UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 6 Anatomy of Flowering Plants 

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 6 Anatomy of Flowering Plants (पुष्पी पादपों का शारीर)

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अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विभिन्न प्रकार के मेरिस्टेम की स्थिति तथा कार्य बताइए।
उत्तर :
1. शीर्षस्थ विभज्योतक :
ये मुख्य रूप से जड़ व तने के शीर्षों पर तथा पत्तियों के अग्रों पर मिलते हैं जहाँ ये नई-नई कोशिकाएँ बनाते रहते हैं।

 2. अन्तर्वेशी विभज्योतक :
यह शीर्षस्थ विभज्योतक का अलग होकर छूटा हुआ भाग होता है। जो स्थाई ऊतकों में परिवर्तित न होकर उनके मध्य में छूट जाता है। घासों के पर्यों के आधारों में, पोदीने के तने की पर्व सन्धियों के नीचे यह ऊतक पाया जाता है। इनकी कोशिकाओं में (UPBoardSolutions.com) विभाजन के फलस्वरूप पौधों की लम्बाई में वृद्धि होती है।

3. पाश्र्व विभज्योतक :
पौधों में इस ऊतक की स्थिति पार्श्व में होती है इसीलिए इसे पार्श्व विभज्योतक कहते हैं। इनकी कोशिकाओं में विभाजन अरीय दिशा में होता है। इनके

उदाहरण :
पूलीय कैम्बियम व कॉर्क कैम्बियम हैं।

प्रश्न 2.
कॉर्क कैम्बियम ऊतकों से बनता है जो कॉर्क बनाते हैं। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? वर्णन करो।
उत्तर :
हाँ। हम इस कथन से सहमत हैं कि कॉर्क कैम्बियम ऊतकों से बनता है जो कॉर्क बनाते हैं। ये पार्श्व विभज्योतकों की कोशिकाओं के अरीय दिशा में विभाजन के फलस्वरूप बनता है।

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प्रश्न 3.
चित्रों की सहायता से काष्ठीय एन्जियोस्पर्म के तने में द्वितीयक वृद्धि के प्रक्रम का वर्णन कीजिए इसकी क्या सार्थकता है?
उत्तर :

द्वितीयक वृद्धि

शीर्षस्थ विभज्योतक की कोशिकाओं के विभाजन, विभेदन और परिवर्द्धन के फलस्वरूप प्राथमिक ऊतकों का निर्माण होता है। अत: शीर्षस्थ विभज्योतक के कारण पौधे की लम्बाई में वृद्धि होती है। इसे प्राथमिक वृद्धि कहते हैं। द्विबीजपत्री तथा जिम्नोस्पर्स आदि काष्ठीय पौधों में पार्श्व विभज्योतक के कारण तने तथा जड़ की मोटाई में वृद्धि होती है। इस प्रकार मोटाई में होने वाली वृद्धि को द्वितीयक वृद्धि (secondary growth) कहते हैं। जाइलम और फ्लोएम के मध्य विभज्योतक को संवहन एधा (vascular cambium) तथा वल्कुट या परिरम्भ  में विभज्योतक को कॉर्क एधा (cork cambium) कहते हैं।

द्वितीयक वृद्धि-द्विबीजपत्री तना

द्वितीयक वृद्धि संवहन एधा (vascular cambium) तथा कॉर्क एधा (cork cambium) की क्रियाशीलता के कारण होती है।

संवहन एधा की क्रियाशीलता 
द्विबीजपत्री तने में संवहन बण्डल वर्षी (open) होते हैं।  संवहन बण्डलों के जाईलम तथा फ्लोएम के मध्य अन्तःपूलीय एधा (intrafascicular cambium) होती है। मज्जा रश्मियों की मृदूतकीय कोशिकाएँ जो अन्त:पूलीय एधा के मध्य स्थित होती हैं, विभज्योतकी होकर आन्तरपूलीय (UPBoardSolutions.com) एधा (interfascicular cambium) बनाती हैं। पूलीय तथा आन्तरपूलीय एधा मिलकर संवहन एधा का घेरा बनाती हैं।
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संवहन एधा वलय (vascular cambium ring)
की कोशिकाएँ तने की परिधि के समानान्तर तल अर्थात् स्पर्शरेखीय तल (tangential plane) में ही विभाजित होती हैं। इस प्रकार प्रत्येक कोशिका के विभाजन से जो नई कोशिकाएँ बनती हैं उनमें से केवल एक जाइलम या फ्लोएम की कोशिका में रूपान्तरित हो जाती है, जबकि दूसरी कोशिका विभाजनशील (meristematic) बनी रहती है। परिधि की ओर बनने वाली कोशिकाएँ फ्लोएम के तत्त्वों में तथा केन्द्र की ओर बनने वाली कोशिकाएँ जाइलम के तत्त्वों में परिवद्धित हो जाती हैं। बाद में बनने वाला संवहन ऊतक क्रमशः द्वितीयक जाइलम (secondary xylem) तथा द्वितीयक फ्लोएम (secondary phloem) कहलाता है। ये संरचना तथा कार्य में प्राथमिक जाइलम तथा फ्लोएम के समान होते हैं।

कॉर्क एधा की क्रियाशीलता
संवहन एधा की क्रियाशीलता से बने द्वितीयक ऊतक पुराने ऊतकों पर दबाव डालते हैं जिसके कारण भीतरी (केन्द्र की ओर उपस्थित) प्राथमिक जाइलम अन्दर की ओर दब जाता है। इसके साथ ही परिधि की ओर स्थित प्राथमिक फ्लोएम नष्ट हो जाता है। इससे पहले कि बाह्य त्वचा (epidermis) की कोशिकाएँ एक निश्चित सीमा तक खिंचने के बाद टूट-फूट जाएँ, अधस्त्वचा (hypodermis) के अन्दर की कुछ मृदूतकीय कोशिकाएँ विभज्योतक (meristem) होकर कॉर्क एधा (cork cambium) बनाती हैं। कॉर्क एधा कभी-कभी वल्कुट, अन्तस्त्वचा, परिरम्भ (pericycle) आदि से बनती है। कॉर्क एधा तने की परिधि के समानान्तर विभाजित होकर बाहर की ओर सुबेरिनयुक्त (suberized) कॉर्क या फेलम (cork or phellem) का निर्माण करती है। यह तने के अन्दर के भीतरी ऊतकों की सुरक्षा करती है। कॉर्क एधा से केन्द्र की ओर बनने वाली मृदूतकीय (parenchymatous), स्थूलकोणीय अथवा दृढ़ोतकी कोशिकाएँ द्वितीयक वल्कुट (phelloderm) का निर्माण करती हैं। कॉर्क एधा से बने (UPBoardSolutions.com) फेलम तथा फेलोडर्म को पेरीडर्म (periderm) कहते हैं। पेरीडर्म में स्थान-स्थान पर गैस विनिमय के लिए वातरन्ध्र (lenticels) बन जाते हैं। द्वितीयक जाइलम वसन्त काष्ठ तथा शरद् काष्ठ में भिन्नत होता है। इसके फलस्वरूप कुछ पौधों में स्पष्ट वार्षिक वलय बनते हैं।
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित में विभेद कीजिए

(अ) टैकीड तथा वाहिका
(ब) पैरेन्काइमा तथा कॉलेन्काइमा
(स) रसदारु तथा अन्तःकाष्ठ
(द) खुला तथा बन्द संवहन बण्डल।
उत्तर :
(अ) टैकीड तथा वाहिका में अन्तर
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(ब)
पैरेन्काइमा (मृदूतक) तथा कॉलेन्काइमा (स्थूलकोण ऊतक) में अन्तर
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(स)
रसदारु तथा अन्तःकाष्ठ में अन्तर

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(द)
खुले तथा बन्द संवहन बण्डल में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 6 Anatomy of Flowering Plants image 7प्रश्न 5.
निम्नलिखित में शारीर के आधर पर अन्तर कीजिए
(अ) एकबीजपत्री मूल तथा द्विबीजपत्री मूल
(ब) एकबीजपत्री तना तथा द्विबीजपत्री तना।
उत्तर :
(अ)
एकबीजपत्री मूल तथा द्विबीजपत्री मूल में अन्तर

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(ब)
एकबीजपत्री तने तथा द्विबीजपत्री तने में अन्तर ऊतक एकबीजपत्री तना

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प्रश्न 6.
आप एक शैशव तने की अनुप्रस्थं काट का सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन कीजिए। आप कैसे पता करेंगे कि यह एकबीजपत्री तना है अथवा द्विबीजपत्री तना है? इसके कारण बताइए।
उत्तर :
शैशव तने की अनुप्रस्थ काट का सूक्ष्मदर्शीय अवलोकन करके निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर एकबीजपत्री या द्विबीजपत्री तने की पहचान करते हैं

(क)
तने के आन्तरिक आकारिकी लक्षण

  1. बाह्य त्वचा पर उपचर्म (cuticle), रन्ध्र (stomata) तथा बहुकोशीय रोम पाए जाते हैं।
  2.  अधस्त्वचा (hypodermis) उपस्थित होती है।
  3. अन्तस्त्वचा प्रायः अनुपस्थित या अल्पविकसित होती है।
  4. परिरम्भ (pericycle) प्रायः बहुस्तरीय होता है।
  5. संवहन बण्डल संयुक्त (conjoint), बहि:फ्लोएमी (collateral) या उभयफ्लोएमी (bicollateral) होते हैं।
  6. प्रोटोजाइलम एण्डार्क (endarch) होता है।

(ख)
एकबीजपत्री तने के आन्तरिक आकारिकी लक्षण

  1. बाह्यत्वचा पर बहुकोशिकीय रोम अनुपस्थित होते हैं।
  2. अधस्त्वचा दृढ़ोतक (sclerenchymatous) होती है।
  3. भरण ऊतक (ground tissue) वल्कुट, अन्तस्त्वचा, परिरम्भ तथा मज्जा में अविभेदित होता है।
  4. संवहन बण्डल भरण ऊतक में बिखरे रहते हैं।
  5. संवहन बण्डल संयुक्त, बहि:फ्लोएमी तथा अवर्थी (UPBoardSolutions.com) (closed) होते हैं।
  6. संवहन बण्डल चारों ओर से दृढ़ोतक से बनी बण्डल अच्छद से घिरे होते हैं।
  7. जाइलम वाहिकाएँ (vessels) ‘V’ या ‘Y’ क्रम में व्यवस्थित रहती हैं।

(ग)
द्विबीजपत्री तने के आन्तरिक आकारिकी लक्षण

  1. बाह्य त्वचा पर बहुकोशिकीय रोम पाए जाते हैं।
  2. अधस्त्वचा (hypodermis) स्थूलकोण ऊतक से बनी होती है।
  3.  संवहन बण्डल एक या दो घेरों में व्यवस्थित होते हैं।
  4.  भरण ऊतक वल्कुट, अन्तस्त्वचा, परिरम्भ, मज्जा तथा मज्जा रश्मियों में विभेदित होता है।
  5.  संवहन बण्डल संयुक्त, बहि:फ्लोएमी या उभयफ्लोएमी और वर्धा (open) होते हैं।
  6. जाइलम वाहिकाएँ रेखीय (linear) क्रम में व्यवस्थित होती हैं।

प्रश्न 7.
सूक्ष्मदर्शी, किसी पौधे के भाग की अनुप्रस्थ काट में निम्नलिखित शारीर रचनाएँ दिखाती है
(अ) संवहन बण्डल संयुक्त, फैले हुए तथा उसके चारों ओर स्क्लेरेन्काइमी आच्छद हैं।
(ब) फ्लोएम पैरेन्काइमा नहीं है।
आप कैसे पहचानोगे कि यह किसका है?
उत्तर :
एकबीजपत्री तने की आन्तरिक आकारिकी या शारीर में संवहन बण्डल भरण ऊतक में बिखरे रहते हैं। संवहन बण्डल संयुक्त तथा अवर्थी होते हैं। संवहन बण्डल के चारों ओर स्क्लेरेन्काइमी बण्डल आच्छद (bundle sheath) होती है। फ्लोएम में फ्लोएम मृदूतक का अभाव होता है। अत: सूक्ष्मदर्शी में प्रदर्शित पौधे का भाग एकबीजपत्री तना है।

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प्रश्न 8.
जाइलम तथा फ्लोएम को जटिल ऊतक क्यों कहते हैं?
उत्तर :
जाइलम तथा फ्लोएम को जटिल ऊतक इसलिए कहते हैं क्योंकि ये एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनते हैं। सभी कोशिकाएँ मिलकर एक इकाई के रूप में विभाजित होकर कार्य करती हैं।

प्रश्न 9.
रन्ध्रीतन्त्र क्या है? रन्ध्र की रचना का वर्णन करो और इसका नामांकित चित्र भी बनाओ।
उत्तर :
रन्ध्र (Stomata) ऐसी रचनाएँ हैं, जो पत्तियों की बाह्यत्वचा पर पाये जाते हैं। रन्ध्र वाष्पोत्सर्जन तथा गैसों के विनिमय को नियमित करते हैं। प्रत्येक रन्ध्र (stoma= एकवचन) में सेम के आकार की दो कोशिकाएँ होती हैं जिन्हें द्वार कोशिकाएँ (guard cells) कहते हैं। एकबीजपत्री पौधों में द्वार कोशिकाएँ डम्बलाकार होती हैं। द्वार कोशिका की बाहरी भित्ति पतली तथा आन्तरिक भित्ति मोटी होती है। द्वार कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट होता है और यह रन्ध्र के खुलने (UPBoardSolutions.com) तथा बंद होने के क्रम को नियमित करता है। कभी-कभी कुछ बाह्यत्वचीय कोशिकाएँ भी रन्ध्र के साथ लगी रहती हैं, इन्हें उप कोशिकाएँ (accessory cells) कहते हैं। रन्ध्रीय छिद्र, द्वारकोशिका तथा सहायक कोशिकाएँ मिलकर रन्ध्री तन्त्र (stomatal system) का निर्माण करती हैं।
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प्रश्न 10.
पुष्पी पादपों में तीन मूलभूत ऊतक तंत्र बताओ। प्रत्येक तंत्र के ऊतक बताओ।

उत्तर :
पुष्पी पादपों में तीन मूलभूत ऊतक तंत्र निम्नवत् हैं

  1. बाह्यत्वचीय ऊतक तंत्र-मृदूतक।
  2. भरण ऊतक तंत्र-पेरेनकाइमा, कोलेनकाइमा तथा स्क्लेरेनकाइमा।
  3. संवहन ऊतक तंत्र-जाइलम तथा फ्लोएम।

प्रश्न 11.
पादप शारीर का अध्ययन हमारे लिए कैसे उपयोगी है?
उत्तर :
फार्माकोचोसी (Pharmaconosy) विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत औषधीय महत्त्व के पदार्थों के स्रोत, विशेषताओं और उनके उपयोग का अध्ययन प्राकृतिक अवस्था में किया जाता है। यह अध्ययन मुख्य रूप से पौधों के शारीर (anatomy) पर निर्भर करता है। इमारती लकड़ी (timber) की दिन-प्रतिदिन कमी होती जा रही है, इसीलिए अच्छी इमारती लकड़ीके स्थान पर खराब इमारती लकड़ी का उपयोग किया जा रहा है। शारीर अध्ययन द्वारा लकड़ी की किस्म (quality) का पता लगाया जा सकता है। शारीर अध्ययन द्वारा एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री तने और जड़ की पहचान की जा सकती है। जीवाश्म शारीर (fossil anatomy) अध्ययन द्वारा प्राचीनकालीन पौधों का ज्ञान होता है। इससे जैवविकास का ज्ञान होता है कि आधुनिक पौधों की उत्पत्ति किस प्रकार हुई है। सूक्ष्मदर्शीय अध्ययन द्वारा चाय, कॉफी, तम्बाकू, केसर, हींग, वनस्पति रंगों, पादप औषधियों में मिलावट (adulteration) का अध्ययन किया जा सकता है। मिलावट के कारण इनकी आन्तरिक संरचना में भिन्नता आ जाती है।

प्रश्न 12.
परिचर्म क्या है? द्विबीजपत्री तने में परिचर्म कैसे बनता है?
उत्तर :
परिचर्म (Periderm) :
कॉर्क एधा की जीवित मृदूतक कोशिका से परिचर्म का निर्माण होता है। कॉर्क एधा या कागजन (cork cambium or phellogen) की कोशिकाएँ विभाजित होकर परिधि की ओर जो कोशिकाएँ बनाती हैं, वे सुबेरिनयुक्त (suberinized) कोशिकाएँ होती हैं। सुबेरिनयुक्त कोशिकाओं से बना यह स्तर कॉर्क या फेलम (cork or phellem) कहलाता है। कॉर्क एधा (cork cambium) से भीतर की ओर बनने वाली मृदूतकीय कोशिकाएँ द्वितीयक वल्कुट या फेलोडर्म (phelloderm) (UPBoardSolutions.com) बनाती हैं। फेलम (कॉर्क), कॉर्क एधा तथा द्वितीयक वल्कुट मिलकर परिचर्म (periderm) बनाती हैं।

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प्रश्न 13.
पृष्ठाधर पत्ती की भीतरी रचना का वर्णन चिह्नित चित्रों की सहायता से कीजिए।
उत्तर :

पृष्ठाधर या द्विबीजपत्री पत्ती की संरचना

द्विबीजपत्री पौधों की पत्ती की अनुप्रस्थ काट में निम्नलिखित संरचनाएँ दिखाई देती हैं

(क)
बाह्यत्वचा (Epidermis) :
बाह्यत्वचा सामान्यत: दोनों सतहों पर एककोशिकीय मोटे स्तर के रूप में होती है।

(i) ऊपरी बाह्यत्वचा :
यह एक कोशिका मोटा स्तर है। इसकी कोशिकाएँ ढोलकनुमा परस्पर एक-दूसरे से सटी हुई होती हैं। इन कोशिकाओं की बाहरी भित्ति उपचर्म-युक्त होती है। कोशिकाओं में साधारणत: हरितलवक नहीं होते हैं। कुछ पौधों (प्रायः शुष्क स्थानों में उगने वाले पौधों में) में बहुस्तरीय बाह्यत्वचा (multiple epidermis) पाई जाती हैं।

(ii) निचली बाह्यत्वचा :
निचली बाह्यत्वचा एक कोशिका मोटे स्तर रूप में पाई जाती है। इस पर पतला उपचर्म होता है। रन्ध्र बहुतायत में पाए जाते हैं। रन्ध्रों की रक्षक कोशिकाओं में हरितलवक पाए जाते हैं। कुछ पत्तियों की ऊपरी बाह्यत्वचा पर भी रन्ध्र होते हैं, किन्तु इनकी संख्या सदैव कम होती है।

(ख)
पर्णमध्योतक (Mesophyll) :
दोनों बाह्यत्वचाओं के मध्य स्थित सम्पूर्ण ऊतक (संवहन बण्डलों को छोड़कर) पर्णमध्योतक कहलाता है। पृष्ठाधर पत्तियों में पर्णमध्योतक दो प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनता है

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(i) खम्भ ऊतक (Palisade tissue) :
ऊपरी बाह्यत्वचा के नीचे लम्बी, खम्भाकार कोशिकाएँ दो-तीन पर्यों में लगी होती हैं। इन कोशिकाओं के मध्य अन्तराकोशिकीय स्थान बहुत कम या नहीं होते हैं। ये रूपान्तरित मृदूतकीय कोशिकाएँ होती हैं। यह प्रकाश संश्लेषी (photosynthetic) ऊतक है।
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(ii) स्पंजी ऊतक (Spongy tissue) :
खम्भ मृदूतक से लेकर निचली बाह्यत्वचा तक स्पंजी मृदूतक ही होता है। ये कोशिकाएँ सामान्यतः गोल और ढीली व्यवस्था में अर्थात् काफी और स्पष्ट अन्तराकोशिकीय स्थान वाली होती हैं। इन कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट्स कम संख्या में होते हैं। मध्य शिरा में संवहन पूल के ऊपर तथा नीचे दृढ़ोतक या स्थूलकोण ऊतक पाया जाता है।

(ग)
संवहन पूल (Vascular bundles) :
पत्ती की अनुप्रस्थ काट में अनेक छोटी-छोटी शिराएँ संवहन पूलों के रूप में दिखाई पड़ती हैं। संवहन पूल जाइलम और फ्लोएम के मिलने से बनता है। आदिदारु (protoxylem) सदैव ऊपरी बाह्यत्वचा की ओर होती है, जबकि अनुदारु (metaxylem) निचली बाह्यत्वचा की ओर होता है। फ्लोएम निचली बाह्यत्वचा की ओर होता है। जाइलम और फ्लोएम के मध्य एधा (cambium) होती है। इस प्रकार संवहन पूल संयुक्त (conjoint), समपार्श्व (collateral) तथा वध (open) होते हैं। प्रत्येक संवहन पूल दृढ़ोतक रेशों से घिरा होता है तथा इसके बाहर मृदूतकीय कोशिकाओं का पूलीय आच्छद होता है। यह बण्डल आच्छद सामान्यत: छोटी-से-छोटी शिरा के चारों ओर भी होता है।

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प्रश्न 14.
त्वक् कोशिकाओं की रचना तथा स्थिति उन्हें किस प्रकार विशिष्ट कार्य करने में सहायता करती है?
उत्तर :

त्वक कोशिकाएँ

ये पादप शरीर के सभी भागों पर सबसे बाहरी रक्षात्मक आवरण बनाती हैं। यह प्रायः एक कोशिका मोटा स्तर होता है। कोशिकाएँ अनुप्रस्थ काट में ढोलकनुमा (barrel shaped) दिखाई देती हैं। बाहर से देखने पर ये अनियमित आकार की फर्श के टाइल्स की तरह अथवा बहुभुजीय दिखाई देती हैं। ये परस्पर एक-दूसरे से मिलकर अखण्ड सतह बनाती हैं। ये कोशिकाएँ मृदूतकीय कोशिकाओं का रूपान्तरण होती हैं। इन कोशिकाओं में कोशिकाद्रव्य की मात्रा बहुत (UPBoardSolutions.com) कम होती है तथा प्रत्येककोशिका में एक बड़ी रिक्तिका होती है। पौधे के वायवीय भागों की त्वक् कोशिकाएँ उपचर्म (cuticle) से ढकी होती हैं, परन्तु मूलीय त्वचा की कोशिकाओं पर उपचर्म की रक्षात्मक आवरण नहीं होता। तने, पत्ती आदि की त्वक् कोशिकाओं के मध्य रन्ध्र (stomata) पाए जाते हैं। रन्ध्र द्वार कोशिकाओं (guard cells) से घिरे होते हैं। द्वार कोशिकाएँ वृक्काकार होती हैं। द्वार कोशिकाओं के चारों ओर पाई जाने वाली कोशिकाओं को सहायक कोशिकाएँ कहते हैं। रन्ध्रों का खुलना तथा बन्द होना रक्षक कोशिकाओं की आशूनता पर निर्भर करता है। रन्ध्र वाष्पोत्सर्जन तथा गैसों के आदान प्रदान का कार्य करते हैं। रन्ध्रों की स्थिति, संख्या, संरचना, उपचर्म की मोटाई आदि वाष्पोत्सर्जन की दर को प्रभावित करती है।

जड़ों की त्वक कोशिकाओं से एककोशिकीय मूलरोम बनते हैं। ये मृदा से जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण करते हैं। तने और पत्तियों की त्वक्को शिकाओं से बहुकोशिकीय रोम बनते हैं। पत्ती एवं तने की रोमयुक्त सतह वाष्पोत्सर्जन की दर को नियन्त्रित करने में सहायक होती है। रन्ध्रों के रोमों से ढके रहने के कारण मरुभिद् पौधों में वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है। त्वक् कोशिकाएँ वातावरणीय दुष्प्रभावों से पौधों की सुरक्षा करती हैं।

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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किस पादप के फ्लोएम में सह कोशिकाएँ नहीं होती हैं?
(क) साइकस
(ख) नीम
(ग) आम
(घ) सागौन
उत्तर :
(क) साइकस

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से किसकी दारू में वाहिकाएँ नहीं होती हैं?
(क) साइकस
(ख) आम
(ग) नीम
(घ) सागौन
उत्तर :
(क) साइकस

प्रश्न 3.
उस पादप का नाम क्या है जिसमें सिस्टोलिथ पायी जाती है?
(क) फाइकस
(ख) मेज
(ग) आम
(घ) सागौन
उत्तर :
(क) फाइकस

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प्रश्न 4.
वाहिकाएँ तथा सखी कोशिकाएँ किसमें अनुपस्थित रहती हैं?
(क) इफेड्रा
(ख) साइकस
(ग) सूरजमुखी
(घ) आम
उत्तर :
(ख) साइकस।

प्रश्न 5.
मध्यादिदारूक आदिदारू पाया जाता है।
(क) सरसों की जड़ में
(ख) सरसों के तने में
(ग) टेरिस के राइजोम में
(घ) साइकस की कोरेलायड जड़ों में
उत्तर :
(ख) सरसों के तने में

प्रश्न 6.
कैस्पेरियन पट्टी पायी जाती हैं।
(क) बाह्य त्वचा में
(ख) अधत्वचा में
(ग) अन्तस्त्वचा में
(घ) फ्लोयम में
उत्तर :
(ग) अन्तस्त्वचा में।

प्रश्न 7.
रबर की पत्ती में पाये जाने वाले कैल्सियम कार्बोनेट के क्रिस्टल को कहते हैं।
(क) रैफाइड्स
(ख) सिस्टोलिथ
(ग) स्फीरैफाइड्स
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रैफाइड्स

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प्रश्न 8.
संयुक्त, उभयफ्लोएमी और खुले संवहन बण्डले पाये जाते हैं।
(क) मक्का के तने में
(ख) सभी द्विबीजपत्री तनों में
(ग) कुकुरबिटा में
(घ) जड़ों में
उत्तर :
(ग) कुकुरबिटा में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पाश्र्व विभज्योतक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
एधा (cambium)।

प्रश्न 2.
“वल्कुट की सबसे भीतरी परत का नाम लिखिए।
उत्तर :
अन्तस्त्वचा (endodermis)।

प्रश्न 3.
उस जीवित ऊतक का नाम बताइए जो प्रमुखतः शाकीय पौधों में यान्त्रिक शक्ति प्रदान करता है।
उत्तर :
शाकीय पौधों में यान्त्रिक शक्ति प्रदान करने वाला प्रमुख जीवित ऊतक अधः स्तरीय भाग में (in hypodermal part) स्थूल कोण ऊतक (collenchyma) होता है।

प्रश्न 4.
जड़ों में पाये जाने वाले संवहन बण्डलों के लक्षण लिखिए।
उत्तर :
जड़ों में अरीय संवहन बण्डल पाये जाते हैं। इस प्रकार के संवहन बण्डलों में जाइलम और फ्लोएम अलग-अलग त्रिज्याओं पर होते हैं। इनमें जाइलम सदैव बाह्यआदिदारुक मिलता है अर्थात् आदिदारु परिधि की ओर तथा अनुदारु केन्द्र की ओर होता है। इन संवहन बण्डलों में प्राथमिक एधा नहीं पायी जाती। द्विबीजपत्री जड़ों में माइलम तथा फ्लोएम के मध्य बाद में, द्वितीयक एधा बन जाती है।

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प्रश्न 5.
उस पौधे का नाम लिखिए जिसमें उभय फ्लोएमी संवहन बण्डल (पूल) पाये जाते हैं।
उत्तर :
आवृतबीजी पौधों के कुल कुकुरबिटेसी के पौधों जैसे काशीफल (Cucurbita maxima) आदि में उभय फ्लोएमी (bicollateral) संवहन पूल पाये जाते हैं।

प्रश्न 6.
विरल दारुक तथा सघन दारुक काष्ठ में अन्तर बताइए।
उत्तर :
विरल दारुक (manoxylic) काष्ठ :
साइकस में द्वितीयक जाइलम वलयों के मध्य मृदुतक कोशिकाओं के समूह पाये जाते हैं क्योंकि इसमें द्वितीयक वृद्धि के लिए हर वर्ष नयी एधा वलय बनती है। सघन दारुक (pycnoxylic) काष्ठ-आवृतबीजी तथा अधिकांश अनावृतबीजी पौधों में एधा वलय जीवनपर्यन्त क्रियाशील (UPBoardSolutions.com) रहती है। इससे केन्द्र की ओर द्वितीयक जाइलम तथा परिधि की ओर द्वितीयक फ्लोएम बनता रहता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ट्यूनिका कॉर्पस थ्योरी पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
सन् 1924 में शिमिट (Schmidt) ने अग्रस्थ वर्षी प्रदेशों (apical growing regions) के लिए ट्यूनिका कॉर्पस (tunica corpus) की विचारधारा प्रस्तुत की। इस विचारधारा के अनुसार, अग्रस्थ भाग में ऊतियों के दो क्षेत्र ट्यूनिका (tunica) तथा कॉर्पस (corpus) पाए जाते हैं। ट्यूनिका कोशिकाओं का एक या अधिक स्तरों का बाह्य क्षेत्र तथा कॉर्पस मध्य वाला क्षेत्र है जो कोशिकाओं का एक समूह है तथा ट्यूनिकों द्वारा घिरा रहता है। इस विचारधारा के अनुसार, बाह्यत्वचा, ट्यूनिका की बाहरी स्तर से विकसित होती है तथा शेष ऊतक पूर्ण कॉर्पस एवं ट्यूनिका के कुछ भागों से विकसित होते हैं। जब ट्यूनिका केवल एकस्तरीय होती है। तो यह हेन्सटीन द्वारा वर्णित त्वचाजन (dermatogen) की भाँति कार्य करती है, लेकिन जब यह बहुस्तरीय होती है तो यह वल्कुट के ऊतक (cortical tissue) के कुछ भाग के विकास में सहायक हो सकती है। ट्यूनिका की कोशिकाएँ केवल अपनतिक (anticlinal) विभाजन द्वारा विभाजित होती है। जबकि कॉर्पस भाग की कोशिकाएँ अपनतिक तथा परिनतिक (periclinal) विभाजनों से विभाजित होती हैं।

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प्रश्न 2.
बाह्य त्वचा ऊतक तन्त्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
बाह्यत्वचा पौधों के अधिकांश भागों की बाहरी त्वचा है। इसकी कोशिकाएँ लम्बी तथा एक-दूसरे से सटी हुई होती हैं और एक अखण्ड सतह बनाती हैं। बाह्यत्वचा प्राय: एकल परत वाली होती है। बाह्यत्वचीय कोशिकाएँ मृदूतकी प्रकार की होती हैं जिनमें बहुत कम मात्रा में साइटोप्लाज्म होता है। इसमें एक बड़ी (UPBoardSolutions.com) रसधानी होती है। बाह्यत्वचा की बाहरी सतह पर क्यूटिकल (cuticle) नामक रक्षात्मक परत का आवरण पाया जाता है। क्यूटिकल जल की हानि को रोकती है। जड़ों में क्यूटिकल अनुपस्थित होती है।

प्रश्न 3.
वार्षिक वलय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। या कश्मीर में पाये जाने वाले वृक्षों में वार्षिक वलय प्रायः स्पष्ट होते हैं परन्तु उन पौधों में नहीं जो चेन्नई के समीप पाये जाते हैं। क्यों ?
उत्तर :

