UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 11 आपदा एवं आपदा प्रबन्धन

UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 11 आपदा एवं आपदा प्रबन्धन

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आपदा एवं आपदा प्रबन्धन

अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) आपदा किसे कहते हैं?
उत्तर
जिन घटनाओं से मानव समाज, जानवरों और वनस्पतियों को बड़ी मात्रा में तथा तीव्र गति से हानि हो, उन्हें आपदा कहते हैं; जैसे- भूकंप, बाढ़ आदि।

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(ख) प्राकृतिक आपदाओं के पाँच उदाहरण लिखिए।
उत्तर
प्राकृतिक आपदाओं के पाँच उदाहरण हैं- भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, सुनामी, बादल फटना और बाढ़।।

(ग) भूकंप के दौरान कौन-कौन सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तर

  • भूकंप के दौरान किसी मजबूत वस्तु जैसे मेज, तख्त, आदि के नीचे बैठ जाना चाहिए।
  • कमरे के कोनों में खड़े हो जाना चाहिए। (UPBoardSolutions.com)
  • भूकंप के दौरान सीढ़ी से नीचे उतरना और लिफ्ट का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • बिजली का मुख्य स्विच बन्द कर देना चाहिए।
  • खुले स्थान की तरफ जाना चाहिए। हड़बड़ी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

(घ) बादल फटने से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
सीमित समय और सीमित क्षेत्र में गरज और बिजली कड़कने के साथ मूसलाधार वर्षा होने को बादल फटना कहते हैं। बादल फटने पर उस क्षेत्र विशेष में एक घण्टे में 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा हो जाती है।

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(ङ) आपदा प्रबन्धन के कौन-कौन से तत्त्व हैं?
उत्तर
आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के अन्तर्गत आपदा (UPBoardSolutions.com) प्रबन्धन के छः तत्त्वों को सम्मिलित किया गया हैं-

  1. आपदा निरोध,
  2. आपदा निवारण,
  3. आपदा तैयारी,
  4. प्रतिक्रिया,
  5. पुनर्वास,
  6. पुनर्निर्माण और रिकवरी।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
उत्तर
(क) सुनामी जापानी भाषा का शब्द है।
(ख) आकाशीय बिजली का गिरना प्राकृतिक आपदा है।
(ग) संसद द्वारा आपदा प्रबन्धन अधिनियम वर्ष 2005 में पारित किया गया।
(घ) आपदा-पुनर्वास, आपदा के उपरान्त की अवस्था है।

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प्रश्न 3.
सही जोड़े बनाइए-
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 11 आपदा एवं आपदा प्रबन्धन img-1

भौगोलिक कुशलताएँ- विद्यार्थी स्वयं करें।

परियोजना कार्य- विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 अमरकंटक से डिंडौरी (मंजरी)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 अमरकंटक से डिंडौरी (मंजरी)

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पाठ का साट (सारांश)

प्रस्तुत पाठ में लेखक अमृतलाल बेगड़ ने नर्मदा-सौन्दर्य के साथ-साथ नदी तट के जन-जीवन की झलक वर्णित की है। यात्रा नर्मदा के किनारे-किनारे से वर्णित हुई है। अमरकंटक जहाँ नर्मदा का उद्गम स्थल है, कोई बड़ा पहाड़ नहीं है। लेखक जाते समय इस पर पगडंडी से केवल दो घण्टे में ही चढ़ गए। यहाँ कपिलधारा के सामने गहरी घाटी चौड़ी हो गई, मैदान आ गया। नर्मदा को मेकलसुता भी कहा जाता है क्योंकि अमरकंटक का नाम मेकल भी है। पगडंडी मिल जाने पर शाम तक पकरीसोदो पहुँचे।

दूसरे दिन पदयात्रा करते किरंगी गाँव आ गए। एक ग्रामीण के घर ठहरकर अखण्ड कीर्तन और आम के पेड़ के विवाह में शामिल हुए। गारकाभट्टा में गोपी कोटवार के घर रहे। यहाँ एक शादी में दूल्हा-दुल्हन के पैर पूजे जा रहे थे। यहाँ से आगे चलने पर नर्मदा का एक प्रपात कोठीघुघरा मिला। अगला पड़ाव था बंजरटोली। इसके (UPBoardSolutions.com) सिवनीसंगम पर सिवनी नदी नर्मदा से मिलती है। बैसाखी पूर्णिमा के दिन खूब बरातें देखने को मिलीं। मैदान में पगडण्डी की परवाह किए बिना नर्मदा के किनारे-किनारे चलना आसान था। पथरकुचा तक पहुँचते-पहुँचते वर्षा हो गई और कीचड़ होने से रात में रुकना पड़ा।

