UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 1 परिमेय संख्याएँ

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 1 परिमेय संख्याएँ

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अभ्यास 1(a)

प्रश्न 1.
निम्नांकित पूर्णांकों को परिमेय संख्याओं के (UPBoardSolutions.com) रूप में लिखिए, जिनका हर 1 हो -7, 11, 27, -45, -71 हल : -727=
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प्रश्न 2.
[latex]\frac { -4 }{ 5 } [/latex] को ऐसी परिमेय संख्याओं के रूप में व्यक्त कीजिए, जिसका अंश है –
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प्रश्न 3.
[latex]\frac { -5 }{ -7 } [/latex] को ऐसी परिमेय संख्या के रूप में व्यक्त कीजिए, जिसका हर है
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प्रश्न 4.
निम्नांकित परिमेय संख्या के हर को धनात्मक बनाइए। (UPBoardSolutions.com)
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प्रश्न 5.
निम्नांकित परिमेय संख्या के अंश को धन पूर्णांक बनाइए।
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UP Board Solutionsप्रश्न 6.
निम्नांकित संख्याओं में कौन सी परिमेय संख्याएँ धनात्मक हैं?
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प्रश्न 7.
निम्नांकित संख्याओं में कौन-कौन-सी (UPBoardSolutions.com) परिमेय संख्याएँ ऋणात्मक हैं?
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित परिमेय संख्याओं को सरलतम रूप में लिखिए।
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प्रश्न 9.
अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिये (UPBoardSolutions.com)
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प्रश्न 10.
प्रत्येक के समतुल्य तीन और परिमेय संख्याएँ लिखिए। (UPBoardSolutions.com)
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अभ्यास 1(b)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित परिमेय संख्या को (UPBoardSolutions.com) उनके सरलतम रूप में लिखिए।
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UP Board Solutionsप्रश्न 2.
संकेतों = और ≠ में से चुनकर रिक्त स्थानों को भरिए। (रिक्त स्थान भरकर)
उत्तर :
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प्रश्न 3.
निम्नांकित परिमेय संख्याओं (UPBoardSolutions.com) के जोड़ों में कौन-कौन समान हैं?
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प्रश्न 4.
निम्नांकित परिमेय संख्या को संख्या-रेखा पर निरूपित कीजिए –
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प्रश्न 5.
निम्नांकित परिमेय संख्याओं के जोड़ों में कौन-कौन असमान हैं? (UPBoardSolutions.com)
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अभ्यास 1(c)

प्रश्न 1.
निम्नांकित दो परिमेय (UPBoardSolutions.com) संख्याओं में कौन बड़ी है?
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प्रश्न 2.
निम्नांकित दो परिमेय संख्याओं में कौन छोटी है? (UPBoardSolutions.com)
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प्रश्न 3.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर के चार विकल्प दिए (UPBoardSolutions.com) गए हैं, जिनमें से एक ही सही है। सही उत्तर छाँटिए।
(क) परिमेय संख्या [latex]\frac { -4 }{ 18 }[/latex] के समतुल्य परिमेय संख्या है : (UPBoardSolutions.com)
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(ख) परिमेय संख्या [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] से बड़ी परिमेय संख्या है:
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(ग) परिमेय संख्या [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex] से छोटी परिमेय संख्या है :
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(घ) परिमेय संख्या [latex]\frac { 0 }{ -5 }[/latex] से बड़ी परिमेय संख्या है।
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प्रश्न 4.
अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतार कर खाली स्थान [latex]\Box [/latex] में >, = या < में से जो . उपयुक्त हो, भरिए (भरकर) –
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प्रश्न 5.
निम्नांकित परिमेय संख्याओं को आरोही क्रम में लिखिए। हल :
उत्तर :
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प्रश्न 6.
निम्नांकित परिमेय संख्याओं (UPBoardSolutions.com) को अवरोही क्रम में लिखिए।
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दक्षता अभ्यास-1

प्रश्न 1.
इस प्रश्न के प्रत्येक खंड में चार विकल्प दिए गए हैं। (UPBoardSolutions.com) इनमें से केवल एक ही सही है। सही उत्तर अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए।
(क) किसी परिमेय संख्या के समतुल्य परिमेय संख्याएँ होती हैं :

  1. एक
  2. दो
  3. 50
  4. अनन्त

उत्तर :
4. अनन्त

(ख) परिमेय संख्या [latex]\frac { -16 }{ 80 } [/latex] का सरलतम रूप है :
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(ग) परिमेय संख्या [latex]\frac { 40 }{ -25 } [/latex] का सरलतम रूप है :
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(घ) दो असमान परिमेय संख्या के बीच परिमेय संख्याएँ होती हैं :
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प्रश्न 2.
निम्नांकित कथनों में सत्य और असत्य बताइए : (सत्य-असत्य बताकर) – (UPBoardSolutions.com)
(क) समान परिमेय संख्याओं (UPBoardSolutions.com) के सरलतम रूप समान होते हैं। (सत्य)

(ख) [latex]\frac { -7 }{ -11 } [/latex] धन परिमेय संख्या है। (सत्य)
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(ड) दो असमान परिमेय (UPBoardSolutions.com) संख्याओं के बीच अनन्त परिमेय संख्याएँ होती हैं। (सत्य)

प्रश्न 3.
निम्नांकित परिमेय संख्याओं को अवरोही क्रम में लिखिए।
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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 14 Respiration in Plants 

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 14  Respiration in Plants (पादप में श्वसन)

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अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इनमें अन्तर करिए
(अ) साँस (श्वसन) और दहन
(ब) ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र
(स) ऑक्सी श्वसन तथा किण्वन
उत्तर :
(अ) साँस (श्वसन) तथा दहन में अन्तर
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(ब) ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र में अन्तर
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(स) ऑक्सीश्वसन तथा किण्वन में अन्तर
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प्रश्न 2.
श्वसनीय क्रियाधार क्या है? सर्वाधिक साधारण क्रियाधार का नाम बताइए।

उत्तर :
वे कार्बनिक पदार्थ जो एनाबोलिक विधि से संश्लेषित हों अथवा संचित भोजन के रूप में संग्रह किए जाएँ और ऊर्जा के विमोचन के लिए उनका विघटन हो उन्हें श्वसनीय क्रियाधार कहते हैं। सर्वाधिक साधारण क्रियाधार है ग्लूकोज (मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट)।

प्रश्न 3.
ग्लाइकोलिसिस को रेखा द्वारा बनाइए।
उत्तर :
ग्लाइकोलिसिस ग्लाइकोलिसिस को EMP मार्ग (Embden Meyerhoff Parnas Pathway) भी कहते हैं। यह कोशिकाद्रव्य में सम्पन्न होता है। इसमें ऑक्सीजन का प्रयोग नहीं होता; अतः ऑक्सी तथा अनॉक्सीश्वसन दोनों में यह क्रिया होती है। इस क्रिया के अन्त में ग्लूकोस के एक (UPBoardSolutions.com) अणु से पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) के 2 अणु बनते हैं। ग्लाइकोलिसिस में 4 ATP बनते हैं, 2 ATP खर्च होते हैं; अत: 2 ATP अणु का लाभ होता है। इन अभिक्रियाओं में मुक्त 2H+ आयन्स हाइड्रोजनग्राही NAD से अनुबन्धित होकर NAD.2H बनाते हैं। ये क्रियाएँ विभिन्न चरणों में पूर्ण होती हैं। ग्लाइकोलिसिस से कुल 8 ATP अणु ऊर्जा प्राप्त होती है।
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प्रश्न 4.
ऑक्सीश्वसन के मुख्य चरण कौन-कौन से हैं ? यह कहाँ सम्पन्न होती है?

उत्तर :

ऑक्सीश्वसन के मुख्य चरण

जीवित कोशिका में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोस (कार्बनिक पदार्थ) के जैव-रासायनिक  ऑक्सीकरण को ऑक्सीश्वसन कहते हैं। इस क्रिया के अन्तर्गत रासायनिक ऊर्जा गतिज ऊर्जा के रूप में ATP में संचित हो जाती है।
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ऑक्सीश्वसन निम्नलिखित चरणों में पूर्ण होता है
(क)
ग्लाइकोलिसिस अथवा ई० एम० पी० मार्ग (Glycolysis or E.M.P. Pathway) :

यह क्रिया कोशिकाद्रव्य में सम्पन्न होती है। इसमें ग्लूकोस के आंशिक ऑक्सीकरण के फलस्वरूप पाइरुविक अम्ल के दो अणु प्राप्त होते हैं। ग्लाइकोलिसिस प्रक्रिया में कुल 8 ATP अणु प्राप्त होते हैं।

(ख)
ऐसीटिल कोएन्जाइम-A का निर्माण (Formation of Acetyl CoA)

यह माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में सम्पन्न होती है। कोशिकाद्रव्य (सायटोसोल) में उत्पन्न पाइरुविक अम्ल माइटोकॉन्ड्रिया में प्रवेश करके NAD+ और कोएन्जाइम-A से संयुक्त होकर पाइरुविक अम्ल का ऑक्सीकीय CO2 वियोजन (Oxidative decarboxylation) होता है। (UPBoardSolutions.com) इस क्रिया में CO2 का एक अणु मुक्त होता है और NAD.2H बनता है और अन्त में ऐसीटिल कोएन्जाइम-A बनता है। पाइरुविक अम्ल + CoA + NAD
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(ग) क्रेब्स चक्र या ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र (Krebs Cycle or Tricarboxylic Acid Cycle) :
यह पूर्ण क्रिया माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में सम्पन्न होती है। क्रेब्स चक्र के एन्जाइम्स मैट्रिक्स में पाए जाते हैं। ऐसीटिल कोएन्जाइम-A माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में उपस्थित ऑक्सेलोऐसीटिक अम्ल से क्रिया करके 6-कार्बन यौगिक सिट्रिक अम्ल बनाता है। सिट्रिक अम्ल का क्रमिक निम्नीकरण होता है और अन्त: में पुनः ऑक्सेलोऐसीटिक अम्ल प्राप्त हो जाता है। क्रेब्स चक्र में 2 अणु CO2  के मुक्त होते हैं। चार स्थानों पर 2H+ मुक्त होते हैं जिन्हें हाइड्रोजनग्राही NAD यो FAD ग्रहण करते हैं। क्रेब्स चक्र में 24ATP अणु ETS द्वारा प्राप्त होते है। ऐसीटिल कोएन्जाइम
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(घ) इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र (Electron Transport System) :
यह माइटोकॉण्ड्रिया की भीतरी सतह पर स्थित F कण या ऑक्सीसोम्स पर सम्पन्न होता है। क्रेब्स चक्र की ऑक्सीकरण क्रिया में डिहाइड्रोजिनेस (dehydrogenase) एन्जाइम विभिन्न पदार्थों से हाइड्रोजन तथा इलेक्ट्रॉन के जोड़े मुक्त कराते हैं। हाइड्रोजन तथा इलेक्ट्रॉन कुछ मध्यस्थ संवाहकों के द्वारा होते हुए ऑक्सीजन से मिलकर जल का निर्माण करते हैं। हाइड्रोजन परमाणुओं के एक इलेक्ट्रॉनग्राही से दूसरे इलेक्ट्रॉनग्राही पर स्थानान्तरित होते समय ऊर्जा मुक्त होती है। यह ऊर्जा ATP में संचित हो जाती है।

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प्रश्न 5.
क्रेब्स चक्र का समग्र रेखाचित्र बनाइए।
उत्तर :
क्रेब्स चक्र या ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र

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प्रश्न 6.
इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र का वर्णन कीजिए।

उत्तर :
इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र के विभिन्न पदों में अपघटन के फलस्वरूप उत्पन्न हुई ऊर्जा के अधिकांश भाग का परिवहन हाइड्रोजनग्राही करते हैं; जैसे-NAD, NADP, FAD आदि। ये 2H+ (हाइड्रोजन आयन) के साथ मिलकर अपचयित (reduce) हो जाते हैं। इन्हें वापसे ऑक्सीकृत (oxidise) करने के लिए विशेष तन्त्र, इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण तन्त्र (ETS = Electron Transport System) की आवश्यकता होती है। यह तन्त्र इलेक्ट्रॉन्स (e) को एक के बाद एक ग्रहण करते हैं। तथा उन पर उपस्थित ऊर्जा स्तर (energy level) को कम करते हैं। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य कुछ ऊर्जा को निर्मुक्त करना है। यही निर्मुक्त ऊर्जा ATP (adenosine triphosphate) में संगृहीत हो जाती है। इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र एक श्रृंखलाबद्ध क्रम के रूप में होता है जिसमें कई सायटोक्रोम एन्जाइम्स (cytochrome enzymes) होते हैं। इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र के एन्जाइम माइटोकॉन्ड्रिया की अन्त:कला (inner membrane) में श्रृंखलाबद्ध क्रम से लगे रहते हैं। सायटोक्रोम्स लौह तत्त्व के परमाणु वाले वर्णक हैं, जो इलेक्ट्रॉन मुक्त कर ऑक्सीकृत (oxidised) हो जाते हैं
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साइटोक्रोम्स की इस श्रृंखला में प्रारम्भिक साइटोक्रोम ‘बी’ (cytochrome ‘ b’ = cyt ‘b’ Fe3+) उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन (e) को ग्रहण करता है तथा अपचयित हो जाता है। इलेक्ट्रॉन का स्थानान्तरण हाइड्रोजन आयन्स से होता है, जो पदार्थ से NAD या NADP के द्वारा लाए गए थे। बाद में ये FAD को दे दिए गए थे और यहाँ से स्वतन्त्र कर दिए गए। इलेक्ट्रॉन्स के Cyt ‘b’ Fe+++ पर स्थानान्तरण में सम्भवत: सह-एन्जाइम ‘क्यू’ (Co-enzyme ‘Q’ = Co ‘Q’ = ubiquinone) सहयोग (UPBoardSolutions.com) करता है। इस प्रारम्भिक सायटोक्रोम के बाद श्रृंखला में कईऔर सायटोक्रोम रहते हैं। ये क्रमश: इलेक्ट्रॉन को अपने से पहले वाले सायटोक्रोम से ग्रहण करते हैं तथा अपने से अगले सायटोक्रोम को स्थानान्तरित कर देते है।

