UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Population Problems and Their Solution

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Geography
Chapter Chapter 5
Chapter Name Population Problems and Their Solution (जनसंख्या की समस्याएँ एवं उनका निराकरण)
Number of Questions Solved 13
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Population Problems and Their Solution (जनसंख्या की समस्याएँ एवं उनका निराकरण)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
जनाधिक्य की समस्या एवं उसके निराकरण के उपायों की विवेचना कीजिए।
या
जनसंख्या-वृद्धि के मुख्य कारण बताते हुए उसे रोकने के उपाय प्रस्तावित कीजिए।
या
विश्व की जनसंख्या-वृद्धि के कारण बताइए तथा वृद्धि को कम करने के उपाय सुझाइए।
या
जनसंख्या का घनत्व क्या है? जनाधिक्य के मानव-जीवन पर पड़ने वाले चार प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
या
जनाधिक्य की समस्याओं की विवेचना कीजिए तथा इसके समाधान हेतु सुझाव दीजिए।
या
जनसंख्या अतिरेक की समस्याओं की विवेचना कीजिए और इसमें समाधान के उपाय सुझाइए।
या
जनसंख्या की द्रुत वृद्धि की अवस्थाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर

जनसंख्या का घनत्व
Density of Population

जनसंख्या का घनत्व एक ऐसा सूचकांक है जिसके द्वारा मनुष्य और भूमि के निरन्तर परिवर्तनशील सम्बन्ध की सूचना मिलती है। यह जनसंख्या बसाव की दर होती है, जो कि निम्नलिखित प्रकार की होती है –
(i) गणितीय घनत्व – किसी प्रदेश के क्षेत्रफल तथा वहाँ निवास करने वाली जनसंख्या को अनुपात गणितीय घनत्व कहलाता है। जनसंख्या में क्षेत्रफल से भाग देने पर प्रति वर्ग किलोमीटर घनत्व प्राप्त हो जाता है।
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(ii) आर्थिक घनत्व – प्रदेश के आर्थिक संसाधनों की क्षमता तथा वहाँ के सम्पूर्ण जनसंख्या अनुपात को आर्थिक घनत्व कहते हैं।
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(iii) कृषि क्षेत्रीय घनत्व – किसी क्षेत्र की कृषिगत भूमि तथा सम्पूर्ण जनसंख्या का अनुपात कृषि क्षेत्रीय घनत्व होता है।
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(iv) कृषि घनत्व – प्रदेश की कृषिगत भूमि के क्षेत्रफल तथा वहाँ कृषि-कार्य में लगी जनसंख्या के अनुपात से यह घनत्व निकाला जाता है।
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विश्व में जनसंख्या की समस्या
Problem of Population in the World

दिन-प्रतिदिन विश्व की जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण कुछ प्रदेशों में भूमि पर मानव का भार बढ़ता जा रहा है। सन् 2010 में विश्व की जनसंख्या लगभग 6.90 अरब है। विश्व की यह जनसंख्या 135 करोड़ वर्ग किमी क्षेत्रफल पर निवास करती है। जहाँ एक ओर उत्तरी अमेरिका महाद्वीप का क्षेत्रफल विश्व का 16% है, वहाँ विश्व की केवल 7% जनसंख्या ही निवास करती है तथा विश्व की 45% आय का उपभोग होता है। दूसरी ओर एशिया महाद्वीप का क्षेत्रफल विश्व का 18% है, जबकि यहाँ विश्व की 60.8% जनसंख्या का निवास है तथा यह महाद्वीप विश्व की 12% आय का उपभोग करता है। अतः स्पष्ट है कि अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं।

इन क्षेत्रों के निवासियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता और जो भोजन मिलता है वह भी पौष्टिक नहीं होता। इस दृष्टि से विश्व की लगभग 60% जनसंख्या अधनंगी, भूखी, अस्वस्थ, अशिक्षित, दरिद्र एवं कुपोषण की शिकार हो गयी है, जो विश्व-शान्ति के लिए स्थायी खतरा बन गयी है। कुछ देशों की विस्तारवादी नीति इसी तथ्य की प्रतिफल है। इसके परिणामस्वरूप जनसंख्या एवं उपलब्ध संसाधनों में असन्तुलन की स्थिति बन गयी है। अत: जनसंख्या-वृद्धि पर रोक लगाना नितान्त आवश्यक हैं।
जनसंख्या को यह असहनीय भार विश्व के निम्नलिखित चार क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखलाई पड़ती है –

1. दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देश – इसके अन्तर्गत चीन, भारत, पाकिस्तान एवं जापान सम्मिलित हैं। भारत के अतिरिक्त ये देश अपनी विस्तारवादी नीति में उलझकर रह गये हैं। ये प्रयास बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैण्ड, लाओस, कम्पूचिया एवं वियतनाम, भारत और रूस जैसे देशों की सीमा सम्बन्धी विवादों के रूप में प्रकट हुए हैं। फिलीपीन्स, इण्डोनेशिया एवं मलेशिया की राजनीतिक हलचलें स्थिति को और भी अस्थिर बनाये हुए हैं।

2. मध्य एशिया एवं उत्तरी अफ्रीका – यह मुस्लिम बहुल क्षेत्र विश्व का दूसरा बड़ा अस्थिर क्षेत्र है। यहाँ पर आन्तरिक हलचलें विश्व के लिए सदैव खतरे की सूचना देती रहती हैं। इराक एवं ईरान युद्ध इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

3. दक्षिणी अमेरिका – यद्यपि दक्षिणी अमेरिका विरल जनसंख्या रखने वाला महाद्वीप है, परन्तु यह विश्व के लिए खतरे की घण्टी कहा जा सकता है। यहाँ जनसंख्या-वृद्धि के साथ-साथ नगरीकरण तीव्र गति से बढ़ रहा है जिससे लोगों का जीवन-स्तर घट रहा है एवं नागरिक जीवन में अस्थिरता उत्पन्न हो गयी है।

4. अफ्रीका – इस महाद्वीप के सहारा प्रदेश में, विशेष रूप से मध्यवर्ती अफ्रीका जहाँ जन्म-दर अधिक तथा मृत्यु दर कम है, तीव्र जनसंख्या वृद्धि हो रही है।
पाश्चात्य विद्वानों ने इन प्रदेशों को जनसंख्या के विस्फोटक क्षेत्रों की संज्ञा प्रदान की है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुमानों के अनुसार इन प्रदेशों में न केवल भूतकाल में ही जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुई है, बल्कि भविष्य में भी ये प्रदेश तीव्र जनसंख्या वृद्धि के लिए उत्तरदायी होंगे।

विद्वानों की धारणा है कि विकासशील देशों में तीव्र जनसंख्या-वृद्धि विकसित देशों के लिए खतरे की घण्टी है। जनसंख्या की यह वृद्धि विश्व-शान्ति के लिए एटमबम से भी अधिक खतरनाक है। अतः इस स्थिति पर नियन्त्रण लगाने के लिए आवश्यक है कि मानव की जन्म-दर पर रोक लगायी जाए, क्योंकि प्रकृति के पास इस बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए न तो पर्याप्त खाद्य भण्डार हैं एवं न ही उद्योगों के लिए पर्याप्त खनिज एवं ऊर्जा संसाधन। स्थिति अधिक गम्भीर न होने पाये, इसलिए इस वृद्धि को पहले ही रोकने के प्रयास किये जाने चाहिए और विश्व की जनसंख्या को सीमित कर दिया जाना चाहिए।

जनसंख्या-वृद्धि के कारण
Causes of Population Growth

विश्व में तीव्र जनसंख्या वृद्धि के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं –
1. ऊँची जन्म – दर तथा कम मृत्यु-दर-पिछड़े एवं विकासशील देशों में जन्म-दर बहुत ऊँची है। एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका आदि महाद्वीपों में जन्म-दर 40 से 50 प्रति हजार तक है। इन महाद्वीपों में मृत्यु-दर पर्याप्त नीची है। सामाजिक सुरक्षा, पौष्टिक आहार तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो जाने से एशिया, अफ्रीको तथा दक्षिणी अमेरिका में मृत्यु-दर अत्यन्त नीची हो गयी है। जन्म-दर की अपेक्षा मृत्यु-दर कम होने से विश्व में जनाधिक्य तेज़ी से हो गया है।

2. गर्म जलवायु – एशिया, अफ्रीका तथा दक्षिणी अमेरिका के देशों में गर्म जलवायु पायी जाती है। गर्म जलवायु में स्त्री-पुरुष की प्रजनन-शक्ति अधिक होती है। शीघ्र विवाह सूत्र में बँधकर नवदम्पति सन्तानोत्पत्ति में लगकर जनसंख्या बढ़ाते हैं।

3. अशिक्षा और रूढ़िवादिता – अशिक्षा और रूढ़िवादिता भी जनाधिक्य का प्रमुख कारण है। अशिक्षित व्यक्ति जनसंख्या बढ़ाने में बहुत योग देते हैं। वे सन्तान को भाग्य और ईश्वरीय देन मानकर जनसंख्या बढ़ाते रहते हैं। अशिक्षित और रूढ़िवादी लोग प्रजनन-शक्ति का भरपूर उपयोग करके जनाधिक्य में सहायक बन जाते हैं।

4. बहुपत्नी प्रथा – जिन देशों में एक से अधिक स्त्रियों के साथ विवाह करने की प्रथा है, वहाँ जनाधिक्य के द्वार स्वत: खुले हुए हैं। बहुपत्नी प्रथा वाले देशों में कई पत्नियों के अधिक सन्ताने जन्म लेती हैं, जो जनसंख्या को बढ़ाने में बहुत योग देती हैं।

5. सामाजिक एवं धार्मिक अन्धविश्वास – पिछड़े हुए समाजों में सामाजिक संकीर्णता एवं धार्मिक कठोरता अधिक सन्तान उत्पत्ति को बढ़ावा देते हैं। इस्लाम धर्मानुयायी सन्तति को धर्म के विरुद्ध मानकर सन्तान उत्पत्ति में लगे रहते हैं। भारत में पुत्र मोह में कई कन्याएँ होने पर भी सन्तानोत्पादन का प्रचलन है, जो जनाधिक्य का कारण बनता है।

6. निम्न जीवन-स्तर – निर्धनता के कारण व्यक्ति का जीवन-स्तर निम्न होता है। अविकसित तथा पिछड़े देशों में लोग निर्धन होते हुए भी जीवन-स्तर के सुधार की ओर ध्यान न देकर सन्तानोत्पत्ति में लगे रहते हैं। उच्च जीवन-स्तर के लोग अपेक्षाकृत कम सन्तान पैदा करते हैं।

7. मनोरंजन के साधनों का अभाव – निर्धन और पिछड़े देशों के लोगों के पास मनोरंजन के स्वस्थ साधन नहीं हैं। उनके पास स्त्रियाँ ही मनोरंजन का साधनमात्र हैं, जिसका परिणाम होता है. अधिक सन्तानं। इस प्रकार मनोरंजन के साधनों का अभाव तीव्र जनसंख्या वृद्धि का कारण बन जाता है।

8. उपजाऊ भूमि – समतल तथा उपजाऊ भूमि कृषि की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। उपजाऊ भूमि में वर्ष भर कृषि कार्य होता रहता है। यह अधिक जनसंख्या को भोजन देने में सक्षम है। एशिया की उपजाऊ तथा चावल उत्पादक भूमि घनी जनसंख्या को भोजन प्रदान करके जनाधिक्य में सहायक हो जाती है।

9. उद्योग-धन्धे-उद्योग – धन्धे जनसंख्या को पर्याप्त आजीविका के साधन उपलब्ध कराते हैं। उत्तरी-पश्चिमी यूरोप में उद्योग-धन्धों का पर्याप्त विकास होने से ही यह क्षेत्र सघन जनसंख्या को क्षेत्र बन गया है। इस प्रकार उद्योग-धन्धों का विकास तीव्र जनाधिक्य का एक प्रमुख कारण है।

10. सरकार की नीति – सरकार की उदार नीतियाँ भी जनाधिक्य का मुख्य कारण हैं। जिन देशों में सरकार ने जनसंख्या के सम्बन्ध में कोई निश्चित नीति तय नहीं की है तथा परिवार कल्याण कार्यक्रमों की ओर ध्यान नहीं दिया है, वहाँ जनसंख्या का संकेन्द्रण हो गया है। सरकार की ढुलमुल नीतियाँ भी जनसंख्या-वृद्धि में सहायक रही हैं। भारत, पाकिस्तान, चीन तथा जापान देश इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

जनसंख्या-वृद्धि की समस्याएँ
Problems of Population Growth

सामान्यत: तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या की निम्नलिखित समस्याएँ हैं –

  1. विश्व में पिछले कई दशकों से जनसंख्या बड़ी तीव्र गति से बढ़ रही है और भविष्य में भी इसके और अधिक बढ़ने की सम्भावनाएँ हैं, जो अविकसित भागों में अधिक हो सकती हैं।
  2. इसी असीमित वृद्धि के फलस्वरूप विकासशील देशों में राजनीतिक उथल-पुथल, आन्तरिक अस्थिरता एवं युद्ध की सम्भावनाएँ प्रकट हुई हैं। ये देश अन्य देशों के लिए संकट बन गये हैं।
  3. जिस गति से जनसंख्या में वृद्धि हुई है, उसी अनुपात में खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि नहीं हो पायी है। फलस्वरूप विश्व की आधी से अधिक जनसंख्या का जीवन-स्तर निम्न, कुपोषण और दरिद्रता से भरा हुआ है।
  4. बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए उपलब्ध भूमि बहुत ही सीमित है।

जनसंख्या-वृद्धि के दुष्परिणाम या प्रभाव
Effects or Demerits of Population-Growth

जनसंख्या की वृद्धि या जनाधिक्य किसी देश के लिए अनेक दुष्प्रभाव उत्पन्न करती है, जो संक्षेप में निम्नलिखित हैं –

  1. विकासशील देशों में जनाधिक्य की समस्या बढ़ रही है। इसका सबसे महत्त्वपूर्ण दुष्परिणाम यह हुआ है कि कृषि उपयोगी भूमि पर जनसंख्या का भार बढ़ गया है, क्योंकि विकासशील देशों के भूमि तथा अन्य संसाधन सीमित हैं, जबकि जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। भारत, चीन तथा बांग्लादेश इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
  2. जनसंख्या की तीव्र वृद्धि से खाद्यान्न की समस्या उत्पन्न होती है। प्रति व्यक्ति भोजन के लिए आवश्यक कैलोरी तक प्राप्त नहीं होती। इससे निवासियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वे कुपोषण के शिकार होते हैं।
  3. जनसंख्या की वृद्धि होने से रोजगार के अवसरों में कमी आती है। बेरोजगारों की संख्या बढ़ जाती है। लोगों का जीवन-स्तर गिर जाता है।
  4. जनाधिक्य से किसी भी देश के अर्थतन्त्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उसका विदेशी व्यापार असन्तुलित हो जाता है। इससे देश का विकास रुक जाता है।

जनसंख्या वृद्धि की समस्या का निवारण 
Remedies to solve the Problem of Population-Growth

बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्या का निवारण शीघ्र हो जाना अति आवश्यक है। इसके लिए सभी बड़े राष्ट्र प्रयत्नशील हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने जनसंख्या विशेषज्ञों की एक समिति बनाई हुई है, जिसमें जनसंख्या के सभी पक्षों का अध्ययन किया जाता है तथा उनके निवारण के उपाय सुझाये जाते हैं। जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को रोकने के लिए निम्नलिखित उपायों पर जोर दिया जाना चाहिए –
1. परिवार नियोजन – सुदृढ़ राष्ट्र के लिए उसके निवासियों को स्वस्थ होना अति आवश्यक है। आधुनिक गर्भ निरोधक ओषधियों अथवा नसबन्दी द्वारा परिवार कल्याण कार्यक्रमों को अपनाया जाना चाहिए। ऐसी नीति अपनानी चाहिए कि एक परिवार में 2 या 3 से अधिक बच्चे न हो।

2. विवाह की आयु में वृद्धि – लड़के एवं लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाई जानी चाहिए। यह कम-से-कम लड़कियों के लिए 20 वर्ष तथा लड़कों के लिए 30 वर्ष तक हो सकती है। उष्ण जलवायु के देशों में यह उम्र क्रमशः 18 एवं 25 वर्ष हो सकती है। विवाह जितनी देर से किया जाएगा, वैवाहिक जीवन में उतने ही कम बच्चे उत्पन्न हो सकेंगे।

3. सन्तति सुधार – जनसंख्या में गुणात्मक सुधार करना भी आवश्यक है। सन्तति-सुधार कार्यक्रम में छूत या संक्रामक रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों के विवाह और सन्तानोत्पत्ति पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए।

4. सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार – देशवासियों की आर्थिक क्षमता बनाये रखने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सफाई आदि पर ध्यान देना अति आवश्यक है। यद्यपि चिकित्सा विज्ञान ने कई असाध्य रोगों पर नियन्त्रण पा लिया है, परन्तु उष्ण कटिबन्धीय देशों में अभी भी बहुत-से रोगों पर नियन्त्रण पाया जाना आवश्यक है।

5. शिक्षा का प्रचार-प्रसार – परिवार के आकार को सीमित बनाये रखने के लिए शिक्षा का प्रचार-प्रसार बहुत आवश्यक है। शिक्षित मानव अधिक उत्तरदायी एवं विवेकपूर्ण हो जाता है। उसकी दृष्टि एवं विचार विस्तृत हो जाते हैं। उसे परिवार के आकार एवं गर्भ निरोधक विधियों के प्रसार का ज्ञान भली-भाँति हो जाता है।

6. भूमि का सर्वोत्तम उपयोग – बढ़ती हुई जनसंख्या के भार को कम करने का एक कारगर उपाय भूमि का वैज्ञानिक एवं उचित उपयोग करना अति आवश्यक है। भूमि के उचित उपयोग से आशय उपलब्ध भूमि का सर्वोत्तम उपयोग करना है अर्थात् अधिकाधिक उत्पादन प्राप्त करना है।

7. औद्योगीकरण – जनाधिक्य वाले देशों में औद्योगीकरण एक आवश्यक प्रक्रिया है। इसके लिए अधिकतर लघु एवं घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए, क्योंकि लघु उद्योग़ जब व्यवस्थित हो जाते हैं तो कृषि एवं वृहत् उद्योगों के बीच एक आवश्यक समन्वय स्थापित कर लेते हैं। इससे मानव की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि मानव अधिकांश समय अपने खाद्यान्न-प्राप्ति तथा सामाजिक कार्यों में ही लगा रहता है। इन देशों के निवासियों को यौन सम्बन्धों के अतिरिक्त भी मानसिक सन्तुष्टि के अन्य साधन उपलब्ध हो जाते हैं। आर्थिक उन्नति और शिक्षा के उच्च स्तर तक पहुँचने पर नगरीय-औद्योगिक सभ्यता के प्रसार के साथ-साथ यह वृद्धि कम हो जाती है; अर्थात् पहले मृत्यु-दर में कमी होती है तथा उसके बाद जन्म-दर भी तेजी से घट जाती है।

8. प्रवास या स्थानान्तरण – आज भी विश्व में अनेक देश ऐसे हैं, जहाँ पृथ्वी पर मानव-भार असह्य होता जा रहा है; जैसे- चीन, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, इण्डोनेशिया आदि। यहाँ पर अधिकांश मानवता अर्द्ध-वस्त्रधारी एवं भूखी रहती है। इसके अतिरिक्त विश्व में ऐसे भी विस्तृत क्षेत्र हैं जहाँ जनशक्ति के अभाव में स्वच्छन्दता से भेड़-बकरी आदि पशु पाले जाते हैं; जैसे-ऑस्ट्रेलिया, अर्जेण्टाइना, उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीका एवं अमेरिका, कनाडा तथा दक्षिणी अमेरिकी देशों में। इस प्रकार आर्थिक एवं सामाजिक विषमताएँ विश्व-शान्ति के लिए बाधा के रूप में हैं। इन बाधाओं के कारण नये देशों की प्रगति अवरुद्ध हो गयी है तथा मानव उनसे वंचित हो गया है। इस समस्या के निवारण हेतु अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों द्वारा प्रवास को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

