UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 14
Chapter Name Biomolecules
Number of Questions Solved 96
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 14 Biomolecules (जैव-अणु)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं, जबकि साइक्लोहेक्सेन अथवा बेन्जीन (सामान्य छह सदस्यीय वलय युक्त यौगिक) जल में अविलेय होते हैं। समझाइए।
उत्तर :
ग्लूकोस तथा सुक्रोस में क्रमश: 5 तथा 8 –OH समूह होते हैं। ये जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाते हैं। अत्यधिक H- आबन्धन के कारण ग्लूकोस तथा सुक्रोस जल में विलेय हैं। दूसरी ओर, साइक्लोहेक्सेन में –OH समूह नहीं होते हैं। यह जल के साथ हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनाता है, अतएव इसमें अविलेय रहता है।

प्रश्न 2.
लैक्टोस के जल-अपघटन से किन उत्पादों के बनने की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर :
जल-अपघटन पर लैक्टोस मोनोसैकेराइड के दो अणु देता है अर्थात् D – (+) – ग्लूकोस तथा D – (+) गैलेक्टोस का एक-एक अणु।
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प्रश्न 3.
D – ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में आप ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति को कैसे । समझाएँगे?
उत्तर :
ग्लूकोस ऐल्डोहेक्सोस होने के कारण ऐल्डिहाइड समूह की लाक्षणिक अभिक्रियाएँ देता है; जैसे -NH2OH, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया। ग्लूकोस के ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड के साथ ऐसिलीकरण से प्राप्त ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट इन अभिक्रियाओं को नहीं देता है।
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इसका अभिप्राय है कि ग्लूकोस पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह या तो अनुपस्थित होता है या इन अभिक्रियाओं के लिए उपलब्ध नहीं रहता है। वास्तव में D – ग्लूकोस के पेण्टाऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह हेमीऐसीटल संरचना का भाग होता है, अतएव इन अभिक्रियाओं में भाग लेने के लिए उपलब्ध नहीं रहता है।

प्रश्न 4.
ऐमीनो अम्लों के गलनांक एवं जल में विलेयता सामान्यतः संगत हैलो अम्लों की तुलना में अधिक होती है। समझाइए।
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल ज्विट्टर आयन (H3  [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] -CHR-COO) के रूप में पाए जाते हैं। द्विध्रुवीय लवण सदृश लक्षण के कारण इनमें प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव अथवा स्थिर-विद्युत आकर्षण बल पाए जाते हैं, अतएव ऐमीनो अम्लों के क्वथनांक उच्च होते हैं। ऐमीनो अम्ल H20 अणुओं के साथ प्रबल अन्योन्यक्रिया करते हैं। तथा इसमें विलेय होते हैं। हैलो अम्लों की लवण सदृश्य संरचना नहीं होती है, अत: इनके क्वथनांक निम्न होते हैं। हैलोअम्ल ऐमीनो अम्लों की तरह H20 अणुओं के साथ प्रबलता के साथ अन्योन्यक्रिया नहीं करते हैं, अत: जल में ऐमीनो अम्लों की विलेयता हैलोअम्लों से अधिक होती है।

प्रश्न 5.
अण्डे को उबालने पर उसमें उपस्थित जल कहाँ चला जाता है?
उत्तर :
उबालने पर अण्डे में उपस्थित प्रोटीनों का पहले विकृतिकरण और फिर स्कंदन हो जाता है। इन स्कंदित प्रोटीनों द्वारा जल अवशोषित या अधिशोषित हो जाता है।

प्रश्न 6.
हमारे शरीर में विटामिन C संचित क्यों नहीं होता?
उत्तर :
विटामिन C (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) जल में विलेय होता है। यह शीघ्र ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं रह सकता है।

प्रश्न 7.
यदि DNA के थायमीनयुक्त न्यूक्लियोटाइड का जल-अपघटन किया जाए तो कौन-कौन से उत्पाद बनेंगे?
उत्तर :
2-डीऑक्सी-D-राइबोस, फॉस्फोरिक अम्ल तथा थायमीन।

प्रश्न 8.
जब RNA का जल-अपघटन किया जाता है तो प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता। यह तथ्य RNA की संरचना के विषय में क्या संकेत देता है?
उत्तर :
DNA अणु में दो कुण्डलिनियों (strands) में चार पुरक क्षारक परस्पर युग्म बनाए रखते हैं जैसे साइटोसीन (C) सदैव ग्वानीन (G) के साथ युग्म बनाता है, जबकि थायमीन (T) सदैव ऐडेनीन के साथ युग्म बनाता है। इसलिए जब एक DNA अणु जल-अपघटित होता है, तब साइटोसीन की मोलर मात्राएँ सदैव ग्वानीन के तुल्य तथा इसी प्रकार ऐडेनीन की सदैव थायमीन के तुल्य होती हैं। RNA में भी चार क्षारक होते हैं जिनमें प्रथम तीन DNA के समान, परन्तु चौथा क्षारक यूरेसिल (U) होता है। चूंकि RNA में प्राप्त चारों क्षारकों (C,G, A तथा U) की मात्राओं के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं होता है, इसलिए क्षारक-युग्मन सिद्धान्त (अर्थात् A के साथ U तथा C के साथ G का युग्म) का पालन नहीं होता है, इससे यह संकेत मिलता है कि DNA के विपरीत RNA में एक कुण्डलिनी होती है।

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
मोनोसैकेराइड क्या होते हैं? (2018)
उत्तर :
वे कार्बोहाइड्रेट जो छोटे अणुओं में जल – अपघटित नहीं हो सकते, मोनोसैकेराइड कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
अपचायी शर्करा क्या होती है?
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करते हैं तथा फेहलिंग विलयन के साथ लाल अवक्षेप देते हैं, अपचायी शर्कराएँ कहलाते हैं। सभी मोनोसैकेराईड (ऐल्डोस तथा कीटोस) तथा डाइसैकेराइड (सुक्रोस को छोड़कर) अपचायी शर्कराएँ हैं।

प्रश्न 3.
पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।
उत्तर :
(i) पादप कोशिका भित्तियों का संरचनात्मक पदार्थ (Structural material for plant cell walls)
उदाहरणार्थ :
पॉलीसैकेराइड सेलुलोस पादप कोशिका भित्ति का प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होता है।

(ii) जैव ईंधन (Bio fuels) कार्बोहाइड्रेट जैसे :
ग्लूकोस, फ्रक्टोस, शर्करा, स्टार्च तथा ग्लाइकोजन जैव ईंधनों के रूप में कार्य करते हैं तथा जैव तन्त्रों में विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उदाहरणार्थ :
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिएराइबोस, 2-डिऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलेक्टोस, फ्रक्टोस तथा लैक्टोस
उत्तर :

  1. मोनोसैकेराइड :राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलेक्टोस, तथा फ्रक्टोस।
  2. डाइसैकेराइड :माल्टोस तथा लैक्टोस।

प्रश्न 5.
ग्लाइकोसाइडी बन्ध से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
दो मोनोसैकेराइड अणु परस्पर ऑक्सीजन आबन्ध द्वारा जुड़े होते हैं जिसका निर्माण जल के अणु की हानि से होता है। दो मोनोसैकेराइड इकाइयों के मध्य ऑक्सीजन से होकर आबन्ध ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
माल्टोस अणु में ग्लाइकोसाइडिक आबन्ध नीचे प्रदर्शित है
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प्रश्न 6.
ग्लाइकोजन क्या होता है तथा ये स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर :
जन्तुओं के शरीर में कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन के रूप में संचित रहता हैं। इसे जन्तु स्टार्च भी कहते हैं, क्योंकि इसकी संरचना ऐमाइलोपेक्टिन के समान होती है, लेकिन यह इससे अत्यधिक शाखित होता है। यह यकृत तथा पेशियों में संचित रहता है। जब हमारे शरीर को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है तब एन्जाइम ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में परिवर्तित कर देते हैं। दूसरी ओर, स्टार्च ऐमाइलोस (15-20%) जो कि जल में विलेय होता है तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80-85%) जो कि जल में अविलेय होता है का मिश्रण होता है। ग्लाइकोजन तथा ऐमाइलोपेक्टिन दोनों α -D.ग्लूकोस के शाखित बहुलक होते हैं। स्टार्च पौधों का प्रमुख संचित पॉलीसैकेराइड होता है।

प्रश्न 7.
(अ) सुक्रोस तथा
(ब) लैक्टोस के जल-अपघटन से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर :
(अ) सुक्रोस जल :
अपघटित होकर 1-अणु ग्लूकोस तथा 1-अणु फ्रक्टोस देता है।
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(ब) लैक्टोस जल :
अपघटित होकर D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस का सममोलर मिश्रण देता है।
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प्रश्न 8.
स्टार्च तथा सेलुलोस में मुख्य संरचनात्मक अन्तर क्या है?
उत्तर :
स्टार्च ऐमिलोस तथा ऐमिलोपेक्टिन से मिलकर बनता है। ऐमिलोस α – D -ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है, जबकि सेलुलोस β – D-ग्लूकोस का रेखीय बहुलक होता है। ऐमिलोस में एक ग्लूकोस इकाई का C-1 अन्य ग्लूकोस इकाई के C-4 से α – ग्लाइकोसाइडी बन्ध द्वारा जुड़ा रहता है। इसे अग्रांकित चित्र में देखा जा सकता है
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सेलुलोस, β – D -ग्लूकोस से बनी ऋजु शृंखलायुक्त पॉलिसैकेराइड है जिसमें एक ग्लूकोस इकाई के C-1 तथा दूसरी ग्लूकोस इकाई के C-4 के मध्य β ग्लाइकोसाइडी बन्ध बनता है।

प्रश्न 9.
क्या होता है जब D-ग्लूकोस की अभिक्रिया निम्नलिखित अभिकर्मकों से करते हैं?
(i) HI
(ii) ब्रोमीन जल
(iii) HNO3.
उत्तर :
(i)
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प्रश्न 10.
ग्लूकोस की उन अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जो इसकी विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकतीं।
उत्तर :
निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ग्लूकोस की विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकती हैं, इन्हें बॉयर ने प्रस्तावित किया था

  1.  ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होते हुए भी ग्लूकोस 2 , 4 – DNP परीक्षण तथा शिफ़-परीक्षण नहीं देता एवं यह NaHSO3 के साथ हाइड्रोजन सल्फाइड योगज उत्पाद नहीं बनाता।
  2. ग्लूकोस का पेन्टाऐसीटेट, हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता जो मुक्त —CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करता है।
  3.  जब D-ग्लूकोस को शुष्क हाइड्रोजन क्लोराईड गैस की उपस्थिति में मेथेनॉल के साथ अभिकृत कराया जाता है, तब यह दो समावयव मोनोमेथिल व्युत्पन्न देता है जिन्हें मेथिल -α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β-D-ग्लूकोसाइड के नाम से जाना जाता है। ये ग्लूकोसाइड फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते तथा हाइड्रोजन सायनाइड अथवा हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं तथा मुक्त -CHO समूह की अनुपस्थिति को इंगित करते हैं।

प्रश्न 11.
आवश्यक तथा अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
(i) आवश्यक ऐमीनो अम्ल (Essential amino acids) :
ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है, लेकिन इनका संश्लेषण मनुष्य के शरीर में नहीं होता है, आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-वेलिन, ल्यूसीन, फेनिलऐलानीन आदि।
(ii) अनावश्यक ऐमीनो अम्ल (Non-essential amino acids) :
ऐमीनो अम्ल जिनकी आवश्यकता मानव स्वास्थ्य तथा वृद्धि के लिए होती है तथा जिनका संश्लेषण मानव शरीर में होता है, अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं; जैसे-ग्लाइसीन, ऐलानीन, ऐस्पार्टिक अम्ल आदि।

प्रश्न 12.
प्रोटीन के सन्दर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए
(i) पेप्टाइड बन्ध
(ii) प्राथमिक संरचना
(iii) विकृतीकरण। (2015)
उत्तर :
(i) पेप्टाइड बन्ध (Peptide bond) :
रासायनिक रूप से पेप्टाइड आबन्ध, -COOH समूह तथा -NH2, समूह के मध्य बना एक आबन्ध होता है। दो एक जैसे अथवा भिन्न ऐमीनो अम्लों के अणुओं के मध्य अभिक्रिया एक अणु के ऐमीनो समूह तथा दूसरे अणु के कार्बोक्सिल समूह के मध्य संयोग से होती है जिसके फलस्वरूप एक जल का अणु मुक्त होता है तथा पेप्टाइड आबन्ध -CO-NH- बनता है। चूँकि उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों के द्वारा बनता है, अत: इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं। उदाहरणार्थ :
जब ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलेनीन के ऐमीनो समूह के साथ संयोग करता है तो हमें एक डाइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलैनीन प्राप्त होता है।
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(ii) प्राथमिक संरचना (Primary structure) :
प्रोटीन में एक अथवा अनेक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ उपस्थित हो सकती हैं। किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट क्रम में संयुक्त होते हैं। ऐमीनो अम्लों का यह विशिष्ट क्रम प्रोटीन्स की प्राथमिक संरचना बनाता है। प्राथमिक संरचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन अर्थात् ऐमीनो अम्लों के क्रम में परिवर्तन से भिन्न प्रोटीन उत्पन्न होती हैं।

(iii) विकृतीकरण (Denaturation) :
जैविक निकाय में पायी जाने वाली विशेष त्रिविम संरचना तथा जैविक सक्रियता वाली प्रोटीन, प्राकृत प्रोटीन कहलाती हैं। जब प्राकृत प्रोटीन में भौतिक परिवर्तन जैसे ताप में परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन करते हैं (जैसे-pH में परिवर्तन आदि) तो हाइड्रोजन आबन्धों में अस्तव्यस्तता उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हेलिक्स अकुण्डलित हो जाती है तथा प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देती है। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं। विकृतीकरण के दौरान 2° तथा 3° संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, परन्तु 1° संरचना अप्रभावित रहती है। उबालने पर अण्डे की सफेदी का स्कन्दन विकृतीकरण का एक सामान्य उदाहरण है। एक अन्य उदाहरण दही का जमना है जो दूध में उपस्थित बैक्टीरिया द्वारा लैक्टिक अम्ल उत्पन्न होने के कारण होता है।

प्रश्न 13.
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के सामान्य प्रकार क्या हैं?
उत्तर :
किसी प्रोटीन की द्वितीयक संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला विद्यमान होती है। यह दो भिन्न प्रकार की संरचनाओं में विद्यमान होती हैं α – हेलिक्स तथा β – प्लीटेड शीट संरचना। ये संरचनाएँ पेप्टाइड आबन्ध के
[latex]\\ \begin{matrix} O \\ \parallel \\ -C- \end{matrix}[/latex]
तथा – NH -समूह के मध्य हाइड्रोजन आबन्ध के कारण पॉलिपेप्टाइड की मुख्य श्रृंखला के नियमित कुण्डलन में उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 14.
प्रोटीन की -हेलिक्स संरचना के स्थायीकरण में कौन-से आबन्ध सहायक होते हैं?
उत्तर :
प्रोटीन की z-हेलिक्स संरचना एक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट के C=0 तथा चतुर्थ ऐमीनो अम्ल अवशेष के N – H के मध्य अन्तरा – आणविक H-आबन्ध द्वारा स्थायित्व प्राप्त करती है।

प्रश्न 15.
रेशेदार तथा गोलिकाकार (globular) प्रोटीन को विभेदित कीजिए।
उत्तर :
(i) रेशेदार प्रोटीन (Fibrous proteins) :
जब पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ समानान्तर होती हैं। तथा हाइड्रोजन एवं डाइसल्फाइड आबन्धों द्वारा संयुक्त रहती हैं तो रेशासम (रेशे जैसी) संरचना बनती है। इस प्रकार के प्रोटीन सामान्यत: जल में अविलेय होती हैं। रेशेदार प्रोटीन जन्तु ऊतकों की प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होती हैं। कुछ सामान्य उदाहरण किरेटिन (बाल, ऊन तथा रेशम में उपस्थित) तथा मायोसिन (मांसपेशियों में उपस्थित) आदि हैं।

(ii) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular proteins) :
जब पॉलिपेप्टाइड की श्रृंखलाएँ कुण्डली बनाकर गोलाकृति प्राप्त कर लेती हैं तो ऐसी संरचनाएँ प्राप्त होती हैं। ये सामान्यतः जल में विलेय होती हैं क्योकि इनके अणु दुर्बल अन्तराअणुक बलों द्वारा जुड़े रहते हैं। इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन इनके सामान्य उदाहरण

प्रश्न 16.
ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति को आप कैसे समझाएँगे? (2016, 18)
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल में एक कार्बोक्सिल समूह (अम्लीय) तथा एक ऐमीन समूह (क्षारीय) समान अणु में पाए जाते हैं। जलीय विलयन में -COOH समूह एक H+ खोता है तथा —NH2, समूह इसे स्वीकार करता है। इस प्रकार ज्विट्टर आयन (zwitter ion) का निर्माण होता है।
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द्विध्रुवीय या ज्विट्टर आयन संरचना के कारण ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी (amphoteric) प्रकृति के होते हैं। ऐमीनो अम्ल की अम्लीय प्रकृति [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] के कारण होती है तथा क्षारीय प्रकृति COO समूह के कारण होती है।
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प्रश्न 17.
एन्जाइम क्या होते हैं? (2016, 17, 18)
उत्तर :
एन्जाइम जैव-उत्प्रेरक होते हैं। जीवधारियों में होने वाली विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में समन्वयन के कारण ही जीवन सम्भव होता है।
उदाहरणार्थ :
भोजन का पाचन, उपयुक्त अणुओं का अवशोषण तथा अन्तत: ऊर्जा का उत्पादन। इस प्रक्रम में अभिक्रियाएँ एक अनुक्रम में होती हैं तथा ये सभी अभिक्रियाएँ शरीर में मध्यम परिस्थितियों में सम्पन्न होती हैं। यह कुछ जैव-उत्प्रेरकों की सहायता से होता है। इन्हीं जैव-उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहा जाता है। रासायनिक रूप में लगभग सभी एन्जाइम गोलिकाकार प्रोटीन होते हैं। एन्जाइम किसी विशेष अभिक्रिया अथवा विशेष क्रियाधार के लिए विशिष्ट होते हैं अर्थात् प्रत्येक जैव-तन्त्र के लिए भिन्न एन्जाइम की आवश्यकता होती है, इसलिए एन्जाइम अन्य प्रचलित उत्प्रेरकों से भिन्न होते हैं। ये अत्यन्त सक्रिय होते हैं तथा इनकी अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा की ही आवश्यकता होती है। ये अनुकूल ताप (310K) तथा pH(7.4) एवं एक वायुमण्डलीय दाब पर कार्य करते हैं।

प्रश्न 18.
प्रोटीन की संरचना पर विकृतीकरण का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर :
प्रोटीन ऊष्मा, खनिज अम्ल, क्षार आदि की क्रिया के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। गर्म करने या खनिज अम्लों की क्रिया कराने पर गोलिकामय प्रोटीन (विलेय प्रोटीन) स्कन्दित या अवक्षेपित होकर तन्तुमय प्रोटीन देते हैं जोकि जल में अविलेय होते है जिसके परिणामस्वरूप प्रोटीन की जैव सक्रियता समाप्त हो जाती है। रासायनिक रूप से विकृतिकरण प्राथमिक संरचना को परिवर्तित नहीं करता है, लेकिन प्रोटीन की द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ परिवर्तित हो जाती हैं।

प्रश्न 19.
विटामिनों को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है? रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन का नाम दीजिए। (2016)
उत्तर :
विटामिनों को जल या वसा में विलेयता के आधार पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है

  1. जल में विलेय विटामिन (Water soluble vitamins) : विटामिन B-कॉम्प्लेक्स तथा विटामिन Cl
  2. वसा में विलेय विटामिन (Fat soluble vitamins) : विटामिन A, D, E, K आदि। विटामिन K रक्त के थक्के जमने के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 20.
विटामिन A व C हमारे लिए आवश्यक क्यों हैं? उनके महत्त्वपूर्ण स्रोत दीजिए।
उत्तर :
विटामिन A की कमी से जीरोफ्थैल्मिया (xerophthalmia) तथा रतौंधी (night blindness) हो जाते हैं, अत: इसका प्रयोग हमारे लिए आवश्यक होता है।
(i) स्रोत (Sources) :
मछली के यकृत का तेल, गाजर, मक्खन तथा दूध। विटामिन C की कमी से स्कर्वी (scurvy) तथा पायरिया हो जाता है।
(ii) स्रोत (Sources) :
नींबू, आँवला, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंकुरित अनाज आदि।

प्रश्न 21.
न्यूक्लीक अम्ल क्या होते हैं? इनके दो महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए। (2016, 17)
उत्तर :
न्यूक्लीक अम्ल वे जैव-अणु होते हैं जो सभी जीवित कोशिकाओं के नाभिकों में न्यूक्लियो- प्रोटीन अथवा क्रोमोसोम के रूप में पाए जाते हैं। न्यूक्लीक अम्ल मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं—डिऑक्सीराइबोस न्यूक्लीक अम्ल (DNA) तथा राइबोसन्यूक्लीक अम्ल (RNA)। चूंकि न्यूक्लीक अम्ल न्यूक्लियोटाइडों की लम्बी श्रृंखला वाले बहुलक होते हैं, अतः इन्हें पॉलिन्यूक्लियोटाइड भी कहते हैं। न्यूक्लीक अम्लों के दो महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं

(i) DNA आनुवंशिकता का रासायनिक आधार है तथा इसे आनुवंशिक सूचनाओं के संग्राहक के रूप में जाना जाता है। DNA लाखों वर्षों से किसी जीव की विभिन्न प्रजातियों की पहचान बनाए रखने के लिए विशिष्ट रूप से उत्तरदायी है। कोशिका विभाजन के समय एक DNA अणु स्वप्रतिकरण (self replication) में सक्षम होता है तथा पुत्री कोशिका में समान DNA रज्जुक का अन्तरण होता है।
(ii) न्यूक्लीक अम्ल (DNA तथा RNA) का दूसरा महत्त्वपूर्ण कार्य कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण है। वास्तव में कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण विभिन्न RNA अणुओं द्वारा होता है, परन्तु किसी विशेष प्रोटीन के संश्लेषण का सन्देश DNA में उपस्थित होता है।

प्रश्न 22.
न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड में क्या अन्तर होता है? (2012)
उत्तर :
1. न्यूक्लियोसाइड (Nucleosides) :
न्यूक्लियोसाइड में न्यूक्लिक अम्ल के दो आधारीय घटक होते हैं—पेण्टोस शर्करा तथा एक नाइट्रोजनी क्षारक।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा → न्यूक्लियोसाइड
उपस्थित शर्करा के आधार पर न्यूक्लियोसाइड राइबोसाइड तथा डीऑक्सीराइबोसाइड प्रकार के होते हैं।

2. न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides) :
न्यूक्लियोटाइड में न्यूक्लिक अम्लों के तीनों घटक अर्थात् H3 PO4, पेण्टोस शर्करा तथा नाइट्रोजनी क्षारक पाए जाते हैं।
नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोस शर्करा + H3 PO4 न्यूक्लियोटाइड  या  न्यूक्लियोसाइड + H3 PO न्यूक्लियोटाइड
उपस्थित शर्करा के प्रकार के आधार पर न्यूक्लियोटाइड दो प्रकार के होते हैं

  1. राइबोन्यूक्लियोटाइड
  2. डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटइड।

प्रश्न 23.
DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं। समझाइए।
उत्तर :
DNA अणु में दो रज्जुक, एक रज्जुक के प्यूरीन क्षारक तथा अन्य के पिरिमिडीन क्षारक के मध्य या इसके विपरीत के मध्य हाइड्रोजन आबन्धों के द्वारा जुड़े रहते हैं। क्षारकों के विभिन्न आकारों एवं ज्यामितियों के कारण DNA में एकमात्र सम्भव युग्मन G (ग्वानीन) तथा C (साइटोसीन) के मध्य तीन हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा हो सकता है। दूसरे शब्दों में क्षारकों A (ऐडीनीन) तथा T (थायमीन) के मध्य दो हाइड्रोजन आबन्धों द्वारा युग्मन सम्भव होता है।
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इस क्षारक-युग्मन सिद्धान्त के कारण एक रज्जुक में क्षारकों का अनुक्रम दूसरे रज्जुक में क्षारकों के अनुक्रम को स्वत: व्यवस्थित कर देता है। अत: DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

प्रश्न 24.
DNA तथा RNA में महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अन्तर लिखिए।
उत्तर :
संरचनात्मक अन्तर (Structural Difference)
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क्रियात्मक अन्तर (Functional Difference)
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प्रश्न 25.
कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA कौन-से हैं?
उत्तर :
कोशिका में तीन प्रकार के RNA पाए जाते हैं

  1. राइबोसोमल RNA (r-RNA)
  2. सन्देशवाहक RNA (m-RNA)
  3. स्थानान्तरण RNA (t-RNA)

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
यौगिकों का युग्म जिसमें दोनों यौगिक टॉलेन्स अभिकर्मक के साथ धनात्मक परीक्षण देते (2016)
(i) ग्लूकोस तथा सुक्रोस
(ii) फ्रक्टोस तथा सुक्रोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस

प्रश्न 2.
सुक्रोस (sucrose) है एक (2017)
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
उत्तर :
(i) डाइसैकेराइड

प्रश्न 3.
इन्युलिन के जल-अपघटन से प्राप्त होता है (2017)
(i) ग्लूकोस
(ii) फ्रक्टोस
(iii) ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस
(iv) लैक्टोस
उत्तर :
(ii) फ्रक्टोस

प्रश्न 4.
सेलुलोस (cellulose) है एक (2017)
(i) मोनोसैकेराइड
(ii) डाइसैकेराइड
(iii) ट्राइसैकेराइड
(iv) पॉलिसैकेराइड
उत्तर :
(iv) पॉलिसैकेराइड

प्रश्न 5.
ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह के अतिरिक्त होता है
(i) एक द्वितीयक तथा चार प्राथमिक –OH समूह
(ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह
(iii) दो प्राथमिक -OH तथा तीन द्वितीयक –OH समूह
(iv) तीन प्राथमिक –OH तथा दो द्वितीयक –OH समूह
उत्तर :
(ii) एक प्राथमिक तथा चार द्वितीयक –OH समूह

प्रश्न 6.
लैक्टोस के तनु अम्ल के साथ जल-अपघटन में प्राप्त होता है
(i) D-ग्लूकोस तथा D.ग्लूकोस का सममोलर मिश्रण।
(ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस को सममोलर मिश्रण
(iii) D-ग्लूकोस तथा D-फ्रक्टोस का सममोलर मिश्रण
(iv) L-ग्लूकोस तथा D.फ्रक्टोस को सममोलर मिश्रण
उत्तर :
(ii) D-ग्लूकोस तथा D-गैलेक्टोस का सममोलर मिश्रण

प्रश्न 7.
ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन के आधिक्य से क्रिया करके बनाता है
(i) ग्लूकोसाजोन
(ii) ग्लूकोस फेनिलहाइड्राजीन
(iii) ग्लूकोस ऑक्सिम
(iv) सोरबिटॉल
उत्तर :
(i) ग्लूकोसाजोन

प्रश्न 8.
मेथिल α – D-ग्लूकोसाइड तथा मेथिल β -D-ग्लूकोसाइड हैं
(i) ऐपीमर
(ii) एनोमर
(iii) एनेन्शियोमर
(iv) डाइस्टीरियोमर
उत्तर :
(ii) एनोमर

प्रश्न 9.
वह कार्बोहाइड्रेट, जो मनुष्यों के पाचन तन्त्र में नहीं पचता है, है (2014)
(i) स्टार्च
(ii) सेलुलोस
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) ग्लूकोस
उत्तर :
(ii) सेलुलोस

प्रश्न 10.
निम्न में से कौन-सा यौगिक बाइयूरेट परीक्षण नहीं देता है? (2014)
(i) कार्बोहाइड्रेट
(ii) पॉलीपेप्टाइड
(iii) यूरिया
(iv) प्रोटीन
उत्तर :
(i) कार्बोहाइड्रेट

प्रश्न 11.
दूध में शर्करा होती है
(i) सुक्रोस
(ii) माल्टोस
(iii) ग्लूकोस
(iv) लैक्टोस
उत्तर :
(iv) लैक्टोस

प्रश्न 12.
शरीर में आरक्षित ग्लूकोस के रूप में कार्य करने वाला कार्बोहाइड्रेट है (2017)
(i) सुक्रोस
(ii) स्टार्च
(iii) ग्लाइकोजन
(iv) फ्रक्टोस
उत्तर :
(iii) ग्लाइकोजन

प्रश्न 13.
इन्सुलिन किसके उपापचय को नियन्त्रित करता है?
(i) खनिज
(ii) ऐमीनो अम्ल
(iii) ग्लूकोस
(iv) विटामिन
उत्तर :
(iii) ग्लूकोस

प्रश्न 14.
शर्करा के किस कार्बन परमाणु पर हाइड्रॉक्सिल समूह की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति RNA तथा DNA में विभेद करती है?
(i) दूसरे
(ii) तीसरे
(iii) चौथे
(iv) पहले
उत्तर :
(i) दूसरे

प्रश्न 15.
बायर अभिकर्मक का उपयोग किया जाता है (2016)
(i) ऑक्सीकरण के लिए
(ii) द्वि-बन्ध की जाँच के लिए
(iii) ग्लूकोस की जाँच के लिए
(iv) अपचयन के लिए।
उत्तर :
(i) ऑक्सीकरण के लिए

प्रश्न 16.
प्रोटीनों में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्ल जिन्हें मानव शरीर संश्लेषित करता है, हैं
(i) 20
(ii) 10
(iii) 5
(iv) 4
उत्तर :
(ii) 10

प्रश्न 17.
निम्न में से कौन-सा परीक्षण प्रोटीनों के लिए नहीं किया जाता है?
(i) मिलन परीक्षण
(ii) मोलिश परीक्षण
(iii) बाइयूरेट परीक्षण
(iv) निनहाइडूिन परीक्षण
उत्तर :
(ii) मोलिश परीक्षण

प्रश्न 18.
मानव शरीर में संश्लेषित हो सकने वाला ऐमीनो अम्ल है
(i) लाइसीन
(ii) हिस्टीडीन
(iii) वेलीन
(iv) ऐलानीन
उत्तर :
(iv) ऐलानीन

प्रश्न 19.
α -ऐमीनो अम्ल जिसमें ऐरोमैटिक पाश्र्व श्रृंखला होती है, है
(i) प्रोलीन
(ii) टाइरोसीन
(iii) वेलीन
(iv) ट्रिप्टोफेन
उत्तर :
(iv) ट्रिप्टोफेन

प्रश्न 20.
ऐमीनो अम्लों के सन्दर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(i) ये सभी प्रोटीनों के घटक होते हैं
(ii) ये सभी उच्च गलनांक वाले होते हैं
(iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।
(iv) इनके अभिलाक्षणिक आइसोइलेक्ट्रिक बिन्दु होते हैं।
उत्तर :
(iii) प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले ऐमीनो अम्लों का D-विन्यास होता है।

प्रश्न 21.
ऐमीनो अम्ल निम्न में से किसके निर्माण की इकाई होते हैं? (2011, 12)
(i) कार्बोहाइड्रेट के
(ii) प्रोटीन के
(iii) वसा के
(iv) विटामिन के
उत्तर :
(ii) प्रोटीन के

प्रश्न 22.
एन्जाइम होते हैं (2017)
(i) तेल
(ii) वसा-अम्ल
(iii) प्रोटीन
(iv) खनिज
उत्तर :
(iii) प्रोटीन

प्रश्न 23.
विटामिन B1, का रासायनिक नाम है (2016, 18)
(i) एस्कॉर्बिक अम्ल
(ii) रिबोफ्लेविन
(iii) थायमिन
(iv) पाइरीडॉक्सीन
उत्तर :
(iii) थायमिन

प्रश्न 24.
मानव शरीर में निम्न में से किसका निर्माण नहीं हो सकता है?
(i) एन्जाइम
(ii) DNA
(iii) विटामिन्स
(iv) हॉर्मोन्स
उत्तर :
(iii) विटामिन्स

प्रश्न 25.
कैल्सीफेरॉल कहलाता है (2011)
(i) विटामिन A
(ii) विटामिन B
(iii) विटामिन C
(iv) विटामिन D
उत्तर :
(iv) विटामिन D

प्रश्न 26.
विटामिन A की कमी से होता है (2012)
(i) स्कर्वी
(ii) बेरी-बेरी
(iii) रतौंधी
(iv) अरक्तता
उत्तर :
(iii) रतौंधी

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन स्कर्वी रोग के लिए उत्तरदायी है? (2011)
(i) A
(ii) C
(iii) K
(iv) D
उत्तर :
(ii) C

प्रश्न 28.
ऐस्कॉर्बिक अम्ल है (2010)
(i) प्रोटीन
(ii) एन्जाइम
(iii) हॉर्मोन
(iv) विटामिन
उत्तर :
(iv) विटामिन

प्रश्न 29.
बन्ध्यारोधी विटामिन है
(i) विटामिन D
(ii) विटामिन B समूह
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन A
उत्तर :
(iii) विटामिन E

प्रश्न 30.
वसा के साथ आँत में अवशोषित होने वाले विटामिन हैं
(i) A, D
(ii) B, C
(iii) A, C
(iv) B, D
उत्तर :
(i) A, D

प्रश्न 31.
बायोटीन यीस्ट में पाये जाने वाला कार्बनिक पदार्थ है। इसे अन्य किस नाम से पुकारते हैं?
(i) विटामिन H
(ii) विटामिन K
(iii) विटामिन E
(iv) विटामिन B12
उत्तर :
(i) विटामिन H

प्रश्न 32.
वह विटामिन जो न तो जल में और न ही वसा में विलेय है, है
(i) बायोटीन
(ii) थायमीन
(iii) कैल्सीफेरॉल
(iv) ये सभी
उत्तर :
(i) बायोटीन

प्रश्न 33.
निम्न में से प्यूरीन व्युत्पन्न है
(i) साइटोसीन
(ii) ग्वानीन
(iii) यूरेसिल
(iv) थायमीन
उत्तर :
(ii) ग्वानीन

प्रश्न 34.
DNA की द्विकुण्डलीत संरचना का कारण है
(i) स्थिर विद्युत आकर्षण
(ii) वाण्डरवाल्स बल
(iii) द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन
उत्तर :
(iv) हाइड्रोजन आबन्धन

प्रश्न 35.
DNA में पाये जाने वाले पिरीमिडीन क्षार हैं
(i) साइटोसीन तथा ऐडेनीन
(ii) साइटोसीन तथा ग्वानीन
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन
(iv) साइटोसीन तथा यूरेसिल
उत्तर :
(iii) साइटोसीन तथा थायमीन

प्रश्न 36.
निम्न में से कौन-सा अंग फाइट या फ्लाइट हॉर्मोन स्रावित करता है?
(i) ऐड्रीनेलिन
(ii) ऐड्रीनल
(iii) पिट्यूटरी
(iv) वृक्क
उत्तर :
(ii) ऐड्रीनल

प्रश्न 37.
निम्न में से किस हॉर्मोन में आयोडीन होती है?
(i) टेस्टेस्टोरेन
(ii) ऐड्रीनेलिन
(iii) थायरोक्सिन
(iv) इन्सुलिन
उत्तर :
(iii) थायरोक्सिन

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोहाइड्रेट को परिभाषित कीजिए। (2016, 17)
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेट ध्रुवण घूर्णक पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन होते हैं या वे पदार्थ होते हैं जो जल-अपघटित होकर मोनोसैकेराइड के कई अणु देते हैं।

प्रश्न 2.
स्टार्च तथा सेलुलोस के मोनोमरों में संरचनात्मक अन्तर क्या होता है।
उत्तर :
स्टार्च ऐमाइलोस (20%) तथा ऐमाइलोपेक्टिन (80%) से बना होता है तथा ये दोनों α – D -ग्लूकोस से बने होते हैं। सेलुलोस β – D -ग्लूकोस अणुओं का रैखिक (linear) बहुलक (polymer) होता है।

प्रश्न 3.
मानव शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व क्या है? (2017)
उत्तर :

