UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि

UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि

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संस्कृत व्याकरण व अनुवाद

सब्धि

‘सन्धि’ का शाब्दिक अर्थ है-‘मेल’। जब पास-पास आये हुए दो वर्ण आपस में मिलकर एक नया रूप धारण करते हैं तो उस एकीकरण को सन्धि कहते हैं। सन्धि करने पर निकट के दो वर्ण मिलकर एक हो जाते हैं; जैसे-
हिम + आलयः = हिमालयः
सूर्य + उदयः = सूर्योदयः।
सु + आगतम् = स्वागतम् ।

सन्धि तीन प्रकार की होती हैं—

  1. स्वर सन्धि,
  2. व्यंजन सन्धि तथा
  3. विसर्ग सन्धि। ध्यातव्य-पाठ्यक्रम में (UPBoardSolutions.com) केवल स्वर सन्धि के ‘यण’ एवं ‘वृद्धि’ भेद ही निर्धारित हैं।

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स्वर सन्धि

जहाँ दो स्वरों के मेल से परिवर्तन होता है, वहाँ स्वर सन्धि होती है (स्वर + स्वर = स्वर सन्धि)। स्वर सन्धि के भी अनेक भेद हैं, जिनमें प्रमुख भेदों का नियमसहित विवरण नीचे दिया जा रहा है-

1. दीर्घ सन्धि (सूत्र–अकः सवर्णे दीर्घः)
नियम-यदि अ, इ, उ, ऋ, ले (ह्रस्व या दीर्घ) के बाद समान स्वर हो तो दोनों के स्थान पर उस वर्ण का दीर्घ; अर्थात् आ, ई, ऊ, ऋ, ऋ (लू नहीं) हो जाता है;
उदाहरण-
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2. गुण सन्धि (सूत्र-आद्गुणः)
नियम–यदि अ या आ के बाद इ, उ, ऋ, लू (ह्रस्व या दीर्घ) आएँ तो उनके स्थान पर क्रमशः ए, ओ, अर् और अल् हो जाते हैं;
उदाहरण-
UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि img-3

3. वृद्धि सन्धि (सूत्र-वृद्धिरेचि)
नियम-यदि अ या आ के बाद ए-ऐ तथा ओ-औ आएँ तो उनके स्थान पर क्रमश: ऐ तथा औ अर्थात् वृद्धि हो जाती है;
उदाहरण-
UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि img-4
UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि img-5

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4. यण् सन्धि (सूत्र–इको यणचि)
नियम–यदि इ, उ, ऋ, लू (ह्रस्व या दीर्घ) के बाद असमान स्वर आते हैं तो उनके स्थान पर क्रमशः य, व, र, ल् हो जाता है;
उदाहरण-
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UP Board Solutions for Class 10 Hindi सन्धि img-1

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अभ्यास

प्रश्न 1.
नीचे लिखे पदों का सन्धि-विच्छेद कीजिए और सन्धि का प्रकार भी लिखिए-
उत्तर
(I)
महौत्सुक्यम्, शुद्धौषधम्, गंगौघः, महैश्वर्यम्, समयौचित्यम्, तत्रैव, मतैक्य, तदैव, रामौदार्यम्।
(II) मात्राज्ञाः, प्रत्युत्तरम्, अत्यन्तम्, करोम्यहम्, ग्रामेष्वपि, यद्यपि, गुर्वाज्ञा, (UPBoardSolutions.com) अभ्युदयः, अन्वेषणम्, दध्यानय, स्वागतम्, पित्राकृतिः, प्रत्युपकार, देवेन्द्रः, हरिश्चन्द्रः, वाग्जाल, नमस्कार।

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प्रश्न 2.
नीचे लिखे पदों में सन्धि कीजिए-
उत्तर
(I)
कृष्ण + औत्कण्ठम्, महा + ऐक्यम्, अद्य + एव,
बाला + ओदनम्, अत्र + एव, रामस्य + एकः, अत्र + एव।
(II) लू + आकृतिः , इति + आदिः, वस्त्राणि + अपि, इति + उक्त्वा ,
मधु + अत्र, धातृ + अंशः, जाति + उपकारः, काष्ठ + ओषधिः।

प्रश्न 3.
यण् अथवा वृद्धि सन्धि की परिभाषा लिखिए तथा उदाहरण भी दीजिए। [2012]

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi पर्यायवाची शब्द

UP Board Solutions for Class 10 Hindi पर्यायवाची शब्द

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Hindi पर्यायवाची शब्द.

पर्यायवाची शब्द

पाठ्यक्रम में केवल पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द ही निर्धारित हैं।
नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 2 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।

एक ही अर्थ को प्रकट करने वाले एकाधिक शब्द पर्यायवाची कहलाते हैं। यद्यपि किसी भाषा में कोई दो शब्द समान अर्थ वाले नहीं होते, उनमें सूक्ष्म-सा अन्तर अवश्य होता है तथापि अर्थ के स्तर पर अधिक निकट होने वाले शब्दों को समानार्थी कहा जाता है; उदाहरणार्थ-अश्व, हय और तुरंग-तीनों घोड़े के लिए प्रयुक्त होते हैं। अत: ये पर्यायवाची शब्द हैं।-

