UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion

UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion (गति)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 9 Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion (गति).

पाठ्य – पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 110)

प्रश्न 1.
एक वस्तु के द्वारा कुछ दूरी तय की गई। क्या इसका विस्थापन शून्य हो सकता है? अगर हाँ, तो अपने उत्तर को उदाहरण के द्वारा समझाएँ।
उत्तर-
एक धावक जब वृत्ताकार पथ पर दौड़ता है। और एक चक्कर पूरा करके प्रारम्भिक बिन्दु पर पहुँच जाता है तब उसका विस्थापन शून्य होगा, परन्तु तय की गई दूरी (UPBoardSolutions.com) परिधि (वृत्ताकार पथ) के बराबर होगी।

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The Average Velocity calculator computes the velocity (V) based on the change in position (Δx) and the change in time (Δt).

प्रश्न 2.
एक किसान 10m की भुजा वाले एक वर्गाकार खेत की सीमा पर 40s में चक्कर लगाती है। 2 मिनट 20 सेकण्ड के बाद किसान के विस्थापन का परिमाण क्या होगा?
हल-
वर्गाकारे खेत की भुजा = 10 m
एक चक्कर में तय की गई दूरी = 10 x 4 = 40 m
एक चक्कर लगाने में लगा समय = 40 सेकण्ड
चाल = [latex]\frac { 40 }{ 40 }[/latex] = 1 m/s
2 मिनट और 20 सेकण्ड अर्थात् 140 सेकण्ड में किसान द्वारा तय की गई दूरी = 140 x 1 = 140 मीटर
अर्थात् 140 सेकण्ड में किसान 3[latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] चक्कर पूरे करेगा और उस समय उसकी स्थिति B बिन्दु पर होगी।
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प्रश्न 3.
विस्थापन के लिए निम्न में कौन सही है?
(a) यह शून्य नहीं हो सकता है।
(b) इसका परिमाण वस्तु के द्वारा तय की गई दूरी से अधिक होता है।
उत्तर-
विस्थापन के लिये निम्न में से कोई सही नहीं है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 112)

प्रश्न 1.
चाल एवं वेग में अन्तर बताइए।
उत्तर-
चाल एवं वेग में निम्नलिखित अन्तर हैं-
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प्रश्न 2.
किस अवस्था में किसी वस्तु के औसत वेग का परिमाण उसकी औसत चाल के बराबर होगा?
उत्तर-
यदि कोई वस्तु समान त्वरण से चलती है और उसका विस्थापन तथा कुल तय की गई दूरी समान है, तब उसके औसत वेग को परिमाण उसकी औसत चाल के समान होगा।

प्रश्न 3.
एक गाड़ी का ओडोमीटर क्या मापता है?
उत्तर-
एक गाड़ी का ओडोमीटर गाड़ी द्वारा तय की गई दूरी को मापता है।

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प्रश्न 4.
जब वस्तु एकसमान गति में होती है तब उसका मार्ग कैसा दिखाई पड़ता है?
उत्तर-
वस्तु एक सरल रेखीय गति से चलती है तथा उसका मार्ग सरल रैखिक होता है।

प्रश्न 5.
एक प्रयोग के दौरान अंतरिक्ष यान से एक सिग्नल को पृथ्वी पर पहुँचने में 5 मिनट का समय लगता है। पृथ्वी पर स्थित स्टेशन से उस अंतरिक्षयान की दूरी क्या है? (सिग्नल की चाल = प्रकाश की चाल = 3 x 108 ms-1)
हल-
सिग्नल द्वारा पृथ्वी तक पहुँचने में लगा समय t = 5 मिनट = 300 सेकण्ड
इसलिए, स्टेशन से अन्तरिक्ष यान की दूरी = सिग्नल की चाल x लगा समय
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पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 114)

प्रश्न 1.
आप किसी वस्तु के बारे में कब कहेंगे कि,
(i) वह एकसमान त्वरण से गति में है?
(ii) वह असमान त्वरण से गति में है?
उत्तर-
(i) एक वस्तु समान त्वरण में कही जाती है। यदि उसके एक सरल रेखा में वेग परिवर्तन (बढ़ना यो घटना) की दर समान समयान्तरालों में समान है चाहे समयान्तराल (UPBoardSolutions.com) कितना भी कम क्यों न हो।
उदाहरण- एक स्वतन्त्र रूप से गिरती हुई वस्तु का त्वरण एक समान त्वरित गति का उदाहरण है।
(ii) एक वस्तु असमान त्वरण में कही जाती है यदि उसका वेग असमान रूप से बढ़े या घटे अर्थात् समान समयान्तरालों में असमान वेग में परिवर्तन हो।

प्रश्न 2.
एक बस की गति 5s में 80 kmh-1 से घटकर 60 kmh-1 हो जाती है। बस का त्वरण ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 3.
एक रेलगाड़ी स्टेशन से चलना प्रारम्भ करती है और एकसमान त्वरण के साथ चलते हुए 10 मिनट में 40 km/h की चाल प्राप्त करती है। इसका त्वरण ज्ञात कीजिए।
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पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 118)

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के एकसमान व असमान गति के लिए समय-दूरी ग्राफ की प्रकृति क्या होगी?
उत्तर-
समान गति के लिए ग्राफ का स्वरूप एक सरल रेखा में होता है, जबकि असमान गति के लिए यह वक्र रेखा में होता है।

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प्रश्न 2.
किसी वस्तु की गति के विषय में आप क्या कह सकते हैं, जिसका दूरी-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सरल रेखा है?
उत्तर-
यदि समय-दूरी ग्राफ समय अक्ष के समानान्तर है तो इसका यह अर्थ है कि वस्तु की स्थिति में समय के साथ। कोई परिवर्तन नहीं है अर्थात् वस्तु विराम अवस्था में होगी।

प्रश्न 3.
किसी वस्तु की गति के विषय में आप क्या कह सकते हैं, जिसका चाल-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सरल रेखा है?
उत्तर-
यदि चाल-समय ग्राफ समय अक्ष के समानान्तर एक (UPBoardSolutions.com) सरल रेखा है तो वह वस्तु एकसमान चाल से चल रही है क्योंकि समय बढ़ने पर चाल में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

प्रश्न 4.
वेग-समय ग्राफ के नीचे के क्षेत्र से मापी गई राशि क्या होती है?
उत्तर-
समय-वेग ग्राफ के अन्तर्गत क्षेत्रफल से हम वस्तु के द्वारा निश्चित समय में तय की दूरी नाप सकते हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 121)

प्रश्न 1.
कोई बस विरामावस्था से चलना प्रारम्भ करती है तथा 2 मिनट तक 0.1 ms-2 के एकसमान त्वरण से चलती है। परिकलन कीजिए
(a) प्राप्त की गई चाल तथा
(b) तय की गई दूरी।
हल-
बस का प्रारंभिक वेग = u = 0
त्वरण (a) = 0.1 m/s2
समय है = 2 मिनट = 120 सेकण्ड
हम जानते हैं-
v = u + at = 0 + 0.1 x 120 = 12 m/s
(a) 2 मिनट के पश्चात् बस का वेग = 12 m/s
(b) तय की गई दूरी (s) = ?
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प्रश्न 2.
कोई रेलगाड़ी 90 kmh-1 के चाल से चल रही है। ब्रेक लगाए जाने पर वह -0.5 ms-2 का एकसमान त्वरण उत्पन्न करती है। रेलगाड़ी विराम अवस्था में आने के पहले कितनी दूरी तय करेगी?
हल-
रेलगाड़ी का प्रारम्भिक वेग (u) = 90 km/h
= [latex]\frac { 90 x 1000 }{ 60 x 60 }[/latex] = 25 m/s
अन्तिम वेग (v) = 0
त्वरण (a) = -0.5 m/s2
मान लो रुकने से पहले रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = s = ?
हम जानते हैं
2 as = v2 – u2
2 (- 0.5) x s = (0)2 – (25)2
– 2 x 0.5s = – 625
s = 625 m

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प्रश्न 3.
एक ट्रॉली एक आनत तल पर 2ms-2 के त्वरण से नीचे जा रही है। गति प्रारंभ करने के 3s के पश्चात् उसका वेग क्या होगा?
हल-
ट्रॉली का त्वरण (a) = 2 cm/s2
ट्रॉली का आरम्भिक वेग (u) = 0
समय (t) = 3 सेकण्ड
माना 3 सेकण्ड के पश्चात् वेग (v) = ?
v = u + at
v = 0 + 2 x 3 = 6 cm/s

प्रश्न 4.
एक रेसिंग कार को एकसमान त्वरण 4 ms-1 है। गति प्रारम्भ करने के 10s के पश्चात् वह कितनी दूरी तय करेगी?
हल-
कार का प्रारम्भिक वेग (u) = 0
त्वरण (a) = 4 m/s2
समय (t) = 10 सेकण्ड
माना 10 सेकण्ड के पश्चात् तय की गई दूरी = s
s = ut + [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] at2
= 0 x t + [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x 4 x (10)2
= 2 x 100 = 200 m.

प्रश्न 5.
किसी पत्थर को ऊध्र्वाधर ऊपर की ओर 5s-1 के वेग से फेंका जाता है। यदि गति के दौरान पत्थर का नीचे की ओर दिष्ट त्वरण 10ms-2 है, तो पत्थर के द्वारा कितनी ऊँचाई प्राप्त की गई तथा उसे वहाँ पहुँचने में कितना समय लगा?
हल-
पत्थर का आरम्भिक वेग (u) = 5 m/s
त्वरण (a) = – 10 m/s2
(i) माना पत्थर की अधिकतम ऊँचाई = h या s
2ah = v2 – u2
2(-10) h = 0 – (5)2
– 20h = -25
h = [latex]\frac { 5 }{ 4 }[/latex]
या
h = 1.25 m
(ii) माना अधिकतम ऊँचाई पहुँचने में लगा समय = t है।
v = u + at
0 = 5 – 10t
t = [latex]\frac { 5 }{ 10 }[/latex] = 0.5 सेकण्ड

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 124 – 125)

प्रश्न 1.
एक एथलीट वृत्तीय रास्ते, जिसका व्यास 200 m है, का एक चक्कर 40 s में लगाता है। 2min 20s के बाद वह कितनी दूरी तय करेगा और उसका विस्थापन क्या होगा?
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प्रश्न 2.
300 m सीधे रास्ते पर जोसेफ जॉगिंग करता हुआ 2min 50s में एक सिरे A से दूसरे सिरे B पर पहुँचता है और घूमकर 1min में 100m पीछे बिंद C पर पहुँचता है। जोसेफ की और चाल तथा औसत वेग क्या होंगे?
(a) सिरे A से सिरे B तक तथा
(b) सिरे A से सिरे C तक।
उत्तर-
(i) सिरे ‘A’ से सिरे ‘B’ तक कुल तय दूरी AB = 300 m
तथा लिया गया समय = 2 मिनट 50 सेकण्ड = 170 सेकण्ड
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प्रश्न 3.
अब्दुल गाड़ी से स्कूल जाने के क्रम में औसत चाल को 20 kmh-1 पाता है। उसी रास्ते से लौटने के समय वहाँ भीड़ कम है और औसत चाल 40 kmh-1 है। अब्दुल की इस पूरी यात्रा में उसकी औसत चाल क्या है?
हल-
विद्यालय जाते समय औसत चाल = 20 km/h
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प्रश्न 4.
कोई मोटरबोट एक झील में विरामावस्था से सरल रेखीय पथ पर 3.0 ms-2 की नियत त्वरण से 8.0s सेकण्ड तक चलती है। इस समय अंतराल में मोटरबोट कितनी दूरी तय करती है?
हल-
मोटरबोट का प्रारम्भिक वेग, u = 0
मोटरबोट का त्वरण (a) = 3.0 m/s2
लिया गया समय = 8.0s
माना मोटरबोट द्वारा तय की गई दूरी, s = ?
हम जानते हैं-
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प्रश्न 5.
किसी गाड़ी का चालक 52 kmh-1 की गति से चल रही कार में ब्रेक लगाता है तथा कार विपरीत दिशा में एकसमान दर से त्वरित होती है। कार 5s में रुक जाती है। दूसरा चालक 30 kmh-1 की गति से चलती हुई दूसरी कार पर धीमे-धीमे ब्रेक लगाता है तथा 10s में रुक जाता है। एक ही ग्राफ पेपर पर दोनों कारों के लिए चाल-समय ग्राफ आलेखित करें। ब्रेक लगाने के पश्चात् दोनों में से कौन-सी कार अधिक दूरी तक जाएगी?
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प्रश्न 6.
चित्र में तीन वस्तु A, B और C के दुरी-समय ग्राफ प्रदर्शित हैं। ग्राफ को अध्ययन करके निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) तीनों में से कौन सबसे तीव्र गति से गतिमान
(b) क्या ये तीनों किसी भी समय सड़क के एक ही बिंदु पर होंगे?
(c) जिस समय B, A से गुजरती है उस समय तक c कितनी दूरी तय कर लेती है?
(d) जिस समय B, C से गुजरती है उस समय तक यह कितनी दूरी तय कर लेती है?
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उत्तर-
(a) B सबसे तेज चल रहा है क्योंकि B की ढाल A तथा C की अपेक्षा अधिक है।
(b) तीनों सड़क पर किसी एक स्थान पर कभी नहीं मिलेंगे क्योंकि तीनों ग्राफ आपस में किसी एक बिन्दु पर नहीं काटते या मिलते।
(c) जब B तथा A एक-दूसरे को मिलते हैं तो C मूल बिन्दु से 7 km की दूरी पर था।
(d) जब B तथा C एक बिन्दु पर मिलते हैं उस समय B मूल बिन्दु से 5 km की दूरी तय कर चुका था।

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प्रश्न 7.
20 m ऊँचाई से एक गेंद को गिराया जाता है। यदि उसका वेग 10 ms-2 के एकसमान त्वरण की दर से बढ़ता है तो यह किसे वेग से धरातल से टकराएगी? कितने समय पश्चात् वह धरातल से टकराएगी?
उत्तर-
(i) गेंद का प्रारम्भिक वेग (u) = 0
त्वरण (a) = 10 m/s2
ऊँचाई (S) = 20 m.
मान लिया गेंद पृथ्वी से वेग से टकराती है।
हम जानते हैं v2 – u2 = 2as
v2 – 0 = 2 x 10 x 20
v2 = 400
v = 20 ms-1
(ii) गेंद द्वारा पृथ्वी तल से टकराने में लिया गया समय = t = ?
v = u + at
20 = 0 + 10 x t
t = 2 s

प्रश्न 8.
किसी कार को चाल-समय ग्राफ निम्न चित्र में प्रदर्शित किया गया है-
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(a) पहले 4 सेकण्ड में कार कितनी दूरी तय करती है? इस अवधि में कार द्वारा तय की गई दूरी को ग्राफ में छायांकित क्षेत्र द्वारा दर्शाइए।
(b) ग्राफ का कौन-सा भाग कार की एकसमान गति को दर्शाता है?
हल-
(a) प्रथम 4 सेकण्ड में कार द्वारा तय दूरी को संलग्न चित्र में छायांकित क्षेत्र द्वारा प्रदर्शित किया गया है।
(b) प्रथम 6 सेकण्ड के बाद का ग्राफ एक (UPBoardSolutions.com) क्षैतिज रेखा है, अर्थात् ग्राफ का ढाल (त्वरण) शून्य है, अत: ग्राफ का यह भाग कार की एकसमान गति को प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन-सी अवस्थाएँ संभव हैं तथा प्रत्येक के लिए एक उदाहरण दीजिए-
(a) कोई वस्तु जिसका त्वरण नियत हो परंतु वेग शून्य हो।
(b) कोई वस्तु किसी निश्चित दिशा में गति कर रही हो तथा त्वरण उसके लंबवत् हो।।
उत्तर-
(a) संभव है। मकान की छत से छोड़ते समय गेंद का वेग शून्य होता है, जबकि त्वरण नियत रहता है।
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(b) असंभव है; क्योंकि यदि त्वरण गति की दिशा के लंबवत् दिशा में है तो दिशा निश्चित नहीं रह सकती, वह समय के साथ बदल जाएगी।
उदाहरण- जब किसी मकान की छत से किसी गेंद को क्षैतिज दिशा में फेंका जाता है तो गेंद पर गुरुत्वीय त्वरण गति की दिशा के लंब दिशा में कार्य करता है जिस कारण उसकी गति की दिशा बदलती जाती है।

प्रश्न 10.
एक कृत्रिम उपग्रह 42,250 किमी त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में घूम रहा है। यदि वह 24 घंटे में पृथ्वी की परिक्रमा करता है तो उसकी चाल का परिकलन कीजिए।
हल-
कृत्रिम उपग्रह के वृत्तीय पथ की त्रिज्या (r) = 42,250 km
पृथ्वी के चारों ओर एक चक्कर पूरा करने में लिया गया समय (t) = 24 घंटे
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सजीवों में किस प्रकार गति होती है?
उत्तर-
सजीव वस्तुएँ स्वयं गतिमान होती हैं।

प्रश्न 2.
सरल रेखीय गति से क्या समझते हो?
उत्तर-
सरल रेखीय गति (Linear Motion)यदि किसी पिण्ड (वस्तु) की गति का पथ एक सरल रेखा (सीधा) हो तो उस पिण्ड (वस्तु) की गति सरल रेखीय गति कहलाती है।

प्रश्न 3.
अदिश भौतिक राशियाँ किन्हें कहते हैं?
अथवा
अदिश राशियों को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
अदिश भौतिक राशियाँ (Scalar Physical Quantities) या अदिश राशियाँ (Scalar Quantities)- वे भौतिक राशियाँ जिनको व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण (UPBoardSolutions.com) की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं, अदिश भौतिक राशियाँ अथवा अदिश राशियाँ कहलाती हैं।

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प्रश्न 4.
अदिश भौतिक राशियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
अदिश भौतिक राशियों के उदाहरण-दूरी, चाल, द्रव्यमान, लम्बाई, समय, घनत्व, दाब आदि।

प्रश्न 5.
सदिश भौतिक राशियाँ किन्हें कहते हैं?
अथवा
सदिश राशियों को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
सदिश भौतिक राशियाँ (Vector Physical Quantities) अथवा सदिश राशियाँ (Vector Quantities)- वे भौतिक राशियाँ जिनको व्यक्त करने के (UPBoardSolutions.com) लिए परिमाण एवं दिशा दोनों की आवश्यकता होती है, सदिश भौतिक राशियाँ अथवा सदिश राशियाँ कहलाती हैं।

प्रश्न 6.
सदिश राशियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
सदिश भौतिक राशियों के उदाहरणविस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग आदि।

प्रश्न 7.
अदिश एवं सदिश राशियों में प्रमुख अन्तर बताइए।
उत्तर-
अदिश एवं सदिश राशियों में प्रमुख अन्तर-अदिश राशियों को व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है जबकि सदिश राशियों को व्यक्त करने के लिए परिमाण एवं दिशा दोनों की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 8.
विस्थापन किसे कहते हैं? इसका मात्रक बताइये।
उत्तर-
विस्थापन (Displacement)- किसी वस्तु की स्थिति में एक निश्चित दिशा में हुए परिवर्तन को विस्थापन कहते हैं। विस्थापन का मात्रक-इसका मात्र ‘मीटर है।

प्रश्न 9.
दूरी किसे कहते हैं? इसका मात्रक बताइये।
उत्तर-
दूरी (Distance)- उस मार्ग की कुल लम्बाई को जिस पर कोई वस्तु गतिशील होती है, दूरी कहते हैं।
दूरी का मात्रक-इसका मात्रक ‘मीटर’ है।

प्रश्न 10.
दूरी (स्थानान्तरण) एवं विस्थापन में प्रमुख अन्तर बताइए।
उत्तर-
दूरी (स्थानान्तरण) एक अदिश राशि है। जबकि विस्थापन एक सदिश राशि है।

प्रश्न 11.
वेग-समय ग्राफ का ढाल (Slope) क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर-
वेग-समय ग्राफ का ढाल त्वरण प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 12.
एक पिंड एक वृत्ताकार पथ पर निश्चित गति से घूम रहा है, क्या गति समान है या त्वरित?
उत्तर-
पिंड वृत्ताकार पथ पर निश्चित गति से घूम रहा है, अतः इसकी गति नहीं बदलती है, लेकिन दिशा लगातार बदलती है,
अतः गति एकसमान नहीं है, त्वरित है।

प्रश्न 13.
मुक्त रूप से गिरता हुआ पिंड किस प्रकार की गति प्रदर्शित करता है?
उत्तर-
यह एकसमान त्वरित गति प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 14.
एक पत्थर ऊर्ध्वाधर दिशा में फेंका जाता है, इसका वेग लगातार कम होता जाता है। क्यों?
उत्तर-
जब कोई पत्थर ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका जाता है तो उसका वेग लगातार कम होता जाता है क्योंकि गुरुत्वीय त्वरण सदैव पृथ्वी के केन्द्र की तरफ आरोपित होता है।
अतः त्वरण विपरीत दिशा में लगता है और पत्थर की गति लगातार कम होती जाती है।

प्रश्न 15.
वृत्तीय गति की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
एक स्थिर बिन्दु के चारों तरफ वृत्ताकार पथ पर गति करती हुई चलती हुई वस्तु की गति वृत्तीय गति कहलाती है।

प्रश्न 16.
एक व्यक्ति वृत्ताकार पथ पर घूमकर पुनः अपनी मूल स्थिति में आ जाता है। दूरी व विस्थापन क्या है?
उत्तर-
दूरी होगी 2πr यदि r वृत्ताकार पथ की त्रिज्या है और विस्थापन है शून्य।

प्रश्न 17.
एक भौतिक राशि को -10ms-1 मापा गया, क्या यह चाल है अथवा वेग?
उत्तर-
यह वेग है क्योंकि वेग ऋणात्मक हो सकता है लेकिन चाल हमेशा धनात्मक होती है।

प्रश्न 18.
कोई वस्तु एकसमान गति में कब कही जाती है?
उत्तर-
कोई वस्तु एकसमान गति में कही जाती है, जब वह समान समय अन्तराल में समान दूरी तय करे।

प्रश्न 19.
कोई गति असमान कब कही जाती है?
उत्तर-
कोई वस्तु असमान गति में कही जाती है जब वह समान समय अन्तराल में असमान दूरी तय करती है।

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प्रश्न 20.
चाल व वेग में मुख्य अन्तर बताइये।
उत्तर-
चाल व वेग में मुख्य अन्तर यह है कि चाल एक अदिश राशि है जबकि वेग एक सदिश राशि है।

प्रश्न 21.
वेग का S.I. मात्रक क्या है?
उत्तर-
वेग का मात्रक है मीटर/सेकण्ड या m/s

प्रश्न 22.
ऊर्जा व त्वरण में से कौन सदिश राशि है?
उत्तर-
त्वरण सदिश राशि है।

प्रश्न 23.
त्वरण से क्या तात्पर्य है? त्वरण को। मात्रक क्या है?
उत्तर-
त्वरण-वेग परिवर्तन की दर त्वरण कहलाती है। त्वरण का मात्रक है मीटर/सेकण्ड2 या m/s2 या ms-2

प्रश्न 24.
तुम कब कह सकते हो कि कोई वस्तु समान त्वरण से गति कर रही है?
उत्तर-
जब कोई वस्तु समान समय अन्तराल में वेग में समान वृद्धि करती है, समान त्वरण से गति कर रही होती है।

प्रश्न 25.
उस भौतिक राशि का नाम लिखिए जो विस्थापन में परिवर्तन की दर को प्रदर्शित करती है।
उत्तर-
विस्थापन में परिवर्तन की दर वेग कहलाती है।

प्रश्न 26.
ऋणात्मक त्वरण क्या है?
उत्तर-
ऋणात्मक त्वरण मंदन है।

प्रश्न 27.
मंदन का S.I. मात्रक क्या है?
उत्तर-
मीटर/सेकण्ड² या m/s2 या ms-2

प्रश्न 28.
दूरी-समय ग्राफ -अक्ष के समान्तर है। यह क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर-
यह वस्तु की विरामावस्था को प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 29.
यदि एक पिंड एकसमान चाल से चल रहा है तो दूरी-समय ग्राफ किस प्रकार का प्राप्त होगा?
उत्तर-
एकसमान चाल से चल रहे पिंड की दूरीसमय ग्राफ एक सरल रेखा होती है।

प्रश्न 30.
दूरी-समय ग्राफ का ढाल (Slope) क्यो प्रदर्शित करता है?
उत्तर-
दूरी-समय ग्राफ का ढाल पिंड की चाल प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 31.
किसी पिंड का चाल-समय ग्राफ x-अक्ष के समान्तर है। यह क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर-
यह पिंड की समान गति प्रदर्शित करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चाल’ किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर-
चाल (Speed) – किसी भी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गयी दूरी को, चाल कहते हैं।
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प्रश्न 2.
‘एकसमान चाल’ से क्या तात्पर्य है? किसी ऐसी वस्तु का उदाहरण दें जिसकी चाल एकसमान हो?
उत्तर-
एकसमान चाल (Uniform Speed) – यदि कोई वस्तु बराबर समय-अन्तराल में बराबर दूरी तय करे तो उस वस्तु की चाल को एकससाने चाल कहते हैं।
उदाहरण-घड़ी की सूई की चाल।

प्रश्न 3.
‘असमान चाल’ किसे कहते हैं?
उत्तर-
असमान चाल (Variable Speed) – यदि कोई वस्तु बराबर समय-अन्तराल में बराबर दूरी तय नहीं करे तो उस वस्तु की चाल को असमानं चाल कहते हैं।

प्रश्न 4.
‘औसत चाल’ किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर-
औसत चाल (Average Speed) – किसी समय अन्तराल में तय की गयी कुल दूरी और समयअन्तराल के अनुपात को, औसत चाल कहते हैं।
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This online velocity calculator is used to find the velocity of water in a pipe with the flow rate and diameter of the pipe.

प्रश्न 5.
वेग की परिभाषा लिखिए। C.G.S. तथा M.K.S. पद्धतियों में इनके मात्रक लिखिए।
उत्तर-
वेग (Velocity) – समय के साथ विस्थापन की दर को वेग कहते हैं।
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वेग का मात्रक-
(i) C.G.S. पद्धति में सेमी/सेकण्ड’ है।
(ii) M.K.S. पद्धति में ‘मीटर/सेकण्ड’ है।

प्रश्न 6.
समान वेग किसे कहते हैं?
उत्तर-
समान वेग (Uniform Velocity)-कोई गतिशील वस्तु बराबर समय अन्तराल में एक ही निश्चित दिशा में बराबर दूरी तय करती है तो उस वस्तु के वेग को समान वेग कहते हैं।

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प्रश्न 7.
असमान (परिवर्ती) वेग किसे कहते हैं?
उत्तर-
असमान (परिवर्ती) वेग (Variable velocity) – कोई गतिशील वस्तु बराबर समय-अन्तराल में बराबर दूरी तय करे लेकिन उसकी गति की दिशा बदल जाये अथवा बराबर (UPBoardSolutions.com) समय-अन्तराल में बराबर दूरी तय नहीं करे तो उस वस्तु के वेग को, असमान वेग कहते हैं।

प्रश्न 8.
दूरी एवं विस्थापन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
दूरी एवं विस्थापन में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
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प्रश्न 9.
चाल, वेग तथा त्वरण के सूत्र लिखिए।
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प्रश्न 10.
चाल और वेग में प्रमुख अन्तर बताइये।
उत्तर-
चाल और वेग में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
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प्रश्न 11.
समान वेग’ और परिवर्ती वेग’ में उदाहरण देकर अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
समान वेग’ एवं ‘परिवर्ती वेग’ में अन्तर| जब कोई पिण्ड सुनिश्चित दिशा में समान कालखण्ड में समान दूरी तय करे, तो उसका वेग समान वेग होता है। जैसे-समान चाल से एक सीधी रेखा में उड़ते हुए वायुयान का वेग समान वेग होता है।
जब किसी पिण्ड की गति दिशा परिवर्तित हो तो उसकी चाल समान होते हुए भी उसका वेग परिवर्ती होगा। जैसे-वृत्ताकार मार्ग पर समान चाल से चलते हुए पिण्ड का वेग परिवर्ती वेग होगा।

प्रश्न 12.
क्या गति सापेक्ष है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
हाँ, गति सापेक्ष है। एक उदाहरण से स्पष्ट करते हैं। मान लीजिए A, B व C तीन व्यक्ति हैं। B व C कार के अन्दर बैठे हैं व A कार के बाहर खड़ा है। कार गति करना आरम्भ करती है, B व C अपनी स्थिति A के सापेक्ष परिवर्तित करते हैं, किन्तु B व C एक-दूसरे के सापेक्ष अपनी (UPBoardSolutions.com) स्थिति में परिवर्तन नहीं करते हैं।
अतः B व C, A के सापेक्ष गति में हैं। लेकिन B, C के सापेक्ष यो C, B के सापेक्ष गति में नहीं है। अतः गति सापेक्ष है।

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प्रश्न 13.
अदिश राशि वे सदिश राशि में अन्तर बताइये।
उत्तर-
अदिश राशि व सदिश राशि में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
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प्रश्न 14.
एक बस, 235 किमी लम्बे मार्ग में पहले 60 किमी 40 किमी/घण्टा की एक समान चाल से तय करती है। शेष 175 किमी की दूरी किस चाल से तय करे कि पूरी यात्रा के लिये उसकी औसत चाल 47 किमी/घण्टा हो?
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -27

प्रश्न 15.
एक स्कूटर सवार स्थाने A से B तक की दूरी 30 किमी/घण्टा की एकसमान चाल से तय करता है। B से A तक 50 किमी/घण्टे की एकसमान चाल से वापस आता है। सम्पूर्ण यात्रा के लिए औसत चाल ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 16.
एक स्कूटर सवार 36 km/h की चाल से चल रहा है, उसकी चाल को m/s में व्यक्त कीजिए।
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प्रश्न 17.
निम्न को बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(i) 18 किमी/घण्टा की चाल से चलती हुई साइकिल
(ii) 7 ms की चाल से दौड़ता हुआ धावक
(iii) 2000 m/min की चाल से चलती हुई कार।
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प्रश्न 18.
रेखीय गति में किसी कण के विस्थापन को परिभाषित कीजिए। क्या यह मूल (Origin) पर निर्भर करता है?
उत्तर-
वस्तु, जब एक स्थिति से दूसरी तक चलती है, दिशा के साथ, वस्तु की प्रारम्भिक स्थिति और अन्तिम स्थिति के बीच सबसे छोटी दूरी (सीधी रेखा)को उसका (UPBoardSolutions.com) विस्थापन कहा जाता है।
विस्थापन का मान मूल बिन्दु की पसंद पर निर्भर नहीं करता है।