दूसरे दिन लिखनी गाँव में पहुँचे, जहाँ एक वृद्धा ने भोजन-पानी से सेवा की। अगला पड़ाव मझियाखार था और इसके बाद गोमतीसंगम और लछमणमड़वा। दोपहर होने पर डिंडौरी पहुँचे जो एक बड़ा कस्बा है। वहाँ नर्मदा पार करने वाले ग्रामीणों का क्रम चलता रहता है। लोग नर्मदा मैया की जय बोलकर सावधानीपूर्वक तेज प्रवाह में मुख्यधारा से पार होते हैं। यह दृश्य बहुत रोमांचकारी होता है। तीन दिन तक यहाँ मगन रहकर अमरकंटक से डिंडौरी तक की आसान यात्रा पूरी की। इसमें आधे दिन का पहाड़ एक दिन का जंगल और कुछ दिनों का सँकरे मैदान का भ्रमण शामिल था।

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प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को
प्रश्न 1.
जहाँ दो या दो से अधिक नदियाँ मिलती हैं, उस स्थान को संगम कहते हैं। हमारे देश में ऐसे कई संगम हैं। निम्नांकित शीर्षकों के अन्तर्गत कुछ संगमों का विवरण तैयार करें।
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 अमरकंटक से डिंडौरी (मंजरी) 1

प्रश्न 2.
छात्र स्वयं करे।

प्रश्न 3.
आपके घर के आसपास भी कोई न कोई नदी होगी। पता कीजिए-उसका उद्गम स्थल कहाँ से है और वह कहाँ तक जाती है।
उत्तर :
हमारे घर के पास यमुना नदी है। इसका उद्गम स्थल यमुनोत्री है और यह बंगाल की खाड़ी तक जाती है।

प्रश्न 4.
हमारी नदियाँ हमारे ही द्वारा निरंतर प्रदूषित की जा रही हैं जिससे इनके अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है। कक्षा में शिक्षक की मदद से चर्चा कीजिए कि – – नदियाँ किन-किन कारणों से प्रदूषित हो रही हैं?
– आप इनके बचाव के लिए क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर :
संकेत –
मानव द्वारा नदी में कूड़ा-कचरा बहाना, बरतन, कपड़े धोना, पशुओं को नहलाना, कारखानों को रसायन नदी में गिराना आदि। नदी में कूड़ा-कचरा न बहाया जाए, नदी की वार्षिक सफाई हो, रसायन का बहाव नदी में न होने दिया जाए।

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प्रश्न 5.
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

विचार और कल्पना

प्रश्न 1.
नर्मदा नदी का उद्गम अमरकंटक है। हिमालय पर्वत से हमारे देश की अनेक नदियाँ निकलती हैं। नीचे दी गई नदियों के नाम से उसके उद्गम स्थल का मिलान कीजिए।
उत्तर :
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प्रश्न 2.
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

पाठ से

प्रश्न 1.
नर्मदाकुंड से आगे की यात्रा को लेखक ने नया अध्याय क्यों कहा है?
उत्तर :
नर्मदाकुंड से आगे की यात्रा संगम की ओर है जो दक्षिण तट से होती है।

प्रश्न 2.
लेखक ने विवाह और उससे सम्बन्धित जिन घटनाओं का वर्णन किया है, उसे लिखिए।
उत्तर :
विवाह में दूल्हा-दुल्हन के पैर पूजे जाते हैं। चार भाँवरे लड़की के घर पड़ती हैं तथा तीन लूड़के के घर।

प्रश्न 3.
लिखनी गाँव में पहुँचने पर लेखक न चाहने पर भी रोटी क्यों खा लेता है?
उत्तर :
लिखनी गाँव में पहुंचने पर लेखक बुढिया के प्यार-दुलार से प्रभावित हो गया और उसके चेहरे पर आए तृप्ति के भाव से न चाहने पर भी रोटी खा लेता है।

