UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals 

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals (प्राणियों में संरचनात्मक संगठन)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
एक शब्द या एक पंक्ति में उत्तर दीजिए

  1.  पेरिप्लेनेटा अमेरिकाना का सामान्य नाम लिखिए।
  2.  केंचुए में कितनी शुक्राणुधानियाँ पाई जाती हैं?
  3.  तिलचट्टे में अण्डाशय की स्थिति क्या है?
  4.  तिलचट्टे के उदर में कितने खंड होते हैं?
  5.  मैल्पीघी नलिकाएँ कहाँ मिलती हैं?

उत्तर :

  1.  तिलचट्टा अथवा कॉकरोच।
  2.  केंचुए में चार जोड़ी शुक्राणुधानियाँ पायी जाती हैं।
  3.  अण्डाशय 4, 5, 6, 7 खंड में आहारनाल के पाश्र्व में स्थित होते हैं।
  4.  दस
  5.  मध्यांत्र व पश्चांत्र के संधि स्थल पर।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(i) वृक्कक को क्या कार्य है?
(ii) अपनी स्थिति के अनुसार केंचुए में कितने प्रकार के वृक्कक पाए जाते हैं?
उत्तर :
(i) वृक्कक (Nephridia) का कार्य :
संघ ऐनेलिडा के प्राणियों में उत्सर्जन हेतु विशेष प्रकार की कुण्डलित रचनाएँ वृक्कक पाई जाती हैं। ये जल सन्तुलन का कार्य भी करती हैं।

UP Board Solutions

(ii) वृक्कक के प्रकार (Types of Nephridia) :
स्थिति के अनुसार वृक्कक निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं

(a) पटीय वृक्कक (Septal nephridia)
(b) अध्यावरणी वृक्कक (integumentary nephridia)
(C) ग्रसनीय वृक्कक (pharyngeal nephridia)।

प्रश्न 3.
केंचुए के जननांगों का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर :
केंचुएँ के जननांग
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 1

प्रश्न 4.
तिलचट्टे की आहारनाल का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर :
तिलचट्टे की आहारनाल
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 2

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में विभेद कीजिए

(अ)
पुरोमुख एवं परितुंड।
(ब)
पटीय (Septal) वृक्कक एवं ग्रसनीय वृक्कक।
उत्तर :

(अ)
पुरोमुख एवं परितुंड में अन्तर क्र० पुरोमुख

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 3

(ब)
पटीय एवं ग्रसनीय वृक्कक में अन्तर
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 4

प्रश्न 6.
रुधिर के कणीय अवयव क्या हैं?
उत्तर
रुधिर के कणीय अवयव रुधिर हल्के पीले रंग का, गाढ़ा, हल्का क्षारीय (pH7-3-7-4) द्रव होता है। स्वस्थ मनुष्य में रुधिर उसके कुल भार का 7% से 8% होता है। इसके दो मुख्य घटक होते हैं

  1. निर्जीव तरल मैट्रिक्स प्लाज्मा (plasma) तथा
  2. कणीय अवयव रुधिर कणिकाएँ (blood corpuscles)।

UP Board Solutions

रुधिर कणिकाएँ रुधिर का लगभग 45% भाग बनाती हैं। ये तीन प्रकार की होती हैं
(क) लाल रुधिर कणिकाएँ
(ख) श्वेत रुधिर कणिकाएँ तथा
(ग) रुधिर प्लेटलेट्स।

लाल रुधिर कणिकाएँ
लाल रुधिर कणिकाएँ कशेरुकी जन्तुओं (vertebrates) में ही पाई जाती हैं। मानव में लाल रुधिराणु 75-8μ व्यास तथा 1-2μ मोटाई के होते हैं। पुरुषों में इनकी संख्या लगभग 50 से 55 लाख किन्तु स्त्रियों में लगभग 45 से 50 लाख प्रति घन मिमी होती है। ये गोलाकार (UPBoardSolutions.com) एवं उभयावतल (biconcave) होती हैं। निर्माण के समय इनमें केन्द्रक (nucleus) सहित सभी प्रकार के कोशिकांग (cell organelle) होते हैं किन्तु बाद में केन्द्रक, गॉल्जीकाय, माइटोकॉन्ड्रिया, सेन्ट्रियोल आदि संरचनाएँ लुप्त हो जाती हैं, इसीलिए स्तनियों के लाल रुधिराणुओं को केन्द्रकविहीन (non-nucleated) कहा जाता है। ऊँट तथा लामा में लाल रुधिराणु केन्द्रकयुक्त (nucleated) होते हैं। लाल रुधिराणुओं में हीमोग्लोबिन (haemoglobin) प्रोटीन होती है। स्तनियों में इनका जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है। वयस्क अवस्था में इनका निर्माण लाल अस्थिमज्जा में होता है। हीमोग्लोबिन, हीम (haem) नामक वर्णक तथा ग्लोबिन (globin) नामक प्रोटीन से बना होता है। हीम पादपों में उपस्थित क्लोरोफिल के समान होता है, जिसमें क्लोरोफिल के मैग्नीशियम के स्थान पर हीमोग्लोबिन में लौह (Fe) होता है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 5
हीमोग्लोबिन के एक अणु का निर्माण हीम के 4 अणुओं के एक ग्लोबिन अणु के साथ संयुक्त होने से होता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन परिवहन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लाल रुधिराणुओं के कार्य ।
लाल रुधिराणुओं के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

  1. यह एक श्वसन वर्णक है। यह ऑक्सीजन वाहक (oxygen carrier) के रूप में कार्य करता है। हीमोग्लोबिन का एक अणु ऑक्सीजन के चार अणुओं का संवहन करता है।
  2.  शरीर के अन्त:वातावरण में pH सन्तुलन को बनाए रखने में हीमोग्लोबिन सहायता करता है।
  3. कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन (transport) कार्बोनिक एनहाइड्रेज (carbonic anhydrase) नामक एन्जाइम की उपस्थिति में ऊतकों से फेफड़ों की ओर करता है।

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 6

UP Board Solutions

श्वेत रुधिर कणिकाएँ।
श्वेत रुधिर कणिकाएँ अनियमित आकार की, केन्द्रकयुक्त, रंगहीन तथा अमीबीय (amoeboid) कोशिकाएँ हैं। इनके कोशिकाद्रव्य की संरचना के आधार पर इन्हें दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है
(अ) ग्रैन्यूलोसाइट्स (granulocytes) तथा
(ब) एग्रैन्यूलोसाइट्स (agranulocytes)।

(अ)
ग्रेन्यूलोसाइट्स (Granulocytes) :

इनका कोशिकाद्रव्य कणिकामय तथा केन्द्रक पालियुक्त (lobed) होता है, ये तीन प्रकार की होती हैं
(i) बेसोफिल्स
(ii) इओसिनोफिल्स तथा
(iii) न्यूट्रोफिल्स।

(i) बेसोफिल्स (Basophils) :
ये संख्या में कम होती हैं। ये कुल श्वेत रुधिर कणिकाओं का लगभग 0-5 से 2% होती हैं। इनका केन्द्रक बड़ा तथा 2-3 पालियों में बँटा दिखाई देता है। इनका कोशिकाद्रव्य मेथिलीन ब्लू (methylene blue) जैसे— क्षारीय रजंकों से अभिरंजित होता है। इन कणिकाओं से हिपैरिन, हिस्टैमीन एवं सेरेटोनिन स्रावित होता है।

(ii) इओसिनोफिल्स या एसिडोफिल्स (Eosinophils or Acidophils) :
ये कुल श्वेत रुधिर कणिकाओं का 2-4% होते हैं। इनका केन्द्रक द्विपालिक (bilobed) होता है। दोनों पालियाँ परस्पर महीन तन्तु द्वारा जुड़ी रहती हैं। इनका कोशिकाद्रव्य अम्लीय रंजकों जैसे इओसीन से अभिरंजित होता है। ये शरीर की प्रतिरक्षण, एलर्जी तथा हाइपरसेन्सिटिवटी का कार्य करते हैं। परजीवी कृमियों की उपस्थिति के कारण इनकी संख्या बढ़ जाती है, इस रोग को इओसिनोफिलिया कहते हैं।

(iii) न्यूटोफिल्स या हेटेरोफिल्स (Neutrophils or Heterophils) :
ये कुल श्वेत रुधिर कणिकाओं का 60 – 70% होती हैं। इनका केन्द्रक बहुरूपी होता है। यह तीन से पाँच पिण्डों में बँटा होता है। ये सूत्र द्वारा परस्पर जुड़े रहते हैं। इनके कोशिकाद्रव्य को अम्लीय, क्षारीय व उदासीन तीनों प्रकार के रंजकों से अभिरंजित कर सकते हैं। ये जीवाणु तथा अन्य (UPBoardSolutions.com) हानिकारक पदार्थों का भक्षण करके शरीर की सुरक्षा करते हैं। इस कारण इन्हें मैक्रोफेज (macrophage) कहते हैं।

UP Board Solutions

(ब)
एग्रैन्यूलोसाइट्स (Agranulocytes) :

इनका कोशिकाद्रव्य कणिकारहित होता है। इनका केन्द्रक अपेक्षाकृत बड़ा व घोड़े की नाल के आकार का (horse-shoe shaped) होता है। ये दो प्रकार की होती हैं

(i) लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes) :
ये छोटे आकार के श्वेत रुधिराणु हैं। इनका कार्य प्रतिरक्षी (antibodies) का निर्माण करके शरीर की सुरक्षा करना है।

(ii) मोनोसाइट्स (Monocytes) :
ये बड़े आकार की कोशिकाएँ हैं, जो भक्षकाणु क्रिया (phagocytosis) द्वारा शरीर की सुरक्षा करती हैं।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित क्या हैं तथा प्राणियों के शरीर में कहाँ मिलते हैं?
(अ) उपास्थि अणु (कोन्ड्रोसाइट)
(ब) तन्त्रिकाक्ष (ऐक्सॉन)
(स) पक्ष्माभ उपकला।
उत्तर :

(अ)
उपास्थि अणु या कोन्ड्रोसाइट्स (Chondrocytes) :
उपास्थि (cartilage) के मैट्रिक्स में स्थित कोशिकाएँ कोन्ड्रोसाइट्स कहलाती है। ये गर्तिकाओं या लैकुनी (lacunae) में स्थित होती हैं। प्रत्येक गर्तिका में एक-दो या चार कोन्ड्रोसाइट्स होते हैं। कोन्ड्रोसाइट्स की संख्या वृद्धि के साथ-साथ उपास्थि में वृद्धि होती है। कोन्ड्रोसाइट्स द्वारा ही उपास्थि का मैट्रिक्स स्रावित होता है। यह कॉन्ड्रिन प्रोटीन (chondrin protein) होता है। उपास्थियाँ प्रायः अस्थियों के सन्धि स्थल पर पाई जाती हैं।

UP Board Solutions

(ब)
तन्त्रिकाक्ष य़ा ऐक्सॉन (Axon) :
तन्त्रिका कोशिका (neuron) तन्त्रिकातन्त्र का निर्माण करती है। प्रत्येक तन्त्रिका कोशिका के तीन भाग होते हैं

  1. साइटॉन (cyton)
  2.  डेन्ड्रॉन्स (dendrons) तथा
  3.  ऐक्सॉन (axon)।

साइटॉन से निकले प्रवर्षों में से एक प्रवर्ध अपेक्षाकृत लम्बा, मोटा एवं बेलनाकार होता है। इसे ऐक्सॉन (axon) कहते हैं। यह साइटॉन के फूले हुए भाग ऐक्सॉन हिलोक (axon hillock) से निकलता है। इसकी शाखाओं के अन्तिम छोर पर घुण्डी सदृश साइनेप्टिक घुण्डियाँ (synaptic buttons) होती हैं। ये अन्य तन्त्रिका कोशिका के डेन्ड्रॉन्स के साथ सन्धि बनाती हैं। ऐक्सॉन मेड्यूलेटेड (medullated) या नॉन-मेड्यूलेटेड (non-medullated) होते हैं। ऐक्सॉन श्वान कोशिकाओं (UPBoardSolutions.com) (Schwann cells) से बने न्यूरीलेमा (neurilemma) से घिरा होता है। मेड्यूलेटेड ऐक्सॉन में न्यूरीलेमा तथा ऐक्सॉन के मध्य वसीय पदार्थ माइलिन होता है।

(स)
पक्ष्माभ उपकला (Ciliated Epithelium) :

इसकी कोशिकाएँ स्तम्भकार या घनाकार होती : हैं। कोशिकाओं के बाहरी सिरों पर पक्ष्म या सीलिया होते हैं। प्रत्येक पक्ष्म के आधार पर एक आधारकण (basal granule) होता है। पक्ष्मों की गति द्वारा श्लेष्म व अन्य पदार्थ आगे की ओर धकेल दिए जाते हैं। यह श्वास नाल, ब्रौंकाई, अण्डवाहिनी, मूत्रवाहिनी आदि की भीतरी सतह पर पाई जाती हैं।

प्रश्न 8.
रेखांकित चित्र की सहायता से विभिन्न उपकला ऊतकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उपकला ऊतक (Epithelial Tissue) :
संरचना तथा कार्यों के आधार पर उपकला ऊतक को दो समूहों में बाँटा जाता है-आवरण उपकला (covering epithelium) तथा ग्रन्थिल उपकला (glandular epithelium)।

(क)
आवरण उपकला
यह अंगों तथा शरीर सतह को ढके रखता है। यह सरल तथा संयुक्त दो प्रकार की होती है

1. सरल उपकला या सामान्य एपिथीलियम (Simple Epithelium) 
यह उपकला उन स्थानों पर पाई जाती है, जो स्रावण, अवशोषण, उत्सर्जन आदि का कार्य करते हैं। यह निम्नलिखित पाँच प्रकार की होती हैं

(i) सरल शल्की उपकला (Simple Squamous Epithelium) :
कोशिकाएँ चौड़ी, चपटी, बहुभुजीय तथा परस्पर सटी रहती है। शल्की उपकला वायु कूपिकाओं, रुधिर वाहिनियों के आन्तरिक स्तर, हृदय के भीतरी स्तर, देहगुहा के स्तरों आदि में पाई जाती हैं।

UP Board Solutions

(ii) सरल स्तम्भी उपकला (Simple Columnar Epithelium) :
इस उपकला की कोशिकाएँ लम्बी तथा परस्पर सटी होती हैं। आहारनाल की भित्ति का भीतरी स्तर इसी उपकला का बना होता है। ये पचे हुए खाद्य पदार्थों का अवशोषण भी करती हैं।

(iii) सरल घनाकार उपकला (Simple Cuboidal Epithelium) :
इस उपकला की कोशिकाएँ घनाकार होती हैं। यह ऊर्तक श्वसनिकाओं, मूत्रजनन नलिकाओं, जनन ग्रन्थियों आदि में पाया जाता है। जनन ग्रन्थियों (gonads) में यह ऊतक जनन उपकला (germinal epithelium) कहलाता है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 7

(iv) पक्ष्माभी उपकला (Ciliated Epithelium) :
इसकी कोशिकाएँ स्तम्भाकार अथवा घनाकार होती हैं। इन कोशिकाओं के बाहरी सिरों पर पक्ष्म या सीलिया होते हैं। प्रत्येक पक्ष्म के आधार पर आधार कण (basal granule) होता है। पक्ष्मों की गति द्वारा श्लेष्म तथा अन्य पदार्थ आगे की ओर धकेले जाते हैं। यह उपकला श्वासनाल, अण्डवाहिनी (oviduct), गर्भाशय आदि में पाई जाती है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 8

UP Board Solutions

(v) कूटस्तरित उपकला (Pseudostratified Epithelium) :
यह सरल स्तम्भाकार उपकला को रूपान्तरित स्वरूप है। इसमें कोशिकाओं के मध्य गोब्लेट या म्यूकस कोशिकाएँ स्थित होती हैं। ये ट्रेकिया, श्वसनियों (bronchi), ग्रसनी, नासिका गुहा, नर मूत्रवाहिनी (urethra) आदि में पाई जाती हैं।

2. संयुक्त या स्तरित एपिथीलियम या उपकला (Compound or Stratified Epithelium) 
इसमें उपकला अनेक स्तरों से बनी होती है। कोशिकाएँ विभिन्न आकार की होती हैं। कोशिकाएँ आधारकला (basement membrane) पर स्थित होती हैं। सबसे निचली पर्त की कोशिकाएँ निरन्तर विभाजित होती रहती हैं। बाहरी स्तर की कोशिकाएँ मृत होती हैं। कोशिकाओं (UPBoardSolutions.com) की संरचना के आधार पर ये निम्नलिखित प्रकार की होती हैं

(i) स्तरित शल्की उपकला (Stratified Squamous Epithelium) :
इसमें सबसे बाहरी स्तर की कोशिकाएँ चपटी वे शल्की होती हैं तथा सबसे भीतरी स्तर की कोशिकाएँ स्तम्भी या घनाकार होती हैं। आधारीय जनन स्तर की कोशिकाओं में निरन्तर विभाजन होने से त्वचा के क्षतिग्रस्त होने पर इसका पुनरुदभवन होता रहता है। स्तरित शल्की उपकला किरेटिनयुक्त या किरेटिनविहीन होती है। स्तरित शल्की उपकला त्वचा की अधिचर्म, मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रसिका, योनि, मूत्रनलिका, नेत्र की कॉर्निया, नेत्र श्लेष्मा आदि में पाई जाती हैं।

(ii) अन्तवर्ती या स्थानान्तरित उपकला (Transitional Epithelium) :
इसमें आधारकला तथा जनन स्तर नहीं होता है। इसकी कोशिकाएँ लचीले संयोजी ऊतक पर स्थित होती हैं। सजीव कोशिकाएँ परस्पर अंगुली सदृश प्रवर्धा (interdigitation) द्वारा जुड़ी रहती हैं। ये कोशिकाएँ फैलाव व प्रसार के लिए रूपान्तरित होती हैं। यह मूत्राशय, मूत्रवाहिनियों (ureters) की भित्ति का भीतरी स्तर बनाती हैं।

(iii) तन्त्रिका संवेदी उपकला (Neurosensory Epithelium) :
यह स्तम्भकार उपकला के रूपान्तरण से बनती है। कोशिकाओं के स्वतन्त्र सिरों पर संवेदी रोम होते हैं। कोशिका के आधार से तन्त्रिका तन्तु (nerve fibres) निकलते हैं। यह नेत्र के रेटिना (retina), घ्राण अंग की श्लेष्मिक कला,अन्त:कर्ण की उपकला आदि में पाई जाती है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 9

UP Board Solutions

(ख)
ग्रन्थिल उपकला।
ये घनाकार या स्तम्भाकार उपकला से विकसित होती हैं। ग्रन्थिल कोशिकाएँ एकाकी या सामूहिक होती हैं।

1. एककोशिकीय ग्रन्थियाँ (Unicellular Glands) :
ये स्तम्भकार उपकला में एकल रूप में पाई जाती हैं। इन्हें श्लेष्म या गॉब्लेट कोशिकाएँ (goblet cells) कहते हैं।

2. बहुकोशिकीय ग्रन्थियाँ (Multicellular Glands) :
ये उपकला के अन्तर्वलन से बनती हैं। इसका निचला भाग स्रावी (glandular) तथा ऊपरी भाग नलिकारूपी होता है; जैसे–स्वेद ग्रन्थियाँ, जठर ग्रन्थियाँ आदि। रचना के आधार पर बहुकोशिकीय ग्रन्थियाँ नलिकाकार, कूपिकाकार होती हैं। ये सरल, संयुक्त अथवा मिश्रित प्रकार की होती हैं। स्वभाव के आधार पर ग्रन्थियाँ मोरोक्राइन (merocrine), एपोक्राइन (apocrine) या होलोक्राइन (holocrine) प्रकार की होती हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 10

प्रश्न 9.
निम्न में विभेद कीजिए
(अ) सरल उपकला तथा संयुक्त उपकला ऊतक
(ब) हृद पेशी तथा रेखित पेशी
(स) सघन नियमित तथा सघन अनियमित संयोजी ऊतक
(द) वसामय तथा रुधिर ऊतक
(य) सामान्य तथा संयुक्त ग्रन्थि
उत्तर :
(अ)
सरल उपकला तथा संयुक्त उपकला ऊतक में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 11

(ब)
हृद पेशी तथा रेखित पेशी में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 12

(स)
सघन नियमित तथा सघन अनियमित

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 13

(द)
वसामय तथा रुधिर ऊतक में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 14

(य)
सामान्य तथा संयुक्त ग्रन्थि में अन्तर सामान्य ग्रन्थि

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 15

UP Board Solutions

प्रश्न 10.
निम्न श्रृंखलाओं में सुमेलित न होने वाले अंशों को इंगित कीजिए

(अ) एरिओलर ऊतक, रुधिर, तन्त्रिका कोशिका न्यूरॉन, कंडरा (टेंडन)।
(ब) लाल रुधिर कणिकाएँ, सफेद रुधिर कणिकाएँ, प्लेटलेट, उपास्थि ।
(स) बाह्यस्रावी, अन्तःस्रावी, लार ग्रंथि, स्नायू (लिगामेंट)
(द) मैक्सिला, मैडिबल, लेब्रम, श्रृंगिका (एंटिना)
(य) प्रोटोनीमा, मध्यवेक्ष, पश्चवक्ष तथा कक्षांग (कॉक्स)

उत्तर :
(अ) तन्त्रिका कोशिका न्यूरॉन
(ब) उपास्थि
(स) स्नायु (लिगामेंट)
(द) श्रृंगिका (एंटिना)
(य) प्रोटोनीमा।

प्रश्न 11.
स्तम्भ I तथा स्तम्भ II को सुमेलित कीजिए
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 16

उत्तर :
(क) (iii)
(ख) (iv)
(ग) (v)
(घ) (i)
(ङ) (i)
(च) (vii)
(छ) (vi)

प्रश्न 12.
केंचुए के परिसंचरण तन्त्र का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
केंचुए का रुधिर परिसंचरण तन्त्र केंचुए में रुधिर परिसंचरण ‘बन्द प्रकार का होता है। रुधिर लाल होता है। हीमोग्लोबिन प्लाज्मा में घुला होता है। रुधिराणु रंगहीन तथा केन्द्रकमय होते हैं। केंचुए के रुधिर परिसंचरण में निम्नलिखित । अनुदैर्घ्य रुधिर वाहिनियाँ होती हैं

UP Board Solutions

(i) पृष्ठ रुधिरवाहिनी (Dorsal Blood Vessel) :
यह आहारनाल के मध्य पृष्ठ तल पर स्थित होती है। यह पेशीय, कपाटयुक्त रुधिरवाहिनी होती है। यह अन्तिम खण्डों से रुधिर एकत्र करके प्रथम 13 खण्डों में वितरित कर देती है। रुधिर का अधिकांश भाग चार जोड़ी हृदय द्वारा अधर रुधिरवाहिनी में पहुँच जाता है।

(ii) अधर रुधिरवाहिनी (Ventral Blood vessel) :
यह आहारनाल के मध्य अधर तल पर स्थित होती है। यह अनुप्रस्थ रुधिर वाहिनियों द्वारा रुधिर का वितरण करती है। इसमें कपाट नहीं पाए। जाते।

(iii) पाश्र्व ग्रसनिका रुधिर वाहिनियाँ (Lateral Oesophageal Blood vessels) :
एक जोड़ी रुधिर वाहिनियाँ दूसरे खण्ड से 14वें खण्ड तक आहारनाल के पाश्र्यों में स्थित होती हैं। ये रुधिर एकत्र करके ग्रसिकोपरि वाहिनी (supra-oesophageal blood vessel) को पहुँचाती हैं।

