UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 17 हैदर अली (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

हैदर अली अपने परिश्रम, दूरदर्शिता, कुशाग्र बुद्धि, असाधारण प्रतिभा तथा योग्यता के बल पर एक सिपाही के पद से मैसूर राज्य के शासक बने। इनका जन्म सन् 1721 में मैसूर राज्य के सामान्य परिवार में हुआ था। बचपन में ही इनके पिता (UPBoardSolutions.com) जी मृत्यु हो गई थी। इन्होंने मैसूर की सेना में नौकरी कर ली और फिर अपनी कुशाग्र बुद्धि से मैसूर के शासक बन बैठे। मराठे, निजाम तथा अँग्रेज सभी इनकी वीरता का लोहा मानते थे। इन्होंने अँगेजी सेना तक को सन्धि के लिए मजबूर कर दिया था। हैदरअली एक धर्म-निरपेक्ष शासक थे और हिन्दुओं के त्योहारों में स्वयं उपस्थित होते। इनके सिक्कों पर भी एक ओर त्रिशूल लिए शिव और पार्वती की आकृतियाँ बनी हुई थीं।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
हैदर अली मैसूर के शासक किस प्रकार बने?
उत्तर:
मैसूर के राजा के स्वर्गवासी हो जाने पर (UPBoardSolutions.com) वह स्वयं मैसूर के शासक बन गए।

प्रश्न 2:
अँग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करने में हैदर अली को सफलता क्यों नहीं मिली?
उत्तर:
अँग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करने में हैदर अली को सफलता नहीं मिली; क्योंकि वह अकेला ही अँग्रेजों से जूझते रहे।

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प्रश्न 3:
किस आधार पर हम कह सकते हैं कि हैदर अली धर्म निरपेक्ष शासक थे ?
उत्तर:
हैदर अली हिंदुओं और मुसलमानों में किसी (UPBoardSolutions.com) प्रकार का भेद-भाव नहीं करते थे। उनके सिक्के पर एक ओर त्रिशूल लिए शिव और पर्वती की आकृतियाँ बनी थीं। महानवमी का त्योहार वे विशेष उत्साह वे मनाते थे। दशहरे के दिन हाथी, ऊँट तथा घोड़ों के साथ शानदार जुलूस निकलता था। हैदर अली हाथी पर बैठकर जुलूस के साथ चलते थे। भगवान राम की सवारी के पास पहुँचकर वे उनका दर्शन करते और आशीर्वाद लेते थे। इस आधार पर हम कह सकते है कि हैदर अली धर्म निरपेक्ष शासक थे।

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प्रश्न 4:
हैदरअली को किन विशेषताओं के कारण जाना जाता है ?
उत्तर:
हैदर अली एक कुशल प्रशासक थे। अपनी प्रजा को समान दृष्टि से देखते थे। वे न्याय प्रिये एवं अनुशासन प्रिय थे। वे स्वयं भी अनुशासन में रहते थे। वे किसानों के हितों का ध्यान रखते थे। दीन-दुखियों की सहायता के लिए सदैव तैयार (UPBoardSolutions.com) रहते थे। हैदर अली के शासनकाल में मैसूर की प्रजा सुखी और संपन्न थी। इन्हीं विशेषताओं के कारण हैदर अली को जाना जाता है।

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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 11 मीराबाई (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 11 मीराबाई (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

मीराबाई मेवाड़ के रतनसिंह राठौर की एकमात्र कन्या थी। इसका जन्म . सन् 1498 ई० में राजस्थान में हुआ। बचपन में ही इनकी माता की मृत्यु हो जाने से इनका लालन-पालन दादा रावदूदा ने किया। रावदूदा वैष्णव भक्त थे। मीरा.पर दादा के विचारों और क्रियाओं का प्रभाव होने के कारण ये बचपन से ही श्री कृष्ण की अनन्य भक्त बन गईं। मीरा का विवाह राणा के ज्येष्ठ पुत्र महाराज कुँवर भोजराज से हुआ। सुखी जीवन बिताते हुए ये पति सेवा और उपासना में लगी रहती थीं। दस वर्ष बाद पति की मृत्यु हो जाने पर मीरा श्री कृष्ण की आराधना में लीन हो गईं। इनकी भक्ति की चर्चा सुनकर (UPBoardSolutions.com) सन्त लोग दर्शन करने आने लगे। भाव-विभोर होकर मीरा संतों के साथ नाचने लगतीं। मीरा की सास, ननद-ऊदा और राणा विक्रम सिंह को मीरा का रहन-सहन बुरा लगता था। उन सबने मीरा को बहुत कष्ट दिया। इससे मीरा का कृष्ण के प्रति लगाव और बढ़ता गया। राणा ने मीरा को मारने के लिए जहर दिया; परन्तु उस पर कुछ प्रभाव नहीं पड़ा।

