UP Board Solutions for Class 8 Civics Chapter 4 नागरिक सुरक्षा

UP Board Solutions for Class 8 Civics Chapter 4 नागरिक सुरक्षा

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नागरिक सुरक्षा

अभ्यास

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) हवाई हमले से बचने के क्या उपाय हैं?
उत्तर
हवाई हमला होने पर जनता को 2-3 मिनट पहले सायरन द्वारा सूचना दी जाती है। इससे बचने के निम्नलिखित उपाय हैं

  1. सुरक्षित स्थानों पर छिपने से 65 प्रतिशत तक बचाव हो सकता है।
  2. खुले में पेट के बल लेटने पर 50 प्रतिशत तक बचाव हो सकता है।
  3. निचले स्थान, नाले या खाई में शरण लेने पर 35 प्रतिशत तक बचाव हो सकता है।
  4. पक्के मकानों में 90 प्रतिशत (UPBoardSolutions.com) बचाव होता है।
  5. गृह में शरण लेने पर 95 प्रतिशत बचाव होता है। अत: उक्त विधियों से उपरोक्त, छिपकर बचाव किया जा सकता है।

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(ख) हवाई हमले से अपने घर को बचाने के लिए ब्लैक आउट करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर
शत्रु द्वारा रात्रि में हवाई हमला करने की स्थिति में ब्लैक आउट किया जाता है। इसमें ऐसे उपाय किए जाते हैं, जिससे शत्रु भ्रमित हो जाए और लक्ष्य न पहचान सके।
ब्लैक आउट के समय बचाव के उपाय निम्नलिखित हैं

1. प्रकाश पर प्रतिबन्ध- दो स्तरों पर यह प्रतिबन्ध लगाया जाता है।

(i) प्रथम स्तर पर-

  1. हवाई हमले की सम्भावना पर मकानों की खिड़की, दरवाजे व रोशनदानों के शीशे काले रंग से रंग दिए जाते हैं।
  2. विज्ञापन बोर्डों व विद्युत खम्भों की लाइट बन्द कर दी जाती है।

(ii) द्वितीय स्तर पर-

  1. हमला निश्चित होने पर पूरा अन्धेरा कर दिया जाता है।
  2. यह पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।

2. केमाप्लाजिंग व कंसीलमेन्ट (आकार गोपन व छद्मावरण)- शत्रु बम गिराने के लिए लक्ष्य पहचानने की कोशिश करता है। इसलिए लक्ष्य को पेंट कराना, हरे पत्तों व टहनियों से ढकना जरूरी होता है। इससे पायलट भ्रमित हो जाता है।

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(ग) नागरिक सुरक्षा संगठन का क्या उद्देश्य है?
उत्तर
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई जान-माल को हानि को देखते हुए प्रत्येक देश ने अपने यहाँ नागरिक सुरक्षा संगठन की स्थापना की। इस संगठन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. हवाई आक्रमणों से जन-धन की हानि को कम करना।।
  2. औद्योगिक/कृषि क्षेत्र में उत्पादन बनाए (UPBoardSolutions.com) रखना।
  3. प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग करना।
  4. शान्तिकाल में अधिकारियों एवं स्वयं सेवकों को प्रशिक्षित करना।
  5. सामाजिक व जन कल्याणकारी कार्य जैसे–पल्स पोलियो व महामारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण आदि में सहयोग प्रदान करना।

(घ) आग लगने पर किस तरह से बचाव करना चाहिए?
उत्तर
आग लगने पर निम्नलिखित कार्य करके बचाव करना चाहिए-

  1. आग लगने पर सीधे पानी डालकर बुझाना चाहिए।
  2. ज्वलनशील पदार्थ (पेट्रोल, डीजल आदि) में आग लगने पर हवा से सम्पर्क हटा देना चाहिए।
  3. गैस से आग लगने पर जूट की बोरी से ढककर आग बुझानी चाहिए।
  4. गैस के रेगुलेटर नॉब को बन्द कर देना चाहिए तथा घर के खिड़की दरवाजे खोल देने चाहिए।
  5. बिजली से लगी आग पर पानी नहीं डालना चाहिए बल्कि बुझाने से पहले मेन स्विच से बिजली काट देनी चाहिए।
  6. शरीर में आग लगने पर शरीर को कम्बल से ढंक देना चाहिए।

(ङ) रसोई गैस से आग लगने पर बचाव के कौन-कौन से तरीके अपनाएंगे?
उत्तर
रसोई गैस से आग लगने पर जूट की बोरी से ढककर आग बुझाना चाहिए। जल्दी से गैस सिलिंडर का नॉब बन्द करके बाहर निकाल देना चाहिए।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर
(क) नागरिक सुरक्षा संगठन प्राकृतिक आपदाओं के समय सुरक्षा कार्य में सहयोग करता है।
(ख) हवाई हमला बन्द हो जाने पर हरे रंग की प्रकाश दिखाया जाता है।
(ग) रात्रि में हवाई हमले के समय दुश्मन को भ्रमित करने के लिए ब्लैक आउट किया जाता है।
(घ) पेट्रोल से लगी आग को फोम टाइप अग्नि शामक यंत्र से बुझाया जाता है।
(ङ) गैस की आग बुझाने के लिए जूट की बोरी का प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 3.
निम्न कथनों में जो सही हों उनके आगे (✓) का चिह्न और जो गलत हों उनके आगे (✗) का चिह्न लगाइए-
उत्तर
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प्रश्न 4.
मिलान कीजिए-
उत्तर
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UP Board Solutions for Class 8 Civics Chapter 3 वैश्विक समुदाय एवं भारत

UP Board Solutions for Class 8 Civics Chapter 3 वैश्विक समुदाय एवं भारत

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वैश्विक समुदाय एवं भारत

अभ्यास

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर
(क) 20वीं सदी में दो विश्वयुद्ध हुए।
(ख) संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 में हुई थी।
(ग) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में पाँच स्थाई सदस्य होते हैं।
(घ) महासभा की बैठक, वर्ष में एक बार अवश्य होती है।
(ङ) महासभा के सभापति का कार्यकाल एक वर्ष के लिए होता है।
(च) मानवाधिकार दिवस 10 दिसम्बर को मनाया जाता है।
(छ) राष्ट्रकुल के सदस्य अपने आंतरिक एवं बाह्य मामले में पूर्णरूप से स्वतंत्र हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर संक्षेप में दीजिए।
(क) संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना क्यों हुई?
उत्तर
संयुक्त राः, पंघ की स्थापनः विश्व में शान्ति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। 20वीं शताब्दी में अब तक दो महायुद्ध हो चुके हैं, जिसमें अपार जन-धन की हानि हुई है। अनेक देश पूरी तरह नष्ट हो गए। संसार (UPBoardSolutions.com) में ऐसा विनाश फिर न हो इस उद्देश्य से विश्व के 51 राष्ट्रों ने मिलकर 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की।

(ख) संयुक्त राष्ट्र संघ के अंगों एवं विशिष्ट संस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर
संयुक्त राष्ट्र संघ के 6 प्रमुख अंग हैं-

  1. महासभा
  2. सुरक्षा परिषद्
  3. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्,
  4. संरक्षण परिषद्,
  5. अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय,
  6. सचिवालय।

(ग) दक्षेस एवं आसियान के बारे में लिखिए।
उत्तर
आसियान की स्थापना 1967 में हुई। वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या 10 है। आसियान तेजी से बढ़ता हुआ एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है। भारत इस संगठन का औपचारिक सदस्य नहीं है, फिर भी आसियान एवं उसके सदस्य देशों के साथ प्रगाढ़ व्यापारिक, सांस्कृतिक, सामरिक संबंध हैं।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में लिखिए-
1. महासभा
2. सुरक्षा परिषद्
3. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय
उत्तर
1. महासभा- संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य महासभा के सदस्य होते हैं। प्रत्येक सदस्य राष्ट्र महासभा में पाँच प्रतिनिधि भेज सकता है किन्तु मतदान के समय एक ही वोट दे सकता है। वर्ष में इसकी एक बैठक (UPBoardSolutions.com) अवश्य होती है। इसका सभापति केवल 1 वर्ष के लिए ही चुना जाता है। महासभा विश्व की गहन समस्याओं पर विचार-विमर्श के लिए विश्व सम्मेलन बुलाती है।

2. सुरक्षा परिषद्- यह परिषद् विश्व में शान्ति और सुरक्षा बनाए रखने का प्रयास करती हैं। दो राष्ट्रों के बीच हुए विवाद को हल करने का प्रयास करती है। युद्ध होने की स्थिति में उसे समाप्त कराने का प्रयत्न करती है और उसके लिए सेना भी भेजती है। सुरक्षा परिषद् में 15 सदस्य होते हैं, जिनमें चीन, इंग्लैण्ड, फ्रांस, अमेरिका व रूस, ये पाँच स्थायी सदस्य हैं। शेष दस अस्थायी सदस्य महासभा से केवल दो वर्षों के लिए चुने जाते हैं।

3. अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय- संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य राष्ट्रों में आपस में विवाद और मतभेद हो जाने पर अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय में उसको शान्तिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाता है। इस न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं।

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UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 1 From the Beginning of Time

UP Board Solutions for Class 11 History Chapter 1 From the Beginning of Time (समय की शुरुआत से)

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पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर

संक्षेप में उत्तर दीजिए
प्रश्न 1.

पृष्ठ 27 पर दिए गए सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था (Positive Feedback Mechanism) को दर्शाने वाले आरेख को देखिए। क्या आप उन निवेशों (Inputs) की सूची दे सकते हैं जो औजारों के निर्माण में सहायक हुए? औजारों के निर्माण से किन-किन प्रक्रियाओं को बल मिला?
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उत्तर :
(I)  निम्नलिखित निवेश (Inputs) औजार निर्माण में सहायक हुए

  1. मस्तिष्क के आकार में वृद्धि हुई तथा उसकी क्षमता बढ़ी।
  2.  वस्तुओं को उठाने, औजारों को बनाने तथा उपयोग के लिए हाथ स्वतन्त्र थे।
  3. मानव अपने पैरों पर सीधा चलने लगा था।
  4. आखेट और भोजन के लिए।

(II)  औजारों के निर्माण में निम्नलिखित प्रक्रियाएँ आगे बढ़ीं

  1.  मानव की कार्यक्षमता में वृद्धि हो गई।
  2.  मानव सरलता से आखेट करने लगा।
  3.  वह मांस के बड़े टुकड़ों को छोटे-छोटे आकार में कर सकता था, जिससे उसे खाने में सरलता होने लगी।
  4. औजारों के उपयोग से उसने घर बनाना भी सीखा।

प्रश्न 2.
मानव और लंगूर तथा वानरों जैसे स्तनपायियों के व्यवहार तथा शरीर रचना में कुछ समानताएँ पाई जाती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि सम्भवतः मानव का क्रमिक विकास वानरों से हुआ (क) व्यवहार और (ख) शरीर रचना शीर्षकों के अन्तर्गत दो अलग-अलग स्तम्भ बनाइए और उन समानताओं की सूची दीजिए। दोनों के बीच पाए जाने वाले उन अन्तरों का भी उल्लेख कीजिए जिन्हें आप महत्त्वपूर्ण समझते हैं?
उत्तर :
समानताएँ (व्यवहार) :

  1. मानव, लंगूर और वानर ये तीनों ‘प्राइमेट’ स्तनपायी प्राणियों के एक अधिक बड़े समूह के अन्तर्गत एक समूह है।
  2.  ये तीनों अपनी सन्तानों से प्यार करते हैं।
  3.  तीनों चलते समय पैरों और हाथों का उपयोग करते हैं।
  4. तीनों ही प्रजनन द्वारा सन्तान को जन्म देते हैं।
  5. अपना और अपने बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं।

शारीरिक समानताएँ :

