UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi पद्य-साहित्य का विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 1
Chapter Name पद्य-साहित्य का विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Number of Questions 152
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi पद्य-साहित्य का विकास अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

सामान्य प्रश्न

प्रश्न 1:
हिन्दी-काव्य-साहित्य के विविध कालों का समय बताइट।
या
हिन्दी काव्य के इतिहास को कितने काल-खण्डों में विभाजित किया जाता है? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  आदिकाल (वीरगाथाकाल) – सन् 993 ई० से सन् 1318 ई० तक।
  2. पूर्व-मध्यकाल (भक्तिकाल) – सन् 1318 ई० से सन् 1643 ई० तक।
  3. उत्तर-मध्यकाल (रीतिकाल) – सन् 1643 ई० से सन् 1843 ई० तक।
  4. आधुनिककाल (गद्यकाल) – सन् 1843 ई० से अब तक।

प्रश्न 2:
कविता के बाह्य तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1.  लय,
  2. तुक,
  3.  छन्द,
  4. शब्द-योजना,
  5. चित्रात्मक भाषा तथा
  6.  अलंकार।

प्रश्न 3:
कविता के आन्तरिक तत्त्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1.  अनुभूति की व्यापकता,
  2.  कल्पना की उड़ान,
  3.  रसात्मकता और सौन्दर्य बोध तथा
  4.  भावों का उदात्तीकरण।

प्रश्न 4:
प्रबन्ध काव्य और मुक्तक काव्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रबन्ध काव्य में ऐसी धारावाहिक कथा होती है, जिसमें किसी घटना या कार्य का काव्यात्मक वर्णन होता है, किन्तु मुक्तक काव्य में प्रत्येक पद स्वतन्त्र होता है, उनका कथा रूप में सूत्रबद्ध होना अनिवार्य नहीं।

प्रश्न 5:
हिन्दी पद्य-साहित्य के इतिहास के विभिन्न कालों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. वीरगाथाकाल ( आदिकाल),
  2.  भक्तिकाल (पूर्व-मध्यकाल),
  3. रीतिकाल (उत्तरमध्यकाल) एवं
  4.  आधुनिककाल।

प्रश्न 6:
काव्य के कितने भेद होते हैं?
उत्तर:
काव्य के दो भेद होते हैं

  1. श्रव्य काव्य और
  2.  दृश्य काव्य।

प्रश्न 7:
प्रबन्ध काव्य के कितने भेद होते हैं?
उत्तर:
प्रबन्ध काव्य के दो भेद होते हैं

  1.  महाकाव्य और
  2.  खण्डकाव्य।

प्रश्न 8:
महाकाव्य और खण्डकाव्य में अन्तर बताइट।
उत्तर:
महाकाव्य की कथा में जीवन की सर्वांगीण झाँकी होती है, जब कि खण्डकाव्य में जीवन के एक पक्ष का चित्रण होता है। महाकाव्य की विस्तृत कथावस्तु पर अनेक खण्डकाव्य लिखे जा सकते हैं।

प्रश्न 9:
दो महाकाव्यों के नाम लिखिए ।
उत्तर:
दो महाकाव्यों के नाम हैं

  1.  श्रीरामचरितमानस और
  2. कामायनी।

प्रश्न 10:
दो खण्डकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
दो खण्डकाव्यों के नाम हैं

  1. जयद्रथ-वध और
  2. हल्दीघाटी।

प्रश्न 11:
हिन्दी का प्रथम महाकाव्य किसे माना जाता है? उसका रचनाकार कौन है?
उत्तर:
श्रीरामचरितमानस – तुलसीदास।

आदिकाल (वीरगाथाकाल)

प्रश्न 12:
हिन्दी-साहित्य का आदिकाल किस साम्राज्य की समाप्ति के समय से प्रारम्भ होता है?
उत्तर:
वर्द्धन साम्राज्य की समाप्ति के समय से हिन्दी साहित्य का आदिकाल प्रारम्भ होता है।

प्रश्न 13:
हिन्दी के आदिकाल का समय निर्देश कीजिए और हिन्दी के प्रथम कवि का नाम बताइट।
उत्तर:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार आदिकाल का समय 993 ई० से 1318 ई० तक माना जाता है। सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है।

प्रश्न 14:
हिन्दी का प्रथम कवि किसे माना जाता है? उनका रचना-काल कब से प्रारम्भ हुआ?
उत्तर:
सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। उनका रचना-काल 769 ई० से प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 15:
आदिकाल (वीरगाथाकाल) की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
या
आदिकालीन हिन्दी-साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
या
आदिकाल (वीरगाथाकाल) की किन्हीं दो प्रमुख काव्य-प्रवृत्तियाँ लिखिए।
या
आदिकाल के योगदान की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
विशेषताएँ – (1) आदिकाल में अधिकांश रासो ग्रन्थ लिखे गये; जैसे–पृथ्वीराज रासो, परमाल रासो आदि। इनमें आश्रयदाताओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा है। (2) वीर और श्रृंगार रस की प्रधानता है। (3) युद्धों का सुन्दर और सजीव वर्णन किया गया है। (4) काव्यभाषा के रूप में डिंगल और पिंगल का प्रयोग हुआ है। (5) काव्य-शैलियों में प्रबन्ध और गीति शैलियों का प्रयोग मिलता है। (6) सामूहिक राष्ट्रीयता की भावना को अभाव रहा है।

प्रश्न 16:
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के प्रमुख कवियों और उनकी कृतियों के नाम बताइए।
या
वीरगाथाकाल के किन्हीं दो प्रमुख काव्यों (रचनाओं) के नाम लिखिए।
उत्तर:
आदिकाल (वीरगाथाकाल) के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं – चन्दबरदायी (पृथ्वीराज रासो), नरपति-नाल्ह (बीसलदेव रासो), दलपति विजय (खुमान रासो), जगनिक (परमाल रासो या आल्हखण्ड), विद्यापति (पदावली), अब्दुल रहमान (सन्देश रासक), स्वयंभू (पउमचरिउ), धनपाल (भविसयत्तकहा), जोइन्दु (परमात्मप्रकाश), पुष्पदन्त (उत्तरपुराण) एवं अमीर खुसरो की फुटकर रचनाएँ।

प्रश्न 17:
वीरगाथाकाल (आदिकाल) में साहित्य रचना की प्रमुख धाराओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
इस काल की तीन प्रमुख काव्यधाराएँ निम्नलिखित हैं

  1.  संस्कृत काव्यधारा,
  2.  प्राकृत एवं अपभ्रंश काव्यधारा तथा
  3.  हिन्दी काव्यधारा।

प्रश्न 18:
आदिकाल के विभिन्न नाम बताइए।
या
‘वीरगाथाकाल के लिए प्रयुक्त दो अतिरिक्त नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वीरगाथाकाल, अपभ्रंशकाल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल, चारणकाल, बीजवपनकाल एवं सिद्ध-सामन्त युग आदि।

प्रश्न 19:
वीरगाथाकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
या
आदिकाल के किन्हीं दो कवियों (रचनाकारों) के नाम लिखिए।
उत्तर:
चन्दबरदायी, नरपति नाल्ह, दलपति विजय एवं जगनिक।

प्रश्न 20:
आदिकाल की चार प्रमुख कृतियों के नाम बताइए।
या
दो रासो काव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, परमाल रासो (आल्हखण्ड) एवं विद्यापति पदावली।

प्रश्न 21:
वीरगाथाकाल में रचनाएँ कौन-कौन-से काव्य रूपों में लिखी गयीं?
उत्तर:
प्रबन्धकाव्य और वीर गीतों के रूप में।

प्रश्न 22:
वीरगाथाकाल की रचनाओं में कौन-सी भाषा प्रयुक्त हुई है?
या
रासो ग्रन्थों में किन दो भाषाओं का प्रयोग किया गया है?
उत्तर:
डिंगल और पिंगल।

प्रश्न 23:
वीरगाथाकाल (आदिकाल) की दो प्रमुख रचनाओं एवं उनके कवियों के नाम लिखिए।
या
‘पृथ्वीराज रासो’ की रचना किस काल में हुई और उसके रचयिता कौन हैं?
उत्तर:
पृथ्वीराज रासो (चन्दबरदायी), परमाल रासो या आल्हखण्ड (जगनिक) ये वीरगाथाकाल (आदिकाल) की दो प्रमुख रचनाएँ हैं।

प्रश्न 24:
आदिकाल के साहित्य को कितने वर्गों में विभाजित किया जा सकता है?
उत्तर:
पाँच वर्गों में – (1) सिद्ध साहित्य, (2) जैन साहित्य, (3) नाथ साहित्य, (4) रासो साहित्य, (5) लौकिक साहित्य,

प्रश्न 25:
जैन साहित्य का सबसे अधिक लोकप्रिय रूप किन ग्रन्थों में मिलता है?
उत्तर:
जैन साहित्य को सर्वाधिक लोकप्रिय रूप ‘रास ग्रन्थों में मिलता है।

प्रश्न 26:
नाथ साहित्य के प्रणेता कौन थे? नाथ साहित्य के दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
नाथ साहित्य के प्रणेता मत्स्येन्द्र नाथ थे। इस साहित्य के दो प्रमुख कवियों के नाम हैं – गोरखनाथ, तथा जलन्धर।।

प्रश्न 27:
रासो साहित्य से सम्बन्धित किन्हीं दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वीराज रासो-चन्दबरदायी। बीसलदेव रासो-नरपति नाल्ह।

प्रश्न 28:
आदिकाल के सिद्ध साहित्य और जैन साहित्य के एक-एक प्रमुख कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
सिद्ध साहित्य के प्रमुख कवि हैं – सरहपा, शबरपा, लुइपा, डोम्भिपा, कण्हपा आदि जैन साहित्य के प्रमुख कवि हैं-आचार्य देवसेन, मुनिंशमलिभद्र सूरि, विजयसेन सूरि, जिनधर्म सूरि आदि।

प्रश्न 29:
गोरखनाथ के गुरु का क्या नाम था?
उत्तर:
गोरखनाथ के गुरु का नाम मत्स्येन्द्रनाथ (मछन्दरनाथ) था।

भक्तिकाल

प्रश्न 30:
भक्तिकाल की सभी प्रमुख काव्यधाराओं का परिचय दीजिए।
उत्तर:
भक्तिकाल में हिन्दी कविता दो’ धाराओं में प्रवाहित हुई – निर्गुण भक्ति-धारा और सगुण भक्ति-धारा निर्गुणवादियों में भी जिन्होंने ज्ञान को अपनाया, वे ज्ञानमार्गी और जिन्होंने प्रेम को अपनाया, वे मार्गी कहलाये। सगुणवादी जिन कवियों ने भगवान् के दुष्टदलनकारी-लोकरक्षक रूप को सामने रखा, वे शभक्ति शाखा से सम्बद्ध माने गये और जिन्होंने भगवान् के लोकरंजक रूप को सामने रखा, वे कृष्णभक्ति शाखा के कवि कहलाये।

प्रश्न 31:
भक्तिकाल की विभिन्न धाराओं के नाम बताइए।
या
निर्गुण भक्ति की दो शाखाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
भक्तिकाल में दो प्रकार की काव्य-रचना हुई –
(1) निर्गुणमार्गीय तथा
(2) सगुणमार्गीय।

  1. निर्गुण काव्य की दो धाराएँ हैं – (क) ज्ञानाश्रयीं-काव्यधारा तथा (ख) प्रेमाश्रयी काव्यधारा।
  2. सगुण काव्य की भी दो धाराएँ हैं – (क) कृष्णभक्ति-काव्यधारा तथा (ख) रामभक्ति-काव्यधारा।

प्रश्न 32:
सन्तकाव्य का अर्थ स्पष्ट कीजिए। इस धारा के प्रमुख कवि का नाम भी लिखिए।
उत्तर:
सन्तकाव्य से आशय निर्गुण ज्ञानाश्रयी-शाखा से है। ये भक्त निर्गुण-निराकार की उपासना करते हैं। और ज्ञान को उसकी प्राप्ति का साधन मानते हैं। इस धारा के प्रमुख कवि हैं—कबीर, रैदास, नानक, दादू , मलूकदास आदि।

प्रश्न 33:
भक्तिकाल की निर्गुण तथा सगुण भक्ति-धारा का परिचय दीजिए।
या
भक्तिकाल की एक प्रमुख काव्यधारा का परिचय लिखिए।
उत्तर:
जिस धारा में भगवान् के निर्गुण-निराकार रूप की आराधना पर बल दिया गया, वह निर्गुण धारा कहलायी और जिसमें सगुण-साकार रूप की आराधना पर बल दिया गया, वह सगुण धारा कहलायी। निर्गुणवादियों में जिन्होंने भगवत्-प्राप्ति के साधन-रूप में ज्ञान को अपनाया, वे ज्ञानमार्गी और जिन्होंने प्रेम को अपनाया, वे प्रेममार्गी कहलाये। ज्ञानमार्गी शाखा के सबसे प्रमुख कवि कबीर और प्रेममार्गी (सूफी) शाखा के मलिक मुहम्मद जायसी हुए।

प्रश्न 34:
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
या
ज्ञानाश्रयी भक्ति-शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। या भक्तिकाल की किन्हीं दो प्रमुख विशेषताओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  सद्गुरु का महत्त्व सर्वाधिक; सत्संग पर भी बल।
  2. निर्गुण की उपासना एवं अवतारवाद का खण्डन।
  3. भगवान् के नाम-स्मरण तथा भजन पर बल।
  4. धर्म के क्षेत्र में रूढ़िवाद, बाह्याचार एवं आडम्बर का विरोध तथा सामाजिक क्षेत्र में विषमता, ऊँच-नीच एवं छुआछूत का खण्डन।
  5. आन्तरिक शुद्धि एवं प्रेम साधना पर बल।
  6.  ईश्वर की एकता पर बल; अर्थात् राम-रहीम अभिन्न हैं।

प्रश्न 35:
ज्ञानाश्रयी शाखा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कवि-कबीर; रचित ग्रन्थ-बीजक, साखी।

प्रश्न 36:
प्रेमाश्रयी भक्ति-शाखा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ) लिखिए।
या
निर्गुण-पन्थ की प्रेमाश्रयी-शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
या
निर्गुण भक्ति की प्रेमाश्रयी-शाखा का संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर:

  1. मुसलमान होकर भी हिन्दू प्रेमगाथाओं का वर्णन, जिनमें हिन्दू संस्कृति का चित्रण मिलता है।
  2. सूफी सिद्धान्तों का निरूपण।
  3.  रहस्यवाद की चरम अभिव्यक्ति।
  4.  लौकिक वर्णनों के माध्यम से अलौकिकता की व्यंजना।
  5. मसनवी शैली का प्रयोग।
  6.  पूर्वी अवधीभाषा तथा दोहा-चौपाई छन्दों का प्रयोग।

प्रश्न 37:
प्रेमाश्रयी शाखा की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. पद्मावत् तथा
  2.  मृगावती।

प्रश्न 38:
कृष्ण-काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  1. श्रीमद्भागवत का आधार लेकर कृष्णलीला-गान।
  2.  सख्य, वात्सल्य एवं माधुर्य भाव की उपासना एवं लोकपक्ष की उपेक्षा।
  3. काव्य में श्रृंगार एवं वात्सल्य रसों की प्रधानता; मूल आधार कृष्ण के बाल और किशोर रूप का लीला वर्णन।
  4. ब्रज भाषा में मुक्तक काव्य-शैली की प्रधानता, जिसमें अद्भुत संगीतात्मकता का गुण विद्यमान है।

