UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 23 हमारे महान वनस्पति-वैज्ञानिक (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 23 हमारे महान वनस्पति-वैज्ञानिक (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

जगदीश चन्द्र बसु-इनका जन्म 3० नवम्बर, सन् 1858 ई० को बंगाल के मैमन सिंह जिले के फरीदपुर गाँव में हुआ। इनके पिता भगवान चन्द्र बसु डिप्टी मजिस्ट्रेट थे। उन्होंने इनका दाखिला गाँव के स्कूल में ही करवाया। बालक जगदीश घुड़सवारी (UPBoardSolutions.com) करना और साहसिक कहानियाँ पसन्द करता था।
नौ वर्ष की उम्र में घर छोड़कर पढ़ने के लिए इन्हें कोलकाता भेजा गया। वहाँ ये पेड़-पौधे तथा जीव-जन्तुओं में विशेष रुचि लेते थे। सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता से स्नातक परीक्षा पास करके ये इंग्लैंड गए। सन् 1884 ई० में भौतिकी, रसायन और वनस्पति विज्ञान की शिक्षा लेकर बी०एस०सी० की उपाधि ली। सन् 1885 ई० में कोलकाता प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्राध्यापक नियुक्त हुए।
जगदीश चन्द्र बसु ने पौधों में प्राण और संवेदनशीलता का पता लगाया। इसके लिए इन्होंने ‘क्रेस्कोग्राफ’ नामक यन्त्र बनाया। जिससे पौधों में होने वाली सूक्ष्म प्रक्रियाओं का पता लगाया जा सकता है। अँग्रेजों ने इसके लिए इन्हें ‘सर’ की उपाधि दी।
भौतिकी के क्षेत्र में भी बसु की गहरी पैठ थी। सन् 1895 ई० में मारकोनी से पहले ये बेतार का तार’ का सफल सार्वजनिक प्रदर्शन कर चुके थे। इन्होंने कोलकाता में बसु विज्ञान मन्दिर नामक प्रयोगशाला खोली। सन् 1937 ई० अर्थात् अपनी मृत्यु होने (UPBoardSolutions.com) तक ये इस संस्थान में कार्यरत रहे। प्रोफेसर बसु अपने अथक परिश्रम और अनुसंधानों के कारण विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं।

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बीरबल साहनी: इनका जन्म 14 नवम्बर, 1899 को पंजाब के भेड़ा कस्बे में हुआ। इनके पिता रुचिराम रसायन विज्ञान के अध्यापक थे। इनकी माता ईश्वरीदेवी कुशल गृहिणी थीं। बीरबल बपचन से ही पेड़-पौधे और भूगर्भ में रुचि लेने लगे थे। बीरबल स्वभाव से बहुत निर्भीक थे। सन् 1911 ई० में ये लन्दन गए। कैंब्रिज के प्रोफेसर सीवर्ड अपने होनहार शिष्ये बीरबल को अत्यन्त स्नेह देते थे। लन्दन से डी०एस०सी० उपाधि लेकर साहनी सन् 1919 ई० में भारत आ गए। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर नियुक्त हुए । साहनी स्नातक कक्षाओं की पढ़ाई पर विशेष जोर देते थे। (UPBoardSolutions.com) छात्र इनकी उदारता, विद्वता और सादगी से बहुत प्रभावित थे। काशी के बाद साहनी लखनऊ आ गए।
प्रोफेसर साहनी को भारतीय पुरा-वनस्पति का जनक माना जाता है। इन्होंने बिहार की राजमहल पहाड़ियों में अत्यन्त महत्वपूर्ण फॉसिल-पेंटजाइली की खोज की। इन्होंने अपना सारा जीवन वनस्पतिजगत् के अनुसंधानों में लगा दिया। लखनऊ स्थित ‘साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोबॉटनी’ भारत का ही नहीं, विश्व का महत्त्वपूर्ण शोध संस्थान है। इस संस्थान के शिलान्यास के सात दिन बाद 9 अप्रैल, सन् 1949 ई० को बीरबल साहनी संसार छोड़ गए। इस महान वैज्ञानिक की स्मृति में भारत के सर्वश्रेष्ठ वनस्पति वैज्ञानिक को ‘बीरबल साहनी पदक’ प्रदान किया जाता है।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
जगदीश चन्द्र बसु ने सर्वप्रथम किस बात का पता लगाया?
उत्तर:
जगदीश चन्द्र बसु ने सर्वप्रथम पौधों (UPBoardSolutions.com) में प्राण और संवेदनशीलता का पता लगाया।

