UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 16 गुरु तेग बहादुर (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 16 गुरु तेग बहादुर (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

गुरु तेग बहादुर का जन्म 18 अप्रैल, 1621 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। ये गुरु हरगोबिंद जी के पाँचवें पुत्र थे। सिक्खों के आठवें गुरु हरिकृष्ण जी के निधन के बाद सिक्खों के नवें गुरु बने। इनके बचपन का नाम ‘त्यागमल’ था। मुगलों के साथ हुए युद्ध में इनकी वीरता देखकर इनके पिता ने इनका नाम तेग बहादुर (तलवार का धनी) रख दिया। मुगलों के साथ युद्ध में हुए भीषण रक्तपात का इनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा और इन्होंने वैराग्य धारण कर लिया। (UPBoardSolutions.com) इन्होंने 20 वर्षों तक एकांत में साधना की। इन्होंने आनंदपुर साहिब का निर्माण कराया और वहीं रहने लगे। धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए इन्होंने कई स्थानों का भ्रमण किया। इन्होंने परोपकार के लिए कई कुँओं एवं धर्मशालाओं का निर्माण कराया। गुरु तेग बहादुर ने लोगों का बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने का विरोध किया जिससे नाराज होकर औरंगजेब ने दिल्ली के चाँदनी चौक पर गुरु तेग बहादुर का शीश काटने का हुक्म दिया। गुरु तेग बहादुर ने हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। गुरु तेग बहादुर की याद में उनके शहीदी स्थल पर गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा शीशगंज साहिब है। यह दिल्ली के चाँदनी चौक में है। मानवता के हित में उनका यह त्यागमय बलिदान अतुलनीय व अविस्मरणीय है।

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अभ्यास-प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिएप्रश्न

प्रश्न 1:
गुरु तेग बहादुर का जन्म कब (UPBoardSolutions.com) और कहाँ हुआ ?
उत्तर:
गुरु तेग बहादुर का जन्म 18 अप्रैल, 1621 को पंजाब प्रांत के अमृतसर में हुआ था।

प्रश्न 2:
सिक्खों के नवें गुरु कौन थे ?
उत्तर:
सिक्खों के नवें गुरु- गुरु तेग बहादुर थे।

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प्रश्न 3:
“मानवता के हित में गुरु तेग बहादुर (UPBoardSolutions.com) का बलिदान अतुलनीय व अविस्मरणीय है।” इस पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
विश्व के इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर जी का स्थान अद्वितीय है। गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान न केवल धर्म पालन के लिए अपितु समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए था। इनके बलिदान से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए।

प्रश्न 4:
गुरु तेग बहादुर को इनके बलिदान के कारण क्या कहा जाता है ?
उत्तर:
गुरु तेग बहादुर को इनके बलिदान (UPBoardSolutions.com) के लिए इनको ‘हिंद की चादर’ या ‘भारत की ढाल’ कहा जाता है।

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प्रश्न 5:
गुरु तेग बहादुर के व्यक्तित्व की विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
गुरु तेग बहादुर के व्यक्तित्व की अनेक विशेषताएँ हैं। गुरु तेग बहादुर अपने जीवन के आरंभ में एक वीर योद्धा थे। मुगलों के साथ हुए युद्ध के बाद इन्हें हिंसा से नफरत हो गई और इन्होंने वैराग्य धारण कर लिया। बाद में (UPBoardSolutions.com) मानव कल्याण में लग गए तथा कुँओं एवं धर्मशालाओं का निर्माण कराया। अपने सिक्ख धर्म के प्रचार के लिए देश के कई स्थानों का भ्रमण किया तथा अंत में धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। अंत में हम यही कह सकते हैं कि ये एक उच्च कोटि के संत तथा महापुरुष थे। इन्हें सदैव ही याद किया जाएगा।

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UP Board Solutions for Class 9 Hindi उपन्यास

UP Board Solutions for Class 9 Hindi उपन्यास

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प्रश्न 1.
द्विवेदी युग के तीन प्रसिद्ध उपन्यासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  • मुंशी प्रेमचन्द
  • बाबू वृन्दावनलाल वर्मा
  • किशोरीलाल गोस्वामी।