  1. कार्बोहाइड्रेट्स पौधों तथा जन्तुओं दोनों के लिये आवश्यक हैं ये भोजन का मुख्य घटक हैं।
  2. मोनोसैकेराइड शरीर की उपापचयी क्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  3.  ये शारीरिक ईंधन के रूप में कार्य करते हैं।
  4. ग्लूकोस शरीर के रक्त का एक मुख्य घटक है।
  5. कार्बोहाइड्रेट संचित ऊर्जा के रूप में कार्य करता है।

प्रश्न 4.
ग्लूकोस के दो रासायनिक परीक्षण लिखिए। (2009)
उत्तर :

  1. शुष्क परखनली में ग्लूकोस गर्म करने पर पिघलता है और फिर भूरा पड़ जाता है तथा जली शर्करा की-सी गन्ध आती है।
  2. अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ ग्लूकोस चाँदी का दर्पण देता है।

प्रश्न 5.
मोलिश परीक्षण क्या है? (2012, 17, 18)
उत्तर :
यह कार्बोहाइड्रेट का परीक्षण है। एक परखनली में ग्लूकोस का जलीय विलयन लेकर उसमें 2 मिली 2-नैफ्थॉल का ऐल्कोहॉलिक विलयन मिलाकर उसमें कुछ बूंद सान्द्र H2SO4 की डालने पर दो द्रवों के बीच बैंगनी रंग का वलय बनता है।

प्रश्न 6.
सुक्रोस का रासायनिक सूत्र लिखिए। शुष्क अवस्था में गर्म करने का इस पर क्या प्रभाव होता है? (2010)
उत्तर :
सुक्रोस का रासायनिक सूत्र  C12H22O11 है। शुष्क अवस्था में गर्म करने पर यह भूरे रंग का पदार्थ बनाता है।

प्रश्न 7.
इनुलिन क्या है ? इनुलिन से फ्रक्टोस कैसे प्राप्त करते हैं। समीकरण दीजिए। (2009, 17, 18)
उत्तर :
इनुलिन डहेलिया के पौधे की गाँठों से प्राप्त एक प्रकार का स्टार्च है। इनुलिन को तनु H2SO4 के साथ जल-अपघटित करने पर फ्रक्टोस औद्योगिक मात्रा में बनता है।
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प्रश्न 8.
किस बैक्टीरिया की सहायता से पशु सेलुलोस को पचाते हैं। (2014)
उत्तर :

  1. फाइब्रोबैक्टर सक्सिनोजिनस (Fibrobactor succinoginus)।
  2. रूमिनोकस फ्लेवीफेशियन्स (Ruminocus flacifaciens)।

प्रश्न 9.
स्टार्च तथा ग्लूकोस में दो अन्तर बताइए। (2016)
उत्तर :
स्टार्च तथा ग्लूकोस में प्रमुख अन्तर निम्नवत् हैं

  1. स्टार्च फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप नहीं बनाता है, जबकि ग्लूकोस बनाता है।
  2. स्टार्च टॉलेन अभिकर्मक के साथ गर्म करने पर सिल्वर दर्पण नहीं बनाता है जबकि ग्लूकोस बनाता

प्रश्न 10.
प्रोटीन के मुख्य स्रोत क्या हैं? इनमें पाये जाने वाले विभिन्न तत्त्वों के नाम लिखिए। प्रोटीन का हमारे भोजन में क्या महत्त्व है? (2009, 10, 11, 13, 15, 18)
उत्तर :
मुख्य स्रोत : दूध, अण्डा, दालें, मछली, माँस आदि।
मुख्य तत्त्व : C, H, N, 0, S हैं। महत्त्व-प्रोटीन हमारे शरीर की वृद्धि के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। ये हमारे शरीर में नये ऊतकों का निर्माण करते हैं तथा पुराने ऊतकों की टूट-फूट को ठीक करते हैं। प्रोटीन हमारे शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करते हैं, परन्तु यह कार्य कार्बोहाइड्रेट तथा वसा की अनुपस्थिति में होता है। प्रोटीन संकीर्ण नाइट्रोजनयुक्त यौगिक हैं। ये हमारे शरीर में पाये जाने वाले खून आदि का pH भी ठीक रखते हैं।

प्रश्न 11.
प्रोटीन क्या हैं? इनके महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए। (2009, 16, 17)
उत्तर :
प्रोटीन :
प्रोटीन उच्च अणुभार वाले नाइट्रोजन युक्त जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जो वनस्पति तथा जन्तु दोनों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और जल अपघटन पर 2-ऐमीनो अम्ल देते हैं। ये सभी जीव-जन्तुओं के शरीर का प्रमुख अवयव हैं। जन्तु शरीर का लगभग 19% भाग प्रोटीन का बना होता है। प्रोटीनों के उपयोग

  1. आहार के रूप में : यह भोजन का आवश्यक अंग हैं; जैसे-अण्डा, मांस, दाल इत्यादि।
  2. एन्जाइम : समस्त एन्जाइम प्रोटीन हैं।
  3. हॉर्मोन : शरीर की अनेक आवश्यक क्रियाओं में भाग लेने वाले पदार्थ प्रोटीन ही हैं।
  4. वस्त्रों में : केसीन (casein) का उपयोग कृत्रिम ऊन और रेशम के बनाने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त केसीन प्लास्टिक का उपयोग बटन बनाने में किया जाता है।
  5. औषधियों में : जिलेटिन का उपयोग कैप्सूल (capsules) और फोटोग्राफी की फिल्म तथा प्लेट बनाने में किया जाता है। दवाइयों में प्रयुक्त होने वाले ऐमीनो अम्ल प्रोटीन से प्राप्त किए जाते हैं।
  6. चमड़ा उद्योग में : चमड़े का निर्माण जानवरों की खालों की प्रोटीनों की कमाई (tanning) करके किया जाता है।

प्रश्न 12.
विटामिन A का अणुसूत्र क्या है ? इसकी कमी से क्या हानि होती है? (2010)
उत्तर :
विटामिन A का अणुसूत्र C20H29OH है। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्र रोग हो जाता है।

प्रश्न 13.
उन बीमारियों के नाम बताइए जो विटामिन ‘B’ की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं। इसके दो स्रोत भी लिखिए। या विटामिन B का क्या महत्त्व है? या विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2012)
उत्तर :
विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जल में विलेय कई विटामिनों B, B2, B6, B12 आदि का जटिल मिश्रण है। आजतक लगभग 12 विटामिन B ज्ञात हैं और इनको B1, B2,…., B6…. B12आदि कहा जाता है। बेरी-बेरी का रोग विटामिन B1 के अभाव से होता है। विटामिन B2 की कमी से त्वचा के रोग हो जाते हैं। विटामिन B12 की कमी से ऐनीमिया हो जाता है। अधिक कमी होने पर स्नायविक दोष हो जाते हैं। इनकी कमी से बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है। यह विटामिन खमीर में अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त दाल, अनाज, पत्तेदार तरकारियाँ, दूध के पदार्थ, माँस, कलेजी, अण्डे आदि इसके मुख्य स्रोत हैं।

प्रश्न 14.
विटामिन C का रासायनिक नाम तथा अणुसूत्र लिखिए। शरीर में इस विटामिन की कमी होने पर क्या हानि होती है? (2009, 11, 15, 16)
उत्तर :
विटामिन C का रासायनिक नाम ऐस्कॉर्बिक ऐसिड है तथा इसका अणुसूत्र C6H806 है। इस विटामिन के अभाव से स्कर्वी रोग हो जाता है, हड्डियाँ भंगुर होने लगती हैं तथा मसूड़े फूल जाते हैं और उनमें से रक्त आने लगता है तथा दाँत ढीले होकर गिरने लगते हैं। गर्म करने पर यह विटामिन नष्ट हो जाता है परन्तु आँवले में पाया जाने वाला विटामिन C गर्मी से नष्ट नहीं होता है। जल में अत्यधिक विलेय होने के कारण यह मूत्र के साथ शीघ्र उत्सर्जित हो जाता है तथा हमारे शरीर में संचित नहीं हो पाता। स्रोत-नींबू, आँवला, नारंगी, टमाटर, फल आदि।

प्रश्न 15.
विटामिन A तथा विटामिन D के क्या स्रोत हैं? शरीर में इनकी कमी से कौन-सी बीमारियाँ हो सकती हैं? (2009, 10, 15, 17)
उत्तर :
(i) विटामिन A के मुख्य स्रोत :
दूध, कॉड मछली का तेल, पालक, पपीता, गाजर, टमाटर आदि। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी नामक नेत्ररोग हो जाता है।
(ii) विटामिन D के मुख्य स्रोत :
सूर्य का प्रकाश, मक्खन, घी, अण्डे, मछली का तेल आदि। विटामिन D की कमी से हड्डियाँ कमजोर, लचीली और टेढ़ी पड़ जाती हैं और रिकेट्स नामक रोग हो जाता है। इसकी कमी से दाँत भी कमजोर हो जाते हैं।

प्रश्न 16.
सूर्य की किरणों की उपस्थिति में त्वचा के द्वारा कौन-सा विटामिन संश्लेषित होता है और कैसे? (2009)
उत्तर :
सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा में स्थित अगस्टीरॉल, अल्ट्रा-वायलेट किरणों के प्रभाव में विटामिन D2 में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न17.
विटामिन E की कमी से होने वाले रोग का नाम बताइए तथा इसके दो स्रोत लिखिए। (2014)
उत्तर :
विटामिन E की कमी से पेशियों में अपह्यसन होता है तथा जन्तुओं में बन्ध्यता रोग उत्पन्न होता है। विटामिन E गेहूँ के अंकुर के तेल, बिनौले के तेल आदि में पाया जाता है।

प्रश्न 18.
लिपिड क्या हैं? इनके मुख्य कार्य क्या हैं? (2014, 16)
उत्तर :
वे वसा और तेल जो जन्तुओं एवं वनस्पतिओं से प्राप्त होते हैं उन्हें लिपिड वर्ग के अन्तर्गत रखा गया है। लिपिड जल में अविलेय कार्बनिक पदार्थ हैं जो निम्न ध्रुवण के कार्बनिक विलायकों (जैसे-ईथर, क्लोरोफॉर्म) में विलेय होते हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण लिपिड इस प्रकार हैं

  1. वसा और तेल
  2. फॉस्फोलिपिड
  3. स्टेरॉयड
  4. टर्मीन्स

लिपिड के कार्य :

  1. कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के अभाव में शरीर को ऊर्जा प्रदान करना।
  2. शरीर के ताप को नियन्त्रित करना।
  3. स्टेरॉयड कोशिका झिल्ली के घटक हैं।
  4. ये हॉर्मोन्स विकास, वृद्धि, पोषण, जनन क्षमता को नियन्त्रित करते हैं।

प्रश्न 19.
मानव शरीर के लिए वसा का क्या महत्त्व है? ।
उत्तर :
वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। शरीर के कोमल भागों की रक्षा करती है और शरीर को बाहरी सर्दी, गर्मी से बचाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड तथा पॉलीसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट से आप क्या समझते हैं? इनमें कैसे विभेद कीजिएगा? । (2012) कार्बोहाइड्रेटों को उदाहरण देते हुए वर्गीकृत कीजिए। (2011, 12, 13, 17) या मोनोसैकेराइड एवं पॉलीसैकेराइड से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित वर्णन (2018) कीजिए।
उत्तर :
कार्बोहाइड्रेटों का वर्गीकरण-कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण उनकी आणविक जटिलता या उनके जल-अपघटन पर उत्पन्न पदार्थों पर आधारित है। कार्बोहाइड्रेटों को निम्नलिखित मुख्य वर्गों में बाँटा गया है।
1. मोनोसैकेराइड :
ये सरल शक्कर होती हैं। इनका जल-अपघटन नहीं किया जा सकता है। इसके अणु में कार्बन परमाणु 6 से अधिक नहीं होते हैं, जैसे कि- C6H12O6 (ग्लूकोस), C6H12O6 (फ्रक्टोस) आदि।

2. ओलिगोसैकेराइड :
जो शर्कराएँ जल-अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के कुछ अणु (2 से 10 अणु ) देती हैं ओलिगोसैकेराइड कहलाती हैं। ये शर्कराएँ डाइसैकेराइड, ट्राइसैकेराइड आदि प्रकार की होती हैं।

3. डाइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटने पर मोनोसैकेराइडों के दो अणु देती हैं; जैसे कि— C12H22O11 (सुक्रोस), C12H22O11 (माल्टोस) आदि।
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4. ट्राइसैकेराइड :
ये वे शक्करें हैं जो जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के तीन अणु देती हैं, जैसे कि– C18H32O16 (रैफिनोस)।
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5. पॉलीसैकेराइड :
ये स्वाद में मीठे नहीं होते हैं; अत: इन्हें शक्कर नहीं कहते हैं। ये जल-अपघटन पर मोनोसैकेराइडों के बहुत अधिक अणु बनाते हैं। इनका सामान्य सूत्र (C6H10O5)n, है। इनका अणुभार बहुत अधिक होता है, जैसे कि स्टार्च, सेलुलोस आदि।
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प्रश्न 2.
(i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण लिखिए।
(ii) फ्रक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित कर देता है, जबकि उसमें कीटोन समूह होता है। (2016)
उत्तर :
(i) ग्लूकोस और स्टार्च में विभेद के परीक्षण निम्नवत् हैं
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(ii) फ्रक्टोस, टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन द्वारा ऑक्सीकृत होकर क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप बनाता है। इसका कारण यह है कि दोनों अभिकर्मकों में उपस्थित क्षार की उपस्थिति में फ्रक्टोस का ग्लूकोस में पुनर्विन्यास हो जाता है, इस प्रकार प्राप्त ग्लूकोस की टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन से अभिक्रिया के फलस्वरूप क्रमशः रजत दर्पण तथा लाल अवक्षेप प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 3.
ग्लूकोस तथा सुक्रोस में विभेद करने वाले दो रासायनिक समीकरण लिखिए। (2016)
उत्तर :
1. ग्लूकोस सान्द्रH2SO4 के साथ ठण्डे में नहीं झुलसता परन्तु गर्म करने पर काला हो जाता है।
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2. सुक्रोस सान्द्र H2SO4 के साथ ठण्डे में झुलसकर काली हो जाती है।
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प्रश्न 4.
डाइसैकेराइड क्या हैं? इनके प्रकार तथा किसी एक के रासायनिक परीक्षण भी लिखिए। (2017)
उत्तर :
डाइसैकेराइड (Disaccharides) :
जो कार्बोहाइड्रेट जल अपघटित करने पर मोनोसैकेराइड के दो अणु देते हैं, डाइसैकेराइड कहलाते हैं
उदाहरण :
सुक्रोस, नाटोस, लैक्टोस। डाइसैकेराइड दो प्रकार के होते हैं

  1. अपचायी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित करते हैं उन्हें अपचायी शर्करा कहते हैं; जैसे—माल्टोज और लैक्टोस
  2. अनपचयी शर्कराएँ : जो शर्करा फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते हैं उन्हें अनपचयी शर्करा कहते हैं; जैसे-सुक्रोस

परीक्षण :

  1. डाइसैकेराइड भी अन्य कार्बोहाड्रेट की तरह मॉलिश परीक्षण देते हैं।
  2. सुक्रोस फेहलिग विलयन को अपचयित नहीं करता जबकि माल्टोस और लेक्टोस फेहलिंग विलयन को अपचयित करता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्लूकोस का संरचना सूत्र लिखिए। इसकी तीन रासायनिक अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जिनसे इसके पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड का होना सिद्ध होता है। (2015) या  उस रासायनिक समीकरण का उल्लेख कीजिए जिससे ज्ञात होता है कि ग्लूकोस में पाँच हाइड्रॉक्सिल समूह उपस्थित हैं। (2014, 15, 16)
उत्तर :
ग्लूकोस की संरचना
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(i) ग्लूकोस में –OH समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की CH3,COCI के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस पेन्टा ऐसीटेट बनता है जिससे यह सिद्ध होता है कि ग्लूकोस में 5(–OH) समूह उपस्थित
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(ii) ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस की HCN के साथ क्रिया कराने पर ग्लूकोस सायनोहाइड्रिन बनता है।
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(iii) ग्लूकोस में-CHO समूह की उपस्थिति :
ग्लूकोस फेहलिंग विलयन एवं टॉलेन अभिकर्मक को अपचयितं करता है।
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उपर्युक्त अभिक्रियाओं से यह प्रदर्शित होता है कि ग्लूकोस पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड है।

प्रश्न 2.
ऐमीनो अम्ल क्या हैं? इनका वर्गीकरण कैसे किया जाता है। उदाहरण देकर समझाइए। (2015)
उत्तर :
ऐमीनो अम्ल-ऐमीनो अम्लों के अणु प्रोटीन अणुओं की निर्माण की इकाई या एकलक इकाइयाँ हैं।
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जहाँ  R  ऐल्किल या ऐरिल समूह है।
ऐमीनो अम्लों का वर्गीकरण
1.
प्रकृति के आधार पर
(i) उदासीन ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें -NH2, तथा —COOH समूह की संख्या समान होती है, उन्हें उदासीन ऐमीनो अम्ल कहते हैं।
उदाहरण :
-NH2-CH2-COOH

(ii) अम्लीय ऐमीनो अम्ल :
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें प्रत्येक अणु में केवल एक ऐमीनो (-NH2) समूह तथा एक से अधिक कार्बोक्सिल (-COOH) समूह होते हैं।
उदाहरण :
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(iii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें एक-COOH समूह तथा एक से अधिक -NH2, समूह होते हैं।
उदाहरण :
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(iv) सल्फरयुक्त ऐमीनो अम्ल :
इनमें सल्फर उपस्थित होता है।
उदाहरण :
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2.
हाइड्रोकार्बन की प्रकृति के आधार पर
(i) ऐलिफैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐल्किल समूह होता है।
उदाहरण :
ग्लाइसीन, ऐलानीन आदि।

(ii) ऐरोमैटिक ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R ऐरिल समूह होता है।
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(iii) विषम चक्रीय ऐमीनो अम्ल :
इनमें पार्श्व श्रृंखला भाग R विषम चक्रीय होता है।
उदाहरण :
प्रोलीन
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प्रश्न 3.
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना से आप क्या समझते हैं। प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले कारकों को लिखिए। (2016)
उत्तर :
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना-किसी प्रोटीन की द्वितीयक (2°) संरचना का सम्बन्ध उस आकृति से है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला पायी जाती हैं। ये दो प्रकार की संरचनाएँ हैं α -हैलिक्स तथा β-प्लीटेड शीट संरचना।
1.α -हैलिक्स संरचना :
इस संरचना में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला दक्षिणावर्ती पेंच के समान मुड़ी रहती है। इसमें प्रत्येक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट का – NH समूह, कुण्डली के अगले मोड़ पर स्थित (- C = O) समूह के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाता है। हैलिक्स संरचना को 3-613हैलिक्स भी कहते हैं क्योंकि हैलिक्स के प्रत्येक घुमाव में 3- 6 ऐमीनो अम्ल अवशेष रहते हैं। हैलिक्स विभिन्न भागों में C = O तथा —NH समूहों के मध्य H – आबन्ध द्वारा 13 सदस्य वलय बनाती है। बालों व ऊन जैसी रेशेदार प्रोटीनों की संरचना इस प्रकार की होती है।

2. β -प्लीटेड शीट संरचना :
इस प्रकार की संरचना में सभी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ खुली हुई अवस्था में एक-दूसरे के पार्श्व में स्थित होती हैं तथा परस्पर अन्तराण्विक हाइड्रोजन बन्धों द्वारा
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जुड़ी होती हैं। अत: इस प्रकार की संरचना वाली प्रोटीन मुलायम होती है। रेशम की संरचना ऐसी ही होती है।
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प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले कारक प्रोटीन की संरचना को स्थायित्व प्रदान करने वाले प्रमुख कारक निम्न हैं

    1. आयनिक आबन्ध या लवण आबन्ध
    2. हाइड्रोजन आबन्ध
  1. हाइड्रोफोबिक आबन्ध (जलविरोधी बन्ध)
  2. डाइसल्फाइड आबन्ध

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes (हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes (हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 10
Chapter Name Haloalkanes and Haloarenes
Number of Questions Solved 65
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 Haloalkanes and Haloarenes (हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए –
(i) 2- क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन
(ii) 1-क्लोरो-4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iii) 4-तृतीयक-ब्यूटिल-3-आयोडोहेप्टेन
(iv) 1, 4-डाइब्रोमोब्यूट-2-ईन ।
(v) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक-ब्यूटिल-2-मेथिलबेंजीन।
उत्तर
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प्रश्न 2.
ऐल्कोहॉल तथा KI की अभिक्रिया में सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग क्यों नहीं करते हैं?
उत्तर
2KI + H2SO4 → 2KHSO4 + 2HI
2HI + H2SO4 → 2H2O + I2 + SO2
इन अभिक्रियाओं में H,SO, एक ऑक्सीकारक है। यह अभिक्रिया के दौरान निर्मित HI को I2 में ऑक्सीकृत कर देता है एवं HI तथा ऐल्कोहॉल की क्रिया से ऐल्किल हैलाइड के निर्माण को रोकता है। इस समस्या के निदान के लिए H2SO4 के स्थान पर फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) का प्रयोग किया जाता है, जो कि अभिक्रिया के लिए HI उपलब्ध कराता है तथा H2SO4 के समान I2 नहीं देता है।

प्रश्न 3.
प्रोपेन के विभिन्न डाइहैलोजेन व्युत्पन्नों की संरचनाएँ लिखिए।
उत्तर
प्रोपेन (CH3 CH2 CH3) के चार समावयवी डाइहैलोजन व्युत्पन्न सम्भव हैं।
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प्रश्न 4.
C5H12 अणुसूत्र वाले समावयवी ऐल्केनों में से उसको पहचानिए जो प्रकाश रासायनिक क्लोरीनीकरण पर देता है –
(i) केवल एक मोनोक्लोराइड
(ii) तीन समावयवी मोनोक्लोराइड
(iii) चार समावयवी मोनोक्लोराइड
उत्तर
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निओपेन्टेन निओपेन्टेन के सभी H-परमाणु तुल्य हैं अतएव किसी भी H-परमाणु के प्रतिस्थापन से समान उत्पाद प्राप्त होता है।
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[latex]\overset { a }{ C } { H }_{ 3 }[/latex] [latex]\overset { b }{ C } { H }_{ 2 }[/latex] [latex]\overset { c }{ C } { H }_{ 2 }[/latex] [latex]\overset { b }{ C } { H }_{ 2 }[/latex] [latex]\overset { a }{ C } { H }_{ 3 }[/latex] में समान H-परमाणुओं के तीन समुच्चय हैं, जिन्हें a, b तथा c से चिह्नित किया गया है। प्रत्येक समुच्चय से किसी एकसमान हाइड्रोजन के विस्थापन से समान उत्पाद प्राप्त होता है। अत: तीन समावयवी मोनोक्लोराइड सम्भव हैं।
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चार प्रकार के तुल्य H-परमाणु उपस्थित हैं, जिन्हें a, b,c तथा d से चिह्नित किया गया है। अतः चार समावयवी मोनोक्लोराइड संभव हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया के लिए मोनोहैलो उत्पाद की संरचना बनाइए-
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उत्तर
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प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों को क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –

  1. ब्रोमोमेथेन, ब्रोमोफॉर्म, क्लोरोमेथेन, डाइब्रोमोमेथेन
  2. 1-क्लोरोप्रोपेन, आइसोप्रोपिल क्लोराइड, 1-क्लोरोब्यूटेन

उत्तर

  1. क्वथनांकों का बढ़ता क्रम है- क्लोरोमेथेन < ब्रोमोमेथेन < डाइब्रोमोमेथेन < ब्रोमोफॉर्म
    कारण (Reason) – आण्विक द्रव्यमान बढ़ने के साथ क्वथनांक बढ़ता है।
  2. क्वथनांकों का बढ़ता क्रम है –
    आइसोप्रोपिल क्लोराइड < 1-क्लोरोप्रोपेन < 1-क्लोरोब्यूटेन
    कारण (Reason) – आण्विक द्रव्यमान बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है। समावयवी ऐल्किल हैलाइडों में शाखित समावयवी का क्वथनांक निम्न होता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित युग्मों में से आप कौन-से ऐल्किल हैलाइड द्वारा SK 2क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करने की अपेक्षा करते हैं? अपने उत्तर को समझाइए।
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उत्तर
यदि विशेष सूत्र के समावयवियों में छोड़ने वाला समूह (leaving group) समान हो तब SN 2 क्रियाविधि के सापेक्ष समावयवियों की क्रियाशीलता त्रिविम बाधा (steric hindrance) बढ़ने के साथ घटती है, अतः
(i) CH3 CH2 CH2 CH2 Br (1° ऐल्किल हैलाइड)CH3CH2– CHBr – CH3 (2° ऐल्किल हैलाइड) से अधिक क्रियाशील होता है।
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(2° ऐल्किल हैलाइड), (CH3)3 CBr (3° ऐल्किल हैलाइड) से अधिक क्रियाशील होता है।

(iii) दोनों 2° ऐल्किल हैलाइड हैं, लेकिन (II) ऐल्किल हैलाइड में C2 पर स्थित- CH3 समूह Br परमाणु के निकट स्थित है जबकि (I) ऐल्किल हैलाइड में C3 पर स्थित -CH3 समूह Br परमाणु से कुछ दूर स्थित है। इसके परिणामस्वरूप ऐल्किल हैलाइड (II) अधिक त्रिविम बाधा अनुभव करता है, अतएव SN 2 अभिक्रिया में (I), (II) की तुलना में अधिक तीव्रता से क्रिया करेगा।

प्रश्न 8.
हैलोजेन यौगिकों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा यौगिक तीव्रता से SN 1 अभिक्रिया करेगा?
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उत्तर
SN 1 अभिक्रिया में हैलोजेन यौगिकों की क्रियाशीलता आयनन के परिणामस्वरूप निर्मित कार्बोधनायन के स्थायित्व पर निर्भर करती है। स्थायित्व का क्रम तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक है। अत:
(i) (a) 3° ऐल्किल क्लोराइड है जबकि (b) 2° ऐल्किल क्लोराइड है। अतएव (a) SN 1 अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील है।
(ii) (a) 2° ऐल्किल क्लोराइड है जबकि (b) 1° ऐल्किल क्लोराइड है। अतएव 2° ऐल्किल क्लोराइड sN 1 अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में A,B,C,D,E,R तथा R’ को पहचानिए –
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उत्तर
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अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित हैलाइडों के नाम आई०यू०पी०ए०सी० (IUPAC) पद्धति से लिखिए तथा उनका वर्गीकरण, ऐल्किल, ऐलिलिक, बेन्जिलिक (प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक), वाइनिल अंथवा ऐरिल हैलाइड के रूप में कीजिए –

  1. (CH3)2CHCH(Cl)CH3
  2. CH3CH2CH(CH3)CH(C2H5)Cl
  3. CH3CH2C(CH3)2CH2I
  4. (CH3)3 CCH2CH(Br)C6H5
  5. CH3CH(CH3)CH(Br)CH3
  6. CH3C(C2H5)2CH2Br
  7. CH3C(Cl)(C2H5)CH2CH3
  8. CH3CH = C(Cl)CH2CH(CH3)2
  9. CH3CH = CHC(Br)(CH3)2
  10. p-ClC6H4CH2CH(CH3)2
  11. m-ClCH2C6H4CH2C(CH3)3
  12. o-Br-C6H4CH(CH3)CH2CH3

उत्तर

  1. 2-क्लोरो-3-मेथिलब्यूटेन, 2° ऐल्किल हैलाइड
  2. 3-क्लोरो-4 मेथिलहेक्सेन, 2° ऐल्किल हैलाइड
  3. 1-आयोडो-2,2-डाइमेथिलब्यूटेन, 1° ऐल्किल हैलाईड
  4. 1-ब्रोमो-3, 3-डाइमेथिल-1- फेनिलब्यूटेन, 2° बेन्जिलिक हैलाइड
  5. 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन, 2° ऐल्किल हैलाइड
  6. 1-ब्रोमो-2-एथिल-2-मेथिलब्यूटेन, 1° ऐल्किल हैलाइड
  7. 3-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन, 3° ऐल्किल हैलाइड
  8. 3-क्लोरो-5-मेथिलहेक्स-2-ईन, वाइनिलिक हैलाइड
  9. 4-ब्रोमो-4-मेथिलपेन्ट-2-ईन, ऐलीलिक हैलाइड
  10. 1-क्लोरो-4-(2-मेथिलप्रोपिल)- बेंजीन, ऐरिल हैलाइड
  11. 1-क्लोरोमेथिल-3-(2, 2-डाइमेथिलप्रोपिल) बेंजीन, 1° बेंजाइलिक हैलाइड
  12. 1-ब्रोमो-2-(1-मेथिलप्रोपिल) बेंजीन, ऐरिल हैलाइड

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिए –

  1. CH3CH(Cl)CH(Br)CH3
  2. CHF2CBrClF
  3. ClCH2C ≡ CCH2Br
  4. (CCl3)3CCl
  5. CH3C(p- ClC6H4)2CH(Br)CH3
  6. (CH3)3CCH = ClC6HI-P

उत्तर

  1. 2-ब्रोमो-3-क्लोरोब्यूटेन
  2. 1-ब्रोमो-1-क्लोरो-1, 2, 2-ट्राइफ्लोरोएथेन
  3. 1-ब्रोमो-4-क्लोरोब्यूट-2-आइन
  4. 2-(ट्राइक्लोरोमेथिल) -1,1,1, 2, 3, 3, 3,-हैप्टाक्लोरोप्रोपेन
  5. 2-ब्रोमो-3,3-बिस (4-क्लोरोफेनिल)ब्यूटेन
  6. 1-क्लोरो-1-(4-आयोडोफेनिल)-3, 3-डाइमेथिलब्यूट- 1-ईन

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कार्बनिक हैलोजेन यौगिकों की संरचना दीजिए –
(i) 2-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन
(ii) p-ब्रोमोक्लोरो बेन्जीन
(iii) 1-क्लोरो-4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iv) 2-(2-क्लोरोफेनिल)-1-आयोडोऑक्टेन
(v) 2-ब्रोमोब्यूटेन
(vi) 4-तृतीयक-ब्यूटिल-3-आयोडोहेप्टेन
(vii) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक-ब्यूटिल-2-मेथिल बेन्जीन
viii) 1,4-डाइब्रोमोब्यूट-2-ईन।
उत्तर
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक होगा?

  1. CH2Cl2
  2. CHCl3
  3. CCl4

उत्तर
CH2Cl2 का द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक है। इसका कारण यह है कि इसमें दोनों C-Cl आबन्ध आघूर्गों का परिणामी तथा दोनों C-H आबन्ध आघूर्गों के परिणामी एक ही दिशा में कार्य करते हैं।
CHCl3 में दोनों C – Cl आबन्ध आघूर्गों का परिणामी तीसरे C – Cl आबन्ध आघूर्ण के विपरीत दिशा में कार्य करता है।
CCl4 की आकृति सममित होने के कारण इसका द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है।
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प्रश्न 5.
एक हाइड्रोकार्बन C5H10 अँधेरे में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता, परन्तु सूर्य के तीव्र प्रकाश में केवल एक मोनोक्लोरो यौगिक C5H9Cl देता है। हाइड्रोकार्बन की संरचना क्या है?
उत्तर
हाइड्रोकार्बन C5H10 या तो एक ऐल्कीन है अथवा साइक्लोऐल्केन। चूँकि यह क्लोरीन से अन्धेरे में क्रिया नहीं करता है, अतएव यह ऐल्कीन नहीं हो सकता। इस प्रकार इसे एक साइक्लोऐल्केन होना चाहिए।
साइक्लोऐल्केन सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में Cl2 से अभिक्रिया करके मोनोक्लोरो यौगिक, C5H9Cl देता है। इसलिए साइक्लोऐल्केन के सभी 10 H-परमाणु तुल्य होंगे। अत: साइक्लोऐल्केन साइक्लोपेन्टेन (cyclopentane) है। सूर्य के प्रकाश में साइक्लोपेन्टेन निम्न प्रकार से क्लोरीन से क्रिया कर एक मोनोक्लोरो यौगिक C5H9Cl देता है –
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इस प्रकार C5H10 साइक्लोपेन्टेन है।

प्रश्न 6.
C4H9Br सूत्र वाले यौगिक के सभी समावयवी लिखिए।
उत्तर
C4H9Br एक संतृप्त यौगिक है, क्योंकि इसका पितृ हाइड्रोकार्बन C4H10 है। इसके समावयवी निम्न हैं –
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित से 1-आयोडोब्यूटेन प्राप्त करने की समीकरण दीजिए –
(i) 1-ब्यूटेनॉल
(ii) 1-क्लोरोब्यूटेन
(iii) ब्यूट-1-ईन।
उत्तर
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प्रश्न 8.
उभयदन्ती नाभिकरागी क्या होते हैं? एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर
जो नाभिकरागी अभिकर्मक किसी इलेक्ट्रॉन न्यून केन्द्र पर अपने दो भिन्न परमाणुओं के माध्यम से आक्रमण करने में सक्षम होते हैं, उन्हें उभयदन्ती नाभिकरागी कहा जाता है; जैसे- सायनाइड आयन एक उभयदन्ती नाभिकरागी है, क्योंकि यह निम्न दो अनुनाद संरचनाओं का एक संकर है और C तथा N, दोनों परमाणुओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉन न्यून केन्द्र पर आक्रमण करने में सक्षम है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रत्येक युग्मों में से कौन-सा यौगिक OH के साथ SN 2 अभिक्रिया में अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा?

  1. CH2Br अथवा CH3I
  2. (CH3)3 CCl अथवा CH3Cl

उत्तर

  1. CH3I अधिक तेजी से क्रिया करेगा, क्योंकि Br की अपेक्षा I आसानी से यौगिक को छोड़ देगा।
  2. कम त्रिविम बाधा (steric hindrance) प्रदर्शित करने के कारण CH3Cl,SN 2अभिक्रिया में तेजी से क्रिया करेगा।

प्रश्न10.
निम्नलिखित हैलाइडों के एथेनॉल में सोडियम हाइड्रॉक्साइडे द्वारा विहाइड्रोहैलोजेनीकरण के फलस्वरूप बनने वाली सभी ऐल्कीनों की संरचना लिखिए। इसमें से मुख्य ऐल्कीन कौन-सी होगी?

  1. 1-ब्रोमो-1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेन
  2. 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन
  3. 2,2,3-ट्राइमेथिल-3-ब्रोमोपेन्टेन।

उत्तर
1. चूँकि Br के दोनों ओर स्थित है-हाइड्रोजन परमाणु समतुल्य हैं, अतएव केवल एक ऐल्कीन प्राप्त होगी।
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2. 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन में समतुल्य β- हाइड्रोजनों के 2 अलग-अलग समुच्चय हैं अत: यह 2 ऐल्कीन देगा।
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चूँकि अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन अधिक स्थायी होगी अत: 2-मेथिलब्यूट-2-ईन ही मुख्य ऐल्कीन होगी।
(iii) हैलाइड में दो भिन्न प्रकार के β- हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हैं। अतएव विहाइड्रोहैलोजनीकरण अभिक्रिया में यह दो ऐल्कीन 3,4,4-ट्राइ-मेथिल पेंट-2-ईन तथा 2-एथिल-3, डाइमेथिलब्यूट-1-ईन का निर्माण करेगा। पहला ऐल्कीन अधिक स्थिर है, क्योंकि यह अधिक प्रतिस्थापित (more substituted) है (सैटजैफ नियम के अनुसार)। अतएव यह प्रमुख उत्पाद है।
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित परिवर्तन आप कैसे करेंगे?
(i) एथेनॉल से ब्यूट-1-आइन
(ii) एथीन से ब्रोमोएथेन
(iii) प्रोपीन से 1-नाइट्रोप्रोपीन
(iv) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(v) प्रोपीन से प्रोपाइन
(vi) एथेनॉल से एथिल फ्लुओराइड
(vii) ब्रोमोमेथेन से प्रोपेनोन
(viii) ब्यूट-1-ईन से ब्यूट-2-ईन
(ix) 1-क्लोरोब्यूटेन से n-ऑक्टेन
(x) बेन्जीन से बाइफेनिल
उत्तर
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प्रश्न 12.
समझाइए, क्यों –

  1. क्लोरोबेन्जीन का द्विध्रुव आघूर्ण साइक्लोहेक्सिले क्लोराइड की तुलना में कम होता है?
  2. ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय होते हुए भी जल में अमिश्रणीय हैं?
  3. ग्रीन्यार अभिकर्मक का विरचन निर्जलीय अवस्थाओं में करना चाहिए?

