UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 5 अथातो घुमक्कड़-जिज्ञासा

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 5 अथातो घुमक्कड़-जिज्ञासा (राहुल सांकृत्यायन) are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 5 अथातो घुमक्कड़-जिज्ञासा (राहुल सांकृत्यायन).

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Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 5
Chapter Name अथातो घुमक्कड़-जिज्ञासा (राहुल सांकृत्यायन)
Number of Questions 5
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 5 अथातो घुमक्कड़-जिज्ञासा (राहुल सांकृत्यायन)

लेखक का साहित्यिक परिचय और कृतियाँ

प्रश्न 1.
राहुल सांकृत्यायन का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों पर प्रकाश डालिए।
या
राहुल सांकृत्यायन को साहित्यिक परिचय दीजिए एवं उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

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इन्होंने पाँच बार सोवियत संघ, श्रीलंका और तिब्बत की यात्रा की। छ: मास वे यूरोप में रहे। एशिया को तो, इन्होंने छान ही डाला था। कोरिया, मंचूरिया, ईरान, अफगानिस्तान, जापान, नेपाल आदि देशों का पर्यटन करने में इन्होंने अपना बहुत-सा समय बिताया। इन्होंने भारत के तो कोने-कोने का भ्रमण किया। बद्रीनाथ, केदारनाथ, कुमाऊँ-गढ़वाल से लेकर कर्नाटक, केरल, कश्मीर, लद्दाख तक भ्रमण किया। राहुल जी मुक्त विचारों के व्यक्ति थे। घुमक्कड़ी ही इनकी पाठशाला थी। यही इनका विश्वविद्यालय था। इन्होंने विश्वविद्यालय की चौखट पर पैर भी नहीं रखा था। भारत का यह पर्यटन-प्रिय साहित्यकार 14 अप्रैल, सन् 1963 ई० को संसार त्यागकर परलोक सिधार गया।

साहित्यिक योगदान–राहुल जी उच्चकोटि के विद्वान् और अनेक ऋषाओं के ज्ञाता थे। इन्होंने धर्म, दर्शन, पुराण, इतिहास, भाषा एवं यात्रा पर ग्रन्थों की रचनाएँ कीं। हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में इन्होंने ‘अपभ्रंश काव्य-साहित्य और दक्षिणी हिन्दी-साहित्य’ आदि श्रेष्ठ रचनाएँ प्रस्तुत की। इनकी रचनाओं में प्राचीनता का पुनरावलोकन, इतिहास का गौरव और तत्सम्बन्धी स्थानीय रंगत विद्यमान है। इनकी साहित्यिक सेवाओं का निरूपण निम्नलिखित रूपों में किया जा सकता है-

निबन्धकार के रूप में निबन्धकार के रूप में राहुल जी ने भाषा और साहित्य से सम्बन्धित निबन्धों की रचना की, जिनमें धर्म, इतिहास, राजनीति और पुरातत्त्व प्रमुख हैं। इन्होंने रूढ़ियों के बन्धन ढीले करने के लिए धर्म, ईश्वर, सदाचार आदि विषयों पर निबन्ध लिखे। अपने निबन्धों में इन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने । पर पर्याप्त बल दिया तथा उर्दू-मिश्रित हिन्दी का विरोध किया। उपन्यासकार के रूप में राहुल जी ने अपने उपन्यासों में भारत के प्राचीन इतिहास का गौरवशाली रूप प्रस्तुत किया है। इन्होंने ‘सिंह सेनापति’ नामक उपन्यास में राजतन्त्र और गणतन्त्र की तुलना करते हुए गणतन्त्र को श्रेष्ठ सिद्ध किया है।

कहानीकार के रूप में राहुल जी के कहानी-संग्रहों में ‘वोल्गा से गंगा’ और ‘सतमी के बच्चे’ श्रेष्ठ संग्रह हैं। ‘वोल्गा से गंगा में इन्होंने पिछले आठ हजार वर्षों के मानव-जीवन का विकास कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है। ‘सतमी के बच्चे कहानी-संग्रह में आकर्षक और कलात्मक ढंग से (लघु मानव) के प्रति राग और ममता को प्रस्तुत किया गया है।