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प्रश्न 2.
प्रेमचन्द युग के चार उपन्यासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  • चतुरसेन शास्त्री
  • विश्वम्भरनाथ ‘कौशिक’
  • गोपालराम गहमरी
  • बाबू वृन्दावन लाल वर्मा।

प्रश्न 3.
प्रेमचन्दोत्तर युग के तीन उपन्यासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  • जैनेन्द्र कुमार
  • अमृतलाल नागर
  • यशपाल।

प्रश्न 4.
जयशंकर प्रसाद के दो उपन्यासों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  • तितली
  • कंकाल।

प्रश्न 5.
हिन्दी के प्रमुख सामाजिक उपन्यासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर :
मुंशी प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, बाबू वृन्दावनलाल वर्मा, आचार्य चतुरसेन शास्त्री व विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक आदि हिन्दी के प्रमुख सामाजिक उपन्यासकार हैं।

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प्रश्न 6.
द्विवेदी युग में प्रायः किस प्रकार के उपन्यास लिखे गये?
उत्तर :
द्विवेदी युग में प्रायः तिलस्मी, जासूसी, सामाजिक, ऐतिहासिक, पौराणिक, चरित्र प्रधान तथा भाव-प्रधान उपन्यास लिखे गये। लिखिए।

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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 9 चन्द्रगुप्त मौर्य (महान व्यक्तित्व)

UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 9 चन्द्रगुप्त मौर्य (महान व्यक्तित्व)

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पाठ का सारांश

चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने बाहुबल और अदम्य साहस से भारत में राजनैतिक एकता स्थापित की। सिकन्दर ने सिन्ध, पंजाब, तथा सीमा प्रदेश को जीता ओर यूनानी अधिकारियों को यहाँ का शासन सौंपकर लौट गया। अत्याचारी शासन से दुखी प्रजा को महत्त्वाकांक्षी चन्द्रगुप्त का नेतृत्व मिल गया। (UPBoardSolutions.com) चन्द्रगुप्त ने सेना संगठित की और यूनानियों को भारत-भूमि से बाहर निकाल दिया। इसने मगध साम्राज्य को जीता और यह राजधानी पाटलिपुत्र के सिंहासन पर बैठ गया।
उत्तर भारत के बाद सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बाँधने के लिए बंगाल, मालवा आदि राज्य इसने जीत लिया। सिकन्दर के सेनापति सेल्यूकस को भी इसने अपने अन्तिम युद्ध में हराया, तब सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह इससे कर दिया। अपने विशाल साम्राज्य की व्यवस्था को इसने तीन भागों में बाँट दिया था।- (1) केन्द्रीय शासन, (2) प्रान्तीय शासन, (3) स्थानीय शासन। सेना, पुलिस तथा गुप्तचर व्यवस्था उत्तम कोटि की थी। (UPBoardSolutions.com) वह प्रजा की उन्नति और सुख-सुविधा के लिए सदैव तत्पर रहता था। इसने अनेक धर्मशालाएँ, पाठशालाएँ, अस्पताल, नहरें और सड़कें बनवाई। चौबीस वर्षों तक राज्य करने के बाद अपने पुत्र बिन्दुसार को शासन का भार सौंपकर यह साधु का जीवन बिताने लगा। 298 ई० पूर्व में चन्द्रगिरि पर्वत पर चन्द्रगुप्त का निधन हो गया।

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अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
चन्द्रगुप्त मौर्य कौन था?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य एक साहसी (UPBoardSolutions.com) और महत्त्वाकांक्षी सम्राट था।

प्रश्न 2:
मगध की राजधानी का क्या नाम था?
उत्तर:
मगध की राजधानी का नाम पाटलिपुत्र था।

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प्रश्न 3:
चन्द्रगुप्त मौर्य ने प्रजा हित के लिए क्या-क्या कार्य किए?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य अपनी प्रजा की उन्नति के प्रति सदैव प्रयत्नशीन रहता था। उसने यातायात के । (UPBoardSolutions.com) साधनों की समुचित व्यवस्था की। सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाए, कुएँ तथा धर्मशालाएँ बनवाई। सिंचाई हेतु अनेक तालाब और कुएँ खुदवाए।

प्रश्न 4:
चन्द्रगुप्त मौर्य जीवन के अन्तिम क्षणों में कहाँ और क्यों गए?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य जीवन के अन्तिम क्षणों में जैन मुनि (UPBoardSolutions.com) भद्रबाहु के साथ चन्द्रगिरि पर्वत पर साधक के रूप में जीवन व्यतीत करने हेतु गए।

