UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 11 ऐरेज

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 11
Chapter Name ऐरेज
Number of Questions Solved 25
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 11 ऐरेज

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
किसी ऐरे के तत्त्व को किससे पहचाना जाता है? .
(a) सबस्क्रिप्ट से
(b) वैरिएबल के नाम से
(C) क्रम संख्या से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ऐरे में, ऐरे के नाम के बाद सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 2
सबस्क्रिप्टेड वैरिएबल को क्या कहा जाता है?
(a) फंक्शन
(b) क्लास
(c) ऑब्जेक्ट
(d) ऐरे
उत्तर:
(d) ऐरे

प्रश्न 3
यदि = द्विविमीय ऐरे है, तो =[3] [4] सूचित करता है कि x में है। [2016]
(a) 3 कॉलम व 4 रो
(b) 4 कॉलम व 3 रो
(c) 34 एलीमेण्ट्स
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 4 कॉलम व 3 रो

प्रश्न 4
int marks[3][2] क्या प्रदर्शित करता है?
(a) वैरिएल
(b) द्विविमीय ऐरे
(c) एकविमीय ऐरे
(d) फंक्शन।
उत्तर:
(b) द्विविमीय ऐरे में, ऐरे को घोषित करने का प्रारूप
data_type array_name[rows][columns];

प्रश्न 5
Arr[5][8], मैमोरी में कितने तत्त्वों के लिए स्थान सुरक्षित करेगा?
(a) 40
(b) 400
(c) 58
(d) 13
उत्तर:
(a) Arr[5][8] में, पंक्तियों (Rows) की संख्या 5 तथा स्तम्भों (Columns) की संख्या 8 है तथा यह कुल मिलाकर (5 x 8 =) 40 तत्वों के लिए स्थान सुरक्षित करेगा।

प्रश्न 6
स्ट्रिंग में प्रयुक्त चिह्न 10 क्या कहलाता है?
(a) नल कैरेक्टर
(b) स्पेशल कैरेक्टर
(c) गारबेज कैरेक्टर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) नल कैरेक्टर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
ऐरे को परिभाषित कीजिए। [2013, 03]
अथवा
ऐरे को केवल एक वाक्य में व्यक्त कीजिए। [2018]
उत्तर:
एक प्रकार के डाटा के समूह को एक साथ प्रदर्शित करने के लिए जिस तकनीक का प्रयोग किया जाता है, उसे ऐरे कहते हैं।

प्रश्न 2
एकविमीय ऐरे को घोषित करने का प्रारूप लिखिए।
उत्तर:
Largest data_type array_name [size] ;

प्रश्न 3
ऐरे कितने प्रकार के होते हैं? [UP 2003]
उत्तर:
ऐरे दो प्रकार के होते हैं

  • एकविमीय ऐरे
  • द्विविमीय ऐरे

प्रश्न 4
एकविमीय ऐरे से डाटा कितने प्रकार से पढ़ सकते हैं?
उत्तर:
एकविमीय ऐरे से डाटा को दो प्रकार से पढ़ सकते हैं

  • लूप का प्रयोग करके
  • बिना लूप के।

प्रश्न 5
द्विविमीय ऐरे में प्रारम्भिक मान कैसे दे सकते हैं?
उत्तर:
द्विविमीय ऐरे में प्रारम्भिक मान देने का प्रारूप data_type array_name [rows] [columns]
= {value1, value2, …, valueN};

प्रश्न 6
स्ट्रिग को घोषित करने का प्रारूप क्या होता है?
उत्तर:
char string_name [size];

लघु उत्तरीय प्रश्न I (2 अंक)

प्रश्न 1
ऐरे की उदाहरण सहित संक्षिप्त व्याख्या कीजिए। [2018]
उत्तर:
एक प्रकार के डाटा के समूह को एक साथ प्रदर्शित करने के लिए जिस तकनीक या वैरिएबल का प्रयोग किया जाता है, उसे ऐरे (Array) या सबस्क्रिप्टेड वैरिएबल (Subscripted variable) कहते हैं। ऐसा ऐरे, जिसमें ऐरे एलीमेण्ट की संख्या को व्यक्त करने के लिए केवल एक ही सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है, एकविमीय ऐरे कहलाता है।
एकविमीय ऐरे को घोषित करना
अन्य वैरिएबल की तरह, ऐरे को भी प्रोग्राम में प्रयोग करने से पहले घोषित करना होता है।

प्रारूप
data type array_name [size];
उदाहरण
int age [100];
float salary [15];

द्विविमीय ऐरे में, डाटा सारणी के रूप में संग्रहीत किया जाता है, जिसमें पंक्तियों (Rows) तथा स्तम्भों (Columns) का संयोजन (Combination) होता है। द्विविमीय ऐरे को मैट्रिक्स (Matrix) के नाम से भी जाना जाता है।

द्विविमीय ऐरे को घोषित करना
प्रारूप
data_type array_name [rows][columns);
उदाहरण
int x [3] [4];
float matrix [20] [25];
पहली स्टेटमेण्ट में से 3 व कॉलम 4 है, इसलिए ऐरे का साइज (3 x 4 =) 12 होगा।

प्रश्न 2
ऐरे को कैसे घोषित किया जाता है?
उत्तर:
ऐरे को घोषित करने के लिए सबसे पहले ऐरे का डाटा टाइप बताना होता है। कि वह int, chart, float आदि में से किस टाइप का है। फिर ऐरे का नाम और उसके साथ पैरेनथेसिस ([ ]) में ऐरे की संख्या लिखनी होती है। प्रारूप data_type array_name [size] ।

प्रश्न 3
एकविमीय ऐरे का प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक क्यों होता है?
उत्तर:
ऐरे को घोषित करने के बाद उसका प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक होता है अन्यथा उसमें निरर्थक मान (Garbage value) भर जाता है, इसलिए ऐरे को कम्पाइल करते समय ही उसका प्रारम्भिक मान दे सकते हैं, जिससे उसमें निरर्थक मान न आए। प्रारम्भिक मान देते समय, यदि सूची के मानों की संख्या ऐरे के साइज से कम है तो केवल उतने ही तत्त्वों (Elements) को प्रारम्भिक मान दिया जाएगा और शेष का मान शून्य रख दिया जाएगा।

प्रश्न 4
एकविमीय ऐरे में लूप की सहायता से डाटा इनपुट कीजिए।
उत्तर:
एकविमीय ऐरे में लूप की सहायता से डाटा इनपुट निम्न उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है।
void main( )
{
int rollno [5];
for (int i = 0; 1 < 5; i++)
{
cout<<“Enter the Roll No.” <<end1; cin>>rollno[i];
}
}

प्रश्न 5
स्ट्रिग से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
चिह्न (” “) (Quotation marks) के अन्तर्गत लिखा गया कोई भी संख्यात्मक, शाब्दिक तथा विशेष चिह्न स्ट्रिग कहलाता है। C++ में, वर्गों की संख्या या स्ट्रिग को वर्गों का ऐरे माना जाता है, जिसे एक अलग डाटा टाइप का नाम न देकर char ऐरे ही कहा जाता है। स्ट्रिग के अन्त में नल कैरेक्टर (NO) लगा होता है, जो स्ट्रिग की समाप्ति को प्रदर्शित करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न II (3 अंक)

प्रश्न 1
द्विविमीय ऐरे से डाटा को कैसे पढ़ा जाता है?
उत्तर:
द्विविमीय ऐरे से डाटा को पढ़ने के लिए दो लूपों की आवश्यकता होती है।
उदाहरण:
void main( )
int arr [2] [3] , r, c;
for(r = 0; r < 2; r++)
{
for(c = 0; c < 3; c++)
{
cout<<“Enter the value”<<end1; cin>>arr[r][c];
}
}
for(r = 0; r < 2; r++)
{
for(c = 0; c < 3; c++)
{
cout<<“Array”<<endl<<arr[r] [c];
}
}
}

प्रश्न 2
एक C++ का प्रोग्राम लिखिए, जिसमें 5 परीक्षार्थियों की उम्र और ग्रेड इनपुट किए जाते हैं। यदि छात्रों की उम्र 20 वर्ष से अधिक हो और ग्रेड ‘B’ हो, उनकी उम्र व ग्रेड प्रिण्ट करें।
उत्तर:
#include
void main( )
{
int age [5], i;
char grade [6];
for (i=0; i<5; i++)
cout<<“Enter age and grade of student”<<i+1<<“:”; cin>>age[i]>>grade [i];
}
for (i=0; i<5; i++) { if ( (age [1]>=20) && (grade[i]==’B’))
{
cout<<“\n age=”< }
}
}

आउटपुट
Enter age and grade of student 1: 25 A
Enter age and grade of student 2:25 B
Enter age and grade of student 3:33 A
Enter age and grade of student 4:24 A
Enter age and grade of student 5:12 A
age = 25 grade = B

प्रश्न 3
इनपुट स्ट्रिग में उपस्थित अक्षरों की संख्या बताने हेतु C++ में एक प्रोग्राम लिखिए। [2010]
उत्तर:
#include
#include
#include
void main( )
{
clrscr( );
int charcnt=0, i;
char ch, str[125];
cout<<“Enter a string:”;
gets (str);
for (i=0; str [i] != “\0′;i++)
charcnt=i;
cout<<“\nTotal Characters:”
<<charcnt+1;
getch( );
}

आउटपुट
Enter a string : Arihant
Total Characters : 7

प्रश्न 4
स्ट्रिग को प्रारम्भिक मान देने की प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
स्ट्रिग को प्रारम्भिक मान देना आवश्यक होता है। C++ में, स्टिगों को दो विधियों द्वारा प्रारम्भिक मान दिया जा सकता है।
उदाहरण
char name [30]= “RAHUL SHARMA”;
अथवा
char name [30] = { ‘R’, ‘A’, ‘H’, ‘U’, ‘L’,’ ‘, ‘s’, ‘H’, ‘A’, ‘R’, ‘M’, ‘A’, ‘\0’ };
दूसरे उदाहरण में ‘\0′ (Null character) का प्रयोग किया गया है जो स्ट्रिग के अन्त को दर्शाता है, परन्तु पहले उदाहरण में ‘\0’ प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि स्ट्रिग का मान कोटेशन चिह्नों ( ” “) में दिया है, जिसे कम्पाइलर स्वत: ही स्ट्रिंग मान लेगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1
एकविमीय ऐरे को उदाहरण सहित विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
ऐसा ऐरे, जिसमें ऐरे एलीमेण्ट की संख्या को व्यक्त करने के लिए केवल एक ही सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है, एकविमीय ऐरे कहलाता है।

एकविमीय ऐरे को घोषित करना
अन्य वैरिएबल की तरह, ऐरे को भी प्रोग्राम में प्रयोग करने से पहले घोषित करना होता है।

प्रारूप
data type array_name [size]
उदाहरण
int age [100];
float salary[15];

एकविमीय ऐरे का प्रारम्भिक मान रखना
ऐरे को घोषित करने के बाद उसका प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक होता है। अन्यथा उसमें निरर्थक मान (Garbage value) भर जाता है, इसलिए ऐरे को कम्पाइल करते समय ही उसका प्रारम्भिक मान दे सकते हैं।
प्रारूप
data_type array_name [size] = {valuel, value2, …, valueN);
उदाहरण
int marks [5]={50,70, 89,90,75};