  1.  तीनों के शरीर पर बाल पाए जाते हैं।
  2.  सन्तान जन्म लेने से पूर्व अपेक्षाकृत दीर्घकाल तक माता के गर्भ में पलती है।
  3. तीनों में स्तनपायी ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं।

मानव, लंगूर तथा वानर में अन्तर

  1. तीनों की खोपड़ियों की रचना में बड़ा अन्तर है।
  2.  तीनों के दाँत भी भिन्न प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 3.
मानव उद्भव के क्षेत्रीय निरमंतरता मॉडल के पक्ष में दिए गए तर्कों पर चर्चा कीजिए। क्या आपके विचार से यह मॉडल पुरातात्त्विक साक्ष्य को युक्तियुक्त स्पष्टीकरण देता है?
उत्तर :
मानव उद्भव के क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं

  1. आधुनिक सभ्य मानवों में सर्वत्र शारीरिक और आनुवंशिक समरूपता पाई जाती है। इस समरूपता का कारण क्षेत्रीय निरन्तरता है।
  2. सभी आधुनिक सभ्य मानवों के पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे और वहीं से अन्य स्थानों पर गए।
  3. आधुनिक मानव के जो जीवाश्म इथोपिया में मिले हैं उनसे इनकी पुष्टि होती है।
  4. आधुनिक सभ्य समाज में जो शारीरिक भिन्नताएँ दिखाई देती हैं उसका कारण उन लोगों का , परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को तैयार करना है। इस प्रकार क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल पुरातात्त्विक साक्ष्य का सही-सही स्पष्टीकरण देता है। जिसकी पुष्टि पुरातात्त्विक साक्ष्य भी करते हैं।

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सी क्रिया के साक्ष्य व प्रमाण पुरातात्विक अभिलेख में सर्वाधिक मिलते हैं
(क) संग्रहण
(ख) औजार बनाना
(ग) आग का प्रयोग
उत्तर :
(ख) औजार बनाना

संक्षेप में निबन्ध लिखिए।

प्रश्न 5.
भाषा के प्रयोग से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी मदद . मिली होगी? इस पर चर्चा कीजिए। इन क्रिया-कलापों के लिए विचार सम्प्रेषण के अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था?
उत्तर :
शिकार करने और आश्रय या घर बनाने के कार्य में भाषा के प्रयोग से मानव को बहुत सुविधा प्राप्त हुई होगी। भाषा-विचार सम्प्रेषण का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। पहले भाषा का रूप हाव-भाव थे। होमोनिड भाषा में हाव-भाव या हाथों का संचालन सम्मिलित था। उच्चारित भाषा से पूर्व मौखिक या अशाब्दिक संचार का प्रयोग किया जाता था। मानव की वाणी का प्रारम्भ सम्भवतया प्राइमेट्स में पाए जाने वाले बुलावों की क्रिया से हुआ। प्रारम्भिक मानव एक-दूसरे को भाषा के माध्यम से शिकार का स्थान और उसका प्रकार बताता होगा। यही नहीं, शिकार किस प्रकार किया जाए, इसकी भी जानकारी प्राप्त करता होगा। कुछ पुरातत्त्वशास्त्रियों का विचार है कि भाषा, कला के साथ-साथ 40000-35000 वर्ष पूर्व विकसित हुई उच्चारित भाषा का विकास कला के साथ निकटतापूर्वक जुड़ा है। इसी कला के माध्यम से मानव को आश्रय या घर की सुविधा के विषय में ज्ञान प्राप्त हुआ होगा। घर बनाने की तकनीक, इसमें प्रयुक्त होने वाली सामग्री की जानकारी भी एक-दूसरे से भाषा के माध्यम से ही प्राप्त हुई होगी। विचार सम्प्रेषण केअन्य तरीकों के रूप में नृत्य, हाव-भाव का प्रदर्शन, चित्रकारी करना, रेखाएँ खींचना, लक्ष्य दिखाना आदि का प्रयोग किया जाता रहा होगा।

प्रश्न 6.
अध्याय के अन्त में दिए गए प्रत्येक कालानुक्रम में से किन्हीं दो घटनाओं को चुनिए और यह बताइए कि इनका क्या महत्त्व है?
उत्तर :
अध्याय के अन्त में दिए युए कालानुक्रम प्रथम की दो सम्मुख घटनाओं का वर्णन इस प्रकार है

  1. आस्ट्रेलोपिथेकस : 56 लाख वर्ष पूर्व आस्ट्रेलोपिथिकस का उद्भव हुआ था। इसके मस्तिष्क का आकार होमो की अपेक्षा बड़ा था। जबंड़े अधिक भारी थे। दाँत भी बड़े थे। आस्ट्रेलोपिथिकस नाम लातिनी भाषा के शब्द ‘आस्ट्रेल’ अर्थात् दक्षिणी और यूनानी भाषा के शब्द ‘पिथिक्स’ यानी ‘वानर’ से मिलकर बना है। यह नाम इसलिए ‘दिया गया, क्योंकि मानव के आदिकालीन रूप में उसकी वानर अवस्था के अनेक लक्षण विमान रहे।
  2. होमोसेपियन्स : होमोसैपियन्स अथवा आधुनिक मानव जो बुद्धिमान तथा चिन्तनशील कहलाता है। ये 1.9-1.6 लाख वर्ष पूर्व के हैं।

कालानुक्रम द्वितीय की दो घटनाएँ निम्नलिखित हैं

  1.  स्वरतन्त्र का विकास : स्वरतन्त्र का सम्बन्ध बोली जाने वाली भाषा से है। पुरातत्त्वविदों
    का विचार है कि होमोबिलस के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ रही होंगी, जिनके कारण वे बोल सके होंगे। स्वरतन्त्र का विकास भी भाषा की उत्पत्ति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। स्वरतन्त्र का विकास लगभग 2 लाख वर्ष पूर्व हुआ। वास्तव में इसका सम्बन्ध आधुनिक मानवों से रहा है।
  2.  चूल्हों के इस्तेमाल के बारे में पहला साक्ष्य (1,25,000 लाख वर्ष पूर्व) :
    1,25,000 वर्ष । पूर्व गुफाओं तथा खुले निवास क्षेत्र का प्रचलन प्रारम्भ हो गया था। इसके प्रमाण यूरोप के पुरास्थलों से मिलते हैं। दक्षिण फ्रांस में स्थित लेजरेट गुफा की दीवार को 12×4 मीटर आकार के एक निवास स्थान से सटाकर बनाया गया है। इसके अन्दर दो चूल्हे मिले हैं। चूल्हे आग के नियन्त्रित प्रयोग के परिचायक हैं। इसके कई लाभ थे। नियन्त्रित आग का प्रयोग गुफाओं के अन्दर प्रकाश और उष्णता मिलने में सहायक होता था। इससे भोजन भी पकाया जाता था। आग का प्रयोग खतरनाक जानवरों को भगाने में भी किया जाता रहा होगा।

परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न :
प्रश्न 1.
जीवाश्मों का अध्ययने क्यों आवश्यक है।
(क) जीवित मानव के लिए।
(ख) मानव की लुप्त प्रजातियों के लिए।
(ग) मृत जीवों के लिए ।
(घ) विशिष्ट अध्ययन हेतु
उत्तर :
(ख) मानव की लुप्त प्रजातियों के लिए।

प्रश्न 2.
पशुओं और कुत्तों को कब पालतू बनाया गया?
(क) 7000-6000 ई० पू०
(ख) 5000-4000 ई० पू०
(ग) 2000-3000 ई० पू०
(घ) 1000-1500 ई० पू०
उत्तर :
(क) 7000-6000 ई० पू०

प्रश्न 3.
प्रथम ओलम्पिक खेलों का आयोजन किस देश में हुआ?
(क) यूनान
(ख) एशिया
(ग) यूरोप
(घ) भारत
उत्तर :
(क) यूनान 

प्रश्न 4.
गेहूँ और जौ की खेती कहाँ प्रारम्भ हुई थी?
(क) भारत
(ख) यूनान
(ग) यूरोप
(घ) अफ्रीका
उत्तर :
(ग) यूरोप।

प्रश्न 5.
भीमबेटका के गुफाचित्र भारत के किस प्रदेश में हैं।
(क) गुजरात
(ख) महाराष्ट्र
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) राजस्थान
उत्तर :
(ग) मध्य प्रदेश

प्रश्न 6.
प्राज्ञ मानव कहलाता है
(क) आस्ट्रेलोपिथिकस
(ख) होमोहैबिलस
(ग) होमोसैपियन्स
(घ) निअण्डरथल
उत्तर :
(ग) होमोसैपियन्स

प्रश्न 7.
सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले मानव थे
(क) होमोहैबिलस
(ख) होमोइरेक्टस
(ग) होमोसैपियन्स
(घ) निअण्डरथल
उत्तर :
(ख) होमोइरेक्टस

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवाश्म से क्या आशय है?
उत्तर :
जीवाश्म अत्यन्त प्राचीन वृक्ष, मानव तथा जानवरों के अवशेष हैं। ये पत्थर में परिवर्तित हो । जाते हैं तथा प्रायः चट्टानों में संचित रहते हैं। इस प्रकार जीवाश्म लाखों वर्षों तक सुरक्षित बने रहते हैं।

प्रश्न 2.
‘प्राइमेट्स से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
प्राइमेट्स स्तनधारियों के बड़े समूह के उपसमूह हैं। इसमें लंगूर, वानर तथा मानव को सम्मिलित किया जाता है। प्राइमेट्स का गर्भधारणकाल
अपेक्षाकृत लंबा होता है। इनमें स्तनग्रन्थियाँ पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
प्रारम्भ में मानव ने अपना भोजन किस प्रकार प्राप्त किया?
उत्तर :
प्रारम्भ में मानव ने अपना भोजन जानवरों का शिकार करके, भोजन की तलाश करके अंथवा वृक्षों से प्राप्त कंद-मूल से प्राप्त किया।

प्रश्न 4.
वे कौन-से कारक हैं जो प्रारम्भिक मानव इतिहास को समझने में हमारी सहायता करते हैं?
उत्तर :
निम्नलिखित कारक प्रारम्भिक मानव इतिहास को समझने में हमारी सहायता करते हैं

  1.  जीवाश्म,
  2.  पत्थर के औजार,
  3. गुफाओं की चित्रकारी।

प्रश्न 5.
मानव विज्ञान के अध्ययन के विषय क्या हैं?
उत्तर :
मानव विज्ञान एक ऐसा विषय है जिसमें मानव संस्कृति और मानव जीवविज्ञान के उविकासीय पक्षों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 6.
नृवंशशास्त्र (Ethnography) शास्त्र के अध्ययन का विषय क्या है?
उत्तर :
नृवंशशास्त्र के अध्ययन का विषय समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन होता है। इसमें उनके रहन-सहन, खान-पान, आजीविका के साधन, प्रौद्योगिकी आदि की जाँच की जाती है।

प्रश्न 7.
भाषा की उत्पत्ति कब हुई?
उत्तर :
उच्चरित यानी बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति के विषय में नृतत्त्वशास्त्रियों का मत है कि ‘होमोहैबिलस’ के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ थीं जिनके कारण उसके लिए बोलना सम्भव हुआ। इस प्रकार सम्भवतः भाषा का विकास 20 लाख वर्ष पूर्व हुआ होगा।

प्रश्न 8.
आस्ट्रेलोपिथिकस की खोज किसने की?
उत्तर :
आस्ट्रेलोपिथिकस की खोज सर्वप्रथम मैरी लिके (Mary Leakey) ने 17 जुलाई, 1959 को की थी।

प्रश्न 9.
प्रजातियों का वर्गीकरण कैसे किया गया है?
उत्तर :
आदिकालीन मानवों के अवशेषों को भिन्न-भिन्न प्रजातियों में वर्गीकृत किया गया है। इन प्रजातियों को अक्सर उनकी हड्डियों की रचना में पाए जाने वाले अन्तरों के आधार पर एक-दूसरे से । अलग किया जाता है।

प्रश्न 10.