अन्य विधा-लेखक के रूप में इनके – अतिरिक्त राहुल जी ने जीवनी, संस्मरण और यात्रा-साहित्य की विधाओं पर भी प्रभावशाली रीति से सुन्दर रचनाएँ लिखीं। ‘मेरी जीवन यात्रा’ नामक इनका आत्मकथात्मक ग्रन्थ पाँच खण्डों में विभक्त है। ‘बचपन की स्मृतियाँ’, ‘असहयोग के मेरे साथी’ आदि संस्मरणात्मक रचनाओं में इनका व्यक्तित्व उभरा है। इन्हें यात्रा-साहित्य लिखने में सर्वाधिक सफलता मिली है। इनकी रचनाओं में देश-विदेश की यात्राओं का वर्णन है। घुमक्कड़शास्त्र में घुमक्कड़ी का महत्त्व बताया गया है।

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साहित्य में स्थान-भाषा के प्रकाण्ड पण्डित राहुल सांकृत्यायन ने अपने अनुभव पर आधारित विशद लेखन से हिन्दी-साहित्य के विकास में अपूर्व योगदान दिया है। इन्होंने अपनी साहित्यिक रचनायों में प्राचीन इतिहास एवं वर्तमान जीवन के उन अंशों पर भी लिखा है, जिन पर आमतौर पर अन्य लेखकों की दृष्टि भी नहीं गयी थी।

गद्यांशों पर आधारित प्रश्नोत्तर

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 शिक्षा का उद्देश्य

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 शिक्षा का उद्देश्य (डॉ० सम्पूर्णानन्द) are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 शिक्षा का उद्देश्य (डॉ० सम्पूर्णानन्द).

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Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 4
Chapter Name शिक्षा का उद्देश्य (डॉ० सम्पूर्णानन्द)
Number of Questions 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 4 शिक्षा का उद्देश्य (डॉ० सम्पूर्णानन्द)

लेखक का साहित्यिक परिचय और भाषा-शैली

प्रश्न 1.
डॉ० सम्पूर्णानन्द की साहित्यिक सेवाओं (परिचय) का उल्लेख कीजिए।
या
डॉ० सम्पूर्णानन्द का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए।
या
डॉ० सम्पूर्णानन्द का साहित्यिक परिचय दीजिए एवं उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए।

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साहित्य में स्थान–डॉ० सम्पूर्णानन्द ने हिन्दी में गम्भीर विषयों पर निबन्धों और ग्रन्थों की रचना की। इनकी रचनाओं में मौलिक चिन्तन, गम्भीरता और उच्च स्तर का पाण्डित्य पाया जाता है। सम्पादन के क्षेत्र में भी इन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है। एक मनीषी साहित्यकार के रूप में हिन्दी-साहित्य में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान सदा बना रहेगा।

गद्यांशों पर आधारित प्रश्नोत्तर

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 3 आचरण की सभ्यता

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Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name आचरण की सभ्यता (सरदार पूर्णसिंह)
Number of Questions 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 3 आचरण की सभ्यता (सरदार पूर्णसिंह)

लेखक का साहित्यिक परिचय और कृतियाँ

प्रश्न 1.
“सरदार पूर्णसिंह का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए।
या
सरदार पूर्णसिंह का साहित्यिक परिचय दीजिए एवं उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए।

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UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 2 महाकवि माघ का प्रभात-वर्णन

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 2 महाकवि माघ का प्रभात-वर्णन (आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी) are part of UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 2 महाकवि माघ का प्रभात-वर्णन (आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी).

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Class Class 11
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name महाकवि माघ का प्रभात-वर्णन (आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी)
Number of Questions 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Samanya Hindi गद्य गरिमा Chapter 2 महाकवि माघ का प्रभात-वर्णन (आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी)

लेखक का साहित्यिक परिचय और कृतियाँ


प्रश्न 1.
आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का संक्षिप्त जीवन-परिचय लिखिए तथा उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए।
या
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर

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कृतियाँ-द्विवेदी जी की प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं-
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साहित्य में स्थान–द्विवेदी जी हिन्दी गद्य के उन निर्माताओं में से हैं, जिनकी प्रेरणा और प्रयत्नों से हिन्दी भाषा को सम्बल प्राप्त हुआ है। इन्होंने और इनकी ‘सरस्वती ने अपने युग के साहित्यकारों का मार्गदर्शन कर अपनी प्रतिभा से पूरे युग को प्रभावित किया।

गद्यांशों पर आधारित प्रश्नोत्तर

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्यांजलि Chapter 7 महाकवि भूषण

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Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 7
Chapter Name महाकवि भूषण
Number of Questions 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्यांजलि Chapter 7 महाकवि भूषण