हिन्दी भाषा के कुछ शब्दों के पर्यायवाची निम्नवत् हैं-

अमृत [2011, 12, 13, 15]-अमिय, सुधा, पीयूष, अमी।
अतिथि [2014, 18]-अभ्यागत, मेहमान, पाहुना, आगन्तुक।
असुर-दनुज, दानव, दैत्य, राक्षस, निशाचर, खल, रजनीचर।
अग्नि [2011, 12, 13, 15, 16]–हुताशन, वह्नि, अनल, पावक, आग, दहन, ज्वाला।
अनुपम-अद्भुत, अद्वितीय, अनोखा, अपूर्व, अनूठा।
अधर्म-पतित, भ्रष्ट, नीच, निकृष्ट, खल, (UPBoardSolutions.com) पामर, दुर्जन।
अपमान-अनादर, उपेक्षा, तिरस्कार, निरादर।।
अन्धकार—तम, तिमिर, तमिस्र, तमिस, तमर, तारीक।
अश्व [2013, 15]-घोड़ा, वाहन, हय, बाजी, घोटक, सैंधव, तुरंग।
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अहंकार-अभिमान, गर्व, घमण्ड, मद, दर्प।
आकाश [2011, 13, 14, 15, 16, 17] – अन्तरिक्ष, अम्बर, आसमान, व्योम, नभ, गगन।
आँख [2011, 12, 14, 16]-दृग, लोचन, चक्षु, अक्षि, नेत्र, नयन।।
आनन्द–प्रसन्नता, हर्ष, उल्लास, खुशी।
आम [2017]-आम्र, रसाल, सहकार, अमृतफल।
आभूषण--गहना, भूषण, अलंकार, जेवर इनाम-पुरस्कार, पारितोषिक, प्रीतिकर, आनन्दकर।
इच्छा-अभिलाषा, चाह, मनोरथ, कामना, आकांक्षा, लालसा।
इन्द्र [2011, 15, 17, 18]-देवेन्द्र, सुरेन्द्र, सुरपति, पुरन्दर, देवराज, शचीपति।
ईश्वर-ईश, परमात्मा, परमेश्वर, प्रभु, भगवान, जगदीश।
उषा—प्रभात, सवेरा, अरुणोदय, निशान्त।
उदर—पेट, जठर।
उत्पन्न–पैदा, उद्भूत, आविर्भाव, प्रादुर्भूत।
उन्नति–उदय, वृद्धि, उत्कर्ष, उत्थान।
उद्देश्य-अभिप्राय, आशय, लक्ष्य, ध्येय, इष्ट, तात्पर्य।
उद्यान [2012, 13]-उपवन, कुसुमाकर, बगीचा, बाग, वाटिका।
कोयल [2013, 18]-पिक, कोकिल, परभृत, वसन्तदूत।
किरण—-मरीचि, मयूख, कर, रश्मि, अंश।
कामदेव [2011, 13, 15]-मदन, मनसिज, रतिपति, पंचशर, अतनु, कन्दर्प, मन्मथ, मनोज, अनंग।
कमल [2011, 12, 13, 14, 15, 17, 18]-शतदल, पुण्डरीक, (UPBoardSolutions.com) उत्पल, वारिज, कोकनद, सरसिज, पद्म, नलिन, राजीव, सरोज, पंकज, अरविन्द, अम्बुज, जलज, सरोरुह, कंज, नीरज।
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कपड़ा [2016, 18]–वस्त्र, पट, वसन, चीर, अम्बर।।
किनारा-तट, तीर, कगार, कूल।
कृष्ण [2016]–घनश्याम, मोहन, केशव, माधव, वासुदेव, गिरिधर, गोपाल, मुरारि कथा-कहानी, आख्यान, गल्प, आख्यायिका।।
कलह–झगड़ा, विवाद।
कान-कर्ण, श्रोत्र, श्रवण।
कृपा–अनुग्रह, मेहरबानी, दया, अनुकम्पा।
क्रोध-गुस्सा, रोष, कोप, अमर्ष।
खग [2016]-पक्षी, पखेरू, विहंग, द्विज, चिड़िया
गणेश [2011, 12]-गणपति, भालचन्द्र, लम्बोदर, गजानन, विनायक।
गंगा [2015, 16, 17]-भागीरथी, देवनदी, सुरसरि, मंदाकिनी, नदीश्वरी।
गाय [2012, 13, 15, 16]–गौ, सुरभि, धेनु।
गोद-अंक, क्रोड, उत्सर्ग।।
घर (2011, 14, 15, 16)-सदन, धाम, गेह, आयतन, आलय, आगार, भवन, गृह, निकेतन।
चाँदनी—ज्योत्स्ना, कौमुदी, चन्द्रिका, चन्द्रमरीची।
चाँद [2011, 12, 13, 14, 15, 18]–निशाकर, हिमांशु, राकेश, निशिपति, कलानिधि, सुधाधर, चन्द्र, चन्द्रमा, विधु, सोम, शशि, शशांक, मयंक, इन्दु, रजनीश।
जल[2012, 14, 15, 16, 17, 18]-पय, सलिल, पानी, जीवन, तोय, अम्बु, वारि, उदक, नीर।
जंगल [2013, 17]-विपिन, कानन, अरण्य, वन।।
जीभ-जिह्वा, रसना, रसज्ञा, रसा।
जूता-चरणदास, जूत, जोड़ा, पदत्र, पादत्राण।
झण्डा-ध्वज, पताका, निशान, केतु।
तलवार-खड्ग, कृपाण, असि, शमशीर, करवाल।
तरंग-लहर, उर्मि, वीचि, हिलोर।
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तालाब [2011, 13, 14, 15, 17]-सर, सरोवर, तड़ाग, जलाशय, ताल, पोखर।
तारा-नक्षत्र, तारक, ऋण, नखत। तीर [2012]-बाण, शर, सायक, शिलीमुख।
दुष्ट-खल, दुर्जन, पामर, शठ।।
दूध [2017]–पय, दुग्ध, गोरस, क्षीर।
दन्त-दाँत, दर्शन, रद, द्विज, दंश।
दास—भृत्य, नौकर, सेवक, अनुचर, परिचारक।
दिन [2012, 16]-दिवस, वार, वासर, अहन्।
देवता–सुर, अमर, देव, त्रिदिव, गीर्वाण, आदित्य।
दुर्गा – भवानी, देवी, कालिका, (UPBoardSolutions.com) अम्बा, चण्डिका।।
दुःख-पीड़ा, कष्ट, व्यथा, विषाद, यातना, वेदना।
धनुष-धनु, कोदण्ड, चाप, कमान, कार्मुक, शरासन।
धन-द्रव्य, अर्थ, वित्त, सम्पत्ति, लक्ष्मी।
नदी [2011, 12, 15, 16, 18]-सरिता, तरंगिणी, जलमाता, नद, तटिनी।
नरक–दुर्गति, संघात, यमपुर, यमलोक, यमालय।
नेत्र [2016]–नयन, लोचन, चक्षु, आँख, दृग।।
नारी [2011]-स्त्री, कामिनी, महिला, अबला, वनिता, भामिनी, ललना, वामा, कान्ता, रमणी।
रात [2012,16]–निशा, यामिनी, रात्रि, रजनी, शर्वरी।।
नौका-नाव, तरिणी, जलयान, बेड़ा, पतंग, तरी।।
पण्डित [2014]–विद्वान, प्राज्ञ, बुद्धिमान, धीमान, वीर, सुधी।
पक्षी [2013]-खग, नभचर, विहग, विहंगम, पतंग, शकुंत, अण्डज, शकुनि, पखेरू, खेचर।
पत्नी [2015]-वधू, गृहिणी, स्त्री, प्राणप्रिया, अर्धांगिनी, वल्लभा, तिय, भार्या।।
पति-स्वामी, नाथ, वर, कान्त, प्राणनाथ, आर्य, ईश।।