उत्तर
1. उच्च s- लक्षण के कारण sp2 – संकरित कार्बन sp3 – संकरित कार्बन से अधिक ऋणविद्युती होता है। अत: क्लोरोबेंजीन में C-Cl आबन्ध के sp2 – संकरित कार्बन में साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड के sp3 – ‘संकरित कार्बन की तुलना में Cl की इलेक्ट्रॉन मुक्त करने की प्रवृत्ति कम होती है, जिसके परिणामस्वरूप क्लोरोबेंजीन में C-Cl आबन्ध साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड में C-Cl आबन्ध से कम ध्रुवीय होता है। बेंजीन वलय पर Cl परमाणु के एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकरण (delocalization) के कारण क्लोरोबेंजीन के C-Cl आबन्ध में आंशिक द्विआबन्ध लक्षण आ जाते हैं। दूसरे शब्दों में क्लोरोबेंजीन में C-Cl आबन्ध साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड में C-Cl आबन्ध से छोटा होता है।
चूँकि द्विध्रुव आघूर्ण आवेश तथा दूरी को गुणनफल होता है, अत: क्लोरोबेंजीन को द्विध्रुव आघूर्ण साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड से कम होता है।

2. ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय (polar) होते हैं अत: इनके अणु द्विध्रुव आकर्षण द्वारा परस्पर बँधे रहते हैं। H2O के अणु परस्पर हाइड्रोजन आबन्ध द्वारा जुड़े रहते हैं। चूँकि जल तथा ऐल्किल हैलाइड में नये बने आबन्ध बल पूर्व से उपस्थित बलों से दुर्बल होते हैं। अतः ऐल्किल हैलाइड जल में अमिश्रणीय (immiscible) होते हैं।

3. ग्रिगनार्ड (ग्रीन्यार) अभिकर्मक अत्यधिक क्रियाशील होते हैं। ये उपकरण के अन्दर उपस्थित नमी से अभिक्रिया करते हैं। अतः ग्रिगनार्ड अभिकर्मकों को निर्जल परिस्थितियों (anhydrous conditions) में बनाते हैं।
R – MgX + H – OH → RH + Mg(OH)X

प्रश्न 13.
फ्रेऑन-12, DDT, कार्बन टेट्राक्लोराइड तथा आयोडोफॉर्म के उपयोग दीजिए। (2017, 18)
उत्तर
फ्रेऑन-12 के उपयोग (Uses of Freon-12) – यह ऐरोसॉल प्रणोदक, प्रशीतक तथा वायु शीतलन में उपयोग करने के लिए उत्पादित किए जाते हैं।
DDT के उपयोग (Uses of DDT) – DDT का उपयोग कीटनाशी के रूप में किया जाता है, परन्तु जीवों में इसके सतत अन्तर्ग्रहण से उत्पन्न विषैले प्रभावों के कारण इसे प्रतिबन्धित कर दिया गया है।
कार्बन टेट्राक्लोराइड के उपयोग (Uses of Carbon Tetrachloride)

  1. यह शुष्क धुलाई में विलायक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  2. यह औषधियों में हुकवर्म तथा कीटनाशक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  3. यह वसा, तेल, मोम तथा रेजिन के लिए भी उचित विलायक है।
  4. आयोडाइड तथा ब्रोमाइड के क्लोरीन जल परीक्षण में भी यह विलायक के रूप में प्रयुक्त किया जाता
  5. इससे फ्रेऑन-12 भी प्राप्त होता है।
  6. यह पाइरीन नाम से अग्निशामक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसके घने वाष्प जलते पदार्थ के ऊपर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं और ऑक्सीजन या वायु को जलते पदार्थ के सम्पर्क में आने से रोकते हैं। इसके उपयोग के बाद कक्ष का संवातन (ventilation) करते हैं जिससे बनी हुई फॉस्जीन पूर्णतया दूर हो जाए।

आयोडोफॉर्म के उपयोग (Uses of Iodoform) – इसका उपयोग प्रारम्भ में पूतिरोधी (ऐण्टीसेप्टिक) के रूप में किया जाता था, परन्तु आयोडोफॉर्म का यह पूतिरोधी गुण आयोडोफॉर्म के कारण स्वयं नहीं, बल्कि मुक्त हुई आयोडीन के कारण होता है। इसकी अरुचिकर गन्ध के कारण अब इसके स्थान पर आयोडीनयुक्त अन्य दवाओं का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया में बनने वाले मुख्य कार्बनिक उत्पाद की संरचना लिखिए –
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उत्तर
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए –
n-BuBr + KCN [latex]\underrightarrow { { EtOH-H }_{ 2 }O } [/latex] nBuCN
उत्तर
KCN निम्न संरचनाओं का अनुनादी संकर होता है –
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अत: CN उभयदन्ती नाभिकस्नेही के रूप में कार्य करता है। अतः यह n – BuBr में C-Br आबन्ध के कार्बन परमाणु पर C या N परमाणु से आक्रमण करता है। चूंकि C-N आबन्ध, C-C आबन्ध से दुर्बल होता है अत: C पर आक्रमण होता है तथा n -ब्यूटिल सायनाइड बनता है।
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प्रश्न 16.
SN 2 प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता के आधार पर इन यौगिकों के समूहों को क्रमबद्ध कीजिए –

  1. 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमोपेन्टेन, 2-ब्रोमोपेन्टेन
  2. 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन
  3. 1-ब्रोमोब्यूटेन, 1-ब्रोमो-2,2-डाइमेथिलप्रोपेन, 1-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन।

उत्तर

  1. 1-ब्रोमोपेन्टेन > 2-ब्रोमोपेन्टेन > 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन
  2. 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन
  3. 1-ब्रोमोब्यूटेन > 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 1-ब्रोमो-2- मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमो-2, 2-डाइमेथिलप्रोपेन

प्रश्न 17.
C6H5CH2Cl तथा C6H5CHClC6H5 में से कौन-सा यौगिक जलीय KOH से , शीघ्रता से जल-अपघटित होगा?
उत्तर

  • SN 1 परिस्थितियों में C6H5CHClC6H5,C6H5CH2Cl की तुलना में शीघ्रता से जल अपघटित होगा।
  • SN 2 परिस्थितियों में C6H5CH2Cl, C6H5CHClC6H5 की तुलना में शीघ्रता से जल-अपघटित होगा।

प्रश्न 18.
o- तथा m- समावयवियों की तुलना में p- डाइक्लोरोबेन्जीन का गलनांक उच्च एवं विलेयता निम्न होती है, विवेचना कीजिए।
उत्तर
p-समावयव अधिक सममिताकार होने के कारण क्रिस्टल जालक में भली-भाँति स्थित हो जाता है, इसलिए इसमें o- तथा m- समावयवों की तुलना में प्रबल अन्तराअणुक आकर्षण बल उपस्थित होते हैं।
चूँकि संगलन अथवा विलायकीकरण (solvation) के दौरान क्रिस्टल जालक टूटता है, इसलिए p- समावयव के संगलन अथवा इसे विलेय करने के लिए सम्बन्धित o- तथा m- समावयवों की तुलना में अधिक ऊष्मा की आवश्यकता होती है। दूसरे शब्दों में, p- समावयव का गलनांक सम्बन्धित o- तथा m- समावयव की तुलना में उच्च होता है, जबकि इसकी विलेयता निम्न होती है।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित परिवर्तन कैसे सम्पन्न किए जा सकते हैं?
(i) प्रोपीन से प्रोपेन-1-ऑल
(ii) एथेनॉल से ब्यूट-2-आइन
(iii) 1-ब्रोमोप्रोपेन से 2-ब्रोमोप्रोपेन
(iv) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल।
(v) बेन्जीन से 4-ब्रोमोनाइट्रोबेन्जीन
(vi) बेन्जिल ऐल्कोहॉल से 2-फेनिल एथेनोइक अम्ल
(vii) एथेनॉल से प्रोपेननाइट्राइल
(viii) ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन
(ix) 2-क्लोरोब्यूटेन से 3,4-डाइमेथिलहेक्सेन
(x) 2-मेथिल-1-प्रोपीन से 2-क्लोरो-1-मेथिलप्रोपेन
(xi) एथिल क्लोराइड से प्रोपेनोइक अम्ल
(xii) ब्यूट-1-ईन से n-ब्यूटिल आयोडाइड
(xiii) 2-क्लोरोप्रोपेन से 1-प्रोपेनॉल
(xiv) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल से आयोडोफॉर्म
(xv) क्लोरोबेन्जीन से p-नाइट्रोफीनॉल
(xvi) 2-ब्रोमोप्रोपेन से 1-ब्रोमोप्रोपेन
(xvii) क्लोरोएथेन से ब्यूटेन
(xviii) बेन्जीन से डाइफेनिल
(xiv) तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड से आइसो-ब्यूटिल ब्रोमाइड
(xx) ऐनिलीन से फेनिलआइसोसायनाइडे।
उत्तर
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प्रश्न 20.
ऐल्किल क्लोराइड की जलीय KOH से अभिक्रिया द्वारा ऐल्कोहॉल बनता है, लेकिन ऐल्कोहॉलिक KOH की उपस्थिति में ऐल्कीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। समझाइए।
उत्तर
जलीय विलयन में KOH लगभग पूर्ण आयनित होकर OH आयन देता है जो प्रबल नाभिकरागी होने के कारण ऐल्किल हैलाइडों पर प्रतिस्थापन अभिक्रिया करके ऐल्कोहॉल बनाते हैं। जलीय विलयन में OH आयन उच्च जलयोजित होते हैं। इससे OH आयनों का क्षारीय गुण घट जाता है जिससे ये ऐल्किल हैलाइड के β- कार्बन से हाइड्रोजन परमाणु पृथक्कृत करने में असफल हो जाते हैं तथा ऐल्कीन नहीं बना पाते।
दूसरी ओर KOH के ऐल्कोहॉली विलयन में ऐल्कॉक्साइड (RO) आयन होते हैं जो OH से प्रबल क्षार होने के कारण सरलतापूर्वक ऐल्किल क्लोराइड से HCl अणु का विलोपन करके ऐल्कीन बना लेते हैं।

प्रश्न 21.
प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड C4H9Br (क), ऐल्कोहॉलिक KOH से अभिक्रिया द्वारा यौगिक (ख) देता है। यौगिक ‘ख’ HBr के साथ अभिक्रिया से यौगिक ‘ग देता है जो कि यौगिक ‘क’ का समावयवी है। जब यौगिक ‘क’ की अभिक्रिया सोडियम धातु से होती है तो यौगिक ‘घ’ C8H18 बनता है, जो कि ब्यूटिल ब्रोमाइड की सोडियम से अभिक्रिया द्वारा बने उत्पाद से भिन्न है। यौगिक ‘क’ का संरचना सूत्र दीजिए तथा सभी अभिक्रियाओं की समीकरण दीजिए।
उत्तर
आण्विक सूत्र C4H9Br के दो प्राथमिक हैलाइड निम्नलिखित हो सकते हैं –
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अतः यौगिक (क) या तो n- ब्यूटिल ब्रोमाइड है या आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड।
चूँकि यौगिक ‘क’ की अभिक्रिया सोडियम धातु से होने पर यौगिक ‘घ’ (आण्विक सूत्र C8H18) प्राप्त होता है जो कि n-ब्यूटिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम धातु से होने पर प्राप्त यौगिक से भिन्न है, इसलिए यौगिक ‘क’ आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड होना चाहिए तथा यौगिक ‘घ’ 2,5-डाइमेथिलहेक्सेन होना चाहिए।
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अब यदि यौगिक ‘क’ आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड है तो यौगिक ‘ख’, जो यौगिक ‘क’ की ऐल्कोहॉलिक KOH से अभिक्रिया द्वारा प्राप्त होता है, 2-मेथिल-1-प्रोपीन होना चाहिए।
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यौगिक ‘ख’ HBr के साथ अभिक्रिया से मार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार यौगिक ‘ग’ देता है। इसलिए यौगिक ‘ग’ तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड है जो यौगिक ‘क’ (आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड) का एक समावयव है।
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इस प्रकार, ‘क’ आईसोब्यूटिल ब्रोमाइड, ‘ख’ 2-मेथिल-1-प्रोपीन, ‘ग’ तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड तथा ‘घ’ 2,5-डाइमेथिलहेक्सेन है।

प्रश्न 22.
तब क्या होता है जब –
(i) n-ब्यूटिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ अभिकृत किया जाता है?
(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोबेन्जीन की अभिक्रिया मैग्नीशियम से होती है?
(iii) क्लोरोबेन्जीन का जल-अपघटन किया जाता है?
(iv) एथिल क्लोराइड की अभिक्रिया जलीय KOH से होती है?
(v) शुष्क ईथर की उपस्थिति में मेथिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम से होती है?
(vi) मेथिल क्लोराइड की अभिक्रिया KCN से होती है?
उत्तर
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(vi) मेथिल सायनाइड बनता है।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
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(i) 1, 1-डाइएथिल-2, 2-डाइमेथिलपेन्टेन
(ii) 4, 4 डाइमेथिल-5, 5-डाइएथिलपेन्टेन
(iii) 5, 5- डाइएथिल-4, 4-डाइमेथिलपेन्टेन
(iv) 3-एथिल-4, 4-डाइमेथिलहेप्टेन
उत्तर
(iv) 3-एथिल-4, 4-डाइमेथिलहेप्टेन

प्रश्न 2.
प्रदर्शित यौगिक का IUPAC नाम है –
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(i) 2-ब्रोमो-6-क्लोरोसाइक्लोहेक्स-1-ईन
(ii) 6-ब्रोमो-2-क्लोरोसाइक्लोहेक्सेन
(iii) 3-ब्रोमो-1-क्लोरोसाइक्लोहेक्सीन
(iv) 1-ब्रोमो-3-क्लोरोसाइक्लोहेक्सीन
उत्तर
(iii) 3-ब्रोमो-1-क्लोरोसाइक्लोहेक्सीन

प्रश्न 3.
निम्न यौगिकों में से किसका क्वथनांक उच्चतम है?
(i) CH3CH2CH2Cl
(ii) CH3CH2CH2CH2Cl
(iii) CH3CH2(CH3)CH2Cl
(iv) (CH3)3Cl
उत्तर
(ii) CH3CH2CH2CH2Cl

प्रश्न 4.
3-फेनिलप्रोपीन HBr से क्रिया करके मुख्य उत्पाद देता है –
(i) C6H5CH2CH(Br)CH3
(ii) C6H5CH(Br)CH2CH3
(iii) C6H5CH2CH2CH2Br
(iv) C6H5CH(Br)CH = CH2
उत्तर
(i) C6H5CH2CH(Br)CH3

प्रश्न 5.
ऐल्कोहॉलीय KOH के प्रति निम्न में से सर्वाधिक क्रियाशील है- ,
(i) CH = CHBr
(ii) CH3COCH2CH2Br
(iii) CH3CH2Br
(iv) CH3CH2CH2Br
उत्तर
(iv) CH3CH2CH2Br

प्रश्न 6.
अभिक्रियाओं के निम्न अनुक्रम में ऐल्कीन यौगिक बनाती है। यौगिक B है
CH3CH = CHCH3 [latex]\xrightarrow [ { O }_{ 3 } ]{ { cCl }_{ 4 } } [/latex] A [latex]\xrightarrow [ { H }_{ 2 }O ]{ Zn }[/latex] B
(i) CH3CH2CHO
(ii) CH3COCH3
(iii) CH3CH2COCH3
(iv) CH3CHO
उत्तर
(iv) CH3CHO

प्रश्न 7.
CH3CH BrCH2 -CH3 [latex]\underrightarrow { Alc.KOH } [/latex] का मुख्य उत्पाद है – (2017)
(i) प्रोपीन-1
(ii) ब्यूटीन-2
(iii) ब्यूटेन
(iv) ब्यूटाइन-1
उत्तर
(ii) ब्यूटीन-2

प्रश्न 8.
ऐल्कोहॉलीय KOH की उपस्थिति में किस मिश्रण के साथ कार्बिल ऐमीन परीक्षण किया जाता है? (2017)
(i) क्लोरोफॉर्म एवं रजत चूर्ण
(ii) त्रि-हैलोजनीकृत मेथेन और एक प्राथमिक ऐमीन
(iii) एक ऐल्किल हैलाइड और एक प्राथमिक ऐमीन
(iv) एक ऐल्किल सायनाइड और एक प्राथमिक ऐमीन
उत्तर
(ii) त्रि-हैलोजनीकृत मेथेन और एक प्राथमिक ऐमीन

प्रश्न 9.
निम्नलिखित अभिक्रिया C6H6 + Cl, I उत्पाद, में उत्पाद है। (2014)
(i) C6H5Cl
(ii) o- C6C4Cl2
(iii) C6H6Cl6
(iv) p-C6H4Cl2
उत्तर
(iii) C6H6Cl6

प्रश्न 10.
CHCl3 ऑक्सीकरण पर देता है – (2017, 18)
(i) फॉस्जीन
(ii) फॉर्मिक अम्ल
(iii) कार्बन टेट्रा क्लोराइड
(iv) क्लोरोपिक्रिन
उत्तर
(i) फॉस्जीन

प्रश्न11.
क्लोरोपिक्रिन है – (2018)
(i) CCl3HNO2
(ii) CCl3. NO2
(iii) CCl2(NO2)2
(iv) CCl2H2NO2
उत्तर
(ii) CCl3. NO2

प्रश्न 12.
जब क्लोरोफॉर्म सान्द्र HNO3 से अभिक्रिया करता है तो निम्न में से क्या बनता है? (2017)
(i) CHCl3NO2
(ii) C(NO2)Cl3
(iii) CHCl3HNO3
(iv) CHCl2NO2
उत्तर
(ii) C(NO2)Cl3

प्रश्न 13.
फॉस्जीन है – (2017)
(i) PH3
(ii) POCl3
(iii) CS2
(iv) COCl2
उत्तर
(iv) C0Cl2

प्रश्न 14.
क्लोरोफॉर्म का प्रयोग होता है – (2014)
(i) एक कीटनाशक के रूप में।
(ii) एक फफूदीनाशक के रूप में
(iii) औद्योगिक विलायक के रूप में
(iv) अवशोषक के रूप में
उत्तर
(iii) औद्योगिक विलायक के रूप में

प्रश्न 15.
आयोडोफॉर्म निम्न में से किससे नहीं बनाई जा सकती?
(i) एथिल मेथिल कीटोन
(ii) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल
(iii) 2-मेथिल-2-ब्यूटेनॉन
(iv) आइसोब्यूटिल ऐल्कोहॉल
उत्तर
(iv) आइसोब्यूटिल ऐल्कोहॉल

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कारण दीजिए- ऐल्किल हैलाइडों में C-X के ध्रुवीय होने पर भी यह जल में अविलेय होता है।
उत्तर
ऐसा जल के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाने की अयोग्यता एवं जल में उपस्थित हाइड्रोजन आबन्ध को न तोड़ पाने के कारण होता है।

प्रश्न 2.
ध्रुवण घूर्णक पदार्थ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
वह पदार्थ जो समतल ध्रुवित प्रकाश के तल को एक निश्चित कोण तक घुमाने की प्रवृत्ति रखता है, ध्रुवण घूर्णक पदार्थ कहलाता है।

प्रश्न 3.
असममित कार्बन परमाणु किसे कहते हैं?
उत्तर
वह कार्बन परमाणु जिसकी चारों संयोजकताएँ भिन्न-भिन्न परमाणुओं या समूहों द्वारा सन्तुष्ट होती हैं, उसे असममित कार्बन परमाणु कहते हैं।

प्रश्न 4.
प्रकाश समावयवी से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
समान अणुसूत्र तथा समान रासायनिक संरचनाओं वाले दो-या-दो से अधिक यौगिक जो समतल ध्रुवित प्रकाश के प्रति भिन्न व्यवहार दर्शाते हैं, प्रकाश समावयवी कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
C2H5O2Br सूत्र वाला एक कार्बोक्सिलिक अम्ल प्रकाश सक्रिय है। उसकी संरचना लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 6.
किस ऐल्किल हैलाइड का घनत्व सर्वाधिक होता है और क्यों?
उत्तर
CH3I का घनत्व सर्वाधिक होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसमें कार्बन की संख्या न्यूनतम है और यह सबसे भारी हैलोजन है।

प्रश्न 7.
निम्न को क्वथनांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
CH3 CH2 CH2 CH2Br, (CH3)3 CBr, (CH3)2 CHCH2Br
उत्तर
(CH3)3 CBr < (CH3)2 CHCH2Br < CH3CH2CH2CH2Br

प्रश्न 8.
कारण दीजिए-ऐल्किल हैलाइड ऐरिल हैलाइड से श्रेष्ठ विलायक होते हैं।
उत्तर
हैलोऐल्केनों में C- X आबन्ध हैलोऐरीनों से अधिक ध्रुवीय होता है। C – X आबन्ध की ध्रुवता के कारण ऐल्किल हैलाइड ऐरिल हैलाइड से श्रेष्ठ विलायक होते हैं।

प्रश्न 9.
कारण दीजिए-उद्योगों में प्रयुक्त विलायक हैलोऐल्केन ब्रोमो यौगिकों के विपरीत क्लोरो यौगिक होते हैं।
उत्तर
क्लोरीन, ब्रोमीन की तुलना में अधिक ऋणविद्युती होने के कारण ऐल्किल क्लोराइड में C-Cl आबन्ध ऐल्किल ब्रोमाइड में C- Br आबन्ध से अधिक ध्रुवीय (polar) होता है। आबन्ध की उच्च ध्रुवता के कारण क्लोरोऐल्केन ब्रोमोऐल्केनों की तुलना में श्रेष्ठ विलायक होते हैं।

प्रश्न 10.
किन परिस्थितियों में 2-मेथिलप्रोपीन को हाइड्रोजन ब्रोमाइड द्वारा आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड में परिवर्तित किया जा सकता है?
उत्तर
परॉक्साइडों की उपस्थिति में HBr के प्रतिमार्कोनीकॉफ योग द्वारा।
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प्रश्न11.
निम्न में से कौन-सा यौगिक SN 2 अभिक्रिया में OH के साथ शीघ्रता से अभिक्रिया करेगा?
CH2= CHBr अथवा CH= CHCH2Br
उत्तर
CH2= CHCH2Br शीघ्रता से अभिक्रिया करेगा क्योंकि ऐलिल ब्रोमाइड, वाइनिल ब्रोमाइड से अधिक क्रियाशील होते हैं।

प्रश्न 12.
वाइनिल क्लोराइड एथिल क्लोराइड की तुलना में धीमे जल-अपघटित होता है, क्यों?
उत्तर
वाइनिल क्लोराइड को निम्नलिखित संरचनाओं के अनुनादी संकर के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है –
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अनुनाद के कारण C-Cl आबन्ध में कुछ द्विआबन्ध लक्षण आ जाते हैं। दूसरी ओर एथिल क्लोराइड में कार्बन-क्लोरीन आबन्ध शुद्ध एकल आबन्ध होता है। अतः वाइनिल क्लोराइड एथिल क्लोराइड की तुलना में धीमे जल-अपघटित होता है।

प्रश्न 13.
ट्राइक्लोरोमेथेन को गहरी रंगीन बोतलों में संगृहीत करते हैं। तर्क दीजिए। (2017)
उत्तर
ट्राइक्लोरोमेथेन या क्लोरोफॉर्म प्रकाश की उपस्थिति में वायुमण्डलीय ऑक्सीजन से ऑक्सीकृत होकर अत्यधिक विषैली गैस फॉस्जीन (COCl2) बनाता है।
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अत: प्रकाश से बचाने के लिए क्लोरोफॉर्म को गहरी रंगीन, बोतलों में संगृहीत किया जाता है।

प्रश्न 14.
कारण दीजिए-क्लोरोफॉर्म क्लोरीन यौगिक है फिर भी यह सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ कोई अवक्षेप नहीं देता है, क्यों?
उत्तर
क्लोरोफॉर्म सहसंयोजी यौगिक है, अत: यह क्लोराइड आयन नहीं देता है। इसलिए यह AgNO3 के साथ किसी प्रकार का अवक्षेप नहीं देता है।

प्रश्न 15.
क्लोरोफॉर्म को प्रकाश एवं वायु के प्रभाव से बचाने के लिए कौन-सी सावधानियाँ बरती जाती हैं? (2017)
उत्तर
क्लोरोफॉर्म को रंगीन बोतलों में, काले कागज में लपेटकर, अंधेरे में, मुँह तक भर कर तथा 1 % C2H5OH की कुछ बूंद मिलाकर रखना चाहिए।

प्रश्न 16.
क्लोरोबेन्जीन की बेन्जीन रिंग की एक प्रतिस्थापन अभिक्रिया को समीकरण लिखिए। (2017)
उत्तर
क्लोरोबेन्जीन का नाइट्रीकरण
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प्रश्न17.
कौन-सा रसायन ओजोन परत को क्षति पहुँचाता है?
उत्तर
फ्रेऑन (CFCs)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए

  1. राइमर टीमन अभिक्रिया (2016, 17)
  2. कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया (2016)
  3. वुज-फिटिग अभिक्रिया। (2016, 17, 18)
  4. फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया (2016)
  5. विहाइड्रोहैलोजेनीकरण या डिहाइड्रोहैलोजेनीकरण (2016)

उत्तर
1. जब फीनॉल, क्लोरोफॉर्म तथा ऐल्कोहॉलिक KOH के मिश्रण को गर्म किया जाता है तो सैलिसिलेल्डिहाइड बनता है, जिसे ऑर्थों-हाइड्रॉक्सीबेन्जेल्डिहाइड कहते हैं।
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यह अभिक्रिया राइमर यमन अभिक्रिया कहलाती है।
2. क्लोरोफॉर्म को ऐनिलीन और ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गर्म करने पर अभिक्रिया द्वारा तीव्र दुर्गन्ध युक्त पदार्थ आइसोसायनाइड बनता है। यह अभिक्रिया कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहलाती है।
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3. जब ऐरिल हैलाइड को ऐल्किल हैलाइड के साथ धात्विक सोडियम की उपस्थिति में शुष्क ईथर विलयन में अभिकृत किया जाता है तो बेन्जीन का ऐल्किल व्युत्पन्न प्राप्त होता है। यह अभिक्रिया वुज-फिटिग अभिक्रिया कहलाती है।
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4. क्लोरोबेन्जीन मेथिल क्लोराइड के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में अभिक्रिया द्वारा o- मेथिल तथा p- मेथिल क्लोरोबेन्जीन का मिश्रण देता है।
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यह अभिक्रिया फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया कहलाती है।
5. ऐल्कोहॉलिक KOH वे NaNH2 को गर्म करने पर ऐल्काइन बनते हैं।
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इसे विहाइड्रोहैलोजेनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 2.
ट्राइआयोडोमेथेन (आयोडोफॉर्म) पर एक टिप्पणी लिखिए। (2017, 18)
उत्तर
यह मेथेन का ट्राइआयोडो व्युत्पन्न (derivative) है तथा औषधियों एवं रासायनिक उद्योगों में कई प्रकार से उपयोग किया जाता है। सामान्यत: इसे आयोडोफॉर्म (iodoform) कहते हैं।
यह विशिष्ट गन्ध वाला पीला क्रिस्टलीय ठोस है। इसका उपयोग प्रारम्भ में पूतिरोधी (ऐंटिसेप्टिक) के रूप में किया जाता था। आयोडोफॉर्म का यह पूतिरोधी गुण स्वयं आयोडोफॉर्म के कारण नहीं बल्कि मुक्त हुई आयोडीन के कारण होता है। इसकी अरुचिकर गंध के कारण अब इसके स्थान पर आयोडीनयुक्त अन्य दवाओं का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
फ्रेऑन क्या है? इसका पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है? (2016, 17)
या
किसी फ्रेऑन का रासायनिक सूत्र लिखिए। (2017)
या
फ्रेऑन क्या है? इसका एक उपयोग लिखिए। (2018)
उत्तर
ऐल्केनों के पॉलिक्लोरोफ्लुओरो व्युत्पन्नों को फ्रेऑन कहते हैं। पॉलिक्लोरोफ्लुओरोमेथेन तथा पॉलिक्लोरोफ्लुओरोएथेन महत्त्वपूर्ण फ्रेऑन हैं, जैसे –

  1. CFCl3 ट्राइक्लोरोफ्लुओरोमेथेन (फ्रेऑन-11)
  2. CF2Cl2 डाइक्लोरोडाइफ्लुओरोमेथेन (फ्रेऑन-12)
  3. C2F2Cl4 ट्रेट्रीक्लोरोडाइफ्लुओरोएथेन (फ्रेऑन-112)

CFCl3 में कार्बन तथा फ्लुओरीन का अनुपात 1: 1 है, अत: इस कारण इसका नाम फ्रेऑन-11 है। CF2Cl2 में कार्बन तथा फ्लुओरीन का अनुपात 1: 2 है, अतः इस कारण इसका नाम फ्रेऑन-12 है।
फ्रेऑन के गुण – फ्रेऑन रंगहीन, गन्धहीन, विषहीन, अत्यन्त अक्रिय तथा कम क्वथनांक वाले द्रव हैं। ये बहुत कम दाब पर ही गैस अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं, इस कारण इनका उपयोग रेफ्रीजेरेटर तथा वातानुकूलन में प्रशीतक के रूप में होता है। इन यौगिकों को संक्षिप्त रूप में CFCs भी कहते हैं। इनका पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। इनको ओजोन परत को नष्ट करने के लिए उत्तरदायी माना जा रहा है।

प्रश्न 4.
डी डी टी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2017)
या
डी डी टी का उपयोग लिखिए तथा पर्यावरण पर इसका क्या प्रभाव पडता है? (2016, 17)
उत्तर
DDT का उपयोग एक सम्पर्क कीटनाशक (contact insecticide) की भाँति किया जाता है। सस्ता तथा शक्तिशाली होने के कारण मक्खी, मच्छर, कीड़े-मकोड़े, शलभ तथा कृषि पीड़कों को मारने के लिए इसका व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है।
यह मुख्यत: मलेरिया फैलाने वाले ऐनोफीलीज मच्छर (Anopheles mosquito) तथा टाइफस वाहक जुओं को समाप्त करने में प्रभावकारी है।

द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् कीटनाशक के रूप में DDT का उपयोग विश्व स्तर पर तेजी से बढ़ा। 1940 ई० के अन्त में DDT के अत्यधिक उपयोग के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएँ सामने आने लगीं। कीटों की अनेक प्रजातियों ने DDT के प्रति प्रतिरोधात्मकता विकसित कर ली तथा यह मछलियों के लिए अति विषैली सिद्ध हुई। DDT के अत्यधिक रासायनिक स्थायित्व तथा इसकी वसा में विलेयता ने समस्या को और जटिल बना दिया। जन्तुओं द्वारा DDT का शीघ्रता से उपापचय नहीं होता है बल्कि यह वसीय ऊतकों में एकत्र तथा संग्रहित हो जाती है। यदि जन्तु इसका निरन्तर अन्तर्ग्रहण करता रहता है तो समय के साथ इसकी मात्रा निरन्तर बढ़ती जाती है। यह बढ़ी हुई मात्रा जन्तुओं के जनन तन्त्र पर विपरीत प्रभाव डालती है। इसके दुष्प्रभावों (ill effects) को देखते हुए, यू० एस० ए० ने 1973 ई० में DDT पर प्रतिबन्ध लगा दिया था यद्यपि विश्व में अनेक स्थानों पर इसका उपयोग आज भी हो रहा है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्लोरोबेन्जीन बनाने की विधियों का वर्णन कीजिए। इसके भौतिक तथा रासायनिक गुण लिखिए। इसके उपयोग बताइए। (2016)
या
टिप्पणी लिखिए-सैण्डमायर अभिक्रिया। (2016)
या
क्लोरोबेन्जीन का हैलोजन वाहक की उपस्थिति में हैलोजनीकरण किस प्रकार होता है? सम्बन्धित समीकरण लिखिए। (2018)
उत्तर
सूत्र
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प्रयोगशाला विधि – प्रयोगशाला में क्लोरोबेन्जीन को विरचन बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ क्यूप्रस क्लोराइड (Cu2Cl2) की उपस्थिति में लगभग 60°C ताप पर गर्म करके किया जाता है। इस अभिक्रिया को सैण्डमायर अभिक्रिया कहते हैं। अभिक्रिया में प्रयुक्त डाइऐजोनियम लवण ऐनिलीन की 0°C से 5°C पर सोडियम नाइट्राइट तथा तनु HCl की डाइऐजोटीकरण (diazotisation) अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।
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बेन्जीन से – हैलोजेनवाहक की उपस्थिति में गर्म बेन्जीन में शुष्क क्लोरीन गैस प्रवाहित करने से क्लोरोबेन्जीन बनती है।
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फीनॉल से – फीनॉल पर फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड की अभिक्रिया से C6H5Cl बनता है। इस अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद (C6H5)3PO4 होता है।
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गाटरमान अभिक्रिया द्वारा – इस अभिक्रिया में बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को कॉपर चूर्ण व HCl के साथ गर्म करने पर क्लोरोबेन्जीन बनती है।
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भौतिक गुण – क्लोरोबेन्जीन रंगहीन, सुगन्धित भारी द्रव होता है। इसका क्वथनांक 132°C होता है। यह जल में अविलेय, परन्तु ऐल्कोहॉल तथा ईथर में पूर्ण विलेय है।

रासायनिक गुण 
1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया – क्लोरोबेन्जीन को उच्च दाब (200 वायुमण्डल) तथा उच्च ताप (300°C) पर जलीय NaOH के साथ अभिकृत करने पर फीनॉल बनता है।
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2. अमोनिया की अभिक्रिया – क्लोरोबेन्जीन को अमोनिया के जलीय विलयन के साथ क्यूप्रस ऑक्साइड की उपस्थिति में उच्च दाब पर 200°C ताप तक गर्म करने पर इसका CI परमाणु-NH, समूह द्वारा प्रतिस्थापित होकर ऐनिलीन बनाता है।
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3. वुज-फिटिग अभिक्रिया – जब एक अणु ऐरिल हैलाइड तथा दूसरा अणु ऐल्किल हैलाइड सोडियम के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में अभिक्रिया करके ऐल्किल ऐरीन देता है, तो यह अभिक्रिया वुज-फिटिग अभिक्रिया कहलाती है। जैसे- क्लोरोबेन्जीन शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम और मेथिल क्लोराइड के साथ गर्म करने पर टॉलुईन देती है।
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4. फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया – इस अभिक्रिया में क्लोरोबेन्जीन मेथिल क्लोराइड के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में अभिक्रिया द्वारा o-मेथिल तथा p- मेथिल क्लोरोबेन्जीन का मिश्रण देता है।
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5. हैलोजनीकरण – जब क्लोरोबेन्जीन का किसी हैलोजनवाहक की उपस्थिति में हैलोजनीकरण कराया जाता है, तो 0- वे p- डाईक्लोरोबेंजीन की प्राप्ति होती है।
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क्लोरोबेन्जीन के उपयोग

  1. विभिन्न ऐरोमैटिक यौगिकों के निर्माण में।
  2. कीटनाशक पदार्थ डी०डी०टी० के निर्माण में।
  3. फफूदनाशी, डाइऐजोरंजकों आदि के निर्माण में।

