UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi कथा भारती Chapter 4 समय

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 4
Chapter Name समय (यशपाल)
Number of Questions 4
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi कथा भारती Chapter 4 समय (यशपाल)

प्रश्न 1:
श्री यशपाल द्वारा लिखित ‘समय’ कहानी का सारांश (कथानक) अपने शब्दों में लिखिए।
या
‘समय’ कहानी की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
प्रसिद्ध कहानीकार यशपाल की ‘समय’ कहानी बड़ी रोचक है। एक अधिकारी को रिटायर होने से डेढ़-दो वर्ष पहले से ही चिन्ता होने लगी कि उसका समय कैसे कटेगा ? जब वे नौकरी करते थे तब अवकाश के दिन कितने अच्छे लगते थे। गिन-गिन कर अवकाश के दिनों की प्रतीक्षा करते थे। लेकिन पूर्ण अवकाश होने पर व्यक्ति निरुत्साहित क्यों हो जाता है ? उसको इसे तो अपने श्रम का अर्जित फल मानकर, उससे पूरी लाभ उठाना चाहिए और सन्तोष करना चाहिए। आराम और अपनी इच्छा से श्रम करने में तो कोई बाधा नहीं डालेगा। अध्ययन का मन चाहा अवसर होगा और पर-आदेश पालन से मुक्ति मिलेगी। इससे बड़ा सन्तोष दूसरा क्या चाहिए?

सर्विस के समय गर्मियों में महीने दो महीने हिल स्टेशनों पर रह लेने का पापा को बहुत शौक था। मितव्ययिता के कारण रिटायर होने पर उन्होंने पहाड़ जाना छोड़ दिया है। रिटायर होने पर उन्होंने लखनऊ आवास बनाया तथा सन्ध्या के समय टहलने जाने का नियम भी। पहले टहलने या शॉपिंग के लिए वे स्वयं व पत्नी को लेकर जाते थे, बच्चों को साथ नहीं ले जाते थे। बच्चों को मम्मी-पापा के साथ बाजार जाने की उत्सुकता रहती थी। जब कभी बच्चों को बाजार साथ ले जाते तो बच्चे जो भी चीज माँगते, वह खरीद देते। बाजार में पापा बच्चों को डराते-धमकाते नहीं थे। मम्मी-पापा जब बाजार जाने को तैयार होते तो बच्चों को नौकर के साथ इधर-उधर टहला देते थे। वे अपने साथ बच्चों को बाजार में ले जाकर स्वयं को बुजुर्ग सिद्ध करना नहीं चाहते थे।

समय बीतने पर पापा के स्वभाव और, व्यवहार में कुछ परिवर्तन और आया। पहले उन्हें अपनी पोशाक चुस्त-दुरुस्त रखने और व्यक्तिगत उपयोग में बढ़िया चीजों का शौक था। अब पापा अपने शौक और रुचियों को बच्चों द्वारा पूरा होते देखकर सन्तोष पाते हैं; मानो उन्होंने अपने व्यक्तित्व को न्यास बच्चों में कर लिया है। धीरे-धीरे समय के गुजरने के साथ-साथ पापा के स्वभाव में पर्याप्त परिवर्तन हो गया। पत्नी अस्वस्थ एवं वृद्ध होने के कारण टहलने में असमर्थ हो गयी। इसलिए पापा हजरतगंज बाजार टहलने जाने के लिए बच्चों को साथ ले जाने लगे। कभी मण्टू को, कभी पुष्पा को और कभी किसी एक बच्चे को साथ ले जाते। हजरतगंज टहलने के बाद पापा स्वयं ही प्रस्ताव कर देते – कहो, क्या पसन्द है? कॉफी या आइसक्रीम।

बच्चों को साथ ले जाने के दो ही प्रयोजन होते थे। एक तो बूढ़ों या बुजुर्गों की अपेक्षा नवयुवकों का साथ और दूसरे बुढ़ापे के कारण, कमजोर नजर का प्रभाव। अकेले चलने में वे ठोकर खा जाते हैं और प्रकाश की चकाचौंध से परेशानी का भी अनुभव करते हैं। इसलिए जब वे सन्ध्या समय बाहर जाते, तो किसी न किसी को साथ ले जाते थे।

पापा की बाहर जाने की तैयारी अनेक घोषणाओं और पुरस्कारों के साथ होती, जिससे सब जान जाएँ कि वे बाहर जा रहे हैं और कोई उनके साथ हो ले। एक बार उन्होंने हमेशा की तरह आवाज लगायी, पुष्पा दीदी आवाज सुनकर मण्ट्र से साथ जाने को कहती हैं। लेकिन मण्टू ने उत्तर दिया कि मुझे बुङ्कों के साथ जाने में बोरियत होती है। पापा ने इस बात को सुन लिया और चिन्ता में डूब गये। मुझे भी बचपन की स्मृति आ गयी। सोचने लगा समय के साथ सब बदल जाते हैं। पापा ने माँ से अपनी छड़ी माँगी और टहलने चल दिये।। सम्भवतः उन्होंने भी स्वीकार कर लिया कि समय के साथ सब बदल जाता है।

प्रश्न 2:
कहानी-कला की दृष्टि से यशपाल द्वारा लिखित ‘समय’ कहानी की समीक्षा कीजिए।
या
पात्र-योजना की दृष्टि से ‘समय’ कहानी का विवेचन कीजिए।
या
‘वातावरण’ एवं ‘भाषा-शैली के आधार पर ‘समय’ कहानी का मूल्यांकन कीजिए।
या
‘समय’ कहानी की समीक्षा देश-काल के आधार पर कीजिए।
या
कथावस्तु की दृष्टि से ‘समय’ कहानी की विशेषताएँ बताइए।
या
‘समय’ का कथानक लिखिए तथा उसके उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
या
कहानी के तत्त्वों के आधार पर ‘समय’ कहानी की समीक्षा कीजिए।
या
कहानी-कला के तत्त्वों के आधार पर ‘समय’ कहानी की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
या
‘समय’ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।
या
‘समय’ कहानी के पात्रों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
यथार्थवादी प्रगतिशील कहानीकारों में यशपाल जी का विशिष्ट स्थान है। यशपाल जी समाजवादी विचारधारा के प्रबुद्ध कहानीकार हैं। उनकी प्रस्तुत कहानी का कथानक मध्यमवर्गीय जीवन से लिया गया है। उनकी यह कहानी सत्य और यथार्थ पर आधारित समाजवादी विचारधारा की सुन्दर रचना है। कहानी-शिल्प की दृष्टि से इस कहानी की विशेषताएँ निम्नवत् हैं-

(1) शीर्षक – प्रस्तुत कहानी का शीर्षक ‘समय’ एक प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुआ है। सम्पूर्ण कहानी में समय की ही प्रमुखता को दर्शाया गया है। अपने जीवन के शीर्ष समय में शीर्ष पर स्थित व्यक्ति समय बदल जाने; अर्थात् नौकरी से अवकाश प्राप्त कर लेने अथवा बुजुर्ग हो जाने पर कितना बदल जाता है, उसके आस-पास की स्थितियों में कितना परिवर्तन हो जाता है, उसे इस कहानी में अच्छी तरह से दर्शाया गया है। शीर्षक में प्रतीकात्मकती, कौतूहल, सरलता और सजीवता है। ‘समय’ सम्पूर्ण कहानी के कथानक का प्राण है।

(2) कथावस्तु – इस कहानी के माध्यम से एक ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार का चित्र खींचा गया है, जिसका मुखिया उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी है। अपनी नौकरी के समय में कार्यालय से घर वापस आने पर इनको अधिकांश समय; चाहे वह बाजार जाने का हो या टहलने का; पत्नी के साथ ही व्यतीत होता था। इसमें बच्चों की सहभागिता न्यूनतम होती थी। अवकाश-प्राप्ति के बाद लखनऊ में स्थापित होने पर इन्हें बच्चों के साहचर्य की आवश्यकता महसूस होने लगी। पहले तो ये पत्नी के साथ ही घूमने चले जाया करते थे, लेकिन पत्नी के असमर्थ होने और कुछ अपनी भी कमजोरियों के कारण अब वे अपने युवा हो चुके बच्चों पर निर्भर होने लगे। लेकिन युवा मानसिकता की अपनी रुचि, अपनी व्यस्तता। एक दिन मण्टू ने तो स्पष्ट रूप से कह दिया कि बुड्डों के साथ जाने में बोरियत होती है। पापा ने यह सब कुछ सुना, समझा और छड़ी उठाकर अकेले ही टहलने के लिए चल दिये। सम्भवतः उन्होंने भी अन्तर्मन से इस सत्य को स्वीकार कर लिया।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कहानी का कथानक संगठित है। लेखक ने यथार्थवादी दृष्टि से एक मध्यमवर्गीय तथाकथित शिक्षित परिवार की वास्तविक तसवीर प्रस्तुत की है। कथानक में संक्षिप्तता, सजीवता, रोचकता, कुतूहल आदि गुण विद्यमान हैं। कहानी मर्मस्पर्शी तो नहीं है, लेकिन विचारों को आन्दोलित अवश्य करती है।

(3) पात्र और चरित्र-चित्रण – इस कहानी के सभी पात्र यथार्थवादी हैं। कहानी में पात्रों की संख्या कम है। सभी पात्र एक परिवार के सदस्य और भाई-बहन हैं। परिवार के मुखिया अर्थात् पापा ही कहानी के मुख्य पात्र हैं और शेष सभी पात्र; जिसमें गृह-स्वामिनी भी सम्मिलित है; गौण हैं। ये सभी मुख्य पात्र पापा की चारित्रिक विशेषताओं को उजागर करने के लिए ही कहानी में प्रयुक्त हुए हैं। कहानी में यशपाल ने पात्रों को चरित्र-चित्रण अत्यधिक स्वाभाविकता और मनोवैज्ञानिकता के साथ किया है।

(4) कथोपकथन या संवाद – ‘समय’ कहानी के संवाद जीवन की यथार्थ अभिव्यक्ति में सक्षम हैं। सम्पूर्ण कहानी लेखक द्वारा अपनी पूर्व स्मृति और बचपन की घटनाओं को समायोजित करते हुए लिखी गयी है। कहानी में लेखक के स्वयं के कथन और उठाये गये प्रश्न हैं। इन प्रश्नों के उत्तर भी लेखक ने स्वयं ही दिये हैं। कहानी में संवाद-योजना अति अल्प है, लेकिन जहाँ कहीं भी है, पूर्णता के साथ मुखर हुई है। एक उदाहरण द्रष्टव्य हैमण्टू ने मुझे रोककर कहा-”सुनो, अम्मी पापा के साथ बाजार जा रही हैं। हम भी उनके साथ बाजार जाएँगे।”

मण्टू ने हुबिया को सम्बोधित किया, “हुबिया, हमारी सैण्डल में कील लग रही है। हम दूसरी सैण्डल पहनकर आते हैं।” हम दोनों घर की ओर भाग आये। मण्टू का अनुमान ठीक था। हम लौटे तो ड्योढ़ी में पहुँचते ही अम्मी की पुकार सुनायी दी – ”जी, आइए, मैं चल रही हैं।” अम्मी बाहर जाने के लिए साड़ी बदले और जूड़े में पिनें खोंसती हुई आ रही थीं। मण्टू अम्मी की कमर से लिपट गयी और डबडबाई आँखें अम्मी के मुँह की ओर उठाकर आँसू-भरे स्वर में हिचक-हिचककर गिड़गिड़ाने लगी – ‘कभी कभी कभी बच्चों को भी ” तो “साथ ले जाना
चाहिए।”
तब तक पापा भी आ गये थे। उन्होंने पूछा–“क्या है, क्या है?” वे समझ गये थे, बोले- “अच्छा बच्चो, एकदम तैयार हो जाओ।”

इस प्रकार ‘समय’ कहानी के संवाद पात्रों के मनोभावों को भली-भाँति अभिव्यक्त करते हैं। वे संक्षिप्त तथा प्रभावशाली हैं।

(5) देश-काल तथा वातावरण – यशपाल जी एक यथार्थवादी कहानीकार हैं और उनकी कहानी ‘समय’ एक, यथार्थपरक कहानी है। इसमें देश-काल तथा वातावरण का वर्णन कहानी को पूर्णता प्रदान करने के उद्देश्य से ही किया गया है। एक उदाहरण देखिएहम लोग उनकी संगति के लिए बचपन के दिनों की तरह लालायित नहीं रह सकते। कारण यह है कि अठारह-बीस पार कर लेने पर हम लोग भी अपना व्यक्तित्व अनुभव करने लगे हैं।

हम लोगों की अपनी वैयक्तिक रुझानें, अपने काम और अपने क्षेत्र भी हो गये हैं और उनके आकर्षण और आवश्यकताएँ भी रहती हैं। कभी-कभी पापा की आवश्यकता और हमारी संगति के लिए उनकी इच्छा और हमारी अपनी आवश्यकताओं और आकर्षणों में द्वन्द्व की स्थिति आ जाना अस्वाभाविक नहीं है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि देश-काल तथा वातावरण का वर्णन सीमित रूप से होते हुए भी कहानी की सफलता में अपना योगदान करता है।

(6) भाषा-शैली – प्रस्तुत कहानी के पात्र समाज के शिक्षित और मध्यम वर्ग से सम्बन्धित हैं। इसलिए कहानी की भाषा सरल, सुबोध और व्यावहारिक खड़ी बोली है। कहानी में तत्सम शब्दों का प्रयोग प्रचुरता से हुआ है। सम्पूर्ण कहानी की भाषा कहीं पर भी स्तर से नीचे नहीं होने पायी है। आजकल का युवा वर्ग बात-चीत में अंग्रेजी शब्दों का खुलकर प्रयोग करता है। इसी उद्देश्य से लेखक ने अपनी भाषा में भी अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग बिना किसी संकोच के खुलकर किया है। इसके प्रयोग से कहीं भी भाषा की गतिमयता बाधित होती नहीं दीखती। कहीं-कहीं पर स्थानीय बोली में प्रयुक्त शब्द भी आये हैं। कहानी में विचारात्मक-विश्लेषणात्मक शैली का प्रयोग हुआ है। एक उदाहरण देखिए

पापा की अवचेतना में रिटायर हो जाने के डेढ़-दो वर्ष पूर्व से ही चिन्ता सिर उठाने लगी थी-रिटायर हो जाने पर अवकाश का बोझ कैसे सँभलेगा? अपनी इस चिन्ता का निराकरण करने के लिए प्राय: ही कहने लगते लोग बाग रिटायर होकर निरुत्साह क्यों हो जाते हैं? सोचिए नौकरी करते समय अवकाश के दिनों की प्रतीक्षा की जाती है। जब दीर्घ श्रम के पुरस्कार में पूर्ण अवकाश का अवसर आ जाये तो निरुत्साह होने का क्या कारण? इसे तो अपने श्रम का अर्जित फल मानकर, उससे पूरा लाभ उठाना और सन्तोष पाना चाहिए।

(7) उद्देश्य –  यशपाल प्रगतिशील साहित्यकार हैं। प्रस्तुत कहानी में यशपाल जी ने यह दर्शाया है कि प्रत्येक व्यक्ति को समय का महत्त्व समझना चाहिए और समय के परिवर्तन के साथ-साथ अपने में भी परिवर्तन ले आना चाहिए। यह सत्य है कि अधिक उम्र का व्यक्ति युवा के साथ रहकर स्वयं को भी युवावत अनुभव करता है। लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि युवा स्न्नयं को उम्रदराज के साथ कैसा अनुभव करता होगा। अत: सभी को समय के साथ स्वयं में परिवर्तन ले आना चाहिए। लेखक ने इस बात को कहानी के अन्त में स्पष्ट भी कर दिया है-“हाँ, यह तो बहुत अच्छी बात है।” पापा ने छड़ी की मूठ पर हाथ फेरकर कहा और छड़ी. टेकते हुए किसी की ओर देखे बिना घूमने के लिए चले गये; मानो हाथ की छड़ी को टेककर उन्होंने समय को स्वीकार कर लिया।

प्रश्न 3:
‘समय’ कहानी के माध्यम से लेखक क्या सन्देश देना चाहता है?
उत्तर:
‘समय’ कहानी के माध्यम से लेखक यशपाल यह सन्देश देना चाहते हैं कि जब बच्चे युवा हो जाएँ, अपना हित-अहित सोचने में सक्षम हो जाएँ, औचित्य-अनौचित्य का निर्णय करने में समर्थ हो जाएँ तो बुजुर्गों को उनके व्यक्तिगत कार्यों या व्यस्तताओं में न तो हस्तक्षेप करना चाहिए, न ही उसे अपने अनुसार परिवर्तित करना चाहिए और न ही उनमें स्वयं को समायोजित करने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी स्थिति अनावश्यक रूप से कटुता को जन्म देती है। अत: प्रत्येक व्यक्ति को समय के अनुसार अपने आचार-विचारव्यवहार में परिवर्तन लाना चाहिए। यही विचार सुखी जीवन की आधारशिला है।

प्रश्न 4:
‘समय’ कहानी का प्रमुख पात्र कौन है? उसका चरित्र-चित्रण कीजिए अथवा उसकी चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
या
‘समय’ कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर:
‘समय’ कहानी का प्रमुख पात्र एक अवकाश प्राप्त अधिकारी है। कहानी में इन्हें ‘पापा’ की संज्ञा दी गयी है। इनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(1) सम्भावित भविष्य के प्रति चिन्तित – ‘पापा’ अपनी नौकरी से अवकाश प्राप्त करने के पूर्व से ही चिन्तित थे कि अवकाश का बोझ कैसे सँभलेगा और जीवन का अधिकांश समय कैसे व्यतीत होगा?

(2) व्यवस्थित दिनचर्या के व्यक्ति – ‘पापा’ व्यवस्थित दिनचर्या वाले व्यक्ति हैं। अवकाश प्राप्त होने पर उन्हें कार्यालयीय भार से मुक्ति मिल जाएगी। अतः उस समय का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने पहले से ही योजना बना ली थी कि वे अपने शासन-कार्य के अनुभव पर एक पुस्तक लिखेंगे। अब वे इस पर अध्ययन करते हैं और नोट्स भी बनाते हैं। शाम को वे विभिन्न वस्तुओं की खरीदारी भी करते हैं।

(3) शौकीन मिजाज – पापा बहुत ही शौकीन मिजाज के व्यक्ति थे। उनकी पोशाक हमेशा चुस्त-दुरुस्त रहती थी। अपने उपयोग में आने वाली अच्छी और स्तरीय वस्तुओं का उन्हें शौक था। नौकरी के दौरान वे खर्चीले स्वभाव के थे। गरमियों के दिनों में पर्वतीय स्थानों पर घूमने व रहने का उन्हें बड़ा शौक था। घर में हमेशा दो-तीन नौकर रहा करते थे।

(4) जीवन से सन्तुष्ट – पापा अपनी नौकरी के समय में अपने जीवन से सन्तुष्ट थे और अब अवकाश के समय में भी सन्तुष्ट हैं। अपने जिन शौक और रुचियों से उन्हें अब सन्तुष्टि नहीं होती, उन शौक और रुचियों को अपने बच्चों द्वारा पूरा होते देखकर वे सन्तुष्ट हो जाते हैं।

(5) युवा दिखने की चाहत – पापा को शुरू से ही युवा दीखने की चाहत थी। इसीलिए मम्मी के साथ घूमने जाते समय वे बच्चों को अपने साथ नहीं ले जाते थे; क्योंकि इससे उन्हें अपने बुजुर्ग होने का अनुभव होता था।

(6) समय के साथ परिवर्तित – अवकाश प्राप्त होने के बाद पापा मितव्ययी हो गये। दूसरे वे बच्चों को भी अपने साथ ले चलना चाहते हैं; क्योंकि बच्चे भी अब कद में उनसे ऊँचे, जवान, स्वस्थ और सुडौल हो गये हैं। इससे उन्हें अब गर्व का अनुभव होता है।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि एक पढ़े-लिखे, सभ्य और सुशिक्षित युवक और कालान्तर में परिवर्तित प्रौढ़ व्यक्ति के चरित्र में जो गुण होने चाहिए, वे सभी गुण पापा में निहित हैं। लेखक यशपाल जी ने कहानी में इनका चरित्र-चित्रण अत्यधिक गरिमापूर्ण और स्वाभाविक ढंग से ऐसे ही किया है, जैसे वे स्वयं अपने पिता का चरित्र-चित्रित कर रहे हों।

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UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter

UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter ( द्रव्य के तापीय गुण) are part of UP Board Solutions for Class 11 Physics . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter ( द्रव्य के तापीय गुण)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Physics
Chapter Chapter 11
Chapter Name Thermal Properties of matter
Number of Questions Solved 86

UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter ( द्रव्य के तापीय गुण)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निऑन तथा Co2 के त्रिक बिन्दु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।
हल-
यहाँ TNe = 24.57 K तथा TCO2 = 216.55 K
परन्तु (t + 273.15) = T ⇒t = (T – 273.15)°C
∴ tNe = TNe – 273.15 = (24.57 – 279.15)°C = -248.58°C
tCo2 = TCo2 -273.15 = (216.55 – 273.15) = -56.6°C
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प्रश्न 2.
दो परम ताप मापक्रमों A तथा B पर जल के त्रिक बिन्दु को 200A तथा 350B द्वारा परिभाषित किया गया है। TA तथा TB में क्या सम्बन्ध है?
हल-
दिया है कि दोनों परम ताप मापक्रम हैं अर्थात् दोनों का (UPBoardSolutions.com) शून्य, परम शून्य ताप से सम्पाती है। प्रश्नानुसार प्रथम पैमाने पर परम शून्य से जल के त्रिक बिन्दु (ताप 273.15K) तक के ताप को 200 भागों में तथा दूसरे पैमाने पर 350 भागों में विभाजित किया गया है।
अतः 200A – 0A = 350B – 0B = 273.16 K – 0k
या 200A = 350B = 273.16 K
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प्रश्न 3.
किसी तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नलिखित सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है R = R0 [1+ α (T -T0)] यदि तापमापी का जल के त्रिक बिन्दु 273,16K पर प्रतिरोध 1016.Ω तथा लैड के सामान्य संगलन बिन्दु (600.5K) पर प्रतिरोध 165.5Ω है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध 123.4Ω है।
हल-
यहाँ T1 = 273.16 K पर R1 = 101.6 Ω
T2 = 600.5 K पर R2 = 165.5 Ω
माना T3 =? पर R3 = 123.4 Ω
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए :
(a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिन्दु एक मानक नियत बिन्दु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत-बिन्दु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापक्रम में किया गया था।) क्या दोष है?
(b) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिन्द थे। जिनको क्रमशः 0°C तथा 100°C संख्याएँ निर्धारित की गई थीं। परम ताप मापक्रम पर दो में से एक नियत बिन्दु जल का त्रिक बिन्दु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापक्रम पर संख्या 273.16 K निर्धारित की गई है। इस मापक्रम (केल्विन परम ताप)
पर अन्य नियत बिन्दु क्या है?
(c) परम ताप (केल्विन मापक्रम) T तथा सेल्सियस मापक्रम पर ताप t¢ में सम्बन्ध इस प्रकार है:
tc =T -273.15
इस सम्बन्ध में हमने 273.15 लिखा है 273.16 क्यों नहीं लिखा?
(d) उस.परमताप मापक्रम पर, जिसके एकांक अन्तराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अन्तराल की आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिन्दु का ताप क्या होगा?
उत्तर-
(a) क्योकि जल का त्रिक बिन्दु एक अद्वितीय बिन्दु है, जिसके संगत ताप 273.16 K अद्वितीय है, जबकि हिम का गलनांक तथा जल का क्वथनांक नियत नहीं है ये दाब परिवर्तित करने पर बदल जाते हैं।
(b) केल्विन मापक्रम पर अन्य नियत बिन्दु, परम शून्य ताप है जिस पर सभी गैसों का दाब शून्य हो जाता है।
(c) सेल्सियस पैमाने पर 0°C, सामान्य दाब पर बर्फ का गलनांक है जिसके संगत केल्विन (UPBoardSolutions.com) ताप 273.15 K है न कि 273.15 K। इस प्रकार प्रत्येक परम ताप, संगत सेल्सियस ताप से 273.15 K ऊँचा है इसीलिए उक्त सम्बन्ध में 273.15 का प्रयोग किया गया है।
(d) हम जानते हैं कि 32°F = 273.15 K तथा 212°F = 273.15 K
∴ 212°F – 32°F = (373.15 – 273.15) K या 180°F = 100 K
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प्रश्न 5.
दो आदर्श गैस तापमापियों A तथा B में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित हैं:
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(a) तापमापियों A तथा B के द्वारा लिए गए पाठ्यांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप क्या हैं?
(b) आपके विचार से तापमापियों A तथा B के उत्तरों में थोड़ा अन्तर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है)। दो पाठ्यांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्या प्रावधान आवश्यक हैं?
हल-
(a) तापमापी A के लिए।
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(b) दोनों तापमापियों के पाठ्यांकों में अन्तर इसलिए है क्योंकि प्रयोग की गई गैसें आदर्श नहीं हैं। विसंगति को दूर करने के लिए पाठ्यांक कम दाब पर लेने चाहिए जिससे कि गैसें आदर्श गैस की भाँति व्यवहार करें।

प्रश्न 6.
किसी 1 m लम्बे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन 27.0°C पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप 45°C था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लम्बाई 63.0 cm मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई क्या थी? जिस दिन ताप 27.0°C होगा उस दिन इसी छड़ की लम्बाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.20 x 10-5 K-1.
हल-
जब ताप 27°C से बढ़कर 45°C हो जाती है तो ताप में वृद्धि ΔT = (45-27)°C ≡ 18K; माना 27°C पर अंशांकित स्टील के फीते पर इस ताप वृद्धि के कारण इसकी l1 = 1 सेमी लम्बाई बढ़कर l2, हो जाती है तो
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अतः यदि स्टील का फीता 45°C पर 1 सेमी मापता है तो छड़ की वास्तविक लम्बाई 1.000216 सेमी होगी। परन्तु यहाँ 45°C परं यह 63 सेमी मापता है। अत: स्टील छड़ की वास्तविक लम्बाई
= 63 x 1.000216 सेमी = 63.0136 सेमी
जिस दिन ताप 27°C होगा उस दिन स्टील फीते पर 1 सेमी चिह्न की वास्तविक लम्बाई 1 सेमी ही होगी चूंकि यह फीता इसी ताप पर अंशांकित किया गया है। अत: 27°C पर छड़ की वास्तविक लम्बाई = 63.0 x 1 सेमी = 63.0 सेमी ही होगी।’

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प्रश्न 7.
किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। 27°C पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 cm तथा पहिए के केन्द्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है। सूखी बर्फ (ठोस Co2) द्वारा धुरी को ठण्डा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रैखिक प्रसार गुणांक नियत रहता है। αस्टील = 1.20 x 10-5 K-1.
हल-
T1 = 27°C = (27 + 273) K = 300K पर धुरी का व्यास D1 = 8.70 सेमी।
माना धुरी को T2K तक ठण्डा किया गया है ताकि इसका व्यास सिकुड़कर पहिए के केन्द्रीय छिद्र के व्यास D2 = 8.69 सेमी के बराबर हो जाये जिससे कि पहिया धुरी पर चढ़ सके।
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प्रश्न 8.
ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। 27.0°C पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। इस धातु की चादर को 227°C तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.70 x 10-5K-1.
हल-
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प्रश्न 9.
27°C पर 1.8 cm लम्बे किसी ताँबे के तार को दो दृढ़ टेकों के बीच अल्प तनाव रखकर थोड़ा कसा गया है। यदि तार को -39°C ताप तक शीतित करें तो तार में कितना तनाव उत्पन्न हो जाएगा? तार का व्यास 2.0 mm है। पीतल को रेखीय प्रसार गुणांक = 2.0 x 10-5 k-1, पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = 0.91 x 1011Pa,
हल-
दिया है : T1 = 27°C, T2 = -39°C,
ताप परिवर्तन ∆T = [27 -(-39)] = 66°C या 66 K, तार (UPBoardSolutions.com) की लम्बाई L = 1.8 cm
तार का व्यास 2r = 2.0 mm
∴त्रिज्या r = 1.0 x 10-3m
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 11

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प्रश्न 10.
50 cm लम्बी तथा 3.0 mm व्यास की किसी पीतल की छड़ को उसी लम्बाई तथा व्यास की किसी स्टील की छड़ से जोड़ा गया है। यदि ये मूल लम्बाइयाँ 40°C पर हैं तो 250°C पर संयुक्त छड़ की लम्बाई में क्या परिवर्तन होगा? क्या सन्धि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न होगा? छड़ के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है। (पीतल तथा स्टील के रेखीय प्रसार गुणांक क्रमशः 2.0 x 10-5 k-1 तथा 1.2 x 10-5 x k-1 हैं।)
हल-
प्रत्येक छड़ का ताप T1 = 40°C पर लम्बाई L1 = 50 सेमी
संयुक्त छड़ का अन्तिम ताप T2 = 250°C
अतः प्रत्येक छड़ के ताप में वृद्धि
∆T = T2 – T1 = (250 -40)°C = 210°C = 210K
(∵ सेल्सियस तथा केल्विन पैमाने पर 1 डिग्री को आकार बराबर होता है)
∵ पीतल की छड़ की लम्बाई में वृद्धि
(∆L)पीतल =L1 • α.पीतल x ∆T
= 50 सेमी x2.0 x 10-5 K-1 x 210K
= 0.21
सेमी स्टील की छड़ की लम्बाई में वृद्धि (∆L)स्टील = L1 x 0.स्टील x ∆T
= 50 सेमी x 1.2 x 10-5 K-1 x 210K
= 0.126 सेमी ≈ 0.13 सेमी
∴ संयुक्त छड़ की लम्बाई में वृद्धि
= (∆L)पीतल + (∆L)स्टील ।
= 0.21 सेमी + 0.13 सेमी
= 0.34 सेमी
चूँकि छड़ों के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है, अत: संधि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होगा।

प्रश्न 11.
ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक 49 x 10-5 K-1 है। ताप में 30°C की वृद्धि होने पर इसके घनत्व में क्या आंशिक परिवर्तन होगा?
हल-
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प्रश्न 12.
8.0 kg द्रव्यमान के किसी ऐलुमिनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए किसी 10 kw की बरमी का उपयोग किया गया है। 2.5 मिनट में ब्लॉक के ताप में कितनी वृद्धि हो जाएगी? यह मानिए कि 50% शक्ति तो स्वयं बरमी को गर्म करने में खर्च हो जाती है अथवा परिवेश में लुप्त हो जाती है। ऐलुमिनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.91 J g-1K-1 है।
हल-
बरमी की शक्ति P = 10 किलोवाट = 104 वाट = 104 जूल/सेकण्ड
समय t = 2.5 मिनट = 2.5 x 60 सेकण्ड = 150 सेकण्ड
∴ बरमी द्वारा प्रयुक्त ऊर्जा w = P x T = (104 जूल/सेकण्ड) x 150 सेकण्ड
= 1.5 x 106 जूल।
m = 8.0 किग्रा के ऐल्युमीनियम के छोटे ब्लॉक द्वारा बरमी की प्रयुक्त ऊर्जा से ली गयी ऊर्जा
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प्रश्न 13.
2.5 kg द्रव्यमान के ताँबे के गुटके को किसी भट्टी में 500°C तक तप्त करने के पश्चात् किसी बड़े हिम-ब्लॉक पर रख दिया जाता है। गलित हो सकने वाली हिम की अधिकतम मात्रा क्या है? ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.39 J g-1 K-1; बर्फ की संगलन ऊष्मा= 335 Jg-1.
हल-
यहाँ गुटके का द्रव्यमान m = 2.5
किग्रा गुटके की विशिष्ट ऊष्माधारिता s = 0.39 जूल-ग्राम-1-K-1
= 0.39 x 103 जूल-किग्रा-1°C-1
गुटके का प्रारम्भिक ताप T1 = 500°C,
अन्तिम ताप T2 = बर्फ का ताप = 0°C
∴ गुटके के ताप में कमी ∆T = (T1 – T2) = 500°C
माना गलित होने वाले बड़े हिम ब्लॉक की मात्रा = mबर्फ
बर्फ के संगलन की ऊष्मा L = 335 जूल-ग्राम-1 = 335 x 103 जूल-किग्रा-1
ऊष्मामिति के सिद्धान्त से,
गुटके द्वारा दी गयी ऊष्मा = बर्फ द्वारा गलने में ली गयी ऊष्मा
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प्रश्न 14.
किसी धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के प्रयोग में 0.20 kg के धातु के गुटके को 150°C पर तप्त करके, किसी ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक = 0.025 kg) जिसमें 27°C का 150 cm3 जल भरा है, में गिराया जाता है। अन्तिम ताप 40°c है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता परिकलित कीजिए। यदि परिवेश में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानकर परिकलन किया जाता है, तब क्या आपका उत्तर धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के वास्तविक मान से अधिक मान दर्शाएगा अथवा कम?
हल-
धातु के गुटके का द्रव्यमान m = 0.20 किग्री
माना इसकी विशिष्ट ऊष्मा = s
जल तथा ऊष्मामापी की ताप T2 = 27°C
मिश्रण को प्रारम्भिक ताप T1 = 150°C
मिश्रण का अन्तिम ताप T = 40°C
ऊष्मामापी का तुल्यांक W = Ms = 0.025 किग्रा ।
जल का आयतन = 150 सेमी3 = 150 x 10-6 मी3
जल का घनत्व = 103 किग्रा/मी3
∴ जले का द्रव्यमान M = आयतन x घनत्व
= 150 x 10-6 मी3 x 103 किग्रा/मी3 = 0.150 किग्रा
धातु के गुटके द्वारा दी गयी ऊष्मा = m x s x (T1 – T)
= 0.20 x s x (150-40) = 0.20 x 110 x s
(ऊष्मामापी + जल) द्वारा ली गयी ऊष्मा =(mजल x Sजल + W)x (T – T2)
=(0.150 x 1+ 0.025) x (40-27)
=(0.175 x 13) किलो कैलोरी
कैलोरीमिति के सिद्धान्त से,
दी गयी ऊष्मा = ली गयी ऊष्मा
∴ 0.20 x 110 x 5 = 0.175 x 13
[latex s=2]s=\left( \frac { 0.175\times 123 }{ 0.20\times 110 } \right) [/latex] किलो कैलोरी/किग्रा-°C
= 0.103 किलो कैलोरी/किग्रा-K

प्रश्न 15.
कुछ सामान्य गैसों के कक्ष ताप पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं के प्रेक्षण नीचे दिए गए हैं।
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इन गैसों की मापी गई मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ एक परमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं से सुस्पष्ट रूप से भिन्न हैं। प्रतीकात्मक रूप में किसी एक परमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता 2.92 cal/mol K होती है। इस अन्तर का स्पष्टीकरण कीजिए। क्लोरीन के लिए कुछ अधिक मान (शेष की अपेक्षा) होने से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर-
एक परमाणुक गैसों के अणुओं में केवल स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा होती है जबकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं में स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त घूर्णी गतिज ऊर्जा भी होती है। ऐसा इसलिए सम्भव है क्योंकि द्विपरमाणुक गैसों के अणु अन्तराणविक अक्ष के लम्बवत् दो अक्षों के परितः घूर्णन भी कर सकते हैं। जब किसी गैस को ऊष्मा दी जाती है तो यह ऊष्मा अणुओं की सभी प्रकार की ऊर्जाओं में समान वृद्धियाँ करती है। अब चूँकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं की ऊर्जा के प्रकार अधिक होते हैं इसीलिए इनकी मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ भी अधिक होती हैं। क्लोरीन की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता की अधिक होना यह प्रदर्शित करता है कि इसके अणु स्थानान्तरीय तथा घूर्णी गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त कम्पनिक गतिज ऊर्जा भी रखते हैं।