वार्षिक वलय

संवहन एधा की क्रियाशीलता मौसम में परिवर्तन के साथ अलग-अलग होने के कारण अधिक ठण्डे शरद ऋतु और बसन्त ऋतु में बनने वाले द्वितीयक जाइलम (secondary xylem) में काफी (कभी-कभी अत्यधिक भी) अन्तर उत्पन्न कर देती है। बसन्त ऋतु (spring season) में तापमान उचित होने आदि के कारण बनने वाले द्वितीयक जाइलम अर्थात् बसन्त काष्ठ (spring wood) में
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वाहिकाएँ इत्यादि अधिक स्पष्ट तथा चौड़ी गुहा वाली होती हैं। शरद ऋतु में पौधे के सभी भागों के साथ पूलीय एधा (fascicular cambium) भी कम क्रियाशील हो जाती है। इस प्रकार, इस काष्ठ में वाहिकाएँ बहुत कम तथा बहुत छोटी गुहा वाली होती हैं, साथ ही इस काष्ठ में वाहिनिकाओं और काष्ठ रेशों (tracheids and wood fibres) की अधिकता होती है। इसका रंग भी गहरा होता है। इस प्रकार बने काष्ठ को शरद काष्ठ (autumn wood) कहते हैं दोनों प्रकार के काष्ठ अर्थात् बसन्त काष्ठ तथा शरद काष्ठ तने की अनुप्रस्थ काट (transverse section) संकेन्द्री वलयों (concentric rings) के रूप में दिखायी देते हैं।इस प्रकार एक शरद काष्ठ और एक बसन्त काष्ठ के वलय को मिलाकर वार्षिक वलय (annual ring) अथवा वृद्धि वलय (growth ring) कहते हैं। इस प्रकार एक वलय के बनने में एक वर्ष का समय लगता है अत: वार्षिक वलयों की संख्या देखकर किसी वृक्ष की आयु का पता लगाया जा सकता है।

यह भी स्पष्ट है कि केवल मुख्य स्तम्भ के आधारीय भाग में ही वार्षिक वलयों की संख्या गिनकर वृक्ष की आयु बतायी जा सकती है, क्योकि आधार से सिरे की ओर वलयों की संख्या कम होती जाती है। वर्षभर के मौसम में अधिक परिवर्तन नहीं होने से वार्षिक वलय नहीं बनते हैं अथवा स्पष्ट नहीं होते हैं; इसलिए ‘वार्षिक वलय’ में बसन्त वे शरद् ऋतुओं में अत्यधिक अन्तर होने से कश्मीर में बसन्त काष्ठ व शरद काष्ठ स्पष्ट रूप से घेरों या वलयों (rings) में बनते हैं। चेन्नई मेंदोनों ऋतुओं के तापमान में न तो इतना अन्तर होता है और न ही काष्ठ में बसन्त व शरद काष्ठ के वलय बन पाते हैं।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए
(i) अन्तःकाष्ठ तथा रस काष्ठ
(ii) वातरन्ध्र
उत्तर :
(i) अन्त:काष्ठ तथा रस काष्ठ (Heart wood and Sap wood) :
तने के पुराने भाग अथवा केन्द्रीय भाग में टैनिन (tannin), रेजिन (resin), गोंद (gum) आदि पदार्थों के जमाव के कारण यह भाग कठोर हो जाता है। इस भाग को अन्त:काष्ठ (heart wood) अथवा ड्यूरामेन (duramen) कहते हैं। द्वितीयक वृद्धि के साथ-साथ प्रतिवर्ष अन्त:काष्ठ की मात्रा बढ़ती जाती है।अनुप्रस्थ कोट में यह भाग गहरे बादामी रंग को दिखलाई देता है। इसका मुख्य कार्य दृढ़ता प्रदान करना है। द्वितीयक काष्ठ की परिधि वाला भाग हल्के रंग का होता है। इस भाग। को रस काष्ठ (sap wood) अथवा एलबर्नम (alburnum) कहते हैं। यह काष्ठ का सक्रिय भाग है। यह जल तथा खनिज लवणों को पत्तियों तक पहुँचाने का कार्य करता है।

(ii) वातरन्ध्र (Lenticel) :
ये पुराने वृक्ष के तनों पर पाये जाने वाले लेंस की तरह के छिद्र होते हैं जिनके द्वारा तना वातावरण से गैसों का आदान-प्रदान करता है। वातरन्ध्र (lenticel), रन्ध्र (stomata) के नीचे स्थित होते हैं। प्रत्येक वातरन्ध्र में अनियमित आकार की छोटी, पतली भित्ति वाली कोशिकाओं का समूह पाया जाता है जिन्हें पूरक या कम्पलीमेण्टरी (complementary) कोशिकाएँ कहते हैं। इस प्रकार ये कोशिकाएँ कॉर्क कैम्बियम द्वारा बाहर की ओर कॉर्क कोशिकाओं के स्थान पर बनती हैं। इन (UPBoardSolutions.com) कोशिकाओं की कोशिका-भित्ति में सुबेरिन नहीं होती। इन कोशिकाओं की संख्या बढ़ते रहने से बाह्यत्वचा फट जाती है और पूरक कोशिकाएँ ऊपर की ओर उठकर छोटे-छोटे उभार बना लेती हैं। इस प्रकार वातरन्ध्र (lenticel) बन जाते हैं। शीत ऋतु में कॉर्क कोशिकाओं के बनने के कारण वातरन्ध्र बन्द हो जाते हैं, परन्तु नववर्ष के आगमन पर ये पुनः खुल जाते है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विभज्योतक क्या है ? स्थिति के आधार पर ये कितने प्रकार के होते हैं ? या शीर्षस्थ विभज्योतक तथा अन्तर्वेशी (अन्तर्विष्ट) विभज्योतक में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

विभज्योतक ऊतक

विभज्योतक या मेरिस्टेमी ऊतक (meristems) वे हैं जिनकी कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता होती है अथवा इनमें विभाजन हो रहा होता है। इनका भिन्नन (differentiation) भी नहीं हुआ होता है। इनकी कोशिकाएँ सेलुलोस की पतली भित्ति वाली, कोशिकाद्रव्य से भरी हुई अर्थात् रिक्तिकाएँ बहुत कम और छोटी, किन्तु बड़े व स्पष्ट केन्द्रक वाली होती हैं। इनमें कोशिकाएँ अत्यन्त पास-पास लगी होती हैं जिनके मध्य अन्तराकोशिकीय स्थान (intercellular spaces) प्रायः नहीं होते। ये आकार में समव्यासी (isodiametric) होती हैं तथा उपापचयी (metabolic) रूप से अधिक सक्रिय होती हैं।

विभज्योतक पौधों के वृद्धि भागों में मिलते हैं। निम्न श्रेणी के बहुकोशिकीय पौधों में ये पूरे पौधे के शरीर में रहते हैं, किन्तु उच्च श्रेणी के पौधों में तो ये निश्चित और विशेष स्थितियों में ही पाये जाते हैं। इन कोशिकाओं के विभाजन, परिवर्द्धन, वृद्धि और भिन्नन के बाद ही स्थायी ऊतक (permanent tissues) बनते हैं।

स्थिति के आधार पर विभज्योतक
स्थिति के अनुसार विभज्योतक निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं

1. शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical meristem) :
यह ऊतक किसी अंग (मूल या तने) के शीर्ष में होता है और नई-नई कोशिकाएँ बनाते रहने के कारण, वहाँ पर वर्धन प्रदेश (growing zone) बनाता है। इसी के कारण उस भाग में पौधों की लम्बाई में वृद्धि होती है। तने तथा जड़ कें शीर्षों के अनुदैर्ध्य काटों में इनको तथा इनसे बनने वाले स्थायी ऊतकों (permanent tissues) को देखा जा सकता है। शीर्षस्थ विभज्योतक प्रायः सदैव ही प्राथमिक (primary) प्रकार का विभज्योतक होता है। शीर्षस्थ विभज्योतक से तनों तथा जड़ों के शीर्षों में जिस प्रकार से क्रमशः नये तथा स्थायी ऊतकों का निर्माण होता है, इसको समय-समय पर कई प्रकार के सिद्धान्तों के द्वारा समझाया जाता रहा है। इनमें सबसे पुराना तथा मान्यवाद हिस्टोजन वाद (histogen theory) है। इस वाद के अनुसार, किसी शीर्षस्थ विभज्योतक से बनने वाले स्तर तीन प्रकार के ऊतकजन क्षेत्रों (histogen zones) में बँटे होते हैं (चित्र देखिए)। ये क्षेत्र प्राविभज्योतक (promeristem) के रूप में अपना परिवर्द्धन प्रारम्भ करते हैं तथा अग्रलिखित प्रकार से स्थायी ऊतकों का निर्माण करते हैं जड़ के (UPBoardSolutions.com) शीर्ष पर चूँकि मूलगोप (root cap) होता है अतः इसको निर्मित करने वाला एक अलग विभज्योतक होता है, इसे कैलिप्ट्रोजन (calyptrogen) कहते हैं। यह मूलगोप की होते रहने वाली क्षति की पूर्ति करता है।
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2. पाश्र्व विभज्योतक (Lateral meristem) :
यह ऊतक तने या मूल के पाश्र्यों में अक्ष के समान्तर अर्थात् स्पर्श रेखीय तल (tangential plane) में स्थित होता है। इसकी कोशिकाएँ केवल इसी तल में विभाजित होती हैं। अत: इससे द्वितीयक ऊतकों (secondary tissues) का निर्माण होता है, जिससे जड़ या तने (प्ररोह) की मोटाई बढ़ती है। द्विबीजपत्री पौधों के तने में उपस्थित संवहन एधा (fascicular cambium)इस प्रकार का ऊतक होता है। अन्य उदाहरण में तने या जड़ में स्थायी ऊतकों से उत्पन्न होने वाला द्वितीयक विभज्योतक (secondary meristem) काग एधा (cork cambium) अथवा द्विबीजपत्री जड़ों में उत्पन्न होने वाली द्वितीयक संवहन एधा (secondary fascicular cambium) होती है। उपर्युक्त सभी उदाहरणों में तने अथवा जड़ की मोटाई में द्वितीयक वृद्धि (secondary growth in thickness) ही होती है।

3. अन्तर्वेशी विभज्योतक (Intercalary meristem) :
यह ऊतक शीर्षस्थ विभज्योतक का अलग होकर छूटा हुआ भाग होता है, जो स्थायी ऊतकों में परिवर्तित न होकर, उनके मध्य में रह जाता है। इस ऊतक के कारण भी पौधे के भागों की लम्बाई में वृद्धि होती है। घासों के पर्वो (internodes) के आधारों में तथा पोदीना (mint) के तने की पर्वसन्धियों (UPBoardSolutions.com) (nodes) के नीचे यह ऊतक पाया जाता है। यह पर्णाधार (leaf base) पर भी पाया जाता है; जैसे-चीड़ (Pinus) में। अन्तर्वेशी विभज्योतक प्राथमिक स्थायी ऊतकों को जन्म देते हैं तथा पौधों की लम्बाई बढ़ाते हैं। इस प्रकार की वृद्धि अल्पकालिक होती है।

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प्रश्न 2.
ऊतक से आप क्या समझते हैं? पौधों के स्थायी ऊतकों की संरचना और उनके कार्यों का सचित्र वर्णन कीजिए। या स्थूलकोण ऊतक तथा दृढ़ोतक में अन्तर बताइए।
उत्तर :
ऊतक कोशिकाओं का वह समूह जिसकी उत्पत्ति, संरचना तथा कार्य समान होते हैं, ऊतक कहलाता है। पादप ऊतक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं

  1.  स्थायी ऊतक तथा
  2. विभज्योतकी ऊतक।

स्थायी ऊतक
इसकी कोशिकाओं में कोशा विभाजन की क्षमता नहीं होती है।

1. सरल ऊतक  :
ये जीवित या मृत पतली या मोटी भित्ति वाली एक जैसी कोशिकाओं का समूह होता है। सरल ऊतक निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं

(i) मृदूतक (Parenchyma) :
यह समव्यासी, गोलाकार, अण्डाकार या बहुभुजी, पतली भित्ति वाली जीवित कोशाओं से बना होता है। कोशिकाओं के मध्य प्रायः अन्तराकोशीय स्थान (inercellular space) पाया जाता है। यह ऊतक प्रायः पौधों के कोमल भागों में पाया जाता है।

कार्य :
(अ) जल एवं खाद्य पदार्थों (स्टार्च, प्रोटीन, वसा) को संचय करता है।
(ब) हरितलवक (chloroplast) की उपस्थिति के कारण प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण करता है।
(स) वायु गुहिकाओं युक्त मृदूतक को वायुतक (aerenchyma) कहते हैं। यह जलीय पौधों के प्लवने (floating) में सहायक होता है।
(द) इसे स्पंजी मृदूतक भी कहते है। यह गैस विनिमय में सहायता करता है।
(य) कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता स्थापित हो जाने के कारण द्वितीयक वृद्धि एवं घाव भरने में सहायता करता है।
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(ii) स्थू लकोण ऊतक Collenchyma) :
ये कोणीय कोशिकायें मृदूतक की अपेक्षा लम्बी होती हैं। इनमें अन्तराकोशीय अवकाश (intercellular space) का अभाव होता है। कोशिकाओं के कोनों पर । पेक्टिन तथा सेलुलोस एकत्र हो जाता है। जिससे ये कोशिकायें अनुप्रस्थ काट में गोलाकार या अण्डाकार दिखाई देती हैं। कभी-कभी कोशिकाओं में हरितलवक भी उत्पन्न हो जाता है।
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कार्य :
(अ)
पौधों के कोमल अंगों को तनन दृढ़ता (tensile strength) प्रदान करता है।
(ब) भोजन का संचय करता है।
(स) हरितलवक की उपस्थिति के कारण भोजन का निर्माण करता है।

(iii) दृढ़ ऊतक (Sclerenchyma) :
कोशिका भित्ति के लिग्निनकरण के कारण परिपक्व कोशिकाएँ मृत (dead) हो जाती हैं। दृढ़ ऊतक दो प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है।
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(a)
दृढ़ोतक रेशे (Sclerenchymatous fibres) :

ये लम्बी, सँकरी तथा दोनों सिरों पर नुकीली, मृत कोशिकाएँ होती हैं कोशिकायें लिग्निनकरण के कारण मृत (dead) हो जाती हैं। तन्तुओं की लम्बाई प्राय: 1 से 3 मिमी होती है। जूट (jute) के रेशे 20 मिमी तथा बोहमेरिया (Boehmeria) के रेशे 550 मिमी तक लम्बे होते हैं।

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(b)
दृढ़ कोशाएँ (Stone cells or sclereids) :

ये कोशिकाएँ लगभग समेव्यासी, गोलाकार, अण्डाकार या अनियमित होती हैं। कोशिका भित्ति लिग्निनयुक्त हो जाने से कोशिकाएँ मृत हो जाती हैं। दृढ़ कोशाएँ फलभित्ति, बीजकवच आदि में पायी जाती हैं।

कार्य :
(अ) दृढ़ ऊतके पौधे के विभिन्न अंगों को यान्त्रिक शक्ति (mechanical strength) प्रदान करता है।
(ब) यह बीज तथा फलों का रक्षात्मक आवरण बनाता है।

2. जटिल ऊतक (Complex tissue) :
दो या अधिक प्रकार की कोशिकाएँ परस्पर मिलकर एक ही कार्य सम्पन्न करती हैं। जटिल ऊतक दो प्रकार के होते हैं

(i) जाइलम तथा
(ii) फ्लोएम।

(i) जाइलम :
इसके अध्ययन के लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 देखें।

(ii) फ्लोएम :
इस ऊतक का प्रमुख कार्य पौधे के प्रकाश संश्लेषी भागों (जैसे–पत्तियों) में निर्मित भोज्य-पदार्थों को पौधे के अन्य भागों में स्थानान्तरित करना होता है। इस ऊतक को बास्ट (bast) भी कहते हैं।

संरचना  :
जाइलम की तरह ही फ्लोएम के निर्माण में भी चार प्रकार की कोशिकाएँ भाग लेती हैं। ये कोशिकाएँ निम्नवत् हैं

  1. चालनी नलिकाएँ (sieve tubes)
  2. सहचर कोशिका (companion cell)
  3.  फ्लोएम पेरेनकाइमा (phloem parenchyma)
  4. फ्लोएम तन्तु (phloem fibres)।

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(a)
चालनी नलिकाएँ
एन्जियोस्पर्म में चालनी नलिका (sieve tube) :
मिलती है तथा टेरिडोफाइटा में चालनी कोशिका (sieve cell) मिलती है। ये पतली नली के समान होती हैं जिसमें कोशिकाएँ एक के ऊपर एक कतार में
लगी रहती हैं। इनकी अन्त:भित्ति (end wall) पर चालनी प्लेट (sieve plate) पाई जाती है। कोशिका भित्ति सेलुलोस की बनी होती है। इसमें अनेकों छिद्र मिलते हैं जिससे आस-पास की कोशिकाओं में सम्पर्क बना रहता है। कभी-कभी चालनी प्लेट अनुदैर्ध्य भित्ति (longitudinal wall) में भी पाई जाती है। वर्षी ऋतु (growing season) के अन्त में चालनी पट्टिका एक प्रकार के रंगहीन चमकदार कैलोस (callose) नामक कार्बोहाइड्रेट की तह से ढक जाती है, जिसे कैन्नस (callus) कहते हैं। बहुत पुरानी चालनी-पट्टिका में कैलस स्थाई रूप से जम जाता है जिससे भोजन का संवहन रूक जाता है। परिपक्व चालनी नलिका में केन्द्रक नहीं मिलता है। प्रत्येक चालनी नलिका के साथ छिद्रों द्वारा जुड़ी हुई एक लम्बी सहचर कोशिका (companion cell) पाई जाती है।

(b)
सहचर कोशिका 

जिम्नोस्पर्म व टेरिडोफाइटा में सहचर-कोशिका नहीं पाई जाती है। जिम्नोस्पर्म व टेरीडोफाइटा में चालनी कोशिका (sieve cell) मिलती है जिस पर चालनी प्लेट (sieve plate) स्पष्ट नहीं होती है। आमतौर पर चालनी क्षेत्र (sieve areas) पाश्र्व दीवार (lateral wall) पर पाए जाते हैं। एन्जियोस्पर्म में चालनी नलिका से पाश्र्व दिशा से लगी एक लम्बी-पतली कोशिका होती है जिसे सहचर कोशिका कहते हैं। यह पतली कोशिका भित्ति वाली कोशिका होती है जो भोजन के संवहन में (UPBoardSolutions.com) सहायता करती है। सामान्यत: एक चालनी नलिका से एक सहचर कोशिका लगी रहती है। सहचर कोशिका में एक बड़ा केन्द्रक व प्रचुर मात्रा में जीवद्रव्य मिलता है। इनमें स्टार्च कण (starch grain) नहीं मिलते हैं, परन्तु माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria), एन्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम (endoplasmic reticulum), राइबोसोम (ribosome) आदि कोशिकांग मिलते हैं।

(c)
फ्लोएम पेरेनकाइमा
आकृति में ये कोशिकाएँ लम्बी, चौड़ी, पतली व गोल हो सकती हैं। ये कोशिकाएँ चालनी नलिका के बीच-बीच में मिलती हैं व जीवित होती हैं। इनको मुख्य कार्य भोजन का संचय करना व संवहन में सहायता करना है। इन कोशिकाओं के अन्य गुण पेरेनकाइमा की कोशिकाओं की तरह होते हैं। एकबीजपत्री पौधों के तनों में फ्लोएम पेरेनकाइमा का प्रायः अभाव होता है।

(d)
फ्लोएम तन्तु
ये दृढ़ऊतक के बने होते हैं। इनकी कोशिकाभित्ति मोटी, कोशिका-गुहा सँकरी व इनमें गर्त मिलते हैं। इन तन्तुओं का बहुत आर्थिक महत्त्व है। इनसे रस्सी, सुतली, गद्दे, बैग आदि बनाए जाते हैं। तन्तुओं की लम्बाई निश्चित नहीं होती है। ये द्वितीयक फ्लोएम में अधिक मिलते हैं। प्राथमिक फ्लोएम में तन्तुओं की कोशिकाभित्ति अधिकतर सेलुलोस की बनी होती है।

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प्रश्न 3.
दारु के विभिन्न घटकों का विवरण दीजिए एवं उनके कार्यों की संक्षिप्त विवेचना कीजिए। या जाइलम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। या दारु (जाइलम) ऊतक के विभिन्न अवयवों के नामांकित चित्र बनाइए। या टिप्पणी लिखिए-जाइलम द्वारा खनिज लवणों का परिवहन।
उत्तर :

दारु या जाइलम

दारु या जाइलम (xylem) ऐसा संवहन ऊतक (vascular tissue) है जिसके द्वारा भूमि से अवशोषित जल तथा उसमें घुले हुए खनिज पदार्थों का संवहन होता है। इन कार्यों को करने के लिए जाइलम में निम्नलिखित चार प्रकार की विशेष संरचनाएँ या दारु अवयव (xylem elements) पाए। जाते हैं।

1. दारु वाहिनिकाएँ (Xylem tracheids) :
ये लम्बी व नलिकाकार कोशिकाएँ होती हैं जिनके भीतर जीवद्रव्य नहीं होता तथा ये मृत हो जाती हैं। इनकी भित्तियाँ, जो प्राथमिक रूप में सेलुलोस की बनी होती हैं, किन्तु बाद में लिग्निन (lignin) से स्थूलितं होने से, अधिक मोटी हो जाती हैं। लिग्निनयुक्त (lignified) होने के कारण ये कठोर तथा काष्ठीय हो जाती हैं। कोशिका भित्तियों को लिग्निन द्वारा स्थूलन (thickening) होने से भित्तियों पर कई प्रकार की संरचनाएँ बन जाती हैं। इन्हीं के आधार पर ये कई प्रकार की मानी जाती हैं; जैसे-वलयाकार (annular), सर्पिल (spiral) प्रकार के स्थूलन प्रोटोजाइलम (protoxylem) में होते हैं। सीढ़ीनुमा (scalariform) प्रकार का स्थूलन प्रोटोजाइलम तथा मेटाजाइलम (metaxylem) दोनों में होता है। जालिकारूपी (reticulate) प्रकार का स्थूलन मेटाजाइलम में मिलता है।

जब कोशिका भित्ति पर जालिकावत् स्थूलन और भी अधिक घना हो जाता है तो कुछ स्थानों पर ही लिग्निन न जमा होने के कारण छोटे-छोटे स्थान शेष रह जाते हैं।इन स्थानों पर केवल सेलुलोस की भित्ति ही होती है, इन स्थानों को गर्त (pits) कहते हैं। गर्त पड़ोसी कोशिका की भित्ति पर भी इसी स्थान पर बनता है, अतः इन्हें गर्त युग्म (pit pair) कहना अधिक उचित है। गर्त साधारण (simple) अर्थात् पूरी गहराई तक बराबर स्थूलन वाले अथवा परिवेशित  (bordered) हो सकते हैं। परिवेशित गर्त में स्थूलन बाहर से अन्दर की ओर क्रमशः कम होता जाता है। गर्तमय (pitted) स्थूलन मेटाजाइलम में पाया जाता है।

2. दारु वाहिकाएँ या टैकी (Xylem vessels or tracheae) :
ये बहुत लम्बी और चौड़ी नलिकाओं के समान संरचनाएँ होती हैं जो एक पंक्ति में, एक के सिरे से दूसरी (end to end) लगी रहती हैं। वाहिकाओं (vessels) में वाहिनिकाओं की अपेक्षा अनुप्रस्थ भित्तियों का पूर्ण या अपूर्ण रूप से अभाव होता है। यदि अनुप्रस्थ भित्तियाँ होती हैं तो अत्यधिक छिद्रिल होती हैं। (UPBoardSolutions.com) वाहिकाओं (vessels) में भी मृत, मोटी कोशिका भित्ति होती है तथा वाहिनिकाओं की तरह कोशिका भित्तियाँ समान मोटाई की होती हैं। वाहिकाओं की भित्ति पर लिग्नीभवन (lignification) भी वाहिनिकाओं के समान कई प्रकार का होता है।

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अनुप्रस्थ काट में जाइलम वाहिकाएँ वाहिनिकाओं के समान ही बहुभुजी दिखायी देती हैं। अनावृतबीजी पौधों (gymnosperms) में जाइलम केवल वाहिनिकाओं (tracheids) का बना रहता है, इनमें वाहिकाओं (vessels) का प्रायः अभाव होता है जबकि आवृतबीजी पौधों (angiosperms) में वाहिकाएँ ही प्रमुख जाइलम अवयव (xylem elements) हैं।

3. दारु मृदूतक (Xylem parenchyma) :
ये मृदूतकीय कोशिकाएँ (parenchymatous cells) जाइलम के अन्दर पायी जाती हैं। इनकी भित्तियाँ बाद में कुछ मोटी हो जाती हैं, किन्तु ये सजीव होती हैं। स्थूलित होने पर इन कोशिकाओं की भित्तियों में सरल गर्त (pits) होते हैं। इनका मुख्य कार्य जल व खाद्य पदार्थ संचित रखना है, किन्तु ये जल संवहन में भी दारु | वाहिकाओं आदि को सहयोग देती हैं।

4. दारु रेशे (Xylem fibres) :
ये रेशे दृढ़ोतकी (sclerenchymatous) होते हैं अर्थात् इनकी भित्तियाँ लिग्निनयुक्त (lignified) होती हैं और इन भित्तियों में विभिन्न प्रकार के गर्त पाये जाते हैं। इन रेशों का मुख्य कार्य मजबूती तथा सहारा देना होता है।

(i) आदिदारु (Protoxylem) :
वाहिनिकाएँ और वाहिकाएँ पहले संकरी बनती हैं तथा उनकी भित्तियों पर वलयाकार अथवा सर्पिल स्थूलन (annular or spiral thickening) होती है। इनको आदिदारु (protoxylem) कहते हैं।

(ii) अनुदारु (Metaxylem) :
बाद में वाहिकाएँ (vessels) तथा वाहिनिकाएँ (tracheids) चौड़ी तथा अधिक लम्बी हो जाती हैं। इनकी भित्तियों पर जालिकारूपी या सीढ़ीनुमा स्थूलन (thickenings) अथवा गर्त पाये जाते हैं, इसको अनुदारु (metaxylem) कहते हैं।

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(iii) जाइलम के कार्य (Functions of xylem) :

  1.  जाइलम द्वारा, मूलों द्वारा अवशोषित जल तथा लवणों के घोल को पौधों के वायव भागों तक (पत्तियों तक) पहुँचाया जाता है। इस कारण इस जटिल ऊतक को जल संवाहक ऊतक (water conducting tissue) कहते हैं।
  2.  इसमें उपस्थित कोशिकाओं की भित्तियाँ मोटी व दृढ़ होने के कारण यह ऊतक पौधे के भागों को यान्त्रिक शक्ति (mechanical strength) प्रदान करता है।

प्रश्न 4.
भरण ऊतक तन्त्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
बाह्यत्वचा तथा संवहन बण्डल के अतिरिक्त सभी ऊतक भरण ऊतक की श्रेणी में आते हैं। ये पेरेनकाइमा, कोलेनकाइमा तथा स्क्लेरेनकाइमा कोशिकाओं से बने होते हैं। पत्तियों में भरण ऊतक पतली भित्ति वाले तथा क्लोरोप्लास्ट युक्त होते हैं और इसे पर्णमध्योतक (leaf mesophyll) कहते हैं। भरण ऊतक में निम्नलिखित भाग आते हैं

(i) वल्कुट (Cortex) :
यह बाह्यत्वचा के नीचे पाया जाने वाला भरण ऊतक (ground tissue) है जो प्रायः अन्तस्त्वचा (endodermis) तक फैला रहता है। इसमें निम्नलिखित भाग होते हैं

(a)
अधस्त्वचा (Hypodermis) :

द्विबीजपत्री पौधों में बाह्यत्वचा के नीचे स्थूलकोण ऊतक (collenchyma tissue) तथा एकबीजपत्री पौधों में बाह्यत्वचा के नीचे दृढ़ोतके (sclerenchyma tissue) की एक या कुछ परतें पूरी पट्टी के रूप में अथवा छोटे-छोटे टुकड़ों में पाई जाती हैं। इन्हें अधस्त्वचा (hypodermis) कहते हैं। यह ऊतक पतली कोशिकाभित्ति वाली मृदूतक कोशिकाओं से बना होता है तथा अधस्त्वचा के ठीक नीचे पाया जाता है। ये परतें रक्षा का कार्य करती हैं।

(b)
सामान्य वल्कुट (General Cortex) :

इनमें सुविकसित अन्तराकोशिकीय स्थान (intercellular spaces) पाए जाते हैं। प्रायः तरुण तने की वल्कुट की कोशिकाओं में हरितलवक पाए जाते हैं। इस प्रकार के मृदूतक को क्लोरेनकाइमा (chlorenchyma) कहते हैं। वल्कुट की कोशिकाओं में मण्ड, टेनिन तथा अन्य उत्सर्जी पदार्थ भी पाए जाते हैं। जलीय पौधों में वल्कुट में एक विशेष प्रकार का मृदूतक पाया जाता है जिसे वायूतक (aerenchyma) कहते हैं। इसमें बीच-बीच में काफी बड़े वायु-स्थान (air-spaces) मिलते हैं। वल्कुट (cortex) पौधों को यान्त्रिक शक्ति प्रदान करता है; ‘भोज्य-पदार्थ का संग्रह करता है तथा पौधों के आन्तरिक ऊतकों की रक्षा करता है।

(c)
अन्तस्त्वचा (Endodermis) :

इसे मण्डआच्छद (starch sheath) भी कहते हैं। यह कोशिकाओं की एक अकेली परत के रूप में पायी जाती है। यह वल्कुट को रम्भ (stele) से पृथक् करती है। यह परत ढोल-सदृश (barrel-shaped) कोशिकाओं की बनी होती है और इनके बीच अन्तराकोशिकीय स्थान नहीं होते। यह (UPBoardSolutions.com) कोशिकाएँ जीवित होती हैं और इनमें मण्ड, टेनिन, म्यूसिलेज की अधिकता होती है। मण्डे की उपस्थिति के कारण ही इसे मण्ड आच्छद (starch sheath) भी कहते हैं। अन्तस्त्वचा की कुछ कोशिकाओं की अरीय (radial) और आन्तरिक (inner) भित्तियाँ, सुबेरिन (suberin), क्यूटिन (cutin) या कभी-कभी लिग्निन (lignin) पदार्थों के संग्रह के कारण स्थूलित (thickened) हो जाती हैं। इस स्थूलित पट्टी को केस्पेरियन पट्टी (casparian strip) कहते हैं। इन मोटी भित्ति वाली अन्तस्त्वचा कोशिकाओं के बीच अनेक जड़ों में कुछ पतली भित्ति वाली कोशिकाएँ आदिदारु (protoxylem) के अभिमुख (opposite) होती हैं। इन कोशिकाओं को मार्ग कोशिकाएँ (passage cells) अथवा संचरण कोशिकाएँ (transfusion cells) कहते हैं। इन्हीं कोशिकाओं द्वारा मूलरोमों द्वारा अवशोषित जल व खनिज पदार्थ जाइलम में जाते हैं।

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प्रश्न 5.
संवहन बण्डल क्या हैं ? चित्रों की सहायता से आवृतबीजी पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के संवहन बण्डलों की संरचना का वर्णन कीजिए। या उपयुक्त चित्रों की सहायता से आवृतबीजियों में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के संवहन बण्डलों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

संवहन पूल

जाइलम व फ्लोएम (Xylem and phloem) पौधों में पाये जाने वाले संवहन ऊतक हैं। ये पौधों में अलग-अलग प्रकार से विन्यसित होते हैं। प्रायः यह भी देखा गया है कि दोनों प्रकार के संवहन ऊतक सदैव ही एक-दूसरे के आस-पास रहते हैं। इस प्रकार जाइलम और फ्लोएम के पास-पास होने तथा इनसे बनने वाले विशेष तन्तुओं (strands) को संवहन पूल (vascular bundle) कहते हैं। द्विबीजपत्री पौधों (dicot plants) में जाइलम तथा फ्लोएम के अतिरिक्त एधा (cambiun) भी संवहन पूल बनाने में मदद करती है। समस्त पौधों में संवहन पूल अपनी संवहन ऊतकों की व्यवस्था के अनुसार प्रमुखत: निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं

1. संयुक्त संवहन पूल
इस प्रकार के संवहन पूल में जाइलम और फ्लोएम एक ही त्रिज्या (radius) पर होते हैं। इस प्रकार के संवहन पूल सामान्यत: आवृतबीजी (angiospermic) पौधों के स्तम्भों (stems) में पाये जाते हैं। ये संवहन पूल भी निम्नलिखित दो प्रकार के मिलते हैं

(i) कोलेटरल संवहन (Collateral vascular bundles) :
ये प्रायः अधिकतर तनों में मिलते हैं। इन संवहन पूलों में जाइलम केन्द्र की ओर तथा फ्लोएम परिरम्भ (pericycle) की ओर होता है। द्विबीजपत्री तनों में जाइलम और फ्लोएम के मध्य प्राथमिक एधा (primary cambium) होती है जिससे ये पूल वर्धा (open) कहलाते हैं। एकबीजपत्री तनों के संवहन पूलों में एधा नहीं होती और वे अवर्थी (closed) कहलाते हैं। इन संवहन पूलों में जाइलम सदैव ही अन्तःआदिदारुक (endarch) होता है अर्थात् आदिदारु केन्द्र की ओर तथा अनुदारु परिधि की ओर होता है।

(ii) बाइकोलेटरल संवहन पूल (Bicollateral vascular bundles) :
इस प्रकार के संवहन पूलों में जाइलम के दोनों ओर अर्थात् केन्द्र की ओर भी और परिधि की ओर भी फ्लोएम होता है। इस प्रकार के संवहन पूलों में भी जाइलम अन्त:आदिदारुक ही होता है और ये मदेव बर्थी होते हैं। इनमें जाइलम तथा फ्लोएम के मध्य दोनों ओर एधा होती है।

उदाहरण :
कद्दू के पौधों के तनों में संवहन पूल प्राय: बाइकोलेटरल ही होते हैं।
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2. अरीय संवहन पूल
इस प्रकार के पूलों में जाइलम और फ्लोरम अलग-अलग त्रिज्याओं पर होते हैं। इस प्रकार के संवहन पूल जड़ों में पाये जाते हैं। इनमें जाइलम सदैव बाह्यआदिदारुक (exarch) मिलता है अर्थात् आदिदारु परिधि की ओर तथा अनुदारु केन्द्र की ओर होता है। इन संवहन पूलों में प्राथमिक एधा (primary cambium) नहीं पायी जाती है। द्विबीजपत्री जड़ों में जाइलम तथा फ्लोएम के मध्य, बाद में द्वितीयक एधा (secondary cambitum) बन जाती है। 3. संकेन्द्री संवहन पूल इन पूलों (UPBoardSolutions.com) में एक संवहन ऊतक (vascular tissue) केन्द्र में तथा दूसरा इसे चारों ओर से घेरता है। सभी सुकेन्द्री संवहन पूल अवर्थी closed) होते हैं अर्थात् इनमें एधा कभी नहीं होती है। जाइलम तथा फ्लोएम की स्थिति के अनुसार ये संवहन पूल प्रायः निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं।

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(i) दारु केन्द्री (Amphicribral) :
इस प्रकार के संवहन पूलों में जाइलम केन्द्र में तथा फ्लोएम इसे चारों ओर से घेरता है। दारु केन्द्री संवहन पूल फर्क्स (ferns) के राइजोम में मिलते हैं।

(ii) फ्लोएम केन्द्री (Amphivasal) :
इस प्रकार के संवहन पूलों में फ्लोएम मध्य में तथा दारु इसे चारों ओर से घेरता है। फ्लोएम केन्द्री संवहन पूल कुछ एकबीजपत्री पौधों; जैसे—यक्का (Yucca), डैसीना (Dracaena) आदि के तने में मिलते हैं।

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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 9 Biomolecules 

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 9 Biomolecules (जैव अणु)

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अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वृहत अणु क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जो तत्त्व अम्ल अविलेय अंश में पाये जाते हैं वे वृहत् अणु या वृहत् जैविक अणु कहलाते हैं।

उदाहरणार्थ :
(i) न्यूक्लिक अम्ल।

प्रश्न 2.
ग्लाइकोसाइडिक, पेप्टाइड तथा फॉस्फोडाइएस्टर बन्धों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

1. ग्लाइकोसाइडिक बन्ध (Glycosidic Bond) :
बहुलकीकरण में मोनोसैकेराइड अणु एक-दूसरे के पीछे जिस सहसंयोजी बन्ध द्वारा जुड़ते हैं उसे ग्लाइकोसाइडिक बन्ध कहते हैं। इस बन्ध में एक मोनोसैकेराइड अणु का ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह दूसरे अणु के एक ऐल्कोहॉलिय अर्थात् हाइड्रॉक्सिल (UPBoardSolutions.com) समूह (-OH) से जुड़ता है जिसमें कि जल (H,O) का एक अणु पृथक् हो जाता है।

2. पेप्टाइड बन्ध (Peptide Bond) :
जिस बन्ध द्वारा अमीनो अम्लों के अणु एक-दूसरे से आगे-पीछे जुड़ते हैं, उसे पेप्टाइड या ऐमाइड बन्ध कहते हैं। यह बन्ध सहसंयोजी होता है और एक अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिलिक समूह की अगले अमीनो अम्ल के अमीनो समूह से अभिक्रिया के फलस्वरूप बनता है। इसमें जल का एक अणु हट जाता है।

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3. फॉस्फोडाइएस्टर बन्ध (Phosphodiester Bonds) :
न्यूक्लीक अम्ल के न्यूक्लिओटाइड्स (nucleotides) फॉस्फोडाइएस्टर बन्धों (phosphodiester bonds) द्वारा एक-दूसरे से संयोजित होकर पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला बनाते हैं। फॉस्फोडाइएस्टर बन्ध समीपवर्ती दो न्यूक्लियोटाइड्स के फॉस्फेट अणुओं के मध्य बनता है। DNA की दोनों पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं के नाइट्रोजन क्षारक हाइड्रोजन बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं।

प्रश्न 3.
प्रोटीन की तृतीयक संरचना से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
प्रोटीन की तृतीयक संरचना के अन्तर्गत प्रोटीन की एक लम्बी कड़ी अपने ऊपर ही ऊन के एक खोखले गोले के समान मुड़ी हुई होती है यह संरचना प्रोटीन के त्रिआयामी रूप को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 4.
10 ऐसे रुचिकर सूक्ष्म जैव अणुओं का पता लगाइए जो कम अणुभार वाले होते हैं व इनकी संरचना बनाइए। ऐसे उद्योगों का पता लगाइए जो इन यौगिकों का निर्माण विलगन द्वारा करते हैं? इनको खरीदने वाले कौन हैं? मालूम कीजिए।
उत्तर :
सूक्ष्म जैव अणु जीवधारियों में पाए जाने वाले सभी कार्बनिक यौगिकों को जैव अणु कहते हैं।

(i) कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates); जैसे :
ग्लूकोस, फ्रक्टोस, राइबोस, डिऑक्सीराइबोस शर्करा, माल्टोस आदि।

(ii) वसा व तेल (Fat & Oils) :
पामिटिक अम्ल, ग्लिसरॉल, ट्राइग्लिसराइड, फॉस्फोलिपिड्स, कोलेस्टेरॉल आदि।

(iii) ऐमीनो अम्ल (Amino Acids) :
ग्लाइसीन, ऐलेनीन, सीरीन आदि।।

(iv) नाइट्रोजन क्षारक (Nitrogenous Base) :
ऐडेनीन (adenine), ग्वानीन : (guanine), थायमीन (thymine), यूरेसिल (uracil), सायटोसीन (cytosine) आदि।
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शर्करा उद्योग, तेल एवं घी उद्योग, औषधि उद्योग आदि इनका निर्माण करते हैं। मनुष्य इनका उपयोग अपनी शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु करती है।

प्रश्न 5.
प्रोटीन में प्राथमिक संरचना होती है, यदि आपको जानने हेतु ऐसी विधि दी गई है जिसमें प्रोटीन के दोनों किनारों पर ऐमीनो अम्ल है तो क्या आप इस सूचना को प्रोटीन की शुद्धता अथवा समांगता (homogeneity) से जोड़ सकते हैं?
उत्तर :
प्रोटीन्स की पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ लम्बी व रेखाकार होती हैं। प्रोटीन कुण्डलन एवं वलन द्वारा विभिन्न प्रकार की आकृति धारण करती हैं। इन्हें प्रोटीन्स के प्राकृत संरूपण (native conformations) कहते हैं। प्रोटीन के प्राकृत संरूपण चार स्तर के होते हैं—प्राथमिक, (UPBoardSolutions.com) द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुष्क स्तर। पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में पेप्टाइड बन्धों द्वारा जुड़े ऐमीनो अम्लों के अनुक्रम प्रोटीन की संरचना का प्राथमिक स्तर प्रदर्शित करते हैं। प्रोटीन में ऐमीनो अम्लों का अनुक्रमे इसके जैविक प्रकार्य का निर्धारण करता है।
पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के एक सिरे पर प्रथम ऐमीनो अम्ल का खुला ऐमीनो समूह तथा दूसरे सिरे पर अन्तिम ऐमीनो अम्ल का खुला कार्बोक्सिल समूह (carboxyl group) होता है। अतः इन सिरों को क्रमशः N-छोर तथा C-छोर कहते हैं। इससे प्रोटीन की शुद्धता या समांगता प्रदर्शित होती है।UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 9 Biomolecules image 3

प्रश्न 6.
चिकित्सार्थ अभिकर्ता (therapeutic agents) के रूप में प्रयोग में आने वाले प्रोटीन का पता लगाइए व सूचीबद्ध कीजिए। प्रोटीन की अन्य उपयोगिताओं को बताइए। (जैसे-सौन्दर्य-प्रसाधन आदि)।
उत्तर :
साइटोक्रोम ‘C’, हीमोग्लोबिन तथा इम्यूनोग्लोबिन ‘G’ चिकित्सार्थ अभिकर्ता के रूप में प्रयोग में आने वाले प्रोटीन हैं। प्रोटीन के निम्नलिखित कार्यों की वजह से इनकी उपयोगिता अधिक है।

  1. लगभग सभी एन्जाइम्स (enzymes) प्रोटीन के बने होते हैं।
  2. थ्रोम्बिन (thrombin) तथा फाइब्रोजिन (fibrogen) रुधिर प्रोटीन्स हैं जो चोट लगने पर रुधिर का थक्का बनने में सहायक होती हैं।
  3. एक्टिन तथा मायोसिन (actin & myosin) संकुचन प्रोटीन्स हैं जो सभी कंकालीय (UPBoardSolutions.com) पेशियों के संकुचन में भाग लेती हैं।
  4. रेशम में फाइब्रोइन (fibroin) प्रोटीन होती है।
  5. कुछ हार्मोन्स; जैसे—अग्र पिट्यूटरी ग्रन्थि का वृद्धि हार्मोन (somatotropic) तथा अग्न्याशय ग्रन्थि से स्रावित इन्सुलिन (insulin) हार्मोन शुद्ध प्रोटीन के बने होते हैं।
  6. एन्टीबॉडीज या इम्यूनोग्लोब्यूलिन जोकि शरीर की सुरक्षा करती है प्रोटीन से ही बनी होती है।

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प्रश्न 7.
ट्राइग्लिसराइड के संगठन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
एक ग्लिसरॉल (glycerol or glycerine) अणु से एक-एक करके तीन वसीय अम्ल अणुओं के तीन सहसंयोजी बन्धों (covalent bonds) द्वारा जुड़ने से वास्तविक वसा का एक अणु बनता है। इन बन्धों को एस्टर बन्ध (ester bonds) कहते हैं। ग्लिसरॉल एक ट्राइहाइड्रिक ऐल्कोहॉल trihydric alcohol) होता है, क्योंकि इसकी कार्बन श्रृंखला के तीनों कार्बन परमाणुओं से एक-एक हाइड्रॉक्सिल समूह (hydroxyl group, -OH) जुड़ा होता है। एस्टर बन्ध प्रत्येक हाइड्रॉक्सिल समूह तथा एक वसीय अम्ल के कार्बोक्सिल समूह ( COOH) के बीच बनती है। इसीलिए वसा अणु को ट्राइग्लिसराइड या ट्राइऐसिलग्लिसरॉल (triglyceride or triacylglycerol) कहते हैं।
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प्रश्न 8.
क्या आप प्रोटीन की अवधारणा के आधार पर वर्णन कर सकते हैं कि दूध का दही अर्थवा योगर्ट में परिवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर :
दूध की विलेय प्रोटीन केसीनोजन (caseinogen) को अविलेय केसीन (casein) में बदलने का कार्य रेनिन (rennin) एन्जाइम तथा स्ट्रेप्टोकोकस जीवाणु करते हैं। ये किण्वन द्वारा दूध को ही या योगर्ट में बदल देते हैं; क्योंकि केसीनोजन प्रोटीन अवक्षेपित हो जाती है।

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प्रश्न 9.
क्या आप व्यापारिक दृष्टि से उपलब्ध परमाणु मॉडल (बॉल व स्टिक नमूना) का प्रयोग करते हुए जैव अणुओं के उन प्रारूपों को बना सकते हैं?
उत्तर :
बॉल व स्टिक नमूना (Ball and Stick Model) के द्वारा जैव अणुओं के प्रारूपों को (UPBoardSolutions.com) प्रदर्शित किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
ऐमीनो अम्लों का दुर्बल क्षार से अनुमापन (itrate) कर, ऐमीनो अम्ल में वियोजी क्रियात्मक समूहों का पता लगाने का प्रयास कीजिए।
उत्तर :
ऐमीनो अम्लों का दुर्बल क्षार से अनुमापन करने से कार्बोक्सिल समूह (-COOH) तथा ऐमीनो समूह (-NH2) पृथक् हो जाते हैं।

प्रश्न 11.
ऐलेनीन ऐमीनो अम्ल की संरचना बताइए।
उत्तर :
ऐलेनीन में R समूह अत्यधिक जलरोधी हाइड्रोकार्बन समूह होते हैं जिन्हें पार्श्व श्रृंखलाएँ कहते हैं। इसमें पाश्र्व श्रृंखला मेथिल समूह की होती है।UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 9 Biomolecules image 5

प्रश्न 12.
गोंद किससे बने होते हैं? क्या फेविकोल इससे भिन्न है?

उत्तर :

गोंद (Gum) :
यह एक द्वितीयक उपापचयज (secondary metabolite) है। यह एक कार्बोहाइड्रेट बहुलक (polymer) है। गोंद पौधों की काष्ठ वाहिकाओं (xylem vessels) से प्राप्त होने वाला उत्पाद है। यह कार्बनिक घोलक में अघुलनशील होता है। गोंद जल के साथ चिपचिपा घोल (sticky solution) बनाता है। फेविकोल (fevicol) एक कृत्रिम औद्योगिक उत्पाद है।

प्रश्न 13.
प्रोटीन, वसा व तेल, ऐमीनो अम्लों का विश्लेषणात्मक परीक्षण बताइए एवं किसी भी फल के रस, लार, पसीना तथा मूत्र में इनका परीक्षण कीजिए?
उत्तर :
प्रोटीन एवं ऐमीनो अम्ल का परीक्षण प्रोटीन के वृहत् अणु (macromolecules) ऐमीनो अम्लों की लम्बी श्रृंखलाएँ होते हैं। ऐमीनो अम्ल पेप्टाइड बन्धों द्वारा जुड़े रहते हैं। इनका आण्विक भार बहुत अधिक होता है। अण्डे की सफेदी, सोयाबीन, दालों (मटरे, राजमा आदि) में प्रोटीन (ऐमीनो अम्ल) प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं। अण्डे की सफेदी या दालों (सेम, चना, मटरे, राजमा) आदि को जल के साथ पीसकर पतली लुगदी बना लेते हैं। इसे जल के साथ उबाल कर छान लेते हैं। निस्वंद द्रव में प्रोटीन (ऐमीनो अम्ल) होती है।

प्रयोग 1 :
एक परखनली में 3 मिली प्रोटीन नियंद लेकर, इसमें 1 मिली सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (HNO3) मिलाइए। सफेद अवक्षेप बनता है। परखनली को गर्म करने पर अवक्षेप घुल जाता है तथा विलयन का रंग पीला हो जाता है। अब इसे ठण्डा करके इसमें 10% सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) (UPBoardSolutions.com) विलयन मिलाते हैं। परखनली में विलयन का रंग पीले से नारंगी हो जाता है।

प्रयोग 2 :
एक परखनली में प्रोटीन नियंद की 1 मिली मात्रा लेकर इसमें लगभग 1 मिली मिलन अभिकर्मक (Millon’s Reagent) मिलाने पर हल्के पीले रंग का अवक्षेप बनता है। इस अवक्षेप में 4-5 बूंदें सोडियम नाइट्रेट (NaNO3,) की मिलाकर विलयन को गर्म करने पर अवक्षेप का रंग लाल हो जाता है।

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वसा व तेल का परीक्षण

ये जल में अविलेय और ईथर, पेट्रोल, क्लोरोफॉर्म आदि में घुलनशील (विलेय) होती हैं। साधारण ताप पर जब वसाएँ ठोस होती हैं तो वसा (चर्बी-fat) और जब ये तरल होती हैं तो तेल (oil) कहलाती हैं। पादप वसाएँ असंतृप्त (नारियल का तेल तथा ताड़ का तेल संतृप्त) तथा जन्तु वसाएँ संतृप्त होती हैं।

प्रयोग 1 :
मूंगफली के कच्चे दाने लेकर उनको सफेद कागज पर रखकर पीस लीजिए। अब इस कागज के टुकड़े को प्रकाश के किसी स्रोत की ओर रखकर देखिए। यह अल्पपारदर्शी नजर आता है। इस पर एक बूंद पानी डालकर देखिए। कागज पर पानी का प्रभाव नहीं होता। यह प्रयोग जन्तु वसा (देशी घी) के साथ भी किया जा सकता है।

प्रयोग 2 :
एक परखनली में 0:5 मिली परीक्षण तेल या वसा तथा 0:5 मिली जल (दोनों बराबर मात्रा में) लेते हैं। अब इसमें 2-3 बूंदें सुडान-III विलयन की डालकर हिलाते हैं तथा पाँच मिनट तक ऐसे ही रख देते हैं। परखनली में जल तथा तेल की पृथक् पर्यों में, तेल की पर्त लाल नजर आती है। (नोट-फल के रस, लार, पसीना तथा मूत्र में इनका परीक्षण उपर्युक्त विधियों द्वारा किया जा सकता है।)

प्रश्न 14.
पता लगाइए कि जैवमण्डल में सभी पादपों द्वारा कितने सेलुलोस का निर्माण होता है? इसकी तुलना मनुष्यों द्वारा उत्पादित कागज से कीजिए। मानव द्वारा प्रतिवर्ष पादप पदार्थों की कितनी खपत की जाती है? इसमें वनस्पतियों की कितनी हानि होती है?
उत्तर :
सेलुसोस (cellulose) पृथ्वी पर सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाला कार्बोहाइड्रेट है। यह जटिल बहुलक होता है। पादपों में सेलुलोस की मात्रा सर्वाधिक होती है। यह पादप कोशिकाओं की कोशिका भित्ति को यान्त्रिक दृढ़ता प्रदान करता है। पौधों के काष्ठीय भागों व कपास तथा रेशेदार पौधों में इसकी मात्रा बहुत अधिक होती है। काष्ठ में लगभग 50% तथा कपास के रेशे में इसकी मात्रा लगभग 90% होती है। मनुष्य द्वारा सेलुलोस का उपयोग ईंधन तथा इमारती लकड़ी के रूप में, तन्तुओं के रूप में वस्त्र निर्माण, कृत्रिम रेशे निर्माण, कागज निर्माण में प्रमुखता से किया जाता है। नाइट्रोसेलुलोस का उपयोग विस्फोटक पदार्थ के रूप (UPBoardSolutions.com) में किया जाता है। इसका उपयोग पारदर्शी प्लास्टिक सेलुलॉयड, (celluloid) बनाने के लिए किया जाता है जिससे खिलौने, कंघे आदि बनाए जाते हैं। मनुष्य‘सेलुलोस का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनस्पतियों को हानि पहुँचा रहा है। इसके फलस्वरूप प्राकृतिक वन क्षेत्रों में निरन्तर कमी होती जा रही है। पारितन्त्र के प्रभावित होने के कारण अनेक पादप प्रजातियाँ विलुप्त होती जा रही हैं।

प्रश्न 15.
एन्जाइम के महत्त्वपूर्ण गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
एन्जाइमों के महत्त्वपूर्ण गुण निम्नवत् हैं-

  1. विकर (enzymes), उत्प्रेरकों (catalyst) के रूप में कार्य करते हैं और जीवों (living organisms) में अभिक्रिया की दर (rate of reaction) को प्रभावित करते हैं।
  2. क्रियाधारों (reactants or substrate) को उत्पादों (products) में बदलने के लिए एन्जाइम की बहुत सूक्ष्म मात्रा अथवा सान्द्रता की आवश्यकता होती है।
  3. एन्जाइम उत्प्रेरक (enzyme catalyst) उच्च अणुभार के, जटिल, नाइट्रोजनी कार्बनिकः यौगिक, प्रोटीन होते हैं जो जीवित कोशिकाओं में उत्पन्न होते हैं। एन्जाइम का अणु उसके क्रियाधार के अणु की तुलना में बहुत बड़ा होता है। एन्जाइम का आणविक भार हजारों से लेकर लाखों तक होता है, जबकि क्रियाधारों का अणुभार प्रायः कुछ सैकड़ों में ही होता है।
  4. ये किसी रासायनिक क्रिया को प्रारम्भ नहीं करते, बल्कि क्रिया की गति को उत्प्रेरित (catalysed) करते हैं।
  5. अधिकांश एन्जाइम जल अथवा नमक के घोल में घुलनशील होते हैं। कोशिकाद्रव्य में ये कोलॉइडी (colloidal) विलयन बनाते हैं।
  6. एन्जाइम जीवों में होने वाली समस्त शरीर-क्रियात्मक अभिक्रियाओं (physiological reactions), जैसे-जल-अपघटन, ऑक्सीकरण, अपचयन, अपघटन आदि को उत्प्रेरित करते हैं।
  7. एन्जाइम प्रायः विशिष्ट (specific) होते हैं, अर्थात् एक एन्जाइम एक विशेष क्रिया का ही उत्प्रेरण करता है। उदाहरणार्थ-एन्जाइम इन्वटेंस (invertase) केवल सुक्रोस के जल-अपघटन को उत्प्रेरित करता है।
    UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 9 Biomolecules image 6
    इन्वटेंस (invertase) एन्जाइम द्वारा माल्टोस का ग्लूकोस में जल-अपघटन उत्प्रेरित नहीं होता
  8. एन्जाइम ताप परिवर्तन से अत्यधिक प्रभावित होते हैं। किसी एन्जाइम की उत्प्रेरक सक्रियता जिस ताप पर सर्वाधिक होती है उसे अनुकूलन ताप (optimum temperature) कहते हैं। अनुकूलन ताप पर अभिक्रिया की दर उच्चतम होती है। अधिक ताप पर एन्जाइम की विकृति (denatured) हो जाती है अर्थात् एन्जाइम की प्रोटीन संरचना और उसकी उत्प्रेरक सक्रियता नष्ट हो जाती है। एन्जाइमों का अनुकूलन ताप साधारणत: 25-40°C होता है। बहुत कम ताप पर एन्जाइम निष्क्रिय (inactive) हो जाते हैं।
  9. एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं की दर pH परिवर्तमं से बहुत प्रभावित होती है। प्रत्येक एन्जाइम एक विशेष (UPBoardSolutions.com) pH माध्यम में ही पूर्ण सक्रिय होता है। प्रत्येक एन्जाइम की उत्प्रेरक सक्रियता जिस pH पर अधिकतम होती है उसे अनुकूलनःH (optimum pH) कहते हैं। एन्जाइमों की अनुकूलन pH साधारणत: 5-7 होती है।
  10. कुछ एन्जाइम अम्लीय माध्यम में तथा कुछ क्षारीय माध्यम में क्रिया करते हैं।
  11. कुछ एन्जाइम कोशिका के अन्दर सक्रिय होते हैं तथा कुछ एन्जाइम कोशिका के बाहर भी सक्रिय होते हैं।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एन्जाइम की रासायनिक प्रकृति (स्वभाव) है।
(क) वसा
(ख) कार्बोहाइड्रेट्स
(ग) हाइड्रोकार्बन
(घ) प्रोटीन
उत्तर :
(घ) प्रोटीन

प्रश्न 2.
उस विकर (एन्जाइम) का नाम लिखिए जो बेकरी उद्योग में प्रयुक्त होता है।
(क) फॉस्फेटेज
(ख) एमाइलेज
(ग) जाइमेज
(घ) फॉस्फोरिलेज
उत्तर :
(ख) एमाइलेज

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फॉस्फो-प्रोटीन्स के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
फॉस्फो-प्रोटीन्स में फॉस्फोरस सम्मिलित होता है; जैसे-दुग्ध प्रोटीन-केसीन (castin), अण्डे की पीतक प्रोटीन-फॉस्फोवाइटिन (phosphovitin) आदि।

प्रश्न 2.
वसा अम्ल क्या है?
उत्तर :
वसा अम्ल (fatty acids) लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल (carboxylic acids) हैं।

प्रश्न 3.
दो आवश्यक वसा अम्लों के नाम लिखिए।
उत्तर :
जन्तुओं में वसीय अम्ल प्रायः संतृप्त होते हैं तथा पादपों में असंतृप्त। मनुष्य सहित सभी स्तनियों में लाइनोलीक (linoleic) तथा लाइनोलीनिक (linolenic) वसीय अम्ल शरीर की कोशिकाओं में संश्लेषित नहीं होते अतः ये दोनों केवल पादपों से प्राप्त होते हैं तथा आवश्यक (essential) वसीय अम्ल कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
स्तनधारियों में दुग्ध शर्करा किस रूप में उपस्थित होती है?
उत्तर :
स्तनधारियों में दुग्ध शर्करा (milk sugar) एक डाइसैकेराइड (disaccharide)लैक्टोज (lactose) के रूप में पायी जाती है। यह हेटेरोडाइसैकेराइड (heterodisaccharide) होती है, क्योंकि इसका एक अणु ग्लूकोज एवं गैलेक्टोज के एक-एक अणु 3-1,4 से ग्लाइकोसिडिक बन्ध द्वारा जुड़ने से बनता है। यह पानी में कम घुलनशील तथा कम मीठी होती है।

प्रश्न 5.
प्रोटीन की संरचनात्मक इकाइयों को क्या कहते हैं? जन्तुओं में ये कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर :
प्रोटीन की संरचनात्मक इकाइयों को अमीनो अम्ल (amino acids) कहते हैं। ये जन्तु शरीर में 20 होते हैं जिनमें से 10 अमीनो अम्ल आवश्यक कहे जाते हैं, क्योंकि इनका संश्लेषण शरीर नहीं कर सकता है। शेष अनावश्यक कहलाते हैं जिनका संश्लेषण जन्तु शरीर स्वयं कर लेता है।

प्रश्न 6.
उपापचयी निष्क्रिय पदार्थ किसे कहते हैं? पौधों में संचित पदार्थ कार्बोहाइड्रेट का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उपापचयी क्रिया के फलस्वरूप प्राप्त उत्पादों के निष्क्रिय रहने की अवस्था को उपापचयी निष्क्रिय पदार्थ कहते हैं। पौधों में संचित पदार्थ मण्ड (कार्बोहाइड्रेट) होता है जो कि एक पॉलिसैकेराइड है। इसमें ग्लूकोज इकाइयों से बने दो प्रकार के होमोपॉलिसैकेराइड अणु होते (UPBoardSolutions.com) हैं-10 से 30% तक ऐमाइलोस के तथा 70 से 90% का ऐमाइलोपेक्टिन के अणु। ऐमाइलोपेक्टिन के अणु शाखान्वित और संकेन्द्रीय रूप से कुण्डलित होते हैं। ऐमाइलोस और ऐमाइलोपेक्टिन के अणु प्रायः समूहों में एकत्रित होकर विभिन्न आकृतियों एवं माप के मण्ड कण बना लेते हैं।

प्रश्न 7.
न्यूक्लियोसाइड्स तथा न्यूक्लियोटाइड्स में दो अन्तर बताइए।
उत्तर :

  1. एक न्यूक्लियोटाइड न्यूक्लिक अम्ल की एक पूर्ण इकाई है, जबकि न्यूक्लियोसाइड में एक फॉस्फेट मूलक (PO4) की कमी होती है।
  2. स्वभाव में न्यूक्लियोसाइड्स क्षारकीय होते हैं जबकि न्यूक्लियोटाइड्स अम्लीय होते हैं।

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प्रश्न 8.
ATP तथा ADP के पूरे नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. ATP = ऐडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट (adenosine triphosphate)
  2. ADP = ऐडीनोसीन डाइफॉस्फेट (adenosine diphosphate)

प्रश्न 9.
जीवधारियों में खनिजों के दो कार्य लिखिए। या जीवन के लिए आवश्यक दो महत्त्वपूर्ण खनिज तत्त्वों के नाम लिखिए तथा इनके महत्त्व बताइए।
उत्तर :

  1. कई धात्विक खनिज अनेक एन्जाइम्स को क्रियाशील बनाते हैं अर्थात् सह-कारक (co-factor) का कार्य करते हैं; जैसे-लौह (Fe) एवं कॉपर (Cu)।
  2. कुछ खनिज; जैसे–सोडियम, पोटैशियम तथा क्लोराइड्स आयन्स के रूप में कोशिका कला की पारगम्यता (permeability) तथा विद्युत विभव को प्रभावित करते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संदेश वाहक RNA पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
संदेशवाहक-RNA m-RNA, DNA के ऊपर निर्देशित सूचना का संदेशवाहक है। इसकी जीवन अवधि अल्प होती है। इसका संश्लेषण तीव्र गति से होता है। इसका अणुभार तथा लम्बाई सूचना संदेश के अनुसार कम या अधिक होती रहती है। m-RNA के विषय में सर्वप्रथम जानकारी ब्रेनर आदि (Brenner etal) ने 1961 ई० में दी। नीरेनबर्ग तथा मथाई (Nirenberg and Matthaei) ने 1961 ई० में प्रयोगशाला में कोशिका के बाहर प्रोटीन संश्लेषण में इसे दर्शाया। बेसीलस सबटिलिस (Bacillus subtilis) के m-RNA की अर्द्धआयु केवल 2.30 मिनट होती है। इसका अणुभार 50,000 से 2,00,000 डाल्टन तक हो सकता है। m-RNA सदैव (UPBoardSolutions.com) एकरज्जुकी (single stranded) होता है। इसमें मिलने वाले क्षारक यूरेसिल, साइटोसीन, ग्वानीन तथा एडीनीन हैं। यह केन्द्रक में DNA से बनता है तथा प्रत्येक जीन अपना अलग m-RNA अनुलेखित (transcribe) करती है। जब m-RNA केवल एक जीन (सिस्ट्रोन) से बना होता है तब इसको मोनोसिस्ट्रोनिक अथवा मोनोजीनिक m-RNA (monocistronic or monogenic m-RNA) कहते हैं। यूकैरियोट का m-RNA मोनोसिस्ट्रोनिक होता है।

