UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 12 फुटकर व्यापार

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 12 फुटकर व्यापार are the part of UP Board Solutions for Class 10 Commerce. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 12 फुटकर व्यापार.

Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 12
Chapter Name फुटकर व्यापार
Number of Questions Solved 22
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 12 फुटकर व्यापार

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
मध्यस्थों की श्रृंखला की अन्तिम कड़ी है
(a) उत्पादक
(b) थोक व्यापारी
(c) फुटकर व्यापारी
(d) ये सभी
उत्तर:
(c) फुटकर व्यापारी

प्रश्न 2.
फुटकर व्यापारी की विशेषता है
(a) थोड़ी-थोड़ी मात्रा में क्रय
(b) थोड़ी-थोड़ी मात्रा में विक्रय
(c) कम पूँजी
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

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प्रश्न 3.
विभागीय भण्डार को प्रारम्भ सबसे पहले हुआ था
(a) अमेरिका में
(b) फ्रांस में
(c) जर्मनी में
(d) लन्दन में
उत्तर:
(b)फ्रांस में

प्रश्न 4.
स्वयं सेवा पद्धति अपनायी जाती है
(a) विभागीय भण्डार में
(b) श्रृंखलाबद्ध भण्डार में
(c) सुपर बाजार में
(d) इन सभी में
उत्तर:
(c) सुपर बाजार में

निश्चित उतरी्य प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
उस फुटकर व्यापारी को क्या कहते हैं, जो जगह-जगह माल बेचता है?
उत्तर:
फेरी वाला

प्रश्न 2.
बड़ी मात्रा में फुटकर व्यापार करने वाली दो संस्थाओं के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. विभागीय भण्डार
  2. बहुसंख्यक दुकानें

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प्रश्न 3.
बहुसंख्यक दुकानें किसके द्वारा खोली जाती हैं? (2011)
उत्तर:
उत्पादकों द्वारा।

प्रश्न 4.
विभिन्न वस्तुओं व सेवाओं का लेन-देन करने वाले बाजार का नाम लिखिए। (2013)
उत्तर:
सुपर बाजार

प्रश्न 5.
‘बिग बाजार’ किस क्षेत्र से सम्बन्धित है?
उत्तर:
फुटकर व्यापार

प्रश्न 6.
बहुमूल्य धातुओं अर्थात् सोना एवं चाँदी का लेन-देन करने वाले बाजार का नाम लिखिए। (2014)
उत्तर:
सर्राफा बाजार

प्रश्न 7.
अंशों का लेन-देन करने वाले बाजार का नाम बताइए। (2012)
उत्तर:
शेयर बाजार

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
फुटकर व्यापार क्या है? फुटकर व्यापार के दो गुणों को लिखिए। (2014)
उत्तर:
फुटकर व्यापार से आशय ऐसे व्यापार से है, जिसमें व्यापारी थोक व्यापारी से माल क्रय करके थोड़ी-थोड़ी मात्रा में उपभोक्ताओं को बेचता है। फुटकर व्यापारी वितरण श्रृंखला की अन्तिम एवं महत्त्वपूर्ण कड़ी होती है। फुटकर व्यापार के दो गुण निम्नलिखित हैं-

  1. फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को उनकी (UPBoardSolutions.com) आवश्यकतानुसार वस्तुएँ उपलब्ध करवाते हैं।
  2. फुटकर व्यापारी अपने ग्राहकों को उधार माल बेचकर साख सुविधाएँ प्रदान करते हैं।

प्रश्न 2.
फुटकर व्यापारी द्वारा प्रदान की जाने वाली किन्हीं दो सेवाओं का वर्णन कीजिए। (2015)
उत्तर:
फुटकर व्यापारी द्वारा प्रदान की जाने वाली दो सेवाएँ निम्नलिखित हैं

  1. फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को उनकी रुचि, फैशन व रीति-रिवाज, आदि के आधार पर माल का विक्रय करते हैं।
  2. फुटकर व्यापारी अपने नियमित ग्राहकों को उधार माल बेचकर साख सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।

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प्रश्न 3.
डाक द्वारा व्यापार से क्या तात्पर्य है? इसकी दो विशेषताएँ बताइए। (2015)
उत्तर:
डाक द्वारा व्यापार में ग्राहकों से डाक द्वारा आदेश प्राप्त करके डाक द्वारा ही माल भेजा (विक्रय किया जाता है। इसमें क्रेता और विक्रेता एक-दूसरे से अनजाने रहते हैं। इस पद्धति को प्रोत्साहन देने में विज्ञापन का विशेष महत्त्व होता है। डाक द्वारा (UPBoardSolutions.com) व्यापार की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. इसमें माल का क्रय-विक्रय डाक द्वारा किया जाता है।
  2. इस पद्धति में ग्राहकों से व्यक्तिगत सम्पर्क करने की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 4.
सुपर बाजार किसे कहते हैं?
उत्तर:
सुपर बाजार का प्रारम्भ सर्वप्रथम अमेरिका में हुआ था। सुपर बाजार एक ऐसे फुटकर व्यापार का संगठन है, जहाँ विभिन्न प्रकार की दैनिक उपयोग की वस्तुएँ नकद एवं स्वयं सेवा के आधार पर बेची जाती हैं। यह सहकारिता के सिद्धान्तों पर आधारित फुटकर व्यापार को आधुनिक संगठन होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
थोक एवं फुटकर व्यापारी से आप क्या समझते हैं? इनके मध्य चार अन्तर लिखिए। (2016)
अथवा
थोक व्यापार व फुटकर व्यापार में अन्तर कीजिए। (2011)
अथवा
फुटकर व्यापार से आप क्या समझते हैं? फुटकर एवं थोक व्यापार में क्या अन्तर है? (2007)
उत्तर:
थोक व्यापारी यह ऐसे व्यापारी होते हैं, जो उत्पादकों व निर्माताओं से भारी मात्रा में माल का क्रय करते हैं और उसे आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फुटकर व्यापारियों को बेचते हैं। प्रो. हलें के अनुसार, “थोक व्यापारी वे विपणन व्यक्ति होते हैं, (UPBoardSolutions.com) जो फुटकर व्यापारी तथा निर्माता या उत्पादक के मध्य का स्थान ग्रहण करते हैं।” फुटकर व्यापारी यह थोक व्यापारियों से बड़ी मात्रा में माल खरीदते हैं तथा उपभोक्ताओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बेचते हैं। यह मध्यस्थों की श्रृंखला की अन्तिम कड़ी होती है। स्टीफेन्सन के अनुसार, “फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं सम्बन्धी वस्तुओं के वितरण में लगा वह व्यापारिक मध्यस्थ होता है, जिसका अन्तिम उपभोक्ताओं से प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है।”

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थोक व्यापारी व फुटकर व्यापारी में अन्तर अन्तर
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प्रश्न 2.
फुटकर व्यापारी द्वारा प्रदान की जाने वाली चार सेवाओं का वर्णन कीजिए। (2016)
उत्तर:
फुटकर व्यापारी द्वारा प्रदान की जाने वाली चार सेवाएँ निम्नलिखित हैं

  1. उपभोक्ताओं की रुचि व माँग के अनुसार सूचना देना फुटकर व्यापारी, उपभोक्ताओं की रुचि, फैशन वे रीति-रिवाज, आदि से सम्बन्धित जानकारी थोक व्यापारियों व उत्पादकों को देते हैं। इससे नवीनतम वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है।
  2. माँग उत्पन्न करना फुटकर व्यापारी, थोक व्यापारी से प्राप्त माल को बेचकर अधिकाधिक माल की माँग उत्पन्न करते हैं। यह माल के विक्रय में भी सहायता प्रदान करते हैं।
  3. ग्राहकों को आवश्यकतानुसार माल का विक्रय करना फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को उनकी रुचि, फैशन व रीति-रिवाज, आदि के आधार पर माल का विक्रय करते हैं।
  4. क्षेत्र की माँग के अनुसार वस्तुओं की पूर्ति करना फुटकर व्यापारी (UPBoardSolutions.com) अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं की माँग के अनुसार वस्तुओं की पूर्ति करते हैं।

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प्रश्न 3.
खुदरा व्यापारियों के महत्त्व को बताइए।
उत्तर:
खुदरा व्यापारियों के महत्त्व को निम्नलिखित तक से स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. ग्राहकों की सन्तुष्टि पर ध्यान फुटकर व्यापारी उपभोक्ता की सेवा और सन्तुष्टि पर पर्याप्त ध्यान देते हैं।
  2. सीमित पूँजी फुटकर व्यापारी को अपना व्यवसाय (दुकान) चलाने के लिए अपेक्षाकृत कम पूँजी की आवश्यकता होती है।
  3. उधार व नकद खरीद ये थोक व्यापारियों और उत्पादकों से माल, उधार तथा नकद दोनों प्रकार से खरीदते हैं।
  4. थोड़ी मात्रा में विक्रय फुटकर व्यापारी, थोक व्यापारियों से माल खरीदकर उपभोक्ताओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बेचते हैं।
  5. थोड़ी मात्रा में क्रय फुटकर व्यापारी, थोक व्यापारियों व उत्पादकों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में वस्तुएँ क्रय करते हैं।
  6. सजावट फुटकर व्यापारी बिक्री को बढ़ाने के उद्देश्य से दुकान में सजावट पर अधिक ध्यान देते हैं। ये वस्तुओं का प्रदर्शन भी करते हैं।
  7. ग्राहकों से सीधा सम्पर्क फुटकर व्यापारी और उपभोक्ता के (UPBoardSolutions.com) बीच में सीधा और निकटतम सम्बन्ध होता है।
  8. स्थान का महत्त्व फुटकर व्यापारी दुकान ऐसे स्थान पर लगाता है, जहाँ अधिक मात्रा में लोग आते-जाते हों।
  9. विभिन्न वस्तुओं में व्यापार फुटकर व्यापारी अनेक प्रकार की वस्तुओं को क्रय-विक्रय करते हैं। ये किसी विशिष्ट वस्तु का व्यवसाय नहीं करते हैं।
  10. मध्यस्थों की अन्तिम कड़ी मध्यस्थों की अन्तिम कड़ी फुटकर व्यापारी होते हैं। इनका ग्राहकों से व्यक्तिगत सम्पर्क होता है।
  11. चयन की सुविधा ये उपभोक्ता को विभिन्न वस्तुओं की विभिन्न किस्मों के चयन की सुविधा प्रदान करते हैं।
  12. प्रायः नकद विक्रय ये उपभोक्ताओं को अधिकतर नकद माल बेचते हैं। कुछ ग्राहकों को उधार भी दे देते हैं।

प्रश्न 4.
ऑनलाइन व्यवसाय को परिभाषित कीजिए। इसके गुणों को बताइए। (2018)
उत्तर:
यदि व्यवसाय का स्वामी अपने व्यवसाय को चलाने हेतु इण्टरनेट का उपयोग करता है, तो सम्बन्धित व्यवसाय को ‘ऑनलाइन व्यवसाय’ कहा जाता है। अन्य शब्दों में, ऑनलाइन व्यवसाय में क्रय तथा विक्रय ऑनलाइन होता है तथा इसके अन्तर्गत व्यवसायी अपने ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाएँ प्रदान करता है।

ऑनलाइन व्यवसाय के गुण

  1. लागत की बचत होती है।
  2. बेहतर कार्यक्षमता होती है।
  3. पूरे विश्व में ग्राहक इसकी सुविधा किसी (UPBoardSolutions.com) भी समय प्राप्त कर सकता है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
फुटकर व्यापारी की सेवाओं का वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
फुटकर व्यापारियों की सेवाएँ फुटकर व्यापारी उत्पादकों, थोक व्यापारी, उपभोक्ताओं अथवा समाज के प्रति विभिन्न महत्त्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करते हैं। ये सेवाएँ निम्नलिखित हैं

I. उत्पादकों व थोक व्यापारियों के प्रति सेवाएँ
फुटकर व्यापारी उत्पादकों व थोक व्यापारियों के प्रति निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करते हैं

  1. उपभोक्ताओं की रुचि व माँग के अनुसार सूचना देना फुटकर व्यापारी, उपभोक्ताओं की रुचि, फैशन वे रीति-रिवाज, आदि से सम्बन्धित जानकारी थोक व्यापारियों व उत्पादकों को देते हैं। इससे नवीनतम वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है।
  2. माँग उत्पन्न करना फुटकर व्यापारी, थोक व्यापारी से प्राप्त माल को बेचकर अधिकाधिक माल की माँग उत्पन्न करते हैं। यह माल के विक्रय में भी सहायता प्रदान करते हैं।
  3. स्थानीय विज्ञापन से मुक्ति फुटकर व्यापारी अपने स्थानीय स्तर पर किसी वस्तु का विज्ञापन स्वयं कर लेते हैं। इसके लिए थोक व्यापारियों को विज्ञापन की आवश्यकता नहीं रहती है।
  4. वितरण के झंझटों से मुक्त करना फुटकर व्यापारियों के उपलब्ध होने पर थोक व्यापारियों को माल के वितरण की समस्या नहीं होती है।
  5. नए माल का प्रचार फुटकर व्यापारी अपने व्यक्तिगत सम्पर्क और प्रभाव (UPBoardSolutions.com) से थोक व्यापारी या उत्पादकों के लिए बाजार में नए माल का प्रचार करके अधिक बिक्री हेतु प्रयास करते हैं।
  6. वितरण लागत में कमी उत्पादक या थोक व्यापारी, फुटकर व्यापारी को उपभोक्ताओं की तुलना में अधिक माल बेचते हैं। इससे वितरण लागत में कमी आती है।
  7. आँकड़ों को एकत्रीकरण फुटकर व्यापारी माल की माँग व मूल्य आदि से सम्बन्धित आँकड़ों का संग्रहण करके उत्पादकों व थोक व्यापारियों को उपलब्ध करवाते हैं।

II. समाज या उपभोक्ताओं के प्रति सेवाएँ

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फुटकर व्यापारी समाज तथा उपभोक्ताओं के प्रति निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करते  हैं-

