UP Board Solutions for Class 9 Social Science सामाजिक विज्ञान

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UP Board Solutions for Class 9 Social Science सामाजिक विज्ञान
UP Board Solutions for Class 9 Social Science सामाजिक विज्ञान

UP Board Class 9 Social Science Solutions सामाजिक विज्ञान

UP Board Solutions for Class 9 Social Science History (इतिहास)
इकाई-1 
भारत और समकालीन विश्व-1

खण्ड-1 : घटनाएँ और प्रक्रियायें

खण्ड-2 : जीविका, अर्थव्यवस्था एवं समाज

खण्ड-3 : रोजाना की जिंदगी, संस्कृति और राजनीति

मानचित्र-कार्य

UP Board Solutions for Class 9 Social Science Geography (भूगोल)
इकाई-2 
समकालीन भारत-1

UP Board Solutions for Class 9 Social Science Civics (नागरिकशास्त्र)
इकाई-3 लोकतांत्रिक राजनीति-1

UP Board Solutions for Class 9 Social Science Economics (अर्थशास्त्र)
इकाई-4 अर्थव्यवस्था

मासिक आन्तरिक मूल्यांकन एवं प्रोजेक्ट कार्य
• प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र

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Balaji Publications Mathematics Class 9 Solutions UP Board

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Balaji Maths Book Solutions Class 9

Balaji Publications Mathematics Class 9 Solutions by Dr Sudhir Kumar Pundir

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 1 Real Numbers (वास्तविक संख्याएँ)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 2 Exponents of Real Numbers (वास्तविक संख्याओं के घातांक)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 3 Rationalisation (परिमेयीकरण)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 4 Algebraic Identities (बीजगणितीय सर्वसमिकाऐं)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 5 Polynomial and their Factors (बहुपद तथा उनके गुणनखण्ड)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 6 Remainder Theorem and Factor Theorem (शेषफल प्रमेय तथा गुणनखण्ड प्रमेय)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 7 Linear Equation in Two Variables (दो चरों के रैखिक समीकरण)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 8 Coordinate Geometry (निर्देशांक ज्यामिति)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 9 Introduction to Euclid’s Geometry (यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 10 Lines and Angle (रेखाएँ एवं कोण)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 11 Triangles and Its Angles (त्रिभुज एवं उसके गुण)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 12 Congruence of Triangles (त्रिभुजों की सर्वांगसमता)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 13 Quadrilateral (चतुर्भज)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 14 Area of Parallelograms and Triangles ( समान्तर चतुर्भुज व त्रिभुज के क्षेत्रफल )

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 15 Circle (वृत्त)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 16 Constructions (रचनाऐं)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 17 Heron’s Formula (हीरोन का सूत्र)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 18 Surface Area and Volume of a Cube, Cuboid and Right Circular Cylinder (घन, घनाभ तथा लम्बवृत्तीय बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 19 Surface Area and Volume of a Right Circular Cone and Sphere (लम्बवृत्तीय शंकु एवं गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 20 Statistics (सांख्यिकी)

Balaji Maths Book Solutions Class 9 Chapter 21 Probability (प्रायिकता)

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UP Board Solutions for Class 9 Hindi हिंदी

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UP Board Class 9 Hindi Book Solutions हिंदी

गद्य-खण्ड

काव्य-खण्ड

संस्कृत-खण्ड

हिन्दी गद्य के विकास का संक्षिप्त परिचय

गद्य की विभिन्न विधाओं पर आधारित परीक्षोपयोगी प्रश्न

हिन्दी पद्य के विकास का संक्षिप्त परिचय

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UP Board Solutions for Class 9 English

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UP Board Class 9 English Book Solutions

SECTION A

ENGLISH READER

Prose

Poetry

Supplementary Reader

SECTION B

GRAMMAR

  1. Parts of Sentence
  2. The Sentence: Types
  3. The Verbs (Transitive Verb and Intransitive Verb)
  4. Primary Auxiliaries (Be, Have, Do)
  5. Modal Auxiliaries
  6. Negative Sentences
  7. Interrogative Sentences
  8. Tenses : Form and Uses
  9. The Passive Voice
  10. The Parts of Speech
  11. Indirect or Reported Speech
  12. Word Formation
  13. Punctuation and Spellings
  14. Translation
  15. Long Composition
  16. Controlled Composition
  17. Letter Writing/Application Writing
  18. Comprehension (Unseen)

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UP Board Solutions for Class 9 Social Science History Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

UP Board Solutions for Class 9 Social Science History Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वाइमर गणराज्य के सामने क्या समस्याएँ थीं?
उत्तर:
प्रथम विश्व युद्ध के अंत में साम्राज्यवादी जर्मनी की हार के बाद सम्राट केजर विलियम द्वितीय अपनी जान बचाने के लिए हॉलैण्ड भाग गया। इस अवसर का लाभ उठाते हुए संसदीय दल वाइमर में मिले और नवम्बर, 1918 ई. में वाइमर गणराज्य नाम से प्रसिद्ध एक गणराज्य की स्थापना की। इस गणराज्य को जर्मनों द्वारा अच्छी तरह से स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनों की हार के बाद मित्र (UPBoardSolutions.com) सेनाओं ने इसे जर्मनों पर थोपा था।
वाइमर गणराज्य की प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार थीं प्रथम विश्वयुद्ध के उपरान्त जर्मनी पर थोपी गई वर्साय की कठोर एवं अपमानजनक संधि को वाइमर गणराज्य ने स्वीकार किया था इसलिए बहुत सारे जर्मन न केवल प्रथम विश्वयुद्ध में हार के लिए अपितु वर्साय में हुए अपमान के लिए भी वाइमर गणराज्य को ही जिम्मेदार मानते थे। वर्साय की संधि द्वारा जर्मनी पर लगाए गए 6 अरब पौंड के जुर्माने को चुकाने में वाइमर गणराज्य असमर्थ था।

जर्मनी के सार्वजनिक जीवन में आक्रामक फौजी प्रचार और राष्ट्रीय सम्मान व प्रतिष्ठा की चाह के सामने वाइमरे गणराज्य का लोकतांत्रिक विचार गौण हो गया था। इसलिए वाइमर गणराज्य के समक्ष अस्तित्व को बचाए रखने का संकट उपस्थित हो गया था। रूसी क्रान्ति की सफलता से प्रोत्साहित होकर जर्मनी के कुछ भागों में साम्यवादी प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था। वाइमर गणराज्य द्वारा 1923 ई. में हर्जाना चुकाने (UPBoardSolutions.com) से इनकार करने पर फ्रांस ने जर्मनी के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र ‘रूर’ पर कब्जा कर लिया जिसके कारण वाइमर गणराज्य की प्रतिष्ठा को बहुत ठेस पहुँची। 1929 ई. की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के कारण जर्मनी में महँगाई बहुत अधिक बढ़ गई। वाइमर सरकार मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण करने में असफल रही। कारोबार ठप्प हो जाने से समाज में बेरोजगारी की समस्या अपने चरम पर पहुँच गई थी।