प्रश्न 39:
कृष्णभक्ति-काव्य में वर्णित प्रमुख रसों का नामोल्लेख करते हुए उस रचना का नाम भी बताइए, जिसमें उन सभी रसों का सर्वश्रेष्ठ चित्रण हुआ है।
उत्तर:
कृष्णभक्ति-काव्य में श्रृंगार रस का सांगोपांग एवं वात्सल्य और भक्ति रसों का प्रयोग प्रमुखता से हुआ है। सूरदास के ‘सूरसागर’ में इन सभी रसों का सर्वश्रेष्ठ चित्रण है।

प्रश्न 40:
कृष्ण-काव्यधारा के दो प्रमुख कवियों के नाम बताइट।
या
अष्टछाप के किन्हीं दो कवियों का नाम लिखिए।
या
वल्लभाचार्य के किन्हीं दो शिष्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
अष्टछाप के कवि ही कृष्ण-काव्यधारा के प्रमुख कवि थे। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के चार शिष्यों एवं अपने चार शिष्यों को मिलाकर महाप्रभु के सुपुत्र गोसाईं विट्ठलनाथ जी ने अष्टछाप की स्थापना की, जिसके आठ कवि थे – सूरदास, कुम्भनदास, परमानन्ददास, कृष्णदास, छीतस्वामी, गोविन्ददास, चतुर्भुजदास, नन्ददास। इनके अतिरिक्त अन्य प्रमुख कवि हैं-मीरा, रसखान, हितहरिवंश और नरोत्तमदास।

प्रश्न 41:
राम-काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ बताइट।
उत्तर:

  1.  लोकसंग्रह (लोकहित) की भावना के कारण मर्यादा की प्रबल भावना।
  2. राम का परब्रह्मत्व
  3.  दास्य भाव की उपासना।
  4. समन्वय की विराट् चेष्टा।
  5.  स्वान्त:सुखाय काव्य-रचना
  6.  अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं, प्रबन्ध और मुक्तक दोनों काव्य-शैलियों एवं विविध छन्दों का प्रयोग।

प्रश्न 42:
रामाश्रयी शाखा के दो प्रमुख कवियों का नाम दीजिए।
या
राम को नायक मानकर रचना करने वाले दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
गोस्वामी तुलसीदास और आचार्य केशवदास रामाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं। इन दोनों ने राम को नायक मानकर अपने काव्यों की रचना की है।

प्रश्न 43:
भक्तिकालीन काव्य को ‘हिन्दी कविता का स्वर्णयुग’ क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भावों की उदात्तता, महती प्रेरकता, अनुभूति-प्रवणता, लोकहित का मुखरित स्वर, भारतीय संस्कृति का मूर्तिमान रूप, समन्वय की विराट् चेष्टा तथा कलापक्ष की समृद्धि इस काल की ऐसी विशेषताएँ हैं, जो किसी अन्य काल के काव्य में इतनी उच्चकोटि की नहीं मिलतीं। इसीलिए भक्तिकाल को हिन्दी काव्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।

प्रश्न 44:
निम्नलिखित वाक्यों में से भक्ति-काल की दो सही प्रवृत्तियों को लिखिए
(क) श्रृंगार रस की प्रधानता
(ख) स्वान्तः सुखाय की भावना
(ग) राजप्रशस्ति की अभिव्यक्ति
(घ) भाव-पक्ष एवं कला-पक्ष का समन्वय तर
उत्तर:
(ख) स्वान्तः सुखाय की भावना तथा
(घ ) भाव-पक्ष एवं कला पक्ष को समन्वय

प्रश्न 45:
भक्तिकाव्य की दो प्रमुख शाखाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  निर्गुण – भक्तिशाखा और
  2. सगुण – भक्तिशाखा।।

प्रश्न 46:
भक्तिकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास, मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास और तुलसीदास।

प्रश्न 47:
भक्तिकालीन विभिन्न काव्यधाराओं में किस धारा का काव्य सर्वश्रेष्ठ है और उसका सर्वश्रेष्ठ कवि कौन है?
उत्तर:
सर्वश्रेष्ठ काव्यधारा-रामाश्रयी काव्यधारा तथा सर्वश्रेष्ठ कवि–गोस्वामी तुलसीदास।

प्रश्न 48:
भक्तिकाल की चार प्रमुख काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
बीजके, पद्मावत, सूरसागर तथा श्रीरामचरितमानस।

प्रश्न 49:
तुलसीदास एवं कबीरदास किस भक्तिधारा के कवि हैं?
उत्तर:
तुलसीदास भक्तिकाल क़ी सगुण भक्तिधारा की रामभक्ति-शाखा के कवि हैं तथा कबीरदास भक्तिकाल की निर्गुण भक्तिधारा के ज्ञानमार्गी शाखा के कवि हैं।

प्रश्न 50:
निर्गुण-काव्यधारा की कोई एक प्रमुख विशेषता बताइए और उसके प्रमुख कवि का नामोल्लेख कीजिए।
या
निर्गुण भक्ति-काव्यधारा के दो प्रसिद्ध कवियों के नाम बताइट।
उत्तर:
निर्गुण काव्य में परम ब्रह्म के निराकार स्वरूप की उपासना हुई तथा ज्ञान एवं प्रेम तत्त्व की प्रधानता रही। कबीर एवं मलिक मुहम्मद जायसी इस धारा के प्रमुख कवि हैं।

प्रश्न 51:
सन्त काव्यधारा के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास, रैदास, दादू तथा नानक।

प्रश्न 52:
प्रेममार्गी निर्गुण (सूफी) काव्यधारा के प्रमुख कवि का नाम तथा उनकी प्रमुख रचना की उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
कवि-मलिक मुहम्मद जायसी। रचना–पद्मावत (महाकाव्य)।

प्रश्न 53:
सूफी काव्यधारा की कुछ प्रमुख कृतियों के नाम लिखिए।
या
सूफी काव्य के दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
पद्मावत, मृगावती (कुतुबन), मधुमालती (मंझन), चित्रावली (उसमान) आदि।

प्रश्न 54:
“महिका सेसि कि कोहरंहिँ” कहने वाले कवि का नाम क्या था?
उत्तर:
प्रश्न में उल्लिखित पंक्ति कहने वाले कवि का नाम मलिक मुहम्मद जायसी था।

प्रश्न 55:
सगुण कृष्णभक्ति-शाखा के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सूरदास, मीरा, रसखान, कुम्भनदास, गोविन्ददास, नरोत्तमदास एव परमानन्ददास।

प्रश्न 56:
कृष्णाश्रयी शाखा के दो प्रमुख कवियों के नाम तथा उनकी एक-एक कृति का उल्लेख कीजिए।
या
महाकवि सूरदास की दो रचनाओं के नाम लिखिए।
या
कृष्ण को नायक मानकर रचना करने वाले दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. सूरदास-सूरसागर व साहित्यलहरी तथा
  2.  मीराबाई- नरसीजी का मायरा।

प्रश्न 57:
निम्नलिखित में से कौन-सी दो रचनाएँ भक्तिकाल की नहीं हैं?
(क) सूरसागर
(ख) बिहारी सतसई
(ग) बीजक
(घ) आँस
उत्तर:
‘बिहारी सतसई’ (रीतिकाल) और ‘आँसू (छायावाद) भक्तिकाल की रचनाएँ नहीं हैं।

प्रश्न 58:
राम-काव्यधारा के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
तुलसीदास राम-काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं। अन्य प्रमुख कवि हैं – केशवदास, नाभादास एवं सेनापति।

प्रश्न 59:
राम-काव्यधारा की रचना किन भाषाओं में हुई है?
उत्तर:
राम-काव्यधारा की रचना प्रमुख रूप से अवधी तथा ब्रजभाषा में हुई है।

प्रश्न 60:
ब्रजभाषा तथा अवधी भाषा के मध्यकालीन एक-एक प्रसिद्ध महाकाव्य का नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. ब्रजभाषा – सूरसागर तथा
  2. अवधी भाषा – श्रीरामचरितमानस।

प्रश्न 61:
रामाश्रयी एवं कृष्णाश्रयी शाखा के एक-एक प्रमुख काव्य का नाम लिखिए
उत्तर:
रामाश्रयी शाखा का प्रमुख महाकाव्य ‘श्रीरामचरितमानस तथा कृष्णाश्रयी शाखा का प्रमुख महाकाव्य ‘सूरसागर’ है।

प्रश्न 62:
सगुण भक्ति काव्यधारा के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सगुण भक्ति काव्य-धारा के दो प्रमुख कवियों के नाम हैं – (1) सूरदास (कृष्णाश्रयी काव्यधारा) तथा (2) गोस्वामी तुलसीदास (रेरामाश्रयी काव्यधारा)।

प्रश्न 63:
रामभक्ति-शाखा के किसी एक कवि तथा उसके द्वारा रचित ग्रन्थों के नाम लिखिए।
या
सगुण भक्तिधारा की रामाश्रयी शाखा के किसी एक कवि द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
या
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
या
‘गीतावली’ और ‘दोहावली भक्तिकाल के किस कवि की रचनाएँ हैं?
उत्तर:
तुलसीदास जी के चार ग्रन्थों के नाम हैं – (1) श्रीरामचरितमानस, (2) विनयपत्रिका, (3) कवितावली, (4) गीतावली, (5) दोहावली, (6) बरवै रामायण आदि।

प्रश्न 64:
भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी शाखा के एक कवि और उनकी एक रचना का नाम लिखिए।
या
निर्गुण भक्ति-शाखा की दो प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
या
मलिक मुहम्मद जायसी प्रणीत दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कवि – मलिक मुहम्मद जायसी और उनकी रचना का नाम है – पद्मावत और अखरावट।

प्रश्न 65:
भक्तिकाल की तीन सामान्य प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. जीव की नश्वरता का समान रूप से वर्णन है।
  2. प्रभु के नाम-स्मरण तथा गुरु की महत्ता का वर्णन सभी कवियों ने किया है।
  3. कवियों के नामोल्लेख की प्रवृत्ति रही है।

प्रश्न 66:
हिन्दी-साहित्य के विकास में भक्तिकाल के योगदान का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भक्त कवियों ने हृदय सागर का मन्थन कर मनोरम भावों का नवनीत प्रदान किया है। भाव, भाषा । और शैली की समृद्धि के कारण ही भक्तिकाल को हिन्दी-साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।

प्रश्न 67:
तुलसीदास के रचना काल का युग बताते हुए उनके द्वारा विरचित दो प्रसिद्ध काव्यकृतियों के नाम लिखिए जिनमें एक अवधी तथा दूसरी ब्रजभाषा की हो।
या
तुलसीदास किस काल के कवि हैं। उनकी एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
तुलसीदास का रचना काल पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल) में पड़ता है। इनकी कृतियाँ

  1. श्रीरामचरितमानस-अवधी भाषा तथा
  2.  विनय-पत्रिका–ब्रजभाषा।।

प्रश्न 68:
अवधी भाषा में लिखे गये दो प्रमुख महाकाव्यों और उनके रचनाकारों का नाम लिखिए।
उत्तर:
अवधी भाषा में लिखे गये दो प्रमुख महाकाव्यों के नाम हैं

  1.  ‘पद्मावत’ (मलिक मुहम्मद जायसी) तथा
  2. श्रीरामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास)।

प्रश्न 69:
द्वैतवाद के प्रवर्तक का नाम लिखिए।
उत्तर:
द्वैतवाद के प्रवर्तक श्री मध्वाचार्य हैं।

रीतिकाल

प्रश्न 70:
रीतिकाल का यह नाम क्यों पड़ा?
उत्तर:
संस्कृत काव्य – शास्त्र में रीति शब्द काव्यांश विशेष का सूचक रहा है। हिन्दी आचार्यों ने रीति का प्रयोग कवित्त – रीति, कवि – रीति, काव्य – रीति, अलंकार-रीति, रस – रीति, मुक्तक-रीति आदि के लिए किया है। सामान्यतया रीति शब्द काव्य – रचना की पद्धति के लिए प्रयुक्त होता है। रीति – निरूपण के निमित्त रचना में प्रवृत्त होने के कारण इसे ‘रीतिकाल’ की संज्ञा दी गयी।

प्रश्न 71:
रीतिकाल की प्रमुख साहित्यिक विशेषताएँ बताइए।
या
रीतिकालीन काव्य की प्रमुख विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।
उत्तर:

  1.  राज्याश्रित कवियों द्वारा लक्षण-लक्ष्य पद्धति पर काव्य-रचना की गयी (इस प्रकार की रचना करने वाले कवि रीतिबद्ध कहलाए)।
  2. कुछ कवियों ने उपर्युक्त पद्धति; अर्थात् रीति पद्धति का तिरस्कार क़र स्वतन्त्र काव्य-रचना की (ऐसे कवि रीतिमुक्त कहलाए)।
  3. श्रृंगार रस की प्रधानता, परन्तु वीर रस का भी ओजस्वी वर्णन।
  4.  मुख्यत: मुक्तक शैली एवं ब्रज भाषा का प्रयोग।
  5. भाव पक्ष की अपेक्षा कला पक्ष पर बल।

प्रश्न 72:
रीतिबद्ध काव्य के अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए इस प्रवृत्ति की किन्हीं दो रचनाओं और उसके रचयिताओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
जिस काव्य में काव्य-तत्त्वों का लक्षण देकर उदाहरण रूप में काव्य-रचनो प्रस्तुत की जाती है,
उसे रीतिबद्ध काव्य’ कहते हैं। इस प्रवृत्ति की रचनाओं और उनके रचयिताओं के नाम हैं

  1. रस-विलास – आचार्य चिन्तामणि तथा
  2. कविप्रिया-आचार्य केशवदास।

प्रश्न 73:
हिन्दी में रीतिबद्ध और रीतिमुक्त कविता का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
या
रीतिकाव्य कितनी धाराओं में विभाजित है? किन्हीं दो काव्यधाराओं के एक-एक प्रमुख कवि का नाम लिखिए।
या
रीतिकालीन साहित्य को किन दो वर्गों में विभाजित किया गया है?
उत्तर:
रीतिकाव्य मुख्य रूप से दो धाराओं – रीतिबद्ध और रीतिमुक्त – में विभाजित है। एक अन्य गौण विभाजन रीतिसिद्ध भी है। रीतिबद्ध काव्य के अन्तर्गत वे ग्रन्थ आते हैं, जिनमें काव्य-तत्त्वों के लक्षण देकर उदाहरण के रूप में काव्य – रचनाएँ की जाती हैं, जब कि रीतिमुक्त काव्यधारा की रचनाओं में रीति-परम्परा के साहित्यिक बन्धनों एवं रूढ़ियों से मुक्त; स्वच्छन्द रचनाएँ। रीतिमुक्त काव्यधारा के कवियों में घनानन्द का और रीतिबद्ध काव्यकारों में आचार्य चिन्तामणि को प्रमुख स्थान है।

प्रश्न 74:
रीतिकाल के चार प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
या
रीतिकाल के दो महत्त्वपूर्ण कवियों के नाम बताइए।
उत्तर:
केशवदास, बिहारीलाल, देव एवं घनानन्द।

प्रश्न 75:
रीतिकाल में वीर रस का प्रमुख कवि कौन था? उसकी एक रचना का नाम लिखिए।
या
रीतिकाल के किस कवि ने वीर रस की रचना लिखी है? यी भूषण किस रस के कवि थे?
उत्तर:
रीतिकाल में वीर रस में रचना करने वाले प्रमुख कवि ‘भूषण’ थे। उनकी प्रमुख रचना का नाम है-‘शिवराज भूषण’।।

प्रश्न 76:
केशवदास की दो प्रमुख काव्य-रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  रामचन्द्रिका तथा
  2.  कविप्रिया।।