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प्रश्न 19.
एक साइकिल सवार P से Q दूरी 4 km दूरी चलता है और फिर PQ से समकोण पर 3 km की दूरी पर मुड़ जाता है। इसका परिणामी विस्थापन ज्ञात कीजिए।
हल-
परिणामी विस्थापन PR है।
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प्रश्न 20.
एक व्यक्ति पूर्व की ओर 3 km चलता है। फिर 2 km उत्तर की ओर और अन्त में 3.5 km पूर्व की ओर दूरी तय करता है।
(i) चली गई कुल दूरी क्या है?
(ii) उसका परिणामी विस्थापन क्या है?
हल-
AB की दूरी = 3 km पूर्व,
BC = 2 km उत्तर
तथा CD = 5.5 km पूर्व
(i) चली गई कुल दूरी = AB + BC + CD = 3 km + 2 km + 3.5 km = 8.5 km.
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प्रश्न 21.
मीनाक्षी के घर तथा स्कूल के बीच की दूरी 2 km है। वह घर से स्कूल जाती है तथा वापस स्कूल से घर आती है। इस पूरी यात्रा में मीनाक्षी द्वारा चली गई दूरी तथा विस्थापन ज्ञात कीजिए।
हल-
स्कूल से घर की दूरी = 2 km
मीनाक्षी इस दूरी को दो बार तय करती है अत: उसके द्वारा चली गई कुल दूरी = 2 x 2 = 4 km
मीनाक्षी घर से स्कूल जाकर वापस आ जाती है।
अतः उसके द्वारा कम-से-कम चली गई दूरी = शून्य
अत: विस्थापन = शून्य

प्रश्न 22.
एक उपग्रह समान चाल से पृथ्वी के इर्द-गिर्द चक्कर काटता है। क्या वह गति त्वरित है? यदि हाँ तो त्वरण किस दिशा में क्रियाशील है?
उत्तर-
पृथ्वी के इर्द-गिर्द चक्कर काटते उपग्रह का वेग उसकी गति की दिशा में परिवर्तन के सापेक्ष परिवर्तित होता है। अतः उपग्रह की गति त्वरित है। उसका त्वरण पृथ्वी के केन्द्र की ओर क्रियाशील होता है।

प्रश्न 23.
एक प्रयोग के दौरान, अंतरिक्ष यान से एक सिग्नल को पृथ्वी पर पहुँचने में 5 मिनट का समय लगता है। पृथ्वी पर स्थित स्टेशन से उस अंतरिक्ष यान की दूरी क्या है?
हल-
सिग्नल द्वारा पृथ्वी तक पहुँचने में लगा समय
t = 5 मिनट = 300 सेकण्ड
इसलिए स्टेशन से अन्तरिक्ष यान की दूरी = सिग्नल की चाल x लगा समय
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -33

प्रश्न 24.
एक रेलगाड़ी स्टेशन से चलना प्रारम्भ करती है और एकसमान त्वरण के साथ चलते हुए 10 मिनट में 40 किमी/घण्टा की चाल प्राप्त करती है। इसका त्वरण क्या है?
हल-
स्टेशन पर, रेलगाड़ी का प्रारम्भिक वेग u = 0
जबकि अन्तिम वेग v = 40 किमी/घण्टा
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गति के प्रथम समीकरण v = u + at की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर-
मान लीजिए किसी गतिमान पिण्ड का प्रारम्भिक वेग u तथा t समय पश्चात् उसको अन्तिम वेग है तथा आरोपित त्वरण a है तो गति के समीकरण
v = u + at की व्युत्पत्ति करनी है।
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प्रश्न 2.
गतिके द्वितीय समीकरण’ s = ut + [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] at2 की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर-
मान लीजिए कि किसी गतिमान पिण्ड का प्रारम्भिक वेग u, अन्तिम वेग v, त्वरण a तथा t समय में चली गई दूरी s हो तो गति के समीकरण
s = ut + [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] at2 की व्युत्पत्ति करनी है।
चूँकि प्रारम्भिक वेग u तथा अन्तिम वेग v है इसलिए औसत वेग = [latex]\frac { u + v }{ 2 }[/latex] होगा।
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प्रश्न 3.
गति के तृतीय समीकरण v2 = u2 + 2as की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर-
मान लीजिए कि किसी गतिमान वस्तु का प्रारम्भिक वेग u, अन्तिम वेग v, त्वरण a, यात्रा में लगा समय t है एवं कुल चली गई दूरी s हो, तो
चूँकि v = u + at (गति का प्रथम समीकरण) …(i)
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प्रश्न 4.
(i) वेग-समय आरेख क्या प्रकट करता है?
(ii) समान वेग से गतिमान वस्तु का आरेख कैसा दिखाई देगा?
(iii) समान वेग 40 km/h की गति से चलती एक कार के लिए एक वेग-समय आरेख खींचिए।
उत्तर-
(i) सर रखा में गतिमान किसी वस्तु के लिए समय के साथ वेग में विभिन्नता को वेग-समय आरेख द्वारा दर्शाया जाता है। इस आरेख में समय को x-अक्ष के साथ और वेग को y-अक्ष के साथ दर्शाया जाता है।
(ii) यदि वस्तु समान वेग से गतिमान होती है, तो समय के साथ इसके वेग-समय ग्राफ की ऊँचाई नहीं बदलेगी। यह x-अक्ष के समानान्तर एक सरल रेखा होगी।
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प्रश्न 5.
एक वस्तु स्थिर अवस्था से चलना आरम्भ करती है। यदि वस्तु प्रथम 4 सेकण्ड में S1 तथा अगले 4 सेकण्ड में S2 दूरी तय करे, तो सिद्ध कीजिए।
S2 = 3S1

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प्रश्न 6.
समय-दूरी ग्राफ क्या है? एकसमान तथा असमान गतियों के लिए एक ग्राफ खींचें। इस वक़ से नीचे वाला क्षेत्र क्या दर्शाता है? इसकी ढाल क्या बताती है?
उत्तर-
समय-दुरी ग्राफ – समय को स्वतन्त्र-चर अक्ष पर तथा दूरी को परतंत्र- चर अक्ष पर लेकर खींचा गया ग्राफ समय-दूरी ग्राफ कहलाता है। इससे हर क्षण पर दूरी का तथा इसकी ढाल से चाल का पता चल सकती है।
समय-दूरी ग्राफ निम्न तीन प्रकार के हो सकते हैं-
(i) समय-दुरी ग्राफ जब चाल अपरिवर्तित रहती है – जब चाल अपरिवर्तित रहती है तो समय-दूरी ग्राफ एक सरल रेखा होती है। इसे चित्र में रेखा OA द्वारा प्रदर्शित किया गया है। समय-दूरी ग्राफ की किसी बिन्दु पर ढाल उसकी चाल बताती है।
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(ii) समय-दूरी ग्राफ जब चाल एकसमान दर से बदलती हो – इस स्थिति में समय-दूरी ग्राफ एक परवलय (Parabola) होती है। इसे चित्र में दिखाया गया है।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -41
(iii) समय-दूरी ग्राफ जब चाल असमान दर से बदलती हो – इस स्थिति में समय-दूरी ग्राफ एक सरल रेखा या परवलय न होकर एक वक्र रेखा होती है जिसका स्वरूप चाल बदलने की दर पर निर्भर करता है। इसे चित्र में दिखाया गया है।
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प्रश्न 7.
(i) वृत्तीय गति क्या है? एक उदाहरण दीजिए।
(ii) समान वृत्तीय गति क्या है?
(iii) यदि एक धावकr त्रिज्या वाले वृत्तीय पथ को एक पूरा चक्कर लगाने में समय लेता है तो वेग-विस्तार, त्रिज्या और समय के बीच सम्बन्ध ज्ञात कीजिए।
(iv) एक कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगाने में 90 मिनट लेता है। उपग्रह की कोणीय गति का परिकलन कीजिए।
उत्तर-
(i) एक वृत्तीय पथ के साथ-साथ किसी पिण्ड की गति वृत्तीय गति कहलाती है। वृत्तीय गति के दौरान, किसी निश्चित बिन्दु पर गति की दिशा को उस बिन्दु पर स्पर्श रेखा डालकर जाना जाता है।
उदाहरण-
1. पृथ्वी तथा अन्य ग्रह सूर्य के इर्द-गिर्द वृत्तीय पथ पर चक्कर काटते हैं।
2. चन्द्रमा भी पृथ्वी के इर्द-गिर्द वृत्तीय पथ पर गतिशील है।
3. एक मजबूत धागे से बँधा पत्थर जब घुमाया/हिलाया जाता है, तो वह पत्थर भी वृत्तीय गति को संकेतित करता है।
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प्रश्न 8.
ग्राफीय विधि से v = u + at स्थापित कीजिए।
उत्तर-
एकसमान त्वरण से गतिशील वस्तु का चाल-समय आरेख निम्न रूप में प्रदर्शित है-
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प्रश्न 9.
विस्थापन क्या है? यह दूरी से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर-
विस्थापन – किसी निश्चित दिशा में वस्तु की स्थिति में हुआ परिवर्तन विस्थापन कहलाता है।
मान लीजिए, एक वस्तु मूल बिन्दु O से समय t1 पर x1 स्थिति में है और समय t2 पर x2 स्थिति में है।
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अगर विस्थापन d है तो d = (x2 – x1).
विस्थापन का चिन्ह – विस्थापन की दिशा तीर (arrow-head) द्वारा प्रदर्शित करते हैं, जो मूल बिन्दु से अन्तिम स्थिति की तरफ खींचा जाता है, तीर (arrowhead) की लम्बाई विस्थापन का परिमाण (magnitude) प्रदर्शित करती है।
अगर विस्थापन मूल बिन्दु के दायीं तरफ है तो इसे धन चिन्ह (+) से व विस्थापन मूल बिन्दु के बायीं तरफ है तो इसे ऋण चिन्ह (-) से प्रदर्शित करते हैं।
दुरी – आम भाषा में विस्थापन व दूरी का एक ही अर्थ लिया जाता है, लेकिन विज्ञान में विस्थापन व दूरी में थोड़ा अन्तर है,
“विस्थापन किसी वस्तु की स्थिति में किसी निश्चित दिशा में परिवर्तन कहलाता है जबकि दूरी वस्तु द्वारा उसकी अन्तिम स्थिति में पहुँचने में तय किये गये पथ की लम्बाई।”
उदाहरणार्थ- यदि एक व्यक्ति A से B की तरफ 4 किमी गति करता है, वे B से लम्बवत् 3 किमी उत्तर दिशा में C की तरफ गति करता है, जैसा कि चित्र में
प्रदर्शित है।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -47
तो दूरी = AB + BC
और विस्थापन = AC. [अगर आप एक निश्चित स्केल लेकर दूरियाँ खींचें]
जैसे
1 km = 1 cm, तुम देखोगे कि
AC = 5 cm
अतः विस्थापन = 5 km
जबकि दूरी = 4 km + 3 km = 7 km

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प्रश्न 10.
कोई व्यक्ति 3 किमी की दूरी पूरब की ओर, फिर 2 किमी की दूरी उत्तर की ओर और 3.5 किमी की दूरी पूरब की ओर तय करता है। ज्ञात कीजिए
(i) व्यक्ति द्वारा तय की गयी दूरी
(ii) उसकी स्थिति में विस्थापन।
उत्तर-
(i) जैसा कि हम जानते हैं, दूरी किसी वस्तु द्वारा तय किये गये पथ की वास्तविक लम्बाई होती है।
अतः दूरी = 3 किमी + 3 किमी + 3.5 किमी = 8.5 किमी
(ii) विस्थापन या अन्तिम व आरम्भिक स्थितियों में अन्तर ज्ञात करने के लिए, एक सुविधाजनक स्केल (पैमाना) लेकर चित्र खींचते हैं।
माना 1 किमी = 1 सेमी
व्यक्ति 3 किमी पूरब जाता है, तब AB = 3 सेमी BC = 2 सेमी उत्तर अर्थात् AB के लम्बवत् खींची फिर CD = 3.5 सेमी पूरब अर्थात् पुनः BC के लम्बवत् खींची जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है।
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AD को मापकर देखो।
AD की लम्बाई = 6.8 सेमी
विस्थापन = 6.8 किमी

प्रश्न 11.
वृत्तीय और एकसमान वृत्तीय गति को वर्णन कीजिए।
उत्तर-
वृत्तीय-गति – एक वृत्ताकार पथ पर किसी पिण्ड की गति वृत्तीय गति कहलाती है।
समान वृत्तीय गति – जब कोई पिण्ड किसी वृत्ताकार पथ पर समान चाल से गति करता है, तब यह गति समान वृत्तीय गति कहलाती है।
क्या समान वृत्तीय गति त्वरित गति है – वह गति एकसमान गति कहलाती है, यदि गति करने वाला पिण्ड किसी निश्चित दिशा में समान समय अन्तराल में समान दूरी तय करता है। यदि पिण्ड असमान दूरी तय करता है। या दिशा बदलता है तो यह गति त्वरित गति कहलाती है।
एकसमान वृत्तीय गति के विषय में, एक उदाहरण द्वारा उसे स्पष्ट करेंगे। एक छोटे पत्थर के टुकड़े को एक मजबूत धागे से बाँधकर उसे एक वृत्ताकार पथ पर एकसमान गति से घुमाते हैं, जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है।
जब पत्थर P बिन्दु पर है, और उसे छोड़ दिया जाये तो वह पूरब दिशा में गति करता है, और जब पत्थर Q स्थिति में है और उसे छोड़ा जाये तो वह दक्षिण दिशा में गति करता है।
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अत: P व Q बिन्दुओं पर पिण्ड के गति करने की दिशा समान नहीं है इसीलिए पिण्ड का वेग तो समान है। फिर भी दिशा में हर बिन्दु पर लगातार परिवर्तन होता है।
अत: समान वृत्तीय गति सदैव एक त्वरित गति है।

प्रश्न 12.
समान रेखीय गति व समान वृत्तीय गति में अन्तर कीजिए व समान वृत्तीय गति के चार उदाहरण दीजिए।
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समान वृत्तीय गति के उदाहरण-
1. समान गति से घूमते हुए पहिये पर किसी कण की गति
2. किसी उपग्रह के ग्रह के चारों तरफ घुमने की गति
3. चन्द्रमा की पृथ्वी के चारों तरफ गति
4. किसी घड़ी की सूई पर स्थित किसी कण की गति

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक वस्तु विरामावस्था से आरम्भ कर समान त्वरित गति से चलकर 100 मी दूरी 5 सेकण्ड में तय करती है। त्वरण की गणना करिये।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -51

प्रश्न 2.
विरामावस्था से गतिशील होकर किसी पिण्ड का त्वरण 10 m/s हो जाता है। पिण्ड द्वारा 5 सेकण्ड में चली गई दूरी को परिकंलन कीजिए।
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प्रश्न 3.
एक कार 72 किमी/घण्टा की चाल से चल रही है। चालक 50 मी की दूर पर एक बच्चे को देखता है, वह ब्रेक लगाकर कार को बच्चे से ठीक पहले रोक देता है। त्वरण की गणना कीजिए।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -53

प्रश्न 4.
एक बस 54 किमी प्रति घण्टे की चाल से चल रही है। ब्रेक लगाने से 8 सेकण्ड में रुक जाती है। त्वरण ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -54

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प्रश्न 5.
एक कार 72 किमी/घण्टा की चाल से गुति कर रही है। ब्रेक लगाने से 4 सेकण्ड में विरामावस्था में आ जाती है। गणना कीजिए
(i) त्वरण व
(ii) इस समय अन्तराल में चली गयी दूरी।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -55
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प्रश्न 6.
एक कार एक सीधी सड़क पर समान त्वरित गति से चल रही है। विभिन्न समय अन्तरालों पर उसका वेग निम्न प्रकार है-
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion image -57
उचित पैमाने का चयन कर वेग-समय ग्राफ खीचिए वे ज्ञात कीजिए|
(i) कार को त्वरण
(ii) 50 सेकेण्ड में कार द्वारा चली गयी दूरी।
उत्तर-
(i) x-अक्ष व y-अक्ष खींचकर उचित पैमाने का चयन करें।
माना x-अक्ष पर 1 सेमी = 10 मी/से व y-अक्ष पर 1 सेमी = 5 मी/से
सभी बिन्दुओं को अंकित कर ग्राफ खींचें। यह चित्र की तरह प्राप्त होगा।
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अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. सदिश राशि है
(a) कार्य
(b) दाब
(c) बल
(d) सामर्थ्य

2. अदिश राशि है
(a) संवेग
(b) आवेग
(c) बल
(d) दाब

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3. एक पिण्ड वृत्ताकार पथ पर निश्चित चाल से चल रहा है। उसकी गति
(a) समान है।
(b) त्वरित है।
(c) मंदन होती हुई
(d) इनमें से कोई नहीं।

4. नीचे की तरफ ढाल वाला वेग-समय ग्राफ, इंगित करता है-
(a) समान गति
(b) त्वरित गति
(c) मंदन करती गति
(d) इनमें से कोई नहीं।

5. एक कार 72 किमी/घण्टा की चाल से चल रही है। उसकी चाल है
(a) 7.2 मी/से
(b) 10 मी/से
(c) 15 मी/से
(d) 20 मी/से

6. ……. सदिश नहीं है-
(a) त्वरण
(b) वेग
(c) घनत्व
(d) विस्थापन

7. विस्थापन परिवर्तन की दर कहलाती है
(a) त्वरण
(b) वेग
(c) चाल
(d) इनमें से कोई भी नहीं।

8. वेग परिवर्तन की दर कहलाती है
(a) त्वरण
(b) वेग
(c) चाल
(d) उपर्युक्त से कोई भी नहीं।

9. किसी पिण्ड का दूरी-समय ग्राफ x-अक्ष के समान्तर है। यह प्रदर्शित करता है कि
(a) पिण्ड समान गति से चल रहा है।
(b) पिण्ड त्वरित गति से चल रहा है।
(c) पिण्ड विरामावस्था में हैं।
(d) पिण्ड असमान गति से चल रहा है।

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10. वेग-समय ग्राफ x-अक्ष के समान्तर है। यह प्रदर्शित करता है कि
(a) पिण्ड समान गति से चल रहा है।
(b) पिण्ड त्वरित गति से चल रहा है
(c) पिण्ड विरामावस्था में है।
(d) पिण्ड असमान गति से चल रहा है।

11. m/s SI मात्रक है
(a) वेग का
(b) चाल का .
(c) विस्थापन का
(d) त्वरण का

12. वेग-समय ग्राफ का ढाल प्रदर्शित करता है
(a) चाल
(b) त्वरण
(c) विस्थापन
(d) वेग

उत्तरमाला

  1. (c)
  2. (d)
  3. (b)
  4. (c)
  5. (d)
  6. (c)
  7. (b)
  8. (a)
  9. (c)
  10. (a)
  11. (d)
  12. (b)

We hope the UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion (गति) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion (गति), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy

UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy (कार्य, शक्ति और ऊर्जा)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 9 Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy (कार्य, शक्ति और ऊर्जा).

पाठ्य – पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 164)

प्रश्न 1.
किसी वस्तु पर 7 N को बल लगता है। मान लीजिए बल की दिशा में विस्थापन 8 m है। (चित्र)। मान लीजिए वस्तु के विस्थापन के समय लगातार वस्तु पर बल लगता रहता है। इस स्थिति में किया गया कार्य कितना होगा?
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy
हल-
बल = 7N, विस्थापन = 8 m
किया गया गया = बल x विस्थापन = 7N x 8m = 56 Nm or J

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 165)

प्रश्न 1.
हम कब कहते हैं कि कार्य किया गया है?
उत्तर-
जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और वस्तु विस्थापित हो जाती है तो कहा जाता है कि कार्य किया गया है।

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प्रश्न 2.
जब किसी वस्तु पर लगने वाला बल इसके विस्थापन की दिशा में हो तो किए गए कार्य को व्यंजक लिखिए।
उत्तर-
जब बल विस्थापन की दिशा में ही लगता है तो
कार्य = बल x विस्थापन

प्रश्न 3.
1J कार्य को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
जब किसी वस्तु पर एक न्यूटन का बल लगाने पर वस्तु में बल की दिशा में 1 मीटर का विस्थापन हो जाता है तो किया गया कार्य 1 J कहलाता है।
1 J= 1 N x 1 m

प्रश्न 4.
बैलों की एक जोड़ी खेत जोतते समय किसी हल पर 140 N बल लगाती है। जोता गया खेत 15 m लंबा है। खेत की लंबाई को जोतने में कितना कार्य किया गया?
उत्तर-
बैलों द्वारा लगाया गया बल = 140N
जोता गया खेत = 15 m किया गया कार्य = बल x विस्थापन
= 140 N x 15 m = 2100 Nm या 2100 जूल

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 169)

प्रश्न 1.
किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा क्या होती है?
उत्तर-
गतिज ऊर्जा – किसी वस्तु में उसकी गति के कारण संचित ऊर्जा उसकी गतिज ऊर्जा कहलाती है। गतिज ऊर्जा उस वस्तु की चाल बढ़ने पर बढ़ती है।
अथवा
किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर होती है जो उस वस्तु का वेग प्राप्त करने के लिए वस्तु पर किया जाता है।
उदाहरण- चलती हुई कार, दौड़ते हुए खिलाड़ी, (UPBoardSolutions.com) बहते हुए जल, गति करते हुए अणु इन सभी में गतिज ऊर्जा होती है।

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प्रश्न 2.
किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर-
वस्तु की गतिज ऊर्जा = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
जहाँ, m = वस्तु का द्रव्यमान, v = वस्तु की चाल

प्रश्न 3.
5 ms-1 के वेग से गतिशील किसी m द्रव्यमान की वस्तु की गतिज ऊर्जा 25 J है। यदि इसके वेग को दोगुना कर दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जायेगी? यदि इसके वेग को तीन गुना कर दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जायेगी?
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 174)

प्रश्न 1.
शक्ति क्या है?
उत्तर-
शक्ति, प्रति इकाई समय में किया गया कार्य है।

प्रश्न 2.
एक वाट शक्ति को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
यदि किसी स्रोत द्वारा एक सेकण्ड में एक जूल ऊर्जा की आपूर्ति की जाए तो उस स्रोत की शक्ति एक वाट होगी।

प्रश्न 3.
एक लैम्प 1000 J विद्युत ऊर्जा 10 सेकण्ड में व्यय करता है। इसकी शक्ति कितनी है?
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प्रश्न 4.
औसत शक्ति को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
ऊर्जा आपूर्ति को कुल लिए गए समय से विभाजित करने पर औसत ऊर्जा प्राप्त होती है। यदि कोई एजेन्ट t समय में ‘W’ यूनिट कार्य करता है, तब औसत शक्ति ‘P’
P = [latex]\frac { W }{ t }[/latex]

अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 176-178)

प्रश्न 1.
निम्न सूचीबद्ध क्रिया-कलापों को ध्यान से देखिए। अपनी कार्य शब्द की व्याख्या के आधार पर तर्क दीजिए कि इनमें कार्य हो रहा है अथवा नहीं।

  1. सूमा एक तालाब में तैर रही है।
  2. एक गधे ने अपनी पीठ पर बोझ को उठा रखा है।
  3. एक पवन-चक्की (पिण्ड मिल) कुएँ से पानी उठा रही है।
  4. एक हरे पौधे में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हो रही है।
  5. एक इंजन रेल को खींच रहा है।
  6. अनाज के दाने सूर्य की धूप में सूख रहे हैं।
  7. एक पाल-नाव पवन ऊर्जा के कारण गतिशील है।

उत्तर-

  1. सूमा एक तालाब में तैर रही है-तैरते समय सूमो अपने हाथों से पानी पीछे फेंकती है तथा प्रतिक्रिया के कारण सूमा पर आगे की ओर बल लगता है। जिसके कारण वह पानी पर तैरती हुई ‘आगे बढ़ती है। अतः कार्य हुआ है।
  2. एक गधे ने अपनी पीठ पर बोझ उठा रखा है- इस स्थिति में कोई कार्य नहीं हुआ क्योंकि गुरुत्व बल नीचे की ओर ऊर्ध्वाधर दिशा में कार्य कर रहा है परन्तु कोई विस्थापन नहीं हो रहा है।
  3. एक पवन चक्की कुएँ से पानी उठा रही है- इस स्थिति में पवन चक्की द्वारा कार्य किया जा रहा है क्योंकि पानी कुएँ से ऊपर की ओर उठाया जा रहा है जिससे बल लगाने पर विस्थापन हुआ है।
  4. एक हरे पौधे में प्रकाश संश्लेषण (UPBoardSolutions.com) की क्रिया हो रही है- यहाँ कोई कार्य नहीं हो रहा है क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से विस्थापन नहीं हो रहा है।
  5. अनाज के दाने सूर्य की गर्मी में सूख रहे हैं- यहाँ भी कोई कार्य नहीं हो रहा है क्योंकि अनाज अपने स्थान पर स्थिर है। उसमें कोई विस्थापन नहीं होता।
  6. एक इंजन ट्रेन को खींच रहा है- इंजन द्वारा ट्रेन को खींचकर ले जाने में कार्य हो रहा है क्योंकि वस्तु का विस्थापन बल लगाने पर बल की दिशा में हो रहा है।
  7. एक पाल-नाव पवन ऊर्जा के कारण गतिशील है- यहाँ पवन गतिज ऊर्जा के कारण पाल-नाव पर बल लगाती है जिससे पाल-नाव की स्थिति में विस्थापन होता है। अत: यहाँ कार्य होता है।

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प्रश्न 2.
एक पिण्ड को धरती से किसी कोण पर फेंका गया है। यह एक वक्र पथ पर चलता है और वापस पृथ्वी पर आ गिरता है। पिण्ड के पथ के प्रारंभिक तथा अन्तिम बिन्दु एक ही क्षैतिज रेखा पर स्थित हैं। पिण्ड पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया गया?
उत्तर-
गुरुत्व बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य शून्य होगा क्योंकि गुरुत्व बल नीचे की ओर ऊर्ध्वाधर दिशा में कार्य कर रहा है परन्तु वस्तु का विस्थापन क्षैतिज दिशा में है जो कि बल की दिशा के साथ 90° का कोण बनाती है। अतः गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

प्रश्न 3.
एक बैट्री बल्ब जलाती है। इस प्रक्रम में होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
बैट्री में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक पदार्थों की रासायनिक ऊर्जा का सबसे पहले विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण होता है। बल्ब जलने पर विद्युत ऊर्जा का प्रकाश ऊर्जा में रूपान्तरण होता है।

प्रश्न 4.
20 kg द्रव्यमान पर लगने वाला कोई बल इसके वेग को 5 ms-1 से 2 ms-1 में परिवर्तित कर देता है। बल द्वारा किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
हल-
बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य = वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy image -1
ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि बल वस्तु की गति के विपरीत दिशा में लग रहा है।

प्रश्न 5.
10 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड मेज पर A बिन्दु पर रखा है। इसे B बिन्दु तक लाया जाता है। यदि A तथा B को मिलाने वाली रेखा क्षैतिज है तो पिण्ड पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
वस्तु पर लगा गुरुत्व बल ऊध्र्वाधर नीचे की। ओर कार्य कर रहा है तथा वस्तु का विस्थापन गुरुत्व बल के साथ 90° कोण पर क्षैतिज दिशा में है।अतः गुरुत्व बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य शून्य होगा।

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प्रश्न 6.
मुक्त रूप से गिरते एक पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा लगातार कम होती जाती है। क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन करती है? कारण बताइए।
उत्तर-
स्वतंत्र रूप से गिरते एक हुए पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा धीरे-धीरे घटती जाती है। यह ऊर्जा संरक्षण नियम के विरुद्ध नहीं है क्योंकि जब वस्तु स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती है तो (UPBoardSolutions.com) उसकी स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण गतिज ऊर्जा में होता जाता है। किसी भी बिन्दु पर गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग हमेशा समान रहता है। जो कि ऊर्जा संरक्षण नियम के अनुसार ही है।

प्रश्न 7.
जब आप साइकिल चलाते हैं तो कौन-कौन से ऊर्जा रूपांतरण होते हैं?
उत्तर-
साइकिल चलाते समय शरीर की पेशीय ऊर्जा साइकिल की गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। साइकिल की गतिज ऊर्जा घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में व्यय हो जाती है।

प्रश्न 8.
जब आप अपनी सारी शक्ति लगाकर एक बड़ी चट्टान को धकेलना चाहते हैं और इसे हिलाने में असफल हो जाते हैं तो क्या इस अवस्था में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है? आपके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा कहाँ चली जाती है?
उत्तर-
नहीं, जब हम अपनी पूरी शक्ति से विशाल चट्टान को धकेलने पर नहीं खिसका पाते हैं, तो ऊर्जा का हस्तांतरण नहीं होता है। जब हम चट्टान को धकेलते हैं, तो हमारी पेशियाँ तन जाती हैं तथा इन पेशियों की ओर रक्त बहुत तेजी से विस्थापित होता है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा खपत होती है तथा हम थका हुआ महसूस करते हैं।

प्रश्न 9.
किसी घर में एक महीने में ऊर्जा की 250 यूनिटें’ व्यय हुईं। यह ऊर्जा जूल में कितनी होगी?
हल-
पूरे महीने के दौरान कुल ऊर्जा खपत = 250 न्यूनिट
1 यूनिट = 1 kWh
250 न्यूनिट = 250 kWh
पुनः 1 kWh = 36,00,000 J
250 kWh = 250 x 36,00,000 J = 90,00,00,000 J = 9 x 108 J

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प्रश्न 10.
40 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड धरती से 5 m की ऊँचाई तक उठाया जाता है। इसकी स्थितिज ऊर्जा कितनी है? यदि पिण्ड को मुक्त रूप से गिरने दिया जाए तो जब पिण्ड ठीक आधे रास्ते पर है उस समय इसकी गतिज ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (g = 10 ms-2)
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प्रश्न 11.
पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए एक उपग्रह पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया जाएगा? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए।
उत्तर-
पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे उपग्रह द्वारा गुरुत्व बल के कारण किया गया कार्य शून्य होगा क्योंकि गुरुत्व बल की क्रिया-रेखा की दिशा उपग्रह की गति की दिशा के लम्बवत् है
अतः किया गया कार्य = F x Cosθ = F x Cos 0 = F x 0 = 0.

