UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 17 सामाजिक विषमताओं तथा विछेदनों का निराकरण

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Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 17
Chapter Name सामाजिक विषमताओं तथा विछेदनों का निराकरण
Number of Questions Solved 22
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 17 सामाजिक विषमताओं तथा विछेदनों का निराकरण

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
विषमता को आशय है।
(a) जीवन स्तर एवं जीवन-शैली में मिन्नता
(b) शिक्षा में अन्तर
(c) आयु में असमानता
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) जीवन-शर एवं जीवन-शैली में भिन्नता

प्रश्न 2.
सामाजिक विषमता की उत्पत्ति के विषय में प्रचलित व्याख्याओं में 
शामिल हैं।
(a) प्राकृतिक विभेद
(b) शम्न विभाजन एवं वर्ग निर्माण
(c) प्रकार्यात्मक आवश्यकता
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन विषमता के कारणों में सम्मिलित नहीं है?
(a) अर्जित आय
(b) व्यवसाय
(c) जन्म, जाति एवं प्रजाति
(d) बटाईदार
उत्तर:
(d) बटाईदार

प्रश्न 4.
भारत में किस तरह की समाज्ञ यवस्था पाई जाती है?
(a) मुली समज व्यवस्था
(b) द समाज व्यवस्था
(c) अर्ब बुली समाज व्यवस्था
(d) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(b) बन्द अमात्र ब्यवस्था

प्रश्न 5,
समाज विछेदन का तात्पर्य हैं।
(a) सन्या दूट जाना
(b) सम्बन्धों में अलगाव
(c) ” और ” दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों

प्रश्न 6.
सामाजिक विजेदन के कारणों में सम्मिलित हैं
(a) जातिवाद
(b) जनसंख्या वृमि
(c) सामाजिक कुरीतियों
(d) में सनी
उत्तर:
(d) ये सभी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
विषमता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विषमता का तात्पर्य एक समाज के लोगों के जीवन स्तर तथा जीवन-शैली 
को भिताओं में है।

प्रश्न 2. विषमता की उत्पत्ति को लेकर कितने मत प्रचलित हैं?
उत्तर:
विषमता की उत्पत्ति को लेकर प्रमुख रूप से दो प्रकार के मत प्रचलित हैं।

प्रश्न 3.
समाज में सामाजिक विषमता कैसे उत्पन्न होती है? (2018)
अक्षा सामाजिक विषमता के दो कारणों को लिखिए।
उत्तर:
सामाजिक विषमता उत्पन्न होने के दो मुख्य कारण इस प्रकार हैं।

  • अर्जित आय
  • व्यवसाय

प्रश्न 4.
भारत किस तरह की समाज व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत 
करता है?
उत्तर:
भारत परम्परावादी खेतिहर समाज का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ जाति के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि सुधार होने तक कृषि व्यवस्था में छः स्तर देखने को मिलते हैं।

  • गैर-खेतिहर भूस्वामी
  • गैर खेतिहर पट्टेदार
  • खेतिहर भूस्वामी
  • खेतिहर रैय्यत
  • बटाईदार
  • भूमिहीन खेतिहर मजदूर

प्रश्न 5.
सामाजिक विछेदन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
सामाजिक विच्छेदन दो प्रकार के होते हैं, जो निम्नलिखित है।

  • भक्तिगत विच्छेदन
  • सामाजिक विच्छेदन

प्रश्न 6.
सामाजिक विच्छेदन के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
सामाजिक विछेदन के दो कारण निम्नलिखित हैं।

  • आतिवाद
  • जनसंख्या वृद्धि

प्रश्न 7.
सामाजिक विषमता एवं विच्छेदन को दूर करने के लिए किन्हीं दो पाय को बताए।
उत्तर:
समाज में विषमता एवं विच्छेदन को दूर करने के उपाय हैं।

  • पूंजी एवं आय का पुनर्वितरण
  • आधुनिकीकरण

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
सामाजिक विषमता का क्या अर्थ है: समझाए।
उत्तर:
सामाजिक विषमता से आशय एक समाज के लोगों के जीवन स्तर तथा जीवन-शैली को भिन्नताओं से है, जो सामाजिक परिस्थितियों में इनकी विषम स्थिति में रहने के कारण होती हैं। उदाहरण के रूप में पूरयामो तथा भूमिहीन श्रमिक या ब्राह्मण व इरिजन को सामाजिक परिस्थितियों में पाए जाने वाले अनार के कारण उन्हें प्राप्त जीवन-स्तरों तथा जोवन-शैलियों में भी अन्तर देखने को मिलता है। सामाजिक विषमता की उत्पत्ति के विषय में निम्न माएँ प्रनित हैं।

  • प्राकृतिक विभेद
  • व्यझिागत सम्पत्ति
  • श्रम विभाजन एवं वर्ग निर्माण
  • युद्ध एवं विजय
  • प्रकार्यात्मक आवश्यकता
  • अभिमत एवं शक्ति

विषमता की उत्पत्ति को लेकर प्रमुख रूप से दो प्रकार के मत प्रतित हैं। एक मत के अनुसार विषमता एक ऐतिहासिक तथ्य है, जो समय के साथ-साथ अपने आप समाप्त हो जाएगी, लेकिन सो मतानुसार विषमता को समाज में समाप्त नहीं किया जा सकता, यह शाश्वत र निरन्तर बेनी रहेगी।

प्रश्न 2.
विषमता के कारणों में शिक्षा किस प्रकार उत्तरदायी है? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
शिक्षा सम्बन्धी अन्तर विषमता को जन्म देते हैं। जहाँ सिद्धान्त रूप में शिक्षा की समान मुविधा की बात की जाती है, वहीं व्यवहुप्त रूप में अनेक अन्तर देखने को मिलते हैं जहाँ मापन सम्पन्न लोगों के बच्चों को निजी रसों में पढ़ने की सुविधा उपलब्ध है, वहीं गरीब लोगों के बच्चों अभावमय स्थिति में पड़ना पड़ता है। जहाँ एक और कुछ गिने-चुने लोगों को उच्च एवं आवसायिक शिश प्राप्त करने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से उच्च पदों पर आसीन होने के अवसर प्राप्त है, वहीं दूसरी और अधिकांश लोगों को इस तरह के अवसर समान रूप में उपलब्ध नहीं है, जहाँ एक और आर्थिक विषमता शिक्षा को असमान सुविधाओं के लिए उत्तरदायी है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा सम्बन्धी असमान सुपिधाएँ विषमता की खाई और अधिक बढ़ाने में योगदान देती हैं। अदि शिक्षा सम्बन्धी अवसर सभी वर्गों एवं व्यक्तियों के लिए उपलब्ध हो जाए, तो समाज में व्याप्त सामाजिक विषमता को पनपने से रोका जा सकता है। इस प्रकार शिक्षा की असमनता के कारण भी समाज में विषमता पनपती हैं, जोकि स्वस्थ 
समाज के विकास हेतु उपयुक्त नहीं है।

प्रश्न 3.
भारत में सामाजिक विषमता पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत परम्परावादी खेतिहर समाज का उदाहरण है, जहां बन्द समाज व्यवस्था पाई जाती हैं। यहाँ जाति के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि सुधार होने तक कृषि-व्यवस्था के दिन छः स्तर देखने को मिलते हैं, जिनमें एक संतरण व्यवस्था है।

  • गैर-खेतिहर भूस्वामी
  • गैर खेतिहर पट्टेदार
  • तर भूस्वामी
  • खेतिहर रैय्यत
  • बटाईदार
  • भूमिहीन खेतिहर मजदूर

इन छ: स्तरों के बीच सामाजिक विषमता के कई रूप देखने को मिलते हैं। उदाहरण के रूप में ब्रेतिहर भूस्वामी तथा भूमिहीन खेतिहर मजदूर के जीवन-स्तर तथा जीवन शैली में पर्याप्त अन्तर पाए जाते हैं। परम्परागत कृषि उत्पादन संगठन के दो प्रमुख पक्ष ऐसे हैं, जिनका सामाजिक विषमता को समस्या पर विशेष प्रभाव पड़ता है। पहला, भूस्वामिण एवं नियन्त्रण तथा शारारिक भ्रम के बीच विपरीत सम्बन्ध है। और दुसरा, मध्यम वर्ग को प्रपुर मात्रा में विकास। अधिकांश परम्परागत कृषि समाजों में से दो प्रवृत्तियों पाई जाती हैं। इसका तात्पर्य यह है कि परम्परागत भारतीय समाज में भूमि के नियन्त्रण एवं उपयोग में विषमताएँ केवल व्यवहार रूप में व्याप्त ही नहीं थीं, बल्कि इसे न्यायसंगत रूप में स्वीकार भी किया गया था।

प्रश्न 4.
सामाजिक विचदिन का क्या तात्पर्य है? विचम्दन के दो कारणों को 
स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सामाजिक विच्छेदन का पर्य यह है कि किसी समूह या परिवार के सदस्यों के मध्य सम्बन्ध टूट जाना या अलगाव उत्पन्न हो जाना। सामाजिक विच्छेदन व्यक्तिगत तथा सामाजिक दोनों प्रकार का होता है। इस सम्बन्ध में पी.एच, लेडिस ने अपनी पुस्तक ऐन इण्ट्रोडक्शन दू सोशियोलॉजी’ में बताया है कि सामाजिक नियन्त्रण की व्यवस्था का भंग होना और विश्रृंखला उत्पन्न होना ही सामाजिक विपटन है। सामाजिक विच्छेदन के कारण सामाजिक दिन के कारण निम्नलिखित है।

  1. जातिवाद .के. एन.शर्मा के अनुसार, जातिवाद या जाति शक्ति एक ही जाति के व्यक्तियों की उस भावना को कहा जाता है, जो देश व समाज के सामान्य हितों का ध्यान न रखते हुए केवल अपनी जाति के सदस्यों के उत्थान, जातीय एकता और जाति को सामाजिक परिस्थिति को दृढ़ रखने के लिए प्रेरित करती हैं।
  2. जनसंख्या वृद्धि जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है, जिससे रोजगार के अवसरों में कमी आ रही है। प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध कराना एक चुनौती बन गया है। बेरोजगारी की स्थिति में कोई भी व्यक्ति परिवार के अन्य सदस्यों के लिए साधन सुविधाएँ जुटाने में असमर्थ होता है, जिसके कारण विच्छेदन होने लगता है।

प्रश्न 5.
विषमता एवं विच्छेदन के निराकरण में नवीन औद्योगिकी का 
समुचित विकास किस प्रकार किया जाना चाहिए?
उत्तर:
वर्तमान युग । कृषि क्षेत्र में नवीन प्रौद्योगिकी के विकास ने भूमि के साथ-साथ पूँजी के मित्र को भी विषमता का प्रमुख आधार बना दिया है, जो पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उदाहरणों में स्पष्ट है। इन क्षेत्रों में जिन शु स्वामियों के पास पूँजी थी, उन्होंने अपने खेतों के पास ही ऊंची कीमतों पर भूमि को खरीदकर बड़े बड़े फार्म बना लिए हैं। अब ये पैगी की सहायता से ट्रैक्टर, पम्पिंग सैट, पावर भैसर तथा अन्य मशीनों को कृषि के लिए काफी प्रयोग करने लगे हैं। ऐसे में वो किन गरी ए -साकारी दोनों ही सोते से अधिक ऋण लेने में सफल रहे हैं। परिणामस्वरूप विषमता कम होने के अतिरिक्त और बने लगी है। इसी प्रकार पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से चलाए गए विकास कार्यक्रमों से देश की आर्थिक प्रगति तो हुई है, लेकिन इनका लाभ भी कुछ गिने-चुने शक्ति सम्पन्न लोगों को ही मिल पाया है। अतः विषमता दूर करने के लिए हमें वास्तविकत के धरातल पर आना होगा और सही दिशा में कारगर उपाय अपनाने होंगे।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अक)

प्रश्न 1.
सामाजिक विषमता से आप क्या समझते हैं। भारत में सामाजिक 
विषमता के स्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सामाजिक विषमता से आशय एक समाज के लोगों के जीवन-स्तर तथा जीवन-सी की भिन्नताओं से है, जो सामाजिक परिस्थितियों में इनकी विषम स्थिति में रहने के कारण होती हैं। उदाहरण के रूप में भूस्वामी तद्दा भूमिहीन श्रमिक या ब्राह्मण व हरिजन की सामाजिक परिस्थितियों में पाए आने वाले अनार के कारण उन्हें प्राप्त जीवन-स्तरों तथा जीवन-शैलियों में मो अन्तर देखने को मिलता है।

सामाजिक विषमता की उत्पत्ति के विषय में निम्नलिखित व्याख्याएँ प्रचलित हैं।

  • प्राकृतिक विभेद
  • व्यक्तिगत सम्पत्ति
  • श्रम विभाजन एवं वर्ग निर्माण
  • सुद्ध एवं विजय
  • प्रकार्यात्मक आवश्यकता है
  • अभिमत एवं शक्ति

विषमता की उन को लेकर प्रमुख रूप से दो प्रकार के मत प्रचलित हैं। एक मत के अनुसार, विषमता एक ऐतिहासिक तथ्य है, जो समय के साथ-साथ अपने आप समाप्त हो जाएगी, लेकिन दूसरे मतानुसार, विषमता को समाज से समाप्त नहीं किया जा सकता, यह शाश्वत और निरन्तर बनी रहेगी।

भारत में सामाजिक विषमता
भारत परम्परावादी खेतिहर समाज का उदाहरण हैं, जहाँ बन्द समाज-व्यवस्था पाई जाती रही हैं। यहाँ जाति के साथ-साथ शामीण क्षेत्रों में भूमि सुधार होने तक कृषि-व्यवस्था के निम्न छः स्तर देखने को मिलते हैं, जिनमें एक अंतरण व्यवस्था है ।

  • गैर-खेतिहर भूस्वामी
  • गैर-खेतिहर पट्टेदार
  • खेतिहर भूस्वामी
  • खेतिहर रैय्यत
  • बटाईदार
  • भूमिहीन खेतिहर मजदूर

उपरोक्त छ: स्तरों के बीच सामाजिक विषमता के कई कप देखने को मिलते हैं। उदाहरण के रूप में खेतिहर भूस्वामी तथा भूमिहीन खेतिहर मजदूर के जीवन-स्तर तथा जीवन-शैली में पर्याप्त अन्तर पाए जाते हैं। परम्परागत कृषि उत्पादन संगठन के दो प्रमुख पक्ष ऐसे हैं, जिनका सामाजिक विषमता को समस्या पर विशेष प्रभाव पड़ता है। पहला, भूस्वामित्व एवं नियन्त्रण तथा शारीरिक श्रम के बीच विपरीत सम्बन्ध है और दूसरा, मध्यवर्ती वर्गों को प्रचुर मात्रा में विकास अधिकांश परम्परागत कृषि समाजों में ये दो प्रवृत्तियां हई जाती हैं। भारतीय कृषि व्यवस्था अपने लम्बे इतिहास की अवधि में प्रमुखतः संस्तरजात्मक रही हैं। सामान्यतः अध्ययनों के आधार पर पाया गया है कि बड़े शू स्वामी ऊँची जाति के, भूमिहीन मजदूर निम्न या किसी अस्पृश्य जाति के सदस्य थे। इन दोनों के बीच मध्य स्तरीय किसान थे, जो खेतिहर जातियों के अन्तर्गत आते थे। इसका तात्पर्य यह है कि परम्परागत भारतीय समाज में भूमि के नियन्त्रण एवं उपयोग में विषमताएँ केवल पहार रूप में प्राप्त हो नहीं दी, बल्कि इसे न्यायसंगत रूप में स्वीकार भी किया गया था।