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प्रश्न 2
जनसंख्या के स्थानान्तरण (प्रवास) को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए। (2016)
या
जनसंख्या स्थानान्तरण के विभिन्न प्रकारों की विवेचना कीजिए। उदाहरण सहित उनके कारणों की व्याख्या कीजिए। [2008, 16]
या
जनसंख्या स्थानान्तरण के प्रकार एवं कारणों की विवेचना कीजिए। [2014]
उत्तर
प्रागैतिहासिक काल से ही मानव एक स्थान से दूसरे स्थान को एक समूह के रूप में प्रवास करता रहा है। ”पृथ्वी के विभिन्न भागों में एक प्रदेश से दूसरे स्थान को मानव-वर्गों का प्रवसन होता रहा है, इसे हम जनसंख्या का स्थानान्तरण कहते हैं।” स्थानान्तरण के निम्नलिखित दो भेद हैं –
1. प्रवास (Emigration) – इसके द्वारा मानव वर्ग एक स्थान से दूसरे स्थान को जाते हैं; जैसे- यूरोपियन उत्तरी अमेरिकी, दक्षिणी अमेरिकी, ऑस्ट्रेलिया आदि को गये। यह प्रवास कठोर जलवायु, बाढ़, सूखा, जीवन-निर्वाह अथवा अन्य कोई सामाजिक या राजनीतिक कठिनाई के कारण होता है।

2. आवास (Immigration) – बाह्य स्थानों से मानव किसी प्रदेश या स्थान के अन्दर आते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तरी अमेरिका में ब्रिटेन, इटली, फ्रांस आदि देशों से मानव-वर्गों का आवास होता रहा है। जिन देशों में आजीविका तथा मानवीय मूल्यों की सुविधाएँ अधिक होती हैं, वे विदेशियों के आवास को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मध्य एशिया से अनेक बार जनसंख्या का आवास चीन, भारत एवं यूरोपीय देशों को होता रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में जो जनसंख्या है, उसकी वृद्धि एवं विकास यूरेशिया महाद्वीप से बार-बार हुए मानव-वर्गों के स्थानान्तरण से हुआ है।

स्थानान्तरण के पक्ष
Aspects of Migration

देश, काल, संख्या और स्थिरता के विचार से स्थानान्तरण के अग्रलिखित भेद होते हैं –
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जनसंख्या के स्थानान्तरण (प्रवास) के कारण
Causes of Migration of Population

जनसंख्या के स्थानान्तरण में निम्नलिखित दो प्रकार की शक्तियों या क्रियाओं का प्रभाव पड़ता है –
(i) प्रवासकारी शक्तियाँ (Emigrating Forces) – इन शक्तियों के द्वारा किसी प्रदेश का मानव-वर्ग बाहर की ओर स्थानान्तरित हो जाता है। जब किसी प्रदेश में बाढ़, अकाल आदि कोई भौतिक आपदा आती है तो उस प्रदेश से बाहर की ओर मानव-प्रवास होता है। उदाहरण के लिए, मध्य एशिया की शुष्क एवं विषम जलवायु तथा जीवन-यापन की कठिनाइयों के कारण मानव-वर्ग बाहर की ओर प्रवास कर गये थे।

(ii) आवासकारी शक्तियाँ (Immigrating Forces) – इन शक्तियों के कारण किसी प्रदेश में अन्दर की ओर मानव-वर्गों का आवास होता है। अमेरिका की विस्तृत कृषि भूमि ने पश्चिमी यूरोप के सघन प्रदेशों से मानव-वर्गों को आवास के लिए आकर्षित किया था। | उपर्युक्त स्थानान्तरणकारी शक्तियों को उत्पन्न करने वाले निम्नलिखित चार कारक प्रमुख हैं –
(1) भौतिक कारक (Physical Factors) – भौतिक कारकों में जलवायु सबसे प्रभावशाली है। हिमयुग में जलवायु के परिवर्तन से मानव-जातियों के स्थानान्तरण बड़े पैमाने पर होते रहे थे। शीत-प्रधान टुण्ड्रा प्रदेशों एवं हिमाच्छादित प्रदेशों से मानव-वर्ग शीत ऋतु में गर्म प्रदेशों की ओर प्रवास कर जाते हैं तथा ग्रीष्म ऋतु आने पर पुनः इन ठण्डे प्रदेशों में चले आते हैं। हिमालय प्रदेश में इस प्रकार के मौसमी स्थानान्तरण प्रतिवर्ष नियमित रूप से होते रहते हैं।
अन्य भौतिक कारकों में नदियों की बाढ़ एवं मार्ग परिवर्तन, अतिवर्षा, वर्षा का न होना, अकील, भूकम्प, ज्वालामुखी उद्गार, हिमराशियों का घटना-बढ़ना, मिट्टियों का अनुपजाऊ होना, समुद्री तटों का ऊपर उठना या नीचे धंसना मुख्य स्थान रखते हैं।

(2) आर्थिक कारक (Economic Factors) – आर्थिक कारकों में जीविकोपार्जन की सुविधाएँ । सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। जिन प्रदेशों में जीवन-निर्वाह के साधन उपलब्ध नहीं होते या उनमें कठिनाइयाँ होती हैं, वहाँ से मानव-वर्ग उन प्रदेशों को प्रवास कर जाते हैं जहाँ आर्थिक संसाधन पर्याप्त मात्रा में सुलभ होते हैं। निम्नलिखित आर्थिक कारक प्रमुख स्थान रखते हैं –

  1.  सघन जनसंख्या एवं उनके निवास क्षेत्रों में जीविकोपार्जन के साधनों की कमी
  2. बाह्य प्रदेशों में कृषि-कार्यों के लिए नयी भूमि की प्राप्ति
  3. अधिक उपजाऊ भूमि का आकर्षण
  4. सिंचाई के साधनों की सुविधा
  5. खनिज-पदार्थों की प्राप्ति
  6. वन-संसाधनों की प्राप्ति
  7. यातायात एवं परिवहन के साधनों की सुलभता
  8. औद्योगीकरण एवं औद्योगिक केन्द्रों का आकर्षण
  9. व्यापारिक सुविधाएँ।

पश्चिमी यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी चीन आदि क्षेत्रों की अत्यधिक जनसंख्या दूसरे देशों को प्रवास करती रही है। उदाहरण के लिए, सन् 1920 से 1940 तक जापान में जनसंख्या अधिक हो जाने के कारण बहुत-से जापानी कोरिया, मंचूरिया एवं ब्राजील आदि देशों में जा बसे थे। पूर्वी चीन से लोग मलेशिया, इण्डोनेशिया और वियतनाम में जाकर बस गये थे। नदियों के बेसिनों; जैसे–सिन्धु-गंगा का मैदान, यांगटिसीक्यांग बेसिन तथा समुद्रतटीय मैदानों में उपजाऊ भूमि के कारण अन्य प्रदेशों से जनसंख्या आकर बस गयी थी।

ऑस्ट्रेलिया में कालगूर्ती एवं कूलगर्जी सोने की खाने उष्ण मरुस्थल में स्थित हैं। और 560 किमी लम्बी पाइप लाइन द्वारा जल ले जाकर वहाँ मानवीय बस्तियाँ बसाई गयी हैं। दक्षिणी अफ्रीका एवं एण्डीज पर्वत पर खनिज पदार्थों के आकर्षण के कारण मानव के निवास खानों के समीप विकसित हुए हैं। मध्य एशिया में तेल के कुओं के समीप सघन जनसंख्या खनिज तेल के आकर्षण द्वारा विकसित हुई है। औद्योगिक केन्द्रों के समीप आर्थिक उन्नति की सुलभता के कारण जनसंख्या आकर्षित होती है।

3. सामाजिक-सांस्कृतिक कारक (Socio-cultural Factors) – सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों से भी जनसंख्या का स्थानान्तरण होता है। निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा इसकी पुष्टि होती है –

  1. भारत से हजारों व्यक्ति अपना धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रचार करने के लिए म्यांमार, श्रीलंका, हिन्द चीन, मलेशिया, थाईलैण्ड, जावा, बाली आदि देशों को पाँचवीं शताब्दी तक स्थानान्तरण कर गये थे।
  2. अरब से बाहर की ओर प्रवास करने वाले इस्लाम धर्मावलम्बियों ने अपनी सभ्यता को मिस्र, सूडान, ईरान, अफगानिस्तान, तुर्की, सीरिया, इराक, ओमान, यमन, मालदीव, सुमात्रा, मलाया एवं पूर्वी द्वीप समूह तक फैला दिया था।
  3. धार्मिक भावनाओं के कारण स्पेन के लोग मैक्सिको में जाकर बसे तथा फ्रांसीसी कनाडा में जाकर बसे। धार्मिक स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए यहूदी लोग जर्मनी एवं रूस से भागकर अमेरिकी देशों को चले गये थे।
  4. सन् 1947 में भारत-विभाजन के समय भारत से लाखों मुसलमान पाकिस्तान चले गये तथा पाकिस्तान से करोड़ों हिन्दू भागकर भारत आ गये थे।
  5. अरब में मक्का-मदीना में हज के लिए प्रत्येक वर्ष हजारों मुस्लिम व्यक्ति भारत, पाकिस्तान, जावा, ईरान, मिस्र आदि देशों से अरब को जाते हैं और हज के बाद अपने देशों को वापस लौट आते हैं।
  6. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, ब्रिटेन आदि देशों के निवासी भारत की सामाजिक अवस्था और संस्कृति को समझने में रुचि रखने लगे हैं। भारत से भी प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी, वैज्ञानिक, शिक्षक-प्रशिक्षक आदि उच्च अध्ययन के लिए विदेशों को जाते रहते हैं। विदेशों से भी बहुत-से लोग इन कार्यों की प्राप्ति के लिए भारत में आते रहते हैं।
  7. पर्यटक, खिलाड़ी, कलाकार, संगीतज्ञ, नाटककार, राजनीतिज्ञ, व्यापारी आदि लोगों का एक देश से दूसरे देशों को आना-जाना बना रहता है तथा उनमें से कुछ स्थायी रूप से भी वहीं बस जाते हैं। | (viii) कुछ देशों; जैसे-जर्मनी, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि ने भारत के विभिन्न आर्थिक विकास कार्यक्रमों में सहयोग दिया है तथा वे अस्थायी रूप से यहाँ पर निवास कर रहे हैं। इस प्रकार सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारकों से अन्तर्राष्ट्रीय स्थानान्तरण दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है।

4. राजनीतिक कारक (Political Factors) – इस प्रकार का स्थानान्तरण निम्नलिखित चार प्रकार की क्रियाओं द्वारा होता है –

  1. आक्रमण एवं उसके परिणाम
  2. विजय
  3. उपनिवेशन तथा
  4. स्वतन्त्र स्थानान्तरण।

आक्रमण द्वारा मानव – वर्ग के स्थानान्तरण के उदाहरण सिकन्दर, महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी, बाबर, चंगेज खाँ, तैमूर आदि शासकों के समय में हुए हैं, जिन्होंने भारत पर आक्रमण किया तथा उनके साथ आये बहुत-से सैनिक भारत में बस गये थे।
जब अंग्रेज लोग भारत आये तो वे मात्र व्यापारी थे। इस कम्पनी ने धीरे-धीरे भारतीय राजाओं के आपसी झगड़ों का लाभ उठाकर भारत में अंग्रेजी राज्य की नींव डाल दी। धीरे-धीरे इन्होंने राजाओं एवं नवाबों को परास्त कर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। तब ब्रिटेन से बहुत-से लोग प्रशासन चलाने के लिए भारत में बस गये थे।

इसी प्रकार चीन ने मंचूरिया प्रदेश को जीतकर अपनी बढ़ती जनसंख्या को मंचूरिया में बसा दिया था। द्वितीय महायुद्ध से पूर्व जापान ने कोरिया एवं मंचूरिया पर अपना आधिपत्य जमाकर इनमें अपनी जनसंख्या बसा दी थी। उपनिवेश के द्वारा फ्रांसीसी एवं अंग्रेजों ने अफ्रीका महाद्वीप में नयी बस्तियों को बसाया था। इसी प्रकार उन लोगों ने इण्डोनेशिया में तथा स्पेनी एवं पुर्तगालियों ने 16वीं शताब्दी में दक्षिणी अमेरिका में अपने उपनिवेश बनाये थे। 18वीं एवं 19वीं शताब्दी में अफ्रीका से बहुत-से नीग्रो लोगों को पकड़कर जबरदस्ती दास बनाकर संयुक्त राज्य अमेरिका में मजदूरी करने के लिए भेजा गया था। स्वतन्त्र स्थानान्तरण में लोगों को प्रवास करने में अपनी छाँट बनी रहती है। यह आर्थिक लाभ की प्राप्ति तथा सम्पन्न जीवन व्यतीत करने के लिए किया जाता है।

क्या स्थानान्तरण से जनाधिक्य की समस्या का समाधान हो सकता है?
जनाधिक्य की समस्या के निराकरण के लिए प्रवास एक उपाय के रूप में सुझाया जाता है। जनाधिक्य के सम्बन्ध में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री माल्थस का यह कथन सत्य है कि ”जनसंख्या में ज्यामितीय दर से तथा उत्पादन में गणितीय दर से वृद्धि होती है। अतः जनाधिक्य की समस्या तब उत्पन्न होती है। जब किसी देश की जनसंख्या एवं उत्पादन में असन्तुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है; अर्थात् जनसंख्या की अपेक्षा उत्पादन कम होता है। विश्व में अनेक देश ऐसे हैं जहाँ पर जनसंख्या-वृद्धि आदर्श बिन्दु को पार कर गयी है। वास्तव में आदर्श जनसंख्या वह होती है जो उस देश के संसाधनों के साथ सन्तुलन बनाये रखती है।

जनसंख्या एवं संसाधनों में सन्तुलन बनाये रखने के लिए प्रवास या स्थानान्तरण आवश्यक हो जाता है। अतः कम संसाधन होने पर जनसंख्या का स्थानान्तरण किया जा सकता है। ऐसा देखने में आता है कि प्रवास आर्थिक आकर्षण के कारण होता है, जबकि उस स्थान पर पोषण शक्तियों का शोषण पूर्ण रूप से नहीं हुआ हो। ऐसी स्थिति में जनसंख्या प्रवास को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।

प्रवास द्वारा जनाधिक्य की समस्या का समाधान पूर्ण रूप से नहीं किया जा सकता । इसके लिए जनसंख्या के आदर्श बिन्दु की खोज करना नितान्त आवश्यक है। यदि आदर्श बिन्दु प्राप्त नहीं हुआ है तो देश की पोषण शक्ति के शोषण के लिए नवीनतम योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। स्थानान्तरण तो एक अस्थायी साधन है। इसे रोकने के लिए बहुत-से देशों की सरकारों ने कड़े प्रतिबन्ध, नियम ऍवं कानूनों को बना दिया है जिससे जनसंख्या का प्रवास तुरन्त न हो सके।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
जनसंख्या की द्रुत गति से वृद्धि की दो समस्याओं का उल्लेख कीजिए। (2010, 11, 14, 15)
उत्तर
जनसंख्या की द्रुत गति से वृद्धि की दो समस्याएँ निम्नलिखित हैं –

  1. खाद्य पदार्थों की समस्या – जिस गति से जनसंख्या की वृद्धि हुई है, उसी अनुपात में खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि नहीं हो पायी है। फलस्वरूप विश्व की आधी से अधिक जनसंख्या का जीवन-स्तर निम्न, कुपोषण और दरिद्रता से भरा हुआ है।
  2. बेरोजगारी एवं सामाजिक अव्यवस्था – जनसंख्या में द्रुत गति से वृद्धि के कारण सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा है, जिससे बेरोजगारी के साथ-ही-साथ समाज में असन्तोष भी बढ़ रहा है। कानून और प्रशासन की समस्या उत्पन्न हो गयी है। आर्थिक और सामाजिक अपराधों में वृद्धि हुई है तथा उग्रवाद प्रबल हुआ है। मदिरापान और जानलेवा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी बढ़ी है।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Population Problems and Their Solution

प्रश्न 2
टिप्पणी लिखिए-जनसंख्या का स्थानान्तरण।
या
जनसंख्या के अन्तर्राष्ट्रीय स्थानान्तरण के कारणों की विवेचना कीजिए। [2007]
उत्तर
जनसंख्या के एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में प्रवसन को जनसंख्या का स्थानान्तरण कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है –

  1. प्रवास अर्थात् मानव को एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना तथा
  2. आवास अर्थात् मानव को बाहर से किसी प्रदेश के अन्दर आना। किसी क्षेत्र से जनसंख्या का प्रवास निम्नलिखित कारणों से होता है –
    1. बाढ़, अकाल, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसी क्षेत्र की जनसंख्या अन्यत्र स्थानान्तरण करती है।
    2. प्राचीन काल में बड़े पैमाने पर हिमानीकरण होने पर भी जनसंख्या का स्थानान्तरण हुआ।
    3. जब किसी क्षेत्र में जीविकोपार्जन के साधनों की कमी हो जाती है तो वहाँ के लोग अन्य क्षेत्रों में प्रवास करते हैं।
    4. धार्मिक कारणों से भी मिशनरी लोग अन्य देशों में प्रवास करते हैं।
    5. किसी देश के विभाजन के फलस्वरूप भी जनसंख्या का स्थानान्तरण होता है।
    6. पर्यटक, खिलाड़ी, कलाकार, संगीतज्ञ आदि भी किसी दूसरे देश से आकर्षित होकर प्रवास करते हैं और वहीं बस जाते हैं।
    7. प्राचीन तथा मध्य युग में अनेक आक्रान्ताओं ने दूसरे देशों पर आक्रमण किये और वहीं बस गये।
    8. व्यापार के उद्देश्य से अंग्रेज, डच, फ्रांसीसी आदि लोगों ने एशियाई तथा अफ्रीकी देशों में प्रवास किया।

जनसंख्या का आवास भी अनेक कारणों से होता है, जिनमें मुख्य हैं –

  1. प्राकृतिक रूप से सुरक्षित स्थानों पर जनसंख्या का बसना।
  2. किसी क्षेत्र में उपलब्ध आर्थिक सुविधाओं का आकर्षण।
  3. धर्म-प्रचार के लिए किसी देश में स्थायी रूप से बस जाना।
  4. राजनीतिक कारणों से किसी देश में लोगों का शरण लेना।

उपर्युक्त प्रवास या आवास अनेक प्रकार के होते हैं –

  1. दीर्घकालिक और अल्पकालिक
  2. अन्तर्महाद्वीपीय, अन्तर्देशीय, अन्तर्राज्यीय तथा स्थानीय
  3. स्थायी और अस्थायी तथा
  4. बड़े पैमाने पर और छोटे पैमाने पर।

प्रश्न 3
जनाधिक्य के चार प्रभावों का वर्णन कीजिए। [2014]
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 के अन्तर्गत ‘जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम या प्रभाव शीर्षक देखें।

प्रश्न 4
तीव्र जनसंख्या वृद्धि की दो समस्याओं का वर्णन कीजिए। [2010, 12]
उत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 के अन्तर्गत ‘जनसंख्या वृद्धि की समस्याएँ’ शीर्षक देखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1
जनसंख्या के स्थानान्तरण को कौन-सी दो शक्तियाँ प्रभावित करती हैं?
उत्तर
जनसंख्या के स्थानान्तरण को प्रवासकारी एवं आवासकारी शक्तियाँ प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 2
जनसंख्या के स्थानान्तरण के किन्हीं दो कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर

  1. किसी देश के विभाजन के कारण जनसंख्या स्थानान्तर सर्वविदित है; जैसे कि भारतपाकिस्तान बनने पर हुआ था।
  2. प्राकृतिक आपदा, जैसे बाढ़ व अकाल में भी जनसंख्या स्थानान्तर कर जाता है।

प्रश्न 3
जनसंख्या का स्थानान्तरण किसे कहते हैं?
उत्तर
कठोर जलवायु, बाढ़, सूखा, जीवन-निर्वाह, सामाजिक या राजनीतिक कठिनाई के कारण पृथ्वी के विभिन्न भागों में एक प्रदेश से दूसरे स्थान को मानव वर्गों का प्रवसन होता रहा है। इसे ही जनसंख्या का स्थानान्तरण कहते हैं।

प्रश्न 4
किन राजनीतिक कारकों से स्थानान्तरण होता है?
उत्तर
निम्नलिखित चार क्रियाएँ स्थानान्तरण के राजनीतिक कारक हैं –

  1. आक्रमण एवं उसके परिणाम
  2. विजय
  3. उपनिवेश तथा
  4. स्वतन्त्र स्थानान्तरण।

बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1
स्थानीय स्थानान्तरण है –
(क) गाँवों से शहरों की ओर
(ख) शहरों से गाँवों की ओर
(ग) अन्तक्षेत्रीय प्रवसन
(घ) ये सभी
उत्तर
(घ) ये सभी।

प्रश्न 2
अन्तक्षेत्रीय स्थानान्तरण किसके बीच होता है?
(क) ग्रामीण क्षेत्र से नगर की ओर
(ख) नगर से उपनगर की ओर
(ग) नगर से महानगर की ओर
(घ) ये सभी
उत्तर
(घ) ये सभी

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प्रश्न 3
निम्नलिखित में से स्थानीय प्रवसन का प्रकार कौन-सा है –
(क) नगर से गाँव की ओर
(ख) अन्तक्षेत्रीय प्रवसन
(ग) गाँव से नगर की ओर
(घ) ये सभी
उत्तर
(घ) ये सभी।

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UP Board Solutions for Class 12 English Prose Chapter 7 The Heritage of India

UP Board Solutions for Class 12 English Prose Chapter 7 The Heritage of India are part of UP Board Solutions for Class 12 English. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 English Prose Chapter 7 The Heritage of India.