उदाहरण
एकविमीय ऐरे की सहायता से डाटा इनपुट करना व उसका रिवर्स ऑर्डर (Order) प्रिण्ट कराना।
#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void main( )
{
clrscr( );
int A[5], i, n=5;j = n-1, temp;
cout<<“Enter the array element”<<end1;
for (i=0;i<n; i++) { cin>>A[i];
}
for(i=0, j = n-1;i<n/2;i++,j–)
{
temp=A[i];
A[i]=A[j];
A[j] =temp;
}
cout<<“Reverse array”<<end1;
for (i=0;i<n;i++)
{
cout<<A[i]<<” “;
}
getch( );
}

आउटपुट
Enter the array element
4
5
6
2
6
Reverse array
6  2  6  5  4

प्रश्न 2
द्विविमीय ऐरे को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
द्विविमीय ऐरे में, डाटा सारणी के रूप में संग्रहीत किया जाता है, जिसमें पंक्तियों (RowB) तथा स्तम्भों (Columns) का संयोजन (Combination) होता है। द्विविमीय ऐरे को मैट्रिक्स (Matrix) के नाम से भी जाना जाता है।

द्विविमीय ऐरे को घोषित करना
प्रारूप: data_type array_name [rows] {columns ] ;
उदाहरण int x [3] [4] ;
float matrix [20] [25];

पहली स्टेटमेण्ट में से 3 व कॉलम 4 है, इसलिए ऐरे का साइज (3 x 4 =) 12 होगा।
द्विविमीय ऐरे को प्रारम्भिक मान देना
एकविमीय ऐरे की तरह द्विविमीय ऐरे में भी उसका प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक होता है, इसलिए ऐरे को कम्पाइल करते समय ही उसका प्रारम्भिक मान दे सकते हैं।

प्रारूप data_type array_name (rows] [columns] ={value1, value2, …, valueN);
अथवा
data_type array_name[rows] [columns] ={{value of 1st row}, {value of 2nd row},….};

उदाहरण

int x [3] [4] = (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9,10, 11, 12}},
अथवा
int x [3][4] = ( 1, 2, 3, 4), (5, 6, 7, 8}, (9, 10, 11, 12} };

उदाहरण
मैट्रिक्स को प्रिण्ट करना
#include<iostream.h>
void main ( )
{
int m, n, A[10] [10],i,j;
cout<<“Enter the number of rows: “; cin>>m;
cout<<“Enter the number of columns : “; cin>>n;
cout<<“Enter the elements of the matrix” <<end1;
for(i=0;i<m; i++)
{
for(j=0; j<n; j++) { cin>>A[i][j];
}
}
cout<<“Matrix”<<end1;
for (i=0; i<m;i++)
{
for(j=0; j<n; j++)
{
cout<<A[i][j]<<” “;
}
cout<<end1;
}
}

आउटपुट
Enter the number of rows : 3
Enter the number of columns :3
Enter the elements of the matrix
5
6
7
8
9
5
6
4
3
Matrix
5 6 7
8 9 5
6 4 3

प्रश्न 3
ऐरे से आप क्या समझते हैं? एकविमीय तथा द्विविमीय ऐरे में अन्तर उदाहरण सहित समझाइए। [2007]
अथवा
एकविमीय ऐरे तथा द्विविमीय ऐरे में अन्तर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। [2010]
उत्तर:
एक प्रकार के डाटा के समूह को एक साथ प्रदर्शित करने के लिए जिस तकनीक का प्रयोग किया जाता है, उसे ऐरे कहते हैं।
एकविमीय ऐरे तथा द्विविमीय ऐरे में अन्तर

एकविमीय ऐरे द्विविमीय ऐरे
इस ऐरे में, एलीमेण्ट की संख्या व्यक्त करने के लिए केवल एक ही सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है। इस ऐरे में, एलीमेण्ट की संख्या व्यक्त करने के लिए दो सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है।
प्रारूप
data_type array_name[size];
प्रारूप
data_type array_name[rows] [columns];
उदाहरण int age [50]; उदाहरण int a [3] [4];

उदाहरण
एकविमीय ऐरे की सहायता से डाटा इनपुट करना व उसका रिवर्स ऑर्डर (Order) प्रिण्ट कराना।
#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void main( )
{
clrscr( );
int A[5], i, n=5;j = n-1, temp;
cout<<“Enter the array element”<<end1;
for (i=0;i<n; i++) { cin>>A[i];
}
for(i=0, j = n-1;i<n/2;i++,j–)
{
temp=A[i];
A[i]=A[j];
A[j] =temp;
}
cout<<“Reverse array”<<end1;
for (i=0;i<n;i++)
{
cout<<A[i]<<” “;
}
getch( );
}

आउटपुट
Enter the array element
4
5
6
2
6
Reverse array
6 2 6 5 4

प्रश्न 4
C++ में, दस संख्याओं की ऐरे में सबसे छोटी तथा सबसे बड़ी संख्या छापने हेतु प्रोग्राम लिखिए। [2009]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int Arr[100], n, i, small, large;
cout<<“Enter number of elements that you want to insert:”; cin>>n;
for (i=0; i<n; i++)
{
cout<<“Enter element “<<i+1<<“:”; cin>>Art [i];
}
small = Arr[0];
large = Arr [0];
for (1=0; i<n; i++)
{
if (Arr[i]<small) small=Arr[i]; if (Arr[i]>large)
large=Arr[i];
}
cout<<“\nLargest element is:” <<large;
cout<<“\n Smallest element is:” <<small;
getch( );
}

आउटपुट
Enter number 1elements that you want to insert: 10
Enter element 1: 23
Enter element 2: 65
Enter element 3: 34
Enter element 4: 89
Enter element 5: 76
Enter element 6: 45
Enter element 7: 44
Enter element 8: 65
Enter element 9: 23
Enter element 10:12
Largest element is : 89
Smallest element is: 12

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 8 प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 8 प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव are part of UP Board Solutions for Class 12 Home Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 8 प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव

Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 8
Chapter Name प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव
Number of Questions Solved 33
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 8 प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव

बहुविकल्पीय प्रश्न   (1 अंक)

प्रश्न 1.
पर्यावरण कहते हैं
(a) प्रदूषण को
(b) वातावरण को
(c) पृथ्वी के चारों ओर के वातावरण को
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पृथ्वी के चारों ओर के वातावरण को

प्रश्न 2.
वायु प्रदूषण के कारण हैं
(a) औद्योगीकरण
(b) वनों की अनियमित कटाई
(c) नगरीकरण
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 3.
जल प्रदूषण को रोकने के लिए कौन-से रासायनिक पदार्थ का प्रयोग किया जाता है?
(a) सोडियम क्लोराइड
(b) कैल्शियम क्लोराइड
(C) ब्लीचिंग पाउडर
(d) पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट
उत्तर:
(c) ब्लीचिंग पाउडर

प्रश्न 4.
लाउडस्पीकर की आवाज से किस प्रकार का प्रदूषण फैलता है?
(a) वायु प्रदूषण
(b) ध्वनि प्रदूषण
(C) मृदा प्रदूषण
(d) जल प्रदूषण
उत्तर:
(b) ध्वनि प्रदूषण

प्रश्न 5.
ध्वनि प्रदूषण के कारण हैं
(a) वाहनों के हॉर्न
(b) सायरन
(c) लाउडस्पीकर
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 6.
ध्वनि प्रदूषण प्रभावित करता है
(a) आमाशय को
(b) वृक्क को
(c) कान को
(d) यकृत को
उत्तर:
(c) कान को

प्रश्न 7.
पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है?
(a) 1 जून
(b) 5 जून
(c) 12 जून
(d) 18 जून
उत्तर:
(b) 5 जून

प्रश्न 8.
वस्तुओं के जलने से कौन-सी गैस बनती है?
(a) ऑक्सीजन
(b) कार्बन डाइऑक्साइड
(c) नाइट्रोजन
(d) अमोनिया
उत्तर:
(b) कार्बन डाइऑक्साइड

प्रश्न 9.
पर्यावरण रक्षा के लिए (2018)
(a) पेड़-पौधे उगाने चाहिए
(b) ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत ढूंढना चाहिए
(c) नदियों को साफ रखना चाहिए।
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

प्रश्न 1.
पर्यावरण की एक परिभाषा लिखिए
उत्तर:
जिन्सबर्ट के अनुसार, “पर्यावरण वह सब कुछ है, जो एक वस्तु को चारों ओर से घेरे हुए है तथा उस पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है।”

प्रश्न 2.
जनजीवन पर पर्यावरण के हानिकारक प्रभाव को रोकने के बारे में लिखिए
उत्तर:
जनजीवन पर पर्यावरण का प्रमुख हानिकारक प्रभाव पर्यावरण प्रदूषण के माध्यम से पड़ता है। अतः पर्यावरण प्रदूषण को नियन्त्रित करके उसके हानिकारक प्रभावों को रोका जा सकता है।

प्रश्न 3.
पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण के किसी एक भाग अथवा सभी भागों का दूषित होना ही पर्यावरण | प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 4.
पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण क्या हैं? (2017)
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्न हैं।

  1. वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का बढ़ना।
  2. घरेलू अपमार्जकों का अधिकाधिक प्रयोग।
  3. वाहित मल का नदियों में गिरना।
  4. औद्योगिक अपशिष्ट तथा रासायनिक पदार्थों का विसर्जन।

प्रश्न 5.
प्रदूषण के प्रकार लिखिए।   (2013)
उत्तर:
प्रदूषण के चार प्रकार हैं- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण व मृदा प्रदूषण।

प्रश्न 6.
वायु प्रदूषण से होने वाली चार बीमारियों के नाम लिखिए। (2017)
अथवा
वायु प्रदूषण से फैलने वाले चार रोगों के नाम लिखिए। (2012)
उत्तर:
वायु प्रदूषण से चेचक, तपेदिक, खसरा, काली खाँसी आदि रोग हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
वृक्ष पर्यावरण को कैसे शुद्ध करते हैं?
अथवा
पेड़-पौधे वातावरण को कैसे शुद्ध करते हैं?
उत्तर:
पेड़-पौधे वातावरण में ऑक्सीजन को विसर्जित करके उसे शुद्ध बनाए रखते हैं तथा वातावरण से हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं।

प्रश्न 8.
कल-कारखानों से वातावरण कैसेप्रदूषित होता है?
उत्तर:
कल-कारखानों से विसर्जित होने वाले अपशिष्ट पदार्थों (गन्दा जल, रसायन आदि) एवं गैसों (धुआँ) से जल प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है, इसके अतिरिक्त इनमें उत्पन्न उच्च ध्वनि से ध्वनि प्रदूषण में भी वृद्धि होती है।

प्रश्न 9.
जल प्रदूषण के कारण लिखिए।
अथवा
जल प्रदूषण के दो कारण लिखकर उनके निवारण के उपाय लिखिए।
उत्तर:
जल प्रदूषण के प्रमुख कारण जल स्रोतों में औद्योगिक अपशिष्टों एवं घरेलू वाहित मल का मिलना है। औद्योगिक अपशिष्ट को जल-स्रोतों में मिलने से रोकनी, सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट, जैव उर्वरक के प्रयोग आदि से जल प्रदूषण का निवारण किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
मृदा प्रदूषण का जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
मृदा प्रदूषण से जनजीवन पर निम्न प्रभाव पड़ते हैं।

