UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 15 कन्स्ट्रक्टर्स एण्ड डिस्ट्रक्टर्स

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Computer
Chapter Chapter 15
Chapter Name कन्स्ट्रक्टर्स एण्ड डिस्ट्रक्टर्स
Number of Questions 18
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Computer Chapter 15 कन्स्ट्रक्टर्स एण्ड डिस्ट्रक्टर्स

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
प्रोग्राम में क्या, ऑब्जेक्ट के निर्माण के समय स्वतः ही क्रियान्वित हो जाता है?
(a) कन्स्ट्रक्टर
(b) डिस्ट्रक्टर
(c) क्लास
(d) फंक्शन
उत्तर
(a) कन्स्ट्रक्टर

प्रश्न 2.
C++ में, कन्स्ट्रक्टर्स कितने प्रकार के होते हैं?
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर
(b) C++ में तीन प्रकार के कन्स्ट्रक्टर्स-डिफॉल्ट, पैरामीटराइज्ड तथा कॉपी होते हैं।

प्रश्न 3.
कॉपी कन्स्ट्रक्टर का प्रारूप क्या है?
(a) class_name object 2 = object 1;
(b) class_name object 1 = object 2;
(c) class_name object 2:
(d) class_name object 2();
उत्तर
(a) class_name object 2 = object 1;

प्रश्न 4.

class_name ()
{
constructor_definition;
};

उपरोक्त प्रारूप है
(a) कॉपी कन्स्ट्रक्टर का
(b) पैरामीटराइज्ड कन्स्ट्रक्टर को
(c) डिफॉल्ट कन्स्ट्रक्टर का
(d) डिस्ट्रक्टर का
उत्तर
(c) डिफॉल्ट कन्स्ट्रक्टर का

प्रश्न 5.
आरग्यूमेण्ट वाले कन्स्ट्रक्टर को क्या कहा जाता है?
(a) कॉपी कन्स्ट्रक्टर
(b) डिफॉल्ट कन्स्ट्रक्टर
(c) फंक्शन कन्स्ट्रक्टर
(d) पैरामीटराइज्ड कन्स्ट्रक्टर
उत्तर
(d) पैरामीटराइज्ड कन्स्ट्रक्टर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
डिफॉल्ट कन्स्ट्रक्टर किसे कहते हैं?
उत्तर
जिस कन्स्ट्रक्टर फंक्शन में कोई आरग्यूमेण्ट नहीं होता, उसे डिफॉल्ट कन्स्ट्रक्टर कहा जाता है।

प्रश्न 2.
पैरामीटराइज्ड कन्स्ट्रक्टर को घोषित करने का प्रारूप लिखिए।
उत्तर
class_name object_name = constructor, name (arguments);

प्रश्न 3.
कॉपी कन्स्ट्रक्टर को समझाइए।
उत्तर
कॉपी कन्स्ट्रक्टर एक ऐसा कन्स्ट्रक्टर है, जिसके द्वारा किसी ऑब्जेक्ट के प्रारम्भिक मान रखने में उसी क्लास के किसी अन्य ऑब्जेक्ट के मानों का प्रयोग किया जाता है।

लघु-उत्तरीय प्रश्न। (2 अंक)

प्रश्न 1.
कन्स्ट्रक्टर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2010, 08)
अथवा
कन्स्ट्रक्टर शब्द का अर्थ समझाइए। (2014)
उत्तर
प्रोग्राम में किसी क्लास टाइप को कोई ऑब्जेक्ट बनाने के लिए कम्पाइलर उसके लिए स्थान सुरक्षित करने के लिए एक फंक्शन को कम्पाइल करता है, जिसे कन्स्ट्रक्टर कहा जाता है। कन्स्ट्रक्टर किसी भी प्रकार की कोई वैल्यू रिटर्न नहीं करता। यह स्वतः ही कॉल होता है जब क्लास का ऑब्जेक्ट बनता है। इसका नाम क्लास के नाम के समान ही होता है।

प्रश्न 2.
डिस्ट्रक्टर का अर्थ समझाइए। (2013, 08)
अथवा
डिस्ट्रक्टर की व्याख्या संक्षेप में कीजिए। (2018) उत्तर डिस्ट्रक्टर किसी क्लास का एक विशेष सदस्य फंक्शन होता है, जो तब क्रियान्वित होता है जब उस क्लास का ऑब्जेक्ट सीमा (Scope) से बाहर जाता है। डिस्ट्रक्टर का नाम भी क्लास के नाम के समान ही होता है, परन्तु इसमें पहले टाइल्ड (~) प्रीफिक्स का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
कन्स्ट्रक्टर तथा डिस्ट्रक्टर में अन्तर बताइए। (2012, 06)
उत्तर
कन्स्ट्रक्टर तथा डिस्ट्रक्टर में निम्न अन्तर है

कन्स्ट्र क्टर डिस्ट्रक्टर
ये स्वतः ही कॉल होते हैं, जब ऑब्जेक्ट बनता है। ये स्वतः ही कॉल होते हैं, जब ऑब्जेक्ट सीमा (Scope) से बाहर जाता है।
कन्स्ट्रक्टर का नाम क्लास के नाम के समान होता हैं। हिस्ट्रक्टर का नाम क्लास के नाम के समान होता है, परन्तु उसमें पहले टाइल्या (~) प्रीफिक्स का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 4.
डिस्ट्रक्टर की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर
डिस्ट्रक्टर की विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. एक डिस्ट्रक्टर के पास डिफॉल्ट आरग्यूमेण्ट हो सकते हैं।
  2. डिस्ट्रक्टर अपनी क्लास के सदस्य फंक्शन को कॉल कर सकता है।
  3. ये स्टैटिक नहीं हो सकते।
  4. ये स्वतः कॉल होते हैं, जब ऑब्जेक्ट्स सीमा (Scope) से बाहर जाते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न।। (3 अंक)

प्रश्न 1.
कन्स्ट्रक्टर फंक्शन को कैसे इनव्रोक किया जाता है? कन्स्ट्रक्टर | फवशन की चार विशेषताओं को सूचीबद्ध करें। (2006)
उत्तर
कन्स्ट्रक्टर फंक्शन को इनवोक करना

#include
class Student
{
public:
Student ()
{
cout<<end1<<"Constructor Function";
}
};
void main ()
{
Student stu;
}

कन्स्ट्रक्टर फंक्शन Student () ऑब्जेक्ट stu के बनते ही स्वत: कॉल हो जाएगा, जो निम्न आउटपुट प्रिण्ट करेगा
Constructor Function
कन्स्ट्रक्टर फंक्शन की विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. कन्स्ट्रक्टर्स स्वतः ही कॉल होते हैं, जब ऑब्जेक्ट बनता है।
  2. कन्स्ट्रक्टर्स स्टैटिक नहीं हो सकते।
  3. कन्स्ट्रक्टर्स के पास डिफॉल्ट आरग्यूमेण्ट होते हैं।
  4. कन्स्ट्रक्टर अपनी क्लास के सदस्य फंक्शन को कॉल कर सकता है।

प्रश्न 2.
कन्स्ट्रक्टर को डिक्लेयर करने के नियम बताइए।
उत्तर
कन्स्ट्रक्टर को डिक्लेयर करते समय निम्नलिखित नियमों पर ध्यान देना चाहिए –

  1. कन्स्ट्रक्टर का नाम वही होना चाहिए जो क्लास का नाम है।
  2. कन्स्ट्रक्टर्स में पैरामीटर हो सकते हैं।
  3. कन्स्ट्रक्टर, फंक्शन को ओवरलोड कर सकता है।
  4. जिस कन्स्ट्रक्टर में कोई आरग्यूमेण्ट नहीं होता, वह डिफॉल्ट कन्स्ट्रक्टर होता हैं।
  5. कन्स्ट्रक्टर का एक्जीक्यूशन स्वयं होता हैं।
  6. कन्स्ट्रक्टर को public सेक्शन में डिक्लेयर किया जाता है।
  7. कन्स्ट्रक्टर का एड्रेस किसी को रेफर नहीं किया जा सकता।
  8. कन्स्ट्रक्टर स्वतः ही डिफॉल्ट तथा कॉपी कन्स्ट्रक्टर उत्पन्न कर सकता है।

प्रश्न 3.
डिस्ट्रक्टर को कैसे घोषित किया जाता है? समझाइए।
उत्तर
डिस्ट्रक्टर को दो प्रकार से घोषित किया जा सकता है, जो निम्न प्रकार हैं।
(i) क्लास के अन्दर डिस्ट्रक्टर

class Teacher
{
public:
Teacher ()
{
cout<<"Teacher is Present";
}
~Teacher ()
{
cout<<"Teacher is Absent";
}
};

(ii) क्लास के बाहर डिस्ट्रक्टर

class Teacher
{
public:
Teacher ()
{
cout<<"Teacher is Present";
}
~Teacher ();
};
Teacher :: ~ Teacher ()
{
cout<<"Teacher is Absent";
}

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न 1.
कन्स्ट्रक्टर क्या है? इसे कैसे डिक्लेयर करते हैं? इसकी विशेषताएँ बताइट। (2008)
उत्तर
प्रोग्राम में किसी क्लास टाइप का कोई ऑब्जेक्ट बनाने के लिए कम्पाइलर उसके लिए स्थान सुरक्षित करने के लिए एक फंक्शन को कम्पाइल करता है, जिसे कन्स्ट्रक्टर कहा जाता है। कन्स्ट्रक्टर किसी भी प्रकार की कोई वैल्यू रिटर्न नहीं करता। यह स्वतः ही कॉल होता है जब क्लास का ऑब्जेक्ट बनता है। इसका नाम क्लास के नाम के समान ही होता है। कन्स्ट्रक्टर की विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. कन्स्ट्रक्टर्स स्वतः ही कॉल होते हैं, जब ऑब्जेक्ट बनता है।
  2. कन्स्ट्रक्टर्स स्टैटिक नहीं हो सकते।
  3. कन्स्ट्रक्टर्स के पास डिफॉल्ट आरग्यूमेण्ट होते हैं।
  4. कन्स्ट्रक्टर अपनी क्लास के सदस्य फंक्शन को कॉल कर सकता है।

कन्स्ट्रक्टर को घोषित करना
जब कन्स्ट्रक्टर क्रियान्वित होता है तो यह वैल्यू रिटर्न नहीं करता। कन्स्ट्रक्टर को घोषित करने का प्रारूप,
class_name (argument_list);
(i) क्लास के अन्दर कन्स्ट्रक्टर

class Emp
{
public:
int sal;
Emp ()
{
cout<<"Employee Salary"
}
};

(ii) क्लास के बाहर कन्स्ट्रक्टर

class Emp
{
public:
int sal;
Emp ();
};
Emp :: Emp()
cout<<"Employee Salary";
}

प्रश्न 2.
कन्स्ट्रक्टर के प्रकार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2012)
उत्तर
कन्स्ट्रक्टर के प्रकार इसके लिए फास्ट ट्रैक रिविजन में पृष्ठ संख्या 70-71 का अध्ययन करें।

प्रश्न 3.
डिस्ट्रक्टर का अर्थ समझाइए। (2013, 08)
अथवा
डिस्ट्रक्टर को उदाहरण सहित समझाइए। (2011)
उत्तर
यह किसी क्लास का एक विशेष सदस्य फंक्शन होता है, जो तब क्रियान्वित होता है जब उस क्लास का ऑब्जेक्ट सीमा (Scope) से बाहर जाता है।
इसका नाम भी वही होता है, जो क्लास का नाम होता है, परन्तु उसमें पहले टाइल्ड (~) प्रीफिक्स का उपयोग किया जाता है।
उदाह्रण डिस्ट्रक्टर की क्रियाविधि

#include<iostream.h>
#include<conio.h>
class Line
{
private:
double length;
public:
void set Length (double len);
double getLength ();
Line (); //This is the constructor
//declaration
~Line(); //This is the destructor
//declaration
};
Line :: Line () //Constructor definition
{
cout<<"Object is being created"<<end1;
}
Line : : ~Line() //Destructor definition
{
cout<<"Object is being deleted"<<end1;
}
void Line :: set Length (double len)
{
length = len;
}
double Line :: getLength()
{
return length;
}
void main()
{
Line line; line.setLength(6.0); //set line length
cout<<"Length of line";
cout<<line.getLength() <<end1;
getch();
}

आउटपुट
0bject is being created
Length of line 6
Object is being deleted

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography: Nature and Scope

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography: Nature and Scope (मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र)

UP Board Class 12 Geography Chapter 1 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 1 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:
(i) निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता
(क) समाकलनात्मक अनुशासन
(ख) मानव और पर्यावरण के बीच अन्तर-सम्बन्धों का अध्ययन
(ग) द्वैधता पर आश्रित
(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं
उत्तर:
(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं।

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक भौगोलिक सूचना का स्रोत नहीं है
(क) यात्रियों के विवरण
(ख) प्राचीन मानचित्र
(ग) चन्द्रमा से चट्टानी पदार्थों के नमूने
(घ) प्राचीन महाकाव्य
उत्तर:
(घ) प्राचीन महाकाव्य।

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक लोगों और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक है
(क) मानव बुद्धिमत्ता
(ख) प्रौद्योगिकी
(ग) लोगों के अनुभव
(घ) मानवीय भाईचारा।
उत्तर:
(ख) प्रौद्योगिकी।

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपगमन नहीं है
(क) क्षेत्रीय विभिन्नता
(ख) मात्रात्मक क्रान्ति
(ग) स्थानिक संगठन
(घ) अन्वेषण और वर्णना
उत्तर:
(ख) मात्रात्मक क्रान्ति।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography: Nature and Scope

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए :
(i) मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
मानव भूगोल वह विज्ञान है जिसमें मनुष्य और उनके भौतिक पर्यावरण के मध्य सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। रैटजेल के अनुसार, “मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच सम्बन्धों का संश्लेषित अध्ययन है।”

(ii) मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।
उत्तर:
मानव भूगोल के उपक्षेत्र हैं
1. व्यवहारवादी भूगोल
2. सामाजिक कल्याण का भूगोल
3. अवकाश का भूगोल
4. सांस्कृतिक भूगोल
5. लिंग भूगोल
6. ऐतिहासिक भूगोल
7. चिकित्सा भूगोल
8. निर्वाचन भूगोल
9. सैन्य भूगोल
10. संसाधन भूगोल
11. कृषि भूगोल
12. उद्योग भूगोल
13. विपणन भूगोल
14. पर्यटन भूगोल
15. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का भूगोल।

(iii) मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से सम्बन्धित है?
उत्तर:
मानव भूगोल अन्तर-विषयक विषय है, क्योंकि यह मानव और पर्यावरण के अन्तर-सम्बन्धों का अध्ययन करता है। अत: इसका अन्य सामाजिक विज्ञानों से गहरा सम्बन्ध है, जिनमें सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, मानव विज्ञान, इतिहास, राजनीति विज्ञान, जनांकिकी आदि मुख्य हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए
(i) मानव के प्राकृतीकरण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव का प्राकृतीकरण-मानव ने जब से पृथ्वी पर जन्म लिया है, तब से वह निरन्तर भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करता आया है। मानव प्रौद्योगिकी का विकास करता है और उसकी सहायता से भौतिक पर्यावरण के साथ अन्तक्रिया करता है। मानव सभ्यता के प्रारम्भिक काल में प्रौद्योगिकी निम्न स्तर पर विकसित थी और मानवीय क्रियाकलापों पर प्राकृतिक पर्यावरण के तत्त्वों का प्रभाव अधिक था। प्राकृतिक शक्तियाँ मानवीय क्रियाओं का मार्गदर्शन करती थीं। मानव, प्रकृति की सुनता और उसकी आज्ञा का पालन करता था।

मानव, प्रकृति की प्रचण्डता से भयभीत होता था और उसकी पूजा करता था। इस तरह आदिमानव लगभग पूर्णतया प्राकृतिक पर्यावरण की शक्तियों द्वारा नियन्त्रित था। ऐसी दशाएँ जिसमें आदिमानव की तुलना में पर्यावरण की शक्तियाँ अधिक प्रबल होती हैं, उसे ‘पर्यावरणीय निश्चयवाद’ कहते हैं।

पर्यावरण, निश्चयवाद की दशा को भारत के अनेक क्षेत्रों में देखा जा सकता है, जहाँ पर आदिवासी निवास करते हैं। इन क्षेत्रों में मानव सतत पोषण हेतु प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर करता है। ऐसे समाज में पर्यावरण ‘माता-प्रकृति’ का रूप धारण करता है। वह दशा जिसमें मानव पर प्रकृति का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है ‘मानव का प्राकृतीकरण’ कहलाती है।

(ii) मानव भूगोल के विषय-क्षेत्र पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र-भौगोलिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में मानव के उद्यम द्वारा निर्मित सांस्कृतिक दृश्यभूमि का अध्ययन ही मानव भूगोल की विषय-वस्तु है। मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है। इसमें वे सभी पदार्थ, कर्म और विचार शामिल किए जाते हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्य व उसके पर्यावरण से जुड़े होते हैं।

हंटिंगटन द्वारा प्रतिपादित मानव भूगोल का क्षेत्र .
अमेरिकी भूगोलवेत्ता हंटिंगटन द्वारा प्रतिपादित मानव भूगोल का क्षेत्र सर्वाधिक विस्तृत एवं मान्य है। उन्होंने मानव भूगोल के तथ्यों को एक तालिका बनाकर तीन प्रमुख श्रेणियों में विभक्त किया है-

  • भौतिक दशाएँ
  • जीवन के रूप और
  • मानव अनुक्रियाएँ (तालिका)।

ये तीनों प्रकार के तथ्य आपस में जुड़े हुए हैं। हंटिंगटन ने सर्वप्रथम यह बताया कि भौतिक दशाओं का सामूहिक प्रभाव जीवन के विभिन्न रूपों (पौधे, जन्तु और मानव) पर होता है। जीवन के ये रूप भी आपस में अन्तर्सम्बन्धी हैं। भौतिक दशाओं, पौधों और जन्तुओं से मानव की क्रिया-प्रतिक्रिया होती है जिसके परिणामस्वरूप मानव की अनुक्रियाएँ (Responses) उत्पन्न होती हैं।
तालिकाः एल्सवर्थ हंटिंगटन के अनुसार मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography Nature and Scope 1
नोट – तीर तथा उनके विस्तार, उन तरीकों का संकेत करते हैं, जिनमें भौतिक दशाएँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए जलवायु, पृथ्वी की गोल आकृति, धरातल के लक्षणों तथा महासागर जैसे जलाशयों से प्रभावित होती है। बदले में यह धरातल के लक्षणों, मिट्टी की गुणवत्ता और खनिज निक्षेपों के स्वरूप को प्रभावित करती है। यह जलाशयों को भी प्रभावित करती है …….. लेकिन स्पष्टता की दृष्टि से कुछ को ‘छोड़ दिया गया है।

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UP Board Class 12 Geography Chapter 1 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव भूगोल को परिभाषित करते हुए इसकी प्रकृति को समझाइए।
उत्तर:
मानव भूगोल की परिभाषाएँ विद्वानों द्वारा मानव भूगोल को अग्र प्रकार से परिभाषित किया गया है

  • फ्रेडरिक रैटजेल के अनुसार, “मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच सम्बन्धों का संश्लेषित अध्ययन है।”
  • कु० एलेन चर्चिल सैम्पल के अनुसार, “मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील सम्बन्धों का अध्ययन है।”
  • पॉल विडाल डी-ला ब्लाश के अनुसार, “हमारी पृथ्वी को नियन्त्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य सम्बन्धों के अधिक संश्लेषित ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना को मानव भूगोल कहते हैं।”

उपर्युक्त परिभाषाओं के अनुसार, मानव भूगोल में यह अध्ययन किया जाता है कि भिन्न-भिन्न भौतिक दशाओं में मनुष्य का प्रत्युत्तर (Response) कैसा होता है? अथवा वह किस प्रकार प्रकृति से समायोजन या संघर्ष करके अपनी आवश्यकताओं को पूरा करता है और उसे अपने लिए उपयोगी बनाता है। यह तभी सम्भव है जब थोड़ा मानव का प्राकृतीकरण हो और कुछ प्रकृति का मानवीकरण हो।

