CO का प्रमुख सिंक क्या है?
उत्तर
मृदा में उपस्थित सूक्ष्मजीव CO का मुख्य सिंक हैं। ये CO को CO2 में परिवर्तित कर देते हैं।

प्रश्न 15.
क्लोरोसिस से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
SO2 के प्रभाव के कारण पौधों में क्लोरोफिल का निर्माण कम हो जाता है, जिसके कारण इनकी पत्तियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तथा अपना हरा रंग खो देती हैं। इसे ही क्लोरोसिस कहते हैं।

प्रश्न 16.
कणिकीय प्रदूषकों का आकार कितना होता है?
उत्तर
कणिकीय प्रदूषकों का आकार 5 mm से 500000 nm के मध्य होता है।

प्रश्न 17.
कौन-से ऐरोमैटिक यौगिक वायु में कणिकाओं के रूप में उपस्थित होते हैं?
उत्तर
बहुचक्रीय ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Polycyclic Aromatic Hydrocarbon, PAH) वायु में कणिकाओं के रूप में उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 18.
किन्हीं दो सजीव कणिकीय प्रदूषकों के नाम लिखिए।
उत्तर
जीवाणु तथा कवक सजीव कणिकीय प्रदूषकों के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 19.
सामान्य धूम कुहरा किस प्रकार की जलवायु में देखने को मिलता है? इसकी प्रकृति कैसी होती है।
उत्तर
सामान्य धूम कुहरा ठण्डी तथा नम जलवायु में देखने को मिलता है। इसकी प्रकृति अपचायक होती है।

प्रश्न 20.
प्रदूषित वायु से कणिकीय प्रदूषकों को पृथक करने के लिए प्रयोग की जाने वाली दो युक्तियों के नाम लिखिए।
उत्तर
प्रदूषित वायु से कणिकीय प्रदूषकों को पृथक् करने के लिए मुख्यतः आर्द्र स्क्रबर तथा साइक्लोन संग्राहक का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 21.
ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाले दो यौगिकों के नाम बताइए।
उत्तर
नाइट्रिक ऑक्साइड तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बन ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाले दो यौगिक

प्रश्न 22.
अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र किस ऋतु में बनता है?
उत्तर
अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र बसंत ऋतु में बनता है।

प्रश्न 23.
पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफेनिल का प्रयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर
पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफेनिल का प्रयोग ट्रांसफार्मरों तथा संधारित्रों में तरलों के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 24.
किस प्रकार का प्रदूषण समुद्री पक्षियों को हानि पहुँचाता है?
उत्तर
समुद्र के जल में तेल प्रदूषण समुद्री पक्षियों को हानि पहुंचाता है।

प्रश्न 25.
पीने के पानी में नाइट्रेट की अधिकतम मात्रा कितनी होनी चाहिए?
उत्तर
पीने के पानी में नाइट्रेट की अधिकतम मात्रा 50 ppm है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रदूषक और संदूषक में क्या अन्तर है?
उत्तर
प्राकृतिक स्रोतों अथवा मानव क्रियाओं अथवा दोनों द्वारा संयुक्त रूप से उत्पन्न पदार्थ जो पर्यावरण में पहले से उपस्थित उसी पदार्थ की सान्द्रता में वृद्धि करके उसे पर्यावरण के समीप या निर्जीव घटकों के लिए हानिकारक बना देता है, प्रदूषक कहलाता है जबकि वह पदार्थ जो प्रकृति में पहले से उपस्थित नहीं होता है परन्तु मानव संक्रियाओं के कारण पर्यावरण में प्रवेश पाता है, संदूषक कहलाता है।

प्रश्न 2.
प्राथमिक तथा द्वितीयक प्रदूषकों से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
प्राथमिक प्रदूषक वे प्रदूषक होते हैं जो निर्माण के पश्चात् पर्यावरण में प्रवेश करते हैं तथा जैसे के तैसे बने रहते हैं। उदाहरणार्थ-SO2, NO2 आदि। जबकि द्वितीयक प्रदूषक वे प्रदूषक हैं जो प्राथमिक प्रदूषकों के मध्य रासायनिक अभिक्रियाओं से बनते हैं। उदाहरणार्थ-हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड जो प्राथमिक प्रदूषक हैं, सूर्य के प्रकाश में परस्पर क्रिया करके ऐसे पदार्थ बनाते हैं जो हानिकारक होते हैं। इस प्रकार निर्मित यौगिक द्वितीयक प्रदूषक कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
जैव निम्नीकरणीय और जैव अनिम्नीकरणीय प्रदूषकों से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
जैव निम्नीकरणीय प्रदूषक वे हैं जो सूक्ष्मजीवों द्वारा या प्राकृतिक रूप से या उचित क्रिया द्वारा आसानी से विघटित हो जाते हैं और इस प्रकार हानिकारक नहीं होते हैं लेकिन जब ये वातावरण में आधिक्य में होते हैं तब इनका पूर्णतः निम्नीकरण नहीं होता है, अतः ये प्रदूषक बन जाते हैं। उदाहरणार्थ-वाहित मल, गोबर आदि जबकि जैव अनिम्नीकरणीय प्रदूषक मर्करी, ऐलुमिनियम, DDT आदि जैसे पदार्थ होते हैं जिनका निम्नीकरण प्रकृति में स्वयं नहीं होता है या मन्द गति से होता है। तथा वातावरण में इनकी अल्प मात्रा उपस्थित होने पर भी ये मनुष्यों तथा पौधों के लिए अत्यन्त हानिकारक होते हैं। ये वातावरण में उपस्थित अन्य यौगिकों से क्रिया करके और अधिक विषैले यौगिक बनाते हैं।

प्रश्न 4.
SOx प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव लिखिए।
उत्तर
SOx प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव निम्नवत् हैं-

  1. SO2 तथा SO3 दोनों श्वसन नली को हानि पहुँचाती हैं। 5 ppm सान्द्रण पर SO2 गले तथा
    नेत्रों में जलन उत्पन्न करती है। SO3 1ppm सान्द्रण में बेचैनी उत्पन्न करती है। वयोवृद्ध व्यक्ति तथा हृदय या फेफड़ा रोग से ग्रसित व्यक्ति अधिक गम्भीर रूप से प्रभावित होते हैं।
  2. अत्यधिक कम सान्द्रण (0.03 ppm) में भी SO2 पौधों पर अत्यधिक हानिकारक प्रभाव डालती है। ऐसे वायुमण्डल में लम्बे समय तक अर्थात् कुछ दिनों या सप्ताहों तक रखे पौधों में क्लोरोफिल का निर्माण कम हो जाता है तथा इनकी पत्तियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तथा हरा रंग खो देती हैं। इसे क्लोरोसिसः (chlorosis) कहते हैं।
  3. SO2 अपने वास्तविक रूपं में अथवा H2 SO4 में परिवर्तित होकर अनेक पदार्थों पर। निम्नलिखित प्रतिकूल प्रभाव डालती है-
    • यह इमारतों विशेषकर संगमरमर की इमारतों को नष्ट करती है। उदाहरणार्थ-आगरा में ताजमहल का संगमरमर उसके निकट स्थित मथुरा रिफाइनरी तथा तापीय शक्ति केन्द्र के कारण नष्ट हो रहा है।
    • यह धातुओं विशेषतः आइरन तथा स्टील को संक्षारित करती है।
    • यह पेण्ट के रंगों को प्रभावित करती है।
    • इससे वस्त्र, चमड़ा, कागज आदि नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 5.
SO2 किस प्रकार एक वायु-प्रदूषक का कार्य करती है?
उत्तर
SO2 एक अत्यन्त हानिकारक गैस है। वायुमण्डल में इसकी उपस्थिति से श्वसन रोग, हृदय रोग, गले तथा आँखों में अनेक परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं। यह अम्ल वर्षा (acid rain) का मुख्य कारण है। अम्ल वर्षा जन्तुओं, वनस्पतियों एवं भवनों के लिए अत्यन्त घातक है। अम्ल वर्षा से सम्बन्धित प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्न हैं-

SO2 + hv → SO2
SO2 + O2 → So3 + O
SO2 + SO2 → SO3 + SO
SO+ SO2 → SO3 + S
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-12

इस प्रकार, SO2 एक घातक वायु प्रदूषक है।

प्रश्न 6.
हरितगृह प्रभाव से क्या तात्पर्य है? इसके प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।
या
हरितगृह प्रभाव क्या है? यह किस प्रकार से वैश्विक ऊष्मायन (तापमान) के लिए उत्तरदायी
उत्तर
पृथ्वी की सतह अवशोषित ऊष्मा को अवरक्त किरणों के रूप में उत्सर्जित करती है जिसे वायुमण्डल में उपस्थित CO2 तथा जल-वाष्प अवशोषित करके पुनः पृथ्वी की ओर उत्सर्जित कर देती है। इससे पृथ्वी के वायुमण्डल के निचले भाग के ताप में वृद्धि होती है। यही प्रभाव हरितगृह प्रभाव कहलाता है। उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि हरितगृह प्रभाव के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ता है और लगातार बढ़ता जा रहा है। पृथ्वी के तापमान में हो रही इस वृद्धि को वैश्विक ऊष्मायन (global warming) कहते हैं। चूंकि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के कारण हरितगृह प्रभाव होता है तथा हरितगृह प्रभाव के कारण वैश्विक ऊष्मायन होता है इसलिए, हम कह सकते हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड गैस व हरितगृह प्रभाव वैश्विक ऊष्मायन के लिए उत्तरदायी हैं। हरितगृह प्रभाव के प्रमुख कारण निम्नवत् हैं-

  1. औद्योगिकीकरण-औद्योगिकीकरण के कारण वर्तमान समय में उद्योगों एवं घरों में जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में वृद्धि हुई है। वर्तमान समय में प्रतिवर्ष लगभग चार अरब टन जीवाश्म ईंधन जलाया जाता है जिससे प्रतिवर्ष लगभग 4% कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि हो जाती है। CO2 में यह वृद्धि हरितगृह प्रभाव में वृद्धि करती है।
  2. वनोन्मूलन-पौधे प्रकाश संश्लेषण में CO2 का प्रयोग करके O2 छोड़ते हैं तथा इस प्रकार वे वायुमण्डल में CO2 के स्तर को बनाए रखते हैं। वनोन्मूलन से वायुमण्डल में CO2 की वृद्धि दो प्रकार से होती है-एक तो प्रकाश संश्लेषण की कमी होने से CO2 का उपयोग कम हो जाता है तथा दूसरी ओर वृक्षों के ईंधन के रूप में प्रयुक्त होने से CO2 वायुमण्डल में पहुँचती है। इस प्रकारे वनों के विनाश से हरितगृह को बढ़ावा मिलता है।
  3. क्लोरोफ्लोरोकार्बन का उपयोग–क्लोरोफ्लोरोकार्बनों का प्रयोग रेफ्रिजरेटरों, एयरकन्डीशनरों, गद्देदार सीट बनाने वाली फोम (foam) तथा ऐरोसॉल स्प्रे (aerosol spray) के निर्माण में किया जाता है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन हरित गृह प्रभाव में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार, क्लोरोफ्लोरोकार्बन और मेथेन गैसों का हरितगृह प्रभाव की वृद्धि में 90% तक योगदान सम्भव है।

प्रश्न 7.
CO2 की अधिक मात्रा भूमण्डलीय ताप वृद्धि के लिए कैसे उत्तरदायी है?
उत्तर
CO2 चक्र के कारण प्राकृतिक रूप से वातावरण में CO2 की सान्द्रता स्थिर रहती है। लेकिन, जब वातावरण में CO2 की सान्द्रता मानवीय क्रियाओं के कारण एक निश्चित स्तर से अधिक हो जाती है, तो वायुमण्डल में उपस्थित CO2 का आधिक्य पृथ्वी द्वारा विकरणित ऊष्मा को अवशोषित कर लेता है। अवशोषित ऊष्मा का कुछ भाग वायुमण्डल में निस्तारित हो जाता है और शेष भाग पृथ्वी पर वापस विकरणित हो जाता है जिससे पृथ्वी की सतह का तापमान बढ़ जाता है और भूमण्डलीय ताप में वृद्धि होती है। इस प्रभाव को ग्रीनहाउस प्रभाव
कहा जाता है।

प्रश्न 8.
अम्ल वर्षा से क्या तात्पर्य है? यह किस प्रकार होती है?
उत्तर

वह वर्षा जिसमें सल्फर ऑक्साइड तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड (वायु प्रदूषकों) की जल-वाष्प से अभिक्रिया के फलस्वरूप बने सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल होते हैं, अम्ल वर्षा कहलाती है।। वायुमण्डल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड (SO, ),सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकृत होने के पश्चात् जल-वाष्प से अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती है।

2SO2 + O2 → 2SO3
SO3 + H2O → H2 SO4

ठीक इसी प्रकार नाइट्रोजन के ऑक्साइड विभिन्न अभिक्रियाओं के द्वारा N2O5 बनाते हैं जो जल-वाष्प से अभिक्रिया करके नाइट्रिक अम्ल बनाता है।

NO + O3 → NO2 + O2
NO2 + O3 → NO3 + O2
NO3 + NO2 → N2O5
N2O5 + H2O → 2HNO3

इस प्रकार विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं के द्वारा उत्पन्न नाइट्रिक अम्ल तथा सल्फ्यूरिक अम्ल वर्षा के जल के साथ अम्ल वर्षा (acid rain) के रूप में पृथ्वी पर आ जाते हैं।

प्रश्न 9.
कणिकीय प्रदूषक क्या हैं? इनके विभिन्न स्रोत क्या हैं?
उत्तर
कणिकीय प्रदूषक-वायु में निलम्बित सूक्ष्म ठोस कण तथा द्रवीय बूंदें कणिकीय प्रदूषक कहलाते हैं। इन कणों का आकार 5 nm से 500000 pm के मध्य होता है। इनकी सान्द्रता भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होती है। स्वच्छ वायु में इनकी संख्या 100 cm होती है जबकि प्रदूषित वायु में इनकी संख्या 100000 cm होती है। कणिकीय प्रदूषकों के स्रोत निम्नलिखित हैं-

  1.  प्राकृतिक स्रोत
    • मिट्टी एवं धूल को हवा द्वारा उड़ना,
    • ज्वालामुखी का फटना,
      समुद्रों द्वारा लवणों का छिड़काव।
  2. मानव-निर्मित स्रोत
    • कज्जल-ये सबसे सामान्य और सबसे छोटे कणिकीय प्रदूषक हैं। ये औद्योगिक संस्थानों, स्वचालित वाहनों तथा घरों में जीवाश्म ईंधनों के दहन से उत्पन्न होते हैं।
    • फ्लाई एश–ये सबसे बड़े कणिकीय प्रदूषक हैं। ये राख के कण हैं जो ऊष्मीय विद्युत संयन्त्रों, खनन आदि क्रियाओं में जीवाश्म ईंधनों के दहन से उत्पन्न होते हैं।
    • कार्बनिक कणिकीय प्रदूषक-ओलेफिन, पैराफिन, ऐरोमैटिक यौगिक आदि इस श्रेणी में आते हैं। ये स्थायी ईंधनों तथा स्वचालित वाहनों में जीवाश्म ईंधनों के दहन से उत्पन्न होते हैं। ये पेट्रोलियम शोधन, संयन्त्रों (petroleum refineries) में भी उत्पन्न होते हैं। ऐरोमैटिक यौगिकों में से बहुचक्रीय ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (polycyclic aromatic hydrocarbon, PAH) प्रमुख कणिकीय प्रदूषक हैं। ये कज्जली कणों की सतह पर अधिशोषित हो जाते हैं तथा इस रूप में और अधिक हानिकारक हो जाते हैं।
    • अकार्बनिक कणिकीय प्रदूषक-धात्विक ऑक्साइड, धात्विक कण, ऐस्बेस्टॉस की धूल, सल्फ्यूरिक अम्ल की बूंदें, नाइट्रिक अम्ल की बूंदें, लेड हैलाइड आदि अकार्बनिक
      कणिकीय प्रदूषक हैं।

प्रश्न 10.
कणिकीय प्रदूषकों के हानिकारक प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
कणिकीय प्रदूषकों के प्रमुख हानिकारक प्रभाव निम्नवत् हैं-

  1. कणिकीय प्रदूषक मनुष्यों में अनेक रोग उत्पन्न करते हैं। 5 माइक्रोन से बड़े कणिकीय प्रदूषक नासिकाद्वार में जमा हो जाते हैं जबकि 1.0 माइक्रोन के कण फेफड़ों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। अपने अत्यधिक सतही क्षेत्रफल के कारण ये कण विभिन्न कैंसरजन्य यौगिकों को अधिशोषित करके फेफड़ों का कैंसर, ब्रोंकाइटिस (bronchitis) आदि रोग उत्पन्न करते हैं। विभिन्न प्रकार के कणिकीय प्रदूषक विभिन्न रोग उत्पन्न करते हैं, उदाहरणार्थ-सिलिका युक्त धूल से सिलिकोसिस (silicosis) नामक रोग हो जाता है जबकि ऐस्बेस्टॉस से ऐस्बेस्टॉसिस (asbestosis) नामक रोग होता है। लेड के कणिकीय प्रदूषक अपनी विषैली प्रकृति के कारण मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं।
  2. विभिन्न कणिकीय प्रदूषक पौधों की पत्तियों पर जमा होकर रन्ध्रों (stomata) को अवरुद्ध कर.. देते हैं। इससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis), वाष्पोत्सर्जन (transpiration) आदि क्रियाएँ प्रभावित होती हैं और पौधों की वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  3. वायुमण्डल में कणिकीय प्रदूषकों की उपस्थिति के कारण देखने में परेशानी होती है। ऐसा कणिकीय प्रदूषकों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन (scattering) के कारण होता है।
  4. कणिकीय पदार्थ सूर्य की ऊष्मा को वापस अन्तरिक्ष में परावर्तित कर देते हैं। इससे सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुँच पाती है। साथ ही कणिकीय पदार्थ बादल–निर्माण में केन्द्रकों की भाँति कार्य करते हैं।
  5. ये धातुओं के संक्षारण में वृद्धि करते हैं।
  6. विभिन्न प्रकार के कणिकीय प्रदूषक इमारतों, भवनों, मृदा, कपड़ों, पेण्टों आदि को हानि पहुँचाते हैं।

प्रश्न 11.
आयनमण्डल में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
मध्यमण्डल का विस्तार समुद्र तल से 50-85 km की ऊँचाई तक है जबकि तापमण्डल का विस्तार समुद्र-तल से 85-500 km ऊँचाई तक है। इन दोनों मण्डलों को संयुक्त रूप से आयनमण्डल (ionosphere) कहते हैं। इनमें गैसें आयनित रूप में उपस्थित रहती हैं।
इन मण्डलों में विभिन्न प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप मुक्त आयनों और इलेक्ट्रॉनों का निर्माण होता है। इन मण्डलों में होने वाली कुछ अभिक्रियाएँ निम्न हैं-

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-10

मध्यमण्डल के निचले भाग में ये मुक्त आयन तथा इलेक्ट्रॉन अन्य आयनों, परमाणुओं तथा अणुओं से टकराकर उदासीन स्पीशीज बनाते हैं। चूँकि ऊपरी वायुमण्डल में ऐसी अन्य स्पीशीज उपस्थित नहीं होती हैं जिनसे ये संयोग कर सकें अत: वहाँ ये लम्बे समय तक बनी रहती हैं।

प्रश्न 12.
कौन-सा ऐरोसॉल (aerosol) ओजोन पर्त को विच्छेदित (deplete) करता है?
उत्तर
क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) ऐरोसॉल; जैसे—फ्रिऑन (CCl2F2) वायुमण्डल के समताप-मण्डल (stratosphere) में उपस्थित ओजोन पर्त को विच्छेदित करते हैं। निहित अभिक्रियाएँ निम्न हैं-

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry img-11

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख कारण, प्रभाव तथा नियन्त्रण के उपाय लिखिए।
उत्तर
जल प्रदूषण-जल के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक अभिलक्षणों में परिवर्तन जिससे यह मनुष्य तथा जलीय जीवों के लिए हानिकारक हो जाता है तथा अन्य उपयोगों के लिए भी अनुपयुक्त हो जाता है, जल प्रदूषण कहलाता है। जल प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  1. घरेलू अपशिष्ट और वाहित मल-घरों से निकलने वाले अपशिष्ट, जैसे-कूड़ा-करकट | आदि और वाहित मल नालियों इत्यादि से होते हुए जलाशयों, नदियों आदि में पहुँचते हैं जहाँ ये उनके जल को प्रदूषित करते हैं।
  2. घरेलू अपमार्जक–घर में उपयोग किए जाने वाले अपमार्जक कपड़े धोने, बर्तन साफ आदि करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के साबुन, सर्फ आदि होते हैं। ये अपमार्जक घरों से नालियों, तालाबों तथा नदियों तक पहुँचकर जल प्रदूषण फैलाते हैं।
  3. औद्योगिक रसायन विभिन्न उद्योगों से निकलने वाले जल में विभिन्न प्रकार के कार्बनिक तथा अकार्बनिक रसायन हो सकते हैं। ये पदार्थ निम्न प्रकार के हो सकते हैं–धूल, क्षार, अम्ल, सायनाइड, मर्करी, जिंक, कॉपर, फेरस लवण, तेल आदि। ये रसायन जल के प्रदूषक
  4. कृषि उद्योग के प्रदूषक-कृषि की उपज में वृद्धि के लिए विभिन्न प्रकार के उर्वरकों, | पीड़कनाशियों, कीटनाशियों आदि का प्रयोग किया जाता है। ये रसायन वर्षा के जल के साथ बहते हुए विभिन्न जल स्रोतों में पहुँचकर जल को प्रदूषित करते हैं।
  5. रेडियोधर्मी पदार्थ–नाभिकीय विस्फोट, नाभिकीय ऊर्जा प्रक्रम से निकलने वाली विकिरण जल में घुलकर प्रदूषण फैलाती है। यूरेनियमयुक्त खनिजों का खनन भी जल प्रदूषण करता है।
  6. सिल्टेशन–पहाड़ों की नदियों में मृदा तथा चट्टानों के कण जल में घुलते रहते हैं। यह प्रक्रम | सिल्टेशन कहलाता है। सिल्ट अथवा गाद के जल में मिलने से भी जल प्रदूषण होता है।
  7. पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफेनिल-इन्हें अभी जल प्रदूषकों की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है। | इनका प्रयोग ट्रांसफॉर्मरों तथा संधारित्रों (capacitors) में तरलों के रूप में किया जाता है।
  8. ऊष्मीय प्रदूषक–वे प्रदूषक जो जल के ताप में वृद्धि कर देते हैं, ऊष्मीय प्रदूषक कहलाते हैं। अनेक उद्योगों में पदार्थों, माध्यमों आदि को ठंडा करने की आवश्यकता होती है। इनकी ऊष्मा को जल को स्थानान्तरित कर दिया जाता है जिससे उसका ताप बढ़ जाता है। इस गर्म जल को फिर जल-स्रोतों में डाल दिया जाता है।

जल प्रदूषण के प्रभाव निम्नवत् हैं-

  1. प्रदूषित जल में उपस्थित रोगाणु (pathogens) मनुष्यों तथा पालतू पशुओं में विभिन्न रोग उत्पन्न करते हैं।
  2. अपमार्जकों में उपस्थित ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट (alkyl benzene sulphonate) से जल की अम्लीयता बढ़ती है जो जलीय जीवों के लिए हानिकारक होती है।
  3. जल में उपस्थित वाहित मल, पत्तियाँ और विभिन्न उद्योगों, जैसे—कागज उद्योग, चर्म शोधन उद्योग के कार्बनिक अपशिष्ट पादप प्लवकों की अत्यधिक वृद्धि में सहायता करते हैं। सूक्ष्म जीवों द्वारा कार्बनिक अपशिष्टों के अपघटन से दुर्गंध उत्पन्न होती है। ऐसे जल स्रोत तैरने, नाव चलाने आदि के लिए भी उपयुक्त नहीं होते हैं। जल में ऑक्सीजन की मात्रा घटने से उसमें उपस्थित जलीय जीवों की मृत्यु भी हो सकती है।
  4. तलछट जल को गंदला बनाते हैं।
  5. विषाक्त भारी धातुओं वाले जल का प्रयोग करने से विभिन्न रोग हो जाते हैं। उदाहरणार्थ-कैडमियम प्रदूषण से टाई-टाई नामक रोग हो जाता है। इसी प्रकार मर्करी
    प्रदूषण से मिनामाटा रोग हो जाता है।
  6. जल स्रोतों में उद्योगों द्वारा सीधा डाला गया गर्म जल भी प्रदूषक है। इसमें उपस्थित ऊष्मा जलीय जीवों को हानि पहुँचाती है।
  7. पॉलीक्लोरीनेटिड बाइफेनिल (PCBs) कैंसरजन्य है।
  8. उर्वरकों में प्रयुक्त फॉस्फेट जल स्रोतों में पहुँचकर शैवालों की वृद्धि में सहयोग करता है। शीघ्र ही शैवाल पूरी जल सतह को ढक लेते हैं। इससे जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है। साथ ही फॉस्फेटों की उपस्थिति में जलीय पौधों की संख्या में भी वृद्धि होती है। इससे जल में घुली ऑक्सीजन काफी कम हो जाती है। इससे जलीय जीवों की मृत्यु होने लगती है। जल-निकायों में पौष्टिक अभिवृद्धि के कारण ऑक्सीजन की कमी तथा उसके परिणामस्वरूप
    जलीय जीवों की मृत्यु सुपोषण कहलाती है।

जल प्रदूषण को नियन्त्रित करने के कुछ प्रमुख उपाय निम्नवत् हैं-

  1. वाहित मल को उपचारित करके ही जल स्रोतों में डालना चाहिए।
  2. गर्म जल को जल-स्रोतों में डालने से पहले ठण्डा कर लेना चाहिए।
  3. कृषि में प्रयोग किए जाने वाले रसायनों का केवल आवश्यक मात्रा में ही प्रयोग किया जाना चाहिए। रसायनों के स्थान पर जैव उर्वरकों (bio-fertilizers) आदि का प्रयोग किया जा सकता है।।
  4. विभिन्न उद्योगों के बहिस्रावों (effluents) को उपचारित करने के पश्चात् ही जल-स्रोतों में डालना चाहिए। इसके लिए उद्योगों को सख्त निर्देश दिए जाने चाहिए और सम्बन्धित कानून का भी सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

प्रश्न 2.
मृदा प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? इसके कारण, प्रभाव तथा नियन्त्रण का वर्णन कीजिए।
उत्तर
मृदा प्रदूषण-भूपर्पटी की वह ऊपरी सतह जिसमें पौधे उगते हैं, मृदा कहलाती है। मृदा चट्टानों के अपक्षयण से बनती है। बाह्य स्रोतों के कारण अनावश्यक पदार्थों (प्रदूषकों) का मृदा से मिलकर उसे अनुत्पादक बनाना या प्रदूषित करना मृदा प्रदूषण कहलाती है। मृदा प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्नवत् हैं-

  1. शहरी अपशिष्ट–इनमें कूड़ा, पत्तियाँ, पॉलिथीन की थैलियाँ, कागज, काँच, फल या सब्जियों के छिलके, खाद्य अपशिष्ट, मल आदि सम्मिलित हैं।।
  2. औद्योगिक अपशिष्ट-उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्टों में अनेक विषैले तथा जैव अनिम्नीकरणीय (non-biodegradable) पदार्थ होते हैं। चीनी मिल, वस्त्र उद्योग, रसायन उद्योग, काँच उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, पेट्रोलियम उद्योग आदि ऐसे प्रमुख उद्योग हैं जिनसे मृदा प्रदूषण होता है।
  3. कृषि के प्रदूषक–कृषि में पौधों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने, उन्हें पीड़कों से बचाने आदि के लिए अनेक रसायनों का प्रयोग किया जाता है। ये रसायन मृदा प्रदूषण को प्रमुख कारण हैं।
  4. रेडियोधर्मी प्रदूषक-नाभिकीय परीक्षणों में उत्पन्न नाभिकीय धूल (nuclear dust) पहले वायुमण्डल में जाती है और अंततः मृदा पर बैठकर उसे प्रदूषित करती है। नाभिकीय संयन्त्रों से उत्पन्न नाभिकीय अपशिष्ट मृदा में दबा दिए जाते हैं। ये प्रदूषक का कार्य करते हैं। युद्ध में प्रयोग किए जाने वाले नाभिकीय बम (परमाणु बम और हाइड्रोजन बम) रेडियोधर्मी उप-उत्पाद बनाते हैं। इनके रेडियोधर्मी अपशिष्टों से हानिकारक विकिरणें निकलती हैं।
  5. अन्य स्रोत–वनोन्मूलन (deforestation) से मृदा अपरदन में वृद्धि होती है। इससे उपजाऊ मृदा समाप्त हो जाती है। अतिचारण भी मृदा अपरदन का एक कारण है।

मृदा प्रदूषण के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. कूड़ा, काँच; खाद्य अपशिष्ट आदि दृश्य (scene) को गंदा बनाते हैं। अनेक अपशिष्ट सड़कर दुर्गंध देते हैं।
  2. विभिन्न रसायन और पीड़कनाशी मृदा के संघटन को प्रभावित करके उसमें उपस्थित विभिन्न | सूक्ष्म जीवों को मार देते हैं। इससे मृदा की उर्वरता (fertility) कम हो जाती है।
  3. अनेक रसायन और पीड़कनाशी मृदा को विषाक्त करके उसे पौधों के उगने के अयोग्य बनाते हैं।
  4. अनेक पीड़कनाशी और उनके उत्पाद पौधों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। ये विषैले पदार्थ खाद्य श्रृंखला (food chain) के माध्यम से जन्तुओं और मनुष्यों तक पहुँच जाते हैं।
  5. मनुष्यों के मल तथा पशुओं के गोबर आदि पौधों की उपज में वृद्धि करने के साथ-साथ मृदा को प्रदूषित भी करते हैं। मल आदि में उपस्थित रोगाणु मृदा और पौधों को संदूषित करके मनुष्य और पालतू पशुओं के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं।
  6. रेडियोधर्मी धूल मृदा से पौधों और पौधों से मवेशियों, मनुष्यों आदि में पहुँचकर उनके स्वास्थ्य को हानि पहुँचाती है।

मृदा प्रदूषण को निम्नलिखित प्रकार से नियन्त्रित किया जा सकता है-

  1. शहरों के अपशिष्टों को अलग-अलग करके उसके विभिन्न घटकों का प्रयोग निचले क्षेत्रों (low-lying areas) को भरने, कम्पोस्ट (compost) आदि में किया जा सकता है। इसके घटकों का आवश्यकतानुसार पुनः चक्रण (recycle) किया जा सकता है या जलाया जा सकता है।
  2. गोबर का उपयोग गोबर गैस संयन्त्रों में गोबर-गैस बनाने के लिए किया जा सकता है।
  3. स्क्रैप से विभिन्न धातुओं को प्राप्त किया जा सकता है।
  4. काँच और प्लास्टिक का पुनः चक्रण किया जा सकता है। इसी प्रकार कागज का भी पुनः चक्रण किया जा सकता है। पुरानी पुस्तकों, अखबारों, मैग्जीनों को नया कागज बनाने के लिए। कागज की मिलों (paper mills) को भेजा जा सकता है।
  5. रासायनिक उर्वरकों और पीड़कनाशियों का प्रयोग सोच-समझकर और आवश्यकतानुसार ही किया जाना चाहिए।
  6. रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैव उर्वरकों (bio-fertilizers) तथा खाद (manure) का | उपयोग करना चाहिए। इससे मृदा प्रदूषण तो घटता ही है साथ ही, धन की बचत भी होती है।
  7. पीड़कों के नियन्त्रण के लिए जैविक विधियों का प्रयोग करना चाहिए। इससे रासायनिक पीड़कों का प्रयोग कम होगा और मृदा प्रदूषण में भी कमी आएगी।
  8. वनोन्मूलन को नियन्त्रित करके अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाए जाने चाहिए तथा अतिचारण को भी रोकना चाहिए।

