Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2

Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 बहुपद

Ex 2.2 Polynomials अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
यदि α, β, γ बहुपद 2x3 + x2 – 13x + 16 के मूल हैं, तब αβγ का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
यदि 2x3 + x2 – 13x + 16 के मूल α,β,γ हैं, तब
मूलों का गुणनफल (α · β · γ) = [latex]\frac{-d}{a}=\frac{-16}{2}[/latex] = – 8

प्रश्न 2.
यदि त्रिघात बहुपद ax3 + bx2 + cx + d के दो मूल 0 हैं तब तीसरा मूल ज्ञात कीजिए।
हलः
यदि त्रिघात बहुपद ax3 + bx2 + cx + d के (UPBoardSolutions.com) दो मूल α व β, शून्य हैं तब तीसरा मूल
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प्रश्न 3.
यदि बहुपद 3x3 + 5x2 – 7x – 27 के दो मूलों का गुणनफल 3 है, तब तीसरा मूल ज्ञात कीजिए।
हलः
बहुपद 3x3 + 5x2 – 7x – 27 के दो (UPBoardSolutions.com) मूलों का गुणनफल 3 है।
अतः α · β = 3 तथा तीसरा मूल γ = ?
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 2
अतः तीसरा मूल γ = 3

प्रश्न 4.
यदि बहुपद 2x3 – x2 – 5x – 2 के दो मूल -1 और 2 हैं तब इसका तीसरा मूल ज्ञात कीजिए। (NCERT)
हलः
बहुपद 2x3 – x2 – 5x – 2
माना बहुपद के दो दिए गए मूल α = -1 तथा β = 2 हैं।
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अतः बहुपद का तीसरा मूल γ = [latex]-\frac{1}{2}[/latex]

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प्रश्न 5.
यदि बहुपद x3 – 4x2 – 7x + 10 के दो (UPBoardSolutions.com) मूल 1 और -2 हैं, तो इसका तीसरा मूल ज्ञात कीजिए।
हलः
बहुपद x3 – 4x2 – 7x + 10
बहुपद के दो मूल α = 1 तथा β = -2 हैं।
माना बहुपद का तीसरा मूल γ है।
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 4
अतः बहुपद का तीसरा मूल γ = 5

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प्रश्न 6.
यदि बहुपद x3 – 4x2 + x + 6 का एक मूल -1 है तो अन्य मूल ज्ञात कीजिए।
हलः
मानां f (x) = x3 – 4x2 + x + 6
तथा बहुपद का एक मूल α = -1, β तथा γ हैं।
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अतः बहुपद के अन्य मूल 3 व 2 हैं।

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प्रश्न 7.
यदि त्रिघात बहुपद x3 + ax2 + bx + c का (UPBoardSolutions.com) एक मूल -1 है तब अन्य दो मूलों का गुणनफल ज्ञात कीजिए।
हलः
त्रिघात बहुपद x3 + ax2 + bx + c में,
α = -1, β = ?, γ = ?
तब मूलों का गुणनफल (α · β · γ) = [latex]\frac{-d}{a}[/latex]
⇒ α · β · γ = [latex]\frac{-c}{1}[/latex]
∵ α = -1 तो -1 × β, γ = -c ⇒ βγ = c
अतः दो मूलों का गुणनफल, βγ = c

प्रश्न 8.
यदि त्रिघात बहुपद ax3 + bx2 + cx + d का एक मूल 0 है तब अन्य दो मूलों का गुणनफल ज्ञात कीजिए।
हलः
त्रिघात बहुपद ax3 + bx2 + cx +d में, α = 0
तब αβ + βγ + γα = [latex]\frac{c}{a}[/latex]
0 × β + βγ × γ × 0 = [latex]\frac{c}{a}[/latex]
0 + βγ + 0 = [latex]\frac{c}{a}[/latex]
अतः दो मूलों का गुणनफल, βγ = [latex]\frac{c}{a}[/latex]

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प्रश्न 9.
यदि बहुपद f (x) = x3 – 3px2 + qx – r के (UPBoardSolutions.com) मूल समान्तर श्रेणी में हैं तब p,q और r के बीच में सम्बन्ध ज्ञात कीजिए।
हलः
यदि f (x) = x3 – 3px2 + qx – 7
∵ मूल समान्तर श्रेणी में हैं।
अतः माना α = a – d, β = a, γ = a + d
∴ α + β + γ = [latex]\frac{-b}{a}[/latex]
⇒ a – d + a + a + d = [latex]\frac{3 p}{1}[/latex]
⇒ 3a = 3p
⇒ a = P
तथा α·β + β·γ + γ·α = [latex]\frac{c}{a}[/latex]
(a – d) × a + a × (a + d) + (a + d) (a – d) = [latex]\frac{q}{1}[/latex]
a = p रखने पर,
(p – d) × p + px (p + d) + (p + d) (p – d) = q
p2 – pd + p2 + pd + p2 – d2 = q
3p2 – d2 = q
3p2 – q = d2
या d2 = 3p2 – q
अब α·β·γ = [latex]\frac{-d}{a}[/latex]
(a – d) × a × (a + d) = [latex]\frac{-(-r)}{1}[/latex]
a × (a2 – d2) = r
a = p तथा d2 = 3p2 – q रखने पर,
p × [p2 – (3p2 – q)] = r
p(p2 – 3p + q) = r
p(-2p2 + q) = r
-2p3 + pq = r
Pq – r = 2p3

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प्रश्न 10.
p का वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए बहुपद x3 + 4x2 – px + 8, (x – 2) से पूरी तरह विभाजित है।
हलः
यदि बहुपद x3 + 4x2 – px + 8, (x – 2) से (UPBoardSolutions.com) पूरी तरह विभाजित है तो शेषफल शून्य होगा।
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चूँकि शेषफल = 0
-2p + 32 = 0
-2p = -32
2p = 32
p = [latex]\frac{32}{2}[/latex]
p = 16

Ex 2.2 Polynomials लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 11.
एक त्रिघात बहुपद ज्ञात कीजिए जिसके मूल -2, -3 और -1 हैं।
हलः
माना α = –2, β = -3 और γ = -1
तब α + β + γ = (-2) + (-3) + (-1) = -2 – 3 – 1 = -6
αβ + βγ + γα = (-2)(-3) + (-3)(-1) + (-1)(-2) = 6 + 3 + 2 = 11
तथा αβγ = (-2)(-3)(-1) = -6
अतः अभीष्ट बहुपद = x3 – (α + β + γ)x2 + (αβ + βγ + γα)x – α·β·γ
= x3 – (-6)x2 + 11x – (-6)
= x3 + 6x2 + 11x + 6

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प्रश्न 12.
एक त्रिघात बहुपद ज्ञात कीजिए जिसके (UPBoardSolutions.com) मूल 3, [latex]\frac{1}{2}[/latex] और -1 हैं।
हलः
माना α = 3, β = 7 और γ = -1
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प्रश्न 13.
एक त्रिघात बहुपद ज्ञात कीजिए, जिसके मूलों का (UPBoardSolutions.com) योगफल, दो-दो करके मूलों के गुणनफल का योगफल और इसके मूलों का गुणनफल क्रमशः 3,-1 और -3 है। (NCERT)
हलः
माना त्रिघात बहुपद के मूल क्रमशः α, β तथा γ हैं।
प्रश्नानुसार, मूलों का योगफल (α + β + γ) = 3
तथा αβ + βγ + γα = -1
और α·β·γ = -3
तब. त्रिघात बहुपद = x3 – (α + β + γ)x2 + (αβ + βγ + γα)x -α·β·γ
= x3 – 3x2 + (-1)x – (-3)
= x3 – 3x2 – x + 3

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प्रश्न 14.
यदि α, β, γ बहुपद f (x) = ax3 + bx2 + cx + d के मूल हैं तब [latex]\frac{1}{\alpha}+\frac{1}{\beta}+\frac{1}{\gamma}[/latex] का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
यदि f(x) = ax3 + bx2 + cx + d
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प्रश्न 15.
यदि α, β, γ बहुपद f (x) = x3 – ax2 + bx – c के मूल हैं तब [latex]\frac{1}{\alpha \beta}+\frac{1}{\beta \gamma}+\frac{1}{\gamma \alpha}[/latex] का मान ज्ञातकीजिए।
हलः
यदि f (x) = x3 – ax2 + bx – c
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प्रश्न 16.
5x3 – 13x2 + 21x – 14 को 3 – 2x + x2 द्वारा विभाजित (UPBoardSolutions.com) करो और विभाजन एल्गोरिथम का सत्यापन करो।
हलः
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 11
भागफल = 5x – 3, शेषफल = -5
सत्यापन : विभाजन एल्गोरिथम से,
भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल
= (x2 – 2x + 3) × (5x – 3) + (-5)
= 5x3 – 10x2 + 15x – 3x2 + 6x – 9 – 5
= 5x3 – 13x2 + 21x – 14

प्रश्न 17.
विभाजन एल्गोरिथम का प्रयोग करके सिद्ध कीजिए कि
3x2 + 5, 6x5 + 15x4 + 16x3 + 4x2 + 10x – 35 का एक गुणनखण्ड है।
हलः
माना f (x) = 6x5 + 15x4 +16x3 + 4x2 + 10x – 35 तथा g(x) = 3x2 + 5
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∵ शेषफल शून्य है।
∴ g(x), f (x) का एक गुणनखण्ड है।

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प्रश्न 18.
यदि बहुपद f (x) = x3 – 3x2 + x + 1 के मूल a – b, a, a + b हैं तो a और b के मान ज्ञात कीजिए। (NCERT)
हलः
बहुपद x3 – 3x2 + x + 1
∵ बहुपद के मूल a – b, a, a + b हैं।
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प्रश्न 19.
यदि x = 1 बहुपद f (x) = x3 – 2x2 + 4x + k का एक मूल है तो k का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
बहुपद f(x) = x3 – 2x2 + 4x + k
यदि x = 1 बहुपद का एक मूल है तथा f(x) = 0
0 = (1)3 – 2(1)2 + 4 × 1 + k
0 = 1 – 2 + 4 + k
0 = 3 + k
-3 = k या k = -3

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प्रश्न 20.
विभाजन एल्गोरिथम का प्रयोग करके यह जाँच कीजिए (UPBoardSolutions.com) कि क्या प्रथम बहुपद, दूसरे बहुपद का एक गुणनखण्ड है?
(i) g(x) = x2 – 3, f (x) = 2x4 + 3x3 – 2x2 – 9x – 12 (NCERT)
(ii) g(x) = 2x2 – x + 3, f(x) = 6x5 – x4 + 4x3 – 5x2 – x – 15
हल:
(i) g(x) = x2 – 3, f(x) = 2x4 + 3x3 – 2x2 – 9x – 12
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∵ शेषफल शून्य है।
∴ g(x), f(x) का एक गुणनखण्ड है।