प्रश्न 77:
रीतिकाल की दो काव्यकृतियों और उनके रचनाकारों के नाम लिखिए।
या
रीतिकाल के किन्हीं दो कवियों के नाम लिखिए और उनकी एक-एक रचना भी लिखिए।
या
रीतिकाल के एक प्रमुख कवि तथा उसकी रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  सतसई-बिहारी तथा
  2.  रामचन्द्रिका केशवदास।

प्रश्न 78:
रीतिकाल के चार रीतिबद्ध कवियों के नाम लिखिए।
या
रीतिकाल की रीतिबद्ध काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. चिन्तामणि,
  2. मतिराम,
  3. भूषण तथा,
  4. देवा ।

प्रश्न 79:
रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  घनानन्द,
  2.  ठाकुर,
  3.  बोधा,
  4.  आलम।

प्रश्न 80:
रीतिमुक्त काव्यधारा की किन्हीं दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रीतिमुक्तरीतिमुक्त काव्य की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1.  रीतिमुक्त काव्यों में हृदय की शुचिता और पावनता की ही अभिव्यक्ति हुई है।
  2.  रीतिमुक्त काव्यों में भावपक्ष की प्रधानता है, अलंकारादि की बाह्य अतिरंजक प्रवृत्ति नहीं हुई है।

प्रश्न 81:
रीतिकाव्य की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1.  आश्रयदाताओं की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा।
  2.  श्रृंगार और वीर रस की प्रधानता।
  3. रीतिकाल की कविता का प्रमुख स्वर श्रृंगार का था।
  4.  रीतिकाल के कवियों ने नारी को भोग्या रूप में प्रस्तुत किया।

प्रश्न 82:
रीतिकाल के किन्हीं दो आचार्य कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. आचार्य केशव-रामचन्द्रिका तथा
  2. आचार्य चिन्तामणि-रस-विलास।।

प्रश्न 83:
रीतिकाल में काव्य-रचना जिन छन्दों में की गयी है उनमें से दो प्रमुख छन्दों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. कवित्त तथा
  2.  सवैया।।

प्रश्न 84:
बिहारी तथा घनानन्द्र ‘रीतिकाल की किस धारा के कवि हैं?
उत्तर:
बिहारी रीतिबद्ध काव्यधारा के तथा घनानन्द रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि हैं।

प्रश्न 85:
निम्नलिखित कृतियों में कौन-सी दो रीतिकाल की रचनाएँ नहीं हैं
(क) उद्धवशतक,
(ख) शिवराजभूषण,
(ग) ललित ललाम,
(घ) गीतिका।
उत्तर:
उद्धवशतक तथा गीतिको।

प्रश्न 86:
‘कठिन काव्य का प्रेत’ किस कवि को कहा जाता है? उस कवि द्वारा रचित महाकाव्यात्मक कृति का नाम लिखिए
उत्तर:
कठिन काव्य का प्रेत ‘रीतिकालीन कवि आचार्य केशवदास को कहा जाता है। इनकी महाकाव्यात्मक कृति का नाम ‘रामचन्द्रिका’ है।

प्रश्न 87:
“सिवा को सराह, के सराह छत्रसाल को” उक्ति किसने कही थी?
उत्तर:
प्रश्न में उल्लिखित उक्ति महाकवि भूषण ने कही थी।

प्रश्न 88:
किस काल को गद्यकाल की संज्ञा दी गयी हैं।
उत्तर:
कविता के आधुनिककाल को गद्यकाल की संज्ञा दी गयी है।

आधुनिककाल

प्रश्न 89:
कविता के आधुनिककाल के प्रथम युग का नाम लिखिए तथा उस युग के एक प्रमुख कवि (प्रवर्तक कवि) का नाम बताइट।
उत्तर:
कविता के आधुनिककाल का प्रथम युग – भारतेन्दु युग। प्रमुख कवि – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

प्रश्न 90:
‘नवजागरण का अग्रदूत’ किस कवि को कहा जाता है? उसके द्वारा सम्पादित किसी एक पत्रिका का नाम लिखिए।
उत्तर:
नवजागरण का अग्रदूत आधुनिक युग के प्रवर्तक कवि-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को कहा जाता है। इनके द्वारा सम्पादित पत्रिका ‘कवि वचन सुधा’ है।

प्रश्न 91:
पुनर्जागरण काल (भारतेन्दु युग) का समय लिखिए।
उत्तर:
सन् 1857 से 1900 ई० तक।

प्रश्न 92:
हिन्दी काव्य में आधुनिक युग कब से माना जाता है?
उत्तर:
हिन्दी काव्य में आधुनिक युग सन् 1843 से माना जाता है।

प्रश्न 93:
भारतेन्दु युग के दो कवियों के नाम उनकी एक-एक रचना सहित लिखिए।
या
पुनर्जागरण काल की एक काव्यकृति का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1.  बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ – प्रेमघन सर्वस्व तथा
  2.  प्रतापनारायण मिश्र – प्रताप लहरी।

प्रश्न 94:
निम्नलिखित में से किन्हीं दो की एक-एक प्रसिद्ध काव्य-रचना का नाम लिखिए
(1) महादेवी वर्मा,
(2) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’,
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,
(4) केशवदास।
उत्तर:

  1. महादेवी वर्मा – ‘दीपशिखा’।
  2. सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ – ‘परिमल’।
  3.  भारतेन्दु हरिश्चन्द्र  –  ‘प्रेम-फुलवारी’।
  4.  केशवदास  –  ‘रामचन्द्रिका’।

प्रश्न 95:
द्विवेदी युग के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
या
आधुनिककाल के दो महाकाव्यों और उनके रचयिताओं के नाम बताइए।
या
द्विवेदी युग के किसी एक महाकाव्य का नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) साकेत – मैथिलीशरण गुप्त।
(2) प्रियप्रवास  – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

प्रश्न 96:
द्विवेदीयुगीन कविता की दो प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का वर्णन कीजिए।
या
द्विवेदी युग के काव्य की दो विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।
उत्तर:
द्विवेदी युग के काव्य की दो विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) निम्नलिखित हैं

  1.  काव्य में ब्रजभाषा के स्थान पर खड़ी बोली की प्रतिष्ठा हुई।
  2. स्वदेश प्रेम तथा स्वदेशी गौरव पर काव्य-रचनाएँ की गयीं।

प्रश्न 97:
कविता के आधुनिकंकाल के द्वितीय युग का नाम तथा उस युग के एक प्रमुख कवि तथा एक रचनों का नाम लिखिए।
उत्तर:
आधुनिककाल के द्वितीय’ युग का नाम ‘द्विवेदी युग’ है। कवि-मैथिलीशरण गुप्त; रचना–साकेत।

प्रश्न 98:
द्विवेदी युग की समयसीमा बताइए।
उत्तर:
द्विवेदी युग की समय-सीमा 1900 ई० से 1918 ई० तक है।।

प्रश्न 99:
छायावादी काव्य की प्रमुख विशेषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख करते हुए किन्हीं दो छायावादी कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  मूलतः सौन्दर्य और प्रेम का काव्य,
  2.  प्रकृति का मानवीकरण,
  3.  अज्ञात के प्रति जिज्ञासा (रहस्यवादी प्रवृत्ति),
  4.  नारी की महिमा का वर्णन,
  5. राष्ट्रीयता की भावना,
  6.  वैराग्य, वेदना और पलायनवादिता,
  7. प्रतीकात्मकता और लाक्षणिकता,
  8.  चित्रात्मकता,
  9.  प्रगतिमयता तथा
  10.  खड़ी बोली का अतिशय परिमार्जन।।

दो छायावादी कवियों के नाम – (1) जयशंकर प्रसाद तथा (2) सुमित्रानन्दन पन्त।

प्रश्न 100:
छायावादी कविता के हास के कारण लिखिए।
उत्तर:
विदेशी शासन के दमन के कारण जनसाधारण की निरन्तर बढ़ती पीड़ा छायावाद के ह्रासं का मुख्य कारण बनी। इस दमन को देखकर कविगण कल्पना लोक से उबरकर यथार्थ के कठोर धरातल पर आ गये। संक्षेप में, छायावादी कविता के ह्रास के कारण इस प्रकार हैं

  1. (1) छायावादी कविता में सूक्ष्म और वायवीय कल्पनाओं की अधिकता थी।
  2. (2) स्थूल जगत् की कठोर वास्तविकता से उसका कोई सम्बन्ध नहीं रह गया था।
  3. (3) समाज में पूँजी के विरुद्ध आवाज उठ रही थी, इसलिए अतिशय कल्पना को छोड़ रोटी, कपड़ा और मकान कविता का विषय बनने लगे थे।

प्रश्न 101:
छायावाद काल की समय-सीमा बताइए।
उत्तर:
सन् 1918 से 1938 ई० तक का समय, छायावाद के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 102:
छायावाद के चार कवि और उनकी दो-दो रचनाएँ लिखिए।
या
छायावाद युग के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए।
या
छायावाद के दो कवियों के नाम बताइए और उनकी एक-एक रचना का उल्लेख कीजिए।
या
जयशंकर प्रसाद की दो काव्य-कृतियों का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1.  जयशंकर प्रसाद कामायनी; आँसू,
  2. सुमित्रानन्दन पन्ते – पल्लव; ग्राम्या,
  3. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ – परिमल; गीतिका,
  4.  महादेवी वर्मा – दीपशिखा; सान्ध्य – गीत।

प्रश्न 103:
गुसाईंदत्त को कवि के रूप में किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
गुसाईंदत्त को कवि के रूप में “सुमित्रानन्दन पन्त” के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 104:
दो रहस्यवादी कवि और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. सुमित्रानन्दन पन्त कृत ‘पल्लव’ तथा
  2. महादेवी वर्मा कृत ‘दीपशिखा’।

प्रश्न 105:
निम्नलिखित कवियों की एक-एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए-जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’, सुमित्रानन्दन पन्त।
उत्तर:

  1. जगन्नाथदास रत्नाकर’, रचना – गंगावतरण।
  2. सुमित्रानन्दन पन्त, रचना – चिदम्बरा।

प्रश्न 106:
निम्नलिखित कवियों में से किन्हीं दो द्वारा रचित एक-एक प्रमुख काव्यग्रन्थ का नाम लिखिए –
(1) सुमित्रानन्दन पन्त,
(2) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’,
(3) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’,
(4) रामधारी सिंह “दिनकर।
उत्तर:

  1.  चिदम्बरा,
  2.  कितनी नावों में कितनी बार,
  3.  प्रियप्रवास तथा
  4.  कुरुक्षेत्र।

प्रश्न 107:
आधुनिक युग के किसी एक महाकाव्य और उसके रचनाकार का नाम लिखिए।
या
‘कामायनी’ महाकाव्य के रचयिता का नाम लिखिए।
उत्तर:
महाकाव्य-कामायनी; रचनाकार – जयशंकर प्रसाद।

प्रश्न 108:
प्रगतिवादी कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
या
प्रगतिवादी काव्य की दो प्रमूख प्रवृत्तियों का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. साम्यवाद का काव्यात्मक रूपान्तर (अर्थात् मार्क्स और रूस को गुणगान, पूँजीवाद का विरोध एवं कृषक-मज़दूर-राज्य की स्थापना का स्वप्न),
  2. यथार्थवाद,
  3.  परम्पराओं और रूढ़ियों का विरोध,
  4.  धर्म और ईश्वर में अविश्वास,
  5.  श्रम की महत्ता की स्थापना,
  6. शोषितों के प्रति सहानुभूति,
  7.  वेदना और निराशा,
  8.  नारी के प्रति आधुनिक यथार्थवादी दृष्टिकोण,
  9. जन-भाषा का आग्रह तथा
  10.  छन्दों और अलंकारों का बहिष्कार।

प्रश्न 109:
प्रगतिवाद के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
नागार्जुन (युगधारा), केदारनाथ अग्रवाल (युग की गंगा), शिवमंगल सिंह ‘सुमन (प्रलय-सृजन), त्रिलोचन शास्त्री (धरती)।

प्रश्न 110:
‘प्रगतिशील लेखक संघ के अधिवेशन की अध्यक्षता मुंशी प्रेमचन्द ने कहाँ और कब की थी?
उत्तर:
सन् 1936 ईसवी में लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन’ के समय प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना हुई। मुंशी प्रेमचन्द ने इस संस्था के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।

प्रश्न 111:
प्रगतिवादी युग के दो कवियों तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
या
छायावादोत्तर काल के किसी एक कवि तथा उनकी रचना का नाम-निर्देश कीजिए।
उत्तर:

  1.  रामधारी सिंह ‘दिनकर’-उर्वशी तथा
  2. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’–विन्ध्य हिमालय से।

प्रश्न 112:
छायावादोत्तर काल की कविता का काल-विभाजन लिखिए।
उत्तर:

  1. प्रगतिवाद, प्रयोगवाद (1938 – 1959 ई०);
  2.  नयी कविता का काल (1959 ई० से वर्तमान तक)।

प्रश्न 113:
प्रयोगवादी कविता की दो मुख्य विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) बताइए।
या।
छायावादोत्तर काल की काव्य-प्रवृत्तियाँ लिखिए।
उत्तर:

  1. अति वैयक्तिकता,
  2. निराशा, कुण्ठा और घुटन,
  3.  फ्रायड के प्रभाववश नग्न यौन-चित्रण,
  4. अतियथार्थवाद (नग्न यथार्थ),
  5.  पराजय, पलायन और वेदना,
  6. बौद्धिकता,
  7.  क्षण का महत्त्व,
  8.  अवचेतन के यथावत् प्रकाशन का आग्रह,
  9. अनगढ़ भाषा का प्रयोग एवं
  10. नया शिल्पविधान (नये उपमानों, बिम्बों, प्रतीकों का प्रयोग तथा छन्दहीनता का आग्रह)।

प्रश्न 114:
प्रयोगवाद से आप क्या समझते हैं? ‘नयी कविता’ क्या है?
उत्तर:
सन् 1943 में प्रकाशित ‘तारसप्तक’ की कविताओं में नये बिम्ब-विधानों, नये अलंकारों और नयी भावाभिव्यक्ति को अपनाया गया। काव्य की इसी नयी विधा को ‘प्रयोगवादी काव्य’ के नाम से अभिहित किया गया। नयी कविता इस प्रयोगवादी कविता का ही विकसित रूप है।

प्रश्न 115:
प्रयोगवादी काव्यधारा का नेतृत्व करने वाले कवि का नामोल्लेख कीजिए और उनके एक प्रमुख प्रकाशन का नाम लिखिए।
या
अज्ञेय का पूरा नाम लिखिए। उन्हें किस काव्य-कृति पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था?
उत्तर:
प्रयोगवादी काव्यधारा का नेतृत्व करने वाले कवि सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ हैं। इन्होंने ‘तारसप्तक’ नामक एक काव्य-संकलन सन् 1943 ई० में प्रकाशित किया। ‘कितनी नावों में कितनी बार इनकी एक प्रमुख रचना है, जिस पर इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार की प्राप्ति हुई है।

प्रश्न 116:
तारसप्तक के कवियों के नाम लिखिए।
या
हिन्दी में प्रयोगवादी काव्यधारा के किन्हीं चार कवियों के नाम लिखिए।
या
किन्हीं दो प्रयोगवादी कवियों के नाम लिखिए।
या
सप्तक परम्परा के दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, गजानन माधव मुक्तिबोध’, गिरिजाकुमार माथुर, प्रभाकर माचवे, नेमिचन्द्र जैन, भारत भूषण और रामविलास शर्मा। सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने। इन सात कवियों की रचनाएँ ‘तारसप्तक’ के नाम से सन् 1943 ई० में प्रकाशित कीं।