  1. ग्राहकों को आवश्यकतानुसार माल का विक्रय करना फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को उनकी रुचि, फैशन व रीति-रिवाज, आदि के आधार पर माल का विक्रय करते हैं।
  2. क्षेत्र की माँग के अनुसार वस्तुओं की पूर्ति करना फुटकर व्यापारी अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं की माँग के अनुसार वस्तुओं की पूर्ति करते हैं।
  3. साख सुविधाएँ प्रदान करना फुटकर व्यापारी अपने नियमित ग्राहकों को माल उधार बेचकर साख सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ सरलता से उपलब्ध हो जाती हैं।
  4. ताजी वस्तुएँ प्रदान करना फुटकर व्यापारी अपने ग्राहकों को ताजी व शुद्ध वस्तुएँ उपलब्ध करवाते हैं, इसलिए ग्राहक आवश्यकता के अनुसार कभी भी माल खरीद सकते हैं।
  5. माल वापसी की सुविधा देना फुटकर व्यापारी उपभोक्ता को कोई माल पसन्द न आने पर उसे वापस लेने की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
  6. माल को घर पहुँचाना फुटकर व्यापारी ग्राहकों के व्यक्तिगत सम्बन्धों के कारण उनके घर पर माल की सुपुर्दगी की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
  7. माँग के अनुसार वस्तुएँ उपलब्ध कराना फुटकर व्यापारी अपनी दुकान में मौसम के अनुकूल अलग-अलग प्रकार की वस्तुएँ खरीदकर एकत्र कर लेते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को आवश्यकतानुसार उनकी पसन्द की वस्तुएँ सरलता से मिल जाती हैं।
  8. निःशुल्क परामर्श देना फुटकर व्यापारी अपने ग्राहकों से व्यक्तिगत सम्पर्क होने के कारण उनको वस्तुओं के उचित चयन व उपयोगिता के विषय में नि:शुल्क परामर्श देते हैं।
  9. ग्राहकों को चुनाव की सुविधा फुटकर व्यापारी ग्राहकों को उनकी आवश्यकता के (UPBoardSolutions.com) अनुसार वस्तु के उपयुक्त चुनाव की सुविधा देते हैं।
  10. ठगे जाने का भय नहीं फुटकर व्यापारी ग्राहकों के निकट व स्थायी रूप से होने के कारण ग्राहकों से धोखा नहीं करता है। उपभोक्ताओं को फुटकर व्यापारी पर पूर्ण विश्वास होता है।

प्रश्न 2.
फुटकर व्यापारी से आप क्या समझते हैं? यह थोक व्यापारी से किस प्रकार भिन्न है? एक फुटकर व्यापारी की समाज के प्रति सेवाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
फुटकर व्यापारी से आशय 
थोक व्यापारी यह ऐसे व्यापारी होते हैं, जो उत्पादकों व निर्माताओं से भारी मात्रा में माल का क्रय करते हैं और उसे आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फुटकर व्यापारियों को बेचते हैं। प्रो. हलें के अनुसार, “थोक व्यापारी वे विपणन व्यक्ति होते हैं, जो फुटकर व्यापारी तथा निर्माता या उत्पादक के मध्य का स्थान ग्रहण करते हैं।”

फुटकर व्यापारी यह थोक व्यापारियों से बड़ी मात्रा में माल खरीदते हैं तथा उपभोक्ताओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बेचते हैं। यह मध्यस्थों की श्रृंखला की अन्तिम कड़ी होती है। स्टीफेन्सन के अनुसार, “फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं सम्बन्धी वस्तुओं के वितरण में लगा वह व्यापारिक मध्यस्थ होता है, जिसका अन्तिम उपभोक्ताओं से प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है।”

समाज या उपभोक्ताओं के प्रति सेवाएँ
फुटकर व्यापारी समाज तथा उपभोक्ताओं के प्रति निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करते  हैं-

  1. ग्राहकों को आवश्यकतानुसार माल का विक्रय करना फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को उनकी रुचि, फैशन व रीति-रिवाज, आदि के आधार पर माल का विक्रय करते हैं।
  2. क्षेत्र की माँग के अनुसार वस्तुओं की पूर्ति करना फुटकर व्यापारी अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं की माँग के अनुसार वस्तुओं की पूर्ति करते हैं।
  3. साख सुविधाएँ प्रदान करना फुटकर व्यापारी अपने नियमित ग्राहकों को माल उधार बेचकर साख सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ सरलता से उपलब्ध हो जाती हैं।
  4. ताजी वस्तुएँ प्रदान करना फुटकर व्यापारी अपने ग्राहकों को ताजी व शुद्ध वस्तुएँ उपलब्ध करवाते हैं, इसलिए ग्राहक आवश्यकता के अनुसार कभी भी माल खरीद सकते हैं।
  5. माल वापसी की सुविधा देना फुटकर व्यापारी उपभोक्ता को कोई माल पसन्द न आने पर उसे वापस लेने की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
  6. माल को घर पहुँचाना फुटकर व्यापारी ग्राहकों के व्यक्तिगत सम्बन्धों के कारण उनके घर पर माल की सुपुर्दगी की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
  7. माँग के अनुसार वस्तुएँ उपलब्ध कराना फुटकर व्यापारी अपनी दुकान में मौसम के अनुकूल अलग-अलग प्रकार की वस्तुएँ खरीदकर एकत्र कर लेते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को आवश्यकतानुसार उनकी पसन्द की वस्तुएँ सरलता से मिल जाती हैं।
  8. निःशुल्क परामर्श देना फुटकर व्यापारी अपने ग्राहकों से व्यक्तिगत सम्पर्क होने के कारण उनको वस्तुओं के उचित चयन व उपयोगिता के विषय में नि:शुल्क परामर्श देते हैं।
  9. ग्राहकों को चुनाव की सुविधा फुटकर व्यापारी ग्राहकों को उनकी (UPBoardSolutions.com) आवश्यकता के अनुसार वस्तु के उपयुक्त चुनाव की सुविधा देते हैं।
  10. ठगे जाने का भय नहीं फुटकर व्यापारी ग्राहकों के निकट व स्थायी रूप से होने के कारण ग्राहकों से धोखा नहीं करता है। उपभोक्ताओं को फुटकर व्यापारी पर पूर्ण विश्वास होता है।

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प्रश्न 3.
विभागीय भण्डार से क्या आशय है? विभागीय भण्डार एवं श्रृंखलाबद्ध दुकानों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विभागीय भण्डार विभागीय भण्डार का विकास सर्वप्रथम फ्रांस में सन् 1852 में हुआ था। विभागीय भण्डार के अन्तर्गत एक ही भवन की छत के नीचे वस्तुओं का पृथक्-पृथक् विभागों में विक्रय किया जाता है। इन भण्डारों में उपभोक्ताओं की आवश्यकता की सभी वस्तुएँ अर्थात् सुई से लेकर कार तक एक ही स्थान पर मिल जाती हैं।

इन वस्तुओं के बिल एक ही छत के नीचे अलग-अलग विभागों में बनते हैं। क्लार्क के अनुसार, “विभागीय भण्डार एक फुटकर संस्था है, जिसमें एक ही छत के नीचे बहुत-सी वस्तुओं का व्यापार होता है। ये वस्तुएँ निश्चित विभागों में विभाजित होती हैं। इनका (UPBoardSolutions.com) केन्द्रीय प्रबन्ध होता है और ये मुख्य रूप से स्त्री ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।” जेम्स स्टीफेन्सन के अनुसार, “विभागीय भण्डार एक ही छत के अन्तर्गत एक बड़ा भण्डार है, जो विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का फुटकर व्यापार करते हैं।”

विभागीय भण्डार व श्रृंखलाबद्ध दुकानों में अन्तर
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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक are the part of UP Board Solutions for Class 10 Commerce. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक.

Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 18
Chapter Name सहकारी बैंक
Number of Questions Solved 21
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 18 सहकारी बैंक

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
भारत में सहकारी समिति अधिनियम कब पारित हुआ? (2014)
(a) सन् 1901 में
(b) सन् 1904 में
(c) सन् 1903 में
(d) सन् 1905 में
उत्तर:
(b) सन् 1904 में

प्रश्न 2.
केन्द्रीय सहकारी बैंक किस स्तर पर होते हैं?
(a) ग्राम स्तर पर
(b) प्रदेश स्तर पर
(c) जिला स्तर पर
(d) मण्डल स्तर पर
उत्तर:
(c) जिला स्तर पर

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प्रश्न 3.
केन्द्रीय सहकारी बैंक कितने प्रतिशत लाभ का वितरण करते हैं?
(a) 25%
(b) 30%
(c) 75%
(d) 40%
उत्तर:
(c) 75%

प्रश्न 4.
केन्द्रीय सहकारी बैंक का मुख्य कार्य होता है।
(a) जननिक्षेप प्राप्त करना
(b) क्षेत्रीय व्यवस्था को प्रोत्साहित करना
(c) ग्रामीण साख-सुविधा प्रदान करना
(d) उपभोक्ताओं को ऋण देना
उत्तर:
(c) ग्रामीण साख-सुविधा प्रदान करना

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
केन्द्रीय सहकारी बैंक का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
जिला सहकारी बैंक

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प्रश्न 2.
केन्द्रीय सहकारी बैंक की स्थापना गाँव/शहर में की जाती हैं।
उत्तर:
शहर

प्रश्न 3.
केन्द्रीय सहकारी बैंकों का प्रबन्ध किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
संचालक मण्डल

प्रश्न 4.
केन्द्रीय सहकारी बैंक अल्पकालीन/दीर्घकालीन ऋण देते हैं।
उत्तर:
अल्पकालीन

प्रश्न 5.
राज्य सहकारी बैंक का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
शीर्ष बैंक

प्रश्न 6.
भारत के सहकारी साख आन्दोलन में सरकारी हस्तक्षेप कम/अधिक होता है।
उत्तर:
अधिक

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प्रश्न 7.
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना सन् 1975/1980 में की गई। (2014)
उत्तर:
सन् 1975 में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
सहकारी बैंकों के दो लक्षण बताइए।
उत्तर :
सहकारी बैंक के दो लक्षण निम्नलिखित हैं

  1. प्रबन्ध इन बैंकों के प्रबन्ध का कार्य लोकतान्त्रिक आधार पर किया जाता है।
  2. स्थापना का उद्देश्य सहकारी बैंकों की (UPBoardSolutions.com) स्थापना व्यक्तियों द्वारा स्वयं के कल्याण अर्थात् स्वयं की सहायता के उद्देश्य से की जाती है।

प्रश्न 2.
सहकारी बैंक के प्रकार बताइए।
उत्तर:
सहकारी बैंक निम्नलिखित निम्न प्रकार के होते हैं

  1. केन्द्रीय सहकारी बैंक
  2. राज्य सहकारी बैंक

प्रश्न 3.
केन्द्रीय सहकारी बैंक से क्या आशय है?
उत्तर:
केन्द्रीय सहकारी बैंक को ‘जिला सहकारी बैंक (District Co-operative Bank) भी कहते हैं। इन बैंकों का प्रमुख उद्देश्य जिले की प्राथमिक समितियों से सम्पर्क स्थापित करना, उनका निरीक्षण करना व उन्हें सहयोग प्रदान करना होता है। यह प्रत्येक (UPBoardSolutions.com) जिले में एक ही होता है तथा इसकी स्थापना शहर में की जाती है।

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प्रश्न 4.
सहकारी बैंक के चार कार्य लिखिए। (2018)
उत्तर:
सहकारी बैंक के चार कार्य निम्नलिखित हैं

  1. ये बैंक सहकारी शिक्षा को बढ़ावा देते हैं।
  2. ये बैंक सम्पूर्ण प्रादेशिक सहकारी आन्दोलने के लिए वित्त की व्यवस्था ए करते हैं।
  3. ये बैंक केन्द्रीय सहकारी बैंक के मार्गदर्शक होते हैं।
  4. ये बैंक प्रदेश के अनेक केन्द्रीय बैंकों के मध्य सन्तुलन बनाए रखते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
सहकारी बैंक के बारे में आप क्या जानते हैं? वर्णन कीजिए। (2010)
उत्तर:
सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) व्यक्तियों के ऐसे संगठन, जो समानता, स्वयं सहायता व प्रजातान्त्रिक आधार पर सभी के हित के लिए बैंकिंग सम्बन्धी सभी कार्य करते हैं, सहकारी बैंक कहलाते हैं। सहकारी बैंक, सहकारी समितियों का एक संगठन होता है। इन बैंकों की स्थापना सन् 1904 में सहकारी साख अधिनियम के पारित होने के बाद हुई। हेनरी वोल्फ के अनुसार, “सहकारी बैंकिंग एक ऐसी एजेन्सी है, जो छोटे वर्ग के व्यक्तियों से व्यवहार करने की स्थिति में है तथा जो अपनी शर्तों के अनुसार उनकी जमाओं को स्वीकार करती है व ऋण प्रदान करती है।

सहकारी बैंक कृषकों को वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन उधार देते हैं। सहकारी बैंक कषकों को बीज व खाद खरीदने, मजदरी का भगतान करने, भमि में सधार करवाने, कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए किसानों को ऋण देते हैं। सहकारी बैंक किसानों (UPBoardSolutions.com) को सस्ती ब्याज दर एवं सरल शर्तों पर ऋण प्रदान करते हैं। भारत में सहकारी बैंक का ढाँचा त्रि-स्तरीय है। सहकारी बैंक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

  1. जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक इनके द्वारा प्राथमिक साख समितियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूर्ण किया जाता है।
  2. राज्य स्तर पर शीर्ष बैंक ये बैंक राज्य में सहकारी आन्दोलन के विकास हेतु उत्तरदायी होते हैं।

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प्रश्न 2.
सहकारी बैंकों के दोषों का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
सहकारी बैंकों के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं-

  1. सरकार को अधिक नियन्त्रण इन बैंकों पर सरकार का अधिक नियन्त्रण रहता है, इसलिए जनता इन्हें अपना सहायक न मानकर सरकारी संस्थाएँ मानती है।
  2. अकुशल संचालक ग्रामीण क्षेत्रों की समितियों के संचालक बैंकों का प्रबन्ध सुव्यवस्थित प्रकार से नहीं कर पाते हैं।
  3. पूँजी की कमी भारतीय सहकारी बैंकों के पास पूँजी का अभाव पाया जाता है, इसलिए ये बैंक कुशलता से कार्य करने में असमर्थ होते हैं।
  4. ऋण वसूल करने में देरी सहकारी बैंकों द्वारा दिए गए ऋणों की राशि समय (UPBoardSolutions.com) पर वसूल नहीं हो पाती है। इससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
  5. अधिक ब्याज दर इन बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में नकद कोष नहीं होता है, इसलिए ये समितियाँ दूसरों के ऋण पर निर्भर रहती हैं। अत: इनके ब्याज की दर अन्य संस्थाओं से अधिक होती है।
  6. सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान न होना भारतीय ग्रामीण जनता व इन समितियों के कर्मचारियों को सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान नहीं होता है। इससे ये संस्थाएँ सफल नहीं हो पाती हैं।

प्रश्न 3.
वाणिज्यिक बैंक व सहकारी बैंक में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2009,07)
उत्तर:
वाणिज्यिक व सहकारी बैंकों में अन्तर
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
को-ऑपरेटिव बैंक (सहकारी बैंक) क्या है? इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए।
अथवा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सहकारी बैंकों की भूमिका की विवेचना कीजिए। (2011, 06)
अथवा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी बैंक का महत्त्व बताइए। (2008)
अथवा
सहकारी बैंकों के गुणों का वर्णन कीजिए। (2007)
उत्तर:
को-ऑपरेटिव बैंक से आशय

सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) व्यक्तियों के ऐसे संगठन, जो समानता, स्वयं सहायता व प्रजातान्त्रिक आधार पर सभी के हित के लिए बैंकिंग सम्बन्धी सभी कार्य करते हैं, सहकारी बैंक कहलाते हैं। सहकारी बैंक, सहकारी समितियों का एक संगठन होता है। इन बैंकों की स्थापना सन् 1904 में सहकारी साख अधिनियम के पारित होने के बाद हुई। हेनरी वोल्फ के अनुसार, “सहकारी बैंकिंग एक ऐसी एजेन्सी है, जो छोटे वर्ग के व्यक्तियों से व्यवहार करने की स्थिति में है तथा जो अपनी शर्तों के अनुसार उनकी जमाओं को स्वीकार करती है व ऋण प्रदान करती है।

सहकारी बैंक कृषकों को वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन उधार देते हैं। सहकारी बैंक कषकों को बीज व खाद खरीदने, मजदरी का भगतान करने, भमि में सधार करवाने, कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए किसानों को ऋण देते हैं। सहकारी बैंक किसानों को सस्ती ब्याज दर एवं सरल शर्तों पर ऋण प्रदान करते हैं। भारत में सहकारी बैंक का ढाँचा त्रि-स्तरीय है। सहकारी बैंक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

  1. जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक इनके द्वारा प्राथमिक साख समितियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूर्ण किया जाता है।
  2. राज्य स्तर पर शीर्ष बैंक ये बैंक राज्य में सहकारी आन्दोलन के विकास हेतु उत्तरदायी होते हैं।

भारत में सहकारी बैंकों को महत्त्व व गुण या भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी बैंकों की भूमिका सहकारी बैंक देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख कर्णधार हैं। इन बैंकों की व्यवस्था से समाज की आर्थिक स्थिति उन्नत हुई। है व कृषि क्षेत्र में अनेक लाभ हुए हैं। इसके प्रमुख लाभों या महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट कर सकते हैं

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  1. कृषि कार्यों के लिए ऋण सहकारी बैंक किसानों को खाद, बीज, कृषि यन्त्रों, आदि के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करवाते हैं।
  2. कुटीर उद्योगों का विकास सहकारी बैंकों द्वारा कुटीर उद्योगों को सहायता प्रदान किए जाने से इनका विकास हुआ है।
  3. ग्रामीणों के रोजगार में वृद्धि सहकारी बैंकों द्वारा ऋण देने से कृषि कार्यों का विकास होता है, जिससे ग्रामीण जनता को अधिक रोजगार प्राप्त होता है।
  4. महाजनों के प्रभाव में कमी कृषि विकास बैंकों की स्थापना के बाद से यह बैंक किसानों को आवश्यकतानुसार ऋण प्रदान करते रहते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारों का प्रभाव कम हुआ है।
  5. कृषि उपज के विपणन में सहायता इन बैंकों के द्वारा कृषि विपणन समितियों की स्थापना से किसानों को फसल का उचित दाम मिल जाता है।
  6. सामाजिक गुणों का विकास इन बैंकों व समितियों के सक्रिय रूप से कार्य करने के कारण लोगों में सहयोग, मित्रता, आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।
  7. सहयोग की भावना में वृद्धि सहकारी बैंकों से जनता में परस्पर सहयोग (UPBoardSolutions.com) की भावना में वृद्धि हुई है।
  8. बचत की आदत का विकास ये समितियाँ प्रजातान्त्रिक सिद्धान्त पर कार्य करती हैं। इससे किसानों में बैंक के प्रयोग व उनमें बचत करने की आदत को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 2.
हमारे देश में सहकारी बैंकों की असफलता के क्या कारण हैं? इन्हें उपयोगी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए? (2016)
उत्तर:
सहकारी बैंकों की असफलता के प्रमुख कारण

  1. सहकारी बैंकों पर सरकार का अत्यधिक नियन्त्रण सरकार ने इन बैंकों पर अनेक प्रकार के नियन्त्रण लगाए हैं। इससे जनता इन्हें सरकार का बैंक समझती है।
  2. उचित प्रबन्ध का न होना इन बैंकों में कुशल व्यक्तियों का अभाव होता है। फलस्वरूप इनको लाभ के स्थान पर हानि अधिक होती है।
  3. पर्याप्त पूँजी का अभाव इन बैंकों के पास पूँजी की कमी होती है, क्योंकि इनके अधिकांश सदस्यों के पास धन नहीं होता है।
  4. ऋण वसूली करने में देरी सहकारी बैंक ऋण राशि को सही समय पर वसूल करने में असफल रहते हैं। परिणामस्वरूप, जिन्हें आवश्यकता होती है, उन्हें धन नहीं मिल पाता।
  5. अपूर्ण ज्ञान सहकारी बैंकों को ग्रामीण जनता व समितियों के सिद्धान्तों का ज्ञान नहीं होती है।

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भारत में सहकारी बैंकों के सुधार के लिए सुझाव

  1. पूँजी में वृद्धि इन समितियों को अपने रक्षित कोषों में वृद्धि करनी चाहिए।
  2. सरकारी नियन्त्रण में कमी सहकारी संगठन पर सरकारी नियन्त्रण में कमी कर देनी चाहिए, जिससे कि समिति के सदस्यों पर उत्तरदायित्व का भार डाला जा सके।
  3. सहकारिता के सिद्धान्तों का प्रचार इन बैंकों में सहकारिता के सिद्धान्तों की शिक्षा प्रदान करने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
  4. समन्वय एवं सहयोग इन बैंकों का व्यापारिक बैंकों के साथ सहयोग और समन्वय (UPBoardSolutions.com) होना चाहिए, जिससे ये बैंक अधिक सुविधाएँ प्रदान कर सकें।
  5. कर्मचारियों के लिए उचित प्रशिक्षण सहकारी बैंकों में अनेक स्थानों पर उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे योग्य कर्मचारियों की सेवाएँ बैंकों को उपलब्ध हो सकें।
  6. ब्याज की दर इन समितियों को ब्याज की दर में कमी करनी चाहिए।

प्रश्न 3.
सहकारी बैंक क्या है? इसके गुण वे दोषों का वर्णन कीजिए। (2013)
उत्तर:
सहकारी बैंक से आशय

सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) व्यक्तियों के ऐसे संगठन, जो समानता, स्वयं सहायता व प्रजातान्त्रिक आधार पर सभी के हित के लिए बैंकिंग सम्बन्धी सभी कार्य करते हैं, सहकारी बैंक कहलाते हैं। सहकारी बैंक, सहकारी समितियों का एक संगठन होता है। इन बैंकों की स्थापना सन् 1904 में सहकारी साख अधिनियम के पारित होने के बाद हुई। हेनरी वोल्फ के अनुसार, “सहकारी बैंकिंग एक ऐसी एजेन्सी है, जो छोटे वर्ग के व्यक्तियों से व्यवहार करने की (UPBoardSolutions.com) स्थिति में है तथा जो अपनी शर्तों के अनुसार उनकी जमाओं को स्वीकार करती है व ऋण प्रदान करती है।

सहकारी बैंक कृषकों को वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन उधार देते हैं। सहकारी बैंक कषकों को बीज व खाद खरीदने, मजदरी का भगतान करने, भमि में सधार करवाने, कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए किसानों को ऋण देते हैं। सहकारी बैंक किसानों को सस्ती ब्याज दर एवं सरल शर्तों पर ऋण प्रदान करते हैं। भारत में सहकारी बैंक का ढाँचा त्रि-स्तरीय है। सहकारी बैंक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

  1. जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक इनके द्वारा प्राथमिक साख समितियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूर्ण किया जाता है।
  2. राज्य स्तर पर शीर्ष बैंक ये बैंक राज्य में सहकारी आन्दोलन के विकास हेतु उत्तरदायी होते हैं।

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सहकारी बैंकों के गुण

भारत में सहकारी बैंकों को महत्त्व व गुण या भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी बैंकों की भूमिका सहकारी बैंक देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख कर्णधार हैं। इन बैंकों की व्यवस्था से समाज की आर्थिक स्थिति उन्नत हुई। है व कृषि क्षेत्र में अनेक लाभ हुए हैं। इसके प्रमुख लाभों या महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट कर सकते हैं

  1. कृषि कार्यों के लिए ऋण सहकारी बैंक किसानों को खाद, बीज, कृषि यन्त्रों, आदि के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करवाते हैं।
  2. कुटीर उद्योगों का विकास सहकारी बैंकों द्वारा कुटीर उद्योगों को सहायता प्रदान किए जाने से इनका विकास हुआ है।
  3. ग्रामीणों के रोजगार में वृद्धि सहकारी बैंकों द्वारा ऋण देने से कृषि कार्यों का विकास होता है, जिससे ग्रामीण जनता को अधिक रोजगार प्राप्त होता है।
  4. महाजनों के प्रभाव में कमी कृषि विकास बैंकों की स्थापना के बाद से यह बैंक किसानों को आवश्यकतानुसार ऋण प्रदान करते रहते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारों का प्रभाव कम हुआ है।
  5. कृषि उपज के विपणन में सहायता इन बैंकों के द्वारा कृषि विपणन समितियों की स्थापना से किसानों को फसल का उचित दाम मिल जाता है।
  6. सामाजिक गुणों का विकास इन बैंकों व समितियों के सक्रिय रूप से कार्य करने के कारण लोगों में सहयोग, मित्रता, आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।
  7. सहयोग की भावना में वृद्धि सहकारी बैंकों से जनता में परस्पर सहयोग की भावना में वृद्धि हुई है।
  8. बचत की आदत का विकास ये समितियाँ प्रजातान्त्रिक सिद्धान्त पर कार्य करती हैं। इससे किसानों में बैंक के प्रयोग व उनमें बचत करने की आदत को प्रोत्साहन मिलता है।

सहकारी बैंकों के दोष

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सहकारी बैंकों के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं-

  1. सरकार को अधिक नियन्त्रण इन बैंकों पर सरकार का अधिक नियन्त्रण रहता है, इसलिए जनता इन्हें अपना सहायक न मानकर सरकारी संस्थाएँ मानती है।
  2. अकुशल संचालक ग्रामीण क्षेत्रों की समितियों के संचालक बैंकों का प्रबन्ध सुव्यवस्थित प्रकार से नहीं कर पाते हैं।
  3. पूँजी की कमी भारतीय सहकारी बैंकों के पास पूँजी का अभाव पाया जाता है, इसलिए ये बैंक कुशलता से कार्य करने में असमर्थ होते हैं।
  4. ऋण वसूल करने में देरी सहकारी बैंकों द्वारा दिए गए ऋणों की राशि समय पर वसूल नहीं हो पाती है। इससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
  5. अधिक ब्याज दर इन बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में नकद कोष नहीं होता है, इसलिए (UPBoardSolutions.com) ये समितियाँ दूसरों के ऋण पर निर्भर रहती हैं। अत: इनके ब्याज की दर अन्य संस्थाओं से अधिक होती है।
  6. सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान न होना भारतीय ग्रामीण जनता व इन समितियों के कर्मचारियों को सहकारिता के सिद्धान्तों का ज्ञान नहीं होता है। इससे ये संस्थाएँ सफल नहीं हो पाती हैं।

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण are the part of UP Board Solutions for Class 10 Commerce. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण.

Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 3
Chapter Name बैंक समाधान विवरण
Number of Questions Solved 25
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण

बहुविकल्पीय प्रश्न ( 1 अंक)
                   

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण किसके द्वारा बनाया जाता है?
(a) व्यापारी
(b) बैंक
(c) देनदार
(d) लेनदार
उत्तर:
(a) व्यापारी

प्रश्न 2.
बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है?
(a) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष से
(b) रोकड़ पुस्तक के रोकड़ कॉलम शेष से
(c) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष यो पास बुक के शेष से
(d) पास बुक के शेष से
उत्तर:
(c) रोकड़ पुस्तक के बैंक कॉलम शेष या पास बुक के शेष से

प्रश्न 3.
बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है
(a) व्यापारी की इच्छानुसार
(b) अन्तिम खाते बनाने से पूर्व
(c) अन्तिम खाते बनाने के पश्चात्
(d) छमाही
उत्तर:
(d) व्यापारी की इच्छानुसार

प्रश्न 4.
बैंक अधिविकर्ष होता है।
(a) जब ग्राहक का रुपया बैंक में जमा होता है।
(b) जब बैंक ग्राहक को उसकी जमा राशि से अधिक रुपया ऋण के रूप में दे देता है।
(c) जब ग्राहक खाता बन्द कर देता है।
(d) उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं।
उत्तर:
(b) जब बैंक ग्राहक को उसकी जमा राशि से अधिक रुपया ऋण के रूप में दे देता है।

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निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
रोकड़ पुस्तक और पास बुक के शेषों का मिलान करने के लिए तैयार किए जाने वाले विवरण का नाम लिखिए। (2014)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण

प्रश्न 2.
बैंक समाधान विवरण में कितने खाने होते हैं?
उत्तर:
तीन खाने

प्रश्न 3.
रोकड़ बही में ओवरड्राफ्ट (अधिविकर्ष) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर;
रोकड़ बही का क्रेडिट शेष

प्रश्न 4.
बैंक पास बुक का कौन-सा शेष अधिविकर्ष कहलाता है?
उत्तर:
ऋणी शेष

प्रश्न 5.
रोकड़ बही का डेबिट शेष क्या दर्शाता है?
उत्तर:
नकद रोकड़

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न  (2अंक)

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण क्या है?
उत्तर:
बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है।

प्रश्न 2.
रोकड़ बही एवं बैंक पास बुक में अन्तर के कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर:
रोकड़ बही एवं बैंक पास बुक में अन्तर के दो कारण निम्नलिखित

  1. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु (UPBoardSolutions.com) भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए।
  2. चैक बैंक में वसूली के लिए भेजे, जो अभी तक वसूल नहीं हुए।

लघु उत्तरीय प्रश्न  (4 अंक)

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण क्या है? यह क्यों तैयार किया जाता है? (2016, 11)
अथवा
बैंक समाधान विवरण से आप क्या समझते हैं? एक व्यापारी के द्वारा यह विवरण बनाया जाना क्यों आवश्यक है? (2007)
अथवा
बैंक समाधान विवरण बनाने के मुख्य उद्देश्यों को बताइए। (2008)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण का अर्थ
1. बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।

2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।

3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में (UPBoardSolutions.com) कर देता है। यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।

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4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे—बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि। इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।

5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।

6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।

7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अत: चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।

9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है

10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ छूट प्रदान करता है, जिससे व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अत: रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि। इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के (UPBoardSolutions.com) कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।

12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।

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बैंक समाधान विवरण के उद्देश्य

बैंक समाधान विवरण का अर्थ  बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है|

1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।

2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।

3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।

4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।

5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।

6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।

बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है

1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।

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(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है

  1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
  2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान।
  4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा (UPBoardSolutions.com) कर देना।
  5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक में भेज दिए गए।

जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है

  1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
  2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान।
  4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
  5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।

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(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।

2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष (UPBoardSolutions.com) या अधिविकर्ष द्वारा बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दावलियों की सोदाहरण व्याख्या कीजिए।

  1. अधिविकर्ष
  2. पास बुक (2007)

उत्तर:
1. अधिविकर्ष बैंक अपने चालू खाताधारकों को एक विशेष सुविधा प्रदान करता है कि यदि वे चाहें तो आवश्यकता के समय अपनी जमा की हुई धनराशि से अधिक धनराशि बैंक से निकाल सकते हैं। यह सुविधा बैंक अधिविकर्ष’ कहलाती है। इसमें व्यापारी बैंक का ऋणी और बैंक व्यापार का ऋणदाता बन जाता है। उदाहरण-यदि बैंक में ₹ 2,00,000 जमा हों और व्यापारी ₹ 2,50,000 निकाल लेता है, तो ₹ 2,50,000 – ₹ 2,00,000 = ₹ 50,000 का अधिविकर्ष कहलाता है।

2. पास बुक यह एक छोटी-सी पुस्तक होती है, जिसमें ग्राहक व बैंक के बीच हए सभी लेन-देनों का लेखा किया जाता है। यह बैंक की पुस्तकों में खुले ग्राहक के खाते की प्रतिलिपि होती है। इसमें बैंक में धनराशि जमा कराने, धनराशि निकालने तथा ब्याज, आदि का तिथि के साथ विवरण दिया जाता है। उदाहरण-

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 3 बैंक समाधान विवरण 1

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न  (8 अंक)

प्रश्न 1.
बैंक समाधान विवरण क्या है? रोकड़ शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के आठ कारणों का उल्लेख कीजिए।  (Imp 2007)
अथवा
किसी निश्चित तिथि पर पास बुक तथा रोकड़ पुस्तक के शेषों में अन्तर होने के क्या-क्या कारण होते हैं? वर्णन कीजिए। (2011)
उत्तर:
1. बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या (UPBoardSolutions.com) विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।

2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।

3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में कर देता है। यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।

4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि। इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।

5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।

6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।

7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अत: चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।

9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है

10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ (UPBoardSolutions.com) छूट प्रदान करता है, जिससे व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अत: रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि। इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।

12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।

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प्रश्न 2.
बैंक समाधान विवरण क्या है? इसकी क्या उपयोगिता है? इसको बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 देखें। बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है|

1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।

2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।

3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।

4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।

5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।

6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।

बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है

1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।

(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है

  1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
  2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान।
  4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा कर देना।
  5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक में भेज दिए गए।

जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया (UPBoardSolutions.com) जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है

  1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
  2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान।
  4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
  5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।

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(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।

2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष या अधिविकर्ष द्वारा बैंक समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता

प्रश्न 3.
बैंक समाधान विवरण क्या है? यह क्यों बनाया जाता है? रोकड़ बही के शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के किन्हीं छः कारणों का उल्लेख कीजिए। (2008)
उत्तर:
बैंक समाधान विवरण का अर्थ
बैंक समाधान विवरण से आशय बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गई बाकी और ग्राहक की रोकड़ पुस्तक में आई हुई बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण-पत्र बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण’ कहा जाता है। रोकड़ पुस्तक की बैंक शेष तथा पास बुक की बैंक शेष में अन्तर के कारण व्यवसायी की रोकड़ पुस्तक के बैंक शेष एवं पास बुक के बैंक शेष में अन्तर के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

1. अस्वीकृत चैक या विपत्र बैंक चैक या विपत्र की राशि अन्तिम रूप से खाते में तब ही जमा करता है, जब राशि लेनदारों से वसूल हो जाती है, लेकिन व्यापारी इस प्रकार के चैकों तथा विपत्रों की राशि को रोकड़ पुस्तक की बैंक बाकी में तभी लिख देता हैं, जब वह बैंक को चैक वसूली के लिए भेजता है, जिसके कारण दोनों शेषों में अन्तर आ जाता है।

2. पास बुक में की गई अशुद्धि कई बार बैंक भूल से ग्राहक के खाते में कोई अशुद्ध प्रविष्टि कर देता है, जिसके कारण पास बुक व रोकड़ बही के शेषों में अन्तर आ जाता है।

3. चैक निर्गमित किए गए, परन्तु बैंक समाधान विवरण बनाने के समय तक भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं हुए जिस समय व्यापारी अपने किसी लेनदार को चैक काटकर देता है, तो वह उसी समय इसकी प्रविष्टि अपनी रोकड़ बही के बैंक खाते के धनी पक्ष में कर देता है। (UPBoardSolutions.com) यदि बैंक समाधान विवरण की तिथि तक वह लेनदार इस चैक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं करता है, तो पास बुक में ऐसे चैकों की कोई प्रविष्टि नहीं हो पाती है, जिसके कारण व्यापारी की रोकड़ बही का शेष कम हो जाता है, परन्तु पास बुक का शेष कम नहीं होता है।

4. ग्राहक के आदेशानुसार भुगतान करना बैंक अपने ग्राहक के आदेश के बिना कभी-कभी कुछ भुगतान कर देता है; जैसे—बीमा की किस्त, चन्दा, देय बिल, आदि। इनको लेखा बैंक भुगतान करते समय ही पास बुक में कर देता है, परन्तु ग्राहक इसको लेखा अपनी रोकड़ बही में सूचना प्राप्त होने पर ही करता है।

5. कुछ लिपिकीय अशुद्धियाँ रोकड़ बही या पास बुक में रकम लिखने या शेष निकालने में कोई लिपिकीय अशुद्धि हो जाती है, तो ऐसी दशा में भी दोनों पुस्तकों की बाकियों में अन्तर हो जाता है।

6. क्रेडिट शेष पर बैंक द्वारा दिया गया ब्याज जब बैंक अपने ग्राहक को जमा राशि पर ब्याज देता है, तो वह नकद न देकर यह राशि उसके खाते में जमा कर देता है। इस तरह बैंक पास बुक का शेष बढ़ जाता है, जबकि ग्राहक/व्यापारी को इसका पता बाद में ही चल पाता है।

7. चैक निर्गमित किए, लेकिन रोकड़ बही में उनका लेखा होने से छूट गया कभी-कभी व्यापारी अपने लेनदार को चैक काटकर दे देता है, लेकिन वह रोकड़ बही में चैक का लेखा करना भूल जाता है। अत: चैक का भुगतान होने के पश्चात् रोकड़ बही और पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

8. वसूली के लिए चैक जमा किए गए, परन्तु अभी तक वसूल नहीं हुए व्यापारी को जब भुगतान में या अपने देनदार से चैक प्राप्त होते हैं, तो वह इसे वसूली के लिए बैंक में भेज देता है तथा बैंक का शेष उतनी ही रकम से बढ़ा लेता है, लेकिन वास्तव में बैंक अपने ग्राहक के खाते अर्थात् पास बुक का शेष उस समय तक नहीं बढ़ाती जब तक कि वह उन चैकों का भुगतान वसूल नहीं कर लेता है। इस प्रकार, रोकड़े बही के बैंक खाने का शेष बढ़ जाता है, जबकि पास बुक में यह उतना ही बना रहता है।

9. विनियोगों पर प्राप्त ब्याज एवं लाभांश समय-समय पर बैंक अपने ग्राहकों से विनियोगों पर ब्याज व लाभांश वसूल करता रहता है, लेकिन ग्राहकों को इसकी सूचना नहीं होती है, जिसके कारण इसकी रोकड़ बही में प्रविष्टि नहीं हो पाती है

10. अवधि से पूर्व विपत्र के भुगतान पर छूट जब व्यापारी के पास देय बिल की अवधि से पहले ही धनराशि की व्यवस्था हो जाती है, तो वह बैंक को अपने द्वारा स्वीकृत बिल का भुगतान कर सकता है। इस स्थिति में बैंक अपने व्यापारी को इस अवधि के लिए कुछ छूट प्रदान करता है, जिससे (UPBoardSolutions.com) व्यापारी का खाता धनी कर दिया जाता है। अत: रोकड़ बही एवं पास बुक के शेषों में अन्तर आ जाता है।

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11. रकम जो बैंक द्वारा वसूल की गई बैंक ग्राहकों की ओर से कुछ भुगतान प्राप्त कर लेता है; जैसे-ब्याज, लाभांश एवं प्राप्य बिल, आदि। इनका लेखा बैंक द्वारा पास बुक में तो रकम प्राप्त होते ही कर दिया जाता है, लेकिन ग्राहक बैंक से कोई सूचना प्राप्त न होने के कारण रोकड़ बही में इसको लेखा नहीं कर पाती है।

12. व्यापारी या ग्राहकों द्वारा सीधे चैक या धनराशि बैंक में जमा करना ग्राहकों द्वारा अपने लेनदारों के खातों में धनराशि को जमा कर दिया जाता है, परन्तु इसकी सूचना व्यापारी को देर से हो पाती है। जिसके कारण पास बुक का शेष तो बढ़ जाता है, परन्तु रोकड़ बही का शेष पूर्ववत् ही रहता है।

बैंक समाधान विवरण बनाने के उददेश्य

बैंक समाधान विवरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 देखें। बैंक समाधान विवरण की उपयोगिता/उद्देश्य बैंक समाधान विवरण का बनाया जाना वैसे तो आवश्यक या अनिवार्य नहीं है, परन्तु फिर भी निम्नलिखित उपयोगिताओं/उद्देश्यों/महत्त्व के लिए इसे बनाया जाता है|

1. रोकड़ बही में उचित संशोधन रोकड़ बही तथा पास बुक का मिलान करने से रोकड़ बही में उपयुक्त संशोधन करना सम्भव हो जाता है। यदि बैंक की पास बुक में ब्याज, बैंक-व्यय, ग्राहकों से रकम तथा चैकों की सीधी प्राप्ति, आदि के लेखे किए हुए हैं, तो रोकड़ बही में इनकी प्रविष्टियाँ करके संशोधित रोकड़ बही तैयार की जाती है।

2. त्रुटि को दूर करना यदि रोकड़ बही या पास बुक में लेखा करते समय कोई भूल या त्रुटि हो गई है, तो दोनों पुस्तकों का मिलान करके त्रुटि को ज्ञात करना और उसे दूर करना सरल हो जाता है।

3. भविष्य में चैक जारी करना बैंक समाधान विवरण तैयार करने से व्यापारी को बैंक शेष की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिससे उसे भविष्य में चैक जारी करने में सुविधा होती है।

4. भूल-चूक का ज्ञान यदि व्यापारी और बैंक के द्वारा लेन-देन का लेखा करने में कोई भूल-चूक हो गई है, तो इसका ज्ञान बैंक समाधान विवरण द्वारा हो जाती है।

5. चैक वसूली में अनावश्यक देरी का ज्ञान बैंक समाधान विवरण से बैंक द्वारा चैकों की वसूली करने में हुई अनावश्यक देरी की जानकारी प्राप्त हो जाती है।

6. अन्तर के कारणों का ज्ञान होना पास बुक और रोकड़ पुस्तक के शेष में अन्तर के कारण (UPBoardSolutions.com) भी बैंक समाधान विवरण द्वारा ज्ञात हो जाते हैं।

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रोकड़ बही के शेष और पास बुक के शेष में अन्तर के कारण

बैंक समाधान विवरण बनाने की विधि/बैंक समाधान विवरण तैयार करना बैंक समाधान विवरण निम्नलिखित दो प्रकार के शेषों को लेकर बनाया जा सकता है

1. रोकड़ बही के शेष द्वारा रोकड़ पुस्तक के बैंक खाते का शेष दो प्रकार का हो सकता है-एक ऋणी शेष, जो बैंक में धनराशि जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा धनी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति बताता है।

(i) रोकड़ बही के ऋणी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में जोड़ दिया जाता है

  1. चैक निर्गमित किए गए, लेकिन भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
  2. बैंक द्वारा व्यापारी को दिया गया ब्याज।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से प्राप्त किया गया कोई भुगतान।
  4. किसी ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में धनराशि जमा कर देना।
  5. चैक, जो रोकड़ बही में बिना लेखा किए बैंक (UPBoardSolutions.com) में भेज दिए गए।

जब बैंक समाधान विवरण रोकड़ बही का ऋणी शेष (Debit Balance) लेकर बनाया जाता है, तो निम्नलिखित मदों को उस शेष में से घटा दिया जाता है

  1. चैक जो वसूली के लिए जमा किए गए, परन्तु अभी वसूल नहीं हुए।
  2. बैंक चार्जेज या बैंक व्यय।
  3. बैंक द्वारा ग्राहक की ओर से किया गया कोई भुगतान।
  4. संग्रह के लिए भेजे गए चैक या बिल जो तिरस्कृत हो गए।
  5. चैक जो रोकड़ बही में लिख दिए गए, लेकिन बैंक में वसूली के लिए भेजने से रह गए।

(ii) रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा बैंक समाधान विवरण बनाना रोकड़ बही के धनी शेष द्वारा विवरण तैयार करने में ऋणी शेष में जुड़ने वाली ” मदों को घटाया जाता है और घटाई जाने वाली मदों को जोड़ा जाता है।

2. पास बुक के शेष द्वारा रोकड़ बही की भाँति पास बुक का शेष भी दो प्रकार का हो सकता है-एक धनी शेष, जो बैंक में धन जमा होने की दशा में होता है तथा दूसरा ऋणी शेष, जो अधिविकर्ष की स्थिति को बताता है। जब बैंक समाधान विवरण पास बुक के धनी शेष द्वारा बनाया जाता है, तो उपरोक्त विधि के अन्तर्गत जोड़ी जाने वाली मदों को घटाकर दिखाते हैं। तथा घटाई जाने वाली मदों को जोड़ते हैं। इसके विपरीत जब पास बुक के ऋणी शेष या अधिविकर्ष द्वारा बैंक (UPBoardSolutions.com) समाधान विवरण तैयार किया जाता है, तो उपरोक्त जोड़ी जाने वाली मदों को इसमें जोड़कर तथा घटाई जाने वाली मदों को घटाकर दिखाया जाता

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क्रियात्मक प्रश्न  (8 अंक)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सूचना से एक बैंक समाधान विवरण 31 मार्च, 2016 को बनाइए।

  1. इस तिथि को रोकड़ बही में बैंक खाते का शेष ₹ 3,000 था।
  2. ₹ 200 का चैक बैंक में जमा किया गया था, परन्तु बैंक खाते में अभी तक जमा नहीं हुआ।
  3. लेनदारों को ₹ 1,800 के दो चैक दिए थे, उनमें से बैंक के पास ₹ 800 का एक चैक ही भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया।
  4. निम्नलिखित प्रविष्टियाँ पास बुक में की गई थी, परन्तु रोकड़ बही में उस तिथि तक नहीं लिखी गई थी।
  • बैंक व्यय ₹ 40
  • ₹ 200 का बीमा प्रीमियम बैंक द्वारा चुकाया गया था।
  • एक ग्राहक द्वारा बैंक में ₹ 500 सीधे जमा कर दिए गए। (2017)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 मार्च, 2016 को)
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प्रश्न 2.
निम्न से बैंक समाधान विवरण-पत्र तैयार कीजिए।