मानव भूगोल की प्रकृति
मानव भूगोल भौतिक पर्यावरण तथा मानव-जनित सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्सम्बन्धों का अध्ययन उनकी परस्पर अन्योन्यक्रिया के द्वारा करता है। उल्लेखनीय है कि भू-आकृतियाँ, मृदाएँ, जल, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, विविध प्राणिजात (Fauna), वनस्पतिजात (Flora), चट्टानें और खनिज भौतिक पर्यावरण के तत्त्व हैं। भौतिक पर्यावरण द्वारा प्रदत्त मंच पर मनुष्य अपने कार्यकलापों के द्वारा अपनी सुख-सुविधाओं और विकास के लिए कुछ लक्षणों को उत्पन्न करता है। घर, गाँव, खेत, नगर, नहरें, पुल, सड़कें, रेलमार्ग, कारखाने, बाँध, स्कूल, पत्तन और दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुएँ ऐसे ही मानवीय लक्षण हैं। मानव निर्मित परिस्थितियों से ही मानव के सांस्कृतिक विकास की झलक मिलती है। मानव की सभी विकासात्मक गतिविधियों पर भौतिक वातावरण का भारी प्रभाव पड़ता है। इसीलिए मानव भौतिक परिवेश से व्यापक अनुकूलन करके ही सांस्कृतिक अथवा मानवीय परिवेश की रचना करता है। इसी तरह भौतिक पर्यावरण भी मानव द्वारा वृहत् स्तर पर परिवर्तित किया गया है।

प्रश्न 2.
मानव भूगोल एक गत्यात्मक विषय है। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव भूगोल एक गत्यात्मक विषय मानव भूगोल एक गत्यात्मक विषय है जिस तरह तकनीक के विकास के साथ मनुष्य और पर्यावरण का सम्बन्ध बदलता जा रहा है, उसी प्रकार मानव भूगोल की विषय-वस्तु में समय के साथ वृद्धि और विस्तार होता जा रहा है। उदाहरणत: बीसवीं सदी के आरम्भ में मानव भूगोल में सांस्कृतिक एवं आर्थिक पक्षों पर विशेष ध्यान दिया जाता था किन्तु बाद में नई समस्याओं और चुनौतियों के आने पर उन्हें भी विषय-वस्तु का अंग बना लिया गया। इसीलिए मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र में अग्रोन्मुख परिवर्तन होना स्वाभाविक है। वर्तमान में मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र में जिन नए प्रकरणों को शामिल किया गया है, वे हैं

राजनीतिक आयाम (Political Dimensions), सामाजिक सम्बद्धता (Social Reference), लिंग असमानता (Sex Inequality), जननीति (Public Policy), नगरीकरण तथा नगर-प्रणाली (Urbanization and Urban System), स्वास्थ्य तथा सामाजिक सुविधाएँ (Health and Social well-being) इत्यादि। अध्ययन क्षेत्र में समसामयिक विषयों को शामिल करते समय मानव भूगोल न केवल समन्वयकारी (Integrating) तथा अन्तर्विषयक (Inter-disciplinary) गुणों से परिपूर्ण हुआ है बल्कि इसके अध्ययन में कई नई विधियाँ भी जुड़ गई हैं।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography: Nature and Scope

प्रश्न 3.
निश्चयवाद, सम्भववाद, नव-निश्चयवाद किस तरह एक-दूसरे से भिन्न हैं? समझाइए।
उत्तर:
निश्चयवाद, सम्भववाद एवं नव-निश्यवाद में अन्तर
1. निश्चयवाद – निश्चयवादी विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक क्रियाकलाप को पर्यावरण नियन्त्रित करता है। निश्चयवाद के समर्थक यह मानते हैं कि भौतिक कारक; जैसे-जलवायु, उच्चावच, प्राकृतिक वनस्पति और मानव के समस्त क्रियाकलापों और जीवन-शैली आदि को नियन्त्रित करते हैं। निश्चयवाद सामान्यतया मानव को एक निष्क्रिय कारक समझता है जो पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित है।

2. सम्भववाद – सम्भववाद के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिदत्त अनेक सम्भावनाओं का अपने लाभ के लिए इच्छानुसार उपयोग कर सकता है। सम्भववाद प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान देता है और उसे सक्रिय शक्ति के रूप में देखता है। सम्भववाद के अनुसार निश्चयवाद का यह सिद्धान्त कि मनुष्य प्रकृति का दास है, अस्वीकृत कर दिया गया।

3. नव-निश्चयवाद – यह विचारधारा उपर्युक्त दोनों विचारधाराओं की चरम अवस्था के बीच का दर्शन है। ग्रिफिथ टेलर का मानना था कि किसी देश द्वारा अपनाए गए सर्वोत्तम आर्थिक कार्यक्रम का एक बड़ा भाग प्रकृति द्वारा निर्धारित होता है और यह भूगोलवेत्ता का कर्तव्य है कि वह इस कार्यक्रम की व्याख्या करे। देश के विकास की प्रगति को आगे बढ़ाने, धीमा या अवरुद्ध करने में मनुष्य सक्षम होता है। वह प्रगति की दिशा के स्थान पर दर को परिवर्तित करता है, यह एक बड़े शहर में यातायात नियन्त्रक की तरह होता है और सम्भवतया ‘रुको और जाओ’ ग्रिफिथ टेलर के दर्शन ‘नव-निश्चयवाद’ को अधिक स्पष्ट करता है। मनुष्य यदि बुद्धिमान हो, तो वह प्रकृति के कार्यक्रम का पालन कर सकता है, जो सम्भावनाओं के इस विवाद को स्वीकारता है कि पर्यावरण द्वारा स्थापित विस्तृत सीमा में से मनुष्य सबसे अन्त में चयन कर सकता है।

प्रश्न 4.
मानव भूगोल की कल्याणपरक विचारधारा मानवतावादी विचारधारा से किस तरह भिन्न है? दोनों के मध्य अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव भूगोल की कल्याणपरक विचारधारा में मनुष्य के कल्याण तथा हित के विचार हैं जबकि मानवतावादी विचारधारा में मानव और प्रकृति के मध्य सम्बन्धों की चर्चा की जाती है। दोनों में अन्तर इस प्रकार हैं
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography Nature and Scope 2
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography Nature and Scope 3

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography: Nature and Scope

प्रश्न 5.
निश्चयवाद और सम्भववाद में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
निश्चयवाद और सम्भववाद में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography Nature and Scope 4

प्रश्न 6.
क्रमबद्ध भूगोल तथा प्रादेशिक भूगोल में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
क्रमबद्ध भूगोल तथा प्रादेशिक भूगोल में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography Nature and Scope 5
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography Nature and Scope 6

प्रश्न 7.
मानव भूगोल की महत्त्वपूर्ण शाखाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव और प्रकृति की अन्तक्रियाओं के फलस्वरूप अनेक प्रकार के सांस्कृतिक लक्षण जन्म लेते हैं; जैसे-गाँव, कस्बा, शहर, सड़क, उद्योग, भवन आदि। इन्हीं सभी लक्षणों की स्थिति तथा वितरण का अध्ययन मानव भूगोल में आता है। मानव भूगोल की शाखाएँ मानव भूगोल की महत्त्वपूर्ण शाखाएँ निम्नलिखित हैं
1. आर्थिक भूगोल – मानव भूगोल की इस शाखा में मानवीय क्रियाकलापों में विभिन्नता का अध्ययन किया जाता है तथा इन क्रियाओं द्वारा वस्तुओं के उत्पादन, वितरण तथा विनिमय का अध्ययन किया जाता है।

2. सांस्कृतिक भूगोल – मानव भूगोल की इस शाखा में स्थान और समय के सन्दर्भ में मनुष्य के सांस्कृतिक पक्षों, धर्म और दृष्टिकोणों का अध्ययन किया जाता है।

3. सामाजिक भूगोल – सामाजिक भूगोल में विभिन्न मानव समूहों और उनके पर्यावरण के बीच सम्बन्धों की समीक्षा की जाती है।

4. जनसंख्या भूगोल – मानव भूगोल की इस शाखा में जनसंख्या, उसके वितरण, घनत्व, जन्म-दर एवं मृत्यु-दर, साक्षरता, आयु, लिंगानुपात, प्रवास तथा जनसंख्या वृद्धि जैसी जनांकिकीय विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है।

5. ऐतिहासिक भूगोल – मानव भूगोल की इस शाखा में ऐतिहासिक घटनाओं का विश्लेषण क्षेत्रीय अथवा भौगोलिक सन्दर्भ में किया जाता है।

6. राजनीतिक भूगोल – राजनीतिक भूगोल में राष्ट्रों अथवा राज्यों की सीमा, विस्तार, उनके विभिन्न घटकों तथा शासित भू-भागों का अध्ययन किया जाता है।

7.सैन्य भूगोल – सैन्य भूगोल का उद्देश्य स्थल तथा समुद्र के भौगोलिक चरित्र का युद्ध की घटनाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को स्पष्ट करना है।

8. कृषि भूगोल – मानव भूगोल की इस शाखा में विश्व के विभिन्न भागों में पाए जाने वाले पर्यावरण के सन्दर्भ में कृषि सम्बन्धी तत्त्वों का अध्ययन किया जाता है।

9. मानव भूगोल की अन्य उप – शाखाएँ-मानव भूगोल की अन्य उप-शाखाएँ अधिवास भूगोल, नगरीय भूगोल, चिकित्सा भूगोल, संसाधन भूगोल, परिवहन भूगोल, वाणिज्य भूगोल, औद्योगिक भूगोल तथा व्यावहारिक भूगोल इत्यादि हैं।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 1 Human Geography: Nature and Scope

प्रश्न 8.
पर्यावरण निश्चयवाद से क्या अभिप्राय है? मानव के प्राकृतीकरण के द्वारा इस संकल्पना के विकास को समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण निश्चयवाद का अर्थ-पर्यावरण निश्चयवाद या निश्चयवादी विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक कार्यकलाप को पर्यावरण से नियन्त्रित माना जाता है। इसके अनुसार भौतिक कारक; जैसे-जलवायु, उच्चावच, प्राकृतिक वनस्पति आदि मानव के समस्त क्रियाकलापों और जीवन-शैली आदि को नियन्त्रित करते हैं।

मानव के प्राकृतीकरण के द्वारा पर्यावरण निश्चयवाद की संकल्पना का विकास
मानव के प्राकृतीकरण के द्वारा मनुष्य अपने भौतिक पर्यावरण के साथ तकनीकी ज्ञान की सहायता से . पारस्परिक सम्बन्ध रखता है। यह महत्त्वपूर्ण नहीं है कि मनुष्य ने क्या उत्पन्न किया है अपितु यह महत्त्वपूर्ण है कि उसने किन उपकरण और तकनीक की सहायता से उत्पन्न किया है। प्राकृतिक नियमों को समझने के बाद ही मनुष्य ने तकनीकी विकास किया है। जिस प्रकार उसने आग का आविष्कार किया है उसी प्रकार डी०एन०ए० की जानकारी से अनेक रोगों का पता चलता है। मनुष्य एक प्रकार से ‘प्रकृति का दास’ कहलाता था। प्रकृति के अनुसार ही वह अपने आपको बनाता था। आदिमानव समाज तथा प्रकृति की शक्ति को ‘पर्यावरण निश्चयवाद’ कहा जाता है। यही मनुष्य का प्राकृतीकरण था।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव का प्राकृतीकरण का संक्षेप में तीन बिन्दुओं द्वारा वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव का प्राकृतीकरण-मानव के प्राकृतीकरण का अभिप्राय है कि प्रकृति ही मनुष्य के क्रियाकलापों पर अपना प्रभाव डालती है अर्थात् मनुष्य प्रकृति का दास बनकर रह जाता है। उसके सभी क्रियाकलाप प्रकृति द्वारा नियन्त्रित होते हैं।
मानव के प्राकृतीकरण के बिन्दु

  • मानव के सभी क्रियाकलाप उसके पर्यावरण द्वारा नियन्त्रित होते हैं; जैसे-मानव के रहन-सहन एवं कार्य, जलवायु, उच्चावच आदि द्वारा प्रभावित होते हैं।
  • प्रकृति या पर्यावरण ही मनुष्य के समाज को एक स्वरूप प्रदान करता है। उसका खान-पान, रहन-सहन, वेशभूषा, आवास आदि सभी पर्यावरण के द्वारा निर्धारित होते हैं। यहाँ तक कि मानव की विचारधारा भी उसके पर्यावरण की ही देन है।
  • आदिवासी लोग विश्व में सभी जगह अपने पर्यावरण के दास हैं; जैसे—कालाहारी के बुशमैन, टुण्ड्रा के एस्किमो, कांगो के पिग्मी अपने पर्यावरण द्वारा ही नियन्त्रित होते थे।

प्रश्न 2.
प्रकृति और मानव किस तरह एक-दूसरे से जटिलता से जुड़े हुए हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर:
मानव और भौतिक पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हैं। मानव के पास तकनीकी ज्ञान है। वह अपने तकनीकी ज्ञान द्वारा प्रकृति से पदार्थ प्राप्त करता है। प्रकृतिप्रदत्त वस्तुओं का मानव अपने ज्ञान के द्वारा उपयोग करता है। प्रकृति मानव को प्रभावित करती है। वह प्रकृति के अनुसार ही अपने आपको पर्यावरण में ढालता है। वह कठोर पर्यावरण में भी अपने तकनीकी ज्ञान के आधार पर रहता है। कम अथवा अधिक तापमान को नियन्त्रित करता है। आज मानव ने डी०एन०ए० और आनुवंशिकी के रहस्यों को समझकर अनेक गम्भीर रोगों पर विजय प्राप्त की है। आदिमानव समाज तथा प्रकृति की शक्तियों को ‘पर्यावरणीय नियतिवाद’ कहते हैं। इस तरह मानव और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़े हैं।

प्रश्न 3.
प्रकृति का मानवीयकरण किस प्रकार होता है? उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रकृति का मानवीयकरण-मनुष्य भौतिक वातावरण और तकनीकी सहायता से प्रकृति पर प्रभाव डालता है। प्रकृति मानव को प्रभावित करती है तो मनुष्य अपनी तकनीक से प्रकृति को प्रभावित करता है। इसलिए इस बात का महत्त्व होता है कि मानव ने किस तकनीक और उपकरण के साथ प्रकृति पर विजय प्राप्त की है।

उदाहरण – घर्षण व ताप से आग की खोज हुई। उसी तरह डी०एन०ए० के ज्ञान से कई तरह के वंशानुगत रोगी की जानकारी प्राप्त हुई। तकनीकी ज्ञान मनुष्य पर प्रकृति की पकड़ को कमजोर करता है। प्रारम्भ में मानव प्रकृति से अधिक प्रभावित था लेकिन अब उसने उपकरणों तथा तकनीक की सहायता से प्रकृति को अपने अनुकूल बना लिया है।

प्रश्न 4.
निश्चयवाद की उपयुक्त उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
निश्चयवाद-निश्चयवादी विचारधारा के अनुसार मानव के समस्त क्रियाकलाप पर्यावरण द्वारा नियन्त्रित होते हैं। निश्चयवाद का अनुसरण करने वाले मानते हैं कि भौतिक कारक; जैसे-जलवायु, उच्चावच, प्राकृतिक वनस्पति आदि, मानव के समस्त क्रियाकलाप और जीवन-शैली को नियन्त्रित करते हैं।

उदाहरण के लिए-टुण्ड्रा क्षेत्र के एस्किमो के बर्फ के घर (इग्लू) व भोजन वालरस व सील मछली होती है। ह्वेल भी उनके जीवन का प्रमुख अंग है। वे मछली के तेल का भी उपयोग करते हैं। थार, सहारा जैसे गर्म मरुस्थलों के लोग भेड़, बकरी तथा ऊँट आदि जैसे जानवरों पर निर्भर करते हैं।

निश्चयवादी, साधारणतया मानव को एक निष्क्रिय कारक मानते हैं जो कि पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित हैं।

प्रश्न 5.
“प्रकृति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।” कथन की पुष्टि उदाहरण देकर कीजिए।
उत्तर:
प्रौद्योगिकी किसी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक होती है। मानव प्रकृति के नियमों को बेहतर ढंग से समझने के बाद ही प्रौद्योगिकी की विकास कर पाया।
उदाहरण

  • घर्षण और ऊष्मा की संकल्पनाओं ने अग्नि की खोज में हमारी सहायता की।
  • डी०एन०ए० और आनुवंशिकी के रहस्यों की समझ ने हमें अनेक गम्भीर रोगों पर विजय पाने के योग्य बनाया।
  • अधिक तेजी से चलने वाले यान विकसित करने के लिए हम वायु गति के नियमों का प्रयोग करते हैं।
    अतः प्रकृति, प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है और प्रौद्योगिकी मानव पर पर्यावरण की बंदिशों को कम करती है।

प्रश्न 6.
“भौतिक भूगोल और मानव भूगोल के तत्त्वों के मध्य परस्पर अन्योन्यक्रिया होती है।” उपयुक्त उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
मानव भूगोल भौतिक वातावरण और मनुष्य द्वारा सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण के मध्य अन्तर्सम्बन्धों का अध्ययन करता है। भौतिक भूगोल के अंग हैं-स्थलाकृति, मृदा, जलवायु, जल, प्रकृति, वनस्पति आदि। मानव भूगोल तथा भौतिक भूगोल में परस्पर गहरा सम्बन्ध है। मनुष्य भौतिक वातावरण से तकनीकी सहायता के साथ पारस्परिक प्रभाव डालता है। यह बात महत्त्वपूर्ण है कि मानव ने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किस तकनीक और उपकरण के साथ उत्पादन किया। भौतिक वातावरण का मानव पर प्रभाव पड़ता है। वह मनुष्य को अपने अनुरूप ढालने को मजबूर करता है।

उदाहरण – मरुस्थल में रहने वाले लोगों की जीवनचर्या मैदानों में रहने वाले लोगों से भिन्न होती है। उसकी आवश्यकताएँ भी भिन्न हैं। लेकिन मनुष्य कठिनाई के बावजूद कठिन वातावरण में रहने का प्रयास करता है। वह नवीन तकनीक व उपकरणों का उपयोग करके वातावरण को अपने रहने के लिए अनुकूल बना लेता है।

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प्रश्न 7.
मानव भूगोल की कल्याणपरक विचारधारा के लक्षणों को समझाइए।
उत्तर:
मानव भूगोल की कल्याणपरक विचारधारा के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं

  • कल्याणपरक विचारधारा में मानव की वित्तीय स्थिति का अध्ययन किया जाता है।
  • इसमें मानव के विकास में प्रादेशिक असमानता का अध्ययन किया जाता है।
  • पूँजीवाद के कारण इस विचारधारा का जन्म हुआ।
  • कौन, कहाँ, क्या पाता है और कैसे; कल्याणपरक विचारधारा के मूल बिन्दु हैं।

प्रश्न 8.
मानव भूगोल की मानवतावादी विचारधारा के लक्षण बताइए।
उत्तर:
मानव भूगोल की मानवतावादी विचारधारा के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

  • मानवतावादी विचारधारा स्वयं मनुष्य पर केन्द्रित है।
  • मानवतावादी विचारधारा में मानव जागृति, मानव साधन, मानव चेतना आदि के सन्दर्भ में मनुष्य की केन्द्रीय एवं क्रियाशील भूमिका पर बल दिया जाता है।
  • इस विचारधारा के विन्यास में मानव भूगोल में मानवीय परिघटनाओं के प्रतिरूपों के वर्णन के स्थान पर इनके पीछे कार्यरत प्रक्रिया को समझना है।
  • यह मानव भूगोल में जोड़ी गई नई विचारधारा है जिसका सम्बन्ध मानव कल्याण के स्थानिक प्रतिरूप से है।

प्रश्न 9.
सम्भववाद की संकल्पना को उपयुक्त उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
सम्भववाद की संकल्पना-सम्भववाद की संकल्पना के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिदत्त अनेक सम्भावनाओं का अपने लिए इच्छानुसार उपयोग कर सकता है। मानव और पर्यावरण में परस्पर सम्बन्ध में यह विचारधारा मानव केन्द्रित है।

उदाहरण – वर्षा के कार्य को सिंचाई द्वारा पूरा करना, पर्वतीय ढालों पर सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती करना आदि। ये उदाहरण प्राकृतिक पर्यावरण पर मनुष्य की श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं। सम्भववाद की संकल्पना के अनुसार नियतिवाद का यह सिद्धान्त कि मनुष्य प्रकृति का दास है को अस्वीकृत कर दिया गया।