  1. मृदा प्रदूषण का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव फसलों पर पड़ता है, जिससे कृषि उत्पादन घटता है।
  2. प्रदूषित मृदा में उत्पन्न भोज्य पदार्थ ग्रहण करने से मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 11.
ध्वनि की तीव्रता के मापन की इकाई क्या है?
उत्तर:
ध्वनि की तीव्रता के मापन की इकाई डेसीबल है।

प्रश्न 12.
ध्वनि प्रदूषण के कारण बताइए।
उत्तर:
सामान्यत: ध्वनि प्रदूषण के दो कारण होते हैं।

  1. प्राकृतिक
  2. कृत्रिम

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

प्रश्न 1.
मानव जीवन पर वायु प्रदूषण के प्रभाव लिखिए।
उत्तर:
वायु प्रदूषण मानव जीवन को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित करता है।

  1. वायु प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ होती हैं; जैसे—छाती एवं साँस सम्बन्धी बीमारियाँ-तपेदिक, फेफड़े का कैंसर आदि।
  2. वायु प्रदूषण से नगरों का वातावरण दूषित हो जाता है तथा अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वायु प्रदूषण से बच्चों को खाँसी तथा साँस फूलने की समस्या पैदा होती है। वायु प्रदूषण महत्त्वपूर्ण स्मारकों, भवनों आदि के क्षरण में मुख्य भूमिका निभाता है; जैसे-ताजमहल।।
  3. वायु प्रदूषण से वायुमण्डल में हानिकारक गैसों की मात्रा बढ़ती है, इससे ओजोन परत का क्षरण होता है।
  4. वायु प्रदूषण के कारण ओजोन क्षरण से पराबैंगनी किरणों का प्रभाव हमारे | ऊपर अधिक पड़ता है, जिससे त्वचा कैंसर जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो | सकती हैं।
  5. वायु प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग का एक प्रमुख कारण है।
  6. वायु प्रदूषण से कृषि एवं फसलों को नुकसान पहुँचता है। कृषि उत्पादन में कमी होती है। वायु प्रदूषण अम्ल वर्षा का कारण बनता है, जिससे मानव, वनस्पति, भवन आदि सभी प्रभावित होते हैं।

प्रश्न 2.
संवातन किसे कहते हैं? यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वायु प्राणियों के जीवन का एक आवश्यक तत्त्व है। मनुष्य के बेहतर स्वास्थ्य हेतु शुद्ध वायु आवश्यक है। संवातन से आशय ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें शुद्ध वायु का कमरे में प्रवेश और अशुद्ध वायु का निराकरण किया जाता है। अशुद्ध वायु स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है तथा विभिन्न रोगों को निमन्त्रण देती है। संवातन हेतु घर में खिड़की, दरवाजों एवं रोशनदानों की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे घर के अन्दर, बाहर से शुद्ध वायु का प्रवाह होता रहे एवं घर का वातावरण स्वस्थ बना रहे।

प्रश्न 3.
वायु प्रदूषण के कारण और रोकथाम के उपाय बताइए
अथवा
वायु प्रदूषण से क्या तात्पर्य है? वायु प्रदूषण किन कारणों से होता है?
उत्तर:
कुछ बाहरी कारकों के समावेश से किसी स्थान की वायु में गैसों के प्राकृतिक अनुपात में होने वाले परिवर्तन को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से धूलकण, धुआँ, कार्बन-कण, सल्फर डाइऑक्साइड (SO,), शीशी, कैडमियम आदि घातक पदार्थों के वायु में मिलने से होता है। ये सब उद्योग, परिवहन के साधनों, घरेलू भौतिक साधनों आदि के माध्यम से वायुमण्डल में मिलते हैं, जिससे वायु प्रदूषित हो जाती है।
वायु प्रदूषण के कारण
वायु प्रदूषण निम्नलिखित कारणों से फैलता है।

  1. औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के परिणामस्वरूप उत्पन्न विभिन्न गैसे, धुआँ | आदि। विभिन्न प्रकार के ईंधनों; जैसे- पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल आदि के दहन से उत्पन्न धुआँ एवं गैसें।
  2. वनों की अनियमित और अनियन्त्रित कटाई।
  3. रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का प्रयोग।

वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
वायु प्रदूषण को रोकने हेतु निम्न उपाय किए जा सकते हैं।

  1. पदार्थों का शोधन करना।
  2. घरेलू रसोई एवं उद्योगों आदि में ऊँची चिमनियों द्वारा धुएँ का निष्कासन।
  3. परिवहन के साधनों पर धुआँरहित यन्त्र लगाना।
  4. ईंधन के रूप में सीएनजी, एलपीजी, बायो डीजल आदि को प्रयोग करना।

प्रश्न 4.
जल प्रदूषण द्वारा मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए
अथवा
जल प्रदूषण से होने वाली हानियों का वर्णन कीजिए
उत्तर:
जल प्रदूषण से मानव जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं।

  1. प्रदूषित जल के सेवन से विभिन्न प्रकार के रोग फैलते हैं; जैसे-टाइफाइड, हैजा, अतिसार, पेचिश।
  2. जल प्रदूषण से पेयजल का संकट उत्पन्न होता है।
  3. प्रदूषित जल वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं को हानि पहुँचाता है।
  4. प्रदूषित जल का कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  5. प्रदूषित जल के सेवन से दाँतों की समस्या, पेट की समस्या, कब्ज आदि | बीमारियाँ भी फैलती हैं। उदाहरण राजस्थान में प्रदूषित जल के सेवन से ‘नारू’ नामक रोग फैलने से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।
  6. मत्स्य उत्पादन प्रभावित होता है।

प्रश्न 5.
ध्वनि प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
UP Board Class12 Home Science Chapter 8 1

प्रश्न 6.
जल प्रदूषण के दो कारण लिखिए
उत्तर:
जल प्रदूषण के दो कारण निम्न प्रकार हैं।

  1. उद्योगों; जैसे-चमड़ा उद्योग, रसायन उद्योग आदि से निकलने वाला अपशिष्ट | पदार्थ, गन्दा जल आदि जल स्रोतों को दूषित कर देता है।
  2. नगरीकरण के परिणामस्वरूप अपशिष्ट पदार्थों आदि का जल में मिलना। यमुना नदी इस प्रकार के प्रदूषण का ज्वलन्त उदाहरण है।

प्रश्न 7.
पर्यावरण प्रदूषण जनजीवन को कैसे प्रभावित करता है?
अथवा
व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पर्यावरण प्रदूषण का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण वर्तमान समय में मानव के समक्ष उत्पन्न एक गम्भीर समस्या है। पर्यावरण प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्रों पर पड़ता है। पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव को हम निम्नलिखित रूपों में स्पष्ट कर सकते हैं।
जन स्वास्थ्य पर प्रभाव
जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव निम्नलिखित हैं।

  1. प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियाँ; जैसे-हैजा, कॉलरा, टायफाइड आदि होती हैं।
  2. ध्वनि प्रदूषण से सर दर्द, चिड़चिड़ापन, रक्तचाप बढ़ना, उत्तेजना, हृदय की धड़कन बढ़ना आदि समस्याएँ होती हैं।
  3. जल प्रदूषण से टायफाइड, पेचिश, ब्लू बेबी सिण्ड्रोम, पाचन सम्बन्धी विकार (कब्ज) आदि समस्याएँ होती हैं।
  4. वायु प्रदूषण से फेफड़े एवं श्वास सम्बन्धी, श्वसन-तन्त्र की बीमारियाँ होती हैं। व्यक्तिगत कार्यक्षमता पर प्रभाव । व्यक्तिगत कार्यक्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव निम्नलिखित हैं।
  5. पर्यावरण प्रदूषण व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
  6. इससे व्यक्ति की कार्यक्षमता अनिवार्य रूप से घटती है।।
  7. प्रदूषित वातावरण में व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं रह पाता।
  8. प्रदूषित वातावरण में व्यक्ति की चुस्ती, स्फूर्ति, चेतना आदि भी घट जाती है।

आर्थिक जीवन पर प्रभाव
आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव निम्नलिखित हैं।

  1. पर्यावरण प्रदूषण का गम्भीर प्रभाव जन सामान्य की आर्थिक गतिविधियों एवं आर्थिक जीवन पर पड़ता है।
  2. कार्यक्षमता घटने से उत्पादन दर घटती है।
  3. साधारण एवं गम्भीर रोगों के उपचार में अधिक व्यय करना पड़ता है।
  4. आय दर घटने तथा व्यय बढ़ने पर आर्थिक संकट उत्पन्न होता है। इस प्रकार पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन पर बहुपक्षीय, गम्भीर तथा प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करता है। अत: इसके समाधान हेतु व्यक्ति एवं राष्ट्र दोनों को मिलकर कार्य करना चाहिए।

प्रश्न 8.
पर्यावरण संरक्षण के लिए जनता को कैसे जागरूक किया जा सकता है?
अथवा
पर्यावरण संरक्षण के उपाय लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण का मानव जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध है, पर्यावरण संरक्षण के लिए जनचेतना का होना बहुत आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य निम्नलिखित उपायों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

  1. पर्यावरण शिक्षा द्वारा जनता में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाई जा सकती है। सामान्य जनता को पर्यावरण के महत्त्व, भूमिका तथा प्रभाव आदिसे अवगत कराना आवश्यक है।
  2. वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कराना चाहिए; जैसे-स्टॉकहोम सम्मेलन (1972), रियो डि जेनेरियो सम्मेलन (1992)।
  3. गाँव, शहर, जिला, प्रदेश, राष्ट्र आदि सभी स्तरों पर पर्यावरण संरक्षण में लोगों को शामिल करना चाहिए।
  4. पर्यावरण अध्ययन से सम्बन्धित विभिन्न सेमिनार पुनश्चर्या, कार्य-गोष्ठियाँ, | दृश्य-श्रव्य प्रदर्शनी आदि का आयोजन कराया जा सकता है।
  5. विद्यालय, विश्वविद्यालय स्तर पर ‘पर्यावरण अध्ययन विषय को लागू करना एवं प्रौढ़ शिक्षा में भी पर्यावरण-शिक्षा को स्थान देना महत्त्वपूर्ण उपाय है।
  6. जनसंचार माध्यमों-रेडियो, दूरदर्शन तथा पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
  7. पर्यावरण से सम्बन्धित विभिन्न राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करना महत्त्वपूर्ण प्रयास है; जैसे-इन्दिरा गाँधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार, वृक्ष मित्र पुरस्कार, महावृक्ष पुरस्कार, इन्दिरा गाँधी पर्यावरण पुरस्कार आदि।
  8. विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) का आयोजन जागरूकता लाने की दिशा में उठाया गया महत्त्वपूर्ण कदम है।