कवि-परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ

प्रश्न:
कवि भूषण का जीवन-परिचय लिखिए।
या
कवि भूषण की काव्यगत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
कवि भूषण का जीवन-परिचय लिखते हुए उनकी कृतियों का नामोल्लेख कीजिए तथा साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय: कविवर भूषण का जन्म संवत् 1670 वि० (सन् 1813 ई०) में कानपुर जिले के तिकवाँपुर (त्रिविक्रमपुर) ग्राम में हुआ था। इनके पिता पं० रत्नाकर त्रिपाठी संस्कृत के महान् विद्वान् एवं ब्रजभाषा के अच्छे कवि थे। ये कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। भूषण का वास्तविक नाम क्या था? इसकी कोई जानकारी नहीं मिलती। एक दोहे से विदित होता है कि चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्रदेव ने इन्हें ‘भूषण’ की उपाधि दी थी। कदाचित् कालान्तर में ये ‘भूषण’ नाम से इतने विख्यात हुए कि इनका वास्तविक नाम ही विलुप्त हो गया। इनके जीवन का प्रारम्भिक चरण अकर्मण्यता से ग्रसित था, परन्तु भाभी के एक कटु व्यंग्य ने इनका जीवन बदल डाला। ये मर्माहत हो घर से निकल गये। कहाँ गये, कैसे रहे, इसका कुछ पता नहीं चलता, पर जब ये दस वर्षों के बाद घर लौटे तो इनमें पाण्डित्य एवं कवित्व-शक्ति का पर्याप्त विकास हो चुका था, जिसका राज्याश्रयों में उत्तरोत्तर विकास होता रहा। ये कई राजदरबारों में रहे, परन्तु इन्हें सन्तुष्टि न मिली। अन्त में मनोवांछित आश्रयदाताओं के रूप में इन्हें वीर शिवाजी व छत्रसाल मिले। इन दोनों ने भूषण को पर्याप्त सम्मान दिया। संवत् 1772 वि० (सन् 1715 ई०) के लगभग इनकी मृत्यु हो गयी।

रचनाएँ – भूषण की कीर्ति के आधारस्तम्भ इनके तीन काव्य-ग्रन्थ हैं – (1) शिवराज भूषण, (2) शिवा बावनी और (3) छत्रसाल दशक। शिवसिंह सरोज ने ‘भूषण-हजारा’ व ‘भूषण-उल्लास’ नामक दो अन्य रचनाओं को भी भूषणकृत माना है, परन्तु उनका यह मत प्रमाणपुष्ट नहीं है।

काव्यगत विशेषताएँ

भावपक्ष की विशेषताएँ

राष्ट्रीयता की भावना – भूषण के काव्य की सबसे बड़ी विशेषता उनकी राष्ट्रीयता है। यद्यपि रीतिकाल के अन्य कवियों की भाँति ये भी राज्याश्रित कवि थे और इन्होंने भी अपने आश्रयदाताओं की यशोगान किया है, तथापि इनकी मनोवृत्ति उनसे भिन्न रही है। इन्होंने वीर शिवाजी तथा छत्रसाल को हिन्दू संस्कृति के रक्षक के रूप में देखा, इसीलिए उन्हें अपने काव्य का नायक बनाकर उनकी प्रशस्ति की। भूषण की कविताओं ने उस समय सम्पूर्ण राष्ट्र को चेतना प्रदान की। इनकी रचनाओं की यही विशेषता इनको ‘राष्ट्रीय कवि’ कहने के लिए बाध्य करती है।

वीर रस की मार्मिक व्यंजना – भूषण के काव्य की दूसरी विशेषता वीर रस की अभूतपूर्व व्यंजना है। वीर रस को उद्दीप्त करने वाले सम्पूर्ण तत्त्व इनकी रचनाओं में विद्यमान हैं। अनेक पद्यों में शिवाजी की वीरता एवं उनका मुगलों पर आतंक बहुत प्रभावशाली रूप में चित्रित हुआ है; जैसे

गरुड़ को दावा जैसे नाग के समूह पर,
दावा नाग जूह पर सिंह सरताज को।

युद्ध में छत्रसाल की बरछी के कमाल द्रष्टव्य हैं

भुज भुजगेस की वै संगिनी भुजंगिनी-सी,
खेदि-खेदि खाती दीह दारुन दलन के।

भूषण ने शिवाजी एवं छत्रसाल की वीरता का वर्णन युद्ध-क्षेत्र में ही नहीं, अपितु दया, दान, धर्म आदि क्षेत्रों में भी किया है।
वीर रस के साथ रौद्र एवं भयानक रसों का वर्णन भी स्वाभाविक रूप में हुआ है। वीभत्स रस युद्ध-स्थलों पर स्वत: आ जाता है। इनकी रचनाओं में श्रृंगार रस के भी कई छन्द मिलते हैं, पर उनमें वह सौन्दर्य नहीं, जो वीर रस के पदों में है। भूषण की कविता ओज गुण की साक्षात् मूर्ति है।