होमिनिड्स के उपविभाग लिखिए।
उत्तर :
होमिनिड्स के उपविभाग हैं

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस
  2.  होमो

प्रश्न 11.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच क्या अन्तर है?
उत्तर :
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच मुख्य अन्तर मस्तिष्क के आकार, जबड़ों तथा दाँतों में आस्ट्रेलोपिथिकस मस्तिष्क का आकार होमो की अपेक्षा छोटा होता है। इसके अलावा आस्ट्रेलोपिथिकस के जबड़े होमो के मुकाबले भारी तथा दाँत लम्बे होते हैं।

प्रश्न 12.
पत्थर के औजार बनाने तथा प्रयोग करने के प्रारम्भिक साक्ष्य हमें कहाँ मिले?
उत्तर :
पत्थर के औजार बनाने तथा प्रयोग करने के प्रारम्भिक साक्ष्य हमें अफ्रीका महाद्वीप के इथियोपिया तथा कार्निया में मिले हैं।

प्रश्न 13.
पत्थर के औजारों का प्रयोग सर्वप्रथम किसके द्वारा किया गया?
उत्तर :
आस्ट्रेलोपिथिकस सम्भवतः पत्थर के औजार बनाने वाले सर्वप्रथम थे।

प्रश्न 14.
हादजा कौन है?
उत्तर :
हादजा शिकारियों तथा संग्राहकों का एक छोटा समूह है, जो दक्षिण अफ्रीका में ‘लेक इयासी एक खारे पानी की विभ्रंश घाटी में बनी झील के आस-पास रहते हैं।

प्रश्न 15.
लेजरेट गुफा के पास मिले निवास स्थल में चूल्हे (Hearths) किस बात के प्रतीक हैं।
उत्तर :
चूल्हे इस बात का प्रतीक हैं कि मानव आग का नियन्त्रित प्रयोग जानता था। आग से गुफाओं को गर्म रखने तथा उजाला करने में सहायता मिलती थीं।

प्रश्न 16.
प्रारम्भिक होमिनिड्स के खाद्य स्रोत कौन से थे?
उत्तर :
ऐसा माना जाता है कि प्रारम्भिक होमिनिड्स मृत जानवरों के शरीर में मांस तथा मज्जा प्राप्त करते होंगे। ये जानवर या तो प्राकृतिक रूप से मर जाते होंगे या अन्य जानवरों द्वारा मार दिए जाते होंगे। प्रश्न 17. मानव के सीधे खड़े होने की स्थिति का उसे क्या लाभ मिला? उत्तर-सीधा खड़ा होने तथा पिछले पैरों से चलना सीखना मानव के विकास की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना थी। मानव अब स्वयं को दूसरे जानवरों से अलग कर सकता था। खड़ा होने पर मानव के आगे के अंग वस्तुओं को पकड़ने तथा औजारों का हथियारों के रूप में प्रयोग करने के लिए स्वतन्त्र थे।

प्रश्न 18.
मानव इतिहास में प्रमुख निर्णायक अवस्था कब आई?
उत्तर :
मानव इतिहास में प्रमुख निर्णायक अवस्था उस समय आई जब मानव ने भोजन की तलाश से कृषि करना सीखा।

प्रश्न 19.
होमो’ शब्द का अर्थ बताइए।
उत्तर :
‘होमो’ लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘मानव’।

प्रश्न 20.
नृतत्त्वशास्त्रियों द्वारा सभी प्रजातियों के नाम किन भाषाओं से लिए गए हैं। एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
नृतत्त्वशास्त्रियों द्वारा सभी प्रजातियों के नाम लैटिन तथा ग्रीक भाषाओं से लिए गए हैं, जैसेआस्ट्रेलोपिथिकस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के ‘आस्ट्रल’ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है दक्षिणी तथा ग्रीक भाषा के शब्द ‘पिथिकोस’ से हुई, जिसका अर्थ है ‘वानर’।

प्रश्न 21.
ओल्डवर्ड गोर्ज क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
ओल्डवर्ड गोर्ज से आदिकालीन मानव के अनेक अवशेष मिले हैं, इसलिए यह प्रसिद्ध है।

प्रश्न 22.
आस्ट्रेलोपिथिकस कैसे लुप्त हो गया?
उत्तर :
हिमयुग के प्रारम्भ में तापमान और वर्षा की कमी के कारण जंगल कम हो गए और घास के मैदानों का क्षेत्रफल बढ़ता गया। फलस्वरूप आस्ट्रेलोपिथिकस के प्रारम्भिक रूप लुप्त हो गए।

प्रश्न 23.
गुफाओं में चित्रकारी क्यों की जाती थी?
उत्तर :

  1.  शिकार करने में सफलता प्राप्त करने पर।
  2.  गुफाएँ संगमस्थल थीं जहाँ लोगों के छोटे-छोटे समूह मिलते थे।

प्रश्न 24.
हादजा जनसमूह का भोजन क्या है?
उत्तर :
हादजा जनसमूह का भोजन 80% वनस्पतिजन्य और शेष 20% मांस और शहद से पूर्ण किया जाता है।

प्रश्न 25.
होमिनिड कहाँ निवास करते थे?
उत्तर :
होमिनिड पेड़ों की शाखाओं पर निवास करते थे।

प्रश्न 26.
आदिकालीन मानव के दो औजारों के नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. मँड़ासा,
  2. हस्तकुठार,
  3.  छेनी

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
इन चार खोपड़ियों को देखिए
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खोपड़ी—क, एक वानर की है।
खोपड़ी—ख, आस्ट्रेलोपिथिकस नामक प्रजाति की है (नीचे देखिए)
खोपड़ी–ग, होमोइरेक्टस (सीखे खड़े होकर चलने वाले आदमी) की है।
खोपड़ी-घ, होमोसेपियन्स (चिन्तनशील/प्राज्ञ मानव) नामक प्रजाति की है। आज के मानव इसी प्रजाति के हैं। इन खोपड़ियों में आप अधिक-से-अधिक जितनी समानताएँ और अन्तर देखते हैं उनकी सूची बनाइए; इस हेतु आप सबसे पहले इन खोपड़ियों का मस्तिष्क खोलो, जबड़ों और दाँतों को भली-भाँति देखिए।
उत्तर :
उपर्युक्त प्रस्तुत चार खोपड़ियाँ क, ख, ग, घ के विषय में हमारे अध्ययन का निष्कर्ष निम्न है
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प्रश्न 2.
प्रजाति की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
प्रजाति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(i)
प्रजाति जीवों का एक ऐसा समूह है जिसके नर और मादा सहवास के माध्यम से बच्चे पैदा कर सकते हैं।
(ii) ये बच्चे भी कालान्तर में सहवास करके सन्तान उत्पन्न करते हैं।
(iii) एक प्रजाति विशेष के सदस्य दूसरी प्रजाति के सदस्यों से सहवास करके सन्तान उत्पन्न नहीं कर सकते।
(iv) विभिन्न प्राणियों की आनुवंशिकी भी भिन्न-भिन्न होती है।

प्रश्न 3.
“जीवित प्राणियों में केवल मानवों में ही भाषा पाई जाती है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
विश्व के समस्त जीवित प्राणियों में केवल मानव द्वारा ही भाषा का प्रयोग किया जाता है। भाषा के विकास से जुड़े निम्नलिखित मत हैंहोमोनिड मानव भाषा के रूप में हाव-भाव तथा हाथों की चेष्टा का उपयोग करता था। ध्वनि तथा हाव-भाव और चेहरे के भाव द्वारा अपनी बात समझाना बोल-चाल की भाषा से पूर्व का रूप था। मानव भाषा का प्रारम्भ प्राइमेट्स में पाई गई आवाजों से हुआ। प्रारम्भिक अवस्था में मानव के पास भाषा के रूप में कम ध्वनियाँ रही होंगी, धीरे-धीरे इनका विकास भाषा में हुआ होगा।

प्रश्न 4.
आदिमानव के दो पैरों पर चलने से क्या लाभ हुए?
उत्तर :
आदिमानव जब दो पैरों पर चला तो उसे निम्नलिखित लाभ हुए

  1. दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण उसके हाथ वस्तुओं को उठाकर ले जाने के लिए मुक्त हो गए।
  2.  हाथों के प्रयोग से सन्तुलन बना और दो पैरों पर खड़े होकर चलने की कुशलता भी बढ़ गई।
  3.  हाथों का इस्तेमाल औजार बनाने में काम आया।
  4. चलने से उसकी शारीरिक ऊर्जा की खपत अन्य कार्यों में होने लगी।

प्रश्न 5.
आकृति (क) चिम्पैंजी की ठीक व सूक्ष्म पकड़ दर्शाती है।
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आकृति (ख) होमिनिड़ की दुरुस्त व सूक्ष्म पकड़ दर्शाती है। आकृति (ग) मनुष्य के हाथ की सशक्त (Power) पकड़ दर्शाती है। हाथ की सशक्त पकड़ का विकास सम्भवतः ठीक व सूक्ष्म पकड़ से पहले ही हुआ होगा। चिम्पैंजी की ठीक पकड की तुलना मनुष्य के हाथ की ठीक व सूक्ष्म पकड़ से कीजिए। उन कामों की सूची बनाइए जिन्हें करते समय आप ठीक व पकड़ सूक्ष्म का इस्तेमाल करते हैं। आप किन-किन कामों को करने के लिए सशक्त पकड़ का प्रयोग करते हैं?
उत्तर :
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हम यथार्थ मात्रता पकड़ के आधार पर औजार बनाने, छोटी-छोटी वस्तुओं को उठाने तथा उन्हें पकड़ने आदि का काम करते हैं। सशक्त पकड़ के आधार पर हम किसी वस्तु; जैसे-क्रिकेट का बैट, हॉकी, भाला, साइकिल, स्कूटर का हैंडिल आदि को पकड़ने का कार्य करते हैं।

प्रश्न 6.
कुछ स्थानों पर मानव-निर्मित औजार एक ही स्थान पर भारी मात्रा में मिले हैं। इसका क्यो कारण है?
उत्तर :
कुछ स्थानों, जैसे कीनिया में किलोंबे और ओलोर्जेसाइली में हजारों की संख्या में शल्य उपकरण और हस्तकुठार प्राप्त हुए हैं। ये 7 लाख से 5 लाख वर्ष प्राचीन हैं। एक ही स्थान पर हजारों की संख्या में औजार मिलने का कारण यह हो सकता है कि जिन स्थानों पर खाद्य प्राप्ति के संसाधन अधिक मात्रा में उपलब्ध थे वहाँ बार-बार आते-जाते रहे होंगे। वे लोग जाते समय वहाँ अपने क्रिया-कलापों और उपस्थिति के चिह्न; जैसे-शिल्प वस्तुएँ, औजार आदि छोड़ गए होंगे। धीरे-धीरे इन स्थानों पर औजारों का ढेर लग गया। जहाँ लोग कम आते थे वहाँ ये वस्तुएँ कम पाई गईं।

प्रश्न 7.
मानव द्वारा आखेट या शिकार कब प्रारम्भ किया गया?
उत्तर :
मानव द्वारा आखेट लगभग 5,00,000 वर्ष पूर्व प्रारम्भ किया गया। योजनाबद्ध तरीके से सोच-समझकर बड़े स्तनपायी जानवरों का शिकार और उनका वध करने का सबसे प्राचीन स्पष्ट साक्ष्य दो स्थानों से मिला है—दक्षिण इंग्लैण्ड में बॉक्स ग्रोव से 5 लाख वर्ष पूर्व का और जर्मनी में । शोनिजन से 4 लाख वर्ष पूर्व का। लगभग 35 हजार वर्ष पूर्व मानव के योजनाबद्ध तरीके से शिकार करने का साक्ष्य कुछ यूरोपीय खोज स्थलों से मिलता है। ऐसा लगता है कि पूर्व मानव
ने कुछ ऐसे स्थल जैसे कि नदी के पास दोलनी वेस्तोनाइस (चेक गणराज्य) को सोच-समझकर शिकार के लिए चुना था। रेन्डियर और घोड़ा जैसे स्थान बदलने वाले जानवरों के झुण्ड के झुण्ड पतझड़ और वसन्त के मौसम में सम्भवतः उस नदी के पार जाते थे आर तब उनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था।
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चित्र-यूरोप