पत्ता [2017]-पात, दल, पत्र, किसलय, पर्ण, पल्लव।
पराग-पुष्परज, कुसुमरज, पुष्पधूलि।
पर्वत [2012, 14, 16, 18]–गिरि, पहाड़, शैल, नग, अचल, महीधर, धराधर, अद्रि, भूधर।
पुत्र-सुत, बेटा, लड़का, पूत, तनय, पुत्र, आत्मज, तनु।
पुत्रीसुला, बेटी, लड़की, नन्दिनी, तनया, तनुजा, (UPBoardSolutions.com) दुहिता, आत्मजा।
पत्थर [2014, 15, 16]-पाषाण, वज्र, पाहन, उपल, शिला।
पुरुष-मनुज, आदमी, मर्द, जन, नर, मनुष्य।
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पृथ्वी [2011, 13, 14, 17, 18]-वसुन्धरा, वसुधा, अवनि, मेदिनी, धरती, धरा, भूमि, मही, वसुमति।।
पुष्प [2012, 13, 15] कुसुम, सुमन, फूल, पुहुप, मंजरी, प्रसून।
प्रकाश-उजाला, ज्योति, प्रभाव, विभा, आलोक।।
प्रसन्नता–हर्ष, खुशी, आह्लाद, मोद।
फल-रसाल, सस्य, पीलांक।
फूल [2016, 17, 18]-पुष्प, सुमन, कुसुम, मंजरी।
बादल [2012, 13, 14, 16, 17]-मेघ, जलद, नीरद, घन, वारिद, पयोद, धराधर, अम्बुद।
बन्दर–कपि, मर्कट, शाखामृग, हरि, वानर।
बिजली [2018]-दामिनी, सौदामिनी, विद्युत, चंचला, चपला, तड़ित।
बाल-अलक, कच, चिकुर, केश, कुन्तल।।
ब्राह्मण-भूसुर, द्विज, भूदेव, विप्र।।
बर्फ़-तुषार, हिम, तुहिन।
भ्रमर [2012, 17]-मधुप, मधुकर, भौंरा, भुंग, द्विरेफ, अलि, षट्पद।
भयानक–डरावना, भयजनक, विकट, गम्भीर
भिक्षा–भीख, याचना, माँगना, खैरात।
भूख-क्षुधा, बुभुक्षा, अन्नलिप्सा, आहारेच्छा।
भाई (2015)-भ्राता, सहोदर, बंधु, प्रियजन।
मछली-अण्डज, मीन, मत्स्य।
मदिरा-शराब, सुरा, मद्य, (UPBoardSolutions.com) वारुणी।
माता (2013, 14, 15)-जननी, माँ, मात, मैया, अम्बा।
मित्र-सखा, सहचर, साथी, मीत, दोस्त।
मुख-मुँह, मुखड़ा, आनन, वदन।
मृत्यु-निधन, देहान्त, अन्त, मौत।।
मनुष्य-मनुज, नर, आदमी, मानव, पुरुष।
मोर [2016]-मयूर, शिखी, शिखण्डी, कलापी।
मूर्ख-अज्ञ, अबोध, गॅवार, मूढ़।।
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मल्लाह–नाविक, माँझी, खेवट, कर्णधार, केवट।
महादेव-शिव, शम्भू, शंकर, महेश, त्रिलोचन, त्रिनेत्र, पशुपति, उमापति, कैलाशपति, रूद्र, भूतनाथ, नीलकण्ठ, पिनाकी।
यत्न-उद्यम, प्रयास, उद्योग, प्रयत्न, पुरुषार्थ।
यमुना [2014]-यम की बहन, नदी, कालिन्दी, दुर्गा।
यौवन-जवानी, युवावस्था, जीवन, शिरोमणि, तरुणाई।
युवक-जवान, युवा, तरुण।।
युद्ध-रण, संग्राम, लड़ाई, समर, संगर।
रात्रि [2012, 15, 16]–यामिनी, विभावरी, निशि, क्षपा, रात, रजनी, निशा।।
राजा-नरेश, भूपति, भूपाल, नरेन्द्र, महीपाल. नृप, नृपति, महीप।।
लक्ष्मी-इन्दिरा, कमला, रमा, हरिप्रिया, श्री।
लंहू-रक्त, खून, शोणित, रुधिर।।
लता [2016]-बेल, शोरा, वल्ली, आरोही, द्राक्षा।
वायु 2011, 12, 13, 15]-अनिल, वात, मारुत, पवमान, समीरण, हवा, पवन, प्रकम्पन, समीर।
वृक्ष [2017]-रुख, विटप, द्रुम, पादप, तरु, पेड़।
वज्र [2014, 18]-अश्मि, पवि, कुलिश।
वन [2011, 12, 13]-विपिन, जंगल, कानन, अटवी, अरण्य।
वर्ष-अब्द, साल, बरस, संवत्।।
वसन [2017]-वस्त्र, आवरण, चीर।
वानर [2018]–बन्दर, कपि, हरि, मर्कट, शाखामृग।
वर्षा (2016)–बारिश, बरसात, बौछारे, (UPBoardSolutions.com) वृष्टि।
विष्णु [2016, 18]-नारायण, जनदिन, चक्रपाणि, माधव, केशव।
व्यर्थ-निरर्थक, अर्थहीन, फ़िजूल।
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शत्रु-रिपु, दुश्मन, विपक्षी, अरि, वैरी, अराति।
शरीर-देह, काया, कलेवर, तन, वपु।।
शहद [2014]–मधु, अमृत, सुधा, घी।
शोभा–छवि, दीप्ति, कान्ति, सुषमा, आभा, छटा।
शिव [2017]–महादेव, शंकर, शम्भू, त्रिलोचन, महेश।
सेना –अनी, दल, चमू, कटेक, फौज।
सोना [2014]–हेम, हिरण्य, कंचन, स्वर्ण, कनक, कुन्दन।।
सूरज [2012, 13, 14, 16, 17, 18]–भानु, भास्कर, सूर्य, दिनेश, दिनकर, आदित्य, प्रभाकर, रवि, दिवाकर।
सूर [2017]-देवता, वसु, आदित्य।।
समुद्र [2012, 13, 14]-सागर, सिन्धु, रत्नाकर, उदधि, जलधि, जलनिधि, पारावार, अम्बुधि।
सिंह-हरि, शेर, केसरी, शार्दूल, व्याघ्र, केहरि, मृगेन्द्र, मृगराज, पंचानन।
स्वर्ग-द्युलोक, बैकुण्ठ, सुरलोक, देवलोक।
सवेरा–सूर्योदय, अरुणोदय, प्रातः, उषा, भोर।
साँप [2012, 14, 17]–नाग, फणि, व्याल, सर्प, अहि, भुजंग, पन्नग, विषधर।
संसार [2013]–विश्व, जगत, जग, दुनिया, (UPBoardSolutions.com) भव, भुवन।
सुगन्धि–सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू।
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सरस्वती-शारदा, भारती, गिरा, वाणी।
सन्तान-सन्तति, अपत्य, प्रजा, प्रसूति, औलाद।
हंस [2014]–मराल, कलहंस, मानसौकस।
हाथ [2016]-हस्त, कर, पाणिः ।
हिरण [2014, 18]–कुरंग, सारंग, मृग।
हाथी [2014, 17, 18]-दन्ती, कुंजर, द्विरद, द्विप, मतंग, हस्ती, गज, करी।
हनुमान-अंजनीनन्दन, कपीश्वर, पवनसुत, वज्रांगी, महावीर, बजरंगबली।