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मीराबाई निर्भीक महिला थीं। इन्होंने रूढ़िवादी परम्पराओं को तोड़ा। ये पहले वृन्दावन और बाद में द्वारका चली गईं और शेष जीवन भक्तों की तरह बिताने लगीं। द्वारका में ये प्रतिदिन श्री । द्वारकाधीश मन्दिर जाती थीं। द्वारका में रहते हुए ही इनका निधन हुआ। मीराबाई में अपूर्व काव्य क्षमता थी। इन्होंने ब्रजभाषा, राजस्थानी, गुजराती भाषा में अपने भावों को सरल शब्दों में व्यक्त किया है। मीरा के पदों ने जन-जन को प्रभावित किया। (UPBoardSolutions.com) इनका सम्बन्ध किसी सम्प्रदाय विशेष से नहीं था। इन्होंने निजी साधना को मान्यता दी। इनकी उपासना माधुर्य भाव की थी और ये श्री कृष्ण को पति रूप में पूजती थीं। मीराबाई ने उच्चकोटि की भक्ति साधना से अपना, समाज, साहित्य और ३ क कल्याण किया। ये भारतीय नारी समाज का गौरव थीं। इनके पद हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि हैं।

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अभ्यास-प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

प्रश्न 1:
बचपन में मीराबाई पर उनके दादा जी का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
बचपन में मीराबाई पर उनके दादा रावदूदा जी की भक्ति (UPBoardSolutions.com) भावना का बहुत प्रभाव पड़ा। मीरा श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त बन गईं।

प्रश्न 2:
मीराबाई की ससुराल वाले मीरा से क्यों अप्रसन्न थे?
उत्तर:
मीराबाई के ससुराल वाले रूढ़िवादी थे। उन्हें मीरा की भक्ति भावना और उनका रहन-सहन पसन्द नहीं था।

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प्रश्न 3:
मीराबाई के पदों ने जन सामान्य को अधिक प्रभावित क्यों किया?
उत्तर:
भोराबाई ने अपनी भक्ति भावना को (UPBoardSolutions.com) सीधे-सरल शब्दों में व्यक्त किया। उनके हृदय की बात उनके पदों में फूट पड़ी, जिसका जन-जन पर प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 4:
सही कथन के सामने (✓) का निशान तथा गलत कथन के सामने (✘) का निशान लगाइए ( निशान लगाकर )
(अ) पति की मृत्यु के बाद मीराबाई का मन कृष्ण भक्ति में नहीं लगता था। (✘)
(ब) मीराबाई के ऊपर अपने दादा जी के संस्कारों (UPBoardSolutions.com) का बहुत प्रभाव पड़ा। (✓)
(स) राणा विक्रम सिंह ने मीरा को तरह-तरह के कष्ट दिये। (✓)
(द) मीराबाई को देहावसान जटापुर में ही हुआ। (✘)
(य) मीराबाई की रचनाओं में ब्रजभाषा, राजस्थानी, गुजराती भाषाओं के शब्द मिलते हैं। (✓)

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प्रश्न 5:
निम्नलिखित पदों को पूरी कीजिए (पदों को पूरा करके)

(क) विष का प्यालो राणा जी भज्यो पीवत मीरा हाँसी रे,
मैं तो अपने नारायण की आप ही हो गई दासी रे।।

(ख) मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जाके (UPBoardSolutions.com) सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥

प्रश्न 6:
सही मिलान कीजिए
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प्रश्न 7:
नोट- विद्यार्थी स्वयं करें। (UPBoardSolutions.com)