  1. दिनांक 31-12-2014 को रोकड़ बही के अनुसार बैंक शेष ₹ 3,200 है।
  2. बैंक व्यय ₹ 20 था।
  3. बैंक ने ₹ 100 लाभांश एकत्रित किया।
  4. ₹ 1,780 के चैक जारी किए गए, लेकिन भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  5. ₹ 860 के बैंक बैंक में जमा कराए, किन्तु अभी क्रेडिट नहीं हुए। (2016)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2014 को)

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प्रश्न 3.
निम्न विवरण से 31 मार्च, 2015 को बैंक समाधान विवरण-पत्र बनाइए।

  1. रोकड़ बही के बैंक खाते का क्रेडिट शेष (अधिविकर्ष) ₹ 14,400 हैं।
  2. ₹ 6,160 के चैक बैंक में जमा कराए गए, परन्तु राशि जमा नहीं हुई।
  3. देनदारों को ₹ 2,880 के चैक जारी किए गए, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  4. बैंक ने ₹ 200 अपना बैंक व्यय लगाया।
  5. ₹ 4,000 एक ग्राहक ने व्यापारी के बैंक खाते में सीधे जमा करवाए। (2016)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 मार्च, 2015 को)
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित विवरण से रनवीर सिंह, मुम्बई का 31 दिसम्बर, 2013 का बैंक समाधान विवरण बनाइए।

  1. 31 दिसम्बर, 2013 को पास बुक का क्रेडिट शेष ₹ 6,225 था।
  2. ₹ 2,375 का चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया था, किन्तु संग्रह नहीं हुआ।
  3. 1,750 और ₹ 1,500 के दो चैकों को निर्गमित किया गया, किन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  4. बैंक द्वारा ₹ 225 ब्याज के क्रेडिट किए गए।
  5. ग्राहक की ओर से ₹ 1,200 का बीमा प्रीमियम का बैंक द्वारा सीधे भुगतान किया गया।

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2013 को)
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित विवरण से श्यामनन्दन, कानपुर का 31 दिसम्बर, 2012 का बैंक समाधान विवरण बनाइए।

  1. 31 दिसम्बर, 2012 को रोकड़ बही के अनुसार ₹ 5,000 डेबिट शेष था।
  2. संग्रह हेतु भेजा गया, ₹ 1,000 के चैक का बैंक द्वारा संग्रह नहीं हुआ।
  3. ₹ 500 का एक निर्गमित चैक भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किया गया।
  4. बैंक द्वारा ब्याज के पास बुक में हैं  ₹ 125 क्रेडिट किए गए, किन्तु रोकड़ । पुस्तक लेखा नहीं हुआ।
  5. बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के ₹ 500 का भुगतान सीधे कर दिया गया।

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2012 को)
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प्रश्न 6.
निम्नलिखित विवरण से मै, अमर चन्द्र, कुँवर चन्द्र, वाराणसी का 31 दिसम्बर, 2011 को बैंक समाधान विवरण बनाइए।

  1. 31 दिसम्बर, 2011 को रोकड़ बही के अनुसार ₹ 6,023 का डेबिट शेष था।
  2. बैंक में संग्रह हेतु ₹ 1,420 का चैक भेजा गया था जिसका संग्रह नहीं हुआ था।
  3. ₹ 3,000 के चैक निर्गमित किए गए थे, किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किए गए।
  4. ₹ 1,850 बैंक द्वारा बीमा प्रीमियम के लिए सीधे भुगतान किए गए।
  5. ₹ 120 बैंक ने ब्याज के क्रेडिट किए। (2012)

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हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2011 को)
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प्रश्न 1.
निम्नलिखित सूचनाओं से 31 दिसम्बर, 2010 को एक बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए।

  1. रोकड़ पुस्तक के अनुसार शेष ₹ 8,000 था।
  2. ₹ 11,000 का चैक संग्रह हेतु बैंक भेजा गया, किन्तु संग्रह नहीं हुआ।
  3. ₹ 12,000 के चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान के लिए केवल ₹ 10,000 के चैक प्रस्तुत किए गए।
  4. एक ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में ₹ 4,000 जमा कर दिए गए।
  5. बैंक द्वारा ब्याज के लिए हैं ₹ 500 क्रेडिट किए गए।
  6. बैंक द्वारा ₹ 1,500 बीमा प्रीमियम के लिए भुगतान किया गया। (2011)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2010 को)
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित सूचनाओं के आधार पर 31 दिसम्बर, 2005 को बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए।

  1. पास बुक के अनुसार क्रेडिट शेष ₹ 9,000 था।
  2. ₹ 7,000 के चैक वसूली के लिए भेजे गए, किन्तु वसूल नहीं हुए।
  3. बैंक व्यय के ₹ 60 डेबिट किए गए, किन्तु रोकड़ पुस्तक में लेखा नहीं हुआ।
  4. ₹ 9,600 के चैक निर्गमित किए गए, किन्तु भुगतान हेतु उन्हें प्रस्तुत नहीं किया गया।
  5. पास बुक में गलती से ₹ 3,000 डेबिट हो गए।  (2006)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2005 को)
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प्रश्न 10.
निम्नलिखित सूचनाओं के आधार पर बैंक समाधान विवरण तैयार कीजिए। 31 दिसम्बर, 2004 को मोहन की पास बुक में ₹ 8,000 का डेबिट शेष था। रोकड़ बही से मिलान करने पर निम्नलिखित अन्तर ज्ञात हुए

  1. बैंक में जमा किया गया ₹ 1,000 का चैक अभी तक वसूल नहीं हुआ।
  2. ₹ 1,000 के चैक निर्गमित किए गए, परन्तु भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  3. ग्राहक ने ₹ 1,000 सीधे मोहन के खाते में जमा कर दिए।
  4. ₹ 500 विनियोग पर ब्याज बैंक ने वसूल किया।
  5. बैंक द्वारा लिया गया ब्याज ₹ 1,000।

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2004 को)
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प्रश्न 11.
निम्न से बैंक समाधान विवरण-पत्र तैयार कीजिए।

  1. दिनांक 31.12.2017 को पास बुक के अनुसार बैंक शेष (जमा) ₹ 6,428 था।
  2. बैंक व्यय ₹ 120 था।
  3. बैंक ने ₹ 1,000 लाभांश एकत्रित किया।
  4. ₹ 2,600 के चैक जारी किए गए, लेकिन भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए।
  5. ₹ 1,600 के चैक बैंक में जमा कराए, किन्तु अभी तक क्रेडिट नहीं हुए। (2018)

हल
बैंक समाधान विवरण
(31 दिसम्बर, 2017 को)
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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज part of UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज.

Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name गरुड़ध्वज
Number of Questions Solved 13
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi नाटक Chapter 3 गरुड़ध्वज

कथावस्तु पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक का कथानक संक्षेप में लिखिए। (2016)
अथवा
‘गरुड़वज़’ नाटक की कथावस्तु अपने शब्दों में लिखिए। (2016)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के कथानक पर प्रकाश डालिए। (2016)
अथवा
‘गरुड़ध्वज़”नाटक के प्रथम अंक की कथा का सार अपने शब्दों में लिखिए।
अथवा
किसी एक अंक की कथा पर संक्षिप्त चर्चा कीजिए। (2017, 10)
उत्तर:
प, लमीनारायण मिश्र द्वारा रचित नाटक ‘गरुड़ध्वज’ के प्रथम अंक की कहानी का प्रारम्भ विदिशा में कुछ प्रहरियों के वार्तालाप से होता है। पुष्कर नामक सैनिक, सेनापति विक्रममित्र को महाराज शब्द से सम्बोधित करता है, तब नागसेन उसकी भूल की ओर संकेत करता है। वस्तुतः विक्रममित्र स्वयं को सेनापति के रूप में ही देखते हैं और शासन का प्रबन्ध करते हैं। विदिशा शृंगवंशीय विक्रममित्र की राजधानी है, जिसके वह योग्य शासक हैं। उन्होंने अपने साम्राज्य में सर्वत्र सुख-शान्ति स्थापित की हुई है और वृहद्रथ को मारकर तथा गरुड़ध्वज की शपथ लेकर राज-काज सँभाला है।

काशीराज की पुत्री वासन्ती मलयराज की पुत्री मलयवती को बताती है कि उसके पिता उसे किसी वृद्ध यवन को सौंपना चाहते थे, तब सेनापति विक्रममित्र ने ही उसका उद्धार किया था। वासन्ती एकमोर नामक युवक से प्रेम करती हैं और वह आत्महत्या करना चाहती है, लेकिन विक्रममित्र की सतर्कता के कारण वह इसमें सफल नहीं हो पाती।

श्रेष्ठ कवि एवं योद्धा कालिदास विक्रममित्र को आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की प्रतिज्ञा के कारण भीष्म पितामह’ कहकर सम्बोधित करते हैं और इस प्रसंग में एक कथा सुनाते हैं। 87 वर्ष की अवस्था हो जाने के कारण विक्रममित्र वृद्ध हो गए हैं। वे वासन्ती और एकमोर को महल में भेज देते हैं। मलयवती के कहने पर पुष्कर को इस शर्त पर क्षमादान मिल जाता है कि उसे राज्य की ओर से युद्ध लड़ना होगा। उसी समय साकेत से एक यवन-श्रेष्ठि की कन्या कौमुदी का सेनानी देवभूति द्वारा अपहरण किए जाने तथा उसे लेकर काशी चले जाने की सूचना मिलती है। सेनापति विक्रममित्र कालिदास को काशी पर आक्रमण करने के लिए भेजते हैं और यहीं पर प्रथम अंक समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 2.
‘गरुड़ध्वज’ के द्वितीय अंक का कथा सार लिखिए। (2017, 14, 12, 11, 10)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के दूसरे सर्ग की कथा अपने शब्दों में लिखिए। (2018)
उत्तर:
नाटक का द्वितीय अंक राष्ट्रहित में धर्म-स्थापना के संघर्ष का है। इसमें विक्रममित्र की दृढ़ता एवं वीरता का परिचय मिलता है, साथ ही उनके कुशल नीतिज्ञ एवं एक अच्छे मनुष्य होने का भी बोध होता है।

इसमें मान्धाता सेनापति विक्रममित्र को अतिलिक के मन्त्री हलोघर के आगमन की सूचना देता है। कुरु प्रदेश के पश्चिम में तक्षशिला राजधानी वाला यवन प्रदेश का शासक शृंगवंश से भयभीत रहता है। उसका मन्त्री हलधर भारतीय संस्कृति में आस्था रखता था

वह राज्य की सीमा को वार्ता द्वारा सुरक्षित करना चाहता है। विक्रममित्र देवभूति को पकड़ने के लिए कालिदास को काशी भेजने के बाद बताते हैं कि कालिदास का वास्तविक नाम मेघरुद्र था, जो 10 वर्ष की आयु में ही बौद्ध भिक्षुक बन गया था। उन्होंने उसे विदिशा के महल में रखा और उसका नया नाम कालिदास रख दिया। काशी का घेरा डालकर कालिदास काशीराज के दरबार के बौद्ध आचार्यों को अपनी विद्वत्ता से प्रभावित कर लेते हैं तथा देवभूति एवं काशीराज को बन्दी बनाकर विदिशा ले आते हैं। विक्रममित्र एवं हलधर के बीच सन्धि वार्ता होती है, जिसमे हलधर विक्रममित्र की सारी शर्ते स्वीकार कर लेता है तथा अतिलिक द्वारा भेजी गई मॅट विक्रममित्र को देता हैं। भेट में स्वर्ण निर्मित एवं रत्नजड़ित गरुड़ध्वज भी हैं। वह विदिशा में एक शान्ति स्तम्भ का निर्माण करवाता है। इसी समय कालिदास के आगमन पर वासन्ती उसका स्वागत करती है तथा वीणों पर पड़ी पुष्पमाला कालिदास के गले में डाल देती है। इसी समय द्वितीय अंक का समापन हो जाता है।

प्रश्न 3.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के तृतीय अंक की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए। (2016)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के तृतीय अंक की कथा संक्षेप में लिखिए। (2014, 11)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के तृतीय अंक की कथा अपने शब्दों में प्रस्तुत कीजिए। (2018)
उत्तर:
नाटक के तृतीय अंक की कथा अवन्ति में घटित होती है। गर्दभिल्ल के वंशज महेन्द्रादित्य के पुत्र कुमार विषमशील के नेतृत्व में अनेक चोरों ने शकों के हाथों से मालवा को मुक्त कराया। अवन्ति में महाकाल के मन्दिर पर गरुध्वज फहरा रहा है तथा मन्दिर का पुजारी वासन्ती एवं मलयवती को बताता है कि युद्ध की सभी योजनाएं इसी मन्दिर में बनी हैं। राजमाता से विषमशील के लिए चिन्तित न होने को कहा जाता है, क्योंकि सेना का संचालन स्वयं कालिदास एवं मान्धाता कर रहे हैं। काशीराज अपनी पुत्री वासन्ती का विवाह कालिदास से करना चाहते हैं, जिसे विक्रममित्र स्वीकार कर लेते हैं। विषमशील का राज्याभिषेक किया जाता है और कालिदास को मन्त्रीपद सौंपा जाता है। राजमाता जैनाचार्यों को क्षमा-दान देती हैं और जैनाचार्य अवन्ति का पुनर्निर्माण करते हैं।

कालिदास की मन्त्रणा से विषमशील का नाम आचार्य विक्रममित्र के नाम के पूर्व अंश ‘विक्रम’ तथा पिता महेन्द्रादित्य के नाम के पश्च अंश ‘आदित्य’ को मिलाकर विमादित्य’ रखा जाता है। विक्रममित्र काशी एवं विदिशा राज्यों का भार भी विक्रमादित्य को सौंप कर स्वयं संन्यासी बन जाते हैं। कालिदास अपने स्वामी ‘विक्रमादित्य’ के नाम पर उसी दिन से ‘विक्रम संवत्’ का प्रवर्तन करते हैं। नाटक की कथा यहीं पर समाप्त हो जाती हैं।