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प्रश्न 16.
CO2 के p-T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) किस ताप व दाब पर co2 की ठोस, द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाएँ साम्य में सहवर्ती हो सकती
(b) co2 के गलनांक तथा क्वथनांक पर दाब में कमी का क्या प्रभाव पड़ता है?
(c) co2 के लिए क्रान्तिक ताप तथा दाब क्या हैं? इनको क्या महत्त्व है?
(d) (a) – 70°C ताप व 1 atm दाब, (b) – 60°C ताप व 10 atm दाब, (c) 15°C ताप व 56 atm दाब पर co2 ठोस, द्रव अथवा गैस में किस अवस्था में होती है?
उत्तर-
(a) – 56.6°C ताप तथा 5.11 atm दाब पर (त्रिक बिन्दु के संगत)।
(b) दाब में कमी होने पर दोनों घटते हैं।
(c) बिन्दु ८ के संगत, क्रान्तिक ताप = 31.1°C तथा क्रान्तिक दाब = 73.0 atm इससे उच्च ताप पर CO2 द्रवित नहीं होगी, चाहे उस पर कितना भी अधिक दाब आरोपित किया जाए।
(d) (a) वाष्प अर्थात् गैसीय अवस्था में, (b) ठोस अवस्था में, (c) द्रव अवस्था में।

प्रश्न 17.
CO2 के p-T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) 1 atm दाब तथा -60°C ताप पर CO2 का समतापी सम्पीडन किया जाता है? क्या यह द्रव प्रावस्था में जाएगी?
(b) क्या होता है जब 4 atm दाब पर CO2 का दाब नियत रखकर कक्ष ताप पर शीतन किया जाता है।
(c) 10 atm दाब तथा -65°C ताप पर किसी दिए गए द्रव्यमान की ठोस CO2 को दाब नियत रखकर कक्ष ताप तक तप्त करते समय होने वाले गुणात्मक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
(d) CO2 को 70°C तक तप्त तथा समतापी सम्पीडित किया जाता है। आप प्रेक्षण के लिए इसके किन गुणों में अन्तर की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर-
(a) समतापी सम्पीडन का अर्थ है कि गैस को -60°C ताप पर दाब अक्ष के समान्तर ऊपर को ले जाया जाता है। इसके लिए हम -60°C ताप पर दाब अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। हम देख सकते हैं। कि यह रेखा गैसीय क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्र (UPBoardSolutions.com) में प्रवेश कर जाती है और द्रव क्षेत्र से नहीं गुजरती। | इसका अर्थ यह है कि गैस बिना द्रवित हुए ठोस में बदल जाएगी।
(b) इस बार हम 4 atm दाब पर ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। हम देखते हैं कि यह रेखा वाष्प क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है। इसका अर्थ है गैस, द्रव अवस्था में आए बिना ही ठोस अवस्था में संघनित हो जाएगी।
(c) इस बार हम 10 atm दाब तथा -65°C ताप से प्रारम्भ करके ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। यह रेखा ठोस क्षेत्र से द्रव क्षेत्र तथा द्रव क्षेत्र से वाष्प क्षेत्र में प्रवेश करेगी।
इसका अर्थ यह है कि 10 atm दाब तथा -65°C ताप पर गैस ठोस अवस्था में होगी। गर्म किए जाने पर धीरे-धीरे यह द्रव अवस्था में आ जाएगी तथा और गर्म किए जाने पर गैसीय अवस्था में आ जाएगी। द्रव्य के तापीय गुण 309
(d)∵70°C ताप गैस के क्रान्तिक ताप से अधिक है; अत: इसे समतापी सम्पीडन द्वारा द्रवित नहीं किया जा सकता; अत: चिर स्थायी गैसों की भाँति दाब बढ़ाते जाने पर इसका आयतन कम होता जाएगा।

प्रश्न 18.
101°F ताप ज्वर से पीड़ित किसी बच्चे को एन्टीपायरिन (ज्वर कम करने की दवा) दी गई जिसके कारण उसके शरीर से पसीने के वाष्पन की दर में वृद्धि हो गई। यदि 20 मिनट में ज्वर 98°F तक गिर जाता है तो दवा द्वारा होने वाले अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर क्या है? यह मानिए कि ऊष्मा ह्रास का एकमात्र उपाय वाष्पन ही है। बच्चे का द्रव्यमान 30 kg है। मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा धारिता जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के लगभग बराबर है तथा उस ताप पर जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 580 cal g-1 है।
हल-
बच्चे का द्रव्यमान M = 30 किग्रा
उसके ताप में कमी
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प्रश्न 19.
थर्मोकोल का बना ‘हिम बॉक्स विशेषकर गर्मियों में कम मात्रा के पके भोजन के भण्डारण का सस्ता तथा दक्ष साधन है। 30 cm भुजा के किसी हिम बॉक्स की मोटाई 5.0 cm है। यदि इस बॉक्स में 4.0 kg हिम रखा है तो 6h के पश्चात बचे हिम की मात्रा का आकलन कीजिए। बाहरी ताप 45°C है तथा थर्मोकोल की. ऊष्मा चालकता 0.01 Js-1m-1k-1 है। (हिम की संगलन ऊष्मा = 335 x 103Jkg-1)
हल-
हिम बॉक्स की भुजा a = 30 cm = 0.3 m, बॉक्स की मोटाई l = 5.0 cm = 0.05 m
बाहरी ताप T1 = 45°C, अन्दर (बर्फ) का ताप T2 = 0°C
समय t = 6h = 6 x 60 x 60 s , बर्फ का द्रव्यमान = 4.0 kg
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माना ईसे ऊष्मा को प्राप्त करके m द्रव्यमान बर्फ पिघल जाती है। इस प्रक्रिया में बर्फ द्वारा अवशोषित ऊष्मा

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प्रश्न 20.
किसी पीतल के बॉयलर की पेंदी का क्षेत्रफल 0.15 m2 तथा मोटाई 1.0 cm है। किसी गैस स्टोव पर रखने पर इसमें 6.0 kg/min की दर से जल उबलता है। बॉयलर के सम्पर्क की ज्वाला के भाग का ताप आकलित कीजिए। पीतल की ऊष्मा चालकता = 109 Js-1m-1K-1; जल की वाष्पन ऊष्मा = 2256 x 103 Jkg-1है।
हल-
पेंदी का क्षेत्रफल A = 0.15 m2, मोटाई l = 1.0 cm = 0.01 m,
पीतल की ऊष्मा चालकता K = 109 Js-1m-1K-1,
जल की वाष्पन ऊष्मा L = 2256 x 103 J kg-1,
जल उबलने की दर = 6.0 kg/min
मानी ज्वाला का ताप T1 है जबकि बॉयलर का (UPBoardSolutions.com) आन्तरिक ताप T2 = 100°C
t = 1 min या 60 s में बॉयलर के भीतर प्रविष्ट होने वाली ऊष्मा
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प्रश्न 21. स्पष्ट कीजिए कि क्यों
(a) अधिक परावर्तकता वाले पिण्ड अल्प उत्सर्जक होते हैं।
(b) कंपकंपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है।
(c) कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है, खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्टी में रखते हैं। तो वह ताप का सही मान मापता है?
(d) बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।
(e) भाप के परिचालन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक दक्ष होते हैं।
उत्तर-
(a) हम जानते हैं कि उच्च परावर्तकता वाले पिण्ड अपने ऊपर गिरने वाले अधिकांश विकिरण को परावर्तित कर देते हैं अर्थात् वे अल्प अवशोषक होते हैं, इसीलिए वे अल्प उत्सर्जक भी होते हैं। (b) लकड़ी की ट्रे ऊष्मा की कुचालक होती है जबकि पीतल का गिलास ऊष्मा का सुचालक है। यद्यपि कंपकंपी वाले दिन दोनों ही समान ताप पर होंगे, परन्तु हाथ से छूने पर गिलास हमारे हाथ से तेजी व्य के तापीय गुण 311 से ऊष्मा लेता है जबकि लकड़ी की ट्रे बहुत कम ऊष्मा लेती है। यही कारण है कि पीतल का गिलास लकड़ी की ट्रे की तुलना में अधिक ठण्डा लगता है। | (c) इसका कारण यह है कि खुले में रखे तप्त लोहे का गोला तेजी से ऊष्मा खोता है और ऊष्मा धारिता कम होने के कारण तेजी से ठण्डा होता जाता है, इससे उत्तापमापी को पर्याप्त विकिरण ऊर्जा लगातार नहीं मिल पाती। इसके विपरीत (UPBoardSolutions.com) भट्ठी में रखने पर गोले का ताप स्थिर बना रहता है और वह नियत दर से विकिरण उत्सर्जित करता रहता है।
(d) हम जानते हैं कि वायु ऊष्मा की कुचालक होती है, यही कारण है कि पृथ्वी के चारों ओर का वायुमण्डल एक कम्बल की भाँति कार्य करता है और पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरणों को वापस पृथ्वी की ओर परावर्तित कर देता है। वायुमण्डल की अनुपस्थिति में पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरण सीधे सुदूर अन्तरिक्ष में चले जाते तथा पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाती।
(e). हम जानते हैं कि 1g जलवाष्प, 100°C के 1g जल की तुलना में 540 cal अतिरिक्त ऊष्मा रखती है। इससे स्पष्ट है कि जलवाष्प आधारित तापन निकाय, तप्त जल आधारित तापन निकाय से अधिक दक्ष हैं।

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प्रश्न 22.
किसी पिण्ड का ताप 5 min में 80°C से 50°C हो जाता है। यदि परिवेश का ताप 20°c है। तो उस समय को परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप 60°C से 30°C हो जाएगा।
हल-
80°C तथा 50°C का माध्य 65°C है इसका परिवेश ताप से अन्तर (65 -20) = 45°C है।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
ताप जो सेल्सियस और फारेनहाइट पैमाने पर समान पाठ देता है, वह है।
(i) 0°
(ii) 30°
(iii) 40°
(iv) 50°
उत्तर-
(iii) 40°

प्रश्न 2. केल्विन पैमाने पर पानी का हिमांक होता है।
(i) 0 K
(ii) 100 K
(iii) 273 K
(iv) 373 K
उत्तर-
(iii) 273 K

प्रश्न 3. 0°, केल्विन पैमाने का मान होता है।
(i) 272 K
(ii) 273 K
(iii) 274 K
(iv) 275 K
उत्तर-
(ii) 273 K

प्रश्न 4. सेल्सियस तथा फारेनहाइट पैमाने में सम्बन्ध है।
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उत्तर-
(i) °C = [latex]\frac { 5 }{ 9 }[/latex](°F – 32)

प्रश्न 5. केल्विन पैमाने पर पानी का क्वथनांक होता है।
(i) 373 K
(ii) 273 K
(iii) 100 K
(iv) 230 K
उत्तर-
(i) 373 K

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प्रश्न 6.
एक आदर्श गैस थर्मामीटर द्वारा मापा गया ताप व्यंजक [latex s=2]\theta =\frac { { P }_{ t }-{ P }_{ 0 } }{ { P }_{ 100 }-{ P }_{ 0 } } \times 100[/latex] द्वारा दिया जाता है, तो ताप 0°है।
(i) केल्विन
(ii) फारेनहाइट
(iii) रयूमर
(iv) सेल्सियस
उत्तर-
(iv) सेल्सियस

प्रश्न 7. आदर्श गैस के रुद्रोष्म प्रक्रम में ताप T तथा दाब P में सम्बन्थ है
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उत्तर-
(i) [latex s=2]\frac { { T }^{ \gamma } }{ { P }^{ ^{ \gamma }-1 } } [/latex] नियतांक

प्रश्न 8.
किसी ताप पर आदर्श गैस के अणुओं में होती है।
(i) केवल गतिज ऊर्जा ।
(ii) केवल स्थितिज ऊर्जा
(iii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर-
(i) केवल गतिज ऊर्जा

प्रश्न 9.
आदर्श गैस के लिए γ = Cp/Cυ अतः
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उत्तर-
(ii) [latex s=2]\gamma =1+\frac { R }{ { C }_{ \upsilon } } [/latex]

प्रश्न 10.
हीलियम गैस के लिए Cy तथा C, का अनुपात है
(i) 5/7
(ii) 7/5
(iii) 3/5
(iv) 5/3
उत्तर-(iv) 5/3

प्रश्न 11.
एक मोल गैस की 7 ताप पर आन्तरिक ऊर्जा है।
(i) Cp x T
(ii) Cυ x T
(iii) (Cp – Cυ)xT
(iv)Cp/Cυ x T
उत्तर-
(iii) (Cp – Cυ)xT

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प्रश्न 12.
किसी पदार्थ का क्षेत्रीय प्रसार गुणांक 0.0002 प्रति °c है। उसका रेखीय प्रसार गुणांक होगा !
(i) 0.0001 प्रति °C
(ii) 0.0002 प्रति °C
(iii) 0.0004 प्रति °C
(iv) 0.0003 प्रति °C
उत्तर-
(i) 0.0001 प्रति °C

प्रश्न 13.
द्रव के वास्तविक एवं आभासी प्रसार गुणांकों में सम्बन्ध प्रदर्शित करने का सही व्यंजक है
(i) γr = γa + γg
(ii) γg = γr + γa
(iii) γa = γr + γg
(iv) γr = γa – γg
उत्तर-
(i) γr = γa + γg

प्रश्न 14.
वास्तविक प्रसार गुणांक का सूत्र होता है।
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उत्तर-
(i) द्रव का वास्तविक प्रसार गुणांक = [latex s=2]\frac { { \left( \Delta V \right) }_{ r } }{ V\times \Delta \theta } [/latex]

प्रश्न 15.
पानी का घनत्व अधिकतम होगा, यदि उसका ताप है।
(i) 0°C
(ii) 4°C
(iii) 32°C
(iv) 100°C
उत्तर-
(ii) 4°C

प्रश्न 16.
ठण्डे देशों में झील के पानी के जम जाने पर भी मछलियाँ जीवित रहती हैं, क्योंकि
(i) वे अधिक ठण्ड सहन कर सकती हैं।
(ii) वे अपने अन्दर आवश्यक ऑक्सीजन संचय करती हैं।
(iii) झील के पानी की जमी हुई सतह के नीचे पानी द्रव के रूप में 4°C पर रहता है।
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर-
(iii) झील के पानी की जमी हुई सतह के नीचे पानी द्रव के (UPBoardSolutions.com) रूप में 4°C पर रहता है।

प्रश्न 17.विशिष्ट ऊष्मा का SI मात्रक होता है।
(i) जूल/किग्रा-°C
(ii) जूल/किग्रा-°F
(iii) जूल ग्राम-°C
(iv) जूल/किग्रा
उत्तर-
(i) जूल/किग्रा-°C

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प्रश्न 18.
मोलर विशिष्ट ऊष्मा का सूत्र होता है।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 25
उत्तर-
(ii) मोलर विशिष्ट ऊष्मा [latex s=2]\frac { 1 }{ \mu } .\frac { \Delta Q }{ \Delta T } [/latex]

प्रश्न 19.
मोटर गाड़ी के इंजन को ठण्डा करने के लिए जल प्रयोग में लाया जाता है, क्योंकि
(i) जल की विशिष्ट ऊष्माधारिता उच्च होती है।
(ii) यह निम्न ताप पर उपलब्ध है।
(iii) यह निम्न घनत्व पर होता है।
(iv) यह आसानी से उपलब्ध है।
उत्तर-
(i) जल की विशिष्ट ऊष्माधारिता उच्च होती है।

प्रश्न 20.
0°C पर स्थित पानी की कुछ मात्रा में उसी ताप पर स्थित बर्फ की कुछ मात्रा मिला दी। जाती है। अब ताप |
(i) घटेगा।
(ii) बढ़ेगा।
(iii) वही रहेगा
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(iii) वही रहेगा

प्रश्न 21.
जल की विशिष्ट ऊष्मा 1 कैलोरी/ग्राम °C है। इसका मान जूल/किग्रा °C में होगा
(i) [latex ]\frac { 1 }{ 4.2\times { 10 }^{ 3 } } [/latex]
(ii) 4.2×103
(iii) 8.4×103
(iv) 4.1×103
उत्तर-
(i) 4.2×103

प्रश्न 22.
भाप की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा का मान है।
(i) 80 किलो कैलोरी/किग्रा
(ii) 536 किलो कैलोरी/किग्रा
(iii) 4.2 किलो कैलोरी/किग्रा
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ii) 536 किलो कैलोरी/किग्रा

प्रश्न 23.
किसी पदार्थ को गुप्त ऊष्मा देने पर
(i) गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
(ii) स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।
(iii) स्थितिज ऊर्जा कम हो जाती है।
(iv) दोनों प्रकार की ऊर्जाएँ अप्रभावित रहती हैं।
उत्तर-
(ii) स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
सेल्सियस पैमाने के उच्चतम बिन्दु का मान क्या होता है?
उत्तर-
सेल्सियस पैमाने के उच्चतम बिन्दु का मान 100°C होता है।

प्रश्न 2.
त्रिक बिन्दु के संगत दाब तथा ताप के मान बताइए।
उत्तर-
दाब 4.58 मिमी तथा ताप 0.01°C.

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प्रश्न 3.
तापमापी में जल का उपयोग क्यों नहीं किया जाता? तीन कारण लिखिए।
उत्तर-
(i) जल पारदर्शी है,
(ii) काँच से चिपकता है तथा
(iii) इसका ऊष्मीय प्रसार असमान है।

प्रश्न 4.
स्थिर-आयतन वायु तापमापी का सिद्धान्त बताइए।
उत्तर-
सिद्धान्त किसी गैस का स्थिर आयतन पर दाब गैस के ताप के साथ बदलता है। यदि गैस के एक निश्चित द्रव्यमान के, स्थिर आयतन पर, 0°C, 100°C तथा एक अज्ञात ताप t पर दाब क्रमशः P0, P100 तथा Pt हों तो
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प्रश्न 5.
प्रतिरोध तापमापी में प्लेटिनम का तार क्यों प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर-
प्लेटिनम के तार का प्रतिरोध ताप के बढ़ने पर (200°C से 1200°C तक) एकसमान (UPBoardSolutions.com) रूप से बढ़ता है, गलनांक ऊँचा होता है तथा यह अन्य पदार्थों से रासायनिक क्रिया नहीं करता।

प्रश्न 6.
समीकरण Rt = R0(1 + αt) में R प्रतिरोध तथाt ताप है। α का मात्रक बताइए।
उत्तर-
प्रति°C

प्रश्न 7. मानव शरीर का सामान्य ताप क्या होता है?
उत्तर-
मानव शरीर का सामान्य ताप 37°C (98.4°F) होता है।

प्रश्न 8.
सार्वत्रिक गैस नियतांक R का मान क्या होता है?
उत्तर-
सार्वत्रिकं गैस नियतांक R = 8.31 जूल-1 मोल-1 केल्विन-1

प्रश्न 9.
एक परमाणुक गैस के लिए Cυ, का मान कितना होता है?
उत्तर-
3/2R.

प्रश्न 10.
आदर्श गैस की स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा Cp की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा-गैस के 1 ग्राम अणु को मोल कहते हैं। 1 मोल गैस का द्रव्यमान M ग्राम होता है, जहाँ M गैस का अणुभार है। गैस के 1 ग्राम अणु अथवा 1 मोल को स्थिर आयतन पर तथा स्थिर दाब पर 1°C ताप बढ़ाने के लिए क्रमश: Mcυ तथा Mcpऊष्मा की (UPBoardSolutions.com) आवश्यकता होगी। ऊष्मा की इन मात्राओं को ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा कहते हैं तथा इन्हें क्रमश: Cυ तथा Cp से व्यक्त करते हैं।

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प्रश्न 11.
किसी धातु के रेखीय प्रसार गुणांक तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर-
β = 2α.

प्रश्न 12.
किसी ठोस के रेखीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर-
γ = 3α

प्रश्न 13.
रेखीय प्रसार गुणांक, क्षेत्रीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
α: β: γ = 1:2:3.

प्रश्न 14.
ठोस के लिए ऊष्मीय प्रसंगर गुणांक नियत नहीं होता है। क्यों?
उत्तर-
ऊष्मीय प्रसार गुणांक ताप के साथ परिवर्तित होता है क्योंकि कोई भी ठोस वस्तु ऊष्मा पाकर फैल जाती है तथा ठण्डा होने पर सिकुड़ जाती है। इसीलिए किसी भी ठोस वस्तु के लिए ऊष्मीय प्रसार गुणांक नियत नहीं रहता है।

प्रश्न 15.
साधारण काँच की प्लेट अधिक गर्म करने पर चटक जाती है। क्यों?
उत्तर-
साधारण काँच की प्लेट का आयतन प्रसार गुणांक अधिक होता है, इसलिए अधिक गर्म करने पर यह चटक जाती है।

प्रश्न 16.
विशिष्ट ऊष्मा किसकी सबसे अधिक होती है तथा किसकी सबसे कम?
उत्तर-
जल की सर्वाधिक तथा पारे की सबसे कम।।

प्रश्न 17.
पानी की विशिष्ट ऊष्मा जूल के पदों में कितनी होती है।
उत्तर-
4.18 x 103 जूल/किग्रा °C

प्रश्न 18.
ऊष्माधारिता का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
ऊष्माधारिता = द्रव्यमान x विशिष्ट ऊष्मा।

प्रश्न 19.
स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा Cυ की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
स्थिर आयतन पर किसी गैस के 1 ग्राम द्रव्यमान का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की (UPBoardSolutions.com) मात्रा को उस गैस की स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा Cυ कहते हैं।

प्रश्न 20.
बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा का मान बताइए।
उत्तर-
80 कैलोरी/ग्राम।

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प्रश्न 21.
जल की वाष्पन की गुप्त ऊष्मा का मान बताइए।
उत्तर-
536 कैलोरी/ग्राम।।

प्रश्न 22.
बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा 80 कैलोरी/ग्राम है। इसका मान जूल/किग्रा में लिखिए।
उत्तर-
3.36 x 105 जूल/किग्रा।

प्रश्न 23.
गलनांक पर अपद्रव्यों का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
गलनोक कम हो जाता है।

प्रश्न 24.
कैलोरीमिति का क्या सिद्धान्त है?
उत्तर-
ऊष्मा का प्रवाह सदैव ऊँचे ताप वाली वस्तु से नीचे ताप वाली वस्तु में होता है और यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि दोनों वस्तुओं के ताप समान नहीं हो जाते। इस क्रिया में बाहर से ऊष्मा का आदान-प्रदान न हो तो एक वस्तु द्वारा दी गई ऊष्मा, दूसरी वस्तु द्वारा ली (UPBoardSolutions.com) गई ऊष्मा के बराबर होगी। यही कैलोरीमिति का सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के अनुसार, गर्म वस्तु द्वारा दी गई ऊष्मा = ठण्डी वस्तु द्वारा ली गई ऊष्मा।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेखीय प्रसार गुणांक की परिभाषा तथा मात्रक लिखिए।
या रेखीय प्रसार गुणांक (α) का अर्थ समझाइए।
उत्तर-
रेखीय प्रसार गुणांक (Coefficient of linear expansion)-माना किसी छड़ की एक निश्चित ताप t पर लम्बाई L है तथा उसके ताप में ΔT की वृद्धि करने पर लम्बाई में ΔL की वृद्धि हो जाती है। किसी ठोस वस्तु को गर्म करने पर उसकी लम्बाई में वृद्धि निम्न बातों पर निर्भर करती है–
(i) छड़ की प्रारम्भिक लम्बाई पर-लम्बाई में वृद्धि छड़ की प्रारम्भिक लम्बाई (L) के अनुक्रमानुपाती होती है। अर्थात्
∆L ∝ L
(ii) छड़ के ताप में वृद्धि पर लम्बाई में वृद्धि ΔL छड़ के ताप में वृद्धि ΔT के अनुक्रमानुपाती होती
अर्थात ∆L ∝∆L
उपर्युक्त दोनों तथ्यों को एक साथ लिखने पर,
∆L ∝ L∆T
अथवा ∆L = α L∆T …(1)
जहाँ α (ऐल्फा) एक नियतांक है। यह छड़ के पदार्थ का “रेखीय प्रसार गुणांक’ कहलाता
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 27
किसी पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक, लम्बाई में उस वृद्धि के बराबर होता है, जब उसकी एकांक लम्बाई का ताप 1°C बढ़ाते हैं।
यह छड़ के पदार्थ पर भी निर्भर करता है। यदि विभिन्न पदार्थों की समान छड़ों को समान ताप तक गर्म किया जाये तो उनकी लम्बाई में वृद्धि भिन्न-भिन्न होती है। उपर्युक्त सूत्र (2) से रेखीय प्रसार गुणांक का मात्रक =
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 27
अत: रेखीय प्रसार गुणांक का मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस होता है।

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प्रश्न 2.
आयतन प्रसार गुणांक की परिभाषा दीजिए तथा जल के असंगत प्रसार की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
आयतन प्रसार गुणांक-—किसी वस्तु का आयतन प्रसार गुणांक उसके आयतन में वृद्धि के बराबर होता है जब उसके एकांक आयतन का ताप 1°C बढ़ाया जाता है। आयतन प्रसार गुणांक को मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस होता है।
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जल का असंगत प्रसार–प्राय: सभी द्रवों का आयतन ताप बढ़ने से बढ़ता है परन्तु जब जल को 0°C से 4°C तक गर्म किया जाता है, तो उसका आयतन (बढ़ने की बजाय घटता है तथा 4°C के पश्चात् फिर जल का आयतन बढ़ने लगता है [चित्र 11.1 (a)]। 4C पर जल का आयतन (UPBoardSolutions.com) न्यूनतम होता है; अतः 4°C पर जल का घनत्व अधिकतम होता है। जल के अधिकतम घनत्व का मान 1.0000 x 103 किग्रा/मीटर3 है। जल के घनत्व तथा ताप का ग्राफ चित्र 11.1(b) में प्रदर्शित है।
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स्पष्टत: 0°C से 4°C तक जल का प्रसार असामान्य होता है, परन्तु 4°C से ऊपर के तापों पर इसका प्रसार सामान्य होता है।

प्रश्न 3.
रेखीय प्रसार गुणांक (α) तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर-
रेखीय प्रसार गुणांक (α) तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) में सम्बन्ध-
माना किसी वस्तु की एक वर्गाकार पटल ABCD है, जिसकी प्रत्येक भुजा की लम्बाई 1 मीटर है। इसका प्रारम्भिक क्षेत्रफल 1 मीटर होगा। पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक α है। माना वर्गाकार पटल के ताप में 1°C की वृद्धि की जाती है। तब इस नये ताप पर
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प्रश्न 4.
वास्तविक तथा आभासी प्रसार गुणांकों में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर-
वास्तविक तथा आभासी-प्रसार-गुणांकों में सम्बन्ध- माना कि काँच के एक बर्तन में कोई द्रव भरा है जिसका आयतन V है। माना कि बर्तन को गर्म करके द्रव के ताप में ∆t की वृद्धि की जाती है। तब
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अत: किसी द्रव को वास्तविक प्रसार गुणांक उस द्रव के आभासी-प्रसार गुणांक तथा बर्तन के पदार्थ के आयतन प्रसार गुणांक के योग के बराबर होता है।

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प्रश्न 5.
ठण्डे प्रदेशों में तालाबों के जम जाने पर भी उसमें मछलियाँ जीवित कैसे रहती हैं?
उत्तर-
ठण्डे प्रदेशों में सर्दी के दिनों में वायुमण्डल का ताप 0C से भी कम रहता है। अत: वहाँ तालाबों में जल जमने लगता है परन्तु 4°C पर जल का घनत्व अधिकतम होने के कारण नीचे को जल 4°C बना रहता है। तापमान के 0°C पहुँचने पर तालाब की ऊपरी सतह पर बर्फ जम जाती है (चित्र 11.3)। बर्फ के सम्पर्क में जो जले होता है, उसका ताप 0°C रहता है। बर्फ ऊष्मा की कुचालक है; अत: नीचे से ऊष्मा ऊपर की ओर अत्यन्त ॐ मछलियाँ । धीरे-धीरे संचरित होती है, फलस्वरूप नीचे का ताप भी । 4°C ही बना रहता है। इस प्रकार इस जल में मछलियाँ तथा
अन्य जल के जन्तु जीवित रहते हैं।
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प्रश्न 6.
रेल की पटरियों के बीच खाली स्थान क्यों छोड़ा जाता है?
उत्तर-
रेल की पटरियों को बिछाते समय उनके बीच कुछ रिक्त स्थान छोड़ दिया जाता है, जिससे कि गर्मी के दिनों में ताप बढ़ने पर पटरियों को फैलने के लिए स्थान मिल सके। यदि पटरियाँ सटाकर बिछा दी जाएँ, तो गर्मियों में फैलने के कारण पटरियाँ तिरछी हो जायेंगी, जिससे रेल दुर्घटना हो सकती है।

प्रश्न 7.
सर्दियों की रातों में जल के पाइप कभी-कभी फट जाते हैं, क्यों?
उत्तर-
क्योंकि 0°C पर बर्फ का आयतन जल के आयतन से अधिक होता है, अतः सर्दी की रातों में जब वायुमण्डल का ताप 0°C से कम हो जाता है, तो पाइप में उपस्थित जल जमकर बर्फ में बदल जाता है। बर्फ बनने पर आयतन बढ़ता है, परन्तु आयतन प्रसार के लिए स्थान उपलब्ध न होने के कारण पाइप की सतह पर अन्दर से दबाव बढ़ता है, जिससे वे फट जाते हैं।

प्रश्न 8.
समतापीय तथा रुद्धोष्म प्रक्रमों में क्या अन्तर है?
उत्तर-
समतापीय तथा रुद्धोष्म प्रक्रमों में अन्तर ।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 34

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प्रश्न 9.
वाष्पन तथा क्वथन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
घाष्पन तथा क्वथन में अन्तर
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 35

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) तथा आयतन प्रसार गुणांक (γ) का अर्थ समझाइए। α β एवं γ में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर-
क्षेत्रीय प्रसार गुणांक-माना किसी आयताकार पटल का क्षेत्रफल A है तथा गर्म करके, इसके ताप में ∆t की वृद्धि करने पर क्षेत्रफल में वृद्धि ∆A होती है। प्रयोगों द्वारा यह पाया गया है कि क्षेत्रफल में वृद्धि
(i) प्रारम्भिक क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् ∆A∝A
(ii) ताप में वृद्धि के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् ∆A∝∆T
उपर्युक्त दोनों तथ्यों को एक साथ लिखने पर ।
∆Α ∝ ΑΔΤ अथवा
∆A = β. A∆T…(1)
यहाँ β (बीटा) एक नियतांक है जिसे पटल के पदार्थ का क्षेत्रीय प्रसार गुणांक कहते हैं। इसका मान अन्य किसी राशि (जैसे-आकार या आकृति) पर निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 36
अत: किसी पदार्थ के पटल (lamina) के एकांक क्षेत्रफल का ताप 1°c बढ़ाने पर उसके क्षेत्रफल में जो वृद्धि होती है उसे उसे पदार्थ का क्षेत्रीय प्रसार गुणांक कहते हैं।
क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) का मात्रक भी प्रति °c होता है।
आयतन प्रसार गुणांक- प्रयोगों द्वारा पाया गया कि किसी ठोस के आयतन में वृद्धि (i) उसके (UPBoardSolutions.com) प्रारम्भिक आयतन v के तथा (ii) ताप में वृद्धि ∆t के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् यदि किसी वस्तु का प्रारम्भिक आयतन V हो तथा उसके ताप में ∆T वृद्धि करने पर उसके आयतन में ∆V की वृद्धि हो, तो उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 37
अतः किसी वस्तु का आयतन प्रसार गुणांक उसके आयतन में वृद्धि के बराबर होता है जब उसके एकांक आयतन का ताप 1°C बढ़ाया जाता है।
आयतन प्रसार गुणांक को मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस होता है।
रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांक में सम्बन्ध
हम जानते हैं कि
β = 2α , γ = 3α
अतः α : β : γ = α : 2 α : 3 α
α : β : γ = 1 : 2 : 3