We hope the UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry (पर्यावरणीय रसायन) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 14 Environment Chemistry (पर्यावरणीय रसायन), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism (गतिमान आवेश और चुम्बकत्व) are part of UP Board Solutions for Class 12 Physics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism (गतिमान आवेश और चुम्बकत्व).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Physics
Chapter Chapter 4
Chapter Name Moving Charges and Magnetism (गतिमान आवेश और चुम्बकत्व)
Number of Questions Solved 88
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism (गतिमान आवेश और चुम्बकत्व)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
तार की एक वृत्ताकार कुंडली में 100 फेरे हैं, प्रत्येक की त्रिज्या 8.0 cm है और इनमें 0.40A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है ?
हल-
दिया है,
कुण्डली में तार के फेरों की संख्या n = 100
प्रत्येक फेरे की त्रिज्या r = 8.0 सेमी = 8.0 x 10-2 मीटर
कुण्डली में प्रवाहित धारा I = 0.40 ऐम्पियर
कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण B = ?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 2.
एक लम्बे, सीधे तार में 35 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। तार से 20 cm दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?
हल-
एक लम्बी धारावाही सीधी तार के कारण r दूरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q2
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 3.
क्षैतिज तल में रखे एक लम्बे सीधे तार में 50A विद्युत धारा उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के पूर्व में 2.5 m दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण और उसकी दिशा ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है,
धारा की प्रबलता I = 50 ऐम्पियर
दिए गए बिन्दु की तार से लम्बवत् दूरी r = 2.5 मीटर
बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण व दिशा = ?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 4.
व्योमस्थ खिंचे क्षैतिज बिजली के तार में 90 A विद्युत धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के 1.5 m नीचे विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण और दिशा क्या है?
हल-
तार में धारा i = 90 A (पूर्व से पश्चिम), तार से दूरी = 1.5 m
तार के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q4
चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्षैतिजत: उत्तर से दक्षिण की ओर होगी।

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
एक तार जिसमें 8 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, 0.15 T के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में, क्षेत्र से 30° का कोण बनाते हुए रखा है। इसकी एकांक लम्बाई पर लगने वाले बल का परिमाण और इसकी दिशा क्या है?
हल-
चुम्बकीय क्षेत्र B में क्षेत्र से θ कोण पर रखे L लम्बाई के धारावाही चालक तार पर लगने वाले बल का परिमाण
F = ILB sin θ (जहाँ I = तार में प्रवाहित धारा)
तार की एकांक लम्बाई ([latex s=2]\frac { F }{ L }[/latex]) = IB sin θ
यहाँ I = 8A; B = 0.15 T तथा θ = 30°
([latex s=2]\frac { F }{ L }[/latex]) = 8 x 0.15 x sin 30° न्यूटन/मीटर
= 8 x 0.15 x ([latex s=2]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]) न्यूटन/मीटर
= 0.60 न्यूटन/मीटर

प्रश्न 6.
एक 3.0 cm लम्बा तार जिसमें 10 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, एक परिनालिका के भीतर उसके अक्ष के लम्बवत् रखा है। परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र का मानं 0.27 T है। तार पर लगने वाला चुम्बकीय बल क्या है?
हल-
परिनालिका के अन्दर उसकी (UPBoardSolutions.com) अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र B = 0.27 T (जिसकी दिशा अक्ष के अनुदिश ही होती है)। धारावाही तार अक्ष के लम्बवत् है,
अतः θ = 90°; तार की लम्बाई L = 3.0 सेमी = 3.0 x 10-2 मी; तार में धारा I = 10 A; अतः तार पर लगने वाला चुम्बकीय बल
F = ILB sin θ न्यूटन
= 10 x (3.0 x 10-2) (0.27) x sin 90° न्यूटन
= 81 x 10-2 x 1 न्यूटन
= 8.1 x 10-2 न्यूटन

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
एक-दूसरे से 4.0 cm की दूरी पर रखे दो लम्बे, सीधे, समान्तर तारों A एवं B से क्रमशः 8.0 A एवं 5.0 A की विद्युत धाराएँ एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। तार A के 10 cm खण्ड पर बल का आकलन कीजिए।
हल-
परस्पर समान्तर दो लम्बे सीधे धारावाही तारों के बीच प्रत्येक तार की एकांक लम्बाई पर कार्य करने वाला पारस्परिक बल
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 8.
पास-पास फेरों वाली एक परिनालिका 80 cm लम्बी है और इसमें 5 परतें हैं जिनमें से प्रत्येक में 400 फेरे हैं। परिनालिका का व्यास 1.8 cm है। यदि इसमें 8.0 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है तो परिनालिका के भीतर केन्द्र के पास चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण परिकलित कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 9.
एक वर्गाकार कुंडली जिसकी प्रत्येक भुजा 10 cm है, में 20 फेरे हैं और उसमें 12 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडली ऊर्ध्वाधरतः लटकी हुई है और इसके तल पर खींचा गया अभिलम्ब 0.80 T के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा से 30° का एक कोण बनाता है। कुंडली पर लगने वाले बल-युग्म आघूर्ण का परिमाण क्या है?
हल-
बल-युग्म के आघूर्ण का परिमाण τ = NIAB sin θ
यहाँ फेरों की संख्या N = 20; वर्गाकार कुण्डली के तल को क्षेत्रफल
A = भुजा2 = (0.10 मी)2 = 0.01 मी
कुण्डली में धारा I = 12 A; चुम्बकीय क्षेत्र B = 0.80 T तथा θ = 30°
τ = 20 x 12 x 0.01 x 0.80 x sin 30° न्यूटन मीटर
= 240 x 0.008 x ([latex s=2]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]) न्यूटन मीटर
= 0.960 न्यूटन मीटर।

प्रश्न 10.
दो चल कुंडली गैल्वेनोमीटर मीटरों MI एवं M, के विवरण नीचे दिए गए हैं।
R1 = 10 Ω, N1 = 30, A1 = 3.6 x 10-3 m2, B1 = 0.25 T
R2 = 14 Ω, N2 = 42, A2 = 1.8 x 10-3 m2, B2 = 0.50 T
(दोनों मीटरों के लिए स्प्रिंग नियतांक समान है)।
(a) M2 एवं M1 की धारा-सुग्राहिताओं,
(b) M2 एवं M1 की वोल्टता-सुग्राहिताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 11.
एक प्रकोष्ठ में 6.5 G (1G = 10-4 T) का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र बनाए रखा गया है। इस चुम्बकीय क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉन 4.8 x 106 ms-1 के वेग से क्षेत्र के लम्बवत् भेजा गया है। व्याख्या कीजिए कि इस इलेक्ट्रॉन का पथ वृत्ताकार क्यों होगा? वृत्ताकार कक्षा की त्रिज्या ज्ञात कीजिए। (e = 1.6 x 1019 C, me = 9.1 x 10-31 kg)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q11
क्योंकि चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् प्रवेश करने वाले इलेक्ट्रॉन पर चुम्बकीय बल सदैव इसके वेग के लम्बवत् रहने के कारण इलेक्ट्रॉन का पथ वृत्ताकार हो जाता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 12.
प्रश्न 11 में, वृत्ताकार कक्षा में इलेक्ट्रॉन की परिक्रमण आवृत्ति प्राप्त कीजिए। क्या यह उत्तर इलेक्ट्रॉन के वेग पर निर्भर करता है? व्याख्या कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 13.
(a) 30 फेरों वाली एक वृत्ताकार कुंडली जिसकी त्रिज्या 8.0 cm है और जिसमें 6.0 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, 1.0 T के एकसमान क्षैतिज चुम्बकीय क्षेत्र में ऊर्ध्वाधरतः लटकी है। क्षेत्र रेखाएँ कुंडली के अभिलम्ब से 60° का कोण बनाती हैं। कुंडली को घूमने से रोकने के लिए जो प्रति आघूर्ण लगाया जाना चाहिए उसके परिमाण परिकलित कीजिए।
(b) यदि (a) में बतायी गई वृत्ताकार कुंडली को उसी क्षेत्रफल की अनियमित आकृति की समतलीय कुंडली से प्रतिस्थापित कर दिया जाए (शेष सभी विवरण अपरिवर्तित रहें) तो क्या आपका उत्तर परिवर्तित हो जाएगा?
हल-
(a) कुंडली में फेरे N = 30, त्रिज्या r = 8.0 x 10-2 m, i = 6.0 A
चुम्बकीय क्षेत्र B = 1.0 T, θ = 60°
कुंडली पर चुम्बकीय क्षेत्र के कारण बल-युग्म का आघूर्ण
τ = NiAB sin 60° = Ni (πr²) B sin 60°
= 30 x 6.0 x (314 x 64.0 x 10-4) x 1.0 x [latex s=2]\frac { \surd 3 }{ 2 }[/latex] = 3.13 N-m
स्पष्ट है कि कुंडली को घूमने से रोकने के लिए 3.13 N-m का बल-आघूर्ण विपरीत दिशा में लगाना होगा।
(b) नहीं, उत्तर में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इसका कारण यह है कि बल-आघूर्ण (τ = NiAB sin θ) कुंडली के क्षेत्रफल A पर निर्भर करता है न कि उसके आकार पर।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 14.
दो समकेन्द्रिक वृत्ताकार कुंडलियाँ x और Y जिनकी त्रिज्याएँ क्रमशः 16 cm एवं 10 cm हैं, उत्तर-दक्षिण दिशा में समान ऊध्र्वाधर तल में अवस्थित हैं। कुंडली X में 20 फेरे हैं और इसमें 16 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, कुंडली Y में 25 फेरे हैं और इसमें 18 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। पश्चिम की ओर मुख करके खड़ा एक प्रेक्षक देखता है कि X में धारा प्रवाह वामावर्त है जबकि में दक्षिणावर्त है। कुंडलियों के केन्द्र पर, उनमें प्रवाहित विद्युत धाराओं के कारण उत्पन्न कुल चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण एवं दिशा ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 15.
10 cm लम्बाई और 10-3 m2 अनुप्रस्थ काट के एक क्षेत्र में 100 G (1G = 10-4) का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र चाहिए। जिस तार से परिनालिका का निर्माण करना है उसमें अधिकतम 15 A विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है और क्रोड पर अधिकतम 1000 फेरे प्रति मीटर लपेटे जा सकते हैं। इस उद्देश्य के लिए परिनालिका के निर्माण का विवरण सुझाइए। यह मान लीजिए कि क्रोड लौह-चुम्बकीय नहीं है।
हल-
माना परिनालिका की एकांक लम्बाई में फेरों की संख्या n तथा उसमें प्रवाहित धारा 1 है तब उसकी अक्ष पर केन्द्रीय भाग में
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q15
दी गई परिनालिका के लिए ni = नियतांक
इस प्रतिबन्ध में दो चर राशियाँ हैं; अत: हम किसी एक राशि को दी गई सीमाओं के अनुरूप स्वेच्छ मान देकर दूसरी राशि का चुनाव कर सकते हैं।
इससे स्पष्ट है कि अभीष्ट परिनालिका के बहुत से भिन्न-भिन्न विवरण सम्भव हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
हम जानते हैं कि परिनालिका की अक्ष पर उसके केन्द्रीय भाग में चुम्बकीय क्षेत्र लगभग एकसमान होता है। अतः दिया गया स्थान (UPBoardSolutions.com) (10 cm लम्बा व 10-3 m2 अनुप्रस्थ क्षेत्रफल वाला) परिनालिका की अक्ष के अनुदिश तथा केन्द्रीय भाग में होना चाहिए।
अत: परिनालिका की लम्बाई लगभग 50 cm से 100 cm के बीच (10 cm से काफी अधिक) होनी चाहिए तथा परिनालिका का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल 10-3 m2 से अधिक होना चाहिए।
माना परिनालिका की त्रिज्या r है, तब
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q15.2
अतः हम परिनालिका की त्रिज्या 2 cm से अधिक (माना 3 cm) ले सकते हैं।
अतः परिनालिका का विवरण निम्नलिखित है :
लम्बाई l = 50 cm लगभग, फेरों की संख्या N = nl = 800 x 0.5 = 400 लगभग
त्रिज्या r = 3 cm लगभग, धारा i = 10 A

UP Board Solutions

प्रश्न 16.
I धारावाही, N फेरों और R त्रिज्या वाली वृत्ताकार कुंडली के लिए, इसके अक्ष पर, केन्द्र से x दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए निम्नलिखित व्यंजक है-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q16
(a) स्पष्ट कीजिए, इससे कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए सुपरिचित परिणाम कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
(b) बराबर त्रिज्या R एवं फेरों की संख्या N, वाली दो वृत्ताकार कुंडलियाँ एक-दूसरे से R दूरी पर एक-दूसरे के समान्तर, अक्ष मिलाकर रखी गई हैं। दोनों में (UPBoardSolutions.com) समान विद्युत धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही है। दर्शाइए कि कुण्डलियों के अक्ष के लगभग मध्यबिन्दु पर क्षेत्र, एक बहुत छोटी दूरी के लिए जो कि Rसे कम है, एकसमान है और इस क्षेत्र का लगभग मान निम्नलिखित है-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q16.1
[बहुत छोटे से क्षेत्र पर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए बनायी गई ऊपर वर्णित व्यवस्था हेल्महोल्ट्ज कुण्डलियों के नाम से जानी जाती है।]
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 17.
एक टोरॉइड के (अलौह चुम्बकीय) क्रोड की आन्तरिक त्रिज्या 25 cm और बाह्य त्रिज्या 26 cm है। इसके ऊपर किसी तार के 3500 फेरे लपेटे गए हैं। यदि तार में प्रवाहित विद्युत धारा 11 A हो तो चुम्बकीय क्षेत्र को मान क्या होगा?
(i) टोरॉइड के बाहर,
(ii) टोरॉइड के क्रोड में,
(iii) टोरॉइड द्वारा घिरी हुई खाली जगह में।
हल-
दिया है, आन्तरिक त्रज्या r1 = 0.25 m, बाह्य त्रिज्या r2 = 0.26 m
फेरों की संख्या N = 3500, धारा i = 11 A
(i) टोरॉइड के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र B = 0
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q17
(iii) टोरॉइड द्वारा घेरे गए रिक्त स्थान में चुम्बकीय क्षेत्र B = 0

प्रश्न 18.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(a) किसी प्रकोष्ठ में एक ऐसा चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित किया गया है जिसका परिमाण तो एक बिन्दु पर बदलता है, पर दिशा निश्चित है। (पूर्व से पश्चिम)। इस प्रकोष्ठ में एक आवेशित कण प्रवेश करता है और अविचलित एक सरल रेखा में अचर वेग से चलता रहता है। आप कण के प्रारम्भिक वेग के बारे में क्या कह सकते हैं?

(b) एक आवेशित कण, एक ऐसे शक्तिशाली असमान चुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है। जिसको परिमाण एवं दिशा दोनों एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर बदलते जाते हैं, एक जटिल पथ पर चलते हुए इसके बाहर आ जाता है। यदि यह मान लें कि चुम्बकीय क्षेत्र में इसका किसी भी दूसरे कण से कोई संघट्ट नहीं होता तो क्या इसकी अन्तिम चाल, प्रारम्भिक चाल के बराबर होगी?

(c) पश्चिम से पूर्व की ओर चलता हुआ एक इलेक्ट्रॉन एक ऐसे प्रकोष्ठ में प्रवेश करता है। जिसमें उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर एकसमान एक विद्युत क्षेत्र है। वह दिशा बताइए जिसमें एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित किया जाए ताकि इलेक्ट्रॉन को अपने सरल रेखीय पथ से विचलित होने से रोका जा सके।
हल-
(a) आवेशितं कण अविचलित सरल रेखीय गति करता है, इसका यह अर्थ है कि कण पर चुम्बकीय क्षेत्र के कारण कोई बल नहीं लगा है। इससे प्रदर्शित होता है कि (UPBoardSolutions.com) कण का प्रारम्भिक वेग या तो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में है अथवा उसके विपरीत है।

(b) हाँ, कण की अन्तिम चाल उसकी प्रारम्भिक चाल के बराबर होगी। इसका. कारण यह है कि चुम्बकीय क्षेत्र के कारण गतिमान आवेश पर कार्यरत बल सदैव कण के वेग के लम्बवत् दिशा में लगता है जो केवल गति की दिशा को बदल सकता है परन्तु कण की चाल को नहीं।

(c) विद्युत क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन पर दक्षिण से उत्तर की ओर विद्युत बल F, कार्य करेगा, जिसके कारण इलेक्ट्रॉन उत्तर दिशा की ओर विक्षेपित होने की प्रवृत्ति रखेगा। इलेक्ट्रॉन बिना विचलित हुए सरल रेखीय गति करे इसके लिए आवश्यक है कि चुम्बकीय क्षेत्र ऐसी दिशा में लगाया जाए कि चुम्बकीय (UPBoardSolutions.com) क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन पर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर चुम्बकीय बल कार्य करे। इसके लिए फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से चुम्बकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधरत: नीचे की ओर लगाना चाहिए।

प्रश्न 19.
ऊष्मित कैथोड से उत्सर्जित और 2.0 kV के विभवान्तर पर त्वरित एक इलेक्ट्रॉन 0.15 T के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन का गमन पथ ज्ञात कीजिए यदि चुम्बकीय क्षेत्र
(a) प्रारम्भिक वेग के लम्बवत है,
(b) प्रारम्भिक वेग की दिशा से 30° का कोण बनाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 20.
प्रश्न 16 में वर्णित हेल्महोल्ट्ज कुंडलियों का उपयोग करके किसी लघुक्षेत्र में 0.75 T का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित किया है। इसी क्षेत्र में कोई एकसमान स्थिरविद्युत क्षेत्र कुंडलियों के उभयनिष्ठ अक्ष के लम्बवत लगाया जाता है। (एक ही प्रकार के) आवेशित कणों का 15 kV विभवान्तर पर (UPBoardSolutions.com) त्वरित एक संकीर्ण किरण पुंज इस क्षेत्र में दोनों कुण्डलियों के अक्ष तथा स्थिरविद्युत क्षेत्र की लम्बवत दिशा के अनुदिश प्रवेश करता है। यदि यह किरण पुंज 9.0 x 10-5 Vm-1, स्थिरविद्युत क्षेत्र में अविक्षेपित रहता है तो यह अनुमान लगाइए कि किरण पुंज में कौन-से कण हैं। यह स्पष्ट कीजिए कि यह उत्तर
एकमात्र उत्तर क्यों नहीं है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q20
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

UP Board Solutions

प्रश्न 21.
एक सीधी, क्षैतिज चालक छड़ जिसकी लम्बाई 0.45 cm एवं द्रव्यमान 60 g है। इसके सिरों पर जुड़े दो ऊर्ध्वाधर तारों पर लटकी हुई है। तारों से होकर छड़ में 5.0 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है।
(a) चालक के लम्बवत कितना चुम्बकीय क्षेत्र लगाया जाए कि तारों में तनाव शून्य हो जाए।
(b) चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा यथावत रखते हुए यदि विद्युत धारा की दिशा उत्क्रमित कर दी जाए तो तारों में कुल आवेश कितना होगा? (तारों के द्रव्यमान की उपेक्षा कीजिए। (g = 9.8 ms-2)
हल-
छड़ की लम्बाई l = 0.45 m व द्रव्यमान m = 0.06 kg, तार में धारा i = 5.0 A
(a) तारों में तनाव शून्य करने के लिए आवश्यक है कि चुम्बकीय क्षेत्र के कारण छड़ पर बल उसके भार के बराबर वे विपरीत हो।
अतः ilB sin 90° = mg
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q20
(b) यदि धारा की दिशा बदल दी जाए तो चुम्बकीय बल तथा छड़ का भार दोनों एक ही दिशा में हो जाएँगे।
इस स्थिति में, तारों का तनाव = mg + IlB sin 90°
= 2mg (∵ प्रथम दशा से, IlB sin 90° = mg)
= 2 x 0.06 x 9.8 = 1.176 = 1.18 N

प्रश्न 22.
एक स्वचालित वाहन की बैटरी से इसकी चालने मोटर को जोड़ने वाले तारों में 300 A विद्युत धारा (अल्प काल के लिए) प्रवाहित होती है। तारों के बीच प्रति एकांके लम्बाई पर कितना बल लगता है यदि इनकी लम्बाई 70 cm एवं बीच की दूरी 1.5 cm हो। यह बल आकर्षण बल है या प्रतिकर्षण बल ?
हल-
दिया है, तारों में धारा i1 = i2 = 300 A, बीच की दूरी r = 1.5 x 10-2 m
तारों की लम्बाई = 70 cm
तारों के बीच एकांक लम्बाई पर बल
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q22
चूँकि तारों में धारा विपरीत दिशा में प्रवाहित होती है; अत: यह बल प्रतिकर्षण का होगा।

UP Board Solutions

प्रश्न 23.
1.5 T का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र, 10.0 cm त्रिज्या के बेलनाकार क्षेत्र में विद्यमान है। इसकी दिशा अक्ष के समान्तर पूर्व से पश्चिम की ओर है। एक तार जिसमें 7.0 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। इस क्षेत्र में होकर उत्तर से दक्षिण की ओर गुजरती है। तार पर लगने वाले बल का परिमाण और दिशा क्या है, यदि
(a) तार अक्ष को काटता हो।
(b) तार N-S दिशा से घुमाकर उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम दिशा में कर दिया जाए,
(c) N-S दिशा में रखते हुए ही तार को अक्ष से 6.0 cm नीचे उतार दिया जाए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 24.
धनात्मक z-दिशा में 3000 G की एक एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र लगाया गया है। एक आयताकार लूप जिसकी भुजाएँ 10 cm एवं 5 cm और जिसमें 12 A धारा प्रवाहित हो रही है, इस क्षेत्र में रखा है। चित्र 4.7 में दिखायी गई लूप की विभिन्न स्थितियों में इस पर लगने वाला बल-युग्म आघूर्ण क्या है? हर स्थिति में बल क्या है? स्थायी सन्तुलन वाली स्थिति कौन-सी है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
हल-
दिया है, B = 3000 G = 0.3 T, a = 0.1 m, b = 0.05 m, i = 12 A
कुंडली का क्षेत्रफल A = ab = 0.1 m x 0.05 m = 5 x 10-3 m
(a), (b), (c), (d) प्रत्येक दशा में कुंडली के तल पर अभिलम्ब, चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् है; अतः प्रत्येक दशा में
बल-युग्म का आघूर्ण τ = iAB sin 90° = 12 x 5 x 10-3 x 0.3 = 1.8 x 10-2 N-m
प्रत्येक दशा में बल शून्य है, क्योंकि एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखे धारालूप पर बल-युग्म कार्य करता है परन्तु बल नहीं।
(a) τ = 1.8 x 10-2 N-m ऋण y-अक्ष की दिशा में तथा बल शून्य है।
(b) τ = 1.8 x 10-2 N-m ऋण y-अक्ष की दिशा में तथा बल शून्य है।
(c) τ = 1.8 x 10-2 N-m ऋण x-अक्ष की दिशा में तथा बल शून्य है।
(d) τ = 1.8 x 10-2 N-m तथा बल शून्य है।
(e) तथा (f) दोनों स्थितियों में कुंडली के तल पर अभिलम्ब चुम्बकीय क्षेत्र के अनुदिश है; अत:
t = iAB sin 0° = 0
अत: इन दोनों दशाओं में बल-आघूर्ण व बल दोनों शून्य हैं। यह स्थितियाँ सन्तुलन की स्थायी अवस्था में दर्शाती हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 25.
एक वृत्ताकार कुंडली जिसमें 20 फेरे हैं और जिसकी त्रिज्या 10 cm है, एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखी है जिसका परिमाण 0.10 है और जो कुंडली के तल के लम्बवत है। यदि कुंडली में 5.0 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही हो तो,
(a) कुंडली पर लगने वाला कुल बल-युग्म आघूर्ण क्या है?
(b) कुंडली पर लगने वाला कुल परिणामी बल क्या है?
(c) चुम्बकीय क्षेत्र के कारण कुंडली के प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला कुलै’औसत बल क्या है?
(कुंडली 10-5 m2 अनुप्रस्थ क्षेत्र वाले ताँबे के तार से बनी है, और ताँबे में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व 1029 m-3 दिया गया है।)
हल-
फेरे N = 20, i = 5.0 A, r = 0.10 m, B = 0.10 T
इलेक्ट्रॉन घनत्व n = 1029 m-3,
तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A = 10-5 m2
(a) कुंडली का तल चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् है; अत: कुंडली के तल पर अभिलम्ब व चुम्बकीय क्षेत्र के बीच का कोण शून्य है (θ = 0°)
बल-आघूर्ण τ = NiLAB sin 0° = 0
(b) कुंडली पर नेट बल भी शून्य है।
(c) यदि इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग vd है तो
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q25

प्रश्न 26.
एक परिनालिका जो 60 cm लम्बी है, जिसकी त्रिज्या 4.0 cm है और जिसमें 300 फेरों वाली 3 परतें लपेटी गई हैं। इसके भीतर एक 2.0 cm लम्बा, 2.5 g द्रव्यमान का तार इसके (केन्द्र के निकट) अक्ष के लम्बवत रखा है। तार एवं परिनालिका का अक्ष दोनों क्षैतिज तल में हैं। तार को परिनालिका के समान्तर दो वाही संयोजकों द्वारा एक बाह्य बैटरी से जोड़ा गया है जो इसमें 6.0 A विद्युत धारा प्रदान करती है। किस मान की विद्युत धारा (परिवहन की उचित दिशा के साथ) इस परिनालिका के फेरों में प्रवाहित होने पर तारे का भार संभाल सकेगी? (g = 9.8 ms-2)
हल-
परिनालिका की लम्बाई l = 0.6 m, त्रिज्या = 4.0 cm, फेरे N = 300 x 3
तार की लम्बाई L = 20 x 10-2 m, द्रव्यमान m = 25 x 10-3 kg, धारा I = 6.0 A
माना परिनालिका में प्रवाहित धारा = i
तब परिनालिका के अक्ष पर केन्द्रीय भाग में चुम्बकीय क्षेत्र
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 27.
किसी गैल्वेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध 12 Ω है। 4 mA की विद्युत धारा प्रवाहित होने पर यह पूर्णस्केल विक्षेप दर्शाता है। आप इस गैल्वेनोमीटर को 0 से 18 V परास वाले वोल्टमीटर में कैसे रूपान्तरित करेंगे ?
हल-
दिया है, G = 12 Ω, ig = 4 mA = 4 x 10-3 A
0 से V (V = 18 V) वोल्ट परास के वोल्टमीटर में बदलने के लिए गैल्वेनोमीटर के श्रेणीक्रम में एक उच्च प्रतिरोध R जोड़ना होगा, जहाँ
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q27.1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q27
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q27.1
अत: गैल्वेनोमीटर के श्रेणीक्रम में 4488 Ω का प्रतिरोध जोड़ना होगा।

UP Board Solutions

प्रश्न 28.
किसी गैल्वेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध 15 Ω है। 4 mA की विद्युत धारा प्रवाहित होने पर यह पूर्णस्केल विक्षेप दर्शाता है। आप इस गैल्वेनोमीटर को 0 से 6 A परास वाले अमीटर में कैसे रूपान्तरित करेंगे?
हल-
दिया है, G = 15 Ω, ig = 4 mA = 4.0 x 10-3 A, i = 6 A
गैल्वेनोमीटर को 0-1 ऐम्पियर धारा परास वाले अमीटर में बदलने के लिए इसके पाश्र्वक्रम में एक सूक्ष्म प्रतिरोध S (शण्ट) जोड़ना होगा, जहाँ
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
अत: इसके समान्तर क्रम में 10 mΩ का प्रतिरोध जोड़ना होगा।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गतिशील आवेश उत्पन्न करता है- (2013)
(i) केवल वैद्युत क्षेत्र
(ii) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
(iii) वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
(iv) वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र में से कोई नहीं
उत्तर-
(iii) वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों

प्रश्न 2.
एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जा सकता है- (2015)
(i) केवल गतिमान आवेश द्वारा
(ii) केवल बदलते वैद्युत क्षेत्र द्वारा
(iii) (i) तथा (ii) दोनों के द्वारा
(iv) इनमें से किसी के द्वारा नहीं
उत्तर-
(iii) (i) तथा (ii) दोनों के द्वारा

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का मात्रक होता है- (2011)
या
चुम्बकीय क्षेत्र का मात्रक होता है- (2015, 16)
(i) वेबर x मीटर2
(ii) वेबर/मीटर2
(iii) वेबर
(iv) वेबर/मीटर
उत्तर-
(i) वेबर/मीटर2

प्रश्न 4.
[latex s=2]\left( { \mu }_{ 0 }{ \varepsilon }_{ 0 } \right) ^{ \frac { -1 }{ 2 } }[/latex] का मान है- (2011, 14, 16, 18)
(i) 3 x 108 सेमी/सेकण्ड
(ii) 3 x 1010 सेमी/सेकण्ड
(iii) 3 x 109 सेमी/सेकण्ड
(iv) 3 x 108 किमी/सेकण्ड
उत्तर-
(ii) 3 x 1010 सेमी/सेकण्ड

प्रश्न 5.
एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन जिनकी गतिज ऊर्जाएँ समान हैं, एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् प्रक्षेपित किए जाते हैं। पथ की त्रिज्या होगी- (2013)
(i) प्रोटॉन के लिए अधिक
(ii) इलेक्ट्रॉन के लिए अधिक
(iii) दोनों के पथ समान वक्रीय होंगे।
(iv) दोनों पथ सरल रेखीय होंगे
उत्तर-
(i) प्रोटॉन के लिए अधिक (∵ त्रिज्या ∝ द्रव्यमान)

प्रश्न 6.
एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में बल रेखाओं के समान्तर एक इलेक्ट्रॉन जिसका आवेश e है, वेग v से चलता है। इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला बल है- (2011, 14)
(i) evB
(ii) शून्य
(iii) [latex s=2]\frac { ev }{ B }[/latex]
(iv) [latex s=2]\frac { Bv }{ e }[/latex]
उत्तर-
(ii) शून्य

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
m द्रव्यमान का कण जिस पर आवेश q है एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B के लम्बवत् वेग v से प्रविष्ट होता है। इसके पथ की त्रिज्या होगी- (2014)
(i) [latex s=2]\frac { m }{ qB }[/latex]
(ii) [latex s=2]\frac { m }{ qvB }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { 2m }{ qB }[/latex]
(iv) [latex s=2]\frac { mv }{ qB }[/latex]
उत्तर-
(iv) [latex s=2]\frac { mv }{ qB }[/latex]

प्रश्न 8.
एक प्रोटॉन व एक α-कण समान वेग से एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् प्रवेश करते हैं। यदि उनके परिक्रमण काल क्रमशः T1 व T2 हों तब (2012)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 9.
किसी समान चुम्बकीय क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉन क्षेत्र के लम्बवत दिशा में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन का पथ होगा (2013, 15, 17)
(i) परवलयाकार
(ii) दीर्घवृत्ताकार
(iii) वृत्ताकार
(iv) सरल रैखिक
उत्तर-
(iii) वृत्ताकार

प्रश्न 10.
यदि आवेशित कण का वेग दोगुना तथा चुम्बकीय क्षेत्र का मान आधा कर दिया जाए, तो आवेश के मार्ग (पथ की त्रिज्या हो जाएगी) (2014)
(i) 8 गुनी
(ii) 4 गुनी
(iii) 3 गुनी
(iv) 2 गुनी
उत्तर-
(ii) 4 गुनी

प्रश्न 11.
एक हीलियम नाभिक 0.8 मीटर त्रिज्या के वृत्त में प्रति सेकण्ड एक चक्कर लगाता है। वृत्त के केन्द्र पर उत्पन्न चुकीय क्षेत्र होगा (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 12.
एक वृत्ताकार छल्ले का क्षेत्रफल 1.0 सेमी है तथा इसमें 10.0 ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है। 0.1 टेस्ला तीव्रता का चुम्बकीय क्षेत्र छल्ले के तल के लम्बवत लगाया जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र के कारण छल्ले पर लगने वाला बल-आघूर्ण होगा (2015)
(i) शून्य
(ii) 10-4 न्यूटन-मी
(iii) 10-2 न्यूटन-मी
(iv) 1.0 न्यूटन-मी
उत्तर-
(iv) 1.0 न्यूटन-मी

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 14.
एक वृत्ताकार लूप का पृष्ठ क्षेत्रफल A तथा इसमें प्रवाहित धारा I है। चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B लूप के तल के लम्बवत है। चुम्बकीय क्षेत्र के कारण लूप में लगने वाला बल आघूर्ण (2017)
(i) BIA
(ii) 2BIA
(iii) [latex s=2]\sigma [/latex] BIA
(iv) शून्य
उत्तर-
(i) BIA

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लॉरेन्ज बल क्या है? (2009, 18)
या
एक इलेक्ट्रॉन (आवेश e) + X अक्ष की दिशा में v चाल से, समरूप चुम्बकीय क्षेत्र B जो Y अक्ष की दिशा में है, प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन पर कार्य करने वाले बल का सूत्र एवं दिशा ज्ञात कीजिए। (2015)
उत्तर-
चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश (इलेक्ट्रॉन) पर लगने वाले चुम्बकीय बल को लॉरेन्ज बल कहते हैं। यदि q आवेश v वेग से चुम्बकीय क्षेत्र [latex s=2]\vec { B }[/latex] की दिशा से θ कोण पर गति करे, तो उस पर कार्य करने वाला लॉरेन्ज बल F = qvB sin θ। बल की दिशा [latex s=2]\vec { v }[/latex] तथा [latex s=2]\vec { B }[/latex] दोनों के लम्बवत् होती है।