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श्रृंखला के अन्तिम सायटोक्रोम से दो इलेक्ट्रॉन्स, ऑक्सीजन के एक परमाणु से मिलकर उसे सक्रिय कर देते हैं। अब यह ऑक्सीजन परमाणु उपलब्ध दो हाइड्रोजन आयन्स के साथ जुड़कर जेल का एक अणु (H2O) बना लेता है। श्वसन से सम्बन्धित यह सायटोक्रोम तन्त्र माइटोकॉन्ड्रिया की अन्त:कला (inner membrane) में स्थित होता है।

ए०टी०पी० का संश्लेषण

श्वसन क्रिया दो क्रियाओं ग्लाकोलिसिस (glycolysis) तथा क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle) में पूर्ण होती है। इन क्रियाओं के अन्त में कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल बनते हैं। जबकि दो अणु काम में आ जाते हैं। अतः केवल दो ATP अणुओं को लाभ होता है। ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र में मुक्त 2H+ (हाइड्रोजन आयन) को NAD, NADP या FAD ग्रहण करते हैं। इनसे मुक्त परमाणु हाइड्रोजन अणु हाइड्रोजन में बदलकर ऑक्सीजन के साथ मिलकर जल बनाते हैं। इस क्रिया में मुक्त 2e (इलेक्ट्रॉन) इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण तन्त्र (ETS) में पहुंचकर धीरे-धीरे अपना ऊर्जा स्तर (energy level) कम करते हैं। इस प्रकार निष्कासित ऊर्जा ADP को ATP में बदलने के काम आती है। इस प्रकार प्रत्येक जोड़े 2H+ से तीन ATP अणु बनते हैं। FAD पर स्थित 2H+ से केवल दो ATP अणु ही बनते हैं। इस प्रकार ग्लाइकोलिसिस से लेकर पूर्ण ऑक्सीकरण होने तक कुल ATP अणुओं की संख्य निम्नलिखित हो जाती है

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(a) ग्लाइकोलिसिस की अभिक्रियाओं में
(कुल चार अणु बनते हैं तथा दो प्रयुक्त हो जाते हैं)। = 2 ATP

(b) ग्लाइकोलिसिस में ही बने दो NAD.H,
(ETS में जाने के बाद) = 6 ATP

(c) क्रेब्स चक्र के पूर्व पाइरुविक अम्ल से ऐसीटिल को-एन्जाइम ‘ए’ बनते समय NAD.H2 बनने तथा ETS में जाने के बाद
(दो अणु पाइरुविक अम्ल से दो NAD.H2) बनते हैं। = 6ATP

(d) क्रेब्स चक्र में बने 3NADH2 के ETS में जाने पर [दो बार यही चक्र पूरा होने पर ध्यान रहे, दो ऐसीटिल को-एन्जाइम ‘ए’
(acetyl Co ‘A’) अर्थात् एक ग्लूकोस के अणु से दो क्रेब्स चक्र में 6NADH2 की प्राप्ति होती है। ATP के 9 अणु बनाते हैं।]
9x 2 = 18 ATP

(e) क्रेब्स चक्र में ही FAD.H2 से (ETS में जाने पर) दो अणु ATP बनते हैं
(इस प्रकार, एक पूरे ग्लूकोस अणु से चार अणु ATP बनते हैं।) = 2 x 2 = 4 ATP

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(f) क्रेब्स चक्र में ही सक्सीनिक अम्ल (succinic acid) बनते समय जी० टी० पी०
(GTP = (guanosine triphosphate)) का निर्माण होता है जो बाद में एक ADP को ATP में बदल देता है।
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इस प्रकार कुल योग

ग्लिसरॉल फॉस्फेट शटल (Glycerol Phosphate Shuttle)
की कार्य क्षमता कम होती है। इसमें दो अणु NADH,, जो ग्लाइकोलिसिस में बनते हैं, उनसे कभी-कभी 6 ATP के स्थान पर 4 ATP की ही प्राप्ति होती है। ये NADH, माइटोकॉन्ड्रिया के बाहर जीवद्रव्य में बनते हैं। NADH2 का अणु माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर प्रवेश नहीं कर पाता, (UPBoardSolutions.com) यह अपने H+ माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर भेजता है। मस्तिष्क तथा पेशियों की कोशिकाओं में प्रत्येक NADH2 के H+ के भीतर प्रवेश में 1 ATP अणु खर्च हो जाता है; अतः अन्त में कुल 36 ATP अणुओं की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित के मध्य अन्तर कीजिए
(अ) ऑक्सीश्वसन तथा अनॉक्सीश्वसन
(ब) ग्लाइकोलिसिस तथा किण्वन
(स) ग्लाइकोलिसिस तथा सिट्रिक अम्ल चक्र
उत्तर :
(अ)
ऑक्सीश्वसन तथा अनॉक्सीश्वसन में अन्तर

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(ब)
ग्लाइकोलिसिस तथा किण्वन में अन्तर

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(स)
ग्लाइकोलिसिस तथा सिट्रिक अम्ल चक्र में अन्तर

क्रेब्स चक्र या ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र को सिट्रिक अम्ल चक्र (Citric Acid Cycle) भी कहते हैं। अन्तर के लिए प्रश्न 1 (ब) का उत्तर देखिए।

प्रश्न 8.
शुद्ध ए०टी०पी० के अणुओं की प्राप्ति की गणना के दौरान आप क्या कल्पनाएँ करते हैं?
उत्तर :

ए०टी०पी० अणुओं की प्राप्ति की कल्पनाएँ।

  1.  यह एक क्रमिक, सुव्यवस्थित क्रियात्मक मार्ग है जिसमें एक क्रियाधार से दूसरे क्रियाधार का निर्माण होता है जिसमें ग्लाइकोलिसिस से शुरू होकर क्रेब्स चक्र तथा इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र (ETS) एक के बाद एक आती है।
  2. ग्लाइकोलिसिस में संश्लेषित NAD माइटोकॉन्ड्रिया में आता है, जहाँ उसका फॉस्फोरिलीकरण (UPBoardSolutions.com) होता है।
  3. श्वसन मार्ग के कोई भी मध्यवर्ती दूसरे यौगिक के निर्माण के उपयोग में नहीं आते हैं।
  4. श्वसन में केवल ग्लूकोस का उपयोग होता है। कोई दूसरा वैकल्पिक क्रियाधार श्वसन मार्ग के किसी भी मध्यवर्ती चरण में प्रवेश नहीं करता है।

वास्तव में सभी मार्ग (पथ) एकसाथ कार्य करते हैं। पथ में क्रियाधार आवश्यकतानुसार अन्दर- बाहर आते-जाते रहते हैं। आवश्यकतानुसार ATP का उपयोग हो सकता है। एन्जाइम की क्रिया की दर विभिन्न कारकों द्वारा नियन्त्रित होती है। श्वसन जीवन के लिए एक उपयोगी क्रिया है। सजीव तन्त्र में ऊर्जा का संग्रहण तथा निष्कर्षण होता रहता है।

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प्रश्न 9.
“श्वसनीय पथ एक ऐम्फीबोलिक पथ होता है।” इसकी चर्चा कीजिए।
उत्तर :

श्वसनीय पथ एक ऐम्फीबोलिक पथ

श्वसन क्रिया के लिए ग्लूकोस एक सामान्य क्रियाधार (substrate) है। इसे कोशिकीय ईंधन (cellular fuel) भी कहते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स श्वसन क्रिया में प्रयोग किए जाने से पूर्व ग्लूकोस में बदल दिए जाते हैं। अन्य क्रियाधार श्वसन पथ में प्रयुक्त होने से पूर्व विघटित होकर ऐसे पदार्थों में बदले जाते हैं, जिनका उपयोग किया जा सके; जैसे—वसा पहले ग्लिसरॉल तथा वसीय अम्ल में विघटित होती है। वसीय अम्ल ऐसीटाइल कोएन्जाइम बनकर श्वसन मार्ग में प्रवेश करता है। ग्लिसरॉल फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड (PGAL) में बदलकर श्वसन मार्ग में प्रवेश करता है। प्रोटीन्स विघटित होकर ऐमीनो अम्ल बनाती है। ऐमीनो अम्ल विऐमीनीकरण (deamination) के पश्चात् क्रेब्स चक्र के विभिन्न चरणों में प्रवेश करता है।

इसी प्रकार जब वसा अम्ल का संश्लेषण होता है तो श्वसन मार्ग से ऐसीटाइल कोएन्जाइम अलग हो जाता है। अतः वसा अम्ल के संश्लेषण और विखण्डन के दौरान श्वसनीय मार्ग का उपयोग होता है। इसी प्रकार प्रोटीन के संश्लेषण व विखण्डन के दौरान भी श्वसनीय मार्ग का उपयोग होता है। इस प्रकार (UPBoardSolutions.com) श्वसनी पथ में अपचय (catabolic) तथा उपचय (anabolic) दोनों क्रियाएँ होती हैं। इसी कारण श्वसनी मार्ग (पथ) को ऐम्फीबोलिक पथ (amphibolic pathway) कहना अधिक उपयुक्त है न कि अपचय पथ।
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प्रश्न 10.
साँस (श्वसन) गुणांक को परिभाषित कीजिए, वसा के लिए इसका क्या मान है?
उत्तर :
साँस (श्वसन) गुणांक एक दिए गए समय, ताप व दाब पर श्वसन क्रिया में निष्कासित CO2 व अवशोषित O2 के अनुपात को श्वसन (साँस) गुणांक या भागफल (R.Q.) कहते हैं। श्वसन पदार्थों के अनुसार श्वसन गुणांक भिन्न-भिन्न होता है।
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वसा (fats) :
का श्वसन गुणांक एक से कम होता है। वसीय पदार्थों के उपयोग से निष्कासित CO2की मात्रा अवशोषित O2 की मात्रा से कम होती है। वसा का R.Q. लगभग 0.7 होता है।
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प्रश्न 11.
ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण क्या है?

उत्तर :
ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण ऑक्सीश्वसन क्रिया के विभिन्न चरणों में मुक्त हाइड्रोजन आयन्स (2H+) को हाइड्रोजनग्राही NAD या FAD ग्रहण करके अपचयित होकर NAD.2H या FAD.2H बनाता है। प्रत्येक NAD.2H अणु से दो इलेक्ट्रॉन (2e) तथा दो हाइड्रोजन परमाणुओं (2H+) के निकलकर (UPBoardSolutions.com) ऑक्सीजन तक पहुँचने के क्रम में तीन और FAD.2H से दो ATP अणुओं का संश्लेषण होता है। ETS के अन्तर्गत इलेक्ट्रॉन परिवहन के फलस्वरूप मुक्त ऊर्जा ADP + Pi→ ATP क्रिया द्वारा ATP में संचित हो जाती है। प्रत्येक ATP अणु बनने में प्राणियों में 7:3 kcal और पौधों में 10-12 kcal ऊर्जा संचय होती है। यह क्रिया फॉस्फोरिलीकरण (phosphorylation) कहलाती है, क्योंकि श्वसन क्रिया में यह क्रिया O2 की उपस्थिति में होती है; अतः इसे ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण (oxidative phosphorylation) कहते हैं।

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प्रश्न 12.
सॉस के प्रत्येक चरण में मुक्त होने वाली ऊर्जा का क्या महत्त्व है?

