UP Board Class 5 Hindi व्याकरण

UP Board Class 5 Hindi व्याकरण

प्रश्न:
व्याकरण क्या है?
उत्तर:
भाषा की शुद्धता-अशुद्धता का ज्ञान कराने वाला शास्त्र व्याकरण कहलाता है।

जैसे –

  • श्याम ने पढ़ा। (शुद्ध)
  • श्याम पढ़ा। (अशुद्ध)

प्रश्न:
भाषा क्या है?
उत्तर:
भाषा – भावों या विचारों की पूर्ण अभिव्यक्ति के लिए अपनाया गया माध्यम ही भाषा है;
जैसे – संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी, मैथिली, मराठी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम आदि।

भाषा को उसके प्रयोग के आधार पर तीन भागों में बाँटा जा सकता है-
(१) लिखित भाषा – जो भाषा लिखने और पढ़ने में प्रयोग की जाती है, उसे ‘लिखित भाषा’ कहते हैं।
(२) कथित भाषा अथवा मौखिक – जो भाषा आपस में बातचीत करते समय प्रयोग की जाती है, उसे ‘कथित भाषा’ अथवा ‘मौखिक’ भाषा कहते हैं।
(३) सांकेतिक भाषा – यदि संकेतों से विचार प्रकट किए जाएँ, तो उसे ‘सांकेतिक भाषा’ कहते हैं।

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प्रश्न:
लिपि किसे कहते हैं?
उत्तर:
लिपि – वर्ण का लिखित चिह्न ही लिपि है।

प्रश्न:
वर्ण या अक्षर किसे कहते हैं? उसके भेद बताओ।
उत्तर:
वर्ण (अक्षर) – वर्ण (अक्षर) भाषा की वह छोटी-से-छोटी मूल ध्वनि है, जिसके टुकड़े न हो सकें, जैसे – अ, इ, ए, क्, ख् आदि।

वर्ण या अक्षर के भेद –
१. स्वर
२. व्यंजन।

प्रश्न:
स्वर किसे कहते हैं? उसके भेद बताओ।
उत्तर:
स्वर – स्वर वे अक्षर या वर्ण हैं, जिनके बोलने में दूसरे अक्षरों की सहायता नहीं लेनी पड़ती। ये ग्यारह होते हैं – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ और औ।

स्वर के तीन भेद होते हैं –
(क) ह्रस्व स्वर – जैसे – अ, इ, उ, ऋ आदि।
(ख) दीर्घ स्वर – जैसे – आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ आदि।
(ग) प्लुत स्वर – जैसे – ओ३म आदि।

विशेष –
(क) हिन्दी में अब प्लुत का लिखित प्रयोग नहीं होता।
(ख) ‘अं’ और ‘अ’ को अयोगवाह कहते हैं।

प्रश्न:
व्यंजन किसे कहते हैं? इसके प्रकार भी बताओ।
उत्तर:
व्यंजन – वे वर्ण या अक्षर हैं, जिनके बोलने में स्वरों की सहायता लेनी पड़ती है; जैसेक में अ जोड़ने से ‘क’ तथा ख में अ जोड़ने से ‘ख’ बन जाता है। स्वर के बिना हम व्यंजन वर्णों को लिख तो सकते हैं;

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जैसे- क्, ख् आदि लेकिन उच्चारण नहीं कर सकते।

व्यंजन के प्रकार – हिन्दी वर्णमाला में तैंतीस (३३) व्यंजन होते हैं।
१. क वर्ग – क ख ग घ ङ
२. च वर्ग – च छ ज झ ञ
३. ट वर्ग – ट ठ ड ढ ण
४. त वर्ग – त थ द ध न
५. प वर्ग – प फ ब भ म
६. अन्तःस्थ – य र ल व
७. ऊष्म – श ष स ह
८. संयुक्त – क्ष = ‘क् + ष् + अ, त्र = त् + र् + अ, ज्ञ = ज् + ञ् + अ।

अनुस्वार – पंचम वर्णों (ङ, ञ, ण, न, म) का बिंदी रूप ही अनुस्वार है। इसे ‘अं’ लिखकर दर्शाते हैं; जैसे – मंगल, दंगल, कंगन, नंदन, चंदन आदि।
विसर्ग – यह केवल संस्कृत के शब्दों के साथ प्रयुक्त होता है। इसे ‘अ’ लिखकर दर्शाते हैं; जैसेप्रातः, अतः, स्वतः, यतः, कुतः आदि।
मात्रा – व्यंजन को पूरा करने में स्वर का जो लिखित रूप सहायक होता है, उसे मात्रा कहते हैं। मात्राएँ निम्न होती हैं
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विशेष – अ सभी व्यंजनों में छिपा होता है; अतः इसकी मात्रा नहीं होती है।