 

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject English Prose
Chapter Chapter 7
Chapter Name The Heritage of India
Number of Questions Solved 20
Category NCERT Solutions

UP Board Solutions for Class 12 English Prose Chapter 7 The Heritage of India

LESSON at a Glance

A.L. Basham, the author of this lesson, was deeply interested in Indian culture, its traditions and customs. He makes us realize that the ancient Hindu civilization, assimilating the best in different cultures, continues with its cultural tradition which will never be lost.

According to the author, Mahatma Gandhi developed the theme of social service as a religious duty, and the development still continues. The author believes that Gandhiji, though an epitome of Hindu tradition, was much influenced by Western ideas. His passionate love of the undeveloped and his antipathy to caste, were unorthodox in the extreme and owed more to European 19th century liberalism than anything Indian. This championing of women’s right is also the result of Western influence.

But there is no denying to the fact that Gandhi and his followers of the Indian National Congress have given new orientation and new life to Hindu culture, after centuries of stagnation. Indians of coming generations will not be unconvincing and self-conscious copies of Europeans, but will be men rooted in their traditions, and aware of continuity of their culture.

In the past, Hindu civilization has received, adapted and digested elements of many different cultures—Indo European, Mesopotamian, Iranian, Greek, Roman, Scythian, Turkish, Persian and Arab. With each new influence it has somewhat changed. Now it is well on the way to assimilating the culture of the West.

पाठ का हिन्दी अनुवाद

(1) Ram Mohan Roy ………………… successors.
राममोहन राय ने समाज-सुधार की जोरदार वकालत करके नये युग को सूत्रपात किया। विवेकानन्द ने इसे और अधिक राष्ट्रीय सुर में दोहरायो जब उन्होंने घोषित किया कि महान् माता (भारतमाता) की सेवा सर्वोच्च समाज-सेवा है। अन्य महान् भारतीयों ने भी, जिनमें मुख्य महात्मा गाँधी थे, समाज-सेवा के विषय को धार्मिक कर्तव्य के रूप में विकसित किया और यह विकास गाँधी जी के उत्तराधिकारियों के अधीन भी चल रहा है।

(2) Mahatma Gandhi was ………………… stagnatton.
बहुत से भारतीय भी और यूरेपियन भी महात्मा गाँधी को हिन्दी परम्परा के प्रतीक मानते थे। किन्तु यह एक झूठा निर्णय था, क्योंकि वे पाश्चात्य विचारों से बहुत प्रभावित थे। गाँधीजी अपनी प्राचीन संस्कृति के आधारभूत सिद्धान्तों में विश्वास करते थे। यद्यपि प्राचीन भारत में उनका दलितों के प्रति अत्यधिक प्यार और
जात-पाँत से अत्यधिक घृणा अनूठी थी फिर भी वे अत्यधिक रूढ़िवादी न थे और किसी भी भारतीय बात ‘ की अपेक्षा उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोप में उदारवाद के अधिक ऋणी थे। जैसा कि हम देख चुके हैं उनका
अहिंसा में विश्वास किसी भी प्रकार हिन्दुत्व की विशेषता नहीं थी। विद्रोह में उनसे पहले उनके पूर्वज, मराठा ब्राह्मण बी० जी० तिलक तथा गाँधीजी के कट्टर अनुयायी सुभाषचन्द्र बोस इस सम्बन्ध में कहीं अधिक

कट्टर थे। गाँधीजी की शान्तिवाद की नीति के लिए ईसा का व्याख्यान ‘सर्मन ऑन दी मॉउण्ट’ तथा टॉल्सटॉय की ओर देखना चाहिए। स्त्रियों के अधिकारों के लिए उनका समर्थन भी पाश्चात्य प्रभाव का ही परिणाम था। अपने सामाजिक सन्दर्भ में वे सदा रूढ़िवादी होने की अपेक्षा आधुनिक अधिक थे। यद्यपि उनके कुछ साथी उनके सीमित समाज-सुधार के कार्यक्रम को अत्यधिक धीमा मानते थे फिर भी हिन्दू विचार के समस्त बल को जाति तथा वर्ग की प्रणाली के स्थान पर एक प्रसिद्ध तथा समानता के आधार वाले सामाजिक ढाँचे की ओर ले जाने में उन्हें सफलता मिली। उन्नीसवीं शताब्दी के कम विख्यात सुधारक के कार्य को आगे बढ़ाकर गाँधीजी ने तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उनके अनुयायियों ने हिन्दू संस्कृति को जो शताब्दियों से निर्जीव पड़ी थी, नया जीवन प्रदान किया है।

(3) Today there are ………………… culture of the West.
आज ऐसे भारतीय बहुत कम हैं जिनका धार्मिक विश्वास चाहे कुछ भी हो किन्तु जो अपनी प्राचीन संस्कृति को गर्व से न देखते हों और ऐसे भारतीय भी बहुत कम हैं जो उसकी दुर्बलताओं को बलिदान करने को तैयार न हों ताकि भारत उन्नति और विकास कर सके। राजनीतिक एवं आर्थिक दोनों क्षेत्रों में भारत कठिन समस्याओं का सामना कर रहा है और कोई भी व्यक्ति निश्चित रूप से उसके भविष्य के विषय में भविष्यवाणी नहीं कर सकता। किन्तु निश्चित रूप से यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि भारत का भविष्य चाहे कुछ भी हो किन्तु भावी पीढ़ियों के भारतीय यूरोप के लोगों की बिना सोचे-समझे नकल करने वाले नहीं होंगे, किन्तु वे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अपनी परम्पराओं में दृढ़ हों तथा अपनी संस्कृति की निरन्तरता को पहचानें। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के केवल सात वर्ष बाद ही राष्ट्रीय आत्म-ग्लानि और सांस्कृतिक वैभव के लिए उन्माद की अति समाप्त हो रही है। हमें विश्वास है कि हिन्दू सभ्यता समन्वय के अत्यधिक आश्चर्यजनक कार्य को करने के योग्य है। भूतकाल में इसने बहुत-सी भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के तत्त्वों को स्वीकार करके अपनाया है और अपने में मिलाया है; जैसे—इण्डो-यूरोपियन, मेसोपोटामिया, ईरान, यूनान, रोम, सीरिया, तुर्की, फारस तथा अरब की संस्कृति। प्रत्येक नये प्रभाव के साथ यह कुछ बदली है। अब यह पाश्चात्य संस्कृति को मानते हुए ठीक रास्ते पर चल रही है।

(4) Hindu civilization ………………… ways of the West.
हमें विश्वास है कि हिन्दू सभ्यता अपनी निरन्तरता को बनाए रखेगी। भगवद्गीता कर्मशील व्यक्तियों को । प्रेरणा देना बन्द नहीं करेगी और उपनिषद् विचारशील व्यक्तियों को। भारतीय जीवन की सुन्दरता और भलाई बनी रहेग्म चाहे यह पश्चिम की मेहनत बचाने वाले उपायों से कितनी ही प्रभाविते क्यों न हो। लोग महाभारत और रामायण के वीरों की कहानियों से प्यार करते रहेंगे तथा दुष्यन्त, शकुन्तला, पुरुरवा तथा उर्वशी के प्रेम को भी। वह शान्त और सज्जनता से पूर्ण आनन्द जो प्रत्येक काल में भारतीय जीवन में व्याप्त रहा और जहाँ दमन, बीमारी और गरीबी इस पर प्रभाव नहीं डाल सके हैं, वह पश्चिम के उत्तेजना से भरपूर जीवन के ढंगों के सामने निश्चित रूप से गायब नहीं होगा।

(5) Much that was ………………… never be lost. [2018]
प्राचीन भारतीय संस्कृति में जो बेकार था उसमें से बहुत कुछ पहले ही नष्ट हो चुका है। वैदिक युग की विनाशकारी और असभ्य सार्वजनिक बलि बहुत पहले ही भुला दी गई है फिर भी कुछ वर्गों में पशु-बलि अभी जारी है। विधवाओं को अपने पति की चिताओं पर भस्म होना बन्द हो चुका है। कानून के अनुसार लड़कियों का बचपन में विवाह नहीं हो सकता। पूरे भारतवर्ष में बसों और रेलगाड़ियों में ब्राह्मण अत्यधिक शुद्धता का विचार किये बिना नीची जाति के लोगों से मिलजुल सकते हैं और मन्दिर कानूनन सभी के लिए खुले हैं।
जाति-भेद अदृश्य होता जा रहा है। यह प्रक्रिया बहुत दिनों पहले आरम्भ हो गई थी किन्तु अब इसकी रफ्तार इतनी तेज है कि जाति को अत्यधिक आपत्तिजनक स्वरूप लगभग एक पीढ़ी में ही समाप्त हो जाएगा। पुरानी प्रणाली आज की परिस्थितियों के अनुकूल हो रही है। वास्तव में पूरे भारत का रूप बदल रहा है, किन्तु सांस्कृतिक परम्परा जारी है और यह कभी भी समाप्त नहीं होगी।

Understanding the Text

Explanations
Explain one of the following passages with reference to the context :
(1) Ram Mohan Roy had ………………… Gandhiji ‘s successors. [2010, 18]
Reference : These lines have been taken from the lesson ‘The Heritage of India’written by Sh.A.L. Basham. [ N.B. : The above reference will be used for all explanations of this lesson.)

Context : In this lesson the author describes his experiences about Indian culture, its traditions and customs which he felt during his short stay in India. He makes us realize that the ancient Hindu civilization assimilating the best in different cultures continues with its cultural tradition which will never be lost.

Explanation : In this opening paragraph the author tells us that Ram Mohan Roy expressed the need of social reform and started a new age. Then Vivekanand also repeated it in another way saying that the service of Bharat Mata is the greatest social service. Other Indians also, the main among whom is—Mahatma Gandhi developed this topic as the religious duty. The successors of Gandhiji also continued this development,

(2) Mahatma Gandhi ………………… to anything Indian. [2010]
Context : In this lesson the author describes his experiences about Indian culture, its traditions and customs which he felt during his short stay in India. He makes us realize that the ancient Hindu civilization assimilating the best in different cultures continues with its cultural tradition which will never be lost.

Explanation : In these lines the author says that many Indians as well as foreigners regard Mahatma Gandhi as the epitome of Hindu tradition. But the writer does not agree with this statement because Gandhiji was much influenced by western ideas. His passionate love of the under developed and his antipathy to caste, were unorthodux in the extreme and owed more to European 19th century liberalism than anything Indian.

(3) His championing ………………… class and caste. [2009]
Context: Here the author says that there was a great influence of West on Gandhiji. Gandhiji was not a man of conservative views. He realised the pitiable condition of down-trodden and low caste people. So, he worked hard for them.

Explanation : Gandhiji was not an orthodox follower of old theories. In social field he always preferred a change in old theories and customs. Some of his followers thought that the speed of Gandhiji was very slow. But this was not true. Gandhiji established a new society based on equality. He abolished the class and caste system from the society. Thus, he gave a new shape and new life to Hindu culture.

(4) Today there are ………………… with any certainty. [2013]
Context : Here the author tells us about the greatness of Indian culture and traditions. For many centuries–there had been no change in it. But in 20th century Gandhiji brought many changes in it and moulded it according to needs of modern society.

Explanation : In these lines the author says that Indian culture is very old and great. Most of Indian people are proud of their old culture without any distinction of caste or creed. They are also ready to sacrifice the weaknesses of their cult They know well that without removing the weaknesses and shortcomings of Indian culture, country cannot make progress. So, the outlook of every Indian is pragmatic. At present India is facing many difficult political and economical problems. So it can’t be forecasted what would be the future of India.

(5) Politically and ………………… feat of synthesis. [2009, 14, 16, 17]
Context : Here the author tells us that most of the Indian people are proud of their culture. Yet they are ready to sacrifice its shortcomings so that India may develop and progress.

Explanation : Here the author points out that in the present time in India there are so many political and economical problems. They seem to be very difficult to be solved. So, no one can forecast about the future of India. The author says that in ancient time the people were blind followers of the West. But the coming generations will not copy them blindly. They will use their own reason in copying any change in their culture, it is also sure that they will retain the continuity of their culture. After independence, the achievements of India are that the factors of national selfcondemnation and unreasoning enthusiasm for the glory of our country are disappearing.

(6) Already, after ………………… feat of synthesis. [2018]
Context : Here the author says that every Indian concerns with the progress of India. In ancient time they were blind followers of the West. But the people of coming generations do not copy them blindly. They use their own reason.

Explanation : In these lines the author says that only seven years have passed when we ndence. But a great change in the outlook and mentality of our people is noted. We see that the factors of national self-condemnation and unreasoning enthusiasm for the glory of our own country are disappearing. Now the people of India are busy in combining the different people and different elements although this is a very difficult work.

(7) Hindu civilization ………………… of the West. [2009, 13, 18]
Or
The quiet and ………………… of the West. [2015]
Context : Here the author tells us about the continuity of Hindu civilization. Our religious books have always inspired us and will go on inspiring in future also.

Explanation : In these lines the author says that Hindu civilization will never cease. But it will go on as usual. The Bhagavad Gita will always teach us to work and Upanishads to think deeply. It is possible that the people of India may follow the labour saving devices of the West but they will not forget the ideals of religious books e.g., the Mahabharata, the Ramayana etc. Calm and gentle happiness has ever been the characteristic of Indian life and people will never forget it. Western hectic ways of hurry and worry will be away from us.

(8) Much that was ………………… generation or so. [2009, 18]
Context : The author says that there are so many old customs in the society, but there is no existence of these customs now. This is only due to the change of time.

Explanation : The author says that time is changing rapidly. The cruel customs of the Vedic period do not attract a man of modern age. Now Sati Pratha is not in existence. Now widows are not burnt with the dead bodies of their husband. There is no childhood marriage system, because this system is illegal now. In buses, trains and aeroplanes Brahman and Thakur travel with lowest castes. They do not feel ashamed. Now all castes are equal according to law. So the conclusion of author is that the Indian civilization will never perish. Hindu culture is not accepting distinction between persons. Now Indian society is free from untouchability system. There is no high or low caste in Indian society. The process of rejection of distinction between persons began before sometime, but now this process is in high speed. The author’s hope is that after present generation this useless and dangerous evil of caste system will vanish from the society.

(9) Caste is vanishing ………………… never be lost. [2009, 10, 17, 18]
Context : Here the author says that in 20th century a tremendous change has been brought in Indian culture. The main changes are abolition of animal sacrifice, caste system, burning of widows, child marriage, untouchability, etc.

Explanation : To conclude his views the author says that caste system has been vanishing at a very high speed and very soon the points on which the people disagree will be totally abolished. A great change in family system also is seen and people are moulding it according to the present condition. Although there are changes in every field yet the cultural tradition will continue. Thus, we can say that many social evils have been abolished in 20th century for the good of the society.

Short Answer Type Questions

Answer one of the following questions in not more than 30 words:
Question 1.
What did Ram Mohan Roy advocate ? [2009, 18]
(राम मोहन राय ने क्या वकालत की?)
Answer :
Ram Mohan Roy advocated social reform.
(राम मोहन राय ने समाज-सुधार की वकालत की।)

Question 2.
What, according to Vivekananda, was the highest form of service of the Great Mother ? [2016]
(विवेकानन्द के अनुसार भारत माँ की सबसे बड़ी सेवा क्या थी?)
Answer :
According to Vivekananda the highest form of service of the Great Mother was social service.
(विवेकानन्द के अनुसार भारत माँ की सबसे बड़ी सेवा समाज-सेवा थी।)

Question 3.
What contribution did Ram Mohan Roy and Swami Vivekanand make to the Indian society ?
(राम मोहन राय तथा स्वामी विवेकानन्द को भारतीय समाज के लिए क्या योगदान रहा?)
Answer :
Ram Mohan Roy and Swami Vivekanand both were ardent social-servants and worked for social upliftment throughout their life. While Ram Mohan Roy advocated social reform, Swami Vivekanand believed the greatest service to the country was social service.
(राजा राम मोहन राय तथा स्वामी विवेकानन्द दोनों ही समाज सेवा के लिए तत्पर रहते थे और उन्होंने आजीवन समाज की उन्नति के लिए कार्य किए। जहाँ राजा मोहन राय समाज-सुधार की वकालत करते थे तो स्वामी विवेकानन्द समाज-सुधार को ही देश की महानतम सेवा मानते थे।)

Question 4.
What do you understand by ‘social service as a religious duty’ ?
(‘समाज सेवा धार्मिक कर्त्तव्य है’ से आप क्या समझते हैं?)
Answer :
“Social service is a religious duty’ means that we should serve all human beings without any distinction of caste, creed and colour.
(‘समाज-सेवा धार्मिक कर्तव्यं है इसका अर्थ यह है कि हम सभी मनुष्यों की सेवा बिना जाति, धर्म या रंग के भेदभाव से करें।)

Question 5.
“Mahatma Gandhi was looked on as the epitome of Hindu tradition.” Why does the author call it a false statement ?
(“महात्मा गाँधी को हिन्दू परम्परा के प्रतीक के रूप में देखा जाता था।” लेखक इसे झूठा वक्तव्य क्यों कहता है?)
Answer :
Mahatma Gandhi was greatly influenced by western ideas. So the author does not agree with the statement that Mahatma Gandhi was looked on as the epitome of Hindu tradition.
(‘महात्मा गाँधी पाश्चात्य विचारों से बहुत प्रभावित थे। इसलिए लेखक इसे वक्तव्य से सहमत नहीं है कि गाँधीजी को हिन्दू परम्परा का प्रतीक माना जाता था।)

Question 6.
Which three great Indians who tool
ise of social service have been mentioned here ?
(कौन-से तीन महान् भारतीयों का उल्लेख यहाँ किया गया है जिन्होंने समाज सेवा के कार्य को अपनाया?)
Answer :
The three great Indians who took up the cause of social service are :
1. Ram Mohan Roy,
2. Vivekanand,
3. Mahatma Gandhi.
(तीन महान् भारतीय जिन्होंने समाज सेवा के कार्य को अपनाया; वे हैं :
1. राम मोहन राय,
2. विवेकानन्द,
3. महात्मा गाँधी।)

Question 7.
In what ways was Gandhiji influenced by the European 19th century liberalism ?
(किस प्रकार गाँधीजी उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोप के उदारवाद से प्रभावित हुए?)
Answer :
Gandhiji was influenced by the European 19th century liberalism in his love for the poor and his dislike for caste system.
(गाँधीजी उन्नीसवीं शताब्दी के उदारवाद से गरीबों के प्रति प्रेम और जाति-प्रथा के प्रति घृणा से प्रभावित हुए।)

Question 8.
In what ways was Gandhian philosophy moulded ?
(किस प्रकार गाँधीजी की विचारधारा बदली ?)
Answer :
European 19th century liberalism, discourse of Jesus Christ and Tolstoy moulded Gandhian philosophy. He began to love the poor and disliked caste system. (यूरोप के उन्नीसवीं शताब्दी के उदारवाद तथा ईसा मसीह एवं टॉलस्टॉय के उपदेश ने गाँधीजी की विचारधारा को बदल दिया। वे गरीबों से प्रेम करने लगे तथा जाति-प्रथा से उन्हें घृणा हो गई।)