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प्रश्न 2.
इस्पात तथा ताँबे की छड़ों की लम्बाइयाँ क्या होनी चाहिए जिससे कि सभी तापों पर इस्पात की छड़ ताँबे की छड़ से 5 सेमी बड़ी हो? इस्पात का रेखीय-प्रसार-गुणांक 1.1 x 105°C-1 तथा ताँबे का 1.7 x 10-5°c-1 है।
हल-
माना इस्पात की छड़ की लम्बाई ls तथा ताँबे की छड़ की लम्बाई lc है। सभी तापों पर,
ls – lc = 5
सेमी ऐसा तब ही सम्भव है, जब किसी भी ताप-परिवर्तन ΔT के लिए, दोनों छड़ों में परिवर्तन समान हो अर्थात्
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प्रश्न 3.
रुद्धोष्म प्रक्रम क्या है? रुद्रोष्म प्रक्रम में आदर्श गैस के लिए परमताप ‘T’ एवं दाब ‘P’ में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर-
रुद्धोष्म प्रक्रम-जब किसी ऊष्मागतिक निकाय में परिवर्तन इस प्रकार होता है कि सम्पूर्ण प्रक्रम में निकाय तथा बाह्य वातावरण के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता तो इस प्रकार के प्रक्रम को ‘रुद्धोष्म अथवा स्थिरोष्म प्रक्रम’ कहते हैं।
आदर्श गैस के लिए परमताप T एवं दाब P में सम्बन्धमाना आदर्श गैस के 1 ग्राम-अणु (1 मोल) का दाब P, परमताप T तथा आयतन V है। माना कि गैस में बहुत थोड़ा-सा ‘रुद्धोष्म’ प्रसार होता है जिसमें कि यह बाह्य कार्य करती हैं। चूँकि गैस के भीतर बाहर से ऊष्मा को नहीं आने दिया जाता है, अत: बाह्य कार्य करने के लिए गैस अपनी ऊष्मा (आन्तरिक ऊर्जा) को ही प्रयुक्त करेगी। फलतः, किसी किए गये कार्य के तुल्य गैस की आन्तरिक ऊर्जा कम हो जायेगी जिससे गैस का ताप गिर जायेगा। अत: यदि गैस की
आन्तरिक ऊर्जा में होने वाली कमी dU हो तथा किया गया बाह्य कार्य dW हो, तो ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार,
dU + dW = 0 …(1)
माना कि रुद्धोष्म प्रसार के कारण गैस का आयतन V से V + dV तक बढ़ जाता है तथा ताप T से T – dT तक गिर जाता है (गैस के दाब P को स्थिर मान सकते हैं क्योंकि आयतन में परिवर्तन बहुत कम हुआ है)। तब, गैस द्वारा किया गया बाह्य कार्य
dW = P dV …(2)
चूँकि एक आदर्श गैस के अणु परस्पर आकर्षित नहीं करते, अत: इसकी आन्तरिक ऊर्जा पूर्णतया अणुओं की गतिज ऊर्जा ही है तथा केवल गैस के ताप पर निर्भर करती है। अत: गैस का ताप dT गिरने पर इसकी आन्तरिक ऊर्जा में होने वाली कमी गैस से ली गई ऊष्मा के तुल्य होगी, अर्थात् ।
dU = Cυ dT …(3)
जहाँ, Cυ गैस की स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा है। समी० (2) तथा (3) से dW तथा dU के मान समी० (1) में रखने पर,
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प्रश्न 4.
Cp तथा Cν का अर्थ समझाइए। किसी आदर्श गैस के लिए सिद्ध कीजिए कि Cp – Cυ = R, जहाँ प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।
उत्तर-
साधारणत: किसी गैस की दो विशिष्ट ऊष्माएँ होती हैं। एक । तो वह जो गैस को ऊष्मा देते समय उसका आयतन स्थिर रखकर उसके दाब को बढ़ने दिया गया हो (अर्थात् गैस का प्रसार न होने दिया गया हो) तथा दूसरी वह जो ऊष्मा देते समय गैस का दाब स्थिर रखकर (UPBoardSolutions.com) उसके आयतन को बढ़ने दिया गया हो (अर्थात् गैस का स्थिर दाब पर प्रसार होने दिया गया हो)। इन्हें क्रमश: गैस की ‘स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा’ तथा ‘स्थिर दाबे पर विशिष्ट ऊष्मा’ कहते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 40
स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा(Cp) – स्थिर दाब पर, किसी गैस के 1 ग्राम-अणु द्रव्यमान का ताप 1°C बढ़ाने के। लिए जितनी ऊष्मा की आवश्यकता होती है, उसे स्थिर दाब पर गैस की ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (Cp) कहते हैं।
Cp = MCp (जहाँ, M = अणुभार)
स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुळे विशिष्ट ऊष्मा (Cυ)-स्थिर आयतन पर किसी गैस के 1 ग्राम-अणु द्रव्यमान का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस गैस की स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (Cυ) कहते हैं।
Cυ = MCυ (जहाँ M = अणुभार)
मेयर के सूत्र Cp – Cυ = R की व्युत्पत्ति-माना आदर्श गैस के 1 ग्राम-अणु या एक मोल का दाब, ताप व आयतन क्रमश: P, T व V हैं। गैस की यह अवस्था ताप T पर खींचे गए एक समतापीय वक्र के बिन्दु A से प्रदर्शित है।
माना गैस का आयतन स्थिर रखते हुए उसका ताप AT बढ़ाया गया, जिसके कारण यह अवस्था A से C में चली जाती है। ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से प्रक्रम A →C में गैस की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन
Uc -UA = ΔU = Q – W
जहाँ Q गैस द्वारा ली गई ऊष्मा तथा W गैस द्वारा कृत-कार्य है। चूंकि इस प्रक्रम में आयतन नियत है।
(ΔV = 0), अतः W = P X ΔV = 0 तथा Q = Cυ ΔT
इसलिए Uc – UA = Cυ ΔT …(1)
माना गैस को पुनः अवस्था A में वापस लाया जाता है फिर नियत दाब पर इसका ताप T से T + ΔT कर दिया जाता है, जिससे कि गैस अवस्था A से B में चली जाती है। अत: A → B में आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन
UB – UA = ΔU = Q – W
चूँकि इस प्रक्रम में आयतन में परिवर्तन ΔV होता है।
अतः इस प्रक्रम में किया गया कार्य W = PΔV
तथा Q = Ct
UB – UA = CpΔT – PΔV ..(2)
प्रक्रम A → B के लिए प्रारम्भिक अवस्था A में गैस का आयतन V व परमताप T है तथा अन्तिम अवस्था B में गैस का आयतन (V + ΔV) तथा परमताप (T + ΔT) हो जाता है, जबकि दाब P नियत रहता है। अत: अवस्था A व B के लिए आदर्श गैस समीकरण से
PV = RT (अवस्था A के लिए) …(3)
P(V + ΔV) = R(T + ΔT) (अवस्था B के लिए) ..(4)
समी० (4) में से समी० (3) को घटाने पर,
PΔV = RΔT …(5)
समी० (5) तथा समी० (2) से,
UB – UA = CpΔT – RΔT …(6)
चूंकि प्रक्रम A → B तथा A →C में गैस के ताप में परिवर्तन ΔT होता है तथा आदर्श गैस की आन्तरिक ऊर्जा केवल ताप पर निर्भर करती है। अत: इन दोनों प्रक्रमों में आन्तरिक ऊर्जा में समान परिवर्तन होगा। अर्थात् ।
UC -UA = UB – UA
समी० (1) व समी० (6) से,
CυΔT = CpΔT – RΔT
दोनों पक्षों में ΔT से भाग देने पर
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प्रश्न 5.
समतापी एवं रुद्रोष्म प्रक्रम के लिए दाब-आयतन ग्राफ खींचिए। इनमें किस वक़ का ढलान अधिक होता है? इसका कारण दीजिए।
उत्तर-
समतापी एवं रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए दाब-आयतन ग्राफ—चित्र 11.5 में किसी आदर्श गैस के एक निश्चित द्रव्यमान के लिए, दो स्थिर तापों T1 व T2 पर समतापी वक्र खींचे गये हैं। माना कि गैस के प्रारम्भिक दाब, आयतन व ताप क्रमशः P1,V1 व T1, हैं। गैस की यह अवस्था (UPBoardSolutions.com) चित्र 11.5 में बिन्दु A के द्वारा प्रदर्शित है जो कि T1 ताप वाले समतापी वक्र पर स्थित है। यदि हम गैस के ताप को T1 पर ही स्थिर रखते हुए इसका ‘समतापी’ प्रसार (isothermal expansion) करें तो इसकी अवस्थाएँ इसी वक्र पर विभिन्न बिन्दुओं द्वारा प्रदर्शित होंगी।
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रुद्वोष्म वक्र परन्तु यदि गैस का अवस्था A से रुद्धोष्म प्रसार करें (जिससे कि यह बाहर से ऊष्मा नहीं ले सकती) तो दाब के साथ-साथ इसका ताप भी गिर जायेगा। माना कि गैस के अन्तिम
आयतन व ताप क्रमशः P2, V2, व T2, हो जाते हैं। गैस की यह अवस्था बिन्दु B द्वारा प्रदर्शित होगी जो कि ताप T2, वाले । समतापी वक्र पर स्थित है। चूंकि गैस की अवस्था A से अवस्था B तक रुद्धोष्म प्रसार हुआ है, अत: बिन्दु A व B को मिलाने वाला वक्र AB रुद्धोष्म वक्र होगा।

यदि हम गैस के दाब को स्थिर रखते हुए उसे गर्म करें तो गैस का प्रसार चार्ल्स के नियम के अनुसार होगा। इस दशा में गैस का दाब-आयतन वक्र (P-V curve) एक सरल रेखा के रूप में होगा। इसे ‘समदाबी रेखा’ कहते हैं तथा यह आयतन-कक्ष के समान्तर होती है। (चित्र 11.5)। दूसरे शब्दों में, समदाबी रेखा का आयतन-अक्ष से ढलान (slope) शून्य है।

समतापी तथा रुद्धोष्म वक्रों की तुलना से यह स्पष्ट है कि रुद्धोष्म वक्र का ढलान समतापी वक्र के ढलान से अधिक है। इसका कारण यह है कि गैस के समतापी तथा रुद्धोष्म दोनों प्रसारों में गैस का दाब गिरता है, परन्तु गैस के दाब में होने वाली. उतनी ही गिरावट के लिए, गैस के आयतन में रुद्धोष्म प्रसार के समय होने वाली वृद्धि, समतापी प्रसार के समय होने वाली वृद्धि की अपेक्षा कम होती है क्योंकि रुद्धोष्म प्रसार में गैस का ताप भी गिर जाता है।
आदर्श गैस के लिए, रुद्धोष्मं वक़ का ढलान समतापी वक़ के ढलान से γ गुना अधिक होता है-
आदर्श गैस के समतापी वक्र की समीकरण निम्न है
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γ का मान सदैव 1 से अधिक होता है, एक-परमाणुक गैस के लिए 1.67, द्वि-परमाणुक गैस के लिए 1.41. तथा बहुपरमाणुक गैस के लिए 1.33. अत: किसी बिन्दु पर रुद्धोष्म वक्र ढलान उस बिन्दु पर समतापी वक्र के ढलान से अधिक होता है। किसी रुद्धोष्म प्रक्रम में γ का मान जितना अधिक होगा, रुद्धोष्म वक्र का ढलान उतना ही अधिक होगा। द्वि-परमाणुक गैस की अपेक्षा, एक-परमाणुक गैस के रुद्धोष्म वक्र का ढलान अधिक होता है।
ढलान अधिक होने के कारण
(i) गैस के प्रसार में रुद्धोष्म वक्र समतापी वक्र के नीचे होगा [चित्र 11.6 (a)]।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 45
(ii) गैस के संकुचन में रुद्धोष्म वक्र समतापी वक्र से ऊपर होगा [चित्र 11.6 (b)]]

प्रश्न 6.
समतापीय प्रक्रम की एक अवस्था A(P1, V1) से दूसरी अवस्था B(P2, V2) तक परिवर्तन में कृत कार्य का व्यंजक लिखिए।
उत्तर-
समतापीय प्रक्रम-जब किसी ऊष्मागतिक निकाय में कोई भौतिक परिवर्तन इस प्रकार हो कि सम्पूर्ण प्रक्रम में निकाय का ताप स्थिर बना रहे, समतापीय प्रक्रम कहलाता है। समतापीय प्रक्रम में आदर्श गैस द्वारा कृत कार्य (Work done by an ideal gas in isothermal process)-जब किसी (UPBoardSolutions.com) गैस के आयतन में समतापी प्रसार होता है तो गैस द्वारा कार्य किया जाता है। माना कि ॥ मोल आदर्श गैस एक स्थिर परमताप T पर प्रारम्भिक आयतन V; से अन्तिम आयतन V, तक प्रसारित होती है। तब, गैस द्वारा किया गया बाह्य कार्य
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प्रश्न 7.
0.20 किग्रा द्रव्यमान के एक धातु के गोले को 150°C तक गर्म करने के पश्चात 27°C के 150 सेमी3 जल से भरे ताँबे के ऊष्मामापी (जिसका जल-तुल्यांक 0.025 किग्रा है) में डाला जाता है। स्थायी अवस्था में अन्तिम ताप 40°C है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा ज्ञात कीजिए। जल का घनत्व 103 किग्रा/मी3 तथा विशिष्ट ऊष्मा 4.2 x 103 जूल किग्रा-1°C-1. यदि बाह्य परिवेश में ऊष्मा ह्रास नगण्य नहीं है, तब आपका उत्तर विशिष्ट ऊष्मा के वास्तविक मान से कम होगा या अधिक।
हल-
माना धातु की विशिष्ट ऊष्मा s है, तब धातु के गोले द्वारा दी गई ऊष्मा
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यदि बाह्य परिवेश में ऊष्मा का ह्रास होता है, तब ली गई ऊष्मा कम होगी। अत: विशिष्ट ऊष्मा c कम होगी।

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प्रश्न 8.
100 ग्राम जल का ताप 24°C से 90°C बढ़ाने के लिए उसमें कुछ भाप घोली गई। आवश्यक भाप के द्रव्यमान की गणना कीजिए। भाप की गुप्त ऊष्मा 540 कैलोरी ग्राम-1। जल की विशिष्ट ऊष्मा 1.0 कैलोरी/(ग्राम°c) है।
हल-
माना आवश्यक भाप का द्रव्यमान m, गुप्त ऊष्मा L तथा जल की विशिष्ट ऊष्मा c है।
100°C के जल में संघनित होने के लिए भाप द्वारा दी गई ऊष्मा mL तथा संघनित जल (UPBoardSolutions.com) को 100°C से 90°C तक ठण्डा होने में दी गई ऊष्मा m c ΔT है, जहाँ ΔT = 100°C-90°C = 10°C
तब, भाप द्वारा कुल दी गई ऊष्मा
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter 49

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्यांजलि Chapter 2 मलिक मुहम्मद जायसी

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 2
Chapter Name मलिक मुहम्मद जायसी
Number of Questions 5
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi काव्यांजलि Chapter 2 मलिक मुहम्मद जायसी

कवि-परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ

प्रश्न:
मलिक मुहम्मद जायसी का जीवन परिचय लिखिए।
या
मलिक मुहम्मद जायसी की काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
या
मलिक मुहम्मद जायसी का जीवन-परिचय देते हुए उसकी रचनाएँ लिखिए।
उत्तर:
मलिक मुहम्मद जायसी प्रेम की पीर’ के गायक के रूप में विख्यात हैं और हिन्दी के गौरव ग्रन्थ ‘पद्मावत’ नामक प्रबन्ध काव्य के रचयिता हैं। ये हिन्दी-काव्य की निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा के सर्वाधिक प्रमुख एवं प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं।

जीवन-परिचय – जायसी के अपने कथन के अनुसार उनका जन्म 900 हिजरी (1492 ई० ) में हुआ था – ‘भा औतार मौर नौ सदी।’ जायसी को जन्म-स्थान रायबरेली जिले का जायस नामक स्थान था, जैसा कि उन्होंने स्वयं कहा है – जायसनगर मोर अस्थानू। इसी कारण ये ‘जायसी’ कहलाए। इनके पिता का नाम शेख ममरेज था। इनके माता-पिता की मृत्यु इनके बचपन में ही हो गयी थी। फलत: ये फकीरों और साधुओं के साथ रहने लगे। जायसी का व्यक्तित्व आकर्षक न था। इनके बायें कान की श्रवण-शक्ति एवं बायीं आँख सम्भवतः चेचक से जाती रही थी, जिसका उल्लेख इन्होंने स्वयं ‘पद्मावत’ में किया है-मुहम्मद बाईं दिसि तजा, एक सरवन एक आँखि। जायसी के सम्बन्ध में प्रसिद्ध है कि वे एक बार शेरशाह के दरबार में गये। शेरशाह उनके कुरूप चेहरे पर हँस पड़ा। इस पर कवि ने बड़े शान्त भाव से पूछा-‘मोहिका हँसेसि कि कोहरहि?’ अर्थात् तुम मुझ पर हँसे थे या उस कुम्हार (सृष्टिकर्ता ईश्वर) पर? इस पर शेरशाह ने लज्जित होकर इनसे क्षमा माँगी थी। कवि जायसी का कण्ठस्वर बड़ा ही मीठा था और काव्य था ‘प्रेम की पीर’ से लबालब भरा हुआ। मुख की कुरूपता को देखकर जो हँसे थे, वे ही इस प्रेमकाव्य को सुनकर आँसू भर लाये-जेइमुख देखा तेइ हँसा, सुना तो आये आँसु। कवि का आध्यात्मिक अनुभव बहुत बढ़ा-चढ़ा था। सूफी मुसलमान फकीरों के अतिरिक्त कई सम्प्रदायों (जैसे—गोरखपन्थी, रसायनी, वेदान्ती आदि) के हिन्दू साधुओं के सत्संग से इन्हें हठयोग, वेदान्त, रसायन आदि से सम्बद्ध बहुत-सा ज्ञान प्राप्त हो गया था, जो इनकी रचना में सन्निविष्ट है। इन्हें इस्लाम और पैगम्बर पर पूरी आस्था थी। ये निजामुद्दीन औलिया की शिष्य-परम्परा में थे। ये बड़े भावुक भगवद्भक्त थे और अपने समय के बड़े ही सिद्ध और पहुँचे हुए फकीर माने जाते थे। सच्चे भक्त का प्रधान गुण प्रेम इनमें भरपूर था। अमेठी के राजा रामसिंह इन पर बड़ी श्रद्धा रखते थे।

जीवन के अन्तिम दिनों में ये अमेठी से कुछ दूर एक घने जंगल में रहा करते थे। यहीं पर एक शिकारी की गोली से इनकी मृत्यु हो गयी। इनका निधन 949 हिजरी अर्थात् सन् 1542 ई० में हुआ बताया जाता है।
रचनाएँ जायसी की तीन रचनाएँ प्रामाणिक रूप से इन्हीं की मानी जाती हैं। ये हैं – पद्मावत, अखरावट और आखिरी कलाम।

पद्मावत: जायसी की कीर्ति का मुख्य आधार ‘पद्मावत’ नामक प्रबन्ध काव्य है, जो हिन्दी में अपने ढंग का अनोखा है। यह एक प्रेमाख्यानक काव्य है, जिसका पूर्वार्द्ध कल्पित और उत्तरार्द्ध ऐतिहासिक है। पूर्वार्द्ध में चित्तौड़ के राजा रत्नसेन और सिंहलद्वीप की राजकुमारी पद्मावती की प्रेमगाथा है। सूफी सिद्धान्तानुसार कवि ने रत्नसेन को साधक और पद्मावती को ब्रह्म के रूप में प्रस्तुत किया है। रत्नसेने अनेक बाधाओं को पार करता और कष्टों को सहता हुआ अन्त में पद्मावती को प्राप्त करता है। उत्तरार्द्ध में पद्मिनी और अलाउद्दीन वाली ऐतिहासिक गाथा है। इस भाग में पद्मावती ब्रह्म रूप में नहीं, प्रत्युत एक सामान्य नारी के रूप में प्रस्तुत की गयी है।

आखिरी कलाम – यह रचना दोहे-चौपाइयों में और बहुत छोटी है। इनमें मरणोपरान्तं जीव की दशा और कयामत (प्रलय) के अन्तिम न्याय आदि का वर्णन है।

अखरावट – इसमें वर्णमाला के एक-एक अक्षर को लेकर इस्लामी सिद्धान्त-सम्बन्धी कुछ बातें कही गयी हैं। इसमें ईश्वर, जीव, सृष्टि आदि से सम्बन्धित दार्शनिक वर्णन है।

चित्ररेखा – यह ‘प्रेमकाव्य है, जिसमें कन्नौज के राजा कल्याणसिंह के पुत्र राजकुमार प्रीतम सिंह तथा चन्द्रपुर-नरेश चन्द्रभानु की राजकुमारी चित्ररेखा की प्रेमकथा वर्णित है।

काव्यगत विशेषताएँ

भावपक्ष की विशेषताएँ

रस-योजना -‘पद्मावत’ प्रबन्ध काव्य होते हुए भी एक श्रृंगारप्रधान प्रेमकाव्य है; अतः श्रृंगार के संयोग और वियोग दोनों पक्षों का वर्णन इसमें मिलता है। यद्यपि अन्य रसों की भी योजना की गयी है, परन्तु गौण रूप में ही। ये गौण रस हैं–करुण, वात्सल्य, वीर, शान्त और अद्भुत।

संयोग-पक्ष – जायसी के प्रमुख काव्य ‘पद्मावत’ में संयोग-पक्ष को उतना विशद् और विस्तृत चिंत्रण नहीं है, जितना वियोग-पक्ष का; क्योंकि संयोग-पक्ष से कवि के आध्यात्मिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती थी। रहस्यवादी कवि होने के नाते इन्होंने रनसेन और पद्मावती को जीव और ब्रह्म का प्रतीक माना है। सूफी सिद्धान्त की दृष्टि से रत्नसेन और पद्मावती के संयोग-वर्णन को इन्होंने अधिक महत्त्व दिया है। संयोग के अन्तर्गत नवोढ़ा स्त्री की भावनाओं का अत्यधिक सुन्दर चित्र निम्नांकित पंक्तियों में मिलता है

हौं बौरी औ दुलहिन, पीउ तरुन सह तेज।
ना जानौं कस होइहिं, चढ़त कंते के सेज ॥

विरह-वर्णन – जायसी का विरह-वर्णन अद्वितीय है। नागमती और पद्मावती दोनों के विरह-चित्र हमें ‘पद्मावत’ में मिलते हैं। यद्यपि इस वर्णन, में अत्युक्तियों का सहारा भी लिया गया है, पर उसमें जो वेदना की तीव्रता है, वह हिन्दी-साहित्य में अन्यत्र दुर्लभ है। उसका एक-एक पद विरह का अगाध सागर है। पति के प्रवासी होने पर नागमती बहुत दु:खी है। वह सोचती है कि वे स्त्रियाँ धन्य हैं, जिनके पति उनके पास हैं

जिन्ह घर कंता ते सुखी, तिन्ह गारौ औ गर्ब।
कन्त पियारा बाहिरे, हम सुख भूला सर्ब ।।

करुणरस – श्रृंगार के उपरान्त करुण रस का जायसी ने विशेष वर्णन किया है। करुणा का प्रथम दृश्य वहाँ आता है, जहाँ रत्नसेन योगी बनकर घर से निकलने लगता है और उसकी माता–पत्नी विलाप करती हुई उसे समझाती

रोवत मायन बहुरत बारा। रतन चला घर भा अँधियारा॥
रोवहिं रानी तजहिं पराना। नोचहिं बार करहिं खरिहाना ॥

रहस्यवाद – कविवर जायसी ने अपने ‘पद्मावत’ नामक महाकाव्य में लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम का चित्रण किया है। ‘पद्मावत’ में ऐसे अनेक स्थल हैं, जहाँ लौकिक पक्ष से अलौकिक की ओर संकेत किया गया है। नागमती का हृदयद्रावक सन्देश निम्नलिखित पंक्तियों में द्रष्टव्य है ।

पिउ सौ कहेउ सँदेसड़ा, हे भौंरा ! हे काग।
सो धनि बिरहै जरि मुई, तेहि क धुवाँ हम्ह लाग॥

प्रकृति-चित्रण – मानव-प्रकृति के चित्रण के अतिरिक्त जायसी ने बाह्य दृश्यों का भी बहुत ही उत्कृष्ट चित्रण किया है। यद्यपि इनके काव्य में प्रकृति का आलम्बन-रूप में चित्रण नहीं मिलता, तथापि उद्दीपन और मानवीकरण अलंकारों के रूप में प्रकृति के अनेक रम्य चित्र उपलब्ध होते हैं।
भावपक्ष के उपर्युक्त विवेचन से सिद्ध होता है कि जायसी वास्तव में रससिद्ध कवि हैं।

कलापक्ष की विशेषताएँ।

भावपक्ष के साथ ही जायसी का कलापक्ष भी पुष्ट, परिमार्जित और प्रांजल है, जिसका विवेचन निम्नवत् है

छन्दोविधान:
जायसी ने अपने काव्य के लिए दोहा-चौपाई की पद्धति चुनी है। इस पद्धति में कवि ने चौपाई की सात पंक्तियों के बाद एक दोहे का क्रम रखा है, जब कि तुलसी ने आठ पंक्तियों के बाद। इस छन्द-विधान के लिए जायसी तुलसी के पथ-प्रदर्शक भी माने जा सकते हैं।

भाषा:
जायसी की भाषा ठेठ अवधी है। इसमें बोलचाल की अवधी का माधुर्य पाया जाता है। इसमें शहद की। सहज मिठास है, मिश्री को परिमार्जित स्वाद नहीं। लोकोक्तियों के प्रयोग से इसमें प्राण-प्रतिष्ठा भी हुई है। कहीं-कहीं शब्दों को तोड़-मरोड़ दिया गया है और कहीं एक ही भाव या वाक्य के कई स्थानों पर प्रयुक्त होने के कारण पुनरुक्ति दोष भी आ गया है। भाषा की स्वाभाविकता, सरसता और मनोगत भावों की प्रकाशन-पद्धति ने जायसी को अवधी साहित्य के क्षेत्र में मान्य बना दिया है।

शैली:
काव्य-रूप की दृष्टि से जायसी ने प्रबन्ध शैली को अपनाया है। उस समय फारसी में मसनवी शैली और हिन्दी में चरितकाव्यों की एक विशेष शैली प्रचलित थी। जायसी ने दोनों का समन्वय कर एक नवीन शैली को जन्म दिया। ‘पद्मावत’ में शैली का यही मिश्रित-नवीन रूप मिलता है। ‘पद्मावत’ के आरम्भ में मसनवी शैली और भाषा, छन्द आदि में चरित-काव्य की शैली मिलती है। इन्होंने चौपाई और दोहा छन्दों में भाषा-शैली को सुन्दर निर्वाह किया है। समग्र रूप में जायसी की भाषा-शैली सरल, सशक्त एवं प्रवाहपूर्ण है।

अलंकार – अलंकारों का प्रयोग जायसी ने काव्य-प्रभाव एवं सौन्दर्य के उत्कर्ष के लिए ही किया है, चमत्कार-प्रदर्शन के लिए नहीं। इनके काव्य में सादृश्यमूलक अलंकारों की प्रचुरता है। आषाढ़ के महीने के घन-गर्जन को विरहरूपी राजा के युद्ध-घोष के रूप में प्रस्तुत करते हुए बिजली में तलवार का और वर्षा की बूंदों में बाणों की कल्पना कर कितना सुन्दर रूपक बाँधा गया है

खड़गे बीजु चमकै चहुँ ओरा। बूंद बान बरसहिं घन घोरा॥

यहाँ रूपक के साथ-साथ अनुप्रास का भी सुन्दर एवं कलात्मक प्रयोग हुआ है।
साहित्य में स्थानडॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल ने जायसी की सराहना करते हुए लिखा है कि, “जायसी अत्यन्त संवेदनशील कवि थे। संस्कृत के महाकवि बाण की भाँति वे शब्दों के चित्र लिखने के धनी हैं। वे अमर कवि हैं।

पद्यांशों पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-निम्नलिखित पद्यांशों के आधार पर उनसे सम्बन्धित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए

नागमती-वियोग-वर्णन

प्रश्न 1:
नागमती चितउर पथ हेरा । पिउ जो गए पुनि कीन्ह न फेरा ।।
नागर काहु नारि बस परा।   तेइ मोर पिउ मोसौं हरा ।।
सुआ काल होइ लेइगा पीऊ । पिउ नहिं जात, जात बरु जीऊ ।।
भयउ नरायन बावन करा। राज करत रोजा बलि छरा ।।
करन पास लीन्हेछ कै छंदू । बिप्र रूप धरि झिलमिल इंदू ॥
मानत भोग गोपिचंद भोगी । लेइ अपसवा जलंधर जोगी ।।
लै कान्हहिं भी अकरूर अलोपी । कठिन बिछोह जियहिं किमि गोपी ।।

सारस जोरी कौन हरि, मारि बियाधा लीन्ह ।
झुरि-झुरि पज़र हौं भई, बिरह काल मोहि दीन्ह ॥

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइट।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) नागमती चित्तौड़ में किसकी राह देख रही है?
(iv) विष्णु ने वामन रूप धारण करके किसे छला था?
(v) किर कारण नागमती सूखकर हड्डियों का ढाँचामात्र रह गयी है?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में ‘नागमती-वियोग-वर्णन’ शीर्षक के अन्तर्गत संकलित एवं मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित ‘पद्मावत’ महाकाव्य से उद्धृत है।। अथवा निम्नवत् लिखिए
शीर्षक का नाम – नागमती-वियोग-वर्णन।
कवि का नाम – मलिक मुहम्मद जायसी।
[संकेत – इस शीर्षक के शेष सभी पद्यांशों के लिए प्रश्न (i) का यही उत्तर लिखना है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – नागमती चित्तौड़ में अपने पति राजा रत्नसेन की बाट जोह रही थी और
कहती थी कि सारस की जोड़ी में से एक (नर) को मारकर किस व्याध (बहेलिये) ने मादा को उससे अलग कर दिया है और यह विरहरूपी काल मुझे दे दिया है, जिसके कारण मैं सूखकर हड्डियों का ढाँचामात्र रह गयी हूँ।
(iii) नागमती चित्तौड़ में अपने राजा रत्नसेन की राह देख रही है।
(iv) विष्णु ने वामन रूप धारण करके राजा बलि को छला था।
(v) नागमती अपने प्रीतम से अलग होकर विरह काल के कारण सूखकर हड्डियों का ढाँचामात्र रह गयी है।

प्रश्न 2:
पाट महादेइ ! हिये न हारू । समुझि जीउ चित चेतु सँभारू ।।
भौंर कँवल सँग होइ मेरावा । सँवरि नेह मालति पहँ आवा ।।
पपिहै स्वाती सौं जस प्रीती । टेकु पियास बाँधु मन थीती ।।
धरतिहिं जैस गगन सौं नेहा । पलटि आव बरषा ऋतु मेहा ।।
पुनि बसंत ऋतु आव नवेली । सो रसे सो मधुकर सो बेली ।।
जिनि असे जीव करसि तू बारी । यह तरिबर पुनि उठिहिं सँवारी ।।
दिन दस बिनु जल सूखि बिधंसा । पुनि सोई सरबर सोई हंसा ।।

मिलहिं जो बिछुरे साजन, अंकम भेटि गहंत ।
तपनि मृगसिरा जे सहैं, ते अद्रा पलुहंत ॥

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(i) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) पति-वियोग से पीड़ित नागमती को उनकी सखियाँ क्या धीरज बँधाती हैं?
(iv) आकाश पृथ्वी से किस रूप में वापस आ मिलता है?
(v) पपीहा अपनी प्यास कैसे बुझाता है
उत्तर:
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – रानी नागमती पति-वियोग से पीड़ित है। उसकी सखियाँ उसे धीरज बँधाती हुई कहती हैं कि पटरानी जी! आप अपने हृदय में इतनी निराश न हों। धैर्य धारण कर स्वयं को सँभालिए। जब बिछुड़े हुए पति तुम्हें पुनः मिलेंगे तो वे (द्विगुणित अनुराग से) तुम्हें प्रगाढ़ आलिंगन में बाँध लेंगे; क्योकि जो मृगशिरा नक्षत्र में (ज्येष्ठ मास) की तपन सहते हैं, वे आर्द्रा नक्षत्र (आषाढ़) की वर्षा से पुनः पल्लवित (हरे-भरे) हो उठते हैं।
(iii) पति-वियोग से पीड़ित नागमती को उनकी सखियाँ यह धीरज बँधाती हैं कि महारानी आप निराश मत होइए। महाराज आपके पूर्व स्नेह को स्मरण करके पुन: वापस आ जाएँगे।
(iv) आकाश पृथ्वी से मेधों की वर्षा की बूंदों के रूप में वापस आ मिलता है।
(v) पपीहा स्वाति नक्षत्र का जल पीकर अपनी प्यास बुझाता है।

प्रश्न 3:
चढ़ा असाढ़ गगन घन गाजा । साजा बिरह दुद दल बाजा ।।
धूम, साम, धौरे घन धाए । सेत धजा बग पाँति देखाए ।।
खड़ग ‘बीजु चमकै चहुँ ओरा। बुंद बान बरसहिं घनघोरा ।।
ओनई घटा आइ चहुँ फेरी । कंत ! उबारु मदन हौं घेरी ।।
दादुर मोर कोकिला पीऊ। गिरै बीजु घट रहै न जीऊ ।।
पुष्य नखत सिर ऊपर आवा । हौं बिनु नाह मंदिर को छावा ?
अद्रा लाग लागि भुईं लेई । मोहिं बिनु पिउ को आदर देई ?