प्रमुख विराम चिह्न – हिन्दी में लिखते समय निम्नलिखित चिह्न प्रमुख रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं-
१. अल्पविराम (,)
२. अर्धविराम (;)
३. पूर्णविराम (।)
४. प्रश्नवाचक चिह्न (?)
५. विस्मयादिबोधक चिह्न (!)
६. बराबर का चिहन (=)
७. विवरण (विसर्ग चिह्न) (:)
८. संयोजक चिह्न (-)
९. निर्देशक चिह्न (-)
१०. अवतरण चिह्न (“…”) (‘…’)

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शब्द

शब्द की परिभाषा – वर्णों का सार्थक समूह ही शब्द है; जैसे – रघुवर, सीता, पुस्तक, लेखक आदि।

भाव के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं
(१) सार्थक शब्द – जिस शब्द का कुछ निश्चित अर्थ निकले, उसे ‘सार्थक शब्द’ कहते हैं; जैसेपुस्तक, आम, लड़का आदि।
(२) निरर्थक शब्द – जिस शब्द का कुछ भी अर्थ न निकले, उसे ‘निरर्थक शब्द’ कहते हैं, जैसेकातपु, मआ, काड़ल, मलक, कखले, तणिग आदि।

व्याकरण के अनुसार शब्दों के पाँच भेद होते हैं –
१. संज्ञा
२. सर्वनाम
३. क्रिया
४. विशेषण
५. अव्यय

संज्ञा

१. संज्ञा – किसी वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं; जैसे- पुस्तक, आगरा, राम, श्याम, अंकित, प्रियंका आदि।

संज्ञा के पाँच भेद होते हैं –

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा – जिस संज्ञा शब्द से किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान का बोध हो उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे – राम, सीता, गंगा, यमुना, भारत, उत्तर प्रदेश, मोहन, गीता आदि।
  2. जातिवाचक संज्ञा – जिस संज्ञा शब्द से एक प्रकार की सब वस्तुओं का बोध हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे – लड़की, गाय, नदी, गेंद, माता-पिता, भाई-बहन आदि।
  3. समूहवाचक संज्ञा – जिस शब्द से प्राणियों या वस्तुओं के एकत्र या साथ होने का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे – सभा, कक्षा, भीड़, दल, झंड, दर्जन, समिति, सेना आदि।।
  4. द्रव्यवाचक संज्ञा – मापे जाने वाले या तौले जाने वाले पदार्थ का ज्ञान कराने वाले शब्द द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं; जैसे – चावल, दाल, आटा, तेल, घी, दूध, सब्जी, सीमेंट, लोहा, सोना, चाँदी, लकड़ी, कपड़ा, रस्सी आदि।
  5. भाववाचक संज्ञा – जिस संज्ञा शब्द से गुण, दशा, व्यापार आदि का बोध हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे – सुन्दरता, मोटापा, कालापन, मिठास, कड़वाहट, अधिकता, कठोरता आदि।

सर्वनाम

२. सर्वनाम – जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होता है, उसे सर्वनाम कहते हैं; जैसे- मैं, हम, वह, तुम आदि।
उदाहरण – गीता लखनऊ में रहती है। वह स्कूल जाती है। यहाँ ‘वह’ सर्वनाम है। मैं, हम, वह, तुम, आप, कौन, कोई आदि भी सर्वनाम हैं।

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सर्वनाम के छह भेद होते हैं –

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम – जैसे – मैं, हम, तुम, वह आदि। इसके तीन भेद होते हैं –
    (क) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम – जैसे – मैं. हम।
    (ख) मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम – जैसे – तू, तुम।
    (ग) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम – जैसे – वह, वे, उसे, उनका, यह, ये, इसे, इनका आदि।
  2. निश्चयवाचक सर्वनाम – जैसे – यह, ये, वह, वे आदि।
  3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम – जैसे – कोई, कुछ आदि।
  4. संबंधवाचक सर्वनाम – जैसे – जो-सो, जैसा-वैसा आदि।
  5. प्रश्नवाचक सर्वनाम – जैसे – क्या, कौन आदि।
  6. निजवाचक सर्वनाम – जैसे – स्वयं, खुद, अपने-आप, आप ही आप, स्वतः आदि।

विशेषण

३. विशेषण – जो शब्द किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताए, उसे विशेषण कहते हैं, जैसे – काला, अच्छा, मोटा, सुन्दर आदि।

  • गुणवाचक विशेषण – जैसे – अच्छा, बुरा, काला, मोटा, पीला आदि।
  • परिमाणवाचक विशेषण – जैसे – किलोग्राम, मीटर, लीटर आदि।
  • संख्यावाचक विशेषण – जैसे – एक, दो, दस, सौ, हजार आदि।

क्रिया

४. क्रिया – जिन शब्दों में किसी काम का करना या होना पाया जाए, उन्हें क्रिया कहते हैं, जैसेदौड़ना, पढ़ना, खेलना आदि।
जैसे – सीता खेलती है।

राम पढ़ता है। ऊपर के वाक्यों मे ‘खेलना’ और ‘पढ़ना’ क्रियाएँ हैं। इसके अतिरिक्त दौड़ना, नाचना, चलना, जाना, गाना, हँसना इत्यादि सब क्रियाएँ हैं।

