UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 6 Secondary Activities

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 6 Secondary Activities (द्वितीयक क्रियाएँ)

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(i) निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है
(क) हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण स्थापित हुए
(ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छन्द उद्योग हैं
(ग) खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है
(घ) पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।
उत्तर:
(ग) खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है।

(ii) निम्न में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है
(क) पूँजीवाद
(ख) मिश्रित
(ग) समाजवाद
(घ) कोई भी नहीं।
उत्तर:
(क) पूँजीवाद।

(iii) निम्न में से कौन-सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करता है
(क) कुटीर उद्योग
(ख) छोटे पैमाने के उद्योग
(ग) आधारभूत उद्योग
(घ) स्वच्छन्द उद्योग।
उत्तर:
(ग) आधारभूत उद्योग।

(iv) निम्न में से कौन-सा एक जोड़ा सही मेल खाता है
(क) स्वचालित वाहन उद्योग – लॉस एंजिल्स
(ख) पोत निर्माण उद्योग – लूसाका
(ग) वायुयान निर्माण उद्योग – फ्लोरेंस
(घ) लौह-इस्पात उद्योग – पिट्सबर्ग
उत्तर:
(घ) लौह-इस्पात उद्योग – पिट्सबर्ग।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित पर लगभग 30 शब्दों में टिप्पणी लिखिए-:
(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग
उत्तर:
उच्च तकनीक विनिर्माण में सबसे नवीन विधि है। गहन खोज और विकास के द्वारा अग्रिम वैज्ञानिक इंजीनियरिंग को समझा जाता है। व्यावसायिक (सफेद कालर) कामगार कुल कार्यशक्ति का एक बड़ा भाग है। ये उच्च विशेषज्ञ वास्तविक उत्पादक हैं। रोबोटिक, कम्प्यूटर जीवन आकृति और विनिर्माण शोधन प्रक्रिया का इलेक्ट्रॉनिक्स नियन्त्रणमय रासायनिक और फार्मास्युटिकल उत्पाद उच्च तकनीक उद्योग के उदाहरण हैं।

(ii) विनिर्माण
उत्तर:
वे क्रियाएँ जिनमें प्राथमिक व्यवसाय जैसे कृषि, पशुपालन, खनन आदि के उत्पादों को तकनीकों का प्रयोग करके संसाधित किया जाता है और अधिक उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है। ऐसी प्रक्रियाएँ विनिर्माण उद्योग कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, कपास को कच्चे माल के रूप में सूती वस्त्र उद्योग में प्रयोग करके वस्त्र उत्पादन किया जाता है।

(iii) स्वच्छन्द उद्योग
उत्तर:
स्वच्छन्द उद्योग व्यापक विविधता वाले स्थानों पर लगाए जा सकते हैं। वे किसी विशेष प्रकार के कच्चे माल पर निर्भर नहीं होते जिनके भार का ह्रास होता हो अथवा नहीं। ये उद्योग अधिकतर संघटक पुों पर निर्भर करते हैं जिन्हें कहीं से भी प्राप्त किया जा सकता है। इनमें उत्पादन की मात्रा व श्रमिक कम होते हैं। आमतौर पर ये उद्योग प्रदूषण नहीं फैलाते। इनकी अवस्थिति में सबसे महत्त्वपूर्ण कारक सड़क मार्गों द्वारा ‘पहुँच’ है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों का 150 शब्दों में उत्तर दीजिए :
(i) प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में क्या अन्तर है?
उत्तर:
प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में अन्तर
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(ii) विश्व के विकसित देशों के उद्योगों के सन्दर्भ में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विकसित औद्योगिक देशों में आधुनिक औद्योगिक क्रियाकलापों में परिवर्तनशील प्रवृत्तियाँ देखी गई हैं। ये परिवर्तनशील प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं

  • उद्योगों की अवस्थिति के लिए उत्तरदायी कारकों के महत्त्व में निरन्तर कमी आती जा रही है।
  • विकसित अर्थव्यवस्था में विकास तथा वैज्ञानिक तकनीक की उन्नति के परिणामस्वरूप उद्योगों की संरचना एवं स्वरूप में परिवर्तन आया है। निरौद्योगीकरण की प्रवृत्तियाँ उत्पन्न हो रही हैं।
  • आधुनिक औद्योगिक क्रियाकलापों में भी कई प्रकार के परिवर्तन हुए हैं। उद्योगों के उत्पादन के लिए उच्च तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
  • कारखानों के स्थान पर छोटी इकाइयों का बिखराव बहुत बड़े क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
  • अवशिष्ट पदार्थों में कमी की वजह से पुन:चक्रण प्रतिस्थापन तथा विकल्पों का योगदान अधिक है।
  • श्रम गहन उद्योग विकासशील देशों में विकसित हो रहे हैं।
  • बड़े-बड़े कारखानों का स्थान छोटे कारखाने ले रहे हैं।
  • डिजाइन तथा उत्पादन में बहुत ही तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं।

(iii) अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
उच्च प्रौद्योगिक उद्योग औद्योगिक क्षेत्र अथवा प्रौद्योगिक पार्कों के रूप में महानगरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लन्दन, पेरिस, मिलान, टोकियो आदि इसके उदाहरण हैं।
महानगरों के परिधीय क्षेत्र में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के विकसित होने के निम्नलिखित कारण हैं

  • महानगरों के मध्यवर्ती क्षेत्रों की तुलना में परिधि क्षेत्रों में भूमि सस्ती और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है।
  • यह क्षेत्र मानवीय आवास से दूर होता है, इस कारण मानवीय आवास औद्योगिक प्रदूषण से अधिक प्रभावित नहीं होते।
  • महानगरों के परिधीय भागों में यातायात साधनों का पर्याप्त विकास पाया जाता है। यहाँ सड़क मार्ग एवं रेलों का सघन जाल पाया जाता है और यातायात बाधित नहीं होता।
  • उत्पाद की खपत के लिए बाजार महानगरों के समीप ही उपलब्ध हो जाते हैं।
  • इस भाग में खुला क्षेत्र अधिक होने के कारण पर्यावरण साफ व स्वच्छ रहता है।
  • समीपवर्ती आवासीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों से श्रम की आपूर्ति आसानी से हो जाती है जो सस्ता भी होता है।
  • सरकार की औद्योगिक नीति के कारण ही यह उद्योग मानवीय आवासों से दूर महानगर की परिधि क्षेत्र में स्थापित किए जाते हैं।

(iv) अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन हैं फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह बहुत पिछड़ा . महाद्वीप है। समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
यह सत्य है कि अफ्रीका प्राकृतिक संसाधन में धनी है लेकिन औद्योगिक दृष्टि से वह पिछडा महाद्वीप है, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. विषम जलवायु – अफ्रीका महाद्वीप के अधिकांश भाग में विषम जलवायु पायी जाती है। सहारा मरुस्थलीय जलवायु में आने वाले देश अधिक तापमान व गर्म पवनों के कारण पिछड़े हुए हैं। इसी तरह जिन भागों में भूमध्यरेखीय जलवायु पायी जाती है उन क्षेत्रों में विषम परिस्थितियों के कारण उद्योग विकसित नहीं हो पाए।

2. उच्च प्रौद्योगिकी की अनुपलब्धता – उच्च प्रौद्योगिकी की अनुपलब्धता के कारण भी अफ्रीका के देशों में उद्योग विकसित नहीं हो पाए।

3. परिवहन साधनों का अभाव – अफ्रीका महाद्वीप के देशों में विषम जलवायु; उच्चावच आदि के कारण परिवहन साधनों का विकास नहीं हो पाया है।

4. कुशल (प्रशिक्षित) श्रम का अभाव – अफ्रीका महाद्वीप के जिन देशों में खनिज पदार्थों की उपलब्धता है उन क्षेत्रों में कुशल श्रम के अभाव के कारण वे देश औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं।

5. पूँजी का अभाव – अफ्रीका महाद्वीप में पूँजी का पर्याप्त अभाव है जिसके कारण यहाँ औद्योगिक विकास नहीं हो पाया है।

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 6 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए। अथवा विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत विनिर्माण उद्योगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विनिर्माण उद्योग-वे क्रियाएँ जिनमें प्राथमिक क्रियाएँ जैसे कृषि, पशुपालन, खनन आदि के उत्पादों को तकनीक का प्रयोग करके संशोधित किया जाता है और उन्हें अधिक उपयोगी वस्तुओं में बदला . जाता है। ऐसी प्रक्रियाएँ विनिर्माण उद्योग कहलाती हैं।
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विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण
विनिर्माण उद्योगों के वर्गीकरण के आधार हैं-आकार, कच्चा माल, उत्पाद एवं स्वामित्व।

  1. आकार पर आधारित उद्योग – किसी उद्योग के आकार का निश्चय उसमें लगाई गई पूँजी की मात्रा, कार्यरत श्रमिकों की संख्या तथा उत्पादन की मात्रा के आधार पर किया जाता है। इस आधार पर उद्योग तीन प्रकार के होते हैं
    • कुटीर उद्योग
    • छोटे पैमाने के उद्योग
    •  बड़े पैमाने के उद्योग।
  2. कच्चे माल पर आधारित उद्योग – कच्चे माल पर आधारित उद्योगों के वर्गीकरण के आधार निम्नलिखित हैं- ..
    • कृषि आधारित उद्योग
    • खनिज आधारित उद्योग
    • रसायन आधारित उद्योग
    • वन आधारित उद्योग
    • पशु आधारित उद्योग।
  3. उत्पाद आधारित उद्योग – ऐसे उत्पाद जो अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करते हैं, उत्पाद आधारित उद्योग कहलाते हैं। उत्पाद आधारित उद्योगों के दो प्रकार निम्नलिखित हैं
    • आधारभूत उद्योग (मूलभूत उद्योग) – जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग।
    • उपभोक्ता वस्तु उद्योग-जैसे – ब्रेड, बिस्कुट, चाय, साबुन आदि उद्योग।
  4. स्वामित्व के आधार पर उद्योग – स्वामित्व / अधिकार के आधार पर उद्योग के तीन प्रकार निम्न हैं
    • सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग-ये उद्योग सरकार के अधीन होते हैं।
    • निजी क्षेत्र के उद्योग-ये उद्योग व्यक्ति विशेष के अधीन होते हैं।
    • संयुक्त क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का संचालन संयुक्त कम्पनी के द्वारा अथवा किसी निजी एवं . सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी के संयुक्त प्रयासों से होता है।

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प्रश्न 2.
आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण
आकार के आधार पर उद्योगों के वर्गीकरण के आधार हैं-निवेशित पूँजी, कार्यरत श्रमिकों की संख्या एवं उत्पादन की मात्रा।
आकार के आधार पर उद्योगों के तीन प्रकार निम्नलिखित हैं
1. कुटीर उद्योग – यह विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई है। इसे ‘शिल्प उद्योग’ भी कहा जाता है। इसमें दस्तकार अपनी पैतृक दक्षता के आधार पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग करते हुए सरल विधियों से अपने घर पर ही छोटी-छोटी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। तैयार माल का या तो वह स्वयं उपभोग करता है अथवा उसे स्थानीय बाजार में बेच देता है। कभी-कभी वह वस्तु-विनिमय भी करता है। ये उद्योग पूँजी व परिवहन से प्रभावित नहीं होते हैं। इन उद्योगों में दैनिक जीवन में काम आने वाली वस्तुओं जैसे खाद्य पदार्थ, कपड़ा, बर्तन, औजार, फर्नीचर, जूते एवं लघु मूर्तियाँ आदि बनाई जाती हैं।

2. छोटे पैमाने के उद्योग (लघु उद्योग) – यह उद्योग कुटीर उद्योग का विस्तृत एवं संशोधित रूप है। इसमें स्थानीय कच्चे माल का उपयोग किया जाता है। इस उद्योग में अर्द्धकुशल श्रमिक व शक्तिचालित यन्त्रों का प्रयोग किया जाता है। रोजगार के अवसर इस उद्योग में अधिक होते हैं।

3. बड़े पैमाने के उद्योग – बड़े पैमाने के उद्योग की विशेषताएँ हैं—विशाल बाजार, विभिन्न प्रकार का कच्चा माल, शक्ति साधन, कुशल श्रमिक, विकसित प्रौद्योगिकी, अधिक उत्पादन एवं अधिक पूँजी। वर्तमान में इन उद्योगों का विस्तार विश्व के सभी क्षेत्रों में है।
बड़े पैमाने पर हुए विनिर्माण की प्रणाली के आधार पर विश्व के प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों को दो बड़े समूहों में विभक्त किया जा सकता है

  • बड़े पैमाने के परम्परागत औद्योगिक प्रदेश, एवं
  • उच्च प्रौद्योगिकी वाले बड़े पैमाने के औद्योगिक प्रदेश।

प्रश्न 3.
विश्व में सूती वस्त्र उद्योग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सूती वस्त्र उद्योग सूती वस्त्र उद्योग संसार के प्राचीनतम उद्योगों में से एक हैं। भारत में हड़प्पा संस्कृति और मिस्त्र में वस्त्र निर्माण के प्रमाण मिले हैं। यह उद्योग कृषि आधारित है। इस उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इस उद्योग की प्रमुख क्रियाएँ हैं
(1) कताई, (2) बुनाई एवं (3) वस्त्र निर्माण।
सूती वस्त्र उद्योग की अवस्थिति के कारक
(1) जलवायु, (2) कच्चे माल की उपलब्धता, (3) स्वच्छ जल की आपूर्ति, (4) कुशल कारीगर, (5) सस्ती जलविद्युत, (6) बाजार की समीपता आदि।
सूती वस्त्र निर्माण के सेक्टर – इस उद्योग में सूती वस्त्रों का निर्माण तीन सेक्टरों में किया जाता है
1. हथकरघा सेक्टर – यह श्रम सघन क्षेत्र है जिसमें अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है। यह सेक्टर अर्द्धकुशल श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। इस सेक्टर में पूँजी निवेश भी कम होता है। इसमें सूत की कताई, बुनाई आदि का काम किया जाता है।

2. बिजली करघा सेक्टर – बिजली करघों से कपड़ा बनाने में मशीनों का प्रयोग किया जाता है। परिणामस्वरूप इसमें श्रमिकों की कम आवश्यकता होती है। इस सेक्टर का उत्पादन हथकरघा सेक्टर की अपेक्षा अधिक होता है।

3. मिल सेक्टर – मिलों में कपड़ा बनाने के लिए अधिक पूँजी का निवेश किया जाता है, परन्तु उसमें कपड़ा अच्छा बनता है और अधिक मात्रा में बनता है।
सूती वस्त्र उद्योग का वितरण – सूती वस्त्र बनाने वाले प्रमुख देश भारत, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान एवं मिस्र हैं। विश्व की 50 प्रतिशत से अधिक कपास का उत्पादन यही देश करते हैं। ग्रेट-ब्रिटेन, उत्तर-पश्चिमी यूरोप के देश एवं जापान आयातित धागे से सूती कपड़े का उत्पादन करते हैं। अकेला यूरोप विश्व की लगभग आधी कपास का आयात करता है।

प्रतिस्पर्धा और संकट – वर्तमान में सूती वस्त्र उद्योग को संश्लेषित रेशे से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। . परिणामस्वरूप अनेक देशों में यह उद्योग नकारात्मक प्रवृत्ति दिखा रहा है।

अर्थव्यवस्था में विकास तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी उन्नति के फलस्वरूप उद्योगों की संरचना और स्वरूप में बदलाव लाया जा सकता है। उदाहरणत: दूसरे विश्वयुद्ध से लेकर सन् 1980 तक वस्त्र निर्माण में जर्मनी ने खूब तरक्की की, लेकिन बाद में यह उद्योग कम श्रम लागत के कारण जब अल्पविकसित देशों में स्थानान्तरित हो गया तो जर्मनी में वस्त्र उद्योग का ह्रास हो गया।
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प्रश्न 4.
कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए। अथवा कच्चे माल पर आधारित उद्योगों के वर्गीकरण के आधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का वर्गीकरण
कच्चे माल पर आधारित उद्योगों के वर्गीकरण के पाँच आधार निम्नलिखित हैं
1. कृषि आधारित उद्योग – ये वे उद्योग हैं जो कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं तथा इन्हें विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा तैयार माल में बदलकर बिक्री हेतु ग्रामीण और नगरीय बाजारों में भेजते हैं। प्रमुख कृषि आधारित उद्योग हैं— भोजन प्रसंस्करण, शक्कर, अचार, फलों के रस, पेय पदार्थ (चाय, कॉफी, कोको), मसाले, तेल एवं वस्त्र एवं रबड़ उद्योग आदि।

2. खनिज आधारित उद्योग – खनिज आधारित उद्योगों में खनिजों का कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। ये उद्योग दो प्रकार के होते हैं

  • लौह-धातु उद्योग – ये उद्योग ऐसी धातुओं पर आधारित होते हैं जिनमें लौहांश की मात्रा होती है। लौह-इस्पात उद्योग, मशीन व औजार उद्योग, तेल इंजन, मोटरकार तथा कृषि औजार उद्योग इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
  • अलौह-धातु उद्योग – ये उद्योग ऐसी धातुओं पर आधारित होते हैं जिनमें लौहांश नहीं होता; जैसेताँबा, ऐलुमिनियम एवं जवाहरातों पर आधारित उद्योग।

3. रसायन आधारित उद्योग – रसायन आधारित उद्योगों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक खनिजों का उपयोग होता है, जैसे- पेट्रो रसायन उद्योग में खनिज तेल का उपयोग होता है। नमक, गन्धक एवं पोटाश उद्योगों में भी प्राकृतिक खनिजों को काम में लेते हैं।

4. वन आधारित उद्योग – वन आधारित उद्योगों में वनों से प्राप्त मुख्य एवं गौण उपजों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं। उदाहरणतः फर्नीचर उद्योग के लिए लकड़ी, कागज उद्योग के लिए लकड़ी, बाँस एवं घास तथा लाख उद्योग के लिए लाख वनों से ही प्राप्त होती है। .

5. पशु आधारित उद्योग – चमड़ा उद्योग के लिए चमड़ा एवं ऊनी वस्त्र उद्योग के लिए ऊन पशुओं से प्राप्त होती है। चमड़ा उद्योग, ऊनी वस्त्र उद्योग, हाथीदाँत उद्योग आदि पशु आधारित उद्योग हैं।

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प्रश्न 5.
उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों की विशेषताएँ
उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • उद्योगों की अवस्थिति के आधुनिक कारकों का अलग-अलग प्रभाव नहीं होता।
  • ये कारक उद्योगों की अवस्थिति को सामूहिक रूप से प्रभावित करते हैं।
  • इन कारकों का आपस में जटिल सम्बन्ध होता है।
  • इन कारकों का सापेक्षिक महत्त्व कभी स्थायी नहीं होता बल्कि वह समय, स्थान, उद्योगों के प्रकार व अर्थव्यवस्था के अनुसार बदलता रहता है।
  • किसी निश्चित समय पर उद्योगों की स्थापना के सभी कारक अनुकूल हों, आवश्यक नहीं।
  • हर जगह कुछ कारक अनुकूल होते हैं व कुछ प्रतिकूला उद्योगों के लिए अच्छे स्थान वे माने जाते हैं जहाँ अनुकूल कारक अधिक प्रभावशाली हों व प्रतिकूल कारक कम प्रभावशाली हो ।
  • उद्योगों की अनुकूलतम (Optimum) अवस्थिति वह होती है जहाँ सभी अनुकूल कारकों में सन्तुलन बैठ रहा हो। वैसे अनुकूलतम अवस्थिति एक सापेक्षिक (Relative) शब्द है।

प्रश्न 6.
आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषताएँ
आधुनिक युग में बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. कौशल अथवा उत्पादन की विधियों का विशिष्टीकरण – शिल्प पद्धति में केवल थोड़ी वस्तुओं का ही उत्पादन किया जाता है जिनका पहले से ऑर्डर प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप वस्तुओं की उत्पादन लागत अधिक आती है। बड़े पैमाने पर होने वाले उत्पादन में प्रत्येक कर्मचारी बड़ी संख्या में एक जैसे सामान (वस्तु). को बार-बार बनाता रहता है। इससे वस्तु की लागत भी कम आती है और वस्तुओं का मानक भी समान रहता है।

2. मशीनीकरण – मशीनीकरण से अभिप्राय ऐसी युक्तियों के उपयोग से है जिनसे कार्य सम्पन्न होता है। विनिर्माण में स्वचालित मशीनों का उपयोग मशीनीकरण की विकसित अवस्था को प्रदर्शित करता है। वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व में ऐसे स्वचालित कारखाने दिखने लगे हैं जो कि कम्प्यूटर द्वारा नियन्त्रित हैं और जिनमें मशीनों को ‘सोचने’ के लिए विकसित किया गया है।

3. प्रौद्योगिक नवाचार – बड़े पैमाने के आधुनिक विनिर्माण की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वे सतत शोध एवं विकास के बल पर ऐसे प्रौद्योगिक नवाचार का उपयोग करते हैं जिनसे गुणवत्ता का नियन्त्रण, अपशिष्टों का निस्तारण, अदक्षता की समाप्ति और प्रदूषण में कमी प्रभावी ढंग से हो सकती है।

4.संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण – आधुनिक विनिर्माण उद्योग एक संगठन की तरह कार्य करता है जिसमें सभी विभाग अपना-अपना दायित्व निभाते हैं। इस वृहद् प्रणाली के प्रमुख लक्षण हैं

  • एक जटिल प्रौद्योगिकी यन्त्र
  • अत्यधिक विशिष्टीकरण व श्रम विभाजन के द्वारा कम लागत पर उत्पादन
  • अधिक पूँजी
  • बड़े संगठन एवं
  • प्रशासकीय अधिकारी वर्ग।

5. अनियमित भौगोलिक वितरण – आधुनिक विनिर्माण के प्रमुख संकेन्द्रण विश्व में बहुत ही थोड़े स्थानों पर विकसित हो पाए हैं। विनिर्माण उद्योगों से सम्पन्न देश आर्थिक एवं राजनीतिक शक्ति के केन्द्र बन गए हैं।

प्रश्न 7.
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उद्योग हर जगह पर विकसित नहीं हो पाते। उनकी स्थापना ऐसे स्थानों पर की जाती है जहाँ उत्पाद के निर्माण और विक्रय पर लागत कम-से-कम आए और अधिक-से-अधिक लाभ हो। ऐसी अवस्थिति का चयन काफी सोच-विचार के उपरान्त किया जाता है। किसी भी उद्योग की अवस्थिति अनेक प्रकार के कारकों द्वारा नियन्त्रित होती है।
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
1. बाजार – उद्योगों की स्थापना में सबसे महत्त्वपूर्ण कारक उसके द्वारा उत्पादित माल के लिए उपलब्ध बाजार का होना है। बाजार से अभिप्राय उस क्षेत्र से होता है जहाँ तैयार माल की माँग हो और वहाँ के निवासियों में उन वस्तुओं को खरीदने की क्षमता भी हो।

2. कच्चे माल की प्राप्ति – उद्योग के लिए कच्चा माल अपेक्षाकृत सस्ता एवं आसानी से परिवहन योग्य होना चाहिए। कच्चे माल के स्रोत के समीप स्थित होने वाले उद्योग हैं