जिन्ह घर कंता ते सुखी, तिन्ह गारौ औ गर्ब ।
कंत पियारा बाहिरै, हम सुख भूला सबै ॥

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइट।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) आषाढ़ के महीने में नागमती को बिजली की चमक तथा मेघों की गड़गड़ाहट कैसी प्रतीत होती
(iv) आषाढ़ माह में चारों ओर किनकी आवाजें सुनायी पड़ती हैं?
(v) आषाढ़ माह में कौन-सी स्त्रियाँ गर्व का अनुभव करती हैं?
उत्तर:
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – राजा रत्नसेन पद्मावती को पाने के लिए योगी बनकर सिंहलगढ़ की ओर चले गये हैं। लम्बे समय तक न लौटने पर रानी नागमती शंकित होती है तथा विरह की अग्नि में जलने लगती है। आर्द्रा नक्षत्र के उदय होने पर घनघोर वर्षा होती है। ऐसे वातावरण में उसकी विरह-वेदना और बढ़ जाती है। वह अनुभव करती है कि जिन स्त्रियों के पति घर पर होते हैं। वे ही सुखी होती हैं। उन्हीं को पत्नी होने का गौरव प्राप्त होता है। विरहिणियों को तो दु:खी जीवन ही बिताना पड़ता है। मेरा पति बाहर है तो मैं तो सभी सुख भूल गयी हूँ।
(iii) आषाढ़ के महीने में नागमती को बिजली की चमक तलवार जैसी दिखाई पड़ती है तथा मेघों की गड़गड़ाहट युद्ध के जुगाड़ों के समान प्रतीत होती है।
(iv) आषाढ़ माह में चारों ओर मेंढ़क, मोर तथा कोयलों की आवाजें सुनायी पड़ती हैं।
(v) आषाढ़ माह में जिन स्त्रियों के पति घर पर हैं, वे गर्व का अनुभव करती हैं।

प्रश्न 4:
भा बैसाख तपनि अति लागी । चोआ चीर चॅदन भा आगी ।।
सुरुज जरत हिवंचल तांका । बिरह बजागि सौंह रथ हाँका ।।
जरत बजागिनि करु पिउ छाहाँ ।आइ बुझाउ अँगारन्ह माहाँ ।।
तोहि दरसन होइ सीतल नारी । आइ आगि ते करु फलवारी ।।
लागिउँ जरै जरै जस भारू | फिर फिर पूँजेसि, तजेउँ न बारू ।।
सरवर हिया घटती निति जाई । टूक टूक , होइ के बिहराई ।।
बिहरत हिया करहु पिउ ! टेका।’ दीठि दवॅगरा मेरवहु एका ।।

कॅवल जो बिगसा मानसर, बिनु जल गयउ सुखाइ।
कबहुँ बेलि फिरि पलुहै, जौ पिउ सींचै आइ॥

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) वैशाख माह में कौन भाड़ में पड़े दाने के समान भुन रहा है?
(iv) विरह के ताप में कौन उत्तरोत्तर सूखता जा रहा है?
(v) किसके सींचने पर बेल फिर से हरी हो सकती है?
उत्तर:
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या – वैशाख मास की प्रचण्ड गर्मी में अपनी दशा का वर्णन करती हुई विरहिणी नागमती कहती है कि मानसरोवर में जो कमल खिला था, वह जल के अभाव में सूख गया। आपके सम्पर्क में आकर मुझे जो प्रेम मिला था, अब वही विरह के कारण नष्ट होता जा रहा है। वह बेल फिर हरी-भरी हो सकती है, यदि प्रिय स्वयं आकर उसे सींचें।
(iii) वैशाख माह में नागमती विरह वेदना के कारण भाड़ में पड़े चने के समान भुन रही है?
(iv) विरह के ताप में नागमती का हृदयरूपी सरोवर उत्तरोत्तर सूखता जा रहा है।
(v) पिय के स्वयं आकर सींचने पर बेल फिर से हरी हो सकती है।

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UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids

UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids (तरलों के यान्त्रिक गुण) are part of UP Board Solutions for Class 11 Physics . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids (तरलों के यान्त्रिक गुण)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Physics
Chapter Chapter 10
Chapter Name Mechanical Properties Of Fluids
Number of Questions Solved 150

UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids (तरलों के यान्त्रिक गुण)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्पष्ट कीजिए क्यों
(a) मस्तिष्क की अपेक्षा मानव का पैरों पर रक्त चाप अधिक होता है।
(b) 6 km ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब समुद्र-तल पर वायुमण्डलीय दाब का लगभग आधा हो जाता है, यद्यपि वायुमण्डल का विस्तार 100 km से भी अधिक ऊँचाई तक है। |
(c) यद्यपि दाब, प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल होता है तथापि द्रवस्थैतिक दाब एक अदिश राशि है।
उत्तर-
(a) पैरों के ऊपर रक्त स्तम्भ की ऊँचाई मस्तिष्क के ऊपर रक्त स्तम्भ की ऊँचाई से अधिक होती है। चूंकि द्रव स्तम्भ का दाब गहराई के अनुक्रमानुपाती होता है; अत: पैरों पर रक्त दाब मस्तिष्क पर रक्त दाब की तुलना में अधिक होता है।
(b) पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव के कारण वायु के अणु पृथ्वी के समीप बने रहते हैं अधिक ऊँचाई तक नहीं जा पाते। इसी कारण 6:km से अधिक ऊँचाई पर जाने पर वायु बहुत ही विरल हो जाती है और घनत्व बहुत कम हो जाता है। चूँकिं तरल-दाब, तरल के घनत्व के अनुक्रमानुपाती होता है; अतः 6 km से ऊपर की वायु का कुल दाब अत्यन्त कम होता है; अत: पृथ्वी-तल से 6 km की ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाबं समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब का आधा रह जाता है।
(c) पास्कल के नियम के अनुसार किसी बिन्दु पर द्रव-दाब सभी दिशाओं में समान रूप से लगता है, अर्थात् दाब के साथ कोई दिशा नहीं जोड़ी जा सकती; अत: दाब एक अदिश राशि है।।

प्रश्न 2.
स्पष्ट कीजिए क्यों
(a) पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिककोण होता है जबकि जल का काँच के साथ स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है।
(b) काँच के स्वच्छ समतल पृष्ठ पर जल फैलने का प्रयास करता है जबकि पारा उसी पृष्ठ पर बूंदें | बनाने का प्रयास करता है। (दूसरे शब्दों में जल काँच को गीला कर देता है जबकि पारा ऐसा नहीं करता है।)
(c) किसी द्रव का पृष्ठ-तनाव पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है।
(d) जल में घुले अपमार्जकों के स्पर्श कोणों का मान कम होना चाहिए।
(e) यदि किसी बाह्य बल का प्रभाव न हो तो द्रव बूंद की आकृति सदैव गोलाकार होती है।
उत्तर-
(a) पारे के अणुओं के बीच ससंजक बल, पारे व काँच के अणुओं के बीच आसंजक बल से अधिक होता है, इस कारण काँच व पारे का स्पर्श कोण अधिककोण होता है।
इसके विपरीत जल के अणुओं के बीच ससंजक बल, काँच व जल (UPBoardSolutions.com) के अणुओं के बीच आसंजक बल से कम होता है, इस कारण जल तथा काँच के बीच स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है। |
(b) खण्ड (a) के उत्तर में वर्णित कारण यहाँ भी लागू होता है।
(c) रबड़ की झिल्ली को खींचने पर उसमें तनाव बढ़ जाता है परन्तु किसी द्रव के मुक्त पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ा देने पर उसके तनाव में कोई परिवर्तन नहीं आता; अत: द्रव का पृष्ठ-तनाव उसके मुक्त क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता।।
(d) अपसार्जक घुले होने पर जल का पृष्ठ-तनाव कम हो जाता है; अतः स्पर्श कोण भी कम हो जाता है।
(e) बाह्य बल की अनुपस्थिति में बूंद की आकृति केवल पृष्ठ-तनाव द्वारा निर्धारित होती है। पृष्ठ-तनाव के कारण बूंद न्यूनतम मुक्त क्षेत्रफल वाली आकृति ग्रहण करना चाहती है। चूंकि एक दिए गए आयतन के लिए गोले का मुक्त पृष्ठ न्यूनतम होता है; अतः बूंद की आकृति पूर्ण गोलाकार हो जाती

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प्रश्न 3.
प्रत्येक प्रकथन के साथ संलग्न सूची में से उपयुक्त शब्द छाँटकर उस प्रकथन के रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(a) व्यापक रूप में व्रवों का पृष्ठ-तनाव ताप बढने पर…….है। (बढ़ता/घटता)
(b) गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर………है, जबकि द्रवों की श्यानता ताप बढने पर……..है। (बढ़ती/घटती)।
(c) दृढ़ता प्रत्यास्थता गुणांक वाले ठोसों के लिए अपरूपण प्रतिबल……….के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि द्रवों के लिए वह……….के अनुक्रमानुपाती होता है। (अपरूपण विकृति/अपरूपण विकृति की दर) ।
(d) किसी तरल के अपरिवर्ती प्रवाह में आए किसी संकीर्णन पर प्रवाह की चाल में वृद्धिमें…….. का अनुसरण होता है। (संहति का संरक्षण/बरनौली सिद्धान्त)
(e) किंसी वायु सुरंग में किसी वायुयान के मॉडल में प्रक्षोभ की चाल वास्तविक वायुयान के प्रक्षोभ के लिए क्रांतिक चाल की तुलना में………होती है। (अधिक/कम)
उत्तर-
(a) घटता
(b) बढ़ती, घटती,
(c) अपरूपण विकृति, अपरूपण विकृति की दर,
(d) संहति को संरक्षण,
(e) अधिक।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के कारण स्पष्ट कीजिए
(a) किसी कागज़ की पट्टी को क्षतिज रखने के लिए आपको उस कागज़ पर ऊपर की ओर हवा फेंकनी चाहिए, नीचे की ओर नहीं।
(b) जब हम किसी जल टोंटी को अपनी उँगलियों द्वारा बन्द करने का प्रयास करते हैं तो उँगलियों के बीच की खाली जगह से तीव्र जल धाराएँ फूट निकलती हैं।
(c) इंजेक्शन लगाते समय डॉक्टर के अंगूठे द्वारा आरोपित दाब की अपेक्षा सुई का आकार दवाई की बहिःप्रवाही धारा को अधिक अच्छा नियन्त्रित करता है।
(d) किसी पात्र के बारीक छिद्र से निकलने वाला तरल उस पर पीछे की ओर प्रणोद आरोपित करता है।
(e) कोई प्रचक्रमान क्रिकेट की गेंद वायु में परवलीय प्रपथ का अनुसरण नहीं करती।
उत्तर-
(a) कागज़ के ऊपर फेंक मारने से ऊपर वायु का वेग अधिक हो जाएगा। क्षैतिज प्रवाह के लिए बरनौली प्रमेय [latex s=2]\left( P+\frac { 1 }{ 2 } { \rho \nu }^{ 2 } \right) [/latex] = नियत के अनुसार कागज़ के ऊपर वायु दाब, नीचे की तुलना में कम हो जाएगा। इससे कागज़ पर उत्थापक बल लगेगा जो कागज़ को नीचे नहीं गिरने देगा। |
(b) टोंटी को उँगलियों द्वारा बन्द करने पर जल उँगलियों के बीच की खाली जगह से निकलने लगता है। यहाँ धारा का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल टोंटी के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल से कम होता है; अतः अविरतता के सिद्धान्त (A1ν1 = A2ν2) से जल का वेग अधिक हो जाता है। |
(c) अविरतता के सिद्धान्त से, समान दाब आरोपित किए जाने पर भी, सुई बारीक होने पर (अनुप्रस्थ क्षेत्रफल कम होने पर) बहि:प्रवाही धारा का प्रवाह वेग बढ़ जाता है; अत: बहि:प्रवाह वेग सुई के आकार से अधिक नियन्त्रित होता है।
(d) जब कोई तरल किसी पात्र में बने बारीक छिद्र से बाहर आता है तो अविरतता के सिद्धान्त से वह उच्च बहि:स्राव वेग प्राप्त कर लेता है। बाह्य बल की अनुपस्थिति में पात्र + तरल का संवेग संरक्षित रहता है; अतः पात्र विपरीत दिशा में संवेग प्राप्त करता है, अर्थात् बाहर निकलता हुआ द्रव पात्र पर : विपरीत दिशा में प्रणोद आरोपित करता है।
(e) घूमती हुई गेंद अपने साथ वायु को खींचती है; अतः गेंद के ऊपर तथा नीचे वायु के वेग में अन्तर आ जाता है; अतः दाबों में भी अन्तर आ जाता है। इसके कारण गेंद पर भार के अतिरिक्त एक अन्य बल भी लगने लगता है और गेंद को पथ परवलयाकार नहीं रह जाता।।

प्रश्न 5.
ऊँची एड़ी के जूते पहने 50 kg संहति की कोई बालिका अपने शरीर को 1.0 cm व्यास की एक ही वृत्ताकार एड़ी पर सन्तुलित किए हुए है। क्षैतिज फर्श पर एड़ी द्वारा आरोपित दाब ज्ञात कीजिए।
हल-
वृत्ताकार एड़ी की त्रिज्या R = व्यास /2 = 1.0 सेमी/2
= 0.5 सेमी = 5 x 10-3 मीटर
वृत्ताकार एड़ी का क्षेत्रफल A = πR2 =3.14 (5 x 10-3 मी)2
= 78.50 x 10-6 मी2
एड़ी पर पड़ने वाला बल F = बालिका का भार = mg
= 50 किग्रा x 9.8 मी/से2 =490 न्यूटन
क्षैतिज फर्श पर एड़ी द्वारा आरोपित दाब = एड़ी पर आरोपित दाब
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प्रश्न 6.
टॉरिसेली के वायुदाबमापी में पारे का उपयोग किया गया था। पास्कल ने ऐसा ही वायुदाबमापी 984 kg m-3 घनत्व की फ्रेंच शराब का उपयोग करके बनाया। सामान्य वायुमण्डलीय दाब के लिए शराब-स्तम्भ की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
हल-
h ऊँचाई के शराब स्तम्भ का दाब P = h.ρ.g
शराब स्तम्भ की ऊँचाई h = [latex s=2]\frac { P }{ \rho .g } [/latex]
यहाँ P = 1 वायुमण्डलीय दाब
= 1.013 x 105Pa = 1.013 x 105 न्यूटन/मी2
शराब का घनत्व ρ = 984 किग्रा/मी3 तथा g = 9.8 मी/से2
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प्रश्न 7.
समुद्र तट से दूर कोई ऊध्र्वाधर संरचना 109 Pa के अधिकतम प्रतिबल को सहन करने के लिए बनाई गई है। क्या यह संरचना किसी महासागर के भीतर किसी तेल कूप के शिखर पर रखे जाने के लिए उपयुक्त है? महासागर की गहराई लगभग 3km है। समुद्री धाराओं की उपेक्षा कीजिए।
हल-
यदि समुद्र के जल द्वारा आरोपित दाब, संरचना द्वारा सहन किये जा सकने वाले अधिकतम प्रतिबल से कम होगा तो संरचना महासागर के भीतर तेल कूप के शिखर पर रखे जाने के लिए उपयुक्त होगी। समुद्र जल द्वारा आरोपित दाब
P = hρg
यहाँ h = 3 किमी = 3 x 103 मीटर,
जल का घनत्व = 103 किग्रा – मी-3 तथा g = 9.8 मी/ से2
P =3 x 103 मी x 103 किग्रा -मी3 x 9.8 मी-से-2
= 2.94 x 107 न्यूटन /मी2 = 2.94 x 107 Pa
चूँकि P < अधिकतम प्रतिबल 109 Pa; अत: संरचना आवश्यक कार्य के लिए उपयुक्त है।

प्रश्न 8.
किसी द्रवचालित आटोमोबाइल लिफ्ट की संरचना अधिकतम 3000 kg संहति की कारोंको उठाने के लिए की गई है। बोझ को उठाने वाले पिस्टन की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 425 cm2 है। छोटे पिस्टन को कितना अधिकतम दाब सहन करना होगा?
हल-
पास्कल के नियम के अनुसार,
छोटे पिस्टन पर अधिकतम दाब = बोझ उठाने वाले बड़े पिस्टन पर दाब
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प्रश्न 9.
किसी U-नली की दोनों भुजाओं में भरे जल तथा मेथेलेटिड स्पिरिट को पारा एक-दूसरे से पृथक् करता है। जब जल तथा पारे के स्तम्भ क्रमशः 10 cm तथा 12.5 cm ऊँचे हैं तो दोनों भुजाओं में पारे का स्तर समान है। स्पिरिट का आपेक्षिक घनत्व ज्ञात कीजिए।
हल-
U-नली की एक भुजा में जल स्तम्भ के लिए,
h1 = 10.0 सेमी; ρ1 (घनत्व) = 1 g-cm-3
U-नली की दूसरी भुजा में मेथेलेटिड स्प्रिट के लिए,
h2 =12.5 सेमी; ρ2 =?
चूंकि दोनों भुजाओं में पारे का तल समान है अत: इस तल पर दोनों भुजाओं के स्तम्भों के दाब भी समान होंगे। अर्थात् ।
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प्रश्न 10.
यदि प्रश्न 9 की समस्या में, U-नली की दोनों भुजाओं में इन्हीं दोनों द्रवों को और उड़ेल कर दोनों द्रवों के स्तम्भों की ऊँचाई 15 cm और बढ़ा दी जाए तो दोनों भुजाओं में पारे के स्तरों में क्या अन्तर होगा? (पारे का आपेक्षिक घनत्व = 13.6)
हल-
माना कि U-नली की दोनों भुजाओं में पारे के तलों का अन्तर h है तथा ρ पारे का घनत्व है, तो ,
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प्रश्न 11.
क्यो,बरनौली समीकरण का उपयोग किसी नदी की किसी क्षिपिका के जल-प्रवाह का विवरण देने के लिए किया जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
बरनौली प्रमेय का समीकरण केवल धारारेखी प्रवाह पर लागू होता है। चूंकि नदी की क्षिफ्रिका (UPBoardSolutions.com) का जल-प्रवाह धारारेखी प्रवाह नहीं होता; अत: इसका विवरण देने के लिए बरनौली समीकरण का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 12.
बरनौली समीकरण के अनुप्रयोग में यदि निरपेक्ष दाब के स्थान पर प्रमापी दाब (गेज़ दाब) का प्रयोग करें तो क्या इससे कोई अन्तर पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
बरनौली समीकरण के अनुसार,
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माना दो बिन्दुओं पर वायुमण्डलीय दाब Pq तथा Pq हैं व गेज दाब क्रमशः P’ व P; हैं तब
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अर्थात् यदि दोनों बिन्दुओं के वायुमण्डलीय दाबों में बहुत कम अन्तर है तो परम दाब के स्थान पर गेज़ दाब का प्रयोग करने से कोई, अन्तर नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 13.
किसी 1.5 m लम्बी 10 cm त्रिज्या की क्षैतिज नली से ग्लिसरीन का अपरिवर्ती प्रवाह हो रहा है। यदि नली के एक सिरे पर प्रति सेकण्ड एकत्र होने वाली ग्लिसरीन का परिमाण 4.0 x 10-3 kg s-1 है तो नली के दोनों सिरों के बीच दाबान्तर ज्ञात कीजिए। (ग्लिसरीन का घनत्व = 1.3 x 103 kg m-3 तथा ग्लिसरीन की श्यानता = 0.83 Pas) आप यह भी जाँच करना चाहेंगे कि क्या इस नली में स्तरीय प्रवाह की परिकल्पना सही है?
हल-
धारा-रेखीय प्रवाह मानते हुए नली में ग्लिसरीन के प्रवाह की दर के प्वॉइजली के सूत्र [latex s=2]Q=\frac { \pi \rho { r }^{ 4 } }{ 8\eta { l }^{ 4 } } [/latex]
से नली के सिरों के बीच दाबान्तर
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यह धारा-रेखी प्रवाह के लिए मान्य अधिकतम मान 2000 से काफी कम है। अतः नली में ग्लिसरीन को प्रवाह धारा-रेखी है।।

प्रश्न 14.
किसी आदर्श वायुयान के परीक्षण प्रयोग में वायु-सुरंग के भीतर पंखों के ऊपर और नीचे के पृष्ठों पर वायु-प्रवाह की गतियाँ क्रमशः 70 ms-1 तथा 63 ms-1 हैं। यदि पंख का क्षेत्रफल 2.5 m2 है तो उस पर आरोपित उत्थापक बल परिकलित कीजिए। वायु का घनत्व 1.3 kg m-3 लीजिए।
हल-
बरनौली प्रमेय के अनुसार, वायु के. क्षैतिज प्रवाह के लिए
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जहाँ P1 = वायुयान पंख के ऊपर दाब तथा P2 = पंख के नीचे दाब
υ1 = पंख की ऊपरी सतह पर वायु का वेग तथा υ2 = निचली सतह पर वायु का वेग
∴  पंख की ऊपरी सतह की तुलना में निचली सतह पर दाब आधिक्य अर्थात् पंखों की सतहों के बीच दाबान्तर
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प्रश्न 15.
चित्र-10.1 (a) तथा (b) किसी द्रव (श्यानताहीन) का अपरिवर्ती प्रवाह दर्शाते हैं। इन दोनों चित्रों में से कौन-सही नहीं है? कारण स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर-
चित्र-10.1 (a) सही नहीं है। नलिका की ग्रीवा में अनुप्रस्थ क्षेत्रफल कम है; अत: अविरतता के सिद्धान्त से यहाँ वेग अधिक होगा; अत: बरनौली प्रमेय से यहाँ जल का दाब कम होगा जबकि चित्र (a) में ग्रीवा पर जल दाब अधिक दिखाया गया है।

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प्रश्न 16.
किसी स्प्रे पम्प की बेलनाकार नली की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 8.0 cm2 है। इस नली के एक सिरे पर 1.0 mm व्यास के 40 सूक्ष्म छिद्र हैं। यदि इस नली के भीतर द्रव के प्रवाहित होने की दर 1.5 m min-1 है तो छिद्रों से होकर जाने वाले द्रव की निष्कासन-चाल ज्ञात कीजिए।
हल-
नली की अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल A1 = 8 x 10-4 मी2
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प्रश्न 17.
U-आकार के किसी तार को साबुन के विलयन में डुबोकर बाहर निकाला गया जिससे उस पर एक पतली साबुन की फिल्म बन गई। इस तार के दूसरे सिरे पर फिल्म के सम्पर्क में एक फिसलने वाला हलका तार लगा है जो 1.5 x 10-2 N भार (जिसमें इसका अपना भार भी सम्मिलित है) को सँभालता है। फिसलने वाले तार की लम्बाई 30 cm है। साबुन की फिल्म का पृष्ठ-तनाव कितना है?
हल-
तार की लम्बाई l = 30 cm = 0.3 m
तार पर लटका भार W = 1.5 x 10-2 N
माना फिल्म का पृष्ठ-तनाव S है, तब फिल्म के एक ओर के पृष्ठ (UPBoardSolutions.com) के कारण तार पर F1 = S x l बल लगेगा।
∴ दोनों पृष्ठों के कारण तार पर बल
F = 2F1 = 2sl
यह बल भार को सन्तुलित करता है; अतः
2Sl = W
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प्रश्न 18.
निम्नांकित चित्र-10.2 (a) में किसी पतली द्रव-फिल्म को 4.5 x 10-2 N का छोटा भार सँभाले दर्शाया गया है। चित्र (b) तथा (c) में बनी इसी द्रव की फिल्में इसी ताप पर कितना भार सँभाल सकती हैं? अपने उत्तर को प्राकृतिक नियमों के अनुसार स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर-
चित्र-10.2 (a), (b) व (c) प्रत्येक में फिल्म के नीचे वाले किनारे की लम्बाई 40 cm (समान) है।
इस किनारे पर फिल्म के पृष्ठ-तनाव S के कारण समान बल F = S x 2l लगेगा।
यही बल लटके हुए भार को साधता है। चूंकि साधने वाला बल प्रत्येक दशा में समान है; अतः चित्र-10.2 (b) व (C) में भी वही भार 4.5 x 10-2 N सँभाला जा सकता है।

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प्रश्न 19.
3.00 mm त्रिज्या की किसी पारे की बूंद के भीतर कमरे के ताप पर दाब क्या है? 20°C ताप पर पारे का पृष्ठ तनाव 4.65 x 10-1 N m-1 है। यदि वायुमण्डलीय दाब 101 x 105 Pa है तो पारे की बूंद के भीतर दाब-आधिक्य भी ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है : त्रिज्या r =3.00 mm = 3.00 x 10-3m,
वायुमण्डलीय दाब Pa = 1.01 x 105 Pa
20°C पर पारे का पृष्ठ-तनाव S =4.65 x 10-1Nm-1
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प्रश्न 20.
5.00 mm त्रिज्या के किसी साबुन के विलयन के बुलबुले के भीतर दाब-आधिक्य क्या है? 20°C ताप पर साबुन के विलयन का पृष्ठ-तनाव 2.50 x 10-2 Nm-1 है। यदि इसी विमा का कोई वायु का बुलबुला 1.20 आपेक्षिक घनत्व के साबुन के विलयन से भरे किसी पात्र में 40.0 cm गहराई पर बनता तो इस बुलबुले के भीतर क्या दाब होता, ज्ञात कीजिए। (1 वायुमण्डलीय दाब = 101 x 105 Pa)
हल-
(a) बुलबुले की त्रिज्या r = 5.00 mm = 5.0 x 10-3 m,
विलयन का पृष्ठ-तनाव S = 2.50 x 10-2 Nm-1
साबुन के घोल का बुलबुला वायु में बनता है; अतः इसके दो मुक्त पृष्ठ होंगे।
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अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 21.
1.0 m2 क्षेत्रफल के वर्गाकार आधार वाले किसी टैंक को बीच में ऊर्ध्वाधर विभाजक दीवार द्वारा दो भागों में बाँटा गया है। विभाजक दीवार के नीचे 20 cm2 क्षेत्रफल का कब्जेदार दरवाजा है। टैंक का एक भाग जल से भरा है तथा दूसरा भाग 1.7 आपेक्षिक घनत्व के अम्ल से भरा है। दोनों भाग 40 m ऊँचाई तक भरे गए हैं। दरवाजे को बन्द रखने के लिए आवश्यक बल परिकलित कीजिए।
हुल-
दरवाजे को बन्द रखने के लिए आवश्यक बल
F = विभाजक दीवार के दोनों ओर का दाबान्तर x दरवाजे का क्षेत्रफल
= (अम्ल स्तम्भ का दाब – जल स्तम्भ का दाब) x A
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प्रश्न 22.
चित्र-10.3 (a) में दर्शाए अनुसार कोई मैनोमीटर किसी बर्तन में भरी गैस के दाब का पाठ्यॉक लेता है। पम्प द्वारा कुछ गैस बाहर निकालने के पश्चात मैनोमीटर चित्र 10.3 (b)] में दर्शाए अनुसार पाठ्यांक लेता है। मैनोमीटर में पारा भरा है तथा वायुमण्डलीय दाब का मान 76 cm मरकरी (Hg) है।
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(i) प्रकरणों (a) तथा (b) में बर्तन में भरी गैस के निरपेक्ष दाब तथा प्रमापी दाब cm (Hg) के मात्रक में लिखिए।
(ii) यदि मैनोमीटर की दाहिनी भुजा में 13.6 cm ऊँचाई तक जल (पारे के साथ | अमिश्रणीय) उड़ेल दिया जाए तो प्रकरण (b) में स्तर में क्या परिवर्तन होगा? (गैस के आयतन में हुए थोड़े परिवर्तन की उपेक्षा कीजिए।)
हस-
वायुमण्डलीय दाब P0 = 76 सेमी पारा ।
(i) चित्र 10.3 (a) में
निरपेक्ष दाब P = P0 + 20 सेमी पारा ।
= 76 सेमी पारा + 20 सेमी पारा = 96 सेमी पारा
‘प्रमापी (गेज) दाब = (P – P0) = 20 सेमी पारा
चित्र 10.3 (b) में,
निरपेक्ष दाब P = P0 – 18 सेमी पारा
= 76 सेमी पारा – 18 सेमी पारा
= 58 सेमी पारा
प्रमापी (गेज) दाब = (P – P0) = -18 सेमी पारा
यह ऋणात्मक (-) चिह्न यह दर्शाता है कि बर्तन में भरी गैस का दाब वायुमण्डलीय दाब से कम है।
(ii) यदि मैनोमीटर की दाहिनी भुजा में 13.6 सेमी ऊँचाई तक जल उड़ेल दिया जाता है, तो चित्र 10.4 के अनुसार मैनोमीटर की दाहिनी भुजा में पारे। का तल नीचे गिरता है तथा बायीं भुजा में यह ऊपर उठता है ताकि तली पर दोनों ओर के दाब समान हो जायें। माना पारे का दाहिनी भुजा से बायीं भुजा में स्थानान्तरण x सेमी है। अत: दोनों भुजाओं में पारे। के स्तम्भ का अन्तर 2x सेमी होगा।
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प्रश्न 23.
वो पात्रों के आधारों के क्षेत्रफल समान हैं परन्तु आकृतियाँ भिन्न-भिन्न हैं। पहले पात्र में दूसरे पात्र की अपेक्षा किसी ऊँचाई तक भरने पर दोगुना जल आता है। क्या दोनों प्रकरणों में पात्रों के आधारों पर आरोपित बल समान हैं? यदि ऐसा है तो भार मापने की मशीन पर रखे एक ही ऊँचाई तक जल से भरे दोनों पात्रों के पाठ्यांक भिन्न-भिन्न क्यों होते हैं?
हल-
माना प्रत्येक पात्र में जल-स्तम्भ की ऊँचाई h तथा आधार का क्षेत्रफल A है तो
आधार पर बल = जल-स्तम्भ का दाब x क्षेत्रफल
= h ρ g × A = A h ρ g
∵A व h दोनों के लिए समान है तथा ρ व g अचर राशियाँ हैं।
∴दोनों पात्रों के आधारों पर समान बल आरोपित होंगे। भार मापने वाली मशीन, पात्र के आधार पर आरोपित बल को मापने के स्थान पर पात्र + जल का भार मापती है।
∵ एक पात्र में दूसरे की अपेक्षा दोगुना जल है; अतः भार मापने की मशीन के पाठ्यांक अलग-अलग होंगे।

प्रश्न 24.
रुधिर-आधान के समय किसी शिरा में, जहाँ दाब 2000 Pa है, एक सुई धेसाई जाती है। रुधिर के पात्र को किस ऊँचाई पर रखा जाना चाहिए ताकि शिरा में रक्त ठीक-ठीक प्रवेश कर सके। (रुधिर का घनत्व = 1.06 x 10kg m-3)
हुल-
शिरा में रक्त दाब P = 2000 Pa, रक्त का घनत्व ρ = 1.06 x 103 kg m-3
माना कि रक्त के पात्र की सुई से ऊँचाई = h
रक्त के शिरा में ठीक-ठीक प्रवेश करने हेतु, h ऊँचाई वाले रक्त स्तम्भ का दाब, (UPBoardSolutions.com) शिरा में रक्त स्तम्भ के दाब के ठीक बराबर होना चाहिए।
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प्रश्न 25.
बरनौली समीकरण व्युत्पन्न करने में हमने नली में भरे तरल पर किए गए कार्य को तरल की गतिज तथा स्थितिज ऊर्जाओं में परिवर्तन के बराबर माना था।
(a) यदि क्षयकारी बल, उपस्थित हैं, तब नली के अनुदिश तरल में गति करने पर दाब में परिवर्तन किस प्रकार होता है?
(b) क्या तरल का वेग बढ़ने पर क्षयकारी बल अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं? गुणात्मक रूप में चर्चा कीजिए।
उत्तर-
(a) क्षयकारी बल की अनुपस्थिति में बहते हुए द्रव के एकांक आयतन की कुल ऊर्जा स्थिर रहती है परन्तु क्षयकारी बल की उपस्थिति में नली में तरल के प्रवाह को बनाए रखने के लिए क्षयकारी बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। इस कारण नली के अनुदिश चलने पर तरल का दाब अधिक तेजी से घटता जाता है। यही कारण है कि शहरों में जल की टंकी से बहुत दूरी पर स्थित मकानों की ऊँचाई टंकी से कम होने पर भी जल उनकी ऊपर वाली मंजिल तक नहीं पहुँच पाता। तरलों के यान्त्रिक गुण, 267
(b) हाँ, तरलं का वेग बढ़ने पर तरल की अपरूपण दर बढ़ जाती है; अतः क्षयकारी बल (श्यान बल) और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।

प्रश्न 26.
(a) यदि किसी धमनी में रुधिर का प्रवाह पटलीय प्रवाह ही बनाए रखना है तो | 2 x 10-3 m त्रिज्या की किसी धमनी में रुधिर-प्रवाह की अधिकतम चाल क्या होनी चाहिए?
(b) तद्नुरूपी प्रवाह-दर क्या है ? (रुधिर की श्यानता 2.084 x 10-3 Pas लीजिए।
हल-
(a) धमनी रुधिर प्रवाह की अधिकतम चाल = क्रान्तिक वेग [latex s=2]{ \nu }_{ c }=\frac { { R }_{ e }\eta }{ \rho d } [/latex]
परन्तु धारा-रेखी प्रवाह के लिए रेनॉल्ड संख्या का अधिकतम मान
Re =2000
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प्रश्न 27.
कोई वायुयान किसी निश्चित ऊँचाई पर किसी नियत चाल से आकाश में उड़ रहा है तथा इसके दोनों पंखों में प्रत्येक का क्षेत्रफल 25 m2 है। यदि वायु की चाल पंख के निचले पृष्ठ पर 180 kmh-1 तथा ऊपरी पृष्ठ पर 234 km h-1 है तो वायुयान की संहति ज्ञात कीजिए। (वायु का घनत्व 1 kgm-3 लीजिए।) ।
हल-
वायुयान के एक पंख पर उत्थापक बल = (P2 – P1) x A
अतः दोनों पंखों पर उत्थापक बल F =2 (P2 – P1) x A
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प्रश्न 28.
मिलिकन तेल की बूंद प्रयोग में, 2.0 x 10-5 m त्रिज्या तथा 1.2 x 103 kg m-3 घनत्व की किसी बूंद की सीमान्त चाल क्या है? प्रयोग के ताप पर वायु की श्यानता 1.8 x 10-5 Pas लीजिए। इस चाल पर बूंद पर श्यान बल कितना है? (वायु के कारण बूंद पर उत्प्लावन बल की उपेक्षा कीजिए।)
हल-
किसी तरल (वायु) में गिरती हुई तेल की बूंद का सीमान्त वेग
[latex s=2]{ \nu }_{ r }=\frac { 2(\rho -\sigma ){ r }^{ 2 }.g }{ 9\eta } [/latex]
यहाँ वायु के कारण उत्प्लावन बल की उपेक्षा की गयी है। अतः σ को नगण्य अर्थात् शून्य मानते हुए
[latex s=2]{ \nu }_{ r }=\frac { 2\rho { r }^{ 2 }.g }{ 9\eta } [/latex]
परन्तु यहाँ बूंद (तेल) का घनत्व ρ = 1.2 x 103 किग्रा-मी-3, बूंद की त्रिज्या
r = 2.0 x 10-5 मीटर, बूंद का श्यानता गुणांक η = 1.8 x 10-5 Pa.s
तथा g = 9.8 मी/से2.
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प्रश्न 29.
सोडा काँच के साथ पारे का स्पर्श कोण 140° है। यदि पारे से भरी द्रोणिका में 1.00 mm त्रिज्या की काँच की किसी नली का एक सिरा डुबोया जाता है तो पारे के बाहरी पृष्ठ के स्तर की तुलना में नली के भीतर पारे का स्तर कितना नीचे चला जाता (पारे का घनत्व = 136 x 103kg m-3)
हल-
केशनली की त्रिज्या r = 1.00 mm = 10-3 m, स्पर्श कोण θ = 140°,
पारे का घनत्व ρ = 13.6 x 103 kg m-3, पृष्ठ-तनाव S = 0.4355 N m-1
माना पारे का स्तर केशनली में h ऊँचाई ऊपर उठता है तो
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प्रश्न 30.
3.0 mm तथा 6.0 mm व्यास की दो संकीर्ण नलियों को एक साथ जोड़कर दोनों सिरों से खुली एक U-आकार की नली बनाई जाती है। यदि इस नली में जल भरा है तो इस नली की दोनों भुजाओं में भरे जल के स्तरों में क्या अन्तर है? प्रयोग के ताप पर जल का पृष्ठ-तनाव 7.3 x 10-2 N m-1 है। स्पर्श कोण शून्य लीजिए तथा जल का घनत्व 10 x 103 kg m-3 लीजिए। (g = 9.8 ms-2)
हल-
त्रिज्याएँ r1 = 1.5 x 10-3 m, r2 = 3.0 x 10-3 m,
जल का पृष्ठ-तनाव S = 7.3 x 10-2 N m-1,
जल का घनत्व ρ = 1.0 x 103 kg m-3, g = 9.8 ms-2
पृष्ठ-तनाव की अनुपस्थिति में दोनों नलिकाओं में जल का तल समान ऊँचाई पर (UPBoardSolutions.com) होता। माना। पृष्ठ-तनाव के कारण जल दोनों ओर क्रमशः h1 व h2 ऊँचाई तक चढ़ता है तो दोनों नलिकाओं में जल के तल का अन्तर
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परिकलित्र/कम्प्यूटर पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 31.
(a) यह ज्ञात है कि वायु का घनत्व ρ, ऊँचाई y (मीटरों में) के साथ इस सम्बन्ध के अनुसार घटता है:
ρ = ρ0e-y/y0
यहाँ समुद्र तल पर वायु का घनत्व ρ0 = 1.25 kg m-3 तथा y0 एक नियतांक है। घनत्व में इस परिवर्तन को वायुमण्डल का नियम कहते हैं। यह संकल्पना करते हुए कि वायुमण्डल का ताप नियत रहता है (समतापी अवस्था) इस नियम को प्राप्त कीजिए। यह भी मानिए कि g का मान नियत रहता है।
(b) 1425 m³ आयतन का हीलियम से भरा कोई बड़ा गुब्बारा 400 kg के किसी पेलोड को उठाने के काम में लाया जाता है। यह मानते हुए कि ऊपर उठते समय गुब्बारे की त्रिज्या नियत रहती है, गुब्बारा कितनी अधिकतम ऊँचाई तक ऊपर उठेगा? . [y0 = 8000 m तथा ρHe = 0.18 kg m-3 लीजिए।]
हल-
(a) समुद्र तल से ऊँचाई पर वायु के एक काल्पनिक बेलन पर विचार कीजिए जिसका अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A है। माना बेलन की ऊँचाई dy है। बेलन के निचले तथा ऊपर वाले सिरों पर वायु दाब क्रमशः P तथा P + dP हैं।
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दाब का मात्रक है ।।
(i) न्यूटन
(ii) न्यूटन-मी
(iii) न्यूटन-मी2
(iv) न्यूटन/मी2
उत्तर-
(iv) न्यूटन/मी2

प्रश्न 2.
एक व्यक्ति द्वारा भूमि पर सर्वाधिक दाब तब लगेगा, जब वह
(i) लेटा हो ।
(ii) बैठा हो
(iii) एक पैर पर खड़ा हो।
(iv) दोनों पैरों पर खड़ा हो
उत्तर-
(iii) एक पैर पर खड़ा हो