प्रश्न 9.
मानव जीवन में जल का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
जल सभी जीवन-जन्तु एवं वनस्पतियों के लिए अत्यन्त आवश्यक है। मानव के लिए तो ‘जल ही जीवन है ऐसा माना जाता है। जल का उपयोग केवल पीने के पानी और कृषि के लिए ही नहीं होता, बल्कि जल के अन्य कई उपयोग हैं; जैसे-कल-कारखानों और इण्डस्ट्रीज क्षेत्रों में भी जल अत्यन्त आवश्यक है। घर बनाने से लेकर मोटरगाड़ी इत्यादि चलाने, यातायात के साधनों तक सभी चीजों में ही जल की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी घर में एक दिन पानी नहीं आता है, तो उस दिन उस घर का सारा काम बन्द हो जाता है; जैसे-खाना नहीं बन पाता, कपड़े नहीं धुल पाते, साफ-सफाई तथा स्नान आदि मुश्किल होता है। इसके अतिरिक्त जल की कमी के कारण कृषि सबसे अधिक प्रभावित होती है। फसलें नष्ट हो जाती हैं, जिससे बाजार में उपलब्ध अनाजों के दाम भी बढ़ जाते हैं। अतः जल मानव जीवन में हर क्षण महत्त्वपूर्ण है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न ( 5 अंक, 100 शब्द)

प्रश्न 1.
पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? यह कितने प्रकार का होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण से आशय पर्यावरण के किसी एक या सभी भागों का दूषित होना है। यहाँ दूषित होने से आशय पर्यावरण के प्रकृति प्रदत्त रूप में इस प्रकार परिवर्तन होता है, जोकि मानव जीवन के लिए प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करे। पर्यावरण प्रदूषण जल, मृदा, वायु तथा ध्वनि के रूप में हो सकता है। पर्यावरण के इन कारकों के आधार पर ही पर्यावरण प्रदूषण के चार रूप हैं।

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. मृदा प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण

वायु प्रदूषण
कुछ बाहरी कारकों के समावेश से किसी स्थान की वायु में गैसों के प्राकृतिक अनुपात में होने वाले परिवर्तन को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से धूलकण, धुआँ, कार्बन-कण, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), शीशा, कैडमियम आदि घातक पदार्थों के वायु में मिलने से होता है। ये सब उद्योग, परिवहन के साधनों, घरेलू भौतिक साधनों आदि के माध्यम से वायुमण्डल में मिलते हैं, जिससे वायु प्रदूषित हो जाती है।
जल प्रदूषण
जल के मुख्य स्रोतों में अशुद्धियों तथा हानिकारक तत्त्वों का समाविष्ट हो जाना ही जल प्रदूषण है। जल में जैव-रासायनिक पदार्थों तथा विषैले रसायनों, सीसा, कैडमियम, बेरियम, पारा, फॉस्फेट आदि की मात्रा बढ़ने पर जल प्रदूषित हो जाता है। इन प्रदूषकों के कारण जल अपनी उपयोगिता खो देता है तथा जीवन के लिए घातक हो जाता है। जल प्रदूषण दो प्रकार का होता है-दृश्य प्रदूषण एवं अदृश्य प्रदूषण।।
मृदा प्रदूषण
मृदा प्रदूषण, पर्यावरण प्रदूषण का एक अन्य रूप है। मिट्टी में पेड़-पौधों के लिए हानिकारक तत्त्वों का समावेश हो जाना ही मृदा प्रदूषण है।
मृदा प्रदूषण के कारण
मृदा प्रदूषण के निम्नलिखित कारण होते हैं।

  1. मृदा प्रदूषण की दर को बढ़ाने में जल तथा वायु प्रदूषण का भी योगदान होता है।
  2. वायु में उपस्थित विषैली गैसे, वर्षा के जल में घुलकर भूमि पर पहुँचती हैं, जिससे मृदा प्रदूषित होती है।
  3. औद्योगिक संस्थानों से विसर्जित प्रदूषित जल तथा घरेलू अपमार्जकों आदि से युक्त जल भी मृदा प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
  4. इसके अतिरिक्त रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, फफूदीनाशकों आदि का अनियन्त्रित उपयोग भी मृदा को प्रदूषित करता है।

मृदा प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि मृदा प्रदूषण, वायु एवं जल प्रदूषण से अन्तर्सम्बन्धित है। अतः इसकी रोकथाम के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। आवश्यक है कि कृषि क्षेत्र में सतत् विकास को दृष्टि में रखते हुए, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का संयमित प्रयोग किया जाए।
ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण पर्यावरण प्रदूषण का ही एक रूप है। पर्यावरण में अनावश्यक तथा अधिक शोर का व्याप्त होना ही ध्वनि प्रदूषण है। वर्तमान युग में शोर अर्थात् ध्वनि प्रदूषण में अत्यधिक वृद्धि हुई है, इसको प्रतिकूल प्रभाव हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। ध्वनि प्रदूषण की माप करने के लिए ध्वनि की तीव्रता की माप की जाती है। इसकी माप की इकाई को डेसीबल कहते हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि 85 डेसीबल से अधिक तीव्रता वाली ध्वनि का पर्यावरण में व्याप्त होना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अतः पर्यावरण में 85 डेसीबल से अधिक तीव्रता वाली ध्वनियों का व्याप्त होना ध्वनि प्रदूषण है।
ध्वनि प्रदूषण के कारण
ध्वनि प्रदूषण के सामान्यत: दो कारण हैं

  1. प्राकृतिक
  2. कृत्रिम

प्राकृतिक कारण

  1. बादलों की गड़गड़ाहट
  2. बिजली की कड़के
  3. भूकम्प एवं ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न ध्वनि
  4. आँधी, तूफान आदि से उत्पन्न शोर।

कृत्रिम अथवा मानवीय कारण
ध्वनि प्रदूषण फैलाने में मुख्यतः कृत्रिम कारकों का ही महत्त्वपूर्ण योगदान है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

1.परिवहन के साधनों से उत्पन्न शोर जैसे बस, ट्रक, मोटरसाइकिल, हवाई | जहाज, पानी का जहाज आदि से उत्पन्न ध्वनियाँ ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाती हैं।

2.उद्योगों, फैक्टरियों आदि का शोर फैक्टरियों, औद्योगिक संस्थानों आदि की विशालकाय मशीनें, कलपुर्जे, इंजन आदि भयंकर शोर उत्पन्न करके ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं।

3.विभिन्न प्रकार के विस्फोट एवं सैनिक अभ्यास पहाड़ों को काटने की गतिविधियाँ एवं युद्ध क्षेत्र में गोला-बारूद आदि के प्रयोग से ध्वनि प्रदूषण फैलता है।

4.मनोरंजन के साधन टीवी, म्यूजिक सिस्टम आदि मनोरंजन के साधन भी ध्वनि | प्रदूषण फैलाते हैं।

5.विभिन्न लड़ाकू एवं अन्तरिक्ष यान वायुयान, सुपरसोनिक विमान वे अन्तरिक्ष यान आदि ध्वनि प्रदूषण में योगदान करते हैं।

6.उत्सवों का आयोजन विभिन्न उत्सवों आदि में प्रयुक्त लाउडस्पीकर, म्यूजिक सिस्टम, डी. जे. आदि द्वारा ध्वनि प्रदूषण फैलाया जाता है।

शोर या ध्वनि प्रदूषण पर नियन्त्रण/उपचार
ध्वनि प्रदूषण नियन्त्रित करने के कुछ उपाय निम्नलिखित हैं।

  1. उद्योगों के शोर के नियन्त्रण के लिए कारखाने आदि में शोर अवरोधक दीवारें तथा मशीनों के चारों ओर मफलरों का कवच लगाना चाहिए।
  2. कल-कारखानों को शहर से दूर स्थापित करना चाहिए।
  3. मोटर वाहनों में बहुध्वनि वाले हॉर्न बजाने पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए।
  4. उद्योगों में श्रमिकों को कर्ण प्लग या कर्ण बन्धकों का प्रयोग अनिवार्य किया | जाना चाहिए।
  5. आवास गृहों, पुस्तकालयों, चिकित्सालयों, कार्यालयों आदि में उचित निर्माण सामग्री तथा उपयुक्त बनावट द्वारा शोर से बचाव किया जा सकता है।
  6. अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अधिकतम शोर सीमा का निर्धारण करना चाहिए। ध्वनिरोधक सड़कों एवं भवनों को निर्माण करना अन्य उपाय हैं !

उपरोक्त उपायों द्वारा ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? जल व वायु प्रदूषण को नियन्त्रित करने के उपाय लिखिए?
अथवा
जल प्रदूषण क्या है? जल प्रदूषण के कारण एवं इनकी रोकथाम के उपाय लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण से आशय पर्यावरण के किसी एक या सभी भागों का दूषित होना है। यहाँ दूषित होने से आशय पर्यावरण के प्रकृति प्रदत्त रूप में इस प्रकार परिवर्तन होता है, जोकि मानव जीवन के लिए प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करे। पर्यावरण प्रदूषण जल, मृदा, वायु तथा ध्वनि के रूप में हो सकता है। पर्यावरण के इन कारकों के आधार पर ही पर्यावरण प्रदूषण के चार रूप हैं।

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. मृदा प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण

वायु प्रदूषण
कुछ बाहरी कारकों के समावेश से किसी स्थान की वायु में गैसों के प्राकृतिक अनुपात में होने वाले परिवर्तन को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से धूलकण, धुआँ, कार्बन-कण, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), शीशा, कैडमियम आदि घातक पदार्थों के वायु में मिलने से होता है। ये सब उद्योग, परिवहन के साधनों, घरेलू भौतिक साधनों आदि के माध्यम से वायुमण्डल में मिलते हैं, जिससे वायु प्रदूषित हो जाती है।
वायु प्रदूषण के कारण
वायु प्रदूषण निम्नलिखित कारणों से फैलता है ।

  1. औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के परिणामस्वरूप उत्पन्न विभिन्न गैसे, धुआँ आदि।
  2. विभिन्न प्रकार के ईंधनों; जैसे-पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल आदि के | दहन से उत्पन्न धुआँ एवं गैसें।
  3. वनों की अनियमित और अनियन्त्रित कटाई।
  4. रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का प्रयोग।
  5. घरेलू अपशिष्ट, खुले में शौच, कूड़ा-करकट इत्यादि।
  6. रसोईघर तथा कारखानों से निकलने वाला धुंआ।
  7. खनिजों का अवैज्ञानिक खनन एवं दोहन।
  8. विभिन्न रेडियोधर्मी पदार्थों का विकिरण।

वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
वायु प्रदूषण को रोकने हेतु निम्न उपाय किए जा सकते हैं।

  1. पदार्थों का शोधन करना।
  2. घरेलू रसोई एवं उद्योगों आदि में ऊँची चिमनियों द्वारा धुएँ का निष्कासन।
  3. परिवहन के साधनों पर धुआँरहित यन्त्र लगाना।
  4. ईंधन के रूप में सीएनजी, एलपीजी, बायो डीजल आदि का प्रयोग करना।
  5. वन तथा वृक्ष संरक्षण करना, सड़कों के किनारे पेड़ लगाना।
  6. खुले में शौच न करना, बायोटायलेट का निर्माण करना।
  7. नगरों में मल-जल की निकासी का उचित प्रबन्ध करना।
  8. सीवर लाइन, टैंक आदि का निर्माण करना।
  9. नगरों में हरित पट्टी का विकास करना।
  10. प्रदूषण को रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाना।
  11. स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से बच्चों में चेतना फैलाना।
  12. उद्योगों, फैक्टरियों आदि को आवास स्थल से दूर स्थापित करना तथा उनसे निकलने वाले अपशिष्ट के निस्तारण का समुचित उपाय करना।