प्रश्न 10.
‘नव-निश्चयवाद’ की विचारधारा पर टिप्पणी लिखिए। अथवा ‘रुको और जाओ निश्चयवाद’ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नव-निश्चयवाद-भूगोलवेत्ता ग्रिफिथ टेलर ने एक नई संकल्पना प्रस्तुत की जो दो विचारों ‘पर्यावरणीय निश्चयवाद’ और ‘सम्भववाद’ के मध्य मार्ग को दर्शाता है। उन्होंने उसे नव-निश्चयवाद अथवा रुको और जाओ निश्चयवाद का नाम दिया। विचारधारा के अनुसार न तो नितान्त आवश्यकता की स्थिति (पर्यावरणीय निश्चयवाद) है और न ही नितान्त स्वतन्त्रता (सम्भववाद) की स्थिति है। इसका अर्थ है कि प्राकृतिक नियमों की अनुपालना करके हम प्रकृति पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। मानव को प्रकृति के ‘रुको’ के संकेतों का प्रत्युत्तर देना होगा और जब प्रकृति रूपान्तरण की स्वीकृति दे तो वे अपने विकास के प्रयत्नों में आगे बढ़ सकता है। अभिप्राय यह है कि उन सीमाओं में, जो पर्यावरण को हानि न पहुँचाते हों, सम्भावनाओं को उत्पन्न किया जा सकता है।

प्रश्न 11.
प्रकृति के मानवीयकरण पर टिप्पणी लिखिए। . .
उत्तर:
प्रकृति का मानवीयकरण-मानव क्रियाओं की छाप प्रत्येक स्थान पर देखी जा सकती है। उच्च स्थानों; जैसे-पर्वतों तथा समतत्त्व क्षेत्रों; जैसे—मैदानों में स्वास्थ्य केन्द्र, विशाल नगरीय विस्तार, चरागाह, उद्यान आदि देखे जा सकते हैं। तटीय भागों में बन्दरगाह, महासागरीय मार्ग तथा अन्तरिक्ष उपग्रह आदि। ये सभी मानव क्रियाएँ हैं। प्रकृति अवसर प्रदान करती है और मनुष्य इसका लाभ उठाता है। इस प्रकार प्रकृति धीरे-धीरे मानवकृत हो जाती है और मानव छाप उस पर पड़नी आरम्भ हो जाती है।

प्रश्न 12.
मानवतावाद के लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मानवतावाद के लक्षण/विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • मानवतावाद विचारधारा मानव कल्याण, मानव जागृति, मानव चेतना,. मानव संसाधन एवं मानव की सृजनात्मकता के सन्दर्भ में मानव सक्रियता पर बल देती है।
  • इस विचारधारा का केन्द्र बिन्दु मानव है जो मानव विकास पर बल देता है।
  • इस विचारधारा के विकास में मानव भूगोल में मानवीय परिघटनाओं के प्रतिरूपों के वर्णन के स्थान पर इनके पीछे कार्यरत प्रक्रिया को समझना है।
  • मानवतावाद मानव भूगोल में जोड़ी गई नई विचारधारा है जिसका सम्बन्ध मानव कल्याण के स्थानिक प्रतिरूप से है।

प्रश्न 13.
प्रत्यक्षवाद के लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रत्यक्षवाद के लक्षण निम्नलिखित हैं

  • प्रत्यक्षवाद में मात्रात्मक विधियों के प्रयोग पर अधिक बल दिया गया ताकि विभिन्न कारकों के भौगोलिक प्रतिरूपों के अध्ययन के समय विश्लेषण को अधिक वस्तुनिष्ठ बनाया जा सके।
  • यह विचारधारा मुख्यत: निरीक्षण एवं अनुभवों पर आधारित है। इसी कारण इसे ‘प्रयोगवाद’ भी कहते हैं।
  • इस विचारधारा के प्रमुख समर्थक हैं-वी० जे० एलवेरी, डेविड हाइँ तथा विलियम वंग आदि हैं।

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प्रश्न 14.
निश्चयवाद के लक्षणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निश्चयवाद के लक्षण (विशेषताएँ) निम्नलिखित हैं

  • निश्चयवादी विचारधारा के अनुसार प्राकृतिक पर्यावरण सर्वप्रमुख है जो मानव के सारे क्रियाकलापों को नियन्त्रित करता है।
  • इस विचारधारा के अनुसार विभिन्न सामाजिक समूह, समाज अथवा देश का इतिहास, संस्कृति, मानव जीवन-शैली तथा विकास की अवस्था आदि सभी पर्यावरण के भौतिक कारकों द्वारा नियन्त्रित होते हैं।
  • इस विचारधारा के अनुसार मनुष्य प्रकृति का दास है और उसके सभी कार्य प्रकृति द्वारा प्रभावित होते हैं।
  • निश्चयवाद में विश्वास करने वाले मानव को निष्क्रिय समझा जाता है।

प्रश्न 15.
सम्भववाद के लक्षणों को समझाइए।
उत्तर:
सम्भववाद के लक्षण निम्नलिखित हैं

  • सम्भववाद के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिदत्त अनेक सम्भावनाओं का अपने लाभ के लिए इच्छानुसार उपयोग कर सकता है।
  • यह विचारधारा प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान देती है और उसे सक्रिय शक्ति के रूप में देखती है।
  • इस विचारधारा के अनुसार निश्चयवाद का यह सिद्धान्त कि मनुष्य प्रकृति का दास है, अस्वीकृत कर दिया गया।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के साथ मनुष्य ने कुशल तकनीक का विकास किया।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नव निश्चयवाद की धारणा किसने प्रस्तुत की?
उत्तर:
नव निश्चयवाद की धारणा ग्रिफिथ टेलर ने प्रस्तुत की।

प्रश्न 2.
पृथ्वी के कितने घटक हैं? नाम बताइए।
उत्तर:
पृथ्वी के दो घटक हैं

  • प्रकृति (भौतिक पर्यावरण) एवं
  • जीवन के रूप (मनुष्य भी शामिल)।

प्रश्न 3.
रैटजेल के शब्दों में मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
रैटजेल के अनुसार, “मानव भूगोल, मानव समाजों और धरातल के मध्य सम्बन्धों का संश्लेषित अध्ययन है।”

प्रश्न 4.
कु० सैम्पल की मानव भूगोल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
कु० सैम्पल के अनुसार, “मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील सम्बन्धों का अध्ययन है।”

प्रश्न 5.
ब्लॉश के शब्दों में मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ब्लॉश के अनुसार, “हमारी पृथ्वी को नियन्त्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य सम्बन्धों के अधिक संश्लेशित ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना।”

प्रश्न 6.
जनसंख्या भूगोल का सम्बन्ध आप किस सामाजिकशास्त्र से जोड़ेंगे?
उत्तर:
जनसंख्या भूगोल का सम्बन्ध हम जनांकिकी से जोड़ेंगे।

प्रश्न 7.
भूगोल की कितनी शाखाएँ हैं? नाम लिखिए।
उत्तर:
भूगोल की दो शाखाएँ हैं

  • भौतिक भूगोल, एवं
  • मानव भूगोल।

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प्रश्न 8.
निश्चयवाद से आप क्या समझते हैं? अथवा पर्यावरण निश्चयवाद क्या है?
उत्तर:
निश्चयवाद के अनुसार मानव के प्रत्येक क्रियाकलाप पर्यावरण द्वारा नियन्त्रित होते हैं।

प्रश्न 9.
सम्भववाद क्या है?
उत्तर:
सम्भववाद के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिदत्त अनेक सम्भावनाओं का अपने लाभ के लिए इच्छानुसार उपयोग कर सकता है।

प्रश्न 10.
नव-निश्चयवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
नव-निश्चयवाद के अनुसार मानव भूगोल में निश्चयवाद तथा सम्भववाद की चरम स्थिति के बीच एक मध्य मार्ग है। इसके अनुसार मानव प्रकृति में विकास के लिए एक सीमा तक ही जा सकता है और अन्ततः उसे प्रकृति के साथ समझौता करना पड़ता है।

प्रश्न 11.
ग्रिफिथ टेलर ने नव निश्चयवाद को क्या कहा?
उत्तर:
ग्रिफिथ टेलर ने नव-निश्चयवाद को ‘रुको और जाओ निश्चयवाद’ कहा।

प्रश्न 12.
आर्थिक भूगोल से सम्बन्धित सामाजिक भूगोल की चार प्रमुख उप-शाखाओं के नाम बताइए।
उत्तर:
(1) संसाधन भूगोल – संसाधन अर्थशास्त्र
(2) कृषि भूगोल – कृषि विज्ञान
(3) उद्योग भूगोल – औद्योगिक अर्थशास्त्र
(4) विपणन भूगोल – व्यावसायिक अर्थशास्त्र, वाणिज्य।

प्रश्न 13.
भूगोल के अध्ययन क्षेत्र की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
भूगोल के अध्ययन क्षेत्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • यह एक समाकलनात्मक अध्ययन है।
  • यह एक आनुभविक अध्ययन है।

प्रश्न 14.
भूगोल को समस्त विज्ञानों की जननी क्यों कहा जाता है? ‘
उत्तर:
भूगोल वास्तव में विश्वव्यापी प्रकृति का विज्ञान है। इसमें सभी प्राकृतिक तथा मानवीय लक्षणों का अध्ययन किया जाता है। यह एक अन्तर्विषयक विज्ञान है। इसलिए इसे समस्त विज्ञानों की जननी कहा जाता है।

प्रश्न 15.
मानव भूगोल का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
मानव भूगोल का उद्देश्य मानव, वातावरण तथा मानवीय क्रियाओं के सम्बन्ध का विज्ञान है।

प्रश्न 16.
मानव भूगोल के चार क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मानव भूगोल के क्षेत्र हैं

  • सामाजिक भूगोल
  • नगरीय भूगोल
  • राजनीतिक भूगोल एवं
  • जनसंख्या भूगोल।

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प्रश्न 17.
सामाजिक भूगोल के चार प्रमुख उपक्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सामाजिक भूगोल के उपक्षेत्र हैं

  • व्यवहारवादी भूगोल
  • सामाजिक कल्याण का भूगोल
  • सांस्कृतिक भूगोल
  • चिकित्सा भूगोल।

प्रश्न 18.
मानव भूगोल की प्रादेशिक विश्लेषण विधि क्या है?
उत्तर:
जब भूगोल में किसी प्रदेश को उप-विभागों या प्रदेशों में बाँटकर समूचा अध्ययन करते हैं तो इस विवरणात्मक अध्ययन को ‘प्रादेशिक विश्लेषण विधि’ कहते हैं।

प्रश्न 19.
प्रादेशिक भूगोल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
प्रादेशिक भूगोल में किसी प्रदेश के सभी भौगोलिक तत्त्वों का एक इकाई के रूप में अध्ययन होता है।

प्रश्न 20.
क्रमबद्ध भूगोल से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
क्रमबद्ध भूगोल में किसी प्रदेश के एक विशिष्ट भागौलिक तत्त्व का अध्ययन होता है।

प्रश्न 21.
प्रत्यक्षवाद विचारधारा से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रत्यक्षवाद विचारधारा में मात्रात्मक विधियों के प्रयोग पर बल दिया गया। यह मुख्यत: निरीक्षण तथा अनुभवों पर आधारित है। इसे ‘प्रयोगवाद’ भी कहा जाता है।

प्रश्न 22.
मानवतावाद विचारधारा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मानवतावाद मानव भूगोल में जोड़ी गई विचारधारा है जिसका सम्बन्ध मानव कल्याण के स्थानिक प्रतिरूप से है। इस विचारधारा का केन्द्र बिन्दु मानव है।

प्रश्न 23.
प्राकृतिक (भौतिक) पर्यावरण के घटकों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्राकृतिक (भौतिक) पर्यावरण के घटक हैं-जलवायु, धरातलीय उच्चावच, अपवाह प्रणाली, मृदा, खनिज, जल, वन एवं अन्य जीव आदि।

प्रश्न 24.
सांस्कृतिक (मानव-निर्मित) प्रर्यावरण के घटकों के नाम बताइए।
उत्तर:
सांस्कृतिक (मानव-निर्मित) पर्यावरण के घटक हैं—मानव जनसंख्या, मानव बस्तियाँ, मानव व्यवसाय, उद्योग, कृषि, पशुचारण, परिवहन, संचार आदि।

प्रश्न 25.
‘रुको और जाओ निश्चयवाद’ के प्रतिपादक कौन थे?
उत्तर:
ग्रिफिथ टेलर।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ज्ञान की जननी किस विषय को कहा गया है
(a) राजनीतिशास्त्र
(b) मनोविज्ञान
(c) अर्थशास्त्र
(d) भूगोल।
उत्तर:
(d) भूगोल।

प्रश्न 2.
सांस्कृतिक पर्यावरण का तत्त्व है
(a) घर
(b) उद्योग
(c) सड़कों का जाल
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

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प्रश्न 3.
‘माता प्रकृति’ किसे कहते हैं
(a) सांस्कृतिक पर्यावरण को
(b) भौतिक पर्यावरण को
(c) (a) व (b) दोनों को
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) भौतिक पर्यावरण को।

प्रश्न 4.
उत्तर उपनिवेशन युग में मानव भूगोल में किस उपागम का प्रयोग किया गया
(a) प्रादेशिक विश्लेषण
(b) क्षेत्रीय विभेदन
(c) स्थानिक संगठन
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) प्रादेशिक विश्लेषण।

प्रश्न 5.
नव-नियतिवाद को ‘रुको और जाओ निश्चयवाद’ का नाम किसने दिया
(a) ब्लाश ने
(b) ब्रून्श ने
(c) ग्रिफिथ टेलर ने
(d) हंटिंगटन ने।
उत्तर:
(c) ग्रिफिथ टेलर ने।

प्रश्न 6.
नव-नियतिवाद का प्रतिपादन किया
(a) हंटिंगटन ने
(b) ब्रून्श ने
(c) हम्बोल्ट ने
(d) ग्रिफिथ टेलर ने।
उत्तर:
(d) ग्रिफिथ टेलर ने।

प्रश्न 7.
भौतिक पर्यावरण का तत्त्व है.
(a) भू-आकृति
(b) मृदा
(c) जलवायु
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 8.
ऐतिहासिक भूगोल मानव भूगोल की किस शाखा से सम्बन्धित है
(a) सामाजिक भूगोल
(b) नगरीय भूगोल
(c) जनसंख्या भूगोल
(d) आवास भूगोल।
उत्तर:
(a) सामाजिक भूगोल।

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प्रश्न 9. आर्थिक भूगोल की उपशाखा है
(a) संसाधन भूगोल
(b) उद्योग भूगोल
(c) कृषि भूगोल
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 10.
सैन्य भूगोल मानव भूगोल की किस शाखा की उपशाखा है
(a) राजनीतिक भूगोल
(b) आर्थिक भूगोल
(c) सामाजिक भूगोल
(d) नगरीय भूगोल।
उत्तर:
(a) राजनीतिक भूगोल।

प्रश्न 11.
1970 के दशक में मानव भूगोल की कौन-सी विचारधारा का प्रचलन हुआ
(a) मानवतावादी विचारधारा
(b) आमूलवादी विचारधारा
(c) व्यवहारवादी विचारधारा
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 12.
अन्तर-युद्ध अवधि के बीच 1930 के दशक में किस उपागम का मानव भूगोल में प्रयोग किया गया
(a) क्षेत्रीय विभेदन
(b) स्थानिक संगठन
(c) अन्वेषण और विवरण
(d) प्रादेशिक विश्लेषणा
उत्तर:
(a) क्षेत्रीय विभेदन।

प्रश्न 13.
‘सम्भववाद’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया
(a) अलइदरीसी
(b) रैटजेल
(c) अलमसूदी
(d) लूसियन फैब्रे।
उत्तर:
(d) लूसियन फैब्रे।

प्रश्न 14.
मानव को एक निष्क्रिय कारक समझता है
(a) निश्चयवाद
(b) सम्भववाद
(c) नव-निश्चयवाद
(d) मानवतावाद।
उत्तर:
(a) निश्चयवाद।

प्रश्न 15.
किस विचारधारा के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है
(a) निश्चयवाद
(b) सम्भववाद
(c) नव-निश्चयवाद
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) सम्भववाद।

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 8 Transport and Communication

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 8 Transport and Communication (परिवहन एवं संचार)

UP Board Class 12 Geography Chapter 8 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 8 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए
(i) पार महाद्वीपीय स्टुअर्ट महामार्ग किनके मध्य से गुजरता है
(क) डार्विन और मेलबोर्न
(ख) एडमंटन और एकॉरेज
(ग) बैंकूवर और सेंट जॉन नगर
(घ) चेगडू और ल्हासा।
उत्तर:
(क) डार्विन और मेलबोर्न।

(ii) किस देश में रेलमार्गों के जाल का सघनतम घनत्व पाया जाता है
(क) ब्राजील
(ख) कनाडा
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) रूस।
उत्तर:
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका।

(iii) बृहद् ट्रंक मार्ग होकर जाता है
(क) भूमध्यसागर हिन्द महासागर से होकर
(ख) उत्तर अटलाण्टिक महासागर से होकर
(ग) दक्षिण अटलाण्टिक महासागर से होकर
(घ) उत्तर प्रशान्त महासागर से होकर।
उत्तर:
(ख) उत्तर अटलाण्टिक महासागर से होकर।

(iv) ‘बिग इंच’ पाइप लाइन के द्वारा परिवहित किया जाता है
(क) दूध
(ख) जल
(ग) तरल पेट्रोलियम गैस (LPG)
(घ) पेट्रोलियम।
उत्तर:
(घ) पेट्रोलियम।

(v) चैनल टनल जोड़ता है
(क) लन्दन-बर्लिन
(ख) बर्लिन-पेरिस
(ग) पेरिस-लन्दन
(घ) बार्सिलोना-बर्लिन।
उत्तर:
(ग) पेरिस-लन्दन।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
(i) पर्वतों, मरुस्थलों तथा बाढ़ सम्भावित क्षेत्रों में स्थल परिवहन की क्या-क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर:
सड़क मार्गों के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि भूमि समतल तथा ऊबड़-खाबड़ नहीं होनी चाहिए, लेकिन पर्वतीय और मरुस्थलीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण की उपयुक्त दशाएँ नहीं मिलतीं; इसीलिए इन क्षेत्रों में इसके निर्माण की समस्या आ जाती है। बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में भी सड़क निर्माण आर्थिक दृष्टि से उपयोगी नहीं है, क्योंकि प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ . सड़क तथा पुलों को बहाकर ले जाती है। इसी कारण इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण की समस्या है।

(ii) पार महाद्वीपीय रेलमार्ग क्या होता है?
उत्तर:
महाद्वीप के आर-पार बनाए गए तथा इसके दो सिरों को जोड़ने वाले मार्गों को ‘पार महाद्वीपीय रेलमार्ग’ कहते हैं। ऐसे रेलमार्ग हैं-ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग, कनाडियन पैसेफिक रेलमार्ग तथा ट्रांस-ऑस्ट्रेलियन रेलमार्ग।

(iii) जल परिवहन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
जल परिवहन के लाभ जल परिवहन के निम्नलिखित लाभ हैं

  • जल परिवहन में किसी प्रकार के मार्ग निर्माण की आवश्यकता नहीं होती है।
  • जल परिवहन यातायात का सस्ता माध्यम है।
  • जल परिवहन में एक साथ अधिक माल ढोया जा सकता है।
  • जल परिवहन के रखरखाव पर बहुत कम खर्च होता है।

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक न दें
(i) “एक सुप्रबन्धित परिवहन प्रणाली में विभिन्न एक-दूसरे की सम्पूरक होती है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एक सुप्रबन्धित परिवहन प्रणाली में यातायात के सभी साधन एक-दूसरे के सम्पूरक होते हैं। सभी यातायात साधनों का उद्देश्य यात्रियों और माल का आवागमन करना है। सुप्रबन्धित परिवहन प्रणाली की सार्थकता परिवहित की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागत और उपलब्ध परिवहन लागत पर निर्भर होती है। विभिन्न परिवहन के साधन इस प्रकार कार्य करते हैं

  • वस्तुओं का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार या वितरण भारवाही जलयानों द्वारा किया जाता है। .
  • कम दूरी और एक घर से दूसरे घर की सेवाएँ प्रदान करने के लिए सड़क परिवहन सस्ता एवं तीव्रगामी होता है।
  • किसी देश के आन्तरिक भाग में स्थूल पदार्थों के विशाल परिणाम को लम्बी दूरियों तक परिवहन करने के लिए रेल सबसे अनुकूल साधन है।
  • उच्च मूल्य वाली हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का वायुमार्गों द्वारा परिवहन सर्वश्रेष्ठ होता है। अत: सुप्रबन्धित परिवहन तन्त्र में परिवहन के विभिन्न साधन एक-दूसरे के सम्पूरक होते हैं।