प्रश्न 3.
यदि क्षेत्रफल एक-चौथाई हो जाए, तो दाब
(i) दोगुना हो जायेगा ।
(ii) चौथाई रह जायेगा।
(iii) चार गुना हो जायेगा
(iv) वही रहेगा
उत्तर-
(iii) चार गुना हो जायेगा।

प्रश्न 4.
द्रव दाब निर्भर करता है।
(i) केवल द्रव की गहराई पर
(ii) केवल द्रव के घनत्व पर
(iii) केवल गुरुत्वीय त्वरण पर ,
(iv) गहराई, घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण तीनों पर
उत्तर-
(iv) गहराई, घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण तीनों पर

प्रश्न 5.
वायुमण्डलीय दाब का अचानक गिर जाना प्रदर्शित करता है।
(i) तूफान
(ii) वर्षा
(iii) स्वच्छ मौसम
(iv) शीत लहर
उत्तर-
(i) तूफान

प्रश्न 6.
बल F, दाब P तथा क्षेत्रफल A में सम्बन्ध है।
(i) F = [latex s=2]\frac { P }{ A }[/latex]
(ii) A = F x P
(iii) F = A x P
(iv) F² = P x A
उत्तर-
(i) F = A x P

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प्रश्न 7.
एक गोताखोर समुद्र में 30 मी की गहराई पर तैर रहा है उस पर लगने वाला कुल दाब का मान होगा (समुद्री जल का घनत्व) = 1000 किग्रा/मी3, 1 वायुमण्डलीय दाब = 10 x 105 न्यूटन/मी2
(i) 4 वायुमण्डलीय दाब
(ii) 10 वायुमण्डलीय दाब
(iii) 12 वायुमण्डलीय दाब
(iv) 5 वायुमण्डलीय दाब ।
उत्तर-
(i) 4 वायुमण्डलीय दाब

प्रश्न 8.
हाइड्रोलिक ब्रेक का कार्य सिद्धान्त आधारित है।
(i) चार्ल्स नियम पर ।
(ii) पास्कल नियम पर
(iii) बॉयल नियम पर
(iv) इनमें से किसी पर भी नहीं
उत्तर-
(i) पास्कल नियम पर

प्रश्न 9. एक जहाज समुद्र पर तैरता है क्योंकि
(i) जहाज द्वारा विस्थापित पानी का भार जहाज के भार के बराबर है।
(ii) जहाज द्वारा विस्थापित पानी का भार जहाज के भार से अधिक है।
(iii) जहाज द्वारा विस्थापित पानी का भार जहाज के भार से कम है।
(iv) प्रत्येक पिण्ड अवश्य ही तैरता है।
उत्तर-
(ii) जहाज द्वारा विस्थापित पानी का भार जहाज के भार से अधिक है।

प्रश्न 10.
लकड़ी का एक टुकड़ा जल में पूरा डुबोकर रखा गया है। टुकड़े पर जल का उत्क्षेप, टुकड़े के भार की अपेक्षा होगा ।
(i) अधिक
(ii) बराबर
(iii) कम
(iv) शून्य
उत्तर-
(i) अधिक

प्रश्न 11.
जल में किसी पत्थर के टुकड़े का भार उसके वायु में वास्तविक भार की तुलना में होगा
(i) बराबर :
(ii) भारी
(iii) हल्का
(iv) शून्य
उत्तर-
(iii) हल्का

प्रश्न 12. बरनौली प्रमेय पूर्णतया सत्य है।
(i) आदर्श द्रव के धारा-रेखी प्रवाह के लिए।
(ii) आदर्श द्रव के विक्षुब्ध’ प्रवाह के लिए।
(iii) वास्तविक द्रव के धारा-रेखी प्रवाह के लिए
(iv) किसी भी द्रव के किसी भी प्रकार के प्रवाह के लिए
उत्तर-
(i) आदर्श द्रव के धारा-रेखी प्रवाह के लिए

प्रश्न 13. बरनौली प्रमेय आधारित है।
(i) संवेग संरक्षण पर
(ii) ऊर्जा संरक्षण पर
(iii) द्रव्यमान संरक्षण पर
(iv) वेग संरक्षण पर,
उत्तर-
(ii) ऊर्जा संरक्षण पर

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प्रश्न 14. एक वायुयान कार्य करता है।
(i) आर्किमिडीज के सिद्धान्त पर
(ii) पास्कल के नियम पर
(iii) बरनौली सिद्धान्त पर
(iv) स्टोक्स के नियम पर
उत्तर-
(iii) बरनौली सिद्धान्त पर

प्रश्न 15. जल से भरे बर्तन में मुक्त तल से 3.2 मीटर गहराई पर एक छिद्र है। यदि गुरुत्वीय त्वरण 10 मी/से2 हो तो जल का बहिसाव वेग होगा।
(i) 5.7 मी/से
(ii) 5.7 सेमी/से
(iii) 8.0 मी/से
(iv) 32 मी/से
उत्तर-
(iii) 8.0 मी/से ।

प्रश्न 16..किसी असमान त्रिज्या वाली नली में जल बह रहा है। नली में प्रविष्टि तथा निकासी सिरों की त्रिज्याओं का अनुपात 3:2 है। नली में प्रविष्ट करने वाले तथा निकलने वाले जल के वेगों का अनुपात होगा
(i) 8:27
(ii) 4:9
(iii) 1:1
(iv) 9:4
उत्तर-
(ii) 4:9

प्रश्न 17. ताप के बढ़ने पर श्यानता गुणांक ।
(i) गैसों तथा द्रवों दोनों का बढ़ता है।
(ii) गैसों तथा द्रवों दोनों का घटता है।
(iii) गैसों का बढ़ता है तथा द्रवों का घटता है।
(iv) गैसों का घटता है तथा द्रवों का बढ़ता है।
उत्तर-
(ii) गैसों का बढ़ता है तथा द्रवों का घटता है।

प्रश्न 18. दो छोटी गोलियाँ जिनकी त्रिज्याओं का अनुपात 1:2 है, किसी श्याने द्रव से होकर गिर रही हैं। उनकी सीमान्त चालों का अनुपात होगा।
(i) 1:2
(ii) 1:4
(iii) 2:1
(iv) 4:1
उत्तर-
(ii) 1:4 .

प्रश्न 19.
श्यान द्रव में सीमान्त वेग से गिरने वाले पिण्ड का त्वरण होता है
(i) शून्य
(ii) g
(iii) g से अधिक
(iv) g से कम
उत्तर-
(i) शून्य ।

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प्रश्न 20. वर्षा की एक छोटी बूंद सीमान्त चाल से नीचे गिर रही है। इस बूंद से दोगुनी त्रिज्या वाली दूसरी बूंद का सीमान्तवेग होगा
(i) ν
(ii) 2ν
(iii) 8ν
(iv) 4ν
उत्तर-
(iv) 4ν

प्रश्न 21.
वर्षा की बूंद की वायु में सीमान्त चाल थे बराबर है।
(i) ν = krη
(ii) ν = kr²η
(iii) ν = krη²
(iv) ν = kr²/η
उत्तर-
(iv) ν = kr²/η

प्रश्न 22.
द्रव का पृष्ठ तनाव
(i) पृष्ठ क्षेत्रफल के साथ बढ़ता है।
(ii) पृष्ठ क्षेत्रफल के साथ घटता है।
(iii) ताप के साथ बढ़ता है।
(iv) ताप के साथ घटता है।
उत्तर-
(iv) ताप के साथ घटता है।

प्रश्न 23. पृष्ठ तनाव का विमीय सूत्र है।
(i) [MLT²]
(ii) [ML²T²]
(iii)[MT-2]
(iv) [MLT-1]
उत्तर-
(iii) [MT-2]

प्रश्न 24.
किसी केशनली में जल 4 सेमी की ऊँचाई तक चढ़ता है। यदि नली की अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल एक-चौथाई कर दिया जाये तो जल किस ऊँचाई तक चढेगा?
(i) 2 सेमी :
(ii) 4 सेमी
(iii) 8 सेमी
(iv) 12 सेमी
उत्तर-
(iii) 8 सेमी

प्रश्न 25.
साबुन के घोल के बुलबुले की त्रिज्या R तथा पृष्ठ तनाव T है, बुलबुले के भीतर आधिक्य दाब का सूत्र है।
(i) T/R
(ii) 2T/R
(iii)4T/R
(iv) T/2R
उत्तर-
(iii) 4T/R

प्रश्न 26. वर्षा की बूंद की वायु में सीमान्त चाल है।
(i) ν =krη
(ii) ν = kr²η
(iii) ν = krη²
(iv) ν = kr²η
जहाँ r, जल की बूंद की त्रिज्या, η वायु का श्यानता. गुणांक तथा k नियतांक है।.
उत्तर-
(iv) ν = kr²/η

प्रश्न 27.
2 x 10-6 मी2 पृष्ठ क्षेत्रफल की एक गोलाकार बूंद है, जिसके द्वेव का पृष्ठ-तनाव 7.5 x 10-2 न्यूटन/मी है। यह समान त्रिज्या की 8 गोलाकार बूंदों में विभक्त हो जाती है। इस प्रक्रिया में किया गया कार्य होगा ।
(i) 0.75 x 10-7 जूल
(ii) 1.5 x 10-7 जूल
(iii) 4.5 x 10-7 जूल।
(iv)3.0 x 10-7 जूल
उत्तर-
(ii) 1.5 x 10-7 जूल ।

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प्रश्न 28. जल की एक बड़ी बूंद को 27 छोटी बूंदों में स्प्रे किया गया है। छोटी बूंद के भीतर दाब आधिक्य बड़ी बूंद की अपेक्षा कितना होगा?
(i) दोगुना ।
(ii) तीन गुना
(iii) आधा
(iv) एक-तिहाई
उत्तर-
(ii) तीन गुना ।

प्रश्न 29. एक ऊर्ध्वाधर केशनली में जल 10 सेमी लम्बाई तक चढ़ता है। यदि नली को 45° झुका दिया जाये तो नली के चढ़े हुए जल की लम्बाई होगी।
(i) 10 सेमी.
(ii) 10√2 सेमी
(iii) [latex s=2]\frac { 10 }{ \sqrt { 2 } } [/latex] सेमी
(iv) 5 सेमी
उत्तर-
(ii) 10√2 सेमी :

प्रश्न 30. साबुन के दो बुलंबुलों के अन्दर आधिक्य दाब क्रमशः 1.01 वायुमण्डल और 1.02 वायुमण्डल हैं। इन बुलबुलों के आयतनों का अनुपात है।
(i) 102 : 101
(ii) (102)2 : (101)3
(iii) 8:1
(iv) 2:1
उत्तर-
(ii) (102)2 : (101)3

प्रश्न 31.
साबुन के दो बुलबुलों की त्रिज्याएँ 2:1 के अनुपात में हैं। उनके भीतर आधिक्य दाब को अनुपात है।
(i) 1: 2
(ii) 2:1
(ii) 4:1
(iv) 1:4
उत्तर-
(i) 1: 2

प्रश्न 32.
लोहे की एक सूई पानी की सतह पर तैरती है। इस परिघटना का कास्ण है।
(i) द्रव का उत्प्लावन
(ii) श्यानता
(iii) पृष्ठ तनाव
(iv) गुरुत्वीय त्वरण
उत्तर-
(ii) पृष्ठ तनाव

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दाब से क्या तात्पर्य है। इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर-
द्रव द्वारा सम्पर्क सतह के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित (UPBoardSolutions.com) अभिलम्बवत् बल को दाब कहते हैं। दाब का मात्रक न्यूटन/मी अथवा पास्कल होता है।

प्रश्न 2.
बल तथा दाब में सम्बन्ध का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
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प्रश्न 3.
द्रव में किसी गहराई hपर द्रव-दाब क्या होगा?
उत्तर-
P= hdg

प्रश्न 4.
यदि बल को चार गुना तथा तल के क्षेत्रफल को आधा कर दें तो दोब, प्रारम्भिक दाब का कितने गुना हो जायेगा?
उत्तर-
आठ गुना।

प्रश्न 5.
द्रव का दाब किस पर निर्भर करता है?
उत्तर-
द्रव स्तम्भ की ऊँचाई पर।

प्रश्न 6.
तरल दाब से क्या तात्पर्य है। इसके लिए सूत्र बताइए।
उत्तर-
किसी पात्र या बर्तन में उपस्थित तरल द्वारा पात्र या बर्तन की दीवारों के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित बल को तरल दाब कहते हैं। द्रव के स्वतन्त्र तल से h गहराई पर द्रव के दाब, P = hρg यहाँ, ρ = द्रव का घनत्व, g = गुरुत्वीय त्वरण

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प्रश्न 7.
कील एक सिरे से नुकीली क्यों बनाते हैं?
उत्तर-
जिससे कम बल लगाकर भी दाब अधिक लगे।

प्रश्न 8.
यदि बल को नियत रखा जाए तथा क्षेत्रफल आधा कर दिया जाए तो दाब पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
हम जानते हैं कि, दाब
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दाब, क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अत: क्षेत्रफल आधा कर देने पर दाब दोगुना हो जाएगा।

प्रश्न 9.
हमें वायुमण्डलीय दाब का अनुभव क्यों नहीं होता?
उत्तर-
रक्त दाब के कारण हमें वायुमण्डलीय दाब का अनुभव नहीं होगा।

प्रश्न 10.
वायुमण्डल में बहुत अधिक ऊपर जाने पर रक्तनलिकाओं के फटने का डर क्यों रहता है?
उत्तर-
वायुदाब कम होने के कारण तथा रक्तदाब से सन्तुलन बिगड़ने के कारण।”

प्रश्न 11.
स्पिन करती टेनिस की गेंद एक सरल रेखा पर नचलकर वक्राकार पथ पर क्यों चलती है?
उत्तर-
गेंद के ऊपर वायु-दाब अधिक तथा गेंद के नीचे कम होता है। इस दाबान्तर के कारण गेंद सरल रेखा में न चलकर, नीचे की ओर झुकते हुए वक्राकार पथ पर चलती है।

प्रश्न 12.
पास्कल नियम के दो अनुप्रयोग बताइए।
उत्तर-
द्रवचालित ब्रेक, द्रवचालित लिफ्ट।

प्रश्न 13.
आर्किमिडीज के सिद्धान्त के आधार पर द्रव के आपेक्षिक घनत्व का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
द्रव का आपेक्षिक घनत्व
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प्रश्न 14.
किसी ठोस को किसी द्रव में डुबोने पर ठोस के भार में कितनी कमी होती है?
उत्तर-
उसके द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर

प्रश्न 15.
एक कॉर्क जल पर तैर रही है। इसका आभासी भार क्या है?
उत्तर-
शून्य, क्योंकि कॉर्क का भार कॉर्क पर जल के (UPBoardSolutions.com) प्रणोद (Upthrust) द्वारा सन्तुलित हो जाता है।

प्रश्न 16.
गेज दाब को समझाइए। उत्तर-द्रव के अन्दर किसी बिन्दु पर द्रव स्थैतिक दाब (p’) तथा वायुमण्डलीय दाब (PA) का अन्तर उस बिन्दु पर
गेज दाब कहलाता है।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 34

प्रश्न 17.
धारा रेखीय प्रवाह से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
यदि द्रव के प्रवाह में किसी एक बिन्दु से होकर गुजरने वाले द्रव के सभी कण एक ही वेग से, एक ही मार्ग से होकर गुजरें, तब यह प्रवाह धारा रेखीय प्रवाह कहलाता है।

प्रश्न 18.
आदर्श द्रव के धारा रेखीय प्रवाह के अविरतता के सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
इस सिद्धान्त के अनुसार, यदि कोई द्रव किसी असमान अनुप्रस्थ-परिच्छेद की नलिका में धारा रेखीय प्रवाह में बह रहा हो, तब प्रत्येक बिन्दु पर नली के अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल (A) तथा द्रव के वेग (ν) का गुणनफल नियत रहता है, अर्थात् A x ν = नियतांक

प्रश्न 19.
आदर्श द्रव के धारा रेखीय प्रवाह के लिए बरनौली का प्रमेय समीकरण प्रयुक्त चिह्नों का अर्थ । बताते हुए लिखिए।
उत्तर-
बरनौली का समीकरण p = [latex s=2]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]ρν² + ρgh नियतांक
जहाँ p = दाब, ρ = द्रव का घनत्व, ν = द्रव प्रवाह का वेग, g = गुरुत्वीय त्वरण, h = पृथ्वी तल से स्थान की ऊँचाई ।
इसके अतिरिक्त p,[latex s=2]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]ρν² (UPBoardSolutions.com) तथा ρgh क्रमशः दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा को व्यक्त करते हैं।

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प्रश्न 20.
बरनौली प्रमेय में दाब शीर्ष, वेग शीर्ष तथा गुरुत्वीय शीर्ष के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर-
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प्रश्न 21.
एक टंकी की ऊँचाई hहै। टंकी की दीवार में नीचे से hऊँचाई पर एक सूक्ष्म छिद्र है। जब टंकी को पानी से पूरा भर लिया जाता है, तो छिद्र से पानी कितने वेग से निकलेगा तथा कितनी क्षैतिज दूरी पर गिरेगा?
हल-
चित्र 10.6 में A तथा B बिन्दुओं पर बरनौली प्रमेय लगाने पर,
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 36

प्रश्न 22.
क्रिकेट तथा टेनिस के खेल में चक्रण (spin) करती हुई गेंद अपने मार्ग से घूम जाती है, इसकी व्याख्या किस सिद्धान्त या प्रमेय के आधार पर की जा सकती है?
उत्तर-
बरनौली प्रमेय के आधार पर।

प्रश्न 23.
ऊँचाई के साथ जाने पर वायु के घनत्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
वायु का घनत्व कम होता जाता है।

प्रश्न 24.
लकड़ी के एक पिण्ड का भार w तथा आयतन v है। जल पर तैराने पर पिण्ड का भार कितना होगा?
उत्तर-
शून्य।

प्रश्न 25.
जब गुब्बारा उड़ता हुआ किसी निश्चित ऊँचाई पर पहुँच कर रुक जाता है तो उस स्थान की वायु तथा गुब्बारे में भरी गैस के घनत्व में क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर-
दोनों के घनत्व बराबर होंगे।

प्रश्न 26. सन्तुलित भौतिक तुला के एक पलड़े के नीचे तेजी से हवा चलाने पर तुला के सन्तुलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उतर-
पलड़े के नीचे वायु-वेग बढ़ने से दाब कम हो (UPBoardSolutions.com) जायेगा। अत: पलड़ा कुछ नीचे झुक जायेगा।

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प्रश्न 27.
गहरा जल सदैव शान्त होता है, कारण बताइए।
उत्तर-
गहरे जल का द्रवस्थैतिक दाब अधिक होता है इसलिए वहाँ जल का वेग कम होगा अर्थात् जल शान्त होगा।

प्रश्न 28.
नदी के किनारे जल का वेग कम तथा बीच में अधिक होता है?
उत्तर-
नदी के किनारे जल का वेग कम तथा बीच में अधिक इसलिए होता है क्योंकि स्थिर पृष्ठ से दूर जाने पर जल की परतों का वेग बढ़ता है।

प्रश्न 29.
श्यानता गुणांक को परिभाषित कीजिए। इसकी विमा और मात्रक भी लिखिए।
उत्तर-
किसी द्रव का श्यानता गुणांक उस द्रव की एकांक सम्पर्क क्षेत्रफल वाली दो परतों के बीच कार्यरत् । श्यान बल के परिमाण के बराबर होता है, जबकि परतों के मध्य वेग-प्रवणता एकांक होती है। इसका SI मात्रक किग्रा/मी-से तथा विमा [ML-1T-1] होती है।

प्रश्न 30.
जल, वायु, रक्त तथा शहद में कौन सबसे अधिक श्यान होता है तथा कौन सबसे कम?
उत्तर-
शहद, वायु।

प्रश्न 31.
श्यान बल से सम्बन्धित स्टोक का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
श्यान बल F = 6πηrν.

प्रश्न 32.
श्यान व्रव में गिरती हुई गोली की सीमान्त चाल के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर-
सीमान्त चाल [latex s=2](\nu )=\frac { 2 }{ 9 } \frac { { r }^{ 2 }(\rho -\sigma ) }{ \eta } g[/latex]
जहाँ, r = गोली की त्रिज्या, g = गुरुत्वीय त्वरण, (UPBoardSolutions.com) σ = श्यान द्रव का घनत्व, ρ = गोली के पदार्थ का घनत्व,η = द्रव का श्यानता गुणांक

प्रश्न 33.
किसी व्रव का क्रान्तिक वेग किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर-
द्रव की श्यानता पर, द्रव के घनत्व पर तथा नली की त्रिज्या पर
[latex s=2]\left( { \nu }_{ c }=\frac { k\eta }{ \rho a } \right) [/latex]

प्रश्न 34.
क्या वर्षा की गिरती बूंदों की चाल लगातार बढ़ती जाती है? क्या बड़ी व छोटी बूंदें पृथ्वी पर एक ही चाल से पहुँचती हैं?
उत्तर-
नहीं, वे एक सीमान्त चाल से नीचे गिरती हैं। नहीं, बड़ी बूंद की सीमान्त चाल अधिक होती है।

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प्रश्न 35.
किसी श्यान द्रव में गिरती हुई गोली का त्वरण शून्य कब होता है?
उत्तर-
जब गोली पर लगने वाला नेट बल शून्य हो।

प्रश्न 36.
आकाश में बादल तैरते क्यों दिखाई देते हैं? ।
उत्तर-
जब जल की वाष्प धूल के कणों पर संघनित्र होती है, तो शुरू में बूंदें बहुत छोटी होती हैं तथा वायु की श्यानता के कारण यह सीमान्त चाल प्राप्त कर लेती हैं तथा नीचे की ओर बहुत धीमी चाल से चलती हैं, क्योंकि यह चाल बूंदों की त्रिज्या जो कि बहुत छोटी है, के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है; इन्हें ही बादल कहते हैं तथा ये आकाश में तैरते प्रतीत होते हैं।

प्रश्न 37.
किसी द्रव के पृष्ठ-तनाव की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
किसी द्रव का पृष्ठ-तनाव वह बल है जो कि द्रव के पृष्ठ पर खींची गई किसी काल्पनिक रेखा की एकांक लम्बाई पर पृष्ठ के तेल में तथा रेखा के लम्बवत् कार्य करता है। इसका S.I. मात्रक न्यूटन/मीटर है।

प्रश्न 38.
किसी द्रव में बने हुए वायु के बुलबुले के भीतर दाब-आधिक्य का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
p = [latex s=2]\frac { 2T }{ R }[/latex]

प्रश्न 39.
पृष्ठ-तनाव की परिभाषा पृष्ठीय ऊर्जा के पदों में दीजिए।
उत्तर-
T पृष्ठ-तनाव वाले द्रव के पृष्ठीय क्षेत्रफल में ΔA की वृद्धि करने में किया गया कार्य अर्थात् | पृष्ठीय ऊर्जा w = T x ΔA अथवा  [latex s=2]T=\frac { W }{ \Delta A } [/latex] यदि ΔA = 1, तो W = T, अत: किसी द्रव का पृष्ठ-तनाव उस कार्य के बराबर होता है जो (UPBoardSolutions.com) नियत ताप पर उस द्रव के पृष्ठ के क्षेत्रफल में एकांक वृद्धि कर दे। अत: पृष्ठ-तनाव का मात्रक जूल/मी² भी लिखा जा सकता है।

प्रश्न 40.
गर्म सूप ठण्डे सूप की अपेक्षा अधिक स्वादिष्ट लगता है। क्यों?
उत्तर-
ठण्डे सूप की अपेक्षा गर्म सूप का पृष्ठ-तनाव कम होता है। अतः गर्म सूप ठण्डे सूप की अपेक्षा जीभ का अधिक क्षेत्रफल घेरता है जिससे कि वह ठण्डे सूप की तुलना में अधिक स्वादिष्ट लगता है।।

प्रश्न 41.
पृष्ठ ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा, यदि जल की एक बड़ी बूंद को अनेक छोटी-छोटी बूंदों में विभक्त किया जाये?
उत्तर-
पृष्ठ ऊर्जा बढ़ जाएगी।

प्रश्न 42.
किसी केशिका नली में जल के उन्नयन का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
h =2T cos θ/rρg.

प्रश्न 43.
दो साबुन के बुलबुलों की त्रिज्याओं का अनुपात 1:4है। उनके आधिक्य दाबों का अनुपात क्या होगा?
उत्तर-
p ∝ 1/R ⇒ p: p2 = R2: R1 = 4 : 1

प्रश्न 44.
द्रव की छोटी बूंदें लगभग गोल आकार क्यों धारण कर लेती हैं? समझाइए।
उत्तर-
पृष्ठ-क्नाव के कारण द्रव का स्वतन्त्र तल सिकुड़कर न्यूनतम क्षेत्रफल ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखता है। चूंकि किसी दिये हुए आयतन के लिए गोले के पृष्ठ का क्षेत्रफल (surface area) न्यूनतम (minimum) होता है। इसलिए द्रव की छोटी बूंदें लगभग गोल आकार धारण कर लेती हैं।

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प्रश्न 44.
साबुन के घोल का पृष्ठ-तनाव 30 x 10-2 न्यूटन/मी है। इसका क्या अर्थ है?
उत्तर-
इसका अर्थ है कि साबुन के घोल के पृष्ठ पर खींची गयी काल्पनिक रेखा की एक मीटर लम्बाई पर इसके लम्बवत् 3.0 x 10-2 न्यूटन स्पर्शरेखीय बल कार्य करेगा।

प्रश्न 46.
स्पर्श कोण क्या है?
उत्तर-
“द्रव व ठोस के स्पर्श बिन्दु से द्रव के पृष्ठ पर खींची गयी स्पर्श रेखा तथा ठोस के (UPBoardSolutions.com) पृष्ठ पर द्रव के अन्दर की ओर खींची गयी स्पर्श रेखा के बीच बने कोण को उस ठोस व द्रव के लिए स्पर्श कोण कहते हैं।” चित्र 10.7 में स्पर्श कोण को θ से प्रदर्शित किया गया है।
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प्रश्न 47.
खेत की जुताई करने से उसकी नमी रुकती है। भौतिक सिद्धान्त की सहायता से व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
फसल में पानी देने के बाद गुड़ाई कर दी जाती है और वर्षा के बाद किसान खेत की जुताई कर देता है। पानी देने के बाद मिट्टी में केशिकाएँ बन जाती हैं जिनमें पानी का वाष्पीकरण होता रहता है परन्तु गुड़ाई या जुताई करने के बाद ये केशिका नलियाँ टूट जाती हैं जिससे पानी का वाष्पीकरण नहीं हो पाता है। अतः मिट्टी में नमी बनी रहती है।

प्रश्न 48.
लोहे का घनत्व जल की अपेक्षा अधिक होता है, फिर भी लोहे की । पतली सूई जल पर तैर सकती है। क्यों?
उत्तर-
एक स्वच्छ पतली सूई को स्याही सोखते पर रखकर धीरे से पानी की सतह पर रखते हैं। सोखता कुछ देर तक पानी को सोखकर गीला होता रहता है। और अन्त में डूब जाता है, परन्तु सुई पानी पर तैरती रहती है। इसका कारण जल का पृष्ठ-तनाव ही है। चित्र 10.8 में जल के (UPBoardSolutions.com) पृष्ठ पर तैरती हुई सूई का ॐ अनुप्रस्थ-काट दिखाया गया है। जल के पृष्ठ पर तैरती हुई सूई पर दो बल लगते (i) पृष्ठ-तनाव बल T, (ii) सूई का भार W। पृष्ठ-तनाव का परिणामी बल । ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर लगता है जो सूई के भार W को सन्तुलित करता है। फलस्वरूप सूई तैरती है।
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 38

प्रश्न 49.
समुद्र की लहरों को शान्त करने के लिए लहरों पर तेल डाल देते हैं; क्यों?
उत्तर-
तेल डाल देने पर, तेज हवा तेल को जल के पृष्ठ पर हवा की दिशा में दूर तक फैला देती है। बिना तेल वाले जल का पृष्ठ तनाव तेल वाले जल से अधिक होता है। अत: बिना तेल वाला जल तेल वाले जल । को वायु की विपरीत दिशा में खींचता है जिससे की लहरें शान्त हो जाती हैं।

प्रश्न 50.
पृष्ठ-तनाव पर किन बातों का प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
पृष्ठ-तनाव पर निम्नलिखित बातों को प्रभाव पड़ता है
1. ताप का प्रभाव Effect of temperature ताप बढ़ने से संसंजक बल का मान घट जाता है। | जिसके फलस्वरूप पृष्ठ-तनाव घट जाता है। क्रान्तिक ताप पर पृष्ठ-तनाव शून्य होता है।
2. संदूषण का प्रभाव Effect of contamination यदि द्रव के तल पर धूल, कोई चिकनाई; जैसे- ग्रीस या तेल हो, तो इससे द्रव का पृष्ठ-तनाव घट जाता है।
3. विलेय का प्रभाव Effect of solute प्रयोगों से ज्ञात होता है कि जल का पृष्ठ तनाव उसमें घोले गये पदार्थ व उसकी घुलनशीलता पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, जल में नमक घोलने पर जल का पृष्ठ-तनाव बढ़ जाता है। इसके विपरीत जल में साबुन घोलने पर जल को पृष्ठ-तनाव घट जाता

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. द्रव दाब के नियम लिखिए।
उत्तर-
द्रव दाब के नियम-ये नियम निम्नलिखित हैं
1. किसी द्रव के भीतर एक ही क्षैतिज तल में स्थित सभी बिन्दुओं पर दाब समान होता है।
2. द्रव से भरे बीकर में डूबे पिण्ड अथवा उसकी दीवारों पर द्रव द्वारा आरोपित दाब पिण्ड के पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु के लम्बवत् कार्य करता है।
3. स्थिर द्रव के भीतर किसी बिन्दु पर दाब द्रव के मुक्त पृष्ठ से उस बिन्दु की गहराई के अनुक्रमानुपाती है।
4. किसी द्रव का दाब उसके घनत्व के अनुक्रमानुपीती होता है।
5. द्रव दाब बीकर के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता। अतः दाब परिकलन के लिए द्रव के स्तम्भ की । ऊँचाई व घनत्व महत्त्वपूर्ण हैं। पात्र की आकृति व आधार का अनुप्रस्थ-काट द्रव दाब की गणना में महत्त्व नहीं रखता है।

प्रश्न 2.
एक द्रव स्तम्भ द्वारा उत्पन्न दाब का व्यंजक प्राप्त कीजिए। या तरल स्तम्भ के कारण दाबे का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 39
तरल स्तम्भ के कारण दाब Pressure due to fluid column- द्रव के भीतर स्थित किसी बिन्दु पर दाब माना कि किसी द्रव में उसके स्वतंत्र तल से h गहराई पर कोई बिन्दु B स्थित है, जहाँ पर हमें द्रव के दाब का मान ज्ञात करना है। बिन्दु B को केन्द्र मानकर कोई वृत्त खींचो। माना कि इस वृत्त का क्षेत्रफल A है। इस क्षेत्रफल पर द्रव द्वारा आरोपित बल, इस पर खड़े h ऊँचाई के बेलनाकार द्रव स्तम्भ के भार के बराबर होगा।
अब द्रव स्तम्भ का आयतन V= क्षेत्रफल x ऊँचाई = A x h
यदि द्रव का घनत्व ρ हो, तो द्रव स्तम्भ का द्रव्यमान |
m = V x ρ = A x H x ρ
तथा द्रव का स्तम्भ का भार W = mg = Ahρg
जहाँ g गुरुत्वीय त्वरण है।
यह लम्बवत् भार (बल) w बिन्दु B के चारों ओर A क्षेत्रफल पर आरोपित रहता है। अतः बिन्दु B पर द्रव का दाब
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अत: द्रव के अन्दर किसी बिन्दु पर द्रव के कारण दाब द्रव की सतह से उस बिन्दु तक की गहराई, द्रव के घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।
अतः उपर्युक्त सूत्र किसी तरल (द्रव अथवा गैस) के h ऊँचाई के स्तम्भ के कारण दाब का सूत्र है। इस सूत्र में एक ही द्रव के लिए ρ नियत तथा स्थान विशेष के लिए g नियत होता है अत: P ∝ h. अतः दिए गये द्रव के अन्दर किसी बिन्दु पर दांब, द्रव के स्वतन्त्र तल से उस बिन्दु की गहराई के अनुक्रमानुपाती होता है। यह उस बर्तन के आकार अथवा आकृति पर निर्भर नहीं करता जिसमें द्रव रखा जाता है।

प्रश्न 3.
आर्किमीडिज का सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर-
आर्किमीडिज का सिद्धान्त–इसके अनुसार, “जब कोई वस्तु किसी द्रव में (UPBoardSolutions.com) पूरी अथवा आंशिक रूप से डुबोई जाती है तो उसके भार में कमी प्रतीत होती है। भार में यह आभासी कमी उस वस्तु द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होती है।”
माना किसी वस्तु का वायु में भार W1, तथा द्रव में डुबोने पर वस्तु का भार W2 है;
अत: द्रव में डूबने से वस्तु के भार में आभासी कमी = W1 – W2,
यदि वस्तु के द्रव में डूबे भाग का आयतन V हो तो इसके द्वारा हटाये गये द्रव का आयतन भी v ही होगा। यदि द्रव का घनत्व d हो तो ।
वस्तु. द्वारा हटाये गये द्रव का द्रव्यमान = V x d
हटाये गये द्रव का भार = V x d x g
अत: आर्किमिडीज के सिद्धान्त से, वस्तु के भार में कमी
(W1-W2) = V x d x g

प्रश्न 4.
उत्प्लावन (उत्क्षेप) से क्या तात्पर्य है? उत्प्लावन का सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
उत्प्लावन बल अथवा उत्क्षेप तथा उत्प्लावन केन्द्र प्रत्येक द्रव अपने अन्दर पूर्ण अथवा आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है। इस बल को उत्प्लावन बल अथवा. उत्क्षेप कहते हैं। किसी वस्तु पर द्रव का उत्क्षेप वस्तु द्वारा हटाए गए भार के बराबर होता है। यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के गुरुत्व केन्द्र पर कार्य करता है, इसे उत्प्लावन केन्द्र कहते हैं। उत्प्लावन बल के कारण ही द्रव में डूबी वस्तुएँ अपने वास्तविक भार से हल्की लगती हैं। यदि ρ घनत्व वाले किसी द्रव में किसी वस्तु का V आयतन डूबा है तो वस्तु पर द्रव का उत्क्षेप = हटाए गए द्रव का भार
= वस्तु का डूबा हुआ आयतन x द्रव का घनत्व x g = Vρg

प्रश्न 5.
प्लवन या तैरने का नियम लिखिए।
उत्तर-
तैरनेका नियम-जब कोई वस्तु किसी द्रव में आंशिक या पूर्ण रूप से डूबी या तैरती है तो वस्तु का कुल भार डूबे हुए भाग द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होता है।

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प्रश्न 6.
भारी वाहनों के पहियों के टायर काफी चौड़े क्यों बनाये जाते हैं?
उत्तर-
भारी वाहनों के पहियों के टायर चौड़े होने से (क्षेत्रफल A अधिक है) सड़क अथवा जमीन पर लगने वाला दाब (P = F / A) कम हो जाता है, क्योंकि वाहन का भार अधिक क्षेत्रफल पर लगता है, इसीलिए वाहन के पहिये सड़क में धंसने से बच जाते हैं।