प्रश्न 2.
q आवेश वाला कोई कण वेग v से एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B के समान्तर दिशा में गति कर रहा है। इस कण पर लगने वाले बल का मान कितना होगा? (2016)
उत्तर-
F = qvB sin θ = qvB sin 0° = 0 अर्थात् शून्य।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
q आवेश का एक आवेशित कण, [latex s=2]\vec { v }[/latex] वेग से चलता हुआ एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में, क्षेत्र की दिशा से 30° का कोण बनाता हुआ प्रवेश करता है। आवेश पर लगने वाले बल का परिमाण क्या होगा? (2015)
उत्तर-
F = qvB sin θ = qvB sin 30°
F = [latex s=2]\frac { qvB }{ 2 }[/latex] [∵ sin 30° = [latex s=2]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]]

प्रश्न 4.
एक इलेक्ट्रॉन 0.1 न्यूटन/ऐम्पियर-मीटर के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् 105 मीटर/सेकण्ड की चाल से प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन पर लॉरेन्ज बल का मान ज्ञात कीजिए। (2017)
हल-
दिया है, B = 0.1 न्यूटन/ऐम्पियर-मीटर, v = 105 मी/सेकण्ड
लॉरेन्ज बल (F) = qvB = 1.6 x 10-19 x 105 x 0.1 = 1.6 x 10-15 न्यूटन

प्रश्न 5.
एक सीधे लम्बे तार से 2.0 सेमी दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता 10-6 टेस्ला है। तार में वैद्युत धारा ज्ञात कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 6.
साइक्लोट्रॉन किस सिद्धान्त पर कार्य करता है? (2015)
उत्तर-
साइक्लोट्रॉन के कार्य करने का सिद्धान्त यह है कि डीज के बीच लगने वाले प्रत्यावर्ती विभवान्तर की रेडियो आवृत्ति, डीज के भीतर आवेशित कण के परिक्रमण की आवृत्ति के बराबर होनी चाहिए।

प्रश्न 7.
[latex s=2]{ \mu }_{ 0 }{ \varepsilon }_{ 0 }[/latex] का मान ज्ञात कीजिए। संकेतों के सामान्य अर्थ हैं। (2017, 18)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism VSAQ 7

प्रश्न 8.
[latex s=2]{ \mu }_{ 0 }{ \varepsilon }_{ 0 }[/latex] का विमीय सूत्र लिखिए। (2017)
उत्तर-
[L-2T2]

UP Board Solutions

प्रश्न 9.
दिखाइए कि निर्वात में प्रकाश की चात [latex s=2]c=\frac { 1 }{ \sqrt { { \mu }_{ 0 }{ \varepsilon }_{ 0 } } }[/latex] होती है। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 10.
किसी 20 सेमी त्रिज्या के वृत्ताकार लूप में 4 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। लूप के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र की गणना कीजिए। (2012, 13)
हल-
वृत्ताकार धारावाही लूप के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism VSAQ 10
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism VSAQ 10.1

प्रश्न 11.
2.0 मिमी व्यास के ताँबे के तार में 10 ऐम्पियर की धारा है। इस धारा के कारण अधिकतम चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का परिमाप ज्ञात कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 12.
ऐम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए। (2014, 15, 17, 18)
उत्तर-
“किसी बन्द वक्र के परित: चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का रेखा-समाकलन (line-integral) उस बन्द वक्र द्वारा घिरे क्षेत्रफल में से गुजरने वाली कुल वैद्युत धारा का µ0 गुना होता है, जहाँ µ0 निर्वात् की निरपेक्ष चुम्बकशीलता है।” अर्थात्
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism VSAQ 12
जिसमें I पथ द्वारा घिरी नेट धारा है तथा C बन्द पथ की सीमा है।

UP Board Solutions

प्रश्न 13.
एक ऐम्पियर की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
“1 ऐम्पियर वह वैद्युत धारा है जो कि निर्वात् अथवा वायु में 1 मीटर दूर रखे दो समान्तर तारों में प्रवाहित होने पर उसकी प्रति मीटर लम्बाई पर 2 x 10-7 न्यूटन का बल आरोपित करती है।”

प्रश्न 14.
लम्बी धारावाही परिनालिका के भीतरी अक्ष पर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय बल क्षेत्र का सूत्र लिखिए। (2011, 12)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 15.
किसी धारा लूप का क्षेत्रफल 0.25 मी2 है तथा उसमें प्रवाहित धारा 0.5 ऐम्पियर है। इस लूप का चुम्बकीय आघूर्ण क्या होगा? (2017)
हल-
दिया है, A = 0.25 मीटर2, I = 0.5 ऐम्पियर
चुम्बकीय आघूर्ण (M) = IA = 0.5 x 0.25 = 0.125 ऐम्पियर-मी

प्रश्न 16.
एक ऋजु रेखीय चालक में धारा से उत्पन्न चुम्बकीय बल रेखाओं की प्रकृति क्या होगी? (2009)
उत्तर-
वृत्ताकार।

प्रश्न 17.
दो समान्तर धारावाही ऋजुरेखीय तारों के बीच लगने वाले बल का सूत्र लिखिए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q17
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism Q19

प्रश्न 18.
किसी धारावाही अल्पांश dl से r दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए बायो-सेवर्ट नियम को सदिश रूप में लिखिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism VSAQ 18
प्रश्न 19.
चल-कुण्डल धारामापी की सुग्राहिता से क्या तात्पर्य है? (2014)
उत्तर-
यदि किसी धारामापी में थोड़ी-सी धारा प्रवाहित करने से ही पर्याप्त विक्षेप आ जाए तो धारामापी को सुग्राही कहते हैं। कुण्डली में एकांक धारा प्रवाहित करने पर उसमें उत्पन्न विक्षेप को धारामापी की सुग्राहिता कहते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 20.
एक धारामापी को वोल्टमीटर में कैसे बदलते हैं? (2014)
उत्तर-
श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध जोड़ने पर धारामापी वोल्टमीटर में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 21.
किसी चल कुण्डली धारामापी का ऐमीटर और वोल्टमीटर में कैसे रूपान्तरण किया जाता (2015)
उत्तर-

  1. धारामापी की कुण्डली के समान्तर में लघु प्रतिरोध (शन्ट) लगा देते हैं, जिसका मान ऐमीटर की परास पर निर्भर करता है। इस प्रकार चल कुण्डली धारामापी का ऐमीटर में रूपान्तरण हो जाता है।
  2. श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध जोड़ने पर धारामापी वोल्टमीटर में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 22.
99 ओम प्रतिरोध के चल कुण्डली धारामापी में मुख्य धारा का 10% भेजने के लिए आवश्यक शन्ट के प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 23.
चुम्बकीय आघूर्ण की परिभाषा दीजिए। (2017, 18)
हल-
किसी चुम्बकीय द्विध्रुव का चुम्बकीय आघूर्ण वह बल आघूर्ण है जो इस द्विध्रुव को एकांक व एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् रखने पर द्विध्रुव पर लगता है।

प्रश्न 24.
चुम्बकीय बल रेखाओं एवं वैद्युत बल रेखाओं में अन्तर लिखिए। (2017)
हल-

  1. चुम्बकीय बल रेखाएँ बन्द वक्र में होती हैं जबकि वैद्युत बल रेखाएँ बन्द वक्र में नहीं होती हैं। इसका मुख्य कारण चुम्बकीय ध्रुव का विलगित नहीं होना है जबकि धनावेश एवं ऋणावेश विलगित अवस्था में प्राप्त किए जा सकते हैं।
  2. चुम्बकीय बल रेखाओं का किसी चुम्बकीय पदार्थ से किसी भी कोण पर निर्गमन अथवा आगमन सम्भव होता है। जबकि वैद्युत बल रेखाओं को किसी चालक पदार्थ से लम्बवत् निर्गमन अथवा आगमन होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
m द्रव्यमान का इलेक्ट्रॉन (आवेश q), एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में विरामावस्था से त्वरित होता है। सिद्ध कीजिए कि x-दूरी तय करने में इलेक्ट्रॉन द्वारा अर्जित वेग [latex s=2]\sqrt { \frac { 2qEx }{ m } }[/latex] होगा। (2013)
उत्तर-
माना द्रव्यमान m तथा धन आवेश q का एक कण एकसमान वैद्युत क्षेत्र [latex s=2]\vec { E }[/latex] में बिन्दु A पर विराम अवस्था में स्थित है (चित्र 4.8)। वैद्युत क्षेत्र द्वारा आवेशित कण पर आरोपित बल,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 2.
समान गतिज ऊर्जा वाले दो आवेशित कण समरूप चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत प्रवेश करते हैं। यदि उनके द्रव्यमानों का अनुपात 4 : 1 तथा आवेशों का अनुपात 2 : 1 हो तो उनके वृत्तीय पथों की त्रिज्याएँ किस अनुपात में होंगी? (2014)
हल-
यहाँ दोनों कणों की गतिज ऊर्जाएँ समान हैं अर्थात् K1 = K2 = K तथा चुम्बकीय क्षेत्र भी समान हैं।
माना पहले कण का द्रव्यमान व आवेश क्रमशः m1 तथा q1 एवं द्वितीय कण का द्रव्यमान व आवेश क्रमश: m2 तथा q2 हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 3.
एक इलेक्ट्रॉन-धारा में इलेक्ट्रॉन का वेग 2.0 x 107 मीटर/सेकण्ड है। इलेक्ट्रॉन 1.6 x 103 वोल्ट/मीटर के स्थिर वैद्युत क्षेत्र के लम्बवत दिशा में 10 सेमी चलने में 3.4 मिमी विक्षेपित हो जाता है। इलेक्ट्रॉन के विशिष्ट आवेश की गणना कीजिए। (2013)
हल-
यदि कोई इलेक्ट्रॉन E तीव्रता के वैद्युत क्षेत्र में v वेग से लम्बवत् प्रवेश करके इस क्षेत्र में x दूरी तय करने पर y दूरी ऊर्ध्वाधरतः विक्षेपित हो जाए, तो
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism SAQ 3
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 4.
एक प्रोटॉन, एक ड्यूट्रॉन तथा एक α-कण समान विभवान्तर से त्वरित होकर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् प्रवेश करते हैं।
(i) इनकी गतिज ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।
(ii) यदि प्रोटॉन के वृत्ताकार मार्ग की त्रिज्या 10 सेमी हो, तो ड्यूट्रॉन तथा a कण के मार्गों की त्रिज्याएँ क्या होंगी? (2017)
हल-
(i) V वोल्ट विभवान्तर से त्वरित q कूलॉम आवेश की गतिज ऊर्जा
K = qV जूल।
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा Kp = eV (∵ आवेश q = e)
ड्यूट्रॉन की गतिज ऊर्जा Kd = ev (∵ q = e)
α-कण की गतिज ऊर्जा Kα = 2eV (∵ q = 2e)
Kp : Kd : Kα = 1 : 1 : 2
(ii) चुम्बकीय क्षेत्र B में v चाल से गतिमान आवेशित कण (द्रव्यमान m, आवेश q) के वृत्ताकार पथ की त्रिज्या r के लिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism SAQ 4.1

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
एक वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक निगमित कीजिए। (2017, 18)
या
बायो-सेवर्ट का नियम समझाइए। इस नियम का उपयोग करके एक वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र के व्यंजक का निगमन कीजिए। (2014, 16)
उत्तर-
बायो-सेवर्ट का नियम- [संकेत-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 2 का उत्तर पढ़िए।]
वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र- माना एक तार को मोड़कर r मीटर त्रिज्या की वृत्ताकार कुण्डली बनाई गयी है। माना कुण्डली में i ऐम्पियर की (UPBoardSolutions.com) धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली के केन्द्र O पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करने के लिए मान लेते हैं कि कुण्डली की परिधि अनेक अल्पांशों से मिलकर बनी है। इनमें से एक अल्पांश की लम्बाई ∆l है। बायो-सेवर्ट नियम के अनुसार अल्पांश ∆l के कारण O पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism SAQ 5.1

प्रश्न 6.
0.5 एंगस्ट्रॉम त्रिज्या के वृत्त में एक इलेक्ट्रॉन 3 x 105 चक्कर/सेकण्ड की दर से घूमता है। वृत्त के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए। (2017)
हल-
वृत्ताकार मार्ग की त्रिज्या (r) = 0.5 Å = 0.5 x 10-10 मी
इलेक्ट्रॉन की चाल (v) = 3 x 105 चक्कर/से
आवेश (q) = e = 1.6 x 10-19 कूलॉम
इलेक्ट्रॉन की वृत्तीय पथ पर गति के कारण केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism SAQ 6

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
2 x 10-10 मी त्रिज्या के वृत्ताकार मार्ग पर एक इलेक्ट्रॉन 3 x 10-6 मी/से की एक समान चाल से चक्कर लगा रहा है। वृत्ताकार मार्ग के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की गणना कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 8.
किसी 10-5 टेस्ला के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में 10 eV ऊर्जा का एक इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार मार्ग पर परिक्रमा कर रहा है। वृत्ताकार मार्ग की त्रिज्या ज्ञात कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism SAQ 8
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 9.
दो लम्बे समान्तर तारों में हैं i तथा 2i धाराएँ समान दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। यदि तारों के बीच की लम्बवत दूरी 2a हो तब तारों के बीच मध्य बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान व दिशा ज्ञात कीजिए। (2014)
हल-
ऐम्पियर की धारा के कारण बिन्दु P पर चुम्बकीय क्षेत्र
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
परिणामी क्षेत्र कागज के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर होगा।

प्रश्न 10.
2.0 मीटर लम्बी परिनालिका में 1000 फेरे हैं। इसमें 10 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। इसके केन्द्र में उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का मान ज्ञात कीजिए। (2015)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism SAQ 10

प्रश्न 11.
दो लम्बे सीधे तार, जिनमें प्रत्येक में 5.0 ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है, एक-दूसरे के समान्तर 2.5 सेमी की दूरी पर रखे हैं। तारों की 10.0 सेमी लम्बाई पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 12.
एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में एक धारावाही आयताकार कुण्डली लटकायी गई है। इस पर लगने वाले बल युग्म के आघूर्ण का व्यंजक प्राप्त कीजिए। (2017)
हल-
एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित धारा-लूप (अथवा कुण्डली अथवा परिनालिका) को व्यवहार ठीक वैसा ही होता है जैसा दण्ड-चुम्बक का। हमने यह पढ़ा है कि चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित धारा-लूप पर एक बल-युग्म लगता है जो कि लूप को ऐसी स्थिति में घुमाने की प्रवृत्ति रखता है जिसमें कि लूप की अक्ष चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर हो जाये। ठीक इसी प्रकार, चुम्बकीय क्षेत्र में लटकाया गया दण्ड-चुम्बक भी घूम (UPBoardSolutions.com) कर ऐसी स्थिति में ठहरता है जिसमें कि चुम्बक की अक्ष चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर हो जाती है। स्पष्ट है कि चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित दण्ड-चुम्बक पर भी एक बल-युग्म लगता है जो कि चुम्बक की अक्ष को क्षेत्र के समान्तर करने की प्रवृत्ति रखता है। चुम्बक के परमाणवीय मॉडल के अनुसार, चुम्बक का प्रत्येक परमाणु एक नन्हा धारा-लूप होता है तथा ये सभी धारा-लूप एक ही दिशा में संरेखित होते हैं चुम्बकीय क्षेत्र में इन नन्हें धारा-लूपों पर लगने वाले बल-युग्मों का योग ही चुम्बक पर लगने वाला बल-युग्म होता है (चित्र 4.12)।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

हम जानते हैं कि चुम्बकीय क्षेत्र [latex s=2]\vec { B }[/latex] में, क्षेत्र की दिशा से θ कोण पर स्थित धारा-लूप पर लगने वाले बल-युग्म का आघूर्ण
= (iA) B sin θ
जहाँ A धारा-लूप को क्षेत्रफल है। यदि दण्ड-चुम्बक में N धारा-लूप हों, तब पूरे चुम्बक पर लगने वाले बल-युग्म का आघूर्ण
T = (NiA) B sin θ …..(1)
चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित दण्ड-चुम्बक, धारा-लूप अथवा धारावाही कुण्डली का व्यवहार वैद्युत क्षेत्र में स्थित वैद्युत द्विध्रुव के व्यवहार के सदृश है। यही कारण है कि दण्ड-चुम्बक, धारा-लूप, धारावाही कुण्डली, इत्यादि ‘चुम्बकीय द्विध्रुव’ (magnetic dipole) कहलाते हैं। हम जानते हैं कि वैद्युत क्षेत्र [latex s=2]\vec { E }[/latex] में क्षेत्र की दिशा से कोण पर स्थित वैद्युत द्विध्रुव पर एक बल-युग्म लगता है, जिसका आघूर्ण निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है-
t = pE sin θ …..(2)
जहाँ, p वैद्युत द्विध्रुव का आघूर्ण है। समीकरण (1) व (2) की तुलना से यह स्पष्ट है कि राशि NiA, वैद्युत द्विध्रुव के आघूर्ण p के समतुल्य है। इसे चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण’ अथवा दण्ड-चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण’ (magnetic moment) M कहते हैं, अर्थात्
M= NiA
चुम्बकीय आघूर्ण एक सदिश राशि है। यह चुम्बकीय अक्ष के अनुदिश दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की । ओर दिष्ट होता है।
अब, समीकरण (1) से, दण्ड-चुम्बक पर लगने वाले बल-युग्म का आघूर्ण
t = MB sin θ

UP Board Solutions

प्रश्न 13.
चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा दीजिए। बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित चुम्बकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए। (2017)
या
चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा लिखिए। (2018)
उत्तर-
चुम्बकीय द्विध्रुव की ध्रुव सामर्थ्य तथा चुम्बक की प्रभावी लम्बाई के गुणनफल की चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं। इसे ‘M’ से प्रकट करते हैं।
जब किसी चुम्बकीय द्विध्रुव को एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो इस पर एक बल-युग्म का आघूर्ण कार्य करता है जो कि चुम्बकीय द्विध्रुव को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयत्न करता है। अत: चुम्बकीय द्विध्रुव को चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा से घुमाने – में कार्य करना पड़ता है। यह कार्य ही चुम्बकीय द्विध्रुव में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
माना एक चुम्बकीय द्विध्रुव जिसका चुम्बकीय द्विध्रुव-आघूर्ण M है। एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में क्षेत्र की दिशा से से कोण बनाते हुए स्थित है अत: चुम्बकीय द्विध्रुव पर कार्यरत बल-युग्म का आघूर्ण
τ = MB sin θ
चुम्बकीय द्विध्रुव को इस स्थिति से अत्यन्त सूक्ष्म कोण dθ घुमाने में किया गया कार्य
dW = tdθ = MB sin θ dθ
इसी प्रकार चुम्बकीय द्विध्रुवे को चुम्बकीय क्षेत्र में अभिविन्यास θ1 से अभिविन्यास θ2 तक घुमाने में किया गया कार्य
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 14.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन 5.0 x 10-11 मी त्रिज्या की कक्षा में 2 x 106 मी/से की चाल से गति कर रहा है। परमाणु का चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए। (2017)
या
एक परमाणु में इलेक्ट्रॉन 0.50 Å त्रिज्या की कक्षा में 4 x 1015 चक्कर/से से घूम रहा है। परमाणु के चुम्बकीय आघूर्ण का मान ज्ञात कीजिए। (2018)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 15.
एक धारामापी की कुण्डली का प्रतिरोध 100 ओम है। 5.0 मिली ऐम्पियर धारा से इसमें पूर्ण स्केल विक्षेपण प्राप्त होता है। इसे 0 से 10 ऐम्पियर परास के अमीटर में कैसे परिवर्तित करेंगे? (2014)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
साइक्लोट्रॉन के सिद्धान्त एवं कार्य विधि का संक्षिप्त विवरण दीजिए। साइक्लोट्रॉन की सीमाओं का उल्लेख कीजिए। (2017)
हल-
सिद्धान्त- चुम्बकीय क्षेत्र में परिक्रमण करने वाले आवेशित कणों की परिक्रमण आवृत्ति कण की ऊर्जा पर निर्भर नहीं करती है। अत: क्रॉसित (परस्पर लम्बवत्) वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों का उपयोग कर आवेशित कण को चुम्बकीय क्षेत्र की सहायता से बार-बार एक ही वैद्युत क्षेत्र से गुजारकर उसको उच्च ऊर्जा तक त्वरित किया जा सकता है।

कार्य-विधि- माना m द्रव्यमान तथा +q आवेश का एक आयन, आयन-स्रोत से उस क्षण निर्गत होता है जबकि D2 ऋण विभव पर है। यह आयनन डीज के बीच के अन्तराल में विद्यमान वैद्युत क्षेत्र के द्वारा D2 की ओर को त्वरित होकर D2 में वेग v (माना) से प्रवेश कर जाता है। डीज के भीतर प्रवेश करते ही यह आयन डीज की धात्विक दीवारों द्वारा वैद्युत क्षेत्र से परिरक्षित कर दिया जाता है। अब डीज के तल के लम्बवत् चुम्बकीय क्षेत्र के कारण आयन नियत चाल v से त्रिज्या r के वृत्ताकार पथ पर चलने लगता है। आयन की वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल, उस पर कार्यरत चुम्बकीय बल से प्राप्त होता है। अतः अभिकेन्द्र बल = चुम्बकीय बल।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism LAQ 1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
साइक्लोट्रॉन की सीमाएँ-
(i) साइक्लोट्रॉन द्वारा अनावेशित कण जैसे- न्यूट्रॉन (जो कि नाभिकीय क्रियाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रक्षेप्य कण है) को त्वरित नहीं किया जा सकता है।
(ii) साइक्लोट्रॉन द्वारा इलेक्ट्रॉनों को त्वरित नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनका द्रव्यमान बहुत कम होता है, अतः सूक्ष्म गतिज ऊर्जा ग्रहण कर ही ये बहुत उच्च वेग से गति करने लगते हैं।
(iii) साइक्लोट्रॉन द्वारा आवेशित कणों को इतने उच्च वेग तक त्वरित नहीं किया जा सकता है कि उनका वेग प्रकाश के वेग के तुल्य हो जाए क्योंकि इतने उच्च (UPBoardSolutions.com) वेग पर आवेशित कणों का द्रव्यमान नियत न रहकर वेग के साथ परिवर्तित होता हैं। यदि आवेशित कण का विराम द्रव्यमान m0 हो तथा v वेग से गति करते समय कण का वेग m हो, तब
[latex s=2]m=\frac { { m }_{ 0 } }{ \sqrt { 1-\frac { { v }^{ 2 } }{ { c }^{ 2 } } } }[/latex]
जहाँ, c निर्वात् में प्रकाश की चाल है।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता से सम्बन्धित बायो-सेवर्ट नियम की व्याख्या कीजिए। बायो-सेवर्ट नियम की समीकरण से निर्वात की चुम्बकशीलता का मात्रक एवं विमीय समीकरण निकालिए। (2017)
या
बायो-सेवर्ट नियम को शब्दों तथा सूत्र में लिखिए। (2011)
या
बायो-सेवर्ट नियम का उल्लेख कीजिए। (2013, 17, 18)
या
किसी धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के सम्बन्ध में बायो-सेवर्ट के नियम का उल्लेख कीजिए। (2015)
उत्तर-
बायो-सेवर्ट का नियम (Biot-Savart Law)- सन् 1820 में बायो तथा सेवर्ट ने धारावाही चालकों द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए अनेक प्रयोग किये। इन प्रयोगों के आधार पर उन्होंने बताया कि किसी धारावाही चालक के एक अल्पांश ∆l के द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में किसी बिन्दु P पर क्षेत्र का मान ∆B निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism LAQ 2.1UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 3.
ऐम्पियर के परिपथीय नियम का उपयोग करके एक अनन्त लम्बाई के सीधे धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र स्थापित कीजिए। (2014)
या
ऐम्पियर के परिपथीय नियम का उपयोग करके अनन्त लम्बाई के सीधे धारावाही तार के निकट किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 4.
ऐम्पियर के परिपथीय नियम की सहायता से धारावाही परिनालिका के अन्दर उसकी अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र के सूत्र की स्थापना कीजिए। (2015)
उत्तर-
माना एक लम्बी परिनालिका की प्रति मीटर लम्बाई में तार के n फेरे हैं तथा इसमें i ऐम्पियर की धारा बह रही है। माना एक आयताकार बन्द पथ a b c d है जिसकी भुजा a b परिनालिका की अक्ष के समान्तर है तथा भुजाएँ। c तथा a d बहुत लम्बी हैं जिससे कि यह माना जा सके कि (UPBoardSolutions.com) भुजा c d परिनालिका से बहुत दूर है तथा इस भुजा पर परिनालिका के कारण चुम्बकीय क्षेत्र नगण्य है। जब परिनालिका लम्बी है। तथा आयताकार बन्द पथ परिनालिका के किसी भी किनारे के बहुत समीप नहीं है, तो क्षेत्र b c तथा a d भुजाओं के लम्बवत् हैं।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism LAQ 4UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism LAQ 4.2

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल [latex s=2]\frac { F }{ l } =\frac { { \mu }_{ 0 } }{ 2\Pi } =\frac { { i }_{ 1 }{ i }_{ 2 } }{ r }[/latex] न्यूटन/मीटर के लिए सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। उपर्युक्त सूत्र के आधार पर धारा के एक ऐम्पियर की परिभाषा दीजिए। (2017)
या
दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच क़ार्य करने वाले बल का सूत्र ज्ञात कीजिए। (2012, 17, 18)
या
दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल के लिए सूत्र स्थापित कीजिए। इसके आधार पर वैद्युत धारा के मात्रक ऐम्पियर की परिभाषा दीजिए। (2013)
या
L मीटर लम्बाई के दो समान्तर तारों, जिनके मध्य की दूरी r मीटर है तथा जिनमें i1 और i2 ऐम्पियर की विद्युत धाराएँ प्रवाहित हैं, के मध्य प्रति एकांक लम्बाई पर बल का सूत्र [latex s=2]\frac { F }{ L } =\frac { { \mu }_{ 0 } }{ 2\Pi } =\frac { { i }_{ 1 }{ i }_{ 2 } }{ r }[/latex] व्युत्पादित कीजिए। इस सूत्र से ऐम्पियर की परिभाषा दीजिए। (2015)
उत्तर-
धारावाही चालक के चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है तथा चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित धारावाही चालक पर एक बल कार्य करता है। अत: यदि एक धारावाही चालक के निकट कोई दूसरा धारावाही चालक रखा जाये तो यह चालक पहले चालक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के (UPBoardSolutions.com) कारण एक बल का अनुभव करेगा। इसी प्रकार पहला धारावाही चालक दूसरे धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के कारण एक बल अनुभव करेगा। स्पष्ट है कि पास-पास रखे दो धारावाही चालक चुम्बकीय क्षेत्र की पारस्परिक क्रिया के कारण एक-दूसरे पर बल लगाते हैं।

पारस्परिक बल का परिमाण एवं प्रकृति- माना दो लम्बे ऋजुरेखीय तार P९ तथा RS वायु या निर्वात् में एक-दूसरे के समीप परस्पर समान्तर रखे हैं। इनके बीच की दूरी r है (चित्र 4.20)। माना PQ एवं RS में प्रवाहित धाराएँ क्रमशः i1 एवं i2 हैं। PQ में प्रवाहित धारा । के कारण चालक RS के किसी भी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
इसकी दिशा भी फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम अथवा दायें हाथ की हथेली के नियम नं० 2 से निर्धारित की जाएगी। यदि धारा i2 उसी दिशा में है जिसमें i1 है तो PQ पर लगने वाला बल चालक RS की ओर दिष्ट होगा। [चित्र 4.20 (a)] और यदि यह विपरीत दिशा में है तो यह RS से दूर (UPBoardSolutions.com) दिष्ट होगा [चित्र 4.20 (b)]। अतः उपर्युक्त विवेचना से यह स्पष्ट होता है कि यदि दो समान्तर तारों में धाराएँ एक ही दिशा में हैं तो वे एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और यदि धाराएँ विपरीत दिशा में हैं तो तार एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

प्रश्न 6.
आवश्यक सिद्धान्त देते हुए चल कुण्डली गैल्वेनोमीटर की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। (2014)
या
चल कुण्डली धारामापी का सिद्धान्त एवं कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसकी सुग्राहिता किस प्रकार बढ़ायी जा सकती है? (2017)
या
निम्नलिखित चल कुण्डली धारामापी का सिद्धान्त लिखिए एवं उसकी धारा सुग्राहिता का व्यंजक ज्ञात कीजिए। (2018)
उत्तर-
चल कुण्डली गैल्वेनोमीटर- ये निम्न दो प्रकार के होते हैं
1. निलम्बित कुण्डली धारामापी- यह वैद्युत-धारा के संसूचन (detection) तथा मापन (measurement) के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला उपकरण है। इसकी क्रिया चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही कुण्डली पर कार्यरत् बलाघूर्ण पर आधारित है।
संरचना- इसमें एक आयताकोर कुण्डली होती है जोकि ताँबे के पतले पृथक्कृत (insulated) तार के ऐलुमीनियम के फ्रेम के ऊपर लपेटकर बनायी जाती है (चित्र 4.21)।

इस कुण्डली को एक पतली फॉस्फर-ब्रॉन्ज मरोड़ टोपी (phosphor-bronze) की पत्ती (strip) से एक स्थायी घोड़ा-नाल चुम्बक (horse-shoe magnet) NS के बेलनाकार ध्रुव-खण्डों फॉस्फर-ब्रॉन्ज (pole-pieces) के बीच लटकाया जाता है। पत्ती को ऊपरी सिरा एक मरोड़ टोपी (torsion head) से जुड़ा होता है। कुण्डली का निचला सिरा एक अत्यन्त पतले की कुण्डली का फ्रेम फॉस्फर-ब्रॉन्ज के तार के ढीले-वेष्ठित स्प्रिंग (loosely-wound spring) से जुड़ा होता है। कुण्डली के भीतर एक नर्म लोहे की क्रोड C सममित तथा बिना कुण्डली को स्पर्श किए रखी जाती है। क्रोड बल-रेखाओं को संकेन्द्रित कर देती है तथा इस प्रकार (UPBoardSolutions.com) ध्रुव-खण्डों के स्प्रिंग छ। बीच चुम्बकीय क्षेत्र ‘प्रबल हो जाता है। निलम्बन पत्ती (suspension strip) के। निचले भाग पर एक छोटा दर्पण (mirror) M लगा होता है, जो पत्ती के साथ-साथ घूमती है तथा जिसका विक्षेप एक लैम्प तथा पैमाने (lamp and scale arrangement) की सहायता से पढ़ा जा सकता है। सम्पूर्ण प्रबन्ध को एक धात्विक बक्से में बन्द रखा जाता है (चित्र 4.21 में प्रदर्शित नहीं) जिसके सामने की ओर काँच की एक खिड़की तथा आधार पर समतलकारी पेंच (levelling screws) लगे होते हैं।

धारा जिसको मापने करना हो, एक टर्मिनल (terminal) T1 से प्रवेश करती है तथा निलम्बन, कुण्डली व स्प्रिंग से होकर दूसरे टर्मिनल T2 से निर्गत होती है। स्थायी चुम्बक के ध्रुव खण्ड बेलनाकार रखे जाते हैं ताकि कुण्डली की प्रत्येक स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र त्रिज्य (radial) रहे अर्थात् कुण्डली का तल प्रत्येक स्थिति में बल-रेखाओं के समान्तर रहे।
सिद्धान्त- जब कुण्डली में धारा 1 प्रवाहित की जाती है तो कुण्डली पर लगने वाला बल-आघूर्ण
T= N i AB sin 90° = NiBA

यहाँ θ कुण्डली के तल पर लम्ब की दिशा तथा चुम्बकीय क्षेत्र [latex s=2]\vec { B }[/latex] की दिशा के बीच कोण है। A कुण्डली का क्षेत्रफल तथा N कुण्डली में फेरों की संख्या है।
धारामापी में चुम्बकीय क्षेत्र [latex s=2]\vec { B }[/latex] को, ध्रुवखण्डों N व S को बेलनाकार बनाकर तृथा कुण्डली के भीतर नर्म लोहे की बेलनाकार क्रोड रखकर “त्रिज्य’ (radial) बनाया जाता है। इस दिशा में कुण्डली के तल पर अभिलम्ब चुम्बकीय क्षेत्र B से सदैव समकोण पर होगा (चित्र 4.21) अर्थात् θ = 90° होगा। अत: कुण्डली पर कार्यरत् बलाघूर्ण
t = Ni B A sinθ [θ= 90°]
= NiB A