जल प्रदूषण
जल के मुख्य स्रोतों में अशुद्धियों तथा हानिकारक तत्त्वों का समाविष्ट हो जाना ही जल प्रदूषण है। जल में जैव-रासायनिक पदार्थों तथा विषैले रसायनों, सीसा, कैडमियम, बेरियम, पारा, फॉस्फेट आदि की मात्रा बढ़ने पर जल प्रदूषित हो जाता है। इन प्रदूषकों के कारण जल अपनी उपयोगिता खो देता है तथा जीवन के लिए घातक हो जाता है। जल प्रदूषण दो प्रकार का होता है-दृश्य प्रदूषण एवं अदृश्य प्रदूषण।।
जल प्रदूषण के कारण
जल प्रदूषण निम्नलिखित कारणों से फैलता है।

  1. उद्योगों; जैसे-चमड़ा उद्योग, रसायन उद्योग आदि से निकलने वाला | अवशिष्ट पदार्थ, गन्दा जल आदि जल स्रोतों को दूषित कर देता है।
  2. नगरीकरण के परिणामस्वरूप अवशिष्ट पदार्थों आदि का जल में मिलना। यमुना नदी इस प्रकार के प्रदूषण का ज्वलन्त उदाहरण है।
  3. नदियों में कपड़े धोना अथवा उनमें नालों आदि का गन्दा जल मिलना।
  4. कृषि में प्रयुक्त कीटनाशकों, अपमार्जकों आदि का वर्षा के माध्यम से जले स्रोतों में मिलना।
  5. समुद्री परिवहन, तेल का रिसाव आदि से जल स्रोत का दूषित होना।।
  6. परमाणु ऊर्जा उत्पादन एवं खनन के परिणामस्वरूप विकिरण युक्त जल का नदी, समुद्र में पहुँचना।
  7. नदियों में अधजले शव, मृत शरीर आदि का विसर्जन।
  8. घरेलू पूजा सामग्री, मूर्तियों आदि का जल में विसर्जन।

जल प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
जल प्रदूषण की रोकथाम हेतु निम्नलिखित उपाय सम्भव हैं।

  1. नगरों में अशुद्ध जल को ट्रीटमेण्ट के उपरान्त शुद्ध करके ही नदियों में छोड़ना।
  2. सीवर ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट एवं उद्योगों में ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट लगाकर अशुद्ध जल एवं अवशिष्ट सामग्री का शोधन करना।।
  3. समुद्री जल में औद्योगिक गन्दगी आदि को न मिलने देना।
  4. मृत जीव एवं चिता के अवशेष आदि नदियों में प्रवाहित न होने देना।
  5. नदियों तथा तालाबों की समय-समय पर सफाई करना।
  6. नदियों, तालाबों के जल में कपड़े न धोना।
  7. नदियों में धार्मिक आयोजन के अवशिष्ट पदार्थों को न फेंकना।
  8. कृषि में जैव उर्वरकों को प्रयोग करना।।
  9. जल प्रदूषण नियन्त्रण हेतु जन-जागरूकता फैलाना एवं सहयोग के लिए प्रेरित करना

प्रश्न 3.
पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते हैं? पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न कारण बताइए?
अथवा
पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? पर्यावरण प्रदूषण के सामान्य कारकों का उल्लेख कीजिए तथा उसे नियन्त्रित करने के उपाय भी बताइए।
अथवा
पर्यावरण प्रदूषण से क्या तात्पर्य है? प्रदूषण के कारण तथा मानव पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण से आशय
पर्यावरण प्रदूषण से आशय पर्यावरण के किसी एक या सभी भागों का दूषित होना है। यहाँ दूषित होने से आशय पर्यावरण के प्रकृति प्रदत्त रूप में इस प्रकार परिवर्तन होता है, जोकि मानव जीवन के लिए प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करे। पर्यावरण प्रदूषण जल, मृदा, वायु तथा ध्वनि के रूप में हो सकता है। पर्यावरण के इन कारकों के आधार पर ही पर्यावरण प्रदूषण के चार रूप हैं।

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. मृदा प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण

पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण
पर्यावरण प्रदूषण अपने आप में एक गम्भीर तथा व्यापक समस्या है। पर्यावरण प्रदूषण के लिए मुख्यतः मानव समाज ही जिम्मेदार है। विश्व में मानव ने जैसे-जैसे सभ्यता का बहुपक्षीय विकास किया है, वैसे-वैसे उसने प्राकृतिक पर्यावरण को प्रभावित किया है। पर्यावरण प्रदूषण के असंख्य कारण हैं, परन्तु उनमें से मुख्य एवं अधिक प्रभावशाली सामान्य कारण निम्नलिखित हैं।

1.औद्योगीकरण तीव्र औद्योगीकरण पर्यावरण प्रदूषण के लिए एक मुख्य कारक है। औद्योगिक संस्थानों में ईंधन जलने से वायु प्रदूषण होता है, वहीं औद्योगिक अपशिष्टों का उत्सर्जन जल एवं मृदा प्रदूषण तथा उद्योगों की मशीनों का शोर ध्वनि प्रदूषण फैलाने में सहायक है। विश्व में हर जगह तीव्र औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।

2.नगरीकरण नगरीकरण के परिणामस्वरूप जनसंख्या के बड़े भाग का नगरीय क्षेत्रों में बसना प्रदूषण का एक मुख्य कारण है। नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न उद्योगों की स्थापना, पानी की अतिरेक खपत, परिवहन साधनों के बढ़ते प्रयोग आदि ने प्रदूषण बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

3.घरेलू जल-मल का अनियमित निष्कासन आवासीय क्षेत्रों में खुले में शौच, विभिन्न घरेलू अपशिष्ट आदि द्वारा वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है।

4.घरेलू अपमार्जकों का प्रयोग घर में प्रयुक्त अनेक अपमार्जक पदार्थ; जैसे-मक्खी, मच्छर, खटमल, कॉकरोच, दीमक आदि को नष्ट करने के लिए विभिन्न दवाओं का प्रयोग, विभिन्न दवाइयाँ एवं साबुन, तेल आदि वायु अथवा जल के माध्यम से हमारे पर्यावरण में मिल जाते हैं तथा पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि करते हैं।

5.दहन एवं धुआँ रसोईघर, उद्योगों, परिवहन के साधनों आदि द्वारा विभिन्न प्रकार की गैसों एवं धुएँ में वृद्धि से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जोकि हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है।।

6.कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों एवं रासायनिक उर्वरक का प्रयोग कृषि कार्य हेतु विभिन्न प्रकार के कीटनाशक एवं रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग द्वारा प्रदूषण में वृद्धि हुई है। विभिन्न लाभकारक कीटों को भी कीटनाशकों द्वारा समाप्त किया जाता है। कीटनाशक एवं उर्वरक वर्षा जल के माध्यम से नदियों में मिलकर एवं नृदा में मिलकर जल एवं मृदा प्रदूषण में योगदान करते हैं फीनोल, मेथाक्सीक्लोर आदि कीटनाशकों एवं उर्वरक के प्रमुख उदाहरण हैं।

7.वृक्षों की अत्यधिक कटाई/वन विनाश वन विनाश के परिणामस्वरूप वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है, क्योंकि वन/वृक्ष ही जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर एवं प्राणदायक ऑक्सीजन प्रदान करके वायुमण्डल में ऑक्सीजन का सन्तुलन बनाए रखते हैं। अत: वन विनाश पर्यावरण प्रदूषण का एक प्रमुख कारक है।

8.विभिन्न भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि वर्तमान समय में प्रयुक्त | एसी, फ्रिज, वाटरहीटर आदि से विभिन्न प्रकार की जहरीली गैसे निकलती हैं, जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि होती है। एसी से निकलने वाली सीएफसी गैस इसका प्रमुख उदाहरण है।

9.परिवहन के साधन वर्तमान समय में परिवहन के साधनों; जैसे-कार, ट्रक, मोटरसाइकिल, हवाई जहाज, पानी के जहाज आदि में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इन साधनों में पेट्रोल डीजल के दहन से विभिन्न जहरीली गैसें; जैसे-कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि निकलती हैं, जिनसे वायु प्रदूषण होता है। इनके चलने से एवं हॉर्न से उत्पन्न शोर से क्रमशः ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है।

10.रेडियोधर्मी पदार्थों द्वारा प्रदूषण परमाणु ऊर्जा, परमाणु परीक्षणों आदि से वातावरण में रेडियोधर्मी पदार्थों का समावेश होता है, जोकि पर्यावरण प्रदूषण का एक प्रमुख कारक है। इस कारक का पर्यावरण के जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति पर हानिकर प्रभाव पड़ता है।

पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम/ नियन्त्रण के उपाय
पर्यावरण प्रदूषण एक गम्भीर समस्या है। वर्तमान समय में विश्व के समस्त देश इस समस्या को लेकर चिन्तित हैं तथा इसके समाधान हेतु प्रयासरत् हैं। भारत एवं विश्व में इस समस्या के समाधान हेतु निम्नलिखित प्रमुख प्रयास किए जा रहे हैं।

  1. उद्योगों एवं घरेलू स्तर पर धुएँ की निकासी हेतु ऊँची चिमनी का प्रयोग – करना।
  2. उद्योगों एवं फैक्टरियों से निकले अपशिष्ट पदार्थ, जल आदि को पूर्ण | रूप से उपचारित करने के पश्चात् ही निष्कासित करना।
  3. फैक्टरियों एवं उद्योगों की स्थापना आवासीय क्षेत्र से दूर करना।
  4. वाहन प्रदूषण की रोकथाम हेतु वाहनों की समय-समय पर जाँच | करवाना।
  5. ईंधन की कम-से-कम खपत करना, अनावश्यक ईंधन व्यर्थ न करना।
  6. कृषि में जैव-उर्वरकों का प्रयोग करना। परिवहन ईंधन के रूप में सीएनजी, एलपीजी आदि पर्यावरण हितैषी ईंधन को बढ़ावा देना। ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन हेतु एलपीजी एवं गोबर गैस संयन्त्रों की स्थापना करना।
  7. जन सामान्य को पर्यावरण के प्रति सचेत करना। | इन सभी उपायों को लागू करके पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है, इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

जन स्वास्थ्य पर प्रभाव
जन स्वास्थ्य पर प्रभाव निम्नलिखित हैं।

  1. प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियाँ; जैसे-हैजा, कॉलरा, टायफाइड आदि होती हैं।
  2. ध्वनि प्रदूषण से सर दर्द, चिड़चिड़ापन, रक्तचाप बढ़ना, उत्तेजना, हृदय की धड़कन बढ़ना आदि समस्याएँ होती हैं।
  3. जल प्रदूषण से टायफाइड, पेचिश, ब्लू बेबी सिण्ड्रोम, पाचन सम्बन्धी विकार (कब्ज) आदि समस्याएँ होती हैं।
  4. वायु प्रदूषण से फेफड़े एवं श्वास सम्बन्धी, श्वसन-तन्त्र की बीमारियाँ होती हैं।