प्रश्न 7
ऊँट रेगिस्तान में आसानी से क्यों चल लेता है?
उत्तर-
सूत्र दाब =बल/क्षेत्रफल से, ऊँट के पैर चौड़े होने के कारण इनका क्षेत्रफल अधिक होता है, अतः पृथ्वी पर दाब कम लगता है। इस कारण पैरों के नीचे की पृथ्वी धंसती नहीं है, अतः ऊँट रेगिस्तान में आसानी से चल लेता है।

प्रश्न 8.
रेलगाड़ी की पटरियों के नीचे लकड़ी या लोहे के चौड़े स्लीपर क्यों लगाये जाते हैं?
उत्तर-
यदि पटरियों के नीचे चौड़े स्लीपर न लगाये जायें तो पटरियाँ अधिक दबाव के कारण जमीन में धंस सकती हैं। पटरियों के नीचे स्लीपर लगाने से क्षेत्रफल अधिक हो जाता है जिसके कारण दाब कम पड़ता है और पटरी जमीन में नहीं धंसती।

प्रश्न 9.
लोहे से बना जहाज समुद्र में तैरता है, परन्तु लोहे का ठोस टुकड़ा (कील) डूब जाता है, क्यों? सम्बन्धित नियम देते हुए कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
लोहे की कील की बनावट इस प्रकार की होती है कि उसका भार, उसके द्वारा हटाये गये जल के भार से बहुत अधिक होता है। इसी कारण वह जल में डूब जाती है। इसके विपरीत, लोहे का जहाज तैरता रहता है। इसका कारण यह है कि जहाज का ढाँचा अवतल होता है तथा अन्दर से खोखला बनाया जाता है। जैसे ही जहाज समुद्र में प्रवेश करता है तो उसके द्वारा (उसकी बनावट के कारण) इतना जल हटा दिया जाता है कि उसके द्वारा हटाये गये जल का भार, जहाज (जहाज व उसके समस्त समान सहित) के कुल भार के बराबर हो जाता है। इसी कारण पास्कल के सिद्धान्त के अनुसार, जहाज तैरता रहता है।

प्रश्न 10.
हिमखण्ड जल पर क्यों तैरता है?
उत्तर-
हिमखण्ड का घनत्व, जल के घनत्व से कम होता है, जिससे हिमखण्ड के आयतन के बराबर जल का उत्क्षेप-बल हिमखण्ड के भार से अधिक हो जाता है और हिमखण्ड जल पर तैरता रहता है। तैरते समय हिमखण्ड का केवल उतना आयतन ही जल में डूबता है, जितने आयतन के द्वारा हटाये गये जल का भार हिमखण्ड के भार के बराबर होता है।

प्रश्न 11.
0.02 मी2 तथा 0.04 मी2 परिच्छेद क्षेत्रफल के दो क्षैतिज पाइप एक-दूसरे से जुड़े हैं, जिसमें जल बह रहा है। पहले पाइप में जल की चाल 16 मी/से तथा दाब 2.0 x 104 न्यूटन/मी2 है। दूसरें पाइप में जल की चाल तथा दाब की गणना कीजिए।
हल-
दिया है, पहले पाइप के परिच्छेद का क्षेत्रफल (A1) = 0.02 मी2
दूसरे पाइप के परिच्छेद का क्षेत्रफल (A1) = 0.04 मी2
पहले पाइप में जल की चाल = (ν1) = 16 मी/से
पहले पाइप में जल का (UPBoardSolutions.com) दाब (ρ1) = 2 x 104 न्यूटन/मी2
अविरतता के सिद्धान्त से, A1ν1 = A2ν2
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प्रश्न 12.
असमान परिच्छेद की एक बेलनाकार पाइप में जल प्रवाहित हो रहा है। एक स्थान पर नली की त्रिज्या 0.3 मी है तथा जल का वेग 1.0 मी/से है। दूसरे स्थान पर जहाँ नली की त्रिज्या 0.15 मी है, वहाँ पर जल के वेग की गणना कीजिए।
हल-
यहाँ, नली के पहले स्थान की त्रिज्या (r1) = 0.3 मी,
नली के दूसरे स्थान की त्रिज्या (r2) = 0.15 मी
नली के पहले स्थान पर जल का वेग (ν1) = 1.0 मी/से
नली के दूसरे स्थान पर जल का वेग (ν2)) = ?
अविरतता के सिद्धान्त से,
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अतः जल का वेग = 4 मी/से है।

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प्रश्न 13.
हवाई जहाज में पंखों के सामने के किनारे गोलाई में तथा पीछे के किनारे चपटे क्यों होते हैं?
उत्तर-
हवाई जहाज के पंख की आकृति इस प्रकार रखी जाती है कि उसकी ऊपरी सतह की वक्रता निचली सतह की वक्रता से अधिक होती है। तथा, सामने का किनारा गोल तथा पीछे का किनारा चपटा रखा जाता है (चित्र 10.10)। जब हवाई जहाज दौड़ लगाता है तब पंख के ऊपुर तथा नीचे से होकर वायु की धारा बहती है। (चित्र’10.10) से स्पष्ट है कि पंख के ऊपर का पृष्ठ कुछउभरा तथा ।
नीचे का पृष्ठ सीधा है। अत: वायु को पंख के ऊपर, नीचे की अपेक्षा अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, फलतः वायु की धारा का वेग ऊपरी पृष्ठ पर अधिक तथा निचले पृष्ठ पर कम होता है। इस कारण ऊपरी पृष्ठ पर कम दाब तथा निचले पृष्ठ पर अधिक दाब कार्य करता है तथा वायुयान के पंख पर इन दोनों दाबों के अन्तर (P2 – P1) के बराबर एक प्रणोद (thrust) L कार्य करता है तथा पंख ऊपर को उठने लगता है।
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प्रश्न 14.
श्यानता-गुणांक की परिभाषा दीजिए। इसका विमीय सूत्र तथा M.K.S. मात्रक लिखिए। या श्यानता-गुणांक की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
श्यानता-गुणांक-धारा-रेखीय प्रवाह के लिए द्रव की किन्हीं दो पर्तों के मध्य लगने वाला (UPBoardSolutions.com) श्यान-बल निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है–
1. यह पर्तों के सम्पर्क क्षेत्रफल (A) के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात् ।
F∝A
2. यह पर्यों के बीच की वेग-प्रवणत Δνx/Δy के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात्
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जहाँ η (ईटा) एक नियतांक है, जिसे द्रव का श्यानता-गुणांक (coefficient of viscosity) कहते हैं। यदि A = 1 तथा 20/Δνx/Δy = 1 हो, तो η = ± F, अर्थात् किसी द्रव का श्यानता-गुणांक उस श्यान बल के बराबर है जो एकांक क्षेत्रफल वाली पर्तों के बीच कार्य करता है, जबकि पर्तों के बीच एकांक वेग-प्रवणता हो।
उपर्युक्त सूत्र में ± चिह्न का अर्थ है कि बल F दो पर्यों के बीच अन्योन्य बल है। द्रव की किसी पर्त पर उससे ऊपर वाली पर्त आगे की ओर बल लगाती है, जबकि उससे नीचे वाली पर्त उस पर पीछे की ओर बल लगाती है।
श्यानता-गुणांक की विमा एवं मात्रक
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 45
η का मात्रक (M.K.S. में) किग्रा/मीटर-सेकण्ड है। इसका एक अन्य मात्रक प्वॉइज है।
1 किग्रा/(मीटर-सेकण्ड) = 10 प्वॉइज

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प्रश्न 15.
200 वर्ग सेमी क्षेत्रफल की एक समतल प्लेट तथा एक और बड़ी प्लेट के बीच ग्लिसरीन की 1 मिमी मोटी तह है। यदि ग्लिसरीन का श्यानता-गुणांक 1.0 किग्रा/मीटर-सेकण्ड हो, तो प्लेट को 9 सेमी/सेकण्ड के वेग से चलाने के लिए कितना बल चाहिए?
हल-
प्रश्नानुसार, η = 1.0 किग्रा/(मीटर-सेकण्ड),
A = 200 वर्ग सेमी = 2 x 10-2 वर्ग मीटर,
Δνx = 9 x 10-2 मीटर/सेकण्ड
तथा Δy = 1 मिमी = 10-3 मीटर
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 46

प्रश्न 16.
स्टोक्स के सूत्र का प्रयोग कर किसी श्यान द्रव में गिरते हुए एक गोलीय पिण्ड के सीमान्त वेग के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
स्टोक्स का नियम–स्टोक्स ने सिद्ध किया कि यदि r त्रिज्या की गोली किसी पूर्णत: समांग वे अनन्त विस्तार वाले तरल माध्यम में वेग ν से गति करे तो गोली पर कार्य करने वाला श्यान बल । F = 6πηrν होता है जो सदैव गोलीं की गति की विपरीत दिशा में लगता है, (UPBoardSolutions.com) जहाँ η उस द्रव का श्यानता-गुणांक है।।
सीमान्त वेग की गणना-माना कोई गोली जिसकी त्रिज्या r तथा घनत्व ρ है, σ घनत्व वाले द्रव में गिर रही है, जबकि द्रव का श्यानता-गुणांक η है। जब गोली सीमान्त वेग प्राप्त कर लेती है तो इस पर निम्नलिखित दो बल कार्य करते हैं—
1. नीचे की ओर कार्य करने वाला प्रभावी बल = [latex s=2]V(\rho -\sigma )g=\frac { 4 }{ 3 } \pi { r }^{ 3 }(\rho -\sigma )g[/latex]
2. ऊपर की ओर कार्य करने वाला श्यान बल = 6πηrν
चूँकि गोली नियत वेग से चल रही है अर्थात् त्वरण शून्य है। अतः इस पर लगने वाला नेट बल। शून्य होना चाहिए; अर्थात् उपर्युक्त दोनों बल बराबर होने चाहिए।
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अतः गोली की सीमान्त चाल गोली की त्रिज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।

प्रश्न 17.
किसी द्रव की पृष्ठ-ऊर्जा की व्याख्या कीजिए। द्रव के मुक्त पृष्ठ के क्षेत्रफल प्रसार में किए गए कार्य का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
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द्रव की पृष्ठ-ऊर्जा जब द्रव के पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ाया जाता है तो द्रव के कुछ अणु उसके अन्दर से मुक्त पृष्ठ पर आते हैं। इन अणुओं को मुक्त पृष्ठ के ठीक नीचे वाले अणुओं के आकर्षण-बल के विरुद्ध कुछ कार्य करना पड़ता है। यह कार्य, निर्मित हुए नवीन पृष्ठ में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। इस अतिरिक्त पृष्ठ-क्षेत्रफल के बढ़ने पर शीतलन (cooling) भी होता है। अत: बाहर से कुछ ऊष्मा पृष्ठ में आकर इसे पुन: प्रारम्भिक ताप पर ले आती है। इस प्रकार पृष्ठ को कुछ ऊर्जा बाहर से भी प्राप्त हो जाती है। इससे स्पष्ट है कि द्रव-पृष्ठ में स्थित अणु अपनी स्थिति के कारण कुछ अतिरिक्त (additional) ऊर्जा (UPBoardSolutions.com) रखते हैं। अत: द्रव के मुक्त पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल की इस अतिरिक्त ऊर्जा को ‘द्रव की पृष्ठ-ऊर्जा’ (surface energy of liquid) कहते हैं। द्रव के पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ाने में किये गये कार्य व पृष्ठ-तनाव में सम्बन्ध माना एक मुड़े हुए तार ABC तथा उस पर बिना घर्षण खिसकने वाले सीधे तार PQ के बीच किसी द्रव की फिल्म । बनी है (चित्र 10.11)। हम जानते हैं कि पृष्ठ तनाव के कारण फिल्म का मुक्त पृष्ठ सिकुड़ने की चेष्टा करता है, अत: तार PQ ऊपर की ओर (फिल्म की ओर) चलेगा। तार PQ को साम्यावस्था में रखने के लिए इस पर एकसमान बल F नीचे की ओर लगाना होगा।
प्रयोगों से ज्ञात होता है कि बल F को मानतार PQ के सम्पर्क में A फिल्म की लम्बाई l के अनुक्रमानुपाती होता है। चूंकिं फिल्म में । दो मुक्त पृष्ठ होते हैं (एक बाहर वाला तथा दूसरा अन्दर वाला),
अतः F ∝ 2l
अथवा F = T x 2l = 2Tl
जहाँ T एक नियतांक है जो कि द्रव का पृष्ठ-तनाव कहलाता है।
माना तार PQ को ∆x दूरी से नीचे खिसकाया जाता है जिससे यह नवीन स्थिति P’ Q’ में आ जाता है। इस क्रिया में द्रव की फिल्म के क्षेत्रफल में वृद्धि होती है। फिल्म के क्षेत्रफल में वृद्धि के लिए किया गया यान्त्रिक कार्य W = बल x दूरी
= F x ∆x = (2Tl) ∆x =T x (2l∆x)
परन्तु 2l ∆x = फिल्म के दोनों पृष्ठों के क्षेत्रफल में होने वाली कुल वृद्धि = ∆A
अत: W = T x ∆A अथवा [latex s=2]T=\frac { W }{ \Delta A } [/latex]
यदि ∆A = 1; तब T = w, अतः द्रव के पृष्ठ के एकांक क्षेत्रफल को बढ़ाने में किया गया कार्य पृष्ठ-तनाव T के बराबर है। इस आधार पर हम पृष्ठ-तनाव की परिभाषा निम्न प्रकार कर सकते हैं
“नियत ताप पर द्रव के मुक्त पृष्ठ के क्षेत्रफल में एकांक वृद्धि करने के लिए किया गया कार्य द्रव को पृष्ठ-तनाव कहलाता है।”
इस परिभाषा के आधार पर पृष्ठ-तनाव के मात्रक को जूल/मी² से भी व्यक्त कर सकते हैं।
ताप बढ़ाने पर पृष्ठ-तनाव का मान घटता है।

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प्रश्न 18.
पारे की एक बूंद की कमरे के ताप पर त्रिज्या 3 मिमी है। उसी ताप पर पारे का पृष्ठ तनाव 0.465 न्यूटन/मी है। बूंद के भीतर आधिक्य दाब तथा कुल दाब ज्ञात कीजिए। वायुमण्डलीय दाब 1.01 x 105 न्यूटन/मी2 है।
हल-
माना कि पारे का पृष्ठ-तनाव = T, बूंद की त्रिज्या = R
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 49

प्रश्न 19.
पानी की 1000 छोटी बूंदों को, जिनमें प्रत्येक की त्रिज्या 0.01 मिमी है, मिलाकर एक बड़ी बूंद बनाने में मुक्त ऊर्जा की गणना कीजिए। पानी का पृष्ठ-तनाव =7 x 10-2 न्यूटन/मी।
हल-
माना बड़ी बूंद की त्रिज्या R = 0.01 मिमी तथा छोटी बूंद की त्रिज्या r है,
अतः एक बड़ी बूंद का आयतन = 1000 (UPBoardSolutions.com) छोटी बूंदों का आयतन
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प्रश्न 20.
एक केशनली में जल 5.0 सेमी ऊपर चढ़ता है। यदि एक अन्य केशनली की त्रिज्या इसकी आधी हो तो उसमें जल की ऊँचाई क्या होगी?
हल-
चूँकि किसी केशनली में चढ़े द्रव-स्तम्भ की ऊँचाई उसकी नली की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात् h∝1/r अर्थात् hr = नियतांक
∴ यदि r1 वा r2 त्रिज्या वाली केशनलियों में द्रव-स्तम्भ की ऊँचाइयाँ क्रमश: h1 व h2 हों, तो
h1r1 = h2r2
अथवा
h2 = h1(r1/r2) …(1)
परन्तु यहाँ दूसरी केशनली की त्रिज्या = [latex s=2]\frac { 1 }{ 2 }[/latex](पहली केशनली की त्रिज्या)
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प्रश्न 21.
एक केशनलिका जिसकी त्रिज्या 0.4 मिमी है, जल में ऊध्र्वाधर डुबाई जाती है। ज्ञात कीजिए कि केशनलिका में जल कितनी ऊँचाई तक चढेगा? यदि इस केश नलिका को ऊध्र्वाधर रेखा से 60° झुका दें तो नली की कितनी लम्बाई तक जल चढेगा? जल का पृष्ठ-तनाव 7.0 x 10-2 न्यूटन/मी है।
हल-
दिया है, r = 0.4 मिमी = 0.4 x 10-3 मी,
T = 7.0 x 10-2 न्यूटन/मी,
θ = 0° अर्थात् cos θ = cos 0° = 1 एवं g = 9.8 मी/से2,
जल का घनत्व ρ = 103 किग्रा/मी3
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प्रश्न 22.
साबुन के घोल से 2.0 सेमी त्रिज्या का बुलबुला फेंककर बनाने में कितना कार्य करना पड़ेगा? साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव 0.03 न्यूटन/मी है।
हल-
साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव T = 0.03 न्यूटन/मी
बुलबुले की त्रिज्या R =2 सेमी या 2 x 10-2 मीटर
साबुन के घोल के बुलबुले में 2 मुक्त पृष्ठ होते हैं।
अत: घोल से R मीटर त्रिज्या का बुलबुला फेंककर बनाने में इसके पृष्ठीय क्षेत्रफल में कुल वृद्धि
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प्रश्न 23.
किसी द्रव के एक बूंद की त्रिज्या 5 x 10-3 मीटर है। द्रव बूंद के भीतर आधिक्य दाब की गणना कीजिए। द्रव का पृष्ठ तनाव 0.5 न्यूटन/मीटर है।
हल-
बूंद की त्रिज्या = R = 5 x 10-3 मीटर,
द्रव का पृष्ठ तनाव T = 0.5 न्यूटन/मीटर
द्रव की बूंद के भीतर आधिक्य दाब,
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 54

प्रश्न 24.
एक केशनली में पानी 2.0 सेमी ऊपर चढ़ता है। यदि एक अन्य केशनली की त्रिज्या उसकी एक-तिहाई हो, तो उसमें पानी कितना चढेगा?
हल-
किसी केशनली में चढ़े स्तम्भ की ऊँचाई उसकी नली की त्रिज्या (UPBoardSolutions.com) के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात् । h ∝ [latex s=2]\frac { 1 }{ r }[/latex] अर्थात् hr = नियतांक।
माना r1 वे r2 त्रिज्या वाली केशनलियों में द्रव-स्तम्भ की ऊँचाइयाँ क्रमश: h1 व h2 हों, तो
h1 r1 = h2 r2
या, h2 = h1 (r1/r2) …(1)
परन्तु दूसरी केशनली की त्रिज्या = [latex s=2]\frac { 1 }{ 3 }[/latex](पहली केशनली की त्रिज्या)
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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तरल दाब के पास्कल का नियम लिखिए। हाइड्रोलिक लिफ्ट के सिद्धान्त और कार्यविधि की व्याख्या कीजिए। या पास्कल का नियम लिखिए।
उत्तर-
पास्कल का नियम-द्रव में दाब के संचरण के सम्बन्ध में वैज्ञानिक पास्कल ने सन् 1653 में एक नियम प्रतिपादित किया था जो पास्कल का नियम कहलाता है। इसे द्रव के दाब संचरण का नियम भी कहा जाता है।
इस नियम के अनुसार, “किसी बर्तन में रखे द्रव की संतुलन अवस्था में द्रव के किसी भाग पर आरोपित दाब (बिना क्षय हुए) द्रव द्वारा सभी दिशाओं में समान रूप से ( परिमाण में) संचरित कर दिया जाता है।”
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 10 Mechanical Properties Of Fluids 56
द्रव चालित लिफ्ट (Hydraulic lift)-यह भारी वस्तुओं; जैसे-कार, मोटरगाड़ी, ट्रक आदि को ऊपर उठाने के प्रयोग में लायी जाती है। इसका कार्य सिद्धान्त पास्कल के नियम पर आधारित है।

सिद्धान्त (Principle)– पास्कल के नियम के अनुसार, द्रव के किसी स्थान पर आरोपित दाब अन्य सभी स्थानों पर समान परिमाण में संचरित होता है। अतः कम परिमाण के दाब को अपेक्षाकृत बहुत बड़े क्षेत्रफल पर संचरित करके उस क्षेत्रफल पर (UPBoardSolutions.com) कार्यरत अधिक बल प्राप्त किया जा सकता है। यह तथ्य निम्न प्रकार समझा जा सकता हैं —
उपर्युक्त चित्र 10.13 में A तथा B दो बेलनाकार बर्तन हैं जिनकी अनुप्रस्थ-काट क्रमश: A1 तथा A2 है एवं A2 > A1। इनको परस्पर क्षैतिज नली C द्वारा जोड़ दिया गया है। माना बर्तन A में लगे पिस्टन P1 पर भार W1 रखने पर इस पर लगाया गया बल F1 है।
अत: इसके द्वारा A में भरे द्रव पर आरोपित दाब P = [latex s=2]P=\left( \frac { { F }_{ 1 } }{ { A }_{ 1 } } \right) [/latex]
पास्कल के नियम के अनुसार यही दाब नली C से संचरित होकर बर्तन B में भरे द्रव के प्रत्येक बिन्दु पर संचरित हो जाता है। इसलिए B में लगे पिस्टन P2 पर भी P दाब लगेगा।
अतः इसे पर ऊपर की ओर कार्यरत् बल ।
F2 = P x A2 = (F1/A1 ) x A2
अथवा [latex s=2]{ F }_{ 2 }={ F }_{ 1 }\left( \frac { A_{ 2 } }{ { A }_{ 1 } } \right) [/latex] …(1)
∵ A2 > A1 अत: F2 > F1 अतः A2, क्षेत्रफल A1 से जितना गुना बड़ा होगा पिस्टने P2, पर उतने गुना अधिक बल लगेगा जिससे कि P2 पर रखे भार W2(> W1) को P1 पर बहुत कम बल लगाकर उठाया जा सकता है।
F2/F1 को इस मशीन का यांत्रिक लाभ कहते हैं।
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रचना तथा कार्यविधि—इसमें दो खोखले बेलनाकार बर्तन A तथा B होते हैं। A का परिच्छेद क्षेत्रफल A1,B के परिच्छेद क्षेत्रफल A2 से बहुत कम होता है। इन बर्तनों की तली में क्रमश: वाल्व V1 तथा V2, लगे होते हैं। बर्तन A को वाल्व V1 द्वारा तेल के एक टैंक से जोड़ दिया जाता है। इस बर्तन में लगे पिस्टन P1 को ऊपर-नीचे करने के लिए एक लीवर की व्यवस्था होती है। बर्तन B को वाल्व V2, के द्वारा नली T के माध्यम से बर्तन A से जोड़ दिया जाता है तथा इसको वाल्व V3 के द्वारा तेल टैंक से जोड़ दिया जाता है (चित्र 10.14)।
जब पिस्टन P1 को लीवर द्वारा ऊपर उठाया जाता है तो बर्तन A में पिस्टन P1 के नीचे दाब कम हो जाता है। अत: वाल्व V1 द्वारा टैक से तेल बर्तन A में चढ़ जाता है। अब लीवर के द्वारा पिस्टन P1 को नीचे गिरा देते हैं जिससे द्रव का दाब बढ़ जाता है। दाब में यह वृद्धि नली T द्वारा बर्तन B में संचरित हो जाती है जिससे इसमें लगे पिस्टन P2, पर (A2/A1) गुना बड़ा बल कार्य करता है। इसके कारण पिस्टन P2, ऊपर उठता है जिससे कि उस पर रखा हुआ भार (जैसे- मोटरगाड़ी) भी ऊपर उठ जाता है। जब काम पूरा हो जाता है तो वाल्व V3, द्वारा बर्तन B के अतिरिक्त तेल को तेल टैंक में वापस भेज दिया जाता है और पिस्टन P2 नीचे होकर अपनी पूर्वावस्था में आ जाता है।

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प्रश्न 2.
किसी 3000 किग्रा द्रव्यमान के वाहन को उठाने के लिए एक हाइड्रॉलिक पम्प का निर्माण किया गया है, जिसके बड़े पिस्टन का क्षेत्रफल 900 सेमी2 है। यदि छोटे पिस्टन का क्षेत्रफल 10 सेमी2 हो तो बताइए इस कार्य के लिए उस पर कितना बल आरोपित करना पड़ेगा?
उत्तर
दिया है, वाहन का द्रव्यमान (m) = 3000 किग्रा
छोटे पिस्टन का क्षेत्रफल, (A1) = 10 सेमी2 = 10 x 10-4 मी2
बड़े पिस्टन का क्षेत्रफल (A2) = 900 सेमी2 = 900 x 10-4 मी2
बड़े पिस्टन के लिए, (F2) = mg = 3000 x 9.8 = 29400 न्यूटन
छोटे पिस्टन के लिए, F1 = ?
पास्कल के नियम से, [latex s=2]\frac { { F }_{ 1 } }{ { A }_{ 1 } } =\frac { { F }_{ 2 } }{ { A }_{ 2 } } [/latex]
छोटे पिस्टन के लिए आरोपित बल,
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प्रश्न 3.
आदर्श द्रव किसे कहते हैं? सिद्ध कीजिए कि किसी नली में आदर्श द्रव का धारारेखीय प्रवाह होने पर नली के अनुप्रस्थ-परिच्छेद एवं द्रव के वेग का गुणनफल स्थिर रहता है। या आदर्श द्रव के धारा-रेखीय प्रवाह की अविरतता के सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए। या आदर्श द्रवों के सांतत्य प्रवाह का समीकरण स्थापित कीजिए।
उत्तर-
आदर्श द्रव-वह द्रव जिसमें
(i) शून्य सम्पीड्यता तथा
(ii) शून्य श्यानता होती है; आदर्श द्रव कहलाता है।
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उपपत्ति—मान लीजिए कि एक असम्पीड्य तथा अश्यान द्रव एक असमान अनुप्रस्थ-काट की नली XY में होकर बह रहा है। माना कि नली के X व Y सिरों पर अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल क्रमशः A1 व A2 हैं तथा द्रव का वेग ν1 व ν2 है। (UPBoardSolutions.com) माना कि द्रव का घनत्व ρ है। सिरे X से प्रवेश करने वाला द्रव एक सेकण्ड में ν1 दूरी तय करता है। अतः एक सेकण्ड में सिरे X पर क्षेत्रफल A1 से गुजरने वाले द्रव का आयतन = A1 x ν1
∴1 सेकण्ड में सिरे x से गुजरने वाले द्रव का द्रव्यमान = ρ x A1 x ν1
इसी प्रकार, 1 सेकण्ड में सिरे Y से गुजरने वाले द्रव का द्रव्यमान = ρ x A2 x ν2
अब, क्योंकि सिरे X में जो भी द्रव प्रवेश करता है वह दूसरे सिरे Y से बाहर निकल जाता है, उपर्युक्त दोनों द्रव्यमान बराबर हैं,
अर्थात् ρ x A1 x ν1 = ρ x A2 x ν2
अर्थात् A1 x ν1 = A2 x ν2
या। A x ν = नियतांक
स्पष्ट है कि नली में प्रत्येक स्थान पर नली के अनुप्रस्थ-काट के क्षेत्रफल तथा द्रव के वेग का गुणनफल एक नियतांक होता है। उपर्युक्त समीकरण को सांतत्य समीकरण (Equation of continuity) भी कहते हैं।
इस सिद्धान्त को द्रवों के बहने का अविरतता का सिद्धान्त’ भी कहते हैं।

प्रश्न 4.
बरनौली के प्रमेय का उल्लेख कर उसको सिद्ध कीजिए। या बरनौली के प्रमेय के कथन को लिखिए तथा सम्बन्धित समीकरण को स्थापित कीजिए।
उत्तर-
बरनौली की प्रमेय-जब कोई असम्पीड्य तथा अश्यान द्रव (अथवा गैस) एक स्थान से दूसरे स्थान तक धारा-रेखीय प्रवाह में बहता है तो इसके मार्ग के प्रत्येक बिन्दु पर इसके एकांक आयतन की कुल ऊर्जा अर्थात् दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग एक नियतांक होता है। अर्थात्
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इस प्रकार बरनौली प्रमेय बहते हुए द्रव (अथवा गैस) के लिए ऊर्जा-संरक्षण का सिद्धान्त है।
उपपत्ति-चित्र 10.16 में एक असमान अनुप्रस्थ-काट की नली में एक असम्पीड्य तथा अश्यान द्रव प्रवाहित हो रहा है। द्रव का प्रवाह धारा-रेखीय है। माना पृथ्वी तल से h1, ऊँचाई पर नली की अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल A1, द्रव का वेग ν1, व दाब P1 है तथा पृथ्वी तल से h2; ऊँचाई पर नली की अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल A2, द्रव का वेग ν2, व दाब P2 है। यहाँ A2 < A1 है। इसलिए । ν1 < ν2 होगा।
अनुप्रस्थ परिच्छेद A1 पर प्रवेश करने वाले द्रव पर P1 x A1 बल कार्य करता है। इस बल के अन्तर्गत द्रवे 1 सेकण्ड में ν1 दूरी तय करता है; अत: 1 सेकण्ड में A1 सिरे पर प्रवेश करने वाले द्रव पर
किया गया कार्य = बेल x दूरी = P1 x A1 x ν1
इसी प्रकार अनुप्रस्थ-परिच्छेद A2, पर निकलने वाला द्रव, बल = P2 x A2, के विरुद्ध कार्य करता है।
तथा 1,सेकण्ड में ν2 दूरी तय करता है।
अतः 1 सेकण्ड में A2 सिरे से निकलने वाले द्रव द्वारा किया गया कार्य
= P2 x A2 x ν2
द्रव पर किया गया नेट कार्य = P1 x A1 x ν1 – P2 x A2 x ν2 …(1)
परन्तु A1 x ν1 तथा A2 x ν2 , क्रमशः एक (UPBoardSolutions.com) सिरे से प्रवेश करने वाले व दूसरे सिरे से निकलने वाले द्रव का आयतन है जो आपस में बराबर होंगे।
अतः A1 ν1 = A2 ν2 = m/ρ
जहाँ एक सेकण्ड में प्रवेश करने वाले द्रव का द्रव्यमान m तथा द्रव का घनत्व ρ है।
द्रव पर किया गया नेट कार्य = (P1 – P2)m/ρ
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अत: किसी द्रव के क्षैतिज व धारा-रेखीय प्रवाह के लिए प्रत्येक बिन्दु पर दाब तथा द्रवे के एकांक आयतन की गतिज ऊर्जा का योग एक नियतांक होता है।
बरनौली प्रमेय समीकरण से यह स्पष्ट है कि किसी प्रवाहित द्रव (अथवा गैस) में जिस स्थान पर द्रव का वेग कम होता है, वहाँ दाब अधिक हो जाता है तथा जिस स्थान पर वेग अधिक होता है, वहाँ दाब कम हो जाता है। यदि हम द्रव को किसी ऐसी नली में प्रवाहित (UPBoardSolutions.com) करें जिसके बीच का भाग संकीर्ण हो, तो इस भाग में द्रव का वेग सबसे अधिक होगा तथा दाब सबसे कम होगा। प्रवाहित द्रव के दाब-शीर्ष, वेर्ग-शीर्ष तथा गुरुत्वीय-शीर्ष- बरनौली की समीकरण (6) को ρg से भाग देने पर,
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इसमें P/ρg को ‘दाब-शीर्ष’ (pressure head), ν²/2g को ‘वेग-शीर्ष’ (velocity head) तथा h को ‘गुरुत्वीय-शीर्ष’ (gravitational head) कहते हैं। इन तीनों की विमाएँ ऊँचाई की विमा [L] के समतुल्य हैं। इनके योग को ‘सम्पूर्ण शीर्ष’ (total head) कहते हैं। अत: बरनौली प्रमेय को निम्न प्रकार भी कहा जा सकता है —
आदर्श द्रव के धारा-रेखा प्रवाह में द्रव के किसी बिन्दु पर दाब-शीर्ष, वेग-शीर्ष तथा गुरुत्वीय-शीर्ष का योग सदैव नियत रहता है। यह यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण को व्यक्त करती है।

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प्रश्न 5.
बरनौली के प्रमेय के आधार पर कणित्र की कार्यविधि समझाइए।
उत्तर-
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कणित्र (Atomizer)-यह रंग अथवा सुगन्धित द्रव को छिड़कने, कार, स्कूटर पर पेण्ट करने, नाइयों द्वारा सिर पर जल फुहारने, डॉक्टरों द्वारा नाक, कान को धोने व गले में दवाई को छिड़कने के काम आता है। इसमें एक साधारण पिचकारी होती है, जिसके मुख पर एक केशनली (capillary tube) लगा दी जाती है। केशनली का निचला सिरा बर्तन में भरे द्रव में डूबा रहता है। जब पिचकारी की गेंद को दबाते हैं, तो वायु अत्यधिक वेग से निकलती है, जिससे पिचकारी के मुँह पर दाब गतिज ऊर्जा बढ़ने से (बरनौली प्रमेय के आधार पर) घट जाता है। दाब के घटने से केशिका नली में द्रव चढ़कर पिचकारी के मुँह तक आ जाता है और दोबारा पिचकारी की गेंद को दबाने पर यह वायु के साथ मिलकर फव्वारे के रूप में बाहर निकलता है।।

प्रश्न. 6.
आदर्श द्रवों के प्रवाह से सम्बन्धित बरनौली की प्रमेय लिखिए। जल से भरे एक बर्तन की दीवार में बने एक छिद्र से जल का स्वतन्त्र तल h ऊँचाई पर है। छिद्र से निकलने वाले जल के बहिःस्राव वेग के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए।
उत्तर-
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बहिःस्राव वेग के लिए व्यंजक–चित्र 10.18 में एक बर्तन दर्शाया गया है जिसमें H ऊँचाई तक द्रव भरा है। माना द्रव का घनत्व p है। बर्तन द्रव के स्वतन्त्र तल से h गहराई पर एक छिद्र A है। माना A से निकलने वाले द्रव का बहि:स्राव वेग » है। द्रव के स्वतन्त्र तल पर गतिज ऊर्जा शून्य है, केवल स्थितिज ऊर्जा है। परन्तु A से निकलने वाले द्रव में स्थितिज तथा गतिज दोनों ही प्रकार की ऊर्जाएँ हैं। बरनौली प्रमेय के अनुसार, द्रव के स्वतन्त्र तल पर तथा छिद्र A पर द्रव के एकांक आयतन की कुल ऊर्जा अर्थात् दाब ऊर्जा,
गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जाओं का योग बराबर होना चाहिए। । यदि वायुमण्डलीय दाब P हो, तो
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अत: यदि छिद्र बर्तन की दीवार के ठीक बीच में है तो द्रव की धार सबसे अधिक दूर (बर्तन में द्रव की ऊँचाई के बराबर दूरी पर) गिरती है।