प्रश्न 12.
क्या किसी पिण्ड पर लगने वाले किसी भी बल की अनुपस्थिति में, इसका विस्थापन हो सकता है? सोचिए। इस प्रश्न के बारे में अपने मित्रों तथा अध्यापकों से विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर-
हाँ, बल की अनुपस्थिति में वस्तु में विस्थापन हो सकता है। यदि वस्तु एकसमान गति से चल रही है। तो उस वस्तु पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता परन्तु वस्तु में विस्थापन होता है। जब वस्तु को किसी आनत-तल से मुक्त अवस्था में छोड़ा जाता है तो वह गुरुत्व बल के कारण नीचे आती है (UPBoardSolutions.com) परन्तु पृथ्वी तल पर पहुँचने पर क्षैतिज दिशा में उस पर कोई बल कार्य नहीं करता परन्तु वह वस्तु’ क्षैतिज दिशा में एकसमान गति से चलती है तथा उसमें विस्थापन होता रहता है।

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प्रश्न 13.
कोई मनुष्य भूसे के एक गट्ठर को अपने सिर पर 30 मिनट तक रखे रहता है और थक जाता है। क्या उसने कोई कार्य किया या नहीं? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए।
उत्तर-
भूसे के गट्ठे पर व्यक्ति द्वारा कोई कार्य नहीं किया गया क्योंकि गट्ठे की स्थिति में कोई विस्थापन नहीं हुआ।

प्रश्न 14.
एक विद्युत हीटर (ऊष्मक) की घोषित शक्ति 1500 w है। 10 घंटे में यह कितनी ऊर्जा उपयोग करेगा?
हल-
विद्युत हीटर की शक्ति (P) = 1500 w
लिया गया समय है = 10 घंटे = 10 x 3600 सेकण्ड
हीटर द्वारा खर्च की गई ऊर्जा = P x t = 1500 x 36000 = 54000000 J
ऊर्जा (kWh में) = [latex]\frac { 54000000 }{ 3600000 }[/latex] = 1.5 kWh.

प्रश्न 15.
जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले जाकर छोड़ते हैं तो यह दोलन करने लगता है। इसमें होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों की चर्चा करते हुए ऊर्जा संरक्षण के नियम की व्याख्या कीजिए। गोलक कुछ समय पश्चात् विराम अवस्था में क्यों आ जाता है? अंततः इसकी ऊर्जा को क्या होता है? क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन है ?
उत्तर-
एक सरल लोलक में एक धातु का गोलाकार गोलक किसी धागे द्वारा किसी दृढ़ आधार से लटकाया जाता है। जब किसी लोलक के गोले को एक ओर विस्थापित किया जाता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में कुछ वृद्धि हो जाती है। जब इस लोलक को विराम अवस्था से छोड़ा जाता है तो उसकी गतिज ऊर्जा बढ़ती है तथा स्थितिज ऊर्जा घटती जाती है। मध्य स्थिति में पहुँचने तक गतिज ऊर्जा अधिकतम हो जाती है जैसा चित्रे (b) में दिखाया गया है। जब गोलक मध्य स्थिति से दूसरी ओर गति करता है तो उसकी गतिज ऊर्जा कम होती जाती है (UPBoardSolutions.com) तथा स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा, गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग होती है। यह कुल ऊर्जा गोलक की चरम सीमा पर स्थितिज ऊर्जा अथवा गोलक की मध्य अवस्था में गतिज ऊर्जा के बराबर होती है। इस प्रकार किसी भी स्थिति में कुल ऊर्जा हमेशा बराबर रहती है अर्थात् ऊर्जा संरक्षित रहती है। अतः हम कह सकते हैं कि जब लोलक दोलन करता है तो किसी भी स्थिति में उसकी ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है।
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गोलक धीरे-धीरे विराम अवस्था में आ जाता है इसका कारण यह है कि लोलक के आधार बिन्दु पर घर्षण तथा वायु के प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का क्षय होता रहता है। इस प्रकार गतिशील लोलक की आरंभिक यांत्रिक ऊर्जा का घर्षण के कारण ऊष्मा में क्षय होता रहता है अंततः लोलक विराम अवस्था में आ जाता है।

प्रश्न 16.
m द्रव्यमान का एक पिण्ड एक नियत वेग v से गतिशील है। पिण्ड पर कितना कार्य करना चाहिए कि यह विराम अवस्था में आ जाये?
हल-
वस्तु का द्रव्यमान = m
वस्तु का प्रारंभिक वेग = v,
वस्तु का अन्तिम वेग = 0
वस्तु पर किया गया कार्य = वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन = अन्तिम गतिज ऊर्जा – प्रारंभिक गतिज ऊर्जा
= [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] m x (0)² – [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
= 0 – [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² = [latex]\frac { -1 }{ 2 }[/latex] mv²
ऋणात्मक चिन्ह यह प्रदर्शित करता है कि किया गया कार्य वस्तु की गति की दिशा के विपरीत है।

प्रश्न 17.
1500 kg द्रव्यमान की कार को जो 60 km/h के वेग से चल रही है, रोकने के लिए किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
हल-
द्रव्यमान m = 1500 kg
वेग v = 60 km/h = [latex]\frac { 60 x 1000 m }{ 3600 s }[/latex] = 16.67 m/s
गतिज ऊर्जा = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
= [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x 1500 kg x (16.67 m/s)² = 208416.67 J

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प्रश्न 18.
निम्न में से प्रत्येक स्थिति में m द्रव्यमान के एक पिण्ड पर एक बल F लग रहा है। विस्थापन की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर है जो एक लंबे तीर से प्रदर्शित की गई है। चित्रों को ध्यानपूर्वक देखिए और बताइए कि किया गया कार्य ऋणात्मक है, धनात्मक है। या शून्य है।
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उत्तर-
चित्र के (a) स्थिति में किए गए कार्य की मात्रा शून्य है, क्योंकि बल विस्थापन के लंबवत् कार्य करता है।
θ कोण पर किया गया कार्य = F x s x cos θ
W = F x s x cos 90°
W = F x s x 0 = 0 J
चित्र के (b) स्थिति में किया गया कार्य धनात्मक है, क्योंकि वस्तु का विस्थापन आरोपित बल की दिशा में होता है।
चित्र के (c) स्थिति में किया गया कार्य ऋणात्मक है, क्योंकि आरोपित बल की विपरीत दिशा में वस्तु का विस्थापन होता है।

प्रश्न 19.
सोनी कहती है कि किसी वस्तु पर त्वरण शून्य हो सकता है, चाहे उस पर कई बल कार्य कर रहे हों। क्या आप सहमत हैं? बताइए क्यों?
उत्तर-
हाँ, हम उससे सहमत हैं। चाहे वस्तु पर कई बल लगे रहें, परंतु यदि वे बल परस्पर संतुलित हैं तो वस्तु पर परिणामी बल शून्य होगा।
तब समीकरण F = ma के अनुसार वस्तु का त्वरण = [latex]\frac { F }{ m }[/latex] (चूँकि F = 0) भी शून्य होगा।)

प्रश्न 20.
चार युक्तियाँ जिनमें प्रत्येक की शक्ति 500 w है 10 घंटे तक उपयोग में लाई जाती हैं। इनके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा kWh में परिकलित कीजिए।
हल-
प्रत्येक युक्ति की शक्ति P = 500 वाट = [latex]\frac { 500 }{ 1000 }[/latex] किलोवाट = 0.5 किलोवाट,
t = 10 घंटे
P = [latex]\frac { W }{ t }[/latex]
प्रत्येक युक्ति द्वारा व्यय ऊर्जा
(W) = P x t = 0.5 किलोवाट घंटे x 10 घंटे = 0.5 x 10 किलोवाट-घंटे
चार युक्तियों द्वारा उपयोग की गई कुल ऊर्जा = 4 x 5 = 20 किलोवाट-घंटा।

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प्रश्न 21.
मुक्त रूप से गिरता एक पिण्ड अंततः धरती तक पहुँचने पर रुक जाता है। इसकी गतिज ऊर्जा का क्या होता है?
उत्तर-
जब कोई वस्तु स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती है। तो उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती जाती है। जब वह भूतल से टकराती है तो संचित गतिज ऊर्जा का रूपातंरण, ऊष्मा, ध्वनि या अन्य रूप में हो जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(क) किसी पिण्ड पर F बल लगाकर उसे बल की दिशा से 8 कोण बनाते हुए d दूरी तक विस्थापित किया गया है। बल द्वारा किये गये कार्य का व्यंजक लिखिए।
(ख) यदि विस्थापन की दिशा बल के लम्बवत् हो तो कार्य कितना होगा?
उत्तर-
(क) कार्य w = F.d. cos θ
(ख) कार्य (W) = F.d.cos 90° = 0 (cos 90° = 0)

प्रश्न 2.
S.I. पद्धति में सामर्थ्य तथा स्थितिज ऊर्जा। के मात्रक लिखिए।
उत्तर-
सामर्थ्य का मात्रक-वाट (watt); स्थितिज ऊर्जा का मात्रक-जूल (Joule)।

प्रश्न 3.
अश्व शक्ति (H.P.) किस राशि का मात्रक है? एक अश्व शक्ति में कितने वाट होते हैं?
उत्तर-
अश्व शक्ति मशीन की सामर्थ्य का मात्रक है।
1 अश्व-शक्ति (Horse-Power) = 746 वाट।

प्रश्न 4.
50 किलोग्राम भार के पिण्ड को उठाये एक व्यक्ति पृथ्वी पर क्षैतिज दिशा में चल रहा है। एक किलोमीटर तक जाने में उसके द्वारा पिण्ड पर किये गये। कार्य की गणना कीजिए।
उत्तर-
शून्य (मजदूर का विस्थापन गुरुत्व बल के लंबवत् है।)

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प्रश्न 5.
घड़ी में चाबी भरने पर स्प्रिंग में ऊर्जा किस रूप में एकत्रित हो जाती है?
उत्तर-
स्प्रिंग की प्रत्यास्थ-स्थितिज ऊर्जा

प्रश्न 6.
अधिकतम तथा न्यूनतम कार्य के लिए बल तथा विस्थापन की दिशाओं के बीच कितना कोण होना चाहिए?
उत्तर-
W = Fd cos θ (जहाँ θ बल एवं विस्थापन के बीच कोण है।)
W (अधिकतम) = F.d cos 0° = F.d (cos 0° = 1)
W (न्यूनतम) = F.d. cos 90° = 0 (cos 90° = 0)
अतः अधिकतम कार्य के लिए बल एवं विस्थापन के बीच कोण शून्य एवं न्यूनतम विस्थापन के लिए कोण 90° होना चाहिए।

प्रश्न 7.
यदि पिण्ड का वेग तीन गुना कर दिया जाय, तो पिण्ड की गतिज ऊर्जा कितनी गुनी हो जायगी?
हल-
K = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² यदि v = 3v
K = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] m (3v)² = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] m 9v² = 9.K
अर्थात् गतिज ऊर्जा 9 गुनी हो जायेगी।

प्रश्न 8.
यान्त्रिक कार्य अथवा कार्य से आप क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
अथवा
कार्य को परिभाषित कीजिए। इसको मात्रक भी लिखिए।
उत्तर-
यान्त्रिक कार्य अथवा कार्य (Mechanical work) – किसी पिण्छ पर लगे बल एवं बल की दिशा में विस्थापन के गुणनफल को यान्त्रिक कार्य या कार्य कहते है।
अर्थात् यान्त्रिक कार्य = बल x बल की दिशा में विस्थापन
कार्य का मात्रक – इसका मात्रक न्यूटन-मीटर अथवा जूल है।

प्रश्न 9.
यदि बल (F) एवं विस्थापन (S) के बीच कोण (θ) हो तो कार्य (W) के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर-
कार्य (W) = बल (F) x विस्थापन (S) cosθ

प्रश्न 10.
एक जूल कार्य को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
एक जूल कार्य-किसी वस्तु पर एक न्यूटन का बल लगाकर, उसे बल की दिशा में एक मीटर विस्थापित करने में किया गया कार्य एक जूल कार्य कहलाता है।

प्रश्न 11.
कार्य अदिश राशि है या सदिश?
उत्तर-
कार्य एक अदिश राशि है।

प्रश्न 12.
किसी वस्तु पर बल लगाने से बल की दिशा में वस्तु दूरी तय करती है तब बल और दूरी के गुणनफल को किस नाम से पुकारते हैं?
उत्तर-
अभीष्ट गुणनफल को यान्त्रिक कार्य या कार्य के नाम से पुकारते हैं।

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प्रश्न 13.
ऊर्जा क्या है? ऊर्जा का मात्रक लिखिए।
अथवा
ऊर्जा से क्या समझते हो ? ऊर्जा का मात्रक लिखिए।
उत्तर-
ऊर्जा (Energy) – किसी वस्तु द्वारा कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।
ऊर्जा का मात्रक – इसका मात्रक जूल’ या न्यूटन-मीटर’ है।

प्रश्न 14.
एक जूल ऊर्जा से क्या समझते हो?
अथवा
एक जूल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
एक जूल (Joule) – किसी वस्तु पर एक न्यूटन का बल लगाकर उसे बल की दिशा में एक मीटर विस्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा एक जूल। कहलाती है।

प्रश्न 15.
यान्त्रिक ऊर्जा से क्या समझते हो?
अथवा
यान्त्रिक ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर-
यान्त्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) – किसी निकाय की सम्पूर्ण ऊर्जाओं के योग को उस निकाय की यान्त्रिक ऊर्जा कहते हैं।

The kinetic energy (KE) of an object is the energy that it possesses due to its motion. Use our online kinetic energy calculator to calculate KE in Joules.

प्रश्न 16.
यान्त्रिक ऊर्जा कितने प्रकार की होती है? उनके नाम लिखिए।
उत्तर-
यान्त्रिक ऊर्जा के प्रकार-यान्त्रिक ऊर्जा निम्नलिखित दो प्रकार की होती है

  1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
  2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

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प्रश्न 17.
किलोवाट घण्टा और जूल में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर-
1 किलोवाट घण्टा = 3.6 x 106 जूल।

प्रश्न 18.
ऊर्जा अदिश राशि है या सदिश?
उत्तर-
ऊर्जा एक अदिश राशि है।

प्रश्न 19.
स्थितिज ऊर्जा को परिभाषित कीजिए।
अथवा
वस्तु की स्थितिज ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
अथवा
स्थितिज ऊर्जा से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर-
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) – किसी वस्तु में उसकी विशेष स्थिति अथवा आकार के कारण जो कार्य करने की क्षमता होती है, उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
स्थितिज ऊर्जा का मात्रक – इसका मात्रक जूल’ है।

प्रश्न 20.
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा के लिए सूत्र (व्यंजक) लिखिए।
अथवा
h ऊँचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कितनी होगी?
उत्तर-
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा = mgh.

प्रश्न 21.
गतिज ऊर्जा को परिभाषित कीजिए।
अथवा
वस्तु की गतिज ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
अथवा
गतिज ऊर्जा से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर-
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)- किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की क्षमता को गतिज ऊर्जा कहते हैं।
गतिज ऊर्जा का मात्रक – इसका मात्रक जूल’ या न्यूटन-मीटर है।

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प्रश्न 22.
गतिज ऊर्जा के लिए सूत्र (व्यंजक) लिखिए।
अथवा
v वेग से गतिमान m द्रव्यमान की वस्तु में कितनी गतिज ऊर्जा होगी?
उत्तर-
गतिज ऊर्जा = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv².

प्रश्न 23.
किसी वस्तु की संहति दोगुनी करने पर या उसका वेग दोगुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा किस स्थिति में अधिक प्रभावित होगी और क्यों?
उत्तर-
उसका वेग दोगुना करने पर। संहति दोगुनी करने पर गतिज ऊर्जा दोगुनी होगी जबकि वेग दोगुना करने पर गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जायेगी।

प्रश्न 24.
यदि किसी पिण्ड का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा किस प्रकार प्रभावित होगी?
उत्तर-
यदि किसी पिण्ड का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा पहले की दोगुनी हो जायेगी, क्योंकि गतिज ऊर्जा द्रव्यमान के समानुपाती होती है।

प्रश्न 25.
यदि किसी पिण्ड का वेग आधा कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा किस प्रकार प्रभावित होगी?
उत्तर-
यदि किसी पिण्ड का वेग आधा कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा पहले की [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] (चौथाई) रह जायेगी, क्योंकि गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है।

प्रश्न 26.
ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखिए।
उत्तर-
ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Energy) – किसी निकाय की ‘ सम्पूर्ण ऊर्जाओं का योग सदैव नियत रहता है।

प्रश्न 27.
समान द्रव्यमान की वस्तुएँ A तथा B पृथ्वी से क्रमशः 5 मीटर तथा 7 मीटर ऊँचाई पर हैं। बताइए किस वस्तु में स्थितिज ऊर्जा का मान अधिक होगा?
उत्तर-
A की अपेक्षा अधिक ऊँचाई पर स्थित होने के कारण B की स्थितिज ऊर्जा अधिक होगी (स्थितिज ऊर्जा = mgh)

प्रश्न 28.
सामर्थ्य का मात्रक क्या होता है? एक सामान्य व्यक्ति की सामर्थ्य कितनी होती है?
उत्तर-
सामर्थ्य को मात्रक – M.K.S. पद्धति में जूल. सेकण्ड या वाट होता है।
अन्य मात्रक हॉर्स पावर (H.P) है।
1 हार्स पॉवर = 746 वाटं
एक सामान्य व्यक्ति की सामर्थ्य 0.05 से 0.10 अश्व सामर्थ्य तक होती है।

प्रश्न 29.
m किग्रा का पिण्ड v मीटर-सेकण्ड 1 की चाल से गतिमान है। पिण्ड की गतिज ऊर्जा क्या होगी?
उत्तर-
गतिज ऊर्जा Ek = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² जूल।

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प्रश्न 30.
E = mc² में c किस भौतिक राशि का प्रतीक है?
उत्तर-
निर्वात में विद्युत-चुम्बकीय तरंगों (जैसे प्रकाश) की चाल का c = 3 x 108 मी से-1

प्रश्न 31.
यदि 1 जूल कार्य 1 सेकण्ड में किया जाय तो कर्ता की सामर्थ्य क्या होगी?
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प्रश्न 32.
1 वाट की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
यदि कोई वस्तु 1 सेकण्ड में 1 जूल कार्य करती है तो
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प्रश्न 33.
किलोवाट-घंटा’ किस भौतिक राशि का मात्रक है?
उत्तर-
किलोवाट घंटा’ ऊर्जा अथवा कार्य का मात्रक है।

प्रश्न 34.
1 किलोवाट घण्टा का अर्थ समझाइए। 1 किलोवाट घंटा’ का मान जूल में लिखिए।
उत्तर-
1 किलोवाट घंटा = 1000 x 1 वाट x 1 घंटा = 1000 x 1 वाट x 3600 सेकण्ड = 3.6 x 106 जूल।

प्रश्न 35.
निम्नलिखित में से अदिश तथा सदिश राशियाँ चुनिए-
कार्य, संवेग, गतिज ऊर्जा, सामर्थ्य, बल
उत्तर-
अदिश- कार्य, सामर्थ्य, गतिज ऊर्जा
सदिश- संवेग, बल।

प्रश्न 36.
निम्नलिखित में किस प्रकार का ऊर्जा रूपान्तरण होता है
(i) विद्युत बल्ब,
(ii) मोमबत्ती,
(iii) पेट्रोल इंजन,
(iv) टार्च में प्रयुक्त सेल।
उत्तर-
(i) विद्युत बल्ब – विद्युत ऊर्जा → प्रकाश, ऊष्मीय ऊर्जा।
(ii) मोमबत्ती – रासायनिक ऊर्जा → प्रकाश, ऊष्मीय ऊर्जा।
(iii) पेट्रोल इंजन – पेट्रोल की रासायनिक ऊर्जा → ऊष्मा → यांत्रिक ऊर्जा।
(iv) टार्च में प्रयुक्त सेल – रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा → प्रकाश, ऊष्मा।

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प्रश्न 37.
जैव पदार्थ से ऊर्जा प्राप्त करने का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
गोबर → गोबर गैस की रासायनिक ऊर्जा (मेथेन) → ऊष्मा, प्रकाश।

प्रश्न 38.
एक टुक तथा एक कार दोनों 50 किमी-घण्टा की समान चाल से गतिशील हैं। किसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी?
उत्तर-
ट्रक की गतिज ऊर्जा अधिक होगी।

प्रश्न 39.
यांत्रिक ऊर्जा के दो स्वरूप लिखिए तथा यांत्रिक संरक्षण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
यांत्रिक ऊर्जा के स्वरूप-
(i) स्थितिज ऊर्जा,
(ii) गतिज ऊर्जा।
उदाहरण-
(i) सरल लोलक द्वारा आवर्त गति करना।
(ii) किसी ऊँचाई से गिरती हुई वस्तु में स्थितिज ऊर्जा

प्रश्न 40.
1 जूल कार्य से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
जब 1 न्यूटन का बल लगाकर वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित किया जाय तो किया गया कार्य 1 जूल होगा।

प्रश्न 41.
जब माइक्रोफोन के सामने बोला जाता है तो कौन-सी ऊर्जा किस रूप में परिवर्तित होती है?
उत्तर-
ध्वनि ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा।

प्रश्न 42.
वृत्ताकार मार्ग पर घूमता पिण्ड एक चक्कर पूरा करने में कितना कार्य करेगा?
उत्तर-
वृत्ताकार मार्ग पर एक चक्कर पूरा करने में विस्थापन शून्य होगा। अत: किया गया कार्य भी शून्य होगा।

प्रश्न 43.
यदि किसी वस्तु का विस्थापन उस पर लगे बल से 90° का कोण बनाता है तो बल द्वारा कितना कार्य किया गया?
उत्तर-
शून्य।

प्रश्न 44.
कार्य की परिभाषा एवं मात्रक लिखिए।
उत्तर-
बल लगाकर किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करने की क्रिया को कार्य कहते हैं। कार्य का मात्रक न्यूटन मीटर या जूल होता है।

प्रश्न 45.
एक अश्व-शक्ति में कितने वाट होते हैं?
उत्तर-
एक अश्व शक्ति = 746 वाट।

प्रश्न 46.
एक कार तथा एक बस दोनों 70 किमी घण्टा-1 की चाल से गतिमान हैं। किसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी?
उत्तर-
बस की गतिज ऊर्जा अधिक होगी।

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प्रश्न 47.
प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
प्रत्यास्थ बलों के कारण वस्तुओं में निहित ऊर्जा को प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्य’ को व्यापक सूत्र लिखिए तथा स्पष्ट कीजिए कि वृत्ताकार पथ पर समान चाल से गतिमान पिण्ड द्वारा किया गया कार्य शून्य क्यों होता है?
उत्तर-
कार्य का व्यापक सूत्र-यदि बल एवं विस्थापन की दिशायें समान न हों अर्थात् बल एवं विस्थापन एक-दूसरे से किसी कोण पर कार्य कर रहे हों, जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है, तो कार्य की गणना करने के लिए विस्थापन का वह घटक लेना होगा जो बल की दिशा में हो।
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वस्तु का विस्थापन A से B तक हुआ परन्तु विस्थापन L की दिशा तथा बल F की दिशा एक-दूसरे से θ कोण बनाती हैं, अतः बल (F) की दिशा में L का घटक AC होगा जिसका मान L cos θ है। अतः बल F द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य w = FL cosθ
उपर्युक्त सूत्र के अनुसार यदि बल (F) एवं विस्थापन (L) परस्पर लम्बवत् हों अर्थात् θ = 90° हो तो कार्य W = F.L. cos 90° = F.L. x 0 = 0.
वृत्ताकार मार्ग पर घूमते हुए किसी पिण्ड का विस्थापन तो होता है परन्तु घूमने के लिए लग रहे अभिकेन्द्र बल की दिशा केन्द्र की ओर है, जो विस्थापन के लम्बवत् है।
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अतः वृत्ताकार गति में किया गया कार्य शून्य होता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित राशियों के S.I. मात्रक निगमित कीजिए। इन राशियों में क्या अन्तर है?
(i) कार्य,
(ii) सामर्थ्य।
उत्तर-
(i) कार्य = बल x बल की दिशा में विस्थापन
कार्य का मात्रक = बल का मात्रक x विस्थापन का मात्रक
S.I. पद्धति में कार्य का मात्रक = न्यूटन x मीटर = किग्रा मी/से2 x मी = किग्रा.मी से-2
S.I. पद्धति में कार्य को मात्रक न्यूटन-मीटर, जिसे जूल (Joule) कहते हैं।
यह उस कार्य के बराबर होगा जो 1 न्यूटन बल लगाने पर वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित करता है।
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किसी कर्ता द्वारा किये गये प्रति एकांक समय कार्य को सामर्थ्य कहते हैं। परिभाषा से यह अन्तर स्पष्ट है।

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प्रश्न 3.
सामर्थ्य किसे कहते हैं? कार्य तथा सामर्थ्य में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
सामर्थ्य (Power) – कार्य किये जाने की समय दर को सामर्थ्य अथवा शक्ति कहते हैं।
कार्य तथा सामर्थ्य में सम्बन्ध (Relation between Work and Power) – यदि किसी मशीन द्वारा W कार्य के समय में संपादित किया जाय, तो
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प्रश्न 4.
(a) किसी गतिमान पिण्ड की गतिज ऊर्जा किन कारकों पर किस प्रकार निर्भर करती है? आवश्यक सूत्र देकर बताइए।
उत्तर-
द्रव्यमान m के पिण्ड का वेग यदि v हो, तो पिण्ड की गतिज ऊर्जा Ek = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² होती है।
अतः पिण्ड की गतिज ऊर्जा
(i) पिण्ड के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती (Ek ∝ m),
तथा
(ii) पिण्ड के वेग के अनुक्रमानुपाती (Ek ∝ v²) होती है।

प्रश्न 4.
(b) यांत्रिक ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? यह कितने प्रकार की होती है?
उत्तर-
यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)- किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा के योग को उस वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं। यह दो प्रकार की होती है-

  1. गतिज ऊर्जा
  2.  स्थितिज ऊर्जा।

प्रश्न 5.
एक पिण्ड को किसी वेग से ऊपर की ओर फेंकने पर वह कुछ समय बाद वापस पृथ्वी पर लौट आता है। इस पूरी प्रक्रिया में पिण्ड की ऊर्जा में होने वाले रूपान्तरण को स्पष्ट कीजिए। (गणितीय विवेचना आवश्यक नहीं)।
उत्तर-
पृथ्वी तल पर पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा शून्य मान लेने पर पिण्ड को फेंकते समय उसकी गतिज ऊर्जा [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² तथा स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है। जैसे-जैसे पिण्ड ऊपर उठता है उसका वेग (v) घटता जाता है तथा पृथ्वी तल से ऊँचाई (h) बढ़ती जाती है- अतः पिण्ड की गतिज ऊर्जा ([latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²) में कमी तथा स्थितिज ऊर्जा (mgh) में वृद्धि होती जाती है अर्थात् गतिज ऊर्जा का रूपांतरण गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में होता जाता है।

अधिकतम ऊँचाई H पर पिण्ड एक क्षण के लिए रुक जाता है (v = 0), अतः इस स्थिति में पिण्ड की समस्त गतिज ऊर्जा का स्थितिज ऊर्जा में (UPBoardSolutions.com) रूपांतरण हो जाता है।
अब नीचे गिरते समय ऊँचाई (h) के घटने तथा वेग (v) के बढ़ने के कारण स्थितिज ऊर्जा घटती तथा गतिज ऊर्जा बढ़ती जाती है-अर्थात् गुरुत्वीय-स्थितिज ऊर्जा का रूपांतरण गतिज ऊर्जा में होता जाता है।
पृथ्वी पर वापस पहुँचने पर स्थितिज ऊर्जा पुनः शून्य तथा गतिज ऊर्जा है [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² हो जाती है।
इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में पिण्ड की संपूर्ण यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) अचर रहती है।

प्रश्न 6.
ऊर्जा-रूपान्तरण से क्या तात्पर्य है? इसके तीन उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
किसी प्रक्रिया में ऊर्जा के एक स्वरूप से दूसरे स्वरूप में परिवर्तन को ऊर्जा-रूपान्तरण कहते हैं। इसके कुछ उदाहरण निम्नवत् हैं-
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प्रश्न 7.
आइन्सटीन का द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण लिखिए तथा इसका अर्थ समझाइए।
उत्तर-
आइन्सटीन के समीकरण के अनुसार, E = mc²
जबकि m किसी कण या पिण्ड का द्रव्यमान तथा E वह ऊर्जा है जो पिण्ड के द्रव्यमान का ऊर्जा में रूपान्तरण होने से प्राप्त होती है।
c = निर्वात में प्रकाश की चाल (3 x 108 मीटर सेकण्ड-1) है।
उदाहरणतः यदि 1 किलोग्राम द्रव्यमान का ऊर्जा में परिवर्तन हो तो उससे प्राप्त ऊर्जा
E = 1 किग्रा. x (3 x 108 मी. से-1)2 = 9 x 1016 जूल होगी।

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प्रश्न 8.
जल-विद्युत उत्पादन गृह में किसी बाँध में एकत्र जल से विद्युत ऊर्जा उत्पादन के विभिन्न चरणों में होने वाले ऊर्जा-रूपान्तरण बताइए।
उत्तर-
(i) बाँध में एकत्र जल नीचे गिरने में गति प्राप्त करता है। इसमें जल में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण जल की गतिज ऊर्जा में होता है।
(ii) गतिमान जल टरबाइन के ब्लेडों से टकराकर उन्हें चलाती है तथा ब्लेड टरबाइन से जुड़े विद्युत-जेनरेटर में लगे आर्मेचर–कुंडली के घूमने से कुंडी को गतिमान करते (घुमाते) हैं। इस चरण में जल की गतिज ऊर्जा, टरबाइन की तथा अन्ततः जेनरेटर के आर्मेचर की (UPBoardSolutions.com) गतिज ऊर्जा में बदलती है।
(iii) आर्मेचर-कुंडली के घूमने से कुंडली के सिरों पर विद्युत-वाहक बल उत्पन्न होता है। इस चरण में आर्मेचर की गतिज ऊर्जा का रूपान्तरण विद्युत-स्थितिज ऊर्जा में होता है।
(iv) जेनरेटर बाह्य परिपथ में धारा प्रवाहित करता है। इस चरण में जेनरेटर की विद्युत-स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा में होता है-जो विद्युत ऊर्जा का उपयोगी स्वरूप है।