(iv) ग्रसिकोपरि वाहिनी (Supra-oesophageal Blood Vessel) :
यह आहारनाल के पृष्ठ तल पर 9वें खण्ड से 14वें खण्ड तक फैली होती है। यह पाश्र्व ग्रसनिका से 2 जोड़ी अग्रलूपों (anterior loops) द्वारा रुधिर एकत्र करके अधर रुधिरवाहिनी को पहुँचा देती है।

(v) अधो तन्त्रिकीय रुधिरवाहिनी (Sub-neural Blood vessel) :
यह आहारनाल के आंत्रीय भाग में तन्त्रिका रज्जु के नीचे मध्य-अधर तल पर स्थित होती है। यह खण्डीय भागों से (UPBoardSolutions.com) रुधिर एकत्र करके योजि वाहिनियों द्वारा पृष्ठ रुधिरवाहिनी में पहुँचा देती है।’
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 17

प्रश्न 13.
निम्नलिखित के कार्य बताइए
(अ) मेढक की मूत्रवाहिनी
(ब) मैल्पीघी नलिका
(स) केंचुए की देहभित्ति।
उत्तर :
(अ)
मेढक की मूत्रवाहिनी (Ureter of Frog) :

नर मेढक में वृक्क से मूत्रवाहिनी निकलकर क्लोएका में खुलती है। यह मूत्रजनन नलिका का कार्य करती है। मादा मेंढक में मूत्रवाहिनी तथा अण्डवाहिनी (oviduct) क्लोएको में पृथक्-पृथक् खुलती हैं। मूत्रवाहिनी वृक्क से मूत्र को क्लोएका तक पहुँचाती है।

UP Board Solutions

(ब)
मैल्पीघी नलिकाएँ (Malpighian tubules) :

ये कीटों में मध्यान्त्र तथा पश्चान्त्र के सन्धितल पर पाई जाने वाली पीले रंग की धागे सदृश (UPBoardSolutions.com) उत्सर्जी रचनाएँ होती हैं। ये उत्सर्जी पदार्थों को हीमोसील से ग्रहण करके आहारनाल में पहुँचाती हैं।

(स)
केंचए की देहभित्ति (Bodywall of Earthworm) :

केंचुए की देहभित्ति नम तथा चिकमी होती है। यह श्वसन हेतु गैस विनिमय में सहायक होती है। देहभित्ति का श्लेष्म केंचुए के बिलों (सुरंग) की सतह को चिकना एवं मजबूत बनाता है।

प्रश्न 14.
मेढक के पाचन तन्त्र का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर :
मेढक का पाचन तन्त्र
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 18

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रकार का ऊतक है?
(क) आहारनाल
(ख) यकृत
(ग) रुधिर
(घ) अग्न्याशय
उत्तर :
(ग) रुधिर

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से किसका उद्भव भ्रूणीय मीसोडर्मल स्तर से हुआ है?
(क) मस्तिष्क
(ख) फेफड़ा
(ग) रक्त
(घ) यकृत
उत्तर :
(ग) रक्त

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से किस रुधिर वर्ग को सर्वग्राही माना जाता है?
(क) वर्ग A
(ख) वर्ग B
(ग) वर्ग AB
(घ) वर्ग 0
उत्तर :
(ग) वर्ग AB

UP Board Solutions

प्रश्न 4.
तिलचट्टे की देहगुहा होती है।
(क) सीलोम
(ख) हीमोसील
(ग) स्यूडोसील
(घ) सीलेन्ट्रॉन
उत्तर :
(ख) हीमोसील

प्रश्न 5.
तिलचट्टे का मुखांग होता है।
(क) बेधक एवं चूषक प्रकार का
(ख) कुंतक एवं चर्वणक प्रकार का
(ग) चर्वणक एवं लेहनकारी प्रकार का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कुंतक एवं चर्वणक प्रकार का

प्रश्न 6.
तिलचट्टे का श्वसन अंग है।
(क) फेफड़ा
(ख) जलक्लोम
(ग) ट्रेकिया
(घ) त्वचा
उत्तर :
(ग) ट्रेकिया

प्रश्न 7.
कॉकरोच का मुख्य उत्सर्जी उत्पाद है।
(क) यूरिया
(ख) अमोनिया
(ग) यूरिक ऐसिड
(घ) ऐमीनो ऐसिड
उत्तर :
(ग) यूरिक ऐसिड

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जन्तुओं में कौन-कौन से ऊतक निम्नलिखित कार्यों को सम्पन्न करते हैं?
(क) अस्थियों का अस्थियों से संयोजन।
(ख) उपांगों की गति।
(ग) संवेदना का संचालन।
(घ) पोषक पदार्थों एवं गैसों का परिवहन।
उत्तर :
(क) श्वेत कोलेजन तन्तुओं से बने स्नायु (ligaments) अस्थियों को परस्पर जोड़ने का कार्य करते हैं।
(ख) पेशी ऊतक (रेखित पेशियाँ) उपांगों को गति प्रदान करते हैं।
(ग) तन्त्रिका ऊतक (nerve tissue) संवेदना का संचालन करते हैं।
(घ) तरल संयोजी ऊतक (fluid connective tissue) शरीर में परिसंचरण के द्वारा पोषक पदार्थों एवं गैसों के परिवहन को बनाये रखते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
हिपैरिन कहाँ बनता है? इसके मुख्य कार्य लिखिए।
उत्तर :
हिपैरिन (heparin) संयोजी ऊतक (connective tissue) में उपस्थित मास्ट कोशिकाओं (mast cells) द्वारा स्रावित होता है तथा रुधिर वाहिनियों में रुधिर को जमने (clotting) से रोकता है।

प्रश्न 3.
किन्हीं दो संयोजी ऊतकों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. अन्तराली संयोजी ऊतक (aereolar connective tissue)
  2. रुधिर (blood)।

प्रश्न 4.
कण्डरा का एक प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर :
यह पेशियों (muscles) को अस्थियों (bones) से जोड़ने का कार्य करता है।

प्रश्न 5.
मनुष्य के किन्हीं दो अंगों के नाम बताइए जिनमें लचीली उपास्थि पायी जाती है।
उत्तर :
बाह्य कर्ण, नाक का छोर, एपिग्लॉटिस।

प्रश्न 6.
उस रुधिर कणिका का नाम लिखिए जो रुधिर स्कन्दन में सहायता करती है।
उत्तर :
रुधिर प्लेटलेट्स।

प्रश्न 7.
संयोजी ऊतक किसे कहते हैं ? इसका विकास भ्रूण के किस स्तर से होता है ?
उत्तर :
भ्रूण में जब मीसोडर्मी कोशिकाओं का विभेदीकरण होने लगता है तो मीसोडर्म स्तर के कुछ भाग तो सघन होकर वयस्क के कंकालीय एवं पेशीय ऊतक बनाते हैं और शेष ढीले रहकर संवहनीय और संयोजी ऊतक बनाते हैं। पेशीय ऊतकों के अतिरिक्त वयस्क के अन्य (UPBoardSolutions.com) सभी विविध प्रकार के मीसोडर्मी ऊतक संयोजी ऊतक कहलाते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
रैनवियर के नोड पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर :
मज्जायुक्त तन्त्रिका कोशिका के अक्ष तन्तु की न्यूरीलेमा जिन स्थानों पर अक्ष तन्तु से चिपकी रहती है, उन्हें रैनवियर के नोड कहते हैं। इनके कारण अक्ष तन्तु तक 0, तथा पोषक तत्त्व पहुँचते रहते हैं।

प्रश्न 9.
कॉकरोच में श्वसन किस अंग द्वारा होता है?
उत्तर :
श्वास नाल (trachea)।

प्रश्न 10.
तिलचट्टे की पेषणी के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

  1. इसके अन्दर ग्रहण किया गया भोजन पीसा जाता है तथा
  2.  पिसा हुआ भोजन आगे बढ़ने से पहले छनता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऊतक को परिभाषित कीजिए। तरल संयोजी ऊतक की तीन विशेषताएँ लिखिए। या ऊतक की परिभाषा लिखिए। समझाइए कि रुधिर एक ऊतक है।
उत्तर :

ऊतक

एक विशिष्ट कार्य करने वाले कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहा जाता है। ऊतक (tissue) शब्द के सर्वप्रथम प्रयोग का श्रेय बाइकाट (Bichat, 1771-1802) को है। मारसेलो मैल्पीघी (Marcello Malpighi, 1694) ने ऊतकों का विस्तृत अध्ययन किया। मेयर (Meyer, 1819) ने ऊतकों के अध्ययन के विज्ञान को ‘हिस्टोलोजी’ (histology) नाम दिया। उपर्युक्त एवं अन्य वैज्ञानिकों के अनुसार ऊतक की परिभाषा इस प्रकार दी गयी है—कोशिकाओं का ऐसा समूह जो उत्पत्ति (origin), रचना (structure) तथा कार्य (function) में समान हो, ऊतक (tissue) कहलाता है। ऊतकों की कोशिकाएँ एक आन्तरकोशीय (intercellular) पदार्थ के द्वारा परस्पर चिपकी रहती हैं। ऊतक का यह आधार द्रव्य (ground substance) मैट्रिक्स (matrix) कहलाता है। ऊतक की कोशिकाएँ ही इस मैट्रिक्स का स्रावण करती हैं।

UP Board Solutions

तरल संयोजी ऊतक की विशेषताएँ

ये विशेष प्रकार के संयोजी ऊतक हैं, जिनका शरीर के लगभग सभी भागों में संचारण होता है; उदाहरणार्थ-रुधिर। इनमें निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं

  1. इनमें मैट्रिक्स तरल अवस्था में होता है। इसे प्लाज्मा (plasma) कहते हैं तथा प्लाज्मों में तन्तु (fibres) नहीं होते हैं।
  2. इनकी कोशिकाएँ, कणिकाएँ (corpuscles) कहलाती हैं तथा ये प्लाज्मा का स्रावण नहीं करती हैं।
  3. ये अन्य ऊतकों की भाँति शरीर को दृढ़ता, निश्चित स्वरूप अथवा गति देने का कार्य नहीं करते हैं। (UPBoardSolutions.com) उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि रुधिर एक ऊतक है।

प्रश्न 2.
संवहनीय ऊतक से आप क्या समझते हैं? सामान्य संयोजी ऊतक से यह किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर :

संवहनीय ऊतक

उविकास के साथ-साथ जब हमारे शरीर का माप बढ़ा और इसके रचनात्मक संगठन में जटिलता आई, तो इसके विभिन्न भागों के मध्य पदार्थों का परिवहन एक महत्त्वपूर्ण कार्य हो गया। अतः स्पंजों, निडेरिया एवं असीलोमेट तथा स्यूडोसीलोमेट जन्तुओं को छोड़कर शेष जन्तुओं में एक संवहनीय तन्त्र का विकास हुआ। इस तन्त्र के अन्तर्गत अधिकांश उच्च जन्तुओं में परिवहन के माध्यम के रूप में रुधिर एवं लसीका का विकास हुआ। ये विशेष प्रकार के तरल संयोजी ऊतक होते हैं, जिनका कि सम्पूर्ण शरीर में परिसंचरण होता है। इस प्रकार के ऊतकों को ही संवहनीय ऊतक कहा जाता है।

प्रश्न 3.
लाल रुधिराणु अपघटन तथा लाल रुधिराणु निर्माण क्रिया को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर :
लाल रुधिराणु अपघटन मैक्रोफेज तथा फेगोसाइट्स कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त लाल रुधिराणुओं का भक्षण करके हीमोग्लोबिन को हीम तथा ग्लोबिन में तोड़ देती हैं। इस प्रक्रिया को लाल रुधिराणु अपघटन कहते हैं। हीम का उपयोग पुनः हीमोग्लोबिन निर्माण में हो जाता है। लाल रुधिराणु निर्माण यकृत, अस्थिमज्जा, लसीका गाँठों, थाइमस ग्रन्थि आदि में लाल रुधिराणुओं का निर्माण होता है। इनका निर्माण एरिथ्रोब्लास्ट कोशिकाओं से होता है।

प्रश्न 4.
हैवर्सिअन नलिका पर टिप्पणी कीजिए। या स्तनी की अस्थि की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए। या स्तनधारी की अस्थि में पाए जाने वाले हैवर्सिअन संस्थान का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
उत्तर :
हैवर्सिअन  नलिका :
स्तनी प्राणियों की अस्थियाँ अधिक मोटी होती हैं। इसके मैट्रिक्स में हैवर्सिअन तन्त्र होता है। हैवर्सिअन नलिका के चारों ओर अस्थि कोशिकाओं के संकेन्द्रित घेरे होते हैं। हैवर्सिअन नलिकाएँ परस्पर अनुप्रस्थ या तिरछी वॉल्कमैन नलिकाओं से जुड़ी रहती हैं। हैवर्सिअन तन्त्र के कारण (UPBoardSolutions.com) अस्थियों में पोषक पदार्थों तथा 0, आदि का संचरण सुगमता से होता है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 19

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
तिलचट्टे के लार ग्रन्थि-पुंज का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 20

प्रश्न 6.
तिलचट्टे के श्वसन नली तंत्र में गैसीय विनिमय की यांत्रिकी का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
तिलचट्टे की विश्रामावस्था में ट्रैकिओल्स में केशिका खिंचाव (capillary force) के कारण ऊतक द्रव्य (tissue fluid) इनमें कुछ दूर तक भरा रहता है। यह भीतर आयी हवा से CO2 के बदले O2 लेता है। इसके विपरीत तिलचट्टे की सक्रिय अवस्था में, उपापचयी दर (metabolic rate) के बढ़ जाने से, ऊतक द्रव्य में परासरणी दाब (Osmotic pressure) बढ़ जाता है। इससे ट्रैकिओल्स में से ऊतक द्रव्य निकल जाता है। अतः अब हवा सीधी कोशिकाओं तक पहुँच जाती है, इससे गैसीय विनिमय बढ़ जाता है। CO2 उपचर्म में से भी O2 की अपेक्षा कहीं अधिक प्रसरित (diffuse) होती है। अतः यह हवा के साथ ही नहीं, वरन् हीमोलिम्फ में घुलकर देहभित्ति की उपचर्म में से भी प्रसरण द्वारा बाहर निकलती है।

प्रश्न 7.
कायान्तरण की परिभाषा लिखिए। त्वक पतन से कॉकरोच को क्या लाभ मिलता है ?
उत्तर :
वह प्रक्रिया जिसके अन्तर्गत शिशु अनेक अवस्थाओं से होते हुए वयस्क बनता है, कायान्तरण कहलाती है। उदाहरणार्थ-कॉकरोच के शिशु को निम्फ कहते हैं। ये रचना में वयस्क कॉकरोच के ही समान परन्तु छोटे, हल्के रंग के और पंखहीन होते हैं। इनके जननांग भी अर्द्धविकसित होते हैं। (UPBoardSolutions.com) इनकी शिशु अवस्था लगभग 6 माह से 2 वर्ष तक होती है। इस बीच शिशु में सक्रिय पोषण के कारण वृद्धि होती है। वृद्धि अवस्था में10 से 12 बार निम्फ के बाह्य कंकाल का त्वक् पतन होता है, परिणामस्वरूप इसकी वृद्धि होती है। अन्तिम त्वक् पतन के पश्चात् वृद्धि प्रावस्था समाप्त हो जाती है तथा निम्फ वयस्क बन जाता है। इसके पंख भी बन जाते हैं तथा जननांग क्रियाशील हो जाते हैं।

प्रश्न 8.
उत्सर्जन के बारे में आप क्या जानते हैं? तिलचट्टे की मैलपीघियन नलिकाओं का कार्य बताइए।
उत्तर :
उत्सर्जन :
प्रत्येक जीव में कोशिकीय उपापचयी क्रियाओं के फलस्वरूप कई प्रकार के अपशिष्ट उत्पाद बनते हैं, जो उनके शरीर के लिए निरर्थक एवं हानिकारक होते हैं। इन अपशिष्ट उत्पादों को शरीर से निष्कासित करने की जैव-क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। मैलपीषियन नलिकाओं के कार्य-ये पीले रंग की धागेनुमा नलिकाएँ हैं, जो मध्य आंत्र तथा पश्च आंत्र के जोड़ पर स्थित होती हैं। ये नलिकाएँ नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थों का अवशोषण करके उन्हें जैव रासायनिक क्रिया द्वारा यूरिक अम्ल में परिवर्तित कर देती हैं। यूरिक अम्ल पश्च आंत्र द्वारा उत्सर्जित कर दिया। जाता है।

UP Board Solutions

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पेशी ऊतक कितने प्रकार के होते हैं? अरेखित पेशियों की सचित्र संरचना तथा कार्यविधि ६ का वर्णन कीजिए। प्रत्येक का उदाहरण दीजिए। या अरेखित तथा रेखित पेशियों में मुख्य अन्तर लिखिए।
उत्तर :

पेशी ऊतक

पेशी ऊतक अनेक लम्बे एवं बेलनाकार तन्तुओं (रेशों) से बना होता है जो समानांतर पंक्तियों में सजे रहते हैं। यह तन्तु कई सूक्ष्म तन्तुओं से बना होता है जिसे पेशी तन्तुक (myofibril) कहते हैं। समस्त पेशी तन्तुक समन्वित रूप से उद्दीपन के कारण संकुचित हो जाते हैं तथा पुनः लम्बा होकर अपनी असंकुचित अवस्था में आ जाते हैं। पेशी ऊतक की क्रिया से शरीर वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार गति करता है तथा शरीर के विभिन्न अंगों की स्थिति को सँभाले रखता है। (UPBoardSolutions.com) सामान्यतया शरीर की सभी गतियों में पेशियाँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं। पेशी ऊतक अग्र तीन प्रकार के होते हैं

1. अरेखित पेशी ऊतक
यह अनैच्छिक पेशी ऊतक है। ये पेशियाँ कार्यिकी व वातावरणों के अनुसार संकुचित होती हैं। ये पेशियाँ कंकाल से सम्बन्धित नहीं होती हैं। इन्हें विसरल पेशियाँ भी कहते हैं। ये पेशियाँ आहारनाल, श्वासनली, गर्भाशय, पित्ताशय, रुधिरवाहिनी, शिश्न आदि में मिलती हैं। अरेखित पेशियों के तन्तु 100-200μ लम्बे तथा 10μ चौड़े होते हैं। ये पतले तथा तरूपी होते हैं। तन्तु के ऊपर कोशिका कला मिलती है। इसको सारकोलेमा कहते हैं। तन्तु का द्रव सारकोप्लाज्म कहलाता है। इसमें एक्टिन व मायोसिन प्रोटीन के समानांतर. पेशी तन्तु मिलते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 21

2. रेखित पेशी ऊतक
ये पेशियाँ अंगों में इच्छानुसार गति को नियन्त्रित करती हैं। इन्हें ऐच्छिक पेशियाँ कहते हैं। ये पेशियाँ कंकाल से जुड़ी होती हैं। हाथ, पैर व शरीर की गति को संचालित करने के कारण इन्हें कंकालीय पेशी अथवा दैहिक पेशी भी कहते हैं। ये पेशियाँ गर्दन, हाथ, पैर, उदर आदि सभी अंगों में मिलती हैं। ये तन्तु संयोज़ी ऊतक तथा कोलेजन तन्तुओं के आवरण से आच्छादित होती हैं। इसे एन्डोमायोसियम कहते हैं। प्रत्येक तन्तु बेलनाकार तथा 1-30 μ लम्बा तथा 10-100 μ व्यास का होता है। इसके आवरण को सारकोलेमा कहते हैं। सारकोलेमा त्रिस्तरीय होता है। सारकोप्लाज्म में मायोफाइब्रिल मिलती है। रेखित पेशियों में एक्टिन तथा मायोसिन प्रोटीन मिलती है।

3. हृद पेशी ऊतक
यह एक संकुचनशील ऊतक है जो केवल हृदय में ही पाया जाता है। हृद पेशी ऊतक की कोशिकाएँ कोशिका संधियों द्वारा द्रव्य कला से एकरूप होकर चिपकी रहती हैं। संचार संधियों अथवा अन्तर्विष्ट डिस्क (intercalated disc) के कुछ संगलन बिंदुओं पर कोशिका एक इकाई रूप में संकुचित होती है। जैसे कि जब एक कोशिका संकुचन के लिए संकेत ग्रहण करती है, तब दूसरी पास की कोशिका भी संकुचन के लिए उद्दीपित होती है।

प्रश्न 2.
तिलचट्टे के मुखांगों का सचित्र वर्णन कीजिए। या कॉकरोच के मुखांगों को, उनके प्राकृतिक क्रम में, सरल, स्वच्छ आरेखी चित्र खींचकर उचित नामांकन द्वारा स्पष्ट कीजिए (वर्णन अनापेक्षित)
उत्तर :

तिलचट्टे/कॉकरोच के मुखांग

कॉकरोच के सिर पर उपस्थित चार जोड़ी उपांगों में से तीन जोड़ी उपांग छोटे और मुखद्वार के चारों ओर स्थित होते हैं। सिर कोष की लैब्रम (labrum) तथा हाइपोफैरिंक्स (hypopharynx) नाम की एक अन्य काइटिनयुक्त रचना भी मुखद्वार से सम्बन्धित होती है। इन सब उपांगों का सम्बन्ध (UPBoardSolutions.com) भोजन-ग्रहण से होता है। अत: इन्हें मुख उपांग या मुखांग कहते हैं। ये भोजन को कुतर-कुतरकर खाने के लिए उपयोजित अर्थात् मैन्डीबुलेट होते हैं। मुखद्वार के चारों ओर ये चित्र में दिखाए गए क्रम में स्थित रहते हैं।

1. लैब्रम :
यह मुखद्वार पर, सामने ढकी, सिर कोष की सबसे निचली, चपटी एवं गतिशील, प्लेटनुमा स्कलीराइट होती है। अतः इसे ऊपरी होंठ भी कहते हैं। यह लचीली पेशियों द्वारा क्लाइपियस से जुड़ी होती है। इसका स्वतन्त्र किनारा बीच से कटा होता है। कटाव के दोनों ओर स्वाद-ज्ञान की संवेदी सीटी होती हैं।

UP Board Solutions

2. मैन्डीबल्स :
ये लैब्रम के नीचे, मुखद्वार के पार्यों में एक-एक होते हैं। मजबूत पेशियाँ इन्हें सिर-कोष से जोड़ती हैं। प्रत्येक मैन्डीबल कठोर काइटिन की त्रिकोणाकार-सी रचना होती है। इससे मुख की ओर वाले किनारे पर तीन बड़े और कई छोटे-छोटे मजबूत दाँतों जैसे नुकीले उभार (denticles) होते हैं। इसी किनारे के आधार कोण पर प्रोस्थीका नामक छोटा-सा कोमल भाग होता है जिस पर संवेदी सीटी होती हैं। पेशियों की सहायता से मैन्डीबल्स अनुप्रस्थ दिशा में गतिशील होकर दाँतों के बीच आए भोजन को चबाते हैं।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 22