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प्रश्न 4.
“बेटा, बूंदी का लड्डू पूरा खाओ तो मीठा लगता है और चूरी खाओ तो मीठा लगता है। साध्वी ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर :
साध्वी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि यदि पूरी (UPBoardSolutions.com) परिक्रमा एक साथ करने का समय नहीं हो तो छुट्टियों में थोड़ी-थोड़ी परिक्रमा करने पर भी सिद्धि मिल जाती है।

प्रश्न 5.
यात्रावृत्त में आए सभी गाँवों व स्थानों की सूची बनाइए।।
उत्तर :
गाँव व स्थानों के नाम: गंगोत्री, नर्मदा कुंड, उत्तर तट-दक्षिण तट, कपिलधारा, कबीरचौरा, डिंडौरी, दूधधारा, अमरकंटक, पकरीसोंढा, किरंगी, गारकामटो, कोठीघुघरा, बंजर टोला, सिवनी संगम, गोरखपुर, पथरकुचा, लिखनी, मझियाखार, गोमतीसंगम, लक्ष्मनमड़वा

भाषा की बात

प्रश्न 1.
‘नवजात शिशु की तरह नदी यहाँ धवल, उज्ज्वल और कोमल होती है। इस पंक्ति में नर्मदा नदी की तुलना नवजात शिशु से की गई है। इस प्रकार के अन्य वाक्य पाठ से चुनकर लिखिए। यमना यमुना
उत्तर :
नर्मदा का जन्म मानो गौरैया की तरह हुआ है। ऊपर कुण्ड के घोंसले में अण्डे की तरह अंवतरित हुई है। अण्डे में से बाहर वह नीचे निकली है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 अमरकंटक से डिंडौरी (मंजरी) 3

प्रश्न 3.
“गिरते-पड़ते, चढ़ते-उतरते, चप्पा-चप्पा आगे बढ़ रहे थे। इस वाक्य में तीन प्रकार के शब्द-युग्मों का प्रयोग हुआ है। नीचे लिखे शब्द-युग्मों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :
इक्का-दुक्का
= रास्ता खतरनाक होने के कारण इक्का-दुक्का आदमी ही यहाँ से गुजरता है।
दस्सी-दस्सी = दस्सी-दस्सी कह-कहकर छोटा बच्चा सो गया।
हरे-भरे = आजकल हरे-भरे आम के बागों से गुजरना स्फूर्तिदायक होता है।
आमने-सामने = फाइनल मैच में दोनों टीमें आमने-सामने होंगी।

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प्रश्न 4.
अद्भुत आकर्षक में ‘अद्भुत’ शब्द ‘विशेषण’ है। पाठ में आए पाँच विशेषण और विशेष्य शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 17 अमरकंटक से डिंडौरी (मंजरी) 4

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UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 18 नीड़ का निर्माण फिर-फिर (मंजरी)

UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 18 नीड़ का निर्माण फिर-फिर (मंजरी)

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समस्त पद्यांशों की व्याख्या
नीड़ का निर्माण ………………………………………. फिर फिर।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मंजरी’ के नीड़ का निर्माण फिर-फिर’ कविता से उद्धृत हैं। इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन’ हैं।

प्रसंग – कवि ने कविता द्वारा जीवन की कठिनाइयों से लड़ने और सब कुछ नष्ट हो जाने पर भी फिर से नए निर्माण की प्रेरणा दी है।

व्याख्या – हे पक्षी! अपने नष्ट हुए घोंसले का फिर से निर्माण कर और अपने मीठे स्वर से इस संसार में फिर से प्रेम और स्नेह भर दे।
आकाश में आँधी उठने से अचानक अँधेरा हो गया। धूल से भरे बादलों ने एकदम पृथ्वी को घेर लिया। इससे दिन, रात्रि के समान अंधकारयुक्त हो गया। रात्रि और भी अधिक अँधेरे वाली काली हो गई। (UPBoardSolutions.com) ऐसा प्रतीत होता है मानो अब प्रकाश करने वाला सवेरा नहीं हो सकेगा। इस रात के तूफान और अंधकार से पृथ्वी का कण-कण और जीवजगत् भयभीत हो गया। परन्तु पूर्व दिशा में सूर्य की किरणें चमकने से अंधकार दूर हो गया। इससे हे पक्षी! निराश न हो और प्रेम को निमन्त्रण देकर, फिर से निर्माण कार्य कर नए घोंसले को निर्मित कर।