प्रश्न 9.
यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लेख कीजिए। सिद्ध कीजिए कि किसी निश्चित ऊँचाई से गुरुत्व बल के अन्तर्गत गिरते हुए पिण्ड के लिए पथ के प्रत्येक बिन्दु पर गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा का योग नियत रहता है।
अथवा
ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखिए तथा व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
यान्त्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम (Mechanical Energy Conservation of Law) – यदि किसी वस्तु से ऊष्मा अथवा विकिरणों के रूप में ऊर्जा की हानि न हो, तो वस्तु की यान्त्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) अचर बनी रहती है।
शेष प्रश्न के लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 5 का अवलोकन करें।

प्रश्न 10.
ऊर्जा के मात्रक किलोवाट-घण्टा’ का मान जूल में निगमित कीजिए।
उत्तर-
परिभाषानुसार,
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अथवा कार्य = सामर्थ्य x समय
यदि सामर्थ्य का मात्रक वाट तथा समय का मात्रक घंटा’ लिया जाय तो
कार्य का मात्रक = 1 वाट x 1 घंटा = 1 वाट-घंटा
अब 1 किलोवाट घंटा = 1 x 108 वाट-घंटा = 1 वाट x 1 घंटा x 103 = 1 वाट x 3600 सेकण्ड x 103 = 3600 x 103 वाट x सेकण्ड
परन्तु 1 वाट x सेकण्ड = 1 जूल
1 किलोवाट घंटा = 3600 x 103 जूल
1 किलोवाट घंटा = 3.6 x 106 जूल।

प्रश्न 11.
एक कार समतल क्षैतिज सड़क पर एक-समान वेग से गति कर रही है। क्या कार द्वारा कोई कार्य किया जा रहा है? यदि हाँ, तो किन बलों के कारण?
उत्तर-
समान वेग बनाये रखने के लिए कार को घर्षण बल के विरुद्ध, सड़क पर बल लगाना पड़ता है। कार का विस्थापन उस पर लगे क्षैतिज बाह्य-बल (घर्षण) की विपरीत दिशा में होता है। अतः कार द्वारा सड़क पर, कार्य किया जा रहा है।
(कार के कार्य की गणना कार द्वारा सड़क पर लगाये बल के अनुसार होगी, न कि कार पर लगे बलों से)

प्रश्न 12.
एक व्यक्ति 20 किग्रा का बोझ लेकर जीने से चढ़ता हुआ 20 सेकण्ड में छत पर पहुँच जाता है। दूसरा व्यक्ति उतने ही बोझ को लेकर उसी छत पर 30 सेकण्ड में पहुँच पाता है। दोनों व्यक्तियों के अपने भार बराबर हैं। कारण देते हुए बताइए
(i) क्या दोनों व्यक्तियों ने बराबर कार्य किया?
(ii) क्या दोनों की सामर्थ्य बराबर है?
उत्तर-
(i) हाँ, चूँकि व्यक्तियों के बोझ के द्रव्यमान एवं विस्थापन समान हैं। अतः उनके द्वारा सम्पादित कार्य भी समान होंगे।
(ii) पहले व्यक्ति ने कार्य करने में 20 सेकण्ड लिए। परन्तु दूसरे व्यक्ति ने वही कार्य करने में 30 सेकण्ड लिए।
अत: P ∝ [latex]\frac { 1 }{ t }[/latex] से पहले व्यक्ति की सामर्थ्य अधिक है।

प्रश्न 13.
कहा जाता है कि कार्य केवल गतिज ऊर्जा द्वारा किया जाता है, स्थितिज ऊर्जा द्वारा नहीं। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कार्य सम्पन्न होने के लिए वस्तु का विस्थापन आवश्यक है तथा विस्थापन तभी होता है जब वस्तु में गति हो। अतः वही वस्तु कार्य कर सकती है जिसमें गतिज ऊर्जा हो। जिस वस्तु में स्थितिज ऊर्जा है, उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन आवश्यक है।
उदाहरणतः ऊँचाई पर स्थित हथौड़े में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा है, परन्तु यह किसी वस्तु को तोड़ने का कार्य तभी कर सकता है जब यह गतिमान होकर वस्तु पर गिरे अर्थात् स्थितिज ऊर्जा का परिवर्तन हथौड़े की गतिज ऊर्जा में हो जाय।

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प्रश्न 14.
दो प्रोटॉन एक-दूसरे से कुछ दूरी पर स्थित हैं। यदि उन्हें परस्पर समीप लाया जाय तो उनकी स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि होगी या कमी, कारण देते हुए बताइए।
उत्तर-
प्रोटॉन धन आवेशित होते हैं। अतः एक-दूसरे के निकट रखे दो प्रोटॉन एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। उन्हें एक-दूसरे के पास लाने में उनका विस्थापन उन पर लगे बलों के विपरीत होता है। अतः इस क्रिया में प्रोटॉनों पर कार्य किया जाता है। यह कार्य प्रोटॉनों में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है। अतः प्रोटॉनों की विद्युत-स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि होती है।
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(टिप्पणी-यदि प्रोटॉन एक-दूसरे से दूर हटें तो बल एवं विस्थापन एक ही दिशा में होने के कारण प्रोटॉन कार्य करेंगे। इसमें उनमें संचित ऊर्जा व्यय होगी तथा स्थितिज ऊर्जा घट जायेगी।)

प्रश्न 15.
यदि किसी पिण्ड की गतिज ऊर्जा 16 गुनी बढ़ा दी जाय तो ज्ञात कीजिए कि उसका संवेग कितने गुना बढ़ेगा या घटेगा?
उत्तर-
यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान m तथा वेग v हो तो उसका संवेग p = mv तथा गतिज ऊर्जा
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प्रश्न 16.
यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण के आधार पर सिद्ध कीजिए कि भूमि से ऊँचाई h से स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने वाले पिण्ड का भूमि से टकराने का वेगः √2gh होता है।
उत्तर-
माना m द्रव्यमान की वस्तु h मीटर ऊँचाई पर स्थित है और विरामावस्था में है ऐसी दशा में उसकी स्थितिज ऊर्जा U = mgh
तथा गतिज ऊर्जा = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mu² = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] m x 0 चूँकि u = 0
संपूर्ण यांत्रिक ऊर्जा E = K + U = 0 + mgh
यदि वायु के घर्षण द्वारा ऊर्जा का क्षय शून्य हो, तो पृथ्वी पर पहुँचते समय पृथ्वी से ऊँचाई = 0
U = mg x 0 = 0
और वेग यदि v मान लें तो वस्तु की गतिज ऊर्जा
K = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा, E = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² + 0
यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण के नियमानुसार, वस्तु की सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा प्रारम्भिक अवस्था से गिरते समय = वस्तु की सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा पृथ्वी पर पहुँचते समय
mgh = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
v² = 2gh
v = √2gh [दोनों पक्षों को वर्गमूल लेने पर]

प्रश्न 17.
दो पिण्डों के द्रव्यमान m1 तथा m2 हैं तथा उनके संवेग समान हैं। यदि उनकी गतिज ऊर्जा क्रमशः E1 एवं E2 हो तो E1 : E2 कितना होगा?
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प्रश्न 18.
एक पिण्ड पर बल लगाकर उसे विस्थापित किया जाता है। समझाइए
(i) पिण्ड पर किस दिशा में बल लगाने पर अधिकतम कार्य होगा?
(ii) पिण्ड पर किस दिशा में बल लगाने पर कार्य शून्ये होगा?
उत्तर-
(i) पिण्ड पर बल विस्थापन की दिशा में लगे तो कार्य अधिकतम होगा।
(ii) पिण्ड पर बल विस्थापन के लम्बवत् लगे तो कार्य शून्य होगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्य’ से क्या तात्पर्य है? इसे किस प्रकार नापा जाता है? आवश्यक सूत्र का निगमन कीजिए तथा कार्य का S.I. मात्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
कार्य की परिभाषा (Definition of work) – सामान्य भाषा में कार्य का अर्थ किसी क्रिया के सम्पादन से होता है। जब कोई व्यक्ति खेत में हल चलाता है, चक्की से आटा पीसता है, लकड़ी चीरता है या ढेकली से खेत में पानी देता है, पुस्तक पढ़ता है या उसका मनन करता है, तो सामान्य भाषा में यह कहा जाता है कि व्यक्ति कार्य कर रहा है, परन्तु भौतिकी में कार्य का विशेष अर्थ है जो निम्नवत् है-
बल लगाकर किसी वस्तु को बल की (UPBoardSolutions.com) दिशा में । विस्थापित करने की क्रिया को ही कार्य कहते हैं। अर्थात् कार्य होने के लिए (i) बल तथा (ii) बल की दिशा । में विस्थापन दोनों आवश्यक हैं। यदि बल लगाने से वस्तु में विस्थापन उत्पन्न न हो या विस्थापन तो उत्पन्न हो परन्तु बल की दिशा में विस्थापन न हो, तो भौतिकी में यही कहा जायेगा कि कार्य नहीं हो रहा है।

कार्य की माप (Measurement of work) – स्पष्ट है कि यदि विभिन्न द्रव्यमान की वस्तुयें मेज पर पड़ी हों और उनमें से प्रत्येक को एक निश्चित ऊँचाई तक उठाना हो तो इस निश्चित विस्थापन को उत्पन्न करने के लिए उन पर लगाये गये बल का मान वस्तुओं के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होगा तथा जिस वस्तु को विस्थापित करने में अधिक बल लगाना पड़ेगा उस वस्तु पर किया गया कार्य भी उसी अनुपात में अधिक होगा।
अतः किसी वस्तु को एक निश्चित दूरी तक विस्थापित करने में किया गया कार्य वस्तु पर लगाये गये बल के अनुक्रमानुपाती होता है।
कार्य (W) ∝ बल (F) …(i)

अब यदि एक ही वस्तु को बल लगाकर विस्थापित किया जाता हो तो जितना अधिक विस्थापन होगा उसी अनुपात में किया गया कार्य भी अधिक होगा। पानी से भरी एक बाल्टी को जितनी अधिक ऊँचाई पर ऊपर ले जाना होगा उतना ही अधिक कार्य बाल्टी पर करना होगा।
अत: समान बल लगाकर किसी वस्तु को विस्थापित करने में किया गया कार्य विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होगा।
कार्य (W) ∝ विस्थापन (d) …(ii)
अतः समीकरण (i) एवं (ii) से
कार्य (W) ∝ F (बल) x d (विस्थापन) …(iii)
W = K.F.d (जहाँ K एक समानुपाती स्थिरांक है।)
यदि कार्य का मात्रक इस प्रकार चुना जाय कि एकांक बल लगाने पर एकांक विस्थापन होने से कार्य भी एकांक हो अर्थात्
जब F = 1 तथा d = 1 तो W = 1
तब उपर्युक्त समीकरण (iii) से,
W = K.F.d या,
1 = K.1.1.
या, K = 1
अतः W = F x d.
अर्थात् कार्य = बल x बल की दिशा में विस्थापन
कार्य का मात्रक (Unit of Work) :
कार्य = बले x विस्थापन
कार्य को मात्रक = बल को मात्रक x विस्थापन का मात्रक
S.I. पद्धति में बल का मात्रक न्यूटन तथा विस्थापन का मात्रक मीटर है।
अतः कार्य का मात्रक = 1 न्यूटन x मीटर = 1 न्यूटन-मीटर।
S.I. पद्धति में कार्य के मात्रक न्यूटन-मीटर को जूल (joule) कहते हैं। जूल को संकेताक्षर J से प्रदर्शित करते है।
अतः 1 जूल का कार्य उस समय होगा जब एक न्यूटन का बल लगाकर वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित किया जाता है।

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प्रश्न 2.
ऊर्जा’ का क्या अर्थ है? ऊर्जा तथा कार्य में सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
ऊर्जा – प्रतिदिन की बोलचाल की भाषा में हम सभी लोग ऊर्जा शब्द का प्रयोग करते हैं और उसके अर्थ को समझते हैं। दिनभर एक मजदूर शारीरिक कार्य करता है और शाम को थक जाने पर उसकी ऊर्जा कम हो जाती है। जिसको वह आराम करके तथा भोजन करके पुनः प्राप्त कर लेता है। अक्सर हम कहते हैं कि एक गिलास सन्तरे या गन्ने के रस में बड़ी ऊर्जा है। बीमार पड़ जाने पर टॉनिकों का प्रयोग करके ऊर्जा प्राप्त की जाती है। इस प्रकार भोजन करने, फलों के रस या टॉनिकों को लेने से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे हमें पुनः काम करने की क्षमता प्राप्त हो जाती है। इसी प्रकार कोयला, पेट्रोल, लकड़ी आदि अनेक इस प्रकार के ईंधन हैं। जिनसे मशीनों को कार्य करने की क्षमता प्राप्त होती है। अत: ऊर्जा एक ऐसा कारक (factor) है जो कार्य करने के लिए आवश्यक है।

जब किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता होती है। तो कहा जाता है कि वस्तु में ऊर्जा है।
ऊर्जा की कोई मौलिक परिभाषा नहीं दी (UPBoardSolutions.com) जा सकती। केवल यही कहा जा सकता है कि जिस कारण से किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता रहती है उसे ऊर्जा कहते हैं।

उदाहरणतः गिरते हुए हथौड़े, चलती हुई बन्दूक की गोली, उच्च दाब पर अथवा तेज बहती हुई वायु, ऊँचाई पर रखा अथवा तेज गति से बहते झरने का जल, ऊष्मा इंजन में जलवाष्प, विद्युत सेल आदि ऐसी वस्तुयें हैं जो कार्य कर सकती हैं अर्थात् वस्तुओं पर बल लगाकर उनका विस्थापन कर सकती हैं। अतः इनमें ऊर्जा है। स्पष्ट है कि ऊर्जा का मात्रक वही होगा जो कार्य का मात्रक है तथा कार्य की भाँति यह भी एक अदिश (Scalar) राशि है।

कार्य तथा ऊर्जा स्थानान्तरण (Work and Energy Transformation)-
हम जानते हैं कि बल लगाने में सदा दो वस्तुयें भाग लेती हैं- एक, जो बल लगा रही है तथा दूसरी, जिस पर बल लग रहा है जब किसी पत्थर के टुकड़े को हाथ से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो पत्थर पर बल हाथ द्वारा लगाया जा रहा है। पत्थर को उठाने का कार्य हाथ द्वारा किया गया है इस क्रिया में कार्य करने वाली वस्तु (हाथ) की ऊर्जा व्यय हुई और पत्थर, जिस पर कार्य किया गया उसको ऊर्जा प्राप्त हुई और उसकी ऊर्जा में वृद्धि हुई।

इसी प्रकार हॉकी का खिलाड़ी जब रुकी बाल (UPBoardSolutions.com) को स्टिक से हिट लगाकर आगे फेंकता है तो स्टिक द्वारा गेंद पर बल लगाया जाता है और स्टिक द्वारा गेंद पर कार्य किया जाता है जिससे गेंद की ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है। तथा हिट लगाने वाले की ऊर्जा का व्यय होता है। इस प्रकार ऊर्जा स्टिक से गेंद में स्थानान्तरित हो गयी। स्पष्ट है कि कार्य होने की क्रिया में ऊर्जा स्थानान्तरण होता है।

कार्य तथा ऊर्जा में सम्बन्ध – जब एक वस्तु दूसरी पर कार्य करती है तो कार्य करने वाली वस्तु की ऊर्जा को व्यय होता है तथा जिस पर कार्य किया जाता है उसकी ऊर्जा बढ़ जाती है। निकाय की सम्पूर्ण ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता। एक की जितनी ऊर्जा व्यय होती है। उतनी ही ऊर्जा की वृद्धि दूसरे की हो जाती है। ऊर्जा-स्थानान्तरण की माप किये गये कार्य से की जा सकती है।
स्थानान्तरित ऊर्जा = किया गया कार्य

प्रश्न 3.
गतिज ऊर्जा की परिभाषा लिखिए तथा किसी गतिमानवस्तुकी गतिज ऊर्जा का सूत्रनिगमित कीजिए।
अथवा
किसी पिण्ड का द्रव्यमान m एवं इसका वेग v है। सिद्ध कीजिए कि उसकी गतिज ऊर्जा [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² होगी।
उत्तर-
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) – किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की जो क्षमता होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा कहते है।
उदाहरणार्थ – पैडल चलाना बंद करने पर भी साइकिल, उस पर लगने वाले घर्षण बल के विरुद्ध कुछ दूरी तय कर सकती है। इस क्रिया में साइकिल घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करती है। उसकी यह गतिज ऊर्जा उसके द्वारा किये गये इस कार्य के बराबर होगी।

गतिज ऊर्जा का सूत्र (Formula of Kinetic Energy) – माना कि m द्रव्यमान की कोई वस्तु v वेग से गतिशील है और एक मंदक बल F लगाने पर वह s दूरी चलकर विरामावस्था में आ जाती है। इन क्रिया में वस्तु द्वारा जितना कार्य किया जायगा वही उसकी गतिज ऊर्जा होगी। चूँकि F बल के विरुद्ध s दूरी चलने में किया गया कार्य F.s होता है अतः उसकी गतिज (UPBoardSolutions.com) ऊर्जा का मान F.s होगा।
यदि मंदक बल F के कारण वस्तु में उत्पन्न मंदन a हो तो गति के तृतीय समीकरण के लिए वस्तु का प्रारंभिक वेग v, अंतिम वेग शून्य, त्वरण -q तथा चली गयी दूरी s है।
अतः
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प्रश्न 4.
स्थितिज ऊर्जा से क्या अर्थ है? स्थितिज ऊर्जा के विभिन्न स्वरूपों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर-
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) – किसी वस्तु में उसकी विशेष अवस्था अथवा स्थिति के करण, वस्तु में कार्य करने की जो क्षमता होती है उसे वस्तु की स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। इस ऊर्जा की माप उस कार्य से की जायगी जो वह वस्तु अपनी अवस्था विशेष से प्रारम्भिक सामान्य अवस्था में आने में कर सकती है।

स्थितिज ऊर्जा सापेक्ष रूप से ही नापी जाती है। वस्तु की प्रारम्भिक अवस्था कुछ भी मानी जा सकती है और स्थितिज ऊर्जा की माप उस अवस्था के सापेक्ष नापी जायेगी। यह आवश्यक नहीं है कि तनावरहित स्थिति को ही प्रारम्भिक स्थिति माना जाय। संपीडित अथवा तनी हुई अवस्था (UPBoardSolutions.com) को भी प्रारम्भिक स्थिति मानकर अन्य अवस्थाओं में पूर्व अवस्था के सापेक्ष स्थितिज ऊर्जा की माप की जा सकती है। भिन्न-भिन्न प्रारम्भिक अवस्थाओं के लिए एक विशेष अवस्था की स्थितिज ऊर्जा भिन्न-भिन्न होगी।

स्थितिज ऊर्जा के विभिन्न स्वरूप (Different Forms of Potential Energy)-
(i) प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy) – किसी संपीडित अथवा तनी हुई स्प्रिंग, तनी हुई कमान, खिंची हुई रबर की पट्टी, मुड़ी हुई धातु की छड़, संपीडित गैस आदि में उनकी प्रत्यास्थता (Elasticity) के गुण के कारण ऐसे बल उत्पन्न हो जाते हैं जो उन्हें सामान्य प्रारम्भिक अवस्था में लाने का प्रयास करते हैं। इन बलों को अन्य वस्तुओं पर आरोपित कराके कार्य किया जा सकता है।
अतः प्रत्यास्थ बलों के कारण वस्तुओं में निहित ऊर्जा को प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

(ii) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy) – जैसे ही किसी m द्रव्यमान का पिण्ड पृथ्वी की सतह से v वेग से ऊपर उठता है, गुरुत्वाकर्षण बल mg पिण्ड पर नीचे की ओर गति की दिशा के विरुद्ध, कार्य करने लगता है और इस बल के विरुद्ध वस्तु जब ऊपर उठती है तो उसका वेग घटने लगता है। जब इसका वेग v से घटकर v1 हो जाता है तो गतिज ऊर्जा [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² से घटकर [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv1² हो जाती है। इस गतिज ऊर्जा का परिवर्तन स्थितिज ऊर्जा के रूप में होता है जो पिण्ड में एकत्र हो जाती है।h ऊँचाई पर पहुँचकर जब वस्तु का वेग शून्य हो जाता है और गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है तो इस क्रिया में सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा को रूपान्तरण पिण्ड में स्थितिज ऊर्जा के रूप में (UPBoardSolutions.com) हो जाता है। इस क्रिया में पिण्ड में स्थितिज ऊर्जा उस पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने के कारण उत्पन्न हुई अत: इस ऊर्जा को गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
किसी स्थिति में वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उस कार्य से मापी जाती है जो उस वस्तु को किसी प्रारम्भिक स्थिति से उस स्थिति विशेष में गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध लाने में करना पड़ता है।
यदि पृथ्वी के तल को प्रारम्भिक स्थिति मान लिया। जाय (अर्थात् इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा शुन्य है) तो m द्रव्यमान के पिण्ड को x ऊँचाई तक गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध विस्थापित करने में पिण्ड पर किया गया कार्य = गुरुत्वीय बल x विस्थापन = (mg) x (x) = mgx
अब जब पिण्ड x ऊँचाई पर पहुँच जाता है तो पृथ्वी तल के सापेक्ष पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा mgx होगी तथा h ऊँचाई पर पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा mgh होगी।
गुरुत्वीय क्षेत्र में कोई वस्तु पृथ्वी तल से जितनी अधिक ऊँचाई पर स्थित होगी उतनी ही अधिक उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होगी, क्योंकि अधिक ऊँचाई से गिरने वाली वस्तुओं द्वारा अधिक कार्य किया जा सकता है।

(iii) वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrical Potential Energy) – जिस प्रकार पृथ्वी के गृरुत्वीय क्षेत्र में रखे किसी पिण्ड पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के। कारण उसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का समावेश हो जाता है, उसी प्रकार विद्युत क्षेत्र में यदि कोई आवेशित वस्तु रखी हो तो उस पर लगने वाले वैद्युत बलों के कारण वस्तुयें विस्थापित हो सकती हैं और उनमें कार्य करने की क्षमता का समावेश हो जाता है।
यह ऊर्जा वस्तु में विशेष अवस्था (वैद्युत क्षेत्र में स्थित होने) के कारण है
अतः इस ऊर्जा को वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

(iv) चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा (Magnetic Potential Energy) – चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित किसी गतिशील आवेश या धारावाही चालक पर चुम्बकीय बलों के कारण कार्य करने की जो क्षमता उत्पन्न होती है उसे चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा कहा जाता है।

(v) रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy) – पदार्थ में उसकी विशेष परमाणविक संरचना के कारण जो स्थितिज ऊर्जा निहित होती है उसे रासायनिक ऊर्जा कहते हैं। रासायनिक क्रियाओं में इस ऊर्जा का रूपान्तरण अन्य स्वरूप (ऊष्मा, प्रकाश, वैद्युत-ऊर्जा आदि) में होता है।

(vi) नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) – पदार्थ के मूल कणों (प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन) के परमाणुओं के नाभिक में रहने की विशेष अवस्था के कारण नाभिक (UPBoardSolutions.com) में जो स्थितिज ऊर्जा निहित रहती है उसे नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। परमाणु-बम, हाइड्रोजन बम, सूर्य तथा अन्य नक्षत्रों (stars) में नाभिकीय ऊर्जा का रूपान्तरण ऊष्मा, प्रकाश, यांत्रिक ऊर्जा आदि में होता है।

(vii) द्रव्यमान ऊर्जा (Mass Energy) – विभिन्न प्रकार की नाभिकीय प्रक्रियाओं में पदार्थ के द्रव्यमान का कुछ अंश ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है अर्थात् द्रव्यमान भी ऊर्जा का ही एक स्वरूप है। इसे दव्यमान ऊर्जा (Mass Energy) कहते हैं।

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प्रश्न 5.
ऊर्जा-संरक्षण’ का क्या अर्थ है? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर-
ऊर्जा का संरक्षण (Conservation of Energy) – विज्ञान के अध्ययन के फलस्वरूप ऊर्जा सम्बन्धी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण तथा व्यापक सिद्धान्त का पता चलता है। वह सिद्धान्त यह है कि ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में केवल परिवर्तन ही किया जा सकता है, ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है न ही नष्ट। इसे ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धान्त (Principle of Conservation of Energy) कहते हैं। इसके परिणामस्वरूप विश्व की समस्त प्रकार की ऊर्जा का कुल परिमाण स्थिर (constant) रहता है। इसका (UPBoardSolutions.com) तात्पर्य यह है कि यदि किसी क्रिया में किसी प्रकार की कुछ ऊर्जा लुप्त हो जाती है तो उतनी ही ऊर्जा किसी दूसरे रूप में उत्पन्न हो जाती है।
ऊर्जा – संरक्षण के उदाहरण (Examples of Conservation of Energy)
उदाहरण-
1. जब कोई पिण्ड किसी ऊँचाई से गिर रहा होता है तो उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (U = mgh) का मान h के निरन्तर घटते जाने से कम होता जाता है जबकि पिण्ड का वेग v बढ़ता जाता है।
अतः पिण्ड की गतिज ऊर्जा [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² बढ़ती जाती है। इस प्रकार पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण गतिज ऊर्जा में होता रहता है परन्तु गणितीय विवेचना द्वारा निम्न प्रकार यह सिद्ध किया जा सकता है कि पिण्ड की प्रत्येक स्थिति में उसकी गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा का योग अर्थात् उसकी सम्पूर्ण ऊर्जा नियत रहती है।
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मान लीजिए m द्रव्यमान की एक वस्तु पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर स्थित बिन्दु A पर विरामावस्था में है। क्योंकि A पर वस्तु का वेग शून्य है, इसलिए यहाँ इसकी गतिज ऊर्जा का मान शून्य होगा। अतः इस अवस्था में वस्तु की।
कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = 0 + mgh = mgh … (i)
अब मान लें वस्तु को उसकी प्रारम्भिक स्थिति से x दूरी नीचे बिन्दु B तक गिराया जाता है। गति के तीसरे समीकरण से B पर वस्तु में उत्पन्न वेग ७ निम्न समीकरण से दिया जायेगा-
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उपर्युक्त समीकरण (i), (ii) व (iii) से स्पष्ट है कि तीनों स्थितियों में वस्तु की कुल ऊर्जा सदैव स्थिर mgh रहती है। जब वस्तु पृथ्वी से टकरा जाती है तो उसकी कुल ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि तथा प्रकाश में बदल जाती है।
इसी प्रकार ऊपर की ओर फेंके गये पिण्ड में भी गतिज ऊर्जा का रूपान्तरण स्थितिज ऊर्जा में होता जाता है तथा प्रत्येक स्थिति में दोनों का योग नियत रहता है।

2. सरल लोलक की दोलन क्रिया में भी गोलक की विभिन्न स्थितियों में इसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में तथा गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में रूपान्तरित होती रहती है। यदि घर्षण का प्रभाव नगण्य माना जाय तो प्रत्येक स्थिति में दोनों प्रकार की ऊर्जाओं का योग नियत रहता है। ऊर्जा संरक्षण के कारण आदर्श स्थिति (घर्षण की अनुपस्थिति) में यह निरन्तर गति करता रहेगा परन्तु व्यवहार में इसकी ऊर्जा निलम्बन आधार तथा गोलक व वायु के बीच घर्षण के विरुद्ध कार्य करने में धीरे-धीरे व्यय होती रहती है। यह व्यय हुई ऊर्जा ऊष्मा में रूपान्तरित होती रहती है जिससे दोलनों का आयाम धीरे-धीरे कम होता जाता है। यदि इस दशा में ऊष्मीय ऊर्जा को भी । गणना में ले लिया जाय तो गोलक की प्रत्येक स्थिति में स्थितिज, गतिज एवं ऊष्मीय ऊर्जा का योग नियत रहता है। यही ऊर्जा संरक्षण का नियम है।

3. स्प्रिंग (Spring) – चित्र के अनुसार एक स्प्रिंग से एक भार लटकाइए। जब भार चित्र
(क) की तरह उच्चतम बिन्दु पर होता है, तो उसमें केवल स्थितिज ऊर्जा होती है और स्प्रिंग में कोई ऊर्जा नहीं होती।
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जब भार नीचे को लगता है, तो उसमें गति उत्पन्न होने के कारण गतिज ऊर्जा संचित होती है, किन्तु स्थितिज ऊर्जा में कमी होती है। इसके अतिरिक्त स्प्रिंग को खींचने के कारण उसमें स्थितिज ऊर्जा का संचय होता है। जब भार अपनी गतिशील अवस्था में होता है, तो उसकी प्रारम्भिक पूर्ण स्थितिज ऊर्जा, इसकी अपनी गतिज ऊर्जा एवं स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा में परिणत हो जाती है। जब भार चित्र
(ख) की तरह निम्नतम बिन्दु पर होता है तो उसकी सम्पूर्ण ऊर्जा स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा के रूप में परिवर्तित हो जाती है। परिकलन से ज्ञात होता है कि प्रत्येक स्थिति में कुल ऊर्जा का परिमाण नियत रहता है। स्पष्ट है कि इसमें ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन होता है।