Question 9.
What were the main sources of Gandhiji’s philosophy of life ?
(गाँधीजी के जीवन की विचारधारा के मुख्य स्रोत कौन-कौन से थे ?)
Answer :
The main sources of Gandhiji’s philosophy of life were Christ’s Sermon on the Mount and Tolstoy, the great Russian writer.
(गाँधीजी की जीवन की विचारधारा के मुख्य स्रोत ईसा मसीह के पहाड़ी पर दिए उपदेश तथा रूस का महान् लेखक टॉलस्टॉय थे।)

Question 10.
“Gandhiji was always rather an innovator than a conservative.” How?
(“गाँधीजी रूढ़िवादी होने की अपेक्षा नई बातों के चलाने वाले अधिक थे।” कैसे?).
Answer :
Gandhiji did not believe in caste system and untouchability. He gave a new shape on the basis of equality. So, he was an innovator rather than a conservative. (गाँधीजी जाति-प्रथा में या अस्पृश्यता में विश्वास नहीं करते थे। उन्होंने समानता के आधार पर समाज को एक नया रूप दिया। इसलिए वे रूढ़िवादी न होकर नये परिवर्तनों के समर्थक थे।)

Question 11.
What is the contribution of Gandhiji to Hindu culture ?
(हिन्दू संस्कृति को गाँधीजी का क्या योगदान है ?)
Answer :Gandhiji opposed the caste system. He helped the oppressed and down-trodden. He fought for the women’s rights and equality. He gave a new direction to Hindu culture.
(गाँधीजी ने जाति-प्रथा का विरोध किया। उन्होंने दु:खी एवं दलित लोगों की सहायता की। वे स्त्रियों के अधिकारों एवं समानता के लिए लड़े। उन्होंने हिन्दू संस्कृति को एक नई दिशा दी।)

Question 12.
What significant changes, according to the author, have taken place in India since the attainment of freedom?
(लेखक के अनुसार स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद से भारत में क्या-क्या महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं?).
Answer :
According to the author many significant changes have taken place in India since freedom. Animal sacrifices, burning of widows on their husband’s pyres and girls’ marriage in childhood have almost been stopped. Untouchability also has almost been abolished. Indians have stopped copying European traditions blindly.
(लेखक के अनुसार स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद से भारत में अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। पशु-बलि, विधवाओं का अपने पति की चिता पर जलना और लड़कियों का बाल-विवाह लगभग बन्द हो गया है। छुआछूत भी लगभग समाप्त हो गई है। भारतीयों ने बिना सोचे-समझे यूरोप की परम्पराओं की नकल करना छोड़ दिया है।)

Question 13.
What does the author predict about the Indian way of life ?
(भारतीय जीवन-पद्धति के विषय में लेखक की भविष्यवाणी क्या है?)
Or
What kind of men will the Indians of coming generation be according to the writer ?
(लेखक के अनुसार आने वाली पीढ़ी के भारतीय किस प्रकार के व्यक्ति होंगे?)
Or
What is the future of Indian culture according to the writer ? [2011]
(लेखक के अनुसार भारतीय संस्कृति का भविष्य क्या है?)
Answer :
The author predicts about the Indian way of life that future generation will not be following Europeans blindly. They will root out the evils of their traditions but will be aware of the continuity of their culture.
(लेखक भारतीय जीवन पद्धति के विषय में भविष्यवाणी करता है कि भावी पीढ़ियाँ यूरोप का अनुसरण बिना सोचे-समझे नहीं करेंगी। वे अपनी परम्पराओं की बुराइयों को उखाड़ फेंकेंगे और अपनी संस्कृति की निरन्तरता के प्रति सचेत रहेंगे।)

Question 14.
How will Hindu civilization retain its continuity ? [2009]
(हिन्दू सभ्यता अपनी निरन्तरता को कैसे बनाए रखेगी ?)
Or
What does A. L. Basham mean when he says that ‘Hindu civilization will retain its continuity’?
(‘हिन्दू सभ्यता अपनी निरन्तरता को सुरक्षित रखेगी इस कथन से A.L. Basham का क्या तात्पर्य है?)
Answer :
Hindu civilization will retain its continuity in the following way. The Bhagwad. Gita and Upanishads would inspire the man of actions and thoughts. People will love the tales of the heroes of the Mahabharata and the Ramayana. Western life of hurry and worry will not touch us. The quiet and gentle happiness, the charm and glory of Indian way of life will continue.
(भारतीय सभ्यता अपनी निरन्तरता को निम्न ढंग से बनाये रखेगी। भगवद्गीता और उपनिषद् मनुष्य के कार्य और विचारों को प्रेरणा देंगे। लोग महाभारत तथा रामायण के वीरों की कहानियों से प्रेम करेंगे। शोर-शराबे. व चिन्ता का पाश्चात्य जीवन हमारा स्पर्श भी नहीं कर सकेगा। शान्त एवं सौम्य आनन्द तथा भारतीय जीवन-पद्धति की सुन्दरता एवं वैभव निरन्तर रहेगा।)

Question 15.
What contrast does the author see between the Indian way of life and that of the West ?
(लेखक भारतीय जीवन-पद्धति एवं पाश्चात्य जीवन-पद्धति में क्या अन्तर बताता है?)
Or
What, according to the writer, is the difference between the Indian and Western way of life? .
(लेखक के अनुसार भारतीय तथा पाश्चात्य जीवन पद्धति में क्या अन्तर है ?)
Answer :
According to the author Indian way of life is full of quiet and gentle happiness while the Western way of life is of hurry, worry and mechanization.
(लेखक के अनुसार भारतीय जीवन पद्धति शान्त एवं सौम्य आनन्द से भरी हुई है, जबकि पाश्चात्य जीवन-पद्धति जल्दबाजी, चिन्ताओं और मशीनीकरण से भरी हुई है।)

Question 16.
Which useless customs in ancient Indian culture have been discarded ?
(प्राचीन भारतीय संस्कृति के कौन-कौन से व्यर्थ के रीति-रिवाज समाप्त हो चुके हैं?)
Answer :
Useless customs in ancient Indian culture e.g., animal sacrifice, burning of widow, child marriage, untouchability, etc., have been discarded.
(भारतीय संस्कृति के व्यर्थ के रीति-रिवाज; जैसे-पशु-बलि, विधवाओं का आत्मदाह, बाल विवाह, छुआछूत आदि समाप्त हो गए हैं।)

Question 17.
What evidence does the author give to prove that Indian culture has changed a lot ? [2011]
(यह सिद्ध करने के लिए कि भारतीय संस्कृति बहुत बदल गई है, लेखक क्या प्रमाण देता है?)
Answer :
The author has given many evidences to prove that Indian culture has changed a lot. For untouchability he says that now in buses and trains even the great brahmins rub their shoulders with low caste people. Temples and public wells are open to all. Many evils, e.g., animal sacrifice, widow’s burning, child marriage, etc have been abolished.

(लेखक यह सिद्ध करने के लिए कि भारतीय संस्कृति बहुत बदल गई है, अनेक प्रमाण देता है; जैसे-छुआछूत के विषय में वह कहता है कि अब महान् ब्राह्मण भी निम्न जाति के लोगों से सटकर बसों और रेलगाड़ियों में यात्रा करते हैं। मन्दिर तथा सार्वजनिक कुएँ सभी के लिए खुले हैं। बहुत-सी बुराइयाँ; जैसे-पशु-बलि, विधवाओं का आत्मदाह, बाल-विवाह आदि समाप्त हो गए हैं।)

Question 18.
What does the heritage of India consist of ? [2017]
(भारत की धरोहर क्या है?)
Answer :
The heritage of India consists of its ancient culture and traditions, its glorious past, its holy books and literature and its peaceful and gentle way of living.

(भारत की धरोहर में प्राचीन संस्कृति एवं परम्पराएँ, इसका शानदार भूतकाल, इसकी धार्मिक पुस्तकें और साहित्य तथा इसकी शान्त एवं सौम्य जीवन-पद्धति शामिल हैं।)

Question 19.
What changes have taken place in Indian caste system ?
(भारतीय जाति-प्रथा में कौन-कौन से परिवर्तन हुए हैं ?)
Or
How is the old caste system perishing ? Give examples.
(पुरानी जाति-प्रथा कैसे समाप्त हो रही है ? उदाहरण दीजिए।)
Answer :
The old caste system is vanishing rapidly, Brahmins rub shoulders with lowest castes. Temples are open to all.
(पुरानी जाति-प्रथा तेजी से समाप्त हो रही है। ब्राह्मण निम्न जाति के लोगों से कन्धे से कन्धा मिलाकर चलते हैं। मन्दिर सभी के लिए खोल दिए गए हैं।)

Question 20.
What change in the old family system is taking place ?
(पुरानी परिवार प्रथा में क्या परिवर्तन हो रहा है ?)
Answer :
The old family system is moulding itself to present day conditions.
(पुरानी परिवार प्रथा स्वयं को वर्तमान स्थितियों के अनुसार ढाल रही है।)

Question 21.
What is unique about Indian culture ? [2013, 14, 17, 18]
(भारतीय संस्कृति के विषय में अनूठी क्या बात है ?)
Answer :
Indian culture has received, adapted and digested elements of different cultures but itself remained unchanged.
(भारतीय संस्कृति ने भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के तत्त्वों को स्वीकार किया है और अपने में मिलाया है, किन्तु स्वयं अपरिवर्तनीय रही है।)

Vocabulary

Choose the most appropriate word or phrase that best completes the sentence :
1. In his social context, he (Gandhiji) was always rather an ………………… than a conservative.
(a) innovator
(b) technician
(c) inventor
(d) discoverer

2. There are few Indians, whatever their creed, who do not ………………… with pride on their ancient culture. [2015]
(a) look upon
(b) look after
(c) look into
(d) look back

3. Politically and economically India ………………… many problems.
(a) forces
(b) focuses
(c) faces
(d) fences

4. We believe that Hindu Civilization is in the act of performing its most spectacular feat of …………………
(a) unity
(b) diversity
(c) synthesis
(d) analysis

5. The Bhagvad Gita will not cease to inspire men of …………………, and the Upanishads, men of.
(a) religion, reason
(b) reason, religion
(c) action, thought
(d) thought, action

6. Widows have long ………………… to be burnt on their husband’s pyres. [2013, 15, 17, 18]
(a) ceased
(b) continued
(c) compelled
(d) been anxious

7. In buses and trains all over India, Brahmans rub shoulders with the lowest castes without consciousness of grave …………………
(a) pollution
(b) dirtiness
(c) sin
(d) impurity

8. The old family system is ………………… itself to present day conditions. [2009, 11]
(a) moulding
(b) making
(c) adapting
(d) adopting

9. ………………… the whole face of India is altering, but the cultural tradition continues and it will never be lost.
(a) Really
(b) In reality
(c) In fact
(d) Consequently

10. Subhash Chandra Bose was one of the greatest of our ………………… leaders.
(a) social
(b) political
(c) religious
(d) nationalist

11. Gandhiji believed in the ………………… of ancient culture. [2017]
(a) sorrows
(b) materialism
(c) utilitarianism
(d) fundamentals

12. The cultural tradition of India will ………………… be lost. [2010, 17]
(a) ever
(b) once
(c) always
(d) never

13. Mahatma Gandhi’s passionate love of the under dog and his ………………… to caste, were unorthodox in the extreme. [2011, 14]
(a) sympathy
(b) empathy
(c) antipathy
(d) antimony

14. Mahatma Gandhi and his followers have given a new ………………… and new life to Hindu culture, after centuries of stagnation. [2011]
(a) presentation
(b) orientation
(c) intimation
(d) representation

15. Much that was ………………… in ancient Indian culture has already perished. [2012, 17, 18]
(a) violent
(b) religious
(c) unique
(d) useless

16. Hindu civilization will, we believe ………………… its continuity. [2014]
(a) loss
(b) maintain
(c) retain
(d) destroy

17. Hindu civilization will not vanish before the more ………………… ways of the West. [2015, 17]
(a) tactic
(b) hectic
(c) static
(d) erratic

18. The ‘Upanishads’ will not ………………… to inspire the men of thought. [2015]
(a) cease
(b) crease
(c) breeze
(d) grease

Answers :
1. (a), 2. (d), 3. (c), 4. (c), 5. (c), 6. (a), 7. (a), 8. (c), 9.(c), 10. (d), 11. (d), 12. (a), 13. (c), 14. (b), 15. (d), 16. (c), 17. (b), 18. (a).

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UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो are part of UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो.

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject Samanya Hindi
Chapter Chapter 3
Chapter Name काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो
Number of Questions 120
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi काव्य-साहित्यका विकास बहुविकल्पीय प्रश्न : दो

बहुविकल्पीय प्रश्न : दो

[ ध्यान दें: नीचे दिये गये बहुविकल्पीय प्रश्नों के विकल्पों में सामान्य से अधिक काले छपे विकल्प को उचित विकल्प समझे।]
उचित विकल्प का चयन करें-

(1) ‘झरना’ काव्य-ग्रन्थ के रचयिता हैं [2010, 13]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(घ) महादेवी वर्मा

(2) ‘श्रीकृष्णगीतावली’, ‘विनयपत्रिका’ और ‘कवितावली’ के रचयिता हैं- [2015]
(क) तुलसीदास
(ख) सूरदास
(ग) भूषण
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(3) ‘द्वापर’ के रचयिता हैं-
(क) महादेवी वर्मा
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) स० ही० वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

(4) कौन-सी रचना भूषण की नहीं है ? [2013]
(क) शिवी बावनी
(ख) छत्रसाल दशक
(ग) शिवराज भूषण
(घ) रामचन्द्रिका

(5) सुमित्रानन्दन पन्त की रचना नहीं है-
(क) युगाधार
(ख) युगान्त
(ग) लोकायतन
(घ) वीणा

(6) अज्ञेय की रचना नहीं है–
(क) हरी घास पर क्षण भर
(ख) सुनहले शैवाल
(ग) आँगन के पार-द्वार
(घ) दूध-बताशी

(7) कौन-सी रचना भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की नहीं है ?
(क) प्रेम-फुलवारी
(ख) प्रेम-प्रलाप
(ग) प्रिय-प्रवास
(घ) प्रेम-सरोवर

(8) कौन-सी रचना महादेवी वर्मा की नहीं है ?
(क) सान्ध्यगीत
(ख) यामा
(ग) उर्वशी
(घ) नीरजा

(9) कौन-सी रचना सूरदास की नहीं है ?
(क) सूरसागर
(ख) सबद
(ग) सूरसारावली
(घ) साहित्य-लहरी

(10) कौन-सी रचना मैथिलीशरण गुप्त की नहीं है ?
(क) यशोधरा
(ख) पंचवटी
(ग) रसकलश
(घ) भारत-भारती

(11) धर्मवीर भारती ने लिखा है–
(क) अणिमा
(ख) अपरा
(ग) अन्धा-युग
(घ) अर्चना

(12) सुमित्रानन्दन पन्त की रचना नहीं है–
(क) परिमल
(ख) पल्लव
(ग) रश्मिबन्ध
(घ) स्वर्णधूलि

(13) ‘बहुत रात गये’ किस कवि का संकलन है ?
(क) नरेन्द्र शर्मा
(ख) भवानी प्रसाद मिश्र
(ग) गजानन माधव मुक्तिबोध’
(घ) गिरिजाकुमार माथुर

(14) ‘साहित्य-लहरी’ के रचनाकार हैं [2011]
(क) तुलसीदास
(ख) कबीरदास
(ग) सूरदास
(घ) मीरा

(15) कला और बूढ़ा चाँद’ के रचनाकार हैं-
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) महादेवी वर्मा

(16) ‘रस-विलास’ के रचनाकार हैं
(क) बिहारी
(ख) पद्माकर
(ग) आचार्य चिन्तामणि
(घ) सेनापति

(17) ‘पार्वतीमंगल’ के रचयिता कौन हैं ?
(क) सूर
(ख) भूषण
(ग) तुलसी
(घ) रत्नाकर

(18) भूषण की रचना है
(क) रामचन्द्रिका
(ख) शिवा शौर्य
(ग) गीतावली
(घ) प्रेम सरोवर

(19) ‘कुरुक्षेत्र’ के रचयिता हैं
(क) अज्ञेय
(ख) प्रसाद
(ग) दिनकर
(घ) रत्नाकर

(20) मैथिलीशरण गुप्त की रचना है-
(क) सिद्धराज
(ख) नीरजा
(ग) उर्वशी
(घ) पारिजात

(21) ‘आँगन के पार द्वार’ के रचयिता हैं [2018]
(क) प्रसाद
(ख) रत्नाकर
(ग) अज्ञेय
(घ) दिनकर

(22) ‘अज्ञेय’ को ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्राप्त हुआ [2016]
(क) कितनी नावों में कितनी बार’ पर
(ख) ‘अरी ओ करुणा प्रभामय’ पर
(ग) ‘आँगन के पार द्वार पर।
(घ) ऐसा कोई घर आपने देखा है पर

(23) सुमित्रानन्दन पन्त को ज्ञानपीठ पुरस्कार उनकी रचना पर मिला था- [2015, 18]
(क) लोकायतन
(ख) युगान्त
(ग) कला और बूढ़ा चाँद
(घ) चिदम्बरा

(24) ‘भारत-भारती’ के कवि हैं [2012, 14]
(क) रामधारीसिंह ‘दिनकर’
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा

(25) महाकवि भूषण की वीर रस प्रधान रचना है [2011]
(क) चिदम्बरा
(ख) दीपशिखा
(ग) शिवा बावनी
(घ) कीर्तिलता

(26) ‘रामचन्द्रिका’ के रचयिता हैं [2012, 14]
(क) तुलसीदास
(ख) केशवदास
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) जयशंकर प्रसाद

(27) सुमित्रानन्दन पन्त की रचना है– [2010]
(क) दोहावली
(ख) झरना
(ग) जूही की कली
(घ) पल्लव

(28) ‘उद्धवशतक’ के कवि का नाम है– [2011]
(क) सूरदास
(ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(ग) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’
(घ) मैथिलीशरण गुप्त

(29) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना है [2012]
(क) उर्वशी
(ख) गुंजन
(ग) आँगन के पार द्वार
(घ) झरना

(30) ‘ग्राम्या’ के रचयिता हैं
(क) स० ही० वा० अज्ञेय
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

(31) महादेवी वर्मा की रचना है [2010]
(क) रसवन्ती
(ख) सुनहले शैवाल
(ग) भस्मांकुर
(घ) यामा

(32) ‘यामा’ रचना है [2010, 16]
(क) “अज्ञेय’ की
(ख) ‘दिनकर’ की
(ग) महादेवी वर्मा की
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त की

(33) ‘श्रावकाचार’ के रचयिता हैं
(क) देवसेन
(ख) मुनि जिनविजय
(ग) विजयसेनसूरि
(घ) जिनधर्मसूरि

(34) निम्नलिखित में कौन-सी अज्ञेय की रचना नहीं है ?
(क) पूर्वा,
(ख) बावरा अहेरी
(ग) शैवाल
(घ) पल्लव

(35) ‘तुलसीदास’ के रचयिता हैं-
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) गोस्वामी तुलसीदास
(ग) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’

(36) ‘भरतेश्वर बाहुबली रास’ के कवि का नाम है–
(क) दलपत विजय
(ख) मुनि जिनविजय
(ग) देवसेन
(घ) कुक्कुरिया

(37) ‘भक्तमाल’ के रचयिता हैं
(क) कुम्भनदास
(ख) नाभादास
(ग) नन्ददास
(घ) सुन्दरदास

(38) ‘कितनी नावों में कितनी बार’ रचना के कवि हैं [2015]
(क) सुमित्रानन्दन पन्त
(ख) स० ही० वा० ‘अज्ञेय’
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(घ) धर्मवीर भारती

(39) निम्नलिखित में कौन-सा कवि राष्ट्रीय काव्यधारा का नहीं है ?
(क) दिनकर
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) अज्ञेय

(40) जयशंकर प्रसाद की रचना है-
(क) युगवाणी
(ख) अनामिका
(ग) लहर
(घ) साकेत

(41) निम्नलिखित में कौन प्रगतिवादी कवि नहीं हैं ?
(क) नागार्जुन
(ख) त्रिलोचन
(ग) केदारनाथ अग्रवाल
(घ) नेमिचन्द जैन