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बह चले झोंके ………………………………………. फिर फिर।

संदर्भ – पूर्ववत्।।

प्रसंग – रात्रि के भयंकर तूफान और आँधी ने जन जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया।

व्याख्या – रात्रि में आई आँधी इतनी भयंकर और विनाशकारी थी कि उससे बड़े आकार वाले पर्वत भी हिल उठे। अच्छे और बड़े-बड़े पेड़ टूटकर जड़ समेत उखड़-उखड़कर नीचे गिर पड़े। फिर तिनकों से बने घोंसले नष्ट होने से कैसे बच सकते थे? अर्थात् घोंसले भी नष्ट हो गए। कंकड़, पत्थर और ईंट से बने सुदृढ़ महल भी डगमगा गए। इतने (UPBoardSolutions.com) विनाश के होने पर भी आशारूपी पक्षी छिपा बैठा था। यह पक्षी आकाश में ऊँचा चढ़कर गर्व से अपनी छाती खोले उड़ रहा था। नए सिरे से फिर से घोंसले के निर्माण में व्यस्त होकर, स्नेह और प्रेम को निमन्त्रण देकर सृजन में लगा था।

प्रश्न-अभ्यास।

कुछ करने को

प्रश्न 1.
‘आशावान व्यक्ति कभी पराजित नहीं होता है’ -विषय पर कक्षा में भाषण : प्रतियोगिता आयोजित कीजिए।
उत्तर :
इन बिंदुओं पर आप भाषण लिख सकते हैं-आशा मनुष्य का शुभ संकल्प है। प्राणियों में वह अमृत समान है। जैसे सारा वनस्पति जगत सूर्य से प्रेरणा पाता है वैसे ही मनुष्य में आशाएँ ही पूर्ण शक्ति का संचार करती हैं। मनुष्य की प्रत्येक उन्नति जीवन की सफलता, जीवन लक्ष्य की प्राप्ति का संचार आशाओं द्वारा होता है। आशाएँ न होती तो संसार नीरस, अव्यक्त और निश्चेष्ठ सा दिखाई देता है। आशावाने व्यक्ति कभी पराजित नहीं हो सकता।।

आशाएँ जीवन का शुभ लक्षण हैं। इनके सहारे मनुष्य घोर विपत्तियों में दुश्चिंताओं को हँसते-हँसते जीत लेता है जो केवल दुनिया का रोना रोते रहते हैं उन्हें अर्धमृत ही समझना चाहिए किन्तु आशावान व्यक्ति पौरुष के लिए सदैव समुद्यत रहता है। वह हाथ में फावड़ा लेकर टूट पड़ता है। खेतों में मिट्टी से सोना पैदा कर लेता है। आशावान व्यक्ति अपने भाग्य का स्वयं निर्माण करता है। वह औरों के आगे अपना हाथ नहीं फैलाता है वरन् औरों को जीवन देता है।

आशा और आत्मविश्वास चिरसंगी है। आशावादी व्यक्ति का आत्मविश्वासी होना भी अवश्यंभावी है। आत्मविश्वास से आंतरिक शक्तियाँ जागृत होती हैं। इन शक्तियों को वह जिस कार्य में जुटा दे, वहीं आश्चर्यजनक सफलता दिखाई देने लगेगी। संपूर्ण मानसिक चेष्टाओं से किए हुए प्रयास असफल नहीं होते किन्तु निराशा वह मानवीय दुर्गुण है जो वृद्धि को (UPBoardSolutions.com) भ्रमित कर देता है। मानसिक शक्तियों को लुज-पुंज कर देता है। ऐसा व्यक्ति आधे मन से डरा-डरा सा काम करेगा। ऐसी अवस्था में सफलता प्राप्त कर सकना संभव नहीं है। जहाँ आशा नहीं वहाँ प्रयत्न नहीं।।

विद्वान विचारक स्वेट मार्डन ने लिखा है-निराशावाद भयंकर राक्षस है जो हमारे नाश की ताक में बैठा रहता है। निराशावादी प्रगति की भावना का त्याग कर देते हैं। यदि कभी उन्नति करने का कुछ खयाल आया भी तो विपत्तियों के पहाड़ उन्हें दिखाई देने लगते हैं। कार्य आरम्भ नहीं हुआ कि चिंताओं के बादल मँडराने लगे पर आशावादी व्यक्ति प्रसन्न होकर कार्य प्रारम्भ करता है। गतिमान बने रहने के लिए मुसीबतों को सहायक मानकर चलता है। उत्साहपूर्वक अंत तक पूर्व नियोजित कार्य में सन्नद्ध रहता, है इसी से उसकी आशाएँ फलवती होती हैं।

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प्रश्न 2.
नोट- विद्यार्थी चित्र स्वयं बनाएँ।

विचार और कल्पना.