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जब एक m-RNA दो या अधिक जीन से बनते हैं तब उसे पॉलिसिस्ट्रोनिक अथवा पॉलिजीनिक m-RNA (polycistronic or polygenic m-RNA) कहते हैं। प्रोकैरियोट का m-RNA पॉलिसिस्ट्रोनिक होता है। एक मोनोसिस्ट्रोनिक m-RNA की संरचना के निम्नलिखित भाग हैं

1. कैप (Cap) :
यूकैरियोट तथा कुछ विषाणुओं के m-RNA पर 5′ अन्त (5’end) पर 7-मिथाइल ग्वानोसीन समूह मिलता है। यह कैप (cap) कहलाता है। इस कैप के द्वारा ही m-RNA राइबोसोम से जुड़ता है। प्रोटीन संश्लेषण की गति इसकी उपस्थिति से तीव्र हो जाती है। क्योंकि यदि m-RNA पर कैप न हो तो वह राइबोसोम के साथ ठीक से नहीं जुड़ पाता है तथा प्रोटीन संश्लेषण की गति अति धीमी हो जाती है।

2. नॉन कोडिंग क्षेत्र  :
(Non-coding Region )-कैप के पश्चात् 10 से 100 न्यूक्लिओटाइड होते हैं जो प्रोटीन संश्लेषण में भाग नहीं लेते हैं। इस क्षेत्र में ‘A’ तथा ‘U’ अधिक मात्रा में होते हैं।

3. इनीशिएसन कोडोन (Initiation Codon) :
सभी प्रोकैरियोट तथा यूकैरियोट में प्रोटीन संश्लेषण की शुरुआत इनीशिएशन कोडोन AUG से होती है।

4. कोडिंग क्षेत्र (Coding Region) :
यह AUG के पश्चात् उपस्थित क्षारक क्रमों का क्षेत्र है जो प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया में भाग लेता है। इसमें उपस्थित सभी न्यूक्लिओटाइड एक जीन के निर्देश को प्रोटीन में अनुवादित करते हैं।

5. टर्मिनेटिंग कोडोन (Terminating Codon) :
ये क्षारक क्रम UAA, UAG या UGA से अंकित होते हैं। इन कोडोन के आते ही प्रोटीन बनने की श्रृंखला समाप्त हो जाती है।

6. पॉली ‘A’ क्रम (Poly ‘A’ Sequence) :
m-RNA के छोर (end) पर एक लम्बी लगभग 200 न्यूक्लिओटाइड की श्रृंखला होती है जो Adenylic acid (poly’A’ अर्थात् AAAAAA….A) क्रम में रहती है। यह m-RNA की पूँछ (tail) है। यह m-RNA के साइटोप्लाज्म तक पहुँचने से पूर्व केन्द्रक में जोड़ी जाती है।

प्रश्न 2.
ए०टी०पी० की संरचना तथा कार्य लिखिए। या पादप कोशिका में ऊर्जा की मुद्रा क्या है? किन्हीं तीन ऊर्जा वाहकों का नाम लिखिए।
उत्तर :

ए०टी०पी० या ऐडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट

सभी जीवित कोशिकाओं में ए०टी०पी० अणु महत्त्वपूर्ण संरचना वाले पदार्थ हैं। ये अपने अन्तिम दो फॉस्फेट समूहों के अन्तर्गत अत्यधिक ऊर्जा को इस प्रकार संचित रखते हैं कि आवश्यकतानुसार (कम ऊर्जा वाले स्थान या समय में) टूटकर इसको मुक्त कर देते हैं और इस (UPBoardSolutions.com) ऊर्जा का उपयोग जीव अपने कार्यों के सम्पादन हेतु कर लेता है। इस प्रकार, ये ऊर्जा के सिक्के (energy coins) हैं, जो सभी प्रकार की उपापचयिक क्रियाओं में, फिर चाहे ये उपचयी (anabolic) हों अथवा अपचयी (catabolic), अपना स्थान रखते हैं ऊर्जा ग्रहण करते हैं अथवा ऊर्जा मुक्त करते हैं, अतः इन्हें उपापचयी (metabolic) जगत का सिक्का भी कहते हैं।

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किसी भी ऐसे स्थान पर, कोशिका में जहाँ ऊर्जा की कमी होती है, ATP का एक उच्च ऊर्जा बन्ध टूट जाता है और यह ADP (ऐडीनोसीन डाइफॉस्फेट) में बदल जाता है। इस प्रकार जो ऊर्जा प्राप्त होती है। वह सभी प्रकार की उपापचयी (metabolic) अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होती है। विभिन्न प्रकार की ऑक्सीकारक क्रियाओं में (विशेषकर श्वसन में) ऊर्जा उत्पन्न होती है। यही ऊर्जा ABP से ATP बनाने के लिए प्रयुक्त की जाती है। ऊर्जा वाहक (Energy carriers)-पादप कोशिका में ए०टी०पी० (ATP) के अतिरिक्त कई अन्य पदार्थ भी ऊर्जा वाहक का कार्य करते हैं; जैसे

  1. ऐसीटिल को-एन्जाइम ‘ए’ (acetyl co-enzyme (‘A’)
  2. ग्वानोसीन ट्राइफॉस्फेट (guanosine triphosphate = GTP)
  3. निकोटिनेमाइड ऐडीनीन डाइन्यूक्लियोटाइड (nicotinamide adenine dinucleotide =NAD) इन ऊर्जा वाहकों का मुख्य मध्यस्थ यौगिक भी ए०टी०पी० ही होता है।

प्रश्न 3.
एन्जाइम के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
एन्जाइम्स के कार्य एन्जाइम्स वे रासायनिक पदार्थ हैं जो जीवों में होने वाली विभिन्न रासायनिक क्रियाओं की गति को प्रेरित करते हैं। ये सामान्यत: अभिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं। ये मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार के रासायनिक परिवर्तनों को प्रेरित करते हैं।

1. जल अपघटन (Hydrolysis) :
जब पदार्थ के अणु जल के अणु ग्रहण करके अपेक्षाकृत छोटे अणुओं में विघटित हो जाते हैं, इस प्रकार की क्रियाओं को जल अपघटन कहते हैं; जैसे—प्रोटीन्स जल अपघटन द्वारा प्रोटिओजेज, पेप्टोन्स, पॉलिपेप्टाइड्स (proteoses, peptones, polypeptides) तथा अन्त में अमीनो अम्ल (amino acid) में परिवर्तित हो जाते हैं। इसी प्रकार मण्ड, शर्करा आदि के मोनोसैकेराइड्स (monosaccharides) में परिवर्तन भी जल अपघटन क्रिया के ही उदाहरण हैं। जीवित कोशिकाओं में निर्जलीकरण (dehydration) की भी उतनी ही सम्भावनाएँ हैं जितनी कि जल अपघटन की होती हैं। इन्हें भी एन्जाइम्स ही प्रेरित करते हैं।

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2. कार्बोक्सिलीकरण (Carboxylation) :
इस प्रकार की क्रियाओं में COOH-समूह विलग होने से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का निर्माण होता है। पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid), डीकार्बोक्सीलेज (decarboxylase) एन्जाइम द्वारा ऐसीटैल्डिहाइड (acetaldehyde) तथा CO2 में विघटित हो जाता है।UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 9 Biomolecules image 8
यद्यपि इस क्रिया में को-फैक्टर तथा को–एन्जाइम भी कार्य करते हैं और यह क्रिया अत्यधिक जटिल होती है।

3. ऑक्सीकरण व अवकरण (Oxidation and reduction) :

उपापचय क्रिया के समय खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होती है। ग्लूकोज के एक ग्राम अणु से ,0 व CO, बनने में ऑक्सीकरण के फलस्वरूप 4.1 cal ऊर्जा उत्पन्न होती है। सदैव ही ऑक्सीकरण की क्रिया के अन्तर्गत एक पदार्थ का ऑक्सीजन क्षय अथवा (UPBoardSolutions.com) हाइड्रोजन ग्रहण द्वारा अवकरण होता है। ऑक्सीजन क्षय द्वारा अवकृत पदार्थ ऑक्सीजन दाता (Oxygen donor) कहलाता है। तथा ऑक्सीकृत पदार्थ ग्राहक (acceptor) कहलाता है। इसी प्रकार हाइड्रोजन ग्रहण द्वारा अवकृत पदार्थ हाइड्रोजन ग्राहक (hydrogen acceptor) तथा अवकारक पदार्थ हाइड्रोजन दाता (hydrogen donor) कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
विकर के प्रकार का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सन् 1961 में अन्तर्राष्ट्रीय जैव रसायनज्ञ संघ (IUB) ने विकर वर्गीकरण वे नामकरण की एक नवीन पद्धति का अनुसरण किया। इसके अनुसार विकर का नाम ‘‘स्वव्याख्या’ (self explanatory) द्वारा सम्पन्न होता है। इस पद्धति के अनुसार विकरों का वर्गीकरण छ: मुख्य वर्गों में किया गया है

1. ऑक्सीडोरिडक्टेजेज (Oxidoreductases) :
इस वर्ग में ऑक्सीकरण-अपचयन (oxidation-reduction) की अभिक्रियाएँ उत्प्रेरित करने वाले विकर आते हैं। ये इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण (electron transport) को उत्प्रेरित करते हैं।

उदाहरणार्थ
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(ii) 
Cytochrome-oxidase (साइटोक्रोम-ऑक्सीडेज) ऑक्सीजन का अपचयन करके cyt. a3 का ऑक्सीकरण करता है।

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2. ट्रान्सफरेजेज (Transferases) :
वे विकर जो एक क्रियाधार (substrate) से H के अतिरिक्त अन्य किसी भी समूह को दूसरे अणु में स्थानान्तरित कर देते हैं, ट्रान्सफरेज कहलाते हैं। स्थानान्तरित होने वाले समूह प्राय: अमीनो एसाइल, मिथाइल ग्लूकोसिल, फॉस्फेट, थायोल, कीटोन, फार्माइल आदि होते हैं; जैसे– डी-हेक्सोज-6-फॉस्फोट्रान्सफरेज (हेक्सोकाइनेज-hexokinase) ATP से एक फॉस्फेट अणु का स्थानान्तरण ग्लूकोस को कर देता है।
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3. हाइड्रोलेजेज (Hydrolases) :
वे विकर जो क्रियाधार (substrate) का जल अपघटन (hydrolysis) करते हैं, हाइड्रोलेज कहलाते हैं; जैसे–पाचक एन्जाइम, ग्लूटामीन हाइड्रोलेज (ग्लूटामिनेज- glutaminase) आदि।
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4. लायेजेज (Lyases or Desmolases) :
वे विकर जो जल अपघटन के अतिरिक्त किसी अन्य विधि से क्रियाधार (substrate) में से समूहों को हटाते या जोड़ते हैं, लायेजेज कहलाते हैं; जैसे

  1. मैलेट-हाइड्रोलायेज (फ्यूमेरेज-fumerase)
  2.  डीकार्बोक्सीलेज (कार्बनिक एनहाइड्रेज-carbonic anhydrase)
  3. कीटोज-1-फॉस्फेट ऐल्डिहाइड लायेज (ऐल्डोलेज-aldolase) आदि।

5. आइसोमेरेजेज (Isomerases) :
ये विकर क्रियाधार (substrate) में समूहों की अन्त: अवस्था में परिवर्तन कर पुनर्व्यवस्था को उत्प्रेरित करते हैं अर्थात् किसी यौगिक के एक समावयवी (isomer) को दूसरे समावयवी में बदलते हैं। इन्हें आइसोमेरेज कहते हैं, जैसे

  1. ट्रायोज आइसोमेरेज (triose isomerase)
  2.  फॉस्फोहेक्सोसआइसोमेरेज (phosphohexoseisomerase)
  3.  फॉस्फोग्लिसरोम्यूटेज (phosphoglyceromutase) आदि।

6. लाइगेजेज (Ligases) :
ये विकर सिन्थेटेज (synthetase) के नाम से भी जाने जाते हैं। ये ATP से ऊर्जा प्राप्त कर यौगिकों को जोड़ने की अभिक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं; जैसे

  1. को-एन्जाइम ए लाइगेज (ऐसीटाइल को-एन्जाइम-ए सिन्थेटेज)
  2. अमोनिया लाइगेज (ग्लूटामीन सिन्थेटेज) आदि।।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोहाइड्रेट्स के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए। मानव शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स का क्या महत्त्व है? या कार्बोहाइड्रेट्स की प्रमुख श्रेणियों के नाम लिखिए। इन श्रेणियों में प्रमुख अन्तर क्या होते हैं? इन्हें सैकेराइड्स क्यों कहते हैं?
उत्तर :

कार्बोहाइड्रेट्स तथा उनके प्रकार (संवर्ग) या श्रेणियाँ

ये कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के यौगिक हैं तथा इनका सामान्य सूत्र (CH2O)n होता है अर्थात् इनमें कार्बन, हाइड्रोजन तथा
ऑक्सीजन का अनुपात 1: 2 : 1 का होता है। कार्बोहाइड्रेट्स को सैकेराइड्स (saccharides) भी कहते हैं क्योंकि इनके छोटे अणु स्वाद में मीठे होते हैं। स्पष्टतः इनमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात जेल के समान (H2O) होता है। कुछ कार्बोहाइड्रेट्स में सल्फर, नाइट्रोजन (UPBoardSolutions.com) तथा फॉस्फोरस तत्त्व भी होते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण सभी क्लोरोफिल युक्त जीवाणुओं, शैवालों, पौधों आदि के द्वारा किया जाता है। कार्बोहाइड्रेट्स के प्रमुखत: तीन प्रकार (संवर्ग) होते हैं

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(i) मोनोसैकेराइड्स (Monosaccharides) :
ये सरलतम कार्बोहाइड्रेट्स हैं तथा सबसे छोटे होते हैं। इन्हें प्राय: सरल शर्कराएँ (simple sugars) कहते हैं तथा ये स्वाद में मीठे और जल में घुलनशील होते हैं। इनके बनने की इस क्रिया को बहुलीकरण (polymerization) कहते हैं। इनमें उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर इन्हें ट्राइओज (triose) जैसे ग्लिसरैल्डिहाइड (glyceraldehyde); टेट्रोज (tetrose) जैसे इरिथ्रोज (erythrose); पेण्टोज (pentose) जैसे राइबोज (ribose), डीऑक्सीराइबोज (deoxyribose) आदि; हेक्सोज (hexose) जैसे ग्लूकोज (glucose C6H1206), फ्रक्टोज (fructose) आदि, हेप्टोज (heptose) जैसे हेप्ट्यू लोज (heptulose) आदि वर्गों में वर्गीकृत किया गया है।

(ii) ऑलिगोसैकेराइड्स (Oligosaccharides) :
ऐसे कार्बोहाइड्रेट्स दो से दस तक मोनोसैकेराइड इकाइयों से मिलकर इनके बहुलक के रूप में होते हैं। इनके बनने की इस क्रिया को बहुलीकरण (polymerization) कहते हैं। बेहुलीकरण के लिए मोनोसैकेराइड्स ग्लाइकोसिडिक बन्ध (glycosidic bond) के द्वारा जुड़ते हैं। ये भी अधिकतर स्वाद में मीठे तथा जल में घुलनशील होते हैं। ये रेखीय श्रृंखला में होते हैं किन्तु जल में घुलने पर चक्रीय स्वरूप में आ जाते हैं। इसी अवस्था में इनका बहुलीकरण भी होता है। ग्लाइकोसिडिक बन्ध बनाने में एक मोनोसैकेराइड का ऐल्डिहाइड या कीटोन (aldehyde or ketone) समूह दूसरे मोनोसैकेराइड के हाइड्रोक्सिल (ऐल्कोहॉलीय) समूह से जुड़ता है तथा जल का एक अणु बनाता है। सामान्यत: ऑलिगोसैकेराइड्स डाइसैकेराइड्स (disaccharides) ही पाये जाते हैं। इनमें दो मोनोसैकेराइड्स होते हैं। अधिक मोनोसैकेराइड्स वाले ऑलिगोसैकेराइड्स अन्य कार्बनिक यौगिकों जैसे-प्रोटीन्स, लिपिंड्स के साथ मिलकर ग्लाइकोप्रोटीन्स, ग्लाइकोलिपिड्स आदि बनाते हैं। जन्तुओं में ये प्रायः कोशिका कला (plasma membrane) का बाह्य आवरण बनाते हैं। डाइसैकेराइड प्रमुखतः माल्टोज (maltose), सुक्रोज (sucrose) आदि होते हैं।

(iii) पॉलिसैकेराइड्स (Polysaccharides) :
इन्हें ग्लाइकन्स (glycans) भी कहते हैं। ये सामान्यत: संगृहीत खाद्य के रूप में जीवद्रव्य में पाये जाते हैं। इनके निर्माण में दस से अधिक (कभी-कभी काफी जैसे सैकड़ों, हजारों) मोनोसैकेराइड इकाइयाँ (शाखित या अशाखित रेखीय श्रृंखला में) आपस में सम्बन्धित होती हैं; जैसे–मण्ड (starch), सेल्यूलोज (cellulose), ग्लाइकोजन (glycogen) आदि। इनका अणुभार (molecular weight) लाखों में होता है।

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कार्बोहाइड्रेट्स का मानव शरीर में महत्त्व

मानव शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व इस प्रकार है

  1. ये श्वसन आधार (respiratory substrate) होते हैं। इन्हीं से ऊर्जा (energy) उत्पन्न की जाती है, इसीलिए इन्हें ‘जीव का ईंधन’ कहते हैं अर्थात् ये शरीर के लिए ऊर्जा के प्रमुख स्रोत है
  2. अन्य कार्बनिक अथवा अकार्बनिक अणुओं या मूलकों से मिलकर ये अनेक महत्त्वपूर्ण पदार्थ बनाते हैं; जैसे—पेण्टोज शर्कराएँ न्यूक्लिक अम्लों के अणुओं का अनिवार्य भाग होती हैं। ये ATP के संश्लेषण में भी सहायक होते हैं।
  3. इनका महत्त्व खाद्य संचय के लिए अत्यधिक है; जैसे शरीर में ये ग्लाइकोजन (glycogen) के रूप में संचित रहते हैं।
  4. ये रुधिर का थक्का जमने (clotting) से रोकने में सहायक होते हैं; जैसे—हीपैरिन (heparin)।
  5. शर्करा के कुछ अणु अस्थि सन्धियों पर स्नेहक (चिकनाई) का कार्य करते हैं।
  6. कोशिका कला की बाहरी सतह पर ग्लाइकोप्रोटीन्स तथा ग्लाइकोलिपिड्स के रूप में संयुक्त कार्बोहाइड्रेट्स की उपस्थिति कलाओं की पहचान बनाती है और ग्राही का कार्य करती है।
  7. लारे, म्यूकस, रुधिर समूह के एण्टीजेन्स में भी शर्करा के अणु उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 2.
एन्जाइम की क्रिया-विधि का वर्णन कीजिए। विभिन्न प्रकार के कारकों को एन्जाइम की क्रिया-विधि पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए। या विकर की संरचना का वर्णन कीजिए तथा इसकी उत्प्रेरित अभिक्रियाओं को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो कारकों का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
उत्तर :

एन्जाइम्स

एन्जाइम्स (enzyme, Gr, en = in; zyme = yeast) विशेष प्रकार के कार्बनिक उत्प्रेरक (organic catalysts) हैं जो जीवों में रासायनिक प्रक्रियाओं के उत्प्रेरण के लिए उत्तरदायी होते हैं। जीवतन्त्र में एन्जाइम्स की उपस्थिति का ज्ञान बहुत पुराना है। यद्यपि एन्जाइम (enzyme) नाम तब पड़ा, जब कुहने (Kuhne, 1878) ने यीस्ट (yeast) में पाये जाने वाले खमीर को इस नाम से पुकारा। प्राय: सभी एन्जाइम्स प्रोटीन (protein) के बने होते हैं। इनकी संरचना जटिल तथा अणुभार भी बहुत अधिक होता है। जीव तन्त्र के बाहर अर्थात् प्रयोगशाला में इनका संश्लेषण अभी सम्भव नहीं है। वैज्ञानिकों ने कई एन्जाइम्स (enzymes) को कोशिकाओं से (UPBoardSolutions.com) निकालकर उनके रवे (crystals) प्राप्त किये हैं। अनेक एन्जाइम; जैसे—पेप्सिन (pepsin) में शुद्ध प्रोटीन के साथ अन्य पदार्थ जुड़े रहते हैं। अनेक एन्जाइम में प्रोटीन के साथ किसी धातु; जैसे-लोहा (Fe), जस्ता (Zn), ताँबा (Cu) आदि के अंश सम्बद्ध होते हैं, जैसे—साइटोक्रोम्स (cytochromes) में लोहा होता है आदि। एज़ाइम के प्रोटीन तथा नॉन-प्रोटीन भाग क्रमश: एपोएन्जाइम  (apoenzyme) तथा प्रोस्थेटिक ग्रुप (prosthetic group) कहलाते हैं तथा सम्पूर्ण एन्जाइम को होलोएन्जाइम (holoenzyme) कहते हैं। कुछ एन्जाइम्स की सक्रियता उनसे लगे हुए आयनों (ions) पर निर्भर करती है। ऐसे आयनों को डायलिसिस (dialysis) द्वारा विलग किया जा सकता है। इस प्रकार के आयन सक्रिय कारक होते हैं।UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 9 Biomolecules image 13

एन्जाइम्स की क्रिया-विधि

वास्तव में, एन्जाइम जिस क्रिया के प्रति अपनी सक्रियता प्रदर्शित करते हैं, वे अपने-आप भी होती हैं। किन्तु अत्यधिक धीमी गति से। एन्जाइम कैसे कार्य करता है? इस बारे में समय-समय पर अनेक विचारधाराएँ प्रस्तुत की गई हैं, जैसे. हेनरी (Henry, 1903) ने बताया कि एन्जाइम अपने क्रियाधार या सब्सट्रेट (substrate) से मिलकर एक यौगिक बना लेते हैं। बाद में, इस सिद्धान्त को एन्जाइम-सब्सट्रेट कॉम्प्लेक्स (enzyme-substrate complex) परिकल्पना कहा गया। इसके अनुसार, एन्जाइम के बाह्य तल पर विशेष प्रकार की संरचनाएँ होती हैं जिनको टेम्प्लैट (template) कहते हैं। इन्हीं में आधारीय पदार्थों के अणु हँस जाते हैं। इन अणुओं की संरचना टेम्प्लैट के अनुसार होती है। इस प्रकार बनने वाले विशिष्ट घनिष्ठ साहचर्य की स्थापना के विषय में निम्नलिखित दो सिद्धान्त प्रस्तुत किये गये हैं

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1. ताला-कुँजी सिद्धान्त
इस विचारधारा को वैज्ञानिक एमिल फिशर (Emil Fisher, 1894) ने दिया। इसके अनुसार, एन्जाइम क्रियाधार (substrate) के साथ क्रिया कर एन्जाइम-सब्सट्रेट कॉम्प्लेक्स (enzyme-substrate complex) नामक अत्यधिक सक्रिय अस्थाई यौगिक बनाता है। इस कॉम्प्लेक्स से अन्त में एन्जाइम अलग हो जाता है तथा क्रियाधार से नया पदार्थ बनता है।
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2. प्रेरित आसंजन सिद्धान्त
कॉशलेण्ड (Koshland, 1960) द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धान्त में ये माना गया है कि एन्जाइम का सक्रिय स्थल (active site) स्थिर संरचना का न होकर परिवर्तन योग्य होता है। एक विशेष प्रकार का क्रियाधार (substrate) एक विशेष एन्जाइम के सक्रिय स्थल में परिवर्तन प्रेरित करने में सक्षम होता
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है अर्थात् प्रारम्भ में सब्सट्रेट की रचना तथा सक्रिय स्थल की रचना अनुपूरक (complementary) नहीं होती, किन्तु सक्रिय स्थल में परिवर्तन प्रेरित कर यह क्रियाधार इसे अपने अनुपूरक बना लेता है और एन्जाइम के साथ संयुक्त हो जाता है। इसके बाद की क्रियाओं में सक्रिय स्थल क्रियाधार के बॉण्ड्स (bonds) को विच्छेदित कर उत्पादक पदार्थों को मुक्त कर देता है।

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एन्जाइम की सक्रियता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित कारक

एन्जाइम की क्रियाशीलता को प्रभावित करते हैं

1. ताप (Temperature) :
एन्जाइम को जिस स्थान पर कार्य करना है, वहाँ का ताप; सामान्यतः 35° से 45°C होना चाहिये। इससे अधिक या कम ताप पर एन्जाइम की क्रियाशीलता कम हो जाती है। 60°-65°C ताप तथा इससे अधिक ताप पहुँचने पर एन्जाइम प्रायः नष्ट हो जाते हैं। इसी प्रकार, कम ताप (UPBoardSolutions.com) पर भी इनकी क्रियाशीलता घटती है और 0°C पर पहुँचने पर ये प्रायः निष्क्रिय होकर परिरक्षित (preserve) हो जाते हैं।

2. pH का मान (Value of pH) :
कुछ एन्जाइम्स अम्लीय माध्यम में तथा अन्य क्षारीय माध्यम में क्रियाशील होते हैं, इसके विपरीत ये कार्य नहीं करेंगे। वास्तव में, प्रत्येक एन्जाइम एक विशेष pH माध्यम में ही उच्चतम क्रियाशीलता प्रदर्शित करता है। pH मान कम या अधिक होने पर एन्जाइम की सक्रियता कम हो जाती है। pH परिवर्तन से अभिक्रिया की दिशा भी बदल सकती है।
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pH परिवर्तन से एन्जाइम, क्रियाधार, सक्रियकारक व संदमकों की घुलनशीलता तथा आयनीकरण प्रभावित होते हैं। एन्जाइमों पर अम्लीय अथवा क्षारीय आयनों युक्त अनेक पाश्र्व श्रृंखलाएँ पायी जाती हैं। pH परिवर्तनों से इन पार्श्व श्रृंखलाओं में परिवर्तन होने से आयनीकरण प्रभावित होता है।

3. आर्द्रता (Humidity) :
10-25% आर्द्रता पर एन्जाइम सक्रियता समाप्त हो जाती है। अनुकूलतम बिन्दु तक आर्द्रता बढ़ाने पर एन्जाइम की सक्रियता बढ़ती है।

4. अन्तिम उत्पादों की सान्द्रता (Concentration of end products) :
अन्तिम उत्पादों के संचयन (accumulation) से एन्जाइम की सक्रियता कम हो जाती है। उत्पाद संचयन से अभिक्रिया का विपरीत दिशा में तीव्र होना, एन्जाइम की सतह पर संचयन
से एन्जाइम का निष्क्रिय होना अथवा उत्पादों द्वारा pH प्रभावित होना आदि पाया जाता है। कभी-कभी उत्पाद सक्रिय स्थल पर जुड़कर उसे अवरुद्ध कर देता है। इस घटना को पुनर्निवेशित
संदमन feedback inhibition)कहते हैं।

5. सक्रियकारक (Activators) :
अनेक अकार्बनिक आयन अथवा परमाणु सूक्ष्म मात्रा में रहकर एन्जाइमों की सक्रियता बढ़ा देते हैं; जैसे-K+, Mg++, Mn++, Cl आदि। सक्रियकारक क्रियाधार व एन्जाइम के जुड़ने में सहायक होते हैं।

6. प्रोटीनविष (Protein poisons) :
भारी धातु (Hg++, Ag++, Pb++ आदि)-COOH अथवा -SH से जुड़ जाते हैं। ऑक्सीकारक (oxidants) S-S बन्ध बनाकर एन्जाइम की संरचना में परिवर्तन कर देते हैं। साइनाइड्स (cyanides), कार्बन मोनोऑक्साइड (carbon monoxide), फ्लोराइड्स (fluorides) आदि सक्रियकारक के साथ जुड़कर सम्मिश्र बनाते हैं। ये सब अप्रतियोगी संदमक (non-competitive inhibitors) कहलाते हैं।

7. क्रियाधार आकृतिक अनुरूप पदार्थ (Substrate analogues) :
क्रियाधार आकृतिक अनुरूप पदार्थ एन्जाइम के सक्रिय स्थल के लिये होड़ करते हैं। इनकी उपस्थिति से एन्जाइम सक्रियता में कमी होती है। इन पदार्थों को प्रतियोगी संदमक (competitive inhibitors) कहते हैं। इस संदमन को क्रियाधार की सान्द्रता बढ़ाने से दूर किया जा सकता है।

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8. विकिरण (Radiant rays) :
उच्च ऊर्जा किरणों (X-rays, gamma rays, ultraviolet rays) आदि से विभिन्न बन्ध टूटकर (-SH) नये बन्ध (S-S) बनते हैं जिससे एन्जाइम सक्रियता कम हो जाती है।

9. क्रियाधार की सान्द्रता (Substrate concentration) :
यदि एन्जाइम की मात्रा अधिक हो तो क्रियाधार की सान्द्रता बढ़ाने से अभिक्रिया की दर में वृद्धि होती है।

10. एन्जाइम की सान्द्रता (Enzyme concentration) :
यदि क्रियाधार की सान्द्रता अधिक हो तो एन्जाइम की सान्द्रता बढ़ाने से अभिक्रिया की दर में वृद्धि होती है। एन्जाइम के द्वारा सम्पादित प्रतिक्रियाएँ प्रतिवर्ती (reversible) होती हैं। अतः संश्लेषणात्मक (synthetic) प्रतिक्रिया होगी या विखण्डनात्मक (decompositional), इसका निर्णय अन्य दशाओं पर निर्भर होगा, न कि एन्जाइम पर। सामान्यतः किसी भी ऐसी प्रक्रिया के फलस्वरूप उत्पादित (produced) पदार्थ को अन्य प्रक्रियाओं के द्वारा हटाया जाते रहना चाहिये। (UPBoardSolutions.com) इसलिये एन्जाइम प्रक्रियाएँ सामूहिक एवं शृंखलाबद्ध serial) होती हैं, क्योंकि प्रत्येक क्रिया में बना हुआ उत्पाद (product) अगली प्रतिक्रिया के लिये आधारीय पदार्थ (substrate) का कार्य करता है।

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UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण Ex 6(a)

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण Ex 6(a) are the part of UP Board Solutions for Class 7 Maths. Here we have given UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण Ex 6(a).