यदि निलम्बन पत्ती की मरोड़ दृढ़ता (torsional rigidity) c हो तथा निलम्बन पत्ती में ऐंठन Φ हो, तो प्रत्यानयन बल-युग्म = cΦ होगा।
साम्यावस्था के लिये,
विक्षेपक बल-युग्म आघूर्ण = प्रत्यानयन बल-युग्म का आघूर्ण
N i A B = cΦ
i = [latex s=2]\frac { c }{ NAB }[/latex] Φ = kΦ
जहाँ, k = c/NAB उपकरण का (UPBoardSolutions.com) नियतांक है। जिसे धारा परिवर्तन गुणांक (current reduction factor) भी कहते हैं। अतः धारामापी में प्रवाहित धारा, उत्पन्न विक्षेप के अनुक्रमानुपाती होती है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

2. कीलकित-कुण्डली अथवा वेस्टन धारामापी- यह भी चल कुण्डली धारामापी है। यह निलम्बित-कुण्डली धारामापी की अपेक्षा कुछ कम सुग्राही होता है परन्तु अधिक सुविधाजनक है। इसमें ताँबे के महीन पृथक्कृत तार की, ऐलुमीनियम के फ्रेम पर लिपटी कुण्डली एक स्थायी तथा शक्तिशाली नाल-चुम्बक के ध्रुव-खण्डों के बीच दो चूलों (pivots) पर झूलती है (चित्र 4.22)। कुण्डलियों के दोनों सिरों पर चूलों के पास दो क्रोड स्प्रिंग लगे रहते हैं जो कुण्डली के घूमने पर ऐंठन बल-युग्म उत्पन्न करते हैं तथा कुण्डली को दो कुण्डली स्प्रिंग : सम्बन्धक-पेचों T1 व T2 से जोड़ते हैं। कुण्डली का विक्षेप पढ़ने के लिए कुण्डली के साथ एक ऐलुमीनियम का (UPBoardSolutions.com) लम्बा संकेतक लगा रहता है जो एक वृत्ताकार पैमाने पर घूमता है। पैमाने पर बराबर दूरियों पर चिह्न लगे रहते हैं तथा शून्यांक चिह्न बीच में होता है। अतः धारामापी के सम्बन्धक-पेचों पर धन व ऋण के चिह्न नहीं बने होते। चुम्बकीय क्षेत्र को त्रिज्य बनाने के लिए इससे भी ध्रुव-खण्ड अवतलाकार कटे होते हैं तथा कुण्डली के अन्दर मुलायम लोहे की क्रोड लगी होती है। इसका सिद्धान्त के कार्यविधि चल-कुण्डली धारामापी के समान ही है। इसकी सहायता से 10-6 ऐम्पियर तक की वैद्युत धारा नापी जा सकती है। धारामापी की सुग्राहिता N, A तथा B का मान बढ़ाकर तथा c का मान कम करके बढ़ाई जा सकती है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism

प्रश्न 7.
किसी धारामापी को अमीटर में कैसे परिवर्तित करेंगे? उपयुक्त परिपथ द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2014, 18)
उत्तर-
धारामापी का अमीटर में रूपान्तरण- अमीटर वह यन्त्र है जो वैद्युत परिपथ में धारा की प्रबलता सीधे ऐम्पियर में नापने के काम आता है। मिलीऐम्पियर की कोटि की धारा नापने वाले यन्त्र को मिलीअमीटर कहते हैं।

अमीटर मूलतः धारामापी ही होता है जिसे परिपथ के श्रेणीक्रम में डाल देते हैं ताकि नापी जाने वाली सम्पूर्ण धारा इसमें से होकर जाये। तब अमीटर में उत्पन्न विक्षेप अमीटर से होकर जाने वाली धारा की माप देगा (Φ ∝ i)। परन्तु चूँकि अमीटर की अपनी कुण्डली का भी कुछ प्रतिरोध होता है (UPBoardSolutions.com) अतः इसे परिपथ के श्रेणीक्रम में जोड़ने पर परिपथ का प्रतिरोध बढ़ जायेगा जिससे परिपथ में धारा घट जायेगी। अतः अमीटर द्वारा पढ़ा गया धारा का मान, उस धारा के मान से कम होगा जिसे नापना था। अत: यह आवश्यक है कि अमीटर का अपना प्रतिरोध, जितना हो सके कम होना चाहिए ताकि इसे परिपथ में डालने पर नापी जाने वाली धारा का मान न बदले।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
स्पष्ट है इस त्रुटि को पूर्णतः दूर करने के लिए RA का मान शून्य होना चाहिए अर्थात् एक आदर्श अमीटर का अपना प्रतिरोध शून्य होना चाहिए परन्तु शून्य प्रतिरोध का (UPBoardSolutions.com) अमीटर प्राप्त नहीं किया जा सकता। अतः व्यवहार में, एक अच्छे अमीटर का अपनी प्रतिरोध परिपथ में उपस्थित अन्य प्रतिरोधों की तुलना में बहुत कम होना चाहिए अर्थात्
RA << R1 + R2
तब i का मान लगभग i के ही बराबर होगा।

साधारणतः कीलकित (pivoted type) चल-कुण्डली धारामापी को। ही अमीटर के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इसके लिए इसकी कुण्डली के समान्तर क्रम में एक छोटा प्रतिरोध डाल देते हैं जिसे ‘शन्ट’ (shunt) कहते हैं (चित्र 4.24)। इस प्रबन्ध का संयुक्त प्रतिरोध धारामापी की (UPBoardSolutions.com) कुण्डली तथा शन्ट दोनों के अलग-अलग प्रतिरोधों से कम होता है। अतः जब इसे किसी परिपथ में डालते हैं तो अमीटर यह परिपथ की धारा में कोई विशेष परिवर्तन नहीं करता। इस प्रकार । चित्र 4.24 यह प्रबन्ध एक अच्छे अमीटर का कार्य करता है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
धारामापी में शन्ट लगाने का एक अन्य लाभ भी है। यदि शन्ट न हो तब परिपथ की पूरी धारा कुण्डली में से होकर जायेगी। इस दशा में धारामापी द्वारा अधिक-से-अधिक उतनी धारा नापी जा सकती है जिससे कि कुण्डली में पूरे पैमाने का विक्षेप (full-scale deflection) हो जाये। शन्ट के होने पर, परिपथ की धारा का केवल एक छोटा भाग ही कुण्डली से होकर जाता है, अधिकांश भाग शन्ट से होकर निकल जाता है। चूंकि कुण्डली का विक्षेप कुण्डली में को जाने वाली धारा के अनुक्रमानुपाती होता है, अत: कुण्डली का विक्षेप (UPBoardSolutions.com) काफी कम हो जाता है। अतः अब परिपथ में पहले से कहीं अधिक धारा होने पर कुण्डली में पूरे पैमाने का विक्षेप होता है। इस प्रकार, शन्टयुक्त धारामापी (अमीटर) कहीं अधिक मान की धारा को नाप सकता है। दूसरे शब्दों में, शन्ट लगाने से मापन की परास (range) बढ़ जाती है। (यद्यपि सुग्राहिता घट जाती है)। वास्तव में शन्ट के प्रतिरोध का मान इसी से निर्धारित किया जाता है कि अमीटर किस परास को बनाना है।

माना कि परिपथ की धारा i है, धारामापी की कुण्डली का प्रतिरोध G तथा शन्ट का प्रतिरोध S है। माना। कि धारा का ig भाग कुण्डली G में तथा शेष भाग (i – ig) शन्ट S में होकर जाता है। चूंकि G व S समान्तर, में हैं, अतः उनके सिरों के बीच एक ही विभवान्तर होगा।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism
यदि कुण्डली में धारा ig, के द्वारा पूरे पैमाने का विक्षेप हो तो परिपथ में धारा i होने पर पूरे पैमाने का विक्षेप होगा। अतः स्पष्ट है कि धारामापी के समान्तर में उपरोक्त मान का शन्ट लगाने पर धारामापी, ऐम्पियर की परास का अमीटर होगा। एक दिये गये धारामापी के लिए ig का मान प्रयोग द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism (गतिमान आवेश और चुम्बकत्व) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 4 Moving Charges and Magnetism (गतिमान आवेश और चुम्बकत्व), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity (विद्युत धारा) are part of UP Board Solutions for Class 12 Physics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity (विद्युत धारा).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Physics
Chapter Chapter 3
Chapter Name Current Electricity (विद्युत धारा)
Number of Questions Solved 118
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity (विद्युत धारा)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी कार की संचायक बैटरी का विद्युत वाहक बल 12 V है। यदि बैटरी को आन्तरिक प्रतिरोध 0.4 Ω हो तो बैटरी से ली जाने वाली अधिकतम धारा का मान क्या है?
हल-
E वैद्युत वाहक बल वाली बैटरी से ली जाने वाली धारा,
I = [latex s=2]\frac { E }{ R+r }[/latex]
जिसमें R बाह्य प्रतिरोध तथा r आन्तरिक प्रतिरोध है।
अधिकतम धारा के लिए बाह्य प्रतिरोध, R = 0
धारा, I = [latex s=2]\frac { E }{ r }[/latex] = [latex s=2]\frac { 12 }{ 0.4 }[/latex] = 30 A

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
10 V विद्युत वाहक बल वाली बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध 3 Ω है, किसी प्रतिरोधक से संयोजित है। यदि परिपथ में धारा का मान 0.5 A हो तो प्रतिरोधक का प्रतिरोध क्या है? जब परिपथ बन्द है तो सेल की टर्मिनल वोल्टता क्या होगी?
हल-
दिया है, बैटरी का वैद्युत वाहक बल E = 10 वोल्ट
बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध = 3 ओम
| परिपथ में धारा I = 0.5 ऐम्पियर
प्रतिरोधक का प्रतिरोध R = ?
बन्द परिपथ में बैटरी की टर्मिनल वोल्टता V= ?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 3.
(a) 1 Ω, 2 Ω और 3 Ω के तीन प्रतिरोधक श्रेणी में संयोजित हैं। प्रतिरोधकों के संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या है?
(b) यदि प्रतिरोधकों का संयोजन किसी 12 V की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है से सम्बद्ध है तो प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टता पात ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
हल-
दिया है, R1 = 1 Ω; R2 = 2 Ω; R3 = 3 Ω
(a) यदि श्रेणी संयोजन में तुल्य प्रतिरोध R हो, तो
R = R1 + R2 + R3 = 1 + 2 + 3 = 6 ओम
(b) दिया है, बैटरी का वै० वा० बल E = 12 वोल्ट
बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध r = 0
तथा बाह्य प्रतिरोध R = 6 ओम
यदि संयोजन द्वारा परिपथ में प्रवाहित धारा i हो, तो
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 4.
(a) 2 Ω, 4 Ω और 5 Ω के तीन प्रतिरोधक पार्श्व में संयोजित हैं। संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा ?
(b) यदि संयोजन को 20 V के विद्युत वाहक बल की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है, से सम्बद्ध किया जाता है तो प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा तथा बैटरी से ली गई कुल धारा का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
(a) समान्तरक्रम में तुल्य प्रतिरोध Rp के लिए
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 5.
कमरे के ताप (27.0°C) पर किसी तापन-अवयव का प्रतिरोध 100 Ω है। यदि तापन-अवयव का प्रतिरोध 117 Ω हो तो अवयव का ताप क्या होगा? प्रतिरोधक के पदार्थ का ताप-गुणांक 1.70 x 10-4°C-1 है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 6.
15 मीटर लम्बे एवं 6.0 x 10-7 m2 अनुप्रस्थ काट वाले तार से उपेक्षणीय धारा प्रवाहित की गई है और इसका प्रतिरोध 5.0 Ω मापा गया है। प्रायोगिक ताप पर तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता क्या होगी?
हल-
दिया है, तार की लम्बाई l = 15 मीटर
तार की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A = 6.0 x 10-7 मीटर
तथा तार का प्रतिरोध R = 5.0 ओम
तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता ρ = ?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q6

UP Board Solutions

प्रश्न 7.
सिल्वर के किसी तार का 27.5°C प प्रतिरोध 2.1 Ω और 100°C पर प्रतिरोध 2.7 Ω है। सिल्वर का प्रतिरोधकता ताप-गुणांक ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 8.
नाइक्रोम का एक तापन-अवयव 230 V की सप्लाई से संयोजित है और 3.2 A की प्रारम्भिक धारा लेता है जो कुछ सेकेण्ड में 2.8 A पर स्थायी हो जाती है। यदि कमरे का ताप 27.0°C है तो तापन-अवयव का स्थायी ताप क्या होगा? दिए गए ताप-परिसर में नाइक्रोम का औसत प्रतिरोध का ताप-गुणांक 1.70 x 10-4°C-1 है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 9.
चित्र 3.2 में दर्शाए नेटवर्क की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित धारा ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q9.1

UP Board Solutions

प्रश्न 10.
(a) किसी मीटर-सेतु में जब प्रतिरोधक S = 12.5 Ω हो तो सन्तुलन बिन्दु, सिरे A से 39.5 cm की लम्बाई पर प्राप्त होता है। R का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। व्हीटस्टोन सेतु या मीटर सेतु में प्रतिरोधकों के संयोजन के लिए मोटी कॉपर की पत्तियाँ क्यों प्रयोग में लाते हैं ?
(b) R तथा S को अन्तर्बदल करने पर उपर्युक्त सेतु का सन्तुलन बिन्दु ज्ञात कीजिए।
(c) यदि सेतु के सन्तुलन की अवस्था में गैल्वेनोमीटर और सेल का अन्तर्बदल कर दिया जाए तब क्या गैल्वेनोमीटर कोई धारा दर्शाएगा?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q10.1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 11.
8 V विद्युत वाहक बल की एक संचायक बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध 0.5 Ω है, को श्रेणीक्रम में 15.5 Ω के प्रतिरोधक का उपयोग करके 120 V के D.C. स्रोत द्वारा चार्ज किया जाता है। चार्ज होते समय बैटरी की टर्मिनल वोल्टता क्या है? चार्जकारी परिपथ में प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में सम्बद्ध करने का क्या उद्देश्य है?
हल-
जब बैटरी को 120 V की D.C. सप्लाई से आवेशित किया जाता है, तो बैटरी में सामान्य अवस्था की अपेक्षा धारा विपरीत दिशा में होगी। अतः बैटरी की टर्मिनल वोल्टता,
V = E + Ir
यहाँ विद्युत वाहक बल, E = 8 V, आन्तरिक प्रतिरोध r = 0.5 Ω
परिपथ में धारा,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q11
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
श्रेणी-प्रतिरोध बाह्य D.C. सप्लाई से ली गई धारा को सीमित करता है। बाह्य प्रतिरोध की अनुपस्थिति में संचायक बैटरी द्वारा अनुमेय सुरक्षित धारा के मान से अधिक धारा प्रवाहित हो सकती है।

प्रश्न 12.
किसी पोटेशियोमीटर व्यवस्था में, 1.25 V विद्युत वाहक बल से एक सेल का सन्तुलन बिन्दु तार के 35.0 cm लम्बाई पर प्राप्त होता है। यदि इस सेल को किसी अन्य सेल द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो सन्तुलन बिन्दु 63.0 cm पर स्थानान्तरित हो जाता है। दूसरे सेल का विद्युत वाहक बल क्या है ?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 13.
किसी ताँबे के चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व 8.5 x 1028 m3 आकलित किया गया है। 3 m लम्बे तार के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अपवाह करने में इलेक्ट्रॉन कितना समय लेता है? तार की अनुप्रस्थ-काट 2.0 x 10-6 m2 है और इसमें 3.0 A धारा प्रवाहित हो रही है।
हल-
दिया है, इलेक्ट्रॉन का संख्या घनत्व n = 8.5 x 1028 m3
तार की लम्बाई l = 3 m
तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A = 20 x 10-6 m2
तार में धारा i = 3.0 A
इलेक्ट्रॉन का आवेश e = 1.6 x 10-19 C
माना तार के एक (UPBoardSolutions.com) सिरे से दूसरे सिरे तक प्रवाहित होने में इलेक्ट्रॉन द्वारा लिया गया समय t है, तब सूत्र
i = neAvd से,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q13.1

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 14.
पृथ्वी के पृष्ठ पर ऋणात्मक पृष्ठ-आवेश घनत्व 10-9 C cm-2 है। वायुमण्डल के ऊपरी भाग और पृथ्वी के पृष्ठ के बीच 400 kV विभवान्तर (नीचे के वायुमण्डल की कम चालकता के कारण) के परिणामतः समूची पृथ्वी पर केवल 1800 A की धारा है। यदि वायुमण्डलीय विद्युत क्षेत्र बनाए (UPBoardSolutions.com) रखने हेतु कोई प्रक्रिया न हो तो पृथ्वी के पृष्ठ को उदासीन करने हेतु (लगभग) कितना समय लगेगा? (व्यावहारिक रूप में यह कभी नहीं होता है। क्योंकि विद्युत आवेशों की पुनः पूर्ति की एक प्रक्रिया है यथा पृथ्वी के विभिन्न भागों में लगातार तड़ित झंझा एवं तड़ित का होना)। (पृथ्वी की त्रिज्या = 6.37 x 106 m);
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 15.
(a) छह लेड एसिड संचायक सेलों, जिनमें प्रत्येक का विद्युत वाहक बल 2Vतथा आन्तरिक प्रतिरोध 0.015 Ω है, के संयोजन से एक बैटरी बनाई जाती है। इस बैटरी का उपयोग 8.5 Ω प्रतिरोधक जो इसके साथ श्रेणी सम्बद्ध है, में धारा की आपूर्ति के लिए किया जाता है। बैटरी से कितनी (UPBoardSolutions.com) धारा ली गई है एवं इसकी टर्मिनल वोल्टता क्या है?
(b) एक लम्बे समय तक उपयोग में लाए गए संचायक सेल का विद्युत वाहक बल 1.9 V और विशाल आन्तरिक प्रतिरोध 380 Ω है। सेल से कितनी अधिकतम धारा ली जा सकती है? क्या सेल से प्राप्त यह धारा किसी कार की प्रवर्तक-मोटर को स्टार्ट करने में सक्षम होगी?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q15.1

प्रश्न 16.
दो समान लम्बाई की तारों में एक ऐलुमिनियम का और दूसरा कॉपर को बना है। इनके प्रतिरोध समान हैं। दोनों तारों में से कौन-सा हल्का है? अतः समझाइए कि ऊपर से जाने वाली बिजली केबिलों में ऐलुमिनियम के तारों को क्यों पसन्द किया जाता है? (ρal = 2.63 x 10-8 Ωm, ρcu = 1.72 x 10-8 Ωm, Al का आपेक्षिक घनत्व = 2.7, कॉपर का आपेक्षिक घनत्व = 8.9)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
स्पष्ट है कि ऐलुमिनियम के तार का द्रव्यमान, कॉपर के तार के द्रव्यमान का आधा है अर्थात् ऐलुमिनियम का तार हल्का है। यही कारण है कि ऊपर से जाने वाले बिजली (UPBoardSolutions.com) के केबिलों में ऐलुमिनियम के तारों का प्रयोग किया जाता है। यदि कॉपर के तारों का प्रयोग किया जाए तो खम्भे और अधिक मजबूत बनाने होंगे।

UP Board Solutions

प्रश्न 17.
मिश्रधातु मैंगनिन के बने प्रतिरोधक पर लिए गए निम्नलिखित प्रेक्षणों से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
हल-
दी गई सारणी के प्रत्येक प्रेक्षण से स्पष्ट है कि
[latex s=2]\frac { V }{ i }[/latex] = 19.7 Ω
इससे स्पष्ट है कि मैंगनिन का प्रतिरोधक लगभग पूरे वोल्टेज परिसर में ओम के नियम का पालन करता है, अर्थात् मैंगनिन की प्रतिरोधकता पर ताप का बहुत कम प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 18.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  1. किसी असमान अनुप्रस्थ काट वाले धात्विक चालक से एकसमान धारा प्रवाहित होती है। निम्नलिखित में से चालक में कौन-सी अचर रहती है-धारा, धारा घनत्व, विद्युत क्षेत्र, अपवाह चाल।
  2. क्या सभी परिपथीय अवयवों के लिए ओम का नियम सार्वत्रिक रूप से लागू होता है? यदि नहीं, तो उन अवयवों के उदाहरण दीजिए जो ओम के नियम का पालन नहीं करते।
  3. किसी निम्न वोल्टता संभरण जिससे उच्च धारा देनी होती है, का आन्तरिक प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए, क्यों?
  4. किसी उच्च विभव (H.T.) संभरण, मान लीजिए 6 kV को आन्तरिक प्रतिरोध अत्यधिक होना चाहिए, क्यों?

हल-

  1. केवल धारा अचर रहती है, जैसा कि दिया गया है। अन्य राशियाँ अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती हैं।
  2. नहीं, ओम का नियम सभी परिपथीय अवयवों पर लागू नहीं होता। निर्वात् नलिकाएँ, (डायोड वाल्व, ट्रायोड वाल्व) अर्द्धचालक युक्तियाँ (सन्धि डायोड तथा ट्रांजिस्टर) इसी प्रकार की युक्तियाँ हैं।
  3. किसी संभरण से प्राप्त महत्तम धारा
    imax = [latex s=2]\frac { E }{ r }[/latex]
    वि० वा० बल कम है; अतः पर्याप्त धारा प्राप्त करने के लिए आन्तरिक प्रतिरोध का कम होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त आन्तरिक प्रतिरोध के अधिक होने से सेल द्वारा दी गई ऊर्जा का अधिकांश भाग सेल के भीतर ही व्यय हो जाता है।
  4. यदि आन्तरिक प्रतिरोध बहुत कम है तो किसी कारणवश लघुपथित होने की दशा में संभरण से अति उच्च धारा प्रवाहित होगी और संभरण के क्षतिग्रस्त होने की संभावना उत्पन्न हो जाएगी।

प्रश्न 19.
सही विकल्प छाँटिए-

  1. धातुओं की मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता प्रायः उनकी अवयव धातुओं की अपेक्षा (अधिक/कम) होती है?
  2. आमतौर पर मिश्रधातुओं के प्रतिरोध का ताप-गुणांक, शुद्ध धातुओं के प्रतिरोध के ताप-गुणांक से बहुत (कम/अधिक) होता है।
  3. मिश्रधातु मैंगनिन की प्रतिरोधकता ताप में वृद्धि के साथ लगभग (स्वतन्त्र है/तेजी से बढ़ती है)।
  4. किसी प्रारूपी विद्युतरोधी (उदाहरणार्थ, अम्बर) की प्रतिरोधकता किसी धातु की प्रतिरोधकता की तुलना में (1022 /1023) कोटि के गुणक से बड़ी होती है?

उत्तर-

  1. अधिक।
  2. कम।
  3. स्वतन्त्र है।
  4. 1022

UP Board Solutions

प्रश्न 20.
(a) आपको Rप्रतिरोध वाले n प्रतिरोधक दिए गए हैं। (i) अधिकतम, (ii) न्यूनतम प्रभावी प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए आप इन्हें किस प्रकार संयोजित करेंगे? अधिकतम और न्यूनतम प्रतिरोधों का अनुपात क्या होगा?
(b) यदि 1 Ω, 2 Ω, 3 Ω के तीन प्रतिरोध दिए गए हों तो उनको आप किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त तुल्य प्रतिरोध हों:
(i) [latex s=2]\frac { 11 }{ 3 }[/latex] Ω
(ii) [latex s=2]\frac { 11 }{ 5 }[/latex] Ω
(iii) 6 Ω
(iv) [latex s=2]\frac { 6 }{ 11 }[/latex] Ω
(c) चित्र 3.7 में दिखाए गए नेटवर्को का तुल्य प्रतिरोध प्राप्त कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q20.1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q20.3

प्रश्न 21.
किसी 0.5 Ω आन्तरिक प्रतिरोध वाले 12 V के एक संभरण (Supply) से चित्र 3.10 में दर्शाए गए अनन्त नेटवर्क द्वारा ली गई धारा का मान ज्ञात कीजिए। प्रत्येक प्रतिरोध का मान 1 Ω है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q21.1
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 22.
चित्र 3.12 में एक पोटेशियोमीटर दर्शाया गया है। जिसमें एक 2.0 V और आन्तरिक प्रतिरोध 0.40 Ω का कोई सेल, पोटेशियोमीटर के प्रतिरोधक तार AB पर वोल्टता पात बनाए A रखता है। कोई मानक सेल जो 1.02 V का अचर विद्युत वाहक बल बनाए रखता है (कुछ mA की बहुत सामान्य धाराओं के लिए) तार की 67.3 cm लम्बाई पर सन्तुलन बिन्दु देता है। मानक सेल से अति न्यून धारा लेना सुनिश्चित करने के लिए । इसके साथ परिपथ में श्रेणी 600 kΩ का एक अति उच्च प्रतिरोध इसके साथ सम्बद्ध किया जाता है, जिसे सन्तुलन बिन्दु प्राप्त होने के निकट लघुपथित (shorted) कर दिया जाता है। इसके बाद मानक सेल को किसी अज्ञात विद्युत वाहक बल E के सेल से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है जिससे सन्तुलन बिन्द तार की 82.3 cm लम्बाई पर प्राप्त होता है।
(a) E का मान क्या है?
(b) 600 kΩ के उच्च प्रतिरोध का क्या प्रयोजन है?
(c) क्या इस उच्च प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(d) क्या परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(e) उपर्युक्त स्थिति में यदि पोटेशियोमीटर के परिचालक सेल का विद्युत वाहक बल 2.0 V के स्थान पर 1.0 V हो तो क्या यह विधि फिर भी सफल रहेगी?
(f) क्या यह परिपथ कुछ mV की कोटि के अत्यल्प विद्युत वाहक बलों (जैसे कि किसी प्रारूपी तापविद्युत युग्म का विद्युत वाहक बल) के निर्धारण में सफल होगी? यदि नहीं, तो आप इसमें किस प्रकार संशोधन करेंगे?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
हल-
(a) विभवमापी के तार की समान विभव प्रवणता के लिए, दो सेलों के वै० वा० बलों की तुलना करने का सूत्र निम्न है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity Q21.1
(b) उच्च प्रतिरोध का प्रयोजन धारामापी में धारा को कम करना है जबकि जौकी संतुलन बिन्दु से दूर है। इससे प्रमाणिक सेल नुकसान (damage) से बचा रहता है।
(c) संतुलन बिन्दु उच्च प्रतिरोध से प्रभावित नहीं होता है, क्योंकि संतुलन की स्थिति में सेल के द्वितीयक परिपथ में धारा नहीं बहती।
(d) परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से संतुलन बिन्दु प्रभावित नहीं होता क्योंकि हमने तार पर विभव प्रवणता पहले से ही नियत रख दी है।
(e) नहीं, क्योंकि विभवमापी के कार्य करने के लिए परिचालक सेल का वै० वी० बल, द्वितीयक परिपथ के सेल के वै० वा० बल (E) से अधिक होना चाहिए।
(f) क्योकि संतुलन बिन्दु सिरे A के निकट होगा तथा मापन में त्रुटि बहुत अधिक होगी। इसके लिए परिचालक सेल के श्रेणीक्रम में एक परिवर्ती प्रतिरोध (R) जोड़ते हैं तथा इसका मान इस प्रकार व्यवस्थित करते हैं कि तार AB के सिरों के बीच विभवपात द्वितीयक सेल के वै० वा० बल से (UPBoardSolutions.com) थोड़ा ही अधिक हो ताकि संतुलन बिन्दु अधिक लम्बाई पर प्राप्त हो, इससे मापन में त्रुटि कम होगी तथा मापने की यथार्थता बढ़ेगी।

UP Board Solutions

प्रश्न 23.
चित्र 3.13 दो प्रतिरोधों की तुलना के लिए विभवमापी परिपथ दर्शाता है। मानक प्रतिरोधक R = 10.0 Ω के साथ सन्तुलन बिन्दु 58.3 cm पर तथा अज्ञात प्रतिरोध X के साथ 68.5 cm पर प्राप्त होता है। X का मान ज्ञात कीजिए। यदि आप दिए गए सेल E से सन्तुलन बिन्दु प्राप्त करने में असफल रहते हैं तो आप क्या करेंगे?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
हल-
कुँजियों K1 तथा K2 को क्रमशः बन्द करके विभवमापी के तार पर सन्तुलन बिन्दु प्राप्त करने पर यदि संगत सन्तुलन लम्बाई क्रमशः l1 तथा l2 हो, तो R के सिरों का विभवान्तर = Kl1 = RI
तथा X के सिरों का विभवान्तर = Kl2 = XI
जहाँ I = विभवमापी के तार में धारा
तथा K = इसकी विभव प्रवणता
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
यदि सन्तुलन बिन्दु प्राप्त नहीं होता है तो इसका अर्थ है कि R या X के सिरों के बीच विभवान्तर विभवमापी के तार AB के सिरों के बीच विभवान्तर से अधिक है। ऐसी स्थिति में बाह्य परिपथ में धारा का मान कम करने के लिए श्रेणीक्रम में एक उचित प्रतिरोध जोड़ना होगा जो बिन्दु C व D के बीच जोड़ा जाएगा।

प्रश्न 24.
चित्र 3.14 में किसी 1.5 V के सेल का आन्तरिक प्रतिरोध मापने के लिए एक 2.0 V को पोटेशियोमीटर दर्शाया गया है। खुले परिपथ में सेल का सन्तुलन बिन्दु 76.3 cm (UPBoardSolutions.com) पर मिलता है। सेल के बाह्य परिपथ में 9.5 Ω रतिरोध का एक प्रतिरोधक संयोजित करने पर सन्तुलन बिन्दु पोटेंशियोमीटर के तार की 64.8 cm लम्बाई पर पहुँच जाता है। सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
हल-
यहाँ वैद्युत वाहक बल E = 1.5 वोल्ट जिसके संगत (जब सेल खुले परिपथ में है) विभवमापी के तार की संगत सन्तुलन लम्बाई l1 = 76.3 सेमी। सेल के साथ बाह्य प्रतिरोध R = 9.5 Ω संयोजित करने पर (अर्थात् जब सेल बन्द परिपथ में है) तो सेल के टर्मिनल विभवान्तर V के संगत लम्बाई l2 = 64.8 सेमी।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी चालक में 3.2 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। प्रति सेकण्ड प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी। (2015)
(i) 2 x 1019
(ii) 3 x 1020
(iii) 5.2 x 1019
(iv) 9 x 1020
उत्तर-
(i) 2 x 1019

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
वैद्युत धारा घनत्व j तथा अपवाह वेग vd में सम्बन्ध है। (2015)
(i) j = nevd
(ii) j = [latex]\frac { ne }{ { v }_{ d } }[/latex]
(iii) j = [latex]\frac { { v }_{ d }e }{ n }[/latex]
(iv) j = [latex]{ v }_{ d }^{ 2 }[/latex]
उत्तर-
(i) j = nevd

प्रश्न 3.
प्रतिरोध की विमा है।
(i) [ML2T-2A-2]
(ii) [M2L3T-2A-2]
(iii) [ML2T-3A-2]
(iv) [ML3T-3A-3]
उत्तर-
(iii) [ML2T-3A-2]

प्रश्न 4.
40 W तथा 60 w के दो बल्ब 220 V लाइन से जोड़े जाते हैं, उनके प्रतिरोधों में अनुपात होगा
(i) 4 : 3
(ii) 3 : 4
(iii) 2 : 3
(iv) 3 : 2
उत्तर-
(iv) 3 : 2

प्रश्न 5.
एक ताँबे के तार को खींचकर 1% लम्बाई में वृद्धि कर दी जाए, तो प्रतिरोध में प्रतिशत परिवर्तन होगा (2009, 12)
(i) 4% वृद्धि
(ii) 2% वृद्धि
(iii) 1% वृद्धि
(iv) 2% कमी
उत्तर-
(ii) 2% वृद्धि

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
50 Ω प्रतिरोध के धात्विक तार को खींचकर उसकी लम्बाई दो गुनी कर देते हैं। उसका नया प्रतिरोध है- (2016)
(i) 25 Ω
(ii) 50 Ω
(iii) 100 Ω
(iv) 200 Ω
उत्तर-
(iv) 200 Ω

प्रश्न 7.
एक 100 वाट-220 वोल्ट का बल्ब 110 वोल्ट की सप्लाई से जुड़ा है। बल्ब में व्यय होने वाली शक्ति होगी। (2017)
(i) 100 वाट
(ii) 50 वाट
(iii) 25 वाट
(iv) 2 वाट
उत्तर-
(iii) 25 वाट