3. प्रथम मैक्सिली :
ये मुखद्वार के पाश्र्वो में, मैन्डीबल्स के आगे एक-एक होती हैं। प्रत्येक मैक्सिला कई पोडोमीयर्स की बनी होती है। इसके आधार भाग अर्थात् प्रोटोपोडाइट में काडों एवं स्टाइप्स नामक दो पोडोमीयर्स होते हैं। काड पेशियों द्वारा सिर-कोष से तथा स्टाइप्स 99° के कोण पर कारों से जुड़ा होता है। स्टाइप्स के दूरस्थ छोर के बाहरी भाग से एक पतला पंचखण्डीय (five-jointed) बाह्य पादांग (exopodite) जुड़ा होता है। इसे मैक्सिलरी स्पर्शक (maxillary palp) कहते हैं। इसके छोटे आधार पोडोमीयर को पैल्पीफर कहते हैं। स्टाइप्स के छोर से ही जुड़ा अन्त:पादांग (endopodite) होता है। इसमें परस्पर सटी दो पोडोमीयर्स होती हैं-बाहरी गैलिया तथा भीतरी (UPBoardSolutions.com) लैसीनिया (lacinia)। गैलिया कोमल तथा आगे से चौड़ी, छत्ररूपी (hood-like) होती है। लैसीनिया कठोर तथा आगे से नुकीली, पंजेनुमा होती है। इसके सिरे पर दो कण्टिकाएँ तथा भीतरी किनारों पर अनेक नन्हे शूक (bristles) होते हैं। इनके द्वारा प्रथम मैक्सिली भोजन को उस समय पकड़े रहती हैं जब मैन्डीबल्स भोजन को चबाते हैं। लैसीनिया के शूकों द्वारा मैक्सिली, ब्रुश की भाँति, अन्य मुख उपांगों की सफाई भी करती रहती हैं।

4. द्वितीय मैक्सिली :
ये समेकित होकर एक सहरचना बनाती हैं जिसे लेबियम या निचला होंठ (lower lip) कहते हैं; क्योंकि यह मुखद्वार के अधरतल पर ढका होता है। इसका आधार भाग बड़ा-सा चपटा सबमेन्टम होता है जो इसे सिर-कोष से जोड़ता है। सबमेन्टम के आगे छोटा मेन्टम इससे जुड़ा होता है। लेबियम का शेष, शिखर भाग, प्रथम मैक्सिली की ही भाँति पोडोमीयर्स एक जोड़ी रचनाओं का बना होता है जिनके आधार भाग मिलकर प्रीमेन्टम बनाते हैं। सबमेन्टम, मेन्टम और प्रीमेन्टम मिलकर लेबियम का प्रोटोपोडाइट बनाते हैं। प्रीमेन्टम के प्रत्येक पार्श्व में एक पैल्पीजर नामक स्कलीराइट होती है। इससे एक त्रिखण्डीय (three jointed) बाह्यपादांग (exopodite) जुड़ा होता है जिसे लेबियल स्पर्शक (labial palp) कहते हैं। प्रीमेन्टम के छोर पर, मध्य भाग से लगे, दो छोटे ग्लोसी तथा बाहरी भागों से लगे एक-एक बड़े पैराग्लोसी नामक पोडोमीयर्स होते हैं।

ये मिलकर इन मैक्सिली के अन्त:पादांग (endopodites) बनाते हैं। इन्हें मिलाकर लिगूला भी कहते हैं। पैल्प्स के अन्तिम खण्डों तथा पैराग्लोसी पर स्पर्श एवं स्वाद-ज्ञान की संवेदी सीटी होती हैं। यदि मैन्डीबल्स, प्रथम मैक्सिली या द्वितीय मैक्सिली में से किसी भी एक मुख उपांग को काटकर हटा दें तो कॉकरोच की भोजन-ग्रहण की व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। यह न तो भोजन को ठीक से कुतर-कुतरकर खा पाएगा और न ही भोजन के स्पर्श, गन्ध आदि उद्दीपनों को ग्रहण कर पाएगा। इस प्रकार, उपयुक्त पोषण के अभाव में इसकी मृत्यु हो सकती है।

5. हाइपोफैरिंक्स या लिंग्वा :
यह लेबियम के पृष्ठतल पर, लैब्रम से ढका, प्रथम मैक्सिली के बीच में, मुखद्वार के छोर से लगा हुआ बेलनाकार-सा मुख उपांग होता है। इसके स्वतन्त्र छोर पर अनेक संवेदी सीटी होती हैं। आधार भाग पर सहलार नलिका (common salivary duct) का छिद्र होता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
संयुक्त नेत्र से आप क्या समझते हैं? कॉकरोच के एक नेत्रांशक का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए। या संयुक्त नेत्र क्या है? तिलचट्टे के एक नेत्रांशक की खड़ी काट का नामांकित चित्र बनाइए तथा मोजैक दृष्टि की क्रियाविधि को विस्तारपूर्वक समझाइए।
उत्तर :
संयुक्त नेत्र कॉकरोच में सिर के अग्र भाग के पार्श्व में दोनों ओर दो काले संयुक्त नेत्र होते हैं। ये अवृन्त तथा वृक्काकार होते हैं। संयुक्त नेत्र अनेक दृष्टि एककों (visual elements) से निर्मित होते हैं जिन्हें नेत्रांशक (ommatidia) कहा जाता है। प्रत्येक नेत्रांशक एक स्वतन्त्र एकक है अर्थात् जो वस्तु उसके सामने होती है उसका उतना प्रतिबिम्ब वह बना लेता है। कॉकरोच के संयुक्त नेत्र में लगभग 2,000 नेत्रांशक मिलते हैं। नेत्र के ऊपरी क्यूटिकल का आवरण कॉर्निया (cornea) बनाता है जो अनेक कोष्ठों में बँटा होता है, जिन्हें फलक (facets) कहते हैं। ये फलक षट्कोणीय होते हैं। प्रत्येक फलक के नीचे एक नेत्रांशक (ommatidium) स्थित होता है।

नेत्रांशक (Ommatidium) :
नेत्रांशक को दो भागों डायोप्ट्रिकल (dioptrical) तथा ग्राही भाग (receptor region) में बाँटा जाता है

(i) डायोप्टिकल भाग (Dioptrical Region) :
कॉर्निया का फलक मध्य से मोटा होकर एक द्विउत्तल लेंस (biconvex lens) बनाता है जिसके नीचे दो कॉरनिएजन कोशिकाएँ (corneagen cells) मिलती हैं। ये कोशिकाएँ उपत्वचीय कोशिकाओं को रूपान्तरण हैं। निर्मोचन (moulting) के पश्चात् ये नया कॉर्निया बनाती हैं। इसके पीछे चार शंकु कोशिकाएँ (cone cells) मिलती हैं जो पारदर्शी क्रिस्टलीय शंकु (crystalline cone) के चारों ओर स्थित होती हैं। इस भाग का मुख्य कार्य वस्तु से आने वाली प्रकाश की किरणों को फोकस करना है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 23

(ii) ग्राही भाग (Receptor Region) :
इसके मध्य में एक लम्बी तरूपी (spindle shaped) छड़ (rod) मिलती है जिस पर अनुप्रस्थ दरारें रेब्डॉम (rhabdome) मिलती हैं। रेब्डॉम को घेरते हुए सात दृष्टि पटल कोशिकाएँ (retinal cells) मिलती हैं जो इसकी रक्षा करती हैं तथा उस तक पोषक पदार्थ पहुँचाती हैं। रेब्डॉम का (UPBoardSolutions.com) निर्माण रेटाइनल कोशिकाओं के स्राव से होता है। रेटाइनल कोशिकाएँ तथा रेब्डॉम दूरस्थ सिरे पर आधार कला (basement membrane) पर आधारित व तन्त्रिका तन्तुओं से सम्बन्धित होते हैं। इस भाग पर प्रतिबिम्ब बनता है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals image 24
नेत्रांशक एक-दूसरे से वर्णक परतों द्वारा पृथक् होते हैं। वर्णक परतें वर्णक अमीबा समान कोशिकाओं (pigmented amoeboid cells) द्वारा निर्मित होती हैं। दो नेत्रांशकों के मध्य की वर्णक परत दो वर्णक समूहों से बनती है। डायोप्ट्रिकल भाग में मिलने वाला वर्णक समूह आइरिस वर्णक समूह (iris pigment group) तथा रेटाइनल भाग में मिलने वाला वर्णक समूह रेटाइनल वर्णक समूह (retinal pigment group) कहलाता है।

UP Board Solutions

प्रत्येक नेत्रांशक स्वतन्त्र प्रतिबिम्ब बनाता है। संयुक्त नेत्र में किसी भी वस्तु का प्रतिबिम्ब छोटे-छोटे प्रतिबिम्बों के समेकन से बनता है। इस प्रकार की दृष्टि को संकलित दृष्टि (mosaic vision) कहते हैं। प्रतिबिम्ब की प्रकृति प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर करती है। तीव्र प्रकाश में एपोजीशन प्रतिबिम्ब (UPBoardSolutions.com) (apposition image) बनता है तथा मन्द प्रकाश में सुपरपोजीशन प्रतिबिम्ब (super-position image) बनता है। यह प्रतिबिम्ब अंशछादित (overlapping) होता है; अतः स्पष्ट नहीं होता है।

We hope the UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 7 Structural Organisation in Animals , drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit संस्कृत के प्रमुख निबन्ध

UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit संस्कृत के प्रमुख निबन्ध

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit. Here we have given UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit संस्कृत के प्रमुख निबन्ध.

विजयदशमी

1. विजयदशमी भारतस्य प्रमुखः उत्सवः अस्ति।
2. अयम् उत्सवः अश्विन मासस्य शुक्लायां दशाभ्यां भवति।
3. अयम् उत्सवः रामस्य विजयं रावणस्य च पराजयं प्रकटयति।
4. विजयदशमी दिने रामः रावणवधम् अकरोत्।
5. विजयदशमी क्षत्रियाणां प्रमुखः उत्सवः।
6. विजयदशमी दिने जनाः शमी वृक्षस्य पूजनं कुर्वन्ति।
7. अस्मिन् दिने नीलकंठ दर्शनस्य प्राचीना परम्परा अस्ति।
8. अस्मिन् दिने जनाः पत्र वंश खण्डादिभिः निर्मितां रावण प्रतिमां वेधयन्ति।
9. विजयदशमी दिने रामस्य पराक्रमाः अभीयन्ते।
10. अयम् उत्सवः धर्माचरणं शिक्षयति।

लखनऊनगरम्

1. लखनऊ नगरम् उत्तर प्रदेशस्य राजधानी अस्ति।
2. इदम् नगरं प्राचीन सुरम्यम् च अस्ति।
3. अस्मिन् नगरे बहूनि दर्शनीयानि स्थानानि सन्ति।
4. लखनऊ नगरस्य विश्वविद्यालयः प्रसिद्धतमः विश्वविद्यालयः।
5. अस्मिन् नगरे ‘इमामबाड़ा’ भवनम् अतीव मनोहरम्।
6. प्राचीन काले अस्यनाम् लक्ष्मणपुरम् आसीत्।
7. लखनऊ नगरे एकः चिकित्सा महाविद्यालयः अपि अस्ति।
8. अस्मिन् नगरे विधानसभायाः अधिवेशनानि भवन्ति।
9. लखनऊ नगरे एवं उत्तर प्रदेशस्य राज्यपाल: निवसति।
10. अस्मिन् नगरे सुरम्याणिउद्यानानि सन्ति।
11. लखनऊ नगरं एकं ऐतिहासिकं नगरम् अस्ति।

गणतन्त्र दिवसः

1. गणतन्त्र दिवस: भारतस्य: प्रमुखः राष्ट्रीयः पर्वः।
2. अयमुत्सवः जनवरीमासस्य षटविंशत दिनांके भवति।
3. देशे सर्वत्र भव्याः समारोहा भवन्ति।
4. दिल्ली नगरे तू गणतन्त्र दिवसस्य भव्य समारोहाः भवति।
5. गणतन्त्र दिवसः अस्माकं स्वतन्त्रतायाः प्रतीकः।
6. अयमुत्सवः नगरे–नगरे ग्रामे-ग्रामे च भवति।
7. विद्यालयेषु राजकीय भवनेषु च जनाः पताका आरोहन्ति।
8. रात्रौ यत्र-तत्र दीपिकाः प्रज्वाल्यन्ते।
9. अयमुत्सवः प्रमुख राष्ट्रीय पर्वेषु अन्यतमः।

We hope the UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit संस्कृत के प्रमुख निबन्ध help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit संस्कृत के प्रमुख निबन्ध, drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom 

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom (प्राणि जगत)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यदि मूलभूत लक्षण ज्ञात न हों तो प्राणियों के वर्गीकरण में आप क्या परेशानियाँ महसूस करेंगे?
उत्तर :

  1. यदि मूलभूत लक्षण ज्ञात नहीं हैं तब सभी जीवों का पृथक रूप से अध्ययन करना सम्भव नहीं होगा।
  2. जीवों के मध्य परस्पर सम्बन्ध स्थापित करना कठिन होगा।
  3. एक वर्ग के सभी जन्तुओं की केवल एक या दो (UPBoardSolutions.com) जीवों के अध्ययन से जानकारी प्राप्त करना सम्भव नहीं होगा।
  4. अन्य जन्तु जातियों का विकास नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 2.
यदि आपको एक नमूना (specimen) दे दिया जाये तो वर्गीकरण हेतु आप क्या कदम अपनाएँगे?
उत्तर :

  1. संगठन के स्तर (levels or grades of organisation)
  2.  संगठन का पैटर्न (patterns in organisation)
  3. सममिति (symmetry)
  4. द्विकोरिक तथा त्रिकोरिक संगठन (diploblastic and triploblastic organisation)
  5. देहगुहा (body cavity) तथा प्रगुहा (coelom) 6. खण्डीभवन (segmentation)

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
देहगुहा एवं प्रगुहा का अध्ययन प्राणियों के वर्गीकरण में किस प्रकार सहायक होता है?
उत्तर :
देहभित्ति एवं कूटगुहा (pseudocoelom) के बीच प्रगुहा की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति वर्गीकरण के लिए विशेष प्रयोजनीय है। देहगुहा जब मीसोडर्म से स्तरित रहता है तब इसे सीलोम (coelom) कहते हैं। जिन जन्तुओं में सीलोम उपस्थित रहता है उन्हें सीलोमेटा (coelomata) कहते हैं, जैसे एनेलिडा, मोलस्का, आर्थोपोडा, इकाइनोडर्मेटा , हेमीकॉडेंटा तथा कॉडेंटा। कुछ जन्तुओं में देहगुहा मीसोडर्म द्वारा स्तरित नहीं होती, लेकिन एक्टोडर्म एवं एण्डोडर्म के (UPBoardSolutions.com) बीच छोटी-छोटी गोलाकार आकृति में छितरा रहता है। इस तरह की देहगुहा को आहारनाल कहते हैं एवं उन जन्तुओं को स्यूडोसीलोमेटा (pseudocoelomata) कहते हैं, जैसे-एस्केल्मिंथीज (Aschelminthes)। जिन जन्तुओं में देहगुहा अनुपस्थित रहती है उन्हें एसीलोमेट्स (acoelomates) कहते हैं, जैसे-प्लेटीहेल्मिंथीज (Platyhelminthes)।

प्रश्न 4.
अन्तः कोशिकीय एवं बाह्य कोशिकीय पाचन में विभेद करें।
उत्तर :
अन्तः कोशिकीय एवं बाह्य कोशिकीय पाचन में निम्नलिखित अन्तर है
UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom image 1 UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom image 2

प्रश्न 5.
प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष परिवर्धन में क्या अन्तर है?
उत्तर :
प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष परिवर्धन में निम्नलिखित अन्तर हैं

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 3

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
परजीवी प्लेटीहेल्मिंथीज के विशेष लक्षण बताइए।
उत्तर :

  1. टेगुमेन्ट (tegument) का मोटा स्तर उपस्थित।
  2. पोषक (host) के शरीर में ऊतकों से चिपकने के लिये चूषक (suckers) और प्रायः कंटक या अंकुश (spines or hooks) उपस्थित।
  3. चलन अंग (locomotory organs) अनुपस्थित।
  4.  कुछ चपटे कृमि खाद्य पदार्थ को परपोषी से सीधे अपने शरीर (UPBoardSolutions.com) की सतह से अवशोषित करते हैं।
  5. जनन तन्त्र (reproductive system) पूर्ण विकसित होता है।
  6. प्रायः अवायवीय श्वसन (anaerobic respiration) पाया जाता है।

प्रश्न 7.
आर्थोपोडा प्राणी समूह का सबसे बड़ा वर्ग है। इस कथन के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर :

  1. सुरक्षा के लिए क्युटिकल (cuticle) की उपस्थिति।
  2. विकसित पेशी तन्त्र गमन में सहायक।
  3. कीटों में श्वसनलियों द्वारा श्वसन (tracheal respiration) से सीधे ऑक्सीजन प्राप्त होती है।
  4. संधियुक्त उपांगों (jointed appendages) द्वारा विभिन्न कार्य सम्भव होते हैं।
  5. तन्त्रिका तन्त्र (nervous system) तथा संवेदी अंग (sense organs) विकसित होते हैं।
  6.  संचार हेतु फेरोमोन्स (pheromones) पाये जाते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
जल संवहन तन्त्र किस वर्ग का मुख्य लक्षण है
(a) पोरीफेरा
(b) टीनोफोरा
(e) इकाइनोडर्मेटा
(d) कॉडेंटा
उत्तर :
(c) इकाइनोडर्मेटा

प्रश्न 9.
सभी कशेरुकी (vertebrates) रज्जुकी (chordates) हैं लेकिन सभी रज्जुकी कशेरुकी नहीं हैं इस कथन को सिद्ध कीजिए।
उत्तर :
सभी कॉडेंट्स (chordates) में पृष्ठ रज्जु (notochord) पायी जाती है। कॉडेंट्स के अन्तर्गत यूरोकॉडेंटा तथा सेफैलोकॉडेंटा (दोनों को प्रोटोकॉडेंटा कहा जाता है) तथा वर्टीब्रेटा सम्मिलित हैं। कशेरुकियों (vertebrates) में पृष्ठ रज्जु (notochord) भ्रूणीय अवस्था में (UPBoardSolutions.com) पायी जाती है। वयस्क अवस्था में पृष्ठ रज्जु अस्थिल अथवा उपास्थिल मेरुदंड (backbone) में परिवर्तित हो जाती है। यद्यपि प्रोटोकॉडेंटस में वर्टिब्रल कॉलम (vertibral column) नहीं पायी जाती है। अतः कशेरुकी (vertebrates) रज्जुकी (chordates) भी हैं, परन्तु सभी रज्जुकी, कशेरुकी नहीं हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 10.
मछलियों में वायु-आशय (air bladders) की उपस्थिति का क्या महत्त्व है?
उत्तर :
मछलियों में वायु कोष/आशय (air bladders) उत्प्लावन (buoyancy) में सहायक होते हैं। इनकी सहायता से मछलियाँ जल में तैरती हैं। वायु कोष इन्हें जेल में डूबने से बचाते हैं। वायु कोष वर्ग ओस्टिक्थीज (osteichthyes) में पाये जाते हैं जबकि वर्ग कॉन्ड्रीक्थीज (chondrichthyes) में अनुपस्थित होते हैं। जिन मछलियों में वायु कोष नहीं होते हैं उन्हें जल में डूबने से बचने के लिये लगातार तैरना पड़ता है।

प्रश्न 11.
पक्षियों में उड़ने हेतु क्या-क्या रूपान्तरण हैं?
उत्तर :

  1. अग्रपाद (forelimbs) रूपान्तरित होकर पंख बनाते हैं।
  2. अन्त: कंकाल की लम्बी अस्थियाँ खोखली तथा वायुकोष युक्त होती हैं, जिससे शरीर हल्का रहता है।
  3.  मूत्राशय (urinary bladder) अनुपस्थित होता है।
  4.  उड़ने में सहायक पेशियाँ (flight muscles) विकसित होती हैं।

प्रश्न 12.
क्या अण्डजनक तथा जरायुज द्वारा उत्पन्न अण्डे या बच्चे संख्या में बराबर होते हैं? यदि हाँ तो क्यों? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर :
नहीं, अण्डजनक (oviparous) जन्तुओं में अण्डे से बच्चा मादा शरीर के बाहर अर्थात् बाह्य वातावरण में विकसित होता है। अत: बहुत से अण्डों के नष्ट होने की संभावना होती है। इसलिए ये जन्तु अधिक संख्या में अण्डे देते हैं। जरायुज (viviparous) जन्तुओं में भ्रूण का विकास मादा शरीर के अन्दर होता है। अतः केवल 1 या कुछ बच्चे ही उत्पन्न होते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से शारीरिक खण्डीभवन किसमें पहले देखा गया?
(a) प्लेटीहेल्मिंथीज
(b) एस्केल्मिंथीज
(c) एनेलिडा
(d) आर्थोपोडा
उत्तर :
(c) एनेलिडा

प्रश्न 14.
निम्न का मिलान कीजिए
(a) प्रच्छद (Operculum)  –  (I) टीनोफोरा (Ctenophora)
(b) पाश्र्वपाद (Parapodia)   – (II) मोलस्का (Mollusca)
(c) शल्क (Scales)  – (III) पोरीफेरा (Porifera)
(d) कंकत पट्टिका(Comb plates)  – (IV) रेप्टीलिया (Reptillia)
(e) रेडूला (Radula)  – (V) एनेलिडा (Annelida)
(f) बाल (Hairs)  – (VI) साइक्लोस्टोमेटा एवं कॉन्ड्रीक्थीज (Cyclostomata and Chondrichthyes)
(g) कीपकोशिका (Choanocytes)  – (VII) मैमेलिया (Mammalia)
(h) क्लोम छिद्र (Gill slits)  –  (VIII) ऑस्टिक्थीज (Osteichthyes)
उत्तर :
(a) (VIII)
(b) (V)
(c) (IV)
(d) (I)
(e) (II)
(f) (VII)
(g) (III)
(h) (VI)

UP Board Solutions

प्रश्न 15.
मनुष्यों पर पाये जाने वाले कुछ परजीवियों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. टीनिया (फीताकृमि)
  2. एस्केरिस (गोलकृमि)
  3. वुचेरेरिया (फाइलेरिया कृमि)
  4. एनसाइकोस्टोमा (अंकुश कृमि)
  5. ट्राइचुरिस (व्हीप कृमि)
  6. ड्रेकुनकुलस (गुइनिया कृमि)
  7. पेडीकूलस (जू)

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐसे जीव जो पानी की सतह पर उतराते रहते हैं, वे क्या कहलाते हैं?
(क) नितलस्थ
(ख) पिलैजिक
(ग) प्लवकीय
(घ) उभयचरी
उत्तर :
(ग) प्लवकीय

प्रश्न 2.
संघ पोरीफेरा का वर्गीकरण किस पर आधारित है ?
(क) नालतंत्र
(ख) कंटिकाएँ
(ग) कोएनोसाइट्स का आकार
(घ) एस्कोसाइट्स
उत्तर :
(ख) कंटिकाएँ

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
स्पंजों में ‘टोटीपोटेन्ट’ कोशिकाएँ होती हैं।
(क) थीजोसाइट्स
(ख) ट्रोफोसाइट्स
(ग) आर्किओसाइट्स
(घ) कोएनोसाइट्स
उत्तर :
(ग) आर्किओसाइट्स

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन स्वतंत्रजीवी है?
(क) फैसिओला
(ख) टीनिया
(ग) प्लैनेरिया
(घ) सिस्टोसोमा
उत्तर :
(ग) प्लैनेरिया

प्रश्न 5.
क्लाइटेलम केंचुए के किन खण्डों में होता है?
(क) 19, 20 तथा 21
(ख) 14, 15 तथा 16
(ग) प्रथम तीन खण्ड
(घ) अन्तिम तीन खण्ड
उत्तर :
(ख) 14, 15 तथा 16