प्रश्न 2.
सामाजिक विषमता के कारणों की विस्तारपूर्वक विवेचना 
कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न समाजों में विषमता के भिन्न-भिन्न कारण देखने को मिलते हैं। यद्यपि कुछ कारण सभी समाजों में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। विषमता के प्रमुख कारण इस प्रकार है

  1. अर्जित आय एक ही समाज के लोगों की आय में पर्याप्त भिन्नता देखने को मिलती हैं। आथ सम्बन्धी इस भिन्नता के परिणामस्वरूप व्यक्तियों के भोजन, वस्त्र, मकान, आभूषण तथा जीवन-स्तर में अन्तर पाए जाते हैं। इन अन्तरों के कारण विषमताएं उत्पन्न होती हैं।
  2. व्यवसाय विषमता का एक प्रमुख कारण मसाय सम्बन्धी भेद भी हैं। व्यवसायों में ऊंच-नीच का एक संस्मरण पाया जाता है। जहां किसी व्यवसाय को अधिक प्रतिष्ठित माना जाता है, वहीं किसी व्यवसाय को होनता की दृष्टि से भी देखा जाता है। विभिन्न व्यवसायों का इस प्रकार का मूल्यांकन इनमें लगे हुए व्यकियों में विषमता को बढ़ावा देता है।
  3. शिक्षा जहाँ एक और आर्थिक विषमता शिक्षा को असमान सुविधाओं के लिए उत्तरदायी है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा सम्बन्धी असमान सुविधाएँ विषमता की खाई को और अधिक बढ़ाने में योगदान देती हैं।
  4. पद पद का सम्बन्ध सम्पति एवं शक्ति में नहीं वरन् आदर और प्रतिष्ठा से है। विभिन्न समाज भिन्न-भिन्न गुणों का आदर भिनभिन्न रूप से करते हैं। पद सम्बन्धी अन्तर के आधार अलग-अलग होने के कारण विषमता पनपती है।
  5. सम्पत्ति सम्मान के आधार पर सभी समाजों में स्तरीकरण किया जाता है। आदिम समाजों में भी सम्पत्ति के आधार पर ऊँच-नीच का भेद पाया जाता है। समाज में वे लोग ऊँचे माने जाते हैं, जिनके पास अधिक सम्पति होती है तथा जो सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं को जुटाने में सक्षम होते हैं।
  6. शमित शक्ति एवं सत्ता के वितरण में असमानता भी विषमता के लिए उत्तरदायी है। जिन लोगों के पास सैनिक शक्ति, सना शासन की बागडोर होती है, उनको स्थिति उन लोगों से ऊँची होती हैं, जो सत्ता एवं शक्तिविहीन होते हैं।
  7. जन्म, जाति एवं प्रजाति जो लोग उच्च समझे जाने माने कुल, मंत्र, राति एवं प्रजाति में जन्म लेते हैं, वे स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मानते हैं और इस आधार पर विषमता पनपती हैं। ग्रामीण भारत में जति समस्या सामाजिक विषमता का एक प्रमुख आधार है।

प्रत्येक समाज में एक संस्कृति या सामूहिक प्रतिनिधानों का एक पुत्र होता हैं, मूल्यांकन जिसका एक महत्वपुर्ण लक्षण है और यह विषमता के मौलिक स्रोत को प्रस्तुत करता है। आन्द्रे येतेई ने अपने अध्ययनों के आधार पर बताया है कि मूल्यांकन विषमता का एक सार्वभौमिक स्रोत है। इसका दूसरा झोत बल, शकित तथा प्रभुत्व है।

प्रश्न 3.
सामाजिक विच्छेदन के कारणों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सामाजिक विच्छेदन के कारण निम्नलिखित हैं
1. जातिवाद डॉ. के. एन. शर्मा के अनुसार, जातिवाद या जाति-शक्ति एक ही 
जाति के प्रतियों को उस सामना को कहा जाता है, जो देश में समाज के सामान्य हितों का ख्याल न रखते हुए केवल अपनी जाति के सदस्यों के उत्थान, जातीय एकता और जाति की सामाजिक परिस्थिति को छ रखने के लिए प्रेरित करती है।

2. जनसंख्या वृद्धि जनसंख्या
में जौन गति से वृद्धि हो रही है, जिससे रोजगार 
के अवसरों में कमी आ रही है। प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध कराना एक चुनौती बन गया है। बेरोजगारी पात में कोई भी व्यक्ति परिवार के अन्य सदस्यों के लिए साधन सुविधाएँ जुटाने में असमर्थ होता है, जिसके कारण विछेदन हुने लगता है।

3. राजनैतिक भ्रष्टाचार
राजनैतिक ग्वार्थों के चलते विभिन्न जाति के लोगों में 
आपस में तय उत्पन्न कर अनेक वर्गों में विभाजित कर दिया जाता है। इससे किसी एक वर्ग को विशेष सुविधा उपलब्ध कराकर आकर्षित किया ता है। इससे उनमें राष्ट्रीयता की भावना रागापत होकर अपने वर्ग को ही भावना रह जाती है, जिसके कारण सामाजिक विच्छेदन होने लगता है।

4. सामाजिक कुरीतियों
मारतीय समाज में अनेक तरह की कुरीतियों व्याप्त है, जिने चाल विवाह या हि पर रोक, बेमेल विवाह, विवाह-विद 
आदि हैं। इन कुरीतियों के कारण परिवार के सभी सदस्यों में सामंजस्य नहीं बन पाता और सम्बन्ध–विच्छेद होने लगते हैं। यहां तक कि परिवार टूट जाते

5. धार्मिक दृष्टिकोण
भारतीय समाज अनेक वर्षों में विभाजित हैं, जिनमें अस्पृश्य वर्ग को जोवन-स्तर अत्यन्त निम्न है। सवर्णों द्वारा इन पर अनेक प्रकार के फतव्यों का बोझ डाला जाता है, जिससे इनमें तीन भावना आ जाती हैं और कता पनपने लगती हैं।

6. साम्प्रदायिकता
की भावना वर्तमान समाज में धर्म, जाति तथा भाषा आदि के आधार पर अनेक वर्ग बन गए हैं, जिनमें एक-दूसरे के प्रति विरोध उत्पन्न हो गया है। आपस में संघर्ष और तनाव की स्थिति के कारण सामाजिक सम्बन्धों में विच्छेदन होने लगा है।

7. नए-पुराने में संघर्ष
नई और पुरानी पड़ी में तनाव उत्पन्न होने से विच्छेदन 
को स्थिति बनती है, क्योकि युवा वर्ग और पुराने लोगों के विचारों में टकराहट होने से संघर्ष पैदा हो जाता है, जो विच्छेदन तक पहुँच जाता है। है,

8. दोषप्रद शिक्षा प्रणाली
अव के शिक्षित युवा पुरानी मर्यादाओं तथा 
मापदों का मूल्य नहीं समझ पाते हैं। उनके लिए इनका कोई औचित्य नहीं हैं, लेकिन पुरानी पीढ़ी इन पर जोर देती है, जिसके कारण दोनों वर्षों में विच्छेदन उत्पन्न हो जाता है।

9, नैतिक मूल्यों का हास
धनी वर्ग सम्पन्न और समृद्ध होता है, इसलिए उसके 
पास पैसा और समय दोनों प्रचुर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इस वर्ग को जीवन-शैली और जीवन-स्तर पर पाश्चात्य प्रभाव अधिक रहता है। पाश्चात्य जीवन-शैली परिवार के उन सदस्यों को उचित नहीं लगती, जो परम्पराओं और नैतिक मूल्यों का निर्वहन करते हैं। इस स्थिति में परिवार में तनाव और संघर्ष उत्पन्न हो जाता है, जो विच्छेदन के रूप में परित होता है।

प्रश्न 4.
विषमता एवं विच्छेदन के निराकरण पर एक निवन्ध्र लिखिए।
उत्तर:
समाज में विषमता एवं विच्छेदन को दूर करने के उपाय निम्नलिखित हैं।
1. पूँजी एवं आय का पुनर्वितरण विषमता एवं विच्छेदन दूर करने के लिए 
जहां भूमि एवं पूँजी का पुनर्वितरण आवश्यक है, वहीं आय का पुनर्वितरण भी जरूरी हैं। जिन क्षेत्रों में नवीन प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा सकता है, वहीं भू-स्वामियों का मुनाफा अवश्य बढ़ा है, परन्तु साथ ही कृषि श्रमिकों की मजदूरी भी बढ़ी है और कई शानों पर तो तेजी से तथा पर्याप्त मात्रा में, लेकिन कृषि मजदूरों की सुरक्षा के लिए इन आर्थिक स्थायी आर प्रदान किया जाना चाहिए और इस हेतु कुटीर योग-धन्धों को तेजी से विकास किया जाए।

2. आधुनिकीकरण
आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बने से विषमता को दूर किया जा सकता है। आधुनिकीकरण से समाज का दृष्टिकोण विकसित तथा एक नए माहौल में समरसता का भाव पनव 
सकेगा, जोकि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

3. प्रजातान्त्रिक मूल्यों एवं मानवतावादी दृष्टिकोण
विषमता के आधारों पर चोट करने के लिए प्रजातान्त्रिक मूल्यों एवं मानवतावादी दृष्टिकोण का व्यापक प्रचार-प्रसार करना चाहिए, क्योंकि समाजीकरण की प्रक्रिया के दौरान ही प्रजातान्त्रिक एवं मानवतावादी मूल्यों के प्रति आस्था पैदा की जा सकती है।

4. जनैतिक परिवर्तन
विषमता एवं विच्छेदन को दूर करने के लिए कानूनी 
एवं राजनैतिक परिवर्तन भी आवश्यक हैं। टी.एच.मार्शल ने इंग्लैण्ड़ में पहले कानुनी समता, फिर राजनौतिक समता और अन्त में नागरिक समता के विकास का विस्तार से वर्णन किया है। अतः राजनैतिक तथा प्रशासनिक कार्यक्रमों द्वारा विषमता को कम किया जा सकता है।

5. आर्थिक विकास
पूर्व यूरोपीय विद्वानों द्वारा बिषमता को समाप्त करने के लिए आर्थिक विकास को आवश्यक माना गया है। आन्द्रे बेतेई के अनुसार, अषक विकास के माध्यम से गरीबों, दरिद्रता एवं बेरोजगारी की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यदि आर्थिक क्षेत्र में विषमता को कम किया जा सका तो अन्य क्षेत्रों में विषमता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। इसका प्रमुख कारण यह है कि आज आय, सम्पत्ति, भौतिक साधन अर्थात् 
आर्थिक शक्ति व्यक्ति को सामाजिक प्रस्थिति के निर्धारण में प्रमुख रूप से महत्त्वपूर्ण है।

6. नवीन प्रौद्योगिकी का समुचित विकास
नौन प्रौद्योगिकी विकास से इन 
भू-स्वामियों को अधिक लाभ मिल पाया, जिनके पास पर्याप्त मात्रा में पूँजी थी। इसी प्रकार पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से चलाए गए विकास कार्यक्रम से देश को आर्थिक प्रगति तो हुई है, लेकिन इनका लाभ भी कुछ गिने-चुने शक्ति-सम्पन्न लोगों को ही मिला है। अतः विषमता दूर करने के लिए सही दिशा में कारगर उपाय अपनाने होंगे, जो निम्न हैं।

  • जनसंख्या नियन्त्रण जनसंख्या नियन्त्रण से आवास तथा भोजन जैसी मूलभूत समस्याओं से छुटकारा पाया जाता है। जनसंख्या वृद्धि से इन सुविधाओं का अभाव हो जाता है, जिसमें तनाव और संघर्ष होता है, इसलिए जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण से विषमता और विच्छेद को रोका जा सकता है।
  • साम्प्रदायिक सद्भावना समाज सामाजिक समता स्थापित करने तथा विच्छेदन को रोकने के लिए आपसी सौहार्दू एवं सद्भावना को बनाए रखना आवश्यक है, जो लोग अपने-अपने धर्मों की सर्वश्रेष्ठता स्थापित करने के उद्देश्य से आपसी तनाव पैदा करते हैं, उन्हें आपस में मिल-जुलकर रहना चाहिए, ताकि सद्भावना बनी रहे।

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 प्राकृतिक आपदाएँ

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Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 10
Chapter Name प्राकृतिक आपदाएँ
Number of Questions Solved 25
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 प्राकृतिक आपदाएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
बाढ़, भूकम्प, चक्रवात, सूखा आदि आपदाओं के पीछे निहित कारक होते हैं।
(a) दैवी प्रकोप सम्बन्धी कारक
(b) पाप में वृद्धि सम्बन्धी कारक
(C) प्राकृतिक कारक
(d) मानव द्वारा पर्यावरण-प्रदूषण में वृद्धि सम्बन्धी कारक
उत्तर:
(c) प्राकृतिक कारक

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सी भूकम्प की स्थिति है?
(a) मकान गिरने से भूमि का हिलना
(b) रेलगाड़ी की धमक से भूमि में कम्पन
(C) पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों की उथल-पुथल से भूमि में कम्पन
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(c) पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों की उथल-पुथल से भूमि में कम्पन

प्रश्न 3.
भूकम्प किन कारणों से आ सकता है?
(a) विवर्तनिक हलचल
(b) ज्वालामुखी विस्फोट
(c) अत्यधिक खनन (d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 4.
16 व 17 जून, 2013 में भारत के किस राज्य को भयंकर प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा था? (2014)
(a) बिहार
(b) उत्तर प्रदेश
(c) उत्तराखण्ड
(d) केरल
उत्तर:
(c) उत्तराखण्ड

प्रश्न 5.
बाढ़ से नष्ट होता है। (2017)
(a) फसल
(b) मकान
(c) सड़के और रेलमार्ग
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 6.
बाढ़ से क्षति होती है। (2018)
(a) मनुष्य एवं पालतू जानवर की
(b) मकान की
(C) फसलों की
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 7.
सूखा आपदा का कारण है। (2014)
(a) वन-विनाश
(b) भूमिगत जल का अधिक दोहन
(c) नदी मार्गों में परिवर्तन
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 8.
सुनामी का सबसे अधिक प्रभाव कहाँ होता है? (2013)
(a) पहाड़ी क्षेत्रों में
(b) तटवर्ती क्षेत्रों में
(C) समुद्र के मध्यवर्ती क्षेत्रों में
(d) मैदानी भागों में
उत्तर:
(b) तटवर्ती क्षेत्रों में

प्रश्न 9.
अकस्मात् उत्पन्न होने वाली आपदा है।
(a) पर्यावरण प्रदूषण
(b) भूमि का मरुस्थलीकरण
(C) सूखा
(d) भूस्खलन
उत्तर:
(d) भूस्खलन

प्रश्न 10.
आग लगने का कारण है। (2016)
(a) पानी
(b) सूरज की किरण
(c) कीचड़
(d) लघु परिपथ
उत्तर:
(d) लघु परिपथ

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदा से क्या तात्पर्य है? (2009, 18)
उत्तर:
जिन आपदाओं के पीछे उत्तरदायी कारक मानवे नहीं, वरन् प्रकृति होती है, उन्हें प्राकृतिक आपदा’ कहते हैं।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक आपदाएँ कौन-कौन सी हैं? (2009, 13)
उत्तर:
बाढ़, सूखा, भूकम्प, भूस्खलन, ज्वालामुखी विस्फोट, चक्रवात, बादल फटना, सुनामी, ओलावृष्टिं आदि प्राकृतिक आपदाएँ हैं।