प्रश्न 8.
2 ऐम्पियर की वैद्युत धारा चित्र 3.15 में प्रदर्शित परिपथ में प्रवाहित हो रही है। विभवान्तर (VB – VD) है। (2013)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
(i) 12 वोल्ट
(ii) 6 वोल्ट
(ii) 4 वोल्ट
(iv) 0 वोल्ट
उत्तर-
(iv) 0 वोल्ट

प्रश्न 9.
समान्तर क्रम में जुड़े 10 ओम के दो प्रतिरोधों की तुल्य प्रतिरोध है। (2014)
(i) 20 ओम
(ii) 10 ओम
(iii) 15 ओम
(iv) 5 ओम
उत्तर-
(iv) 5 ओम

प्रश्न 10.
दो प्रतिरोध R तथा 2R एक विद्युत परिपथ में समान्तर क्रम में जुड़े हैं। R तथा 2R में उत्पन्न ऊष्मीय ऊर्जा का अनुपात होगा (2015)
(i) 1 : 2
(ii) 2 : 1
(iii) 1 : 4
(iv) 4 : 1
उत्तर-
(ii) 2 : 1

UP Board Solutions

प्रश्न 11.
एक चालक तार का प्रतिरोध R ओम है। इसको n बराबर भागों में बाँटकर उनको समान्तर क्रम में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध होगा
(i) [latex s=2]\frac { R }{ { n }^{ 2 } }[/latex]
(ii) [latex s=2]\frac { { n }^{ 2 } }{ R }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { n }{ R }[/latex]
(iv) [latex s=2]\frac { R }{ n }[/latex]
उत्तर-
(i) [latex s=2]\frac { R }{ { n }^{ 2 } }[/latex]

प्रश्न 12.
एक प्राथमिक सेल का वि० वा० बल 2.4 V है। इस सेल को जब लघुपथित कर देते हैं तो 4.0 A की वैद्युत धारा प्राप्त होती है। सेल को आन्तरिक प्रतिरोध है। (2014)
(i) 6.0 Ω
(ii) 1.2 Ω
(iii) 4.0 Ω
(iv) 0.6 Ω
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 13.
एक बैटरी जिसका वि० वा० बल 5 वोल्ट है तथा आन्तरिक प्रतिरोध 2.0 ओम है, एक बाहरी प्रतिरोध से जुड़ी है। यदि परिपथ में धारा 0.4 ऐम्पियर हो, तो बैटरी की टर्मिनल वोल्टता है। (2010, 12)
(i) 5 वोल्ट
(ii) 5.8 वोल्ट
(iii) 4.6 वोल्ट
(iv) 4.2 वोल्ट
उत्तर-
(iv) 4.2 वोल्ट

प्रश्न 14.
किरचॉफ का धारा का नियम किसके संरक्षण के परिणामस्वरूप है?
(i) ऊर्जा
(ii) संवेग
(iii) आवेश
(iv) द्रव्यमान
उत्तर-
(iii) आवेश

UP Board Solutions

प्रश्न 15.
5 मीटर लम्बे तथा 5 2 प्रतिरोध वाले विभवमापी के तार में 2 mA की धारा प्रवाहित हो रही है। विभवमापी की विभव-प्रवणता है। (2010)
(i) 2.0 x 10-3 वोल्ट/मीटर
(ii) 2.5 x 10-3 वोल्ट/मीटर
(iii) 1.6 x 10-3 वोल्ट/मीटर
(iv) 2.3 x 10-3 वोल्ट/मीटर
उत्तर-
(i) 2.0 x 10-3 वोल्ट/मीटर

प्रश्न 16.
विभवमापी के प्रयोग में दो सेलों के विद्युत वाहक बल E1 तथा E2 हैं। इन्हें श्रेणीक्रम में जोड़कर विभवमापी के तार पर अविक्षेप बिन्दु 58 सेमी पर प्राप्त होता है। जब E2 विद्युत वाहक बल वाली सेल की ध्रुवता उलट दी जाती है तब अविक्षेप बिन्दु 29 सेमी पर प्राप्त होता है। [latex s=2]\frac { { E }_{ 1 } }{ { E }_{ 2 } }[/latex] का अनुपात है (2014)
(i) 3 : 1
(ii) 2 : 1
(iii) 1 : 3
(iv) 1 : 2
उत्तर-
(ii) 2 : 1

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी चालक के भीतर वैद्युत-क्षेत्र [latex]\vec { E }[/latex] तथा धारा घनत्व [latex]\vec { J }[/latex] में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
[latex]\vec { E }[/latex] = p [latex]\vec { J }[/latex], जहाँ p चालक के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध है।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
समीकरण [latex]\vec { E }[/latex] = p [latex]\vec { J }[/latex] में p को मात्रक लिखिए। (2009)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 2

प्रश्न 3.
किन्हीं दो गुणों से एक चालक और एक अर्द्धचालक का भेद बताइए। (2009)
उत्तर-

  1. चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत अधिक होती है, जबकि अंर्द्धचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन चालकों से कम होते हैं।
  2. चालकों का ताप बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्द्धचालकों का ताप बढ़ाने से उनका प्रतिरोध घटता है।

प्रश्न 4.
विशिष्ट चालकत्व (specific conductance) की परिभाषा दीजिए। इसकी इकाई भी लिखिए।
या
विशिष्ट चालकता के लिए सूत्र एवं मात्रक लिखिए। (2012, 18)
या
किसी चालक पदार्थ की विशिष्ट चालकता क्या है? विशिष्ट चालकता का अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति में मात्रक दीजिए। (2014)
उत्तर-
किसी चालक के पदार्थ के विशिष्ट प्रतिरोध (UPBoardSolutions.com) के व्युत्क्रम को उस पदार्थ की विशिष्ट चालकता (specific conductance) कहते हैं।
इसे ‘[latex s=2]\sigma[/latex]’ से प्रदर्शित करते हैं। अर्थात् [latex s=2]\sigma =\frac { 1 }{ \rho }[/latex] इसकी इकाई म्हो-मीटर-1 होती है।

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
धारा-घनत्व, विशिष्ट चालकता तथा विद्युत-क्षेत्र के बीच परस्पर सम्बन्ध लिखिए तथा इससे विशिष्ट चालकता का मात्रक निकालिए। (2009, 11, 12)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 6.
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग तथा वैद्युत धारा घनत्व में सम्बन्ध लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए। (2015)
हल-
धारा घनत्व (j) = nevd
जहाँ, n= मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या
e = इलेक्ट्रॉन का आवेश
vd = इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग

प्रश्न 7.
ताँबे के एक तार, जिसकी अनुप्रस्थ काट 2 x 10-6 मी2 है; में 3.2 ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है। तार में प्रवाहित धारा-घनत्व का मान ज्ञात कीजिए। (2011, 14)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 7

प्रश्न 8.
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग एवं भ्रांतिकाल में सम्बन्ध लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 9.
एक इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार कक्षा में 6 x 106 चक्कर प्रति सेकण्ड की दर से घूम रहा है। लूप में तुल्य प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 9

प्रश्न 10.
0.5 मिमी त्रिज्या के एक तार में 0.5 ऐम्पियर की धारा बह रही है। यदि तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या 4 x 1028 प्रति मी3 हो, तो उनके अनुगमन वेग की गणना कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 11.
अनओमीय परिपथ से आप क्या समझते हैं? इसका एक उदाहरण दीजिए। (2009)
या
अनओमीय चालक किसे कहते हैं?
या
गत्यात्मक प्रतिरोध का अर्थ क्या है? (2010)
उत्तर-
वे परिपथ (अर्थात् चालक) जिनमें ओम के नियम का पालन नहीं होता है; अर्थात् जिनके सिरों पर आरोपित विभवान्तर V तथा संगत धारा i का अनुपात नियत नहीं रहता है, अनओमीय परिपथ (चालक) कहलाते हैं। ऐसे परिपथों के लिए V तथा i के अनुपात के नियत न रहने का अर्थ है कि (UPBoardSolutions.com) इनका वैद्युत प्रतिरोध परिवर्तनीय होता है। अतः इनके प्रतिरोध को गत्यात्मक प्रतिरोध (dynamic resistance) भी कहते हैं। अनओमीय परिपथ के किसी खण्ड के विभवान्तर में अल्पांश परिवर्तन ΔV तथा उसके संगत धारा में परिवर्तन Δi का अनुपात गत्यात्मक प्रतिरोध के बराबर होता है; अर्थात् गत्यात्मक प्रतिरोध = [latex s=2]\frac { \triangle V }{ \triangle i }[/latex]
उदाहरण- बल्ब को तन्तु तथा डायोड बल्ब।

प्रश्न 12.
एक तार का प्रतिरोध 10 ओम है। इसे दोगुनी लम्बाई तक खींचा जाता है। इसका नया प्रतिरोध क्या होगा?
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 12

प्रश्न 13.
कार्बन प्रतिरोधक के सिरों पर 50 वोल्ट विभवान्तर लगाया जाता है। प्रतिरोधक पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वलयों के रंग क्रमशः लाल, पीला एवं नारंगी हैं। प्रतिरोधक में धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 13

UP Board Solutions

प्रश्न 14.
विशिष्ट प्रतिरोध का मात्रक एवं विमाएँ लिखिए। (2010, 11, 12, 15)
उत्तर-
मात्रक-ओम-मीटर या ओम-सेमी
विमा सूत्र- [ML3T-3A-2]

प्रश्न 15.
पूर्ण प्रज्वलन स्थिति में 100 वाट, 200 वोल्ट के विद्युत बल्ब का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2013)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 15

प्रश्न 16.
एक प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी का प्रतिरोध 0°C ताप पर 3.0 ओम तथा 1000°C पर 3.75 ओम है। किसी अज्ञात ताप पर इसका प्रतिरोध 3.15 ओम है। अज्ञात ताप का मान ज्ञात कीजिए। (2015)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 17.
1000 W – 250 V के हीटर के तार का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2015)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 17

प्रश्न 18.
एक चालक में 50 वोल्ट पर 2 मिली-ऐम्पियर तथा 60 वोल्ट पर 3 मिली-ऐम्पियर धारा बहती है। चालक ओमीय है या अन-ओमीय इसे गणना द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 19.
ऐसे दो पदार्थों के नाम लिखिए जिनकी प्रतिरोधकता ताप बढ़ाने पर घटती है।
उत्तर-
अर्द्धचालक- जर्मेनियम तथा सिलिकॉन।

प्रश्न 20.
किसी धातु के प्रतिरोध पर ताष को क्या प्रभाव पड़ता है? (2015)
उत्तर-
ताप के बढ़ने से किसी धातु के प्रतिरोध का मान बढ़ता है अर्थात् धातु के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध अथवा पदार्थ की प्रतिरोधकता बढ़ जाती है। दूसरे शब्दों में, ताप के बढ़ने पर धातु की वैद्युत चालकता कम हो जाती है।

प्रश्न 21.
ताप बढाने से किसी चालक के प्रतिरोध में वृद्धि को दर्शाने वाला सूत्र लिखिए। (2015)
उत्तर-
जैसे-जैसे तार का ताप बढ़ता है इसके मुक्त इलेक्ट्रॉनों की वर्ग-माध्य-मूल चाल Vrms बढ़ती है। अतः चालक का प्रतिरोध
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 21

UP Board Solutions

प्रश्न 22.
1 किलोवाट के विद्युत बल्ब में 1 मिनट में कितनी ऊर्जा व्यय होगी? (2015)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 22
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 22.1

प्रश्न 23.
60 वाट, 30 वोल्ट के बल्ब को 90 वोल्ट सप्लाई पर जलाने के लिए श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए। (2014)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 24.
दिये गये परिपथ में A और B के बीच तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 24
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 25.
10 Ω प्रतिरोध के तार को 5 बराबर भागों में काट कर उनको समान्तर क्रम में जोड़ा गया है। इस संयोजन का परिणामी प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2014)
हल-
10 Ω के प्रतिरोध को 5 बराबर भागों में बाँटने पर प्रत्येक प्रतिरोध का मान = [latex s=2]\frac { 10 }{ 5 }[/latex] = 2 Ω
माना समान्तर क्रम में जोड़ने पर इनका तुल्य प्रतिरोध R है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 25

प्रश्न 26.
सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से आप क्या समझते हैं? (2015, 16, 18)
उत्तर-
जब किसी सेल की प्लेटों को तार द्वारा जोड़ देते हैं तो तार में वैद्युत धारा सेल की धन-प्लेट से ऋण-प्लेट की ओर तथा सेल के भीतर उसके घोल में ऋण-प्लेट से (UPBoardSolutions.com) धन-प्लेट की ओर बहती है। इस प्रकार, सेल की दोनों प्लेटों के बीच सेल के भीतर वैद्युत धारा के प्रवाह में घोल द्वारा उत्पन्न अवरोध को सेल का ‘आन्तरिक प्रतिरोध’ कहते हैं।

प्रश्न 27.
सेल का आन्तरिक प्रतिरोध किन-किन बातों पर निर्भर करता है? (2018)
उत्तर-
सेल का आन्तरिक प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-

  • सेल के इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी पर- यह दूरी के अनुक्रमानुपाती होता है।
  • वैद्युत-अपघट्य के घोल में इलेक्ट्रोडों के डूबे हुए भागों के क्षेत्रफल पर- यह क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  • वैद्युत-अपघट्य की प्रकृति तथा सान्द्रता पर- विभिन्न वैद्युत-अपघट्यों के लिए आन्तरिक प्रतिरोध भिन्न होता है तथा यह वैद्युत अपघट्य के घोल की सान्द्रता के भी अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 28.
सेल के विद्युत वाहक बल एवं टर्मिनल विभवान्तर में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2012, 13, 15)
उत्तर-
एकांक आवेश को पूरे परिपथ में सेल सहित प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा को सेल का ‘विद्युत वाहक बल’ कहते हैं, जबकि किसी परिपथ (UPBoardSolutions.com) के दो बिन्दुओं के बीच एकांक आवेश को प्रवाहित करने में किए गए कार्य को उन बिन्दुओं के बीच ‘टर्मिनल विभवान्तर’ कहते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 29.
3.2 वोल्ट की एक बैटरी 1.5 ओम प्रतिरोध में 2 ऐम्पियर की धारा भेज रही है। बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2013)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity VSAQ 29

प्रश्न 30.
किसी वैद्युत परिपथ में 2 ऐम्पियर की धारा 5 मिनट तक प्रवाहित करने पर सेल द्वारा 1200 जूल कार्य किया जाता है। सेल के विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए। (2012)
हल-
परिपथ में प्रवाहित वैद्युत आवेश
q = it = 2 x 5 x 60 = 600 कूलॉम
विद्युत वाहक बल = [latex s=2]\frac { 1200 }{ 600 }[/latex] = 2 वोल्ट

प्रश्न 31.
एक सेल से 0.5 ऐम्पियर धारा लेने पर उसका विभवान्तर 1.8 वोल्ट तथा 1.0 ऐम्पियर धारा लेने पर 1.6 वोल्ट हो जाता है। सेल का आन्तरिक प्रतिरोध तथा विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिए। (2015, 16)
हल-
दिया है, (i) जब = 0.5 ऐम्पियर तब
V = 1.8 वोल्ट तथा
(ii) जब
i = 1.0 ऐम्पियर तब
V = 1.6 वोल्ट
V = E – ir …..(1)
प्रथम स्थिति में समी० (1) से,
1.8 = E – (0.5) ….. (2)
द्वितीय स्थिति में समी० (1) से
1.6 = E – (1.0) r …..(3)
समी० (2) व (3) को हल करने पर,
सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r = 0.4 Ω विद्युत वाहक बल
E = 2.0 वोल्ट

UP Board Solutions

प्रश्न 32.
मिश्रितक्रम में सेलों के संयोजन में अधिकतम धारा की क्या शर्त है? (2013)
उत्तर-
बैटरी का कुल आन्तरिक प्रतिरोध = बाह्य परिपथ का प्रतिरोध।

प्रश्न 33.
निम्न चित्र में धारा का मान ज्ञात कीजिए- (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
हल-
बिन्दु P पर धारा i1 = बिन्दु P की ओर आने वाली धाराओं का योग – बिन्दु P से दूर जाने वाली धाराओं का योग
i1 = 2 + 2 – 1 = 3 A
बिन्दु Q पर धारा i2 = i1 – 1 A = 3 – 1 = 2 A
बिन्दु R पर धारा i2 + 1 A = i + 1.2 A
i = (2 + 1 – 1.2) A = 1.8 A

प्रश्न 34.
किरचॉफ का पहला नियम तथा दूसरा नियम किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित है?
उत्तर-
किरचॉफ का पहला नियम आवेश के संरक्षण पर तथा दूसरा नियम ऊर्जा के संरक्षण पर आधारित है।

प्रश्न 35.
व्हीटस्टोन सेतु की सर्वाधिक सुग्राही होने की शर्त क्या है?
उत्तर-
व्हीटस्टोन सेतु के चारों प्रतिरोध जब एक ही कोटि (order) के होते हैं तो यह सर्वाधिक सुग्राही होता है।

प्रश्न 36.
व्हीटस्टोन सेतु में यदि सेल तथा धारामापी की स्थिति को आपस में बदल दिया जाए तो सन्तुलन की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? क्यों? (2009, 14)
उत्तर-
कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका कारण यह है कि सेल तथा धारामापी व्हीटस्टोन सेतु के विकर्णो के सिरों के बीच जुड़े होते हैं। किसी भी एक विकर्ण के सिरों के बीच सेल जोड़ने पर दूसरे विकर्ण के सिरे समविभव पर होने से सेतु सन्तुलित रहता है।

प्रश्न 37.
यदि संलग्न चित्र 3.19 में दिखाया गया व्हीटस्टोन परिपथ सन्तुलित हो, तो अज्ञात प्रतिरोध x का मान बताइए। (2011)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 38.
विभवमापी द्वारा मापे गये सेल का वि० वा० बल यथार्थ क्यों होता है ? (2009, 16)
उत्तर-
क्योंकि विभवमापी से पाठ्यांक तब लिया जाता है जब परिपथ में परिणामी धारा शून्य होती है। अर्थात् सेल खुले परिपथ में होती है।

प्रश्न 39.
विभवमापी की सुग्राहिता से क्या तात्पर्य है? इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है? (2012, 16)
उत्तर-
विभवमापी की सुग्राहिता का अर्थ है कि जौकी को शून्य विक्षेप स्थिति से थोड़ा-सा खिसकाने पर धारामापी में बहुत अधिक विक्षेप उत्पन्न हो जाये। विभवमापी की सुग्राहिता विभव-प्रवणता के व्युत्क्रमानुपाती होती है। परन्तु विभव-प्रवणता K = [latex s=2]\frac { V }{ L }[/latex] (जहाँ V = विभवमापी के तार के सिरों का विभवान्तर), (UPBoardSolutions.com) अत: K ∝ [latex s=2]\frac { 1 }{ L }[/latex] अर्थात् विभवमापी के तार की लम्बाई L बढ़ाने से K का मान कम हो जाएगा; अर्थात् सुग्राहिता बढ़ जाएगी। इस प्रकार विभवमापी की सुग्राहिता में वृद्धि तार की लम्बाई में वृद्धि करके की जा सकती है।

प्रश्न 40.
किसी विभवमापी में 1.0182 वोल्ट विवा०बल के सेल के लिए सन्तुलन बिन्दु 339.4 सेमी लम्बाई पर प्राप्त होता है। विभवमापी की विभव प्रवणता ज्ञात कीजिए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धारा-घनत्व j से आप क्या समझते हैं? इसका मात्रक M.K.S.A. पद्धति में लिखिए तथा विमा सूत्र बताइए। यह सदिश राशि है या अदिश?
या
धारा-घनत्व की परिभाषा दीजिए तथा इसका मात्रक भी लिखिए।
या
धारा घनत्व (j) की परिभाषा लिखिए। (2013)
उत्तर-
धारा-घनत्व (Current Density)- किसी चालक में किसी बिन्दु पर प्रति एकांक क्षेत्रफल से अभिलम्बवत् गुजरने वाली धारा को उस बिन्दु पर ‘धारा-घनत्व’ कहते हैं। इसे j से प्रदर्शित करते हैं। यदि किसी चालक में प्रवाहित धारा , चालक के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A पर एकसमान रूप से वितरित हो, तब उस क्षेत्रफल के किसी बिन्दु पर धारा-घनत्व j = [latex s=2]\frac { i }{ A }[/latex]
M.K.S.A. पद्धति में इसका मात्रक ऐम्पियर प्रति मीटर तथा विमा [AL-2] है। धारा-घनत्व, चालक के भीतर किसी बिन्दु का एक लाक्षणिक गुण है (न कि सम्पूर्ण चालक का) तथा यह एक सदिश राशि है। किसी बिन्दु पर धारा-घनत्व की दिशा उस बिन्दु पर धनावेश के चलने की दिशा होती है।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
किसी धारावाही चालक में धारा घनत्व J, अनुगमन वेग vd, प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा मूल आवेश में सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2017)
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग समझाइए। अनुगमन वेग व धारा-घनत्व के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2016)
या
किसी चालक में प्रवाहित धारा तथा इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह (अनुगमन) वेग में सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2013, 18)
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के लिए विद्युत धारा के पद में व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। (2017)
उत्तर-
मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग- [संकेत- दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1 के उत्तर में पढ़िए।]
धारा तथा अनुगमन वेग में सम्बन्ध- माना किसी धातु में किसी स्थान से t सेकण्ड में मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा ले जाया जाने वाला कुल आवेश q है, तब धातु में वैद्युत धारा
i = [latex s=2]\frac { q }{ t }[/latex] …(1)
माना तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल A है तथा उसके प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n व इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग vd है, तब
एक सेकण्ड में तार के क्षेत्रफल में से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = nAvd
t सेकण्ड में तार के क्षेत्रफल में से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = nAvd x t
तथा t सेकण्ड में तार के क्षेत्रफल में से गुजरने वाले आवेश की मात्रा
q = nAvd x t x e (जहाँ, e = इलेक्ट्रॉन का आवेश है)
q का मान समीकरण (1) में रखने पर। i = neAvd …(2)
यह वैद्युत धारा तथा अनुगमन वेग में सम्बन्ध है।
धारा-घनत्व तथा अनुगमन वेग में सम्बन्ध- हम जानते हैं कि
धारा-घनत्व j = [latex s=2]\frac { i }{ A }[/latex]
समीकरण (2) से हो का मान रखने पर
j = nevd
यह धारा-घनत्व तथा अनुगमन वेग के बीच सम्बन्ध है।

प्रश्न 3.
एक तार के अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल 1 x 10-7 मीटर तथा तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2 x 1028 प्रति मीटर है। तार में 3.2 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। ज्ञात कीजिए-
(i) तार में धारा-घनत्व,
(ii) तार में इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग। (2010)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 4.
L लम्बाई के एक चालक को E विद्युत वाहक बल की सेल से जोड़ा जाता है। यदि इस चालक के स्थान पर समान पदार्थ व समान मोटाई के किसी अन्य चालक जिसकी लम्बाई 3L हो, सेल से जोड़ दिया जाए तब अनुगमन वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (2014).
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 5.
धातुओं में इलेक्ट्रॉनों के अनियमित (मुक्त) वेग और उनके अनुगमन वेग में क्या अन्तर है? (2014)
उत्तर-
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन बन्द बर्तन में भरी गैस के अणुओं की तरह व्यवहार करते हैं तथा धातु के भीतर स्थित धन आयनों के बीच खाली स्थान में उच्च (UPBoardSolutions.com) वेग (105 मी/से) से अनियमित गति करते हैं, यह मुक्त इलेक्ट्रॉनों का वेग है। धातु के सिरों के बीच विभवान्तर होने पर मुक्त इलेक्ट्रॉन अपनी अनियमित गति के होते हुए भी एक निश्चित सूक्ष्म वेग (=10-4 मी/से) से उच्च विभव वाले सिरे की ओर खिसकते हैं, यह अनुगमन वेग है।

प्रश्न 6.
सिद्ध कीजिए कि [latex s=2]\hat { j } =\sigma \vec { E }[/latex] है, जहाँ E चालक का वैद्युत क्षेत्र, [latex s=2]\hat { j } [/latex] धारा घनत्व तथा विशिष्ट चालकता है। (2014)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 7.
ताँबे में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व 8.5 x 1028 /मीटर3 है। 0.2 मीटर लम्बाई तथा 1 मिमी2 परिच्छेद क्षेत्रफल के ताँबे के तार से होकर प्रवाहित धारों का मान ज्ञात कीजिए, जबकि 4 वोल्ट की एक बैटरी जुड़ी है। तार में इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता 4.5 x 10-6 मी2/वोल्ट सेकण्ड है। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 8.
एक तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2 x 1028 प्रति मी है। तार का अपवाह (अनुगमन) वेग 1.0 सेमी/सेकण्ड है। तार में धारा घनत्व की गणना कीजिए। (2013)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 8
प्रश्न 9.
एक चालक में 6.4 ऐम्पियर वैद्युत धारा प्रवाहित होती है। यदि चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या 8 x 1024 प्रति मीटर हो तो उनका अनुगमन वेग ज्ञात कीजिए। (2014)
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 10.
विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा दीजिए तथा मात्रक बताइए। विशिष्ट प्रतिरोध तथा विशिष्ट वैद्युत-चालकता में क्या सम्बन्ध है? या विशिष्ट प्रतिरोध की परिभाषा लिखिए। (2014, 15)
उत्तर-
विशिष्ट प्रतिरोध- ‘‘किसी धारावाही चालक के अन्दर किसी बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता E तथा उस बिन्दु पर धारा-घनत्व ) के अनुपात को चालक का विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं।”
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 11.
किसी धातु के 20 सेमी लम्बे तार को खींच कर इसकी लम्बाई 25% बढ़ा दी जाती है। नये तार के प्रतिरोध में प्रतिशत वृद्धि की गणना कीजिए। (2009)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 11

UP Board Solutions

प्रश्न 12.
चित्र 3.20 में किसी चालक में बहने वाली धारा I तथा उसके सिरों पर लगाए गए विभवान्तर V को ग्राफ द्वारा प्रदर्शित किया I (ऐम्पियर) गया है। चालक का प्रतिरोध, कोण θ के व्यंजक में कितना होगा? (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 12
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 13.
एक बल्ब पर 100 वाट तथा 220 वोल्ट अंकित है। जब बल्ब जल रहा हो, तब उसका प्रतिरोध एवं उसमें प्रवाहित धारा की गणना कीजिए। (2015)
हल-
यदि बल्ब का प्रतिरोध R ओम तथा वह V वोल्ट पर जलता है, तब उसमें क्षय वैद्युत शक्ति (वाट में)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 14.
8 ओम के मोटे तार को खींचकर इसकी लम्बाई दोगुनी कर दी जाती है। तार के नये प्रतिरोध की गणना कीजिए। (2015, 16)
हल-
दिया है, तार का प्रतिरोध (R) = 8 ओम
तार की लम्बाई में वृद्धि (n) = 2
माना तार का नया प्रतिरोध = R’
तब, R’ = n²R = (2)² x 8 = 4 x 8 = 32 ओम

प्रश्न 15.
दिये गये तीन प्रतिरोधों में प्रत्येक का प्रतिरोध 42है तथा प्रत्येक को अधिकतम 64वाट तक की विद्युत शक्ति दी जा सकती है। पूरा परिपथ अधिकतम कितनी शक्ति ले सकता है ? (2012)
हल-
तार में व्यय वैद्युत-शक्ति P = i²R
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 15
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 16.
एक कार्बन प्रतिरोधक की तीन पट्टियों (बैण्ड) के वर्ण कोड़ क्रमशः नीला, काला तथा पीला हैं। यदि इनके सिरों के बीच 30 वोल्ट का विभवान्तर लगाया जाए तब इसमें प्रवाहित धारा क्या है? (2014)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 16

प्रश्न 17.
तीन प्रतिरोध तार हैं। प्रत्येक का प्रतिरोध 4 ओम है। इनके सम्भावित संयोजनों को प्रदर्शित कीजिए तथा प्रत्येक संयोजन में तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2016)
हल-
चित्र 3.22 (a) से,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 18.
एक R ओम प्रतिरोध के तार को खींचकर तीन गुनी लम्बाई की जाती है। इस खींचे तार को । तीन बराबर लम्बाई के तारों में काट कर उन्हें समान्तर क्रम में जोड़ दिया जाता है। इस संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा? (2014)
हल-
माना तार की प्रारम्भिक लम्बाई l है तथा खींचने के पश्चात् l’ है। तार का प्रारम्भिक अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A है तथा खींचने के पश्चात् A’ है। तार का प्रारम्भिक आयतन Al (UPBoardSolutions.com) तथा खींचने के पश्चात् A’l’ होगा। परन्तु खींचने पर तार का आयतन नहीं बदलेगा; अत:
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 19.
सेल के विद्युत वाहक बल से क्या तात्पर्य है ? किसी वोल्टमीटर से सेल का वि० वा० बल सही-सही क्यों नहीं नापा जा सकता है ?
या
किसी सेल के विद्युत वाहक बल से क्या तात्पर्य है? (2014)
उत्तर-
सेल का विद्युत वाहक बल- एकांक आवेश को पूरे परिपथ (सेल सहित) में प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा को सेल का ‘विद्युत वाहक बल’ (electromotive force) कहते हैं। यदि किसी परिपथ में q आवेश प्रवाहित करने पर सेल को W कार्य करना पड़े (ऊर्जा देनी पड़े) तो सेल का वि० वा० बल [latex s=2]\frac { W }{ q }[/latex] यदि W जूल में तथा q कूलॉम में हों तो E का मान वोल्ट (UPBoardSolutions.com) में प्राप्त होता है। यदि किसी परिपथ में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित करने पर सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा 1 जूल हो, तो सेल का वि० वा० बल 1 वोल्ट होता है। वि० वा० बल प्रत्येक सेले का एक लाक्षणिक गुण होता है। सेल के विद्युत वाहक बल का सही मापन करने के लिए, इसको मापने के लिए प्रयुक्त यन्त्र का प्रतिरोध अनन्त होना चाहिए। परन्तु वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनन्त नहीं होता है। इसलिए इससे विद्युत वाहक बल का सही-सही मापन नहीं किया जा सकता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 20.
किसी सेल के टर्मिनल विभवान्तर, वि० वा० बल तथा आन्तरिक प्रतिरोध में सम्बन्ध स्थापित कीजिए तथा दिखाइए कि टर्मिनल विभवान्तर, सेल से ली गयी धारा पर निर्भर करता है। (2009, 16)
या
किसी सेल के विद्युत वाहक बल तथा इसके सिरों के बीच विभवान्तर (टर्मिनल विभवान्तर) में सम्बन्ध का सूत्र स्थापित कीजिए। (2013)
उत्तर-
माना E विद्युत वाहक बल तथा आन्तरिक प्रतिरोध वाली एक, सेल को चित्र 3.23 की भाँति एक कुंजी. K द्वारा किसी बाह्य परिपथ में जोड़ दिया गया है, जिसका प्रतिरोध R है। कुंजी को बन्द करने पर परिपथ में एक नियत धारा । प्रवाहित होने लगती है जिसका मान परिपथ के श्रेणीक्रम में जुड़े अमीटर की सहायता से पढ़ा जाता है।

माना धारा i परिपथ में t समय के लिए प्रवाहित की जाती है। अत: परिपथ में प्रवाहित आवेश q = धारा x समय = i x है, सेल सहित पूरे परिपथ में इस आवेश को प्रवाहित कराने में सेल द्वारा किया गया कार्य (अर्थात् सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा) w हो, तो यह ऊर्जा सेल सहित पूरे परिपथ में निम्नलिखित दो भागों में प्रयुक्त होती है-

ऊर्जा का एक भाग वाडा ; प्रतिरोध R में आवेश १ को प्रवाहित कराने में तथा शेष दूसरा भाग Wआन्तरिक, सेल के आन्तरिक प्रतिरोध r (अर्थात् वैद्युत-अपघट्य) में आवेश q को प्रवाहित कराने में व्यय होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 20
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 22
यही टर्मिनल विभवान्तर तथा सेल के आन्तरिक प्रतिरोध के बीच सम्बन्ध है। इस सम्बन्ध से स्पष्ट है कि जब किसी सेल से वैद्युत धारा ली जा रही होती है; अर्थात् (UPBoardSolutions.com) सेल बन्द परिपथ में होती है तो उसका टर्मिनल विभवान्तर V उसके विद्युत वाहक बल E से कम होता है। ऐसा सेल के आन्तरिक प्रतिरोध में विभव पतन ir के कारण होता है। परन्तु जब सेल को धारा दी जा रही होती है तो उपर्युक्त सूत्र (2) निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है- V = E + ir