Board UP Board
Textbook NCERT
Class Class 7
Subject Maths
Chapter Chapter 6
Chapter Name रेखीय समीकरण
Exercise Ex 6(a)
Number of Questions Solved 5
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण

प्रश्न 1.
निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए एवं अपने उत्तर की जाँच कीजिए

(i) 3x – 5 = 4
हुल:
3x – 5 = 4 =
⇒ 3x = 5 + 4
⇒ 3x = 9
⇒ x = [latex]\frac { 9 }{ 3 }[/latex] =3

उत्तर की जाँचः
बायाँ पक्ष = 3 × 3 – 5 = 9 – 5 = 4
दायाँ पक्ष = 4
अतः बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष

(ii) 5y + 2 = 3y + 8
हल:
5y + 2 = 3y + 8
⇒ 5y – 3y = 8 – 2
⇒ 2y = 6
⇒ y = [latex]\frac { 6 }{ 2 }[/latex] =3

UP Board Solutions

उत्तर की जाँच:
बायाँ पक्ष = 5 × 3 + 2 = 15 + 2 = 17
दायाँ पक्ष = 3 × 3 + 8 = 9 + 8 = 17
अतः बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

उत्तर की जाँच : आगे के प्रश्नों में उत्तर (UPBoardSolutions.com) की जाँच छात्र उपर्युक्त प्रश्नों की भाँति स्वयं करें।
(iii) 3x + 12 = 24
हल:
3x + 12 = 24
⇒ 3x = 24 – 12
⇒ 3x = 12 =
⇒ x = [latex]\frac { 12 }{ 3 }[/latex] = 4

(iv) 6y – 9 = 2y + 15
हल:
6y – 9 = 2y + 15
⇒ 6y – 2y = 15 + 9
⇒ 4y = 24
⇒ y = [latex]\frac { 24 }{ 4 }[/latex] = 6

(v) 18 – 5y = 3y – 6
हल:
18 – 5y = 3y – 6
⇒ -5y – 3y = 6 – 18
⇒ -8y = -24
⇒ y = [latex]\frac { -24 }{ -8 }[/latex] = 3

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए और उत्तर की जाँच कीजिए (UPBoardSolutions.com)
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 1

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 2

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 3

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 4

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए और उत्तर की जाँच कीजिए
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 5

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 6

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 7

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UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 8

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित समीकरणों (UPBoardSolutions.com) को हल कीजिए?
(i) 1.5y – 7 = 0.5y
हल:
1.5y – 7 = 0.5y
⇒ 1.5y – 0.5y = 7
⇒ y = 7

(ii) 2.8x = 5.4 + x
हल:
2.8x = 5.4 + x
⇒ 2.8x – x = 5.4
⇒ 1.8x = 5.4
⇒ x = [latex]\frac { 5.4 }{ 1.8 }[/latex]= 3

(iii) 0.5y + 0.2y = 0.3y + 2
हल:
0.5y +0.2y = 0.3y + 2
⇒ 5y + 2y –3y = 2
⇒ 4y = 2
⇒ y = [latex]\frac { 2 }{ 4 }[/latex] = 5

(iv) 0.16 (5x – 2) = 0.4x + 7
हल:
0.16 (5x – 2) = 0.4x + 7
⇒ 8x – .32 = 4x + 7
⇒ 8x – 4x 7+ 32
⇒ 4x = 7.32 =
⇒ x = [latex]\frac { 7.32 }{ 4 }[/latex] = 18.3

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित समीकरणों को हल (UPBoardSolutions.com) कीजिए एवं उत्तर की जाँच कीजिए
(i) x + 2(x – 2) + 3x = 35
हल:
x + 2(x – 2) + 3x = 35
⇒ x + 2x – 4 + 3x = 35
⇒ 6x – 4 = 35
⇒ 6x = 39
⇒ x = [latex]\frac { 39 }{ 6 }[/latex] = 6.5

(ii) 3x – 2 (x – 5) = 2 (x + 3) – 8
हल:
3x – 2 (x-5) = 2 (x + 3) – 8
⇒ 3x – 2x + 10 = 2x + 6 – 8
⇒ x – 2x = -2 – 10
⇒ x = – 12
⇒ x = 12

(iii) 15 (y – 4) – 2 (y – 9) + 5 (y + 6) = 0
हल:
15 (y – 4) – 2 (y – 9) + 5 (y + 6) = 0
⇒ 15 y-60 – 2 y + 18 + 5y + 30 = 0
⇒ 15y – 2y + 5y – 60 + 18 + 30 = 0
⇒ 18y – 12 = 0
⇒ 18y = 12
⇒ y = [latex]\frac { 12 }{ 18 } =\frac { 2 }{ 3 }[/latex]

(iv) 7 (3 – 2x) +3 (5 – 4x) = 45
हल:
7 (3 – 2x) + 3(5 – 4x) = 45
⇒ 21-14x + 15-12x = 45
⇒ 36 – 26x = 45
⇒ -26x = 45 – 36
⇒ -26x = 9
⇒ x= [latex]-\frac { 9 }{ 26 }[/latex]

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(v) 3 (15-4x) + 5 (3x – 7) = 15
हल:
3 (15 – 4x) + 5 (3x – 7) = 15
⇒ 45 – 12x + 15x – 35 = 15
⇒ 3x = 15 – 10
⇒ 3x = 5 =
⇒ x = [latex]\frac { 5 }{ 3 }[/latex]

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अभ्यास 6(b)

प्रश्न 1.
किसी परिमेय संख्या का अंश उसके हर से 3 कम है। (UPBoardSolutions.com) यदि उसके अंश और हर में 5 जोड़ दें, तो नई संख्या का मान [latex]\frac { 3 }{ 4 }[/latex] हो जाता है संख्या ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 9

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प्रश्न 2.
वज्रगुणन विधि से हल कीजिए

UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 10

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प्रश्न 3.
एक भिन्न का हर उसके अंश से 3 अधिक है। यदि अंश और हर (UPBoardSolutions.com) दोनों में 5 जोड़ दिया जाता है, तो उसका मान [latex]\frac { 3 }{ 4 }[/latex] ई हो जाता है। भिन्न ज्ञात कीजिए।
हल :
माना किसी संख्या का अंश = x
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 11

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अभ्यास 6(c)

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनिए
(a) किसी संख्या x और 7 का गुणनफल 28 है, तो वह संख्या है
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 12

(b) किसी संख्या x में 5 से भाग देने पर भागफल 7 आता है, तो वह संख्या है
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 13

(c) यदि एक विषम संख्या 2x +1 है, तो दूसरी क्रमागत विषम संख्या होगी
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 14

प्रश्न 2.
कुछ गणितीय कथनों को रेखीय समीकरणों के रूप में (UPBoardSolutions.com) अभिव्यक्त किया गया है। सही समीकरणों को छाँटिए
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 15

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प्रश्न 3.
एक संख्या का [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex], उसी संख्या के [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] से 15 अधिक है, संख्या ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 16

प्रश्न 4.
एक संख्या 7 से 4 बड़ी है, वह संख्या बताइए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 17

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प्रश्न 5.
एक कक्षा में 45 विद्यार्थी हैं। यदि छात्रों की संख्या छात्राओं की (UPBoardSolutions.com) हो, तो छात्राओं की संख्या बताइए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 18

प्रश्न 6.
एक संख्या के [latex]\frac { 1 }{ 3 }[/latex] भाग में क्सका [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] भाग घटाने पर 4 शेष है। संख्या बताइए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 19

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प्रश्न 7.
आदर्श, डेविड और हमीद का कुल भार 44 किलोग्राम है। (UPBoardSolutions.com) यदि डेविड का भार आदर्श के भार से 1.3 किग्रा अधिक एवं हमीद के भार से 2.1 किग्रा० अधिक हो, तो तीनों का अलग-अलग भार ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 20
प्रश्न 8.
दो अंकों की एक संख्या के अंकों का योगफल 4 है। यदि दहाई के अंक से इकाई का अंक घटा दिया जाए, तो शेष 2 है। संख्या ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 21

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प्रश्न 9.
दो क्रमागत संख्याओं का योगफल 21 है। (UPBoardSolutions.com) उन संख्याओं को बताइए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 22

प्रश्न 10.
दो क्रमागत सम संख्याओं का योगफल 30 है। उन संख्याओं को ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 23

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प्रश्न 11.
दो क्रमागत विषम संख्याओं को योगफल 40 है। उन संख्याओं को ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 24

प्रश्न 12.
एक भिन्न संख्या का हर 7 है। यदि उसके अंश और हर दोनों में 3 (UPBoardSolutions.com) जोड़ दिया जाए, तो उस भिन्न का मान [latex]\frac { 4 }{ 5 }[/latex] हो जाता है। वह भिन्न ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 25

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अभ्यास 6(d)

प्रश्न 1.
माँ की आयु उसके पुत्र की आयु की 5 गुनी है। 8 वर्ष पश्चात् माँ पुत्र की आयु से 3 गुनी हो जाएगी। दोनों की वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
हल :
माना पुत्र की वर्तमान आयु = x वर्ष
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 26
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 27

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प्रश्न 2.
अब्दुल अपने पिता से 25 वर्ष छोटा है। यदि 10 वर्ष पूर्व पिता की (UPBoardSolutions.com) आयु अब्दुल की आयु की छह गुनी रही हो, तो अब्दुल की वर्तमान आयु क्या है?
हल :
माना अब्दुल की वर्तमान आयु = x वर्ष
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 28

प्रश्न 3.
माँ की आयु पिता की आयु से 5 वर्ष कम है। 10 वर्ष पूर्व दोनों की आयु का अनुपात 5:6 था। माँ की वर्तमान आयु बताइए।
हल :
माना माँ की वर्तमान आयु = x वर्ष
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 29

प्रश्न 4.
माया अपने 5 वर्ष के बच्चे से इस समय 20 वर्ष बड़ी है। (UPBoardSolutions.com) अब से कितने वर्ष पश्चात् उसकी आयु बच्चे की आयु की 3 गुनी हो जाएगी?
हल :
बच्चे की वर्तमान आयु = 5 वर्ष
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 30

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अभ्यास 6(e)

प्रश्न 1.
एक समकोण त्रिभुज के दो न्यूनकोणों का अनुपात (UPBoardSolutions.com) 7:11 है। कोणों के मान ज्ञात कीजिए।
हल :
माना त्रिभुज के दो न्यूनकोण = 7 x व 11 x

प्रश्न 2.
दो कोटिपूरक कोणों का अन्तर 20° है। प्रत्येक कोण की माप बताइए।
हल :
माना पहला कोण = x

प्रश्न 3.
दो सम्पूरक कोणों का अन्तर 40° है। प्रत्येक कोण की माप क्या है?
हल :
माना पहला कोण = x

प्रश्न 4.
एक आयताकार मैदान 190 मी लम्बे तार से घिरा है। यदि मैदान (UPBoardSolutions.com) की लम्बाई उसकी चौड़ाई की डेढ़ गुनी हो, तो मैदान की लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग ज्ञात कीजिए।
हल :
माना मैदान की चौड़ाई = x मी

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अभ्यास 6(f)

प्रश्न 1.
एक मालगाड़ी जिसकी लम्बाई 450 मी है, एक खम्भे को 18 सेकंड में पार करती है, उस मालगाड़ी की चाल किमी प्रति घण्टा में ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 31

प्रश्न 2.
1.3 किमी दूर खड़े आदर्श को एक गोले के फटने की आवाज (UPBoardSolutions.com) उसके फटने से 4 सेकंड बाद सुनाई पड़ी। ध्वनि की चाल मीटर प्रति सेकंड में ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 32

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प्रश्न 3.
एक व्यक्ति 15 किमी की दूरी 3 घण्टे में तय करता है जिसमें कुछ दूरी (UPBoardSolutions.com) टहलते हुए तथा शेष दूरी दौड़कर तय करता है। यदि उसकी चाल टहलने में 3 किमी प्रति घण्टा तथा दौड़ने में 9 किमी प्रति घण्टा रही हो, तो उसने दौड़कर कितनी दूरी तय की थी?
हल :
माना व्यक्ति द्वारा टहलते हुए तय की गई दूरी = x किमी
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 33

प्रश्न 4.
नसरीन घर से 3 किमी प्रति घण्टा की चाल से विद्यालय जाती है और 4 किमी प्रति घण्टा की चाल से वापस आती है। यदि उसे आने-जाने में कुल 21 मिनट लगे, तो उसके घर से विद्यालय कितनी दूरी है?
हल :
माना नसरीन के घर से विद्यालय की दूरी = x किमी
(UPBoardSolutions.com)
नसरीन द्वारा घर से विद्यालय जाने में लगा समय = [latex s=2]\frac { x }{ 3 }[/latex] घण्टे
नसरीन द्वारा विद्यालय से घर जाने में लगा समय = [latex s=2]\frac { x }{ 4 }[/latex] घण्टे
आने-जाने में लगा कुल समय = 21 मिनट = [latex s=2]\frac { 21 }{ 60 }[/latex] घण्टे
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 34

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प्रश्न 5.
संजय साइकिल द्वारा 10 किमी प्रति घण्टा की चाल से कार्यालय (UPBoardSolutions.com) 6 मिनट विलम्ब से पहुँचा। यदि वह अपनी चाल 2 किमी प्रति घण्टा बढ़ा देता, तो वह 6 मिनट पहले पहुँच जाता। उसके घर से कार्यालय की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल :
माना घर से कार्यालय की दूरी = x किमी
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 35

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प्रश्न 6.
हामिद के घर से डेविड का घर 19 किमी दूर है। प्रातः 9 बजे वे एक-दूसरे के घर के लिए साइकिल द्वारा प्रस्थान करते हैं यदि हामिद की चाल 9 किमी प्रति घण्टा और डेविड की चाल 10 किमी प्रति घण्टा हो, तो वे दोनों हामिद के घर से (UPBoardSolutions.com) कितनी दूरी पर तथा कब मिलेंगे?
हल :
हामिद के घर से डेविड के घर की दूरी = 19 किमी
चूँकि हामिद वे डेविड विपरीत दिशा में जी रहे हैं,
अत: एक-दूसरे के सापेक्ष चाल = 9+ 10 = 19 किमी/घण्टा
दूरी तय करने में लगा समय = दूरी/चाल = [latex s=2]\frac { 19 }{ 19 }[/latex] = 1 घण्टा
हामिद द्वारा 1 घण्टे में चली दूरी = हामिद की चाल x समय
= 9x 1 = 9 किमी।
अतः दोनों हामिद के घर से 9 किमी की दूरी पर तथा 9+ 1 = 10 बजे प्रातः मिलेंगे।

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प्रश्न 7.
सरकार द्वारा अनाथालय के बच्चों को पुष्टाहार देने के लिए 200 ग्राम दलिया प्रति बच्चे की दर से वितरित किया गया। यदि कुल 20 किग्रा० दलिया वितरित हुआ हो तो बच्चों की संख्या कितनी थी?
हल :
कुल दलिया वितरित हुआ = 20 किग्रा० = 20000 ग्राम
1 बच्चे को दलिया मिला = 200 ग्राम
बच्चों की संख्या = [latex s=2]\frac { 2000 }{ 200 }[/latex] = 100

प्रश्न 8.
पन्द्रह अगस्त के उपलक्ष्य में एक स्कूल के बच्चों में कुल ४ (UPBoardSolutions.com) किग्रा० सेब वितरित हुआ। सेब का मूल्य रुपये प्रति किग्रॉ० था। फल व्यापारी ने राष्ट्रीय पर्व के सम्मान में 10 रुपया प्रतिकिग्रा० मूल्य कम लिया। सेब का कुल मूल्य 2000 रुपये को भुगतान राशि को समीकरण द्वारा दर्शाइए।
हल :
बच्चों में कुल सेब वितरित हुआ = x किग्रा०
1 किग्रा० सेब का मूल्य था = ₹ m
व्यापारी के 10 रुपये कम करने पर….
1 किग्रा० सेब का मूल्य = ₹ x (m – 10)
x किग्रा० सेब का मूल्य = ₹ x (m – 10)
2000 = ₹ x (m – 10)
अत: x (m – 10) = ₹ 2000

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दक्षता अभ्यास 6

प्रश्न 1.
निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिएः
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 36

प्रश्न 2.
किसी संख्या के 5 गुने से उसका 3 गुना घटने पर शेषफल 18 है। वह संख्या बताइए।
हल :
मानो वह संख्या = x
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 37

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प्रश्न 3.
दो क्रमागत विषम संख्ओं का योगफल उसके अन्तर का 6 गुना है। उन संख्याओं को ज्ञात कीजिए।
हल :
माना प्रथम विषम संख्या = x
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 38

प्रश्न 4.
एक व्यक्ति एक बाग से कुछ फूल चुनता है। वह इन फूलों का (UPBoardSolutions.com) [latex]\frac { 1 }{ 2 }[/latex] भाग माली को, [latex]\frac { 1 }{ 4 }[/latex] भाग फूलदान के लिए, [latex]\frac { 1 }{ 6 }[/latex] है भाग अपने पुत्र को [latex]\frac { 1 }{ 18 }[/latex] भाग अपनी पुत्री को तथा शेष 1 फूल अपनी पत्नी को भेंट करता है। उसने कुल कितने फूल चुने थे?
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 39

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प्रश्न 5.
रबिया और एबी की आयु में 2 वर्षों का अन्तर है। (UPBoardSolutions.com) यदि रबिया की आयु एबी की आयु के 2 गुने से 6 वर्ष कम हो, तो दोनों की आयु ज्ञात कीजिए।
हल :
माना रबिया की आयु = x वर्ष
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 40

एबी की आयु = x -2 = 10-2 = 8 वर्ष
अतः रबिया की आयु 10 वर्ष तथा एबी की आयु 8 वर्ष है।

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प्रश्न 6.
पिता की आयु उसके पुत्र की आयु की 4 गुनी है। 6 वर्ष बाद पिता की आयु पुत्र की आयु के ढाई गुने से 6 वर्ष अधिक हो जाएगी। दोनों की वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
हल :
माना पुत्र की वर्तमान आयु = x वर्ष
तथा पिता की वर्तमान आयु = 4x वर्ष
6 वर्ष बाद पुत्र की आयु = (x +6) वर्ष
6 वर्ष बाद पिता की आयु = (4x +6) वर्ष
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 41

प्रश्न 7.
एक आयत की लम्बाई उसकी चौड़ाई से 5 सेमी अधिक है। यदि उसका परिमाप 26 सेमी हो, तो उसकी लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल :
माना आयत की चौड़ाई = x सेमी
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 42

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प्रश्न 8.
एक समान्तर चतुर्भुज की एक भुजा (2x -1) सेमी तथा उसके सामने की भुजा (4x – 6) सेमी है। भुजा की माप बताइए।
हल :
समान्तर चतुर्भुज की एक भुजा = (2x – 1) सेमी
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 43

प्रश्न 9.
पाश्र्वांकित चित्र में x का मान ज्ञात कीजिए।
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 44
हल :
त्रिभुज के तीनों कोणों का योग = 180°
⇒ x + 40° + 85° = 180°
⇒ x = 180° – 40° – 85° = 180° – 125°
⇒ x = 55°

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प्रश्न 10.
एक महिला साइकिल से’ (4x + 1) किमी की दूरी 5 घण्टे में तय करती है। यदि उसकी चाल (x -2) (UPBoardSolutions.com) किमी प्रति घण्टा हो, तो तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल :
दूरी = (4x + 1) किमी
समय = 5 घण्टे
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 45

प्रश्न 11.
एक लड़का [latex]2\frac { 1 }{ 2 }[/latex] घण्टे में 20 किमी दूरी तय करता है। यदि उसने 5 किमी प्रति घण्टा की चाल से कुछ दूरी पैदल चलकर और शेष दूरी को 10 किमी प्रति घण्टा की चाल से साइकिल द्वारा तय की हो तो उसके द्वारा (UPBoardSolutions.com) पैदल चली गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल :
माना लड़का पैदल दूरी तय करता है = x किमी
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 46

UP Board Solutions

प्रश्न 12.
जब माधव 12 किमी प्रति घण्टा की चाल से विद्यालय जाता है, (UPBoardSolutions.com) तो वह 3 मिनट विलम्ब से पहुँचता है। किन्तु जब वह 16 किमी प्रति घण्टा की चाल से विद्यालय जाता है, तो वह 2 मिनट पहले पहुँचता है। उसके घर से विद्यालय की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल :
माना घर से विद्यालय की दूरी = x किमी
12 किमी/घण्टे की चाल से चलकर विद्यालय पहुँचने में लगा समय = [latex s=2]\frac { x }{ 12 }[/latex] घण्टे
16 किमी/घण्टे की चाल से चलकर विद्यालय पहुँचने में लगा समय = [latex s=2]\frac { x }{ 16 }[/latex] घण्टे
UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण 47

UP Board Solutions

एम.एस.ई

प्रश्न 13.
दो संख्याओं का योगफल 710 है। जब बड़ी संख्या को (UPBoardSolutions.com) छोटी संख्या से भाग दिया जाता है, तो भागफल 12 और शेषफल 8 आता है, तो बड़ी संख्या होगी।
(क) 566
(ख) 656
(ग) 665
(घ) 654
हल :
माना छोटी संख्या b है, तो बड़ी संख्या 710 – b होगी।
प्रश्नानुसार, 12b + 8 = 710 – b
13 b = 710 – 8 = 702
b = 54, तो बड़ी संख्या = 710 – 54 = 656 (ख)

UP Board Solutions

प्रश्न 14.
यदि 2 +7= 17, 2z + x = 15 और 2x + y = 10, तो x + y +z का मान होगा।
(क) 42
(ख) 39
(ग) 41
(ग) 14
हल :
(2y + z) + (2z +x) + (2x + y) = 17 + 15 + 10
2y + z + 2z + x + 2x + y = 42
3y + 3z + 3x = 42
= x ÷ y + z = [latex]\frac { 42 }{ 3 }[/latex] = 14 (घ)

We hope the UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण Ex 6(a) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 7 Maths Chapter 6 रेखीय समीकरण Ex 6(a), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactions

UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactions (अपचयोपचय अभिक्रियाएँ)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Chemistry. Here we have given UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactions (अपचयोपचय अभिक्रियाएँ).

पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित स्पीशीज में प्रत्येक रेखांकित तत्व की ऑक्सीकरण संख्या का निर्धारण कीजिए-
(क) NaH2PO4
(ख) Na HSO4
(ग) H4P2O7
(घ) K2MnO4
(ङ) CaO2
(च) NaBH4
(छ) H2S2O7
(ज) KAl(SO4).12H2O
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-1
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactions img-2
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के रेखांकित तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या क्या है तथा इन परिणामों को आप कैसे प्राप्त करते हैं?
(क) KI3
(ख) H2S4O6
(ग) Fe3O4
(घ) CH2CH2OH
(ङ) CH3COOH
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-3
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-4
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-5
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-6

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अपचयोपचय अभिक्रियाओं के रूप में औचित्य स्थापित करने का प्रयास कीजिए–
(क) CuO(s)+ H2(g) + Cu(s) + H2O(g)
(ख) Fe2O3(s) + 3CO(g)—-→ 2Fe(s) + 3CO2(g)
(ग) 4BCl3(g) + 3LiAlH4(s) → 2B2H6(g) + 3LiCl(s) + 3AlCl3(s)
(घ) 2K(s) + F2(g) → 2K+F (s)
(ङ) 4NH3(g) + 5O2(g) → 4NO(g) + 6H2O(g)
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-7
इस अभिक्रिया में, Cu की ऑक्सीकरण अवस्था +2(CuO में) से घटकर शून्य (Cu में) हो जाती है जबकि H की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य (H2 में) से बढ़कर +1(H2O में) हो जाती है। इसलिए अभिक्रिया में CuO का अपचयन तथा H का ऑक्सीकरण हो रहा है। अतः यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-8
इस अभिक्रिया में, Fe2O3 का अपचयन हो रहा है क्योंकि Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +3(Fe2O3 में) से घटकर शून्य (Fe में) हो जाती है। CO का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि C की ऑक्सीकरण अवस्था +2 (CO में) से बढ़कर +4 (CO,2में) हो जाती है। अत: यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया (redox reaction) है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-9
इस अभिक्रिया में, BCl3 का अपचयन हो रहा है क्योकि B की ऑक्सीकरण अवस्था +3 (BCl3 में) से घटकर -3 (B2H6 में) हो जाती है तथा LiAlH4 का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योकि H की ऑक्सीकरण अवस्था -1(LiAlH4 में) से बढ़कर +1 (B2H6 में) हो जाती है। अतः यह एक अपचयोपचय (redox) अभिक्रिया है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-10
इस अभिक्रिया में, K का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था शून्य से बढ़कर +1 हो जाती है तथा F को अपचयन हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था । शून्य से घटकर -1 हो जाती है। अत: यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-11
इस अभिक्रिया में, NH3 को ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था -3 से बढ़कर +2 हो जाती है तथा O2 का अपचयन हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था शून्य से घटकर -2 (H2O में) हो जाती है। अतः यह एक अपचयोपचय (redox) अभिक्रिया है।

प्रश्न 4.
फ्लुओरीन बर्फ से अभिक्रिया करके यह परिवर्तन लाती है
H2O(s) + F2(g) → HF(g) + HOF(g)
इस अभिक्रिया का अपचयोपचय औचित्य स्थापित कीजिए।
उत्तर
H2O(s) + F (g) → HF(g) + HOF (g)
इस अभिक्रिया में, F2 का अपचयन के साथ-साथ ऑक्सीकरण भी हो रहा है क्योंकि यह H (वैद्युत धनात्मक तत्त्व) को जोड़कर HF बनाती है तथा 0 (एक वैद्युत ऋणात्मक तत्त्व) को जोड़कर HOF बनाती है। अत: यह एक ऑक्सीकरण अपचयन अभिक्रिया (redox reaction) है।

प्रश्न 5.
H2SO5, Cr2O2-7 तथा NO3 में सल्फर, क्रोमियम तथा नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या की गणना कीजिए। साथ ही इन यौगिकों की संरचना बताइए तथा इसमें हेत्वाभास | (fallacy) का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर
(i) H2SO5 में S की ऑक्सीकरण संख्या :
(+1)x2 + (x) + [(-2)x5]= 0
अथवा x= 10-2= +8
S की ऑक्सीकरण संख्या +8 सम्भव नहीं है क्योंकि s के बाह्य कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं और उसकी अधिकतम ऑक्सीकरण संख्या +6 हो सकती है। अत: H, SO में दो ऑक्सीकरण परमाणुओं को एक-दूसरे से जुड़ा होना चाहिए। इस हेत्वाभास (fallacy) को H2SO4 की निम्नलिखित संरचना द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-12
(ii) Cr2O2-7 में Cr की ऑक्सीकरण संख्या :
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-13
(iii) NO3 में N की ऑक्सीकरण संख्या :
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-14
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-15

प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए-
(क) मर्करी (II) क्लोराइड
(ख) निकिल (II) सल्फेट
(ग) टिन (IV) ऑक्साइड
(घ) थैलियम (I) सल्फेट
(ङ) आयरन (II) सल्फेट
(च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड
उत्तर
(क) HgCl2
(ख) NiSO4
(ग) SnO2
(घ) Th2SO4
(ङ) Fe2(SO4 )3
(च) Cr2O7

प्रश्न 7.
उन पदार्थों की सूची तैयार कीजिए जिनमें कार्बन-4 से +4 तक की तथा नाइट्रोजन-3 से +5 तक की ऑक्सीकरण अवस्था होती है।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-16

प्रश्न 8.
अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक-दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?
उत्तर
SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या +4 होती है। S अपनी अभिक्रियाओं में -2 और +6 के बीच की कोई भी ऑक्सीकरण-संख्या दर्शा सकता है। अत: SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या घट सकती है और बढ़ भी सकती है; अर्थात् इसका ऑक्सीकरण तथा अपचयन दोनों सम्भव है। इस कारण SO2 ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों अभिकर्मकों की तरह व्यवहार करती है। H2O2 की स्थिति भी समान प्रकार की है। H2O2 में, O की ऑक्सीकरण अवस्था -1 होती है। ऑक्सीजन -2 और 0 (शून्य) के बीच की कोई भी ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है (+2 भी जब F से जुड़ा होता है) अतः H2O2 में ऑक्सीजन अपनी ऑक्सीकरण संख्या घटा तथा बढ़ा सकता है। इस कारण H2O2 ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों अभिकर्मकों की तरह व्यवहार करता है।
O3 में, ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है। यह अपनी ऑक्सीकरण-अवस्था को -1 तथा -2 तक घटा सकता है परन्तु अपनी ऑक्सीकरण-अवस्था को बढ़ा नहीं सकता। अत: O3 केवल एक ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करती है। H2O2 की स्थिति भी समान प्रकार की है। HNO3 में, N की ऑक्सीकरण-अवस्था +5 होती है जो N की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था है। अत: N केवल अपनी ऑक्सीकरण अवस्था घटा सकता है। इस कारण HNO3 केवल ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करता है।

प्रश्न 9.
इन अभिक्रियाओं को देखिए
(क) 6CO2(g) + 6H2O(l) → C6H12O6 (aq) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + 2O2(g)
बताइए कि इन्हें निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
(क) 6CO2(g) + 12H2O(I) → C2H12O6 (aq) + 6H2O(I) + 6O2(g)
(ख) O2(g) + H2O2(l) → H2O(I) + O2(g) + O2(g)
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रियाओं (क) तथा (ख) के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
उत्तर
(क) यह प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की अभिक्रिया है जो कि एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और अनेक चरणों में सम्पन्न होती है। इस अभिक्रिया में, 12H2O अणु क्लोरोफिल (chlorophyll) की उपस्थिति में पहले अपघटित होकर H2 तथा O2 देते हैं। इस प्रकार निर्मित H2CO2 को अपचयित कर C2H12O6 का निर्माण करती है। अतः अभिक्रिया को एक सरल रूप में अभिक्रिया निम्न प्रकार दिखाया जा सकता है|
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-17
इसलिए इस अभिक्रिया को समीकरण (iii) की भाँति लिखना ज्यादा उचित है। इस निरूपण में 12H2O अणु भाग लेते हैं तथा 6H2O अणु उत्पन्न होते हैं।
(ख) दी गई अभिक्रिया का वास्तविक प्रारूप निम्न प्रकार है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-18
समीकरण (iii) प्रदर्शित करती है कि O2 का एक अणु O3 से प्राप्त होता है, जबकि दूसरा H2O2 से प्राप्त होता है। इसलिए, समीकरण को प्रदर्शित करने की यह विधि अधिक उपयुक्त है। समीकरण (क) तथा (ख) का अन्वेषण ट्रेसर तकनीक (tracer technique) के द्वारा किया जा सकता है। समीकरण (क) में H2O18 तथा समीकरण (ख) में H2O18 (या O183) का प्रयोग कर अभिक्रिया के पथ को निर्धारित किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
AgF2 एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है। क्यों?
उत्तर
AgF2 में, Ag की ऑक्सीकरण-अवस्था +2 होती है जो Ag की अत्यधिक अस्थायी अवस्था है। इसलिए, यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद शीघ्रता से अपचयित होकर स्थायी ऑक्सीकरण-अवस्था +1 प्राप्त कर लेता है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-19
इसी कारण AgF2 (यदि प्राप्त हो जाये) एक अत्यन्त प्रबल ऑक्सीकारक की भाँति व्यवहार करता है।

प्रश्न 11.
“जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया सम्पन्न की जाती है, तब अपंचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है। इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।
उत्तर
दिये गये वक्तव्य का औचित्य निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-20
अभिक्रिया (i) में अपचायक (reducing agent) कार्बन अधिकता में है, जबकि अभिक्रिया (ii) में ऑक्सीकारक (oxidising agent) O2 अधिकता में है। अभिक्रिया (i) में CO (कार्बन की O.S.= +2) तथा अभिक्रिया (ii) में CO2 (कार्बन की O.S. = +4) का निर्माण होता है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-21

प्रश्न 12.
इन प्रेक्षणों की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे?
(क) यद्यपि क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट तथा अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट दोनों ही
ऑक्सीकारक हैं। फिर भी टॉलूईन से बेन्जोइक अम्ल बनाने के लिए हम ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग ऑक्सीकारक के रूप में क्यों करते हैं? इस अभिक्रिया के लिए सन्तुलित अपचयोपचय समीकरण दीजिए।
(ख) क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गन्ध वाली HCI गैस प्राप्त होती है, परन्तु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?
उत्तर
(क) यदि टॉलूईन का ऑक्सीकरण क्षारीय अथवा अम्लीय KMnO4 द्वारा किया जाये तो ऑक्सीकरण को नियन्त्रित करना कठिन होगा। इसमें मुख्य उत्पाद बेंजोइक ऐसिड (benzoic acid) के साथ-साथ सह अभिक्रियाओं (side reactions) द्वारा दूसरे उत्पाद भी प्राप्त होंगे। इसलिए टॉलूईन के ऑक्सीकरण के लिये क्षारीय अथवा अम्लीय KMnO4 के स्थान पर ऐल्कोहॉलिक KMnO4 को वरीयता दी जाती है। अपचयोपचय (redox reaction) अभिक्रिया नीचे दी गई है–
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-22
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-23
(ख) जब सान्द्र H2SO4 को क्लोराइडयुक्त एक अकार्बनिक मिश्रण में मिलाया जाता है, तो कम वाष्पशील अम्ल H2SO4 अधिक वाष्पशील अम्ल HCl को विस्थापित करता है और HCl गैस की तीक्ष्ण गन्ध आती है।