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 15 वैवाहिक समायोजन

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Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 15
Chapter Name वैवाहिक समायोजन
Number of Questions Solved 13
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 15 वैवाहिक समायोजन

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
एक संस्था है।
(a) जन्म
(b) विवाह
(c) समाज
(d) जाती
उत्तर
(b) विवाह

प्रश्न 2.
वैवाहिक समायोजन के तत्त्व है।
(a) सहयोग
(b) संस्था
(c) पर्यावरण
(d) ये सभी
उत्तर:
(a) सहयोग

प्रश्न 3.
सहयोग सामाजिक एवं ………… समायोजन है।
(a) गुणों का
(b) आर्थिक
(c) लैंगिक
(d) व्यापारिक
उत्तर:
(c) लैंगिक

प्रश्न 4.
पति-पत्नी के बीच असामंजस्य के कारण ।
(a) संवेगात्मक असन्तुलन
(b) आर्थिक अभाव
(c) संयुक्त परिवार
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
विवाह क्या है?
उत्तर:
विवाह एक सामाजिक संस्था है, जो किसी-न-किसी रूप में विश्व के सभी समाजों में पाई जाती है। विवाहित स्त्री-पुरुष को एक सिक्के के दो पहलू अथवा गृहस्थ जीवन को गाड़ी के दो पहुए माना जाता है। इस प्रकार वैवाहिक जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्त्री-पुरुष दोनों का समय होना 
अनिवार्य है।

प्रश्न 2.
वैवाहिक समायोजन में कौन-कौन से तत्त्व सम्मिलित होते हैं?
उत्तर:
वैवाहिक समायोजन में सहयोग, दायित्वों की पूर्ति, प्रेमपूर्ण व्यवहार, 
अटूट विश्वास, मनपसन्द गौवन साथी तथा धार्मिक विश्णास मुख्य तत्व हैं।

प्रश्न 3.
सहयोग किस प्रकार का समायोजन है?
उत्तर:
सहयोग सामाजिक एवं लैगिक समायोजन है। पति तथा पत्नी दोनों के कार्य अलग-अलग होते हैं। इनमें पत्नी घर के काम-काज देखती है तथा पति कृत्रि में बाहरी कार्यों को देखता है। अत: दोनों को परस्पर सहयोग की 
आवश्यकता होती है।

प्रश्न 4.
बेमेल विवाह की मुख्य समस्या क्या है।
उत्तर:
बेमेल विवाह की मुख्य समस्या आपसी विचारों का न मिलना होता है। विवाह में सड़के व सड़की की आयु यदि एक-दूसरे से बहुत कम अथवा बहुत 
आपके हो तब भी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 5.
वैवाहिक अनुकूलन के कोई दो उपाय बताइट।
उत्तर:
वैवाहिक सम्बन्धों में अनुकूलन के दो उपाय निम्नलिखित हैं।

  • संवेगों में सामंजस्य
  • शिक्षा का प्रसार होना

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
वैवाहिक समायोजन के किन्हीं दो तत्त्वों को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
विशाह संग्ग्या में पति व फनी एक-दूसरे के पूरक होते हैं। अतः समायोजन के बिना किसी भी स्त्री-पुरुष का वैवाहिक जीवन सुचारु रूप से नहीं चल सकता। समायोजन में संवेगात्मक, सामाजिक एवं शैगिक तथा आर्थिक सहित कई आवश्यक तत्त्व समिति होते हैं, जिन्हें प्यान में रखका वैवाहिक जीवन को सफल बनाया जा सकता है।

  1. सहयोग सहयोग सामाजिक एवं गक समायोजन है। पति तथा पो दोनों के कार्य अलग अलग होते हैं। इनमें पत्नी पर के काम-काज देखती है तथा पति खेतों एवं बाहरी कार्यों को देखता हैं। अतः दोनों को परस्पर सहयोग को आवश्यकता होती है।
  2. दायित्वों की पूर्ति यदि विवाहोपरान्त पति व पत्नी दोनों ही जोबिकौशन के लिए नौकरी करते हैं तब दोनों को अपने परिवार के प्रति दायित्वों का निर्वहन अपना कार्य सम्झकर करना चाहिए। इससे वैवाहिक सामंजस्य बना रहता है।

प्रश्न 2.
वैवाहिक जीवन में सामंजस्य क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
चक विवाह एक सामाजिक संस्था है, जहाँ त सभी एक-दूसरे के पूरक कहलाते हैं। इस सभा में समायोजन के बिना पति-पत्नी के गृहस्थी की गाढ़ी ठीक इंग से नहीं चल सकती हैं। वैवाकि जैन को सफल बनाने के लिए कुछ वैवाहिक सम्योजन के तत्वों की आवश्यकता होती है, जो निम्नलिखित हैं।

  1. प्रेमपूर्ण व्यवहार पति-पत्नी के बीच एक दूसरे के सेट में वफादारी का व्यवहार होना चाहिए। सम्बन्ध मधुर रहने से दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है।
  2. अटूट विश्वास वाह सम्बन्ध विश्वास पर टिका होता है। यदि पति-पत्नी एक-दूसरे पर विश्वास नहीं करते हैं तो उनका परिवार टूट जाता है।
  3. मनपसन्द जीवन साथी होना भारतीय समाज में अधिकांशतः वैवाहिक सम्बन्। माता-पिता द्वारा ही जोड़े जाते हैं। अत: माता-पिता को चाहिए कि वह एक-दूसरे | के अनुरूप ही जीवन साथी का चुनाव करे।
  4. धार्मिक विश्वास भारतीय सामाजिक परिप्रेक्ष्य में गिह एक पवित्र एवं धार्मिक क्या है, जहाँ पति-पत्नी का सम्बन्ध ईश्वर की इड़ा से जोड़ा जाता है। यहाँ विवाह के समय लिए गए मन्त्रों से वनभर सम्म निभाए जाते हैं।

प्रश्न 3.
लड़के और लड़कियों में पाए जाने वाले सामाजिक भेद लिखिए (2018)
उत्तर:
लड़के से लड़कियों में पाए जाने वाले सभी सामाजिक भेदों का आधार लैंगिक असमानता ही होता है। गगक असमानता से तात्पर्य ही भार पर लड़कियों के साथ भेदभाव से है। परम्परागत रुप से समाज में लड़कियों को कमजोर वर्ग के रूप में देखा जाता है। वे घर और समाज दोनों जगहों पर शोषण, अपन और भेदभाव से पॉड़ित होती हैं। इस प्रकार लड़के एवं लड़कियों में पाए जाने वाले सामाजिक भेद निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है

  1. भारत में पुरुष प्रधान समाज की व्यवस्था रही है, जिसमें स्त्रियों पर पुरुषों का वर्चस्व रहा है।
  2. भारत में ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था में स्त्रियों को घर के अन्दर रहकर घरेलू कार्य करने होते हैं।
  3. स्त्रियों में अशिक्षा होने के कारण वे अन्यविश्वास तथा मनगढन्त धार्मिक गाथाओं की झूठी बातों में दबी रहती हैं।
  4. भारतीय समाज में स्त्रियों की सम्पत्ति में समान अधिकार न मिलने के कारण भी उनका वर्चस्व अपेक्षाकृत कम रहता है।
  5. स्त्रियों को शारीरिक एवं मानसिक दृष्टिकोण से कमजोर माना जाता है, जिसके रूण उन्हें रोजगार सम्बन्धी कार्यों में भी लैंगिक विभेदता का सामना करना पड़ता हैं।
  6. स्त्रियों के आर्थिक रूप से सम्पन्न न होने के कारण वे सदैव पिता, पति भाई अथवा बच्चों पर ही आश्रित रहती है।
  7. विभिन्न धार्मिक कार्यों में भी पुरुषों को अपेक्षाकृत अधिक महत्व दिया जाता है।
  8. पितृसत्ताक समाज होने के कारण लड़की की अपेक्षा तहके के जन्म पर अधिक उल्लास एवं खुशी मनाई जाती है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1.
वैवाहिक असमायोजन के क्या कारण हैं? इस समस्या का निराकरण कैसे हो सकता है? समझाइए। 
(2018)
या
अधरा वैवाहिक समायोजन क्या है? विवाहित जीवन में असामंजस्य के प्रमुख 
कारणों का उल्लेख करते हुए वैवाहिक अनुकूलन के उपाय बताइट।
या
अधरा वैवाहिक समायोजन क्या है तथा इसमें असामंजस्य के कौन-कौन से 
कारण होते हैं।
उत्तर:
विवाह एक सामाजिक संस्था है, जो किसी-न-किसी रूप में विश्व के सभी समाजों में पाई जाती हैं। विहित रु-पुरुष को एक सिक्वे के दो पहलू अश्या गृह जीवन की गाड़ी के दो पहिए माना जाता है। इस प्रकार वैवाहिक जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्त्री-पुरुष दोनों का माझ होना अनिवार्य है। 

वैवाहिक समायोजन का अर्थ

विवाह के पश्चात् पति-पत्नी को एक दूसरे के स्वभाव, चि एवं भावनाओं के अनुसार कार्य करना सुखी वैवाहिक जीवन कहलाता है। यदि वैवाहिक जीवन में अनुतन न हो तो आपसी समय बिताया जा सकता, किन्तु जब पति व पत्नी त्याग व सहयोग से ओवन व्यतीत करते हैं, वह वैवाहिक समायोजन कलाता है।

विवाहिक जीवन में असामंजस्य तथा उसके कारण

वैाहिक जीवन में प्रेम, सहानुभूति, विश्वास तथा सहयोग की आवश्यकता होती है, जिसे पति-पत्नी अपना कर्तव्य समझकर उसका पालन करते हैं, किन्तु कभी-कभी इस जीवन में कुछ असमानता आ आती है और परिवार बिखर जाता है। वैवाहिक जीवन में असामंजस्य के कारण म्नलिखित हैं।
1. संवेगात्मक असन्तुलन मार में जन्म से ही संवेग होते है, जिसमें 
मुख-दुख परस्पर आते-जाते रहते हैं। विवाह के चात् जब पति य पत्नी साम ते हैं तब दोनों ही मुख-दुख के भागी होते हैं और एक-दूसरे को मान देने के लिए स्वयं उनके अनुरूप ढाल लेते हैं, किनु कहीं-कहीं पर यह भी सम्भावना होती है कि पति-पानी के विचार आपस में मिलते हों, जिसके कारण उनमें आपसी संघर्ष होते हैं।

2. आर्थिक अभाग मानव जीवन की आवश्यकताएँ कभी समाप्त नहीं होती। एक के बाद एक नई आवश्यकताएँ उत्पन्न होती रहती हैं, जिन्हें पूर्ण करना क-कभी असम्भव होता है। मध्यम आय वर्ग वाले परिवार में कि। स्त्री की आवश्यकता पूर्ण नहीं होती, तो वह अपने पति से संपर्ष करने लगती है। इससे घर में लेश या जाता हैं। धीरे-धीरे यह क्लेश इतना बढ़ जाता है कि दोनो सम्बन्ध बिच्छेद के लिए तैयार हो जाते हैं।