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प्रश्न 2.
इस बारे में चर्चा कीजिए कि 1930 ई. तक आते-आते जर्मनी में नात्सीवाद को लोकप्रियता क्यों मिलने लगी?
उत्तर:
जर्मनी में नाजीवाद की लोकप्रियता के मुख्य कारण इस प्रकार थे-
(i) आर्थिक संकट- प्रथम विश्वयुद्ध चार वर्षों तक चलता रहा। इसे लम्बे युद्ध में जर्मनी को अपार धन की हानि उठानी पड़ी। युद्ध के बाद देश में वस्तुओं के भाव बहुत बढ़ गए। जर्मन सरकार ने बड़े पैमाने पर मुद्रा को छापना शुरू कर दिया जिसके कारण उसकी मुद्रा मार्क को मूल्य तेजी से गिरने लगा। अप्रैल में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 24,000 मार्क के बराबर थी जो जुलाई में 3,53,000 मार्क, अगस्त में 46,21,000 मार्क तथा दिसम्बर में 9,88,60,000 मार्क हो गई। इस तरह एक डॉलर में खरबों मार्क मिलने लगे। जैसे-जैसे मार्क की कीमत गिरती गई, जरूरी चीजों की कीमतें आसमान छूने लगीं। 1929 में अमेरिका तथा सम्पूर्ण विश्व में आए आर्थिक संकट ने जर्मनी की स्थिति को और भी भयावह बना दिया।

(ii) वर्साय की सन्धि- जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध में पराजय के बाद वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए विवश किया गया। इस कठोर व अपमानजनक संधि को जर्मन कभी मन से स्वीकार न सके। इसी अपमान का प्रतिफल था कि जर्मनी में हिटलर के नाजीवाद का जन्म हुआ। जर्मन लोग हिटलर में अपने जर्मनी की खोई हुई प्रतिष्ठा के पुनरुद्धारक का प्रतिबिम्ब देखते थे।

(iii) हिटलर का व्यक्तित्व- वास्तव में हिटलर का व्यक्तित्व आकर्षक एवं प्रभावशाली था। हिटलर एक उत्कृष्ट वक्ता था। इसके जोशवर्द्धक भाषण लोगों पर जादू, जैसा प्रभाव डालते थे। लोग उसके भाषणों को सुनने के लिए दूर-दूर से आया करते थे। उसने अपने भाषणों में वादा किया कि “वह बेरोजगारों को रोजगार और नात्सीवाद और हिटलर का उदय नौजवानों को एक सुरक्षित भविष्य देगा और तमाम (UPBoardSolutions.com) विदेशी साजिशों का मुंहतोड़ जवाब देगा। लोगों ने उसके समर्थन में बड़ी-बड़ी रैलियाँ और जनसभाएँ आयोजित कीं। नासियों ने अपने प्रचार में हिटलर को एक ऐसे मसीहा के रूप में पेश किया जैसे उसका जन्म ही जर्मनों के उत्थान के लिए हुआ हो।

(iv) वाइमर गणराज्य की विफलता- वाइमर संविधान में कुछ ऐसी कमियाँ थीं जिनकी वजह से गणराज्य कभी भी अस्थिरता और तानाशाही का शिकार बन सकता था। इनमें से एक कमी आनुपातिक प्रतिनिधित्व से संबंधित थी। इस प्रावधान की वजह से किसी एक पार्टी को बहुमत मिलना लगभग नामुमकिन बन गया था। हर बार गठबंधन सरकार सत्ता में आ रही थी। दूसरी समस्या अनुच्छेद 48 की वजह से थी जिसमें राष्ट्रपति को आपातकाल लागू करने, नागरिक अधिकार रद्द करने और अध्यादेशों के जरिए शासन चलाने का अधिकार दिया गया था। अपने छोटे से जीवन काल में वाइमर गणराज्य का शासन 20 मंत्रिमण्डलों के हाथों में रहा और उनकी औसत अवधि 239 दिन से ज्यादा नहीं रही। इस दौरान अनुच्छेद 48 का भी जमकर इस्तेमाल किया गया। पर इन सारे नुस्खों के बावजूद संकट दूर नहीं हो पाया। लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था में लोगों को विश्वास खत्म होने लगा क्योंकि वह उनके लिए कोई समाधान नहीं खोज पा रही थी।

(v) राजनैतिक उथल-पुथल- यद्यपि जर्मनी में अनेक राजनैतिक दल थे जैसे राष्ट्रवादी, राजभक्त, कम्युनिस्ट, सामाजिक, लोकतंत्रवादी आदि। यद्यपि लोकतंत्रात्मक सरकार (UPBoardSolutions.com) में इनमें से कोई भी बहुमत में नहीं था। दलों में मतभेद अपने चरम पर थे। इसने सरकार को कमजोर कर दिया और अंततः नाजियों को सत्ता हथियाने का अवसर दे दिया।

(vi) जर्मनों की लोकतंत्र में आस्था नहीं थी- प्रथम विश्व युद्ध के अन्त में जर्मनी की हार के बाद जर्मनों का संसदीय संस्थाओं में कोई विश्वास नहीं था। उस समय जर्मनी में लोकतंत्र एक नया व भंगुर विचार था। लोग स्वाधीनता व आजादी की अपेक्षा प्रतिष्ठा और यश को प्राथमिकता देते थे। उन्होंने खुले दिल से हिटलर का साथ दिया क्योंकि उसमें उनके सपने पूरे करने की योग्यता थी।

प्रश्न 3.
नात्सी सोच के खास पहलू कौन-से थे?
उत्तर:
नात्सी सोच के खास पहलू इस प्रकार थे-

  1. नाजी दल जर्मनी को अन्य सभी देशों से श्रेष्ठ मानता था और पूरे विश्व पर जर्मनी का प्रभाव जमाना चाहता था।
  2. इसने युद्ध की सराहना की तथा बल प्रयोग को यशोगान किया।
  3. इसने जर्मनी के साम्राज्य विस्तार और उन सभी उपनिवेशों को जीतने पर ध्यान केन्द्रित किया जो उससे छीन लिए गए थे।
  4. ये लोग ‘शुद्ध जर्मनों एवं स्वस्थ नॉर्डिक आर्यों के नस्लवादी राष्ट्र का सपना देखते थे और उन सभी का खात्मा चाहते थे जिन्हें वे अवांछित मानते थे।
  5. नाजियों की दृष्टि में देश सर्वोपरि है। सभी शक्तियाँ देश में निहित होनी चाहिए। लोग देश के लिए हैं न कि देश लोगों के (UPBoardSolutions.com) लिए।
  6. नाजी सोच सभी प्रकार की संसदीय संस्थाओं को समाप्त करने के पक्ष में थी और एक महान नेता के शासन में विश्वास रखती थी।
  7. यह सभी प्रकार के दल निर्माण व विपक्ष के दमन और उदारवाद, समाजवाद एवं कम्युनिस्ट विचारधाराओं के उन्मूलन की पक्षधर थी।
  8. इसने यहूदियों के प्रति घृणा का प्रचार किया क्योंकि इनका मानना था कि जर्मनों की आर्थिक विपदा के लिए यही लोग जिम्मेदार थे।

