UP Board Solutions for Class 7 Science Chapter 13 भोजन, स्वास्थ्य व रोग

UP Board Solutions for Class 7 Science Chapter 13 भोजन, स्वास्थ्य व रोग

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में सही विकल्प छाँटकर अपनी (UPBoardSolutions.com) अभ्यास पुस्तिका में लिखिए-
(क) राइजोपस है-
(अ) कवक (✓)
(ब) जीवाणु
(स) विषाणु
(द) उपरोक्त सभी

(ख) इनमें से संचारी रोग है-
(अ) हैजा (✓)
(ब) कैंसर
(स) जोड़ों में दर्द
(द) डायबिटीज

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(ग) विषाणु जनित रोग हैं-
(अ) चेचक (✓)
(ब) पेचिस
(स) प्लेग
(द) डिफ्थीरियां

(घ) प्लेग रोग फैलता है-
(अ) वेरियोला (UPBoardSolutions.com) वायरस से
(ब) विब्रियो कॉलेरी जीवाणु से
(स) बैसिली जीवाणु से
(द) इनमें से कोई नहीं (✓)

प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों में सही के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (✗) का चिह्न लगाइए-
(क) डिब्बा बंद भोज्य पदार्थों (UPBoardSolutions.com) का अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए। (✓)
(ख) प्लेग संक्रामक रोग नहीं है। (✗)
(ग) पाश्चरीकरण एक परिरक्षण विधि है। (✓)
(घ) असंचारी रोग वायु द्वारा फैलते हैं। (✗)
(ङ) दाद कवक के कारण होता है। (✓)

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(क) डायरिया को अतिसार भी कहते हैं।
(ख) म्यूकर एक कवक (UPBoardSolutions.com) है।
(ग) फिनाइल, डी.डी.टी, क्लोरीन कीटनाशक पदार्थ हैं।
(घ) विब्रियो कॉलेरी एक जीवाणु है।
(ङ) कैंसर असंचारी रोग है।

प्रश्न 4.
सही मिलान कीजिए-
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) परिरक्षण क्या है ?
उत्तर-
भोज्य पदार्थों को लम्बे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने की प्रचलित विधियाँ परिरक्षण कहलाती हैं।
परिरक्षण द्वारा भोज्य पदार्थों को वातावरण में उपस्थित सूक्ष्मजीवों के संक्रमण से बचाया जा सकता है।

(ख) भोजन को सड़ाने एवं खराब करने वाले कारकों (UPBoardSolutions.com) का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भोजन को सड़ाने एवं खराब करने वाले कारकों में जीवाणु, यीस्ट, फफूद आदि सूक्षमजीव कीट-पतंग तथा रोडन्ट प्रमुख हैं। कवक या फफूद नम स्थानों पर रखी रोटी, डबलरोटी, अचार, फल, सब्जी, चमड़ा आदि पर सफेद बालों जैसी रचना बना लेते हैं। कुछ कवक जैसे राइजोपस, म्यूकर, एस्पर्जिलस आदि खाद्य पदार्थों को नष्ट कर देते हैं। जीवाणु सर्वव्यापी होते हैं। इनके द्वारा दूषित किए गए भोज्य पदार्थ को खाने से निमोनिया, हैजा, पेचिस, पेट दर्द, उल्टी आदि बीमारियाँ हो जाती हैं। (UPBoardSolutions.com) खमीर से खाने में खट्टापन आ जाता है। लंबे समय तक बंद बर्तनों में रखे, विभिन्न अनाज जैसे- गेहूँ, चना, मटर आदि में घुन लग जाता है। उसी प्रकार अनाजों को चूहे और सब्जियों को कीट-पतंगे नष्ट कर देते हैं।

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(ग) किन्हीं दो जीवाणु जनित रोगों के लक्षण, कारण, उपचार, बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर-
दो जीवाणु जनित रोग-

  1. मलेरिया और
  2. डेंगू

1. मलेरिया- लक्षण-तीव्रज्वर, सिरदर्द, बदन दर्द, कँपकँपी लगना।
कारण – प्लाज्मोडियम मादा मच्छर एनाफिलीज का काटना। उपचार- चिकित्सक के परामर्श अनुसार एंटीबायोटिक दवाएँ लेना।
बचाव – मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए।