(ii) विश्व के वे कौन-से प्रमुख प्रदेश हैं जहाँ वायुमार्ग का सघन तन्त्र पाया जाता है?
उत्तर:
विश्व में सघन वायुमार्ग वाले क्षेत्र हैं

  • पश्चिमी यूरोप।
  • पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • दक्षिण-पूर्वी एशिया।

संयुक्त राज्य अमेरिका अकेला ही विश्व के 60% वायु परिवहन का प्रयोग करता है। न्यूयॉर्क, लन्दन, पेरिस, एमस्टरडम, फ्रेंकफर्ट, रोम, बैंकॉक, मुम्बई, कराँची, नई दिल्ली, लॉस एंजिल्स आदि ऐसे केन्द्र हैं जहाँ से वायु परिवहन भिन्न देशों को जाता है अथवा इन केन्द्रों पर आता है।

(iii) वे कौन-सी विधाएँ हैं जिनके द्वारा साइबर स्पेस मनुष्यों के समकालीन आर्थिक और सामाजिक स्पेस की वृद्धि करेगा?
उत्तर:
साइबर स्पेस इण्टरनेट-साइबर स्पेस इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटरराइज्ड स्पेस की दुनिया है। यह ‘वर्ल्ड वाइड वेबसाइट’ (www) जैसे इण्टरनेट द्वारा घेरा हुआ है। यह इलेक्ट्रॉनिक डिजीटल है जो कम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा सूचना भेजने के लिए होता है जिसमें प्रेषक और प्राप्तकर्ता को कोई भौतिक गति नहीं करनी होती। साइबर स्पेस सभी स्थानों पर होता है। यह कार्यालय नाव, वायुयान तथा अन्य सभी स्थानों पर होता है।

प्रगति – इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क की गति जिस पर यह कार्य करता है असामान्य होती है जो मानव इतिहास में अद्वितीय है। सन् 1955 में इण्टरनेट के उपयोगकर्ता संख्या में 5 करोड़ थे जो सन् 2000 में 40 करोड़ और सन् 2010 में 200 करोड़ हैं। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक उपयोगकर्ताओं का संयुक्त राज्य अमेरिका से विकासशील देशों में स्थानान्तरण हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका में उपयोगकर्ताओं का प्रतिशत अंश सन् 1995 में 66 प्रतिशत रह गया। अब विश्व के अधिकांश उपयोगकर्ता संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, चीन और भारत में हैं।

भविष्य – साइबर स्पेस समकालीन, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में ई-मेल, ई-कॉमर्स लर्निंग आदि द्वारा परिवर्तन लाएँगी। फैक्स, टी०वी०, रेडियो के साथ इण्टरनेट प्रत्येक व्यक्ति की पहुँच में हो जाएगा। यह आधुनिक संचार प्रणाली है।

UP Board Class 12 Geography Chapter 8 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 8 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
परिवहन से आप क्या समझते हैं? सड़क परिवहन के लाभों पर प्रकाश डालिए। अथवा सड़क परिवहन के गुण/महत्त्व/उपयोगिता/लाभ का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परिवहन का अर्थ-वस्तुओं और यात्रियों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने-ले जाने को ‘परिवहन’ कहते हैं।
सड़क परिवहन के महत्त्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैं

  • सड़क परिवहन, रेल परिवहन की तुलना में सस्ता है। इसकी लागत, मरम्मत और देखभाल तुलनात्मक दृष्टि से कम है।
  • सड़कें उपभोक्ताओं के घर तक पहुँचती हैं। उत्पादक और व्यापारी, सड़क परिवहन को इसलिए पसन्द करते हैं कि इसमें माल को जगह-जगह उतारना नहीं पड़ता। कच्चा माल, मशीनें आदि सीधे कारखानों में और तैयार माल सीधे उपभोक्ताओं तक सुरक्षित पहुँच जाता है।
  • कम दूरी के लिए उत्तम है। व्यक्ति और सामान जल्दी पहुँच जाते हैं।
  • शीघ्र नष्ट होने वाली सब्जियों, फलों, दूध के लिए अत्यन्त उपयोगी है। ट्रक कृषि का आधार ही सड़कें हैं।
  • कहीं भी; कभी भी समय और स्थान की पाबन्दी नहीं। व्यक्ति और सामान कहीं से भी. किसी भी समय ढोया जा सकता है।
  • स्थायी व्यय नहीं रेलों की तरह स्टेशनों, प्लेटफार्मों, रेलमार्गों आदि के रखरखाव पर कर्मचारियों की अधिक संख्या में आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • दुर्गम, तीव्रढाल वाले पहाड़ी क्षेत्र, बीहड़ों आदि में सड़कें बनाना और उपयोग में लाना कठिन, लेकिन सम्भव है।
  • पैकिंग आदि की औपचारिकता नहीं। फल-सब्जियाँ आदि सीधे ट्रकों में बिना पैकिंग के लाद दिए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
रेल परिवहन के गुणों व अवगुणों का वर्णन कीजिए। अथवा रेल परिवहन के गुण/लाभ/महत्त्व/उपयोगिता का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
सड़क परिवहन के गुण/लाभ/महत्त्व/उपयोगिता रेल परिवहन के गुण/लाभ/महत्त्व/उपयोगिता निम्नलिखित हैं

  • रेल परिवहन लम्बी दूरियों के यात्रियों और सामान के लिए सस्ता साधन है।
  • लम्बी दूरियों के लिए यह तीव्रगामी परिवहन है।
  • वातानुकूलन, शायिका व्यवस्था और खान-पान की सुविधा से रेलयात्रा सुखद हो गई है।
  • भारी और बड़े परिमाण का सामान अधिक मात्रा में लम्बी दूरियों तक आसानी से ले जाया जाता है।
  • रेल कृषि उत्पादों को उपभोक्ताओं तक और कच्चे माल को कारखानों तक पहुँचाने में सुविधाजनक है।
  • शीघ्रनाशी वस्तुओं के परिवहन के लिए प्रशीतित डिब्बों का उपयोग किया जाता है।
  • रेलों द्वारा किसी क्षेत्र के आर्थिक विकास में काफी मदद मिलती है। रेल परिवहन के अवगुण/दोष/सीमाएँ/कमियों

रेल परिवहन के अवगुण/दोष/सीमाएँ कमियाँ निम्नलिखित हैं

  • रेलमार्गों, स्टेशनों, प्लेटफार्मों, डिब्बों आदि के बनाने और रख-रखाव के लिए भारी पूँजी और कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
  • पर्वतीय व मरुस्थलीय क्षेत्रों में रेलमार्गों का निर्माण करना और चालू रखना कठिन है।
  • अधिक वर्षा व हिमपात वाले क्षेत्रों में रेल परिवहन लगभग असम्भव है।
  • रेलमार्गों के विभिन्न गेजों के कारण रेल परिवहन में कठिनाई होती है और व्यय बढ़ता है।

प्रश्न 3.
अन्तःस्थलीय जलमार्ग किसे कहते हैं? अन्तःस्थलीय जलमार्गों के लिए आवश्यक दशाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अन्तःस्थलीय जलमार्ग-परिवहन के उपयोग में आने वाली नदियों, झीलों और नहरों को ‘अन्तःस्थलीय जलमार्ग’ कहा जाता है।
अन्तःस्थलीय जलमार्गों के लिए आवश्यक दशाएँ

  • नदियाँ सदानीरा अर्थात् पूरे वर्ष निरन्तर प्रवाह वाली होनी चाहिए। बरसाती नदियाँ जल परिवहन के अयोग्य होती हैं।
  • जलप्रपातों और क्षिप्रिकाओं वाली नदियों में जल परिवहन नहीं हो सकता।
  • नदियों, झीलों और नहरों का पानी शीत ऋतु में जमना नहीं चाहिए।
  • नदियों के मुहानों पर रेत, मिट्टी आदि जमा नहीं होनी चाहिए। इससे जल की गहराई कम हो जाती है।
  • अत्यधिक मोड़दार नदियों में परिवहन में अधिक समय लगता है।
  • नदियाँ बाढ़ के समय मार्ग बदलने वाली नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 4.
अन्तःस्थलीय जलमार्गों के गुणों व अवगुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अन्तःस्थलीय जलमार्गों के गुण
अन्तःस्थलीय जलमार्गों के गुण निम्नलिखित हैं

  • भारी और बड़े परिमाण वाले सामान का परिवहन सस्ता और आसान होता है। कोयला, विभिन्न अयस्क तथा भारी-भरकम निर्मित सामान जल परिवहन के लिए अधिक उपयुक्त हैं।
  • नदियाँ और झीलें प्राकृतिक मार्ग हैं। इनके बनाने और रख-रखाव पर व्यय नहीं करना पड़ता।
  • सघन और भारी वर्षा वाले वनों में नदियाँ ही परिवहन का अकेला साधन हैं।
  • इसमें दुर्घटनाओं का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है।

अन्तःस्थलीय जलमार्गों के अवगुण
अन्त:स्थलीय जलमार्गों के अवगुण निम्नलिखित हैं

  • धीमी गति से समय की बर्बादी होती है।
  • शीघ्र खराब होने वाले फल-सब्जियों और दूध एवं उसके उत्पादों के परिवहन के लिए अनुपयुक्त है।
  • अधिकतर नदियाँ परिवहन की माँग वाले सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों से दूर बहती हैं अत: अनुपयोगी हैं।
  • मौसम के अनुसार नदियों के जल में कमी होने से परिवहन में बाधा आती है।
  • नदियों, नहरों और झीलों की गहराई बनाए रखने के लिए रेत, मिट्टी निकालने में व्यय होता है और . परिवहन बाधित होता है।

प्रश्न 5.
स्वेज नहर व पनामा नहर की तुलना कीजिए।
उत्तर:
स्वेज नहर व पनामा नहर की तुलना (अन्तर)
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प्रश्न 6.
वायु परिवहन की विशेषताओं व दोषों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वायु परिवहन की विशेषताएँ (गुण/महत्त्व/लाभ/उपयोगिता) वायु परिवहन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • वायुयान पूर्व-निर्धारित समय-सारणी के अनुसार उड़ान भरते हैं।
  • सुरक्षा कारणों से वायुयान विभिन्न देशों के ऊपर से निर्धारित गलियारों से ही गुजर सकते हैं।
  • लम्बी दूरी के लिए परिवहन का सबसे उपयुक्त साधन है।
  • यह परिवहन का सबसे तीव्रतम लेकिन महँगा साधन है।
  • हल्की, लेकिन कीमती और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं जैसे फूल, कुछ विशेष प्रकार के फल और सब्जियाँ, आभूषण, हीरे जवाहरात के परिवहन के लिए उपयुक्त है।
  • प्राकृतिक आपदाओं के समय कहीं भी राहत पहुँचाई जा सकती है।
  • दुर्गम क्षेत्रों में वायुयान परिवहन उपयुक्त है।

वायु परिवहन के दोष
वायु परिवहन के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं

  • वायु परिवहन महँगा परिवहन साधन है। इसका लाभ केवल सम्पन्न वर्ग ही ले सकता है।
  • छोटी/कम दूरियों के लिए वायु परिवहन उपयोगी नहीं है।
  • खराब मौसम में वायु परिवहन में बाधा आती है।
  • सस्ती व भारी वस्तुओं के परिवहन में यह उपयोगी नहीं है।
  • वायु दुर्घटनाएँ कई बार भयंकर रूप ले लेती हैं।

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प्रश्न 7.
परिवहन का चयन कैसे किया जाए? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
परिवहन का चयन
परिवहन के प्रत्येक माध्यम का अपना महत्त्व होता है। किसी भी विधा की सार्थकता ढोई जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागत तथा उपलब्ध विधा पर निर्भर करती है।

  • स्थूल तथा भारी-भरकम सामानों का परिवहन आमतौर पर जलमार्गों द्वारा सस्ता पड़ता है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय-स्तर पर वस्तुओं का परिवहन सामान्यत: समुद्री मालवाहक जहाजों द्वारा किया जाता है। जलमार्गों द्वारा परिवहन में पत्तनों से आन्तरिक गन्तव्यों तक माल पहुँचाने की कुछ सीमाएँ हैं तथा इस प्रकार का परिवहन धीमा होता है।
  • छोटी दूरियों के लिए सड़क परिवहन अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है और इसकी गति भी तेज होती है। इसके अलावा यह द्वार-से-द्वार तक भी सेवा प्रदान करता है।
  • लेकिन यदि किसी को बड़ी मात्रा में स्थूल सामान देश के सुदूर स्थानों पर ले जाना हो तो इसके लिए रेलमार्ग सबसे अच्छा साधन है।
  • इसके विपरीत उच्च मूल्य वाली हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का परिवहन वायुयान द्वारा सबसे अच्छा रहता है।
  • तरल तथा गैसीय पदार्थों का परिवहन आजकल पाइप लाइनों द्वारा फायदेमन्द रहता है।

एक सुप्रबन्धित परिवहन प्रणाली में परिवहन की विभिन्न विधाएँ एक-दूसरे के पूरक और सहयोगी होती हैं।

प्रश्न 8.
पाइप लाइन परिवहन के गुण व दोषों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पाइप लाइन परिवहन के गुण
पाइप लाइन परिवहन के मुख्य गुण निम्नलिखित हैं

  • पाइप लाइनों को ऊबड़-खाबड़ भू-भागों तथा पानी के नीचे भी बिछाया जा सकता है।
  • पाइप लाइन बिछाने की आरम्भिक लागत अधिक जरूर होती है, लेकिन एक बार बिछ जाने के बाद संचालन और रख-रखाव में लागत कम आती है।
  • पाइप लाइनें पदार्थों की निरन्तर आपूर्ति को सुनिश्चित करती हैं।
  • पाइप लाइनों को बिछाने के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं करना पड़ता। इसमें किसी और प्रकार की बर्बादी भी नहीं होती।
  • इससे ऊर्जा का उपयोग भी कम मात्रा में होता है और समय भी नष्ट नहीं होता।
  • पाइप लाइनें परिवहन का सस्ता, तीव्र, सक्षम और पर्यावरण-अनुकूल तरीका हैं।

पाइप लाइन परिवहन के दोष
पाइप लाइन परिवहन के दोष निम्नलिखित हैं

  • एक बार पाइप लाइन बिछा देने के बाद उसकी क्षमता में वृद्धि नहीं की जा सकती, अत: यह परिवहन का लोचदार साधन नहीं है।
  • कई बार पाइप लाइन की सुरक्षा भी नहीं की जा सकती।
  • भूमिगत पाइप लाइन की मरम्मत करना भी कठिन हो जाता है।
  • पाइप लाइन का रिसाव हो जाने की स्थिति में रिसाव-स्थान का पता लगाना कठिन हो जाता है।

प्रश्न 9.
पनामा नहर के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पनामा नहर का महत्त्व
पनामा नहर के महत्त्व के प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैं
(1) पनामा नहर संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों का पोषण और संरक्षण अधिक करती है।
(2) इस नहर के बन जाने से उत्तरी व दक्षिणी-अमेरिका के पूर्वी व पश्चिमी तटों के बीच दूरी कम हो गई है।
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(3) इस नहर के कारण यूरोपीय पत्तनों और संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित बन्दरगाहों के बीच की दूरी कम हो गई है।

(4) संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए इस नहर का सामाजिक महत्त्व है। इसी नहर के द्वारा वह अपने जंगी बेड़ों को अटलाण्टिक महासागर से प्रशान्त महासागर या इसके उलट तुरन्त भेज सकता है।

(5) पश्चिमी द्वीप समूह, जो अमेरिका के लिए सुरक्षात्मक कवच का निर्माण करते हैं, की देख-रेख व वहाँ सैनिक अड्डों की स्थापना इस नहर के कारण आसान हो गई है।

(6) ब्रिटेन को भी पनामा नहर से लाभ हुआ है। उसे न्यूजीलैण्ड, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी . तटों तक पहुँचने का छोटा मार्ग मिल गया है।

(7) इस मार्ग द्वारा अटलाण्टिक महासागर से पैट्रोलियम, चाँदी, पारा, सिनकोना, गन्ना, केला, ऊन, मांस, अयस्क, लकड़ी, दुग्धोत्पाद, रबड़ का निर्यात प्रशान्त महासागरीय क्षेत्रों को होता है तथा मशीनें, ताँबा, नाइट्रेट, . इस्पात की वस्तुएँ, टिन, मछली व निर्मित वस्तुएँ प्रशान्त महासागरीय क्षेत्र से निर्यात की जाती हैं।

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प्रश्न 10.
स्वेज नहर के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्वेज नहर का महत्त्व स्वेज नहर के महत्त्व के प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैं
(1) इस मार्ग के खुल जाने से यूरोप के देशों, पूर्वी अफ्रीका, एशिया व ऑस्ट्रेलिया के बीच मार्ग छोटा हो गया है। इससे यात्रा में लगने वाले समय और पैसे की बचत हुई है। पहले जहाजों को अफ्रीका के दक्षिण से लम्बा चक्कर काटकर आशा-अन्तरीप मार्ग से जाना पड़ता था लेकिन अब भूमध्यसागर से नहर स्वेज होते हुए लाल सागर और फिर अरब सागर में छोटे मार्ग से जल्दी पहुँचा जाता है। उदाहरणत: आशा-अन्तरीप मार्ग की तुलना में स्वेज मार्ग से लन्दन और मुम्बई के बीच 9600 किमी तथा न्यूयॉर्क और अदन के बीच 10,720 किमी की दूरी कम हुई है।
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(2) इस नहर के बनने से यूरोपीय देशों विशेष रूप से ब्रिटेन को बहुत लाभ हुआ। इस जलमार्ग के द्वारा ब्रिटेन अपने सुदूर-पूर्व स्थित उपनिवेशों से सस्ता कच्चा माल मँगाता था तथा उन्हें निर्मित माल निर्यात किया करता था। इसीलिए इस नहर को ‘ब्रिटिश साम्राज्य की स्नायु नाड़ी’ कहा जाता था।

(3) इस नहर से न केवल पश्चिमी देशों को ही लाभ हुआ है, बल्कि पूर्वी संसार को भी इससे व्यापारिक लाभ हुआ है। पूर्वी देश पश्चिमी देशों को इसी नहर मार्ग द्वारा पटसन, चाय, रेशम, चीनी, रबड़, गर्म मसाले, मांस, ऊन, टिन, हैंप इत्यादि का निर्यात करते हैं जबकि पश्चिमी देश पूर्वी अफ्रीका, एशिया व ऑस्ट्रेलिया को मशीनें, दवाइयाँ, रासायनिक उत्पाद तथा कपड़ा इत्यादि भेजते हैं। खाड़ी क्षेत्र में घटने वाले राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार इस मार्ग का प्रयोग घटता-बढ़ता, बन्द होता और खुलता रहता है फिर भी यह निश्चित है कि स्वेज नहर निर्माण के द्वारा भौगोलिक परिवर्तन करके राष्ट्रों के भाग्य बदलने वाला इससे बड़ा अकेला मानवीय उद्यम पिछली शताब्दियों में और कोई नहीं हुआ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
परिवहन के प्रकार को वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
महामार्ग की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
महामार्ग की विशेषताएँ
महामार्ग की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

  • महामार्गों का निर्माण इस तरह किया जाता है ताकि उन पर वाहन निर्बाध गति से दौड़ सकें।
  • इन महामार्गों में यातायात की अलग-अलग लाइन होती है।
  • महामार्ग आने और जाने वाले वाहनों के लिए दो भागों में बँटे होते हैं।
  • पुल और उपरिसेतु यातायात को सुचारु बनाते हैं।

प्रश्न 3.
ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग के भौगोलिक महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग का भौगोलिक महत्त्व ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग का भौगोलिक महत्त्व निम्नवत् है

  • इस मार्ग के खुल जाने से कभी उपेक्षित तथा अत्यन्त पिछड़ा हुआ पूर्वी साइबेरिया, जिसे ‘काला पानी’ कहा जाता था, आज प्राकृतिक सम्पदाओं का खजाना माना जा रहा है।
  • इस मार्ग के कारण ही मध्य एशिया और साइबेरिया के पशु, वन, मिट्टी, खनिज, जल एवं कृषि सम्पत्ति का दोहन सम्भव हो सका है।
  • इस मार्ग पर खाद्यान्नों, कोयला, धातुओं, लकड़ी, लुगदी, समूर, चमड़ा, मक्खन व सूखा दूध इत्यादि का परिवहन पश्चिम की ओर तथा मशीनरी और औद्योगिक उत्पाद पूर्व की तरफ भेजे जाते हैं।