प्रश्न 4.
नासियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ नफ़रत पैदा करने में इतना असरदार कैसे रहा?
उत्तर:
हिटलर ने 1933 ई. में तानाशाह बनने के बाद सभी शक्तियों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। हिटलर ने जर्मनी में एक शक्तिशाली केन्द्रीय सरकार का गठन किया। उसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। एक दल, एक नेता और पूरी तरह अनुशासन उसके शासन का (UPBoardSolutions.com) आधार था। हिटलर ने यहूदियों के विरुद्ध विद्वेषपूर्ण प्रचार शुरू किया जो यहूदियों के प्रति जर्मनों में नफरत फैलाने में सहायक सिद्ध हुआ। यहूदियों के खिलाफ नाजियों के प्रोपेगैंडा के सफल होने के प्रमुख कारण इस प्रकार थे-

  1. हिटलर ने जर्मन लोगों के दिलो-दिमाग में पहले ही अपना महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया था। जर्मन लोग हिटलर द्वारा कही गयी बातों पर आँख मूंदकर विश्वास करते थे। हिटलर के चमत्कारी व्यक्तित्व के कारण यहूदियों के विरुद्ध नाजी दुष्प्रचार सफल सिद्ध हुआ।
  2. नाजियों ने भाषा और मीडिया का बहुत सावधानी से प्रयोग किया। नाजियों ने एक नस्लवादी विचारधारा को जन्म दिया कि यहूदी निचले स्तर की नस्ल से संबंधित थे और इस प्रकार वे अवांछित थे।
  3. नाजियों ने प्रारम्भ से उनके स्कूल के दिनों में ही बच्चों के दिमागों में भी यहूदियों के प्रति नफरत भर दी। जो अध्यापक यहूदी थे उन्हें बर्खास्त कर दिया गया और यहूदी बच्चों को स्कूलों से निकाल दिया गया। इस प्रकार के तरीकों एवं नई विचारधारा के प्रशिक्षण ने नई पीढ़ी के बच्चों में यहूदियों के प्रति नफरत फैलाने और नाजी प्रोपेगैन्डा को सफल बनाने में पूर्णतः सफलता प्राप्त की।
  4. यहूदियों के प्रति नफरत फैलाने के लिए प्रोपेगैन्डा फिल्मों का निर्माण किया गया। रूढ़िवादी यहूदियों की पहचान की गई एवं उन्हें चिन्हित किया गया। उन्हें उड़ती हुई दाढ़ी और कफ्तान पहने दिखाया जाता था।
  5. उन्हें केंचुआ, चूहा और कीड़ा कह कर (UPBoardSolutions.com) संबोधित किया जाता था। उनकी चाल की तुलना कुतरने वाले छछंदरी जीवों से की जाती थी।
  6. ईसा की हत्या के अभियुक्त होने के कारण ईसाइयों की यहूदियों के प्रति पारम्परिक घृणा का नाजियों ने पूरा लाभ उठाया जिससे जर्मन यहूदियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो गए।

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प्रश्न 5.
नात्सी समाज में औरतों की क्या भूमिका थी? फ्रांसीसी क्रांति और नात्सी शासन में औरतों की भूमिका के बीच क्या फर्क था? एक पैराग्राफ में बताएँ।
उत्तर:
नात्सी समाज में औरतों की भूमिका निम्न थी-

  1. घरेलू दायित्वों की पूर्ति करना।
  2. बच्चों को नात्सी मूल्यों एवं मान्यताओं की शिक्षा देना।
  3. शुद्ध आर्य नस्ल के बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को अनेक सुविधाएँ प्रदान की जाती थीं।
  4. नात्सी मान्यता के अनुसार औरत-मर्द के लिए समान अधिकारों का संघर्ष गलत है।
  5. लड़कियों का फर्ज था अच्छी माँ बनना और शुद्ध आर्य रक्त वाले बच्चों को जन्म देना।
  6. आर्य नस्ल की शुद्धता को बनाए रखने के लिए यहूदियों से दूर रहना।

फ्रांसीसी क्रान्ति और नात्सी शासन में औरतों की भूमिका के बीच अन्तर-

  1. फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका- फ्रांसीसी समाज में महिलाएं अपने हितों के प्रति जागरुक थीं। फ्रांस के विभिन्न राज्यों में 60 महिला राजनीतिक क्लब अस्तित्व में थे। वह पुरुषों के समान अधिकारों के लिए माँग कर रही थीं। लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा अनिवार्य थी। वह अपनी मर्जी से शादी करने के लिए स्वतंत्र थीं। महिलाओं को तलाक लेने का अधिकार प्रदान किया गया। महिलाएँ व्यावसायिक प्रशिक्षण ले सकती थीं, कलाकार बन सकती थीं और व्यवसाय कर (UPBoardSolutions.com) सकती थीं।
  2. नासी शासन में औरतों की भूमिका- फ्रांस के विपरीत जर्मनी में महिलाओं को अपनी इच्छा से विवाह करने की अनुमति नहीं थी। महिलाओं के लिए नात्सी सरकार द्वारा निर्धारित आचार संहिता का उल्लंघन करने वाली महिलाओं को सार्वजनिक रूप से दण्डित किया जाता था। उन्हें न केवल कारागार में डाल दिया जाता था बल्कि उनके नागरिक अधिकार, पति और परिवार से भी उन्हें वंचित कर दिया जाता था।

प्रश्न 6.
नात्सियों ने जनता पर पूरा नियंत्रण स्थापित करने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए?
उत्तर:
हिटलर ने 1933 ई. में जर्मनी का तानाशाह बनने के बाद शासन की समस्त शक्तियों पर अधिकार कर लिया। उसने एक शक्तिशाली केन्द्रीय सरकार का गठन किया। उसने लोकतांत्रिक विचारों को हासिए पर डाल दिया। उसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा दिया।
नात्सियों ने जनता पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए निम्न तरीके अपनाए-

(i) जनसंचार माध्यमों का उपयोग- शासन के लिए समर्थन हासिल करने और नात्सी विश्व दृष्टिकोण को फैलाने के लिए मीडिया का बहुत सोच-समझ कर इस्तेमाल किया गया। नात्सी विचारों को फैलाने के लिए तस्वीरों, फिल्मों, रेडियो, पोस्टरों, आकर्षक नारों और इश्तहारी पर्यों का खूब सहारा लिया जाता था। नात्सीवाद ने लोगों के दिलोदिमाग पर गहरा असर डाला, उनकी भावनाओं को भड़का कर उनके गुस्से और
नफरत को ‘अवांछितों पर केन्द्रित कर दिया। इसी अभियान से नासीवाद को सामाजिक आधार पैदा हुआ।