  • सकर्मक क्रिया
  • अकर्मक क्रिया

अव्यय

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५. अव्यय – जिन शब्दों के रूप सदैव एक-से रहते हैं, उन्हें ‘अव्यय’ या अविकारी शब्द कहते हैं; जैसे – धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी, इधर-उधर आदि।

क्रिया-विशेषण – क्रिया-विशेषण उन शब्दों को कहते हैं, जो क्रियाओं की विशेषताएँ प्रकट करते हैं; जैसे – साइकिल तेज दौड़ती है। गौरव अच्छा लिखता है। यहाँ ‘तेज’ और ‘अच्छा’ शब्द क्रिया-विशेषण हैं।

लिंग

लिंग की परिभाषा – जिससे किसी वस्तु या प्राणी की जाति (पुरुष या स्त्री) का बोध हो, उसे ‘लिंग’ कहते हैं; जैसे – राम, सीता, कुर्सी, लड़का आदि।

लिंग के निम्नलिखित दो भेद होते हैं –

  • पुल्लिंग – जिस शब्द से पुरुष जाति का बोध हो, उसे ‘पुल्लिंग’ कहते हैं; जैसे – राम, आम, घोड़ा आदि।
  • स्त्रीलिंग – जिस शब्द से स्त्री जाति का बोध हो, उसे ‘स्त्रीलिंग’ कहते हैं; जैसे – सीता, लीची, घोड़ी आदि।

वचन

वचन की परिभाषा – संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से किसी वस्तु या प्राणी की संख्या का बोध हो, उसे ‘वचन’ कहते हैं; जैसे – गाय-गाएँ, पुस्तक-पुस्तकें आदि।
वचन के निम्नलिखित दो भेद होते हैं –

  • एकवचन – जिससे केवल एक वस्तु या प्राणी का बोध हो, उसे ‘एकवचन’ कहते हैं; जैसे – गाय, पुस्तक, लड़का आदि।
  • बहुवचन – जिससे एक से अधिक वस्तुओं अथवा प्राणियों का बोध हो, उसे ‘बहुवचन’ कहते हैं; जैसे – गाएँ, पुस्तकें, लड़के आदि।

काल

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काल की परिभाषा – क्रिया में लगनेवाला समय ही काल है। काल के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं –

  • वर्तमान काल – जिस क्रिया से कार्य का चल रहे समय में होना पाया जाए, उसे ‘वर्तमान काल’ कहते हैं; जैसे – गीता खाना खा रही है।
  • भूतकाल – जिस क्रिया से कार्य का बीते हुए समय में होना पाया जाए, उसे ‘भूतकाल’ कहते हैं; जैसे – गीता ने खाना खाया था।
  • भविष्यत्काल – जिस क्रिया से कार्य का आने वाले समय में होना पाया जाए, उसे ‘भविष्यत् काल’ कहते हैं; जैसे – गीता खाना खाएगी।

कारक

कारक – संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सम्बन्ध वाक्य के दूसरे शब्दों, विशेषकर क्रिया के साथ जाना जाता है, उसे ‘कारक’ कहते हैं। हिन्दी में कारक आठ होते हैं-
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विभक्ति – कारक के चिह्न ही ‘विभक्ति’ कहलाते हैं।

विलोम शब्द (विपरीतार्थक शब्द)

विलोम शब्द – जो शब्द का उलटा (विपरीत) अर्थ बताए, उसे विपरीतार्थक शब्द कहते हैं; जैसे – मीठा का विलोम शब्द खट्टा है।
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तत्सम और तदभव शब्द

तत्सम शब्द – शब्दों के शुद्ध संस्कृत रूप को, ‘तत्सम शब्द’ कहते हैं; जैसे – कर्ण, कृषक आदि।
तद्भव शब्द – संस्कृत शब्दों के बिगड़े हुए रूप को, ‘तद्भव शब्द’ कहते हैं; जैसे – अग्नि का आग।
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पर्यायवाची शब्द

ऐसे शब्द जिनके अर्थ समान होते हैं, वे ‘पर्यायवाची शब्द’ या ‘समानार्थी शब्द’ कहलाते हैं; जैसे –
अग्नि – आग, पावक, अनल, हुताशन, दहन, कृशानु।
आकाश – गगन, अम्बर, नभ, अन्तरिक्ष, व्योम, शून्य।
अमृत – पीयूष, सुधा, सोम, अमी, अमिय, मधु।
कमल – सरोज, जलज, पंकज, अम्बुज, नीरज, अरविन्द।
चन्द्रमा – शशि, राकेश, मयंक, सुधाकर, निशाकर, इन्दु।
राजा भूप, नृप, महीप, नरेन्द्र, भूपति, नरेश।
गंगा – देवनदी, भागीरथी, सुरसरि, मन्दाकिनी, हरिप्रिया, शिवसुता।
भगवान – ईश, ईश्वर, परमात्मा, जगदीश, प्रभु, जगन्नाथ।
सूर्य – दिनकर, रवि, भास्कर, भानु, अर्क, सविता, आदित्य।
पर्वत – पहाड़, महीधर, नग, गिरि, अचल, शैल, भूधर।
वन – कानन, जंगल, विपिन, अरण्य, अटवी।
बिजली – चपला, चंचला, दामिनी, तड़ित, क्षणप्रभा, विद्युत्।
पुत्री – तनया, सुता, बेटी, लड़की, आत्मजा, दुहिता, तनुजा।