2. डेंगू – डेंगू वायरस वाहक एडीज इजिप्टी मच्छर का काटना
लक्षण – ठंड लगने के बाद तेज बुखार (5-7 दिन तक) सिर, माँसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, चेहरे, गर्दन और छाती पर गुलाबी रंग के चकत्ते उपचार खून की जाँच एवं चिकित्सक के परामर्श अनुसार और दवाओं का सेवन
बचाव – ऐसे कपड़े पहनें जिससे पूरा-का-पूरा शरीर ढका हो। (UPBoardSolutions.com) मच्छरदानी का प्रयोग करें। बर्तनों एवं कूलरों में पानी इकट्ठा न होने दें।

(घ) संचारी तथा असंचारी रोग से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
वह सभी रोग जो सूक्ष्म जीवों द्वारा होते हैं तथा एक से दूसरे मनुष्य तक छुआछूत के कारण फैलते हैं, उन्हें संचारी रोग कहते हैं। जैसे-हैजा, चेचक, टीबी आदि।
कुछ रोग शरीर में किसी कमी या खराबी होने के कारण हो जाते हैं न, कि छुआछूत से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलते हैं, असंचारी रोग कहलाते हैं। जैसे-उच्च रक्त चाप, कैंसर, डायबिटीज, एलर्जी आदि।

(ङ) निःसंक्रमण क्या है ?
उत्तर-
संक्रमण रोगों के रोगाणुओं को नष्ट करने की प्रक्रिया को नि:संक्रमण (UPBoardSolutions.com) कहते हैं।

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(च) परिरक्षण विधियों के बारे में लिखिए।
उत्तर-
परिरक्षण की कई विधियाँ हैं जिनसे विविध प्रकार के भोज्य पदार्थ परिरक्षित किए जाते हैं। जैसे-सुखाना, उबालना, तथा ठंडा करना। धूप में भोज्य पदार्थों को सुखाना एक पुरानी तथा बहु प्रचलित विधि है। इस विधि में सूर्य किरणों से प्राप्त ऊष्मा में भोज्य पदार्थों को सुखाने से इनमें उपस्थित जल की मात्रा वाष्पीकृत हो जाती है और सूक्ष्म जीवों के वृधि के अवसर कम हो जाते हैं।

उबालना – उबालने की प्रक्रिया में अधिक तापमान के कारण कुछ हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि दूध को उबाला जाता है।

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ठंडा करना – इसके विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा भोजन का परिरक्षण आधुनिक विकसित उपकरणों द्वारा किया जाता है। जैसे-हिमीभूत करना (फ्रीजिंग)- इसके अंतर्गत भोज्य पदार्थों को जीवाण शुओं से बचाने के लिए 18°C (UPBoardSolutions.com) यो इससे नीचे के तापमान पर रखा जाता है। प्रशीतन में भोजन को ठण्डे स्थान पर रखकर गीले कपड़ों से ढक दिया जाता था लेकिन आजकल घरों में रेफ्रिजरेटर के माध्यम से भोजन को परिरक्षित किया जाता है। इसके अलावा हिमीकरण द्वारा वस्तुएँ जैसे कस्टर्ड पाउडर, सूप कॉफी आदि संरक्षित की जाती हैं।

प्रोजेक्ट कार्य – नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्य सौन्दर्य के तत्त्व छन्द

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्य सौन्दर्य के तत्त्व छन्द are part of UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्य सौन्दर्य के तत्त्व छन्द.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name काव्य सौन्दर्य के तत्त्व छन्द
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्य सौन्दर्य के तत्त्व छन्द

छन्द

छन्द का अर्थ है – ‘बन्धन’। ‘बन्धनमुक्त’ रचना को गद्य कहते हैं और बन्धनयुक्त को पद्य। छन्द प्रयोग के कारण ही रचना पद्य कहलाती है और इसी कारण उसमें अद्भुत संगीतात्मकता उत्पन्न हो जाती है। दूसरे शब्दों में, मात्रा, वर्ण, यति (विराम), गति (लय), तुक आदि के नियमों से बंधी पंक्तियों को छन्द कहते हैं।
छन्द के छः अंग हैं – (1) वर्ण, (2) मात्रा, (3) पाद या चरण, (4) यति, (5) गति, (6) तुका