3. यौन इच्छाओं की पूर्ति न होना आधुनिक युग में यौन सम्बन्धो को लेकर युवक व युवतियों को कई प्रान्तिय राहती हैं। यही कारण है कि विवाह के पश्चात् वे एक दूसरे की कारों को पूर्ण नहीं कर पाते तथा इनमें आपस में तनाव उत्पन्न होता है, जो वैहिक जीवन में परेशानियों खड़ी करते हैं।

4. संयुक्त परिवार ज्यादातर संयुक्त परिवारों के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल की कमी होती है, इनके विचार भी आपस में नहीं मिलते। चाही समस्या पति-पत्नी के बीच भी उत्पन्न होती है, जो बहू और घर के अन्य सदस्यों को आपस में नहीं बनती। पति अथ । की अपेक्षा अपने परिवार को भा।। का पालन करता है तब पति और पत्नी के बोच मनमुटाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं।

5. बेमेल विवाह विवाह में लड़के व लड़की की आयु यदि एक-दूसरे से चात कम् असा मत ज्यादा हो य भो मरमा आग होती हैं। इनकी समस्या के मूल में आपसी विचारों का न मिलना ही मुख्य होता है।

वैवाहिक अनुकूलन के उपाय
वैवाहिक अनुलन के उपाय निम्नलिखित हैं।

  1. पति-पत्नी का स्कोर रूप से व्यवहार पति-पान को आपसी मतभेदों का त्यागकर आपसी समस्या रखना चाहिए, ताकि एक-दूसरे के प्रति पूर्ण व्यवहार बना रहे।
  2. उचित विवाह विवाह लड़के-लड़किओं की वियों, आदतों व स्वभाव के अनुकूल विवाह होना चाहिए, उम्र में ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए ।
  3. शिक्षा यदि लड़के व लड़की दोनों शिक्षित होते हैं, तो वैवाक जीवन सुचारु रुप से चलता है तथा परिवार ज्यादा समायोजित होता है।
  4. विश्वास में सहयोग विश्वास ही परिवार की बुनियाद है। पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति विश्वास व सहयोग को भग्न रखनी चाहिए।
  5. मनोरंजन करना वैवाहिक जीवन में पति पत्नी को घोड़ा समय निकालकर मनोरंजन करना चाहिए, जिससे दोनों को कुछ बदलाव तया प्रसन्नता की अनुभूति होती हैं।

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Name नियुक्ति आवेदन-पत्र
Number of Questions 3
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र

कुछ महत्वपूर्ण बातें

  1. अन्य पत्रों के समान आवेदन तथा प्रर्थनापत्र में पत्र-लेखक अपना नाम-पतादि प्रारम्भ में नहीं लिखता और न ही प्रारम्भ में दिनांक लिखा जाता है। आंवेदक अपना पता पत्र-समाप्ति पर अन्त में हस्ताक्षर के नीचे दायीं ओर लिखता है और बायीं ओर दिनांक लिखा जाता है।
  2. इन पत्रों का प्रारम्भ प्रथम पंक्ति में बायीं ओर कोने में ‘सेवा में या ‘प्रति’ लिखने से होता है।
  3. ‘सेवा में लिखकर दूसरी पंक्ति में बायीं ओर से कुछ स्थान छोड़कर उद्दिष्ट अधिकारी का पदनाम और पता लिखा जाता है।
  4. सम्बोधन के रूप में मान्यवर/मान्य महोदय/महोदया लिखना चाहिए।
  5. निवेदन प्रारम्भ करते हुए प्रारम्भिक विनय-वाक्य लिखना चाहिए; जैसे-सादर निवेदन है।सविनय निवेदन है आदि।।
  6. आवेदन का सम्पूर्ण कथ्य लिखने के उपरान्त शिष्टाचार के लिए सधन्यवाद लिखना चाहिए।
  7. स्वनिर्देश के रूप में भवदीय/विनीत/प्रार्थी लिखना चाहिए। स्वनिर्देश के नीचे हस्ताक्षर और पूरा पता देना चाहिए।
  8. अन्त में संलग्न प्रपत्रों की सूची देनी चाहिए।

आवेदन-पत्र की दो शैलियाँ होती हैं—

  1. प्रपत्र शैली तथा
  2. पत्र शैली। दोनों ही शैली के उदाहरण यहाँ दिये जा रहे हैं।

प्रश्न 1.
लिपिक पद हेतु हिन्दी में प्रपत्र शैली में एक आवेदन-पत्र लिखिए।
या
अपनी शैक्षिक योग्यताओं का उल्लेख करते हुए किसी उद्योग प्रबन्यक को लिपिक के पद पर नियुक्ति हेतु एक आवेदन-पत्र लिखिए।
या
अपने जनपद के जिलाधिकारी को उनके कार्यालय में रिक्त लिपिक पद पर नियुक्ति पाने के लिए एक आवेदन-पत्र लिखिए।
या
प्रधानाचार्य प्रबन्धक महोदय को लिपिक पद पर नियुक्ति हेतु एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर:
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र img-1
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र img-2
9. शुल्क विवरण-पोस्टल आर्डर संलग्न (संख्या 05921, दिनांक …………………………………) मैं घोषणा करती हूँ कि आवेदित पद के लिए सभी निर्धारित अर्हताएँ मुझमें हैं। मैंने जो सूचनाएँ इस आवेदन-पत्र में दी हैं, वे सही हैं। यदि इनमें से कोई भी जानकारी गलत पायी जाये तो मेरी उम्मीदवारी निरस्त कर दी जाये।।
10. संलग्नकों की संख्या : तीन
दिनांक : 14 मई, 2014

भवदीया
हस्ताक्षर
[ नाम …………………………………..]

प्रश्न 2.
सहायक अध्यापक पद के लिए पत्र शैली में शिक्षा-निदेशक के नाम एक आवेदन-पत्र लिखिए।
या
किसी विद्यालय के प्रबन्धक के नाम हिन्दी प्रवक्ता पद हेतु अपनी नियुक्ति के लिए आवेदन-पत्र लिखिए।
या
अपने जनपद के किसी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य करने के लिए अपना आवेदन-पत्र विद्यालय-प्रबन्धक को प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
सेवा में,
शिक्षा निदेशक
लखनऊ

विषय-सहायक अध्यापक पद के लिए आवेदन-पत्र।

महोदय,
दिनांक 11 मार्च, 2010 के ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में प्रकाशित आपके विज्ञापन के उत्तर में मैं हिन्दी में सहायक अध्यापक पद के लिए आवेदन कर रहा हूँ। मेरी शैक्षणिक योग्यताओं एवं अन्य जानकारियों का विवरण इस प्रकार है–
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र img-3
अन्य गतिविधियाँ-विद्यालय तथा महाविद्यालय स्तर पर हुई वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में प्रथम पुरस्कार विजेता, कुछ एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के सफल संचालन का अनुभवे।

स्थायी पता-15A, सी-ब्लॉक, शास्त्रीनगर, मेरठ।
मेरी अध्यापन में अत्यधिक रुचि है। यदि आपने इस पद का उत्तरदायित्व मुझे सौंपा, तो मैं पूर्ण निष्ठा से उसका निर्वाह करूंगा तथा कभी शिकायत का अवसर नहीं दूंगा।।
सेवा का अवसर प्रदान कर कृतार्थ करें।
धन्यवाद!

भवदीया

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र img-4

प्रश्न 3.
बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्राइमरी शिक्षक के पद के लिए आवेदन-पत्र लिखिए।
या
समाचार-पत्र में दिये गये विज्ञापन के आधार पर सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हेतु अपने जनपद के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक आवेदन-पत्र लिखिए।
या
समाचार-पत्र में प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर ग्राम पंचायत अधिकारी पद पर नियुक्ति हेतु अपने जनपद के जिला पंचायत राज अधिकारी को एक आवेदन-पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
बेसिक शिक्षा अधिकारी,
मेरठ (उ० प्र०)

विषय-प्राइमरी शिक्षक के पद हेतु आवेदन-पत्र।

महोदय,
आपके कार्यालय द्वारा कल दिनांक ………….. को दैनिक जागरण में प्रकाशित विज्ञापन के प्रत्युत्तर में मैं अपना आवेदन-पत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ। मुझसे सम्बन्धित विवरण निम्नवत् है-
UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi नियुक्ति आवेदन-पत्र img-5
शैक्षणिक योग्यताएँ—

  1. 2002 ई० में उ० प्र० बोर्ड से 62% अंक लेकर हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण की।
  2. 2004 ई० में उ० प्र० बोर्ड से 61% अंक लेकर इण्टरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की।
  3. 2006 ई० में दो वर्षीय बी० टी० सी० प्रशिक्षण कोर्स (उ० प्र०) से किया।

अनुभव-सितम्बर 2006 से अब तक जनता विद्यालय, मेरठ में प्राथमिक शिक्षक के रूप में कार्य कर रहा हूँ।
आशा है कि आप सेवा का अवसर प्रदान कर कृतार्थ करेंगे।
दिनांक …………………………….

भवदीय
रूपेश कुमार

संलग्नक-सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ व अनुभव प्रमाण की मूल प्रति।

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 20 बाल कल्याण की आधुनिक गतिविधियाँ, संगठन

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Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 20
Chapter Name बाल कल्याण की आधुनिक गतिविधियाँ, संगठन
Number of Questions Solved 16
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 20 बाल कल्याण की आधुनिक गतिविधियाँ, संगठन

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
शिशु सुरक्षा के संगठन हैं।
(a) भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी
(b) यूनिसेफ
(c) कस्तूरबा गाँधी ट्रस्ट
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 2.
यूनीसेफ की स्थापना कब हुई थी? (2005, 16)
(a) वर्ष 1945
(b) वर्ष 1949
(c) वर्ष 1946
(d) वर्ष 1944
उत्तर:
(c) वर्ष 1946

प्रश्न 3.
यूनीसेफ का मुख्यालय कहाँ है?
(a) पेरिस
(b) न्यूयॉर्क
(C) टोकियो
(d) हेग
उत्तर:
(b) न्यूयॉर्क

प्रश्न 4.
यूनीसेफ का क्या कार्य है? (2014)
(a) वन जीवों की सुरक्षा करना.
(b) माता एवं शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना
(c) सैनिकों की सुरक्षा करना
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(b) माता एवं शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना

प्रश्न 5.
भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मुख्य कार्यालय है।
(a) दिल्ली
(b) कोलकाता
(C) मुम्बई
(d) हैदराबाद
उत्तर:
(a) दिल्ली

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान, भारत सरकार के किस मन्त्रालय के अन्तर्गत कार्यरत् है?
(a) महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय
(b) युवा मामले का मन्त्रालय
(c) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय

प्रश्न 7.
एकीकृत बाल विकास योजना का लक्ष्य है।
(a) छ: वर्ष तक के बच्चों को पोषण
(b) गर्भवती महिलाओं को उत्तम स्वास्थ्य
(c) स्तनपान कराने वाली माताओं का पोषण
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