प्रश्न 2:
जगदीश चन्द्र बसु ने आधा वेतन लेना स्वीकार क्यों नहीं किया?
उत्तर:
जगदीश चन्द्र बसु अपनी योग्यता और परिश्रम में अंग्रेजों से आगे थे।

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प्रश्न 3:
बीरबल साहनी को किसका जनक माना जाता है?
उत्तर:
बीरबल साहनी को भारतीय (UPBoardSolutions.com) पुरा-वनस्पति का जनक माना जाता है।

प्रश्न 4:
नीचे लिखे वाक्यों पर सही (✓) अथवा गलत (✘) का चिह्न लगाइए (चिह्न लगाकर )
(क) जगदीश चन्द्र बसु ने क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया।                               (✓)
(ख) जगदीश चन्द्र बसु का मन चित्रकला में अधिक लगता था।                            (✘)
(ग) बीरबल साहनी की स्मृति में ‘बीरबल साहनी पदक’ दिया जाता है।                 (✓)
(घ) बीरबल साहनी ने कोलकाता में ‘साहनी इंस्टीट्यूट’ की स्थापना की।              (✘)

प्रश्न 5:
नीचे दिए विकल्पों में सही उत्तर छाँटिए ( सही उत्तर छाँटकर)

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(क) जगदीश चन्द्र बसु ने सर्वप्रथम पता लगाया कि

  • पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है।
  • पेड-पौधो निर्जीव (UPBoardSolutions.com) होते हैं।
  • पेड़-पौधों में जीवन है, वे भी हमारी तरह सुख-दुःख का अनुभव करते हैं।

(ख) बीरबल साहनी के मन में दृढ़ इच्छा थी

  •  वनस्पति विज्ञान पर पुस्तक लिखने की।
  • घर में एक बाग लगाने की।
  •  पुरा-वनस्पति विज्ञान मंदिर की स्थापना करने की।

योग्यता विस्तार:
नोट– विद्यार्थी अपने शिक्षक/शिक्षिका की (UPBoardSolutions.com) सहायता से स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 27 गरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 27 गरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

रवीन्द्रनाथ का जन्म 7 मई, 1861 ई० को कोलकाता में हुआ। इनके पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर और माता शारदा देवी थीं। बचपन से ही इन्हें प्रकृति से बहुत प्रेम था। सन् 1868 ई० में इन्हें स्कूल भेजा गया। इनका स्कूल में मन नहीं लगता था। कुश्ती, चित्रकारी, व्यायाम, संगीत और विज्ञान में इनकी विशेष रुचि थी। सत्रह वर्ष की अवस्था में उच्च शिक्षा के लिए ये इंग्लैंड गए। ये लेखन
और चित्रकारिता में निपुण होकर भारत लौटे। सन् 1883 ई० में इनका विवाह मृणालिनी से हुआ। पिता ने इन्हें जमींदारी सँभालने के लिए कहा। रवीन्द्र ने गरीब और अन्धविश्वास से पूर्ण किसानों के लिए स्कूल खोलने का निश्चय किया। पूछे (UPBoardSolutions.com) जाने पर मृणालिनी ने सहमति व्यक्त की। शान्ति निकेतन विद्यालय खुल गया, जहाँ कक्षाएँ खुले वातावरण में पेड़ों के नीचे लगती थीं। शान्ति निकेतन आगे चलकर विश्वभारती विश्वविद्यालय बन गया, जो बाद में देश को समर्पित हुआ। टैगोर ने गाँवों की उन्नति के लिए खेतीबाड़ी
और पशुपालन के उन्नत तरीके अपनाए।
टैगोर की प्रतिभा बहुमुखी थी। इनकी कहानियों, कविताओं, उपन्यासों, नाटकों, गीतों व चित्रों में, इनके चिन्तन और विचारों की अभिव्यक्ति होती है। हमारा राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन अधिनायक जय हे’ इन्हीं का लिखा हुआ है। (UPBoardSolutions.com) गांधी जी ने रवीन्द्र को ‘गुरुदेव’ की उपाधि दी। ‘गीतांजलि’ के लिए सन् 1913 ई० में इन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। सन् 1914 ई० में इन्हें ‘सर’ की उपाधि मिली, जो इन्होंने जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में वापस लौटा दी। 7 अगस्त, सन् 1941 ई० को इनके समृद्ध और उत्कृष्ट जीवन का अन्त हो गया।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
रवीन्द्र नाथ टैगोर के बचपन की रुचि के विषय में लिखिए।
उत्तर:
बचपन में टैगोर की रुचि कुश्ती, व्यायाम, चित्रकारी, संगीत, विज्ञान, कविता, रचना और प्रकृति प्रेम आदि में थी।