(1) वर्ण – वर्ण दो प्रकार के होते हैं – (क) लघु और (ख) गुरु। ह्रस्व वर्ण (अ, इ, उ, ऋ, चन्द्रबिन्दु UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्य सौन्दर्य के तत्त्व छन्द 18  को लघु और दीर्घ वर्ण आ, ई, ऊ, अनुस्वार UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्य सौन्दर्य के तत्त्व छन्द 19, विसर्ग ( : ) ] को गुरु कहते हैं। इनके अतिरिक्त संयुक्त वर्ण से पूर्व का और हलन्त वर्ण से पूर्व का वर्ण गुरु माना जाता है। हलन्त वर्ण की गणना नहीं की जाती। कभी-कभी लय में पढ़ने पर गुरु वर्ण भी लघु ही प्रतीत होता है। ऐसी स्थिति में उसे लघु ही माना जाता है। कभी-कभी पाद की पूर्ति के लिए अन्त के वर्ण को गुरु मान लिया जाता है। लघु वर्ण का चिह्न खड़ी रेखा ‘ । ‘ और दीर्घ वर्ण का चिह्न अवग्रह ‘ ऽ’ होता है।

(2) मात्रा – मात्राएँ दो हैं – ह्रस्व और दीर्घ। किसी वर्ण के उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर मात्रा का निर्धारण होता है। ह्रस्व वर्ण (अ, इ, उ आदि) के उच्चारण में लगने वाले समय को एक मात्राकाल तथा दीर्घ वर्ण आदि के उच्चारण में लगने वाले समय को दो मात्राकाल कहते हैं। मात्रिक छन्दों में ह्रस्व वर्ण की एक और दीर्घ वर्ण की दो मात्राएँ गिनकर मात्राओं की गणना की जाती है।

(3) पाद या चरण – प्रत्येक छन्द में कम-से-कम चार भाग होते हैं, जिन्हें चरण या पाद कहते हैं। कुछ ऐसे छन्द भी होते हैं, जिनमें चरण तो चार ही होते हैं, पर लिखे वे दो ही पंक्तियों में जाते हैं; जैसे—दोहा, सोरठा, बरवै आदि। कुछ छन्दों में छह चरण भी होते हैं; जैसे—कुण्डलिया और छप्पय।

(4) यति (विराम) – कभी-कभी छन्द का पाठ करते समय कहीं-कहीं क्षणभर को रुकना पड़ता है, उसे यति कहते हैं। उसके चिह्न ‘,’, ‘।’, ‘।।’, ‘?’ और कहीं-कहीं विस्मयादिबोधक चिह्न ‘!’ होते हैं।

(5) गति ( लय) – पढ़ते समय कविता के कर्णमधुर प्रवाह को गति कहते हैं।

( 6) तुक – कविता के चरणों के अन्त में आने वाले समान वर्गों को तुक कहते हैं, यही अन्त्यानुप्रास होता है।
गण – लघु-गुरु क्रम से तीन वर्षों के समुदाय को गण कहते हैं। गण आठ हैं – यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण, सगण। ‘यमाताराजभानसलगा’ इन गणों को याद करने का सूत्र है। इनका स्पष्टीकरण अग्रवत् है
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छन्दों के प्रकार – छन्द दो प्रकार के होते हैं – (1) मात्रिक तथा (2) वर्णिक। जिस छन्द में मात्राओं की संख्या का विचार होता है वह मात्रिक और जिसमें वर्गों की संख्या का विचार होता है, वह वर्णिक कहलाता है। वर्णिक छन्दों में वर्गों की गिनती करते समय मात्रा-विचार (ह्रस्व-दीर्घ का विचार) नहीं होता, अपितु वर्गों की संख्या-भर गिनी जाती है, फिर चाहे वे ह्रस्व वर्ण हों या दीर्घ; जैसे-रम, राम, रामा, रमा में मात्रा के हिसाब से क्रमशः 2, 3, 4, 3 मात्राएँ हैं, पर वर्ण के हिसाब से प्रत्येक शब्द में दो ही वर्ण हैं।