उत्तर :
(क)
कोशिका में जैव रासायनिक ऑक्सीकरण के दौरान श्वसनी क्रियाधार में संचित सम्पूर्ण रासायनिक ऊर्जा एकसाथ मुक्त नहीं होती, जैसा कि दहन प्रक्रिया में होता है। यह एन्जाइम्स द्वारा नियन्त्रित चरणबद्ध धीमी अभिक्रियाओं के रूप में मुक्त होती है। मुक्त रासायनिक ऊर्जा गतिज ऊर्जा के रूप में ATP में संचित हो जाती है।

(ख)
श्वसन प्रक्रिया में मुक्त ऊर्जा सीधे उपयोग में नहीं आती। श्वसन प्रक्रिया में मुक्त ऊर्जा का उपयोग ATP संश्लेषण में होता है।

(ग)
ATP ऊर्जा मुद्रा का कार्य करता है। कोशिका की समस्त जैविक क्रियाओं के लिए ऊर्जा ATP के टूटने से प्राप्त होती है।

(घ)
विभिन्न जटिल कार्बनिक पदार्थों के संश्लेषण में भी ATP से मुक्त ऊर्जा उपयोग में आती है।

(ङ)
कोशिकाओं में खनिज लवणों के आवागमन में प्रयुक्त ऊर्जा ATP से ही प्राप्त होती है।

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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोशिकीय श्वसन में ग्लूकोज से पाइरुविक अम्ल का बनना कहलाता है।
(क) ग्लाइकोलिसिस
(ख) हाइड्रोलिसिस
(ग) क्रेब्स चक्र
(घ)C3 चक्र
उत्तर :
(क) ग्लाइकोलिसिस

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया शुद्ध रूप में ऑक्सीश्वसन को प्रदर्शित करती है?
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उत्तर :
(ग) C6H12O6 + 6O2  → 6CO2+ 6H2O + 673 k.cals

प्रश्न 3.
क्रेब्स चक्र के एक बार चलने में NADPH बनते हैं।
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) छः
उत्तर :
(ख) तीन

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किण्वन क्रिया को प्रदर्शित करने वाले उपकरण का नाम लिखिए।
उत्तर :
फर्मेन्टर या बायोरिएक्टर।

प्रश्न 2.
उस रासायनिक यौगिक का नाम लिखिए जो ग्लाइकोलिसिस और क्रेब्स चक्र के बीच की कड़ी है।
उत्तर :
ऐसीटिल-कोएन्जाइम-A

प्रश्न 3.
ग्लूकोस के एक अणु के पूर्ण ऑक्सीकरण से ATP व CO2 के कितने अणु प्राप्त होते हैं?
उत्तर :
ग्लूकोस के एक अणु के पूर्ण ऑक्सीकरण से 38 ATP एवं 6 CO2 अणु प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 4.
पाइरुविक अम्ल का ऑक्सी-ऑक्सीकरण कोशिका के किस भाग में होता है?
उत्तर :
माइटोकॉण्ड्रिया के अन्दर मैट्रिक्स में होता है।

प्रश्न 5.
श्वसन को प्रभावित करने वाले दो कारक लिखिए।
उत्तर :

  1. तापक्रम
  2. ऑक्सीजन

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प्रश्न 6.
बीज भरे भण्डारों को खोलने पर गर्मी निकलती है। कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बीज भरे भण्डारों को खोलने पर गर्मी निकलती है, क्योंकि बीज श्वसन की क्रिया में 0, को ग्रहण करके CO2, H2O ऊर्जा उत्पन्न करते हैं जिसके कारण भण्डार गृह का तापमान बढ़ जाता है।

प्रश्न 7.
श्वसन गुणांक को प्रदर्शित करने वाले उपकरण का नाम लिखिए।
उत्तर :
गैनांग श्वसनमापी।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किण्वन की परिभाषा लिखिए। यह अनॉक्सी श्वसन से किस प्रकार भिन्न है? समझाइए। या अनॉक्सी श्वसन और किण्वन में अन्तर स्पष्ट कीजिए। या किण्वन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। या अवायवीय श्वसन तथा किण्वन में अन्तर बताइए।
उत्तर :

किण्वन 

प्रत्येक प्रकार का श्वसन (अनॉक्सी या ऑक्सी श्वसन) ग्लूकोज से प्रारम्भ होता है और इसमें ग्लाइकोलिसिस (glycolysis) क्रिया के द्वारा पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) का निर्माण होता है। निम्न श्रेणी के अनेक जीवों; जैसे-कुछ जीवाणुओं, यीस्ट (yeast) अन्य कवकों (fungi) आदि अवायव जीवों (anaerobs) में अनॉक्सीश्वसन के द्वारा ही ऊर्जा उत्पन्न होती है। चूंकि इस क्रिया में प्रायः
ऐल्कोहॉल (alcohol) उत्पन्न होता है, अत: इस (अनॉक्सीश्वसन) को ऐल्कोहॉलिक किण्वन (alcoholic fermentation) भी कहते हैं। किण्वन का अध्ययन सबसे पहले सन् 1870 में पाश्चर (Pasteur) ने किया था। अधिकतर उन सूक्ष्म पौधों में जिनमें श्वसन होता है इससे (UPBoardSolutions.com) सम्बन्धित सभी एन्जाइम एक जटिल समूह के रूप में रहते हैं; जैसे—यीस्ट में यह जाड़मेज (ymase) कहलाता है। दूसरे जीवों में अन्य एन्जाइम की उपस्थिति के कारण अन्य प्रकार की अभिक्रियाओं के फलस्वरूप एथिल एल्कोहॉल के स्थान पर अन्य यौगिक बनते हैं; जैसे-ऐसीटिक अम्ल, लैक्टिक अम्ल, ब्यूटाइरिक अम्ल, साइट्रिक अम्ल, ऑक्सेलिक अम्ल आदि। ये सम्पूर्ण क्रियाएँ किण्वन (fermentation) कहलाती हैं तथा उत्पाद के नाम पर जानी जाती हैं। उच्च श्रेणी के पौधों तथा जन्तुओं में अनॉक्सीश्वसन केवल थोड़े
समय के लिये ही होता है। इसके पश्चात् कम ऊर्जा उत्पन्न होने तथा विषैले पदार्थ इत्यादि एकत्र होने के कारण कोशिकाओं की मृत्यु होने लग जाती है।

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किण्वन व अनॉक्सी श्वसन में अन्तर

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प्रश्न 2.
कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन तथा कार्बनिक अम्लों के श्वसन गुणांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
1. कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) :
मण्ड, सुक्रोज, माल्टोज, ग्लूकोज, फ्रक्टोज आदि अनेक कार्बोहाइड्रेट्स श्वसन आधार की तरह प्रयोग किये जाते हैं। इनमें से ग्लूकोज तथा फ्रक्टोज सीधे ही काम आ जाते हैं जबकि सुक्रोज, माल्टोज आदि डाइसैकेराइड्स (disaccharides), तथा मण्ड जैसे पॉलिसैकेराइड्स (polysaccharides) की पहले हाइड्रोलिसिस होती है तथा ग्लूकोज या फ्रक्टोज अथवा दोनों पदार्थ बनते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स के इस प्रकार, ऑक्सी श्वसन में आधार होने से आयतन से जितनी ऑक्सीजन (O2) काम आती है उतनी ही कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्पन्न होती है।
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अत: कार्बोहाइड्रेट्स के लिए समीकरण के अनुसार
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इस प्रकार सामान्यतः कार्बोहाइड्रेट्स (मण्डयुक्त अनाजों; जैसे-गेहूं, चावल आदि) के लिए श्वसन गुणांक इकाई में आता है, किन्तु कुछ कारणों से यह इकाई से भिन्न दिखायी पड़ता है। जब

  1. श्वसन आधार का ऑक्सीकरण पूर्ण रूप से न हो सके; जैसे–नागफनी (Opuntia) आदि सरस पौधों या पौधे (UPBoardSolutions.com) के भागों में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम हो जाती है अथवा बिल्कुल नहीं होती है; क्योंकि मैलिक अम्ल आदि बन जाते हैं, अतः श्वसन गुणांक इकाई से कम हो जाता है।
  2. उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड किसी अन्य कार्य; जैसे—प्रकाश संश्लेषण में प्रयुक्त हो जाए।
  3. अवशोषित ऑक्सीजन किसी अन्य कार्य में प्रयुक्त हो जाए।
  4. किसी अन्य अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न हो जाए।

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2. प्रोटीन्स (Proteins) :
इनका ऑक्सीकरण (oxidation) तथा डीएमीनेशन (deamination) होता है। इस प्रकार बने हुए कार्बनिक अम्ल (organic acids) ऑक्सी श्वसन के बाद की क्रियाओं (क्रेब्स चक्र) में सम्मिलित हो जाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल में विघटित हो जाते हैं। वसाओं की तरह प्रोटीन्स के सम्पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए बाहर से अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ने के कारण, इनका श्वसन गुणांक (RQ) भी इकाई से कम (0.8-0.9) होता है।

3. कार्बनिक अम्ल (Organic acids) :
कार्बनिक अम्लों में ऑक्सीजन अधिक मात्रा में होने के कारण इनका श्वसन गुणांक (RQ) इकाई से अधिक होता है। श्वसन गुणांक, अनॉक्सी या अवायव श्वसन (anaerobic respiration) में सदैव ही एक से अधिक (सामान्यतः 2) होता है क्योंकि यहाँ ऑक्सीजन बाहर से उपयोग में नहीं लायी जाती, फिर भी कार्बन डाइऑक्साइड तो निकलती ही है।। श्वसन गुणांक को मापन गैनांग श्वसनमापी
(Ganong’s respirometer) द्वारा किया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ए०टी०पी० का महत्व समझाइए।
उत्तर :

ए०टी०पी० का महत्त्व

जीवित कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पन्न करने वाली (energy yielding) तथा ऊर्जा का उपभोग करने वाली (energy consuming) क्रियाएँ निरन्तर होती रहती हैं। एक पदार्थ (उदाहरणार्थ-ग्लूकोज) में संचित ऊर्जा के निष्कासन से दूसरे पदार्थों का निर्माण होता है। उदाहरणार्थ-प्रोटीन का। अब इन दूसरे पदार्थों में संचित ऊर्जा के निष्कासन से कोशिका में दूसरे कार्य किए जा सकते हैं। कोशिका में अस्थाई रूप से ऊर्जा संचय का एक साधन होता है। यह पदार्थ एडिनोसीन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine Tri-Phosphate = ATP) है। यह पदार्थ जीवित कोशिकाओं के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। श्वसन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और वसा के (UPBoardSolutions.com) ऑक्सीकरण द्वारा निष्कासित ऊर्जा, तुरन्त ही ADP और अकार्बनिक फॉस्फेट (iP) से ATP के संश्लेषण मेंप्रयोग हो जाती है। इस प्रकार से श्वसन द्वारा ATP में ऊर्जा संचित हो जाती है। इस प्रकार ATP के संश्लेषण की क्रिया को ऑक्सीकीय फॉस्फोरिलीकरण (oxidative phosphorylation) कहते हैं।

विभिन्न जैविक क्रियाओं, जैसे-कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन तथा वसा पदार्थों का संश्लेषण तथा परासरण (osmosis), सक्रिय अवशोषण (active absorption), खाद्य-पदार्थों के स्थानान्तरण (translocation of food); जीवद्रव्य प्रवाह (streaming of protoplasm), वृद्धि (growth) इत्यादि में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसके लिए ATP का ADP वे iP में विखण्डन हो जाता है और ऊर्जा मुक्त हो जाती है, यह ऊर्जा ही जैविक क्रियाओं में प्रयुक्त होती है। इस प्रकार ATP एक पदार्थ से ऊर्जा लेकर तथा दूसे पदार्थ को ऊर्जा देकर एक मध्यस्थ यौगिक (intermediatory compound) के रूप में कार्य करता है। इस कारण से ATP को जैविक संवर्ध ऊर्जा के आदान-प्रदान की मुद्रा (monetary system of energy exchange in living organisms) भी कहा जाता है।

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प्रश्न 2.
श्वसन क्रिया को प्रभावित करने वाले बाह्य तथा आन्तरिक कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
श्वसन क्रिया को प्रभावित करने वाले कारक-श्वसन की क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों को निम्नलिखित दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है

A. बाह्य कारक

1. तापक्रम (Temperature) :
श्वसन पर प्रभाव डालने वाले कारकों में तापक्रम सबसे महत्त्वपूर्ण कारक है। 0 से 30°C तक तापक्रम बढ़ने पर श्वसन क्रिया की दर लगातार बढ़ती रहती है। वांट हॉफ (Vant Hoffs) के नियमानुसार 0°C से अधिंक 30°C तक प्रत्येक 10°C तापक्रम बढ़ने पर श्वसन की दर 2 से 2.5 गुना बढ़ जाती है, अर्थात् श्वसन का तापक्रम गुणांक (Q 10°C) 2 से 2.5 के बीच होता है। श्वसन क्रिया की सर्वाधिक दर 30°C पर होती है। 30°C से ऊपर तापक्रमों पर आरम्भ में श्वसन दर बढ़ती है, परन्तु शीघ्र ही दर घट जाती है। और जितना अधिक तापक्रम होगा उतनी ही अधिक प्रारम्भ में देर बढ़ेगी और उतनी ही शीघ्र तथा अधिक समय के साथ दर घटेगी।