प्रश्न 2:
रवीन्द्र को मन विद्यालय में क्यों (UPBoardSolutions.com) नहीं लगता था?
उत्तर:
रवीन्द्र का मुन स्कूल की चारदीवारी में घुटता था। उन्हें स्वच्छन्द वातावरण पसन्द था।

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प्रश्न 3:
रवीन्द्र ने गरीबों की सहायता हेतु क्या निश्चय किया?
उत्तर:
रवीन्द्र ने गरीबों की सहायता हेतु निश्चय (UPBoardSolutions.com) किया कि ग्रामीणों की समस्याएँ समझी जाएँ और विकास के कार्य किए जाएँ। उन्होंने गरीब और अन्धविश्वासी गरीब लोगों के लिए स्कूल खोलने को निश्चय किया।

प्रश्न 4:
शान्ति निकेतन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
शान्ति निकेतन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को जीवन का अभिन्न अंग बनाना था।

प्रश्न 5:
मातृभाषा के विषय में रवीन्द्रनाथ के क्या विचार थे?
उत्तर:
रवीन्द्र मातृभाषा के प्रबल पक्षधर थे। जिस प्रकार (UPBoardSolutions.com) माँ के दूध से बच्चा स्वस्थ रहता है, वैसे ही मातृभाषा पढ़ने से मन और मस्तिष्क सशक्त बनता है।

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प्रश्न 6:
रवीन्द्रनाथ को नोबेल पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
उत्तर:
रवीन्द्रनाथ को ‘गीतांजलि’ के लिए (UPBoardSolutions.com) नोबेल पुरस्कार मिला।

प्रश्न 7:
महात्मा गांधी ने रवीन्द्रनाथ को किस उपाधि से सम्मानित किया?
उत्तर:
महात्मा गांधी ने रवीन्द्रनाथ को ‘गुरुदेव’ की उपाधि से सम्मानित किया।

प्रश्न 8:
सही विकल्प चुनिए (विकल्प चुनकर )

मृणालिनी ने शान्ति निकेतन की स्थापना का
(क) विरोध किया
(ख) स्वागत किया
(ग) कोई विचार व्यक्त नहीं किया

रवीन्द्र नाथ ने ‘सर’ की उपाधि त्याग दी
(क) क्योंकि यह उनके योग्य न थी।
(ख) जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड के विरोध में।
(ग) पिता की मृत्यु से दुखी होकर। (UPBoardSolutions.com)

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प्रश्न 9:
घटनाओं से सम्बन्धित सही तिथि पर (✓) का चिह्न लगाइए (सही चिह्न लगाकर)

(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ
(1) 1860
(2) 1841
(3) 1861
(4) 1864

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(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार मिला
(1) 1913
(2) 1914 (UPBoardSolutions.com)
(3) 1916
(4) 1929 4

योग्यता विस्तार:
नोट– विद्यार्थी अपने शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 22 तात्या टोपे (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 22 तात्या टोपे (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

तात्या टोपे का जन्म महाराष्ट्र में नासिक के निकट पटौदा जिले के येवाले नामक गाँव में सन 1814 में हुआ था। इनका वास्तविक नाम रामचन्द्र पाण्डुरंग येवालकर था। इनके पिता बाजीराव पेशवा के गृह प्रबंध विभाग के प्रधान थे। बाजीराव 1818 में अंग्रेजों से युद्ध हार गए। उन्हें पूरा छोड़ना पड़ा। तात्या के पिता भी पेशवा के साथ पूना से कानपुर के पास बिठूर आ गए। यहीं पर बचपन में तात्यी पेशवा के पुत्र नाना साहब, लक्ष्मीबाई (मनु) (UPBoardSolutions.com) आदि के साथ युद्ध के खेल खेला करते थे। तात्या आजीवन अविवाहित रहे। 1851 में पेशवा की मृत्यु के बाद नाना साहब बिठूर के राजा बने। 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में कानपुर छावनी में तात्या ने अंग्रेजी सेना पर हमला कर दिया। इस युद्ध में तात्या की विजय हुई और अंग्रेजी सैन्य अधिकारी व्हीलर को आत्म-समर्पण करना पड़ा। तात्या अपने कुशलता और बहादुरी के बल पर स्वाधीनता संघर्ष में सबसे लंबी अवधि 17 जुलाई, 1857 से अपने पकड़े जाने तक अर्थात 7 अप्रैल, 1859 तक अंग्रेजी फौजों से गोरिल्ला (छापामार) युद्ध करते रहे। इस कारण उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ गुरिल्ला युद्ध के सेनानायक के रूप में प्रसिधि मिली। तात्या नाना साहब के सेनाध्यक्ष थे। उन्होंने लगातार 8 महीनों तक पीछा करने वाली अंग्रेजी फौजों को छकाए रखा। स्वतंत्रता संघर्ष के वीरों में से एकमात्र बचे अंतिम और सर्वश्रेष्ठ वीर तात्या को अंग्रेजों ने धोखे से गिरफ्तार कर लिया। 14 अप्रैल 1859 को उन्हें फाँसी दे दी गई। उनका नाम सदैव एक राष्ट्रीय वीर पुरुष के रूप में सम्मान पूर्वक लिया जाता रहेगा।