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UP Board Solutions for Class 9 Hindi विभिन्न युगों के कवि और उनकी रचनाएँ

UP Board Solutions for Class 9 Hindi विभिन्न युगों के कवि और उनकी रचनाएँ

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UP Board Solutions for Class 9 Hindi पाठ्य-पुस्तक में दिये गये प्रश्न एवं उनके उत्तर

UP Board Solutions for Class 9 Hindi पाठ्य-पुस्तक में दिये गये प्रश्न एवं उनके उत्तर

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किस काल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग कहा जाता है?
उत्तर :
भक्तिकाल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग कहा जाता है।

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प्रश्न 2.
निर्गुण काव्यधारा की शाखाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
निर्गुण काव्यधारा की शाखाएँ हैं-

  • ज्ञानमार्गी तथा
  • प्रेममार्गी।

प्रश्न 3.
सगुण काव्यधारा की शाखाओं के नाम बताइए।
उत्तर :
सगुण काव्यधारा की शाखाएँ हैं–

  • रामभक्ति शाखा तथा
  • कृष्णभक्ति शाखा।

प्रश्न 4.
सगुण भक्ति शाखा के दो कवियों के नाम, उनकी एक-एक रचनाओं के साथ लिखिए।
उत्तर :

  • तुलसीदास-रामचरितमानस।
  • सूरदास-सूरसागर

प्रश्न 5.
निर्गुण भक्ति शाखा के दो कवियों के नाम उनकी एक-एक रचनाओं के साथ लिखिए।
उत्तर :

  • मलिक मुहम्मद जायसी-पद्मावत
  • कुतुबन-मृगावती।।

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प्रश्न 6.
कबीर के अतिरिक्त दो प्रमुख सन्त कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  • रैदास तथा
  • मलूकदास।

प्रश्न 7.
सूफी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि का नाम बताइए।
उत्तर :
सूफी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं-मलिक मुहम्मद जायसी।

प्रश्न 8.
रामभक्ति धारा के प्रतिनिधि कवि का नाम बताइए।
उत्तर :
रामभक्ति धारा के प्रतिनिधि कवि हैं-गोस्वामी तुलसीदास

प्रश्न 9.
सन्त काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि का नाम बताइए।
उत्तर :
सन्त काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि कबीरदास हैं।

प्रश्न 10.
कृष्णभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
कृष्णभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि सूरदास जी हैं?

प्रश्न 11.
रामभक्ति काव्य की रचना किन भाषाओं में हुई?
उत्तर :
रामभक्ति काव्य की रचना अवधी और ब्रजभाषा में हुई।

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प्रश्न 12.
आदिकाल के विभिन्न नाम बताइए।
उत्तर :
आदिकाल को वीरगाथा काल, चारण काल, अपभ्रंश काल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल, भट्टकाल आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है।

प्रश्न 13.
पूर्व-मध्यकाल किस काल को कहते हैं?
उत्तर :
भक्तिकाल को पूर्व-मध्यकाल कहते हैं।

प्रश्न 14.
आदिकाल की अवधि लिखिए।
उत्तर :
आदिकाल की अवधि 743 ई० से 1343 ई० तक है।

प्रश्न 15.
आदिकाल की भाषा का नाम बताइए।
उत्तर :
आदिकाल की भाषा का नाम डिंगल है।

प्रश्न 16.
वीरगाथा काल के प्रथम कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
चन्दबरदाई।

प्रश्न 17.
वीरगाथा काल को चारणकाल क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
इस युग में चारण कवियों द्वारा राजाओं की प्रशंसा में बहुतायत रचनाएँ की गयीं इसीलिए इसे चारणकाल भी कहते हैं।

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प्रश्न 18.
आदिकाल की कविता का मुख्य विषय क्या रहा?
उत्तर :
आदिकाल की कविता का मुख्य विषय आश्रयदाता राजाओं की प्रशंसा एवं वीर रस से पूर्ण गाथाओं का वर्णन था।