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UP Board Solutions for Class 6 Hindi प्रार्थना पत्र (पत्र – लेखन)

UP Board Solutions for Class 6 Hindi प्रार्थना पत्र (पत्र – लेखन)

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पत्रों के भेद – पत्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं –

  1. व्यक्तिगत पत्र (सामाजिक पत्र)।
  2. व्यापारिक पत्र।
  3. सरकारी पत्र।

कुछ मुख्य प्रशस्ति – सूचक तथा अभिवादन एवं अन्त में लिखे जानेवाले शब्द –
UP Board Solutions for Class 6 Hindi प्रार्थना पत्र (पत्र - लेखन) 1

पुत्र का पिता के नाम पत्र

राजकीय इन्टर कॉलेज,
लखन
दिनांक 1 अप्रैल, 20xx
पूजनीय पिता जी,
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ कुशल हैं और आपकी कुशलता की ईश्वर से कामना करता हूँ। मैं मन लगाकर पढ़ रहा हैं। अब शीघ्र ही मेरी वार्षिक परीक्षाएँ शुरू होने वाली हैं। (UPBoardSolutions.com)
संमयाभाव के कारण इस बार मैं घर आने में असमर्थ रहूँगा। पूज्य माता जी को सादर प्रणाम। छोटे भाई-बहनों को शुभ आशीर्वाद।
आपका प्रिय पुत्र
सुनील कुमार

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निमन्त्रण पत्र

बुलन्दशहर
दिनांक 10 जून, 20xx
प्रिय शर्मा जी,
सादर नमस्ते।
ईश्वर की अनुकंपा से मेरे पुत्र सुनील का जन्मदिन दिनांक 15 जून, 20xx को है। आपसे प्रार्थना है कि आप इस मंगल बेला में सपरिवार पधारकर उत्सव की शोभा बढ़ाएँ।
आपका दर्शनाभिलाषी
अजय सिन्हा

मित्र को पत्र

इलाहाबाद
दिनांक 1 जून, 20xx
अभिन्न हृदयं मयंक,
सस्नेह नमस्कार।
मैं कुशलता से हूँ और तुम्हारी कुशलता की कामना ईश्वर से करता हूँ। तुम्हारा और तुम्हारे पत्र का इंतजार हर समय रहता हैं लेकिन आशा-निराशा में बदल जाती है न तुम आते हो, न तुम्हारा पत्र। मैं इससे अनभिज्ञ हूँ कि इस उपेक्षा और निष्ठुरता का क्या कारण है। अतीत की स्मृतियाँ दिन-रात तुमसे मिलने के लिए बेचैन करती रहती हैं। अगर मेरे (UPBoardSolutions.com) इस पत्र का उत्तर नहीं दोगे तो आगे से मेरा भी तुम्हें कोई पत्र नहीं मिलेगा। पत्र का उत्तर शीघ्र देना। भाभी जी को प्रणाम के बच्चों को प्यार।
तुम्हारा मित्र
राजेश

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बधाई पत्र

इलाहाबाद
दिनांक 25 जुलाई, 20xx
स्नेहमयी ज्योति,
यह ज्ञात होने पर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हुई कि तुमने मेरठ विश्वविद्यालय में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए। इस सफलता के लिए मैं तुम्हें हार्दिक बधाई देती हैं और आशा करती हूँ कि तुम्हें एम०ए० में भी ऐसा गौरव प्राप्त हो। आशा है विश्वविद्यालय की तरफ से तुम्हें स्वर्ण-पदक भी प्राप्त होगा। ईश्वर सदैव तुम्हारा पथ प्रशस्त करता रहे।
मैं सपरिवार तुम्हें तुम्हारी सफलता के लिए बधाई देती हूँ। घर में सबको नमस्कार कहना।
तुम्हारी मित्र
सीमा।