प्रश्न 4.
पार-कैनेडियन रेलमार्ग के भौगोलिक महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
पार-कैनेडियन रेलमार्गका भौगोलिक महत्त्व पार-कैनेडियन रेलमार्ग का भौगोलिक महत्त्व निम्नलिखित है

  • इस रेलमार्ग के कारण ही कनाडा के पूर्वी भागों में उद्योग पनप सके व पश्चिमी भाग में कृषि में प्रगति हुई।
  • प्रेयरी प्रदेशों का गेहूँ इसी मार्ग द्वारा पूर्वी बन्दरगाहों को भेजा जाता है, जहाँ से उसे यूरोपीय बाजार में निर्यात कर दिया जाता है।
  • इसी रेलमार्ग के कारण ही कनाडा में जनसंख्या का सघन बसाव आरम्भ हुआ। कनाडा के अधिकांश बड़े नगर इसी रेलमार्ग के किनारे स्थित हैं।
  • कनाडा के आन्तरिक भागों में सीधा सम्पर्क जोड़ देने के कारण इस रेलमार्ग का प्रशासकीय एवं राजनीतिक महत्त्व है।

प्रश्न 5.
परिवहन तथा संचार में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
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प्रश्न 6.
संसार में रेलमार्गों के विकास में सहायक प्रमुख कारक बताइए।
उत्तर:
संसार में रेलमार्गों के विकास में सहायक कारक

  • समतल भूमि – समतल मैदानों में रेलमार्गों का विकास अधिक सम्भव है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के मैदानों में रेलमार्गों का जाल बिछा हुआ है।
  • सघन जनसंख्या – सघन जनसंख्या के कारण भी अधिक रेलमार्ग बिछाए जाते हैं। उदाहरण—भारत का उत्तरी मैदान।
  • औद्योगीकरण तथा समृद्ध कृषि – उद्योगों के विकास तथा समृद्ध कृषि क्षेत्रों में भी रेलों का विकास होता है। उदाहरण-यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका।

प्रश्न 7.
संचार सेवाओं के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संचार सेवाओं का महत्त्व
संचार सेवाओं का निम्नलिखित महत्त्व है

  • आधुनिक समय में संचार के साधनों ने सम्पूर्ण विश्व को एक वैश्विक ग्राम बना दिया है।
  • रेडियो, दूरदर्शन, फैक्स और इण्टरनेट ने इस क्षेत्र में क्रान्ति ला दी है। हम फैक्स/इण्टरनेट से थोड़े-से समय में दूर तक सन्देश भेज सकते हैं।
  • अंकीय सूचना संचार कम्प्यूटर प्रणाली में मिश्रित हो गया है। कम्प्यूटर के द्वारा विश्व के किसी भाग से भी हम सूचना एकत्र कर सकते हैं।
  • आज के समय में इण्टरनेट का इलेक्ट्रॉनिक जाल संचार का सबसे बड़ा साधन है, जिसके द्वारा एक अरब लोग एक साथ जुड़ सकते हैं।

प्रश्न 8.
समुद्री जल यातायात के क्या लाभ हैं? अथवा महासागरीय मार्गों के लाभों को समझाइए।
उत्तर:
समुद्री जल यातायात/महासागरीय मार्गों के लाभ
समुद्री जल यातायात/महासागरीय मार्गों के निम्नलिखित लाभ हैं

  • महासागर सभी महाद्वीपों को एक-दूसरे से मिलाते हैं।
  • खनिज तेल अथवा गैस आदि को ढोने के लिए विकास टैंकरों का उपयोग किया जा सकता है।
  • पत्तनों पर कण्टेनरों के प्रयोग से सामान को उतारना या चढ़ाना आसान है।
  • समुद्री परिवहन द्वारा जिनता सामान एक साथ जलयानों द्वारा ढोया जा सकता है वह किसी अन्य साधन द्वारा सम्भव नहीं है।

प्रश्न 9.
उत्तरी अटलाण्टिक समुद्री मार्ग की विशेषताएँ समझाइए।
उत्तर:
उत्तरी अटलाण्टिक समुद्री मार्ग की विशेषताएँ उत्तरी अटलाण्टिक समुद्री मार्ग की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

  • यह मार्ग औद्योगिक दृष्टि से विकसित विश्व के दो प्रदेशों उत्तर-पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी यूरोप को मिलाता है।
  • विश्व का एक-चौथाई विदेशी व्यापार इस मार्ग द्वारा परिवहित होता है।
  • यूरोप के देश जो कृषि व उद्योग में विकसित हैं वस्त्र, रसायन, मशीनें, उर्वरक आदि संयुक्त राज्य अमेरिका व कनाडा को निर्यात करते हैं।
  • इस मार्ग के दोनों तटों पर पत्तंन और पोताश्रय की उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 10.
ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग एशिया का सबसे महत्त्वपूर्ण और विश्व का सर्वाधिक लम्बा (9,322 किमी) दोहरे पथ से युक्त विद्युतीकृत पार महाद्वीपीय रेलमार्ग है। रूस का यह प्रमुख रेलमार्ग पश्चिम में सेंट पीटर्सबर्ग से पूर्व में प्रशान्त महासागर तट पर स्थित ब्लाडीवोस्टक तक जाता है। इस मार्ग ने एशियाई प्रदेश को पश्चिमी यूरोपीय बाजारों से जोड़ा है। इस रेलमार्ग को दक्षिण में जोड़ने वाले योजक मार्ग भी हैं।

प्रश्न 11.
राइन जलमार्ग की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
राइन जलमार्ग की विशेषताएँ राइन जलमार्ग की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • यह नदी समृद्ध कोयला क्षेत्र से गुजरती है, अत: इस नदी का सम्पूर्ण बेसिन एक समृद्ध औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुका है।।
  • इस नदी के व्यापार में कोयले की महत्ता के कारण इसे ‘कोयला नदी’ भी कहा जाता है।
  • यह जलमार्ग स्विट्जरलैण्ड, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम तथा नीदरलैण्ड के औद्योगिक क्षेत्रों को उत्तरी अटलाण्टिक समुद्री मार्ग से जोड़ता है।
  • यह जलमार्ग यूरोपीय साझा बाजार के व्यापार की धुरी है।

अतिलघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
परिवहन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं और यात्रियों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने-ले-जाने को परिवहन’ कहते हैं।

प्रश्न 2.
संचार क्या है?
उत्तर:
उद्गम स्थल से लक्ष्य तक किसी माध्यम के द्वारा सूचनाओं का प्रेषण ही संचार है। टेलीफोन सूचना प्रेषण का एक माध्यम है।

प्रश्न 3.
महामार्ग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
महामार्ग दूरस्थ स्थानों को जोड़ने वाली पक्की सड़कें होती हैं। इनका निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि अबाधित रूप से यातायात का आवागमन हो सके।

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प्रश्न 4.
परिवहन जाल क्या है?
उत्तर:
अनेक स्थान जिन्हें परस्पर मार्गों की श्रेणियों द्वारा जोड़ दिए जाने पर जिस प्रारूप का निर्माण होता है, उसे ‘परिवहन जाल’ कहते हैं।

प्रश्न 5.
परिवहन की प्रमुख विधाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
परिवहन की प्रमुख विधाएँ हैं

  • स्थल परिवहन
  • जल परिवहन
  • वायु परिवहन, तथा
  • पाइप लाइन परिवहन।

प्रश्न 6.
परिवहन विधा की सार्थकता किस पर निर्भर करती है?
उत्तर:
परिवहन विधा की सार्थकता परिवहित की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागतों और उपलब्ध विधा पर निर्भर करती है।

प्रश्न 7.
उच्च मूल्य वाली, हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का परिवहन किससे सर्वश्रेष्ठ होता है?
उत्तर:
उच्च मूल्य वाली, हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का वायुमार्गों द्वारा परिवहन सर्वश्रेष्ठ होता है।

प्रश्न 8.
प्रथम सार्वजनिक रेलमार्ग कब और कहाँ प्रारम्भ हुआ?
उत्तर:
प्रथम सार्वजनिक रेलमार्ग सन् 1825 में उत्तरी इंग्लैण्ड के स्टॉकटन और इर्लिंग्टन स्थानों के मध्य प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 9.
पाइप लाइनों से किसका परिवहन व्यापक रूप से किया जाता है?
उत्तर:
पाइप लाइनों से जल, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि का परिवहन किया जाता है।

प्रश्न 10.
साइबर स्पेस क्या है?
उत्तर:
साइबर स्पेस विद्युत द्वारा कम्प्यूटरीकृत स्पेस का संसार है। यह वर्ल्ड वाइड वेबसाइट (www) जैसे इण्टरनेट द्वारा आवृत्त है।

प्रश्न 11.
पार साइबेरियन रेलमार्ग के अन्तिम स्टेशनों के नाम बताइए।
उत्तर:
सेंट पीटर्सबर्ग तथा ब्लाडीवोस्टक।

प्रश्न 12.
ओरिएण्ट एक्सप्रेस रेलमार्ग के अन्तिम सिरों के स्टेशनों के नाम बताइए।
उत्तर:
पेरिस तथा इस्तमबूल।।

प्रश्न 13.
पार कनाडियन रेलमार्ग के अन्तिम स्टेशनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
बैंकूवर तथा हैलीफैक्स।

प्रश्न 14.
विश्व का सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग कौन-सा है?
उत्तर:
उत्तर अटलाण्टिक महासागरीय मार्ग।

प्रश्न 15.
एशिया और यूरोप दोनों महाद्वीपों के लिए वाणिज्य द्वार के रूप में सेवा करने वाली नौगम्य नहर का नाम बताइए।
उत्तर:
स्वेज नहर।

प्रश्न 16.
जर्मनी के सबसे महत्त्वपूर्ण आन्तरिक जलमार्ग का नाम बताइए।
उत्तर:
राइन जलमार्ग।

प्रश्न 17.
स्वेज नहर के प्रत्येक सिरे के समुद्री पत्तनों के नाम बताइए।
उत्तर:
पोर्ट सईद उत्तर में तथा स्वेज पत्तन दक्षिण में स्थित है।

प्रश्न 18.
इण्टरनेट क्या है?
उत्तर:
इण्टरनेट एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है जिसके द्वारा प्रयोगकर्ता माइक्रो कम्प्यूटर और मोडेम के माध्यम से साइबर स्पेस से जुड़ जाता है और इससे सम्बन्धित.विविध निम्नतम जानकारी प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न 19.
कनाडा के प्रमुख रेलमार्ग का नाम बताइए।
उत्तर:
पार कैनेडियन रेलमार्ग। .

प्रश्न 20.
पार महाद्वीपीय रेलमार्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
महाद्वीपों के आर-पार अथवा एक छोर से दूसरे छोर तक बनाए गए रेलमार्गों को ‘पार महाद्वीपीय रेलमार्ग’ कहते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इंग्लैण्ड में स्थित यूरो टनल ग्रुप द्वारा प्रचालित सुरंग मार्ग किन दो शहरों को जोड़ता है
(a) लन्दन-बर्लिन
(b) बर्लिन-पेरिस
(c) पेरिस-लन्दन
(d) बार्सीलोना-बर्लिन।
उत्तर:
(c) पेरिस-लन्दन।

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प्रश्न 2.
कैनेडियन-पैसेफिक रेलमार्ग स्थित है
(a) यूरोप में
(b) दक्षिण अमेरिका में
(c) एशिया में
(d) उत्तरी अमेरिका में।
उत्तर:
(d) उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 3.
विश्व का सबसे लम्बा रेलमार्ग कौन-सा है
(a) ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग
(b) कैनेडियन-पैसेफिक रेलमार्ग
(c) ऑस्ट्रेलियाई अन्तर्महाद्वीपीय रेलमार्ग
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग।

प्रश्न 4.
स्थूल और भारी भरकम सामानों के परिवहन के लिए कौन-सा मार्ग अधिक उपयुक्त रहता है.
(a) जलमार्ग
(b) वायुमार्ग
(c) रेलमार्ग
(d) सड़क मार्ग।
उत्तर:
(a) जलमार्ग।

प्रश्न 5.
संसार का सबसे व्यस्ततम जलमार्ग कौन-सा है
(a) वोल्गा जलमार्ग
(b) मिसीसिपी जलमार्ग
(c) राइन जलमार्ग
(d) सोन जलमार्ग।
उत्तर:
(c) राइन जलमार्ग।

प्रश्न 6.
जर्मनी में महामार्गों को किस नाम से जाना जाता है
(a) मोटर वेज
(b) ऑटोवान
(c) हाइवेज
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) ऑटोवान।

प्रश्न 7.
स्वेज नहर जोड़ती है
(a) अटलाण्टिक महासागर और प्रशान्त महासागर को
(b) भूमध्यसागर और लाल सागर को
(c) भूमध्यसागर और कैस्पियन सागर को
(d) काला सागर और लाल सागर को।
उत्तर:
(b) भूमध्यसागर और लाल सागर को।

प्रश्न 8.
पनामा नहर जोड़ती है
(a) भूमध्यसागर और लाल सागर को
(b) भूमध्यसागर और कैस्पियन सागर को
(c) अटलाण्टिक महासागर और प्रशान्त महासागर को
(d) हिन्द महासागर और प्रशान्त महासागर को।
उत्तर:
(c) अटलाण्टिक महासागर और प्रशान्त महासागर को।

प्रश्न 9.
वायु परिवहन का उपयोग किया जाता है
(a) कीमती वस्तुएँ तथा यात्रियों के लिए
(b) लकड़ी के लिए
(c) कम कीमती तथा भारी सामान के लिए
(d) भारी खनिज के लिए।
उत्तर:
(a) कीमती वस्तुएँ तथा यात्रियों के लिए।

प्रश्न 10.
पाइप लाइन ‘बिग इंच’ का सम्बन्ध किस देश से है
(a) जर्मनी
(b) कनाडा
(c) ब्राजील
(d) संयुक्त राज्य अमेरिका।
उत्तर:
(d) संयुक्त राज्य अमेरिका।

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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi शैक्षिक निबन्ध

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Board UP Board
Textbook SCERT, UP
Class Class 12
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 8
Chapter Name शैक्षिक निबन्ध
Category UP Board Solutions

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1. शिक्षा और छात्र राजनीति (2016)
संकेत विन्दु भूमिका, शिक्षा और राजनैतिक गतिविधियाँ, शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक विचारधारा, उपसंहार।।

भूमिका विद्यार्थी जीवन मानव जीवन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण समय होता है। इस काल में विद्यार्थी जिन विषयों का अध्ययन करता है अथवा जिन नैतिक मूल्यों को वह आत्मसात् करता है वही जीवन मूल्य उसके भविष्य निर्माण का आधार बनता है। विद्यार्थियों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा ग्रहण करना है और उन्हें अपना पूरा ध्यान इसी ओर लगाना चाहिए।

लेकिन राष्ट्रीय परिस्थितियों का ज्ञान और उसके सुधार के उपाय सोचने की योग्यता पैदा करना भी शिक्षा में शामिल होना चाहिए ताकि वे राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सके। शिक्षा ही व्यक्ति का सर्वागीण विकास करती हैं। अतः प्रत्येक विद्यार्थी को पूरे मनोयोग से विद्याध्ययन करना चाहिए, परन्तु आज हमारे विद्यार्थियों का व्यवहार इसके बीच विपरीत ही नज़र आ रहा है।

आज वे अध्ययन की प्रवृत्ति को त्यागकर सक्रिय राजनीति की दलदल में धंसने के लिए तैयार बैठे प्रतीत होते हैं, इसी के परिणामस्वरूप हमारे देश की लगभग सभी शिक्षण संस्थाएँ गन्दी राजनीति का अखाड़ा बनती जा रही हैं।

शिक्षा और राजनैतिक गतिविधियाँ शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को स्वयं अपने अन्दर झाँकना चाहिए और सोचना चाहिए कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रत्नाकार छात्र पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमारा उद्देश्य है?

विद्यार्थियों का मूल उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना होता है, जिसमें उन्हें पूरी लगन के साथ लगे रहना चाहिए, वरना उनके ज्ञानार्जन के कार्य में व्यवधान पड़ जाता है। वे कहते हैं कि एक सजग एवं प्रबुद्ध नागरिक होने के नाते, उन्हें निश्चित ही राजनैतिक नीतियों और गतिविधियों के प्रति जागरूक अवश्य रहना चाहिए, परन्तु सक्रिय राजनीति में प्रवेश करना किसी भी प्रकार उचित नहीं है। यदि छात्र सक्रिय और दलगत राजनीति में फंस जाते हैं, तो शिक्षा के श्रेष्ठ आदर्श को भूलकर वे अपने मार्ग से भटक जाते हैं। सक्रिय राजनीति में प्रवेश से पहले उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करनी चाहिए। जहाँ तक सक्रिय राजनीति की शिक्षा प्राप्त करने का प्रश्न है, जो तिलक, गोखले और गाँधी जैसे अनेक नेताओं के उदाहरण हमारे सामने हैं, जिन्हें ऐसी किसी शिक्षा की आवश्यकता कभी नहीं पड़ी।

गाँधी और जयप्रकाश नारायण द्वारा किए गए छात्रों के आह्वान के सन्दर्भ में कहा जाता है कि जहाँ गाँधी ने स्वतन्त्रता संघर्ष के निर्णायक दौर में देश की सम्पूर्ण शक्ति को लगा देने की दृष्टि से ही ऐसा किया था, वहीं जयप्रकाश नारायण ने भी छात्रों को विषम परिस्थितियों में क्रियाशील बनाने की नीयत से ही उन्हें ललकारा था। वास्तव में उपरोक्त दोनों नेताओं सहित अन्य बड़े-बड़े नेताओं ने देश के विद्यार्थी समुदाय को यही परामर्श दिया है कि वे पूर्ण निष्ठा व लगन के साथ अपनी पढ़ाई करें तथा नई-नई ऊँचाइयों को छुएँ।

शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक विचारधारा शिक्षण संस्थानों में राजनीति के बीज बोने का काम राजनीतिक दल करते हैं। ये राजनीतिज्ञ छात्रों की विशेषताओं से भली-भाँति परिचित होते हैं। वे जानते हैं कि युवा विद्यार्थी प्रायः आदर्शवादी होते हैं। और उन्हें आदर्श से ही प्रेरित किया जा सकता है। उन्हें यह पता होता है कि संगठित छात्र-शक्ति असीम होती है। उन्हें यह भी ज्ञान होता है कि विद्यार्थी वर्ग एक बार किसी को अपना नेता मान लेने के बाद उस पर पूर्ण निष्ठा रखने लगता है। वे इस तथ्य से भी परिचित होते हैं कि सामान्यत: छात्र समुदाय राजनीतिक की टेही चालों तथा उनके पीछे छिपे स्वार्थों को ताड़ पाने की परिपक्व बुद्धि से युक्त नहीं होते।।

इन्हीं बातों को देखते हुए राजनीतिज्ञ अपनी स्वार्थ पूर्ति के उद्देश्य से उनको सक्रिय राजनीति में घसीटने के कुत्सित प्रयास करते हैं। यह स्पष्ट है कि राजनीति में विद्यार्थी स्वयं नहीं जाते, बल्कि स्वार्थी राजनीतिज्ञ ही उन्हें उसमें खींचने का यत्न करते रहते हैं। इसकी पूरी सम्भावना है कि राजनीतिज्ञ छात्र-शक्ति को अपने हित साधन का माध्यम बनाते ही रहेंगे।

उपसंहार अतः कहा जा सकता है कि छात्र शक्ति को सही मार्गदर्शन देते हुए राष्ट्रहित में उसका योगदान सुनिश्चित करना जरूरी है। छात्रसंघों के चुनाव अनेक राज्यों में प्रतिबन्धित हैं। छात्रसंघों से राजनीति और सत्ता को घबराहट होती है। यहां तक कि जो राजनेता छात्रसंघों के माध्यम से राजनीति में आए, वे भी छात्रसंघों के प्रति उदार नहीं हैं। होना यह चाहिए कि छात्रसंघ विद्यार्थियों के सांस्कृतिक, वैचारिक और राजनीतिक रुझानों के विकास में सहायक बनें ताकि छात्र नेतृत्व और उसकी गम्भीरता को समझकर अपने व्यक्तित्व का विकास कर सके। छात्रसंघ और छात्र राजनीति कहीं-न-कहीं इस भूमिका से जुड़ी हुई है, इसलिए देश के राजनेताओं व अन्य प्रशासकों को इनका गला दबाने का अवसर मिला।