  • ह्रासमान भार वाले कच्चे माल का प्रयोग करने वाले उद्योग, जैसे-चीनी उद्योग।
  • भारी कच्चा माल प्रयोग करने वाले उद्योग, जैसे-लौह-इस्पात उद्योग।
  • कच्चे माल का भार कम होने वाले उद्योग, जैसे-ताँबा उद्योग।
  • शीघ्र नष्ट होने वाले कच्चे माल पर आधारित उद्योग, जैसे-दुग्ध पदार्थ, डिब्बाबन्द फल आदि।

3. शक्ति के साधन – वे उद्योग जिन्हें अधिक शक्ति की आवश्यकता है, शक्ति स्रोतों के समीप ही लगाए जाते हैं, जैसे-ऐलुमिनियम उद्योग।

4.श्रम आपूर्ति – कम्प्यूटरों के बढ़ते उपयोग, यन्त्रीकरण, स्वचालन एवं औद्योगिक प्रक्रिया के लचीलेपन के कारण उद्योगों की श्रमिकों पर निर्भरता थोड़ी कम हुई है। फिर भी औद्योगिक विकास के लिए उचित वेतन पर सही श्रमिकों का महत्त्व आज भी बना हुआ है।

5. परिवहन एवं संचार की सुविधा – कच्चे माल को कारखाने तक लाने के लिए और उत्पादित माल को खपत केन्द्रों तक पहुँचाने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन सुविधाएँ उद्योगों की अवस्थिति के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कारक हैं। उद्योगों के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं प्रबन्धन के लिए संचार की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता होती है।

6. सरकारी नीति – सरकारी नीति में उद्योगों के अवस्थितिकरण को प्रभावित करने वाली महत्त्वपूर्ण कारक है।
उपर्युक्त सभी कारक सम्मिलित रूप से किसी उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित व नियन्त्रित करते हैं।

प्रश्न 8.
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की विशेषताएँ
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(1) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों के उन्नत, वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पाद अत्यन्त परिष्कृत होते हैं जिनका निर्माण गहन वैज्ञानिक शोध एवं विकास पर आधारित होता है।

(2) इन उद्योगों में उच्च कुशलता वाले दक्ष एवं विशिष्ट व्यावसायिक श्रमिकों (सफेद कॉलर) को नौकरी पर रखा जाता है। इनकी संख्या वास्तविक उत्पादन करने वाले श्रमिकों (नीला कॉलर) से अधिक होती है।

(3) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों के कुछ प्रमुख उत्पाद-रोबोट (यन्त्र मानव), कम्प्यूटर आधारित डिजाइन (CAD) तथा निर्माण, धातु पिघलाने एवं शोधन करने के इलैक्ट्रॉनिक नियन्त्रण और रसायन व औषधियाँ होते हैं।

(4) इस नए औद्योगिक भू-दृश्य में धुआँ उगलती चिमनियों, बड़े-बड़े बदसूरत विशाल भवन, कारखाने, भण्डार और कूड़े के ढेर नहीं होते बल्कि उसके स्थान पर आधुनिक, साफ-सुथरे, स्मार्ट व डिजाइनर भवन, यत्र-तत्र स्थित कार्यालय तथा शोध एवं विकास की प्रयोगशालाएँ देखने को मिलती हैं।

(5) ये उद्योग बाजार की बदलती माँग के अनुसार अपने उत्पादों में तेजी से सुधार करते हैं। इसी कारण इसके उत्पाद अल्पजीवी होते हैं।

(6) इन उद्योगों में श्रम की गतिशीलता बहुत अधिक होती है, क्योंकि योग्यता और अनुभव अधिक आय उन्नत सुविधाओं व सामाजिक स्तर के प्रति संवेदनशील होते हैं।

(7) आज भी उपभोक्ता संस्कृति में एक बार तो इनके उत्पाद खूब बिकते हैं। उदाहरणत: कम्प्यूटरों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है।

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प्रश्न 9.
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की अवस्थिति के कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्रियाकलापों में नवीनतम पीढ़ी है। पिछले दो दशकों से उच्च प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं।
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की अवस्थिति के कारक
इन स्वच्छन्द उद्योगों पर पारम्परिक कारकों का कोई विशेष प्रभाव नहीं होता। इनके स्थानीयकरण (अवस्थिति) में कुछ नए कारकों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है
(1) ये हल्के उद्योग होते हैं जो अधिकतर कच्चे माल की जगह उत्पादन के लिए अर्द्धनिर्मित तथा संसाधित वस्तुओं का उपयोग करते हैं।

(2) वैज्ञानिक और तकनीकी दक्षता पर निर्भर रहने के कारण ये उद्योग प्रायः विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थाओं के समीप स्थापित किए जाते हैं।

(3) इन उद्योगों के लिए ऊर्जा की आपूर्ति बिजली द्वारा होती है जो मुख्यत: राष्ट्रीय ग्रिड से प्राप्त होती है।

(4) इन उद्योगों के लिए अनुकूल जलवायु वाले महानगरीय क्षेत्र अधिक अनुकूल साबित होते हैं। महानगरों की सामाजिक, सांस्कृतिक व वैज्ञानिक गतिविधियाँ इन उद्योगों को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देती हैं। .

(5) इन उद्योगों का अन्तिम उत्पाद छोटा किन्तु परिष्कृत होता है। अत: इन्हें सड़क मार्गों के निकट प्रदूषण रहित आवासीय क्षेत्रों से लगाया जा सकता है।

(6) ज्यादा-से-ज्यादा सफलता प्राप्त करने की अतृप्त भूख तथा प्रतिस्पर्धी कम्पनियों को पटकनी देकर सदा आगे रहने की मानसिकता के कारण नए उद्योगों के वैज्ञानिक, शोधार्थी प्रबन्धक, वित्त विशेषज्ञ तथा प्रशासक सदा तनावग्रस्त रहते हैं। उनके तनावरहित सन्तुलित व्यवहार को बनाए रखने के लिए कम्पनियों का पर्यावरण हरा-भरा, आकर्षक व सुखद होना आवश्यक है। अत: ऐसे उद्योग मनभावन जगहों पर विकसित होते हैं।

(7) परिवहन और संचार के अत्याधुनिक साधनों के बिना ये उद्योग जीवित ही नहीं रह सकते। उपभोक्ताओं, वित्तीय संस्थाओं, सरकारी विभागों, आपूर्तिदाताओं से तत्काल सम्पर्क बनाने तथा शोध के विभिन्न चरणों की सफलता के लिए उच्च कोटि के संचार व परिवहन के साधन आवश्यक हैं।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
द्वितीयक क्रियाकलाप से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
द्वितीयक क्रियाकलाप-प्रकृति में पाए जाने वाले कच्चे पदार्थों यथा-गेहूँ, चावल, कपास, लकड़ी, धातुएँ आदि में से बहुत कम का ही प्रत्यक्ष रूप से उपभोग किया जा सकता है। अत: आवश्यक है कि कच्चे माल का हाथ अथवा मशीनों की सहायता से रूप बदला जाए और उन्हें पहले से अधिक उपयोगी बनाया जाए। उदाहरणत: कपास को सूत में परिवर्तित करने पर उसका मूल्य बढ़ जाता है, क्योंकि इसका उपयोग वस्त्र बनाने में किया जा सकता है। स्पष्ट है कि जब प्राथमिक उत्पादों का प्रसंस्करण करके नई, उपयोगी और मूल्यवान वस्तुओं की रचना की जाती है तो इन्हें ‘द्वितीयक क्रियाकलाप’ कहते हैं। इस तरह द्वितीयक क्रियाकलापों का सम्बन्ध तीन चीजों से होता है- .

  • विनिर्माण
  • प्रसंस्करण, एवं
  • निर्माण।

प्रश्न 2.
विनिर्माण के अर्थ को समझाइए।
उत्तर:
विनिर्माण का अर्थ-विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है-‘हाथ से बनाना’, लेकिन अब इसमें मशीनों से बनी वस्तुओं को भी शामिल किया जाने लगा है। मूल रूप से विनिर्माण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कच्चे अथवा अर्द्धनिर्मित माल को ऐसे ऊँचे मूल्य के तैयार उपयोगी माल में बदल दिया जाता है जिसे स्थानीय अथवा दूर स्थित बाजार में बेचा जा सकता है। विनिर्माण का अभिप्राय किसी भी वस्तु के उत्पादन से है। इसमें हस्तशिल्प कार्य से लेकर लोहे व इस्पात को गढ़ना, प्लास्टिक के खिलौने बनाने से लेकर कम्प्यूटर के अति सूक्ष्म घटकों को जोड़ना और अन्तरिक्षयान निर्माण आदि सभी प्रकार का उत्पादन शामिल होता है।

प्रश्न 3.
स्वच्छन्द उद्योग की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
स्वच्छन्द उद्योग की विशेषताएँ स्वच्छन्द उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • स्वच्छन्द उद्योग हल्के उद्योग होते हैं।
  • ये उद्योग कच्चे माल के स्थान पर पुों का उपयोग करते हैं।
  • शक्ति के साधनों द्वारा प्रायः राष्ट्रीय ग्रिड से प्राप्त बिजली का उपयोग करते हैं।
  • इस उद्योग के उत्पाद छोटे तथा आसानी से परिवहन के योग्य होते हैं।
  • इन उद्योगों में कम लोग कार्य करते हैं।
  • ये उद्योग स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त होते हैं।
  • ये उद्योग संसाधन और बाजार उन्मुख नहीं होते।

प्रश्न 4.
कुटीर उद्योग की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
कुटीर उद्योग की विशेषताएँ कुटीर उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • कुटीर उद्योग विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई है।
  • इस उद्योग में दस्तकार/कलाकार अपनी पैतृक दक्षता के आधार पर घर में ही छोटी-छोटी वस्तुओं का निर्माण करते हैं।
  • इस उद्योग में दस्तकार परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग करते हुए वस्तुओं का निर्माण करते हैं।
  • इन उद्योगों का व्यापारिक महत्त्व बहुत ही कम है।
  • इन उद्योगों में खाद्य पदार्थ, बर्तन, आभूषण, दरियाँ, चटाइयाँ, थैले, टोकरियाँ इत्यादि बनाने का काम होता है।

प्रश्न 5.
लघु उद्योग की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
लघु उद्योग की विशेषताएँ लघु उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • लघु उद्योगों को उत्पादन की तकनीक एवं निर्माण स्थल (घर से बाहर कारखाना) दोनों के आधार पर कुटीर उद्योगों से अलग किया जाता है।
  • इस उद्योग में स्थानीय कच्चे माल का उपयोग होता है।
  • इस उद्योग में अर्द्धकुशल श्रमिक व शक्ति के साधनों से चलने वाले यन्त्रों का प्रयोग किया जाता है।
  • रोजगार के अवसर इस उद्योग में अधिक होते हैं।
  • इस उद्योग से स्थानीय निवासियों की क्रयशक्ति में वृद्धि होती है।

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प्रश्न 6.
कृषि व्यापार पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
कृषि व्यापार-कृषि व्यापार औद्योगिक पैमाने पर व्यापारिक कृषि है। इसमें प्राय: बड़े-बड़े उद्योगपति पैसा लगाते हैं जैसे-टाटा अनेक प्रकार के उद्योग चलाता है तथा चाय के बागान के क्षेत्र में भी अपनी पूँजी लगाई है। कृषि व्यापार के फार्मों की विशेषताएँ हैं-यन्त्रीकरण, बड़ा आकार, साधनों का उपयोग तथा प्रबन्धन की आधुनिक प्रणाली। इन्हें कृषि कारखाने भी कहा जाता है।

प्रश्न 7.
भोजन प्रसंस्करण पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भोजन प्रसंस्करण-भोजन प्रसंस्करण उद्योग वर्तमान गतिशील जीवन में तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसमें डिब्बाबन्द भोजन, क्रीम उत्पादन, फल प्रसंस्करण एवं मिठाई बनाना आदि शामिल किए जाते हैं। भोजन को सुरक्षित रखने की अनेक विधियों का ज्ञान मनुष्य को प्राचीनकाल से है; जैसे-उसे सुखाकर रखना, उसका अचार बनाना, उसे किण्वित करना यानि खमीर उठाना इत्यादि। हालाँकि इन विधियों से औद्योगिक क्रान्ति से पहले की माँगों को सीमित मात्रा में ही पूरा किया जाता था।

प्रश्न 8.
नगरों के आन्तरिक भागों की तुलना में सीमान्त क्षेत्रों में औद्योगिक संकुल व प्रौद्योगिक पार्कों के लाभों को समझाइए।
उत्तर:
नगरों के आन्तरिक भागों की तुलना में सीमान्त क्षेत्रों में औद्योगिक संकुल व प्रौद्योगिक पाकों के लाभ

  • जमीन की कीमतें अपेक्षाकृत सस्ती होने के कारण एकमंजिले कारखाने बनाए जा सकते हैं।
  • ऐसे स्थानों पर भविष्य में भी विस्तार के लिए जगह उपलब्ध हो जाती है।
  • प्रमुख सड़कों व रेलमार्गों तक पहुँचने की सुविधा होती है।
  • समीपवर्ती बस्तियों से प्रतिदिन शहर की तरफ जाने वाले लोगों द्वारा श्रम की आपूर्ति हो जाती है।
  • उद्योगों के स्थापित होने से पहले ही वहाँ भूमि विकसित हो जाती है तथा सभी प्रकार की संचार, परिवहन व नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध हो जाती हैं।

प्रश्न 9.
स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण
1.सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग – ये उद्योग सरकार के नियन्त्रण में होते हैं। भारत में कई उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के नियन्त्रण में हैं। समाजवादी देशों में कई उद्योग सरकारी नियन्त्रण में होते हैं।

2. निजी क्षेत्र के उद्योग – इन उद्योगों पर व्यक्तिगत निवेशकों का स्वामित्व होता है। ये उद्योग निजी संगठनों द्वारा संचालित होते हैं। पूँजीवादी देशों में अधिकांश उद्योग निजी क्षेत्र में होते हैं।

3. संयुक्त क्षेत्र के उद्योग – इन उद्योगों का संचालन संयुक्त कम्पनी के द्वारा अथवा किसी निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी के संयुक्त प्रयासों द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 10.
कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में अन्तर
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प्रश्न 11.
लघु उद्योग एवं बड़े पैमाने के उद्योग में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
लघु उद्योग एवं बड़े पैमाने के उद्योग में अन्तर
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प्रश्न 12.
निजी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्योग में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
निजी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्योग में अन्तर
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प्रश्न 13.
उपभोक्ता वस्तु उद्योग एवं उत्पादक वस्तु उद्योग में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
उपभोक्ता वस्तु उद्योग एवं उत्पादक वस्तु उद्योग में अन्तर
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अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
प्राथमिक उत्पाद क्या है?
उत्तर:
कृषि, पशुपालन, वानिकी, खनन, मत्स्य ग्रहण इत्यादि मानव की प्राथमिक क्रियाएँ हैं और इनसे प्राप्त उत्पाद ‘प्राथमिक उत्पाद’ कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
द्वितीयक क्रियाकलाप किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब प्राथमिक उत्पादों का प्रसंस्करण करके नई, उपयोगी और मूल्यवान वस्तुओं की रचना की जाती है तो इन्हें ‘द्वितीयक क्रियाकलाप’ कहते हैं।

प्रश्न 3.
विनिर्माण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, “विनिर्माण जैविक अथवा अजैविक पदार्थों का एक नए उत्पाद के रूप में यान्त्रिक तथा रासायनिक परिवर्तन है, चाहे यह कार्य शक्तिचालित मशीन द्वारा सम्पन्न होता है अथवा हाथ द्वारा, चाहे यह कार्य कारखाने में किया जाता है अथवा कामगारों के घर में और उत्पाद चाहे थोक में बेचे जाएँ अथवा फुटकर में।”

प्रश्न 4.
विनिर्माण उद्योगों की सामान्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
विनिर्माण उद्योगों की सामान्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • जटिल किन्तु स्मार्ट संगठन
  • विशिष्टीकृत श्रम
  • मशीनों का उपयोग
  • ऊर्जा के साधनों का उपयोग
  • पूँजी का भारी निवेश
  • बड़े पैमाने पर उत्पादन
  • परिष्कृत उत्पाद
  • अनुसन्धान एवं विकास
  • एक जैसी वस्तुओं का उत्पादन।

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प्रश्न 5.
भोजन प्रसंस्करण के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
भोजन प्रसंस्करण के उदाहरण हैं—डिब्बाबन्द भोजन, क्रीम उत्पादन, फल प्रसंस्करण एवं मिठाई बनाना आदि।

प्रश्न 6.
द्वितीयक क्रियाओं के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
द्वितीयक क्रियाओं के उदाहरण हैं

  • कपास द्वारा सूती वस्त्र बनाना
  • लौह-अयस्क से मशीनों का निर्माण।

प्रश्न 7.
कुटीर उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
कुटीर उद्योग विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई है। इसे ‘शिल्प उद्योग’ भी कहा जाता है।

प्रश्न 8.
बड़े पैमाने के उद्योग की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
बड़े पैमाने के उद्योग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • उत्पादन ऊर्जा चालित बड़ी-बड़ी मशीनों से होता है।
  • एक ही इकाई में बहुत बड़ी संख्या (हजारों) में श्रमिक कार्य करते हैं।

प्रश्न 9.
कृषि आधारित उद्योग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
कृषि आधारित उद्योग वे उद्योग हैं जो कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं व इन्हें विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा तैयार माल में बदलकर बिक्री हेतु ग्रामीण और नगरीय बाजारों में बेचते हैं।

प्रश्न 10.
आधारभूत या मूलभूत उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन उद्योगों का निर्मित माल अथवा उत्पाद अन्य अनेक उद्योगों का आधार बनता है उन्हें आधारभूत या मूलभूत उद्योग कहा जाता है; जैसे-लौह-इस्पात उद्योग, विद्युत उत्पादन उद्योग एवं भारी मशीन निर्माण उद्योग आदि।

प्रश्न 11.
उपभोक्ता उद्योग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
उपभोक्ता उद्योग वे उद्योग हैं जिनके उत्पाद का प्रयोग प्राय: अधिकतर लोग दैनिक जीवन में करते हैं। इन्हें गैर-आधारभूत उद्योग भी कहा जाता है; जैसे-कागज, पैन, वस्त्र व खाद्य पदार्थ आदि के उद्योग।

प्रश्न 12.
संसार में द्वितीयक क्रियाओं का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
संसार में द्वितीयक क्रियाओं का महत्त्व इसलिए है क्योंकि इस क्रिया द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है। वे अधिक मूल्यवान हो जाते हैं।

प्रश्न 13.
लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस उद्योग पर अन्य सभी उद्योग निर्भर हैं।

प्रश्न 14.
आधारभूत तथा उपभोक्ता उद्योग के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
आधारभूत उद्योग

  • लोहा एवं इस्पात उद्योग, एवं
  • मशीनी उपकरण उद्योग।

उपभोक्ता उद्योग

  • साबुन उद्योग, एवं
  • चाय उद्योग।

प्रश्न 15.
धातु उद्योग से क्या तात्पर्य है? ‘
उत्तर:
जिन उद्योगों में विभिन्न प्रकार की धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है, ‘धातु उद्योग’ कहलाते हैं। ये उद्योग दो प्रकार के होते हैं

  • लौह धातु, एवं
  • अलौह धातु उद्योग।

प्रश्न 16.
अधातु उद्योग से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
ऐसे उद्योग जो अधात्विक खनिजों पर आधारित होते हैं उन्हें ‘अधातु उद्योग’ कहते हैं। कोयला, पेट्रोलियम, गन्धक आदि इसके उदाहरण हैं।

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प्रश्न 17.
आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
आकार के आधार पर उद्योगों के तीन वर्ग होते हैं

  • कुटीर उद्योग
  • छोटे पैमाने के उद्योग एवं
  • बड़े पैमाने के उद्योग।

बहविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
द्वितीयक क्रियाकलाप सम्बन्धित हैं
(a) विनिर्माण से
(b) प्रसंस्करण से
(c) निर्माण से
(d) इन सभी से।
उत्तर:
(d) इन सभी से।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है
(a) प्राथमिक क्रियाओं द्वारा
(b) द्वितीयक क्रियाओं द्वारा
(c) तृतीयक क्रियाओं द्वारा
(d) चतुर्थक क्रियाओं द्वारा।
उत्तर:
(b) द्वितीयक क्रियाओं द्वारा।

प्रश्न 3.
निर्माण के अन्तर्गत माना जाता है
(a) लोहे व इस्पात को गढ़ना
(b) प्लास्टिक के खिलौने बनाना
(c) प्लास्टिक के अति सूक्ष्म घटकों को जोड़ना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की विशेषता है
(a) कौशल का विशिष्टीकरण
(b) यन्त्रीकरण
(c) प्रौद्योगिकीय नवाचार
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 5.
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाला कारक है
(a) बाजार
(b) कच्चा माल
(c) श्रम आपूर्ति
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 6.
उद्योगों के वर्गीकरण का आधार है
(a) आकार
(b) उत्पाद
(c) कच्चा माल
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 7.
विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है
(a) हाथ से बनाना
(b) मशीनों से बनाना
(c) (a) व (b) दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) व (b) दोनों।

प्रश्न 8.
उपभोक्ता वस्तु उद्योग का उदाहरण है
(a) ब्रेड उद्योग
(b) चाय उद्योग
(c) कॉफी उद्योग
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 9.
स्वच्छन्द उद्योग की एक प्रमुख विशेषता है
(a) कुशलता
(b) निम्न पूँजी की आवश्यकता
(c) अधिक उत्पादन
(d) कहीं भी स्थापना।
उत्तर:
(d) कहीं भी स्थापना।

प्रश्न 10.
वन आधारित उद्योग हैं
(a) फर्नीचर उद्योग
(b) कागज उद्योग
(c) लाख उद्योग
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 11.
रूहर क्षेत्र का सम्बन्ध किस देश से है
(a) जर्मनी
(b) जापान
(c) चीन
(d) फ्रांस।
उत्तर:
(a) जर्मनी।

प्रश्न 12.
संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात के उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है
(a) उत्तर अप्लेशियन प्रदेश
(b) महान झील क्षेत्र
(c) अटलाण्टिक तट
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 13.
भारत में लोहा-इस्पात उद्योग का प्रमुख केन्द्र है
(a) जमशेदपुर
(b) दुर्गापुर
(c) राउरकेला
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

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प्रश्न 14.
सिलीकॉन घाटी किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है
(a) सॉफ्टवेयर
(b) इस्पात उद्योग
(c) वस्त्र उद्योग
(d) रासायनिक उद्योग।
उत्तर:
(a) सॉफ्टवेयर।

प्रश्न 15.
हथकरघा क्षेत्र की विशेषता है
(a) अधिक श्रमिकों की आवश्यकता
(b) अर्द्धकुशल श्रमिकों को रोजगार
(c) कम पूँजी की आवश्यकता
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 International Trade

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 International Trade (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार)

UP Board Class 12 Geography Chapter 9 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 9 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें
(i) संसार के अधिकांश महान पत्तन इस प्रकार वर्गीकृत किए गए हैं
(क) नौसेना पत्तन
(ख) विस्तृत पत्तन
(ग) तैल पत्तन
(घ) औद्योगिक पत्तन
उत्तर:
(ख) विस्तृत पत्तन

(ii) निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है
(क) एशिया
(ख) यूरोप
(ग) उत्तरी अमेरिका
(घ) अफ्रीका
उत्तर:
(ख) यूरोप

(iii) दक्षिण अमेरिकी राष्ट्रों में से कौन-सा एक ओपेक का सदस्य है
(क) ब्राजील
(ख) वेनेजुएला
(ग) चिली
(घ) पेरू
उत्तर:
(ख) वेनेजुएला