प्रश्न 2.
प्रयोगशाला में क्लॉरोफॉर्म बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। प्राप्त क्लॉरोफॉर्म से शुद्ध क्लोरोफॉर्म कैसे प्राप्त करोगे? इसके प्रमुख गुणधर्म व उपयोग भी दीजिए। या रासायनिक समीकरण देते हुए समझाइए कि एथिल ऐल्कोहॉल से क्लोरोफॉर्म कैसे बनाया जाता है? क्लोरोफॉर्म को गहरे रंग की बोतलों में क्यों रखा जाता है? (2017)
उत्तर
सूत्र– CHCl3 I.U.P.A.C. नाम – ट्राइक्लोरोमेथेन
प्रयोगशाला में शुद्ध क्लॉरोफॉर्म का विरचन – प्रयोगशाला में शुद्ध क्लोरोफॉर्म का विरचन निम्न दो प्रकार से किया जाता है –
(i) एथिल ऐल्कोहॉल से क्लोरोफॉर्म – एथिल ऐल्कोहॉल को नम विरंजक चूर्ण (bleaching powder) के साथ मिलाकर आसवन करने पर क्लोरोफॉर्म प्राप्त होता है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित पदों में होती है –
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(ii) ऐसीटोन से क्लोरोफॉर्म – ऐसीटोन के नम विरंजक चूर्ण के साथ आसवन से भी क्लोरोफॉर्म बनता है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित पदों में होती है –
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एक गोल पेंदी के फ्लास्क में 200 ग्राम विरंजक चूर्ण की 400 मिली जल से बनी लेई और 50 मिली ऐसीटोन या ऐल्कोहॉल लेकर जल ऊष्मक के ऊपर गर्म करते हैं। जिससे जल तथा क्लोरोफॉर्म का मिश्रण आसवित होकर जल से भरे ग्राही पात्र में इकट्ठा हो जाता है। पृथक्कारी कीप द्वारा आसुत द्रव का नीचे वाला अंश एकत्रित करते हैं। अम्लीय अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसे NaOH विलयन द्वारा धोकर, फिर जल से धोकर और इसमें निर्जल CaCl2 मिलाकर पुन: आसवित करते हैं जिससे लगभग 61°C पर शुद्ध क्लोरोफॉर्म प्राप्त होता है।

भौतिक गुण – यह एक रंगहीन, मीठी गन्ध वाला, ज्वलनशील द्रव है। इसका क्वथनांक 61°C तथा आपेक्षिक घनत्व 1.485 है। यह जल में अविलेय, किन्तु ईथर व ऐल्कोहॉल में विलेय है। इसकी वाष्प को सँघने से कुछ समय के लिए मूच्र्छा आ जाती है। इसी गुण के कारण इसका उपयोग निश्चेतक (anaesthetic) के रूप में किया जाता है।

रासायनिक गुण
1. ऑक्सीकरण – सूर्य के प्रकाश तथा वायु में खुला रखने से फॉस्जीन (विषैली) या कार्बोनिल क्लोराइड गैस बनती है।
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क्लोरोफॉर्म को गहरे भूरे रंग की बोतल में ऊपर तक भरकर इसलिए रखते हैं, जिससे प्रकाश और वायु अन्दर न पहुँच सके अन्यथा क्लोरोफॉर्म धीरे-धीरे ऑक्सीकृत होकर फॉस्जीन गैस बनाता है जो कि अत्यन्त घातक विष है। क्लोरोफॉर्म में 1% एथिल ऐल्कोहॉल संदमक (inhibitor) के रूप में डालते हैं और लाल-भूरे रंग की बोतल में रखते हैं जो प्रकाश को रोकती है। एथेनॉल इस अभिक्रिया में ऋणात्मक उत्प्रेरक का कार्य करता है। एथिल ऐल्कोहॉल की उपस्थिति में वायु द्वारा क्लोरोफॉर्म के ऑक्सीकरण की गति अत्यन्त धीमी पड़ जाती है अर्थात् क्लोरोफॉर्म को स्थायित्व बढ़ जाता है। यदि कुछ फॉस्जीन बनता भी है तो वह एथिल ऐल्कोहॉल से अभिक्रिया करके डाइएथिल कार्बोनेट बनाता है जो विषैला नहीं होता है।
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2. अपचयन – यह जिंक और जल के साथ उबालने पर अपचयित होकर मेथेन देता है, Zn और तनु HCl के साथ अपचयित होकर मेथिलीन क्लोराइड देता है, जबकि Zn तथा ऐल्कोहॉलिक HCl द्वारा अपचयन पर मेथिल क्लोराइड बनता है।
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3. क्लोरीन से अभिक्रिया – कार्बन टेट्रोक्लोराइड प्राप्त होता है।
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4. ऐसीटोन से अभिक्रिया – क्षार की उपस्थिति में ऐसीटोन से संघनन अभिक्रिया द्वारा क्लोरीटोन प्राप्त होता है जिसका उपयोग निद्राकारी औषधि के निर्माण में होता है।
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5. नाइट्रिक अम्ल से क्रिया – नाइट्रोक्लोरोफॉर्म (या क्लोरोपिक्रिन) प्राप्त होता है, जिसका उपयोग कीटनाशक व अश्रु (tear) गैस के रूप में होता है।
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उपयोग – क्लोरोफॉर्म के निम्नलिखित उपयोग हैं –

    1. 30% ईथर में इसका विलयन शल्य चिकित्सा में निश्चेतक के रूप में।
    2. लाख, रबड़, चर्बी आदि के लिए विलायक के रूप में।
  1. दवाईयों के रूप में।
  2. जीवाणुनाशक के रूप में।
  3. सुगन्धित पदार्थ के रूप में।
  4. टेफ्लॉन (PTFE) के निर्माण में।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines (ऐमीन) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 13 Amines (ऐमीन).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 13
Chapter Name Amines
Number of Questions Solved 67
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines (ऐमीन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए.
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(iii) (C2H5)CHNH2,
(iv) (C2H5)2 NH.
उत्तर :
(i) प्राथमिक ऐमीन
(ii) तृतीयक ऐमीन ।
(iii) प्राथमिक ऐमीन
(iv) द्वितीयक ऐमीन।

प्रश्न 2.
(i) अणुसूत्र C4H11N  से प्राप्त विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना लिखिए।
(ii) सभी समावयवों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए।
(iii) विभिन्न युग्मों द्वारा कौन-से प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है? या सूत्र  C4H11N  से कितने प्राथमिक ऐमीन सम्भव हैं?
उत्तर :
आठ समावयवी ऐल्कीन सम्भव हैं
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N,N-डाइमेथिलएथेनेमीन (तृतीयक)
विभिन्न ऐमीनों द्वारा प्रदर्शित समावयवता :

  • श्रृंखला समावयवी : (i) तथा(ii); (iii) तथा (iv); (i) तथा (iv)
  • स्थाने समावयवी : (ii) तथा (iii); (ii) तथा (iv)
  • मध्यावयवी : (v) तथा (vi); (vii) तथा (viii)
  • क्रियात्मक समावयवी : तीनों प्रकार की ऐमीन एक-दूसरे की क्रियात्मक समावयवी होती हैं।

प्रश्न 3.
आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे?
(i) बेन्जीन से ऐनिलीन
(ii) बेन्जीन से N, N-डाइमेथिल ऐनिलीन
(iii) Cl—(CH2)4—Cl से हेक्सेन – 1, 6 – डाइऐमीन
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 13 Amines image 4

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को उनके बढ़ते हुए क्षारकीय प्रबलता के क्रम में लिखिए
(i) C2H5NH2,  C6H5NH2,  NH3,  C6H5NH2NH2)  तथा  (C2H5)2 NH
(ii) C2H5NH2,  (C2H5)2 NH,  (C2H5)3 N,  C6H5NH2
(iii) CH3NH2,  (CH3)2NH,  (CH3)3N,  C6H5NH2,  C6H5CH2NH2
उत्तर :
(i) C6H5NH2 < NH3 < C6H5CH2NH2 < C2H5NH2, < (C2H5)2 NH
(ii) C6H5NH2 <  C2H5NH2<  (C2H5)3N < (C2H5)2 NH
(iii) C6H5NH2  <  C6H5CH2NH2 < (CH3)3N < CH3NH2 < (CH3)2NH

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अम्ल-क्षारक अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए तथा उत्पादों के नाम लिखिए
(i) CH3CH2CH2NH2 + HCl →
(ii) ( (C2H5)2 N  + HCl   →
उत्तर :
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प्रश्न 6.
सोडियम कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में मेथिल आयोडाइड के आधिक्य द्वारा ऐनिलीन के ऐल्किलन में उत्पन्न होने वाले उत्पादों के लिए अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 7.
ऐनिलीन की बेन्जोइल क्लोराइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 8.
अणुसूत्र C3H9 N से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिए। उन समावयवों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए जो नाइट्रस अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त। करते हैं।
उत्तर :
आण्विक सूत्र C3H9 N चार समावयवी ऐलिफैटिक ऐमीनों को निरूपित करता है। ये निम्नवत् है।
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केवल प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल (HONO) के साथ क्रिया करके N2 गैस मुक्त करती हैं तथा संगत प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाती हैं।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित परिवर्तन कीजिए
(i) 3 – मेथिल ऐनिलीन से 3 – नाइट्रोटॉलूईन
(ii) ऐनिलीन से 1, 3, 5 – ट्राइब्रोमो बेन्जीन।
उत्तर :
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अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए तथा इनके आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए

  1. (CH3)2CHNH2
  2. CH3(CH2)2CH2NH2
  3. CH3NHCH(CH3)2
  4. (CH3)3CNH2
  5.  C6H5NHCH3
  6. (CH3CH2)2NCH3
  7. m-BrC6H4NH

उत्तर :

  1. प्रोपेन-2-ऐमीन (1°)
  2. प्रोपेन-1-ऐमीन (1°)
  3. N-मेथिल प्रोपेन-2-ऐमीन (2°)
  4. 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (3°)
  5. N-मेथिलबेन्जीनेमीन या N-मेथिलऐनिलीन (2°)
  6. N-एथिल, N-मेथिलऐथेनेमीन (3°)
  7. 3-ब्रोमोबेन्जैनेमीन या 3-ब्रोमोऐनिलीन (1°)

प्रश्न 2.
निम्नलिखित युग्मों के यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए
(i) मेथिल ऐमीन एवं डाइमेथिल ऐमीन
(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन
(iii) एथिल ऐमीन एवं ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन एवं बेन्जिल ऐमीन
(v) ऐनिलीन एवं N-मेथिल ऐनिलीन।
उत्तर :
(i) मेथिल ऐमीन एवं डाइमेथिल ऐमीन :
इनमें कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। मेथिलऐमीन प्राथमिक ऐमीन है, इसलिए यह कार्बिलऐमीन परीक्षण देती है अर्थात् KOH के ऐल्कोहॉलिक विलयन तथा CHCl3 के साथ गर्म करने पर यह मेथिल काबिलेमीन की तीव्र गन्ध देती है। इसके विपरीत, डाइमेथिलऐमीन एक द्वितीयक ऐमीन है, इसलिए यह कार्बिलऐमीन परीक्षण नहीं देती।
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(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन :
इनमें लिबरमैन नाइट्रोसोऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। द्वितीयक ऐमीन लिबरमैन नाइट्रोसोऐमीन परीक्षण देती हैं, जबकि तृतीयक ऐमीन ये परीक्षण नहीं देती।। द्वितीयक ऐमीन HNO2, से अभिक्रिया करके पीले रंग का तैलीय N-नाइट्रोसोऐमीन देती हैं। यहाँ HNO2, को खनिज अम्ल (HCI) तथा सोडियम नाइट्राइट की अभिक्रिया द्वारा माध्यम में (in situ) ही बनाया जाता है
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N-नाइट्रोसोडाइएथिल ऐमीन को फीनॉल के क्रिस्टल तथा सान्द्र H2SO2 के साथ गर्म करने पर यह एक हरा विलयन देती है जिसे जलीय NaOH के साथ क्षारीय बनाए जाने पर गहरा नीला विलयन प्राप्त होता है जो तनुकरण पर लाल हो जाता है। तृतीयक ऐमीन यह परीक्षण नहीं देती हैं।

(iii) एथिल ऐमीन एवं ऐनिलीन : 
एथिलऐमीन प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन है, जबकि ऐनिलीने प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन है। इन्हें ऐजो रंजक परीक्षण द्वारा विभेदित किया जा सकता है। ऐजो रंजक परीक्षण – इसमें ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन की HNO2, (NaNO2, + तनु HCl ) के साथ 273–278K पर अभिक्रिया होती है तथा इसके पश्चात् 2 नैफ्थॉल (β – नैफ्थॉल) के क्षारीय विलयन के साथ अभिक्रिया से गहरे पीले, नारंगी या लाल रंग का रंजक प्राप्त होता है।
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ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन उपर्युक्त परिस्थितियों के अन्तर्गत प्राथमिक ऐल्कोहॉलों के निर्माण के साथ नाइट्रोजन गैस तीव्रता से मुक्त करती हैं अर्थात् विलयन पारदर्शी ही रहता है।
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(iv) ऐनिलीन एवं बेन्जिल ऐमीन :
इन्हें नाइट्रस अम्ल परीक्षण द्वारा विभेदित किया जा सकता है। नाइट्रस अम्ल परीक्षण – बेन्जिल ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाती है जो कम ताप पर भी अस्थायी होने के कारण N2, के विमुक्तन के साथ विघटित हो जाता है।
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ऐनिलीन HNO2, से अभिक्रिया करके बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनाती है जो 273 – 278 K पर स्थायी होता है, इसलिए विघटित होकर नाइट्रोजन गैस नहीं देता है।
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(v) ऐनिलीन एवं N-मेथिल ऐनिलीन :
इनमें कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा विभेद किया जा सकता है। ऐनिलीन प्राथमिक ऐमीन होने के कारण कार्बिलऐमीन परीक्षण देती है अर्थात् ऐल्कोहॉलिक KOH विलयन तथा CHCl3 के साथ गर्म करने पर यह फेनिल आइसोसायनाइड की हानिकारक गन्ध देती है। इसके विपरीत, N – मेथिल ऐनिलीन द्वितीयक ऐमीन होने के कारण यह परीक्षण नहीं देती।
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित के कारण बताइए
(i) ऐनिलीन का pKb मेथिल ऐमीन की तुलना में अधिक होता है।
(ii) एथिल ऐमीन जल में विलेय है, जबकि ऐनिलीन नहीं।
(iii) मेथिल ऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देती है।
(iv) यद्यपि ऐमीनो समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में ऑर्थों एवं पैरा-निर्देशक होता है, फिर भी ऐनिलीन नाइट्रीकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में     मेटा-नाइट्रोऐनिलीन देती है।
(v) ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं।
(vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती
उत्तर :
(i) ऐनिलीन, मेथिलऐमीन से अधिक दुर्बल क्षार होती है। ऐनिलीन में  N – परमाणु पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व घट जाता है। दूसरी ओर, मेथिलऐमीन में CH3 समूह के + I  प्रभाव के कारण N-परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। अत: ऐनिलीन मेथिलऐमीन से दुर्बल क्षार होता है, अत: इसका  pKb, मान मेथिलऐमीन से उच्च होता है।

(ii) एथिलऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबन्ध बनाने के कारण जल में विलेय होती है।
image 18
दूसरी ओर, ऐनिलीन जल में वृहत् हाइड्रोकार्बन भाग CH5 के कारण अविलेय होता है, क्योंकि यह हाइड्रोजन आबन्ध नहीं बनाता है।

(iii) मेथिलऐमीन जल से अधिक क्षारीय होने के कारण जल से प्रोटॉन ग्रहण करके OH आयन मुक्त करती है।
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ये OH आयन जल में उपस्थित Fe3+ आयनों से संयुक्त होकर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का भूरा अवक्षेप देती हैं।
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(iv) नाइट्रीकरण की प्रक्रिया सान्द्र HNO3 तथा सान्द्र H2SO4 के मिश्रण की उपस्थिति में होती है। इन अम्लों की उपस्थिति में अधिकांश ऐनिलीन प्रोटॉनीकृत होकर ऐनिलीनियम आयन बनाती है। अतः । अम्लों की उपस्थिती में अभिक्रिया मिश्रण में ऐनिलीन और ऐनिलीनियम आयन होते हैं -NH2, समूह ऐनिलीन में ऑर्थों तथा पैरा निर्देशक होता है तथा सक्रियक (dactivating) होता है, जबकि ऐनिलीनियम आयन में [latex]\overset { + }{ N } { H }_{ 3 }[/latex] समूह मेटा निर्देशक तथा निष्क्रियकारक होता है। ऐनिलीन के नाइट्रीकरण से p-नाइट्रोऐनिलीन प्राप्त होती है, जबकि ऐनिलीनियम आयन मेटा नाइट्रोऐनिलीन देता है।
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अतः ऐनिलीन का नाइट्रीकरण ऐमीनो समूह के प्रोटॉनीकरण द्वारा m – नाइट्रोऐनिलीन देता है।

(v) ऐल्किलीकरण तथा ऐसिलीकरण की तरह ऐनिलीन फ्रीडल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देती है क्योंकि यह एलुमिनियम क्लोराइड जो कि उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है (लुईस अम्ल) के साथ लवण बनाती है। इस नाइट्रोजन परमाणु के कारण ऐनिलीन -NH2, समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर धनावेश आ जाता है अतः यह पुनः अभिक्रिया के लिए प्रबल निष्क्रियकारक समूह का कार्य करता है।

(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों के लवणों से अधिक स्थायी होते हैं। क्योंकि निम्न ताप पर ऐलिफैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण वियोजित होकर नाइट्रोजन गैस देते हैं।
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(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड अभिक्रिया से शुद्ध प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है। अतएव, इसका प्रयोग प्राथमिक ऐमीनों के संश्लेषण में किया जाता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को क्रम में लिखिए
(i) pKb, मान के घटते क्रम में
C2H5NH2, C6H5NHCH3, (C2H5)2 NH एांव C6H5NH2,

(ii) क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2, (C2H5)2 NH, एांव CH3NH2

(iii) क्षारकीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में
(क) ऐनिलीन, पैरा-नाइट्रोऐनिलीन एवं पैरा-टॉलूडीन
(ख)C6H5NH2, C6H5NHCH3, C6H5CH2NH2

(iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में
C2H5NH2, (C2H5)2 NH, (C2H5)3 N एवं  NH3

(v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में
C2H5OH, (CH3)2NH, C6H5NH2

(vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में
C2H5NH2,  (C2H5)2 NH, C2H5NH2
उत्तर :
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प्रश्न 5.
इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे
(i) एथेनोइक अम्ल को मेथेनेमीन में
(ii) हेक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमीनोपेन्टेन में
(iii) मेथेनॉल को एथेनोइक अम्ल में
(iv) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में
(v) एथेनोइक अम्ल को प्रोपेनोइक अम्ल में
(vi) मेथेनेमीन को एथेनेमीन में
(vii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिल ऐमीन में
(viii) प्रोपेनोइक अम्ल को एथेनोइक अम्ल में?
उत्तर :
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प्रश्न 6.
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
उत्तर :
बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड (C6H5SO4Cl), जिसे हिन्सबर्ग अभिकर्मक भी कहा जाता है, प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीनों से अभिक्रिया करके सल्फोनेमाइड बनाता है।
(i) बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड और प्राथमिक ऐमीन की अभिक्रिया से N-एथिलबेन्जीन सल्फोनेमाइड प्राप्त होता है।
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सल्फोनेमाइड की नाइट्रोजन से जुड़ी हाइड्रोजन प्रबल इलेक्ट्रॉन खींचने वाले सल्फोनिल समूह की उपस्थिति के कारण प्रबल अम्लीय होती है, अत: यह क्षार में विलेय होता है।

(ii) द्वितीयक ऐमीन की अभिक्रिया से N,N-डाइएथिलबेन्जीनसल्फोनेमाइड बनता है।
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N, N – डाइएथिलबेन्जीन सल्फोनेमाइड N, N – डाइएथिलबेन्जीन सल्फोनेमाइड में कोई भी हाइड्रोजन परमाणु नाइट्रोजन परमाणु से नहीं जुड़ा है। अत: यह अम्लीय नहीं होता तथा क्षार में अविलेय होता है।

(iii) तृतीयक ऐमीन बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड से अभिक्रिया नहीं करती। विभिन्न वर्गों के ऐमीनों का यह गुण जिसमें वे बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड से भिन्न-भिन्न प्रकार से अभिक्रिया करती हैं, प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में विभेद करने एवं इन्हें मिश्रण से पृथक् करने में प्रयुक्त होता है। यद्यपि आजकल बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड के स्थान पर p – टॉलूईन सल्फोनिल क्लोराइड का प्रयोग होता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पर लघु टिप्पणी लिखिए
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया (2014, 16, 17)
(ii) डाइऐजोकरण (2015)
(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (2018)
(iv) युग्मन अभिक्रिया
(v) अमोनीअपघटन
(vi) ऐसीटिलन
(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण।
उत्तर :
(i) काबिलऐमीन अभिक्रिया (Carbylamine Reaction) :
जब ऐलिफैटिक या ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन (जैसे – ऐनिलीन, एथिल या मेथिल ऐमीन) को ऐल्कोहॉलीय KOH की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म की कुछ बूंदों के साथ गर्म किया जाता है तो तीव्र दुर्गन्धयुक्त आइसोसायनाइड प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया को कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहते हैं। इसका उपयोग प्राथमिक ऐमीन समूह की उपस्थिति ज्ञात करने में होता है।
उदाहरण :
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(ii) डाइऐजोकरण अभिक्रिया (Diazotisation Reaction) :
वह क्रिया जिसमें ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन सोडियम नाइट्राइट व तनु HCl के मिश्रण (तनु खनिज अम्ल) के साथ 273 से 278 K ताप पर अभिक्रिया द्वारा ऐमीनो समूह को डाइऐजो समूह में परिवर्तित करते हों, डाइऐजोकरण अभिक्रिया कहलाती है।
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उदाहरण :
ऐनिलीन को सोडियम नाइट्राइट व तनु HCl के मिश्रण के साथ 273 से 278 K ताप पर अभिकृत करने पर बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनता है।
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(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (Hofmann’s Bromamide Reaction) : 
वह अभिक्रिया जिसमें ऐलिफैटिक या ऐरोमैटिक ऐसिड ऐमाइड द्रव ब्रोमीन के साथ कास्टिक पोटाश के जलीय विलयन की उपस्थिति में अभिक्रिया करके प्राथमिक ऐमीन (1C कम का) बनाते हैं, तो यह अभिक्रिया हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया कहलाती है। इस अभिक्रिया की सहायता से – CONH2, समूह को -NH2, समूह में परिवर्तित किया जाता है।
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इस अभिक्रिया में ऐसीटेमाइड, प्रोपिल ऐमाइड तथा बेन्जेमाइड को क्रमशः मेथिल ऐमीन, एथिल ऐमीन । तथा ऐनिलीन में परिवर्तित किया जा सकता है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित पदों में होती है
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(iv) युग्मन अभिक्रिया (Coupling Reaction) :
डाइऐजोनियम लवणों की फीनॉलों तथा ऐरोमैटिक ऐमीनों के साथ अभिक्रिया जिससे सामान्य सूत्र, Ar – N = N – Ar के ऐजो यौगिक बनते हैं। युग्मन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इस अभिक्रिया में डाइऐजो समूह का नाइट्रोजन परमाणु उत्पाद में भी उपस्थित रहता है। फीनॉलों के साथ युग्मन अल्प क्षारीय माध्यम में होता है, जबकि ऐमीनों के साथ यह पर्याप्त अम्लीय माध्यम में होता है।
उदाहरणार्थ :
बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड फीनॉल से अभिक्रिया करके इसके पैरा स्थान पर युग्मित होकर पैरा हाइड्रॉक्सीऐजोबेन्जीन बनाता है। इसी प्रकार की अभिक्रिया को युग्मन अभिक्रिया कहते हैं। इसी प्रकार से डाइऐजोनियम लवण की ऐनिलीन से अभिक्रिया द्वारा पैरा-ऐमीनोऐजोबेन्जीन बनती है। यह एक इलेक्ट्रॉनरागी अभिक्रिया का उदाहरण है।
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युग्मन सामान्यतया पैरा स्थिति [हाइड्रॉक्सिल अथवा ऐमीनो समूह के सापेक्ष (यदि मुक्त है)] पर होता है, अन्यथा यह ऑर्थो स्थिति पर होता है।

(v) अमोनीअपघटन (Ammonolysis) :
ऐल्किल अथवा बेन्जिल हैलाइडों में कार्बन-हैलोजेन आबन्ध नाभिकरागी द्वारा सरलता से विदलित हो जाता है, इसलिए ऐल्किल अथवा बेन्जिल हैलाइड अमोनिया के एथेनॉलिक विलयन से नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं जिसमें हैलोजेन परमाणु ऐमीनो (NH2) समूह से प्रतिस्थापित हो जाता है। अमोनिया अणु द्वारा C-X आबन्ध के विदलन की प्रक्रिया को अमोनीअपघटन (ammonolysis) कहते हैं। यह अभिक्रिया 373 K ताप पर सील बन्द नलिका में कराते हैं। इस प्रकार से प्राप्त प्राथमिक ऐमीन नाभिकरागी की तरह व्यवहार करती है और पुनः ऐल्किल हैलाइड से अभिक्रिया करके द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन तथा अन्तत: चतुष्क अमोनियम लवण बना सकती है।
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इस अभिक्रिया में हैलाइडों की ऐमीनों से अभिक्रियाशीलता का क्रम RI > RBr > RCI होता है। अमोनियम लवण से मुक्त ऐमीन प्रबल क्षार द्वारा अभिक्रिया से प्राप्त की जा सकती है।
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अमोनीअपघटन में यह असुविधा है कि इससे प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन तथा चतुष्क अमोनियम लवण का मिश्रण प्राप्त होता है। यद्यपि अमोनिया आधिक्य में लेने पर प्राप्त मुख्य उत्पाद प्राथमिक ऐमीन हो सकता है।

(vi) ऐसीटिलन या ऐसीटिलीकरण (Acetylation) :
किसी –OH या –NH, समूह के हाइड्रोजन परमाणु का ऐसीटिल (CH3CO) समूह द्वारा विस्थापन ऐसीटिलन या ऐसीटिलीकरण कहलाता है। यह प्रक्रम ऐसीटिल क्लोराइड (CH3COCI), ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड या ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल द्वारा किया जाता है।
उदाहरण :
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इस प्रक्रम का उपयोग ऐमीनो तथा हाइड्रॉक्सी समूहों की संख्या ज्ञात करने में होता है।

(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis) :
गैब्रिएल संश्लेषण का प्रयोग प्राथमिक ऐमीनों के विरचन के लिए किया जाता है। थैलिमाइड एथेनॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया द्वारा थैलिमाइड का पोटैशियम लवण बनाता है जो ऐल्किल हैलाइड के साथ गर्म करने के पश्चात् क्षारीय जल-अपघटन द्वारा संगत प्राथमिक ऐमीन उत्पन्न करता है।
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ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन इस विधि से नहीं बनाई जा सकती क्योंकि ऐरिल हैलाइड थैलिमाइड से प्राप्त ऋणायन के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं कर सकते।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित परिवर्तन निष्पादित कीजिए
(i) नाइट्रोबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल
(ii) बेन्जीन से m-ब्रोमोफीनॉल
(iii) बेन्जोइक अम्ल से ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन से 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन
(v) बेन्जिल क्लोराइड से 2 – फेनिलएथेनेमीन
(vi) क्लोरोबेन्जीन से p – क्लोरोऐनिलीन
(viii) बेन्जेमाइड से टॉलूईन
(vii) ऐनिलीन से p – ब्रोमोऐनिलीन
(ix) ऐनिलीन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
उत्तर :
(i)
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(ix) (vii) के समान ऐनिलीन से अभिक्रिया लिखिए, तब
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में  A, B  तथा  C की संरचना दीजिए
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उत्तर :
(i)
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प्रश्न 10.
एक ऐरोमैटिक यौगिक  ‘A’  जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर यौगिक  ‘B’  बनाता है जो Br2, (ब्रोमीन) एवं KOH के साथ गर्म करने पर अणुसूत्र C6H7N वाला यौगिक ‘C’ बनाता है। A, B एवं C यौगिकों की संरचना एवं इनके आई०यू०पी०ए०सी० नाम। लिखिए।
उत्तर :
चूंकि यह ऐरोमैटिक यौगिक है अत: इसमें बेन्जीन वलय होगी। B, Brतथा KOH के साथ गर्म करने पर (हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया) यौगिक ‘C’ (अणुसूत्र C6H7N ) बनाता है। केवल उच्च ऐमाइड हॉफमैन ब्रोमेमाइड अभिक्रिया [Br2 +KOH] द्वारा निम्न ऐमीन देते हैं। अतएव  B, C6H5CONH2, तथा  C, C6H5NH, हैं। चूंकि यौगिक C6H5CONH2, A से प्राप्त होता है, अत: A, C6H5COOH (कार्बोक्सिलिक अम्ल) होगा, अभिक्रियाओं का अनुक्रम और A, B तथा C की संरचनाएँ अग्रवत् होंगी
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए
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उत्तर :
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प्रश्न 12.
ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण से क्यों नहीं बनाया जा सकता?
उत्तर :
ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा नहीं बनाई जा सकती क्योंकि ऐरिल हैलाइड थैलिमाइड द्वारा निर्मित ऋणीयन के साथ नाभिकस्नेही प्रतिस्थापने अभिक्रियाएँ नहीं देते हैं।
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प्रश्न.13.
ऐलिपैटिक एवं ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर :
(i) ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन HCI की उपस्थिचिभमें माइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके ऐरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण बनाती हैं।
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(ii) ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया करके प्राथमिक ऐल्कोहॉल तथानाइट्रोजन गैस देती हैं।
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित में प्रत्येक का सम्भावित कारण बताइए
(i) समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है।
(ii) प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफैटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं।
उत्तर :
(i) किसी ऐमीन से एक प्रोटॉन निकलने पर ऐमाइड आयन प्राप्त होता है, जबकि ऐल्कोहॉल से एक प्रोटॉन निकलने पर ऐल्कॉक्साइड आयन प्राप्त होता है जैसा कि निम्नवत् दर्शाया गया है
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चूँकि N की तुलना में 0 अधिक विद्युतऋणात्मक है, इसलिए RO° पर ऋणावेश RNH° की तुलना में अधिक सरलता से रह सकता है। दूसरे शब्दों में, ऐमीन ऐल्कोहॉल से कम अम्लीय होती हैं।

(ii) प्राथमिक ऐमीनों के N-परमाणुओं पर दो हाइड्रोजन परमाणुओं की उपस्थिति के कारण ये विस्तीर्ण अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्ध दर्शाती हैं, जबकि तृतीयक ऐमीन में नाइट्रोजन पर हाइड्रोजन अणुओं के अभाव के कारण अन्तराआण्विक संघटन नहीं होता। इसलिए प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
उदाहरणार्थ :
n-ब्यूटिलऐमीन का क्वथनांक (351 K) तृतीयक ब्यूटिलऐमीन (क्वथनांक 319 K) से अधिक होता है।
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(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफेटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं क्योंकि
(क) ऐरोमैटिक ऐमीनों में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है, इसलिए यह प्रोटॉनीकरण के लिए सरलतापूर्वक उपलब्ध हो जाता है।
(ख) ऐरिल ऐमीन आयनों को स्थायित्व संगत ऐरिल ऐमीनों की तुलना में कम होता है अर्थात् ऐरोमैटिक ऐमीनों का प्रोटॉनीकरण उपयुक्त नहीं होता है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण का प्रयोग किसके विरचन के लिए किया जाता है?
(i) 1° ऐमीन
(ii) 2° ऐमीन
(iii) 3° ऐमीन
(iv) ये सभी
उत्तर :
(i) 1° ऐमीन

प्रश्न 2.
क्लोरोफॉर्म तथा ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ किसे गर्म करने पर कार्बिलऐमीन की अरुचिकर गन्ध प्राप्त होती है?
(i) कोई ऐरोमैटिक ऐमीन
(ii) कोई प्राथमिक ऐमीन
(iii) कोई ऐमीन
(iv) कोई ऐलिफैटिक ऐमीन
उत्तर :
(ii) कोई प्राथमिक ऐमीन

प्रश्न 3.
निम्न में से किस अभिक्रिया द्वारा ऐमाइड ऐमीन में परिवर्तित किये जा सकते हैं?
(i) पर्किन
(ii) क्ले जन
(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड
(iv) क्लीमेन्सन
उत्तर :
(iii) हॉफमैन ब्रोमेमाइड

प्रश्न 4.
निम्न में से कौन हॉफमान अभिक्रिया द्वारा प्राथमिक ऐमीन देता है?
(i) RCOCI
(ii) RCONHCH3
(iii) RCONH2
(iv) RCOOR
उत्तर :
(iii) RCONH2

प्रश्न 5.
C3H7NH2, NH3, CH3NH2, C2H5NH2  तथा   C6H5NH, में से सबसे कम क्षारीय यौगिक है।
(i) C3H7NH2
(ii) NH3
(iii) CH3NH2
(iv) C6H5NH2
उत्तर :
(iv) C6H5NH2

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक KOH तथा प्राथमिक ऐमीन के साथ गर्म करने पर कार्बिलेमीन परीक्षण देता है?
(i) CHCl3
(ii) CH3Cl
(iii) CH3OH
(iv) CH3 CN
उत्तर :
(i) CHCl3

प्रश्न 7.
निम्न में से कौन-सी ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया करके N, मुक्त नहीं करती है?
(i) ट्राइमेथिलेमीन
(ii) ऐथिलेमीन
(iii) s – ब्यूटिलेमीन
(iv) t – ब्यूटिलेमीन
उत्तर :
(i) ट्राइमेथिलेमीन

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन – सी ऐमीन  KMnO4, द्वारा संगत नाइट्रोयौगिक में सीधे ऑक्सीकृत हो जाती है?
(i)CH3NH2
(ii) C6H5NH2
(iii) (CH3)2NH
(iv) (CH3)3C– NH2
उत्तर :
(iii) (CH3)2NH

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से धनात्मक कार्बिलेमीन परीक्षण कौन देता है?
(i) 2,  4 – डाइमेथिलेनिलीन
(ii) N, N – डाइमेथिलेनिलीन
(iii) N – मेथिल -o- मेथिलेनिलीन
(iv) p – मेथिलबेन्जिलेमीन
उत्तर :
(i) 2, 4-डाइमेथिलेनिलीन

प्रश्न10.
n – प्रोपिलेमीन वाष्पशील यौगिक X देती है जो ऐल्कोहॉलीय क्षार तथा क्लोरोफॉर्म के साथ गर्म करने पर अरुचिकर गन्ध देती है।xकी संरचना है।
(i) CHCH2CHCN
(ii) (CH3)2CHCN
(iii) CHCH2CHNC
(iv) (CH3)2CHNC
उत्तर :
(iii) CHCH2CHNC

प्रश्न 11.
नाइट्रोबेन्जीन का प्रबल अम्लीय माध्यम में अपचयन करने पर अन्तिम उत्पाद बनता है (2017)
(i) ऐनिलीन
(ii) फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन
(iii) p – ऐमीनो फीनॉल
(iv) ऐजोबेन्जीन
उत्तर :
(i) ऐनिलीन

प्रश्न 12.
नाइट्रोबेन्जीन को कहते हैं   (2017)
(i) कसीस का तेल
(ii) मिरवेन का तेल
(iii) सिनेमन ऑयल
(iv) विन्टरग्रीन का तेल
उत्तर :
(ii) मिरवेन का तेल

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐमीन किन्हें कहते हैं? प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन का एक-एक उदाहरण दीजिए तथा उनके साधारण नाम लिखिए।
उत्तर :
ऐमीन :
अमोनिया के ऐल्किल व्युत्पन्न को ऐल्किल ऐमीन कहते हैं।
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प्रश्न 2.
नाइट्रोबेन्जीन के उदासीन माध्यम में अपचयन की अभिक्रिया लिखिए। (2014, 15)
उत्तर :
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प्रश्न 3.
क्या होता है जब ऐनिलीन की क्रिया Br, जल से करायी जाती है?
उत्तर :
2, 4, 6 – ट्राइब्रोमोऐनिलीन बनता है।