2. शिक्षा में आरक्षण (2016)
संकेत बिन्दु भूमिका, शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था, निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण, आरक्षण के नाम पर राजनीति, उपसंहार।।

भूमिका स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में दलितों एवं आदिवासियों की दशा अत्यंत दयनीय थी। इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने काफी सोच-समझकर इनके लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की और वर्ष 1950 में संविधान के लागू होने के साथ ही सुविधाओं से वंचित वर्गों को आरक्षण की सुविधा मिलने लगी, ताकि देश के संसाधनों, अवसरों एवं शासन प्रणाली में समाज के प्रत्येक समूह की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। उस समय हमारा समाज ऊँच-नीच, जाति-पांति, छुआछूत जैसी कुरीतियों से ग्रसित था।

हमारे पूर्व प्रधानमन्त्री श्री लालबहादुर शास्त्री ने एक बार कहा भी था-“यदि कोई एक व्यक्ति भी ऐसा रह गया जिसे किसी रूप में अछूत कहा जाए, तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा।” वास्तव में, आरक्षण वह माध्यम है, जिसके द्वारा जाति, धर्म, लिंग एवं क्षेत्र के आधार पर समाज में भेदभाव से प्रभावित लोगों को आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होता है, किन्तु वर्तमान समय में देश में प्रभावी आरक्षण नीति को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि आज यह राजनेताओं के लिए सिर्फ चोट बटोरने की नीति बनकर रह गई है। वंचित वर्ग आरक्षण के लाभ से आज भी अछूता है।

शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था शिक्षा आज एवं आने वाले भविष्य का सबसे महत्त्वपूर्ण विषय है। प्राचीन काल में शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले भेदभाव को देखते हुए शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था की गई। प्राचीन समय में सभी को शिक्षा के समान अवसर प्राप्त न होने के कारण जाति, लिग, जन्मस्थान, धर्म के आधार पर शिक्षा के क्षेत्र में भी भेदभाव होता था। देश की उन्नति के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने की बहुत अधिक आवश्यकता थी, जिसके लिए सभी को समान शिक्षा के अधिकार देने की ज़रूरत थी, इसलिए संविधान में इसके लिए प्रावधान किया गया।

भारतीय संविधान में वंचित वर्गों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान का वर्णन इस प्रकार है-अनुच्छेद-15 (समानता का मौलिक अधिकार) द्वारा राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी एक के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा, लेकिन अनुच्छेद-15 (4) के अनुसार इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खण्ड (2) की कोई बात राज्य को शैक्षिक अथवा सामाजिक दृष्टि से पिछड़े नागरिकों के किन्हीं वर्गों की अथवा अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था बनाने से नहीं रोक सकती अर्थात् राज्य चाहे तो इनके उत्थान के लिए आरक्षण या शुल्क में कमी अथवा अन्य उपबन्ध कर सकती है। कोई भी व्यक्ति उसकी विधि मान्यता पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता कि यह वर्ग-विभेद उत्पन्न करते हैं।

स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय से ही भारत में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में आरक्षण लागू हैं। मण्डल आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के बाद वर्ष 1993 से ही अन्य पिछड़े वर्गों के लिए नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था कर दी गई। वर्ष 2006 के बाद से केन्द्र सरकार के शिक्षण संस्थानों में भी अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू हो गया। इस प्रकार आज समाज के अत्यधिक बड़े तबके को आरक्षण की सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है, लेकिन इस आरक्षण नीति का कोई उचित परिणाम नहीं निकला।

अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए आरक्षण लागू होने के लगभग छः दशक बीत चुके हैं और मण्डल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के भी लगभग दो दशक पूरे हो चुके हैं, लेकिन क्या सम्बन्धित पक्षों को उसका पर्याप्त लाभ मिला? सत्ता एवं सरकार अपने निहित स्वार्थों के कारण आरक्षण की नीति की समीक्षा नहीं करती।

अन्य पिछड़े वर्गों के लिए मौजूद आरक्षण की समीक्षा तो सम्भव भी नहीं है, क्योंकि इससे सम्बद्ध वास्तविक आँकड़ों का पता ही नहीं है, चूंकि आँकड़े नहीं हैं, इसलिए योजनाओं का कोई लक्ष्य भी नहीं हैं। आंकड़ों के अभाव में इस देश के संसाधनों, अवसरों और राजकाज में किस जाति और जाति समूह की कितनी हिस्सेदारी है, इसका तुलनात्मक अध्ययन ही सम्भव नहीं है। सैम्पल सर्वे (नमूना सर्वेक्षण) के आँकड़े इसमें कुछ मदद कर सकते हैं, लेकिन इतने बड़े देश में चार-पाँच हज़ार के नमूना सर्वेक्षण से ठोस नतीजे नहीं निकाले जा सकते।

निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण सरकार ने 104वें संविधान संशोधन के द्वारा देश में सरकारी विद्यालयों के साथ-साथ गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों में भी अनुसूचित जातियों/जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ प्रदान कर दिया है। सरकार के इस निर्णय का समर्थन और विरोध दोनों किए गए हैं। वास्तव में, निजी क्षेत्रों में आरक्षण लागू होना अत्यधिक कठिन है, क्योंकि निजी क्षेत्र लाभ से समझौता नहीं कर सकते, यदि गुणवत्ता प्रभावित होने से ऐसा होता हो। ‘तुलियन सिविजियन’ ने कहा था-“जब आप पर खोने के लिए कुछ भी न होगा, तब आप अद्भुत आविष्कार करेंगे, आप बिना डर या आरक्षण के बड़ा जोखिम लेने हेतु तैयार रहेंगे।”

आरक्षण के नाम पर राजनीति पिछले कई वर्षों से आरक्षण के नाम पर राजनीति हो रही है, आए दिन कोई-न-कोई वर्ग अपने लिए आरक्षण की माँग कर बैठता है एवं इसके लिए आन्दोलन करने पर उतारू हो जाता है। इस तरह, देश में अस्थिरता एवं अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

आर्थिक एवं सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर निम्न तबके के लोगों के उत्थान के लिए उन्हें सेवा एवं शिक्षा में आरक्षण प्रदान करना उचित है, लेकिन जाति एवं धर्म के आधार पर तो आरक्षण को कतई भी उचित नहीं कहा जा सकता, क्योंकि एक ओर तो इससे समाज में विभेद उत्पन्न होता है, तो दूसरी ओर आरक्षण पाकर व्यक्ति कर्म क्षेत्र से भी विचलित होने लगता है।

कार्लाइल के अनुसार, “तुम किसी समुदाय को निष्क्रिय बनाना चाहते हो, तो उसे अतिरिक्त सुविधाएँ दे दो, सुविधाओं के व्यामोह में समुदाय कर्मपथ से विरत हो जाएगा।” ऊँची डाली को छूने के लिए हमें ऊपर उठना चाहिए न कि डाली को ही झुकाना चाहिए। उसी तरह, कमजोर को योग्य बनाकर उसे कार्य सौंपे न कि आरक्षण से कार्य को ही झुका दें |

उपसंहार वर्ष 2014 के प्रारम्भ में कांग्रेस पार्टी के महासचिव श्री जनार्दन द्विवेदी ने कहा था कि देश में आरक्षण जाति आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक आधार पर किया जाना चाहिए।

वास्तव में, द्विवेदी जी की कही बात पर गम्भीरतापूर्वक विचारने का समय आ गया है, क्योंकि आज प्रश्न गरीबी का है और गरीबी की कोई जाति या धर्म नहीं होता। आज समाज के हर वर्ग के उत्थान हेतु आरक्षण के अलावा अन्य विकल्प भी खोजा जाना चाहिए, ताकि समाज में सबके साथ न्याय हो सके और सभी वर्गों के लोग एक साथ उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सकें।

3. छात्र जीवन में अनुशासन का महत्त्व (2014, 13, 12)
अन्य शीर्षक विद्यार्थी और अनुशासन (2011), छात्रों में अनुशासन की समस्या।।
संकेत बिन्दु अनुशासन का तात्पर्य, अनुशासनहीनता के दुष्परिणाम, घर- समाज से अनुशासन की शिक्षा, अनुशासन सफलता की कुंजी, उपसंहार।

अनुशासन का तात्पर्य अनुशासन शब्द का अर्थ है-‘शासन के पीछे चलना’ अर्थात् सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक सभी प्रकार के आदेशों और नियमों का पालन करना। ‘शासन’ शब्द में दण्ड की भावना छिपी हुई है, क्योंकि नियमों का निर्माण लोक कल्याण के लिए होता है। चाहे वे किसी भी प्रकार के नियम हों, उनका पालन करना उन सब व्यक्तियों के लिए अनिवार्य होता है। जिनके लिए वे बनाए गए हैं। पालन न करने पर दण्ड का विधान होता है, ताकि कोई भी मनमाने ढंग से नियम का उल्लंघन न कर सके।

अनुशासनहीनता के दुष्परिणाम बाल्यकाल में जिन बच्चों पर उनके माता-पिता लाड़ प्यार के कारण नियन्त्रण नहीं रख पाते, वे आगे चलकर गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। अनुशासन के अभाव में कई प्रकार की बुराइयाँ समाज में अपनी जड़े जमा लेती हैं। नित्य-प्रति होने वाले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, परीक्षा में नकल, शिक्षकों से बदसलूकी अनुशासनहीनता के ही उदाहरण हैं, इसका कुपरिणाम उन्हें बाद में जीवन की असफलताओं के रूप में भुगतना पड़ता है, किन्तु जब तक वे समझते हैं, तब तक देर हो चुकी होती है। अत: विद्यार्थी जीवन में अनुशासित रहना नितान्त आवश्यक है। यदि परिवार के मुखिया का शासन सही नहीं है तो परिवार में अव्यवस्था व्याप्त रहेगी ही। यदि किसी स्थान का प्रशासन सही नहीं है, तो वहाँ अपराध का ग्राफ स्वाभाविक रूप से ऊपर रहेगा। यदि राजनेता कानून का पालन नहीं करेंगे तो जनता से इसके पालन की उम्मीद नहीं की जा सकती।

यदि खेल के मैदान में कैप्टन स्वयं अनुशासित नहीं रहेगा, तो टीम के अन्य सदस्यों से अनुशासन की आशा करना व्यर्थ है और यदि टीम अनुशासित नहीं है। तो उसकी पराजय से उसे कोई नहीं बचा सकता।

इसी तरह, यदि देश की सीमा पर तैनात सैनिकों का कैप्टन ही अनुशासित न हो तो उसकी सैन्य टुकड़ी कभी अनुशासित नहीं रह सकती। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शब्दों में—”अनुशासन के बिना न तो परिवार चल सकता है और न संस्था या राष्ट्र ही।

घर-समाज से अनुशासन की शिक्षा एक बच्चे का जीवन उसके परिवार से प्रारम्भ होता है। यदि परिवार के सदस्य गलत आचरण करते हैं, तो बच्चा भी उनका अनुसरण करेगा। परिवार के बाद बच्चा अपने समाज एवं स्कूल से सीखता है। यदि उसके साथियों का आचरण खराब होगा, तो उससे उसके भी प्रभावित होने की पूरी सम्भावना बनी रहेगी। यदि शिक्षक का आचरण गलत है तो भला बच्चे कैसे सही हो सकते हैं? इसलिए वही व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासित रह सकता है, जिसे बाल्यकाल में ही अनुशासन की शिक्षा दी गई हो।

अनुशासन सफलता की कुंजी किसी मनुष्य की व्यक्तिगत सफलता में भी उसके विद्यार्थी जीवन की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। जो विद्यार्थी अपना प्रत्येक कार्य नियम एवं अनुशासन का पालन करते हुए सम्पन्न करते हैं, वे अपने अन्य साथियों से न केवल श्रेष्ठ माने जाते हैं, बल्कि सभी के प्रिय भी बन जाते हैं। महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानन्द, सुभाषचन्द्र बोस, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, दयानन्द सरस्वती जैसे महापुरुषों का जीवन अनुशासन के कारण ही समाज के लिए उपयोगी और सबके लिए प्रेरणा स्रोत बन सका। अतः अनुशासन सफलता की कुंजी हैं।

उपसंहार रॉय स्मिथ ने ठीक ही कहा है-“अनुशासन वह निर्मल अग्नि है, जिसमें प्रतिभा क्षमता में रूपान्तरित हो जाती हैं। अतः हम सभी विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन को महत्त्व देते हुए अपने कर्तव्य पथ पर ईमानदारीपूर्वक चलने और अपने देश की सेवा करने का संकल्प लेना होगा, तभी हम सच्चे | अर्थों में अपनी मातृभूमि और भारतमाता का कर्ज चुका पाएँगे।

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UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives (अवकलज के अनुप्रयोग) are part of UP Board Solutions for Class 12 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives (अवकलज के अनुप्रयोग)

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Maths
Chapter Chapter 6
Chapter Name Application of Derivatives
Exercise Ex 6.1, Ex 6.2, Ex 6.3, Ex 6.4, Ex 6.5
Number of Questions Solved 109
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives

प्रश्नावली 6.1

प्रश्न 1.
वृत्त के क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर इसकी त्रिज्या r के सापेक्ष ज्ञात कीजिए, जबकि
(a) r = 3 सेमी है
(b) r = 4 सेमी है।
हल-
(a) माना वृत्त का क्षेत्रफल A है, तब
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 1
अत: क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर 6π सेमी²/सेकण्ड है।
(b) उपरोक्त की भाँति स्वयं हल कीजिए।[उत्तर : 8π सेमी²/से]

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प्रश्न 2.
एक घन का आयतन 9 सेमी3/से की दर से बढ़ रहा है। यदि इसकी कोर की लम्बाई 10 सेमी है तो इसके पृष्ठ का क्षेत्रफल किस दर से बढ़ रहा है?
हल-
माना घन की कोर = x सेमी, घन का आयतन = V तथा पृष्ठ क्षेत्रफल = S
तब V = x3 तथा S = 6x2. जहाँ x समय t को फलन है।
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 2
अतः पृष्ठ क्षेत्रफल 3.6 सेमी²/से की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 3.
एक वृत्त की त्रिज्या समान रूप से 3 सेमी/से की दर से बढ़ रही है। ज्ञात कीजिए की वृत्त का क्षेत्रफल किस दर से बढ़ रहा है जब त्रिज्या 10 सेमी है?
हल-
मानी वृत्त की त्रिज्या r सेमी है, तब वृत्त का क्षेत्रफल A = πr² सेमी²
प्रश्नानुसार, [latex ]\frac { dr }{ dt }=3[/latex] सेमी/से …(i)
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 3
अत: क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर 60π सेमी²/सेकण्ड है।

प्रश्न 4.
एक परिवर्तनशील घन का किनारा 3 cm/s की दर से बढ़ रहा है घन का आयतन किस दर से बढ़ रहा है जबकि किनारा 10 cm लम्बा है?
हल-
माना घन का आयतन = V तथा भुजा = a है, तब V = a3
ज्ञात है
[latex ]\frac { da }{ dt }=3[/latex] सेमी/से, a = 10 सेमी
∴ समय के सापेक्ष आयतन के परिवर्तन की दर
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 4
अतः जब घन का किनारा 10 cm लम्बा हो तब घन का आयतन 900 cm2/s की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 5.
एक स्थिर झील में एक पत्थर डाला जाता है और तरंगें वृत्तों में 5 सेमी/से की गति से चलती है। जब वृत्ताकार तरंग की त्रिज्या 8 सेमी है तो उस क्षण घिरा हुआ क्षेत्रफल किस दर से बढ़
हल-
दिया है- [latex ]\frac { dr }{ dt }=5[/latex] सेमी/से, r = 8 सेमी
माना तरंगों से बने वृत्त का क्षेत्रफल A सेमी² है।
तब A = πr²
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 5
अतः जब तरंग की त्रिज्या 8 सेमी हो तब तरंगों द्वारा घिरा हुआ क्षेत्रफल 80 π सेमी²/से की दर से बढ़ रहा है।

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
एक वृत्त की त्रिज्या 0.7 सेमी/से की दर से बढ़ रही है। इसकी परिधि की वृद्धि की दर क्या है। जब r = 4.9 सेमी है?
हल-
माना वृत्त की त्रिज्या r सेमी है, तब परिधि C = 2πr
प्रश्नानुसार,
UP Board Solutions for Class 12 Maths Chapter 6 Application of Derivatives image 6
अत: वृत्त की परिधि 1.4π सेमी/से की दर से बढ़ रही है।

प्रश्न 7.
एक आयत की लम्बाई x, 5 सेमी/मिनट की दर से घट रही है और चौड़ाई y, 4 सेमी/मिनट की दर से बढ़ रही है। जब x = 8 सेमी और y = 6 सेमी है। तब आयत के
(a) परिमाप
(b) क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए।
हल-
ज्ञात है- [latex ]\frac { dx }{ dt }=5[/latex] सेमी/मिनट
तथा [latex ]\frac { dy }{ dt }=4[/latex] सेमी/मिनट
माना आयत का क्षेत्रफल = A सेमी², परिमाप = p सेमी
लम्बाई = x सेमी, चौड़ाई = y सेमी
(a) परिमाप p = 2(x + y)
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अत: आयत का क्षेत्रफल 2 सेमी2/सेमी की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 8.
एक गुब्बारा जो सदैव गोलाकर रहता है, एक पम्प द्वारा 900 सेमी3/सेकण्ड की दर से फुलाया जाता है। गुब्बारे की त्रिज्या के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए जब त्रिज्या 15 सेमी है।
हल-
माना गुब्बारे की त्रिज्या = r तथा आयतन = V
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प्रश्न 9.
एक गुब्बारा जो सदैव गोलाकार रहता है कि त्रिज्या परिवर्तनशील है। त्रिज्या के सापेक्ष आयतन के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए जब त्रिज्या 10 सेमी है।
हल-
माना गुब्बारे का आयतन = V तथा त्रिज्या = r
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अतः जब त्रिज्या 10 सेमी हो तब गुब्बारे का आयतन 400 π सेमी3/सेमी की दर से बढ़ता है।

प्रश्न 10.
एक 5 मी लम्बी सीढी दीवार के सहारे झुकी है। सीढ़ी का नीचे का सिरा जमीन के अनुदिश दीवार से दूर 2.0 मी/से की दर से खींचा जाता है। दीवार पर इसकी ऊँचाई किस दर से घट रही है जबकि सीढ़ी को नीचे का सिरा दीवार से 4 मी दूर है?
हल-
माना दीवार OC है तथा किसी क्षण सीढ़ी AB की स्थिति इस प्रकार है कि OA = x और OB = y
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अत: दीवार पर सीढ़ी की ऊँचाई 8/3 मी/से की दर से घट रही है।

प्रश्न 11.
एक कण वक्र 6y = x3 + 2 के अनुगत गति कर रहा है। वक्र पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जबकि x निर्देशांक की तुलना में y निर्देशांक 8 गुना तीव्रता से बदल रहा है।
हल-
दिया है-
6y = x3 + 2 और [latex ]\frac { dy }{ dt } =8\frac { dx }{ dt } [/latex]
t के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 12.
हवा के बुलबुले की त्रिज्या, [latex ]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] सेमी/सेकण्ड की दर से बढ़ रही है। बुलबुले का आयतन किस दर से बढ़ रहा है जबकि त्रिज्या 1 सेमी है?
हल-
माना बुलबुले की त्रिज्या = r तथा बुलबुले का आयत
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अत: बुलबुले का आयतन 2π सेमी3/से की दर से बढ़ रहा है।