प्रश्न 8.
आदिमानव की औजार बनाने की पंच ब्लेड विधि को सचित्र समझाइए।
उत्तर-लगभग 11000 वर्ष पूर्व सिले हुए कपड़ों के प्राथमिक प्रमाण मिलते हैं। पंच ब्लेड विधि के द्वारा छोटे रूखानी जैसे औजार बनाए जाने लगे। इनकी सहायता से हड्डियों, बारहसिंगों के सींग, हाथीदाँत या लकड़ी पर नक्काशी की जाने लगी।
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पंच ब्लेड विधि (The Punch Blade Technique)

(क) एक बड़े पत्थर का ऊपरी भाग पत्थर के हथौड़े से हटाया जाता है।
(ख) इससे एक सपाट तल (Flat Surface) बनता है जिसे चोट मारने वाला प्लेटफार्म (Striking platform) कहा जाता है।
(ग) इसे हथौड़े तथा पंच के द्वारा पीटा जाता है, जो कि हड्डी या बारहसिंगे के सींग के बने होते हैं।
(घ) इससे ब्लेड बनते हैं जिन्हें चाकुओं या रूखानियों (Chisels) के रूप में हड्डी बारहसिंगे की सींग, हाथीदाँत या लकड़ी पर नक्काशी अथवा खुदाई (Engraving) के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
(ङ) हड्डी पर नक्काशी (Engraving) का एक उदाहरण। इस पर जानवरों के चित्रों को देखें।
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एक फेंकने वाली बरछी (A Spear Hrowner)

प्रश्न 9.
होमोनिड्स के क्रियाकलाप के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
प्रस्तुत चित्र से स्पष्ट होता है कि एक ही स्थल पर होमोनिड्स, अन्य प्राइमेट्स तथा मांसाहारी पाए गए हैं। नृतत्त्वशास्त्रियों का विचार है कि प्रारम्भिक होमोनिड्स जैसे होमोहैबिलस जहाँ कहीं भी भोजन मिलता था उसका अधिकांश उपयोग करते थे। विभिन्न स्थानों पर सोते थे और अपना अधिकांश समय पेड़ों पर बिताते थे।
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
आधुनिक मानव की उत्पत्ति के स्थान के विषय में प्रतिस्थापन मॉडल और क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल के बिन्दुओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर :
आधुनिक मानव की उत्पत्ति के विषय में हुई खोजों के पश्चात् वैज्ञानिकों ने दो मॉडल विकसित किए|

  1. क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल,
  2. प्रतिस्थापन मॉडल।

 

  1.  क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल : इस प्रतिरूप के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रदेशों में रहने वाले होमोसैपियन्स का आधुनिक मानव के रूप में विकास धीरे-धीरे अलग गति से हुआ। इसीलिए आधुनिक मानव विश्व के विभिन्न भागों में पहली बार अलग अलग स्वरूप में दिखाई दिया।यह तर्क वर्तमान मानव के लक्षणों की विभिन्नताओं पर आधारित है।
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  2.  प्रतिस्थापन मॉडल : प्रतिस्थापन मॉडल में यह कल्पना की गई है कि मानव के सभी प्राचीन रूप, चाहे वे कहीं भी थे, बदल गए। उनका स्थान पूरी तरह आधुनिक मानव ने ले लिया। इस विचारधारा का समर्थन इस प्रमाण से होता है कि आधुनिक मानव में सभी जगह शारीरिक और जाननिक समरूपता दिखाई देती है।

प्रश्न 2.
प्रारम्भिक मानव के भोजन प्राप्त करने के तरीकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर :
पुरातात्त्विक प्रमाणों से पता चलता है कि प्रारम्भिक मानव दो तरीकों से भोजन प्राप्त करते थे|

  1.  संग्रहण द्वारा।
  2. आखेट (शिकार) द्वारा।

 

  1.  संग्रहण द्वारा : यत्र-तत्र बिखरे हुए खाद्य पदार्थों को खोजकर एकत्र करना, बिखरे हुए दाने, बीजों आदि को बटोरना और जल से मछली पकड़ना आदि संग्रहण है। प्रारम्भिक मानव अपने भोजन के लिए सम्भवतया इसी संग्रहण प्रक्रिया का सहारा लेता होगा। इस प्रक्रिया के कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए हैं।
    आखेट (शिकार) द्वारा : प्रारम्भिक मानव का भोजन प्राप्त करने का दूसरा प्रमुख तरीका आखेट था। प्राप्त साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि आदिकालीन होमिनिड मृत जानवरों की मांस-मज्जा खुरचकर निकाल लेते थे और उसका भोजन के रूप में प्रयोग करते थे। इसके लिए वे पत्थर के औजारों का इस्तेमाल करते थे। ये औजार दक्षिण अफ्रीका में इथोपिया और केन्या में मिले हैं। सम्भवतया ये लोग स्तनपायी जानवरों, पक्षियों, चूहे, साँप और कीड़े-मकौड़ों को  अपना आहार बनाते होगे। आखेट या शिकार द्वारा भोजन प्राप्त करने का तरीका मानव ने 5 लाख वर्ष पूर्व ही अपना लिया था। आस्ट्रेलोपिथिकस सम्भवतः पत्थर के औजार बनाने वाले सबसे पहले थे। इनसे मांस-मज्जा खुरचकर वे उसका प्रयोग भोजन में करते थे।
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योजनाबद्ध आखेट करने के सर्वाधिक प्राचीन प्रमाण दो स्थलों से प्राप्त हुए हैं ।

  1. दक्षिणी इंग्लैण्ड में बॉक्स ग्रोव से—यह 5 लाख वर्ष पूर्व का है।
  2. जर्मनी में स्कोनिंजन से—यह 4 लाख वर्ष पूर्व का है।
    वर्तमान समाज में भी अनेक जनजातियाँ संग्रहण और आखेट द्वारा अपना भरण-पोषण करती हैं, किन्तु इनकी तुलना प्राचीन समाज से नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 3.
होमों का क्या अर्थ है? होमो जीवाश्मों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है?
उत्तर :
‘होमो’ लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘मानव’। नृतत्त्वशास्त्रियों द्वारा होमो को अनेक प्रजातियों में बाँटा गया है तथा प्रजातियों को उनकी विशिष्टताओं के आधार पर अलग-अलग नाम दिए गए हैं। होमो जीवाश्मों को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा गया है

  1. होमोबिलस : औजार बनाने वाले।
  2.  होमोइरेक्टस : सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले।
  3.  होमोसेपियन्स : चिन्तनशील या प्राज्ञ मानव।
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    होमोहबिलस के जीवाश्म इथियोपिया में ओमो तथा तंजानिया के ओल्ड्वर्ड गोर्ज में मिले हैं। होमोइरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म अफ्रीका के कूबीफोरा तथा पश्चिमी तुर्काना, केन्या और जावा  के मोड़जोकर्ता तथा संकरित में मिले थे। होमोसैपियन्स आधुनिक मानव है। यह बुद्धिमान तथा चिन्तनशील माना जाता है।

विश्व में मानव प्रजातियों का विकास’

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UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 18 अस्थियों की टूट और मोच

UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 18 अस्थियों की टूट और मोच

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Home Science . Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 18 अस्थियों की टूट और मोच.

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
अस्थि-भंजन से आप क्या समझती हैं? अस्थि-भंजन के कारणों एवं प्रकारों का उल्लेख कीजिए। [2008, 09, 10, 11]
या
अस्थि-भंग या फ्रेक्चर किसे कहते हैं? इनके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए। [2011, 12, 13, 14, 15, 17]
या
हड्डी की टूट कितने प्रकार की होती है? चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए। [2011]
या
हड्डियों की टूट कितने प्रकार की होती है ? संक्षेप में लिखिए। [2009, 11]
उत्तर:
अस्थि-भंजन का अर्थ

शरीर के किसी भी अंग की अस्थि के टूट जाने को अस्थि-भंजन कहते (UPBoardSolutions.com) हैं। यहाँ यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि यदि कोई अस्थि पूरी तरह से टूटे नहीं, परन्तु उसमें साधारण-सी दरार भी आ जाए तो उसे भी अस्थि-भंजन की ही श्रेणी में रखा जाता है।

अस्थि-भंजन के कारण
आकस्मिक दुर्घटना के कारण किसी अस्थि (हड्डी) के टूट जाने को अस्थि-भंजन कहते हैं। अस्थि-भंजन होने के सामान्य कारण निम्नलिखित हैं

(1) गिरना:
अचानक गिरने अथवा फलों आदि के छिलकों से फिसलने पर प्रायः अस्थि-भंजन की सम्भावना रहती है। ठोकर खाना, छत अथवा सीढ़ियों से गिरना तथा फलों के छिलकों द्वारा फिसलना आदि इस प्रकार की सामान्य दुर्घटनाएँ हैं, जोकि अधिकांशतया अस्थि-भंजन का कारण होती हैं।

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(2) टक्कर लगना:
किसी वाहन (साइकिल, कार, बस व ट्रक आदि) अथवी दीवार इत्यादि से टक्कर होने पर अस्थि-भंजन की अत्यधिक सम्भावना रहती है।

(3) दब जाना अथवा गोली लगना:
अधिक भार वाली वस्तुओं; जैसे-मशीन, पत्थर तथा वाहन आदि) के नीचे दब जाने पर अथवा गोली लगने पर भी अस्थि-भंजन की अत्यधिक सम्भावना रहती है।

अस्थि-भंजन के विभिन्न प्रकार

सामान्य रूप से अस्थियाँ प्रत्यक्ष भंजन; जैसे—किसी अंग में गोली लगने से अस्थि टूटना व अप्रत्यक्ष भंजन; जैसे-खेलते हुए यदि कोई व्यक्ति हाथों के बल गिर जाए तथा झटके से कन्धे की अस्थि का टूटना; से टूटती हैं।
अस्थि-भंजन के मुख्य प्रकारों का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है

(1) साधारण अस्थि-भंजन:
इस प्रकार के अस्थि-भंजन में केवल अस्थि ही टूटती है तथा आस-पास के ऊतकों को कोई विशेष क्षति नहीं होने पाती है।

(2) संयुक्त अस्थि:
भंजन–इस प्रकार के अस्थि-भंजन में टूटने वाली अस्थि का एक सिरा मांस तथा त्वचा को फाड़कर बाहर निकल जाता है, जिसके फलस्वरूप प्रभावित अंग विकृत हो जाता है तथा रोगाणुओं द्वारा घाव के संक्रमित होने की आशंका रहती है।

(3) जटिल अस्थि-भंजन:
इसमें अस्थि टूटने पर आस-पास की रुधिर-वाहिनियों तथा अन्य कोमल अंगों; फेफड़े व मस्तिष्क आदि; को घायल कर देती हैं। जटिल टूट अनेक बार घातक भी सिद्धरो पकती है; अत: इसका तत्काल उपचार आवश्यक है। अनेक बार असावधानी के कारण अथवा (UPBoardSolutions.com) अनुपयुक्त विधि से पीड़ित व्यक्ति को हिलाने-डुलाने पर अथवा स्थानान्तरित करने पर साधारण अस्थि-भंजन भी जटिल अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। इसलिए अस्थि-भंजन के रोगी की भाल नियम एवं विधिपूर्वक की जानी चाहिए।

(4) बहुखण्डी अस्थि-भंजन:
इसमें प्रभावित स्थान पर अस्थि के एक से अधिक टुक जाते हैं।