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) दोमुँहा सर्प (इरिक्स जोनाई) में मुँह आगे तथा पीछे दोनों ओर होते हैं।
(ख) बड़ों की अपेक्षा छोटे स्तनधारी प्राणियों की आधारी उपापचय दर (बी०एम०आर०) प्रायः अधिक होती है
(ग) फैसिओला हिपेटिका में गुदा द्वार तथा वास्तविक सीलोम नहीं पाया जाता
(घ) एड्रीनल ग्रन्थि से स्रावित हॉर्मोन्स को ‘जीवन-रक्षक’ हॉर्मोन्स भी कहते हैं।
उत्तर :
(क) दोमुँहा सर्प (इरिक्स जोनाई) में मुँह आगे तथा पीछे दोनों ओर होते हैं।

प्रश्न 7.
पक्षियों के वायु-कोष सहायक होते हैं।
(क) रुधिर परिसंचरण में
(ख) ताप नियन्त्रण में
(ग) शरीर भार को कम करने में
(घ) शरीर को गर्म रखने में
उत्तर :
(ग) शरीर भार को कम करने में

प्रश्न 8.
निम्न में से किसकी अनुपस्थिति में चिड़िया चमगादड़ से भिन्न होती है ?
(क) समशीतोष्णता (समतापता)
(ख) चतुर्वेश्मी हृदय
(ग) श्वासनली
(घ) डायफ्राम
उत्तर :
(घ) डायफ्राम

UP Board Solutions

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्पंज के व्यक्तित्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
यह बहुकोशिकीय जन्तु होता है जिसका शरीर ऊतकों में विभाजित नहीं होता है। यह जन्तु जलीय होता है तथा अधिकांशतः समुद्रों में, पत्थरों पर, शिलाओं पर, लकड़ी के लट्ठों, अन्य जन्तुओं के खोलों आदि पर चिपका रहता है। इसके शरीर की रचना अति (UPBoardSolutions.com) सरल होती है। इसकी देहभित्ति में असंख्य सूक्ष्मछिद्र होते हैं जिससे बाहरी जल से लगातार इसका सम्पर्क रहता है। यह जल छिद्रों से अन्दर स्पंजगुहा में आता है तथा ऑस्कुलम से बाहर निकल जाता है।

प्रश्न 2.
प्रोटोस्टोमिया तथा ड्यूटेरोस्टोमिया में दो अन्तर बताइए।
उत्तर :

  1. प्रोटोस्टोमिया जन्तुओं का एक समूह है जिसके अन्तर्गत आर्थोपोडा, मोलस्का,ऐनेलिडा तथा अन्य समूह आते हैं। ड्यूटेरोस्टोमिया भी जन्तुओं का एक समूह है, परन्तु इसके अन्तर्गत इकाइनोडर्मेटा, कॉडेंटा, एग्नेथा तथा बैंकिओपोडा समूह आते हैं।
  2. प्रोटोस्टोमिया में पहले मुख को निर्माण होता  है जबकि ड्यूटेरोस्टोमिया में पहले गुदा का निर्माण होता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
केंचुआ तथा तिलचट्टे के उत्सर्जन अंगों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. केंचुआ के उत्सर्जी अंग – वृक्कक
  2. तिलचट्टे के उत्सर्जी अंग – मैल्पीघियन नलिकाएँ

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित जन्तुओं का वर्गीकरण कीजिए
(i) मकड़ी
(ii) टिड्डी
(iii) तारामीन या सितारा मछली
(iv) घोंघा (पाइला)/सेब घोंघा
(V) कटल फिश
(vi) केंचुआ
(vii) हाइड्रा
(viii) घरेलू मक्खी
(ix) फीताकृमि
(x) लिवर फ्लूक
(xi) यूग्लीना
(xii) पैरामीशियम
(xiii) जोंक
(xiv) समुद्री अर्चिन
(xv) पुर्तगीज मैन ऑफ वार

उत्तर :
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 4
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 5
UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom image 6
UP Board Solutions
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 7
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 8
UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom image 9UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 10
प्रश्न 2.
हाइड्रा में श्रम विभाजन पर टिप्पणी लिखिए। या ऊतकीय विभेदीकरण की परिभाषा दीजिए। हाइड्रा के शरीर की संरचना के सन्दर्भ में इसे संक्षेप में समझाइए।
उत्तर :
ऊतकीय विभेदन तथा शरीर क्रियात्मक श्रम विभाजन प्रत्येक जीवधारी गमन, श्वसन, पोषण, उत्सर्जन, वृद्धि, जनन आदि जैविक क्रियाएँ करने में सक्षम होता है। प्रोटोजोआ संघ के सदस्य एककोशिकीय (unicellular) होने पर भी उपर्युक्त क्रियाएँ सम्पन्न कर पाते हैं, जबकि उच्च श्रेणी के जन्तु बहुकोशिकीय होते हैं तथा विभिन्न महत्त्वपूर्ण क्रियाओं के लिए उनके अनुसार विशिष्ट ऊतक तन्त्रों एवं अंगों का निर्माण कर लेते हैं। हेनरी मिल्नी एडवर्ड (Henry Milne Edward,1800-1885) के अनुसार, जिस प्रकार मानव समाज में कार्यों का विभाजन (जैसे—अध्यापक, चिकित्सक, इन्जीनियर, कृषक, बढ़ई, लुहार, अन्य मजदूर आदि) होता है, उसी प्रकार प्राणियों के शरीर में जैविक क्रियाओं के लिए कोशिकाओं के बीच क्रियात्मक श्रम विभाजन होता है। प्राणी जगत् में हाइड्रा से ही वास्तविक संरचनात्मक विभेदीकरण तथा इससे सम्बन्धित क्रियात्मक श्रम विभाजन प्रारम्भ हुआ है। हाइड्रो एक द्विस्तरीय (diploblastic) प्राणी है और इसकी देहभित्ति के एक्टोडर्म व एण्डोडर्म स्तर विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं। ये कोशिकाएँ विभिन्न कार्यों के लिए उपयोजित होती हैं।

UP Board Solutions

एक्टोडर्म की उपकला-पेशी कोशिकाएँ मुख्यत: रक्षात्मक होती हैं तथा शरीर के फैलने व सिकुड़ने में सहायता प्रदान करती हैं। अन्तराली कोशिकाएँ रूपान्तरित होकर अन्य प्रकार की कोशिकाओं को जन्म देती हैं। जनन कोशिकाएँ केवल जनन में योगदान देती हैं। दंश कोशिकाएँ सुरक्षा, आक्रमण, चिपकने एवं शिकार पकड़ने का कार्य करती हैं। ग्रन्थिम-पेशी कोशिकाएँ हाइड्रा को आधार से चिपकने एवं गमन में सहायता करती हैं। एण्डोडर्म की पोषक-पेशी कोशिकाएँ अमीबा के समान हाइड्रा को भोजन के प्राणिसम अन्तर्ग्रहण (holozoic ingestion) में सहायता करती हैं। हाइड्रा में कोई विशिष्ट संवहन व उत्सर्जन तन्त्र नहीं पाया जाता है। इस प्रकार, हाइड्रा एक सरल द्विस्तरीय प्राणी है, जिसमें संरचनात्मक विभेदीकरण के क्रियात्मक श्रम विभाजन से सम्बन्धित होने के कारण जैविक क्रियाएँ सुविधापूर्वक सम्पन्न होती हैं।

प्रश्न 3.
पोरीफेरा संघ में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के नाल तन्त्रों का उल्लेख कीजिए। या नाल तन्त्र क्या है ? साइकॉननाल तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए तथा ल संवहन पथ को  तीरों द्वारा प्रदर्शित कीजिए। नाल तन्त्र के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। या निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए-स्पंज में नाल तन्त्र।
उत्तर :
संघ-पोरीफेरा (स्पंजों) में नाल तन्त्र स्पंजों के शरीर की भित्ति में अनेक छिद्रों एवं नलियों का जाल बना होता है, जिसके माध्यम से कीप कोशिकाओं (choanocytes) के कशाभिकों (flagella) की निरन्तर गति होते रहने से स्पंज गुहा (Spongocoel) में जल प्रवाह की धारा अविरल बनी रहती है। इसे नाल तन्त्र या नाल प्रणाली (canal system) कहते हैं। नाल तन्त्र स्पंजों के शरीर का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तन्त्र होता है। स्पंजों की सम्पूर्ण कार्यिकी; जैसे-श्वसन, उत्सर्जन, पोषण आदि नाल तन्त्र में प्रवाहित होने वाले जल द्वारा ही पूरी होती है।

नाल तन्त्रों के प्रकार

स्पंजों में शारीरिक संगठन की जटिलता के आधार पर निम्नलिखित प्रकार के नाल तन्त्र पाये जाते हैं।

1. एस्कॉन प्रकार का नाल तन्त्र :
स्पंजों में पाया जाने वाला यह सबसे सरल प्रकार का नाल तन्त्र है। इस प्रकार के नाल तन्त्र में स्पंज गुहा (spongoceal) के अन्दर उपस्थित कीप कोशिकाओं की कशाभिकाओं की निरन्तर गति के कारण बाहरी जल की अविरल धारा असंख्य ऑस्टिया (रन्ध्रों) से होकर सीधे स्पंज गुहा में प्रवेश करती है और ऑस्कुलम से होकर बाहर निकलती है। इस प्रकार स्पंज का पूरा शरीर एक नाले तन्त्र का कार्य करता है। ल्यूकोसोलेनिया Leucosolenia) नामक सरल स्पंज में इसी प्रकार का नाल तन्त्र पाया जाता है।
UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom image 11

2. साइकॉन प्रकार की नाल तन्त्र :
इस प्रकार का नाल तन्त्र साइकॉन (स्काइफा) एवं कुछ अन्य स्पंजों में पाया जाता है। यह मूलतः एस्कॉन प्रकार के नाल तन्त्र की भित्ति में अनुप्रस्थ वलन (transverse folds) हो जाने से बनता है। इससे स्पंज की देहभित्ति, पास-पास सटी व शरीर के अक्ष के समकोण पर स्थित अनेक महीन नलिकाओं का रूप ले लेती है, जिन्हें अरीय नाल (radial canals) कहते हैं। प्रत्येक अरीय नाल बाहर की ओर बन्द होती है और भीतर की ओर एक बड़े छिद्र द्वारा स्पंज गुहा (UPBoardSolutions.com) में खुलती है जिसे निर्गम छिद्र या अपद्वार या एपोपाइल (apopyle) कहते हैं। इस प्रकार के नाल तन्त्र में ऑस्टिया अरीय नलिकाओं की भित्ति में होते हैं जिन्हें आगामी द्वार या प्रोसोपाइल (prosopyle) कहते हैं।

कीप कोशिकाएँ केवल अरीय नालों को स्तरित करती हैं। स्पंज गुहा का भीतरी स्तर पिनैकोसाइट कोशिकाओं का होता है। अरीय नालों की भित्ति के बीच के स्थान अन्तर्वाही नालों (incurrent canals) का रूप ले लेते हैं। ये स्पंज गुहा की ओर बन्द किन्तु शरीर की बाहरी सतह पर खुलती हैं। बाहरी जल पहले अन्तर्वाही नालों में आता है और आगामी द्वार या प्रोसोपाइल (prosopyle) में होकर अरीय नलिकाओं (जिन्हें कशाभीनलिकाएँ भी कहते हैं) में और फिर एपोपाइल्स द्वारा स्पंज गुहा में आता है। स्पंज गुहा में आया हुआ ल ऑस्कुलम से होकर बाहर निकल जाता है।

UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom image 12
3. ल्यूकॉन प्रकार का नाल तन्त्र :
यह सबसे जटिल प्रकार का नाल तन्त्र है। इस प्रकार का नालतन्त्र स्पॉन्जिला (Spongilla) आदि स्पंजों में पाया जाता है। इसका निर्माण कशाभिकी लिकाओं की दीवार के वलन से होता है। वलन के कारण इन नलिकाओं की दीवार में छोटे-छोटे गोले कक्ष बन जाते हैं। इन कक्षों को कशाभिकी कक्ष flagellated chambers) कहते हैं। कीप कोशिकाएँ इन कक्षों की दीवार पर ही सीमित रह जाती हैं। अरीय नलिकाओं की गुहाओं के चारों ओर पिनैकोसाइट्स का स्तर होता है। इन्हें अपवाही नलिकाएँ (excurrent canals) कहते हैं। इसमें बाहरी जल पहले अन्तर्वाही नलिकाओं (incurrent canals) में, फिर प्रोसोपाइल्स से कशाभी कक्षों में और एपोपाइल्स से अपवाही नलिकाओं में से होता हुआ स्पंज गुहा में आकर ऑस्कुलम से बाहर निकल जाता है।

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 13

प्रश्न 4.
दंश कोशिकाओं की संरचना एवं कार्य समझाइए। या हाइड्रा में पायी जाने वाली दो प्रकार की दंश कोशिकाओं का सचित्र वर्णन कीजिए। , या हाइड्रा की दंश कोशिका की स्खलित अवस्था का एक नामांकित चित्र बनाइए (वर्णन की । आवश्यकता नहीं है)। या हाइड्रा में पायी जाने वाली पेनीट्रैण्ट प्रकार की दंश कोशिकाओं का सचित्र वर्णन कीजिए। या टिप्पणी लिखिए-दंश कोशिका।
उत्तर :

दंशिका की संरचना

दंश कोशिका की इस थैलीनुमा रचना का मुख्य भाग सम्पुट (capsule) कहलाता है। सम्पुट के अग्र सिरे पर भित्ति अन्दर की ओर धंसकर एक गड्डा बनाती है, जो झिल्ली द्वारा ढका रहता है। इस गड्ढे में पायी जाने वाली सूक्ष्म कणिकाओं में एक विशिष्ट पदार्थ भरा रहता है। यह सम्पुट (UPBoardSolutions.com) के ढक्कन (lid of operculum) का कार्य करता है। भीतर की ओर धंसने वाली भित्ति एक लम्बे, कुण्डलित वे काँटेदार सूत्र (thread) में रूपान्तरित होती है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 14

UP Board Solutions

दंशिकाओं के प्रकार

संध निडेरिया के विभिन्न सदस्यों में पायी जाने वाली दंश कोशिकाओं में लगभग 30 प्रकार की दंशिकाएँ होती हैं। हाइड्रा में कुल चार प्रकार की दंशिकाएँ पायी जाती हैं। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है।

1. स्टीनोटील्स अथवा पेनीटैण्ट्स (Stenoteles or Penetrants) :
ये सबसे बड़ी व जटिल रचना वाली दंशिका हैं। इनके बड़े कुन्दे पर स्टाइलेट्स व शूल (stylets and spines) पाये जाते हैं। इनके सूत्रों पर भी शूलों (spines) की तीन सर्पिल पंक्तियाँ होती हैं।

2. होलोट्राइकस आइसोराइजाज (Holotrichous Isorhizas) :
ये कुछ लम्बी, अण्डाकार तथा कुन्दविहीन होती हैं। इनका सूत्र लम्बा व सिरे पर खुला होता है। इन पर स्पाइन्स की केवल एक ही सर्पिल पंक्ति होती है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 15
3. एट्राइकस आइसोराइजाज (Atrichous Isorhizas) :
ये कुछ छोटी होती हैं तथा इनके सूत्रों पर स्पाइन्स नहीं पाये जाते हैं।

4. डेस्मोनीम या वॉलवेण्ट (Desmoneme Or Volvent) :
सबसे छोटी, 9 μ व्यास की, नाशपाती के आकार की, गोल व अण्डाकार इन दंशिकाओं को सूत्र छोटा, मोटा, सिरे पर बन्द व कुन्दविहीन होता है। ये एक ही बार कुण्डलित होती हैं तथा इन पर केवल कुछ ही स्पाइन्स पाये जाते हैं।

5.दंशिकाओं का दगना या स्खलन (Dscharge of Nematocysts)
उत्तेजित होने पर दंश कोशिकाओं के सूत्र तुरन्त झटके के साथ ऑपरकुलम को धकेल कर बाहर निकल आते हैं। इस प्रकार भीतरी पदार्थ एवं काँटे सूत्र के साथ दंशिका की बाहरी सतह पर आ जाते हैं। इवान्जोफ (Iwanzoff, 1895) के मतानुसार दंशिका में जब भी द्रव्य का दबाव बढ़ता है तो यह स्खलित हो जाती है।

UP Board Solutions

दंशिकाओं के कार्य

  1.  स्टीनोटील्स या पेनीट्रैण्ट्रेस का सूत्रे भोजन योग्य शिकार के सम्पर्क में आने पर तेजी से दगकर  शिकार के शरीर में चुभ जाता है। यह हिप्नोटॉक्सिन (hypnotoxin) नामक विषैले पदार्थ द्वारा शिकार को अचेत कर मार देता है।
  2.  डेस्मोनीम्स जब शिकार के सम्पर्क में आती हैं तो इनके सूत्र शिकार को चारों ओर से लपेटकर (UPBoardSolutions.com) जकड़ लेते हैं।
  3. होलोट्राइकस आइसोराइजाज के सूत्रों के स्पाइन्स शत्रु के शरीर में घुसकर हाइड्रा को उससे बचाने में सहायता करते हैं।
  4. एट्राइकस आइसोराइजाज के सूत्र चिपचिपे होते हैं। ये उपयुक्त आधार पर स्पर्शकों को चिपकने में सहायता करते हैं। इस प्रकार ये हाइड्रा को गमन में सहयोग देते हैं।

प्रश्न 5.
ज्वाला कोशिका किसे कहते हैं? यह किस जन्तु में पायी जाती हैं? इसके कार्य लिखिए। या ज्वाला कोशिकाओं की संरचना एवं कार्य समझाइए।
उत्तर :
ज्वाला कोशिकाएँ या शिखा कोशिकाएँ ये विशेष प्रकार की उत्सर्जी (excretory) कोशिकाएँ हैं जिनमें प्रमुखतः दो भाग होते हैं।

  1.  कोशिका का प्रमुख अण्डाकार भाग कोशिका काय (cell body) कहलाता है। इसको शिखा कन्द (flame bulb) भी कहते हैं। इसी भाग में केन्द्रक (nucleus) होता है। इसकी सतह से लगभग सभी ओर शाखित प्रवर्द्ध (cytoplasmic processes) निकले रहते हैं जो पैरेन्काइमा में इधर-उधर फैले रहते हैं।
  2. शिखा कन्द से एक ओर एक लम्बा सँकरा तथा नाल के समान भाग होता है जिसका अन्दर का खोखला भाग कन्द के अन्दर उपस्थित गुहा से सम्बन्धित होता है। यह गुहा काफी चौड़ी होती है। इसके चौरस भाग के जीवद्रव्य में छोटे-छोटे कई आधार कण (basal granules) होते हैं। जिनसे कशाभिकाएँ (flagella) निकलकर गुहा में लटकी रहती हैं तथा एक लौ के समान हर समय काँपती रहती हैं। ये आपस में गुच्छा बनाती हैं। यह गुहा सँकरी होकर एक महीने नलिका के रूप में अन्य नलिकाओं से सम्बन्धित रहती है।
    UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 16

UP Board Solutions

ज्वाला कोशिकाएँ प्लेटीहेल्मिन्थीज समूह की उत्सर्जन इकाइयाँ होती हैं। टीनिया जैसे अन्त:परजीवी जन्तुओं में इनका कार्य स्पष्ट नहीं है।

प्रश्न 6.
नर तथा मादा ऐस्कैरिस में अन्तर स्पष्ट कीजिए। या मनुष्य के शरीर में पाये जाने वाले गोलकृमि का वैज्ञानिक नाम व वासस्थान (अंग) लिखिए तथा उनके नर व मादा के एक-एक पहचान के लक्षण बताइए।
उत्तर :
मनुष्य में पाया जाने वाला गोलकृमि-ऐस्कैरिस लम्ब्रीकॉयडिस (Ascaris lumbricoides)। इसका वासस्थान (अंग)-मनुष्य की आँत।

नर तथा मादा ऐस्कैरिस में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 17

प्रश्न 7.
निम्नलिखित के नामांकित चित्र बनाइए

(क) मादा ऐस्कैरिस के मध्य भाग की अनुप्रस्थ काट।
(ख) नर ऐस्कैरिस के मध्य भाग की अनुप्रस्थ काट।

उत्तर :

(क)
मादा ऐस्कैरिस के मध्य भाग की अनुप्रस्थ काट

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 18

UP Board Solutions

(ख)
नर ऐस्कैरिस के मध्य भाग की अनुप्रस्थ काट

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 19

प्रश्न 8.
केंचुए के आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए या “केंचुए किसानों के परम मित्र हैं?” संक्षेप में स्पष्ट कीजिए। या केंचुए की जैव पारिस्थितिकी एवं आर्थिक महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
केंचुए का आर्थिक महत्त्व केंचुए ‘किसान के मित्र’ कहे जाते हैं, क्योंकि वे खेतों की मिट्टी को सुरंगें बनाकर पोली कर देते हैं तथा नीचे की मिट्टी को ऊपर पलट देते हैं, जिससे भूमि अधिक उपजाऊ बनती है। इसके साथ ही केंचुए कार्बनिक पदार्थों को सुरंगों में ले (UPBoardSolutions.com) जाते हैं जो खाद के रूप में सहायक होते हैं तथा केंचुए स्वयं भी मरकर सुरंगों के अन्दर खाद के रूप में बदल जाते हैं। केंचुए से मनुष्य को खेती के लिए उपजाऊ भूमि प्राप्त करने के अतिरिक्त अन्य लाभ भी हैं; जैसे

  1. ऑस्ट्रेलिया की आदिम जातियाँ केंचुए को भोजन के रूप में ग्रहण करती हैं।
  2.  काँटों में लगाकर मछलियों को पकड़ने हेतु इसे चारे के रूप में प्रयोग करते हैं।
  3. अपने देश में गठिया रोग के लिए यह औषधि बनाने के काम में आता है।
  4. प्रयोगशाला में अध्ययन सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाता है। केंचुओं से होने वाली हानियाँ कोई विशेष महत्त्व नहीं रखती हैं। कई बार वर्षा ऋतु में इनके द्वारा बनायी गयी सुरंगों के ढेर मृदा अपरदन का कारण बन जाते हैं। केंचुओं की कुछ जातियाँ पान, इलायची, धान आदि के पौधों के लिए हानिकारक होती हैं।

UP Board Solutions

प्रश्नु 9.
किन्हीं दो ऐसे लक्षणों को लिखिए जो नॉन-कॉडेंट्स को कॉडेंट्स से पूर्णतः विभेदित करते हैं?
उत्तर :
कॉडेंट एवं नॉन-कॉडेंट में अन्तर
UP Board Solutions for Class 11 Bio logy Chapter 4 Animal Kingdom image 20

प्रश्न 10.
निम्नलिखित के संघ सहित जन्तु वैज्ञानिक नाम लिखिए

(क) जेली फिश (jelly fish)
(ख) सिल्वर फिश (silver fish)
(ग) स्टार फिश (star fish)
(घ) डॉग फिश (dog fish)
(ङ) कबूतर (pigeon)
(च) खरगोश (rabbit)
(छ) जोंक (leech)

उत्तर :
सामान्य नाम :
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 21

प्रश्न 11.
चमगादड़ का वर्गीकरण वर्ग तक कीजिए तथा इसके दो लक्षण लिखिए।या चमगादड़ चिड़ियों के समान उड़ता है फिर भी इसे स्तनी वर्ग में क्यों रखा गया है ?
उत्तर :
लक्षण :