(iv) निम्न व्यापार समूहों में से भारत किसका एक सह-सदस्य है
(क) साफ्टा (SAFTA)
(ख) आसियान (ASEAN)
(ग) ओईसीडी (OECD)
(घ) ओपेक (OPEC)
उत्तर:
(क) साफ्टा (SAFTA)

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए
(i) विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-से हैं?
उत्तर:
विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य
विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य निम्नलिखित हैं

  • विश्व व्यापार संगठन एकमात्र ऐसा अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है, जो राष्ट्रों के मध्य वैश्विक नियमों का व्यवहार करता है।
  • यह विश्वव्यापी व्यापार तन्त्र के लिए नियमों को तय करता है।
  • इसके सदस्य देशों के मध्य विवादों का निपटारा करता है।
  • यह विश्व को उच्च सीमा शुल्क और विभिन्न प्रकार की बाधाओं से मुक्त करवाता है।

(ii) ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
उत्तर:
एक ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का अर्थ होगा कि देश. वस्तुओं के क्रय पर उससे अधिक खर्च करता है जितना कि अपने सामानों के विक्रय से अर्जित करता है। यह अन्तिम रूप में वित्तीय संचय की समाप्ति · को अभिप्रेरित करता है।

(iii) व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
प्रादेशिक व्यापार समूह व्यापार की मदों में भौगोलिक सामीप्य, समरूपता और पूरकता के साथ देशों के मध्य व्यापार को बढ़ाने में सहायता करते हैं। ये व्यापार पर लगे प्रतिबन्ध हटाने में सहायता करते हैं। ये प्रादेशिक व्यापार को बढ़ावा देते हैं। दावा लेते हैं।

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक में न दें
(i) पत्तन किस प्रकार व्यापार में सहायक होते हैं? पत्तनों का वर्गीकरण उनकी अवस्थिति के आधार पर कीजिए।
उत्तर:
पत्तन व्यापार के सहायक के रूप में

  • ये अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की दुनिया में मुख्य प्रवेश द्वार होते हैं। इन्हीं पत्तनों के द्वारा जहाजी माल तथा । यात्री विश्व के एक भाग से दूसरे भाग को जाते हैं।
  • पत्तन जहाज के लिए गोदी लादने, उतारने तथा भण्डारण हेतु सुविधाएँ प्रदान करते हैं।
  • एक पत्तन के महत्त्व को नौभार के आकार और निपटान के लिए जहाजों की संख्या द्वारा निश्चित किया जाता है।
  • एक पत्तन द्वारा निपटाया नौभार उसके पृष्ठ प्रदेश के विकास के स्तर का सूचक है।

पत्तनों का वर्गीकरण – अवस्थिति के आधार पर
अवस्थिति के आधार पर पत्तनों के दो प्रकार हैं
1. आन्तरिक पत्तन – ये पत्तन समुद्र दूर स्थलखण्ड के भीतर स्थित होते हैं, परन्तु नदी या नहर द्वारा समूह से जुड़े होते हैं, जिससे विशेष प्रकार के पोत बजरे (छोटी अतिरिक्त नौकाएँ) की सहायता से इन तक पहुँचते हैं, उदाहरण के लिए मानचेस्टर, कोलकाता आदि।

2. बाह्य पत्तन – ये गहरे पानी के पत्तन हैं। ये वास्तविक पत्तनों से दूर गहरे समुद्रों में बनाए जाते हैं, क्योंकि जलपोत या तो अपने बड़े आकार के कारण या अधिक मात्रा में अवसाद हो जाने के कारण वास्तविक पत्तन तक नहीं पहुंच पाते। बोस्टन ऐसा ही पत्तन है।

(ii) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से देश कैसे लाभ प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विश्व के अन्य देशों के साथ वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से देशों को निम्नवत् लाभ पहुँचता है

  • राष्ट्र उन वस्तुओं का आयात कर सकते हैं जिनका उनके यहाँ उत्पादन नहीं होता।
  • अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से देशों में आपसी सहयोग और भाई-चारा बढ़ता है।
  • देश अपने यहाँ अतिरिक्त उत्पादन को उचित मूल्य पर अन्य देशों को बेच सकते हैं जिससे राष्ट्रीय आय में वृद्धि होगी।
  • देश अपने विशिष्ट उत्पादन का निर्यात कर सकते हैं, इससे विश्व अर्थव्यवस्था में सुधार आता है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धान्तों और वस्तुओं के स्थानान्तरण के सिद्धान्त पर निर्भर करता है, जिससे व्यापार करने वाले देशों को लाभ ही पहुँचता है।
  • आधुनिक युग में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के अन्तर्गत प्रौद्योगिक ज्ञान तथा अन्य बौद्धिक सेवाओं का भी आदान-प्रदान किया जाता है जिससे दोनों देशों को लाभ पहुँचता है।

UP Board Class 12 Geography Chapter 9 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 9 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से होने वाली हानियों का वर्णन कीजिए। अथवा उन परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए जिन्हें पैदा करके अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार राष्ट्रों के लिए हितकर नहीं होगा।
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से होने वाली हानियाँ
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से होने वाली हानियाँ निम्नलिखित हैं

  • कुछ देश दूसरे देशों पर पूर्णतया आश्रित हो जाते हैं।
  • विकास के वितरण में असमानता हो जाती है।
  • शोषण और व्यापारिक प्रतिद्वन्द्विता से युद्ध होने की आशंका रहती है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से जीवन का प्रत्येक क्षेत्र प्रभावित होता है।
  • इसके द्वारा पर्यावरण से लेकर स्वास्थ्य और खुशहाली पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
  • प्राकृतिक संसाधनों का उत्पादन और उपयोग काफी बढ़ जाता है।
  • संसाधनों का इतनी तेजी से दोहन होता है कि उनकी पुन: पूर्ति नहीं हो पाती।
  • समुद्री जीव-जन्तु व वन तेजी से कम होते जाते हैं।
  • विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों में तेजी से वृद्धि होती है।
  • बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के काम करने के तरीके ऐसे होते हैं कि वे सतत पोषणीय विकास का ध्यान नहीं रखतीं।

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प्रश्न 2.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्तियाँ
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्तियों के महत्त्वपूर्ण बिन्दु इस प्रकार हैं

  • प्राचीन काल में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार बहुत थोड़ी वस्तुओं का और आज की तरह जटिल नहीं था। अधिकांश मदें विलासिता की वस्तुएँ थीं।
  • औद्योगिक क्रान्ति के बाद व्यापार का संयोजन बदला; विलासिता की वस्तुओं के साथ कच्चे माल, ईंधन, उपभोक्ता पदार्थ भी व्यापार में शामिल हो गए।
  • उष्ण कटिबन्ध से प्राथमिक उत्पाद शीतोष्ण कटिबन्ध में तथा शीतोष्ण कटिबन्ध से विनिर्मित वस्तुएँ उष्ण कटिबन्ध में आने लगीं।
  • विकसित राष्ट्रों का व्यापार सन्तुलन धनात्मक और विकासशील राष्ट्रों का ऋणात्मक होने लगा। विकसित राष्ट्र विश्व व्यापार के 3/4 भाग पर कब्जा किए हुए हैं।
  • कच्चा तेल, खनिज पदार्थ, मशीनें एवं परिवहन उत्पाद अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्त्वपूर्ण बनने लगे।
  • सूचना और परिवहन के क्षेत्र में हुई दोहरी प्रौद्योगिक क्रान्ति ने वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा एवं गुणवत्ता बढ़ा दी।
  • विश्व व्यापार संगठन एवं प्रादेशिक व्यापार समूह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की नवीनतम प्रवृत्तियाँ बनकर उभरे।

प्रश्न 3.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण पक्षों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण पक्ष अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रतिरूप को निर्धारित करने वाले महत्त्वपूर्ण तीन पक्ष हैं
(1) व्यापार का परिमाण, (2) व्यापार का संयोजन, एवं (3) व्यापार की दिशा।
1. व्यापार का परिमाण – व्यापार की गई वस्तुओं के वास्तविक तौल को ‘व्यापार का परिमाण’ कहा जाता है। हालाँकि तौल से मूल्य का सही-सही ज्ञान कभी नहीं हो पाता और न ही व्यापारिक सेवाओं को तौल में मापा जा सकता है; इसलिए व्यापार की गई कुल वस्तुओं तथा सेवाओं के कुल मूल्य को व्यापार के परिमाण के रूप में जाना जाता है।
विभिन्न देशों के बीच व्यापार के परिमाण की भिन्नता
(i) उत्पादित पदार्थों, (ii) सेवाओं की प्रकृति, (iii) द्विपक्षीय सन्धियों तथा (iv) व्यापार निषेधों पर निर्भर करती है।

2. व्यापार का संयोजन – अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में जगह पाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार भी बदलते रहते हैं। 20वीं शताब्दी के आरम्भ में आयात और निर्यात की वस्तुओं में प्राथमिक उत्पादों की प्रधानता थी। बाद में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में विनिर्मित वस्तुओं ने प्रमुखता प्राप्त कर ली। वर्तमान में यद्यपि विश्व व्यापार के अधिकांश भाग पर विनिर्माण सेक्टर का आधिपत्य है, सेवा क्षेत्र जिसमें परिवहन तथा अन्य व्यावसायिक सेवाएँ शामिल हैं, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की वृद्धि की प्रकृति दिखा रहा है। विगत कुछ वर्षों से व्यापार में पेट्रोलियम का. स्थान महत्त्वपूर्ण बना हुआ है।

3. व्यापार की दिशा – अट्ठारहवीं सदी तक विकासशील देश यूरोप को विनिर्मित वस्तुएँ निर्यात किया करते थे। उन्नीसवीं सदी में व्यापार की दिशा बदली और यूरोप से विनिर्मित माल तीन दक्षिणी महाद्वीपों—दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका व ऑस्ट्रेलिया की ओर आने लगा। बदले में ये महाद्वीप यूरोप को कच्चे माल व खाद्य पदार्थों को यूरोप भेजते थे। आज प्रौद्योगिकी व्यापार महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापार में तो भारत अनेक विकसित देशों से आगे चल रहा है।

प्रश्न 4.
व्यापार सन्तुलन किसे कहते हैं? इसके प्रकारों को समझाइए।
उत्तर:
दुनिया का प्रत्येक राष्ट्र कुछ वस्तुओं का निर्यात करता है व अन्य कुछ वस्तुओं का आयात भी करता है। इसी कारण व्यापार सन्तुलन की स्थिति उत्पन्न होती है।
व्यापार सन्तुलन का अर्थ – किसी समयावधि में आयात एवं निर्यात के बीच मूल्यों के अन्तर को ‘व्यापार सन्तुलन’ कहा जाता है
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 9 International Trade (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार) 1
व्यापार सन्तुलन के प्रकार
व्यापार सन्तुलन दो प्रकार के होते हैं
(1) धनात्मक व्यापार सन्तुलन, एवं (2) ऋणात्मक व्यापार सन्तुलन।
1. धनात्मक व्यापार सन्तुलन – यदि किसी देश में आयात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है तो ऐसे देशों के व्यापार सन्तुलन को धनात्मक कहा जाता है। इसे ‘अनुकूल व्यापार सन्तुलन’ भी कहते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और अनेक विकसित पश्चिम यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाएँ ऐसी ही हैं।

2. ऋणात्मक व्यापार सन्तुलन – यदि किसी देश में निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा आयात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है तो उस देश का व्यापार सन्तुलन ऋणात्मक कहलाता है। इसे असन्तुलित अथवा विलोम व्यापार सन्तुलन भी कहा जाता है। भारत का व्यापार सन्तुलन लगभग सदा ऋणात्मक रहा है।
धनात्मक व्यापार सन्तुलन वाले देश को ‘साहूकार’ देश तथा ऋणात्मक व्यापार सन्तुलन वाले देश को ‘ऋणी’ देश कहा जाता है।
किसी भी देश की आर्थिकी के लिए.व्यापार सन्तुलन तथा भुगतान सन्तुलन के गम्भीर निहितार्थ हुआ करते हैं। ऋणात्मक व्यापार सन्तुलन अन्तत: देश के वित्तीय संचय को समाप्त कर देता है।

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से आप क्या समझते हैं? अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का अर्थ – विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात को ‘अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार’ कहते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं

  • प्राकृतिक संसाधनों में भिन्नता – प्राकृतिक संसाधनों का वितरण सभी देशों में एकसमान नहीं पाया जाता। प्राकृतिक संसाधनों में भिन्नता, भू-गर्भिक संरचना, खनिज उच्चावच, मृदा, वनस्पति, जलवायु तथा नदियों जैसे प्राकृतिक तत्त्वों में विभिन्नता के कारण पैदा होती है।
  • जनसंख्या कारण – विभिन्न देशों में जनसंख्या का आकार, उसका वितरण तथा सामाजिक-आर्थिक विविधता व्यापार के लिए आई वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार और उनकी मात्रा को प्रभावित करते हैं।
  • आर्थिक विकास की प्रावस्था – आर्थिक विकास की विभिन्न अवस्थाओं में देशों द्वारा व्यापार की गई वस्तुओं का प्रकार भी बदल जाता है।
  • विदेशी निवेश की सीमा – विदेशी निवेश की सीमा भी अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्त्वपूर्ण आधार है।
  • परिवहन एवं संचार प्रणाली का विकास – पुराने समय के परिवहन साधनों की तुलना में आज परिवहन व संचार प्रणाली तथा प्रशीतन एवं परिरक्षण के बेहतर साधनों के कारण व्यापार का स्थानिक विस्तार हुआ है।

प्रश्न 6.
विश्व व्यापार संगठन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व व्यापार संगठन (WTO) स्थापना-व्यापार के प्रतिबन्धों को कम करके देशों के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि करने के उद्देश्य से सन् 1948 में जिनेवा (स्विट्जरलैण्ड) में गैट अर्थात् ‘जनरल एग्रीमेण्ट ऑन ट्रेड एण्ड टैरिफ’ नामक संस्था की स्थापना की गई। सन् 1994 में सदस्य देशों द्वारा राष्ट्रों के बीच मुफ्त एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी संस्था के गठन का निर्णय लिया गया तथा 1 जनवरी, 1995 से गैट को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में रूपान्तरित कर दिया गया।
विश्व व्यापार संगठन के उद्देश्य एवं कार्य
विश्व व्यापार संगठन के उद्देश्य एवं कार्य निम्नलिखित हैं

  • यह एकमात्र अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के मध्य वैश्विक नियमों को लागू करता है।
  • यह विश्वव्यापी व्यापार तन्त्र के लिए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए नियम बनाता है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के विस्तार से अल्पविकसित देश भी लाभान्वित हों।
  • यदि कोई सदस्य देश समझौतों और नियमों का पालन नहीं करता तो उसकी शिकायत विवाद निपटारा समिति को की जाती है।
  • विश्व व्यापार संगठन वस्तु व्यापार, सेवा व्यापार जैसे दूरसंचार व बैंकिंग, बौद्धिक सम्पदा, अधिकारों का संरक्षण, विदेशी निवेश तथा अन्य विषयों को अपने कार्यों में शामिल करता है।
  • यह संगठन उपभोक्ताओं को लाभान्वित करने के लिए सभी देशों में प्रतिस्पर्धा तो बढ़ाता ही है, साथ ही विश्व में रोजगार के स्तर को बढ़ाने के लिए उत्पादन और उत्पादकता दोनों को बढ़ाता है।
  • संसाधनों का इष्टतम उपयोग, लोगों के जीवन-स्तर में सुधार तथा अति गरीब राष्ट्रों के विकास के लिए विशेष प्रयास करना भी इसके उद्देश्यों में शामिल हैं।
  • विश्व व्यापार नीति निर्माण में समन्वय लाने के लिए यह संगठन अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक को सहयोग करता है।

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प्रश्न 7.
विश्व के प्रमुख प्रादेशिक व्यापार समूहों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व के प्रमुख प्रादेशिक व्यापार समूह
विश्व के प्रमुख प्रादेशिक व्यापार समूह निम्नलिखित हैं
1. दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (ASEAN-आसियान) – इसका गठन अगस्त 1967 में इण्डोनेशिया, मलयेशिया, थाईलैण्ड, फिलिपीन्स, ब्रुनेई, वियतनाम तथा सिंगापुर ने मिलकर किया था। इसका मुख्यालय जकार्ता (इण्डोनेशिया) में है। भारत भी इसका सह-सदस्य बन गया है। कृषि उत्पाद, खनिज, ऊर्जा तथा सॉफ्टवेयर प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ हैं।

2. सी०आई०एस० (C.I.S.) – इसका गठन तत्कालीन सोवियत संघ के विघटन के बाद किया गया। इसका मुख्यालय मिस्क (बेलारूस) है। इसका मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था, प्रतिरक्षण तथा विदेश नीति के मामलों पर समन्वय व सहयोग स्थापित करना है। आइमीनिया, अजरबैजान, बेलारूस, जार्जिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मौल्डोवा, रूस, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उक्रेन तथा उजबेकिस्तान इस संगठन के सदस्य हैं। अशोधित तेल, प्राकृतिक गैस, सोना, कपास, रेशे, ऐलुमिनियम आदि मुख्य व्यापारिक वस्तुएँ हैं।

3. यूरोपीय संघ (E.U.) – इसे ‘यूरोपीय आर्थिक समुदाय’ (EEC) या ‘यूरोपीय साझा बाजार’ (ECM) भी कहते हैं। इसका गठन मार्च 1957 में रोम सन्धि के फलस्वरूप किया गया। इसके 6 सदस्य देश थे- फ्रांस, बेल्जियम, लक्जेमबर्ग, नीदरलैण्ड्स, जर्मन संघीय गणराज्य तथा इटली। इसका मुख्यालय बुसेल्स (बेल्जियम) में है। फरवरी 1992 में इसका नाम ‘यूरोपीय संघ’ कर दिया गया। ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, फिनलैण्ड, आयरलैण्ड, इटली, नीदरलैण्ड, लक्जमबर्ग, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और यू०के० इस संगठन के सदस्य हैं। कृषि उत्पाद, खनिज, रसायन, लकड़ी, कागज, परिवहन की गाड़ियाँ, घड़ियाँ, कलाकृतियाँ, पुरा वस्तु आदि मुख्य व्यापारिक वस्तुएँ हैं।

4. लैटिन अमेरिकन इंटीग्रेशन एसोसिएशन (LAIA) – इसका गठन सन् 1960 में किया गया था। इसका मुख्यालय मॉण्टोविडियो (उरुग्वे) में है। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण अमेरिका के बीच आपसी व्यापार को बढ़ावा देना है। अर्जेण्टीना, बोलिविया, ब्राजील, कोलम्बिया, इक्वाडोर, मैक्सिको, पराग्वे, पेरु, उरुग्वे तथा वेनेजुएला इसके सदस्य हैं।

5. नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (NAFTA) — इसका गठन सन् 1988 में विश्व के दो बड़े व्यापारिक सहयोगियों-संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के बीच व्यापार प्रतिबन्धों को समाप्त करने के लिए किया गया। सन् 1994 में इसका विस्तार किया गया और मैक्सिको को भी इसका सदस्य बनाया गया। कृषि उत्पाद, मोटरगाड़ियाँ, स्वचालित पुर्जे, कम्प्यूटर, वस्त्र आदि प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ हैं।

6. ओपेक (OPEC) – इसका गठन पेट्रोलियम का निर्यात करने वाले देशों के हितों की रक्षा के लिए सन् 1949 में किया गया। इसका मुख्यालय वियना (ऑस्ट्रिया) में है। इसके सदस्य देश अल्जीरिया, इण्डोनेशिया, इराक, ईरान, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला हैं। संगठन अशोधित खनिज तेल के व्यापार से सम्बन्धित है। संगठन पेट्रोलियम के मूल्यों सम्बन्धी नीतियों को निर्धारित करता है।

7. साफ्टा (SAFTA) – इसका गठन जनवरी 2006 में हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य अन्तर-प्रादेशिक व्यापार के करों को कम करना है। बंगलादेश, मालदीव, भूटान, नेपाल, भारत, पाकिस्तान तथा श्रीलंका इसके सदस्य देश हैं।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
द्विपाश्विक व्यापार से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
द्विपाश्विक व्यापार-यह व्यापार दो देशों के बीच होता है। इस प्रकार का व्यापार तभी पनपता है, जब दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे की पूरक हों। उदाहरणतया—एक विकासशील देश, विकसित देश को कच्चा माल निर्यात करता है और बदले में विकसित देश विकासशील देश को निर्मित वस्तुएँ उपलब्ध कराता है। ऐसा कुछ निश्चित वस्तुओं के सन्दर्भ में सीमित मात्रा में ही सम्भव हो पाता है।

प्रश्न 2.
बहुपाश्विक व्यापार से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बहुपाश्विक व्यापार-यह व्यापार बहुत-से देशों के साथ किया जाता है। वही देश अन्य देशों के साथ व्यापार कर सकता है। देश कुछ व्यापारिक साझेदारों को सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र’ (MFN) की स्थिति प्रदान कर सकता है।

प्रश्न 3.
अनुकूल व्यापार सन्तुलन एवं प्रतिकूल व्यापार सन्तुलन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अनुकूल व्यापार सन्तुलन – यदि किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक है तो इसे उस देश का ‘अनुकूल व्यापार सन्तुलन’ कहा जाता है।
प्रतिकूल व्यापार सन्तुलन – यदि किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक है तो इसे उस देश का ‘प्रतिकूल व्यापार सन्तुलन’ कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
प्रादेशिक व्यापार समूहों की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
प्रादेशिक व्यापार समूहों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • प्रादेशिक व्यापार समूहों का मुख्य उद्देश्य भौगोलिक सामीप्य वाले देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना तथा प्रोत्साहित करना है।
  • व्यापारिक मदों में सम्पूरकों को प्रोत्साहित करना।
  • विकासशील देशों के व्यापार पर लगी पाबन्दियों के अन्त का उद्देश्य।
  • आसियान, साफ्टा, ओपेक आदि संसार के प्रमुख प्रादेशिक व्यापार समूह हैं।

प्रश्न 5.
व्यापार सन्तुलन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यापार सन्तुलन-किसी समयावधि में किसी देश के निर्यात और आयात के अन्तर को ‘व्यापार का सन्तुलन’ कहते हैं। यदि कोई देश वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात आयात की अपेक्षा अधिक करता है तो व्यापार सन्तुलन को अनुकूल या धनात्मक कहते हैं। यदि आयात, निर्यात से अधिक होता है तो व्यापार सन्तुलन को प्रतिकूल या ऋणात्मक कहते हैं। ।

प्रश्न 6.
व्यापार की आवश्यकता क्यों है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यापार की आवश्यकता के कारण

  • व्यापार की आवश्यकता मुख्यतः उत्पादन तथा उत्पादकता की प्रादेशिक भिन्नता के कारण होती है।
  • पृथ्वी के धरातल पर प्राकृतिक संसाधनों के वितरण में भिन्नता पायी जाती है। सभी देश प्राकृतिक संसाधनों में धनी नहीं होते।
  • जो देश अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग अधिक दक्षता से करके अधिशेष उत्पादन करता है वह इसे अन्य देशों में जहाँ इनका अभाव होता है बेचने में सक्षम होता है।