(ii) युंगफोक- युंगफोक 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का नात्सी युवा संगठन था। 10 साल की उम्र के बच्चों का युंगफोक में दाखिला करा दिया जाता था। 14 साल की उम्र में सभी लड़कों को नात्सियों के युवा संगठन हिटलर यूथ की सदस्यता लेनी पड़ती थी। इस संगठन में वे युद्ध की उपासना, आक्रामकता व हिंसा, लोकतंत्र की निंदा और यहूदियों, कम्युनिस्टों, जिप्सियों व अन्य ‘अवांछितों से घृणा को (UPBoardSolutions.com) सबक सीखते थे। गहन विचारधारात्मक और शारीरिक प्रशिक्षण के बाद लगभग 18 साल की उम्र में वे लेबर सर्विस (श्रम सेवा) में शामिल हो जाते थे। इसके
बाद उन्हें सेना में काम करना पड़ता था और किसी नासी संगठन की सदस्यता लेनी पड़ती थी।

(iii) विशेष निगरानी एवं सुरक्षा दस्तों का गठन- पूरे समाज को नात्सियों के हिसाब से नियंत्रित और व्यवस्थित करने के लिए विशेष निगरानी और सुरक्षा दस्ते गठित किए गए। पहले से मौजूद हरी वर्दीधारी पुलिस और स्टॉर्म टूपर्स (एस.ए.) के अलावा गेस्टापो (गुप्तचर राज्य पुलिस), एस.एस. (अपराध नियंत्रण पुलिस) और सुरक्षा सेवा (एस.डी.) का भी गठन किया गया। इन नवगठित दस्तों को बेहिसाब असंवैधानिक अधिकार दिए गए और इन्हीं की वजह से नात्सी राज्य को एक बूंखार आपराधिक राज्य की छवि प्राप्त हुई। (UPBoardSolutions.com) गेस्टापो के यंत्रणा गृहों में किसी को भी बंद किया जा सकता था। ये नए दस्ते किसी को भी यातना गृहों में भेज सकते थे, किसी को भी बिना कानूनी कार्रवाई के देश निकाला दिया जा सकता था या गिरफ्तार किया जा सकता था। दण्ड की आशंका से मुक्त पुलिस बलों ने निरंकुश और निरपेक्ष शासन का अधिकार प्राप्त ।
कर लिया था।

(iv) कम्युनिस्टों का दमन- अधिकांश कम्युनिस्टों को रातों-रात कंसन्ट्रेशन कैम्पों में बन्द कर दिया गया।
(v) तानाशाही की स्थापना- 3 मार्च, 1933 ई. को प्रसिद्ध विशेषाधिकार अधिनियम की सहायता से जर्मनी में तानाशाही की स्थापना की गई।
(vi) राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध- नात्सी दल के अतिरिक्त अन्य सभी राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियनों को प्रतिबंधित कर दिया गया।
(vii) रैलियाँ और जनसभाएँ- नासियों ने जनसमर्थन प्राप्त करने के लिए तथा जनता को मनोवैज्ञानिक रूप से नियंत्रित करने के लिए बड़ी-बड़ी रैलियाँ और जनसभाएँ आयोजित कीं।
(vii) अग्नि अध्यादेश- सत्ता प्राप्ति के पश्चात् अग्नि अध्यादेश के जरिए अभिव्यक्ति, प्रेस एवं सभा करने की आजादी जैसे नागरिक अधिकारों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। हिटलर के जर्मन साम्राज्य की वजह से नात्सी राज्य को इतिहास में सबसे खूखार आपराधिक राज्य की छवि (UPBoardSolutions.com) प्राप्त हुई। नाजियों ने जर्मनी की युद्ध में हार के लिए यहूदियों को जिम्मेदार ठहराया। यहूदी गतिविधियों पर कानूनी रूप से रोक लगा दी गई और उनमें से अधिकांश को या तो मार दिया गया या जर्मनी छोड़ने के लिए बाध्य किया गया।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जर्मनी की नात्सी सरकार ने सर्वाधिक अत्याचार किस समुदाय पर किया?
उत्तर:
यहूदियों पर।

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प्रश्न 2.
अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध में पहला परमाणु बम किस जापानी नगर पर गिराया?
उत्तर:
हिरोशिमा पर।

प्रश्न 3.
हिटलर ने आत्महत्या कब की?
उत्तर:
30 अप्रैल, 1945 ई. को।

प्रश्न 4.
हिटलर की सेना ने पोलैण्ड पर कब आक्रमण किया?
उत्तर:
1 सितम्बर, 1939 ई. को।

प्रश्न 5.
विश्व तुष्टीकरण की नीति को सर्वाधिक बढ़ावा किस नेता ने दिया?
उत्तर:
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चैम्बरलेन ने।

प्रश्न 6.
वाइमर गणराज्य का सम्बन्ध किस देश से था?
उत्तर:
जर्मनी से।

प्रश्न 7.
जर्मनी के किस नेता को ‘द फ्यूहरर’ के नाम से सम्बोधित किया जाता था?
उत्तर:
हिटलर को।

प्रश्न 8.
राइख्सटाग के किस अधिनियम ने हिटलर को एक अधिकार सम्पन्न शासक बनाया?
उत्तर:
समर्थकारी अधिनियम (Enabling Act)

प्रश्न 9.
नात्सी पार्टी का पूरा नाम क्या था?
उत्तर:
इस पार्टी का पूरा नाम राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार पार्टी (National Socialist German Workers Party) था।

प्रश्न 10.
हिटलर जर्मनी का भाग्यविधाता किस वर्ष बना?
उत्तर:
हिटलर 1936 ई. में शासक की समस्त शक्तियाँ अपने में केन्द्रित कर लीं।

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प्रश्न 11.
हिटलर की विदेश नीति के दो प्रमुख उद्देश्य बताइए।
उत्तर:

  1. हिटलर जर्मनी को विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनाना चाहता था।
  2. उसे विस्तारवादी नीति में विश्वास था।

प्रश्न 12.
जर्मन संसद का क्या नाम था?
उत्तर:
राइख्सटाग।

प्रश्न 13.
स्कूलों में सफाई और शुद्धीकरण की मुहिम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
नात्सी शासन काल में स्कूलों से यहूदी तथा राजनीतिक रूप से अविश्वसनीय लोगों को हटा दिया गया। अवांछित बच्चों (यहूदियों, जिप्सियों और विकलांग बच्चों) को स्कूलों से निकाल दिया गया। इस समस्त प्रक्रिया को स्कूलों की सफाई और शुद्धीकरण के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 14.
घेटो बस्तियाँ क्या थीं?
उत्तर:
यहूदी लोग समाज से अलग बस्तियों में रहते थे जिन्हें घेटो (दड़बा) बस्तियाँ कहा जाता था।