मात्रिक छन्द

1. चौपाई।
लक्षण (परिभाषा) – चौपाई एक सम-मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16 : मात्राएँ होती हैं। अन्त में जगण (। ऽ।) और तगण (ऽऽ।) के प्रयोग का निषेध है; अर्थात् चरण के अन्त में गुरु लघु (ऽ।) नहीं होने चाहिए। दो गुरु (ऽ ऽ), दो लघु (।।), लघु-गुरु (। ऽ) हो सकते हैं।
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2. दोहा
लक्षण (परिभाषा) – यह अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे (विषम) चरणों में 13, 13 मात्राएँ और दूसरे तथा चौथे (सम) चरणों में 11, 11 मात्राएँ होती हैं। अन्त के वर्ण गुरु और लघु होते हैं; यथा
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3. सोरठा
लक्षण (परिभाषा) – यह भी अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 11 तथा दूसरे और चौथे चरण में 13 मात्राएँ होती हैं। यह दोहे का उल्टा होता है; यथा
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4. रोला
लक्षण (परिभाषा) – रोला एक सम मात्रिक छन्द है, इसके प्रत्येक चरण में 11 और 13 के विराम (यति) से 24 मात्राएँ होती हैं; यथा
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5. कुण्डलिया।
लक्षण (परिभाषा) – कुण्डलिया एक विषम मात्रिक छन्द है जो छः चरणों का होता है। दोहे और रोले को क्रम से मिलाने पर कुण्डलिया बन जाता है। इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। प्रथम चरण के प्रथम शब्द की अन्तिम चरण के अन्तिम शब्द के रूप में तथा द्वितीय चरण के अन्तिम अर्द्ध-चरण की तृतीय चरण, के प्रारम्भिक अर्द्ध-चरण के रूप में आवृत्ति होती है; येथा
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6. हरिगीतिका
लक्षण (परिभाषा) – हरिगीतिका एक सम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके प्रत्येक चरण में 16/12 के विराम (यति) से 28 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक चरण के अन्त में रगण (ऽ । ऽ) आना आवश्यक होता है; जैसे
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7. बरवै
लक्षण (परिभाषा) – यह एक अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। इसके पहले और तीसरे चरणों में 12-12 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरणों में 7-7 मात्राएँ होती हैं। सम चरणों के अन्त में जगण (IST) आवश्यक होता है; जैसे
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वर्ण-वृत्त (वर्णिक छन्द)

8. इन्द्रवज्रा
लक्षण (परिभाषा) – इन्द्रवज्रा एक सम वर्ण-वृत्त है। इसके प्रत्येक चरण में दो तगण (ऽ ऽ।), एक जगण (।ऽ।) और दो गुरु (ऽऽ) होते हैं। इस प्रकार इसके प्रत्येक चरण में कुल 11 वर्ण होते हैं; जैसे
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9. उपेन्द्रवज्रा
लक्षण (परिभाषा) – उपेन्द्रवज्रा एक सम वर्ण-वृत्त है। इसके प्रत्येक चरण में 11 वर्ण होते हैं और वे जगण (।ऽ।), तगण (ऽ ऽ।), जगण और दो गुरु के क्रम से होते हैं; जैसे
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10. वसन्ततिलका
लक्षण (परिभाषा) – वसन्ततिलका एक सम वर्ण-वृत्त है। इसके प्रत्येक चरण में 14 वर्ण होते हैं और प्रत्येक चरण में एक तगण (ऽ ऽ।), एक भगण (ऽ।।), दो जगण (।ऽ।) और अन्त में दो गुरु होते हैं। इसमें 8, 6 वर्गों पर यति होती है; जैसे
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11. मालिनी
लक्षण (परिभाषा) – मालिनी एक सम वर्ण-वृत्त है। इसमें 15 वर्ण होते हैं और इसके प्रत्येक चरण में नगण (।।।), नगण, मगण (ऽ ऽ ऽ), यगण (। ऽ ऽ), यगण होते हैं और यति 8-7 वर्गों पर पड़ती है; जैसे
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12. सवैया
लक्षण (परिभाषा) – 22 से 26 वर्षों तक के वर्ण-वृत्त को सवैया कहते हैं। इसके अनेक भेद होते हैं। मत्तगयन्द, सुन्दरी, सुमुखी आदि इसके कुछ प्रमुख भेद हैं, जो आगे दिये जा रहे हैं

(i) मत्तगयन्द (सवैया)
लक्षण (परिभाषा) – यह एक सम वर्ण-वृत्त है। इसके प्रत्येक चरण में सात भगण (ऽ।।) और अन्त में दो गुरु वर्ण होते हैं। इस प्रकार यह 23 वर्णो को छन्द है; जैसे
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(ii) सुमुखी (सवैया)
लक्षण परिभाषा) – यह एक सम वर्ण-वृत्त है। इसके प्रत्येक चरण में सात जगण (। ऽ ।) तथा अन्त में लघु और गुरु होते हैं। यह भी 23 वर्गों को छन्द है; जैसे
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(iii) सुन्दरी (सवैया)
लक्षण (परिभाषा) – यह एक सम वर्ण-वृत्त है। इसके प्रत्येक चरण में आठ सगण (।।ऽ) और एक गुरु । मिलकर 25 वर्ण होते हैं; जैसे
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(iv) मनहर या मनहरण (सवैया)
लक्षण (परिभाषा) – सवैयों से अधिक अर्थात् 26 से अधिक वर्षों वाले छन्द दण्डक छन्द कहलाते हैं। मनहर एक दण्डक वृत्त है। इसके प्रत्येक चरण में कुल 31 वर्ण होते हैं और 8, 8, 8, 7 अथवा 16, 15 वर्षों पर यति होती है। इसका दूसरा नाम मनहरण भी है। इसका अन्तिम वर्ण दीर्घ होती है; जैसे