प्रश्न 3.
बाढ़ की उत्पत्ति में मानवीय क्रियाकलापों की भूमिका स्पष्ट करें।
उत्तर:
अन्धाधुन्ध वन कटाव, अवैज्ञानिक कृषि पद्धतियाँ, अनियोजित निर्माण कार्य आदि मानवीय क्रियाकलापों से प्राकृतिक अपवाह तन्त्र अवरुद्ध हो जाता है। तथा बाढ़ की विध्वंसता बढ़ जाती है।

प्रश्न 4.
सुनामी की उत्पत्ति किस अन्य आपदा से सम्बन्धित है?
उत्तर:
सुनामी की उत्पत्ति भूकम्पीय तरंगों से होती है। अत: यह भूकम्प का एक प्रभाव है।

प्रश्न 5.
सुनामी लहरें तटवर्ती क्षेत्रों पर क्यों अधिक प्रभावी होती हैं?
उत्तर:
जल तरंगों की गति उथले समुद्र में अधिक एवं गहरे समुद्र में कम होती है। इसके अतिरिक्त तरंगों की ऊँचाई तट के निकट अत्यधिक बढ़ जाती है, इन्हीं कारणों से सुनामी लहरें तटवर्ती क्षेत्रों पर अधिक प्रभावी होती हैं।

प्रश्न 6.
सुनामी लहरों से बचाव के कोई दो उपाय बताइए।
उत्तर:
सुनामी लहरों से बचाव के सुरक्षात्मक उपाय के रूप में समुद्रतटवर्ती भागों में पूर्वसूचना केन्द्रों का विकास एवं विस्तार किया जाना चाहिए, इसके अतिरिक्त समुद्री लहरों के प्राकृतिक अवरोधक के रूप में मैंग्रोव वनों को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।

प्रश्न 7.
राष्ट्रीय आपदा से आप क्या समझते हैं? राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन की क्या आवश्यकता है? (2014)
उत्तर:
जिस आपदा से पूरा राष्ट्र प्रभावित वे चिन्तित हो, उसे ‘राष्ट्रीय आपदा कहते हैं। किसी भी राष्ट्रीय आपदा को रोकने, उसके प्रभाव को सीमित करने व उससे बचाव के लिए व्यापक उपाय करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन की आवश्यकता होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदा पर चार बिन्दु लिखिए। (2008, 10, 13)
उत्तर:
ऐसी आपदाएँ जिनका सम्बन्ध प्रकृति से होता है, ‘प्राकृतिक आपदाएँ कहलाती हैं। प्राकृतिक आपदा से सम्बन्धित चार बिन्दु निम्नलिखित हैं।

  • प्राकृतिक आपदा से जान-माल को बहुत नुकसान होता है।
  • इससे समाज में गरीबी एवं बेरोजगारी की समस्याएँ बढ़ती हैं।
  • प्राकृतिक आपदाओं को रोकना सम्भव नहीं है, लेकिन इनके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  • प्राकृतिक आपदा के समय जनता को धैर्य से काम लेना चाहिए व मिलकर कार्य करना चाहिए।

प्रश्न 2.
सूखा आपदा के प्रमुख कारण लिखिए। (2012)
उत्तर:
‘सूखा आपदा’ का सीधा सम्बन्ध वर्षा से है, जब किसी क्षेत्र में लम्बे समय तक वर्षा का अभाव होता है और पृथ्वी में नमी की कमी हो जाती है, तो उस स्थिति को ‘सूखा’ कहते हैं। सूखे की स्थिति में कृषि की पैदावार नहीं हो पाती है, प्राकृतिक घास आदि पेड़-पौधे भी नहीं उग पाते हैं, जिससे मानव, पशु व अन्य जीव-जन्तुओं के लिए ‘अकाल’ की स्थिति पैदा हो जाती है।

सूखा आपदा के कारण
सूखा आपदा के निम्नलिखित कारण हैं।

  • किसी क्षेत्र में वर्षा का बिल्कुल न होना या बहुत कम होना।
  • भूमिगत जल को अनियोजित व अनावश्यक रूप में खर्च करना, जिससे पेयजल की कमी हो जाती है।
  • वनों की अन्धाधुन्ध कटाई करना। वन वर्षा को नियमित रूप देने में प्रमुख | भूमिका निभाते हैं। वनों की कमी से वर्षा में भी कमी आ जाती है, जिससे सूखे की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • अवैज्ञानिक ढंग से खनन कार्य करने से भी सम्बन्धित क्षेत्र में सूखे की समस्या हो जाती है।
  • नदी के मार्ग परिवर्तन से पुरातन नदी तटीय क्षेत्र में सूखे की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • मिट्टी की संरचना में परिवर्तन होने से भी सम्बन्धित क्षेत्र में जल की कमी हो जाती है तथा पेड़-पौधे सूखने लगते हैं।

प्रश्न 3.
सूखे के परिणामस्वरूप क्या हानियाँ होती हैं? (2016, 18)
उत्तर:
सूखे के परिणामस्वरूप होने वाली हानियों/प्रभावों को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत वर्णित किया जा सकता है।

  • सूखा पड़ने पर फसलें बर्बाद हो जाती हैं, जिससे अन्न की कमी हो जाती है। इस स्थिति को अकाल कहा जाता है।
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में चारे की कमी होने से मवेशियों की मृत्यु होने लगती है। कृषि कर्म में उपयोगी पशुओं की मौत से सर्वाधिक छोटे एवं सीमान्त किसान प्रभावित होते हैं, इसके अतिरिक्त दूध, मांस आदि की आपूर्ति भी प्रभावित होती है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि कर्म पर आधारित होती है। अतः सूखे की स्थिति में बेरोजगारी वृद्धि दर में तेजी आती है। लोग रोजगार के अवसरों की तलाश में पलायन करने लगते हैं। अत: जनसंख्या असन्तुलन की समस्या उत्पन्न होने लगती है।
  • सूखे की स्थिति में लोगों की क्रयक्षमता कम हो जाती है, जबकि महँगाई में तेजी से वृद्धि होती है, इसका प्रभाव सम्पूर्ण वाणिज्य व्यवस्था पर पड़ता है।
  • कृषि आधारित कच्चे माल के उत्पादन में गिरावट आने से देश के औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • सरकार को सूखे की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न उपायों पर धन व्यय करना पड़ता है। उदाहरणत: सरकार की सब्सिडी एवं आयात आदि पर व्यय बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप राष्ट्रीय बचत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है एवं विकास कार्यों में ठहराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • पानी की कमी के कारण लोग दूषित जल पीने को बाध्य होते हैं। इसके परिणामस्वरूप पेयजल सम्बन्धी बीमारियाँ; जैसे-आन्त्रशोथ, हैजा और हेपेटाइटिस हो जाती हैं।

प्रश्न 4.
सूखे के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उसके निवारण के उपाय लिखिए।
उत्तर:
सूखा आपदा निवारण के उपाय
सूखे से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय सम्भव हैं।

  • वर्षाजल का संरक्षण-संवर्द्धन, नदियों एवं नहरों के जल का समुचित उपयोग आदि माध्यमों से जल-प्रबन्धन आवश्यक है।
  • वृक्षारोपण के माध्यम से हरित पट्टी को विस्तार किया जाए।
  • कुओं, पोखरों एवं तालाबों को स्थानीय जन-सहयोग से पुनर्जीवित किया जाए।
  • नदी-जोड़ो परियोजना के माध्यम से बाढ़ एवं सूखा दोनों आपदाओं पर नियन्त्रण किया जा सकता है।
  • भूमि उपयोग नियोजन प्रणाली का निर्धारण क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाना चाहिए।

प्रश्न 5.
भूस्खलन आपदा पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
भूस्खलन के कारण
भूस्खलन की घटना को प्रभावित करने वाले कारकों में भूआकृतिक कारक, ढाल, भूमि उपयोग, वनस्पति आवरण और मनव क्रियाकलाप प्रमुख भूमिका निभाते हैं। भूस्खलने की घटना प्रायः असंघटित चट्टानों एवं तीव्र ढालों पर अधिक होती है। भूमि का कटाव भी इसमें योगदान देता है।

भूस्खलन के प्रभाव

  • इसका प्रभाव स्थानीय होता है, किन्तु सड़क मार्ग में अवरोध, रेलपटरियों का टूटना और जल वाहिकाओं में चट्टानें गिरने से पैदा हुई रुकावटों के गम्भीर परिणाम हो सकते हैं।
  • भूस्खलन के कारण नदी मार्गों में बदलाव, बाढ़ का कारण बनता है।
  • विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है।

भूस्खलन आपदा के निवारण के उपाय
भूसखलन आपदा के निवारण के लिए निम्न उपाय लिए जा सकते हैं

  • भूस्खलन सम्भावी क्षेत्रों में बड़े बाँध बनाने जैसे निर्माण कार्यों पर प्रतिबन्ध होना चाहिए।
  • कृषि कार्य, नदी घाटी तथा कम ढाल वले क्षेत्रों तक सीमित होना चाहिए। पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि करनी चाहिए।
  • वनीकरण को बढ़ावा देना चाहिए।
  • जल बहाव को कम करने के लिए छोटे अवरोधक बाँधों का निर्माण करना
    चाहिए।

प्रश्न 6.
आग लगने के सम्भावित कारणों का वर्णन करते हुए आग की घटनाओं से बचाव हेतु व्यवहार्य उपायों का सुझाव कीजिए।
उत्तर:
आग लगने के कारण
आग लगने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं।

  • ज्वलनशील पदार्थ एवं उपकरणों से आग लगने की सम्भावना अधिक रहती है। विद्युत हीटर, विद्युत प्रेस आदि इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
  • रसोईघर में चूल्हे के बर्नर का खुला रह जाना, स्टोव अथवा सिलेण्डर का फटना आदि घटनाएँ भी आग लगने का प्रमुख कारण होते हैं।
  • विद्युत धारा के प्रवाह में अनियमितता, बिजली की कमजोर वायरिंग अथवा बहुकेन्द्रीय एडाप्टर शॉर्ट सर्किट (लघु परिपथ) का कारण बनकर आग लगा सकते हैं।
  • शीघ्र आग पकड़ने वाले पैकिंग पेपर, पटाखे आदि में भी आग लगने की सम्भावना विद्यमान रहती है। असावधानीपूर्वक धूम्रपान का व्यवहार भी आग लगने का प्रमुख कारण माना जाता है।

आग से बचाव
आग की घटनाओं से बचाव हेतु निम्नलिखित उपायों को अपनाया जा सकता है।

  • घर के अन्दर ज्वलनशील पदार्थ रखने से बचना चाहिए यदि रखना आवश्यक ‘: हो तो पूरी सावधानी अपनानी चाहिए।
  • घर में आग बुझाने वाले सिलिण्डर को आवश्यक रूप से रखना चाहिए एवं सभी सदस्यों को इसका प्रयोग करना आना चाहिए।
  • घर से बाहर निकलते समय विद्युत तथा गैस उपकरणों को ध्यान से बन्द कर देना चाहिए एवं घर में प्रवेश करने पर सर्वप्रथम गैस आदि के रिसाव की जाँच कर लेनी चाहिए।
  • बिजली के एक सॉकिट से अनेक विद्युत उपकरणों को नहीं जोड़ना चाहिए अन्यथा शॉर्ट सर्किट होने की सम्भावना हो सकती है।
  • आग लगने के कारण को जानकर, तद्नुसार तत्काल आवश्यक कदम उठाना चाहिए। यदि बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगी हैं, तो आग बुझाने में पानी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • आग लगने की घटना की सूचना तत्काल ही फायर बिग्रेड को दी जानी चाहिए।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक, 100 शब्द)

प्रश्न 1.
भूकम्प आपदा द्वारा कौन-कौन सी हानियाँ होती हैं? (2017)
अथवा
प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव व उनसे बचने का उपाय लिखिए। (2017)
अथवा
हमारे समाज में भूकम्प का क्या प्रभाव पड़ता है? इससे बचने के उपायों को समझाइए। (2010)
अथवा
टिप्पणी कीजिए भूकम्प के प्रभाव तथा उससे बचने के उपाय। (2010)
उत्तर:
भूकम्प
पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों के प्रभाव के कारण से पृथ्वी के किसी भी भाग में होने वाले धीमे या भयंकर कम्पन को भूकम्प कहते हैं। जब पृथ्वी की आन्तरिक परतों में हलचल होती है, तो इसका प्रभाव पृथ्वी की सतह पर खड़ी इमारतों, सड़कों, पुलों, बाँधों आदि पर होता है, जिससे प्रभावित मानवों का जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है।

समाज में भूकम्प का प्रभाव
भूकम्प उन प्राकृतिक आपदाओं में से एक है, जिन्होंने हमारे समाज को सबसे अधिक दुष्प्रभावित किया है। वास्तव में, भूकम्प अनेक प्रकार की तबाही का कारण बनता है। भूकम्प से पृथ्वी की बाह्य परत पर भी कम्पन होता है, जिससे प्रभावित क्षेत्र के मकान, सड़कें, टावर, पुल, वन-क्षेत्र इत्यादि को क्षति पहुँचती है। बाँध टूटने से नदियों में बाढ़ आ जाती है, जिससे आस-पास के क्षेत्र भी डूबने लगते हैं।

इन सभी स्थितियों से जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। बहुत-से लोग काल का ग्रास बन जाते हैं, तो बहुत-से जीवनभर के लिए अवसादग्रस्त हो जाते हैं। बहुत-से परिवार बिखर जाते हैं, बच्चे अनाथ हो जाते हैं। इसका सम्पूर्ण सामाजिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

प्रभावित क्षेत्रों में सुधार के प्रयासों में देरी होने पर महामारियाँ फैलने लगती हैं, जिसका प्रभाव जन-सामान्य पर पड़ता है। इस प्रकार भूकम्प से प्रभावित समाज के पुनर्वास में बहुत समय लग जाता है।

भूकम्प से बचाव के उपाय
यद्यपि भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदा को टाला नहीं जा सकता है, किन्तु इसके प्रभावों को शीघ्रता से कम अवश्य ही किया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं।

  1. भूकम्प की आशंका होने पर, इसकी चेतावनी जारी कर देनी चाहिए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को हटाया जा सके, इससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगी।
  2. भूकम्प आने पर शीशे की खिड़की आदि नुकीली चीजों से दूर हट जाना चाहिए।
  3. भूकम्प आते ही घरों से बाहर आकर किसी खुले भाग में चले जाना चाहिए।
  4. खुला स्थान न मिलने पर मेज या पलंग के नीचे बैठ जाना चाहिए।
  5. मकान की दीवारों या भारी सामान से दूर हट जाना चाहिए।
  6. दरवाजों के पास खड़े होकर चौखट को पकड़ लेना चाहिए।
  7. भूकम्प आने पर खुले स्थान पर भी बिजली के तारों इत्यादि से दूर हट जाना चाहिए।
  8. भूकम्प से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में मकान लकड़ी के बनाए जाने चाहिए।

प्रश्न 2.
बाढ़ के प्रभाव तथा उससे बचने के उपाय लिखिए। (2011)
उत्तर:
बाढ़
जब नदी का पानी अपने प्रवाह क्षेत्र से बाहर निकलकर आस-पास के क्षेत्रों में फैल जाती है, तो उस स्थिति को ‘बाढ़’ कहते हैं। सामान्यत: वर्षा ऋतु में अधिक वर्षा के कारण नदियों में बाढ़ की स्थिति देखी जाती है। इसके अलावा बाँधों के टूटने से, नदी के मार्ग परिवर्तित करने आदि स्थितियों के कारण भी बाढ़ की स्थिति देखी जाती है।