  1. शरीर पर बाल (hair) तथा बाह्य कर्ण (pinna) होते हैं।
  2.  मादा बच्चे उत्पन्न करती है तथा अपनी स्तन ग्रन्थियों से बच्चों को दूध पिलाती है। उपर्युक्त (UPBoardSolutions.com) दोनों ही लक्षण स्तनियों के मूल लक्षण हैं। इनके शरीर पर अथवा विकास में पक्षियों के कोई लक्षण; जैसे शरीर पर परों (feathers) की उपस्थिति आदि नहीं होते हैं अतः इन्हें स्तनी वर्ग में ही रखा जाता है।

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 22
प्रश्न 12.
कारण बताइए

(अ) हेल मछली नहीं, स्तनधारी है। क्यों?
(ब) एकिडना अण्डे देता है, फिर भी स्तनधारी वर्ग का सदस्य है। क्यों?
उत्तर :
ह्वेल मछली तथा एकिडना दोनों को ही संघ कॉडेंटा वर्ग-स्तनधारी में रखा गया है, क्योंकि इनमें बाल तथा स्तन ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। दाँत, विषमदन्ती एवं गर्तदन्ती होते हैं। ग्रीवा कशेरुकाओं की संख्या सात होती है। मध्य कर्ण में तीन छोटी अस्थियाँ पाई जाती हैं।

UP Board Solutions

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित जन्तुओं का वर्गीकरण कीजिए

(i) जेली फिश (jelly fish)
(ii) मेंढक (frog)
(iii) गौरेया (sparrow)
(iv) कुत्ता मछली (स्कोलिओडॉन) (dog fish)
(v) समुद्री घोड़ा (sea horse)
(vi) घरेलू छिपकली (wall lizard)
(vii) नाग(cobra)
(viii) कबूतर (pigeon)
(ix) आधुनिक मनुष्य (modern man)
(x) झींगा मछली (prawn)
(xi) तिलचट्टा (cockroach)
(xii) टोड  (toad)
(xiii) ड्रैको (Draco)
(xiv) खरगोश (rabbit)

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 23
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 24
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 25
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 26
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 27
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom image 28

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
कॉडेटा संघ के प्राणियों के मूल लक्षणों का सविस्तार वर्णन कीजिए। स्तनी वर्ग के प्राणियों को उपवर्ग तक प्रमुख लक्षणों एवं उदाहरण सहित वर्गीकृत कीजिए। या स्तनी वर्ग के प्राणियों के प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिए तथा प्रोटोथेरिया, मेटाथेरिया एवं यूथेरिया में उदाहरणों सहित अन्तर बताइए। या पृष्ठवंशी के चार मूल लक्षणों को लिखिए।
उत्तर :

संघ-कॉडेंटा के प्रमुख लक्षण

  1. कॉडेटा संघ के प्राणियों का शरीर द्विपार्श्व सममित (bilaterally symmetrical), देहगुहीय (coelomate) तथा त्रिजनस्तरीय (triploblastic) होता है।
  2.  इनके जीवन में किसी-न-किसी अवस्था में शरीर के मध्य पृष्ठ भाग में मेरुदण्ड अथवा नोटोकॉर्ड (notochord) अवश्य ही पाया जाता है।
  3.  इनमें जीवन की किसी-न-किसी अवस्था में ग्रसनी (pharynx) की (UPBoardSolutions.com) दीवार में एक जोड़ा गिल दरारों (gills clefts) को अवश्य बनती है।
  4.  इनमें शरीर के पृष्ठ मध्य तल में मस्तिष्क से लेकर शरीर के पिछले सिरे तक विस्तृत एक खोखली केन्द्रीय तन्त्रिका नाल (central neural tube) पायी जाती है।
  5.  इनमें हृदय देहगुहा में अधर तल पर स्थित होता है तथा रुधिर परिसंचारी तन्त्र बन्द (closed) प्रकार का होता है।
  6. इनमें रुधिर में लाल रुधिर कणिकाएँ (red blood corpuscles) पायी जाती हैं जिनमें ऑक्सीजन ग्राही हीमोग्लोबिन (haemoglobin) नामक लाल वर्णक पाया जाता है

स्तनधारियों (मैमेलिया) के प्रमुख लक्षण

  1.  इस वर्ग के जन्तु नियततापी होते हैं अर्थात् इनका ताप सदैव एक-सा रहता है।
  2.  इन जन्तुओं की त्वचा रोमयुक्त होती है। अधिकतर जन्तुओं का शरीर बालों (hair) से ढका रहता है।
  3.  इनमें बाह्य कर्ण (external ears) पाये जाते हैं।
  4. मादी में स्तन ग्रन्थियाँ (mammary glands) होती हैं, जिनसे ये नवजात शिशु को दूध पिलाती है।
  5.  गर्दन में केवल सात ग्रीवा कशेरुकाएँ (cervical vertebrae) होती हैं।
  6. त्वचा में तेल ग्रन्थियाँ (oil glands) तथा स्वेद ग्रन्थियाँ (sweat glands) होती हैं।
  7. देहगुहा एक पेशीय मध्यछद या डायफ्राम (diaphragm) द्वारा वक्षीय गुहा तथा उदरगुहा (thoracic and abdominal cavity) में बँटी रहती है।
  8. हृदय में चार कोष्ठ (four chambers) होते हैं तथा यह पूर्ण विकसित होता है। केवल बायाँ दैहिक चाप (left systemic arch) ही उपस्थित होता है।
  9.  मुख गुहिका (buccal cavity) नासामार्ग (nasal passage) से एक उपास्थि-अस्थि की प्लेट से अलग रहती है।
  10. श्वसन केवल फेफड़ों (lungs) के द्वारा होता है।
  11.  कपाल तन्त्रिकाएँ (cranial nerves) बारह जोड़े होती हैं।
  12.  नर स्तनधारियों में शिश्न (penis) के रूप में मैथुन अंग होता है तथा वृषण (testes) उदरगुहा के बाहर वृषण कोषों (scrotal sacs) में पाये जाते हैं।
  13.  योनि एकल (vagina single) होती है तथा दोनों गर्भाशय परस्पर पूर्णतः मिले रहते हैं।
  14. निषेचन मादा के शरीर के अन्दर अण्डवाहिनी (fallopian tube) में होता है।
  15.  बच्चों को जन्म देते हैं जिनका परिवर्द्धन गर्भाशय (uterus) में होता है। (कुछ स्तनधारी; जैसे-एकिडना (echidna) तथा डकबिल प्लेटीपस या ऑर्निथोरिंकस (Ornithorhynchus) अण्डे देते हैं।

UP Board Solutions

स्तनधारियों का वर्गीकरण

पुराने वर्गीकरण में वर्ग मैमेलिया को सीधे तीन उपवर्गों (subclasses) में बाँट दिया करते थे-प्रोटोथेरिया, मेटाथेरिया तथा यूथेरिया किन्तु वर्तमान में वर्ग मैमेलिया को दो उपवर्गो-प्रोटोथेरिया (prototheria) तथा थेरिया (theria) में वर्गीकृत करते हैं।

उपवर्ग 1.
प्रोटोथेरिया :

  1.  चुचुक स्पष्ट नहीं होते, स्तन ग्रन्थियाँ सक्रिय।
  2. अण्डे देते हैं शिशु बाहर ही अण्डे से निकलता है।
  3.  जरायु (placenta) उपस्थित नहीं।
  4.  एक ही छिद्र अवस्कर द्वार (Cloacal aperture) के रूप में।
  5.  मस्तिष्क में कॉर्पस कैलोसम अनुपस्थित।

उदाहरण :

(i) डकबिल प्लेटोपस (Duckbill platypus) या ऑर्निथोरिंकस (Ornithorhynchus),
(ii) एकिडना (echidna) आदि।

उपवर्ग 2.
थेरिया

अधिवर्ग 1 :

पैण्टोथेरिया (Pantotheria) :
सभी जन्तु विलुप्त हो चुके हैं।

अधिवर्ग 2 :

मेटाथेरिया (Metatheria) :
कुछ ही जन्तु जीवित हैं। इनके निम्नलिखित लक्षण हैं।

  1.  मादा के उदर पर चूचुकों को ढके हुए त्वचा की थैली होती है, इसे शिशुधानी या मार्क्सपियम (marsupium) कहते हैं। जन्म के समय शिशु अपरिपक्व होते हैं। ये रेंगकर, शिशुधानी में पहुँचकर, अपने मुख द्वारा चूचुकों (UPBoardSolutions.com) से चिपक जाते हैं तथा दुग्धपान करते हैं।
  2.  कपाल गुहा छोटी होती है।
  3. दाँत जीवन में केवल एक ही बार निकलते हैं (monophyodont)
  4.  जरायु (placenta) अल्प विकसित अथवा अनुपस्थित होता है।
  5. गर्भाशय तथा योनि जोड़े में (paired) होते हैं।

उदाहरण :

(i) ऑस्ट्रेलिया का कंगारू (Macropus)
(ii) तस्मानिया का डैसीयूरस (Dasyurus)
(iii) अमेरिका : का ओपोसम (Opossum or Didelphis)

अधिवर्ग 3.

यूथेरिया (Eutheria) :
पूर्ण विकसित स्तनी हैं। इनके निम्नलिखित लक्षण हैं।

  1. मादा के गर्भाशय में भ्रूण एवं शिशु का जरायु (placenta) द्वारा पूर्ण पोषण होने से शिशु जन्म के समय पूर्ण परिपक्व।
  2. मार्क्सपियम अनुपस्थित, चूचुक भली-भाँति विकसित।
  3. कॉर्पस कैलोसम (corpus callosum) तथा मस्तिष्क भली-भाँति विकसित।
  4. गर्भाशय एवं योनि केवल एक-एक (uterus and vagina single) होते हैं।

UP Board Solutions

उदाहरण :

(i) चूहा
(ii) खरगोश
(iii) चमगादड़
(iv) ह्वेल
(v) हाथी
(vi) मनुष्य आदि।

प्रश्न 3.
उभयचर वर्ग के प्राणियों के प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिए। इस वर्ग को गण तक उनके लक्षणों एवं उदाहरणों सहित वर्गीकृत कीजिए। या उभयचर वर्ग (क्लास एम्फिबिया) के दो प्राणियों के जन्तु-वैज्ञानिक नाम लिखिए तथा उनके चार प्रमुख लक्षण बताइए।
उत्तर :

उभयचरों के प्रमुख लक्षण

  1.  ये जीवन चक्र का अधिकांश भाग जल व थल दोनों स्थानों पर पूरा करते हैं। इनके शरीर असमतापी (cold blooded) होते हैं। शरीर सिर, धड़ व पुच्छ में विभाज्य होता है।
  2. त्वचा शल्कविहीन होती है तथा इसमें अनेक श्लेष्म ग्रन्थियाँ (mucous glands) व विष ग्रन्थियाँ (poison glands) होती हैं। इस पर बाल या फर भी नहीं होते। त्वचा अधिकांशतः चिकनी तथा नम होती है। सभी ग्रन्थियाँ बहुकोशिकीय होती हैं।
  3. सभी में कायान्तरण (metamorphosis) पाया जाता है।
  4. अवस्कर वेश्म (cloacal chamber) उपस्थित होता है।
  5. करोटि (skull) में रीढ़ की अस्थि की प्रथम कशेरुका के (UPBoardSolutions.com) साथ सन्धियोजन (articulation) के लिए दो पश्चकपाल मुण्डिकाएँ (occipital condyles) होती हैं।
  6. उँगलियों में नख या नखर (claws) आदि नहीं होते हैं।
  7. हृदय त्रिवेश्मी (three-chambered) होता है, दो अलिन्द (auricles) व एक निलय। इनकी लाल रुधिर कणिकाएँ (RBCS) केन्द्रकयुक्त (nucleated) होती हैं।
  8. उत्सर्जन वृक्कों (nephridia) द्वारा। ये यूरिया उत्सर्गी (ureotelic) होते हैं।
  9. ये अंडायुज (oviparous) होते हैं। अण्डे जल में या नम जगहों में दिये जाते हैं। इनके चारों ओर जेली की तरह लसलसे पदार्थ का सुरक्षात्मक आवरण होता है।
  10. एकलिंगी (unisexual) अर्थात् नर तथा मादा अलग-अलग होते हैं। निषेचन आन्तरिक या पानी में होता है।
  11.  लारवा पूर्ण रूप से जलचारी होता है। इनमें श्वसन क्लोमों (gils) द्वारा होता है, जबकि वयस्क अवस्था में (केवल कुछ अपवादों को छोड़कर) फेफड़ों द्वारा तथा नम और रुधिर वाहिनियों के घने जाल से युक्त त्वचा द्वारा होता है।

UP Board Solutions

उदाहरण :

1. सामान्य मेंढक  :
राना टिग्रीना तथा
2. टोड :
ब्यूफो मिलेनोस्टिक्टस

उभयचरों का वर्गीकरण

विलुप्त तथा जीवित सभी उभयचरों को पाँच उपवर्गों तथा 10 गणों में वर्गीकृत किया गया है।

A.
उपवर्ग लेबरिन्थोडोन्शिया (Labrinthodontia) :

विकास में पहले उभयचर। केवल विलुप्त जातियाँ। तीन गणों (orders) में वर्गीकृत; जैसे – सेमूरिया (Seymouria)

B.
उपवर्ग लीपोस्पोन्डाइली (Lepospondyli) :

सभी विलुप्त पुरातन उभयचर। तीन गंणों में वर्गीकृत; जैसे-डिप्लोकॉलस (Diplocaulus)।

C.
उपवर्ग सैलेन्शिया (Salientia) :

दो गण

  1. प्रोएन्यूरा (proanura) सभी विलुप्त
  2.  एन्यूरा (anura) कुछ विलुप्त और अन्य विद्यमान जातियाँ; जैसे-मेंढक तथा टोड (frogs and toads)

लक्षण :

  1.  वयस्क में पूंछ व क्लोम अनुपस्थित।
  2. धड़ छोटा, करोटि छोटी।
  3.  कशेरुकाएँ कम, अन्तिम कशेरुका छड़नुमा यूरोस्टाइल (urostyle)
  4.  पश्चपाद अग्रपादों से लम्बे, अँगुलियाँ जालयुक्त (webbed)
  5.  अन्त:कंकाल का काफी भाग उपास्थीय।
  6. अण्डनिक्षेपण, संसेचन एवं भ्रूणीय परिवर्धन जल में जीवन-वृत्त में मछली-सदृश भेकशिशु (tadpole) प्रावस्था। अतः कायान्तरण (metamorphosis) महत्त्वपूर्ण; जैसे-टोड (Bufo), हायला (Hyla), मेंढक (Rana)

UP Board Solutions

D.
उपवर्ग यूरोडेला (Urodela) :

विलुप्त एवं विद्यमान जातियाँ, एक ही गण, कॉडेटा (Caudata)

लक्षण :

  1. शरीर सिर, धड़ एवं पूँछ में विभेदित धड़ लम्बा।
  2. दोनों जोड़ी पाद लगभग समान लम्बाई के।
  3.  मेखलाएँ उपास्थीय।
  4. जातियाँ कुछ पूर्णरूपेण जलीय, कुछ मुख्यत: स्थलीय; श्वसनांग जलीय जातियों में क्लोम, स्थलीय में फेफड़े।
  5. भेकशिशु वयस्क के समान अतः कायान्तरण स्पष्ट नहीं। उदाहरण-सैलामैण्डर (Salamender), नेक्ट्यू रस (Necturus) आदि।

E.
उपवर्ग ऐपोडा (Apoda) :

एक गण जिम्नोफियोना (Gymnophiona)

लक्षण :

  1. बिलों में रहने वाले पादविहीन उभयचर।
  2. शरीर लम्बा व सँकरा, देखने में केंचुए जैसा।
  3. पादों की मेखलाएँ नहीं।
  4. सिर सुरंग खोदने के लिए मजबूत, नेत्र अर्धविकसित, पलकरहित व प्रायः त्वचा से ढके।
  5.  त्वचा चिकनी, इस पर अनुप्रस्थ झुर्रियाँ।
  6. पूँछ छोटी या अनुपस्थित।
  7.  क्लोम (gills) केवल शिशु में। वयस्क में श्वसन फेफड़ों द्वारा; जैसे-इक्थियोफिस (Ichithyophis)

UP Board Solutions

प्रश्न 4.
सरीसृप वर्ग के प्राणियों के प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिए तथा गण तक उदाहरण सहित वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :

वर्ग रेप्टीलिया (सरीसृप) के प्रमुख
लक्षण :

  1. ये साधारणतः स्थलवासी होते हैं, लेकिन कुछ जलवासी भी होते हैं।
  2. इनमें बाह्य कर्ण छिद्र अनुपस्थित, लेकिन टिम्पैनम कर्ण उपस्थित हैं।
  3.  ये थल पर रेंगकर (repere = crawl) चलते हैं इसलिए, इस वर्ग को रेप्टीलिया कहा जाता है।
  4.  ये असमतापी जन्तु हैं।
  5. त्वचा में एपिडर्मल शृंगी शल्क (epidermal horny scales) पाए जाते हैं।
  6. त्वचा रुखी होती है। इसमें ग्रन्थियाँ (glands) नहीं होती हैं।
  7. अन्त:कंकाल अस्थि (bony) का बना होता है।
  8. खोपड़ी में केवल एक ऑक्सिपिटल कॉण्डाइल, (Occipital condyle) होता है।
  9.  क्लोम (gills) विकास की प्रारम्भिक अवस्था में पाए जाते हैं। (UPBoardSolutions.com) वयस्क में श्वसन-क्रिया फेफड़े। (lungs) द्वारा होती है।
  10.  हृदय में दो अलिंद तथा आंशिक रूप से विभाजित एक निलय (ventricle) होता है।
  11. लाल रुधिर कणिकाएँ पाई जाती हैं।
  12. आहारनाल, जनन तथा मूत्रवाहिनियाँ क्लोएका में खुलती हैं, इसलिए पृथक्-पृथक् गुदा एवं जनन छिद्र नहीं होते हैं।
  13. साधारणतः अन्त:निषेचन (internal fertilization) होता है। अण्डे बड़े और चूनेदार (calcareous) कवच (shell) द्वारा आच्छादित रहते हैं।
  14.  इनमें कोई लार्वा अवस्था नहीं होती।

सरीसृपों का वर्गीकरण

सरीसृप वर्ग को निम्नलिखित 6 उपवर्गों में बाँटा गया है।

(क)
उपवर्ग ऎनेप्सिडा (Subclass Anapsida) :

करोटि का पृष्ठ भाग पूर्ण अर्थात् इसके टेम्पोरल क्षेत्र में कोई छिद्र (fossa) नहीं, क्वाड्रेट अस्थि कर्ण अस्थि से समेकित। तीन गण (orders), दो में केवल विलुप्त जातियाँ, केवल एक (किलोनिया) में विलुप्त एवं विद्यमान जातियाँ। गण किलोनिया (Order Chelonia)-विभिन्न प्रकार के कछुए (turtles, tortoises and terrapins)।

  1. जल में, कभी-कभी किनारे की नम भूमि पर आ जाते हैं।
  2.  शरीर चौड़ा, हॉर्न (horm) एवं अस्थि के बने कठोर खोल (shell) में बन्द। खोल का पृष्ठभाग पृष्ठवर्म अर्थात् कैरापेस (carapace) तथा अधर भाग प्लास्ट्रोन (plastron)} खोल पर चिम्मड़ त्वचा ढकी, त्वचा सपाट या षट्भुजीय प्रशल्कों (scutes) द्वारा ढकी।
  3.  सिर, पाद एवं पूँछ शल्कों से ढके। इन्हें खोल में समेटकर जन्तु शत्रुओं से रक्षा करता है।
  4. जबड़े हॉर्न के बने, दन्तविहीन।
  5. क्वाड्रेट हड्डी अचल।
  6.  अवस्कर छिद्र अनुलम्ब दरार के रूप में।
  7. नर में उत्तेजित होकर तनने वाला मैथुन अंग (copulatory organ) अर्थात् शिश्न (penis)
  8. मादा भूमि में गड्ढा बनाकर अण्डे देती और रेत से इन्हें ढक देती है।

UP Board Solutions

उदाहरण :

ट्रायोनिक्स (Trionyx) :

भारतीय नदियों का कछुआ

  1. कीलोन (Chelone)
  2. टेस्टुडो (Testudo)

(ख)
उपवर्ग यूरेऐप्सिडा (Subclass Euryapsida) :

विलुप्त जातियाँ, दो गण।

(ग)
उपवर्ग सिनेप्सिडा (Subclass Synapsida) :

विलुप्त जातियाँ, दो गण।

(घ)
उपवर्ग इथिओप्टेरीजिया (Subclass Ichthyopterygia) :

विलुप्त जातियाँ, एक गण।

(ङ)
उपवर्ग लेपिडोसॉरिया (Subclass Lepidosauria) :

एक विलुप्त तथा दो विलुप्त एवं विद्यमान जातियों के गण।करोटि (skull) के टेम्पोरल क्षेत्र में दो जोड़ी टेम्पोरल छिद्र (temporal fossae)

विलुप्त एवं विद्यमान जातियों के दो गण निम्नलिखित हैं

1.
गण रिकोसिफैलिया (Order Rhynchocephalia) :

इसकी अब एक ही जाति स्फीनोडॉन पंक्टेटस (Sphenodon punctatus)-न्यूजीलैण्ड के निकट छोटे-छोटे द्वीपों में पाई जाती है। इसे स्थानीय लोग टुआटरा (Tuatara) कहते हैं। इसके लक्षण विलुप्त सरीसृपों जैसे हैं। अतः ये “जिन्दा जीवाश्म (living fossils)’ कहलाते हैं। लगभग 55 सेमी लम्बा शरीर छिपकली-जैसा और बहुत सुस्त। बिलों से रात्रि में निकलकर (nocturnal) केंचुओं, घोंघों, कीड़ों आदि को खाते हैं। उपापचय (metabolism) की दर बहुत कम, परन्तु आयु लगभग 100 वर्ष मध्यवर्ती तीसरा नेत्र तथा त्वचा की शल्कें दानों के रूप में। नर में मैथुन अंग नहीं। अण्डे छोटे। अवस्कर छिद्र दरार जैसा।

UP Board Solutions

2.
गण स्क्वै मैटा (Order Squamata) :

छिपकलियाँ (lizards) एवं सर्प (snakes)

  1.  कुछ जलीय; शेष जंगलों, खेतों, घरों, बगीचों आदि में; कुछ बिलों में रहने वाले।
  2. तेजी से रेंगकर शत्रुओं से बचने की क्षमता।
  3.  त्वचा के हॉर्नी शल्कों के आवरण का समय-समय पर टुकड़ों या केंचुल के रूप में त्याग (moulting)
  4.  पूँछ लम्बी।
  5. जबड़े करोटि से दोनों ओर एक-एक चल क्वाड्रेट हड्डी द्वारा इस प्रकार जुड़े कि मुख-ग्रासने गुहिका बहुत चौड़ी खुल सकती है। दाँत जबड़ों की हड्डियों से समेकित (fused)
  6.  कशेरुकाएँ अग्रगर्ती (procoelous)
  7.  नर में दोहरा मैथुन अंग।
  8.  अवस्कर छिद्र अनुप्रस्थ दरार जैसा। दो उपगण

(अ)
उपगण लैसरटिलिया या सॉरिया (Suborder Lacertilia or Sauria) छिपकलियाँ।

  1. पाद प्रायः विकसित और पंजेदार।
  2.  नेत्रों की पलकें प्रायः चल।
  3. अंसमेखला प्रायः विकसित।
  4. निचले जबड़े के अर्धाश आगे परस्पर समेकित।
  5.  स्टर्नम, टिम्पैनम एवं मूत्राशय उपस्थित।
  6.  मस्तिष्क खोल आगे से खुला। उदाहरण-घरेलू छिपकली अर्थात् हेमोडेक्टाइलस (Hemidactylus), गोह अर्थात् वैरेनस (Varunus), साँडा अर्थात् यूरोमेस्टिक्स (Uromastix), विषैली छिपकली-हीलोडर्मा अर्थात् गिला मोन्स्टर (Heloderma-Gila monster) आदि।