2NaCl (5) + H2SO4 (l) → 2NaHSO4 (s) + 2HCl(g)

HCl एक दुर्बल अपचायक है। यह H2SO4 को SO2 में अपचयित करने में असमर्थ है। जब मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित होता है तो अधिक उड़नशील अम्ल HBr विस्थापित होता है। HBr एक अधिक प्रबल अपचायक है और H2SO4 को SO2 में अपचयित कर देता है। यह स्वयं ऑक्सीकृत होकर ब्रोमीन देता है जो लाल वाष्प के रूप में प्राप्त होती है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-24

प्रश्न 13.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-
(क) 2AgBr(s) + C6H6O2(aq) → 2Ag(s) + 2HBr (aq) + C6H4O2(aq)
(ख) HCHO(7) +2[Ag(NH3)2]+ (aq) + 3OH (aq) → 2Ag(s)+ HCOO7 (aq) +4NH3(aq) +2H2O(7)
(ग) HCHO(1) + 2Cu2+(aq) + 5OH (aq) → Cu2O(s)+ HCOO (aq) +3H2O(l)
(घ) N2H4(l) + 2H2O(l) → N2(g)+ 4H2O(l)
(ङ) Pb(s) + PbO2(s)+ 2HSO4 (aq) → 2PbSO4(s) + 2H2O(l)
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-25

प्रश्न 14.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में एक ही अपचायक थायोसल्फेट, आयोडीन तथा ब्रोमीन से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया क्यों करता है?
2S2O2-3 (aq) + I2(s) → S4O2-6(aq) + 2I (aq)
S2O2-3 (aq) + 2Br2(l) + 5H2O(l) → 2SO2-4 (aq) + 4Br(aq) + 10H+ (aq)
उत्तर
प्रस्तुत स्पीशीज (species) में S की ऑक्सीकरण संख्या निम्न है-

S2O2-3 = +2, S4O2-6 = 2.5, SO2-4 = +6

ब्रोमीन, आयोडीन से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। इसलिये यह S2O2-3 (S की 0.S. = +2) को SO2-4 (S की O.S. = +6) में ऑक्सीकृत कर देता है; जिसमें S उच्च-ऑक्सीकरण अवस्था में है। I2 एक दुर्बल ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करता है। यह S2O2-3 को S4O2-6(S की O.S. = 2.5) में . ऑक्सीकृत करता है, जिसमें S की ऑक्सीकरण-अवस्था कम है। यही कारण है कि S2O2-3, Br2 से I2 से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया करता है।

प्रश्न 15.
अभिक्रिया देते हुए सिद्ध कीजिए कि हैलोजनों में फ्लुओरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक तथा हाइड्रोहैलिक यौगिकों में हाइड्रोआयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक है।
उत्तर
हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता का घटता हुआ क्रम निम्न है-F2 > Cl2, > Br2 > I2। F2 एक प्रबल ऑक्सीकारक है तथा यह Cl, Br तथा I आयनों का ऑक्सीकर कर देती है। Cl2 केवल Br तथा I आयनों को और Br2 केवल I आयनों को ही ऑक्सीकृत कर पाती है। I2 इनमें से किसी को भी ऑक्सीकृत करने में असमर्थ है। अभिक्रियायें नीचे दी गई हैं-
F2 की ऑक्सीकारक अभिक्रियाएँ-

F2(g) + 2Cl(aq) -→ 2F (aq) + Cl2 (g)
F2 (g)+2Br(aq) 2F(aq) + Br2 (1)
F2(g) + 2I(aq) → 2F(aq) + I(s)

Cl2 की ऑक्सीकारक अभिक्रियाएँ-

Cl2(g)+ 2Br(aq) -→ 2Cl(aq) + Br (1)
Cl2(g) + 2I(aq) → 2C(aq) + I2(l),

I2 की ऑक्सीकारक अभिक्रियाएँ-

Br2(l) + 2I(aq) → 2Br(aq) + I2(s)

इस प्रकार F2 सबसे अच्छा ऑक्सीकारक है। हाइड्रोलिक अम्लों की अपचायक क्षमता का घटता हुआ क्रम निम्न प्रकार है-

HI> HBr> HCl> HF

HI और HBr सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) को SO2 में अपचयित कर देते हैं, जबकि HCl व HF ऐसा नहीं कर पाते।

2HBr + H2SO4 → SO2+ 2H2O+ Br2
2HI + H2SO4 → SO2 + 2H2O + I2

HCI, MnO2 को Mn2+ में अपचयित कर देता है परन्तु HF ऐसा करने में असमर्थ है। यह दर्शाता है। कि HCl की ऑक्सीकृत क्षमता HBr से अधिक है।

MnO2 +4HCl → MnCl2 + Cl2 + 2H2O
MnO2 + 4HF → कोई अभिक्रिया नहीं

अतः हाइड्रोलिक अम्लों में HI प्रबलतम अपचायक है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित अभिक्रिया क्यों होती है?
XeO4-6(aq) + 2F(aq) + 6H+(aq) → XeO3(g) + F2(g) + 3H2O(I)
यौगिक Na4XeO6 (जिसका एक भाग XeO4-6 है) के बारे में आप इस अभिक्रिया में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-26
इस अभिक्रिया में XeO6 को XeO3 में अपचयन तथा F का F2 में ऑक्सीकरण हो रहा है। यह अभिक्रिया इसलिये सम्पन्न होती है क्योंकि XeO6, F2 से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। चूंकि XeO4-6 F2 की तुलना में अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है, अत: Na4XeO6 एक प्रबल ऑक्सीकारक होगा।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में-
(क) H3PO2(aq) + 4AgNO3(aq) + 2H2O(l) → H2PO4(aq) + 4Ag(s) +4HNO3(aq)
(ख) H3PO2(aq) + 2CuSO4 (aq) + 2H2O(I)→ H3PO4 (aq) + 2Cu(s) +2H2SO4 (aq)
(ग) C2H5CHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH (aq) → C6H5COO (aq) +2Ag(s) +4NH3(aq) +2H2O(l)
(घ) C6H5CHO(l) +2Cu2+ (aq) + 5OH (aq) कोई परिवर्तन नहीं।
इन अभिक्रियाओं से A+ तथा Cu2+ के व्यवहार के विषय में निष्कर्ष निकालिए।
उत्तर
ये अभिक्रिया दर्शाती है कि Ag+,Cu2+ से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह निम्न तथ्यों से स्पष्ट है-

  1. अभिक्रिया (क) और (ख) दर्शाती है कि Ag2व Cu2+ दोनों आयने H3PO2 को H3PO4 में ऑक्सीकृत कर सकते हैं। अत: दोनों ऑक्सीकारक हैं।।
  2. अभिक्रिया (ग) दर्शाती है कि [Ag(NH3)2]+ आयन C6H5CHO को C6H2COOH में ऑक्सीकृत कर सकता है, परन्तु अभिक्रिया (घ) के अनुसार Cu2+ आयन ऐसा करने में असमर्थ है।
    अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यद्यपि Ag+व Cu2+ दोनों ऑक्सीकारक अभिकर्मक हैं, परन्तु Ag+,Cu2+ से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है।

प्रश्न 18.
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रियाओं को सन्तुलित कीजिए-
(क) MnO4(aq) +I(aq) → MnO2(s) +I2(s)
(क्षारीय माध्यम)
(ख) MnO4(aq) + SO2(8) → Mn2+ (aq) + HSO4(aq) (अम्लीय माध्यम)
(ग) H2O2(aq) +Fe2+ (aq) → Fe3+ (aq) +H2O(l) (अम्लीय माध्यम)
(घ) Cr2O2-7 +SO2(g) → Cr3+ (aq) + SO2-4(aq) (अम्लीय माध्यम)
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-27
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UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-31
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प्रश्न 19.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरणों को आयन-इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा सन्तुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकारक और
अपचायकों की पहचान कीजिए-
(क) P4(s) + OH (aq) → PH3(g) + HPO27 (aq)
(ख) N2H4(l) + ClO3(aq) → NO(g) + Cl(g)
(ग) Cl2O7(g) + H2O2(aq) → ClO2 (aq) + O2(g) + H+(aq)
उत्तर
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UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-34
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-35
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प्रश्न 20.
निम्नलिखित अभिक्रिया से आप कौन-सी सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं-
(CN)2(g) + 2OH (aq) → CN (aq) + CNO (aq) + H2O(l)
उत्तर
यह एक असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया है। इसमें (CN)2 एक ही समय में CN में अपचयित और CNO में ऑक्सीकृत होता है। यह अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है।

प्रश्न 21.
Mn3+ आयन विलयन में अस्थायी होता है तथा असमानुपातन द्वारा Mn2+, MnO2 और H+ आयन देता है। इस अभिक्रिया के लिए सन्तुलित आयनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-42
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-43
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-44

प्रश्न 22.
Cs, Ne, I तथा F में ऐसे तत्व की पहचान कीजिए, जो
(क) केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ख) केवल धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ग) ऋणात्मक तथा धनात्मक दोनों ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(घ) न ऋणात्मक और न ही धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
उत्तर
(क) F : यह सर्वाधिक वैद्युत ऋणात्मक तत्त्व है और सदैव -1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ख) Cs : यह एक क्षार धातु है जो अत्यधिक वैद्युत धनात्मक है। यह सदैव +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ग) I: यह एक हैलोजन है। इसके संयोजक कोश में सात इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं। इसलिये यह -1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। 4-कोश (orbitals) की उपस्थिति के कारण यह +1, +3, +5, और +7 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करता है।
(घ) Ne: यह एक उत्कृष्ट गैस (noble gas) है तथा किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेती है। इसलिए, यह न तो धनात्मक ऑक्सीकरण-अवस्था में पाई जाती है और न ही ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था में।

प्रश्न 23.
जल के शुद्धिकरण में क्लोरीन को प्रयोग में लाया जाता है। क्लोरीन की अधिकता हानिकारक होती है। सल्फर डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करके इस अधिकता को दूर किया जाता है। जल में होने वाले इस अपचयोपचय परिवर्तन के लिए सन्तुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर
क्लोरीन तथा सल्फर डाइऑक्साइड की अभिक्रिया निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त की जा सकती है

Cl2 + SO2 → Cl + SO2-4

इस अपचयोपचय अभिक्रिया को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से निम्नांकित पदों में सन्तुलित करते हैं-
पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-

Cl2 + SO2 → Cl+ SO2-4

पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ निम्नवत् हैं-

  1. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया : SO2 → SO2-4
  2. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया : Cl2 → Cl

पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में 0 परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण में बाईं ओर दो जल अणु जोड़ते हैं-

SO2 + 2H2O → SO2-4 +4H+

पद 4. सन्तुलित अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया निम्नवत् होगी ।-

Cl2 → 2Cl

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन इस प्रकार करेंगे-

SO2 + 2H2O → SO2-4 +4H+ +2e
Cl2 +2e → 2Cl

पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर-

Cl2 + SO2 + 2H2O → 2Cl + SO2-4 +4H+

अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि समीकरण परमाणुओं की संख्या एवं आवेश की दृष्टि से सन्तुलित है।

प्रश्न 24.
आवर्त सारणी की सहायता से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) सम्भावित अधातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन की अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
(ख) किन्हीं तीन धातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
उत्तर
(क) P4, Cl2 और S हैं।
(ख) Cu, Ga और In| इनकी असमानुपातन की अभिक्रियाएँ निम्न हैं-

2Cu+ (aq) -→ Cu2+(aq) + Cu (s)
3Ga+ (aq) → Ga3+(aq) + 2Ga(s)
3In+ (aq) → In3+(aq) + 2In (3)

ये धातु तीन ऑक्सीकरण अवस्थाओं में पायी जाती हैं, जो निम्न हैं-

Cu: +2, 0, +1
Ga : +3, 0, +1
In : +3, 0, +1

प्रश्न 25.
नाइट्रिक अम्ल निर्माण की ओस्टवाल्ड विधि के प्रथम पद में अमोनिया गैस के ऑक्सीजन गैस द्वारा ऑक्सीकरण से नाइट्रिक ऑक्साइड गैस तथा जलवाष्प बनती है। 10.0 ग्राम अमोनिया तथा 20.00 ग्राम ऑक्सीजन द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड की कितनी अधिकतम मात्रा प्राप्त हो सकती है?
उत्तर
प्रक्रम की रासायनिक समीकरण निम्न है-
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-45
समीकरण के अनुसार 68 ग्राम NH3 के ऑक्सीकरण के लिए 160 ग्राम O2 की आवश्यकता होती है।
∴ 10 ग्राम NH3 के ऑक्सीकरण के लिए होगी [latex]\frac { 160 }{ 68 } \times 10=23.53g[/latex] O2 की आवश्यकता। प्रक्रम में केवल 20g O2 का प्रयोग किया गया है। अत: O2 सीमान्त अभिकर्मक है।
∵ 160g O2 से प्राप्त होती है, NO= 120g
∴ 20g O2 से प्राप्त होगी, NO=[latex]\frac { 120 }{ 160 } \times 20=15.00g[/latex]

प्रश्न 26.
पाठ्य-पुस्तक की सारणी 8:1 में दिए गए मानक विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या इन अभिकारकों के बीच अभिक्रिया सम्भव है?
(क) Fe3+ तथाI(aq)
(ख) Ag+ तथा Cu(s)
(ग) Fe3+(aq) तथा Br (aq)
(घ) Ag(s) तथा Fe3+(aq)
(ङ) Br2(aq) तथा Fe2+
उत्तर
(क) सम्भव है- 2Fe3+(aq) + 2I (aq) → 2Fe2+ (aq) + I2(s)
(ख) सम्भव है- Cu (s) + 2Ag+ (aq) Cu2+ (aq) + 2Ag (s)
(ग) सम्भव है- Cu (s) + 2Fe3+(aq) → Cu2+ (aq) + 2Fe2+ (aq)
(घ) सम्भव नहीं है।
(ङ) सम्भव है— Br2 (aq) +2Fe2+(aq) 2Br (aq) + 2Fe3+(aq)

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से प्रत्येक के विद्युत-अपघटन से प्राप्त उत्पादों के नाम बताइए-
(क) सिल्वर इलेक्ट्रोड के साथ AgNO का जलीय विलयन
(ख) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ AgNO का जलीय विलयन
(ग) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ H,SO4 का तनु विलयन ।
(घ) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ CuCl2 का जलीय विलयन।
उत्तर
(क) कैथोड पर Ag प्राप्त होती है। ऐनोड घुलकर Ag+ आयन देगा।
(ख) कैथोड पर Ag, ऐनोड पर O2
(ग) कैथोड पर H2, ऐनोड पर O2
(घ) कैथोड पर Cu, यदि विलयन सान्द्र है तो ऐनोड पर Cl2 अन्यथा O2

प्रश्न 28.
निम्नलिखित धातुओं को उनके लवणों के विलयन में से विस्थापन की क्षमता के क्रम में लिखिए-
Al, Cu, Fe, Mg तथा Zn
उत्तर
Mg > Al> Zn > Fe>Cu

प्रश्न 29.
नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती अपचायक क्षमता के क्रम में लिखिए-
K+/K= -2.93V, Ag+/Ag= 0.80 V, Hg2+/Hg= 0.79V
Mg2+/Mg = -2.37 V, Cr3+/Cr = -0-74V
उत्तर
Ag < Hg < Cr < Mg < K

प्रश्न 30.
उस गैल्वेनी सेल कों चित्रित कीजिए, जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है
Zn(s) +2Ag+ (aq) → Zn2+ (aq) + 2Ag(s)
अब बताइए कि-
(क) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है?
(ख) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन हैं?
(ग) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ क्या हैं?
उत्तर
Zn (s)|Zn2+ (aq) || Ag+ (aq)| Ag (5)
(क) Zn/ Zn2+ इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है।
(ख) बाह्य परिपथ में वैद्युत धारा के वाहक इलेक्ट्रॉन हैं जिनका प्रवाह Zn इलेक्ट्रोड से Ag इलेक्ट्रोड की ओर होता है।
(ग) ऐनोड पर : Zn (s) → Zn2+ (aq) +2e
कैथोड पर : 2Ag+ (aq) + 2e → 2Ag (s)

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
CHC2 में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या है
(i) 0
(ii) + 2
(iii) -2
(iv) +4
उत्तर
(ii) +2

प्रश्न 2.
NaOCl तथा NaClO3 में क्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) + 1, +2
(ii) +1, +5
(iii) -1, +5
(iv) -1,-5
उत्तर
(ii) +1, +5

प्रश्न 3.
OF2 एवं H2O2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या है
(i) – 2,- 1
(ii) + 2, – 1
(iii) + 2, + 1
(iv) – 2,+ 1
उत्तर
(ii) +2,-1

प्रश्न 4.
S4O2-6 एवं S2O2-8 में S की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) + 2.5,+ 6
(ii) + 2.5,+7
(iii) – 2.5, + 6
(iv) + 2.5,- 6
उत्तर
(ii) + 2.5,+ 7

प्रश्न 5.
CH2O में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) -2
(ii) +2
(iii) 0
(iv) +4
उत्तर
(iii) 0

प्रश्न 6.
CH2Cl2 में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +2
(ii) +1
(iii) 0
(iv) +4
उत्तर
(iii) 0

प्रश्न 7.
H2S2O8 में s की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +4
(ii) +5
(iii) +6
(iv) +7
उत्तर
(iii) +6

प्रश्न 8.
ऑक्सीजन की सर्वाधिक ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित करने वाला यौगिक है
(i) H2O2
(ii) F2O
(iii) Cl2O2-7
(iv) NaOCl
उत्तर
(ii) F2O

प्रश्न 9.
H2SO4, H2SO4 तथा SO2Cl2 में s की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः हैं-
(i) +6, +4, +6
(ii) +6, +6, +4
(iii) +6, -6 +4
(iv) -4, +6, +6
उत्तर
(i) +6, +4, +6

प्रश्न 10.
निम्नलिखित यौगिकों में से किसमें Mn की ऑक्सीकरण संख्या अधिकतम है?-
(i) Mn2O3
(ii) KMnO4
(iii) K2MnO4
(iv) MnO2
उत्तर
(ii) KMnO4

प्रश्न 11.
Mn की ऑक्सीकरण संख्या K2MnO4 तो MSO4 में क्रमशः है-
(i) +7 और 12
(ii) +6 और +2
(iii) + 5 और +2
(iv) +2 और +6
उत्तर
(ii) +6 और +2

प्रश्न 12.
पोटैशियम डाइक्रोमेट में क्रोमियम की ऑपलीकरण संख्या है-
(i) +2
(ii) + 3
(iii) +4
(iv) +6
उत्तर
(iv) + 6

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से किसमें नाइट्रोजन की औसीकरण संख्या भिन्नात्मक है?
(i) N2H4
(ii) Ca3N2
(iii) HN3
(iv) N2F2
उत्तर
(ii) HN3

प्रश्न 14.
एक अभिक्रिया में एक धातु आयन M2+ से दो इलेक्ट्रॉनों के निष्कासित होने के बाद ऑक्सीकरण संख्या हो जाती है-
(i) शून्य
(ii) +2
(iii) +1
(iv) +4
उत्तर
(iv) +4

प्रश्न 15.
क्लोरीन की सर्वाधिक ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित करने वाला यौगिक है–
(i) ClO2
(ii) Cl2O
(iii) Cl2O7
(iv) NaClO3
उत्तर
(iii) Cl2O7

प्रश्न 16.
Sg, S2F2 और H2S में सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या के मान क्रमशः हैं|
(i) + 2, + 1 तथा -2
(ii) -2,-1 तथा + 2
(iii) 0, + 1 तथा + 2
(iv) 0, + 1 तथा – 2
उत्तर
(iv) 0, + 1 तथा – 2

प्रश्न 17.
Cl2 NaOCl तथा ClO3 में Cl की क्रमशः ऑक्सीकरण संख्याओं के मान हैं-
(i) +2, 0, +5
(ii) 0, + 2, +5
(iii) +2, +, +5
(iv) 0, + 1, +5
उत्तर
(iv) 0, +1, +5

प्रश्न 18.
Na2S4O6 की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) + 2
(ii) + 3
(iii) + 15
(iv) + 2.5
उत्तर
(iv) + 2.5

प्रश्न 19.
Ni(CO)4 में Ni की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) 0
(ii) 4
(iii) 8
(iv) 2
उत्तर
(i) 0

प्रश्न 20.
सोडियम नाइट्रोपुसाइड में आयरन (Fe) की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +3
(ii) +2
(iii) +4
(iv) 0
उत्तर
(ii) +2

प्रश्न 21.
निम्नलिखित में Mn की न्यूनतम ऑक्सीकरण संख्या वाला यौगिक है-
(i) KMnO4
(ii) MnO2
(iii) KaMnO4
(iv) Mn2O3
उत्तर
(iv) Mn2O3

प्रश्न 22.
O3 तथा H2O2में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या के मान क्रमशः हैं-
(i) 0, -1
(ii) 0, +1
(iii) 0-2
(iv) -2,-1
उत्तर
(i) 0, -1

प्रश्न 23.
निम्न में कौन-सी रेडॉक्स अभिक्रिया है?
(i) AgNO3 + HCl → AgCl + HNO3
(ii) BaO2 + H2SO4 → BaSO4 + H2O2
(iii) SO2 + 2H2S → 2H2O+ 3s
(iv) CaC2O4 +2HCl → CaCl2 + H2C2O4
उत्तर
(iii) SO2 + 2H2S→ 2H2O+ 3s

प्रश्न 24.
निम्नलिखित अभिक्रिया में ऑक्सीकारक है-
2CrO2-2 + 2H+ → Cr2O2-7 + H2O
(i) H+
(ii) CrO2-4
(iii) Cr+3
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(iv) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 25.
निम्न अभिक्रिया में अपचयित होने वाला पदार्थ है–
2CusO4+ 4KI→ Cu2I2 + 2K2SO4+I2
(i) CuSO4
(ii) KI
(iii) Cu2I2
(iv) I2
उत्तर
(i) CuSO4

प्रश्न 26.
हाइड्रोजन द्वारा अपचयित होने वाला ऑक्साइड है
(i) MnO2
(ii) MgO
(iii) CaO
(iv) CoO
उत्तर
(iv) CoO

प्रश्न 27.
4Fe + 3O2 → 4Fe3+ + 6O2- अभिक्रिया में निम्न में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(i) रेडॉक्स अभिक्रिया है।
(ii) Fe अपचायक है।
(iii) Fe का अपचयन Fe3+ में हुआ है।
(iv) ऑक्सीजन का अपचयन हुआ है।
उत्तर
(iii) Fe का अपचयन Fe3+ में हुआ है।

प्रश्न 28.
298 K पर अर्द्ध अभिक्रियाओं के मानक अपचयन विभव हैं
(i) zn2+ +2e → Zn (s); – 0.762
(ii) Cr3++ 3e → Cr (3);- 0.740
(iii) 2H+ +2e → H2 (g);- 0.000
(iv) Fe3+ + e → Fe3+(aq); + 0.770
कौन-सा प्रबलतम अपचायक है।
(i) Zn (s)
(ii) Cr (s)
(iii) H2 (g)
(iv) Fe2+ (aq)
उत्तर
(i) Zn (s)

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेडॉक्स अभिक्रिया की व्याख्या एक उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर
परमाणु या आयन जिस अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉन त्यागता है, उसे ऑक्सीकरण और जिसमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, उसे अपचयन कहते हैं। ऑक्सीकरण तथा अपचयन क्रियाएँ साथ-साथ चलती हैं क्योंकि जब कोई परमाणु या आयन एक इलेक्ट्रॉन त्यागेगा तो उसको ग्रहण करने वाला कोई अन्य परमाणु या आयन ही होगा अर्थात् जब किसी अभिक्रिया में एक पदार्थ का ऑक्सीकरण होता है। तो दूसरे किसी अन्य पदार्थ का अपचयन भी होता है। स्पष्ट है कि ऑक्सीकरण व अपचयन क्रियाएँ साथ-साथ होती हैं। इन ऑक्सीकरण व अपचयन अभिक्रियाओं को सम्मिलित रूप से ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया या रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरणार्थ-
2HgCl2 + SnCl2 → Hg2Cl2 + SnCl4
उपर्युक्त अभिक्रिया में HgCl2 का Hg2Cl2 में अपचयन होता है और HgCl2, SnCl2 को SnCl4 में ऑक्सीकृत कर देता है।

प्रश्न 2.
ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर ऑक्सीकारक तथा अपचायक की पहचान किस प्रकार की जाती है? एक उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर, ऑक्सीकारक वह पदार्थ है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या घटती है, जबकि अपचायक पदार्थ की ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है। उदाहरणार्थ-ऑ०सं. प्रति परमणु लिखने पर,
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-46
उपर्युक्त अभिक्रिया में SnCl2 में Sn की ऑक्सीकरण संख्या +2 है तथा उत्पाद SnCl4 में +4 है। Sn की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि हो रही है।
∴ SnCl2 अपचायक है जबकि FeCl3 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3 व FeCl2 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +2 है, अत: FeCl3 ऑक्सीकारक है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अभिक्रिया की दो अर्द्ध अभिक्रियाएँ लिखिए। यह भी उल्लेख कीजिए कि कौन-सी अर्द्ध अभिक्रिया ऑक्सीकरण व कौन-सी अपचयन अभिक्रिया है?
SnCl2 + 2HgCl2 → SnCl4 + Hg2Cl2
उत्तर
प्रश्न में उल्लिखित अभिक्रिया को दो अर्द्ध अभिक्रियाओं में निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं-

  1. SnCl2 + Cl2 → SnCl2 (ऑक्सीकरण अभिक्रिया)
  2. 2HgCl2 → Hg2Cl2 + Cl2 ↑ (अपचयन अभिक्रिया)
    इस अभिक्रिया में HgCl2 में Hg की ऑक्सीकरण संख्या +2 है तथा Hg2Cl2 में Hg की ऑक्सीकरण संख्या 0 है। चूंकि ऑक्सीकरण संख्या में कमी हो रही है, अतः Hg2Cl2 ऑक्सीकारक है|

प्रश्न 4.
कारण सहित बताइए कि निम्नलिखित अभिक्रिया में कौन ऑक्सीकारक तथा कौन अपचायक है?
2KI + Cl2 → 2KCI + I2
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-47
चूंकि KI में 1 की ऑक्सीकरण संख्या -1 तथा I2 में 0 है, अर्थात् I की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि हो रही है, अतः KI अपचायक है। इसके विपरीत, Cl2 में CI की ऑक्सीकरण संख्या 0 है तथा KCI में -1 है। चूंकि ऑक्सीकरण संख्या में कमी हो रही है, अतः Cl2 ऑक्सीकारक है।

प्रश्न-5.
ऑक्सीकरण संख्या को उदाहरण सहित समझाइए।
या
ऑक्सीकरण संख्या पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
किसी यौगिक या आयन में तत्त्व के एक परमाणु पर स्थित धन या ऋण आवेशों की संख्या उस तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या कहलाती है, जबकि उस अणु या आयन में उपस्थित अन्य परमाणुओं को उनके सम्भावित आयनों के रूप में पृथक् कर दिया जाता है। यह संख्या धनात्मक व ऋणात्मक दोनों प्रकार की हो सकती है। उदाहरणार्थ-NaCl में Na की ऑक्सीकरण संख्या +1 और Cl की ऑक्सीकरण संख्या -1 है, क्योंकि Na पर इकाई धनावेश तथा Cl पर इकाई ऋणावेश है।

प्रश्न 6.
शून्य, -1 तथा +1 ऑक्सीकरण संख्या से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
एक यौगिक में किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या शून्य (0) से तात्पर्य है कि तत्त्व के परमाणु पर धन या ऋण आवेश नहीं है अर्थात् परमाणु विद्युत उदासीन है। तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या +1 से तात्पर्य यह है कि तत्त्व के परमाणु पर इकाई धन आवेश है, जिसे उदासीन करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की आवश्यकता होती है। तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या -1 से तात्पर्य है कि तत्त्व के ” परमाणु पर इकाई ऋणावेश है, जिसे उदासीन करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन त्यागने की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 7.
ब्लू परक्रोमेट में Cr की ऑ०सं० ज्ञात कीजिए।
उत्तर
ब्लू परक्रोमेट की संरचना
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-48
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-49

प्रश्न 8.
सम्बन्धित तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए
(i) KMnO4 में Mn की
(ii) ClO3में Cl की
(iii) NaOCl में Cr की
(iv) H2S2O6 में S की
(v) Cl2 में Cl की
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-50

प्रश्न 9.
निम्नलिखित यौगिकों में s (सल्फर) की ऑक्सीकरण संख्या बताइए-
(i) Na2S4O6,
(ii) SO2Cl2
उत्तर
(i) Na2S4O6-माना S की ऑक्सीकरण संख्या x है। अत:
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-51
(ii) SO2Cl2-माना S की ऑक्सीकरण संख्या x है। अत:
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-52

प्रश्न 10.
K2FeO4 में Fe तथा NH4 में N की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-53

प्रश्न 11.
I—Cl में ci तथा H—H में H की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए। कारण भी दीजिए।
उत्तर
I—Cl में Cl की ऑक्सीकरण संख्या -1 होगी; क्योंकि Cl की विद्युत ऋणात्मकता I से अधिक है, जबकि H—H में H की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होगी क्योंकि समान परमाणु वाले यौगिक के अणुओं में तत्त्वों के परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।

प्रश्न 12.
S8 अणु में s की संयोजकता तथा ऑक्सीकरण संख्या क्या है?
उत्तर
S8 में S की संयोजकता 2 है, जबकि ऑक्सीकरण संख्या शून्य है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित समीकरण को सन्तुलित एवं पूर्ण कीजिए-
SO2+ MnO4+…… → SO2-4 + Mn2+ +…..
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-54

प्रश्न 14.
आयनिक समीकरण Br2 + OH → Br + BrO3 + H2O को सन्तुलित कीजिए तथा ऑक्सीकारक और अपचायक बताइए।
उत्तर
दी गई आयनिक अभिक्रिया समीकरण को अर्द्ध अभिक्रिया समीकरण के रूप में लिखने पर,

Br2 → Br …(i)
Br2 → BrO3 …(ii)

समी० (i) से,
[Br2 +2e → 2Br]x 5
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-55

प्रश्न 15.
(i) Cl2O7 में Cl की ऑक्सीकरण संख्या की गणना कीजिए।
(ii) 2FeCl3 + H2S → 2FeCl2 + 2HCI+S इस अभिक्रिया में ऑक्सीकारक और
अपचायक का नाम लिखिए।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-56

प्रश्न 16.
निम्न में से किसमें Mn की ऑक्सीकरण संख्या सबसे अधिक है और क्यों?
Mn2O3, MnO2, Mno, K2MnO4
उत्तर
K2MnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या सबसे अधिक (+6) है, क्योंकि इसमें ऑक्सीजन परमाणुओं का आपेक्षिक अनुपात बाकी अणुओं से अधिक है।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित समीकरण को सन्तुलित कीजिए।
Fe2+ + NO3 + H+ —> Fe2 + …. + H2O
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-57

प्रश्न 18.
विद्युत रासायनिक श्रेणी के आधार पर F, CI, Br तथा I की ऑक्सीकारक क्षमता को समझाइए।
या
कारण देते हुए समझाइए कि हैलोजन ऑक्सीकारक के रूप में क्यों कार्य करते हैं?
उत्तर
हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता उनके इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। जिस हैलोजन की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है वह अधिक प्रबल ऑक्सीकारक होता है। अधिक प्रबल ऑक्सीकारक के रेडॉक्स युग्म का मानक अपचयन विभव अधिक धनात्मक होता है। हैलोजनों (X2) की ऑक्सीकारक क्षमता उनके रेडॉक्स युग्मों (X2/X) के मानक अपचयन विभवों के मान बढ़ने के क्रम में बढ़ती है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-58