बाढ़ के प्रभाव
बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है। यह अपने प्रभाव क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित कर देती है। बाढ़ के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं।

  1. बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में चारों ओर पानी-ही-पानी भरा होता है। पानी इमारतों, घरों, दफ्तरों, स्कूलों में भर जाता है, जिससे लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है।
  2. बाढ़ में डूबने से बड़ी संख्या में मानव जीवने व पशुओं की क्षति होती है।
  3. बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव बुजुर्गों व अपाहिज लोगों पर पड़ता है, जो अपना बचाव करने में सक्षम नहीं होते हैं।
  4. बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पेयजल आदि दिन-प्रतिदिन की आवश्यक वस्तुओं की कमी हो जाती है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा भी कुप्रभावित होती है।
  5. अधिक समय तक पानी भरे रहने से सम्बन्धित क्षेत्रों में महामारी फैलने का डर बना रहता है। इसके अलावा मच्छर आदि का भी प्रकोप बढ़ जाता है।

बाढ़ आपदा निवारण के उपाय
बाढ़ आपदा निवारण के उपाय सामान्यत: तीन स्तरों में बाँटे जा सकते हैं, इनका विवरण निम्नलिखित है।

1. बाढ़ आपदा से पूर्व उपाय
बाढ़ सम्भावित क्षेत्रों में निम्नलिखित उपायों पर ध्यान देकर बाढ़ जैसी प्राकृतिक घटना को आपदा बनने से रोका जा सकता है।

  • बाढ़ सम्भावित क्षेत्रों में नदी जलमार्गों को सीधा रखने पर ध्यान देना चाहिए, नदियों के मार्ग बदलने से बाढ़ आने की आशंका अधिक रहती है।
  • स्थानीय स्तर पर कृत्रिम जलाशय बनाए जाने चाहिए, जिससे बाढ़ की स्थिति में जल को कृत्रिम जलाशय की ओर मोड़ा जा सके।
  • नदियों को आपस में जोड़ने की व्यवस्था की जानी चाहिए, इससे वर्षा के अधिक जल को कम जल क्षेत्र की ओर मोड़ा जा सकता है।
  • तटबन्धों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में बाढ़ आपदा को रोकने के लिए भूस्खलन पर नियन्त्रण आवश्यक है। अतः पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण हेतु विस्फोटों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे भूस्खलन की आशंकाएँ बढ़ती हैं।
  • नगर नियोजन के दौरान जल निकास व्यवस्था पर पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी भी प्रकार से जलधाराओं का प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध नहीं होना चाहिए।
  • नदियों, तालाबों व झीलों के निकट अतिक्रमण के द्वारा बसाव कार्यों पर पूर्ण रोक लगाई जानी चाहिए, जिससे बाढ़ द्वारा होने वाली क्षति न्यूनतम हो।
  • नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों पर सघन वृक्षारोपण का अभियान चलाया जाना चाहिए तथा वन विनाश को रोकने के लिए हर सम्भव उपाय किए। जाने चाहिए।

2. बाढ़ आपदा के दौरान उपाय
बाढ़ आपदा के दौरान निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए

  • जल बहाव के मार्ग में, सतह पर रेत के थैले रखे जाने चाहिए, जिससे सतह सुरक्षित रहे।
  • कमजोर इमारतों से निकलकर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।
  • बाढ़ के दौरान पेड़ों पर चढ़ना खतरनाक साबित हो सकता है। घर की छतों का उपयोग बाढ़ के दौरान उपयुक्त हो सकता है।

3. बाढ़ आपदा के पश्चात् उपाय
बाढ़ आपदा के पश्चात् किए जाने वाले राहत कार्यों के अन्तर्गत निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • अपने घर तथा आस-पास के क्षेत्र की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए एवं कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • युवा पीढ़ी को मिलकर स्थानीय स्तर पर वृक्षारोपण का अभियान चलाया जाना चाहिए, जिससे मिट्टी के कटाव की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।
  • सरकारी स्तर पर प्राप्त हो रही सुविधाओं का लाभ उठाने हेतु, क्षेत्र के सम्बन्धित प्रशासनिक अधिकारी से अवश्य सम्पर्क स्थापित करना चाहिए।
  • बाढ़ के पश्चात् चारों ओर फैले हुए पानी पर कीटाणुनाशक दवाएँ छिड़कनी चाहिए, जिससे संक्रामक रोगों के प्रसार को रोका जा सके।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में बाढ़ के लिए प्राकृतिक कारणों की अपेक्षा मानवीय कारण अधिक प्रभावी होते जा रहे हैं। अतः आवश्यकता है कि हम पर्यावरण व्यवस्था को बनाए रखने पर विशेष ध्यान केन्द्रित करें। इससे बाढ़ प्रकोप की घटनाओं में अवश्य ही कमी आएगी।

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 16 दहेज समस्या एवं उसका उन्मूलन

UP Board Solutions for Class 12  Home Science Chapter 16 दहेज समस्या एवं उसका उन्मूलन are part of UP Board Solutions for Class 12  Home Science. Here we have given UP Board Solutions for Class 12  Home Science Chapter 16 दहेज समस्या एवं उसका उन्मूलन.

Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 16
Chapter Name दहेज समस्या एवं उसका उन्मूलन
Number of Questions Solved 19
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 16 दहेज समस्या एवं उसका उन्मूलन

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
दहेज़ को ई में क्या कहते हैं।
(a) जहेज़
(b) वरदक्षिणा
(c) सौगात
(d) दान
उत्तर:
(a) जहेज़

प्रश्न 2.
दहेज़ वह धन, वस्तु अथवा सम्पत्ति है, जो एक स्त्री विवाह के समय पति के लिए लाती हैं। विवाह की यह परिभाषा विसवे द्वारा दी गई है?
(a) चार्ल्स विनिफ
(b) मैक्श रैडिन्
(c) वैतटर शब्दकोश
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) बेब्सटर शब्दकोश

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन-सा एक कारण दहेज प्रथा का नहीं हैं।
(a) अंतर्विवाह
(b) महँगी शिधा प्रणाली
(c) अनुलोम विवाह
(d) शिक्षा का प्रसार
उत्तर:
(d) शिक्षा का प्रसार

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से दहेज प्रथा के उन्मूलन के उपायों में शामिल हैं।
(a) शिक्षा का प्रसार
(b) कानून के प्रति जागरूकता
(c) पानमत तैयार करना
(d) में सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 5.
दहेज रोधक अधिनियम बना था
(a) 1961 में
(b) 1562 में
(c) 1955 में
(d) 164 में
उत्तर:
(a) 1981 में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
दहेज़ से क्या आशय है?
उत्तर:
विवाह के अवसर पर कन्या पक्ष द्वारा वर पक्ष को दिया जाने वाला, सम्पत्ति और सामान इत्यादि को ‘दहेज’ कहा जाता है।

प्रश्न 2.
दहेज़ देने का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
नवविवाहितों के जीवन निर्वाह में मदद करने के उद्देश्य से ही दहेज दिया

प्रश्न 3.
वर मूल्य किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह निश्चित धन या भेट, जो विवाह से पूर्व वा पक्ष द्वारा निश्चित की जाती है, जिसे विवाह से पहले या विवाह तक कन्या पक्ष को चुकाना होता है, बरमूल्य 
कहलाता है।

प्रश्न 4.
दहेज प्रथा के दोष के अन्तर्गत बेमेल विवाह को अति संक्षेप में 
समझाइए।
उत्तर:
अधिक दहेज न दे पाने के कारण माता-पिता अपनी कन्या का विष अवगुण व अपाहिज पुरुष के साथ कर देते हैं। सामान्य रूप में ये बेमेल विवाह

प्रश्न 5.
दहेज़ सम्बन्धी अपराध की सुनवाई कहीं की जाती है?
उत्तर:
दहेज सम्वन्धी अपराध की सुनवाई प्रदम श्रेणी का मजिस्ट्रेट ही कर सकता है तथा इस तरह की शिकायत लिवित होनी चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
दहेज के अर्थ को स्पष्ट करते हुए इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:

दहेज का अर्थ

दहेज शब्द अरबी भाषा के बहे शब्द से रुपान्तरित हुआ है, जिसका अर्थ है-सौगात्। विवाह के अवसर पर कन्या पक्ष द्वारा वर पक्ष को दिया जाने वाला इन, सम्पत्ति और सामान ल्यादि को दहेज कहा जाता हैं। दहेज को उर्दू में जहेज़ कहते हैं। इसे हुण्डा या वरदक्षिणा आदि नामों में से भी जाना जाता हैं। वेव्सटर शब्दकोश के अनुसार, “दहेज वह पन, वस्तु अशा सम्पत्ति है, जो एक र विवाह के समय पति के लिए सातो हैं।”

दहेज का उद्देश्य

प्राचीनकाल से ही वधू के माता-पिता द्वारा वस्त्र, गहने एवं गृहस्थी का कुछ सामान भेंट करते थे, जिसका मूल उद्देश्य वर-वधू की नई गृहस्थी को सुचारु रूप से चलाने में सहायता करना था। वर्तमान युग में दहेज नवविवाहितो के वन निर्वाह में मदद करने के उद्देश्य से ही दिया जाता है।

प्रश्न 2.
दहेज प्रथा के कारणों का उलेख कीजिए।
उत्तर:
दहेज प्रथा आज जिस विकृत रूप में व्याप्त है, उसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।

  1. अनुलोम विवाह अनुलोम विवाह के चलन से उच्च कुलों के घर की माँग बड़ती गई। उच्च कुलो के लड़कों के पिता ऐसी स्थिति में बड़ी धनराशि की मांग करने लगे।
  2. अत्तर्विवाह अन्तविवाह के नियम के कारण किसी भी कन्या का विवाह जुम की जाति अथवा उपति पर। के शाप होना आवश्यक हो गया। इस कारण विवाह का क्षेत्र सीमित हो गया। योग्य वरों की कम संख्या में दहेज को बढ़ावा दिया।
  3. विवाह की अनिवार्यता कन्या विवाह को अनिवार्य मान गया है। इसलिए उनका विवाह करना जरूरी हो गया। धीरे धीरे योग्य वरो की तलाश में धन को खर्च किया जाने लगा।
  4. धन के महत्व में वृद्धि बर्तमान समय में भौतिकदी विचारधारा के कारण पन का महत्व बढ़ गया। इससे दहेज प्रथा और भी सशकत हो गई।
  5. महँगी शिक्षा प्रणाली माता-पिता अपने बच्चों पर काफी पैसा खर्च करते है, फिर माता-पिता विवाह द्वारा इसकी पूरी का प्रयास करते हैं, जिसके फलस्वरूप यह दहेज प्रथा में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 3.
दहेज के विकृत रूप को समझाइए।
अथवा
वर्तमान समय में दहेज की प्रथा किस प्रकार विकसित हुई है?
उत्तर:
पुराने समय से प्रारम्भ हुई दहेज की परम्परा आर पूर्णरूप से विकसित हो गई है। अर्थात् आज इस प्रदा ने विकराल रूप धारण कर लिया है, इसलिए अब इसे र मूल्य कहना अधिक उपयुक्त होगा, क्योंकि योग्य, समृद्ध एवं उच्च शिक्षा प्राप्त वर के लिए अधू के माता-पिता को वर मूल्य देना पड़ता है। दूसरे शब्दों में, वर-मूल्य वह निश्चित धन या भेट हैं, जो विवाह के पहले वर पक्ष द्वारा निश्चित किया जाता है, जिसे विवाह से पूर्व या विवाह तक कन्या पश को चुकाना होता है, इसलिए आज विवाह बन्धन पवित्रता का बन्धन नहीं, बल्कि देवानी का सापत्र बन गया है।

प्रश्न 4.
अन्तर्विवाह द्वारा दहेज़ प्रथा को किस प्रकार बढ़ावा मिला हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अन्तर्विवाह के नियम के कारण किसी भी कन्या को मिला उसी की जाति अपवा उपजाति के पुरुष के आप होना आवश्यक हो गया। इस कारण हि का क्षेत्र सीमित हो गा, जिससे विशाह के लिए योग्य वरों की कमी हो गई। अब योग्य वर देने के लिए अधिक धन खर्च करने की आवश्यकता महसूस की गई। इससे दहेज की प्रथा को प्रोत्साहन मिला। योग्य और समय पर भी विवाह के लिए एक निश्चित धनराशि के साथ वस्त्र एवं आभूषणों तथा अन्य उपहारों को माँग करने लगें, ताकि अधिक-से-अधिक धन की प्राप्ति विषाह में मिलने वाले दहेज से हो सके। यदि इस निश्चित धनराशि को कन्या पक्ष देने में असमर्थ होता हैं, तो विवाह सम्म तोड़ दिया जाता है। कई बार तो तलाक जैसी घटनाएं भी देखने को मिल जाती हैं और यदि कन्या पक्ष इस निश्चित धनराशि का भुगतान करता है, तो सड़की के माता पिता या अभिभावक जीवनभर संघर्ष करते रहते हैं, लेकिन प्रत्येक माता-पिता अपनी कन्या के लिए अच्छे-से-अप्डे वर ढूंढना चाहते है, जिसके लिए वधू-मूल्य अधिक देना।

प्रश्न 5.
दहेज प्रथा के प्रमुख दोषों का वर्णन कीजिए। धनी दहेज प्रथा की हानियाँ लिखिए। 
(2018)
उत्तर:
दहेज प्रथा के कारण समाज में अनेक दोष व्याप्त है, जो निम्नलिखित हैं।

  1. पारिवारिक संपर्ष दहेज प्रथा अनेक पारिवारिक संघ से तनालों को जन्म देती हैं। दहेज कम मिलने पर नववधू को तरह-तरह के कष्ट दिए जाते हैं। उन्हें हर समय दहेज का उलाहना दिया जाता है, इससे नववधुओं में हीनता की भावना का जन्म होता है।
  2. ऋणग्रस्तता, आत्महत्या, शिशु हत्या मध्यमवर्गीय परिवारों में कन्या विवाह के लिए व की रकम जुटाना कठिन होता है। इसके लिए उन ची मात्रा में ऋण होना पड़ता है और परिवार अनपस्त हो जाता है। कभी व्यक्ति निन्दा के भय से आमहत्या कर लेता है, तो कभी कन्या शिशु को हत्या भी कर दी जाती है।
  3. बेमेल विवाह अधिक दहेज न दे पाने के कारण माता-पिता अपनी कन्या का विवाह अवगुण, अपाहिज पुरुष के साथ कर देते हैं। ये सामान्य रूप से बेमेल विवाह होते हैं।
  4. अविवाहित लड़कियों की संख्या में वृद्धि दहेज न दे पाने के कारण बहुत-सी सङ्गलियाँ अवाहित हू जाती हैं।
  5. अनेक समस्याओं को जन्म दहेज के कारण हिंसा, हत्या, चोरी आदि होने लगी हैं, क्योंकि व्यक्ति कैसे भी हो इहेव उजुटाना चाहता है, साथ ही दहेज हत्या तथा बहू जला देने की घटनाएँ भी होती हैं।