प्रश्न 7.
वस्त-विनिमय तथा मुद्रा आधारित विनिमय में अन्तर बताइए।
उत्तर:
वस्तु-विनिमय तथा मुद्रा आधारित विनिमय में अन्तर

क्र० सं० वस्तु-विनिमय मुद्रा आधारित विनिमय
1. यह स्थानीय व्यापार का प्राचीन ढंग है। यह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का आधुनिक ढंग है।
2. इस विधि में वस्तुओं के विनिमय द्वारा व्यापार होता है। इस विधि में मुद्रा के विनिमय से व्यापार होता है।
3. यह विधि आज भी विश्व की आदिम जातियों में जाती है। यह विधि विश्व के विकसित देशों में प्रयोग की प्रचलित है।
4. यह विधि सीमित विधि है। यह विधि संसार के अनेक देशों में प्रयोग की जाती है।

प्रश्न 8.
बाह्य पत्तनों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
बाह्य पत्तनों की विशेषताएँ

  • बाह्य पत्तन गहरे पानी के पत्तन हैं जो वास्तविक पत्तन से दूर गहरे समुद्र में बनाए जाते हैं।
  • ये पत्तन बड़े आकार के जहाजों के खड़े होने के लिए बनाए जाते हैं जो वास्तविक पत्तन तक नहीं पहुँच सकते हैं।
  • ये वास्तविक पत्तन के सहायक पत्तन होते हैं। ब्रिस्टल तथा एथेन्स में पिरास इसके अच्छे उदाहरण हैं।

प्रश्न 9.
निपटाए गए नौभार के अनुसार पत्तनों के प्रकार बताइए।
उत्तर:
निपटाए गए नौभार के अनुसार पत्तनों के प्रकार

  • औद्योगिक पत्तन – ये पत्तन थोक नौभार के लिए विशेषीकृत होते हैं; जैसे–अनाज, चीनी, अयस्क, तेल, रसायन और इसी प्रकार के पदार्थ।
  • वाणिज्यिक पत्तन – ये मुख्यतः सामान के आयात-निर्यात के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कुछ पत्तनों को सवारियाँ भी प्रयोग करती हैं तथा कुछ मत्स्यन जलपोतों को आश्रय देते हैं।
  • विस्तृत पत्तन – ये पत्तन बड़े पैमाने पर सामान्य नौभार का थोक प्रबन्ध करते हैं। विश्व के अधिकांश बड़े पत्तन इसी वर्ग के हैं।

प्रश्न 10.
पत्तन, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार होते हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पत्तन, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार-पत्तन (Port) लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है—द्वार। यह वास्तव में समुद्र और भूमि को जोड़ने का कार्य करता है। पत्तन, समुद्र तट का वह स्थान है जहाँ से भारी मात्रा में माल समुद्री मार्गों से स्थल मार्गों द्वारा भेजा जाता है। पत्तन अपने पृष्ठप्रदेश के लिए विदेशों से माल आयात करता है तथा अपने पृष्ठ प्रदेश में उत्पादित माल दूसरे देशों को भेजता है। इस तरह एक पत्तन व्यापार के लिए स्थल से समुद्र तक तथा समुद्र से स्थल तक द्वार का काम करता है, अत: पत्तनों को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वार के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का तोरण भी कहा जाता है।

प्रश्न 11.
पैकेट पत्तन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
पैकेट पत्तन-इन्हें ‘फैरी पोर्ट’ भी कहते हैं। इन्हें छोटे समुद्री मार्ग से आने वाले यात्रियों को उतारने-चढ़ाने तथा डाक लाने व ले जाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें प्राय: दो स्टेशन आमने-सामने होते हैं। इसका नाम उन जहाजों पर पड़ा है, जो प्राचीनकाल में पत्र एवं राज्य-पत्र आदि ले जाते थे, जिन्हें ‘पैकेट’ कहते थे, अत: उनके ठहरने के स्थान को ‘पैकेट स्टेशन’ कहते हैं।

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प्रश्न 12.
मार्ग पत्तन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मार्ग पत्तन-बहुत-से ऐसे पत्तन महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों के साथ विकसित हो जाते हैं, जहाँ पर जलपोत ईंधन तथा खाना लेने के लिए रुकते हैं। कालान्तर में ये पूर्ण पत्तनों के रूप में विकसित हो जाते हैं। अदन, होनोलूलू तथा सिंगापुर इसी प्रकार के पत्तन हैं।

प्रश्न 13.
आन्त्रोपो पत्तन से आपका क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आन्त्रोपो पत्तन — ये पत्तन एक देश के माल को दूसरे देश में भेजने का कार्य करते हैं। ऐसे पत्तनों पर जो माल आता है, उसका गन्तव्य अन्य देश होते हैं, अत: उस माल का संचयन बड़े-बड़े गोदामों में किया जाता है और दूसरे देशों को भेजा जाता है। सिंगापुर, हांगकांग, रोटरडम, कोपेनहेगन, औटवर्प आदि इसी प्रकार के पत्तन हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
व्यापार किसे कहते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं और सेवाओं के स्वैच्छिक आदान-प्रदान को ‘व्यापार’ कहते हैं।

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय व्यापार से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
देश के भीतर ही देश के विभिन्न भागों के बीच होने वाला व्यापार ‘राष्ट्रीय व्यापार’ कहलाता है।

प्रश्न 3.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से क्या आशय है?
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विभिन्न राष्ट्रों के बीच राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार वस्तुओं एवं सेवाओं के आदान-प्रदान से सम्बन्धित है।

प्रश्न 4.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार बताइए।
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार हैं

  • राष्ट्रीय संसाधनों में भिन्नता
  • जनसंख्या कारक
  • आर्थिक विकास की प्रावस्था
  • विदेशी निवेश की सीमा, एवं
  • परिवहन।

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण पक्ष बताइए।
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के तीन महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं

  • व्यापार का परिमाण
  • व्यापार संयोजन, तथा
  • व्यापार की दिशा।

प्रश्न 6.
GATT का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
General Agreement on Tariff and Trade’.

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प्रश्न 7.
WTO का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
‘World Trade Organisation’.

प्रश्न 8.
व्यापार सन्तुलन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रत्येक देश कुछ वस्तुओं का आयात करता है तथा कुछ अन्य वस्तुओं का निर्यात करता है। आयात तथा निर्यात के बीच मूल्यों के अन्तर को ‘व्यापार सन्तुलन’ कहा जाता है।

प्रश्न 9.
मुक्त व्यापार किसे कहते हैं?
उत्तर:
व्यापार हेतु अर्थव्यवस्थाओं को खोलने की प्रक्रिया को ‘मुक्त व्यापार’ या ‘व्यापारिक उदारीकरण’ कहते हैं।

प्रश्न 10.
डंप करना से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
लागत की दृष्टि से नहीं बल्कि भिन्न-भिन्न कारणों से अलग-अलग कीमत की किसी वस्तु को दो देशों में विक्रय करने की प्रथा ‘डंप करना’ कहलाती है।

प्रश्न 11.
विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
उत्तर:
विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय ‘जिनेवा’ (स्विट्जरलैण्ड) में है।

प्रश्न 12.
प्रादेशिक व्यापार समूह का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
प्रादेशिक व्यापार समूह का मुख्य उद्देश्य संरक्षणवाद को कम करना तथा सदस्य देशों के बीच आर्थिक सम्बन्धों में वृद्धि करना है।

प्रश्न 13.
ASEAN का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
‘Association of South-East Asian Nations’.

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प्रश्न 14.
LAIA का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
‘Latin American Integration Association’.

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वार हैं
(a) समुद्री बन्दरगाह
(b) हवाई पत्तन
(c) प्रादेशिक समूह
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) समुद्री बन्दरगाह।

प्रश्न 2.
जब एक ही क्षेत्र के निवासी वस्तु-विनिमय करते हैं, तो यह कौन-सा व्यापार है.
(a) स्थानीय व्यापार
(b) राष्ट्रीय व्यापार
(c) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(a) स्थानीय व्यापार।

प्रश्न 3.
जब वस्तुओं या सेवाओं का विनिमय कई देशों के बीच हो तो वह कहलाता है
(a) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार
(b) क्षेत्रीय व्यापार
(c) द्विपक्षीय व्यापार,
(d) बहुपक्षीय व्यापार।
उत्तर:
(d) बहुपक्षीय व्यापार।

प्रश्न 4.
आयात और निर्यात के बीच मूल्य के अन्तर को क्या कहा जाता है
(a) व्यापार सन्तुलन
(b) अनुकूल व्यापार सन्तुलन
(c) विलोम व्यापार सन्तुलन
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) व्यापार सन्तुलन।

प्रश्न 5.
जब निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा आयात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है, तो व्यापार कहलाता है
(a) व्यापार सन्तुलन
(b) धनात्मक व्यापार सन्तुलन
(c) ऋणात्मक व्यापार सन्तुलन
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) ऋणात्मक व्यापार सन्तुलन।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सबसे कम प्रवाह होता है
(a) उत्तरी अमेरिका
(b) यूरोप
(c) एशिया
(d) अफ्रीका।
उत्तर:
(d) अफ्रीका।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित व्यापार समूहों में से भारत किसका एक सह-सदस्य नहीं है
(a) आसियान
(b) साफ्टा
(c) ओपेक
(d) (a) व (b) दोनों का।
उत्तर:
(c) ओपेक।

प्रश्न 8
विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय कहाँ है
(a) न्यूयॉर्क
(b) लन्दन
(c) पेरिस
(d) जिनेवा।
उत्तर:
(d) जिनेवा।

प्रश्न 9.
हुगली नदी पर बना कोलकाता पत्तन निम्नलिखित में से किस प्रकार का है
(a) बाह्य पत्तन
(b) आन्त्रोपो पत्तन.
(c) आन्तरिक पत्तन
(d) सवारी पत्तन।
उत्तर:
(c) आन्तरिक पत्तन।

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प्रश्न 10.
बन्दरगाह के जंगी जहाजों के लिए काम करते हैं, उसे कहते हैं
(a) तेल बन्दरगाह
(b) आन्तरिक पत्तन
(c) पोर्ट ऑफ कॉल
(d) नौसैनिक पत्तन।
उत्तर:
(d) नौसैनिक पत्तन।

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Primary Activities

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Primary Activities (प्राथमिक क्रियाएँ)

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
(i) निम्न में से कौन-सी रोपण फसल नहीं है
(क) कॉफी
(ख) गन्ना
(ग) गेहूँ
(घ) रबड़।
उत्तर:
(ग) गेहूँ।

(ii) निम्न देशों में से किस देश में सहकारी कृषि का सफल परीक्षण किया गया है
(क) रूस
(ख) डेनमार्क
(ग) भारत
(घ) नीदरलैण्ड।
उत्तर:
(ख) डेनमार्क।

(iii) फूलों की कृषि कहलाती है
(क) ट्रक फार्मिंग
(ख) कारखाना कृषि
(ग) मिश्रित कृषि
(घ) पुष्पोत्पादन।
उत्तर:
(घ) पुष्पोत्पादन।

(iv) निम्न में से कौन-सी कृषि के प्रकार का विकास यूरोपीय औपनिवेशिक समूहों द्वारा किया गया
(क) कोलखहोज
(ख) अंगूरोत्पादन
(ग) मिश्रित कृषि
(घ) रोपण कृषि।
उत्तर:
(घ) रोपण कृषि।

(v) निम्न प्रदेशों में से किसमें विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि नहीं की जाती है
(क) अमेरिका एवं कनाडा के प्रेयरी क्षेत्र
(ख) अर्जेण्टीना के पम्पास क्षेत्र
(ग) यूरोपीय स्टैपीज क्षेत्र
(घ) अमेजन बेसिन।
उत्तर:
(घ) अमेजन बेसिन।

(vi) निम्न में से किस प्रकार की कृषि में खट्टे रसदार फलों की कृषि की जाती है
(क) बाजारीय सब्जी कृषि
(ख) भूमध्यसागरीय कृषि
(ग) रोपण कृषि
(घ) सहकारी कृषि।
उत्तर:
(ख) भूमध्यसागरीय कृषि।

(vii) निम्न कृषि के प्रकारों में से कौन-सा प्रकार कर्तन-दहन कृषि का प्रकार है
(क) विस्तृत जीवन निर्वाह कृषि
(ख) आदिकालीन निर्वाहक कृषि
(ग) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि
(घ) मिश्रित कृषि।
उत्तर:
(ख) आदिकालीन निर्वाहक कृषि।

(viii) निम्न में से कौन-सी एकल कृषि नहीं है
(क) डेयरी कृषि
(ख) मिश्रित कृषि
(ग) रोपण कृषि
(घ) वाणिज्य अनाज कृषि।
उत्तर:
(क) डेयरी कृषि।

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प्रश्न 2.
निम्न प्रश्नों का 30 शब्दों में उत्तर दीजिए
(i) स्थानान्तरी कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है। विवेचना कीजिए।
उत्तर:
स्थानान्तरी कृषि आदिम जातियों द्वारा पुरातन ढंग से की जाती है जिसमें प्रति व्यक्ति व प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होता है। कम वहन क्षमता के कारण स्थानान्तरी कृषकों को खाद्यान्न की समस्या रहती है जिससे इनकी संख्या घट रही है। जिन जंगलों को जलाकर कृषि भूमि तैयार की जाती थी, वे भी सिकुड़ रहे हैं। अनेक सरकारें स्थानान्तरी कृषि से जुड़े कबीलियाई लोगों को स्थायी रूप से बसाने के प्रयास कर रही हैं। इससे भी इस प्रकार की कृषि कम हो रही है। इन कारणों से स्पष्ट है कि स्थानान्तरी कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है।

(ii) बाजारीय सब्जी कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप ही क्यों की जाती है?
उत्तर;
बाजारीय सब्जी कृषि को ‘ट्रक कृषि’ भी कहते हैं। इसके नगरीय क्षेत्रों के समीप किए जाने के कारण निम्नलिखित हैं

  • नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या की अधिकता के कारण सब्जी की माँग अधिक होती है और वृहद् बाजार उपलब्ध होता है।
  • इन क्षेत्रों में परिवहन की सुविधा के कारण सब्जियाँ आसानी से खपत केन्द्रों पर भेजी जा सकती हैं।
  • पूर्ति की तुलना में माँग की अधिकता के कारण सब्जी की कीमत उच्च होती है।

(iii) विस्तृत पैमाने पर डेयरी कृषि का विकास यातायात के साधनों एवं प्रशीतकों के विकास के बाद ही क्यों सम्भव हो सका है?
उत्तर:
डेयरी कृषि के मुख्य उत्पाद दूध और दुग्ध पदार्थ होते हैं जो शीघ्र ही खराब होने वाली वस्तुएँ हैं। इसे उपभोक्ता तक पहुँचाने के लिए आवश्यक है कि यातायात के साधन तीव्र और सक्षम हों और इन वस्तुओं को कुछ देर तक बचाए रखने के लिए प्रशीतन प्रणाली विकसित हो। इसी कारण यातायात के साधनों और प्रशीतकों के विकास के बाद ही डेयरी कृषि का विस्तृत पैमाने पर विकास सम्भव हो पाया।

प्रश्न 3.
निम्न प्रश्नों का 150 शब्दों में उत्तर दीजिए(i) चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में अन्तर कीजिए।
उत्तर:
चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में अन्तर
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(ii) रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ बताइए एवं भिन्न-भिन्न देशों में उगाई जाने वाली कुछ प्रमुख रोपण फसलों के नाम बताइए।
उत्तर:
रोपण कृषि की विशेषताएँ/गुण/लक्षण रोपण कृषि की प्रमुख विशेषताएँ/गुण/लक्षण निम्नलिखित हैं

  • रोपण कृषि बड़े-बड़े आकार के फार्मों पर की जाती है।
  • इस कृषि में अधिक पूँजी निवेश, उच्च प्रबन्धन एवं वैज्ञानिक तकनीकियों का प्रयोग किया जाता है।
  • इस कृषि से उत्पादित अधिकांश भाग निर्यात कर दिया जाता है।
  • इस प्रकार की कृषि में एक फसल के उत्पादन पर ही अधिक जोर दिया जाता है।
  • इस कृषि में वैज्ञानिक विधियों, मशीनों, उर्वरक आदि का प्रयोग होता है।
  • इस कृषि में कुशल श्रमिक कार्य करते हैं। ये श्रमिक स्थानीय होते हैं। कुछ प्रदेशों में दास श्रमिक भी कार्य करते हैं।
  • बाजारों एवं कृषि बागानों को सुचारु रूप से जोड़ने के लिए कुशल व सस्ते परिवहन का प्रयोग किया जाता है।
  • यह लाभ प्राप्त करने वाली वृहद् उत्पादन प्रणाली है जिसका विकास यूरोपीय लोगों द्वारा विश्व के अनेक औपनिवेशिक देशों में किया गया है।
  • यह कृषि मुख्य रूप से उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में की जाती है।

विभिन्न देशों में उगाई जाने वाली प्रमुख रोपण फसलें

क्र०सं० देश का नाम प्रमुख रोपण फसल
1. भारत चाय
2. श्रीलंका चाय
3. मलयेशिया रबड़
4. ब्राजील कॉफी
5. पश्चिमी द्वीप समूह गन्ना एवं केला
6. पश्चिमी अफ्रीका कॉफी एवं कोको
7. फिलीपीन्स नारियल व गन्ना

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 5 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आखेटकों और भोजन संग्राहकों की मुख्य विशेषताएँ बताइए तथा संग्रहण के उत्पाद और उपयोग बताइए। .
उत्तर:
आखेटकों और भोजन संग्राहकों की विशेषताएँ
आखेटकों और भोजन संग्राहकों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • आखेट और भोजन संग्रहण का कार्य आदिमकालीन समाज के लोग करते हैं
  • ये लोग अपने भोजन, वस्त्र तथा आवास की आवश्यकता की पूर्ति हेतु पशुओं एवं वनस्पति का संग्रह करते हैं।
  • ये लोग भोजन की तलाश में भटकते रहते हैं।
    UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Primary Activities 2
  • ये लोग छोटे समूहों में रहते हैं। इनकी कोई निजी सम्पत्ति नहीं होती।
  • ये लोग आखेट के लिए भालों और तीरकमान का उपयोग करते हैं।
  • ये लोग स्थानीय पदार्थों से वस्त्रों और आवास की व्यवस्था करते हैं।
  • ये लोग विभिन्न जलवायु प्रदेशों और संसाधनों वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक जीवनयापन करते हैं।
  • सामान्यतया ये लोग अपनी जीवन पद्धति के द्वारा अपने पर्यावरण में कोई परिवर्तन नहीं करते।

संग्रहण के उत्पाद और उपयोग
संग्रहण के प्रमुख उत्पाद और उपयोग इस प्रकार हैं

  • भोजन के लिए कन्द-मूल, नट, फल, शहद, पुष्प व चिकिल आदि।
  • वस्त्रों के लिए पेड़ों की छाल, पत्ते, घास व कुछ विशिष्ट किस्म के पेड़ों का रेशा।
  • अस्थायी निवास के लिए झोपड़ी, छप्पर निर्माण हेतु बाँस, टहनियाँ, पत्तियाँ व घास-फूस।
  • भोजन बनाने, सर्दी से बचने तथा जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए आग जलाने के लिए लकड़ी।
  • विभिन्न रोगों का उपचार करने के लिए औषधियाँ तथा जड़ी-बूटियाँ।

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प्रश्न 2.
चलवासी पशुचारण की प्रमुख विशेषताएँ तथा इससे सम्बन्धित क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चलवासी पशुचारण-चलवासी पशुचारण जीवन-निर्वाह का प्राचीन व्यवसाय रहा है। चूंकि ये पशुचारक स्थायी जीवन नहीं जीते; इसलिए इन्हें ‘चलवासी’ कहा जाता है।
चलवासी पशुचारण की विशेषताएँ
चलवासी पशुचारण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(1) इस कृषि में पशुचारक अपने पालतू पशुओं के साथ पानी व चरागाह की उपलब्धता एवं गुणवत्ता के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित होते रहते हैं।

(2) इसमें पशुचालक न तो चारे की फसल उगाते हैं और न ही घास उगाने की व्यवस्था करते हैं। अत: इनके पशु पूर्णतया प्राकृतिक वनस्पति पर निर्भर करते हैं।

(3) प्रत्येक पशुचारक वर्ग अपने-अपने निश्चित चरागाह क्षेत्र में विचरण करता है। इन चरागाहों के सुस्पष्ट सीमा क्षेत्र होते हैं।

(4) इन्हें जानकारी होती है कि इनके द्वारा विचरित क्षेत्र में मौसम के अनुसार जल और घास कहाँ और कितनी मिलेगी।

(5) भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के पशु पाले जाते हैं। उदाहरणत: उष्ण कटिबन्धीय अफ्रीका के बढ़िया चरागाहों में गाय-बैल प्रमुख पशु हैं, जबकि सहारा तथा एशिया के शुष्क मरुस्थलों में भेड़, बकरी और ऊँट अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में गधे व घोड़े पाले जाते हैं। तिब्बत तथा एण्डीज के उच्च पठारी भागों में याक व लामा तथा आर्कटिक और उपउत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में रेण्डियर पाले जाते हैं।

(6) चलवासी पशुचारक अपने भोजन, वस्त्र, शरण, औजार तथा यातायात के लिए अपने पशुओं व उनके उत्पादों पर निर्भर करते हैं।

(7) नए चरागाहों की खोज में ये पशुचारक समतल भागों तथा पर्वतीय क्षेत्रों में लम्बी दूरियाँ तय करते हैं। गर्मियों में मैदानी भाग से पर्वतीय चरागाह की ओर तथा शीत में पर्वतीय भाग से मैदानी चरागाहों की तरफ प्रवास करते हैं। इनकी इस गतिविधि को ‘ऋतु प्रवास’ कहते हैं।

चलवासी पशुचारण से सम्बन्धित क्षेत्र
चलवासी पशुचारण से सम्बन्धित तीन प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • चलवासी पशुचारण का प्रमुख क्षेत्र उत्तरी अफ्रीका के अटलाण्टिक तट से अरब प्रायद्वीप होता हुआ मंगोलिया एवं मध्य चीन तक विस्तृत है।
    UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Primary Activities 3
  • दूसरा क्षेत्र यूरोप तथा एशिया के टुण्ड्रा प्रदेश में है।
  • तीसरा क्षेत्र दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका एवं मैडागास्कर द्वीप पर है।

प्रश्न 3.
वाणिज्य पशुधन पालन की प्रमुख विशेषताएँ तथा इससे सम्बन्धित क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वाणिज्य पशुधन पालन की विशेषताएँ
वाणिज्य पशुधन पालन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • वाणिज्य पशुधन पालन अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित एवं पूँजी प्रधान है।
  • यह पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है एवं फार्म भी स्थायी होते हैं।
  • इसमें फार्म विशाल क्षेत्र पर फैले होते हैं तथा सम्पूर्ण क्षेत्र को छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित कर दिया जाता है। चराई को नियन्त्रित करने के लिए इन्हें बाड़ लगाकर एक-दूसरे से अलग कर दिया जाता है।
  • इसमें पशुओं की संख्या चरागाह की वहन क्षमता के अनुसार रखी जाती है। .
  • यह एक विशिष्ट गतिविधि है, जिसमें केवल एक ही प्रकार के पशु पाले जाते हैं। प्रमुख पशुओं में भेड़, बकरी, गाय-बैल एवं घोड़े हैं।
  • पालतू पशुओं से प्राप्त मांस, खालें एवं ऊन को वैज्ञानिक ढंग से संसाधित तथा डिब्बाबन्द कर विश्व के बाजारों में निर्यात कर दिया जाता है।
  • पशु फार्म में पशुधन पालन वैज्ञानिक आधार पर किया जाता है। इसमें प्रमुख ध्यान पशुओं के प्रजनन, जननिक सुधार रोगों पर नियन्त्रण तथा उनके स्वास्थ्य पर दिया जाता है।