प्रश्न 117:
‘तारसप्तक’ का प्रकाशन किसने और किस समय किया? इसके सम्पादक कौन थे?
या
‘तारसप्तक का सम्पादन प्रथम बार कब और किसने किया?
उत्तर:
श्री सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने सन् 1943 ई० में अपनी पीढ़ी के अन्य छह कवियों के सहयोग से ‘तारसप्तक’ का प्रकाशन किया। इसके सम्पादक श्री सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ स्वयं थे।

प्रश्न 118:
‘तारसप्तक’ की कविताएँ किस काव्यधारा से सम्बन्धित हैं?
उत्तर:
‘तारसप्तक’ की कविताएँ प्रयोगवादी काव्यधारा से सम्बन्धित हैं।

प्रश्न 119:
दूसरा सप्तक में संकलित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
दूसरा सप्तक सन् 1951 ई० में प्रकाशित हुआ। इसमें संकलित कवियों के नाम हैं-भवानी प्रसाद मिश्र, शकुन्त माथुर, हरिनारायण व्यास, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय तथा धर्मवीर भारती।

प्रश्न 120:
तीसरा सप्तक कब प्रकाशित हुआ? संकलित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
तीसरा सप्तक सन् 1959 ई० में प्रकाशित हुआ। इसमें संकलित कवियों के नाम हैंप्रयागनारायण त्रिपाठी, कीर्ति चौधरी, मदन वात्स्यायन, केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण, विजय देवनारायण साही तथा सर्वेश्वरदयाल सक्सेना।

प्रश्न 121:
चौथा सप्तक कब प्रकाशित हुआ? इसमें संकलित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सन् 1979 में चौथा सप्तक प्रकाशित हुआ। इसमें संकलित कवियों के नाम हैं-अवधेश कुमार, राजकुमार कुम्भज, स्वदेश भारती, नन्दकिशोर आचार्य, सुमन राजे, श्रीराम वर्मा तथा राजेन्द्र किशोर।

प्रश्न 122:
गजानन माधव मुक्तिबोध’ किस सप्तक में संकलित हैं?
उत्तर:
गजानन माधव मुक्तिबोध’ सन् 1943 में प्रकाशित ‘तारसप्तक’ में संकलित हैं।

प्रश्न 123:
प्रयोगवादी काव्य की पाँच रचनाओं और रचयिताओं के नाम लिखिए।
या
प्रयोगवादी काव्यधारा के किन्हीं दो कवियों की एक-एक रचना का उल्लेख कीजिए।
या
गजानन माधव मुक्तिबोध की किसी एक काव्य-कृति का नाम लिखिए।
उत्तर:
भग्नदूत (सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय’), चाँद का मुंह टेढा (गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’); ओ अप्रस्तुत मन (भारतभूषण अग्रवाल), धूप के धान (गिरिजाकुमार माथुर), गीतफरोश (भवानीप्रसाद मिश्र)।

प्रश्न 124:
आधुनिक युग की कविता की चार मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  1.  यथार्थ का उन्मुक्त चित्रण,
  2. नारी-मुक्ति का आह्वान,
  3. लघुता के प्रति सजगता और
  4. गेय तत्त्व की अवहेलना।।

प्रश्न 125:
आधुनिक कविता के प्रमुख वादों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, हालावाद, स्वच्छन्दतावाद आदि आधुनिक कविता के प्रमुख वाद हैं।

प्रश्न 126:
नयी कविता से आप क्या समझते हैं?
या
‘नयी कविता’ पत्रिका के सम्पादक का नाम लिखिए तथा इस पत्रिका का सर्वप्रथम प्रकाशन वर्ष लिखिए।
उत्तर:
नयी कविता का आरम्भ सन् 1954 ई० में जगदीश गुप्त और डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी के सम्पादन में नयी कविता के प्रकाशन से हुआ। यह कविता किसी वाद से बँधकर नहीं चलती।

प्रश्न 127:
नयी कविता को अकविता क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
नयी कविता परम्परागत कविता के स्वरूप से नितान्त भिन्न हो गयी है। यह किसी वाद या दर्शन से जुड़ी नहीं है, इसलिए इसे अकविता कहा जाता है।

प्रश्न 128:
नयी कविता की किन्हीं दो प्रमुख रचनाओं का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1.  युग की गंगा-केदारनाथ अग्रवाल तथा
  2. बूंद एक टपकी-भवानीप्रसाद मिश्र।

प्रश्न 129:
‘नयी कविता’ से सम्बन्धित किन्हीं दो पत्रिकाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. कल्पना’ तथा
  2. ज्ञानोदय’।

प्रश्न 130:
नयी कविता के पाँच प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
उत्तर:
जगदीश गुप्त, धर्मवीर भारती, नरेश मेहता, लक्ष्मीकान्त वर्मा तथा सर्वेश्वरदयाल सक्सेना।

प्रश्न 131:
नयी कविता की विंडोषताओं (प्रवृत्तियों) का उल्लेख करते हुए किन्हीं दो प्रतिनिधि कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर;
नयी कविता की प्रमुख विशेषताएँ हैं

  1. यथार्थता,
  2. वर्जनाओं से मुक्ति (अर्थात् सामाजिक मर्यादाओं एवं बन्धनों का तिरस्कार करके नि:संकोच अश्लील चित्रण),
  3.  हृदयपक्ष की अपेक्षा बुद्धिपक्ष की प्रधानता,
  4. निराशा तथा अवसाद (खिन्नता), की प्रबलता,
  5. खिचड़ी भाषा, जिसमें हिन्दी की विभिन्न बोलियों, प्रादेशिक भाषाओं एवं अंग्रेजी आदि के शब्दों का घालमेल,
  6.  प्रतीकों, बिम्बों एवं मुक्त छन्द पर बल। नयी कविता के दो प्रतिनिधि कवि हैं – जगदीश गुप्त और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना।

प्रश्न 132:
नवगीत’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
नवगीत’ छायावादी एवं प्रगतिवादी दोनों ही काव्यों की कई विशेषताओं से युक्त ऐसा काव्य है, जिसमें आधारभूत चेतना, जीवन-दृष्टि, भाव-भूमि एवं अभिव्यंजना शैली की व्यापकता, सूक्ष्मता, विविधता, यथार्थता एवं लौकिकता का एकान्तिक संयोग हैं।

प्रश्न 133:
‘नवगीत’ की किन्हीं दो आधारभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
नवगीत की दो आधारभूत विशेषताएँ हैं

  1.  सर्वत्र भावानुकूल भाषा का प्रयोग तथा
  2.  स्वस्थ बिम्ब एवं प्रतीक विधान।

प्रश्न 134:
‘नवगीत’ के दो महत्त्वपूर्ण गीतकारों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
नवगीत के दो महत्त्वपूर्ण गीतकार और उनकी रचनाएँ हैं

  1.  शम्भूनाथ सिंह (‘उदयाचल’, ‘दिवालोक’, ‘समय की शिला पर’, ‘जहाँ दर्द नील हैं’ आदि।) तथा
  2.  वीरेन्द्र मिश्र (‘गीतम’, ‘लेखनी बेला’, ‘अविराम चल मधुवन्ति’ आदि।)

प्रश्न 135:
नवगीतधारा के प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
उत्तर:
रमानाथ अवस्थी, डॉ० शम्भूनाथ सिंह, श्रीपाल सिंह ‘क्षेम’, गुलाब खण्डेलवाल, सुमित्राकुमारी सिन्हा, शान्ति मेहरोत्रा, हंसकुमार तिवारी, सोम ठाकुर, गोपालदास नीरज’, वीरेन्द्र मिश्र तथा डॉ० कुँवर बेचैन।

प्रश्न 136:
साठोत्तरी कविता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
साठोत्तरी कविता मोह-भंग, आक्रोश, अस्वीकार, तनाव और विद्रोह की कविता है। इसका मुहावरा नया है, शैली बेपर्द है और इसमें जिजीविषा का गहरा रंग है।

प्रश्न 137:
साठोत्तरी कविता की किन्हीं दो आधारभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
साठोत्तरी कविता की दो आधारभूत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1.  अन्याय के विरुद्ध और शासन द्वारा कही जाने वाली चिकनी-चुपड़ी बातों की आक्रोशयुक्त स्वर में अभिव्यक्ति तथा
  2. व्यक्ति और उसके परिवेश की हर परत की बेपर्द अभिव्यक्ति।

प्रश्न 138:
साठोत्तरी कविता के किन्हीं दो प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर:
साठ्येत्तरी कविता के दो महत्त्वपूर्ण कवि और उनकी रचनाएँ हैं

  1. धूमिल (‘संसद से सड़क तक’, ‘कल सुनना मुझे’, ‘सुदामा पाण्डे का प्रजातन्त्र आदि) तथा
  2.  रामदरश मिश्र (‘पथ के गीत’, बैरंग बेनाम चिट्ठियाँ’, ‘पक गयी है धूप’, ‘कन्धे पर सूरज’ आदि)।

प्रश्न 139:
‘नया दोहा’ के प्रमुख संकलनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
नया दोहा’ के प्रमुख संकलनों के नाम हैं

  1.  अमलतास की छाँव (पाल भसीन),
  2. आँखों खिले पलाश (पं० देवेन्द्र शर्मा इन्द्र’),
  3.  बटुक सतसई (विश्वप्रकाश दीक्षित ‘बटुक’),
  4. कालाय तस्मै नमः (भारतेन्दु मिश्र) आदि।

प्रश्न 140:
वर्तमान युग के पाँच जीवित कवियों के नाम लिखिए।
या
वर्तमान युग के किन्हीं दो जीवित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
वर्तमान युग के पाँच जीवित कवियों के नाम हैं-पं० देवेन्द्र शर्मा इन्द्र’, पाल भसीन, विश्वप्रकाश दीक्षित ‘बटुक’, भारतेन्दु मिश्र और दिवाकर आदित्य शर्मा।।

प्रश्न 141:
रीतिकाल के किसी एक भक्त कवि का नामोल्लेख करते हुए उसके द्वारा प्रयुक्त भाषा का नाम लिखिए।
उत्तर:
बिहारी-परिमार्जितः ब्रजभाषा।

प्रश्न 142:
हिन्दी साहित्य के आधुनिक काव्य की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. यथार्थपरक तथा मानक्तावादी दृष्टि तथा
  2.  जीवन के नए प्रतिमानों की स्थापना।

प्रश्न 143:
अवधी भाषा के किन्हीं दो कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
तुलसीदास तथा मलिक मुहम्मद जायसी।

प्रश्न 144:
‘पद्मावत’ में जायसी द्वारा प्रयुक्त भाषा और शैली का नामोल्लेख कीजिए।
या
जायसी का ‘पद्मावत’ किस भाषा में लिखा गया है?
उत्तर:
भाषा-अवधी, शैली – प्रबन्ध शैली।

प्रश्न 145:
दो प्रमुख प्रयोगवादी कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1.  सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’।
  2.  गजानन माधव मुक्तिबोध’।

प्रश्न 146:
छायावादोत्तर काल के किसी एक कवि तथा उनकी एक रचना का नाम निर्देश कीजिए।
उत्तर:
सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ -गीतिका।

प्रश्न 147:
‘कवितावर्धिनी सभा’ के संस्थापक तथा उसके मुखपत्र का नाम लिखिए।
उत्तर:
कवितावर्धिनी’ सभा के संस्थापक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र थे। इस सभा के मुखपत्र का नाम ‘कविवचन सुधा’ था।

प्रश्न 148:
जनवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनवाद कला, साहित्य और जीवन के प्रति विशिष्ट दृष्टिकोण है, जो जनसामान्य को महत्त्व देता है। जनवाद मोटे तौर पर मार्क्सवाद से प्रेरित साहित्य है जिसका मूलाधार भौतिक दर्शन पर टिका हुआ है। कार्ल मार्स ने जो समाज और उसके विविध रूपों और विचारों की ऐतिहासिक व्याख्याएँ कीं, वे कला और साहित्य पर भी लागू होती हैं। ऐसे साहित्य की जो मार्क्सवादी विवेचना हुई, उसी से जनवाद का प्रादुर्भाव हुआ।

प्रश्न 149:
जनवादी कविता से आप क्या समझते हैं? इसकी आधारभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जनवादी कविता में मानव के सामूहिक भावों की अभिव्यक्ति होती है। व्यक्ति-वैचित्र्य के लिए उसमें स्थान नहीं होता। रचनाकार में शक्ति जनता से आती है, जनता के साथ उसको सम्बन्ध जितना घनिष्ठ होता है, उसमें उतनी ही अधिक रचना-शक्ति आती है और उसकी रचना में उतना ही अधिक सौन्दर्य बढ़ता है। जिस कवि की दृष्टि मात्र अन्तर्मुखी न हो, जिस कवि की विषय-वस्तु में सिर्फ व्यक्ति-निष्ठ भावनाओं का चित्रण न हो। और जिस कवि के काव्य को सम्पर्क जनता के व्यापक जीवन से हो वही कवि जनवादी कवि होता है।

प्रश्न 150:
प्रमुख जनवादी कवियों और उनकी कतिपय रचनाओं का नामोल्लेख कीजिए।
या
जनवादी कविता की वृहत्-त्रयी के लेखकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
जनवादी कविता के लेखकों की वृहतत्रयी नहीं है। वृहत्-त्रयी छायावादी रचनाकारों की मानी जाती है। प्रमुख जनवादी कवि और उनकी कतिपय रचनाएँ निम्नलिखित हैं

  1. नागार्जुन – ‘युगधारा’, ‘सतरंगे पंखों वाली’, ‘प्यासी पथराई आँखें’, ‘भस्मांकुर’, ‘खिचड़ी विप्लव देखा हमने’, ‘पुरानी जूतियों का कोरस’ आदि।
  2.  केदारनाथ अग्रवाल –  ‘नींद के बादल’, ‘युग की गंगा’, ‘फूल नहीं रंग बोलते हैं’, ‘गुल मेंहदी’, ‘कहै केदार खरी-खरी’, ‘आत्म-गंध’ आदि।
  3. धूमिल –  ‘संसद से सड़क तक’, ‘कल सुनना मुझे’, ‘मोचीराम’ आदि।
  4. त्रिलोचन – ‘मिट्टी की बारात’, ‘ताप के ताए हुए दिन’, उस जनपद का कवि हूँ’, ‘अरधान’, ‘धरती’, ‘तुम्हें सौपता हूँ’, ‘अनकहनी भी कुछ कहनी है’ आदि। इनके अतिरिक्त आलोक धन्वा, विनोद कुमार शुक्ल, कुमार विकल आदि भी जनवादी कवि हैं।

प्रश्न 151:
जायसी की दो काव्यकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. पद्मावत तथा
  2. आखरी कलाम।

प्रश्न 152:
‘रसवन्ती के रचनाकार को नाम लिखिए।
उत्तर:
रामधारीसिंह ‘दिनकर’।

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi संस्कृत दिग्दर्शिका Chapter 3 सदाचारोपदेशः

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Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name सदाचारोपदेशः
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi संस्कृत दिग्दर्शिका Chapter 3 सदाचारोपदेशः

श्लोकों का ससन्दर्भ अनुवाद

(1) सं गच्छध्वं ………………… उपासते।।

[सं गच्छध्वम्-मिलकर चलो। संवदध्वम् = मिलकर बोलो। वः मनांसि-अपने मनों को। सं जानताममिलकर जानो। पूर्वे सञ्जनानां देवाः – प्राचीनकाल में एक मत में रहने वाले देवगण| भागम् = (अपने) कर्तव्य कर्म के अंशों को। उपासते = करते थे।]

सन्दर्भ – प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के ‘सदाचारोपदेशः’ नामक पाठ से अवतरित है।
[ विशेष – इस पाठ के समस्त श्लोकों के लिए यही सन्दर्भ प्रयुक्त होगा।]