प्रश्न 1.
जैसे चिड़िया अपना घोंसला बनाती है वैसे ही मनुष्य अपने पक्के मकान बनाता है। बताइए एक मकान के निर्माण में किन-किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है?
उत्तर :
एक मकान के निर्माण में पक्की ईंटें, सीमेण्ट, रेत, सरिया, लकड़ी पानी आदि की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
“आशा ही जीवन है’ पर 1० पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर :
आशा ही जीवन है, जबकि निराशा मृत्यु। संसार के सारे बड़े-बड़े रचनात्मक कार्य आशावान, साहसी लोगों ने ही किए हैं। आशा व्यक्ति का मार्ग-दर्शन करती है। मनुष्य का भविष्य के प्रति आशावान होकर कार्य करना ही उचित होता है। यदि हम इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि सभी पराक्रमी । महापुरुष आशावादी थे। उन सबका दृष्टिकोण सकारात्मक था। आशा का पतवार लेकर बड़े-बड़े नाविकों ने महाद्वीपों का पता लगाया। इसके प्रतिकूल निराशा जीवन का नाश करने वाली (UPBoardSolutions.com) और मनोबल गिराने वाली होती है। अतः हमें आशावादी होना चाहिए।

प्रश्न 3.
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

कविता से

प्रश्न 1.
‘नेह का आह्वान फिर-फिर’ से कवि का क्या आशये है?
उत्तर :
‘नेह का आह्वान फिर-फिर’ से कवि का आशय है, स्नेह (आशा) से युक्त होकर नए सृजन कार्य में व्यस्त होना।

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प्रश्न 2.
निराशा में आशा का संचार किस रूप में होता है?
उत्तर :
कवि के अनुसार निराशा में आशा का संचार प्रेम और स्नेह के रूप में होता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित भाव किन पंक्तियों में आए हैं? लिखिए

(क)
घोर तूफान और रात्रि के कष्टों से भयभीत जन में उषा अपनी सुनहरी किरणों से नई आशा भर देती है।
उत्तर :
रात के उत्पात-भय से.
भीत जन-जन, भीत कण-कण
किन्तु प्राची से ऊषा की।
मोहनी मुस्कान फिर-फिर

(ख) तेज आँधी के झोंकों के चलने से जब बड़े-बड़े पेड़-पर्वत काँपने लगते हैं, बड़े-बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं, तब तिनकों से बने हुए घोंसलों की क्या स्थिति होगी?
उत्तर :
बह चले झोंके कि काँपे
भीम कायावान भूधर,
जड़ समेत उखड़े-पुखड़कर,
गिर पड़े, टूटे विटप वर,
हाय तिनकों से विनिर्मित घोंसलों पर क्या न बीती।

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प्रश्न 4.
सतत संघर्ष और निर्माण की क्रियाओं की उपमा कवि ने किससे की है?
उत्तर :
सतत संघर्ष और निर्माण की क्रिया की उपमा कवि ने नीड़’ का निर्माण फिर-फिर और नेह का आह्वान ‘फिर-फिर’ से की है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) रात-सा दिन हो गया, फिर रात आयी और काली।
भाव – धूल युक्त बादलों ने धरती पर इस प्रकार घेरा डाल दिया मानो दिन रात में बदल गया हो। और रात का अंधकार और बढ़ गया।

(ख)
बोल, आशा के विहंगम किस जगह पर तू छिपा था।
भाव – आशारूपी पक्षी, तू अब तक कहाँ छिपा था (UPBoardSolutions.com) जो आकाश पर चढ़कर गर्व से बार-बार सीना तानता है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
‘धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भाँति घेरा’ में ध-ध और भ-भ की आवृत्ति हुई है। इससे पंक्ति में एक सरसता आ गई है, बताइए यहाँ किस अलंकार का प्रयोग हुआ है?
उत्तर :
अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।

