UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 मंत्र (गद्य खंड)

UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 मंत्र (गद्य खंड)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 9 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 मंत्र नानकदेव (गद्य खंड).

(विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नांकित गद्यांशों में रेखांकित अंशों की सन्दर्भ सहित व्याख्या और तथ्यपरक प्रश्नों के उत्तर दीजिये –
(1) मोटर चली गयी। बूढ़ा कई मिनट तक मूर्ति की भाँति निश्चल खड़ा रहा। संसार में ऐसे मनुष्य भी होते हैं, जो अपने आमोद-प्रमोद के आगे किसी की जान की भी परवाह नहीं करते, शायद इसका उसे अब भी विश्वास न आता था। सभ्य संसार इतना निर्मम, इतना कठोर है, इसका ऐसा मर्मभेदी (UPBoardSolutions.com) अनुभव अब तक न हुआ था। वह उन पुराने जमाने के जीवों में था, जो लगी हुई आग को बुझाने, मुर्दे को कन्धो देने, किसी के छप्पर को उठाने और किसी कलह को शान्त करने के लिए सदैव तैयार रहते थे। जब तक बूढ़े को मोटर दिखायी दी, वह खड़ा टकटकी लगाये उस ओर ताकता रहा।
प्रश्न
(1) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) पुराने जमाने के जीवों का व्यवहार कैसा था?
(4) भगत को किस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था?
(5) भगत के अनुसार सभ्य संसार कैसा है?
[शब्दार्थ-आमोद-प्रमोद = मनोरंजन करना । जान = जीवन । परवाह = चिन्ता। निर्मम = निर्दय ।]
उत्तर-

  1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी गद्य’ में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित ‘मंत्र’ नामक कहानी से अवतरित है। इसमें लेखक ने विरोधी घटनाओं और भावनाओं के चित्रण द्वारा कर्तव्य का बोध कराया है। यहाँ पर लेखक ने बूढ़े भगत तथा डॉ० चड्डा के व्यवहार का वर्णन किया है। |
  2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- बूढ़ा भगत अपने बीमार बेटे को दिखाने डॉ० चड्डा के पास आया । परन्तु डॉ० चड्डा ने उसकी प्रार्थना पर कोई ध्यान नहीं दिया और मोटर में सवार होकर खेलने चले गये। मोटर चली जाने के बाद बूढ़ा भगत सोचने लगा कि क्या संसार में ऐसे भी हृदयहीन व्यक्ति हैं, जो अपने मनोरंजन के सामने दूसरों के जीवन की कोई चिन्ता नहीं करते। वह ऐसे व्यवहार की लेशमात्र भी आशा नहीं करता था। उसे अपनी सरलता के कारण उनके इसे कठोर व्यवहार पर अब भी विश्वास नहीं हो रहा था। वह यह नहीं जानता था कि सभ्य संसार इतना हृदयहीन और कठोर होता है। इस बात का हँदयस्पर्शी (UPBoardSolutions.com) अनुभव उसे अभी तक कभी नहीं हुआ था। वह प्राचीन मान्यताओं और परम्पराओं को माननेवाला व्यक्ति था। वह उन व्यक्तियों में से था, जो सदैव परोपकार में लीन रहते हैं, जो दूसरों की आग को बुझाने, मुर्दो को कन्धा देने, किसी के छप्पर को उठाकर रखने और किसी के घर की लड़ाई को शान्त करने को ही अपना कर्त्तव्य समझते हैं । इस प्रकार बूढ़ा भगत निः। स्वार्थ सेवा करनेवाला और दूसरों के दु:ख में सहयोग तथा सहानुभूति रखनेवाला व्यक्ति था।
  3. पुराने जमाने के जीवों का व्यवहार सरलता से परिपूर्ण होते हैं।
  4. भगत को विश्वास नहीं हो रहा था कि संसार में ऐसे मनुष्य भी रहते हैं जो अपने आमोद-प्रमोद के आगे किसी की जान । की परवाह नहीं करते हैं।
  5. भगत के अनुसार सभ्य संसार बहुत निर्मम एवं कठोर है।

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(2) ‘अरे मूर्ख, यह क्यों नहीं कहता कि जो कुछ न होना था, हो चुका । जो कुछ होना था वह कहाँ हुआ? माँ-बाप ने बेटे का सेहरा कहाँ देखा? मृणालिनी का कामना-तरु क्या पल्लव और पुष्प से रंजित हो उठा? मन के वह स्वर्ण-स्वप्न जिनसे जीवन आनन्द का स्रोत बना हुआ था, क्या पूरे हो गये? (UPBoardSolutions.com) जीवन के नृत्यमय तारिका-मण्डित सागर में आमोद की बहार लूटते हुए क्या उसकी नौका जलमग्न नहीं हो गयी? जो न होना था, वह हो गया!’
प्रश्न
(1) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) माँ-बाप ने क्या नहीं देखा?
(4) ‘नौका जलयान होना’ का क्या अर्थ है?
(5) मृणालिनी का कामना तरु क्या था?
[शब्दार्थ-सेहरा = पगड़ी। कामना तरु = इच्छारूपी वृक्ष । पल्लव = पत्ते । रंजित = युक्त, लहलहानी । स्वर्ण-स्वप्न = सुनहरी इच्छाएँ । स्रोत = झरना। नृत्यमय तारिका-मंडित = नाचते हुए तारों से सुशोभित । आमोद = प्रसन्नता । जलमग्न = पानी में डूब जाना।]
उत्तर-

  1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी गद्य’ में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित ‘मंत्र’ नामक पाठ से लिया गया है। प्रस्तुत गद्यांश में उस समय का विवरण है, जबकि कैलाश के प्राण सर्पदंश द्वारा हर लिये जाते हैं तथा झाड़-फेंक के साधन भी उत्तर दे जाते हैं तो एक सज्जन कहते हैं
  2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- अरे मूर्ख ! आज इस घर में जो हुआ है वह नहीं होना चाहिए था क्योंकि कैलाश अभी नवयुवक है, जीवन के समस्त आनन्दों का रसास्वादन अभी उसके लिए शेष है। उसके माता-पिता तो उसका विवाह भी न देख पाये और मृणालिनी, उसकी कामनाएँ जो कैलाश के जीवित होने पर पुष्पित, पल्लवित थीं, कैलाश के आकस्मिक निधन से नष्टप्राय हो गयी है। जब जीवन के आनन्द का एकमात्र स्रोत कैलाश ही उसके जीवन में न रहा, तो वह अब किस अनिर्वचनीय (UPBoardSolutions.com) आनन्द की अनुभूति करे। उसके मन की अनेक इच्छाएँ एवं सुनहरे स्वप्न क्या कैलाश की मृत्यु के साथ अपूर्ण होकर नहीं रह गये । जिस प्रकार किसी सागर में आमोद-प्रमोद करती नाव सागर की उठती हुई तरंगों से सागर के गर्भ में समा जाती है उसी प्रकार कैलाशरूपी नौका के सवार भी जीवनरूपी सागर के जल में पूर्णतया डूब गये थे। भाव यह है कि कैलाश की मृत्यु उस समय हुई, जबकि उसे जीवन के प्रत्येक सुख को देखना था तथा उसकी मृत्यु से उसके माता-पिता, मृणालिनी आदि सभी पूर्णतया प्रभावित हुए हैं।
  3. माँ-बाप ने बेटे के सिर पर सेहरा नहीं देखा।
  4. नौका जलमग्न होने का तात्पर्य सहारा नष्ट हो जाना है जिससे मृणालिनी का विवाह होना था जब वही नहीं रहेगा तो इसे ही नौका का जलमग्न कहा जायेगा।
  5. मृणालिनी कल्पना तरु वैवाहिक जीवन का स्वर्ण-स्वप्न था जो जीवन-आनन्द का स्रोत बना हुआ था, जो समय पर पल्लव और पुष्प से रंजित होता।

(3)  वही हरा-भरा मैदान था, वही सुनहरी चाँदनी एक नि:शब्द संगीत की भाँति प्रकृति पर छायी हुई थी, वही मित्र-समाज था। वही मनोरंजन के सामान थे। मगर जहाँ हास्य की ध्वनि थी, वहाँ अब करुण-क्रन्दन और अश्रु-प्रवाह था।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यखण्ड का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) प्रकृति पर क्या छायी हुई थी?
उत्तर-

  1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यांश मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित कहानी ‘मंत्र’ से उद्धृत है।
  2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- कैलाश के जन्मदिन समारोह के समय जो हँसीपूर्ण वातावरण था, चारों ओर हास्यपरिहास छाया था वहीं कैलाश को साँप के काट लेने पर करुण पुकार होने लगी, थी। सभी के नेत्रों से आँसू बह रहे थे। हर्ष का वातावरण शोक में बदल गया था।
  3. प्रकृति पर सुनहरी चाँदनी संगीत की भाँति छायी हुई थी।

(4) वह एक जड़ी कैलाश को सुंघा देता । इस तरह न जाने कितने घड़े पानी कैलाश के सिर पर डाले गये और न जाने कितनी बार भगत ने मन्त्र फेंका। आखिर जब ऊषा (UPBoardSolutions.com) ने अपनी लाल-लाल आँखें खोलीं, तो कैलाश की भी लाल-लाल आँखें खुल गयीं। एक क्षण में उसने अँगड़ाई ली और पानी पीने को माँगा। डॉक्टर चड्डा ने दौड़कर नारायणी को गले लगा लिया। नारायणी दौड़कर भगत के पैरों पर गिर पड़ी और मृणालिनी कैलाश के सामने आँखों में आँसू भरे पूछने लगी-‘अब कैसी तबीयत है?’
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।
(3) आँखें खुलते ही अँगड़ाई लेते हुए कैलाश ने क्या माँगा?
उत्तर-