प्रश्न 6.
ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का विवरण दीजिए।
उतर-
ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy) – ऊर्जा के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं-
1. ईंधन (Fuels) – लकड़ी, कोयला, किरोसीन, पेट्रोल, डीजल आदि को जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जाती है, जिसका सीधे अथवा विद्युत-ऊर्जा में परिवर्तन करके उपयोग किया जाता है। वर्तमान समय में यह ऊर्जा का प्रयुक्त होने वाला स्रोत है।
2. जल से ऊर्जा (To Water Energy) – भाखड़ा-नांगल जैसे बाँधों (Dams) में पहले जल को ऊँचाई पर इकट्ठा किया जाता है। इस जल में स्थितिज ऊर्जा होती है। जब जल टरबाइन के पंखे की पंखुड़ियों पर गिरकर टकराता है तो टरबाइन का पहिया घूमने लगता है। इस क्रिया में जल की स्थितिज ऊर्जा पहिये की गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। इस पहिये द्वारा एक डायनामो के आर्मेचर को घुमाते हैं जिससे विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है। आजकल विद्युत ऊर्जा प्राप्त करने का यह महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
3. वायु से ऊर्जा (To Air Energy) – वायु की गतिज ऊर्जा से अनेक यांत्रिक कार्य किये जाते हैं, जैसे अनाज से भूसा अलग करना, समुद्र में पाल द्वारा नाव चलाना, पवन-चक्की द्वारा विद्युत उत्पादन आदि।
4. ईंधन, कोयला, पेट्रोल (Fuel, coal, Petrolium) – विभिन्न प्रकार के ईंधनों, जैसे कोयला, मिट्टी का तेल, गैस, पेट्रोल आदि में रासायनिक ऊर्जा होती है। विभिन्न युक्तियों का प्रयोग करके ऐसे इंजन तैयार किये गये हैं। जिनमें इन ईंधनों की रासायनिक ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में बदली जाती है। इसी से मोटरकार, वायुयान आदि के इंजन चलाये जाते हैं।
5. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) – सन् 1939 में दो जर्मन वैज्ञानिकों हॉन तथा स्ट्रॉसमैन (Hahn and Strassman) ने यूरेनियम पर तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की बमबारी की। इस बमबारी से यूरेनियम का नाभिक दो लगभग बराबर नाभिकों में टूट जाता है तथा कुछ द्रव्यमान की क्षति हो जाती है। यह द्रव्यमान क्षति आइन्सटीन के द्रव्यमाने-ऊर्जा सिद्धान्त के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तथा अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
उपर्युक्त अभिक्रिया में जो ऊर्जा मुक्त होती है (UPBoardSolutions.com) उसे नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं तथा यह क्रिया नाभिकीय विखण्डन कहलाती है। उस ऊर्जा को उत्पन्न करने के लिए नाभिकीय रिएक्टर (Nuclear Reactors) बनाये। गये हैं। मुम्बई के निकट ट्राम्बे में भाषा अनुसंधान केन्द्र में कई रिएक्टर-अप्सरा, साइरस और जरलीना कार्य कर रहे हैं। इनमें से अप्सरा सन् अगस्त 1956 से तथा जरलीना सन् 1961 से कार्य कर रहा है। इन रिएक्टरों से वैद्युत-ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
हमारे देश में विभिन्न स्थानों जैसे तारापुर (महाराष्ट्र), कोटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु) तथा नरोरा (उत्तर प्रदेश) में ऐसे वैद्युत उत्पादक गृह हैं जिनमें नाभिकीय रिएक्टरों से प्राप्त नाभिकीय ऊर्जा से वैद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
6. अवशिष्ट जैव पदार्थ – हम दैनिक जीवन में बहुत-से कार्बनिक पदार्थों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। अब ऐसे पदार्थ ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रयोग में लाये जा रहे हैं। उदाहरणार्थ : सड़ी-गली वनस्पतियाँ, गोबर आदि। इनको इकट्ठा करके किसी बन्द गड्डे में सड़ने दिया जाता है। इनसे एक प्रकार की गैस निकलती है जिसे मेथेन (CH4) कहते हैं। यह एक ज्वलनशील गैस है। जिसका प्रयोग आजकल ईंधन की जगह किया जा रहा है। गोबर गैस भी इसी प्रकार का उदाहरण है।

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प्रश्न 7.
सूर्य को ऊर्जा का मूल स्रोत क्यों कहते हैं? सूर्य की प्राप्त ऊष्मा तथा प्रकाश, किस प्रकार के ऊर्जा रूपान्तरण से प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
ऊर्जा का मूल स्रोत : सूर्य-वास्तव में सभी प्रकार की ऊर्जाओं का मूल स्रोत सूर्य ही है। मनुष्य ने पृथ्वी पर जो भी ऊर्जा का स्रोत बनाया है अथवा खोजा है। उन सब में सूर्य की ऊर्जा का ही रूपान्तरण होता है। सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर नये पेड़-पौधे बढ़ते हैं जिससे लकड़ी प्राप्त होती है। प्राचीन काल में पेड़-पौधों के पृथ्वी के अन्दर दब जाने से पृथ्वी के अन्दर अत्यधिक दाब के कारण ये पत्थर के कोयले, पेट्रोल आदि में परिवर्तित हो जाते हैं। इनसे हम ऊर्जा प्राप्त करते हैं। समुद्र का जल सूर्य से ऊष्मा लेकर वाष्प में परिवर्तित हो (UPBoardSolutions.com) वायुमण्डल में चला जाता है तथा वर्षा होती है। वर्षा के जल से, बड़े-बड़े बाँध बनाकर वैद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। अतः हमारी पृथ्वी पर समस्त ऊर्जा स्रोतों का मूल स्रोत सूर्य से प्राप्त ऊर्जा ही है जो सौर ऊर्जा कहलाती है।

सूर्य में ऊर्जा की उत्पत्ति पदार्थ के द्रव्यमान अथवा द्रव्यमान-ऊर्जा के रूपान्तरण से होती है। सूर्य में हाइड्रोजन का विशाल भण्डार है। सूर्य में ऊर्जा-रूपान्तरण की क्रिया में चार-चार हाइड्रोजन नाभिक परस्पर संयोग करके एक-एक हीलियम नाभिक बनाते रहते हैं। इस क्रिया में पदार्थ (नाभिकों) का कुछ द्रव्यमान, ऊष्मा, प्रकाश तथा अन्य स्वरूपों में रूपान्तरित हो जाता है। यही ऊर्जा सूर्य में प्रसारित होती है। द्रव्यमान से ऊर्जा में रूपान्तरण की इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) कहते हैं।

द्रव्यमान एवं ऊर्जा के पारस्परिक रूपान्तरण की परिकल्पना सर्वप्रथम वैज्ञानिक आइन्सटीन ने सन् 1905 में की थी। सापेक्षता सिद्धान्त (Theory of Relativity) के अनुसार उन्होंने गणितीय विवेचना द्वारा, द्रव्यमान तथा ऊर्जा के पारस्परिक सम्बन्ध को निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त किया। इसके अनुसार द्रव्यमान m के रूपान्तरण से प्राप्त ऊर्जा
E = mc²
जबकि c = 3 x 108 मीटर-सेकण्ड-1, निर्वात में प्रकाश की चाल है।
उदाहरण : 1 किलोग्राम से प्राप्त ऊर्जा का मान E = 1 किग्रा (3 x 108 मीटर-सेकण्ड-1)2 = 9 x 1016 जूल।

प्रश्न 8.
यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखिए। सिद्ध कीजिए कि स्वतन्त्रतापूर्वक गिरते हुए किसी भी पिण्ड में गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग सदैव नियत रहता है।
उत्तर-
यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण नियम – यदि किसी वस्तु से ऊष्मा अथवा विकिरणों के रूप में ऊर्जा की हानि न हो, तो वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) अचर बनी रहती है।
नोट – शेष उत्तर हेतु दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 5 के उत्तर में ऊर्जा संरक्षण का नियम में दिये गये उदाहरण (1) को देखिए।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
2 किग्रा की एक पुस्तक 1 मीटर ऊँची मेज पर रखी है। पुस्तक की स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। (g = 9.8 मी.से-2)
हल :
द्रव्यमान m = 2 किग्रा
ऊँचाई (h) = 1 मी
स्थितिज ऊर्जा (P.E.) = mgh = 2 x 9.8 x 1 = 19.6 जूल।

प्रश्न 2.
एक पिण्ड पर 20 न्यूटन का बल लगता है। यदि बल की क्रिया-रेखा विस्थापन की दिशा में 45° का कोण बनाता है। तो पिण्ड को 4 मीटर विस्थापित करने में किये गये कार्य का मान ज्ञात कीजिए।
हल :
कार्य (W) = F x d.cosθ [cos45° = [latex]\frac { 1 }{ \surd 2 }[/latex]]
= 20 x 4 x cos45°
= 80 x [latex]\frac { 1 }{ \surd 2 }[/latex]
= 40√2 जूल
= 40 x 1.4142 [√2 = 1.4142]
= 56.57 जूल।

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प्रश्न 3.
एक कुली 40 किग्रा का बोझ लेकर क्षैतिज प्लेटफॉर्म पर 20 मीटर की दूरी चलता है। उसके द्वारा गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कितना कार्य किया गया?
हल :
शून्य, क्योंकि W = Fd.cos θ, F व d लम्बवत् हैं।
= mgd cos 90° = 40 x 9.8 x 20 x cos 90° [cos 90°= 0]
= 40 x 9.8 x 20 x 0 = 0

प्रश्न 4.
एक मशीन 20 सेकण्ड में 150 जूल कार्य करती है। मशीन की सामर्थ्य क्या है?
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy image -4
प्रश्न 5.
एक पम्प की सामर्थ्य 7.5 किलोवाट है। वह प्रति मिनट अधिक से अधिक कितना पानी 25 मीटर ऊपर उठा सकता है? (g = 10 मी.सेकण्ड-2)
हल :
दिया हैसामर्थ्य 7.5 किलोवाट = 7500 वाट
कार्य = सामर्थ्य x समय
बल x विस्थापन = सामर्थ्य x समय
द्रव्यमान x त्वरण x विस्थापन = सामर्थ्य x समय
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प्रश्न 6.
10 अश्व-सामर्थ्य की मोटर द्वारा 7.46 मीटर गहरे कुएँ से प्रति सेकण्ड कितने किलोग्राम पानी खींचा जा सकता है? (g = 10 मी.सेकण्ड-2)
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy image -6
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy

प्रश्न 7.
एक इंजन की सामर्थ्य 20 किलोवाट है। इसके द्वारा 100 किग्रा. के पिण्ड को 50 मीटर ऊँचाई तक उठाने में कितना समय लगेगा? ( g = 10 मी-सेकण्ड-2)
हल :
सामर्थ्य = 20 किलोवाट = 20 x 103 वाट;
द्रव्यमान = 100 किग्रा; विस्थापन = 50 मीटर।
सामर्थ्य = कार्य/समय
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प्रश्न 8.
5 किग्रा-भार के एक पत्थर के टुकड़े को 10 मीटर ऊँचाई से गिराया जाता है। पृथ्वी से टकराते समय उसकी गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मी.से है।
हल :
पत्थर का द्रव्यमान (m) = 5 किग्रा
ऊँचाई (h) = 10 मीटर
g = 10 मी.से-2 (दिया है)
स्थितिज ऊर्जा = mgh = 5 x 10 x 10 = 500 जूल।
स्थितिज ऊर्जा ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाएगी।

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प्रश्न 9.
10 किलोवाट सामर्थ्य वाले एक इंजन द्वारा 80 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक पानी की टंकी जिसकी क्षमता 50 किलोलीटर है, को भरने में लगने वाले समय की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मीटर-सेकण्ड-2 है।
हल :
टंकी को भरने में किया गया कार्य = mgh = 50 x 1000 x 10 x 80 जूल
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प्रश्न 10.
2 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड पृथ्वी से 10000 सेमी की ऊँचाई से गुरुत्वीय त्वरण (g) के अन्तर्गत स्वतंत्रतापूर्वक नीचे गिरता है। पृथ्वी पर पहुँचने पर इसका वेग तथा कुल ऊर्जा ज्ञात कीजिए। (g = 10 मीटर.से-2)
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प्रश्न 11.
10 किग्रा की एक ट्रॉली को एक स्प्रिंग से इतना सटाकर रखते हैं कि स्प्रिंग दबी रहे। ट्रॉली को छोड़ने पर स्प्रिंग के धक्के से ट्रॉली 4 मीटर-सेकण्ड-1 के वेग से चलना प्रारम्भ कर देती है। दबी अवस्था में स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा कितनी थी?
हल :
स्प्रिंग खुलने पर ट्रॉली को गतिज ऊर्जा प्रदान करता है जो उसकी स्थितिज ऊर्जा के बराबर होती है।
ट्रॉली की गतिज ऊर्जा = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
[latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x 10 किग्रा x (4 मीटर.सेकण्ड-1)2
= 80 किग्रा मीटर .सेकण्ड-2 = 80 जूल
अत: स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा = 80 जूल।

प्रश्न 12.
1 ग्राम द्रव्यमान को ऊर्जा में बदल देने पर कितनी ऊर्जा प्राप्त होगी?
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प्रश्न 13.
18 मीटर ऊँची तथा 10 किलोलीटर क्षमता की पानी की टंकी को आधे घण्टे में भरने के लिए किस सामर्थ्य की मोटर लगानी पड़ेगी?
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प्रश्न 14.
एक पम्प प्रति सेकण्ड 100 किग्रा जल 5 मीटर की ऊँचाई तक उठाता है। पम्प की सामर्थ्य की गणना कीजिए। (g = 10 मीटर-सेकण्ड-2)
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प्रश्न 15.
एक खिलाड़ी पोल वाल्ट के खेल में 5.0 मीटर ऊँचा कूदना चाहता है। यदि ऊपर उठने के लिए आवश्यक ऊर्जा उसकी गति से प्राप्त हो तो उसे किस वेग से दौड़ना चाहिए?(g = 10 मीटर-सेकण्ड-2)
हल :
खिलाड़ी को इतने वेग से दौड़ना चाहिए कि कूदने से पूर्व उसकी गतिज ऊर्जा उसकी उच्चतम बिन्दु पर स्थितिज ऊर्जा के बराबर हो|
गतिज ऊर्जा = स्थितिज ऊर्जा
[latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² = mgh
अथवा v² = 2gh = 2 x 10 x 5 = 10 x 10
v = 10 मीटर-सेकण्ड-1

प्रश्न 16.
10 किग्रा दव्यमान के एक पत्थर को ऊर्ध्वाधर फेंका जाता है एवं वह पृथ्वी की सतह से 10 मीटर ऊँचाई तक पहुँचती है। फेंके जाते समय उसकी प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मीटर-से-1 है।
हल :
द्रव्यमाने m = 5 किग्रा
पृथ्वी की सतह से ऊँचाई h = 10 मीटर
गुरुत्वीय त्वरण g = 10 मी.से
स्थितिज ऊर्जा = mgh = 10 x 10 x 10 = 1000 जूल
यही ऊर्जा प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा थी।

प्रश्न 17.
500 किग्रा द्रव्यमान की मोटर कार की चाल 20 मी.से-1 से बढ़ाकर 40 मी.से-1 करने में इंजन को कितना कार्य करना पड़ेगा? यदि यह कार्य 15 सेकण्ड में हो जाय तो इंजन की क्षमता का मान अश्व-शक्ति में कितना होगा?
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प्रश्न 18.
एकं पम्प की सामर्थ्य 5 किलोवाट है। यह 100 मीटर ऊँचाई पर स्थित टंकी में प्रति मिनट कितना जल चढ़ा सकता है? (g = 10 मी-से-2)
हल :
पम्प की सामर्थ्य = 5 किलोवाट = 5000 वाट
माना पम्प W किग्रा पानी टंकी में प्रति मिनट चढ़ा सकता है,
W किग्रा पानी 100 मी ऊपर चढ़ाने में किया गया
कार्य = Wgh = W x 10 x 100
पम्प की सामर्थ्य के अनुसार प्रति मिनट उसके द्वारा किया गया कार्य = 5000 x 60 जूल।
W x 10 x 100 = 5000 x 60
W = [latex]\frac { 5000 x 60 }{ 10×100 }[/latex] = 300 किग्रा।

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प्रश्न 19.
2 किग्रा द्रव्यमान का पिण्ड 20 मीटर की ऊँचाई से विरामावस्था से भूमि पर गिरने में 20 मीटर-सेकण्ड-1 की चाल से भूमि पर पहुँचता है। गणना द्वारा सिद्ध कीजिए कि यह आँकड़े यान्त्रिक ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं। (g = 10 मी.से-2)
हल :
20 मीटर की ऊँचाई पर पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा = mgh = 2 x 10 x 20 = 400 जूल।
तथा गतिज ऊर्जा = शून्य अतः कुल ऊर्जा = 400 जूल + 0 जूल = 400 जूल
पृथ्वी तल पर पहुँचने से स्थितिज ऊर्जा = शून्य तथा गतिज ऊर्जा = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
= [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x 2 x (20)² = 400 जूल
कुल ऊर्जा = 0 + 400 जूल = 400 जूल।
अतः पिण्ड की जितनी ऊर्जा ऊपर थी उतनी ही पृथ्वी तल पर पहुँचकर है।
अत: ये आँकड़े ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं।

प्रश्न 20.
4 किग्रा दव्यमान के एक पिण्ड की गतिज ऊर्जा 200 जूल है। पिण्ड का संवेग ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 21.
एक गेंद को 10 मीटर की ऊँचाई से छोड़ा जाता है। यदि फर्श पर टकराने के बाद गेंद की ऊर्जा में 40% की कमी हो जाती है, तो गेंद फर्श से वापस लौटने पर कितनी ऊँचाई तक जायेगी?
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प्रश्न 22.
मान लो 50 न्यूटन का एक बल किसी वस्तु में 15 मी.से-1 का औसत वेग उत्पन्न कर देता है। उस बल की सामर्थ्य क्या होगी?
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प्रश्न 23.
क्षैतिज तल से 45° पर झुके घर्षण रहित एक ढाले पर 30 किग्रा-भार का एक पिण्ड ऊपर खींचा जाता है। यदि ढाल की लम्बाई 28 मीटर से, तो पिण्ड को खींचने में उस पर किये गये कार्य की गणना कीजिए। [पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मी.से-2 है।]
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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 11 Work, Power and Energy image -7
प्रश्न 24.
100 ग्राम भार को एक पत्थर का टुकड़ा 100 मीटर की ऊँचाई से नीचे गिराया जाता है। इसकी महत्तम गतिज ऊर्जा तथा पृथ्वी से टकराते समय इसके वेग की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मी.से-2 है।
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प्रश्न 25.
एक व्यक्ति किसी भवन की पाँचवीं मंजिल पर चढ़ने में 5000 जूल कार्य करता है और 5 मिनट का समय लेता है। उसके सामर्थ्य की गणना कीजिए।
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प्रश्न 26.
क्षैतिज तल से 30° पर झुकी घर्षण रहित एक ढाल पर 50 किग्रा-भार का एक पिण्ड ऊपर खींचा जाता है। यदि ढाल की लम्बाई 20 मीटर हो, तो इसमें किये गये कार्य की गणना कीजिए। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण 10 मीटर-सेकण्ड है।
हल :
प्रश्न 23 की तरह हल करें।
[उत्तर – 5000 जूल]

प्रश्न 27.
5 ग्राम द्रव्यमान को ऊर्जा में बदल देने पर कितनी ऊर्जा प्राप्त होगी? (प्रकाश की चाल c = 3 x 108 मी.से)
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प्रश्न 28.
एक साइकिल सवार पर 100 न्यूटन घर्षण बल कार्य करता है। वह 2 मी-से-1 की चाल से जा रहा है तो उसकी सामर्थ्य बताइए।
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प्रश्न 29.
किसी पिण्ड पर 3 न्यूटन व 4 न्यूटन के दो बल एक साथ कार्यरत हैं। यदि इनका परिणामी बल 5 न्यूटन हो तो दोनों बल एक-दूसरे से कितने कोण पर झुके होंगे?
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प्रश्न 30.
एक मशीन की औसत सामर्थ्य 2 किलोवाट है। इसके द्वारा 10 मिनट में किये गये कार्य की गणना कीजिए।
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प्रश्न 31.
15 ग्राम द्रव्यमान की एक गोली 100 मीटर-सेकण्ड के वेग से लक्ष्य को बेधती है। लक्ष्य बेधन के बाद उसका वेग 40 मीटर-सेकण्ड रह जाता है। गणना करके बताइए कि गोली की ऊर्जा में कितना ह्रास हुआ?
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प्रश्न 32.
एक 100 किलोवाट सामर्थ्य वाले इंजन द्वारा 500 किलोग्राम के दव्यमान को 50 मीटर की ऊँचाई तक उठाया जाता है। इसमें लगे समय का परिकलन कीजिए। (गुरुत्वीय त्वरण g = 10 मी.से-2)
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प्रश्न 33.
एक 100 किलोवाट सामर्थ्य वाले इंजन द्वारा 1000 किलोग्राम भार के द्रव्यमान को 20 मीटर की ऊँचाई तक उठाने में लगने वाले समय की गणना कीजिए। (गुरुत्वीय त्वरण g = 10 मी.से-2)
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प्रश्न 34.
1 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड पृथ्वी तल जूल से 20 मीटर की ऊँचाई पर विरामावस्था में स्थित है तथा स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने पर 20 मीटर-सेकण्ड-1 की चाल से पृथ्वी पर पहुँचता है। गुरुत्वीय त्वरण g = 9.8 मीटर-सेकण्ड-है। गणना द्वारी सिद्ध कीजिए कि ये आँकड़े यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं।
हल :
प्रारम्भ में पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा = mgh = 1 x 10 x 20 जूल = 200 जूल
पिण्ड विरामावस्था में है।
पिण्ड की गतिज ऊर्जा = 0
प्रारम्भ में पिण्ड की कुल ऊर्जा = 200 + 0 जूल = 200 जूल …(i)
पृथ्वी पर पहुँचने पर पिण्ड की पृथ्वी तेल से ऊँचाई 0 होगी।
पृथ्वी तल पर पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा = 0
पृथ्वी तल पर पिण्ड की गतिज ऊर्जा = [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv²
= [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x 1 x 20 x 20 जूल = 200 जूल
पृथ्वी तल पर पिण्ड की कुल ऊर्जा = (0 + 200) जूल = 200 जूल … (ii)
समीकरण (i) व (ii) से स्पष्ट है कि दिये गये आँकड़े यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण की पुष्टि करते हैं।

अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

निर्देश : प्रत्येक प्रश्न में दिये गये वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए-
1. कार्य का S.I. मात्रक होता है
(a) जूले या न्यूटन मीटर
(b) न्यूटन
(c) वाट या जूल सेकण्ड
(d) किलोवाट

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2. निम्न में से कौन-सी राशि अदिश है?
(a) आवेग
(b) संवेग
(c) आवेश
(d) बल

3. सामर्थ्य का S.I. मात्रक होता है
(a) वाट या जूल सेकण्ड-1
(b) न्यूटन मीटर या जूल-सेकण्ड-1
(c) किलोवाट-घण्टा
(d) जूल

4. किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता कहलाती है
(a) सामर्थ्य
(b) ऊर्जा
(c) अश्व शक्ति
(d) बल

5. [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] mv² सूत्र है-
(a) गतिज ऊर्जा का
(b) स्थितिज ऊर्जा का
(c) सामर्थ्य का
(d) नाभिकीय ऊर्जा का

6. घड़ी को चाबी देने में संग्रह करते हैं
(a) स्थितिज ऊर्जा
(b) गतिज ऊर्जा
(c) गुरुत्वीय त्वरण
(d) सामर्थ्य

7. एक वस्तु पृथ्वी की ओर गिर रही है उसकी स्थितिज ऊर्जा
(a) बढ़ेगी
(c) घटेगी
(c) वही रहेगी।
(d) इनमें से कोई नहीं

8. अपने सिर पर ईंट रखकर एक मजदूर क्षैतिज सड़क (horizontal road) पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में
(a) अधिकतम कार्य करता है।
(b) कोई कार्य नहीं करता है।
(c) ऋणात्मक कार्य करता है।
(d) न्यूनतम कार्य करता है।

9. ऊर्जा कैसी राशि है?
(a) सदिश
(b) अदिश
(c) दोनों प्रकार की
(d) इनमें से कोई नहीं

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10. किसी पिण्ड का द्रव्यमान दुगुना तथा वेग आधा करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी
(a) आधी
(b) चौथाई
(c) दुगुनी
(d) अपरिवर्तित

11. गतिज ऊर्जा को मात्रक होता है
(a) जूल
(b) वाट
(c) किलोवाट
(d) न्यूटन

12. यदि कोई पिण्ड पृथ्वी से ठीक ऊपर की ओर फेंका जाय तो ऊपर की ओर जाते हुए उसकी सम्पूर्ण ऊर्जा
(a) बढ़ेगी
(b) कम होती जाती है।
(c) नियत रहती है।
(d) कभी कम होगी कभी बढ़ेगी

13. सामर्थ्य किस प्रकार की भौतिक राशि है
(a) सदिश
(b) अदिश
(c) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं

14. एक पिण्ड का वेग उसके प्रारंभिक वेग का तीन गुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायगी
(a) तीन गुनी
(b) दोगुनी
(c) अपरिवर्तित
(d) नौगुनी

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15. किसी पिण्ड को बल लगाकर विस्थापित किया जाता है। कुल कार्य न्यूनतम होगा जबकि तल व विस्थापन के बीच कोण
(a) 0°
(b) 30°
(c) 60°
(d) 90°

16. मात्रक जूले के स्थान पर लिख सकते हैं।
(a) वाट
(b) न्यूटन मीटर
(c) किलोवाट
(d) न्यूटन/मीटर

17. वाट-सेकण्ड मात्रक है।
(a) बल का
(b) ऊर्जा का
(c) सामर्थ्य का
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

18. निम्नलिखित में कौन-सा कार्य का मात्रक नहीं है
(a) जूल
(b) न्यूटन-मीटर
(c) वाट
(d) किलोवाट-घंटा

19. 2 किग्रा द्रव्यमान का पिण्ड कुछ बल लगाकर ऊपर की ओर ऊर्ध्वाधरतः फेंका जाता है तथा 5 मीटर की ऊँचाई तक जाकर पृथ्वी पर वापस आ जाता है। इस सम्पूर्ण क्रिया में पिण्ड पर किया । गया सम्पूर्ण कार्य होगा- (g = 10 मी.से-2)
(a) 100 जूल
(b) 200 जूल
(c) 10 जूल
(d) शून्य

20. एक मशीन 200 जूल कार्य 8 सेकण्ड में करती है।
मशीन की सामर्थ्य होगी
(a) 25 वाट
(b) 25 जूल.
(c) 1600 जूल-से
(d) 25 जूल-से

21. जब किसी वस्तु का वेग दुगुना कर दिया जाता है
(a) उसकी गतिज ऊर्जा दुगुनी हो जाती है।
(b) उसकी स्थितिज ऊर्जा दुगुनी हो जाती है।
(c) उसकी गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
(d) उसकी गतिज ऊर्जा आधी रह जाती है।

22. 1 किग्रा के एक पिण्ड की गतिज ऊर्जा 200 जूल है। उसका वेग है
(a) 20 मी.सेकण्ड-1
(b) √20 मी.सेकण्ड-1
(c) 100 मी.सेकण्ड-1
(d) 400 मी.सेकण्ड-1

23. किसी पिण्ड का द्रव्यमान आधा तथा वेग दुगुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायगी
(a) चौथाई।
(b) आधी
(c) दुगुनी
(d) अपरिवर्तित

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24. 1 किलोवाट बराबर होता है
(a) 1.34 अश्व सामर्थ्य
(b) 746 अश्व सामर्थ्य
(c) 16 अश्व सामर्थ्य
(d) इनमें से कोई नहीं

25. शक्ति की इकाई है
(a) न्यूटन
(b) न्यूटन-मीटर
(c) जूल-सेकण्ड
(d) जूल-मीटर-1

26. निम्न में कौन सामर्थ्य का मात्रक नहीं है
(a) जूल-सेकण्ड-1
(b) जूल x सेकण्ड
(c) वाट
(d) अश्व शक्ति

27. बल तथा विस्थापन के बीच कोण 8 के जिस मान के लिए कार्य शून्य होगा, वह है-
(a) 0°
(b) 45°
(c) 60°
(d) 90°

उत्तरमाला

  1. (a)
  2. (c)
  3. (a)
  4. (b)
  5. (a)
  6. (a)
  7. (b)
  8. (b)
  9. (b)
  10. (a)
  11. (a)
  12. (c)
  13. (b)
  14. (d)
  15. (d)
  16. (b)
  17. (b)
  18. (c)
  19. (d)
  20. (a)
  21. (c)
  22. (a)
  23. (c)
  24. (d)
  25. (c)
  26. (b)
  27. (d)

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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation

UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation (गुरुत्वाकर्षण)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 9 Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation (गुरुत्वाकर्षण).