मुहावरे व उनका अर्थ, वाक्य प्रयोग सहित

१. तीर की भाँति = बहुत तेजी से।
महेश अपने भाई को जलने से बचाने के लिए तीर की भाँति जलते हुए घर में घुसा।

२. डेरा डालना = एक स्थान पर जम जाना।
रामचन्द्र जी की सेना ने समुद्र पार करके लंका में डेरा डाल दिया।

३. खलबली मचाना = बहुत घबराहट पैदा करना।
वीर अभिमन्यु ने चक्रव्यूह में प्रवेश करके कौरवों की सेना में खलबली मचा दी।

४. जान पर खेलना = मृत्यु की चिन्ता न करते हुए संकट का सामना करना।
युद्ध में वीर सिपाही अपनी जान पर खेलकर अपने देश की स्वाधीनता की रक्षा करते हैं।

५. बेहाल करना = व्याकुल करना।
कुंभकर्ण ने रीछों और बन्दरों को मार-मारकर बेहाल कर दिया।

६. ढेर कर देना = मार डालना।
रामू ने लाठी के एक ही वार से चोर को ढेर कर दिया।

७. आग पैदा करना = जोश उत्पन्न करना।
सुभाषचन्द्र बोस ने अपने भाषण से भारतीयों के हृदयों में आग पैदा कर दी।

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८. मन रमना = मन लगना।
मसूरी के प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर मेरा मन रम गया।

६. छक्के छुड़ाना = हौसला पस्त कर देना।
महाराणा प्रताप ने हल्दी घाटी के मैदान में मुगलों के छक्के छुड़ा दिए।

१०. खाक कर देना = नष्ट करना।
देखते-ही-देखते आग ने पटाखे की दुकान को खाक कर दिया।

लोकोक्तियाँ

अंत भले का भला – भलाई करने से खुद का भी भला होता है।
अंत बुरे का अंत बुरा – बुराई का फल बुरा होता है।
अक्ल बड़ी या भैंस – बुद्धि शारीरिक बल से श्रेष्ठ होती है।
आ बैल मुझे मार – जान-बूझकर मुसीबत मोल लेना।
आगे कुआँ पीछे खाई – दोनों ओर मुसीबत।
एक और एक ग्यारह – एकता में बल होता है।
एक हाथ से ताली नहीं बजती – भूल दोनों ओर से होती है।

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UP Board Solutions for Class 5 Maths गिनतारा Chapter 11 एकिक नियम

UP Board Solutions for Class 5 Maths गिनतारा Chapter 11 एकिक नियम

अभ्यास

प्रश्न 1.
12 पुस्तकों का मूल्य रु. 144 है। एक पुस्तक का मूल्य कितना होगा?
हल:
∵ 12 पुस्तकों का मूल्य = 144 रु०
∴ 1 पुस्तक का मूल्य = [latex]\frac{144}{12}[/latex] = 12

प्रश्न 2.
5 गेंदों का मूल्य रु. 45 है। ऐसी ही 8 गेंदों का मूल्य ज्ञात करो।
हल:
∵ 5 गेंदों का मूल्य = 45 रु०
∴ 1 गेंद का मूल्य = [latex]\frac{45}{5}[/latex] रु०
∴ 8 गेंदों का मूल्य = [latex]\frac{45 \times 8}{5}[/latex] = 9 × 8 = 72 रु०

प्रश्न 3.
एक रेलगाड़ी 300 किमी की दूरी 6 घंटे में तय करती है। इसी चाल से वह रेलगाड़ी 500 किमी की दूरी कितने समय में तय करेगी।
हल:
∵ 300 किमी दूरी तय करने में लगा समय = 6 घंटे
∴ 1 किमी दूरी तय करने में लगा समय = [latex]\frac{6}{300}[/latex] घंटे
∴ 500 किमी दूरी तय करने में लगा समय = [latex]\frac{6}{300}[/latex] × 500 = 10 घंटे

प्रश्न 4.
एक परिवार में 15 किग्रा गेहूँ 20 दिनों के लिए पर्याप्त होता है। 30 किग्रा गेहूँ कितने दिनों के लिए पर्याप्त होगा?
हल:
∵ 15 किग्रा गेहूँ पर्याप्त है= 20 दिन के लिए
∴ 1 किग्रा गेहूँ पर्याप्त होगा = [latex]\frac{20}{15}[/latex] दिन के लिए
∴ 30 किग्रा गेहूँ पर्याप्त होगा = [latex]\frac{20}{15}[/latex] × 30 = 40 दिन के लिए