प्रश्न 4.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक राष्ट्र की एकता और संस्कृति का संदेश अपनी घटनाओं में अभिव्यक्त करता है। इस कथन को सोदाहरण सिद्ध कीजिए। (2018)
अथवा
‘राष्ट्रीय एकता और समरसता की दृष्टि से गरुड़ध्वाज नाटक सफल है। स्पष्ट कीजिए। (2018)
अथवा
‘गरुड़ध्वज़ नाटक राष्ट्रीय एकता एवं संस्कृति का संदेश देता है।’ इस कथना के आधार पर इस नाटक की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। (2018)
अथवा
गरुड़ध्वज़’ नाटक के कथानक में न्याय और राष्ट्रीय एकता पर विचार व्यक्त कीजिए। (2015)
अथवा
‘गरुड़ध्वज़’ नाटक के शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए। (2013)
अथवा
‘गरुड़ध्वज़’ नाटक में ‘राष्ट्र की एकता और संस्कृति की गरिमा’ का सन्देश है। नाटक की इस विशेषता पर प्रकाश डालिए। (2014)
उत्तर:
पण्डित लक्ष्मीनारायण मिश्र द्वारा रचित नाटक ‘गरुड़ध्वज’ में ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी के भारतीय इतिहास के युग के एक महत्त्वपूर्ण स्वरूप को चित्रित किया गया है, जो भारत की राष्ट्रीय एकता और प्राचीन संस्कृति को प्रस्तुत करता है। इसमें तत्कालीन न्यायिक-व्यवस्था के स्वरूप को भी दर्शाया गया है।

राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति प्रस्तुत नाटक में मगध, साकेत, अवन्ति एवं मलय देश के एकीकरण की घटना वस्तुत: सुदृढ़ भारत राष्ट्र के निर्माण, उसकी एकता एवं अखण्डता का प्रतीक है। नाटक में प्रस्तुत किए गए विक्रममित्र एवं विषमशील के चरित्र सशक्त भारत के निर्माता एवं राष्ट्रीय एकता व अखण्डता के सन्देशवाहक हैं। नाटककार ने इसमें धार्मिक संकीर्णता एवं स्वार्थपूर्ण भावनाओं के कारण अध:पतन की ओर जा रही देश की स्थिति की ओर ध्यान आकृष्ट किया है तथा इसके माध्यम से वह राष्ट्र की एकता को सुदृढ़ करने का सन्देश भी देता है। नाटक के नायक विक्रममित्र वैदिक संस्कृति एवं भागवत् धर्म के उन्नायक हैं। विष्णु भगवान का उपासक होने के कारण उनका राजचिह्न गरुड़ध्वज है, जो उनके लिए सर्वाधिक पवित्र एवं पूज्य है। वह सर्वत्र सनातन भागवत् धर्म की ध्वजा फहरते देखना चाहते हैं। इस दृष्टि से नाटक का शीर्षक ‘गरुड़ध्वज’ भी पूर्णतः सार्थक सिद्ध होता है।

न्यायिक-व्यवस्था प्राचीन भारत की न्यायिक व्यवस्था अपनी निष्पक्षता के लिए प्रसिद्ध ही है। अपने परिजनों एवं मित्रों को भी किसी अपराध के लिए समान रूप से कठोर दण्ड दिया जाता था। नाटक के प्रथम अंक की घटना इसका उत्तम उदाहरण है, जिसमें शुगवंश के कुमार सेनानी देवभूति द्वारा श्रेष्ठ अमोघ की कन्या कौमुदी का अपहरण विवाह-मण्डप से कर लिए जाने के समाचार से विक्रममित्र अत्यन्त दुःखी हो जाते हैं तथा अपने सैनिकों को तुरन्त काशी का घेरा डालने एवं देवभूति को पकड़ने का आदेश देते हैं। कालिदास के नेतृत्व में भेजी गई सेना उसे बन्दी बनाकर विक्रममित्र के सामने प्रस्तुत कर देती हैं। आंग साम्राज्य में ही शासक हे देवभूति के प्रति किया गया व्यवहार तत्कालीन निष्पक्ष एवं सुदृढ़ न्यायिक-व्यवस्था को स्पष्ट प्रमाण है।

प्रश्न 5.
‘गरुड़ध्वज़’ नाटक एक ऐतिहासिक नाटक है। समीक्षा कीजिए। (2016)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक एक ऐतिहासिक नाटक है। कथन की समीक्षा कीजिए। (2016)
अथवा
‘गरुड़ध्वज़’ नाटक के कथानक में ऐतिहासिकता एवं काल्पनिकता का अद्भुत सामंजस्य है। स्पष्ट कीजिए। (2016)
अथवा
‘नाट्यकला की दृष्टि से ‘गरुड़ध्वज’ की समीक्षा कीजिए। अथना ‘गरुड़ध्वज’ नाटक की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2018, 17, 14, 12)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक की कथावस्तु को संक्षेप में लिखिए। (2014, 13, 12, 11, 10)
उत्तर:
नाट्यकला की दृष्टि से पण्डित लक्ष्मीनारायण मिश्र की रचना ‘गरुड़ध्वज’ एक उत्कृष्ट कोटि की रचना है, जिसका तात्विक विवेचन निम्नलिखित है।

‘गरुड़ध्वज’ नाटक की कथावस्तु ऐतिहासिक है, जिसमें इंसा से एक शताब्दी पूर्व के प्राचीन भारत का सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक परिवेश चित्रित किया गया है। प्रथम अंक में विक्रममित्र के चरित्र, काशीराज का अनैतिक चरित्र तथा वासन्ती की असन्तुलित मानसिक दशा के साथ ही समाज में बौद्ध भिशुओं द्वारा किए जा रहे अनाचार का चित्रण किया गया हैं। इसमें विदेशियों के आक्रमण तथा बौद्ध धर्मावलम्बियों द्वारा राष्ट्रहित को तिलांजलि देकर उनकी सहायता किए जाने को वर्णित एवं चित्रित किया गया है।

दूसरे अंक में राष्ट्रहित में किए जाने वाले धर्म की स्थापना से सम्बन्धित संघर्ष को दर्शाया गया है। तीसरे अंक के अन्तर्गत युद्ध में विदेशियों की पराजय, कालकाचार्य एवं काशीराज का पश्चाताप, विक्रममित्र की उदारता तथा आक्रमणकारी हूणों की क्रूर जातिगत प्रकृति को चित्रित किया गया है। इस नाटक का कथानक राज्य के संचालन, धर्म, अहिंसा एवं हिंसा के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालता है। नाटक में वर्णित घटनाओं को तत्कालीन समय की समस्याओं से जोड़ने के लिए नाटककार ने नाटक में काल्पनिकता का सुन्दर प्रयोग किया है। उसने धार्मिक संकीर्णता व कट्टरता को त्यागकर उदार व्यक्तित्व का निर्माण करके, देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने, राष्ट्रीय एकता को बनाने व महिलाओं का सम्मान करने इत्यादि उद्देश्यों को ऐतिहासिक पात्रों के संवादों में अपनी कल्पनाशक्ति का प्रयोग करके उनसे कहलवाया है, जिसने नाटक की रोचकता के स्तर में वृद्धि कर दी है और नाटक को बोझिल होने से बचाया है।

देशकाल और वातावरण

प्रस्तुत नाटक में देशकाल एवं वातावरण के तत्त्व का निर्वाह समुचित ढंग से हुआ है। ईसा पूर्व की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं राजनीतिक हलचलों का सुन्दर एवं उचित प्रस्तुतीकरण नाटक में हुआ है। नाटककार ने तत्कालीन सामाजिक वातावरण का चित्रण बड़े ही जीवन्त ढंग से किया है। लगता है जैसे तत्कालीन समाज आँखों के सामने जी उठा है। तत्कालीन समाज में राजमहल, युद्ध भूमि, पूजागृह, सभामण्डल आदि का वातावरण अत्यन्त कुशलता के साथ चित्रित हुआ है। नाम, स्थान एवं वेशभूषा के अन्तर्गत भी देशकाल एवं वातावरण का सुन्दर सामंजस्य देखने को मिलता है। उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर सारांश स्वरूप कहा जा सकता है कि नाटक में ऐतिहासिक तथ्यों का व घटनाओं का भली-भाँति उपयोग किया है, जिनके कारण इसे ऐतिहासिक नाटकों की श्रेणी में सहजता से रखा जा सकता है। साथ ही नाटककार द्वारा काल्पनिकता का प्रयोग करने से नाटक में रोचकता उत्पन्न हुई है।

प्रश्न 6.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक की रचना नाटककार ने किन उद्देश्यों से प्रेरित होकर की है? (2014, 13, 12, 11, 10)
उत्तर:
ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी के भारतीय इतिहास पर आधारित नाटक ‘गरुड़ध्वज’ में आदियुग या प्राचीन भारत के एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्वरूप को उजागर करने का प्रयास किया गया है। इसमें धार्मिक संकीर्णताओं एवं स्वार्थों के कारण विघटित होने वाले देश की एकता एवं नैतिक पतन की ओर नाटककार ने ध्यान आकृष्ट किया है। इसके अतिरिक्त, वह राष्ट्र को एकता के सूत्र में भी बाँधने का सन्देश भी देता है। इस नाटक के निम्नलिखित उद्देश्य है—

  1. नाटककार धार्मिक संकीर्णता एवं कट्टरता से बाहर निकलकर जन-कल्याण की ओर उन्मुख होता है।
  2. नाटककार स्पष्ट सन्देश देना चाहता है कि देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
  3. नाटक का मूल स्वर धार्मिक भावना की उदारता में निहित है।
  4. राष्ट्रीय एकता एवं जनवादी विचारधारा का समर्थन किया गया है।
  5. नारी के शील एवं सम्मान की रक्षा के लिए प्रेरणा दी गई है।
  6. नाटक में स्वस्थ गणराज्य की स्थापना पर बल दिया गया है।
  7. राष्ट्रहित हेतु एवं अत्याचारों का विरोध करने के उद्देश्य से शस्त्रों के प्रयोग को उचित ठहराया गया है।

प्रश्न 7.
‘गरुड़ध्वज’ की अभिनेयता या रंगमंचीयता पर प्रकाश डालिए। (2012, 11)
उत्तर:
‘गरुड़ध्वज’ नाटक में कुल तीन अंक हैं, जिन्हें सुगमतापूर्वक मंच पर अभिनीत किया जा सकता है। इसमें पात्रों एवं चरित्रों की वेशभूषा का प्रबन्ध भी सहज है, जिसके कारण किसी प्रकार की कठिनाई या समस्या का सामना नहीं करना पड़ता हैं। प्रस्तुत नाटक की रंगमंचीयता के सम्बन्ध में सारी परिस्थितियाँ अनुकूल हैं, लेकिन एक समस्या नाटक की भाषा की दुरूहता एवं इसके पात्रों के कठिन नामों को लेकर हैं, जो कहीं-कहीं सफल संवाद सम्प्रेषण में कठिनाई उत्पन्न करती हैं, लेकिन नाटक की ऐतिहासिकता को ध्यान में रखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रामाणिकता को बनाए रखने तथा, देशकाल एवं वातावरण के. सजीव चित्रण के लिए ऐसा करना आवश्यक था।

प्रश्न 8.
संवाद योजना (कथोपकथन) की दृष्टि से ‘गरुड़ध्वज़’ नाटक की विवेचना कीजिए। (2011, 10)
उत्तर:
किसी भी नाटक का सबसे सबल तत्त्व उसकी संवाद योजना होती है। संवादों के द्वारा ही पात्रों का चरित्र चित्रण किया जाता है। इस दृष्टि से नाटककार ने संवादों का उचित प्रयोग किया है। प्रस्तुत नाटक के संवाद सुन्दर, सरल, संक्षिप्त तथा पात्रों के चरित्र एवं व्यक्तित्व के अनुकूल हैं। प्रायः सभी संवाद सम्बन्धित पात्रों के मनोभावों को प्रकट करने में सफल रहे हैं। इसमें । तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था के अनुरूप संवादों की रचना की गई है। संक्षिप्त संवाद अत्यधिक प्रभावशाली बन पड़े हैं।

जैसे–
वासन्ती— ………. नहीं ………. नहीं, बस दो शब्द पूछूगी कवि! लौट आओ ……….
कालिदास–(विस्मय से) क्या है राजकुमारी?
वासन्ती–यहाँ आइए! आज मैं कुमार कार्तिकेय का स्वागत करूगी। उनका वाहन मोर भी यहीं है।
संवादों में कहीं-कहीं हास्य, व्यंग्य, विनोद तथा संगीतात्मकता का पुट भी मिलता है।

प्रश्न 9.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक की भाषा-शैली की दृष्टि से समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
लक्ष्मीनारायण मिश्र द्वारा रचित नाटक ‘गरुड़ध्वज’ की भाषा सुगम, सहज एवं सुपरिचित है। हालाँकि इसकी भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है, लेकिन पाठक की। सुबोधता का लेखक ने पर्याप्त ध्यान रखा है। सुबोध एवं सहज शैली में लिखे गए इस नाटक में मुहावरों एवं लोकोक्तियों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है। भाषा में । कहीं-कहीं क्लिष्टता हैं, लेकिन वह ऐतिहासिकता को देखते हुए उचित प्रतीत होता है। नाटक की भाषा की स्वाभाविकता पाठकों को अत्यधिक आकर्षित करती है; जैसे-“उसके भीतर जो देवी अंश था, उसी ने उसे कालिदास बना दिया। उसकी । शिक्षा और संस्कार में मैं प्रयोजन मात्र बना था। उसका पालन मैंने ठीक इसी तरह। किया, जैसे यह मेरे अंश का ही नहीं, मेरे इस शरीर का हो।’

पात्र एवं चरित्र-चित्रण पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 10.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के नायक की चारित्रिक विशेषताओं को संक्षेप में लिखिए। (2018)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर विक्रममित्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। (2018)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के प्रमुख पात्र के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2016)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के मुख्य पात्र का चरित्रांकन/चरित्र-चित्रण कीजिए। (2018, 16)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के प्रमुख पुरुष पात्र (नायक) विक्रममित्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। (2014, 13, 12, 11, 10)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए। (2017)
उत्तर:
ऐतिहासिक नाटक ‘गरुड़ध्वज’ के नायक तेजस्वी व्यक्तित्व वाले आचार्य विक्रममित्र हैं। नाटक में उनकी आयु 87 वर्ष दर्शायी गई है। उनके चरित्र एवं व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ है-