अनुवाद – मिलकर चलो (अर्थात् मिलकर कार्य करो)। मिलकर बोलो (अर्थात् काम करने से पहले परस्पर परामर्श करो) तुम सब लोग अपने मनों को मिलकर जानो (अर्थात् आपस में विचारों की एकता स्थापित करो)। जिस प्रकार प्राचीनकाल में देवगण आपस में मिल-जुलकर तथा एक स्थान पर बैठकर (अर्थात् परस्पर परामर्शपूर्वक) अपने-अपने कर्तव्ये कर्म के अंश को करते थे (वैसे ही मिल-जुलकर तुम लोग भी करो)।

(2) कुर्वन्नेवेह ……………………. लिप्यते नरे।।

[कुर्वन्नेवेह (कुर्वन् + एद + इह) – (शास्त्रविहित) कर्म करते हुए। एव = ही। इह = इस संसार में। जिजीविषेच्युतम (जिजीविषेत +शतम्) = सौ (वर्ष तक) जीने की इच्छा करे। समाः = वर्ष! एवम् = इस प्रकार। नान्यथेतोऽस्ति (न +अन्यथा +इतः +अस्ति) = इससे (इतः) भिन्न अन्य कोई उपाय (अन्यथा) नहीं है (न अस्ति)]

अनुवाद – (मनुष्य को) इस संसार में (शास्त्रानुकूल) त्यागपूर्वक कर्म करते हुए ही सौ वर्ष तक जीने की इच्छा करनी चाहिए। इस प्रकार (धर्मानुसार त्यागपूर्वक कर्म करने से मनुष्य कमों में लिप्त नहीं होता। इसे छोड़ (कर्म-बन्धन से बचने का) अन्य कोई (उपाय) नहीं है।

(3) मधुमन्मे …………………….. मधुसदृशः।।

[ में- मेरा। निष्क्रमणम् = निकलना, जाना (निकटता स्थापित करना)| मधुमत् = माधुर्ययुक्त। परायणं = दूर हटना (किसी से सम्बन्ध तोड़ना)| वाचा = वाणी से। मधुसदृशः = मधुरूप (या सर्वत्र मधु को ही देखने वाला)| भूयासम् = हो जाऊँ।]

अनुवाद – मेरा (किसी व्यक्ति के) निकट जाना (मित्रता स्थापित करना) माधुर्ययुक्त हो अर्थात् किसी के साथ मित्रता आदि का परिणाम मधुर हो। मेरा (किसी से) दूर हटना (सम्बन्ध तोड़ना) भी माधुर्यपूर्ण हो। मैं मीठी बोली बोलू और मधुरूप (सर्वत्र मधु को ही देखने वाला) हो जाऊँ। (आशय यह है कि मेरे कारण कहीं कोई कटुता उत्पन्न न होकर सर्वत्र मधुरता का ही संचार हो और मेरे सम्बन्ध मधुर हों।)

(4) आचाराल्लभते ………………………….. चेह च।।

[ आचारात -सदाचार से। लभते = प्राप्त करता है। ह्यायुः (हि +आयुः) = आयु को। श्रियम् = धन को। प्रेत्य = मरकर परलोक में। चेह (च +इह) – और इस लोक में।]

अनुवाद – सदाचार से मनुष्य (लम्बी) आयु प्राप्त करता है, सदाचार से लक्ष्मी (धन) प्राप्त करता है, सदाचार से इसे लोक और परलोक में कीर्ति (यश) प्राप्त करता है।

(5) ये नास्तिका …………… गतायुषः।।

[नास्तिकाः = ईश्वर को न मानने वाले (मूलतः नास्तिक’ का अर्थ है ‘वेद को न मानने वाला’-नास्तिको वेदनिन्दकः)| निष्क्रियाः = आलसी। गुरुशास्त्रातिलङ्घिनः (गुरुशास्त्र +अतिलङ्घिनः)= गुरु और शास्त्रों (की आज्ञा) का उल्लंघन करने वाले। गतायुषः (गत +आयुषः) = क्षीण आयु वाले। ]

अनुवाद – जो मनुष्य ईश्वर को न मानने वाले, आलसी, गुरु और शास्त्रों के वचनों का उल्लंघन करने वाले, धर्मविहीन एवं दुराचारी होते हैं, उनकी आयु कम हो जाती है और वे मरे हुए के समान होते हैं।

(6) ब्राह्म मुहूर्ते ……………………… कृताञ्जलिः ||

[बुध्येत = जाग जाना चाहिए। धर्मार्थी (धर्म + अथौ) च = धर्म और धन को। अनुचिन्तयेत – चिन्तन करना चाहिए। आचम्य = आचमन (कुल्ला) करके कृताञ्जलिः = हाथ जोड़कर।]

अनुवाद – (मनुष्य को) ब्राह्ममुहूर्त में (सूर्योदय के समय के एक घण्टे पूर्व) जाग जाना चाहिए, धर्म (कर्तव्य) और धन (आय के साधनों) का चिन्तन करना चाहिए। (फिर शय्या से) उठकर तथा आचमन (कुल्ला) करके, हाथ जोड़कर पूर्व सन्ध्या (प्रातः सन्ध्या) के लिए बैठ जाना चाहिए।

(7) अक्रोधनः …………………………. वर्षाणि जीवति।।

[अक्रोधनः = क्रोध न करने वाला भूतानामविहिंसकः (भूतानाम +अविहिंसकः) = जीवों की हिंसा न करने वाला| अनसूयुः = दूसरों से असूया (ईष्र्या, द्वेष) न करने वाला| अजिह्मः = जो जिह्म (कुटिल) न हो,
सरलचित्त।]

अनुवाद – क्रोध न करने वाला, सत्य बोलने वाला, जीवों की हिंसा न करने वाला, दूसरों से ईष्र्या न करने वाला एवं कुटिलता से रहित (सरलचित्त) व्यक्ति सौ वर्ष तक जीता है (अर्थात् दीर्घायु होता है)।

(8) अकीर्तिम् ………….. हन्त्य लक्षणम्।।

[ अनर्थम् = आपत्ति। अलक्षणम् = अशुभ।]

अनुवाद – विनम्रती अपयश को नष्ट करती है, पराक्रम (पुरुषार्थ) अनर्थ (आपत्ति) को नष्ट करता है, क्षमाशीलता सदा क्रोध को नष्ट करती है और सदाचरण (समस्त) अशुभों को नष्ट कर देता है।

(9) अभिवादनशीलस्य ………………… बलम्।।

[अभिवादनशीलस्य = (बड़ों को) प्रणाम करने वाले का। वृद्धोपसेविनः (वृद्ध+उपसेविनः) = बड़े-बूढ़ों की सेवा करने वाला। वर्द्धन्ते = बढ़ते हैं।]

अनुवाद – (अपने से बड़ों को) प्रणाम करने वाले तथा नित्य बड़े-बूढ़ों की सेवा करने वाले की आयु, विद्या, यश और बल-इन चारों की (उत्तरोत्तर) वृद्धि होती है।

(10) वृत्तं यत्नेन ……………….. हतो हतः।।

[वृत्तम् – चरित्र। वित्तमायाति (वित्तम् + आयाति) – धन आता है। याति = चला जाता है। अक्षीणः हानि न होना।]

अनुवाद – चरित्र की प्रयत्नपूर्वक रक्षा करनी चाहिए, (क्योंकि) धन तो आता-जाता रहता है। धन नष्ट होने से व्यक्ति की कोई (विशेष) हानि नहीं होती, किन्तु चरित्र नष्ट होने से व्यक्ति मरे हुए के समान हो जाता है। विशेष – अंग्रेजी की सूक्ति से तुलनीय-If wealth is lost nothing is lost, if health is lost something is lost, if character is lost everything is lost.

(11) सत्येन …………………… रक्ष्यते।।

[योगेन – (निरन्तर) प्रयोग से। मृजया = स्वच्छता, सफाई से। वृत्तेन = चरित्र से। ]

अनुवाद – सत्य से धर्म की रक्षा होती है, प्रयोग (निरन्तर अभ्यास) से विद्या की रक्षा होती है, स्वच्छता से रूप की रक्षा होती है, (और) चरित्र से कुल की रक्षा होती है।

(12) श्रूयतां …………………… समाचरेत् ।

[ धर्मसर्वस्वम् = धर्म के सार को। चाप्यवधार्यताम् (च +अपि +अवधार्यताम्) – च-और, अपि – भी, अवधार्यतां = धारण करो। परेषां – दूसरों का। ]

अनुवाद – धर्म का सार सुनो और सुनकर (मन में) धारण करो (कि) जो कार्य अपने विरुद्ध हो, उसका आचरण दूसरों के साथ न करो (अर्थात् जिस बात को तुम अपने लिए हानिकर समझते हो, उससे दूसरों को भी हानि पहुँचेगी, ऐसा समझकर वैसा कार्य दूसरों के प्रति न करो)।

 

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi संस्कृत दिग्दर्शिका Chapter 2 प्रयाग:

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Chapter Chapter 2
Chapter Name प्रयाग:
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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi संस्कृत दिग्दर्शिका Chapter 2 प्रयाग:

अवतरणों का ससन्दर्भ अनुवाद

(1) भारतवर्षस्य …………………… प्रत्यगच्छत् ।
गङ्गायमुनयोः ……………… आत्मान पावयान्ता ।
भारतवर्षस्य ………………… आत्मानं पावयन्ति।

[ ब्रह्मणः = ब्रह्मा का। प्रकृष्टयागकरणात् = उत्तम यज्ञ करने से। सितासितजले (सित + असित + जले) – श्वेत और श्याम जल में (अर्थात गंगा और यमुना के जल में)। विगतकल्मषाः = पापरहित] अमायाम् =अमावस्या में | सम्मर्दः = भीड़। उषित्वा =रहकर। पावयन्ति=पवित्र करते हैं। प्रत्यगच्छत् = लौट जाता था।]

सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के ‘प्रयागः’ शीर्षक पाठ से अवतरित है। इसमें तीर्थराज प्रयाग का वर्णन किया गया है।
[ विशेष – इस पाठ के समस्त अवतरणों के लिए यही सन्दर्भ प्रयुक्त होगा।]
अनुवाद – भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश राज्य में प्रयाग का विशेष स्थान है। यहाँ ब्रह्मा द्वारा किये गये श्रेष्ठ यज्ञ के कारण इसका नाम प्रयाग (प्र + याग = प्रकृष्ट यज्ञ) पड़ा। गंगा-यमुना के संगम पर श्वेत-श्याम जल में स्नान करके मनुष्य पापरहित हो जाते हैं, ऐसा लोगों का विश्वास है। अमावस्या, पूर्णिमा और संक्रान्ति पर यहाँ स्नान करने वालों की बड़ी भीड़ होती है। प्रति वर्ष माघ-मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर यहाँ लाखों लोग आते हैं और एक महीने (तक) रहकर संगम के पवित्र जल से एवं विद्वानों-महात्माओं के उपदेशरूपी अमृत से अपने आपको पवित्र करते हैं। इसी पर्व (त्योहार) पर महाराज श्रीहर्ष (हर्षवर्द्धन) प्रत्येक पाँचवें वर्ष यहाँ आकर माँगने वालों को अपना सर्वस्व (सब कुछ) दान में देकर मेघ (बादल) के सदृश पुनः (धन) इकट्ठा करने के लिए अपनी राजधानी को लौट जाते थे।

(2) ऋषेः भरद्वाजस्य …………………… अगच्छत् ।

[दशसहसमिताः = दस हजार) अधीतिनः आसन् = पढ़ते थे, अध्ययन करते थे। वस्तव्यम् = रहना चाहिए, निवास करना चाहिए। प्रष्टुम् – पूछने को। त्वन्निवासयोग्यम् (त्वत् + निवासयोग्यम्) = तुम्हारे रहने योग्य। तेनादिष्टः (तेन +आदिष्टः) =उनसे आज्ञा पाकर। ]

अनुवाद – भरद्वाज ऋषि का आश्रम भी यहीं है। यहाँ प्राचीनकाल में दस हजार विद्यार्थी पढ़ते थे। पिता की आज्ञा का पालन करते हुए पुरुषोत्तम (पुरुषों में श्रेष्ठ) श्रीराम अयोध्या से वन को जा रहे थे तो मुझे कहाँ निवास करना चाहिए’ यह पूछने के लिए (वे) यहीं भरद्वाज (ऋषि) के पास आये। चित्रकूट ही तुम्हारे रहने योग्य उपयुक्त स्थान है’, ऐसी उनसे आज्ञा पाकर सीता और लक्ष्मण के साथ श्रीराम चित्रकूट गये।

(3) पुरा वत्सनामकमेकं ……………………….. दुर्गे सुरक्षितः) ।
पूरा वत्सनामकमेकं ……………………. स्वशिलालेखमकारयत्।

[ इतः = यहाँ से। नातिदूरेऽवर्तत (न + अतिंदरे + अवर्तत) = बहुत दूर नहीं (अर्थात् पास ही) थी। ललितकलाभिज्ञश्चासीत् (ललितकला +अभिज्ञः +च+आसीत्) =और ललित कलाओं के जानकार थे। ध्वंसावशेषाः = खण्डहर। ख्यापयन्ति = प्रकट करते हैं। स्वशिलालेखमकारयत् (स्वशिलालेखम् + अकारयत्) – अपना शिलालेख लिखवाया। योऽधुना (यः + अधुना) = जो अब।]

अनुवाद – प्राचीनकाल में वत्स नाम का एक समृद्ध (धन-धान्य सम्पन्न) राज्य था। इसकी राजधानी ‘कौशाम्बी यहाँ से थोड़ी ही दूर थी। इस राज्य के शासक महाराज उदयनवीर, अत्यधिक सुन्दर और ललित कलाओं के मर्मज्ञ (पारखी) थे। यमुना के किनारे आधुनिक सुजावन’ (नामक) ग्राम में उनके सुयामुन (नामक) महल के खण्डहर उनके सौन्दर्य-प्रेम को प्रकट करते हैं। प्रियदर्शी सम्राट अशोक ने कौशाम्बी में ही अपना शिलालेख लिखवाया था, जो अब कौशाम्बी से लाकर प्रयाग के किले में सुरक्षित (रखा गया) है।

(4) गङ्गायाः पूर्वं …………………… अतिमहत्त्वपूर्णमस्ति।
इतिहासप्रसिद्धः ……………………………. स्थितोऽस्ति।
इतिहासप्रसिद्धः ……………………..……… इत्यकरोत् ।

[ पुरूरवसः =पुरूरवा की। झूसीत्याधुनिकनाम्ना (झूसी +इति +आधुनिक+नाम्ना) = आजकल कँसी के नाम से प्रतिष्ठा=सम्मान। विदुषाम-विद्वानों के स्थित्या = रहने से, निवास से। अक्षुण्णैव (अक्षुण्ण + एव) =अखण्डित ही है। दुष्करम् = कठिन। विज्ञाय = जानकर। परिवृतम् = घिरा हुआ। दुर्गमकारयत (दुर्गम् + अकारयत्) – किला बनवाया। बन्धमप्यकारयत् (बन्धम् + अपि + अकारयत्) = बाँध भी
बनवाया। ]

अनुवाद – गंगा के पूर्व की ओर पुराणों में प्रसिद्ध महाराज पुरूरवा की राजधानी प्रतिष्ठानपुर, आजकल झुंसी नाम से प्रसिद्ध है। इसका गौरव आज भी विद्वानों और महात्माओं के निवास से अखण्डित है (अर्थात् कम नहीं हुआ है)।