प्रश्न 5.
एक ट्यूबवेल से 3 हेक्टेयर खेत 36 घंटे में सींचा जाता है। उसी ट्यूबवेल से 12 हेक्टेयर खेत कितने घंटों में सींचा जाएगा?
हल:
∵ 3 हेक्टेयर सींचने में लगा समय = 36 घंटे
∴ 1 हेक्टेयर सींचने में लगा समय = [latex]\frac{36}{3}[/latex] घंटे
∴ 12 हेक्टेयर सींचने में लगा समय = [latex]\frac{36 \times 12}{3}[/latex] = 36 × 4 = 144 घंटे

प्रश्न 6.
यदि 2 रजिस्टर्ड पत्र भेजने में 38.50 रुपए लगते हैं तो ऐसे ही १ रजिस्टर्ड पत्र भेजने में कितने रुपए लगेंगे?
हल :
∵ 2 रजिस्टर्ड पत्र भेजने में लगा खर्च = 38.50 रुपए
∴ 9 रजिस्टर्ड पत्र भेजने में लगा खर्च = [latex]\frac{38.50}{2}[/latex] रुपए
∴ 9 रजिस्टर्ड पत्र भेजने में लगा खर्च = [latex]\frac{38.50 \times 9}{2}[/latex] = 19.25 × 9 = 173.25 रु.

प्रश्न 7.
राशन की दुकान पर 2 किग्रा चावल रु. 34 में मिलता है। 5 किग्रा. चावल कितने रुपए में मिलेगा? सही उत्तर के क्रम पर सही का चिह्न (✓) लगाओ (लगाकर )।
(क) रु0 68
(ख) रु0 85 (✓)
(ग) रु0 170
(घ) इनमें से कोई उत्तर सही नहीं है।

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UP Board Solutions for Class 5 Maths गिनतारा Chapter 10 लाभ – हानि

UP Board Solutions for Class 5 Maths गिनतारा Chapter 10 लाभ – हानि

अभ्यास

प्रश्न 1.
बताओ लाभ हुआ या हानि और कितना?
हल:
(क) विक्रय मूल्य = 330.00 रु०, क्रय मूल्य = 300.00 रु०
लाभ = विक्रय मूल्य – क्रय मूल्य = 330 -300 = 30 रु०

(ख) क्रय मूल्य = 850.00 रु०, विक्रय मूल्य = 700.00 रु०
हानि = क्रय मूल्य – विक्रय मूल्य = 850 – 700 = 150 रु०

(ग) विक्रय मूल्य = 1200.00 रु०, क्रय मूल्य = 1250.00
हानि = क्रयमूल्य – विक्रय मूल्य = 1250 – 1200 = 50 रु.

(घ) विक्रय मूल्य = 2800.00 रु०, क्रय मूल्य = 2650.00
लाभ = विक्रय मूल्य — क्रय मूल्य = 2800 – 2650 = 150 रु०

प्रश्न 2.
एक स्कूटर का विक्रय मूल्य रु. 20350 और क्रय मूल्य रु0 20200 है। लाभ बताओ?
हल:
स्कूटर का विक्रय मूल्य = 20350 रु०
स्कूटर का क्रय मूल्य = 20200 रु०
लाभ = 20350 – 20200 = 150 रु.

प्रश्न 3.
क्रय मूल्य ज्ञात करो, यदि-
(क) विक्रय मूल्य रु. 5600, लाभ रु. 1600
हल:
(क) विक्रय मूल्य = 5600 रु०, लाभ = 1600 रु.
क्रय मूल्य = विक्रय मूल्य – लाभ = 5600 – 1600 = 4000 रु.

(ख) विक्रय मूल्य रु. 6400, हानि रु. 1100
हल:
(ख) विक्रय मूल्य = 6400 रु०, हानि = 1100 रु०
क्रय मूल्य = विक्रय मूल्य + हानि = 6400 + 1100 = 7500 रु.

प्रश्न 4.
एक व्यापारी ने 6 दर्जन गिलास रु. 150 प्रति दर्जन के हिसाब से खरीदा। यदि वह 14 रुपए प्रति गिलास के हिसाब से बेचे तो उसे कितना लाभ होगा?
हल:
150 रु. प्रति दर्जन के हिसाब से 6 दर्जन गिलास का मूल्य = 150 × 6 = 900 रु०
14 रु. प्रति गिलास के हिसाब से 6 दर्जन गिलास का मूल्य = 14 × 6 × 12 = 1008 रु०
व्यापारी को लाभ होगा = 1008 – 900 = 108 रु.