प्रश्न 15.
दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार कौन-सा है?
उत्तर:
वाल स्ट्रीट एक्सचेंज (अमेरिका)।

प्रश्न 16.
1929 ई. तथा 1932 ई. के चुनावों में नात्सी पार्टी को कितने प्रतिशत वोट मिले थे?
उत्तर:

  1. 1929 के चुनाव में 2.6%,
  2. 1932 के चुनाव में 37%।

प्रश्न 17.
हिटलर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर:
आस्ट्रिया (1889 ई.)।

प्रश्न 18.
नात्सी यूथ लीग का गठन कब हुआ था?
उत्तर:
सन् 1922।

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प्रश्न 19.
युंगफोक क्या था?
उत्तर:
युंगफोक, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का नात्सी युवा संगठन था।

प्रश्न 20.
हिटलर यूथ संगठन में छात्रों को क्या सिखाया जाता था?
उत्तर:

  1. युद्ध की उपासना,
  2. आक्रामकता की भावना,
  3. हिंसा,
  4. लोकतंत्र तथा साम्यवाद की निंदा,
  5. यहूदियों तथा अन्य अवांछितों से घृणा।

प्रश्न 21.
‘नवम्बर के अपराधी’ शब्द किसके लिए प्रयोग किया जाता था?
उत्तर:
वाइमर सरकार को।

प्रश्न 22.
बोल्शेविक क्रांति की तर्ज पर जर्मनी में किस संगठन की स्थापना हुई?
उत्तर:
स्पार्टकिस्ट लीग की।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
महामंदी ने नाजीवाद को जन-आन्दोलन बनाने में क्या भूमिका निभायी?
उत्तर:
नाजीवाद 1930 ई. के दशक में अधिक लोकप्रिय नहीं बन पाया किन्तु मंदी के दौरान नाजीवाद एक जनआंदोलन बन गया। 1929 ई. के बाद बैंक दिवालिया हो चुके थे, काम-धन्धे बन्द होते जा रहे थे, मजदूर बेरोजगार हो रहे थे और मध्यवर्ग को लाचारी और भुखमरी का डर सता रहा था। ऐसे में लोगों को नाजी प्रोपेगैन्डा में एक बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई देती थी। 1929 में नाजियों को जर्मन संसद ‘राइख्सटाग’ में केवल 2.6 प्रतिशत वोढ़ मिले। 1932 ई. तक यह सबसे बड़ा दल बन गई और इसे 27 प्रतिशत (UPBoardSolutions.com) वोट मिले।
इस दौरान नाजियों ने अनेक बड़ी रैलियों का आयोजन किया। हिटलर का जनसमर्थन दिखाने और लोगों में एकता की भावना का संचार करने के लिए जनसभाओं का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिटलर ने बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने तथा युवाओं के लिए बेहतर भविष्य का वायदा किया।

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प्रश्न 2.
जनसामान्य की नाजीवाद के प्रति क्या धारणा थी?
उत्तर:

  1. बहुत से लोग नाजीवाद की निरंकुश पुलिस, दमन एवं हत्याओं के विरुद्ध खड़े हो गए।
  2. अधिकतर जर्मनीवासी निष्क्रिय मूकदर्शक एवं उदासीन बने रहे। वे इतने भयभीत थे कि न तो वे कुछ कर पाए, न मतभेद जता पाए और न ही विरोध कर पाए।
  3. कई लोगों ने नाजियों की दृष्टि से देखा और नाजियों की भाषा में उनके मस्तिष्क की बातें बताईं। उन्होंने यहूदियों के प्रति गुस्सा और घृणा विकसित कर ली थी। यहूदियों के घर चिह्नित किए गए और संदिग्ध पड़ोसी के रूप में उनकी शिकायत की गई। उनका विश्वास था कि नाजीवाद खुशहाली लाएगा और उनके जीवन को सुखी बना देगा।

प्रश्न 3.
विशेषाधिकार अधिनियम के प्रावधान बताइए।
उत्तर:
3 मार्च, 1933 को पारित विशेषाधिकार अधिनियम के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार थे-

  1. नाजियों व उनके सहयोगियों को छोड़ कर अन्य सभी राजनैतिक दलों व ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया।
  2. अर्थव्यवस्था, मीडिया, सेना और न्यायपालिका पर राज्य ने पूर्ण रूप से नियंत्रण कर लिया।
  3. इसने जर्मनी में तानाशाही स्थापित कर दी।
  4. इसने संसद को दरकिनार करते हुए हिटलर को डिक्री से शासन करने की सारी शक्तियाँ दे दी।

प्रश्न 4.
वर्साय की संधि की प्रमुख चार शर्तों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मित्र देशों (इंग्लैण्ड, फ्रांस और रूस) ने जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध में पराजित करने के बाद उसे वर्साय सन्धि नामक एक शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए विवश किया। इस सन्धि की शर्ते जर्मनी के लिए अत्यन्त अपमानजनक और कठोर थीं।
सन्धि के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार थे-

  1. युद्ध अपराधबोध अनुच्छेद के तहत युद्ध के कारण मित्र देशों को हुई हानि और सारी तबाही के लिए जर्मनी को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके एवज में उस पर छः अरब पौंड का जुर्माना लगाया गया।
  2. खनिज संसाधनों वाले राईनलैण्ड पर भी बीस के दशक में ज्यादातर मित्र राष्ट्रों का ही कब्जा रहा।
  3. जर्मनी को अपने समुद्र पार के उपनिवेश, 13 प्रतिशत भू-भाग, 75 प्रतिशत लौह-भण्डार, 26 प्रतिशत कोयला भण्डार फ्रांस, पोलैण्ड, डेनमार्क और (UPBoardSolutions.com) लिथुआनिया के हवाले करने पड़े।
  4. जर्मनी की रही-सही ताकत खत्म करने के लिए मित्र राष्ट्रों ने उसकी सेना भी भंग कर दी।

प्रश्न 5.
नात्सीवाद की विजय के प्रमुख परिणामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
नात्सीवाद की विजय के प्रमुख परिणाम-

  1. जर्मनी में सैन्यकरण का कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किया गया तथा युद्ध की तैयारियाँ बड़े जोर-शोर से शुरू की गयीं।
  2. जर्मनी में अन्य सभी साहित्य को जला दिया गया जिसमें उदारवाद, समाजवाद व लोकतंत्र के विचारों की प्रशंसा की गई थी।
  3. हिटलर व नात्सी पार्टी का उत्थान द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रमुख कारण बना।
  4. जर्मनी में हिटलर के नेतृत्व में नात्सी पार्टी की तानाशाही स्थापित हो गई। इससे वहाँ आतंकवाद छा गया तथा नात्सी विरोधी नेताओं की बड़े पैमाने पर हत्या कर दी गई।
  5. जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। समाजवादियों व साम्यवादियों का भी विरोध किया गया।