(ii) g(x) = 2x2 – x + 3, f(x) = 6x5 – x4 + 4x3 – 5x2 – x -15
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 15
∵ शेषफल शून्य है।
∴ g(x), f(x) का एक गुणनखण्ड है।

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Ex 2.2 Polynomials दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 21.
सत्यापित कीजिए कि 3, -1 और [latex]\frac{-1}{3}[/latex] घात (UPBoardSolutions.com) बहुपद f (x) = 3x3 – 5x2 – 11x – 3 के मूल हैं और तब इसके मूलों एवं गुणांकों के बीच में सम्बन्ध की सत्यता की जाँच कीजिए। (NCERT)
हलः
बहुपद f (x) = 3x3 – 5x2 – 11x – 3
3, बहुपद f(x) का एक मूल है यदि f (3) = 0
अब f(3) = 3 × (33 – 5(3)2 – 11(3) – 3
= 81 – 45 – 33- 3
= 81 – 81 = 0
इसी प्रकार,
f(-1) = 3(-1)3 – 5(-1)2 – 11(-1) – 3
= -3 – 5 + 11 – 3
= -11 + 11 = 0
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प्रश्न 22.
बहुपद f (x) = x3 + 3px2 + 3qr + r के मूलों के समान्तर श्रेणी में होने के प्रतिबन्ध ज्ञात कीजिए।
हलः
यदि f (x) = x3 + 3px2 + 3qx + r
∵ मूल समान्तर श्रेणी में हैं।
अतः माना α = a – d, β = a, γ = a + d
∴ α + β + γ = [latex]\frac{-b}{a}[/latex]
a – d + a + a + d = [latex]\frac{-3 p}{1}[/latex]
⇒ 3a = -3p
⇒ a = -p
तथा α·β + β·γ + γ·α = [latex]\frac{c}{a}[/latex]
(a – d) × a + a × (a + d) + (a + d)·(a – d) = [latex]\frac{3 q}{1}[/latex]
a2 – ad + a2 + ad + a2 – d2 = 3q
3a2 – d2 = 3q
a = -p रखने पर,
3(-p)2 – d2 = 3q
-3p2 – d2 = 3q
d2 = 3p2 – 3q
अब α·β·γ = [latex]\frac{-d}{a}[/latex]
(a – d) × a × (a + d) = [latex]\frac{-r}{1}[/latex]
a × (a2 – d2) = -r
a = -p तथा d2 = 3p2 – 3q रखने पर,
(-p) x [p2 – (3p2 – 3q)] = -r
-p(p2 – 3p2 + 3q) = -r
p(-2p2 + 3q) = r
-2p3 + 3pq = r
-2p3 + 3pq – r = 0
2p3 – 3pq + r = 0

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प्रश्न 23.
यदि बहुपद f (x) = ax3 + 3bx2 + 3cr + d के मूल (UPBoardSolutions.com) समान्तर श्रेणी में है तब सिद्ध कीजिए 2b3 – 3abc + a2d = 0
हलः
यदि f (x) = ax3 + 3bx2 + 3cx + d
∵ मूल समान्तर श्रेणी में हैं।
अतः माना बहुपद के मूल α = A – D, β = A तथा γ = A + D
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प्रश्न 24.
निम्न में विभाजन एल्गोरिथम का प्रयोग करके, f(x) को g(x) (UPBoardSolutions.com) द्वारा विभाजित करने पर, भागफल और शेषफल ज्ञात कीजिए।
(i) f(x) = x3 – 3x + 5x – 3; g(x) = x2 – 2 (NCERT)
(ii) f(x) = x4 – 3x + 4x + 5; g(x) = x2 – x + 1 (NCERT)
(iii) f(x) = x4 – 5x + 6; g(x) = 2 – x2 (NCERT)
हल:
(i) f(x) = x3 – 3x2 + 5x – 3; g(x) = x2 – 2
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भागफल = (x – 3) तथा शेषफल = (7x – 9)

(ii) f(x) = x4 – 3x2 + 4x + 5; 8(x) = x2 – x + 1
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अतः भागफल = x2 + x – 3 तथा शेषफल = 8

(iii) f(x) = x4 – 5x + 6; g(x) = 2 – x2
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 22
अतः भागफल = -x2 – 2 तथा शेषफल = -5x + 10

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प्रश्न 25.
यदि बहुपद x4 – 6x3 – 26x2 + 138x – 35 के दो पद (UPBoardSolutions.com) [latex]2 \pm \sqrt{3}[/latex] हैं, तो अन्य मूल ज्ञात कीजिए। (NCERT)
हलः
बहुपद x4 – 6x3 – 26x2 + 138x – 35
माना बहुपद के मूल α = 2 + [latex] \sqrt{{3}} [/latex], β = 2 – [latex] \sqrt{{3}} [/latex], γ तथा δ हैं।
तब α + β + γ + δ = [latex]\frac{-b}{a}[/latex]
2 + [latex] \sqrt{{3}} [/latex] + 2 – [latex] \sqrt{{3}} [/latex] + y + δ = [latex]\frac{-(-6)}{1}[/latex]
4 + γ + δ = 6
γ + δ = 6 – 4
γ + δ = 2 …(1)
α · β · γ· δ = [latex]\frac{l}{a}[/latex]
(2 + [latex] \sqrt{{3}} [/latex])(2 – [latex] \sqrt{{3}} [/latex]).γδ = [latex]\frac{-35}{1}[/latex]
(4 – 3)γδ = -35
γδ = -35 …(2)
समी० (2) से 8 का मान समी० (1) में रखने पर,
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 23

प्रश्न 26.
f(x) = 4x4 + 2x3 – 2x2 + x – 1 में क्या जोड़ें कि प्राप्त बहुपद g(x) = x2 + 2x – 3 से विभाजित हो जाये?
हल:
f(x) = 4x4 + 2x3 – 2x2 + x -1 तथा g(x) = x2 + 2x – 3
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 24
अत: बहुपद में, -(-61x + 65) अर्थात् 61x – 65 जोड़ना पड़ेगा।

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प्रश्न 27.
बहुपद f (x) = x4 + 2x3 – 13x2 – 12x + 21 में क्या (UPBoardSolutions.com) घटायें कि प्राप्त बहुपद x2 – 4x + 3 से पूरी तरह विभाजित हो जाये।
हलः
बहुपद f(x) = x4 + 2x3 – 13x2 – 12x + 21
g(x) = x2 – 4x + 3
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 25
अतः बहुपद में से (2x – 3) घटाना होगा।

प्रश्न 28.
x4 + 4x3 – 2x2 -20x – 15 के अन्य सभी मूल ज्ञात (UPBoardSolutions.com) कीजिए यदि इसके दो मूल [latex] \sqrt{{5}} [/latex] और -[latex] \sqrt{{5}} [/latex]
हलः
माना बहुपद f (x) = x4 + 4x3 – 2x2 – 20x – 15
प्रश्नानुसार, [latex] \sqrt{{5}} [/latex] और -[latex] \sqrt{{5}} [/latex], f(x) के मूल हैं।
= (x – [latex] \sqrt{{5}} [/latex]) और (x + [latex] \sqrt{{5}} [/latex]), f (x) के गुणनखण्ड हैं।
= (x – [latex] \sqrt{{5}} [/latex])· (x + [latex] \sqrt{{5}} [/latex]), f(x) का एक गुणनखण्ड है।
= (x2 – 5), f(x) का एक गुणनखण्ड है।
अत: f (x) को x2 – 5 से विभाजित करने पर,
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 26
⇒ f(x) = (x2 – 5)(x2 + 4x + 3)
अतः f(x) = 0
तब x2 – 5 = 0 तथा x2 +4x +3 = 0
x2 = 5 तथा x2 + 3x + x + 3 = 0
x = ±[latex] \sqrt{{5}} [/latex]         x(x + 3) + 1(x + 3) = 0
(x + 3)(x + 1) = 0
x + 3 = 0 या x + 1 = 0
x = -3 या x = -1
अतः बहुपद f(x) के अन्य मूल -3 और -1 हैं।

प्रश्न 29.
बहुपद f (x) = x4 + 2x3 – 2x2 + x – 1 में क्या जोड़ें कि प्राप्त बहुपद x2 + 2x – 3 से पूरी तरह विभाजित हो जाये।
हलः
f(x) = x4 + 2x3 – 2x2 + x – 1
तथा g(x) = x2 + 2x – 3
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अतः बहुपद में, (-x + 2) अर्थात् (x – 2) जोड़ना पड़ेगा।

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प्रश्न 30.
बहुपद 3x3 + 10x2 – 14x + 9 में से क्या वास्तविक (UPBoardSolutions.com) संख्या घटायें कि यह (3x – 2) से पूरी तरह विभाजित हो जाये?
हलः
माना f(x) = 3x3 + 10x2 – 14x + 9
तथा g(x) = (3x – 2)
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∵ f(x) को g(x) से भाग देने पर 5 शेषफल आता है।
∴ बहुपद f (x) में से वास्तविक संख्या 5 घटाने पर f(x), g(x) से पूरी तरह विभाजित हो जाता है।

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Ex 2.1 Polynomials अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
यदि बहुपद x2 + x + 1 के मूल α और β हैं तब α + β का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
हम जानते हैं कि, (UPBoardSolutions.com)
मूलों का योग, α + β = [latex]\frac{-b}{a}=\frac{-1}{1}[/latex] = -1

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प्रश्न 2.
यदि α, β बहुपद x2 + x + 1 के मूल हैं तब [latex]\frac{1}{\alpha}+\frac{1}{\beta}[/latex] का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
हम जानते हैं कि,
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 1

प्रश्न 3.
यदि α, β बहुपद 4x2 + 3x + 7 के (UPBoardSolutions.com) मूल हैं तब αβ का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
हम जानते हैं कि,
मूलों का गुणनफल, α · β = [latex]\frac{c}{a}=\frac{7}{4}[/latex]