(42) ‘जयन्द्र प्रकाश’ किसकी रचना है ?
(क) दरबरदायी
(ख) नरपति नाल्ह
(ग) भट्ट केदार
(घ) विद्यापति

(43) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ रीतिकाल का है ?
(क) साकेत
(ख) उद्धवशतक
(ग) रामचरितमानस
(घ) बिहारी सतसई

(44) निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रन्थ भक्तिकाल का है ?
(क) पृथ्वीराज रासो
(ख) साकेत
(ग) कामायनी
(घ) विनयपत्रिका

(45) ‘आँसू’ की रचना किस कवि ने की ? (2010, 16)
(क) बिहारी
(ख) नरपति नाल्ह
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) अज्ञेय

(46) निम्नलिखित में से रीतिकालीन कवि कौन-सा है ? [2016]
(क) मीराबाई
(ख) रसखान
(ग) घनानन्द
(घ) मैथिलीशरण गुप्त

(47) प्रयोगवाद के प्रवर्तक हैं [2012, 14]
(क) निराला
(ख) अज्ञेय
(ग) जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर
(घ) मैथिलीशरण गुप्त

(48) निम्नलिखित में से कौन-सी भूषण की रचना नहीं है ? [2009]
(क) शिवा-बावनी
(ख) छत्रशाल दशक
(ग) शिवराज भूषण
(घ) रामचन्द्रिका

(49) निम्नलिखित में से किस कवि को राष्ट्र कवि को सम्मान प्राप्त हुआ ? [2009]
(क) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त

(50) निम्नलिखित में से कौन-सा कवि रामभक्ति शाखा से सम्बन्धित नहीं है? [2009]
(क) तुलसीदास
(ख) नन्ददास
(ग) अग्रदास
(घ) नाभादास

(51) सही ( सुमेलित ) कीजिए [2010]
(क) भारत-भारती – महाकाव्य
(ख) प्रणभंग – चरितकाव्य
(ग) गीतिका – वीर काव्य
(घ) रश्मिरथी – खण्डकाव्य

(52) कबीर के दोहों को नाम से जाना जाता है [2012]
(क) दूहा
(ख) सबद
(ग) साखी
(घ) पद

(53) नवधा भक्ति के प्रकार हैं [2012]
(क) एक
(ख) तीन
(ग) आठ
(घ) नौ

(54) ‘साकेत’ की नायिका है [2012]
(क) यशोधरा
(ख) उर्मिला
(ग) राधा
(घ) द्रौपदी

(55) ‘दिनकर’ को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है
(क) ‘कुरुक्षेत्र’ पर
(ख) रश्मिरथी’ पर
(ग) ‘उर्वशी’ पर
(घ) ‘हुंकार’ पर

(56) ‘कामायनी’ में श्रद्धा सर्ग’ किस सर्ग के बाद है? [2012]
(क) आशा सर्ग
(ख) चिन्ता सर्ग
(ग) काम सर्ग
(घ) लज्जा सर्ग

(57) ‘संसद से सड़क तक’ किस कवि की रचना है ? [2012, 15]
(क) “मुक्तिबोध’
(ख) ‘नागार्जुन’
(ग) ‘धूमिल’
(घ) “अज्ञेय’

(58) निम्नलिखित में से किस काव्य-कृति पर ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है ? [2012]
(क) चिदम्बरा
(ख) कितनी नावों में कितनी बार
(ग) उर्वशी
(घ) प्रियप्रवास

(59) ‘दोहाकोश’ के रचनाकार हैं [2014]
(क) शबरपा
(ख) लुइपा
(ग) सरहपा
(घ) कण्हपा

(60) रामधारीसिंह ‘दिनकर’ की रचना नहीं है [2016]
(क) रश्मिरथी
(ख) चक्रवाल
(ग) परशुराम की प्रतीक्षा
(घ) सुनहले शैवाल

(61) तुलसीदास की रचना नहीं है [2014]
(क) रामलला नहछु
(ख) पार्वती मंगल
(ग) कवितावली
(घ) रामचन्द्रिका

(62) ‘खालिक बारी’ के रचयिता हैं (2015, 16)
(क) कुशलनाथ
(ख) भट्ट केदार
(ग) मलिक मुहम्मद जायसी
(घ) अमीर खुसरो

(63) ‘नौका-विहार’ कविता अवतरित है [2015]
(क) ‘गुंजन’ से
(ख) वीणा’ से
(ग) “पल्लव’ से
(घ) युगान्त’ से

(64) ‘क्या भूलें क्या याद करू’ रचना की विधा है [2015]
(क) जीवनी
(ख) यात्रा वृत्तान्त
(ग) आत्मकथा
(घ) संस्मरण

(65) चन्दबरदाई की रचना है [2015]
(क) पृथ्वीराजरासो
(ख) खुमाणरासो
(ग) राउल वेल
(घ) जय मंयक जस चन्द्रिका

(66) अष्टछाप के कवि नहीं हैं [2015]
(क) सूरदास
(ख) कुम्भनदास
(ग) तुलसीदास
(घ) कृष्णदास

(67) रीतिबद्ध काव्यधारा के कवि नहीं हैं [2015]
(क) जसवंत सिंह
(ख) याकूब खाँ
(ग) दलपति राय वंशीधर
(घ) घनानन्द

(68) ‘दूसरा सप्तक’ का प्रकाशन वर्ष हैं [2015, 16]
(क) 1943 ई०
(ख) 1951 ई०
(ग) 1959 ई०
(घ) 1976 ई०

(69) ‘विद्यापति’ कवि हैं [2015]
(क) भक्तिकाल के
(ख) रीतिकाल के
(ग) आदिकाल के
(घ) आधुनिक काल के

(70) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की रचना है [2015]
(क) साकेत
(ख) पल्लव
(ग) प्रियप्रवास
(घ) गीत

(71) छायावाद के प्रवर्तक माने जाते हैं [2015]
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) महादेवी वर्मा

(72) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्रदान किया गया (2015)
(क) कुरुक्षेत्र पर
(ख) उर्वशी पर
(ग) रेणुका पर
(घ) हुँकार पर

(73) हिन्दी प्रदीप के सम्पादक हैं [2016]
(क) प्रताप नारायण मिश्र
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(74) ‘रामभक्ति शाखा’ के कवि नहीं हैं [2016]
(क) तुलसीदास
(ख) अग्र दास
(ग) नन्ददास
(घ) नाभादास

(75) बिहारी सतसई’ में दोहों की संख्या है– [2016]
(क) 719
(ख) 713
(ग) 719
(घ) 724

(76) ‘गंगावतरण’ काव्यकृति के रचयिता हैं [2016]
(क) अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध’
(ख) जगन्नाथदास ‘रत्नाकर
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(77) कबीर के गुरु का नाम था [2016]
(क) वल्लभाचार्य
(ख) नरहरिदास
(ग) रामानन्द
(घ) रामकृष्ण परमहंस

(78) ‘सूरसागर’ के वय॑विषय का आधार है [2016]
(क) श्रीमद्भागवत
(ख) विष्णुपुराण
(ग) केनोपनिषद्
(घ) मनुस्मृति

(79) विद्यापति के पदों में कहीं-कहीं पुट है [2016]
(क) श्रृंगार का
(ख) भक्ति का
(ग) नीति का
(घ) प्रशास्त का

(80) ‘हरिवंशपुराण’ के रचनाकार हैं [2016]
(क) देवसेन
(ख) विमलदेव सूरि
(ग) पुष्पदन्त
(घ) स्वयंभू

(81) वीरगाथाकाल की विशेषता है [2017]
(क) नारी का रूप-सौन्दर्य चित्रण
(ख) प्रकृति-चित्रण
(ग) युद्धों का सजीव चित्रण
(घ) मुक्तक काव्य-रचना

(82) अज्ञेय जी को निम्नलिखित में से किस वाद का प्रतीक माना जाता है?
(क) छायावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) हालावाद
(घ) प्रयोगवाद

(83) निम्नलिखित में से रीतिबद्ध धारा के कवि कौन नहीं हैं? [2017]
(क) चिन्तामणि
(ख) मतिराम
(ग) द्विजदेव
(घ) पद्माकर

(84) हिन्दी साहित्य के आदिकाल के लिए ‘सिद्ध सापन्तकाल’ नाम दिया है [2017]
(क) राहुल सांकृत्यायन ने
(ख) रामचन्द्र शुक्ल ने
(ग) रामकुमार वर्मा ने
(घ) डॉ० नगेन्द्र ने

(85) हिन्दी साहित्य के किस काल को स्वर्ण युग कहा जाता है? [2017]
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिककाल

(86) ‘पारिजात’ किस कवि के गीतों का संकलन है? [2017]
(क) सुमित्रानन्दन पन्त
(ख) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) मैथिलीशरण गुप्त

(87) ‘अज्ञेय’ द्वारा सम्पादित सप्तकों की संख्या है [2017]
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार

(88) किस कवि को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ नहीं मिला? [2017]
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त को
(ग) जयशंकर प्रसाद को
(घ) महादेवी वर्मा को

(89) ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना हुई थी [2017]
(क) सन् 1935 में
(ख) सन् 1936 में
(ग) सन् 1938 में
(घ) सन् 1943 में

(90) मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कृति है [2017]
(क) प्रदक्षिणा’
(ख) “दानलीला’
(ग) “रसकलश’
(घ) “अतिमा

(91) सुमित्रानन्दन पन्त की रचना नहीं है [2017]
(क) पल्लव
(ख) स्वर्णधूलि
(ग) ग्रंथि
(घ) रसवन्ती

(92) अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध’ की रचना है– [2017]
(क) रसकलश
(ख) युगान्तर
(ग) ग्राम्य
(घ) हुंकार

(93) ‘प्रसाद’ की निम्न कृतियों में से एक कृति के नायक मनु हैं। वह कृति है
(क) प्रेम पथिक
(ख) झरना
(ग) कामायनी
(घ) कानन-कुसुम

(94) निम्न में से कौन मैथिलीशरण गुप्त की एक अनूदित रचना है [2017]
(क) मेघनाद वध
(ख) यशोधरा
(ग) प्रदक्षिणा
(घ) सिद्धराज

(95) कवि ‘हरिऔध’ का रस है [2017]
(क) करुण
(ख) श्रृंगार
(ग) भक्ति
(घ) वीर

(96) चित्राधार’ काव्य की भाषा है
(क) अवधी
(ख) ब्रज
(ग) कन्नौजी भोजपुरी
(घ) भोजपुरी

(97) कवि पन्त समाजवाद की ओर उन्मुख हुए [2017]
(क) ग्राम्या में
(ख) स्वर्णधूलि में
(ग) चिदम्बरा में
(घ) ग्रन्थि में

(98) ‘दिनकर’ को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। [2017]
(क) वर्ष 1970 में
(ख) वर्ष 1971 में
(ग) वर्ष 1972 में
(घ) वर्ष 1974 में

(99) निम्नलिखित में कौन प्रेमश्रयी शाखा के कवि नहीं हैं? [2017]
(क) जायसी
(ख) सूरदास
(ग) मंझन
(घ) कुतुबन

(100) कौन-सी रचना ‘अज्ञेय’ की नहीं है? [2017]
(क) बावरा अटेरी
(ख) सुनहले शैवाल
(ग) इत्यलप्
(घ) रेणूका

(101) रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित ग्रन्थ है [2017]
(क) हुँकार
(ख) धूप के धान
(ग) कालजयी
(घ) चित्राधार

(102) ‘कामायनी’ में सर्गों की संख्या है [2017]
(क) बारह
(ख) चौदह
(ग) पन्द्रह
(घ) सत्रह

(103) जयशंकर प्रसादकृत ‘कामायनी’ किस प्रकार का काव्य है? [2018]
(क) खण्डकाव्य
(ख) महाकाव्य
(ग) मुक्तक काव्य
(घ) इनमें से कोई नहीं

(104) पन्त जी की किस रचना पर ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया है? [2018]
(क) लोकायतन
(ख) पल्लव
(ग) चिदम्बरा
(घ) वीणा

(105) ‘आँगन के पार-द्वार’ रचना है [2018]
(क) जयशंकर प्रसाद की
(ख) महादेवी वर्मा की
(ग) अज्ञेय की
(घ) सुमित्रानन्दन पंत की

(106) हिन्दी साहित्य के आदिकाल के लिए चारण काल नाम दिया है [2018]
(क) राहुल सांकृत्यायन ने
(ख) रामचन्द्र शुक्ल ने
(ग) रामकुमार वर्मा ने
(घ) डॉ० नगेन्द्र ने

(107) ‘लहर’ के रचनाकार है [2018]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) गिरिजा कुमार माथुर
(ग) हरिवंशराय बच्चन
(घ) सुमित्रानन्दन पंत

(108) निम्नलिखित में नई कविता’ के कवि हैं [2018]
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ग) जगन्नाथदास रत्नाकार
(घ) सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

(109) हिन्दी साहित्य के किस काल को ‘पूर्व-मध्य काल कहा जाता है?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिककाल

(110) ‘कामायनी’ रचना है (2018)
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला” की।
(ख) महादेवी वर्मा की
(ग) जयशंकर प्रसाद की
(घ) मोहन अवस्थी की

(111) हिन्दी साहित्य के ‘आदिकाल’ के लिए बीज वपन’ नाम दिया है (2018)
(क) रामचन्द्र शुक्ल ने
(ख) रामकुमार वर्मा ने
(ग) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने
(घ) डॉ० नगेन्द्र ने

(112) कितनी नावों में कितनी बार’ काव्यकृति है (2018)
(क) सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की
(ख) हरिवंशराय बच्चन’ की
(ग) गिरिजा कुमार माथुर की
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त की

(113) कविता में चार चाँद लगाने वाली शक्ति है
(क) अभिधा
(ख) लक्षणा
(ग) व्यंजना
(घ) तात्पर्या

(114) ‘खुमान रासो’ के रचयिता हैं
(क) नरपति नाल्ह
(ख) दलपति विजय
(ग) चन्दबरदाई
(घ) जगनिक

(115) ‘रसिकप्रिया’ रचना है-
(क) मतिराम की
(ख) केशवदास की
(ग) नरपति नाल्ह की
(घ) सुमित्रानन्दन पन्त की

(116) अग्रदास किस काव्यधारा के कवि हैं?
(क) कृष्ण काव्यधारा के
(ख) सूफी काव्यधारा के
(ग) वीर काव्यधारा के
(घ) राम काव्यधारा के

(117) पपीहों की वह पीन पुकार’ किसकी पंक्ति है?
(क) भारतेन्दु की
(ख) जयशंकर प्रसाद की
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त की
(घ) महादेवी की

(118) ‘प्रिय प्रवास’ काव्यकृति का मुख्य रस है
(क) संयोग श्रृंगार
(ख) करुण
(ग) वियोग श्रृंगार
(घ) शान्त

(119) ‘धर्म के प्रति अनास्था’ तथा ‘शोषक-वर्ग के प्रति घृणा’ प्रमुख विशेषता है
(क) “छायावाद’ की
(ख)’प्रगतिवाद’ की
(ग) ‘प्रयोगवाद’ की
(घ) “नयी कविता’ की

(120) ‘महाभारत’ के ‘शान्तिपर्व’ के कथानक पर आधारित ‘दिनकर’ की काव्यकृति है-
(क) रेणुका
(ख) ‘कुरुक्षेत्र
(ग) “सामधेनी
(घ) “हारे को हरिनाम

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UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi खण्डकाव्य Chapter 5 त्यागपथी

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi खण्डकाव्य Chapter 5 त्यागपथी (रामेश्वर शुक्ल अञ्चल) are part of UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi . Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi खण्डकाव्य Chapter 5 त्यागपथी (रामेश्वर शुक्ल अञ्चल).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 11
Subject Sahityik Hindi
Chapter Chapter 5
Chapter Name त्यागपथी (रामेश्वर शुक्ल अञ्चल)
Number of Questions 6
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Sahityik Hindi खण्डकाव्य Chapter 5 त्यागपथी (रामेश्वर शुक्ल अञ्चल)

प्रश्न 1:
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की कथावस्तु (कथानक) को संक्षेप में लिखिए।
या
‘त्यागपथी’ काव्यग्रन्थ की प्रमुख घटनाओं का क्रमबद्ध उल्लेख कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के तृतीय सर्ग का सारांश लिखिए।
या
‘त्यागपथी’ के पंचम सर्ग की कथा अपनी भाषा में लिखिए।
या
‘त्यागपथी’ के अन्तिम सर्ग की कथावस्तु की आलोचना कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में उल्लिखित दिवाकर मित्र की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में वर्णित किसी प्रेरणाप्रद घटना का सोदाहरण उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
श्री रामेश्वर शुक्ल अञ्चल द्वारा रचित ‘त्यागपथी ऐतिहासिक खण्डकाव्य की कथा पाँच सर्गों में विभाजित है। इसमें छठी शताब्दी के प्रसिद्ध सम्राट हर्षवर्धन के त्याग, तप और सात्विकता का वर्णन किया गया है। सम्राट हर्ष की वीरता का वर्णन करते हुए कवि ने इस खण्डकाव्य में राजनीतिक एकता और विदेशी आक्रान्ताओं के भारत से भागने का भी वर्णन किया है। इस खण्डकाव्य का सर्गानुसार कथानक अग्रवत् है

प्रथम सर्ग

थानेश्वर के राजकुमार हर्षवर्द्धन वन में आखेट हेतु गये थे। वहीं उन्हें अपने पिता प्रभाकरवर्द्धन के विषम ज्वर-प्रदाह का समाचार मिलता है। कुमार तुरन्त लौट आते हैं। वे पिता के रोग का बहुत उपचार करवाते हैं, परन्तु उन्हें सफलता नहीं मिलती। हर्षवर्द्धन के बड़े भाई राज्यवर्द्धन उत्तरापथ पर हूणों से युद्ध करने में लगे थे। हर्षवर्द्धन ने दूत के साथ अपने अग्रज को पिता की अस्वस्थता का समाचार पहुँचाया। इधर हर्षवर्द्धन की माता अपने पति की दशा बिगड़ती देख आत्मदाह के लिए तैयार हो जाती हैं। हर्ष ने उन्हें बहुत समझाया, पर वे नहीं मानीं और हर्ष के पिता की मृत्यु से पूर्व ही वे आत्मदाह कर लेती हैं। कुछ समय पश्चात् राजा प्रभाकरवर्द्धन की भी मृत्यु हो जाती है। पिता को अन्तिम संस्कार कर हर्षवर्द्धन शोकाकुल मन से राजमहल में लौट आते हैं। उन्हें इस बात की बड़ी चिन्ता है कि पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर अनुजा (बहन) राज्यश्री तथा अग्रज (भाई) राज्यवर्द्धन की क्या दशा होगी ?