(5) पच्चड़ी अस्थि-भंजन:
इसमें टूटी हुई अस्थि के सिरे पच्चड़ की तरह एक-दूसरे में घुस जाते हैं।
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6) कच्ची अस्थि-भंजन:
इंस प्रकार की अस्थि-भंजन प्रायः बच्चों की लचीली अस्थियों में होती है। ये अस्थियाँ चोट लगने पर या तो झुक जाती हैं या उनमें दरारें पड़ जाती हैं।

प्रश्न 2:
अस्थि-भंजन के मुख्य लक्षण क्या हैं? अस्थि-भंजन की सामान्य प्राथमिक चिकित्सा आप किस प्रकार करेंगी? [2007, 08, 09, 10, 11, 12, 14, 15, 16]
या
हड्डी टूटने पर आप रोगी को क्या प्राथमिक उपचार देंगी? [2007, 08, 09, 10, 17]
या
हड्डी की टूट के लक्षण क्या हैं? हड्डी टूटने पर क्या प्राथमिक सहायता देनी चाहिए? हड्डियों के लिए किस पोषक तत्त्व की अधिक आवश्यकता होती है ? [2009]
उत्तर:
अस्थि -भंजन

अस्थियाँ शरीर के अन्दर अर्थात् त्वचा एवं मांसपेशियों के नीचे होती हैं; अत: इन्हें बाहर से देखा नहीं जा सकता। इस स्थिति में अस्थि-भंजन की जानकारी कुछ सामान्य लक्षणों के माध्यम से ही प्राप्त की जाती है। अस्थि-भंजन होने पर पीड़ित व्यक्ति दर्द के साथ अनेक प्रकार की कठिनाइयों की भी अनुभूति करता है, जिनके आधार पर प्राथमिक चिकित्सक अस्थि-भंजन की वास्तविकता का अनुमान लगा सकता है।

लक्षण: अस्थि-भंजन के सामान्य लक्षणों का विवरण निम्नलिखित है

  1. हड्डी टूटने के स्थान के निकट असहनीय पीड़ा होती है, जिससे कि पीड़ित व्यक्ति दर्द से तड़पने लगता है।
  2.  हड्डी टूटने वाले अंग की शक्ति नष्ट हो जाती है।
  3.  हड्डी टूटने पर आस-पास के स्थान पर सूजन आ जाती है।
  4. अस्थि-भंजन होने पर ऊतकों के नीचे रक्त प्रवाह के प्रभावित होने के कारण त्वचा का रंग नीला पड़ जाता है।
  5. अस्थि-भंजन के कारण प्रभावित अंग की आकृति बिगड़ जाती है।
  6. प्रभावित अंग को स्वाभाविक ढंग से हिलाने-डुलाने में पीड़ा होती है।
  7. कई बार टूटी हुई अस्थि के सिरे एक-दूसरे के ऊपर चढ़े हुए प्रतीत होते हैं।
  8.  प्रभावित अंग स्वाभाविक ढंग से हिलता-डुलारा नहीं है।
  9. त्वचा के पास हड्डी टूटने पर रोगी स्वयं इसका अनुभव कर सकता है।
  10. टूटी हुई हड्डी के टुकड़े परस्पर रगड़ खाने पर ‘कर-कर’ की ध्वनि उत्पन्न (UPBoardSolutions.com) करते हैं। ऐसी अवस्था में अस्थि-भंजन का निर्णय लेने के लिए किसी योग्य चिकित्सक से भी परामर्श कर लें।
  11.  संयुक्त अथवा जटिल अस्थि-भंजन में पीड़ित व्यक्ति भारी दुर्बलता का अनुभव करता है। तथा वह मूर्च्छित भी हो सकता है।
  12. कभी-कभी टूटी हुई हड्डी मांस व खाल को फाड़कर बाहर आ जाती है।

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उपर्युक्त लक्षणों के दिखाई देने पर अस्थि-भंजन की निश्चित जानकारी के लिए एक्स-रे परीक्षण आवश्यक होता है।

सामान्य प्राथमिक चिकित्सा

अस्थि-भंजन की अवस्था में पीड़ित व्यक्ति की निम्नलिखित विधियों द्वारा प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करानी चाहिए

(1) उपयुक्त चिकित्सा सहायता:
इसके लिए अविलम्ब किसी योग्य चिकित्सक को बुलाना चाहिए। योग्य चिकित्सक के उपलब्ध न होने पर प्राथमिक चिकित्सा के आवश्यक उपाय करने चाहिए।

(2) रक्त-स्राव को रोकना:
अनेक बार अस्थि-भंजन के कारण पीड़ित व्यक्ति की रुधिर वाहिनियाँ फट जाती हैं, जिसके कारण रक्तस्राव होने लगता है। किसी स्वच्छ कपड़े के द्वारा दबाव डालकर रक्त-स्राव को रोकने का प्रयास करना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो टूर्नीकेट का प्रयोग भी किया जा सकता है।

(3) टूटी हड्डी की देखभाल:
अस्थि-भंजन का प्राथमिक उपचार दुर्घटनास्थल पर किया जाना ही उचित रहता है। रोगी की टूटी हुई हड्डी को खपच्ची, कार्ड-बोर्ड के टुकड़े, छड़ी अथवा अन्य किसी लकड़ी की सहायता से बाँधकर अचल बना देना चाहिए।

(4) घायल अंग की देखभाल:
रोगी के घावों को नि:संक्रामक घोल द्वारा साफ कर ऐन्टीसेप्टिक क्रीम लगाकर घायल अंग को स्वच्छ रूई अथवा कपड़े से ढक देना चाहिए।

(5) झोल का प्रयोग:
यदि बाहु की हड्डियाँ टूटी हों, तो रोगी को आराम देने के लिए उपयुक्त झोल का प्रयोग करना चाहिए।

(6) घायल का स्थानान्तरण:
घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने के पश्चात् किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहिए।

(7) गर्म पेय पदार्थ देना:
यदि रोगी होश में है, तो उसे पीने के लिए गर्म दूध, चाय व कॉफी देना लाभप्रद रहता है।

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(8) सान्त्वना देना एवं धैर्य बँधाना:
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति सदमे की स्थिति में होता है, जोकि अर्धिक होने पर घातक भी हो सकता है। प्राथमिक चिकित्सक का यह दायित्व है कि वह रोगी की घबराहट दूर कर उसे धैर्य बँधाए।।

प्रश्न 3
मोच आने से क्या अभिप्राय है? मोच आने के लक्षण और उपचार लिखिए। [2007, 09, 12, 14, 15, 18]
या
मोच के सामान्य उपचार क्या हैं? [2016]
उत्तर:
मोच आना

हड्डियाँ जोड़ के स्थान पर एक-दूसरे से बन्धक-सूत्रों अथवा तन्तुओं से जुड़ी होती हैं। अचानक चलते-चलते फिसलने, ऊँचे-नीचे स्थानों पर पैर पड़ने अथवा गिर जाने के कारण बन्धक-सूत्र या तो अधिक खिंच जाते हैं अथवा टूट जाते हैं। इसे मोच आंना कहते हैं। प्राय: (UPBoardSolutions.com) कलाई, गर्दन, कमर व टखने में मोच आने की भी अधिक सम्भावना रहती है।

लक्षण:
सामान्यतः मोंच आने पर पीड़ित व्यक्ति निम्नखित कठिनाइयाँ अनुभव करता है

  1. मोच से प्रभावित स्थान पर असहनीय पीड़ा होती है।
  2. जोड़ में सूजन आ जाती है और वह कमजोर हो जाता है।
  3.  मोच के स्थान पर त्वचा का रंग नीला अथवा काला पड़ जाता है।
  4.  मोच से प्रभावित अंग शिथिल हो जाता है। हिलाने-डुलाने पर मोच आए अंग में भयंकर दर्द होता है।

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प्राथमिक चिकित्सा

  1.  मोच आए अंग को आरामदायक स्थिति में रखना चाहिए तथा उसे अनावश्यक हिलानाडुलाना नहीं चाहिए।
  2. यदि मोच आते समय रोगी ने जूता अथवा सैण्डिल आदि पहने हों, तो उन्हें तत्काल उतार देना चाहिए। सूजन बढ़ने पर इनका उतारना कठिन एवं कष्टदायक होता है।
  3. मोच से प्रभावित जोड़ के स्थान पर कसकर पट्टी बाँध देनी चाहिए।
  4. मोच खाए स्थान पर ठण्डे पानी की पट्टी बाँधने से लाभ होता है। पट्टी को लगातार गीला रखना चाहिए।
  5.  यदि ठण्डे पानी की पट्टी से लाभ न हो, तो गर्म पानी की पट्टी बाँधनी चाहिए अथवा एक चिलमची में गर्म पानी तथा दूसरी चिलमची में ठण्डा पानी
    लेकर मोच आए अंग को पाँच मिनट तक
    क्रमशः गर्म व ठण्डे पानी में रखने पर काफी लाभ होता है।
  6. जब उपर्युक्त पट्टियाँ लाभ देना बन्द कर दें, तो उनका प्रयोग (UPBoardSolutions.com) रोक दें तथा कुछ घण्टे पश्चात् इनका फिर से प्रयोग करें।
  7. मोच खाए अंग पर धीरे-धीरे मालिश या मसाज करने से भी आराम मिलता है।
  8. मोच खाए अंग पर आयोडेक्स व मैडीक्रीम आदि मलने पर दर्द व सूजन में लाभ होता है।
  9.  मोच खाए अंग को दिन में तीन-चार बार गर्म पानी में थोड़ा नमक डालकर सेंकने से दर्द व सूजन में कमी आती है।।
  10.  प्रभावित अंग के दोनों ओर थोड़ी दूर तक कसकर पट्टी बाँधने से मोच खाया अंग अचल हो जाता है। इससे घायले बन्धक-सूत्रों को आराम मिलता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
खोपड़ी में अस्थि-भंजन होने पर आप क्या करेंगी?
उत्तर:
सिर के बल गिरने अथवा अन्य किन्हीं कारणों से सिर में चोट लगने पर सिर की कोई अस्थि टूट सकती है। सिर की अस्थि के टूटने से प्रायः व्यक्ति मूर्च्छित हो जाता है। इसके अलावा उसके मस्तिष्क को भी हानि हो सकती है। ऐसी स्थिति में सामान्यतः निम्नलिखित प्राथमिक उपचार करने चाहिए

  1. घायल व्यक्ति को कुर्सी पर सीधा बैठाना चाहिए, ताकि सिर ऊपर की ओर उठा रहे।
  2.  किसी साफ कपड़े की तह करके ठण्डे पानी में भिगोकर घायल व्यक्ति के सिर पर रखना चाहिए।
  3. घायल व्यक्ति के कपड़े ढीले कर देने चाहिए।
  4. अस्थि विशेषज्ञ से तुरन्त सम्पर्क करना चाहिए।
  5. यदि रुधिर बह रहा हो तो उसे रोकने का यथासम्भव प्रबन्ध करना चाहिए।
  6. यदि वह मूर्च्छित है, तो उसकी मूच्र्छा दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।
  7.  चिकित्सक की सलाह लेना अत्यन्त आवश्यक है।

प्रश्न 2:
पसलियाँ टूटने पर आप क्या करेंगी?
उत्तर:
अनेक बार सीने के बल गिरने या पसलियों पर सीधा आघात पहुँचने पर पसलियाँ टूट जाती हैं। पसलियों का अस्थि-भंजन साधारण, जटिल, संयुक्त या किसी अन्य प्रकार का भी हो सकता है।
घायल व्यक्ति को हिलने-डुलने में पीड़ा होती है तथा श्वास लेने में कठिनाई होती है। इस प्रकार के रोगी को प्रारम्भिक उपचार निम्न प्रकार किया जा सकता है