  1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी गद्य’ में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित ‘मंत्र’ नामक कहानी से अवतरित है। प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने विरोधी घटनाओं, परिस्थितियों और भावनाओं का चित्रण करके कर्तव्य-बोध का मार्ग समझाया है।
  2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- बूढ़े भगत ने कैलाश को जड़ी सुंघाया और इसके बाद उसके सिर पर घड़े भर-भरकर पानी डाला गया। बूढ़े भगत ने इस बीच कई बार उस पर मंत्र फेंका। काफी समय बाद जब उषा ने कैलाश को देखने के लिए अपनी लाल-लाल आँखें खोलीं तो उसी समय अचानक कैलाश की भी लाल आँखें खुल गयीं। अँगड़ाई लेते हुए कैलाश ने पीने के लिए पानी (UPBoardSolutions.com) माँगा तो इतना सुनते ही डॉ० चड्ढा ने नारायणी को प्रसन्नता के आवेश में दौड़कर गले लगा लिया। नारायणी कृतज्ञ भाव से भरकर तुरंत ही भगत के पैरों पर गिर पड़ी। मृणालिनी आँखों में आँसू भरकर कैलाश से पूछने लगी, “अब तुम्हारी कैसी तबीयत है?”
  3. आँखें खुलते ही कैलाश ने अँगड़ाई लेते हुए पानी माँगा।

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(5) चड्रा – रात को मैंने नहीं पहचाना, पर जरा साफ हो जाने पर पहचान गया। एक बार यह एक मरीज को लेकर आया था। मुझे अब याद आता है कि मैं खेलने जा रहा था और मरीज को देखने से इनकार कर दिया था। आज उस दिन की बात याद करके मुझे जितनी ग्लानि हो रही है, उसे प्रकट नहीं (UPBoardSolutions.com) कर सकता। मैं उसे खोज निकालूंगा और पैरों पर गिरकर अपना अपराध क्षमा कराऊँगा । वह कुछ लेगा नहीं, यह जानता हूँ, उसका जन्म यश की वर्षा करने ही के लिए हुआ है। उसकी सज्जनता ने मुझे ऐसा आदर्श दिखा दिया है, जो अबे से जीवन-पर्यन्त मेरे सामने रहेगा।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) ग्लानि किसको हो रही थी?
(4) डॉ० चड्ढा किस आदर्श पर जीवन भर चलने का संकल्प लेते हैं?
(5) प्रस्तुत पंक्तियों में भगत की किस-चारित्रिक विशेषता का पता चलता है?
[शब्दार्थ-ग्लानि = दु:ख। जीवन-पर्यन्त = जीवन के अन्त तक।]

उत्तर-

  1. सन्दर्भ- यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी गद्य’ में संकलित एवं मुंशी प्रेमचन्द जी द्वारा लिखित ‘मन्त्र’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें उन्होंने यह बताया है कि मनुष्य को अपनी गल्तियों का अनुभव तब होता है, जब उसके प्रायश्चित्त का समय निकल जाता है। अपने ऊपर उसी प्रकार की विपत्ति के आने से मनुष्य की आँखें खुल जाती हैं।
  2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- बूढ़े के मन्त्र-तन्त्र के उपचार से कैलाश ठीक हो जाता है। डॉक्टर चड़ा उस बूढ़े को पहचानने का प्रयास करते हैं और अन्तत: उन्हें उस घटना का स्मरण हो आता है, जब वे गोल्फ खेलने के लिए जा रहे थे और वह बूढ़ा अपने इकलौते पुत्र को मृतप्राय अवस्था में उनके पास लेकर आया था, लेकिन वह उसको देखे बिना गोल्फ खेलने के लिए चले गये थे। आज बूढ़े द्वारा अपने ऊपर किये गये उपकार के कारण उन्हें अपने उस दिन के व्यवहार पर अपार दु:ख हो रहा है। वह आज (UPBoardSolutions.com) अपने उस अमानवीय व्यवहार का प्रायश्चित्त करना चाहते हैं। अपनी पत्नी नारायणी से वे कह रहे हैं कि यद्यपि मैं जानता हूँ कि वह बूढ़ा कुछ लेगा नहीं तथापि मैं उसे अवश्य खोजेंगा, वह अवश्य ही मेरे अपराध को क्षमा कर देगा। इस संसार में कुछ लोग दूसरों की भलाई के लिए ही जन्म लेते हैं, अपने लिये नहीं। वह बूढ़ा भी उन लोगों में से ही एक व्यक्ति था। लगता है कि भगवान् ने उसको यश की वर्षा करने के लिए ही जन्म दिया है। अपने नि:स्वार्थ सेवा-भावना से उसने मुझे सज्जनता का ऐसा आदर्श दिखा दिया है, जिसे मैं जीवन के अन्तिम क्षण तक याद रखेंगा।।
  3. ग्लानि डॉक्टर चड्डी को हो रही थी।
  4. डॉ० चड्ढा भगत द्वारा दिखाये सज्जनता के आदर्श पर जीवन भर चलने का संकल्प लेते हैं।
  5. इन पंक्तियों में भगत की चारित्रिक विशेषता उसकी सज्जनता है। उसका जन्म यश की वर्षा करने ही के लिए हुआ था।

प्रश्न 2. मुंशी प्रेमचन्द के जीवन-परिचय एवं भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।

प्रश्न 3. मुंशी प्रेमचन्द के जीवन एवं साहित्यिक परिचय का उल्लेख कीजिए।
अथवा मुंशी प्रेमचन्द की जीवनी एवं साहित्यिक सेवाएँ स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 4. मुंशी प्रेमचन्द के जीवन-परिचय एवं कृतियों का उल्लेख कीजिए। अथवा मुंशी प्रेमचन्द जी का साहित्यिक परिचय दीजिए तथा उनकी प्रमुख रचनाओं (कृतियों) का उल्लेख कीजिए।

मुंशी प्रेमचन्द
(स्मरणीय तथ्य )

जन्म-सन् 1880 ई०। मृत्यु-सन् 1936 ई० जन्म-स्थान-लमही (वाराणसी) उ० प्र०। पिता-अजायब राय । अन्य बातें-निर्धन, संघर्षमय जीवन, बी० ए० तक शिक्षा, पहले अध्यापक फिर सब-डिप्टी इंसपेक्टर।
साहित्यिक विशेषताएँ-उपन्यास सम्राट्, महान् कथाकार। यथार्थ और आदर्श का मिश्रण।
भाषा- सरल, रोचक, प्रवाहमयी।
शैली- निजी, वर्णनात्मक, विवेचनात्मक, भावात्मक, व्यंग्यात्मक आदि।

  • जीवन-परिचय- मुंशी प्रेमचन्द का जन्म वाराणसी जिले के लमही ग्राम में सन् 1880 ई० में हुआ था। इनके बचपन का नाम धनपतराय धा : प्रेमचन्द जी पहले उर्दू में नवाबराय के नाम से कहानियाँ लिखते थे। बाद में जब हिन्दी में आये तो इन्होंने प्रेमचन्द नाम से कहानियाँ लिखनी शुरू कीं। इनका जन्म एक साधारण कायस्थ-परिवार में हुआ था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो गयी थी। (UPBoardSolutions.com) इनके पिता का नाम अजायब राय था। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद भी इन्होंने बड़े ही परिश्रम से अपना अध्ययनक्रम जारी रखा। आरम्भ में कुछ वर्षों तक स्कूल की अध्यापकी करने के पश्चात् ये शिक्षा-विभाग में डिप्टी इंसपेक्टर हो गये। असहयोग आन्दोलन से प्रेरित होकर इन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और आजीवन साहित्य-सेवा करते रहे। इन्होंने कई पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। इनकी मृत्यु सन् 1936 ई० में हुई।
  • कृतियाँ- मुंशी प्रेमचन्द मुख्य रूप से कहानी और उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध हैं, परन्तु उन्होंने नाटक, निबन्ध और सम्पादन-कला को भी अपनी समर्थ लेखनी का विषय बनाया। इनकी रचनाओं का विवेचन निम्न प्रकार है
    • (क) उपन्यास-गोदान, सेवासदन, कर्मभूमि, रंगभूमि, गबन, प्रेमाश्रम, निर्मला, वरदान और कायाकल्प नामक श्रेष्ठ उपन्यास लिखे। इनके उपन्यासों में मानव-जीवन के विविध पक्षों और समस्याओं का यथार्थ चित्रण हुआ है। |
    • (ख) कहानी-संग्रह- मुंशी प्रेमचन्द ने लगभग 300 कहानियाँ लिखीं। उनके कहानी संग्रहों में सप्तसुमन, नवनिधि, प्रेमपचीसी, प्रेम सदन, मानसरोवर (आठ भाग) प्रमुख हैं। इनकी कहानियों में बाल-विवाह, दहेज-प्रथा, रिश्वत, भ्रष्टाचार आदि विविध समस्याओं को यथार्थ चित्रण कर उनका समाधान प्रस्तुत किया गया है।
    • (ग) नाटक-संग्राम, प्रेम की वेदी, कर्बला- इन नाटकों में राष्ट्र-प्रेम और विश्व-बन्धुत्व का सन्देश दिया गया है।
    • (घ) निबन्ध-‘कुछ विचार’ और ‘साहित्य का उद्देश्य’ में मुंशी प्रेमचन्द जी के निबन्धों का संग्रह है।
    • (ङ) सम्पादन-माधुरी, मर्यादा, हंस, जागरण आदि।
      इनके अतिरिक्त इन्होंने ‘तलवार और त्याग’ जीवनी, बालोपयोगी साहित्य और कुछ अनूदित पुस्तकों द्वारा हिन्दी-साहित्य के भण्डार की अभिवृद्धि की है।
  • साहित्यिक परिचय- मुंशी प्रेमचन्द हिन्दी के युगांतरकारी कथाकार हैं। इनकी कहानियाँ समसामयिक आर्थिक परिस्थितियों के किताबी दस्तावेज हैं जिनमें किसानों की दयनीय दशा, सामाजिक बन्धनों में तड़पती नारियों की वेदना, वर्णव्यवस्था का खोखलापन, हरिजनों की पीड़ा आदि का बड़ा ही मार्मिक चित्रण है। सामयिकता के साथ ही इनके साहित्य में स्थायित्व प्रदान करनेवाले तत्त्व विद्यमान हैं।
  • भाषा-शैली- मुंशी प्रेमचन्द प्रारम्भ में उर्दू में लिखा करते थे, अत: इनकी रचनाओं पर उर्दू की छाया स्पष्ट है। शैली अत्यन्त ही सरल, सुबोध तथा स्वाभाविक है, जिसमें (UPBoardSolutions.com) मुहावरों और कविता के समावेश से और भी सजीवता आ गयी है। आवश्यकतानुसार भाषा में अंग्रेजी, अरबी, उर्दू, फारसी और पूर्वी के देशज शब्दों का प्रयोग हुआ है। भाषा की स्पष्टता एवं प्रभावशीलता के लिए कहीं-कहीं आलंकारिक एवं काव्यमय भाषा का प्रयोग किया गया है। प्रेमचन्द की शैली के रूप हैं–(1) व्यावहारिक और (2) संस्कृतनिष्ठ शैली। व्यावहारिक शैली पर उर्दू की स्पष्ट छाप है। भाषा सरल और मुहावरेदार है।