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प्रश्न 4.
यदि α, β बहुपद 4x2 + 3x + 7 के मूल हैं तब (UPBoardSolutions.com) [latex]\frac{1}{\alpha}+\frac{1}{\beta}[/latex] का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
हम जानते हैं कि, मूलों का योग, α · β = [latex]\frac{-b}{a}=\frac{-3}{4}[/latex]
तथा मूलों का गुणनफल, α · β = [latex]\frac{c}{a}=\frac{7}{4}[/latex]
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प्रश्न 5.
यदि α, β बहुपद x2 + 6x + 2 के मूल हैं (UPBoardSolutions.com) तब [latex]\frac{1}{\alpha}+\frac{1}{\beta}[/latex] का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
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प्रश्न 6.
यदि α, β बहुपद f (x) = x2 + x – 2 के मूल हैं तो [latex]\frac{1}{\alpha}-\frac{1}{\beta}[/latex] का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
f(x) = x2 + x – 2
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प्रश्न 7.
यदि α, β द्विघात बहुपद f(x) = 6x2 + x – 2 के मूल हैं (UPBoardSolutions.com) तो [latex]\frac{\alpha}{\beta}+\frac{\beta}{\alpha}[/latex] का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
f(x) = 6x2 + x – 2
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प्रश्न 8.
यदि द्विघात बहुपद f (x) = 4x2 – 5x – 1 के मूल (UPBoardSolutions.com) α और β हैं, तो α2β + αβ2 का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
यदि f(x) = 4x2 – 5x – 1
तो α2β + αβ2 = α·β (α + β)
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प्रश्न 9.
यदि α, β बहुपद f(x) = x2 – p(x + 1) – c के मूल हैं (UPBoardSolutions.com) तब (α + 1)(β + 1) का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
ज्ञात करना है, (α + 1)(β + 1) = α · β + α + β + 1
= α · β + (α + β) + 1
= [latex]\frac{c}{a}+\left(\frac{-b}{a}\right)+1=\frac{-p-c}{1}+\left(\frac{p}{1}\right)+1[/latex]
= -p – c + p + 1 = 1 – c

प्रश्न 10.
यदि α, β बहुपद x2 – p(x + 1) – c के मूल हैं तथा (α + 1)(β + 1) = 0, तब c का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
(α + 1)(β + 1) = α · β + α + β + 1
= α · β + (α + β) + 1
= [latex]\frac{c}{a}+\left(\frac{-b}{a}\right)+1=\frac{-p-c}{1}+\left(\frac{p}{1}\right)+1[/latex]
= -p – c + p + 1 = 1 – c

दिया है, (α + 1)(β + 1) = 0
1 – c = 0
1 = c या c = 1

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प्रश्न 11.
बहुपद x2 + [latex]\frac{1}{6} x[/latex] – 2 के मूल ज्ञात कीजिए।
हलः
बहुपद, f(x) = x2 + [latex]\frac{1}{6} x[/latex] – 2
अब f(x) = 0 तो, 0 = x2 + [latex]\frac{1}{6} x[/latex] – 2
6x2 + x – 12 = 0
6x2 + 9x – 8x -12 = 0
3x(2x + 3) – 4 (2x + 3) = 0
(2x + 3)(3x – 4) = 0
2x + 3 = 0 तथा 3x – 4 = 0
2x = -3 3x = 4
x = [latex]-\frac{3}{2}[/latex] x = [latex]\frac{4}{3}[/latex]
अत: बहुपद के दो मूल [latex]-\frac{3}{2}[/latex] व [latex]\frac{4}{3}[/latex] हैं। .

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प्रश्न 12.
यदि एक द्विघातीय बहुपद kx2 + 3x + k का एक (UPBoardSolutions.com) मूल 2 हैं तब k का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
माना
f(x) = kx2 + 3x + k
⇒ kx2 + 3x + k = 0, जहाँ f (x) = 0
∵ 2 समीकरण का एक मूल है।
∴ समीकरण में x = 2 रखने पर,
k(2)2 + 3 × 2  +k = 0
4k + 6 + k = 0
5k + 6 = 0
5k = -6
k = [latex]-\frac{6}{5}[/latex]

प्रश्न 13.
एक द्विघातीय बहुपद x2 + kx + k, k >0 के मूलों का चिह्न ज्ञात कीजिए।
हलः
बहुपद x2 + kx + k, k > 0
∵ विविक्तकर, b2 – 4ac > 0
∴ समीकरण के दोनों मूल धनात्मक होंगे।

Ex 2.1 Polynomials लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 14.
बहुपद f (x) = 2x2 + 5x – 12 के मूल ज्ञात कीजिए (UPBoardSolutions.com) तथा इसके मूलों एवं गुणांकों के बीच में सम्बन्ध का सत्यापन कीजिए।
हलः
बहुपद f (x) = 2x2 + 5x -12
= 2x2 + 8x – 3x -12
= 2x(x + 4) – 3(x + 4) = (x + 4)(2x – 3)
अब f(x) = 0
तो (x + 4)(2x – 3) = 0
x + 4 = 0 तथा 2x – 3 = 0
x = -4 2x = 3 ⇒ x = [latex]\frac{3}{2}[/latex]
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 8
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प्रश्न 15.
यदि बहुपद f (x) = ax2 – 6x + 4 के मूलों का गुणनफल 4 है तो a का मान ज्ञात कीजिए।
हलः
यदि f(x) = ax2 – 6x + 4
प्रश्नानुसार, मूलों का गुणनफल = 4
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 9

प्रश्न 16.
द्विघात बहुपद f (x) = 6x2 – 3 के मूल ज्ञात कीजिए तथा (UPBoardSolutions.com) मूलों एवं गुणांकों के बीच में सम्बन्ध का सत्यापन कीजिए।
हलः
बहुपद f (x) = 6x2 – 3
f(x) = 0 रखने पर,
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 10

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प्रश्न 17.
निम्न प्रत्येक बहुपदों के मूल ज्ञात कीजिए तथा इनके (UPBoardSolutions.com) मूलों एवं गुणांकों के बीच में सम्बन्ध का सत्यापन कीजिए।
(i) f1(x) = x2 – 2x – 8 (NCERT)
(ii) f2(x) = 4x2 – 4x + 1 (NCERT)
(iii) f3(x) = x2 – 15 (NCERT)
हल:
(i) बहुपद f1 (x) = x2 – 2x – 8
= x2 – 4x + 2x – 8
= x(x – 4) + 2(x – 4)
= (x – 4)(x + 2)
यदि f (x) = 0 हो तो,
(x – 4)(x + 2) = 0
⇒ x – 4 = 0 तथा x + 2 = 0
x = 4 x = -2
∴ f(x) के मूल 4 तथा -2 हैं।
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 11
(ii) बहुपद f2(x) = 4x2 – 4x + 1
= 4x2 – 2x – 2x + 1
= 2x(2x – 1) -1(2x – 1)
= (2x – 1)(2x – 1)
यदि f (x) = 0 हो तो,
(2x – 1)(2x – 1) = 0
⇒ 2x – 1 = 0 तथा 2x – 1 = 0
x = [latex]\frac{1}{2}[/latex] x = [latex]\frac{1}{2}[/latex]
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 12
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 13

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प्रश्न 18.
एक द्विघात बहुपद ज्ञात कीजिए जिसके मूल (UPBoardSolutions.com) बहुपद f (x) = ar2 + bx + c, a ≠ 0, c ≠ 0 के मूलों के व्युत्क्रम हैं।
हलः
बहुपद f (x) = ax2 + bx + c
माना बहुपद के दो मूल α व β हैं।
Balaji Class 10 Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.1 14

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Ex 2.1 Polynomials दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 19.
एक द्विधात बहुपद ज्ञात कीजिए, जिसके मूलों का योग तथा गुणनफल क्रमशः दी गई संख्याएँ हैं-
(i) 1, 1 (NCERT)
(ii) [latex]\frac{1}{4}[/latex], -1 (NCERT)
(iii) 4, 1 (NCERT)
हल:
(i) दिया है, α + β = 1 तथा α · β = 1
अतः द्विघात बहुपद = x2 – (α + β)x + α ·β = x2 – x + 1

(ii) दिया है, α + β = [latex]\frac{1}{4}[/latex] तथा α ·β = -1
अतः द्विघात बहुपद = x2 – (α + β) x + α ·β
= x2 –  [latex]\frac{1}{4}[/latex]x -1

(iii) दिया है, α + β = 4 तथा α · β = 1
अतः द्विघात बहुपद = x2 – (α + β)x + α · β
= x2 – 4x + 1

प्रश्न 20.
द्विघात बहुपद ज्ञात कीजिए जिसके मूलों का योग 8 (UPBoardSolutions.com) तथा गुणनफल 12 है। यहाँ बहुपद के मूलों को ज्ञात कीजिए।
हलः
दिया है, मूलों का योग (α + β) = 8
तथा मूलों का गुणनफल (α · β) = 12
अतः द्विघात बहुपद f(x) = x2 – (α + β)x + α·β
⇒ f(x) = x2 – 8x + 12
अब f(x) = 0 रखने पर,
तब, x2 – 8x + 12 = 0
x2 – 6x – 2x + 12 = 0
x(x – 6) -2(x – 6) = 0
(x – 6)(x – 2) = 0
x – 6 = 0 तथा x – 2 = 0
x = 6 x = 2
x = 6 व 2

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प्रश्न 21.
एक द्विघात बहुपद ज्ञात कीजिए, जिसके मूलों का योग -5 तथा गुणनफल 6 है। यहाँ बहुपद के मूलों को ज्ञात कीजिए।
हलः
दिया है, मूलों का योग (α + β) = -5
तथा मूलों का गुणनफल (α·β) = 6
अतः द्विघात बहुपद f(x) = x2 – (α + β) x + α·β
= x2 – (-5)x + 6
= x2 + 5x + 6
यदि f(x) = 0 हो तब, x2 + 5x + 6 = 0
x2 + 3x + 2x + 6 = 0
x(x + 3) + 2(x + 3) = 0
(x + 3)(x + 2) = 0
⇒ x + 3 = 0 तथा x + 2 = 0
x = -3 x = -2
अतः मूल -3, -2 हैं।

प्रश्न 22.
एक द्विघातीय बहुपद ज्ञात कीजिए जिसके मूल 5 और -3 हैं।
हलः
मूलों का योगफल α + β = (5) + (-3) = 5 -3 = 2
तथा मूलों का गुणनफल α·β = 5 × -3 = -15
∴ अभीष्ट बहुपद है,
x2 – (α + β)x + αβ = x2 – 2x – 15

प्रश्न 23.
एक द्विघातीय बहुपद के मूलों का योगफल तथा मूलों (UPBoardSolutions.com) का गुणनफल क्रमशः 3 और -10 हैं तब द्विघातीय बहुपद ज्ञात कीजिए।
हलः
मूलों का योगफल (α + β) = 3
मूलों का गुणनफल (α – β) = -10
∴ अभीष्ट बहुपद है,
x2 – (α + β)x + α·β = x2 – 3x – 10

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प्रश्न 24.
यदि α, β एक बहुपद के मूल हैं तथा α + β = 6 और αβ = 4 है तो बहुपद लिखिए।
हलः
यदि α + β = 6 और α·β = 4
तो अभीष्ट बहुपद है,
x2 – (α + β)x + α·β = x2 – 6x + 4

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 27 साहस

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 27 साहस are the part of UP Board Solutions for Class 10 Commerce. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 27 साहस.

Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 26
Chapter Name साहस
Number of Questions Solved 15
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 27 साहस

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
उद्यमी होता है।
(a) वैतनिक कर्मचारी
(b) अवैतनिक कर्मचारी
(c) सरकारी कर्मचारी
(d) केवले उपभोक्ता
उत्तर:
(b) अवैतनिक कर्मचारी

प्रश्न 2.
जोखिम उठाने का कार्य है।
(a) पूँजीपति का
(b) उद्यमी का
(c) संगठनकर्ता का
(d) ये सभी
उत्तर:
(b) उद्यमी का

प्रश्न 3.
साहसी का कार्य मुख्यतः होता है।
(a) मानसिक
(b) शारीरिक
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) मानसिक

प्रश्न 4.
उत्पादन के किस साधन का पुरस्कार ऋणात्मक हो सकता है? (2010, 09)
(a) पूँजी
(b) उद्यम
(c) श्रम
(d) संगठन
उत्तर:
(b) उद्यम

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निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
साहस उत्पत्ति का सक्रिय साधन है/नहीं है।
उत्तर:
सक्रिय साधन है।

प्रश्न 2.
उद्यमी व्यापार का जोखिम उठाता है/नहीं उठाता है।
उत्तर:
उठाता है।

प्रश्न 3.
उद्यमी व्यवसाय का वेतनभोगी कर्मचारी/स्वामी होता है।
उत्तर:
स्वामी होता है।

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प्रश्न 4.
उद्यमी के पुरस्कार को लाभ/ब्याज कहते हैं।
उत्तर:
लाभ कहते हैं।

प्रश्न 5.
लाभ ऋणात्मक हो सकता है/नहीं हो सकता है। (2010)
उत्तर:
हो सकता है।

प्रश्न 6.
साहसी का पारिश्रमिक ऋणात्मक हो सकता है।नहीं हो सकता है। (2009)
उत्तर:
हो सकता है।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
उद्यमी या साहसी से आप क्या समझते हैं? (2012)
उत्तर:
उद्यम से आशय हानि तथा लाभ को वहन करने की क्षमता से है (UPBoardSolutions.com) तथा जो व्यक्ति यह क्षमता रखता है, वह ‘साहसी’ या ‘उद्यमी’ कहलाता है। दूसरे शब्दों में, उद्यमी अपने उद्यम का एक अवैतनिक कर्मचारी होता है एवं वह व्यवसाय का स्वामी होता है।

प्रश्न 2.
प्रो. जे. के. मेहता के अनुसार उद्यमी या साहसी को परिभाषित कीजिए। (2012)
उत्तर:
प्रो. जे. के. मेहता के अनुसार, “उत्पादन में सदैव कुछ-न-कुछ जोखिम रहता है। इस जोखिम से उत्पन्न होने वाली हानियों को सहन करने के लिए किसी-न-किसी व्यक्ति की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति इन हानियों को सहन करता है, उसे साहसी या उद्यमी कहते हैं।”

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लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
संगठनकर्ता व साहसी में अन्तर बताइए।
उत्तर:
संगठनकर्ता (प्रबन्धक) तथा साहसी में अन्तर

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 27 साहस

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प्रश्न 2.
कुशल साहसी के गुणों का वर्णन कीजिए। उत्तर कुशल साहसी के गुण निम्नलिखित हैं-

  1. नेतृत्व का गुण एक कुशल साहसी में नीति-निर्धारण करने व निर्णय लेने का गुण होना चाहिए। साहसी में प्रोत्साहित व प्रेरित करने की योग्यता भी होनी चाहिए।
  2. अच्छी साख साहसी की बाजार में अच्छी साख होनी चाहिए, जिससे कि उसे सरलता से पूँजी उपलब्ध हो सके।
  3. व्यावसायिक ज्ञान साहसी को व्यवसाय के प्रत्येक पहलू के बारे में पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए।
  4. नैतिक शिक्षा एक साहसी में आत्मविश्वास, ईमानदारी, सहचरित्रता, (UPBoardSolutions.com) आदि नैतिक गुणों का होना आवश्यक है।
  5. दूरदर्शिता साहसी को पूर्वानुमान लगाकर भावी परिवर्तनों के लिए होने वाले जोखिमों के लिए तैयार रहना चाहिए।
  6. निर्णय लेने की योग्यता साहसी में व्यवसाय से सम्बन्धित विवेकपूर्ण निर्णय लेने की योग्यता होनी चाहिए।
  7. साहस, धैर्य व दृढ़ता एक साहसी में जोखिम व अनिश्चितता का सामना करने के लिए साहस, धैर्य व दृढ़ता का गुण होना आवश्यक है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
उद्यमी किसे कहते हैं? एक उद्यमी के प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए। (2016)
उत्तर:
द्यमी से आशय साहस या उद्यम उत्पादन का पाँचवाँ उपादान है। अमेरिकन अर्थशास्त्रियों ने सर्वप्रथम उत्पादन के ‘उद्यम’ (पाँचवाँ उपादान) को महत्त्व दिया है। प्रत्येक व्यवसाय में किसी-न-किसी प्रकार का छोटा या बड़ा जोखिम होता है। ‘साहस’ उत्पत्ति का सक्रिय साधन है। उद्यम से आशय हानि तथा लाभ को वहन करने की क्षमता से है तथा जो व्यक्ति यह क्षमता रखता है, वह साहसी या उद्यमी कहलाता है। डॉ. मार्शल के अनुसार, “साहसी साहस का कार्य करता है और जोखिम उठाता है।”

प्रो. जे. के. मेहता के अनुसार, “उत्पादन में सदैव कुछ-न-कुछ जोखिम रहता है। इस जोखिम से उत्पन्न होने वाली हानियों को सहन करने के लिए किसी-न-किसी व्यक्ति की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति इन हानियों को सहन करता है, उसे साहसी या उद्यमी कहते हैं।” प्रो. नाइट के अनुसार, “उद्यमी वह व्यक्ति है, जो दो कार्य करता है-व्यापार के जोखिम उठाना और उस पर नियन्त्रण रखना।” उद्यमी/साहसी के कार्य एक साहसी (UPBoardSolutions.com) या उद्यमी द्वारा किए जाने वाले कार्यों को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा जा सकता है

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1. निर्णय सम्बन्धी कार्य साहसी के निर्णय सम्बन्धी कार्य निम्न हैं-

  • व्यवसाय का चुनाव साहसी को यह निर्णय लेना पड़ता है कि कौन-सा व्यवसाय प्रारम्भ किया जाए तथा किस व्यवसाय में अधिक लाभ कमाया जा सकता है। इस प्रकार इन बातों को ध्यान में रखकर उचित व्यवसाय का चुनाव किया जा सकता है।
  • उत्पादन के स्थान का चुनाव उद्योग की स्थापना किस स्थान पर की जाए, यह निर्णय भी साहसी को ही लेना पड़ता है। साहसी यह निर्णय लेते समय कच्चे माल व शक्ति के साधनों की उपलब्धता, यातायात के साधनों की व्यवस्था, बाजार, बैंक, आदि सुविधाओं को ध्यान में रखता है।
  • वस्तु का चुनाव साहसी को उत्पादन कार्य प्रारम्भ करने से पहले वस्तु (UPBoardSolutions.com) के चुनाव सम्बन्धी निर्णय भी लेने पड़ते हैं।
  • उत्पादन की इकाई के आकार का निर्णय व्यवसाय, स्थान व वस्तु का चुनाव करने के पश्चात् उत्पादित वस्तु के आकार सम्बन्धी निर्णय भी साहसी द्वारा लिए जाते हैं। यह घटक उत्पादित वस्तु की माँग पर निर्भर करता है।

2. वितरण सम्बन्धी कार्य वर्तमान युग में संयुक्त साधनों के द्वारा ही उत्पादन किया जा सकता है। प्रत्येक साधन को उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बदले उचित प्रतिफल दिया जाता है अर्थात् व्यवसाय में प्राप्त आय में से भूमिपति को लगान, पूँजीपति को ब्याज, श्रमिकों को मजदूरी व प्रबन्धक को वेतन दिया जाता है। शेष बचे लाभ को साहसी अपने पास रखता है।

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3. जोखिम सहन करने सम्बन्धी कार्य प्रत्येक प्रकार के व्यवसाय में जोखिम पाए जाते हैं। बिना (UPBoardSolutions.com) जोखिम के उत्पादन कार्य नहीं किया जा सकता है। साहसी द्वारा ही व्यवसाय के जोखिम व अनिश्चितता को वहन किया जाता है।

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 22 उत्पादन (उत्पत्ति) के साधन : आशय, विशेषताएँ एवं महत्त्व

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 22 उत्पादन (उत्पत्ति) के साधन : आशय, विशेषताएँ एवं महत्त्व are the part of UP Board Solutions for Class 10 Commerce. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 22 उत्पादन (उत्पत्ति) के साधन : आशय, विशेषताएँ एवं महत्त्व.

Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 22
Chapter Name उत्पादन (उत्पत्ति) के साधन : आशय, विशेषताएँ एवं महत्त्व
Number of Questions Solved 17
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 22 उत्पादन (उत्पत्ति) के साधन : आशय, विशेषताएँ एवं महत्त्व

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
उत्पादन का/के साधन है/हैं। (2013)
(a) भूमि
(b) श्रम
(c) पूँजी
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 2.
उत्पादन का सक्रिय साधन है।
(a) पूँजी
(b) श्रम
(c) भूमि
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) श्रम

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन-सा उत्पादन का साधन नहीं है?
(a) भूमि
(b) श्रम
(c) वितरण
(d) पूँजी
उत्तर:
(c) वितरण

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निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
उपयोगिता का सृजन ही उत्पादन/उपभोग है। (2010)
उत्तर:
उत्पादन है

प्रश्न 2.
अर्थशास्त्र में चिकित्सकों को उत्पादक माना/नहीं माना जाता है। (2011)
उत्तर:
माना जाता है

प्रश्न 3.
धन सदैव उत्पादक होता है/नहीं होता है। (2009)
उत्तर:
नहीं होता है

प्रश्न 4.
उत्पादन के पाँच/चार साधन होते हैं। (2008)
उत्तर:
पाँच साधन होते हैं।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
उत्पादन के साधनों से आप क्या समझते हैं? (2013)
उत्तर:
उत्पादन के साधनों (Factors of Production) (UPBoardSolutions.com) का तात्पर्य उन वस्तुओं व साधनों से है, जो उपयोगिता अथवा मूल्य के सृजन में सहायक होते हैं। बेन्हम के अनुसार, “कोई भी वस्तु या सेवा, जो किसी भी स्तर पर उत्पादन कार्य में सहयोग प्रदान करती है, उत्पादन का साधन कहलाती है।”