सम्भवतः ऐसा इसलिए होता है कि श्वसन में कार्य करने वाले विकर (enzymes) अधिक तापक्रम पर विकृत (denatured) हो जाते हैं। 0°C से कम तापक्रम पर श्वसन दर बहुत कम हो जाती है इसीलिए फलों एवं बीजों को कम तापक्रम पर संरक्षित किया जाता है। यद्यपि कुछ पौधों में -20°C तापक्रम पर भी श्वसन क्रिया होती रहती है। सुषुप्त बीजों को यदि -50°C तापक्रम पर रखा जाए तो वे जीवित रहते हैं। जिसका अर्थ है कि उनमें इस तापक्रम पर भी श्वसन होता है।

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2. ऑक्सीजन (Oxygen) :
ऑक्सीजन (O2) की उपस्थिति तथा अनुपस्थिति पर श्वसन को क्रमशः ऑक्सी -श्वसन (aerobic respiration) तथा अनॉक्सी श्वसन (anaerobic respiration) में विभाजित किया जाता है। वायु में 20.8% ऑक्सीजन (0%) होती है। वातावरण में ऑक्सीजन (O2) की मात्रा को एक निश्चित सीमा में घटाने या बढ़ाने पर भी श्वसन क्रिया की दर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वायु में ऑक्सीजन (O2) की मात्रा को लगभग 2% तक घटाने पर श्वसन क्रिया की दर बहुत कम हो जाती है। (UPBoardSolutions.com) ऑक्सीजन की सान्द्रती अत्यधिक कम हो जाने पर अनॉक्सी-श्वसन के कारण एथिल ऐल्कोहॉल (ethyl alcohol) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) अधिक मात्रा में निष्कासित होते हैं।

3. जल (Water) :
जल की कमी होने पर श्वसन की दर घटती है। सूखे बीजों में (प्रायः 8 से 12% जल होता है। बहुत कम श्वसन होता है और बीज द्वारा जल का अन्तःशोषण (imbibition) करने पर श्वसन की दर बढ़ जाती है। गेहूँ के बीजों में जल की मात्रा 16 से 17% बढ़ने पर श्वसन दर बहुत अधिक बढ़ जाती है। यद्यपि जिन ऊतकों में पहले से ही जल। की मात्रा काफी होती है, जल की मात्रा के घटाने-बढ़ाने से श्वसन दर पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। बीज को जीवनकाल जल की मात्रा कम रहने से बढ़ता है। श्वसन विकरों (enzymes) के कार्य में जल आवश्यक होता है।

4. प्रकाश (Light) :
श्वसन रात्रि में भी होता रहता है। इसके लिए प्रकाश का होना आवश्यक नहीं है, किन्तु प्रकाश में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया होने के कारण शर्कराओं का संश्लेषण होता है जिससे उनकी सान्द्रता बढ़ती है और श्वसन-प्रयुक्त पदार्थों (respiratory substrates) की मात्रा अधिक होने से श्वसन दर बढ़ती है। अत: प्रकाश श्वसन को परोक्ष रूप से प्रभावित करता है।

5. कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2) :
वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2) की सान्द्रता सामान्य रूप से अधिक होने पर श्वसन दर कम हो जाती है। बीजों का अंकुरण एवं वृद्धि दर कम हो जाते हैं। हीथ (Heath, 1950) ने सिद्ध किया है कि कार्बन डाइऑक्साइड ( CO2) से पत्ती पर स्थित रन्ध्र (stomata) बन्द हो जाते हैं। इससे ऑक्सीजन ( O2) पत्ती में प्रवेश नहीं करती जिससे श्वसन दरें घट जाती है।

6. क्षति (Injury) :
घायल ऊतक में सामान्यतः श्वसन दर तीव्र हो जाती है। सम्भवतः क्षतिग्रस्त भाग में कुछ कोशिकाएँ विभज्योतकी (meristematic) होकर तेजी से विभाजित होने लगती हैं। वृद्धि कर रही कोशिकाओं में, परिपक्व कोशिकाओं की अपेक्षा श्वसन दर अधिक होती है। हॉपकिन्स (Hopkins) के अनुसार पौधे के क्षतिग्रस्त भागों में स्टार्च का शर्करा में परिवर्तन तेजी से होने लगता है, जिसके कारण भी क्षतिग्रस्त भागों की श्वसन दर बढ़ जाती है।

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B. आन्तरिक कारक

1. श्वसन में प्रयुक्त पदार्थों की सन्द्रिता (Concentration of Using Substrates in Respiration) :
श्वसन में प्रयुक्त होने वाले पदार्थों की सान्द्रता बढ़ने पर श्वसन दर बढ़ जाती है।

2. जीवद्रव्य की दशा (Age of Protoplasm) :
पौधों की वृद्धि करने वाले भागों; जैसे—प्ररोहों एवं जड़ के अग्रस्थ स्थित युवा कोशिकाओं का जीवद्रव्य (UPBoardSolutions.com) अत्यधिक सक्रिय होता है जिससे इन भागों में, श्वसन दर अधिक होती है जबकि ऊतकों एवं पौधों के विभिन्न भागों की वृद्ध कोशिकाओं में श्वसन दर घट जाती है।

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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 10 Cell Cycle And Cell Division

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 10 Cell Cycle And Cell Division (कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 10 Cell Cycle and Cell Division (कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्तनधारियों की कोशिकाओं की औसत कोशिका चक्र अवधि कितनी होती है?
उत्तर :
24 घण्टे के समय में मनुष्य की कोशिको अथवा स्तनधारियों की कोशिका में कोशिका विभाजन पूर्ण होने में केवल एक घण्टा लगता है।

प्रश्न 2.
जीवद्रव्य विभाजन व केन्द्रक विभाजन में क्या अन्तर है?
उत्तर :
कोशिका चक्र के M-प्रावस्था में केन्द्रक विभाजन आरम्भ होता है जिसमें गुणसूत्र अलग होकर दो केन्द्रकों का निर्माण करते हैं। इसे केन्द्रक विभाजन अथवा केरियोकाइनेसिस (karyokinesis) कहते हैं। सामान्यत: इस क्रिया की समाप्ति पर कोशिका (UPBoardSolutions.com) द्रव्य में भी विभाजन होकर दो कोशिका बन जाती हैं। इसे जीवद्रव्ये विभाजन अथवा साइटोकाइनेसिस (cytokinesis) कहते हैं। यदि केवल केरियोकाइनेसिस हो तथा साइटोकाइनेसिस न हो, तो एक कोशिका बहुकेन्द्रकी (multinucleate) बन जाती है।

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प्रश्न 3.
अन्तरावस्था में होने वाली घटनाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
यह अवस्था कोशिका की विश्राम अवस्था (resting phase) मानी जाती है क्योंकि इस अवस्था में कोशिका वृद्धि करती है, अगले विभाजन की तैयारियाँ पूर्ण होती हैं तथा DNA का द्विगुणन होता है। इस अवस्था के तीन चरण हैं

  1.  G– फेस (Gap 1)
  2. S – फेस (संश्लेषण अवस्था)
  3.  G2– फेस (Gap 2)

G1-फेस माइटोसिस तथा DNA द्विगुणन प्रारम्भ होने का मध्यावकाश है। S-फेस में DNA संश्लेषण व द्विगुणन होता है। DNA की मात्रा दोगुनी हो जाती है परन्तु गुणसूत्र संख्या में वृद्धि नहीं होती है। यदि Gमें 2n गुणसूत्र संख्या हो, तो S में भी 2n ही होगी। जन्तु कोशिका में DNA द्विगुणन के साथ-साथ सेन्ट्रिओल विभाजन भी होता है। G2फेस में प्रोटीन संश्लेषण होता है तथा कोशिका टोसिस (mitosis) के लिए तैयार होती है।

प्रश्न 4.
कोशिका चक्र का G0 (प्रशान्त प्रावस्था) क्या है?
उत्तर :
कुछ कोशिकाओं में विभाजन की क्रिया नहीं होती है। कोशिका की मृत्यु होने पर दूसरी कोशिका उसका स्थान ले लेती है। अत: G1 -प्रावस्था एक अक्रिय अवस्था में प्रवेश करती है, इसे शान्त प्रावस्था (G0) कहते हैं। इस अवस्था में कोशिका केवल उपापचयी रूप से सक्रिय रहती है।

प्रश्न 5.
सूत्री विभाजन को सम विभाजन क्यों कहते हैं?
उत्तर :
सूत्री विभाजन में बनी दोनों पुत्री कोशिकाओं (daughter cells) में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका के समान ही बनी रहती है। इसी कारण सूत्री विभाजन को सम विभाजन (equational division) भी कहते हैं।

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प्रश्न 6.
कोशिका चक्र की उस प्रावस्था का नाम बताइए जिसमें निम्न घटनाएँ सम्पन्न होती हैं

  1. गुणसूत्र तर्क मध्य रेखा की ओर गति करते हैं।
  2. गुणसूत्र बिन्दु का टूटना व अर्ध गुणसूत्र का पृथक् होना।
  3.  समजात गुणसूत्रों का आपस में युग्मन होना।
  4.  समजात गुणसूत्रों के बीच विनिमय का होना।

उत्तर :

  1. मेटाफेस
  2.  एनाफेस
  3.  प्रोफेस-I की जाइगोटीन अवस्था जिसमें साइनेप्सिस (synapsis) होती है
  4.  प्रोफेस-I की पेकीटीन (pachytene) प्रावस्था।

प्रश्न 1.
निम्न के बारे में वर्णन कीजिए
(i) सूत्रयुग्मन
(ii) युगली
(iii) काएज्मेटा।
उत्तर :

(i) सूत्रयुग्मन (Synapsis) :
अर्धसूत्री विभाजन के प्रथम प्रोफेसे की जाइगोटीन अवस्था में (UPBoardSolutions.com) गुणसूत्र जोड़े बनाते हैं। इसे सूत्रयुग्मन कहते हैं।

(ii) युगली (Bivalent) :
सूत्रयुग्मन से बने समजात गुणसूत्र जोड़े में 4 अर्धगुणसूत्र होते हैं तथा इस जोड़े को युगली कहते हैं।

(iii) काएज्मेटा (Chiasmeta) :
डिप्लोटीन में यदि गुणसूत्र में विनिमय प्रारम्भ होने से पहले ‘x’ आकार की संरचना बनती है, तो उसे काएज्मेटा कहते हैं।

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प्रश्न 8.
पादप व प्राणी कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य विभाजन में क्या अन्तर है?
उत्तर :
पादप कोशिका में विभाजन के समय पट्ट बनता है जिससे बाद में कोशिका भित्ति बनती है। परन्तु जन्तु कोशिका में दोनों ओर से वलन बनकर मध्य में आते हैं और दो भागों में कोशिका बँट जाती है।

प्रश्न 9.
अर्द्धसूत्री विभाजन के बाद बनने वाली चार संतति कोशिकाएँ कहाँ आकार में समान व कहाँ भिन्न आकार की होती हैं?
उत्तर :
अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा युग्मक निर्माण होता है। शुक्राणुजनन (spermatogenesis) में मातृ कोशिका के विभाजन से बनने वाली चारों पुत्री कोशिकाएँ समान होती हैं। ये शुक्रकायान्तरण द्वारा शुक्राणु का निर्माण करती हैं। शुक्रजनन में बनने वाली चारों संतति कोशिकाएँ (UPBoardSolutions.com) आकार में समान होती हैं। अण्डजनन (oogenesis) में मातृ कोशिका से बनने वाली संतति कोशिकाएँ आकार में भिन्न होती हैं। अण्डनन के फलस्वरूप एक अण्डाणु तथा पोलर कोशिकाएँ बनती हैं। पोलर कोशिकाएँ आकार में छोटी होती हैं। पौधों के बीजाण्ड में गुरुबीजाणुजनन (अर्द्धसूत्री विभाजन) के फलस्वरूप गुरुबीजाणु से चार कोशिकाएँ बनती हैं। इनमें आधारीय कोशिका अन्य कोशिकाओं से भिन्न होती है। यह वृद्धि और विभाजन द्वारा भ्रूणकोष (embryo sac) बनाता है। पौधों में लघु-बीजाणु जनन द्वारा लघु बीजाणु या परागकण बनते हैं। ये आकार में समान होते हैं।

प्रश्न 10.
सूत्री विभाजन की पश्चावस्था तथा अर्द्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था I में क्या अन्तर है?
उत्तर :
सूत्री विभाजन तथा अर्द्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था प्रथम में अन्तर

प्रश्न 11.
सूत्री एवं अर्द्धसूत्री विभाजन में प्रमुख अन्तरों को सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर :
सूत्री व अर्द्धसूत्र विभाजन में अन्तर

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प्रश्न 12.
अर्द्धसूत्री विभाजन का क्या महत्त्व है?