प्रश्न 21.
60 ओम के बाह्य प्रतिरोध को बैटरी के टर्मिनलों से जोड़ने पर 0.3 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित होती है तथा प्रतिरोध घटाकर 30 ओम कर देने पर धारा का मान 0.5 ऐम्पियर हो जाता है। बैटरी के वि० वा० बल और आन्तरिक प्रतिरोध की गणना कीजिए। (2014)
हल-
माना बैटरी का विद्युत वाहक बल E तथा आन्तरिक प्रतिरोध है। इससे जुड़े बाह्य प्रतिरोध R में
वैद्युत धारा
i = [latex s=2]\frac { E }{ R+r }[/latex]
⇒ E = i (R + r)
प्रथमं स्थिति में, E = 0.3 (60 + r) …..(1)
द्वितीय स्थिति में, E = 0.5 (30 + r) ……..(2)
समी० (1) व (2) से,
0.3 (60 + r) = 0.5 (30 + r)
18 + 0.3r = 15 + 0.5r
0.2 r = 3 ⇒ r = 15 Ω
विद्युत वाहक बल E = 0.3 (60 + 15) = 0.3 x 75 = 22.5 वोल्ट

प्रश्न 22.
खुले परिपथ में एक सेल की प्लेटों के बीच विभवान्तर 1.5 वोल्ट है। इस सेल को 10 ओम के प्रतिरोध से जोड़ने पर इसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर 1.2 वोल्ट हो जाता है। वैद्युत परिपथ बनाकर सेल का आन्तरिक प्रतिरोध एवं 10 ओम के प्रतिरोध में प्रवाहित होने वाली , धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2015, 16)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 22.1

प्रश्न 23.
किसी बैटरी के सिरों पर उच्च प्रतिरोध के वोल्टमीटर को जोड़ने पर पाठ्यांक 15 वोल्ट मिलता है। बैटरी के सिरों को एमीटर से जोड़ने पर एमीटर 1.5 ऐम्पियर और वोल्टमीटर 9 वोल्ट पढ़ता है। बैटरी के आन्तरिक प्रतिरोध तथा एमीटर एवं संयोजक तारों के प्रतिरोध की गणना कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 24.
किसी सेल से 0.6 ऐम्पियर धारा लेने पर उसकी टर्मिनल वोल्टता 1.6 वोल्ट हो जाती है तथा 0.8 ऐम्पियर धारा लेने पर टर्मिनल वोल्टता 1.3 वोल्ट हो जाती है। सेल का वैद्युत वाहक बल तथा आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2017)
हल-
दिया है, I1 = 0.6 ऐम्पियर, V1 = 1.6 वोल्ट
I2 = 0.8 ऐम्पियर, V2 = 1.3 वोल्ट
सेल के सिरों पर विभवान्तर V = E – Ir
पहली स्थिति में, 1.6 = E – 0.6 x r …….(1)
दूसरी स्थिति में, 1.3 = E – 0.8 x r ……..(2)
समीकरण (1) व (2) को हल करने पर,
सेल का वैद्युत वाहक बल E = 2.5 वोल्ट
तथा सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r = 1.5 ओम

UP Board Solutions

प्रश्न 25.
आपको एक 6 वोल्ट विद्युत वाहक बल तथा 1 ओम आन्तरिक प्रतिरोध की सेल के साथ दो बाह्य प्रतिरोध R1 = 2 ओम व R2 = 3 ओम दिए जाते हैं। परिपथमें धारा क्या होगी, जब
(i) R1 व R2 श्रेणीक्रम में जोड़े जाएँ?
(ii) R1 व R2 समान्तर क्रम में जोड़े जाएँ। (2014)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 26.
एक 3 वोल्ट विद्युत वाहक बल की सेल 4 ओम प्रतिरोध वाले विभवमापी तार AC के मध्य जुड़ी है। 2 ओम प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए, यदि सम्पर्क बिन्दु B विभवमापी तार के ठीक मध्य में हो। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 26
हल-
E = iR – ir [जहाँ r = 0]
E = iR [जहाँ R = 4 Ω]
i = [latex s=2]\frac { 3 }{ 4 }[/latex] ऐम्पियर
2 Ω प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर
V = iR = [latex s=2]\frac { 3 }{ 4 }[/latex] x 2 = 1.5 वोल्ट

प्रश्न 27.
निम्नचित्र में प्रदर्शित परिपथ में प्रतिरोध R है। A व B के बीच तुल्य प्रतिरोधज्ञात कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 27
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
प्रश्न में दिए गए चित्र 3.26 में दिए गए प्रतिरोधों को चित्र 3.27 की भाँति व्यवस्थित कर सकते हैं। इस प्रकार यह परिपथ एक सन्तुलित व्हीटस्टोन सेतु के तुल्य है। यदि A व B के बीच सेल जोड़ दी जाए तो भुजा CD में कोई धारा नहीं बहेगी। अत: C व D के बीच जुड़ा प्रतिरोध प्रभावहीन है।
ADB में जुड़े प्रतिरोधों का परिणामी प्रतिरोध
R1 = R + R = 2R Ω
तथा ACB में जुड़े प्रतिरोधों का परिणामी प्रतिरोध
R2 = R + R = 2R Ω
भुजा ADB तथा ACB में जुड़े प्रतिरोध R1 व R2 परस्पर समान्तर क्रम में हैं।
अतः A व B के बीच तुल्य प्रतिरोध
[latex s=2]R=\frac { 2R\times 2R }{ 2R+2R } =R\Omega[/latex]

प्रश्न 28.
चित्र में दर्शाए गए 75 Ω के प्रतिरोध में प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2017)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity SAQ 28UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग से आप क्या समझते हैं? इलेक्ट्रॉन अनुगमन वेग के सिद्धान्त द्वारा ओम के नियम का निगमन कीजिए। (2011, 12, 17, 18)
या
किसी चालक के विभवान्तर तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह (अनुगमन) वेग के बीच का सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2012)
या
किसी चालक के बीच विभवान्तर तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2013)
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के ‘अपवाह वेग से आप क्या समझते हैं? मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के आधार पर ओम के नियम की व्याख्या कीजिए। (2014, 18)
या
अनुगमन वेग की परिभाषा दीजिए। (2014)
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग से आप क्या समझते हैं? (2015)
या
किसी धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग से क्या तात्पर्य है? मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के आधार पर ओम का नियम व्युत्पन्न कीजिए। (2017, 18)
उत्तर-
अनुगमन वेग (अपवाह वेग)- किसी धातु के तार के सिरों को बैटरी से जोड़ देने पर तार के सिरों के बीच एक विभवान्तर स्थापित हो जाता है। इस विभवान्तर अथवा वैद्युत-क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन एक वैद्युत बल का अनुभव करते हैं जो इलेक्ट्रॉनों को त्वरण प्रदान करता है। परन्तु इस त्वरण से इलेक्ट्रॉनों की चाल लगातार बढ़ती नहीं जाती, बल्कि धातु के धन आयनों से टकराकर ये इलेक्ट्रॉन बैटरी से प्राप्त ऊर्जा (UPBoardSolutions.com) को खोते रहते हैं। स्पष्ट है कि बैटरी का विभवान्तर इलेक्ट्रॉनों को त्वरित गति प्रदान नहीं कर पाता बल्कि तार की लम्बाई के अनुदिश एक लघु नियत वेग ही दे पाता है जो इलेक्ट्रॉनों की अनियमित गति पर आरोपित हो जाता है। इलेक्ट्रॉनों के इस लघु नियत वेग को ही ‘अनुगमन वेग’ (drift velocity) कहते हैं। इसे 04 से प्रदर्शित करते हैं।

ओम के नियम का निगमन- माना एक धातु के तार की लम्बाई l तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल A है। जब इसके सिरों के बीच विभवान्तर V लगाया जाता है, तो इसमें वैद्युत धारा i प्रवाहित होने लगती है। यदि तार के प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या (मुक्त इलेक्ट्रॉन-घनत्व) n हो तथा इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग vd हो, तब
i = neAvd …(1)
जहाँ, e इलेक्ट्रॉन का आवेश है। तार के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-क्षेत्र की तीव्रता E = [latex s=2]\frac { V }{ l }[/latex]
इस क्षेत्र द्वारा प्रत्येक मुक्त इलेक्ट्रॉन पर आरोपित बल F = eE = [latex s=2]\frac { eV }{ l }[/latex]
यदि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m हो, तो इस बल के कारण इलेक्ट्रॉन में उत्पन्न त्वरण
a = [latex s=2]\frac { F }{ m }[/latex] = [latex s=2]\frac { eV }{ ml }[/latex] …(2)

तार के भीतर मुक्त इलेक्ट्रॉन धातु के धन आयनों से बारम्बार टकराते रहते हैं। किसी धन आयन से टकराने के पश्चात् इलेक्ट्रॉन का वेग वैद्युत-क्षेत्र E की विपरीत दिशा में बढ़ने लगता है। यदि किसी इलेक्ट्रॉन की, धन आयनों से हुई दो क्रमागत टक्करों के बीच का समयान्तराल t है, (UPBoardSolutions.com) तो इलेक्ट्रॉन के वेग में aτ वृद्धि होगी। यदि किसी क्षण वैद्युत-क्षेत्र की अनुपस्थिति में किसी इलेक्ट्रॉन का ऊष्मीय वेग u1 है, तब वैद्युत-क्षेत्र में की उपस्थिति में उसका वेग बढ़कर u1 + aτ1 हो जाएगा; जहाँ τ1 उस इलेक्ट्रॉन का दो क्रमागत टक्करों के बीच का समयान्तराल है। इसी प्रकार, अन्य इलेक्ट्रॉनों के वेग (u2 + aτ2), (u3 + aτ3) होंगे। सभी n इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग ही मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग vd है। इस प्रकार
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity LAQ 1.1
UP Board Solutions

प्रश्न 2.
हाइड्रोजन परमाणु में 1 इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर 7.0 x 10-11 मीटर त्रिज्या की कक्षा में 4.4 x 106 मी/से की चाल से चक्कर लगाता है। कक्षा में इसके समतुल्य वैद्युत धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2011)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 3.
60 W.220 V तथा 100 W.220 V के दो बल्ब श्रेणीक्रम में जोड़कर 220 वोल्ट मेन्स से सम्बन्धित किये गये हैं। उनमें प्रवाहित होने वाली धाराओं की गणना कीजिए। यदि बल्ब समान्तर क्रम में जोड़े जाये तब धाराएँ कितनी होंगी? (2011, 17)
हल-
श्रेणीक्रम में जुड़े बल्बों में समान धारा प्रवाहित होगी।
60 वोट के बल्ब का प्रतिरोध
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity LAQ 3.1

प्रश्न 4.
दिये गये चित्र 3.29 में दिखाए गए परिपथ में लगी बैटरी का विद्युत वाहक बल 12 वोल्ट तथा आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है। अमीटर A के पाठ्यांक की गणना कीजिए। जबकि, कुँजी k
(i) खुली हो, (ii) बन्द हो। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity LAQ 4
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 5.
वैद्युत परिपथ के लिए किरचॉफ के नियमों का व्याख्या सहित वर्णन कीजिए।
या
वैद्युत परिपथ के लिए किरचॉफ के नियमों का उल्लेख कीजिए और उनको परिपथ बनाकर समझाइए। (2012, 18)
या
वैद्युत परिपथ सम्बन्धी किरचॉफ के दोनों नियम समुचित परिपथ आरेख बनाकर समझाइए। (2014)
या
वैद्युत परिपथ सम्बन्धी किरचॉफ के नियम लिखिए। (2015, 17)
या
किरचॉफ का धारा नियम लिखिए तथा धारा के लिए चिह्न परिपाटी भी बताइए। (2018)
उत्तर-
किरचॉफ के नियम (Kirchhoff’s Laws)-
प्रथम नियम- किसी वैद्युत परिपथ की किसी भी सन्धि पर मिलने वाली धाराओं का बीजगणितीय योग (algebraic sum) शून्य होता है;
अर्थात् [latex]\sum { i }[/latex] = 0
माना कि चालक जिनमें धाराएँ i1, i2, i3, i4 व i5 बह रही हैं, सन्धि O पर मिलते हैं। चिह्न परिपाटी के अनुसार सन्धि की ओर आने वाली धारा धनात्मक है। अतः i1 वे i2 धनात्मक तथा i3, i4 व i5 ऋणात्मक हैं। किरचॉफ के नियम के अनुसार,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
i1 + i2 – i3 – i4 – i5 = 0
या i1 + i2 = i3 + i4 + i5
स्पष्ट है कि परिपथ के किसी बिन्दु पर आने वाली धाराओं का योग वहाँ से जाने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है। यह नियम आवेश के संरक्षण को व्यक्त करता है।

द्वितीय नियम- किसी वैद्युत परिपथ में प्रत्येक बन्दपाश के विभिन्न भागों में प्रवाहित होने वाली धाराओं एवं संगत प्रतिरोधों के गुणनफलों का बीजगणितीय योग उस पाश में लगने वाले समस्त वि० वा० बलों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
अर्थात् [latex]\sum { iR }[/latex] = [latex]\sum { E }[/latex]
इस नियम को लगाते समय धारा की दिशा में चलने पर धारा व इसके संगत प्रतिरोध का गुणनफल धनात्मक लेते हैं तथा सेल के वैद्युत-अपघट्य में ऋण इलेक्ट्रोड से धन इलेक्ट्रोड की ओर चलने पर वि० वा० बल धनात्मक लेते हैं। चित्र 3.32 में दिखाये गये वैद्युत परिपथ में दो बन्दपाश (1) व (2) हैं। इस नियम के अनुसार बन्दपाश (1) के लिए
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
i1R1 – i2R2 = E1 – E2
तथा बन्दपाश (2) के लिए ।
i2R2 + (i1 + i2) R3 = E2
इन समीकरणों को हल करके i1 व i2 के मान ज्ञात किये जा सकते हैं। यह नियम ऊर्जा के संरक्षण को व्यक्त करता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
वैद्युत परिपथ के लिए, किरचॉफ के नियमों का उल्लेख कीजिए तथा उनकी सहायता से किसी व्हीटस्टोन सेतु के सन्तुलित होने का सूत्र [latex]\frac { P }{ Q }[/latex] = [latex s=2]\frac { R }{ S }[/latex] व्युत्पादित कीजिए, जहाँ संकेतों को सामान्य अर्थ है। (2014)
या
व्हीटस्टोन सेतु का परिपथ चित्र खींचकर उसकी साम्यावस्था का प्रतिबन्ध निकालिए। (2009, 14, 17)
या
व्हीटस्टोन ब्रिज का सिद्धान्त क्या है? (2014)
या
व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था में उसकी भुजाओं के प्रतिरोध में सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2017)
या
व्हीटस्टोन सेतु का परिपथ आरेख खींचिए तथा संतुलन के प्रतिबन्ध का व्यंजक प्राप्त कीजिए। (2017)
या
व्हीटस्टोन ब्रिज सिद्धान्त की संतुलन गति को लिखिए। (2018)
उत्तर-
किरचॉफ के नियमों के लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 5 का उत्तर देखिए।
व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धान्त- चित्र 3.33 में व्हीटस्टोन सेतु व्यवस्था दिखायी गयी है। जब व्हीटस्टोन सेतु में चतुर्भुज रूप में जुड़े प्रतिरोधों के मान इस प्रकार समायोजित किये जाएँ कि सेल की कुंजी K1 तथा धारामापी की कुंजी K2 दोनों बन्द करने पर धारामापी में कोई विक्षेप न आये तो इस दशा में सेतु सन्तुलित (balanced) कहा जाता है।
“सेतु की सन्तुलन अवस्था में सेतु (चतुर्भुज) की किन्हीं दो संलग्न भुजाओं में लगे प्रतिरोधों का अंनुपात शेष दो संलग्न भुजाओं में लगे प्रतिरोधों के अनुपात के बराबर होता है।”
अर्थात् [latex]\frac { P }{ Q }[/latex] = [latex s=2]\frac { R }{ S }[/latex]
किरचॉफ के नियमों का उपयोग करके उपर्युक्त सम्बन्ध का निगमन-
चित्र 3.33 में बन्दपाश ABDA में किरचॉफ का द्वितीय नियम लगाने पर
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

प्रश्न 7.
विभवमापी का सिद्धान्त चित्र खींचकर समझाइए। यह वोल्टमीटर से श्रेष्ठ क्यों है? (2017, 18)
या
हम सेल का विद्युत वाहक बल नापने के लिए वोल्टमीटर की अपेक्षा विभवमापी को वरीयता क्यों देते हैं। (2014)
या
विभवमापी का सिद्धान्त समझाइए। इसकी सुग्राहिता किस प्रकार बढ़ाई जा सकती है? (2015, 18)
या
विभवमापी में प्रयोग किए जाने वाले तार के विशेष गुण लिखिए।
उत्तर-
विभवमापी- यह किसी सेल का विद्युत वाहक बल अथवा किसी वैद्युत परिपथ के दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर नापने का यथार्थ उपकरण है।
विभवमापी का सिद्धान्त- इसमें मुख्यत: एक लम्बा व एकसमान व्यास की धातु का प्रतिरोध-तार AB होता है। इसका एक सिरा A एक संचायक-बैटरी के धन-ध्रुव से (UPBoardSolutions.com) जुड़ा होता है। बैटरी का ऋण-ध्रुव एक कुंजी (K) तथा एक धारा नियन्त्रक (Rh) के द्वारा सार के दूसरे सिरे B से जोड़ दिया जाता है। धारा नियन्त्रक के द्वारा तार AB में धारा को घटाया अथवा बढ़ाया जा सकता है।

E एक सेल है जिसका विद्युत वाहक बल नापना है। इसका धन-ध्रुव तार के A सिरे से जुड़ा होता है। तथा ऋण-ध्रुव एक धारामापी G के द्वारा जौकी J से जुड़ा होता है जो तार पर खिसकाकर कहीं भी स्पर्श करायी जा सकती है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
बैटरी से वैद्युत धारा तार के सिरे A से सिरे B की ओर को बहती है। अत: A से B की ओर तार के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत-विभव गिरता जाता है। तार की प्रति एकांक लम्बाई में विभव-पतन को विभव-प्रवणता कहते हैं तथा इसे K से प्रदर्शित करते हैं।

माना जौकी को J1 पर स्पर्श कराते हैं, जबकि A और J1 के बीच विभवान्तर, सेल E के वि० वा० बल से कम है। चूंकि बिन्दु A का विभव J1 से। ऊँचा है; अत: बैटरी B1 की धारा AE J1 मार्ग से धारामापी में प्रवाहित होगी। परन्तु सेल E का धन-ध्रुव, बिन्दु A से जुड़ा है; अतः सेल की धारा AJ1E मार्ग से धारामापी में प्रवाहित होगी। स्पष्ट है। कि ये दोनों धाराएँ परस्पर विपरीत दिशाओं में हैं। परन्तु चूँकि सेल का वि० वा० बल (UPBoardSolutions.com) बैटरी के कारण उत्पन्न A व J1 के बीच विभवान्तर से अधिक है; अत: सेल की धारा की प्रधानता होगी। इस प्रकार AJ1E की दिशा में प्रवाहित एक परिणामी धारा के – कारण धारामापी की सूई एक ओर विक्षेपित हो जाएगी।

इसके विपरीत यदि जौकी को J2 पर स्पर्श कराते हैं, जबकि A व J2 के बीच विभवान्तर, सेल E के वि० वा० बल से अधिक हो, तो बैटरी B1 की धारा की प्रधानता होगी। इस दशा में धारामापी में एक परिणामी धारा AEJ2 दिशा में प्रवाहित होगी और धारामापी की सूई पहले से विपरीत दिशा में विक्षेपित हो जाएगी।

स्पष्ट है कि जौकी की दोनों स्थितियों J1 व J2 के मध्य में J एक ऐसा बिन्दु होगा, जहाँ पर जौकी को स्पर्श कराने पर धारामापी में कोई विक्षेप नहीं होगा। यह शून्य विक्षेप की स्थिति होगी और ऐसी स्थिति में A व J के मध्य विभवान्तर, सेल के वि० वा० बल के बराबर होगा।
माना तार में बहने वाली धारा का मान i है तथा तार की 1 सेमी लम्बाई का प्रतिरोध p है, तब
विभव-प्रवणता K = ip
यदि तार के भाग AJ की लम्बाई l सेमी हो तथा बिन्दु A व J के बीच विभवान्तर V हो, तो
V = Kl
शून्य विक्षेप स्थिति में, विभवान्तर V सेल के विद्युत वाहक बल E के बराबर होता है। अतः
E = Kl
विभवमापी की सुग्राहिता बढ़ाने के लिए विभवमापी के तार की लम्बाई बढ़ा दी जाती है जिस कारण विभव-प्रवणता कम हो जाती है और शून्य विक्षेप की स्थिति की दूरी (l) अधिक लम्बाई पर आती है।
विभवमापी में प्रयोग होने वाले तार के विशेष गुण

  1. तार का व्यास सर्वत्र समान होना चाहिए।
  2. तार के पदार्थ का प्रतिरोध ताप-गुणांक अधिक होना चाहिए।
  3. तार के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध कम होना चाहिए।

वोल्टमीटर की तुलना में विभवमापी की श्रेष्ठता

  1. जब हम सेल का वि० वा० बल विभवमापी से नापते हैं तो शून्य-विक्षेप स्थिति में सेल के परिपथ में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती; अर्थात् सेल खुले परिपथ पर होती है। अतः इस स्थिति में सेल के वि० वा० बल का वास्तविक मान प्राप्त होता है। इस प्रकार विभवमापी अनन्त प्रतिरोध के आदर्श वोल्टमीटर के समतुल्य है।
  2. वोल्टमीटर द्वारा वि० वा० बल (UPBoardSolutions.com) नापने के लिए वोल्टमीटर में विक्षेप पढ़ना पड़ता है। विक्षेप के पढ़ने में त्रुटि रह सकती है। इसके विपरीत विभवमापी द्वारा वि० वी० बल अविक्षेप (null) विधि से नापा जाता है। इसमें तार पर शून्य-विक्षेप स्थिति को पढ़ना होता है। शून्य-विक्षेप स्थिति में पढ़ने में अधिक-से-अधिक 1 मिमी की त्रुटि हो सकती है, जो नगण्य है।

प्रश्न 8.
एक विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसके द्वारा सेल का विद्युत वाहक बल कैसे ज्ञात किया जाता है? (2011)
या
विभवमापी का सिद्धान्त समझाइए। विभवमापी से किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए परिपथ आरेख खींचिए तथा प्रयुक्त सूत्र को प्राप्त कीजिए। (2013, 15)
या
विभवमापी का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। इसकी सहायता से किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध कैसे ज्ञात करते हैं? (2015)
उत्तर-
विभवमापी की संरचना- विभवमापी में मुख्यतः एक उच्च विशिष्ट प्रतिरोध व निम्न प्रतिरोध ताप गुणांक की मिश्रधातु (जैसे- कॉन्सटेन्टन, मैंगनिन आदि) का 4 से 12 मीटर तक लम्बा एक समान व्यास का तार होता है। इस तार को एक-एक मीटर के समान्तर टुकड़ों के रूप में चित्र 3.35 की भाँति एक लकड़ी के तख्ते पर बिछा देते हैं। तार के ये सभी टुकड़े ताँबे की मोटी पत्तियों के द्वारा श्रेणीक्रम में ज़ोड़ (UPBoardSolutions.com) दिये जाते हैं। इस सम्पूर्ण तार के प्रारम्भ होने वाले सिरे और अन्तिम सिरे पर क्रमशः संयोजक पेंच A और B लगा देते हैं। तारों की लम्बाई के समान्तर एक मीटर पैमाना M लगा रहता है, जिससे जौकी J की स्थिति पढ़ ली जाती है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
कार्यविधि अथवा कार्य सिद्धान्त- उपरोक्त दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 में पढ़िए।
विभवमापी द्वारा किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना- इसके लिए विभवमापी के तार AB के सिरों के बीच एक संचायक सेल B1 धारा नियन्त्रक Rh व कुंजी K1 चित्र 3.36 के अनुसार जोड़ देते हैं। सेल B1 का धन-ध्रुव तार के सिरे A से जोड़ा जाता है। अब जिस सेल को आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना होता है, उसके धन सिरे को बिन्दु A से तथा ऋण सिरे को एक शण्टयुक्त धारामापी G द्वारा जौकी J (UPBoardSolutions.com) से जोड़ देते हैं। इस सेल के समान्तरक्रम में चित्र 3.36 के अनुसार एक प्रतिरोध बॉक्स व कुंजी K2 डाल देते हैं। सर्वप्रथम कुंजी K2 से प्लग को निकालकर सेल E को खुले परिपथ में रखा जाता है। अब कुंजी K1 का प्लग लगाकर सेल E के लिए शून्य विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लीजिए कि इस स्थिति में सिरे A से दूरी l1 सेमी है। चूंकि खुले परिपथ पर सेल की प्लेटों के बीच विभवान्तर V इसके विद्युत वाहक ब्रल E के बराबर है, अतः
E = Kl1 …..(1)

जहाँ K तार AB की विभव-प्रवणता है। अब प्रतिरोध बॉक्स में से कोई उचित प्रतिरोध R निकालकर कुंजी K2 को बन्द कर देते हैं। इस दशा में प्रतिरोध R के सिरों के बीच लगने वाले विभवान्तर V के लिए तार AB पर शून्य विक्षेप स्थिति ज्ञात करे लेते हैं। माना इस स्थिति की बिन्दु A से दूरी l2 सेमी है, तब
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
इस सूत्र (5) से r के मान का परिकलन किया जा सकता है। l1 व l2 के अनेक प्रेक्षण लेते हैं और प्रत्येक प्रेक्षण से सेल के आन्तरिक प्रतिरोध को परिकलन करके औसत मान ज्ञात कर लेते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 9.
विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसके द्वारा दो सेलों के वि० वाहक बल की तुलना कैसे की जाती है। परिपथं आरेख बनाकर समझाइए। (2015)
उत्तर-
विभवमापी की संरचना- उपरोक्त दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 8 में पढ़िए।
विभवमापी की कार्यविधि- उपरोक्त दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 7 में पढ़िए।
विभवमापी द्वारा दो सेलों के वि0 वा बल की तुलना- पहले विभवमापी के तार के सिरों A व B के बीच एक संचायक सेल अथवा बैटरी B1, धारी-नियन्त्रक Rh तथा एक (UPBoardSolutions.com) कुंजी K1 जोड़ देते हैं। (चित्र 3.36)। B1 का धन-ध्रुव तार के A सिरे से जोड़ा जाता है। अब जिन दो सेलों E1 व E2 के विद्युत वाहक बलों की तुलना करनी है, उनके धन-ध्रुवों कों A से जोड़ देते हैं तथा ऋण-ध्रुवों को एक द्वि-मार्गी (two-way) कुंजीk, के द्वारा एक शन्टयुक्त धारामापी G से जोड़कर जौकी J से जोड़ देते हैं। पहले कुंजी K1 को लगाकर तार AB के सिरों के बीच विभवन्तर स्थापित करते हैं। अब पहले सेल” E1 को कुंजी K2 के द्वारा परिपथ में डालते हैं और जौकी के द्वारा शून्य-विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लो तार पर शून्य-विक्षेप स्थिति की बिन्दु A से दूरी l1 सेमी है। तब
E = Kl1
जहाँ K तार पर विभव-प्रवणता है। इसी प्रकार दूसरे सेल E2 को कुंजी K2 के द्वारा परिपथ में डालकर पुनः शून्य-विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लो इस स्थिति की बिन्दु A से दूरी l2 सेमी है।
तब
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity LAQ 9
यदि इनमें एक सेल प्रमाणिक सेल हो, जिसका विद्युत वाहक बल ज्ञात होता है तो दूसरी सेल का विद्युत वाहक बल ज्ञात किया जा सकता है। विभवमापी में शून्य-विक्षेप की स्थिति में, सेल E, अथवा E, में कोई धारा नहीं बहती अर्थात् सेल खुले। परिपथ में होती है। अतः विभवमापी से सेल का यथार्थ विद्युत वाहक बल प्राप्त होता है।

प्रश्न 10.
चित्र 3.37 में AB एक 15 ओम प्रतिरोध का 1 मीटर लम्बा, समरूप तार है। शेष आँकडे चित्र में प्रदर्शित हैं। ज्ञात कीजिए-
(i) तार AB में विभव-प्रवणता तथा
(ii) अविक्षेप स्थिति में तार AO की लम्बाई। (2011, 14)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity
हल-
(i) चित्र 3.37 में विभवमापी के तार से जुड़े मुख्य परिपथ का कुल प्रतिरोध = 10 Ω + 15 Ω = 25 Ω
तथा परिपथ में जुड़े सेल का वि० वा० बल E = 2 वोल्ट; अतः इस तार में प्रवाहित धारा,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity (विद्युत धारा) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 3 Current Electricity (विद्युत धारा), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter (चुम्बकत्व एवं द्रव्य) are part of UP Board Solutions for Class 12 Physics. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter (चुम्बकत्व एवं द्रव्य).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Physics
Chapter Chapter 5
Chapter Name Magnetism and Matter (चुम्बकत्व एवं द्रव्य)
Number of Questions Solved 72
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter (चुम्बकत्व एवं द्रव्य)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भू-चुम्बकत्व सम्बन्धी निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  1. एक सदिश को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए तीन राशियों की आवश्यकता होती है। उन तीन स्वतन्त्र राशियों के नाम लिखिए जो परम्परागत रूप से पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होती हैं।
  2. दक्षिण भारत में किसी स्थान पर नति कोण का मान लगभग 18° है। ब्रिटेन में आप इससे अधिक नति कोण की अपेक्षा करेंगे या कम की?
  3. यदि आप ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में (UPBoardSolutions.com) भू-चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का नक्शा बनाएँ तो ये रेखाएँ पृथ्वी के अन्दर जाएँगी या इससे बाहर आएँगी?
  4. एक चुम्बकीय सुई जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है, यदि भू-चुम्बकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखी हो तो यह किस दिशा में संकेत करेगी?
  5. यह माना जाता है कि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र लगभग एक चुम्बकीय द्विध्रुव के क्षेत्र जैसा है। जो पृथ्वी के केन्द्र पर रखा है और जिसका द्विध्रुव आघूर्ण 8 x 1022 JT-1 है। कोई ढंग सुझाइए जिससे इस संख्या के परिमाण की कोटि जाँची जा सके।
  6. भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि मुख्य N-S चुम्बकीय ध्रुवों के अतिरिक्त, पृथ्वी की सतह पर कई अन्य स्थानीय ध्रुव भी हैं, जो विभिन्न दिशाओं में विन्यस्त हैं। ऐसा होना कैसे सम्भव है?