प्रश्न 2.
उत्पादन की दो रीतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
उत्पादन की दो रीतियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. रूप-परिवर्तन द्वारा उत्पादन जब किसी वस्तु के रंग, रूप अथवा आकार में परिवर्तन करके उसे पहले की तुलना में अधिक उपयोगी व लाभदायक बना दिया जाता है, तो इसे रूप-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कहा जाता है।
  2. स्थान-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कई बार वस्तु का स्थान परिवर्तित करने से भी उपयोगिता का सृजन होता है या उपयोगिता में वृद्धि होती है, उसे स्थान-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कहा जाता है।

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प्रश्न 3.
उत्पत्ति के साधनों के नाम लिखिए। (2017)
उत्तर:
उत्पत्ति के निम्नलिखित पाँच साधन हैं-

  1. भूमि
  2. श्रम
  3. पूँजी
  4. संगठन
  5. उद्यम या साहस

प्रश्न 4.
उत्पादन के साधन के रूप में संगठन की भूमिका बताइए। (2018)
उत्तर:
संगठन उत्पादन का चौथा महत्त्वपूर्ण साधन संगठन है। संगठन का अभिप्राय उत्पादन के विभिन्न साधनों में अनुकूलतम संयोग स्थापित कर इन्हें उत्पादन कार्य में संलग्न करने की कला व विज्ञान से है। दूसरे शब्दों में, संगठन वह विशिष्ट श्रम है, जो उत्पादन (UPBoardSolutions.com) के साधनों श्रम, पूँजी व भूमि को एकत्रित करके उनमें आदर्शतम् समन्वय स्थापित करता है। उनके कार्यों का निरीक्षण करता है अथवा आवश्यक परिवर्तन करता है। इसके अभाव में कुशलता का अभाव रहता है।

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लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
उत्पादन के कौन-कौन से साधन हैं?
अथवा
उत्पादन के किन्हीं पाँच साधनों का उल्लेख कीजिए। (2006)
उत्तर:
उत्पादन के साधनों से आशय उत्पादन के साधनों से हमारा तात्पर्य उन वस्तुओं व साधनों से है, जो उपयोगिता अथवा मूल्य के सृजन में सहायक होते हैं। बेन्हम के अनुसार, “कोई भी वस्तु या सेवा, जो किसी भी स्तर पर उत्पादन कार्य में सहयोग प्रदान करती है, उत्पादन का साधन कहलाती है।” उत्पादन के साधन आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने उत्पादन के साधनों को निम्नलिखित पाँच भागों में बाँटा है

1. भूमि यह उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण, किन्तु निष्क्रिय साधन है। साधारण बोलचाल में, भूमि (Land) का अर्थ केवल भूमि की ऊपरी सतह से लगाया जाता है, परन्तु अर्थशास्त्र में भूमि का बहुत ही व्यापक अर्थ होता है। प्रो. मार्शल के अनुसार, “भूमि का अर्थ (UPBoardSolutions.com) केवल पृथ्वी की ऊपरी सतह से नहीं वरन् उन सभी वस्तुओं एवं शक्तियों से है, जिन्हें प्रकृति ने भूमि, वायु, प्रकाश, आदि के रूप में मानव की सहायता के लिए नि:शुल्क प्रदान किया है।” अर्थशास्त्र में भूमि का अभिप्राय उन समस्त प्राकृतिक उपहारों से है, जिसके अन्तर्गत भूमि की सतह, वायु, नदी, पहाड़, प्रकाश, खनिज, जल, आदि प्रकृतिदत्त पदार्थ सम्मिलित हैं।

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2. श्रम श्रम (Labour) उत्पादन का दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण एवं सक्रिय साधन है। इसका महत्त्व इसलिए अधिक है, क्योंकि यह समस्त आर्थिक क्रियाओं को आदि और अन्त (साधन और साध्य) दोनों हैं। अर्थशास्त्र में श्रम से मनुष्य के उन सभी शारीरिक और मानसिक प्रयत्नों का बोध होता है, जो धनोपार्जन के उद्देश्य से किए जाते हैं। धनोत्पादन के उद्दश्य से किए गए मानव के सभी शारीरिक एवं मानसिक प्रयत्नों का भी श्रम में समावेश होता है, परन्तु मनोरंजन, देश प्रेम, पारिवारिक स्नेह, आदि के लिए किए गए कार्यों को श्रम में सम्मिलित नहीं किया जाता है।

3. पूँजी उत्पादन का तीसरा महत्त्वपूर्ण साधन पूँजी (Capital) है। आज की आधुनिक जटिल उत्पादन अवस्था में पूँजी का महत्त्व निरन्तर बढ़ता जा रहा है। पूँजी उत्पादन का एक निष्क्रिय साधन होते हुए भी इसकी बढ़ती हुई स्वयं संचालिता, इसे और भी महत्त्वपूर्ण (UPBoardSolutions.com) बनाती जा रही है। प्रो. मार्शल के अनुसार, “पूँजी मनुष्य द्वारा उत्पादित धन का वह भाग है, जिसे अधिक सम्पत्ति के उत्पादन में प्रयुक्त किया जाता है। इस प्रकार पूँजी के अन्तर्गत केवल नकदी ही नहीं आती वरन् मशीनें, कच्चा माल, बीज, आदि भी आते हैं।’

4. संगठन उत्पादन का चौथा महत्त्वपूर्ण साधन (Organisation) संगठन है। संगठन का अभिप्राय उत्पादन के विभिन्न साधनों में अनुकूलतम संयोग स्थापित कर इन्हें उत्पादन कार्य में संलग्न करने की कला व विज्ञान से है। दूसरे शब्दों में, संगठन वह विशिष्ट श्रम है, जो उत्पादन के साधनों श्रम, पूँजी व भूमि को एकत्रित करके उनमें आदर्शतम् समन्वय स्थापित करता है। उनके कार्यों का निरीक्षण करता है अथवा आवश्यक परिवर्तन करता है। इसके अभाव में कुशलता का अभाव रहता है।

5. उद्यम या साहस आधुनिक उत्पादन प्रक्रिया में अनेक जटिलताओं के कारण जोखिम में वृद्धि हुई है। जो व्यक्ति इन जोखिमों को वहन करता है, उसे साहसी या उद्यमी (Enteprise) कहते हैं। पहले साहसी को उत्पादन का महत्त्वपूर्ण साधन नहीं माना जाता था, किन्तु आधुनिक उत्पादन अवस्था में विभिन्न प्रकार के जोखिमों की प्रधानता के कारण साहसी को महत्त्वपर्ण साधन माना जाने लगा है। संयुक्त पूँजी कम्पनियों की स्थापना में साहसी ही आगे आते हैं।

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प्रश्न 2.
उत्पादन तथा उपभोग में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2016, 09, 08)
उत्तर:
उपभोग से आशय उपभोग का अर्थ साधारण रूप से वस्तुओं के खाने-पीने से लगाया जाता है, जबकि अर्थशास्त्र में इस शब्द का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है। अर्थशास्त्र में उपभोग को अर्थ मानव द्वारा की जाने वाली उन समस्त क्रियाओं से है, (UPBoardSolutions.com) जिनसे उसकी आवश्यकता की पूर्ति होती है। उपभोग द्वारा किसी वस्तु के तुष्टिगुण को कम या समाप्त किया जा सकता है अर्थात् वस्तुओं द्वारा आवश्यकताओं की प्रत्यक्ष सन्तुष्टि की क्रिया को उपभोग कहते हैं।

उत्पादन तथा उपभोग में अन्तर

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 22 उत्पादन (उत्पत्ति) के साधन : आशय, विशेषताएँ एवं महत्त्व
उत्पादन का महत्त्व उत्पादन का महत्त्व निम्नलिखित है-

  1. आवश्यकताओं की पूर्ति उत्पादन के परिणामस्वरूप ही मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। उत्पादन के साधन उत्पादन प्रक्रिया से अपनी आय प्राप्त करते हैं तथा उस आय से अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ एवं सेवाएँ क्रय करते हैं।
  2. राष्ट्रीय आय में वृद्धि राष्ट्रीय आय पर उत्पादन का गहरा प्रभाव पड़ता है। जब अर्थशास्त्र के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन से वृद्धि होती है, तो इससे देश की राष्ट्रीय आय में भी वृद्धि होती है।
  3. जीवन-स्तर में सुधार किसी देश के लोगों का जीवन-स्तर उत्पादन की मात्रा व प्रकृति पर निर्भर करता है।
  4. रोजगार में वृद्धि देश में उत्पादन में वृद्धि से रोजगार पर अनुकूलतम प्रभाव पड़ता है। उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होती है।
  5. व्यापार में वृद्धि उत्पादन वृद्धि का व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ आन्तरिक व्यापार एवं विदेशी व्यापार का विकास होता है।
  6. आर्थिक विकास का आधार किसी राष्ट्र का आर्थिक विकास उसके (UPBoardSolutions.com) उत्पादन की मात्रा, स्वरूप, वृद्धि स्वरूप एवं वृद्धि की दर पर निर्भर होता है।
  7. परिवहन के साधनों का विकास उत्पादन वृद्धि से परिवहन के साधनों का भी विकास होता है। उत्पादन वृद्धि के लिए कच्चा माल व मशीनों, आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाना व ले जाना पड़ता है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
उत्पादन की परिभाषा दीजिए। विभिन्न प्रकार के उत्पादन का उल्लेख कीजिए। (2014)
अथवा
अर्थशास्त्र में उत्पादन से क्या आशय होता है? उत्पादन के प्रकारों की विवेचना कीजिए। (2006)
उत्तर:
उत्पादन से आशय उत्पादन (Production). से आशय वस्तुओं व सेवाओं में उपयोगिता सृजन के साथ-साथ उनके मूल्य या विनिमय शक्ति में वृद्धि करना होता है। अत: वस्तुओं व सेवाओं द्वारा आर्थिक उपयोगिता के सृजन को उत्पादन कहा जाता है। फेयरचाइल्ड के अनुसार, “सम्पत्ति को अधिक उपयोगी बनाना ही उत्पादन है।” टॉमस के अनुसार, “वस्तु के मूल्य में वृद्धि करना अथवा आर्थिक उपयोगिता में वृद्धि करना ही उत्पादन है।” डॉ. बसु के अनुसार, “उत्पादन का अर्थ तुष्टिगुण सृजन करना है।” ए. एच. स्मिथ के अनुसार, “उत्पादन वह प्रक्रिया है, जिससे वस्तुओं में उपयोगिता का सृजन होती है।” प्रो. एली के अनुसार, “आर्थिक उपयोगिताओं का निर्माण ही उत्पादन है।”

उत्पादन के प्रकार या उपयोगिता वृद्धि की रीतियाँ उत्पादन के प्रकार या उपयोगिता वृद्धि की रीतियाँ निम्नलिखित हैं