वाणिज्य पशुधन पालन से सम्बन्धित क्षेत्र
वाणिज्य पशुधन पालन विश्व के सात क्षेत्रों में मुख्यत: किया जाता है
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  • उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र।
  • दक्षिणी अमेरिका में वेनेजुएला का लानोस घास स्थल।
  • ब्राजील के पठारी भाग में अर्जेण्टीना की दक्षिणी सीमा का क्षेत्र।
  • दक्षिणी अफ्रीका का वेल्ड क्षेत्र।।
  • ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैण्ड की शीतोष्ण घास भूमि।
  • कैस्पियन सागर के पूर्व में स्थित क्षेत्र।
  • अरब सागर के उत्तर में स्थित क्षेत्र।

प्रश्न 4.
आदिकालीन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ तथा इससे सम्बन्धित क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदिकालीन निर्वाह कृषि की विशेषताएँ
आदिकालीन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • आदिकालीन निर्वाह कृषि को स्थानान्तरणशील कृषि भी कहा जाता है।
  • यह कृषि उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में की जाती है जहाँ आदिम जाति के लोग कृषि करते हैं।
  • इस कृषि में वनस्पति को जलाकर साफ करके कृषि कार्य किया जाता है।
  • यह कृषि कर्तन एवं दहन कृषि भी कहलाती है।
  • इस कृषि में खेत बहुत छोटे-छोटे होते हैं तथा कृषि भी परम्परागत औजारों यथा–कुदाली, फावड़ा, लकड़ी आदि से की जाती है।
  • जब भूमि का उपजाऊपन समाप्त हो जाता है, तब कृषक नए क्षेत्र में वन जलाकर कृषि के लिए भूमि तैयार करता है।
  • यह कृषि किसान व उसके परिवार के जीवन-निर्वाह के उद्देश्य से की जाती है।
  • इस कृषि में प्रति इकाई भूमि व प्रति व्यक्ति उपज कम होती है।
  • इस कृषि में खाद्यान्न फसलें मुख्य रूप से उगाई जाती हैं। प्रमुख फसलें मक्का, कसावा, केला व शकरकन्दी आदि हैं।

आदिकालीन निर्वाह कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र
आदिकालीन निर्वाह कृषि से सम्बन्धित प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में।
  • मध्य अमेरिका एवं मैक्सिको में।
  • मलयेशिया व इण्डोनेशिया में।
  • ब्राजील में।
  • जायरे में।
  • मध्य अफ्रीका में।
  • फिलीपीन्स में।

आदिकालीन निर्वाह कृषि के स्थानीय नाम
आदिकालीन निर्वाह कृषि को विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में इसे ‘झूम’, मलयेशिया व इण्डोनेशिया में ‘लादांग’, मध्य अमेरिका व मैक्सिको में ‘मिल्पा’, ब्राजील में ‘रोका’, जायरे व मध्य अफ्रीका में ‘मसोले’ तथा फिलीपीन्स में ‘चेनगिन’ कहा जाता है।
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प्रश्न 5.
गहन निर्वाह कृषि के प्रकार बताते हुए इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गहन निर्वाह कृषि—यह कृषि की वह पद्धति है जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रति इकाई भूमि पर पूँजी और श्रम का अधिक मात्रा में निवेश किया जाता है।
गहन निर्वाह कृषि के प्रकार
गहन निर्वाह कृषि के दो प्रकार हैं
1. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि — इसमें चावल मुख्य फसल होती है। जनसंख्या घनत्व की अधिकता के कारण खेत छोटे होते हैं। कृषि में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है। भूमि का गहन उपयोग होता है तथा मानव श्रम का अपेक्षाकृत अधिक महत्त्व है। भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए गोबर खाद व हरी खाद का उपयोग किया जाता है। इसमें प्रति इकाई उत्पादन अधिक एवं प्रति कृषक उत्पादन कम होता है।

2. चावल रहित गहन निर्वाह कृषि — मानसून एशिया के अनेक भागों में उच्चावच, जलवा (, मृदा तथा अन्य भौगोलिक दशाएँ चावल की खेती के लिए अनुकूल नहीं हैं। ऐसे ठण्डे और कम वर्षा वाले क्षेत्र उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरी कोरिया एवं उत्तरी जापान में स्थित हैं। यहाँ चावल की अपेक्षा गेहूँ, सोयाबीन, जौ एवं सोरघम बोया जाता है। भारत के गंगा-सिन्धु मैदान के पश्चिमी भाग में गेहूँ और दक्षिणी एवं पश्चिमी शुष्क प्रदेश में ज्वार-बाजरा मुख्य रूप से उगाया जाता है। इस कृषि में सिंचाई की जरूरत पड़ती है।
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गहन निर्वाह कृषि की विशेषताएँ
गहन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • जनसंख्या घनत्व की अधिकता के कारण खेतों का आकार छोटा होता है।
  • कृषि कार्य में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है।
  • इस कृषि में यन्त्रों का महत्त्व अपेक्षाकृत कम होता है और मानव श्रम का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
  • कृषि भूमि पर जनसंख्या के अधिक दबाव के कारण भूमि का अनुकूलतम प्रयोग करने की चेष्टा की जाती है।
  • कृषि की गहनता इतनी अधिक है कि एक वर्ष में तीन या चार फसलें उगाई जाती हैं।
  • भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए पशुओं की गोबर की खाद एवं हरी खाद का उपयोग किया जाता है।
  • इस कृषि में प्रति इकाई उत्पादन अधिक होता है, लेकिन प्रति कृषक उत्पादन कम होता है।
  • इस कृषि में खाद्यान्न फसलों पर अधिक जोर दिया जाता है।
  • यह कृषि अत्यधिक उपजाऊ भूमि और उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्रों में की जाती है।

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प्रश्न 6.
रोपण कृषि की विशेषताएँ बताते हुए इसके क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रोपण कृषि की विशेषताएँ
रोपण कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • यह एक प्रकार की आधुनिक, संगठित एवं व्यवस्थित कृषि है जिसकी तुलना विनिर्माण उद्योग से की जा सकती है।
  • इस कृषि में कृषि क्षेत्र का आकार बहुत विस्तृत होता है।
  • इस कृषि में अधिक पूँजी निवेश, उच्च प्रबन्ध एवं तकनीकी आधार एवं वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  • यह एकफसली कृषि है जिसमें किसी एक फसल के उत्पादन पर ही विशिष्टीकरण किया जाता है।
  • इस कृषि में सस्ते श्रमिक उपलब्ध हो जाते हैं।
  • इन कृषि क्षेत्रों की विकसित यातायात व्यवस्था बागान एवं बाजार को सुचारु रूप से जोड़े रहती है।
  • इस कृषि में फार्मों पर मशीनों, उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं व रोगनाशक रसायनों का प्रयोग किया जाता है।
  • इस कृषि में बागानों की प्रमुख उपजें रबड़, चाय, कॉफी, कोको, कपास, गन्ना, केले, अनन्नास, गरी, पटसन व सन हैं।
  • बागानों उपजों को फार्मों पर ही संसाधित करके निर्यात हेतु उपलब्ध कराया जाता है।

रोपण कृषि के प्रमुख क्षेत्र
रोपण कृषि के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • फ्रांसवासियों ने पश्चिमी अफ्रीका में कॉफी एवं कोको की पौध लगाई थी।
  • ब्रिटेनवासियों ने भारत व श्रीलंका में चाय के बागान, मलयेशिया में रबड़ के बागान एवं पश्चिमी द्वीप समूह में गन्ना एवं केले के बागान विकसित किए।
  • स्पेन एवं अमेरिकावासियों ने फिलीपीन्स में नारियल व गन्ने के बागान लगाए।
  • इण्डोनेशिया में एक समय गन्ने की कृषि पर हॉलैण्डवासियों (डचों) का एकाधिकार था।
  • ब्राजील में कुछ कॉफी के बागान, जिन्हें ‘फेजेंडा’ कहा जाता है, यूरोपवासियों के नियन्त्रण में हैं।

प्रश्न 7.
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की विशेषताएँ बताते हुए इसके क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि मध्य अक्षांशों के आन्तरिक अर्द्धशुष्क प्रदेशों में की जाती है।
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की विशेषताएँ
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की प्रमुख फसल गेहूँ है। यद्यपि अन्य फसलें जैसे मक्का, जौ, राई एवं जई भी बोई जाती हैं।
  • इस कृषि में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होता है, किन्तु कृषित भूमि के बड़े क्षेत्रफल के कारण कुल उत्पादन अधिक रहता है।
  • कम जनसंख्या घनत्व के कारण प्रति व्यक्ति अधिक उत्पादन होता है।
  • इस कृषि में खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है तथा खेत जोतने से फसल काटने तक सभी कार्य यन्त्रों द्वारा सम्पन्न किए जाते हैं।
  • इस कृषि में एक या दो फसलों में विशिष्टीकरण प्राप्त कर लिया जाता है जिसमें पैदा किया जाने वाला मुख्य अनाज गेहूँ है।

विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि के प्रमुख क्षेत्र
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज।
  • अर्जेण्टीना के पम्पास।
  • दक्षिणी अफ्रीका के वेल्ड्स।
  • यूरेशिया के स्टैपीज।
  • ऑस्ट्रेलिया के डाउन्स।
  • न्यूजीलैण्ड के केंटरबरी।

उपर्युक्त सभी घास के मैदानों में विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की जाती है।
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प्रश्न 8.
डेयरी फार्मिंग की विशेषताएँ बताते हुए इसके क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
डेयरी फार्मिंग-जिस कृषि पद्धति में दूध व दुग्ध पदार्थों की नगरीय माँग को पूरा करने के लिए पशुओं, विशेष रूप से गायों के पालन और प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जाता है, उसे ‘डेयरी फार्मिंग’ कहते हैं।
डेयरी फार्मिंग की विशेषताएँ
डेयरी फार्मिंग की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • डेयरी फार्मिंग दुधारू पशुओं के पालन-पोषण का सर्वाधिक उन्नत एवं दक्ष प्रकार है।
  • इसमें पूँजी की अधिक आवश्यकता होती है।
  • इसमें पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन एवं पशु चिकित्सा पर भी अधिक ध्यान दिया जाता है।
  • इसमें पशुओं को चराने, दूध निकालने आदि कार्यों के लिए वर्षभर गहन श्रम की आवश्यकता होती है।
  • डेयरी फार्मिंग का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केन्द्रों के समीप किया जाता है, क्योंकि ये क्षेत्र डेयरी फार्मिंग के उत्पादों के अच्छे खपत केन्द्र होते हैं।
  • वर्तमान समय में विकसित परिवहन के साधनों प्रशीतकों के उपयोग, पाश्चुरीकरण की सुविधा के कारण विभिन्न डेयरी उत्पादों को अधिक समय तक रखा जा सकता है।

डेयरी फार्मिंग के प्रमुख क्षेत्र
डेयरी फार्मिंग के तीन प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • सबसे बड़ा प्रदेश – उत्तर-पश्चिमी यूरोप।
  • दूसरा क्षेत्र – कनाडा।
  • तीसरा क्षेत्र-न्यूजीलैण्ड, दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया एवं तस्मानिया।
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प्रश्न 9.
ट्रक कृषि क्या है? ट्रक कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ट्रक कृषि-नकदी कमाने अथवा व्यापार के उद्देश्य से सब्जियों व फलों की विशेषीकृत कृषि जो नगरों से काफी दूर सुगम मार्गों से जुड़े स्थानों पर की जाती है और जिसमें परिवहन की आवश्यकता होती है, ‘ट्रक कृषि’ कहलाती है।
‘ट्रक’ शब्द का प्रयोग अधिकांशतः संयुक्त राज्य अमेरिका में किया जाता है जिसका सीधा-सीधा अर्थ होता है— “बाजार के लिए उगाई गई ताजी सब्जियाँ व फल।”

ट्रक कृषि की विशेषताएँ
ट्रक कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • ट्रक कृषि में अधिक मुद्रा मिलने वाली फसलें जैसे सब्जियाँ, फल एवं पुष्प लगाए जाते हैं जिनकी माँग नगरीय क्षेत्रों में होती है।
  • इस कृषि में खेतों का आकार छोटा होता है।
  • इस कृषि में खेत अच्छे यातायात साधनों के द्वारा नगरीय केन्द्रों से जड़े रहते हैं।
  • इस कृषि में गहन श्रम एवं अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है।
  • इस कृषि में उर्वरक, सिंचाई, उत्तम बीज, कीटनाशकों, हरित गृह एवं शीत क्षेत्रों में कृत्रिम ताप का भी उपयोग किया जाता है।
  • इस कृषि में गहन कृषि पद्धति अपनाई जाती है व छोटी-छोटी भू-जोतों पर सिंचाई की सुविधा, खाद एवं उन्नत बीजों का प्रयोग करके अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जाता है।

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प्रश्न 10.
खनन क्या है? खनन की विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खनन का अर्थ-पृथ्वी के सतह से अथवा भूगर्भ से चट्टानी पदार्थों को अधिक उपयोगी तथा मूल्यवान बनाने के उद्देश्य से संसाधित करने के लिए हटाना या खोदना ‘खनन’ कहलाता है।
खनन की विधियाँ
उपस्थिति की अवस्था एवं अयस्क की प्रकृति के आधार पर खनन के दो प्रकार हैं
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(1) धरातलीय खनन एवं (2) भूमिगत खनन।
1. धरातलीय खनन – धरातलीय खनन को ‘विवृत्त खनन’ भी कहा जाता है। इस विधि में धरातल की मिट्टी, चट्टानों आदि को हटाकर खनिज की परतों को खोदा, काटा या विस्फोटित किया जाता है। यह खनन का सबसे आसान व सस्ता तरीका है। इस विधि में सुरक्षात्मक पूर्वोपायों एवं उपकरणों पर होने वाली ऊपरी लागत अपेक्षाकृत कम होती है। खनिजों का उत्पादन भी शीघ्र व अधिक होता है। धरातलीय खनन तभी सफल व उपयोगी होता है जहाँ खनिजों के भण्डार धरातल के समीप कम गहराई पर अवस्थित होते हैं।

2. भूमिगत खनन – भूमिगत खनन को ‘कूपकी खनन’ भी कहा जाता है। जब अयस्क धरातल के नीचे गहराई में होता है तब इस विधि का प्रयोग किया जाता है। इस विधि में लम्बवत् कूपक गहराई तक स्थित हैं, जहाँ से भूमिगत गैलरियाँ खनिजों तक पहुँचने के लिए फैली हैं। इन मार्गों से होकर खनिजों का निष्कर्षण एवं परिवहन धरातल तक किया जाता है। खदानों में कार्यरत् श्रमिकों तथा निकाले जाने वाले खनिजों के सुरक्षित और प्रभावी परिवहन हेतु इसमें विशेष प्रकार की लिफ्टें, बरमा माल ढोने की गाड़ियाँ तथा वायु संचार प्रणाली की आवश्यकता होती है। भूमिगत खनन, धरातलीय खनन की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण होता है। इनमें जहरीली गैसों, आग, बाढ़ तथा सुरंगों और गुफाओं के बैठ जाने के कारण जानलेवा दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भोजन संग्रहण करने वाले लोगों द्वारा पौधे के विभिन्न भागों के उपयोग पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भोजन संग्राहकों द्वारा पौधे के विभिन्न भागों का उपयोग–भोजन संग्राहक कीमती पौधों की पत्तियाँ, छाल एवं औषधीय पौधों को सामान्य रूप से संशोधित कर बाजार में विक्रय का कार्य भी करते हैं। पौधे के विभिन्न भागों का ये उपयोग करते हैं। उदाहरण के तौर पर

  • छाल का उपयोग कुनैन, चमड़ा तैयार करना एवं कार्क के लिए।
  • पत्तियों का उपयोग पेय पदार्थ, दवाइयाँ एवं कान्तिवर्द्धक वस्तुओं के लिए।
  • रेशे का उपयोग कपड़ा बनाने के लिए।
  • दृढ़फल का उपयोग भोजन एवं तेल के लिए।
  • तने का उपयोग रबड़, बलाटा, गोंद व राल बनाने के लिए।

प्रश्न 2.
वर्तमान में भोजन संग्रह विश्व के किन-किन भागों में किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वर्तमान में भोजन संग्रह विश्व के दो भागों में किया जाता है

  • उच्च अक्षांश के क्षेत्र जिनमें उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया एवं दक्षिणी चिली आते हैं।
  • निम्न अक्षांश के क्षेत्र जिनमें अमेजन बेसिन, उष्ण कटिबन्धीय अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया का आन्तरिक भाग आता है।

प्रश्न 3.
संग्रहण के भविष्य पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संग्रहण का भविष्य – आज विश्व स्तर पर भोजन संग्रहण का अधिक महत्त्व नहीं रहा है। विश्व बाजार की प्रतिस्पर्धा में इन क्रियाओं द्वारा प्राप्त उत्पाद पिछड़ जाते हैं। अनेक प्रकार के गुणवत्ता और कम मूल्य वाले कृत्रिम उत्पादों ने उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन के भोजन संग्रह करने वाले समूहों के उत्पादों का स्थान ले लिया है।

प्रश्न 4.
चलवासी पशुचारण के क्षेत्रों की विशेषताएँ समझाइए।
उत्तर:
चलवासी पशुचारण के क्षेत्र की विशेषताएँ
चलवासी पशुचारण के क्षेत्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(1) चलवासी पशुचारण के क्षेत्र सामान्यतया कठोर प्राकृतिक दशाओं वाले होते हैं। ये क्षेत्र या तो अत्यधिक गर्म व शुष्क हैं या अत्यधिक ठण्डे।

(2) विषम जलवायु के कारण यहाँ घास और झाड़ियाँ छोटी-छोटी और बिखरे टुकड़ों में पायी जाती हैं। अधिक शुष्क मौसम आने पर घास का घनत्व भी कम हो जाता है। इससे घास के मैदानों में प्रति इकाई भूमि की वहन शक्ति घट जाती है। इस कारण चरवाहों को बहुत विस्तृत क्षेत्र में पशुचारण कराना पड़ता है।

प्रश्न 5:
गहन जीविकोपार्जी कृषि की नवीन प्रवृत्तियों पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
गहन जीविकोपार्जी कृषि की नवीन प्रवृत्तियाँ-पिछले दो दशकों में उन क्षेत्रों में जहाँ चावल तथा गेहूँ की उन्नत किस्मों के संकर बीजों को बोया गया है, वहाँ कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुछ क्षेत्रों में रासायनिक खादों, फफूंदीनाशक एवं कीटनाशक दवाओं तथा सिंचाई सुविधाओं का प्रयोग होने से परम्परागत जीविकोपार्जी कृषि में वाणिज्यिक कृषि की कुछ विशेषताएँ विकसित हो गई हैं।

प्रश्न 6.
मिश्रित कृषि व डेयरी कृषि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि व डेयरी कृषि में अन्तर
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 5 Primary Activities 10

प्रश्न 7.
रोपण कृषि व उद्यान कृषि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रोपण कृषि व उद्यान कृषि में अन्तर
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प्रश्न 8.
मिश्रित कृषि किसे कहते हैं? इसके प्रचलन वाले क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि – वह कृषि जिसमें फसलों को उगाने के साथ-साथ पशुओं को पालने का कार्य भी किया जाता है, उसे ‘मिश्रित कृषि’ कहा जाता है।
मिश्रित कृषि के प्रचलन वाले क्षेत्र – मिश्रित कृषि का अधिक प्रचलन पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, अर्जेण्टीना, दक्षिणी अफ्रीका, न्यूजीलैण्ड व दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में है।

प्रश्न 9.
विश्व में मिश्रित कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि की विशेषताएँ मिश्रित कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • मिश्रित कृषि विश्व के अत्यधिक विकसित भागों में की जाती है।
  • इस कृषि में खेतों का आकार मध्यम होता है।
  • इस कृषि में बोई जाने वाली फसलें गेहूँ, जौ, राई, जई, मक्का, चारे की फसल एवं कन्द-मूल प्रमुख हैं। चारे की फसलें मिश्रित कृषि के प्रमुख घटक हैं।
  • इस कृषि में फसल उत्पादन एवं पशुपालन दोनों को समान महत्त्व दिया जाता है।
  • फसलों के साथ पशु भी आय के मुख्य स्रोत हैं।
  • शस्यावर्तन (फसलों की हेर-फेर) एवं अन्त:फसली कृषि मृदा की उर्वरता को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • पर्याप्त पूँजी, आधुनिक प्रबन्धन, वैज्ञानिक कृषि विधियाँ, कृषि यन्त्र, इमारतों, रासायनिक एवं हरी खाद के गहन उपयोग, यातायात, शहरी बाजार की समीपता व पर्याप्त वर्षा वाली शीतल जलवायु से इस कृषि को भारी प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 10:
भूमध्यसागरीय कृषि के विस्तार पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भूमध्यसागरीय कृषि का विस्तार (क्षेत्र)-यह एक अति-विशिष्ट प्रकार की वाणिज्य कृषि है जो
(1) यूरोप में भूमध्यसागर के तटीय क्षेत्रों
(2) एशिया माइनर
(3) उत्तरी अफ्रीका की तटीय पट्टियों पर ट्यूनीशिया से अटलाण्टिक तट तक विस्तृत है। भूमध्य सागरीय तटों से दूर यह कृषि व्यवस्था कैलिफोर्निया (संयुक्त राज्य अमेरिका), मध्य चिली, दक्षिण-पश्चिमी केप प्रान्त (दक्षिण अफ्रीका) और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया . के दक्षिण-पश्चिम में पायी जाती है।

प्रश्न 11.
संसार में भूमध्यसागरीय कृषि की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
भूमध्यसागरीय कृषि की विशेषताएँ

  • भूमध्यसागरीय कृषि अति विशिष्ट प्रकार की कृषि है।
  • अंगूर की कृषि इस कृषि की प्रमुख विशेषता है।
  • यह कृषि मुख्यतः यहाँ की लम्बी ग्रीष्म ऋतु, शीतकालीन वर्षा और शुष्क एवं अकालग्रस्त अवधि में कृत्रिम सिंचाई द्वारा प्रभावित रहती है।
  • शीत ऋतु में जब यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में फलों एवं सब्जियों की माँग होती है तब उनकी पूर्ति इसी क्षेत्र से की जाती है।

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प्रश्न 12.
पश्चिमी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के औद्योगिक क्षेत्रों की कारखाना कृषि की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
कारखाना कृषि की विशेषताएँ
कारखाना कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • कारखाना कृषि में गाय-बैल एवं कुक्कुट जैसा पशुधन पाला जाता है।
  • इस कृषि में पशुधन को बाड़े में रखा जाता है और वहाँ उन्हें कारखाने में बना-बनाया भोजन (चारा) दिया जाता है।
  • इस कृषि में भवन निर्माण, यन्त्र खरीदने, प्रकाश एवं ताप की व्यवस्था करने तथा पशुओं के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर पर्याप्त पूँजी निवेश करना पड़ता है।
  • कुक्कुट एवं पशुओं की श्रेष्ठ नस्ल का यहाँ संवर्धन किया जाता है और उनके लिए प्रजनन की वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 13.
सहकारी कृषि क्या है? विश्व में इसके क्षेत्र बताइए।
उत्तर:
सहकारी कृषि – जब कृषकों का एक समूह अपनी कृषि से अधिक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर कृषि कार्य सम्पन्न करे उसे ‘सहकारी कृषि’ कहते हैं। इसमें व्यक्तिगत कार्य अक्षुण्ण रहते हुए सहकारी रूप में कृषि की जाती है।