द्वितीय सर्ग

राज्यवर्द्धन हूणों को परास्त कर सेनासहित अपने नगर सकुशल लौट आते हैं। शोकविह्वल हर्षवर्द्धन की दशा देख वे बिलख-बिलखकर रोते हैं। माता-पिता की मृत्यु से शोकाकुल राज्यवर्द्धन वैराग्य लेने का निश्चय कर लेते हैं, किन्तु तभी उन्हें समाचार मिलता है कि मालवराज ने उनकी छोटी बहन राज्यश्री के पति गृहवर्मन को मार डाला है तथा राज्यश्री को कारागार में डाल दिया है। राज्यवर्द्धन वैराग्य को भूल मालवराज का विनाश करने चल देते हैं। राज्यवर्द्धन गौड़ नरेश को पराजित कर देते हैं, परन्तु गौड़ नरेश छलपूर्वक उनकी हत्या करवा देता है। हर्षवर्द्धन को जब यह समाचार मिलता है तो वे विशाल सेना लेकर मालवराज से युद्ध करने के लिए चल पड़ते हैं। मार्ग में हर्षवर्द्धन को समाचार मिलता है कि उनकी छोटी बहन राज्यश्री बन्धनमुक्त होकर; विन्ध्याचल की ओर वन में चली गयी है। यह समाचार पाकर हर्षवर्द्धन बहन को खोजने वन की ओर चल देते हैं। वन में दिवाकर मित्र के आश्रम में उन्हें एक भिक्षुक से यह समाचार मिलता है कि राज्यश्री आत्मदाह करने वाली है। वे शीघ्र ही पहुँचकर राज्यश्री को आत्मदाह करने से बचा लेते हैं। वे दिवाकर मित्र और राज्यश्री को अपने साथ ले कन्नौज लौट आते हैं।

तृतीय सर्ग

हर्षवर्द्धन अपनी बहन के छीने हुए राज्य को पुन: प्राप्त करने के लिए अपनी विशाल सेना के साथ कन्नौज पर आक्रमण कर देते हैं। वहाँ अनीतिपूर्वक अधिकार जमाने वाला मालव-कुलपुत्र भाग जाता है। राज्यवर्द्धन का हत्यारा गौड़पति-शशांक भी अपने गौड़-प्रदेश को भाग जाता है। सभी लोग हर्षवर्द्धन से कन्नौज का राजा बनने की प्रार्थना करते हैं, परन्तु हर्ष अपनी बहन का राज्य लेने से मना कर देते हैं। वे अपनी बहन से सिंहासन पर बैठने को कहते हैं, परन्तु बहन भी राज-सिंहासन ग्रहण करने से मना कर देती है। फिर हर्षवर्द्धन ही कन्नौज के संरक्षक बनकर अपनी बहन के नाम से वहाँ का शासन चलाते हैं।

इसके बाद छह वर्षों तक हर्षवर्द्धन का दिग्विजय-अभियान चलता है। उन्होंने कश्मीर, पञ्चनद, सारस्वत, मिथिला, उत्कल, गौड़, नेपाल, वल्लभी, सोरठ आदि सभी राज्यों को जीतकर तथा यवन, हूण और अन्य विदेशी शत्रुओं का नाश करके देश को अखण्ड और शक्तिशाली बनाकर एक सुसंगठित राज्य बनाया। अपनी बहन के स्नेहवश वे अपनी राजधानी भी कन्नौज को ही बनाते हैं और अनेक वर्षों तक धर्मपूर्वक शासन करते हैं। उनके राज्य में प्रजा सुखी थी तथा धर्म, संस्कृति और कला की भी पर्याप्त उन्नति हो रही थी।

चतुर्थ सर्ग

राज्यश्री एक बड़े राज्य की शासिका होकर भी दुःखी है। वह सब कुछ छोड़कर गेरुए वस्त्र धारण कर भिक्षुणी बनना चाहती है। वह हर्षवर्द्धन से संन्यास ग्रहण करने की आज्ञा माँगने जाती है तो हर्षवर्द्धन उसे समझाते हैं कि तुम तो मन से संन्यासिनी ही हो। यदि तुम गेरुए वस्त्र ही धारण करना चाहती हो तो अपने वचनानुसार मैं भी तुम्हारे साथ ही संन्यास ले लूंगा। तभी दिवाकर मित्र आकर उन्हें समझाते हैं कि वास्तव में आप दोनों भाई-बहन का मन संन्यासी है, किन्तु आज देश की रक्षा एवं सेवा संन्यास-ग्रहण करने से अधिक महत्त्वपूर्ण है। दिवाकर मित्र के समझाने पर दोनों संन्यास का विचार त्याग देशसेवा में लग जाते हैं।

पंचम सर्ग

हर्षवर्द्धन एक आदर्श सम्राट के रूप में शासन करते हैं। उनके राज्य में प्रजा सब प्रकार से सुखी है, विद्वानों की पूजा की जाती है। सभी प्रजाजन आचरणवान्, धर्मपालक, स्वतन्त्र तथा सुरुचिसम्पन्न हैं। महाराज हर्षवर्द्धन सदैव जन-कल्याण एवं शास्त्र-चिन्तन में लगे रहते हैं। अपने भाई के ऐसे धर्मानुशासन को देखकर राज्यश्री भी प्रसन्न रहती है। सम्पूर्ण राज्य एकता के सूत्र में बँधा हुआ है। एक बार हर्षवर्द्धन तीर्थराज प्रयाग में सम्पूर्ण राजकोष को दान कर देने की घोषणा करते हैं

हुई थी घोषणा सम्राट की साम्राज्य भर से,
करेंगे त्याग सारा कोष ले संकल्प कर में।

सब कुछ दान करके वे अपनी बहन से माँगकर वस्त्र पहनते हैं। इसके पश्चात् प्रत्येक पाँच वर्ष बाद वे इसी प्रकार अपना सर्वस्व दान करने लगे। इस दान को वे प्रजा-ऋण से मुक्ति का नाम देते हैं। अपने जीवन में वे छह बार इस प्रकार के सर्वस्व-दान का आयोजन करते हैं। हर्षवर्द्धन संसारभर में भारतीय संस्कृति का प्रसार करते हैं। इस प्रकार कर्तव्यपरायण, त्यागी, परोपकारी, परमवीर, महाराज हर्षवर्द्धन का शासन सब प्रकार से सुर्खकर तथा कल्याणकारी सिद्ध होता है।

प्रश्न 2:
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की कथावस्तु की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की कथावस्तु की विवेचना (समीक्षा) कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ नाटक की विशेषता लिखिए।
या
‘त्यागपथी’ में वर्णित भारत की राजनीतिक उथल-पुथल एवं सांस्कृतिक वैभव का उल्लेख कीजिए। यह भारत के राजनीतिक संघर्ष का एक दस्तावेज है।” सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की कथावस्तु की प्रमुख विशेषताएँ निम्नवत् हैं

(1) इतिहास और कल्पना का समन्वय – ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में श्री रामेश्वर शुक्ल अञ्चल ने इतिहास और कल्पना का सुन्दर समन्वय किया है। इस खण्डकाव्य में हर्षवर्द्धन, राज्यश्री, प्रभाकरवर्द्धन, राज्यवर्द्धन, शशांक आदि सभी पात्र ऐतिहासिक हैं।
हर्षवर्द्धन के माता-पिता, भाई, बहनोई की मृत्यु, राज्यश्री की खोज, राज्यश्री के नाम पर हर्षवर्द्धन की दिग्विजय, राजधानी थानेश्वर से कन्नौज ले जाना, प्रयाग में हर पाँचवें वर्ष सर्वस्व-दान, हर्षवर्द्धन का धर्मानुशासन आदि सभी ऐतिहासिक तथ्य हैं।
इनके अतिरिक्त यशोमती का चिता-प्रवेश, शोकाकुल हर्षवर्द्धन की व्यथा, राज्यश्री को खोजते-खोजते हर्षवर्द्धन का दिवाकर मित्र के आश्रम में पहुँचना और वहाँ एक भिक्षुक से राज्यश्री के आत्मदाह करने की सूचना प्राप्त करना बाणभट्ट की प्रमुख रचना ‘हर्षचरित’ पर आधारित हैं।
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में माता-पिता और भाई-बहन के प्रति हर्षवर्द्धन की प्रेम-भावाभिव्यक्ति में तथा बौद्ध श्रमण आचार्य दिवाकर मित्र, राज्यश्री, हर्षवर्द्धन के चरित्र-चित्रण में कवि ने कल्पना का प्रयोग किया है। कवि ने इस खण्डकाव्य में ऐतिहासिक एवं काल्पनिक घटनाओं का इतना सुन्दर और सजीव समन्वय किया है। कि सभी घटनाएँ एवं चरित्र बहुत अधिक प्रभावशाली बन गये हैं।

(2) कथा-संगठन की श्रेष्ठता – कुमार हर्षवर्द्धन पर किशोरावस्था में ही दु:खों के पहाड़ टूटने लगते हैं। यहीं से कथानक का आरम्भ होता है। कथा का आरम्भ बहुत ही रोचक एवं प्रभावशाली है। कन्नौज के राजा की मृत्यु का बदला लेने के लिए हर्षवर्द्धन द्वारा ससैन्य प्रयाण तथा उन्हीं पर सम्पूर्ण राज्यभार आ पड़ना कथा का विकास है। हर्षवर्द्धन द्वारा दिग्विजय के बाद तीर्थराज प्रयाग में सर्वस्व त्याग कथानक की चरम सीमा है। यहाँ आकर त्यागपथी हर्षवर्द्धन का लोककल्याण अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है। इसके पश्चात् हर्षवर्द्धन के सुशासन का वर्णन कथानक का उतार है और उनकी मृत्यु तथा उनके महान् चरित्र से प्रेरणा लेने की कामना के साथ ‘त्यागपथी’ के कथानक का अन्त हो जाता है। इस प्रकार इस खण्डकाव्य का सम्पूर्ण कथानक सुगठित और सुविकसित है। प्रसंगों में प्रवाह है और कथा की तारतम्यता कहीं भी शिथिल या बाधित नहीं होती है।

(3) कौतूहलवर्द्धक – ‘त्यागपथी’ की कथावस्तु कौतूहलवर्द्धक है। आखेट के समय हर्षवर्द्धन को पिता के भयंकर ज्वर-दाह की सूचना, माता यशोमती का आत्मदाह, कन्नौज की घटनाएँ, राज्यवर्द्धन की हत्या, राज्यश्री की खोज तथा कन्नौज का शासन ग्रहण करने की समस्या आदि सभी घटनाएँ पाठकों के मन में कौतूहल जगाती

(4) मार्मिकता – प्रस्तुत काव्य में कवि ने मार्मिक घटनाओं का चयन करने में बड़ी सावधानी से काम लिया है। यशोमती को चितारोहण, राज्यवर्द्धन और हर्षवर्द्धन का वैराग्य लेने को तैयार होना, राज्यश्री के वैधव्य का समाचार पाकर हर्ष की व्याकुलता, आत्मदाह के लिए उद्यत राज्यश्री का हर्ष से मिलना इत्यादि ऐसी मार्मिक घटनाएँ हैं, जिनके वर्णन को पढ़कर पाठक का हृदय द्रवित हो जाता है। इस प्रकार ‘त्यागपथी’ की कथावस्तु वास्तव में अत्यन्त मार्मिक, सुसम्बद्ध, इतिहास और कल्पना के सुन्दर समन्वय से रमणीय और प्रेरणाप्रद है।

प्रश्न 3:
‘त्यागपथी’ के नायक अथवा प्रमुख पात्र (हर्षवर्धन) का चरित्र-चित्रण कीजिए।
या
” ‘त्यागपथी’ के हर्षवर्द्धन का चरित्र देशप्रेम का प्रखरतम (आदर्श) उदाहरण है।” उपयुक्त उदाहरण देते हुए इस कथन को प्रमाणित कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के आधार पर हर्ष की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
” ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के नायक हर्षवर्द्धन का सम्पूर्ण जीवन सदाचार, उन्नत मानवीय जीवन के प्रति निष्ठा, सहयोग और सदभावना के प्रति जीवन्त आस्था का एक महान् उदाहरण है।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।
या
‘हर्षवर्द्धन मानवीय आदर्शों का प्रतीक है।”त्यागपंथी’ खण्डकाव्य के आधार कथन की समीक्षा कीजिए।
या
‘सोदाहरण सिद्ध कीजिए कि त्यागपथी खण्डकाव्य हर्षवर्द्धन की देशभक्ति, राष्ट्र-रचना और लोक-कल्याणकारी सदवृत्तियों का सम्यक उद्घाटन करता है।’
या
‘हर्षवर्द्धन के चरित्र में लोकमंगल की कामना निहित है। इस कथन के आलोक में ‘त्यागपथी’ के नायक हर्षवर्द्धन का चरित्रांकन कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य महाराजा हर्षवर्द्धन की दानवीरता और राष्ट्रीयता का द्योतक है, कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
थानेश्वर के महाराज प्रभाकरवर्द्धन के छोटे पुत्र हर्षवर्द्धन के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(1) नायक – हर्षवर्द्धन ‘त्यागपथी’ के नायक हैं। इस खण्डकाव्य की सम्पूर्ण कथा का केन्द्र वही हैं। सम्पूर्ण घटनाचक्र उन्हीं के चारों ओर घूमता है। कथा आरम्भ से अन्त तक हर्षवर्द्धन से ही सम्बद्ध रहती है।

(2) आदर्श पुत्र एवं भाई – इस खण्डकाव्य में हर्षवर्द्धन एक आदर्श पुत्र एवं आदर्श भ्राता के रूप में पाठकों के समक्ष आते हैं। अपने पिता के रुग्ण होने का समाचार पाकर वे आखेट से तुरन्त लौट आते हैं और यथासामर्थ्य उनकी चिकित्सा करवाते हैं। पिता के स्वस्थ न होने तथा माता द्वारा आत्मदाह करने की बात सुनकर वे भाव-विह्वल हो जाते हैं। वे अपनी माता से कहते हैं

मुझ मन्द पुण्य को छोड़ न माँ तुम भी जाओ।
छोड़ो विचार यह, मुझे चरण से लिपटाओ।।

आदर्श पुत्र के समान ही वे आदर्श भाई का कर्तव्य भी पूरा करते हैं। वे अपनी बहन राज्यश्री को अग्निदाह करने एवं संन्यास लेने से रोकते हैं

दोनों करों से घेरकर छोटी बहिन के भाल को।
भूल खड़े थे निकट जलती चिता की ज्वाल को ।।

(3) देश-प्रेमी – हर्षवर्द्धन सच्चे देश-प्रेमी हैं। उन्होंने छोटे राज्यों को एक साथ मिलाकर विशाल राज्य की स्थापना की। देश की एकता एवं रक्षा हेतु वे बड़े-से-बड़ा युद्ध करने से भी नहीं हिचकते थे। उन्होंने एक बड़े राज्य की स्थापना ही नहीं की, वरन् धर्मपूर्वक शासन भी किया। देश-सेवा ही उनके जीवन का व्रत है।

(4) अजेय योद्धा – हर्षवर्द्धन एक अजेय योद्धा हैं। विद्रोही उनके तेजबल के आगे ठहर नहीं पाता। कोई भी राजा उन्हें पराजित नहीं कर सका। भारत के इतिहास में महाराज हर्षवर्द्धन की दिग्विजय, उनका युद्ध-कौशल और उनकी अनुपम वीरता आज भी स्वर्णाक्षरों में लिखी है। उनकी वीरता एवं कुशल शासन का ही यह परिणाम था कि ”उठा पाया न सिर कोई प्रवंचक।”

(5) श्रेष्ठ शासक – महाराज हर्षवर्द्धन एक श्रेष्ठ शासक हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन प्रजा के हितार्थ ही समर्पित है। उनका शासन धर्म-शासन है। उनके शासन में सब जनों को समान न्याय एवं सुख उपलब्ध है।

वे सदैव प्रजा के कल्याण में लगे रहते थे और स्वयं को प्रजा का सेवक समझते थे। उनका मत था

नहीं अधिकार नृप को पास रखे धन प्रजा का,
करे केवल सुरक्षा देश-गौरव की ध्वजा का।

(6) महान् त्यागी – हर्षवर्द्धन महान् त्यागी एवं आत्म संयमी हैं। आत्म संयम एवं सर्वस्व त्याग करने के कारण ही कवि ने उन्हें ‘त्यागपथी’ के नाम से पुकारा है। पिता की मृत्यु के पश्चात् वे अपने बड़े भाई के अधिकार को ग्रहण करना नहीं चाहते। इसी प्रकार कन्नौज का राज्य भी वे अपनी बहन के नाम पर चलाते हैं। प्रयाग में छः बार अपना सर्वस्व प्रजा के लिए दे देना उनके महान् त्याग को प्रमाण है। वे राजकोष को प्रजा की सम्पत्ति मानते हैं। इसीलिए वे उसे प्रजा को ही दान कर देते हैं।

(7) धर्मपरायण – हर्षवर्द्धन के जीवन में धर्मपरायणता कूट-कूटकर भरी हुई है। वे जन-सेवा में ही अपना जीवन लगा देते हैं

रहे कल्याण मानवमात्र का ही धर्म मेरा,
रहे सर्वस्व-त्यागी पुण्य पर विश्वास मेरा।

उन्होंने शैव, शाक्त, वैष्णव और वेद-मत को एक साथ रखा। उन्होंने किसी के प्रति भी भेदभाव नहीं बरता।

(8) कर्त्तव्यनिष्ठ एवं दृढनिश्चयी – सम्राट हर्ष ने आजीवन अपने कर्तव्य का पालन किया। प्रारम्भ में इच्छा न होते हुए भी इन्होंने अपने भाई के कहने पर राज्य सँभाला और प्रत्येक संकटापन्न स्थिति में भी अपने कर्तव्य को निभाया। बहन राज्यश्री को वनों में खोजकर वे अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हैं। भाई की छल से की गयी हत्या का समाचार सुनकर उन्होंने जो प्रतिज्ञा की थी, उससे उनके दृढ़निश्चय का पता चलता है

लेकर चरण रज आर्य की करता प्रतिज्ञा आज मैं,
निर्मूल कर दूंगा धरा से अधर्म गौड़ समाज मैं।

(9) महादानी – त्यागपथी के हर्षवर्द्धन आत्मसंयमी तथा महादानी हैं। महान् त्यागी होने के कारण ही कवि ने उन्हें ‘त्यागपथी’ नाम से पुकारा है। पिता की मृत्यु के पश्चात् वे अपने बड़े भाई का अधिकार ग्रहण नहीं करना चाहते। कन्नौज विजय के बाद भी वे कन्नौज का सिंहासन राज्यश्री को देना चाहते हैं।

इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि हर्ष का चरित्र एक महान् राजा, आदर्श भाई, आदर्श पुत्र और महान् त्यागी का चरित्र है, जिसके लिए प्रजा की सुख-सुविधा ही सर्वोपरि है और वह अपने मानवीय कर्तव्यों के प्रति भी निष्ठावान् है।

प्रश्न 4:
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के आधार पर राज्यश्री का चरित्र-चित्रण कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ में निरूपित राज्यश्री की चारित्रिक छवि पर सोदाहरण प्रकाश डालिए।
उत्तर:
राज्यश्री सम्राट् हर्षवर्द्धन की छोटी बहन है। हर्षवर्द्धन के चरित्र के बाद राज्यश्री का चरित्र ही ऐसा है, जो पाठकों के हृदय एवं मस्तिष्क पर छा जाता है। राज्यश्री के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है

(1) माता-पिता की लाडली – राज्यश्री अपने माता-पिता को प्राणों से भी प्यारी है। कवि कहता है

माँ की ममता की मूर्ति राज्यश्री सुकुमारी।
थी सदा पिता को, माँ को प्राणोपम प्यारी ॥

(2) आदर्श नारी – राज्यश्री आदर्श पुत्री, आदर्श बहन और आदर्श पत्नी के रूप में हमारे समक्ष आती है। वह यौवनावस्था में विधवा हो जाती है तथा गौड़पति द्वारा बन्दिनी बना ली जाती है। भाई राज्यवर्द्धन की मृत्यु के बाद वह कारागार से भाग जाती है और वन में भटकती हुई एक दिन आत्मदाह के लिए उद्यत हो जाती है; किन्तु अपने भाई हर्षवर्द्धन द्वारा बचा लेने पर वह तन-मन-धन से प्रजा की सेवा में ही अपना जीवन अर्पित कर देती है। हर्ष द्वारा राज्य सौंपे जाने पर भी वह राज्य स्वीकार नहीं करती। यही है उसका आदर्श रूप, जो सबको आकर्षित करता है

विपुल साम्राज्य की अग्रज सहित वह शासिका थी,
अभ्यन्तर से तथागत की अनन्य उपासिका थी।

(3) देश-भक्त एवं जन-सेविका – राज्यश्री के मन में देशप्रेम और लोक-कल्याण की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है। हर्ष के समझाने पर वह अपने वैधव्य का दुःख झेलती हुई भी देश-सेवा में लगी रहती है। देशप्रेम के कारण राज्यश्री संन्यासिनी बनने का विचार भी छोड़ देती है तथा शेष जीवन को देश-सेवा में ही लगाने का । व्रत लेती है।

(4) करुणामयी नारी – राज्यश्री ने माता-पिता की मृत्यु तथा पति और बड़े भाई की मृत्यु के अनेक दु:ख झेले। इन दु:खों ने उसे करुणा की मूर्ति बना दिया। अपने अग्रज हर्षवर्द्धन से मिलते समय उसकी कारुणिक दशा अत्यन्त मार्मिक प्रतीक होती है

सतत बिलखती थी बहिने माता-पिता की याद कर।
ले नाम सखियों का, उमड़ती थी नदी-सी वारि भर ॥
था सास्तु अग्रज धैर्य देता माथ उसका ढाँपकर।
रोती रही अविरल बहिन बेतस लता-सी काँपकर ॥

(5) त्यागमयी नारी – राज्यश्री का जीवन त्याग की भावना से आलोकित है। भाई हर्षवर्द्धन द्वारा कन्नौज का राज्य दिये जाने पर भी वह उसे स्वीकार नहीं करती। वह कहती है