उत्तर :
अर्द्धसूत्री विभाजन का महत्त्व इसके निम्नलिखित महत्त्व हैं

  1. अर्द्धसूत्री विभाजन के फलस्वरूप बने युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है। लेकिन जनन में नर तथा मादा युग्मकों के मिलने से द्विगुणित जाइगोट (zygote)का निर्माण होता है। इस प्रकार अर्द्धसूत्री विभाजन तथा निषेचन के फलस्वरूप प्रत्येक जाति में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित बनी रहती है।
  2. अर्द्धसूत्री विभाजन के समय विनिमय (crossing over) के कारण गुणसूत्रों की संरचना बदल जाती है, इससे भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। जैव विभिन्नताएँ जैव विकास का आधार होती हैं।

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प्रश्न 13.
अपने शिक्षक के साथ निम्नलिखित के बारे में चर्चा कीजिए

  1.  अगुणित कीटों व निम्न श्रेणी के पादपों में कोशिका विभाजन कहाँ सम्पन्न होता है?
  2.  उच्च श्रेणी पादपों की कुछ अगुणित कोशिकाओं में कोशिका विभाजन कहाँ नहीं होता है?

उत्तर :

  1.  नर मधुमक्खियाँ अर्थात् ड्रोन्स (drones) अगुणित होते हैं। इनमें सूत्री विभाजन अनिषेचित अगुणित अण्डों में होता है। निम्न श्रेणी के पादपों; जैसे-एककोशिकीय क्लैमाइडोमोनास (Chlamydomonas), बहुकोशिकीय यूलोथ्रिक्स (Ulothrix) आदि में समसूत्री विभाजन द्वारा जनन होता है। इनमें अगुणित युग्मक बनते हैं। युग्मकों के परस्पर मिलने से युग्माणु (zygote) बनते हैं। जाइगोट में अर्द्धसूत्री विभाजन होता है। इसके (UPBoardSolutions.com) फलस्वरूप बने अगुणित बीजाणु समसूत्री विभाजन द्वारा नए पादपों का विकास करते हैं।
  2. उच्च श्रेणी के पादपों में द्विगुणित बीजाण्डकाय में गुरुबीजाणु मातृ कोशिका में अर्द्धसूत्री विभाजन के कारण चार अगुणित गुरुबीजाणु बनते हैं। इनमें से तीन में कोशिका विभाजननहीं होता। सक्रिय गुरुबीजाणु से भ्रूणकोष (embryo sac) बनता है। भ्रूणकोष की अगुणित प्रतिमुख कोशिकाओं (antipodal cells) तथा सहायक कोशिकाओं (synergids)में क्रोशिका विभाजन नहीं होता। साइकस के लघुबीजाणुओं (परागकण) के अंकुरण के फलस्वरूप नर युग्मकोभिद् बनता है। इसकी प्रोथैलियल कोशिका (prothallial cell) तथा लिका कोशिका (tube cell) में कोशिका विभाजन नहीं होता।

प्रश्न 14.
क्या S प्रावस्था में बिना डी०एन०ए० प्रतिकृति के सूत्री विभाजन हो सकता है?
उत्तर :
‘S’ प्रावस्था में DNA की प्रतिकृति के बिना सूत्री विभाजन नहीं हो सकता।

प्रश्न 15.
क्या बिना कोशिका विभाजन के डी०एन०ए० प्रतिकृति हो सकती है?
उत्तर :
कोशिका विभाजन के बिना भी DNA प्रतिकृति हो सकती है। सामान्यतया DNA से RNA का निर्माण प्रतिकृति के फलस्वरूप ही होता रहता है।

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प्रश्न 16.
कोशिका विभाजन की प्रत्येक अवस्थाओं के दौरान होने वाली घटनाओं का विश्लेषण कीजिए और ध्यान दीजिए कि निम्नलिखित दो प्राचलों में कैसे परिवर्तन होता है?

  1.  प्रत्येक कोशिका की गुणसूत्र संख्या (N)
  2.  प्रत्येक कोशिका में डी०एन०ए० की मात्रा (C)

उत्तर :
अन्तरावस्था की G1 प्रावस्था में कोशिका उपापचयी रूप से सक्रिय होती है। इसमें निरन्तर वृद्धि होती रहती है। S-प्रावस्था में DNA की प्रतिकृति होती है। इसके फलस्वरूप DNA की मात्रा दोगुनी हो जाती है। यदि DNA की प्रारम्भिक मात्रा 2C से प्रदर्शित करें तो इसकी मात्रा 4C हो जाती है, जबकि गुणसूत्रों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता। यदि G1 प्रावस्था में गुणसूत्रों की संख्या 2N है। तो G2 प्रावस्था में भी इनकी संख्या 2N रहती है।

अर्द्धसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था प्रथम की युग्मपट्ट (जाइगोटीन) अवस्था में समजात गुणसूत्र (UPBoardSolutions.com) जोड़े बनाते हैं। पश्चावस्था प्रथम में गुणसूत्रों का बँटवारा होता है। यदि गुणसूत्रों की संख्या 2N है तो अर्द्धसूत्री विभाजन के पश्चात् गुणसूत्रों की संख्या N रह जाती है। जननांगों (2N) में युग्मकजनन अर्द्धसूत्री विभाजन के फलस्वरूप होता है। इसके फलस्वरूप युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या घटकर अगुणित (आधी-N) रह जाती है।

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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वे कोशिकाएँ कौन-सी हैं, जिनमें सेण्ट्रिओल नहीं होता?
(क) तन्त्रिका कोशिका
(ख) जनन कोशिका
(ग) अस्थि कोशिका
(घ) यकृत कोशिका
उत्तर :
(क) तन्त्रिका कोशिका

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोशिका चक्र की विभिन्न अवस्थाओं को क्रम में लिखिए।
उत्तर :
G1 ,S, G2 एवं M प्रावस्थाएँ।

प्रश्न 2.
कोशिका चक्र की G1 प्रावस्था में क्या घटित होता है?
उत्तर :
G1 प्रावस्था में कोशिका वृद्धि करती है। DNA का संश्लेषण करने वाले एन्जाइम तथा DNA के विभिन्न घटकों का निर्माण होता है। G1 प्रावस्था में कोशिका चक्र का लगभग 35% से 50% समय लगता है।

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प्रश्न 3.
कोशिकाद्रव्य विभाजन पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर :
केन्द्रक विभाजन के पश्चात् जन्तु कोशिकाओं में खाँच विधि (furrow method) से तथा पादप कोशिका (UPBoardSolutions.com) में कोशिका पट्ट निर्माण से कोशिकाद्रव्य का बँटवारा होता है।

प्रश्न 4.
सूत्री विभाजन की किस अवस्था में प्रत्येक गुणसूत्र का गुणसूत्र बिन्दु दो भागों में बँट जाता
उत्तर :
मध्यावस्था के अन्त में।

प्रश्न 5.
सूत्री विभाजन के समय गुणसूत्र किस अवस्था में कोशिका के मध्य में एक प्लेट पर एकत्र होते हैं?
उत्तर :
मध्यावस्था में।

प्रश्न 6.
अर्द्धसूत्री विभाजन में प्रथम पूर्वावस्था की उप-प्रावस्थाओं को सही क्रम में लिखिए।
उत्तर :

  1. तनुसूत्र (Leptotene)
  2.  युग्मसूत्र (Zygotene)
  3.  स्थूलसूत्र (Pachytene)
  4.  द्विपट्ट्ट (Diplotene) एवं
  5. पारगतिक्रम (Diakinesis)

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प्रश्न 7.
अर्द्धसूत्री विभाजन के समय समजात गुणसूत्र किस अवस्था में अलग होते हैं?
उत्तर :
पश्चावस्था-I में।

प्रश्न 8.
अर्द्धसूत्री विभाजन की किस अवस्था में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है?
उत्तर :
अर्द्धसूत्री विभाजन-प्रथम (न्यूनकारी विभाजन) में।।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तर्क तन्तु क्या हैं ? प्रत्येक प्रकार के त तन्तुओं के कार्य लिखिए।
उत्तर :

तर्क तन्तु एवं उनके कार्य

समस्त जन्तु कोशिकाओं में विभाजनान्तराल अवस्था (interphase) में ट्यूब्यूलिन (tubulin) प्रोटीन से बनी सूक्ष्म नलिकाओं के संघनन की दो तारककेन्द्र या सेण्ट्रिओल्स (centrioles) नामक सूक्ष्म संरचनाएँ केन्द्रक के समीप स्थित होती हैं। ये दोनों तारककेन्द्र कोशिकाद्रव्य के विशेष कणिकामय (granular) छोटे से क्षेत्र में स्थित होते हैं। इसे कोशिका का विभाजन केन्द्र (division centre) या तारककाय (सेण्ट्रोसोम-centrosome) कहते हैं। यह वनस्पति कोशिकाओं में अनुपस्थित होता है। कोशिका विभाजन में सेण्ट्रोसोम की प्रमुख भूमिका होती है। इण्टरफेज अवस्था की S-उप अवस्था में ही तारककेन्द्रों से दो नये तारककेन्द्र बनने लगते हैं जो G2 प्रावस्था के अन्त तक पूर्ण विकसित हो जाते हैं। पूर्वावस्था (prophase) के प्रारम्भ में सेण्ट्रोसोम के चारों ओर अनेक सूक्ष्म नलिकाएँ बनती हैं, जिन्हें (UPBoardSolutions.com) तारक किरणें (astral rays) कहते हैं। इनके कारण सेण्ट्रोसोम सितारे (star) जैसी आकृति का दिखाई देता है, इसलिए इसे तारक (aster) कहते हैं। तारक किरणों के बन जाने पर तारक दो सन्तति सेण्ट्रोसोम्स (daughter centrosomes) में विभाजित हो जाता है, शीघ्र ही सन्तति सेण्ट्रोसोम जनक सेण्ट्रोसोम से दूर हटने लगते हैं और दोनों सेण्ट्रोसोम्स के बीच कोशिकाद्रव्य की सूक्ष्म नलिकाओं से तर्क तन्तु (spindle fibres) बनने लगते हैं। पूर्वावस्था के समाप्त होने तक दोनों सेण्ट्रोसोम्स कोशिका में विपरीत ध्रुवों पर पहुंच जाते हैं और दोनों के मध्य । ध्रुवीय तर्क तन्तु (polar spindle fibres) बनने से तर्क निर्माण (spindle formation) पूरा हो जाता है। इस द्विध्रुवीय तर्क को समसूत्री तर्क (mitotic spindle) या द्वितारक (एम्फीऐस्टर-amphiaster) कहते हैं। समसूत्री तर्क में निम्नलिखित तीन प्रकार के तन्तु होते हैं।

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1. निरन्तरे या सतत् अथवा ध्रुवीय तर्क तन्तु (Continuous or polar spindle fibres) :
ये एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक फैले रहते हैं।

2. असतत् या गुणसूत्री त तन्तु (Discontinuous or chromosomal spindle fibres) :

ये तर्क ध्रुव से तर्क की मध्यवर्ती रेखा तक फैले होते हैं और गुणसूत्रों के गुणसूत्र बिन्दु (सेण्ट्रोमियर) से जुड़े होते हैं।

3. अन्तक्षेत्रीय तर्क तन्तु (Interzonal spindle fibres) :
ये तर्कु पश्चावस्था (anaphase) में बनते हैं और दो पृथक् व क्रमश: दूर होते पुत्री गुणसूत्रों (daughter chromosomes) के मध्य फैले रहते हैं।

प्रश्न 2.
असूत्री विभाजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इस प्रकार के विभाजन में सबसे पहले केन्द्रक कुछ लम्बा हो जाता है तथा मध्य स्थान पर या किसी एक सिरे के पास संकुचन (constriction) बन जाता है। कुछ समय के बाद केन्द्रक समान आकार के नहीं होते हैं। यह अनिवार्य नहीं है कि केन्द्रक विभाजन के बाद कोशिका का भी विभाजन हो। इस प्रकार का विभाजन सामान्यतः कवकों (fungi) तथा शैवालों (algae) में पाया जाता है। उच्च वर्ग के पौधों में यह केवल पुरानी कोशिकाओं (जो नष्ट हो रही हैं) में होता है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्द्धसूत्री विभाजन से आप क्या समझते हैं? इसकी विभिन्न प्रावस्थाएँ लिखिए। समसूत्री विभाजन तथा इसका महत्व भी बताइए।
उत्तर
अर्द्धसूत्री विभाजन यह प्रत्येक जीव के जीवन चक्र (life cycle) में एक बार होने वाला ऐसा विभाजन है जो कोशिका में उपस्थित द्विगुणित (diploid = 2n) गुणसूत्रों को अगुणित (haploid = n) संख्या में हासित (reduce) कर देता है। इसी के बाद अगुणित (n) युग्मकों (gametes) का निर्माण होता है। युग्मकों के समेकन (fusion) के बाद जो युग्मनज बनता है उसमें क्रोमोसोम्स की संख्या फिर दोगुनी हो जाती है। इस प्रकार अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) के (UPBoardSolutions.com) बिना युग्मक नहीं बन सकते तथा संयुग्मन निषेचन (fertilization) के बिना युग्मनज (zygote) का निर्माण नहीं हो सकता। अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis or reduction division) में जनक गुणसूत्रों का द्विगुणन तो एक बार ही होता है, परन्तु कोशिका दो बार विभाजित होती है अर्थात् विभाजनान्तराल प्रावस्था (interphase) एक ही बार होती है।