विश्व में सहकारी कृषि के क्षेत्र – सहकारी कृषि विश्व के कुछ विकसित देशों जैसे इटली, नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, नीदरलैण्ड व बेल्जियम इत्यादि में प्रचलित है। सर्वाधिक सफलता इसे डेनमार्क में मिली जहाँ प्रत्येक कृषक इसका सदस्य है।

प्रश्न 14.
सामूहिक कृषि पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सामूहिक कृषि – सामूहिक कृषि का आधारभूत सिद्धान्त यह है कि इसमें उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सम्पूर्ण समाज एवं सामूहिक श्रम पर आधारित होता है। कृषि का यह प्रकार पूर्व सोवियत संघ में प्रारम्भ हुआ था जहाँ कृषि की स्थिति सुधारने एवं उत्पादन में वृद्धि व आत्म-निर्भरता प्राप्ति हेतु सामूहिक कृषि प्रारम्भ की गई। इस प्रकार की कृषि को सोवियत संघ में ‘कोलखहोज’ नाम दिया गया।

प्रश्न 15.
संसार में सामूहिक कृषि की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
सामूहिक कृषि की विशेषताएँ
सामूहिक कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • सामूहिक कृषि में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सम्पूर्ण समाज एवं सामूहिक श्रम पर आधारित होता था।
  • इस कृषि में कृषक अपने संसाधन जैसे भूमि, पशुधन एवं श्रम को मिलाकर कृषि कार्य करते थे।
  • इस कृषि में कृषक अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमि का छोटा-सा भाग अपने अधिकार में भी रखते थे।
  • इस कृषि में फार्म बड़े आकार के थे।
  • कृषि का अधिकांश कार्य मशीनों से होता था।

प्रश्न 16.
खनन को प्रभावित करने वाले भौतिक कारकों को समझाइए।
उत्तर:
खनन को प्रभावित करने वाले भौतिक कारक खनन को प्रभावित करने वाले भौतिक कारक निम्नलिखित हैं

  • खनिज क्षेत्र का विस्तार जितना विस्तृत होगा खनिज का निष्कासन आर्थिक दृष्टि से उतना ही लाभदायक होगा।
  • खनिज क्रिया, खनिज की गहराई पर भी निर्भर करती है। अधिक गहराई में पाए जाने वाले खनिज आर्थिक दृष्टि से अधिक लाभदायक नहीं होते।
  • खनिज का अंश जितना अधिक होगा उतनी ही उस खनिज की गुणवत्ता अधिक होगी। उतना ही खनिज लाभदायक होगा।

प्रश्न 17.
खनन को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारकों को समझाइए।
उत्तर:
खनन को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारक खनन को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारक निम्नलिखित हैं

  • खदान को विकसित करने के लिए आवश्यक पूँजी।
  • खनन कार्य के लिए आवश्यक तकनीक, ज्ञान व प्रौद्योगिकी।
  • पर्याप्त मात्रा में सस्ते श्रम की उपलब्धता।
  • परिवहन के प्रकार, उनके विकास की स्थिति व क्षमता।
  • खनिजों की स्थानीय व अन्तर्राष्ट्रीय मांग इत्यादि।

अतिलघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आर्थिक क्रिया किसे कहते हैं?
उत्तर:
मानव के वह कार्यकलाप जिनसे आय प्राप्त होती है, उन्हें ‘आर्थिक क्रिया’ कहा जाता है।

प्रश्न 2.
आर्थिक क्रियाओं को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
आर्थिक क्रियाओं को चार भागों में बाँटा जा सकता है

  • प्राथमिक
  • द्वितीयक
  • तृतीयक तथा
  • चतुर्थक क्रियाएँ।

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प्रश्न 3.
प्राथमिक क्रियाएँ किस पर निर्भर हैं.और क्यों?
उत्तर:
प्राथमिक क्रियाएँ सीधे-सीधे पर्यावरण पर निर्भर हैं क्योंकि ये प्राकृतिक संसाधनों जैसे भूमि, जल, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं खनिजों के उपयोग से जुड़ी हुई हैं।

प्रश्न 4.
प्राथमिक क्रियाओं में कौन-कौन से कार्य शामिल किए जाते हैं?
उत्तर:
प्राथमिक क्रियाओं में आखेट, भोजन-संग्रह, पशुचारण, मछली पकड़ना, वनों से लकड़ी काटना, कृषि एवं खनन कार्य शामिल किए जाते हैं।

प्रश्न 5.
चिकल किसे कहते हैं?
उत्तर:
चुविंगगम चूसने के बाद शेष बचे भाग को ‘चिकल’ कहते हैं। ये जेपोटा वृक्ष के दूध से बनता है।

प्रश्न 6.
कृषि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विभिन्न प्रकार की फसलों का बोया जाना तथा पशुपालन कृषि कहलाता है।

प्रश्न 7.
रैन्च (Ranch) क्या है?
उत्तर:
वाणिज्य पशुधन पालन में पशुओं को सैकड़ों वर्ग किमी क्षेत्र के बाड़ों में रखा जाता है, जिन्हें प्रेयरी क्षेत्र (उत्तरी अमेरिका) में ‘रैन्च’ कहा जाता है।

प्रश्न 8.
एस्टेंशिया (Estancia) क्या है?
उत्तर:
वाणिज्य पशुधन पालन में पशुओं को सैकड़ों वर्ग किमी क्षेत्र के बाड़ों में रखा जाता है, जिन्हें पम्पास क्षेत्र (दक्षिणी अमेरिका) में ‘एस्टेंशिया’ कहा जाता है।

प्रश्न 9.
निर्वाह कृषि को वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
निर्वाह (जीविकोपार्जी) कृषि को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है

  • आदिकालीन निर्वाह कृषि एवं
  • गहन निर्वाह कृषि।

प्रश्न 10.
आदिकालीन निर्वाह कृति के कोई दो स्थानीय नाम क्षेत्र सहित लिखिए।
उत्तर:
आदिकालीन निर्वाह कृषि के स्थानीय नाम हैं

  • भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में – झूमिंग कृषि
  • मलयेशिया व इण्डोनेशिया में – लदांग

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प्रश्न 11.
मिल्या क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आदिकालीन निर्वाह (स्थानान्तरित) कृषि को मध्य अमेरिका एवं मैक्सिको में ‘मिल्पा’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 12.
उन दो क्रियाओं के नाम बताइए जिन पर आदिमकालीन मानव अपने जीवन निर्वाह के लिए निर्भर रहते हैं।
उत्तर:
आखेट तथा संग्रहण।

प्रश्न 13.
चलवासी पशुचारण क्या है?
उत्तर:
चलवासी पशुचारण वह मानवीय क्रिया है जिसमें पशुचारक चारे एवं जल की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं।

प्रश्न 14.
विश्व में चलवासी पशुचारकों की संख्या क्यों घट रही है? इसका मुख्य कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
चरागाह धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। उन पर कृषि की जा रही है तथा घर बनाए जा रहे हैं।

प्रश्न 15.
मिश्रित कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह कृषि जिसमें फसलों को उगाने के साथ-साथ पशुओं को पालने का कार्य भी किया जाता है, उसे ‘मिश्रित कृषि’ कहा जाता है।

प्रश्न 16.
विश्व में मिश्रित कृषि के विस्तार वाले क्षेत्रों के नाम बताइए।
उत्तर:
उत्तर-पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका का पूर्वी भाग, यूरेशिया के कुछ भाग तथा दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश वाले भागों में मिश्रित कृषि का विस्तार है।

प्रश्न 17.
मिश्रित कृषि की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि की विशेषताएँ हैं

  • विकसित कृषि यन्त्र,
  • रासायनिक व वनस्पति खाद का गहन उपयोग।

प्रश्न 18.
डेयरी कृषि का कार्य कहाँ किया जाता है और क्यों?
उत्तर:
डेयरी कृषि का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केन्द्रों के समीप किया जाता है, क्योंकि ये क्षेत्र ताजा दूध एवं अन्य डेयरी उत्पाद के अच्छे बाजार होते हैं।

प्रश्न 19.
सहकारी कृषि क्या है?
उत्तर:
जब कृषकों का एक समूह अपनी कृषि से अधिक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर कृषि कार्य सम्पन्न करे तो उसे ‘सहकारी कृषि’ कहते हैं।

प्रश्न 20.
सामूहिक कृषि का आधारभूत सिद्धान्त क्या है?
उत्तर:
सामूहिक कृषि का आधारभूत सिद्धान्त यह होता है कि इसमें उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सम्पूर्ण समाज व सामूहिक श्रम पर आधारित होता है।

प्रश्न 21.
कोलखहोज क्या है?
उत्तर:
सामूहिक कृषि को सोवियत संघ में कोलखहोज के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 22.
कारखाना कृषि कहाँ की जाती है?
उत्तर:
पश्चिमी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यान कृषि के अलावा कारखाना कृषि भी की जाती है।

प्रश्न 23.
खनन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी की सतह से अथवा भूगर्भ से चट्टानी पदार्थों को अधिक उपयोगी व मूल्यवान बनाने के उद्देश्य से संसाधित करने के लिए हटाना या खोदना ‘खनन’ कहलाता है।

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प्रश्न 24.
अयस्क किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन कच्ची धातुओं से खनिज मिलते हैं, उन्हें ‘अयस्क’ कहा जाता है।

प्रश्न 25:
उत्खनन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
यदि धरातल से खुदाई करके खनिज प्राप्त किए जाएँ तो उसे ‘उत्खनन’ कहते हैं।

प्रश्न 26.
खनन की विधियों के नाम बताइए।
उत्तर:
उपस्थिति की अवस्था एवं अयस्क की प्रकृति के आधार पर खनन के दो प्रकार हैं

  • धरातलीय खनन एवं
  • भूमिगत खनन।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
प्राथमिक क्रियाएँ हैं
(a) आखेट
(b) भोजन संग्रह
(c) पशुचारण
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 2.
आर्थिक क्रियाओं के कितने वर्ग हैं
(a) चार
(b) पाँच
(c) छह
(d) सात।
उत्तर:
(a) चार।

प्रश्न 3.
आदिमकालीन समाज किस पर निर्भर था
(a) उद्योगों पर
(b) कृषि पर
(c) व्यापार पर
(d) जंगली पशुओं पर।
उत्तर:
(d) जंगली पशुओं पर।

प्रश्न 4.
प्राचीनतम ज्ञात आर्थिक क्रिया हैं
(a) आखेट
(b) भोजन संग्रह
(c) कृषि
(d) (a) व (b) दोनों।
उत्तर:
(d) (a) व (b) दोनों।

प्रश्न 5.
पौधे की छाल का उपयोग करते हैं
(a) कुनैन में
(b) चमड़ा तैयार करने में
(c) कार्क में
(d) उपर्युक्त सभी में।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी में।

प्रश्न 6.
चलवासी पशुचारण में पशुचारक किस चीज के लिए पशुओं पर ही निर्भर करता है
(a) भोजन
(b) वस्त्र
(c) औजार
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 7.
चलवासी पशुचारण के कितने प्रमुख क्षेत्र हैं
(a) चार
(b) पाँच
(c) छह
(d) तीन।
उत्तर:
(d) तीन।

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प्रश्न 8.
वाणिज्य पशुधन पालन में पाला जाने वाला प्रमुख पश हैं
(a) भेड़ व बकरी
(b) गाय व बैल
(c) घोड़े
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 9.
गहन निर्वाह कृषि के कितने प्रकार हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच।
उत्तर:
(a) दो।

प्रश्न 10.
मलयेशिया व इण्डोनेशिया में स्थानान्तरित कृषि का स्थानीय नाम है
(a) मिल्पा
(b) झूमिंग
(c) लदांग
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) लदांग।

प्रश्न 11.
रोपण कृषि में उगाई जाने वाली प्रमुख फसल है
(a) चाय
(b) रबड़
(c) गन्ना
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 12.
भूमध्यसागरीय कृषि में उगाई जाने वाली फसल है
(a) अंगूर
(b) जैतून
(c) अंजीर
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

प्रश्न 13.
सहकारी कृषि को सर्वाधिक सफलता किस देश में मिली है
(a) डेनमार्क
(b) नीदरलैण्ड
(c) बेल्जियम
(d) स्वीडन।
उत्तर:
(a) डेनमार्क।

प्रश्न 14.
सामूहिक कृषि को कोलखहोज नाम कहाँ दिया गया
(a) नीदरलैण्ड में
(b) कनाडा में
(c) जर्मनी में
(d) सोवियत संघ में।
उत्तर:
(d) सोवियत संघ में।

प्रश्न 15.
खनन की विधियाँ हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच।
उत्तर:
(a) दो।

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 4 Human Development

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 4 Human Development (मानव विकास)

UP Board Class 12 Geography Chapter 4 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 4 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सर्वोत्तम वर्णन करता है
(क) आकार में वृद्धि
(ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन
(ग) आकार में स्थिरता
(घ) गुण में साधारण परिवर्तन।
उत्तर:
(ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन।

(ii) मानव विकास की अवधारणा निम्नलिखित में से किस विद्वान की देन है
(क) प्रो० अमर्त्य सेन
(ख) डॉ० महबूब-उल-हक
(ग) एलन सी० सेम्पुल ।
(घ) रैटजेल।
उत्तर:
(ख) डॉ० महबूब-उल-हक।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए :
(i) मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र कौन-से हैं?
उत्तर:
दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन, ज्ञान प्राप्त करना एवं एक शिष्ट जीवन जीने के लिए पर्याप्त साधनों का होना मानव विकास के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। मानव विकास के ये पक्ष तीन मूलभूत क्षेत्रों में निहित होने आवश्यक हैं

  • संसाधनों तक पहुँच
  • स्वास्थ्य एवं
  • शिक्षा।

उपर्युक्त तीनों क्षेत्र के विकास से ही मानव विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

(ii) मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मानव विकास के चार प्रमुख घटक हैं

  • समता
  • सतत पोषणीयता
  • उत्पादकता और
  • सशक्तीकरण।

(iii) मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक के आधार पर विश्व के देशों का वर्गीकरण निम्नलिखित चार प्रकार से किया गया है, जिसे तालिका में स्पष्ट किया गया है
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक में न दीजिए :
(i) मानव विकास शब्द से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव विकास
मानव विकास का शाब्दिक अर्थ मानव के सर्वांगीण विकास से है। सर्वांगीण विकास के लिए मानव को. स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क तो चाहिए ही साथ ही विकास का उचित अवसर प्रदान करने वाला प्राकृतिक पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक परिवेश भी उपलब्ध होना चाहिए, जो एक नियोजित विकास प्रणाली का आधार है।

मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन डॉ० महबूब-उल-हक के द्वारा किया गया था। डॉ० हक ने मानव विकास का वर्णन एक ऐसे विकास के रूप में किया है जो लोगों के विकल्पों में वृद्धि करता है और उनके जीवन में सुधार लाता है। इस अवधारणा में सभी प्रकार के विकास का केन्द्र बिन्दु मनुष्य है। मानव विकास का मूल उद्देश्य ऐसी दशाओं को उत्पन्न करना है जिनमें लोग सार्थक जीवन व्यतीत कर सकते हैं। दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन जीना, ज्ञान प्राप्त करना तथा एक शिष्ट जीवन जीने के पर्याप्त साधनों का होना मानव विकास के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। अत: मानव विकास ऐसा विकास है जो विकास के विकल्पों में वृद्धि करता है। ये विकल्प स्थिर नहीं बल्कि परिवर्तनशील होते हैं। लोगों के विकल्पों में वृद्धि करने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच में उनकी क्षमताओं का निर्माण करना महत्त्वपूर्ण है। यदि इन क्षेत्रों में लोगों की क्षमता नहीं है तो विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। जैसे एक अशिक्षित बच्चा डॉक्टर बनने का विकल्प नहीं चुन सकता क्योंकि उसका विकल्प शिक्षा के अभाव में सीमित हो गया है। इसलिए लोगों को विकास की धारा में सम्मिलित करने के लिए उनको विभिन्न विकल्पों के चयन की स्वतन्त्रता, अवसर और क्षमता में वृद्धि करना मानव विकास का मुख्य लक्ष्य है।

(ii) मानव विकास अवधारणा के अन्तर्गत समता और सतत पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मानव विकास के अन्तर्गत समता और सतत पोषणीयता
मानव विकास की अवधारणा के मूलत: चार स्तम्भ हैं—

  • समता
  • सतत पोषणीयता
  • उत्पादकता तथा
  • सशक्तीकरण।

इन चारों आधारी पक्षों में से प्रथम दो पक्षों का सर्वाधिक महत्त्व है।

समता का आशय एक सन्तुलित समाज या प्रदेश से है, इसके अन्तर्गत प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करना महत्त्वपूर्ण है जिससे समतामूलक समाज का सृजन हो सके और लोगों को उपलब्ध अवसर-लिंग, प्रजाति, आय और जाति के भेदभाव के विचार के बिना समान रूप से मिल सकें। भारत में स्त्रियों और सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों तथा दूरस्थ क्षेत्रों में निवास करने वाले व्यक्तियों को विकास के समान अवसर प्राप्त नहीं होते; अत: मानव विकास में इस अभाव को दूर करने का प्रयास समतामूलक विकास के माध्यम से किया जाता है।

सतत पोषणीयता टिकाऊ विकास को अभिव्यक्त करती है। मानव विकास के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक पीढ़ी को विकास और संसाधन उपभोग के समान अवसर मिल सकें। अत: वर्तमान पीढ़ी को समस्त पर्यावरणीय वित्तीय एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग भविष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। इस संसाधनों में से किसी भी एक का दुरुपयोग भावी पीढ़ियों के लिए विकास के अवसरों को कम करता है। इससे विकास का सतत चक्र अवरुद्ध हो जाता है। वर्तमान समय में पर्यावरण संसाधनों का जिस प्रकार दुरुपयोग हो रहा है उससे अनेक प्राकृतिक संसाधनों के समाप्त होने के खतरे में वृद्धि हुई है जिसे सतत पोषणीय विकास की बाधा के रूप में दर्ज किया जा सकता है। अत: मानव विकास अवधारणा की सतत पोषणीयता इसी गैर-टिकाऊ विकास की ओर सचेत करने पर बल देती है।

UP Board Class 12 Geography Chapter 4 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 4 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव विकास सूचकांक को स्पष्ट कीजिए। सूचकांक के आधार पर विश्व के प्रमुख समूहों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक
अनेक दशकों तक किसी देश के मानव विकास स्तर को केवल आर्थिक बृद्धि के सन्दर्भ में मापा जाता था। इस आधार पर जिस देश की अर्थव्यवस्था जितनी बढ़ी होती थी उसे उतना ही अधिक विकसित कहा जाता था। परन्तु अब मानव विकास में सभी को विकास के समान अवसर, सशक्तीकरण, सतत पोषणीयता और उत्पादकता को विशेष महत्त्व प्रदान किया जाता है।

मानव विकास का मापन, जिसे मानव विकास सूचकांक भी कहा जाता है, के अन्तर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निष्पादन के आधार पर देशों का क्रम तैयार किया जाता है। इनमें से प्रत्येक आयाम को 1/3 भार दिया जाता है। मानव विकास सूचकांक इन सभी आयामों को दिए गए भारों का कुल योग होता है। यह सूचकांक स्कोर 1 के जितना अधिक निकट होता है मानव विकास का स्तर उतना ही उच्च होता है।

मानव विकास सूचकांक के आधार पर विश्व के प्रमुख समूह
मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अर्जित मानव विकास स्कोर के आधार पर विश्व के देशों को चार समूहों में वर्गीकृत किया जाता है
1. अति – उच्च सूचकांक मूल्य वाले देश-अति-उच्च मानव विकास सूचकांक वाले देशों में वे देश सम्मिलित हैं जिनका सूचकांक 0.8 से अधिक है। मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार इस वर्ग में 51 देश सम्मलित हैं।
तालिका 4.2 इस वर्ग के प्रथम दस देशों को दर्शाती है।
तालिकाः अति-उच्च सूचकांक मूल्य वाले सर्वोच्च 10 देश
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2. उच्च मानव सूचकांक मूल्य वाले देश – उच्च मानव विकास सूचकांक वाले देशों में वे देश सम्मिलित हैं जिनका सूचकांक 0.701 से 0.799 के बीच में है। मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार इस वर्ग में 56 देश सम्मिलित हैं।

उच्च मानव विकास सूचकांक वाले देश यूरोप में अवस्थित हैं और वे औद्योगीकृत पश्चिमी विश्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। फिर भी गैर-यूरोपीय देशों की संख्या आश्चर्यचकित करने वाली है, जिन्होंने इस सूची में अपना स्थान बनाया है।

3. मध्यम सूचकांक मूल्य वाले देश — मध्यम मानव विकास सूचकांक वाले देशों में वे देश सम्मिलित हैं जिनका सूचकांक 0.550 से 0.700 के बीच में है। मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार इस वर्ग में कुल 41 देश हैं। इनमें से अधिकांश देशों का विकास द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की अवधि में हुआ है। इस वर्ग के कुछ देश पूर्वकालीन उपनिवेश थे जबकि अन्य अनेक देशों का विकास सन् 1990 में तत्कालीन सोवियत संघ के विघटन के बाद हुआ है। इनमें से अनेक देश अधिक लोकोन्मुखी नीतियों को अपनाकर एवं सामाजिक भेदभाव को दूर करके तेजी से अपने मानव विकास मूल्य को सुधार रहे हैं। इस वर्ग के देशों में उच्चतर मानव विकास के मूल्य वाले देशों की तुलना में सामाजिक विविधता अपेक्षाकृत अधिक पायी जाती है। इस वर्ग के देशों ने राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक विद्रोह का सामना किया है।

4. निम्न मूल्य सूचकांक वाले देश – निम्न मूल्य सूचकांक वाले देशों में वे देश सम्मिलित हैं जिनका सूचकांक 0.549 के नीचे है। मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार इस वर्ग में कुल 41 देश सम्मिलित हैं। इनमें अधिकांश छोटे देश हैं, जो राजनीतिक उपद्रव, गृहयुद्ध के रूप में सामाजिक अस्थिरता, अकाल एवं विभिन्न रोग प्रसरण की अधिक घटनाओं के दौर से गुजर रहे हैं। उन्नत नीतियों के द्वारा इस वर्ग के देशों को मानव विकास की आवश्यकताओं के समाधान की त्वरित आवश्यकता है।

अतएव मानव विकास-स्तर की दृष्टि से विश्व के देशों की तुलना करने पर यह कहा जा सकता है कि उच्च-स्तर वाले देशों में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के कारण सामाजिक क्षेत्र पर अधिक निवेश किया जाना है इसलिए इन देशों में राजनीतिक परिवेश के कारण लोगों को उपलब्ध स्वतन्त्रता अधिक है जबकि अन्य देशों की स्थिति इसके विपरीत है।