पाठ्य – पुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 149)

प्रश्न 1.
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बताइये।
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम-विश्व का प्रत्येक पिंड प्रत्येक अन्य पिंड को एक बल से आकर्षित करता है, जो दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा (UPBoardSolutions.com) उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation
चित्र- किन्हीं दो एकसमान पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल उनके केंद्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में निदेशित होता है।

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प्रश्न 2.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
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पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 152)

प्रश्न 1.
मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
जब किसी वस्तु को किसी, मीनार या मकान की छत से मुक्त रूप से छोड़ा जाता है तो वस्तु पृथ्वी के आकर्षण के कारण बढ़ते हुए वेग से पृथ्वी तल की ओर गिरती है। पृथ्वी के आकर्षण के कारण किसी वस्तु का मुक्त रूप से पृथ्वी तल की ओर गिरना मुक्त पतन कहलाता है।

प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
पृथ्वी के आकर्षण के कारण पृथ्वी तल की ओर गिरती हुई किसी वस्तु का त्वरण ‘गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है।
इसे ‘g’ से प्रदर्शित करते हैं। पृथ्वी तल पर (UPBoardSolutions.com) गुरुत्वीय त्वरण का मान 9.8 m/s² है।

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पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 153)

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है?
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प्रश्न 2.
किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का [latex]\frac { 1 }{ 6 }[/latex] गुणा क्यों होता है?
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation image -1

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 157)

प्रश्न 1.
एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों?
उत्तर-
जब स्कूल बैग को उसके साथ लगे एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से उठाते हैं तो हाथ तथा डोरी के मध्य संपर्क क्षेत्रफल बहुत कम होता है तथा स्कूल बैग के भार के कारण हमारे हाथ पर दाब अधिक पड़ता है क्योंकि जब बल छोटे क्षेत्रफल पर लगता है तो दाब अधिक होता है (UPBoardSolutions.com) अर्थात् बल का प्रभाव अधिक होता है इसी कारण स्कूल बैग को पतली डोरी से बने पट्टे की सहायता से उठाना कठिन है।

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प्रश्न 2.
उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
जब किसी वस्तु को किसी तरल पदार्थ में डुबाया जाता है तो उस वस्तु पर ऊपर की दिशा में एक बल लगता है। यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए तरल पदार्थ के भार के बराबर होता है। इस प्रकार वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाले बल को उत्प्लावकता बल या उत्प्लावन बल कहते हैं। यदि तरल पदार्थ का घनत्व अधिक होगा तो वस्तु द्वारा हटाए गये तरल पदार्थ का भार भी अधिक होगा और उत्प्लावन बल भी अधिक होगा।

प्रश्न 3.
पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या बुबती है?
उत्तर-
जब किसी वस्तु को पानी की सतह पर रखा जाता है या पानी में डुबाया जाता है तो यदि वस्तु द्वारा हटाए गये पानी का भार वस्तु के भार से अधिक है अर्थात् वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से कम है तो वस्तु पानी पर तैरती रहेगी। यदि वस्तु द्वारा हटाए गये पानी का भार वस्तु के भार से कम हो अर्थात् वस्तु का घनत्व पानी से अधिक हो तो वस्तु पानी में डूब जायेगी।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 158)

प्रश्न 1.
एक तुला (weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42 kg नोट करते हैं। क्या आपको द्रव्यमान 42 kg से अधिक है या कम?
उत्तर-
वास्तव में हमारा द्रव्यमान 42 kg से अधिक है। जब हम अपना भार एक कमानीदार तुला से मापते हैं। तो वायु द्वारा हमारे शरीर पर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है, (UPBoardSolutions.com) जिसके कारण हमारा भार कुछ कम हो जाता है|

प्रश्न 2.
आपके पास एक रुई को बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 kg द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक-दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन-सा भारी है और क्यों?
उत्तर-
वास्तव में रुई का बोरा लोहे की छड़ की अपेक्षा भारी होगा क्योंकि रुई के बारे का आयतन अधिक होने के कारण रुई के बोरे द्वारा हटाये गये वायु को भार लोहे की छड़ द्वारा हटाये गये वायु के भार से अधिक होगा। अतः वायु में रूई के बोरे के भार में अधिक कमी होती है। परन्तु दोनों का वायु में भार समान है अतः हम कह सकते हैं कि वास्तव में रुई के बोरे का भार लोहे की। छड़ की अपेक्षा अधिक होगा।

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अभ्यास प्रश्न (पृष्ठ संख्या 160 – 161)

प्रश्न 1.
यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियमानुसार दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके बीच दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
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अतः वस्तु के बीच दूरी आधी करने पर उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना हो जाता है।

प्रश्न 2.
सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती?
उत्तर-
स्वतंत्र रूप से गिरते समय प्रत्येक वस्तु त्वरण ‘g’ अनुभव करती है। इसे [latex]g\quad =\quad \frac { GM }{ { R }^{ 2 } }[/latex] द्वारा व्यक्त किया जाता है जहाँ, G = सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक तथा R = पृथ्वी की त्रिज्या है।
अतः स्वतंत्र रूप से गिरते समय, भारी वस्तु अपेक्षाकृत तेजी से नहीं गिरती है।

प्रश्न 3.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1 kg की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? (पृथ्वी का द्रव्यमान 6 x 1024 kg है तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6.4 x 106 m है)।
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प्रश्न 4.
पृथ्वी तथा चंद्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चंद्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों?
उत्तर-
पृथ्वी चंद्रमा को उसी बल से अपनी ओर आकर्षित करती है जिस बल से चंद्रमा पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है। क्योंकि, गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के (UPBoardSolutions.com) अनुसार, अंतरिक्ष में प्रत्येक वस्तु अन्य दूसरी वस्तु को उसी बल से आकर्षित करती है जो उन वस्तुओं की मात्रा के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

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प्रश्न 5.
यदि चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, तो पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?
उत्तर-
न्यूटन की गति के तीसरे नियम के अनुसार, चंद्रमी भी पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है। किन्तु, न्यूटन की गति के दूसरे नियम के अनुसार त्वरण, वस्तु के द्रव्यमान के (UPBoardSolutions.com) व्युत्क्रमानुपाती होता है। चंद्रमा की द्रव्यमान पृथ्वी से बहुत कम है। अतः हम पृथ्वी को चंद्रमा की ओर गति करते नहीं देखते हैं।

प्रश्न 6.
दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा, यदि-
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
(iii) दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ?
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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation image -2

प्रश्न 7.
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्त्व हैं?
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का महत्त्व-
(i) इस बल के कारण ही सभी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे आदि पृथ्वी पर टिके हुए हैं।
(ii) सौरमण्डल में सूर्य के चारों ओर ग्रहे गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही चक्कर लगाते हैं।
(ii) चन्द्रमा भी पृथ्वी के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही चक्कर लगाता है।
(iv) समुद्र में ज्वार-भाटा भी चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होता है।
(v) पृथ्वी पर वायुमण्डल भी इसी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण है।

प्रश्न 8.
मुक्त पतन का त्वरण क्या है?
उत्तर-
स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती हुई वस्तुओं का त्वरण 9.8 m/s-2 होता है जो अग्रे प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है।
मान लिया कोई m द्रव्यमान की वस्तु स्वतंत्र रूप से पृथ्वी की ओर नीचे त्वरण g से गिरती है तो वस्तु पर लगा बल
F = mg
परन्तु गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार
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प्रश्न 9.
पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?
उत्तर-
किसी वस्तु तथा पृथ्वी के मध्य लगा आकर्षण बल उस वस्तु का भार कहलाता है।

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प्रश्न 10.
एक व्यक्ति A अपने मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत् वृत्त पर अपने मित्र को दे देता है। क्या उसका मित्र खरीदे हुए सोने के भार से संतुष्ट होगा? यदि नहीं तो क्यों? (संकेत : ध्रुवों पर g का मान विषुवत् वृत्त की अपेक्षा अधिक है।)
उत्तर-
व्यक्ति A का मित्र उसके द्वारा ध्रुवों पर खरीदे गए सोने के भार से सहमत नहीं होगा क्योंकि भूमध्य (या विषुवत्) रेखा पर उसी सोने का भार ध्रुवों की अपेक्षा कम होगा। इसका कारण यह है कि वस्तु का भार गुरुत्वीय त्वरण g पर निर्भर करता है। पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी पिचकी हुई है जिसके (UPBoardSolutions.com) कारण ध्रुवों पर पृथ्वी की त्रिज्या भूमध्य रेखा की अपेक्षा कम है। गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। ध्रुवों पर g का मान भूमध्य रेखा की अपेक्षा कम होगा। अतः ध्रुवों पर सोने का भार भूमध्य रेखा की अपेक्षा कम होगा।

प्रश्न 11.
एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है?
उत्तर-
जब कागज के पन्ने को गेंद की आकृति में बदला जाता है तो उसका पृष्ठ क्षेत्रफल जो वायु के संपर्क में आता है कम हो जाता है इस प्रकार नीचे गिरते समय वायु द्वारा उस पर पेपर सीट की अपेक्षा कम प्रतिरोध लगता है। अतः गेंद की आकृति का कागज नीचे जल्दी गिरता है, पेपर सीट का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण वायु का प्रतिरोध अधिक लगता है इसलिए वह धीरे गिरता है।

प्रश्न 12.
चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा ३ गुणा है। एक 10 kg की वस्तु का चन्द्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा?
हल-
वस्तु का द्रव्यमान m = 10 kg
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण g = 9.8 m/s2
पृथ्वी पर वस्तु का भार = m x g = 10 x 9.8 = 98 N
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान g = [latex]\frac { 9.8 }{ 6 }[/latex] = 1.63 m/s2
चन्द्रमा पर वस्तु का भार = mg = 10 x 1.63 = 16.3 N
वस्तु का द्रव्यमान प्रत्येक स्थान पर स्थिर रहता है।
अतः वस्तु का पृथ्वी पर द्रव्यमान = 10 kg
वस्तु का चन्द्रमा पर द्रव्यमान = 10 kg

प्रश्न 13.
एक गेंद को ऊध्र्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s के वेग से फेंकी जाती है तो परिकलन कीजिए
(i) अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है।
(ii) पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय।
हल-
(i) वस्तु का आरंभिक वेग, u = 49 m/s
अधिकतम ऊँचाई पर वस्तु का वेग, v = 0
गुरुत्वीय त्वरण, g = – 9.8 m/s2
मान लिया गेंद द्वारा तय की गई अधिकतम ऊँचाई = h
हम जानते हैं कि,
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गेंद द्वारा जितना समय अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में लिया जाता है उतना ही समय वापस पृथ्वी तल पर लौटने में लिया जाएगा।
अतः गेंद द्वारा लिया गया कुल समय = 5 + 5 = 10 सेकण्ड।

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प्रश्न 14.
19.6 m ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अंतिम वेग ज्ञात कीजिए।
हल-
मीनार की ऊँचाई h = 19.6 m
g = 9.8 m/s2
पत्थर को आरंभिक वेग u = 0
मान लिया पत्थर का अन्तिम वेग v = ?
हम जानते हैं,
v2 – u2 = 2gh
⇒ v2 – 0 = 2 (9.8) x 19.6
⇒ v2 = 19.6 x 19.6
⇒ v = 19.6 m/s

प्रश्न 15.
कोई पत्थर ऊध्र्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m/s के प्रारंभिक वेग से फेंका गया है। g = 10 m/s लेते हुए ग्राफ की सहायता से पत्थर द्वारा पहुँची अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गई कुल दूरी कितनी होगी?
हल-
प्रारंभिक वेग u = 40 m/s
ऊपर की ओर गुरुत्वीय त्वरण, g = 10 m/s2 नीचे की ओर
माना कि पत्थर को उच्चतम बिंदु तक आने में 1 सेकण्ड लगते हैं, जहाँ उसका वेग v = 0 हो जाता है।
अब, v = u – gt
0 = 40 – 10t
या 10t = 40
या t = 4 सेकण्डे
अर्थात् अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में पत्थर को 4 सेकण्ड लगते हैं।
पुनः v = u – gt
g = 10 m/s2 तथा क्रमशः t = 0, 1, 2, 3, 4 सेकण्ड रखने पर निम्नांकित सारणी प्राप्त होती है-
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पत्थर पर कुल विस्थापन = प्रारंभिक तथा अंतिम बिंदु के बीच सरल रेखीय गति
जबकि कुल तय दूरी = तय किए गए पथ की लंबाई = 2 x अधिकतम ऊँचाई = 2 x 80 = 160 m.

प्रश्न 16.
पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है,
पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 x 1024 kg तथा सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030 kg।
दोनों के बीच की औसत दूरी 1.5 x 1011 m है।
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प्रश्न 17.
कोई पत्थर 100 m ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोई दूसरा पत्थर 25 m/s के वेग से ऊध्र्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलने कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे?
हल-
माना पत्थर t सेकण्ड पश्चात् मिलेंगे।
पहले पत्थर द्वारा t सेकण्ड में चली गई दूरी,
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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation image -3
प्रश्न 18.
ऊध्र्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद 6s पश्चात् फेंकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए।
(a) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई;
(b) गेंद द्वारा पहुँची गई अधिकतम ऊँचाई; तथा
(c) 4s पश्चात् गेंद की स्थिति।
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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation image -5
प्रश्न 19.
किसी दूर्व में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?
उत्तर-
जब किसी वस्तु को किसी द्रव में डुबोया जाता है तो वस्तु पर ऊध्र्वाधर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है।

प्रश्न 20.
पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी की सतह पर क्यों आ जाता है?
उत्तर-
जब प्लास्टिक के गुटके को पानी में डुबोकर छोड़ा जाता है तो वह पानी की सतह पर ऊपर आ जाता है। क्योंकि प्लास्टिक के गुटके पर पानी के कारण लगने वाला उत्प्लावन बल गुटके के भार से अधिक होता है। या हम यह भी कह सकते हैं कि प्लास्टिक के गुटके का घनत्व पानी के घनत्व से कम है (UPBoardSolutions.com) इसलिए यह पानी में छोड़ने पर पानी में नहीं डूबता बल्कि पानी पर तैरने लगता है।

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प्रश्न 21.
50 g के किसी पदार्थ का आयतन 20 cm है। यदि पानी का घनत्व 1 gcm हो, तो पदार्थ तैरेगा या डूबेगा?
हल-
पदार्थ का द्रव्यमान, m = 50 g
आयतन V = 20 g/cm3
पदार्थ का घनत्व = [latex]\frac { m }{ V }[/latex] = [latex]\frac { 50 }{ 20 }[/latex] = 2.5 g/cms
पदार्थ का घनत्व (2.5 g/cm3) पानी के घनत्व (1 g/cm3) से अधिक है इसलिए यह पानी में डूब जाएगा।

प्रश्न 22.
500 g के एक मोहरबंद पैकेट का आयतन 350 cm3 है। पैकेट 1 g cm-3 घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा? इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा?
हल-
(i) सील किए हुए पैकेट का द्रव्यमान,
m = 500 g
आयतन, V = 350 cm3
धनत्व = [latex]\frac { m }{ V }[/latex] = [latex]\frac { 500 }{ 350 }[/latex] = [latex]\frac { 10 }{ 7 }[/latex] = 1.43 g/cm
पैकेट पानी में डूब जाएगा क्योंकि इसका घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है इसलिए पानी द्वारा लगाया गया उत्प्लावन बल पैकेट के भार से कम है।
(ii) पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का आयतन = 350 cm3
पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान = पानी का घनत्व x पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का आयतन = 1 x 350 = 350 ग्राम
अतः पैकेट द्वारा विस्थापित जल का भार 350 ग्राम होगा।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सार्वत्रिक नियतांक का मान कितना है?
उत्तर-
सार्वत्रिक नियतांक का मान है 6.67 x 10-11 Nm/kg2

प्रश्न 2.
पृथ्वी की सतह पर ‘G’ का मान 6.673 x 10-11 Nmkg-2 है। चन्द्रमा की सतह पर ‘G’ का मान क्या होगा?
उत्तर-
चन्द्रमा की सतह पर ‘G’ का मान 6.673 x 10-11 Nm kg-2 होगा।

प्रश्न 3.
1 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु का भार कितना होगा? (g = 9.8 मी/से)
हल-
W = m x g = 1 x 9.8 = 9.8 न्यूटन।

प्रश्न 4.
पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु को द्रव्यमान 10 किग्रा है। इसका भार कितना होगा यदि इसे पृथ्वी के केन्द्र पर ले जायें?
उत्तर-
शून्य, क्योंकि पृथ्वी के केन्द्र पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान शून्य होता है।

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प्रश्न 5.
समुद्र में ज्वार-भाटा बनने के लिए उत्तरदायी बल का प्रकार तथा नाम बताइए।
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण बल |

प्रश्न 6.
G का मान्य मान क्या है?
उत्तर-
6.67 x 10-11 Nm/kg2

प्रश्न 7.
उस बल का नाम बताइए जो मुक्त पतन में वस्तु को त्वरित करता है?
उत्तर-
पृथ्वी का गुरुत्व बले।

प्रश्न 8.
मुक्त पतन का त्वरण क्या होगा?
उत्तर-
मुक्त पतन का त्वरण 9.8 ms-2 है।

प्रश्न 9.
पृथ्वी के अन्य स्थानों की तुलना में पृथ्वी के केंद्र पर वस्तु का द्रव्यमान क्या होगा?
उत्तर-
वस्तु का द्रव्यमान, प्रत्येक स्थान पर स्थिर रहता है।

प्रश्न 10.
m1 वे m2 द्रव्यमान अगर R दूरी पर हों तो उनके मध्य लगने वाला बल कितना होगा?
उत्तर-
[latex]F\quad =\quad G\frac { { m }_{ 1 }{ m }_{ 2 } }{ { R }^{ 2 } }[/latex]

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प्रश्न 11.
क्या स्थिरांक G का मान प्रत्येक स्थान के लिए समान रहता है?
उत्तर-
हाँ, यह एक सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक है।

प्रश्न 12.
G को S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर-
G का S.I. मात्रक है Nm/kg2

प्रश्न 13.
पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 kg है। इसका भार कितना होगा यदि इसे पृथ्वी के केंद्र पर ले जाएँ?
उत्तर-
शून्य। क्योंकि पृथ्वी के केंद्र पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान शून्य होता है।

प्रश्न 14.
g और G में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
[latex]g\quad =\quad \frac { GM }{ { R }^{ 2 } }[/latex]

प्रश्न 15.
किसी वस्तु का पृथ्वी पर द्रव्यमान 50 kg है। चन्द्रमा पर उसका द्रव्यमान क्या होगा और क्यों?
उत्तर-
वस्तु का चन्द्रमा पर द्रव्यमान 50 kg होगा। क्योंकि प्रत्येक स्थान पर द्रव्यमान का मान अचर रहता है।

प्रश्न 16.
दाब की परिभाषा कीजिए।
उत्तर-
एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला प्रणोद दाब कहलाता है।

प्रश्न 17.
किसी द्रव में डुबोने पर कोई वस्तु हल्की क्यों प्रतीत होती है?
उत्तर-
द्रव द्वारा वस्तु पर लगाए गए उत्प्लावन बल के कारण।

प्रश्न 18.
किसी पदार्थ का घनत्व 825 kgm-3 है। बताइए यह पानी में डूबेगा या तैरेगा। पानी का घनत्व 1000 kgm-3
उत्तर-
पदार्थ का घनत्व पानी के घनत्व से कम है। अतः पदार्थ पानी पर तैरेगा।

प्रश्न 19.
एक वस्तु को पहाड़ की चोटी पर ले जाने पर उसका भार कम होगा अथवा अधिक?
उत्तर-
उसका भार कम होगा क्योंकि ‘g’ को मान ऊँचाई पर कम होता जाता है।

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प्रश्न 20.
किसी वस्तु के द्रव्यमान की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
किसी वस्तु में निहित द्रव्य का परिमाण उसका द्रव्यमान कहलाता है।

प्रश्न 21.
1 किग्रा-भार कितने न्यूटन के बराबर है।
उत्तर-
1 किग्रा भार = 9.8 न्यूटनन्।

प्रश्न 22.
1 किग्रा और 5 किग्रा के दो पत्थर कुतुबमीनार की चोटी से साथ-साथ गिराये गये। कौनसा पत्थर पृथ्वी पर पहले पहुँचेगा?
उत्तर-
दोनों पत्थर पृथ्वी पर साथ-साथ पहुँचेंगे।

प्रश्न 23.
भार ज्ञात करने के लिए किस प्रकार की तुला का प्रयोग करते हैं?
उत्तर-
कमानीदार तुला का।

प्रश्न 24.
एक वस्तु का द्रव्यमान पृथ्वी पर 600 ग्राम है, चन्द्रमा पर उसका द्रव्यमान क्या होगा?
उत्तर-
600 ग्राम ही होगा, क्योंकि द्रव्यमान सदा समान रहता है।

प्रश्न 25.
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान क्या है?
उत्तर-
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण के मान का [latex]\frac { 1 }{ 6 }[/latex]

प्रश्न 26.
एक व्यक्ति का पृथ्वी पर भार 600 किग्रा-भार है, तो चन्द्रमा पर उसका भार कितना होगा?
उत्तर-
100 किंग्रा-भार।

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प्रश्न 27.
ग्रह अपने परिपथ में क्यों घूमते हैं?
उत्तर-
ग्रह अपने परिपथ में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण घूमते हैं।

प्रश्न 28.
यदि दो पिंडों के मध्य दूरी आधी कर दी जाये तो गुरुत्वाकर्षण कितना हो जायेगा?
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण बल पिंडों के मध्य दूरी आधी करने पर चार गुना हो जायेगा क्योंकि F ∝ [latex]\frac { 1 }{ { R }^{ 2 } }[/latex]

प्रश्न 29.
उस बल का नाम बताइए जो चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर घूमने के लिए उत्तरदायी है।
उत्तर-
पृथ्वी का अभिकेन्द्रीय बल।

प्रश्न 30.
ग्रह कक्षाओं में क्यों घूमते हैं?
उत्तर-
सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आर्किमिडीज का सिद्धान्त बताइए।
उत्तर-
आर्किमिडीज का सिद्धान्त- जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है। तो वह ऊपर की दिशा में एक बल का अनुभव करती है जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।

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प्रश्न 2.
उत्प्लावन बल से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
किसी वस्तु को किसी तरल में डुबोने पर, उसके द्वारा अनुभव किया गया ऊपर की ओर लगने वाला बल, उत्प्लावन बल कहलाती है।

प्रश्न 3.
आपेक्षिक घनत्व क्या है?
यदि किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्णतया डुबोया जाए जिससे उत्प्लावन बल, वस्तु के भार के बराबर हो, तो द्रव तथा वस्तु के आपेक्षिक घनत्वों के बीच क्या संबंध होगा?
उत्तर-
आपेक्षिक घनत्व- किसी पदार्थ का आपेक्षिक घनत्व उसके और पानी के घनत्व का अनुपात है अर्थात्
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प्रश्न 4.
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण सम्बन्धी नियम लिखिए तथा सम्बन्धित सूत्र दीजिए।
उत्तर-
दो बिन्दु कणों को पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण बल दोनों कणों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा बल (UPBoardSolutions.com) की दिशा दोनों वस्तुओं को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है।
यदि एक कण का द्रव्यमान m1 दूसरे कण का द्रव्यमान m2 तथा उनके बीच की दूरी r हो तो
[latex]F\quad =\quad \frac { G{ m }_{ 1 }{ m }_{ 2 } }{ { r }^{ 2 } }[/latex]
यहाँ F दोनों वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल है तथा G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है।

प्रश्न 5.
गुरुत्वाकर्षण नियतांक क्या होता है? इसका S.I. मात्रक निगमित कीजिए।
उत्तर-
यदि दो पिण्डों के द्रव्यमान m1 एवं m2 तथा उनके बीच की दूरी हो तो पिण्डों के बीच गुरुत्वाकर्षण
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प्रश्न 6.
गुरुत्वाकर्षण, गुरुत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
पदार्थ के किन्हीं दो कणों के बीच उनके द्रव्यमान तथा बीच की दूरी पर निर्भर रहने वाले आकर्षण बल के उत्पन्न होने के गुण को गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) कहते हैं, जबकि पृथ्वी द्वारा किसी पिण्ड पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व (Gravity) तथा इसके द्वारा पिण्ड में (UPBoardSolutions.com) उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।
इस प्रकार गुरुत्वाकर्षण द्रव्य का एक मौलिक गुण, गुरुत्व एक बल तथा गुरुत्वीय त्वरण एक त्वरण है।

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प्रश्न 7.
राशियाँ G तथा g क्या व्यक्त करती हैं? इनमें सम्बन्ध बताने वाला समीकरण स्थापित कीजिए।
उत्तर-
राशि G गुरुत्वाकर्षण नियतांक है। इसका मान परस्पर 1 मीटर की दूरी पर स्थित 1-1 किग्रा द्रव्यमान के दो पिण्डों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल को व्यक्त करता है।
राशि g गुरुत्वीय त्वरण है अर्थात् यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को व्यक्त करती है।
g तथा G में सम्बन्ध निम्नवत् है-
[latex]g\quad =\quad \frac { G{ M }_{ e } }{ { R }_{ e }^{ 2 } }[/latex]
जबकि Me पृथ्वी का द्रव्यमान तथा Re पृथ्वी की औसत त्रिज्या है।

प्रश्न 8.
किसी वस्तु के ‘भार’ से क्या तात्पर्य है? भार का S.I. मात्रक क्या है?
उत्तर-
किसी वस्तु पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को वस्तु का भार कहते हैं। इसका मान वस्तु के द्रव्यमान। (m) तथा गुरुत्वीय त्वरण (g) के गुणनफल से व्यक्त होता है (W = m.g)
भार का S.I. मात्रक वही है जो बल का- अर्थात् न्यूटन (newton) ।

प्रश्न 9.
किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में अन्तर बताइए।
उत्तर-
द्रव्यमान तथा भार में अन्तर (Difference Between Mass and weight)- द्रव्यमान तथा भार में निम्नलिखित अन्तर हैं
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प्रश्न 10.
लोहे का बना जहाज जल पर तैरता है। जबकि ठोस लोहे का टुकड़ा जल में डूब जाता है। क्यों?
उत्तर-
लोहे के टुकड़े का भार उसके द्वारा हटाए गए जल के भार से अधिक होता है जिससे वह जल में डूब जाता है। जहाज का ढाँचा इस प्रकार बनाया जाता है कि इसके थोड़े-से हिस्से द्वारा हटाए गए जल का भार जहाज तथा उसमें लदे सामान के भार के बराबर होता है जिससे जहाज तैरने लगता है।

प्रश्न 11.
जब मनुष्य चलता है तो भूमि पर दाब | क्यों अधिक पड़ता है, अपेक्षाकृत कि जब वह खड़ा होता है?
उत्तर-
जब मनुष्य चलता है, तो एक समय पर उसका एक ही पैर भूमि पर होता है। इसके कारण, मनुष्य के भार का दाब उत्पन्न करता है। दूसरी ओर, जब मनुष्य खड़ा होता है, तो उसके दोनों पैर भूमि पर होते हैं। इसके कारण मनुष्य के भार का बल भूमि के बड़े क्षेत्र पर लगता है और भूमि पर कम दाब उत्पन्न करता है।

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प्रश्न 12.
गद्दे पर जब मनुष्य खड़ा होता है तो क्यों काफी अधिक दबता है अपेक्षाकृत कि जब वह उस पर लेटा होता है?
उत्तर-
जब मनुष्य गद्दे के ऊपर खड़ा होता है तो उसके केवल दो पैर (कम क्षेत्रफल वाले) गद्दे के संपर्क में होते हैं। इसके कारण मनुष्य का भार गद्दे के छोटे से क्षेत्र पर लगता है और अधिक दाब उत्पन्न करता है। यह अधिक दाब गद्दे में बड़े गर्त का कारण होता है। दूसरी ओर जब वही मनुष्य गद्दे के ऊपर लेटा होता है, तो इसका संपूर्ण शरीर (बड़े क्षेत्रफल वाला) गद्दे के संपर्क में होता है। इस स्थिति में मनुष्य का भार गद्दे के काफी बड़े क्षेत्र के ऊपर लगता है और काफी कम दाब उत्पन्न करता है और यह कम दाब गद्दे में बहुत छेटा गर्त बनाता है।

प्रश्न 13.
गुरुत्वीय त्वरण (g) व गुरुत्वीय स्थिरांक (G) में सम्बन्ध तथा अन्तर बताइये।
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प्रश्न 14.
नीचे की ओर गिरती हुई और ऊपर की ओर फेंकी गयी वस्तुओं के लिए u, v, g और h में सम्बन्ध लिखिए।
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गुरुत्वाकर्षण’ से क्या तात्पर्य है? न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)- आकाशीय पिण्डों जैसे चन्द्रमा, ग्रह, पृथ्वी आदि की गतियों के आधार पर न्यूटन ने यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया कि ब्रह्माण्ड में सभी वस्तुएँ एक-दूसरे को अपनी ओर बल लगाकर आकर्षित करती हैं।
जिस बल के कारण दो वस्तुएँ एक-दूसरे को (UPBoardSolutions.com) अपनी ओर आकर्षित करती हैं, उस बल को गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force) तथा वस्तुओं के परस्पर आकर्षित होने के गुण को गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) कहते हैं।
न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton’s Law of Universal Gravitation)- न्यूटन ने दो पिण्डों के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल सम्बन्धी एक नियम प्रस्तुत किया जिसे न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण सम्बन्धी नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार “विश्व में पदार्थ का प्रत्येक कण, प्रत्येक दूसरे कण को अपनी ओर आकर्षित करता है तथा किन्हीं दो कणों का पारस्परिक आकर्षण का बल कणों के द्रव्यमानों के अनुक्रमानुपाती एवं कणों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”
इस बल की क्रिया- रेखा दोनों कणों को मिलाने वाली ऋजु रेखा के अनुदिश होती है।
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G एक समानुपातिक नियतांक है। इसका मान सभी कणों के लिए सभी स्थानों पर एवं सभी दशाओं में समान रहता है।
अतः इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal gravitational constant) कहते हैं।
इसका मान 6.67 x 10-11 न्यूटन मीटर/किग्रा है।

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The Distance Traveled at Constant Acceleration calculator computes the distance traveled (dx) by an object after a period of time (t), based on its initial distance from the origin (x), the object’s initial velocity (V) and a constant acceleration (a).