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प्रश्न 2.
कविता में ‘फिर-फिर’, ‘जन-जन’ तथा ‘कण-कण’ (पुनरुक्त शब्द) का प्रयोग हुआ है। फिर-फिर निर्माण करने की क्रिया’ की विशेषता प्रकट कर रहा है जबकि ‘जन-जन’ से ‘प्रत्येक जन’ और ‘कण-कण’ से ‘प्रत्येक कण’ का बोध हो रहा है। इसी प्रकारे नीचे लिखे पुनरुक्त शब्दों का अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :
घर-घर = राम के राज्याभिषेक पर अवध में घर-घर खुशियाँ मनाई गई।
क्षण-क्षण = युद्ध के मोर्चे पर क्षण-क्षण की खबर रखनी पड़ती है।
धीरे-धीरे = धीरे-धीरे गर्मी बढ़ती जा रही है।
भाई-भाई = हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा बहुत पुराना है।

प्रश्न 3.
इस कविता को पढ़िए
‘दुख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात;
एक परदा यह झीना नील छिपाये है जिसमें सुख गात।
जिसे तुम समझे हो अभिशाप, जगत की ज्वालाओं का मूल;
ईश का वह रहस्य वरदान, कभी मत इसको जाओ भूल।
विषमता की पीड़ा से व्यस्त हो रहा स्पंदित विश्व महान;
यही दुख-सुख-विकास का सत्य यही भूमा का मधुमय दान।”

(क) कविता में आए कठिन शब्दों के अर्थ शब्दकोश से ढूंढकर लिखिए।
उत्तर :
रजनी-रात; नवल-नया; प्रभात-सवेरा; गात-शरीर; ज्वाला-अग्नि; स्पंदित-धड़कता, जीवित; भूमा-ऐश्वर्य

(ख) इस कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
कवि कहता है कि दुख की रात्रि में ही कहीं सुख का नया सवेरा जन्म लेता है। यह एक झीना परदा है जिसने दुख रूपी नीले निशान के पीछे सुख रूपी शरीर छिपा रखा है। जिसे मनुष्य अभिशाप समझता। वही जगत की ज्वाला रूपी जीवन का मूल होता है। ईश्वर के इस रहस्य रूपी वरदान को भूलना नहीं चाहिए। जीते जागते विशाल विश्व में अनेक (UPBoardSolutions.com) विषमताएँ हैं जो जग की पीड़ा का कारण हैं। दुख या सुख के विकास का सत्य है और यही ऐश्वर्य का दान है।

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(ग) कविता पर अपने साथियों से पूछने के लिए प्रश्न बनाइए।
उत्तर :

  • दुख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात से कवि को क्या तात्पर्य है?
  • जग की पीड़ा के क्या कारण हैं?

(घ) कविता को उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर :
सुख-दुख।

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UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 1 संसाधन

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संसाधन

अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) संसाधन किसे कहते हैं?
उत्तर
विभिन्न प्रकार की वस्तु या पदार्थ जिसकी उपयोगिता हो संसाधन कहलाती है।

(ख) अक्षयशील संसाधन कौन-कौन से हैं?
उत्तर
सूर्य का प्रकाश, पवन, वायु आदि कभी न समाप्त होने वाले संसाधन को अक्षयशील संसाधन कहते हैं।

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(ग) जीवाश्मी ईंधन अनवीकरणीय संसाधन क्यों हैं?
उत्तर
ऐसे प्राकृतिक संसाधन जो भूतकाल में निर्मित हुए हैं तथा जिनका भंडार सीमित मात्रा में है, अनवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं। इन संसाधनों का एक बार उपयोग कर लेने के बाद इन्हें पुन: प्राप्त नहीं (UPBoardSolutions.com) किया जा सकता। जीवाश्मी ईंधन भी एक ऐसा ही संसाधन है जिसे पुन: निर्मित होने में हजारों वर्ष लग जाते हैं। इसी कारण इसे अनवीकरणीय ईंधन कहा जाता है।