उदाहरण

  1. व्यावहारिक शैली –“बूढ़े ने पगड़ी उतार कर चौखट पर रख दी और रोकर बोला-हुजूर, एक निगाह देख लें। बस एक निगाह। लड़का हाथ से चला जायेगा। हुजूर, सात लड़कों में यही एक बच रहा है हुजूर ।’
  2. संस्कृतनिष्ठ शैली –“कितने ही सिद्धान्त जो एक जमाने में सत्य समझे जाते थे, आज असत्य सिद्ध हो गये हैं, क्योंकि उनका सम्बन्ध मनोभावों से है और मनोभावों में कभी परिवर्तन नहीं होता है।”

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. क्या ‘मंत्र’ एक मर्मस्पर्शी कहानी है और क्यों?
उत्तर- ‘मंत्र’ एक मर्मस्पर्शी कहानी है। भगत अपने पुत्र के जीवनदान की याचना डॉ० चड्ढा के समक्ष करता है, लेकिन चड्ढा के ऊपर उसका कोई असर नहीं हुआ। अपनी बीमारी के (UPBoardSolutions.com) कारण भगत का लड़का इस दुनिया से सिधार गया। डॉ० चड्ढा के लड़के को सर्प ने जब डस लिया तो चड्ढा ने बूढ़े भगत को इलाज के लिए बुलवाया था। पहले तो भगत ने ना कर दिया, लेकिन रात में चड्ढा के लड़के के उपचार के लिए जाता है। उसके उपचार से चड्ढा के लड़के की जान बच जाती है।

प्रश्न 2. “भगवान् बड़ा कारसाज है।” इस वाक्य का भाव स्पष्ट कीजिए। |
उत्तर- अच्छा और बुरा सब ईश्वर के हाथ में है। ईश्वर सब कुछ करने में समर्थ है। वह जिन्दा को मुर्दा कर सकता है और मुर्दा को जिन्दा।

प्रश्न 3. अंततः भगत डॉ० चड्ढा के पुत्र को बचाने क्यों चला गया?
उत्तर- डॉ० चड्ढा के पुत्र की हालत जानकर भगत से नहीं रहा गया। उसके मन में बदले की भावना नहीं थी। जीवन में इस तरह का उसने कभी भी कोई कार्य नहीं किया था। भगत के मन में दया थी। इसलिए डॉ० चड्ढा के पुत्र को बचाने चला गया।

प्रश्न 4. डॉ० चड्ढा के सामने भगत ने अपनी पगड़ी उतार कर क्यों रख दी?
उत्तर- अपने पुत्र की जान बचाने के लिए भगत ने अपनी पगड़ी डॉ० चड्ढा के सामने उतार कर रख दी।

प्रश्न 5. कैलाश को सर्प ने क्यों काट लिया था?
उत्तर- कैलाश ने सर्प की गर्दन को कसकर दाब दिया था जिससे सर्प क्रोधित हो उठा और गर्दन ढीली होते ही उसने कैलाश को काट लिया।

प्रश्न 6. ‘मंत्र’ कहानी का सन्देश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर- ‘मंत्र’ कहानी को सन्देश यह है कि हमें अमीर-गरीब के साथ समान व्यवहार करना चाहिए तथा दूसरों के सुखदु:ख में समान रूप से भागीदार होना चाहिए।

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प्रश्न 7. नारायणी ने भगत के लिए क्या सोचा था? |
उत्तर- नारायणी ने सोचा था कि मैं उसे कोई बड़ी रकम देंगी।

प्रश्न 8. कैलाश के जन्म-दिवस की तैयारियों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर- कैलाश के बीसवें सालगिरह पर हरी-हरी घास पर ‘कुर्सियाँ बिछी हुई थीं। शहर के रईस और हुक्काम इकठे हुए थे। बिजली के प्रकाश से सारा मैदान जगमगा रहा था। आमोद-प्रमोद के साधन भी थे।

प्रश्न 9. डॉ० चड्ढा और बूढ़े से सम्बन्धित दस वाक्य लिखिए। |
उत्तर- डॉ० चड्ढा ने खूब यश और धन कमाया, लेकिन इसके साथ ही अपने स्वास्थ्य की रक्षा भी की। पचास वर्ष की अवस्था में उनकी चुस्ती और फुर्ती युवकों को भी लज्जित करती थी। उनके प्रत्येक काम का समय निश्चित था। इस नियम से वह जौ-भर भी न टलते थे। डॉ० चड्ढा उपचार और संयम का रहस्य खूब समझते थे। बूढ़ा भगत विनम्र और दयालु था। वह पुत्र के निधन के बाद भी धैर्य धारण किये हुए था। वह (UPBoardSolutions.com) नियमित रूप से अपने जीवन निर्वाह के लिए कार्य करता था। भगत में बदले की भावना नहीं थी। वह जब चड्ढा के बेटे को साँप काटने की खबर सुनता है तो उससे रहा नहीं जाता और रात में चड्ढा के घर पहुँच जाता है-वहाँ वह झाड़-फेंक करता है। उसके झाड़-फेंक से डॉ० चड्ढा का लड़का ठीक हो जाता है।

प्रश्न 10. इस पाठ से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर- इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों के सुख-दुःख में समान रूप से भागीदार होना चाहिए।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘भगवान् बड़ा कारसाज है।’ यह वाक्य कहानी में कितनी बार आया है?
उत्तर- ‘भगवान् बड़ा कारसाज है’ यह वाक्य कहानी में दो बार प्रयुक्त हुआ है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से सही वाक्य के सम्मुख सही (√) का चिह्न लगाइए
(अ) भगत कठोर हृदय का व्यक्ति नहीं था।                            (√)
(ब) कैलाश नारायणी का पुत्र था।                                            (√)
(स) बुढ़िया ने भगत को दूसरी बार डॉ० चड्ढा के यहाँ भेजा था। (×)
(द) अंततः कैलाश की मृत्यु हो गयी थी।                                   (×)

प्रश्न 3. मुंशी प्रेमचन्द का जन्म एवं मृत्यु सन् बताइए।
उत्तर- मुंशी प्रेमचन्द का जन्म सन् 1880 ई० तथा मृत्यु सन् 1936 ई० हुई।

प्रश्न 4. मुंशी प्रेमचन्द किस युग के लेखक हैं?
उत्तर- मुंशी प्रेमचन्द शुक्ल युग के लेखक हैं।

प्रश्न 5. कैलाश और मृणालिनी कौन थे?
उत्तर- कैलाश और मृणालिनी सहपाठी थे।

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प्रश्न 6. ‘हंस’ पत्रिका के संस्थापक कौन थे?
उत्तर- ‘हंस’ पत्रिका के संस्थापक मुंशी प्रेमचन्द थे।

व्याकरण-बोध

1. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ बताकर वाक्य-प्रयोग कीजिए –
आँखें ठण्डी होना, चैन की नींद सोना, किस्मत ठोंकना, कलेजा ठण्डा होना, हाथ से चला जाना, सूरत आँखों में फिरना।
उत्तर-