प्रश्न 4.
क्या होता है जब एथिलेमीन की क्रिया बेन्जेल्डिहाइड से कराते हैं?
उत्तर :
बेन्जेलिडीन एथिलेमीन (शिफ क्षारक) बनता है।
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प्रश्न 5.
मेण्डियस अभिक्रिया को प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर :
यह ऐल्किल या ऐरिल सायनाइडों का सोडियम तथा ऐल्कोहॉल के साथ अपचयन है, इससे प्राथमिक (1°) ऐमीन प्राप्त होती है।
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प्रश्न 6.
क्या होता है जब बेन्जेमाइड को ब्रोमीन के साथ क्षार की उपस्थिति में गर्म किया जाता है? रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
ऐनिलीन बनती है।
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प्रश्न 7.
आप एथेनेमाइड को मेथेनेमीन में किस प्रकार परिवर्तित करेंगे?
उत्तर :
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प्रश्न 8.
क्या होता है जब R – N = C का जल अपघटन अम्लीय माध्यम में किया जाता है? रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 9.
निम्न अभिक्रियाओं को पूर्ण कर उनके नाम लिखिए
(i) RNH2 +CHCl+ 3KOH
(ii) RCONH2 + Br2 + 4NaOH 
उत्तर :
(i)
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यह अभिक्रिया कार्बिलेमीन अभिक्रिया कहलाती है।
(ii)
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इस अभिक्रिया को हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया या हॉफमान निम्नीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 10.
निम्न में A तथा B को पहचानिए
उत्तर :
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प्रश्न 11.
ऐमीनों के क्वथनांक संगत ऐल्केनों से उच्च क्यों होते हैं?
उत्तर :
ऐमीनों के क्वथनांक संगत ऐल्केनों से हाइड्रोजन आबन्धन के कारण उच्च होते हैं। ऐल्केनों में केवल दुर्बल वाण्डरवाल्स बल पाए जाते हैं।

प्रश्न 12.
ट्राइमेथिलेमीन तथा n-प्रोपिलेमीन का अणुभार समान होता है लेकिन ट्राइमेथिलेमीन निम्न ताप (276 K) तथा n-प्रोपिलेमीन अधिक ताप (322 K) पर उबलता है। समझाइए।
उत्तर :
n-प्रोपिलेमीन में N-परमाणु पर दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, अत: इसका क्वथनांक अन्तरा – आणविक हाइड्रोजन आबन्धन के कारण अधिक होता है। ट्राइमेथिलेमीन (CH3)2N तृतीयक ऐमीन होने के कारण इसमें N-परमाणु पर H-परमाणु नहीं होते हैं। जिसके परिणामस्वरूप इसमें हाइड्रोजन आबन्धन अनुपस्थित होता है तथा इसका क्वथनांक निम्न होता है।

प्रश्न13.
कौन अधिक क्षारीय है-ऐनिलीन या अमोनिया?
उत्तर :
अमोनिया ऐनिलीन से अधिक क्षारीय होती है।

प्रश्न 14.
बेन्जीन वलय पर एक इलेक्ट्रॉन विमोचक प्रतिस्थापी की उपस्थिति किस प्रकार ऐरोमैटिक ऐमीन की क्षारीय सामर्थ्य को प्रभावित करती है?
उत्तर :
ऐरोमैटिक ऐमीन की क्षारीय सामर्थ्य बढ़ती है।

प्रश्न 15.
ऐरोमैटिक ऐमीनों में इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन, बेन्जीन की तुलना में शीघ्रता से क्यों होता है।
उत्तर :
अनुनाद के कारण ऐनिलीन के N-परमाणु पर इलेक्ट्रॉन बेन्जीन वलय पर विस्थानीकृत (delocalised) हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। दूसरे शब्दों में, ऐनिलीन सक्रिय हो जाती है अत: ऐनिलीन में इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन शीघ्रता से होता है।

प्रश्न16.
क्या होता है जब एथिलेमीन की क्रिया एथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड से कराते हैं?
उत्तर :
एथेन बनती है।

प्रश्न 17.
एथिलेमीन से एथिल आइसोसायनाइड के विरचन के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न18.
एथिल ऐमीन की पहचान करने वाला एक रासायनिक परीक्षण लिखिए। (2017)
उत्तर :
C2H5NH2, को CHCl3 और (alc.) KOH के साथ गर्म करने पर तीव्र दुर्गन्ध युक्त पदार्थ एथिल आइसोसायनाइड बनता है।
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प्रश्न19.
ऐमीनोएथेन (एथिलेमीन) किस प्रकार एथेनल (ऐसीटेल्डिहाइड) से प्राप्त करते हैं?
उत्तर :
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प्रश्न 20.
निम्न अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए
उत्तर :
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प्रश्न 21.
ऐमाइड ऐमीनों से अधिक अम्लीय होते हैं, क्यों?
उत्तर :
ऐमाइड ऐमीनों से अधिक अम्लीय होते हैं, क्योंकि -NH, समूह के N-परमाणु में एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है, लेकिन एकाकी युग्म में निम्नवत् अनुनाद (resonance) पाया जाता है
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+R प्रभाव के कारण –NH, समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी युग्म इलेक्ट्रॉन की उपलब्धता घटती है जिसके परिणामस्वरूप ऐसिड ऐमाइड ऐमीन से दुर्बल क्षार होते हैं। N-परमाणु पर धनावेश के कारण यह आसानी से प्रोटॉन त्यागकर दुर्बल अम्ल के समान व्यवहार करता है।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित को घटते हुए अम्लीयता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए
0 – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
p – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
m – नाइट्रो बेन्जोइक एसिड
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प्रश्न 23.
सल्फैनेलिक अम्ल के दो महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए।
उत्तर :
सल्फैनेलिक अम्ल का प्रयोग सल्फा औषधियों तथा रंजकों के निर्माण के लिए किया जाता है।

प्रश्न 24.
बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से बेन्जोनाइट्राइल के निर्माण का रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 25.
अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए C6H5NCI+KI 
उत्तर :
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प्रश्न 26.
आप बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को नाइट्रोबेन्जीन में किस प्रकार परिवर्तित करेंगे ?
उत्तर :
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प्रश्न 27.
निम्न अभिक्रिया के मुख्य उत्पाद का सूत्र दीजिए
उत्तर :
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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नाइट्रोबेन्जीन की —NO2, समूह तथा बेन्जीन वलय की एक-एक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए। (2016)
उत्तर :
NO2, समूह की अभिक्रिया :
नाइट्रोबेन्जीन में नाइट्रोसमूह बेन्जीन वलय से जुड़ा होता है जो एक ऑक्सीकारक समूह है। इस कारण अभिक्रियाओं में इसका अपचयन होता है।
अपचयन :
नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन निम्न पदों में होता है
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नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन उत्पाद माध्यम के pH और अपचायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
बेन्जीन वलय की अभिक्रिया
इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया नाइट्रोबेन्जीन में – NO2 समूह बेन्जीन वलय से जुड़ा होता है। नाइट्रीकरण – नाइट्रोबेन्जीन को सान्द्र नाइट्रिक अम्ल तथा सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ 95- 100°C पर गर्म करने पर m-डाइनाइट्रो बेन्जीन बनती है।
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प्रश्न 2.
एक कार्बनिक यौगिक A के अपचयन से अणुसूत्र C2H7N वाला ऐमीन प्राप्त होता है जो क्लोरोफॉर्म तथा कास्टिक पोटाश के साथ गर्म करने पर तीव्र दुर्गन्ध वाला यौगिक B बनाता है। A तथा B के संरचनात्मक सूत्र तथा नाम लिखिए। (2017)
उत्तर :
प्रश्नानुसार यौगिक A की C6H5NO2, होने की सम्भावना लगती है।
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प्रश्न 3.
डाइऐजोनियम लवण क्या है? बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से क्लोरोबेन्जीन प्राप्त करने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। (2016)
उत्तर :
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रयोगशाला में एथिल ऐमीन बनाने की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए तथा सम्बन्धित अभिक्रिया भी लिखिए। इसके दो रासायनिक गुण भी दीजिए। (2012, 13)
उत्तर :
प्रयोगशाला विधि :
प्रोपिओनेमाइड पर ब्रोमीन तथा कास्टिक पोटाश विलयन (आधिक्य में) की क्रिया कराने से एथिल ऐमीन बनती है। यह क्रिया हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया कहलाती है और यह निम्नलिखित पदों में होती है
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संलग्न चित्रानुसार, एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में 20 ग्राम प्रोपिओनेमाइड और 18 मिली ब्रोमीन लेकर ठण्डा करते हैं, फिर इसमें 10% KOH का 200 मिली विलयन मिलाते हैं। मिश्रण को तब तक हिलाते रहते हैं जब तक कि ब्रोमो प्रोपिओनेमाइड के कारण पीले रंग का विलयन न बन जाए। अब इसमें 50% KOH को 100 मिली विलयन पृथक्कारी कीप से डालकर जल ऊष्मक पर 60-70°C पर गर्म करते हैं जिससे विलयन रंगहीन हो जाए। तत्पश्चात् फ्लास्क के द्रव का आसवन करते हैं जिससे एथिल ऐमीन गैस निकलती है जो ग्राही में रखे तनु HCI से क्रिया करके एथिल ऐमीन हाइड्रोक्लोराइड का विलयन देती है। इसे तनु KOH विलयन से क्रिया कराकर एथिल ऐमीन प्राप्त कर ली जाती है। एथिल ऐमीन के रासायनिक गुण
(i) ऐसीटिल क्लोराइड से अभिक्रिया :
प्रतिस्थापित ऐमाइड बनाता है।
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(ii) ऐल्कोहॉलीय कास्टिक पोटाश तथा क्लोरोफॉर्म के साथ क्रिया करके एथिल आइसोसायनाइड (C2H5NC) बनता है।
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प्रश्न 2.
प्रयोगशाला में ऐनिलीन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी दीजिए तथा इसका प्रमुख रासायनिक गुण एवं उपयोग भी बताइए।
उत्तर :
प्रयोगशाला विधि प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन का टिन तथा सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल द्वारा अपचयन करने से ऐनिलीन प्राप्त होती है।
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उपर्युक्त अभिक्रिया में बनी ऐनिलीन, स्टैनिक क्लोराइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से संयोग करके ऐनिलीन स्टैनिक क्लोराइड नामक ठोस लवण बनाती है।
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जब इस ठोस लवण को कास्टिक सोड़े के सान्द्र विलयन के साथ हिलाते हैं तो ऐनिलीन काले रंग के तेल के रूप में पृथक् हो जाती है।
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मिश्रण का भाप आसवन करने पर ऐनिलीन आसुत में आ जाती है।
रासायनिक गुण
1. कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया :
फेनिल आइसोसायनाइड बनता है।
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2. ऐल्डिहाइडों के साथ अभिक्रिया :
बेन्जिलीडीनऐनिलीन बनता है।
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3. ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया-ऐनिलीन ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोकार्बन बनाती है।
C2H5MgBr + C6H5NH→ C2H6 + C6H5NHMgBr
पयोग :

  1. दवाइयाँ तथा सल्फा औषधियों के निर्माण में
  2. ऐजोरंजक बनाने में मध्यवर्ती यौगिक के रूप में
  3. रबड़ उत्पाद बनाने में
  4. फेनिल आइसोसायनेट बनाने में जिसका उपयोग पॉलियूरिथेन नामक प्लास्टिक बनाने में होता है।

प्रश्न 3.
प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए तथा सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी लिखिए। इसके प्रमुख रासायनिक गुण एवं उपयोग भी बताइए।
उत्तर :
प्रयोगशाला विधि प्रयोगशाला में नाइट्रोबेन्जीन बेन्जीन को सान्द्र नाइट्रिक अम्ल और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण के साथ 50- 60°C ताप पर गर्म करके बनाते हैं।
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विधि :
एक गोल पेंदी के फ्लास्क में बेन्जीन (60 मिली) लेकर उसमें धीरे-धीरे सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (60 मिली) और सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल (90 मिली) का ठण्डा मिश्रण मिलाते हैं। फ्लास्क में एक सीधा खड़ा हुआ वायु संघनित्र लगाकर मिश्रण को जल-ऊष्मक पर 50- 60°C पर लगभग 1 घण्टे तक गर्म करते हैं। नाइट्रोबेन्जीन बनती है और अम्ल के ऊपर पीले रंग के द्रव की परत के रूप में एकत्रित हो जाती है। फ्लास्क को ठण्डा करके एक पृथक्कारी फनल की सहायता से अम्ल की परत को नाइट्रोबेन्जीन की परत से अलग कर देते हैं। नाइट्रोबेन्जीन को क्रमशः सोडियम कार्बोनेट विलयन और जल से धोकर निर्जल कैल्सियम क्लोराइड के ऊपर सुखाते हैं। फिर एक सूखे हुए वायु-संघनित्र लगे आसवन फ्लास्क में उसका आसवन करते हैं। शुद्ध नाइट्रोबेन्जीन 208- 211°C ताप रेन्ज में आसवित होकर ग्राही में एकत्रित हो जाती है।
रासायनिक गुण
अपचयन :
नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन निम्नलिखित पदों में होता है
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नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन उत्पाद माध्यम के pH और अपचायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
1. अम्लीय माध्यम में अपचयन :
टिन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Sn + HCl), या आयरन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Fe+ HCl), द्वारा नाइट्रोबेन्जीन का ऐनिलीन में अपचयन होता है।
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2. उदासीन माध्यम में अपचयन :
ऐलुमिनियम-मर्करी युग्म और जल, या जिंक चूर्ण और अमोनियम क्लोराइड (Zn + NH4Cl), द्वारा नाइट्रोबेन्जीन का फेनिलहाइड्रॉक्सिल ऐमीन में
अपचयन होता है।
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बेन्जीन वलय की प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ।
1. सल्फोनीकरण :
नाइट्रोबेन्जीन को सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर m-नाइट्रोबेन्जीनसल्फोनिक अम्ल बनता है।
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2. हैलोजनीकरण :
नाइट्रोबेन्जीन की क्लोरीन के साथ क्रिया कराने पर m-क्लोरोनाइट्रोबेन्जीन बनती
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उपयोग :

  1. विलायक के रूप में।
  2. मिरबेन के तेल के नाम से जूतों की पॉलिश और साबुन बनाने में सस्ती सुगन्ध के रूप में।
  3. ऐनिलीन और ऐजो-रंजकों (azo-dyes) के निर्माण में।
  4. ऑक्सीकारक के रूप में।

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UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds (उपसहसंयोजन यौगिक) are part of UP Board Solutions for Class 12 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Chapter 9 Coordination Compounds (उपसहसंयोजन यौगिक).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Chemistry
Chapter Chapter 9
Chapter Name Coordination Compounds
Number of Questions Solved 72
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds (उपसहसंयोजन यौगिक)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखिए –

  1. टेट्राऐम्मीनडाइऐक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड (2018)
  2. पोटैशियम टेट्रासायनिडोनिकिलेट (II)
  3. ट्रिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड
  4. ऐम्मीनब्रोमिडोक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II)
  5. डाइक्लोरोबिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
  6. आयरन (III) हेक्सासायनिडोफेरेट (II) (2018)

उत्तर

  1. [Co(NH3)4(H2O)2]Cl3
  2. K2[Ni(CN)6]
  3. [Cr (en)3]Cl3
  4. [Pt (NH3) BrCl(NO2)]
  5. [PtCl2(en)2](NO3)2
  6. Fe4[Fe(CN)6]3

प्रश्न 2.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए –

  1. [Co(NH3)6]Cl3
  2. [Co(NH3)Cl]Cl2
  3. K3[Fe(CN)6]
  4. K3[Fe(C2O4)3]
  5. K2[PdCl4]
  6. [Pt (NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl

उत्तर

  1. हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
  2. पेन्टाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
  3. पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)
  4. पोटैशियम ट्राइऑक्सेलेटोफेरेट (III)
  5. पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
  6. डाइऐम्मीनक्लोरिडो( मेथिलऐमीन)प्लैटिनम (II) क्लोराईड

प्रश्न 3.
निम्नलिखित संकुलों द्वारा प्रदर्शित समावयवता का प्रकार बतलाइए तथा इन समावयवों की संरचनाएँ बनाइए –

  1. K[Cr(H2O)2 (C2O4)2]
  2. [Co(en)3] Cl3
  3. [Co(NH3)5 (NO2)](NO3)2
  4. [Pt(NH3)(H2O)Cl2]

उत्तर
1. (क) इसके लिए ज्यामितीय (सिस-ट्रान्स) तथा प्रकाशिक समावयव सम्भव हैं।
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(ख) सिस के प्रकाशिक समावयव (d- तथा l-)
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2. इसके दो प्रकाशिक समावयव हो सकते हैं।
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3. आयनन समावयव – निम्न समावयव सम्भव हैं (इसके दो आयनन तथा दो बन्धनी समावयव सम्भव हैं)।
[Co(NH3)(NO2)](NO3)2, [Co(NH3)5(NO3)](NO2)(NO3)
बन्धनी समावयव 
[Co(NH3)5(NO2)](NO3)2, [Co(NH3)5(ONO)](NO3)2

4. इसके दो ज्यामितीय समावयव (सिस-, ट्रान्स-) सम्भव हैं।
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प्रश्न 4.
इसका प्रमाण दीजिए कि [Co(NH3)5 Cl]SO4 तथा [Co(NH3)5SO4]Cl आयनन समावयव हैं।
उत्तर
आयनन समावयव जल में घुलकर भिन्न आयन देते हैं, इसलिए विभिन्न अभिकर्मकों के साथ भिन्न-भिन्न अभिक्रियाएँ देते हैं।
[Co(NH3)5Cl]SO4 + Ba2+ → BaSO4 (s)
[Co(NH3)5SO4]Cl + Ba2+ → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5Cl]SO4 + Ag+ → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5SO4]Cl + Ag+ → AgCl (s)
चूँकि दिए गए संकुल विभिन्न अभिकर्मकों के साथ भिन्न अभिक्रियाएँ देते हैं, अतः ये आयनन समावयव हैं।

प्रश्न 5.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि वर्ग समतलीय संरचना वाला [Ni(CN)4]2- आयन प्रतिचुम्बकीय है तथा चतुष्फलकीय ज्यामिति वाला [NiCl4]2- आयन अनुचुम्बकीय है।
उत्तर
[Ni(CN)4]2- का चुम्बकीय व्यवहार (Magnetic behaviour of [Ni(CN)4]2- – Ni का परमाणु क्रमांक 28 है। Ni, Ni2+ तथा [Ni(CN)4]2- में निकिल की अवस्था के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं –
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संकुल आयन [Ni(CN)4]2- प्रतिचुम्बकीय है; क्योंकि इसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं।
[NiCl4]2- का चुम्बकीय व्यवहार (Magnetic behaviour of [NiCl4]2-)- इसमें Cl दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड है तथा यह इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं करता है।
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संकुल आयन [NiCl4]2- के d-उपकोश में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं, इसलिए यह अनुचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 6.
[NiCl4]2- अनुचुम्बकीय है, जबकि [Ni(CO)4] प्रतिचुम्बकीय है यद्यपि दोनों चतुष्फलकीय हैं। क्यों?
उत्तर
[Ni(CO)4] में निकिल शून्य ऑक्सीकरण अवस्था में है, जबकि [NiCl4]2- में यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था में है। CO लिगेण्ड की उपस्थिति में निकिल के अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं, परन्तु Cl दुर्बल लिगेण्ड होने के कारण अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करने योग्य नहीं होता है। अतः [Ni(CO)4] में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित नहीं होता, इसलिए यह प्रतिचुम्बकीय है तथा [NiCl4]2- में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण यह अनुचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 7.
[Fe(H2O)6]3+ प्रबल अनुचुम्बकीय है, जबकि [Fe(CN)6]3- दुर्बल अनुचुम्बकीय। समझाइए।
उत्तर
CN (प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में, 3d- इलेक्ट्रॉन युग्मित होकर केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं। d2 sp3 संकरण वाला आन्तरिक कक्षक संकुल बनता है। इसलिए [Fe(CN)6]3- दुर्बल अनुचुम्बकीय होता है। HO (दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में 3d-इलेक्ट्रॉन युग्मित नहीं होते अर्थात् संकरण spa है जो बाह्य कक्षक संकुल, जिसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, बनाता है, इसलिए [Fe(H2O)6]3+ प्रबल अनुचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 8.
समझाइए कि [Co(NH3)6]3+ एक आन्तरिक कक्षक संकुल है, जबकि [Ni(NH3)6]2+ एक बाह्य कक्षक संकुल है।
उत्तर
NH3 की उपस्थिति में Co के 3d- इलेक्ट्रॉन युग्मित होकर दो रिक्त d-कक्षक छोड़ते हैं जो [Co(NH3)6]3+ की स्थिति में आन्तरिक कक्षक संकुल बनाने वाले d2 sp3 संकरण में सम्मिलित होते हैं। [Ni(NH3)6]2+ में निकिल +2 ऑक्सीकरण अवस्था में है तथा इसका विन्यास 28 है। इसमें बाह्य कक्षक संकुल बनाने वाला sp3 d2 संकरण में सम्मिलित होता है।

प्रश्न 9.
वर्ग समतली (Pt(CN)4]2- आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बतलाइए।
उत्तर
78Pt आवर्त सारणी के वर्ग 10 में स्थित होता है तथा इसका विन्यास 5d9 6s1 है। अत: Pt2+ का विन्यास d8 है।
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वर्ग समतली संरचना के लिए संकरण dsp2 होता है। चूंकि 5d में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युग्मित होकर dsp2 संकरण के लिए एक रिक्त d-कक्षक बनाते हैं, अत: कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता।

प्रश्न 10.
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त को प्रयुक्त करते हुए समझाइए कि कैसे हेक्साऐक्वा मैंगनीज (II) आयन में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि हेक्सासायनो आयन में केवल एक ही अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
उत्तर
ऑक्सीकरण अवस्था +2 में Mn का विन्यास 3d5 होता है। लिगेण्ड के रूप में H2O (दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में इन पाँच इलेक्ट्रॉनों का वितरण t32g e2g होता है अर्थात् सभी इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रह जाते हैं। लिगेण्ड के रूप में CN (प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में वितरण  t52g e0g है। अर्थात् दो t2g कक्षकों में युग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि तीसरे t2g कक्षक में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता

प्रश्न 11.
[Cu(NH3)4]2+ संकुल आयन के β4 का मान 2.1 x 1013 है, इस संकुल के समग्र वियोजन स्थिरांक के मान की गणना कीजिए।
हल
समग्र वियोजन स्थिरांक, समग्र स्थायित्व स्थिरांक का व्युत्क्रम होता है।
अतः समग्र वियोजन स्थिरांक = [latex]\frac { 1 }{ { \beta }_{ 4 } } =\frac { 1 }{ { 2.1\times 10 }^{ 13 } } [/latex] = 4.7 x 10-14

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 1.
वर्नर की अभिधारणाओं के आधार पर उपसहसंयोजन यौगिकों में आबन्धन को समझाइए।
उत्तर
उपसहसंयोजन यौगिकों में आबन्धन को समझाने के लिए वर्नर ने सन् 1898 में उपसहसंयोजन यौगिकों का सिद्धान्त प्रस्तुत किया। इस सिद्धान्त की मुख्य अभिधारणाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. उपसहसंयोजन यौगिकों में धातुएँ दो प्रकार की संयोजकताएँ दर्शाती हैं- प्राथमिक तथा द्वितीयक।
  2. प्राथमिक संयोजकताएँ सामान्य रूप से धातु परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था से सम्बन्धित होती हैं। तथा आयननीय होती हैं। ये संयोजकताएँ ऋणात्मक आयनों द्वारा सन्तुष्ट होती हैं।
  3. द्वितीयक संयोजकताएँ धातु परमाणु की उपसहसंयोजन संख्या से सम्बन्धित होती हैं। द्वितीयक संयोजकताएँ अन-आयननीय होती हैं। ये उदासीन अणुओं अथवा ऋणात्मक आयनों द्वारा सन्तुष्ट | होती हैं। द्वितीयक संयोजकता उपसहसंयोजन संख्या के बराबर होती है तथा इसका मान किसी धातु के लिए सामान्यत: निश्चित होता है।
  4. धातु से द्वितीयक संयोजकता से आबन्धित आयन समूह विभिन्न उपसहसंयोजन संख्या के अनुरूप दिक्स्थान में विशिष्ट रूप से व्यवस्थित रहते हैं।

आधुनिक सूत्रीकरण में इस प्रकार की दिक्स्थान व्यवस्थाओं को समन्वये बहुफलक (coordination polyhedra) कहते हैं। गुरुकोष्ठक में लिखी स्पीशीज संकुल तथा गुरु कोष्ठक के बाहर लिखे आयन प्रति आयन (counter ions) कहलाते हैं।

उन्होंने यह भी अभिधारणा दी कि संक्रमण तत्वों के समन्वय यौगिकों में सामान्यतः अष्टफलकीय, चतुष्फलकीय व वर्ग समतली ज्यामितियाँ पायी जाती हैं। इस प्रकार [Co(NH3)6]3+, [CoCl(NH3)5]2+ तथा [CoCl2(NH3)4]+ की ज्यामितियाँ अष्टफलकीय हैं, जबकि [Ni(CO)4)] तथा [PtCl4]2- क्रमश: चतुष्फलकीय तथा वर्ग समतली हैं।
उपर्युक्त अभिधारणाओं से वर्नर, जिसने निम्नलिखित यौगिकों को कोबाल्ट (III) क्लोराइड की NH3 से अभिक्रिया करके बनाया, ने इन यौगिकों (उपसहसंयोजक) की संरचना की सफलतापूर्वक व्याख्या की जिसका वर्णन निम्नलिखित है –

  • CoCl3.6NH3 नारंगी
  • CoCl3.5NH3 . H2O गुलाबी
  • CoCl3.5NH3 बैंगनी
  • CoCl3.4NH3 बैंगनी
  • CoCl3.3NH3 हरा

CoCl3.4NH3 के विभिन्न रंगों का कारण यह है कि यह समपक्ष तथा विपक्ष समावयव के रूप में उपस्थित होता है।
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प्रश्न 2.
FeSO4 विलयन तथा (NH4)2SO4 विलयन का 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रण Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, परन्तु CuSO4 व जलीय अमोनिया का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता। समझाइए क्यों?
उत्तर
FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन में 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर एक द्विक-लवण प्राप्त होता है, जिसे मोहर लवण (FeSO4.(NH4)2SO4.6H2O) कहते हैं। यह निम्न प्रकार आयनित होता है –
FeSO4 .(NH4)2 SO4 .6H4O → F2+ + 2NH+4 + 3SO2-4 + 6H2O

विलयन में Fe2+ आयनों की उपस्थिति के कारण यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है। जब CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रित किया जाता है, तो संकर लवण [Cu(NH4)4]SO4 प्राप्त होता है। यह विलयन में निम्न प्रकार आयनित होता है-
[Cu(NH3)4]SO4 → [Cu(NH3)4]2+ + SO2-4
संकर आयन [Cu(NH3)4]2+ पुन: आयनित होकर Cu2+ आयन नहीं देता है। इसलिए विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है।

प्रश्न 3.
प्रत्येक के दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए-समन्वय समूह, लिगेण्ड, उपसहसंयोजन संख्या, उपसहसंयोजन बहुफलक, होमोलेप्टिक तथा हेटरोलेप्टिक।
या
उपसहसंयोजक (समन्वय) संख्या को एक उदाहरण द्वारा ज्ञात कीजिए। (2018)
उत्तर
1. उपसहसंयोजन सत्ता या समन्वय समूह (Coordination entity) – केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन से किसी एक निश्चित संख्या में आबन्धित आयन अथवा अणु मिलकर एक उपसहसंयोजन सत्ता का निर्माण करते हैं। उदाहरणार्थ– [CoCl3(NH3)3] एक उपसहसंयोजन सत्ता है। जिसमें कोबाल्ट आयन तीन अमोनिया अणुओं तथा तीन क्लोराइड आयनों से घिरा है। अन्य उदाहरण हैं –
[Ni(CO)4],[PtCl2(NH3)2], [Fe(CN)6]4-, [Co(NH3)6]3+ आदि।

2. लिगेण्ड (Ligand) – उपसहसंयोजन सत्ता में केन्द्रीय परमाणु/आयन से परिबद्ध आयन अथवा अणु लिगेण्ड कहलाते हैं। ये सामान्य आयने हो सकते हैं; जैसे- Cl, F, CN, OH छोटे अणु हो सकते हैं; जैसे- H2O या NH3, बड़े अणु हो सकते हैं; जैसे- H2NCH2CH2NH2 या N(CH2CH2NH2)3 अथवा वृहदाणु भी हो सकते हैं; जैसे- प्रोटीन।

3. उपसहसंयोजन संख्या (Coordination number) – एक संकुले में धातु आयन की उपसहसंयोजन संख्या (CN) उससे आबन्धित लिगेण्डों के उन दाता परमाणुओं की संख्या के बराबर होती है, जो सीधे धातु आयन से जुड़े हों।
उदाहरणार्थ– संकुल आयनों [PtCl6]2- तथा [Ni(NH3)4]2+ में Pt तथा Ni की उपसहसंयोजन संख्या क्रमश: 6 तथा 4 है। इसी प्रकार संकुल आयनों [Fe(C2O4)3]3- और [Co(en)3]3+ में Fe और Co दोनों की समन्वय संख्या 6 है क्योंकि C2O2-4 तथा en (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) द्विदन्तुर लिगेण्ड हैं।

उपसहसंयोजन संख्या के सन्दर्भ में यह तथ्य महत्त्वपूर्ण है कि केन्द्रीय परमाणु/आयन की उपसहसंयोजन संख्या केन्द्रीय परमाणु/आयन तथा लिगेण्ड के मध्य बने केवल o (सिग्मा) आबन्धों की संख्या के आधार पर ही निर्धारित की जाती है। यदि लिगेण्ड तथा केन्द्रीय परमाणु/आयन के मध्य π (पाई) आबन्ध बने हों तो उन्हें नहीं गिना जाता।

4. उपसहसंयोजन बहुफलक (Coordination polyhedron) – केन्द्रीय परमाणु/आयन से सीधे जुड़े लिगेण्ड परमाणुओं की दिक्स्थान व्यवस्था (spacial arrangement) को उपसहसंयोजन बहुफलक कहते हैं। इनमें अष्टफलकीय, वर्ग समतलीय तथा चतुष्फलकीय मुख्य हैं। उदाहरणार्थ– [Co(NH3)6]3+ अष्टफलकीय है, [Ni(CO)4] चतुष्फलकीय है तथा [PtCl4]2- वर्ग समतलीय है। चित्र-1 में विभिन्न उपसहसंयोजन बहुफलकों की आकृतियाँ दर्शायी गई हैं।
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5. होमोलेप्टिक (Homoleptic) – संकुल जिनमें धातु परमाणु केवल एक प्रकार के दाता समूह (लिगेण्ड) से जुड़ा रहता है, होमोलेप्टिक संकुल कहलाते हैं। उदाहरणार्थ– [Co(NH3)6]3+ तथा [Fe(CN)6]4-.

6. हेटरोलेप्टिक (Heteroleptic) – संकुल जिनमें धातु परमाणु एक से अधिक प्रकार के दाता समूहों (लिगेण्डों) से जुड़ा रहता है, हेटरोलेप्टिक संकुल कहलाते हैं। उदाहरणार्थ – [Co(NH3)4Cl2]+ तथा [Pt(NH3)5Cl]3+.

प्रश्न 4.
एकदन्तुर, द्विदन्तुर तथा उभयदन्तुर लिगेण्ड से क्या तात्पर्य है? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
लिगेण्ड का एक परमाणु दाता परमाणु होता है जो केन्द्रीय धातु आयन को एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म दान करके उपसहसंयोजक आबन्ध बनाता है। जब एक लिगेण्ड धातु आयन से एक दाता परमाणु द्वारा परिबद्ध होता है; जैसे- Cl, H2O या NH3 तो लिगेण्ड एकदन्तुर (unidentate) कहलाता है। जब लिगेण्ड दो दाता परमाणुओं द्वारा परिबद्ध होता है; जैसे- H2NCH2CH2NH2 (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) अथवा C2O2-4 (ऑक्सेलेट) तो ऐसा लिगेण्ड द्विदन्तुर कहलाता है।

वह लिगेण्ड जो दो भिन्न परमाणुओं द्वारा जुड़ सकता है, उसे उभयदन्ती संलग्नी या उभयदन्तुर लिगेण्ड कहते हैं। ऐसे लिगेण्ड के उदाहरण हैं- NO2 तथा SCN आयन। NO2 आर्यन केन्द्रीय धातु परमाणु/आयन से या तो नाइट्रोजन द्वारा अथवा ऑक्सीजन द्वारा संयोजित हो सकता है। इसी प्रकार SCN आयन सल्फर अथवा नाइट्रोजन परमाणु द्वारा संयोजित हो सकता है।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में धातुओं के ऑक्सीकरण अंक का उल्लेख कीजिए –

  1. [Co(H2O)(CN)(en)2]2+
  2. [CoBr2(en)2]+
  3. [PtCl4]2-
  4. [K3[Fe(CN)6]
  5. [Cr(NH3)3Cl3].

उत्तर
माना कि दिये गये संकर आयनों में धातु के ऑक्सीकरण अंक x हैं। अत:

  1. x + (0) + (-1) + 2 × (0) = +2; ∴ x = +3
  2. x + 2 × (-1) + 2 × (0) = +1; ∴ x = +3
  3. x + 4 × (-1) = – 2, ∴ x = +2
  4. 3 × (+1) + x + 6 × (-1) = 0; ∴ x = +3
  5. x + 3 × (0) + 3 × (-1) = 0; ∴ x = +3

प्रश्न 6.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के लिए सूत्र लिखिए –

  1. टेट्राहाइड्रॉक्सिडोजिंकेट(II)
  2. पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
  3. डाइऐम्मीनडाइक्लोरिडोप्लैटिनम (II)
  4. पोटैशियम टेट्रासायनिडोनिकिलेट (II)
  5. पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो-O-कोबाल्ट(III)
  6. हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट(III) सल्फेट
  7. पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सेलेटो) क्रोमेट(III)
  8. हेक्साऐम्मीनप्लैटिनम(IV)
  9. टेट्राब्रोमिडोक्यूप्रेट(II)
  10. पेन्टाऐम्मीनंनाइट्रिटो-N-कोबाल्ट(III)

उत्तर

  1. [Zn(OH)4]2-
  2. K2[PdCl4]
  3. [Pt(NH3)2Cl2]
  4. K2[Ni(CN)4]
  5. [Co(NH3)5(ONO)]2+
  6. [Co(NH3)6]2(SO4)3
  7. K3[Cr(C2O4)3]
  8. [Pt(NH3)6]4+
  9. [CuBr4]2-
  10. [Co(NH3)5(NO2)]2+

प्रश्न 7.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के सुव्यवस्थित नाम लिखिए –

  1. [Co(NH3)6]Cl3
  2. [Pt(NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl
  3. [Ti(H2O)6]3+
  4. [Co(NH3)4Cl(NO2)]Cl
  5. [Mn(H2O)6]2+  (2018) 
  6. [NiCl4]2-
  7. [Ni(NH3)6]Cl2  (2017)
  8. [Co(en)3]3+
  9. [Ni(CO)4]

उत्तर

  1. हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
  2. डाइऐम्मीनक्लोरिडो( मेथिल ऐमीन)प्लैटिनम (II) क्लोराइड
  3. हेक्साऐक्वाटाइटेनियम (III) आयन
  4. टेट्राऐम्मीनक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-कोबाल्ट (III) क्लोराईड
  5. हेक्साऐक्वामैंगनीज (II) आयन
  6. टेट्राक्लोरिडोनिकिलेट (II) आयन
  7. हेक्साऐम्मीननिकिल (II) क्लोराइड
  8. ट्रिस(एथेन-1,2-डाइऐमीन) कोबाल्ट (III) आयन
  9. टेट्राकार्बोनिलनिकिल(0)।

प्रश्न 8.
उपसहसंयोजन यौगिकों के लिए सम्भावित विभिन्न प्रकार की समावयवताओं को सूचीबद्ध कीजिए तथा प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
उपसहसंयोजन यौगिकों में दो प्रमुख प्रकार की समावयवताएँ ज्ञात हैं। इनमें से प्रत्येक को पुनः प्रविभाजित किया जा सकता है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में कितने ज्यामितीय समावयव सम्भव हैं?