(घ) सतत पोषणीय विकास किसे कहते हैं?
उत्तर
संसाधनों के अंधाधुध उपयोग पर लगाम लगाने की जरूरत है संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को संसाधन संरक्षण कहते हैं। संसाधन संरक्षण का अर्थ संसाधनों के प्रयोग को पूर्णतः रोकना नहीं है, बल्कि इस प्रकार से उपयोग करना है कि वर्तमान पीढी के साथ-साथ भावी पीढ़ी भी इनसे लाभान्वित हो सके। ऐसे विकास को ही सतत पोषण विकास कहते हैं।

(ङ) प्राकृतिक संसाधानों के संरक्षण के उपाय लिखिए।
उत्तर
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उपाय

  1. मृदा का संरक्षण- मृदा की बहुत बड़ी हानि अपरदन से होती है। मृदा के अपरदन को रोकने के लिए फसल का 10-15 से०मी० तक डंठल छोड़कर काटना चाहिए। जिससे वायु वेग का प्रभाव न पड़े। क्योंकि मृदा का अपरदन वायु द्वारा भी होता है। पशुचारण पर रोक लगाकर तथा खेतों में मेड़ बनाकर मृदा अपरदन को रोका जा सकता है। (UPBoardSolutions.com)
  2. वृक्षों का संरक्षण- औद्योगिक क्रांति के बाद वनों का बड़े पैमाने पर ह्रास हुआ है, अतः वृक्षारोपण को बढ़ावा देकर वन संपदा की वृद्धि की जा सकती है। वृक्षारोपण द्वारा मिट्टी के कटाव को भी कम किया जा सकता है।
  3. खनिज संरक्षण- खनिजों के संरक्षण के लिए इनका बहुत सोच-विचार कर ही उपयोग करना चाहिए। दुर्लभ या कम मिलने वाले खनिजों के लिए इनके विकल्पों को खोजा जाना चाहिए। जैसे धातुओं । के स्थान पर प्लास्टिक का उपयोग करके खनिजों का संरक्षण किया जा सकता है।
  4. जल का संरक्षण- जल का संरक्षण जीवन का संरक्षण है। जल का प्राकृतिक स्रोत वर्षा है। वर्षा का जल प्रवाहित होकर नदियों एवं नालों में पहुँचता है। वर्षा के जल के उपयोग के लिए बाँध बनाकर इसे जमा किया जा सकता है। नहरों को पक्का करके तथा टिकिल सिंचाई द्वारा जल के उपयोग को कम किया जा सकता है। घरों में पानी का सीमित प्रयोग कर जल का संरक्षण किया जा सकता है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित के सही जोड़े बनाइए-
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 1 संसाधन img-1

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर
(क) पुल एक मानवनिर्मित संसाधन है।
(ख) उपजाऊ भूमि प्राकृतिक संसाधन है।
(ग) संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग संसाधन संरक्षण कहलाता है।

परियोजना कार्य-
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UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 10 प्राकृतिक प्रदेश एवं जनजीवन-2

UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 10 प्राकृतिक प्रदेश एवं जनजीवन-2

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प्राकृतिक प्रदेश एवं जनजीवन-2

अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए
(क) मानसूनी प्रदेश के एशियाई देशों के नाम लिखिए।
उत्तर
भारत, श्रीलंका, सिंगापुर, नेपाल, पाकिस्तान, चीन, भूटान, अफगानिस्तान आदि।

(ख) मानसूनी प्रदेश का नाम कैसे पड़ा?
उत्तर
जहाँ मौसमी पवनों द्वारा वर्षा होती है, उन प्रदेशों को मानसूनी प्रदेश कहते हैं।

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(ग) मानसूनी प्रदेश में वर्षा किस ऋतु में अधिक होती है?
उत्तर
मानसूनी प्रदेश में वर्षा, वर्षा ऋतु में अधिक होती है।

(घ) मानसूनी प्रदेश की मुख्य फसलें कौन-कौन सी हैं?
उत्तर
मानसूनी प्रदेश की मुख्य फसलें चावल, दाल, कहवा, गन्ना, जूट, कपास, गेहूँ, जौ, चना आदि हैं।

(ङ) मानसूनी प्रदेश के चाय और चावल के दो प्रमुख उत्पादक देश कौन से हैं?
उत्तर
चीन और भारत मानसूनी प्रदेश के चाय और चावल के प्रमुख उत्पादक देश हैं।