कर बिनु कैसे गाय दुहिहै हमारी वह,
पद बिनु कैसे नाचि थिरकि रिझाइहै। (= 31 वर्ण)
कहैं रत्नाकर बदन बिनु कैसे चाखि,
माखन बजाइ बेनु गोधन चराइहै ।।
देखि सुनि कैसे दृग स्रवन बिना ही हाय !
भोर ब्रजवासिन की बिपति बराइहै।
रावरो अनूप कोऊ अलख अरूप ब्रह्म,
ऊधौ कहौ कौन धौं हमारे काम आइहै ।।

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UP Board Solutions for Class 7 English Appendix – 1

UP Board Solutions for Class 7 English Appendix – 1

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Appendix – I

Story Writing

Complete the story from the given hints and give a suitable title :
Hints-A fox falls into a well – a goat happens to pass that way – asks about the welfare of the fox – the cunning fox lures the goat – this water is sweet – come and enjoy. The foolish goat jumps into the well – the fox climbs on the goat’s back – jumps out of the well – the poor goat is left alone in the well – beware of mean and cunning fellows. Write the story in the past tense:

The Cunning Fox

Once upon a time a fox fell into a well. It could not come out of it. A goat happened to pass near the well. Seeing the fox, the goat asked about the fox’s welfare and the reason to be in the well. The cunning fox said that the well’s water was sweet and that the goat should come into it to enjoy. It successfully lured the foolish goat and it jumped into the well. The fox climbed up on the goat’s back and jumped out of the well. The poor goat was left alone in the well, crying for help.

This story teaches us that we should be beware of mean and cunning fellows.

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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 21 स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगनाएँ (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 21 स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगनाएँ (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

रानी लक्ष्मीबाई- बचपन में लक्ष्मीबाई का नाम मनु था। चंचलता के कारण इन्हें सब प्यार से छबीली भी कहते थे। माता की मृत्यु के समय मनु चार-पाँच साल की थी। इनका बचपन पेशवा बाजीराव के पुत्रों के साथ व्यतीत हुआ। उनके साथ मनु ने तीर-तलवार चलाना, घुड़सवारी करना, बन्दूक चलाना आदि सीख लिये। मनु का साहस और कौशल देखकर लोग दंग रह जाते थे। मनु का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ और इन्हें रानी लक्ष्मीबाई नाम दिया गया। रानी लक्ष्मीबाई स्त्री को अबला के स्थान पर सबला के रूप में देखती थीं। इन्होंने वीर, साहसी स्त्रियों की सेना का गठन (UPBoardSolutions.com) किया और उन्हें प्रशिक्षण दिलाकर युद्धकला में निपुण बनाया।
रानी के एक पुत्र हुआ, जो कुछ महीनों के बाद गुजर गया। रानी ने पाँच वर्ष के बालक दामोदर राव को गोद ले लिया। गोद लेने के दूसरे दिन गंगाधर राव की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। अँग्रेजों ने राजा के पुत्र न होने के कारण झाँसी पर अधिकार कर लिया। रानी इससे नाराज हो गईं। इन्होंने संकल्प किया कि मैं अन्तिम साँस तक किले पर अँग्रेजों का अधिकार नहीं होने देंगी। शत्रु सेना ने झाँसी की सेना को घेर लिया। किले के रक्षक खुदाबख्श और तोपखाने के अधिकारी सरदार गुलाम गौस खाँ मारे गए। समय की गम्भीरता जानते हुए रानी ने कालपी जाने का निश्चय किया। सुरक्षित निकल जाने के लिए योजना में झलकारी ने प्रमुख भूमिका निभाई।