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प्रश्न 7.
चित्र 10.19 के अनुसार एक क्षैतिज नलिका में जल प्रवाहित होता है। बिन्दु A व B के मध्य 5 मिमी पारे का दाब परिवर्तन है जहाँ अनुप्रस्थ परिच्छेद 20 सेमी2 तथा 10 सेमी2 है। नलिका में जल प्रवाह की दर ज्ञात कीजिए। (पारे का घनत्व = 1.36 x 103 किग्रा/मी3, जल का घनत्व = 1.0 x 103 किग्रा/मी)
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हल-
दिया है, A1 = 20 सेमी2 = 20 x 10-4 मी2
A2 = 10 सेमी2 = 10 x 10-4 मी2
प्रश्नानुसार, दाब में परिवर्तन P1 – P2 = 5 मिमी
पारा स्तम्भ पर दाब = hdg = 5 x 10-3 x 13.6 x 103 x 9.8
= 666.4 न्यूटन/मी2
अविरतता के सिद्धान्त से,
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प्रश्न 8.
एक क्षैतिज पाइप में जल बहता है, जिसका एक सिरा वाल्व द्वारा बन्द है और पाइप में लगे दाबमापी का पाठ्यांक 5.5 x 105 न्यूटन/मी2 है। पाइप में लगे वाल्व को खोल देने पर दाबमापी का पाठ्यांक 10 x 105 न्यूटन/मी2 रह जाता है। पाइप में प्रवाहित जल के वेग की गणना कीजिए।
उत्तर-
दिया है, जल का घनत्व, (ρ) = 1.0 x 10किग्रा/मी3  
बन्द सिरे के कारण दाबमापी का पाठ्यांक (P1) = 5.5 x 105 न्यूटन/मी2  
न्यूटन/मी खुले सिरे के कारण दाबमापी का पाठ्यांक (P) = 1.0 x 105 न्यूटन/मी2
बरनौली प्रमेय से,
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चूंकि प्रारम्भिक अवस्था में वाल्व बन्द होता है इसलिए ν1 = 0 होगा।
अत: समीकरण (1) से
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प्रश्न 9.
एक छोटा गोला जिसका द्रव्यमान M व घनत्व d1 है। एक ग्लिसरीन भरे पात्र में डाला जाता है। कुछ समय पश्चात् गोले का वेग स्थिर हो जाता है। यदि ग्लिसरीन का घनत्व d2 है, तो गोले पर लगने वाले श्यान बल की गणना कीजिए।
उत्तर-
यहाँ गोले का द्रव्यमान = M, गोले का घनत्व = d1
ग्लिसरीन का घनत्व = d2
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प्रश्न 10.
पृष्ठ-तनाव तथा केशिकात्व की परिभाषा दीजिए। इसका एस० आई० मात्रक बताइए। काँच की केशनली में चढे द्रव-स्तम्भ की ऊँचाई, त्रिज्या तथा द्रव के पृष्ठ-तनाव में सम्बन्ध का सूत्र स्थापित कीजिए।
उत्तर-
पृष्ठ-तनाव (Surface tension)-प्रत्येक द्रव में मुक्त पृष्ठ पर एक तनाव बल कार्य करता है; जिसके कारण उसका स्वतन्त्र पृष्ठ एक तनी झिल्ली की भाँति व्यवहार करता है। यदि इस मुक्त पृष्ठ में चित्र 10.20 की भाँति किसी भी दिशा में एक सरल रेखा AB (UPBoardSolutions.com) की कल्पना की जाये तो रेखा के किसी भी ओर का पृष्ठ रेखा के अपने विपरीत ओर के पृष्ठ पर कर्षण (pulling) बल F लगाता है। यह बल पृष्ठ के तल में तथा इस रेखा के लम्बवत् कार्य करता है। इस रेखा AB की एकांक लम्बाई पर कार्य करने वाले बल का परिमाण ही द्रव के पृष्ठ-तनाव की माप है।
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यदि रेखा AB की लम्बाई । हो और इसके किसी ओर भी कार्य करने वाला सम्पूर्ण बल F हो, तो पृष्ठ तनाव T = [latex s=2]\frac { F }{ l }[/latex].
यदि l = 1, तो T = F
अत: किस द्रव का पृष्ठ-तनाव वह बल है जो द्रव के पृष्ठ पर खींची गयी काल्पनिक रेखा की एकांक लम्बाई पर पृष्ठ के तल में तथा कल्पित रेखा के लम्बवत् कार्य करता है।
पृष्ठ-तनाव का एस० आई० मात्रक न्यूटन/मीटर है।
केशिकात्व Capillarity द्रव का वह गुण-धर्म जिसके कारण किसी केशनली को इसमें खड़ा करने पर यह नली के बाहर द्रव के तल की तुलना में नली में ऊपर चढ़ता है या नीचे उतरता है, केशिकात्व कहलाता है।
काँच की केशनली में चढ़े द्रव-स्तम्भ की ऊँचाई, त्रिज्या तथा द्रव के पृष्ठ-तनाव में सम्बन्ध चित्र 10.21 (a) में जल के एक बीकर में काँच की केशनली खड़ी की गई है जिसमें जल के तल से h ऊँचाई तक जल चढ़ता है। माना कि जल की पृष्ठ-तनाव T है। नली में जल का अवतल-पृष्ठ AEB है। इसकी परिधि 2πr नली की दीवारों के सम्पर्क में है, जहाँ r केशनली की त्रिज्या है। इसकी एकांक लम्बाई पर जल के पृष्ठ-तनाव के कारण बल T नली की दीवार से θ कोण पर जल के अन्दर की ओर लगता है, θ जल-काँच के लिए स्पर्श कोण है।
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नली की दीवार भी प्रतिक्रिया के कारण उतना ही बल T जल के वक्र पृष्ठ की परिधि पर बाहर की ओर लगाती है। इस बल को ऊर्ध्व और क्षैतिज दो घटेकों, T cos θ और T sin θ में वियोजित करते हैं। T cos θ ऊर्ध्व दिशा में परिधि 2πr की प्रत्येक एकांक लम्बाई (UPBoardSolutions.com) पर ऊपर की ओर कार्य करता है; अत: प्रतिक्रिया बल का मान 2πr x T cos θ के बराबर होता है जो नली में चढ़े जल के स्तम्भ के भार को साधता है। चूंकि T sin θ परिधि पर बाहर की ओर लगता है, अतः पूरी परिधि के लिए उनका परिणामी बेल शून्य होगा। यदि जल का घनत्व ρ हो, तो जल के स्तम्भ का भार = πr²h x ρ x g
सन्तुलन की अवस्था में । 2πr x T cos θ =πr²h x ρ x g
[latex s=2]T=\frac { rhg\rho }{ 2cos\theta } [/latex]
उपर्युक्त सूत्र से स्पष्ट है कि यदि जल काँच का स्पर्श-कोण θ ज्ञात हो, तो h तथा r के मान ज्ञात करके जल के पृष्ठ-तनाव T की गणना की जा सकती है।
शुद्ध जल एवं साफ काँच के लिए स्पर्श कोण θ लगभग शून्य है; अत: cos θ = 1, इस प्रकार
[latex s=2]T=\frac { rhg\rho }{ 2 } [/latex]

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प्रश्न 11.
काँच की नली में द्रव के मुक्त पृष्ठ की आकृति की व्याख्या कीजिए। द्रव के वक्र पृष्ठ के दो पाश्र्वो के बीच दाबान्तर क्यों होता है?
उत्तर-
काँच की नली में द्रव के मुक्त पृष्ठ की आकृति जब कोई द्रव किसी ठोस के स्पर्श में आता है तो स्पर्श-तल के समीप द्रव का पृष्ठ वक्रीय हो जाता है। वक्रता की प्रकृति द्रव के अणुओं के बीच संसंजक-बल तथा द्रव व ठोस के अणुओं के बीच आसंजक-बल के सापेक्ष परिणामों पर निर्भर करती है।
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चित्र 10.22 (a) में जल एक काँच की नली की दीवार के सम्पर्क में दिखाया गया है। माना कि काँच के समीप द्रव के मुक्त पृष्ठ पर एक अणु A है तथा इस अणु पर दो आकर्षण-बल कार्य करते हैं।
(i) परिणामी आसंजक-बल P, जो A के समीप वाले ठोस के अणुओं के आकर्षण के कारण A पर कार्य करता है। इसकी दिशा ठोस के पृष्ठ के लम्बवत् है।।
(ii) परिणामी संसंजक-बल Q, जो A के समीप द्रव के अन्य अणुओं के आकर्षण के कारण A पर द्रव के अन्दर की ओर एक दिशा में कार्य करता है।
जल व काँच के अणुओं के बीच लगेने वाला आसंजक-बल, जल के ही अणुओं के बीच परस्पर लगने वाले संसंजक-बल से बड़ा होता है। अत: बेल P, बल Q से बड़ा होगा। चित्र 3.7(a) से स्पष्ट है कि इन दोनों बलों का परिणामी बल R, जल से बाहर की ओर को होगा।
चित्र 10.22 (b) में पारे को काँच की नली की दीवार के सम्पर्क में दिखाया गया है। पारे के अणुओं के बीच संसंजक-बल, पारे व काँच के अणुओं के बीच लगने वाले आसंजक-बल से कहीं अधिक बड़ा होता है। अत: इस दशा में पारे के मुक्त पृष्ठ पर अणु A पर बल Q, बल P से बड़ा होगा तथा इनका परिणामी बल R पारे के भीतर की ओर को होगा। परिणामी बल R, जल अथवा पारे के मुक्त पृष्ठ के सभी अणुओं पर कार्य करता है। दीवार से दूर स्थित अणुओं के लिए आसंजक-बल P घटता जाता है तथा संसंजक-बल Q अधिकाधिक ऊध्वधर होता जाता है। अतः परिणामी बल R भी अधिकाधिक उध्वधर होता जाता है। मुक्त पृष्ठ के बीच वाले भाग में P लगभग शून्य हो जाता है तथा Q ऊर्ध्वाधर हो जाता है। अतः परिणामी बल बिल्कुल ऊर्ध्वाधर हो जाता है। [चित्र 10.23 (a), (b)]
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यदि द्रव का मुक्त पृष्ठ साम्यावस्था में है तो पृष्ठ के किसी अणु पर कार्य करने वाला परिणामी बल पृष्ठ के लम्बवत् होना चाहिये। अत: द्रव का पृष्ठ प्रत्येक स्थान पर परिणामी बल के लम्बवत् हो जाता है। यही कारण है कि काँच की नली में जल का मुक्त पृष्ठ अवतल आकृति धारण कर लेता है तथा पारे का मुक्त पृष्ठ उत्तल आकृति। प्रत्येक दशा में बीच में परिणामी बल ऊर्ध्वाधर होता है, अतः बीच में मुक्त पृष्ठ क्षैतिज होता है [चित्र 10.23 (a), (b)]।
द्रव के वक्र पृष्ठ के पाश्व के बीच दाबान्तर
किसी द्रव के पृष्ठ में स्थित कोई अणु, पृष्ठ के दूसरे अणुओं द्वारा सभी दिशाओं में आकर्षित होता है। यदि द्रव का पृष्ठ समतल हो [चित्र 10.24 (a)] तो अणु सभी दिशाओं में समान रूप से आकर्षित होता है। अतः अणु पर पृष्ठ-तनाव के कारण परिणामी बल शून्य होता है। परन्तु यदि द्रव का पृष्ठ उत्तल हो तो प्रत्येक अणु पर लगने वाले आकर्षण-बलों को एक परिणामी घटक पृष्ठ के लम्बवत् अन्दर की ओर होता है [चित्र 10.24 (b)]। इसी प्रकार, यदि द्रव का पृष्ठ अवतल हो तो प्रत्येक अणु पर पृष्ठ-तनाव के कारण एक परिणामी बल पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर को लगता है [चित्र 10.24 (c)]। अत: वक्र पृष्ठ के सन्तुलन के लिये, पृष्ठ के दोनों पार्यों के बीच दाबान्तर होना चाहिये जिससे कि आधिक्य-दाब (excess of pressure) के कारण लगने वाला बल पृष्ठ-तनाव के कारण उत्पन्न परिणामी बल को सन्तुलित कर सके। स्पष्ट है कि पृष्ठ के अवतल पाश्र्व पर दाब उत्तल पाश्र्व की अपेक्षा अधिक होना चाहिये। दाबों पर यह अन्तर 2T/R के बराबर होता है, जहाँ T द्रव का पृष्ठ-तनाव है तथा R पृष्ठ की त्रिज्या है।
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प्रश्न 12.
किसी साबुन के बुलबुले के भीतर आधिक्य-दाब के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
साबुन के घोल के बुलबुले के भीतर आधिक्य-दाब माना कि त्रिज्या R का एक बुलबुला, पृष्ठ-तनाव T के साबुन के घोल से बना है (चित्र 10.25)। माना बुलबुले के बाहर दाब P है तथा भीतर P + p है। इस प्रकार बुलबुले के भीतर आधिक्य-दाब p है। माना कि यह आधिक्य-दाब बुलबुले के पृष्ठ को अभिलम्बवत् बाहर की ओर दूरी ∆R धकेलता है, जहाँ ∆R इतना सूक्ष्म है कि बुलबुले के भीतर दाब अपरिवर्तित रहता है। अतः आधिक्य-दाब के कारण उत्पन्न बल द्वारा किया गया कार्य
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w = बल x विस्थापन ।
= (आधिक्य-दाब x क्षेत्रफल) x विस्थापन
= (p x 4πR²) x ∆R …(1)
साबुन के घोल के बुलबुले के दो पृष्ठ वायु के सम्पर्क में हैं, एक बुलबुले के भीतर तथा एक बुलबुले के बाहर। अतः उपरोक्त विस्थापन के कारण बुलबुले के पृष्ठ-क्षेत्रफल में कुल वृद्धि
∆A = 2[4π(R + ∆R)²-4πR²]
= 8π[R + (∆R)²+ 2R∆R – R²]
= 16πR(∆R)
अल्प पद (∆R)² को छोड़ने पर
अतः ‘पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि = पृष्ठ-क्षेत्रफल में वृद्धि x पृष्ठ तनाव
= 16πR(∆R) x T …(2)
ऊर्जा में वृद्धि, आधिक्य-दाब के कारण किये गये कार्य से होती है।
अत: समीकरण (1) तथा (2) को बराबर रखने पर,
(p x 4πR²) x ∆R= 16 πR(∆R)xT
अथवा
[latex s=2]p=\frac { 4T }{ R } [/latex]

प्रश्न 13.
द्रव की बूंद के भीतर आधिक्य-दाब का व्यंजक निगमित कीजिए।
उत्तर-
द्रव की बूंद के भीतर आधिक्य-दाब माना कि द्रव की एक बूंद की त्रिज्या R है तथा द्रव का पृष्ठ-तनाव T है (चित्र 10.26)। बूंद के पृष्ठ पर स्थित द्रव के अणुओं पर, पृष्ठ-तनाव के कारण, एक परिणामी बल पृष्ठ के अभिलम्बवत् ‘भीतर की ओर को’ कार्यरत् है। अत: बूंद के (UPBoardSolutions.com) भीतर दाब, बाह्य दाब से अधिक होना चाहिए। बूंद के भीतर यह आधिक्य-दाब बाहर की
ओर को एक बल लगाता है जो पृष्ठ तनाव के बल को सन्तुलित करता है तथा बूंद साम्यावस्था में बनी रहती है।
माना कि बूंद के बाहर दाब P है तथा भीतर P+p है। इस प्रकार, बूंद के भीतर आधिक्य-दाब p है। माना कि यह आधिक्य-दाब बूंद के पृष्ठ को अभिलम्बवत् बाहर की ओर दूरी ∆R तक धकेलता है, जहाँ ∆R इतना सूक्ष्म है कि बूंद के भीतर दाब अपरिवर्तित रहता है। आधिक्य-दाब p के कारण उत्पन्न बल द्वारा किया गया यान्त्रिक कार्य
w = बल x विस्थापन
= (आधिक्य दाब x क्षेत्रफल) x विस्थापन
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UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 8 Index Numbers

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Economics
Chapter Chapter 8
Chapter Name Index Numbers (सूचकांक)
Number of Questions Solved 51
Category UP BoardSolutions

UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 8 Index Numbers (सूचकांक)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मदों के सापेक्षिक महत्त्व को बताने वाले सूचकांक को
(क) भारित सूचकांक कहते हैं।
(ख) सरल समूहित सूचकांक कहते हैं।
(ग) सरल मूल्यानुपातों का औसत कहते हैं।
उत्तर
(क) भारित सूचकांक कहते हैं।

प्रश्न 2.
अधिकांश भारित सूचकांकों में भार का सम्बन्ध
(क) आधार वर्ष से होता है।
(ख) वर्तमान वर्ष से होता है।
(ग) आधार एवं वर्तमान वर्ष दोनों से होता है।
उत्तर
(ख) वर्तमान वर्ष से होता है।

प्रश्न 3.
ऐसी कंस्तु जिसका सूचकांक में कम भार है, उसकी कीमत में परिवर्तन से सूचकांक में कैसा परिवर्तन होगा
(क) कस
(ख)
अधिक
(ग)
अनिश्चित
उत्तर
(क)
कम 

प्रश्न 4.
कोई उपभोक्ता सूचकांक किस परिवर्तन को मापता है?
(क)
खुदरा कीमत ।
(ख) थोक कीमत
(ग)
उत्पादकों की कीमत
उत्तर
(क)
खुदरा कीमत

प्रश्न 5.
औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक में किस मद के लिए उच्चतम भार होता है?
(क) खाद्य पदार्थ
(ख)
आवास
(ग)
कपड़े
उत्तर
(क)
खाद्य पदार्थ

प्रश्न 6.
सामान्यतः मुद्रा-स्फीति में परिकलन में किसका प्रयोग होता है?
(क)
थोक कीमत सूचकांक
(ख) उपभोक्ता कीमत सूचकांक
(ग) उत्पादक कीमत सूचकांक
उत्तर
(क) थोक कीमत सूचकांक

प्रश्न 7.
हमें सूचकांक की आवश्यकता क्यों होती है?
उतर
सूचकांक सम्बन्धित चरों के समूह के परिमाण में परिवर्तनों को मापने का एक सांख्यिकीय साधन है। ये अर्थव्यवस्था के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। निम्नलिखित कारणों से हमें सूचकांक की आवश्यकता होती है

  1. मजदूरी तय करने, लगान, कर, आय नीति का निर्धारण, कीमत-निर्धारण एवं आर्थिक नीति बनाने | के लिए सूचकांक का प्रयोग किया जाता है।
  2. उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) फुटकर (retail)-कीमतों में औसत परिवर्तन मापने के लिए आवश्यक होता है।
  3. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IPI) अनेक उद्योगों के औद्योगिक उत्पादन के स्तर में परिवर्तन को मापने में सहायक होता है।
  4. थोक कीमत सूचकांक (WPI) सामान्य कीमत स्तर में परिवर्तन का संकेत देता है।
  5. कृषि क्षेत्र की प्रगति का जायजा लेने के लिए कृषि उत्पादन सूचकांक (API) आवश्यक होता है।

प्रश्न 8.
आधार अवधि (आधार वर्ष) के वांछित गुण क्या होते हैं?
उत्तर
आधार अवधि (आधार वर्ष) के वांछित गुण निम्नलिखित होने चाहिए|

  1. आधार वर्ष एक सामान्य वर्ष होना चाहिए, इस वर्ष असाधारण प्राकृतिक अथवा राजनीतिक घटनाएँ घटित न हुई हों।
  2. आधार वर्ष में कीमत स्तर में असाधारण परिवर्तन न हुए हों।
  3. यह वर्ष न तो अत्यधिक पुराना हो और न ही अत्यधिक नया।।
  4. इस वर्ष में पर्याप्त एवं विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध होने चाहिए।


प्रश्न 9.
भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की अनिवार्यता क्यों होती
उत्तर
भिन्न उपभोक्ताओं के उपभोग में व्यापक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। इसलिए भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोर्ग कीमत सूचकांक बनाए जाते हैं। भारत में तीन उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाए जाते

  1. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1982)
  2. शहरी गैर-शारीरिक (मजदूर) कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष | 1984-85)
  3. कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक (आधार वर्ष 1986-87)।

प्रश्न 10.
औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है?
उत्तर
भारत के औद्योगिक श्रमिकों के लिए अलग से उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाया जाता है। इसे 1982 को आधार वर्ष मानकर बनाया जाता है। इसका नियमित रूप से हर महीने परिकलन किया जाता है। यह सूचकांक औद्योगिक श्रमिकों के जीवन-निर्वाह पर फुटकर कीमतों में आए परिवर्तनों के प्रभावों को मापता है। इनका प्रकाशन श्रमिक केन्द्र शिमला द्वारा किया जाता है। इसका निर्माण करते समय औद्योगिक श्रमिकों के लिए मुख्य वस्तु समूहों को उपयुक्त भार दिया जाता है।

प्रश्न 11.
कीमत सूचकांक तथा मात्रा सूचकांक में क्या अन्तर है?
उत्तर
कीमत सूचकांक एक अभारित सूचकांक है। यह वस्तु की वर्तमान वर्ष की कीमत एक आधार वर्ष की कीमत का सरल अनुपात होता है। सूत्र रूप में,
[latex] { p }_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma p }_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 0 } } \times 100 [/latex]
यहाँ, P01= कीमत सूचकांक
P1 = वर्तमान वर्ष की कीमत
P0 = आधार वर्ष की कीमत
मात्रा सूचकांक कीमत के स्थान पर उत्पादन की मात्रा का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस प्रकार के सूचकांक की रचना करते समय सर्वप्रथम मात्रा अनुपात ज्ञात किए जाते हैं। सूत्रानुसार,
[latex] \cfrac { q1 }{ q0 } \times 100 [/latex]
यहाँ, Q.R. = मात्रानुपात
q = वर्तमान वर्ष में उत्पादन की मात्रा
qo = आधार वर्ष में उत्पादन की मात्रा
इसके बाद प्रचलित वर्ष के सभी मात्रानुपातों का समान्तर माध्य निकाल लिया जाता है। यही मात्रा सूचकांक है।।

प्रश्न 12.
क्या किसी भी तरह की कीमत परिवर्तन एक कीमत सूचकांक में प्रतिबिम्बित होता है?
उत्तर
कीमत सूचकांक फुटकर कीमतों में परिवर्तनों के औसत को मापता है। यह किसी विशिष्ट कीमत परिवर्तन को प्रदर्शित नहीं करता है, जबकि प्रत्येक प्रकार की कीमत में परिवर्तन कीमत सूचकांक के मान को प्रभावित करता है।

प्रश्न 13.
क्या शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निर्वाह लागत में परिवर्तन का प्रतिनिधित्व कर सकता है?
उत्तर
नहीं, शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निर्वाह लागत में परिवर्तन का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है।

प्रश्न 14.
नीचे एक औद्योगिक केन्द्र के श्रमिकों द्वारा 1980 एवं 2005 के दौरान निम्न मदों पर प्रति
व्यक्ति मासिक व्यय को दर्शाया गया है। इन मदों का भार क्रमशः 75, 10, 5, 6 तथा 4 है। 1980 को आधार मानकर 2005 के लिए जीवन-निर्वाह लागत का एक भारित सूचकांक तैयार कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 1
हल
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 2
[latex] CPI=\cfrac { \Sigma wR }{ \Sigma W } =\cfrac { 18459.47 }{ 100 } =184.59 [/latex]

प्रश्न 15.
निम्नलिखित सारणी को ध्यानपूर्वक पढिए एवं अपनी टिप्पणी कीजिए।
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 3
उत्तर
उपर्युक्त तालिका से निम्नलिखित बातें प्रतिबिम्बित होती हैं

  1. विभिन्न उद्योगों, खनन एवं उत्खनन, विनिर्माण एवं विद्युत की संवृद्धि दरें भिन्न-भिन्न हैं। इनमें विनिर्माण क्षेत्र की संवृद्धि दर सबसे अधिक है, जबकि खनन एवं उत्खनन क्षेत्र की संवृद्धि दर सबसे कम है।
  2. विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को भिन्न-भिन्न भार दिए गए हैं। इनमें सबसे अधिक भार विनिर्माण क्षेत्र को तथा सबसे कम भार विद्युत क्षेत्र को दिया गया है।
  3. सामान्य संवृद्धि दर खनन एवं उत्खनन तथा विद्युत क्षेत्र से अधिक है किन्तु विनिर्माण क्षेत्र से कम

प्रश्न 16.
अपने परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्त्वपूर्ण मदों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए।
उत्तर
हमारे परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्त्वपूर्ण मदों की सूची
1. ईंधन एवं प्रकाश,
2. वस्त्र,
3. खाद्य-पदार्थ,
4. शिक्षा,
5. मकान का किरायी,
6. परिवहन,
7. मनोरंजन,
8. जूते-चप्पल,
9. फर्नीचर,
10. विविध

प्रश्न 17.
यदि एक व्यक्ति का वेतन आधार वर्ष में 4000 प्रतिवर्ष था और उसका वर्तमान वर्ष में वेतन १6000 है। उसके जीवन-स्तर को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिए उसके वेतन में कितनी वृद्धि होनी चाहिए, यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक 400 हो।
उतर
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 4
वेतन में प्रतिशत बढ़ोतरी  [latex]\cfrac { 10000\times 100 }{ 6000 } =166.67 [/latex]%
जीवन-स्तर का समान स्तर कायम रखने हेतु वेतन में 166.67% वृद्धि होनी चाहिए।

प्रश्न 18.
जून 2005 में उपभोक्ता कीमत सूचकांक 125 था। खाद्य सूचकांक 120 तथा अन्य मदीं का सूचकांक 135 था। खाद्य-पदार्थों को दिया जाने वाला भार कुल भार का कितना प्रतिशत है? ।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 5

प्रश्न 19.
किसी शहर में एक मध्यवर्गीय पारिवारिक बजट में जाँच-पड़ताल से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त होती है|
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 6
1995 की तुलना में 2004 में निर्वाह सूचकांक का मान क्या होगा?
हल
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 7
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 8
प्रश्न 20.
दो सप्ताह तक अपने परिवार के (प्रति इकाई) दैनिक व्यय, खरीदी गई मात्रा तथा दैनिक खरीददारी को अभिलेखित कीजिए। कीमत में आए परिवर्तन आपके परिवार को किस तरह से प्रभावित करते हैं?
उत्तर
स्वयं करें।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित आँकड़े दिए गए हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 9

रस्रोत- आर्थिक सर्वेक्षण, भारत सरकार, 2004-2005.
(क) विभिन्न सूचकांकों को प्रयुक्त करते हुए मुद्रास्फीति की दर का परिकलन कीजिए।
(ख) सूचकांकों के सापेक्षिक मानों पर टिप्पणी कीजिए।
(ग) क्या ये तुलना योग्य हैं?
उत्तर
(क)(i)
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UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 11

UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 12
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 13
(iv)
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 14
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 15

(ख) औद्योगिक श्रमिकों के लिए आधार वर्ष 1982 के साथ उपभोक्ता कीमत सूचकांक सबसे अधिक है। थोक मूल्य सूचकांक पूरी अवधि में सबसे कम है। (1993-96 से 2003-04 तक)
(ग) तालिका में दिए गए सूचकांक निम्नलिखित कारणों से तुलनात्मक नहीं हैं

  1. आधार वर्ष अलग-अलग हैं।
  2.  विभिन्न सूचकांकों की मदें भिन्न हो सकती हैं।
  3. अलग-अलग सूचकांकों के लिए विभिन्न मदों को भिन्न भार प्रदान किए जा सकते हैं।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
“कीमत क्य सूचकांक आधार-वर्ष की तुलना में किसी अन्य समय में कीमतों की औसत ऊँचाई को प्रकट करने वाली संख्या है।” यह परिभाषा दी है
(
क) प्रो० चैण्डलर ने
(ख) प्रो० बाउले ने
(ग) किनले ने ।
(घ) हार्पर ने
उत्तर—
(क)
प्रो० चैण्डलर ने

प्रश्न 2. सूचकांक की विशेषता नहीं है
(क) सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है।
(ख) सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त नहीं किया जाता है।
(ग) यह एक विशेष प्रकार का माध्य ही है।
(घ) सूचकांक आर्थिक पहलू के उच्चावचनों को संख्यात्मक रूप में ही माप सकता है।
उत्तर
(ख) सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त नहीं किया जाता है।

प्रश्न 3.
“सूचकांक की श्रेणी एक ऐसी श्रेणी होती है, जो अपने झुकाव तथा उच्चावचनों द्वारा जिस परिमाण से संबंधित है, में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करती है।”
(क) डॉ० बावले ने
(ख) चैण्डलर ने
(ग) होरेस सेक्राइस्ट ने
(घ) किनले ने
उत्तर
(ग) होरेस सेक्राइस्ट ने

प्रश्न 4.
श्रृंखला मूल्यानुपात
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 16

UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 17
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 18

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सूचकांक क्या है?
उत्तर
सूचकांक सम्बन्धित चरों के समूह के परिमाण में परिवर्तनों को मापने की एक सांख्यिकी विधि है।

प्रश्न 2.
सूचकांकों को किस रूप में व्यक्त किया जाता है?
उत्तर
सूचकांकों को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 3.
आधार-वर्ष क्या है?
उत्तर
दो वर्षों में से जिस वर्ष को आधार मानकर तुलना की जाती है, उसे आधार-वर्ष कहते हैं।

प्रश्न 4.
कीमत सूचकांक का क्या उपयोग है?
उत्तर
कीमत सूचकांक कुछ वस्तुओं की कीमतों की माप करता है जिससे उनकी तुलना सम्भव हो जाती

प्रश्न 5.
परिमाणात्मक सूचकांक क्या मापते हैं? उत्तर–परिमाणात्मक सूचकांक उत्पादन की भौतिक मात्रा, निर्माण तथा रोजगार में परिवर्तन को मापते हैं। प्रश्न 6. उत्पार्दन सूचकांक किसका सूचक है?
उत्तर
उत्पादन सूचकांक अर्थव्यवस्था में उत्पादन के स्तर का सूचक होता है।

प्रश्न 7.
एक सरल समूहित कीमत सूचकांक का सूत्र बताइए।
उत्तर
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 2 } } \times 100 [/latex]

प्रश्न 8.
एक भारित समूहित कीमत सूचकांक का सूत्र बताइए।
उत्तर
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 }{ q }_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 2 }{ q }_{ 2 } } \times 100 [/latex]

प्रश्न 9.
मूल्यानुपातों के भारित सूचकांक का सूत्र बताइए।
उत्तर
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { \Sigma W(\cfrac { { P }_{ 1 } }{ { P }_{ 2 } } )\times 100 }{ \Sigma w } [/latex]

प्रश्न 10.
उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है?
उत्तर
यह फुटकर कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है।

प्रश्न 11.
उपभोक्ता कीमत सूचकांक बनाने की क्या उपयोगिता है?
उत्तर
उपभोक्ता कीमत सूचकांक (CPI) मजदूरी समझौता, आय-नीति, कीमत-नीति, किराया नियन्त्रण, कराधान तथा सामान्य आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायक होते हैं।

प्रश्न 12.
थोक कीमत सूचकांक का प्रयोग सामान्यतः किसलिए किया जाता है?
उत्तर
थोक कीमत सूचकांक (WPI) का प्रयोग सामान्य रूप से मुद्रा स्फीति को मापने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 13.
मुद्रा की क्रय शक्ति एवं वास्तविक मजदूरी के परिकलन के लिए किस सूचकांक का प्रया किया जाता है?
उत्तर
उपभोक्ता कीमत सूचकांक।

प्रश्न 14.
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की क्या उपयोगिता है?
उत्तर
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक हमें औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन में परिवर्तन के बारे में परिमाणात्मक अंक प्रदान करता है।

प्रश्न 15.
कृषि उत्पादन सूचकांक का क्या उपयोग है।
उत्तर
कृषि उत्पादन सूचकांक हमें कृषि क्षेत्र के निष्पादन के बारे में बताते हैं।

प्रश्न 16.
सेंसेक्स क्या है?
उत्तर
सेंसेक्स वह सूचक है जो कि भारतीय स्टॉक बाजार में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। इसका आधार-वर्ष 1978-79 है।

प्रश्न 17.
सूचकांकों की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर

  1. सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है।
  2. सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 18.
सूचकांकों के दो लाभ बताइए।
उत्तर

  1. सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए सूचकांकों का प्रयोग किया जाता
  2. सूचकांक वास्तविक आय में होने वाले परिवर्तन का सूचक होता है।

प्रश्न 19.
सूचकांकों की दो सीमाएँ बताइए।
उत्तर

  1. सूचकांके निरपेक्ष परिवर्तनों की मापों की अपेक्षा सापेक्ष परिवर्तनों की ही माप करता है।
  2. विभिन्न सूचकांक अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं।

प्रश्न 20.
फिशर का आदर्श सूचकांक का सूत्र बताइए।
उत्तर
Fisher’s Ideal index
[latex]No.\sqrt { \cfrac { { \Sigma p }_{ 1 }{ q }_{ 0 } }{ \Sigma { p }_{ 0 }{ q }_{ 0 } } \times \cfrac { { \Sigma { p }_{ 1 } }{ q }_{ 1 } }{ \Sigma { p }_{ 0 }{ q }_{ 1 } } } \times 100 [/latex]

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सूचकांकों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर
सूचकांकों की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं

  1. सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है।
  2.  सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त किया जाता है।
  3. इनका प्रयोग ऐसे तथ्यों के परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है, जिन्हें प्रत्यक्ष माप से नहीं मापा जा सकता।
  4. यह एक विशेष प्रकार का माध्य ही है।
  5. सूचकांक आर्थिक पहलू के उच्चावचों को संख्यात्मक रूप में ही माप सकता है।

प्रश्न 2.
सूचकांकों के प्रमुख लाभ (उपयोगिता) बताइए।
उत्तर
सूचकांकों के कुछ महत्त्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैं-

  1. सूचकांकों द्वारा समय-समय पर कीमत स्तर में होने वाले परिवर्तन या मुद्रा के मूल्य की क्रय शक्ति में होने वाले परिवर्तन को मापा जा सकता है।
  2. सूचकांकों की सहायता से समाज में जीवन-स्तर के परिवर्तन का ज्ञान होता है। ये वास्तविक आय में परिवर्तन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
  3. इनकी सहायता से वेतन-भत्तों में परिवर्तन करके वास्तविक आय को स्थिर रखने का प्रयास किया जाता है।
  4. व्यापारी व उत्पादक़ कीमत स्तर के परिवर्तन के अनुसार ही अपने उत्पादन तथा व्यापार की योजनाएँ तैयार करते हैं।
  5. आर्थिक स्थिति को ज्ञान प्राप्त करके ही आर्थिक नीतियों का निर्धारण किया जाता है। “
  6. सूचकांकों के आधार पर ही सरकार मौद्रिक व राजकोषीय नीति का प्रारूप तैयार करती है।

प्रश्न 3.
‘फिशर का सूचकांक एक आदर्श सूचकांक है।’ इस कथन के समर्थन में अपने तर्क दीजिए।
उत्तर
‘फिशर का सूचकांक एक आदर्श सूचकांक है। इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते 
हैं

  1. यह परिवर्तनशील भारों पर आधारित है।
  2. इसमें आधार-वर्ष व चालू वर्ष दोनों की मात्राओं तथा मूल्यों को शामिल किया जाता है।
  3. यह गुणोत्तर माध्य पर आधारित है।
  4. यह ‘समय व्युत्क्रम परीक्षण’ तथा ‘तत्त्व व्युत्क्रम परीक्षण’ दोनों को पूरा करता है।