इतिहास में प्रसिद्ध, नीतिकुशल अकबर नामक मुगल शासक ने दिल्ली से बहुत दूर पूर्व दिशा में स्थित कड़ा और जौनपुर नामक धन-धान्यसम्पन्न राज्यों की देखभाल कठिन जानकर, उन दोनों (राज्यों) के बीच प्रयाग में गंगा और यमुना से घिरा हुआ एक दृढ़ (मजबूत) किला बनवाया और गंगा के प्रवाह (धारा) से उसकी रक्षा के लिए एक विशाल बाँध का भी निर्माण कराया, जो आज भी नगर (प्रयाग) और गंगा के बीच में सीमा के सदृश स्थित है। इसी (अकबर) ने अपने इलाही’ धर्म के अनुसार प्रयाग का नाम (बदलकर) इलाहाबाद कर दिया। यह किला अत्यधिक विशाल, मजबूत और सुरक्षा की दृष्टि से बड़ा महत्त्वपूर्ण है।

(5) भारतस्य …………………… कर्मभूमिश्च।।

[ आजादोपनामकश्चन्द्रशेखरः (आजाद +उपनामकः + चन्द्रशेखरः) = आजाद उपनामधारी चन्द्रशेखर अर्थात् चन्द्रशेखर आजाद उषित्वा = रहकर।]

अनुवाद – यह नगर भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन का प्रमुख केन्द्र था। श्री मोतीलाल नेहरू, महामना मदनमोहन मालवीय, चन्द्रशेखर आजाद तथा स्वतन्त्रता संग्राम के अन्य सैनिकों ने इसी पवित्र भूमि पर निवास करके आन्दोलन का संचालन किया था। राष्ट्रनायक पण्डित जवाहरलाल नेहरू की यह क्रीड़ा-स्थली एवं कर्मभूमि है।

(6) राष्ट्रभाषा …………………… वर्द्धयति।।
अत्रैव च ………………………… वर्द्धयति।
राष्ट्रभाषा ………………………… शोभते।

अनुवाद – राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार में लगा हिन्दी-साहित्य-सम्मेलन यहीं स्थित है और हजारों की संख्या में देशी-विदेशी छात्रों से घिरा, विविध-विद्याओं में निष्णात, श्रेष्ठ विद्वानों से सुशोभित, प्रयाग विश्वविद्यालय भरद्वाज (ऋषि) के प्राचीन गुरुकुल के नवीन रूप की भाँति शोभित है। इस स्वतन्त्र भारत में प्रत्येक नागरिक के न्याय-प्राप्ति के अधिकार की मानो घोषणा करता हुआ उच्च न्यायालय इस नगर की प्रतिष्ठा बढ़ा रहा है।

(7) एवं …………………… शरीरबन्धः ।।
समुद्रपन्योर्जल ……… नास्ति शरीरबन्धः।।

[महिमानं वर्णयन = महिमा का वर्णन करते हुए। समुद्रपन्योः = समुद्र की दो पत्नियों (नदियों) के (यहाँ गंगा और यमुना के)| जलसन्निपाते = संगम पर। किल = निश्चय ही। अभिषेकात = स्नान से। तत्त्वावबोधेन (तत्त्व +अवबोधेन) -तत्त्वज्ञान की प्राप्ति से। विनापि (विन + अपि) – बिना ही। भूयस = पुनः, फिर। तनुत्यजाम् =शरीर त्यागने वालों को। शरीरबन्धः =शरीर का बन्धन (पुनः जन्म लेना)।]

अनुवाद – इस प्रकार गंगा-यमुना-सरस्वती के पवित्र संगम पर स्थित, भारतीय संस्कृति के केन्द्र (इस नगर) की महिमा का वर्णन करते हुए महाकवि कालिदास ने सत्य ही कहा था
निश्चय ही यहाँ समुद्र की पत्नियों ( अर्थात् गंगा-यमुना) के जल-संगम में स्नान करने से पवित्र आत्मा वाले मनुष्यों को शरीर त्यागने पर तत्त्वज्ञान के बिना भी पुनः शरीर के बन्धन में नहीं बँधना पड़ता (अर्थात् उन्हें मोक्ष प्राप्त हो जाता है)।

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi संस्कृत दिग्दर्शिका Chapter 1 वन्दना

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श्लोकों का ससन्दर्भ अनुवाद

(1) विश्वानि ……………………. आसुव।

[ विश्वानि = सम्पूर्ण देव सवितर् = हे सूर्यदेव! दुरितानि = पापों को परासुव= दूर करो, नष्ट करो। यद् (यत्) = जो कुछ। भद्रं = कल्याणकारी (हो)। तन्नः (तत् + नः) = वह हमें। आसुव = प्रदान करो।]

सन्दर्भ – प्रस्तुत वैदिक मन्त्र हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के ‘वन्दना’ नामक पाठ से अवतरित
अनुवाद – हे सूर्यदेव! हमारे समस्त पापों को नष्ट करो (और) जो कल्याणकारी हो, वह हमें प्रदान करो।

(2) ईशावास्यमिदं …………………. धनम्

[ ईशा = ईश्वर से। वास्यम् = व्याप्त है। इदम् – यह। यत् किञ्च= जो कुछ भी। जगत्यां = अखिल ब्रह्माण्ड में। जगत्-जड़-चेतनरूप जगत्। त्यक्तेन = त्यागपूर्वक। भुञ्जीथाः = (इसे) भोगते रहो। मा गृधः = (इसमें) आसक्त मत होओ (मा = मत, नहीं)। कस्य स्विद् – किसका हैं ? (अर्थात किसी का नहीं)।]

सन्दर्भ – पूर्ववत्।।
अनुवाद – इस अखिल ब्रह्माण्ड में (स्थित) जो यह चराचर जगत् है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है, (इसलिए) उस ईश्वर को साथ रखते हुए (उसका सदा-सर्वदा स्मरण करते हुए) त्यागपूर्वक (इसे) भोगो, (इसमें) आसक्त मत होओ, (क्योंकि) धन (भोग्य पदार्थ) किसका है (अर्थात् किसी का भी नहीं है) ? [ अथवा, किसी के भी (कस्य स्वित्) धन पर (धनम्) ललचाओ मत—किसी के धन को मत ग्रहण करो (मा गृधः)।]
विशेष – आशय यह है कि सांसारिक पदार्थ नाशवान् हैं, इसलिए उनमें आसक्त न होकर ईश्वर का सदा स्मरण करते हुए त्यागपूर्वक उनका भोग करो।

(3) सह नाववतु ………………………… विद्विषावहै।

[ सह = साथ-साथ। नाववतु (नौ + अवतु) = ईश्वर हम दोनों (गुरु-शिष्य) की रक्षा करें। भुनक्तु – पालन करें। वीर्यम = शक्ति को करवावहै – (हम दोनो) प्राप्त करें। तेजस्वि- तेजोमयी। नौ – हम दोनों की। अधीतम-पढ़ी हुई विद्या! अस्त-हो। मा विद्विषावहे = हम दोनों परस्पर द्वेष न करें।]

सन्दर्भ – हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका के ‘वन्दना’ नामक पाठ से अवतरित कठोपनिषद् (शान्तिपाठ) के इस मन्त्र में, ईश्वर से गुरु-शिष्य के कल्याणार्थ प्रार्थना की गयी है।
अनुवाद – हे ईश्वर! आप हम दोनों (गुरु-शिष्य) की साथ-साथ रक्षा करें, साथ-साथ पालन करें, हम दोनों साथ-साथ बल प्राप्त करें, हम दोनों की अध्ययन की हुई विद्या तेजोयुक्त हो (हम कहीं किसी से विद्या में परास्त न हों), हम दोनों परस्पर (कभी) द्वेष न करें।

(4) उत्तिष्ठत ……………………………… वरान्निबोधत।

[ उत्तिष्ठत = उठो। प्राप्य = प्राप्त करो। वरान् = श्रेष्ठ मनुष्यों को। निबोधत = ज्ञान प्राप्त करो। ]

सन्दर्भ – कठोपनिषद् (1/3/14) की यह पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के ‘वन्दना नामक पाठ से अवतरित है।
अनुवाद – (हे मनुष्यो!) उठो (उद्यम करो), जागो (सावधान रहो), श्रेष्ठ मनुष्यों के समीप जाकर उनसे ज्ञान प्राप्त करो ( श्रेष्ठ अनुभवी विद्वानों के पास जाकर उनसे ज्ञान अर्जित करो)।

(5) यतो यतः …………………………… पशुभ्यः ।

[यतो यतः = जहाँ-जहाँ से। समीहसे= चाहते हो। ततः = वहाँ से। नः = हमें। शन्नः (शं+नः) = हमारा (नः) कल्याण (शं)| प्रजाभ्यः = प्रजाओं (सन्तान) का। पशुभ्यः = पशुओं से (भय के योग में पञ्चमी विभक्ति होती है)।]

सन्दर्भ – हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के ‘वन्दना’ नामक पाठ से अवतरित यजुर्वेद (36/22) के इस मन्त्र में भगवान् से रक्षा करने की प्रार्थना की गयी है।
अनुवाद – हे प्रभो! तुम जहाँ-जहाँ से उचित समझो (अर्थात् जहाँ-जहाँ से हम पर संकट आने वाला हो) वहाँ से हमें निर्भय करो (अर्थात् हमारी रक्षा करो), हमारी सन्तान का कल्याण करो और हमें पशुओं से निर्भय करो।

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UP Board Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 Comparative Development Experiences of India and its Neighbours

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Economics
Chapter Chapter 10
Chapter Name  Comparative Development Experiences
of India and its Neighbours (भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव)
Number of Questions Solved 45
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 Comparative Development Experiences of India and its Neighbours (भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
कुछ क्षेत्रीय और आर्थिक समूहों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर
विश्व के लगभग सभी राष्ट्र 1960 के दशक से ही अपनी घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए अनेक क्षेघ्रीय एवं वैश्विक आर्थिक समूहों का निर्माण करते रहे हैं जैसे सार्क (SAARC), यूरोपीय संघ (EU), आसियान (ASEAN), जी-8 (G-8) तथा जी-20 (G-20) आदि।।

प्रश्न 2.
वे विभिन्न साधन कौन-से हैं जिनकी सहायता से देश अपनी घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने का प्रयत्न कर रहे हैं ?
उत्तर
विभिन्न देश अपनी घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को निम्न साधनों से मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं

  1. विभिन्न प्रकार के क्षेत्रीय एवं वैश्विक आर्थिक समूहों का निर्माण करके जैसे सार्क (SAARC), आसियान (ASEAN), जी-8 (G-8), यूरोपीय संघ (EU) आदि।।
  2. अपनी अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुधारों को अपनाकर अर्थात् वैश्वीकरण की प्रक्रिया को अपनाकर।
  3. अपने पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा अपनाई गई विकासात्मक प्रक्रियाओं को समझकर।
  4. अपने पड़ोसी देशों की शक्तियों एवं कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझकर।
  5. वैश्वीकरण के प्रभावों का आकलन करके।

प्रश्न 3.
वे समान विकासात्मक नीतियाँ कौन-सी हैं जिनका कि भारत और पाकिस्तान ने अपने-अपने विकासात्मक पथ के लिए पालन किया है?
उत्तर
भारत व पाकिस्तान द्वारा अपनाई गई समान विकासात्मक नीतियाँ जिनके द्वारा उन्होंने अपने विकासात्मक पथ के लिए पालन किया है, निम्नलिखित हैं|

  1. भारत और पाकिस्तान ने अपने विकास पथ पर लगभग एक ही समय चलना प्रारम्भ किया है।
  2. भारत ने 1951 ई० में अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की जबकि पाकिस्तान ने 1956 में अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की। इस प्रकार दोनों ही देशों ने विकास के लिए आर्थिक नियोजन का मार्ग अपनाया।
  3. दोनों ही देशों ने प्रारम्भ में सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार पर बल दिया किन्तु निजी क्षेत्र की भी उपेक्षा नहीं की। इस प्रकार दोनों ही देशों ने ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई।
  4. दोनों ही देशों ने अपने व्यय का अधिकांश ‘सामाजिक विकास पर किया अर्थात् दोनों ही देशों की प्राथमिकता सार्वजनिक विकास’ रही।
  5. दोनों ही देशों ने अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए लगभग एक ही समय पर आर्थिक सुधार कार्यक्रम लागू किए।

प्रश्न 4.
1958 में प्रारम्भ की गई चीन के ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ (महान प्रगति उछाल) अभियाष की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
‘महान् प्रगति उछाल’ (Great Leap Forward: GLF) 1958 ई० में चीन में आरम्भ किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य बड़े पैमाने पर देश का औद्योगीकरण करना था। इस अभियान के अन्तर्गत सरकार ने एक ऐसी सामाजिक जागृति को प्रोत्साहित किया जिसके द्वारा लोग औद्योगीकरण (उद्योगों की स्थापना) की 
ओर आकर्षित हुए। इसके अन्तर्गत लोगों को अपने घरों के पिछवाड़े खाली स्थानों पर उद्योग लगाने को प्रोत्साहित किया गया। इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे

  1. समष्टि स्तर पर औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करना।
  2. लोगों को अपने घरों के पिछवाड़े, खाली स्थानों पर उद्योग लगाने को प्रोत्साहित करना।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक खेती’ (commune) को प्रोत्साहित करना।

‘लेप लीप फॉरवर्ड’ अभियान को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनमें प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित थीं

  1. भयंकर सूखे ने चीन में तबाही मचा दी। इसमें लगभग 3 करोड़ लोग मारे गए।
  2. रूस और चीन के मध्य संघर्ष हो गया और रूस ने अपने उन सभी विशेषज्ञों को वापस बुला लिया जिन्हें औद्योगीकरण की प्रक्रिया के लिए सहायता करने के लिए चीन भेजा गया था।

प्रश्न 5.
“चीन की तीव्र औद्योगिक संवृद्धि 1978 में उसके सुधारों के आधार पर हुई थी। क्या आप | इस कथन से सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
चीन में आर्थिक सुधार 1978 ई० से लागू किए गए। ये सुधार विभिन्न चरणों में शुरू किए गए। प्रारम्भिक चरण में कृषि, विदेशी व्यापार तथा निवेश क्षेत्रकों में सुधार किए गए। उदाहरण के लिए कृषि क्षेत्रक कम्यून (सामूहिक) भूमि को छोटे-छोटे भू-खण्डों में बाँट दिया गया जिन्हें कृषि प्रयोग के लिए अलग-अलग परिवारों को आवंटित किया गया। कर देने के बाद शेष आय के वे स्वयं स्वामी थे। दूसरे चरण में औद्योगिक क्षेत्र में सुधार किए गए। ग्रामीण उद्योगों की स्थापना के लिए निजी क्षेत्रक को प्रोत्साहित किया गया। इसके फलस्वरूप सार्वजनिक क्षेत्रक को निजी क्षेत्रक की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। सुधार प्रक्रिया में ‘दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति’ (Dual pricing policy) लागू की गई—

  1. सरकार द्वारा निर्धारित कीमत,
  2. बाजार द्वारा निर्धारित कीमत।।

आगतों और निर्गतों की एक निर्धारित मात्रा का क्रय-विक्रय सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर किया जाता था जबकि शेष मात्रा का क्रय-विक्रय बाजार द्वारा निर्धारित कीमतों पर किया जाता था। विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (Special economic zones) स्थाषित किए गए। परिणामस्वरूप चीन की औद्योगिक संवृद्धि दर तेजी से बढ़ती गई।

प्रश्न 6.
पाकिस्तान द्वारा अपने आर्थिक विकास के लिए की गई विकासात्मक पहलों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
पाकिस्तान द्वारा अपने आर्थिक विकास के लिए की गई विभिन्न विकासात्मक पहले निम्नलिखित 
हैं
(1) पाकिस्तान ने ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया जिसमें सार्वजनिक व निजी क्षेत्रक मिलकर काम करते हैं। दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं।
(2) 1950 और 1960 के दशकों में अन्त में पाकिस्तान ने अनेक प्रकार के नियन्त्रण लगाए