  • आँखें ठण्डी होना- (निष्प्राण होना)
    सर्प के काटने से कैलाश की आँखें ठण्डी हो गयी थीं।
  • चैन की नींद सोना- (बेफिक्र होना)
    परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर मैं चैन की नींद सोया।
  • किस्मत ठोंकना- (भाग्य को दोष देना)
    परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर मैंने किस्मत ठोंक ली।
  • कलेजा ठण्डा होना- (चैन पड़ना)
    राम के फेल होने पर श्याम का कलेजा ठण्डा हो गया।
  • हाथ से चला जाना- (प्रिय वस्तु का निकल जाना)
    दीनू की माँ का इकलौता बेटा बुरी संगति में पड़कर हाथ से चला गया।
  • सूरत आँखों में फिरना- (भूली हुई चीज याद आना)
    राधा के मुम्बई चले जाने पर उसकी सूरत बार-बार मेरे आँखों में फिरती है।

2. निम्नलिखित शब्दों को सन्धि-विच्छेद करते हुए सन्धि का नाम लिखिएपल्लव, विद्यालय, सज्जन, औषधालय, निश्चल, निःस्वार्थ।
उत्तर-
पल्लव       – पत् + लव           – व्यंजन सन्धि
विद्यालय    – विद्या + आलय    – दीर्घ सन्धि
सज्जन        – सद् + जन         – व्यंजन संधि
औषधालय  – औषध + आलय – दीर्घ सन्धि
निश्चल         – निः + चल          – विसर्ग सन्धि
नि:स्वार्थ     – निः + स्वार्थ        – विसर्ग सन्धि

3. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग बताइए –
उपदेशक, निर्दयी, निवारण, आमोद, प्रतिघात।
उत्तर- उप, निर, नि, आ, प्रति ।

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4. निम्नलिखित समस्त पदों में समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए
महाशय, कामना-तरु, सावन-भादौ, जीवनदान, जलमग्न, आत्मरक्षा, मित्र-समाज।
उत्तर-
समस्त पद          समास-विग्रह                  समास का नाम
महाशय        –  महान् है आशय जिसका     – बहुब्रीहि समास
कामना-तरु   – कामना रूपी तरु                – कर्मधारय समास
सावन-भादौ   – सावन और भादौ                – द्वन्द्व समास
जीवनदान      – जीवन के लिए दान             – सम्प्रदान तत्पुरुष
जलमग्न          – जल में मग्न                        – अधिकरण तत्पुरुष
आत्मरक्षा      – आत्मा की रक्षा                    – सम्बन्ध तत्पुरुष
मित्र-समाज    – मित्रों का समाज                – सम्बन्ध तत्पुरुष

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप

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धातु-रूप

ध्यातव्य-अनुवाद में सहायक होने के कारण पाठ्यक्रम में निर्धारित (पठ्, हस, दृश्, पच्) धातुओं के अतिरिक्त कुछ अन्य धातुओं के रूप भी यहाँ दिये जा रहे हैं।

(1) पठ् धातु (पढ़ना) के रूप
लट् लकार (वर्तमानकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-23

लुट् लकार (भविष्यत्काल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-24

लङ् लकार (भूतकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-25

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लोट् लकार (‘आज्ञा’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-26

विधिलिङ् लकार (‘चाहिए’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-27

(2) हस् धातु (हँसना) के रूप
लट् लकार (वर्तमानकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-28

लुट् लकार (भविष्यत्काल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-29

लङ् लकार (भूतकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-30

लोट् लकार (आज्ञा’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-1

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विधिलिङ् लकार (‘चाहिए’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-2

(3) गम् धातु (जाना) के रूप
लट् लकार (वर्तमानकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-3

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-4

लङ् लकार ( भूतकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-5

लोट् लकार (आज्ञा’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-6

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विधिलिङ् लकार (‘चाहिए’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-7

(4) कृ धातु (करना) के रूप
लट् लकार (वर्तमानकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-8

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-9

लङ् लकार ( भूतकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-10

लोट् लकार (आज्ञा’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-11

विधिलिङ् लकार (‘चाहिए’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-12

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(5) पच् धातु (पकाना) के रूप
लट् लकार (वर्तमानकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-13

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-14

लङ् लकार ( भूतकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-15

लोट् लकार (आज्ञा’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-16

विधिलिङ् लकार (‘चाहिए’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-17

(6) दृश् धातु (देखना) के रूप
लट् लकार (वर्तमानकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-18

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लृट् लकार (भविष्यत्काल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-19

लङ् लकार ( भूतकाल)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-20

लोट् लकार (आज्ञा’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-21

विधिलिङ् लकार (‘चाहिए’ अर्थ में)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi धातु-रूप img-22

अभ्यास

प्रश्न 1
निम्नलिखित धातुओं के निर्देशानुसार रूप लिखिए
उत्तर
(क) दृश्लृ ट् लकार (मध्यम पुरुष, एकवचन, बहुवचन) ।
(ख) दृश्, पच्-लोट् लकार (उत्तम पुरुष, एकवचन, द्विवचन)
(ग) पठ्, दृश्-विधिलिङ् लकार (मध्यम पुरुष, एकवचन व बहुवचन)
(घ) भू, पठ्ल ङ् लकार (मध्यम पुरुष, एकवचन तथा द्विवचन) ।
(ङ) दृश्, पच्-नृट् लकार (उत्तम पुरुष, एकवचन तथा बहुवचन)
(च) हस्, पच्–लुट् तथा लङ् लकार (उत्तम पुरुष, द्विवचन, बहुवचन)
(छ) हस्-लोट् लकार (उत्तम (UPBoardSolutions.com) तथा मध्यम पुरुष, बहुवचन)
(ज) पठ्, हस्, दृश्लृ ट् लकार (उत्तम पुरुष, एकवचन तथा बहुवचन)
(झ) पठ्, हस्, दृश्-लङ् लकार (मध्यम पुरुष, एकवचन तथा बहुवचन)
(ञ) हस्, पच्–लङ् लकार (द्विवचन तथा बहुवचन)
(ट) पठ्, हस्तृ ट् लकार (मध्यम पुरुष, एकवचन तथा बहुवचन),

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प्रश्न 2
निम्नांकित में से किसी एक के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए- [2011]
उत्तर
पक्ष्यथ, पश्यानि, हस, पठिष्यावः, द्रक्ष्यसि, पच, द्रक्ष्यामि, पठानि, पक्ष्यसि, पश्यथ, पठानि, पठेयुः, पठेयम्, अहसन्, अपठ, हसानि, भवेतम्, पठसि, अहसत्, पश्येत्, पठामि, हसिष्यति, पचेव, अपश्य, हंसथः, पठतः, हसेत।

प्रश्न 3
निम्नलिखित में से किसी एक धातु के रूप लिखिए [2012]
उत्तर
लृट् लकार के उत्तम पुरुष के बहुवचन–

  1. पठ्,
  2. हस्,
  3. दृश्।।

लोट् लकार के मध्यम पुरुष के एकवचन–

  1. पच्,
  2. पठ्,
  3. हस्।

प्रश्न 4
निम्नलिखित में से किसी एक धातु के रूप लिखिए [2013]
उत्तर
लट् लकार में–

  1. दृश्,
  2. पठ्,
  3. हँस।।

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प्रश्न 5
निम्नलिखित में से किसी एक के धातु, लकार, पुरुष तथा वचन का उल्लेख कीजिए– [2014]
उत्तर
पठाम:, हसन्तु, पश्याम:, हसतु, पश्यन्ति, पठामि, (UPBoardSolutions.com) अपचताम्, अहसाम, हससि, द्रक्ष्यसि, पचति, पठेः, अपचतम्, हसत, द्रक्ष्यामः, पठानि, पचेयुः पश्येताम्, पठत, अहसः, पश्यामि।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप

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शब्द-रूप

ध्यातव्य–अनुवाद में सहायक होने के कारण हम पाठ्यक्रम में निर्धारित (फल, मति, मधु एवं नदी) शब्दों के अतिरिक्त भी कुछ शब्दों के रूप यहाँ दे रहे हैं।

1. अकारान्त नपुंसकलिङ्ग संज्ञा शब्द : फल

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-4

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[संकेत–वन, कमल, पुष्प, कुसुम, जल, मित्र, पुस्तक, ज्ञान (UPBoardSolutions.com) आदि अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के रूप फल के समान ही होते हैं।]

2. आकारान्त स्त्रीलिङ्ग संज्ञा शब्द : रमा

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-5
UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-2

[ संकेत–लता, बाला, विद्या, छाया, कन्या, निशा आदि आकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप रमा के समान ही होते हैं। ]

3. इकारान्त पुंल्लिङ्ग संज्ञा शब्द : हरि

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-6

[ संकेत-मुनि, कपि, विधि, रवि, गिरि, कवि आदि इकारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों के रूप हरि के समान ही होते हैं।]

4. इकारान्त स्त्रीलिङ्ग संज्ञा शब्द : मति

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-7

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[ संकेत–बुद्धि, भक्ति, शक्ति, श्रुति, स्मृति, नीति, रीति, जाति, रात्रि आदि (UPBoardSolutions.com) इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप मति के समान ही होते हैं।]

5. ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग संज्ञा शब्द : नदी

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-8

[ संकेत-गौरी, पार्वती, जानकी, सावित्री, गायत्री, पृथ्वी आदि ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप नदी के समान ही होते हैं।]

6. उकारान्त नपुंसकलिङ्ग संज्ञा शब्द : मधु

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-9

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[ संकेत–वस्तु, अश्रु, जानु, तालु, सानु, अम्बु, वसु आदि उकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों के रूप मधु के समान ही होते हैं।]
संज्ञा के स्थान पर जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, वे सर्वनाम (UPBoardSolutions.com) कहलाते हैं; जैसे-तद् (वह), युष्मद् (तुम), अस्मद् (मैं) आदि।