प्रश्न 19.
वीरगीत की दो रचनाओं के नाम बताइए।
उत्तर :
वीरगीत की दो रचनाएँ हैं-

  • परमाल रासो एवं
  • बीसलदेव रासो।

प्रश्न 20.
वीरगीत काव्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रन्थ कौन-सा है?
उत्तर :
वीरगीत काव्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य ग्रन्थ आल्हाखण्ड (परमाल रासो) है।

प्रश्न 21.
आदिकाल (वीरगाथा काल) के दो प्रसिद्ध कवियों के नाम बताइए।
उत्तर :
आदिकाल के दो कवि हैं-

  • चन्दबरदाई तथा
  • दलपति विजय।।

प्रश्न 22.
आदिकाल की दो प्रमुख रचनाओं के नाम बताइए।
उत्तर :
आदिकाल की दो प्रमुख रचनाएँ हैं-

  • पृथ्वीराज रासो एवं
  • हम्मीर रासो।

प्रश्न 23.
भक्तिकाल कब से कब तक माना जाता है?
उत्तर :
भक्तिकाल 1343 ई० से 1643 ई० तक माना जाता है।

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प्रश्न 24.
भक्तिकाल की दो शाखाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
भक्तिकाल की दो शाखाएँ हैं-

  • निर्गुण भक्ति शाखा तथा
  • सगुण भक्ति शाखा।

प्रश्न 25.
भक्तिकाल के दो प्रमुख कवियों के नाम बताइए।
उत्तर :

  • तुलसीदास तथा
  • सूरदास।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भक्तिकाल की सगुण शाखा की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
भक्तिकाल की सगुण शाखा की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

  • इसमें ईश्वर (ब्रह्म) के साकार स्वरूप की उपासना की विधि अपनायी गयी है।
  • इस काल के कवियों ने सुधारवादी दृष्टिकोण एवं समन्वय की भावना से ओतप्रोत रचनाएँ की हैं।
  • इस काल में ईश्वर के नाम-स्मरण की महत्ता स्थापित हुई।

प्रश्न 2.
ज्ञानाश्रयी (सन्त काव्यधारा) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
सन्त काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियाँ या विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  • गुरु की महिमा का ज्ञान
  • निर्गुण ब्रह्म की उपासना
  • बाह्य आडम्बरों का विरोध और समाज-सुधार
  • हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल
  • एकेश्वरवाद में विश्वास
  • रहस्यवादी भावना
  • नाम-स्मरण का महत्त्व
  • मायारूपी महाठगिनी की निन्दा
  • पंचमेल या सधुक्कड़ी भाषा।

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प्रश्न 3.
प्रेमाश्रयी (सूफी) काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
प्रेमाश्रयी काव्यधारा की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

  • फारसी की मसनवी पद्धति पर आधारित लोकगाथाओं को लेकर लम्बे प्रेमाख्यानों की रचना हुई।
  • प्रेमाश्रयी शाखा के रचनाकार प्रायः मुसलमान ही हैं जिन्हें हिन्दू परम्पराओं का सामान्य ज्ञान है।
  • कथाएँ प्रायः हिन्दू जीवन से ही सम्बद्ध हैं।
  • प्रेमाख्यानों में श्रृंगार के मादक और मर्मस्पर्शी चित्रण हैं।
  • कथा की ही प्रधानता है, उपदेशात्मक प्रवृत्ति का अभाव है।
  • रचनाएँ प्राय: दोहे-चौपाइयों में हैं।
  • काव्य में रहस्यवाद की झलक मिलती है।

प्रश्न 4.
कृष्णभक्ति काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियों एवं कवियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
भक्तिकालीन कृष्णभक्ति काव्यशाखा की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं

  • उपास्यदेव श्रीकृष्ण हैं।
  • कृष्ण के बाल-स्वरूप एवं किशोर अवस्था की लीलाओं का वर्णन हुआ है।
  • दास्य एवं सखा-भाव की भक्ति-भावना है।
  • वात्सल्य रस का चरमोत्कर्ष प्रस्तुत हुआ है।
  • श्रृंगार के संयोग एवं वियोग-दोनों पक्षों का सुन्दर चित्रण हुआ है।
  • प्रकृति-वर्णन उद्दीपन रूप में हुआ है।
  • भाव और भाषा का उत्कृष्ट रूप है।
  • मुक्तक शैली की प्रधानता है।