1. रूप-परिवर्तन द्वारा उत्पादन किसी वस्तु के रूप को परिवर्तित करके उपयोगिता का सृजन किया जा सकता है। जब किसी वस्तु के रंग, रूप अथवा आकार में परिवर्तन किया जाता है, तो वह पहले से अधिक उपयोगी एवं लाभदायक बन जाती है। इसे रूप-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कहा जाता है; जैसे-लकड़ी का रूप बदलकर मेज व कुर्सी बनाना।

2. स्थान-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कई बार वस्तु का स्थान परिवर्तित करने से भी उपयोगिता का सृजन होता है या उपयोगिता में वृद्धि होती है, उसे स्थान परिवर्तन द्वारा उत्पादन कहा जाता है। जब कोई वस्तु किसी विशेष स्थान पर अधिक उत्पादित होती है, तो उस विशेष स्थान पर उस वस्तु की उपयोगिता कम होती है।

3. समय-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कुछ वस्तुएँ ऐसी भी होती हैं, जिनकी उपयोगिता समय-परिवर्तन के साथ बढ़ती है। कुछ वस्तुएँ ऐसी भी होती हैं, जिनकी समय बीतने के साथ उपयोगिता में वृद्धि होती है। उदाहरणस्वरूप, संग्रह करने से भी कुछ वस्तुओं की उपयोगिता व मूल्य में वृद्धि होती है; जैसे-शराब तथा चावल जितने पुराने होते जाते हैं, उनकी उपयोगिता भी बढ़ने लगती है।

4. अधिकार-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कभी-कभी वस्तु का अधिकार परिवर्तित करने पर अर्थात् एक व्यक्ति द्वारा वस्तु के स्वामित्व को दूसरे व्यक्ति को प्रदान करने पर भी उपयोगिता का सृजन होता है। इसे अधिकार-परिवर्तन द्वारा उत्पादन कहा (UPBoardSolutions.com) जाता है। उदाहरण के लिए, एक पुस्तक, पुस्तक विक्रेता हेतु अधिक उपयोगी नहीं होती है। वह उसके लिए लाभ कमाने की एक वस्तु मात्र होती है, जिसे वह बेचकर अपनी आय प्राप्त करता है, परन्तु जब यह पुस्तक एक विद्यार्थी द्वारा खरीद ली जाती है, तो वस्तु की उपयोगिता बढ़ जाती है।

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5. सेवा द्वारा उत्पादन किसी सेवा या किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत गुणों के कारण भी उपयोगिता का सृजन होता है, उसे सेवा द्वारा उत्पादन कहा जाता है; जैसे-डॉक्टर, वकील, अध्यापक, न्यायाधीश, नौकर, गायक, इत्यादि अपनी सेवाओं के द्वारा उपयोगिता का सृजन करते हैं।

6. ज्ञान वृद्धि द्वारा उत्पादन विज्ञापन द्वारा किसी वस्तु-विशेष से सम्बन्धित ज्ञान का प्रसार करने से उपयोगिता का सृजन होता है; जैसे-जब तक किसी उपभोक्ता को किसी वस्तु-विशेष से सम्बन्धित पूरा ज्ञान नहीं होता। वह वस्तु उसके लिए ज्यादा उपयोगी नहीं होती है, परन्तु यदि विज्ञापन के माध्यम से उपभोक्ता को उस वस्तु की जानकारी प्रदान की जाए, तो उसे उपभोक्ता की उस वस्तु के सन्दर्भ में उपयोगिता बढ़ जाएगी।

प्रश्न 2.
उत्पादन क्या है? उत्पादन के साधनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2016)
अथवा
उत्पादन के साधनों से आप क्या समझते हैं? उत्पादन के विभिन्न साधनों की व्याख्या कीजिए। (2015)
अथवा
अर्थशास्त्र में उत्पादन का क्या अर्थ है? उत्पादन के विभिन्न कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उत्पादन से आशय
उत्पादन से आशय उत्पादन (Production). से आशय वस्तुओं व सेवाओं में उपयोगिता सृजन के साथ-साथ उनके मूल्य या विनिमय शक्ति में वृद्धि करना होता है। अत: वस्तुओं व सेवाओं द्वारा आर्थिक उपयोगिता के सृजन को उत्पादन कहा जाता है। फेयरचाइल्ड के अनुसार, “सम्पत्ति को अधिक उपयोगी बनाना ही उत्पादन है।” टॉमस के अनुसार, “वस्तु के मूल्य में वृद्धि करना अथवा आर्थिक उपयोगिता में वृद्धि करना ही उत्पादन है।” डॉ. बसु के अनुसार, “उत्पादन का अर्थ तुष्टिगुण सृजन करना है।” ए. एच. स्मिथ के अनुसार, “उत्पादन वह प्रक्रिया है, जिससे वस्तुओं में उपयोगिता का सृजन होती है।” प्रो. एली के अनुसार, “आर्थिक उपयोगिताओं का निर्माण ही उत्पादन है।”

उत्पादन के साधनों से आशय उत्पादन के साधनों से हमारा तात्पर्य उन वस्तुओं व साधनों से है, जो उपयोगिता अथवा मूल्य के सृजन में सहायक होते हैं। बेन्हम के अनुसार, “कोई भी वस्तु या सेवा, जो किसी भी स्तर पर उत्पादन कार्य में सहयोग प्रदान करती है, उत्पादन का साधन कहलाती है।” उत्पादन के साधन आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने उत्पादन के साधनों को निम्नलिखित पाँच भागों में बाँटा है

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1. भूमि यह उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण, किन्तु निष्क्रिय साधन है। साधारण बोलचाल में, भूमि (Land) का अर्थ केवल भूमि की ऊपरी सतह से लगाया जाता है, परन्तु अर्थशास्त्र में भूमि का बहुत ही व्यापक अर्थ होता है। प्रो. मार्शल के अनुसार, “भूमि का अर्थ केवल पृथ्वी की ऊपरी सतह से नहीं वरन् उन सभी वस्तुओं एवं शक्तियों से है, जिन्हें प्रकृति ने भूमि, वायु, प्रकाश, आदि के रूप में मानव की सहायता के लिए नि:शुल्क प्रदान किया है।” अर्थशास्त्र में भूमि का अभिप्राय उन समस्त प्राकृतिक उपहारों से है, जिसके अन्तर्गत भूमि की सतह, वायु, नदी, पहाड़, प्रकाश, खनिज, जल, आदि प्रकृतिदत्त पदार्थ सम्मिलित हैं।

2. श्रम श्रम (Labour) उत्पादन का दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण एवं सक्रिय साधन है। इसका महत्त्व इसलिए अधिक है, क्योंकि यह समस्त आर्थिक क्रियाओं को आदि और अन्त (साधन और साध्य) दोनों हैं। अर्थशास्त्र में श्रम से मनुष्य के उन सभी शारीरिक (UPBoardSolutions.com) और मानसिक प्रयत्नों का बोध होता है, जो धनोपार्जन के उद्देश्य से किए जाते हैं। धनोत्पादन के उद्दश्य से किए गए मानव के सभी शारीरिक एवं मानसिक प्रयत्नों का भी श्रम में समावेश होता है, परन्तु मनोरंजन, देश प्रेम, पारिवारिक स्नेह, आदि के लिए किए गए कार्यों को श्रम में सम्मिलित नहीं किया जाता है।

3. पूँजी उत्पादन का तीसरा महत्त्वपूर्ण साधन पूँजी (Capital) है। आज की आधुनिक जटिल उत्पादन अवस्था में पूँजी का महत्त्व निरन्तर बढ़ता जा रहा है। पूँजी उत्पादन का एक निष्क्रिय साधन होते हुए भी इसकी बढ़ती हुई स्वयं संचालिता, इसे और भी महत्त्वपूर्ण बनाती जा रही है। प्रो. मार्शल के अनुसार, “पूँजी मनुष्य द्वारा उत्पादित धन का वह भाग है, जिसे अधिक सम्पत्ति के उत्पादन में प्रयुक्त किया जाता है। इस प्रकार पूँजी के अन्तर्गत केवल नकदी ही नहीं आती वरन् मशीनें, कच्चा माल, बीज, आदि भी आते हैं।’

4. संगठन उत्पादन का चौथा महत्त्वपूर्ण साधन (Organisation) संगठन है। संगठन का अभिप्राय उत्पादन के विभिन्न साधनों में अनुकूलतम संयोग स्थापित कर इन्हें उत्पादन कार्य में संलग्न करने की कला व विज्ञान से है। दूसरे शब्दों में, संगठन वह विशिष्ट श्रम है, जो उत्पादन के साधनों श्रम, पूँजी व भूमि को एकत्रित करके उनमें आदर्शतम् समन्वय स्थापित करता है। उनके कार्यों का निरीक्षण करता है अथवा आवश्यक परिवर्तन करता है। इसके अभाव में कुशलता का अभाव रहता है।

5. उद्यम या साहस आधुनिक उत्पादन प्रक्रिया में अनेक जटिलताओं के कारण जोखिम में वृद्धि हुई है। जो व्यक्ति इन जोखिमों को वहन करता है, उसे साहसी या उद्यमी (Enteprise) कहते हैं। पहले साहसी को उत्पादन का महत्त्वपूर्ण साधन नहीं माना जाता था, किन्तु आधुनिक उत्पादन अवस्था में विभिन्न प्रकार के जोखिमों की प्रधानता के कारण साहसी को महत्त्वपर्ण साधन माना जाने लगा है। संयुक्त पूँजी कम्पनियों की स्थापना में साहसी ही आगे आते हैं।

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प्रश्न 3.
उत्पादन क्या है? यह उपभोग से कैसे भिन्न है? इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए। (2008)
अथवा
उपभोग क्या है? उत्पादन व उपभोग में क्या अन्तर है?
उत्तर:
उत्पादन से आशय
उत्पादन से आशय उत्पादन (Production). से आशय वस्तुओं व सेवाओं में उपयोगिता सृजन के साथ-साथ उनके मूल्य या विनिमय शक्ति में वृद्धि करना होता है। अत: वस्तुओं व सेवाओं द्वारा आर्थिक उपयोगिता के सृजन को उत्पादन कहा जाता है। फेयरचाइल्ड (UPBoardSolutions.com) के अनुसार, “सम्पत्ति को अधिक उपयोगी बनाना ही उत्पादन है।” टॉमस के अनुसार, “वस्तु के मूल्य में वृद्धि करना अथवा आर्थिक उपयोगिता में वृद्धि करना ही उत्पादन है।” डॉ. बसु के अनुसार, “उत्पादन का अर्थ तुष्टिगुण सृजन करना है।” ए. एच. स्मिथ के अनुसार, “उत्पादन वह प्रक्रिया है, जिससे वस्तुओं में उपयोगिता का सृजन होती है।” प्रो. एली के अनुसार, “आर्थिक उपयोगिताओं का निर्माण ही उत्पादन है।”