प्रश्न 6.
दहेज़ निषेद्य अधिनियम, 1961 की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
अधमरा दहेज़ प्रथा को समाप्त करने के लिए वर्ष 1961 के अधिनियम की प्रमुख शर्ते 
क्या थी?
उत्तर:
दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए वर्ष 1961 में एक विधेयक पारित किया गया, जिसे दहेज निरोधक अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है। इस अधिनियम के अनुसार दहेज लेना और देना दण्डनीय अपराध है। अधिनियम 1961 में कुछ मुख्य शर्ते में शामिल है, जो इस प्रकार है

  1. विवाह के पूर्व या बाद में जिन वस्तुओं की माँग की जाएगी, वे दहेज के दायरे में आती हैं।
  2. दो हजार रुपये तक के उपहार देने की क्रूट हैं, जिनमें वस्त्र जपा आभूषण शमिल हैं।
  3. विवाह के पहले या बाद में मिली वस्तुओं पर पूर्णरूप से लड़की का अधिकार होगा।
  4. दहेज देने और लेने के लिए 8 माह का कारस और ₹ 5,000 के इण का प्रधान है।
  5. दहेज सम्बन्धी अपराध की सुनवाई प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट ही कर सकता है तथा इस तरह की शिकायत लिक्षित होनी चाहिए।

प्रश्न 7.
अधिनियम, 1961 के अन्तर्गत 1844 में पर्याप्त संशोधन 
किए गए, जिनमें प्रमुख बातें क्या थीं? समझाए।
उत्तर:
अधिनियम, 1981 को धारा 2 के अन्तर्गत ‘दहेज निषेध अधिनियम, 1984 और 1988 के तौर पर संशोधित किया, इसमें निम्नलिखित माता को दया गया है।

  1. ‘विवाह निश्चित करने हेतु दहेज के रूप में शर्त रखी जाए’ के स्थान पर विवाह के सम्बन्ध में जो भी कुछ दहेज मिले’ वाक्य जोड़ दिया गया।
  2. अभिभावक या सम्बन्धिों से मिलने वाले उपहार उनकी आर्थिक स्थिति के अनुपात में मिलने चाहिए।
  3. कारावास की सजा अधिकतम 10 वर्ष तथा जुर्माने की राशि ₹ 15000 सी गई या माँगी गई, दोनों रकम में से जो भी अधिक हो, मानी जाएगी।
  4. अपराधी को बिना बारष्ट के भी पकड़ा जा सकता है।
  5. यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो 6 महीने में 2 वर्ष की सजा तथा ₹ 10,000 तक का जुर्माना किया जा सकता है।
  6. यदि वधू नाबालिग हैं, तो उसके बालिग होने के तौन महीने के अन्दर सम्पत्ति को हस्तान्तरित करना होगा।
  7. यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो 6 महीने में 2 वर्ष की सजा तथा ₹ 10,000 तक का जुर्माना किया जा सकता है।
  8. पत्नी की मृत्यु के बाद उसके हिस्से को सम्पत्ति का अधिकार उसके उत्तराहारियों को होगा।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1.
दहेज प्रथा क्या है? इसके कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
हिन्दू विवाह से सम्बन्धित समस्याओं में दहेज प्रथा एक प्रमुख समस्या मान जाती है। यह आजकल गम्भीर रूप धारण करती जा रही हैं। आज यह समस्या तन। गम्भीर हो गई है कि यार के कारण नवविवाहित स्त्रियों को जला देने के सामाधार आए दिन आते रहते हैं। दहेज का अर्थ सामान्यतः उस राशि, वस्तुओं या सम्पत्ति से लगाया जाता है, जिसे कन्या पक्ष विवाह के अवसर पर वर पक्ष को प्रदान करता है। बेसटर शब्दकोश के अनुसार, “दहेज वह धन, वस्तु अशा सम्पत्ति है, जो एक स्त्री विवाह के समय पति के लिए लाती है।”

दहेज प्रथा के कारण

दहेज प्रथा जिस विकृत रूप में आज है, उस रूप में वह हिंदू समाज में कभी नहीं रही। दहेज प्रथा के कारण इसके लिए लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 देखें।

 

प्रश्न 2.
दहेज प्रथा के उन्मूलन की विवेचना कीजिए।
अथवा
भारतीय समाज में दहेज प्रथा के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए इसके उन्मूलन हेतु उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दहेज प्रथा के दोष इसके लिए लघु उत्तरीय प्रश्न सं. 5 देखें।

दहेज प्रथा के उन्मूलन के उपाय/सुझाव

दहेज प्रथा के उन्मूलन के उपाय निम्नलिखित हैं

  1. शिक्षा का प्रसार दहेज प्रथा को समाप्त करने हेतु शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार किया जाए, ताकि लोग इस बुराई को पहचान कर इसे समाप्त करे।
  2. अन्तर्जातीय तथा प्रेम विवाह को प्रोत्साहन अन्तर्जातीय तथा प्रेम विवाह होने से योग्य वर ढूँढने में आसानी होगी। इससे दहेज प्रथा को समाप्त किया जा सकेगा, क्योंकि इससे विवाह क्षेत्र का विस्तार होगा, जिससे अधिक दहेज नहीं देना पड़ेगा।
  3. लड़की का आत्मनिर्भर बनना लड़कियों को आत्मनिर्भर बनना भी दहेज रोकने का एक अच्छा उपाय हैं। लड़कियों के आत्मनिर्भर बनने से भी दहेज की माँग में कमी आएगी।
  4. कानून के प्रति जागरूकता दहेज उन्मूलन में कानून भी सहायक हो सकता है, इसलिए कानून के प्रति जागरूकता लाना भी आवश्यक है, जिससे दहेज के प्रति झुकाव कम रहे।
  5. जीवनसाथी के चुनाव को स्वतन्त्रता लड़के-लड़कियों को औवन साथी के चुनाव करने की स्वतन्त्रता होना चाहिए, जिससे दहेज और प्रथा का अना हो सका।
  6. जनमत तैयार करना दहेज प्रथा के विरुद्ध जनमत तैयार किया आना चाहिए, जिससे लोग स्वयं इसी बुराई को समझ सके

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UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 11 ऐरेज

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 11
Chapter Name ऐरेज
Number of Questions Solved 25
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 11 ऐरेज

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
किसी ऐरे के तत्त्व को किससे पहचाना जाता है? .
(a) सबस्क्रिप्ट से
(b) वैरिएबल के नाम से
(C) क्रम संख्या से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ऐरे में, ऐरे के नाम के बाद सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 2
सबस्क्रिप्टेड वैरिएबल को क्या कहा जाता है?
(a) फंक्शन
(b) क्लास
(c) ऑब्जेक्ट
(d) ऐरे
उत्तर:
(d) ऐरे

प्रश्न 3
यदि = द्विविमीय ऐरे है, तो =[3] [4] सूचित करता है कि x में है। [2016]
(a) 3 कॉलम व 4 रो
(b) 4 कॉलम व 3 रो
(c) 34 एलीमेण्ट्स
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 4 कॉलम व 3 रो

प्रश्न 4
int marks[3][2] क्या प्रदर्शित करता है?
(a) वैरिएल
(b) द्विविमीय ऐरे
(c) एकविमीय ऐरे
(d) फंक्शन।
उत्तर:
(b) द्विविमीय ऐरे में, ऐरे को घोषित करने का प्रारूप
data_type array_name[rows][columns];

प्रश्न 5
Arr[5][8], मैमोरी में कितने तत्त्वों के लिए स्थान सुरक्षित करेगा?
(a) 40
(b) 400
(c) 58
(d) 13
उत्तर:
(a) Arr[5][8] में, पंक्तियों (Rows) की संख्या 5 तथा स्तम्भों (Columns) की संख्या 8 है तथा यह कुल मिलाकर (5 x 8 =) 40 तत्वों के लिए स्थान सुरक्षित करेगा।

प्रश्न 6
स्ट्रिंग में प्रयुक्त चिह्न 10 क्या कहलाता है?
(a) नल कैरेक्टर
(b) स्पेशल कैरेक्टर
(c) गारबेज कैरेक्टर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) नल कैरेक्टर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1
ऐरे को परिभाषित कीजिए। [2013, 03]
अथवा
ऐरे को केवल एक वाक्य में व्यक्त कीजिए। [2018]
उत्तर:
एक प्रकार के डाटा के समूह को एक साथ प्रदर्शित करने के लिए जिस तकनीक का प्रयोग किया जाता है, उसे ऐरे कहते हैं।

प्रश्न 2
एकविमीय ऐरे को घोषित करने का प्रारूप लिखिए।
उत्तर:
Largest data_type array_name [size] ;

प्रश्न 3
ऐरे कितने प्रकार के होते हैं? [UP 2003]
उत्तर:
ऐरे दो प्रकार के होते हैं

  • एकविमीय ऐरे
  • द्विविमीय ऐरे

प्रश्न 4
एकविमीय ऐरे से डाटा कितने प्रकार से पढ़ सकते हैं?
उत्तर:
एकविमीय ऐरे से डाटा को दो प्रकार से पढ़ सकते हैं

  • लूप का प्रयोग करके
  • बिना लूप के।

प्रश्न 5
द्विविमीय ऐरे में प्रारम्भिक मान कैसे दे सकते हैं?
उत्तर:
द्विविमीय ऐरे में प्रारम्भिक मान देने का प्रारूप data_type array_name [rows] [columns]
= {value1, value2, …, valueN};

प्रश्न 6
स्ट्रिग को घोषित करने का प्रारूप क्या होता है?
उत्तर:
char string_name [size];

लघु उत्तरीय प्रश्न I (2 अंक)

प्रश्न 1
ऐरे की उदाहरण सहित संक्षिप्त व्याख्या कीजिए। [2018]
उत्तर:
एक प्रकार के डाटा के समूह को एक साथ प्रदर्शित करने के लिए जिस तकनीक या वैरिएबल का प्रयोग किया जाता है, उसे ऐरे (Array) या सबस्क्रिप्टेड वैरिएबल (Subscripted variable) कहते हैं। ऐसा ऐरे, जिसमें ऐरे एलीमेण्ट की संख्या को व्यक्त करने के लिए केवल एक ही सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है, एकविमीय ऐरे कहलाता है।
एकविमीय ऐरे को घोषित करना
अन्य वैरिएबल की तरह, ऐरे को भी प्रोग्राम में प्रयोग करने से पहले घोषित करना होता है।

प्रारूप
data type array_name [size];
उदाहरण
int age [100];
float salary [15];

द्विविमीय ऐरे में, डाटा सारणी के रूप में संग्रहीत किया जाता है, जिसमें पंक्तियों (Rows) तथा स्तम्भों (Columns) का संयोजन (Combination) होता है। द्विविमीय ऐरे को मैट्रिक्स (Matrix) के नाम से भी जाना जाता है।

द्विविमीय ऐरे को घोषित करना
प्रारूप
data_type array_name [rows][columns);
उदाहरण
int x [3] [4];
float matrix [20] [25];
पहली स्टेटमेण्ट में से 3 व कॉलम 4 है, इसलिए ऐरे का साइज (3 x 4 =) 12 होगा।

प्रश्न 2
ऐरे को कैसे घोषित किया जाता है?
उत्तर:
ऐरे को घोषित करने के लिए सबसे पहले ऐरे का डाटा टाइप बताना होता है। कि वह int, chart, float आदि में से किस टाइप का है। फिर ऐरे का नाम और उसके साथ पैरेनथेसिस ([ ]) में ऐरे की संख्या लिखनी होती है। प्रारूप data_type array_name [size] ।

प्रश्न 3
एकविमीय ऐरे का प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक क्यों होता है?
उत्तर:
ऐरे को घोषित करने के बाद उसका प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक होता है अन्यथा उसमें निरर्थक मान (Garbage value) भर जाता है, इसलिए ऐरे को कम्पाइल करते समय ही उसका प्रारम्भिक मान दे सकते हैं, जिससे उसमें निरर्थक मान न आए। प्रारम्भिक मान देते समय, यदि सूची के मानों की संख्या ऐरे के साइज से कम है तो केवल उतने ही तत्त्वों (Elements) को प्रारम्भिक मान दिया जाएगा और शेष का मान शून्य रख दिया जाएगा।

प्रश्न 4
एकविमीय ऐरे में लूप की सहायता से डाटा इनपुट कीजिए।
उत्तर:
एकविमीय ऐरे में लूप की सहायता से डाटा इनपुट निम्न उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है।
void main( )
{
int rollno [5];
for (int i = 0; 1 < 5; i++)
{
cout<<“Enter the Roll No.” <<end1; cin>>rollno[i];
}
}

प्रश्न 5
स्ट्रिग से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
चिह्न (” “) (Quotation marks) के अन्तर्गत लिखा गया कोई भी संख्यात्मक, शाब्दिक तथा विशेष चिह्न स्ट्रिग कहलाता है। C++ में, वर्गों की संख्या या स्ट्रिग को वर्गों का ऐरे माना जाता है, जिसे एक अलग डाटा टाइप का नाम न देकर char ऐरे ही कहा जाता है। स्ट्रिग के अन्त में नल कैरेक्टर (NO) लगा होता है, जो स्ट्रिग की समाप्ति को प्रदर्शित करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न II (3 अंक)

प्रश्न 1
द्विविमीय ऐरे से डाटा को कैसे पढ़ा जाता है?
उत्तर:
द्विविमीय ऐरे से डाटा को पढ़ने के लिए दो लूपों की आवश्यकता होती है।
उदाहरण:
void main( )
int arr [2] [3] , r, c;
for(r = 0; r < 2; r++)
{
for(c = 0; c < 3; c++)
{
cout<<“Enter the value”<<end1; cin>>arr[r][c];
}
}
for(r = 0; r < 2; r++)
{
for(c = 0; c < 3; c++)
{
cout<<“Array”<<endl<<arr[r] [c];
}
}
}

प्रश्न 2
एक C++ का प्रोग्राम लिखिए, जिसमें 5 परीक्षार्थियों की उम्र और ग्रेड इनपुट किए जाते हैं। यदि छात्रों की उम्र 20 वर्ष से अधिक हो और ग्रेड ‘B’ हो, उनकी उम्र व ग्रेड प्रिण्ट करें।
उत्तर:
#include
void main( )
{
int age [5], i;
char grade [6];
for (i=0; i<5; i++)
cout<<“Enter age and grade of student”<<i+1<<“:”; cin>>age[i]>>grade [i];
}
for (i=0; i<5; i++) { if ( (age [1]>=20) && (grade[i]==’B’))
{
cout<<“\n age=”< }
}
}

आउटपुट
Enter age and grade of student 1: 25 A
Enter age and grade of student 2:25 B
Enter age and grade of student 3:33 A
Enter age and grade of student 4:24 A
Enter age and grade of student 5:12 A
age = 25 grade = B

प्रश्न 3
इनपुट स्ट्रिग में उपस्थित अक्षरों की संख्या बताने हेतु C++ में एक प्रोग्राम लिखिए। [2010]
उत्तर:
#include
#include
#include
void main( )
{
clrscr( );
int charcnt=0, i;
char ch, str[125];
cout<<“Enter a string:”;
gets (str);
for (i=0; str [i] != “\0′;i++)
charcnt=i;
cout<<“\nTotal Characters:”
<<charcnt+1;
getch( );
}