  1. [Cr(C2O4)3]3-
  2. [Co(NH3)Cl3]

उत्तर

  1. यह [M(AA)3] प्रकार का संकर आयन है तथा ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करने में असमर्थ है। इसलिए इसका कोई ज्यामितीय समावयवी सम्भव नहीं है।
  2. दो (फेशियल तथा पेरीफेरल)।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित के प्रकाशिक समावयवों की संरचनाएँ बनाइए –
(i) [Cr(C2O4)3]3-
(ii) [PtCl2(en)2]2+
(iii) [Cr(NH3)2Cl2(en)]+
उत्तर
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित के सभी समावयवों (ज्यामितीय व ध्रुवण) की संरचनाएँ बनाइए –

  1. [CoCl2(en)2]+
  2. [Co(NH3)Cl(en)2]2+
  3. [Co(NH3)Cl2(en)]+

उत्तर
1. CoCl2(en)2]+
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2. [Co(NH3)Cl(en)2]2+

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3. [Co(NH3)Cl2(en)]+

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सभी असममिताकार हैं, इसलिए सभी प्रकाशिक समावयवता अर्थात् d(+) तथा l(-) रूप प्रदर्शित करेंगे जो एक-दूसरे पर अध्यारोपित न होने वाले दर्पण प्रतिबिम्ब हैं।

प्रश्न 12.
[Pt(NH3)(Br)(Cl)(Py)] के सभी ज्यामितीय समावयव लिखिए। इनमें से कितने ध्रुवण अर्थात प्रकाशिक समावयवता दर्शाएँगे?
उत्तर
दिए गए यौगिक के तीन ज्यामितीय समावयव सम्भव हैं।
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इस प्रकार के समावयव ध्रुवण समावयवता नहीं दर्शाते हैं। ध्रुवण समावयवता वर्ग समतली या चतुष्फलकीय संकुलों में दुर्लभ रूप में पायी जाती है। जबकि इनमें असममिताकार कोलेटिंग लिगेण्ड उपस्थित हों।

प्रश्न 13.
जलीय कॉपर सल्फेट विलयन (नीले रंग का), निम्नलिखित प्रेक्षण दर्शाता है –

  1. जलीय पोटैशियम फ्लुओराइड के साथ हरा रंग
  2. जलीय पोटैशियम क्लोराइड के साथ चमकीला हरा रंग।

उपर्युक्त प्रायोगिक परिणामों को समझाइए।
उत्तर
जलीय कॉपर सल्फेट विलयन [Cu(H2O)4]SO4 के रूप में स्थित रहता है तथा [Cu(H2O)4]2+ आयनों के कारण इसका रंग नीला होता है।
1. जब KF विलयन मिलाया जाता है, तो दुर्बल H2O लिगेण्ड प्रबल F- लिगेण्ड्स के द्वारा। प्रतिस्थापित हो जाते हैं। इस प्रकार, [CuF4]2- आयन बनते हैं, जो हरा अवक्षेप देते हैं।
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2. जब KCl विलयन मिलाया जाता है तो Cl लिगेण्ड्स दुर्बल H2O लिगेण्ड्स को प्रतिस्थापित कर देते हैं और [CuCl4]2- आयन बनाते हैं, जो चमकीले हरे रंग के होते हैं।
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प्रश्न 14.
कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन में जलीय KCN को आधिक्य में मिलाने पर बनने वाली उपसहसंयोजन सत्ता क्या होगी? इस विलयन में जब H2S गैस प्रवाहित की जाती है तो कॉपर सल्फाइड का अवक्षेप क्यों नहीं प्राप्त होता?
उत्तर
जब जलीय KCN विलयन को जलीय कॉपर सल्फेट के विलयन में मिलाया जाता है, तो निम्न प्रकार से [Cu(CN)4]2- उपसहसंयोजन स्पीशीज प्राप्त होती है –
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इस प्रकार बनी उपसहसंयोजन स्पीशीज [Cu(CN)4]2- अत्यधिक स्थिर होती है क्योंकि CN प्रबल लिगेण्ड होते हैं। इसलिए इस विलयन में H2S गैस प्रवाहित करने पर CuS का अवक्षेप प्राप्त नहीं होता है क्योंकि मुक्त Cu2+ आयन उपलब्ध नहीं होते हैं।

प्रश्न 15.
संयोजकता आबन्धसिद्धान्त के आधार पर निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में आबन्ध की प्रकृति की विवेचना कीजिए –

  1. [Fe(CN)6]4-
  2. [FeF6]3-
  3. [CO(C2O4)3]3-
  4. [COF6]3-

उत्तर
1. [Fe(CN6)]4- – इस संकुल आयन में आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है।
Fe का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar] 3d6 4s2
Fe 2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar] 3d6
छह सायनाइड आयनों से छह इलेक्ट्रॉन युग्मों को स्थान देने के लिए आयरन (II) आयन को छह रिक्त कक्षक उपलब्ध करने चाहिए। ऐसा निम्नलिखित संकरण पद्धति के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है जिसमें d-उपकोश के इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं, चूँकि CN आयन प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड हैं।
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अत: छह सायनाइड आयनों से छह इलेक्ट्रॉन युग्म आयरन (II) आयन के छह संकरित कक्षकों को अध्यासित कर लेते हैं। इस प्रकार किसी भी कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं, इसलिए [Fe(CN)6]4- प्रतिचुम्बकत्व दर्शाता है। अतः [Fe(CN)6]4- प्रतिचुम्बकीय तथा अष्टफलकीय है।

2. [FeF6]3- – यह संकुल उच्च चक्रण (या चक्रण मुक्त) या बाह्य संकुल है, चूंकि केन्द्रीय धातु आयन, Fe(III) संकरण के लिए nd-कक्षकों का प्रयोग करता है। यह एक अष्टफलकीय संकुल है। जिसमें sp3 d2 संकरण होता है, प्रत्येक कक्षक में छह फ्लुओराइड आयनों से एक-एक एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म स्थान प्राप्त करता है जैसा कि निम्नांकित चित्र में दर्शाया गया है –
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चूँकि संकुल में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, अत: यह अनुचुम्बकीय है।

3. [CO(C2O4)3]3-
Co (Z = 27) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : [Ar] 3d7 4s2
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : [Ar] 3d6 4s0
C2O2-4 प्रबल क्षेत्रीय लिगेण्ड है जिसके कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है।
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अतः स्पष्ट है कि [Co(C2O4)3]3- प्रतिचुम्बकीय तथा अष्टफलकीय संकुल है।

4. [CoF6]3- – Co (27) : [Ar] 3d7 4s2
Co3+ : [Ar] 3d6 4s0
F एक दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड होने के कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं कर सकता है।
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अतः [CoF6]3- अनुचुम्बकीय तथा अष्टफलकीय संकुल है।

प्रश्न 16.
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d-कक्षकों के विपाटन को दर्शाने के लिए चित्र बनाइए।
उत्तर
माना छह लिगेण्ड कार्तिक अक्षों के अनुदिश सममित रूप से स्थित हैं तथा धातु परमाणु मूल बिन्दु पर है।
लिगेण्ड के निकट आने पर d-कक्षकों की ऊर्जा में मुक्त आयनों की तुलना में अपेक्षित वृद्धि होती है। जैसा कि गोलीय क्रिस्टल क्षेत्र की स्थिति में होता है।
अक्षों के अनुदिश कक्षक (dz2 तथा dx2– y2) dxy , dyz तथा dzx कक्षकों की तुलना में अधिक प्रबलता से प्रतिकर्षित होते हैं तथा इनमें अक्षों के मध्य निर्देशित पालियाँ (lobes) होती हैं। गोलीय क्रिस्टल क्षेत्र में औसत ऊर्जा की अपेक्षा dz2 तथा dx2– y2 कक्षक ऊर्जा में बढ़ जाते हैं तथा dxy, dyz, dzx, कक्षक ऊर्जा में न्यून हो जाते हैं।
अतः d- कक्षकों का समभ्रंश समूह (degenerate set) दो समूहों में विपाटित हो जाता है- निम्न ऊर्जा कक्षक समूह t2g तथा उच्च ऊर्जा कक्षक समूह eg ऊर्जा Δ0 द्वारा पृथक्कृत होती हैं।
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प्रश्न 17.
स्पेक्टमीरासायनिक श्रेणी क्या है? दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड तथा प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
स्पेक्टमीरासायनिक श्रेणी (Spectrochemical Series) – क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन, Δ0 लिगेण्ड तथा धातु आयन पर विद्यमान आवेश से उत्पन्न क्षेत्र पर निर्भर करता है। कुछ लिगेण्ड प्रबल क्षेत्र उत्पन्न कर सकते हैं तथा ऐसी स्थिति में विपाटन अधिक होता है, जबकि अन्य दुर्बल क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जिसके फलस्वरूप d-कक्षकों का विपाटन कम होता है। सामान्यत: लिगण्डों को उनके बढ़ती हुई क्षेत्र प्रबलता के क्रम में एक श्रेणी में निम्नानुसार व्यवस्थित किया जा सकता है –
I < Br < SCN < Cl < S2 < F < OH < C2O2-4 < H2O < NCS < EDTA4- < NH3 < en < CN < CO
इस प्रकार की श्रेणी स्पेक्ट्रमीरासायनिक श्रेणी (spectrochemical series) कहलाती है। यह विभिन्न लिगेण्डों के साथ बने संकुलों द्वारा प्रकाश के अवशोषण पर आधारित प्रायोगिक तथ्यों द्वारा निर्धारित श्रेणी है।

दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड तथा प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड के मध्य अन्तर (Difference between weak field ligand and strong field ligand) – वे लिगेण्ड जिनकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (CFSE), Δ0 का मान कम होता है, दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड कहलाते हैं। दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड के कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता तथा ये उच्च चक्रण संकुल बनाते हैं। वे लिगेण्ड जिनकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, Δ0 का मान अधिक होता है, प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड कहलाते हैं। प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड के कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है तथा ये निम्न चक्रण संकुल बनाते हैं।

प्रश्न 18.
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा क्या है? उपसहसंयोजन सत्ता में 4-कक्षकों का वास्तविक विन्यास A, के मान के आधार पर कैसे निर्धारित किया जाता है?
उत्तर
जब लिगेण्ड संक्रमण धातु आयन के निकट जाता है, तब d-कक्षक दो समुच्चयों में विपाटित हो जाते हैं, एक निम्न ऊर्जा के साथ तथा दूसरा उच्च ऊर्जा के साथ। कक्षकों के इन दो समुच्चयों के बीच ऊर्जा का अन्तर अष्टफलकीय क्षेत्र के लिए क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, Δ0 कहलाता है।
यदि Δ0 < P (युग्मन ऊर्जा) तो चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक है, कक्षक में प्रवेश करता है तथा t32g e1g विन्यास देकर उच्च चक्रण संकुल बनाता है। ऐसे लिगेण्ड (जिनके लिए, Δ0 < P) दुर्बल क्षेत्र लिंगैण्ड कहलाते हैं।
यदि Δ0 > P तो चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक है t2g कक्षक में युग्मित होता है तथा t42g e0g विन्यास देकर निम्न चक्रण संकुल बनाता है। ऐसे लिगेण्ड (जिनके लिए, Δ0 > P) प्रबल क्षेत्र लिंगेण्ड कहलाते

प्रश्न 19.
[Cr(NH3)6] अनुचुम्बकीय है, जबकि [Ni(CN)4] प्रतिचुम्बकीय, समझाइए क्यों?
उत्तर
[Cr(NH3)6]3+ का निर्माण (Formation of [Cr(NH3)6]3+)
[Cr(NH3)6]3+ आयन में क्रोमियम की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है। क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d5 4s1 है। संकरण को निम्नलिखित आरेख में दर्शाया गया है –
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Cr3+ आयन अमोनिया के छह अणुओं से छह इलेक्ट्रॉन युग्मों को स्थान देने के लिए छह रिक्त कक्षक उपलब्ध कराते हैं। परिणामत: संकुल [Cr(NH3)]3+ में d2 sp3 संकरण होता है तथा यह अष्टफलकीय होता है। संकुल में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति इसके अनुचुम्बकीय गुण को स्पष्ट करती हैं।

[Ni(CN)4]2- का निर्माण (Formation of [Ni(CN)4]2-)
[Ni(CN)4]2- में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d है। संकरण को निम्नवत् समझाया जा सकता है –
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प्रत्येक संकरित कक्षक सायनाइड आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति [Ni(CN)4]2- के प्रतिचुम्बकीय व्यवहार की पुष्टि करती है।

प्रश्न 20.
[Ni(H2O)6]2+ का विलयन हरा है, परन्तु [Ni(CN)4]2- का विलयन रंगहीन है। समझाइए।
उत्तर
[Ni(H2O)6]2+ विलयन में निकिल Ni2+ के रूप में स्थित रहता है तथा इसका 3d8 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। इसमें दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो कि दुर्बल जल लिगेण्डों की उपस्थिति में युग्मित नहीं हो पाते हैं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन d – d संक्रमण प्रदर्शित करते हैं जिसमें Ni2+ लाल प्रकाश अवशोषित करता है। इसलिए, संकर पूरक हरा रंग प्रदर्शित करता है।

[Ni(CN)4]2- में भी निकिल Ni2+ आयन के रूप में रहता है। इसका भी 3d8 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है, जिसमें दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं परन्तु प्रबल CN लिगेण्ड युग्मित हो जाते हैं अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति में d- d संक्रमण नहीं होता है तथा विलयन रंगहीन रहता है।

प्रश्न 21.
[Fe(CN)6]4- तथा [Fe(H2O)6]2+ के तनु विलयनों के रंग भिन्न होते हैं। क्यों?
उत्तर
दोनों जटिलों में आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। Fe2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d6 है। तथा इसमें चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। [Fe(CN)6]4- में CN लिगेण्ड्स प्रबल हैं तथा इलेक्ट्रॉनों को युग्मित कर देते हैं जबकि [Fe(H2O)6]2+ में H2O लिगेण्ड्स दुर्बल हैं तथा इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करने में असमर्थ होते हैं। अत: अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की संख्या में अन्तर के कारण ये जटिल तनु विलयन में भिन्न-भिन्न रंग प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 22.
धातु काबनिलों में आबन्ध की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
उत्तर
धातु कार्बोनिलों में आबन्ध की प्रकृति (Nature of Bonding in Metal Carbonyls) – धातु कार्बोनिलों में निम्नलिखित दो प्रकार के आबन्धन सम्मिलित होते हैं –

  1. CO के कार्बन से एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का धातु परमाणु के उचित रिक्त कक्षक में दान। यह एक अप्रत्यक्ष अतिव्यापन है तथा एक सिग्मा M ← C आबन्ध बनाता है।
  2. π-अतिव्यापन जिसमें पूरित धातु d-कक्षकों से इलेक्ट्रॉनों का CO के रिक्त प्रतिआबन्धन π* आण्विक
    कक्षकों में दान निहित होता है। इसके परिणामस्वरूप M → Cπ आबन्ध बनता है। धातु से लिगेण्ड का आबन्ध एक सहक्रियाशीलता का प्रभाव उत्पन्न करता है जो CO व धातु के मध्य आबन्ध को मजबूत बनाता है।

धातु कार्बोनिलों में आबन्धन निम्नवत् प्रदर्शित है –
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प्रश्न 23.
निम्नलिखित संकुलों में केन्द्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d-कक्षकों का अधिग्रहण एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए –
(i) K3[Co(C2O4)3]
(ii) cis-[CrCl2(en)2]Cl
(iii) (NH4)[CoF4]
(iv) [Mn(H2O)6]SO4
उत्तर
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प्रश्न 24.
निम्नलिखित संकुलों के IUPAC नाम लिखिए तथा ऑक्सीकरण अवस्था, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उपसहसंयोजन संख्या दर्शाइए। संकुल का त्रिविम रसायन तथा चुम्बकीय आघूर्ण भी बतलाइए –
(i) K[Cr(H2O)2(C2O4)2].3H2O
(ii) [CrCl3(Py)3]
(iii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iv) Cs[FeC4]
(v) K4[Mn(CN)6]
उतर
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प्रश्न 25.
उपसहसंयोजन यौगिक के विलयन में स्थायित्व से आप क्या समझते हैं? संकुलों के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
विलयन में उपसहसंयोजन यौगिकों को स्थायित्व (Stability of Coordination Compounds in Solution) – अधिकांश संकुल अत्यधिक स्थायी होते हैं। धातु आयन तथा लिगेण्ड के बीच अन्योन्यक्रिया को लुईस अम्ल-क्षार अभिक्रिया के समान माना जाता है। यदि अन्योन्यक्रिया प्रबल होगी तो बनने वाला संकुल ऊष्मागतिकीय रूप से अत्यधिक स्थायी होगा।
विलयन में संकुल के स्थायित्व का अर्थ है–साम्य अवस्था पर भाग ले रही दो स्पीशीज के मध्य संगुणन की मात्रा का मान। संगुणन के लिए साम्य स्थिरांक (स्थायित्व या विरचन) को परिमाण गुणात्मक रूप से स्थायित्व को प्रकट करता है। इस प्रकार यदि हम निम्न प्रकार की अभिक्रिया को लें –
M + 4L [latex]\rightleftharpoons [/latex] ML
K = [latex]\frac { [{ ML }_{ 4 }] }{ { [M][L] }^{ 4 } } [/latex]
साम्य स्थिरांक का मान जितना अधिक होगा, ML4 की विलयन में मात्रा उतनी ही अधिक होगी। विलयन में मुक्त धातु आयनों का अस्तित्व नगण्य होता है। अत: M सामान्यत: विलायक अणुओं से घिरा होगा जो लिगेण्ड अणुओं, L से प्रतिस्पर्धा करेंगे तथा धीरे-धीरे उनसे प्रतिस्थापित हो जाएँगे।

संकुलों के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारक
(Factors Affecting the Stability of Complexes)
संकुलों को स्थायित्व निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है –
I. केन्द्रीय आयन की प्रकृति (Nature of Central lon)
(i) केन्द्रीय धातु आयन पर आवेश (Charge on central metal ion) – सामान्यतया केन्द्रीय आयन पर आवेश घनत्व जितना अधिक होता है, उसके संकुलों का स्थायित्व भी उतना ही अधिक होता है। दूसरे शब्दों में, किसी आयन पर आवेश अधिक तथा आकार छोटा होने पर अर्थात् आयन का आवेश/त्रिज्या अनुपात अधिक होने पर इसके संकुलों का स्थायित्व अधिक होता है। उदाहरणार्थ– Fe2+ आयन की तुलना में Fe3+ आयन उच्च आवेश वहन करते हैं, परन्तु इनके आकार समान होते हैं। इसलिए Fe2+ आयन की तुलना में Fe3+ पर आवेश घनत्व उच्च होता है, इसलिए Fe3+ आयन के संकुल अधिक स्थायी होते हैं।
Fe3+ + 6CN → [Fe(CN)6]3-; K = 1.2 x 1031
Fe2+ + 6CN → [Fe(CN)6]4-; K = 1.8 x 106

(ii) धातु आयन का आकार (Size of metal ion) – धातु आयन का आकार घटने पर संकुल का स्थायित्व बढ़ता है। यदि हम द्विसंयोजी धातु आयन पर विचार करें तो इनके संकुलों का स्थायित्व केन्द्रीय धातु आयन की आयनिक त्रिज्या घटने के साथ बढ़ता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 32
इसलिए स्थायित्व का क्रम इस प्रकार है –
Mn2+ < Fe2+ < Co2+ < Ni2+ < Cu2+ < Zn2+
यह क्रम इवैग विलयम का स्थायित्व क्रम कहलाता है।

(iii) धातु आयन की विद्युतऋणात्मकता या आवेश वितरण (Electronegativity or Charge distribution of metal ion) – संकुल आयन का स्थायित्व धातु आयन पर इलेक्ट्रॉन आवेश वितरण से भी सम्बन्धित होता है। आरलेण्ड, चैट तथा डेविस के अनुसार धातु आयनों को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है –
(क) वर्ग ‘a’ ग्राही (Class ‘a’ acceptors) – ये पूर्णतया विद्युतधनात्मक धातुएँ होती हैं तथा इनमें वर्ग 1 तथा 2 की धातुएँ सम्मिलित होती हैं। इनके अतिरिक्त आन्तरसंक्रमण धातुएँ तथा संक्रमण श्रेणी के पूर्व सदस्य (वर्ग 3 से 6 तक), जिनमें अक्रिय गैस विन्यास से कुछ इलेक्ट्रॉन अधिक होते हैं, भी इस वर्ग में सम्मिलित होते हैं। ये N, O तथा F दाता परमाणुओं से युक्त लिगेण्डों के साथ अत्यधिक स्थायी उपसहसंयोजक सत्ता बनाते हैं।

(ख) वर्ग ‘b’ ग्राही (Class ‘b’ acceptors) – ये बहुत कम विद्युतधनात्मक होते हैं। इनमें भारी धातुएँ; जैसे- Rh, Pd, Ag, Ir, Pt, Au, Hg, Pb आदि, जिनमें भरित d-कक्षक होते हैं, सम्मिलित होती हैं। ये उन लिगेण्डों के साथ स्थायी संकुल बनाती हैं जिनमें N, O तथा F वर्ग के भारी सदस्य दाता परमाणु होते हैं।

(iv) कीलेट प्रभाव (Chelate effect) – स्थायित्व कीलेट वलयों के निर्माण पर भी निर्भर करता है। यदि L एक एकदन्तुर लिगेण्ड तथा L-L द्विदन्तुर लिगेण्ड हो तथा यदि L तथा L-L के दाता परमाणु एक ही तत्व के हों, तब L-L, L को प्रतिस्थापित कर देगा। कीलेशन के कारण यह स्थायित्व कीलेट प्रभाव कहलाता है। 5 तथा 6 सदस्यीय वलयों में कीलेट प्रभाव अधिकतम होता है। सामान्य रूप में वलय संकुल को अधिक स्थायित्व प्रदान करती है।

(v) वृहद्चक्रीय प्रभाव (Macrocyclic effect) – यदि एक बहुदन्तुर लिगेण्ड चक्रीय है तथा कोई अनुपयुक्त त्रिविम प्रभाव नहीं है तो बनने वाला संकुल बिना चक्रीय लिगेण्ड वाले सम्बन्धित संकुल की तुलना में अधिक स्थायी होगी। यह वृहद्चक्रीय प्रभाव कहलाता है।

II. लिगेण्ड की प्रकृति (Nature of Ligand)
(i) क्षारीय सामर्थ्य (Basic strength) – लिगेण्ड जितना अधिक क्षारीय होगा, उतनी ही अधिक सरलता उसे अपने एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म को दान देने में होगी, इसलिए इससे बनने वाले संकुल उतने ही अधिक स्थायी होंगे। अत: CN तथा F आयन एवं NH3, जो प्रबल क्षार हैं, अच्छे लिगेण्ड हैं। तथा अनेक स्थायी संकुल बनाते हैं।

(ii) लिगेण्डों का आकार तथा आवेश (Size and charge of ligands)-ऋणायनी लिगेण्डों के लिए आवेश उच्च तथा आकार छोटा होने पर बनने वाला संकुल अधिक स्थायी होता है। अतः F अधिक स्थायी संकुल देता है, परन्तु Cl आयन नहीं।

प्रश्न 26.
कीलेट प्रभाव से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
जब कोई बहुदन्तुर लिगेण्ड दो या अधिक दाता परमाणुओं के द्वारा केन्द्रीय धातु आयन से अपने आप को इस प्रकार जोड़ता है कि केन्द्रीय आयन के साथ 5 या 6 सदस्यीय चक्र बनता है, तो यह प्रभाव कीलेट प्रभाव कहलाता है। कीलेट संकर यौगिक को स्थिरता प्रदान करते हैं; जैसे –
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अर्थात् [PtCl2(en)]

प्रश्न 27.
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित में उपसहसंयोजन यौगिकों की भूमिका की संक्षिप्त विवेचना कीजिए –

  1. जैव प्रणालियाँ
  2. औषध रसायन
  3. विश्लेषणात्मक रसायन
  4. धातुओं का निष्कर्षण/धातुकर्म।

या
जैविक निकायों में उपसहसंयोजक यौगिकों के महत्त्व का उल्लेख कीजिए। (2018)
उत्तर
1. जैव प्रणालियाँ (Biological Systems) – उपसहसंयोजन यौगिक जैव तन्त्र में बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। प्रकाश संश्लेषण के लिए उत्तरदायी वर्णक, क्लोरोफिल, मैग्नीशियम का उपसहसंयोजन यौगिक हैं। रक्त का लाल वर्णक हीमोग्लोबिन, जो कि ऑक्सीजन का वाहक है, आयरन का एक उपसहसंयोजन यौगिक है। विटामिन B12 सायनोकोबालऐमीन, प्रतिप्रणाली अरक्तता कारक (antipernicious anaemia factor), कोबाल्ट का एक उपसहसंयोजन यौगिक है। जैविक महत्त्व के अन्य धातु आयन युक्त उपसहसंयोजन यौगिक; जैसे- कार्बोक्सीपेप्टिडेज-A (carboxypeptidase A) तथा कार्बोनिक एनहाइड्रेज (carbonic anhydrase) (जैव प्रणाली के उत्प्रेरक) एन्जाइम हैं।

2. औषध रसायन (Medicinal Chemistry) – औषधं रसायन में कीलेट चिकित्सा के उपयोग में अभिरुचि बढ़ रही है। इसका एक उदाहरण है-पौधे/जीव-जन्तु निकायों में विषैले अनुपात में विद्यमान धातुओं के द्वारा उत्पन्न समस्याओं का उपचार। इस प्रकार कॉपर तथा आयरन की अधिकता को D-पेनिसिलऐमीन तथा डेसफेरीऑक्सिम B लिगेण्डों के साथ उपसहसंयोजन यौगिक बनाकर दूर किया जाता है। EDTA को लेड की विषाक्तता के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है। प्लैटिनम के कुछ उपसहसंयोजन यौगिक ट्यूमर वृद्धि को प्रभावी रूप से रोकते हैं। उदाहरण हैं- समपक्ष-प्लैटिन (cis-platin) तथा सम्बन्धित यौगिक

3. विश्लेषणात्मक रसायन (Analytical Chemistry) – गुणात्मक (qualitative) तथा मात्रात्मक (quantitative) रासायनिक विश्लेषणों में उपसहसंयोजन यौगिकों के अनेक उपयोग हैं। अनेक परिचित रंगीन अभिक्रियाएँ जिनमें धातु आयनों के साथ अनेक लिगेण्डों (विशेष रूप से कीलेट लिगेण्ड) की उपसहसंयोजन सत्ता बनने के कारण रंग उत्पन्न होता है, चिरसम्मत (classical) तथा यान्त्रिक (instrumental) विधियों द्वारा धातु आयनों की पहचान व उनके मात्रात्मक आकलन का आधार हैं। ऐसे अभिकर्मकों के उदाहरण हैं- EDTA, DMG (डाइमेथिल ग्लाइऑक्सिम), α- नाइट्रोसो- β- नैफ्थॉल आदि।

4. धातुओं का निष्कर्षण/धातुकर्म (Extraction of the Metals/Metallurgy) – धातुओं की कुछ प्रमुख निष्कर्षण विधियों में; जैसे- सिल्वर तथा गोल्ड के लिए, संकुल विरचन का उपयोग होता, है। उदाहरणार्थ-ऑक्सीजन तथा जल की उपस्थिति में गोल्ड, सायनाइड आयन से संयोजित होकर जलीय विलयन में उपसहसंयोजन सत्ता, [Au(CN)2] बनाता है। इस विलयन में जिंक मिलाकर गोल्ड को पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 28.
संकुल [Co(NH3)6]Cl2 से विलयन में कितने आयन उत्पन्न होंगे?

  1. 6
  2. 4
  3. 3
  4. 2

उत्तर
3. 3 आयन
[Co(NH3)6]Cl2 → [Co(NH3)6]2+ + 2Cl

प्रश्न 29.
निम्नलिखित आयनों में से किसके चुम्बकीय आघूर्ण का मान सर्वाधिक होगा?

  1. [Cr(H2O)6]3+
  2. [Fe(H2O)6]2+
  3. [Zn(H2O)6]2+

उत्तर
[Fe(H2O)6]2+ का सबसे अधिक चुम्बकीय आघूर्ण है क्योंकि

  1. Cr3+ में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि
  2. में Fe2+ में चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं तथा
  3. Zn2+ में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।

प्रश्न 30.
K[Co(CO)4] में कोबाल्ट (Co) की ऑक्सीकरण संख्या है –

  1. +1
  2. +3
  3. – 1
  4. -3

उत्तर
3. -1
[+1 + x + 4 × (0) = 0: ∴ x = – 1 ]

प्रश्न 31.
निम्नलिखित में सर्वाधिक स्थायी संकुल है –

  1. [Fe(H2O)6]2+
  2. [Fe(NH3)6]3+
  3. [Fe(C2O4)3]3-
  4. [FeCl6]3-

उत्तर
3. [Fe(C2O4)6]3-
(C2O2-4 एक कीलेटिंग लिगेण्ड है तथा संकर योगिक को स्थिरता प्रदान करता है।)

प्रश्न 32.
निम्नलिखित के लिए दृश्य प्रकाश में अवशोषण की तरंगदैर्घ्य का सही क्रम क्या होगा?
[Ni(NO2)6]4-, [Ni(NH3)6]2+, [Ni(H2O)6)2+
उत्तर
स्पेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी में दिये गये संकर यौगिकों में उपस्थित लिगेण्ड्स का क्रम निम्न प्रकार है –
H2O < NH3 < NO3

इसलिए अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य का क्रम निम्न होगा –
[Ni(H2O)6]2+ < [Ni(NH3)6]2+ < [Ni(NO2)6]4-

चूंकि अवलोकित तरंगदैर्घ्य अवशोषित तरंगदैर्घ्य की पूरक होती हैं, इसलिए अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ( E = [latex]\frac { hc }{ \lambda } [/latex]) विपरीत क्रम में होगी अर्थात्
[Ni(NO2)6]4- < [Ni(NH3)6]2+ < [Ni(H2O)6]2+

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
[Co(en)2Cl2]Cl में Co की समन्वय संख्या है – (2017)
(i) 3
(ii) 4
(iii) 5
(iv) 6
उत्तर
(iv) 6

प्रश्न 2.
[Cr(H,0) Cl,J+ आयन में Cr की संयोजकता होती है – (2017)
(i) 3
(ii) 1
(iii) 6
(iv) 5
उत्तर
(iii) 6

प्रश्न 3.
[Co(NH ) Cl]Cl, में Co की ऑक्सीकरण अवस्था है – (2017)
(i) +1
(ii) +2
(iii) +3
(iv) +4
उत्तर
(iii) +3

प्रश्न 4.
हैटरोलैप्टिक संकर है – (2015)
(i) [Fe(CN)6]4-
(ii) [Co(NH3)5SO4]+
(iii) [Hgl4]2-
(iv) [Co(NH3)6]3+
उत्तर
(ii) [Co(NH3)5SO4]+

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-सा आयन उपसहसंयोजन यौगिक नहीं बनाता है? (2017)
(i) Na+
(ii) Cr2+
(iii) Co+2
(iv) Cr3+
उत्तर
(i) Na+

प्रश्न 6.
कौन-सा धनायन अमोनिया के साथ ऐमीन संकुल नहीं बनाता है? (2017)
(i) Ag+
(ii) Al3+
(iii) Cd2+
(iv) Cu2+
उत्तर
(ii) Al3+

प्रश्न 7.
[Pt(NH3)2Cl2] यौगिक के त्रिविम समावयवियों की संख्या है- (2014)
(i) 1
(ii) 2
(iii) 4
(iv) 3
उत्तर
(ii) 2

प्रश्न 8.
जटिल यौगिक [Fe(H2O)5NO]SO4 में Fe के अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्यष्ट है –
(i) 2
(ii) 3
(iii) 4
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(i) 2

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लिगेण्ड क्या है? दो उदाहरण भी दीजिए। (2014, 17)
उत्तर
वह आण्विक अथवा आयनिक स्पीशीज जो संकर यौगिक में केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन से स्थायी रूप से जुड़ी होती है, लिगेण्ड कहलाती है। उदाहरणार्थ– K4[Fe(CN)6] में CN आयन लिगेण्ड है क्योंकि यह संकर में केन्द्रीय Fe2+ आयन से सीधे जुड़ा है। [Cu(NH3)4]2+ एक अन्य संकर आयन है जिसमें Cu2+ आयन चार NH3 लिगेण्ड से जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित लिगेण्डों के नाम लिखिए –
OH, H2O, NH3, NH2, CH2, NH2-CH2NH2, CH3COO, CN, NCS
उत्तर

  • OH ⇒ हाइड्रॉक्सो
  • H2O ⇒ एक्वा
  • NH3 ⇒ ऐम्मीन
  • NH2 ⇒ एमिडो
  • CH2NH2-CH2NH2 ⇒ एथीलिन डाइएमीन
  • CH3COO ⇒ एसीटेटो
  • CN ⇒ सायनो
  • NCS ⇒ थायोसायनेटो

प्रश्न 3.
निम्न में से धनायनिक, ऋणायनिक तथा उदासीन संकर यौगिकों को छाँटिए-
K2[Hg I4], [Co(NH3)6]Cl3, K4[Fe(CN)6], [Ni(CO)4], [Pt(NH3),Cl2], [Fe(H2O)6]Cl3
उत्तर

  • धनायनिक संकर यौगिक ⇒ [Co(NH3)6]Cl3, [Fe(H2O)6]Cl3
  • ऋणायनिक संकर यौगिक ⇒ K2[Hg I4], K4 [Fe(CN)6]
  • उदासीन संकर यौगिक ⇒ [Ni(CO)4], [Pt(NH3)2 Cl2]

प्रश्न 4.
K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O के जलीय विलयन में उपस्थित आयनों के नाम लिखिए।
उत्तर
K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O के जलीय विलयन में K+, Al3+ व SO2-4 आयन उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 5.
[Fe(C2O4)3] में केन्द्रीय धातु आयन की उपसहसंयोजकता (समन्वय संख्या) ज्ञात कीजिए। (2017)
उत्तर
समन्वय संख्या = 6

प्रश्न 6.
संकर [Fe(CN)6]4- की आवेश संख्या ज्ञात कीजिए।
हल
[Fe(CN)6]4- की आवेश संख्या = Fe2+ आयन पर आवेश + (6 × CN आयन पर आवेश) = 2+ 6 × (-1) = -4

प्रश्न 7.
[Cu(NH3)4] SO4 में Cu की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए। (2014)
हल
माना Cu की ऑक्सीकरण संख्या x है।
x + 4(0) + 1(-2) = 0
x – 2= 0
x = +2

प्रश्न 8.
IUPAC नियमों का प्रयोग करते हुए निम्न के नाम लिखिए –
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उत्तर
(i) पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सैलेटो) कोबाल्ट (III)
(ii) टेट्राकार्बोनिलनिकिल (0)
(iii) टेट्राऐम्मीन जिंक (II) क्लोराइड
(iv) पोटैशियम हेक्सा सायनो फैरेट (II)
(v) पोटैशियम ट्राइ ऑक्सेलेटो ऐलुमिनेट (III)
(vi) पोटैशियम ऐम्मीन ट्राइ ब्रोमाइडो प्लैटिनेट (III)
(vii) डाइऐम्मीन सिल्वर (I) डाइसायनो अर्जेन्टेट (I)
(viii) पोटैशियम टेट्रा आयोडो मरक्यूरेट (II)
(ix) सोडियम डाइ सायनो अर्जेन्टेट (I)
(x) टेट्राऐम्मीन कॉपर (II) सल्फेट
(xi) पेन्टा ऐक्वा क्लोरिडो क्रोमियम (III) क्लोराइड
(xii) पेन्टाऐम्मीन कार्बोनेटो कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(xiii) पोटैशियम पेन्टासायनोनाइट्रोसिलफैरेट (II) डाइहाइड्रेट
(xiv) हेक्सा ऐम्मीन प्लेटिनम (IV) क्लोराइड
(xv) पोटैशियम टेट्रासायनो निकिलेट (II)
(xvi) पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सैलेटो) क्रोमेट (III)
(xvii) टेट्राऐम्मीन क्लोराइडो कोबाल्ट (III) सल्फेट
(xviii) कैल्सियम हेक्सा सायनोफैरेट (II)
(xix) पोटैशियम ट्राइहेक्सा नाइट्रोकोबाल्ट (II)
(xx) हेक्साऐक्वाफैरेट (V) ट्राइक्लोराइड
(xxi) टेट्राऐम्मीनडाइऐक्वा कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(xxii) आयरन (III) हेक्सासायनिडोफरेट (II)

प्रश्न 9.
निम्न समावयवियों के युग्मों के द्वारा कौन-सी समावयवता प्रदर्शित होती है?