उपभोग से आशय उपभोग का अर्थ साधारण रूप से वस्तुओं के खाने-पीने से लगाया जाता है, जबकि अर्थशास्त्र में इस शब्द का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है। अर्थशास्त्र में उपभोग को अर्थ मानव द्वारा की जाने वाली उन समस्त क्रियाओं से है, जिनसे उसकी आवश्यकता की पूर्ति होती है। उपभोग द्वारा किसी वस्तु के तुष्टिगुण को कम या समाप्त किया जा सकता है अर्थात् वस्तुओं द्वारा आवश्यकताओं की प्रत्यक्ष सन्तुष्टि की क्रिया को उपभोग कहते हैं।

उत्पादन तथा उपभोग में अन्तर

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 22 उत्पादन (उत्पत्ति) के साधन : आशय, विशेषताएँ एवं महत्त्व

उत्पादन का महत्त्व उत्पादन का महत्त्व निम्नलिखित है-

  1. आवश्यकताओं की पूर्ति उत्पादन के परिणामस्वरूप ही मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। उत्पादन के साधन उत्पादन प्रक्रिया से अपनी आय प्राप्त करते हैं तथा उस आय से अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ एवं सेवाएँ क्रय करते हैं।
  2. राष्ट्रीय आय में वृद्धि राष्ट्रीय आय पर उत्पादन का गहरा प्रभाव पड़ता है। जब अर्थशास्त्र के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन से वृद्धि होती है, तो इससे देश की राष्ट्रीय आय में भी वृद्धि होती है।
  3. जीवन-स्तर में सुधार किसी देश के लोगों का जीवन-स्तर उत्पादन की मात्रा व प्रकृति पर निर्भर करता है।
  4. रोजगार में वृद्धि देश में उत्पादन में वृद्धि से रोजगार पर अनुकूलतम प्रभाव (UPBoardSolutions.com) पड़ता है। उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होती है।
  5. व्यापार में वृद्धि उत्पादन वृद्धि का व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ आन्तरिक व्यापार एवं विदेशी व्यापार का विकास होता है।
  6. आर्थिक विकास का आधार किसी राष्ट्र का आर्थिक विकास उसके उत्पादन की मात्रा, स्वरूप, वृद्धि स्वरूप एवं वृद्धि की दर पर निर्भर होता है।
  7. परिवहन के साधनों का विकास उत्पादन वृद्धि से परिवहन के साधनों का भी विकास होता है। उत्पादन वृद्धि के लिए कच्चा माल व मशीनों, आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाना व ले जाना पड़ता है।

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प्रश्न 4.
अर्थशास्त्र में उत्पादन का क्या अर्थ है? उत्पादन को प्रभावित करने वाले छः कारकों का उल्लेख कीजिए। (2007)
अथवा
उत्पादन क्षमता से क्या आशय है? उत्पादन क्षमता को प्रभावित करने वाली बातों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
उत्पादन से आशय
उत्पादन से आशय उत्पादन (Production). से आशय वस्तुओं व सेवाओं में उपयोगिता सृजन के साथ-साथ उनके मूल्य या विनिमय शक्ति में वृद्धि करना होता है। अत: वस्तुओं व सेवाओं द्वारा आर्थिक उपयोगिता के सृजन को उत्पादन कहा जाता है। फेयरचाइल्ड के अनुसार, “सम्पत्ति को अधिक उपयोगी बनाना ही उत्पादन है।” टॉमस के अनुसार, “वस्तु के मूल्य में वृद्धि करना अथवा आर्थिक उपयोगिता में वृद्धि करना ही उत्पादन है।” डॉ. बसु (UPBoardSolutions.com) के अनुसार, “उत्पादन का अर्थ तुष्टिगुण सृजन करना है।” ए. एच. स्मिथ के अनुसार, “उत्पादन वह प्रक्रिया है, जिससे वस्तुओं में उपयोगिता का सृजन होती है।” प्रो. एली के अनुसार, “आर्थिक उपयोगिताओं का निर्माण ही उत्पादन है।”

उत्पादन क्षमता उत्पादन की कुशलता (Efficiency of Production) से तात्पर्य किसी उत्पादन संस्था की उस योग्यता से है, जिसके द्वारा वह एक निश्चित समय में अन्य उत्पादक संस्थाओं से कम लागत पर अधिक मात्रा में व उच्च स्तर का माल उत्पादित करती है। उत्पादन की कुशलता को प्रभावित करने वाले तत्त्व उत्पादन की कुशलता को प्रभावित करने वाले तत्त्व निम्नलिखित हैं

1. आन्तरिक तत्त्व आन्तरिक तत्त्वों का सम्बन्ध उत्पादन संस्था के आन्तरिक प्रबन्ध और कार्य संचालन से होता है। ये दशाएँ निम्नलिखित हैं

  • साधनों का उचित अनुपात में नियोजन उत्पादन के विभिन्न साधनों को अनुकूलतम अनुपात में लगाने पर उत्पादन की कुशलता में वृद्धि होर? है।
  • उत्पादन साधनों की कुशलता उत्पादन के साधन अधिक कुशल होने से उत्पादन अधिक मात्रा में व श्रेष्ठ होता है। यदि उत्पादन-कार्य में उच्च कोटि का कच्चा माल, नवीनतम मशीनें व योग्य श्रमिकों का प्रयोग किया जाता है, तो उत्पादन उच्च-स्तर का होता है।

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2. बाह्य तत्त्व बाह्य तत्त्वों का सम्बन्ध किसी एक उत्पादन संस्था से न होकर एक उद्योग या एक स्थान पर स्थापित सभी प्रकार की संस्थाओं से होता है। ये दशाएँ निम्नलिखित हैं

  • प्राकृतिक घटक किसी देश की उत्पादन कुशलता उसके प्राकृतिक तत्त्वों; जैसे-जलवायु, खनिज सम्पदा, भूमि का उपजाऊपन, आदि पर – निर्भर करती है।
  • तकनीकी ज्ञान व वैज्ञानिक शोध किसी राष्ट्र की उत्पादन कुशलता उस देश (UPBoardSolutions.com) के तकनीकी ज्ञान व वैज्ञानिक शोध पर निर्भर करती है।
  • यातायात की सुविधाएँ उत्पादन कुशलता यातायात के साधनों पर भी निर्भर करती है।
  • सरकारी नीति उत्पादन कुशलता पर सरकारी नीतियों का प्रभाव भी पड़ता है।

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UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 26 संगठन

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 26 संगठन are the part of UP Board Solutions for Class 10 Commerce. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 26 संगठन.

Board UP Board
Class Class 10
Subject Commerce
Chapter Chapter 26
Chapter Name संगठन
Number of Questions Solved 19
Category UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 26 संगठन

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
“उत्पादन के विभिन्न साधनों को एकत्र करना तथा उन्हें संगठित एवं नियन्त्रित करने को ही संगठन कहते हैं।” परिभाषा है।
(a) प्रो. हैने की
(b) प्रो. वाटसन की
(c) प्रो. मार्शल की।
(d) प्रो. चैपमैन की
उत्तर:
(b) प्रो. वाटसन की.

प्रश्न 2.
बड़े कारखानों में श्रमिकों का प्रत्यक्ष सम्पर्क होता है,
(a) उद्यमी से।
(b) संगठनकर्ता से
(c) पूँजीपति से
(d) इन सभी से।
उत्तर:
(b) संगठनकर्ता से

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प्रश्न 3.
संगठनकर्ता उद्योग का ” कहलाता है।
(a) सैनिक
(b) सेनापति
(c) श्रमिक :
(d) ये सभी
उत्तर:
(b) सेनापति

प्रश्न 4.
संगठनकर्ता के गुण हैं।
(a) साहसी
(b) चरित्रवान
(c) शिक्षित
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

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निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
संगठन उत्पादन का एक साधन है/साधन नहीं है।
उत्तर:
साधन है।

प्रश्न 2.
संगठन उत्पादन का एक गतिशील/अगतिशील उपादान है।
उत्तर:
गतिशील उपादान है।

प्रश्न 3.
संगठनकर्ता व्यवसाय का जोखिम उठाता है/नहीं उठाता है।
उत्तर:
नहीं उठाता है।

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प्रश्न 4.
तैयार माल की बिक्री का प्रबन्ध श्रमिक/संगठनकर्ता करता है।
उत्तर:
संगठनकर्ता करता है।

प्रश्न 5.
संगठनकर्ता का प्रतिफल ब्याज/वेतन होता है।
उत्तर:
वेतन होता है।

प्रश्न 6.
लघु स्तर के उद्योगों में संगठनकर्ता कम/अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।
उत्तर:
कम महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 7.
श्रमिकों के कार्य का निरीक्षण संगठनकर्ता द्वारा किया जाता है। (सत्य/असत्य) (2012, 10)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 8.
संगठनकर्ता का कार्य मुख्यतः मानसिक/शारीरिक होता है।
उत्तर:
मानसिक होता है।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
संगठन का अर्थ स्पष्ट कीजिए। (2012)
उत्तर:
संगठन उत्पादन का महत्त्वपूर्ण साधन है। संगठन का अभिप्राय उत्पादन के विभिन्न साधनों में अनुकूलतम संयोग स्थापित करके उन्हें उत्पादन कार्य में संलग्न करने की कला और विज्ञान से है। दूसरे शब्दों में, संगठन वह विशिष्ट श्रम है, (UPBoardSolutions.com) जो उत्पादन के विभिन्न साधनों; जैसे-श्रम, पूँजी एवं भूमि को एकत्रित करके उनमें आदर्शतम समन्वय स्थापित करता है, उनके कार्यों का निरीक्षण करता है तथा आवश्यक परिवर्तन करता है। इसके अभाव में कुशलता का अभाव रहता है।

प्रश्न 2.
संगठन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
प्रो. वाटसन के अनुसार, “उत्पादन के विभिन्न साधनों को एकत्र करना तथा उन्हें संगठित एवं नियन्त्रित करने को ही संगठन कहते हैं।’ प्रो. होने के अनुसार, “संगठन उत्पादन का ऐसा साधन है, जो भूमि, श्रम और पूँजी को उचित मात्रा और अनुपात में एकत्रित करके उत्पादन कार्य करवाता है।”