प्रश्न 1.
बाल कल्याण से क्या तात्पर्य है? (2005)
अथवा
बाल कल्याण संगठन के कार्य क्या है? (2018)
उत्तर:.
शिशु के जन्म एवं उसके उचित पालन-पोषण के लिए नियमों एवं उपायों का व्यवस्थित अध्ययन एवं उस अध्ययन का क्रियान्वयन करना बाल कल्याण कहलाता है।

प्रश्न 2.
रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा मातृ एवं बाल कल्याण के लिए क्या कार्य किया जाता है?
उत्तर:
यह सोसायटी अनाथालय एवं अस्पतालों में असहाय लोगों को नि:शुल्क दूध एवं दवाइयाँ आदि सामग्री वितरित करती है।

प्रश्न 3.
कस्तूरबा गाँधी ट्रस्ट के द्वारा मातृ एवं बाल कल्याण के लिए कौन-सा कार्य किया जाता है?
उत्तर:
यह संस्था गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान एवं प्रसव के बाद प्रत्येक प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करती है; जैसे-नि:शुल्क दूध एवं दवा का वितरण, प्रसव सम्बन्धी जागरूकता फैलाना इत्यादि।

प्रश्न 4.
भारत में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड’ किस मन्त्रालय के अधीन कार्य करता है?
उत्तर:
भारत में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड केन्द्रीय मानव संसाधन मन्त्रालय के अधीन कार्य करता है।

प्रश्न 5.
शिशु कल्याण योजनाएँ कौन-कौन सी हैं? (2006)
उत्तर:
एकीकृत बाल विकास सेवा योजना, इन्दिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना, जननी सुरक्षा योजना आदि केन्द्र प्रायोजित मातृ एवं बाल कल्याण योजनाएँ हैं।इसके अतिरिक्त मातृ-शिशु कल्याण केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आदि की स्थापना भी बाल कल्याण कार्यक्रम के अंग हैं।

प्रश्न 6.
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कहाँ पर बनाए गए हैं? (2009)
उत्तर:
हमारे देश में ग्रामीण क्षेत्रों के सभी विकास खण्डों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

प्रश्न 7.
बाल कल्याण कार्यक्रमों की सफलता हेतु दो सुझाव बताइए।
उत्तर:
बाल कल्याण कार्यक्रमों की सफलता हेतु दो सुझाव निम्नलिखित हैं।

  1. कार्यक्रमों के समय-समय पर निरीक्षण हेतु एक उत्तरदायी एवं निरपेक्ष संस्था की व्यवस्था होनी चाहिए।
  2. बाल कल्याण कार्यक्रमों एवं नीतियों के क्रियान्वयन में स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

प्रश्न 1.
बाल कल्याण कार्यक्रमों के असन्तोषजनक परिणामों के कारणों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद से ही भारत जैसे देश में विभिन्न संस्थाओं एवं सरकार द्वारा बाल कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए गए हैं, लेकिन आज भी इन योजनाओं का लाभ पूरी तरह से वांछित लोगों तक नहीं पहुँच पाता है, इसके निम्नलिखित कारण हैं।

  1. मातृ एवं शिशु कल्याण के कार्यक्रम बन तो जाते हैं, लेकिन वे फाइलों में ही बन्द पड़े रहते हैं, उनका क्रियान्वयन उचित तरीके से नहीं हो पाता है।
  2. बाल कल्याण कार्यक्रम के लिए देश के लगभग प्रत्येक कोने में केन्द्र स्थापित किए गए, लेकिन इन केन्द्रों में आवश्यक सामग्री प्राप्त नहीं हो पाती है।
  3. दूध पिलाने वाली माताओं के लिए नि:शुल्क दिया जाने वाला दूध, औषधि एवं अन्य सामग्री चोरी कर ली जाती है।
  4. अनेक केन्द्रों पर कुशल कर्मी नहीं हैं और जहाँ कुशल कर्मी हैं, तो वे ठीक से अपना काम नहीं करते हैं।
  5. अशिक्षा के कारण ग्रामीण महिलाएँ इन योजनाओं का लाभ नहीं ले पाती हैं।
  6. इन सबके अतिरिक्त अस्पतालों में अशिक्षित एवं गरीब ग्रामीणों से अवैध | वसूली की जाती है। उनसे सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार नहीं किया जाता है, जिससे परेशान होकर वे अस्पताल जाने से डरते हैं।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक, 100 शब्द)

प्रश्न 1.
बाल कल्याण संगठन और संस्थाओं के प्रकार। (2018)
अथवा
बाल कल्याण से आपका क्या अभिप्राय है? विभिन्न बाल कल्याणकारी योजनाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। ‘बाल कल्याण आन्दोलन’ का उल्लेख करें (2006, 17)
अथवा
विभिन्न आधुनिक मातृ एवं शिशु कल्याण संगठनों एवं सेवाओं के बारे में विस्तार से लिखिए। (2006)
अथवा
बाल कल्याण संगठन क्या हैं? बाल कल्याण संगठन के कार्यों का वर्णन कीजिए। (2011)
अथवा
बाल कल्याण से आपका क्या अभिप्राय है? बाल कल्याण के लिए आजकल शासकीय और अशासकीय कौन-कौन सी योजनाएँ हैं? वर्णन कीजिए। | (2009, 10, 16)
उत्तर:
ऐसे कार्यक्रम, जिनसे बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके, बाल कल्याण कार्यक्रम कहलाता है। बाल कल्याण कार्यक्रम के | अन्तर्गत माताओं की देखभाल भी शामिल होती है, क्योंकि जब माँ स्वस्थ होगी तभी बच्चा भी स्वस्थ होगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विभिन्न नगरों एवं ग्रामों में बाल कल्याण की योजनाओं को जरूरतमन्दों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों की स्थापना की गई है। ये संगठन सरकारी एवं गैर-सरकारी दोनों प्रकार के होते हैं। सरकार द्वारा व्यापक रूप से बॉल कल्याण के कार्यक्रम चलाए जाते हैं। विभिन्न संगठनों एवं सरकार द्वारा संचालित बाल कल्याण कार्यक्रम का योगदान इस प्रकार है।

बाल कल्याण संगठन
इन संगठनों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है

  • यूनीसेफ
  • केयर
  • भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी
  • कस्तूरबा गाँधी ट्रस्ट
  • विकलांगों हेतु शिक्षा-प्रबन्धन संस्थाएँ

यूनीसेफ
द्वितीय विश्वयुद्ध से पीड़ित माताओं एवं । बच्चों के कल्याण के लिए इस संगठन की बाल कल्याण संगठन स्थापना वर्ष 1946 में की गई। इसके द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को भी सहायता दी जाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं बालकों के पोषण के सम्बन्ध में यह संगठन विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health संस्थाएँ। Organisation) और खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organisation) की भी सहायता करता है।

केयर
इसके द्वारा बाल कल्याण के कार्य किए जाते हैं। यह संस्था मुख्यतः पोषण सम्बन्धी समस्याओं के समाधान का कार्य करती है।

भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी
इस संगठन का मुख्यालय दिल्ली में स्थित है। भारत में मातृ एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में सर्वप्रथम इसी संगठन ने अपना योगदान दिया। यह संस्था अनाथालय एवं अस्पतालों में असहाय लोगों को निःशुल्क सामग्री वितरित करती है।

कस्तूरबा गाँधी ट्रस्ट
कस्तूरबा गाँधी ट्रस्ट विभिन्न नगरों एवं गाँवों में महिलाओं एवं शिशुओं की सुरक्षा के लिए विभिन्न प्रकार से सहायता करती है। यह संस्था प्रसवपूर्व, प्रसव के दौरान एवं प्रसव के बाद उत्पन्न समस्याओं के समाधान के बारे में ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करने का भी काम करती है।

विकलांगों हेतु शिक्षा-प्रबन्धन संस्थाएँ
प्रत्येक समाज में कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं, जो अपने धन का उपयोग करके विकलांगों के लिए शिक्षा व्यवस्था का प्रबन्धन करते हैं। ऐसे परोपकारी व्यक्तियों एवं समाज सेवकों के कारण ही विकलांग बच्चे अपने जीवन में कुछ आनन्द प्राप्त कर पाते। हैं। भारत के अनेक नगरों में मूक-बधिर स्कूल स्थापित किए जा चुके हैं।

सरकार द्वारा संचालित बाल कल्याण कार्यक्रम
इन संगठनों के अतिरिक्त सरकार की ओर से भी विभिन्न स्तर पर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

नगरों में बाल कल्याण सम्बन्धी योजनाएँ
विभिन्न नगरों में अनेक मातृ-शिशु कल्याण केन्द्र खोले गए हैं, जहाँ माँ और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है। इन केन्द्रों में विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं ।

प्रसव पूर्व की सुरक्षा इन केन्द्रों पर प्रसव से पूर्व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जाँच के साथ नि:शुल्क परामर्श दिए जाते हैं, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

प्रसव के दौरान की सुरक्षा प्रसव के लिए इन केन्द्रों पर सुव्यवस्थित प्रसवगृह की व्यवस्था की गई है, जहाँ प्रसव के दौरान महिलाओं को कुशल चिकित्सक एवं प्रशिक्षित नर्मों की सेवाएँ मिलती रहती हैं। ये सारी सुविधाएँ महिलाओं को नि:शुल्क दी जाती हैं।

प्रसव के बाद की सुरक्षा प्रसव के बाद माँ एवं बच्चा दोनों की नियमित जाँच की जाती है तथा रोगग्रस्त होने पर उनका नि:शुल्क उपचार किया जाता है।

गाँवों में बाल कल्याण सम्बन्धी योजनाएँ
सरकार के द्वारा गाँवों में जगह-जगह सामुदायिक विकास केन्द्रों की स्थापना की गई, जो लोगों को स्वास्थ्य से सम्बन्धित शिक्षा देते थे। इसके अतिरिक्त विकासखण्डों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आज लगभग सभी विकासखण्डों में प्राथमिक केन्द्र खोले जा चुके हैं। यहाँ ग्रामीणों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इन केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान एवं प्रसव के बाद देखभाल सम्बन्धी परामर्श दिया जाता है।

जन-स्वास्थ्य परिचारिका (स्वास्थ्यचर) जनस्वास्थ्य परिचारिकाओं द्वारा घर-घर जाकर स्वास्थ्य सम्बन्धी शिक्षा दी जाती है। ये ग्रामीण महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान एवं प्रसव के बाद दिए जाने वाले आहार के बारे में जानकारी देती हैं। प्रत्येक स्वास्थ्य परिचारिका को लगभग 200 गर्भवती महिलाओं, 200 शिशुओं और 700 बालकों, जिनकी आयु 3 से 4 वर्ष हो, की देखभाल करनी होती है।

दाइयों को प्रशिक्षित करना प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव कराने के लिए प्रशिक्षित दाइयों की आवश्यकता होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में दाइयों के लोग घर पर भी प्रसव करा लेते हैं। अत: इनका प्रशिक्षित होना अतिआवश्यक है। इस प्रकार ग्रामीण महिलाएँ इन प्रशिक्षित दाइयों के सहयोग से अपने तथा अपने शिशु की रक्षा कर सकती हैं।

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