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अभ्यास-प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

प्रश्न 1:
तात्या टोपे का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर:
तात्या टोपे का जन्म महाराष्ट्र में नासिक के (UPBoardSolutions.com) निकट पटौदी जिले के येवाले नामक गाँव में सन् 1814 में हुआ था।

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प्रश्न 2:
‘तात्या टोपे एक योग्य सेनानायक थे। संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
तात्या को पहली बार सेनानायक के रूप में अपनी योग्यता के प्रदर्शन का मौका वर्ष 1857 में मिला जब उन्होंने कानपुर छावनी में अंग्रेजी फौज पर हमला बोला और अंग्रेजी सैन्य अधिकारी व्हीलर को आत्मसमर्पण करना पड़ा। वह अपनी कुशलता और बहादुरी के बल पर पहले स्वतंत्रता संग्राम में सबसे लंबी अवधि अर्थात 17 जुलाई, 1857 से 8 अप्रैल, 1859 तक डटे रहे। उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ गोरिल्ला युद्ध के सेनानायक (UPBoardSolutions.com) के रूप में प्रसिधि मिली।

प्रश्न 3:
नाना साहब ने तात्या को अपना सेनाध्यक्ष क्यों बनाया?
उत्तर:
जुलाई, 1857 में अंग्रेजी सेना ने कानपुर में धावा बोल दिया। माना की सेना और अंग्रेजी सेना में भीषण युद्ध हुआ, लेकिन अंततः विजय श्री अंग्रेजों को मिली। इस पराजय के बाद नाना साहब ने अपने पूर्व सेनाध्यक्ष को (UPBoardSolutions.com) हटाकर तात्या को अपना सेनाध्यक्ष बना दिया।

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प्रश्न 4:
झाँसी की रानी की सहायता के लिए उनके करीब पहुँचकर भी तात्या को वहाँ से क्यों हटना पड़ा?
उत्तर:
तात्या 20000 सैनिकों की विशाल फौज के साथ लक्ष्मीबाई की सहायता के लिए झाँसी के निकट पहुँच गए थे लेकिन तभी सूचना पाकर यरोज विशाल अंग्रेजी सेना के साथ वहाँ आ धमका। इस युद्ध में अंग्रेजों के अच्छे तोपखाने के कारण तात्या की सेना को पीछे हटना पड़ा।

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प्रश्न 5:
“तात्या टोपे गोरिल्ला युदधा में विश्व स्तर के सेनानायक थे। (UPBoardSolutions.com) इसके पक्ष में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम में तात्या अपनी कुशलता और बहादुरी के बल पर सबसे लंबी अवधि अर्थात 17 जुलाई, 1857 से अपनी गिरफ्तारी होने तक अर्थात 8 अप्रैल, 1859 तक अंग्रेजों के नाक में दम करते रहे। इस कारण उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ गोरिल्ला युद्ध के सेनानायक के रूप में प्रसिद्धि मिली।

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UP Board Solutions for Class 6 Home Craft Chapter 3 पोषण

UP Board Solutions for Class 6 Home Craft Chapter 3 पोषण

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पोषण

अभ्यास

प्रश्न 1.
बहुविकल्पीय प्रश्नसही विकल्प के सामने दिए गए गोल घेरे को काला करिए-
(1) नाश्ते में लेना चाहिए
(क) चाऊमीन ◯
(ख) पिज्जा ◯
(ग) कोल्डड्रिंक ◯
(घ) अंकुरित चना, मूंग ●