प्रश्न 4.
सूचकांक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर
उद्देश्य के आधार पर सूचकांकों को दो भागों में बाँटा जा सकता है
1. थोक मूल्य सूचकांक तथा
2. जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक।
1. थोक मूल्य सूचकांक-
ये सूचकांक थोक मूल्यों के परिवर्तनों को प्रकट करने के लिए बनाए 
जाते हैं। इसमें किसी भी सामान्य वर्ष को आधार मानकर किसी भी अन्य चालू अवधि या अवधियों के मूल्यों में परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है। कुछ प्रतिनिधि वस्तुओं को चुनकर उनके थोक मूल्य लिए जाते हैं, आधार-वर्ष के मूल्यों को 100 मानकर चालू वर्ष या वर्षों के मूल्यानुपात (Price Relatives) निकाले जाते हैं तथा उनका माध्य ज्ञात किया जाता है। औसत मूल्यानुपात में परिवर्तन सामान्य मूल्य-स्तर में परिवर्तन को प्रदर्शित करते हैं।

2. जीवन-
निर्वाह व्यय सूचकांक-जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक किसी स्थान विशेष पर वर्ग विशेष के व्यक्तियों के निर्वाह व्यय में होने वाले परिवर्तनों की दिशा व मात्रा को प्रकट करते हैं। अत: इस सूचकांक को बनाने में उस विशिष्ट वर्ग द्वारा प्रयोग की जाने वाली प्रतिनिधि वस्तुओं को लेते हैं तथा उने सही फुटकर मूल्य ज्ञात करते हैं। विभिन्न वस्तुओं को उनके जीवन-निर्वाह में महत्त्व के अनुसार उचित भारांकन भी किया जाता है।

प्रश्न 5.
सूचकांक की रचना करते समय किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर
सूचकांक की रचना करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए

  1. सूचकांक का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।
  2. सूचकांक के लिए मदों का चयन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए ताकि ये उनका प्रतिनिधित्व कर सकें।
  3. आधार-वर्ष एक सामान्य वर्ष होना चाहिए और इसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाना चाहिए।
  4. उद्देश्य के अनुरूप सूत्र को चयन किया जाना चाहिए।
  5. आँकड़ों के संग्रह में उचित सावधानी बरती जानी चाहिए।

प्रश्न 6.
संवेदी सूचकांक (Sensex) क्या है?
उत्तर
संवेदी सूचकांक (Sensex) वह सूचक है जो कि भारतीय स्टॉक बाजार में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। यह मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज संवेदी सूचकांक का संक्षिप्त रूप है। इसका आधार वर्ष 1978-79 है। संवेदी सूचकांक का मान इस अवधि के सन्दर्भ में होता है। इसके अन्तर्गत 30 स्टॉक हैं जो अर्थव्यवस्था .
के 13 क्षेत्रकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। संवेदी सूचकांक का ऊपर चढ़ना यह बताता है कि अर्थव्यवस्था की दशा अच्छी है, बाजार ठीक चल रहा है और निवेशकों के लाभ बढ़ रहे हैं। इसके विपरीत, सूचकांक का नीचे आना शेयर धारकों की हानि का सबब बनता है।

प्रश्न 7.
फिशर का आदर्श सूचकांक ‘समय उत्क्राम्यता परीक्षण पर कैसे खरा उतरता है?
उत्तर
समय उत्क्राम्यता परीक्षण के अनुसार यदि आधार-वर्ष के आधार पर प्रचलित वर्ष का सूचकांक (Poi) निकाला जाए और फिर प्रचलित वर्ष के आधार पर प्रचलित वर्ष का सूचकांक (Po) ज्ञात किया जाए तो ये दोनों एक-दूसरे के व्युत्क्रम होंगे अर्थात् इन दोनों का गुणनफल 1 होगा। सूत्रानुसार,
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 19

प्रश्न 8.
फिशर का आदर्श सूचकांक ‘तत्त्व उत्क्राम्यता परीक्षण पर कैसे खरा उतरता है?
उत्तर
तत्त्व क्राम्यता परीक्षण-इस परीक्षण के अनुसार, यदि ‘मूल्य’ के स्थान पर ‘मात्रा’ और ‘मात्रा के स्थान पर ‘मूल्य’ रखकर सूचकांक (q01) तैयार किया जाए तो उसका और मूल्य सूचकांक poi का गुणनफल चालू वर्ष के कुल मूल्य (Σp1q1) और आधार-वर्ष के कुल मूल्य (Σp0q0) के अनुपात के बराबर होना चाहिए।
सूत्रानुसार,
UP Board Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics 20

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सूचकांक क्या है? इनकी उपयोगिता तथा सीमाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर
सूचकांक : अर्थ एवं परिभाषाएँ
समाज में वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में सदैव परिवर्तन होते रहते हैं। वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन होने के कारण मुद्रा का मूल्य भी परिवर्तित होता रहता है, जिससे समाज का प्रत्येक वर्ग प्रभावित होता है, फलस्वरूप कीमत-स्तर, उपभोग, जनसंख्या, बचत, निवेश, राष्ट्रीय आय, आयात-निर्यात, मजदूरी, ब्याज, किराया व लगान आदि चरों में सदैव परिवर्तन होते रहते हैं। अत: मुद्रा-मूल्य में हुए परिवर्तनों का माप करना व्यावहारिक दृष्टि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण व उपयोगी है। इन परिवर्तनों को निरपेक्ष रूप से मापने का कोई साधन नहीं है; अतः इनको सापेक्ष माप लिया जाता है। सूचकांक विशिष्ट प्रकार के सापेक्ष माप होते हैं, जिनके आधार पर समंकों की उचित एवं स्पष्ट तुलना की जा सकती है।

सूचकांकों की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं

  1. चैण्डलर के अनुसार-“कीमत का सूचकांक आधार-वर्ष की तुलना में किसी अन्य समय में कीमतों की औसत ऊँचाई को प्रकट करने वाली संख्या है।”
  2. डॉ० बाउले के शब्दों में- “सूचकांक की श्रेणी एक ऐसी श्रेणी होती है, जो अपने झुकाव तथा उच्चावचनों द्वारा जिस परिमाण से संबंधित है, में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करती है।”
  3. किनले के शब्दों में- “सूचकांक वह अंक है, जो किसी पूर्व निश्चित तिथि को चुनी वस्तुओं या | वस्तु-समूह के मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे प्रामाणिक मानते हुए किसी बाद की तिथि को | उन्हीं वस्तुओं के मूल्य से तुलना करते हैं।”
  4. क्रॉक्सटन व काउडेन के अनुसार- “सूचकांक, संबंधित चर-मूल्यों के आकार में होने वाले |. अंतरों की माप करने के साधन हैं।”
  5. होरेस सेक्राइस्ट के शब्दों में- “सूचकांक अंकों की एक ऐसी श्रेणी है, जिसके द्वारा किसी भी तथ्य के परिमाण में होने वाले परिवर्तनों का समय या स्थान पर मापन किया जा सकता है।”

सूचकांकों की विशेषताएँ
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर सूचकांकों की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं-

  1. सूचकांक मुद्रा के मूल्य का निरपेक्ष माप न होकर सापेक्ष माप है। ”
  2. सूचकांकों को प्रतिशतों में व्यक्त किया जाता है।
  3. इनका प्रयोग ऐसे तथ्यों के परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है, जिन्हें प्रत्यक्ष माप से नहीं मापा जा सकता।
  4. यह एक विशेष प्रकार का माध्य ही है।
  5. सूचकांक आर्थिक पहलू के उच्चावचनों को संख्यात्मक रूप में ही माप सकता है।

सूचकांक की उपयोगिता 

सूचकांकों की सार्वभौमिक उपयोगिता है। ये व्यापारी, अर्थशास्त्री व राजनीतिज्ञों का पथ-प्रदर्शन करते हैं। और उन्हें भावी प्रवृत्तियों का अनुमान लगाने में सहायता करते हैं। कीमत, जीवन-निर्वाह, औद्योगिक उत्पादन, खाद्यान्न उत्पादन, निर्यात, आयात, लाभ, मुद्रा-पूर्ति, जनसंख्या, राष्ट्रीय आय, बजट घाटा अथवा आधिक्य आदि से संबंधित सूचकांक विभिन्न घटनाओं का सापेक्षिक माप प्रस्तुत करते हैं, इसीलिए सूचकांक ‘आर्थिक वायुमापक यंत्र’ (Economic Barometers) कहलाते हैं। व्यावहारिक रूप में सूचकांकों से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं

  1. मुद्रा के मूल्य की माप- सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए सूचकांकों का प्रयोग किया जाता है। सामान्य मूल्य-स्तर में होने वाले परिवर्तन से मुद्रा की क्रय-शक्ति में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
  2. आर्थिक स्थिति की तुलना—रहन-सहन संबंधी सूचकांकों की तुलना करके समाज के किसी | वर्ग के रहन-सहने में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
  3. मजदूरी निर्धारण में उपयोगिता– सूचकांक वास्तविक आय में होने वाले परिवर्तन का सूचक होता है। अतः मजदूरी व वेतन के निर्धारण में इनसे बहुत अधिक सहायता मिलती है। ”
  4. ऋणों के न्यायपूर्ण भुगतान का आधार- सूचकांकों की सहायता से मूल्य-स्तर में परिवर्तन का अनुमान लगाया जा सकता है और इसी आधार पर ऋणों की मात्रा में परिवर्तन करके उनका न्यायपूर्ण भुगतान किया जा सकता है। इससे किसी भी पक्ष को असंगत लाभ या हानि नहीं होती।
  5. अंतर्राष्ट्रीय तुलना करने में सहायक- सूचकांकों की सहायता से विभिन्न प्रकार की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ करना संभव है। विभिन्न देशों की मुद्राओं की क्रय-शक्ति में क्या परिवर्तन जहुए हैं, इसकी जानकारी व तुलना सूचकांकों की सहायता से की जा सकती है।
  6. देश के आर्थिक विकास का अनुमान- उत्पादन सुचकांक देश में उत्पादन संबंधी जानकारी देते हैं, जिनके आधार पर सरकार अपनी औद्योगिक नीति का निर्माण करती हैं सूचकांकों की सहायता से ही विदेशी व्यापार की स्थिति व देश में पूँजी व विनियोग की मात्रा को ज्ञान होता है।
  7. भावी प्रवृत्तियों का अनुमान- सूचकॉक न केवल वर्तमान परिवर्तनों को बताते हैं बल्कि इनकी सहायता से भविष्य के संबंध में भी महत्त्वपूर्ण अनुमान लगाए जा सकते हैं।
  8. जटिल तथ्यों को सरल बनाना– सूचकांकों की सहायता से ऐसे जटिल तथ्यों में होने वाले परिवर्तनों की माप भी की जा सकती है, जिनकी माप किसी अन्य साधन से संभव नहीं है।
  9. नियंत्रण एवं नीतियाँ- सूचकांकों के आधार पर ही सरकार आर्थिक नियोजन व नियंत्रण संबंधी नीतियाँ बनाती है। 

सूचकांकों की सीमाएँ

सबसे अधिक उपयोगी सांख्यिकीय विधि होते हुए भी सूचकांक परिवर्तनों की एक अपूर्ण माप है। इसकी प्रमुख सीमाएँ निम्मलिखित हैं

  1. सापेक्ष परिवर्तनों की अनुमानित माप- सूचकांक निरपेक्ष परिवर्तनों की मापों की अपेक्षा सापेक्ष परिवर्तनों की ही माप करता है और वह भी मात्र अनुमान के रूप में। वास्तव में, सूचकांक केवल सामान्य प्रवृत्तियों की ओर ही संकेत करते हैं।
  2. शुद्धता की कमी- सूचकांक बनाते समय समूह की प्रत्येक इकाई को शामिल नहीं किया जाता है। वरन् इसके लिए कुछ प्रतिनिधि इकाइयों का ही चयन किया जाता है। इससे प्रतिदर्श अपर्याप्त और अप्रतिनिधि परिणामों की सत्यता कम हो जाती है।
  3. उद्देश्य में अंतर- विभिन्न सूचकांक अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं। एक सूचकांक, जो एक उद्देश्य के लिए उपयुक्त हो सकता है, अन्य उद्देश्यों के लिए अनुपयुक्त हो सकता है।कोई भी सूचकांक सार्व-उद्देशीय नहीं होता।
  4. अंतर्राष्ट्रीय तुलना कठिन- सूचकांकों की सहायता से दो देशों के संबंध में किसी प्रकार की तुलना करना काफी कठिन होता है क्योंकि सूचकांकों की निर्माण-विधि, उनका आधार-वर्ष तथाप्रतिनिधि वस्तुओं की सूची विभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न होती है।
  5. विभिन्न समय में तुलना करना कठिन– लोगों के द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं में | परिवर्तन होता रहता है। अतः सूचकांकों की सहायता से विभिन्न समयों में तुलना करना संभव नहींहोता है।
  6. भार निर्धारण अवैज्ञानिक- भारित सूचकांकों में भार निर्धारण मनमाना तथा अवैज्ञानिक होता है। भिन्न-भिन्न वर्षों में एक ही वस्तु के भार बदल जाते हैं, जिसके कारण परिणामों में अंतर आ जाता है।

प्रश्न 2.
सूचकांक रचना संबंधी समस्याओं का विवेचन कीजिए।
उत्तर
सूचकांक रचना संबंधी प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं
1. सूचकांक का उद्देश्य,
2. पदों या वस्तुओं का चुनाव,
3. मूल्य उद्धरण,
4. आधार-वर्ष का चुनाव और सूचकांकों का परिगणन,
5. माध्य का चुनाव,
6. भारांकन विधि।।
1. सूचकांक का उद्देश्य
सूचकांक रचना से पूर्व उसके उद्देश्य को निश्चित कर लेना चाहिए क्योंकि वस्तुओं के चुनाव, उनके मूल्य उद्धरण तथा भारांकन आदि का निर्धारण सूचकांक के उद्देश्य पर ही निर्भर करता है। उदाहरण के लिए एक सूक्ष्मग्राही मूल्य सूचकांक में केवल उन वस्तुओं का समावेश किया जाना चाहिए, जिनके मूल्यों में तेजी से परिवर्तन होते रहते हैं। इसके विपरीत, सामान्य उद्देश्य वाले मूल्य सूचकांक में अधिकाधिक वस्तुओं का समावेश किया जाना चाहिए ताकि वह समाज में सभी वर्गों का सही-सही प्रतिनिधित्व कर सके।

2. पदों या वस्तुओं का चुनाव
चूंकि किसी भी एक सूचकांक में समस्त पदों या वस्तुओं का चुना जाना संभव नहीं है; अत: कुछ प्रतिनिधि वस्तुओं का चुनाव कर लिया जाना चाहिए। इस संबंध में उठने वाले स्वाभाविक प्रश्न इस प्रकार हैं
(अ) कौन-सी वस्तुएँ चुनी जाएँ- चुनी जाने वाली वस्तुओं में निम्नलिखित गुण होने चाहिए|

  1.  वस्तुएँ ऐसी होनी चाहिए, जो अपने वर्ग का सच्चे अर्थों में प्रतिनिधित्व कर सकें।
  2. वस्तुएँ ऐसी होनी चाहिए, जो सरलता से पहचानी जा सकें तथा जिनका स्पष्ट रूप से वर्णन किया | जा सके।
  3. चुनी हुई वस्तुएँ प्रमापित व एकरूप होनी चाहिए।
  4. वस्तुएँ लोकप्रिय होनी चाहिए।

(ब) वस्तुओं की संख्या कितनी हो-सामान्यत:
सूचकांक में जितनी अधिक वस्तुएँ सम्मिलित की जाएँगी, वह उतना ही अधिक शुद्ध व विश्वसनीय माना जाएगा, परंतु बहुत अधिक वस्तुओं को सूचकांक में सम्मिलित करना भी संभव नहीं है। वास्तव में, संख्या का निर्धारण सूचकांक के उद्देश्य, उपलब्ध समय, धन तथा वांछित शुद्धता पर अधिक निर्भर करता है। सामान्य परम्परा यह है कि सूचकांक में 25 से 50 वस्तुओं तक का चयन किया जाता है।

(स) वस्तुएँ किस किस्म की हों
सूचकांकों में ऐसी किस्म की वस्तुएँ शामिल की जानी चाहिए, जो सबसे अधिक प्रचलित हों; प्रमापित हों तथा गुणों में स्थिर हों।

(द) वस्तुओं का किस प्रकार वर्गीकरण किया जाए-
चुनी हुई वस्तुओं को सजातीयता के आधार पर कुछ निश्चित वर्गों और उपवर्गों में विभाजित कर देना चाहिए, जिससे सम्पूर्ण मूल्य सूचकांक के साथ-साथ वर्ग सूचकांक भी ज्ञात हो जाए।

3. मूल्य उद्धरण
मूल्य उद्धरण लेते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए
(अ) थोक या फुटकर मूल्य सामान्यतः
मूल्य सूचकांकों की रचना में वस्तुओं के थोक मूल्य ही लिए जाते हैं क्योंकि वे फुटकर मूल्यों की अपेक्षा कम परिवर्तनशील होते हैं, स्थान-स्थान के आधार पर उनमें कम अंतर होते हैं और उन्हें ज्ञात करना भी सरल होता है।

(ब) द्रव्य-मूल्य अथवा वस्तु-मूल्य-
सूचकांकों के लिए मूल्य उद्धरण द्रव्य के रूप में ही व्यक्त किए। जाने चाहिए, वस्तुओं के परिमाण के रूप में नहीं। यदि मूल्य उद्धरण वस्तु-मूल्य के रूप में हों तो उन्हें पहले द्रव्य-मूल्यों के रूप में बदल लेना चाहिए।

(स) मूल्य उद्धरणों की संख्या व आवृत्ति– सूचकांक निर्माण से पूर्व यह भी तय कर लेना चाहिए,कि मूल्य कितनी बार और किस अंतराल में लिए जाने हैं। मूल्य उद्धरणों की आवृत्ति सूचकांक के उद्देश्य, अवधि, उपलब्ध साधन व शुद्धता के स्तर पर निर्भर होती है।

(द) मूल्य उद्धरण प्राप्ति के स्थान व साधन- मूल्य उन मण्डियों से प्राप्त किए जाने चाहिए, जहाँ पर वस्तुओं का बड़ी मात्रा में क्रय-विक्रय होता हो लेकिन जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक बनाने के लिए उसी स्थान के मूल्यों को प्राप्त करना चाहिए। मूल्य उद्धरण के स्रोत निष्पक्ष, विश्वसनीय तथा उपयुक्त होने चाहिए।

4. आधार-वर्ष का चुनाव और सूचकांकों का परिगणन
आधार-वर्ष से हमारा आशय उस वर्ष विशेष से होता है, जिसको आधार मानकर हम आर्थिक क्रियाकलापों की तुलना करते हैं। अतः आधार-वर्ष का चुनाव अत्यंत सतर्कतापूर्वक करना चाहिए। यथासंभव आधार-वर्ष

  1. सामान्य होना चाहिए,
  2. वास्तविक होना चाहिए,
  3. उस काल की समस्त सूचनाएँ उपलब्ध होनी चाहिए तथा
  4. वह वर्ष अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। आधार वर्ष निश्चित करने की निम्नलिखित दो रीतियाँ हैं

(अ) स्थिर आधार रीति,
(ब) श्रृंखला आधार रीति।
(अ) स्थिर आधार रीति–इस रीति के अनुसार सर्वप्रथम एक सामान्य वर्ष चुन लिया जाता है और फिर अन्य वर्षों के मूल्य-स्तर की तुलना उस स्थिर वर्ष के आधार पर की जाती है। स्थिर आधार-वर्षे दो प्रकार का हो सकता है

  1. एकवर्षीय आधार-एकवर्षीय आधार में जो वर्ष आधार-वर्ष के रूप में चुना जाता है, अन्ये वर्षों के मूल्यों की तुलना उस स्थिर वर्ष के आधार पर की जाती है।
  2. बहुवर्षीय मध्य आधार-कभी-कभी कोई अंक वर्ष ऐसा नहीं होता, जो सामान्य हो और जिसे स्थिर आधार माना जा सके। ऐसी दशा में अनेक ऐसे वर्ष छाँट लिए जाते हैं, जिनमें कम उतार-चढ़ाव हुए हों और फिर उन वर्षों के मूल्य-स्तर का समान्तर माध्य निकालकर उन माध्य मूल्यों को आधार माना जाता है।

आधार- वर्ष को निश्चित कर लेने के उपरांत चालू वर्ष के सूचकांक तैयार करने के लिए मूल्यानुपात निकाले जाते हैं। इसके लिए आधार-वर्ष के मूल्य को 100 मानकर, चालू वर्ष के मूल्यों का निकाला गया प्रतिशत मूल्यानुपात’ कहलाता है।
सूत्रानुसार,
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 5. माध्य का चुनाव
सूचकांक विभिन्न वस्तुओं के मूल्यानुपातों का माध्य है। अतः यह निर्धारित करना आवश्यक है कि सूचकांक रचना में किस माध्ये का प्रयोग किया जाए। व्यवहार में माध्यिका समान्तर माध्य अथवा गुणोत्तर माध्य में से किसी एक का प्रयोग करना उपयुक्त रहता है।

6. भारांकन विधि
व्यवहार में भिन्न-भिन्न वस्तुओं का भिन्न-भिन्न सापेक्षिक महत्त्व होता है। उदाहरण के लिए उपभोग के क्षेत्र में लोहे की तुलना में नमक का महत्त्व अधिक है। इसी प्रकार उत्पादन के क्षेत्र में टी०वी० की तुलना में कपड़े का महत्त्व अधिक है। अत: विभिन्न वस्तुओं अथवा पदों के तुलनात्मक महत्त्व को प्रकट करने के लिए किसी सुनिश्चित आधार पर भारों का प्रयोग किया जाता है। ऐसे सूचकांक ‘भारित सूचकांक कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
साधारण सूचकांक रचना की

  1. सरल समूहीकरण विधि व
  2. सरल मूल्य अनुपात माध्य विधि को उदाहरणों की सहायता से समझाइए।

उत्तर
साधारण सूचकांक बनाने की दो मुख्य विधियाँ हैं|
1. सरल समूहीकरण विधि (Simple Aggregative Method),
2. सरल मूल्य अनुपात विधि (Simple Average of Price Relative Method)। 1. सरल समूहीकरण विधि-इस विधि में प्रचलित वर्ष के विभिन्न वस्तुओं के मूल्यों के जोड़ को आधार वर्ष के जोड़ से भाग देकर 100 से गुणा कर दिया जाता है। सूत्र रूप में,
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { \Sigma { p }_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 0 } } \times 100 [/latex]

यहाँ, P01 = वर्तमान वर्ष का मूल्य सूचकांक |
∑P1 = वर्तमान वर्ष की विभिन्न वस्तुओं के मूल्यों का योग
P0= आधारे-वर्ष की उन्हीं वस्तुओं के मूल्यों का योग
उदाहरण
1. निम्नांकित आँकड़ों से सरल समूहीकरण विधि द्वारा 2011 को आधार-वर्ष मानकर वर्ष 2015 के मूल्य सूचकांक तैयार कीजिए।
वस्तुएँ :
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यह विधि अत्यंत सरल है किंतु इस विधि का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब सभी वस्तुओं के मूल्य एक ही इकाई के रूप में व्यक्त किए गए हों। अन्यथा निकाले गए निष्कर्ष भ्रामक होंगे।

2. सरल मूल्य अनुपात माध्य विधि— इस विधि के अनुसार सबसे पहले प्रत्येक वस्तु का मूल्य अनुपात निकाला जाता है। किसी वस्तु का मूल्य अनुपात चालू वर्ष तथा आधार-वर्ष की कीमत का प्रतिशत अनुपात है। इसमें सभी वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता अपितु केवल उन्हीं वस्तुओं का न्यादर्श लिया जाता है जो समग्र (Variance) की विशिष्टता को दर्शाते हैं।
स्थिर आधार के मूल्य को 100 मानकर निकाला गया प्रचलित वर्ष का प्रतिशत ही मूल्यानुपात कहलाता है। अतः
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { { p }_{ 1 } }{ { p }_{ 0 } } \times 100 [/latex]
यहाँ, P01= मूल्य अनुपात
P1 = वर्तमान वर्ष की कीमत
P0= आधार-वर्ष की कीमत
निम्नलिखित सूत्र की सहायता से वर्तमान वर्ष का कीमत सूचकांक ज्ञात किया जा सकता है-
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { \Sigma (\cfrac { { p }_{ 1 } }{ { p }_{ 2 } } \times 100) }{ N } [/latex]
यहाँ, R x 100 = मूल्य अनुपात
N = वस्तुओं की संख्या
P1 = चालू वर्ष के मूल्य
P0= आधार-वर्ष के मूल्य
उदाहरण
1.निम्नांकित आँकड़ों की सहायता से सरल मूल्यानुपात माध्य विधि द्वारा 2011 को आधार-वर्ष मानते हुए 2015 के लिए मूल्य सूचकांक ज्ञात कीजिए
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प्रश्न 4.
भारित सूचकांक से क्या आशय है? भारित सूचकांक के निर्माण की विधियों को उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर

भारित सूचकांक का अर्थ

भारित सूचकांक वे सूचकांक हैं जिनमें श्रृंखला के विभिन्न मदों को उनके सापेक्षिक महत्त्व के आधार पर विभिन्न भार दिए जाते हैं। इसलिए भारित सूचकांक विभिन्न वस्तुओं की कीमतों का भारित औसत है। उदाहरण-मानी एक उपभोक्ता खाद्यान्नों पर कपड़े की तुलना में तीन गुणा अधिक व्यय करता है तो कपड़े को 1 व खाद्यान्नों को 3 भार दिया जाएगा।

भारित सूचकांक के निर्माण की विधियाँ

भारित सूचकांक के निर्माण की दो विधियाँ हैं
1. भारित औसत मूल्य अनुपात माध्य विधि
2. भारित समूही विधि ।

1. भारित औसत मूल्य अनुपात माध्य विधि— इस विधि द्वारा भारित सूचकांक को ज्ञात करने के लिए, विभिन्न वस्तुओं के मूल्य अनुपातों को उनके भार से गुणा करके गुणनफल के योग को भार के योग से भाग दे दिया जाता है। वस्तुओं को भार उनकी मात्रा के आधार पर दिया जाता है। सूत्र रूप में,
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { \Sigma RW }{ \Sigma W } [/latex]

यहाँ,
P01 = आधार-वर्ष के मूल्यों के आधार पर वर्तमान वर्ष के मूल्यों का सूचकांक
w = भार
R = मूल्य अनुपात

उदाहरण 1. निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से मूल्य अनुपात विधि से 2011 को आधार-वर्ष मानकर 2016 का भारित सूचकांक ज्ञात करेंवस्तुएँ
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2. भारित समूही विधि— इस विधि में विभिन्न वस्तुओं को उनकी खरीदी हुई मात्राओं के आधार पर भार प्रदान किया जाता है। विभिन्न विद्वानों ने सूचकांकों का निर्माण करने के लिए भार देने की अलग-अलग विधियों का वर्णन किया है। कुछ प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं|
(i) लास्पीयर की विधि (Laspeyre’s Method)-लास्पीयर के आधार-वर्ष की मात्रा (q0) के आधार पर भार प्रदान किए हैं। सूत्रानुसार,
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 }{ q }_{ 0 } }{ { \Sigma p }_{ 0}{ q }_{ 0 } } \times 100 [/latex]

(ii) पाश्चे की विधि (Paasche’s Method)- पाश्चे ने चालू वर्ष की मात्रा (q1) के आधार पर भार प्रदान किए हैं। सूत्रानुसार,
[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 }{ q }_{ 1 } }{ { \Sigma p }_{ 0}{ q }_{ 1 } } \times 100 [/latex]

(iii) फिशर की विधि (Fisher’s Method)- फिशर ने आधार-वर्ष तथा चालू वर्ष दोनों की मात्राओं (q0 व q1) के आधार पर भार प्रदान किए हैं। सूत्रानुसार,
p01 [latex]\sqrt { \cfrac { { \Sigma p }_{ 1 }{ q }_{ 0 } }{ \Sigma { p }_{ 0 }{ q }_{ 0 } } \times \cfrac { { \Sigma { p }_{ 1 } }{ q }_{ 1 } }{ \Sigma { p }_{ 0 }{ q }_{ 1 } } } \times 100 [/latex]

उदाहरण-2011 को आधार-वर्ष मानते हुए निम्नांकित आँकड़ों के कीमत सूचकांक वर्ष 2016 ज्ञात कीजिए-
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प्रश्न 5.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अथवा निर्वाह व्यय सूचकांक से क्या आशय है? इसके निर्माण की विधि उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अथवा निर्वाह व्यय सूचकांक का अर्थ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वह सूचकांक है जो विशिष्ट वर्ग के उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में आधार-वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में होने वाले परिवर्तन को मापता है। इनका निर्माण विभिन्न स्थानों में रहने वाले उपभोकॅता वर्गों पर फुटकर मूल्यों में होने वाले औसत परिवर्तनों के प्रभावों को मापने के लिए किया जाता है। चूंकि ये किसी वर्ग विशेष के लोगों की निर्वाह लागत में होने वाले परिवर्तन की दिशा तथा मात्रा को प्रकट करते हैं, इसलिए इन्हें निर्वाह व्यय सूचकांक कहा जाता है। भारत में मुख्यत: निम्नलिखित समूहों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बनाए जाते हैं

  • औद्योगिक श्रमिक,
  • शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारी तथा
  • कृषि श्रमिक

जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांकों की रचना

जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांकों की रचना में निम्नलिखित प्रमुख कार्य करने पड़ते हैं

1. सजातीय वर्ग का चुनाव- सर्वप्रथम यह निश्चित किया जाता है कि सूचकांक किस विशेष वर्ग के लिए बनाए जाते हैं। वर्ग सजातीय होना चाहिए। सजातीय वर्ग का चुनाव मुख्यत: निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है-

  • आय की समानता,
  • पेशे की समानता,
  • स्थान की समानता।

2. वस्तुओं का चुनाव- विभिन्न वर्गों के लोग विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का प्रयोग करते हैं। अत:
जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक बनाने के लिए वस्तुएँ वही होनी चाहिए, जिनका उपभोग उस वर्ग के लोग करते हैं, जिनके लिए जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक बनाना है। वस्तुओं को मुख्यत: निम्नलिखित वर्गों में बाँट लेते हैं

  • खाद्य-पदार्थ,
  • वस्त्र,
  • ईंधन तथा प्रकाश,
  • मकान किराया,
  • अन्य।

3. मूल्य उद्धरण– प्रायः चुनी हुई वस्तुओं के फुटकर मूल्य प्राप्त करने पड़ते हैं। ये मूल्य उस स्थान के बाजार मूल्य होने चाहिए, जहाँ से वह वर्ग उन वस्तुओं को खरीदता है। चूंकि स्थान-स्थान पर फुटकर मूल्यों में बहुत अंतर होता है; अत; उन्हें उस स्थान की उच्चकोटि की पत्रिकाओं, सरकारी एवं अर्द्ध-सरकारी प्रकाशनों, व्यापार परिषदों अथवा प्रतिष्ठित व्यापारियों की सहायता से प्राप्त करना चाहिए।

4. भारांकन- विभिन्न वस्तुओं को उनके महत्त्व के अनुसार भारांकित करना चाहिए। वास्तव में,सभी वस्तुएँ बराबर महत्त्व की नहीं होतीं। भार निम्नलिखित दो प्रकारों में से किसी एक प्रकार से दिया जा सकता है-
(अ) समूही आय विधि- भार देने की इस रीति की प्रमुख प्रक्रियाएँ निम्नलिखित हैं|

  1. प्रत्येक वस्तु से चालू वर्ष के मूल्य में आधार-वर्ष की मात्रा का गुणा करते हैं।
    (p1 q0
    )
  2. प्रत्येक वस्तु के आधार-वर्ष के मूल्य में आधार-वर्ष की मात्रा का गुणा करते हैं।
    (p0 q0)
  3. दोनों वर्षों के गुणनफलों को अलग-अलग जोड़ लेते हैं।
  4. चालू वर्ष के गुणनफलों के योग में आधार-वर्ष के गुणनफलों के योग का भाग दे देते हैं।
  5. प्राप्त भजनफल में 100 का गुणा कर देते हैं।
    सूत्रानुसार,

[latex]{ p }_{ 01 }=\cfrac { { \Sigma }p_{ 1 }{ q }_{ 0 } }{ { \Sigma p }_{ 0}{ q }_{ 0 } } \times 100 [/latex]

उदाहरण
1. प्रदत्त आँकड़ों की सहायता से 2011 को आधार-वर्ष मानकर 2016 के लिए जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक (Cost of Living Indexed Number) तैयार कीजिए ।
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हल
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(ब) पारिवारिक बजट या भारित मूल्यानुपात विधि-इस विधि के अनुसार भार देने की प्रक्रिया निम्नलिखित है
(i) प्रत्येक वस्तु के आधार- वर्ष के मूल्य और आधार-वर्ष में उपभोग की गई मात्रा का गुणा करते हैं।
[latex](\cfrac { { p }_{ 1 } }{ { p }_{ 0 } } \times 100) [/latex]
(ii) प्रत्येक वस्तु के आधार-वर्ष के मूल्य और आधार-वर्ष में उपभोग की गई मात्रा का गुणा करते हैं।
(p0 q0)
(iii) प्रत्येक मूल्यानुपात को उसके भार से गुणा करते हैं। (RW)।
(iv) इन गुणनफलों का योग कर लेते हैं (ΣRW)।
(v) भारों का योग निकाल लेते हैं (Σw)।
(vi) गुणनफलों के योग में भारों के योग का भाग दे देते हैं।
[latex](\cfrac { \Sigma RW }{ \Sigma W } )[/latex]
प्राप्त भजनफल सूचकांक होता है। सूत्र रूप में,
Index No.[latex]\cfrac { \Sigma RW }{ \Sigma W } [/latex]

उदाहरण
2.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से 2011 को आधार-वर्ष मानकर 2015 और 2016 के लिए जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक तैयार कीजिए
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प्रश्न 6.
औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक क्या है? इसकी निर्माण विधि समझाइए।
उत्तर-

औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक का अर्थ

औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक एक देश में किसी आधार-वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में होने वाली वृद्धि या कमी का माप करता है। इनकी सहायता से हम औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में होने वाले परिवर्तनों को मापते हैं, मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों को नहीं।

औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक की रचना

औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक की रचना निम्नलिखित चरणों में की जाती है
1. उद्योगों को समान्यतया तीन वर्गों में बाँट लिया जाता है
(i) खनन,
(ii) विनिर्माण तथा
(iii) विद्युत।
2. उत्पादन संबंधी आँकड़े मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर एकत्र कर लिए जाते हैं।
3. विभिन्न वर्गों को उपयुक्त भार दिया जाता है। भारत में वर्तमान में इस प्रकार भार दिए गए हैं
(i) खनन = 10.47;
(ii) विनिर्माण = 79.36 तथा
(iii) विद्युत = 10.17
4. निम्नांकित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
[latex]IP=\left[ \cfrac { \Sigma (\cfrac { { q }_{ 1 } }{ { q }_{ 2 } } )W }{ \Sigma w } \right] [/latex]
यहाँ, IP = औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक |
q1 = चालू वर्ष में उत्पादन का स्तर ।
q0= आधार-वर्ष में उत्पादन का स्तर
W = भार।
उदाहरण-निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक ज्ञात कीजिए
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हल
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