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प्रश्न 5:
चन्द्रगुप्त मौर्य की शासन प्रणाली क्यों आदर्श बन गई ?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल में भारत का बहुमुखी विकास हुआ। (UPBoardSolutions.com) कृषि, व्यापार एवं ललित कला आदि के विकास हेतु शासन द्वारा अनेक सुविधाएँ दी जाती थीं। उस समय प्रजा की नैतिकता उच्चकोटि की थी। इस प्रकार चन्द्रगुप्त मौर्य की शासन प्रणाली आदर्श थी।

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UP Board Solutions for Class 6 Environment Chapter 5 जल संचयन एवं पुनर्भरण

UP Board Solutions for Class 6 Environment Chapter 5 जल संचयन एवं पुनर्भरण

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जल संचयन एवं पुनर्भरण

अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) वर्षा जल पुनर्भरण के लाभ बताइए ?
उत्तर
वर्षा जल पुनर्भरण से निम्न लाभ हैं- आवश्यकतानुसार जल की प्राप्ति, जमीन के अन्दर जल मात्रा बढ़ना, नगर जल समस्या दूर होना, जल स्तर नीचे न गिरना, मिट्टी का कटाव कम होना व कृषि फसलों को हरा-भरा बनाया जा सकना आदि।

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(ख) भू-जल का स्तर नीचे क्यों गिरता जा रहा है ?
उत्तर
वर्षा की कमी व जल की अधिक माँग होने के कारण भू-जल का स्तर नीचे गिरता जा रहा है।

(ग) भू-जल में वृद्धि कैसे की जा सकती है ?
उत्तर
वर्षा जल संचयन एवं पुनर्भरण से भू-जल में वृद्धि की जा सकती है।

(घ) जनसंख्या वृद्धि का भू-जल पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर
जनसंख्या वृद्धि से भू-जल की माँग बढ़ती है, जिससे जल स्तर नीचे गिरता जाता है।

(ङ) वर्षा जल संचयन का अभिप्राय बताइए?
उत्तर
वर्षा जल संचयन का अभिप्राय है वर्षा के जल को एकत्र करके कुओं, तालाबों और गड्ढों आदि को फिर से भरकर पानी की समस्या दूर करना।

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(च) जल का आपके जीवन में क्या महत्त्व है ?
उत्तर
जल का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। जल पीने के लिए, सिंचाई के लिए, सफाई के लिए व उद्योग धंधों आदि कार्यों के लिए आवश्यक है।

(छ) वर्षा जल का संचयन एवं पुनर्भरण क्यों आवश्यक है ?
उत्तर
वर्षा जल का संचयन एवं पुनर्भरण भू-जल आपूर्ति और भू-सतही जल द्वारा सभी कार्यों के लिए जल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है।

(ज) अपने घर की छत के वर्षा जल का संचयन कैसे करेंगे ?
उत्तर
घर से थोड़ी दूर पर 2 से 3 मीटर गहरा गड्ढा खोदकर, गड्ढे को ईंट, कंकड़ और बजरी से भर देते हैं। फिर उसके ऊपर मोटी रेत डालते हैं। इस गड्ढे में छत पर गिरने वाले वर्षा के स्वच्छ जल को इकट्ठा करते हैं।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर
(क) समुद्र का जल खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं होता है।
(ख) भू-जल एवं भू-सतही जल प्रकृति द्वारा कम मात्रा में प्राप्त है।
(ग) तालाब, पोखर आदि जल संचयन के प्राचीन साधन रहे हैं।
(घ) भू-जल में वृद्धि जल संचयन करके कर सकते हैं।
(ङ) शहरों में पक्के मकानों के कारण वर्षा जल भूमि के अन्दर कम प्रवेश होता है।
(च) उन्नत किस्म के धान एवं गेहूं की फसल उगाने के लिए अधिक सिंचाई की। आवश्यकता होती है।
(छ) भारत की जलनीति वर्ष 1987 में बनाई गई थी।
(ज) राष्ट्रीय जलनीति में जल को दुर्लभ एवं बहुमूल्य राष्ट्रीय संसाधन के रूप में माना गया है।