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अर्द्धसूत्री विभाजन की प्राधस्थाएँ

अर्द्धसूत्री विभाजन एक लम्बी प्रक्रिया है और इसमें केन्द्रक व कोशिकाद्रव्य के दो बार विभाजन सम्मिलित हैं। इन दो बार के विभाजनों में से पहला विभाजन ह्रास विभाजन (न्यूनकारी = reduction division) है जिसमें गुणसूत्रों की संख्या विगुणित से अगुणित (2n से n) हो जाती है। दोनों केन्द्रकों में गुणसूत्रों की संरचना यद्यपि एक जैसी होती है किन्तु इन पर उपस्थित आनुवंशिक प्रभावों में अन्तर हो सकता है, अत: इस विभाजन को विषम विभाजन (heterotypic division) भी कहते हैं, जबकि दूसरा विभाजन-साधारण सूत्री विभाजन की तरह ही होता है। इसमें बनने वाले नये केन्द्रकों में गुणसूत्र लम्बाई में टूट कर पहुँचते हैं; अत: इसे सम विभाजन (homotypic division) भी कहते हैं। इस विभाजन के अन्त में चार अगुणित (n) कोशिकाएँ बनती हैं।

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समसूत्री विभाजन एवं इसका महत्त्व

समसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं के अतिरिक्त सभी प्रकार की कायिक कोशिकाओं (somatic cells) में होता है। इसमें क्रोमोसोम्स की संख्या सदैव समान बनी रहती है। नयी सन्तति कोशिकाओं का निर्माण युग्मनज से होता है। इसमें नयी सन्तति कोशिकाएँ बार-बार विभाजित (समसूत्री कोशिका विभाजन द्वारा) होकर वृद्धि करती रहती हैं। कोशिका विभाजन के फलस्वरूप बनने वाली कोशिकाओं में विभेदीकरण (maturation) भी होता है जिससे (UPBoardSolutions.com) जीव के शरीर में विभिन्न अंग विकसित होते हैं। और इस प्रकार भ्रूणीय विकास के बाद एक नन्हे विकसित जीव का निर्माण हो जाता है। अब यह जीव वृद्धि करके वयस्क में बदल जाता है। यह वृद्धि भी सूत्री विभाजनों द्वारा कोशिकाओं की संख्या बढ़ने से ही होती है। इस प्रकार

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  1. यही एक ऐसा विभाजन है जिसके द्वारा बनने वाली सन्तति कोशिकाएँ पूर्णरूप से गुणों और संरचना में मातृ कोशिका की तरह होती हैं। सन्तति कोशिकाओं में क्रोमोसोम्स की संख्या और उनके लाक्षणिक गुण भी मातृ कोशिका की तरह ही रहते हैं।
  2. इस विभाजन के द्वारा बहुकोशिकीय संरचना का निर्माण होता है जबकि प्रत्येक जीव का जीवन चक्र,वास्तव में, एक कोशिका से ही प्रारम्भ होता है।
  3. एककोशिकीय जीवों में तो यह विभाजन जनन की एक विधि है।
  4. वृद्धि के लिए कोई कोशिका यदि परिमाप में बढ़ती जाये तो एक समय ऐसा आयेगा जब उसके जीवद्रव्य की विभिन्न दृष्टिकोण से सक्रियता नहीं रह पायेगी।

अतः यह कोशिका विभाजन जीव का परिमाप बढ़ाते हुए भी सक्रियता को कम नहीं होने देता अर्थात् (UPBoardSolutions.com) इसके द्वारा पुरानी वृद्ध कोशिकाओं के स्थान पर नयी नवजीवन युक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।

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UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 12 Thermodynamics

UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 12 Thermodynamics (ऊष्मागतिकी)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Physics. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 12 Thermodynamics (ऊष्मागतिकी)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कोई गीज़र 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27° C से 77° C तक गर्म करता है। यदि गीज़र का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंधन की दहन-ऊष्मा 40 × 104 Jg-1 है।

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प्रश्न 2.
स्थिर दाब पर 2.0 × 10-2 kg नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45°C वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए? (N2 का अणु भार = 28, R = 8.3 J mol-1 K-1)

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प्रश्न 3.
व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है –

(a) भिन्न-भिन्न तापों T1 व T2 के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय सम्पर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उनका अन्तिम ताप (T1 + T2) / 2 ही हो।
(b) रासायनिक या नाभिकीय संयन्त्रों में शीतलक (अर्थात दूव जो संयन्त्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
(c) कार को चलाते-चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
(d) किसी बन्दरगाह के समीप के शहर की जलवायु , समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।

उत्तर :

(a) चूँकि अन्तिम ताप वस्तुओं के अलग-अलग तापों के अतिरिक्त उनकी ऊष्मा धारिताओं पर भी निर्भर करता है।
(b) शीतलक का कार्य संयन्त्र से अभिक्रिया जनित ऊष्मा को हटाना है इसके लिए शीतलक की विशिष्ट ऊष्मा धारिता अधिक होनी चाहिए जिससे कि वह कम ताप-वृद्धि के लिए अधिक ऊष्मा शोषित कर सके।
(c) कार को चलाते-चलाते, सड़क के साथ घर्षण के कारण टायर का ताप बढ़ जाता है, इसी कारण टायर में भरी हवा का दाब बढ़ जाता है।
(d) बन्दरगाह के निकट के शहरों की आपेक्षिक आर्द्रता समान अक्षांश के रेगिस्तानी शहर की तुलना में अधिक होती है। इसी कारण बन्दरगाह शहर की जलवायु रेगिस्तानी शहर की जलवायु की तुलना में शीतोष्ण बनी रहती है।

प्रश्न 4.
गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलिण्डर में मानक ताप व दाब पर 3 mol हाइड्रोजन भरी है। सिलिण्डर की दीवारें ऊष्मारोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्मारोधी बनाया गया है। यदि गैस को उसके आरम्भिक आयतन के आधे आयतन तक सम्पीडित किया जाए तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
हल : पिस्टन तथा दीवारें ऊष्मारोधी होने के कारण प्रक्रम रुद्धोष्म (adiabatic) है। अत: इसके लिए दाब आयतन सम्बन्ध PVγ = नियतांक से
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प्रश्न 5.
रुद्रोष्म विधि द्वारा किसी गैस की अवस्था परिवर्तन करते समय उसकी एक साम्यावस्था से दूसरी साम्यावस्था B तक ले जाने में निकाय पर 22.3 J कार्य किया जाता है। यदि गैस को दूसरी प्रक्रिया द्वारा अवस्था A से अवस्था B में लाने में निकाय द्वारा अवशोषित नेट ऊष्मा 9.35 cal है तो बाद के प्रकरण में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य कितना है? (1cal= 4 . 19 j)
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प्रश्न 6.
समान धारिता वाले दो सिलिण्डर A तथा B एक-दूसरे से स्टॉपकॉक के द्वारा जुड़े हैं। A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि B पूर्णतः निर्वातित है। स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए –

(a) सिलिण्डर A तथा B में अन्तिम दाब क्या होगा?
(b) गैस की आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
(c) गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा?
(d) क्या निकाय की माध्यमिक अवस्थाएँ (अन्तिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व) इसके P – V – T पृष्ठ पर होंगी?

हल : (a) P1 = मानक दाब = 1 atm, V1 = V (माना)
P2 = ? जबकि V2 = 2 V (चूँकि A व B के आयतन बराबर हैं।)
∵ सिलिण्डर B निर्वातित है; अत: स्टॉपकॉक खोलने पर गैस का निर्वात में मुक्त प्रसार होगा;
अतः गैस कोई कार्य नहीं करेगी और न ही ऊष्मा का आदान-प्रदान करेगी।
अतः गैस की आन्तरिक ऊर्जा व ताप स्थिर रहेंगे।
∴ बॉयल के नियम से, P2 V2 = P1 V1

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(c) ∵ आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रही है; अत: गैस के ताप में भी कोई परिवर्तन नहीं होगा।
(d) ∵ गैस का मुक्त प्रसार हुआ है; अत: माध्यमिक अवस्थाएँ साम्य अवस्थाएँ नहीं हैं; अत: ये अवस्थाएँ P – V – T पृष्ठ पर नहीं होंगी।

प्रश्न 7.
एक वाष्प इंजन अपने बॉयलर से प्रति मिनट 3.6 × 109 ऊर्जा प्रदान करता है जो प्रति मिनट 5.4 × 108 Jकार्य देता है। इंजन की दक्षता कितनी है? प्रति मिनट कितनी ऊष्मा अपशिष्ट होगी ?
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प्रश्न 8.
एक हीटर किसी निकाय को 100 w की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय 75 Js-1 की दर से कार्य करता है तो आन्तरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी?
हल : ∆U =Q – W = (100 Js – 75 Js)= 25 Js
अर्थात् आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि की दर = 25 w

प्रश्न 9.
किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक चित्र-12.1 में दर्शाए अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है। एक समदाबी प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को E से F तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा D से E तथा वहाँ से F तक कुल किए गए कार्य का आकलन कीजिए।
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प्रश्न 10.
खाद्य पदार्थ को एक प्रशीतक के अन्दर रखने पर वह उसे 9°C पर बनाए रखता है। यदि कमरे का ताप 36°c है तो प्रशीतक के निष्पादन गुणांक का आकलन कीजिए।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी गैस पर कृत कार्य सर्वाधिक होता है।
(i) समतापी प्रक्रम में
(ii) समदाबीय प्रक्रम में
(iii) समआयतनिक प्रक्रम में
(iv) रुद्धोष्म प्रक्रम में
उत्तर :
(i) समतापी प्रक्रम में

प्रश्न 2.
किसी चक्रीय प्रक्रम में
(i) किया गया कार्य शून्य होता है।
(ii) निकाय द्वारा किया गया कार्य निकाय को दी गयी ऊष्मा के बराबर होता है।
(iii) किया गया कार्य ऊष्मा पर निर्भर नहीं करता
(iv) निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
उत्तर :
(ii) निकाय द्वारा किया गया कार्य निकाय को दी गयी ऊष्मा के बराबर होता है।

प्रश्न 3.
आन्तरिक ऊर्जा की अभिधारणा सर्वप्रथम प्रस्तुत की गयी।
(i) ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम द्वारा
(ii) स्टोक के नियम द्वारा
(iii) स्टीफन के नियम द्वारा
(iv) वीन के नियम द्वारा
उत्तर :
(i) ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम द्वारा

प्रश्न 4.
एक ऊष्मागतिक निकाय को 100 जूल ऊष्मा दी जाती है तथा निकाय द्वारा 50 जूल कार्य किया जाता है, तो निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन है।
(i) 100 जूल
(ii) 150 जूल
(iii) 50 जूल
(iv) 200 जूल
उत्तर :
(iii) 50 जूल

प्रश्न 5.
ऊर्जा के समविभाजन नियम के अनुसार प्रत्येक स्वातन्त्र्य कोटि से सम्बद्ध प्रति कण औसत आन्तरिक ऊर्जा होती है
(i) [latex]\frac { 1 }{ 2 } [/latex] RT
(ii) [latex]\frac { 3 }{ 2 } [/latex] RT
(iii) [latex]\frac { 3 }{ 2 } [/latex] KT
(iv) [latex]\frac { 1 }{ 2 } [/latex] KT
उत्तर :
(i) [latex]\frac { 1 }{ 2 } [/latex] RT

प्रश्न 6.
एंक गैस को निम्न चित्र 12.2 के अनुसार मार्ग AB, BC तथा CA द्वारा ले जाया जाता है। सम्पूर्ण चक्र में नेट कार्य है।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 12 Thermodynamics 13
(i) 12 P1 V1
(ii) 6 P1 V1
(iii) 3 P1 V1
(iv) P1 V1
उत्तर :
(iii) 3 P1 V1

प्रश्न 7.
त्रि-परमाणुक गैस की विशिष्ट ऊष्मा अनुपात (γ) है।
(i) 1.40
(ii) 1.33
(iii) 1.67
(iv) 1
उत्तर :
(ii) 1.33

प्रश्न 8.
इंजन की दक्षता हो सकती है।
(i) शून्य से अनस्त तक कुछ भी।
(ii) सदैव एक
(iii) सदैव एक से कम
(iv) एक और दो के मध्य
उत्तर :
(iii) सदैव एक से कम

प्रश्न 9.
एक आदर्श इंजन 327° C तथा 27° C के बीच कार्य करता है। इंजन की दक्षता होगी
(i) 60%
(ii) 80%
(iii) 40%
(iv) 50%
उत्तर :
(iv) 50%