प्रश्न 5.
रतन ने एक पुराना रेडियो रु. 385.50 में खरीदा तथा उसकी मरम्मत कराने के लिए रु. 60.00 और खर्च किए। उसने रु. 80.00 का लाभ लेकर उसको बेच दिया। रेडियो का विक्रय मूल्य बताओ।
हल:
UP Board Solutions for Class 5 Maths गिनतारा Chapter 10 लाभ - हानि 1

प्रश्न 6.
एक दुकानदार ने रु. 1850.00 का गेहूँ खरीदा। रु. 125 उसकी ढुलाई और सफाई में खर्च किए। यदि उसने गेहूँ रु० 2000 में बेच दिए तो लाभ हुआ या हानि और कितना?
हल:
UP Board Solutions for Class 5 Maths गिनतारा Chapter 10 लाभ - हानि 2

प्रश्न 7.
नीचे दिए गए चार्ट को देखो और पूरा करो। (चार्ट पाठ्यपुस्तक से देखकर)
हल:
लाभ = 150 रु०, लाभ = 64 रु.

अपने आप-3
तीलियों का जादू
स्वाध्याय पाठ
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 3 भारत का धरालत

UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 3 भारत का धरालत

प्रश्न.
भारत की धरातलीय संरचना देखते हुए उसके पाँच मुख्य भागों के नाम लिखो।
उत्तर:
१. उत्तर का पर्वतीय भाग
२. भारत का उत्तरी मैदान
३. थार का मरुस्थल
४. दक्षिण का पठार
५. समुद्रतटीय मैदान और द्वीप समूह।

१. उत्तर का पर्वतीय भाग

उत्तर के पर्वतीय भाग को हिमालय की पर्वतमाला भी कहते हैं। मानचित्र देखकर इसका फैलाव लिखो। यह पश्चिम में कश्मीर राज्य से पूर्व में अरुणाचल प्रदेश राज्य तक एक तलवार की तरह फैली है।

प्रश्न.
मानचित्र में पर्वतीय भाग के नक्शे में दर्शाई गई नदियों के नाम लिखो।
उत्तर:
(१) गंगा
(२) यमुना
(३) ब्रह्मपुत्र
(४) सतलज
(५) सिन्धु
(६) झेलम।

UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 3 भारत का धरालत

भारत का धरालत अभ्यास

प्रश्न १.
सही जोड़े बनाओ (सही जोड़े बनाकर) –
मसूरी – पर्यटक स्थल
नदी  – ब्रह्मपुत्र
पर्वत श्रेणी – हिमालय
पर्वत शिखर –  एवरेस्ट
पर्वतारोही – तेनसिंह
काजीरंगा – राष्ट्रीय उद्यान

प्रश्न २.
इन प्रश्नों के उत्तर दो –
प्रश्न.
हिमालय को भारत का पहरेदार क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
हिमालय देश के उत्तर में बहुत ऊँचा पहरेदार की तरह खड़ा है। इसे पार करके भारत में आना कठिन है। इसलिए इसे भारत का पहरेदार कहा जाता है।

प्रश्न.
पर्वत पार करने के लिए बने सँकरे मार्ग को क्या कहते हैं?
उत्तर:
दर्रा

प्रश्न.
ग्लेशियर किसे कहते हैं?
उत्तर:
बर्फ के पहाड़ (हिमानी) को ग्लेशियर कहते हैं, जैसे – गंगोत्री, यमनोत्री।

प्रश्न ३.
भूगोल की कॉपी में यह काम करो –
उत्तर:
नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।

२. भारत का उत्तरी मैदान

प्रश्न.
एटलस में देखकर लिखो-
उत्तर:
यह भाग पश्चिम में कश्मीर राज्य से पूर्व में अरुणाचल प्रदेश राज्य तक तथा उत्तर में हिमाचल प्रदेश राज्य से दक्षिण में मध्य प्रदेश राज्य तक फैला है।

UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 3 भारत का धरालत

हिमालय से निकलकर अनेक नदियाँ इस मैदान में उतरती हैं और पूर्व की ओर चली जाती हैं, जैसे – गंगा, यमुना, कोसी। कुछ नदियाँ हिमालय पर्वत से मैदान में उतरकर पश्चिमी दिशा की ओर बहती हैं, जैसे – सतलज, सिन्धु, झेलम नदी।

दक्षिण के पठार से भी कई नदियाँ इस मैदान में उतरती हैं, जैसे – चम्बल, सिन्धु, बेतवा, केन।

प्रश्न.
उत्तर से आने वाली नदियों में साल भर पानी भरा रहता है,पर दक्षिण से आने वाली नदियों में गर्मी में पानी कम हो जाता है। ऐसा क्यों?
उत्तर:
चूंकि ये दक्षिणी पठार से निकलती हैं और बरसाती नदियाँ होती हैं। इसलिए गर्मी में पानी कम हो जाता है।

भारत का धरालत अभ्यास

उत्तर लिखें
प्रश्न १.
उत्तर के मैदान में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम लिखो।
उत्तर:
गंगा, यमुना, शारदा, गोमती, घाघरा, कोसी, गंडक।

प्रश्न २.
उत्तर का मैदान कैसे बना है?
उत्तर:
नदियों की लाई बारीक कणों वाली भुरभुरी उपजाऊ मिट्टी से बना है।