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प्रश्न 3.
संगठन के कोई दो उद्देश्य बताइए। (2012)
उत्तर:
संगठन के दो उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. उत्पादन के विभिन्न साधनों; जैसे-भूमि, श्रम व पूँजी, आदि की व्यवस्था करना।
  2. देश में उपलब्ध विभिन्न साधनों का सर्वोत्तम उपयोग करना।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
संगठन से क्या आशय है? उत्पादन में इसका क्या महत्त्व है? वर्णन कीजिए। (2009)
अथवा
संगठन के महत्त्व की विवेचना कीजिए। (2007)
अथवा
उत्पादन के साधन के रूप में संगठन की भूमिका बताइए।
उत्तर:
संगठन से आशय संगठन उत्पादन का महत्त्वपूर्ण साधन है। संगठन का अभिप्राय उत्पादन के विभिन्न साधनों में अनुकूलतम संयोग स्थापित करके उन्हें उत्पादन कार्य में संलग्न करने की कला और विज्ञान से है। दूसरे शब्दों में, संगठन वह विशिष्ट श्रम है, जो उत्पादन के विभिन्न साधनों; जैसे-श्रम, पूँजी एवं भूमि को एकत्रित करके उनमें आदर्शतम समन्वय स्थापित करता है, उनके कार्यों का निरीक्षण करता है तथा आवश्यक परिवर्तन (UPBoardSolutions.com) करता है। इसके अभाव में कुशलता का अभाव रहता है। संगठन का महत्त्व संगठन बड़े पैमाने पर किए जाने वाले उद्योगों के लिए विशेष महत्त्व रखता है। कम लागत पर अधिकतम उत्पादन करने के लिए उत्पादन के विभिन्न साधनों को एक उचित अनुपात में मिलाकर उत्पादन कार्य किया जाता है, जिससे उत्पादन के साधनों में सहयोग व सामंजस्य बना रहे। यह सब कार्य संगठनकर्ता द्वारा ही किया जाता है।

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आधुनिक उत्पादन व्यवस्था में संगठन के अत्यधिक महत्त्व को ध्यान में रखकर ही टॉमस ने संगठनकर्ता को ‘उद्योग का सेनापति’ कहा है। संगठन के महत्त्व को प्रसिद्ध प्रबन्ध विशेषज्ञ पी. एफ. डुकर ने बड़े ही सुन्दर ढंग से व्यक्त किया है। उनके अनुसार, “प्रबन्धक प्रत्येक व्यवसाय का गतिशील एवं जीवनदायक तत्त्व होता है। उसके नेतृत्व के अभाव में उत्पादन के अन्य साधन केवल साधन ही रह
जाते हैं, कभी उत्पादक नहीं बन पाते।’

प्रश्न 2.
संगठनकर्ता की कार्यकुशलता पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संगठनकर्ता की कार्यकुशलता निम्नलिखित गुणों पर निर्भर करती है-

  1. संगठने योग्यता संगठनकर्ता में विभिन्न साधनों को एक आदर्श व उचित अनुपात में मिलाकर उनको परस्पर संगठित करने की योग्यता होनी चाहिए।
  2. व्यवसाय का विशिष्ट ज्ञान संगठनकर्ता को अपने व्यवसाय के बारे में विशेष ज्ञान होना चाहिए। इससे व्यवसाय में किसी प्रकार का धोखा होने की सम्भावना नहीं रहती है।
  3. उच्च शिक्षा प्रबन्धक को सभी विषयों; जैसे—अर्थशास्त्र, सांख्यिकी व वाणिज्य, आदि का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए।
  4. साहस और आत्मविश्वास संगठनकर्ता में साहस व आत्मविश्वास का गुण होना चाहिए, जिससे वह संकटों व अनिश्चितताओं का सामना सरलता से कर सके।
  5. चरित्रवान एक संगठनकर्ता में नैतिकता के सभी गुण होने चाहिए, जिससे वह (UPBoardSolutions.com) श्रमिकों में अपने प्रति विश्वास उत्पन्न कर सके।
  6. व्यवहारकुशलता संगठनकर्ता को सभी श्रमिकों व अधिकारियों के प्रति उचित व्यवहार करना चाहिए।
  7. दूरदर्शिता संगठनकर्ता में भविष्य में होने वाले गुणात्मक व संख्यात्मक परिवर्तनों का अनुमान लगाने की योग्यता होनी चाहिए।
  8. साख बनाए रखने की योग्यता आज का युग साख का युग है। बड़े पैमाने पर उत्पादन कार्य करने के लिए उधार लेन-देन की आवश्यकता होती है, इसलिए संगठनकर्ता में अपनी फर्म के प्रति साख बनाए रखने की योग्यता का होना अत्यन्त आवश्यक है।
  9. श्रम-विभाजन व श्रम संगठन की योग्यता श्रमिकों को उनके कार्य के अनुसार नियुक्ति प्रदान करके उनसे अधिकतम कार्य करवाना भी संगठनकर्ता का ही कार्य होता है।

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प्रश्न 3.
संगठनकर्ता की कार्यक्षमता किन-किन तत्त्वों से प्रभावित होती है? (2007)
उत्तर:
संगठनकर्ता की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले घटक/तत्त्व एक संगठनकर्ता की कार्यक्षमता को निम्नलिखित दो घटक/तत्त्व प्रभावित करते हैं या एक संगठनकर्ता में निम्न गुणों का होना आवश्यक है

  1. संगठनकर्ता की व्यक्तिगत (निजी) कुशलता एक संगठनकर्ता के उपरोक्त वर्णित व्यक्तिगत गुण उसकी कार्यक्षमता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। यदि किसी संगठनकर्ता द्वारा उत्पादन के साधनों का प्रबन्ध ठीक प्रकार से नहीं किया जाता है, तो कम लागत पर अधिक उत्पादन सम्भव नहीं है।
  2. उत्पादन के अन्य साधनों (उपादानों) की कुशलता एक संगठनकर्ता की कार्यकशलता (UPBoardSolutions.com) उसके व्यक्तिगत गुणों के अतिरिक्त उत्पादन के अन्य साधनों पर भी निर्भर करती है, क्योकि यदि भूमि, श्रम व पूँजी अपर्याप्त या अकुशल होंगे, तो एक संगठनकर्ता योग्य होने के बाद भी कम लागत पर अधिक उत्पादन नहीं कर पाएगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1. संगठनकर्ता या प्रबन्धक के कार्यों एवं आवश्यक गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संगठनकर्ता या प्रबन्धक के कार्य संगठनकर्ता या प्रबन्धक के कार्य निम्नलिखित हैं-

  1. नई तकनीक का प्रयोग उत्पादन की नई तकनीक को खोजकर उसे प्रयोग में लाना संगठनकर्ता का ही कार्य होता है, जिससे उत्पादन की कुशलता में निरन्तर वृद्धि होती रहती है।
  2. मूल्य नीति का निर्धारण संगठनकर्ता माँग व पूर्ति के अनुसार तैयार माल का मूल्य निर्धारण करते हैं।
  3. उत्पादन की योजना तैयार करना संगठनकर्ता द्वारा ही यह निर्णय लिया जाता है कि किस प्रकार के उत्पादन से लाभ होगा व उत्पादन कितनी मात्रा में करना है। इस प्रकार के निर्णय संगठनकर्ता अपनी कुशलता एवं देश-विदेश की परिस्थितियों के आधार पर करता है।
  4. बिक्री की व्यवस्था करना संगठनकर्ता माल की बिक्री के लिए विज्ञापन, नए बाजार की खोज, आदि तकनीकें अपनाता है। उत्पादित माल की बिक्री की व्यवस्था करना भी संगठनकर्ता का ही दायित्व है। माल को मण्डियों तक भेजने हेतु सस्ते व शीघ्रगामी यातायात के साधनों की व्यवस्था करना भी संगठनकर्ता का ही कार्य होता है।
  5. कच्चे माल, यन्त्र व औजारों का प्रबन्ध करना संगठनकर्ता ही उत्पादन (UPBoardSolutions.com) के लिए कच्चे माल, यन्त्र, औजारों, आदि की व्यवस्था करता है। मशीनों को क्रय करते समय लागत, मॉडल व चलाने में श्रमिकों की योग्यता का ध्यान रखना भी संगठनकर्ता का ही कार्य होता है।
  6. श्रमिकों को उनकी योग्यतानुसार कार्य सौंपना संगठनकर्ता श्रमिकों को उनकी रुचि व योग्यता के अनुसार ही कार्य सौंपता है।
  7. निरीक्षण कार्य संगठनकर्ता उद्योग के सभी कार्यों का समय-समय पर निरीक्षण करता है। इससे अव्यवस्था व अनुशासनहीनता पर उचित रूप से नियन्त्रण किया जा सकता
  8. श्रमिकों को संगठित करने की योग्यता संगठनकर्ता ही श्रमिकों की योग्यता के अनुसार कार्य विभाजित करके उन्हें संगठित करता है।

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संगठनकर्ता या प्रबन्धक के गुण
संगठनकर्ता की कार्यकुशलता निम्नलिखित गुणों पर निर्भर करती है-

  1. संगठने योग्यता संगठनकर्ता में विभिन्न साधनों को एक आदर्श व उचित अनुपात में मिलाकर उनको परस्पर संगठित करने की योग्यता होनी चाहिए।
  2. व्यवसाय का विशिष्ट ज्ञान संगठनकर्ता को अपने व्यवसाय के बारे में विशेष ज्ञान होना चाहिए। इससे व्यवसाय में किसी प्रकार का धोखा होने की सम्भावना नहीं रहती है।
  3. उच्च शिक्षा प्रबन्धक को सभी विषयों; जैसे—अर्थशास्त्र, सांख्यिकी व वाणिज्य, आदि का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए।
  4. साहस और आत्मविश्वास संगठनकर्ता में साहस व आत्मविश्वास का गुण होना चाहिए, जिससे वह संकटों व अनिश्चितताओं का सामना सरलता से कर सके।
  5. चरित्रवान एक संगठनकर्ता में नैतिकता के सभी गुण होने चाहिए, जिससे वह श्रमिकों में अपने प्रति विश्वास उत्पन्न कर सके।
  6. व्यवहारकुशलता संगठनकर्ता को सभी श्रमिकों व अधिकारियों के प्रति उचित व्यवहार करना चाहिए।
  7. दूरदर्शिता संगठनकर्ता में भविष्य में होने वाले गुणात्मक व संख्यात्मक (UPBoardSolutions.com) परिवर्तनों का अनुमान लगाने की योग्यता होनी चाहिए।
  8. साख बनाए रखने की योग्यता आज का युग साख का युग है। बड़े पैमाने पर उत्पादन कार्य करने के लिए उधार लेन-देन की आवश्यकता होती है, इसलिए संगठनकर्ता में अपनी फर्म के प्रति साख बनाए रखने की योग्यता का होना अत्यन्त आवश्यक है।
  9. श्रम-विभाजन व श्रम संगठन की योग्यता श्रमिकों को उनके कार्य के अनुसार नियुक्ति प्रदान करके उनसे अधिकतम कार्य करवाना भी संगठनकर्ता का ही कार्य होता है।

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