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(2) किशोरावस्था में बालिकाओं को अधिक पोषक तत्व की आवश्यकता होती है-
(क) प्रोटीन ◯
(ख) लौह तत्व ●
(ग) वसा ◯
(घ) आयोडीन ◯

प्रश्न 2.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न-
(क) फल एवं हरी सब्जियों से कौन सा पोषक तत्व प्राप्त होता है ?
उत्तर
विटामिन और खनिज-लवण।।

(ख) कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख कार्य क्या है ?
उत्तर
कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख कार्य है-दैनिक कार्यों के लिए हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करना।

प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न-
(क) संतुलित आहार किसे कहते हैं ?
उत्तर
जिस भोजन में समस्त पोषक तत्त्व उचित मात्रा में (UPBoardSolutions.com) विद्यमान रहता है तथा जो शरीर की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, सन्तुलित भोजन कहलाता है।

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(ख) भोजन पकाने की विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर
भोजन पकाने के तरीके हैं-

  1. जल द्वारा पकाना (उबालना और सूप बनाना),
  2. भाप द्वारा पकाना (वाष्प द्वारा पकाना),
  3. चिकनाई द्वारा पकाना (कम घी या तेल द्वारा पकाना, अधिक घी या तेल द्वारा पकाना),
  4. आग की आँच में एकाना (भूनना, सेंकना)।

प्रश्न 4.
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
(क) भोजन को पका कर खाने से क्या लाभ है ?
उत्तर
भोजन को पकाकर खाने से भोजन आसानी से चबानेयुक्त हो जाता है जो आसानी से पच जाता है। पकाने से भोजन स्वादिष्ट और बाह्य स्वरूप में आकर्षक बन जाता है। इससे लोग रूचिपूर्वक खाते हैं। भोजन पकाए जाने से सब्जियों आदि में पाए जाने वाले हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते हैं जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।

(ख) भोजन पकाने से पूर्व किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है?
उत्तर
भोजन पकाने से पूर्व निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. साग-सब्जी धोने के पश्चात् ही काटें।
  2. चावल पकाते समय माड़ न निकालें (UPBoardSolutions.com)
  3. आटा छानकर रोटी न बनाएँ। चोकर सहित आटे से बनी रोटियाँ पौष्टिक होती हैं।
  4. भोजन पकाने वाला, बर्तन, स्थान एवं स्वयं भी स्वच्छ रहना चाहिए।
  5. भोजन पकाने से संबंधित सामग्री अपने नजदीक रख लेनी चाहिए।

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प्रोजेक्ट कार्य :                नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 10 फल परिरक्षण

UP Board Solutions for Class 6 Agricultural Science Chapter 10 फल परिरक्षण

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अभ्यास

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. परिरक्षण में 10 से 15% नमक जीवाणुओं के लिए विष का काम करता है।
  2. पेय पदार्थों को परिरक्षित करने में पोटैशियममेटाबाई सल्फाइड तथा सोडियम बेंजोएट रसायनों का प्रयोग किया जाता है।
  3. डिब्बा बन्दी में डिब्बे से हवा निकाल दी जाती है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित में सही के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (✗) का निशान लगाइए – अचार में तेल मिलाया जाता है –

(क) स्वाद बढ़ाने के लिए (✗)
(ख) परिरक्षण के लिए (✓)
(ग) अचार की मात्रा बढ़ाने के लिए (✗)
(घ) सुगन्ध बढ़ाने के लिए। (✗)

प्रश्न 3.
परिरक्षण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
फलों एवं सब्जियों को खराब होने से बचाने हेतु अथवा उनकी गुणवत्ता अधिक समय तक बनाए रखने के लिए की जाने वाली क्रियाओं को फल परिरक्षण कहते हैं।

प्रश्न 4.
परिरक्षण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर :
फल और सब्जियों के सड़ने से भारी नुकसान होता है। इस नुकसान से बचने के लिए परिरक्षण की आवश्यकता पड़ती है।

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प्रश्न 5.
परिरक्षण के कितने प्रकार हैं?
उत्तर :
परिरक्षण के दो प्रकार हैं –