  1. तेजस्वी एवं ओजस्वी व्यक्तित्व आचार्य विक्रममित्र के तेजस्वी एवं ओजस्वी व्यक्तित्व के कारण ही मन्त्री हलोधर विक्रममित्र से आतंकित दिखाई देता है।
  2. अनुशासनप्रियता स्वयं अनुशासित जीवन जीने वाले विक्रममित्र अन्य लोगों को भी अनुशासित रखने के पक्ष में है। इसी अनुशासन का डर पुष्कर में उनके द्वारा ‘महाराज’ शब्द का प्रयोग करने के समय दिखाई देता है।
  3. देशभक्ति महान् देशभक्त विक्रममित्र का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रीय गौरव को बनाए रखने के लिए समर्पित था। वे राष्ट्रहित के लिए शास्त्र एवं शस्त्र दोनों का प्रयोग करते हैं। देशभक्ति की भावना के कारण ही उन्होंने अनेक राज्यों को संगठित किया।
  4. भागवत् धर्म के उन्नायक विक्रममित्र भागवत् धर्म के अनुयायी थे तथा जीवनभर उसके प्रति समर्पित रहे। इसी कारण उन्हें पूजा-पाठ एवं यज्ञ-अनुष्ठान विशेष रूप से प्रिय थे।
  5. दृढ़प्रतिज्ञ विक्रममित्र एक दृढ़प्रतिज्ञ शासक थे। भीष्म पितामह के समान आजीवन ब्रह्मचारी रहने की अपनी प्रतिज्ञा को उन्होंने दृढ़ता के साथ पूरा किया।
  6. न्यायप्रियता विक्रममित्र एक न्यायप्रिय शासक हैं, जो न्याय के सामने सभी को समान समझते हैं, चाहे वह शुगवंश से जुड़ा हुआ देवभूति ही क्यों न हो? वे न्याय के सम्बन्ध में किसी भी तरह का पक्षपात नहीं होने देते।
  7. विनम्रता एवं उदारता विक्रममित्र एक अनुशासनप्रिय एवं दृढ़ प्रकृति के शासक होने के साथ-साथ विनम्र एवं उदार व्यक्ति भी हैं। वे अपनी विनम्रता एवं उदारता का अनेक जगह प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
  8. जनसेवक विक्रममित्र स्वयं को सत्ता का अधिकारी या सत्तासम्पन्न शासक न मानकर जनसेवक ही समझते हैं। यही कारण है कि वह ‘महाराज’ कहलाना पसन्द नहीं करते तथा स्वयं को सेनापति के सम्बोधन में ज्यादा सन्तुष्टि पाते हैं।

प्रश्न 11.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर वासन्ती की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2017)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक की नायिका का चरित्रांकन /चरित्र-चित्रण कीजिए।
अथवा
नाटक गरुड़ध्वज के आधार पर वासन्ती का चरित्र-चित्रण कीजिए। (2018, 16, 15, 14, 13, 12)
अथवा
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के प्रमुख स्त्री पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। (2014, 13, 10)
उत्तर:
ऐतिहासिक नाटक ‘गरुड़ध्वज’ की प्रमुख नारी पात्र वासन्ती है। अतः इसे ही नाटक की नायिका माना जा सकता है। वासन्ती के पिता द्वारा वृद्ध यवन से उसका विवाह कराए जाने के विरोध में विक्रममित्र वासन्ती को विदिशा के महल ले आते हैं तथा उसे सम्मान के साथ सुरक्षा प्रदान करते हैं। बाद में, वासन्ती कालिदास की प्रेमिका के रूप में प्रस्तुत होती है, जिसके चरित्र की उल्लेखनीय विशेषताएँ इस प्रकार हैं

  1. धार्मिक संकीर्णता की शिकार नाटक के कथानक के काल में भारत में एक विशेष प्रकार की धार्मिक संकीर्णता मौजूद थी, जिसकी शिकार वासन्ती भी होती हैं। उसके व्यक्तित्व में एक अवसाद के साथ-साथ ओज का गुण भी। मौजूद रहता है।
  2. विशाल एवं उदार हृदयी वासन्ती का हृदय अत्यन्त विशाल एवं उदार है, जिसके कारण वह मानव-मात्र के प्रति ही नहीं, अपितु जीव मात्र के प्रति भी अत्यन्त स्नेह एवं सहानुभूति रखती है। उसमें बड़े-छोटे, अपने पराए सभी के लिए समान रूप से प्रेमभाव भरा हुआ है।
  3. आत्मग्लानि से विक्षुब्ध वह आत्मग्लानि से विक्षुब्ध होकर अपने जीवन से छुटकारा पाना चाहती है। इसी क्रम में वह आत्महत्या का प्रयास भी करती है, | परन्तु विक्रममित्र के कारण उसका यह प्रयास असफल हो जाता है।
  4. स्वाभिमानी वासन्ती अनेक विषम परिस्थितियों के पश्चात् भी अपना स्वाभिमान नहीं खोती। वह किसी भी ऐसे राजकुमार के साथ विवाह करने को राजी नहीं है, जो विक्रममित्र के दबाव के कारण ऐसा करने के लिए विवश हो।
  5. सहदयी एवं विनोदप्रिय वासन्ती निराश एवं विक्षुब्ध होने के पश्चात् भी सहृदयी एवं विनोदप्रिय नजर आती है। वह कालिदास के काव्य-रस का पूरा आनन्द उठाती है।
  6. आदर्श प्रेमिका वासन्ती एक सहृदया, सुन्दर एवं आदर्श प्रेमिका सिद्ध होती हैं। वह निष्कलंक एवं पवित्र है। वह अपने उज्वल चरित्र एवं शुद्ध विशाल हृदय के साथ कालिदास को प्रेम करती हैं।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि वासन्ती एक आदर्श नारी पात्र एवं नाटक की। नायिका है, जिसका चरित्र अनेक आधुनिक स्त्रियों के लिए भी अनुकरणीय है।

प्रश्न 12.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर नायिका ‘मलयवती’ का चरित्रांकन कीजिए।
उत्तर:
प, लक्ष्मीनारायण लाल द्वारा रचित ‘गरुड़ध्वज’ नाटक के नारी पात्रों में मलयवती एक प्रमुख महिला पात्र है। इसका चरित्र अत्यधिक आकर्षक, सरल एवं विनोदप्रिय है। मलयवती के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

  1. रूपवती मलयवती मलय देश की राजकुमारी है। वह अत्यधिक रूपवती हैं एवं उसका व्यक्तित्व सरल, सहज एवं आकर्षक है। उसके रूप-सौन्दर्य को देखकर ही कुमार विषमशील विदिशा के राजप्रसाद के उपवन में उसके सौन्दर्य पर मुग्ध हो गए थे।
  2. आदर्श प्रेमिका मलयवती एक आदर्श प्रेमिका है। कुमार विषमशील के प्रति उसके हदय में अत्यधिक प्रेम है। वह उसका मन से वरण करने के उपरान्त एकनिष्ठ भाव से उसके प्रति आसक्त है। उसके प्रति उसका प्रेम सच्चा है, उसे स्वयं पर पूर्ण विश्वास है कि वह उसे प्राप्त कर लेगी। कुमार विषमशील को प्राप्त करने की अपनी दृढ़ इच्छा प्रकट करते हुए वह कहती है “तब मुझे अपने आप में पूर्ण विश्वास है। मैं उन्हें अपनी तपस्या से खोजेंगी…. निर्विकार शंकर प्राप्त हो गए और वे प्राप्त न होंगे।”
  3. विनोदप्रिय स्वभाव राजकुमारी मलयवती प्रसन्नचित्त एवं विनोदी स्वभाव की है। वह अपनी प्रिय सखी वासन्ती से अनेक अवसरों पर हास-परिहास करती है। राजभृत्य द्वारा उसे महाकवि के द्वारा कही गई बातों के बारे में बताने पर वह महाकवि पर व्यंग्य करते हुए कहती हैं क्यों महाकवि को यह सूझी है? इस पृथ्वी की सभी कुमारियाँ कुमार हो जाएँ तब तो अच्छी रही। कह देना महाकवि से इस तरह की उलट-फेर में कुमारों को कुमारियाँ होना होगा और महाकवि भी कहीं उस चक्र में न आ जाएँ।”
  4.  ललित कलाओं में रुचि मलयवती की संगीत, चित्रकला इत्यादि ललित कलाओं में रुचि है। वह ललित कलाओं को सीखने व उनमें निपुण होने के लिए विदिशा जाती है। जहाँ वह मलय देश की चित्रकला व संगीत कला को भी सीखती है।

स्पष्टतः मलयवती के चरित्र एवं व्यक्तित्व में सद्गुणों का समावेश है। अपने इन्हीं गुणों एवं स्वभाव के कारण मलयवती की एक आदर्श राजकुमारी के रूप में छवि मिलती है। मलयवती का सरल, सहज और आकर्षक व्यक्तित्व उसे और अधिक आकर्षक बनाता है।

प्रश्न 13.
‘गरुड़ध्वज’ नाटक के आधार पर ‘काशिराज’ की चारित्रिक विशेषताएँ उद्घाटित कीजिए।
उत्तर:
‘आन का मान’ नाटक के पुरुष पात्रों में ‘काशिराज’ काशी प्रदेश का राजा है, जो स्वार्थी व अवसरवादी है। काशिराज की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. कायर काशिराज भवनों के साथ युद्ध न करके सन्धि प्रस्ताव में अपनी पुत्री को मेनेन्द्र के पुत्र को दान में दे देता है, जिसकी आयु पचास वर्ष की थी।
  2. स्वार्थी व अवसरवादी काशिराज कालिदास द्वारा बन्दी बनाकर विक्रममित्र के पास विदिशा लाया गया। जहाँ उसने अपनी पुत्री के साथसाथ कालिदास को भी माँग लिया। वह जनता था कि विक्रममित्र कालिदास के पुत्र वात्सल्य रखते हैं। फिर भी उसने अवसर का लाभ उठाया।
  3. आत्मग्लानि वह वासन्ती के समक्ष पश्चाताप करता है और कहता है। युद्ध क्या कर सकेंगा अब … जब असकी अवस्था थी, तब तो मैं भिक्षु मण्डली में धर्मालाप करता रहा। इस देश के सभी माण्डलीक और गुण मुख्य आज युद्ध में हैं, मैं ही तो ऐसा हूँ जो इस कर्तव्य से वंचित हूँ। मैं बड़ा अभागा हूँ, किन्तु तुम्हारे आँसू इस हृदय को छेद देंगे … हाय।”
  4. विलापी तथा देश प्रेमी काशिराज अपने देश व मातृ भूमि के लिए अत्यन्त चिन्तित हैं, जिस पर किसी समय बौद्धों का आधिपत्य था, आज उस भूमि पर भवनों का अधिकार है, जिसके लिए वह विलाप करता हुआ कहता है कि “मातृ भूमि और जातीय गौरव के प्रति निष्ठा बौद्धों में नहीं होती वत्स। वे किसी भी संकीर्ण घेरे में रहना नहीं चाहते … इस देश और जाति के जितने भी बन्न थे, एक-एक करके सभी काटते गए।” वह अपने देश को बचाने के लिए अपनी जन्म भूमि तथा कन्या (घासन्ती) को भी विदेशी को देने से पीछे नहीं हटता।।

निष्कर्षस्वरूप कहा जा सकता हैं कि काशिराज स्वार्थी कायर राजा होने के साथ साथ उसमें अपने देश के प्रति प्रेम च देशभक्ति जैसे गुण भी निहित हैं।

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi पद्य Chapter 10 मैंने आहुति बनकर देखा / हिरोशिमा

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 10
Chapter Name मैंने आहुति बनकर देखा / हिरोशिमा
Number of Questions Solved 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi पद्य Chapter 10 मैंने आहुति बनकर देखा / हिरोशिमा

मैंने आहुति बनकर देखा / हिरोशिमा – जीवन/साहित्यिक परिचय

(2018, 17, 16, 15, 14, 13, 12, 11, 10)

प्रश्न-पत्र में संकलित पाठों में से चार कवियों के जीवन परिचय, कृतियाँ तथा भाषा-शैली से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं।
जिनमें से एक का उत्तर देना होता हैं। इस प्रश्न के लिए 4 अंक निर्धारित हैं।

जीवन परिचय एवं साहित्यिक उपलब्धियाँ
सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का जन्म वर्ष 1911 में हुआ था। इनके पिता पण्डित हीरानन्द शास्त्री पंजाब के करतारपुर (तत्कालीन जालन्धर जिला) के निवासी और वत्स गोत्रीय सारस्वत ब्राह्मण थे। अज्ञेय का जीवन एवं व्यक्तित्व बचपन से ही अन्तर्मुखी एवं आत्मकेन्द्रित होने लगा था। भारत की स्वाधीनता की लड़ाई एवं क्रान्तिकारी आन्दोलन में भाग लेने के कारण इन्हें 4 वर्षों तक जेल में तथा 2 वर्षों तक घर में नजरबन्द रखा गया। इन्होंने बी.एस.सी. करने के बाद अंग्रेजी, हिन्दी एवं संस्कृत का गहन स्वाध्याय किया। सैनिक’, ‘विशाल भारत’, ‘प्रतीक’ और अंग्रेजी त्रैमासिक ‘वा’ का सम्पादन किया। इन्होंने समाचार साप्ताहिक ‘दिनमान’ और ‘नया भती’ पत्रों का भी सम्पादन किया। तकालीन प्रगतिवादी काव्य का ही एक रुप ‘प्रयोगवाद’ काव्यान्दोलन के रूप में प्रतिफलित हुआ।

इसका प्रवर्तन ‘तार सप्तक’ के माध्यम से ‘अज्ञेय’ ने किया। तार सप्तक की भूमिका इस नए आन्दोलन का घोषणा-पत्र सिद्ध हुई। हिन्दी के इस महान् विभूति का स्वर्गवास 4 अप्रैल, 1987 को हो गया।

साहित्यिक गतिविधियाँ
अग प्रयोगशील नूतन परम्परा के ध्वज वाहक होने के साथ साथ अपने पीछे अनेक कवियों को लेकर चलते हैं, जो उन्हीं के समान नवीन विषयों एवं नवीन शिष्य के समर्थक हैं।

अज्ञेय उन रचनाकारों में से हैं जिन्होंने आधुनिक हिन्दी साहित्य को एक नया आयाम, नया सम्मान एवं नया गौरव प्रदान किया। हिन्दी साहित्य को आधुनिक बनाने का श्रेय अज्ञेय को जाता है। अज्ञेय का कवि, साहित्यकार, गद्यकार, सम्पादक, पत्रकार सभी रूपों में महत्वपूर्ण स्थान है।

कृतियाँ
‘अज्ञेय’ ने साहित्य के गद्य एवं पद्य दोनों विधाओं में लेखन कार्य किए।

  1. कविता संग्रह भग्नदूत, चिन्ता, इत्यलम्, हरी घास पर क्षणभर, बावरा अहेरी, इन्द्र धनुष रौंदे हुए थे, आँगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार, अरी ओं करुणामय प्रभामय।
  2. अंग्रेजी काव्य-कृति ‘प्रिजन डेज एण्ड अदर पोयम्स’
  3. निबन्ध संग्रह सब रंग और कुछ राग, आत्मनेपद, लिखि कागद कोरे आदि।
  4. आलोचना हिन्दी साहित्य : एक आधुनिक परिदृश्य, त्रिशंकु आदि।
  5. उपन्यास शेखर : एक जीवनी (दो भाग), नदी के द्वीप, अपने-अपने अजनबी आदि।
  6. कहानी संग्रह विपथगा, परम्परा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जयदोल, तेरे ये प्रतिरूप, अमर वल्लरी आदि।
  7. यात्रा साहित्य अरे यायावर! रहेगा याद, एक बूंद सहसा उछली।