प्रश्न 2.
‘गुरुत्वीय त्वरण’ का क्या अर्थ है? गुरुत्वाकर्षण के आधार पर पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
गुरुत्वीय त्वरण (Gravitational Acceleration)- पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल को ‘गुरुत्व’ (Gravity) कहते हैं। इस | गुरुत्व बल के कारण वस्तु में जो त्वरण उत्पन्न होता है
उसे गुरुत्वीय त्वरण (gravitational acceleration) कहते हैं।
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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation image -6
उपर्युक्त समीकरण गुरुत्वीय त्वरण (g) तथा गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का सम्बन्ध व्यक्त करता है।

प्रश्न 3.
पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण में किस प्रकार परिवर्तन होता है? आवश्यक सूत्र देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण के मान में परिवर्तन- गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का मान सदा अपरिवर्तित रहता है- परन्तु गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान परिवर्तनीय है। इसका परिवर्तन दो प्रकार से होता है

  1. पृथ्वी के तल पर परिवर्तन – पृथ्वी की त्रिज्या, अर्थात् पृथ्वी के केन्द्र से पृथ्वी तल की दूरी सभी जगह समान नहीं है। पृथ्वी पर ही विषुवत रेखा पर पृथ्वी की त्रिज्या अधिकतम तथा उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवों पर न्यूनतम होती है। अत: समीकरण [latex]g\quad =\quad \frac { G{ M }_{ e } }{ { R }_{ e }^{ 2 } }[/latex] के अनुसार g का मान विषुवत रेखा पर (Re के अधिकतम होने के कारण) न्यूनतम तथा उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव पर (Re के न्यूनतम होने के कारण) अधिकतम होता है।
    अत: विषुवत् रेखा से ध्रुवों की ओर (उत्तर या दक्षिण) जाने पर ४ का मान बढ़ता जाता है।
    इसी प्रकार तल से ऊपर मैदानों तथा पर्वतों में अधिक ऊँचाई पर ‘g’ का मान समुद्र तल पर इसके मान की अपेक्षा कम होता है।
    पृथ्वी पर समुद्र तल से नीचे जैसे गहरी खदानों में जाने पर भी g का मान शून्य होता है।
  2. पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष में – पृथ्वी से दूर जाने पर, पृथ्वी के केन्द्र से दूरी बढ़ने के कारण g का मान कम होता जाता है।
    यदि अंतरिक्ष में किसी स्थान की पृथ्वी के तल से ऊँचाई h हो तो उस स्थान की पृथ्वी के केन्द्र से दूरी r = (Re + h) होगी।
    अतः उस स्थान पर
    [latex]g\quad =\quad \frac { G{ M }_{ e } }{ \left( { R }_{ e }+h \right) ^{ 2 } }[/latex]
    इससे स्पष्ट है कि पृथ्वी तल से ऊँचाई (h) बढ़ने के साथ g का मान कम होता जाता है।

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प्रश्न 4.
पृथ्वी पर अथवा उसके निकट स्थित वस्तुओं की गति पर गुरुत्वीय त्वरण के प्रभावों को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
पृथ्वी पर स्थित वस्तुओं पर गुरुत्व का प्रभाव
(a) एकविमीय गुरुत्वीय गति (One Dimensional Gravity Motion) – यदि कोई वस्तु कुछ ऊँचाई से स्वतन्त्रतापूर्वक छोड़ दी जाय तो वह ऊध्र्वाधर दिशा में गिरने लगेगी। वस्तु के गिरने का वेग लगातार एक-समान दर से बढ़ता जाता है अर्थात् वस्तु एक-समान त्वरण से गिरती है। इसका कारण यह है कि पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपने केन्द्र की ओर आकर्षित करती है। इसी आकर्षण बल के कारण गिरने वाली वस्तु में एक त्वरण उत्पन्न हो जाता है जिसका मान नियत होता है तथा सभी वस्तुओं के लिए समान (UPBoardSolutions.com) होता है। यह त्वरण गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है। इसे g से प्रदर्शित करते हैं। इसका मान 9.8 मी से-2 है। पृथ्वी की ओर गिरती हुई अथवा पृथ्वी से ऊपर की ओर फेंकी गयी वस्तुओं की गति गुरुत्वीय गति कहलाती है।
अतः यदि कोई वस्तु प्रारम्भिक वेग u से पृथ्वी की ओर फेंकी जाय तो उसकी गुरुत्वीय गति के समीकरण निम्नलिखित होंगे- (ये गति के समीकरणों में a = + g रखने पर प्राप्त होती है।)
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(b) प्रक्षेप्य की गति (द्विविमीय गुरुत्वीय गति) [Motion of Projectile (Two Dimensional Motion)] – यदि किसी पत्थर के टुकड़े को किसी ऊँचाई पर स्थित स्थान से पृथ्वी तल के समान्तर दिशा में फेंकते हैं तो इसका पथ पृथ्वी तल के समान्तर क्षैतिज नहीं रह पाता। यह पत्थर वक्र रेखीय प्रक्षेप पथ पर गतिशील होकर पृथ्वी पर गिरता है। चित्र में प्रक्षेप पथ (trajectory) तथा क्षैतिज (horizontal) पथ प्रदर्शित हैं।
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यदि पत्थर पर गुरुत्व बल न लगता तो पत्थर क्षैतिज दिशा में रैखिक गति करता रहता, परन्तु पत्थर परे लगने वाले गुरुत्व बल के कारण इसकी दिशा परिवर्तित हो जाती है और यह त्वरित वेग से प्रक्षेप पथ पर चलकर फेंकने के स्थान से कुछ दूरी पर गिर पड़ता है।
यदि किसी पिण्ड को किसी प्रारम्भिक वेग से पृथ्वी तल के समान्तर फेंका जाता है तो इस पर गुरुत्व बल आरोपित हो जाता है और यह पिण्ड त्वरित वेग से प्रक्षेप पथ पर चलकर पृथ्वी पर गिर पड़ता है तो इस पिण्ड को प्रक्षेप्य कहते हैं। किसी भवन की छत से फेंका गया पत्थर, किसी राइफल से छोड़ी गयी बुलेट, किसी हवाई जहाज से छोड़ा गया बम, खिलाड़ी द्वारा फेंका गया जेवलिन आदि प्रक्षेप्य हैं और प्रक्षेपण पथ पर त्वरित होते हैं।

प्रश्न 5.
क्या न्यूटन को गति का तीसरा नियम और गुरुत्वाकर्षण का नियम, एक-दूसरे के विरोधी हैं? एक पत्थर और पृथ्वी की स्थिति के अनुसार इसका स्पष्टीकरण करें।
उत्तर-
न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार,
“यदि एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर बराबर और विपरीत बल लगाती है।”
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार, ब्रह्माण्ड का प्रत्येक द्रव्यमान (पिंड) दूसरे द्रव्यमान (पिण्ड) को अपनी ओर आकर्षित करता है।
एक पत्थर और पृथ्वी की स्थिति को देखें तो स्वतंत्र अवस्था में गिरता हुआ पत्थर पृथ्वी की ओर आता है अतः पृथ्वी उसे अपने केन्द्र की ओर खींचती है, लेकिन न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार पत्थर द्वारा भी पृथ्वी को अपनी ओर खींचना चाहिए और यह वास्तव में सही है। कि पत्थर भी उतने ही गुरुत्व बल के द्वारा पृथ्वी को अपनी ओर खींचता है, और F = m x a.
पत्थर का द्रव्यमान कम होने के कारण उसके वेग में त्वरण 9.8 मी/से होता है लेकिन पृथ्वी का द्रव्यमान 6 x 1024 किग्रा होने से यह त्वरण 0.00000000000000000000000165 मी/से या 1.65 x 10-24 मी/से होता है; जो इतना कम है कि अनुभव ही नहीं हो सकता।

प्रश्न 6.
उचित उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि सामान्य द्रव्यमान की वस्तुओं के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम और खगोलीय पिंडों के मध्य बहुत अधिक लेता है।
उत्तर-
किन्हीं दो सामान्य द्रव्यमान की वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल अत्यन्त कम होता है। और हमें अनुभव नहीं होता है लेकिन जब एक वस्तु कोई खगोलीय पिंड जैसे पृथ्वी या चन्द्रमा होता है, तो यह बल बहुत अधिक हो जाता है जो निम्न उदाहरणों से स्पष्ट है-
1. मान लीजिए आप और आपके मित्र का द्रव्यमान 50-50 किग्रा है और आप एक-दूसरे से 1 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, तब आपके मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल (F) होगा-
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आंकिक प्रश्न

[आवश्यकतानुसार G = 6.67 x 10-11 न्यूटन.मी2 किग्रा-2 तथा g = 10 मी.से-2 का उपयोग कीजिए।]
प्रश्न 1.
दो पिण्डों में से प्रत्येक का द्रव्यमान 40 किग्रा है तथा ये परस्पर 2 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 2.
दो पिण्डों के बीच की दूरी 90 सेमी होने से उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल 1.0 x 10-27 न्यूटन होता है। यदि पिण्डों के बीच की दूरी 90 मिमी कर दी जाय तो गुरुत्वाकर्षण बल कितना हो जायेगा?
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प्रश्न 3.
पृथ्वी का द्रव्यमान 6 x 1024 किग्रा तथा एक मनुष्य का द्रव्यमान 60 किग्रा है। पृथ्वी मनुष्य को 600 न्यूटन बल से अपनी ओर खींचती है। मनुष्य पृथ्वी पर कितना गुरुत्वाकर्षण बल आरोपित करेगा तथा पृथ्वी का मनुष्य की ओर त्वरण कितना होगा?
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प्रश्न 4.
अंतरिक्ष में किसी स्थान पर 1 किग्रा द्रव्यमान के पिण्ड का गुरुत्वीय त्वरण 5 मी.से होता है। उसी स्थान पर 3 किग्रा के पिण्ड का त्वरण कितना होगा?
हल-
5 मी.से-2 (क्योंकि गुरुत्वीय त्वरण द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता)।

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प्रश्न 5.
एक पत्थर को 20 मीटर की ऊँचाई से गिराया जाता है। ज्ञात कीजिए
(i) पत्थर कितने समय में भूमि पर पहुँचेगा?
(ii) पत्थर कितने वेग से भूमि से टकरायेगा?
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प्रश्न 6.
एक गेंद को 30 मी.से-1 के वेग से ऊध्वधरतः ऊपर को उछाला जाता है। ज्ञात कीजिए-
(i) पत्थर अधिकतम कितनी ऊँचाई तक जाएगा?
(ii) कितने समय में पत्थर महत्तम ऊँचाई तक पहुँचेगा?
(iii) कितने समय बाद पत्थर वापस भूमि पर लौटेगा?
(iv) लौटकर भूमि से टकराते समय पत्थर का वेग कितना होगा?
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प्रश्न 7.
एक पिण्ड का पृथ्वी पर भार 900 न्यूटन है। चन्द्रमा पर इसका भार कितना होगा? चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण, पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का [latex]\frac { 1 }{ 6 }[/latex] है?
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प्रश्न 8.
125.मीटर ऊँची मीनार से एक पिण्ड 10 मी.से-1 की चाल से क्षैतिज दिशा में फेंका जाता है। यह पिण्ड कितने समय बाद तथा मीनार के आधार से कितनी दूर जाकर पृथ्वी पर गिरेगा?
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UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation image -8

प्रश्न 9.
दो पिण्डों के द्रव्यमान 2 किग्रा तथा 5 किग्रा हैं तथा वे परस्पर 3 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। गणना कीजिए-
(i) पिण्डों पर गुरुत्वाकर्षण बल
(ii) यदि पिण्ड गति करने के लिए स्वतंत्र हों तो उनके त्वरण।
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प्रश्न 10.
पृथ्वी तल से 3200 किमी की ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण की गणना कीजिए।
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प्रश्न 11.
पृथ्वी को दूव्यमान 6 x 1024 किग्रा, चन्द्रमा का द्रव्यमान 7.4 x 1022 किग्रा तथा दोनों के द्रव्यमान केन्द्रों के बीच की दूरी 3.84 x 108 मीटर है। पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच लगने वाले आकर्षण बल की गणना कीजिए।
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प्रश्न 12.
एक गेंद 490 मीटर-सेकण्ड-1 के वेग से ऊध्र्वाधरतः ऊपर की ओर फेंकी जाती है। इसके द्वारा प्राप्त महत्तम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 मी./से)
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प्रश्न 13.
पृथ्वी की ओर गिरने वाली वस्तु का त्वरण 10 मी/से2 होता है। यदि कोई गेंद 20 मीटर की ऊँचाई से छोड़ी जाय तो वह कितने समय में तथा किस वेग से पृथ्वी तल पर पहुँचेगी?
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प्रश्न 14.
एक पिण्ड 15 मीटर.से-1 के वेग से ऊपर की ओर फेंका जाता है। पिण्ड पर पृथ्वी के कारण उत्पन्न होने वाला त्वरण 10 मी.से-1 नीचे की दिशा में कार्य करता है। ज्ञात कीजिए
(i) पिण्ड अधिकतम कितनी ऊँचाई तक जायेगा?
(ii) कितने समय बाद पिण्ड पृथ्वी पर वापस लौटेगा?
(iii) अधिकतम ऊँचाई की आधी ऊँचाई पर पिण्ड का वेग कितना होगा?
UP Board Solutions for Class 9 Science Chapter 10 Gravitation image -9
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प्रश्न 15.
एक भवन की छत से गिराये जाने पर एक गेंद 3 सेकण्ड में पृथ्वी पर गिरती है। पृथ्वी की ओर गेंद का त्वरण 10 मी.से-2 मानकर भवन की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
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अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

निर्देश – प्रत्येक प्रश्न में दिये गये वैकल्पिक उत्तरों में सही उत्तर चुनिए-

1. दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल निर्भर नहीं करता
(a) उनके बीच की दूरी पर
(b) उनके द्रव्यमानों के गुणनफल पर
(c) गुरुत्वाकर्षण नियतांक पर
(d) ब्रह्माण्ड में उनकी स्थिति पर

2. पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का मान किसी पिण्ड के
(a) द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता
(b) द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
(c) आकार पर निर्भर करता है।
(d) घनत्व पर निर्भर करता है।

3. ‘g’ का अर्थ है
(a) पृथ्वी का आकर्षण बल
(b) गुरुत्व
(c) गुरुत्वाकर्षण
(d) स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु के वेग में त्वरण

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4. विरामावस्था से स्वतंत्र रूप से गिरते हुए पिण्ड द्वारा पहले सेकण्ड में गिरी गयी दूरी का मान होगा
(a) g मीटर
(b) 2g मीटर
(c) [latex]\frac { g }{ 2 }[/latex] मीटर
(d) [latex]\frac { 3g }{ 2 }[/latex] मीटर

5. यदि पृथ्वी का द्रव्यमान बिनो परिवर्तित हुए, उसका व्यास आधा हो जाये तो पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार
(a) आधा रह जायेगा
(b) दो गुना हो जायेगा
(c) चार गुना हो जायेगा
(d) अपरिवर्तनीय रहेगा

6. भिन्न-भिन्न द्रव्यमानों के दो पिण्ड स्वतंत्रतापूर्वक समान ऊँचाई से छोड़े जाते हैं। इन पिण्डों के
(a) भूमि पर पहुँचने के समय भिन्न-भिन्न होंगे
(b) त्वरण भिन्न-भिन्न होंगे।
(c) भूमि पर पहुँचते समय वेग भिन्न-भिन्न होंगे
(d) पृथ्वी की ओर आकर्षण बल भिन्न-भिन्न होंगे

7. गुरुत्वाकर्षण नियतांक को मात्रक:
(a) न्यूटन.मी-2 किग्रा-2
(b) न्यूटन.मी2 किग्रा-2
(c) न्यूटन.मी2 किग्रा2
(d) मी. से-2

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8. चन्द्रमा का द्रव्यमान, पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग [latex]\frac { 1 }{ 81 }[/latex] है। यदि चन्द्रमा पर पृथ्वी का आकर्षण बल F हो, तो पृथ्वी पर चन्द्रमा का आकर्षण बल होगा
(a) [latex]\frac { F }{ 81 }[/latex]
(b) F
(c) 9F
(d) 81F

9. किसी व्यक्ति का द्रव्यमान 60 किग्रा है, उसका द्रव्यमान चन्द्रमा पर होगा
(a) 60 किग्रा
(b) 10 किग्रा
(c) 360 किग्रा
(d) सभी गलत हैं।

10. किसी पिंड का भार पृथ्वी पर 36 किग्रा भार है, चन्द्रमा पर उसका भार होगा
(a) 36 किग्रा- भार
(b) 6 किग्रा-भार
(c) 216 किग्रा-भार
(d) सभी गलत हैं।

11. किसी पत्थर को एक भवन की छत से छोड़ा गया, यह 2 सेकण्ड में पृथ्वी पर पहुँच गया, भवन की ऊँचाई होगी
(a) 9.8 मी
(b) 19.6 ‘मी
(c) 4.9 मी
(d) 39.2 मी

12. स्वतन्त्रतापूर्वक गिराई गयी वस्तु द्वारा चली गयी दूरी समानुपाती होती है
(a) t के
(b) √t के
(c) t² के
(d) [latex]\frac { 1 }{ t }[/latex] के

13. किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 किग्रा है उसका पृथ्वी पर भार होगा
(a) 9.8 N
(b) 8.9 N
(c) 89.0 N
(d) 98.0 N

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14. पृथ्वी के केन्द्र से 12,800 किमी की दूरी पर गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ का मान होगा-
(a) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
(b) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex]
(c) समान होगा।
(d) पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का दुगुना

15. पृथ्वी पर किसी ऊँचाई से गिरने वाला पत्थर
(a) पृथ्वी द्वारा आकर्षित होता है।
(b) पृथ्वी को आकर्षित करता है।
(c) पृथ्वी तथा पत्थर दोनों एक-दूसरे को आकर्षित | करते हैं।
(d) उपर्युक्त सभी कथन गलत हैं।

16. दो वस्तुओं के मध्य की दूरी दो गुनी कर दी जाये तो उनके मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल हो जायेगा
(a) एक चौथाई
(b) आधा
(c) दुगुना
(d) प्रभावित नहीं होगा

17. गुरुत्वीय त्वरण का मान
(a) पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर समान होता है।
(b) सभी ग्रहों और उपग्रहों पर समान होता है।
(c) भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है।
(d) उपर्युक्त सभी कथन असत्य हैं।

18. गुरुत्वीय स्थिरांक (G) का मान
(a) पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर असमान होता है।
(b) सभी ग्रहों और उपग्रहों पर समान होता है।
(c) भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है।
(d) उपर्युक्त सभी कथन असत्य हैं।

19. गुरुत्वीय स्थिरांक (G) का मान S.I. मात्रक है-
(a) Nm2/kg
(b) Nm2/kg2
(c) N2m/kg
(d) Nm2/kg2

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20. यदि पृथ्वी का द्रव्यमान व अर्द्धव्यास दोनों आधे कर दिये जायें तो गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान होगा
(a) 9.8 मी/से2
(b) 19.6 मी/से2
(c) 4.9 मी/से2
(d) 29.4 मी/से2

उत्तरमाला

  1. (d)
  2. (a)
  3. (d)
  4. (c)
  5. (c)
  6. (d)
  7. (b)
  8. (b)
  9. (a)
  10. (b)
  11. (b)
  12. (c)
  13. (d)
  14. (b)
  15. (c)
  16. (a)
  17. (c)
  18. (b)
  19. (d)
  20. (b)

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UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 2 अस्माकं राष्ट्रियप्रतीकानि (गद्य – भारती)

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 9
Subject Sanskrit
Chapter Chapter 2
Chapter Name अस्माकं राष्ट्रियप्रतीकानि (गद्य – भारती)
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 2 अस्माकं राष्ट्रियप्रतीकानि  (गद्य – भारती)

पाठ का साशंश

राष्ट्रीय प्रतीक-सभी राष्ट्रों में वहाँ के नागरिकों द्वारा उस राष्ट्र की विशेषता बताने वाली कुछ वस्तुएँ राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में स्वीकार की जाती हैं। इन प्रतींकों में उस राष्ट्र का गौरव, चरित्र और गुण झलकता है, इन्हीं को राष्ट्रीय चिह्न कहा जाता है। भारत में भी हमारी संस्कृति, चरित्र और महत्त्व को बताने वाली (UPBoardSolutions.com) ये पाँच वस्तुएँ राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में स्वीकार की गयी हैं- (1) मयूर, (2) चित्रव्याघ्र, (3) कमल, (4) राष्ट्रगान तथा (5) त्रिवर्ण ध्वज।।

(1) मयूर (मोर)–मयूर (मोर) भारत का राष्ट्रीय-पक्षी है। यह बहुत सुन्दर पक्षी है। इसके रंग-बिरंगे पंख और इसका नृत्य अत्यधिक चित्ताकर्षक होता है। यह मधुर ध्वनि करता हुआ भी विषधरों (सर्पो) को खाता है। उसकी इस प्रवृत्ति में हमारा राष्ट्रीय चरित्र झलकता है। हमें भी मोर की तरह मधुरभाषी होना चाहिए और सबके साथ मधुर व्यवहार करते हुए भी राष्ट्रद्रोहियों और राष्ट्रीय एकता के विघातक तत्त्वों को सर्प की तरह नष्ट कर देना चाहिए। |

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(2) चित्रव्याघ्र ( बाघ)–पशुओं में बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु है। इनमें चित्रव्याघ्र ओजस्वी, पराक्रमी और स्फूर्ति-सम्पन्न होता है। वह संकट को दूर से ही जानकर उसे दूर करने में सचेष्ट रहता है। हमें , व्याघ्र की तरह देश की सुरक्षा में सावधान तथा संकट आने पर उसे दूर करने का निरन्तर प्रयत्न करना चाहिए। यह अपनी सीमा में घूमने वाले जंगली जानवर के रूप में संसार में प्रसिद्ध है।

(3) कमल–भारत में कमल को राष्ट्रीय पुष्प के रूप में स्वीकार किया गया है। इसकी कोमलता एवं पवित्रता को देखकर ही इसको काव्य में अत्यधिक महत्त्व दिया गया है। जिस प्रकार से कीचड़ में उत्पन्न होने वाला पंकज (कमल) जल का संसर्ग तथा शरद् ऋतु को प्राप्त कर बढ़ता और शोभित होता है, (UPBoardSolutions.com) उसी प्रकार किसी भी कुल में उत्पन्न होकर व्यक्ति को सुविधा और उपयुक्त अवसर को पाकर उन्नति करते रहना चाहिए, यही कमल का सन्देश है।

(4) राष्ट्रगान–प्रत्येक स्वतन्त्र राष्ट्र का एक अपना राष्ट्रगाने होता है। भारत का भी अपना एक राष्ट्रगान है। इसे महान् अवसरों पर गाया जाता है। अन्य देश के राष्ट्राध्यक्षों के आगमन पर उनके सम्मान में, बड़ी सभाओं के समापन पर तथा विद्यालयों में प्रार्थना के उपरान्त इसे गाया जाता है। इसकी रचना विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की थी। इस राष्ट्रगान में भारत के प्रान्तों, विन्ध्य-हिमालय पर्वतों, गंगादि नदियों के उल्लेख द्वारा देश की विशालता और अखण्डता का वर्णन है। इसको गाने के लिए 52 सेकण्ड का समय निर्धारित है। इसे सावधान मुद्रा में खड़े होकर बिना किसी अंग-संचालन के श्रद्धापूर्वक गाया जाना चाहिए। इसकी ध्वनि सुनकर भी सावधान हो जाने का विधान है।

(5) त्रिवर्ण ध्वज(राष्ट्रीय ध्वज)–प्रत्येक स्वतन्त्र राष्ट्र का अपना एक राष्ट्रध्वज होता है तथा देश के निवासी प्राणपण से इसके सम्मान की रक्षा करते हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है। इसके मध्य में अशोक चक्र है। इसमें हरा रंग, सुख, समृद्धि और विकास का; श्वेत रंग ज्ञान, मैत्री सदाशयता आदि गुणों का तथा केसरिया रंग शौर्य और त्याग का प्रतीक है। ध्वज़ के मध्य में अशोक चक्र धर्म, सत्य और अहिंसा का बोध कराता है। (UPBoardSolutions.com) अशोक चक्र के मध्य में 24 शलाकाएँ पृथक् होती हुई चक्र के मूल में मिली हुई, भारत में विविध भाषा, धर्म, जाति और लिंग का भेद होने पर भी भारत के एक राष्ट्र होने का बोध कराती हैं। राष्ट्रध्वज सदा स्वच्छ, सुन्दर रंगों वाला और बिना कटा-फटी होना चाहिए। राष्ट्रीय शोक के समय इसे झुका दिया जाती है।
ये राष्ट्रीय प्रतीक हमें हमारी स्वतन्त्रता का बोध कराते हैं। हमें इनका आदर और सम्मान तो करना ही चाहिए, इनकी रक्षा भी प्राणपण से करनी चाहिए।

गघांशों का सासन्दर्भ अनुवाद

(1) सर्वेषु राष्ट्रेषु राष्ट्रियवैशिष्ट्ययुक्तानि वस्तूनि प्रतीकरूपेण स्वीक्रियन्ते तत्रत्यैः जनैः। तेषु प्रतीकेषु तद्राष्ट्रस्य गौरवं चारित्र्यं गुणाश्च प्रतिभासन्ते। तान्येव राष्ट्रियप्रतीकानि निगद्यन्ते।।

अस्माकं राष्ट्रे भारतेऽपि कतिपयानि प्रतीकानि स्वीकृतानि सन्ति। तान्यस्माकं चारित्र्यं संस्कृतिं महत्त्वं च व्यञ्जयन्ति। पक्षिषु कतमः पशुषु कतमः पुष्पेषुः कतमत् वाऽस्माकं राष्ट्रियमहिम्नः प्रातिनिध्यं विदधातीति विचार्यैव प्रतीकानि निर्धारितानि सन्ति।

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शब्दार्थ-
वैशिष्ट्ययुक्तानि = विशेषताओं से युक्त।
प्रतीकरूपेण = चिह्न के रूप में।
स्वीक्रियन्ते = स्वीकृत किये जाते हैं।
तत्रत्यैः जनैः = वहाँ के निवासियों के द्वारा।
प्रतिभासन्ते = झलकते हैं।
निगद्यन्ते = कहे जाते हैं।
कतिपयानि = कुछ।
तान्यस्माकम् (तानि + अस्माकम्) = वे हमारे।
व्यञ्जयन्ति = प्रकट करते हैं।
कतमः = कौन-सा।
राष्ट्रियमहिम्नः = राष्ट्रीय महत्त्व का।
विदधातीति (विदधाति + इति) = करता है, ऐसा।
विचार्यैव (विचार्य + एव) = विचार करके ही।
निर्धारितानि सन्ति = निर्धारित (निश्चित) किये गये हैं।

सन्दर्य प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत गद्य-भारती’ के ‘अस्माकं राष्ट्रियप्रतीकानि’ शीर्षक पाठ से उद्धृत है।

संकेत
इस पाठ के शेष सभी गद्यांशों के लिए यही सन्दर्भ प्रयुक्त होगा।]

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में बताया गया है कि प्रत्येक देश की भाँति हमारे देश में भी कुछ राष्ट्रीय प्रतीक निधार्रित किये गये हैं, जिनसे हमारे देश का गौरव और चरित्र झलकता है।।

अनुवाद
सभी राष्ट्रों में वहाँ के निवासियों के द्वारा राष्ट्र की विशेषताओं से युक्त वस्तुएँ प्रतीक रूप में स्वीकार की जाती हैं। उन प्रतीक-वस्तुओं में उस राष्ट्र का गौरव, चरित्र और गुण प्रतिबिम्बित होते हैं। उन्हें ही राष्ट्र के प्रतीक कहा जाता है। | हमारे राष्ट्र भारत में भी कुछ प्रतीक स्वीकार किये गये हैं। वे ही (UPBoardSolutions.com) हमारे देश के चरित्र, संस्कृति और महत्त्व को प्रकट करते हैं। पक्षियों में कौन-सा (पक्षी), पशुओं में कौन-सा (पशु) अथवा फूलों में कौन-सा (फूल) हमारे राष्ट्र की महिमा का प्रतिनिधित्व करता है, ऐसा विचार करके ही प्रतीक निर्धारित किये गये हैं।

(2) मयूरःपक्षिषु मयूरः राष्ट्रियपक्षिरूपेण स्वीकृतोऽस्ति। मयूरोऽतीव मनोहर: पक्षी वर्तते। चन्द्रकवलयसंवलितानि चित्रितानि तस्य पिच्छानि मनांसि हरन्ति। यदा गगनं श्यामलैर्मेधैरोच्छन्नं भवति तदा मयूरो नृत्यति। तस्य तदानीन्तनं नर्त्तनं नयनसुखकरमपि चेतश्चमत्कारकं भवति। मधुमधुरस्वरोऽपि मयूरो विषधरान् भुङ्क्ते। इदमेवास्माकं राष्ट्रियचारित्र्यं विद्यते। सर्वे सह मधुरं वाच्यं मधुरं व्यवहर्तितव्यं मधुरमाचरितव्यं किन्तु ये राष्ट्रद्रोहिणोऽत्याचारपरायणाः राष्ट्रियाखण्डतायाः राष्ट्रियैक्यस्य वा विघातकाः विषमुखाः सर्पतुल्याः मयूरेणैव राष्ट्रेण व्यापादयितव्याः।।

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शब्दार्थ-
मयूरोऽतीव (मयूरः + अति + इव), = मोर बहुत अधिक।
चन्द्रकवलयसंवलितानि = चन्द्रमा के आकार के वृत्त (गोलाकार चिह्न) से युक्त।
पिच्छानि = पूँछ के पंख।
श्यामलैमेघराच्छन्नं, (श्यामलैः + मेघेः + आच्छन्नम्) = काले बादलों से घिरे हुए।
तदानीन्तनम् = उस समय का।
नयनसुखकरम् = आँखों को सुख देने वाला, सुन्दर।
चेतः = मन।
विषधरान् = सर्पो को।
भुङ्क्ते = खाता है।
इदमेवास्माकं (इदं + एव + अस्माकं) = यह ही हमारा।
वाच्यं = बोलना चाहिए।
व्यवहर्तितव्यम् = व्यवहार करना चाहिए।
मधुरमाचरितव्यं (मधुरं + आचरितव्यम्) = मधुर आचरण करना चाहिए।
अत्याचारपरायणाः = अत्याचार में लगे हुए।
विघातकाः = नाशक।
विषमुखाः = विष से भरे मुख वाले।
मयूरेणेव (मयूरेण+ इव) = मोर के समान।
व्यापादयितव्याः = मारने योग्य।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रीय चिह्न के रूप में स्वीकृत राष्ट्रय पक्षी मोर का वर्णन किया बंया है।

अनुवाद
मोर-पक्षियों में मोर को राष्ट्रीय पक्षी के रूप में स्वीकार किया गया है। मोर अत्यन्त सुन्दर पक्षी है। चन्द्राकार वृत्त (गोलाकार चिह्नों) से चित्रित उसकी पूँछ के पंख मन को हरते हैं, अर्थात् उसके रंग-बिरंगे पंखों को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। जब आकाश काले बादलों से ढक जाता है, तब मोर नाचता है। उस समय का उसका नृत्य नेत्रों को सुख देने वाला और चित्त को आह्लादित करने वाला होता है। मधु के समान मीठे स्वर वाला होता हुआ भी मोर सर्पो को खाता है। यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है। सबके साथ मधुर बोलना (UPBoardSolutions.com) चाहिए, सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना चाहिए, शिष्ट आचरण करना चाहिए, किन्तु जो राष्ट्रद्रोही, अत्याचारी, राष्ट्र की अखण्डता या राष्ट्र की एकता के नाशक सर्प के समान विष से भरे हुए हैं, उन्हें उस राष्ट्र के नागरिकों द्वारा उसी प्रकार नष्ट कर देना चाहिए, जिस प्रकार मोर विषैले सर्यों को नष्ट कर देता है।

(3) व्याघ्रःपशुषु व्याघ्रः भारतस्य राष्ट्रियप्रतीकम्। व्याघ्षु चित्रव्याघ्रः बहुवैशिष्ट्य विशिष्टो विद्यते। को न जानाति चित्रव्याघ्रस्यौजः पराक्रमं स्फूर्तिञ्च? एतज्जातीयाः व्याघ्राः अस्मद्देशस्य वनेषुपलभ्यन्ते। एतेषां शरीरे स्थूलकृष्णरेखाः भवन्ति। व्याघोऽसावतीव तीव्रधावकः सततसा- वहितः सङ्कटं विदूरादेव जिघ्न् तदपनेतुं सचेष्टः स्वलक्ष्यमवाप्तुं कृतिरतः स्वसीम्नि एवं पर्यटन् वन्यो जन्तुर्विश्रुतो जगति।। |

शब्दार्थ-
चित्रव्याघ्रः = चितकबरा बाघ।
ओज = बल।
स्फूर्तिञ्च (स्फूर्तिम् + च) = और फूर्ती।
एताज्जातीयाः (एतद् + जातीयाः) = इस जाति के।
अस्मद्देशस्य (अस्मत् + देशस्य) = इस देश के।
वनेषुपलभ्यन्ते (वनेषु + उपलभ्यन्ते) = वनों में प्राप्त होते हैं।
व्याघ्रोऽसावतीव (व्याघ्रः + असौ + अति + इव) = यह बाघ बहुत अधिक।
सावहितः = सावधान।
विदूरादेव = अधिक दूर से ही।
जिघ्रन् = सँघता है।
अपनेतुम् = दूर करने के लिए।
अवाप्तुम् = प्राप्त करने के लिए।
कृतिरतः = कार्यशील।
स्वसीम्नि = अपनी सीमा में विश्रुतः = प्रसिद्ध।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रीय पशु के प्रतीक के रूप में स्वीकृत बाघ का वर्णन किया गया है।