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प्रश्न 6.
नात्सीवादी शासन में वांछित बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को किस प्रकार पुरस्कृत किया गया?
उत्तर:
इस समयावधि में प्रजातीय आधार पर वांछित दिखने वाले बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को पुरस्कार दिया भण्डार जाता था। ऐसी माताओं को चिकित्सालयों में विशेष सुविधाएँ दी जाती थीं, दुकानों में सामान खरीदने पर उन्हें अधिक छूट दी जाती थी। इसके साथ ही थियेटर व रेलगाड़ी के टिकट सस्ती दर पर दिए जाते थे। हिटलर ने ढेर सारे बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को उसी प्रकार पदकों से (UPBoardSolutions.com) सम्मानित करने की व्यवस्था की थी जिस प्रकार सेना में शौर्य प्रदर्शित करने वाले सैनिकों को सम्मानित किया जाता था। चार बच्चे पैदा करने वाली माँ को कांस्य पदक, छः बच्चे पैदा करने वाली माँ को रजत पदक तथा आठ या उससे अधिक बच्चे पैदा करने वाली माँ को सोने के पदक दिए जाते थे।

प्रश्न 7.
नात्सी लोग यहूदियों से क्यों घृणा करते थे?
उत्तर:
जर्मन लोगों द्वारा यहूदियों से घृणा करने की निम्न वजह थी-

  1. नात्सी विचारधारा के अनुसार नस्ली श्रेष्ठता के आधार पर यहूदी विश्व की सबसे निम्न स्तरीय नस्ल है तथा जर्मनी की सभी समस्याओं का मूल कारण यहूदी ही हैं।
  2. यहूदी लोग जर्मन समाज से बिलकुल अलग बस्तियों में रहते थे जिन्हें घेटो’ कहा जाता था।
  3. जर्मनों के अनुसार यहूदी आदतन हत्यारे और सूदखोर थे।
  4. यहूदी लोग मुख्य रूप से व्यापार और धन उधार देने का धन्धा करते थे।
  5. जर्मन ईसाई धर्म के अनुयायी थे और ईसाइयों का आरोप था कि ईसा मसीह को यहदियों ने ही मारा था। इसीलिए मध्यकाल तक जर्मनी में यहूदियों को जमीन का मालिक बनने की मनाही थी।

प्रश्न 8.
नात्सी आचार संहिता का उल्लंघन करने वाली महिलाओं को किस प्रकार दण्डित किया जाता था?
उत्तर:

  1. आचार संहिता का उल्लंघन करने वाली महिलाओं को न केवल जेल की सजा दी जाती थी बल्कि उनके नागरिक सम्मान, पति और परिवार से उन्हें वंचित कर दिया जाता था।
  2. आचार संहिता का उल्लंघन करने वाली आर्य महिलाओं की सार्वजनिक रूप से निन्दा की जाती थी तथा उन्हें कठोर दण्ड दिया जाता था।
  3. आचार संहिता उल्लंघन की दोषी अनेक महिलाओं को गंजा करके, मुँह पर कालिख पोत कर और उनके गले में तख्ती लटका कर उन्हें सारे शहर में घुमाया जाता था। उनके गले में लटकी तख्ती पर लिखा होता था कि मैंने राष्ट्र के सम्मान को मलिन किया है।

प्रश्न 9.
प्रथम विश्व युद्ध का यूरोप पर प्रभाव बताइए।
उत्तर:
प्रथम विश्व युद्ध के यूरोप पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े-

  1. मीडिया में खंदकों की जिंदगी का महिमामंडन किया जा रहा था। लेकिन सच्चाई यह थी कि सिपाही इन खंदकों में बड़ी दयनीय जिंदगी जी रहे थे। वे लाशों को खाने वाले चूहों से घिरे रहते थे। वे जहरीली गैस और दुश्मनों की गोलाबारी का बहादुरी से सामना करते हुए भी अपने साथियों को पल-पल मरते देखते थे।
  2. सार्वजनिक जीवन में आक्रामक फौजी प्रचार और राष्ट्रीय सम्मान प्रतिष्ठा की चाह के सामने बाकी सारी चीजें गौण हो गई जबकि हाल ही में सत्ता में आए रूढ़िवादी तानाशाहों को व्यापक जनसमर्थन मिलने लगा।
  3. यूरोप कृर्ज देने वाले महाद्वीप से कर्जदारों का महाद्वीप बन गया।
  4. पहले महायुद्ध ने यूरोपीय समाज और राजनीतिक व्यवस्था पर अपनी गहरी छाप छोड़ दी थी। सिपाहियों को आम नागरिकों के मुकाबले ज्यादा सम्मान (UPBoardSolutions.com) दिया जाने लगा। राजनेता और प्रचारक इस बात पर जोर देने लगे कि पुरुषों को आक्रामक, ताकतवर और मर्दाना गुणों वाला होना चाहिए।

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प्रश्न 10.
वाइमर संविधान के दोषों को बताइए।
उत्तर:
वाइमर गणतंत्र ने आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर निर्भर ऐसी प्रणाली का विकास किया जिसमें किसी एक दल को बहुमत पाना लगभग असंभव था, फलस्वरूप देश में गठबन्धन सरकारें बनती थीं। अनुच्छेद 48 राष्ट्रपति को नागरिक अधिकार समाप्त करते हुए आपातकाल लागू करके डिक्री द्वारा शासन करने की शक्ति देता था। अल्पकाल में ही वाइमर रिपब्लिक ने 20 अलग-अलग मन्त्रिमण्डल देखे जिनका औसत कार्यकाल 239 दिन था और साथ ही अनुच्छेद 48 का भी भरपूर प्रयोग हुआ। फिर भी संकट का समाधान नहीं हो सका। परिणामस्वरूप लोगों का लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली से विश्वास उठ गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नासीवाद की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नात्सीवाद का उदय जर्मनी में हुआ था। नात्सी लोगों ने एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में आधुनिक काल की सर्वाधिक बर्बर तानाशाही की जर्मनी में स्थापना की।
नात्सीवाद की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  1. यहूदी नस्ल सबसे घटिया नस्ल है तथा संसार की अन्य सभी नस्लें यहूदी और जर्मन के बीच की नस्लें हैं।
  2. हिटलर का मानना था कि लोगों को बसाने के लिए ज्यादा से ज्यादा इलाकों पर कब्जा करना जरूरी है। इससे मातृदेश का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा और नए इलाकों में जाकर बसने वालों को अपने जन्म स्थान से सम्बन्ध बनाए रखने में कोई समस्या नहीं आएगी।
  3. वह पूर्व में जर्मनी की सीमाओं को फैलाना चाहता था ताकि सारे जर्मनों को भौगोलिक दृष्टि से एक ही जगह इकट्ठा किया जा सके।
  4. नात्सीवाद के अनुसार राज्य सबसे ऊपर है। लोग राज्य के लिए हैं न कि राज्य लोगों के लिए।
  5. नात्सीवाद लोकतंत्र तथा साम्यवाद को जड़ से मिटा देना चाहता था।
  6. नात्सीवाद युद्ध तथा शक्ति के प्रयोग को राज्य के विस्तार के लिए आवश्यक मानता था।
  7. नात्सीवाद के अनुसार ब्लाँड, नीली आँखों वाले नॉर्डिक जर्मन आर्य सर्वश्रेष्ठ नस्ल है। उसे अपनी शुद्धता बनाए रखनी चाहिए तथा उसे ही पूरी दुनिया पर वर्चस्व स्थापित करने का हक है।