शोक पत्र

कानपुर
दिनांक 12 फरवरी, 20xx
प्रिय श्रीमती शशि देवी जी,
आपके आदरणीय पति के असामयिक देहावसान का समाचार सुनकर हृदय को अत्यधिक दुख हुआ। निःसन्देश यह आपके और आपके परिवार के ऊपर एक भयंकर वज्रपात हुआ है लेकिन मृत्यु के ऊपर किसी का वश नहीं। भयंकर परिस्थितियों का सामना करना ही मानव का परम कर्तव्य है। इस कर्तव्य का पालन करके ही वह अपने जीवन में सफल हो सकता है।
मैं इस दुःखद घड़ी में आपकी हर प्रकार से सहायता करने के लिए तैयार हैं। आप धीरज रखें। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
आपकी बहन
रेनू

व्यावसायिक पत्र
(पुस्तक विक्रेता से पुस्तकें मँगाने के सम्बन्ध में)

राजकीय इन्टर कॅलेज,
लखनऊ
दिनांक 1 अप्रैल, 20xx
अशोक प्रकाशन,
डिप्टी गंज, बुलन्दशहर।
मान्यवर महोदय,
कृपया निम्नलिखित पुस्तकों को उचित कमीशन काटकर वी०पी०पी० पार्सल द्वारा शीघ्र भेजने की कृपा करें।

  1. राष्ट्र बाल भारती कक्षा 6 – 25 प्रतियाँ
  2. राष्ट्र बाल भारती कक्षा 7 – 25 प्रतियाँ
  3. राष्ट्र बाल भारती कक्षा 8 – 25 प्रतियाँ

भवदीय
कमलकिशोर (अध्यापक)

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प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र

श्रीयुत प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय इन्टर कॉलेज आगरा
श्रीमान जी,
निवेदन यह है कि मुझे रात्रि से बुखार आ रहा है। मैं कॉलेज आने में असमर्थ हैं। अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे दो दिन का अवकाश देने की कृपा करें। आपकी अति कृपा होगी।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
नीरज कुमार, कक्षा 6 (अ)
दिनांक 12 जुलाई, 20xx

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi तत्सम शब्द

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तत्सम शब्द

नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 2 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।
ध्यातव्य – प्रस्तुत प्रकरण के अन्तर्गत शब्द-रचना/शब्द-भण्डार से सम्बन्धित सामग्री किंचित विस्तार से दी गयी है। विद्यार्थियों को ज्ञान-बोध के लिए सम्पूर्ण सामग्री का अध्ययन करना चाहिए।

शब्द–निश्चित अर्थ को प्रकट करने वाले स्वतन्त्र वर्ण-समूह को शब्द कहते हैं; जैसे–घर, मकानं, विद्यालय, सुन्दरता आदि। ये सभी शब्द वर्गों के मेल से बने हैं। इनका अपना निश्चित अर्थ है। ये स्वयं में स्वतन्त्र इकाइयाँ हैं।

शब्दों का महत्त्व—जिस प्रकार व्यक्ति के बिना समाज नहीं बन सकता, बूंद के बिना जल नहीं बन सकता, उसी प्रकार शब्द के बिना भाषा का निर्माण नहीं हो सकता। हमारे प्रत्येक भाव या विचार शब्दों के द्वारा प्रकट होते हैं। (UPBoardSolutions.com) शब्दों के बिना हम अपनी बात दूसरों तक नहीं पहुँचा सकते।।

शब्द-भण्डार–किसी भाषा में प्रयुक्त हो रहे या हो सकने वाले सभी शब्दों के समूह को उस भाषा का ‘शब्द-भण्डार’ कहते हैं। किसी भाषा के सभी शब्दों की गिनती करना सम्भव नहीं है। कारण यह है कि समय के साथ-साथ कुछ शब्दों का प्रयोग समाप्त होता रहता है तथा कुछ नये शब्द बढ़ते रहते हैं। उदाहरणार्थ-रत्ती, तोला, छटाँक, सेर आदि शब्द आजकल बाह्य (आउट ऑफ डेट) हो गये हैं। इसलिए इनका महत्त्व समाप्त होता जा रहा है। दूसरी ओर, (UPBoardSolutions.com) नयी सभ्यता के साथ-साथ टी०वी०, दूरदर्शन, वीडियो, पॉलीथिन, ऑडियो आदि शब्दों का प्रचलन बढ़ रहा है।

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शब्द-भण्डार का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है-

  1. इतिहास या स्रोत के आधार पर,
  2. चना के आधार पर,
  3. योग के आधार पर,
  4. करणिक प्रकार्य के आधार पर तथा
  5. अर्थ के आधार पर।

इतिहास या स्रोत की दृष्टि से वर्गीकरण

हिन्दी की शब्दावली मुख्यत: चार स्रोतों से आयी है। ये स्रोत हैं–तत्सम (संस्कृत), तद्भव, देशी भाषाएँ और विदेशी भाषाएँ। इन्हीं के आधार पर हिन्दी के शब्दों को भी चार भागों में बाँटा जाता है– तत्सम, तद्भव, देशी तथा विदेशी।

1. तत्सम शब्द-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द, जो हिन्दी में भी अपने मूल रूप में प्रचलित हैं, तत्सम कहलाते हैं; जैसे–पुष्प, पुस्तक, बालक, कन्या, विद्या, साधु, आत्मा, तपस्वी, विद्वान, राजा, पृथ्वी, नेता, माता, अहंकार, नवीन, सुन्दर, सहसा, नित्य, अकस्मात् आदि।।

इनके अतिरिक्त जिन संस्कृत शब्दों में संस्कृत के ही प्रत्यय लगाकर नवीन शब्दों का निर्माण किया गया है, वे भी तत्सम शब्द कहलाते हैं; जैसे-आकाशवाणी, दूरदर्शन, आयुक्त, उत्पादनशील, क्रयशक्ति, प्रौद्योगिकी आदि।