आउटपुट
Enter a string : Arihant
Total Characters : 7

प्रश्न 4
स्ट्रिग को प्रारम्भिक मान देने की प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
स्ट्रिग को प्रारम्भिक मान देना आवश्यक होता है। C++ में, स्टिगों को दो विधियों द्वारा प्रारम्भिक मान दिया जा सकता है।
उदाहरण
char name [30]= “RAHUL SHARMA”;
अथवा
char name [30] = { ‘R’, ‘A’, ‘H’, ‘U’, ‘L’,’ ‘, ‘s’, ‘H’, ‘A’, ‘R’, ‘M’, ‘A’, ‘\0’ };
दूसरे उदाहरण में ‘\0′ (Null character) का प्रयोग किया गया है जो स्ट्रिग के अन्त को दर्शाता है, परन्तु पहले उदाहरण में ‘\0’ प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि स्ट्रिग का मान कोटेशन चिह्नों ( ” “) में दिया है, जिसे कम्पाइलर स्वत: ही स्ट्रिंग मान लेगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1
एकविमीय ऐरे को उदाहरण सहित विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
ऐसा ऐरे, जिसमें ऐरे एलीमेण्ट की संख्या को व्यक्त करने के लिए केवल एक ही सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है, एकविमीय ऐरे कहलाता है।

एकविमीय ऐरे को घोषित करना
अन्य वैरिएबल की तरह, ऐरे को भी प्रोग्राम में प्रयोग करने से पहले घोषित करना होता है।

प्रारूप
data type array_name [size]
उदाहरण
int age [100];
float salary[15];

एकविमीय ऐरे का प्रारम्भिक मान रखना
ऐरे को घोषित करने के बाद उसका प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक होता है। अन्यथा उसमें निरर्थक मान (Garbage value) भर जाता है, इसलिए ऐरे को कम्पाइल करते समय ही उसका प्रारम्भिक मान दे सकते हैं।
प्रारूप
data_type array_name [size] = {valuel, value2, …, valueN);
उदाहरण
int marks [5]={50,70, 89,90,75};

उदाहरण
एकविमीय ऐरे की सहायता से डाटा इनपुट करना व उसका रिवर्स ऑर्डर (Order) प्रिण्ट कराना।
#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void main( )
{
clrscr( );
int A[5], i, n=5;j = n-1, temp;
cout<<“Enter the array element”<<end1;
for (i=0;i<n; i++) { cin>>A[i];
}
for(i=0, j = n-1;i<n/2;i++,j–)
{
temp=A[i];
A[i]=A[j];
A[j] =temp;
}
cout<<“Reverse array”<<end1;
for (i=0;i<n;i++)
{
cout<<A[i]<<” “;
}
getch( );
}

आउटपुट
Enter the array element
4
5
6
2
6
Reverse array
6  2  6  5  4

प्रश्न 2
द्विविमीय ऐरे को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
द्विविमीय ऐरे में, डाटा सारणी के रूप में संग्रहीत किया जाता है, जिसमें पंक्तियों (RowB) तथा स्तम्भों (Columns) का संयोजन (Combination) होता है। द्विविमीय ऐरे को मैट्रिक्स (Matrix) के नाम से भी जाना जाता है।

द्विविमीय ऐरे को घोषित करना
प्रारूप: data_type array_name [rows] {columns ] ;
उदाहरण int x [3] [4] ;
float matrix [20] [25];

पहली स्टेटमेण्ट में से 3 व कॉलम 4 है, इसलिए ऐरे का साइज (3 x 4 =) 12 होगा।
द्विविमीय ऐरे को प्रारम्भिक मान देना
एकविमीय ऐरे की तरह द्विविमीय ऐरे में भी उसका प्रारम्भिक मान रखना आवश्यक होता है, इसलिए ऐरे को कम्पाइल करते समय ही उसका प्रारम्भिक मान दे सकते हैं।

प्रारूप data_type array_name (rows] [columns] ={value1, value2, …, valueN);
अथवा
data_type array_name[rows] [columns] ={{value of 1st row}, {value of 2nd row},….};

उदाहरण

int x [3] [4] = (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9,10, 11, 12}},
अथवा
int x [3][4] = ( 1, 2, 3, 4), (5, 6, 7, 8}, (9, 10, 11, 12} };

उदाहरण
मैट्रिक्स को प्रिण्ट करना
#include<iostream.h>
void main ( )
{
int m, n, A[10] [10],i,j;
cout<<“Enter the number of rows: “; cin>>m;
cout<<“Enter the number of columns : “; cin>>n;
cout<<“Enter the elements of the matrix” <<end1;
for(i=0;i<m; i++)
{
for(j=0; j<n; j++) { cin>>A[i][j];
}
}
cout<<“Matrix”<<end1;
for (i=0; i<m;i++)
{
for(j=0; j<n; j++)
{
cout<<A[i][j]<<” “;
}
cout<<end1;
}
}

आउटपुट
Enter the number of rows : 3
Enter the number of columns :3
Enter the elements of the matrix
5
6
7
8
9
5
6
4
3
Matrix
5 6 7
8 9 5
6 4 3

प्रश्न 3
ऐरे से आप क्या समझते हैं? एकविमीय तथा द्विविमीय ऐरे में अन्तर उदाहरण सहित समझाइए। [2007]
अथवा
एकविमीय ऐरे तथा द्विविमीय ऐरे में अन्तर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। [2010]
उत्तर:
एक प्रकार के डाटा के समूह को एक साथ प्रदर्शित करने के लिए जिस तकनीक का प्रयोग किया जाता है, उसे ऐरे कहते हैं।
एकविमीय ऐरे तथा द्विविमीय ऐरे में अन्तर

एकविमीय ऐरे द्विविमीय ऐरे
इस ऐरे में, एलीमेण्ट की संख्या व्यक्त करने के लिए केवल एक ही सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है। इस ऐरे में, एलीमेण्ट की संख्या व्यक्त करने के लिए दो सबस्क्रिप्ट का प्रयोग किया जाता है।
प्रारूप
data_type array_name[size];
प्रारूप
data_type array_name[rows] [columns];
उदाहरण int age [50]; उदाहरण int a [3] [4];

उदाहरण
एकविमीय ऐरे की सहायता से डाटा इनपुट करना व उसका रिवर्स ऑर्डर (Order) प्रिण्ट कराना।
#include<iostream.h>
#include<conio.h>
void main( )
{
clrscr( );
int A[5], i, n=5;j = n-1, temp;
cout<<“Enter the array element”<<end1;
for (i=0;i<n; i++) { cin>>A[i];
}
for(i=0, j = n-1;i<n/2;i++,j–)
{
temp=A[i];
A[i]=A[j];
A[j] =temp;
}
cout<<“Reverse array”<<end1;
for (i=0;i<n;i++)
{
cout<<A[i]<<” “;
}
getch( );
}

आउटपुट
Enter the array element
4
5
6
2
6
Reverse array
6 2 6 5 4

प्रश्न 4
C++ में, दस संख्याओं की ऐरे में सबसे छोटी तथा सबसे बड़ी संख्या छापने हेतु प्रोग्राम लिखिए। [2009]
उत्तर:
#include<iostream.h>
void main( )
{
int Arr[100], n, i, small, large;
cout<<“Enter number of elements that you want to insert:”; cin>>n;
for (i=0; i<n; i++)
{
cout<<“Enter element “<<i+1<<“:”; cin>>Art [i];
}
small = Arr[0];
large = Arr [0];
for (1=0; i<n; i++)
{
if (Arr[i]<small) small=Arr[i]; if (Arr[i]>large)
large=Arr[i];
}
cout<<“\nLargest element is:” <<large;
cout<<“\n Smallest element is:” <<small;
getch( );
}

आउटपुट
Enter number 1elements that you want to insert: 10
Enter element 1: 23
Enter element 2: 65
Enter element 3: 34
Enter element 4: 89
Enter element 5: 76
Enter element 6: 45
Enter element 7: 44
Enter element 8: 65
Enter element 9: 23
Enter element 10:12
Largest element is : 89
Smallest element is: 12

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UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 8 प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव

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Board UP Board
Class Class 12
Subject Home Science
Chapter Chapter 8
Chapter Name प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव
Number of Questions Solved 33
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Home Science Chapter 8 प्रदूषण एवं पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव

बहुविकल्पीय प्रश्न   (1 अंक)

प्रश्न 1.
पर्यावरण कहते हैं
(a) प्रदूषण को
(b) वातावरण को
(c) पृथ्वी के चारों ओर के वातावरण को
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पृथ्वी के चारों ओर के वातावरण को

प्रश्न 2.
वायु प्रदूषण के कारण हैं
(a) औद्योगीकरण
(b) वनों की अनियमित कटाई
(c) नगरीकरण
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 3.
जल प्रदूषण को रोकने के लिए कौन-से रासायनिक पदार्थ का प्रयोग किया जाता है?
(a) सोडियम क्लोराइड
(b) कैल्शियम क्लोराइड
(C) ब्लीचिंग पाउडर
(d) पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट
उत्तर:
(c) ब्लीचिंग पाउडर

प्रश्न 4.
लाउडस्पीकर की आवाज से किस प्रकार का प्रदूषण फैलता है?
(a) वायु प्रदूषण
(b) ध्वनि प्रदूषण
(C) मृदा प्रदूषण
(d) जल प्रदूषण
उत्तर:
(b) ध्वनि प्रदूषण

प्रश्न 5.
ध्वनि प्रदूषण के कारण हैं
(a) वाहनों के हॉर्न
(b) सायरन
(c) लाउडस्पीकर
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 6.
ध्वनि प्रदूषण प्रभावित करता है
(a) आमाशय को
(b) वृक्क को
(c) कान को
(d) यकृत को
उत्तर:
(c) कान को

प्रश्न 7.
पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है?
(a) 1 जून
(b) 5 जून
(c) 12 जून
(d) 18 जून
उत्तर:
(b) 5 जून

प्रश्न 8.
वस्तुओं के जलने से कौन-सी गैस बनती है?
(a) ऑक्सीजन
(b) कार्बन डाइऑक्साइड
(c) नाइट्रोजन
(d) अमोनिया
उत्तर:
(b) कार्बन डाइऑक्साइड

प्रश्न 9.
पर्यावरण रक्षा के लिए (2018)
(a) पेड़-पौधे उगाने चाहिए
(b) ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत ढूंढना चाहिए
(c) नदियों को साफ रखना चाहिए।
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक, 25 शब्द)

प्रश्न 1.
पर्यावरण की एक परिभाषा लिखिए
उत्तर:
जिन्सबर्ट के अनुसार, “पर्यावरण वह सब कुछ है, जो एक वस्तु को चारों ओर से घेरे हुए है तथा उस पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है।”

प्रश्न 2.
जनजीवन पर पर्यावरण के हानिकारक प्रभाव को रोकने के बारे में लिखिए
उत्तर:
जनजीवन पर पर्यावरण का प्रमुख हानिकारक प्रभाव पर्यावरण प्रदूषण के माध्यम से पड़ता है। अतः पर्यावरण प्रदूषण को नियन्त्रित करके उसके हानिकारक प्रभावों को रोका जा सकता है।

प्रश्न 3.
पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण के किसी एक भाग अथवा सभी भागों का दूषित होना ही पर्यावरण | प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 4.
पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण क्या हैं? (2017)
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्न हैं।

  1. वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का बढ़ना।
  2. घरेलू अपमार्जकों का अधिकाधिक प्रयोग।
  3. वाहित मल का नदियों में गिरना।
  4. औद्योगिक अपशिष्ट तथा रासायनिक पदार्थों का विसर्जन।

प्रश्न 5.
प्रदूषण के प्रकार लिखिए।   (2013)
उत्तर:
प्रदूषण के चार प्रकार हैं- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण व मृदा प्रदूषण।

प्रश्न 6.
वायु प्रदूषण से होने वाली चार बीमारियों के नाम लिखिए। (2017)
अथवा
वायु प्रदूषण से फैलने वाले चार रोगों के नाम लिखिए। (2012)
उत्तर:
वायु प्रदूषण से चेचक, तपेदिक, खसरा, काली खाँसी आदि रोग हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
वृक्ष पर्यावरण को कैसे शुद्ध करते हैं?
अथवा
पेड़-पौधे वातावरण को कैसे शुद्ध करते हैं?
उत्तर:
पेड़-पौधे वातावरण में ऑक्सीजन को विसर्जित करके उसे शुद्ध बनाए रखते हैं तथा वातावरण से हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं।

प्रश्न 8.
कल-कारखानों से वातावरण कैसेप्रदूषित होता है?
उत्तर:
कल-कारखानों से विसर्जित होने वाले अपशिष्ट पदार्थों (गन्दा जल, रसायन आदि) एवं गैसों (धुआँ) से जल प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है, इसके अतिरिक्त इनमें उत्पन्न उच्च ध्वनि से ध्वनि प्रदूषण में भी वृद्धि होती है।

प्रश्न 9.
जल प्रदूषण के कारण लिखिए।
अथवा
जल प्रदूषण के दो कारण लिखकर उनके निवारण के उपाय लिखिए।
उत्तर:
जल प्रदूषण के प्रमुख कारण जल स्रोतों में औद्योगिक अपशिष्टों एवं घरेलू वाहित मल का मिलना है। औद्योगिक अपशिष्ट को जल-स्रोतों में मिलने से रोकनी, सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट, जैव उर्वरक के प्रयोग आदि से जल प्रदूषण का निवारण किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
मृदा प्रदूषण का जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
मृदा प्रदूषण से जनजीवन पर निम्न प्रभाव पड़ते हैं।

  1. मृदा प्रदूषण का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव फसलों पर पड़ता है, जिससे कृषि उत्पादन घटता है।
  2. प्रदूषित मृदा में उत्पन्न भोज्य पदार्थ ग्रहण करने से मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 11.
ध्वनि की तीव्रता के मापन की इकाई क्या है?
उत्तर:
ध्वनि की तीव्रता के मापन की इकाई डेसीबल है।

प्रश्न 12.
ध्वनि प्रदूषण के कारण बताइए।
उत्तर:
सामान्यत: ध्वनि प्रदूषण के दो कारण होते हैं।

  1. प्राकृतिक
  2. कृत्रिम

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 50 शब्द)

प्रश्न 1.
मानव जीवन पर वायु प्रदूषण के प्रभाव लिखिए।
उत्तर:
वायु प्रदूषण मानव जीवन को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित करता है।

  1. वायु प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ होती हैं; जैसे—छाती एवं साँस सम्बन्धी बीमारियाँ-तपेदिक, फेफड़े का कैंसर आदि।
  2. वायु प्रदूषण से नगरों का वातावरण दूषित हो जाता है तथा अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वायु प्रदूषण से बच्चों को खाँसी तथा साँस फूलने की समस्या पैदा होती है। वायु प्रदूषण महत्त्वपूर्ण स्मारकों, भवनों आदि के क्षरण में मुख्य भूमिका निभाता है; जैसे-ताजमहल।।
  3. वायु प्रदूषण से वायुमण्डल में हानिकारक गैसों की मात्रा बढ़ती है, इससे ओजोन परत का क्षरण होता है।
  4. वायु प्रदूषण के कारण ओजोन क्षरण से पराबैंगनी किरणों का प्रभाव हमारे | ऊपर अधिक पड़ता है, जिससे त्वचा कैंसर जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो | सकती हैं।
  5. वायु प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग का एक प्रमुख कारण है।
  6. वायु प्रदूषण से कृषि एवं फसलों को नुकसान पहुँचता है। कृषि उत्पादन में कमी होती है। वायु प्रदूषण अम्ल वर्षा का कारण बनता है, जिससे मानव, वनस्पति, भवन आदि सभी प्रभावित होते हैं।