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉनिक सिद्धान्त के आधार पर ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
ऑक्सीकरण—किसी परमाणु, अणु या आयन के इलेक्ट्रॉनों का पृथक् होना ऑक्सीकरण कहलाता है। इसके फलस्वरूप धनात्मक संयोजकता बढ़ती है तथा ऋणात्मक संयोजकता घटती है जो कि त्यागे गये इलेक्ट्रॉन संख्या के बराबर होती है। चूंकि इस क्रिया में इलेक्ट्रॉन त्यागे जाते हैं अत: इसे इलेक्ट्रॉन वियोजन भी कहते हैं।
उदाहरणार्थ–
(i)
Fe2+ → Fe3+ +e (धनात्मक संयोजकता का बढ़ना)
(ii) 2Cl → Cl2 + 2e (ऋणात्मक संयोजकता का घटना)
अपचयन-किसी परमाणु, अणु या आयन से इलेक्ट्रॉनों का जुड़ना अपचयन कहलाता है। इसके फलस्वरूप धनात्मक संयोजकता घटती है तथा ऋणात्मक संयोजकता बढ़ती है जो कि ग्रहण किये गये इलेक्ट्रॉन संख्या के बराबर होती है। चूंकि इस विभव में इलेक्ट्रॉन ग्रहण किये जाते हैं अतः इसे इलेक्ट्रॉनीकरण भी कहते हैं।
उदाहरणार्थ- (i) Fe3+ + e → Fe2+ (धनात्मक संयोजकता का घटना)
(iii) Cl2 +2e → 2Cl (ऋणात्मक संयोजकता का बढ़ना)

प्रश्न 2.
ऑक्सीकरण संख्या तथा संयोजकता में क्या अन्तर है? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर

  1. किसी तत्त्व की संयोजकता उसके एक परमाणु द्वारा स्थानान्तरित या साझे में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या को कहते हैं, जबकि किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या उसे तत्त्व के किसी यौगिक में उसके एक परमाणु पर उपस्थित आवेश को कहते हैं।
  2. किसी तत्त्व की संयोजकता सदैव पूर्णाक होती है, जबकि किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक भी हो सकती है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित समीकरण को ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर सन्तुलित कीजिए। सूत्रों के ऊपर सम्बन्धित तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित है।
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-59
उत्तर
इस अभिक्रिया में कॉपर और नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन हुआ है।
कॉपर की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि = 2 यूनिट प्रति परमाणु Cu
नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या में कमी = 1 यूनिट प्रति अणु HNO3 सन्तुलित समीकरण में ऑक्सीकरण संख्या में हुई कुल वृद्धि और कुल कमी दोनों का बराबर होना
आवश्यक है, अत: समीकरण में HNO3 को 2 से तथा Cu को 1 से गुणा करना आवश्यक है। ऐसा करने पर निम्नलिखित समीकरण प्राप्त होती है
Cu+2HNO3 →Cu(NO3)2 + 2NO2 + H2O
Cu(NO3)2 में एक कॉपर परमाणु से दो नाइट्रेट मूलक संयुक्त हैं, अत: समीकरण को सन्तुलित करने के लिए HNO3 के दो और अणुओं की आवश्यकता पड़ेगी तथा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या सन्तुलित करने के लिए H2O अणु को 2 से गुणा करना आवश्यक है।
Cu+4HNO3 →Cu(NO3)2 + 2NO2 + 2H2O यह समीकरण सन्तुलित है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रिया को ऑक्सीकरण अंक विधि द्वारा पूर्ण एवं संतुलित कीजिए
I2 + HNO3 → NO2 + HIO3
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-60

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अभिक्रिया को सन्तुलित कीजिए-
Zn + HNO3 → Zn(NO3)2 + NO2 + H2O
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-61

प्रश्न 6.
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा अम्लीय माध्यम में निम्न अभिक्रिया की समीकरण सन्तुलित कीजिए
MnO4 + Fe2+ → Fe3+ + Mn2+ + H2O
उत्तर
सर्वप्रथम समीकरण के ऑक्सीकारकों तथा अपचायकों की अर्द्ध-अभिक्रियाएँ पृथक्-पृथक् सन्तुलित की जाती हैं; जैसे-
प्रथम अर्द्ध-अभिक्रिया।

MnO4 → Mn2- (अपचयन)

ऑक्सीजन सन्तुलित करने के लिए 4H2O दाईं तरफ जोड़े जाते हैं। अतः

MnO4 → Mn2+ +4H2O

फिर हाइड्रोजन सन्तुलित करने के लिए 8H+ बाईं तरफ जोड़े जाते हैं। अत:

MnO4 + 8H+ → Mn2+ +4H2O

अब समीकरण में दोनों तरफ आवेश सन्तुलित करने के लिए 5e बाईं तरफ जोड़ने पर निम्नलिखित समीकरण मिलती है-

MnO4 +8H+ +5e → Mn2+ +4H2O …..(i)

दूसरी अर्द्ध-अभिक्रिया

Fe2+ → Fe3+ (ऑक्सीकरण)

आवेश सन्तुलित करने के लिए दाईं तरफ le जोड़ने पर,

Fe2+ → Fe3+ +e …(ii)

अब समीकरण (ii) में 5 की गुणा करके, इसे समीकरण (i) में जोड़ने पर निम्नलिखित समीकरण प्राप्त होती है-

MnO4 + 8H+ + 5Fe2+ +5e → 5Fe3+ + Mn2+ +4H2O+ 5e

इस समीकरण में दोनों तरफ से 5e2 कट जाते हैं। अतः

MnO4 + 8H+ + 5Fe2+ → 5Fe3+ + Mn2+ +4H2O

यही सन्तुलित समीकरण है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया की समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से सन्तुलित कीजिए-
K2Cr2O7 + H2SO4 + FeSO4→ Fe2(SO4)3 + Cr2(SO4)3+ K2SO4 + H2O
उत्तर
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-62
UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactionsimg-63

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऑक्सीकरण संख्या को निर्धारित करने के नियम लिखिए।
उत्तर
ऑक्सीकरण संख्या को निर्धारित करने के नियम किसी यौगिक/आयन में किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या का मान जानने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। ये नियम निम्नवत् हैं-

  1. स्वतन्त्र अथवा तात्त्विक अवस्था में उपस्थित किसी तत्त्व के प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या सदैव शून्य होती है।
    उदाहरणार्थ- He, H2, O2, Cl2, O3, P4, S8, Na, Mg तथा Al में प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या शून्य है।
  2. किसी तत्त्व के अपररूपों की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। उदाहरणार्थ-C के अपररूप हीरा तथा ग्रेफाइट दोनों की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।
  3. किसी एकपरमाणुक आयन (monoatomic ion) की ऑक्सीकरण संख्या उस पर उपस्थित आवेश के बराबर होती है। उदाहरणार्थ-Na+, Mg2+, Fe3+, Cl2,O2- आयनों की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः 1, 2, 3, -1 तथा -2 हैं।
  4. अधातुओं के साथ यौगिकों में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है। धात्विक हाइड्राइडों | (जैसे-NaH,MgH2, LiH, CaH2 आदि) में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।
  5. अधिकांश यौगिकों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -2 होती है। परॉक्साइडों (जैसे H2O2, BaO2 आदि) में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है। सुपर ऑक्साइडों (जैसे-KO2, RbO2 आदि) में प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु के लिए ऑक्सीकरण संख्या -92 निर्धारित की गई है। एक अन्य अपवादस्वरूप ऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड (OF2) तथा डाइऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड (O2F2) जैसे यौगिकों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या
    क्रमशः +2 तथा +1 है।
  6. सभी क्षार धातुओं की अनेक यौगिकों में ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है तथा सभी क्षारीय मृदा धातुओं की ऑक्सीकरण संख्या +2 होती है। ऐलुमिनियम की उसके यौगिकों में ऑक्सीकरण संख्या सामान्यतः +3 होती है।
  7. सभी यौगिकों में फ्लुओरीन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है। यौगिकों में क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन की ऑक्सीकरण संख्या साधारणत: -1 होती है, परन्तु जिन यौगिकों में ये तत्त्व ऑक्सीजन से जुड़े होते हैं उन यौगिकों में इन तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या कोई धनात्मक संख्या होती है।
  8. दो अधातु परमाणुओं वाले यौगिकों में अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्त्व के परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या ऋणात्मक होती हैं जबकि कम विद्युत ऋणात्मक तत्त्व के परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक होती है। उदाहरणार्थ-NH2 तथा NI2 में N कम विद्युत ऋणात्मक परमाणु से जुड़ा है इसीलिए इसको -3 ऑक्सीकरण संख्या दी जाती है, परन्तु जब यह NF2 में अधिक विद्युत ऋणात्मक परमाणु से जुड़ा होता है, तब इसे +3 ऑक्सीकरण संख्या दी जाती है।
  9. उदासीन यौगिकों में सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का बीजीय योग शून्य होता है। उदाहरणार्थ-CH4 में सभी परमाणुओं का बीजीय योग शून्य है।
  10. जटिल तथा बहुपरमाणुक आयनों में, आयन के सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का बीजीय योग आयन पर उपस्थित आवेश के बराबर होता है।

धात्विक तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक होती है तथा अधात्विक तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक या ऋणात्मक होती है। संक्रमण धातु तत्त्व अनेक धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या दर्शाते। हैं। -ब्लॉक के तत्त्वों के लिए उनकी उच्चतम धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या उनकी वर्ग संख्या के बराबर होती है। 2-ब्लॉक के तत्त्वों (उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर) के लिए उच्चतम धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या उनकी वर्ग संख्या में से 10 घटाकर प्राप्त की जाती है। यद्यपि p-ब्लॉक के तत्त्वों के लिए उच्चतम ऋणात्मक ऑक्सीकरण संख्या 8 में से संयोजी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या घटाकर प्राप्त की जा सकती है। इसका अर्थ है कि आवर्त सारणी के किसी आवर्त में उच्चतम धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या सामान्यत: बढ़ती है। आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त में ऑक्सीकरण संख्या +1 से +7 तक बढ़ती है।

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UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 8 Cell The Unit of Life

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 8 Cell The Unit of Life (कोशिका : जीवन की इकाई)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 8 Cell The Unit of Life (कोशिका : जीवन की इकाई).

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इनमें से कौन-सा सही नहीं है?
(अ) कोशिका की खोज राबर्ट ब्राउन ने की थी।
(ब) श्लीडेन व श्वान ने कोशिका सिद्धान्त प्रतिपादित किया था।
(स) विरचोव के अनुसार कोशिका पूर्व स्थित कोशिका से बनती है।
(द) एककोशिकीय जीव अपने जीवन के कार्य एक कोशिका के भीतर करते हैं।
उत्तर :
(अ) कोशिका की खोज राबर्ट ब्राउन ने की थी।

प्रश्न 2.
नई कोशिका का निर्माण होता है
(अ) जीवाणु-किण्वन से।
(ब) पुरानी कोशिकाओं के पुनरुत्पादन से
(स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से
(द) अजैविक पदार्थों से
उत्तर :
(स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से।

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प्रश्न 3.
निम्न के सही जोड़े बनाइए
(अ) क्रिस्टी   – (i) पीठिका में चपटी कलामय थैली
(ब) कुंडिका  – (ii) सूत्रकणिका में अन्तर्वलन
(स) थाइलेकोइड – (iii) गॉल्जी उपकरण में बिंब आकार की थैली
उत्तर :
(अ) (ii)
(ब) (iii)
(स) (i)

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सा सही है?
(अ) सभी जीव कोशिकाओं में केन्द्रक मिलता है।
(ब) दोनों जन्तु व पादप कोशिकाओं में स्पष्ट कोशिका भित्ति होती है।
(स) प्रोकैरियोटिक की झिल्ली में आवरित अंगक नहीं मिलते हैं।
(द) कोशिका का निर्माण अजैविक पदार्थों से नए सिरे से होता है।
उत्तर :
(स) प्रोकैरियोटिक की झिल्ली में आवरित अंगक नहीं मिलते हैं।

प्रश्न 5.
प्रोकैरियोटिक कोशिका में क्या मीसोसोम होता है? इसके कार्य का वर्णन करो।
उत्तर :
प्रोकैरियोटिक कोशिका में विशिष्ट झिल्ली नामक एक संरचना मिलती (UPBoardSolutions.com) है जो प्लाज्मा झिल्ली में वलनों से बनती है इसे मीसोसोम (mesosome) कहते हैं। इसका मुख्य कार्य श्वसन में सहायता करना है।

प्रश्न 6.
कैसे उदासीन विलेय जीवद्रव्य झिल्ली से होकर गति करते हैं? क्या ध्रुवीय अणु उसी प्रकार से इससे होकर गति करते हैं। यदि नहीं तो इनका जीवद्रव्य झिल्ली से होकर परिवहन कैसे होता है?
उत्तर :
जीवद्रव्य झिल्ली का महत्त्वपूर्ण कार्य “इससे होकर अणुओं का परिवहन है।” यह झिल्ली वरणात्मक पारगम्य (selectively permeable) होती है। उदासीन विलेय अणु सामान्य या निष्क्रिय परिवहन द्वारा उच्च सान्द्रता से कम सान्त्रता की ओर साधारण विसरण द्वारा झिल्ली से आते-जाते रहते हैं। इसमें ऊर्जा व्यय नहीं होती। ध्रुवीय अणु सामान्य विसरण द्वारा इससे होकर आ-जा नहीं सकते,  इन्हें परिवहन हेतु वाहक प्रोटीन्स की आवश्यकता होती है। इन्हें आयने कैरियर (ion carriers) भी कहते हैं। इनका परिवहन सामान्यतया सक्रिय विसरण द्वारा होता है। इसमें ऊर्जा व्यय होती है। ऊर्जा  ATP से प्राप्त होती है। ऊर्जा व्यय करके आयन या अणुओं का परिवहन निम्न सान्द्रता से उच्च सान्द्रता की ओर भी हो जाता है।

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प्रश्न 7.
दो कोशिकीय अंगकों के नाम बताइए जो द्विककला से घिरे होते हैं। इन दो अंगकों की क्या विशेषताएँ हैं? इनके कार्य लिखिए व रेखांकित चित्र बनाइए।
उत्तर :
माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) तथा लवक (plastid) द्विकला (double membrane) से घिरे कोशिकांग (cell organelles) हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना माइटोकॉन्ड्रिया को सर्वप्रथम कालीकर (Kallikar, 1880) ने देखा। आल्टमैन (1894) ने इन्हें बायोप्लास्ट कहा। (UPBoardSolutions.com) बेण्डा (1897) ने इन्हें माइटोकॉन्ड्रिया कहा। माइटोकॉन्ड्रिया को  कॉन्ड्रियोसोम भी कहते हैं। यह शलाका, गोल अथवा कणिकारूपी होते हैं। इनकी लम्बाई 40µ तक तथा व्यास 3.5 µ तक होता है। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में इनका अभाव होता है।

परासंरचना (Ultrastructure) :
यह दोहरी पर्त वाली संरचना है। बाह्य पर्त चिकनी तथा अन्दर की पर्त में अंगुलियों के समान अन्तर्वलन मिलते हैं जिन्हें क्रिस्टी (cristae) कहते हैं। दोनों पर्यों के मध्य के स्थान को पेरीमाइटोकॉन्ड्रियल स्थान  कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की गुहा में प्रोटीनयुक्त मैट्रिक्स मिलता है। क्रिस्टी की सतह पर छोटे-छोटे कण मिलते हैं जिन्हें F1 कण अथवा ऑक्सीसोम (oxysomes) कहते हैं। ऑक्सीसोम ऑक्सीकरणीय  फॉस्फेटीकरण (श्वसन) की क्रिया में ATP निर्माण में भाग लेते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया के क्रिस्टी पर इलेक्ट्रॉन अभिगमन होता है जिसके फलस्वरूप ATP बनते हैं। इसके मैट्रिक्स में D.N.A., राइबोसोम, जल,
लवण, क्रेब्स चक्र सम्बन्धी विकर आदि मिलते हैं।
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रासायनिक संघटन (Chemical Composition) :
इनमें 65-70% प्रोटीन, 25% लिपिड, D.N.A., R.N.A. आदि मिलते हैं। अन्दर की कला में श्वसन तन्त्र श्रृंखला सम्बन्धी सभी साइटोक्रोम; जैसे—Cyt b, c, a, a 3, क्वीनोन, NAD, FAD, FMN आदि  मिलते हैं।

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माइटोकॉन्ड्रिया का कार्य
माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र तथा ऑक्सीसोम (F1 कण) पर श्वसन’ श्रृंखला का इलेक्ट्रॉन अभिगमन तन्त्र सम्पन्न होता है, इससे मुक्त ऊर्जा ATP में संचित होती है। ATP समस्त जैविक  क्रियाओं के लिए गतिज ऊर्जा प्रदान करता है। माइटोकॉन्ड्रिया को ‘कोशिका का ऊर्जा गृह’ (Power house of the cell) कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया में स्वद्विगुणन की क्षमता होती है।

लवक की संरचना

लवक दोहरी झिल्ली से घिरे होते हैं। ये यूकैरियोटिक पादप कोशिकाओं में ही मिलते हैं। ये कवक में नहीं मिलते हैं। हीकेल (1865) ने इसकी खोज की तथा शिम्पर ने इसे प्लास्टिड (Plastid) नाम दिया। लवक तीन प्रकार के होते हैं ल्यूकोप्लास्ट; क्रोमोप्लास्ट तथा क्लोरोप्लास्ट।

1. ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplast) :
ये संचयी लवक हैं। वर्णक न होने के कारण ये रंगहीन होते हैं। ये तीन प्रकार के एमाइलोप्लास्ट (UPBoardSolutions.com) (मण्ड संचयी); इलियोप्लास्ट (वसा संचयी) तथा प्रोटीनोप्लास्ट (प्रोटीन संचयी) होते हैं।

2. क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast) :
ये रंगीन लवक हैं। सामान्यतः फूलों की पंखुड़ियों, फल, रंगीन पत्तियों आदि में होते हैं। भूरे शैवालों में फियोप्लास्ट, लाल शैवालों में रोडोप्लास्ट तथा प्रकाश संश्लेषी जीवाणुओं में क्रोमैटोफोर आदि मिलते हैं।

3. क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) :
हरितलवक अथवा क्लोरोप्लास्ट की खोज शिम्पर (Schimper, 1864) ने की। इनमें क्लोरोफिल (पर्णहरित) मिलता है। ये लवक पौधे के हरे भागों में सामान्यतः पत्तियों में  (मीसोफिल, खम्भ ऊतक, क्लोरेनकाइमा) मिलते हैं। ये विभिन्न आकार के होते हैं। हरे शैवाल सामान्यतः हरितलवकं के आकार से पहचाने जाते हैं। उच्च पादप में ये गोल, अण्डाकार, चपटे, दीर्घवृत्ताकार  (elliptical) होते हैं। सामान्यतया इनकी लम्बाई 2-5µ तथा चौड़ाई 3-4µ होती है। कोशिका में इनकी संख्या 20-40 तक हो सकती है।
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4. हरितलवक की परासंरचना (Ultrastructure of Chloroplast) :
इनकी संरचना जटिल होती है। यह दो एकक कलाओं की झिल्ली से बना होता है। दोनों कलाओं के मध्य का स्थान पेरीप्लास्टीडियल स्थान कहलाता है। झिल्ली से घिरा रंगहीन मैट्रिक्स स्ट्रोमा  (stroma) होता है। मैट्रिक्स में कलातन्त्र से बना ग्रैना (grana) होता है। ग्रैना में प्लेट जैसी रचना का समूह होता है, जो पटलिकाओं से जुड़ी रहती हैं, इन्हें लैमिली कहते हैं। ग्रेना की इकाई को  थाइलेकॉइड कहते हैं। ये एक-दूसरे के ऊपर स्थित होते हैं। दो ग्रैना को जोड़ने वाली (UPBoardSolutions.com) पटलिका को स्ट्रोमा लैमिली अथवा फ्रेट चैनल कहते हैं। थाइलेकॉइड पर ‘क्वान्टासोम (quantasomes) पाए जाते हैं। प्रत्येक क्वान्टासोम पर लगभग 230 पर्णहरित अणु पाए जाते हैं। क्लोरोप्लास्ट का रासायनिक संघटन

5. (Chemical Composition of Chloroplast) :
प्रत्येक क्लोरोप्लास्ट में 40-50% प्रोटीन, 23-25% फॉस्फोलिपिड; 3-10% पर्णहरित, 5% R.N.A., 0. 02 -0.01% D.N.A., 1-2% कैरोटीन, विभिन्न विकर, विटामिन तथा धातु; जैसे Mg,Fe, Cu, Mn, Zn आदि मिलते हैं।
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6. क्लोरोप्लास्ट के कार्य (Functions of Chloroplast) :
क्लोरोप्लास्ट का मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण है। ग्रैना में प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशीय क्रिया तथा स्ट्रोमा में अप्रकाशीय क्रिया होती है। प्रकाशीय क्रिया में जल के अपघटन से ऊर्जा निकलती है तथा  अप्रकाशीय अभिक्रिया में CO2, का स्वांगीकरण होता है। भोजन बनाने का चित्र-ग्रेना तथा स्ट्रोमा लैमिली की संरचना। दायित्व होने के कारण इसे कोशिका की किचिन अथवा रसोई कहते हैं।

प्रश्न 8.
प्रोकैरियोटिक कोशिका की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर :
प्रोकैरियोटिक कोशिका या असीमकेन्द्रकीय कोशिकाएँ ऐसी कोशिकाएँ, जिनमें सत्य केन्द्रक (केन्द्रक-कला सहित) नहीं पाया जाता तथा केन्द्रक में पाए जाने वाले प्रोटीन एवं न्यूक्लीक अम्ल  (D.N.A. तथा R.N.A.) केन्द्रक-कला के अभाव में कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) के सम्पर्क में रहते हैं, प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ कहलाती हैं। इनमें एक ही घेरेदार क्रोमोसोम होता है,  जिसमें हिस्टोन प्रोटीन नहीं होती। इनमें राइबोसोम्स 70S प्रकार के होते हैं। इन कोशिकाओं में (UPBoardSolutions.com) अनेक कोशिकांग; जैसे–केन्द्रिक, गॉल्जीकाय, माइटोकॉन्ड्रिया, अन्त:प्रद्रव्यी जालिका आदि; नहीं होते हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में सूत्री विभाजन के लिए घटकों का अभाव होता है। रचना की दृष्टि से इस प्रकार की कोशिकाएँ आदिम मानी गई हैं। जीवाणु कोशिका तथा  नीली-हरी शैवालों की कोशिकाएँ प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 9.
बहुकोशिकीय जीवों में श्रम विभाजन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
एककोशिकीय जीवों में समस्त जैविक क्रियाएँ; जैसे—श्वसन, गति (प्रचलन), पोषण, उत्सर्जन, जनन आदि जीव कोशिका द्वारा ही सम्पन्न होती हैं। इनमें इन कार्यों को सम्पन्न करने हेतु सामान्यतया विशिष्ट अंगक नहीं होते। इनमें मान्य कोशिकाविभाजन द्वारा ही जनन प्रक्रिया हो जाती है। कुछ एककोशिकीय जीवों में लैंगिक जनन भी पाया जाता है। सरल बहुकोशिकीय जीवों में;  जैसे–स्पंज में विभिन्न जैविक कार्य अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं द्वारा सम्पन्न होते हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कोशिका अन्य कार्य भी सम्पन्न कर सकती है। इनमें कार्य विभाजन या श्रम  विभाजन स्थायी नहीं होता। संघ सीलेन्ट्रेटा (Coelenterata) के सदस्यों में कोशिकाएँ विभिन्न जैविक कार्यों के लिए विशिष्टीकृत हो जाती हैं, वे अन्य कार्य सम्पन्न नहीं करतीं। इसे श्रम विभाजन  कहते हैं। श्रम विभाजन की परिकल्पना सर्वप्रथम हेनरी मिलने (UPBoardSolutions.com) एडवर्ड (H. M. Edward) ने प्रस्तुत की। विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करने के लिए कोशिकाएँ ऊतक तथा ऊतक तन्त्र का निर्माण करती हैं।  समान कार्य करने वाली कोशिकाओं में संरचनात्मक समानता पाई जाती है। इसका तात्पर्य यह है कि कोशिकाओं में कार्यिकी भिन्नन (physiological differentiation) के अनुरूप संरचनात्मक और  औतिकीय भिन्नन (structural and histological differentiation) पाया जाता है।

प्रश्न 10.
कोशिका जीवन की मूल इकाई है। संक्षिप्त में वर्णन करें।
उत्तर :
कोशिका शरीर निर्माण की इकाई ही नहीं बल्कि जीवन की कार्यिक इकाई भी है। जीव की सभी क्रियाएँ कोशिका में हो रहे कार्यों के समन्वय से होती हैं। नई कोशिका पूर्व स्थित कोशिका से बनती है।  एक कोशिका से पूर्ण जीव का निर्माण सम्भव है। कोशिका की यह क्षमता टोटीपोटेंसी कहलाती है। प्रत्येक कोशिका में अनेको अंगक होते हैं जो कोशिका द्रव्य में रहते हैं। इनमें हो रहे कार्यों से ही  जीव का जीवन चलता है।

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प्रश्न 11.
केन्द्रक छिद्र क्या है? इनके कार्य बताइए।
उत्तर :

केन्द्रक छिद्र

केन्द्रक के चारों ओर 10 nm से 50 nm मोटी दोहरी केन्द्रक-कला (nuclear membrane) होती है। दोनों झिल्लियों (कलाओं) के मध्य स्थान को परिकेन्द्रकीय स्थान (perinuclear space) कहते हैं।  यह लगभग 100-300 Åचौड़ी होती है। केन्द्रक कला पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं। इन्हें केन्द्रक छिद्र (nuclear pores) कहते हैं। प्रत्येक का व्यास लगभग 400-1000 Å होता है। केन्द्रक-कला का सम्बन्ध कोशिकाद्रव्य में स्थित अन्त:प्रद्रयी जालिका (ER) से होता है।

कार्य :
केन्द्रक में निर्मित विभिन्न प्रकार के R.N.A. अणु विशेषकर m-R.N.A. केन्द्रक कला छिद्रों से होकर कोशिकाद्रव्य में पहुँचते हैं और प्रोटीन संश्लेषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 12.
लयनकाय तथा रसधानी दोनों अन्तः झिल्लीमय संरचनाएँ हैं परन्तु कार्य की दृष्टि से ये अलग होते हैं। इस पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
लयनकाय (lysosome) एकक कला युक्त थैली है जो गॉल्जी काय से बनती है। इसमें हाइड्रोलिटिक विकर होते हैं; जैसे-लाइपेज, ओप्टिएज आदि जो अम्लीय pH में सक्रिय होते हैं। ये विकर कार्बोहाइड्रेट,  प्रोटीन, वसा, न्यूक्लिक अम्ल आदि का पाचन करते हैं। रसधान्ने (vacuole) कोशिकाद्रव्य में उपस्थित थैलीनुमा संरचना है जो एकक कला टोनोप्लास्ट से घिरी रहती है। इसमें जल, उत्सर्जी पदार्थ  जो कोशिका के लिए आवश्यक नहीं हैं तथा कोशिका रस मिलता है। पौधों में ये कोशिका आयतन का 90 प्रतिशत घेर लेती है। पौधों में टोनोप्लास्ट आयन तथा अन्य पदार्थों का सान्द्रता विभव के विरुद्ध  रसधानियों में आना सुनिश्चित रहता है। अतः रसधानी (UPBoardSolutions.com) में सान्द्रता कोशिकाद्रव्य से अधिक रहती है। अमीबा में संकुचनशील रसधानी मिलती है जो उत्सर्जन का कार्य करती है। प्रोटिस्टा के सदस्यों में खाद्य  वेक्युओल मिलते हैं जो खाद्य पदार्थों के निगलने के कारण बनते हैं।

प्रश्न 13.
रेखांकित चित्र की सहायता से निम्नलिखित की संरचना का वर्णन कीजिए
(i) केन्द्रक
(ii) तारककाय।
उत्तर :

(i) केन्द्रक 

सामान्यतः कोशिका का सबसे बड़ा, स्पष्ट तथा महत्त्वपूर्ण कोशिकांग केन्द्रक है। सर्वप्रथम इसकी खोज रॉबर्ट ब्राउन (1831) ने की। यह एक सघन, गोल अथवा अण्डाकार संरचना है। एक कोशिका में इनकी  संख्या सामान्यतः एक (एककेन्द्रकीय; uninucleate) होती है। कभी-कभी इनकी संख्या दो (द्विकेन्द्रकी, binucleate) अथवा अनेक (बहुकेन्द्रकी multinucleate) होती है। पादप कोशिका के  परिपक्वन के साथ-साथ रिक्तिका के केन्द्र में स्थित होने से यह कोशिका दृति (primordial utricle) में एक ओर आ जाता है।

1. संरचना (Structure) :
केन्द्रक के चारों ओर दोहरी केन्द्रक कला  (nuclear membrane) मिलती है। यह कला एकक कला (unit membrane) के समान ही लिपोप्रोटीन की बनी होती है। दोनों कलाओं के मध्य परिकेन्द्रीय स्थान (perinuclear space)  मिलता है। केन्द्रक कला सतत (continuous) नहीं होती है। इसमें बीच-बीच में छिद्र मिलते हैं। इन्हें केन्द्रकीय छिद्र (nuclear pore) कहते हैं। इनका व्यास लगभग 400 होता है। ये  केन्द्रकद्रव्य तथा कोशिकाद्रव्य में सम्बन्ध बनाए रखते हैं। बाह्य केन्द्रक कला का सम्बन्ध अन्तर्द्रव्यी जालिका से होता है। बाहरी केन्द्रक कला पर राइबोसोम चिपके रहते हैं (चित्र)।। केन्द्रक कला के  अन्दर प्रोटीनयुक्त सघन तरल होता है, जिसे केन्द्रकद्रव्य (nucleoplasm) कहते हैं। केन्द्रकद्रव्य में प्रोटीन तथा फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इसमें न्यूक्लियोप्रोटीन (nucleoprotein)  मिलते हैं। केन्द्रकद्रव्य में केन्द्रिक (nucleolus) तथा क्रोमैटिन (chromatin) सूत्र मिलते हैं। केन्द्रिक सामान्यतः एक, परन्तु कभी-कभी अधिक भी हो सकते हैं। केन्द्रिक में r-R.N.A. संश्लेषण होता है,  जो राइबोसोम (UPBoardSolutions.com) के लिए आवश्यक है। केन्द्रिक कोशिका विभाजन के समय लुप्त हो जाते हैं।

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2. क्रोमैटिन सूत्र (Chromatin threads) :
सामान्य अवस्था में जाल के रूप में रहते हैं। इसका कुछ भाग अभिरंजन में गहरा रंग लेता है जिसे हेटरोक्रोमैटिन कहते हैं तथा जो भाग हल्का रंग लेता है, उसे यूक्रोमैटिन (euchromatin) कहते हैं।  कोशिका विभाजन के समय ये संघनित होकर गुणसूत्र बनाते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 8 Cell The Unit of Life image 5