  • औद्योगिक विकास के लिए आयात प्रतिस्थापन की नीति को अफ्नाया।।
  • उपभोक्ता वस्तुओं के विनिर्माण को संरक्षण देने के लिए प्रशुल्क लगाए।
  • प्रतिस्पर्धा आयातों पर आयात-नियन्त्रण लगाए।
  • चुनिन्दा क्षेत्रों की आधारिक संरचना में सार्वजनिक निवेश में वृद्धि की।
  • 1970 ई० के दशक में प्रमुख पूँजीगत वस्तुओं के उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया।
  • कृषि क्षेत्र में हरित क्रान्ति को प्रोत्साहन दिया।
  • 1970 और 1980 के दशकों के अन्त में अ-राष्ट्रीयकरण की नीति अपनाई और निजी क्षेत्रक को प्रोत्साहित किया।
  • 1988 ई० में देश में आर्थिक सुधार लागू किए गए।

प्रश्न 7.
चीन में ‘एक सन्तान नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ क्या है?
उत्तर
1970 ई० के दशक के अन्त में चीन में ‘एक सन्तान नीति लागू की गई थी। इस नीति के निम्नलिखित परिणाम सामने आए

  1. चीन में जनसंख्या वृद्धि की गति बहुत धीमी हो गई।
  2. चीन में लिंगानुपात (प्रति एक हजार पुरुषों में महिलाओं को अनुपात) में गिरावट आई।
  3.  यह अनुमान लगाया गया कि कुछ दशकों के बाद चीन में वयोवृद्ध लोगों की जनसंख्या का अनुपात युवा लोगों की अपेक्षा अधिक हो जाएगा।
  4. चीन को सामाजिक सुरक्षा उपाय बढ़ाने होंगे।

प्रश्न 8.
चीन, पाकिस्तान और १रत के मुख्य जनांकिकीय संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
चीन व भारत क्रमश: विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश हैं। विश्व में रहने वाले प्रत्येक छ: व्यक्तियों में से एक व्यक्ति भारतीय है और दूसरा चीनी है। इसके विपरीत पाकिस्तान की जनसंख्या बहुत कम है और वह चीन या भारत की जनसंख्या का लगभग दसवाँ भाग है। जनसंख्या वृद्धि की दर पाकिस्तान में सबसे अधिक है, और उसके बाद भारत व चीन का स्थान है। चीन में प्रजनन दर भी बहुत कम है और पाकिस्तान में बहुत अधिक। इसे तालिका 10.1 में दर्शाया गया है
UP Board Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 camparative development 1
[* नोट-इन आँकड़ों में हाँगकाँग, मकाओ और ताइवान प्रान्तों के आँकड़े शामिल नहीं हैं।] अर्युक्त तालिका में निम्न बातें स्पष्ट होती है

  1. जनसंख्या की दृष्टि से चीन का प्रथम, भारत का द्वितीय तथा पाकिस्तान का तृतीय है।
  2. जनसंख्या की वार्षिक संवृद्धि दर पाकिस्तान में सर्वाधिक (2.5) है। इसके बाद भारत (1.7) का नम्बर आता है। चीन (1.0) में यह सबसे कम है।
  3. भारत में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक (358) है जबकि पाकिस्तान में 193 तथा चीन में 138 है।
  4. लिंगानुपात की दृष्टि से चीन का  प्रथम (937), भारत का द्वितीय (933) तथा पाकिस्तान का तृतीय (922) है।
  5. प्रजनन दर पाकिस्तान में सर्वाधिक (5.1) है जबकि भारत में यह 3.0 तथा चीन में सबसे कम (1.8) है।
  6. चीन (36.1) तथा पाकिस्तान (33.4) दोनों ही में नगरीकरण अधिक है। भारत में नगरीय क्षेत्रों में लगभग 28% लोग रहते हैं।

प्रश्न 9.
मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
मानव विकास के विभिन्न संकेतक निम्नलिखित हैं

  1. प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद।
  2. निर्धनता रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले लोग।
  3. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा।
  4. प्रौढ़ साक्षरता दरें (15 वर्ष और अधिक आयु)।
  5. सामान्य साक्षरता दर :
  6. शिशु मृत्यु-दर।
  7. मातृत्व मृत्यु-दर।
  8. उत्तम स्वच्छता तक धारणीय पहुँच वाली जनसंख्या।
  9. उत्तम जलस्रोतों तक धारणीय पहुँच वाली जनसंख्या।
  10. अल्पपोषित जनसंख्या।

प्रश्न 10.
स्वतन्त्रता संकेतक की परिभाषा दीजिए। स्वतन्त्रता संकेतकों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर
स्वतन्त्रता संकेतक की परिभाषा स्वतन्त्रता संकेतक को ‘सामाजिक व राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में लोकतान्त्रिक भागीदारी के रूप में परिभाषित किया जाता है। प्रमुख स्वतन्त्रता संकेतांकों के उदाहरण निम्नलिखित हैं

  1. नागरिक अधिकारों की संवैधानिक संरक्षण की सीमा।
  2. न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को संरक्षण देने की संवैधानिक सीमा।
  3. विधिसम्मत शासन।

प्रश्न 11.
उन विभिन्न कारकों का मूल्यांकन कीजिए जिनके आधार पर चीन में आर्थिक विकास में 
तीव्र वृद्धि (तीव्र आर्थिक विकास) हुई। उत्तर
चीन में तीव्र आर्थिक विकास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

  1. विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के दिशा-निर्देशों के बिना ही चीन ने 1978 ई० में आर्थिक सुधारों को आरम्भ किया।
  2. व्यापक भूमि सुधार, सामुदायिकीकरण और ग्रेट लीप फॉरवर्ड जैसी पहले (Initiatives) ली गईं।
  3. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में आधारिक संरचना का निर्माण किया गया, योजनाओं को विकेन्द्रीकरण किया गया, भू-सुधार कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया गया तथा लघु उद्योगों के विकास पर पर्याप्त बल दिया गया।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं का बड़े व्यापक स्तर पर प्रसारण किया गया।
  5. प्रत्येक सुधार को पहले छोटे स्तर पर लागू किया गया और बाद में उसे बड़े पैमाने पर लागू किया गया। उपर्युक्त सुधारों के कारण चीन की वार्षिक संवृद्धि दर में तेजी से वृद्धि हुई।

प्रश्न 12.
भारत, चीन और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं से सम्बन्धित विशेषताओं को तीन शीर्षकों के अन्तर्गत समूहित कीजिए

  1. एक सन्तान का नियम
  2. निम्न प्रजनन दर
  3. नगरीकरण का उच्च स्तर
  4. मिश्रित अर्थव्यवस्था
  5. अति उच्च प्रजनन पर
  6. भारी जनसंख्या
  7. जनसंख्या का अत्यधिक घनत्व
  8. विनिर्माण क्षेत्रक के कारण संवृद्धि
  9. सेवा क्षेत्रक के कारण संवृद्धि।

प्रश्न 13.
पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि दर तथा पुनःनिर्धनता के कारण बताइए।
उत्तर
पाकिस्तान में संवृद्धि दर धीमी रही है। यह 1980-90 के दशक में 6.3% थी जो 1990-2003 की अवधि के दौरान घटकर 3.6% रह गई। यह गिरावट कृषि, विनिर्माण व सेवा–तीनों ही क्षेत्रकों में देखी गई। संवृद्धि दर में गिरावट के साथ-साथ निर्धनता का स्तर भी कम होने के बाद 1990 के दशक में पुन: बढ़ने लगा है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

  1. कृषि संवृद्धि और खाद्य पूर्ति, तकनीकी परिवर्तन संस्थागत प्रक्रिया पर आधारित न होकर अच्छीफसल पर आधारित था। फसल के अच्छा होने पर अर्थव्यवस्था ठीक रहती थी और फसल के अच्छी न होने पर संवृद्धि दर गिर जाती थी।
  2. विदेशी मुद्रा फ़ा अर्जन विनिर्मित उत्पादों के निर्यात पर आधारित न होकर, मध्य-पूर्व में काम करने वाले पाकिस्तानी श्रमिकों की आय प्रेषण तथा अति अस्थिर कृषि उत्पादों के निर्यातों पर आधारित था।
  3. पाकिस्तान में विदेशी ऋणों पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति बढ़ रही थी और दूसरी ओर पुराने ऋणों को चुकाने की कठिनाई बढ़ती जा रही थी। इस प्रकार पाकिस्तान विदेशी ऋण-जाल में फँसता जा रहा था।
  4.  पाकिस्तान विनिर्माण क्षेत्र के लिए आवश्यक आधारिक संरचना का निर्माण नहीं कर पाया।
  5. आतंकवाद के चलते विदेशी निवेशकों ने पाकिस्तान में निवेश के प्रति रुचि नहीं दिखाई।

प्रश्न 14.
कुछ विशेष मानव विकास संकेतांकों के सन्दर्भ में भारत, चीन और पाकिस्तान के विकास की तुलना कीजिए और उसका वैषम्य बताइए।
उत्तर
तालिका 10.2 में भारत, चीन और पाकिस्तान में मानव विकास के कुछ विशेष मानव विकास संकेतांकों की निष्पादन प्रवृत्ति को दर्शाया गया है|

तालिका 10.2 : कुछ विशेष मानव विकास संकेतांक (2003 ई0)
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 उपर्युक्त तालिका के प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं

  1. प्रति व्यक्ति जी०डी०पी० की दृष्टि से चीन भारत व पाकिस्तान से आगे है। इसमें पाकिस्तान का स्थान सबसे नीचे है।
  2. निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या पाकिस्तान में सबसे कम है। भारत में सबसे अधिक लोग निर्धनता रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। यदि इस संख्या को प्रतिशत में अभिव्यक्त करें, तो यह प्रतिशत चीन में सबसे कम है।
  3. जीवन प्रत्याशा चीन में सर्वाधिक है। इसके बाद क्रमशः भारत व पाकिस्तान का स्थान है।
  4. प्रौढ़ साक्षरता दर में चीन का स्थान सर्वोपरि है। इसके बाद भारत और पाकिस्तान का स्थान आता
  5. शिशु मृत्यु-दर एवं मातृत्व मृत्यु-दर भी चीन में ही सबसे कम है। इसके बाद शिशु मृत्यु-दर में भारत तथा मातृत्व मृत्यु दर में पाकिस्तान का स्थान है।
  6. स्वच्छता व जलस्रोतों तक धारणीय पहुँच वाली जनसंख्या का प्रतिशत भी पाकिस्तान में सर्वाधिक
  7. सबसे कम अल्पोषित जनसंख्या का प्रतिशत चीन में है। इसके बाद क्रमशः भारत और पाकिस्तान का स्थान है।

संक्षेप में, अनेक सूचकों में चीन, अनेक सूचकों में भारत तो अनेक सूचकों में पाकिस्तान आगे है, किन्तु समग्र रूप में चीन का सर्वोपर (85वाँ) स्थान है जबकि भारत और पाकिस्ताने का स्थान क्रमशः 127वाँ व 135वाँ है।

प्रश्न 15.
पिछले दो दशकों में चीन और भारत में देखी गई संवृद्धि दर की प्रवृत्तियों पर टिप्पणी| कीजिए।
उत्तर
पिछले दो दशकों में चीन और भारत की संवृद्धि की प्रवृत्तियों को तालिका 10.3 में दर्शाया गया है
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उपर्युक्त तालिका में निम्न बातें स्पष्ट होती हैं

  1. दोनों देशों में कृषि संवृद्धि की दर घटी है। भारत में यह 3.1% से घटकर 2.7% रह गई है जबकि चीन में यह 5.9% से घटकर 3.9% रह गई। स्पष्ट है कि गिरावट की यह दर चीन में अधिक रही
  2. चीन में उद्योग की संवृद्धि दर बढ़ी है। (10.8% से बढ़कर 11.8%) जबकि भारत में औद्योगिक | संवृद्धि दर घटी है (7.4% से घटकर 6.6%)।
  3. भारत में सेवा क्षेत्रक में संवृद्धि दर बढ़ी है (6.9% से बढ़कर 7.9%) जबकि चीन में यह घटी है।| (13.5% से घटकर 8.8%)। इस प्रकार भारत में सेवा क्षेत्रक और चीन में विनिर्माण क्षेत्रक में जी०डी०पी० योगदान अधिक रहा है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित रिक्त स्थानों को भरिए
(क) 1956 ई० में ………….” की प्रथम पंचवर्षीय योजना शुरू हुई थी पाकिस्तान/चीन)
(ख) मातृत्व मृत्यु-दर ……….. में अधिक है। 
(चीन/पाकिस्तान)
(ग) निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का अनुपात :………..’ में अधिक है। 
(भारत/पाकिस्तान)
(घ) …………. में आर्थिक सुधार 1978 ई० में शुरू किए गए थे। (चीन/पाकिस्तान)
उत्तर
(क) पाकिस्तान,
(ख) पाकिस्तान,
(ग) भारत,
(घ) चीन।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
महान प्रगति उछाल (ग्रेट लीप फॉरवर्ड) का आरम्भ कहाँ किया गया?
(क) भारत में
(ख) चीन में
(ग) नेपाल में
(घ) अमेरिका में
उत्तर
(ख) चीन में।।

प्रश्न 2.
चीन में आर्थिक सुधार लागू किए गए
(क) सन् 1958 में
(ख) सन् 1988 में
(ग) सन् 1950 में
(घ) सन् 1978 में
उत्तर
(घ) सन् 1978 में।

प्रश्न 3.
पाकिस्तान में कब आर्थिक सुधार लागू किए गए?
(क) सन् 1988 में
(ख) सन् 1990 में
(ग) सन् 2000 में
(घ) सन् 1900 में
उत्तर
(क) सन् 1988 में।।

प्रश्न 4.
चीन में एक सन्तान नीति कब लागू की गई?
(क) सन् 1980 में
(ख) सन् 1900 में
(ग) सन् 1970 में
(घ) सन् 1950 में
उत्तर
(ग) सन् 1970 में।

प्रश्न 5.
भारत सरकार ने कब आर्थिक सुधार लागू किए?
(क) 1990 के दशक में ।
(ख) 1980 के दशक में
(ग) 2000 के दशक में ।
(घ) 2010 के दशक में
उत्तर
(क) 1990 के दशक में।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किन्हीं दो क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूहों के नाम बताइए।
उत्तर
क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह हैं-
(1) सार्क
(2) आसियान।

प्रश्न 2.
भारत की प्रथम पंचवर्षीय योजना की अवधि क्या थी?
उत्तर
भारत की प्रथम पंववर्षीय योजना की अवधि 1951-56 ई० थी।

प्रश्न 3.
पाकिस्तान ने अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा कब की?
उत्तर
पाकिस्तान ने सन् 1956 में अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की। इसे मध्यकालिक योजना भी कहा गया।

प्रश्न 4.
चीन ने अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा कब की?
उत्तर
चीन ने अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा 1953 ई० में की।

प्रश्न 5.
भारत व पाकिस्तान की दो समान नीतियाँ बताइए।
उत्तर
भारत व पाकिस्तान की दो समान नीतियाँ थीं
(1) वृहत् सार्वजनिक क्षेत्र का सृजन
(2) सामाजिक विकास पर अधिक सार्वजनिक व्यय।

प्रश्न 6.
‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड क्या है?
उत्तर
‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ 1958 ई० में चलाया चीन का एक मुख्य अभियान था जिसका मुख्य बिन्दु देश के औद्योगीकरण को उच्च पैमाने पर ले जाना था।

प्रश्न 7.
कम्यून क्या था?
उत्तर
केम्यून एक ऐसी पद्धति थी जिसके अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सामूहिक रूप से खेती करते थे। 1958 ई० में लगभग 26,000 कम्यून थे।

प्रश्न 8.
जी०एल०एफ० अभियान में कौन-कौन-सी प्रमुख समस्याएँ आई?
उत्तर
जी०एल०एफ० अभियान में दो प्रमुख समस्याएँ सामने आईं-
(1) भयंकर सूखा,
(2) रूस और चीन के मध्य संघर्ष।

प्रश्न 9.
माओ ने चीन में किस क्रान्ति का आरम्भ किया?
उत्तर
1965 ई० में माओ ने ‘महान् सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति’ का आरम्भ किया जिसके अन्तर्गत छात्रों और विशेषज्ञों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने और अध्ययन करने के लिए भेजा गया।

प्रश्न 10.
चीन में तीव्र औद्योगिक संवृद्धि दर का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर
चीन में तीव्र औद्योगिक संवृद्धि दर का मुख्य कारण 1978 ई० में लागू किए गए ‘सुधार कार्यक्रम

प्रश्न 11.
चीन में आर्थिक सुधारों को किस प्रकार लागू किया गया?
उत्तर
चीन में आर्थिक सुधार विभिन्न चरणों में लागू किए गए। प्रथम चरण में कृषि, विदेशी व्यापार तथा निवेश क्षेत्रों में सुधार किए गए तथा द्वितीय चरण में औद्योगिक क्षेत्र में सुधार आरम्भ किए गए।

प्रश्न 12.