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अनुवाद-बाघ
पशुओं में बाघ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। बाघों में चितकबरा बाघ बहुत विशेषताओं से युक्त होता है। चितकबरे बाघ के बल, वीरता और स्फूर्ति को कौन नहीं जानता है; अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति जानता है। इस जाति के बाघ हमारे देश के वनों में मिलते हैं। इनके शरीर पर मोटी काली रेखाएँ होती हैं। यह बाघ अत्यधिक तेज दौड़ने वाला, सदा सावधान रहने वाला, संकट को दूर से ही सूंघने वाला और उसको दूर करने के (UPBoardSolutions.com) लिए प्रयत्नशील, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्यशील अपनी सीमा में ही घूमने वाला संसार में प्रसिद्ध जंगली जानवर है।

(4) कमलम्कमलं सरसिज पद्मं पङ्कजं शतदलमित्यादिनामभिः प्रथितं पुष्पमस्माकं राष्ट्रियप्रतीकत्वेन स्वीकृतं राष्ट्रियपुष्पस्य यशो विधते। तस्य कोमलत्वं मनोहरत्वं विकासशीलत्वं पवित्रत्वञ्चाभिलक्ष्यैव कविभिः तस्य बहुशः वर्णनं कृतम्। न कश्चिन्महाकविः संस्कृतभाषायां, हिन्दीभाषायां वा विद्यते येनैतस्य पुष्पस्य माहात्म्यं न गीतम्। देवानां स्तुतिप्रसङ्गे दिव्यकरचरणादीनामङ्गानां मानवहृदयस्य चोपमानीकृतं सत्सांस्कृतिकं महत्त्वं विभर्ति पुष्पमिदम्।

शब्दार्थ-
प्रथितम् = प्रसिद्ध।
पुष्पमस्माकम् (पुष्पम् + अस्माकम्) = हमारे फूल।
यशो विधत्ते = यश धारण करता है।
पवित्रत्वञ्चाभिलक्ष्यैव (पवित्रत्वं + च + अभिलक्षि + एव) = और पवित्रता का विचार करके ही।
बहुशः = अत्यधिक।
येनैतस्य (येन + एतस्य) = जिसने इसका।
चोपमानीकृतम् (च + उपमानीकृतम्) = और उपमान के रूप में प्रयुक्त किया गया।
बिभर्ति = धारण करता है।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रीय पुष्प के रूप में चयनित ‘कमल’ के फूल का वर्णन किया गया है।

अनुवाद
कमले-कमल, सरसिज, पद्म, पंकज, शतदल इत्यादि नामों से प्रसिद्ध फूल हमारे राष्ट्र के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया गया, राष्ट्रीय पुष्प के यश को धारण करता है। उसकी कोमलता, सुन्दरता, विकासशीलता और पवित्रता को लक्ष्य करके ही कवियों ने उसका बहुत प्रकार से वर्णन किया है। संस्कृत भाषा या हिन्दी भाषा में ऐसा कोई महाकवि नहीं है, जिसने इस पुष्प के महत्त्व का गान न किया हो। देवताओं की स्तुति के (UPBoardSolutions.com) अवसर पर, सुन्दर हाथ-पैर आदि अंगों के और मानव हृदय के उपमान के रूप में प्रयोग किया गया यह फूल सुन्दर सांस्कृतिक महत्त्व को धारण करता है। |

(5) शरदत मनोहरं पुष्पमिदं यत्र तत्र जलसङ्कुलेषु तड़ागेषु सरसु चानायासेनोत्पद्यते वर्धते . रविकनिकरसंसर्गात् प्रस्फुटित। पङ्के जायते पङ्कजं जलसंयोगं शरत्कालञ्चावाप्य वर्धते शोभते । च तथैव कस्मिश्चित् कुले जातः जनः सौविध्यमुपयुक्तावसरञ्च लब्ध्वा वर्धितुं क्षमत इति तत्पुष्पस्य राष्ट्रकृते सन्देशः।।

शब्दार्थ-
शरद (शरद् + ऋर्ती) = शरद् ऋतु में।
चानायासेनोत्पद्यते (च + अनायासेन + उत्पद्यते) = और अनायास उत्पन्न होता है।
रविकरनिकरसंसर्गात् = सूर्य की किरणों के सम्पर्क से।
प्रस्फुटित = विकसित होता है।
सौविध्यमुपयुक्तोवसरञ्च (सौविध्यम् + उपयुक्त + अवसरं + च) = सुविधा और उपयुक्त अवसर को।

प्रसंग
पूर्ववत्।

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अनुवाद
शरद् ऋतु में यह सुन्दर फूल जहाँ-तहाँ जल से भरे तालाबों और पोखरों में सरलता से उत्पन्न होता है और बढ़ता है। सूर्य की किरणों के समूह के सम्पर्क से खिलता है। कीचड़ में (UPBoardSolutions.com) उत्पन्न होता है, उसी प्रकार किसी भी कुल में उत्पन्न हुआ मनुष्य सुविधा और उपयुक्त (अनुकूल) अवसर पाकर बढ़ने में समर्थ होता है। यही इस पुष्प की राष्ट्र के लिए सन्देश है। |

(6) राष्ट्रगानम्-सर्वेषां स्वतन्त्रदेशानां स्वकीयमेकं गानं भवति तदैव राष्ट्रगानसंज्ञयाऽवबुध्यते। प्रत्येकं राष्ट्रं स्वराष्ट्रगानस्य सम्मानं करोति। महत्स्ववसरेषु तद्गानं गीयते। मंदि कश्चिदन्यराष्ट्राध्यक्षोऽस्माकं देशमागच्छति तदा तस्य सम्मानाय तस्य राष्ट्रगानमस्मद्राष्ट्रगानं च वादकैः वाद्येते। महतीनां सभानां समापने तस्य गानमावश्यकम्। विद्यालयेषु प्रार्थनानन्तरं प्रतिदिनं राष्ट्रगानं गीयते।।

शब्दार्थ-
अवबुध्यते = जाना जाता है।
वाद्येते = बजाये जाते हैं।
समापने = समाप्ति पर।
अनन्तरं = बाद में।।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रगान का वर्णन किया गया है।

अनुवाद
राष्ट्रगान–सभी स्वतन्त्र देशों का अपना एक गान होता है, वही राष्ट्रगान’ इसे नाम से जाना जाता है। प्रत्येक राष्ट्र अपने राष्ट्रगान का सम्मान करता है। बड़े महत्त्वपूर्ण अवसरों पर उस गान। को गाया जाता है। यदि किसी दूसरे देश का राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री) हमारे देश में आता है, तब (UPBoardSolutions.com) उसके सम्मान के लिए उसके देश का राष्ट्रगान और हमारा राष्ट्रगान वादकों के द्वारा बजाया जाता है। बड़ी सभाओं के समापन पर राष्ट्रगान का गायन ओवश्यक है। विद्यालयों में प्रार्थना के बाद प्रतिदिन राष्ट्रगान गाया जाता है।

(7) अस्माकं राष्ट्रगानं विश्वकविना कवीन्द्रेण रवीन्द्रेण रचितं ‘जनगणमन’ इति संज्ञया विश्वस्मिन् विश्वे विश्रुतं वर्तते। अस्माकं राष्ट्रगाने भारताङ्गभूतानामनेकप्रान्तानां विन्ध्यहिमालय-पर्वतयोः गङ्गायमुनाप्रभृतिनदी नाञ्चोल्लेखं कृत्वा देशस्य विशालत्वं राष्ट्रस्याखण्डत्वं संस्कृतेः गौरवञ्च विश्वकविना वर्णितम्।।

शब्दार्थ-
संज्ञया = नाम से विश्वस्मिन्
विश्वे = पूरे संसार में।
विश्रुतं = प्रसिद्ध।
प्रभृति = आदि।
अखण्डत्वं = अखण्डता।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रगान के स्वरूप का वर्णन किया गया है।

अनुवाद
हमारा राष्ट्रगान विश्वकवि कवीन्द्र रवीन्द्र द्वारा रचा गया ‘जन-गण-मन’ इस नाम से सारे संसार में प्रसिद्ध है। हमारे राष्ट्रगान में भारत के अंगस्वरूप अनेक प्रान्तों का, विन्ध्याचल और हिमालय पर्वतों का, गंगा-यमुना आदि नदियों का उल्लेख करके विश्वकवि ने देश की विशालता, राष्ट्र की अखण्डता और संस्कृति के गौरव का वर्णन किया है। |

(8) राष्ट्रगानमिदं द्वापञ्चाशत्पलात्मकं भवति। तस्य गाने द्वापञ्चाशत्पलात्मकः-समयोऽपेक्ष्यते। न ततोऽधिको न वा ततो न्यूनः। तस्यारोहावरोहापि निश्चितौ। तत्र विपर्ययः कर्तुं न (UPBoardSolutions.com) शक्यते। राष्ट्रगाने सदोत्थितैः जनैः सावधानमुद्रया गेयम्। राष्ट्रगानावसरेऽङ्गसञ्चालनं निषिद्धम्। चलतोऽपि कस्यचित्कर्णकुहरे गीयमानस्य राष्ट्रगानस्य ध्वनिः दूरादप्यापतति चेत्तदा तत्रैव सावधानमुद्रया तेनाविचलं स्थातव्यम्।राष्ट्रगानं श्रद्धास्पदं भवति।श्रद्धयैवेदं गेयम्। |

शब्दार्थ-
द्वापञ्चाशत्पलात्मकं (द्वांपञ्चाशत् + पल + आत्मकम्) = बावन पल (52 सेकन्ड) वाला।
अपेक्ष्यते = अपेक्षा होती है।
तस्यारोहावरोहापि (तस्य + आरोह + अवरोहौ + अपि) = उसके चढ़ाव और उतार भी।
विपर्ययः = परिवर्तन, विपरीत।
सावधानमुद्रया = सावधान की मुद्रा में।
निषिद्धम् = निषिद्ध, विपरीत।
कर्णकुहरे = कर्ण-छिद्र में।
आपतति = गिरती है, पड़ती है।
चेत् = यदि।
स्थातव्यम् = स्थित होना चाहिए।
श्रद्धास्पदं = श्रद्धा के योग्य।
श्रद्धयैवेदम् (श्रद्धया + एवं+ इदम्) = श्रद्धा से ही इसे। ।

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प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रगान के गाने का समय, गाने की मुद्रा तथा इसके महत्त्व को बताया गया है।

अनुवाद
यह राष्ट्रगान बावन सेकण्ड का होता है। उसके गाने में बोवन सेकण्ड के समय की आवश्यकता होती है। न उससे अधिक की और न ही उससे कम की। उसके स्वरों का आरोह-अवरोह (चढ़ाव और उतार) भी निश्चित है। उसमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। राष्ट्रगान को सदा खड़े हुए लोगों के द्वारा (UPBoardSolutions.com) सावधान मुद्रा में गाया जाना चाहिए। राष्ट्रगान के अवसर पर अंग हिलाना भी वर्जित । है। यदि चलते हुए भी किसी व्यक्ति के कान के छेद में गाये जाते हुए राष्ट्रगान की ध्वनि दूर से भी आ पड़ती है, तब वहीं पर सावधान मुद्रा में उसे स्थिर खड़े हो जाना चाहिए। राष्ट्रगान श्रद्धायोग्य होता है।. श्रद्धापूर्वक ही इसे गाना चाहिए।

(9) राष्ट्रध्वजः सर्वेषु राष्ट्रप्रतीकेषु राष्ट्रध्वजस्य सर्वाधिक महत्त्वं वर्तते। सर्वस्य स्वतन्त्रराष्ट्रस्य स्वकीयो ध्वजो भवति। तद्देशवासिनो जनाः नराः नार्यश्च स्वराष्ट्रध्वजस्य सम्मानं प्राणपणेन रक्षन्ति।।
त्रिवर्णात्मको मध्येऽशोकचक्राङ्कितोऽस्माकं राष्ट्रध्वजः ‘तिरङ्गा’ शब्देन विश्वे विश्रुतो विद्यते।।

शब्दार्थ
सर्वाधिकम् = सबसे अधिक।
वर्तते = है।
प्राणपणेन = प्राणों के मूल्य से अर्थात् प्राणों की बाजी लगाकर।
त्रिवर्णात्मकः = तीन रंगों वाला।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में हमारे राष्ट्रीय प्रतीकों में राष्ट्रध्वज के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है।

अनुवाद
राष्ट्रध्वज-सभी राष्ट्रीय-प्रतीकों में राष्ट्रध्वज का सबसे अधिक महत्त्व है। सभी स्वतन्त्र राष्ट्रों का अपना राष्ट्रध्वज होता है। उस देश के रहने वाले स्त्री और पुरुष अपने राष्ट्रध्वज के (UPBoardSolutions.com) सम्मान की रक्षा प्राणों की बाजी लगाकर करते हैं। तीन रंगों वाला, मध्य में अशोक चक्र से चिह्नित हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा’ शब्द से संसार में प्रसिद्ध है।

(10) ध्वजस्याधोभागः हरितवर्णात्मकः सुखसमृद्धिविकासानां सूचकः, मध्यभागे श्वेतवर्णः ज्ञान-सौहार्द-सदाशयादिसद्गुणानां द्योतकः, ऊर्श्वभागे च स्थितः गैरिकवर्णः त्यागस्य शौर्यस्य च बोधकः। ध्वजस्य मध्यभागस्थितश्वेतवर्णमध्येऽवस्थितमशोकचक्रं धर्मस्य सत्यस्याहिंसायाश्च प्रत्यायकम्। चक्रे चतु:विंशतिशलाकाः पृथगपि चक्रमूले एकत्र सम्बद्धाः भारते भाषाधर्मजातिवर्णालिङ्गभेदेषु सत्स्वपि भारतमेकं राष्ट्रमिति द्योतयन्ति। |

शब्दार्थ-
अधोभागः = निचला भाग।
सौहार्द = बन्धुत्व।
द्योतकः = बतलाने वाला।
गैरिकवर्णः = गेरुआ रंग।
प्रत्यायकम् = विश्वास दिलाने वाला।
चतुःविंशतिशलाकाः = चौबीस तीलियाँ।
सत्स्वपि (सत्सु + अपि) = होने पर भी।
द्योतयन्ति = सूचित करते हैं।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रध्वज के रंगों के वास्तविक अर्थ का बोध कराया गया है। |

अनुवाद
ध्वज के हरे रंग का नीचे का भाग सुख, समृद्धि और विकास का सूचक है। बीच में सफेद रंग ज्ञान, मैत्री, सदाशयता आदि उत्तम गुणों का बोधक है। ध्वज के ऊपरी भाग पर स्थित केसरिया रंग त्याग और शौर्य (वीरता) को सूचक है। ध्वज के मध्य भाग में सफेद रंग के बीच में स्थित अशोक चक्र धर्म, सत्य (UPBoardSolutions.com) और अहिंसा का विश्वास दिलाने वाला है। चक्र में चौबीस रेखाएँ अलग होती हुई भी चक्र के मूल में एक जगह जुड़ी हुई भारत में भाषा, धर्म, जाति, वर्ण, लिंग के भेदों के होते हुए भी ‘भारत एक राष्ट्र है’ ऐसा सूचित करती हैं।

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(11) राष्ट्रध्वजो निर्धारितदीर्घविस्तारपरिमितो भवितव्यः। एषः सदा स्वच्छोऽविकृतवर्णः तिष्ठेत्। जीर्णः शीर्णो विदीर्णो वा ध्वजो नोपयोगयोग्यः। समुच्छ्यिमाणः ध्वजोऽस्तङ्गते सूर्ये समंवतार्य सुरक्षितः संरक्षितव्यः।राष्ट्रियशोकावसरेध्वजोऽर्धमुच्छ्रीयते।।
इत्येतानि राष्ट्रियप्रतीकान्यस्माकं स्वातन्त्र्यस्य प्रत्यायकानि समादृतव्यानि तु सन्त्येव प्राणपणैः रक्षितव्यानि च। |

शब्दार्थ-
परिमितः = निश्चित परिमाण वाला।.
अविकृतवर्णः = शुद्ध रंगों वाला; अर्थात् बिना बिगड़े रंग वाला।
जीर्णः = पुराना।
विदीर्णः = फटा हुआ।
नोपयोगयोग्यः (न + उपयोगयोग्यः) = उपयोग न करने योग्य।
समुच्छ्यिमाणः (सम् + उत् + श्रियमाण:) = ऊपर फहराता हुआ।
समवतार्य = ठीक से उतारकर।
संरक्षितव्य = सुरक्षित रख लेना चाहिए।
इत्येतानि = इस प्रकार ये।
समादृतव्यानि = अधिक आदर करने योग्य। सन्त्येव (सन्ति + एव) = हैं ही।

प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश में राष्ट्रध्वज के स्वरूप एवं उसके फहराये जाने के नियम का उल्लेख है।

अनुवाद
राष्ट्रध्वज निश्चित विस्तार वाला होना चहिए। यह सदा साफ, भद्दे न हुए रंगों वाला होना चाहिए। पुराना, कटा-फटा ध्वज उपयोग के योग्य नहीं है। फहराता हुआ ध्वज सूर्य के छिपने पर उतारकर सुरक्षित रख लेना चाहिए। राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ध्वज आधा (UPBoardSolutions.com) फहराया जाता है।
ये राष्ट्रीय प्रतीक हमारी स्वतन्त्रता का विश्वास दिलाने वाले हैं। ये आदर के योग्य तो हैं ही, साथ ही प्राणपण से रक्षा के योग्य भी हैं।

लघु उत्तरीय प्ररन

प्ररन 1
भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों की गणना कीजिए।
उत्तर
भारत के पाँच राष्ट्रीय प्रतीक हैं, जिनमें ‘मोर’ राष्ट्रीय पक्षी, ‘बाघ’ राष्ट्रीय पशु, ‘कमल’ राष्ट्रीय पुष्प, ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान और तिरंगा राष्ट्रध्वज के रूप में स्वीकृत हैं। |

प्ररन 2
राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में स्वीकृत ‘मोर’ की विशेषता लिखिए। यह राष्ट्रवासियों को क्या सन्देश देता है?
उत्तर
मोर अत्यन्त सुन्दर पक्षी है और इसकी बोली भी अत्यधिक मधुर है। इसका भोजन विषैले सर्प हैं। यह हमें सन्देश देता है कि हमें भी सभी से मधुर वाणी में बोलना चाहिए, (UPBoardSolutions.com) अच्छा व्यवहार करना चाहिए और राष्ट्रीय एकता-अखण्डता को नष्ट करने वाले सर्प के समान दुष्ट व्यक्तियों को मार देना चाहिए।

प्ररन 3
राष्ट्रीय पुष्पकमल’ का राष्ट्र के लिए क्या सन्देश है? |
उत्तर
कमल’ कीचड़ में उत्पन्न होता है, शरद् ऋतु में बढ़ता है और खिलकर शोभा पाता है। यह राष्ट्रवासियों को सन्देश देता है कि प्रतिकूल परिस्थितियों के उत्पन्न होने पर भी उन्हें अपना धैर्य बनाये रखना चाहिए और अनुकूल अवसर की प्रतीक्षा करते रहना चाहिए।

प्ररन4
राष्ट्रीय ध्वज में प्रयुक्त अशोक चक्र का क्या महत्त्व है?
उत्तर
राष्ट्रीय ध्वज में प्रयुक्त अशोक चक्र सत्य, धर्म और अहिंसा का बोध कराता है। जिस प्रकार चक्र की शलाकाएँ अलग-अलग होते हुए भी केन्द्र में मिली होती हैं, उसी प्रकार हमें भी भाषा, धर्म, जाति आदि की भिन्नताओं के बाद भी एकजुट होकर रहना चाहिए। यही भावना अशोक चक्र के द्वारा प्रकट होती है।

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प्ररन 5
अपने राष्ट्र-गान और राष्ट्रध्वज की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
हमारा राष्ट्र-गान कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित है। इसमें कवि ने भारत के प्रान्तों, पर्वतों और नदियों का उल्लेख किया है, जो राष्ट्र की विशालता, अखण्डता, संस्कृति तथा गौरव को ध्वनित करता है। हमारा राष्ट्रध्वज तीन रंगों वाला है और ‘तिरंगा’ नाम से जाना जाता है। इसका हरा रंग सुख, (UPBoardSolutions.com) समृद्धि और विकास का सूचक है, सफेद रंग ज्ञान, भाईचारा, उच्च विचार जैसे सदगुणों का द्योतक है। और केसरिया रंग त्याग और शूरता का बोधक है। सफेद रंग के मध्य में स्थित चक्र ‘अनेकता में एकता’ को प्रकट करता है।

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UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 12 Heron’s Formula

UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 12 Heron’s Formula (हीरोन सूत्र)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 9 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 9 Maths Chapter 12 Heron’s Formula (हीरोन सूत्र).

प्रश्नावली 12.1

प्रश्न 1. एक यातायात संकेत बोर्ड पर ‘आगे स्कूल है’ लिखा है और यह भुजा ‘a’ वाले एक समबाहु त्रिभुज के आकार का है। हीरोन के सूत्र का प्रयोग करके इस बोर्ड का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। यदि संकेत बोर्ड पर परिमाप 180 सेमी है तो इसका क्षेत्रफल क्या होगा?
हल :
दिया है, समबाहु त्रिभुज के आकार के बोर्ड की एक भुजा = a
समबाहु त्रिभुज के आकार के बोर्ड का परिमाप = a + a + a = 3a
त्रिभुज का अर्द्धपरिमाप s = [latex]\frac { 3a }{ 2 }[/latex]
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प्रश्न 2. किसी फ्लाईओवर (flyover) की त्रिभुजाकार दीवार को विज्ञापनों के लिए प्रयोग किया जाता है। दीवार की भुजाओं की लम्बाइयाँ 122 मीटर, 22 मीटर और 120 मीटर हैं। इस विज्ञापन से प्रतिवर्ष 5000 प्रति मीटर² की प्राप्ति होती है। एक कम्पनी ने एक दीवार को विज्ञापन देने के लिए 3 महीने के लिए किराए पर लिया। उसने कुल कितना किराया दिया?
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हल :
फ्लाईओवर की त्रिभुजाकार दीवार की मापें 122 मीटर, 22 मीटर तथा 120 मीटर हैं।
माना a = 122 मीटर, b = 22 मीटर, c = 120 मीटर
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प्रश्न 3. किसी पार्क में एक फिसल (slide) पट्टी बनी हुई है। इसकी पाश्र्वीय दीवारों (slide walls) में से एक दीवार पर किसी रंग से पेन्ट किया गया है और उस पर “पार्क को हरा-भरा और साफ रखिए’ लिखा हुआ है। यदि इस दीवार की विमाएँ 15 मीटर, 11 मीटर और 6 मीटर हैं तो रंग से पेन्ट हुए भाग
पार्क को हरा-भरा को क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
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हल :
जिस दीवार पर पेन्ट किया गया है, उसकी विमाएँ माना
15 मीटर a = 15 मीटर, b = 11 मीटर और c = 6 मीटर
आकृति में दीवार त्रिभुजाकार है।
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प्रश्न 4. उस त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी दो भुजाएँ 18 सेमी और 10 सेमी हैं तथा परिमाप 42 सेमी है।
हल :
माना त्रिभुजे की दो भुजाएँ a = 18 सेमी तथा b = 10 सेमी
माना तीसरी भुजा c सेमी है।
तब, त्रिभुज की परिमाप = a + b + c = 18 + 10 + c = 28 + c
परन्तु दिया है कि त्रिभुज का परिमाप 42 सेमी है।
28 + c = 42 ⇒ c = 42 – 28 = 14 सेमी
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प्रश्न 5. एक त्रिभुज की भुजाओं का अनुपात 12 : 17 : 25 है और उसका परिमाप 640 सेमी है। त्रिभुज का क्षेत्रफले ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, त्रिभुज की भुजाओं का अनुपात 12 : 17 : 25 है।
माना त्रिभुज की भुजाएँ a = 12 x, b = 17 x तथा c = 25 x
त्रिभुज की परिमाप = a + b + c = 12x + 17x + 25x = 54x
तब, प्रश्नानुसार, त्रिभुज का परिमाप = 540 सेमी
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प्रश्न 6. एक समद्विबाहु त्रिभुज का परिमाप 30 सेमी है और उसकी बराबंर भुजाएँ 12 सेमी लम्बी हैं। इस त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
माना त्रिभुज की तीसरी भुजा c सेमी है।
समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाएँ a = 12 सेमी तथा b = 12 सेमी।
त्रिभुज की परिमाप = a + b + c = 12 + 12 + c = (24 + c) सेमी
परन्तु प्रश्नानुसार, परिमाप 30 सेमी है।
24 + c = 30 ⇒ c = 30 – 24 = 6 सेमी
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प्रश्नावली 12.2

प्रश्न 1. एक पार्क चतुर्भुज ABCD के आकार का है, जिसमें ∠C = 90°, AB = 9 मीटर, BC = 12 मीटर, CD = 5 मीटर और AD = 8 मीटर है। इस पार्क का कितना क्षेत्रफल है?
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हल :
पार्क का चित्र संलग्न है।
विकर्ण BD खींचा जिसने चतुर्भुजाकार पार्क ABCD को दो त्रिभुजाकार भागों में विभाजित किया हैं।
पहला समकोण त्रिभुज BCD तथा दूसरा विषमबाहु त्रिभुज ABD समकोण त्रिभुज BCD के आकार वाले भाग का क्षेत्रफल
= [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x आधार x ऊँचाई
= [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x BC x CD
= [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] x 12 x 5 = 30 वर्ग मीटर
BD, समकोण त्रिभुज BCD का कर्ण है।
पाइथागोरस प्रमेय से, BD² = BC² + CD² = (12)² + (5)² = 144 + 25 = 169 = (13)²
⇒ BD = (13)²
⇒ BD = 13 मीटर
तब, ΔABD में, माना a = 9 मीटर, b = 8 मीटर व c = 13 मीटर
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प्रश्न 2. एक चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसमें AB = 3सेमी, BC = 4सेमी, CD = 4सेमी, DA = 5 सेमी और AC = 5 सेमी है।
हल :
चतुर्भुज ABCD बनाया। स्पष्ट है कि विकर्ण AC संलग्न चतुर्भुज को ΔABC व ΔACD में विभक्त करता है।
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प्रश्न 3. राधा ने एक रंगीन कागज से एक हवाईजहाज का चित्र बनाया जैसा कि आकृति में दिखाया गया है। प्रयोग किए गए कागज का कुल क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 4. एक त्रिभुज और एक समान्तर चतुर्भुज का एक ही आधार है और क्षेत्रफल भी एक ही है। यदि त्रिभुज की भुजाएँ 26 सेमी, 28 सेमी और 30 सेमी हैं तथा समान्तर चतुर्भुज 28 सेमी के आधार पर स्थित है तो उसकी संगत ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 5. एक समचतुर्भुजाकार घास के खेत में 18 गायों के चरने के लिए घास है। यदि इस समचतुर्भुज की प्रत्येक भुजा 30 मीटर और बड़ा विकर्ण 48 मीटर है तो प्रत्येक गाय को चरने के लिए इस घास के खेत का कितना क्षेत्रफल प्राप्त होगा?
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प्रश्न 6. दो विभिन्न रंगों के कपड़ों के 10 त्रिभुजाकार टुकड़ों को सी कर एक छाता बनाया गया है। प्रत्येक टुकड़े के माप 20 सेमी, 50 सेमी और 50 सेमी हैं। छाते में प्रत्येक रंग का कितना कपड़ा लगा है?
हल :
छाते में 2 रंग हैं और उसे 10 त्रिभुजाकार टुकड़ों से सिला गया है।
प्रत्येक रंग के [latex]\frac { 10 }{ 2 }[/latex] = 5 टुकड़े होंगे।
प्रत्येक त्रिभुजाकार टुकड़े की माप 20, 50 व 50 सेमी हैं अर्थात प्रत्येक टुकड़ा एक समद्विबाहु त्रिभुज को निरूपित करता है।
माना a = 20 सेमी, b = 50 सेमी तथा c = 50 सेमी
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= 1000 x 2.4494 वर्ग सेमी
= 2449.4 वर्ग सेमी
अतः प्रत्येक रंग का 2449.4 वर्ग सेमी कपड़ा लगेगा।

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प्रश्न 7. एक पतंग तीन भिन्न-भिन्न शेडों (shades) के कागजों से बनी है। इन्हें आकृति में I, II और III से दर्शाया गया है। पतंग का ऊपरी भाग 32 सेमी विकर्ण का एक वर्ग है और निचला भाग 6 सेमी, 6 सेमी और 8 सेमी भुजाओं का एक समद्विबाहु त्रिभुज है। ज्ञात कीजिए कि प्रत्येक शेड का कितना कागज प्रयुक्त किया गया है।
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अतः भाग 1 व भाग II प्रत्येक के कागज का क्षेत्रफल= 256 वर्ग सेमी तथा भाग III के लिए कागज का क्षेत्रफल = 17.88 वर्ग सेमी।।

प्रश्न 8. फर्श पर एक फूलों का डिजाइन 16 त्रिभुजाकार टाइलों से बनाया गया है, जिनमें से प्रत्येक की भुजाएँ 9 सेमी, 28 सेमी और 35 सेमी हैं। इन टाइलों को 50 पैसे प्रति सेमी की दर से पॉलिश कराने का व्ययज्ञात कीजिए।
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कुल 16 त्रिभुजाकार टाइलों का क्षेत्रफल = 16 x एक त्रिभुजाकार टाइल का क्षेत्रफल
= 16 x 36√6 वर्ग सेमी = 5766 वर्ग सेमी
= 576 x 2.45 = 1411.2 वर्ग सेमी
1 वर्ग सेमी पर पॉलिश कराने का व्यय = 50 पैसे
1411.2 वर्ग सेमी पर पॉलिश कराने का व्यय = 1411.2 x 50 = 70560 पैसे
अतः 16 टाइलों पर पॉलिश कराने का व्यय = 70560 पैसे

प्रश्न 9. एक खेत समलम्ब के आकार का है जिसकी समान्तर भुजाएँ 25 मीटर और 10 मीटर हैं। इसकी असमान्तर भुजाएँ 14 मीटर और 13 मीटर हैं। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
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