1. युष्मद् (तुम) शब्द के रूप

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-10

[ संकेत–सर्वनाम शब्दों के सम्बोधन में रूप नहीं होते हैं।]

2. अस्मद् (मैं) शब्द के रूप

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-11

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3. तद् (वह) शब्द के रूप

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4. तद् (वह) शब्द के रूप

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-3

[ संकेत–शेष रूप पुंल्लिङ्ग के समान ही होंगे।]

5. तद् (वह) शब्द के रूप (स्त्रीलिङ्ग)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi शब्द-रूप img-13

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अश्यास

प्रश्न 1
निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों के रूप लिखिए [2010]
उत्तर
(क)
चतुर्थी विभक्ति, एकवचन-

  1. मति,
  2. नदी,
  3. मधु,
  4. युष्मद्।

(ख) तृतीया विभक्ति, एकवचन-

  1. मधु,
  2. नदी,
  3. फल,
  4. युष्मद्।

(ग) चतुर्थी विभक्ति , द्विवचन–

  1. मति,
  2. युष्मद्,
  3. फल,
  4. मधु।

(घ) पञ्चमी विभक्ति, द्विवचन-

  1. मति,
  2. मधु,
  3. फल,
  4. युष्मद्।

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(ङ) पञ्चमी विभक्ति, एकवचन–

  1. अस्मद्,
  2. नदी,
  3. मधु,
  4. मति।

प्रश्न 2
निम्नलिखित शों के रूप लिखिए [2011]
उत्तर
(क)
तृतीया विभक्ति, एकवचन–

  1. ‘फल’ अथवा ‘मधु’ तथा
  2. तद् अथवा ‘युष्मद् ।

(ख) तृतीया विभक्ति के सभी वचनों में–

  1. फल,
  2. मति तथा
  3. नदी।।

(ग) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन–

  1. ‘मति’ अथवा ‘नदी’ तथा
  2. युष्मद् अथवा ‘तद्’।

(घ) तृतीया विभक्ति, बहुवचन-

  1. ‘फल’ अथवा ‘नदी’ तथा
  2. तद् अथवा युष्मद् ।

(ङ) तृतीया विभक्ति के एकवचन में—

  1. ‘फल’ अथवा ‘नदी’ तथा
  2. युष्मद् अथवा तद्’ (पुंल्लिग)।

UP Board Solutions

(च) चतुर्थी विभक्ति के एकवचन में–

  1. ‘फल’ अथवा ‘मधु’ ।

(छ) षष्ठी विभक्ति के एकवचन में–

  1. ‘मधु’ अथवा ‘फल’ तथा ‘तद् अथवा ‘युष्मद्’।

प्रश्न 3
निम्नलिखित शब्दों के रूप लिखिए [2012]
उत्तर
(क)
पञ्चमी विभक्ति के एकवचन में–

  1. ‘मधु’ अथवा ‘नदी’,
  2. तद् (स्त्रीलिङ्ग) अथवा युष्मद।।

(ख) पञ्चमी विभक्ति के एकवचन में–

  1. ‘नदी’ अथवा ‘फल’,
  2. ‘युष्मद्’ अथवा ‘तद्’ (पुंल्लिग)।

(ग) पञ्चमी विभक्ति के बहुवचन में–

  1. ‘मति’ अथवा ‘मधु’,
  2. ‘तद्’ अथवा ‘युष्मद्

(घ) पञ्चमी विभक्ति के बहुवचन में–

  1. नदी,
  2. मति,
  3. तद् (पुं०),
  4. मधु। ५.

(ङ) चतुर्थी विभक्ति के सभी वचनों में–

  1. फल,
  2. नदी,
  3. मति।।

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(च) पञ्चमी विभक्ति के एकवचन में—

  1. ‘मति’ अथवा ‘नदी’,
  2.  ‘युष्मद् (पुं०) अथवा ‘तद्’ (स्त्री०)।

(छ) षष्ठी विभक्ति के द्विवचन में–

  1. ‘नदी’ अथवा ‘मधु’,
  2.  ‘फल’ अथवा ‘मति’।

प्रश्न 4
निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो के रूप लिखिए [2013]
उत्तर
(क)
षष्ठी विभक्ति, एकवचन में-

  1. (i) मति,
    (ii) फल,
    (iii) मधु,
    (iv) नदी।

(ख) पञ्चमी विभक्ति, बहुवचन में–

  1. ‘मधु’ अथवा ‘मति’,
  2. ‘फल’ अथवा ‘नदी।

(ग) तृतीया विभक्ति, एकवचन में–

  1. ‘मधु’ अथवा ‘नदी’
  2. ‘मति’ अथवा ‘युष्मद्’।

(घ) सप्तमी विभक्ति, बहुवचन में-

  1. ‘फल’ अथवा मति’
  2. ‘तद् (पुं०) अथवा युष्मद् ।

UP Board Solutions

(ङ) द्वितीया विभक्ति, एकवचन में–

  1. ‘मति’ अथवा ‘नदी’,
  2. युष्मद् अथवा ‘तद् (स्त्री०)। ।।

(च) चतुर्थी विभक्ति, एकवचन में–

  1. ‘मधु’ अथवा ‘नदी’,
  2. ‘तद्’ (स्त्री०) अथवा ‘युष्मद्’।।

प्रश्न 5
निम्नलिखित शब्दों के रूप लिखिए [2014]
उत्तर
(क)
चतुर्थी विभक्ति, बहुवचन में–

  1. ‘युष्मद् अथवा ‘तद्’ (पुं०),
  2. ‘मति’ अथवा ‘नदी।

(ख) पञ्चमी विभक्ति, बहुवचन में–

  1. ‘मधु’ अथवा ‘मति’,
  2. ‘तद्’ अथवा ‘युष्मद्’।।

(ग) पञ्चमी विभक्ति, एकवचन में–

  1. ‘फल’ अथवा ‘नदी’,
  2. ‘युष्मद् अथवा ‘तद्’।

(घ) सप्तमी विभक्ति, बहुवचन में–

  1. नदी’ अथवा ‘युष्मद्’।

(ङ) सप्तमी विभक्ति, एकवचन में–

  1. ‘मति’ अथवा ‘नदी’,
  2. ‘युष्मद् अथवा ‘तद्’ (पुं०)।

(च) पञ्चमी विभक्ति, बहुवचन में–

  1. ‘नदी’ अथवा ‘मधु’,
  2. ‘तद्’ (स्त्री०) अथवा ‘युष्मद् ।

(छ) षष्ठी विभक्ति, द्विवचन में—

  1. ‘मति’ अथवा ‘मधु’,
  2. युष्मद्।

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प्रश्न 6
निम्नलिखित शब्दों के रूप लिखिए [2015]
उत्तर
(क)
तृतीय विभक्ति, बहुवचन में–

  1. मधु अथवा नदी,
  2. तद् (स्त्रीलिंग) अथवा युष्मद्।।

(ख) षष्ठी विभक्ति, एकवचन में–

  1. मति अथवा नदी,
  2. युष्मद् अथवा तद् (पुंल्लिग)।

(ग) तृतीय विभक्ति, एकवचन में–

  1. नदी अथवा मति,
  2. युष्मद् अथवा तद् (स्त्रीलिंग)।

(घ) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन में–

  1. मति अथवा मधु,
  2. युष्मद् अथवा तद् (स्त्रीलिंग)।

(ङ) षष्ठी विभक्ति, द्विवचन में-

  1. युष्मद् अथवा तद् (स्त्रीलिंग),
  2. फल अथवा (UPBoardSolutions.com) नदी।

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(च) तृतीया विभक्ति, एकवचन में–

  1. मति अथवा फल,
  2. युष्मद्।।

(छ) पंचमी विभक्ति, बहुवचन में–

  1. नदी अथवा मधु,
  2.  तद् (पुंल्लिग) अथवा युष्मद्।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 2 अन्योक्तिविलासः (संस्कृत-खण्ड)

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 2 अन्योक्तिविलासः (संस्कृत-खण्ड)

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अवतरणों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद

प्रश्न 1.
नितरां नीचोऽस्मीति त्वं खेदं कूप ! कदापि मा कृथाः ।। अत्यन्तसरसहृदयो यतः परेषां गुणग्रहीतासि ।। [2009, 16]
उत्तर
[नितरां = अत्यधिक। नीचोऽस्मीति (नीचः + अस्मि + इति) = मैं नीचा (गहरा) हूँ। खेदं = दु:ख। कदापि (कदा + अपि) = कभी भी। मा कृथाः = मत करो। यतः = क्योंकि। परेषां = दूसरों के। ” गुणग्रहीतासि (गुणग्रहीता + असि) = गुणों को ग्रहण करने वाले हो, रस्सियों को लेने वाले हो।]

सन्दर्भ-प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के संस्कृत-खण्ड’ के अन्योक्तिविलासः’ पाठ से उधृत है।

(विशेष—इस पाठ के अन्य सभी श्लोकों के लिए यही सन्दर्भ प्रयुक्त होगा।]

प्रसंग-इस श्लोक में कुएँ के माध्यम से सज्जनों (UPBoardSolutions.com) को यह सन्देश दिया गया है कि उन्हें अपने आपको तुच्छ नहीं समझना चाहिए।