प्रदुख कवि हैं – सूर, नन्ददास, कुम्भनदास, मीरा, रसखान आदि।

प्रश्न 5.
रामभक्ति काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
रामभक्ति काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  • राम को अपना इष्टदेव मानकर उनके लोकरक्षक एवं लोकरंजक रूप में रामचरित का गायन
  • दास्य-भाव की भक्ति
  • चातक-प्रेम के आदर्श पर आधारित अनन्य भक्ति-भावना
  • वर्णाश्रम धर्म से समर्थित सामाजिक व्यवस्था को श्रेष्ठ मानते हुए लोक मर्यादा की प्रतिष्ठा
  • लोकमंगल की भावना
  • विभिन्न मत-मतान्तरों, सम्प्रदायों तथा काव्य-शैलियों में समन्वय की चेष्टा
  • अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं में अधिकारपूर्वक काव्य-रचना
  • प्रबन्ध एवं मुक्तक दोनों काव्य रूपों में रचना।।

प्रश्न 6.
अष्टछाप से क्या तात्पर्य है? अष्टछाप से सम्बन्धित कवियों का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर :
अष्टछाप कवि समुदाय का तात्पर्य-सन्त गुरु वल्लभाचार्य के आठ शिष्य-कवियों के समुदाय को अष्टछाप कवि-समुदाय कहा जाता है। ये कृष्णभक्ति धारा के कवि थे। (UPBoardSolutions.com) इस समुदाय के कवि सूरदास, नन्ददास, परमानन्ददास, कृष्णदास, कुम्भनदास, चतुर्भुजदास, छीतस्वामी एवं गोविन्दस्वामी थे।

प्रश्न 7.
भक्तिकाल का परिचय अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
हिन्दी साहित्य के इतिहास के द्वितीय चरण मध्यकाल के दो उपखण्ड किये गये हैं-पूर्व- मध्यकाल और उत्तरमध्यकाल। पूर्व-मध्यकाल को ही ‘भक्तिकाल’ के नाम से जाना जाता है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इसका समय 1375 ई० से 1700 ई० तक माना है। इस समय तक भारत में मुस्लिम शासन (UPBoardSolutions.com) स्थापित हो चुका था। मुसलमानों के अत्याचारों से पीड़ित हिन्दुओं ने ईश्वर-भक्ति की शरण ली। अब कविता राजदरबार की वस्तु न होकर ईश्वरीय भक्ति का माध्यम बन गयी। भक्ति-भावना से ओत-प्रोत रचनाओं की प्रचुरता के कारण इस काल को भक्तिकाल कहा जाता है।

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प्रश्न 8.
अष्टछाप के चार प्रमुख कवियों के नाम एवं उनकी रचनाएँ लिखिए।
उत्तर :

  • सूरदास–सूरसागर, सूरसारावली, साहित्यलहरी
  • नन्ददास-रास पंचाध्यायी, भ्रमरगीत
  • कृष्णदास-भ्रमरगीत, प्रेमतत्त्व निरूपण।
  • परमानन्ददास-परमानन्द सागर

प्रश्न 9.
आदिकाल को वीरगाथा काल क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
हिन्दी पद्य-साहित्य का प्रथम काल वीरगाथा काल कहलाता है। इसे चारणकाल, अपभ्रंशकाल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल आदि नामों से भी सम्बोधित किया जाता है। इस युग में देश छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था। राजा आपस में लड़ते थे। मुसलमानों का आक्रमण भी प्रारम्भ हो गया था। इस युग में वीरों और योद्धाओं में वीर रस का संचार करना ही काव्य का मुख्य उद्देश्य रह गया था । अतः वीर रस से पूर्ण (UPBoardSolutions.com) गाथाओं का वर्णन किया जाता था इसीलिए इस काल को वीरगाथा काल कहा जाता है। यह सर्वथा उपयुक्त नाम है।

प्रश्न 10.
आदिकाल (वीरगाथा काल ) की पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर :
इस काल की पाँच प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ) इस प्रकार हैं-