प्रश्न 2.
संवातन किसे कहते हैं? यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वायु प्राणियों के जीवन का एक आवश्यक तत्त्व है। मनुष्य के बेहतर स्वास्थ्य हेतु शुद्ध वायु आवश्यक है। संवातन से आशय ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें शुद्ध वायु का कमरे में प्रवेश और अशुद्ध वायु का निराकरण किया जाता है। अशुद्ध वायु स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है तथा विभिन्न रोगों को निमन्त्रण देती है। संवातन हेतु घर में खिड़की, दरवाजों एवं रोशनदानों की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे घर के अन्दर, बाहर से शुद्ध वायु का प्रवाह होता रहे एवं घर का वातावरण स्वस्थ बना रहे।

प्रश्न 3.
वायु प्रदूषण के कारण और रोकथाम के उपाय बताइए
अथवा
वायु प्रदूषण से क्या तात्पर्य है? वायु प्रदूषण किन कारणों से होता है?
उत्तर:
कुछ बाहरी कारकों के समावेश से किसी स्थान की वायु में गैसों के प्राकृतिक अनुपात में होने वाले परिवर्तन को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से धूलकण, धुआँ, कार्बन-कण, सल्फर डाइऑक्साइड (SO,), शीशी, कैडमियम आदि घातक पदार्थों के वायु में मिलने से होता है। ये सब उद्योग, परिवहन के साधनों, घरेलू भौतिक साधनों आदि के माध्यम से वायुमण्डल में मिलते हैं, जिससे वायु प्रदूषित हो जाती है।
वायु प्रदूषण के कारण
वायु प्रदूषण निम्नलिखित कारणों से फैलता है।

  1. औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के परिणामस्वरूप उत्पन्न विभिन्न गैसे, धुआँ | आदि। विभिन्न प्रकार के ईंधनों; जैसे- पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल आदि के दहन से उत्पन्न धुआँ एवं गैसें।
  2. वनों की अनियमित और अनियन्त्रित कटाई।
  3. रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का प्रयोग।

वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
वायु प्रदूषण को रोकने हेतु निम्न उपाय किए जा सकते हैं।

  1. पदार्थों का शोधन करना।
  2. घरेलू रसोई एवं उद्योगों आदि में ऊँची चिमनियों द्वारा धुएँ का निष्कासन।
  3. परिवहन के साधनों पर धुआँरहित यन्त्र लगाना।
  4. ईंधन के रूप में सीएनजी, एलपीजी, बायो डीजल आदि को प्रयोग करना।

प्रश्न 4.
जल प्रदूषण द्वारा मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए
अथवा
जल प्रदूषण से होने वाली हानियों का वर्णन कीजिए
उत्तर:
जल प्रदूषण से मानव जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं।

  1. प्रदूषित जल के सेवन से विभिन्न प्रकार के रोग फैलते हैं; जैसे-टाइफाइड, हैजा, अतिसार, पेचिश।
  2. जल प्रदूषण से पेयजल का संकट उत्पन्न होता है।
  3. प्रदूषित जल वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं को हानि पहुँचाता है।
  4. प्रदूषित जल का कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  5. प्रदूषित जल के सेवन से दाँतों की समस्या, पेट की समस्या, कब्ज आदि | बीमारियाँ भी फैलती हैं। उदाहरण राजस्थान में प्रदूषित जल के सेवन से ‘नारू’ नामक रोग फैलने से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।
  6. मत्स्य उत्पादन प्रभावित होता है।

प्रश्न 5.
ध्वनि प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
UP Board Class12 Home Science Chapter 8 1

प्रश्न 6.
जल प्रदूषण के दो कारण लिखिए
उत्तर:
जल प्रदूषण के दो कारण निम्न प्रकार हैं।

  1. उद्योगों; जैसे-चमड़ा उद्योग, रसायन उद्योग आदि से निकलने वाला अपशिष्ट | पदार्थ, गन्दा जल आदि जल स्रोतों को दूषित कर देता है।
  2. नगरीकरण के परिणामस्वरूप अपशिष्ट पदार्थों आदि का जल में मिलना। यमुना नदी इस प्रकार के प्रदूषण का ज्वलन्त उदाहरण है।

प्रश्न 7.
पर्यावरण प्रदूषण जनजीवन को कैसे प्रभावित करता है?
अथवा
व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पर्यावरण प्रदूषण का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण वर्तमान समय में मानव के समक्ष उत्पन्न एक गम्भीर समस्या है। पर्यावरण प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्रों पर पड़ता है। पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव को हम निम्नलिखित रूपों में स्पष्ट कर सकते हैं।
जन स्वास्थ्य पर प्रभाव
जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव निम्नलिखित हैं।

  1. प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियाँ; जैसे-हैजा, कॉलरा, टायफाइड आदि होती हैं।
  2. ध्वनि प्रदूषण से सर दर्द, चिड़चिड़ापन, रक्तचाप बढ़ना, उत्तेजना, हृदय की धड़कन बढ़ना आदि समस्याएँ होती हैं।
  3. जल प्रदूषण से टायफाइड, पेचिश, ब्लू बेबी सिण्ड्रोम, पाचन सम्बन्धी विकार (कब्ज) आदि समस्याएँ होती हैं।
  4. वायु प्रदूषण से फेफड़े एवं श्वास सम्बन्धी, श्वसन-तन्त्र की बीमारियाँ होती हैं। व्यक्तिगत कार्यक्षमता पर प्रभाव । व्यक्तिगत कार्यक्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव निम्नलिखित हैं।
  5. पर्यावरण प्रदूषण व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
  6. इससे व्यक्ति की कार्यक्षमता अनिवार्य रूप से घटती है।।
  7. प्रदूषित वातावरण में व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं रह पाता।
  8. प्रदूषित वातावरण में व्यक्ति की चुस्ती, स्फूर्ति, चेतना आदि भी घट जाती है।

आर्थिक जीवन पर प्रभाव
आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव निम्नलिखित हैं।

  1. पर्यावरण प्रदूषण का गम्भीर प्रभाव जन सामान्य की आर्थिक गतिविधियों एवं आर्थिक जीवन पर पड़ता है।
  2. कार्यक्षमता घटने से उत्पादन दर घटती है।
  3. साधारण एवं गम्भीर रोगों के उपचार में अधिक व्यय करना पड़ता है।
  4. आय दर घटने तथा व्यय बढ़ने पर आर्थिक संकट उत्पन्न होता है। इस प्रकार पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन पर बहुपक्षीय, गम्भीर तथा प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करता है। अत: इसके समाधान हेतु व्यक्ति एवं राष्ट्र दोनों को मिलकर कार्य करना चाहिए।

प्रश्न 8.
पर्यावरण संरक्षण के लिए जनता को कैसे जागरूक किया जा सकता है?
अथवा
पर्यावरण संरक्षण के उपाय लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण का मानव जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध है, पर्यावरण संरक्षण के लिए जनचेतना का होना बहुत आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य निम्नलिखित उपायों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

  1. पर्यावरण शिक्षा द्वारा जनता में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाई जा सकती है। सामान्य जनता को पर्यावरण के महत्त्व, भूमिका तथा प्रभाव आदिसे अवगत कराना आवश्यक है।
  2. वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कराना चाहिए; जैसे-स्टॉकहोम सम्मेलन (1972), रियो डि जेनेरियो सम्मेलन (1992)।
  3. गाँव, शहर, जिला, प्रदेश, राष्ट्र आदि सभी स्तरों पर पर्यावरण संरक्षण में लोगों को शामिल करना चाहिए।
  4. पर्यावरण अध्ययन से सम्बन्धित विभिन्न सेमिनार पुनश्चर्या, कार्य-गोष्ठियाँ, | दृश्य-श्रव्य प्रदर्शनी आदि का आयोजन कराया जा सकता है।
  5. विद्यालय, विश्वविद्यालय स्तर पर ‘पर्यावरण अध्ययन विषय को लागू करना एवं प्रौढ़ शिक्षा में भी पर्यावरण-शिक्षा को स्थान देना महत्त्वपूर्ण उपाय है।
  6. जनसंचार माध्यमों-रेडियो, दूरदर्शन तथा पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
  7. पर्यावरण से सम्बन्धित विभिन्न राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करना महत्त्वपूर्ण प्रयास है; जैसे-इन्दिरा गाँधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार, वृक्ष मित्र पुरस्कार, महावृक्ष पुरस्कार, इन्दिरा गाँधी पर्यावरण पुरस्कार आदि।
  8. विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) का आयोजन जागरूकता लाने की दिशा में उठाया गया महत्त्वपूर्ण कदम है।

प्रश्न 9.
मानव जीवन में जल का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
जल सभी जीवन-जन्तु एवं वनस्पतियों के लिए अत्यन्त आवश्यक है। मानव के लिए तो ‘जल ही जीवन है ऐसा माना जाता है। जल का उपयोग केवल पीने के पानी और कृषि के लिए ही नहीं होता, बल्कि जल के अन्य कई उपयोग हैं; जैसे-कल-कारखानों और इण्डस्ट्रीज क्षेत्रों में भी जल अत्यन्त आवश्यक है। घर बनाने से लेकर मोटरगाड़ी इत्यादि चलाने, यातायात के साधनों तक सभी चीजों में ही जल की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी घर में एक दिन पानी नहीं आता है, तो उस दिन उस घर का सारा काम बन्द हो जाता है; जैसे-खाना नहीं बन पाता, कपड़े नहीं धुल पाते, साफ-सफाई तथा स्नान आदि मुश्किल होता है। इसके अतिरिक्त जल की कमी के कारण कृषि सबसे अधिक प्रभावित होती है। फसलें नष्ट हो जाती हैं, जिससे बाजार में उपलब्ध अनाजों के दाम भी बढ़ जाते हैं। अतः जल मानव जीवन में हर क्षण महत्त्वपूर्ण है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न ( 5 अंक, 100 शब्द)

प्रश्न 1.
पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? यह कितने प्रकार का होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण से आशय पर्यावरण के किसी एक या सभी भागों का दूषित होना है। यहाँ दूषित होने से आशय पर्यावरण के प्रकृति प्रदत्त रूप में इस प्रकार परिवर्तन होता है, जोकि मानव जीवन के लिए प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करे। पर्यावरण प्रदूषण जल, मृदा, वायु तथा ध्वनि के रूप में हो सकता है। पर्यावरण के इन कारकों के आधार पर ही पर्यावरण प्रदूषण के चार रूप हैं।

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. मृदा प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण

वायु प्रदूषण
कुछ बाहरी कारकों के समावेश से किसी स्थान की वायु में गैसों के प्राकृतिक अनुपात में होने वाले परिवर्तन को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से धूलकण, धुआँ, कार्बन-कण, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), शीशा, कैडमियम आदि घातक पदार्थों के वायु में मिलने से होता है। ये सब उद्योग, परिवहन के साधनों, घरेलू भौतिक साधनों आदि के माध्यम से वायुमण्डल में मिलते हैं, जिससे वायु प्रदूषित हो जाती है।
जल प्रदूषण
जल के मुख्य स्रोतों में अशुद्धियों तथा हानिकारक तत्त्वों का समाविष्ट हो जाना ही जल प्रदूषण है। जल में जैव-रासायनिक पदार्थों तथा विषैले रसायनों, सीसा, कैडमियम, बेरियम, पारा, फॉस्फेट आदि की मात्रा बढ़ने पर जल प्रदूषित हो जाता है। इन प्रदूषकों के कारण जल अपनी उपयोगिता खो देता है तथा जीवन के लिए घातक हो जाता है। जल प्रदूषण दो प्रकार का होता है-दृश्य प्रदूषण एवं अदृश्य प्रदूषण।।
मृदा प्रदूषण
मृदा प्रदूषण, पर्यावरण प्रदूषण का एक अन्य रूप है। मिट्टी में पेड़-पौधों के लिए हानिकारक तत्त्वों का समावेश हो जाना ही मृदा प्रदूषण है।
मृदा प्रदूषण के कारण
मृदा प्रदूषण के निम्नलिखित कारण होते हैं।

  1. मृदा प्रदूषण की दर को बढ़ाने में जल तथा वायु प्रदूषण का भी योगदान होता है।
  2. वायु में उपस्थित विषैली गैसे, वर्षा के जल में घुलकर भूमि पर पहुँचती हैं, जिससे मृदा प्रदूषित होती है।
  3. औद्योगिक संस्थानों से विसर्जित प्रदूषित जल तथा घरेलू अपमार्जकों आदि से युक्त जल भी मृदा प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
  4. इसके अतिरिक्त रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, फफूदीनाशकों आदि का अनियन्त्रित उपयोग भी मृदा को प्रदूषित करता है।

मृदा प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि मृदा प्रदूषण, वायु एवं जल प्रदूषण से अन्तर्सम्बन्धित है। अतः इसकी रोकथाम के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। आवश्यक है कि कृषि क्षेत्र में सतत् विकास को दृष्टि में रखते हुए, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का संयमित प्रयोग किया जाए।
ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण पर्यावरण प्रदूषण का ही एक रूप है। पर्यावरण में अनावश्यक तथा अधिक शोर का व्याप्त होना ही ध्वनि प्रदूषण है। वर्तमान युग में शोर अर्थात् ध्वनि प्रदूषण में अत्यधिक वृद्धि हुई है, इसको प्रतिकूल प्रभाव हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। ध्वनि प्रदूषण की माप करने के लिए ध्वनि की तीव्रता की माप की जाती है। इसकी माप की इकाई को डेसीबल कहते हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि 85 डेसीबल से अधिक तीव्रता वाली ध्वनि का पर्यावरण में व्याप्त होना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अतः पर्यावरण में 85 डेसीबल से अधिक तीव्रता वाली ध्वनियों का व्याप्त होना ध्वनि प्रदूषण है।
ध्वनि प्रदूषण के कारण
ध्वनि प्रदूषण के सामान्यत: दो कारण हैं

  1. प्राकृतिक
  2. कृत्रिम

प्राकृतिक कारण

  1. बादलों की गड़गड़ाहट
  2. बिजली की कड़के
  3. भूकम्प एवं ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न ध्वनि
  4. आँधी, तूफान आदि से उत्पन्न शोर।

कृत्रिम अथवा मानवीय कारण
ध्वनि प्रदूषण फैलाने में मुख्यतः कृत्रिम कारकों का ही महत्त्वपूर्ण योगदान है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

1.परिवहन के साधनों से उत्पन्न शोर जैसे बस, ट्रक, मोटरसाइकिल, हवाई | जहाज, पानी का जहाज आदि से उत्पन्न ध्वनियाँ ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाती हैं।

2.उद्योगों, फैक्टरियों आदि का शोर फैक्टरियों, औद्योगिक संस्थानों आदि की विशालकाय मशीनें, कलपुर्जे, इंजन आदि भयंकर शोर उत्पन्न करके ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं।

3.विभिन्न प्रकार के विस्फोट एवं सैनिक अभ्यास पहाड़ों को काटने की गतिविधियाँ एवं युद्ध क्षेत्र में गोला-बारूद आदि के प्रयोग से ध्वनि प्रदूषण फैलता है।

4.मनोरंजन के साधन टीवी, म्यूजिक सिस्टम आदि मनोरंजन के साधन भी ध्वनि | प्रदूषण फैलाते हैं।

5.विभिन्न लड़ाकू एवं अन्तरिक्ष यान वायुयान, सुपरसोनिक विमान वे अन्तरिक्ष यान आदि ध्वनि प्रदूषण में योगदान करते हैं।

6.उत्सवों का आयोजन विभिन्न उत्सवों आदि में प्रयुक्त लाउडस्पीकर, म्यूजिक सिस्टम, डी. जे. आदि द्वारा ध्वनि प्रदूषण फैलाया जाता है।

शोर या ध्वनि प्रदूषण पर नियन्त्रण/उपचार
ध्वनि प्रदूषण नियन्त्रित करने के कुछ उपाय निम्नलिखित हैं।

  1. उद्योगों के शोर के नियन्त्रण के लिए कारखाने आदि में शोर अवरोधक दीवारें तथा मशीनों के चारों ओर मफलरों का कवच लगाना चाहिए।
  2. कल-कारखानों को शहर से दूर स्थापित करना चाहिए।
  3. मोटर वाहनों में बहुध्वनि वाले हॉर्न बजाने पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए।
  4. उद्योगों में श्रमिकों को कर्ण प्लग या कर्ण बन्धकों का प्रयोग अनिवार्य किया | जाना चाहिए।
  5. आवास गृहों, पुस्तकालयों, चिकित्सालयों, कार्यालयों आदि में उचित निर्माण सामग्री तथा उपयुक्त बनावट द्वारा शोर से बचाव किया जा सकता है।
  6. अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अधिकतम शोर सीमा का निर्धारण करना चाहिए। ध्वनिरोधक सड़कों एवं भवनों को निर्माण करना अन्य उपाय हैं !