अनुवाद–हे कुएँ! (मैं) अत्यन्त नीचा (गहरा) हैं। इस प्रकार कभी भी दु:ख मत करो; क्योंकि (तुम) अत्यन्त सरस हृदय वाले (जलयुक्त) और दूसरों के गुणों (रस्सियों) को ग्रहण करने वाले हो।

भाव–हे गम्भीर पुरुष! मैं अत्यन्त तुच्छ हूँ ऐसा समझकर तुम मन में खेद मत करो; क्योंकि तुम सरस हृदयं वाले और दूसरों के गुणों को ग्रहण करने वाले हो। भाव यह है कि व्यक्ति कितना ही छोटा क्यों न हो यदि वह सरस हृदय और दूसरों के गुणों को ग्रहण करने वाला है तो वह किसी से भी कम नहीं है।

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प्रश्न 2.
नीर-क्षीर-विवेके हंसालस्यं त्वमेव तनुषे चेत् ।
विश्वस्मिन्नधुनान्यः कुलव्रतं पालयिष्यति कः ॥ [2009, 11, 13, 15, 18]
उत्तर
[नीर-क्षीर-विवेके = दूध और पानी को अलग करने में। हंसालस्यं (हंस + आलस्यम्) = हंस आलस्य को (करोगे)। तनुषे = करते हो। चेत् = यदि। विश्वस्मिन्नधुनान्यः (विश्व + अस्मिन् + अधुना + अन्यः) = अब इस विश्व में दूसरा। कुलव्रतं = कुल के व्रत को। पालयिष्यति = पालन करेगा। कः = कौन।]

प्रसंग-प्रस्तुत श्लोक में हंस के माध्यम से लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति आलस्य न करने के लिए कहा गया है।

अनुवाद-हे हंस! यदि तुम्हीं दूध और पानी को अलग करने में (UPBoardSolutions.com) आलस्य करोगे तो इस संसार में दूसरा कौन अपने कुल की मर्यादा का पालन करेगा ? ।

भाव-हे गुणग्राही पुरुष! यदि तुम ही गुण और दोषों को समझने में आलस्य करोगे और उचितअनुचित का निर्णय नहीं करोगे तो इस संसार में दूसरा कौन अपने कुलव्रत का पालन करेगा ? भाव यह है कि कुलीन वृत्ति के लोगों को अपने कुलव्रत; अर्थात् उचित-अनुचित का विवेक; करने में कभी आलस्य नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 3.
कोकिल ! यापय दिवसान् तावद् विरसान् करीलविटपेषु ।
यावन्मिलदलिमालः कोऽपि रसालः समुल्लसति। [2010, 11, 13]
उत्तर
[ यापय = बिताओ। विरसान् = नीरस। करीलविटपेषु = करील के पेड़ों पर। यावन्मिलदलिमालः (यावत् + मिलद् + अलिमाल:) = जब तक भौंरों की पंक्ति से युक्त। रसालः = आम। समुल्लसति = सुशोभित होता है।

प्रसंग—प्रस्तुत श्लोक में कोयल के माध्यम से विद्वान् पुरुषों को सान्त्वना दी गयी है कि एक-न-एक दिन उनका अच्छा समय अवश्य आएगा। उन्हें धैर्यपूर्वक अपने बुरे दिनों को काट लेना चाहिए।

अनुवाद–हे कोयल! तब तक अपने नीरस दिनों को करील के पेड़ों (UPBoardSolutions.com) पर बिता लो, जब तक भौंरों की पंक्ति से युक्त कोई आम का वृक्ष विकसित नहीं होता है।

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भाव-हे विद्वान् पुरुष! तब तक अपने विपत्ति के दिनों को किसी भी प्रकार बिता लो, जब तक कि तुम्हें किसी गुणग्राही व्यक्ति का आश्रय नहीं मिलता है (अर्थात् तुम्हारे अच्छे दिन अवश्य आएँगे)।

प्रश्न 4.
रे रे चातक ! सावधानमनसा मित्र ! क्षणं श्रूयतम् ।
अम्भोदा बहवो हि सन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः ॥
केचिद् वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसुधां गर्जन्ति केचिद् वृथा।
यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वचः ॥ [2010, 13, 17]
उत्तर
[सावधानमनसा = सावधान चित्त से। श्रूयताम् = सुनिए। अम्भोदा = बादल। नैतादृशाः (न + एतादृशाः) = ऐसे नहीं हैं। वृष्टिभिरार्द्रयन्ति (वृष्टिभिः + आर्द्रयन्ति) = वर्षा करके गीला कर देते हैं। वृथा = व्यर्थ। यं यं = जिस-जिसको। मा ब्रूहि = मत कहो। दीनं वचः = दीनता भरे वचन।]

प्रसंग–प्रस्तुत श्लोक में चातक के माध्यम से विद्वानों को यह सन्देश दिया गया है कि व्यक्ति को किसी के भी सामने याचक बनकर हाथ नहीं फैलाना चाहिए।

अनुवाद–हे मित्र चातक! तुम क्षणभर सावधान चित्त से मेरी बात सुनो। आकाश में बहुत-से बादल रहते हैं, किन्तु सभी ऐसे (उदार) नहीं हैं। उनमें से कुछ ही पृथ्वी को वर्षा से भिगोते हैं और कुछ व्यर्थ में गरजते हैं। तुम जिस-जिस बादल को (UPBoardSolutions.com) (आकाश में) देखते हो, उस-उसके सामने अपने दीनतापूर्ण वचन मत कहो।

भाव-हे विद्वान् पुरुष! तुम क्षणभर मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनो। संसार में अनेक धनवान् एवं समर्थ हैं, परन्तु सभी उदार नहीं होते। उनमें कुछ तो अधिक उदार होते हैं और कुछ अत्यन्त कृपण। अत: तुम प्रत्येक से आशा करते हुए उसके सामने अपना हाथ मत फैलाओ।

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प्रश्न 5.
न वै ताडनात् तापनाद् वह्निमध्ये,
न वै विक्रयात् क्लिश्यमानोऽहमस्मि ।
सुवर्णस्य मे मुख्यदुःखं तदेकं ।
यतो मां जनाः गुञ्जया तोलयन्ति ॥ [2008, 12, 14, 17]
उत्तर
[ ताडनात् = पीटने से। वह्निमध्ये तापनाद् = आग में तपाने से। विक्रयात् = बेचने से। क्लिश्यमानोऽहमस्मि (क्लिश्यमानः + अहम् + अस्मि) = मैं दु:खी नहीं हूँ। तदेकं (तत् + एकम्) = वह एक है। गुञ्जया = रत्ती से, गुंजाफल से। तोलयन्ति = तौलते हैं। ]

प्रसंग-प्रस्तुत श्लोक में स्वर्ण के माध्यम से विद्वान् और स्वाभिमानी पुरुष की व्यथा को अभिव्यक्ति दी गयी है।

अनुवाद-मैं (स्वर्ण) ने पीटने से, न आग में तपाने से और न बेचने (UPBoardSolutions.com) के कारण दु:खी हैं। मुझे तो बस एक ही मुख्य दु:ख है कि लोग मुझे रत्ती (चुंघची) से तौलते हैं।

भाव-विद्वान् स्वाभिमानी पुरुष विपत्तियों से नहीं डरता है। उसका अपमान तो नीच के साथ उसकी तुलना करने में होता है। तात्पर्य यह है कि शारीरिक कष्ट उतना दु:ख नहीं देते, जितनी पीड़ा मानसिक कष्ट पहुँचाते हैं।

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प्रश्न 6.
रात्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं,
भास्वानुदेष्यति हसिष्यति पङ्कजालिः ।।
इत्थं विचिन्तयति कोशगते द्विरेफे, हा हन्त !
हन्त ! नलिनीं गज उज्जहार ॥ [2012, 14, 16]
उत्तर
[ रात्रिर्गमिष्यति (रात्रिः + गमिष्यति) = रात्रि व्यतीत हो जाएगी। भविष्यति = होगा। सुप्रभातं = सुन्दर प्रभात। भास्वानुदेष्यति (भास्वान् + उदेष्यति) = सूर्य उदित होगा। हसिष्यति = खिलेगा। पङ्कजालिः = कमलों का समूह। इत्थं = इस प्रकार से। विचिन्तयति = सोचते-सोचते। कोशगते = कमल-पुट में बैठे हुए। द्विरेफे = भौरे के। नलिनीं = कमलिनी को। उज्जहार = हरण कर लिया।]

प्रसंग-प्रस्तुत श्लोक में कमलिनी में बन्द भ्रमर के द्वारा जीवन की अनिश्चितता के विषय में बताया गया है।

अनुवाद—(कमलिनी में बन्द भौंरा सोचता है कि) ‘रात व्यतीत होगी। सुन्दर प्रभात होगा। सूर्य निकलेगा। कमलों का समूह खिलेगा।’ इस प्रकार कमल पुट में बैठे हुए भौरे के ऐसा सोचते-सोचते हाय! बड़ा दु:ख है कि हाथी उसी कमलिनी को (उखाड़कर) ले गया। |

भाव-मनुष्य तो सुख की आशा में अपने दु:ख के दिन काटता (UPBoardSolutions.com) है, परन्तु उसका वह दु:ख समाप्त भी नहीं हो पाता कि उसे मृत्यु ग्रस लेती है। तात्पर्य यह है कि मनुष्य चाहे कितनी भी मधुर कल्पनाएँ क्यों न कर ले, किन्तु उसके ऊपर कुछ भी निर्भर नहीं है। होता वही है जो ईश्वर चाहता है।