संस्कृत भाषा ने अपने समय में जिन शब्दों को अन्य भाषाओं से लिया था, उन्हें (UPBoardSolutions.com) भी हम तत्सम मानते हैं। ऐसे कुछ शब्द हैं-केन्द्र, यवन, असुर, पुष्प, नीर, गण, मर्कट, रात्रि, गंगा, कदली, ताम्बूल, दीनार, सिन्दूर, मुद्रा, तीर आदि।

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2. तद्भव शब्द-संस्कृत के जो शब्द प्राकृत, अपभ्रंश, पुरानी हिन्दी आदि सोपानों से गुजरने के कारण आज हिन्दी में परिवर्तित रूप में मिल रहे हैं, वे तद्भव कहलाते हैं। हिन्दी में प्रचलित कुछ तद्भव शब्द मूल संस्कृत रूपों के साथ नीचे दिये जा रहे हैं-
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3.देशी या देशज शब्द-देशी या देशज शब्द वे हैं, जिनका स्रोत संस्कृत नहीं है, बल्कि वे भारत के ग्राम्य क्षेत्रों और जनजातियों में बोली जाने वाली देशी बोलियों में से लिये गये हैं। इनका स्रोत अज्ञात है; जैसे—झाडू, टट्टी, ठोकर, भोंपू, अटकल, भोंदू, पगड़ी, लोटा, झोला, टाँग, ठेठ, पेट, खिड़की, झंझट, थप्पड़, थूकं, चीनी आदि।

4. आगत (विदेशी) शब्द-हिन्दी में अरबी, फ़ारसी, अंग्रेज़ी भाषा के शब्द (UPBoardSolutions.com) प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसका कारण यह है कि इन भाषाभाषियों ने भारत पर पर्याप्त समय तक राज्य किया। इनके अतिरिक्त ग्रीक, तुर्की, पुर्तगाली तथा फ्रांसीसी भाषा के शब्द भी यत्र-तत्र मिल जाते हैं।

उपर्युक्त प्रमुख स्रोतों के अतिरिक्त शब्दों के निर्माण में निम्नलिखित विधियों का भी प्रयोग हुआ है-

अनुकरणात्मक शब्द-खटखटाना, फ़ड़फड़ाना, फुफकार, ठसक आदि।
संकर शब्द-दो विभिन्न स्रोतों से आये शब्दों को मिलाकर जो शब्द बनते हैं, उन्हें ‘संकर’ कहते हैं; जैसे-
हिन्दी और संस्कृत-वर्षगाँठ, माँगपत्र, कपड़ा-उद्योग, पूँजीपति आदि।
हिन्दी और विदेशी–किताबघर, घड़ीसाज, थानेदार, बैठकबाज, रेलगाड़ी, पानदान आदि।
संस्कृत और विदेशी–रेलयात्री, योजना कमीशन, कृषि, मजदूर, (UPBoardSolutions.com) रेडियोतरंग, छायादार आदि।
अरबी/फ़ारसी और अंग्रेज़ी-अफ़सरशाही, बीमापॉलिसी, पार्टीबाजी, सीलबंद आदि।

रचना के आधार पर वर्गीकरण

रचना की दृष्टि से शब्द दो प्रकार के होते हैं-

  1. मूल शब्द तथा
  2. व्युत्पन्न शब्द।

1. मूल शब्द–इन्हें रूढ़ भी कहते हैं। ये स्वतन्त्र और अपने में पूर्ण होते हैं। इनकी रचना अन्य किसी शब्द या शब्दांश की सहायता से नहीं होती। इसलिए इनके सार्थक खण्ड नहीं हो सकते; जैसे-सेना, फूल, कुत्ता, कुरसी, दिन, किताब, घर, मुँह, काला, घड़ा, (UPBoardSolutions.com) घोड़ा, जल, कमल, कपड़ी, घास आदि।

2. व्युत्पन्न शब्द-व्युत्पन्न का अर्थ है-उत्पन्न। दो या अधिक शब्दों अथवा शब्दांशों के योग से बने शब्द ‘व्युत्पन्न’ कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-यौगिक तथा योगरूढ़।

यौगिक शब्द-जो शब्द किसी शब्द में अन्य शब्द या शब्दांश (उपसर्ग, प्रत्यय) लगाने से उत्पन्न होते हैं, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं; जैसे–

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योगरूढ़ शब्द-जिन यौगिक शब्दों का एक रूढ़ अर्थ हो गया है और अपने विशिष्ट अर्थ में उनका प्रयोग होने लगा है, ऐसे शब्द योगरूढ़ कहे जाते हैं; उदाहरण के लिए-पंकज एक यौगिक शब्द है जिसमें एक शब्द पंक (कीचड़) और प्रत्यय-ज (से उत्पन्न) है। इस यौगिक का सामान्य अर्थ है-कीचड़ से उत्पन्न वस्तु। परन्तु यह शब्द केवल ‘कमल’ के लिए रूढ़ हो गया है। इसलिए यह योगरूढ़ है।
बहुव्रीहि समास के सभी शब्द योगरूढ़ के ही उदाहरण हैं; यथा–
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प्रयोग के आधार पर वर्गीकरण

प्रयोग की दृष्टि से शब्दों को निम्नलिखित दो वर्गों में बाँटा जा सकता है–

1. सामान्य शब्द-सामान्य शब्दावली वह शब्दावली है जिसका प्रयोग सामान्य जन अपने दैनिक कार्य-व्यवहार में करते हैं। ऐसी शब्दावली प्राय: अधिक प्रचलित होती है तथा लोक-व्यवहार से इसका ज्ञान होता है; उदाहरणार्थ
हाथ, नाक, पैर, रेडियो, स्कूल, कॉलेज, माता-पिता, ईश्वर, दुकान, नमक, चीनी, साइकिल, चाचा, मामा, मेज, कुर्सी, सुबह, शाम, घर, बाज़ार, दाल, भात आदि।

2. पारिभाषिक शब्द-इसे तकनीकी शब्दावली भी कहते हैं। पारिभाषिक (UPBoardSolutions.com) शब्द का अर्थ है- ऐसे शब्द, जिनकी परिभाषा सुनिश्चित हो। ये शब्द किसी एक शास्त्र से सम्बन्धित होते हैं तथा एक ही सुनिश्चित अर्थ का वहन करते हैं।