उपरोक्त उपायों द्वारा ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? जल व वायु प्रदूषण को नियन्त्रित करने के उपाय लिखिए?
अथवा
जल प्रदूषण क्या है? जल प्रदूषण के कारण एवं इनकी रोकथाम के उपाय लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण से आशय पर्यावरण के किसी एक या सभी भागों का दूषित होना है। यहाँ दूषित होने से आशय पर्यावरण के प्रकृति प्रदत्त रूप में इस प्रकार परिवर्तन होता है, जोकि मानव जीवन के लिए प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करे। पर्यावरण प्रदूषण जल, मृदा, वायु तथा ध्वनि के रूप में हो सकता है। पर्यावरण के इन कारकों के आधार पर ही पर्यावरण प्रदूषण के चार रूप हैं।

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. मृदा प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण

वायु प्रदूषण
कुछ बाहरी कारकों के समावेश से किसी स्थान की वायु में गैसों के प्राकृतिक अनुपात में होने वाले परिवर्तन को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से धूलकण, धुआँ, कार्बन-कण, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), शीशा, कैडमियम आदि घातक पदार्थों के वायु में मिलने से होता है। ये सब उद्योग, परिवहन के साधनों, घरेलू भौतिक साधनों आदि के माध्यम से वायुमण्डल में मिलते हैं, जिससे वायु प्रदूषित हो जाती है।
वायु प्रदूषण के कारण
वायु प्रदूषण निम्नलिखित कारणों से फैलता है ।

  1. औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के परिणामस्वरूप उत्पन्न विभिन्न गैसे, धुआँ आदि।
  2. विभिन्न प्रकार के ईंधनों; जैसे-पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल आदि के | दहन से उत्पन्न धुआँ एवं गैसें।
  3. वनों की अनियमित और अनियन्त्रित कटाई।
  4. रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का प्रयोग।
  5. घरेलू अपशिष्ट, खुले में शौच, कूड़ा-करकट इत्यादि।
  6. रसोईघर तथा कारखानों से निकलने वाला धुंआ।
  7. खनिजों का अवैज्ञानिक खनन एवं दोहन।
  8. विभिन्न रेडियोधर्मी पदार्थों का विकिरण।

वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
वायु प्रदूषण को रोकने हेतु निम्न उपाय किए जा सकते हैं।

  1. पदार्थों का शोधन करना।
  2. घरेलू रसोई एवं उद्योगों आदि में ऊँची चिमनियों द्वारा धुएँ का निष्कासन।
  3. परिवहन के साधनों पर धुआँरहित यन्त्र लगाना।
  4. ईंधन के रूप में सीएनजी, एलपीजी, बायो डीजल आदि का प्रयोग करना।
  5. वन तथा वृक्ष संरक्षण करना, सड़कों के किनारे पेड़ लगाना।
  6. खुले में शौच न करना, बायोटायलेट का निर्माण करना।
  7. नगरों में मल-जल की निकासी का उचित प्रबन्ध करना।
  8. सीवर लाइन, टैंक आदि का निर्माण करना।
  9. नगरों में हरित पट्टी का विकास करना।
  10. प्रदूषण को रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाना।
  11. स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से बच्चों में चेतना फैलाना।
  12. उद्योगों, फैक्टरियों आदि को आवास स्थल से दूर स्थापित करना तथा उनसे निकलने वाले अपशिष्ट के निस्तारण का समुचित उपाय करना।

जल प्रदूषण
जल के मुख्य स्रोतों में अशुद्धियों तथा हानिकारक तत्त्वों का समाविष्ट हो जाना ही जल प्रदूषण है। जल में जैव-रासायनिक पदार्थों तथा विषैले रसायनों, सीसा, कैडमियम, बेरियम, पारा, फॉस्फेट आदि की मात्रा बढ़ने पर जल प्रदूषित हो जाता है। इन प्रदूषकों के कारण जल अपनी उपयोगिता खो देता है तथा जीवन के लिए घातक हो जाता है। जल प्रदूषण दो प्रकार का होता है-दृश्य प्रदूषण एवं अदृश्य प्रदूषण।।
जल प्रदूषण के कारण
जल प्रदूषण निम्नलिखित कारणों से फैलता है।

  1. उद्योगों; जैसे-चमड़ा उद्योग, रसायन उद्योग आदि से निकलने वाला | अवशिष्ट पदार्थ, गन्दा जल आदि जल स्रोतों को दूषित कर देता है।
  2. नगरीकरण के परिणामस्वरूप अवशिष्ट पदार्थों आदि का जल में मिलना। यमुना नदी इस प्रकार के प्रदूषण का ज्वलन्त उदाहरण है।
  3. नदियों में कपड़े धोना अथवा उनमें नालों आदि का गन्दा जल मिलना।
  4. कृषि में प्रयुक्त कीटनाशकों, अपमार्जकों आदि का वर्षा के माध्यम से जले स्रोतों में मिलना।
  5. समुद्री परिवहन, तेल का रिसाव आदि से जल स्रोत का दूषित होना।।
  6. परमाणु ऊर्जा उत्पादन एवं खनन के परिणामस्वरूप विकिरण युक्त जल का नदी, समुद्र में पहुँचना।
  7. नदियों में अधजले शव, मृत शरीर आदि का विसर्जन।
  8. घरेलू पूजा सामग्री, मूर्तियों आदि का जल में विसर्जन।

जल प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
जल प्रदूषण की रोकथाम हेतु निम्नलिखित उपाय सम्भव हैं।

  1. नगरों में अशुद्ध जल को ट्रीटमेण्ट के उपरान्त शुद्ध करके ही नदियों में छोड़ना।
  2. सीवर ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट एवं उद्योगों में ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट लगाकर अशुद्ध जल एवं अवशिष्ट सामग्री का शोधन करना।।
  3. समुद्री जल में औद्योगिक गन्दगी आदि को न मिलने देना।
  4. मृत जीव एवं चिता के अवशेष आदि नदियों में प्रवाहित न होने देना।
  5. नदियों तथा तालाबों की समय-समय पर सफाई करना।
  6. नदियों, तालाबों के जल में कपड़े न धोना।
  7. नदियों में धार्मिक आयोजन के अवशिष्ट पदार्थों को न फेंकना।
  8. कृषि में जैव उर्वरकों को प्रयोग करना।।
  9. जल प्रदूषण नियन्त्रण हेतु जन-जागरूकता फैलाना एवं सहयोग के लिए प्रेरित करना

प्रश्न 3.
पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते हैं? पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न कारण बताइए?
अथवा
पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? पर्यावरण प्रदूषण के सामान्य कारकों का उल्लेख कीजिए तथा उसे नियन्त्रित करने के उपाय भी बताइए।
अथवा
पर्यावरण प्रदूषण से क्या तात्पर्य है? प्रदूषण के कारण तथा मानव पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण से आशय
पर्यावरण प्रदूषण से आशय पर्यावरण के किसी एक या सभी भागों का दूषित होना है। यहाँ दूषित होने से आशय पर्यावरण के प्रकृति प्रदत्त रूप में इस प्रकार परिवर्तन होता है, जोकि मानव जीवन के लिए प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करे। पर्यावरण प्रदूषण जल, मृदा, वायु तथा ध्वनि के रूप में हो सकता है। पर्यावरण के इन कारकों के आधार पर ही पर्यावरण प्रदूषण के चार रूप हैं।

  1. वायु प्रदूषण
  2. जल प्रदूषण
  3. मृदा प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण

पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण
पर्यावरण प्रदूषण अपने आप में एक गम्भीर तथा व्यापक समस्या है। पर्यावरण प्रदूषण के लिए मुख्यतः मानव समाज ही जिम्मेदार है। विश्व में मानव ने जैसे-जैसे सभ्यता का बहुपक्षीय विकास किया है, वैसे-वैसे उसने प्राकृतिक पर्यावरण को प्रभावित किया है। पर्यावरण प्रदूषण के असंख्य कारण हैं, परन्तु उनमें से मुख्य एवं अधिक प्रभावशाली सामान्य कारण निम्नलिखित हैं।

1.औद्योगीकरण तीव्र औद्योगीकरण पर्यावरण प्रदूषण के लिए एक मुख्य कारक है। औद्योगिक संस्थानों में ईंधन जलने से वायु प्रदूषण होता है, वहीं औद्योगिक अपशिष्टों का उत्सर्जन जल एवं मृदा प्रदूषण तथा उद्योगों की मशीनों का शोर ध्वनि प्रदूषण फैलाने में सहायक है। विश्व में हर जगह तीव्र औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।

2.नगरीकरण नगरीकरण के परिणामस्वरूप जनसंख्या के बड़े भाग का नगरीय क्षेत्रों में बसना प्रदूषण का एक मुख्य कारण है। नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न उद्योगों की स्थापना, पानी की अतिरेक खपत, परिवहन साधनों के बढ़ते प्रयोग आदि ने प्रदूषण बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

3.घरेलू जल-मल का अनियमित निष्कासन आवासीय क्षेत्रों में खुले में शौच, विभिन्न घरेलू अपशिष्ट आदि द्वारा वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है।

4.घरेलू अपमार्जकों का प्रयोग घर में प्रयुक्त अनेक अपमार्जक पदार्थ; जैसे-मक्खी, मच्छर, खटमल, कॉकरोच, दीमक आदि को नष्ट करने के लिए विभिन्न दवाओं का प्रयोग, विभिन्न दवाइयाँ एवं साबुन, तेल आदि वायु अथवा जल के माध्यम से हमारे पर्यावरण में मिल जाते हैं तथा पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि करते हैं।

5.दहन एवं धुआँ रसोईघर, उद्योगों, परिवहन के साधनों आदि द्वारा विभिन्न प्रकार की गैसों एवं धुएँ में वृद्धि से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जोकि हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है।।

6.कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों एवं रासायनिक उर्वरक का प्रयोग कृषि कार्य हेतु विभिन्न प्रकार के कीटनाशक एवं रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग द्वारा प्रदूषण में वृद्धि हुई है। विभिन्न लाभकारक कीटों को भी कीटनाशकों द्वारा समाप्त किया जाता है। कीटनाशक एवं उर्वरक वर्षा जल के माध्यम से नदियों में मिलकर एवं नृदा में मिलकर जल एवं मृदा प्रदूषण में योगदान करते हैं फीनोल, मेथाक्सीक्लोर आदि कीटनाशकों एवं उर्वरक के प्रमुख उदाहरण हैं।

7.वृक्षों की अत्यधिक कटाई/वन विनाश वन विनाश के परिणामस्वरूप वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है, क्योंकि वन/वृक्ष ही जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर एवं प्राणदायक ऑक्सीजन प्रदान करके वायुमण्डल में ऑक्सीजन का सन्तुलन बनाए रखते हैं। अत: वन विनाश पर्यावरण प्रदूषण का एक प्रमुख कारक है।

8.विभिन्न भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि वर्तमान समय में प्रयुक्त | एसी, फ्रिज, वाटरहीटर आदि से विभिन्न प्रकार की जहरीली गैसे निकलती हैं, जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि होती है। एसी से निकलने वाली सीएफसी गैस इसका प्रमुख उदाहरण है।

9.परिवहन के साधन वर्तमान समय में परिवहन के साधनों; जैसे-कार, ट्रक, मोटरसाइकिल, हवाई जहाज, पानी के जहाज आदि में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इन साधनों में पेट्रोल डीजल के दहन से विभिन्न जहरीली गैसें; जैसे-कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि निकलती हैं, जिनसे वायु प्रदूषण होता है। इनके चलने से एवं हॉर्न से उत्पन्न शोर से क्रमशः ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है।

10.रेडियोधर्मी पदार्थों द्वारा प्रदूषण परमाणु ऊर्जा, परमाणु परीक्षणों आदि से वातावरण में रेडियोधर्मी पदार्थों का समावेश होता है, जोकि पर्यावरण प्रदूषण का एक प्रमुख कारक है। इस कारक का पर्यावरण के जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति पर हानिकर प्रभाव पड़ता है।

पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम/ नियन्त्रण के उपाय
पर्यावरण प्रदूषण एक गम्भीर समस्या है। वर्तमान समय में विश्व के समस्त देश इस समस्या को लेकर चिन्तित हैं तथा इसके समाधान हेतु प्रयासरत् हैं। भारत एवं विश्व में इस समस्या के समाधान हेतु निम्नलिखित प्रमुख प्रयास किए जा रहे हैं।

  1. उद्योगों एवं घरेलू स्तर पर धुएँ की निकासी हेतु ऊँची चिमनी का प्रयोग – करना।
  2. उद्योगों एवं फैक्टरियों से निकले अपशिष्ट पदार्थ, जल आदि को पूर्ण | रूप से उपचारित करने के पश्चात् ही निष्कासित करना।
  3. फैक्टरियों एवं उद्योगों की स्थापना आवासीय क्षेत्र से दूर करना।
  4. वाहन प्रदूषण की रोकथाम हेतु वाहनों की समय-समय पर जाँच | करवाना।
  5. ईंधन की कम-से-कम खपत करना, अनावश्यक ईंधन व्यर्थ न करना।
  6. कृषि में जैव-उर्वरकों का प्रयोग करना। परिवहन ईंधन के रूप में सीएनजी, एलपीजी आदि पर्यावरण हितैषी ईंधन को बढ़ावा देना। ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन हेतु एलपीजी एवं गोबर गैस संयन्त्रों की स्थापना करना।
  7. जन सामान्य को पर्यावरण के प्रति सचेत करना। | इन सभी उपायों को लागू करके पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है, इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

जन स्वास्थ्य पर प्रभाव
जन स्वास्थ्य पर प्रभाव निम्नलिखित हैं।

  1. प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियाँ; जैसे-हैजा, कॉलरा, टायफाइड आदि होती हैं।
  2. ध्वनि प्रदूषण से सर दर्द, चिड़चिड़ापन, रक्तचाप बढ़ना, उत्तेजना, हृदय की धड़कन बढ़ना आदि समस्याएँ होती हैं।
  3. जल प्रदूषण से टायफाइड, पेचिश, ब्लू बेबी सिण्ड्रोम, पाचन सम्बन्धी विकार (कब्ज) आदि समस्याएँ होती हैं।
  4. वायु प्रदूषण से फेफड़े एवं श्वास सम्बन्धी, श्वसन-तन्त्र की बीमारियाँ होती हैं।

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