उत्तर-

  1. पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होने वाली तीन राशियाँ निम्नलिखित
    • नति कोण अथवा नमन कोण δ (Angle of Dip or Angle of Magnetic Inclination)
    • दिकुपात का कोण θ (Angle of Declination)
    • पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का क्षैतिज अवयव BH (Horizontal Component of Earth’s Magnetic Field)
  2. जी हाँ, चूँकि ब्रिटेन, दक्षिण भारत की तुलना में पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के अधिक समीप है; अतः यहाँ नति कोण अधिक होगा। वास्तव में ब्रिटेन (UPBoardSolutions.com) में नति कोण लगभग 70° है।
  3. ऑस्ट्रेलिया, पृथ्वी के दक्षिण गोलार्द्ध में स्थित है। चूंकि पृथ्वी के दक्षिण ध्रुव से चुम्बकीय-क्षेत्र रेखाएँ बाहर निकलती हैं; अतः ये पृथ्वी से बाहर निकलती प्रतीत होंगी।
  4. चूँकि ध्रुवों पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र ऊर्ध्वाधर होता है; अतः ध्रुवों पर लटकी चुम्बकीय सुई (जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है) ऊर्ध्वाधर दिशा की ओर इंगित करेगी।
  5. यदि हम मान लें कि पृथ्वी के केन्द्र पर M चुम्बकीय-आघूर्ण का चुम्बकीय द्विध्रुव रखा है तो पृथ्वी के चुम्बकीय निरक्ष पर स्थित बिन्दुओं की इस द्विध्रुव के केन्द्र से दूरी पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर होगी।
    UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
    स्पष्ट है कि पृथ्वी के चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण का यह मान 8 x 1022 JT-1 के अत्यन्त निकट है। इस प्रकार पृथ्वी के चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण के परिमाण की कोटि की जाँच की जा सकती है।
  6. यद्यपि पृथ्वी का सम्पूर्ण चुम्बकीय-क्षेत्र, एकल चुम्बकीय द्विध्रुव के कारण माना जाता है अपितु स्थानीय स्तर पर चुम्बकित पदार्थों के भण्डार अन्य चुम्बकीय ध्रुवों का निर्माण करते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  1. एक जगह से दूसरी जगह जाने पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र बदलता है। क्या यह समय के साथ भी बदलता है? यदि हाँ, तो कितने समय अन्तराल पर इसमें पर्याप्त परिवर्तन होते हैं?
  2. पृथ्वी के क्रोड में लोहा है, यह ज्ञात है। फिर भी भूगर्भशास्त्री इसको पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का स्रोत नहीं मानते। क्यों?
  3. पृथ्वी के क्रोड के बाहरी चालक भाग में प्रवाहित होने वाली आवेश धाराएँ भू-चुम्बकीय क्षेत्र के लिए उत्तरदायी समझी जाती हैं। इन धाराओं को बनाए रखने वाली बैटरी (ऊर्जा स्रोत) क्या हो सकती है?
  4. अपने 4-5 अरब वर्षों के इतिहास में पृथ्वी अपने चुम्बकीय-क्षेत्र की दिशा कई बार उलट चुकी होगी। भूगर्भशास्त्री, इतने सुदूर अतीत के पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के बारे में कैसे जान पाते हैं?
  5. बहुत अधिक दूरियों पर (30,000 km से अधिक) पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र अपनी द्विध्रुवीय आकृति से काफी भिन्न हो जाता है। कौन-से कारक इस विकृति के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं?
  6. अन्तरातारकीय अन्तरिक्ष में 10-12 T की कोटि का बहुत ही क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र होता है। क्या इस क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र के भी कुछ प्रभावी परिणाम हो सकते हैं। समझाइए। [टिप्पणी : प्रश्न 5.2 का उद्देश्य मुख्यतः आपकी जिज्ञासा जगाना है। उपरोक्त कई प्रश्नों के उत्तर या तो काम चलाऊ हैं या अज्ञात हैं। जितना सम्भव हो सका, प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर पुस्तक के अन्त में दिए गए हैं। विस्तृत उत्तरों के लिए आपको भू-चुम्बकत्व पर कोई अच्छी पाठ्यपुस्तक देखनी होगी।]

उत्तर-

    1. यद्यपि यह सत्य है कि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता है, परन्तु चुम्बकीय-क्षेत्र में प्रेक्षण योग्य परिवर्तन के लिए कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती। इसमें सैकड़ों वर्ष का समय भी लग सकता है।
    2. यह सुज्ञात तथ्य है कि पृथ्वी के क्रोड में पिघला हुआ लोहा है परन्तु इसका ताप लोहे के क्यूरी ताप से कहीं अधिक है। इतने उच्च ताप पर यह (लौह चुम्बकीय नहीं हो सकता) कोई चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न नहीं कर सकता।
    3. यह माना जाता है कि पृथ्वी के गर्भ में उपस्थित रेडियोएक्टिव पदार्थों के विघटन से प्राप्त ऊर्जा ही आवेश धाराओं की ऊर्जा का स्रोत है।
    4. प्रारम्भ में पृथ्वी के गर्भ में अनेक पिघली हुई चट्टानें थीं जो समय के साथ धीरे-धीरे ठोस होती चली गईं। इन चट्टानों में मौजूद लौह-चुम्बकीय पदार्थ उस समय के पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के अनुरूप संरेखित हो गए। इस प्रकार भूतकाल का पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र इन (UPBoardSolutions.com) चट्टानों में चुम्बकत्व एवं द्रव्य 185 चुम्बकीय पदार्थों के अनुरूपण में अभिलेखित है। इन चट्टानों का भूचुम्बकीय अध्ययन उस समय के पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का ज्ञान प्रदान करता है।
    5. पृथ्वी के आयनमण्डल में अनेक आवेशित कण विद्यमान रहते हैं जिनकी गति एक अलग चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करती है। यही चुम्बकीय-क्षेत्र, पृथ्वी तल से अधिक दूरी पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र को विकृत कर देता है। आयनों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय-क्षेत्र सौर पवन पर निर्भर करता है।
      UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q2
      इससे स्पष्ट है कि अत्यन्त क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण अति विशाल त्रिज्या का मार्ग अपनाती है जो कि थोड़ी दूरी में लगभग सरल रेखीय प्रतीत होता है; अतः छोटी दूरियों के लिए सूक्ष्म चुम्बकीय-क्षेत्र अप्रभावी प्रतीत होते हैं परन्तु बड़ी दूरियों में ये प्रभावी विक्षेपण उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 3.
एक छोटा छड़ चुम्बक जो एकसमान बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र 0.25 T के साथ 30° का कोण बनाता है, पर 4.5 x 10-2 J का बल आघूर्ण लगता है। चुम्बक के चुम्बकीय-आघूर्ण का परिमाण क्या है?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 4.
चुम्बकीय-आघूर्ण M = 0.32 JT-1 वाला एक छोटा छड़ चुम्बक, 0.15 T के एकसमान बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र में रखा है। यदि यह छड़ क्षेत्र के तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र हो तो क्षेत्र के किस विन्यास में यह
(i) स्थायी सन्तुलन और
(ii) अस्थायी सन्तुलन में होगा? प्रत्येक स्थिति में चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा का मान बताइए।
हल-
दिया है, चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण M = 0.32 जूल/टेस्ला
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 0.15 टेस्ला
(i) चुम्बकीय क्षेत्र में छड़ चुम्बक के स्थायी सन्तुलन के लिए [latex s=2]\vec { M }[/latex] तथा [latex s=2]\vec { B }[/latex] एक ही दिशा में होने चाहिए,
अर्थात् θ = 0 इस स्थिति में चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा
U = [latex s=2]\vec { M }[/latex].[latex s=2]\vec { B }[/latex]
= – MB cos θ
= – 0.32 x 0.15 x cos 0
= – 0.32 x 0.15 x 1
= – 0.048 जूल

(ii) चुम्बकीय क्षेत्र में छड़ चुम्बक के अस्थायी सन्तुलन के लिए [latex s=2]\vec { M }[/latex] तथा [latex s=2]\vec { B }[/latex] परस्पर विपरीत दिशा में होने चाहिए, अर्थात् θ = 180°
U = [latex s=2]\vec { M }[/latex] . [latex s=2]\vec { B }[/latex]
= – MB cos θ
= – MB cos 180
= – 0.32 x 0.15 x (-1)
= +0.048 जूल

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
एक परिनालिका में पास-पास लपेटे गए 800 फेरे हैं तथा इसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 25 x 10-4 m2 है और इसमें 3.0 A धारा प्रवाहित हो रही है। समझाइए कि किस अर्थ में यह परिनालिका एक छड़ चुम्बक की तरह व्यवहार करती है। इसके साथ जुड़ा हुआ चुम्बकीय-आघूर्ण कितना है?
हल-
चुम्बकीय आघूर्ण M = NiA
M = 800 x 3.0 ऐम्पियर x 2.5 x 10-4 मी2
= 0.600 ऐम्पियर-मीटर
चूँकि परिनालिका को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में (UPBoardSolutions.com) लटकाने पर दण्ड-चुम्बक के समान ही इस पर भी एक बल-युग्म कार्य करता है, अत: यह दण्ड-चुम्बक के समान व्यवहार करती है।

प्रश्न 6.
यदि प्रश्न 5 में बताई गई परिनालिका ऊर्ध्वाधर दिशा के परितः घूमने के लिए स्वतन्त्र हो और इस पर क्षैतिज दिशा में एक 0.25 T का एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र लगाया जाए, तो इस परिनालिका पर लगने वाले बल आघूर्ण का परिमाण उस समय क्या होगा, जब इसकी अक्ष आरोपित क्षेत्र की दिशा से 30° का कोण बना रही हो?
हल-
बल-आघूर्ण τ = MB sin θ
τ = (0.600) x (0.25) (sin 30°)
= (0.6 x 0.25 x 0.5) न्यूटन मीटर
= 7.5 x 10-2 न्यूटन-मीटर

प्रश्न 7.
एक छड़ चुम्बक जिसका चुम्बकीय-आघूर्ण 15 JT-1 है, 0.22 T के एक एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र के अनुदिश रखा है।
(a) एक बाह्य बल आघूर्ण कितना कार्य करेगा यदि यह चुम्बक को चुम्बकीय-क्षेत्र के
(i) लम्बवत
(ii) विपरीत दिशा में संरेखित करने के लिए घुमा दे।
(b) स्थिति
(i) एवं
(ii) में चुम्बक पर कितना बल आघूर्ण होता है।
हल-
दिया है, चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण M = 1.5 जूल/टेस्ला
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 0.22 टेस्ला
θ1 = 0
(a) (i) चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् लाने के लिए
θ2 = 90°
अतः कृत कार्य W= MB [cos θ1 – cos θ2]
= 1.5 x 0.22 x [cos 0 – cos 90°]
= 1.5 x 0.22 x [1 – 0]
= 0.33 जूल

(i) चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र की विपरीत दिशा में लाने के लिए
θ2 = 180°
अतः कृत कार्य W = MB [cos θ1 – cos θ2]
= 1.5 x 0.22 x [cos 0 – cos 180°]
= 1.5 x 0.22 x [1 – (-1)]
= 0.66 जूल

(b) (i) जब θ2 = 90° तब चुम्बक पर बल-आघूर्ण
t = MB sinθ
= 1.5 x 0.22 x sin 90
= 1.5 x 0.22 x 1
= 0.33 न्यूटन-मीटर

(ii) जब θ2 = 180° तब चुम्बक पर बल-आघूर्ण
t = MB sinθ
= 1.5 x 0.22 x sin 180°
= 1.5 x 0.22 x 0
= 0

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
एक परिनालिका जिसमें पास-पास 2000 फेरे लपेटे गए हैं तथा जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 1.6 x 10-4 m है और जिसमें 4.0 A की धारा प्रवाहित हो रही है, इसके केन्द्र से इस प्रकार लटकाई गई है कि यह एक क्षैतिज तल में घूम सके।
(a) परिनालिका के चुम्बकीय-आघूर्ण का मान क्या है?
(b) परिनालिका पर लगने वाला बल एवं बल आघूर्ण क्या है, यदि इस पर, इसकी अक्ष से 30° का कोण बनाता हुआ 7.5 x 10-2 T का एकसमान क्षैतिज चुम्बकीय-क्षेत्र लगाया जाए?
हल-
यहाँ N = 2000, A = 1.6 x 10-4 m, i = 4.0 A
(a) परिनालिका का चुम्बकीय आघूर्ण, M = NiA = 2000 x 4.0 x 1.6 x 10-4 = 1.28 ऐम्पियर-मीटर
(b) धारावाही परिनालिका (अथवा चुम्बकीय द्विध्रुव) पर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में नेट बल सदैव शून्य होगा।
परिनालिका पर बल-आघूर्ण, τ = MB sin θ.
यहाँ B = 7.5 x 10-2 T, θ = 30°
τ = 1.28 x 7.5 x 10-2 x sin 30° = 1.28 x 7.5 x 10-2 x 0.5 = 48 x 10-2 न्यूटन-मीटर

प्रश्न 9.
एक वृत्ताकार कुंडली जिसमें 16 फेरे हैं, जिसकी त्रिज्या 10 सेमी है और जिसमें 0.75 A धारा प्रवाहित हो रही है, इस प्रकार रखी है कि इसका तल, 5.0 x 10-2 T परिमाण वाले बाह्य क्षेत्र के लम्बवत है। कुंडली, चुम्बकीय-क्षेत्र के लम्बवत और इसके अपने तल में स्थित एक अक्ष के चारों तरफ घूमने के लिए स्वतन्त्र है। यदि कुंडली को जरा-सा घुमाकर छोड़ दिया जाए तो यह अपनी स्थायी सन्तुलनावस्था के इधर-उधर 2.0 s-1 की आवृत्ति से दोलन करती है। कुंडली का अपने घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण क्या है?
हल-
दिया है, कुण्डली की त्रिज्या r = 10 सेमी = 0.1 मीटर
कुण्डली में तार के फेरों की संख्या N = 16
कुण्डली में प्रवाहित धारा I = 0.75 ऐम्पियर
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 5.0 x 10-2 टेस्ला
कुण्डली की दोलन आवृत्ति f = 2.0 प्रति सेकण्ड
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 10.
एक चुम्बकीय सुई चुम्बकीय याम्योत्तर के समान्तर एक ऊध्र्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है। इसका उत्तरी ध्रुव क्षैतिज से 22° के कोण पर नीचे की ओर झुका है। इसे स्थान पर चुम्बकीय-क्षेत्र के क्षैतिज अवयव का मान 0.35 G है। इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q10
प्रश्न 11.
दक्षिण अफ्रीका में किसी स्थान पर एक चुम्बकीय सुई भौगोलिक उत्तर से 12° पश्चिम की ओर संकेत करती है। चुम्बकीय याम्योत्तर में संरेखित नति-वृत्त की चुम्बकीय सुई का उत्तरी ध्रुव क्षैतिज से 60° उत्तर की ओर संकेत करता है। पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का क्षैतिज अवयव मापने पर 0.16 G पाया जाता है। इस स्थान पर पृथ्वी के क्षेत्र का परिमाण और दिशा बताइए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 12.
किसी छोटे छड़ चुम्बक का चुम्बकीय-आघूर्ण 0.48 JT-1 है। चुम्बक के केन्द्र से 10 cm की दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर इसके चुम्बकीय-क्षेत्र का परिमाण एवं दिशा बताइए यदि यह बिन्दु
(i) चुम्बक के अक्ष पर स्थित हो,
(ii) चुम्बक के अभिलम्ब समद्विभाजक पर स्थित हो।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 13.
क्षैतिज तल में रखे एक छोटे छड़ चुम्बक का अक्ष, चुम्बकीय उत्तर-दक्षिण दिशा के अनुदिश है। सन्तुलन बिन्दु चुम्बक के अक्ष पर, इसके केन्द्र से 14 सेमी दूर स्थित है। इस स्थान पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र 0.36 G एवं नति कोण शून्य है। चुम्बक के अभिलम्ब समद्विभाजक पर इसके केन्द्र से उतनी ही दूर (14 सेमी) स्थित किसी बिन्दु पर परिणामी चुम्बकीय-क्षेत्र क्या होगा ?
हल-
दिया है, पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र B = 0.36 गौस = 0.36 x 10-4 टेस्ला
θ = 0
चुम्बक की अक्ष पर उदासीन बिन्दु की दूरी r = 14 सेमी = 0.14 मीटर
यदि अक्षीय बिन्दु पर चुम्बक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B1 हो, तो
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q13.1
UP Board Solutions

प्रश्न 14.
यदि प्रश्न 13 में वर्णित चुम्बक को 180° से घुमा दिया जाए तो सन्तुलन बिन्दुओं की नई स्थिति क्या होगी?
हल-
चुम्बक को 180° घुमाने पर चुम्बक का उत्तरी ध्रुव भौगोलिक उत्तर की ओर हो जाएगा, अत: अब उदासीन बिन्दु चुम्बक की विषुवत् रेखा पर प्राप्त होगा।
यदि उदासीन बिन्दु की चुम्बके से दूरी r हो, तो
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 15.
एक छोटा छड़ चुम्बक जिसका चुम्बकीय-आघूर्ण 5.25 x 10-2 JT-1 है, इस प्रकार रखा है कि इसका अक्ष पृथ्वी के क्षेत्र की दिशा के लम्बवत है। चुम्बक के केन्द्र से कितनी दूरी पर, परिणामी क्षेत्र पृथ्वी के क्षेत्र की दिशा से 45° का कोण बनाएगा, यदि हम
(a) अभिलम्ब समद्विभाजक पर देखें,
(b) अक्ष पर देखें। इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का परिमाण 0.42 G है। प्रयुक्त दूरियों की तुलना में चुम्बक की लम्बाई की उपेक्षा कर सकते हैं।
हल-
दिया है,
m = 5.25 x 10-2 JT-1, Be = 0.42 G = 0.42 x 10-4 T
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q15
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 16.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  1. ठण्डा करने पर किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ का नमूना अधिक चुम्बकन क्यों प्रदर्शित करता हैं? (एक ही चुम्बककारी क्षेत्र के लिए)
  2. अनुचुम्बकत्व के विपरीत, प्रतिचुम्बकत्व पर ताप का प्रभाव लगभग नहीं होता। क्यों ?
  3. यदि एक टोरॉइड में बिस्मथ का क्रोड लगाया जाए तो इसके अन्दर चुम्बकीय-क्षेत्र उस स्थिति की तुलना में (किंचित) कम होगा या (किंचित) ज्यादा होगा, जबकि क्रोड खाली हो?
  4. क्या किसी लौह चुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकशीलता चुम्बकीय-क्षेत्र पर निर्भर करती है? यदि हाँ, तो उच्च चुम्बकीय-क्षेत्रों के लिए इसका मान कम होगा या अधिक?
  5. किसी लौह चुम्बक की सतह के प्रत्येक बिन्द पर चुम्बकीय-क्षेत्र रेखाएँ सदैव लम्बवत होती हैं (यह तथ्य उन स्थिरविद्युत क्षेत्र रेखाओं के सदृश है जो कि चालक की सतह के प्रत्येक बिन्दु पर लम्बवत होती हैं। क्यों?
  6. क्या किसी अनुचुम्बकीय नमूने का अधिकतम सम्भव चुम्बकन, लौह चुम्बक के चुम्बकन के परिमाण की कोटि का होगा?

उत्तर-

  1. ताप के घटने पर पदार्थ के परमाण्वीय चुम्बकों का ऊष्मीय विक्षोभ कम हो जाता है जिसके कारण इन चुम्बकों के बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र की दिशा में संरेखित होने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।
  2. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के परमाणु ऊष्मीय विक्षोभ के कारण, भले ही किसी भी स्थिति में हों, उनमें बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र के कारण, प्रेरित चुम्बकीय आघूर्ण सदैव ही बाह्य क्षेत्र के विपरीत दिशा में प्रेरित होता है। इस प्रकार प्रतिचुम्बकत्व पर ताप का कोई प्रभाव नहीं होता।
  3. चूँकि बिस्मथ एक प्रतिचुम्बकीय पदार्थ है; अतः चुम्बकीय-क्षेत्र अपेक्षाकृत कुछ कम हो जाएगा।
  4. लौह चुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकशीलता बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र पर निर्भर करती है तथा तीव्र चुम्बकीय-क्षेत्र के लिए इसका मान कम होता है।
  5. जब दो माध्यम किसी स्थान (UPBoardSolutions.com) पर मिलते हैं जिनमें से एक के लिए µ >> 1 हो तो इनके सीमा पृष्ठ पर क्षेत्र रेखाएँ लम्बवत् हो जाती हैं।
  6. हाँ, किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ का अधिकतम सम्भव चुम्बकत्व, लौह चुम्बकीय पदार्थ के चुम्बकन के परिमाण की कोटि को हो सकता है। परन्तु किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ को इस कोटि तक चुम्बकित करने के लिए अति उच्च चुम्बकीय-क्षेत्र की आवश्यकता होती है जिसे प्राप्त करना व्यवहार में सम्भव नहीं है।

UP Board Solutions

प्रश्न 17.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  1. लौह चुम्बकीय पदार्थ के चुम्बकन वक्र की अनुत्क्रमणीयता, डोमेनों के आधार पर गुणात्मक दृष्टिकोण से समझाइए।
  2. नर्म लोहे के एक टुकड़े के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल, कार्बन-स्टील के टुकड़े के शैथिल्य लूप के क्षेत्रफल से कम होता है। यदि पदार्थ को बार-बार चुम्बकन चक्र से गुजारा जाए तो कौन-सा टुकड़ा अधिक ऊष्मा ऊर्जा का क्षय करेगा?
  3. लौह चुम्बक जैसा शैथिल्य लूप प्रदर्शित करने वाली कोई प्रणाली स्मृति संग्रहण की युक्ति है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  4. कैसेट के चुम्बकीय फीतों पर परत चढ़ाने के लिए या आधुनिक कम्प्यूटर में स्मृति संग्रहण के लिए, किस तरह के लौह चुम्बकीय पदार्थों का इस्तेमाल होता है?
  5. किसी स्थान को चुम्बकीय-क्षेत्र से परिरक्षित करना है। कोई विधि सुझाइए।

उत्तर-

  1. जब बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र को शून्य कर दिया जाता है तो भी लौह चुम्बकीय पदार्थ के डोमेन अपनी प्रारम्भिक स्थिति में नहीं लौट पाते अपितु उनमें कुछ चुम्बकन शेष रह जाता है। यही कारण है कि लौह चुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकन वक्र अनुत्क्रमणीय होता है।
  2. किसी पदार्थ के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल एक पूर्ण चुम्बकन चक्र में होने वाली ऊर्जा हानि को प्रदर्शित करता है। यह ऊर्जा हानि ही पदार्थ में ऊष्मा के रूप में उत्पन्न होती है। चूंकि कार्बन-स्टील के शैथिल्य लूप को क्षेत्रफल अधिक है; अतः इसमें अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी अर्थात् कार्बन-स्टील का टुकड़ा अधिक ऊष्मा क्षय करेगा।
  3. किसी लौह-चुम्बकीय पदार्थ का (UPBoardSolutions.com) चुम्बकन उस पर लगाए गए बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र के चक्रों की संख्या पर निर्भर करता है। इस प्रकार किसी लौह चुम्बकीय पदार्थ का चुम्बकन उस पर लगाए गए चुम्बकन चक्र की सूचना दे सकता है। इस प्रकार चुम्बकन चक्र की स्मृति, चुम्बकित पदार्थ के नमूने में एकत्र हो जाती है।
  4. इस कार्य के लिए सिरेमिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।
  5. किसी स्थान को चुम्बकीय-क्षेत्र से परिरक्षित करने के लिए उस स्थान को नर्म लोहे के रिंग से घेर देना चाहिए। इससे चुम्बकीय-क्षेत्र रेखाएँ, नर्म लोहे के रिंग से होकर गुजर जाती हैं तथा रिंग के भीतर प्रवेश नहीं कर पातीं।

प्रश्न 18.
एक लम्बे, सीधे, क्षैतिज केबल में 2.5 A धारा, 10° दक्षिण-पश्चिम से 10° उत्तर-पूर्व की ओर प्रवाहित हो रही है। इस स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर भौगोलिक याम्योत्तर के 10° पश्चिम में है। यहाँ पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र 0.33 G एवं नति कोण शून्य है। उदासीन बिन्दुओं की रेखा निर्धारित कीजिए। (केबल की मोटाई की उपेक्षा कर सकते हैं।) (उदासीन बिन्दुओं पर, धारावाही केबल द्वारा चुम्बकीय-क्षेत्र, पृथ्वी के क्षैतिज घटक के चुम्बकीय-क्षेत्र के समान एवं विपरीत दिशा में होता है।)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 19.
किसी स्थान पर एक टेलीफोन केबल में चार लम्बे, सीधे, क्षैतिज तार हैं जिनमें से प्रत्येक में 1.0 A की धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। इस स्थान पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र 0.39 G एवं नति कोण 35° है। दिक्पात कोण लगभग शून्य है। केबल के 4.0 cm नीचे और 4.0 cm ऊपर परिणामी चुम्बकीय-क्षेत्रों के मान क्या होंगे?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q19
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 20.
एक चुम्बकीय सुई जो क्षैतिज तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है, 30 फेरों एवं 12 cm त्रिज्या वाली एक कुंडली के केन्द्र पर रखी है। कुंडली एक ऊर्ध्वाधर तल में है और चुम्बकीय याम्योत्तर से 45° का कोण बनाती है। जब कुंडली में 0.35 A धारा प्रवाहित होती है, चुम्बकीय सुई पश्चिम से पूर्व की ओर संकेत करती है।
(a) इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के दौतिज अवयव का मान ज्ञात कीजिए।
(b) कुंडली में धारा की दिशा उलट दी जाती है और इसको अपनी ऊध्र्वाधर अक्ष पर वामावर्त दिशा में (ऊपर से देखने पर) 90° के कोण पर घुमा दिया जाता है। चुम्बकीय सुई किस दिशा में ठहरेगी? इस स्थान पर चुम्बकीय दिक्पात शून्य लीजिए।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
(b) चित्र (b) से स्पष्ट है कि इस बार नेट चुम्बकीय-क्षेत्र पूर्व से पश्चिम की ओर होगा; अत: चुम्बकीय सुई पूर्व से पश्चिम की ओर संकेत करेगी।

प्रश्न 21.
एक चुम्बकीय द्विध्रुव दो चुम्बकीय-क्षेत्रों के प्रभाव में है। ये क्षेत्र एक-दूसरे से 60° का कोण बनाते हैं और उनमें से एक क्षेत्र का परिमाण 12 x 10-2 T है। यदि द्विध्रुव स्थायी सन्तुलन में इस क्षेत्र से 15° का कोण बनाए, तो दूसरे क्षेत्र का परिमाण क्या होगा ?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 22.
एक समोर्जी 18 keV वाले इलेक्ट्रॉनों के किरण पुंज पर जो शुरू में क्षैतिज दिशा में गतिमान है, 0.04 G का एक क्षैतिज चुम्बकीय-क्षेत्र, जो किरण पुंज की प्रारम्भिक दिशा के लम्बवत है, लगाया गया है। आकलन कीजिए 30 सेमी की क्षैतिज दूरी चलने में किरण पुंज कितनी दूरी ऊपर या नीचे विस्थापित होगा ? (me = 911 x 10-31 kg, e = 160 x 10-19 C)।
[नोट: इस प्रश्न में आँकड़े इस प्रकार चुने गए हैं कि उत्तर से आपको यह अनुमान हो कि TV सेट में इलेक्ट्रॉन गन से पर्दे तक इलेक्ट्रॉन किरण पुंज की गति भू-चुम्बकीय-क्षेत्र से किस प्रकार प्रभावित होती है।]
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 23.
अनुचुम्बकीय लवण के एक नमूने में 2.0 x 1024 परमाणु द्विध्रुव हैं जिनमें से प्रत्येक का द्विध्रुव आघूर्ण 1.5 x 10-23 JT-1 है। इस नमूने को 0.64 T के एक एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र में रखा गया है और 4.2 K ताप तक ठण्डा किया गया। इसमें 15% चुम्बकीय संतृप्तता आ गई। यदि इस नमूने को 0.98 T के चुम्बकीय-क्षेत्र में 2.8 K ताप पर रखा हो तो इसका कुल द्विध्रुव आघूर्ण कितना होगा? (यह मान सकते हैं कि क्यूरी नियम लागू होता है।)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q23.1
UP Board Solutions

प्रश्न 24.
एक रोलैंड रिंग की औसत त्रिज्या 15 सेमी है और इसमें 800 आपेक्षिक चुम्बकशीलता के लौह चुम्बकीय क्रोड पर 3500 फेरे लिपटे हुए हैं। 1.2 A की चुम्बककारी धारा के कारण इसके क्रोड में कितना चुम्बकीय-क्षेत्र ([latex s=2]\vec { B }[/latex]) होगा ?
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q24

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q25
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter Q25
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक है- (2011, 12)
(i) न्यूटन/ऐम्पियर-मीटर
(ii) ऐम्पियर-मीटर
(iii) वेबर/मीटर2
(iv) हेनरी
उत्तर-
(ii) ऐम्पियर-मीटर

प्रश्न 2.
एक वृत्तीय धारा लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण M है। यदि धारा लूप की त्रिज्या आधी कर दी जाए तब चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण होगा (2014)
(i) M
(ii) [latex s=2]\frac { M }{ 2 }[/latex]
(iii) [latex s=2]\frac { M }{ 4 }[/latex]
(iv) 4M
उत्तर-
(i) [latex s=2]\frac { M }{ 2 }[/latex]

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
l मीटर लम्बाई के एक चालक तार को वृत्ताकार लूप में मोड़ा जाता है तथा ऐम्पियर की धारा प्रवाहित की जाती है। लूप का चुम्बकीय आघूर्ण होगा- (2010, 11)
(i) il²/4π
(ii) il²/2π
(iii) πil²
(iv) il
उत्तर-
(i) il²/4π

प्रश्न 4.
पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों पर नति(नमन) कोण का मान है- (2012, 18)
(i) 45°
(ii) 30°
(iii) शून्य
(iv) 90°
उत्तर-
(iv) 90°

प्रश्न 5.
चुम्बकीय याम्योत्तर तथा भौगोलिक याम्योत्तर के बीच के कोण को कहते हैं- (2013)
(i) नति कोण
(ii) दिक्पात कोण
(iii) ध्रुवण कोण
(iv) क्रान्तिक कोण
उत्तर-
(ii) दिक्पात कोण

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटक बराबर हैं। उस स्थान पर नति कोण का मान होगा- (2009, 11, 12, 17)
(i) 0°
(ii) 45°
(iii) 60°
(iv) 90°
उत्तर-
(ii) 45°
[संकेत- tan θ = V/H = H/H = 1 = tan 45° ⇒ θ = 45°]

प्रश्न 7.
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक शून्य होता है- (2010)
(i) चुम्बकीय ध्रुवों पर
(ii) भौगोलिक ध्रुवों पर
(iii) प्रत्येक स्थान पर
(iv) चुम्बकीय निरक्ष पर
उत्तर-
(i) चुम्बकीय ध्रुवों पर

प्रश्न 8.
पृथ्वी तल के किसी निश्चित स्थान पर, पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक, क्षैतिज घटक का √3 गुना है। इस स्थान पर नति कोण है- (2015)
(i) 0°
(ii) 30°
(iii) 45°
(iv) 60°
उत्तर-
(iv) 60°

प्रश्न 9.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकत्व का क्षैतिज घटक H = 0.3 x 10-4 वेबर/मी2 तथा नमन कोण 30° है। सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा| (2017)
(i) 0.46 x 10-4 वेबर/मी2
(ii) 0.26 x 10-4 वेबर/मी2
(iii) 4.6 x 10-6 वेबर/मी2
(iv) 3.4 x 10-5 वेबर/मी2
उत्तर-
(iv) 3.4 x 10-5 वेबर/मी2

प्रश्न 10.
चुम्बकीय क्षेत्र B के लम्बवत् v वेग से चलने वाले आवेश q पर लगने वाले बल F का मान है-
(i) F = qvB
(ii) F = [latex s=2]\frac { qv }{ B }[/latex]
(iii) F = [latex s=2]\frac { qB }{ v }[/latex]
(iv) F = [latex s=2]\frac { Bv }{ q }[/latex]
उत्तर-
(i) F = qvB

प्रश्न 11.
चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान कम परन्तु धनात्मक होता है- (2012)
(i) अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिए।
(ii) लौहचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(iii) प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(iv) उपरोक्त सभी पदार्थों के लिए
उत्तर-
(i) अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिए

UP Board Solutions

प्रश्न 12.
अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकशीलता का मान होता है- (2012)
(i) 0
(ii) > 1
(iii) < 1
(iv) 1
उत्तर-
(ii) > 1

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनुदैर्ध्य स्थिति में किसी छोटे चुम्बक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता (चुम्बकीय बल क्षेत्र) को सूत्र लिखिए। प्रयुक्त संकेतों का अर्थ भी लिखिए। यो चुम्बकीय द्विध्रुव के कारण अक्षीय स्थिति में किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक लिखिए। (2013)
उत्तर-
अनुदैर्ध्य स्थिति (End-on Position)- M चुम्बकीय बल- आघूर्ण के किसी छोटे दण्ड चुम्बक की अक्षीय रेखा पर इसके मध्य बिन्दु O से r दूरी पर निर्वात् अथवा (UPBoardSolutions.com) वायु में बिन्दु P पर चुम्बकीय क्षेत्र [latex s=2]\vec { B }[/latex] का परिमाण
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
जहाँ, µ0 निर्वात् की चुम्बकशीलता = 4π x 10-7 न्यूटन/ऐम्पियर2 है। चुम्बकीय क्षेत्र B की दिशा अक्ष के समान्तर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।

प्रश्न 2.
परमाणु में परिक्रमण करने वाले इलेक्ट्रॉन के लिए चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण का सूत्र लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए। (2016)
उत्तर-
M = NiA
जहाँ, N = फेरों की संख्या, i = कक्षा के किसी बिन्दु से 1 सेकण्ड में गुजरने वाला आवेश तथा A = लूप के परिच्छेद का क्षेत्रफल

प्रश्न 3.
एक चुम्बक के अक्षीय स्थिति में 10 सेमी दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता 2.0 x 10-4 टेस्ला है। चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण तथा उसके निरक्षीय स्थिति में 20 सेमी की दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता की गणना कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