प्रश्न 10.
भाप इंजन की दक्षता की कोटि है।
(i) 80%
(ii) 50%
(iii) 30%
(iv) 15%
उत्तर :
(i) 80%

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चित्र 12.3 में किसी गैस के लिए P – V वक्र, AB तथा AC प्रदर्शित है। कारण सहित बताइए कि कौन-सा वक्र किस परिवर्तन को प्रदर्शित करता है?
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उत्तर :
यदि गैस आयतन V1 से V2 तक समतापीय और रुद्धोष्म प्रसारित होती है तो ग्राफ के ढाल से यह स्पष्ट है कि ग्राफ AB समतापीय प्रेक्रम तथा ग्राफ AC रुद्धोष्म प्रक्रम प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 2.
एक आदर्श गैस को नियत ताप पर सम्पीडित किया जाता है। गैस की आन्तरिक ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर :
कोई परिवर्तन नहीं होगा। ‘आदर्श गैस में केवल आन्तरिक गतिज ऊर्जा होती है (स्थितिज ऊर्जा नहीं होती) तथा गतिज ऊर्जा केवल ताप पर निर्भर करती है।

प्रश्न 3.
समान ताप पर समान द्रव्यमान के ठोस, द्रव तथा गैस में किसकी आन्तरिक ऊर्जा अधिक होती है और क्यों?
उत्तर :
गैस की आन्तरिक ऊर्जा सबसे अधिक होती है, क्योंकि इसके अणुओं की (ऋणात्मक) स्थितिज ऊर्जा बहुत कम होती है। ठोस के अणुओं की (ऋणात्मक) स्थितिज ऊर्जा बहुत अधिक होती है, अतः आन्तरिक ऊर्जा सबसे कम होती है।

प्रश्न 4.
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम समझाइए। यह नियम किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित है?
उत्तर :
यदि किसी ऊष्मागतिक निकाय को Q ऊर्जा देने पर, निकाय द्वारा कृत कार्य W हो तब निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन ∆U = Q – W होगा। यही ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम है जो कि ऊर्जा-संरक्षण पर आधारित है।

प्रश्न 5.
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का गणितीय स्वरूप लिखिए। प्रयुक्त संकेतों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम
AU = Q – W अथवा Q = ∆U + W
चमदमें θ निकाय को दी गई ऊष्मीय ऊर्जा, W निकाय द्वारा किया गया कार्य, AU निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन है।

प्रश्न 6.
कार्बो इंजन के कार्यकारी पदार्थ का नाम लिखिए।
उत्तर :
आदर्श गैस।

प्रश्न 7.
यदि स्रोत वसिंक के ताप क्रमशः T1 तथा T2 हों तो ऊष्मा इंजन की दक्षता कितनी होगी?
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प्रश्न 8.
कान इंजन की दक्षता कब 1 होगी?
उत्तर :
जबकि सिंक का ताप OK हो।

प्रश्न 9.
ऊष्मा इंजन, प्रशीतक से कैसे भिन्न है?
उत्तर :
ऊष्मा इंजन में कार्यकारी-पदार्थ ऊँचे ताप वाली वस्तु से ऊष्मा लेता है। इसका कुछ भाग यान्त्रिक कार्य में बदलता है तथा शेष भाग नीचे ताप की वस्तु को लौटा देता है। प्रशीतक में कार्यकारी-पदार्थ शीतल वस्तु से ऊष्मा लेता है तथा इस पर बाह्य ऊर्जा-स्रोत से कार्य किया जाता है जिसके फलस्वरूप यह ऊष्मा की अधिक मात्रा को किसी तप्त वस्तु को दे देता है।

प्रश्न 10.
यदि ताप T1 व T2 के बीच कार्य कर रहे इंजन की दक्षता n है तो प्रत्येक ताप को 100 K बढ़ा देने पर दक्षता पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
दक्षता कम हो जायेगी।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्क्रमणीय प्रक्रम क्या है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
उत्क्रमणीय प्रक्रम – वे प्रक्रम जिन्हें विपरीत क्रम में भी ठीक उन्हीं अवस्थाओं में सम्पन्न किया जा सकता है, जिन अवस्थाओं में सीधे क्रम में सम्पन्न किया गया है; परन्तु विपरीत प्रभाव के साथ, उत्क्रमणीय प्रक्रम (reversible process) कहलाते हैं।

उदाहरणार्थ – मान लो पानी से भरा हुआ एक फ्लास्क है जिसे अच्छी तरह बन्द कर दिया गया है। फ्लास्क का पानी एक निकाय है। पानी ही इसे निकाय का कार्यकारी पदार्थ (working substance) है, क्योंकि प्रक्रम के भौतिक परिवर्तन इंसी पर सम्पन्न किये जाते हैं। पानी को गर्म करके हम वाष्प बनाते हैं, यह एक प्रक्रम है और उसे ठण्डा करके पुनः पानी बना देते हैं, यह उसका उल्टा या उत्क्रम प्रक्रम है। इसी प्रकार पानी को उबालकर वाष्प बनाना एक उत्क्रमणीय प्रक्रम है, अर्थात् ऐसा प्रक्रम है जिसे उल्टी दिशा में सम्पन्न करने से प्रारम्भिक अवस्था तक पुन: पहुँचाया जा सकता है।

प्रश्न 2.
अनुत्क्रमणीय प्रक्रम क्या है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
अनुक्रमणीय प्रक्रम – वह प्रक्रम जिसे विपरीत क्रम में ठीक उन्हीं अवस्थाओं से नहीं गुजारा जा सकता है, जिनसे होकर वह सीधे क्रम में गुजरा था, अनुत्क्रमणीय प्रक्रम कहलाता है। दूसरे शब्दों में, जो प्रक्रम उत्क्रमणीय नहीं होता, वह अनुत्क्रमणीय होता है।

उदाहरणार्थ – इसके उदाहरण निम्नलिखित हैं –

  1. पानी में शक्कर का घुलना अनुक्रमणीय प्रक्रम है।
  2. लोहे में जंग लगना।।
  3. किसी भी गैस का अचानक रुद्धोष्म प्रसार या सम्पीडन होना।
  4. गैसों का विसरण अनुक्रमणीय है। दो गैसें परस्पर मिलाये जाने पर आपस में मिलने की प्रवृत्ति रखती हैं, परन्तु मिश्रण से वे अपने आप पृथक् नहीं हो सकतीं।

प्रश्न 3.
ऊष्मागतिकी का शुन्यांकी नियम लिखिए।
उत्तर :
ऊष्मागतिकी का शून्यांकी नियम – इस नियम का प्रतिपादन सन् 1931 में आर०एच० फाउलर ने ऊष्मागतिकी के प्रथम तथा द्वितीय नियम की अभिव्यक्ति के काफी समय बाद किया। ऊष्मागतिकी के शून्यांकी नियम के अनुसार,

“यदि दो ऊष्मागतिक निकाय किसी तीसरे ऊष्मागतिक निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य अर्थात् ऊष्मीय साम्य (themal equilibrium) में हैं तो वे परस्पर भी ऊष्मीय साम्य में होंगे।”

प्रश्न 4.
ऊष्मागतिक निकायक़ी आन्तरिक ऊर्जा का क्या अर्थ है?
उत्तर :
किसी ऊष्मागतिक निकाय की आन्तरिक ऊर्जा उस निकाय की अवस्था का एक अभिलाक्षणिक गुण है; चाहे वह अवस्था किसी भी प्रकार प्राप्त की गयी है।

उदाहरणार्थ – किसी बर्तन में बन्द हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के मिश्रण को बाहर से कोई ऊर्जा नहीं दी जाती, परन्तु फिर भी यह मिश्रण विस्फोट होने पर कार्य कर सकता है। अत: इससे सिद्ध होता है कि मिश्रण में आन्तरिक ऊर्जा विद्यमान है।

प्रश्न 5.
यदि 2 मोल नाइट्रोजन गैस के ताप में 10°C की वृद्धि कर दी जाए, तो उसकी आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन ज्ञात कीजिए। (R = 8.31जूल / मोल × K)
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प्रश्न 6.
सामान्य ताप तथा स्थिर दाब 1.0 × 105 न्यूटन / मी2 पर किसी आदर्श गैस के आयतन में 2.0 सेमीकी कमी करने के लिए कितना बाह्य कार्य करना होगा?
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प्रश्न 7.
0.5 सोल नाइट्रोजन को स्थिर आयतन पर 50°C से 70°C तक गर्म किया जाता है। गैस की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन की गणना कीजिए। नाइट्रोजन की स्थिर दाब पर विशिष्ट ऊष्मा CP = 7 कैलोरी / मोल – K तथा सार्वत्रिक गैस नियतांक R = 2 कैलोरी / मोल – K.
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प्रश्न 8.
यदि किसी ऊष्मागतिकी निकाय को 50 जुल ऊष्मा देने पर निकाय द्वारा 30 जूल कार्य किया जाता है, तो निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल : ऊष्मागतिकी निकाय को दी गयी ऊष्मा Q = + 50 जूल
निकाय पर किया गया कार्य W = – (30 जूल)
∴ ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन
∆U = Q – W = + 50 जूल – ( – 30 जूल) = 50 + 30 = 80 जूल
∵ ∆U का चिह्न धनात्मकं है, अतः आन्तरिक ऊर्जा में 80 जूल की वृद्धि होगी।

प्रश्न 9.
एक परमाणुक आदर्श गैस (ϒ = [latex]\frac { 5 }{ 3 }[/latex]) 17°C पर एकाएक अपने प्रारम्भिक आयतन के [latex]\frac { 1 }{ 8 }[/latex] आयतन तक सम्पीडित कर दी जाती है। गैस का अन्तिम ताप ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
माना गैस का प्रारम्भिक आयतन V1 तथा ताप T2 है तथा अन्तिम आयतन V, तथा ताप T, है। जब परिवर्तन एकदम से किया जाता है तो यह रुद्धोष्म परिवर्तन होगा, इसलिए गैस पॉयसन के नियम का पालन करेगी, जिसके अनुसार
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प्रश्न 10.
एक प्रशीतक (रेफ्रिजरेटर) को चलाने वाली मोटर 300 वाट की है। कमरे का ताप 27°C है। यदि इसके हिमकारी कक्ष से प्रति सेकण्ड 2.7 × 103 जूल ऊष्मा बाहर निकलती है, तो हिमकारी कक्ष का ताप ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 11.
एक कार्यों इंजन प्रत्येक चक्र में स्रोत से 127°C ताप पर 1000 जूल ऊष्मा अवशोषित करता है तथा 600 जूल ऊष्मा सिंक को दे देता है। इंजन की दक्षता तथा सिंक का ताप ज्ञात कीजिए।
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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चक्रीय प्रक्रम से आप क्या समझते हैं। एक उचित (P – V) आरेख खींचकर यह प्रदर्शित कीजिए कि चक्रीय प्रक्रम में एक ऊष्मागतिक निकाय द्वारा किया गया कुल कार्य वक़ से घिरे क्षेत्रफल के बराबर होता है।
उत्तर :
चक्रीय प्रक्रम (Cyclic process) – जब कोई निकाय एक अवस्था से चलकर, भिन्न-भिन्न अवस्थाओं से गुजरता हुआ पुन: अपनी प्रारम्भिक अवस्था में लौट आता है, तो उसे ‘चक्रीय प्रक्रम’ कहते हैं। इस प्रक्रम में निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता अर्थात् ∆U = 0 ; अत: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम की समीकरण ∆U = Q – W से
0 = Q – W अथवा Q = W
अतः चक्रीय प्रक्रम में किसी निकाय को दी गयी ऊष्मा निकाय द्वारा दिये गये नेट कार्य के बराबर होती है।

चक्रीय प्रक्रम में किया गया कुल कार्य (Total work done in cyclic process) – जब कोई निकाय विभिन्न परिवर्तनों द्वारा विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता हुआ अपनी प्रारम्भिक अवस्था में लौट आता है, तो इस सम्पूर्ण प्रक्रम को चक्रीय प्रक्रम कहते हैं।”

माना कोई गैस (ऊष्मागतिक निकाय) दाब तथा आयतन की प्रारम्भिक अवस्था A में है तथा यह किसी प्रक्रम द्वारा फैलकर एक अन्य अवस्था B में पहुँच जाती है (चित्र 12.4)। इस प्रक्रम के लिए दाब-आयतन वक्र ACB है। इसलिए अवस्था A से अवस्था B तक जाने में गैस द्वारा किया गया कार्य WAB = क्षेत्रफल ACBB A’ अब माना किसी प्रक्रम द्वारा गैस को अवस्था B से पुनः अवस्था A में है। लाया जाता है। इस प्रक्रम के लिए दाबे-आयतन वक्र BDA है। गैस को अवस्था B से अवस्था A तक लाने में किसी कारक द्वारा गैस पर किया है गया कार्य WBA = क्षेत्रफल BDAA’ B’
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चूँकि क्षेत्रफल BDAA’B’ क्षेत्रफल ACBB A’ से बड़ा है। इसलिए WBA > WAB, अतः गैस पर किया गया नेट कार्य w = wba – Wab अतः W = क्षेत्रफल BDAA B – क्षेत्रफल ACBB’ A’= क्षेत्रफल ACBDA = बन्द वक्र ACBDA से घिरा क्षेत्रफल अतः उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट है कि “चक्रीय प्रक्रम के लिए दाब-आयतन वक्र एक बन्द वक्र होता है। इस दशा में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य अथवा निकाय पर किया गया नेट कार्य बन्द वक्र से घिरे क्षेत्रफल के बराबर होता है।”