प्रश्न 13.
एक गुब्बारा जो सदैव गोलाकार रहता है, का परिवर्तनशील व्यास [latex ]\frac { 3 }{ 2 }(2x+1)[/latex] है। x के सापेक्ष आयतन के परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए।
हल-
प्रश्नानुसार गोलाकार गुब्बारे का व्यास = [latex ]\frac { 3 }{ 2 }(2x+1)[/latex]
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प्रश्न 14.
एक पाइप से रेत 12 सेमी3/से की दर से गिर रही है। गिरती रेत जमीन पर एक ऐसा शंकु बनाती है जिसकी ऊँचाई सदैव आधार की त्रिज्या का छठा भाग है।रेत से बने शंकु की ऊँचाई किस दर से बढ़ रही है जबकि ऊँचाई 4 सेमी है?
हल-
माना किसी क्षण t है पर शंकु की त्रिज्या r, ऊँचाई h तथा आयतन V है।
[latex ]h=\frac { r }{ 6 }(2x+1)[/latex]
⇒ r = 6h
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प्रश्न 15.
एक वस्तु की x इकाइयों के उत्पादन की कुल लागत C (x) Rs में
C(x) = 0.007x3 – 0.003x2 + 15x + 4000
से प्राप्त होती है। सीमान्त लागत ज्ञात कीजिए जबकि 17 इकाइयों का उत्पादन किया जाता है।
हल-
प्रश्नानुसार, C(x) = 0.007x3 – 0.003x2 + 15x + 4000
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= 6.069 – 0.102 + 15
= 20.967
अतः 17 इकाइयों के उत्पादन की सीमान्त लागत Rs 20.967 है।

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प्रश्न 16.
किसी उत्पाद की x इकाइयों के विक्रय से प्राप्त कुल आय R(x) Rs में R(x) = 13x2 + 26x + 15 से प्राप्त होती है। सीमान्त आय ज्ञात कीजिए जब x = 7 है।
हल-
प्रश्नानुसार, R(x) = 13x2 + 26x + 15
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(MR)x=7 = 26 x 7 + 26
= 182 + 26
= 208
अत: अभीष्ट सीमान्त आय Rs 208 है।

प्रश्न 17.
एक वृत्त की त्रिज्या r = 6 सेमी पर r के सापेक्ष क्षेत्रफल में परिवर्तन की दर है :
(a) 10 π
(b) 12 π
(c) 8 π
(d) 11 π
हल-
मानी वृत्त का क्षेत्रफल = A तथा त्रिज्या = r
क्षेत्रफल A = πr²
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अत: विकल्प (b) सही है।

प्रश्न 18.
एक उत्पाद की x इकाइयों के विक्रय से प्राप्त कुल आय रुपयों में R(x) = 3x² + 36x + 5 से प्रदत्त है। जब x = 15 है तो सीमान्ते आये है :
(a) 116
(b) 96
(c) 90
(d) 126
हल-
दिया है- R(x) = 3x² + 36x +5
सीमान्त ।
सीमान्त आय =
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अब, x = 15, सीमान्त आय = 6 × 21 = Rs 126
अत: विकल्प (d) सत्य है।

प्रश्नावली 6.2

प्रश्न 1.
दिखाइए कि दिया गया फलन f, f(x) = x3 – 3x² + 4x, x ∈ R, R पर निरन्तर वृद्धिमान फलन है।
हल-
दिया गया फलन
f(x) = x3 – 3x² + 4x
f ‘(x) = 3x² – 6x +4
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= 3(x – 1)² + 1 > 0, ∀ x∈R
∵ f ‘(x) > 0, ∀ x∈R
∴ f(x), R पर निरन्तर वृद्धिमान फलन है।

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प्रश्न 2.
सिद्ध कीजिए कि R पर f(x) = 3x + 17 निरन्तर वृद्धिमान फलन है।
हल-
दिया गया फलन f(x) = 3x + 17
f ‘(x) = 3 > 0, ∀ x∈R
f ‘(x) > 0, ∀ x∈R
∴ f(x), R पर निरन्तर वृद्धिमान फलन है।

प्रश्न 3.
सिद्ध कीजिए कि f(x) = sin x द्वारा दिया गया फलन
(a) (0, π/2) में निरन्तर वृद्धिमान है।
(b) (π/2, π) में निरन्तर ह्रासमान है।
(c) (0, π) में न तो वृद्धिमान है और न ह्रासमान।
हल-
(a) f(x) = sin x
⇒ f ‘(x) = cos x
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अन्तराल (0, π/2) में निरन्तर वृद्धिमान तथा अन्तराल (π/2, π) में निरन्तर ह्रासमान है।
∴ फलन अन्तराल (0, π) में न तो वृद्धिमान है और न ह्रासमान,

प्रश्न 4.
अन्तराल ज्ञात कीजिए जिनमें f(x) = 2x² – 3x द्वारा दिया गया फलन
(a) निरन्तर वृद्धिमान है,
(b) निरन्तर ह्रासमान है।
हल-
(a) दिया गया फलन f(x) = 2x² – 3x
f ‘(x) = 4x – 3 > 0, ∀ x > [latex ]\frac { 3 }{ 4 }[/latex]
∴ f(x), अन्तराल (3/4, ∞) पर निरन्तर वृद्धिमान है।

(b) पुनः f ‘(3) = 4x – 3< 0, ∀ x < [latex ]\frac { 3 }{ 4 }[/latex]
∴ f(x), अन्तराल (-∞,3/4) पर निरन्तर ह्रासमान है।

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प्रश्न 5.
अन्तराल ज्ञात कीजिए जिनमें f(x) = 2x3 – 3x2 – 36x + 7 से दिया फलन f (a) निरन्तर वृद्धिमान है, (b) निरन्तर ह्रासमान है।
हल-
(a) दिया गया फलन f(x) = 2x3 – 3x2 – 36x +7
f ‘(x) = 6x2 – 6x – 36 = 6(x2 – x – 6).
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प्रश्न 6.
अन्तराल ज्ञात कीजिए जिनमें निम्नलिखित फलन निरन्तर वर्धमान अथवा हासमान है
(a) f(x) = x² + 2x + 5
(b) f (x) = 10 – 6x – 2x²
(c) f (x) = – 2x3 – 9x2 – 12x + 1
(d) f(x) = 6 – 9x – x²
(e) f(x) = (x + 1)3 (x – 3)3
हल-
(a) ज्ञात है- f (x) = x2 + 2x + 5
f ‘ (x) = 2x + 2 = 2 (x + 1)
f ‘ (x) = 0 ⇒ 2 (x + 1) ⇒ x = – 1
x = – 1 संख्या रेखा को दो भागों में बांटता है। यह भाग अन्तराल (-∞ , -1) तथा (-1, ∞ ) है।
(- ∞ , – 1) में f ‘ (x) = – ऋणात्मक
अत: अन्तराल (-∞ , -1) में फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
(-1, ∞ ) में f ‘ (x) = + धनात्मक
अतः अन्तराल (-1, ∞ ) फलन f निरन्तर वर्धमान है।
(b) ज्ञात है. f (x) = 10 – 6x – 2x²
f ‘ (x) = – 6 – 4x = – 2 (3 + 2x)
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प्रश्न 7.
सिद्ध कीजिए कि
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अपने सम्पूर्ण प्रान्त में एक वृद्धिमान फलन है।
हल-
दिया गया फलन
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प्रश्न 8.
x के उन मानों को ज्ञात कीजिए जिनके लिए y = [x(x – 2)]² एक वर्धमान फलन है।
हल-
ज्ञात है- y = [x (x – 2)]² = x² (x + 4 – 4x)
= x4 – 4x3 + 4x2
x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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∴ x = 0, x = 1, x = 2 से वास्तविक संख्या रेखा के चार भाग अन्तराल (-∞, 0), (0, 1), (1, 2), (2, 2) बनते हैं।
अन्तराल (- ∞, 0) में f ‘ (x) = (-) (-) (-) = – ve (ऋणात्मक)
अतः फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
अन्तराल (0, 1) में f ‘ (x) = (+) (-) (-) = + ve (धनात्मक)
अतः फलन f निरन्तर वर्धमान है।
अन्तराल (1, 2) में f ‘ (x) = (+) (+) (-) = – ve (ऋणात्मक)
अतः फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
अन्तराल (2, ∞) में f ‘ (x) = (+) (+) (+) = +ve (धनात्मक)
अतः फलन f निरन्तर वर्धमान है।
इस प्रकार (0, 1) ∪ (2, ∞) में फलन f वर्धमान है तथा (-∞, 0) ∪ (1, 2) में फलन ह्रासमान है।

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प्रश्न 9.
सिद्ध कीजिए कि [0, π/2] में
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θ का एक वृद्धिमान फलन है।
हल-
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प्रश्न 10.
सिद्ध कीजिए कि लघुगणकीय फलन (0,∞) में निरन्तर वर्धमान फलन है।
हल-
ज्ञात है– f (x) = log x, x > 0
f ‘(x) = [latex ]\frac { 1 }{ x }[/latex] = धनात्मक, x > 0 के लिए
अतः लघुगणकीय फलन अन्तराल (0, ∞) के लिए निरन्तर वर्धमान है। इति सिद्धम्

प्रश्न 11.
सिद्ध कीजिए कि (-1,1) में f (x) = x² – x + 1 से प्रदत्त फलन न तो वर्धमान है। और न ही ह्रासमान है।
हल-
दिया है | f (x) = x² – x + 1
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इस प्रकार (-1, 1) में f ‘(x) का चिह्न एक नहीं है।
अतः इस अन्तराल में यह फलन न तो वर्धमान है और न ही ह्रासमान है। इति सिद्धम्

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में कौन से फलन (0,[latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex]) में निरन्तर ह्रासमान है?
(A) cos x
(B) cos 2x
(C) cos 3x
(D) tan x
हल-
(A) माना f (x) = cos x, ∴ f ‘ (x) = – sin x
अन्तराल (0, π/ 2) में, sin x = + धनात्मक ⇒f ‘ (x) = – ऋणात्मक
अतः फलन f निरन्तर ह्रासमान है।
(B) माना f (x) = cos 2x
∴ f ‘(x) = – 2 sin 2x
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित अन्तरालों में से किस अन्तराल में f (x) = x100 + sin x – 1 द्वारा प्रदत्त फलन f निरन्तर ह्रासमान है ?
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हल-
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प्रश्न 14.
a का वह न्यूनतम मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए अन्तराल [1, 2] में f(x) = x² + ax + 1 से दिया गया फलन निरन्तर वृद्धिमान है।
हल-
दिया गया फलन
f(x) = x² + ax + 1
f ‘(x) = 2x + a
अन्तराल [1, 2] में f ‘(x) का न्यूनतम मान f ‘(1) = 2 + a होगा
∵ f(x) अन्तराल [1, 2] में निरन्तर वृद्धिमान है ∴ f ‘(x) ≥ 0
∴ 2 + a ≥ 0
⇒ a≥ -2
अत: a का न्यूनतम मान -2 है।

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प्रश्न 15
माना[-1, 1] से असंयुक्त एक अन्तराल I हो तो सिद्ध कीजिए कि I में f(x) = [latex]x+\frac { 1 }{ x }[/latex] से दिया गया फलन f निरन्तर वृद्धिमान है।
हल-
दिया गया फलन f(x) = [latex]x+\frac { 1 }{ x }[/latex]
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∴ (x – 1)(x + 1) > 0
∴ f ‘(x) > 0
⇒ f(x) निरन्तर वृद्धिमान है जब x∈ (1, ∞)
अतः f(x), I पर निरन्तर वृद्धिमान है।

प्रश्न 16.
सिद्ध कीजिए कि फलन f(x) = log sin x,(0,[latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex]) में निरन्तर वर्धमान और ([latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex],π) में निरन्तर ह्रासमान है।
हल-
दिया है- f(x) = log sin x
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प्रश्न 17.
सिद्ध कीजिए कि फलन f(x) = log | cos x|; (0, π/2) निरन्तर ह्रासमान और (π/2, π) में निरन्तर वृद्धिमान है।
हल-
दिया गया फलन f(x) = log cos x
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प्रश्न 18.
सिद्ध कीजिए कि R में दिया गया फलन f(x) = x3 – 3x2 + 3x – 100 वर्धमान है।
हल-
ज्ञात है- f (x) = x3 – 3x2 + 3x – 100
∴f ‘(x) = 3x2 – 6x + 3 = 3 (x2 – 2x + 1) = 3(x – 1)2
∀x∈ R, f ’(x) = धनात्मक
अतः फलन f वर्धमान है। इति सिद्धम्

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प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से किस अन्तराल में y = x2e-x वर्धमान है?
(a) (-∞, ∞)
(b) (-2, 0)
(c) (2, ∞)
(d) (0, 2)
हल-
दिया है- f (x) = x2e-x
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प्रश्नावली 6.3

प्रश्न 1.
वक्र y = 3x4 – 4x के x = 4पर स्पर्श रेखा की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 3x4 -4x
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= 4[3 x 64 – 1]
= 4[192 – 1]
= 4 x 191
= 764
∴स्पर्श रेखा की प्रवणता = 764

प्रश्न 2.
वक्र [latex ]y=\frac { x-1 }{ x-2 }[/latex],x ≠ 2 के x = 10 पर स्पर्श रेखा की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\frac { x-1 }{ x-2 }[/latex],x ≠ 2
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर
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प्रश्न 3.
वक्र y = x3 – x + 1 की स्पर्श रेखा की प्रवणता उस बिन्दु पर ज्ञात कीजिए जिसका x-निर्देशांक 2 है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = x3 – x + 1
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प्रश्न 4.
वक्र y = x3 – 3x + 2 की स्पर्श रेखा की प्रवणता उस बिन्दु पर ज्ञात कीजिए जिसका x – निर्देशांक 3 है।
हल-
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प्रश्न 5.
वक्र x = a cos3θ, y= a sin3θ के θ = [latex]\frac { \pi }{ 4 } [/latex] पर अभिलम्ब की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र को समीकरण x = a cos3θ तथा y = a sin3θ
दोनों पक्षों का θ के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 6.
वक्र x = 1 – a sin θ, y = b cos² θ के θ = [latex]\frac { \pi }{ 2 } [/latex] पर अभिलम्ब की प्रवणता ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण x = 1 – a sin θ तथा y = b cos² θ
दोनों पक्षों का θ के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 7.
वक्र y = x3 – 3x– 9x + 7 पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखायें x-अक्ष के समान्तर हैं।
हल-
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प्रश्न 8.
वक्र y = (x – 2)² पर एक बिन्दु ज्ञात कीजिए जिस पर स्पर्श रेखा बिन्दुओं (2,0) और (4,4) को मिलाने वाली रेखा के समान्तर है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = (x – 2)²
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 9.
वक्र y = x3 – 11x + 5 पर उस बिन्दु को ज्ञात कीजिए जिस पर स्पर्श रेखा y = x – 11 है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = x3 – 11x + 5
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प्रश्न 10.
प्रवणता -1 वाली सभी रेखाओं का समीकरण ज्ञात कीजिए जो वक़ [latex ]y=\frac { 1 }{ x-1 }[/latex],x ≠ -1 को स्पर्श करती है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\frac { 1 }{ x-1 }[/latex]
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प्रश्न 11.
प्रवणता 2 वाली सभी रेखाओं का समीकरण ज्ञात कीजिए जो वक्र [latex ]y=\frac { 1 }{ x-3 }[/latex],x ≠ 3 को स्पर्श करती है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\frac { 1 }{ x-3 }[/latex]
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 12.
प्रवणता 0 वाली सभी रेखाओं का समीकरण ज्ञात कीजिए जो वक्र
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को स्पर्श करती है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण
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दोनों पक्षों को x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 13.
वक्र
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पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखाएँ
(i) x-अक्ष के समान्तर हैं,
(ii) y-अक्ष के समान्तर हैं।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण
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दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 14.
दिए वक्रों पर निर्दिष्ट बिन्दुओं पर स्पर्श रेखा और अभिलम्ब के समीकरण ज्ञात कीजिए
(i) y = x4 – 6x3 + 13x2 – 10x + 5 के (0, 5) पर
(ii) y = x4 – 6x3 + 13x2 – 10x + 5 के (1, 3) पर
(iii) y = x3 के (1, 1) पर .
(iv) y = x² के (0, 0) पर
(v) x = cost, y = sin t के [latex]t=\frac { \pi }{ 4 } [/latex] पर
हल-
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प्रश्न 15.
वक्र y = x² – 2x + 7 की स्पर्श रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए, जो
(a) रेखा 2x – y + 9 = 0 के समान्तर है।
(b) रेखा 5y – 15x = 13 पर लम्ब है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = x² – 2x + 7
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 16.
सिद्ध कीजिए कि वक्र y = 7x3 + 11 के उन बिन्दुओं पर स्पर्श रेखाएँ समान्तर हैं जहाँ x = 2 तथा x = – 2 है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 7x3 + 11
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dy }{ dx }[/latex] = 21 x²
जब x = 2, तब स्पर्श रेखा की प्रवणता = 21 x 2² = 21 x 4 = 84
जब x = -2, तब स्पर्श रेखा की प्रवणता = 21 x (-2)² = 84
x = 2 तथा x = -2 पर स्पर्श रेखा की प्रवणता समान हैं।
अतः इन बिन्दुओं पर स्पर्श रेखाएँ समान्तर हैं। इति सिद्धम्

प्रश्न 17.
वक्र y = x3 पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखा की प्रवणता बिन्दु के y-निर्देशांक के बराबर है।
हल-
दिया है, वक्र की समीकरण y = x3
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dy }{ dx }[/latex] = 3x²
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प्रश्न 18.
वक्र y = 4x3 – 2x5, पर उन बिन्दुओं को ज्ञात कीजिए जिन पर स्पर्श रेखाएँ मूलबिन्दु से होकर जाती हैं।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 4x3 – 2x5
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प्रश्न 19.
वक्र x² + y2 – 2x – 3 = 0 के उन बिन्दुओं पर स्पर्श रेखाओं के समीकरण ज्ञात कीजिए जहाँ पर वे x-अक्ष के समान्तर हैं।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण x² + y² – 2x – 3 = 0
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 20
वक्र ay2 = x3 के बिन्दु (am2, um3)पर अभिलम्ब का समीकरण ज्ञात कीजिए और m का मान बताइए जिसके लिए अभिलम्ब बिन्दु (a, 0) से होकर जाता है।
हल-
वक्र ay2 = x3 ….(1)
समीकरण (1) का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 21
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हल-
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प्रश्न 22.
परवलय y² = 4ax के बिन्दु (at², 2at) पर स्पर्श रेखा और अभिलम्ब के समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y² = 4ax
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 23
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हल-
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प्रश्न 24.
अतिपरवलय [latex ]\frac { { x }^{ 2 } }{ { a }^{ 2 } } -\frac { { y }^{ 2 } }{ { b }^{ 2 } } =1[/latex] के बिन्दु (x0, y0) पर स्पर्श रेखा तथा अभिलम्ब के समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]\frac { { x }^{ 2 } }{ { a }^{ 2 } } -\frac { { y }^{ 2 } }{ { b }^{ 2 } } =1[/latex]
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 25.
वक्र [latex ]y=\sqrt { 3x-2 } [/latex] की उन स्पर्श रेखाओं के समीकरण ज्ञात कीजिए जो रेखा 4x – 2y + 5 = 0 के समान्तर है।
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण [latex ]y=\sqrt { 3x-2 } [/latex] …(1)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 26.
वक्र y = 2x2 + 3sin x के x = 0 पर अभिलम्ब की प्रवणता है
(A) 3
(B) [latex ]\frac { 1 }{ 3 }[/latex]
(C) 3
(D) [latex ]-\frac { 1 }{ 3 }[/latex]
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y = 2x² + 3 sin x
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dy }{ dx }=4x+3cosx[/latex]
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अतः विकल्प (D) सही है।

प्रश्न 27.
किस बिन्दु पर y = x + 1, वक्र y² = 4x की स्पर्श रेखा है?
(A) (1,2)
(B) (2,1)
(C) (1,- 2)
(D) (-1, 2)
हल-
दिया है, वक्र का समीकरण y² = 4x …(1)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्नावली 6.4

प्रश्न 1.
अवकल का प्रयोग करके निम्नलिखित में से प्रत्येक का सन्निकट मान दशमलव के तीन स्थानों तक ज्ञात कीजिए
(i) [latex ]\sqrt { 25.3 } [/latex]
(ii) [latex ]\sqrt { 49.5 } [/latex]
(iii) [latex ]\sqrt { 0.6 } [/latex]
(iv) (0.009)1/3
(v) (0.999)1/10
(vi) (15)1/4
(vii) (26)1/3
(viii) (255)1/4
(ix) (82)1/4
(x) (401)1/2
(xi) (0.0037)1/2
(xii) (26.57)1/3
(xiii) (81.5)1/4
(xiv) (3,968)3/2
(xv) (32.15)1/5
हल-
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प्रश्न 2.
f(2.01) का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए जबकि f(x) = 4x² + 5x + 2
हल-
माना x = 2 और x + ∆x = 2.01 तब ∆x = 0.01 = dx (∵∆Y = dx)
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प्रश्न 3.
f(5.001) का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए जहाँ f(x) = x3 – 7 x² + 15
हल-
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प्रश्न 4.
x मी भुजा वाले घन की भुजा में 1% की वृद्धि होने के कारण घन के आयतन में होने वाला सन्निकट परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल-
माना घन का आयतन V = x3
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घन के आयतन में सन्निकट परिवर्तन 0.03 x3 मी है।