  1. घायल व्यक्ति को इस प्रकार लिटाना चाहिए कि प्रभावित अंग पर कम-से-कम दबाव पड़े।
  2.  पीठ के नीचे सुविधानुसार तकिया व कम्बल आदि लगाएँ।
  3. घायल व्यक्ति को बर्फ चूसने के लिए देनी चाहिए।
  4. घायल अंग से सम्बन्धित बाँह को झोली की सहायता से सहारा (UPBoardSolutions.com) देकर पट्टी द्वारा बाँध देना चाहिए।
  5. अस्थि विशेषज्ञ से तत्काल परामर्श लेना चाहिए।

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प्रश्न 3:
हड्डी की टूट और मोच में क्या अन्तर है? [2009, 10, 11, 12, 13, 14]
या
अस्थि-भंग तथा मोच के अन्तर को स्पष्ट कीजिए। [2007, 08, 09, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 18]
उत्तर:
UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 18 अस्थियों की टूट और मोच

प्रश्न 4:
जबड़ों एवं हँसली का अस्थि-भंजन होने पर क्या करना चाहिए?
उत्तर:
जबड़ों का अस्थि-भंजन-जबड़ों का अस्थि-भंजन होने पर जबड़ों की आकृति विकृत हो जाती है तथा मुंह से खून आता है। ऐसे व्यक्ति को बोलने में कष्ट होता है। प्राथमिक उपचार के लिए

  1. हथेली की सहायता से निचले जबड़े को ऊपर वाले से मिला देना चाहिए। यह कार्य धीरे-धीरे सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
  2.  जबड़ों को तिकोनी, सँकरी पट्टी की सहायता से सही अवस्था में रखकर सिर के ऊपर बाँध देना चाहिए और एक अन्य पट्टी के द्वारा जबड़े से कान के पीछे होकर बाँध देना चाहिए।
  3. घायल व्यक्ति को बोलने नहीं देना चाहिए।
  4.  यदि उल्टी इत्यादि हो रही हो तो पट्टी खोली जा सकती है, (UPBoardSolutions.com) किन्तु बाद में बाँध देनी चाहिए।
  5. अस्थि विशेषज्ञ से तुरन्त सम्पर्क करना चाहिए।
  6. रोगी के साथ सहानुभूति का प्रदर्शन करना चाहिए।

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हॅसली का अस्थि-भंजन:
इस अस्थि के टूटने का मुख्य कारण हाथ या कन्धे के बल गिरना है या सामने से हँसली की अस्थि में सीधे चोट लगे, तो यह अस्थि टूट सकती है। इस अस्थि के अस्थि-भंजन से जिस ओर की अस्थि टूटती है उसी ओर की भुजा कार्य नहीं करती और कन्धा ऊपर नहीं उठाया जा सकता तथा सिर भी उसी ओर झुक जाता है जिधर की अस्थि टूटी हुई होती है। इस प्रकार के अस्थि-भंजन में निम्नलिखित उपचार करने चाहिए

  1. घायल व्यक्ति के कपड़े उतार दिए जाएँ।
  2.  पट्टी या कपड़े की तह बनाकर एक गद्दी 4-5 सेमी मोटी बनाई जाए और उसको घायल अंग की ओर वाले बाहु की बगल में रख दिया जाए।
  3.  सेण्ट जॉन झोली के द्वारा उस बाहु को छाती के साथ बाँध देना चाहिए। एक और पट्टी द्वारा कोहनी के मध्य से छाती तथा पेट की ओर घुमाकर बाँध देना चाहिए।
  4. अस्थि विशेषज्ञ से तुरन्त सलाह लेनी चाहिए।

प्रश्न 5:
जाँघ अथवा टाँग की हड्डी (अस्थि) टूटने पर आप क्या प्राथमिक उपचार करेंगी?
उत्तर:
जाँघ की हड्डी की टूट-जाँघ की हड्डी काफी लम्बी और मजबूत होती है, किन्तु अनेक कारणों से यह टूट सकती है। इसे हड्डी के टूटने से सामान्यत: घायल टाँग, स्वस्थ टाँग से छोटी हो जाती है। काफी सूजन आ जाती है तथा असह्य पीड़ा होती है। इस हड्डी के टूटने का उपचार (UPBoardSolutions.com) बहुत सावधानीपूर्वक करना चाहिए और निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए

    1. घायल व्यक्ति की, पीठ को आधार मानकर लिटाना चाहिए। जिस टाँग में चोट लगी हो उसे खींचकर स्वस्थ टाँग के साथ रूई या कपड़े की गद्दी रखकर बाँध देना चाहिए।

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  1.  लम्बी खपच्चियाँ यदि उपलब्ध हों तो उन्हें टाँगों के साथ बाँध देना चाहिए। यदि ये उपलब्ध न हों, तो लाठी, बाँस इत्यादि बाँध देना उचित है, ताकि यह अपने स्थान से हिले-डुले नहीं।
  2. अस्थि विशेषज्ञ से तुरन्त सम्पर्क स्थापित करना चाहिए तथा उसके परामर्श के अनुसार शेष उपचार होना चाहिए।

टाँग की हड्डी की टूट:
टॉग में भी दो हड्डियाँ होती हैं। ये दोनों ही अथवा एक हड्डी टूट सकती है। इसके प्रमुख उपचार जाँघ की हड्डी की तरह किए जाने चाहिए अर्थात् लम्बी खपच्चियाँ, लाठी आदि की सहायता से दोनों पैरों को सीधा करके, खींचकर कसकर बाँध देना चाहिए। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पैर हिले-डुले नहीं।
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प्रश्न 6:
जोड़ उतरने के क्या लक्षण हैं? कन्धे की हड्डी उतरने पर प्राथमिक उपचार आप किस प्रकार करेंगी? [2018]
या
अस्थि का खिसकना किसे कहते हैं? अस्थि के खिसकने के लक्षण एवं उपचार क्या हैं? [2007]
उत्तर:
जोड़ उतरने के लक्षण:

शरीर को गतिशील बनाये रखने के लिए शरीर के कई स्थानों; जैसे—जबड़ा, कन्धा, कोहनी, कूल्हे एवं टखने आदि पर हड्डियों के बीच में सन्धियाँ अथवा जोड़ होते हैं। हड्डियों के अपने स्थान से हट जाने को जोड़ उतरना कहते हैं। इसके मुख्य लक्षण अग्रलिखित हैं

  1. जोड़ के पास भयानक पीड़ा होती है तथा जोड़ अचल हो जाता है।
  2.  जोड़ वाला अंग विकृत हो जाता है तथा इसे हिलाने-डुलाने पर बहुत पीड़ा होती है।
  3.  जोड़ के आस-पास सूजन आ जाती है।

कन्धे की हड्डी उतरने पर प्राथमिक उपचार

  1. रोगी को बिस्तर पर आरामदायक स्थिति में लिटाना चाहिए।
  2.  प्रभावित भाग पर बर्फ की थैली रखनी चाहिए। यदि इनसे लाभ न हो तो गरम सेंक करना चाहिए।
  3. रोगी को गर्म कम्बल से ढककर रखनी चाहिए।
  4. रोगी को पीने के लिए गर्म दूध व चाय देनी चाहिए।
  5. जोड़ को चढ़ाने के लिए अस्थि-रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए। (UPBoardSolutions.com) किसी नीम-हकीम को जोड़ चढ़ाने से रोकना चाहिए।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
हड्डी की टूट (अस्थि-भंग) को अर्थ स्पष्ट कीजिए। [2016]
उत्तर:
शरीर की किसी भी हड्डी के टूटने अथवा उसमें दरार पड़े जाने को हड्डी की टूट (अस्थि -भंग) कहते हैं।

प्रश्न 2:
अस्थि-भंजन के मुख्य प्रकार बताइए। [2011, 12, 13, 14]
उत्तर:
अस्थि-भंजन के मुख्य प्रकार हैं

  1. साधारण अस्थि-भंजन,
  2. बहुखण्डी अस्थिभंजन,
  3.  पच्चड़ी अस्थि-भंजन,
  4. संयुक्त अस्थि-भंजन,
  5. जटिल अस्थि-भंजन तथा
  6.  कच्चा अस्थि -भंजन।

प्रश्न 3:
अस्थि-भंजन में खपच्चियों का प्रयोग क्यों किया जाता है? [2008, 11]
उत्तर:
टूटी हुई अस्थि को सहारा देने व स्थिर रखने के लिए अस्थि-भंजन में खपच्चियाँ प्रयुक्त की जाती हैं।

प्रश्न 4:
कौन-से अस्थि-भंजन में खपच्चियों का प्रयोग नहीं किया जाता?
उत्तर:
खोपड़ी, मेरुदण्ड, पसलियों व जबड़ों के अस्थि-भंजन में खपच्चियों का प्रयोग नहीं किया जाता।

प्रश्न 5:
दुर्घटनास्थल पर खपच्चियाँ उपलब्ध न होने पर आप क्या करेंगी?
उत्तर:
ऐसे अवसर पर खपच्चियों के स्थान पर लकड़ी के टुकड़ों, (UPBoardSolutions.com) चप्पल व छतरी आदि का प्रयोग किया जा सकता है।

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प्रश्न 6:
किस प्रकार के अस्थि-भंजन में रोगी को बर्फ चूसने के लिए दी जाती है?
उत्तर:
पसलियाँ टूटने पर रोगी को बर्फ चूसने के लिए देते हैं।

प्रश्न 7:
कच्चे अस्थि-भंजन से क्या अभिप्राय है? [2007]
उत्तर:
इस प्रकार के अस्थि-भंजन में अस्थि टूटती नहीं है, बल्कि उसमें दरार पड़ जाती है।

प्रश्न 8:
घायलों को किस प्रकार स्थानान्तरित किया जाता है?
या
स्ट्रेचर की उपयोगिता लिखिए। [2009]
उत्तर:
आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा देने के पश्चात् घायलों को आरामदायक स्थिति में स्ट्रेचर पर डालकर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है।

प्रश्न 9:
मोच आ जाने से आप क्या समझती हैं?
उत्तर:
शरीर के किसी भी अस्थि सन्धि स्थल के बन्धन-सूत्रों में खिंचाव आ जाने अथवा उनके टूट जाने की दशा को मोच आ जाना कहते हैं।

प्रश्न 10:
मोच के दो लक्षण लिखिए। [2008, 10, 11, 13, 14, 16]
उत्तर:
मोच के दो मुख्य लक्षण हैं

  1. सम्बन्धित अंग में दर्द का होना तथा
  2. मोच के स्थान का रंग नीला या काला हो जाना।
    का रंग नीला या काला हो जाना।

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प्रश्न 11:
जोड़ उतरने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जोड़ के स्थान से हड्डी के खिसकने अथवा हट जाने को जोड़ उतरना कहते हैं।

प्रश्न 12:
कपाल की हड्डी टूटने की क्या पहचान है?
उत्तर:
कपाल के अस्थि-भंजन में चेहरा विकृत हो जाता है तथा इस पर सूजन (UPBoardSolutions.com) आ जाती है। नाक, मुँह व कान इत्यादि से रक्त-स्रार होने लगता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न-निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए

1. अस्थियों के टूट जाने को कहते हैं [2007]
(क) अस्थि विस्थापन
(ख) अस्थि -भंग
(ग) मोच
(घ) अस्थि-संक्रमण

2. अस्थि-भंजन में होती है
(क) कम पीड़ा
(ख) असहनीय पीड़ा
(ग) सहनीय पीड़ा
(घ) कोई पीड़ा नहीं

3. अस्थि-भंजन में यदि अस्थि टूटकर खाल के बाहर आ जाए, तो उसे कहते हैं
(क) साधारण अस्थि-भंजन
(ख) कच्चा अस्थि-भंजन
(ग) पच्चड़ी अस्थि-भंजन
(घ) संयुक्त अस्थि-भंजन