  • आश्रयदाता राजाओं की प्रशंसा
  • सामूहिक राष्ट्रीयता की भावना का अभाव
  • वीररस की प्रधानता और युद्धों का सजीव चित्रण
  • ऐतिहासिक तथ्यों के प्रस्तुतीकरण में कल्पना का पुट
  • श्रृंगार का पुट।

प्रश्न 11.
वीरगाथा काल के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
इस काल के प्रमुख कवि और रचनाएँ इस प्रकार हैं-

  • (i) चन्दबरदाई-पृथ्वीराज रासो
  • (ii) स्वयम्भू-पउम चरिउ
  • (iii) नरपति नाल्ह-बीसलदेव रासो
  • (iv) दलपति विजय-खुमान रासो
  • (v) जगनिक-आल्हाखण्ड या परमाल रासो
  • विद्यापति-पदावली व कीर्तिलता
  • मधुकर भट्ट-जयमयंक जसचन्द्रिका
  • भट्ट केदार-जयचन्द प्रकाश
  • अमीर खुसरो-इनकी फुटकर रचनाएँ
  • पुष्पदन्त-उत्तर पुराण
  • शारंगधर-हम्मीर रासो
  • अब्दुल रहमान-संदेशरासक
  • जोइन्दु-परमात्म प्रकाश।

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प्रश्न 12.
भक्तिकाल के नामकरण के विषय में बताइए।
उत्तर :
भक्ति-भावना की अधिकता होने के कारण इसका नाम ‘भक्तिकाल’ रखा गया, जो सर्वथा उपयुक्त है। भक्तिकाल में कबीर, जायसी, सूर, तुलसी जैसे भक्त कवियों ने भक्ति काव्य रचा।

प्रश्न 13.
भक्तिकाल की विभिन्न धाराओं का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर :
भक्तिकाल की काव्यधारा चार रूपों में प्रवाहित हुई–

  • ज्ञानमार्गी काव्यधारा
  • प्रेममार्गी काव्यधारा
  • रामभक्ति काव्यधारा
  • कृष्णभक्ति काव्यधारा।

प्रश्न 14.
भक्तिकाल के प्रमुख कवियों एवं उनकी रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :

  • कबीरदास-बीजक
  • मलिक मुहम्मद जायसी-पद्मावत
  • कुतुबन- मृगावती
  • सूरदास-सूरसागर
  • नरोत्तम दास-सुदामाचरित
  • परमानन्द दास-परमानन्द सागर
  • तुलसीदास-रामचरितमानस
  • नाभादास-भक्तमाल
  • प्राणचन्द-रामायण महानाटक आदि।

प्रश्न 15.
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ) लिखिए।
उत्तर :
सन् 1343 ई० से 1643 ई० तक का समय हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल के नाम से जाना जाता है। भक्तिकाल के साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  • भक्ति-भावना
  • गुरु की महिमा
  • सुधारवादी दृष्टिकोण एवं समन्वय की भावना
  • रहस्य की भावना
  • अहंकार का त्याग और लोकमंगल की भावना
  • काव्य का उत्कर्ष
  • जीवन की नश्वरता और ईश्वर के नाम-स्मरण की महत्ता

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प्रश्न 16.
भक्तिकाल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
भक्तिकाल में भाव, भाषा एवं शिल्प की दृष्टि से हिन्दी-साहित्य का उत्कर्ष हुआ। भावपक्ष तथा कलापक्ष के उत्कृष्ट रूप के कारण ही भक्तिकाल को हिन्दी-साहित्य का स्वर्णयुग कहते हैं। इस समय कबीर, जायसी, सूर तथा तुलसी जैसे रससिद्ध कवियों की दिव्य वाणी उनके अन्त:करण से निकलकर देश (UPBoardSolutions.com) के कोने-कोने में फैली थी। यही सार्वभौम और सार्वकालिक साहित्य भक्तिकाल की अनुपम देन है।।

प्रश्न 17.
भक्तिकाल की निर्गुण शाखा की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
निर्गुण शाखा की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