प्रश्न 5.
x मी भुजा वाले घन की भुजा में 1% ह्रास होने के कारण घन के पृष्ठ क्षेत्रफल में होने वाला सन्निकट परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल-
घन का पृष्ठ क्षेत्रफल S = 6x2
[latex ]\frac { dS }{ dx }=12x[/latex]
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घन के आयतन में सन्निकट परिवर्तन -0.12 x2 मी2 है।

प्रश्न 6.
एक गोले की त्रिज्या 7 मी मापी जाती है जिसमें 0.02 मी की त्रुटि है। इसके आयतन के परिकलन में सन्निकट त्रुटि ज्ञात कीजिए।
हल-
ज्ञात है- गोले की त्रिज्या = 7 मी ।
∆r = त्रिज्या में अशुद्धि = 0.02 मी
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प्रश्न 7.
एक गोले की त्रिज्या 9 मी मापी जाती है जिसमें 0.03 मी की त्रुटि है। इसके पृष्ठ क्षेत्रफल के परिकलन में सन्निकट त्रुटि ज्ञात कीजिए।
हल-
ज्ञात है- r = गोले की त्रिज्या = 9 मी
∆r = त्रिज्या में अशुद्धि = 0.03
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प्रश्न 8.
यदि f (x) = 3x² + 15x + 5 हो तो f (3.02) का सन्निकट मान है–
(A) 47.66
(B) 57.66
(C) 67.66
(D) 77.66
हल-
f (3.02) = f (3) + df (3) [3.02 = 3 + 0.02]
यदि f (x) = 3x² + 15x + 5 …(1)
f ‘(x) = 6x + 15
समी० (1) में x = 3 रखने पर,
f (3) = 3 x 9 + 15 x 3 + 5 = 27 + 45 + 5 = 77
df (x) = f ‘(x) x ∆x = (6x + 15) x ∆x
= (6 x 3 + 15) x 0.02 [∴ x = 3, ∆ x = 0.02]
= (18 + 15) x 0.02
= 33 x 0.02 = 0.66
∴ f (3.02) = f (3) + df (3) = 77 + 0.66 = 77.66
अत: विकल्प (D) सही है।

प्रश्न 9.
भुजा में 3% वृद्धि के कारण भुजा x के घन के आयतन में सन्निकट परिवर्तन है
(A) 0.06 x3 मी3
(B) 0.6 x3 मी3
(C) 0.09 xमी3
(D) 0.9 xमी3
हल-
चूँकि घन का आयतन V = x3 (∵ भुजा = x मी)
भुजा में वृद्धि, ∆x = 3% = x का
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अत: विकल्प (C) सही है।

प्रश्नावली 6.5

प्रश्न 1.
निम्नलिखित दिए गए फलनों के उच्चतम या निम्नतम मान, यदि कोई हो तो ज्ञात कीजिए
(i) f (x) = (2x – 1)² + 3
(ii) f (x) = 9x² + 12x + 2
(iii) f (x) = -(x – 1)² + 10
(iv) g(x) = x3 + 1
हल-
(i) दिया गया फलन f(x) = (2x – 1)² + 3
(2x – 1)² का कम-से-कम मान = 0,
⇒ f(x) ≥ 3; ∀ x∈R
∴ f (x) का निम्नतम मान = 3
(ii) दिया गया फलन f (x) = 9x² + 12x + 2 = 9x² + 12x + 4 – 2
= (3x + 2)² – 2
(3x + 2)² का निम्नतम मान = 0,
⇒ f (x) ≥ -2; ∀ x∈R
∴ f (x) का निम्नतम मान = -2
(iii) दिया गया फलन f (x) = – (x – 1)² + 10
– (x – 1)² का उच्चतम मान = 0
⇒f (x) ≤ 10; ∀ x∈R
∴f का उच्चतम मान = 10
(iv) यहाँ g(x) = x3 + 1.
g ‘(x) = 3x² जो x ∈ R के लिए धनात्मक है।
g ‘(x) = 3x² ≥ 0; ∀ x∈R
अत: g एक वर्धमान फलन है।
∴ इसका कोई न्यूनतम तथा अधिकतम मान नहीं है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित दिए गए फलनों के उच्चतम मान या निम्नतम मान, यदि कोई हो तो ज्ञात कीजिए
(i) f(x) = |x + 2| – 1
(ii) g(x) = -|x + 1| + 3
(iii) h(x) = sin (2x) + 5
(iv) f(x) =|sin 4x + 3|
(v) h(x) = x + 1, x∈(-1,1)
हल-
(i) दिया गया फलन f(x) =|x + 2| – 1, f (x)≥ -1; ∀ x∈R
|x + 2| को निम्नतम मान 0 है।
∴ f का निम्नतम मान = -1
|x + 2| कर उच्चतम मान अनन्त हो सकता है।
अत: उच्चतम मान का अस्तित्व नहीं है।
(ii) दिया गया फलन g(x) = -|x + 1| + 3; g (3) ≤ 3∀ x∈R
-|x +1| का उच्चतम मान = 0
g(x) = -|x + 1| + 3 का उच्चतम मान = 0 + 3 = 3
तथा निम्नतम मान का अस्तित्व नहीं है।
(iii) दिया गया फलन h(x) = sin (2x) + 5
हम जानते हैं कि -1 ≤ sin 2x ≤ 1
⇒ 4 ≤ 5 + sin 2x ≤ 6
sin 2x का उच्चतम मान = 1
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प्रश्न 3
निम्नलिखित फलनों के स्थानीय उच्चतम या निम्नतम, यदि कोई हो तो ज्ञात कीजिए तथा स्थानीय उच्चतम या स्थानीय निम्नतम माने, जैसी स्थिति हो, भी ज्ञात कीजिए।
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हल-
(i) दिया गया फलन f(x) = x²
⇒ f ‘(x) = 2x
यदि f ‘(x) = 0 तब 2x = 0 या x = 0
f ‘(x) जैसे ही x = 0 से होकर आगे बढ़ता है तब इसका चिह्न ऋणात्मक से धनात्मक में बदल जाता है।
∴x = 0 पर f स्थानीय मान निम्नतम है।
स्थानीय निम्नतम मान = f (0) = 0
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प्रश्न 4
सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित फलनों को उच्चतम या निम्नतम मान नहीं है–
(i) f (x) = ex
(ii) g(x) = log x
(iii) h(x) = x3 + x2 + x + 1
हल-
(i) दिया गया फलन f ‘(x) = ex
∴f ‘(x) = ex
f ‘(x), x∈R कभी भी शून्य के समान नहीं है।
अत: f का कोई उच्चतम या निम्नतम मान नहीं है। इति सिद्धम्
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प्रश्न 5
प्रदत्त अन्तरालों में निम्नलिखित फलनों के निरपेक्ष उच्चतम मान और निरपेक्ष निम्नतम मान ज्ञात कीजिए
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हल-
(i) दिया गया फलन f(x) = x3, अन्तराल [-2, 2]
f ‘(x) = 3x2
यदि f ‘(x) = 0, तब 3x² = 0
⇒ x = 0
x = -2 पर, f(-2) = (-2)3 = – 8
x = 0 पर, f(0) = (0)3 = 0
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प्रश्न 6
यदि लाभ फलन p(x) = 41 – 72x – 18x² से प्रदत्त है तो किसी कम्पनी द्वारा अर्जित उच्चतम लाभ ज्ञात कीजिए।
हल-
दिया गया फलन लाभ p(x) = 41 -72x – 18x² …(1)
p’ (x) = – 72 – 36x = – 36 (2 + x)
p ” (x) = – 36
यदि p ‘(x) = 0, तब – 36 (2 + x) = 0 ⇒ 2 + x = 0 ∴ x = -2
p ‘(x) = – ve
अतः x = -2 पर p(x) उच्चतम है।
∴उच्चतम लाभ = p(-2)
[समी० (1) में x  = -2 रखने पर]
= 41 – 72 (-2)2 – 18 (-2)²
= 41 + 144 – 72
= 43 इकाई

प्रश्न 7
अन्तराल [0, 3] पर 3x4 – 8x3 + 12x2 – 48x + 25 के उच्चतम मान और निम्नतम मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना f (x) = 3x4 – 8x3 + 12x2 – 48x + 25
f ‘(x) = 12x3 – 24x2 + 24x – 48
= 12 [x3 – 2x2 + 2x – 4] = 12 [x² (x – 2) + 2 (x – 2)]
= 12 (x – 2) (x2 + 2)
यदि f ‘(x) = 0, तब x – 2 = 0 ⇒ x = 2
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प्रश्न 8
अन्तराल [0, 2π] के किन बिन्दुओं पर फलन sin 2 x अपना उच्चतम मान प्राप्त करता है।
हल-
माना f (x) = sin 2x, अन्तराल [0, 2π]
f ‘(x) = 2 cos 2x
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प्रश्न 9.
फलन sin x + cos x का उच्चतम मान क्या है?
हल-
माना f (x) = sin x + cos x, अन्तराल [0, 2π]
f ‘(x) = cos x – sin x
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए,
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प्रश्न 10.
अन्तराल [1,3] में 2x3 – 24x + 107 का महत्तम मान ज्ञात कीजिए। इसी फलन का अन्तराला [-3,-1] में भी महत्तम मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना
f (x) = 2x3 – 24x + 107, अन्तराल [1, 3]
f ‘(x) = 6x² – 24
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, f ‘(x) = 0
⇒ 6x2 – 24 = 0 ⇒ 6x2 = 24 ⇒ x2 = 4 ⇒ x = ±2
अन्तराल [1, 3] के लिए f(x) = 2x3 – 24x + 107 में x के मान रखने पर,
x = 1 पर, f(1) = 2(1)3 – 24 (1) + 107 = 2 – 24 + 107 = 85
x = 3 पर, f (3) = 2(3)3 – 24 (3) + 107 = 54 – 72 + 107 = 89
x = 2 परे, f(2) = 2(2)3 – 24(2) + 107 = 16 – 48 + 107 = 75
इस प्रकार अधिकतम मान f (x) = 89,
x = 3 पर, अन्तराल [-3,-1] के लिए हम x = – 3, – 2, – 1 पर f(x) का मान ज्ञात करते हैं।
x = – 3 पर, f(-3) = 2(-3)3 – 24 (-3) + 107
= – 54 + 72 + 107 = – 54 + 179 = 125
x = – 1 पर f(-1) = 2 (-1)3 – 24 (-1) + 107 = -2 +24 + 107 = 129
x = – 2 पर f(-2) = 2(-2)3 – 24 (-2) + 107 = -16 + 48 +107 = 139
इस प्रकार अधिकतम मान f (x) = 139, x = -2 पर।

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प्रश्न 11.
यदि दिया है कि अन्तराल [0,2] में x = 1 पर फलन x4 – 62x2 + ax + 9 उच्चतम मान प्राप्त करता है तो a का मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना f(x) = x4 – 62x2 + ax + 9
f ‘(x) = 4x3 – 124x + a
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, f ‘(x) = 0
⇒ 4x3 – 124x + a = 0
दिया है, x = 1 पर, f उच्चतम है ⇒ f (1) = 0
4x3 – 124x + a = 0 में x = 1 रखने पर
4 x 1 – 124 x 1 + a = 0 ⇒ 4 – 124 + a = 0 ⇒ – 120 + a = 0
a = 120
इसलिए a का मान 120 है।

प्रश्न 12.
[0,2π] पर x + sin 2x का उच्चतम और निम्नतम मान ज्ञात कीजिए।
हल-
माना f(x) = x + sin 2x
f ‘(x) = 1 + 2 cos 2x
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, f ‘(x) = 0
⇒ 1 + 2 cos 2x = 0 ⇒ cos2x = [latex]-\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
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प्रश्न 13.
ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनका योग 24 है और जिनका गुणनफल उच्चतम हो।
हल-
माना पहली संख्या = x तब दूसरी संख्या = 24 – x है।
प्रश्नानुसार, उनका गुणनफल p = x(24 – x) = 24x – x² …(1)
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, [latex]\frac { dp }{ dx }=0[/latex]
समी० (1) का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 14.
ऐसी दो धन संख्याएँ x और y ज्ञात कीजिए ताकि x + y = 60 और xy3 उच्चतम हो।
हल-
दिया है,
x + y = 60
x = 60 – y …(1)
माना xy3 = P …(2)
समीकरण (1) से x का मान समीकरण (2) में रखने पर,
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प्रश्न 15.
ऐसी दो धन संख्याएँ x और y ज्ञात कीजिए जिनका योग 35 हो और गुणनफल x2y5 उच्चतम हो।
हल-
दो धन संख्याएँ x, y हैं।
दिया है, x + y = 35
⇒ y = 35 – x …(1)
प्रश्नानुसार, माना गुणनफल p = x2y5 …(2)
समीकरण (1) से y का मान समीकरण (2) में रखने पर,
p = x2 (35 – x)5
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 16.
ऐसी दो धन संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनका योग 16 हो और जिनके घनों का योग निम्नतम हो।
हल-
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प्रश्न 17.
18 सेमी भुजा के टिन के किसी वर्गाकार टुकड़े से प्रत्येक कोने पर एक वर्ग काटकर तथा इस प्रकार बने टिन के फलकों को मोड़कर ढक्कन रहित एक सन्दूक बनाना है। काटे जाने वाले वर्ग की भुजा कितनी होगी जिससे सन्दूक का आयतन उच्चतम होगा?
हल-
माना वर्ग की प्रत्येक भुजा x सेमी काटी गई है।
∴ सन्दूक के लिए,
लम्बाई = 18 – 2x
चौड़ाई = 18 – 2x
ऊँचाई = x
आयतन V = ल० × चौ० × ऊँ०
= x(18 – 2x) (18 – 2x)
= x(18 – 2x)x² …(1)
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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प्रश्न 18
45 सेमी लम्बी और 24 सेमी चौड़ी आयताकार लोहे की एक चादर के चारों कोनों से समान भुजा का एक वर्गाकार निकालने के पश्चात् खुला हुआ एक सन्दुक बनाया जाता है। वर्गों की भुजा की माप ज्ञात कीजिये जिसके काटने पर बने सन्दूक का आयतन महत्तम होगा।
हल-
माना अभीष्ट वर्ग की भुजा x है तब ।।
सन्दूक की लम्बाई = (45-2x)
तथा सन्दूक की चौड़ाई = (24-2x)
सन्दूक की ऊँचाई = x
∴ सन्दूक का आयतन
V = (45 – 2x) (24 – 2x) x
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∴x = 5 पर V का मान महत्तम होगा।
∴ वर्ग की भुजा 5 सेमी होगी।

प्रश्न 19.
सिद्ध कीजिए कि एक दिए वृत्त के अन्तर्गत सभी आयतों में वर्ग का क्षेत्रफल उच्चतम होता है।
हल-
माना a त्रिज्या के वृत्त के अन्तर्गत आयत की लम्बाई x तथा चौड़ाई y है।
चित्र ABC में,
AC = व्यास = 2a
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प्रश्न 20.
सिद्ध कीजिए कि दिए हुए सम्पूर्ण पृष्ठ और महत्तम आयतन के लम्बवृत्तीय बेलन की ऊँचाई , उसके आधार के व्यास के बराबर है।
हल-
माना बेलन की ऊँचाई h तथा आधार की त्रिज्या r है।
पुनः माना बेलन का सम्पूर्ण पृष्ठ S और आयतन V है, तब
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प्रश्न 21.
100 सेमी3 आयतन वाले डिब्बे सभी बेलनाकार (लम्ब वृत्तीय) डिब्बों में से न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल वाले डिब्बे की विमाएँ ज्ञात कीजिए।
हल-
माना बेलनाकार डिब्बों की त्रिज्या r और ऊँचाई h है।
आयतन = πr²h = 100 सेमी3
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प्रश्न 22.
28 मीटर लम्बे तार के दो टुकड़े करके एक को वर्ग तथा दूसरे को वृत्त के रूप में मोड़ा जाता है। दोनों टुकड़ों की लम्बाई ज्ञात कीजिए यदि उनसे बनी आकृतियों को संयुक्त क्षेत्रफल न्यूनतम है।
हल-
तार की लम्बाई l = 28 मी
माना वर्ग की भुजा x तथा वृत्त की त्रिज्या r है, तब
l = वर्ग का परिमाप + वृत्त की परिधि = 4x + 2πr = 28 …(1)
माना संयुक्त क्षेत्रफल A है।
A = वर्ग की क्षेत्रफल + वृत्त का क्षेत्रफल = x² + πr²
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प्रश्न 23.
सिद्ध कीजिए कि R त्रिज्या के गोले के अन्तर्गत विशालतम शंकु का आयतन गोले के आयतन का [latex ]\frac { 8 }{ 27 }[/latex] होता है।
हल-
माना V, AB गोले के अन्तर्गत विशालतम शंकु का आयतन है। स्पष्टतया अधिकतम आयतन के लिए शंकु का अक्ष गोले की ऊँचाई के साथ होना चाहिए।
माना ∠AOC = θ,
∴ AC, शंकु के आधार की त्रिज्या = R sin θ, जहाँ R गोले की त्रिज्या है।
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प्रश्न 24.
दर्शाइये कि एक निश्चित आयतन के शंक्वाकार डेरे के बनाने में कम-से-कम कपड़ा लगेगा जब उसकी ऊँचाई आधार की त्रिज्या के √2 गुना होगी।
हल-
माना शंकु की ऊँचाई h, त्रिज्या r तथा तिरछी ऊँचाई l है।
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प्रश्न 25.
सिद्ध कीजिए कि दी हुई तिर्यक ऊँचाई और महत्तम आयतन वाले शंकु का अर्द्ध शीर्ष कोण tan-1√2 होता है।
हल-
माना शंकु की त्रिज्या = r, अर्द्धशीर्ष ∠BAM = θ
ऊँचाई = h; तिर्यक ऊँचाई = l
ऊर्ध्वाधर ऊँचाई, h = AM = l cos θ
शंकु की त्रिज्या, r = MC = l sin θ
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प्रश्न 26.
सिद्ध कीजिए कि दिए हुए पृष्ठ और महत्त्म आयतन वाले लम्बवृत्तीय शंकु का अर्द्धशीर्ष कोण [latex ]{ sin }^{ -1 }\left( \frac { 1 }{ 3 } \right) [/latex] होता है।
हल-
माना शंकु की त्रिज्या r, तिरछी ऊँचाई l सम्पूर्ण पृष्ठ S तथा आयतन V है।
सम्पूर्ण पृष्ठ S = πr (r + l) या πrl = S – πr²
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प्रश्न 27.
वक्र x² = 2y पर (0, 5) से न्यूनतम दूरी पर स्थित बिन्दु है
(A) (2√2, 4)
(B) ( 2√2 , 0)
(C) (0, 0)
(D) (2, 2)
हल-
माना वक्र x² = 2y पर कोई बिन्दु P(x, y) है।
दिया हुआ बिन्दु A (0, 5) है।
PA² = (x – 0)² + (y – 5)² = z (माना)
Z = x² + (y – 5)² …(1)
तथा वक्र x² = 2y …(2)
x² का मान समी० (1) में रखने पर,
Z = 2y + (y – 5)² =2y + y² + 25 – 10y = y² + 25 – 8y
दोनों पक्षों का y के सापेक्ष अवकलन करने पर, [latex ]\frac { dZ }{ dy }=2y-8[/latex]
उच्चतम व निम्नतम मान के लिए, [latex ]\frac { dZ }{ dy }=0[/latex]
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प्रश्न 28.
x के सभी वास्तविक मानों के लिए!
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का न्यूनतम मान है–
(A) 0
(B) 1
(C) 3
(D) [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex]
हल-
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प्रश्न 29.
[x (x – 1) + 1]1/3,0≤x≤1 का उच्चतम मान है
(A) [latex]{ \left( \frac { 1 }{ 3 } \right) }^{ \frac { 1 }{ 3 } }[/latex]
(B) [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex]
(C) 1
(D) 0
हल-
माना y = [x (x – 1) + 1]1/3
दोनों पक्षों का x के सापेक्ष अवकलन करने पर,
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उच्चतम मान = 1
अत: विकल्प (C) सही है।

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