  • अस्थायी परिरक्षण एवं
  • स्थायी परिरक्षण।

अस्थायी परिरक्षण में वस्तुओं को जीवाणु रहित करना, नमी से दूर रखना, ठंडे स्थान में रखना या डिब्बा बन्दी करना आदि होता है। स्थायी परिरक्षण ऊष्मा द्वारा, नमक द्वारा, चीनी द्वारा, (UPBoardSolutions.com) रसायनों द्वारा तथा सुखाना आदि से होता है।

प्रश्न 6.
ऊष्मा द्वारा परिरक्षण कैसे किया जाता है?
उत्तर :
खाद्य पदार्थों के जीवाणुओं को सामान्यतः 65 डिग्री सेल्सियस ऊष्मा पर गर्म करके नष्ट किया जाता है।

प्रश्न 7.
स्थायी एवं अस्थाई परिरक्षण में अन्तर बताइए।
उत्तर :
प्रश्न 5 का उत्तर देखिए।

प्रश्न 8.
आम का अचार सिरके में कैसे तैयार किया जाता है?
उत्तर :
आम के कच्चे फलों को चार भागों में काट लेते हैं। नमक मिलाकर शीशे के बर्तन में रखते हैं। अदरक, लहसुन व लालमिर्च को सिरके में पीसते हैं। मेथी, राई, सौंफ, जीरा तथा मंगरैल को खरल में कूट लेते हैं। फिर आम के निकले हुए पानी में इन सभी मसालों को मिलाकर आम के टुकड़ों से (UPBoardSolutions.com) लपेटते हैं। सरसों का तेल या सिरका इन बर्तनों में भर देते हैं। एक सप्ताह धूप में रखते हैं। अचार खाने योग्य हो जाता है।

प्रश्न 9.
आपके घर में गाजर, फूलगोभी आदि का मिश्रित अचार कब और कैसे बनाया जाता है?
उत्तर :
गाजर, फूल गोभी व शलगम को अच्छी तरह धोते हैं। टुकड़े काटकर 5 मिनट उबले पानी में रखते हैं। फिर इनका पानी सुखाते हैं। मसाले को तेल में भूनकर प्याज, लहसुन, अदरक मिलाते हैं। तैयार सामग्री जार में रखकर गुड़ का घोल या एसिटिक एसिड मिला देते हैं और 3-4 दिन धूप में रखते हैं। मसाला मिलाने के लिए जार को कई बार हिलाते हैं।

आवश्यक सामग्री – गाजर के टुकड़े 500 ग्राम, गोभी टुकड़े -250, शलजम – 250 ग्राम, लहसुन – 20 ग्रां, लाल मिर्च – 20 ग्रा, गर्म मसाला – 30 ग्रा, नमक – 75 ग्रा, सरसों तेल – 250 ग्रा, एसिटिक एसिड – 10 ग्राम

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प्रश्न 10.
पपीते का अचार बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कच्चे पपीते को छीलकर छोटे टुकड़े करते हैं। 100 ग्राम नमक मिलाकर 4 घंटे धूप में रखते हैं। शीशे के जार में सिरका इतना डालें कि टुकड़े डूब जाएँ। टुकड़े तौल लेते हैं फिर प्रति किलो पर 2 चम्मच राई, लाल मिर्च, बड़ी इलायची, जीरा, काली पीपर, पाउडर (प्रत्येक 10 ग्रा) हल्दी डालकर (UPBoardSolutions.com) मिला देते हैं। समय-समय पर बर्तन को हिलाते रहते हैं, जिससे मसाला पूरी तरह मिल जाए। तीन सप्ताह बाद अचार खाने योग्य हो जाता है।

प्रश्न 11.
आम का मीठा अचार कैसे तैयार किया जाता है?
उत्तर :
आम का मीठा अचार –

इसे बनाने के लिए आवश्यक सामग्री – आम की फाँके – 1 किलोग्राम, नमक – 200 ग्रा, चीनी – 600, ग्रा, लालमिर्च पीसी – 20 ग्रा, गर्ममसाला – 20 ग्रा, सोंट – 15 ग्रा, सौंफ – 20 ग्रा, हींग – थोड़ा-सा

बनाने की विधि – आमों को ठंडे पानी में धोते हैं। छिलका उतारकर लम्बाई में बड़े सरौते से काटकर फॉकों को स्टील के काँटों से छेदते हैं। आम की फाँके चीनी की चासनी को अच्छी तरह सोखती हैं। चासनी अचार को सुरक्षित रखती है। काँच के बर्तन में रखकर मसाले और चीनी को (UPBoardSolutions.com) अच्छी तरह मिलाते रहें। 4-5 दिन धूप में रखते हैं।

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