  • इसमें ब्रह्म (ईश्वर) के निराकार स्वरूप की उपासना की विधि अपनायी गयी।
  • निर्गुण शाखा के सन्त कवियों ने साधना के सहज मार्ग को अपनाया।
  • इस शाखा के सन्त कवियों ने जाति-पाँति, तीर्थ-व्रत आदि बाह्याडम्बरों का विरोध किया।
  • इस काल की रचनाएँ पंचमेल सधुक्कड़ी भाषा में लिखी गयीं।

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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 आचार्य दीपंकर श्रीज्ञान (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 आचार्य दीपंकर श्रीज्ञान (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

आचार्य दीपंकर श्रीज्ञान ने विश्व भर में ज्ञान का प्रकाश फैलाया, इनका जन्म सन् 982 ई० में सहोर (बंगाल) में हुआ था। ये विक्रमपुर के राजा कल्याण के दूसरे पुत्र थे। इन्हें बचपन में चन्द्रगर्भ कहते थे। इन्होंने आगे चलकर विवाह तथा सिंहासन स्वीकार नहीं किया। उनतीस वर्ष की (UPBoardSolutions.com) अवस्था तक ज्ञान की सभी शाखाओं का अध्ययन कर इन्होंने ‘महापंडित’ की उपाधि प्राप्त की। वज्रासन महाविहार (बुद्ध गया) में उन्हें दीपंकर श्रीज्ञान के नाम से विभूषित किया गया।
इन्होंने भारत के अनेक विश्वविद्यालयों में अध्यापन किया। ये तीन वर्ष के लिए तिब्बत गए थे, परन्तु सीमा पर लड़ाई छिड़ने के कारण भारत वापस न लौट सके। वर्षों तक बौद्ध मत का प्रचार-प्रसार करने तथा अनेक ग्रन्थों की रचना करने के पश्चात् तिहत्तर वर्ष की अवस्था में वहीं इनका निधन हो गया। ये शान्ति, सद्भाव और आपसी सहयोग के प्रतीक थे।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
राजकुमार चन्द्रगर्भ ने राजसिंहासन को क्यों नहीं स्वीकार किया?
उत्तर:
राजकुमार चन्द्रगर्भ को सांसारिक वैभव के प्रति कोई (UPBoardSolutions.com) लगाव नहीं था, इसी कारण उन्होंने राजसिंहासन को स्वीकार नहीं किया।

प्रश्न 2:
तिब्बत प्रवास के समय दीपंकर श्रीज्ञान ने कौन-कौन से कार्य किए थे?
उत्तर:
तिब्बत प्रवास के समय दीपंकर श्रीज्ञान ने महात्मा बुद्ध के उपदेशों को वहाँ की जनता तक पहुँचाया। इन्होंने बुद्ध मत से सम्बन्धित अनेक ग्रन्थों की रचना एवं अनेक अनुवाद किए। बौद्ध विहारों एवं भिक्षुशालाओं का निरीक्षण करके सुधार (UPBoardSolutions.com) हेतु इन्होंने अपने सुझाव दिए। बौद्ध मत के पुनर्गठन में इनका बहुत योगदान रहा।

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प्रश्न 3:
‘बोधिपथ प्रदीप’ में तीनों कोटि के पुरुषों के क्या लक्षण बताये गए हैं ?
उत्तर:
‘बोधिपथ प्रदीप’ में आचार्य दीपंकर श्रीज्ञान ने पुरुषों को तीन प्रकार का बताया है-अधम, मध्यम और उत्तम। इनके लक्षणों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा है कि जो लोग दूसरों को धोखा देकर, कष्ट पहुँचाकर, भ्रष्ट तरीकों से सांसारिक सुख पाना चाहते हैं, (UPBoardSolutions.com) वे अधम पुरुष हैं। संसार के दुखों से विमुख रहकर या कर्म से दूर रहकर केवल अपने निर्वाण की कामना करने वाले पुरुष मध्यम कोटि में आते हैं। कितु जो लोग अपने बच्चों के दुखों की तरह ही संसार के अन्य लोगों के दुखों का सर्वथा नाश करना= चाहते हैं, वे उत्तम पुरुष हैं।

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प्रश्न 4:
सही मिलान कीजिएउत्तर (UPBoardSolutions.com)
उत्तर:

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