प्रश्न 2.
वर्साय संधि के प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वर्साय संधि के प्रमुख प्रावधानों का विवरण इस प्रकार है-

  1. जर्मनी भविष्य में आक्रमणकारी नीति का अनुकरण कर पुनः युद्ध न छेड़ दे, इसको रोकने के लिए जर्मनी की सैनिक शक्ति को घटा दिया गया। जर्मनी में लामबंदी और अनिवार्य सैनिक शिक्षा की मनाही कर दी। उसकी सेना की संख्या एक लाख निश्चित की गई। शस्त्र बनाने, उन्हें बाहर भेजने या बाहर से मँगवाने पर भी पाबंदी लगा दी गई। जर्मनी के सैनिक विभाग की शक्ति सीमित कर दी गई। राइनलैण्ड और कील के क्षेत्रों को सेना-रहित क्षेत्र करार दिया गया।
  2. जर्मनी की जल-शक्ति में भी भारी कमी कर दी गई। उसे पनडुब्बियाँ रखने की मनाही कर दी गई। उसे केवल 6 लड़ाई के जहाज, 6 हल्के और 12 टारपीडो किश्तियाँ रखने का अधिकार दिया गया।
  3.  युद्ध की सारी जिम्मेदारी जर्मनी पर डाली गई। उसे युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में 6 अरब 10 करोड़ पौंड की बड़ी धनराशि मित्र राष्ट्रों को देने के लिए विवश किया गया।
  4. जर्मनी ने 10 लाख टन कोयला प्रतिवर्ष फ्रांस को और 80 लाख टन कोयला प्रतिवर्ष बेल्जियम और इटली को देना स्वीकार किया।
  5. युद्ध के लिए जर्मनी के सम्राट कैसर विलियम को जिम्मेदार ठहराया गया। उस पर मुकद्दमा चलाने का निर्णय किया गया परन्तु वह जर्मनी से भाग कर हालैण्ड चला गया। अन्तः इस दिशा में कोई कदम न उठाया जा सका। इस प्रकार जर्मनी के लिए यह संधि बड़ी अपमानजनक और घातक सिद्ध हुई और इसने जर्मनी को आर्थिक व सैनिक दृष्टि से असहाय बना दिया।
  6. आल्सेस और लोरेन के प्रांत फ्रांस को, यूपेन, मोर्सनेट और माल्मेडी के तीन जिले बेल्जियम को, मेमल का तटवर्ती बंदरगाह लिथूनिया को और संपूर्ण (UPBoardSolutions.com) पश्चिमी प्रशिया के प्रदेश पोलैण्ड को दिए गए।
  7. सार की घाटी की कोयले की खानों का अधिकार फ्रांस को दिया गया। सार का शासन-प्रबन्ध 15 वर्ष के लिए लीग ऑफ नेशंस की अधीनता में एक अन्तर्राष्ट्रीय कमीशन को सौंपा गया। 1935 में वहाँ जनमत हुआ और उसके आधार पर सार की घाटी को जर्मनी के साथ मिला दिया गया।
  8. राइनलैण्ड को सेना-रहित कर दिया गया। इस प्रदेश में किलेबंदी तोड़ दी गई और भविष्य में जर्मनी को इसकी किलेबंदी करने की मनाही कर दी गई।
  9. डैजिग को लीग ऑफ नेशंस के अधीन एक स्वतन्त्र नगर रखा गया। पोलैण्ड के विशेषाधिकारों को इसमें मान्यता दी गई।
  10. हेलिगोलैंड और ड्यून की बंदरगाहों तथा उनकी किलेबंदी को समाप्त कर दिया गया।।
  11. बेल्जियम, पोलैण्ड और चैकोस्लोवाकिया को स्वतंत्र राज्यों की मान्यता जर्मनी को देनी पड़ीं। पोलैंड को समुद्र तक पहुँचने के लिए जर्मनी के प्रदेशों में से एक संत रास्ता दिया गया।
  12. जर्मनी से उसका औपनिवेशिक साम्राज्य छीन लिया गया और लीग ऑफ नेशन्स के अधीन इसका शासन विभिन्न मित्र-राष्ट्रों को सौंपा गया। पश्चिमी अफ्रीका में जर्मन-उपनिवेश इंग्लैण्ड को दिए गए। कैमरून और टोगोलैण्ड को फ्रांस और इंग्लैण्ड में बाँटा गया। सैमोया द्वीप न्यूजीलैण्ड को तथा शांतुग और क्याओ-चाओ जापान को प्राप्त हुए।

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प्रश्न 3.
नाजियों के अधीन शिक्षण संस्थाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एडोल्फ हिटलर ने इस बात का अनुभव किया कि बच्चों को नाजी विचारधारा सिखाकर ही नाजी समाज का निर्माण संभव है। अतः बच्चों को नाजी विचारधारा में प्रशिक्षित करने के लिए विद्यालयों को माध्यम बनाया। इसके लिए नाजियों ने निम्न प्रयास किए-

  1. नाजियों ने सभी स्कूलों में सफाई और शुद्धीकरण किया जिसका आशय था कि वे अध्यापक जो यहूदी थे अथवा जो राजनैतिक रूप से विश्वसनीय नहीं थे, बर्खास्त कर दिए गए।
  2. विद्यालयों में जर्मनों और यहूदियों को एक साथ बैठने-खेलने की मनाही थी।
  3. नाजियों द्वारा यूथ लीग की स्थापना 1922 ई. में की गयी जिसका नाम बदलकर बाद में हिटलर ने ‘यूथ’ रख दिया।
  4. ‘अवांछित बच्चे’, यहूदी, शारीरिक विकलांग, जिप्सी आदि को स्कूलों से बाहर निकाल दिया गया और अंततः 1940 ई. में इन्हें गैस चैम्बरों में ले जाया गया।
  5. स्कूलों की पाठ्य पुस्तकें पुनः लिखी गईं। नस्ल के बारे में नाजी विचारधारा को सही ठहराने के लिए नस्ल विज्ञान विषयं लागू किया गया।
  6. यहाँ तक कि गणित की कक्षाओं के जरिए भी यहूदियों की खास छवि गढ़ने का प्रयास किया जाता।
  7. बच्चों को वफादार, आज्ञाकारी बनना, यहूदियों से घृणा करना और हिटलर की पूजा करना सिखाया जाता था।
  8. खेल सिखाने का उद्देश्य बच्चों में हिंसा एवं आक्रामकता पैदा करना था। हिटलर का विश्वास था कि मुक्केबाजी लड़कों को पत्थरदिल, मजबूत एवं मर्दाना बना देगी।
  9. युवा संगठनों को जर्मन युवकों को राष्ट्रीय समाजवाद की भावना से लैस करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
  10. 10 वर्ष की आयु के बच्चों को गुंगफ्रोक (14 वर्ष से कम आयु के नाजी बच्चों का संगठन) में दाखिल कराया ..’ जाता। 14 वर्ष की आयु में सभी लड़कों को नाजी युवा संगठन हिटलर यूथ का सदस्य बनना पड़ता जहाँ वे युद्ध की पूजा, हिंसा व आक्रामकता को गौरवान्वित करने, लोकतन्त्र की निन्दा करने, यहूदियों, कम्युनिस्टों, जिप्सी और अन्य इसी प्रकार के अवांछित वर्ग के लोगों से घृणा करना सीखते थे।
  11. 18 वर्ष की आयु में वे लेबर सर्विस में शामिल हो जाते जिसके बाद उन्हें सेना में काम करना पड़ता था और किसी ‘एक नाजी संगठन की सदस्यता लेनी पड़ती थी।