विज्ञान से सम्बन्धित पारिभाषिक शब्द निम्नवत् हैं-
बल, रेखा, अनुक्रिया, प्रदूषण, पर्यावरण।।
प्रशासन से सम्बन्धित पारिभाषिक शब्द निम्नवत् हैं
आयोग, कनिष्ठ, वरिष्ठ, पदोन्नति, बन्धपत्र, कार्यवृत्त, सीमा-शुल्क आदि।
राजनीतिशास्त्र से सम्बन्धित पारिभाषिक शब्द निम्नवत् हैं-
राज्य, राष्ट्रपति, राज्यपाल, संविधान, महान्यायवादी आदि।
साहित्य से सम्बन्धित पारिभाषिक (UPBoardSolutions.com) शब्द निम्नवत् हैं—
छायावाद, दोहा, रूपक, उपमा, समास, सन्धि, साधारणीकरण आदि।

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व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर वर्गीकरण

व्याकरणिक दृष्टि से शब्दों को उनके प्रकार्य के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है—

  1. विकारी तथा
  2. अविकारी।

(1) विकारी शब्द-जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक अथवा काल (UPBoardSolutions.com) आदि के अनुसार परिवर्तन या विकार होता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया विकारी शब्द हैं। निम्नलिखित उदाहरण देखिए-

(क) संज्ञा-
लड़का-लड़के, लड़कों, लड़कपन।
लड़की-लड़कियाँ, लड़कियों।
माता-माताएँ, माताओं।

(ख) सर्वनाम-
मैं-मुझ (को); मुझे; मेरा।
यह–उस (को); उन्हें; ये—उन्होंने।

(ग) विशेषण-
अच्छा-अच्छे, अच्छी, अच्छों।

(घ) क्रिया-
जाना—जाऊँगा, जाता हूँ, जाएँ, जाओ, जाते आदि।

(2) अविकारी शब्द अथवा अव्यय-जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक अथवा काल आदि के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता, वे अविकारी शब्द अथवा अव्यय कहलाते हैं। क्रिया-विशेषण, सम्बन्धसूचक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक शब्द अविकारी शब्द अथवा अव्यय हैं। उदाहरणार्थ

  • क्रिया-विशेषण-जो शब्द क्रिया की विशेषता को प्रकट करें, उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं; जैसे-धीरे, सहसा, इधर, कहाँ, अधिक आदि।
  • सम्बन्धसूचक-जो अव्यय शब्द संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों के साथ सम्बन्ध प्रकट करें, उन्हें सम्बन्धसूचक कहते हैं; जैसे-तक, भर, यहाँ, साथ आदि।
  • समुच्चयबोधक-जो अव्यय शब्द दो या अधिक शब्दों और वाक्यों को जोड़ते हैं, (UPBoardSolutions.com) उन्हें समुच्चयबोधक कहते हैं; जैसे—तथा, और, किन्तु, अथवा आदि।
  • विस्मयादिबोधक-विस्मय, पीड़ा, हर्ष, शोक, घृणा आदि मानसिक भावों को प्रकट करने वाले शब्द विस्मयादिबोधक कहलाते हैं; जैसे–अहो ! ओहो ! छी-छी ! आदि।

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अर्थ के आधार पर वर्गीकरण

शब्द भाषा की लघुतम सार्थक इकाई है। इसका अर्थ से केवल एक ही निश्चित सम्बन्ध नहीं होता। किसी शब्द का एक निश्चित अर्थ होता है, किसी के एक से अधिक अर्थ होते हैं तथा किसी शब्द के समानार्थी शब्दों की उपलब्धता रहती है। कुछ शब्द अन्य शब्दों (UPBoardSolutions.com) के विरोधी भाव को प्रकट करते हैं। इस प्रकार शब्द के निम्नलिखित चार भेद हो जाते हैं-

  1. पर्यायवाची शब्द,
  2. विलोमार्थी शब्द,
  3. एकार्थी शब्द तथा
  4. अनेकार्थी शब्द।

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UP Board Solutions for Class 10 Hindi समास

UP Board Solutions for Class 10 Hindi समास

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समास

नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण से कुल 2 अंकों के प्रश्न पूछे जाएँगे।

ध्यातव्य-पाठ्यक्रम में केवल द्वन्द्व, द्विगु, कर्मधारय तथा बहुव्रीहि समास ही निर्धारित हैं, अतः यहाँ केवल उन्हीं का विस्तृत वर्णन किया जा रहा है।

उपसर्ग तथा प्रत्यय की तरह समास भी यौगिक शब्द बनाते हैं। परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बनने वाले एक स्वतन्त्र शब्द को समास Samas कहते हैं; जैसे-दही-बड़ा, राजकुमार, पीताम्बर, धरोहर, दैनिक, गंगा-तट आदि। समास शब्द संस्कृत का है जो ‘अस्’ धातु में ‘सम्’ उपसर्ग तथा ‘घञ्’ प्रत्यय लगकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “संक्षिप्त करना। समास में किसी प्रकार का अर्थ (UPBoardSolutions.com) परिवर्तन नहीं होता। संक्षिप्त किये गये शब्दों को ‘समस्त पद’ या ‘सामासिक शब्द’ कहते हैं।

विशेषताएँ–समास की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं

(1) हिन्दी में समास प्राय: दो शब्दों से बनते हैं। इसके विपरीत संस्कृत में समास अनेक शब्दों से बनते हैं और पर्याप्त लम्बे-लम्बे भी होते हैं। हिन्दी में सम्भवत: ‘सुत-बित-नारि-भवन-परिवारा’ ही सबसे लम्बा समास है।

(2) समास कुछ अपवादों को छोड़कर प्राय: दो सजातीय शब्दों में ही होता है; जैसे—रसोईघर एवं पाठशाला शब्द ही बन सकते हैं; रसोईशाला’ तथा ‘पाठघर’ नहीं बन सकते।

(3) सामासिक शब्द या तो मिलाकर लिखे जाते हैं या दोनों के बीच योजक-चिह्न लगाकर; जैसे–घरबार, दहीबड़ा अथवा घर-बार, दही-बड़ा आदि।