स्वीकार न मुझको कान्यकुब्ज सिंहासन।
बैठो उस पर तुम करो शौर्य से शासन ।

वह राज्य-कार्य के बन्धन में पड़ना नहीं चाहती; क्योंकि वह मन से संन्यासिनी है। हर्षवर्द्धन के समझाने पर भी वह नाममात्र की ही शासिका बनी रहती है। प्रयाग महोत्सव के समय हर्षवर्द्धन के साथ राज्यश्री भी अपना सर्वस्व प्रजा के हितार्थ त्याग देती है।

(6) सुशिक्षिता एवं ज्ञान – सम्पन्न राज्यश्री सुशिक्षिता एवं शास्त्रों के ज्ञान से सम्पन्न है। जब आचार्य दिवाकर मित्र संन्यास धर्म का तात्त्विक विवेचन करते हुए उसे मानव-कल्याण के कार्य में लगने का उपदेश देते हैं तब राज्यश्री इसे स्वीकार कर लेती है और आचार्य की आज्ञा का पूर्णरूपेण पालन करती है।
इस प्रकार राज्यश्री का चरित्र एक आदर्श भारतीय नारी का चरित्र है। उसके पातिव्रत-धर्म, देश-धर्म, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्श निश्चय ही अनुकरणीय हैं।

प्रश्न 5:
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के भावपक्ष एवं कलापक्ष की विशेषताएँ बताइए।
या
‘त्यागपथी’ की काव्यगत विशेषताओं (काव्य-सौष्ठव) पर प्रकाश डालिए।
या
खण्डकाव्य की दृष्टि से त्यागपथी की समीक्षा (आलोचना) कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ एक ऐतिहासिक खण्डकाव्य है। इस कथन की समीक्षा कीजिए।
या
काव्य-शिल्प की दृष्टि से त्यागपथी’ खण्डकाव्य की सोदाहरण समीक्षा कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की काव्य-शैली की विवेचना कीजिए।
या
खण्डकाव्य के लक्षणों (तत्त्वों) के आधार पर ‘त्यागपथी’ के महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की काव्य-गुणों की दृष्टि से समीक्षा कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की भाषा-शैली की समीक्षा कीजिए।
या
कथावस्तु और चरित्र-चित्रण की दृष्टि से त्यागपथी खण्डकाव्य का मूल्यांकन कीजिए।
या
“त्यागपथी एक सफल खण्डकाव्य है’, इस कथन की पुष्टि कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के संवाद शिल्प पर प्रकाश डालिए।
या
” ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की भाषा कथावस्तु के अनुकूल है।” उचित उदाहरण देते हुए सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
श्री रामेश्वर शुक्ल अञ्चल’ द्वारा रचित खण्डकाव्य ‘त्यागपथी’ एक ऐतिहासिक कथानक पर आधारित खण्डकाव्य है। इस रचना में कवि ने अपनी काव्यात्मक प्रतिभा का प्रयोग अत्यधिक कुशलता से किया है। इस खण्डकाव्य की विशेषताओं का विवेचन अग्रवत् किया जा सकता है।

कथानक की ऐतिहासिकता – ‘त्यागपथी’ में सातवीं शताब्दी के सुप्रसिद्ध सम्राट हर्षवर्द्धन की कथा का वर्णन हुआ है। कवि ने हर्षवर्द्धन के माता-पिता की मृत्यु, भाई और बहनोई की हत्या, कन्नौज में राज्य सँभालना, मालवराज शशांक से युद्ध, दिग्विजय करके धर्म-शासन की स्थापना और हर पाँचवें वर्ष तीर्थराज प्रयाग में सर्वस्व दान करने की ऐतिहासिक घटनाओं को बड़े ही सरल और सुन्दर रूप में प्रस्तुत किया है।

पात्र एवं चरित्र-चित्रण – ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में प्रभाकरवर्द्धन तथा उनकी पत्नी यशोमती; उनके दो पुत्र राज्यवर्द्धन और हर्षवर्द्धन; एक पुत्री राज्यश्री; कन्नौज, मालव, गौड़ प्रदेश के राजाओं के अतिरिक्त आचार्य दिवाकर, सेनापति भण्ड आदि पात्र हैं। इस खण्डकाव्य का नायक हर्षवर्द्धन है तथा इसकी नायिका होने का गौरव उसकी बहन राज्यश्री को प्राप्त है।

‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की काव्यगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(क) भावगत विशेषताएँ

(1) मार्मिकता – इस खण्डकाव्य में कवि ने हर्षवर्द्धन की माता यशोमती का चितारोहण, राज्यवर्द्धन और हर्षवर्द्धन का वैराग्य लेने को तैयार होना, राज्यश्री के विधवा होने की सूचना पाकर हर्षवर्द्धन की व्याकुलता, राज्यश्री द्वारा आत्मदाह के समय हर्षवर्द्धन के मिलन का वर्णन अतीव मार्मिक है।

(2) रस-निरूपण – ‘त्यागपंथी’ में कवि ने करुण, वीर, रौद्र, शान्त आदि रसों का सुन्दर निरूपण किया है।
करुण रस का निम्नलिखित उदाहरण द्रष्टव्य है

मुझ मन्द पुण्य को छोड़ न माँ तुम भी जाओ।
छोड़ो विचार यह, मुझे चरण से लिपटाओ ।
सँवरो देवि ! यह रूप नहीं देखा जाता।
हो पिता अदय, पर सतत वत्सला है माता॥

(3) प्रकृति-चित्रण – ‘त्यागपथी’ में कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों का सुन्दर चित्रण किया है। आखेट के समय जब हर्षवर्द्धन को राजा के गम्भीर रूप से रोगग्रस्त होने का समाचार मिलता है तो वे तुरन्त राजमहल को लौट आते हैं। उस समय के वन का चित्रण द्रष्टव्य है

वन-पशु अविरत, खर-शर-वर्णन से अकुलाये।
फिर गिरि-श्रेणी में खोहों से बाहर आये ॥

(ख) कलागत विशेषताएँ

(1) भाषा – भारतीय इतिहास में गुप्तकाल स्वर्ण युग के रूप में जाना जाता है। उस काल में भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य अपनी उन्नति की चरम सीमा पर थे। ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की भाषा भी वैसी ही गरिमामयी है। इस खण्डकाव्य की भाषा प्रभावशाली, भावानुकूल और समयानुकूल है। इसकी भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली हिन्दी है। भाषा में माधुर्य, ओज एवं प्रसाद गुण विद्यमान हैं। प्रारम्भ के दो सर्गों में ओज गुण अधिक है, जब कि अन्त के सर्गों में चित्त की दीप्ति और विस्तार के कारण माधुर्य और प्रसाद गुण अधिक हैं।

उदाहरण(i) था वस्त्र-कर्मान्तिक सजल-दृग आ गया वल्कल लिए।
(ii) जन-जन वहाँ था साश्रु, जब वल्कल उन्होंने ले लिया।

(2) शैली – त्यागपथी में वर्णनप्रधान चित्रात्मकता लिये हुए संवादात्मक और सुललित सूक्ति-शैली का प्रयोग किया गया है। शब्दों के क्रम और ध्वनियों के संयोजन से जिस लय की रचना होती है, वह लय पूरे खण्डकाव्य में समान रूप से निहित है। अर्थ के साथ-साथ यह लय स्वर के आरोह-अवरोह के कारण और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। पाँचवें सर्ग के अन्त में शैली में एक प्रकार की तीव्रता और आवेग है। इस खण्डकाव्य की शैली में आकर्षण और कौतूहल उत्पन्न करने की क्षमता है, जो खण्डकाव्य के लिए अनिवार्य है।

(3) अलंकार-योजना – ‘त्यागपथी’ में कवि ने स्थान-स्थान पर विभिन्न अलंकारों का प्रयोग किया है। अलंकार-योजना सर्वत्र स्वाभाविक रूप में है। भावोत्कर्ष में अलंकारों का प्रयोग विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण रहा है। कवि ने उपमा, अनुप्रास, उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों का प्रयोग किया है।

(4) छन्द-विधान – रामेश्वर शुक्ल अञ्चल ने ‘त्यागपथी’ में 26 मात्राओं के ‘गीतिका’ छन्द का प्रयोग किया है। अन्त में आकर कवि ने 34 मात्राओं वाले घनाक्षरी छन्द भी लिखे हैं। अन्त में घनाक्षरी छन्द का प्रयोग रचना की समाप्ति का सूचक ही नहीं, वरन् वर्णन की दृष्टि से प्रशस्ति का भी सूचक है। कवि की छन्द-योजना निस्सन्देह प्रशंसनीय है।
निष्कर्षतः ‘त्यागपथी’ काव्य-सौन्दर्य की दृष्टि से एक सफल खण्डकाव्य है।

प्रश्न 6:
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के रचयिता का मुख्य उद्देश्य अथवा सन्देश क्या है ? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
या
“सच्ची राष्ट्रधर्मिता को उद्भासित करना ‘त्यागपथी’ का प्रमुख उद्देश्य है।” इस उक्ति की दृष्टि से त्यागपथी की आलोचना कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के आधार पर भारतीय जीवन-शैली और सामाजिक व्यवस्था का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में हर्षकालीन भारतीय समाज एवं जन-जीवन का उदात्त चित्रण मिलता है, सिद्ध कीजिए।
या
“त्यागपथी’ खण्डकाव्य में हर्षकालीन जीवन व समाज का उदात्त चित्रण मिलता है।” स्पष्ट कीजिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के आधार पर उसके उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में हर्षकालीन भारत सजीव हो उठा है।” इस कथन की विवेचना कीजिए।
या
खण्डकाव्य ‘त्यागपथी’ के नामकरण की सार्थकता एवं उसके उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।
या
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के नाम की सार्थकता पर विचार कीजिए।
उत्तर:
[ संकेत- ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं के स्पष्टीकरण के लिए प्रश्न सं० 1 के उत्तर का अध्ययन करें और उसे संक्षेप में लिखें। ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य में कविवर रामेश्वर शुक्ल ‘अञ्चल’ ने अनेक प्रयोजनों को पल्लवित किया है। इसके मुख्य उद्देश्य या सन्देश निम्नवत् हैं

(1) प्राचीन भारत का गौरवमय चित्र प्रस्तुत करना – अञ्चल जी ने अपने प्रस्तुत काव्य में प्राचीन भारत के गौरवमय चित्र को प्रस्तुत किया है। उस समय समाज में सभी को समान न्याय और सभी प्रकार के सुख उपलब्ध थे। उन्होंने यह दर्शाया है कि प्राचीन भारत धर्म, संस्कृति, सभ्यता, विद्या, अर्थ और सभी दृष्टियों से वैभवसम्पन्न था।

(2) सम्राट् हर्ष के त्यागमय जीवन का आदर्श प्रस्तुत करना – हर्षवर्द्धन ‘त्यागपथी’ के नायक हैं। प्रजा की सेवा और उसका कल्याण ही सम्राट हर्ष के लिए सर्वोपरि था। सम्पूर्ण घटनाचक्र उन्हीं के चारों ओर घूमता है। कवि ने हर्ष के त्यागमय उज्ज्वल चरित्र के माध्यम से यह प्रस्तुत करना चाहा है कि आज के शासक भी उन्हीं की भॉति त्यागमय और सरल जीवन अपनाकर प्रजा के सम्मुख एक आदर्श उपस्थित करें।

(3) मानवीय गुणों की स्थापना करना – कवि ने प्रस्तुत काव्य में बड़ों के प्रति आदर, छोटों से स्नेह, उदारता, विनम्रता के साथ-साथ सांसारिक गरिमा आदि मानवीय गुणों को व्यक्त किया है। उसने हर्षवर्द्धन के माध्यम से सत्य, अहिंसा, त्याग, शान्ति, परोपकार और निष्काम कर्म जैसे गांधीवादी जीवन-मूल्यों की स्थापना की है।

(4) धर्मनिरपेक्षता पर बल देना – अञ्चल जी ने ‘त्यागपथी’ के माध्यम से सर्व-धर्म समभाव की सशक्त अभिव्यंजना की है। कवि ने दिखाया है कि सम्राट हर्ष के समय में सभी धर्मों को अपने प्रचार और प्रसार का समान अवसर प्राप्त था। सभी धर्मावलम्बियों के साथ समान व्यवहार होता था, जिस कारण सर्वत्र सुख और समृद्धि व्याप्त थी।

(5) राष्ट्रप्रेम की अभिव्यक्ति करना – प्रस्तुत काव्य में कवि ने राष्ट्रप्रेम की सशक्त अभिव्यक्ति की है। सम्राट् हर्ष सच्चे देशप्रेमी हैं। उन्होंने छोटे-छोटे राज्यों को मिलाकर विशाल राज्य की स्थापना की। वे देश की एकता और रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे। उन्होंने अपनी बहन राज्यश्री को भी आत्मदाह करने से रोककर; देश-सेवा करने को प्रेरित किया।

(6) मानवतावाद का प्रसार करना – प्रस्तुत खण्डकाव्य की रचना में कवि ने मानवता के प्रसार को सन्देश दिया है। कवि ने युद्ध और हिंसा के स्थान पर प्रेम को बढ़ावा दिया है, जिससे आज शोषित और उत्पीड़ित मानवता दमन-चक्र से मुक्त हो सके।

शीर्षक की सार्थकता – उपर्युक्त सभी सन्देश काव्यकार ने सम्राट हर्षवर्द्धन के चरित्र के माध्यम से दिये हैं। हर्ष ने सर्वस्व त्याग करके ही इन सभी आदर्शों की स्थापना की। उनका त्याग क्षणिक नहीं है और न ही वह भावावेग में लिया हुआ निर्णय है, वरन् उन्होंने इस त्याग-पथ का चयन भली प्रकार सोच-समझकर किया है। प्रति पाँचवें वर्ष अपना सर्वस्व दान कर देने वाले त्याग-पथ के इस अमर पथिक के लिए ‘त्यागपथी’ के अतिरिक्त और कौन नाम उपयुक्त हो सकता है ? इस प्रकार खण्डकाव्य के नायक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करने वाला खण्डकाव्य का शीर्षक ‘त्यागपथी’ सर्वथा उपयुक्त और सार्थक है।

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UP Board Solutions for Class 12 English Prose Chapter 6 Womens Education

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Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 12
Subject English Prose
Chapter Chapter 6
Chapter Name Womens Education
Number of Questions Solved 18
Category NCERT Solutions

UP Board Solutions for Class 12 English Prose Chapter 6 Women’s Education

LESSON at a Glance

We are living in an age where there are great opportunities for women in social work, public life and administration. Society needs women of disciplined minds and restrained manners. Hence, women’s education is of paramount importance in present time.

Dr. Radhakrishnan is not satisfied with the type of education that Indian women are getting. Girls education is not widespread so the institutions imparting education to girls should be encouraged. The education, so imparted, must not only be broad but should also be deep and purposeful.

According to the author, compassion, daya, is the quality which is more characteristic of women than of men. It is therefore, essential for every human being, men and women alike, to develop the quality of considerateness, kindness and compassion. Without these qualities we are only human animals, nara pasu, not more than that.

Dr, Radhakrishnan says that the study of our great classics, such as the Ramayana, Upnishad, etc., and communion with great minds, are the two things that mould men’s mind and heart. They instil into us great moral strength, which will lay down for us the lines on which we have to conduct ourselves. The learned author realises the value of women’s education and says.
“Give us good women, we will have a great civilization.
Give us good mothers, we will have a great nation.”
Such is the importance of women’s education.

पाठ का हिन्दी अनुवाद

(1) You are living ………………. your work.
आप एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहाँ स्त्रियों के लिए सामाजिक कार्य में, जनजीवन में तथा प्रशासन में अनेक महान् अवसर प्राप्त हैं। समाज को अनुशासित मस्तिष्क वाली तथा संयमित आचरण वाली स्त्रियाँ चाहिए। आप चाहे कोई भी कार्य चुनें आपको उसे ईमानदारी तथा अनुशासित मस्तिष्क से करना चाहिए। तभी आपको कार्य में सफलता और आनन्द प्राप्त होंगे।

(2) Actually in our ………………. present generation.
हिन्दी अनुवाद–वास्तव में, हमारे देश में जहाँ तक लड़कियों की शिक्षा का सम्बन्ध है, शिक्षा काफी विस्तृत नहीं है। इसलिए प्रत्येक वह संस्था जो लड़कियों की शिक्षा में योगदान देती है वह मान्यता, उत्साह प्रदान करने के योग्य है। लेकिन मैं इस बात के लिए चिन्तित हूँ कि जो शिक्षा प्रदान की जाए वह केवल विस्तृत ही ने हो, अपितु वह जीवन के रहस्यों को जानने के योग्य भी हो। इसे गहराई में अर्थात् जीवन के रहस्यों को जानने में हम पीछे हैं। हम विद्वान् और कुशल बन सकते हैं। किन्तु यदि हमारे जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है। तब हमारा जीवन अन्धकारमय होगा, हम भारी भूलें करेंगे और फिर हमें दुःख प्राप्त होगा। गीता में कहा है। ‘व्यावसायात्मिका बुद्धिरेकेह’ अर्थात् नि:स्वार्थ कार्य में बुद्धि स्थिर होती है और एक ओर ही लगी रहती है। एक सच्चे सुसंस्कृत मस्तिष्क वाले मनुष्य को मानसिक एकरूपता तथा जीवन के उद्देश्य के प्रति प्रेम होता

है। एक असंस्कृत मनुष्य के लिए सम्पूर्ण जीवन भिन्न-भिन्न दिशाओं में बिखरा रहता है—“बहुशाखा ह्यनन्ताश्च’। अत: यह आवश्यक है कि वह शिक्षा जो आप इन संस्थाओं में प्राप्त कर रहे हैं, वह आपको केवल ज्ञान और कुशलता ही प्रदान न करे, अपितु आपको जीवन का एक निश्चित उद्देश्य भी दे। वह निश्चित उद्देश्य क्या हो यह आपको सोचना है। यह कहा जाता है कि विद्या विवेक प्रदान करती है। विमर्शरूपिणी विद्या आपको यह ज्ञान प्रदान करती है कि जिससे आप यह तय करेंगे कि क्या उचित है। वह आपको अनुचित बातों से बचने में सहायता करेगी। इसलिए आपको यह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए कि इस पीढ़ी में आपसे क्या अपेक्षित है। एक वह उद्देश्य जो सदियों से ठीक रहा है, वह हमारे देश और संसार की तेजी से बदलती हुई परिस्थितियों में ठीक नहीं भी हो सकता। इसलिए वह उद्देश्य जो आप अपनाएँ, वह वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए।

(3) Every time we ………………. more than that.
जब भी हम कोई कार्य आरम्भ करते हैं तब हम अपने मन्त्रों का उच्चारण करते हैं और उस कार्य को समाप्त करते समय शान्ति-शान्ति कहते हैं। अध्यापक तथा शिष्यों से यह आशा की जाती है कि वे एक-दूसरे से घृणा करने से बचें। दया एक ऐसा गुण है जो पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक पाया जाता है। हाल ही में मैंने एक पुस्तक पढ़ी है जिसमें स्त्रियों के गुणों के ह्रास के विषय में पढ़ा है और उसका मुख्य कारण है दया की भावना का ह्रास। दूसरे शब्दों में स्त्री का प्राकृतिक गुण देया है। यदि आप में दया नहीं है तो आप मनुष्य नहीं हैं। इसलिए प्रत्येक प्राणी के लिए यह आवश्यक है कि उसे अपने में दूसरे का ध्यान रखने की भावना, दया और सहानुभूति के गुण पैदा करने चाहिए। इन गुणों के बिना हम मानव कहलाने के योग्य नहीं हैं, बल्कि केवल नर पशु हैं और अधिक कुछ नहीं।