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अतिलघु-उतरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1
कूपः किमर्थं दुःखम् अनुभवति ? [2011, 13]
उत्तर
कूप: नितरां नीचः अस्ति; अतः सः दु:खम् अनुभवति।

प्रश्न 2
अत्यन्तसरसहृदयो यतः किं ग्रहीतासि ?
उत्तर
अत्यन्तसरसहृदयो यतः परेषां गुणग्रहीतासि।

प्रश्न 3
कविः हंसं किं बोधयति ?
उत्तर
कवि: हंसं नीर-क्षीर-विभागे आलस्यं न कर्तुं बोधयति।

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प्रश्न 4
कविः कोकिलं किं कथयति (बोधयति) ?
उत्तर
कवि: कोकिलं कथयति (बोधयति) यत् वसन्तकालं यावत् (UPBoardSolutions.com) कोऽपि रसालः न समुल्लसति तावत् करीलविटपेषु एव सन्तोषं कर्त्तव्यम्।

प्रश्न 5
कविः चातकं किम् उपदिशति (शिक्षयति) ? [2010, 12]
उत्तर
कविः चातकम् उपदिशति (शिक्षयति) यत् स: सर्वेषां पुरतः दीनं वचः न ब्रूयात्।

प्रश्न 6
सुवर्णस्य किं मुख्यदुःखम् अस्ति ? [2009, 11, 12, 13, 14, 16, 18]
उत्तर
जनाः सुवर्णं गुञ्जया सह तोलयन्ति इति सुवर्णस्य मुख्यदु:खम् अस्ति।

प्रश्न 7
भ्रमरे चिन्तयति गजः किम् अकरोत् ? [2010]
उत्तर
भ्रमरे चिन्तयति गज: नलिनीम् उज्जहार।

प्रश्न 8
कोशगतः भ्रमरः किम् अचिन्तयत् ?
उत्तर
कोशगत: भ्रमरः अचिन्तयत् ‘रात्रि: गमिष्यति, सुप्रभातं (UPBoardSolutions.com) भविष्यति, सूर्यम् उदेष्यति, कमलं विकसिष्यति।।

प्रश्न 9
हंसस्य किं कुलव्रतम् अस्ति ? [2013]
उत्तर
हंसस्य कुलव्रतम् नीर-क्षीर-विवेकम् अस्ति।

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प्रश्न 10
कीदृशाः अम्भोदाः गगने वसन्ति ?
उत्तर
गगने सर्वे नैतादृशाः अम्भोदा: वसन्ति। केचिद् वसुधां वृष्टिभि: आर्द्रयन्ति केचिद् वृथा गर्जन्ति।

प्रश्न 11
गजः काम् उज्जहार ? [2010]
उत्तर
गजः नलिनीम् उज्जहार।

प्रश्न 12
नीर-क्षीर-विषये हंसस्य का विशेषता अस्ति? [2014, 16]
उत्तर
नीर-क्षीर-विषये नीर-क्षीर-विवेकम् एव (UPBoardSolutions.com) हंसस्य विशेषता अस्ति।

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अनुवादक

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों को संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 2 अन्योक्तिविलासः (संस्कृत-खण्ड) img-3

प्यारात्मक

प्रश्न 1
पाठ में आयी समस्त अन्योक्तियाँ अन्योक्ति अलंकार का उदाहरण हैं। इस अलंकार का लक्षण बताते हुए किसी एक अन्योक्ति को उदाहरणस्वरूप लेकर उसका स्पष्टीकरण
दीजिए।
उत्तर
जब किसी उक्ति में साधर्म्य के कारण कथित वस्तु के माध्यम (UPBoardSolutions.com) से किसी अन्य को कोई उपदेश, शिक्षा अथवा सन्देश दिया जाता है तो उसे अन्योक्ति अलंकार कहते हैं; जैसे–पाँचवें श्लोक में सोने और गुंजा के माध्यम से गुणवान, स्वाभिमानी व्यक्ति की उस मानसिक पीड़ा को व्यक्त किया गया है, जो उसको नीच व्यक्ति के साथ अपनी तुलना किये जाने पर होती है।

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प्रश्न 2
पाठ की अन्योक्तियों में विभिन्न वस्तुएँ प्रतीक रूप में ली गयी हैं, ये वस्तुएँ जिनका प्रतीक हैं, उन्हें लिखिए
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 2 अन्योक्तिविलासः (संस्कृत-खण्ड) img-2
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 2 अन्योक्तिविलासः (संस्कृत-खण्ड) img-1

प्रश्न 3
निम्नलिखित पदों में सन्धि-विच्छेद कीजिए-
अस्मीति, अत्यन्त, नैतादृशाः, कदापि, अधुनान्यः, तदेकम्।।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 2 अन्योक्तिविलासः (संस्कृत-खण्ड) img-4

प्रश्न 4
बादल, कमल एवं हाथी के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर
बादल — जलदः, नीरदः।
कमल — पुण्डरीकः, जलजः।
हाथी — हस्ती, करी।

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UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence

UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence

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SOLVED EXERCISES BASED ON TEXT BOOK

EXERCISE :: 1
Pick out the Subject in the following sentences. Also point out the Head Word, Qualifier and Determiner :

Study the examples :
Question 1.
Man is mortal.
Answer:
Subject-Man (Head Word)

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Question 2.
A beautiful girl is there.
Answer:
Determiner—A
Questions.
Adjective-beautiful
Head Word-girl

  1.  A tall boy runs.
  2.  A kind man wept.
  3. The old man died.
  4.  My younger brother succeeded.
  5.  The little girl danced.
  6.  Some notorious boys were caught.
  7.  The black crow flew.
  8.  Some dishonest person stole the purse.
  9.  Some old ladies went to the temple.
  10. A strong wrestler was defeated.

Answers:

UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence image 1

EXERCISE :: 2
Complete the following sentences with the Subject parts given in brackets in the correct order :
Questions.
UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence image 2
Answers:

  1. The old man sat here.
  2. My old servant went home.
  3. Some naughty boys quarrelled.
  4. His elder brother is a famous doctor.
  5. An honest boy works hard.
  6. That tall boy came from Mumbai.
  7.  A shining gun was given to him on his birthday.
  8.  New electronic dolls dance.
  9.  The red flowers in my garden are pretty.
  10. The brave people fight for their country.

EXERCISE :: 3.
Complete the following sentences with the Subject parts given in brackets in the correct order :
UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence image 3
Answers:

  1.  Some naughty boys quarrelled.
  2. My younger son is a famous actor.
  3. To pay the taxes is our duty.
  4. My grandmother told an interesting story.
  5. My all friends have arrived.
  6. A kind man wept.
  7. That tall man is dishonest.
  8.  Shashi’s elder brother is in the room.
  9.  A black bird sitting in the tree flew away.
  10.  My younger brother in Agra is a doctor.

Predicate के अन्तर्गत एक शब्द भी हो सकता है तथा एक से अधिक शब्द भी हो सकते हैं। एक शब्द से अधिक होने पर Prelicate का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है–
UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence image 4
Predicate (विधेय) के कई भाग होते हैं|
(i) Verb (क्रिया)–Verb Predicate का प्रथम तथा प्रमुख भाग है जो’कर्ता द्वारा किये गये कार्य को व्यक्त करता है।
(ii) Indirect Object (अप्रत्यक्ष कर्म)–क्रिया से whom (किसको) का प्रश्न करने पर जो शब्द उत्तर में आये, वह Indirect Object होता है।
(iii) Direct Object (प्रत्यक्ष कर्म)–क्रिया से what (क्या) का प्रश्न करने पर जो उत्तर में आये वह Direct Object होता हैं।
(iv) Complement (परिपूरक)–जो शब्द verb के अर्थ को पूरा करता है उसे Complement कहते हैं।
(नोट-प्रायः linking Verb (is, am, are, was, were etc.) के बाद ही complement आता है।
Examples :
1. Ram tells us : nice story. (राम हमें एक अच्छी कहानी सुनाता है।)
Subject—Ram
Verb—tells
Indirect Object—us
Direct Object—a nice story
2. Ashok Was a king. (अशोक एक राजा था।)
Subject-Ashok
Verb (linking)—was
Complement — a king विशेष—Complement भी तीन प्रकार के होते हैं, जैसे
(1) He is a teacher. (Noun Completent)
(2) He is tall. (Adjective Complement)
(3) He is there. (Adverb Complement)
Predicate के parts को निम्नलिखित रूप में स्पष्ट किया जा सकता है–
Verb + Indirect Object + Direct Object अथवा
Verb + Complement.
इसे निम्नलिखित चार्ट की सहायता से आसानी से समझा जा सकता है
UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence image 5

विशेष-Object के रूप में Gerund, Infinitive तथा Participle का भी प्रयोग किया जाता है, जैसे—
(i) He decided to go out. (उसने बाहर जाने का निश्चय किया।)
(ii) He enjoys swimming. (वह तैरने का आनन्द लेता है।)
(iii) I saw her carrying a basket. (मैंने उसे एक टोकरी ले जाते हुए देखा।)

EXERCISE :: 4.
Make five meaningful sentences from the table given below :
Examples:

The old man in the field is my uncle.
UP Board Solutions for Class 9 English Grammar Chapter 1 Parts of Sentence image 6

Answers:
(i) The old man in the corner is an honest teacher.
(ii) This beautiful woman in the room was a doctor.
(iii) The old man in the room is a gentle teacher.
(iv) The beautiful woman in the corner is an intelligent teacher.
(v) The old man in the corner was an actor.