प्रश्न ३.
बाढ़ आने पर नदी अपने साथ क्या-क्या चीजें बहाकर लाती है?
उत्तर:
बालू व काँप मिट्टी बहाकर लाती है।

प्रश्न ४.
नदियों का जल क्यों प्रदूषित हो रहा है?
उत्तर:
नदियों के किनारे बसे शहरों और बढ़ते उद्योगों के कारण नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है।

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एटलस में खोजो –

प्रश्न .
उत्तर के मैदानी भाग की सबसे लम्बी नदी।
उत्तर:
गंगा नदी।

प्रश्न .
इस भाग की सबसे छोटी नदी।
उत्तर:
शारदा (काली नदी)।

प्रश्न .
मैदान में नदियों के किनारे बसे पाँच शहर।
उत्तर:
दिल्ली, आगरा, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी।

  • करके देखो – नोट – विद्यार्थी अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।

३. थार का मरुस्थल

  • मानचित्र में थार के मरुस्थल के फैलाव को देखो और लिखो –

प्रश्न .
यह किस-किस प्रदेश में फैला है?
उत्तर:
राजस्थान और गुजरात।

प्रश्न .
थार के पश्चिम में कौन-सा देश स्थित है?
उत्तर:
पाकिस्तान।

भारत का धरालत अभ्यास

प्रश्न १.
थार का मरुस्थल भारत के किस भाग में है?
उत्तर:
भारत के पश्चिमी भाग में है।

प्रश्न २.
मरुस्थल में आबादी कम क्यों होती है?
उत्तर:
पानी कम होने से पेड़-पौधे नहीं होते हैं, इसलिए जीवन कठिन है।

प्रश्न ३.
तुम जहाँ रहते हो, उस भाग में और मरुस्थल में क्या-क्या अन्तर हैं?
उत्तर:
मरुस्थल – मरुस्थल में सूखे क्षेत्र हैं। यहाँ पानी की कमी है, रेत ही रेत है, नदियाँ नहीं हैं, कृषि क्षेत्र नहीं है। आबादी नहीं के बराबर है। जीवन दुष्कर है।
हमारे यहाँ – हरियाली, नदियाँ, मैदान और कृषि क्षेत्र हैं। आबादी का घनत्व है। जीवन सुखी है।

UP Board Solutions for Class 5 EVS Hamara Parivesh Chapter 3 भारत का धरालत

प्रश्न ४.
मरुस्थल में पाए जाने वाले वृक्षों के नाम लिखो?
उत्तर:
मरुस्थल में पाए जाने वाले वृक्षों के नाम – कटीली झाड़ियाँ, नागफनी।

• खोज-बीन –
एटलस में भारत का राज्यों वाला मानचित्र देखो –

प्रश्न.
मरुस्थल भारत के किन-किन राज्यों में फैला है?
उत्तर:
मरुस्थल भारत के राजस्थान और गुजरात राज्य में फैला हुआ है।

प्रश्न.
इस मरुस्थली भाग में कौन-कौन से बड़े नगर हैं?
उत्तर:
इस मरुस्थली भाग में राजकोट, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर जैसे बड़े नगर हैं।

४. दक्षिण का पठार

भारत का धरालत अभ्यास

प्रश्न १.
पठार और पर्वत में क्या अन्तर है?
उत्तर:
आस-पास की भूमि से अधिक ऊँचाई पर स्थित समतल चौरस मैदान को पठार कहते हैं, जैसे-दक्षिण का पठार। बहुत अधिक ऊँचा ऊबड़-खाबड़ और बर्फ से ढकी चोटियों वाला पहाड़ होता है, जैसे – हिमालय।

प्रश्न २.
पठार और मैदान में क्या अन्तर है?
उत्तर:
मैदान समतल, ढालू, दोमट मिट्टी से बना होता है। पठार ऊँची चौरस समतल भूमि को कहते हैं। यह ज्यादातर पथरीला होता है।

प्रश्न ३.
लावा की मिट्टी कैसे बनी?
उत्तर:
आंतरिक हलचलों से जमीन में विस्फोट हुआ। काला-लाल लावा निकला। चारों ओर बहने लगा। धीरे-धीरे यह ठंडा हो गया। फिर टूट-फूटकर मिट्टी बन गया। नर्मदा और गोदावरी के बीच का भाग इसी मिट्टी का है।

  • करके देखो – नोट – विद्यार्थी अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।
  • लिखो –
  • पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली नदियों के नाम। उत्तर: महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, तुंगभद्रा नदी।
  • पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के नाम। उत्तर: नर्मदा. ताप्ती नदी। नोट – शेष प्रश्न विद्यार्थी स्वयं करें।

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५. समुद्र तटीय मैदान और द्वीप समूह

भारत का धरालत अभ्यास

उत्तर लिखो –

प्रश्न १.
समुद्र तटीय मैदानों की मिट्टी कैसी है?
उत्तर:
समुद्र तटीय मैदानों की बारीक कणों वाली उपजाऊ मिट्टी है।