(4) किसी शब्द में समास ज्ञात करने के लिए समस्त पद के खण्डों को अलग-अलग करना पड़ता है, जिसे विग्रह कहते हैं; जैसे–माँ-बाप’ का विग्रह माँ और बाप तथा गंगा-तट’ का विग्रह गंगा की तट है।

(5) सामासिक शब्द बनाते समय दोनों शब्दों के बीच की विभक्तियाँ या योजक आदि अव्यय शब्दों का लोप हो जाता है।

(6) समास बहुधा वहीं होता है, जहाँ परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दो या अधिक शब्द मिलकर एक तीसरा सार्थक शब्द बनाते हैं।

(7) समास के दोनों शब्दों (पदों) को क्रमशः पूर्व-पद अर्थात् (UPBoardSolutions.com) पहला पद तथा उत्तर-पद अर्थात् दूसरा । पद कहते हैं; जैसे-‘राम-लक्ष्मण’ शब्द में ‘राम’ पूर्व-पद है और लक्ष्मण उत्तरं-पद है।

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(8) हिन्दी में मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन प्रकार के सामासिक शब्द ही प्रयोग में आते हैं-

  • संस्कृत के-यथाशक्ति, पीताम्बर, मनसिज, पुरुषोत्तम आदि।
  • हिन्दी के–अनबन, नील-कमल, बैल-गाड़ी आदि।
  • उर्दू-फ़ारसी आदि के–खुशबू, सौदागर, बेशक, लाइलाज आदि।

इसके अतिरिक्त हिन्दी में रेलवे स्टेशन, बुकिंग ऑफिस, टिकट चेकर आदि इंग्लिश शब्द तथा कुछ संकर शब्द भी प्रयोग में आते हैं; जैसे—बस अड्डा, पुलिस चौकी, चकबन्दी, गुरुडम, पार्टीबाज आदि।

(9) सामासिक शब्दों में पुंल्लिग शब्द पहले और स्त्रीलिंग शब्द बाद में आते हैं; जैसे-लोटा-थाली, देखा-देखी, भाई-बहन, दूध-रोटी आदि।

(10) कभी-कभी विग्रह के आधार पर एक ही शब्द कई (UPBoardSolutions.com) समासों का उदाहरण हो जाता है। जैसे-पीताम्बर का विग्रह यदि “पीत है जो अम्बर’ करें तो कर्मधारय तथा “पीत हैं अम्बर (वस्त्र जिसके) अर्थात् कृष्ण’ करें तो बहुव्रीहि होगा।

भेद–पदों की प्रधानता के आधार पर समास के निम्नलिखित चार भेद किये जाते हैं.

  1. पहला पद प्रधान–अव्ययीभाव
  2. दूसरा पद प्रधान—तत्पुरुष
  3. दोनों पद प्रधान–द्वन्द्व
  4. कोई भी पद प्रधान नहीं-बहुव्रीहि

इन चारों प्रमुख भेदों के अतिरिक्त कर्मधारय और द्विगु दो समास और भी हैं, जिन्हें विद्वद्वर्ग तत्पुरुष के भेद बताता है। इनको मिलाकर समास के छ: भेद हो जाते हैं

  1. अव्ययीभाव
  2. तत्पुरुष
  3. कर्मधारय
  4. द्विगु
  5. द्वन्द्व
  6. बहुव्रीहि

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1. कर्मधारय समास

जिस तत्पुरुष में एक पद उपमेय या विशेषण हो तथा दूसरा पद उपमान या विशेष्य हो, उसे ‘कर्मधारय समास’ कहते हैं। कर्मधारय समास के दो भेद होते हैं–

  1. विशेषण-विशेष्य कर्मधारय तथा
  2.  उपमानउपमेय कर्मधारय।

उदाहरण-

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2. द्विगु समास

जिस समास में पहला पद संख्यावाचक (गिनती बताने वाला) हो, दोनों पदों के बीच विशेषणविशेष्य सम्बन्ध हो और समस्तपद समूह या समाहार का ज्ञान कराये, उसे द्विगु समास कहते हैं।
उदाहरण—

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3. बहुव्रीहि समास

जिस समास में न तो पूर्व पद प्रधान होता है, न उत्तर पद; वरन् समस्तपद किसी अन्य पद का विशेषण होता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं; जैसे-पीताम्बर’। इसका विग्रह हुआ-पीत् + अम्बर = पीला है। वस्त्र जिसका (कृष्ण)। यहाँ न ‘पीत’ प्रधान है, न (UPBoardSolutions.com) ‘अम्बर’; वरन् पीले वस्त्र वाला कृष्ण प्रधान है, अतः यहाँ बहुव्रीहि समास है।
उदाहरण–

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4. द्वन्द्व समास

जिस समास में दोनों पद समान हों, वहाँ द्वन्द्व समास होता है। द्वन्द्व में दो शब्दों का मेल होता है। समास होने पर दोनों को मिलाने वाले ‘और’ या अन्य समुच्चयबोधक अव्यय का लोप हो जाता है।
उदाहरण-
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समास से सम्बन्धित अतिरिक्त सामग्री

प्रश्न 1
निम्नलिखित में विग्रहसहित समास बताइए-
दीनदयाल, मन-मयूर, श्रेय-प्रेय, नयनाभिराम, दृष्टिपात, तहखाना, स्वर्णकलश, महाशय, सायंकाल, जल-प्लावन, विद्यार्थी, पुनरावृत्ति, चिन्ताग्रस्त, पवनपुत्र।
उत्तर
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प्रश्न 2
निम्नलिखित में नामसहित समास-विग्रह कीजिए–
ताम्रपत्र, शौर्यपूर्ण, जीवन-दर्पण, राजमार्ग, रस-मग्न, देशकाल, तुलसीकृत, सत्याग्रह।
उत्तर
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प्रश्न 3
निम्नलिखित में समास-विग्रह कीजिए और बताइए कि इनमें कौन-सा समास है ? हिमालय, शीर्षासन, जलराशि, पर्वतमाला, तन्द्रालस, प्रसन्नक्दन।
उत्तर
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