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प्रश्न 2.
मानव विकास उपागम क्या है? मानव विकास के मुख्य उपागमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास के उपागम मानव विकास की अवधारणा गतिशील है। मानव विकास का किस रूप में अध्ययन किया जाए या अध्ययन का आधार क्या हो, मानव विकास उपागम कहलाता है। इस समस्या के प्रति सभी लोगों का एक समान दृष्टिकोण नहीं है। इसीलिए मानव विकास के उपागम भी भिन्न-भिन्न हैं। इसके चार महत्त्वपूर्ण उपागम निम्नलिखित हैं
1. आय उपागम – आय उपागम मानव विकास का सबसे प्राचीन उपागम है। इस उपागम में मानव विकास को आय के सम्बन्ध में देखा जाता है। इस उपागम में यह माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की आय अधिक है तो उसका विकास स्तर भी उच्च होगा। अर्थात् आय का स्तर व्यक्ति द्वारा उपभोग की जा रही स्वतन्त्रता या अवसरों के स्तर को परिलक्षित करता है।

2. कल्याण उपागम – यह उपागम सरकार द्वारा मानव कल्याणकारी कार्यों में अधिकतम व्यय करके मानव विकास के स्तरों में वृद्धि करने पर बल देता है। इससे लोगों को अधिक-से-अधिक लाभ प्राप्त करने के अवसर प्राप्त होते हैं। इस उपागम में लोग केवल निष्क्रिय प्राप्तकर्ता के रूप में होते हैं अर्थात् इसमें मानव को लाभार्थी या सभी विकासात्मक गतिविधियों के लक्ष्य के रूप में देखा जाता है। अतः कल्याण उपागम मानव विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर उच्चतर सरकारी व्यय का पक्षपाती है।

3. आधारभूत आवश्यकता उपागम – इस उपागम को अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने प्रस्तावित किया था। इसमें छह न्यूनतम आधारभूत आवश्यकताओं; जैसे-स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता और आवास की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। अत: यह उपागम मानव विकल्पों के प्रश्नों की उपेक्षा करता है और परिभाषित वर्गों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति को महत्त्वपूर्ण मानता है।

4. क्षमता उपागम – इस उपागम को प्रो० अमर्त्य सेन ने महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है। इस उपागम में संसाधनों की मानव तक पहुँच की क्षमता में वृद्धि करने पर जोर दिया जाता है। अर्थात् मानव विकास की कुंजी मानव की संसाधन प्राप्त करने की क्षमता में वृद्धि करने में निहित है।

प्रश्न 3.
मानव विकास क्या है? मानव विकास की आवश्यकता क्यों है? कारण बताइए।
उत्तर:
मानव विकास का अर्थ
मानव के अस्तित्व के लिए अनिवार्य भोजन, वस्त्र और आवास तथा सुखदायक वस्तुओं को जुटाना मानव विकास है। मानव विकास का उद्देश्य जीवन की गुणवत्ता को सुधारना है।
मानव विकास की आवश्यकता के कारण
मानव विकास की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

  • मानव विकास सामाजिक अशान्ति को कम करता है और राजनीतिक स्थिरता में वृद्धि करता है।
  • मानव विकास निर्धनता को समाप्त करके स्वस्थ एवं सभ्य समाज के निर्माण में सहायक है।
  • विकास की सभी क्रियाओं का अन्तिम उद्देश्य मानवीय दशाओं को सुधारना है।
  • मानव विकास भौतिक पर्यावरण हितैषी है।
  • मानव विकास मानव को बुद्धिमान तथा विवेकशील बनाता है।
  • मानव विकास उच्च आर्थिक विकास और उत्पादकता को निर्धारित करता है।

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प्रश्न 4.
वृद्धि और विकास का क्या अर्थ है? वृद्धि और विकास में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
वृद्धि का अर्थ – वृद्धि मात्रात्मक और मूल्य निरपेक्ष है। इसका चिह्न धनात्मक अथवा ऋणात्मक हो सकता है।
विकास का अर्थ – विकास का अर्थ गुणात्मक परिवर्तन है जो मूल्य सापेक्ष होता है।
वृद्धि और विकास में अन्तर
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प्रश्न 5.
उच्च मानव विकास सूचकांक तथा निम्न मानव विकास सूचकांक की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
उच्च मानव विकास सूचकांक की विशेषताएँ
उच्च मानव विकास सूचकांक की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • उच्च मानव विकास सूचकांक वर्ग वाले देशों का स्कोर 0.701 से 0.799 के बीच होता है।
  • मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार इस वर्ग में 51 देश शामिल हैं।
  • इस वर्ग के देश सामाजिक क्षेत्रों पर अधिक निवेश करते हैं।
  • इस वर्ग के देश साधारणतया राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता से मुक्त होते हैं।
  • देश के संसाधनों का वितरण और अधिक समान होता है।

निम्न मानव विकास सूचकांक की विशेषताएँ
निम्न मानव विकास सूचकांक की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • निम्न मानव विकास सूचकांक वर्ग वाले देशों का स्कोर 0.549 से नीचे होता है।
  • मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार इस वर्ग में 41 देश शामिल हैं।
  • इस वर्ग के देश सामाजिक क्षेत्र की बजाय सुरक्षा पर अधिक खर्च करते हैं।
  • इस वर्ग के देश प्राय: राजनीतिक दृष्टि से अस्थिर हैं।
  • इस वर्ग के देश आर्थिक विकास को तेजी से शुरू नहीं कर सके हैं।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव विकास का मापन पर टिप्पणी लिखिए। अथवा मानव विकास सूचकांक क्या है? इसे कैसे मापा जाता है?
उत्त:
मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) का निर्धारण कुछ चुने हुए विकास मापदण्डों के आधार पर देशों का क्रम तैयार करके किया जाता है। यह क्रम 0 से 1 के मध्य स्कोर पर आधारित होता है। विकास मापदण्ड में स्वास्थ्य, जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, साक्षरता दर, क्रयशक्ति क्षमता आदि को सम्मिलित किया जाता है। इनमें से प्रत्येक आयाम को 1/3 भार (अंक) दिया जाता है। सभी विकास आयामों का सम्मिलित योग मानव विकास सूचकांक को दर्शाता है। यह सूचकांक स्कोर 1 के जितना अधिक निकट होता है, मानव विकास का स्तर उतना ही उच्च होता है।

वास्तव में मानव विकास सूचकांक विकास में उपलब्धियों का मापन करता है। यह दर्शाता है कि विभिन्न देशों ने मानव विकास के क्षेत्र में क्या-क्या उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। मानव गरीबी सूचकांक मानव विकास से सम्बन्धित है। यह सूचकांक मानव विकास में कमी को मापता है। मानव विकास के इन दोनों मापों का संयुक्त अवलोकन ही किसी देश में मानव विकास की स्थिति का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 2.
विकास की अवधारणा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विकास के अर्थ भिन्न-भिन्न लोगों के लिए भिन्न-भिन्न होते हैं। कुछ लोगों के लिए आय में वृद्धि विकास का सूचक है, जबकि अन्य विशेषज्ञ नियोजन, आय, जीवन-स्तर आदि के संयोग के स्तर में वृद्धि को विकास का मापदण्ड मानते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य लोग व्यक्तियों के जीवन की आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति को विकास मानते हैं। वास्तव में विकास की अवधारणा गतिशील है। सभी विद्वान् विकास की आवश्यकता पर एकमत हैं और लोगों के विकास के लिए तत्पर हैं। किन्तु विकास की अवधारणा और प्राप्त करने की विधियों पर मतैक्य नहीं है। फिर भी विकास का अर्थ प्रायः गुणात्मक परिवर्तन से लिया जाता है जो मूल्य सापेक्ष होता है। अत: यह कहा जा सकता है कि जब किसी क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि हो तो उसे विकास कहा जाता है।

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प्रश्न 3.
मानव विकास की अवधारणा के स्तम्भ उत्पादकता तथा सशक्तीकरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उत्पादकता का अर्थ मानव श्रम उत्पादकता या मानव कार्य के सन्दर्भ में उत्पादकता है। लोगों की कार्य क्षमताओं में वृद्धि करके ऐसी उत्पादकता में निरन्तर वृद्धि की जानी चाहिए। किसी राष्ट्र का सबसे मूल्यवान संसाधन मानव संसाधन है जिसकी कार्यक्षमता में वृद्धि करने के लिए उसे उत्तम स्वास्थ्य तथा शिक्षा के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।

सशक्तीकरण का अर्थ – किसी क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को सामाजिक एवं आर्थिक शक्ति प्राप्त करने के विकल्पों के अवसर उपलब्ध कराना है। मनुष्य में ऐसी शक्ति बढ़ती हुई स्वतन्त्रता और क्षमता से आती है। लोगों को सशक्त करने के लिए सुशासन एवं लोकोन्मुखी नीतियों की आवश्यकता होती है। वर्तमान समय में मानव विकास सूचकांक की दृष्टि से निम्न स्तर वाले पिछड़े हुए समूहों के देशों के लिए सशक्तीकरण का विशेष महत्त्व है।

प्रश्न 4.
“मानव विकास के सामाजिक सन्दर्भ में शिक्षा का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिक्षा मानव का आभूषण है। मानव विकास में वृद्धि के लिए ज्ञान या शिक्षा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। शिक्षित समाज ही वास्तव में विकसित समाज कहलाता है। शिक्षा के दो मापदण्ड हैं। पहला मापदण्ड शिक्षक-शिष्य अनुपात है। अर्थात् शिक्षक-शिष्य अनुपात जितना कम होगा, शिक्षा की गुणवत्ता उतनी ही अच्छी होगी। दूसरा मापदण्ड शिक्षा या साक्षरता योग्यता के स्तर को मापना है। यह मापदण्ड जितना उच्च होगा उस देश का सामाजिक स्तर भी उतना ही उच्च होगा। यू० एन० डी० पी० की वर्ष 2016 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश विकसित देशों में 98 प्रतिशत या इससे अधिक जनसंख्या साक्षर है। जबकि पिछड़े हुए देशों में 45 प्रतिशत से कम जनसंख्या साक्षर है जो इन देशों के निम्न मानव विकास स्तर को प्रकट करता है।

प्रश्न 5.
मानव विकास मापन की विधियों में परिवर्तन को समझाइए।
उत्तर:
मानव विकास मापन की विधियों में परिवर्तन

  • मानव विकास मापन की विधियों का निरन्तर परिष्कार हो रहा है।
  • मानव विकास के विभिन्न तत्त्वों के मापन की नई विधियों पर शोध हो रहे हैं।
  • विशेष प्रदेशों में भ्रष्टाचार के स्तर और राजनीति के सह-सम्बन्धों की जानकारी शोधकर्ताओं में जुटाई है।
  • राजनीतिक स्वतन्त्रता सूचकांक तथा सबसे अधिक भ्रष्ट देशों की सूची पर भी विचार विनिमय हो रहा है।

प्रश्न 6.
मध्यम सूचकांक वाले देशों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
मध्यम सूचकांक वाले देशों की विशेषताएँ

  • इनमें से अधिकांश देशों का उदय द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुआ है।
  • इनमें से कुछ देश साम्राज्यवादी देशों के उपनिवेश थे।
  • इस वर्ग के अनेक देश लोक-लुभावन नीतियाँ अपनाकर तथा सामाजिक भेदभाव घटाकर विकास कर रहे हैं तथा मानव विकास के अधिक अंक अर्जित कर रहे हैं।

प्रश्न 7.
जीवन की सार्थकता क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जीवन की सार्थकता

  • दीर्घजीवन, जीवन की सार्थकता नहीं है।
  • जीवन के कुछ उद्देश्य होने चाहिए।
  • लोग स्वस्थ रहें।
  • अपनी प्रतिभाओं का विकास कर सकें।
  • सामाजिक कार्यों में भाग ले सकें।
  • अपना लक्ष्य पाने के लिए स्वतन्त्र हों।

प्रश्न 8.
डॉ० महबूब-उल-हक और विकास को समझाइए।
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक के अनुसार

  • विकास लोगों के लिए विकल्पों का विस्तार करता है तथा उनके जीवन को उन्नत बनाता है।
  • इस संकल्पना में प्रत्येक श्रेणी के लोग सम्मिलित हैं।
  • विकल्प स्थायी न होकर परिवर्तनशील है।
  • विकास का मूल लक्ष्य ऐसी दशाएँ उत्पन्न करना है, जहाँ लोग एक सार्थक जीवन जी सकें।

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प्रश्न 9.
मानव विकास सूचकांक के लाभ/महत्त्व/गुण/आवश्यकता/उपयोगिता को समझाइए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक के लाभ/महत्त्व/गुण/आवश्यकता/उपयोगिता

  • देश के भीतर और देशों के बीच अन्तर (विकास में) का मापन करता है, जो सकल राष्ट्रीय उत्पाद के द्वारा सम्भव नहीं है।
  • देश के अन्दर और देशों के बीच गरीबी की अधिकता को स्पष्ट करती है।
  • यह एक माप के रूप में कार्य करती है कि देश ने किस सीमा तक विकास किया है। क्या विकास के स्तर और दर में कुछ सुधार हुआ है।
  • यह देश को लक्ष्य निश्चित करने में सहायता करता है।

प्रश्न 10.
मानव विकास के कल्याण उपागम की विशेषताओं को समझाइए।
उत्तर:
कल्याण उपागम की विशेषताएँ

  • इस उपागम में निर्धनता, प्रादेशिक असमानताएँ तथा अभावों जैसे विषम व नगरीय स्थल, झोपड़ी इत्यादि शामिल हैं।
  • असमानता की समस्या पर विचार करने और समाधान खोजने के लिए इस विचारधारा का जन्म हुआ।
  • कौन, कहाँ और कैसे कल्याण उपागम के मुख्य बिन्दु हैं।
  • सरकार कल्याण पर अधिकतम व्यय करके मानव विकास के स्तरों में वृद्धि के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 11.
डॉ० महबूब-उल-हक के अनुसार लोगों के विकल्पों में वृद्धि करने के लिए कौन-से तीन क्षेत्र महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक के अनुसार विकल्पों में वृद्धि करने के तीन क्षेत्र निम्नलिखित हैं
(1) स्वास्थ्य, (2) शिक्षा एवं (3) संसाधन।।

1. स्वास्थ्य का अभिप्राय है कि किसी देश के लोग अच्छा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
2. शिक्षा मानव जीवन के लिए आधारभूत क्षेत्र है।
3. संसाधन विकास के लिए आवश्यक है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव विकास क्या है?
उत्तर:
दीर्घजीविता, शिक्षा तथा उच्च जीवन-स्तर तथा स्वस्थ जीवन के सन्दर्भ में लोगों के विकल्पों को परिवर्धित करने की प्रक्रिया मानव विकास है। .

प्रश्न 2.
मानव विकास के स्तम्भों के नाम बताइए।.
उत्तर:
मानव विकास के चार स्तम्भ हैं

  • समानता
  • तत पोषणीयता
  • उत्पादकता और
  • सशक्तीकरण।

प्रश्न 3.
मानव विकास के उपागमों के नाम बताइए।
उत्तर:
मानव विकास के प्रमुख चार उपागम हैं

  • आय उपागम
  • कल्याण उपागम
  • न्यूनतम उपागम एवं
  • क्षमता उपागम।

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प्रश्न 4.
मानव विकास के किस उपागम के प्रस्तावक डॉ० अमर्त्य सेन हैं?
उत्तर:
मानव विकास के समता उपागम के प्रस्तावक डॉ० अमर्त्य सेन हैं।

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (I.L.O.) ने मूलरूप से किस मानव विकास के उपागम को प्रस्तावित किया था?
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (I.L.0.) ने मूलरूप से आधारभूत आवश्यकता उपागम को प्रस्तावित किया था।

प्रश्न 6.
मानव विकास सूचकांक के आधार बताइए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक के आधार तीन हैं-

  • दीर्घजीविता
  • ज्ञान एवं
  • जीवन स्तर के वंचन।

प्रश्न 7.
मानव विकास सूचकांक का मान कितना होता है?
उत्तर:
मानव विकास के पैमाने पर मानव विकास सूचकांक का मान 0 (शून्य) से 1 (एक) होता है।

प्रश्न 8.
UNDP का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
‘United Nations Development Programme’ (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम)।

प्रश्न 9.
मानव विकास का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
मानव विकास का उद्देश्य जीवन की गुणवत्ता में सुधार है।

प्रश्न 10.
मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार भारत किस स्थान पर है?
उत्तर:
मानव विकास प्रतिवेदन, 2016 के अनुसार भारत 131 वें स्थान पर है।

प्रश्न 11.
मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन किसने किया था?
उत्तर:
मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन डॉ० महबूब-उल-हक के द्वारा किया गया था।

प्रश्न 12.
डॉ० महबूब-उल-हक के अनुसार जीवन की सार्थकता क्या है?
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक के अनुसार सार्थक जीवन केवल दीर्घ नहीं होता। जीवन का कोई उद्देश्य होना भी आवश्यक है।

प्रश्न 13.
सर्वोच्च ‘उच्च मूल्य’ सूचकांक वाले दो देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • नार्वे
  • स्विट्जरलैण्ड।

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प्रश्न 14.
सार्थक जीवन क्या है?
उत्तर:
सार्थक जीवन का अर्थ है कि लोग स्वस्थ हों, उनमें क्षमता बढ़ाने की योग्यता हो, समाज में सहयोगी बनें तथा अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए स्वतन्त्र हों।

प्रश्न 15.
सशक्तता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सशक्तता से तात्पर्य है कि प्रत्येक वर्ग विशेषकर महिलाओं को समाज में तथा देश की मुख्य धारा में शामिल किया जाए।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वृद्धि का चिह्न हो सकता है
(a) ऋणात्मक
(b) धनात्मक
(c) ऋणात्मक अथवा धनात्मक
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) ऋणात्मक अथवा धनात्मक।

प्रश्न 2.
विकास का अर्थ है
(a) गुणात्मक परिवर्तन
(b) मूल्य सापेक्ष
(c) (a) व (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) व (b) दोनों।

प्रश्न 3.
डॉ० महबूब-उल-हक ने मानव विकास सूचकांक निर्मित किया
(a) सन् 1990 में
(b) सन् 1994 में
(c) सन् 1996 में
(d) सन् 2000 में।
उत्तर:
(a) सन् 1996 में।

प्रश्न 4.
मानव विकास का केन्द्र बिन्दु है
(a) संसाधनों तक पहुँच
(b) स्वास्थ्य
(c) शिक्षा
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 5.
मानव विकास के सबसे पुराने उपागमों में से एक है
(a) आय उपागम
(b) ल्याण उपागम
(c) आधारभूत आवश्यकता उपागम
(d) क्षमता उपागम।
उत्तर:
(a) आय उपागम।

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प्रश्न 6.
संसाधनों तक पहुँच की क्रय शक्ति को किस सन्दर्भ में मापा जाता है
(a) यूरो
(b) येन
(c) डॉलर
(d) रुपया।
उत्तर:
(c) डॉलर।

प्रश्न 7.
अति-उच्च मानव विकास स्तर वाले देशों का मानव विकास सूचकांक का स्कोर होता है
(a) 0.8 से ऊपर
(b) 0.6 से ऊपर
(c) 0.7 से ऊपर
(d) 0.9 से ऊपर।
उत्तर:
(a) 0.8 से ऊपर।

प्रश्न 8.
संयुक्त राष्ट्र कब से प्रतिवर्ष मानव विकास सूचकांक का निर्धारण करता है
(a) सन् 1990 से
(b) सन् 1993 से
(c) सन् 1995 से
(d) सन् 1998 से।
उत्तर:
(a) सन् 1990 से।

प्रश्न 9.
विश्व के किस एकमात्र देश ने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) को देश की प्रगति का आधिकारिक माप घोषित किया है
(a) भूटान
(b) श्रीलंका
(c) जापान
(d) चीन।
उत्तर:
(a) भूटान।

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UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Population Composition

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Population Composition (जनसंख्या संघटन)

UP Board Class 12 Geography Chapter 3 Text Book Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 3 पाठ्यपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए :
(i) निम्नलिखित में से किसने संयुक्त अरब अमीरात के लिंग अनुपात को निम्न किया है
(क) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास
(ख) पुरुषों की उच्च जन्म दर
(ग) स्त्रियों की निम्न जन्म-दर
(घ) स्त्रियों का उच्च उत्प्रवास।
उत्तर:
(ग) स्त्रियों की निम्न जन्म-दर।

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या जनसंख्या के कार्यशील आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है
(क) 15 से 65 वर्ष
(ख) 15 से 66 वर्ष
(ग) 15 से 64 वर्ष
(घ) 15 से 59 वर्ष।
उत्तर:
(ख) 15 से 59 वर्ष।

(iii) निम्नलिखित में से किस देश का लिंग अनुपात विश्व में सर्वाधिक है
(क) लैटविया
(ख) जापान
(ग) संयुक्त अरब अमीरात
(घ) फ्रांस।
उत्तर:
(क) लैटविया।

UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Population Composition

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
(i) जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं
उत्तर:
कोई भी जनसंख्या विभिन्न आयु वर्ग के स्त्री-पुरुषों से मिलकर बनती है। जनसंख्या संघटन जनसंख्या की उन विशेषताओं को प्रदर्शित करता है जिनकी माप की जा सके तथा जिनकी मदद से दो विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों के समूह में अन्तर/तुलना की जा सके।
आयु, लिंग, साक्षरता, आवास का स्थान तथा व्यवसाय आदि ऐसे महत्त्वपूर्ण घटक हैं जो जनसंख्या के संघटन को प्रदर्शित करते हैं।

(ii) आयु संरचना का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
आयु संरचना का एक देश के जनांकिकीय तत्त्व के रूप में बड़ा महत्त्व है। आयु संरचना के आधार पर ज्ञात किया जा सकता है कि विभिन्न आयु वर्गों के लोगों का कितना प्रतिशत है।
जनसंख्या के तीन आयु समूह

  • यदि जनसंख्या में 0-14 आयु वर्ग की जनसंख्या अधिक है तो आश्रित जनसंख्या का अनुपात अधिक होगा। इस कारण आर्थिक विकास धीमा होगा।
  • 15-59 वर्ष के आयु वर्ग में अधिक जनसंख्या होने पर कार्यशील अथवा अर्जक जनसंख्या होने की अधिक सम्भावना होती है जो देश के संसाधनों के दोहन करने में सहायक होती है।
  • 60 वर्ष से ऊपर के आयु संरचना वर्ग में बढ़ती हुई जनसंख्या से वृद्धों की देखभाल पर अधिक व्यय होने का संकेत मिलता है।
    उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि जनसंख्या के जनांकिकीय निर्धारक के रूप में आयु संरचना का अध्ययन बहुत महत्त्वपूर्ण है।

(iii) लिंग अनुपात कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
किसी देश की जनसंख्या में लिंग अनुपात पुरुष और महिलाओं की संख्या के बीच एक सन्तुलन का सूचक होता है। यह प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या के रूप में मापा जाता है। इसके लिए अग्र सूत्र का प्रयोग किया जाता है
UP Board Solutions for Class 12 Geography Chapter 3 Population Composition 1

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक में न दें।
(i) जनसंख्या के ग्रामीण नगरीय संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
निवास के आधार पर जनसंख्या को दो भागों में बाँटा जाता है
(1) ग्रामीण जनसंख्या एवं
(2) नगरीय जनसंख्या।
यह विभाजन आवश्यक है क्योंकि ग्रामीण और नगरीय जीवन आजीविका और सामाजिक दशाओं में एक-दूसरे से अलग होता है। ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में अन्तर के आधार हैं—आयु लिंग संघटन, व्यावसायिक संरचना, जनसंख्या का घनत्व तथा विकास का स्तर।