4. यदि अस्थि एक से अधिक स्थान पर टूटती है, तो अस्थि-भंजन कहलाता है
(क) बहुखण्डी
(ख) कच्चा
(ग) संयुक्त
(घ) साधारण

5. मोच आने पर प्रयोग करते हैं [2008, 13]
(क) डेटॉल
(ख) आयोडेक्स
(ग) सैवलॉन
(घ) कोल्ड क्रीम

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6. झटके के साथ बोझ उठाने से अधिक सम्भावना रहती है
(क) मोच आने की
(ख) जोड़ उतरने की
(ग) पेशियों के खिंचाव की
(घ) अस्थि -भंजन की

7. पसलियाँ टूट जाने पर कठिनाई होती है
(क) बैठने में
(ख) लेटने में
(ग) साँस लेने में
(घ) कोई कठिनाई नहीं होती

8. मोच आने का लक्षण है [2012, 13, 16]
(क) पीड़ा होना
(ख) सूजन होना
(ग) मांसपेशियों में खिंचाव
(घ) ये सभी

9. कौन-सी वस्तु का प्रयोग अस्थि-भंग में अधिक रक्तस्राव रोकने के लिए किया जाता है? [2016]
(क) बर्फ का प्रयोग
(ख) टूर्नीकेट का प्रयोग
(ग) रूई से दबाना
(घ) इनमें से कोई नहीं

10. अस्थि -भंग के लक्षण हैं [2016, 17]
(क) सूजन आ जाती है
(ख) दर्द होता है
(ग) अंग निष्क्रिय हो जाता है
(घ) ये सभी

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उत्तर:
1. (ख) अस्थि-भंग,
2. (ख) असहनीय पीड़ा,
3. (घ) संयुक्त अस्थि-भंजन,
4. (क) बहुखण्डी,
5. (ख) आयोडेक्स,
6. (ख) जोड़ उतरने की,
7. (ग) साँस लेने में,
8. (घ) ये सभी,
9. (ख) दूनीकेट का प्रयोग,
10. (घ) ये सभी।

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UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 21 घायल का स्थानान्तरण

UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 21 घायल का स्थानान्तरण

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Home Science . Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 21 घायल का स्थानान्तरण.

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
घायल के स्थानान्तरण से क्या तात्पर्य है? घायल व्यक्ति के स्थानान्तरण की क्यों आवश्यकता होती है? इसके लिए एक अकेले व्यक्ति द्वारा ले जाने की विधि का वर्णन कीजिए
या
घायल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की कितनी विधियाँ हैं? उनका वर्णन कीजिए। [2008]
या
घायल के स्थानान्तरण से क्या तात्पर्य है? स्थानान्तरण की विधियाँ बताइये। [2017]
या
घायल के स्थानान्तरण से क्या समझती हैं? [2018]
उत्तर:
घायल का स्थानान्तरण

दुर्घटनास्थल पर प्रायः चिकित्सा-साधनों का अभाव होता है। इसलिए घायल व्यक्ति को किसी सुरक्षित एवं सुविधाजनक स्थान पर ले जाना हितकर रहता है, परन्तु यह कार्य इतना सरल नहीं है, क्योंकि इसके लिए स्थानान्तरण की विशिष्ट विधियों का ज्ञान होना (UPBoardSolutions.com) अति आवश्यक है। घायल व्यक्ति के स्थानान्तरण के लिए स्ट्रेचर का प्रयोग सर्वोत्तम रहता है, परन्तु सामान्यतः दुर्घटनास्थल पर इनकी उपलब्धि बहुत कम हो पाती है। अतः इसके लिए अन्य विधियों की जानकारी प्राप्त कर लेना भी आवश्यक हो जाता है। इनमें से एक अकेले व्यक्ति द्वारा घायल के स्थानान्तरण की विधि निम्नवर्णित है

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एक व्यक्ति द्वारा घायल का स्थानान्तरण

एक अकेला व्यक्ति घायल की अवस्था के अनुसार उसे स्थानान्तरित करने के लिए निम्नलिखित में से कोई भी एक विधि अपना सकता है

(1) सहारा देकर ले जाना:
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति यदि होश में हो तथा चल सकता हो, तो उस व्यक्ति को सहारा देकर किसी सुरक्षित स्थान तक ले जाया जा सकता है। इसके लिए घायल की बगल में खड़े होकर उसके एक हाथ को अपने विपरीत कन्धे पर गर्दन के पीछे से रखवा लेना चाहिए। घायल के इस हाथ (UPBoardSolutions.com) को अपने उसी ओर के हाथ से पकड़ लेना चाहिए। रोगी की ओर के अपने दूसरे हाथ को रोगी की कमर में पीठ की ओर से घुमाकर बगल से सहारा देना चाहिए। अब रोगी को धीरे-धीरे चलाकर वांछित स्थान तक ले जाया जा सकता है।
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(2) गोद में ले जाना:
मूर्च्छित घायल व्यक्ति को दुर्घटनास्थल पर पीठ के बल सीधा लिटाकर हाथ से उसकी दोनों टाँगों के घुटनों से ऊपर, नीचे र हाथ डालकर तथा दूसरे हाथ से कमर से बैठाकर पीठ की ओर हाथ डालकर चित्रं की भाँति उठाया जाता है। यह विधि बच्चों तथा हल्के भार वाले घायल व्यक्तियों को स्थानान्तरित करने के लिए उपयुक्त रहती है।

(3) पीठ पर लादकर ले जाना:
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति यदि होश में है और उसे दूर तक ले जाना है, तो उसे पीठ पर लादकर ले जाया जा सकता है। इसके लिए रोगी को अपने दोनों हाथ वाहक की गर्दन के दोनों ओर डालकर सीने पर मजबूती से पकड़ लेना चाहिए। वाहक को अपने दोनों हाथों से, अपने कूल्हे से नीचे से घायल को सँभालना चाहिए। इस अवस्था में घायल के दोनों पैर वाहक की कमर से नीचे आगे की ओर होते हैं।

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(4) कन्धे पर लादकर ले जाना:
मूर्च्छित व्यक्ति को स्थानान्तरित करने की यह एक उत्तम विधि है। किसी स्थान पर आग लग जाने पर आग बुझाने वाले व्यक्ति, आग में घिरे लोगों को इसी विधि से बाहर निकाल कर लाते हैं। इसलिए इस विधि को फायरमैन लिफ्ट भी कहते हैं। इस कार्य के लिए घायल व्यक्ति को पेट के सहारे लिटाकर, उसके सिर के पास खड़े होकर रोगी को दोनों हाथों से इस प्रकार उठाया जाता है कि रोगी के दोनों हाथ वाहक के दूसरे कन्धे के इधर-उधर रहें, जबकि रोगी (UPBoardSolutions.com) का अधिकतर भाग, विशेषकर कमर के स्थान से, उल्टी अवस्था में (पेट के बल) वाहक के दाहिने कन्धे पर चित्रानुसार रहे। इस समय वाहक अपने दाहिने हाथ से रोगी का दाहिना हाथ, कोहनी से नीचे पकड़कर अपने सीने के आर-पार सँभाले रहता है।
UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 21 घायल का स्थानान्तरण
इस प्रकार घायल का सारा भार वाहक के कन्धे पर रहता है। कन्धे पर लादकर घायल को और बाएँ कन्धे पर घायल होने के कारण वाहक सहज ही स्थानान्तरित की विधि ऊँचे-नीचे स्थान पर भी चढ़-उतर सकता है। इस प्रक्रिया में घायल का सिर तथा बायाँ हाथ नीचे की तरफ लटके रहते हैं। यह एक सुविधाजनक विधि है जिसमें एक ही व्यक्ति मूर्च्छित व्यक्ति को सरलतापूर्वक स्थानान्तरित कर सकता है।

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प्रश्न 2:
हस्त-आसन द्वारा किसी घायल व्यक्ति को किस प्रकार स्थानान्तरित किया जाता है? [2015, 16]
या
दो व्यक्ति मिलकर हस्त-आसन विधियों द्वारा घायल व्यक्ति का स्थानान्तरण किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर:
घायल के स्थानान्तरण के हस्त-आसन

यदि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति अधिक घायल तथा भारी है, तो एक व्यक्ति वाहक के रूप में (UPBoardSolutions.com) उसका स्थानान्तरण ठीक प्रकारे से नहीं कर सकता है। इस प्रकार के घायलों का स्थानान्तरण करने के लिए कम-से-कम दो व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। दो व्यक्ति वाहक के रूप में घायलों का स्थानान्तरण करने के लिए निम्नलिखित प्रकार के हस्त-आसनों का उपयोग कर सकते हैं
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(1) दोहत्थी आसन:
इस विधि में दोनों वाहक व्यक्ति एक-दूसरे के सामने खड़े होते हैं और एक व्यक्ति अपना दायाँ हाथ तथा दूसरा व्यक्ति अपना बायाँ हाथ आपस में पकड़कर बैठकी बनाते हैं। बैठकी बनाने में दोनों व्यक्तियों की उँगलियाँ एक-दूसरे में फंसी रहेंगी जिससे कि दोनों हाथों का जोड़ मजबूत । बन सके। इस आसन को बनाते समय हाथों में दस्ताने पहनना। अथवा उँगलियों के मध्य कोई . कपड़ा या रूमाल रखना सुविधाजनक रहता है। घायल को इस प्रकार के दोहत्थी आसन पर बैठाकर ले जाने के लिए घायल को अपने बीच में खड़ा कर लिया जाता है तथा दोनों हाथों से इस आसन पर धीरे से बैठा लिया जाता है। इस समय वाहकों के (UPBoardSolutions.com) खाली हाथ घायल की पीठ पर क्रॉस बनाए रहते हैं। इसमें घायल को अपने दोनों हाथ वाहकों को गर्दन में लिपटाकर रखने चाहिए। इस विधि में वाहक छोटे-छोटे कदम रखते हैं तथा चलते समय दाहिनी ओर वाला वाहक अप दायाँ पैर तथा बाईं ओर वाला वाहक अपना बायाँ पैर बाहर निकालता है तथा इसके बाद इसके विपरीत क्रिया दोहराई जाती है।

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(2) तिहत्थी आसन:
इस प्रकार के आसन का प्रयोग भी घायल व्यक्ति के मूर्च्छित न होने की अवस्था में किया जाता है। दोनों वाहक घायल के पीछे आमने-सामने मुँह करके खड़े हो जाते हैं। दाहिनी ओर वाला व्यक्ति अपने दाएँ हाथ से अपने बाएँ हाथ की कलाई पकड़ता है तथा दूसरे वाहक को इसो कलाई को पहला वाहक अपने बाएँ हाथ से पकड़ लेता है। इस प्रकार से तिहत्थी आसन बन जाता है। अब बाईं ओर वाला सहायक अपने बाएँ खाली हाथ से घायल के पैरों को सहारा देता है और आसन पर बैठा लेता है। इस प्रकार के आसन पर कपड़े की गद्दी रखकर घायल व्यक्ति को सुविधाजनक स्थिति में बैठाया जा सकता है। इस विधि में घायल व्यक्ति को अपने दोनों हाथों को दोनों वाहकों की गर्दन में घुमाकर डालना चाहिए, ताकि वह तिहत्थी आसन पर ठीक प्रकार से सँभल कर बैठ सके। इस विधि में दाहिने वाहक को दाहिना पैर तथा बाएँ वाहक को बायाँ पैर एक साथ आगे निकालना चाहिए तथा दोनों को धीरे-धीरे चलना चाहिए।
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(3) चौहत्थी आसन:
इस विधि में भी दोनों वाहक एक-दूसरे की कलाइयाँ पकड़ते हैं। दोनों वाहक आमने-सामने मुँह करके खड़े हो जाते हैं। प्रत्येक वाहक अपने दाहिने हाथ से अपनी बाईं कलाई को पकड़ता है। अब दोनों वाहक अपनेअपने खाली बाएँ हाथ से एक-दूसरे की दाहिनी कलाई को । (UPBoardSolutions.com) पकड़ लेते हैं। इस प्रकार चौहत्थी आसन बन जाता है। इस पर कपड़े की गद्दी डालकर घायल को आराम से बैठाया जाता है। घायल व्यक्ति अपने दोनों हाथ वाहकों के गले में डालकर रखता है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
स्ट्रेचर न मिलने पर रोगी को उठाकर सुविधापूर्वक कैसे ले जा सकते हैं?
या
रोगियों को ले जाने के लिए किन-किन विधियों का प्रयोग किया जाता है? किसी एक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
या
घायल के स्थानान्तरण की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? किसी एक विधि का वर्णन कीजिए। [2014, 15, 16]
उत्तर:
रोगी को अभीष्ट स्थान पर ले जाने का सर्वोत्तम साधन स्ट्रे
उपलब्ध न होने पर रोगी को स्थानान्तरित करने की विधियाँ निम्नलिखित हैं –