  1. [Pt(OH)2 (NH3)4]SO4 तथा Pt(SO4)(NH3)4](OH)2
  2. [Cu(NH3)4] [PtCl4) तथा [Pt(NH3)4] [Cucl4]

उत्तर

  1. आयनन समावयवता,
  2. उपसहसंयोजन समावयवता।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में से किस आयन का चुम्बकीय आघूर्ण सबसे अधिक है?

  1. [Cr(H2O)6]3+
  2. [Fe(H2O)6]2+
  3. [Zn(H2O)6]2+

उत्तर
2. [Fe(H2O)6]2+ का सबसे अधिक चुम्बकीय आघूर्ण है क्योंकि Cr3+ में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि Zn2+ में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है। यौगिक (ii) में Fe2+ में चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न11.
संयोजकता बन्ध सिद्धान्त के अनुसार निम्न उपसहसंयोजन स्पीशीज में बन्ध की प्रकृति बताइए

  1. [Fe(CN)6]4-
  2. [FeF6]3-
  3. [Co(C2O4)3]3-
  4. [CoF6]3-

उत्तर-
(i) d2 sp3, अष्टफलकीय, प्रतिचुम्बकीय,
(ii) sp3 d2, अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय,
(iii) d2 sp3, अष्टफलकीय, प्रतिचुम्बकीय,
(iv) sp3 d2, अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय।

प्रश्न 12.
VBT के आधार पर [FeF6]3- संकुल आयन की संरचना एवं चुम्बकीय प्रकृति बताइए। (2017)
उत्तर
sp3 d2 प्रकार का संकरण, अष्टफलकीय संरचना, अनुचुम्बकीय प्रकृति

प्रश्न 13.
प्रभावी परमाणु क्रमांक क्या है? उदाहरण द्वारा समझाइए। (2017)
उत्तर
प्रभावी परमाणु क्रमांक = परमाणु क्रमांक + ग्रहण किये गये इलेक्ट्रॉनों की संख्या – त्याग किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या।

प्रश्न 14.
[Fe(CN)6]3- में आयरन का प्रभावी परमाणु क्रमांक ज्ञात कीजिए। (Fe का परमाणु क्रमांक = 26) (2018)
उत्तर
[Fe(CN)6]3- में आयरन का प्रभावी परमाणु क्रमांक = [26- 3 + 2(6)] = 35

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आवेश के आधार पर लिगेण्डों को किस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है? उदाहरण देते हुए समझाइए। (2014)
उत्तर
आवेश के आधार पर लिगेण्ड निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं –

  1. धनात्मक लिगेण्ड – धनावेश वाले लिगेण्ड धनात्मक लिगेण्ड कहलाते हैं। ये संकर में बहुत कम पाये जाते हैं।
    उदाहरणार्थ– NO+, NH2 NH+3 आदि।
  2. ऋणात्मक लिगेण्ड – ऋणावेश वाले लिगेण्ड ऋणात्मक लिगेण्ड कहलाते हैं। ये ऋणात्मक स्पीशीज होती हैं जिनमें एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म पाये जाते हैं।
    उदाहरणार्थ– F, Cl, Br, CN आदि।
  3. उदासीन लिगेण्ड – ऐसे लिगेण्डों पर कोई आवेश नहीं होती है और ये प्राय: आण्विक स्पीशीज होती हैं जिनमें एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म उपस्थित रहते हैं।
    उदाहरणार्थ– H2O, NH3, CO, NO आदि।

प्रश्न 2.
संकर यौगिकों में निम्न में से प्रत्येक को उदाहरण सहित समझाइए-

  1. आयनन समावयवता तथा
  2. हाइड्रेट समावयवता।

या
उपसहसंयोजन यौगिकों की संरचना समावयवता की व्याख्या उचित उदाहरण के साथ कीजिए। (2017)
उत्तर
1. आयनन समावयवता – जब सहसंयोजक यौगिकों के अणुसूत्र समान होते हैं परन्तु वह भिन्न आयनन व्यवहार प्रदर्शित करते हैं तथा विलयन में भिन्न आयन प्रदान करते हैं तो इसे आयनन समावयवता कहते हैं। आयनन समावयवता, उपसहसंयोजन तथा आयनन मण्डल के मध्य समूहों के विनिमय के कारण होती है।
उदाहरणार्थ– Co(NH3)5 (Br)(SO4) सूत्र वाले दो भिन्न यौगिक इस प्रकार हैं –
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2. हाइड्रेट समावयवता – जल के अणु लिगण्ड की भाँति तथा क्रिस्टलीकरण जल दोनों की भाँति व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं। जब दो योगिक इस प्रकार की भिन्नता प्रदर्शित करते हैं तो उन्हें हाइड्रेट समावयवी कहते हैं तथा इस घटना को हाइड्रेट समावयवता कहते हैं। उदाहरणार्थ– CrCl. 6H2O सूत्र के निम्नलिखित तीन हाइड्रेट समावयवी ज्ञात हैं –

  • [Cr(H2O)]Cl3 हेक्साऐक्वाक्रोमियम (III) क्लोराइड (बैंगनी)
  • [Cr(H2O)5Cl]Cl. H2O पेन्टाऐक्वाक्लोरिडोक्रोमियम (III) क्लोराइड मोनोहाइड्रेट (नीला-हरा)
  • [Cr(H2O)4Cl2]Cl . 2H2O टेट्राऐक्वाडाइक्लोरिडोक्रोमियम (III) क्लोराइड डाइहाइड्रेट (गाढ़ा-हरा)

प्रश्न 3.
निम्न संकर यौगिकों के सन्दर्भ में ज्यामितीय समावयवता को समझाइए

  1. [PtCl2(NH3)2]
  2. [Co(NH3)2Cl2] तथा
  3. [Pt(gly)2]

या
सिस समावयवता और ट्रांस समावयवता की परिभाषा बताइए। (2015)
उत्तर
जब समान समूह केन्द्रीय धातु परमाणु के एक ही ओर स्थित होते हैं तो उसे सिस समावयवी तथा जब विपरीत ओर स्थित होते हैं तो उसे ट्रांस समावयवी कहते हैं।
1. [PtCl2(NH3)2] के सिस एवं ट्रांस रूप नीचे चित्र में दर्शाए गए हैं –
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2. [Co(NH3)4]+Cl2 के सिस एवं ट्रांस रूप नीचे चित्र में दर्शाए गए हैं –
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3. [Pt(gly)2] के सिस एवं ट्रांस रूप नीचे चित्र में दर्शाए गए हैं –
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 39

प्रश्न 4.
द्विक-लवण क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
ये वे आण्विक अथवा योगात्मक यौगिक हैं जो कि ठोस अवस्था में रहते हैं परन्तु जल में घोलने पर ये अपने घटक आयनों में वियोजित हो जाते हैं। इस प्रकार घटक विलयन में अपनी पहचान खो देते हैं।
उदाहरणार्थ
1. पोटाश एलम (Potash alum), K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O द्विक-लवण है। इसे पोटैशियम सल्फेट तथा ऐलुमिनियम सल्फेट के संतृप्त विलयनों को मिलाकर तथा तत्पश्चात् मिश्रण का वाष्पीकरण करके प्राप्त किया जाता है।
K2SO4 + Al2(SO4)3 + 24H2O → K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O
जब पोटाश एलम को जल में घोला जाता है तो यह पहचान खोकर अपने आयनों में वियोजित हो जाता है।
K2SO4 . Al2(SO4) . 24H2O → 2K+ + 2Al3+ + 4SO2-4 + 24H2O
पोटाश एलम का जलीय विलयन K+, Al3+ तथा SO2-4 आयनों का परीक्षण देता है। अतः यह द्विक लवण है।

2. मोहर लवण (Mohr’s salt) FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O भी एक द्विक-लवण है तथा इसे फेरस सल्फेट तथा अमोनियम सल्फेट के संतृप्त विलयनों को मिश्रित करके तथा मिश्रण को ठण्डा करके प्राप्त किया जाता है।
FeSO4 + (NH4)2 SO4 . 6H2O  → FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O
जब मोहर लवण को जल में घोला जाता है तो वह अपने आयनों में निम्न प्रकार वियोजित होता है ” तथा उसकी पहचान समाप्त हो जाती है –
FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O  → Fe2+ + 2NH+4 + 2SO2-4 + 6H2O
इसका जलीय विलयन Fe2+, NH+4 तथा SO2-4 आयनों का परीक्षण देता है। अत: मोहर लवण एक द्विक-लवण है।

प्रश्न 5.
FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन के साथ 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर विलयन Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, परन्तु CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है। समझाइए क्यों?
उत्तर
FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन में 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर एक द्विक-लवण प्राप्त होता है, जिसे मोहर लवण (FeSO4.(NH4)2SO44.6H2O) कहते हैं। यह निम्न प्रकार आयनित होता है –
(FeSO4.(NH4)2SO44.6H2O) → F2+ + 2NH+4 + 3SO2-4 + 6H2O
विलयन में Fe2+ आयनों की उपस्थिति के कारण यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है।

जब CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रित किया जाता है, तो संकर लवण [Cu(NH3)4]SO4 प्राप्त होता है। यह विलयन में निम्न प्रकार आयनित होता है –
[Cu(NH3)4]SO4 → [Cu(NH3)4]2+ + SO2-4
संकर आयन [Cu(NH3)4]2+ पुनः आयनित होकर Cu2+ आयन नहीं देता है। इसलिए विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त (VBT) की मुख्य अवधारणाएँ क्या हैं? निकिल कार्बोनिल आयन की संरचना तथा चुम्बकीय व्यवहार को इस सिद्धान्त के आधार पर समझाइए।
उत्तर
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त – इस सिद्धान्त का प्रतिपादन लाइनस पॉलिंग (Linus Pauling) ने किया था। इस सिद्धान्त के अनुसार, संकर का निर्माण, एक लूइस बेस (लिगेण्ड) तथा एक लूइस अम्ल (धातु या धातु आयन) के मध्य हुई अभिक्रिया है जिसके परिणामस्वरूप लिगेण्ड तथा धातु के मध्य उपसहसंयोजन अथवा दाता आबन्ध का निर्माण होता है।
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त की अवधारणाएँ – संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त की मुख्य अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन में कई रिक्त कक्षक (उनके उपसहसंयोजन संख्या के बराबर) उपस्थित होते हैं जिनमें लिगेण्ड द्वारा दिये गये इलेक्ट्रॉन समावेशित होते हैं। प्रत्येक एकदंतुर लिगेण्ड केन्द्रीय परमाणु अथवा आयन को इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म प्रदान करता है।
  2. केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन के रिक्त परमाण्विक कक्षक आवश्यकतानुसार संकरण में भाग लेते हैं। संकरण में, कक्षक आपस में मिलकर अपनी ऊर्जा का पुनः वितरण करते हैं। इस प्रकार समान संख्या में समान ऊर्जा वाले संकरित कक्षकों का निर्माण होता है।
  3. जब लिगेण्ड, केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन के सम्पर्क में आता है, तो केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयने के संकरित कक्षक, लिगेण्ड के इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म युक्त कक्षकों के साथ अतिव्यापन करते हैं तथा प्रबल लिगेण्ड-धातु उपसहसंयोजक आबन्धों का निर्माण करते हैं।
  4. केन्द्रीय धातु परमाणु अथवा आयन के अनाबन्धी इलेक्ट्रॉन (non-binding electrons) अप्रभावित रहते हैं तथा रासायनिक आबन्ध निर्माण में भाग नहीं लेते हैं।
  5. संकर निर्माण प्रक्रिया में, हुण्ड के अधिकतम बहुलता के नियम का अनुसरण किया जाता है परन्तु प्रबल लिगेण्ड के प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन हुण्ड के नियम के विरुद्ध युग्मित हो सकते हैं।
  6. यदि किसी संकर में एक या अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों तो वह संकर अनुचुम्बकीय होता है। यदि संकर में उपस्थित सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं तो संकर प्रतिचुम्बकीय होता है।

निकिल कार्बोनिल [Ni(CO)4] – इस संकर में केन्द्रीय निकिल परमाणु चार CO लिगेण्डों से घिरा रहता है। यौगिक में निकिल की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है। निकिल परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 4s2 है। प्रबल CO लिगेण्डों की उपस्थिति में इलेक्ट्रॉन पुनर्व्यवस्थित होता है तथा 4s- इलेक्ट्रॉन 3d-कक्षक में प्रवेश करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। इस प्रकार निकिल में 4s- तथा 4p- कक्षक संकरण में भाग लेने के लिए बाध्य हो जाते हैं। एक 4s- तथा तीन 4p- कक्षक sp3 संकरण में भाग लेते हैं तथा समान ऊर्जा के चार संकरित कक्षक का निर्माण करते हैं जो कि एक नियमित चतुष्फलक के चार कोनों की ओर दिष्ट होते हैं। ये कक्षक CO लिगेण्ड के कक्षक के साथ अतिव्यापित हो जाते हैं और इस प्रकार चतुष्फलकीय [Ni(CO)4] संकर का निर्माण होता है।
UP Board Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 Coordination Compounds image 40
यह संकर चतुष्फलकीय ज्यामिति युक्त है। इसमें सभी इलेक्ट्रॉनों के युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुम्बकीय है।

प्रश्न 2.
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त (CFT) को समझाइए। अष्टफलकीय व चतुष्फलकीय संकुल यौगिकों में d-कक्षकों को विपाटन स्पष्ट कीजिए।
या
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d-कक्षकों के विपाटन को दर्शाने हेतु चित्र बनाइए।
उत्तर
एच० बैथे (H. Bethe, 1929) तथा वी०व्लैक (Van Vleck) द्वारा 1932 ई० में उपसहसंयोजक यौगिकों के गुणों को स्पष्ट करने हेतु एक सिद्धान्त प्रस्तुत किया गया था, जिसे क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त (CFT) कहा गया, जो 1950 में लागू हुआ।
इस सिद्धान्त के मुख्य विन्दु निम्नवत् हैं –

  1. संक्रमण धातु संकुल के केन्द्रीय आयन का कार्य करती हैं। लिगण्ड एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करता है, जबकि संक्रमण धातु आयन के रिक्त कक्षक इन इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करते हैं।
  2. लिगेण्ड (ऋणात्मक/द्विध्रुवी) बिन्दु आवेश की तरह माने जाते हैं।
  3. संकुल यौगिकों में धातु आयन व लिगेण्ड के मध्य बनने वाले आबन्ध को पूर्णतया आयनिक माना जाता , है, अर्थात धातु आयन व लिगेण्ड परस्पर स्थित विद्युत आकर्षण बल द्वारा जुड़े रहते हैं।
  4. यह स्थिर विद्युत आकर्षण बल धनायन व ऋणायन के मध्य आयन-आयन आकर्षण बल हो सकता है या धनायन व उदासीन लिगेण्ड के मध्य आयन-द्विध्रुव आकर्षण बल हो सकता है।

अष्टफलकीय संकुल यौगिकों में 4-कक्षकों को विपाटन
एक मुक्त धातु आयन में सभी पाँच कक्षक (t2g और eg) अपभ्रंश होते हैं, अर्थात् उनकी ऊर्जा समान होती है। एक अष्टफलकीय संकर [ML6]n+ पर विचार करें जिसमें धातु आयन Mn+ अष्ट्रफलक के केन्द्र पर है तथा कोनों पर एकदन्ती लिगेण्ड (L) द्वारा घिरा हुआ है।
जब x,y और z अक्ष पर समस्त छ: लिगेण्ड धातु आयन की ओर अग्रसर होते हैं, तब लिगेण्ड के ऋण छोर (इलेक्ट्रॉन द्वारा) d-कक्षकों में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों से प्रतिकर्षित होते हैं। इस प्रतिकर्षण द्वारा पाँचों d-कक्षकों की ऊर्जाओं में परिवर्तन होता है। चूंकि eg, कक्षकों (dx2– y2 और dz2) की पालियाँ केन्द्रीय धातु आयन के समीप जाने वाले लिगेण्ड के मार्ग में आती हैं,
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अत: t2g कक्षकों (dxy, dyz, dzx) की अपेक्षा इनमें इलेक्ट्रॉनों का प्रतिकर्षण अधिक होता है। इस कारण पाँच d-कक्षक दो ऊर्जा समूहों में विभक्त हो जाते हैं, अर्थात् eg कक्षकों की ऊर्जा में वृद्धि होती है। धातु आयन के पाँच d-कक्षकों का भिन्न ऊर्जा के दो समूहों में विभाजन, d – d विपाटन या क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन कहलाता है। t2g और eg कक्षकों की ऊर्जा के मध्य के अन्तर को Δ0 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। (Δ = ऊर्जा में अन्तर व 0 = अष्टफलकीय) इसे 10Dq द्वारा भी दर्शाया जाता है और यह क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा कहलाती है।

चतुष्फलकीय संकुल यौगिकों में d-कक्षकों का विपाटन – चतुष्फलकीय संकुलों में d- कक्षकों का विपाटन समझने के लिए कल्पना कीजिए कि एक घन में चतुष्फलक रखा हुआ है। चतुष्फलक के चार किनारे घन के एकान्तर कोनों पर स्थापित हैं जिन पर चार लिगेण्ड स्थित हैं तथा धातु आयन उसके केन्द्र पर है।
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अब, हम यदि केन्द्रीय धातु परमाणु के d-कक्षकों की तुलना में चार लिगेण्डों की स्थिति को अध्ययन करें तो अक्ष (dx2– y2 और dz2 अर्थात् eg कक्षक) पर t2g कक्षकों (dxy, dxz, dyz) की अपेक्षा चार लिगण्ड और अधिक दर हो जाते हैं। अतः eg कक्षक निम्न ऊर्जा के हैं और t2g कक्षक उच्च ऊर्जा के हैं। eg और t2g कक्षकों के मध्य ऊर्जा का अन्तर चतुष्फलकीय संकुलों के लिए क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा कहलाता है तथा इसको A) द्वारा दर्शाया जाता है।
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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability (प्रायिकता) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability (प्रायिकता).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 13
Chapter Name Probability (प्रायिकता)
Exercise Ex 13.1, Ex 13.2, Ex 13.3, Ex 13.4, Ex 13.5
Number of Questions Solved 81
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability (प्रायिकता)

प्रश्नावली 13.1

प्रश्न 1.
यदि E और F इस प्रकार की घटनाएँ हैं कि P (E) = 0.6, P (F) = 0.3 और P(E ∩ F) = 02, तो [latex ]P\left( \frac { E }{ F } \right) [/latex] और [latex ]P\left( \frac { F }{ E } \right) [/latex] ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, P(E) = 0.6, P(F) = 0.3
और P (E ∩ F) = 0.2
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UP Board Solutions

प्रश्न 2:
P(A | B) ज्ञात कीजिए यदि P(B) = 0.5 और P(A ∩ B) = 0.32
हल:
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 2

प्रश्न 3.
यदि P (A) = 0.8, P(B) = 0.5 और [latex ]P\left( \frac { B }{ A } \right) =0.4[/latex] तो ज्ञात कीजिए
(i) P(A ∩ B)
(ii) [latex ]P\left( \frac { A }{ B } \right) [/latex]
(iii) P(AU B)
हल-
दिया है, P(A) = 0.8, P(B) = 0.5 और [latex ]P\left( \frac { B }{ A } \right) =0.4[/latex]
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 3
(iii) ∵ P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= 0.8 + 0.5 – 0.32
= 1.3 – 0.32
= 0.98

प्रश्न 4:
P(A ∪ B) ज्ञात कीजिए यदि 2P(A) = P(B) = [latex]\frac { 5 }{ 13 }[/latex] और P(A| B) = [latex]\frac { 2 }{ 5 }[/latex]
हल :
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 4

प्रश्न 5:
यदि P(A) = [latex]\frac { 6 }{ 11 }[/latex] ,P(B) = [latex]\frac { 5 }{ 11 }[/latex] और P(A∪ B) = [latex]\frac { 7 }{ 11 }[/latex] तो ज्ञात कीजिए
(i) P(A ∩B)
(ii) P(A | B)
(iii) P(B | A)
हल:
(i) ∵ P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 5

• निम्नलिखित प्रश्न 6 से 9 तक [latex ]P\left( \frac { E }{ F } \right)[/latex] ज्ञात कीजिए।

प्रश्न 6.
एक सिक्के को तीन बार उछाला गया है
(i) E : तीसरी उछाल पर चित F : पहली दोनों उछालों पर चित
(ii) E : न्यूनतम दो चित F : अधिकतम एक चित ।
(iii) E : अधिकतम दो पट F : न्यूनतम एक पट
हल-
(i) सिक्के को तीन बार उछालने पर कुल प्रतिदर्श समष्टि (प्रकार) = 2³ = 8 समसंभाव्य प्रतिदर्श बिन्दुओं का समुच्चय है जो निम्न प्रकार है।
S = {HHH, HHT, HTH, HTT, THH, THT, TTH, TTT}
E = तीसरी उछाल पर चित = {HHH, HTH, THH, TTH}
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 6
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 7

प्रश्न 7.
दो सिक्कों को एक बार उछाला गया है-
(i) E : एक सिक्के पर पट प्रकट होता है F : एक सिक्के पर चित प्रकट होता है।
(ii) E : कोई पट प्रकट नहीं होता है F : कोई चित प्रकट नहीं होता है।
हल-
(i) E = एक सिक्के पर पट प्रकट होता है। = {TH, HT}
F = एक सिक्के पर चित प्रकट होता है।
= {HT, TH}
∴ E ∩ F = {TH, HT}
दो सिक्कों को उछालने पर प्रतिदर्श समष्टि = 2² = 4
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प्रश्न 8.
एक पासे को तीन बार उछाला गया है
E : तीसरी उछाल पर संख्या 4 प्रकट होना
F : पहली दो उछालों पर क्रमशः 6 तथा 5 प्रकट होना।
हल-
E = तीसरी उछाल पर संख्या 4 प्रकट होना तथा F पहली दो उछालों पर क्रमश: 6 तथा 5 प्रकार होना
= (1,1, 4), (1, 2, 4), (1, 3, 4), … (1, 6, 4)
= (2, 1, 4), (2, 2, 4), (2, 3, 4), … (2, 6, 4)
= (3, 1, 4), (3, 2, 4), (3, 3, 4), … (3, 6, 4)
= (4,1, 4), (4, 2, 4), (4, 3, 4), … (4,6, 4)
= (5, 1, 4), (5, 2, 4), (5, 3, 4), … (5, 6, 4)
= (6,1, 4), (6, 2, 4), 6, 3, 4),… (6, 6, 4)
= 36 परिणाम
तथा F = {6, 5, 1), (6, 5, 2), (6, 5, 3), (6, 5, 4), (6, 5, 5), (6, 5, 6)} = 6 परिणाम
∴E ∩ F = {6, 5, 4}
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प्रश्न 9.
एक पारिवारिक चित्र में माता, पिता व पुत्र यादृच्छया खड़े हैं
E : पुत्र एक सिरे पर खड़ा है
F : पिता मध्य में खड़े हैं।
हल-
यदि एक पारिवारिक चित्र में (m), पिता (f) व पुत्र (s) यादृच्छया खड़े हैं।
कुल तरीके = 3. 2. 1 = 6
E = पुत्र एक सिरे पर खड़ा है।
= {(s m f), (s f m), (f m s), (m f s)}
F = पिता मध्य में खड़े हैं।
= {(m f s), (s f m)}
E ∩ F = {(m f s), (s f m)}
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प्रश्न 10.
एक काले और एक लाल पासे को उछाला गया है
(a) पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग 9 से अधिक होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता ज्ञात कीजिए यदि यह ज्ञात हो कि काले पासे पर 5 प्रकट हुआ है।
(b) पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग 8 होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता ज्ञात कीजिए यदि यह ज्ञात हो कि लाल पासे पर प्रकट संख्या 4 से कम है।
हल-
(a) माना A पासों पर प्राप्त संख्याओं को योगफल 9 से अधिक होने की घटना तथा F काले पासे पर 5 प्रकट होने की घटना को निरूपित करता है।
∴ A = {(4, 6), (5, 5), (6,4), (5, 6), (6, 5), (6, 6)}
तथा B = {(5, 1), (5, 2), (5, 3), (5,4), (5, 5), (5, 6)}
∴ A ∩ B = {(5, 5), (5, 6)}
तथा 2 पासों की उछाल में कुल परिणाम = 36
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(b) माना A घटना पासों पर प्राप्त संख्याओं का योगफल 8 होने तथा B घटना लाल पासे पर प्रकट संख्या 4 से कम घटित होने को निरूपित करते हैं।
A = {(2, 6), (3, 5), 4, 4), (5, 3), (6, 2)}
B = {(1, 1), (1, 2), (1, 3), (1, 4), (1, 5), (1, 6), (2, 1), (2, 2), 2, 3), (2,4), (2, 5), (2, 6), (3, 1), (3, 2), (3, 3), 3, 4), 3, 5), (3, 6)}
कुल प्रकार = 18
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प्रश्न 11.
एक सम पाँसे को उछाला गया है। घटनाओं E = {1, 3, 5}, F = {2, 3} और G = {2, 3, 4,5} के लिए निम्नलिखित ज्ञात कीजिए।
(i) P(E | F) और P(F | E)
(ii) P(E | G) और P(G | E)
(iii) P(E ∪ F|G) और P(E ∩ F | G)
हल:
प्रश्नानुसार, n(E) = 3, n(F) = 2, n(G) = 4
तथा n(E ∩ F) = 1, n(E ∩ G) = 2
(E ∪ F) = {1, 2, 3, 5}, (E OF) = {3}
⇒  n(E∪F) = 4, n(E OF) =1
∴ (E ∪ F) 2G = {2, 3, 5}, E 0 F G = {3}
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प्रश्न 12.
मान लें कि जन्म लेने वाले बच्चे को लड़का या लड़की होना समसंभाव्य है। यदि किसी परिवार में दो बच्चे हैं तो दोनों बच्चों के लड़की होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता क्या है, यदि यह दिया गया है कि
(i) सबसे छोटा बच्चा लड़की है
(ii) न्यूनतम एक बच्चा लड़की है।
हल-
माना पहले तथा-दूसरे बच्चे, लड़कियाँ G1, G2 तथा लड़के B1, B2 हैं।
∴ S = { (G1, G2), (G1, B2), (G2, B1), (B1, B2)}
माना A = दोनों बच्चे लड़कियाँ हैं = {G1 G2}
B = सबसे छोटा बच्चा लड़की है = {G1G2, B1G2}
C = न्यूनतम एक बच्चा लड़की है = {G1B2, G1G2, B1G2}
A ∩ B = {G1G2}, A ∩C = {G1G2}
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प्रश्न 13:
एक प्रशिक्षक के पास 300 सत्य/असत्य प्रकार के आसान प्रश्न, 200 सत्य/असत्य प्रकार के कठिन प्रश्न, 500 बहुविकल्पीय प्रकार के आसान प्रश्न और 400 बहुविकल्पीय प्रकार के कठिन प्रश्नों का संग्रह है। यदि प्रश्नों के संग्रह से एक प्रश्न यदृच्छया चुना जाता है, तो एक आसान प्रश्न की बहुविकल्पीय होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना E = आसान प्रश्न पूछे जाने की घटना
तथा F = बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाने की घटना
तब n(E) = 300 + 500 = 800, n(F) = 500 + 400 = 900
तथा n(E ) F) = 500
∴  अभीष्ट घटना की प्रायिकता = p(F | E) = [latex]\frac { n(E\quad \cap \quad F) }{ n(E) }[/latex] =  [latex]\frac { 500 }{ 800 }[/latex] =  [latex]\frac { 5 }{ 8 }[/latex]

प्रश्न 14.
यह दिया गया है कि दो पासों को फेंकने पर प्राप्त संख्याएँ भिन्न-भिन्न हैं। दोनों संख्याओं का योग 4 होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल-
दो पासों को फेंकने से प्रतिदर्श समष्टि के परिणाम = 6 x 6 = 36
माना A = दो संख्याओं का योग 4 = {(1,3), (2, 2), (3, 1}}
दो पासों को फेंकने पर समान संख्या वाले परिणाम ।
= {(1, 1), (2, 2), (3, 3), 4, 4), (5, 5), 6, 6)} कुल 6 हैं।
∴B = जब संख्या भिन्न हो तो ऐसे परिणाम = 36 – 6 ≠ 30
A ∩ B = {(1, 3), (3, 1)}
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प्रश्न 15.
एक पासे को फेंकने के परीक्षण पर विचार कीजिए। यदि पासे पर प्रकट संख्या 3 का गुणज है तो पासे को पुनः फेंकें और यदि कोई अन्य संख्या प्रकट हो तो एक सिक्के को उछालें। घटना न्यूनतम एक पासे पर संख्या 3 प्रकट होना’ दिया गया है तो घटना ‘सिक्के पर पट प्रकट होने की सप्रतिबन्ध प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिए गए परीक्षण के परिणामों को निम्न समुच्चय के द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
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∴ n(S) = 20
माना घटना E सिक्के पर पट प्रकट होना तथा घटना F न्यूनतम एक पासे पर संख्या 3 प्रकट होना को निरूपित करते हैं।
E = [(1, T), (2, T), (4, T), (5, T)] ⇒ n (E) = 4
F = [(3, 1), (3, 2), (3, 3), (3, 4), (3, 5), (3, 6), (6, 3)]
n(F) = 7
E ∩ F = 0 क्योंकि कोई उभयनिष्ठ बिन्दु नहीं है।
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निम्नलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक में सही उत्तर चुनें।

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प्रश्न 16.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 18
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 19

प्रश्न 17.
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 19a
हल-
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 20

प्रश्नावली 13.2

प्रश्न 1:
यदि  P(A)= [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] और  P(B) = [latex]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] A व B स्वतन्त्र घटनायें हैं, तो P(A ∩ B) ज्ञात कीजिए। 
हल:
∵ A व B स्वतन्त्र घटनाये हैं।
∴  P(A ∩ B) = P(A) . P(B) =  [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] x [latex]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] = [latex]\frac { 3 }{ 25 }[/latex]

प्रश्न 2.
52 पत्तों की एक गड्डी में से यदृच्छया बिना प्रतिस्थापित किये दो पत्ते निकाले गए। दोनों पत्तों के काले रंग का होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
ताश की गड्डी में 26 काले पत्ते होते हैं।
आगे उपरोक्त प्रश्न की भाँति हल करें।
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प्रश्न 3.
सन्तरों के एक डिब्बे का निरीक्षण उसमें से तीस सन्तरों को यदृच्छया बिना प्रतिस्थापित किये हुए निकाल कर किया जाता है। यदि तीनों निकाले गये सन्तरें अच्छे हैं; तो डिब्बे को बिक्री के लिए स्वीकृत किया जाता है अन्यथा अस्वीकृत कर देते हैं। एक डिब्बा जिसमें 15 सन्तरें हैं जिनमें से 12 अच्छे व ३ खराब सन्तरें हैं, के बिक्री के लिए स्वीकृत होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना पहली, दूसरी व तीसरी निकाल में अच्छा सन्तरा निकलने की घटनायें क्रमश: A, B व C है।
तब अभीष्ट प्रायिकता = P(A ∩ B ∩ C)
अब P(A) = पहली निकाल में अच्छा सन्तरा निकलने की प्रायिकता =  [latex]\frac { 12 }{ 15 }[/latex] x [latex]\frac { 4 }{ 5 }[/latex]
पहली निकाल में एक अच्छा सन्तरा निकलने के बाद शेष सन्तरों की संख्या 14 है जिसमें 11 सन्तरे अच्छे हैं।
∴ P(B | A) =  [latex]\frac { 11 }{ 14 }[/latex]
दूसरी निकाल में भी एक अच्छा सन्तरा निकलने के बाद शेष सन्तरे 13 हैं जिसमें 10 सन्तरे अच्छे हैं।
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प्रश्न 4.
एक न्याय्य सिक्का और एक अभिनत पाँसे को उछाला गया। माना A घटना ‘सिक्के पर चित प्रकट होता है और B घटना पाँसे पर संख्या 3 प्रकट होती है’ को निरूपित करते हैं। निरीक्षण कीजिए कि घटनाएँ स्वतन्त्र हैं या नहीं ?
हल:
इस प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि इस प्रकार होगी
S = {(H, 1), (H, 2), (H, 3), (H, 4), (H, 5), (H, 6), (T, 1),(T, 2), (T, 3), (T, 4), T, 5), (T, 6)}
A = सिक्के पर चित प्रकट होना; B = पाँसे पर संख्या 3 प्रकट होती है।
(A ∩ B) = {(H, 3}}
तब n(S) = 12, n(A) = 6, n(B) = 2
तथा n(A ∩ B) = 1
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 23

प्रश्न 5.
एक पाँसे पर 1, 2, 3 लाल रंग से और 4, 5, 6 हरे रंग से लिखे गए हैं। इस पाँसे को उछाला गया। माना A घटना संख्या सम है’ और B घटना ‘संख्या लाल रंग से लिखी गई है’ को निरूपित करते हैं। क्या A और B स्वतन्त्र हैं?
हल:
इस प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि S = {1, 2, 3, 4, 5, 6} ⇒ n(S) = 6
घटना A = {2, 4, 6} }  ⇒ n(A) = 3
तथा घटना B = {1, 2, 3} ⇒  n(B) = 3
तब (A ∩ B) = {2} ⇒  n(A ∩ B) = 1
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 13 Probability image 24

प्रश्न 6.
माना E तथा F दो घटनाएँ इस प्रकार हैं कि P(E) = [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] , P(F) = [latex]\frac { 3 }{ 10 }[/latex]  और P(E ∩ F) = [latex]\frac { 1 }{ 5 }[/latex]  तब क्या E तथा F स्वतन्त्र हैं?
हल:
∵ P(E). P(F) = [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] x  [latex]\frac { 3 }{ 10 }[/latex] = [latex]\frac { 9 }{ 50 }[/latex] ≠ P(E ∩ F)
∴ घटनायें स्वतन्त्र नहीं हैं।

प्रश्न 7.
A और B ऐसी घटनाएँ दी गई हैं जहाँ P(A) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex],P(A ∪ B) = [latex]\frac { 3 }{ 5 }[/latex] तथा P(B) = p, तो p का मान ज्ञात कीजिए यदि (i) घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं, (ii) घटनाएँ स्वतन्त्र हैं। 
हल :
(i) चूँकि घटनायें परस्पर अपवर्जी हैं।
∴ P(A ∩ B) = 0
पुन: P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
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प्रश्न 8:
माना A और B स्वतन्त्र घटनायें है तथा P(A) = 0.3 और P(B) = 0.4 तब
(i) P (A ∩ B)
(i) P(A ∪ B)
(iii) P(A| B)
(iv) P(B | A) ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) ∵ A व B स्वतन्त्र घटनायें हैं।
∴ P(A ∩ B) = P(A): P(B) = 0.3 x 0.4 = 0.12
(ii) P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= 0.3 + 0.4 – 0.12 = 0.58
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प्रश्न 9.
दी गई घटनाएँ A और B ऐसी हैं, जहाँ P(A) = [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex],P(B) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] और P(A ∩ B) = [latex]\frac { 1 }{ 8 }[/latex] तब P(A- नहीं और B -नहीं) ज्ञात कीजिए।
हल:
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प्रश्न 10:
माना A और B दो घटनाएँ हैं और P(A) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] तथा P(B) = [latex]\frac { 7 }{ 12 }[/latex] और P(A- नहीं और B-नहीं)= [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex], क्या A और B स्वतन्त्र घटनायें हैं?
हल:
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प्रश्न 11:
A और B स्वतन्त्र घटनाएँ दी गई हैं जहाँ P(A) = 0.3, P(B) = 0.6 तो
(i) P(A और B)
(ii) P(A और B – नहीं)
(iii) P(A या B)
(iv) P(A और B में कोई भी नहीं) का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) P(A और B) = P(A ∩ B) = P(A): P(B) ∵ P(A) व P(B) स्वतन्त्र घटनायें हैं।
= 0.3 x 0.6 = 0.18

(ii) P(A और B -नहीं) = P(A ∩ [latex]\overline { B }[/latex]) = P(A): P([latex]\overline { B }[/latex])
= P(A): [1 – P(B)]
= 0.3 [1 – 0.6] = 0.3 x 0.4 = 0.12