केन्द्रक के कार्य
केन्द्रक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

  1. सम्पूर्ण कोशिका की संरचना, संगठन व कार्यों का नियन्त्रण तथा नियमन करना।
  2. D.N.A. पर उपस्थित संदेश m-R.N.A. के रूप में कोशिकाद्रव्य में जाते हैं और वहाँ प्रोटीन के रूप में अनुवादित होते हैं।
  3.  प्रोटीन से विभिन्न विकर बनते हैं जो विभिन्न उपापचयी क्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं।
  4.  कोशिका विभाजन का उत्तरदायित्व केन्द्रक पर होता है।
  5.  आनुवंशिक पदार्थ D.N.A केन्द्रक में मिलता है। संतति में लक्षण इसी के द्वारा पहुँचते हैं।
  6. नई संतति में जीन ही लक्षणों को पहुँचाते हैं तथा संगठित स्वरूप प्रदान करते हैं।

(ii) तारककाय

तारककाय प्रायः जन्तु कोशिकाओं में केन्द्रक के समीप पाया जाता है। कुछ शैवाल तथा कवक आदि की पादप कोशिकाओं में भी तारककाय पाया जाता है। तारककार्य में दो सेन्ट्रिओल (centriole) पाए  जाते हैं। प्रत्येक सेन्ट्रिओल नौ जोड़े (nine sets) त्रिक तन्तुओं (triplets fibres) से बना (UPBoardSolutions.com) होता है। प्रत्येक त्रिक तन्तु में तीन सूक्ष्म नलिकाएँ (microtubules) एक रेखा में स्थित होती हैं।  ये त्रिक तन्तु एमॉरफस पदार्थ में धंसे रहते हैं। सेन्ट्रिओल के चारों ओर स्वच्छ कोशिकाद्रव्य का आवरण होता है, इसे सेन्ट्रोस्फीयर (centrosphere) कहते हैं। सेन्ट्रिओल तथा सेन्ट्रोस्फीयर मिलकर  तारककाय (centrosome) कहलाते हैं।
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तारककाय के कार्य

  1. यह कोशिका विभाजन के समय त (spindle) का निर्माण करता है। तारककाय विभाजित होकर विपरीत ध्रुवों का निर्माण करता है।
  2. शुक्राणुओं के निर्माण के समय दोनों सेन्ट्रियोल में से एक शुक्राणु के अक्षीय तन्तु (axial filament) का निर्माण करता है।

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प्रश्न 14.
गुणसूत्र बिन्दु क्या है? गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र का वर्गीकरण किस रूप में होता है? अपने  उत्तर को देने हेतु विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों पर गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति को दर्शाने हेतु चित्र बनाइए।
उत्तर :

गुणसूत्र बिन्दु

प्रत्येक गुणसूत्र दो अर्द्धगुणसूत्र या क्रोमेटिड्स (chromatids) से बना होता है। क्रोमेटिड्स पर क्रोमोमीयर्स (chromomeres) स्थित होते हैं। गुणसूत्र के दोनों क्रोमेटिड्स गुणसूत्र बिन्दु या सेन्ट्रोमीयर  (centromere) द्वारा परस्पर जुड़े होते हैं। गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति के आधार (UPBoardSolutions.com) पर गुणसूत्रे निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

1. अन्तकेन्द्री (Telocentric) :
इसमें गुणसूत्र बिन्दु गुणसूत्र के एक ओर स्थित होता है।

2. अग्र बिन्दु (Acrocentric) :
इसमें गुणसूत्र का एक भाग बहुत छोटा तथा दूसरा भाग बहुत बड़ा होता है। इसमें गुणसूत्र बिन्दु एक सिरे के पास स्थित होता है।

3. उपमध्य केन्द्री (Submetacentric) :
इसमें गुणसूत्र बिन्दु एक किनारे के पास होता है। इसे गुणसूत्र की दोनों भुजाएँ असमान होती हैं।

4. मध्य केन्द्री (Metacentric) :
इसमें गुणसूत्र बिन्दु गुणसूत्र के बीचों-बीच स्थित होता है। इससे गुणसूत्र की दोनों भुजाएँ बराबर लम्बाई की होती हैं।

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जब गुणसूत्र में गुणसूत्र बिन्दु (centromere) नहीं पाया जाता तो गुणसूत्र को एसेन्ट्रिक (acentric) कहते हैं और जब गुणसूत्र बिन्दु की संख्या दो या अधिक होती है तो इसे डाइसेन्ट्रिक  (dicentric) या पॉलीसेन्ट्रिक (polycentric) कहते हैं। कुछ गुणसूत्रों में द्वितीयक संकीर्णन (secondary constriction) पाया जाता है। इस प्रकार के गुणसूत्र को सैट गुणसूत्र  (sat-chromosome) कहते हैं।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवन का भौतिक आधार है।
(क) केन्द्रक
(ख) लिंग गुणसूत्र
(ग) जीवद्रव्य
(घ) DNA
उत्तर :
(ग) जीवद्रव्य

प्रश्न 2.
वह कोशिकांग जो रूपान्तरण में मदद करता है, है।
(क) केन्द्रक
(ख) हरितलवक
(ग) राइबोसोम्स
(घ) माइटोकॉण्ड्रिया
उत्तर :
(ग) राइबोसोम्स

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प्रश्न 3.
राइबोसोम की दोनों सब-इकाइयों के जुड़ने में  Mg
++ सान्द्रता की आवश्यकता होती है।
(क) 0.001 M
(ख) 0.0001 M
(ग) 0.01 M
(घ) 0.1 M
उत्तर :
(घ) 0.1 M

प्रश्न 4.
70 S राइबोसोम के कौन-से दो उपभाग है?
(क) 50 S और 20 S
(ख) 50 S और 30 S
(ग) 50 S और 40 S
(घ) 40 S और 30 S
उत्तर :
(ख) 50 S और 30 S

प्रश्न 5.
80 S राइबोसोम के कौन-से दो उपभाग होते हैं?
(क) 40 S और 40 S
(ख) 50 S और 30 S
(ग) 60 S और 40 S
(घ) 70 S और 30 S
उत्तर :
(ग) 60 S और 40 S

प्रश्न 6.
डाइमोर्फिक हरितलवक पत्तियों में पाये जाते हैं ।
(क) मटर में
(ख) सूर्यमुखी में
(ग) साइप्रस में
(घ) चना में
उत्तर :
(ग) साइप्रस में

प्रश्न 7.
यूलोथ्रिक्स में हरितलवक का आकार लेता है।
(क) मेखला के आकार का
(ख) कप के आकार का
(ग) सर्पिलाकार का
(घ) तारा के आकार का
उत्तर :
(क) मेखला के आकार का

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प्रश्न 8.
एण्टीकोडोन्स पाये जाते हैं।
(क) t-RNA में
(ख) r-RNA में
(ग) m-RNA में
(घ) इनमें से सभी में
उत्तर :
(क) t-RNA में

प्रश्न 9.
डी०एन०ए० नहीं होता है।
(क) क्लोरोप्लास्ट में
(ख) माइटोकॉण्ड्रिया में
(ग) न्यूक्लियस में
(घ) परऑक्सीसोम्स में
उत्तर :
(घ) परऑक्सीसोम्स में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :

  1. एश्केरिशिया कोलाई
  2. आकबैक्टीरिया

प्रश्न 2.
प्रोकैरियोटिक कोशिका के केन्द्रक की क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर :
प्रोकैरियोटिक कोशिका में आरम्भी अवास्तविक केन्द्रक होता है जिसे न्यूक्लियाड कहते हैं। (UPBoardSolutions.com) केन्द्रक,कला एवं केन्द्रिका भी अनुपस्थित होती हैं। DNA के धागों के साथ प्रोटीन नहीं जुड़ी होती है।

प्रश्न 3.
प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं के केन्द्रकों में क्या अन्तर होता है?
उत्तर :
प्रोकैरियोटिक कोशिका में विशिष्ट केन्द्रक अनुपस्थित होता है तथा उसके स्थान पर न्यूक्लियाईड या जीनोफोर उपस्थित होता है जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाओं में केन्द्रक कला, क्रोमैटिन, केन्द्रक द्रव्य,  केन्द्रक मैट्रिक्स व केन्द्रिक युक्त एक विशिष्ट केन्द्रक होता है।

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प्रश्न 4.
एक यूकैरियोटिक पादप कोशिका में पाये जाने वाले दो अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांगों के नाम बताइए। या सुकेन्द्रकीय कोशिका में पाये जाने वाले दो अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांगों के नाम लिखिए।
उत्तर :
यूकैरियोटिक पादप कोशिका में पाये जाने वाले माइटोकॉण्डिया (mitochondria) तथा लवक (plastids) अर्द्ध-स्वायत्त कोशिकांग (semi-autonomous cell organelles) हैं।

प्रश्न 5.
तृतीयक कोशिकाभित्ति का पता लगाने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
उत्तर :
साइरिल फिग।

प्रश्न 6.
एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम के कार्य बताइए।
उत्तर :

  1.  प्रोटीन संश्लेषण के लिए स्थान प्रदान करना।
  2. ग्लाइकोजन संश्लेषण तथा संचय करना।

प्रश्न 7.
हरितलवक के किस भाग में कार्बन स्वांगीकरण होता है?
उत्तर :
हरितलवक (chloroplast) के स्ट्रोमा (stroma) भाग में।

प्रश्न 8.
पर्णहरित के पाइरोल चक्र से सम्बन्धित तत्त्व का नाम लिखिए।
उत्तर :
Mg (मैग्नीशियम)।

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प्रश्न 9.
पादप कोशिका के उस कोशिकांग का नाम लिखिए जो प्रकाश श्वसन के लिए उत्तरदायी है।
उत्तर :
परऑक्सीसोम (peroxisome)।

प्रश्न 10.
किसी एक पौधे का नाम बताइए जिसमें द्विआकारिक हरितलवक होते हैं।
उत्तर :
मक्का (C4 पौधे) में द्विआकारिक हरितलवक पाये जाते हैं।

प्रश्न 11.
उस कोशिकांग का नाम बताइए जो प्रोटीन-संश्लेषण से सम्बन्धित है।
उत्तर :
राइबोसोम।

प्रश्न 12.
RNA में कौन-सी शर्करा पाई जाती है?
उत्तर :
RNA में राइबोस (ribose) शर्करा पाई जाती है।

प्रश्न 13.
न्यूक्लियोसोम अभिधारणा किस वैज्ञानिक ने दी?
उत्तर :
वुडकोक (1973) ने क्रोमेटिन की संरचना के अध्ययन के दौरान न्यूक्लियोसोम शब्द का (UPBoardSolutions.com) प्रयोग किया, जबकि इसकी संरचना का वर्णन कॉर्नबर्ग (1974) द्वारा किया गया।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए
(क) प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका
(ख) जन्तु कोशिका तथा वनस्पति कोशिका।
(ग) डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए०
उत्तर :
(क)
प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं के बीच अन्तर

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(ख)
जन्तु तथा पादप (वनस्पति) कोशिकाओं के बीच अन्तर

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(ग)
डी०एन०ए० तथा आर०एन०ए० के बीच अन्तर

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प्रश्न 2.
एक ग्रेनम थायलेकॉयड की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर :
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प्रश्न 3. 
राइबोसोम की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए। या राइबोसोम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर :
राइबोसोम राइबोसोम कलाविहीन (non-membranous) तथा गोलाकार आकृति के सूक्ष्म कण होते हैं। ये कोशिका में अन्तःप्रद्रव्यी जालिका से चिपके हुए अथवा कोशिकाद्रव्य में स्वतन्त्र रूप में मिलते हैं।  ये लगभग समान परिमाण के होते हैं तथा इनमें लगभग 60% राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) तथा 40% प्रोटीन्स होते हैं।
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राइबोसोम लगभग 100-150 Å व्यास के दो प्रकार के होते हैं  70S तथा 80S, इनमें से 70s आकार के राइबोसोम छोटे होते हैं तथा ये जीवाणु कोशिका, माइटोकॉण्डूिया क्लोरोप्लास्ट तथा अन्य प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में तथा 80S राइबोसोम्स सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाये जाते हैं। राइबोसोम्स की संरचना अत्यन्त जटिल होती है। इसकी दो इकाइयाँ होती हैं।  एक इकाई छोटी और दूसरी बड़ी होती है। दोनों इकाइयाँ मिलकर एक गरारी (UPBoardSolutions.com) की तरह की संरचना बनाती हैं। बड़ी इकाई गुम्बदाकार तथा छोटी इकाई टोपी की तरह होती है। कोशिकाद्रव्य में जब  Mg++ आयन का सान्द्रण कम हो जाता है तो दोनों इकाइयाँ अलग अलग हो जाती हैं, किन्तु इन आयनों की अधिकता होने पर दो राइबोसोम भी जुड़ जाते हैं। इन जुड़े हुए आकारों को डायमर  (dimer) कहते हैं। राइबोसोम का निर्माण केन्द्रिक में होता है तथा वहाँ से केन्द्रक द्रव्य में होकर ये केन्द्रक कला के छिद्रों से निकलकर कोशिकाद्रव्य में आ जाते हैं।

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राइबोसोम्स के कार्य

इबोसोम (ribosome), ऐसी विशिष्ट संरचनाएँ हैं जो प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) के स्थल के रूप में कार्य करती हैं। इनकी संरचना में राइबोसोमल आर०एन०ए०  (ribosomal RNA = r-RNA) होता है। यह अन्य आर०एन०ए० अणुओं (messenger RNA =m-RNA and transfer RNA= t-RNA) के साथ मिलकर प्रोटीन संश्लेषण की  न्तिम कड़ी बनाते हैं। इसी पर विभिन्न एन्जाइम्स आदि की उपस्थिति में प्रोटीन का संश्लेषण होता है।

प्रोटीन के संश्लेषण के लिए कई राइबोसोम्स (ribosomes) मिलकर पॉलिराइबोसोम (polyribosome) श्रृंखला का निर्माण करते हैं जिनमें उपस्थित r-RNA अणु महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं।  ये सन्देशवाहक आर०एन०ए० (messenger RNA = m-RNA के द्वारा) डी०एन०ए० से प्राप्त सन्देशों के अनुसार अन्तरण आर०एन०ए० अणुओं (transfer RNA = t-RNA) की सहायता  से एक निश्चित तथा विशेष क्रम में अमीनो अम्लों को संगठित (organize) तथा श्रृंखलाबद्ध करते हैं। (UPBoardSolutions.com) अपने-अपने कार्यों को सम्पादित करने के लिए विभिन्न RNA अणुओं पर विशेष प्रकार के कोड  (code) तथा प्रतिकोड (anticode) स्थित होते हैं। इन्हीं के आधार पर श्रृंखला की विशेषता तथा निश्चित क्रम बना रहता है।

प्रश्न 4.
80 S तथा 70 s राइबोसोम्स में अन्तर बताइए।
उत्तर :
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प्रश्न 5.
केन्द्रिका की अतिसूक्ष्म संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर :
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प्रश्न 6.
गुणसूत्रों की आकृतिक संरचना तथा उनके कार्यों का उल्लेख चित्रों की सहायता से कीजिए।
उत्तर :
कोशिका विभाजन की मध्यावस्था (metaphase) में प्रत्येक गुणसूत्र में लम्बे तथा पूरी लम्बाई में फैले अर्द्ध-गुणसूत्र या क्रोमैटिड (chromatids) पाये जाते हैं। दोनों अर्द्ध गुणसूत्र एक-दूसरे से एक स्थान पर जुड़े रहते हैं जिसे गुणसूत्र बिन्दु (centromere) कहते हैं। गुणसूत्र बिन्दु से गुणसूत्र दो भागों में विभाजित होता है उन्हें गुणसूत्र की भुजा (arm) कहते हैं। कुछ गुणसूत्र में एक  लम्बी भुजा में द्वितीय संकीर्णन (secondary constriction) भी मिलता है। द्वितीय संकीर्णन के (UPBoardSolutions.com) बाद क्रोमोसोम का जो सबसे छोटा भाग होता है, उसे सैटेलाइट (satellite) कहते हैं।  जिन गुणसूत्रों में सैटेलाइट मिलता है, उन्हें SAT chromosome कहते हैं।
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गुणसूत्र का वह भाग जो केन्द्रिक से जुड़ा रहता है उसे केन्द्रिक संघटक (nucleolar organiser) कहते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र परसूक्ष्म मोतीनुमा संरचनाएँ (beaded structure) होती हैं,  उन्हें क्रोमोमियर्स (chromomeres) कहते हैं। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार ये ही जीन्स तथा जीन्स के समूह हैं जो आनुवंशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानान्तरित करते हैं।

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प्रश्न 7.
क्रोमैटिन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
क्रोमैटिन धागे सदृश रचना हैं जो एक-दूसरे के ऊपर फैलकर एक जाल-सदृश रचना बना लेते हैं। जिसे क्रोमैटिन जालिका (chromatin reticulum) कहते हैं, परन्तु यह वास्तविक  जाल नहीं होता, क्योकि प्रत्येक क्रोमैटिन धागे का सिरा अलग होता है। कोशिका विभाजन (cell division) के अवसर पर ये धागे एक-दूसरे से पृथक् हो जाते हैं और सिकुड़कर छोटे व मोटे हो जाते हैं। इन्हें गुणसूत्र (chromosomes) कहते हैं। केन्द्रक का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग क्रोमैटिन है। (UPBoardSolutions.com) रासायनिक दृष्टि से यह एक न्यूक्लिओप्रोटीन (nucleoprotein) है जो  न्यूक्लिक अम्ल और क्षारीय प्रोटीन (base protein) के मिश्रण से बनता है। क्षारीय प्रोटीन विशेष रूप से हिस्टोन (histone) है जो क्षारीय अमीनो अम्ल से बना होता है।

प्रश्न 8.
हेटरोक्रोमैटिन तथा यूक्रोमैटिन में क्या अन्तर है?
उत्तर :
हेटरोक्रोमैटिन तथा यूक्रोमैटिन में अन्तर
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प्रश्न 9.
स्थानान्तरण आर.एन.ए. (t-RNA) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
इसका अणुभार लगभग 25000 डाल्टन होता है। इसमें क्षारक का अनुपात A : U तथा G: C लगभग 1 होता है। यह लगभग 70-75 न्यूक्लिओटाइड की एक श्रृंखला है। इस श्रृंखला का 80% भाग द्विक  कुण्डलीय (double helical) हो जाता है। इसके CS’ सिरे पर G तथा C3′ सिरे पर C-C-A क्षार मिलता है। AUGC के अतिरिक्त और भी क्षारक मिलते हैं, जैसे—5′ राइबोसिले यूरेसिल अथवा
स्यूडोयूरिडिन (5′ ribosyl uracil or pseudouridine Ψ ), डाइहाइड्रो यूरिडायलिक अम्ल (dihydro uridylic acid), 5-मिथाइल साइटोसीन (5-methyl cytosine) आदि। इस प्रकार  के क्षारक कुल क्षारकों का 10-20% तक होते हैं।  t-RNA की संरचना क्लोवर की पत्ती (clover leaf) के समान होती है। इसके चार भुजाएँ (arms), तीन लूप (loop) तथा एक लम्प (lump) होता है।

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C3′ भुजा को ग्राही भुजा (acceptor arm) कहते हैं। इस पर C-C-A अनुक्रम होता है। इस भुजा पर अमीनो अम्ल जुड़ता है तथा अमीनो एसाइल t-RNA बनता है।  TΨC लूप या राइबोसोम बन्ध लूप (ribosomal binding site) में राइबोसोम से जुड़ता है। दूसरा लूप एन्टीकोडोन लूप होता है। इस पर तीन विशिष्ट क्षारक कोड बनते हैं जिससे m-RNA के  कोडॉन की पहचान की जाती है। तीसरा लूप DHU लूप होता है। यह अमीनो अम्ल सिंथेटेस को बाँधता है। यह 8-12 क्षारकों का बना होता है। TΨCलूप तथा एन्टीकोडोन लूप के मध्य एक लम्प  (lump) मिलता है। t-RNA के क्लोवर लीफ मॉडल को आर० होले (R. Holley) ने 1968 में यीस्ट (UPBoardSolutions.com) (Yeast) के t-RNA विश्लेषण के समय प्रस्तुत किया। किम (Kim) तथा उनके साथियों ने  1973 में X-किरणों के विवर्तन से यीस्ट के फिनाइल एलानीन t-RNA का ‘L’ आकार का मॉडल प्रस्तुत किया। यह t-RNA की त्रिविम ‘रचना भी कहलाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
(क) पादप कोशिका की संरचना का, जैसा कि इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में दिखाई देती है, एक स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।
(ख) दो कोशिकांगों के कार्यों का वर्णन कीजिए। या एक यूकैरियोटिक पादप कोशिका की इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शीय संरचना का नामांकित चित्र खींचिए। या निम्नलिखित में से एक कोशिकांग की संरचना तथा कार्य का विस्तृत विवरण दीजिए
(क) हरितलवक (chloroplast)।
(ख) माइटोकॉण्डिया (mitochondria)।
या माइटोकॉण्डूिया की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए। या हरितलवक की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए। या पादप हरितलवक का एक इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शीय नामांकित चित्र बनाइए। या पौधे के विभिन्न भागों को रंगयुक्त बनाने वाले लवकों का नाम लिखिए तथा उनकी अभिलक्षणिक विशेषताओं का भी उल्लेख कीजिए।

उत्तर :

पादप कोशिका

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(क)
हरितलवक
(अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर में प्रश्न 7 का उत्तर देखें।)

(ख)
माइटोकॉण्डिया
(अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर में प्रश्न 7 का उत्तर देखें।)

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
(क) केन्द्रक,
(ख) प्लाज्मा झिल्ली।
या जीवद्रव्य कला से आप क्या समझते हैं? चित्र की सहायता से इसके कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :

(क) केन्द्रक

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर में प्रश्न 13 का उत्तर देखें।

(ख) प्लाज्मा झिल्ली या जीवद्रव्य कला

संरचना (Structure) :
प्लाज्मा झिल्ली या जीवद्रव्य कला (plasmalemma or plasma membrane) कोशिका में उपस्थित अन्य इकाई कलाओं के समान ही होती है। यह रासायनिक संरचना में प्रोटीन्स  (proteins) तथा लिपिड्स (lipids) से मिलकर बनती है। इनमें प्रोटीन्स पात्रा में लगभग 60% तथा लिपिड्स लगभग 40% पाये जाते हैं। प्लाज्मा झिल्ली में मध्य में फॉस्फोलिपिड्स (phospholipids)  अणुओं की दो पर्ते पाई जाती हैं जिनके दोनों ओर प्रोटीन अणुओं की एक-एक परत पाई जाती है। प्रत्येक प्रोटीन की परत की मोटाई (thickness) 20-25 A तथा दोनों स्तरों के मध्य की लिपिड परत की  मोटाई 25-35 A होती है। स्पष्ट है, इकाई कला की संरचना त्रिस्तरीय (trilamellar) होती है तथा इसकी कुल मोटाई लगभग 75-100 मैं होती है। यह 75-100 $ मोटाई की प्रोटीन-लिपिड-प्रोटीन  (protein-lipid-protein = PLP-sandwich) संरचना रॉबर्टसन (Robertson, 1959) ने इकाई कला मत (unit membrane concept) के अन्तर्गत दी। दूसरे वैज्ञानिक जैसे  बेन्सन (Benson, 1968) ने इकाई कला को प्रोटीन तथा (UPBoardSolutions.com) लिपिड अणुओं के पुंजों के रूप में लगे हुए माना है तथा इन पुंजों (clusters) के बीच-बीच में अनेक चैनलों (channels)  का प्रतिपादन किया है। कुछ वैज्ञानिकों जैसे फिनियन (Finean, 1961) के अनुसार इकाई कला के फॉस्फोलिपिड अणुओं के बीच-बीच कॉलेस्टेरॉल (Cholesterol) के अणु भी होते हैं।

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अध्ययन की अनेक नयी तकनीकों (techniques) के प्रयोग करने से जैव कलाओं (biomembranes) की संरचना के सम्बन्ध में नये-नये तथ्य प्रकट किये गये हैं। इस दिशा में कार्य  करने वाले वैज्ञानिकों में कैवेनौ (Kavanau, 1965), बेन्सन (Benson, 1966), कॉर्न (Kom, 1966), लेहनिंगर (Lehninger, 1968), लिन (Lin, 1970) प्रमुख रहे।  इन्होंने कई प्रकार के मॉडल दिये। वर्ष 1962 में बेल (Bell, 1962) ने इन कलाओं में कार्बोहाइड्रेट्स की उपस्थिति स्पष्ट की। कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा तथा स्वरूप कोशिका के कार्य  आदि पर निर्भर करता है।

जैव कलाओं का तरल मोजेक मॉडल

सिंगर तथा निकोलसन (S.J. Singer and G. Nicholson, 1974) ने विशेष तकनीकों तथा रासायनिक विश्लेषणों के आधार पर जैव कलाओं की संरचना के लिए तरल मोजेक मॉडल प्रस्तुत किया है।  इसके अनुसार, प्रोटीन की दो परतों का लिपिड की परत के बाहर होना ही आवश्यक नहीं, बल्कि प्रोटीन परत के अणु दो प्रकार के होते हैं

  1. परिधीय या बाह्य (extrinsic or peripheral) तथा
  2. समाकल (intrinsic or integral)।

समाकल प्रोटीन के अणु लिपिड अणुओं में कुछ दूरी तक धंसे हुए अथवा आर-पार भी हो सकते हैं। इस विचारधारा में यह भी बताया गया है कि धंसी हुई समाकल प्रोटीन (intrinsic protein) सरलता  सेअलग नहीं की जा सकती है जबकि बाह्य प्रोटीन परत को आसानी से अलग कर सकते हैं। इस प्रकार इस विचारधारा के अनुसार

  1. लिपिड अणु (lipid molecules) तथा समाकल प्रोटीन (intrinsic protein) कलाओं में मोजेक व्यवस्था (mosaic arrangement) में होते हैं तथा ।
  2.  जैव कलायें (biomembranes) अर्द्ध-तरल (quasi-fluid) होती हैं जिससे लिपिड तथा समाकल प्रोटीन-लिपिड (UPBoardSolutions.com) के द्विअणु स्तर में गति कर सकते हैं।

प्लाज्मा झिल्ली के कार्य (Functions of plasmalemma) :
प्लाज्मा झिल्ली का प्रमुख कार्य पदार्थों का कोशिका की सतह पर आदान-प्रदान (विनिमय) करना है। यह एक जीवित कला होती है, अतः कोशिका की आवश्यकता तथा संरचना के अनुसार पदार्थों के चयन में विशेष रूप में महत्त्वपूर्ण है।
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प्रश्न 3.
डी०एन०ए० की संरचना एवं इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए। या कोशिका में न्यूक्लिक अम्ल कहाँ पाये जाते हैं? डी०एन०ए० की संरचना को केवल नामांकित चित्रों की सहायता से समझाइए।
उत्तर :
कोशिका में न्यूक्लिक अम्ल अधिकतम मात्रा में केन्द्रक में होते हैं। इनमें DNA प्रमुखतः क्रोमैटिन (गुणसूत्रों) का भाग होता है जबकि RNA केन्द्रिक (न्यूक्लियोलस) में प्रमुखता से पाया जाता है। RNA सम्पूर्ण जीवद्रव्य में विभिन्न प्रकार की संरचनाओं के साथ अथवा स्वतन्त्र रूप में भी पाया जाता है। DNA माइटोकॉण्ड्रिया तथा क्लोरोप्लास्ट्स में भी कुछ मात्रा में मिलता है।

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डी०एन०ए० = डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल

एक डी०एन०ए० (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल) अणु में दो लम्बी श्रृंखलाओं के बने दो कुण्डल (helixes) होते हैं जो आधारभूत रूप में विशेष इकाइयों जिन्हें न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) कहा जाता है, से बने होते हैं। इस प्रकार, एक अणु में सहस्रों से लेकर लाखों तक न्यूक्लियोटाइड्स अणु होते हैं। इस प्रकार DNA में दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड (polynucleotide) श्रृंखलाएँ पाई जाती हैं। प्रत्येक श्रृंखला का प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड अणु एक विशिष्ट तथा जटिल संरचना है। यह स्वयं तीन प्रकार के घटकों (components) से मिलकर बना होता है, जिनमें

  1.  एक पेण्टोज शर्करा (pentose sugar) डीऑक्सीराइबो (deoxyribo) प्रकार की होती है।
  2. एक फॉस्फेट (phosphate) मूलक तथा ।
  3. एक नाइट्रोजन क्षारक (nitrogen base) जो दो प्रकार के चार क्षारकों में से एक होता है। ये हैं

(क) प्यूरीन (purine) प्रकार के, ऐडीनीन (adenine) व ग्वैनीन (guanine) तथा
(ख) पिरीमिडीन (pyrimidine) प्रकार के साइटोसीन (cytosine) तथा थाइमीन (thymine) क्षारक।

वाटसन एवं क्रिक का DNA मॉडल
वाटसन तथा क्रिक (Watson & Crick) को डी०एन०ए० की संरचना को समझाने तथा प्रतिरूप तैयार करने के लिए सन् 1962 में नोबेल पुरस्कार मिला था। यद्यपि उन्होंने यह, खोज 1953 ई० में कर ली थी। उनके अनुसार केवल चार प्रकार के नाइट्रोजन क्षारकों से चार ही प्रकार के न्यूक्लियोटाइड्स अणुओं का निर्माण होता हैं। ये चारों प्रकार के न्यूक्लियोटाइड अणु विशिष्ट क्रमों में जुड़कर एक लम्बी पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला (polynucleotide chain) का निर्माण करते हैं। DNA में इस प्रकार की दो श्रृंखलाएँ पाई जाती हैं। प्रत्येक कुण्डल का स्तम्भ या सूत्र डीऑक्सीराइबो शर्करा तथा फॉस्फेट के द्वारा बना होता है जबकि सीढ़ी के पगदण्डों (UPBoardSolutions.com) की तरह की रचना नाइट्रोजन क्षारकों के निश्चित युग्मों (pairs) के जुड़े होने से होती है। दो निकटतम युग्मों की दूरी 3.4A तथा एक कुण्डल जिसकी लम्बाई 34A होती है, में कुल 10 क्षारक युग्म होते हैं। इन युग्मों में प्यूरीन क्षारक ऐडीनीन (adenine) केवल पिरीमिडीन क्षारक थाइमीन (thymine) से तथा ग्वैनीन (guanine) प्रकार का प्यूरीन क्षारक केवल पिरामिडीन प्रकार के साइटोसीन (cytosine) क्षारक के साथ ही जुड़कर पगदण्ड को एक भाग बनाता है। इसमें अन्य किसी भी प्रकार का युग्म सम्भव नहीं है। इस प्रकार, यदि एक श्रृंखला में T-C-G-A-T-C-G- आदि हैं तो दूसरी श्रृंखला में T के सामने A, C के सामने G, G के सामने C तथा A के सामने T आदि ही होंगे। इस प्रकार ।

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पगदण्ड में न्यूक्लियोटाइड के क्षारक हाइड्रोजन बन्धों (bonds) के द्वारा जुड़े होते हैं। इसमें ऐडीनीन, थाइमीन के साथ दो तथा साइटोसीन, ग्वैनीन के साथ तीन बन्धों से बन्धनयुक्त होता है। क्षारकों का निश्चित क्रम डी०एन०ए० की रासायनिक शब्दावली बनाता है जिससे आनुवंशिक लक्षणों की स्थापना होती है।
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डी०एन०ए० का महत्त्व

प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्पूर्ण कोशिका पर सभी प्रकार का नियन्त्रण डी०एन०ए० का ही होता है। इस प्रकार के कार्यों (UPBoardSolutions.com) को यह आर०एन०ए० के द्वारा सम्पन्न करता है। यह एक आनुवंशिक पदार्थ है। अतः क्रोमैटिन के रूप में गुणसूत्रों में रहकर जीव के लक्षणों को संतति में ले जाने का कार्य करता है।

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