प्रश्न 2.
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम लिखिए तथा नियम की स्पष्ट व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – किसी ऊष्मागतिक निकाय की दो निश्चित अवस्थाओं के बीच विभिन्न प्रक्रमों में राशि (Q – w) का मान निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। इसलिए यदि निकाय की प्रारम्भिक तथा अन्तिम अवस्थाओं में आन्तरिक ऊर्जाएँ क्रमशः Ui तथा Uf हों, तो
Q – W = UF – Ui अथवा (Q – W) = ∆U
(जहाँ ∆U निकाय की प्रारम्भिक तथा अन्तिम अवस्थाओं में आन्तरिक ऊर्जाओं का अन्तर है।) अथवा Q = ∆U + W ……(1)

यह ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम को गणितीय स्वरूप है। इसको शब्दों में निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है –

“किसी ऊष्मागतिक निकाय को दी गयी ऊष्मा Q (अर्थात् निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा) दो भागों में प्रयुक्त होती है – (i) निकाय द्वारा बाह्य दाब के विरुद्ध कार्य (w) करने में तथा (ii) निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन (∆U) करने में।”

यदि किसी प्रक्रम में निकाय को अनन्त सूक्ष्म ऊर्जा dQ दी जाती है तथा निकाय द्वारा अनन्त सूक्ष्म कार्य dw किया जाता है, तो निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन भी अनन्त सूक्ष्म dU ही होगा। तब समीकरण (1) को निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जायेगा –
dQ = dU+ dW …..(2)

इस प्रकार ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का ही एक रूप है।

प्रश्न 3.
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के आधार पर सिद्ध कीजिए कि किसी निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन

  1. समआयतनिक प्रक्रिया में निकाय को दी गई ऊष्मा अथवा उससे ली गई ऊष्मा के बराबर होता है।
  2. रुद्घोष्म प्रक्रिया में निकाय पर अथवा निकाय द्वारा किये गये कार्य के समान होता है।

उत्तर :
(i) समआयतनिक प्रक्रम (Isochoric process) – यदि निकाय में होने वाले किसी प्रक्रम के अन्तर्गत निकाय का आयतन स्थिर रहे तो उस प्रक्रम को समआयतनिक प्रक्रम कहते हैं। चूंकि ऐसे प्रक्रम में आयतन नियत रहता है, अत: आयतन में परिवर्तन ∆V = 0. इसलिए W = P × ∆V से W = 0 ; अतः ऐसे प्रक्रम में निकाय द्वारा कोई भी कार्य नहीं किया जाता। अत: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम
∆U = Q – W से,
∆U = Q – 0 या ∆U =Q

अतः ऐसे प्रक्रम में निकाय को दी गयी सम्पूर्ण ऊष्मा निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि करने में व्यये हो जाती है। गैसों में होने वाले विस्फोट इस प्रकार के प्रक्रम के उदाहरण हैं।

(ii) रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) – जब ऊष्मागतिक निकाय में होने वाले किसी प्रक्रम के अन्तर्गत ऊष्मा न तो बाहर से निकाय के अन्दर जा सके और न ही ऊष्मा= निकाय से बाहर आ सके, अर्थात् Q = 0, तो ऐसे प्रक्रम को रुद्धोष्म प्रक्रम कहते हैं।

अत: इसे दशा में ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम ∆U = Q – W के अनुसार,
∆U = 0 – W या AU = – W ….(1)

अर्थात् रुद्धोष्म प्रक्रम में निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन कार्य के बराबर होता है।
यदि रुद्धोष्म प्रक्रम में कार्य निकाय पर किया गया है, तो W ऋणात्मक होगा।
अत: उपर्युक्त सूत्र (1) से ∆U = – ( – W) = W (धनात्मक)

प्रश्न 4.
रेफ्रिजरेटर (प्रशीतक) का सिद्धान्त क्या है? इसके कार्य गुणांक का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
रेफ्रिजरेटर का सिद्धान्त – “प्रशीतक एक ऐसी युक्ति है जो ऊष्मा को निम्न ताप की वस्तु से लेकर उच्च ताप की वस्तु में स्थानान्तरित कर देती है।”

दूसरे शब्दों में, प्रशीतक, उत्क्रम दिशा में कार्य करने वाला ऊष्मा इंजन है। इसलिए प्रशीतक को ऊष्मा पम्प (heat pump) या सम्पीडक (compressor) भी कहते हैं। इस प्रकार प्रत्येक चक्र में कार्यकारी पदार्थ रेफ्रिजरेटर (प्रशीतक) में रखे पदार्थ से ऊष्मा अवशोषित करता है। कार्य विद्युत मोटर द्वारा कार्यकारी पदार्थ पर किया जाता है और अन्त में कार्यकारी पदार्थ ऊष्मा को वातावरण में (जिसका ताप अधिक होता है) छोड़ देता है। इस प्रकार रेफ्रिजरेटर में रखा पदार्थ ठण्डा हो जाता है।

इसी के आधार पर कान चक्र में उत्क्रम प्रक्रम में कार्यकारी पदार्थ कम ताप (T2) के सिंक से Q2 ऊष्मा ग्रहण करके, बाह्य स्रोतों द्वारा निकाय पर w कार्य कराकर, उच्च ताप (T1) के स्रोतों को (Q2 +W) = Q1 ऊष्मा देता है। प्रशीतक इसी मूल सिद्धान्त पर कार्य करता है।

कार्य गुणांक – कार्यकारी पदार्थ द्वारा ठण्डी वस्तु से ली गयी ऊष्मा और कार्यकारी पदार्थ पर किये गये कार्य के अनुपात को प्रशीतक का कार्य गुणांक कहते हैं।
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प्रश्न 5.
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम क्या है? एक ऊष्मा इंजन दो तापों के बीच कार्य करता है जिनका अन्तर 100 K है। यदि यह स्रोत से 746 जूल ऊष्मा अवशोषित करता है तथा सिंक को 546 जूल ऊष्मा देता है तो स्रोत व सिंक के ताप ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम – किसी भी स्वतः क्रिया मशीन के लिए, जिसे कोई भी बाह्य स्रोत की सहायता प्राप्त न हो, ऊष्मा को ठण्डी वस्तु से गर्म वस्तु पर अथवा ऊष्मा को अल्प ताप से उच्च ताप पर पहुँचाना असम्भव है।
हल : स्रोत से ली गयी ऊष्मा θ1 = 746 जूल; सिंक को दी गयी ऊष्मा θ2 = 546 जूल, स्रोत व सिंक के तापों को अन्तर T1 – T2 = 100K
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प्रश्न 6.
27°C तथा एक वायुमण्डलीय दाब पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान को (i) धीरे-धीरे, (ii) तेजी से, इतना दबाया जाता है कि इसका अन्तिम आयतन प्रारम्भिक आयतन का एक-चौथाई रह जाता है। प्रत्येक दशा में अन्तिम दाब की गणना कीजिए। (गैस के लिए r = 1.5)
हल : माना गैस का प्रारम्भिक दाब P1 तथा आयतन V1 है तथा अन्तिम दाब P2 तथा आयतन V2 है।
(i) जब उक्त परिवर्तन धीरे-धीरे किया जाता है तो यह परिवर्तन समतापी होगा, इसलिए गैस बॉयल के नियम का पालन करेगी जिसके अनुसार P × V= नियतांक अर्थात्
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प्रश्न 7.
5 मोल ऑक्सीजन को स्थिर आयतन पर 10°C से 20°C तक गर्म किया जाता है। गैस की आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा? ऑक्सीजन की स्थिर दाब पर ग्राम अणुक विशिष्ट ऊष्मा CP = 8 कैलोरी / (मोल-C) है। R = 8.36 जूल / (मोल – C)
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प्रश्न 8.
कार्यों का प्रमेय क्या है? समझाइए।
उत्तर :
कार्नो प्रमेय – इस प्रमेय के अनुसार, किन्हीं दो तापों के मध्य कार्य करते हुए किसी भी इंजन की दक्षता आदर्श उत्क्रमणीय (कानों) इंजन की दक्षता से अधिक नहीं हो सकती। दूसरे शब्दों में, आदर्श उत्क्रमणीय इंजन की दक्षता अधिकतम होती है तथा यह इसमें प्रयुक्त पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर नहीं करती।
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क्योंकि A एक उत्क्रमणीय इंजन है अत: इसे विपरीत दिशा में चलाया जा सकता है। उस दशा में यह रेफ्रिजरेटर की तरह कार्य करेगा। इसके लिए आवश्यक कार्य w इंजन B से प्राप्त किया जा सकता है। चित्र 12.4 में दोनों इंजन एक पट्टी (belt) द्वारा सम्बन्धित हैं। स्पष्ट है कि दोनों इंजन मिलकर एक स्वत: चलने वाली मशीन की तरह कार्य करेंगे। इस दशा में इंजन A निम्न तापं T2 पर Q1 ऊष्मा ग्रहण कर उच्च ताप T1 पर Q1 ऊष्मा लौटाता है। इंजन B उच्च ताप T1 पर Q1 ऊष्मा ग्रहण कर निम्न ताप T2 पर Q2‘ ऊष्मा लौटाता है परन्तु दोनों के द्वारा किया गया कार्य बराबर है,
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समीकरण (2) से स्पष्ट है कि रेफ्रिजरेटर A द्वारा सिंक से ली गई ऊष्मा Q2, इंजन B द्वारा सिंक को दी गयी ऊष्मा Q2 से अधिक है। फलत: सिंक की ऊष्मा लगातार कम होती जायेगी।

इसी प्रकार रेफ्रिजरेटर A द्वारा स्रोत को दी गई ऊष्मा Q1 इन्जन B द्वारा स्रोत से ली गयी ऊष्मा Q1 से अधिक है। अतः स्रोत की ऊष्मा लगातार बढ़ती जायेगी। इस प्रकार हम पाते हैं कि बिना कार्य किये सिंक से स्रोत को ऊष्मा का स्थानान्तरण होता रहेगा। परन्तु यह बात हमारे अनुभव के विपरीत है क्योंकि बिना किसी कार्य किये ऊष्मा का निम्न ताप से उच्च ताप की ओर प्रवाह सम्भव नहीं है।

अतः उपर्युक्त निष्कर्ष गलत है। चूंकि यह निष्कर्ष इस कथन पर आधारित है कि अनुक्रमणीय इंजन B की दक्षता, उत्क्रमणीय इंजन A की दक्षता से अधिक है, अत: यह कथन सर्वथा गलत है। इस प्रकार, इंजन B की दक्षता, इंजन A की दक्षता से अधिक नहीं हो सकती अर्थात् उत्क्रमणीय इंजन की दक्षता महत्तम होती है।

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UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 13 मानसिक अभ्यास

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 13 मानसिक अभ्यास

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अभ्यास 13

रिक्त स्थान की पूर्ति हेतु दिए गये (UPBoardSolutions.com) विकल्पों में से उसे चुनिए जो अनुक्रम को पूरा करें
प्रश्न 1.
ABE, BCF, CDG, [?], EFI
(क) CDH,
(ख) EFH
(ग) DEG
(घ) DEH 

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प्रश्न 2.
2,6,12,20,30,42, [?]
(क) 50
(ख) 52
(ग) 54
(घ) 56 

प्रश्न 3.
14,15,32,99, [?] (UPBoardSolutions.com)
(क) 300
(ख) 350
(ग) 400 
(घ) 450

प्रश्न 4.
4,9,16,25, [?]
(क) 36
(ख) 45
(ग) 49
(घ) 50

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प्रश्न 5.
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 13 मानसिक अभ्यास 1

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प्रश्न 6.
प्रश्न आकृतियों में दिखाए अनुसार कागज को मोड़ने, (UPBoardSolutions.com) काटने तथा खोलने के बाद वह किस उत्तर आकृति जैसा दिखाई देगा?
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 13 मानसिक अभ्यास 2
हल : (घ)

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प्रश्न 7.
दी गयी आकृति में त्रिभुजों की संख्या ज्ञात (UPBoardSolutions.com) कीजिए।
हल : 12.
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 13 मानसिक अभ्यास 3

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प्रश्न 8.
लुप्त संख्या (UPBoardSolutions.com) ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 13 मानसिक अभ्यास 4

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