कलापक्ष की विशेषताएँ

भूषण का कलापक्ष भी इतना उच्चकोटि का है कि उनके भावपक्ष और कलापक्ष में से कौन बढ़कर है, यह कह सकना कठिन है।।
भाषा – भूषण की भाषा में इतनी व्यंजकता एवं ओजस्विता है कि उसमें वीर रस को गर्जन सुनाई पड़ता है

इन्द्र जिमि जंभ पर, बाड़व सुअंभ पर,
रावण सदंभ पर रघुकुल राज है।।

भूषण के काव्य में प्रयुक्त ब्रजभाषा पूर्णतः शुद्ध ब्रजभाषा नहीं है, अपितु उसमें बुन्देलखण्डी, अवधी, अपभ्रंश, तत्कालीन अरबी और फारसी के शब्दों का भी योग है। ब्रजभाषा के अन्य कवियों की भाँति इच्छानुसार तोड़-मरोड़ एवं शब्दं गढ़ने की प्रवृत्ति भी इनमें दिखाई पड़ती है। भूषण ने लोकोक्तियों व मुहावरों के प्रयोग द्वारा भाषा एवं भाव में चमत्कार उत्पन्न किया है। , अलंकार-भूषण के काव्य में उत्प्रेक्षा, रूपक, उपमा, यमक, व्यतिरेक, व्याजस्तुति, अनुप्रास आदि अलंकारों का प्रयोग स्वाभाविक रूप में हुआ है। यमक का एक उदाहरण द्रष्टव्य है

ऊँचे घोर मंदर के अन्दर रहनवारी,
ऊँचे घोर मंदर के अन्दर रहाती हैं।

शब्दालंकारों के समावेश के चक्कर में इन्होंने शब्दों की तोड़-मरोड़ अवश्य की है, जिससे भाषा क्लिष्ट हो गयी है, परन्तु इनकी भाषा में ओज एवं प्रवाह निरन्तर बने रहे हैं; जैसे

पच्छी पर छीने ऐसे परे पर छीने वीर,
तेरी बरछी ने बर छीने हैं, खलन के।

शैली – भूषण की शैली अति प्रभावोत्पादक, चित्रमय, ओजपूर्ण, ध्वन्यात्मक एवं बहुत सशक्त है। इनकी शैली : युद्ध-वर्णन में प्रभावपूर्ण, ओजस्विनी तथा दानवीरता और धार्मिकता के चित्रण में प्रसादयुक्त है।

साहित्य में स्थान – भूषण की कविता भावपक्ष एवं कलापक्ष दोनों ही दृष्टियों से श्रेष्ठ है तथा हिन्दी के वीर रसात्मक काव्य में अद्वितीय स्थान की अधिकारिणी है।

पद्यांशों पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-दिए गए पद्यांशों को पढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

शिवा-शौर्य

प्रश्न 1:
साजि चतुरंग सैन अंग मैं उमंग धारि,
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं ।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के,
नदी नद मद गैबरन के रलते हैं ।।
ऐलफैल खेलभैल खलक में गैलगैल,
गजन की वैल पैल सैल उसलत हैं ।।
तारा सो तरनि धूरि धारा में लगत जिमि,
थारा पर पारा पारावार यों हलत हैं ।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) “सरजा’ की उपाधि से कौन सुशोभित थे?
(iv) शिवाजी की सेना कहाँ के लिए प्रयाण करती है?
(v) सूर्य तारे के समान क्यों दिखायी देने लगता है?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद महाकवि भूषण द्वारा रचित ‘भूषण ग्रन्थावली’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘शिवा-शौर्य’ शीर्षक काव्यांश से उदधृत है।
अथवा निम्नवत् लिखिए-
शीर्षक का नाम – शिवा-शौर्य।
कवि का नाम – महाकवि भूषण।
[संकेत-इस शीर्षक के शेष सभी पद्यांशों के लिए प्रश्न (i) का यही उत्तर लिखना है।]