प्रश्न 4.
जर्मनी में नासीवाद का प्रसार किस प्रकार किया गया?
उत्तर:
जर्मनी में नात्सीवाद का प्रसार इस प्रकार किया गया-
(क) हिटलर ने 1921 ई. में नासी दल का गठन किया था। उसने जर्मन राजधानी बर्लिन की ओर एक अभियान जारी कर सत्ता हासिल करने की योजना बनायी थी, किन्तु वह पकड़ा गया तथा उसे जेल में डाल दिया गया। लेकिन सजा की अवधि पूरी होने से पहले ही उसे छोड़ दिया गया।

(ख) जेल में ही उसने एक पुस्तक ‘मेरा संघर्ष’ लिखी। इस पुस्तक में उसने नात्सी आन्दोलन के दर्शन और डरावने विचार व्यक्त किए। इस पुस्तक में उसने बल प्रयोग, बर्बरतापूर्ण व्यवहार, महान् नेता द्वारा शासन की महिमा का गुणगान करने के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीयता, लोकतंत्र वे शान्ति का मजाक उड़ाया। उसने जर्मन यहूदियों के प्रति बहूत ज्यादा घृणा का प्रचार किया और उन्हें न सिर्फ प्रथम विश्वयुद्ध में (UPBoardSolutions.com) जर्मनी की हार के लिए बल्कि उसकी अनेक आर्थिक समस्याओं के लिए पूरा उत्तरदायी ठहराया। उसने उग्र राष्ट्रवाद का प्रचार किया।

(ग) हिटलर के सत्तारूढ़ होने से पूर्व जर्मनी में चुनाव हुए जिसमें नात्सी दल को समाजवादियों व कम्युनिस्टों को कुल मिलाकर जितने मत मिले थे, उससे भी कम मत मिले थे। वह और उसका दल 650 स्थानों में से केवल 196 स्थान ही ले सका। हिटलर राजनीतिक षड्यंत्रों के जरिए सत्ता में आया। चुनावों में विफलता के बावजूद जर्मनी के राष्ट्रपति हिंडेनबर्ग ने 30 जनवरी, 1933 ई. को उसे जर्मनी वा चांसलर नियुक्त किया। हिटलर के सत्ता में आने के कुछ
ही सप्ताहों के भीतर जर्मनी में जनतंत्र का ढाँचा छिन्न-भिन्न हो गया।

(घ) सत्ता में आते ही हिटलर ने चुनाव कराने के आदेश दिए तथा आतंक का राज्य स्थापित किया। नात्सी-विरोधी नेताओं की हत्या बड़े पैमाने पर कराई गई। नात्सी लोगों ने 27 फरवरी, 1933 ई. को संसद भवन में आग लगा दी। अग्निकाण्ड के लिए जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी पर दोषारोपण कर उसे कुचल दिया गया। नात्सी लोगों द्वारा आतंक फैलाने के बावजूद नात्सी दल को संसद में बहुसंख्यक स्थान नहीं मिल पाए। फिर भी, हिटलर ने तानाशाही अधिकार ग्रहण कर लिए तथा वह राष्ट्रपति भी बन गया।

श्रमिक संघों को प्रतिबन्धित कर दिया गया। हजारों समाजवादियों, कम्युनिस्टों और नात्सी-विरोधी राजनीतिक नेताओं को मंत्रणा शिविरों में भेज दिया गया। नासी लोगों ने पुस्तकों को जलाना शुरू कर दिया। उन्होंने जर्मनी एवं अन्य देशों के प्रतिष्ठित लेखकों की रचनाओं को आग के हवाले कर दिया। समाजवादियों, कम्युनिस्टों, यहूदियों को अपमानित एवं प्रताड़ित किया गया। देश में सैन्यीकरण का एक विशाल (UPBoardSolutions.com) कार्यक्रम आरम्भ किया गया। नात्सीवाद की विजय न केवल जर्मन लोगों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण यूरोप एवं विश्व के लिए विपत्ति सिद्ध हुई। द्वितीय विश्व युद्ध को आरम्भ करने में इसकी प्रमुख भूमिका थी।

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प्रश्न 5.
जर्मन अर्थव्यवस्था पर आर्थिक मंदी का प्रभाव बताइए।
उत्तर:
आर्थिक मंदी का जर्मन अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इस प्रभाव को निम्न रूप में प्रकट किया जा सकता है-

  1. औद्योगिक उत्पादन 1929 ई. के मुकाबले 1932 ई. में 40 प्रतिशत तक घट गया।
  2. जैसे-जैसे मुद्रा का अवमूल्यन होता जा रहा था, मध्यवर्ग, खासतौर से वेतनभोगी कर्मचारी और पेंशनधारियों की बचत भी सिकुड़ती जा रही थी।
  3. कारोबार ठप्प हो जाने से छोटे-मोटे व्यवसायी, स्वरोजगार में लगे लोग और खुदरा व्यापारियों की हालत भी खराब होती जा रही थी।
  4. बड़ा व्यापार भी संकट में था।
  5. किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग कृषि उत्पादों की कीमतों में बेहिसाब गिरावट की वजह से परेशान था। महिलाएँ अपने बच्चों का पेट भर पाने में असफल हो रहीं थीं।
  6. मजदूर या तो बेरोजगार हो गए या उन्हें घटी हुई मजदूरी मिली।
  7. बेरोजगारी एक गम्भीर समस्या बन गई। बेरोजगार नौजवान या तो ताश खेलते पाए जाते थे या नुक्कड़ों पर झुंड लगाए रहते थे या फिर रोजगार दफ्तरों के बाहर लम्बी-लम्बी कतार में खड़े पाए जाते थे।

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