प्रश्न 2.
कारण बताइए
(क) मानसूनी प्रदेश में जनसंख्या अधिक निवास करती है।
उत्तर
मानसूनी प्रदेश की अनुकूल जलवायु तथा मानसूनी वर्षा का कृषि में विशेष योगदान होने के कारण मानसूनी प्रदेश में जनसंख्या अधिक निवास करती है।

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(ख) यूरोप महाद्वीप में मानसूनी प्रदेश नहीं पाए जाते हैं।
उत्तर
यूरोप महाद्वीप के विषुवत रेखा से बहुत दूर होने के कारण, (UPBoardSolutions.com) यह स्थान वर्ष भर ठण्डा रहता है। जिसके कारण मानसून बनने की सम्भावना नहीं होती है। इसी कारण यहाँ मानसूनी प्रदेश नहीं पाए जाते हैं।

(ग) मानसूनी प्रदेश में बाढ़ और सूखा पड़ता है।
उत्तर
मानसूनी प्रदेश में मानसून के औसत से अधिक आने पर वर्षा बहुत अधिक होती है, जिसके कारण बाढ़ आने की सम्भावना बढ़ जाती है। मानसून के उचित समय पर न उपलब्ध होने के कारण सूखा पड़ने लगता है।

(घ) सर्दियों में साइबेरिया के पक्षी मानसूनी प्रदेश में प्रवास करते हैं।
उत्तर
सर्दियों में साइबेरिया में अत्यधिक बर्फ पड़ती है। अधिक बर्फ के कारण यहाँ के पक्षी मानसूनी । प्रदेश में प्रवास करते हैं।

(ङ) चीन तुल्य प्रदेश में वर्ष भर कृषि की जाती है।
उत्तर
चीन तुल्य प्रदेशों में शीतऋतु में साधारण ठंड पड़ती है। अतः सिंचाई की पर्याप्त सुविधा होने के कारण इन प्रदेशों में वर्ष भर कृषि की जाती है।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर
(क) मानसूनी प्रदेश महाद्वीपों के पूर्वी तट पर स्थित हैं।
(ख) मानसूनी प्रदेश में पशुपालन के लिए जलवायु उपलब्ध है।
(ग) मानसूनी प्रदेश की कृषि बहुत कुछ वर्षा पर निर्भर होती है।
(घ) मानसूनी प्रदेश में अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
(ङ) पश्चिम यूरोपीय तुल्य प्रदेश में शीत काल में अधिक वर्षा होती है।
(च) सेंट लारेंश तुल्य प्रदेश में वसन्तकालीन गेहूँ की विस्तृत कृषि की जाती है।

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प्रश्न 4.
सही जोड़े बनाइएकराची –
उत्तर
UP Board Solutions for Class 8 Geography Chapter 10 प्राकृतिक प्रदेश एवं जनजीवन-2 img-1

भौगोलिक कुशलताएँ-
● विश्व के एक रिक्त मानचित्र पर निम्नलिखित प्रदेशों को अलग-अलग रंगों से छायांकित कीजिए-
मानसूनी प्रदेश, सेंट लारेंश तुल्य प्रदेश, चीन तुल्य प्रदेश
नोट- मानसूनी प्रदेश- दक्षिण-पूर्वी एशिया, अफ्रीका के पूर्वी तटवर्ती भाग, उत्तरी अमेरिका के खाड़ी तटीय भाग व पश्चिमी द्वीप समूह एवं मध्य अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया के उत्तरी तटीय भाग।
सेंट लारेंश तुल्य प्रदेश- संयुक्त राज्य अमेरिका का उत्तर-पूर्वी भाग, कनाडा का पूर्वी भाग, चीन का उत्तरी भाग, कोरिया तथा जापान का उत्तरी भाग।
चीन तुल्य प्रदेश- दक्षिण पूर्वी चीन, दक्षिण पूर्वी संयुक्त (UPBoardSolutions.com) राज्य अमेरिका, दक्षिण पूर्वी, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका का पूर्वी तट तथा अस्ट्रेलिया का दक्षिण पूर्वी भागे।
नोट- भारत के मानचित्र में इन स्थानों को बच्चे स्वयं अंकित करें।

विश्व के रिक्त मानचित्र पर मानसूनी प्रदेश के प्रमुख नगरों को एटलस की सहायता से दिखाइए।
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

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परियोजना कार्य- विद्यार्थी स्वयं करें।

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