(ब)
उपगण ओफीडिया या सर्पेन्टीज (Suborder Ophidia or Serpentes) सर्प।

  1. पाद स्टर्नम, टिम्पैनम, अंसमेखला तथा मूत्राशय प्रायः अनुपस्थित।
  2.  निचले जबड़े के अर्धांश आगे एक लचीले स्नायु (ligament) द्वारा जुड़े। अतः मुख शिकार को समूचा निगलने के लिए काफी फैल सकता है।
  3.  मस्तिष्क खोल आगे से बन्द।
  4. चल पलकों तथा बाह्य कर्णछिद्रों का अभाव।
  5. प्रायः लम्बी और आगे से कटी हुई जीभ संवेदांग का काम करती है।
  6. बायां फेफड़ा छोटा या अनुपस्थित।
  7.  दाँत पतले व नुकीले।
  8. मूत्राशय अनुपस्थित।

UP Board Solutions

उदाहरण :

(i) अजगर (Python)
(ii) काला नाग या कोबरा (Cobra-Ngja)
(iii) करैत (Bungarus)
(iv) वाइपर (Viper)

(च)
उपवर्ग आर्कोसॉरिया (Subclass Archosauria) :

चार विलुप्त जातियों के गण। केवल एक गण, क्रोकोडिलिया, में विद्यमान जातियाँ।

गण क्रोकोडिलिया या लोरीकैटा (Order Crocodilia or Loricata) :

    1. गहरी नदियों, बड़ी झीलों आदि के वासी।
    2. शरीर छिपकलियों जैसा, परन्तु बड़ा व भारी। सबसे बड़े वर्तमान रेप्टाइल्स।
  1. सिर लम्बा एवं तुण्डाकार। इसके सिरे पर नासाद्वार (nostrils)।
  2. नेत्र बड़े व उभरे हुए। नासाद्वार, नेत्र तथा कर्ण एक सीध में।
  3. त्वचा मोटी व चिम्मड़। इस पर मोटी शल्कें (scales)शल्कों (UPBoardSolutions.com) के नीचे, दृढ़ता के लिए, हड्डी की प्लेटें।
  4. पूँछ लम्बी, पाश्र्वो में चपटी।
  5.  पाद छोटे। अग्रपादों में 5-5 तथा पश्चपादों में 4-4 पंजेदार अँगुलियाँ। अँगुलियों के बीच जाल (web)। जालयुक्त पाद तथा चपटी पूँछ तैरने में सहायक।
  6. कशेरुकाएँ उभयगर्ती या अग्रवर्ती।
  7. क्वाड्रेट स्थिर।
  8.  मुखद्वार चौड़ा। जबड़े मजबूत। दाँत मजबूत, भीतर की ओर मुड़े और नुकीले। अवस्कर छिद्र अनुलम्बे दरारनुमा।
  9. मादा भूमि पर गड्ढे खोदकर इनमें अण्डे देती है।
  10. श्वसन फेफड़ों द्वारा।
  11.  मूत्राशय अनुपस्थित। इनका चमड़ा कीमती होता है। उदाहरण-भारतीय घड़ियाल या गैवियेलिस (Guvialis), ऐलीगेटर (Alligator), क्रोकोडाइलस (Crocodilus-मगरमच्छ)

We hope the UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 4 Animal Kingdom , drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 7 Home craft Chapter 8 कढ़ाई कला

UP Board Solutions for Class 7 Home craft Chapter 8 कढ़ाई कला

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 7 Home craft. Here we have given UP Board Solutions for Class 7 Home craft Chapter 8 कढ़ाई कला.

अभ्यास

1. बहुविकल्पीय प्रश्न

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए.
(क) फ्रेम लगाकर काढ़ने से सिलवट नहीं आती।
(ख) कढ़ाई कच्चे रंग के धागे से (UPBoardSolutions.com) नहीं काढ़ना चाहिए।
(ग) मछली काँटा स्टिच को उल्टी ओर से काढ़ने पर शैडो वर्क की कढ़ाई बनती है।
(घ) कढ़ाई का नमूना नुकीली पैंसिल से उतारना चाहिए।

2. सही (✓) या गलत (✘) का चिह्न लगाइए
(क) रूमाल पर छोटे नमूने अच्छे लगते हैं। (✓)
(ख) काढ़ते समय धागा दाँत से काटना चाहिए। (✘)
(ग) फ्रेम गोल होता है। (✓)
(घ) कच्चे रंग के धागे से कढ़ाई कर (UPBoardSolutions.com) सकते हैं। (✘)

UP Board Solutions

2. अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

(क) नमूना छापने के लिए दो आवश्यक वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तरे:
नमूना छापने के लिए ट्रेसिंग पेपर, कार्बन पेपर, पिन, पेंसिल, (UPBoardSolutions.com) नमूना, नील, गे, समतल स्थान की आवश्यकता पड़ती है।

(ख) क्रास स्टिच किस प्रकार के कपड़े पर बनाई जाती है?
उत्तर:
क्रॉस स्टिच मैटी के कपड़े पर बनाई जाती है।

UP Board Solutions

3. अति उत्तरीय प्रश्न

(क) कढ़ाई करने के किन्हीं चार टाँकों के (UPBoardSolutions.com) नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. रनिंग स्टिच,
  2. क्रॉस स्टिच,
  3. फिश बोन स्टिच,
  4.  कश्मीरी स्टिचे

UP Board Solutions

(ख) सुन्दर कढ़ाई के लिए ध्यान रखने वाली (UPBoardSolutions.com) दो बातें लिखिए।
उत्तर:

  1. कढ़ाई किए जाने वाले वस्त्र और धागों का रंग पक्का हो।
  2.  नमूना वस्त्र के अनुसार साफ और स्पष्ट हो तथा फ्रेम लगाकर उचित टॉकों का चुनाव कर कढ़ाई की जाए।

UP Board Solutions

4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

(क) ट्रेस करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? किन्हीं तीन विधियों को स्पष्ट करके लिखिए।
उत्तर:
कपड़े पर नमूना ट्रेस करने की निम्नलिखित (UPBoardSolutions.com) विधियाँ हैं

  1.  कार्बन पेपर द्वारा छापना
  2.  नील द्वारा छापना
  3.  गेरु द्वारा नमूना छापना

UP Board Solutions

(ख) कढ़ाई कला की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
जस प्रकार सुंदर वस्त्र और आभूषण से शरीर का सौंदर्य बढ़ (UPBoardSolutions.com) जाता है, उसी प्रकार कढ़ाई से वस्त्र की शोभा बढ़ जाती है तथा जहाँ पर उसका प्रयोग किया जाता है, उस स्थान की सुन्दरता और आकर्षण बढ़ जाता है।

प्रोजेक्ट कार्य
नोट: विद्यार्थी स्वयं करें।

We hope the UP Board Solutions for Class 7 Home craft Chapter 8 कढ़ाई कला help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 7 Home craft Chapter 8 कढ़ाई कला drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom 

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom (वनस्पति जगत)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 11 Biology . Here we  given UP Board Solutions for Class 11 Biology chapter 3 Plant Kingdom

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शैवालों के वर्गीकरण का क्या आधार है?
उत्तर :
शैवालों का वर्गीकरण मुख्यतया उनमें उपस्थित वर्णक (pigments), (UPBoardSolutions.com) फ्लेजिला (flagella), संगृहीत खाद्य पदार्थ (storage food product) और कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना (chemical structure of cell wall) के आधार पर किया जाता है।

प्रश्न 2.
लिवरवर्ट, मॉस, फर्न, जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म के जीवन चक्र में कहाँ और कब निम्नीकरण विभाजन (reduction division) होता है?
उत्तर :
लिवरवर्ट तथा मॉस में निम्नीकरण विभाजन कैप्सूल (capsule) की बीजाणु मातृ कोशा (spore mother cell) में होता है। फर्न में निम्नीकरण विभाजन स्पोरेन्जिया (sporangia) की बीजाणु मातृ कोशा (spore mother cell) में होता है। जिम्नोस्पर्म में निम्नीकरण विभाजन माइक्रोस्पोरेन्जियम (microsporangium) में माइक्रोस्पोर (परागकण) के निर्माण के समय तथा मेगास्पोरेन्जियम में मेगास्पोंर (megaspore) के निर्माण के समय होता है। एन्जियोस्पर्म में निम्नीकरण विभाजन परागकोश (anther) की    माइक्रोस्पोरेन्जियम तथा अण्डाशय (ovule) की मेगास्पोरेन्जियम में होता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
पौधों के तीन वर्गों के नाम लिखिए जिनमें स्त्रीधानी (archaegonia) होती है। इनमें से किसी एक के जीवन-चक्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए
उत्तर :
ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा तथा जिम्नोस्पर्म वर्ग के पौधों में स्त्रीधानी पाई जाती है।

मॉस (ब्रायोफाइट पादप) को जीवन-चक्र

इसकी प्रमुख अवस्था युग्मकोभिद् (gametophyte) होती है। युग्मकोभिद् की दो अवस्थाएँ पाई जाती हैं

(क)
शाखामय, हरे, तन्तुरूपी प्रोटोनीमा (protonema) :
का निर्माण अगुणित बीजाणुओं के अंकुरण से होता है। इस पर अनेक कलिकाएँ (UPBoardSolutions.com) विकसित होती हैं जो वृद्धि करके पत्तीमय अवस्था का निर्माण करती हैं।

(ख)
पत्तीमय अवस्था पर नर तथा मादा जननांग समूह के रूप में बनते हैं। नर जननांग को पुंधानी (antheridium) तथा मादा जननांग को स्त्रीधानी (archegonium) कहते हैं। पुंधानी में द्विकशाभिक पुंमणु (antherozoids) तथा स्त्रीधानी में अण्डाणु (ovum) बनता है।निषेचन जल की उपस्थिति में होता है। पुमणु तथा अण्डाणु संलयन के फलस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (oospore) बनाते हैं। युग्मनजे से वृद्धि तथा विभाजन द्वारा द्विगुणित बीजाणुउभिद् (sporophyte) का निर्माण होता है। यह युग्मकोभिद् पर अपूर्ण परजीवी होता है।

बीजाणुउभिद् के तीन भाग होते हैं

  1. पाद (foot)
  2.  सीटा (seta) तथा
  3.  सम्पुट (capsule)
    UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 1

UP Board Solutions

सम्पुट के बीजाणुकोष्ठ में स्थित द्विगुणित बीजाणु मातृ कोशिकाओं से अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित बीजाणु (spores) बनते हैं।
सम्पुट के स्फुटन से बीजाणु मुक्त हो जाते हैं। बीजाणुओं का प्रकीर्णन वायु द्वारा होता है। अनुकूल (UPBoardSolutions.com) परिस्थितियाँ मिलने पर बीजाणु अंकुरित होकर तन्तुरूपी, स्वपोषी प्रोटोनीमा (protonema) बनाते हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित की सूत्रगुणता (ploidy) बताइए मॉस की प्रथम तन्तुक कोशिका, द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केन्द्रक, मॉस की पत्तियों की कोशिका, फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएँ, मारकेंशिया की जेमा कोशिका, एकबीजपत्री की मेरिस्टेम कोशिका, लिवरवर्ट के अण्डाशय तथा फर्न के युग्मनज।
उत्तर :
इनकी सूत्रगुणता निम्नवत् है

  1. मॉस की प्रथम तन्तुक कोशिका – अगुणित (Haploid-X)
  2.  द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केन्द्रक – त्रिगुणित (Triploid-3X)
  3.  मॉस की पत्तियों की कोशिका – अगुणित (Haploid-X)
  4.  फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएँ – अगुणित (Haploid-X)
  5.  मारकेंशियां की जेमा कोशिका – अगुणित (Haploid-X)
  6. एकबीजपत्री की मेरिस्टेम कोशिका – द्विगुणित (Diploid-2X)
  7. लिवरवर्ट का अण्डाशय – अगुणित (Haploid-X)
  8. फर्न का युग्मनज  – द्विगुणित (Diploid-2X)

प्रश्न 5.
शैवाल तथा जिम्नोस्पर्म के आर्थिक महत्त्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
शैवाल का आर्थिक महत्त्व

1. भोजन के रूप में (Algae as Food) :
पृथ्वी पर होने वाले प्रकाश संश्लेषण का 50% शैवालों द्वारा होता है। शैवाल कार्बोहाइड्रेट, खनिज तथा विटामिन्स से भरपूर होते हैं पोरफाइरा (Porphyra), एलेरिया (Alaria), अल्वा (Ulva),सारगासम (Sargassum), लेमिनेरिया (Luminaria) आदि खाद्य पदार्थ (UPBoardSolutions.com) के रूप में प्रयोग किए जाते हैं क्लोरेला (Chlorella) में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन्स तथा विटामिन्स पाए जाते हैं। इसे भविष्य के भोजन के रूप में पहचाना जा रहा है इससे हमारी बढ़ती जनसंख्या की खाद्य समस्या के हल होने की पूरी सम्भावना है

UP Board Solutions

2. शैवाल व्यवसाय में (Algae in Industry) :

  1. डायटम के जीवाश्म/मृत शरीर डायटोमेशियस मृदा (diatomaceous earth or Kiselghur) बनाते हैं। यह मृदा 1500°C ताप सहन कर लेती है। इसका उद्योगों में विविध प्रकार से उपयोग किया जाता है; जैसे–धातु प्रलेप, वार्निश, पॉलिश, टूथपेस्ट, ऊष्मारोधी सतह आदि।
  2. कोन्ड्रस (Chondrus), यूक्यिमा (Eucheuma) आदि शैवालों से कैरागीनिन (carrageenin) प्राप्त होता है। इसका उपयोग शृंगार-प्रसाधनों, शैम्पू आदिबनाने में किया जाता है
  3. एलेरिया (Alaria), लेमिनेरिया (Laminaria) आदि से एल्जिन (algin) प्राप्त होता है। इसका उपयोग अज्वलनशील फिल्मों, कृत्रिम रेशों आदि के निर्माण में किया जाता है  यह शल्य चिकित्सा के समय रक्त प्रवाह रोकने में भी प्रयोग किया जाता है।
  4. अनेक समुद्री शैवालों से आयोडीन, ब्रोमीन आदि प्राप्त की जाती है।
  5.  क्लोरेला से प्रतिजैविक (antibiotic) क्लोरेलीन (Chlorellin) प्राप्त होती है। यह जीवाणुओं को नष्ट (UPBoardSolutions.com) करती है। कारा (Chara) तथा नाइटेला (Nitella) शैवालों की उपस्थिति से जलाशय के मच्छर नष्ट होते हैं; अतः ये मलेरिया उन्मूलन में सहायक होते हैं
  6.  लाल शैवालों से एगार-एगार (agar-agar) प्राप्त होता है, इसका उपयोग कृत्रिम संवर्धन के लिए  किया जाता है।

जिम्नोस्पर्म का आर्थिक महत्त्व

1. सजावट के लिए (Ornamental Plants) :
सोइकस, पाइनस, एरोकेरिया (Arqucurid), गिंगो (Ginkgo), थूजा (Thujq), क्रिप्टोमेरिया (Cryptomeria) आदि पौधों का उपयोग सजावट के लिए किया जाता है।

2. भोज्य पदार्थों के लिए (Plants of Food value) :
साइकस, जैमिया से साबूदाना (sago) प्राप्त होता है। चिलगोजा (Pinus gerardiana) के बीज खाए जाते हैं। नीटम (Gnetum), गिंगो (Ginkgo) व साइकस के बीजों को भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है।

3. फर्नीचर के लिए लकड़ी :
चीड़ (Pinus), देवदार (Cedrus), कैल (Pinus wallichiana), फर (Abies) से प्राप्त लकड़ी का उपयोग फर्नीचर तथा इमारती लकड़ी के रूप में किया जाता है।

4. औषधियाँ (Medicines) :
साइकस के बीज, छाल व गुरुबीजाणुपर्ण को पीसकर पुल्टिस बनाई जाती है। टेक्सस बेवफोलिया (Taxus brevfolia) से टेक्साल औषधि प्राप्त होती है। जिसका उपयोग कैन्सर में किया जाता है। थूजा (Thuja) की पत्तियों को उबालकर बुखार, खाँसी, गठिया रोग के निदान के लिए प्रयोग किया जाता है।
5. एबीस बालसेमिया (Abies balsamea) :
से कैनाडा बालसम, जूनिपेरस (Juniperus) से सिडार वुड ऑयल (cedar wood oil), पाइनस से तारपीन का तेल प्राप्त होता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म दोनों में बीज होते हैं फिर भी उनका वर्गीकरण अलग-अलग क्यों है?
उत्तर :
जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म दोनों का वर्गीकरण अलग-अलग इसलिए किया जाता है क्योंकि जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न (naked seeds) होते हैं, फल अनुपस्थित होते हैं, फूल अनुपस्थित होते हैं, भ्रूणपोष (endosperm) अगुणित (haploid) होता है तथा निषेचन से पहले बनता है। द्विनिषेचन (UPBoardSolutions.com) (double fertilization) अनुपस्थित होता है। वर्तिकाग्र (stigma) अनुपस्थित होता है तथा स्त्रीधानी (archaegonia) पाई जाती है, जबकि एन्जियोस्पर्म के बीज फल से घिरे रहते हैं, फूल उपस्थित होते हैं, भ्रूणपोष त्रिगुणित (triploid) होता है तथा द्विनिषेचन के पश्चात् बनता है। वर्तिकाग्र (stigma) पाया जाता है। तथा स्त्रीधानी (archaegonia) नहीं पाई जाती है।

प्रश्न 7.
विषम बीजाणुकता क्या है? इसकी सार्थकता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। इसके दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
एक पौधे में दो प्रकार के बीजाणुओं (छोटा माइक्रोस्पोर तथा बड़ा मेगास्पोर) की उपस्थिति विषम बीजाणुकता (heterospory) हलाती है। यह कुछ टेरिडोफाइट; जैसे-सिलेजीनेला (Seluginella), साल्वीनिया (Savinia), मालिया (Marsiled) आदि में तथा सभी जिम्नोस्पर्म व एन्जियोस्पर्म में पाई जाती है। विषम बीजाणुकता का विकास सर्वप्रथम टेरिडोफाइट में हुआ था। विषम बीजाणुकता बीज निर्माण प्रक्रिया की शुरूआत मानी जाती है जिसके  फलस्वरूप बीज का विकास हुआ। विषम बीजाणुकता ने नर एवं मादा युग्मकोभिद् (male and female gametophyte) के विभेदने में सहायता की तथा मादा युग्मकोभिद् जो मेगास्पोरेन्जियम के अन्दर विकसित (UPBoardSolutions.com) होता है कि उत्तरजीविता बढ़ाने में सहायता की।

UP Board Solutions

प्रश्न 8.
उदाहरण सहित निम्नलिखित शब्दावली का संक्षिप्त वर्णन कीजिए

  1. प्रथम तन्तु
  2. पुंधानी
  3. स्त्रीधानी
  4. द्विगुणितक
  5. बीजाणुपर्ण तथा
  6. समयुग्मकी

उत्तर :
1.प्रथम तन्तु (Protonema) :
यह हरी, अगुणित (haploid), प्रकाश-संश्लेषी, स्वतन्त्र प्रारम्भिक युग्मकोभिद् (gametophytic) संरचना है जो मॉस (ब्रायोफाइट) में पाई जाती है। यह बीजाणुओं (spores) के अंकुरण से बनती है तथा नये युग्मकोभिद् पौधे का निर्माण करती है।

2. पुंधानी (Antheridium) :
यह बहुकोशिकीय, कवच युक्त (jacketed) नर जनन अंग (male sex organ) है जो ब्रायोफाइट व टेरिडोफाइट में पाया जाता है। पुंधानी में नर युग्मक (male gamete or antherozoids) बनते हैं।

3. स्त्रीधानी (Archaegonium) :
यह बहुकोशिकीय, फ्लास्क के समान मादा जनन अंग (female sex organ) है जो ब्रायोफाइट, टेरिडोफाइट तथा कुछ जिम्नोस्पर्म में पाई जाती है। यह ग्रीवा (neck) तथा अण्डधा (venter) में विभाजित होती है। इसमें एक अण्ड (egg) बनता है।

4. द्विगुणितक (Diplontic) :
यह जीवन-चक्र का एक प्रकार है जिसमें पौधा द्विगुणित (2n) होता है तथा इस पर युग्मकीय अर्धसूत्री (UPBoardSolutions.com) विभाजन (gametic meiosis) द्वारा अगुणित (haploid) युग्मक (gametes) बनते हैं। उदाहरण-फ्युकस, सारगासम।

5. बीजाणुपर्ण (Sporophyll) :
फर्न (टेरिडोफाइट) में बीजाणु (spores) बीजाणुधानियों (sporangia) में पाए जाते हैं। इन बीजाणुधानियों के समूह को सोरस (sorus) कहते हैं। ये पिच्छक या पत्ती (pinna or leaf) की नीचे की सतह (lower surface) पर मध्य शिरा (mid rib) के दोनों ओर दो पंक्तियों में शिराओं के सिरे पर लगी रहती हैं। इन सोराई धारण करने वाल पत्तियों को बीजाणुपर्ण (sporophyll) कहते हैं।

UP Board Solutions

6. समयुग्मकी (Isogamy) :
यह एक प्रकार का लैंगिक जनन है जिसमें संलयन करने वाले युग्मक (gametes) संरचना तथा कार्य में समान होते हैं।

उदाहरण :

  1. यूलोथ्रिक्स (Ulothrs)
  2. क्लेमाइडोमोनास(Chlamydomonas)
  3. तथा एक्ट्रोकार्पस (Ectocarpus)

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में अन्तर कीजिए लाल शैवाल तथा भूरे शैवाल

  1. लिवरवर्ट तथा मॉस
  2.  समबीजाणुक तथा विषमबीजाणुक (UPBoardSolutions.com) टेरिडोफाइट
  3.  युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन

उत्तर :

(i)
लाल शैवाल तथा भूरे शैवाल में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 2
(ii)
लिवरवर्ट तथा मॉस में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 3

(iii)
समबीजाणुक तथा विषमबीजाणुक टेरिडोफाइट में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 4
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 5

(vi)
युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 6

UP Board Solutions

प्रश्न 10.
एकबीजपत्री को द्विबीजपत्री से किस प्रकार विभेदित करोगे?
उत्तर :

एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री पौधे में अन्तर
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 7

UP Board Solutions

प्रश्न 11.
स्तम्भ I में दिए गए पादपों का स्तम्भ-II में दिए गए पादप वर्गों से मिलाने कीजिए
स्तम्भ-I (पादप)                    स्तम्भ-II (वर्ग)
(a) क्लेमाइडोमोनास               (i) मॉस
(b) साइकस                           (ii) टेरिडोफाइट
(c) सिलैजिनेला                       (iii) शैवाल
(d) स्फेगनम                           (iv) जिम्नोस्पर्म
उत्तर :
(a) (iii)
(b) (iv)
(c) (ii)
(d) (i)

प्रश्न 12.
जिम्नोस्पर्म के महत्त्वपूर्ण अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जिम्नोस्पर्म के महत्त्वपूर्ण अभिलक्षण ये सामान्यत: ‘नग्नबीजी पौधे’ कहलाते हैं। इनके मुख्य अभिलक्षण निम्नलिखित हैं