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झलकारी बाई- रानी की सखी और हमशक्ल झलकारी बाई रानी के सेनानायक पूरन कोरी की पत्नी थी। उसमें देशप्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी थी। उसने रानी के वेश में युद्ध करने के लिए स्वयं को प्रस्तुत किया। रूप-रंग में समानता के कारण अँग्रेज भ्रमित हो गए और रानी को बच निकलने का मौका मिल गया। एक गद्दार द्वारा वास्तविकता मालूम होने पर अँग्रेज सैनिकों ने रानी का पीछा किया। झलकारी (UPBoardSolutions.com) बाई को बन्दी बनाने के एक सप्ताह बाद छोड़ दिया गया। मातृभूमि और लक्ष्मीबाई की रक्षा के लिए समर्पित झलकारी बाई शौर्य और वीरता के कारण देशवासियों के लिए आदर्श बन गई।
कालपी की तरफ घोड़ा दौड़ाते हुए रानी की जाँघ में अँग्रेजों की एक गोली लग गई। मन्दगति हो जाने । पर शत्रुओं ने इन्हें घेर लिया। दोनों से भयंकर संघर्ष हुआ। विवशतावश रानी को युद्ध क्षेत्र छोड़ना पड़ा। संघर्ष के दौरान अँग्रेज घुड़सवार ने मुन्दर को मार दिया। रानी ने क्रोधित होकर उसे मृत्यु के घाट उतार दिया।
कालपी की ओर दौड़ाते हुए रानी का घोड़ा एक नाले को पार नहीं कर सका। इसी बीच अँग्रेज घुड़सवारों ने निकट आकर रानी के हृदय पर संगीन से वार किया। गम्भीर रूप में घायल रानी वीरतापूर्वक लड़ती रहीं। अन्ततः अँग्रेजों को रानी व उसके साथियों से हार मानकर मैदान छोड़ना पड़ा। घायल अवस्था में इनके साथी; रानी को बाबा गंगादास की कुटिया में ले गए। रानी के चेहरे पर दिव्य तेज था। ये वीरगति को प्राप्त हुई। क्रान्ति की यह ज्योति सदा के लिए लुप्त हो गई।

अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
मनु के बचपन के प्रिय खेल कौन-कौन से थे?
उत्तर:
घुड़सवारी, तीर-तलवार और बन्दूक (UPBoardSolutions.com) चलाना मनु के बचपन के प्रिय खेल थे।

प्रश्न 2:
अंग्रेजों ने झाँसी को किसे बहाने से हथियाना चाहा?
उत्तर:
अँग्रेजों ने झाँसी को राजा का पुत्र न होने के बहाने हथियाना चाहा।

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प्रश्न 3:
झलकारी बाई ने रानी के वेश में युद्ध करने के लिए स्वयं को क्यों प्रस्तुत किया?
उत्तर:
झलकारी बाई ने रानी के वेश में युद्ध करने के लिए स्वयं को प्रस्तुत किया ताकि रानी सकुशल निकल सकें।

प्रश्न 4:
“क्यों यह लड़की पागल हो गयी है”-यह वाक्य (UPBoardSolutions.com) अंग्रेज अधिकारी स्टुअर्ट ने क्यों कहा होगा?
उत्तर:
“क्या यह लड़की पागल हो गई है?” यह वाक्य स्टुअर्ट ने झलकारी बाई के दुस्साहस पर कहा होगा।

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प्रश्न 5:
“रानी ने अपने महल के सोने व चाँदी का सामान भी तोप के गोले बनाने के लिए दे दिया।” इससे रानी की किस विशेषता का पता चलता है?
उत्तर:
इससे रानी की दृढ़ता, वीरता, देशभक्ति, साहस, (UPBoardSolutions.com) पराक्रम, त्याग, आत्मविश्वास तथा स्वाभिमानी होने का पता चलता है।

प्रश्न 6:
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)

(क) छोटी उम्र में ही मनु शस्त्र चलाने में निपुण हो गईं।
(ख) लक्ष्मीबाई के पति का नाम गंगाधर राव था।
(ग) झलकारी बाई रानी की हमशक्ल सखी थी।
(घ) रानी झलकारी बाई की बुद्धिमता एवं कार्यक्षमता से प्रभावित हुईं।

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प्रश्न 7:
नीचे लिखे विकल्पों में से सही उत्तर (UPBoardSolutions.com) छाँटकर लिखिए (सही उत्तर छाँटकर)अँग्रेज युद्ध क्षेत्र में झलकारी बाई को देखकर भ्रम में पड़ गए क्योंकि

(क) वंह बहुत सुंदर थी।
(ख) अंग्रेज उनका चेहरा नहीं देख सके।
(ग) वह रणकौशल व रंगरूप में रानी के समान थीं।
(घ) उन्होंने पहले कभी रानी को नहीं देखा था।