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प्रश्न 3.
सही जोड़े बनाएँ-
उत्तर
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 प्रोजेक्ट वर्क- विद्यार्थी स्वयं करें।

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UP Board Solutions for Class 6 Home Craft Chapter 9 बनाई कला

UP Board Solutions for Class 6 Home Craft Chapter 9 बनाई कला

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बनाई कला

अभ्यास

प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(1) मिलान करो-
UP Board Solutions for Class 6 Home Craft Chapter 9 बनाई कला img-1

(2) रिक्त स्थानों की पूर्ति करिए
(1) बार्डर बुनने के लिए 11 या 12 नंबर की सलाइयाँ प्रयोग होती हैं।
(2) बुनाई सदैव ढीली ऊन से डालें।
(3) बार्डर के फंदे सदैव दोहरी ऊन से डालें।

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(3) निम्नलिखित कथनों में सत्य के सामने (✓) तथा असत्य के सामने (✗) का चिह्न लगाइए
(क) गर्म वस्त्र गर्मी में पहने जाते हैं।                                                          (✗)
(ख) बुनाई के लिए सलाइयाँ आवश्यक हैं।                                                (✓)
(ग) घर पर बुनाई करने से समय का सदुपयोग तथा धन की बचत होती है। (✓)

प्रश्न 2.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
(क) हम ऊनी वस्त्र क्यों पहनते हैं ?
उत्तर
ठंड से अपने शरीर की सुरक्षा के लिए जाड़े में ऊनी वस्त्र पहनते हैं।

(ख) ऊनी वस्त्र कितने प्रकार से बुने जाते हैं, उनके नाम लिखिए।
उत्तर
ऊनी वस्त्र दो प्रकार से बुने जाते हैं-

  1. हाथ द्वारा
  2. मशीन द्वारा

प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(क) बुनाई कला का क्या अर्थ है ?
उत्तर
कलात्मक ढंग से ऊन के फंदे बनाकर सलाइयों के माध्यम से डिजाइनदार वस्त्र तैयार करना ही बुनाई कला है।

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(ख) स्वयं बुनाई करने के किन्हीं दो लाभों को लिखिए।
उत्तर
स्वयं बुनाई करने के दो लाभ हैं

  • अपने मनपसंद रंग व डिजाइन के वस्त्र कम दाम में बनाया जा सकता है।
  • समय का सदुपयोग होता है एवं धन कमाया जा सकता है।

प्रश्न 4.
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
(क) ऊनी वस्त्र बुनते समय आप कौन-कौन सी सावथानियाँ रखेंगे।
उत्तर
ऊनी वस्त्रों को बुनते समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए

  1. बुनाई करने लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी की सलाइयों का प्रयोग करें।
  2. सलाइयों को बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  3. साफ हाथ से बुनाई करें।
  4. ऊन को बैग में रखें जिससे गंदी न हो पाए।
  5. बुनाई अच्छी रोशनी में करें।
  6. स्वेटर बार्डर, गले व मुडढे के बार्डर में 11 या 12 नंबर की सलाई का ही प्रयोग करें।
  7. बार्डर के फंदे दोहरी ऊन से डालें।

(ख) सीधा एवं उल्टा फंदा बुनने की विधि लिखिए।
उत्तर
(1) सीधा फंदा- सीधा फंदा बुनते समय खाली सलाई को दाहिने हाथ में तथा फंदों वाली सलाई को बाएं हाथ में पकड़े। इसके बाद दाएं हाथ की खाली सलाई को बाएं हाथ की (UPBoardSolutions.com) सलाई के फंदे में नीचे की ओर घुमाकर ऊन को एक बार बढ़ाकर फंदे के अंदर से निकालें। इसके बाद बाएं हाथ की सलाई से फंदे को गिरा देते हैं। इस प्रकार सीधा फंदा बुना गया।

(2) उल्टा फंदा- उल्टे फंदे में दाएं हाथ की सलाई को फंदे के बीच में से नीचे की ओर निकालते हुए अपनी ओर लाएं। सलाई की नोक पर ऊन को एक बार लपेटें और उसका लूप बनाते हुए इसे बाएं हाथ की सलाई के फंदे में से गिराते हुए निकाल लें। इस प्रकार ये फंदा उल्टा बुना गया।

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प्रोजेक्ट कार्य :     नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।

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