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – भूषण कवि कहते हैं कि शिवाजी की सेना के युद्ध के लिए प्रस्थान करते समय बहुत अधिक धूल उड़ रही थी। उड़ती हुई धूल इतनी अधिक थी कि इस धूल में सूर्य एक तारे के समान प्रतीत हो रहा था। शिवाजी की विशाल सेना के भार से पृथ्वी भी काँप उठी थी। पृथ्वी के कम्पायमान हो जाने से समुद्र आदि भी हिलने लगे थे। समुद्र के हिलने से ऐसा प्रतीत होता था मानो किसी थाली में रखा हुआ पारा हिल रहा हो। तात्पर्य यह है कि शिवाजी की सेना इतनी अधिक विशाल थी कि उसके युद्ध के लिए प्रयाण करते समय उस स्थान पर ही नहीं, वरन् सम्पूर्ण पृथ्वी पर ही खलबली मच गयी थी और समस्त चराचर जगत् में अव्यवस्था का बोलबाला हो उठा था।
(iii) ‘सरजा’ की उपाधि से शिवाजी सुशोभित थे।
(iv) शिवाजी की सेना युद्ध के लिए प्रयाण करती है।
(v) शिवाजी की सेना के चलने से उड़ी धूल की विपुल राशि से सूर्य तारे के समान दिखायी देने लगता है।

प्रश्न 2:
बाने फहराने घहराने घंटा’गजन के,
नाहीं ठहराने राव राने देस देस के ।।
नग भहराने ग्राम नगर पराने सुनि, ।
बाजत निसाने सिवराजजू नरेस के ।।
हाथिन के हौदा उकसाने कुंभ कुंजर के,
भौन को भजाने अलि छूटे लट केस के ।
दल के दरारन ते कमठ करारे फूटे,
केरा के से पात बिहराने फन सेस के ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइट।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) शिवाजी की सेना के नगाड़ों को क्या प्रभाव दिखाई पड़ता है?
(iv) बालों की लटों के समान क्या प्रतीत होते हैं?
(v) किस कारण शेषनाग के फल केले के पत्तों जैसे चिर गए हैं?

उत्तर:
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – पौराणिक मान्यता के अनुसार विष्णु के 24 अवतारों में से एक अवतार कछुए को हुआ था, जिसने समुद्र मन्थन के समय मन्दराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया था। अन्य मान्यता के अनुसार पृथ्वी को शेषनाग (सहस्र फन वाले सर्प) ने अपने फनों पर धारण कर रखा है। इसी कछुए की कठोर पीठ शिवाजी की सेना के चलने की धमक से विदीर्ण हो गयी है और शेषनाग के फन केले के पत्तों के समान चिरकर अलग-अलग हो गये।
(iii) शिवाजी के प्रचण्ड नगाड़ों की ध्वनि से पहाड़ ढह गए और सेना के नमन-मार्ग में पड़ने वाले गाँवों के लोग भाग खड़े हुए।
(iv) हाथियों के गण्डस्थल पर मदपान के लिए एकत्रित भौंरे बालों की लटों के समान प्रतीत हो रहे हैं।
(v) शिवाजी की सेना के चलने की धमक से शेषनाग के फन केले के पत्तों के समान चिर गए हैं।

छत्रसाल-प्रशस्ति

प्रश्न 1:
भुज भुजगेस की वै संगिनी भुजंगिनी-सी,
खेदि खेदि खाती दीह दारुन दलन के ।
बखतर पाखरन बीच धेसि जाति मीन,
पैरि पार जात परवाह ज्यों जलन के ।।
रैयाराव चंपति, के छन्नसाले महाराज,
भूषन सकै करि बखान को बलन के ।
पच्छी पर छीने ऐसे परे पर छीने वीर,
तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) छत्रसाल की भुजा और बरछी को किसके समान बताया गया है?
(iv) छत्रसाल की बरछी ने किनको बलहीन कर दिया है?
(v) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस रस का अनुपम उदाहरण हैं?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद महाकवि भूषण की ‘भूषण-ग्रन्थावली’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘छत्रसाल-प्रशस्ति’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।
अथवा निम्नवत् लिखिए
शीर्षक का नाम – छत्रसाल-प्रशस्ति ।
कवि का नाम – महाकवि भूषण।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – युद्धभूमि में महाराज छत्रसाल की बरछी गजब का कौशल दिखा रही थी। जिस प्रकार पंख कट जाने पर पक्षी भूमि पर गिर पड़ते हैं, उसी प्रकार छत्रसाल की बरछी शत्रु पक्ष के बड़े-बड़े वीरों के हाथ-पैर काटकर उन्हें असहाय पक्षियों की भाँति भूमि पर गिरा रही थी।
(iii) छत्रसाल की भुजा को शेषनाग के समान और उनकी बरछी को शेषनाग की जीवन-संगिनी नागिन के समान भयंकर बताया गया है।
(iv) छत्रसाल की बरछी ने शत्रुओं के बल-पौरुष छीनकर उन्हें सर्वथा बलहीन कर दिया है।
(v) उपर्युक्त पंक्तियाँ वीर रस का अनुपम उदाहरण हैं।

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