प्रश्न 8:
इस पाठ में रानी लक्ष्मीबाई के किन गुणों को उभारा गया है, उन्हें लिखिए।
उत्तर:
इस पाठ में रानी की वीरता, दृढता, आत्मविश्वास, साहस, स्वदेश-प्रेम, रणकौशल आदि गुणों को उभारा गया है।

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प्रश्न 9:
पाठ में आये मुहावरों को ढूंढकर लिखिए।
उत्तर:
लोहा लेना– युद्ध (UPBoardSolutions.com) करना-लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लोहा लिया।
उतार-चढ़ाव– दु:ख और सुख आना-जीवन में मनुष्य को उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं।
पहाड़ टूटना– भयानक विपत्ति आना- भूचाल आ जाने पर लोगों पर कष्टों का पहाड़ टूट पड़ा।
दाँतों तले अँगुली दबाना– अधिक आश्चर्य में पड़ जाना-टीपू के राकेटों की मार देखकर अँग्रेजों ने दाँतों तले अँगुली दबा ली।
वीरगति को प्राप्त होना– युद्ध करते हुए मर जाना–वीर अभिमन्यु कौरवों को अपना युद्ध कौशल दिखाकर वीरगति को प्राप्त हुआ।

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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 25 भारत के महान शिक्षाविद् (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 25 भारत के महान शिक्षाविद् (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

पंडित मदनमोहन मालवीय:
पण्डित मदनमोहन मालवीय का जन्म 26 दिसम्बर, 1861 ई० को इलाहाबाद में हुआ। इनके पिता ब्रजनाथ मालवीय ने इनकी आरम्भिक शिक्षा धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला में कराई। अपने शिक्षक देवकीनन्दन की प्रेरणा से मालवीय जी कुशल (UPBoardSolutions.com) वक्ता बने। इन्होंने स्नातक तक शिक्षा पाने के बाद सरकारी हाईस्कूल में शिक्षक का पद सँभाला। अपनी वक्ता और शिक्षण शैली के कारण ये लोकप्रिय शिक्षक के रूप में विख्यात हुए।

मालवीय जी में बचपन से ही समाजसेवा और देशभक्ति की भावना थी। ये धार्मिक संकीर्णता और साम्प्रदायिकता के घोर विरोधी थे। सन् 1902 ई० में ये उत्तर प्रदेश के एसेंबली चुनाव में सदस्य निर्वाचित हुए। सन् 1910 से 1920 तक सदस्य रहे। 1931 ई० में लन्दने में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्होंने साम्प्रदायिकता का विरोध किया। | मालवीय जी ने निरक्षरता को दूर करने और शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक प्रयत्न किए। ये स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए देशवासियों से धन माँगा। काशी नरेश ने इसके लिए पर्याप्त धन और भूमि दी। इनकी ईमानदारी, लगन और परिश्रम के कारण ही काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 1918 ई० में हुई। इसमें जितने विषयों के अध्ययन की व्यवस्था है, उतनी (UPBoardSolutions.com) एक साथ शायद ही कहीं हो। मालवीय जी राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रबल समर्थक थे। सन् 1946 ई० में इनका निधन हो गया। उनका यश और कीर्ति भारतीयों के मन में जीवित है।