चीन में दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति क्या थी?
उत्तर
चीन में कीमत का निर्धारण दो प्रकार से किया जाता था
(1) निर्धारित मात्रा का क्रय-विक्रय सरकार द्वारा निर्धारित कीमत पर तथा
(2) शेष वस्तुओं का क्रय-विक्रय बाजार कीमतों पर।

प्रश्न 13.
चीन में विशेष आर्थिक क्षेत्र क्यों स्थापित किए गए?
उत्तर
चीन में विशेष आर्थिक क्षेत्र विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्थापित किए गए।

प्रश्न 14.
1950 व 1960 ई० के दशकों के अन्त में पाकिस्तान की नीतियाँ कैसी थीं?
उत्तर
1950 व 1960 के दशकों के अन्त में पाकिस्तान ने अनेक प्रकार की नियन्त्रित नीतियों का प्रारूप लागू किया। इनमें से प्रमुख थीं-आयात-प्रतिस्थापन नीति, प्रशुल्क संरक्षण, प्रतिस्पर्धी आयातों पर प्रत्यक्ष नियन्त्रण आदि।

प्रश्न 15.
पाकिस्तान में हरित क्रान्ति के क्या परिणाम हुए? ”
उत्तर
पाकिस्तान में हरित क्रान्ति के परिणाम हुए-कृषि यन्त्रीकरण में वृद्धि, खाद्यान्नों के उत्पादन में तीव्र वृद्धि, कृषि-भू-संरचना में परिवर्तन आदि।

प्रश्न 16.
चीन में जनसंख्या वृद्धि की धीमी दर का क्या कारण रहा है?
उत्तर
1970 ई० के दशक के अन्त में चीन में केवल एक सन्तान नीति’ को लागू करना।

प्रश्न 17.
1980 ई० के दशक में पाकिस्तान की संवृद्धि दर में भारी गिरावट के क्या कारण थे?
उत्तर
ये कारण थे—
(1) 1988 ई० में प्रारम्भ की गई सुधार प्रक्रिया तथा
(2) राजनीतिक अस्थिरता।

प्रश्न 18.
चीन, भारत व पाकिस्तान के जी०डी०पी० में किस क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक है?
उत्तर
चीन में विनिर्माण क्षेत्रक का तथा भारत व पाकिस्तान में सेवा क्षेत्रक का योगदान सर्वाधिक है।

प्रश्न 19.
कोई दो मानव विकास संकेतांकञताइए।
उत्तर
ये हैं—
(1) प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद तथा
(2) जीवन प्रत्याशा।

प्रश्न 20.
कोई दो स्वतन्त्रता संकेतांक बताइए।
उत्तर
ऐसे संकेतांक हैं—
(1) सामाजिक व राजनीतिक निर्णय-प्रक्रिया में लोकतान्त्रिक भागीदारी तथा
(2) न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को संरक्षण देने की संवैधानिक सीमा।

प्रश्न 21.
चीन, पाकिस्तान और भारत ने कब-कब आर्थिक सुधार आरम्भ किए?
उत्तर
चीन ने 1978 ई० में, पाकिस्तान में 1988 ई० में तथा भारत ने 1991 ई० में आर्थिक सुधार प्रारम्भ किए।

प्रश्न 22.
चीन, पाकिस्तान और भारत में आर्थिक सुधारों का प्रेरणा-स्रोत क्या था?
उत्तर
चीन ने संरचनात्मक सुधारों का निर्णय स्वयं लिया था जबकि भारत और पाकिस्तान को अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने ऐसे सुधार करने के लिए बाध्य किया था।

प्रश्न 23.
चीन ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए किस नीति का अनुसरण किया?
उत्तर
चीन ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए केवल एक सन्तान नीति’ का अनुसरण किया।

प्रश्न 24.
चीन, पाकिस्तान व भारत में से किस देश में कृषि निर्भरता सबसे अधिक है?
उत्तर
चीन, पाकिस्तान व भारत में से भारत में कृषि निर्भरता सबसे अधिक है।

प्रश्न 25.
चीन, पाकिस्तान व भारत की विकास नीति क्या रही?
उत्तर
चीन ने फ्रम्परागत विकास नीति को अपनाया जिसमें क्रमशः कृषि से विनिर्माण तथा उसके बाद सेवा की ओर अग्रसर होने की प्रवृत्ति थी। भारत तथा पाकिस्तान सीधे कृषि से सेवा क्षेत्रक की ओर चले गए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के मुख्य आयात और निर्यात कौन-से हैं?
उत्तर
भारत की मुख्य आयातक वस्तुएँ हैं-उर्वरक, खाद्य तेल, अखबारी कागज, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी, परियोजना का सामान, औषधि और फार्मास्युटिकल उत्पाद, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन, कोयला, कुकिंग कोल व कृत्रिम रेजिन आदि।। भारत की मुख्य निर्यातक वस्तुएँ हैं—समुद्री उत्पाद, अयस्क और खनिज, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, जवाहराते और आभूषण, रसायन और सह-उत्पाद, इन्जीनियरिंग का सामना, कपड़ा और दस्तकारी का सामान, चीनी, दुग्ध उत्पाद व इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि।

प्रश्न 2.
भारत की आर्थिक स्थिति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
भारत एक विकासशील देश है। भारतीय जनसंख्या का लगभग 70% भाग कृषि कार्य में संलग्न है। जबकि सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान लगभग 19.7% है। 1970 के दशक के हरित क्रान्ति के फलस्वरूप कृषि क्षेत्र ने महत्त्वपूर्ण प्रगति की है। इसके बावजूद लगभग 26% भारतीय आज भी निर्धन ही हैं। गत वर्षों में औद्योगि उत्पाद में विस्तार एवं विविधीकरण हुआ है। कार्य-बल का लगभग 15% भाग उद्योग क्षेत्र में कार्यरत है। 1990 के दशक में सरकार ने आर्थिक सुधार लागू किए जिसके अन्तर्गत भारतीय उद्योग को सभी प्रकार के नियन्त्रणों से मुक्त कर दिया गया, व्यापार के लिए भारतीय द्वार खोल दिए गए, विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए उचित कदम उठाए गए। तब से सेवा क्षेत्रक को तेजी से विस्तार हुआ है, आधारिक संरचना का निर्माण हुआ है और रोजगार के नए-नए अवसर सृजित हुए हैं। फलस्वरूप आज भारत विकासशील देशों में अधिकतम विकसित देश है।

प्रश्न 3.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। जनसंख्या का लगभग 50% भाग इस कार्य में लगा है। खाद्यान्नों के उत्पादन में देश आत्मनिर्भर है। पाकिस्तान का उद्योग देश की अधिकांश उपभोक्ता वस्तुओं की जरूरतों को पूरा करता है। तेलशोधन, धातु प्रक्रमण तथा ताप बिजली संयन्त्रों के प्रयोग के फलस्वरूप बिजली के उत्पादन में बहुत अधूिक वृद्धि हुई है। इसके बावजूद आर्थिक दृष्टि से पाकिस्तान एक पिछड़ा देश है। यहाँ प्रति व्यक्ति आय कम है, आर्थिक निष्पादन अकुशल है और राजनीतिक अस्थिरता के कारण विकास की गति रुकी हुई है। विभिन्न आर्थिक एवं सामाजिक विकास की दृष्टि से पाकिस्तान पिछड़ता ही जा रहा है।

प्रश्न 4.
चीन की अर्थव्यवस्था पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
चीन एक विकासशील देश है। 1970 के दशक के पश्चात् इसका बड़ी तेजी से आर्थिक विकास हुआ है। कृषि अभी भी इसका मुख्य व्यवसाय है और 50% से भी अधिक जनसंख्या यहाँ कृषि कार्यों में संलग्न है। यहाँ पशुपालन व्यवसाय भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। यहाँ बड़ी मात्रा में खनिज पदार्थ पाए जाते हैं तथा बड़ी मात्रा में खनिज तेल का उत्पादन किया जाता है। 1970 के अन्तिम वर्षों में आर्थिक नीतियों में परिवर्तन किए गए जिसके अन्तर्गत उद्योगों का विकेन्द्रीकरण किया गया। विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना की गई तथा विदेशी पूँजी को आकर्षित करने के लिए प्रयास किए गए जिसके फलस्वरूप औद्योगिक विकास को गति मिली।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत और पाकिस्तान की एकसमान सफलताएँ और विफलताएँ क्या हैं? किन क्षेत्रों में 
पाकिस्तान का निष्पादन भारत से बेहतर है और किन क्षेत्रों में भारत का निष्पादन पाकिस्तान से बेहतर है?
उत्तर

भारत और पाकिस्तान की एकसमान सफलताएँ

1. भारत तथा पाकिस्तान दोनों ही देश प्रति व्यक्ति आय को दुगुना करने में सफल रहे हैं।
2. दोनों ही देशों पर निर्धनता का भार कम हुआ है।
3. दोनों ही देश खाद्यान्नों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हैं (प्राकृतिक विपदाओं के वर्षों को छोड़कर)।
4. दोनों ही देशों में ‘पोषण स्थिति में सुधार हुआ है।
5. दोनों ही अर्थवयवस्थाओं की प्रकृति दोहरी है-एक सुविकसित आधुनिक क्षेत्र तथा एक पिछड़ा हुआ रूढ़िवादी क्षेछ।

भारत और पाकिस्तान की एकसमान विफलताएँ

1. दोनों ही देश एक ‘सकुशल अर्थव्यवस्था’ का निर्माण कर पाने में विफल रहे हैं।
2. दोनों ही देशों में प्रशासनिक शिथिलता पाई जाती है। व्यापक भ्रष्टाचार, अधिकारों एवं अनुबन्धों का दोषपूर्ण प्रयोग और पारदर्शिता का अभाव दोनों ही देशों में विद्यमान है। इससे ‘जन भागीदारी हतोत्साहित हुई है।
3. दोनों ही देशों के राजकोषीय प्रबन्धन में अकुशलता पाई जाती है। राजकोषीय घाटा उच्च है, अनुत्पादक व्यय अधिक है, ऋण और ऋणों पर ब्याज का भार बढ़ता ही जा रहा है तथा मूल सामाजिक सेवाओं तक जनता की पहुँच निम्न है।
4. वित्तीय क्षेत्र की स्थिति चिन्ताजनक है। साख गुणवत्ता की उपेक्षा की गई है, बैंकों की | गैर-निष्पादक सम्पत्तियाँ बढ़ी हैं तथा वित्तीय क्षेत्र कमजोर हो गया है। 

पाकिस्तान के बेतहर निष्पादन वाले क्षेत्र

वे क्षेत्र जिनमें भारत का निष्पादन पाकिस्तान से बेहतर है, निम्नलिखित हैं
1. सॉफ्टवेयर के निर्यात में भारत ने आशा से अधिक प्रगति की है।
2. भारत में मानव संसाधन की कुशलता में अधिक तेजी से वृद्धि हुई है। ”
3. प्रतिरक्षा, प्रौद्योगिकी, अन्तरिक्ष अनुसन्धान, इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स तणि जेनेटिक्स व दूरसंचार 
आदि क्षेत्रों में भारत की प्रगति अधिक सराहनीय रही है।
4. प्रौढ़ शिक्षा दर, महिला शिक्षा दर, सभी स्तरों पर नामांकन अनुपात तथा शिक्षा सूचकांक भारत में 
पाकिस्तान की तुलना में बहुत आगे हैं।

प्रश्न 2.
आर्थिक व सामाजिक प्रगति की दृष्टि से चीन व भारत की तुलना कीजिए।
उत्तर
चीन व भारत की तुलनात्मक प्रगति चीन में भारत का मुख्य बिन्दुओं को विवेचन निम्न प्रकार है

  1. यद्यपि दोनो ही देश आकार व जनसंख्या की दृष्टि से विशाल हैं, भारत की वृद्धि दर चीन की वृद्धि | दर से कम है तथा इसमें व्यापक उतार-चढ़ाव की प्रवृत्ति भी पाई जाती है।
  2. चीन में सुधार की प्रक्रिया अस्सी के दशक में प्रारम्भ हुई जबकि भारत में सुधार की प्रक्रिया 1990 के दशक में प्रारम्भ हुई।
  3. चीन में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का उद्देश्य देश में प्रतियोगी वातावरण का सृजन करना था जबकिभारत में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का प्रारम्भिक उद्देश्य भुगतान शेष के असाधारण संकट से निपटनी था।
  4. भारत की तुलना में चीन में सुधारों का ढाँचा निर्धन वर्ग के अधिक अनुकूल था।
  5. चीन में व्यापक पैमाने पर कृषि सम्बन्धी सुधार किए गए जबकि भारत में कृषि सम्बन्धी सुधार अभी शैशव अवस्था में ही हैं।
  6. भारत की तुलना में चीनी अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर मुक्त कर दिया गया है। चीन में विदेशी निवेशकों को पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त है। उन्हें उत्कृष्ट आधारिक संरचना प्रदान की गई है। इसके विपरीत भारत में व्यापक निर्धनता, अस्थिर सरकार, बढ़ रही वित्तीय समस्याएँ तथा घटिया भौतिक आधारिक संरचना विदेशी निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण नहीं बना पाई है।
  7. चीन में विदेशी निवेश भूमि, भवनों, प्लाण्ट तथा मशीनरी में पाया जाता है जबकि भारत में तुलनात्मक लघु विदेशी निवेश का अधिक अनुपात पोर्टफोलियो तथा विद्यमान उत्पादन क्षमता को खरीदने में पाया जाता है।
  8. मानवीय विकास सूचकांक के सम्बन्ध में चीन का स्थान भारत से ऊँचा है।
  9. निर्धनता घटाने में चीन की सफलता भारत से कहीं अधिक रही है। (चीन में 10% और भारत में 26%)।
  10. चीन में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योगों का योगदान सर्वाधिक है जबकि भारत में सेवा क्षेत्रक का योगदान सर्वाधिक है। यद्यपि दोनों ही देशों में सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान घटा है। किन्तु भारत की तुलना में चीन में यह अधिक तेजी से घटा है।
  11. चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक औद्योगिक तथा विविध बना लिया है जबकि भारत में औद्योगिक विकास की गति अत्यधिक धीमी है।

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