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(1) अकेले व्यक्ति द्वारा: इसकी निम्नलिखित उपविधियाँ हैं

  1. सहारा देकर ले जाना,
  2.  गोद में ले जाना,
  3. पीठ पर लादकर ले जाना,
  4.  कन्धे पर लादकर ले जाना।

(2) दो व्यक्तियों द्वारा: इसकी उपविधियाँ निम्नलिखित हैं

(क) हस्त-आसन विधि:
इस विधि में घायल के स्थानान्तरण के लिए दोहत्थी, तिहत्थी व चौहत्थी आसन प्रयोग में लाए जाते हैं।

(ख) अग्र-पृष्ठ विधि:
यह कूल्हे पर चोट लगे व्यक्ति के स्थानान्तरण में प्रयोग में लाई जाती है।

प्रश्न 2:
घायल व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्यों? [2007]
या
घायल व्यक्ति को स्थानान्तरित करते समय किन-किन सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए।
उत्तर:
रोगी के स्थानान्तरण में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1.  ऊँचे-नीचे स्थानों से ले जाने पर घायल व्यक्ति को कष्ट होता है; अत: उसे सदैव सुगम मार्ग से ले जाने का प्रयास करना चाहिए।
  2. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के घायल अंगों का विशेष ध्यान रखकर ही उसका (UPBoardSolutions.com) स्थानान्तरण करना चाहिए।
  3. स्थानान्तरण करते समय घायल की अवस्था देखनी चाहिए। होश में होने पर अथवा मूच्छित होने पर घायल के स्थानान्तरण के लिए उपयुक्त विधि का चयन करना चाहिए।
  4. स्ट्रेचर पर घायल को ले जाते समय गड्ढे या नालों को सावधानीपूर्वक पार करना चाहिए।

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प्रश्न 3:
रोगी के स्थानान्तरण की अग्र-पृष्ठ विधि क्या है?
उत्तर:
स्थानान्तरण की अग्र-पृष्ठ विधि–यह विधि ऐसे घायल व्यक्तियों के स्थानान्तरण के लिए प्रयोग में लाई जाती है जिनके कूल्हे पर चोट लगी हो। एक वाहक घायल व्यक्ति के दोनों पैरों के बीच में उसके पैरों की ओर मुंह करके खड़ा हो जाता है तथा घायल के दोनों घुटने पकड़ लेता है। दूसरा वाहक घायल व्यक्ति के पीछे खड़ा होता है तथा अपने दोनों हाथों को घायल व्यक्ति की दोनों बाँहों के नीचे से निकालकर अपनी कलाई पकड़ लेता है। इस प्रकार घायल को ऊँचा उठा लिया जाता है और दोनों वाहक अपने-अपने कदमों को मिलाकर चलते हैं।

प्रश्न 4:
घायल के स्थानान्तरण की स्ट्रेचर विधि की विशेषताएँ बताइए।
या
स्ट्रेचर की क्या उपयोगिता है? आपातकालीन स्ट्रेचर कैसे बनाएँगे?
उत्तर:
स्ट्रेचर विधि:

घायलों के स्थानान्तरण की यह सर्वोत्तम विधि है। इसके द्वारा घायल व्यक्ति को स्थानान्तरित करना सरल भी होता है तथा सुविधाजनक भी। इस विधि द्वारा घायल को स्थानान्तरित करने की स्थिति में उसे किसी प्रकार का कष्ट भी नहीं होता। स्ट्रेचर लकड़ी अथवा लोहे का, एक विशेष प्रकार का फ्रेम होता है जिसके दोनों ओर दो-दो हत्थे लगे होते हैं। फ्रेम के मध्य में दरी, कैनवैस या अन्य किसी मजबूत कपड़े का आधार होता है। घायल को इस आधार पर लिटाकर दोनों वाहक फ्रेम के दोनों ओर खड़े होकर अपने हाथों से फ्रेम के हत्थे को पकड़कर सुरक्षित स्थान तक ले जाते हैं। स्ट्रेचर उपलब्ध न होने पर किसी कुर्सी अथवा चारपाई के दोनों ओर (UPBoardSolutions.com) हत्थियों के समान लकड़ी अथवा लाठियों को बाँधकर कामचलाऊ स्ट्रेचर बनाया जा सकता है। अस्पतालों में ट्रॉलीनुमा स्ट्रेचर भी प्रयोग में लाये जाते हैं। इन्हें ढकेलना सरल होता है। स्ट्रेचर विधि का प्रयोग करने पर वाहकों को अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता तथा रोगी सुविधाजनक स्थिति में रहता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1:
घायल व्यक्ति को कहाँ स्थानान्तरित किया जाता है?
उत्तर:
घायल व्यक्ति को सुरक्षित तथा आरामदायक स्थान पर स्थानान्तरित किया जाता है।

प्रश्न 2:
किसी दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्ति को दुर्घटनास्थल से स्थानान्तरित करना क्यों आवश्यक होता है?
उत्तर:
किसी दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्ति को धूप, गर्मी तथा पुनः दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने के लिए तथा सुरक्षा एवं आराम प्रदान करने के लिए दुर्घटनास्थल से स्थानान्तरित करना आवश्यक होता है।

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प्रश्न 3:
अस्पतालों में घायलों के स्थानान्तरण के लिए कौन- नी विधि प्रयोग में लायी जाती है?
या
स्ट्रेचर की क्या उपयोगिता है? [2008]
उत्तर:
अस्पतालों में घायलों के स्थानान्तरण के लिए प्राय: स्ट्रेचर विधि प्रयोग में लायी जाती है। यह भारत के स्थानान्तरण की सर्वोत्तम विधि है। इस विधि द्वारा घायल व्यक्ति को स्थानान्तरित करना सरल एवं सुविधाजनक होता है।

प्रश्न 4:
हस्त-आसन विधि कब प्रयुक्त की जाती है?
उत्तर:
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के पैर घुटनों अथवा जाँघ में यदि चोट लगी हो, तो प्रायः हस्त आसन विधि का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 5:
हस्त-आसन विधि में कितने वाहकों की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
हस्त-आसन विधि में प्राय: दो वाहकों की (UPBoardSolutions.com) आवश्यकता होती है।

प्रश्न 6:
हस्त-आसन से क्या अभिप्राय है?
या
हैण्ड स्ट्रेचर क्या है ? [2009, 12, 13, 18]
उत्तर:
हाथों द्वारा बनाई गई बैठक को हस्त-आसन कहते हैं।

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प्रश्न 7:
घायल का स्थानान्तरण हस्त-आसन द्वारा कैसे किया जाता है?
या
रोगी को हस्त-आसन द्वारा स्थानान्तरित करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
उत्तर:
हाथों से बनी बैठक द्वारा घायल व्यक्ति के स्थानान्तरण की विधि हस्त-आसन विधि कहलाती है। हस्त-आसन प्राय: तीन प्रकार का होता है

  1. दोहत्थी,
  2. तिहत्थी तथा
  3.  चौहत्थी।

प्रश्न 8:
तिहत्थी बैठकी में क्या मुख्य सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर:
तिहत्थी बैठकी. में रोगी की दोनों भुजाएँ वाहकों के गले में पड़ी होनी चाहिए तथा एक वाहक को, जिसका एक हाथ खाली है, रोगी के पैरों को सहारा देना चाहिए।

प्रश्न 9:
यदि रोगी को ले जाने के लिए स्ट्रेचर न हो, तो क्या करना चाहिए?
उत्तर:
सावधानीपूर्वक हाथ की बैठकी पर रोगी का स्थानान्तरण किया जाना चाहिए।

प्रश्न 10:
मूर्च्छित व्यक्ति के स्थानान्तरण की दो विधियाँ लिखिए।
उत्तर:
मूर्च्छित व्यक्ति को कन्धे पर लादकर या स्ट्रेचर द्वारा स्थानान्तरित किया जा सकता है। (UPBoardSolutions.com) यदि बच्चा हो, तो उसे गोद में उठाकर भी स्थानान्तरित किया जा सकता है।

प्रश्न 11:
आपातकालीन स्ट्रेचर कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर:
आपातकालीन स्टेचर बनाने के लिए दो बॉस लेकर उनके बीच किसी दरी, टाट या कोट आदि को कसकर बाँध लिया जाता है।

प्रश्न 12:
छोटे बच्चे को दुर्घटनास्थल से कैसे स्थानान्तरित किया जाता है?
उत्तर:
छोटे बच्चे को गोद में उठाकर घटनास्थल से स्थानान्तरित किया (UPBoardSolutions.com) जा सकता है।

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बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न:
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए

1. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के स्थानान्तरण का उद्देश्य है
(क) धूप से बचाना
(ख) सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना
(ग) पुन: दुर्घटना से बचाना
(घ) ये सभी

2. आग लग जाने पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों का स्थानान्तरण किया जाता है
(क) कन्धे पर लादकर
(ख) गोद में उठाकर
(ग) सहारा देकर
(घ) दोहत्थी आसन द्वारा

3. घायल को दुर्घटनास्थल से स्थानान्तरित करने की आवश्यकता कब होती है?
(क) आग में घिर जाने पर
(ख) किसी वाहन से टकराने पर
(ग) किसी इमारत से गिरने पर
(घ) तीनों अवस्थाओं में

4. मूर्च्छित अवस्था में घायल को स्थानान्तरित करने की विधि है
(क) हस्त-आसन विधि
(ख) कन्धे पर लादकर ले जाना
(ग) सहारा देकर ले जाना
(घ) ये सभी

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5. घायल बच्चों के स्थानान्तरण की सुविधाजनक विधि है
(क) हस्त-आसन विधि
(ख) सहारा देकर ले जाना
(ग) गोद में उठाकर ले जाना
(घ) पीठ-पृष्ठ विधि

6. घायल व्यक्ति के स्थानान्तरण की सर्वोत्तम विधि है
(क) हस्त-आसन द्वारा
(ख) गोद में उठाकर
(ग) कन्धे पर लादकर
(घ) स्ट्रेचर द्वारा

7. स्ट्रेचर का प्रयोग कब किया जाता है? [ 2017]
(क) खेलने के लिए
(ख) बाजार जाने के लिए
(ग) रोगी को ले जाने के लिए
(घ) घूमने के लिए

8. गाँव में दुर्घटनाग्रस्त हुए व्यक्ति को चिकित्सा केन्द्र तक पहुँचाने के लिए आप कौन-सी विधि अफ्नाएँगी?
(क) चारपाई पर लिटाकर
(ख) तिहत्थी आसन द्वारा
(ग) गोद में उठाकर
(घ) पीठ पर लादकर

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उत्तर:
1. (घ) ये सभी,
2. (क) कन्धे पर लादकर,
3. (घ) तीनों अवस्थाओं में;
4. (ख) कन्धे पर लादकर ले जाना,
5. (ग) गोद में उठाकर ले जाना,
6. (घ) स्ट्रेचर द्वारा,
7. (ग) रोगी को ले जाने के लिए,
8. (क) चारपाई पर लिटाकर।

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