UP Board Solutions

प्रश्न 4.
3.5 सेमी त्रिज्या की वृत्ताकार कुण्डली में 10.0 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। इसका चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए। (2013)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter VSAQ 4

प्रश्न 5.
चुम्बकीय याम्योत्तर की परिभाषा लिखिए। (2012,14)
उत्तर-
किसी स्थान पर अपने गुरुत्व केन्द्र से स्वतन्त्रतापूर्वक लटकायी गयी चुम्बक के चुम्बकीय अक्ष से गुजरने वाले ऊर्ध्वाधर तल को चुम्बकीय याम्योत्तर कहते हैं।

प्रश्न 6.
नति कोण से आप क्या समझते हैं? (2016)
उत्तर-
नति कोण वह कोण है, जो चुम्बकीय याम्योत्तर में पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र Be की दिशा तथा क्षैतिज दिशा के बीच बनता है।

प्रश्न 7.
दिक्पात कोण से क्या तात्पर्य है? (2017)
उत्तर-
पृथ्वी की सतह पर किसी स्थान पर भौगोलिक याग्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच बने न्यूनकोण को उस स्थान के लिए दिक्पात कोण कहते हैं। इसे ‘α’ से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 8.
पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव पर नमन कोण का मान क्या होता है?
उत्तर-
नति कोण को अधिकतम मान 90° है जो पृथ्वी के उत्तरी व दक्षिणी चुम्बकीय ध्रुवों पर होता है।

प्रश्न 9.
किन दो स्थानों पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक शून्य होता है ? (2012)
उत्तर-
पृथ्वी के चुम्बकीय उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव पर। चूँकि इन स्थानों पर नति कोण θ = 90°
अतः H = Be cos θ = Be cos 90° = Be x 0 = 0

UP Board Solutions

प्रश्न 10.
किसी स्थान पर नति कोण, पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक तथा ऊर्ध्व घटक के बीच सम्बन्ध लिखिए। (2010, 12)
या
भू-चुम्बकत्व के अवयवों का आपस में सम्बन्ध लिखिए। (2017)
उत्तर-
tan θ = V/H (जहाँ θ = नति कोण, V = Be sin θ (ऊर्ध्व घटक), H = Be cos θ (क्षैतिज घटक) जहाँ, Be = पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र]

प्रश्न 11.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटक प्रत्येक 0.5 गौस के बराबर हैं। पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की सम्पूर्ण तीव्रता का मान ज्ञात कीजिए। (2015)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 12.
एक स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक 0.2√3 x 10-4 टेस्ला है। यदि उस स्थान पर नति कोण 30° हो तो चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक के मान की गणना कीजिए। (2014)

UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter VSAQ 13

प्रश्न 13.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक का मान ऊर्ध्व घटक के मान का √3 गुना है। उस स्थान पर नमन कोण का मान क्या होगा ? (2011, 14)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter VSAQ 12

UP Board Solutions

प्रश्न 14.
एक स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक 0.3 गौस तथा नति कोण 60° है। उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की सम्पूर्ण तीव्रता ज्ञात कीजिए। (2013, 16)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 15.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटक प्रत्येक 0.35 गौस के बराबर हैं। उस स्थान पर नमन कोण का मान ज्ञात कीजिए। (2015, 16)
हल-
tan θ = [latex s=2]\frac { V }{ H }[/latex] = 1 [V = H = 0.35]
नति कोण θ = 45°

प्रश्न 16.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटक समान हैं। उस स्थान पर नमन कोण का मान ज्ञात कीजिए। (2015, 16)
हल-
tan θ = [latex s=2]\frac { V }{ H }[/latex] = [latex s=2]\frac { H }{ H }[/latex] = 1 [∵ V = H]
tan θ = tan 45° ⇒ θ = 45°
अतः नमन कोण 45° होगा।

प्रश्न 17.
यदि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षैतिज घटक H तथा नमन कोण θ है, तो सम्पूर्ण क्षेत्र की तीव्रता कितनी होगी? (2016)
उत्तर-
दिया है, पृथ्वी का चुम्बकीय घटक H तथा नमन कोण θ है,
H = Be cos θ
सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता Be = H/cos θ

UP Board Solutions

प्रश्न 18.
यदि पृथ्वी के किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर घटक का मान क्षैतिज घटक के मान का √3 गुना हो तो उस स्थान पर नति कोण का मान क्या होगा? (2017)
हल-
माना उर्ध्वघटक V = B sin θ
क्षैतिज घटक H = B cos θ
V = H tan θ प्रश्नानुसार, V√3 = H
अतः V = V√3 tan θ
tan θ = [latex s=2]\frac { 1 }{ \surd 3 }[/latex] = tan 30°
θ = 30°
अतः नति कोण θ = 30°

प्रश्न 19.
किन्हीं दो प्रतिचुम्बकत्व वाले पदार्थों के नाम लिखिए। (2011)
उत्तर-
बिस्मथ तथा ऐण्टीमनी।

प्रश्न 20.
एक अनुचुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकीय सुग्राहिता (ψ) का मान 10-4 है। पदार्थ के सापेक्ष चुम्बकशीलता (µr) का मान ज्ञात कीजिए। (2014)
हल-
µr = 1 + ψ = 1 + 10-4 = 1 + 0.0001 = 1.0001

प्रश्न 21.
निम्नलिखित पदार्थों में से प्रतिचुम्बकीय तथा अनुचुम्बकीय पदार्थों को चुनिए-ताँबा, सोडियम, प्लैटिनम तथा चाँदी। (2017)
उत्तर-
प्रतिचुम्बकीय – ताँबा, चाँदी
अनुचुम्बकीय – सोडियम, प्लैटिनम

UP Board Solutions

प्रश्न 22.
प्रति तथा अनुचुम्बकीय पदार्थों में मुख्य अन्तर लिखिए। (2017, 18)
उत्तर-
ऐसे पदार्थ जो तीव्र प्रबलता के चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में आंशिक रूप से चुम्बकित होते हैं, प्रति चुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। जैसे—सोना, चाँदी, हीरा, नमक, जल, वायु आदि। ऐसे पदार्थ जो प्रबल तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की दिशा में आंशिक रूप (UPBoardSolutions.com) से चुम्बकित होते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। जैसे-ऐलुमिनियम, प्लैटिनम, सोडियम, कॉपर क्लोराइड, ऑक्सीजन आदि।

प्रश्न 23.
किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का व्यवहार अनुचुम्बकीय पदार्थों से किस प्रकार भिन्न होता है? (2017)
उत्तर-
प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की छड़ों को शक्तिशाली चुम्बक के ध्रुवों के बीच स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाने पर इनकी अक्ष (लम्बाई) चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् दिशा में हो जाती है। जबकि अनुचुम्बकीय पदार्थों की छड़ों को शक्तिशाली चुम्बक के ध्रुवों के बीच स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाने पर इनकी अक्ष (लम्बाई) चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में हो जाती है।

प्रश्न 24.
विद्युत चुम्बक किसी स्थायी चुम्बक से किस प्रकार भिन्न होता है? (2017)
उत्तर-
वैद्युत चुम्बक बनाने के लिए नर्म लोहे की एक सीधी छड़ अथवा घोड़े की नाल के आकार की छड़ पर किसी चालक पदार्थ के वैद्युतरोधी तार लपेटकर तार में धारा प्रवाहित की जाती है। धारा प्रवाहित करने पर परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित हो जाता है तथा छड़ के अन्दर उपस्थित (UPBoardSolutions.com) डोमेनों के घूर्णन द्वारा वह पूर्णत: चुम्बकित हो जाती है। वैद्युत चुम्बकों का उपयोग वैद्युत घण्टी, ट्रांसफॉर्मर, वैद्युतमोटर, डायनमो आदि में किया जाता है जबकि स्थायी चुम्बक बनाने के लिए स्टील का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि स्टील की धारणशीलता नर्म लोहे से कम होती है परन्तु इसकी निग्राहिता नर्म लोहे की अपेक्षा बहुत अधिक होती है। स्टील का एक बार चुम्बकन हो जाने पर सरलता से विचुम्बकन नहीं होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चुम्बकीय द्विध्रुव-आघूर्ण की परिभाषा लिखिए। चुम्बकीय द्विध्रुव-आघूर्ण सदिश राशि है। अथवा अदिश राशि? इसका मात्रक भी लिखिए। (2010, 17)
या
चुम्बकीय आघूर्ण की परिभाषा एवं मात्रक लिखिए। (2012, 18)
या
चुम्बकीय द्विध्रुव-आघूर्ण का सूत्र तथा इसका S.I. मात्रक लिखिए। (2014)
या
चुम्बकीय द्विध्रुव-आघूर्ण की परिभाषा लिखिए। समांग चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित चुम्बकीय द्विध्रुव पर लगने वाले बल के आघूर्ण का सूत्र प्राप्त कीजिए। (2015)
उत्तर-
माना चुम्बकीय द्विध्रुव एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में क्षेत्र की दिशा से θ कोण बनाते हुए रखा गया है। अत: द्विध्रुव पर लगने वाले बल-युग्म का आघूर्ण,
τ = MB sin θ.
यदि θ = 90° तो sin θ = 1, तब चुम्बकीय द्विध्रुव पर लगने वाला बल-आघूर्ण अधिकतम होगा, अर्थात्
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter SAQ 1
अत: किसी चुम्बकीय द्विधुव( अथवा धारा लूप) का चुम्बकीय आघूर्ण वह बल-आघूर्ण है जो इस द्विध्रुव को एकसमान एकांक चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् रखने पर द्विध्रुव पर लगता है। (UPBoardSolutions.com)
चुम्बकीय द्विध्रुव-आधूर्ण एक सदिश राशि है तथा इसकी दिशा द्विध्रुव के अक्ष के अनुदिश होती है। धारा लूप में चुम्बकीय-आघूर्ण की दिशा दायें हाथ के नियम द्वारा ज्ञात की जाती है। इस नियम के अनुसार, यदि हम अपने दायें हाथ के पंजे को पूरा फैलाकर अँगुलियों को लूप के चारों ओर धारा की दिशा में मोड़े तो अँगूठा चुम्बकीय-आघूर्ण की दिशा की ओर होगा।
मात्रक एवं विमाएँ
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 2.
एक परमाणु के नाभिक के परितः एक इलेक्ट्रॉन 0.5 Å त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर 5.0 x 1015 चक्कर/से की आवृत्ति से घूम रहा है। परमाणु का चुम्बकीय-आघूर्ण ज्ञात कीजिए। (2012, 18)
हल-
कक्षा में चक्कर काटता इलेक्ट्रॉन एक धारा-लूप के तुल्य है, जिसमें धारा का मान।
i = कक्षा के किसी बिन्दु से 1 सेकण्ड में गुजरने वाला आवेश
= इलेक्ट्रॉन-आवेण x 1 सेकण्ड में चक्करों की संख्या
= (1.6 x 10-19 कूलॉम) x (5.0 x 1015 सेकण्ड-1)
= 8 x 10-4 ऐम्पियर
तुल्य धारा-लूप का चुम्बकीय आघूर्ण M = Ni A
जहाँ, N फेरों की संख्या है तथा A लूप का परिच्छेद-क्षेत्रफल है। यहाँ N = 1; i = 8 x 10-4 ऐम्पियर
तथा A = πr² = π (0.5 x 10-10 मीटर)2
M = 1 x (8 x 10-4) x 3.14 x (0.5 x 10-10)2 = 6.28 x 10-24 ऐम्पियर-मीटर

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
100 फेरों वाली तथा 15 सेमी x 10 सेमी क्षेत्रफल की एक कुण्डली B = 1.0 वेबर/मी2 के चुम्बकीय क्षेत्र में रखी गई है। कुण्डली में धारा 0.2 ऐम्पियर है तथा कुण्डली का तलं चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर है। कुण्डली पर लगते हुए बल आघूर्ण की गणना कीजिए। (2010)
हल-
τ = NiAB sinθ = 100 x 0.2 (15 x 10 x 10-4) x 1.0 sin 90° = 0.3 न्यूटन-मीटर।

प्रश्न 4.
एक लम्बे सीधे तार में 5 ऐम्पियर की वैद्युत धारा प्रवाहित होती है। एक इलेक्ट्रॉन तार से 10 सेमी दूरी पर हवा में 1 x 106 मी/सेकण्ड से धारा की दिशा के समान्तर गति कर रहा है। इलेक्ट्रॉन पर बल की गणना कीजिए। (2016)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 5.
एक हाईड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन 0.53 Å त्रिज्या की एक कक्षा में 2.3 x 106 मी/सेकण्ड के वेग से घूम रहा है। परिक्रमण करने वाले इलेक्ट्रॉन के चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए। (2016)
हल-
दिया है, इलेक्ट्रॉन की त्रिज्या r = 0.53 Å = 0.53 x 10-10 मीटर = 5.3 x 10-11 मीटर
तथा वेग, v = 2.3 x 106 मीटर/सेकण्ड
परिक्रमण करने वाले इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter SAQ 5

प्रश्न 6.
एक परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर 6.6 x 104 मी/से के वेग से 0.7 A त्रिज्या की कक्षा में घूम रहा है। इसके तुल्य वैद्युत धारा तथा इसके तुल्य चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए। (2014)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 7.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज व ऊर्ध्व घटक बराबर हैं। यदि क्षैतिज घटक का मान 0.3 x 10-4 वेबर/मीटर2 हो तब उस स्थान पर सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता कितनी होगी ? (2012)
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter SAQ 7

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
चुम्बकत्व के परमाणवीय मॉडल की व्याख्या कीजिए। (2010, 18)
उत्तर-
चुम्बकत्व का परमाणवीय मॉडल- प्रत्येक पदार्थ असंख्य परमाणुओं से मिलकर बना है। प्रत्येक परमाणु के केन्द्र पर एक धनावेशित नाभिक होता है जिसके चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन घूमते रहते हैं। ये इलेक्ट्रॉन कक्षीय परिक्रमण के अतिरिक्त अपनी धुरी पर भी घूमते रहते हैं। इसे (UPBoardSolutions.com) ‘चक्रण (spin) कहते हैं। चूंकि प्रत्येक इलेक्ट्रॉन आवेशित होता है; अतः कक्षीय अथवा चक्रण गति करता हुआ इलेक्ट्रॉन एक धारावाही लूप या चुम्बकीय द्विध्रुव की भाँति व्यवहार करता है। इसी कारण परमाणु में चुम्बकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है। परमाणु में चुम्बकीय आघूर्ण का अधिकांश भाग (90%) इलेक्ट्रॉनों के ‘चक्रण के कारण होता है; कक्षीय परिक्रमण के कारण आघूर्ण बहुत कम (10%) होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter

प्रश्न 9.
चुम्बकशीलता, चुम्बकीय प्रवृत्ति तथा आपेक्षिक चुम्बकशीलता से क्या तात्पर्य है? किस प्रकार के चुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप पर निर्भर नहीं करती है? (2013)
उत्तर-
चुम्बकशीलता µ (Magnetic Permeability)- जब किसी चुम्बकीय पदार्थ को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो वह पदार्थ चुम्बकित हो जाता है तथा उस पदार्थ में से, वायु के सापेक्ष, अधिक बल-रेखाएँ गुजरती हैं। इससे स्पष्ट है कि बल-रेखाएँ वायु की अपेक्षा चुम्बकीय पदार्थ में से अधिक (UPBoardSolutions.com) सुगमता से गुजरती हैं। इसे हम इस प्रकार भी व्यक्त कर सकते हैं कि वायु की अपेक्षा लोहे में अधिक ‘चुम्बकशीलता’ है। किसी चुम्बकीय पदार्थ में उत्पन्न चुम्बकीय प्रेरण [latex s=2]\vec { B }[/latex] तथा [latex s=2]\vec { H }[/latex] चुम्बकीय क्षेत्र में के अनुपात को पदार्थ की चुम्बकशीलता कहते हैं, अर्थात्।
µ = [latex s=2]\frac { \vec { B } }{ \vec { H } }[/latex]
संख्यात्मक रूप से µ = B/H
इसका S.I. मात्रक वेबर/(ऐम्पियर-मीटर) अथवा न्यूटन/ऐम्पियर2 है।

आपेक्षिक चुम्बकशीलता µr (Relative Magnetic Permeability)- किसी चुम्बकीय पदार्थ की आपेक्षिक चुम्बकशीलता, पदार्थ की चुम्बकशीलता µ0 तथा निर्वात् (वायु) की चुम्बकशीलता 40 के अनुपात को कहते हैं, अर्थात्
µr = [latex s=2]\frac { \mu }{ { \mu }_{ 0 } }[/latex]
यह विमाहीन राशि है तथा निर्वात् के लिए इसका मान 1 है।

चुम्बकीय प्रवृत्ति χm (Magnetic Susceptibility)- किसी पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति उस पदार्थ के चुम्बकत्व धारण करने की क्षमता से नापी जाती है अर्थात् कोई पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में कितनी सरलता से चुम्बकित होता है। किसी चुम्बकीय पदार्थ में उत्पन्न हुई चुम्बकीय तीव्रता (I) तथा उसे उत्पन्न करने वाले चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता (H) के अनुपात को उस पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति कहते हैं, अर्थात्
χm = [latex s=2]\frac { I }{ H }[/latex]
यह एक शुद्ध संख्या है, (I तथा H दोनों के मात्रक एक ही हैं) तथा निर्वात् के लिए इसका मान शून्य न शून्य है (क्योंकि निर्वात् में चुम्बकेन नहीं हो सकता)। अतः इसका कोई मात्रक नहीं होता है। प्रतिचुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप पर निर्भर नहीं करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दिकपात कोण, नमन कोण तथा पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक की व्याख्या कीजिए। (2017)
या
उपयुक्त आरेख बनाकर किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता के क्षैतिज घटक, ऊर्ध्व-घटक एवं नति कोण में सम्बन्ध ज्ञात कीजिए। दिकपात कोण क्या होता है? (2012)
या
नति कोण तथा पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक से क्या तात्पर्य है ? इनके मध्य सम्बन्ध प्राप्त कीजिए। (2012)
या
भू-चुम्बकत्व के चुम्बकीय अवयव क्या हैं? उपयुक्त आरेख की सहायता से उनकी व्याख्या कीजिए। (2017)
या
भू-चुम्बकीय क्षेत्र के विभिन्न अवयव क्या हैं? उनके बीच के सम्बन्ध का सूत्र स्थापित कीजिए। (2017, 18)
उत्तर-
पृथ्वी के भू-चुम्बकत्व के प्रमाण-

  • स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाये गये चुम्बक का सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरना,
  • पृथ्वी में गाड़ने पर लोहे के टुकड़े को कुछ समय बाद चुम्बक बनना तथा
  • उदासीन बिन्दुओं का मिलना।

चुम्बकत्व के मौलिक तत्त्व- पृथ्वी भी एक चुम्बक की भॉति व्यवहार करती है। पृथ्वी के इस गुण को भू-चुम्बकत्व कहते हैं। किसी स्थान पर पृथ्वी के भू-चुम्बकत्व का अध्ययन करने के लिए जिन राशियों की आवश्यकता होती है, वे भू-चुम्बकत्व के अवयव कहलाती हैं। भू-चुम्बकत्व के निम्नलिखित तीन अवयव हैं-
1. दिक्पात कोण (Angle of Declination)- किसी स्थान पर अपने गुरुत्व-केन्द्र से स्वतन्त्रतापूर्वक लटकी चुम्बकीय सूई के अक्ष से गुजरने वाले ऊर्ध्वाधर तल को ‘चुम्बकीय याम्योत्तर’ कहते हैं। इसी प्रकार किसी स्थान पर पृथ्वी के भौगोलिक उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुवों को मिलाने वाली रेखा में से गुजरने वाले ऊर्ध्वाधर तल को ‘भौगोलिक याम्योत्तर’ कहते हैं। पृथ्वी तल के किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर एवं भौगोलिक याम्योत्तर के बीच बने न्यून
कोण को दिक्पात कोण’ कहते हैं।

2. नति कोण अथवा नमन कोण (Angle of Dip)- यदि किसी चुम्बकीय सूई को उसके गुरुत्व केन्द्र से स्वतन्त्रतापूर्वक इस प्रकार लटकाया जाए कि सूई ऊर्ध्वाधर तल में घूम सके तो चुम्बकीय याम्योत्तर में स्थिर होने पर सूई क्षैतिज दिशा से कुछ झुक जाती है। इस अवस्था में सूई का चुम्बकीय अक्ष, चुम्बकीय याम्योत्तर में क्षैतिज दिशा के साथ जो कोण बनाता है, उसे ‘नति कोण’ कहते हैं। चूँकि (UPBoardSolutions.com) सूई का चुम्बकीय अक्ष पृथ्वी के H चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करता है; अत: नति कोण वह नति कोण कोण है, जो चुम्बकीय याम्योत्तर में पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र Be की दिशा तथा क्षैतिज दिशा के बीच बनता है। नति कोण का मान पृथ्वी की चुम्बकीय निरक्ष पर 0° तथा पृथ्वी के चित्र 5.10 चुम्बकीय ध्रुवों पर 90° होता है। उत्तरी गोलार्द्ध में नति सूई का उत्तरी सिरा और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी सिरा नीचे की ओर झुकता है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
3. पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक (Horizontal Component of Earth’s Magnetic Field)- किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर में कार्य करने वाले पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र Be का जो घटक क्षैतिज दिशा में कार्य करता है, उसे पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक (H) कहते हैं। दिक्पात कोण. (α), नति कोण (θ) तथा चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक (H) में भौगोलिक उत्तर (UPBoardSolutions.com) सम्बन्ध-चुम्बकीय निरक्ष को छोड़कर, हर स्थान पर चुम्बकीय सूई क्षैतिज से कुछ झुककर रुकती है। अतः चुम्बकीय उत्तर + किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर में कार्य करने वाले। चुम्बकीय क्षेत्र B को, क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटकों में योम्योत्तर वियोजित किया जा सकता है।

ये घटक क्रमशः H तथा V से प्रकट किये जाते हैं। याम्योत्तर इन दोनों में पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को क्षैतिज घटक H अधिक महत्त्वपूर्ण है। इसीलिए इसको भू-चुम्बकत्व के मौलिक तत्त्वों में सम्मिलित क्रिया गया है।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
NS एक स्वतन्त्रतापूर्वक लटकी चुम्बकीय सूई है। इसके अक्ष में से होकर गुजरने वाला ऊर्ध्वाधर तल OPQR चुम्बकीय याम्योत्तर है। तल OLMR वहाँ पर भौगोलिक याम्योत्तर है। इन तलों के बीच का कोण θ दिक्पात कोण है, जबकि सूई का अक्ष OQ तथा क्षैतिज दिशा OP के (UPBoardSolutions.com) बीच का कोण ‘θ’ नति कोण है।
चुम्बकीय सूई का अक्ष OQ पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र Be की दिशा को प्रदर्शित करता है। चुम्बकीय क्षेत्र Be को क्षैतिज तथा ऊध्र्वाधर घटकों (H वे V) में वियोजित करने पर पृथ्वी के क्षेत्र का क्षैतिज घटक H = Be cos θ
पृथ्वी के क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक V = Be sin θ
अत: समी० (1) व (2) का वर्ग करके जोड़ने पर,
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
यदि किसी स्थान पर α और θ ज्ञात हों तो पृथ्वी के क्षेत्र Be की दिशा पूर्णतया निर्धारित की जा सकती है तथा यदि H और θ ज्ञात हों तो Be का परिमाण ज्ञात किया जा सकता है। इस प्रकार α, θ तथा H किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का पूर्ण ज्ञान कराते हैं। इसी कारण इन्हें भू-चुम्बकीय अवयव कहते हैं। यही इनका महत्त्व है।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
चुम्बकत्व के परमाणवीय मॉडल के आधार पर लौहचुम्बकत्व की व्याख्या कीजिए। (2012)
या
डोमेन सिद्धान्त के आधार पर लौहचुम्बकत्व की व्याख्या कीजिए। (2013, 17)
या
अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के परमाणुओं में क्या अन्तर होता है? (2014, 18)
या
अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों में क्या अन्तर होता है? परमाणु मॉडल के आधार पर समझाइए। (2015)
या
पदार्थों का उनके चुम्बकीय व्यवहार के आधार पर वर्गीकरण कीजिए। प्रत्येक वर्ग की प्रमुख विशेषताओं की व्याख्या कीजिए। (2016)
या
चुम्बकत्व के परमाणवीय मॉडल के आधार पर प्रतिचुम्बकत्व की व्याख्या कीजिए। (2018)
या
प्रतिचुम्बकीय तथा अनुचुम्बकीय पदार्थों में परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण क्रमशः शून्य एवं अशून्य होता है, क्यों? (2018)
उत्तर-
सन् 1846 में फैराडे ने देखा कि सभी पदार्थों में चुम्बकत्व के गुण पाए जाते हैं। उसने अनेक पदार्थों को चुम्बकीय क्षेत्र में रखकर उनके चुम्बकीय व्यवहारों का अध्ययन किया तथा इस आधार पर पदार्थों को निम्न तीन वर्गों में विभाजित किया-
1. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Substances)- कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में क्षीण चुम्बकत्व प्राप्त कर लेते हैं। इन्हें प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। तथा इनके इस गुण को ‘प्रतिचुम्बकत्व’ कहते हैं। बिस्मथ, ऐण्टीमनी, सोना, पानी, ऐल्कोहॉल, जस्ता, ताँबा, चाँदी, हीरा, नमक, पारा इत्यादि प्रतिचुम्बकीय पदार्थ हैं।

प्रतिचुम्बकत्व की व्याख्या- प्रतिचुम्बकत्व का गुण प्रायः उन पदार्थों के अणुओं अथवा परमाणुओं में पाया जाता है जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या सम (even) होती है तथा दो-दो इलेक्ट्रॉन मिलकर युग्म बना लेते हैं। प्रत्येक युग्म में एक इलेक्ट्रॉन का चक्रण दूसरे इलेक्ट्रॉन के चक्रण की विपरीत दिशा में होता है, जिससे ये एक-दूसरे के चुम्बकीय आघूर्ण को निरस्त कर देते हैं।

अतः प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के परमाणु का नेट चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है। जब ऐसे पदार्थ को किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो युग्म के एक इलेक्ट्रॉन का (UPBoardSolutions.com) चक्रण धीमा तथा दूसरे का त्वरित हो जाता है। अब युग्म के इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे के चुम्बकीय प्रभाव को निरस्त नहीं कर पाते और परमाणु में चुम्बकीय आघूर्ण प्रेरित हो जाता है, जिसकी दिशा बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के विपरीत होती है; अर्थात् पदार्थ बाह्य क्षेत्र की विपरीत दिशा में चुम्बकित हो जाता है। ताप के बदलने पर इन पदार्थों के प्रतिचुम्बकत्व गुण पर कोई प्रभाव नहीं होता।

2. अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Substances)- कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की दिशा में क्षीण चुम्बकत्व प्राप्त कर लेते हैं, इन्हें अनुचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं तथा इनके इस गुण को ‘अनुचुम्बकत्व’ कहते हैं। प्लैटिनम, ऐल्युमीनियम, सोडियम, क्रोमियम, मैंगनीज, कॉपर सल्फेट इत्यादि अनुचुम्बकीय पदार्थ हैं।

अनुचुम्बकत्व की व्याख्या- अनुचुम्बकत्व का गुण उन पदार्थों में पाया जाता है जिनके परमाणुओं या अणुओं में कुछ ऐसे आधिक्य इलेक्ट्रॉन होते हैं जिनका चक्रण एक ही दिशा में होता है। अत: प्रत्येक परमाणु में स्थायी चुम्बकीय आघूर्ण होता है और वह एक सूक्ष्म दण्ड चुम्बक की भाँति व्यवहार करता है, जिसे ‘परमाणवीय चुम्बक’ कहते हैं। परन्तु किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में ये पदार्थ (UPBoardSolutions.com) कोई चुम्बकीय प्रभाव नहीं दिखाते। इसका कारण परमाणवीय चुम्बकों का अनियमित रूप से अभिविन्यासित (randomly oriented) होना है [चित्र 5.12 (a)]। बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर प्रत्येक परमाणवीय चुम्बक पर एक बल-आघूर्ण कार्य करता है। जिससे ये क्षेत्र की दिशा में संरेखित हो जाते हैं। इस प्रकार पूरा पदार्थ क्षेत्र की दिशा में चुम्बकीय आधूर्ण प्राप्त कर लेता है; अर्थात् क्षेत्र की दिशा में चुम्बकित हो जाता है [चित्र 5.12 (b)]
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
ऊष्मीय विक्षोभ के कारण चुम्बकीय संरेखण कम होता है, जिससे अनुचुम्बकीय पदार्थों में चुम्बकन बहुत कम हो पाता है। बाह्य क्षेत्र की तीव्रता बढ़ाने पर अथवा ताप घटाने पर चुम्बकन बढ़ जाता है।

3. लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Substances)- कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकित हो जाते हैं, इन्हें लौहचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। | लोहा, कोबाल्ट, निकिल तथा मैग्नेटाइट (Fe3O4) इत्यादि लौहचुम्बकीय पदार्थ हैं।

लौहचुम्बकत्व की व्याख्या (डोमेन सिद्धान्त)- अनुचुम्बकत्व तथा लौहचुम्बकत्व में केवल तीव्रता का अन्तर होता है। वास्तव में लौहचुम्बकीय पदार्थ ऐसे अनुचुम्बकीय पदार्थ हैं, जिनका चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकन अत्यन्त तीव्र होता है। लौहचुम्बकीय पदार्थों का भी प्रत्येक परमाणु एक चुम्बक होता है और यह एक स्थायी चुम्बकीय आघूर्ण रखता है परन्तु लौहचुम्बकीय पदार्थों के परमाणुओं की कुछ (UPBoardSolutions.com) अन्योन्य क्रियाओं के कारण पदार्थों के भीतर परमाणुओं के असंख्य अतिसूक्ष्म आकार के प्रभावी क्षेत्र बन जाते हैं, जिन्हें डोमेन कहते हैं। प्रत्येक डोमेन में 1017 से 1021 तक परमाणु होते हैं, जिनकी चुम्बकीय अक्षं एक ही दिशा में संरेखित होती हैं (परन्तु पास वाले डोमेनों के परमाणुओं से भिन्न दिशा में)। इस प्रकार चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में भी प्रत्येक डोमेन चुम्बकीय संतृप्तता की स्थिति में होता है। परन्तु परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य ही रहता है [चित्र 5.13 (a)]।
UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter
लौहचुम्बकीय पदार्थों को किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर पदार्थ का परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण निम्नलिखित दो प्रकार से बढ़ सकता है-

1. डोमेन की परिसीमाओं के विस्थापन द्वारा– बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित डोमेनों के आकार में वृद्धि होती है, जबकि अन्य दिशाओं में अभिविन्यस्त डोमेनों के आकार छोटे हो जाते हैं (चित्र 5.13 (b))
जब बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र दुर्बल हो जाता है तो लौहचुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकन प्राय: डोमेनों की परिसीमाओं के विस्थापन द्वारा होता है। इस स्थिति में चुम्बकन की क्रिया उत्क्रमणीय होती है; अर्थात् चुम्बकीय क्षेत्र हटा लेने पर डोमेन अपनी पूर्वावस्था में वापस आ जाते हैं। अतः पदार्थ पूर्णत: विचुम्बकित हो जाता है।

2. डोमेनों के घूर्णन द्वारा- डोमेन इस प्रकार घूम जाते हैं कि इनके चुम्बकीय आघूर्ण बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में हो जाते हैं जिससे प्रबल चुम्बकत्व प्राप्त हो जाता है (चित्र 5.13 (c))

बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के दुर्बल होने पर इन पदार्थों में चुम्बकन डोमेनों की परिसीमाओं के विस्थापन द्वारा होता है। परन्तु प्रबल बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में इन पदार्थों का (UPBoardSolutions.com) चुम्बकन डोमेनों के घूर्णन द्वारा होता है। बाह्य क्षेत्र यदि क्षीण है, तो उसे हटा लेने पर डोमेन अपनी मूल स्थितियों में आ जाते हैं और पदार्थ का चुम्बकत्व समाप्त हो जाता है। यदि बाह्य क्षेत्र तीव्र है तो चुम्बकीय-क्षेत्र को हटा लेने पर पदार्थ पूर्णतः विचुम्बकित नहीं होता, बल्कि उसमें कुछ-न-कुछ चुम्बकत्व शेष रह जाता है।

We hope the UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter (चुम्बकत्व एवं द्रव्य) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism and Matter (चुम्बकत्व एवं द्रव्य), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.