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सर सैयद अहमद खाँ:
सर सैयद अहमद खाँ का जन्म 17 अक्टूबर, 1817 ई० को दिल्ली के एक सम्पन्न परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम मीर मुक्तकी और माता का नाम अजीजुन्निसा बेगम था। इनकी शिक्षा अरबी, फारसी, हिन्दी, अँग्रेजी के अनेक विद्वानों द्वारा हुई। इन्होंने पहले मुगल दरबार में नौकरी की। इसके बाद ये अँग्रेजों की नौकरी करने लगे। अनेक पदों पर कार्य करके सन् 1876 ई० में बनारस के स्माल काजकोर्ट के जज के पद से सेवानिवृत्त हुए। अंग्रेजों ने इन्हें ‘सर’ की। उपाधि दी।
अहमद साहब बहुत मितव्ययी थे। इन्होंने एक पुस्तक ‘असबाबे बगावते हिन्द’ (UPBoardSolutions.com) लिखी। इनकी दृष्टि में 1857 के विद्रोह का कारण भारतीयों को कानून बनाने से दूर रखना था। इन्होंने भारतीय मुस्लिम समाज को दिशा-निर्देश दिया। ये मुस्लिमों में बौद्धिक चेतना जाग्रत् करना चाहते थे। इन्होंने ‘तहजीबुल एखलाक’. पत्रिका निकाली। इसके अनुसार धर्म के साथ-साथ आधुनिक विषयों और विज्ञान का ज्ञान प्राप्त करना भी जरूरी था। इनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य छात्र की बौद्धिक चेतना उजागर करना और उसके व्यक्तित्व का निखार करना है।
शिक्षा के विकास के लिए इन्होंने अनेक संस्थाएँ खोलीं। इनमें मुरादाबाद को फारसी मदरसा और साइंटिफिक सोसाइटी गाजीपुर और अलीगढ़ प्रमुख हैं। इन्होंने मोहम्मडन एजुकेशनल कान्फ्रेंस की स्थापना की। इन्होंने समाज के लोगों से चन्दा (UPBoardSolutions.com) एकत्र करके सन् 1875 ई० में मुहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज, अलीगढ़ की स्थापना की, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय’ नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह इनकी अमूल्य देन है।
मुक्त विचारों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और साम्प्रदायिक सौहार्द के कारण सर सैयद अहमद खाँ सर्वत्र : सम्मानित होते थे। 25 मार्च, सन् 1898 को इनका निधन हो गया।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
मालवीय जी की आरम्भिक शिक्षा कहाँ हुई?
उत्तर:
मालवीय जी की आरम्भिक शिक्षा ‘धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला’ प्रयाग में हुई।

प्रश्न 2:
द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में मालवीय जी ने किस बात का विरोध किया?
उत्तर:
द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में मालवीय जी (UPBoardSolutions.com) ने साम्प्रदायिकता का विरोध किया।

प्रश्न 3:
मालवीय जी ने शिक्षा के प्रसार के लिए क्या किया?
उत्तर:
शिक्षा के प्रसार के लिए इन्होंने अनेक प्रयत्न किए। ये स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। ये शिक्षा को देश की उन्नति के लिए जरूरी समझते थे। लोगों से चन्दा अथवा धन एकत्र करके इन्होंने सन्
1918 ई० में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। (UPBoardSolutions.com) इसमें अनेक विषयों के अध्ययन की व्य

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प्रश्न 4:
सर सैयद अहमद खाँ के अनुसार 1857 ई० के विद्रोह का कारण क्या था?
उत्तर:
सर सैयद अहमद खाँ के अनुसार 1857 ई० के विद्रोह का मुख्य कारण भारतीयों को कानून बनाने से अलग रखना था।

प्रश्न 5:
मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए सर सैयद अहमद खाँ ने कौन-कौन से कार्य किए?
उत्तर:
मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए सर सैयद अहमद खाँ ने (UPBoardSolutions.com) अनेक कार्य किए। उन्होंने मुस्लिमों में बौद्धिक चेतना जाग्रत करने के लिए तहजीबुल एखलाक”पत्रिका निकाली। उनका कहना था कि धर्मशास्त्रीय ज्ञान के साथ आधुनिक विषयों और विज्ञान का ज्ञान भी जरूरी है।

प्रश्न 6:
शिक्षा के उत्थान में सर सैयद अहमद खाँ का क्या योगदान है?
उत्तर:
शिक्षा के उत्थान में सर सैयद अहमद खाँ का बहुत योगदान है। उन्होंने इस कार्य के लिए अनेक संस्थाएँ खोली, जिनमें मुरादाबाद का फारसी का मदरसा और साइंटिफिक सोसाइटी गाजीपुर और अलीगढ़ मुख्य हैं। उन्होंने लोगों से चन्दा अथवा धन माँगकर मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कहलाया।।

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प्रश्न 7:
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)
(क) शिक्षक देवकीनन्दन की मालवीय के व्यक्तित्व को निखारने में प्रमुख भूमिका रही।
ख) मालवीय जी का मानना था कि देशभक्ति धर्म का ही एक अंग है।
(ग) सैयद अहमद खाँ समझते थे कि समाज तब सुधर सकता है, जब शिक्षा के क्षेत्र में नया दृष्टिकोण अपनाया जाए।
(घ) सैयद अहमद खाँ की भारत को सबसे बड़ी (UPBoardSolutions.com) देन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय है।

योग्यता विस्तार:
नोट- विद्यार्थी अपने शिक्षक/ शिक्षिका की सहायता से स्वयं करें।

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