(4) There is famous ………………. my dear.
एक प्रसिद्ध कविता है जो हमें बताती है कि संसार विष वृक्ष है। इस अपूर्ण विश्व में अर्थात् संसार में अद्वितीय गुणों के दो फल हैं। वे हैं अपनी महान् साहित्यिक कृतियों का अध्ययन और महान् विचारकों के साथ एकरूपता। यही वे दो बातें हैं जो मनुष्य के हृदय और मस्तिष्क को बदलती हैं। मैं इस बात के लिए उत्सुक हूँ कि हम अपनी महान् कृतियों का अध्ययन करें, देश की उन सभी महान् कृतियों का जो हमें विरासत में प्राप्त हुई हैं। एक उपनिषद् के छोटे से कथोपकथन में एक प्रश्न किया गया है, “अच्छे जीवन का सार क्या है?” शिक्षक उत्तर देता है, “क्या तुमने उत्तर नहीं सुना?” बादलों की गड़गड़ाहट होती है–दा-दा-दा, तुरन्त शिक्षक ने समझाया कि यही अच्छे जीवन का सार है दम, दान व दया। यही अच्छे जीवन का निर्माण करती हैं। दम का अर्थ है आत्म-नियन्त्रण जो मानवता का प्रतीक है। रामायण में बताया गया है जब लक्ष्मण वन को जाने लगे तब उसकी माता ने उन्हें बताया, “राम को अपने पिता दशरथ के समान समझना, सीता को अपनी माता के समान, वन को अयोध्या के समान समझना, जाओ, मेरे प्रिय बेटे।”

(5) There are ever ………………. a great nation.
हमारी साहित्यिक कृतियों में बहुत-सी ऐसी आनन्ददायक कहानियाँ हैं जो हमारे भीतर महान् नैतिक शक्ति का संचार करती हैं जो हमारे लिए ऐसी रूपरेखा बनाती हैं जिनके अनुरूप हम अपना आचरण बनाते हैं।
हमें अच्छी स्त्रियाँ दो, हमारी सभ्यता महान् होगी।
हमें अच्छी माताएँ दो, हमारा राष्ट्र महान् होगा।

(6) When you talk ………………. tatha.
जब आप शिक्षा के विषय में बात करते हैं तब आपके सम्मुख कुछ लक्ष्य होते हैं-जिन लोगों को शिक्षा दी जाती है उन्हें उस संसार का ज्ञान दो जिसमें वे रह रहे हैं—यह ज्ञान आप विज्ञान, इतिहास तथा भूगोल से प्राप्त कर सकेंगे। आप लोगों को कुछ तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के लिए भी प्रशिक्षित करें ताकि वे अपना जीविकोपार्जन कर सकें। इन बातों को पूरे संसार में शिक्षा के लक्ष्यों के रूप में स्वीकार किया जाता है अर्थात् उस संसार का ज्ञान जिसमें आप रहते हैं और तकनीकी योग्यता जिसके द्वारा आप जीविकोपार्जन कर सकते हैं। किन्तु उस शिक्षा की क्या विशेषता है जो हमारे देश के विद्यालयों में दी जा रही है। हमने सुना है कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य दक्षता और ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि उच्च जीवन की प्राप्ति का प्रयास करना है। एक ऐसे संसार के निर्माण का प्रयास जो स्थान व समय से परे हो यद्यपि बाद वाला पहले वाले को प्रकाशित तथा क्रियाशील करता है। यही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य रहा है। सदियों तक हमने स्त्री जाति की उपेक्षा की है। परम्परा सम्भवतः इससे भिन्न रही है।
पुराकल्पेषु नारीनां मन्दिरा वन्दना निश्चितः।
अध्यापनाञ्च वेदानां गायत्री वाचानां तथा।।

(7) In ancient times ………………. into their own.
प्राचीन समय में हमारी स्त्रियों में उपनयन संस्कार होता था। वे वेदों का अध्ययन करने की अधिकारी हो जाती थीं। वे गायत्री मन्त्र का जाप करने की भी अधिकारी हो जाती थीं। ये सभी बातें हमारी स्त्रियों के लिए खुली थीं। किन्तु हमारी सभ्यता संकुचित हो गयी और स्त्रियों की पराधीनता हमारी सभ्यता के पतन का एक प्रतीक है।

स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद महात्मा गाँधी के अथक प्रयासों से हमारे देश में एक क्रान्ति आई और अब स्त्रियाँ अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं।

Understanding the Text is

Explanations
Explain one of the following passages with reference to the context:
(1) You are living ………………. your work. [2018]
Or
Society requires ………………. disciplined mind. [2018]
Reference : These lines have been taken from the lesson ‘Women’s Education’ written by S. Radhakrishnan. [ N.B.: The above reference will be used for all explanations of this lesson.]

Context : In this lesson the author lays emphasis on the need of education for women in India. He advocates that a drastic change should be brought about in the educational pattern specially for women. He wants that the education should be according to the needs of the present time.

Explanation : In this passage the author makes it clear that we are now living in an age which is much different to the previous ages. Those were the ages when women were kept confined in the four walls of their houses. But now the women are free to come out of the houses and work in different fields of life social, public and political. They have a lot of opportunities in these fields. But they should have discipline and controlled manners. They should be honest in their dealing. Only then they will get success and pleasures.

(2) Actually in our country ………………. and bitter. [2014]
Context : In this lesson the author tells us about education particularly about girls’ education. In our country the girls’ education is not widespread. So, we should encourage every institution which contributes in spreading the girls’ education.

Explanation : In these lines the author describes the types of education he wants. There are two essentials of good education–broad education and deep education. No doubt the education given in our schools and colleges is very wide. But it is lacking in depth. We should not be satisfied only with learning and skill. But we should understand the purpose of our life. Without knowing the purpose, we shall be misguided. We shall do mistakes and our life will be painful.

(3) Therefore it is essential ………………. for yourselves. [2013, 16, 18]
Context : The author feels that our education is lacking in depth. We may become learned and skilled, but if we do not have some kind of purpose in our life, our lives may become blind and bitter.

Explanation : To avoid bitterness and blindness in our life, it is necessary that the education which you gain in the schools and colleges should not only add to your knowledge and technique but should also provide you with a clearly defined purpose in life. As regards the purpose, you have to outline it yourself depending upon the needs.

(4) It is said that vidya ………………. present generation. [2009, 14, 16]
Context : Here the author says that the real aim of education is to have a definite purpose of life. Education helps us in it by enabling us to decide what is right and what is wrong.

Explanation : The author tells us that vidya (knowledge) gives us wisdom and enables us to differentiate between right and wrong. So, the author advises us to find out what is needed in us in the present generation. The world is very wide and is rapidly changing. So, the purpose of life also changes in the changed conditions. One particular purpose cannot hold good in all times. So, it is our duty to decide a purpose of life carefully keeping in view the needs of the present generation. Education helps us a lot in this matter.

(5) Compassion, daya, is ……………… more than that. [2011, 16]
Context : Here, the author tells us about one of the greatest qualities of human beings, i.e., compassion. Compassion means pity including sympathy and consideration of others.

Explanation : The author says that compassion or pity is the natural quality of a woman. But it does not mean that men should not have pity. In fact compassion is the quality of every human being. It is compassion which differentiates man from animal. Every one of us should be sympathetic for others. We should be considerate of joys and sorrows of our fellow beings. Pity, sympathy and considerateness make a man civilized. So, if we want to have a strong society, we should develop these qualities in ourselves.

(6) When you talk ………………. livelihood. [2013, 18]
Context : The author has highlighted the value of good women and educated mothers for a nation.

Explanation : In these lines the author is explaining the two of the many purposes of education. The first purpose of education is to give as much theoretical knowledge to the students as we can. This is possible by teaching them science, history and geography. The other purpose of education is to teach the people to gain applied and industrial ability to do jobs by themselves. This will enable them to earn a means of living.

(7) But what is there ………………. education. [2010, 16, 17, 18]
Context : There are several aims of education. First is that education imparts us knowledge of the world in which we live. Science, history, geography and other subjects help us in this field. Second aim of education is to develop technical skill so that man may earn his livelihood.

Explanation : In these lines the author says that these are not the real aims of knowledge. Only getting information and skill are the ordinary aims. The main aim of education is to enable a man to pass a nobler and higher life. To make a man successful in this world is to enable a man to enjoy permanent bliss of spiritual life.

(8) In ancient times. ………………. subjection of women. [2010, 17]
Context : The author has told that the real aim of education should be to enable a man to pass a nobler and higher life. Here the writer tells us about the education of women in ancient times.

Explanation : In these lines the author points out that in ancient times the women had equal rights to men in the field of education. They had the right to perform all religious ceremonies. They had the right to study vedas and to sing gayatri mantra. Their status was not inferior to men in any way. But the ancient civilization began to decline and it affected the rights of women adversely.

(9) After Independence ………………. their own.
Context : The author is narrating the position and role of women in our country. In ancient times they occupied a valuable position but in time to follow they became subdued.

Explanation : The writer says that after India became free on account of the relentless efforts of Gandhiji, a welcome change has been brought out in the condition of women in our country. Women are now receiving their old heritage and regaining their valuable position.

Short Answer Type Questions

Answer one of the following questions in not more than 30 words:
Question 1.
What are the opportunities available to women in our times ? [2013, 15]
(हमारे समय में स्त्रियों को कौन-से अवसर उपलब्ध हैं?)
Answer :
In our times there are opportunities for women in social work, public life and administration.
(हमारे समय में स्त्रियों को सामाजिक कार्यों में, सार्वजनिक जीवन में तथा प्रशासन में बड़े अवसर उपलब्ध

Question 2.
What kind of women does the society need ? [2017, 18]
(समाज को किस प्रकार की स्त्रियों की आवश्यकता है?)
Or
What qualities should the women have according to the present needs of the society?
(आज के समाज की आवश्यकता के अनुसार स्त्रियों में क्या गुण होने चाहिए ?)
Answer :
Society needs disciplined women of controlled behaviour.
(समाज को नियन्त्रित व्यवहार वाली अनुशासित स्त्रियाँ चाहिए।)

Question 3.
What is the real.situation regarding women’s education in India ?
(भारत में स्त्रियों की शिक्षा की वास्तविक स्थिति क्या है?)
Answer :
In reality women’s education in India is not wide spread.
(वास्तव में भारतवर्ष में स्त्रियों की शिक्षा विस्तृत रूप से फैली हुई नहीं है।)

Question 4.
What kind of education does the author recommend (or advocate) and why?
(लेखक किस प्रकार की शिक्षा की सिफारिश करता है और क्यों?).
Answer :
The author recommends an education with a definite purpose because education without purpose leads towards mistaken deeds resulting in grief.
(लेखक निश्चित उद्देश्य वाली शिक्षा की सिफारिश करता है, क्योंकि उद्देश्यहीन शिक्षा गलत कार्यों की ओर प्रेरित करती है जिसके परिणामस्वरूप दुःख होता है।)

Question 5.
Point out the difference between the cultured and the uncultured mind so far as attitude towards life is concerned.
(जहा तक जीवन के प्रति दृष्टिकोण का सम्बन्ध है सुसंस्कृत तथा असंस्कृत मस्तिष्क का अन्तर स्पष्ट करो।)
Answer :
A cultured mind is dedicated to a single purpose while uncultured mind is scattered in many directions.
(एक सुसंस्कृत मस्तिष्क एक ही लक्ष्य की ओर लगा रहता है, जबकि असंस्कृत मस्तिष्क भिन्न-भिन्न दिशाओं में बिखरा रहता है।)

Question 6.
Which particular quality distinguishes men from women ? [2009, 17]
(कौन-सी विशेष गुण पुरुषों को स्त्रियों से भिन्न करता है?)
Answer :
Compassion or feeling of pity distinguishes men from women.
(दया की भावना पुरुषों को स्त्रियों से भिन्न करती है।)

Question 7.
What qualities are necessary for the development of human beings ?
(मनुष्य के विकास के लिए कौन-कौन-से गुण आवश्यक हैं?)
Answer :
Kindness, considerateness and compassion are necessary qualities for the development of human beings.
(दया, दूसरों के प्रति विचारशील होना तथा सहानुभूति मनुष्य के विकास के लिए आवश्यक गुण हैं।)

Question 8.
What are the two important products of the tree of life and what is their effect on human beings ?
(जीवन-रूपी वृक्ष के दो मुख्य उत्पाद क्या हैं और मनुष्य पर उनका क्या प्रभाव होता है ?)
Answer :
The two important products of the tree of life are—the study of our ancient literature and communion with great minds. These two things mould men’s mind and heart.
(जीवन-रूपी वृक्ष के दो प्रमुख उत्पाद हैं—अपने प्राचीन साहित्य का अध्ययन और महान् व्यक्तियों से मस्तिष्क द्वारा सम्पर्क। ये दो वस्तुएँ मनुष्यों के मस्तिष्कों और हृदयों को बदल देती हैं।)

Question 9.
What are the three important qualities of a valuable life? [2018]
(सारयुक्त जीवन के तीन महत्त्वपूर्ण गुण कौन-कौन से हैं?)
Or
What constitutes the essence of good life ? [2017]
(जीवन का सार कौन-सी बात बनाती है?)
Answer :
The three important qualities of a valuable life are—Dama i.e. self-control, Dana i.e. charity and Daya i.e. compassion.
(सारयुक्त जीवन के तीन मुख्य गुण हैं—दम अर्थात् आत्म-नियन्त्रण, दान अर्थात् सहायता और दया अर्थात् सहानुभूति।)

Question 10.
What aims do people have in view generally when they talk about : education ?
(जब लोग शिक्षा के विषय में बात करते हैं, तब सामान्यत: उनके विचार से शिक्षा के क्या उद्देश्य होते हैं?)
Answer :
Generally the people have two aims of education in their view—
(i) to give the student knowledge of the world in which they live through science, history and geography,
(ii) to give them technical skill to earn their livelihood.
(साधारणत: लोगों के मन में शिक्षा के दो उद्देश्य होते हैं–
(i) विद्यार्थियों को विज्ञान, इतिहास तथा भूगोल के द्वारा उस संसार का ज्ञान देना जिसमें वे रहते हैं,
(ii) उन्हें तकनीकी कुशलता देना ताकि वे अपनी : आजीविका प्राप्त कर सकें।)

Question 11.
State the chief purpose of education. [2013, 18]
(शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बताइए।)।
Answer :
The chief purpose of education is not merely to gain skill or to know more and more about the world but the chief purpose of education is the initiation into a higher life, initiation into a world which transcends the world of space and time.
(शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल कार्य-निपुणता प्राप्त करना अथवा संसार की अधिक-से-अधिक जानकारी प्राप्त करना ही नहीं है बल्कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य उच्च जीवन को जानने का प्रयास करना है, उस संसार को जानने का प्रयास करना है जो स्थान और समय से कहीं ऊपर हो।)

Question 12.
What were the things women entitled to in ancient India ? [2018]
(वे कौन-कौन सी बातें थीं जिनका प्राचीन भारत में स्त्रियों को अधिकार था?)
Answer :
In ancient India women were entitled to study Vedas and to the chanting of Gayatri mantra.
(प्राचीन भारत में स्त्रियों को वेदों का अध्ययन करने तथा गायत्री मन्त्र का जप करने का अधिकार था।)

Question 13.
What is one of the signs of the decline of our civilization ?
(हमारी सभ्यता के पतन का एक चिह्न क्या है ?)
Answer :
Subjection of women is one of the signs of the decline of our civilization.
(स्त्रियों की पराधीनता हमारी सभ्यता के पतन का एक चिह्न है।)

Question 14.
Through whose efforts has a change been brought about in the condition of women after Independence ?
(स्वतन्त्रता के बाद स्त्रियों की दशा में परिवर्तन किसके प्रयासों से आया?)
Answer :
Through the efforts of Mahatma Gandhi, a change has been brought about in the condition of women after independence.
(स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद महात्मा गाँधी के प्रयासों से स्त्रियों की दशा में परिवर्तन आया है।)

Question 15.
Briefly describe the importance of the study of classics in shaping the personality of men and women in society.
(हमारे समाज में पुरुष और स्त्रियों के व्यक्तित्व को बनाने में प्राचीन ग्रन्थों के अध्ययन की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।)
Answer :
When we study our classics, we come in close contact of different characters and minds. There we find many examples which fill us with the feelings of considerateness, kindness and compassion which shape the personality of men and women in our society.
(जब हम अपने प्राचीन ग्रन्थों का अध्ययन करते हैं तब हम भिन्न-भिन्न चरित्रों एवं विद्वानों के सम्पर्क में आते हैं। वहाँ हमें बहुत से ऐसे उदाहरण मिलते हैं जो हमें दूसरों के प्रति विचारवान बनाते हैं तथा दया और सहानुभूति की भावनाओं से भर देते हैं जो हमारे समाज में स्त्री तथा पुरुषों के व्यक्तित्व को बनाती है।)

Question 16.
Why is education of women essential for a nation ?
(किसी राष्ट्र की स्त्रियों के लिए शिक्षा क्यों आवश्यक है?)
Answer :
The progress of nation depends upon its women also. So, the education of women is essential so that they may be broad minded and well disciplined.
(किसी राष्ट्र की उन्नति उसकी स्त्रियों पर भी निर्भर करती है। इसीलिए स्त्रियों की शिक्षा आवश्यक है ताकि वे विशाल मस्तिष्क वाली तथा अनुशासित हों।)

Question 17.
What was the great teaching that Lakshman’s mother gave him when he was going to the forest ? [2011, 18]
(लक्ष्मण की माता ने उसे क्या महान् शिक्षा दी जब वे जंगल को जा रहे थे ?)
Answer :
When Lakshman was going to the forest, his mother taught him, “Look upon, Ram as your father, look upon Sita as myself, look upon the forest as Ayodhya.” (जब लक्ष्मण वन को जाने लगे तब उनकी माता ने उन्हें सिखाया, “राम को अपने पिता के समान, सीता को अपनी माता के समान और वन को अयोध्या के समान समझना।)

Question 18.
What causes the decline of womanhood, according to S. Radhakrishnan? [2013,15]
(एस० राधाकृष्णन के अनुसार नारीत्व के पतन का क्या कारण है?)
Answer :
According to S. Radhakrishnan, subjection of women causes the decline of womanhood. (एस० राधाकृष्णन के अनुसार नारीत्व के पतन का कारण नारी की पराधीनता है।)

Vocabulary

Choose the most appropriate word or phrase that best completes the sentence:
1. Society requires women of disciplined minds and ……………… manners. [2017]
(a) controlled
(b) restrained
(c) good
(d) disciplined

2. Actually in our country, education, ……………… girl’s education is concerned, is not widespread enough.
(a) so far as
(b) as far as
(c) so long as
(d) as long as

3. But I am anxious that the kind of education that is imparted must not only be broad but should also be ……………… [2017]
(a) meaningful
(b) useful
(c) purposeful
(d) deep

4. So the purpose which you ……………… in your life must he adapted to the relevant needs of the present generation.
(a) accept
(b) recognise
(c) adapt
(d) adopt

5. I am anxious that our great classics should be studied, the classics of all countries of which we are the ………………
(a) master
(b) possessor
(c) upholders
(d) inheritors

6. There are ever so many ……………… stories in our classics which will in still into us great moral strength, which will lay down for us the lines on which we have to conduct ourselves.
(a) thrilling
(b) joyful
(c) inspiring
(d) moral

7. But our civilization became arrested and one of the main signs of that ……… of our civilization is the subjection of women.
(a) fall
(b) ruin
(c) set back
(d) decay

8. After Independence, through the exertions of ……………… a revolution has been effected in our country, and women are coming into their own.
(a) Mahatma Gandhi
(b) Vinoba Bhave
(c) Mother Teresa
(d) Jawaharlal Nehru

9. When you talk about education, you have several aims ………………
(a) openly
(b) in view
(c) internally
(d) out of tune

10. For some ……………… We neglected our women folk. [2017]
(a) years
(b) weeks
(c) decades
(d) centuries

11. If you do not have ……………… you are not human. [2017]
(a) power
(b) compassion
(c) glory
(d) money

12. You are living in an age when there are great ……………… for women in social work. [2017]
(a) profits
(b) problems
(c) opportunities
(d) dangers

13. The natural quality of women is ……………… [2018]
(a) indifference
(b) charm
(c) selfishness
(d) compassion

14. ……………… is the quality which is more characteristic of women than men. [2012, 18].
(a) Emotion
(b) Compassion
(c) Passion
(d) Impassioned

15. When you talk about education, you have ……………… aims in view. [2016]
(a) several
(b) plenty of
(c) so many
(d) a number of

16. We have heard that the chief ……………… of education is not merely the acquiring of skill or information but the initiation into a higher life. [2016]
(a) aim
(b) goal
(c) purpose
(d) principle

Answers :
1. (b), 2. (b), 3. (b), 4. (d), 5. (), 6. (a), 7. (d), 8. (a), 9. (b), 10. (d), 11. (b), 12. (c), 13. (d), 14. (b), 15. (a), 16. (c).

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