  1. अधिकतर पौधे मरुद्भिदी, (xerophytic), काष्ठीय (woody), बहुवर्षीय (perennial) वृक्ष या झाड़ी होते हैं।
  2. पत्तियाँ प्राय: दो प्रकार की होती हैं-शल्क पर्ण और सत्य पर्ण (scale leaves and foliage leaves) स्टोमेटो निचली सतह पर तथा गत में स्थित होते हैं।
  3. तने में संवहन पूल (vascular bundles), संयुक्त (conjoint), कोलेटरल (UPBoardSolutions.com) m(collateral) तथा खुले (open) होते हैं।
  4. जाइलम (xylem) में वाहिकाओं (vessels) तथा फ्लोएम (phloem) में सह कोशिकाओं श(A) (companion cells) का अभाव होता है।
  5. पौधे विषमबीजाणुक (heterosporous) होते हैं-लघुबीजाणु (microspores) तथा गुरुबीजाणु (megaspores)।
  6. पुष्प शंकु (cones) कहलाते हैं। प्रायः नर और मादा शंकु अलग-अलग होते हैं। पौधे एकलिंगाश्रयी (monoecious) होते हैं। नर शंकु का निर्माण लघुबीजाणुपर्णो (micro SHOOT sporophylls) तथा मादा शंकु का निर्माण गुरुबीजाणुपर्णो से होता है।
  7. नर युग्मकोभिद् (male gametophyte) अत्यन्त ह्रासित (reduced) होता है। परागनलिका (pollen tube) बनती है।
  8. मादा युग्मकोभिद् (female gametophyte) एक गुरुबीजाणु (megaspore) से बनता है। यह बहुकोशिकीय (multicellular) होता है। यह पोषण के लिए पूर्णत: बीजाणुभि पर निर्भर करता है।
  9. भ्रूणपोष अगुणित होता है। यह निषेचन से पहले बनता है।
  10. इन पौधों में सामान्यतः वायु परागण (wind pollination) होता है।
  11. प्राय: बहुभ्रूणता (polyembryony) पाई जाती है; किन्तु अंकुरण के समय केवल एक ही धूण
    विकसित होता है।
  12. नग्न बीजाण्ड से निषेचन तथा परिवर्द्धन के बाद नग्न बीज बनाता है। फल (fruits) नहीं बनते।

UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 8

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सभी शैवालों में पाया जाता है
(क) पर्णहरित-a तथा पर्णहरित-b
(ख) पर्णहरित-b तथा कैरोटीन्स
(ग) पर्णहरित-a तथा कैरोटीन्स
(घ) फाइकोबिलिन्स तथा कैरोटीन्स
उत्तर :
(क) पर्णहरित-a तथा पर्णहरित-b

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा शैवाल भूमि में वातावरण की नाइट्रोजन स्थिर करता है?
(क) ऐनाबीना
(ख) यूलोथ्रिक्स
(ग) स्पाइरोगायरा
(घ) म्यूकर
उत्तर :
(क) ऐनाबीना

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
ऐसीटेबुलेरिया नामक शैवाल के प्रयोगों द्वारा केन्द्रक के महत्व को सर्वप्रथम बताया
(क) वाट्सन ने
(ख) हैमरलिंग ने
(ग) नीरेनबर्ग ने
(घ) रॉबर्ट ब्राउन ने
उत्तर :
(ख) हैमरलिंग ने

प्रश्न 4.
ऐसीटेबुलेरिया है एक
(क) एककोशिकीय हरी शैवाल
(ख) बहुकोशिकीय हरी शैवाल
(ग) एककोशिकीय लाल शैवाल
(घ) बहुकोशिकीय लाल शैवाल
उत्तर :
(क) एककोशिकीय हरी शैवाल

प्रश्न 5.
एल्सिनेट्स, एल्जिनिक अम्ल के लवण हैं जो कोशिका भित्ति में पाये जाते हैं।
(क) रोडोफाइसी के सदस्यों में
(ख) मिक्सोफाइसी के सदस्यों में
(ग) फियोफायसी के सदस्यों में
(घ) क्लोरोफाइसी के सदस्यों में
उत्तर :
(ग) फियोफायसी के सदस्यों में

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
निम्न में से कौन-सा ब्रायोफाइट मृतोपजीवी है?
(क) फ्यूनेरियो
(ख) रिक्सिया
(ग) बक्सबोमिया
(घ) ये सभी
उत्तर :
(ग) बक्सबोमिया

प्रश्न 7.
टेरिडोफाइट्स………..भी कहलाते हैं
(क) फैनेरोगैम्स
(ख) वैस्कुलर क्रिप्टोगैम्स
(ग) क्रिप्टोगैम्स
(घ) एन्जिओस्पर्स
उत्तर :
(ख) वैस्कुलर क्रिप्टोगैम्स।

प्रश्न 8.
प्रवालाभ जड़े (coralloid roots) पायी जाती हैं
(क) साइकस में
(ख) फ्यूनेरिया में
(ग) टेरिस में
(घ) लाइकोपोडियम में
उत्तर :
(क) साइकस में

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसमें चूषक परीगनली पायी जाती है?
(क) पाइनस में
(ख) साइकस में
(ग) हिबिस्कस में
(घ) एलियम में
उत्तर :
(ख) साइकस में

UP Board Solutions

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लाइकेन के दोनों घटकों का नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. कवक
  2.  शैवाल

प्रश्न 2.
चाय की पत्तियों पर लाल किट्ट (Red rust) रोग किस कारण होता है? या एक परजीवी शैवाल का नाम लिखिए।
उत्तर :
सीफैल्यूरोस (Cephaluros) शैवाल से।

प्रश्न 3.
नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने वाले दो नीले-हरे शैवालों के नाम लिखिए। या किसी शैवाल का नाम लिखिए जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण में भाग लेता है।
उत्तर :
नॉस्टॉक तथा ऐनाबीना।

प्रश्न 4.
उस एककोशिकीय शैवाल का नाम लिखिए जो प्रकाश संश्लेषण के अनुसन्धान में प्रयुक्त होता है।
या किस शैवाल में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाई जाती है?
उत्तर :
क्लोरेला (Chlorella)

UP Board Solutions

प्रश्न 5.
एक शैवाल का नाम बताइए जिसमें सर्पिल हरितलवक होते हैं
उत्तर :
स्पाइरोगायरा

प्रश्न 6.
नीले-हरे शैवालों और जीवाणुओं में क्या समानताएँ हैं? या नीले-हरे शैवालों को सायनोबैक्टीरिया क्यों कहते हैं?
उत्तर :

नीले :
हरे शैवाल और जीवाणु दोनों ही मृदा में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। नीले-हरे शैवालों में क्लोरोफिल पाया जाता है जिसकी सहायता से वे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं इसीलिए उन्हें सायनोबैक्टीरिया कहते हैं।

प्रश्न 7.
ब्रायोफाइटा के दो प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर :

  1. इस समुदाय के अधिकांश पौधे हरे होते हैं तथा पृथ्वी पर नम एवं छायादार स्थानों पर उगते हैं। (UPBoardSolutions.com) किन्तु इनमें निषेचन (fertilization) के लिए जल की आवश्यकता होती है, अत: इन्हें पादप जगत का उभयचर (amphibians of the plant kingdom) कहते हैं।
  2. ये पौधे छोटे और थैलस की तरह (thalloid) होते हैं। कुछ उच्च श्रेणी के ब्रायोफाइट्स में वास्तविक (true) जड़े, तना तथा पत्तियाँ तो नहीं होतीं, परन्तु पौधे में तने तथा पत्ती के समान संरचनाएँ मिलती हैं। जड़ों के स्थान पर मूलांग (rhizoids) होते हैं। ये मूलांग पौधों को स्थिर रखने और भूमि से खनिज-लवण का अवशोषण करने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 8.
फ्यूनेरिया के परिमुख में कितने दाँत पाये जाते हैं?
उत्तर :
32 दाँत पाये जाते हैं, जो दो कतारों में (प्रत्येक कतार में 16 दाँत) में व्यवस्थित होते हैं।

UP Board Solutions

प्रश्न 9.
उस पौधे का नाम लिखिए जिसमें परिमुख (peristome) पाया जाता है।
उत्तर :
परिमुख (peristome) अनेक ब्रायोफाइट्स विशेषकर मॉस (mosses), जैसे–फ्यूनेरिया (Fundria) में पाया जाता हैं।

प्रश्न 10.
उस ब्रायोफाइट का नाम लिखिए जिसमें पाइरीनॉइड पाया जाता है।
उत्तर :
एन्थोसिरोस (Anthoceros)

प्रश्न 11.
किस टेरिडोफाइटा का उपयोग जैव उर्वरक के रूप में किया जाता है?
उत्तर :
जलीय टेरिडोफाइट ऐजोला (Azolla) का, क्योंकि इसमें नीला-हरा शैवाल ऐनग्बीना (Anabaena) पाया जाता है।

प्रश्न 12.
टेरिडोफाइटस में रम्भ (स्टील) की विचारधारा किसने प्रस्तुत की थी?
उत्तर :
वान टोघम (Van Tiegham) एवं डुलिट (Doulit) ने।

UP Board Solutions

प्रश्न 13.
टेरिडोफाइट्स के चार प्रमुख लक्षण लिखिए। उत्तर–टेरिडोफाइट्स के चार प्रमुख लक्षण निम्नवत् हैं

  1. मुख्य पौधा बीजाणुभिद् (sporophyte) होता है जो प्रायः जड़, पत्ती तथा स्तम्भ में विभेदित रहता है।
  2. ऊतक तन्त्र विकसित होता है, संवहन बण्डल उपस्थित, इनमें संवहन (UPBoardSolutions.com) ऊतक (vascular tissue), जाइलम एवं फ्लोएम में भिन्नत होता है।
  3. इसमें जाइलम में वाहिकाओं (vessels) तथा फ्लोएम में सह-कोशिकाओं (companion cells) का अभाव होता है।
  4. द्वितीयक वृद्धि (secondary growth) अनुपस्थित, अपवाद स्वरूप आइसोइट्स (Isoetes) में द्वितीयक वृद्धि होती है।

प्रश्न 14.
किस पौधे से तारपीन का तेल प्राप्त किया जाता है? उसका नाम लिखिए।
उत्तर :
अनावृतबीजी पौधे पाइनस से।

प्रश्न 15.
बीरबल साहनी के योगदानों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
प्रो० बीरबल साहनी विश्व के जाने-माने जीवाश्म वनस्पति विज्ञानी (palaeobotanist) थे। उन्हें भारतीय जीवाश्म वनस्पति विज्ञान का जनक (Father of Indian Palaeobotany) कहा जाता है। उनका विशेष योगदान जुरैसिक युग (Jurassic age) के अनावृतबीजी (gymnosperm) विशेषकर एक वर्ग पेण्टोजाइली (pentoxylae) पर शोध कार्य है। उनके प्रयत्नों से, सन् 1946 में विश्व मान्य ‘बीरबल साहनी इन्स्टीट्यूट ऑफ पेलियोबॉटेनी’ (Birbal Sahni Institute of Palaeobotany) लखनऊ की स्थापना हुई। पेलियोबॉटेनिकल सोसायटी ऑफ इण्डिया (Palaeobotanical Society of India) की स्थापना भी उनके ही विशिष्ट प्रयत्नों से हुई।

UP Board Solutions

प्रश्न 16.
उस संरचना का नाम बताइए जो साइकस की पर्णिका में पाश्र्वशिरा का कार्य करती है।
उत्तर :
संचरण ऊतक (transfusion tissue) जिसकी कोशिकाएँ अनुप्रस् रूप में लम्बी होती हैं।

प्रश्न 17.
अनावृतबीजी पौधों के चार प्रमुख लक्षण (विशेषताएँ) लिखिए। या अनावृतबीजी पौधों की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
अनावृतबीजी पौधों के चार प्रमुख लक्षण (विशेषताएँ) निम्नवत् हैं।

  1. इस वर्ग के पौधे प्रायः बहुवर्षीय तथा काष्ठीय होते हैं।
  2. ये मरुद्भिद् स्वभाव के होते हैं जिनमें रन्ध्र पत्ती में धंसे होते हैं तथा बाह्यत्वचा पर उपत्वचा की परत चढ़ी रहती है।
  3.  भ्रूणपोष अगुणित होता है तथा इसका निर्माण निषेचन के पूर्व ही होता है।
  4.  युग्मकोभिद् पीढ़ी बहुत कम विकसित तथा बीजाणुभिद् पीढ़ी पर ही निर्भर होती है।

प्रश्न 18.
भारतीय जीवाश्म वनस्पति विज्ञान (पुरावनस्पति-विज्ञान) का जनक किसे कहा जाता है?
उत्तर :
प्रो० बीरबल साहनी को।

प्रश्न 19.
साइकस तथा फर्न की समानताओं की तुलना कीजिए।
उत्तर :
साइकस तथा फर्न में निम्नलिखित समानताएँ हैं

  1. बीजाणुभिद् का जड़, तना व पत्ती में विभेदन
  2.  अनावृतबीजीयों के गण साइकेडेल्स के सदस्यों की संयुक्त पत्ती में फर्न की भाँति कुण्डलिन विन्यास (circinate venation)
  3. संवहन ऊतक का विकास, दारु या जाइलम में वाहिनियाँ व पोषवाह या (UPBoardSolutions.com) फ्लोएम में सह-कोशिकाएँ अनुपस्थित।
  4. विषमबीजाणुकता (heterospory)
  5. युग्मकोभिद् के आकार में ह्रास।
  6.  बीजाणुभिद् की जटिलता में क्रमिक वृद्धि।
  7. कुछ अनावृतबीजीयों गण साइकेडेल्स, गिंगोएल्स (order Cycadales, Ginkgoales) में बहुपक्ष्माभीय चलनशील पुंमणु (antherozoids)
  8. निषेचन से पूर्व भ्रूणपोष का विकास।

UP Board Solutions

प्रश्न 20.
उभयलिंगी पादप किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
वे पादप जिनमें नर पुष्प एवं मादा पुष्प दोनों अलग-अलग एक ही पादप पर उपस्थित होते हैं, उभयलिंगी पादप कहलाते हैं।

उदाहरणार्थ :

  1. सिडूस देवदार

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यूलोथ्रिक्स और स्पाइरोगाइरा के लैगिक जनन की तुलना कीजिए। या राइजोपस तथा स्पाइरोगाइरा के लैगिक प्रजनन की तुलना कीजिए। 
या चित्रों की सहायता से यूलोथ्रिक्स में लैगिक जनन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :

यूलोथ्रिक्स तथा स्पाइरोगाइरा के लैगिक जनन की तुलना

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 9
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 10
राइजोपस तथा स्पाइरोगाइरा के लैगिक जनन की तुलना
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 11

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 12

प्रश्न 2.
शैवाल तथा कवक में अन्तर बताइए।

उत्तर :
शैवाल तथा कवक में अन्तर

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 13

UP Board Solutions

प्रश्न 3.
निम्नलिखित को ओसवाल्ड टिप्पो के वर्गीकरण के अनुसार वर्गीकृत कीजिए
(i) यूलोथ्रिक्स
(ii) राइजोपस
(iii) साइकस
(iv) गुड़हल (हिबिस्कस)
(v) प्याज (एलियम)
(vi) एलब्यूगो
(vii) अरहर
(viii) पाइनस
(ix) आलू
उत्तर :

(i) यूलोथ्रिक्स

जगत (kingdom)  – पादप (plantae)
उप-जगत (sub -kingdom)  – थैलोफाइटा (thallophyta)
संघ (phylum)   – क्लोरोफाइटा (chlorophyta)
वर्ग (class)    – क्लोरोफाइसी (chlorophyceae)
क्रम (order)   – यूलोट्राइकेल्स (ulotrichales)
उप-क्रम (sub-order)  – यूलोट्राइकिनी (ulotrichineae)
कुल (family)  – यूलोट्राइकेसी (ulotrichaceae)
वंश (genus)  – यूलोथ्रिक्स (Ulothrix)
जाति (species)   – जोनेटा (zonata)

(ii) राइजोपस

जगत व उप-जगत    – यूलोथ्रिक्स के समान
संघ    – यूमाइकोफाइटा (eumycophyta)
वर्ग    – फाइकोमाइसीट्स (phycomycetes)
उप-वर्ग   – जाइगोमाइसीट्स (zygomycetes)
क्रम     – म्यूकोरेल्स (mucorales)
कुल    – म्यूकोरेसी (mucoraceae)
वंश     – राइजोपस (Rhizopus)
जाति    – निग्रीकैन्स (nigricans)

(iii) साइकस

जगत        – पादप (plantae)
उप-जगत – एम्ब्रयोफाइटा (embryophyta)
संघ       – ट्रैकियोफाइटा (tracheophyta)
उप-संघ – टेरॉप्सिडा (pteropsida)
वर्ग         – जिम्नोस्पर्मी (gymnospermae)
उप-वर्ग  – साइकेडोफाइटी (cycadophytae)
क्रम      – साइकेडेल्स (cycadales)
वंश      – साइकस (Cycus)

UP Board Solutions

(iv) गुड़हल

जगत से उप-संघ तक  – साइकस के समान
वर्ग          – एन्जियोस्पर्मी (angiospermae)
उप-वर्ग   – डाइकॉटीलीडनी (dicotyledonae)
विभाग    – पॉलीपिटेली (polypetalae)
श्रेणी       – थैलेमीफ्लोरी (thalamiflorae)
क्रम        – मालवेल्स (malvales)
कुल        – मालवेसी (malvaceae)
वंश        – हिबिस्कस (Hibiscus)
जाति     – रोजासिनेन्सिस (rosasinensis)

(v) प्याज

जगत -से उप-संघ तक – साइकस के समान
वर्ग              – एन्जियोस्पर्मी (angiospermae)
उप-वर्ग       – मोनोकॉटीलीडनी (monocotyledonae)
श्रेणी            – कॉरोनेरी (coronarieae)
कुल             – लिलिएसी (liliaceae)
वंश             – एलियम (Allium)
जाति           – सीपा (cepa)

(vi) एलब्यूगो

जगत           – पादप (plantae)
उप-जगत    – थैलोफाइटा (thallophyta)
संघ             – यूमाइकोफाइटा (eumycophyta)
वर्ग             – फाइकोमाइसिटीज (phycomycetes)
वंश             – एलब्यूगो (Albugo)
जाति           – कैन्डिडा (candida)

UP Board Solutions

(vii) अरहर

जगत            – पादप (plantae)
उप-जगत     – एम्ब्रयोफाइटा (embryophyta)
संघ              – ट्रैकियोफाइटा (tracheophyta)
उप-संघ      – टेरॉप्सिडा (pteropsida)
वर्ग              – एन्जियोस्पर्मी (arigiospermae)
उप-वर्ग      – डाइकॉटीलीडनी (dicotyledonae)
वंश            – कजानस (Cajanus)
जाति          – कजन (cajan)

(viii) पाइनस

जगत          – पादप (plantae)
उप-जगत   – एम्ब्रयोफाइटा (embryophyta)
संघ            – ट्रैकियोफाइटा (tracheophyta)
उप-संघ     – टेरॉप्सिडा (pteropsida)
वर्ग             – जिम्नोस्पर्मी (gymnospermae)
उप-वर्ग      – कोनिफेरोफाइटी (coniferophytae)
गण            – कोनिफेरेल्स (Coniferales)
वंश            – पाइनस (Pinus)
जाति          – रॉक्सबर्थी (roxburghii)

(ix) आलू

जगत          – पादप (plantae)
गण            – सोलेनेल्स (solanales)
कुल           – सोलेनेसी (solanaceae)
वंश            – सोलेनम (Solanum)
जाति          – ट्यूबेरोसम (tuberosum)

UP Board Solutions

प्रश्न 4.
मॉस (फ्यूनेरिया) सम्पुटिका की अनुदैर्घ्य (ऊर्ध्व) काट का नामांकित चित्र बनाइए (वर्णन की आवश्यकता नहीं है) या फ्यूनेरिया के बीजाणुभिद् की अनुदैर्ध्य काट का एक नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर :

मॉस (फ्यूनेरिया) सम्पुटिका (बीजाणुभिद्) 
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 14

प्रश्न 5.
ब्रायोफाइट्स एवं टेरिडोफाइट्स में कोई चार अन्तर लिखिए।
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 15

UP Board Solutions

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के केवल नामांकित चित्र बनाइए
(क) साइकस के सूक्ष्मबीजाणुधानी की लम्ब काट
(ख) साइकस के पत्रक (पर्णक) की अनुप्रस्थ काट
(ग) साइकस के बीजाण्ड की अनुदैर्घ्य काट
उत्तर :

(क)
साइकस के सूक्ष्मबीजाणुधानी की लम्ब काट

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 16
(ख)
साइकस के पत्रक (पर्णक) की अनुप्रस्थ काट

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 17

(ग)
साइकस के बीजाण्ड की अनुदैर्घ्य काट

UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 18

प्रश्न 7.
साइकस की कोरैलॉइड जड़ की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए। यह साइकस की सामान्य जड़ से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर :
साइकस की कोरैलॉइड जड़ की सामान्य जड़ से भिन्नता साइकस की कोरैलॉइड जड़ (coralloid root) सामान्य जड़ से निम्नलिखित विशेषताओं में भिन्न होती है

  1.  कोरैलॉइड जड़े वायवीय (aerial) होती हैं, जबकि सामान्य जड़े भूमिगत होती हैं।
  2. कोरैलॉइड वल्कुट (cortex) बाहरी, मध्य तथा आन्तरिक वल्कुटों में विभक्त होता है जबकि सामान्य जड़ों में सम्पूर्ण वल्कुट एक ही होता है।
  3. कोरेलॉइड जड़ का मध्य वल्कुट वास्तव में एक शैवालीय क्षेत्र (algal zone) होता है (UPBoardSolutions.com) जिसके बड़े-बड़े अन्तराकोशिकीय स्थानों (intercellular spaces) में एनाबीना (Anabaed), नॉस्टॉक (Nostoc) आदि नीले-हरे शैवाल रहते हैं, जो सामान्य जड़ों में नहीं पाये जाते हैं। साइकस की कोरैलॉइड जड़ की अनुप्रस्थ काट
    UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 19

UP Board Solutions

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए
(क) कवक (फफूद)
(ख) टेरिडोफाइट्स
उत्तर
(क) कवकों का आर्थिक महत्त्व कवकों से निम्नलिखित लाभ हैं

1. भोज्य पदार्थों के रूप में (As food) :
अनेक कवकों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन तथा विटामिन होते हैं अतः इन कवकों को भोजन के रूप में काम में लाया जा सकता है। उदाहरण-सब्जी । के रूप में (vegetables) कुकुरमुत्ते (mushrooms), गुच्छी (Morchella), लाइकोपरडॉन (Lycoperdon) आदि। खमीर (yeast) अनेक प्रकार से भोज्य पदार्थों को सुधारने, उनमें विटामिन इत्यादि की मात्रा बढ़ाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

2 औषधि निर्माण में (In medicines) :
अनेक कवकों से अब प्रतिजैविक (antibiotics) प्राप्त किये जाते हैं। एण्टीबायोटिक्स का उपयोग प्रमुखतः जीवाणु रोगों (bacterial diseases) में कियाजाता है। उदाहरण-पेनिसिलिन (penicillin), पेनिसिलियम की जातियों (Penicillium notatum, p chrysogenum), अरगट (ergot) नामक औषधि क्लेविसेप्स परप्यूरिया (Claviceps purpurea) से प्राप्त की जाती है जो रुधिरस्राव (bleeding) रोकने के लिए (विशेषकर प्रसव के समय) प्रयोग में लायी जाती है।