(iii) P(A या B) = P(A ∪ B) = P(A) + P(B) – P(A ∩ B)
= 0.3 + 0.6 – 0.18 = 0.72

(iv) P(A और B में कोई भी नहीं) = P([latex]\overline { A }[/latex] ∩ [latex]\overline { B }[/latex])
= P([latex]\overline { A\cup B }[/latex]) = 1 – P(A ∪ B)
= 1 – 0.72 = 0.28

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प्रश्न 12.
एक पाँसे को तीन बार उछाला जाता है कम से कम एक बार विषम संख्या प्राप्त होने की प्राकियता ज्ञात कीजिए। 
हल:
पाँसे की पहली उछाल में कुल अंक प्राप्त होने की स्थिति = 6
तथा विषम अंक प्राप्त न होने की स्थिति = 3
∴  पहले उछाल में विषम अंक प्राप्त न होने की प्रायिकता P(A) = [latex]\frac { 3 }{ 6 }[/latex]  = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
इसी प्रकार दूसरे उछाल में विषम अंक प्राप्त न होने की प्रायिकता P(B) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
तीसरे उछाल में विषम अंक प्राप्त न होने की प्रायिकता P(C) = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
∵  उपरोक्त तीनों घटनायें स्वतन्त्र हैं।
∴ तीनों के एक साथ घटने की प्रायिकता अर्थात् प्रत्येक उछाल में विषम संख्या प्राप्त न होने की घटना
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प्रश्न 13.
दो गेंदें एक बॉक्स से बिना प्रतिस्थापित किये निकाली जाती हैं। बॉक्स में 10 काली और 8 लाल गेंदें हैं तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(i) दोनों गेंदें लाल हों।
(ii) प्रथम काली एवं दूसरी लाल हो।
(iii) एक काली तथा दूसरी लाल हो।
हल:
माना R = लाल गेंद निकलने की घटना; B = काली गेंद निकलने की घटना
(i) पहले निकाल में लाल गेंद निकलने की प्रायिकता P(R) = [latex]\frac { 8 }{ 10+8 }[/latex] = [latex]\frac { 8 }{ 18 }[/latex] = [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]
क्योंकि गेंद पुनः वापस डाल दी जाती है।
∴  दूसरे निकाल में लाल गेंद निकलने की प्रायिकता P(R) = [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]
∴  दोनों गेंद लाल निकलने की प्रायिकता = P(R). P(R) =

(ii) पहले निकाल में काली गेंद निकलने की प्रायिकता P(B) = [latex]\frac { 10 }{ 18 }[/latex]  = [latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex]
दूसरे निकाल में लाल गेंद निकलने की प्रायिकता P(R) = [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]
∴  P(पहली काली और दूसरी लाल) = P(B). P(R) = [latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex]  x [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]  = [latex]\frac { 20 }{ 81 }[/latex]

(iii) P(एक काली और एक लाल) = P(प्रथम काली और दूसरी लाल) +P(प्रथम लाल और दूसरी काली)
= [latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex] .[latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex]  + [latex]\frac { 4 }{ 9 }[/latex] .[latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex] = [latex]\frac { 40 }{ 81 }[/latex]

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प्रश्न 14.
एक विशेष प्रश्न को A और B द्वारा स्वतन्त्र रूप से हल करने की प्रायिकताएँ क्रमशः [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]  और [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex]  हैं। यदि दोनों स्वतन्त्र रूप से समस्या हल करने का प्रयास करते हैं, तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि
(i) प्रश्ल हल हो जाता है।
(ii) उनमें से तथ्यतः कोई एक प्रश्न हल कर लेता है।
हल:
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प्रश्न 15.
ताश के 52 पत्तों की एक ठीक से फैटी गई गड्डी से एक पत्ता यदृच्छया निकाला जाता है। निम्नलिखित में से किन दशाओं में घटनाएँ E और F स्वतन्त्र हैं?
(i) E : ‘निकाला गया पत्ता हुकुम का है
F : ‘निकाला गया पत्ता इक्का है ।

(ii) E : निकाला गया पत्ता काले रंग का है।
F : निकाला गया पत्ता एक बादशाह है।

(iii) E : निकाला गया पत्ता एक बादशाह या एक बेगम है।
F : निकाला गया पत्ता एक बेगम या एक गुलाम है।
हल:
(i) E : निकाला गया पत्ता हुकुम का है।
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(ii)
E : निकाला गया पत्ता काले रंग का है।
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(iii) E: निकाला गया पत्ता एक बादशाह या एक बेगम है।
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प्रश्न 16.
एक छात्रावास में 60% विद्यार्थी हिंदी का, 40% अंग्रेजी का और 20% दोनों अखबार पढ़ते हैं। एक छात्रा को यदृच्छया चुना जाता है।
(a) प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह न तो हिंदी और न ही अंग्रेजी का अखबार पढ़ती है।
(b) यदि वह हिंदी का अखबार पढ़ती है तो उसके अंग्रेजी का अखबार भी पढ़ने वाली होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(c) यदि वह अंग्रेजी का अखबार पढ़ती है तो उसके हिंदी का अखबार भी पढ़ने वाली होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना H = हिंदी का अखबार पढ़ने की घटना; E = अंग्रेजी का अखबार पढ़ने की घटना
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प्रश्न 17.
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हल:
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प्रश्न 18.
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हल:
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प्रश्नावली 13.3

प्रश्न 1.
एक कलश में 5 लाल और 5 काली गेंदें हैं। यादृच्छया एक गेंद निकाली जाती है, इसका रंग नोट करने के बाद पुनः कलश में रख दी जाती है। पुनः निकाले गएं रंग की 2 अतिरिक्त गेंदें कलश में रख दी जाती हैं तथा कलश में से एक गेंद निकाली जाती है दूसरी गेंद की लाल होने की प्रायिकता क्या है?
हल-
क्योंकि एक कलश में 5 लाल और 5 काली गेंदें हैं।
(i) माना एक लाल गेंद निकाली जाती है।
∴ कुल 10 गेंदों में से एक लाल गेंद निकालने की प्रायिकता = [latex]\frac { 5 }{ 10 } =\frac { 1 }{ 2 } [/latex].
अब यदि दो लाल गेंदें कलश में रख दी जाती हैं।
कलश में 7 लाल और 5 काली गेंदें हैं।
लाल गेंद निकालने की प्रायिकता = [latex ]\frac { 7 }{ 12 }[/latex]

(ii) माना पहले काली गेंद निकाली जाती है।
कुल 10 गेंदों में से एक काली गेंद निकालने की प्रायिकता = [latex]\frac { 5 }{ 10 } =\frac { 1 }{ 2 } [/latex].
फिर दो काली गेंदें कलश में रख दी जाती हैं।
अब कलश में 5 लाल और 7 काली गेंदें हैं।
एक लाल गेंद होने की प्रायिकता = [latex ]\frac { 5 }{ 12 }[/latex]
दूसरी लाल गेंद होने की प्रायिकता =
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प्रश्न 2.
एक थैले में 4 लाल और 4 काली गेंदें हैं और एक अन्य थैले में 2 लाल और 6 काली गेंदें हैं। दोनों थैलों में से एक को यदृच्छया चुना जाता है और उसमें से एक गेंद निकाली जाती है जो कि लाल है। इस बात की प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि गेंद पहले थैले से निकाली गयी है।
हल :
माना पहले वे दूसरे थैले को चुनने की घटनायें क्रमश: E1 व E2 हैं, तब
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प्रश्न 3.
छात्रों में से एक कॉलेज में, यह ज्ञात है कि 60% छात्रावास में रहते हैं और 40% दिन विद्वान हैं (छात्रावास में नहीं रहते हैं)। पिछले साल के परिणाम रिपोर्ट करते हैं कि छात्रावास में रहने वाले सभी छात्रों में से 30% एक ग्रेड प्राप्त करते हैं और दिन के 20% विद्वान अपनी वार्षिक परीक्षा में एक ग्रेड प्राप्त करते हैं। वर्ष के अंत में, एक छात्र को कॉलेज से यादृच्छिक रूप से चुना जाता है और उसके पास ए-ग्रेड होता है क्या छात्र संभावना है कि छात्र एक होस्टल हो?
हल:
E1, E2 और ए निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करते हैं:
E1 = हॉस्टल में रहने वाले छात्र,
E2 दिन विद्वान (छात्रावास में नहीं रह रहे हैं)
और A = छात्र जो ग्रेड A प्राप्त करते हैं
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प्रश्न 4.
एक बहुविकल्पीय प्रश्न का उतर देने में एक विद्यार्थी या तो प्रश्न का उत्तर जानता है या वह अनुमान लगाता है। माना कि उसके उत्तर जानने की प्रायिकता [latex]\frac { 3 }{ 4 }[/latex]  है और अनुमान लगाने की प्रायिकता [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex]  है। मान लें कि छात्र के प्रश्न के उत्तर का अनुमान लगाने पर सही उत्तर देने की प्रायिकता [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex]  है तो इस बात की प्रायिकता क्या है कि कोई छात्र प्रश्न का उत्तर जानता है यदि यह ज्ञात है कि उसने सही उत्तर दिया है?
हल:
माना E1 : विद्यार्थी उत्तर जानता है; E2 : विद्यार्थी अनुमान लगाता हो।
E: विद्यार्थी सही उत्तर देता है।
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प्रश्न 5.
किसी विशेष रोग के सही निदान के लिए रक्त की जाँच 99% असरदार है, जब वास्तव में रोगी उस रोग से ग्रस्त होता है। किंतु 0.5% बार किसी स्वस्थ व्यक्ति की रक्त जाँच करने पर निदान गलत रिपोर्ट देता है यानी व्यक्ति को रोग से ग्रस्त बतलाता है। यदि किसी जनसमुदाय में 0.1% लोग उस रोग से ग्रस्त हैं तो क्या प्रायिकता है कि कोई यदृच्छया चुना गया व्यक्ति उस रोग से ग्रस्त होगा यदि उसके रक्त की जाँच में ये बताया जाता है कि उसे यह रोग है?
हल:
माना E1 : एक व्यक्ति को विशेष रोग होना;
E2 : एक व्यक्ति को विशेष रोग न होना।
तथा E : घटना जब जाँच की रिपोर्ट पॉजीटिव है।
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प्रश्न 6.
तीन सिक्के दिए गए हैं। एक सिक्के के दोनों ओर चित्त ही है। दूसरा सिक्का अभिनत (biased) है जिसमें चित्त 75% बार प्रकट होता है और तीसरा अनभिनत सिक्का है। तीनों में से एक सिक्के को यदृच्छयो चुना गया और उसे उछाला गया है। यदि सिक्के पर चित्त प्रकट हो, तो क्या
प्रायिकता है कि वह दोनों चित्त वाला सिक्का है?
हल:
E1 : सिक्का जिसमें दोनों तरफ चित्त है, चुने जाने की घटना।
E2 : अभिनत सिक्का जिसमें चित्त 75% प्रकट होता है, चुने जाने की घटना
E3 : अनभिनत सिक्का चुने जाने की घटना
E : सिक्के पर चित्त प्रकट होने की घटना
प्रश्नानुसार,
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प्रश्न 7.
एक बीमा कम्पनी 2000 स्कुटर चालकों, 4000 कार चालकों और 6000 ट्रक चालकों का बीमा करती है। दुर्घटनाओं की प्रायिकताएँ क्रमशः 0.01, 0.03 और 0.15 है। बीमाकृत व्यक्तियों ( चालकों ) में से एक दुर्घटना ग्रस्त हो जाता है। उस व्यक्ति के स्कूटर चालक होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना E1 : बीमित व्यक्ति एक स्कूटर चालक है; E2 : बीमित व्यक्ति एक कार चालक है।
E3 : बीमित व्यक्ति एक ट्रक चालक है; E : बीमित व्यक्ति दुर्घटना ग्रस्त है।
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प्रश्न 8.
एक कारखाने में A और B दो मशीनें लगी हैं। रिकार्ड से ज्ञात होता है कि कुल उत्पादन का 60% मशीन A और 40% मशीन B द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त मशीन A का 2% और मशीन B का 1% उत्पादन खराब है। यदि कुल उत्पादन का एक ढेर बना लिया जाता है और उसे ढेर से यदृच्छया निकाली गई वस्तु खराब हो तो इस वस्तु के मशीन A द्वारा बने होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि घटनायें E1 व E2 इस प्रकार हैं।
E1 = वस्तु मशीन A द्वारा बनायी गयी है; E2 = वस्तु मशीन B द्वारा बनायी गयी है। E = वस्तु खराब है।
तब प्रश्नानुसार, P(E1) = 0.6, P(E2) = 0.4
P(E | E1 ) = वस्तु के खराब होने की प्रायिकता जबकि वह मशीन A द्वारा बनायी गयी है।
=  [latex]\frac { 2 }{ 100 }[/latex] = 0.02
इसी प्रकार P(E | E2) =  [latex]\frac { 1 }{ 100 }[/latex] = 0.01
अब वस्तु के मशीन A द्वारा बने होने की प्रायिकता जबकि वह खराब है = P(E1 | E)
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प्रश्न 9.
दो समूह निगम के निदेशक मंडल की स्थिति के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। संभावनाएं जो पहले और दूसरे समूह जीतेंगे क्रमश: 0.6 और 0.4 हैं। इसके अलावा, यदि पहला समूह जीतता है, तो एक नया उत्पाद पेश करने की संभावना 0.7 है और दूसरा समूह जीतने पर संबंधित संभावना 0.3 है। संभावना है कि नए उत्पाद को पेश किया गया नया उत्पाद दूसरे समूह द्वारा किया गया था।
हल:
दिया गया: P (G1) = 0.6, P (G2) = 0.4
P नए उत्पाद P (P | G1) = 0.7 और P (P | G2) = 0.3 के लॉन्चिंग का प्रतिनिधित्व करता है
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प्रश्न 10.
कोई लड़की एक पाँसा उछालती है। यदि उसे 5 या 6 की संख्या प्राप्त होती है तो वह एक सिक्के को तीन बार उछालती है और ‘चित्तों की संख्या नोट करती है। यदि उसे 1, 2, 3 या 4 की संख्या प्राप्त होती है तो वह एक सिक्के को एक बार उछालती है और यह नोट करती है कि उस पर चित्त या पट प्राप्त हुआ। यदि उसे ठीक एक चित्त प्राप्त होता है, तो उसके द्वारा उछाले गए पाँसे पर 1, 2, 3 या 4 प्राप्त होने की प्रायिकता क्या है? 
हल:
माना E1 = एक पाँसे के उछाल पर संख्या 5 या 6 का आना
E= एक पाँसे के उछाल पर संख्या 1, 2, 3 या 4 का आना
E = सिक्के के उछाल में एक ही चित्त का आना
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प्रश्न 11.
एक निर्मात्म के पास A, B तथा C मशीन ऑपरेटर है। प्रथम ऑपरेटर A,1% खराब सामग्री उत्पादित करता है तथा ऑपरेटर B और C क्रमशः 5% और 7% खराब सामग्री उत्पादित करते हैं। कार्य पर A कुल समय का 50% लगाता है, B कुल समय का 30% तथा कुले समय का 20% लगाता है। यदि एक खराब सामग्री उत्पादित है तो इसे A द्वारा उत्पादित किए जाने की प्रायिकता क्या है?
हल:
माना E1 : ऑपरेटर A द्वारा उत्पादित होने की घटना
E2 : ऑपरेटर B द्वारा उत्पादित होने की घटना
E3 : ऑपरेटर C द्वारा उत्पादित होने की घटना
E : एक खराब सामग्री उत्पादित होने की घटना
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प्रश्न 12.
52 ताशों की गड्डी से एक पत्ता खो जाता है। शेष पत्तों से दो पत्ते निकाले जाते हैं जो ईंट के पत्ते हैं। खो गये पत्ते की ईंट होने की प्रायिकता क्या है?
हल:
माना E1 : खोने वाला पत्ता ईंट का है;
E2 : खोने वाला पत्ता पान का है।
E3 : खोने वाला पत्ता चिड़ी का है
E4 : खोने वाला पत्ता हुकम का है।
E : शेष पत्तों से 2 ईंट के पत्ते निकालने की घटना
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प्रश्न 13:
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हल:
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प्रश्न 14:
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हल:
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प्रश्नावली 13.4

प्रश्न 1:
बताइए कि निम्नलिखित प्रायिकता बंटनों में कौन-से एक यादृच्छिक चर के लिए सम्भव नहीं है। अपना उत्तर कारण सहित लिखिए।
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हल:
(i) यहाँ पर P(X = 0) + P(X = 1) + P(X = 2) = 0.4 + 0.4 + 0.2 = 1
और सभी P(X) ≥ 0
∴ यह प्रायिकता बंटन सम्भव है।
(ii) यहाँ पर P (X = 0) + P(X = 1) + P(X = 2) + P(X = 3) + P(X = 4)
= 0.1 + 0.5 + 0.2-0.1 + 0.3 = 1.0
परन्तु P(X = 3) = -0.1 < 0
∴ यह प्रायिकता बंटन सम्भव नहीं है।
(iii) यहाँ पर, P(Y = – 1) + P{Y = 0) + P(Y = 1)
= 0.6 + 0.1 + 0.2 = 0.9 ≠ 1
∴  यह प्रायिकता बंटन सम्भव नहीं है।
(iv) यहाँ पर, P(Z = 3) + P(Z = 2) + P(Z = 1) + P(2 = 0) + P(Z = -1)
= 0.3 + 0.2 + 0.4 + 0.1 + 0.05 ≠  1.054 1
∴ यह प्रायिकता बंटन सम्भव नहीं है।

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प्रश्न 2:
एक कलश में 5 लाल और 2 काली गेंद हैं। दो गेंद यदृच्छया निकाली गई। मान लीजिए x काली गेंदों की संख्या को व्यक्त करता है। X के सम्भावित मान क्या हैं? क्या X यदृच्छिक चर है ?
हल:
हमारे पास 5 लाल और 2 काली गेंदें हैं। जब दो गेंद यदृच्छया निकाली गईं, तब निम्नलिखित सम्भावना बन सकती हैं।
(i) निकाली गई दोनों गेंदें लाल हैं  (ii) 1 गेंद लाल, एक काली (iii) दोनों काली
(i) में X = 0                                 (ii) में X = 1                     (iii) में X = 2
∴ परिणाम X = {0, 1, 2}
∵ X का परिसर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है।
इसलिए x एक यादृच्छिक चर है।

प्रश्न 3:
यदि X चित्तों की संख्या और पटों की संख्या में अन्तर को व्यक्त करता है, जबकि एक सिक्के को 6 बार उछाला जाता है। सम्भावित मूल्य क्या हैं?
हल:
यदि एक सिक्का 6 बार उछाला गया हो तो, चित्तों व पटों की कुल संख्याएँ = 26 = 64
चित्त व पट इस प्रकार आ सकते हैं।
(i) 6 चित्त, 0 पट
(ii) 5 चित्त, 1 पेट
(iii) 4 चित्त, 2 पट
(iv) 3 चित्त, 3 पट
(v) 2 चित्त, 4 पट
(vi) 1 चित्त, 5 पट
(vii) 0 चित्त, 6 पट
चूँकि X: चित्तों की संख्या और पटों की संख्या में अन्तर को व्यक्त करता है।
इसलिए
(i) में       X = 6 – 0= 6
(ii) में      X = 5 – 1 = 4
(iii) में     X = 4 – 2 = 2
(iv) में     X = 3 – 3 = 0
(v) में      X = 4 – 2 = 2
(vi) में     X = 5 -1 = 4
(vii) में    X = 6 – 0 = 6
इसलिए X के सम्भावित मूल्य = 0, 2, 4, 6

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प्रश्न 4:
निम्नलिखित के प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए
(i) एक सिक्के की दो उछालों में चित्तों की संख्या का
(ii) तीन सिक्कों को एक साथ एक बार उछालने पर पटों की संख्या का
(ii) एक सिक्के की चार उछालों में चित्तों की संख्या का 
हल:
(i) सिक्के की दो उछालों की प्रतिदर्श समष्टि : S = {HH, HT, TH, TT}
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प्रश्न 5:
एक पाँसा दो बार उछालने पर सफलता की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए जहाँ
(i) ‘4 से बड़ी संख्या’ को एक सफलता माना गया है।
(ii) न्यूनतम एक ‘पाँसे पर संख्या 6 प्रकट होना’ को एक सफलता माना गया है।
हल:
(i) पॉसे की एक उछाल की प्रतिदर्श समष्टि S = {1, 2, 3, 4, 5, 6}
सफलता की प्रायिकता =P(सफलता)
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प्रश्न 6.
30 बल्बों के समूह में, जिसमें 6 खराब हैं, 4 बल्बों का एक नमूना ( प्रतिदर्श ) यदृच्छया बिना प्रतिस्थापन के निकाला जाता है। खराब बल्बों की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए।
हल:
कुल बल्ब = 30
खराब बल्ब = 6, सही बल्ब = 30 – 6 = 24
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प्रश्न 7.
एक सिक्का समसर्वय सन्तुलित नहीं है जिसमें चित्त प्रकट होने की सम्भावना पट प्रकट होने की सम्भावना की तीन गुनी है। यदि सिक्का दो बार उछाला जाता है तो पटों की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए।
हल:
क्योंकि चित्त और पट की प्रायिकता का अनुपात 3 : 1 है।
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प्रश्न 8.
एक यादृच्छिक चर x का प्रायिकता बंटन नीचे दिया गया है।  (NCERT)
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ज्ञात कीजिए
(i) k
(ii) P(X < 3)
(iii) P(X > 6)
(iv) P(0<X <3)
हल:
(i) चूंकि ∑P(X) = 1
∴  0+k+ 2k + 2k + 3k + k2 + 2k2 + 7k2 + k = 1
⇒ 10k2 + 9k-1 = 0
⇒  (10k – 1) (k + 1) = 0 ⇒  k = [latex]\frac { 1 }{ 10 }[/latex], -1
क्योंकि P(X) ≥ 0 ∴ k = -1 नहीं हो सकता
अतः  k = [latex]\frac { 1 }{ 10 }[/latex]
P(X < 3) = P(X = 0) + P(X = 1) + P(X = 2)
= 0 + k+ 2k = 3k = [latex]\frac { 3 }{ 10 }[/latex]
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प्रश्न 9.
एक यादृच्छिक चर X का प्रायिकता फलन P(x) निम्न प्रकार से है, जहाँ # कोई संख्या है।
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(a) k का मान ज्ञात कीजिए।
(b) P(x<2), (x≤2),P(x≥2) ज्ञात कीजिए।
हल-
(a) चूंकि किसी यादृच्छिक चर के प्रायिकता बंटन का कुल योग 1 के बराबर होता है।
अर्थात ∑P(X) = 1
अत: P(0) + P(1) + P(2) + P (अन्यथा) = 1
∴ k + 2k + 3k + 0 = 1 या 6k = 1 ∴ [latex s=2]k=\frac { 1 }{ 6 }[/latex]
∴ अभीष्ट प्रायिकता बंटन निम्नलिखित है
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प्रश्न 10:
एक न्याय्य सिक्के की तीन उछालों पर प्राप्त चित्तों की संख्या का माध्यज्ञात कीजिए।
हल:
माना तीन सिक्कों की उछाल में X चित्त आने की संख्या दर्शाता है।
तब X = 0, 1, 2 या 3
अब P(H) = एक सिक्के के उछाल पर चित्त आने की प्रायिकता =  [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
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प्रश्न 11:
दो पाँसों को युग्मत् उछाला गया। यदि x, छक्कों की संख्या को व्यक्त करता है, तो x की प्रत्याशा ज्ञात कीजिए।
हल:
स्पष्ट है कि X = 0, 1, 2
P(X = 0) = किसी भी पासे पर 6 न आने की प्रायिकता = [latex]\frac { 25 }{ 36 }[/latex]
केवल एक पाँसे पर 6 आने की घटना
{(1, 6), (2, 6), (3, 6), (4, 6), (5, 6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), (6, 5)}
∴  P(X = 1) = एक 6 आने की प्रायिकता = [latex]\frac { 10 }{ 36 }[/latex]
P(X = 2) = P((6, 6)) =  [latex]\frac { 1 }{ 36 }[/latex]
अत: X का प्रायिकता बंटन है।
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प्रश्न 12:
प्रथम छः धन पूर्णाकों में से दो संख्याएँ यदृच्छया ( बिना प्रतिस्थापन ) चुनी गई। मान लें x दोनों संख्याओं में से बड़ी संख्या को व्यक्त करता है। E(X) ज्ञात कीजिए।
हल:
स्पष्ट है X का मान 2, 3, 4, 5, 6 हो सकता है।
P(X = 2) = प्रायिकता जब दोनों संख्याओं में बड़ी संख्या 2 है।
⇒ P(X = 2) = P((1, 2) या (2, 1))
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प्रश्न 13:
मान लीजिए दो पाँसों को फेंकने पर प्राप्त संख्याओं के योग को x से व्यक्त किया गया है। X का प्रसरण और मानक विचलन ज्ञात कीजिए।
हल:
दो पाँसों की फेंक में कुल घटनायें = 6 x 6 = 36
जिन्हें (xi ;yi}) के रूप में लिख सकते हैं,
जहाँ xi = 1, 2, 3, 4, 5, 6, yi = 1, 2, 3, 4, 5, 6
यादृच्छिक चर X के मान अर्थात् पाँसों पर प्राप्त संख्याओं का योग 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 या 12 हो सकता है।
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प्रश्न 14:
एक कक्षा में 15 छात्र हैं जिनकी आयु 14, 17, 15, 14, 21, 17, 19, 20, 16, 18, 20, 17, 16, 19 और 20 वर्ष हैं। एक छात्र को इस प्रकार चुना गया कि प्रत्येक छात्र के चुने जाने की सम्भावना समान है और चुने गए छात्र की आयु (X) को लिखा गया। यादृच्छिक चर x को प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए। x का माध्य, प्रसरण व मानक विचलन भी ज्ञात कीजिए।
हल:
X का प्रायिकता बंटन इस प्रकार होगा (स्वयं ज्ञात कीजिए।)
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प्रश्न 15.
एक बैठक में 70% सदस्यों ने किसी प्रस्ताव का अनुमोदन किया और 30% सदस्यों ने विरोध किया। एक सदस्य को यदृच्छया चुना गया और, यदि उसे सदस्य ने प्रस्ताव का विरोध किया हो तो x = 0 लिया गया, जब कि यदि उसने प्रस्ताव का अनुमोदन किया हो तो x = 1 लिया गया। Ex)
और प्रसरण (X) ज्ञात कीजिए।
हल:
X का प्रायिकता बंटन इस प्रकार होगा।
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• निम्नलिखित में से प्रत्येक में सही उत्तरे चुनें।।

प्रश्न 16.
तीन चेहरे पर 1 लिखा हुआ मरने पर प्राप्त संख्या का मतलब, दो चेहरों पर 2 और एक चेहरे पर 5 है
(a) 1
(b) 2
(c) 5
(d) [latex s=2]\frac { 8 }{ 3 }[/latex]
हल:
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Mean 2
विकल्प (b) सही है

प्रश्न 17.
मान लीजिए कि दो कार्ड कार्ड के डेक से यादृच्छिक रूप से खींचे जाते हैं। X को प्राप्त एसेस की संख्या होने दें। E(X) का मूल्य क्या है?
(a) [latex s=2]\frac { 37 }{ 221 }[/latex]
(b) [latex s=2]\frac { 5 }{ 13 }[/latex]
(c) [latex s=2]\frac { 1 }{ 13 }[/latex]
(d) [latex s=2]\frac { 2 }{ 13 }[/latex]
हल:
n(S) = 52, n(A) = 4
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अभी व E(X) = [latex s=2]\frac { 2 }{ 13 }[/latex]
विकल्प (d) सही है

प्रश्नावली 13.5

प्रश्न 1:
एक पाँसे को 6 बार उछाला जाता है।
यदि ‘पाँसे पर सम संख्या प्राप्त होना’ एक सफलता है तो निम्नलिखित की प्रायिकता क्या होंगी?
(i) तथ्यतः 5 सफलताएँ
(ii) न्यूनतम 5 सफलताएँ
(iii) अधिकतम 5 सफलताएँ
हल:
मानी प्रयोग में सफलता की प्रायिकता = p
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प्रश्न 2:
बड़ी मात्रा में वस्तुओं में 5% दोषपूर्ण वस्तुएं हैं। संभावना है कि 10 वस्तुओं के नमूने में एक से अधिक दोषपूर्ण आइटम शामिल नहीं होंगे?
हल:
एक दोषपूर्ण वस्तु प्राप्त करने की संभावना = 5%
= [latex s=2]\frac { 5 }{ 100 }[/latex]
= [latex s=2]\frac { 1 }{ 20 }[/latex]
एक अच्छी वस्तु प्राप्त करने की संभावना = [latex s=2]1-\frac { 1 }{ 20 }[/latex] = [latex s=2]\frac { 19 }{ 20 }[/latex]
10 आइटम के नमूने में एक से अधिक दोषपूर्ण आइटम शामिल नहीं हैं।
=> नमूना में सबसे अधिक है (मुझे दोषपूर्ण आइटम इसकी संभावना = P (0) + P (1)
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प्रश्न 3.
वस्तुओं के एक ढेर में 5% त्रुटियुक्त वस्तुएँ हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि 10 वस्तुओं के एक प्रतिदर्श में एक से अधिक त्रुटियुक्त वस्तुएँ नहीं होंगी?
हल-
एक त्रुटियुक्त वस्तु प्राप्त होने की प्रायिकता p = 5 % = [latex ]\frac { 5 }{ 100 }[/latex] = [latex ]\frac { 1 }{ 20 }[/latex]
एक अच्छी वस्तु प्राप्त होने की प्रायिकता q = [latex s=2]1-\frac { 1 }{ 20 }[/latex] = [latex s=2]\frac { 19 }{ 20 }[/latex]
10 वस्तुओं के एक प्रतिदर्श में एक से अधिक त्रुटियुक्त वस्तुएँ नहीं होंगी।
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प्रश्न 4.
पासा की एक जोड़ी 4 बार फेंक दिया जाता है। यदि डबलेट प्राप्त करना सफल माना जाता है, तो दो सफलताओं की संभावनाएं पाएं।
हल-
n(S) = 36, A = {11,22,33,44,55,66}
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प्रश्न 5.
किसी फैक्ट्री में बने एक बल्ब की 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज होने की प्रायिकता 0.05 है। इसकी प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि इस प्रकार के 5 बल्बों में से
(i) एक भी नहीं
(ii) एक से अधिक नहीं
(iii) एक से अधिक
(iv) कम-से-कम एक, 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज हो जाएँगे।
हल-
150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज होने की प्रायिकता p = 0.05
150 दिनों में उपयोग के बाद फ्यूज न होने की प्रायिकता q = 1 – 0.05 = 0.95
(i) P पाँचों में से कोई भी बल्ब 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज नहीं होगा
= (0.95)5
(ii) P (एक से अधिक बल्ब फ्यूज नहीं होंगे)
= (एक भी बल्ब फ्यूज न हो + एक बल्ब फ्यूज हो) की प्रायिकता
= P(0) + P (1) = (0.95)5 + 5C1 x (0.95)4 x (0.05)
= (0.95)4[ 0.95 + 5 x 0.05]
= (0.95)4 [ 0.95 + 0.25]
= (0.95)4 x 1.2
(iii) P (एक से अधिक बल्ब फ्यूज होंगे) = (2 बल्ब + 3 बल्ब +4 बल्ब + 5 बल्ब) फ्यूज होने की अलग-अलग प्रायिकता
= P (2) + P (3) + P (4) + P (5)
= [P (0) + P (1) + P (2) + P (3) + P (4) + P (5) – [P (0) + P (1)]
= 1 – [P (0) + P (1)]
= 1- (0.95)4 x 1.2
(iv) P (कम-से-कम एक बल्ब फ्यूज होता है)
= P (1) + P (2) + P (3) + P (4) + P (5)
= P (0) + P (1) + P (2) + P (3) + P (4) + P (5)- P (0)
= 1 – P (0)
= 1- (0.95)5

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प्रश्न 6:
एक थैले में 10 गेंदें हैं जिनमें से प्रत्येक पर 0 से 9 तक के अंकों में से एक अंक लिखा है। यदि थैले से 4 गेंदें उत्तरोत्तर पुनः वापस रखते हुए निकाली जाती है, तो इसकी क्या प्रायिकता है कि उनमें से किसी भी गेंद पर अंक 0 न लिखा हो ? 
हल:
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प्रश्न 7:
एक सत्य-असत्य प्रकार के 20 प्रश्नों वाली परीक्षा में माना कि एक विद्यार्थी एक न्याय्य (unbiased) सिक्के को उछाल कर प्रत्येक प्रश्न का उत्तर निर्धारित करता है। यदि पाँसे पर चित्त प्रकट हो, तो प्रश्न का उत्तर ‘सत्य’ देता है और यदि पट प्रकट हो, तो असत्य’ लिखता है। इसकी प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह कम से कम 12 प्रश्नों का सही उत्तर देता है।
हल:
प्रश्न का सही उत्तर देने की प्रायिकता (p) = पाँसे पर चित्त आने की प्रायिकता =  [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
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प्रश्न 8:
माना कि X का बंटन B (6, [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] )है। दर्शाएँ कि X = 3 अधिकतम प्रायिकता चाला परिणाम है।
हल:
यहाँ पर X का द्विपद बंटन है जहाँ
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प्रश्न 9:
एक बहु-विकल्पीय परीक्षा में 5 प्रश्न हैं जिनमें प्रत्येक के तीन सम्भावित उत्तर हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि एक विद्यार्थी केवल अनुमान लगा कर चार या अधिक प्रश्नों के सही उत्तर दे देगा ? 
हल:
माना X : सही उत्तरों की संख्या
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प्रश्न 10:
एक व्यक्ति एक लॉटरी के 50 टिकट खरीदता है, जिसमें उसके प्रत्येक में जीतने की। प्रायिकता  [latex]\frac { 1 }{ 100 }[/latex] है। इसकी क्या प्रायिकता है कि वह (a) न्यूनतम एक बार (b) तथ्यत: एक बार (c) न्यूनतम दो बार, इनाम जीतेगा ?
हल:
माना X : जीतने की संख्या
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प्रश्न 11:
एक पाँसे को 7 बार उछालने पर तथ्यतः दो बार 5 आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
मानी सफलता की प्रायिकता = p।
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प्रश्न 12:
एक सँसे को 6 बार उछालने पर अधिकतम 2 बार छः आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
प्रश्नानुसार, n = 6, पाँसे की उछाल पर 6 आने की प्रायिकता अर्थात् सफलता की प्रायिकता
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प्रश्न 13:
यह ज्ञात है कि किसी विशेष प्रकार की निर्मित वस्तुओं की संख्या में 10% खराब है। इसकी क्या प्रायिकता है कि इस प्रकार की 12 वस्तुओं के यादृच्छिक प्रतिदर्श में से 9 खराब है।
हल:
यहाँ n = 12, r = 9
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प्रश्न 14.
100 बल्ब युक्त बॉक्स में, 10 दोषपूर्ण हैं। 5 बल्बों के नमूने से बाहर होने की संभावना, कोई भी दोषपूर्ण नहीं है
(a) [latex s=2]{ 10 }^{ -1 }[/latex]
(b) [latex s=2]{ \left( \frac { 1 }{ 2 } \right) }^{ 5 }[/latex]
(c) [latex s=2]{ \left( \frac { 9 }{ 10 } \right) }^{ 5 }[/latex]
(d) [latex s=2]\frac { 9 }{ 10 }[/latex]
हल:
p = [latex s=2]\frac { 1 }{ 10 }[/latex]
q = [latex s=2]\frac { 9 }{ 10 }[/latex] n = 5, r = 0, P(X=0) = [latex s=2]{ \left( \frac { 9 }{ 10 } \right) }^{ 5 }[/latex]
Option (c) is correct

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प्रश्न 15.
संभावना है कि एक छात्र तैराक नहीं है [latex s=2]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] है। फिर संभावना है कि पांच छात्रों में से चार, तैराक हैं:
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हल:
p = [latex s=2]\frac { 4 }{ 5 }[/latex] , q = [latex s=2]\frac { 1 }{ 5 }[/latex] , n = 5,r = 4
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Option (a) is true

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