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EXERCISE :5
Pick out the Predicate in the following sentences and break the Predicate into its different parts :
Questions.

  1. He reads a magazine.
  2. Mala brings a glove.
  3.  Rakesh opens the door.
  4.  My father writes me a letter.
  5. Your brother drives a car.
  6.  I like playing football.
  7. You love flying kites.
  8.  She loved reading the newspaper.
  9.  He likes to play chess.
  10. He decided to scold his servant.
  11.  Shahjahan was a king.
  12.  The boys made me the captain

Answers:

  1.  Predicate:   
    eads a magazine
    Verb- read
    Object-a magazine
  2. Predicate
    brings a glove
    Verb-brings
    Object–a glove
  3. Predicate
    opens the door
    Verb—-opens
    Object—the door
  4. Predicate
    Writes me a letter
    Verb–writes
    Indirect Object–me
    Direct Object-a letter
  5. Predicate
    rives a car
    Verb—-drives
    Object–a car
  6. Predicate
    like playing football
    Verb-like
    Object (Gerund)–playing football
  7. Predicate
    love lying kites
    Verb love
    Object (Gerund)—flying kites
  8. Predicate
    loved reading the newspaper
    Verb-loved
    Object (Gerund)-reading the newspaper
  9. Predicate
    likes to play chess
    Verb—likes
    Object (Infinitive)–to play chess
  10. Predicate
    decided to scold his servant
    Verb-decided
    Object (Infinitive)—to scold his servant
  11. Predicate
    was a king
    Verb—-was
    complement (Noun)-a king
  12. Predicate
    made me the captain
    Verb—-made
    Indirect Object–me
    Direct Object—the captain

EXERCISE :: 6
The Predicate parts of each of the following sentences is given in brackets. Complete the sentences by putting it in right order :
Questions.

  1. Our friend………………………….. (decided, by; bus, to go, in the, evening)
  2. The servant…………………………. ( food, for; cooks, us)
  3. The teacher………………………….. (his, work. got, at, angry)
  4.   Rana Pratap …………………………. (very, loved, freedom, much)
  5.  The teacher …………………………. (did, servant, the, call, not)
  6.  His sister …………………………. (a, reads, book)
  7.  Kanpur …………………………. (is, big, u, city)
  8.  Gandhiji……………………….. (was, leader; a great)
  9.   My friend ……………………. (doesa hard, not work)
  10. I …………………………. (found, asleep. my.’ children)
  11. His mother ………………… (not, does, him, beat)
  12. The man ………………….. (help, all, friends, promised, 10, my)
  13.  We ……..(not, have, this, done, work)
  14. I ………(bell, the, rang)

Answers:

  1. Our friend decided to go by bus in the evening.
  2. The servant cooks food for us.
  3. The teacher got angry at his work.
  4. Rana Pratap loved freedom very much.
  5. The teacher did not call the servant.
  6. His sister reads a book.
  7. Kanpur is a big city.
  8.  Gandhiji was a great leader.
  9.  My friend does not work hard.
  10.  I found my children asleep.
  11. His mother does not beat him.
  12.  The man promised to help all my friends.
  13.  We have not done this work.
  14.  I rang the bell.

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EXERCISE :: 7
The Predicate parts of each of the following sentences is given in brackets. Complete the sentences by putting it in right order :
Questions.

  1. He ……………..(foot, on, village, goes, his, to)
  2. Children….. (toys, like, drops, and, lemon)
  3. He …………….(not, does, go, everyday, school, to)
  4. I ……………..(just, have, you, the answer, given)
  5. He …………….. .. (work, his, completed, has)
  1. They………….. (know, five, years, for, each other)
  2.  I ………..(the, have, seen, Red Fort)
  3.  He …………………………. (up, went, hill, the)
  4. This tree …………….. (very, is, high)
  5. I ……………….. (see, shall, you, tomorrow)
  6. He …………….(me, see, would, next day, the)
  7.  I ……………..(three, brought, have, for, you, letters)
  8. She ….(the, yesterday, zoo, visited)
  9.  You …..(doing, work, your, not, are)
  10. My mother ……………………. (gave, ten, me, rupees, yesterday)

Answers:

  1. goes to his village on foot
  2.  like lemon drops and toys
  3.  does not go to school everyday
  4. have just given you the answer
  5. has completed his work
  6. know each other for five years
  7.  have seen the Red Fort
  8. went up the hill
  9.  is very high
  10. shall see you tomorrow
  11.  would see me the next day
  12.  have brought three letters for you
  13. visited the zoo yesterday
  14.  are not doing your work
  15. gave me ten rupees yesterday.

EXERCISE :: 8
The Predicate parts of each of the following sentences is given in brackets. Complete the sentences  by putting it in right order :
Questions.

  1. Some people……………………bridge, the, building, were)
  2. Someone…… (discovered, cure, a, has, malaria, for)
  3. You………. (answer, can, question, this)
  4. The students …………(their, respect, should, teachers)
  5. She………………..(work, do, the, must)
  6. You………………..(give, him, can, school, in a, job, your)
  7. They ……………….. (king, him, made)
  8. They ………………. (him, hospital, to, took)
  9. We ……..(call, doctor, a, should)
  10. Someone ………..(pen, the, left, yesterday, classroom, the, in)
  11. They ………..(all, made, had, arrangements, the)
  12. He …………………….. (letter, a, will, written, have)
  13. . Raju …………………….. (essay, an, has, written)
  14.  Geeta ………………..(singing, a song, sweet, was)
  15. Shakespeare …………………… (plays, number, a, of, wrote)

Answers:

  1. Some people were building the bridge.
  2. Someone has discovered a cure for malaria.
  3. You can answer this question.
  4. The students should respect their teacher.
  5. She must do the work.
  6. You can give him a job in your school.
  7. They made him king.
  8. They took him to hospital.
  9. We should call a doctor.
  10. Someone left the pen in the classroom, yesterday.
  11. They had made all the arrangements.
  12. He will have written a letter.
  13. Raju has written an essay.
  14.  Geeta was singing a sweet song.
  15.  Shakespeare wrote a number of play.

Re-Ordering the words to
Frame Meaningful Sentences

(शब्दों को सही क्रम में रखकर अर्थपूर्ण वाक्यों की रचना करना) इसके पूर्व आप पढ़ चुके हैं कि वाक्य के दो प्रमुख भाग होते हैं-जैसे
(i) Subject
(ii) Predicate
साथ ही आप Subject तथा Predicate के विभिन्न भागों का भी अध्ययन कर चुके हैं। उसी के आधार पर शब्दों को सही क्रम में रखकर सार्थक वाक्य की रचना करना है, जैसे—-
It a was sight fine see to.
उपर्युक्त शब्दों का समूह वाक्य नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इस शब्द समूह का अर्थ स्पष्ट नहीं है। इसे निम्नलिखित क्रम में रखने पर वाक्य की रचना होगी, जैसे
It was a fine sight to see. इसी प्रकार कुछ अन्य उदाहरणों को भी देखें
Part ‘A’                                                                        Part ‘B’
1. has the broken glass who?                      Who has broken the glass?
2. tell lies is sin a to.                                        To tell lies is a sin.
3. give me eat to please something.         Please, give me something to eat.
4. gives she milk me.                                      She gives me milk.
Part ‘A’ के शब्दों का समूह वाक्य नहीं है क्योंकि उनका सार्थक आशय नहीं निकलता है, किन्तु उन्हीं शब्द समूहों को जब Part ‘B’ में सही क्रम में रखा गया है, तो वे वाक्य बन गये हैं।
(नोट-शब्दों को सही क्रम में रखते समय Subject तथा Predicate और उनके क्रम को ध्यान में रखना चाहिए।)

EXERCISE :: 9
Frame correct sentences by reordering the words in the following :
Questions.

  1. It a was sight fine see to.
  2. Life not of bed roses is a.
  3. An idle mind workshop is devil’s a.
  4. We others at not laugh should.
  5. It his courage beyond is power my to describe.
  6. They exercises do morning every breakfast before.
  7. I saw over flying an the hill aeroplane.
  8. I a bicycle have bought new.
  9. The in playing are the garden children.
  10. so worried are they why?

Answers:

  1. It was a fine sight to see.
  2. Life is not a bed of roses.
  3. An idle mind is a devil’s workshop.
  4. We should not laugh at others.
  5. It is beyond my power to describe his courage.
  6. They do exercise every morning before breakfast.
  7. I saw an aeroplane flying over the hill.
  8. I have bought a new bicycle.
  9. The children are playing in the garden.
  10. Why are they so worried?

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EXERCISE :: 10
Frame correct sentences by reordering the words in the following :
Questions

  1.  He at dawn up gets everyday.
  2. A scooter I see on the road.
  3.  Raju comes never to late school.
  4. How open you did it?
  5. He help to promised me.
  6. Sarees in Kolkata are printed.
  7. School closed Rekha’s yesterday, was.
  8. They for a have also passion independence.
  9. There class in are thirty my boys.
  10. It dark is not growing.

Answers:

  1. He gets up everyday at dawn.
  2. I see a scooter on the road.
  3. Raju never comes late to school.
  4.  How did you open it?
  5. He promised to help me.
  6. Sarees are printed in Kolkata.
  7. Rekha’s school was closed yesterday.
  8. They also have a passion for independence.
  9. There are thirty boys in my class.
  10. It is not growing dark.

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