UP Board Solutions

3. उद्योगों में (In industry) :
कवकों से अनेक प्रकार के कार्बनिक अम्ल (organic acids); जैसे— ऑक्सेलिक, लैक्टिक, साइट्रिक अम्ल आदि तथा ऐल्कोहॉल्स’ (alcohols), विकर (enzymes), विटामिन्स (vitamins) आदि रासायनिक पदार्थ बनाये जाते हैं जो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होते हैं।

उदाहरण :
यीस्ट के द्वारा शराबों का निर्माण।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 20
पौधों की वृद्धि के लिए जिबरेलिन्स (gibberellins) उपयोगी सिद्ध हुए हैं। ये जिबरेला फ्यूजीकोराई (Gibberella jugikordi) से तैयार किये जाते हैं। ऐस्पर्जिलस (Aspergillus) तथा पेनिसिलियम (Penicillium) आदि यीस्ट (yeast) के अतिरिक्त पनीर बनाने के काम आते हैं। बेकिंग (baking) उद्योग में यीस्ट अत्यन्त उपयोगी है। अनेक विकर (enzymes) तथा विटामिन्स (vitamins) को औद्योगिक निर्माण यीस्ट, एस्पर्जिलस, राइजोपस (Rhizopus), पेनिसिलियम आदि कवकों के द्वारा किया जाता है। कवक ऑडियम लैक्टिस (Oidium lactis) प्लास्टिक उद्योग में काम आता है।

4. मृदा उर्वरता बनाये रखने में (In maintenance of soil fertility) :
कवक जीवाणुओं की तरह प्राकृतिक अपमार्जक (natural scavengers) का कार्य करते हैं और इस प्रकार भूमि की उर्वरता बढ़ाते हैं। जल को रोकने की शक्ति, ह्यूमस (humus) बनाने में सहयोग, लवणों को। अवशोषित कर उन्हें रोके रखने की शक्ति भी भूमि में उत्पन्न करते हैं।

5. पौधों के पोषण में (In nutrition of plants) :
अनेक पौधों की जड़ों पर या उनके अन्दर कुछ कवक (fungi) रहते हैं। इन्हें क्रमशः एक्टोट्रॉफिक माइकोराइजा तथा एण्डोट्रॉफिक माइकोराइजी (ectotrophic and endotrophic mycorrhiza) कहते हैं। अनेक ऑरकिड्स (orchids), मोनोटोपा यूनीफ्लोरा (Monotropd uniflora), साराकोड्स (Sardcodes), पाइनस (Pinus), जैमिया (Zamia) आदि इसके उदाहरण हैं।

UP Board Solutions

(ख)
टेरिडोफाइट्स का आर्थिक महत्त्व

टेरिडोफाइट्स से निम्नलिखित लाभ हैं

1. जैव उर्वरक के रूप में (As Biofertilizer) :
एजोला के अन्दर एनाबीना ऐजोली (Anabdena gzotlae) नामक नीला-हरा शैवाल वास करता है। यह शैवाल स्वतन्त्र नाइट्रोजन को स्थिरीकरण करता है।
इस कारण से एजोला को धान आदि के खेतों में उर्वरक (fertilizer) के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह पौधा तालाब की सतह पर अधिक वृद्धि करके मच्छर के लार्वा को साँस लेने में अवरोध करता है।

2. सजावट के लिए (Ornamental Plants) :
फर्न की विभिन्न जातियाँ घरों व बगीचों में सुन्दरता के लिए लगाई जाती हैं; जैसे-लाइकोपोडियम (ground pines) तथा सैलाजिनेला (spike mosses) आदि।

3. खाद्य पदार्थ के रूप में (As Food) :
क्विलक्स (आइसोइट्स- Isoetes) के घनकन्द (corms), मनुष्यों, पालतू व जंगली जन्तुओं द्वारा खाए जाते हैं।

4. मनोरंजन हेतु (For Entertainment) :
सैलाजिनेला की कुछ मरुभिद् जातियों को पुनर्जीवनी पौधे (resurrection plant) कहा जाता है, इन्हें कौतुहल वश बाजार में बेचा जाता है। ये पौधे सूख जाने पर मुड़कर छोटी गेंद (balls) के रूप में बदल जाते हैं और पूर्णतया मृत प्रतीत होते हैं। पुन: जल में डाल दिए जाने पर पौधे तेजी से पूर्णतया खुलकर हरे हो जाते हैं।

5. जीवाश्म ईंधन का निर्माण (Formation of Fossil Fuel) :
टेरिडोफाइट्स जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) के जमा होने में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हैं। आदि काल में ये विशाल हार्सटेल्स (giant horsetails), क्लब मॉस आदि दलदली वनस्पति (swampy vegetation) का प्रमुख अंश थे। दलदल धीरे-धीरे डूबने लगे और पौधों के विभिन्न भाग एकत्रित होते गए। जल में ऑक्सीजन के अभाव में इन पौधों को जीवाणु विघटित (decompose) नहीं कर पाए। इन परिस्थितियों के कारण कालान्तर में कोयले (coal) का निर्माण हुआ।

6. जीवनाशक के रूप में (As Pesticides) :
लाइकोपोडियम (Lycopodium) की अनेक जातियाँ नाइट्रोजनयुक्त रसायन (alkaloids) बनाती हैं। यह विष का कार्य करता है। अत: कुछ देशों में इसे जीवनाशक (pesticides) के रूप में प्रयोग किया जाता है।

UP Board Solutions

प्रश्न 2.
उपयुक्त नामांकित चित्रों के द्वारा फर्न के जीवन चक्र का वर्णन कीजिए। मॉस के वयस्क पौधे की समानता फर्न के जीवन चक्र की किस अवस्था से की जा सकती है? कारण सहित लिखिए। या पीढी एकान्तरण की परिभाषा लिखिए। नामांकित चित्रों की सहायता से इसे फर्न के जीवन चक्र के साथ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

पीढी एकान्तरण

लैंगिक जनन (sexual reproduction) के समय जब दो युग्मकों (gametes) के संलयन (fusion) से युग्मज (Zygote) का निर्माण होता है तो एम्ब्रयोफाइटा (embryophyta) समूह के पोधों में यह सूत्री विभाजन के द्वारा एक बहुकोशिकीय (multicellular) स्पष्ट भ्रूण (embryo) का निर्माण करता है। यह भ्रूण एक द्विगुणित संरचना है तथा एक विशेष अवस्था है जो एक द्विगुणित पीढ़ी या सन्तति (diploid generation) का निर्माण करती है। इस पीढ़ी को बीजाणुभिद् (sporophyte) कहते हैं। बीजाणुभिद् बीजाणुओं (spores) द्वारा जननकरता है, जो अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) के बाद बनते हैं और अगुणित (haploid) होते हैं। प्रत्येक बीजाणु अंकुरित होता है और सामान्य सूत्री विभाजनों द्वारा बहुकोशिकीय अवस्था अर्थात्यु ग्मकोभिद् (gametophyte) पीढ़ी का निर्माण करता है। इसी पीढ़ी से युग्मकों का निर्माण होता है। उपर्युक्त के अनुसार, एक एम्ब्रयोफाइटिक पौधे (embryophytic plant) में दो पीढ़ियाँ (generations), युग्मकोद्भिद् तथा बीजाणुभिद् एक जीवन चक्र (life cycle) को बनाती हैं। इस प्रकार युग्मकोभिद् पीढ़ी से बीजाणुभिद् पीढ़ी तथा बीजाणुभिद् पीढ़ी से युग्मकोभिद् पीढ़ी का एक के बाद एक आना पीढ़ियों का एकान्तरण (alternation of generations) कहलाता है।

एक फर्न, टेरिस या ड्रायोप्टेरिस का जीवन चक्र

विभाग ट्रैकियोफाइटा (tracheophyta) के उपविभाग टेरोफाइटा या फिलिकोफाइटा (pterophyta or filicophyta), वर्ग लेप्टोस्पोरैन्जियोप्सडा (leptosporangiopsida), गण फिलिकेल्स (filicales) के सदस्य सामान्यत: फर्न (fern) कहलाते हैं। इन पौधों के जीवन चक्र सामान्य रूप से समान प्रकार के होते हैं। यहाँ वर्णन प्रमुखतः ड्रायोप्टेरिस फिलिक्स मैस (Dryoteris filix mas) नामक पौधे के सन्दर्भ में है।
1. बीजाणुभिद् (Sporophyte) :
यह फर्न का मुख्य पौधा होता है। इसके तीन प्रमुख भाग होते हैं

  1.  प्रकन्द (rhizome), जो भूमि में तिरछा उगता है। इसका केवल अगला शीर्ष भाग ही भूमि से बाहर निकला रहता है।
  2.  प्रकन्द से निकलने वाली अनेक पत्तियाँ तथा
  3.  अपस्थानिक जड़े। फर्न के पौधे में पत्तियाँ विशेष रूप से काफी बड़ी सामान्यतः द्विपिच्छाकार संयुक्त (bipinnate compound) होती हैं और ये पौधे की प्रमुख पहचान हैं।

2. बीजाणुपर्ण (Sporophylls) :
कुछ सामान्य पत्तियाँ ही बीजाणुपर्ण (sporophylls) का कार्य करती हैं। इन पत्तियों के पर्णकों की निचली सतह पर अनेक बीजाणुधानियाँ (sporangia) समूहों के रूप में लगी रहती हैं। बीजाणुधानियों के समूहों को सोराई (sori) कहा जाता है।

3. सोरस तथा उसकी बीजाणुधानियाँ (Sorus and its sporangia) :
प्रत्येक सोरस में कई बीजाणुधानियाँ होती हैं। प्रत्येक बीजाणुधानी की भित्ति एक कोशिका मोटी होती है तथा इसमें 12 से 16 तक बीजाणु मातृ कोशिकाएँ (spore mother cells) होती हैं। प्रत्येक बीजाणु मातृकोशिका (2n) से अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) के द्वारा चार अगुणित (haploid=n) बीजाणुओं (spores) का निर्माण होता है। इस प्रकार फर्न का पौधा जो एक बीजाणुभिद् होता है, बीजाणुओं के द्वारा अलैंगिक जनन (asexual reproduction) करता है।

4. बीजाणुधानी का स्फुटन तथा बीजाणुओं का प्रकीर्णन (Dehiscence of sporangium and dispersal of spores) :
शुष्क अवस्थाओं में सोरस तथा बीजाणुधानी का स्फुटन एक विशेष प्रकार से होता है। इससे बीजाणु (spores) दूर तक छिटक जाते हैं तथा वायु में तैरतेहुए भूमि पर पहुँचकर अंकुरित होते हैं।

5. युग्मकोभिद् (Gametophyte) :
प्रत्येक बीजाणु अनुकूल अवस्थाओं में अंकुरित होकर एक नयी पीढ़ी को जन्म देता है। यह एक पूर्णतः (UPBoardSolutions.com) स्वतन्त्रजीवी, पौधे की तरह की संरचना बनाता है। इसे प्रोथैलस (prothallus) कहते हैं। यही फर्न की प्रमुख युग्मकोभिद् (gametophyte) अवस्था है।

6. प्रोथैलस (Prothallus) :
यह एक हरे रंग की चपटी, पतली, हृदयाकार (heart shaped) तथा शयान (prostrate) संरचना होती है और भूमि पर लेटी हुई दशा में बढ़ती है। इसका अग्र भाग चौड़ा होता है तथा इसके मध्य भाग में एक गर्त (notch) होता है जिसके दोनों ओर की पालियाँ एक-दूसरे को ढकने वाली (overlapping) होती हैं। प्रोथैलस के पश्च, संकरे सिरे के निचले भागे से मूलाभास (rhizoids) निकलते हैं। यह स्वपोषी (autotrophic) होता है।

UP Board Solutions

7. जननांग (Reproductive organs) :
फर्न का प्रोथैलस एक उभयलिंगाश्रयी (monoecious) संरचना है अर्थात् एक ही प्रोथैलस पर नर तथा मादा जननांग बन जाते हैं यद्यपि केवल परनिषेचन (cross fertilization) ही होता है। नर जननांग पुंधानियाँ (antheridia) होती हैं तथा मादा जननांग
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 21

स्त्रीधानियाँ (archegonia) होती हैं। जननांग प्रोथैलस के मध्य तथा पश्च भाग तक फैले अधिक मोटे (thick), गद्दी (cushion) के समान भाग पर बनते हैं। स्त्रीधानियाँ गर्त (notch) के आस-पास किन्तु पुंधानियाँ पश्च भाग में बनती हैं।

8. पुंधानी तथा नर युग्मक (Antheridium and male gametes) :
एक परिपक्व पुंधानी प्रोथैलस के तल से बाहर उभरी होती है। यह एक गोल, एककोशिका मोटी भित्ति वाली संरचना होती है। इसके अन्दर 20-50 तक नर युग्मक (male gametes) अर्थात् पुमणुओं (antherozoids) का निर्माण होता है। पुमणु एक सिंप्रग के समान कुण्डलित, (UPBoardSolutions.com) बहुपक्ष्माभिकी (multicilliate) तथा सचल (motile) होते हैं। ये रसायन अनुचलित (chemotactic) होते हैं और जल में तैरकर स्त्रीधानी तक पहुँचते हैं।

9. स्त्रीधानी तथा मादा युग्मक (Archegonium and female gamete) :
एक परिपक्व स्त्रीधानी (archegonium) फ्लास्क के समान तिरछी गर्दन वाली संरचना होती है। इसकी गर्दन, चार ऊर्ध्व पंक्तियों में लगी कोशिकाओं से बनी होती है। इसके फूले हुये भाग अण्डधा (venter) का कोई अपना स्तर नहीं होता। यह प्रोथैलस में ही धंसी रहती है। इसकी गर्दन में ग्रीवा नाल कोशिका (neck canal cell) एक ही, किन्तु द्विकेन्द्रकीय (binucleate) होती है। इसके अतिरिक्त एक अण्डधा नाल कोशिका (venter canal cell) तथा सबसे भीतरी फूले हुये भाग में एक अण्डाणु (oosphere) होता है। अण्डाणु ही अचल (non-motile) मादा युग्मक है।

UP Board Solutions

10. निषेचन (Fertilization) :
निषेचन की क्रिया के लिए जल आवश्यक होता है। स्त्रीधानी के परिपक्व होने पर इसका मुँह खुल जाता है। इस समय मुंह पर उपस्थित कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं, साथ ही ग्रीवा नाल कोशिका तथा अण्डधा नाल कोशिका नष्ट होकर श्लेष्मक बना लेती हैं। श्लेष्मक मुँह से भी बाहर निकलने लगता है जिसमें उपस्थित मैलिक अम्ल (malic acid) से आकर्षित होकर पुमणु जल में तैरते हुये स्त्रीधानी में घुस आते हैं। इनमें से एक अण्डाणु (oosphere) में प्रवेश कर इसे निषेचित (fertilize) करता है। इस प्रकार अण्डाणु से द्विगुणित (diploid = 2n) युग्मनज (zygote) बनता है। शीघ्र ही युग्मनज अपने चारों ओर एक मोटी भित्ति का निर्माण करता है और निषिक्ताण्ड (oospore) में बदल जाता है।
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 22

11. भ्रूण तथा नये बीजाणुभिद् का निर्माण (Formation of embryo and new sporophyte) :
निषिक्ताण्ड (oospore) सामान्य सूत्री विभाजनों (mitotic divisions) से बार-बार एक विशेष पैटर्न में विभाजित होता है तथा एक भ्रूण (embryo) का निर्माण करता है। एक प्रोथैलस पर यद्यपि कई स्त्रीधानियों में निषेचन तथा उससे आगे की अन्य क्रियाएँ हो सकती हैं, किन्तु सामान्यतः भ्रूण एक ही निर्मित हो पाता है। यही भ्रूण बढ़ते हुये अण्डधा द्वारा बनाये गये कैलिप्ट्रा (calyptra) को भी तोड़-फोड़ देता है। इसका एक भाग पाद की तरह प्रोथैलस से सम्बन्धित (UPBoardSolutions.com) रहता है, किन्तु शीघ्र ही एक मूल कुछ दूरी तक प्रोथैलस के साथ बढ़कर बढ़ते हुये भ्रूण को मृदा में जमा देती है। उधर प्ररोह शीर्ष पर लगी प्राथमिक पत्ती प्रोथैलस के गर्त में से होकर ऊपर निकल आती है और हरी हो जाती है। शीर्ष अब प्रकन्द (rhizome) में बदल जाता है। इस प्रकार एक छोटा-सा नया बीजाणुभिद् (new sporophyte) तैयार हो जाता है। उपर्युक्त विवरण स्पष्ट करता है कि यहाँ पीढ़ियों को एकान्तरण दो स्पष्ट, स्वतन्त्रजीवी, स्वपोषी सन्ततियों अर्थात् प्रोथैलस (युग्मकोद्भिद्) तथा मुख्य पौधे (बीजाणुभिद्) के मध्य होता है मॉस का वयस्क पौधा (adult plant of moss) मॉस के जीवन चक्र की युग्मकोभिदी (gametophytic) पीढ़ी है। फर्न के जीवन चक्र में प्रमुख युग्मकोभिद् इसका प्रोथैलस (prothallus) होता है।

UP Board Solutions

निम्नलिखित कारण इसे स्पष्ट करते हैं

  1. दोनों की कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या अगुणित (n) होती है।
  2.  दोनों का निर्माण बीजाणु (spore) के अंकुरण से बने सूत्राकार संरचनाओं पर होता है।
  3. दोनों ही लैंगिक जनन के लिए नर तथा मादा जननांगों अर्थात् पुंधानियाँ व स्त्रीधानियाँ (antheridia and archegonia) तथा उनसे क्रमश: नर व मादा युग्मकों अर्थात् एन्थ्रोजोइड्स (antherozoids) व अण्डाणु (oosphere) का निर्माण करते हैं।
  4. निषेचन के बाद दोनों के ऊपर नये बीजाणुभिदों (sporophytes) का निर्माण होता है।
  5. निषेचन तथा बीजाणुभिद् के परिवर्द्धन की अवस्थाओं आदि में भी काफी समानता होती है।

प्रश्न 3.
नामांकित चित्रों की सहायता से आवृतबीजी पौधों के जीवन चक्र का वर्णन कीजिए। या एक द्विबीजपत्री पौधे के जीवन चक्र का नामांकित रेखीय चित्र बनाइए।
उत्तर :
आवृतबीजी (द्विबीजपत्री) पौधे का जीवन चक्र एक आवृतबीजी पौधा एक अत्यधिक विकसित तथा जटिल शरीर वाला बीजाणुभिद् (sporophyte) होता है अर्थात् यह द्विगुणित (diploid = 2n) होता है। इसके जीवन चक्र की प्रमुख अवस्थाएँ

निम्नलिखित होती हैं

1. पौधे पर पुष्प (flowers) लगते हैं जिनमें लैंगिक अंग (sexual organs) क्रमशः नर तथा मादा पुंकेसर (stamens) और स्त्रीकेसर या अण्डप (carpels) होते हैं।

2. प्रत्येक पुंकेसर का जनन भाग विशेष अंग परागकोष (anther) होता है जिसके अन्दर विशेष  कोशिकाओं द्विगुणित  (diploid=2n) लघुबीजाणु मातृ कोशिकाओं (microspore mother cells) में अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) के द्वारा अगुणित (haploid=n) लघुबीजाणुओं (microspores) का निर्माण होता है। लघुबीजाणु ही युग्मकोभिद् (gametophyte) की प्रथम अवस्था है

3. प्रत्येक स्त्रीकेसर या अण्डप (carpel) में अण्डाशय (ovary) के अन्दर बीजाण्ड (ovule) बनते हैं, जो इसकी गुरुबीजाणुधानियाँ (megasporangia) हैं।

4. बीजाण्ड के मुख्य भाग बीजाण्डकाय (nucellus) में एक बीजाणु मातृ कोशिका (megaspore mother cell) से चार गुरुबीजाणुओं (megaspores) का निर्माण होता है जो इसके मादा युग्मकोभिद् (female gametophyte) की प्रारम्भिक अवस्था है

5. प्रत्येक बीजाण्ड में बनने वाले चार गुरुबीजाणुओं में से केवल एक बढ़कर भ्रूणकोष (embryo sac) बनाता है। यही इसका मादा युग्मकोभिद् है जिसमें प्राय: केवल आठ केन्द्रक ही होते हैं, इनमें एक मादा युग्मक (female gamete) या अण्ड (ovum or egg cell) भी सम्मिलित है।

6. परिपक्व नर युग्मकोभिद् या परागकण केवल दो ही कोशिकाओं का बना होता है तथा इसी अवस्था में परागण के लिए यह परागकोष से बाहर निकलता है।

7. परागण (pollination) की क्रिया के द्वारा परागकण मादा अंग जायांग के वर्तिकाग्र पर किसी साधन से पहुँचते हैं और यहीं अंकुरित होकर पराग नलिका (pollen tube) बनाते हैं। प्रत्येक पराग नलिका के सिरे पर नर युग्मकोभिद् का वर्दी केन्द्रक या नलिका केन्द्रक (tube nucleus) (UPBoardSolutions.com) तथा थोड़ा जनन केन्द्रक (generative nucleus) होता है, जो बाद में पराग नलिका में ही विभाजित होकर दो नर युग्मक (male gametes) बनाता है। पराग नलिका वर्तिका से होती हुई अण्डाशय में तथा बाद में बीजाण्ड के अन्दर प्रवेश करके नर युग्मकों (male gametes) को भ्रूणकोष (embryo sac) के अन्दर पहुँचाती है।

UP Board Solutions
UP Board Solutions for Class 11 Biology Chapter 3 Plant Kingdom image 23

8. दो नर युग्मकों में से, एक मादा युग्मक (अण्ड कोशिका) से संयुग्मित होता है तथा दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus) से संयुक्त होता है। इस प्रकार, इन पौधों में दिनिषेचन (double fertilization) की क्रिया होती है।

9. द्वितीयक केन्द्रक पहले ही दो ध्रुवीय केन्द्रकों के मिलने से बनता है; अत: द्विनिषेचन के अन्त में दौ भिन्न-भिन्न प्रकार के केन्द्रक बनते हैं–एक द्विगुणित (diploid=2n) अब भ्रूणीय कोशिका (embryonal cell) में उपस्थित तथा दूसरा प्रायः त्रिगुणित (triploid=3n) अर्थात् भ्रूणपोष केन्द्रक (endospermic nucleus) जो सम्पूर्ण भ्रूणकोष का प्रतिनिधित्व करने वाले जीवद्रव्य में स्थित होता है।

10. भ्रूणीय कोशिका (embryonal cell) से भ्रूण (embryo) का निर्माण होता है। भ्रूणपोषीय केन्द्रक (endospermic nucleus) भ्रूणकोष के जीवद्रव्य के साथ एक पोषक संरचना भ्रूणपोष (endosperm) का निर्माण करता है।

11. सम्पूर्ण बीजाण्ड भ्रूण और भ्रूणपोष के बनने से बीज में बदल जाता है, जबकि अण्डाशय फल (UPBoardSolutions.com) (fruit) बनाता है। बीज के अन्दर भ्रूण नया बीजाणुभिद् (sporophyte) है; अतः ये जब भी अंकुरित होते हैं तो नये पौधे बनाते हैं।

We hope the UP Board Solutions for Class 11 Biology chapter 3 Plant Kingdom  help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 11 Biology chapter 3 Plant Kingdom, drop a comment below and we will get back to you at the earliest.