प्रश्न २.
बन्दरगाह किसे कहते हैं?
उत्तर:
जहाँ पानी के जहाज आकर ठहरते हैं, उन्हें बन्दरगाह कहते हैं।

प्रश्न ३.
‘लैगून’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
समुद्र तटों पर खारे पानी की झीलों को ‘लैगून’ कहते हैं।

प्रश्न ४.
‘प्रकाश स्तम्भ’ किस काम आता है?
उत्तर:
समुद्र तटों पर जहाजों और नाविकों को प्रकाश दिखाए जाने के काम आता है।

  • खोजबीन – नोट – विद्यार्थी अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।
  • खाली स्थान भरो (खाली स्थान भरकर )
    • चारों ओर जल से घिरे भूमि के छोटे भाग को द्वीप कहते हैं।
    • बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीपसमूह का नाम अंडमान-निकोबार द्वीप समूह है।
    • अरब सागर में स्थित द्वीपसमूह का नाम लक्षद्वीप समूह है।

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UP Board Class 2 नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा

UP Board Class 2 नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा

प्रार्थना
UP Board Class 2 नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा 1

हे प्रभो आनन्द दाता! ज्ञान हमको दीजिए।
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए॥
लीजिए हमको शरण में, हम सदाचारी बनें।
ब्रह्मचारी, धर्म रक्षक, वीर, व्रतधारी बनें॥
गत हमारी आयु हो, प्रभु लोक के उपकार में।
हाथ डालें हम कभी ना, भूलकर अपकार में।
मातृ-भूमि, पितृ-सेवा हो अधिक प्यारी हमें।
देश में पदवी मिले निज देश हितकारी बनें।
कीजिए हम पर कृपा ऐसी हे परमात्मा।
मोह, मद, मत्सर रहित होवे हमारी आत्मा॥

निर्देश-

  • अध्यापकों के लिए-अध्यापक इस प्रार्थना को बच्चों को याद कराएँ।
  • छात्रों के लिए-छात्र इस प्रार्थना को स्वयं कंठस्थ करें।

‘असतो मा सद्गमय।
(मुझे बुराई से अच्छाई की ओर ले चलो।) -उपनिषद्

स्वास्थ्य शिक्षा एवं जीवन के लिए उपयोगी बातें

आज हम तुम्हें स्वस्थ रहने के कुछ नियम एवं जीवन के लिए उपयोगी बातें बताते हैं-

  1. प्रातःकाल उठकर अपने से बड़ों को प्रणाम करो।
  2. शौच जाकर फिर दातुन अथवा ब्रुश से दाँत साफ करने चाहिए।
  3. फिर मल-मलकर नहाना चाहिए।
  4. नहाने के बाद शरीर को मोटे कपड़े से पोंछना और फिर हल्का नाश्ता करना चाहिए।
  5. इन सब कामों के बाद साफ़ कपड़े पहनकर विद्यालय जाना चाहिए तथा शाम को छुट्टी होने पर मैदान में खेलना चाहिए।
  6. माता-पिता, गुरु और अतिथि का सदा आदर करो।
  7. हाथ और पैर के नाखूनों को साफ़ रखो और सदा धूल से बचो।
  8. खाना खूब चबा-चबाकर खाओ और सड़ी-गली चीज़ों को मत खाओ।
  9. रात को जल्दी सोओ और प्रातः जल्दी उठो।
  10. प्रत्येक सामान सँभालकर उचित स्थान पर रखो।
  11. सभी काम मन लगाकर करो।
  12. ‘सदा सत्य बोलो।
  13. जीवों पर दया करो।
  14. भूल होने पर तुरन्त क्षमा माँगो।
  15. बिना पूछे किसी का कोई सामान न लो।
  16. बातचीत करते समय बड़ों को ‘जी’, ‘आप’ और ‘श्रीमान’ आदि आदर सूचक शब्दों का प्रयोग करो।
  17. दूसरों की बातचीत में (बीच में) न बोलो।।
  18. सबकी भलाई का सदा ध्यान रखो।
  19. घर तथा विद्यालय को साफ़, सुन्दर और व्यवस्थित रखो।
  20. सड़क के बीच खड़े होकर बातचीत न करो।
  21. रास्ते पर कूड़ा-करकट और फलों के छिलके न फेंको।
  22. किसी के पूछने पर ठीक रास्ता बताओ।
  23. सबके प्रति विनम्रता का व्यवहार करो।
  24. सबसे मधुर वचन बोलो।
  25. राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का सदा आदर करो।
  26. जो बच्चे इन नियमों का पालन करते हैं, वे कभी भी बीमार नहीं पड़ते हैं। वे सदा सुखी रहते हैं और उनकी आयु लम्बी होती है।

Great Personalities
महान व्यक्तित्व
UP Board Class 2 नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा 2

हमारा शरीर
पहचानो और बताओ-
UP Board Class 2 नैतिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा 3

निर्देश-

  • बच्चों से चित्र के विषय में जानकारी देते हुए अभ्यास कराएँ।

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