सामान्यत: ग्रामीण क्षेत्र वे होते हैं, जो कि प्राथमिक क्रियाओं में लगे होते हैं जबकि नगरीय क्षेत्र वे होते हैं, जिनकी अधिकांश जनसंख्या गैर-प्राथमिक क्रियाओं में लगी होती है।

पश्चिमी देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक है। नेपाल, पाकिस्तान और भारत जैसे देशों में स्थिति इससे विपरीत है। नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की अधिक सम्भावनाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं के आगमन के कारण यूरोप, कनाडा और यू०एस०ए० के नगरीय क्षेत्रों में महिलाओं की अधिकता है। कृषि भी इन देशों में अत्यधिक मशीनीकृत है और यह लगभग पुरुष प्रधान व्यवसाय है। इसके विपरीत एशिया के नगरीय क्षेत्रों में पुरुष प्रधान प्रवास होने के कारण लिंगानुपात भी पुरुषों के अनुकूल है।

भारत जैसे देशों में ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि कार्यों में महिलाओं की सहभागिता काफी अधिक है। भारत में महिलाओं का नगरीय क्षेत्रों में प्रवास कम होने के कारण हैं-नगरों में आवास का अभाव, रहन-सहन की ऊँची लागत, रोजगार अवसरों की कमी एवं सुरक्षा का अभाव आदि।

(ii) विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असन्तुलन के लिए उत्तरदायी कारकों तथा व्यावसायिक संरचना की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग के असन्तुलन के लिए उत्तरदायी कारक . आयु-लिंग के असन्तुलन के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं

  • स्त्री – पुरुष के जन्म दर में अन्तर–प्रत्येक समाज में जन्म के समय नर बच्चे, मादा बच्चों से अधिक पैदा होते हैं।
  • स्त्री – पुरुष की मृत्यु-दर में अन्तर-पुरुष और स्त्री मृत्यु-दरों में अन्तर होने के कारण भी लिंगानुपात में अन्तर आ जाता है। विकसित देशों में भी जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है। अतः जन्म के समय पुरुषों की बढ़ी हुई संख्या, उत्तरोत्तर समाप्त होती जाती है।
  • प्रवास – स्त्रियों और पुरुषों का प्रवास भी लिंगानुपात को गम्भीर रूप से प्रभावित करता है। प्रवास में लिंगीय चयनपरकता बहुत अधिक होती है।

व्यावसायिक संरचना
व्यावसायिक संरचना में 15-59 वर्ष के महिला तथा पुरुष दोनों ही कार्यरत जनसंख्या हैं जो कृषि, वानिकी, मत्स्य, विनिर्माण तथा निर्माण कार्यों में लगे होते हैं। कृषि तथा मत्स्य क्षेत्रों में पुरुष वर्ग अधिक कार्यरत है जबकि महिला वर्ग वानिकी तथा अन्य घरेलू कार्य में है। एक सर्वेक्षण के अनुसार खाड़ी के देशों में पुरुष जनसंख्या महिला जनसंख्या से अधिक है क्योंकि उन देशों में रोजगार के लिए प्रायः पुरुष ही अधिक प्रवास करते हैं।

UP Board Class 12 Geography Chapter 3 Other Important Questions

UP Board Class 12 Geography Chapter 3 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
लिंगानुपात से क्या आशय है? विश्व में लिंगानुपात के सामान्य प्रारूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लिंगानुपात (लिंग संघटन)का अर्थ-जनसंख्या में पुरुषों और स्त्रियों के बीच के अनुपात को ‘लिंगानुपात’ कहा जाता है। भारत में यह अनुपात प्रति हजार पुरुषों और स्त्रियों की संख्या के रूप में दर्शाया जाता है।
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विश्व में लिंगानुपात का सामान्य प्रारूप

  • विश्व में जनसंख्या का औसत लिंगानुपात, प्रति 100 स्त्रियों पर 102 पुरुष है।
  • विश्व में उच्चतम लिंगानुपात लैटविया में दर्ज किया गया है जहाँ प्रति सौ स्त्रियों पर 85 पुरुष हैं।
  • विश्व में निम्नतम लिंगानुपात संयुक्त अरब अमीरात में दर्ज किया गया है जहाँ प्रति सौ स्त्रियों पर 311 पुरुष हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सूचीबद्ध 139 देशों में लिंगानुपात स्त्रियों के लिए अनुकूल है, जबकि शेष 72 देशों में यह उनके लिए प्रतिकूल है।
  • चीन, भारत, सऊदी अरब, पाकिस्तान व अफगानिस्तान जैसे एशियाई देशों में लिंगानुपात अत्यधिक निम्न है।
  • रूस सहित यूरोप के एक बड़े भाग में पुरुष अल्प संख्या में हैं।
  • यूरोप के अनेक देशों में पुरुषों की कमी वहाँ स्त्रियों की बेहतर स्थिति तथा भूतकाल में विश्व के विभिन्न भागों में अत्यधिक पुरुष उत्प्रवास के कारण है।

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प्रश्न 2:
आयु-लिंग पिरामिड का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु लिंग पिरामिड जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना का अभिप्राय विभिन्न आयु वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है।
जनसंख्या पिरामिड का प्रयोग जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना को दर्शाने के लिए किया जाता है। जनसंख्या पिरामिड की आकृति जनसंख्या की विशेषताओं को परिलक्षित करती है। प्रत्येक आयु वर्ग में बायाँ भाग पुरुषों का प्रतिशत तथा दायाँ भाग स्त्रियों का प्रतिशत दर्शाता है।

चित्र में जनसंख्या पिरामिड के विभिन्न प्रकार दर्शाते हैं
1. विस्तारित होती जनसंख्या – अल्प-विकसित देशों में आयु-लिंग पिरामिड का आधार चौड़ा और . शीर्ष तेजी से पतला होता जाता है। इन देशों में उच्च जन्म-दर के कारण निम्न आयु वर्गों में विशाल जनसंख्या पायी जाती है जबकि वृद्धों की संख्या उत्तरोत्तर घटती जाती है। चित्र में नाइजीरिया का आयु-लिंग पिरामिड दर्शाया गया है जो अल्प-विकसित देशों का प्रतिरूपी है। यदि हम बंगलादेश और मैक्सिको के लिए पिरामिड की रचना करें तो वे भी ऐसे ही नजर आएंगे।
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2. स्थिर जनसंख्या – स्थिर जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाला आयु-लिंग पिरामिड घण्टी के आकार का होता है जो कि शीर्ष की ओर शुंडाकार होता जाता है। जन्म-दर और मृत्यु-दर लम्बे समय तक लगभग एक समान रहते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या स्थिर हो जाती है। चित्र में आस्ट्रेलिया का आयु-लिंग पिरामिड दिखाया गया है।
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3. ह्रासमान जनसंख्या – ह्रासमान जनसंख्या के पिरामिड का आधार संकीर्ण और शीर्ष शुण्डाकार होता है। यह निम्न जन्म और मृत्यु-दरों को दर्शाता है। इन देशों में जनसंख्या वृद्धि शून्य अथवा ऋणात्मक होती है।. चित्र में जापान का आयु-लिंग पिरामिड दिखाया गया है।
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प्रश्न 3.
आयु संरचना से आपका क्या अभिप्राय है? आयु वर्ग व उनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु सरंचना का अर्थ-किसी जनसंख्या की आयु संरचना से तात्पर्य विभिन्न आयु वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या के ज्ञान से है।
आयु संरचना को प्रभावित करने वाले तीन कारक प्रमुख हैं
(1) जन्म
(2) मृत्यु एवं
(3) प्रवास।
आयु वर्ग व उनकी विशेषताएँ
सामान्यतया किसी देश की जनसंख्या को तीन बड़े आयु वर्गों में रखा जाता है
1. बाल तथा तरुण आयु वर्ग – इस आयु वर्ग में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शामिल किया जाता है। युवा जनसंख्या के उच्च अनुपात का अर्थ है कि प्रदेश में जन्म दर उच्च है।
विशेषता – आर्थिक रूप से अनुत्पादक होने के कारण यह आयु वर्ग अपने परिवार पर आश्रित रहता है।

2. प्रौढ़ आयु वर्ग – 15 से 59 आयु वर्ग के बीच जनसंख्या का बड़ा आकार एक विशाल कार्यशील जनसंख्या को इंगित करता है।
विशेषता – यह आयु वर्ग आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक उत्पादक, सबसे अधिक प्रजननशील तथा जनांकिकीय दृष्टि से सर्वाधिक गतिशील होता है। यही वर्ग बाल आयु वर्ग की जनसंख्या का भरण-पोषण करता है तथा वृद्धों की देखभाल व सेवा करता है।

3. वृद्ध आयु वर्ग – इस आयु वर्ग में 60 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को शामिल किया जाता है।
विशेषता – इस आयु वर्ग में जनसंख्या अधिक होने पर वृद्धों की देखभाल व उनकी स्वास्थ्य सम्बन्धी . सेवाओं पर अधिक खर्च की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 4.
साक्षरता से आप क्या समझते हैं? साक्षरता दर को प्रभावित करने वाले कारकों को समझाइए।
उत्तर:
साक्षरता का अर्थ-संयुक्त राष्ट्र संघ जनसंख्या आयोग के अनुसार, “साक्षर व्यक्ति वह है जो 15 वर्ष या इससे अधिक आयु का हो और जो किसी भाषा में साधारण सन्देश को पढ़, लिख और समझ सकता हो।”

भारत की सन् 2001 की जनगणना के अनुसार, 7 वर्ष से अधिक आयु वाला जो व्यक्ति किसी भी भाषा को पढ़-लिख सकता है जिसमें समझ के साथ अंकगणितीय परिकलन की योग्यता हो, साक्षर कहलाएगा।”

साक्षरता दर कुल जनसंख्या में साक्षर व्यक्तियों के प्रतिशत को दर्शाती है। इसे ज्ञात करने की विधि
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साक्षरता दर को प्रभावित करने वाले कारक
साक्षरता दर को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं

  • साक्षरता को सर्वाधिक प्रभावित शिक्षा की लागत करती है। आर्थिक रूप में विकसित देशों में साक्षरता और शिक्षा का स्तर अपेक्षाकृत उच्च होता है।
  • नगरों में साक्षरता अपेक्षाकृत अधिक पायी जाती है।
  • जिन समाजों में स्त्री को समानता के अधिकार दिए गए हैं वहाँ स्त्री साक्षरता की दर अपेक्षाकृत उच्च होती है।
  • साक्षरता दर को धार्मिक मान्यताएँ भी प्रभावित करती हैं। ईसाई धर्म में पुरुष और स्त्री दोनों की शिक्षा को बराबर महत्त्व दिया जाता है

जबकि मुस्लिम समाजों में स्त्रियों की साक्षरता दर बहुत कम है।
उन्नत तथा नगरीय अर्थव्यवस्थाएँ उच्चतर साक्षरता दर तथा उच्चतर शैक्षणिक स्तर को प्रतिबिम्बित करती हैं। साक्षरता एवं शिक्षा का निम्न स्तर ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को इंगित करता है।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लिंग संघटन (लिंगानुपात) के महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
लिंग संघटन (लिंगानुपात) का महत्त्व – लिंगानुपात से किसी देश में स्त्रियों की स्थिति के बारे में महत्त्वपूर्ण सूचना प्राप्त होती है। स्त्री-पुरुषों के अलग-अलग आँकड़े रोजगार, उपभोग प्रारूप तथा समुदाय की सामाजिक आवश्यकताओं को समझने के लिए आवश्यक हैं। लिंगानुपात अर्थव्यवस्था का सूचक होता है। अनेक जनसांख्यिकीय लक्षणों; जैसे-जन्मता, उत्पत्तिक्रम, मर्त्यता, प्रवास, वैवाहिक-स्तर तथा व्यावसायिक संरचना इत्यादि के विश्लेषण के लिए लिंगानुपात का ज्ञान महत्त्वपूर्ण है।

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प्रश्न 2.
लिंगानुपात प्रतिकूल होने के कोई चार कारण बताइए।
उत्तर:
जिन प्रदेशों में लिंग भेदभाव होता है, उन प्रदेशों में लिंगानुपात प्रतिकूल होता है। इसके कारण निम्नलिखित हैं

  • स्त्री भ्रूण की हत्या की प्रथा।
  • स्त्री शिशु की हत्या की प्रथा।
  • स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा।
  • स्त्रियों के सामाजिक-आर्थिक स्तर का निम्न होना।

प्रश्न 3.
आयु सरंचना के महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
आयु संरचना का महत्त्व

  • आयु संरचना विभिन्न आयु वर्गों के लोगों की संख्या को प्रदर्शित करती है।
  • जनसंख्या संघटन का यह एक महत्त्वपूर्ण सूचक है।
  • यह भिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 4.
ऑस्ट्रेलिया में स्थिर जनसंख्या पिरामिड क्यों है?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया का जनसंख्या पिरामिड घण्टी के आकार का है। यह शीर्ष की ओर शुण्डाकार होता जाता है। इसमें जन्म-दर तथा मृत्यु-दर लगभग समान हैं। परिणाम- स्वरूप जनसंख्या स्थिर हो जाती है।

प्रश्न 5.
जापान का जनसंख्या पिरामिड ह्रासमान क्यों है?
उत्तर:
जापान के जनसंख्या पिरामिड का आधार संकीर्ण है और शीर्ष शुण्डाकार है। यहाँ जन्म-दर तथा मृत्यु-दर निम्न है। जनसंख्या वृद्धि शून्य है या ऋणात्मक है।

प्रश्न 6.
उत्पादक जनसंख्या को समझाइए।
उत्तर:
उत्पादक जनसंख्या-देश की कुल जनसंख्या का वह भाग जो कार्य करके अपना जीवन-यापन करता है, उसे उत्पादक अर्जक जनसंख्या कहते हैं। भारत में इसका अनुपात 33.45 प्रतिशत है।

प्रश्न 7.
आश्रित जनसंख्या पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
आश्रित जनसंख्या-देश की कुल जनसंख्या का वह भाग जिसमें 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे, छात्र तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध आते हैं तथा घर में काम करने वाली महिलाएँ हैं। ये सभी कोई कार्य (धन कमाने का) नहीं करते। अतः इन्हें ‘आश्रित जनसंख्या में शामिल किया जाता है। भारत में लगभग 66 प्रतिशत जनसंख्या आश्रित है, जो देश के निम्न जीवन-स्तर का परिचायक है। ये लोग भरण-पोषण के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।

प्रश्न 8.
ग्रामीण जनसंख्या की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या की विशेषताएँ

  • गाँवों में रहने वाली जनसंख्या को ‘ग्रामीण जनसंख्या’ कहते हैं।
  • ग्रामीण जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए प्राथमिक व्यवसायों जैसे कृषि, पशुपालन, खनन, मत्स्य, वनों के संग्रहण व कुटीर उद्योग पर निर्भर करती है।
  • ग्रामीण लोग सरल, धर्मनिष्ठ व सामुदायिक भावना से ओत-प्रोत होते हैं।
  • संयुक्त परिवार व आपसी सुख-दुःख में भागीदारी इनकी अन्य विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 9.
नगरीय जनसंख्या की विशेषताएँ समझाइए।
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या की विशेषताएँ

  • नगरों में रहने वाली जनसंख्या को ‘नगरीय जनसंख्या’ कहते हैं।
  • अपनी आजीविका के लिए नगरीय लोग द्वितीयक व तृतीयक, चतुर्थक एवं पंचम व्यवसायों जैसे विनिर्माण उद्योग, परिवहन, व्यापार, सेवाओं तथा उच्चतर बौद्धिक, परामर्श, प्रबन्धन व सुपर स्पेशलिस्ट कार्यों इत्यादि पर निर्भर करते हैं।
  • नगर के लोग एक विशिष्ट-जीवन पद्धति द्वारा अनुकूलित होते हैं तथा यहाँ जीवन की तीव्र गति और सम्बन्ध औपचारिक होते हैं।
  • सामाजिक दूरी, सामाजिक विषमता, आर्थिक दृष्टि से वर्गीकृत समाज, सामुदायिक भावना की कमी नगरीय संस्कृति के लक्षण हैं।

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प्रश्न 10.
साक्षरता के महत्त्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
साक्षरता का महत्त्व-किसी देश में साक्षर जनसंख्या का अनुपात उसके सामाजिक-आर्थिक विकास का सूचक होता है। साक्षरता जनसंख्या के उस सामाजिक पक्ष को प्रतिबन्धित करती है जिसमें हमें जनसंख्या की गुणवत्ता का बोध होता है। शिक्षा के बिना मानव संसाधन का विकास नहीं किया जा सकता। निरक्षरता और पिछड़ापन एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लिंग अनुपात से क्या आशय है?
उत्तर:
जनसंख्या में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या के बीच के अनुपात को ‘लिंग अनुपात’ कहते हैं।

प्रश्न 2.
लिंग अनुपात ज्ञात करने का सूत्र बताइए।
उत्तर:
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प्रश्न 3.
जनसंख्या को कितने आयु समूहों में बाँटा गया है? नाम लिखिए।
उत्तर:
जनसंख्या को तीन आयु समूहों में बाँटा गया है

  • युवक/तरुण
  • प्रौढ़/वयस्क तथा
  • वृद्ध।

प्रश्न 4:
कार्यशील जनसंख्या का आयु वर्ग क्या होता है?
उत्तर:
कार्यशील जनसंख्या का आयु वर्ग 15 से 59 वर्ष तक का होता है।

प्रश्न 5:
आयु-लिंग पिरामिड से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आयु-लिंग पिरामिड एक विशेष प्रकार का रेखाचित्र होता है, जिसकी सहायता से जनसंख्या की आयु तथा लिंग संरचना का अध्ययन किया जाता है। इसकी आकृति पिरामिड से मिलती है।

प्रश्न 6.
ग्रामीण जनसंख्या के व्यवसाय बताइए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या के प्रमुख व्यवसाय कृषि, मत्स्य, आखेट, एकत्रीकरण, खनन आदि हैं।

प्रश्न 7.
नगरीय जनसंख्या के प्रमुख व्यवसाय क्या हैं?
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या के प्रमुख व्यवसाय उद्योग, व्यापार, परिवहन, सेवाएँ जैसे द्वितीयक एवं तृतीयक व्यवसाय हैं।

प्रश्न 8.
ग्रामीण जनसंख्या किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह जनसंख्या जो गाँवों में निवास करती है और प्राथमिक व्यवसायों में संलग्न है, ‘ग्रामीण जनसंख्या’ कहलाती है।

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प्रश्न 9.
नगरीय जनसंख्या किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह जनसंख्या जो नगरों में निवास करती है और गैर-कृषि कार्यों में संलग्न है, ‘नगरीय जनसंख्या कहलाती है।

प्रश्न 10.
नगरों में महिलाओं के प्रवास को रोकने वाले कारक बताइए।
उत्तर:
नगरों में महिलाओं के प्रवास को रोकने वाले कारक हैं—

  • नगरों में आवास का अभाव
  • रहन-सहन की उच्च लागत
  • रोजगार अवसरों का अभाव, एवं
  • सुरक्षा की कमी आदि।

प्रश्न 11.
साक्षर से क्या आशय है?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ के जनसंख्या आयोग के अनुसार, 15 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग का व्यक्ति यदि एक सरल कथन को समझकर पढ़ तथा लिख सकता है, तो वह ‘साक्षर’ है।”

प्रश्न 12.
सक्रिय जनसंख्या से अलग किन्हें रखा जाता है?
उत्तर:
कार्यशील आयु से कम आयु के बच्चे, वृद्ध, सेवामुक्त व्यक्ति, गृहिणियाँ, विद्यार्थी आदि जो अपने जीवन-यापन के लिए किसी आर्थिक कार्य में संलग्न नहीं हैं।

प्रश्न 13.
व्यावसायिक संरचना किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी निश्चित आर्थिक कार्य में सक्रिय जनसंख्या (15 से 59 वर्ष) के आनुपातिक वितरण को ‘व्यावसायिक संरचना’ कहते हैं।

प्रश्न 14.
सक्रिय जनसंख्या किसे कहते हैं?
उत्तर:
पारिश्रमिकयुक्त व्यवसाय कार्यों में संलग्न तथा इन्हीं कार्यों से जीवकोपार्जन करने वाली जनसंख्या को आर्थिक रूप से ‘सक्रिय जनसंख्या’ कहा जाता है।

प्रश्न 15.
वृद्ध होती जनसंख्या से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जनसंख्या का वृद्ध होना एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे बुजुर्ग जनसंख्या का हिस्सा अनुपात की दृष्टि से बड़ा हो जाता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सबसे कम परिवर्तन अनुपात किस जनसंख्या वर्ग का होता है
(a) बाल वर्ग
(b) प्रौढ़ वर्ग
(c) वृद्ध वर्ग
(d) युवा वर्ग।
उत्तर:
(c) वृद्ध वर्ग।

प्रश्न 2.
आयु और लिंग पिरामिड में क्या प्रदर्शित किया जाता है
(a) आयु संरचना
(b) लिंग संरचना
(c) आयु और लिंग संरचना
(d) लिंग अनुपात।.
उत्तर-:
(c) आयु और लिंग संरचना।

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प्रश्न 3.
चौड़ा आधार तथा पतला होता शीर्ष आकृति वाला पिरामिड क्या दर्शाता है
(a) स्थिर जनसंख्या
(b) विकासशील जनसंख्या
(c) घटती जनसंख्या
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) विकासशील जनसंख्या।

प्रश्न 4.
आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक उत्पादक आयु वर्ग कौन-सा है.
(a) बाल वर्ग
(b) प्रौढ़ वर्ग
(c) वृद्ध वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) प्रौढ़ वर्ग।

प्रश्न 5.
गैर कृषि कार्यों से संलग्न जनसंख्या को क्या कहा जाता है
(a) आश्रित जनसंख्या
(b) नगरीय जनसंख्या
(c) ग्रामीण जनसंख्या
(d) सक्रिय जनसंख्या।
उत्तर:
(b) नगरीय जनसंख्या

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सा घटक जनसंख्या के संघटन को प्रदर्शित नहीं करता-.
(a) आयु
(b) लिंग
(c) साक्षरता
(d) प्रजननशीलता।
उत्तर:
(d) प्रजननशीलता।

प्रश्न 7.
कृषि कार्यों में संलग्न जनसंख्या को क्या कहा जाता है
(a) आश्रित जनसंख्या
(b) नगरीय जनसंख्या
(c) ग्रामीण जनसंख्या
(d) सक्रिय जनसंख्या।
उत्तर:
(c) ग्रामीण जनसंख्या।

प्रश्न 8.
जनसंख्या की आयु लिंग संरचना सबसे अच्छी प्रदर्शित होती है
(a) छाया आरेखं द्वारा
(b) दण्ड आरेख द्वारा
(c) वृत्त आरेख द्वारा
(d) पिरामिड आरेख द्वारा।
उत्तर:
(d) पिरामिड आरेख द्वारा।

प्रश्न 9.
प्रौढ़ आयु वर्ग से तात्पर्य है
(a) 15 से 59 वर्ष
(b) 10. से 40 वर्ष
(c) 20 से 60 वर्ष
(d) 12 से 49 वर्ष।
उत्तर:
(a) 15 से 59 वर्ष।

प्रश्न 10.
किस देश का विस्तृत जनसंख्या पिरामिड है
(a) कीनिया
(b) नाइजीरिया
(c) युगाण्डा
(d) चाड।
उत्तर:
(b) नाइजीरिया।

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