काव्यगत विशेषताएँ
भाव पक्ष

  1. मानवतावादी दृष्टिकोण इनका दृष्टिकोण मानवतावादी था। इन्होंने अपने सूक्ष्म कलात्मक बोध, व्यापक जीवन अनुभूति, समृद्ध कल्पना-शक्ति तथा सहज लेकिन संवेतमयी अभिव्यंजना द्वारा भावनाओं के नूतन एवं अनछुए रूपों को प्रकट किया।
  2. व्यक्ति की निजता को महत्त्व अज्ञेय ने समष्टि को महत्वपूर्ण मानते हुए भी व्यक्ति की निजता या महत्ता को अखण्डित बनाए रखा। व्यक्ति के मन की गरिमा को इन्होंने फिर से स्थापित किया। ये निरन्तर व्यक्ति के मन के विकास की यात्रा को महत्त्वपूर्ण मानकर चलते रहे।
  3. रहस्यानुभूति अज्ञेय ने संसार की सभी वस्तुओं को ईश्वर की देन माना है तथा कवि ने प्रकृति की विराट सत्ता के प्रति अपना सर्वस्व अर्पित किया है। इस प्रकार अज्ञेय की रचनाओं में रहस्यवादी अनुभूति की प्रधानता दृष्टिगोचर होती है।
  4. प्रकृति चित्रण अज्ञेय की रचनाओं में प्रकृति के विविध चित्र मिलते हैं, उनके काव्य में प्रकृति कभी अलिम्बन बनकर चित्रित होती है, तो कभी उद्दीपन बनकर। अज्ञेय ने प्रकृति का मानवीकरण करके उसे प्राणी की भाँति अपने काव्य में प्रस्तुत किया है। प्रकृति मनुष्य की ही तरह व्यवहार करती दृष्टिगोचर होती है।

कला पक्ष

  1. नवीन काव्यधारा का प्रवर्तन इन्होंने मानवीय एवं प्राकृतिक जगत के स्पन्दनों को बोलचाल की भाषा में तथा वार्तालाप एवं स्वगत शैली में व्यक्त किया। इन्होंने परम्परागत आलंकारिकता एवं लाक्षणिकता के आतंक से काव्यशिल्प को मुक्त कर नवीन काव्यधारा का प्रवर्तन किया।
  2. भाषा इनके काव्य में भाषा के तीन स्तर मिलते हैं
    • संस्कृत की परिनिष्ठित शब्दावली
    • ग्राम्य एवं देशज शब्दों का प्रयोग
    • बोलचाल एवं व्यावहारिक भाषा
  3. शैली इनके काव्य में विविध काव्य शैलियाँ; जैसे—छायावादी लाक्षणिक शैली, भावात्मक शैली, प्रयोगवादी सपाट शैली, व्यंग्यात्मक शैली, प्रतीकात्मक शैली एवं बिम्बात्मक शैली विद्यमान हैं।
  4. प्रतीक एवं बिम्ब अज्ञेय जी के काव्य में प्रतीक एवं बिम्ब योजना दर्शनीय है। इन्होंने ब) राजीव एवं हृदयहारी बिम्ब प्रस्तुत किए तथा सार्थक प्रतीकों का प्रयोग किया।
  5. अलंकार एवं छन्द इनके काव्य में उपमा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंलकार है। इसके साथ-साथ रूपक, उल्लेख, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण, विशेषण-विपर्यय अंलकार भी प्रयुक्त हुए हैं। इन्होंने मुक्त छन्दों का खुलकर प्रयोग किया है। इसके अलावा गीतिका, बरवै, हरिगीतिका, मालिनी, शिखरिणी आदि छन्दों का भी प्रयोग किया है।

हिन्दी साहित्य में स्थान
अज्ञेय जी नई कविता के कर्णधार माने जाते हैं। ये प्रत्यक्ष का यथावत् चित्रण करने वाले सर्वप्रथम साहित्यकार थे। देश और समाज के प्रति इनके मन में अपार वेदना थी। ‘नई कविता’ के जनक के रूप में इन्हें सदा याद किया जाता रहेगा।

पद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पत्र में पद्य भाग से दो पद्यांश दिए जाएँगे, जिनमें से किसी एक पर आधारित 5 प्रश्नों (प्रत्येक 2 अंक) के उत्तर देने होंगे।

मैंने आहुति बनकर देखा

प्रश्न 1.
मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने,
मैं कब कहता हूँ जीवन-मरु नन्दन-कानन का फूल बने?
काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है,
मैं कब कहता हूँ वह घटकर प्रान्तर का ओछा फूल बने?
मैं कब कहता हूँ मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले?
मैं कब कहता हूँ प्यार करूं तो मुझे प्राप्ति की ओट मिले?
मैं कब कहता हूँ विजय करू-मेरा ऊँचा प्रासाद बर्ने?
या पात्र जगत की श्रद्धा की मेरी धुंधली-सी याद बने?
पथ मेरा रहे प्रशस्त सदा क्यों विकले करे यह चाह मुझे?
नेतृत्व न मेरा छिन जावे क्यों इसकी हो परवाह मुझे?

उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(i) प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार और रचना का नाम बताइए।
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन” अज्ञेय’ जी हैं। और रचना ‘मैंने आहुति बनकर देखा’ है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कैसा व्यक्ति वास्तविक जीवन जीता है?
उत्तर:
कवि ने मानव जीवन की सार्थकता बताते हुए स्पष्ट किया है कि दुःख के बीच पीड़ा सहकर अपना मार्ग प्रशस्त करने वाला तथा दूसरों की पीड़ा हरकर उनमें प्रेम का बीज बोने वाली व्यक्ति ही वास्तविक जीवन जीता है।

(iii) “काँटा कठोर हैं, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा हैं।” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि जिस प्रकार काँटे की श्रेष्ठता उपवन के तच फल में परिवर्तित हो जाने में नहीं, वरन अपने कठोरपन एवं नुकीलेपन में निहित है, उसी प्रकार जीवन की सार्थकता संघर्ष एवं दुःखों से लड़ने में है।

(iv) प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश में दुःख को सुख की तरह, असफलता को सफलता की तरह और हार को जीत की तरह स्वीकार कर कार्य-पथ पर अडिग होकर चलने का भाव व्यक्त किया गया है।

(v) अनुकूल और नेतृत्व शब्दों में क्रमशः उपसर्ग एवं प्रत्यय बताइए।
उत्तर:
अनुकूल – अनु (उपसर्ग), नेतृत्व – त्व (प्रत्यय)।

प्रश्न 2.
मैं प्रस्तुत हुँ चाहे मेरी मिट्टी जनपद की धूल बने—
फिर उस धूली का कण-कण भी मेरा गतिरोधक शुल बने।
अपने जीवन का रस देकर जिसको यत्नों से पाला है—
क्या वह केवल अवसाद-मलिन झरते आँसु की माला हैं?
वे रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव-रस का कटु प्याला है—
वे मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें सम्मोहन-कारी हाला है।
मैंने विदग्ध हो जान लिया, अन्तिम रहस्य पहचान लिया—
मैंने आहुति बनकर देखा यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है!
मैं कहता हूँ मैं बढ़ती हूँ मैं नभ की चोटी चढ़ता हूँ।
कुचला जाकर भी धूली-सा आँधी-सा और उमड़ता हूँ।
मेरा जीवन ललकार बने, असफलता ही असि-धार बने
इस निर्मम रण में पग-पग का रुकना ही मेरा वार बने!
भव सारा तुझको है स्वाहा सब कुछ तप कर अंगार बने—
तेरी पुकार-सा दुर्निवार मेरा यह नीरव प्यार बने!

उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(i) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने अपनी कैसी चाह (इच्छा) को व्यक्त किया है?
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश में कवि को अपने जनपद की धूल बन जाना स्वीकार है, भले ही उस धूल का प्रत्येक कण उसे जीवन में आगे बढ़ने से रोके और उसके लिए पीड़ादायक ही क्यों न बन जाए। इसके पश्चात् भी वह कष्ट सहकर मातृभूमि की सेवा करने या उसके काम आ जाने की चाह व्यक्त करता है।

(ii) प्रेम की वास्तविक अनुभूति से कैसे लोग अनभिज्ञ रह जाते हैं?
उत्तर:
प्रेम को जीवन के अनुभव का कड़वा प्याला मानने वाले लोग सकारात्मक दृष्टिकोण के नहीं होते, अपितु वे मानसिक रूप से विकृत होते हैं, किन्तु वे लोग भी चेतना विहीन निर्जीव की भाँति ही हैं। जिनके लिए प्रेम की चेतना लुप्त करने वाली मदिरा है, क्योंकि ऐसे लोग प्रेम की वास्तविक अनुभूति से अनभिज्ञ रह जाते हैं।

(iii) कवि ने धूल से क्या प्रेरणा ली है?
उत्तर:
कवि धूल से प्रेरणा लेते हुए कहता है कि जिस प्रकार धूल लोगों के पैरों तले रौदी जाती है, परन्तु वह हार न मानकर उल्टे औंधी के रूप में आकर रौंदने वाले को ही पीड़ा पाँचाने लगती है। उसी प्रकार मैं भी जीवन के संघर्षों से पछाड़ खाकर कभी हार नहीं मानता और आशान्वित व होकर आगे की और बढ़ता चला जाता हैं।

(iv) प्रस्तुत पद्यांश में निहित उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवि ने जीवन में संघर्ष के महत्व पर बल दिया है। यदि हमारे समक्ष कोई जटिल समस्या आ जाए, तो हमें उसका सामना करते हुए उसका समाधान ढूँढना चाहिए। जो लोग इन समस्याओं का सामना करने से घबराते हैं, वास्तव में उनके जीवन को सार्थक नहीं कहा जा सकता।

(v) “इस निर्मम रण में पग-पग का रुकना ही मेरा वार बने।” प्रस्तुत पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्ति में ‘पग’ शब्द की पुनरावृत्ति हुई है, अतः यहाँ पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।

हिरोशिमा

प्रश्न 3.
एक दिन सहसा सूरज निकला अरे क्षितिज पर नहीं, नगर के चौक;
धूप बरसी, पर अन्तरिक्ष से नहीं फटी मिट्टी से।
छायाएँ मानव-जन की दिशाहीन, सब ओर पड़ी-वह सूरज
नहीं उगा था पूरब में, वह बरसा सहसा
बीचो-बीच नगर के; काल-सूर्य के रर्थ के
पहियों के ज्यों अरे टूट कर, बिखर गए हों दसों दिशा में!
कुछ क्षण का वह उदय-अस्त!
केवल एक प्रज्वलित क्षण की
दृश्य सोख लेने वाली दोपहरी फिर।।

उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(i) प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार और रचना का नाम बताइए।
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ है तथा यद् पद्यांश ‘हिरोशिमा’ कविता से उद्घृत हैं।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश में किस समय का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश में द्वितीय विश्वयुद्ध की उस भीषण तबाही का उल्लेख किया गया है, जब अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया गया था।

(iii) हिरोशिमा नगर में परमाणु बम विस्फोट के परिणाम क्या हुए?
उत्तर:
हिरोशिमा नगर के जिस स्थान पर बम गिराया गया था, वहाँ की भूमि बड़े बड़े गड्ढों में परिवर्तित हो गई थी, जिसे फटी मिट्टी कहा गया है। वहाँ बहुत अधिक मात्रा में विषैली गैसें निकल रहीं थीं और उनसे निकलने वाले ताप से समस्त प्रकृति मुलस रही थी। विस्फोट के दौरान निकली विकिरणें मान्य के अस्तित्व को मिटा रही थीं।

(iv) “काल-सूर्य के रथ के पहियों के ज्यों अरे टूट कर, बिखर गए हों” पंक्ति से कवि का क्या आशय है?
उत्तर:
परमाणु विस्फोट के पश्चात् सूर्य का उदय प्रतिदिन की तरह पूर्व दिशा से नहीं हुआ था, वरन् उसका उदय अचानक ही हिरोशिमा के मध्य स्थित भूमि से हुआ था। उस सूर्य को देखकर ऐसा आभास हो रहा था जैसे काल अर्थात् मृत्युरूपी सूर्य रथ पर सवार होकर उदित हुआ हो और उसके पहियों के उड़े टूट-टूटकर इधर-उधर दसों दिशाओं में जा बिखरे हों।

(v) ‘काल’ शब्द के तीन पर्यायवाची शब्द बताइए।
उत्तर:

शब्द पर्यायवाची शब्द
काल समय
क्षण वक्त

प्रश्न 4.
छायाएँ मानव-जन की, नहीं मिटीं लम्बी हो-होकर;
मानव ही सब भाप हो गए। छायाएँ तो अभी लिखीं हैं,
झुलसे हुए पत्थरों पर उजड़ी सड़कों की गच पर।
मानव का रचा हुआ सूरज मानव को भाप बनाकर सोख गया।
पत्थर पर लिखी हुई यह जली हुई छाया मानव की साखी है।

उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(i) प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से मानव द्वारा विज्ञान का दुरुपयोग किए जाने पर दुःख जताया गया है, ताकि परमाणु बम गिराने जैसी मानव-विनाशी गलती की पुनरावृत्ति न हो पाए।

(ii) कवि ने आकाशीय सूर्य की तुलना मानव निर्मित सुर्य से किस प्रकार की है?
उत्तर:
कवि आकाशीय सूर्य से मानव निर्मित सूर्य की तुलना करते हुए कहता है। कि आकाश का सूर्य हमारे लिए वरदान स्वरूप है, उससे हमें जीवन मिलता है, परन्तु मानव निर्मित सूर्य परमाणु बम अति विध्वंसक है, क्योंकि इसने अपनी विकिरणों से मानव को वाष्प में परिणत कर उसकी जीवन लीला ही समाप्त कर दी।

(iii) “आयाएँ तो अभी लिखीं हैं झुलसे हुए पत्थरों पर” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परमाणु विस्फोट के दुष्परिणाम स्वरूप उत्सर्जित विकिरणों ने मानव को जलाकर वाष्य में बदल दिया, किन्तु उनकी छायाएँ लम्बी होकर भी समाप्त नहीं हुई हैं। विकिरणों से झुलसे पत्थरों तथा क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की दरारों पर, वे मानवीय छायाएँ आज भी विद्यमान हैं और मौन होकर उस भीषण त्रासदी की कहानी कह रही हैं।

(iv) प्रस्तुत पद्यांश में कवि अत्यन्त मर्माहित क्यों हुआ है?
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश में मानव जीवन की त्रासदी का वर्णन किया गया है। यहाँ मानव ही मानव के विध्वंस का कारण हैं। मानव के इस दानव रूप को देखकर कवि अत्यन्त मर्माहित हो उठा है।

(v) प्रस्तुत पद्यांश में कौन-सा रस है?
उत्तर:
मानव जाति के विध्वंस के कारण शोक की स्थिति उत्पन्न हुई है। अतः प्रस्तुत पद्यांश में करुण रस है।

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